spp/usc/11.00/1a/29.3.2007(1)
अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं
राजस्थान
विधान
सभा
की कार्यवाही
का वृत्तान्त
अंक 7 बारहवीं
विधान
सभा
के सातवें सत्र का
उनतीसवां
दिवस संख्या
19
गुरुवार, 29 मार्च,2007
राजस्थान
विधान
सभा
की बैठक
11:00
बजे
विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्भ हुई।
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष, पदासीन)
अनेक
माननीय सदस्य
: राम-राम सा।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, पहले
कभी इधर भी कर
लिया करें।
श्री अध्यक्ष:
ऐसा है, कायदा
है, परम्परा
यही है कि अध्यक्ष
पहले बाईं
तरफ,
प्रतिपक्ष की
तरफ करता है
और फिर सत्ता
पक्ष की ओर
करता है, क्योंकि
वह निष्पक्ष
है ..(व्यवधान)...
क्योंकि
चेयर निष्पक्ष
होता है।
इसलिए यदि इधर
ही इधर करें
तो फिर वह
पक्ष नजर आ
जायेगा ना।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
एक दिन इधर, एक
दिन उधर।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): संस्कृत
में एक श्लोक
है कि
''दुर्जनम्
प्रथमम् वन्दे,
सज्जनम्
तदनन्तरम्''
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
यहां कोई
दुर्जन नहीं
है, दुर्जन-वुर्जन
कुछ नहीं है,
यह गलत बात कह
रहे हैं। सब माननीय
सदस्य बराबर
हैं।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
बराबर तो हैं
ही।
श्री अध्यक्ष:
नहीं,
तुलसीदासजी
ने कहा है न
सज्जन कहकर
छाडि़ये।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): यह
कह सकते हैं
निन्दक नियरे
राखिये, आँगन कुटी
छवाय ।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): सही
है। ..(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष
: श्री वीरेन्द्र
बेनीवाल।
लेकिन आज
उपस्थिति
इतनी क्षीण क्यों
हैं ?
पी.बी.एम.चिकित्सालय
बीकानेर में
उपलब्ध
चिकित्सा
सुविधाएं/उपकरण
173. श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर): क्या
उच्च शिक्षा
(चिकित्सा)
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे :-
(1) क्या
यह सही है कि
दिनांक 01 मई, 2006
से 31 दिसम्बर,
2006 के मध्य
राज्य में
मच्छरों के
प्रकोप के
कारण अनेक
बीमारियां
यथा - मलेरिया,
डेंगू, चिकनगुनिया
जैसे रोगों से
पीडि़त होकर
बड़ी संख्या
में रोगी अस्पतालों
में भर्ती
हुए? यदि हां,
तो उक्त
रोगों से
पीडि़त
मेडिकल कालेज
से सम्बद्ध
अस्पतालों
में भर्ती
मरीजों की
संख्यावार
सूची सदन की
मेज पर रखते
हुए यह बतायें
कि क्या इलाज
के दौरान किन्हीं
रोगियों की
मृत्यु भी
हुई ? यदि हां,
तो किन-किन
अस्पतालों
में किन-किन
अस्पतालों
में किन किन
मरीजों की ?
(2) क्या
यह सही है कि
जिला बीकानेर
के पी.बी.एम.
अस्पताल में
भी उक्त
रोगों से
पीडि़त अनेक
मरीज भर्ती
हुए ? यदि हां,
तो कितने ?
(3) क्या
उक्त/अनेक
रोगियों को
जांच/इलाज की
समुचित सुविधाएं
उपलबध न होने
के कारण भर्ती
नहीं किया
गया/अन्य अस्पतालों
को रेफर किया
गया ? यदि हां,
तो ऐसी कौनसी
जांच थी/कौनसे
उपकरण थे जो
पी.बी.एम.अस्पताल
बीकानेर में
उपलब्ध नहीं
थे ?
राज्य
मंत्री, चिकित्सा
शिक्षा (श्री
वासुदेव
देवनानी): (1) 01 मई, 2006
से 31 दिसम्बर,
2006के मध्य
मलेरिया, डेंगू
व चिकनगुनिया
के रोगी राज्य
के विभिन्न
मेडिकल
कालेजों से सम्बद्ध
चिकित्सालयों
में भर्ती हुए
रोगियों का
मेडिकल कॉलेजवार
विवरण
परिशिष्ट 'अ'
के रूप में
सदन के पटल पर
रख दिया गया
है। मृतकों की
अस्पतालवार
सूची परिशिष्ट
'ब' के रूप में
सदन के पटल पर
रख दी गयी है ।
(2) जिला
बीकानेर के
पी.बी.एम.अस्पताल
में उक्त
रोगों से
पीडि़त जो
मरीज भर्ती
हुए, उनका विवरण
प्रश्न के
भाग एक के उत्तर
में वर्णित
है।
(3) उक्त
रोगों की जांच
व इलाज की
अधिकांश
सुविधाएं पी.बी.एम.
अस्पताल,
बीकानेर में
उपलब्ध है।
अस्पताल में
ब्लड
सेपरेटर
उपलब्ध नहीं
होने के कारण
डेंगू के दो
मरीजों को अन्यत्र
रेफर किया
गया।
चिकनगुनिया
वायरस की जांच
की सुविधा
पी.बी.एम. अस्पताल
बीकानेर में
उपलब्ध नहीं
है।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से मंत्री
महोदय से
जानकारी
चाहूंगा कि
आपने प्रश्न
के खण्ड संख्या
3 में उक्त
रोगों की जांच
व इलाज की
अधिकांश
सुविधाएं पी.बी.एम.
अस्पताल,
बीकानेर में
उपलब्ध हैं।
अस्पताल में
ब्लड सेल
सेपरेटर
उपलब्ध नहीं
होने के कारण
डेंगू के दो
मरीजों को अन्यत्र
रेफर किया
गया, यह बात
आपने फरमाई
है। मैं आपसे
जानकारी
चाहता हूं कि
ब्लड सेल
सेपरेटर वहां
पर नहीं है तो
क्यों नहीं
है ? क्या यह
सही है कि ब्लड
सेल सेपरेटर
के क्रय किये
जाने के लिये
स्थानीय
सांसद ने वर्ष
2004 में आपको
राशि उपलब्ध
करवा दी थी ? अगर
हां, तो वर्ष 2004
में उपलब्ध
हुई राशि के
उपयोग को करते
हुए आपने वहां
पर ब्लड सेल
सेपरेटर क्यों
नहीं स्थापित
किया गया ? नम्बर
दो, आपने जांच
का किट 1.1.2006 से 31.12.2006
के बीच
में कितने
जांच किट क्रय
किये, कितनी
राशि के क्रय किये,
कितने जांच
किटों का आपने
उपयोग किया और
कितने आपके स्टॉक
में हैं ? नम्बर
तीन, मैं आपसे
यह जानना
चाहूंगा कि यह
जो ब्लड सेल
सेपरेटर है
उसको इंस्टाल
करने की क्या
प्रक्रिया है,
जिस
प्रक्रिया की
पूर्ति आप नहीं
कर पाये? कृपया
आप इसको स्पष्ट
करें ।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
अध्यक्ष
महोदय, सेल
सेपरेटर
बीकानेर में
वर्तमान में
नहीं है व
जयपुर और
जोधपुर में
उपलब्ध है।
बीकानेर के
लिये सही है
कि वहां के
सांसद ने 2004 में
23 लाख रुपये
उपलब्ध
कराये। चूंकि
सेपरेटर के
लिये कम से कम 39
लाख रुपये
चाहिये थे,
उनसे निवेदन
किया । उन्होंने
उसके काफी समय
बाद 16 लाख
रुपये उपलब्ध
करवाये । अभी
हमने वह ब्लड
सेल सेपरेटर
खरीद लिया है
। 18.11.2006 को उसको
इंस्टाल भी
कर दिया गया
है और 1.3.2007 को
लाइसेंस के
लिये सारा
इसंपेक्शन
हो गया है।
हमें उम्मीद
है कि बहुत
जल्दी ही वह
लाइसेंस मिल जायेगा
और यह सुविधा
इनके बीकानेर
अस्पताल में
उपलब्ध हो
जायेगी।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
माननीय
मंत्री महोदय
से जानना
चाहता हूं कि
जिस राशि का
आप जिक्र फरमा
रहे हैं, आपको
आवश्यक राशि
उपलब्ध कराये
हुए डेढ़ वर्ष
हो गये, उस
राशिका उपयोग
नहीं करने के
लिये क्या
किन्हीं
अधिकारियों
की जिम्मेवारी
बनती है ? क्या
यह सही है कि
डेंगू के अनेक
पेशेंट को महज
इसलिए जयपुर
रेफर किया गया
कि आप वहां
उनको इलाज की
सुविधा नहीं
देना चाहते
थे। इससे अलग
हटते हुए मैं
आरोप लगाता
हूं उन डॉक्टरों
के ऊपर कि उन्होंने
प्राइवेट अस्पतालों
की प्रेक्टिस
कराने के नाम
पर यहां पर यह
व्यवस्था
नहीं बनाई और
सैंकड़ों
निर्दोष
लोगों के लाखों
रुपये आपने
खर्च करवाकर
उनको पीड़ा
पहुंचाई और
अनेक लोग मौत
का शिकार हुए।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इसके
इलाज की आवश्यकता
सिर्फ डेंगू
के लिये ही
नहीं बल्कि जो
पाइल्स के
पेशेंट होते
हैं, उनके
लिये भी हमें
सेल सेपरेटर
की आवश्यकता
होती है।
श्री
अध्यक्ष:
भाषण नहीं,
माननीय सदस्य,
प्रश्न
पूछें।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर):
मैं यही प्रश्न
पूछना चाहता
हूं कि क्या यह
सही है कि महज
डेंगू का नाम
लेकर इस सेल
सेपरेटर को
इंस्टाल
नहीं करने के
नाम पर जिन
प्रशासनिक
अधिकारियों
की जिम्मेवारी
बनती है, क्या
आप उनके खिलाफ
कोई
कार्यवाही
करेंगे ? राशि
उपलब्ध होने
के बावजूद
राशि का उपयोग
नहीं होने व घोर
अनियमितता
करने वाले
अधिकारियों
के खिलाफ आप
क्या
कार्यवाही
करेंगे ? यह
बताने का कष्ट
करें।
श्री
अध्यक्ष:
मंत्रीजी आप
एक जवाब और
दीजियेगा । यह
दीजियेगा कि 48
पेशेंट डेंगू
के आपके
विभिन्न अस्पतालों
में हुए और 46 मर
गये, केवल दो
को आप बचा सके।
आखिर इसका कोई
कारण होगा,
डेंगू वाले
प्राइवेट अस्पतालों
में बहुत से
बचे हैं।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
में कुल 2568
डेंगू के मरीज
भर्ती हुए,
उसमें से 35 की
मृत्यु हुई ।
कोई भी सरकार
चाहे विपक्ष
की सरकार हो
या हम हों, कोई
भी नहीं चाहता
कि किसी की
मृत्यु हो।
इसलिए डॉक्टर
उसे बचाना
चाहता है और
हमने उसकी
पूरी व्यवस्थाएं
भी कीं। इसलिए
बीकानेर में
भी किसी की डेंगू
से मृत्यु
नहीं हुई।
केवल दो डेंगू
मरीजों को
दूसरी जगह
रेफर इस सेल
सेपरेटर के न
होने के कारण
किया गया। कोई
बड़ी संख्या
नहीं थी, केवल
दो ही मरीज थे,
जिनको हमने
रेफर किया है।
बाकी जहां तक
दूसरों की बात
है इन्होंने
कई बीमारियों
के लिये कहा।
मलेरिया के बारे
में मैं
निवेदन करना
चाहूंगा कि 2993
मरीज जरूर
भर्ती हुए,
उनमें से 233 की
मृत्यु हुई,
यह सत्य है।
लेकिन इसके
पहले भी
मलेरिया फैलता
रहा है। सन् 2002 - 2003
में भी फैला। 2002
में 290 मलेरिया
के कारण डेथ
हुई और 2003 में 178
हुई।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा): 2002-2003
में मरे इसलिए
2007-2008 में मरेंगे,
यह हम नहीं
सुनेंगे। ...(व्यवधान)...
बार-बार 2002 पर आ
जाते हो आप।
आप 2006-07 की बात
करें। तीन साल
से आपकी सरकार
है। 2002 में मर
गये इसलिए अब
भी मरेंगे।
...(व्यवधान)..
अध्यक्ष
महोदय, 2002 में मर
गये तो अब भी
मरेंगे, यह क्या
उत्तर है ? आप
अपनी जिम्मेदारी
लीजिये।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
मैंने कहा कोई
भी सरकार नहीं
चाहती कि एक
भी आदमी मरे।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
एक भी आदमी
मरे तो जिम्मेदारी
आपकी है। 2002 में
आदमी मरे,
इससे ...(व्यवधान)..
यह कोई
आर्गुमेंट है
? यह कोई तर्क
है ? ...(व्यवधान)..
आप अपनी जिम्मेदारी
को ऑन करिये ।
आपकी सरकार
आने के बाद एक
भी आदमी
मलेरिया से
मरता है तो
जिम्मेदारी
आपकी है । ...(व्यवधान)..
पिछले साल में
मरे, यह
आर्गुमेंट है
आपका ।
...(व्यवधान)..
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इस तरह
का जवाब देकर
आप सदन में क्या
करना चाहते
हैं ? सरकार यह
मानती है कि 2006-07
में 200 से ज्यादा
आदमी मलेरिया
से मरे। यह
सरकार की जिम्मेदारी
नहीं है क्यों
मरे आदमी ? 2004 में
इससे कम मरे
हैं । मरेंगे,
यह क्या तर्क
है ? ...(व्यवधान)..
आप अपनी जिम्मेदारी
को ऑन करिये । ...(व्यवधान)..
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
कोई भी सरकार
नहीं चाहती कि
किसी इंसान की
डेथ हो ।
सरकार पूरी तरह
प्रयत्न
करती है, डॉक्टर
भी प्रयत्न
करते हैं। ...(व्यवधान)..
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
कोई नहीं करती
। ...(व्यवधान)..
यह डेंगू के
इतने आदमी मरे
हैं। आपका रिकार्ड
सही नहीं है ।
डेंगू के मरीज
को पहचान नहीं
पाये आप। इतने
डेंगू से
राजस्थान
में मौतें हुई
हैं । आपने
डेंगू को क्लासिफाई
नहीं किया।
केवल कहा 37
आदमी मरे हैं।
एक एक जिले के
अंदर 37 से ज्यादा
आदमी मरे
हैं।
...(व्यवधान)..
माननीय
मंत्रीजी,
आपका विभाग
डेंगू को
पहचानने में
असफल रहा है। ...(व्यवधान)..
यह अखबारों
में स्टेटमेंट
है विभाग के
डॉक्टर
डेंगू के
लक्षण को
पहचानने में
असफल रहे और
डेंगू के मरीज
को
आइडेंटिफाई
नहीं कर पाये।
राजस्थान
में जितनी
मौतें डेंगू
के नाम पर हुई
हैं, उतनी आज
तक मौतें नहीं
हुईं और डेंगू
में 37 आदमी मरे
हैं। इससे
बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण
स्थिति नहीं
बन सकती।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
मैंने छहों
मेडिकल कालेज
के बारे में
कहा, जो आंकड़े
बिलकुल सत्य
हैं ।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैंने
जो प्रश्न
किया था
माननीय
मंत्रीजी ने
उसका जवाब
नहीं दिया ।
मैंने आपसे यह
जानकारी चाही
थी कि कितने
किट इसके लिये
क्रय किये गये,
कितने किट का
इस्तेमाल
हुआ और कितने
स्टॉक में
हैं । इसके
साथ साथ आपने
जो जवाब दिया है
एक भी मौत
नहीं हुई।
आपकी सूचना को
मैं दुरूस्त
करना चाहूंगा
आपके दिये
जवाब से। आपने
क्रम संख्या
12 पर सतबीर
सिंह नाम के
एक पेशेंट की
डेथ बताई है ।
Msr/usc/1110/1b/29032007
इसके
बाद में आपके
इस जवाब के
अन्दर गलत
आपने यह दिया 28
नम्बर पर फिर
सतवीर सिंह का
ही नाम लिख
रहे हैं। एक
ही पेशेंट की
डैथ को दो जगह
लिस्ट कर रहे
हैं। एक तो यह
आप देख लीजिए।
दूसरा, जो यह
संलग्न सूची
है इसमें
जे.के.लोन अस्पताल
का आप बता रहे
हैं क्रम संख्या
14 पर नोखा का एक 14
साल के बालक
की डैथ हो रही
है, वो भी
डेंगू से डैथ
हो रही है।
यह वो
डैथ हैं,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जो यह
विभाग खुद मान
रहा है। मैं पुन:
आपको यह कहना
चाहता हूं
यहां पर गुरु
को शिष्य बचा
रहा है,
अधिकारी को
बचाने के अन्दर
बहुत से लोग
लिप्त हैं।
जांच की व्यवस्था
का सही चित्रण
नहीं हो पा
रहा, कितने
किट क्रय किये
गये, यह बात स्पष्ट
नहीं हो पा
रही।
श्री
अध्यक्ष: आप
प्रश्न
पूछें, भाषण
नहीं दें।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर):
सैंकड़ों
लोगों की जांच
कर के उनको
रैफर किया गया
प्राइवेट
हास्पिटल्स
में और यह जो
प्रक्रिया है,
क्या यह सही
हे कि स्थानीय
स्तर पर डाक्टर्स
के घरों में
अधिकांश
पेशेंट ने
एप्रोच कर के
और अपने आप को
वहां इलाज की
व्यवस्था
नहीं होने के
कारण डाइरेक्ट
रैफर कराया? इसका
रिकार्ड भी
आपको उपलब्ध
कराया जा सकता
है।
आप यह बताएं
कि कितने किट
आपने परचेज
किये थे?
पी.बी.एम. अस्पताल
में अण्डर
सी.एम.एच.ओ.
कितने किट
परचेज किये
गये, डेंगू की
जांच के कितनी
राशि के क्रय
किये गये, यह
तो आप बताएं।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
प्रश्न
मेडिकल
एजुकेशन का है
और मेडिकल
कालेज का है।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर):
पी.बी.एम. अस्पताल
का बता दीजिए।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
हां, वो
मेडिकल कालेज
का बता रहा
हूं।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर):
बता दीजिए।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
इस हास्पिटल
में डेंगू के 983
लोगों की जांच
की गयी और
प्रत्येक
जांच पर 400
रुपये का
खर्चा आया 3,93,200
रुपये, निशुल्क
सरकार ने वहां
पर जांच की व्यवस्था
की है।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, 983 पेशेंट
की जांच वहां
की गयी है, 983
पेशेंट की जांच
करने के बाद
उनको रैफर
किया गया है
वहां से या
उनको छुट्टी
दे दी गयी है,
उसके लिए इलाज
नहीं हो। 983
लोगों ने अपने
परिजनों के
साथ एस.एम.एस.
अस्पताल में
इलाज कराने के
लिए वहां से
पलायन किया
है। एक-एक व्यक्ति
ने
कितने-कितने
हजार रुपये
खर्च किये हैं,
क्या इसके
प्रति किसी की
जिम्मेदारी
बनती है? क्या
प्रशासनिक स्तर
पर वो डाक्टर्स,
जब यह डेंगू
अपनी पीक पर
था, विदेशों
में भ्रमण कर
रहे थे, वहां
का प्रिंसिपल,
वहां का सुपरिन्टेन्डेंट,
वहां का डिप्टी
सुररिन्टेन्डेंट,
क्या उनकी
कोई जिम्मेदारी
बनती है?
श्री
अध्यक्ष: आप
भाषण देने लग
जाते हैं,
प्रश्न नहीं
पूछते हैं।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
निश्चित रूप से
डेंगू की जांच
के लिए वहां
पर 983 में से 35
लोगों को
भर्ती किया
गया। इन 35
भर्ती वालों
में से इलाज
किया गया और
वहां पर
आई.जी.जी., आई.जी.एम.
और डिटेक्शन
किट व उपकरण
पर्याप्त
मात्रा में
वहां पर उपलब्ध
हैं, इन तीनों
के कारण किसी
भी मरीज को
वहां से
लौटाया नहीं
गया, सब की
जांच की गयी
और जो भर्ती
योग्य थे
उनको भर्ती
किया गया।
वहां से केवल
दो लोगों को
बाहर भेजा,
कोई अपनी इच्छा
से बाहर गया
हो उसके बारे
में तो मैं
नहीं कह सकता
लेकिन इतना
आपको आश्वस्त
कर सकता हूं
कि सरकार इसके
लिए भी
प्रतिबद्ध है
कि सरकार सोशल
वैलफेयर
सरकार है,
सरकार सब के
चिकित्सा का
प्रबन्ध
करती है और
करने में कोई
कोताही नहीं
बरती है लेकिन
फिर भी यदि
कोई आपके पास
इस तरह का
प्रमाण हो कि
पर्टिकुलर
कोई डाक्टर
ने या अपने
किसी बीमार का
कोई केस हो, आप
बतायेंगे मैं
जांच करवा कर
के दोषी लोगों
को निश्चित
रूप से सज़ा
दूंगा।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
जानना चाहता
हूं कि ब्लड
सैपरेटर मशीन
कब आयी और
कितने महीने
तक वो वहां
पड़ी हुई है,
डम्प हुई हुई
है, उसको नहीं
लगाने के पीछे
कौन दोषी है?
दूसरी
बात मैं यह
कहना चाहूंगा
कि बीकानेर
में कितने लोग
डेंगू से मरे, कितनो
को रैफर किया?
तीसरा,
यह कि आपने
मलेरिया और
डेंगू के मच्छरों
को और उनके लार्वा
को एक तरीके
से फैलने नहीं
दने के लिए क्या
उपाय किये? क्या
आपने डी.डी.टी.
या कोई स्प्रे
वगैरह का काम
किया?
मैं स्पष्ट
कहना चाहता
हूं, माननीय
अध्यक्ष
महोदय, पूरे
राजस्थान
में डेंगू और
मलेरिया के
बचाव के लिए
जो स्प्रे का
कार्यक्रम
होता है वो
सरकार ने
ड्राप कर
दिया। इसके
कारण से यह
सारी चीज हुई।
इसका उत्तर
दें कि क्या
आपने कोई स्प्रे
या डी.डी.टी.
छिड़काव
कार्यक्रम
किया था?
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, जहां तक
इनके सैपरेटर
की बात है,
सैपरेटर 18.11.06 को इन्स्टाल
किया गया। 01.03.07
को इसकी जांच
पूरी की गयी ...
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर):
आपने खरीदा
कब, यह बताएं।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
और आज वो
लाइसेंस की
प्रतीक्षा
में है, मुझे लगता
है कि जल्दी
लाइसेंस
उपलब्ध होने
पर हम इसकी सेवाएं
ले पायेंगे।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर):
खरीदा कब, यह
बताएं न।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
खरीदा कब था? ...(व्यवधान)...
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
आया कब?
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा): खरीदा,
इन्स्टाल
करने के साथ
ही तो खरीदा
है।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर): जी
नहीं। जी
नहीं, यह गलत
बयानी कर रहे
हैं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
यह 2004 में 23 लाख
आपके पास आ
गये और छठे
महीने में फिर
16 लाख दे दिये,
माननीय लोक
सभा सदस्य ने
और फिर भी आप
नहीं खरीद
पाये।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा): 2006
में दिये हैं 16
लाख, तो 2006 में ही
तो खरीदा है
हमने। ...(व्यवधान)...
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर): 2006
में नहीं
दिये, 2005 में दिये
हैं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
...(व्यवधान)... 2004
में फिर भी आप
नहीं खरीद
पाये।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर): 2004
में दिये हैं
फिर 2005 में दिये
हैं। उसको
क्रय नहीं
करने की, उसको इन्स्टाल
नहीं करने की
जिम्मेदारी
किस की है?
श्री
अध्यक्ष:
हिण्डौली से
आने वाले
माननीय सदस्य।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
जिम्मेदारी
किसकी है
जिसके कारण
मरीजों को
आपको शिफ्ट
करना पडा जांच
के अभाव में?
इसकी जिम्मेदारी
किसकी है?
...(व्यवधान)...
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर): क्या
यह सही है कि
जब इमरजेंसी
होती है तो
ड्यूटीज जो
होती हैं, जो
छुट्टियों पर
होते हैं उनकी
छुट्टियों को
निरस्त करते
हैं? यदि हां,
तो क्या वहां
पर जो डाक्टर्स
से प्रिंसिपल,
सुपरिन्टेन्डेंट,
डिप्टी
सुपरिन्टेन्डेंट
जो विदेश
यात्रा कर रहे
थे सरकार के
पैसे पर, क्या
आपने उनकी
ड्यूटीज को
निरस्त किया?
श्री
अध्यक्ष: आप
एक के बाद एक
खड़े हो जाते
हैं, आने देते
नहीं हैं,
पहले प्रश्न
का उत्तर ही
नहीं आने देते
हैं।
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इसी से
जुड़ा हुआ है
एक।
श्री
अध्यक्ष:
खड़े हैं न
मंत्रीजी।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, सांसद
महोदय ने दो
अलग-अलग चरणों
में, अक्टुबर,
2004 से जुलाई, 2006 के
मध्य धनराशि
उपलब्ध
करायी। जब
जुलाई, 2006 के मध्य
उपलब्ध
करायी, आर्डर
देंगे और नवम्बर
तक आ गयी और
नवम्बर में
हमने उसको इन्स्टाल
कर दिया तो
निश्चित रूप
से कोई अधिक
समय नहीं लगा
है।
जहां
तक डाक्टर्स
की बात है,
आपने कहा कि
डाक्टर्स के
लिए क्या
किया, हमारे छ:
मेडिकल कालेज
ने बीस दल बना
कर के बाकी स्थानों
के लिए भी
रवाना किये
ताकि इन तीनों
में, जो एक
प्राकृतिक
आपदा पहली बार
डेंगू औरे चिकनगुनिया
का पहली बार
हमारे यहां पर
यह आये, हमने
इसकी व्यवस्था
की हे।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर): आप
तो बीकानेर का
जवाब दीजिए न
कि आपने क्या
किया? वो ठीक है
और जो आप फरमा
रहे हैं।
मैं
फिर स्पष्ट
कहना चाहूंगा,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैंने जो
प्रश्न किया,
2004 में 23 लाख
रुपया, 23.05.05 को 13
लाख रुपये की
प्रशासनिक स्वीकृति
पुन: जारी हो
गयी तो आप
कैसे कहते हैं
कि 2006 में राशि
मिली और जिसकी
स्वीकृति जारी
हो गयी है 2005
में। इसकी
जिम्मेदारी किनकी
बनती है? यह आप
स्पष्ट
करें और उन पर
क्या
कार्यवाही कर
रहे हैं, यह स्पष्ट
करें।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
मैं निश्चित
रूप से आपने
जो डेट बतायी
है इसका पता
करूंगा, यदि
कहीं कोई लैप्स
हुआ होगा तो
मैं
कार्यवाही
करूंगा।
श्री
अध्यक्ष: बस
हो गयी बात।
नैक्स्ट क्वेश्चन।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
कोई पूरे
राजस्थान
में एक जगह
डी.डी.टी. की और
मलेरिया और
डेंगू निरोधक
दवाओं का कहीं
छिड़काव नहीं
किया, इसके
बारे में तो
जवाब दें कि
कहां-कहां
किया और
कितनी-कितनी
राशि खर्च की?
श्री
अध्यक्ष:
डेंगू का मच्छर
तो साफ जगह
होता है। साफ
जगह होता है,
यह तो असेम्बलि
में भी हो
सकता है। ...(व्यवधान)...
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): ऐसा
है कि मच्छरों
को मारने के
लिए
प्रोग्राम
चलाते हैं,
घर-घर,
गांव-गांव के अन्दर
मलेरिया को
रोकने के लिए,
डेंगू को
रोकने के लिए
छिड़काव होता
है लेकिन
सरकार ने
बिलकुल नहीं
किया।
श्री
अध्यक्ष: यह
डेंगू वाला
साफ जगह में
रहता है।
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
कल्ला साहब
ने जो पूछा है ...
श्री
अध्यक्ष:
मंत्रीजी कह
रहे हैं। ...(व्यवधान)...
मंत्रीजी
खड़े हैं न।
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मच्छर
तो हमारे क्वार्टरों
में ही इतना
ज्यादा हैं
जिसकी कोई सीमा
ही नहीं। मच्छरों
पर तो काबू ना
पहले हुआ और
ना अब हो रहा
है।
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक
निवेदन करना
चाह रहा था।
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: आप
सुनें तो सही
मंत्रीजी को।
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं एक
निवेदन करना
चाह रहा था।
आपने मलेरिया
के बारे में
बात की, आपने
मच्छरों के
बारे में बात
की, मलेरिया,
डेंगू के माननीय
सी.पी. जोशी
साहब ने भी
कहा कि राजस्थान
सरकार की जिम्मेदारी
है। मैं मानता
हूं सरकार की
जिम्मेदारी
है। अगर एक भी
डैथ चाहे
मलेरिया से
हो, चाहे
डेंगू से हो
जिम्मेदारी
राजस्थान
सरकार की है।
हम इस जिम्मेदारी
से दूर नहीं
हो रहे बल्कि
इसको मानते हैं
पर निवेदन यह
करना चाहता
हूं कि
डी.डी.टी. स्प्रे
के एक
नियम-कायदे तय
होते हैं सेण्टर
गवर्नमेंट के
स्तर पर। वो
मैं आपको
निवेदन करना
चाहता हूं। पहले
2.5 ए.पी.आई. पर
डी.डी.टी. का स्प्रे
हुआ करता था। 2.5
ए.पी.आई. का
मतलब एनुअल
पैरासाइट इन्डैक्स
वहां उस एरिया
का जिसका होता
था...
श्री
अध्यक्ष:
मंत्रीजी,
गवर्नमेंट ऑफ
इंडिया पर स्वास्थ्य
का मामला न
छोड़ें आप।
नो, नो, आपकी भी
जिम्मेदारी
है।
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, डी.डी.टी.
सप्लाई
गवर्नमेंट ऑफ
इंडिया करती
है, डी.डी.टी. कभी
राजस्थान
गवर्नमेंट
परचेज नहीं
करती है।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
आपने मांगी थी
क्या भारत
सरकार से?
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री): हां,
बिलकुल, मैं
वही निवेदन
करना चाहता
हूं।
श्री
अध्यक्ष: कोई
जरूरी थोड़ी
ही है भारत
सरकार से।
श्री
हेमाराम
चौधरी
(गुढ़ामालानी):
सारा मामला
भारत सरकार पर
छोड़ दिया।
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री):
मैंने माननीय
स्वास्थ्य
मंत्री महोदय
के साथ में
मीटिंग में
निवेदन किया
था जो 2.5 ए.पी.आई.
पर डी.डी.टी. स्प्रे
हुआ करता था
उसके दो
राउंड्स हुआ
करते थे, उसको 5
ए.पी.आई. पर
राजस्थान में
कर दिया गया
इसलिए बहुत
सारा एरिया
ऐसा है जो स्प्रे
उस पर नहीं हो
पाता है।
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, भारत
सरकार की तरफ
से यह हे क्या
कि आप खरीद
नहीं सकते और
आप छिड़काव
नहीं कर सकते?
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री): नहीं
खरीद सकते, वो
ही सप्लाई
करते हैं।
श्री
अध्यक्ष: अच्छा,
तब बात है।
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री): वो ही
सप्लाई करते
हैं और वो उस
हिसाब से ही
सप्लाई करते
हैं इसलिए वो
पूरा एक साथ
नहीं हो पाता
है।
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, लेकिन
यदि आप आवश्यक
समझो तो क्या
नहीं खरीद
सकते?
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री): तो
मैंने माननीय
स्वास्थ्य
मंत्रीजी से
निवेदन भी
किया
था कि राजस्थान
में 2.5 ए.पी.आई.
इसको हम को
वापस से एप्लाई
करें। इसलिए
यह जो बात कह
रहे हैं यह
बात है,
बाइलोजिकल
कंट्रोल भी हम
कर ही रहे
हैं।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, यह तो
साइकलिकल
ट्रेंड हे,
इसमें ऐसे
नहीं कि हमारे
स्तर में
कहीं प्रयास
में कोई कमी
हुई हो परन्तु
यह बात
निश्चित है कि
जितना कवरेज
डी.डी.टी. का
होना चाहिए
था, जो
राउंड्स होना
चाहिए थे वो
पूरा कवरेज
नहीं हो पा
रहा है। ...(व्यवधान)...
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर): जो
सैपरेटर इन्स्टाल
के लिये उसके
लिए स्टॉफ आज
तक पी.बी.एम.
हास्पिटल में
नहीं है। आपके
महकमे से उधार
लेकर के इन्होंने
इंस्पेक्शन
करवाये हैं।
आज तक इनके
पास स्टॉफ
नहीं है, कहां
आप सुविधाओं
की बात करते
हैं, मंत्री
महोदय।
श्री
अध्यक्ष:
नैक्स्ट क्वेश्चन।
श्री लालचंद
कटारिया।
श्री
टीकम चन्द
कान्त
(सिवाना):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं एक
प्रश्न
पूछना चाहता
हूं।
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, अगला
पुकार लिया
मैंने। श्री
लालचंद
कटारिया।
श्री
टीकम चन्द
कान्त
(सिवाना): मैं
एक प्रश्न
पूछना चाहता
हूं कि आर्डर
कब लिया, किस
कम्पनी को
दिया, वो कम्पनी
भारतीय है या
विदेशी है?
Ars/usc/1120/1c/29032007/1
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, कोई
आवश्यकता
नहीं है। श्री
लालचन्द
कटारिया।
श्री
टीकम चन्द
कान्त
(सिवाना): और
आर्डर देने और
माल सप्लाई
करने में जो
विलम्ब हुआ
वह कम्पनी की
तरफ से हुआ या
हमारी तरफ से
हुआ है ?
श्री
अध्यक्ष:
श्री लालचन्द
कटारिया।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
चिकनगुनिया
से बाल उड़
रहे हैं। अब
सरकार को कम
से कम इतनी
अनप्रीसिडेंटल
घटना हुई,
राजस्थान
में डेगूं और
चिकनगुनिया,
आज अख़बार में
खबर है, उन
पेशेण्ट्स
के बाल उड़
रहे हैं। मैं
सरकार से
अपेक्षा
करूंगा कि
सरकार ऐसी अनप्रीसिडेंटल
बीमारियों को
मीट आउट करने
के लिए अपने
लेवल पर आगे
आकर ऐसा काम
करें जिससे
राजस्थान की
जनता को एश्योरेंस
मिले कि डेंगू
हो या
चिकनगुनिया
हो, चाहे उसके
फाल आउट से
कोई भी बीमारी
हो, सरकार
मुस्तैदी से
काम करके इनको
बचाएगी, यह
आपको तैयारी
करने की जरूरत
है।
प्रश्न
संख्या- 174
श्री
अध्यक्ष:
श्री लालचन्द
कटारिया।
(अनुपस्थित:
कृपया आगे
देखें)
श्री
वासुदेव देवनानी
(राज्य
मंत्री, शिक्षा):
इसमें अध्यक्ष
महोदय, मैं
इनकी एक बात
का उत्तर
दूंगा, सरकार
निश्चित रूप
से, हम इसका जन
जागरण अभियान
भी चलायेंगे,
विशेषज्ञ दल
भी गठित करेंगे।
श्री
अध्यक्ष:
नैक्स्ट क्वेश्चन,
मैंने नैक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया।
श्री रिछपाल
सिंह मिर्धा।
विधान
सभा क्षेत्र
डेगाना में
केन्द्रीय
सड़क निधि
योजनान्तर्गत
स्वीकृत
सड़कें
175.
श्री रिछपाल
सिंह मिर्धा
(डेगाना): क्या
सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे :-
(1) केन्द्रीय
सड़क निधि के
अन्तर्गत
डामरीकृत
सड़कें स्वीकृत
करने की क्या
नीति
निर्धारित है
? विवरण सदन की
मेज पर रखें।
(2) वर्ष
2004-05, 2005-06 एवं 2006-07 के
दौरान विधान
सभा क्षेत्र
डेगाना में इस
योजना के अन्तर्गत
कितने
किलोमीटर
सड़कें कहां
कहां पर स्वीकृत
की गई ? विवरण
स्थान एवं
राशि तथा
सड़कों की लम्बाई
सहित सदन की
मेज पर रखें।
(3) अगले
वित्तीय
वर्ष के दौरान
विधान सभा
क्षेत्र
डेगाना के
कितनी आबादी
तक के ग्राम
पक्की
सड़कों से उक्त
योजनान्तर्गत
जोड़ दिये
जायेंगे? ग्रामवार
सूची सदन की
मेज पर रखें।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): (1) केन्द्रीय
सड़क निधि
योजना के अन्तर्गत
डामरीकृत
सड़कें स्वीकृत
करने की नीति,
भारत सरकार के
पोत सड़क परिवहन
एवं राजमार्ग
मंत्रालय, नई
दिल्ली के
पत्रांक आर.
डब्ल्यू/
एन.एच. 28030/1/ 2001- पी
एण्ड एम
दिनांक 13
जुलाई, 2001
द्वारा राज्य
स्तरीय सड़कों
के विकास हेतु
निर्धारित की
गई है। जिसकी
प्रति
परिशिष्ट ‘क’ पर
संलग्न है।
(2) वित्तीय
वर्ष 2004-05, 2005-06 एवं 2006-07
के दौरान
विधान सभा
क्षेत्र
डेगाना के अन्तर्गत
केन्द्रीय
सड़क निधि
योजना में कोई
भी सड़क की स्वीकृति
प्राप्त
नहीं हुई है।
(3) केन्द्रीय
सड़क निधि
योजना के तहत
ग्रामों को
पक्की सड़क
से जोड़ने का
कोई प्रावधान
नहीं है।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से माननीय
मंत्री महोदय
से यह जानना
चाहूंगा कि
केन्द्रीय
निधि सड़क
योजना के तहत
डेगाना में
कोई स्वीकृति
प्राप्त
नहीं हुई, अन्य
जगह कितनी स्वीकृतियां
प्राप्त हुई
हैं जिले में ? यह
भी आप बता
दें।
दूसरा,
कौन कौनसी
सड़कें केन्द्रीय
सड़क निधि
योजना के अन्तर्गत
डेगाना की आती
हैं और उनकी
वर्तमान में क्या
स्थिति है ?
श्री
नन्दलाल
मीणा (प्रतापगढ़):
आती नहीं है।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): आती
कैसे नहीं है,
आपको मालूम
है, मंत्री जी
जवाब देंगे कि
आप देंगे, आती
नहीं है, यहां
बैठे हैं
सक्षम हैं मंत्री
जी जवाब देने
में।
श्री
अध्यक्ष: बीच
में बैठे नहीं
बोलें और बात
सही है मंत्री
जी की जगह आप
कैसे जवाब
देते हैं।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): या आप
दे दो जवाब, मंत्री
जी दे रहे हैं
जवाब बीच में
कहते हैं आती
नहीं है ।
मेरे क्षेत्र
का मेरे को
पता है कि
आपको पता है।
प्रश्नकाल
में ही करने
लग जाते हैं।
श्री
अध्यक्ष: आप
प्रश्न
पूछो।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): मैं
पूछ रहा हूं, प्रश्न
ही पूछ रहा
हूं।
श्री
अध्यक्ष: आप
पूछो कोई दिक्कत
नहीं है।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): उक्त
योजना के अन्तर्गत
डेगाना में
आने वाली
सड़कों के लिए
क्या कोई
प्रस्ताव
बनाये, यदि
नहीं बनाये तो
क्यों नहीं
बनाये, इसका
जवाब भी आप
दें। जबकि आपके
घोषित मापदण्डों
के अनुसार
मेजर
डिस्ट्रिक्ट
रोड, अन्य
महत्वपूर्ण
सड़कें आती
हैं तो इनके
प्रस्ताव
आपने क्यों
नहीं बनाये? स्टेट
हाई वे 59 जो
टहला से
सूदवाड़ तक
जाता है वह
कच्ची सड़क
है उसको आप कब
तक पक्का
करने की योजना
बना रहे हैं
या नहीं बना
रहे हैं ?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य ने यह
जानना चाहा है
कि नागौर और
डेगाना जिले
में कितने
किलोमीटर
सड़क ऐसी है
जो इन सी आर एफ
के मापदण्डों
के अनुसार
जिनका नवीनीकरण,
सुदृढ़ीकरण
किया जा सकता
है, अध्यक्ष
महोदय, नागौर
जिले में 955
किलोमीटर
सड़क स्टेट
हाई वे है सी
आर एफ के फण्ड
से इसमें 419
किलोमीटर
सड़क का
नवीनीकरण और
सुदृढ़ीकरण
कर दिया गया
है। मेजर
डिस्ट्रिक्ट
रोड नागौर
जिले में 377
किलोमीटर है, 113
किलोमीटर का
सुदृढ़ीकरण
और नवीनीकरण
कर दिया गया
है। डेगाना
विधान सभा में
राज्य
राजमार्ग 139
किलोमीटर है
और मुख्य
जिला सड़क 31
किलोमीटर है।
अध्यक्ष
महोदय, मैंने
जिस तरह पहले
निवेदन किया
कि सी आर एफ के
तहत जो मापदण्ड
राज्य सरकार
के बने हुए
हैं इनमें राज
मार्ग स्टेट
हाई वे, मुख्य
जिला सड़क
इनका
सुदृढीकरण और
नवीनीकरण का काम
हम लेते हैं,
कोई मुख्य
ब्रिज अगर टूट
गया तो उसको
भी लेते हैं।
अध्यक्ष
महोदय, यह सही
है कि पिछले
वर्षो में सी
आर एफ के तहत
जो राशि हमें
मिल रही है वह
राशि हमारे
सैस के तहत जो
हमारा हिस्सा
है उसके
अनुसार मिल
रही है और उस
राशि से जो
रिन्युअल
साइकल में जो
सड़कें आती
हैं, जिन
सड़कों की आयु
छह वर्ष से आठ
वर्ष स्टेट
हाईवे में और
मेजर
डिस्ट्रिक्ट
रोड में दस से
बारह वर्ष हो
गयी है, वह इस
मापदण्ड में
नहीं आती है।
वह राशि कम
पड़ती है
इसीलिए अध्यक्ष
महोदय, हमने
एक योजना
बनायी है 325
करोड़ की और 1500 किलोमीटर
सड़कें ऐसी
हैं राजस्थान
के अन्दर जो 1996
में बनी थीं
जिनका अभी तक
नवीनीकरण हम नहीं
कर पाये। इनका
स्टेट हाई वे
और एम डी आर इन
सारी सड़कों
का 325 करोड़ की
जो योजना
बनायी है उनके
तहत हम
नवीनीकरण भी
करेंगे और
इनका
सुदृढ़ीकरण
भी करेंगे।
अध्यक्ष
महोदय, आपने
कहा कि कौन
कौनसी ऐसी
सड़कें हैं जो
रह गयी, मैंने
पहले निवेदन
किया डेगाना
के अन्दर
पहले बड़ी
घाटी, तिरणाउ,
डीड़वाना,
चालीस किलोमीटर
सड़क, चार
करोड़ रुपये
स्वीकृत हुए
थे, जो काम
पूरा हो गया
और नौ
किलोमीटर
सड़क इसी में
इस पर 42 लाख
रुपये स्वीकृत
हुए थे और इसी
तरह नागौर
जिले के अन्दर
भी इस सी आर एफ
के तहत अब तक 42
करोड़ की स्वीकृति
हमने जारी की
है।
अध्यक्ष
महोदय, जो
हमने योजना
बनाई है उस
योजना के तहत माननीय
सदस्य को मैं
विश्वास
दिलाना चाहूंगा
कि इनकी जो भी
सड़कें आएंगी
इस बार जो
हमने 325 करोड़
की योजना
बनायी है...
श्री
अध्यक्ष: सी
आर एफ की एक दो
सड़कें इनकी
भी ले लीजिए।
बात तो इतनी
सी है और क्या
है बहुत बड़ी
बात थोड़े ही
है कुछ।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): कहां
ले रहे हैं, इसकी
तो पीड़ा है
मेरे को।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
नीतिगत प्रश्न
पूछ रहा हूं
रिन्युअल
करने का समय,
आपके माध्यम
से मैं यह
जानना चाहता
हूं कि क्या
यह सही है कि
उक्त योजना
के अन्तर्गत
डेगाना में स्टेट
हाईवे 59 व 82
किलोमीटर स्टेट
हाई 60 की 64
किलोमीटर इस
योजना के
अनतर्गत आती
है। रिन्युअल
की क्या समय
सीमा है? लंगोर
से बामणा आठ
मिलोमीटर
सड़क ग्यारह
वर्ष पूर्व
रिन्युअल की
गयी थी, बाद
में क्यों
नहीं हुई ? स्टेट
हाईवे डेगाना
किरोधा सड़क
की चौड़ाई तीन
मीटर है जबकि
इनके मापदण्ड़ाके
आधार पर 3.75 मीटर
होनी चाहिए,
एम डी आर 24
जैतारण,
मेड़ता,
डेगाना सड़क
की चौड़ाई तीन
मीटर है जबकि
कम से कम 3.75 मीटर
होनी चाहिए।
इन सड़कों की
चौड़ाई तीन
मीटर ही क्यों
है? इनके
मापदण्ड़ों
के अनुसार अध्यक्ष
महोदय, 3.75 है तो
इसका जवाब दे
दें कि इन
सड़कों की
चौड़ाई कम क्यों
है ? यह भी बता
दें और आपने
अब जो तीनसौ
और कुछ करोड़
रुपये की
योजना बनायी
है उसमें मेरे
विधान क्षेत्र
की कौन कौनसी
सड़कें आप ले
रहे हो, कृपा करके
यह भी बता
दें।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, यह जो
सड़कें हैं यह
स्टेट हाई वे
और मेजर
डिस्ट्रिक्ट
रोड हैं यह दो
प्रकार की
सड़कें इस
योजना के अन्दर
हम ले सकते
हैं। यह सारी
सड़क जो पहले
आर्डिनरी
डिस्ट्रिक्ट
रोड होती है
उससे क्रमोन्नत
करके वह सैंसस
जो हम करते
हैं ट्रेफिक
का उसके
अनुसार मेजर
डिस्ट्रिक्ट
रोड बनाते हैं
और मेजर
डिस्ट्रिक्ट
रोड पर जब
यातायात का
दवाब ज्यादा
होता है तो
उन्हीं में
क्रमोन्नत
करके हम स्टेट
हाईवे बनाते
हैं।
इसमें
यह भी बात सही
है कि कई ऐसी
सड़क भी हैं
जिनका क्रमोन्नयन
तो हो गया
परन्तु
जिनकी चौड़ाई
इन मापदण्डों
के अनुसार
नहीं हो रही
या नवीनीकरण
नहीं हुआ,
इसीलिए अध्यक्ष
महोदय, मैंने
निवेदन किया
कि हमने राज्य
स्तर पर जो
योजना बनायी
है उस योजना
के अन्दर हम
इन सारी चीजों
को शामिल कर
रहे हैं। जिस तरह
मैंने पहले
निवेदन किया
राज्य उच्च
मार्ग में छह
वर्ष आठ वर्ष
के बीच में जो
सड़क बन जाती
है उनको रिन्युअल
करने का काम
होता है उसकी
आयु
निर्धारित की हुई
है और मुख्य
जिला सड़क में
आठ दस वर्ष तक,
मैं अध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से
माननीय सदस्य
से निवेदन
करना चाहता
हूं इन्होंने
कुछ सड़कों का
नाम लिया है,
उन सड़कों की
कैटेगरी क्या
है, इसकी पूरी
जानकारी तो मुझे
नहीं है परन्तु
उन सारी
सड़कों में जो
जो सड़कें इस
मापदण्ड के
अनुसार आती
हैं, निश्चित
तौर पर उन पर
विचार करेंगे
और नये प्रस्तावों
में हम उनको
शामिल करके हम
भारत सरकार को
निश्चित तौर
पर भेजेंगे।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): मन्त्री
जी आपने स्वयं
ने जो सवाल के
उत्तर के साथ
दिया है All State roads including State
Highways, Major District roads and other roads of importance….तो
अदर रोड आफ
इम्पार्टेंस
हो सकती है तो
उस कैटेगरी के
अन्तर्गत
माननीय सदस्य
के क्षेत्र
में आप सड़क
कर सकते हैं।
आप यह क्यों
बहाना ले रहे
हैं कि
क्राइटेरिया
में नहीं आती
हैं In other important roads, you can take any road.
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा):
माननीय
मंत्री महोदय,
यह बताएं कि
चार से छह
वर्ष जो स्टेट
हाईवे या स्टेट
हाईवे के रिन्युअल
का टाइम है और
एम डी आर का आठ
से दस का जो आप
बता रहे हैं
अतिवृष्टि से
भीलवाड़ा,
गंगापुर,
कांकरोली
मार्ग जो पूरा
खतम हो चुका,
छह महीने में
सौ एक्सीडैंट
हो चुके हैं ।
श्री
अध्यक्ष:
करौली बीच में
कहां आ गया
डेगाना के ?
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): जो स्टेट
हाई वे है और
राजस्थान के
स्टेट हाईवे
..
श्री
अध्यक्ष: No. I will not
allow.
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): केन्द्रीय
रोड नीति का
मैटर है,
राजस्थान की
रोड नीति की
बात हो रही
है।
श्री
अध्यक्ष: अलग
से प्रश्न
है, अलग से
प्रश्न है ।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा):
इसलिए मैं यह
बात कह रहा हूं
कि क्या चार
से छह वर्ष का
जो रिन्युअल
टाइम है उससे
पहले जो
सड़कें
क्षतिग्रस्त
हुई हैं उनको
भी आप ठीक
करने का केन्द्रीय
रोड नीति में
विचार रखते
हैं ? रखते हैं
तो कब तक ?
श्री
अध्यक्ष: अलग
से प्रश्न
है।
श्री
सुरेन्द्र
गोयल (जैतारण):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मेरा
एक निवेदन है
कि माननीय
मंत्री महोदय,
अदर
डिस्ट्रिक्ट
को जोड़ने
वाली रोड हैं
...................
vns/usc/11.30/1d/29.3.2007/1
उनके बीच
में जो आबादी
बसी हुई है,
गांव बसे हुए
हैं। गांव के
बीच में रोड
इतनी खराब है
कि उसका मैं
मूल्यांकन
नहीं कर सकता
तो उनको सी.सी.
रोड में बनाने
का इस वर्ष
में प्रावधान
है या नहीं है
?
श्री अध्यक्ष:
वह एम.एल.ए. को
कहते हैं बनाओ
अपनी सीमेण्ट
की सड़क।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): आप तो
डेगाना के
बारे में बताइये।
आप तो डेगाना ...
(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जो मेजर
डिस्ट्रिक्ट
रोड और स्टेट
हाईवे हैं, जो
आबादी
क्षेत्र से
गुजरते हैं यह
सही है कि
आबादी
क्षेत्र में
इनकी हालत खराब
रहती है
इसीलिये हमने
100 करोड़ रुपये
की योजना
बनायी है और
जितने भी
राजस्थान में
स्टेट हाईवे,
मेजर
डिस्ट्रिक्ट
रोड्स हैं जो
किसी भी आबादी
क्षेत्र से
गुजरती है उन
सबको आगामी
वित्तीय
वर्ष के अन्दर
हम सीमेण्ट
रोड में बदलने
का काम
करेंगे।
श्री अध्यक्ष:
बहुत अच्छा।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, अब तक जो
हमें राशि
प्राप्त हुई
है सी.आर.एफ. के
तहत वह राशि
लगभग हमें 80
करोड़ से लेकर
102 करोड़ के बीच
प्राप्त होती
है। यह हमारा
सैस में हिस्सा
है वह है।
हमें 635 करोड़
रुपये प्राप्त
हुई हैं और
उसमें से 522
करोड़ रुपये
हमने व्यय कर
दिये हैं। 7431
किलोमीटर
सड़क का रिन्युअल
कर दिया, 112 काम
प्रगति पर
हैं।
इसके पश्चात्
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जिस तरह
मैंने कहा 8000
किलोमीटर
सड़कें ऐसी
थीं स्टेट
हाईवे की
जिनको
योजनाबद्ध
तरीके से
सी.आर.एफ. में
और हमने जो
सैस में लिया
है उस राशि
में इन सबको
मिलाकर सारा
रिन्युअल
करने के काम
को हाथ में
लिया था। 1500
किलोमीटर
आगामी वित्तीय
वर्ष में
करेंगे और
उसमें माननीय
सदस्य ने जो
कहा और यह सही
है जैसा
रामगढ़ से आने
वाले माननीय
सदस्य कह रहे
हैं कि जो
गाइड लाइन है
उस गाइड लाइन
के अन्दर हम
अदर इम्पोर्टेंट
रोड, जो बहुत
महत्वपूर्ण
रोड हैं उनको
भी ले सकते
हैं। तो निश्चित
तौर से रोड की
सूची मैं आपसे
ले लूंगा और
उस पर
गुणावगुण के
आधार पर विचार
करके जो कर
पाऊंगा वह
करूंगा।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): अब
आपने तो स्वयं
ने हमको दिया
है।
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा):
माननीय
मंत्रीजी,
सी.आर.एफ. से ही
जुड़ा हुआ है।
40-45 गांव मेरी
कांस्टीट्वेंसी
के इससे
प्रभावित हैं
... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
No. I will not
allow.
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहूंगा
माननीय
मंत्रीजी से ...
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
नौ-नौ।
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा):
क्या यह सही
है कि भादरा
झासर सड़क
सी.आर.एफ. में मंजूर
हुई ? यदि हां,
तो इसकी
मंजूरी कब
मिली ? इसका
कार्य कब तक
होना चाहिये
था? अब तक
कार्य पूरे
नहीं होने के
क्या कारण
रहे ? ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
No. I have called
next question.
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा):
और तीसरा स्पेसिफिक
है मंत्रीजी
कि अब तक जो भी
कार्य, आगे यह
सड़क कब तक
पूरी हो
जायेगी ?
श्री अध्यक्ष:
श्री जोगाराम
पटेल।
श्री सी. डी.
देवल (रायपुर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, न तो यह
गवर्नमेंट
सी.सी. रोड
बनाती है।
एम.एल.ए. फण्ड
से जो भी बना
उनको भी बंद
कर दिया। कम
से कम यह तो
बता दें कि
सी.सी. रोड
बनाएंगे कि
नहीं?
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैंने
जो रिन्यूअल
का जिक्र
किया। ग्यारह
साल से जो
सड़क पर रिन्यूअल
नहीं हुआ उसका
तो मंत्रीजी
कृपा करके कह दें
कि इस साल
करवा देंगे
अपन। ... (व्यवधान)
सड़क काम नाम
भी बताया।
सड़क ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
मंत्रीजी आप ...
(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, 1996 तक के
जो भी स्टेट
हाई वे और
मेजर
डिस्ट्रिक्ट
रोड होगी उन
सारी को हम
इसी वित्तीय
वर्ष में ले
लेंगे। 1996 तक की
उसमें आपकी
सड़क भी काफी
आ रही है।
श्री अध्यक्ष:
ठीक है। आ
जाएगी।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): ठीक
है साहब।
श्री सी. डी.
देवल (रायपुर):
यह सी.सी.रोड
का भी जवाब
दें माननीय
अध्यक्ष
महोदय, हमारे
जेतारण से आने
वाले माननीय
सदस्य ने
पूछा है।
गांवों में न
यह तो
सी.सी.रोड बनाते
हैं और एम.एल.ए.
ने बनाकर दिया
उसको भी बंद
कर दिया।
श्री अध्यक्ष:
श्री जोगाराम
पटेल।
श्री सी. डी.
देवल (रायपुर):
यहां न तो
मरने देते हैं
और न जीने
देते हैं। ... (व्यवधान)
उनसे कहें
वहां पर
बनायें और
नहीं बनायें
तो इनको कम्प्लीट
तो कर दें। न
तो जीने देते
हैं और न मरने
देते हैं। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
No. I have called
next question.
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा):
सी.आर.एफ. का ही
है माननीय
मंत्रीजी,
जवाब देने के
लिए खड़े हुए
हैं1
श्री अध्यक्ष:
मैंने नेक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया। ...
(व्यवधान)
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, अन्तरराज्यीय
सड़क का मामला
है। राजस्थान
और हरियाणा से
जुड़ा हुआ
मामला है और
राजस्थान की
इज्जत और
बेइज्जती का
भी मामला है। ...
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
मैंने कहा कि
यह इस प्रश्न
से संबंधित
नहीं है ... (व्यवधान)
आपका सप्लीमैंट्री
मूल प्रश्न
से संबंधित
नहीं है ... (व्यवधान)
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा):
हरियाणा से जब
भी राजस्थान
में प्रवेश
करते हैं
भादरा-दुमपर
रोड से तो उस
समय यह रोड
बीच में आती
है और हरियाणा
से आने वाला
हर व्यक्ति ...
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
अंकित नहीं
होगा। ... (व्यवधान)
नो-नो ... (व्यवधान)
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा): 000
श्री
अर्जुन सिंह (दानपुर):
000
श्री अध्यक्ष:
मूल प्रश्न
से संबंधित
आपका सप्लीमैंट्री
नहीं है इसलिए
मंत्री के लिए
कोई आवश्यक
नहीं है। ... (व्यवधान)
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा): 000
श्री
अर्जुन सिंह
(दानपुर): 000
श्री अध्यक्ष:
श्री जोगाराम
पटेल। ... (व्यवधान)
कह दिया न उन्होंने।
मंत्रीजी।
राजस्व
कार्यालयो का
गठन/पुनर्सीमांकन
176. श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): क्या
राजस्व
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1) क्या
सरकार
पटवार-मंडलों,
राजस्व
मंडलों,
उप-तहसीलों व
तहसीलों का
पुन: सीमांकन
करने का विचार
रखती है? यदि
हां, तो कब क व
नहीं हों, तो
क्यों?
(2) क्या
सरकार नये
पटवार-मंडलों,
राजस्व
निरीक्षक
मंडलों, उप
तहसीलों व
तहसीलों के गठन
का विचार रखती
है? यदि हां, तो
कब तक व नहीं
तो क्यों?
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): (1) जी,
नहीं।
(2) जी, नहीं।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
माननीय
मंत्री महोदय
से आपके माध्यम
से दो प्रश्न
निवेदन करना
चाहूंगा।
मेरे प्रश्न
के दो भाग थे।
एक भाग तो क्या
सरकार
पटवार-मंडलों,
राजस्व
मंडलों,
उप-तहसीलों व
तहसीलों का
पुन: सीमांकन
करने का विचार
रखती है? और दूसरे
भाग में यदि
नहीं तो क्यों
नहीं। इन
दोनों प्रश्नों
में दूसरे भाग
का उत्तर क्यों
नहीं दिया?
पहला मेरा
प्रश्न तो यह
है। नहीं करने
का तो जी, नहीं
कर दिया पर क्यों
नहीं करना
चाहते हैं
इसका कोई उत्तर
नहीं दिया।
मेरा पहला
प्रश्न आपके
माध्यम से है
कि जो मेरा हाफ
द क्वेश्चन
है उसका ऑनसर
नहीं दिया।
उत्तर नहीं
देने का क्या
कारण है?
दूसरा प्रश्न
मेरा यह है कि
राजस्थान
लैंड रेवेन्यू,
लैंड रिकार्ड
रूल्स के
कौनसे
प्रोविजन के
तहत आखिरी बार
राजस्थान
में पटवार
सर्कल,
आर.आई.सर्कल
और तहसीलों का
गठन और पुनर्गठन
किया हुआ इन
दोनों का जवाब
दें। एक प्रश्न
मेरा पेंडिंग
रहेगा।
श्री अध्यक्ष:
दें, क्यों
का जवाब
दीजिए। क्यों
नहीं का बता
दें।
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जब
पुन:सीमांकन
का हो ही नहीं
रहा है। पूर्व
के सरकार के
संसाधन और
वित्तीय
स्थिति को
देखते हुए और
क्षेत्र के
सारे मामले को
देखते हुए
जितनी अभी व्यवस्थाएं
हैं उनको ठीक
समझा जा रहा
है। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
पर्याप्त
माना जा रहा
है। ... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री):
सैकिण्ड में
मैं यह निवेदन
करना चाह रहा
हूं कि दूसरे
प्रश्न में
इन्होंने यह
पूछा है कि क्या
सरकार नये
पटवार-मंडलों,
राजस्व
निरीक्षक
मंडलों, उप
तहसीलों व
तहसीलों के गठन
का विचार रखती
है? और मैंने
इसके उत्तर
में भी जी
नहीं कहा है।
वर्तमान में
सरकार के
सामने जो
स्थिति है
उसमें किसी
प्रकार का भी
विचार नहीं
किया जा रहा
है। फिर भी
माननीय सदस्य
और जनता की
जगह-जगह से
मांगों पर
हमें सारी जो
फार्मलिटी
वगैरह है उनके
लिए हमने
तहसील नये
पटवार मंडल
बनाना है या
नहीं बनाना
है। निरीक्षक
मंडल बनाने है
इस सारे की
जहां-जहां से
भी एप्लीकेशन
वगैरह तहसील,
उप तहसील की
आयी है, उनका
एग्जामिनेशन
राजस्व स्तर
पर किया जा
रहा है।
श्री अध्यक्ष:
ठीक है,
बढि़या।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): मेरा
दूसरा प्रश्न
का जवाब नहीं
दिया, माननीय
अध्यक्ष
महोदय, कि
आखिरी बार
राजस्थान
में पटवार
सर्कल, आर.आई. सर्कल
और तहसील का
गठन या
पुनर्गठन कब
हुआ? अब इसके
साथ ही मैं एक
प्रश्न और एड
कर लेता हूं
कि आर.आई.
सर्कल, पटवार
सर्कल, तहसील
सर्कल के गठन
या पुनर्गठन
की बेसिक रिक्वायरमैंट
कौनसे
प्रोविजन में
किया है? यह
बेसिक रिक्वायरमैंट
है कि
एरियावाइज हो,
खातेदारवाइज हो
व ऐसी कोई
बेसिक पॉलिसी
या लॉ में कोई
रिक्वायरमैंट
जिसको बेसिक
रिक्वायरमैंट
बोलते हैं वह
जो बेसिक रिक्वायरमैंट
फुलफिल करता
है वही गठन या
पुनर्गठन एक
पटवार सर्कल
के दो हो सकते
हैं तो बेसिक
रिक्वायरमैंट
क्या है?
आखिरी मेरा
प्रश्न है कि
इस बेसिक रिक्वायरमैंट
के अनुसार
राजस्थान
में, मैं यह भी
पूछ रहा हूं,
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
लूणी में
कितने पटवार
सर्कल, आर.ई. सर्किल
और तहसीलें
गठन या
पुनर्गठन
करने योग्य
है?
श्री अध्यक्ष:
कह दिया न कोई
विचाराधीन
नहीं है उनके।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): यह जवाब
नहीं दिया।
इसमें
विचाराधीन
नहीं, का जवाब
नहीं दिया।
आखिरी बार कब
हुआ? बेसिक
रिक्वायरमैंट
क्या है?
बेसिक रिक्वायरमैंट
में हमारे
यहां पर बनते
हैं या नहीं बनते
हैं यह तीन
बात है।
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इन
इकाइयों के
गठन ... (व्यवधान)
मैं बताता
हूं। ... (व्यवधान)
श्री कन्हैया
लाल मीणा (बस्सी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक
मिनट। मंत्री
महोदय, एक
मिनट मैं, माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से
मंत्री महोदय
से निवेदन
करना चाहूंगा
कि ऐसे रेवेन्यू
पटवार सर्कल
जहां पर नक्शे
फट चुके हैं
बिलकुल और नक्शे
फट जाने की
वजह से वहां
पर किसानों
में बहुत भारी
विवाद रास्ते
को लेकर,
सीमांकन को
लेकर रहता है।
जहां नक्शे
फटे हुए हैं
ऐसे रेवेन्यू
सर्कल्स का
आप सीमांकन
करवाने की
कृपा करेंगे? ...
(व्यवधान)
नक्शे
बनाएंगे या
ठीक करेंगे?
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, पूरे
राजस्थान के
अन्दर ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
अब आप ... (व्यवधान)
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक सवाल
है।
श्री अध्यक्ष:
नहीं। ... (व्यवधान)
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):
पॉलिसी की
नीतिगत बात
पूछ रहा हूं।
मैं यह पूछना
चाहता हूं कि ...
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): पहले
जोगारामजी के,
मूल प्रश्नकर्ता
हैं, उनका
जवाब दे दें
तब ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आप केवल उन्हीं
के प्रश्न का
जवाब दीजिए।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक सवाल
इसी से
संबंधित है।
पटवार सर्कल,
कानूनगो
सर्कल और
तहसील बनाने
की सरकार की
क्या नीति
बनी हुई है? क्या
पॉलिसी बना
रखी है उस
पॉलिसी के अन्तर्गत
कैसे बना है?
वह बता दें।
श्री अध्यक्ष:
मूल प्रश्नकर्ता
का जवाब तो
आने दीजिए।
मूल प्रश्नकर्ता
का जवाब आने
दीजिए। ... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, पूर्व
में भनोत
कमेटी एक बनी
हुई थी। ... (व्यवधान)
श्याम/चौहान 29.03.2007
11.40 1e
अध्यक्ष
महोदय, पूर्व
में भानावत
कमेटी बनी हुई
थी, उसकी 1995 में
सिफारिशें
आयी थी उसमें 771
नये पटवार
मंडल जिसमें
उपनिवेशन भी
शामिल था,
सृजित करने की
अभिशंषा की
गयी थी और उस
वक्त में 1996-97
में 140 और 1998-99 में 100
और 1999-2000 में 175 कुल 415
पटवार मंडल स्वीकृत
किये गये थे
और उसके पश्चात
263 पटवार मंडल
स्वीकृत
नहीं किये जा
सके 415 में से।
इसी प्रकार भानावत
कमेटी ने 406
भू-अभिलेख
सर्किलों के
संरक्षण की
सिफारिश की थी
और 1996-97 में 77, 1998-99 में
50 और 1999-2000 में 23 कुल 150
भू-अभिलेख
निरीक्ष्ंक
सर्किल स्वीकृत
किये गये थे।
उसमें भी 256
भू-अभिलेख
सर्किल स्वीकृत
नहीं किये जा
सके और इसके
अंदर जो संसाधन
और सरकार के
पास जिस हिसाब
से फाइनेंस की
रिक्वायरमेंट
थी उस हिसाब
से 256 नहीं बन
पाये, केवल 150 भू-अभिलेख
सर्किल बनाये
गये ...(व्यवधान)
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): कितनी
आबादी हो गयी,
कितने सर्किल
होंगे, कितनी
तहसीलें ...(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): 1956 से
लेकर 1989 तक
तहसीलों, उप
तहसीलों की संख्या
वृद्वि होती
रही। इस
प्रकार से 1989 को
आधार मानकर के
मजीठिया
कमेटी का गठन
किया गया और
उसकी रिपोर्ट
के आधार पर 1991
में 213 तहसीलें, 87
उप तहसीलें
कार्यरत थी और
उसी के आधार
पर इस कमेटी
के द्वारा
तहसीलें, उप
तहसीलों के पुनर्गठन
के संबंध में
इस प्रकार
सिफारिश की
गयी थी। सामान्य
क्षेत्र में
एक नयी तहसील
के सृजन हेतु 40
पटवार सर्किल,
रेगिस्तानी क्षेत्र
में 30 तथा
अनुसूचित
जाति, जनजाति
...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: मूल
प्रश्नकर्ता,
संतुष्ट हो
गये ना आप। आप
संतुष्ट हो
गये ना। नेकस्ट
क्वेश्चन
लूं ...(व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): एक मिनट,
वह
इनफोर्मेशन दे
रहे हैं, खड़े
कैसे हैं ...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अभी
तो 1956 पर आये हैं
यह, 1956 से कहना
चालू किया है 2007
तक तो पता
नहीं कब
आयेंगे ...(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): मैं
बता रहा हूं
ना ...(व्यवधान)
इन्होंने
कहा है कि एक
तहसील में
कितने पटवार
सर्किल होने
चाहिए तो मैं
यह निवेदन कर
रहा हूं कि 40
पटवार सर्किल
होने चाहिंए।
श्री
अध्यक्ष: आप
इसकी डिटेल क्यों
पढ़ते हैं। आप
सीधी सी बात
बतायें, ना
कोई प्रस्ताव
है, ना कोई
आवश्यकता है,
खत्म हुई
बात।
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): इन्होंने
कहा है कितने
चाहिंए। एक
तहसील के लिए
कितने पटवार
सर्किल
चाहिंए।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): पटवार
सर्किल के
लिए, आर.आई.
सर्किल के लिए
और तहसील के
लिए बेसिक
रिक्वायरमेंट
क्या है कि
यह मिनिमम
होनी चाहिए।
वह क्लियर कर दें,
वह बता दें।
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): वही
तो बता रहा
हूं कि एक
तहसील के लिए 40
की जरूरत है
और रेगिस्तानी
और अनुसूचित
जाति और
जनजाति
क्षेत्र में 30
पटवार मंडल की
जरूरत है और
पहाड़ी
क्षेत्र के
अंदर 20 पटवार
सर्किल होने
चाहिंए।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): पटवार
सर्किल बताये
हैं, एक पटवार
सर्किल और
आर.आई. सर्किल
के लिए बेसिक
रिक्वायरमेंट
क्या है ...(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): इसी
के आधार पर
किया जाता है
...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
जानकारी
प्राप्त
करने का ...(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, अभी 241
तहसीले काम कर
रही हैं।
श्री
अध्यक्ष: ठीक
है।
श्री
अर्जुन सिंह
(दानपुर): अध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से
मंत्री जी से
जानना
चाहूंगा ...(व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): अध्यक्ष
महोदय, मेरा
पूरा हो जाये
फिर आप पूछ
लेना ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: मूल
प्रश्नकर्ता
संतुष्ट हैं
...(व्यवधान)
श्री
अर्जुन सिंह
(दानपुर):
बांसवाड़ा
जिले में 5 तहसीलों
में से 3
तहसीलों में
...(व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): पटवार
मंडल में
बेसिक रिक्वायरमेंट
क्या है ...(व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय मेरा
प्रश्न है
उसका उत्तर आ
जाये ...(व्यवधान)
श्री
अर्जुन सिंह
(दानपुर): 5 में
से 3 तहसील में
सैटलमेंट हुआ
है और दो
तहसीलों का
बाकी है ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
आपका प्रश्न
नीतिगत है ...(व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): इनको
रोको ना ...(व्यवधान)
श्री
अर्जुन सिंह
(दानपुर): क्या
मंत्री जी,
जिनका सर्वे
बाकी है वह
कराना चाहते
हैं या नहीं
...(व्यवधान) 5
तहसीलों में
से 3 का
सैटलमेंट हो
चुका है, 2 का
बाकी है, क्या
मंत्री जी
उसमें
सैटलमेंट
कराना चाहते
हैं, 2 तहसीलों
का बाकी है ...(व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): मैं
आपका संरक्षण
चाहता हूं।
मेरा प्रश्न
है कि पटवार
सर्किल और
आर.आई. सर्किल
के गठन या
पुर्नगठन की
बेसिक रिक्वायरमेंट
क्या है, वह
बता दें ...(व्यवधान)
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): इसी से
संबंधित है
मेरा प्रश्न
...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: वह
कह रहे हैं जी
नहीं, कोई
आवश्यकता
नहीं है। कोई
प्रस्ताव
नहीं है ...(व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): बेसिक
रिक्वायरमेंट
क्या है ...(व्यवधान)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
मंत्री महोदय,
यह क्राइटेरिया
तो कांग्रेस
सरकार के टाइम
का बताया है।
इस सरकार में
आप बैठे हैं
इनका
क्राइटेरिया
क्या है। यह
जरा बता
दीजिये ...(व्यवधान)
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): अध्यक्ष
महोदय, मंत्री
महोदय, यह
बताने का कष्ट
करें ...(व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): अध्यक्ष
महोदय, बेसिक
रिक्वायरमेंट
पटवार सर्किल
और आर.आई.
सर्किल की क्या
है ...(व्यवधान)
श्री
अर्जुन सिंह
(दानपुर): अध्यक्ष
महोदय, मेरे
प्रश्न का भी
जवाब दिला दें
...(व्यवधान) 5
तहसीलों में
से 3 का
सैटलमेंट हो
चुका है, 2 का
बाकी है और
वहां से पूरा
स्टाफ ...(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, अभी
गठन का कोई
मामला ही नहीं
चल रहा है और
पूर्व में दो
कमेटियां बनी
हुई थी, एक तो
भानावत कमेटी
के आधार पर और
एक मजीठिया
कमेटी के आधार
पर, पूर्व में
जो गठन किया
गया था, वह किया
गया है।
श्री
अर्जुन सिंह (दानपुर):
अध्यक्ष
महोदय, मेरा
प्रश्न भी
साथ-साथ ले
लें ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
यह कमेटी कब
बैठाते हैं,
यह बतायें कि कब
बैठायी जाती
है कमेटी, जब
आवश्यकता
अनुभव करते
हैं तब ना ...(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): एक तो
पूर्व में बनाई
हुई थी और उसी
के आधार पर
सिफारिश आयी
थी, राजस्व
मंडल के
चेयरमैन उन पर
विचार करते
हैं।
श्री
अध्यक्ष: वही
तो मैं कह रही
हूं।
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): वह
किस प्रकार से
होते हैं, अभी
कोई विचार
नहीं है बनाने
का, इसलिए कोई
मामला ही नहीं
है।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): मेरा
इसमें निवेदन
है कि राजस्थान
लैंड रेवेन्यु
रूल्स में
कौनसे
प्रोविजन ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
अल्प सूचना
काल प्रश्न
है मेरे पास,
शोर्ट नोटिस
क्वेश्चन
और वह आवश्यक
है पूछा जाना
इसलिए मैं अब
उसे कॉल कर
रही हूं।
श्री
अर्जुन सिंह
(दानपुर): अध्यक्ष
महोदय,
सैटलमेंट की
बात है,
मंत्री जी करना
चाहते हैं कि
नहीं करना
चाहते हैं। 5
में से 3 का हो
गया, 2 का बाकी
है ...(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): आप
अलग से पूछ
लेना
सैटलमेंट का
...(व्यवधान)
अल्प
सूचना प्रश्न
गुर्दा
प्रत्यारोपण
हेतु राज्य
कर्मियों को
पुनर्भरण की
सुविधा
श्री
अध्यक्ष:
श्री जोगेश्वर
गर्ग।
श्री
जोगेश्वर
गर्ग (जालौर):
अल्प सूचना
प्रश्न संख्या
1 ।
श्री
अध्यक्ष:
जवाब दीजिये।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, पूरा
पढूं, यह सबके
पास नहीं जाता
है इसलिए या
खंड ही पढ़
दूं। मेरा
निवेदन यह है
इसमें कि पूरा
पढूं और फिर
जवाब दूं।
पहले प्रश्न
पूछें फिर
जवाब दूं।
श्री
अध्यक्ष: पहले
प्रश्न
पूछें, औरों
को मालूम नहीं
है इसलिए प्रश्नकर्ता
पहले अपना
प्रश्न पढ़ेंगे
और उसके बाद
आप अपना जवाब
दीजिये।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
पढ़ेंगे, तब
मैं जवाब
दूंगा। ठीक
है।
श्री
जोगेश्वर
गर्ग (जालौर):
अध्यक्ष
महोदय, क्या
चिकित्सा
(शिक्षा)
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1) क्या
यह सही है कि
राज्य कर्मचारियों
को स्वयं
अथवा
आश्रितों के
उपचार पर होने
वाले व्यय का
पुनर्भरण
करने की व्यवस्था
है। यदि हां,
तो गुर्दा
प्रत्यारोपण
पर होने वाले
व्यय के
पुनर्भरण के
लिए क्या
नियम हैं।
नियमों की
प्रति सदन की
मेज पर रखें।
(2) राज्य
के कितने
चिकित्सालयों
में गुर्दा प्रत्यारोपण
की सुविधा
उपलब्ध है एवं
उसके लिए क्या
नियम एवं
शर्तें
निर्धारित
हैं।
(3) क्या
यह सही है कि
राज्य से
बाहर गुर्दा
प्रत्यारोपण
करवाने वाले
राज्य
कर्मचारियों
को व्यय का
पुनर्भरण
किया जाता हे।
यदि हां, तो
विगत 8 वित्तीय
वर्षों में ऐसे
कितने मामलों
में पुनर्भरण
किया गया। राज्य
कर्मचारी का
नाम, भुगतान
राशि तथा
भुगतान तिथि
का विवरण सदन
की मेज पर
रखे।
(4) क्या
यह सही है कि
मरीज के निकट
संबंधियों के
अलावा अन्य
किसी दानदाता
से गुर्दा दान
करने की
स्थिति में
राजस्थान के
किसी राजकीय
चिकित्सालय
में प्रत्यारोपण
की अनुमति
नहीं है। यदि
हां, तो उक्त
परिस्थिति
में राज्य से
बाहर प्रत्यारोपण
करवा कर राज्य
सरकार से
पुनर्भरण
प्राप्त
करने हेतु
राज्य के
चिकित्सा
महाविद्यालयों
से अनापत्ति
प्रमाण-पत्र मांगने
के कितने
प्रकरण राज्य
में विचाराधीन
हैं।
श्री
अध्यक्ष:
फरमायें।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): (1) जी
हां। राज्य
कर्मचारियों
एवं उनके
आश्रितों के
गुर्दा प्रत्यारोपण
पर होने वाले
व्यय के
संबंध में
पुनर्भरण के
वही नियम लागू
होते हैं जो
अन्य रोगों
के उपचार के
संबंध में
लागू होते
हैं। संबंधित
नियमों की
प्रति
परिशिष्ठ ‘अ’ के
रूप में सदन
के पटल पर रखी
दी गयी है।
(2)
राजकीय
क्षेत्र में
केवल सवाई
मानसिंह चिकित्सालय,
जयपुर में ही
गुर्दा प्रत्यारोपण
की सुविधा
उपलब्ध है।
गुर्दा प्रत्यारोपण
के संबंध में
मानव अंग
प्रत्यारोपण
अधिनियम, 1994 के
नियम लागू
होते हैं।
जिसके अनुसार
रोगी के निकट
संबंधी के
अलावा अन्य
किसी व्यक्ति
द्वारा
गुर्दा दान
करने की इच्छा
व्यक्त
करने पर उक्त
अधिनियम के
अंतर्गत गठित
ऑथोराइजेशन
कमेटी की
अनुशंषा पर ही
ऐसा किया जाना
संभव है।
(3) जी
हां। राजस्थान
सिविल
सेवा(चिकित्सा
परिचर्या)
नियम, 1970 के नियम
7 के प्रावधान
के अनुसार
राज्य के
राजकीय अस्पतालों
में किसी
विशेष उपचार
की सुविधा
उपलब्ध नहीं
होने की
स्थिति में
मेडिकल कॉलेज
के प्रधानाचार्य
अथवा निदेशक,
चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
सेवाएं, राजस्थान
द्वारा राज्य
से बाहर के
मान्यता
प्राप्त अस्पताल
में उपचार
हेतु अनुशंषा
करने पर
चिकित्सा व्यय
पुनर्भरण देय
है। इन नियमों
के विपरीत बिना
सक्षम
प्राधिकारी
की अनुशंषा के
राज्य से
बाहर मान्यता
प्राप्त अस्पतालों
में गुर्दा
प्रत्यारोपण
करवाने वाले
राज्य कर्मचारियों
को नियमों में
शिथिलता देते
हुए सवाई
मानसिंह
चिकित्सालय, जयपुर
में गुर्दा
प्रत्यारोपण
पर व्यय होने
वाली राशि की
सीमा तक
पुनर्भरण
किया जाता है।
राज्य
से बाहर मान्यता
प्राप्त
संस्थानों
में गुर्दा
प्रत्यारोपण
कराने के लिए
एस.एम.एस.
मेडिकल कॉलेज,
जयपुर द्वारा
जिन व्यक्तियों
को स्वीकृति
प्रदान की गयी
हैं उनका
विवरण परिशिष्ठ
‘ब’ के
रूप में सदन
के पटल पर रख
दिया गया है।
राज्य के
बाहर मान्यता
प्राप्त
संस्थानों
में गुर्दा प्रत्यारोपण
पर व्यय की
गयी राशि के
पुनर्भरण के
संबंध में
मेडिकल
कॉलेजों में
कोई विवरण
संधारित नहीं
किया जाता है।
jyg/akt/29.3.7/11.50/1f
क्योंकि
पुनर्भरण की
कार्यवाही
सम्बन्धित
कर्मचारी के
प्रशासनिक
विभाग द्वारा
ही वित्त
विभाग की
सहमति से की
जाती है। समस्त
प्रशासनिक
विभागों से
वांछित विवरण
प्राप्त
करने के
प्रयास किए जा
रहे हैं किन्तु
इसमें
पर्याप्त
समय लगना अवश्यम्भावी
है। विस्तृत
सूचना प्राप्त
होने पर उपलब्ध
करा दी जाएगी।
दिनांक 28.3.2007 तक
प्राप्त हुई
सूचना
परिशिष्ट ‘स’ के
रूप में सदन
के पटल पर रख
दी गई है।
(4) जी
नहीं। गुर्दा
प्रत्यारोपण
के सम्बन्ध
में मानव अंग
प्रत्यारोपण
अधिनियम, 1994 के
नियम लागू
होते हैं। जिसके
अनुसार रोगी
के निकट सम्बन्धी
के अलावा अन्य
किसी व्यक्ति
द्वारा
गुर्दा दान
करने की इच्छा
व्यक्त
करने पर उक्त
अधिनियम के
अंतर्गत गठित
ऑथोराइजेशन
कमेटी की
अनुशंषा पर
ऐसा किया जाना
संभव है। राज्य
के बाहर
गुर्दा प्रत्यारोपण
करवाकर राज्य
सरकार से
पुनर्भरण
प्राप्त
करने हेतु
मेडिकल कॉलेज,
जयपुर से
अनापत्ति प्रमाण
पत्र चाहने का
कोई प्रकरण
वर्तमान में
विचाराधीन
नहीं है।
श्री
जोगेश्वर
गर्ग (जालौर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
गुर्दा काम
करना बंद कर
तो मानव शरीर
की क्या
स्थिति है, हम
सब उससे
परिचित हैं।
श्री
अध्यक्ष: यह
छोड़ो आप,
प्रश्न पर आओ
आप तो।
श्री
जोगेश्वर
गर्ग (जालौर):
इसलिए ऐसे
मामले में
सरकार और सरकार
के
अधिकारियों
को कितना
संवेदनशील होना
चाहिए इस बारे
में ज्यादा
बात करने की
आवश्यकता
मैं नहीं
समझता। खण्ड
चार के अंत
में जवाब दिया
गया है, ‘पुनर्भरण
प्राप्त
करने हेतु
मेडिकल कॉलेज,
जयपुर से
अनापत्ति प्रमाण
पत्र चाहने का
कोई प्रकरण
वर्तमान में
विचाराधीन
नहीं है।’ यह सूचना
आंशिक रूप से
सही है।
वर्तमान में
जो पेंडिंग था
लगभग साल भर से,
कल शाम 28 तारीख
को निकला है,
इसलिए मैंने
कहा कि आंशिक
रूप से सही
है। मैं
निवेदन करना
चाहता हूं कि
राज्य से
बाहर जब मान्यता
प्राप्त
चिकित्सालय
में करवाते
हैं इलाज तो
खर्चा बहुत
भारी आता है
और उस बड़े
खर्चें को यदि
पुनर्भरण नहीं
करें तो उस
छोटे कर्मचारी
पर बहुत वज़न
पड़ जाता है
जिसको वह इलाज
का खर्चा भी
वहन करना
पड़ता है उसके
बाद फोलो अप
पर लगभग 10-11 हजार
रुपए प्रति
माह खर्चा
होता है, वह भी
उनको मेन्टेन
करना होता है
तो बहुत
मुश्किल काम
हो जाता है
उनके लिए
इसलिए सरकार
से निवेदन है
कि जितना
खर्चा बाहर के
इन्स्टीट्यूशन
में हुआ है
उतना पूरा
पुनर्भरण करे।
सरकार ने किया
भी है, जितनी
उपलब्ध
सूचना माननीय
मंत्रीजी ने
मुझे परिशिष्ट-स
पर बताई है...।
श्री
अध्यक्ष:
भाषण दे रहे
हैं, प्रश्न
तो पूछ नहीं
रहे हैं।
श्री
जोगेश्वर
गर्ग (जालौर):
उसमें 14 लोगों
की सूची है।
मैं यह पूछ
रहा हूं सरकार
से कि इन 14 लोगों
में से 5-6 लोगों
को तो आपने 50
हजार रुपए का
पुनर्भरण
कराया जबकि
उनका ज्यादा
हुआ, बाकी को
अलग-अलग
कराया। एक
पांचू लाल
चौधरी है
जिसका खर्चा
हुआ 5 लाख 43 हजार,
पुनर्भरण 50
हजार, लक्ष्मण
सिंह
राजपुरोहित, 3
लाख 07 हजार,
पुनर्भरण 50
हजार,
रामगोपाल
शर्मा, 2 लाख 12
हजार,
पुनर्भरण 50
हजार, इसी
प्रकार के केस
हैं। उसके
विपरीत दूसरा
उदाहरण है,
मैं आपके सामने
रखना चाहता
हूं, सीताराम
जांगिड़, 4 नम्बर
पर, 2 लाख 7 हजार,
पूरा
पुनर्भरण,
राजगोपाल राजपुरोहित,
3 लाख 23 हजार,
पूरा
पुनर्भरण,
जगदीश प्रसाद
3 लाख 24 हजार, पूरा
पुनर्भरण,
श्रीमती
सारम्मा, 1
लाख 92 हजार,
उसको पूरा
पुनर्भरण। यह
पिछले आठ साल
के आंकड़े
हैं, जिसमें
पाँच साल आपके
हैं और तीन
साल हमारे।
यहां तो कम से
कम पार्टीबाजी
नहीं, गुर्दे
तो दोनों एक
जैसे होते
हैं, एक
कांग्रेस और
एक बी जे पी
नहीं होता है।
इसलिए मेरा
निवेदन है कि
एक यह निर्णय
आपकी सरकार
करे, ऐसे केस
कोई हजारों
में नहीं होते
हैं, कुछ सौ
केस होते
होंगे, एक साल
में कोई
दस-बीस केस
मुश्किल से
आते होंगे।
मुख्य
मंत्री
सहायता कोष भी
हमारे पास
इतना बड़ा उपलब्ध
है, अन्य भी
कई सारी मद
सरकार के पास
होती है तो
ऐसे केस में
भेदभाव नहीं
हो, सबको एक
समान राशि
मिले जिसका
जितना खर्च
हुआ है उतना
सारा मिले।
यदि एस एम एस
में इलाज
कराया है तो
जितना खर्चा
लगा है उतना
मिले और बाहर
करवाया है तो
जितना खर्चा
लगा है उतना
मिले, यह बात
सरकार करने की
मंशा रखती है?
यह मेरा निवेदन
है।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
मंत्रीजी,
मेरा भी एक
प्रश्न है।
एक व्यक्ति
को तो आप 5 लाख 38
हजार रुपए स्वीकृत
करो और दूसरे
को आप 50 हजार
रुपए करो, यह
इतना भेदभाव
कैसे हुआ? ...(व्यवधान)...
श्री
सुरेन्द्र
गोयल (जैतारण):
माननीय
मंत्रीजी ने
जो सूची दी है उसमें
कई
कर्मचारियों
को तो पूरा
पुनर्भरण किया
गया है। एक
अपने विधान
सभा का एम्प्लोयी
है है उसको 50
हजार दिए हैं
तो मेरा
निवेदन है कि
वह अपनी विधान
सभा का एम्प्लोयी
है, जब दूसरों
को पूरा
पुनर्भरण कर
दिया है तो
उसको भी पूरा
का पूरा
पुनर्भरण
करना चाहिए,
काफी समय से
उसकी फाइल चल
रही है।
श्री
अध्यक्ष: यह
तो होना ही
चाहिए। एक को
तो 5 लाख 38 हजार और
एक को 50 हजार।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, यह
गुर्दे और
मुर्दे में भी
भेदभाव करते
हैं। ...(व्यवधान)...
गुर्दे और
मुर्दे में तो
भेदभाव बंद करो
कम से कम।
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मैं आपके माध्यम
से मंत्रीजी
से निवेदन
करना चाहूंगा
कि इस भेदभाव
की प्रवृति को
समाप्त किया
जाए।
श्री
जोगेश्वर
गर्ग (जालौर):
जिस व्यक्ति
को
सर्टिफिकेट
कल जारी किया
गया है, वह शिक्षा
विभाग में अध्यापक
है, उसका एक
बेटा 10 साल
पहले 15 साल की
उम्र में
गुर्दा फेल्योर
से मर चुका और
दूसरा बेटा
उसका 5 साल का,
दूसरे बेटे के
भी गुर्दे फेल
हुए, उनके
इलाज में ताबड़
तोड़ जहां
उपलब्ध हुआ
उसका इलाज
करवाया, ऐसे
व्यक्ति के
साथ भी हम
संवेदनशील
नहीं हो सकते?
उसको आपने एक
लाख रुपए
रिकमण्ड
किया है और
उसका खर्चा है
4 लाख 35 हजार तो
मैं आपके माध्यम
से सरकार से
निवेदन करना
चाहता हूं कि
इस व्यक्ति
को भी पूरा
पुनर्भरण
करें और भविष्य
में किसी के
साथ भेदभाव
नहीं करें।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मैं आपके माध्यम
से मंत्रीजी
से यह जानना
चाहता हूं कि
सैंकड़ों
मरीज ऐसे हैं
जिनको किडनी
ट्रांसप्लांटेशन
करवाना है और
यह जो मानव
अंग प्रत्यारोपण
अधिनियम, 1994 है,
यह पूरे देश
में लागू है। यहां
कई मरीजों को
मना कर दिया
जाता है, वही
मरीज पड़ोसी
राज्यों में
जाकर किडनी
ट्रांसप्लांटेशन
करवा लेते हैं
तो ऐसे क्या
कारण है कि
इनकी किडनी
ट्रांसप्लांटेशन
एस एम एस में
नहीं हो पाता
है, उनको बाहर
जाना पड़ता
है।
दूसरा
इसी से जुड़ा
हुआ है। आप
अभी अगर कुछ
बता देंगे, आप
इतने विद्वान
हैं कि पूरे 8 राज्यों
के अंदर,
पंजाब,
गुजरात,
तमिलनाडु,
महाराष्ट्र,
कर्नाटक और
वेस्ट बंगाल,
यहां पर
केडेवर
ट्रांसप्लांटेशन
लॉ लागू कर
दिया गया है,
जिसके अंतर्गत
यदि किसी व्यक्ति
की एक्सीडेंट
के कारण ब्रेन
डेथ हो जाती
है तो उसके
रिश्तेदार
उसके गुर्दे
को दूसरे व्यक्ति
को लगाने की
परमिशन दे
देते हैं तो
क्या राज्य
सरकार इस पर
विचार कर रही
है कि यह
कानून लाएंगे,
यदि लाएंगे तो
कब तक लाएंगे
जिससे कि यह हजारों
मरीज जो
इधर-उधर भटक
रहे हैं उनको
किडनी
ट्रांसप्लांटेशन
में सहायता
मिल जाए।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
माननीय सदस्य
जोगेश्वर
गर्ग के प्रश्न
पर मैंने सारे
तथ्य
एकत्रित
करवाए तो मुझे
स्वयं को भी
यह लगा कि
इसमें एक
सामान्य
प्रक्रिया
नहीं है और
नियम विभिन्न
है लेकिन
चिकित्सा
शिक्षा विभाग
पुनर्भरण
नहीं करता है,
पुनर्भरण उसका
पेरेंट
डिपार्टमेंट
करता है।
हमारे यह नियम
है कि जो
चिकित्सा
हमारे यहां
उपलब्ध नहीं
है उसके लिए
हम बाहर
रिकमण्ड
करते हैं जो
हमारे यहां
उपलब्ध है
उसका भी इलाज
कोई बाहर
करवाना चाहता
है तो जितना
खर्चा हमारे
यहां
हॉस्पिटल में
लगता है उतनी
राशि के
पुनर्भरण की
चिकित्सा
शिक्षा विभाग
रिकमण्ड
करता है। यह
बात सही है कि
जो 14 की सूची
मैंने प्रस्तुत
की है विभिन्न
विभागों से
लेकर, उसमें
यह भेदभाव है।
कुछ लोगों को
तो 50 हजार रुपए
ही दिए गए हैं,
कुछ लोगों को 10
लाख रुपए भी
दिए गए हैं, 1
लाख भी दिया
गया है।
श्री
अध्यक्ष: 1
लाख भी दिया
गया है, 10 लाख तो
किसी को नहीं है
लेकिन 5 लाख 38
हजार दिया है।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): 5 लाख
भी है। ...(व्यवधान)...
नहीं 10 लाख
नहीं है ...(व्यवधान)...
10,65226 भी है नम्बर
दो पर, मदनलाल
वर्मा, सहायक
लेखाधिकारी,
आवासीय आयक्त,
बीकानेर का
है, वह दिया है
तो इसमें वह
जो विभाग होता
है पेरेंट वह
विभाग इसमें
मैं कोई राजनीतिक
बात नहीं करना
चाहता, यह
सारी सरकारों
के समय का है,
इन तीन साल का
मामला नहीं है
लेकिन मैं यह
कहना चाहूंगा कि
इसमें उसका
विभाग रिकमण्ड
करता है, अपने
वित्त विभाग
से स्वीकृति
लेकर जारी
करता है। हम
इसमें इतना ही
कर सकते हैं
कि प्रश्न
अभी तो माननीय
सदस्य,
जोगेश्वरजी
गर्ग ने पूछा
यह बात सही है
कि हमारे शिक्षा
विभाग के ही
एक कर्मचारी
का हुआ था,
उसकी हमने
सारी जांच
करवाई, वह ऐसा
था कि उनकी तबियत
अचानक खराब हो
गई और उनको
गुजरात में
भर्ती होना
पडा तो कल
हमने इस बात
की जांच करवा
ली, मेडिकल
बोर्ड से, उन्होंने
कहा कि वह
जयपुर लाने की
स्थिति में
नहीं थे,
इसलिए उनको
इमर्जेन्सी
में वहीं उनका
इलाज करवाना
पडा तो हम
उसको रिकमण्ड
करेंगे कि
इसका भी
पुनर्भरण
पूरा किया
जाए।
Gpc/akt/ 29032007/1200/1g
और शिक्षा
विभाग भी
चूंकि मेरे
पास है तो मैं
उसको पूरा
कराने की ..(व्यवधान)..
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
आपने जो राइडर
डाल रखा है
मेडिकल कालेज,
जयपुर का उसको
क्यों नहीं हटाते?
जब आपने दो
चीजें फिक्स
कर लीं, नम्बर
एक, कि जितना
आपका रिएम्बर्स
का अमाउंट है
उतना ही रिएम्बर्स
करेंगे तो जो
आदमी
डिस्ट्रिक्ट
हैडक्वार्टर
से रेफर होकर
जयपुर आये फिर
बाहर भेजे उसकी
बनिस्बत आप
नियम में
परिवर्तन कर
दीजिए कि वहां
का डिस्ट्रिक्ट
होस्पिटल का
डाक्टर बाहर
के लिए रिकमण्ड
कर रहा है तो
आपको उसको
यहां एसएमएस
में लाकर
रिकमण्ड
करने की जो
कंडीशन है
उसको वेव करना
चाहिए।
नम्बर दो,
विभाग के
बनिस्बत जो
एक्चुअल
खर्चा माननीय
सदस्य ने
बताया, मुख्यमंत्री
जीवन रक्षा
कोष में विभाग
जितना पैसा दे
बाकी जो पैसा
बच रहा है वह
मुख्यमंत्री
जीवन रक्षा
कोष से टाई-अप
कर ले जिससे
उनको पूरी
राशि मिल सके।
इसके संबंध
में आपको नियम
बनाने चाहिए,
बाकी आपकी व्यवस्था
में कोई गलती
नहीं है।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
यह कह रहा था
यह बात ठीक है,
गुर्दा का जो
रोगी है एक
बार उसका इलाज
हो जाता है
उसके बाद भी
ट्रांस्प्लांट
के बाद भी
रेगुलर रूप से
उसको जो खर्चा
उठाना पड़ता
है वह किसी भी
सामान्य
आदमी के बस की
बात नहीं है,
बहुत मुश्किल
है और सरकारी
कर्मचारी तो
इसके ऊपर
डिपेंड करता है,
उनके लिए बहुत
मुश्किल है।
मैं जो
भावनाएं आई हैं
उनसे माननीय
मुख्यमंत्री
जी को अवगत
कराऊंगा कि
एक्चुअल
जितना खर्चा
होता है उतना
विभाग दे सकते
हैं तो चिकित्सा
शिक्षा विभाग
को इसमें कोई
आपत्ति नहीं
है, हम इसमें
मदद करेंगे और
इस केस में भी
हम पूरी मदद
करेंगे।
दूसरी जो अभी
माननीय बैद
साहब ने कहा
है ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष:
बीच में नहीं।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): एक
मिनट पूरा कर लूं।
श्री
सुरेन्द्र
गोयल (जैतारण):
विधान सभा का
एम्प्लोई
है उसके लिए
भी तो बताओ।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी (शिक्षा
मंत्री): बता
रहा हूं, सबके
लिए लागू होगा
वह तो। इसमें
एक और चाहते
हैं जो मानव
अंग के बारे
में 1994 के
नियमों के
अंतर्गत
कार्यवाही
करते हैं, नये
नियम बनाने के
लिए आपने जो
बात कही है, विभिन्न
राज्यों में
भी कानून बना
है, कानून तो
बहुत आवश्यक
है उससे मृतक
का कोई रिश्तेदार
अपने गुर्दे,
आँख डोनेट
करना चाहता है
तो इस संबंध
में विचार
करके आवश्यक
कानून जल्दी
से जल्दी
लाया जा सकता
है मरीज के
हित में ऐसा
कानून लाने
में राज्य
सरकार बिलकुल
तत्पर रहेगी
और ऐसा कानून
हम बनाना
चाहेंगे ताकि लोगों
को राहत मिल
सके। इस मामले
में भी हम
रिकमण्ड
करेंगे।
जहां तक
एसएमएस का
सवाल है
एसएमएस
मेडिकल कालेज
स्वयं, हमने
किसी का भी,
केवल एक मामले
को छोड़कर जिसमें
एक भूतपूर्व
विधायक की पत्नी
का सवाल था एक
लाख 50 हजार की
रिकमण्ड की
है, बाकी हमने 50
हजार के अलावा
किसी की रिकमण्ड
नहीं की। ..(व्यवधान)..
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
राइडर क्यों
लगा रखा है?
वहीं
डिस्ट्रिक्ट
होस्पिटल में
पता पड़ जाए।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
किडनी के लिए
विशेषज्ञों
की समिति बनकर
उसकी जांच
करके रिपोर्ट
करती है। मैं
देख लूंगा अगर
डिस्ट्रिक्ट
होस्पिटल के
माध्यम से
किया जा सकता
है तो उस पर
विचार कर
लेंगे और
उसमें
विशेषज्ञों
की समिति से
ही जांच करना
हो तो वहां
करेंगे, इसलिए
मैं चाहूंगा
मानवीय
दृष्टिकोण के
आधार पर इस पर
विचार
करेंगे।
श्री अध्यक्ष:
एक बात और है,
जिन्होंने
गुर्दा प्रत्यारोपण
करवाया है
इनमें से
सर्वाइव
कितने लोगों
ने किया है, क्योंकि
सर्वाइव करना
भी बहुत
मुश्किल होता
है। पाँच-छह
महीने बाद
मोस्टली चले
जाते हैं, मैं
अपनी जानकारी
जैसी रखती
हूं, तो आप यह
भी करें कि
इतने लोगों ने
किया है, अब
सर्वाइव
कितने कर रहे
हैं।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
वैसे यह नहीं
है, मैं इनके
बारे में तो
नहीं कह सकता,
मेरे पास
जानकारी नहीं
है, लेकिन 5-5, 8-8, 10-10
साल तक के, 10 साल
का तो मुझे भी
ध्यान है,
हमारे पड़ोस
के हैं, मेहता
जी हैं, चार्टर्ड
अकाउंटेंट
हैं, कराकर
आये थे। बहुत
लोग हैं, ऐसे
लोग हैं ..(व्यवधान)..
इनके बारे में
मेरे पास
सूचना नहीं
है, लेकिन अब
दवाइयों के
कारण से, जो नई
दवाइयां निकली
हैं ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष:
जानकारी
करें।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): यह
जानकारी कर लेंगे।
जो लोग कराकर
आये थे उनमें
कितने लोगों
की सर्वाइवल रेट
कितने साल की
रही है, वह पता
कर लेंगे। बाकी
आजकल जो
दवाइयां निकल
गई हैं उसके
कारण से रेट
बढ़ गई है।
श्री अध्यक्ष:
ठीक है।
श्री
जोगेश्वर
गर्ग (जालौर):
अध्यक्ष
महोदय, जिस
मरीज की मैं
बात कर रहा
हूं सौभाग्य
से वह सर्वाइव
कर रहा है और
उसने ठीक
रिकवर कर लिया
है, लेकिन
उसके पिता अब
आर्थिक रूप से
बहुत टूट चुके
हैं और तत्काल
उनको मदद नहीं
मिली तो आगे
उस बच्चे को
सर्वाइव करना
बहुत मुश्किल
हो जाएगा। अध्यक्ष
महोदय,
आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहता
हूं आप वित्त
मंत्रालय को
अग्रेषित
कराएं।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
इनको तत्काल
मदद कराएंगे,
जितनी मदद करा
सकते हैं तत्काल
कराएंगे।
श्री
जोगेश्वर
गर्ग (जालौर):
पूरी-पूरी मदद
करें।
श्री अध्यक्ष:
प्रश्नकाल
समाप्त हुआ।
प्रश्नकाल
समाप्त हुआ
और मंत्री घूम
रहे हैं और आप
खड़े हैं।
स्थगन
प्रस्तावों
पर अध्यक्षीय
व्यवस्था
मुझे
माननीय सदस्यों
को सूचित करना
है कि निम्नांकित
स्थगन प्रस्तावों
की सूचना
प्राप्त हुई
है:-
1. डा.
बुलाकीदास
कल्ला एवं
चार अन्य
सदस्यों की
ओर से
पैराटीचर्स
को नियमित अध्यापक
नहीं बनाये
जाने से उत्पन्न
स्थिति के
संबंध में।
दिनांक 6
मार्च, 2007 को इस
विषय पर
मंत्री महोदय
ने विस्तृत
रूप से स्थिति
स्पष्ट कर
दी थी, अत:
अनुमति देने
में असमर्थ
हूं।
2. श्री
श्रवण कुमार,
सदस्य की ओर
से चिड़ावा
में मंदिर
माफी की जमीन
खसरा नं. 618 में
छुट्टियों का
फायदा उठाकर
चार दुकान बना
दिये जाने के
संबंध में।
स्थगन
प्रस्ताव का
विषय नहीं है।
कल दिनांक 28
मार्च, 2007 को नगरीय
विकास की मांग
पर चर्चा के
समय इस विषय
में माननीय
सदस्य बोल
सकते थे, अत:
अनुमति देने
में असमर्थ हूं।
3. श्री
हरिमोहन
शर्मा एवं सात
अन्य सदस्यों
की ओर से दी
राजस्थान स्टेट
को-ऑपरेटिव
बैंक लिमिटेड
द्वारा निजी
भोज पर लगभग 75000
रुपये की राशि
खर्च करने के
संबंध में।
इस संबंध
में राज्य
सरकार से
जानकारी
प्राप्त की
जा रही है और
जानकारी
प्राप्त
होने पर
निर्णय लिया
जाएगा।
4. डा. सी.एस.
बैद एवं 6 अन्य
सदस्यों की
ओर से
सर्वशिक्षा
अभियान में
राज्य व केन्द्र
सरकार द्वारा
समुचित राशि
उपलब्ध
करवाने के
बावजूद भी
दोहरा प्रमाण
पत्र प्रस्तुत
कर बच्चों को
सहायता से
वंचित करने के
संबंध में। इस
प्रकार स्वयं
वहां के
टीचर्स
द्वारा उन
रुपयों का
घालमेल करने
के संबंध में।
हालांकि
शिक्षा की
मांग पर चर्चा
हो चुकी है, अत:
अनुमति देने
में तो असमर्थ
हूं फिर भी
विषय की गंभीरता
को देखते हुए
माननीय सदस्य
डा. सी.एस. बैद
को तीन मिनट
बोलने की
अनुमति होगी।
प्रक्रिया
के नियम 295 के
अन्तर्गत
प्राप्त
विशेष उल्लेख
की सूचनाएं
एक तो मैं
माननीय सदस्यों
से निवेदन
करना चाहूंगी
कि विशेष उल्लेख
के अंदर 250 शब्दों
तक अपनी बात
को सीमित
रखें। कई
माननीय सदस्य
250 नहीं बल्कि 1000
से अधिक शब्दों
का उसमें
प्रयोग करके
बहुत लम्बा-चौड़ा
बना देते हैं।
इसलिए
मेहरबानी
करके इस बात को
मैं कई बार कह
चुकी हूं,
भविष्य में
ध्यान रखें।
1. श्री
जोगाराम पटेल,
सदस्य की ओर
से विधान सभा
क्षेत्र लूणी
के दुन्दाड़ा,
डोली, झंवर,
सालावास,
लूणावास कलां
आदि विद्यालयों
में वाणिज्य
व विज्ञान
संकाय शुरू करने
के संबंध में।
2. डा.
सुरेश चौधरी,
सदस्य की ओर
से विकलांग
प्रमाण पत्र
बनाने वाले चिकित्साधिकारियों
के पद को
क्रमोन्नत
कर कनिष्ठ
विशेषज्ञ
करने के संबंध
में।
आप पदों को
क्रमोन्नत
करवा रहे हैं
या जो आलरेडी
कनिष्ठ
विशेषज्ञ हैं
उनके ही
द्वारा इन प्रमाण-पत्रों
को देने की
बात कह रहे
हैं।
3. श्री टीकम
चन्द कान्त,
सदस्य की ओर
से परम्परागत
समय से रास्ते
मौके पर उपलब्ध
होते हुए भी
राजस्व
रिकार्ड में
दर्ज नहीं
होने से उत्पन्न
स्थिति के
संबंध में।
4. श्री
हीरालाल मीणा,
सदस्य की ओर
से ईसरदा बाँध
के ओवरफ्लो
पानी को ढील व
मोरेल बाँध के
भराव हेतु
देने के संबंध
में।
5. श्री
हरज्ञान सिंह
गुर्जर, सदस्य
की ओर से जिला
करौली के
पांचना बाँध
का पानी आसपास
के गांवों को
लिफ्ट द्वारा
उपलब्ध
करवाने के
संबंध में।
6. श्री
पूंजी लाल
परमार, सदस्य
की ओर से
डूंगरपुर के
सार्वजनिक
चिकित्सालय
को ‘’ए’’
श्रेणी का
करने के संबंध
में।
7. मो.
माहिर आजाद,
सदस्य की ओर
से 129 मदरसा
पैराटीचर्स
को 5 वर्ष का
मानदेय तथा
प्रशिक्षण
दिलवाने के
संबंध में।
8. श्री
श्रवण कुमार,
सदस्य की ओर
से जिला
झुंझुनूं के
भापर निवासी
एक व्यक्ति
को उसकी जमीन
व कुएं से
पीटकर निकाल
दिये जाने की
घटना के संबंध
में।
9. श्रीमती
सूर्यकान्ता
व्यास, सदस्य
की ओर से
जोधपुर शहर की
चिकित्सा
सुविधा में
विस्तार
करने के संबंध
में।
10.श्री
बाबूसिंह
राठौड़, सदस्य
की ओर से
बालेसर की
ग्राम पंचायत
नाथड़ाऊ के
उच्च माध्यमिक
विद्यालय का
नाम
परिवर्तित
करने के संबंध
में।
11. श्री
भरत सिंह,
सदस्य की ओर
से ईस्ट-वेस्ट
कारीडोर
(नेशनल हाईवे-76)
के चार लेन
निर्माण कार्य
में पीली
मिट्टी
आपूर्ति हेतु
ठेकेदार द्वारा
चारागाह भूमि
एवं तालाबों
का स्वरूप
नष्ट करने के
संबंध में।
12.श्री
लालचन्द,
सदस्य की ओर
से गंगनगर
प्रणाली की
नहरों के
किनारे काटे
गये पेड़ों के
स्थान पर नये
वृक्ष लगाने
के संबंध में।
माननीय
सदस्यों को
उनके द्वारा
दी गई उपरोक्त
विषयक सूचना
को पढ़ने की
अनुमति होगी।
डा. चन्द्रशेखर
बैद।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय,
आपके चेम्बर
में बात हुई
थी, आपके चेम्बर
में हम मिले
थे आपको उसके
बारे में देना
है।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
पैराटीचर्स
की जो बात
उठायी है ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष:
नेता,
प्रतिपक्ष आप
क्या फरमा
रहे हैं?
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
माननीय बी.डी.
कल्ला साहब
ने
पैराटीचर्स
की समस्याओं
को उठाया है,
उनको रेगुलर
करने के बारे
में आपने जो
स्थगन प्रस्ताव
दिया उसको
आपने आउटराइट
रिजेकट करके 5
मिनट भी बोलने
का मौका नहीं
दिया। कृपा
करके इसमें
पुनर्विचार
कर बी.डी. कल्ला
को बोलने की
अनुमति दें।
मोहन/अरूण/अशोधित
प्रति
प्रकाशनार्थ
नहीं/29032007/1210/1h
श्री अध्यक्ष: माननीय नेता प्रतिपक्ष, 6 मार्च को इस बारे में विस्तृत चर्चा की जा चुकी है और शिक्षा मंत्री जी जवाब दे चुके हैं, अब पुन: कैसे उठाया जाएगा वह प्रश्न, आप तो पुराने बहुत, जिसे कहना चाहिए वरिष्ठ सदस्य हैं।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): उस वक्त घोषणा नहीं की, उन्हें नियमित ...
श्री अध्यक्ष: आप कहें तो शिक्षा मंत्री जी ने सुनिए।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): आप स्वयं भी उठाती रही हैं पैरा टीचर्स की समस्याएं।
श्री अध्यक्ष: बीकानेर से आने वाले माननीय सदस्य, आप कहें तो, आप लोग बोलते हैं और बोल कर चले जाते हैं। ...(व्यवधान)...
स्थगन
प्रस्तावों
आदि पर
चर्चाधौलपुर
में एक व्यक्ति
के नकेल डालने
विषयक
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): साहब, पति के नकेल डाल कर पत्नी से बलात्कार बहुत महत्वपूर्ण मामला है। ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष: No, the Chair is on legs. ...(व्यवधान)... I say sit down. Sit down ...(व्यवधान)... आप कहें तो जो शिक्षा मंत्री ने कहा है वह मैं पढ़ कर सुना दूं आपको ? क्या कहा है उन्होंने, अब क्या चर्चा करना चाहते हैं और शिक्षा मंत्री जी से जो उस दिन वह क्या कहेंगे शिक्षा मंत्री जी ने शिक्षा की मांग के रोज जो कुछ यहां पर सदन में कहा है, आप कहो तो पुनरावर्ती कर दूं ? ...(व्यवधान)...
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): शिक्षा मंत्री जी मौन धारण करके क्यों बैठे हैं। ...(व्यवधान)... आप क्या करेंगे उन पैरा टीचर्स के बारे में ?
श्री अध्यक्ष: शिक्षा मंत्री जी क्यों बोलेंगे ?
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): पैरा टीचर्स को आप नियमित कर रहे हैं क्या ? सीधा सा इतना सा सवाला है। ...(व्यवधान)...
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इनका जवाब दे दें।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): संविदा टीचर्स को नियमित किया गया, शिक्षा कर्मियों को नियमित किया गया, क्या अब पैरा टीचर्स को नियमित करेंगे तो कब तक करेंगे, चलो हम इतने में ही संतुष्ट हो जाएंगे। सीधी सी बात यह है कि पैरा टीचर्स दर दर की ठोकरें खा रहे हैं, आज 7-8 वर्षों से उनको नियमित नहीं किया जा रहा है। मैं आपके माध्यम से यही जानना चाहता हूं कि उनको कब तक नियमित कर दिया जाएगा, वह एक जैसा काम कर रहे हैं, बराबर पाठशालाओं में अध्यापकों की तरह पढ़ा रहे हैं और उनको वेतन जो दिया जा रहा है वह बहुत कम है। जो पूर्व में शिक्षा कर्मी आपकी सरकार ने लगाये थे लेकिन उनको हमने प्रोत्साहन दिया और वह नियमित हो गये बाद में धीरे धीरे।
श्री अध्यक्ष: मैंने आपको कब समय दिया बोलने का ? ...(व्यवधान)... मैंने आपको कब समय दिया बोलने का ? ...(व्यवधान)...
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): मैं आपके माध्यम से ध्यान आकर्षित कर रहा हूं, आपकी लिबर्टी लेते हुए।
श्री अध्यक्ष: कैसे ध्यान आकर्षित कर रहे हैं ?
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): मैं तो इतना ही कहता हूं कि इनको कब तक नियमित कर देंगे।
श्री अध्यक्ष: वह तो ठीक है आपकी बात।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं जो प्रश्न उठा रहा हूं, सरकार को स्वयं को ही आगे होकर इस घटनाक्रम पर प्रकाश डालना चाहिए था, अपना वक्तव्य देना चाहिए था लेकिन यह शर्म की बात है, माननीय अध्यक्ष महोदय, कि धौलपुर में बलात्कार के आरोपियों ने ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष: नो, सिट डाउन, अंकित नहीं होगा।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): 000
श्री अध्यक्ष: नो, नो, सुनिए, अंकित नहीं होगा।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): 000
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्य, कृपया स्थान ग्रहण कर लें।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): 000
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्य, अंकित नहीं हो रहा है।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): 000
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्य, आप मुझे मजबूर न करें। I will name you. I will name you. माननीय सदस्य, आप शेर की तरह दहाड़ रहे थे और सुबह मैंने इनसे कहा, मैंने खुद कहा, मैंने कहा इतनी इम्पोर्टेंट न्यूज को आपको समझ में आता नहीं है और इस पर आप लोग कुछ उठाते नहीं हो और आप ऊटपटांग यहां पर देते हो स्थगन प्रस्ताव ऊटपटांग पर्चियों पर देते हो। यह इश्यु आपको उठाना चाहिए था जब इन्होंने कहा हां, बात तो सही है और अब आप दहाड़ रहे हो यहां पर। जो भी आपका काम है, आप करते नहीं हो और सरकार का भी काम था, आपको भी जब अख़बार पढ़ा तो इस राज के अन्दर जिसे कहना चाहिए असामाजिक तत्व और ऐसे लोग हों जो गुनहगार हों उनकी इतनी हिम्मत हो जाए कि दुबारा जाकर के नाक में नकेल डाल लें, हाथ तोड़ दें और अपन अपनी तरफ से कुछ न करें, गृह मंत्री जी। लेकिन यह इश्यु आपको स्थगन प्रस्ताव के जरिए लाना चाहिए था, आपको पर्ची के जरिए लाना चाहिए था, आपको और किसी तरीके से लाना चाहिए था लेकिन आप अब आकर के जब मैंने याद दिलाया तो शेर बन गये आप यहां आकर और कोई नोटिस दिया नहीं आपने और यों ही खड़े होकर कहने लगे। ...(व्यवधान)... मंत्री जी बोल रहे हैं।...(व्यवधान)...
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): अध्यक्ष महोदय, आपने स्वयं ने भी इस गंभीर विषय पर चिंता जाहिर की।
श्री अध्यक्ष: सुनो तो सही।
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): अध्यक्ष महोदय, आपने स्वयं ने भी इस गंभीर विषय पर चिंता जाहिर की और जैसा अख़बार में जिसने भी हम सब ने पढ़ा, हमको भी इसके बारे में काफी गंभीर लगा।
श्री अध्यक्ष: दिल दहला देने वाली बात है।
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): हमने तुरन्त यह घटना जो 25 तारीख रात की बताते हैं, 28 तारीख सवेरे पत्रिका के वहां के महेन्द्र मंगल के साथ ये एफआईआर दर्ज कराने के लिए एस पी के पास आए, लगभग साढ़े 11 बजे, एस पी ने स्वयं इनको थाने पर भेजा और 2 बजे, 1.45 पर इनकी एफआईआर दर्ज हुई, दर्ज होने के साथ इनको मेडिकल के लिए धौलपुर भेजा और इसके पति के साथ और इसकी मां के साथ जो मारपीट हुई, लोकल जो वहां का स्वयं जिस गांव के हैं, वहां मेडिकल कराया इनका और क्योंकि बात सुनने में एकदम ऐसी लगती है लेकिन जो मेडिकल रिपोर्ट आई है धौलपुर की उसमें किसी प्रकार का कोई बलात्कार होना प्रमाणित ही नहीं है, मुकदमा इनके कोई आपसी रंजिश होगी, किसी कारण से एक मुकदमा 10.1.2007 को ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष: नहीं, गृह मंत्री जो अख़बार में फोटो आई है, वह पति को यहां पर नाक के अन्दर रस्सी डाले हुए दिखाया है तो मतलब यह गलत है, वह बात ?
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): ऐसा है कि एक विषय तो हो गया कि बलात्कार हुआ कि नहीं हुआ, उस विषय का तो मेडिकल रिपोर्ट से अपनी जगह प्रमाणित हो गया कि नहीं हुआ। रहा सवाल यह कि नकेल डाली नहीं, स्वयं एस पी इस समय मौके पर हैं, सवेरे मेरी बात हुई है, वह स्वयं ही सारे के सारे प्रकरण को देख रहा है कि यह नकेल डालने वाली जो बात आई है, इसमें क्या सच्चाई है, क्या तथ्य किस तरह से हैं क्योंकि इस तरह के दो तीन प्रकरण पहले भी इस सदन में बड़े सनसनीखेज मामले उठे। एक, कुछ लोगों ने जो पिछले वाला प्रकरण था उसमें स्वयं ने अपने नकेल डाली। इस प्रकार एस पी स्वयं मौके पर हैं, अगर वस्तु स्थिति में वास्तव में नकेल डाली गई है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही होगी लेकिन प्रमाणित होने के बाद केवल कह देने मात्र से किसी को मुलजिम बना दिया, यह संभव नहीं है।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): ऐसी घटना की रिपोर्टिंग आज तक किसी अख़बार में नहीं हुई और ऐसी घटनाएं लाखों ....
श्री अध्यक्ष: नेता प्रतिपक्ष खड़े हैं, माननीय सदस्य, नेता प्रतिपक्ष खड़े हैं। ...(व्यवधान)... लो अब आप बैठ गये ...(व्यवधान)... नेता प्रतिपक्ष आपके सदस्य खड़े हो जाएंगे तो आप बैठ जाओगे।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपकी तरफ से मुझे थोड़ा डर था, मैं यह कहता हूं कि ऐसी घटनाएं, दुर्घटनाएं बहुत, बहुत, बहुत कम होती हैं और होती ही नहीं हैं। इस घटना की मेडिकल रिपोर्ट को ही आधार मान कर आप इसका निर्णय नहीं कर सकते, आसपास के वातावरण से मालूम करना चाहिए कि क्या घटना वास्तव में घटी है और घटी है तो महिला के बयान के आधार पर और पति के बयानों के आधार पर केस बनना चाहिए और उनका चालान होना चाहिए, उन्हें सज़ा कराई जानी चाहिए और आसपास की घटना, आसपास के वातावरण से साबित हो जाए तो इनका चालान होना चाहिए। आप मुझे यह बताइए कि उस थाने में क्यों नहीं गये यह रिपोर्ट कराने के लिए, उनको एस पी के पास क्यों आना पड़ा ? थाने में जाकर रिपोर्ट इनको करानी चाहिए थी, वह क्यों नहीं कराई ? क्योंकि थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई ?
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): वह थाने में क्यों नहीं गये इसका जवाब में नहीं, वह स्वयं ही दे सकते हैं कि वह थाने में क्यों नहीं गये। पर मेरा यह है कि थाने में नहीं गये, सीधे एस पी आफिस में गये।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं, वह थाने में गये लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई।
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): नहीं ऐसा नहीं है।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): ऐसा है।
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): ऐसी कोई चीज छिपाने की कोई मंशा नहीं, न अगर उसने अपराध किया है तो उसको बचाने की मंशा है, अगर घटना हुई है तो उसको दण्ड मिलेगा, मुकदमा दर्ज है, मुकदमे की तफ्तीश हो रही है, स्वयं एस पी इस मौके की गंभीरता को समझ कर के स्वयं तफ्तीश के लिए वहां गया हुआ है, उसकी जो वह रिपोर्ट आएगी उसके आधार पर कार्य, इस प्रकार के जघन्य अपराध को न तो कोई मैं बचाना चाहता हूं, न सदन और जिसने भी पढ़ा वह उसको बचाना नहीं बचाता है, जो अपराध हुआ है, उसकी निश्चित रूप से जांच हो रही है और जांच होने के बाद अगर यह प्रमाणित होगा कि उसने नकेल डाल कर उसके साथ यह बर्ताव किया है या उसको ले भी गये हैं, वहां पर अभी तक की उस रिपोर्ट से जो कुछ भी आया नहीं आया फिर जांच चल रही है।
सुरेन्द्र/अरुण/29.3.07/12.20/1j
उसमें
नहीं आया पर
जांच चल रही
है, 62/07 मुकदमा
दर्ज है उसकी
कार्यवाही हो
रही है। इस
रंजिश के कारण
ये ही तीन
मुलजिम इन्होंने
फिर लिखाये
हैं जिनके ऊपर
156 (3) में इसी परिवार
ने इन्हीं
तीन मुलजिमों
के ऊपर एक केस
बनाया था जो कोर्ट
में चालान हो
चुका है। उसी
केस के
रेफरेंस में
यह घटना, वो के वो
मुलजिम वापस
हैं, अगर
इसमें सत्यता
आयेगी तो
निश्चित रूप
से कार्यवाही
होगी इतना मैं
सदन को आश्वस्त
कर सकता हूं
और एस. पी. स्तर
पर ही करा रहा
हूं किसी नीचे
के स्तर पर
भी नहीं।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपका
शुक्रगुजार
हूं कि आपकी वजह
से, आपने इस
घटना की निंदा
की और इसको
बहुत गंभीर
माना तब
मंत्री महोदय
अनिच्छा के
साथ खड़े हुए।
अन्यथा आपको
एज ए होम
मिनिस्टर,
आपको अख़बार
को देखते ही
पूरी रिपोर्ट
आ जानी चाहिए
थी और जब
प्रश्न आया
था माननीय
सदस्य का तो
बात करनी
चाहिए थी और
आपको सुओमोटो
स्टेटमेंट
देना चाहिए
था। आप जैनी
हो, जैनी होकर
के क्या कर
रहे हो? (व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, एक बात
मैं आपसे
पहले.....
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
आप जैन धर्म
को कलंकित कर
रहे हो, आप जैन
धर्म को
कलंकित कर रहे
हो। (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मेरी
आत्मा कमजोर
नहीं है... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, यह क्या
कह रहे हैं? जैन
धर्म को
कलंकित करने
की क्या बात
हो गई? (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मैं
जैनी हूं या
मुख्य सचेतक
हूं, माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मेरी
आत्मा झकझोर
रही है। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
नेता,
प्रतिपक्ष
खड़े हैं,
बैठो।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, नेता,
प्रतिपक्ष को
यह अधिकार नहीं
है, प्रतिपक्ष
के नेता को यह
अधिकार नहीं
है। (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): ....
समाचार पत्र
पढ़कर के ये
अपने कार्यकर्ताओं
को तथा वहां
के एम एल ए को....
(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ..... यह कहना
कि जैन धर्म
को कलंकित कर
रहे हैं, यह क्या
है?
(व्यवधान) यह
क्या बात हुई
अध्यक्ष
महोदय? ये क्या
कह गये? जैन धर्म
को कलंकित
करने की बात
कह गये आप। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
तो विराजो।
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): .... ये
केवल सरकार के
ऊपर निर्भर कर
रहे हैं,
प्रतिपक्ष की
भी कोई भूमिका
है। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
बैठो न।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
ये सारे राम
के पुजारी हैं
और माननीय होम
मिनिस्टर
भगवान महावीर
के पुजारी
हैं। (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): .... अध्यक्ष
महोदय, आपने
स्वयं ने कहा
जब तो इनको
होश आया है,
प्रतिपक्ष को
होश आया है।
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
भगवान महावीर
के पुजारी और
भगवान राम के
पुजारी हो तो
सुबह-सुबह यह
अख़बार में
खबर पढ़ी तो
आपका हृदय क्यों
नहीं हिला? (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
आपके नेता
खड़े हैं और
आप भी खड़े हो
गये। (व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): नेता
खड़े हुए हैं
तो ये खड़े
होते हैं,
इनको आप
बिठाते नहीं
हो। हम तो
आपको यही कह रहे
हैं कि इनको
बिठाइये। (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
क्या कर रहे
हो आप? राजस्थान
का होम मिनिस्टर
अख़बार की खबर
पढ़ ले और
चिंतित नहीं
हो।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आपके एम
एल ए क्या कर
रहे हैं? (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
यह तो माननीय
अध्यक्ष
महोदय ने
संभाल लिया
नहीं तो आप क्या
करते? जैसा
होता वैसा हो
जाता, यह तो
अध्यक्ष
महोदय ने
संभाल लिया।
(व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, माननीय
प्रतिपक्ष के
नेता ने जो मन
की चिंता
जाहिर की, मैं
बहुत दु:खी मन
से इस बात को
कह रहा हूं कि
आज आपके.... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
मिनिस्टर,
डोंट टॉक।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
कितने सदस्यों
ने चाहे स्थगन
लगाया, चाहे
ध्यानाकर्षण
लगाया, चाहे
पर्ची लगाई,
उसमें आपका
किसी का भी ध्यान
नहीं गया।
मैंने फिर भी
जैसे ही घटना
की जानकारी
मिली, मैंने
कल ही इसके
बारे में सारी
जानकारी ली और
जानकारी लेकर
के यहां आपके
सामने
उपस्थित हूं।
यह जरूर है कि
मुझे चलकर
देना, क्योंकि
अभी जीरो ऑवर
की व्यवस्था
हो रही थी,
मैंने मेरी
तरफ से कोई
चीज की कमी नहीं
रखी। अब तक की
जो जानकारी है
वह मैंने हाउस
में रख दी है
और यह मेरा
धर्म भी है कि
इस प्रकार का
अपराध हो जाए
और उसकी
जानकारी मुझे
नहीं हो तो
मेरे लिए और
कोई अफसोस की
बात नहीं हो सकती।
दुर्भाग्य
यह है कि इतनी
तैयारी के साथ
और घटना की
जानकारी के
बाद सारी
डिटेल और वहां
के आई जी से
मेरी बात हुई....
श्री
अध्यक्ष:
शांत रहें।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): वहां
के एस पी से
बात हुई, मौके
पर एस पी है उस
समय उससे और
बात हुई, कल जो मेडिकल
हुआ उसके बारे
में बात हुई।
अब तक की सारी
घटना की जानकारी
मैंने ली है
वही आपके
सामने रखी है।
केवल
राजनीतिक
दृष्टि से कि
हमें चिंता ही
नहीं है, हमें
इस घटना का
कोई अफसोस ही
नहीं हो, मैं
भी इंसान हूं,
आप भी इंसान
हो और एक
इंसान के नाते
भी मेरा धर्म
है कि अगर इस
प्रकार का
कुकृत्य हो
जाए और उसको
सज़ा नहीं
मिले, यह कभी
संभव ही नहीं
है इसलिए
मैंने एस पी
को स्वयं को
वहां पर भेजा।
(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, जब
बलात्कार की
घटना झूठी है
तो यह नाक में
नकेल डालने की
भी झूठी
निकलेगी आप
जांच करा लेना
भले ही। खुद
ने ही डाली
होगी उसने, यह
गारंटेड बात
है, बिल्कुल
सही बात है।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): ऐसा
है कि अभी तक
की जानकारी के
हिसाब से... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: कम्पलीट
करने दो। लेट
हिम कम्पलीट।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, अभी तक
की जानकारी कि
नाक में नकेल
डाली या नहीं
डाली इस विषय
के लिए मैंने
किसी
छोटे-मोटे.... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: बीच
में नहीं
मंत्रीगण।
मंत्रीगण, ये
क्या तमाशा
लगा रखा है आप
दोनों ने? (व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
मैंने किसी
थाने के
अधिकारी को
नहीं दिया, स्वयं
एस पी को मौके
पर भेजा है कि
यह जो नाक में
नकेल डालने
वाली बात है
इसकी सच्चाई
को वो स्वयं
अपनी बातों
से, वहां पर जो
भी एविडेंस है
उसके आधार पर
तय करे और यदि
डाली है तो
निश्चित रूप
से उसके खिलाफ
सख्त
कार्यवाही
करेगा। मैंने
और किसी को
नहीं, एस पी स्वयं
मौके पर है और
अभी घंटे-आधे
घंटे में अगर
वहां से
रिपोर्ट होगी
तो मुझे
भेजेगा। मेरी
जब बात हुई थी
उस समय वह स्वयं
मौके पर था।
आई जी से मेरी
बात हुई है,
प्रद्युम्न
सिंह जी ने भी
मुझे टेलीफोन
किया, मैंने
उनको कहा कि
मैंने सारी
चीजों की जानकारी
ली है और मैं
चाहूंगा कि
इसकी सच्चाई
का पता लगे और
किसी ने अगर
केवल एक
सनसनीखेज खबर
बनाने के लिए
काम किया तो
उसके खिलाफ भी
उतनी ही सख्त
कार्यवाही
करेंगे। (व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय, इसमें
एक बात और
सीरियस है।
मंत्री महोदय
ने जो बात कही
है कि पिछला
मुकदमा जो
चालान हुआ है
वह भी 156 (3) में
इस्तगासे
में हुआ है।
इसका मतलब
पिछली बार जब
रेप हुआ था तब
भी पुलिस ने
मुकदमा दर्ज
नहीं किया और
उसको 156 (3) में
कोर्ट में
जाना पड़ा। यह
बहुत सीरियस
बात है गृह
मंत्री जी,
जिसका आपको
नोटिस लेना
चाहिए कि पहले
बलात्कार के
मुकदमे में
थाने में
मुकदमा दर्ज
क्यों नहीं
हुआ, क्यों
उसको 156 (3) में
कोर्ट में
जाना पड़ा?
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
सुनो आप,
थोड़ा आंखों
से देख लिया
करो। (व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): .... आपकी
पुलिस ने पहले
भी पीडि़त
पक्ष को न्याय
नहीं दिया।
श्री
अध्यक्ष: या
तो उन्हें
सुन लें या आप
कह दें। (व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): .... वह
आपसी झगड़े का
मुकदमा दर्ज
नहीं हुआ, कोई
बलात्कार का
नहीं हुआ, क्यों
सनसनीखेज बना
रहे हो इसको?
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष
महोदय, गृह
मंत्री जी
मुझे माफ
करेंगे। आज
सुबह-सुबह आकर
के आप ऐसे
बैठे थे जैसे
आप भगवान
महावीर का
तीर्थ करके
आये हो। कोई
चिंता नहीं,
कोई गंभीरता
नहीं और अध्यक्ष
महोदय बोले
उसके बाद भी
आपके ऊपर कहीं
शिकन नहीं आई, मैं
आपका चेहरा
देख रहा था।
मैंने आपको कई
बार अख़बार
दिखाये हैं,
राष्ट्रदूत
मैंने आपको
दिया है कि
होम मिनिस्टर
साहब आपके राज
में यह क्या
हो रहा है।
बोले, हां छाप
रहे हैं
अख़बार, देख
रहा हूं।
अख़बार छाप
रहे हैं तो
अख़बार वालों
से ही बात करो
न कि क्यों
छाप रहे हो
झूठे। आप होम
मिनिस्टर हो
राजस्थान के,
अख़बार पर आप
काग्नीजेंस
नहीं लेंगे तो
किस पर लेंगे?
अध्यक्ष
महोदय, आपकी
व्यवस्था....
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अब
अख़बार पर आ
गये। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, ऐसा
लगता है कि यह
प्रतिपक्ष
के....
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
महावीर जी, आप
बात तो होने दीजिये,
बीच में उठकर
के कुछ भी
कहते रहते
हैं। (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
कांग्रेस के
लोग इन्वॉल्व
हैं उसमें,
इसको भी दिखवा
लें।
श्री
अध्यक्ष:
बैठो आप, ऐसा
मत किया करो।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): अध्यक्ष
महोदय, महावीर
जी नहीं थे तो 10-15
बड़ी शांति से
चला। कल से
आये तो कल से
ही यहां माहौल
खराब होना
शुरू हो गया।
(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
क्या बकवास
कर रहे हैं
महावीर जी।
इसको एक्सपंज
कराइये। यह क्या
तरीका है?
महावीर
प्रसाद इन्वॉल्व
हैं... (व्यवधान)
क्या तरीका
है?
कांग्रेस के
लोग इन्वाल्व
हैं, ये हल्की
बात करते हैं
यहाँ बैठे
हुए। मामले को
शांत नहीं
होने देते। कह
रहे हैं
कांग्रेस
वाले इन्वॉल्व
हैं, शर्म आनी चाहिए
आपको। (व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
यह जनता अगली
बार आपके भी
ऐसे ही नकेल
डालेगी। एक
साल बाद
महावीर
प्रसाद जी,
आपके भी सब के
नकेल डलने
वाली है ये हालात
रहे आपके। (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): .... अभी
चिंता व्यक्त
कर रहे हैं और
खुद ही वो यह
कह रहे हैं कि
यह बनावटी है।
अब यदि वो कह
रहे हैं.... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
हां, बैठिये।
(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
अध्यक्ष
महोदय, शर्म
आनी चाहिए
इनको। (व्यवधान)
श्री
महावीर प्रसाद
जैन (मुख्य
सचेतक): इसलिए
मैं कहता हूं,
इसलिए मैं कल
से कह रहा हूं
कि काल्पनिक
आधार पर आप
कोई चार्ज न
लगायें। स्वयं
की जिम्मेदारी
के आधार पर
लगायें।
इसलिए मैं
कहता हूं और
मैं कल से कह
रहा हूं कि यह
केवल काल्पनिक
आधार पर.... (व्यवधान)
डा.
भंवरलाल राजपुरोहित
(मकराना):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह
घटना तो
धौलपुर में
हुई है तो धौलपुर
के विधायक से
पूछा जाए कि
इसकी सही स्थिति
क्या है। (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): अध्यक्ष
महोदय, इनको
रोकिये। नेता,
प्रतिपक्ष खड़े
हैं और ये कुछ
भी बकवास करते
रहते हैं। यह
कोई तरीका है
क्या इनका?
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): ..... मैं
प्रमाणित कर
दूंगा। (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): यह नई
परम्परा मत
डालिये। (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
यदि
प्रतिपक्ष
यही व्यवहार
करेगा और मुख्य
सचेतक यही व्यवहार
रखेंगे....
श्री
अध्यक्ष: प्लीज
सिट डाउन।
डा.
भंवरलाल
राजपुरोहित
(मकराना): अध्यक्ष
महोदय, यह
घटना धौलपुर
की है इसलिए
धौलपुर के
विधायक से ही
पूछा जाए।
धौलपुर के
विधायक ही बता
सकेंगे,
अथोंटिक तो
धौलपुर के
विधायक हैं,
उनको ज्यादा
जानकारी है।
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
प्रतिपक्ष के
माननीय सदस्य
और प्रतिपक्ष
के माननीय
मुख्य सचेतक
अगर यही व्यवहार
करेंगे तो
मान्यवर आप
हमें बुरा मत
कहना।
श्री
अध्यक्ष:
प्रतिपक्ष के
नहीं हैं, वो
सत्ता पक्ष
के हैं।
प्रतिपक्ष के
नहीं हैं।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
मान्यवर,
इनकी भाभी
इनकी माता के
समान थी और
उनको मरे हुए
महीना नहीं
हुआ और यहां
पर ये ***,
हंस रहे हैं,
इनको कुछ तो
लिहाज रखना
चाहिए दिवंगत
आत्मा के
प्रति। शांति
से बैठे रहना
चाहिए। क्या
उथला देंगे
ऐसे कूदकर के
आप?
आप मलंग जैसा
व्यवहार कर
रहे हैं। क्या
कर देंगे? मान्यवर,
ये तो *** हैं।
गृह मंत्री तो
*** है, किसी बात
का असर होता
नहीं है।
अख़बार का भी
नहीं होता।
भगवान जाने क्या
इनका मन है, क्या
इनका चित्त
है। (व्यवधान)
आप तो आप ही
हो। (व्यवधान)
श्री
युनूस खान
(यातायात
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आज
नेता,
प्रतिपक्ष
कौन से मूड
में आये हैं
पता ही नहीं
चल रहा है।
कभी किधर जा
रहे हैं, कभी
किधर जा रहे
हैं।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
गृह मंत्री जी
से इस सिलसिले
में सुबह जैसे
ही मैंने
अख़बार पढ़ा....
Lpm/akt/1230/1k/2932007
मैंने
टेलीफोन किया,
पूजा से जैसे
ही उठा तो
मैंने इनको
अवगत कराया,
मेरा आपसे
निवेदन है कि
अगर आप
मुनासिब समझे
मैं आपको बाध्य
नहीं कर सकता
हूं, आप इस
मामले की गहन
जांच करा ले
और बेहतर यह
होगा कि आपके
आई जी वहां
बैठे हुए हैं
भरतपुर के
अंदर अगर आप
उनको भी कह दे
वो भी मौक़े
पर चले जाए,
सच्चाई आ जाए
हम भी चाहते
हैं सच्चाई आ
जाए, दोषी को
सज़ा मिले।
श्री
अध्यक्ष: एस
पी गये हैं न
मौक़े पर।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
गये हैं वहां
पर, अगर
मुनासिब समझे
एक वरिष्ठ
अधिकारी और
आयेगा क्योंकि
एस पी तो ज़िले
का अधिकारी
है, कल अंगुलि
भी उठ सकती है
कि किस प्रकार
की जांच हो?
अगर आई जी
वहां पहुंच
जाएगा तो सारी
स्थिति आपके
सामने आ
जाएगी, मेरा
सुझाव है अगर
आप इसको
मुनासिब समझे
तो आप यह स्वीकार
कर लीजिए।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
प्रद्युम्नसिंह
जी मैं आपकी
बात का सम्मान
करते हुए आई
जी को भी
बताऊंगा, वो
भी जाकर के
मौक़े की वस्तु-स्थिति
देखे, उसमें
कोई समस्या
नहीं है।
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
अध्यक्ष
महोदय, जैसा
कि माननीय
सदस्य ने कहा
है कि बलात्कार
वाली घटना तो
झूठी है तो
नकेल वाली भी
झूठी है,
मैंने उस फोटो
को देखा है,
हाव-भाव को
देखने से यहां
मैं यह बात (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
इनको भिजवा दो
आप जांच करने
वहां माननीय
सदस्य कर
लेंगे पुलिस
का काम अब (व्यवधान)
चाहे जो ही कह
रहे हो, जो
जानकारी में
है पुलिस अपना
काम कर रही
है।
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
मैं जांच की बात
नहीं कर रहा
हूं माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
नहीं कर रहा
हूं, फोटो
चेहरा देखने
से आदमी के
मनो चरित्र का
उसके चेहरे से
पता लगता है
तो यह बात कह
रहा हूं कि
पत्रिका में
जो फोटो छपी
है उस फोटो को
देखने से ऐसा
लग रहा है कि उसके
साथ जबरदस्ती
कोई सुआ से
नकेल डालकर के
नाथ डाल दे और
ऐसे बैठा-बैठा
हुआ कोई आदमी
दिखा नहीं
सकता, प्रथम
तो उस नाथ को
उसी टाइम में
उसके कोई
परिवार के सदस्य
या खुद अध्यक्ष
महोदय दर्द
नहीं होता है
क्या नाथ का
और निकालने का
प्रयास नहीं
करते, इस तरह
की घटना (व्यवधान)
मैं चेलेंज
नहीं कर रहा
हूं, मैं मेरे
विवेक के
हिसाब से, मैं
तो मेरा
आईडिया और
मेरा विवेक
है...
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आईडिया है आप
पुलिस अफसर है
क्या?
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
मैं पुलिस अफसर
नहीं हूं (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
जो फोटो देखकर
के पहचान लिया
आपने अब तो सारा
काम मंत्री जी
राजस्थान के
आई जी को
हटाकर के इनको
दे दो ताकि ये
फोटो देखकर के
क्राइम का पता
लगा ले।
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
नहीं, मैं कोई विरोध
नहीं कर रहा
हूं अगर इस
तरह की घटना
घटी है तो
उसको दण्ड
मिलना चाहिए
पर इसके
साथ-साथ (व्यवधान)
श्री
बद्रीलाल जाट
(कपासन): अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
की जनता के
लिए यह (व्यवधान)
घटना है इसकी
वस्तु-स्थिति
की भी जांच
कराई जाए
माननीय अध्यक्ष
महोदय (व्यवधान)
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
मैं यह भी कहना
चाहूंगा कि इस
तरह से पूरे
राजस्थान
में झूठी
कहानी गढ़-गढ़
के सनसनीखेज
बनाना बहुत ही
राज्य के हित
में नहीं है
यह।
श्री
अध्यक्ष:
निंदनीय काम है,
ऐसी घटना
निंदनीय है।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, परसों
आपस मिले थे
चैम्बर में,
उसके संबंध
में व्यवस्था
दीजिए आप।
श्री
अध्यक्ष:
उसके बारे में
मैं चाहूंगी
कि मुख्यमंत्री
जी, आप
भैस-रोडगढ़
वाले मामले की
बात कह रहे
हैं, उस
भैस-रोडगढ़
वाले मामले
में मैं
चाहूंगी कि
मुख्यमंत्री
जी यहां नहीं
है लेकिन पी ए
डी मिनिस्टर
यहां बैठे हुए
हैं, मैं
चाहूंगी कि
मुख्यमंत्री
स्वयं उस
मामले को देखे
और उस मामले
में जांच करने
की आवश्यकता
हो तो जांच
कराए, ठीक है।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, जो तथ्य
है उन तथ्यों
के संबंध में
आपने एक पक्ष
कहा है मतलब
दो तीन ईश्यू
इसमें इन्वॉल्व
है टोटल ईश्यूज
के संबंध में
मुख्यमंत्री
जी से जांच
कराएंगे।
श्री
अध्यक्ष: तो
आप क्या
चाहते हैं?
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
हम भी यही कह
रहे हैं कि जो
हम कह रहे हैं
उसमें जो
मुद्दा उठाया
है उसमें दो
मुद्दे हैं
अलग-अलग
संपूर्ण (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: यही
तो कह रही हूं
मैं मुख्यमंत्री
जी देखे।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, आपके
सामने बात हुई
है, मुख्यमंत्री
जी ने कहा कि
वह देख रही है
कि क्या तथ्य
है? अभी तो
उनके सामने
तथ्य प्रस्तुत
किए है, जांच
करने लायक है
या नहीं, यह
देख तो रही वह
(व्यवधान)
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, नहीं,
नहीं राजेन्द्र
जी, please don’t
misquote.
पार्लियामेंट
अफेयर्स
मिनिस्टर
महोदय जो आपकी
परजेंस में
मुख्यमंत्री
जी से बात हुई
है वह बात..
श्री
अध्यक्ष: अब
आप बैठ जाइए,
आप बैठे स्थान
ग्रहण करे।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
माननीय मुख्यमंत्री
जी की
उपस्थिति में
जो चर्चा हुई
है जिसमें
पार्लियामेंट
अफेयर्स
मिनिस्टर भी
मौजूद थे और
उसके बाद में
आप आये उस समय
यह बात कही गई
है कि संपूर्ण
घटना के संबंध
में मुख्यमंत्री
जी जांच करवा
रही है, आप क्या
कह रहे हो? आप
दिखवा रहे हो,
दिखवा रहे हो
का सवाल नहीं
है, दिखवा रहे
हो तो चर्चा
करवा लीजिए
यदि आप मुख्यमंत्री
जी से चर्चा
करने के बाद
पार्लियामेंट
अफेयर्स मिनिस्टर
हमको सदन में
आपके यहां यह
बात कहे तो
मैं समझता हूं
कि इससे
दुर्भाग्यपूर्ण
परिस्थिति
नहीं हो सकती।
श्री
अध्यक्ष:
सुनिये ऐसा है
कि आपको भी
मौका मिल जाए
और उनको भी
मिल जाए।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
तो शुरू कराइए
आप, शुरू
कराइए आप कहे
तो, अध्यक्ष
महोदय, आज के
बाद मुख्यमंत्री
जी से कोई
वार्तालाप
नहीं करेंगे।
श्री
अध्यक्ष: क्यों
नहीं करेंगे?
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
जब ये
पार्लियामेंट
अफेयर्स
मिनिस्टर
इसमें से
विड्रो करते
हैं (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): विड्रो
नहीं कर रहे
हैं।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
विड्रो ही कर
रहे हो आप. Please don’t misquote it. Call the Chief
Minister and we will resign from the House. हम
हाउस को
रिजाइन कर
देंगे मुख्यमंत्री
जी को, यह कोई
तरीका है मुख्यमंत्री
जी के सामने
बैठकर आप, 26
तारीख की बात
हो, 28 तारीख की
बात हो, विश्वास
लेकर बात कर
रहे हैं और
बात कर रहे
हैं आपके
उपस्थिति में
क्या बात हुई
और आज मुख्यमंत्री
जी की
अनुपस्थिति
में मिस-गाईड
कर रहे हैं।
मैं समझता हूं
कि इससे बड़ी
दुर्भाग्यपूर्ण
परिस्थिति
नहीं हो सकती।
मैं मौजूद था,
माननीय
रामगढ़ से आने
वाले सदस्य
मौजूद थे,
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य मौजूद
थे, उनसे चैम्बर
में बात करके,
आपके चैम्बर
में आये, आपके
सामने बात हुई
है और आपको
अधिकृत किया
है हमने, यह
अधिकृत करने
के लिए कहा है
हमने, मैं
समझता हूं
इससे बड़ा
दुर्भाग्य
मनु-स्थिति
मुख्यमंत्री
जी की न मैंने
आज समझी है और
कभी कल्पना
की है कि मुख्यमंत्री
जी के कहने के
बाद
पार्लियामेंट
अफेयर्स
मिनिस्टर उस
चीज को डिस्टोर
कर दे, इस तरह
से मैं समझता
हूं कि इससे
दुर्भाग्यपूर्ण
स्थिति नहीं
हो सकती, आप
चर्चा करवा लीजिए,
हमें तकलीफ
नहीं है, कोई
तकलीफ नहीं
है, चर्चा
कराइए इसमें
और दूध का दूध
और पानी का
पानी हो
जाएगा, चर्चा
करा लीजिए
हमें कोई
तकलीफ नहीं
है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मुख्यमंत्री
जी और आपके
बीच में आपके
स्वयं के
कक्ष में भी
बात हुई है,
पहले भी बात
हुई है जो बात
हुई उसमें
डिस-ऑन करने
की बात है ही नहीं,
इन्होंने
कुछ तथ्य रखे
हैं मुख्यमंत्री
जी ने कहा कि
मैं इन तथ्यों
की प्राईमरी
तौर पर अभी
देख रही हूं,
आवश्यकता
पड़ेगी अगर
जांच का विषय
बनता है तो
जांच कराएंगे।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): Please don’t misquote it. Please don’t misquote
it.
अध्यक्ष
महोदय, आप
चर्चा कराइए
हम तथ्य रख
देंगे सामने. We want to state facts.
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): यह
नहीं हो सकता
अध्यक्ष
महोदय आपके स्वयं
के चैम्बर
में मुख्यमंत्री
जी ने कहा है
(व्यवधान)
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
हम आपके चैम्बर
में चार मिले
हैं, आज जो
डिबेट चल रही
है उसमें मुख्यमंत्री
जी के सामने
बात नहीं करना
चाहते अन-फोरच्युनेट
वहां पर (व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय कल भी
आपके चैम्बर
में बात हुई
है, यह कोई
तरीका नहीं है
अध्यक्ष
महोदय मतलब
मुख्यमंत्री
जी के विश्वास
में लेने के
बाद हाउस को
डिस्कोर
करना चाह रहे
हैं यह कोई
तरीका नहीं है
आप चर्चा
कराइए अध्यक्ष
महोदय.
कोई तकलीफ
नहीं इस बात
के लिए (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, आपके
कक्ष में हम
उस पर (व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक-एक
कागज...
श्री
अध्यक्ष: आप
पी ए डी
मिनिस्टर को
पहले कह लेने
दो, क्या
कहना चाह रहे
हैं वो?
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): पहले
बात तो सुन लीजिए
उसके बाद कह
लेंगे..
श्री
अध्यक्ष: बात
तो सुन लूंगी
उनको सुन लो
पहले आप।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): आप
बात हुई तब
वहां विराजमान
थे एक-एक कागज
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
उनको पहले सुन
लो।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मुख्यमंत्री
को दिखाया
एक-एक कागज (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): अब आप
स्वयं बता
दीजिए क्या
बात तय हुई थी?
हम आपके आसन
के ऊपर छोड़ते
हैं आप स्वयं
बता दीजिए क्या
बात तय हुई थी
आपके कक्ष
में, आप स्वयं
मौजूद थी, आप
वहां से फैसला
लेकर के आये
कि आप क्या
व्यवस्था
देंगे?
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आपको कौन
रिफ्युज कर सकता
है आप उसके
बाद सीधे चैम्बर
में आये (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
मैंने यही तो
कहा है कि
मुख्यमंत्री
जी इसको देख
रही है...
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
नहीं, नहीं यह
बात नहीं हुई
है अध्यक्ष
महोदय फिर हम
सॉरी कह देते
हैं।
श्री
अध्यक्ष:
पहले मुझे
पूरा तो कह
लेने दीजिए,
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य, मैं
यह निवेदन कर
रही हूं कि
मुख्यमंत्री
जी के सामने
यह बात हुई है,
मुख्यमंत्री
जी ने यह कहा मैं
इसकी जांच
कराऊंगी, ठीक
है करा लो
जांच इसमें क्या
दिक्कत है?
बात हो गई यदि
आप इस बात पर
एग्री है तो
मुख्यमंत्री
जी जांच
कराएंगी...
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
नहीं, जांच की
समय सीमा भी
तय होनी चाहिए।
श्री
अध्यक्ष: और
यदि आप इस पर
एग्री नहीं है
तो आप अपनी
बात कह दे और
ओम बिड़ला जी
को मैं टाइम
दूंगी वह अपनी
बात कह देंगे,
खत्म हुई बात
ठीक है।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): आपने
व्यवस्था
दी थी (व्यवधान)
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप शुरू कराइए
बहस हम तैयार
है, आप शुय
कराइए, इसमें
क्या तकलीफ
है?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मुख्यमंत्री
जी के बीच में
आपकी
उपस्थिति में
जो बात हुई
उसमें आपने
आसन से जो
निर्देश दिए
वह ठीक है,
उसके बावजूद
भी माननीय
सदस्य यह
सिद्ध करना
चाहे कि दूसरे
आदमी का पूरा
दोष है आप समय
तय कर देना न
अध्यक्ष
महोदय (व्यवधान)
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अभी-अभी चर्चा
शुरू कराइए,
हमें कोई
तकलीफ नहीं है
(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): दो तारीख
को सदन है, दो
तारीख को करा
ले।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, जीरो
आवर में चर्चा
कराइए, हमें
कोई तकलीफ है
इस बात की (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: अब
कृपया स्थान
ग्रहण करे
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ऐसा है कि मैं
आप 295 वालो को तो
पढ़ा हुआ मान
लिया जाए, वो
तो पढ़े हुए
मान लिए गए और
तीन मिनट का समय
चूंकि मैं व्यवस्था
दे चुकी हूं
श्री चन्द्र
शेखर बैद
बोलेंगे और
उसके बाद यदि
आप तैयार है
इस बारे में
चर्चा करा ली
जाए।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): दो तारीख
को रख दे, कागज
भी ले आएंगे,
यह भी अपने
कागज ले
आएंगे।
श्री
अध्यक्ष:
मुझे कोई
आपत्ति नहीं
है।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आज ही इनके
जवाब से पहले
होगी, आज ही
चर्चा होगी,
अभी चर्चा
होगी यह कोई
तरीका है आप
मुख्यमंत्री
जी को बुला
लीजिए और
चर्चा होगी,
आज फैसला होगा
उसके बाद मुख्यमंत्री
जी (व्यवधान)
ऐसे थोड़े ही
होगा (व्यवधान)
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): आज ही
करा लीजिए
माननीय अध्यक्ष
चर्चा अभी
कराइए (व्यवधान)
....
Bhs/akt/29.3.07/12.40/1l
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
चर्चा
कराइये। मुख्यमंत्री
जी के विश्वास
को तोड़कर
हाउस में इस
तरह से बातें
करते हैं।
मुख्यमंत्री
जी के साथ ऐसे
करते हैं।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
चर्चा करा ली
जाए। माननीय
सदस्य, जवाब
देने को तैयार
हैं आज चर्चा
करवा लें।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री
के विश्वास
को तोड़कर इस
तरह की व्यवस्था
करना चाहते
हैं ...(व्यवधान)...
इन्हें क्या
तकलीफ है?
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): आप
चाहें तो टाइम
फिक्स कर दें
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अध्यक्ष: आप
बोल लिये हैं
...(व्यवधान)...
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
कोई बहुमत के
आधार पर आप
भ्रष्टाचार
रोक सकते हैं
क्या? हमने
मुख्यमंत्री
जी पर विश्वास
रख कर ...(व्यवधान)...
इन्हें क्या
तकलीफ है? चर्चा
कराइये इन्हें
तकलीफ है क्या?
बातें करना
चाहते हैं।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): ...(व्यवधान)...
आप आज चर्चा
करो इस पर।
श्री
अध्यक्ष:
संसदीय सचिव
तैयार हैं यदि
वार्ता को। अब
इनको बोलने
दीजिये।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
हमने मुख्यमंत्री
जी से बात की
मुख्यमंत्री
जी चर्चा शुरू
करवायें ...(व्यवधान)...
मैं राजेन्द्र
राठौड़ साहब
की बात नहीं
मानता।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय):
चर्चा करने के
लिए तैयार हैं
न वो ...(व्यवधान)...
तैयार हैं वो।
तैयार हैं वो
खुद तैयार हैं।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप कौन होते
हैं? बैठिये
आप। आप कौन
होते हैं?
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): मैं
भी पार्टी में
हूं। मैं हाउस
का पार्ट
हूं।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
...(व्यवधान)... आप
कौन हैं,
किसके पीछे
बात कर रहे
हैं? आप कौन
हैं, किस बात
पर बातें कर
रहे हैं? मुख्यमंत्री
से बड़े हो क्या
आप?
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): वो कह
रहे हैं मैं
तैयार हूं
चर्चा कराइये
न आप। ...(व्यवधान)...
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
मुख्यमंत्री
से बड़े हो क्या
आप? मुख्यमंत्री
से बड़े हो क्या?
मुख्यमंत्री
से बड़े आदमी
हो क्या ? बातें
कर रहे हैं। अपनी
लोयल्टी शो
कर रहे हैं ।
मुख्यमंत्री
से बड़े हो क्या
आप? बातें कर
रहे हैं खड़े
होकर। मुख्यमंत्री
से बड़े हो क्या
आप? ...(व्यवधान)...
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): वो
तैयार हैं आप
चर्चा करवा
लो।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
बातें कर रहे
हैं, मुख्यमंत्री
से बड़े हो क्या
आप? बातें कर
रहे हैं। किस
पर कर रहे हैं
आप? बातें कर
रहे हैं खामख्वाह।
मुख्यमंत्री
से बड़े हो क्या
आप?
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): मैं
तो यह कह रहा
हूं जोशी साहब
कि वो तैयार
हैं आप चर्चा
करो न। मैं
मुख्यमंत्री
से बड़ा नहीं
हूं।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
...(व्यवधान)...
बैठ जाओ फिर
क्या तकलीफ है
जिस चीज का
मालूम नहीं है
और बोल रहे
हैं अपने आप में।
मालूम ही नहीं
है।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): मुझे
सब मालूम है
भैंसरोड़गढ़
का मामला है
मुझे सब मालूम
है।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
मुख्यमंत्री
से बड़े हो क्या
आप? मुख्यमंत्री
से बड़े हो क्या
आप?
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय):
माननीय सदस्य
तैयार हैं आप
चर्चा तो
करायें।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
मुख्यमंत्री
से बड़े हो क्या
आप?
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): मैं
मुख्यमंत्री
से बड़ा तो
नहीं हूं।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
हमने मुख्यमंत्री
के सामने बात
करके अपने तथ्य
रखें और मुख्यमंत्री
से सहमत हुए
हैं। बातें
करने लग जाते
हैं।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं आवासीय):
मैं तो आपकी
ही बात कर रहा
हूं। माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
मैं तो इनकी
ही बात कर रहा
हूं माननीय
सदस्य तैयार
हैं चर्चा
करवा लें।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
सब तैयार हैं
। मुख्यमंत्री
से बड़े हो क्या
आप?
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): मैं
मुख्यमंत्री
से बड़ा तो ...(व्यवधान)...
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
मुख्यमंत्री
का ...(व्यवधान)...
खतम करना
चाहते हैं।
बातें करना
चाहते हैं।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता
प्रतिपक्ष):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
सत्ता पक्ष
का अजीब नक्शा
है। हर मिनिस्टर
तो चीफ मिनिस्टर
बना हुई है।
श्री
अध्यक्ष: क्यों
बने हुए हो
मुख्यमंत्री?
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता
प्रतिपक्ष): आप
हैं या आपके
पीछे वाले हैं
या वो या वो
हैं या ये इधर
वाले हैं कौन
सा मुख्यमंत्री
है । सब मुख्यमंत्री
बन रहे हैं । जब
बात यह हो गयी,
अध्यक्ष
महोदय की बात
जब हो गयी
मुख्यमंत्री
से और जांच
करवाएंगी व्यवस्था
दे दी वो
आएंगी तब बात
करेंगे। अभी
चर्चा कराओ तो
अध्यक्ष
महोदय,
चर्चा
प्रारम्भ
मुख्यमंत्री
जी करेंगी
चर्चा
प्रारंभ मुख्यमंत्री
जी करेंगी। ये उछल
रहे हैं इनका
क्या भरोसा
है ये तो कोई
जिम्मेदारी
की बात नहीं
करते। मुख्यमंत्री
जी खुद चर्चा
करें।
श्री
अध्यक्ष:
इनको आप जिम्मेदार
नहीं समझते
किसी को भी?
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता
प्रतिपक्ष):
नहीं भगवान है
इनका तो।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, हम
माननीय मुख्यमंत्री
जी की जानकारी
में यह लाये
हैं कि उनके
कार्यालय का
इस प्रकरण में
दुरुपयोग
किया गया है इसलिए
इस पर चर्चा
उनकी
उपस्थिति में
हो यह मैं आपसे
निवेदन करना
चाहता हूं।
श्री
अध्यक्ष: तो
ठीक है जब
चर्चा होगी तो
मुख्यमंत्री
जी आ जाएंगी
यहां पर क्या
दिक्कत है।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ठीक
है।
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं
पर्यावरण
मंत्री):
माननीय मेरा
आपसे निवेदन
है कि ये जो
भैंसरोडगढ़
चित्तौड़गढ़
का मामला जो
बता रहे हैं
इसमें कुछ पार्ट
वन विभाग से
संबंधित भी है
मुख्यमंत्री
जी के सामने आपने
चर्चा की है
बात हुई है तो
मेरा निवेदन है
कि ये आप स्थगन
प्रस्ताव के द्वारा
या किसी माध्यम
से अगर आप
चर्चा ही
कराना चाहते
हैं तो निश्चित
रूप से दो
तारीख को आप
रख दें चर्चा
कर लेंगे।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
...(व्यवधान)... दो
तारीख को
सरकार भगेगी।
भगेगी सरकार
दो तारीख को।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): ...(व्यवधान)...
आज ही आपने व्यवस्था
रखी है और आज
चर्चा कराइये
।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा): Mr. Parliamentary Affairs Minister, do you want
to backtrack the decision?
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं
पर्यावरण
मंत्री): क्योंकि
चर्चा में
मुझे भाग लेना
है और अकस्मात
आपका स्थगन
प्रस्ताव था
नहीं ...।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप क्या कहना
चाहते हैं
बोलिये स्पीकर
के सामने फिर
क्या करना
चाहते हैं?
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं
पर्यावरण मंत्री):
आपकी पर्ची
कोई थी नहीं
और किसी और
माध्यम से आप
लेकर नहीं
आये।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
नहीं-नहीं,
माननीय मंत्री
जी विराजिये
एक मिनट। आज
सुबह माननीय
मुख्यमंत्री
जी के चैम्बर
में वार्ता
हुई है हमने
अपने तथ्य
मुख्यमंत्री
जी के सामने
रखे उन तथ्यों
के आधार पर
मुख्यमंत्री
जी ने हमें
कहा कि मैं
इसकी जांच कर
रही हूं । हम
संतुष्ट
हैं।
यही बात अध्यक्ष
महोदय के वैश्म
में हुई है और
क्या चर्चा
की बात करना
चाहत हैं ? न
हमने आरोप
लगाया किसी पर
कल न पूछेंगे
रूल, तो क्या
हमने आरोप
लगाया किसी पर
? तो फिर किस
बात की चर्चा
हो रही है? मुख्यमंत्री
जी के विश्वास
को तोड़ने का
काम
पार्लियामेंट्री
मिनिस्टर, यह
काम आप
मेहरबानी
करके न करें
अन्यथा हम
मुख्यमंत्री
जी के चैम्बर
में कभी आकर
नहीं
मिलेंगे। दो
बात नहीं हो सकती
और अध्यक्ष
जी आपसे
निवेदन करना
चाहता हूं मैं
आप तो उस
वार्ता के बाद
उठ कर सीधे चेयर
पर आ गयी फिर
चेंज करने की
आवश्यकता क्या
पड़ी जब हमने
आपको ट्रेस
करके कहा कि
अध्यक्ष जी
जो व्यवस्था
देंगी,
मानेंगे उसके
बाद यह कौनसी
स्लिप आ रही
हैं और कौन
इसको
प्रभावित कर
रहा है? और फिर
भी आप चर्चा
कराना चाहते
हैं अध्यक्ष
महोदय, तो
मुझे कोई
तकलीफ नहीं है
आप रूलिंग कर
दीजिये। हमने
आपको पहले ही
पूरे अधिकार
दे रखे हैं ।
आप कह कर गईं
थी चर्चा कर
लेना मेरी एब्सेंस
में । हम डिप्टी
स्पीकर साहब
से मिल लिये।
कल हम
प्रद्युम्न
सिंह जी और सब
आपके चैम्बर
में मिले।
हमने आपको कल
कंविंस किया
फिर भी आप चाहते
हैं चर्चा
कराने का।
चर्चा का
हमारा अधिकार
है हमने किसी
पर आरोप लगाया
जो खड़े होकर
बोल रहे हैं? हमने
किसी पर आरोप
लगाया, लिख कर
दिया हमने क्या?
हमने क्या
लिख कर दिया? तथ्यों
से हमने
माननीय मुख्यमंत्री
जी को अवगत
कराया
पार्लियामेंट्री
अफेयर्स मिनिस्टर
वहां मौजूद
हैं और
पार्लियामेंट्री
मिनिस्टर, जो
बात मुख्यमंत्री
जी ने कही है Do you stand by this or not?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): Yes.
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा): That’s all. फिर
क्या इश्यु
बन रहा है फिर
स्लिप लिखकर
क्यों भेज
रहे हो मुख्यमंत्री
के पास?
श्री
अध्यक्ष: डॉ.
चन्द्रशेखर
बैद।
सर्वशिक्षा
अभियान में
बच्चों को
दिये जा रहे
मिड डे मील
में
विसंगतियां
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
पिछले तीन
सालों से बार
बार लगातार यह
सवाल उठ रहा
है कि सर्वशिक्षा
अभियान के अन्तर्गत
मिड डे मील
में जितना
पैसा केन्द्र
सरकार राजस्थान
सरकार को
उपलब्ध करा
रही है उसके
बारे में राज्य
सरकार अलग अलग
तरीके से अलग
अलग
प्रतिवेदनों
में गलत
आंकड़े प्रस्तुत
करके और यह
जताने की
कोशिश कर रही
है कि हम मिड
डे मील एक
करोड़ दो लाख
बच्चों को
उपलब्ध करा
रहे हैं वहीं
रूरल
डवलपमेंट का
जो डिपार्टमेंट
है ..।
श्री
अध्यक्ष: आप
मेरे और इनके
बची में क्या
आ रहे हो? फिर
वो ही बात।
समझायें नेता
प्रतिपक्ष,
अपने माननीय
सदस्यों को।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): ...
उसमें यह स्पष्ट
रूप से स्वीकार
किया गया है
कि 74 लाख बच्चों
को मिड डे मील
उपलब्ध करा
रहे हैं तो यह विवाद
शुरू से चल
रहा है कि बच्चे
कितने हैं,
नामांकन
कितने हैं,
उनके नामांकन
कहीं डुप्लीकेट
तो नहीं हैं,
कहीं उनके
नामांकन आंगनबाड़ी
में भी हैं और
सरकारी स्कूल
में भी है,
प्राइवेट स्कूल
में भी हैं और
तीनों जगह मिड
डे मील का पैसा
उठाया जा रहा
है। इसमें घोर
भ्रष्टाचार
हो रहा है।
इसकी खबरें..।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय मंत्रीगण,
बातें कर रहे
हैं और वो कोई
बात कह रहे
हैं आपको।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): बिलकुल।
श्री
अध्यक्ष:
नहीं वो सुनने
लायक बात है
कि एक ही बच्चे
का तीन जगह
मिड डे मील
उठाया जा रहा
है। तीन जगह
नाम है बहुत
गलत बात है आप
कम से कम
सीरियसली लें
इसको।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
बिलकुल गलत कह
रहे हैं।
श्री
अध्यक्ष: गलत
कह रहे हैं तो
आप बता
दीजियेगा उन्हें
कहने तो दो।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
खाद्य
आपूर्ति
मंत्री हैं ही
नहीं।
श्री
अध्यक्ष:
खाद्य
आपूर्ति में
थोड़े ही आएगा
यह। यह तो मिड
डे मील में
आएगा।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
मैं आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहता
हूं कि जो
राज्य सरकार
द्वारा पिछले
तीन साल में
जितने नामांकन
दर्ज किये गये
और जितने बच्चों
को मिड डे मील
उपलब्ध
कराया गया है
तो सरकार के
अलग अलग
आंकड़ों में
अलग अलग
प्रतिवेदनों
में नामांकन
की संख्या
अलग अलग दी
गयी है। अनेक
बार समाचार
पत्रों में ...।
श्री
अध्यक्ष: एक
बच्चे का नाम
यदि तीन जगह
हो तो आप दृष्टांत
दो।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
मैं बता रहा
हूं वो एक मिनट
मैं मेरी
प्रस्तावना
तो बना दूं
मैडम।
तो इससे
जाहिर होता है
कि जो केन्द्र
सरकार राजस्थान
सरकार को मिड
डे मील के तहत
पैसा उपलब्ध
करा रही है
उसका सही
प्रकार से
सदुपयोग नहीं
हो रहा है और
इसके बारे में
अनेक बार
शिकायतें भी आ
गईं और यह
मामला उठाने
का मुख्य
कारण यह था कि
एक जो ब्लॉक
है नोखा ब्लॉक,
नोखा ब्लॉक
में स्पष्ट
परिणाम मिल
गये हैं और वो
प्रमाणित
परिणाम हैं और
उनको मैं टेबल
भी करना
चाहूंगा कि जो
स्कूलें बंद
पड़ी हैं जिन बच्चों
का नामांकन
रजिस्टर में
अंकित हैं उन्हीं
बच्चों का
प्राइवेट स्कूल
में भी है उन्हीं
बच्चों का
नामांकन
आंगनबाड़ी
में भी है तो
एक ही बच्चे
का ..।
श्री
अध्यक्ष: हां
नोखा में तो
है यह।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
प्राइवेट स्कूल
को नहीं मिलता
है मिड डे
मील।
श्री
अध्यक्ष:
उनको नहीं
मिलता हो
लेकिन उनके
नाम दूसरी जगह
हैं।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): एक
नाम के दस आदमी
मिल जाते हैं
साहब यह बकवास
है बिलकुल।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
नहीं-नहीं।
श्री
अध्यक्ष:
वहां पर जब
नाम है इसका
मतलब यह है कि
वो बच्चे
वहां पढ़ रहे
हैं।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): नहीं,
अध्यक्ष
महोदय, ये
बिलकुल राज्य
को बदनाम करने
का दुष्प्रयत्न
है कांग्रेस
पार्टी का। ये
बिलकुल
बर्दाश्त की
बात नहीं है। बिलकुल
राज्य सरकार
बिलकुल ठीक
काम कर रही है
एक दो जगह किसी
बच्चे का गलत
नाम हो उसमें
आप राज्य
सरकार को
बदनाम करना
चाहते हो।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
नोखा के अन्दर।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): नहीं
कहीं नहीं है
ये फर्जी हैं
और हैं भी तो
आपके बनाये
हुए हैं फर्जी
हैं ...(व्यवधान)...
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
नहीं-नहीं।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): डायस
के द्वारा जांच
हुई हुई है
डायस के
द्वारा जांच
है प्रमाणित
आंकड़े हैं
ऐसे थोड़े हैं
अध्यक्ष
महोदय। राज्य
सरकार जो काम
कर रही है
राज्य सरकार
की जो
उपलब्धियां
हैं उनके बारे
में तो कुछ
मिलता नहीं है
और एरीगैरी
कोई बात लेकर सदन
में बिना मतलब
समय खराब करना
चाहते हैं। कोई
मतलब ही नहीं
है।
श्री
कालूलाल गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं
पंचायती राज
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, ये
मिड डे मील
में जो पहले
स्कूलों में
मिड डे मील
बनता था अब वो
सेटल्ड किचन
से बन रहा है
उसके कारण कुछ
लोगों ने
जिनका स्वार्थ
सिद्ध नहीं
होता ऐसे
लोगों ने षड्यंत्र
करके ... ।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
षड्यंत्र है
बिना मतलब बकवास
है।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री): ..
ऐसा केस भी
बनाया है और
ऐसा भी है अध्यक्ष
महोदय,
जहां अच्छा
खाना मिल रहा
है ताजा खाना
मिल रहा है
उसको भी उन्होंने
पता नहीं कहां
से सड़ा गला
खाना रोटी कबाड़ी
और उसमें
कीड़े पड़े
हुए और ऐसा
टीवी में
दिखाया ..।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): नहीं
गलत है ये आंकड़े
गलत है फर्जी
आप भी फर्जी
हो और कांग्रेस
भी फर्जी है।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री): ..
मुझे आश्चर्य
हुआ कि सर्दी
के दिनों में
कीड़े पड़ते
नहीं। सर्दी
में कीड़े
नहीं पड़ते
...(व्यवधान)...
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
बिलकुल फर्जी
है आपके खिलाफ
तो पुलिस में
केस रजिस्टर
होना चाहिए।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
और उसमें
कीड़े पड़ रहे
थे ...(व्यवधान)...
ये सारा
षड्यंत्र उन
लोगों का है
जो कि पहले
मिड डे मील का
बहुत बड़ा
दुरुपयोग
करते थे अब एक
पैसे का
दुरुपयोग
नहीं हो रहा
हे औ अध्यक्ष
महोदय,
जितने बच्चों
का नामांकन कितना
ही हो जितने
उपस्थित होते
हैं उतना ही
पर डे भोजन
बनता है। एक
बच्चे का भी
ज्यादा नहीं
बनता है और
हमारी ...(व्यवधान)...
प्रशंसा भारत
सरकार ने की
और बिलकुल यह
कहा है ।
महाराष्ट्र
सरकार तो यहां
इस पैटर्न को
सीखने के लिए, ट्रेनिंग
लेने के लिए
यहां पर
अधिकारियों
को भेज रही है
और हमारे यहां
एक अच्छा
कार्य हो रहा
है जिसकी
प्रशंसा
सर्वत्र हो रही
है हिन्दुस्तान
के सब राज्य
कर रहे हैं ...।
कैलाश 29.3.07
12.50 (1) 1m
भारत
के सब राज्य
कर रहे हैं और
उसके लिये जान
बूझ कर षड्यंत्र
पूर्वक इसको
बदनाम करने के
लिये ऐसे
मामले उठाये
जा रहे हैं ।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
मंत्री जी
खाली सिरोही जिले
में मिड डे मील
में एसीडी ने 5 मुकदमें
दर्ज किये
हैं, आप की
जानकारी में
है या नहीं है
और आपके 5-5
अधिकारी सस्पेंड
हुए हैं । (व्यवधान)
किस मुंह से
आप अपने आप को
सर्टिफिकेट
दे रहे हो । (व्यवधान)
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री): ...
(व्यवधान) आपको
इस्तीफा दे
देना चाहिये
आप काहे के
जनप्रतिनिधि हो
। (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
मिड डे मील के
मामले में एक
जांच समिति
बनाई थी, आपके
मिड डे मील के
मामले में कोई
जांच ही नहीं
की (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
सुनिए । (व्यवधान)
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री): ..
(व्यवधान)
हमारा राज आने
के बाद की कोई
शिकायत नहीं
है और करोडों
रुपये का इनके
टाइम का
घोटाला निकला
है ।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय मंत्री
ज, बाडमेर से
आने वाले
माननीय सदस्य,
बाडमेर से आने
वाले माननीय
सदस्य । जिस
माननीय सदस्य
ने अपना स्थगन
प्रस्ताव
दिया है और
आसन ने यदि
बोलने का मौका
दिया है तो
उन्हें आप
बोलने दें और
सरकार को इस
बात का पूरा अधिकार
होगा कि सरकार
जवाब दे ।
लेकिन बात तो
सुनिए आप, आप
खडे होकर ऐसे
ही कहने लग
जाते हैं कुछ
नहीं , कुछ
नहीं, सुनो
बात ।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
अध्यक्ष जी,
मैं ज्यादा
नहीं कह कर
सिर्फ इतना
कहना चाहता
हूं कि नौखा
ब्लाक में एक
एक बच्चे का
तीन तीन जगह,
एक बच्चे का
नाम दो जगह हो
सकता है तीन
तीन जगह पर,
आंगनबाडी में
भी वह लाभ उठा रहा
है और सरकारी
स्कूल में भी
लाभ उठा रहा
है, प्राइवेट
स्कूल में भी
लाभ उठा रहा
है । तीन तीन
जगह उसका मिड
डे मील का
खर्चा उठाया
जा रहा है और
आंगनबाडी की
सुविधाएं भी
उठाई जा रही
है ।
श्री
अध्यक्ष: दो
ही जगह उठाया
जायेगा.. (व्यवधान)
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
ऐसी स्थिति
में जो अभी तक
यह आरोप लगते
रहे हैं कि
बच्चों का
नामांकन भी
कितना है एक
करोड दो लाख,
बच्चों की
संख्या और
रूरल
डवलपमेंट
डिपार्टमेंट
में कितने बताते
हैं 74 लाख ।
आपके मिड डे
मील
प्रोग्राम के
जो अधिकारी
हैं वह बताते
हैं कुछ और ।
आपके नामांकन
की संख्या
जितने बच्चों
को मिड डे मील
मिल रहा ह,
जितने बच्चों
का नामांकन एक
जगह नहीं अनेक
जगह अंकित है
उसके स्पष्ट
प्रमाण मिलने
के बावजूद और
मैं आपके माध्यम
से यह कहना
चाहूंगा कि
यही कारण है
कि डब्ल्युएचओ
की रिपोर्ट
में केन्द्र
सरकार ने जब
दो बार इसमें
संशोधन कर के
प्रोटीन की
मात्रा बढा
दी, गेहूं की
मात्रा बढा दी
और पोषक तत्वों
की मात्रा बढा
दी । 43 प्रतिशत
बच्चे आज भी
राजस्थान
में कुपोषित
हैं क्योंकि
उनको सही समय
सही तरीके से
यह लाभ नहीं
मिल पा रहा है
और आपकी
परमिशन हो तो
मैं यह नौखा
ब्लाक के जो
कागज आये हैं
जिस पर मंत्री
जी इतने उत्तेजित
हो रहे हैं कि
यह असत्य है,
गलत है, इनके
ऊपर मुकदमा
चलाया जाना
चाहिये । बिना
जांच किये आप
स्वत: ही यह
कह रहे हो
सारा सही चल
रहा है । एक भी
बच्चे का
नामांकन दो
जगह नहीं है
तो फिर यह जो
अख़बार में पिछले
एक साल से खबर
आ रही है कि
मिड डे मील
में जो गेहूं
जाना चाहिये
वह सीधे फ्लोर
मिल में पहुंच
गया । एसीडी
में इतने मुकदमें
दर्ज हुए यह
सब असत्य है,
सारी चीज असत्य
है । जितने
नामांकन है
उतने ही बच्चों
को मिड डे मील
मिल रहा है ।
मैं आपके माध्यम
से यह अनुरोध
करना चाहता
हूं कि जो
वाजिब बच्चों
को जिनको मिड
डे मील मिलना
चाहिये उसकी
एवज में कुछ
स्वार्थी
तत्व एक ही
बच्चे का
नामांकन तीन
तीन जगह करा
कर जो अनावश्यक
लाभ उठा रहे
हैं उसको रोका
जाये जिससे कि
उन गरीब बच्चों
को जिनको मिड
डे मील मिलना
चाहिये उनको
यह सहायता
उपलब्ध हो
सके और आपकी
परमिशन से मैं
यह टेबल भी कर
रहा हूं जिससे
कि आप जांच
करवा कर स्वयं
देख लें कि इसमें
ऐसा हुआ है या
नहीं हुआ है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अध्यक्ष जी,
मिड डे मील की
जांच के लिये
आपने विधान
सभा के सदस्यों
की एक समिति
बनाई थी । मिड
डे मील में
घोटाले का
मामला विधान
सभा में गत
वर्ष भी उठा
था । उस समिति
की जांच की
रिपोर्ट क्या
है । उसकी एक
मीटिंग भी आज
तक नहीं हुई
और कई बार आरोप
लग चुके, कई
बार बात हो
चुकी, आपने जो
निष्पक्ष निर्णय
कर के वह
समिति बनाई थी
उस समिति की
मिड डे मील के
मामले में एक
मीटिंग नहीं
हुई, एक चर्चा
नहीं हुई तो
वह समिति
बनाने से क्या
फायदा और उस
आश्वासन का
क्या फायदा ।
माननीय
मंत्री जी
आपके सामने वह
समिति बनी थी
और आपने कहा
था कि यह
समिति जांच करेगी,
आज तक कोई
जांच की क्या
आपने, कोई
जांच नहीं की
।
श्री
कालूलाल
गुर्जर(ग्रामीण
विकास एवं
पंचायती राज
मंत्री):
समिति कहां
बनी ?
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
संसदीय समिति
बनी थी, विधान
सभा की समिति
बनी थी ।
श्री
रामनारायण
चौधरी(नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष
महोदय, एक
रेस्पोंसेबल
एनजीओ ने 400 स्कूलों
की जांच कराई
उन 400 स्कूलों
में सब में
गड़बड़ आई है
और वह रिपोर्ट
भारत सरकार को
उस एनजीओ ने
भेजी है ।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय,
हिण्डौली से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने जो कहा कि
सदस्यों की
समिति बनाई
है, कोई जांच
समिति नहीं बनी
पता नहीं आपने
कहां कहां से, आज
तक जब से मेरे
पास मिड डे
मील आया है तब
से तो कोई
समिति है नहीं
पहले कोई जांच
समिति बनी हो
तो माननीय
सदस्य जाने ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
रिकार्ड उठा
कर देख लें ।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय,
जहां तक
तारानगर से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने कहा यह सही
है कि जितनी
भी शिकायतें
हमको मिली है उनकी
हमने जांच
करवाई, भ्रष्टाचार
की भी मिली और
भी मिली लेकिन
वह सब आपके टाइम
की थी, हमारे
टाइम की नहीं
।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
मैं विधान सभा
के सदस्यों
की बात कर रहा
हूं ।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
पहले आप सुन
लीजिए । अध्यक्ष
महोदय,
आपने स्पेशली
अभी जिस पंचायत
समिति नौखा का
नाम लिया अगर
नौखा में कोई
भी बच्चे का
नाम दो या तीन
स्कूलों में
लिखा गया और
अगर वहां किसी
प्रकार का
घोटाला है तो
मैं आज घोषणा
करता हूं कि
उसकी जांच
करवा लूंगा और
अगर उसमें
किसी का दोष
होगा तो
निश्चित रूप
से सज़ा
देंगे, उनके
खिलाफ कठोर
कार्यवाही
करेंगे ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अध्यक्ष
महोदय, जो
समिति आपने
बनाई थी उस
समिति की जांच
होनी चाहिये ।
मिड डे मील
में जो भ्रष्टाचार
हुआ है और सदन
का काफी समय
उस पर चर्चा
में गया है और
आपने ही समिति
बनाई थी उस
समिति की आज
तक मीटिंग क्यों
नहीं हुई और
मिड डे मील
में पर्चेज
में इनमें जो
हुआ उसकी जांच
भी होनी
चाहिये ।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय,
कोई समिति बनी
ही नहीं फिर
कहां से
मीटिंग होगी ।
इनको गलत ध्यान
है वह तो एमएलए
लैड के बारे
में समिति थी
और वह बन गई और
उसकी मीटिंग
भी हो गई।
मुझे याद है
विधान सभा में
एक समिति की
जो माननीय
मुख्य
मंत्री जी ने
घोषणा की थी
वह एमएलए लैड
की थी, मिड डे
मील की जांच
की कोई कमेटी
नहीं बनी। आप सरासर
असत्य भाषण
कर रहे हैं ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आपको याद ही
नहीं है, आपको
याद ही नहीं
है । यहां
विधान सभा के
फ्लोर पर बनी
थी ।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर):
पंचायत ब्लाक
पर जो कमेटीज
बनी हैं उसका
जिक्र कर रहे
हैं माननीय
सदस्य ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अगर विधान सभा
के फ्लोर पर
यहां समिति
बनाई हो तो फिर
आप क्या करोगे
, आप क्या
करोगे फिर ।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
आप तो बता
देना, मान
लेंगे ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप क्या
करोगे, असत्य
तो आप बोल रहे
हैं । जानकारी
ही नहीं है
आपको । यहां
विधान सभा की
समिति बनी थी
।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
मैं कहता हूं
मुझे पूरी जानकारी
है आपको नहीं
है । मैं
विभाग चला रहा
हूं मुझे पूरी
जानकारी है ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आपको कतई
जानकारी नहीं
है, A-B-C-D की
भी जानकारी
नहीं है । आप
चैलेंज स्वीकार
करो कि बनी थी
या नहीं बनी ।
मैं आपको चैलेंज
देता हूं कि
आप असत्य
बयान कर रहे
हैं, आपको
जानकारी ही
नहीं है। समिति
बनी थी पर्चेज
के मामले में
जांच करने के
लिये ।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
आपसे पहले
मैंने वकालत
शुरू की है और
आपसे ज्यादा
जानकारी रखता
हूं । माननीय
सदस्य आपको ग़लतफ़हमी
हो तो उसको
निकाल दो आप
ही विद्वान
नहीं हो इस सदन
में और भी कई
विद्वान बैठे
हैं और
जानकारी रखने
वाले बैठे हैं
। आपके पास
ठेका नहीं है
जानकारी का,
आप विराजिए ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
मैं तो आपकी
विद्ववता का क़ायल
हूं लेकिन सच्चाई
यह है कि यहां
पर समिति बनी
थी । मंत्री
जी आप बोलो ना,
आप क्यों
नहीं बोल रहे
हैं, बोलो ना
समिति बनी थी
कि नहीं बनी,
बोलो आप जांच
समिति बनी थी
यहां।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
आप जबरदस्ती
बुलवा रहे
हैं, कोई
कमेटी नहीं
बनी । आप कह रहे
हो उनको बोलो,
क्या
बोलेंगे जब
कमेटी बनी ही
नहीं ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
संसदीय सचिव
ओम बिरला जी
जानते हैं बनी
थी समिति ।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
मिड डे मील की
कोई कमेटी आज
दिन तक नहीं बनी
आप जबरदस्ती
बोल रहे हो ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
मैं आपको बता
देता हूं वह ।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
हां बता देना
।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): अध्यक्ष
महोदय,
नौखा में तो
मिड डे मील ही
नहीं पशुओं के
चारे के जो
डीपों हैं
उसमें भी
मृतकों को
चारा बांटा जा
रहा है । नौखा
में तो भ्रष्टाचार
का केन्द्र
बन गया ।
करोडो लाखों
रुपये जो आदमी
15-15 साल से मर गये
उनको भी पशु
चारे के डिपो
चल रहे हैं दो
साल से और
एडीएम मान रहा
है कि हां यह
गलती हुई है
और उसकी अभी
तक जांच चल
रही है । दो
साल से जांच
ही पूरी नहीं
हो रही है ।
मुद्दा क्यों
नहीं है ।
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी):
मंत्री महोदय
यह सूचना भी
एक साथ ही दे
देना यह सूचना
भी आपकी ही है
।
(अध्यक्षपीठ
द्वारा संकेत
द्वारा अंकित
नहीं करने के
आदेश प्रदान
किये गये ।)
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर):
000
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): 000
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं
हो, अंकित
नहीं हो ।
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): 000
ans/usc
13.00
1n 29.3.2007
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): 000
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): 000
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री कन्हैया
लाल मीणा (बस्सी):
अंकित नहीं
हो।
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
इसको स्पष्ट
करना चाहूंगा
कि यह जो
दोहरा
नामांकन की
बात है, मिड डे
मील की मंत्री
जी बताएंगे।
राज्य के
समस्त
विद्यालयों
को 30 सितम्बर
को आधार मानते
हुए नामांकन
की सूचना
एकत्र की जाती
है। साथ ही
मुख्यमंत्री
शिक्षा सम्बल
अभियान के
दौरान 30 सितम्बर
सन्दर्भ
तिथि को आधार
मानते हुए
विद्यालय से
वंचित
बालक-बालिकओं
के निजी
विद्यालयों
में नामांकित
बालक
बालिकाओं तथा
ब्रिज कोर्स
में जाने वाले
बच्चों का
सम्पूर्ण
लेखा जोखा
चाइल्ड
ट्रेकिक सिस्टम
के अन्तर्गत
प्रपत्र में
विद्यालय
में
रहता है इस
प्रकार किसी
भी राजकीय
विद्यालय से
संबंधित आस पास
के क्षेत्र
में रहने वाले
समस्त बच्चों
के द्वारा
कहां अध्ययन
किया जा रहा
है अथवा नहीं
किया जा रहा
है इसका
विस्तृत
विवरण रहता
है। चूंकि इस
चाइल्ड
ट्रेकिक
रजिस्टर में
बालक
बालिकाओं के
नाम के आगे दो
विद्यालयों
में अध्ययन
की प्रविष्टि
नहीं हो सकती
तथा डाइस सर्वे
द्वारा प्रत्येक
बालक बालिका
द्वारा किस
विद्यालय में
अध्ययन किया
जा रहा हे
इसका विस्तृत
विवरण रहता है
और ऐसी स्थिति
में दोनों सूचनाओं
की तुलना से
ज्ञात हो जाती
है कि किसी
बच्चे का
नामांकन दो स्कूलों
में तो नहीं
है, ऐसी
स्थिति में
अपवाद स्वरूप,
यदि ऐसी
स्थिति सामने
आने पर बालक
बालिकाओं का
नाम जिस
विद्यालय में
वास्तविक
रूप से अध्ययनरत
है वहीं रखा
जाता है तथा
अन्य
विद्यालय से
उसका नाम हटा
दिया जाता है।
चाइल्ड
ट्रेकिक सिस्टम
एवम डाइस
सूचना
संग्रहण के
समय यह
सुनिश्चित कर
लिया जाता है
कि किसी
विद्यालय में
बालक
बालिकाओं का
दोहरा
नामांकन नहीं
हो।
अब अपवाद
स्वरूप अगर
किसी कारण से
किसी
आंगनबाड़ी
में या किसी
दूसरी स्कूल
में 5-10 बच्चों
का नाम अगर
एक्स्ट्रा
रख लिया जाता
है तो उसको
आधार बनाकर,
सारे राज्य
में अपने को
जो फायदा मिल
रहा है वह
राज्य के बच्चों
को जो फायदा
मिल रहा है
उसको अकारण से
हम
बदनाम न
करें। हमको
जिस प्रकार
काम में फायदा
मिल रहा है,
गरीब व्यक्ति
के पोषण में,
इसमें कोई दो
नाम आ भी गये तो
कोई बच्चा
भूखा है और
उसने दो नाम
लिखवा लिए तो,
गरीब आदमी का
बच्चा है दो
नाम लिखेगा या
कोई खर्चा
चलाने वाला आदमी
खर्चा नहीं
निभा पा रहा
होगा तो
मुश्किल से
काम होगा, यह
अपवाद स्वरूप
होगा इसलिए
मैं आग्रह
करूंगा इस
अपववाद स्वरूप
काम को बिना
मतलब, यह जो
बहुत बढि़या
कार्यक्रम चल
रहा है इसमें
हमको मदद करनी
चाहिये, यह
मुझे माननीय
सदस्यों से
कहना है।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
इश्यू यह है
आईसीडीएस का
प्रोग्राम भी
चल रहा है बच्चों
के लिए, प्री
स्कूल के लिए,
आप दो बातें
समझिये। वह
लोग भी
आइसीडीएस का
पैसा उठा रहे
हैं प्री स्कूल
के बच्चों के
लिए, उन बच्चों
का नाम इस स्कूल
के मिड डे मील
में लिखा हुआ
है। मिड डे
मील स्कीम
ठीक चल रही है
यह इश्यू
नहीं है, इश्यू
यह है कि वह
लोग मिड डे
मील के नाम से
भी जो भारत सरकार
से गेंहू आ
रहा है वह
उसमें इन्क्ल्यूड
हो रहा है और
आइसीडीएस के
नाम से हो रहा
है वह भी हो
रहा है। तो
आइसीडीएस का
पैसा भी 100-200
कोड़ रूपये आ
रहा हैं, उसका
भी पैसा
इनवेस्ट हो
रहा है,
इसका भी हो
रहा है इसलिए
निश्चित तोर
पर आपको, हम
सरकार को
इसलिए नहीं कह
रहे, अच्छा
काम हो रहा है
लेकिन यह पर
स्टूडेण्ट
आपके पास पैसा
आता है भारत
सरकार से, पर
स्टूडेंट
आपको गेंहू
आता है तो यह
दोहरा एडवाटेंज
उठ रहा है। वह
आईसीडीएस के
नाम से भी उठा
रहा है और
उसको भी उठा
रहा है उसको
चैक करने की
जरूरत है।
आईसीडीएस के
संबंध में इसी
विधान सभा में
माननीय अध्यक्ष
महोदय याद कीजिए
आपने
आईसीडीएस
कमेटी को, एक
कमेटी को इंक्वायरी
करने का काम
किया था जब यह
कुरकुरे, मुरमुरे
की बात आई थी
तब आपने यह
कहा था और वह
स्थिति
आज भी सदन के
सामने
वापस नहीं आई
कि रिपोर्ट क्या
हुई, इसलिए
आइसीडीएस का
पैसा भी राजस्थान
सरकार का जा
रहा है, भारत सरकार
का जा रहा है।
मिड डे मील
में भी, यह जो
ओवर लोपिंग हे
उस ओवर लोपिंग
के आधार पर जो
आपके नामांकन
है, उसमें जो
इश्यू आ रहा
हे उसको आप
चैक करवाए यह
इश्यू है।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): देख
लेते हैं।
श्री अध्यक्ष:
नोखा का ही
बताया, और
कहीं का नहीं
बताया, नोखा
का दिखवा दो
आप।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): हां,
यह दिखा लेते
है1 उसको दिखा
लेते हैं कि
जो आइसीडीएस
का पैसा आता
है उसको और स्कूलों
में दोहरा
नामांकन नहीं
हो, उसका कोई
लाभ नहीं उठा
रहा हो यह बात
दिखा लेते
हैं।
श्री अध्यक्ष:
हां वह दिखा
लीजिए, नोखा
का ही मामला
है।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): नोखा
का पर्टिकूलर
दिखा लेंगे।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
दिखा लेंगे।
संदेश
राज्यपाल
महोदया का
कृतज्ञता
ज्ञापन
श्री अध्यक्ष:
मैं माननीय
सदस्यों को
सूचित करती
हूं कि राज्यपाल
महोदय द्वारा
दिए गए
अभिभाषण पर
दिनांक 7
मार्च,2007 को सदन
द्वारा पारित
धन्यवाद प्रस्ताव
के उत्तर में
निम्न संदेश
राज्यपाल
महोदया से
प्राप्त हुआ
है।
प्रिय अध्यक्ष
महोदया, आपके
अर्द्धशासकीय
पंत्राक f/10
(1) सदन, विधान
सभा 2004-7, 1373 दिनांक
7मार्च,2007
प्राप्त
हुआ। माननीय
सदस्यों द्वारा
प्रकट
कृतज्ञता के
लिए मैं उनकी
आभारी हू और आपसे
निवेदन हे कि
कृपया मेरे
कृतज्ञता
ज्ञापन को
माननीय सदस्यों
को पहुंचाने
का कष्ट
करें। सदभावी,
प्रतिभा
पाटिल।
पर्ची के
माध्यम से,
श्रीमती
सूर्यकांता
(अनुपस्थित)
श्री
हीरालाल
निवाई
(अनुपस्थित)
श्री
तगाराम
चौधरी। (व्यवधान)
No. You have lost your turn. तगाराम
चौधरी। नहीं,
बिल्कुल
नहीं। जिनको
मालूम था कि
पर्ची आने
वाली है और इस
तरह से मटरगश्ती
करते फिरते
हैं उनको मैं
बोलने का मौका
नहीं दूंगी।
श्री
हीरालाल
(निवाई): मैं
बाहर गया था,
इनके बाद बोल दूंगा।(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
तगाराम, चलिए
तगाराम।
श्री
तगाराम चौधरी
(बाड़मेर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मेरे
को आपने समय
दिया बहुत
बहुत आभारी
हूं ।
श्री अध्यक्ष:
अब आप बोल दो
जो बोलना है।
श्री
तगाराम चौधरी
(बाड़मेर):
आपके माध्यम
से मैं मेरे
विधान सभा
क्षेत्र
बायतू में राजकीय
बालिका...
श्री अध्यक्ष:
आपका बालिका
आई टी आई
खोलने के बाबत
में है आपकी
पर्ची उस पर
बोलो।
श्री
तगाराम चौधरी
(बाड़मेर): वह
ही बोल रहा
हूं।
श्री अध्यक्ष:
वह ही बोलो।
पर्ची
के माध्यम से
उठाये गये
मुद्दे
बायतू
में राजकीय
बालिका
औद्योगिक
प्रशिक्षण
संस्थान की
स्थापना
श्री
तगाराम चौधरी
(बाड़मेर):
आपके माध्यम
से शिक्ष मंत्री
महोदय का ध्यान
आकर्षित
करूंगा कि
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
बाडमेर के
तहसील मुख्यालय
बायतू में
राजकीय
बालिका
औद्योगिक
प्रशिक्षण संस्थान
खोलने के लिए
मैं निवेदन
करना
चाहूंगा।
श्री अध्यक्ष:
लड़कियां तो
पढ़ती नहीं
वहां पर आई टी
आई में कौन
आएगी आपके।
पढ़ती तो है
नहीं
लड़कियां।
श्री
तगाराम चौधरी
(बाड़मेर):
शिक्षा की मांग के
दिन भी शिक्षा
मंत्री महोदय
ने जिस तरह से
घोषणा की थी
कि तहसील मुख्यालय
पर...
श्री अध्यक्ष:
कोई सैकण्डरी
वैकण्डरी
खुलवा लो, आई
टी आई में कौन
आएगी।
श्री
तगाराम चौधरी
(बाड़मेर): कि
प्रत्येक
तहसील मुख्यालय
पर आई टी आई
खोल दी जाएगी।
मैं विशेष तौर
से क्योंकि
महिला वर्ष और
महिलाओं के
बारे में
माननीय मुख्यमंत्री
महोदय बहुत
ही, महिलाओं
को तरह तरह से
सम्बल देने
के लिए
मातृशक्ति
को भी आगे लाने
के लिए इस तरह
से कार्यक्रम
है उसी के तहत
मैं भी निवेदन
करूंगा कि
बालिका, मेरा
बायतू तहसील
मुख्यालय है
वहां पर उनके
आस पास
बालिकाएं
बहुत पढ़ रही है।
मैं यह भी धन्यवाद
दूं मुख्यमंत्री
महोदय को और
शिक्षा
मंत्री महोदय
को कि उन्होंने
सरकार का पद
सम्भालने के
बाद में,
वसुन्धरा जी
ने जो राजस्थान
के मुख्यमंत्री
का ताज सम्भाला..
(
बजे)
(श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष,
पदासीन)
उसके
तुरंत बाद
मेरे वहां पर
बालिका माध्यमिक
विद्यालय था उसको
सीनियर
बालिका
विद्यालय भी
किया है। इस
तरह से इसी
कड़ी में...
श्रीमती
सूर्यकान्ता
व्यास
(जोधपुर): मेरे
का उल्टी हो
गई थी मैं गई
थी, जब तक आपने नाम
बोल दिया
मेरा। (व्यवधान)
श्री
तगाराम चौधरी
(बाड़मेर):
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहूंगा
मुख्यमंत्री
महोदय से और
शिक्षा
मंत्री महोदय
से कि
इन्होंने
वहां
बालिकाओं के
रोजगार के लिए
औद्योगिक
प्रशिक्षण
संस्थान
बालिका
औद्योगिक
प्रशिक्षण
संस्थान स्वीकृत
कराकर
अनुग्रहित कराया,
धन्यवाद
आपने टाइम
दिया।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
बाड़मेर जिले
में पहले से
ही राजकीय
औद्योगिक
प्रशिक्षण
संस्थान हे
जिनमें 25
प्रतिशत स्थान
बच्चियों के
लिए आरक्षित
है। यह
औद्योगिक
प्रशिक्षण
संस्थान
क्रमश:
बाड़मेर,
बालोतरा,
सिवाणा, शिव
तहसील में है।
माननीय सदस्य
ने जो बायतु
की मांग की है
बाड़मेर
विधान सभा
क्षेत्र के
बायतू
पंचायत
समिति के लिए
निजि निवेशक
यूनिटी एंड
वालेन्टरी
एक्शन संस्थान
आचार्य तुलसी
मार्ग बायतु,
तहसील बायतु जिला
बाड़मेर को
महिला
ओद्योगिकी
प्रशिक्षण संस्थान
खोले जाने
हेतु......
दुर्गा/चौहान
290307 1310 1o
तथा आशय
पत्र जारी कर
दिया गया है।
इस संस्थान
की स्थापना
हेतु नि:शुल्क
भूमि आबंटन
हेतु भी जिला
कलक्टर
महोदय को
निदेशालय,
तकनीकी
शिक्षा,
जोधपुर की ओर
से पत्र लिखा
जा चुका है।
श्री
उपाध्यक्ष:
हाथों-हाथ ही।
श्री जोगाराम
पटेल।
श्री
तगाराम चौधरी
(बाड़मेर): मैं
राजकीय
बालिका औद्योगिक
संस्थान
खुलवाने के
लिये निवेदन
कर रहा था।
आपने निजी में
किया, तो भी
धन्यवाद।
श्रीमती
सूर्यकान्ता
व्यास
(जोधपुर):
उपाध्यक्ष
महोदय, मुझे
बोलना है,
मेरी पर्ची
है। (व्यवधान)
श्री
हीरालाल
(निवाई): उपाध्यक्ष
महोदय, एक
पर्ची आई है,
उसमें भी। (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
हां, अभी
देंगे, अभी
बोलने दें।
(व्यवधान)
जोधपुर
विश्वविद्यालय
के अन्तर्गत
एम बी एम
इंजीनियरिंग
कालेज की
आर्किटेक्चर
शाखा को मान्यता
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, आज का
दिन माननीय
शिक्षा
मंत्रीजी को,
शिक्षा से सम्बन्धित
समर्पित है,
सारे विषय
शिक्षा के सम्बन्ध
में ही आ रहे
हैं। मैं भी
उस सम्बन्ध
में ही एक
बहुत महत्वपूर्ण
विषय की ओर ध्यान
दिलाऊंगा।
वर्तमान युग
में टेक्निकल
एजुकेशन का कितना
महत्वह है,
यह कई बार सदन
में और सदन के
बाहर भी चर्चा
हो चुकी है,
उसके बारे में
वापस नहीं
बताऊंगा। इस
टेक्निकल
एजुकेशन को ध्यान
में रखते हुए
जोधपुर में
बहुत पहले
एम.बी.एम.
इंजीनियरिंग
कालेज की स्थापना
की गई थी जो
जोधपुर विश्वविद्यालय,
वर्तमान में जयनारायण
विश्वविद्यालय
है उससे सम्बन्धित
है और जोधपुर
विश्वविद्यालय
के एम.बी.एम.
इंजीनियरिंग
कालेज में
वर्ष 98 में एक
नई फेकल्टी,
जिसका नाम
आर्किटेक्चर
शाखा के नाम
से स्थापना
की और उस वक्त
नियमों के
अनुसार जितनी
इजाजत लेनी
चाहिए थी,
परमीशन लेनी
चाहिए थी वह
परमीशन ली गयी
थी तथा
पंचवर्षीय
आर्किटेक्चर
डिग्री कोर्स
प्रारम्भ
किया गया। और
प्रथम वर्ष
कोर्स में और
सबसिक्वेंटली
अनेकों
विद्यार्थियों
ने उसमें एडमिशन
लिया और 98 में
जिन
विद्यार्थियों
ने, जिन स्टूडेंट्स
ने एडमिशन
लिया था, 2003 में
उन्होंने अपना
पाँच वर्ष का
पाठ्यक्रम
पूरा कर दिया।
जो आर्किटेक्ट्स
में डिग्री
प्राप्त
करता है,
पंचवर्षीय
डिग्री, उसका
रजिस्ट्रेशन
AICTE में
करवाना जरुरी
है और उसके
बाद कोंसिल जो
है उसमें भी
कराना जरुरी
है और उन्होंने
C.O.A. में एप्लाई
किया। वहां यह
कहकर मना कर दिया
कि आपका जो
एम.बी.एम.
इंजीनियरिंग
कॉलेज का
आर्किटेक्ट
डिपार्टमेंट
है उसका
विधिवत रजिस्ट्रेशन
नहीं हुआ है।
यह विवाद की
जड़ यहां से प्रारम्भ
हुई और जो
विद्यार्थी 2003
में पाँच साल
का डिग्री
कोर्स लेकर के
यूनिवर्सिटी
आफ जोधपुर से
निकले थे वह
आज दिन तक इंतजार
कर रहे हैं,
दर-दर की
ठोकरें खा रहे
हैं। उसके बाद
कई बेच और
निकल गये, 2 या 3
बेच और निकल
गये। वह सारे
के सारे बेच,
जो डिग्री
लेकर निकल रहे
हैं, उनका
रजिस्ट्रेशन
नहीं होने से
उन्होंने जो
डिग्री ली हुई
है वह मान्यता
प्राप्त
नहीं है और
उनकी डिग्री
मान्यता
प्राप्त
नहीं होने से
उनके भविष्य
के साथ बहुत
खिलवाड़ हो
रहा है। मैं
इस सम्बन्ध
में दो तथ्य
आपके सामने
रखना
चाहूंगा।
सबसे पहला यह
कि एम.बी.एम.
इंजीनियरिंग
कालेज
जयनारायण
विश्वविद्यालय
का एक विीााग
है। ऐसा नहीं
है कि वह
प्राइवेट
इंजीनियरिंग
कालेज हो या
कोई प्राइवेट
हो, उसके बारे
में कोई जांच
करें तो
विद्यार्थियों
ने जो एडमिशन
लिया तो वह
जोधपुर विश्वविद्यालय
में, तत्कालीन
जोधपुर विश्वविद्यालय
में और
वर्तमान में
जयनारायण विश्वविद्यालय
के एम.बी.एम.
में
इंजीनियरिंग
के लिये
एडमिशन लिया।
उन्होंने एडमिशन
लिया उस वक्त
इसका एप्रूवल AICTE से था और
सबसिक्वेंटली
उनका एप्रूवल
वह कोंसिल आफ
आर्किटेक्चर
से था, जैसे
मेरी जानकारी
के अनुसार, यह
तथ्य गलत भी
हो सकता है।
परन्तु बीच
में उनका
रेगुलर,
कंटीन्यू
एप्रूवल नहीं
रहा और यह
डिग्री कोर्स
बंद करने के
सम्बन्ध
में आदेश आये।
एक रिट याचिका
माननीय राजस्थान
उच्च न्यायालय
के समक्ष हुई
जो एस.बी.
सिविल रिट
याचिका संख्या
4466/2001, ओर उसमें
माननीय राजस्थान
उच्च न्यायालय
ने यह स्पष्ट
रूप से आदेश
जारी किया “Bachelor degree in the
Architecture awarded by the Indian University established by the Act of
Central-State Legislature or it should not be closed and it should be
continued.” और उसके
बाद यह डिग्री
कोर्स बराबर
चल रहा है।
परन्तु यह जो
कोंसिल आफ
आर्किटेक्चर
है, COA, यह
रजिस्ट्रेशन
नहीं कर रहा
है। यह रजिस्ट्रेशन
नहीं करने से
जिन
विद्यार्थियों
ने आज दिन तक 5
साल का बैचलर
आफ आर्किटेक्चर,
बी.आर., की जो
डिग्री
प्राप्त की
है, वह डिग्री
लिये हुए
फिरते हैं,
उसकी कोई मान्यता
नहीं है और आज
तक वह
विद्यार्थी
उसमें पढ़ रहे
हैं। कई बार
इस सम्बन्ध
में जोधपुर में
हड़ताल भी हुई
विद्यार्थियों
की, समझाया भी गया
और सरकार की
ओर से भी
प्रयास किया
गया परन्तु
मैं इसमें मैं
इतनी बात एड
करुंगा कि
मेरे प्रतिपक्ष
के जो साथी
हैं वह सहायता
करें, यह केन्द्र
सरकार के अधीन
आता है, C.O.A., और वह
रजिस्ट्रेशन
कर लेंगे तो
इन विद्यार्थियों
का भविष्य
सुधर जाएगा,
अन्यथा 70
विद्यार्थी
दर-दर की
ठोकरें खा रहे
हैं। 5 साल उन्होंने
अपने खराब कर
दिये, लाखों
रुपये उन्होंने
खर्च कर दिये।
विभिन्न
क्षेत्रों से
मां-बापों ने
उनको वहां
भर्ती करा
दिया उसके
बावजूद भी
उनके पास मान्यता
प्राप्त डिग्री
नहीं होने से
आर्किटेक्चर
का जो फायदा
मिलना चाहिए
वह नहीं मिल
रहा है। उपाध्यक्ष
महोदय, मैं यह
भी निवेदन
करना चाहूंगा
कि राजस्थान
में
आर्किटेक्चर
डिपार्टमेंट
का यह एक
मात्र विभाग
है और भारत
में इस
एम.बी.एम.
कालेज की इतनी
मान्यता थी
और यह जो C.O.A.
द्वारा मान्यता
नहीं देने से,
इसका रजिस्ट्रेशन
नहीं करने से
जोधपुर
यूनिवर्सिटी
की भी बदनामी
हो रही है,
एम.बी.एम.
इंजीनियरिंग
कालेज की भी
बदनामी हो रही
है और अनावश्यक
रूप से राजस्थान
सरकार के
सामने भी
विवाद की बात
आ रही है। मेरा
आपके मार्फत
अनुरोध है, माननीय
शिक्षा
मंत्रीजी ने
प्रयास बहुत
किये होंगे,
उसके लिये मैं
धन्यवाद भी
उनको दूंगा।
परन्तु साथ
ही उन
विद्यार्थियों
के भविष्य का
विषय है वह 70
विद्यार्थी
पिछले 3 सालों
से बराबर
दर-दर की
ठोकरें खा रहे
हैं। पाँच साल
बर्बाद करने
के बावजूद भी
इनके पास वह डिग्री
है जो कि मान्यता
प्राप्त
नहीं है।
इसलिये इस सम्बन्ध
में कोई न कोई,
उनकी जो समस्या
है उसका
निराकरण करने
का प्रयास
करेंगे, ऐसी
मेरी आपसे
प्रार्थना है,
धन्यवाद।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय,
एम.बी.एम.
इंजीनियरिंग
कालेज, जोधपुर
की आर्किटेक्ट
संकाय की जो
बात माननीय
सदस्य ने
उठाई है, वास्तव
में वह एक
समस्या है।
इस विश्वविद्यालय
का
इंजीनियरिंग,
आर्किटेक्ट
विभाग अभी
कोंसिल आफ
आर्किटेक्चर
से मान्य
नहीं है। क्योंकि
कोंसिल आफ
आर्किटेक्चर
ने अपने
निरीक्षण में
निर्धारित मानदण्डों
के अनुसार
सुविधाएं
उपलब्ध नहीं
होने तथा
शैक्षिक स्टाफ
की नियमित
नियुक्ति
नहीं करने
आदि, बताते हुए
तथा कोंसिल आफ
आर्किटेक्चर
द्वारा इस
विभाग को वर्ष
06-07 के लिये
नो-एडमिशन
केटेगिरी में
रखा गया। राज्य
सरकार ने,
जांच के बाद
यह तय कर दिया
था कि इसको
नहीं रखेंगे
लेकिन क्या
किया गया कि
विद्यार्थियों
ने या विभाग
ने कोर्ट में
जाकर रिट कर
ली और रिट
करके आदेश ले लिया
कि इसको
कंटीन्यू
रखा जाए। तो
वह कोर्ट के
आदेश से वह तो
कंटीन्यू हो
गया लेकिन
आर्किटेक्चर
कोंसिल ने
मान्यता
नहीं दी। दो
काम, एक तो हमने
किया कि हमने
जो सिफारिश
की, उसके
हिसाब से विश्वविद्यालय
को 3 प्रोफेसर
के पद, 4 एसोसिएट
प्रोफेसर के
पद और 6 पद
प्रवक्ता के,
उनको लगाने
की, उनको स्वीकृति
प्रदान कर दी
लेकिन अभी तक
विश्वविद्यालय
ने उनकी भर्ती
नहीं की।
दूसरा, 70 लाख
रुपये उनको
भवन बनाने के
लिये दिये और
विश्वविद्यालय
ने अभी भवन भी
नहीं बनाया।
तो इन सब
कारणों से यह
समस्या पैदा
हो रही है।
हमने कोंसिल
आफ आर्किटेक्ट
से पत्राचार
भी किया, राज्य
सरकार ने पत्र
भी लिखा है।
राज्य सरकार
पूरा प्रयत्न
करेगी। लेकिन
मैं आग्रह
करना चाहूंगा
कि जब तक
फेकल्टी
पूरी नहीं हो,
जब तक भवन
नहीं बने और
मानदण्डों
के हिसाब से
अगर कोंसिल आफ
आर्किटेक्चर,
इसको मान्यता
नहीं दे तो हम
तो प्रयत्न
ही कर सकते
हैं, क्योंकि
यह बच्चे जो
पढ़े हैं वह
उच्च न्यायालय
के स्टे के
कारण से पढ़े
हैं। उन्होंने
तो मना कर दिया।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): नहीं,
उससे पहले भी
हैं। उससे
पहले भी हैं।
उससे पहले भी
सन 98 से हैं।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): ठीक
है। हम तो पूरी
कोशिश करेंगे
कि उनको मान्यता
मिल जाए।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): धन्यवाद।
श्री
उपाध्यक्ष:
श्री विष्णु
मोदी, सभापति,
याचिका समिति,
2006-07 समिति का
चतुर्थ
प्रतिवेदन
उपस्थापित
करेंगे। (व्यवधान)
समिति
का प्रतिवेदन
याचिका
समिति (सं0 4)
श्री विष्णु
मोदी (मसूदा):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से याचिका
समिति, 2006-07 के
चतुर्थ
प्रतिवेदन का
उपस्थापन
करता हूं।
श्रीमती
सूर्यकान्ता
व्यास
(जोधपुर):
उपाध्यक्ष
महोदय, यह क्या...मेरे
को अनुमति
दें। (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
अध्यक्षजी
की तरफ से व्यवस्था
दी जा चुकी
है। अभी समय
नहीं दूंगा
मैं। स्थान
ग्रहण
कीजिये।
याचिका
का उपस्थापन
श्री
भंवरलाल
राजपुरोहित,
सदस्य, विधान
सभा एक याचिका
उपस्थापित
करेंगे।
डा.
भंवरलाल
राजपुरोहित
(मकराना):
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से मकराना
विधान सभा की
विभिन्न
लिंक-सड़कों
के निर्माण
बाबत चार व्यक्तियों
द्वारा हस्ताक्षरित
एक याचिका का
उप-स्थापन
करता हूं।
श्री
उपाध्यक्ष:
राजस्थान
विनियोग (संख्या-2)
विधेयक, 2007।
श्रीमती
वसुन्धरा
राजे, प्रभारी
मंत्री प्रस्ताव
करेंगी कि
राजस्थान
विनियोग (संख्या-2)
विधेयक, 2007 को
विचारार्थ
लिया जाए।
राजस्थान
वित्त
विधेयक, 2007।
श्रीमती
वसुन्धरा
राजे, प्रभारी
मंत्री प्रस्ताव
करेंगी कि
राजस्थान
वित्त
विधेयक, 2007 को
विचारार्थ
लिया जाए।
विधायी
कार्य :
विधेयक पर
विचार
राजस्थान
विनियोग (संख्या
2), 2007
श्रीमती
वसुन्धरा
राजे (मुख्य
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से प्रस्ताव
करती हूं कि
राजस्थान
विनियोग (संख्या-2)
विधेयक, 2007 को
विचारार्थ
लिया जाए।
Vps-usc-29-032007-1320-1p-1
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय,
विधेयक के
खंड-11 में
विद्यमान
अभिव्यक्ति “धारा 77 की
विद्यमान
उप-धारा (1)”
के पश्चात्
और अभिव्यक्ति
“के स्थान
पर” के
पूर्व अभिव्यक्ति
“उसके
स्पष्टीकरण
को छोड़कर”, अन्त:स्थापित
की जाए।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): यह
अमेंडमैंट
सर्कुलेट
करना चाहिए कम
से कम।
राजस्थान
वित्त
विधेयक, 2007
श्रीमती
वसुन्धरा
राजे (मुख्य
मंत्री):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से प्रस्ताव
करती हूं कि
राजस्थान
वित्त
विधेयक, 2007 को
विचारार्थ
लिया जाए।
श्री
उपाध्यक्ष:
श्री
प्रद्युम्न
सिंह।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय,
माननीय वित्त
मंत्रीजी-मुख्य
मंत्रीजी
द्वारा जो
एप्रोप्रिएशन
बिल और फाइनेंस
बिल जो यहां
पर प्रस्तुत
किया गया है
उसके बारे में
मैं अपने
विचार प्रस्तुत
कर रहा हूं।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, आज
राजस्थान की
अर्थव्यवस्था
को देश की
अर्थव्यवस्था,
टोटल देश की
अर्थव्यवस्था
के संदर्भ में
देखना लाजिमी
है। देश की जी.डी.पी.
में बढ़ोतरी
हुई है। बड़ी
सिग्नीफिकेंट
बढ़ोतरी हुई
है देश के
ग्रॉस डोमेस्टिक
प्रोडेक्ट
के अन्दर,
राज्य के
जी.डी.पी. के
अन्दर स्टेट
जी.डी.पी. के
अन्दर
बढ़ोतरी हुई
है और केन्द्र
सरकार के
राजस्व के
अन्दर
लगातार इस साल
और उसके पिछले
साल फाइनेंशियल
ईयर 2006-07, 2005-06 के अन्दर
रफली 19.9 परसेंट
की दर से टैक्सेशन
का कलेक्शन
बढ़ा है और
उसके ही
अनुरूप राज्यों
को केन्द्र
सरकार के टैक्सों
में जो हिस्सा
है टैक्सेशन का
रेगुलेशन प्लस
ग्रांट इन एड,
दोनों के अन्दर
बड़ी सिग्नीफिकेंट
बढ़ोतरी हुई
है।
मैं आपके
सामने आकड़े
बाद में प्रस्तुत
करूंगा लेकिन
मुझे खेद है
कि माननीय
मुख्य
मंत्रीजी ने
जो वित्त
विभाग का
कार्यभार भी
सम्भाल रही
हैं भारत
सरकार के धन्यवाद
के लिए एक शब्द
भी अपने बजट
के अन्दर,
बजट भाषण के
अन्दर नहीं
कहा है जो
कहना चाहिए था
क्योंकि आपके
बहुत सारे
ऐसे, सेवाएं
हैं जिनके अन्दर
जब हमारी
सरकार थी उसके
मुकाबले के
अन्दर बहुत
बड़ी
ब़ढ़ोतरी हुई
है। अगर आप
देखेंगे, चाहे
वह शिक्षा का
क्षेत्र हो,
मिड डे मील हो, इर्रिगेशन
प्रोजेक्ट्स
हो, हैल्थ
प्रोग्राम हो,
ड्रिकिंग
वाटर का हो,
राजीव गांधी
विद्युत मिशन
का हो, इन सबके
अन्दर राज्य
सरकारों को
भारत सरकार ने
दिल खोलकर,
हाथ खोलकर
पैसा दिया है।
मैंने पिछले
साल इस सदन के अन्दर
आकड़े प्रस्तुत
किये थे, अब
मैं एक-एक
करके लेता
हूं।
जो भारत
निर्माण
योजना जो बहुत
ही महत्वाकांक्षी
योजना है भारत
सरकार की, जिसके
तहत राज्य
सरकारों को
पैसा दिया जा
रहा है, उसके
तहत आज शिक्षा
विभाग को ही
ले लीजिए। यह
बात सही है कि
हम अपने वक्त
में हमारी
माली हालत
खराब थी और हम
शिक्षकों की
नियुक्ति
नहीं कर पा
रहे थे। आज 75
फीसदी पैसा
प्रारम्भिक
शिक्षा के
मास्टरों के
लिए, अध्यापकों
के लिए जो
आपने इतनी
बड़ी संख्या
में राज्य के
अन्दर भर्ती
किये हैं,
भारत सरकार
तनख्वाह के
रूप में आपको
दे रही है।
आपको कमरों के
निर्माण के
लिए, हालत यह
थी कि आपके स्कूल
बिना कमरों के
चल रहे थे,
उसके अन्दर
पैसा दिया है
और 2007-08 का जो बजट
वित्त
मंत्रीजी ने
प्रस्तुत
किया है उसके
अन्दर भी दो
लाख अध्यापक
लगाने की बात
है। निश्चित
रूप को राजस्थान
को राज्य के
अध्यापकों
के पेटे संख्या
मिलेगी। आपकी
कितनी मांग
है, क्या
उनका
फार्मूला है
और इस साल फिर
पाँच लाख स्कूलों
के निर्माण की
बात चल रही है
तो मेरे कहने
का अभिप्राय
यह है कि पहले
यह राज्य का
कार्य
क्षेत्र था,
राज्य को
अपने
संसाधनों से
अध्यापकों
की नियुक्ति
पर पैसा खर्च
करना पड़ता था।
स्कूल के
कमरों का
निर्माण करना
पड़ता था
लेकिन आज केन्द्र
सरकार भरपूर
राज्यों को
मदद दे रही
है।
इसी
प्रकार यहां
पर मुख्य
मंत्रीजी ने
अपने बजट भाषण
में कहा कि
हमने बहुत
सारी योजनाएं,
इर्रिगेशन की
योजनाएं हमने
पूरी कीं।
पिछले साल के
जो मेरे पास
आकड़े हैं
ए.आई.बी.पी. के
तहत आपको 150
करोड़ रुपया
मिला। मुझे
करेक्ट कर
दीजिएगा अगर
मैं गलत हूं।
इसी प्रकार
सड़कों के लिए
टी.एफ.सी. की
रिकमण्डेशन
के ऊपर शायद
इतिहास में
कभी नहीं
मिला। टी.एफ.सी.
की रिकमण्डेशन
के ऊपर 150 करोड़
रुपया आपको
सड़कों के रखरखाव
और मरम्मत के
लिए आपको मिल
रहा है लेकिन
इसके बाद भी यह
बात दूसरी है
कि सड़कों की
हालत खस्ता
है।
आपने सेस
लगा रखा है। सेस
आता है उससे
आपको 200 करोड़
रुपया आ रहा
है, आपके पास।
वह पैसा आपको
खर्च करना
चाहिए था सड़कों
की रख-रखाव और
मरम्मत के
लिए लेकिन आप
उसको रिडकोर
के अन्दर इस्तेमाल
कर रहे हैं।
आप जो सड़कें
बना रहे हैं वह
दूसरी किस्म
की सड़कें बना
रहे हैं। आप
इस पैसे का उपयोग
उसके अन्दर
कर रहे हैं जो
कि अनुचित है।
मेरे जिले की
सड़कों की मैं
बात करना
चाहता हूं।
मैंने आपको कहा
है मैं उस
बारे में विगत
में नहीं
जाऊंगा।
सड़कों की
हालत, कुल
मिलाकर
सड़कों की
मेंटिनैंस
पूअर है। आपको
200 करोड़ रुपया
करीब, मैं अन्दाज
कर रहा हूं कि
सेस के रूप
में मिल रहा
है। 150 करोड़
रुपया आपको
टी.एफ.सी. का
मिल रहा है और
आपके अपने बजट
से भी है, उसके
बाद आपकी
सड़कों की
हालत खराब हो,
वह बात अनुचित
लगती है, ठीक
प्रतीत नहीं
होती है।
वह बात
छोड़ दीजिए आप
कि आज पाँच सौ
की आबादी के गांव
केन्द्र
सरकार की मदद
से, केन्द्र
सरकार पूरा
पैसा 500 की
आबादी है,
गांवों को जोड़ने
के अन्दर दे
रही है।
ट्राइबल
एरिया के अन्दर
और डेजर्ट
एरिया के अन्दर
250 ... (व्यवधान)
क्या?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): सड़कों
का रिन्यूअल
भी हमने किया
है। 4500
किलोमीटर
सड़क ऐसी थी
जो डब्ल्यू.बी.एम.
की आप बनाकर
चले गये तो
उनका रिन्यूअल
भी हमने किया
है। स्टेट
हाई-वे और
एम.डी.आर. के
अन्दर सी.सी.
रोड का काम भी
हम कर रहे हैं
और 12 फाइनेंस
कमीशन का पैसा
अगर हमें मिल
रहा है तो कोई
अहसान थोड़े
ही है? सारे स्टेट्स
को हिन्दुस्तान
में मिल रहा
है। ... (व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
अगर आप
देखेंगे ... (व्यवधान)
एक मिनट
रुकिये आप।
देखिये, आप
मेरी बात
सुनियें। यह
बात भी गलत आप
कह रहे हैं कि
टी.एफ.सी. का
पैसा सारे
राज्यों को
मिला रहा है।
आप मुझे करेक्ट
कर दीजिएगा।
मैंने 12
फाइनेंस
कमीशन की रिपोर्ट
पढ़ी है। स्पेसिफिक
नीड के अन्दर
राजस्थान को
दिया इन्होंने
150 करोड़ रुपया
जो कि अन्य
राज्यों को
नहीं मिला है।
कुछ ही राज्यों
को मिला है,
सारे राज्यों
को नहीं मिला
है अगर मैं
गलत हूं तो आप
मुझे करेक्ट
कर दीजिएगा। Please go through it. जवाब
देंगे मुख्य
मंत्रीजी। आप
मुझे करेक्ट
करा दीजिएगा।
इसी प्रकार से
एक्सिलरेटेड
इर्रिगेशन
प्रोजेक्ट्स
के तहत आपने
जो द्रुत गति
से जो आपके
प्रोजेक्ट
अधूरे पड़े
हुए थे
इर्रिगेशन के,
उसके लिए आपको
पैसा मिला।
राजीव गांधी
ड्रिकिंग
वाटर मिशन के
तहत, आपको यह
पिछले साल
फाइनेंशियल
ईयर के अन्दर
आपको करीब 500
करोड़ रुपया
मिला था। इस
साल वह रुपया
आपका बढ़कर
कहीं ज्यादा
होने वाला है।
राजीव गांधी
विद्युत मिशन
के तहत जो
इलेक्ट्रिफाई
राजस्व गांव
थे उसके तहत
आपको पिछले
साल के अन्दर
375 करोड़ रुपया
मिला है। इस
साल तो और
बढ़कर मिलेगा।
कहने का
मेरा
अभिप्राय यह
है कि जिन
मदों के अन्दर
आज राज्य
सरकार को अपने
स्वयं के
संसाधनों से
पैसा खर्च
करना था उन
मदों के अन्दर
केन्द्र
सरकार मुक्तहस्त
से राज्य
सरकार को और
राज्य
सरकारों को
रुपया दे रही
है। यह आपका
कहना ठीक है
कि कोई अहसान
नहीं कर रहे
हैं लेकिन देश
की अर्थव्यवस्था
के अन्दर जो
सुधार आया है,
आज उसका ही
नतीजा है।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके सामने एक
फिगर पेश करना
चाहता हूं। वर्ष
2003-04 के अन्दर
राज्य को,
राजस्थान को
ग्रांट और
टोटल सेंटर का
जो टैक्स का
डिवोल्यूशन
है उसके तहत 6106
करोड़ रुपया
मिला है टोटल।
... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): दोनों
मिलाकर?
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
यस। अब आप
देखिये, वर्ष
2006-07 के अन्दर 10357
करोड़ 34 लाख
रुपया मिला
है। कहां 6
हजार और कहां 10
हजार? और वर्ष
2007-08 के
अन्दर जो
उनके
प्रोजेक्शन
है ....
spp/usc/13.30/1q/29.3.2007
(1)
जो
उन्होंने
बजट एस्टीमेट
मंत्रीजी ने
केन्द्र में
पेश किया है
उसके मुकाबले
के अंदर फिर
इजाफा होने जा
रहा है। आपको
इतना रुपया
मिल रहा है
उसका ही नतीजा
है, माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, कि मैं
आपके सामने
कन्द्रीय
वित्त
मंत्रीजी का
जो उन्होंने
पार्लियामेंट
में ...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): मैं टोकना
नहीं चाह रहा
था। आप यह बता
दें हमारा
हिस्सा नहीं
बढ़ा हो और
हमारी ग्रांट
नहीं बढ़ी हो।
आप बता दो,
आपकी सरकार
में ही बता
दो।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
हां, आप
बिलकुल सही कह
रहे हो। मेरे
पास वह फीगर्स
भी हैं, लेकिन
जिस तेजी से
रुपया बढ़ाया
राज्य को,
जिस तरह से
रुपया बढ़ा
है, मैं उसका
उदाहरण दे रहा
हूं आपके
सामने। यह
आपके सामने
प्रस्तुत कर
रहा हूं। मैं
वित्त
मंत्रीजी का
जो लोक सभा
में एक वक्तव्य
है, उपाध्यक्ष
महोदय, उसके
मैं कुछ अंश
पढ़कर सुनाना
चाहता हूं “Shri P. Chidambram, the Finance Minister:-
The most important thing is that the Government must spend.” Now who is not
spending? “I am sorry to say that the States are not spending. As on day,
before yesterday, the State Governments cash balances were Rs. 45,000 crores.” अनस्पेंड
मनी, जो कि
ट्रेजरी में
खर्चा किया हुआ
था 45 हजार
करोड़ रुपया
राज्य का पडा
हुआ था, वह मैं
आपको फीगर
देता हूं । राजस्थान
के बारे में
भी बताना
चाहूंगा।
यहां मुख्य
मंत्रीजी ने
बहुत गर्व के
साथ कहा था कि
राजस्थान
बीमारू स्टेट
से बाहर निकल
गया। आज की
तारीख में, आज
की क्या
पिछले साल यह
मैं आपके अक्टूबर-नवम्बर
का उनका भाषण
बता रहा हूं,
आज देश के
अंदर कोई भी
राज्य
बीमारू राज्य
नहीं है।
पिछले साल ही
सब निकल गये
थे। आपको जानकर
खुशी होगी कि
आज की तारीख
में कोई भी राज्य
बीमारी राज्य
नहीं है। बड़े
गर्व से एक ही
बात को बार
बार कहते हैं।
एक ही असत्य
बात को आप बार
बार कहते
जाइये कि हम
ओ.डी. में नहीं
हैं। कौनसा
राज्य
ओ.डी.के अंदर
है ? ओ.डी. तो
बहुत दूर की
बात रही, आज की
तारीख में कोई
भी राज्य वेज
एण्ड मींस के
एडवांस में
नहीं है । मैं
आपको एक फीगर
पढ़कर सुनाना
चाहता हूं,
चौंकाने वाले
तथ्य हैं। उनके
बारे में मैं
आगे कहूंगा,
करीब 17 राज्यों
का 18 जनवरी, 2006 को 35,
582 करोड़ रुपया
आप कहें तो राज्यों
के नाम पढ़कर
सुनाना
चाहूंगा, दो
मिनट लगेंगे
जिससे
रिकार्ड पर आ
जाये । आन्ध्र
प्रदेश 253
करोड़ रुपये,
आसाम बीमारू
स्टेट थी 854
करोड़ रुपये
जमा है, खर्च
नहीं कर पा
रहे हैं, ब्याज
खा रहे हैं
पाँच पर्सेन्ट
का। बिहार 3,931
करोड़ रुपये
जमा है, छत्तीसगढ़
711, हरियाणा 3894,
गुजरात 3166,
कर्नाटक 971, मध्य
प्रदेश 2300,
पंजाब 1080, राजस्थान
911, आज आपका
रुपया
ट्रेजरी के
अंदर पडा है
और आपको जानकर
ताज्जुब होगा
यह स्थिति तो
है 18 जनवरी की
और उसके बाद
क्या स्थिति
बनती है।
उपाध्यक्ष
महोदय, 31 मार्च
के दिन आपका
यही रुपया बढ़कर
46 हजार करोड़
हो जाता है 2006
को। मैं आपसे
पूछना चाहता
हूं ..
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): 46 हजार,
पूरे हिन्दुस्तान
में न?
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
हां-हां, पूरे
देश का 31 मार्च को,
आज 14 दिन के
ट्रेजरी बिल
में इन्वेस्ट
कर रही हैं
सरकारें, आप
एट्टी डेज के
ट्रेजरी बिल
में लगा रहे
हैं इन रुपयों
का ब्याज
खाने के लिये
और फिर आपने
जाकर उसको
नाइंटी वन डेज
के अंदर किया।
मेरा कहने का
अभिप्राय यह
है कि आज राज्यों
के पास इतना
पैसा हो गया
है कि राज्य
उस पैसे को
खर्च करने की
स्थिति के
अदंर नहीं है।
माननीय मुख्य
मंत्रीजी ने
यहां पर कहा
कि हमारा प्लान
साइज बहुत बढ़
गया। हर राज्य
का प्लान
साइज बढ़ा । 2007-2008
के मेरे पास
जो आंकड़े हैं
जिसमें जितने
राज्यों का
प्लान साइज
अप्रूव हुआ
है। अप्रूव्ड
प्लान साइज
की बात कर रहा
हूं। हर राज्य
का प्लान
साइज बढ़ा है।
इस साल आपकी
सिगनेफिकेंट
इसलिए कि आपका
36 प्रतिशत के
करीब प्लान
साइज बढ़ा।
लेकिन पिछले
साल 2006-07 का आपका
जो प्लान
साइज था, उसके
अदंर 1.8 की
वृद्धि हुई
थी। न के बराबर
आपके प्लान
साइज की
वृद्धि हुई
थी। आज आपके
सामने मैं बता
रहा हूं कि
छोटे छोटे स्टेट,
बड़ी स्टेट्स
सबके प्लान
साइज के अंदर
पर्सेन्टेजवाइज
वृद्धि हुई
है। यह मेरे
पास फीगर्स हैं।
श्री
उपाध्यक्ष:
अच्छी बात
है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
अच्छी बात है
न। मैं दूसरी
बात पर आ रहा
हूं कि आप खाली
अपने ऊपर
श्रेय लेने की
कोशिश न
कीजिये कि
हमने प्लान
साइज बढ़ा
दिया है। यह
नेशनल फीचर
है। यह राष्ट्रीय
फीचर है कि
सारे देश के
जो प्लान साइज
अप्रूव हुए
हैं और कोई स्टेट
बीमारू स्टेट
नहीं रही।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): एक्सपेंडिचर
भी बता दो साथ
में।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
किसकी ?
हां-हां, वह भी
है मेरे पास।
एक्सपेंडिचर
भी है मेरे
पास।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अपना भी
बता देना और
हमारा भी बता
दो।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मैं आपसे कह
रहा हूं प्लान
एक्सपेंडिचर
का जहां तक
सवाल है, यूं
तो आपने 2006-07 का आपका
जो प्लान
साइज था,आपने
प्लान साइज
बढ़ाकर दिया
था। थोड़ा
बहुत 50-60 करोड़
से कम हो गया।
अगर इतना आप
कह रहे हैं तो
मैं आपसे
पूछना
चाहूंगा,
माननीय वित्त
मंत्रीजी से
पूछना
चाहूंगा 31
मार्च, 2006 और 31
मार्च, 2007 को आप
फीगर्स दे
दीजिये आपका
ट्रेजरी बिल्स
के अंदर कितना
रुपया पडा हुआ
था ? यह कोई
साहूकारों की
सरकार तो नहीं
है कि आप ब्याज
खा रहे हो उस
रुपये के ऊपर
बैठकर । जन
आकांक्षाओं
के ऊपर आप
पैसा खर्च
कीजिये, यह
मेरा आपसे
अनुरोध है। यह
आज इतना पैसा
पडा हुआ है, माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, यह कोई
साधारण किताब
नहीं है, हिन्दुस्तान
की बहुत ही
रेपुटेड
मैगजीन है इकोनोमिकल
एण्ड
पॉलिटिकल
वीकली ..(व्यवधान)..
रिजर्व बैंक
में होते हैं
और कहां रहेंगे
? रिजर्व बैंक
के अंदर वहां
पड़े हुए हैं।
यह इकोनोमिकल
एण्ड
पॉलिटिकल
वीकली है मेरे
पास, आप इसको
देख लीजिये,
पढ़ लीजिये,
आपको मालूम
पड़ जायेगा।
अब सवाल यह
आता है माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, कि
आखिर स्थिति
पैदा क्यों
हुई ? इसके ऊपर
दो सोच है । यह
आपने
एफ.आर.बी.एम.
एक्ट जो पास
किया है, केन्द्र
सरकार ने पास
किया। करीब
करीब सभी राज्यों
में
एफ.आर.बी.एम.
एक्ट पास कर
दिया।
एफ.आर.बी.एम.एक्ट
पास आपने कर
दिया उससे आप
बंध गये। यह
चिन्ता का
विषय है,
डिबेट का विषय
है। वेस्ट
बंगाल
गवर्नमेंट ने
पास नहीं
किया, क्योंकि
आप बंध जाते
हो, आप खर्चा
नहीं कर पाते
हो। जो वित्त
मंत्रीजी ने
कहा “the States
are unable to spend the money.” और उन्होंने
दिये हैं और
इसका सबसे
बड़ा उदाहरण
क्या है 2003-04 के
अंदर जहां
केन्द्र
सरकार से राज्यों
को ग्रांट और
टैक्स के
पेटे 01 लाख 08
हजार करोड़
रुपये मिले,
वहीं बढ़कर 2005-06 1
लाख 82 हजार
करोड़ रुपया
हो गया।
सेंट्रल प्लान,
जो पिछले साल 01
लाख 72 हजार
करोड़ का था,
वही 2007-08 के अंदर 2
लाख 5 हजार
करोड़ का हो
गया तो
निश्चित रूप
से राज्यों
को पैसा अधिक
तो मिलना ही
है सेंट्रल
ग्रांट और
असिसटेंस के
रूप में । मैं
कह रहा था माननीय
मुख्य
मंत्रीजी एक
शब्द तो कह
देतीं कि केन्द्र
सकरार के
सहयोग से हम
करने वाले
हैं। आपने
यहां घोषणाएं
कीं । यहां पर
उस के पेटे ही आपने
दुनिया भर की
घोषणाएं कर
ली, वाहवाही
लूट ली, लेकिन
केन्द्र
सरकार की
सराहना आपने
कहीं किसी रुप
के अंदर नहीं
की।
श्री
उपाध्यक्ष:
बुराई भी नहीं
की।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
बुराई कहां है
इसके अंदर ? One should be grateful.
श्री
मोहन लाल गुप्ता
(किशनपोल):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, यह कोई
अहसान तो नहीं
है।
एक
माननीय सदस्य:
बीच में नहीं
बोलें आप। ..(व्यवधान)...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
उसको एक शब्द
में उस बात को
कहना चाहता
हूं कि आज
राज्य सरकार
की जो आर्थिक
स्थिति
सुधारने की
बात की जाती
है, उसके अंदर केन्द्र
सरकार का महत्वपूर्ण
योगदान है,
जिसको कि हम
नकार नहीं
सकते। आपके
वक्त में थी
आपकी सरकार,
आपने क्या
हमको निहाल
किया था, वह
हमको सब मालूम
है। फिफ्थ पे
कमीशन की
रिपोर्ट आने
के बाद सारे
राज्य रो रहे
थे, उस
वक्त हम बार
बार कहते थे
कि राज्य की
आप कोई मदद
कीजिये।
लेकिन केन्द्र
सरकार ने एक
पैसा फिफ्थ पे
कमीशन के तहत
राज्य को
नहीं दिया।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): माननीय
सदस्य, आप
माफ करेंगे
इसकी बुनियाद
रखी थी तो तत्कालीन
प्रधान
मंत्री, अटल
बिहारी जी
वाजपेयी की सरकार
ने रखी थी ।
ट्वेल्थ
फाइनेंस
कमीशन उन्होंने
बनाया था और
ट्वेल्थ
फाइनेंस
कमीशन की
रिकमंडेशन पर
ही हमें ज्यादा
पैसा मिल रहा
है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
अच्छा,
हो-हो। ट्वेल्थ
फाइनेंस
कमीशन उन्होंने
बनाया था।
फाइनेंस
कमीशन
मुकर्रर होता
है वह तो
संविधान का
प्रावधान है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): स्टेट
का जो हिस्सा
रखा, विधान तो
इलेवंथ
फाइनेंस
कमीशन में भी
बना था ।
Msr/usc/1340/2a/29032007
तो
बनेगा। हर
पाँच साल में
बनेगा कमीशन
तो और उस
कमिशन में जो
सोच था अटलबिहारी
वाजपेयीजी का,
उन्होंने इस
तरह की डिवोल्युशन
की है कि आज
सारे हिन्दुस्तान
में राज्यों
के अन्दर
पैसा ज्यादा
मिला है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
फाइनेंस
कमीशन
मुकर्रर होता
है, वो तो
संविधान का
प्रावधान है।
...(व्यवधान)...
हमने भी
मेमोरेण्डम
पेश कर दिया
था। आप
छोडि़ये, आप
बीच में इन्ट्रप्ट
करते हैं, आप
जवाब दे
दीजियेगा।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): विशेष
तौर पर
ग्रामीण
क्षेत्र में
जो भी योजना
हैं, चाहे
शिक्षा,
चिकित्सा,
किसी की योजना
हो उसमें ज्यादा
पैसा लगा।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मुझे
बड़ी हंसी आती
है कि
वाजपेयीजी ने अपोइण्ट
किया था, वो तो
कोई सरकार
होगी पाँच साल
के अन्दर
फाइनेंस
कमीशन तो
मुकर्रर करना
ही पड़ेगा।
किसी की भी
सरकार हो यह
तो कांस्टीट्युशन
का मेंडेटरी ऑब्लिगेशन
है, आप उससे बच
कैसे सकते हो।
वाजपेयीजी ने
किया था,
टर्म्स ऑफ
रेफरेंस उसके
बंधे हुए हैं।
सरकार टर्म्स
और रेफरेंस
उनको देती है
और ट्वेल्थ
फाइनेंस
कमीशन के
सामने हमने
मेमोरेण्डम
किया था। यह
बात जरूर है
कि इस सरकार
के आने के बाद
इन्होंने
सप्लीमेंट्री
मेमोरेण्डम
उसके सामने
दिया था। सारे
देश में वो
घूमते हैं, सब
की बातें
सुनते हैं,
यहां भी आये
थे, हमने भी
उनसे बात की।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आपने कैसे
प्लीड ही
नहीं किया।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
जी हां, आप आ
गये थे,
यहां बैठे
हमने केस प्लीड
नहीं किया।
...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): दोषी आप
हो।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): अब
आप विराजें।
ज्यादा आप
मक्खन और *** करने
की कोशिश न
करें, समझ गये
आप।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
ट्वेल्थ
फाइनेंस
कमीशन का जब
आया था तब
कांग्रेस पार्टी
की तरफ से मैं
और देवपुराजी
एपियर हुए थे।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आप ही
थे, यह नहीं
थे।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
सुनिये, मेरी
बात सुन
लीजिए।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
वो सरकार से
अलग मिलते
हैं, पता कुछ
है नहीं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आप को
ज्ञापन नहीं
देना था, आप
वित्त
मंत्री थे ...(व्यवधान)...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): बात
सुनो पूरी आप,
जानते कुछ हो
नहीं ...(व्यवधान)...
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
मेरी बात
सुनिये।
पार्टी की तरफ
से में गया
था। पार्टी की
तरफ से मैं और
देवपुराजी एपियर
हुए थे।
हरिशंकरजी
भाभड़ा आपकी
तरफ से एपियर
हुए थे और
जितनी भी
पालिटिकल
पार्टीज थीं,
सब ने यह कहा
कि माथुर साहब
ने जो
रिप्रजेंट दिया
है उसमें हम
एग्री करते
हैं। तो यह तो
हमने, हमारा
कैसे नहीं है
...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): माथुर
साहब, आपकी
बात को तो हम
वर्षों से
एग्री करते
हैं परन्तु
यह आपके साथ
वाले एग्री
नहीं करते
वरना आपका स्थान
यहां थोड़ी
था। आप अगर
होते यह हालात
थोड़ी होते।
...(व्यवधान)...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
ऐसा है कि बीच
में इन्ट्रप्ट
कर रहे हैं,
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय। जब
फाइनेंस
कमीशन आता है
तो सरकार,
मुख्यमंत्री
के निर्देशन
में तमाम
अधिकारी होते
हैं, मैं भी
उसमें था,
हमने अपना
पक्ष रखा उनके
समक्ष उसके
बाद एक
प्रक्रिया, यह
एक सैट
प्रोसीजर है
कि वो राज्य
के राजनीतिक
दलों से भी
मिलते हैं।
राजनीतिक
पार्टियों की
तरफ से
कांग्रेस
पार्टी की तरफ
से सम्माननीय
माथुर साहब और
देवपुराजी
गये थे और
आपकी पार्टी
की तरफ से
भाभडाजी गये
थे। वो भी
उनसे मिले थे।
वो एक अलग
प्रक्रिया
है। सरकार
अपना पक्ष अलग
रखती है और
राजनीतिक दल
अपना पक्ष अलग
रखते हैं। वो
अलग से मिलते
हैं जाकर के
और भी कोई
उनसे मिलना
चाहे, राज्य
के अर्थशास्त्री
उनसे मिलते हैं,
जाकर के अपना
पक्ष रखते हैं
और राज्य के
हित के अन्दर
बात करते हैं
और यहां बैठ
कर के कि यह
नहीं मिले, यह
खुद रिकार्ड
है, रिकार्ड
की बात है। यहां
बैठ कर के
बरगलाना
चाहते हैं,
यहां बैठ कर बीच-बीच
में फुदक-फुदक
कर खड़े हो
जाते हैं, कुछ जानते
हैं नहीं और कि
आप नहीं मिले
थे। आप
रिकार्ड उठा
कर देखो, सरकार
आपकी ही है,
कौन-कौन था उस
मीटिंग के अन्दर,
डैलिब्रेशन
के अन्दर। आपको
पता ही नहीं
कि आप नहीं
मिले थे। ...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आपने राजस्थान
के हितों पर
कुठाराघात
किया था, केस
अच्छी तरह से
प्लीड नहीं
किया था। हमने
जो सप्लीमेंट्री
मेमोरेण्डम
दिया, आप उसी
की परिणति है...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
यह असत्य है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): हमने
जो सप्लीमेंट्री
मेमोरेण्डम
दिया, आज उसी
की परिणति है
कि राजस्थान
राज्य को
ट्वेल्थ
फाइनेंस
कमीशन का पैसा
मिला है, ज्यादा
पैसा मिला है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
यह आपका कहना
बिलकुल असत्य
है। ...(व्यवधान)...
प्रो.
बीरूसिंह
राठौड़
(बनीपार्क):
कांग्रेस ने
किसी भी विषय
को कभी भी गम्भीरता
से नहीं लिया।
...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): यह बात
हुई। यह
प्रोफेसर बोल
रहे हैं,
साहब। ...(व्यवधान)...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
देखिये,
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मुख्य मंत्रीजी
को फिर मैं
नहीं बोलने
दूंगा अगर आप
इस किस्म की
हरकतें
करेंगे तो I will not let the
Chief Minister to speak.
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): चलो नहीं
बोलेंगे,
साहब।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मैं इतने सवाल
दागूंगा, इतने
सवाल दागूंगा
उनके ऊपर कि
आप परेशानी
में आ
जायेंगे। फिर
आप कहेंगे ...(व्यवधान)...
आप इनको
रोकिये।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
कुछ नहीं ...(व्यवधान)...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
आपको जवाब
देना है आप
जवाब दिलवाएं।
कौन मना कर
रहा है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ठीक
है, ठीक है। अब
बिलकुल नहीं
बोलेंगे।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
यहां अनर्गल
बातें, असत्य
बातें ...(व्यवधान)...
मिसलीड करने
की बातें इस
किस्म की
हरकत कर रहे
हैं यहां बैठे
हुए।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
आप गुस्सा मत
हो, बिलकुल
गुस्सा मत
करो, साहब।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
गुस्सा क्या
बात है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): देखो चेहरा
लाल हो रहा है,
अब आप गुस्सा
मत करो।
बोलेंगे ही
नहीं, साहब।
बोलेंगे ही
नहीं।
श्री प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
असत्य बोलने
की सीमा होती
है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): बोलेंगे
नहीं पर गुस्सा
मत करो आप।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
असत्य, आप
पार्लियामेंट्री
अफेयर्स
मिनिस्टर
हैं, यहां की
स्वस्थ
परम्पराओं
का आप निर्वहन
नहीं कर रहे
हैं बैठे हुए यहां
पर। आप बारबार
उंचक-उंचक कर
खड़े हो रहे हैं,
जवाब दे रहे
हैं। एक सीमा
है मक्खन
लगाने की। इस
पूरे सदन के
अन्दर एक
महीने से जिस
प्रकार से
आपने व्यवहार
किया है यह
चिंता का विषय
है, मैं आपसे, माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, यह कहना
चाहता हूं।
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
यह माननीय
मुख्यमंत्रीजी
टी वी पर देख
रही हैं इसलिए
जानबूझकर के
बारबार खड़े
हो रहे हैं
जिससे कि आपके
नम्बर बढ़
जाएं। मुख्य मंत्रीजी
देख रही हैं
टेलीविजन पर
कि राजेन्द्र
कित्तोक बार
खड्यो होवै है।
थारा नम्बर
बढ़ रया है।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
राठौड़ साहब,
प्रद्युम्न
सिंहजी ने यह
तो आपको बता
दिया कि यह
फाइनेंस
कमीशन
संवैधानिक
प्रावधान है
और संविधान कब
बना था,
सुनिये, वो भी
आपको पता है, 1950
में और वो कब,
अटल बिहारी
वाजपेयी का
जिक्र आप
बारबार कर रहे
हो, *** उसके
आठ साल बाद
संविधान बना।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप काहे पर ...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): उसके
आठ साल
संविधान बना था।
यह ध्यान
रखना आप।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप बीच में
नहीं।
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
कम से कम ऐसा
असत्य बयान
तो, माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, नहीं
दिया जाए।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
इतना असत्य
बोलते हैं, ***
...(व्यवधान)... यह
प्रमाण हो तो
सदन की मेज पर
रखो।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
इन्होंने आग
लगाने का काम किया
है। ...(व्यवधान)...
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
देश के टुकड़े
करवा दिये ...(व्यवधान)...
अटलजी तो वो
हस्ती
हैं...(व्यवधान)...
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, इनके पास
प्रमाण हो तो
सदन की मेज पर
रखें आप। इस
तरह अनर्गल
आरोप राष्ट्रीय
नेता पर लगाना
उसका अपमान
करना है ...(व्यवधान)...
माफी मांगें
यह। ...(व्यवधान)...
श्री
उपाध्यक्ष:
अंकित नहीं
हो।
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
कुछ अंकित
नहीं हो रहा
है।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): 000
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा): 000
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप स्थान
ग्रहण कीजिए।
कोई अंकित
नहीं हो रहा
है।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): 000
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): 000
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
कीजिए।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): 000
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): 000
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
करें। ...(व्यवधान)...
अंकित नहीं हो
रहा है। ...(व्यवधान)...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): 000
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): 000
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप अपना स्थान
ग्रहण कीजिए।
...(व्यवधान)...
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
कीजिए। ...(व्यवधान)...
श्री
हीरालाल
(निवाई): 000
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): 000
श्री
उपाध्यक्ष: कोई
अंकित नहीं हो
रहा है...(व्यवधान)...
माननीय सदस्य,
बीच में नहीं
बोलें। ...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य, आप स्थान
ग्रहण कीजिए।
...(व्यवधान)...
पहले आप स्थान
ग्रहण कीजिए।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
हीरालाल
(निवाई): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य।
आप स्थान
ग्रहण कीजिए।
...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
हीरालाल
(निवाई): 000
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
आपका अंकित
नहीं हो रहा
है, आप अपना स्थान
ग्रहण कीजिए। आप
समय बरबाद कर
रहे हैं ...(व्यवधान)...
Ars/usc/1350/2b/29032007/1
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): 000
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
माननीय सदस्य,
आप स्थान
ग्रहण कीजिये,
अंकित नहीं हो
रहा है।
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): 000
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): 000
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
अंकित नहीं हो
रहा है।
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): 000
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप स्थान
ग्रहण
कीजिये।
श्री
हीरालाल
(निवाई): 000
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): 000
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
माननीय सदस्य,
आप स्थान
ग्रहण कीजिये,
कोई अंकित
नहीं हो रहा
है।
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): 000
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
हीरालाल
(निवाई): 000
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): 000
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
माननीय सदस्य
.....
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
हीरालाल
(निवाई): 000
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप स्थान
ग्रहण कीजिए।
कुछ अंकित
नहीं हो रहा
है, माननीय
सदस्य, आप स्थान
ग्रहण कीजिए।
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप स्थान
ग्रहण
कीजिये।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय, यहां
यह तय हो चुका
था जब कि जो भी
हमारे केन्द्रीय
नेता हैं,
राष्ट्रपुरूष
हैं, उनके
बारे में न
इधर से न उधर
से माननीय
सदस्य टिप्पणी
नहीं करेंगे,
उनके
राजनीतिक
कार्यो को छोड़कर
तो उसके बाद
में इस प्रकार
की बात क्यों
की जा रही है ? फिर
हजार प्रकार
की बातें इधर
से आएंगी तो
एक बार जब व्यवस्था
हो चुकी है तो
मेरा आपसे
आग्रह है कि
जो अभद्र टिप्पणी
की है उसको तो
कार्यवाही से
निकाल दीजिए और
जिन माननीय
सदस्य ने की
है उनको इसके
लिए
क्षमायाचना
करनी चाहिए।
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
माननीय सदस्य,
आप सुनिये,
बात सुनें आप
पहले।
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): 000
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
उपाध्यक्ष
जी, यह तय हो
चुका है
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): 000
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
एक मिनट शांति
जी, उपाध्यक्ष
महोदय, माननीय
माथुर साहब
बैठे हैं,
माननीय
प्रतिपक्ष के
नेता महोदय
बैठे हैं, इन्होंने
कई बार हाउस
में भी कहा है
कि जो केन्द्र
के, सदन के जो
मैम्बर नहीं
हैं उन पर कोई
इस तरह का
आरोप नहीं लगाये,
यह कई बार
आपने ही कहा
है यहां पर,
हमने नहीं कहा,
कई बार कहा है,
आप रिकार्ड उठाकर
देख लीजिए ...(व्यवधान)
माननीय अटल
बिहारी जी
वाजपेयी इस
सदन के सदस्य
नहीं हैं और
देश के
प्रधानमंत्री
रह चुके हैं,
वह सामान्य
व्यक्ति
नहीं हैं और
यहां तक उपाध्यक्ष
महोदय, माननीय
नरसिम्हाराव
जी
प्रधानमंत्री
थे, यू. एन. ओ. के
अन्दर भारत
को रीप्रजेण्ट
करना था और
नरसिम्हाराव
जी ने
कांग्रेस के
किसी मिनिस्टर
को नहीं भेजा
रीप्रजेण्ट
करने के लिये,
विदेश मंत्री
को नहीं भेजा,
माननीय अटल
बिहारी जी
वाजपेयी को स्पेशली
भेजा यू. एन. ओ.
में भारत को
रीप्रजेण्ट
करने के लिए,
उस व्यक्ति
के बारे में
...(व्यवधान) वह
संस्कृति तो
सबकी एक है
आपकी और हमारी
संस्कृति तो
...
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): 000
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
मेरी बात मुझे
कम्पलीट
करने दीजिए।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): 000
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
माहिर साहब आप
बोल लेना,
मेरे बाद बोल
लेना। आप
विराजो।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): 000
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
आप बोलते हैं
तो नहीं बोलता
हूं, न मैं
अनर्गल टिप्पणी
करता हूं,
उपाध्यक्ष
महोदय, मैंने
कभी अनर्गल
टिप्पणी
किसी भी नेता
के बारे में
नहीं की इसलिए
आप मुझे तो
बोलने दीजिए,
कम्पलीट
करने
दीजिए।उपाध्यक्ष
महोदय, इतना
ही नहीं, मैं
एक बात आपको
निवेदन करना
चाहता हूं
जिससे हाउस
में रिकार्ड ...(व्यवधान)
महावीर जी, एक
मिनट, मैं
हाउस में
रिकार्ड पर
लोने के लिए
एक बात कहना
चाहता हूं।
माननीय अटल
बिहारी जी
वाजपेयी जब
नये नये पहली
बार सांसद
बनकर
पार्लियामैंट
में गये थे और
पीछे की सीट
उनको दी गयी
थी, खंभे के
पीछे की, मैं
भी जब
पार्लियामैंट
में पहली बार
गया था खंभे
के पीछे की
सीट, नये मैम्बर
आते हैं पीछे
बैठते हैं,
उन्होंने
विदेश नीति के
ऊपर भाषण दिया
और उस समय रूस
के राष्ट्रपति
भारत आये थे
और भारत आने
के बाद अटल जी को
वहां बुलाकर
के पण्डि़त
नेहरू ने,
नेहरू जी
हमारे सबके
सर्वमान्य
नेता रहे हैं,
उस समय हम भी
उनका आदर करते
हैं, उन्होंने
बुलाकर इण्ट्रोड्यूस
करवाकर के कहा
था कि यह
सांसद ऐसा है
जो भारत का
भविष्य है,
यह नेहरू जी
ने कहा था। उस
व्यक्ति के
बारे में जो
इस सदन के
सदस्य नहीं
हैं, वह व्यक्ति
जो इस देश के
प्रधानमंत्री
रह चुके हैं,
वह व्यक्ति
जिनकी
विदेशों में
भी कद्र की
जाती है, पाकिस्तान
के राष्ट्रपति
ने भी कहा,
उनके
प्रधानमंत्री
आये तो अटल
बिहारी जी से
मिलकर गये हैं
और कहा अटल जी,
आपको बधाई
देता हूं आपने
एक प्रक्रिया
शुरू की थी जो
आज भी चल रही
है। जिस
प्रधानमंत्री
के बारे में
हम ही नहीं,
हमारी पार्टी
नहीं,
कांग्रेस के
नेता जिनकी
इज्जत करते
हैं, उस
प्रधानमंत्री
के बारे में
मेरे माननीय
साथी इस तरह
की टिप्पणी
करें, हमने
कभी भी नेहरू
जी ...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
डा.
भंवरलाल
राजपुरोहित
(मकराना): 000
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
000
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): 000
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
एक मिनट सुनो
ना, रिकार्ड
पर चला जाए,
रिकार्ड में
तो आने दीजिए।
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): 000
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): 000
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): 000
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): 000डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
बस मैं आधी
मिनट में बात
समाप्त कर
रहा हूं।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
बीच में नहीं।
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
माननीय सदस्य,
आधा मिनट, प्लीज
विराजो ना।
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
बद्रीलाल जाट
(कपासन): 000
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): 000
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
एक मिनट
रिकार्ड में
तो आने दो।
उपाध्यक्ष
महोदय, इसलिए
मैं आपसे एक
निवेदन करना
चाहता हूं कि
देश ही नहीं
और मुझे एक
घटना और याद आ
रही है। उपाध्यक्ष
महोदय, इसलिए
मैं यहां सदन
में रिकार्ड पर
लाना चाहता
हूं ...(व्यवधान)
बोलने तो दो
ना एक मिनट, क्या
बीमारी है, एक
मिनट सुनो ना,
क्या हो रहा
है। उपाध्यक्ष
महोदय, माननीय
अटल बिहारी
वाजपेयी .
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): 000
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
बैठो ना, एक
मिनट मैं बोल
रहा हूं।
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं एक
बात कहकर मेरी
बात समाप्त
करना चाहता
हूं। माननीय
अटल बिहारी जी
वाजपेयी ...(व्यवधान)
एक मिनट सुनो
ना, क्या
बीमारी है।
अटल बिहारी जी
वाजपेयी
विदेश नीति पर
भाषण दे रहे
थे, पण्डि़त
जवाहर लाल
नेहरू प्रधान
मंत्री की कुर्सी
पर बैठे हुए
थे ।
vns/usc/14.00/2c/29.3.2007/1
उस समय
नेहरू जी
प्रधानमंत्री
थे।
प्रधानमंत्री
की कुर्सी पर
बैठे हुए थे।
अटल बिहारी जी
वाजपेयी
विदेश नीति पर
बोल रहे थे तो
कांग्रेस के
माननीय सदस्य
हाउस के अन्दर
कुछ हो-हुल्लड,
टोकाटाकी की
तो नेहरू जी
ने खड़े होकर,
यह पार्लियामेंट
की
प्रोसीडिंग्स
में है जो मैं
बोल रहा हूं।
मैं कोई हवा
में बात नहीं
कर रहा हूं,
हाउस की
प्रोसीडिंग्स
में है कि
पंडित नेहरू
ने खड़े होकर
कांग्रेस के
माननीय सदस्यों
को डांट लगाकर
बैठाया और यह
कहा कि जो
तैयारी करके
आते हैं उनको
आप बोलने नहीं
देते हो , खुद
तो तैयारी
नहीं करते हो
और तैयारी
करके ... (व्यवधान) एक मिनट
साहब।
प्रद्युम्न
सिंहजी, आप
बोलते हैं तो
मैं कभी
इंट्रप्शन
नहीं करता
हूं। आप बोल
रहे थे मैं
चुपचाप सुन
रहा था। आप
बहुत अच्छा
बोल रहे थे ... (व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): 000
डा. एन. एस.
गुर्जर
(टोडारायसिंह):
आप बिराजो ना।
मैं तो कभी
आपको इंट्रप्ट
नहीं करता हूं
... (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य
... (व्यवधान)
डा. एन. एस.
गुर्जर
(टोडारायसिंह):
आप बिराजो ना।
बीच में कहां
आ गये आप ? मेरे
बीच में आप
कहां आ रहे
हो। कई ऐसी
बातें होती
हैं जो थोड़ा
सोचना
चाहिये।
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, उस
समय जब ... (व्यवधान)
एक मिनट
बैठिये ना
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): 000
डा. एन. एस.
गुर्जर
(टोडारायसिंह):
समझा दूंगा।
उनको भी समझा
दूंगा। बैठोे
ना तो आप।
प्रद्युम्न
सिंह जी से
बात करनी है
बिराज जाओ आप ...
(व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
प्रद्युम्न
सिंहजी को
तकलीफ नहीं है
आप तो बेकार
ही ... (व्यवधान)
डा. एन. एस.
गुर्जर (टोडारायसिंह):
आपके हाथ
जोड़कर ... (व्यवधान) आप
विद्वान आदमी
है। आप सबसे
ज्यादा
विद्वान है।
बिराजो ना।
मेरे को तो
माफ करो। बैठ
जाओ। प्लीज ...
(व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): 000
श्री
हीरालाल
(निवाई): 000
डा. एन. एस.
गुर्जर
(टोडारायसिंह):
बिराज जाओ।
मैं आपको
इंटरफियर
नहीं करता हूं
... (व्यवधान)
श्री
जोगेश्वर
गर्ग (जालौर):000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
अब सुनिये ... (व्यवधान)
डा. एन. एस.
गुर्जर
(टोडारायसिंह):
मैं एक घटना
बताता हूं। वह
विदेश नीति पर
भाषण कर रहे
थे। उधर से
टोकाटाकी होती
है। अटल जी ने
केवल एक शब्द
कहा। वह शब्द
था कि अध्यक्ष
महोदय, बोलने
के लिये वाणी
चाहिये मगर चुप
रहने के लिये
वाणी और विवेक
दोनों
चाहिये। यह
कहते ही नेहरू
जी उठे और
नेहरू जी ने
अपने सदस्यों
को डाँटते हुए
कहा कि तैयारी
करके आते नहीं
हो और जो
माननीय सदस्य
तैयारी करके
आकर सदन में
बोल रहे हैं
उनकी बात
सुनते नहीं
हो। उस व्यक्ति
के बारे में,
मैं आज भी इधर
से भी यदि नेहरू
जी के बारे
में कोई
अनर्गल टिप्पणी
माननीय सदस्य
हमारी तरफ से
करेगा मैं
उसके पक्ष में
नहीं हूं।
किसी राष्ट्रीय
नेता के बारे
में चाहे इधर का
सदस्य हो,
चाहे उधर का
सदस्य हो,
कोई भी अनर्गल
टिप्पणी करते
हैं तो उस
नेता का अपमान
है, राष्ट्र
का अपमान है,
पूरे राष्ट्र
का अपमान है।
चाहे इधर के
नेता हो, चाहे
उधर के नेता
हो। यह हमारे
सबके नेता हैं
इसलिये माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय,
आपसे निवेदन
है कि जो
माननीय सदस्य
ने बोला है,
सदन की
कार्यवाही से
आप निकालिये
वर्ना यह उत्तेजना
समाप्त नहीं
होगी। आपने
अवसर दिया ... (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य ... (व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
बैठिये।
बैठिये ... (व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): 000
श्री
हीरालाल
(निवाई): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
कोई अंकित
नहीं होगा ... (व्यवधान)
श्री
बद्रीलाल जाट
(कपासन): 000
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
बैठिये ... (व्यवधान)
कल्ला साहब,
आप एक बार
बिराजिये।
बैठिये आप ... (व्यवधान)
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
अब पहले की
बात इसमें
रहेगी क्या ?
अभी वर्तमान
में जो विषय
चल रहा है
उससे आप उनमें
ज्ञान
बांटिये ... (व्यवधान)
डा.
बुलाकीदास कल्ला
(बीकानेर): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
सब निकाल दी।
सब निकली हुई
है ... (व्यवधान)
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य, यह
बात सही है कि
बड़े
सौहार्द्रपूर्ण
वातावरण के
अन्दर
प्रद्युम्न
सिंहजी अपनी
बात कह रहे थे
और आपने बिना
कोई कारण एक
उत्तेजना की
बात ... (व्यवधान)
सुनना आप ... (व्यवधान)
श्री मदन
राठौड़
(सुमेरपुर): 000
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
राठौड़ साहब
ने कोई गलत
बात नहीं कही
है। राठौड़
साहब कोई गलत
बात नहीं कह
रहे हैं। आप
बैठिये ... (व्यवधान)
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
बैठिये आप। आप
इंट्रप्ट कर
रहे थे।
प्रद्युम्न
सिंहजी ने
अपने आप जो
कहना था वह कह
दिया था। आपको
बीच में इस
प्रकार की उत्तेजित
टिप्पणी
नहीं करनी
चाहिये थी।
मैंने उसी वक्त
कह दिया अंकित
नहीं होगा और
आपको उसके
लिये ... (व्यवधान)
अच्छी बात
नहीं है यह।
शोभा नहीं
देता। बड़े
अच्छे
वातावरण में ...
(व्यवधान)
माननीय सदस्य,
इंट्रप्शन
खड़े होकर मत
करिये आप ... (व्यवधान)
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
कोई अंकित
नहीं हो रहा
है ... (व्यवधान) माननीय
सदस्य, आरोप
अंकित नहीं
हुआ है। बैठ
जाएं ... (व्यवधान)
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): 000
श्री मदन
राठौड़
(सुमेरपुर): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
टिप्पणी
अंकित नहीं
हुई ... (व्यवधान)
श्री मदन
राठौड़
(सुमेरपुर): 000
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): 000
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): वैसे
भी भद्दी टिप्पणी
करने से राष्ट्रीय
नेता का कद कम
नहीं होता। हम
जो करते हैं
हमारा ही कद
कम होता है ... (व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
अपनी बात रख
रहा था ... (व्यवधान)
एक मिनट,
महावीर जी अब
बहुत हो गया।
अगर आप नहीं
चाहते हैं तो
मैं बिलकुल
कतई नहीं बोलूंगा
If you want I
would not. बीच
में नहीं। क्या
मतलब है ... (व्यवधान)
अगर आप चाहते
हैं कि ठीक है
आप कह दीजिये ...
(व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा): 000
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, यह
खेदजनक
स्थिति सदन
में इसलिये
बनी, मैं बहुत
दुःख के साथ
कह रहा हूं
सभी
मंत्रियों की
जिम्मेदारी
है लेकिन
पार्लियामेंट्री
अफेयर मिनिस्टर
की ज्यादा
जिम्मेदारी
है। उनका
दायित्व है
कि सदन के अन्दर
आर्डर बना
रहे। मुझे
बड़े खेद के
साथ कहना पड़ता
है पुराने
सदस्य हैं,
कई दफा हमारे
साथ रहे हैं
जिस प्रकार से
कोई बात होती
है ... (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
बुरे मन से
नहीं कहा
आपको। बुरे मन
से नहीं कहते
हैं ... (व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
आप मेरी बात
सुन लें। बुरा
मन नहीं है,
इंट्रप्शन
तो था ... (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
यह तो आपकी
आपस की अंडर
स्टेंडिंग
दिखती है ... (व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
इंट्रप्शन
तो था। मेरी
बात सुनें आप
इंट्रप्शन
तो था ... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): मैं आपको
करेक्ट कर
रहा था। अब
नहीं करूंगा ...
(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
आप बिलकुल
असत्य तरीके
से करेक्ट कर
रहे थे तथ्यविहिन
... (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय, अब
नहीं करेंगे ...
(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
आपने कह दया
कि वह ट्वेलथ
फाइनेंस
कमीशन तो
वाजपेयी जी ने
अपाइंट किया था।
कोई
प्रधानमंत्री
होगा उसे
अपाइंट करना पड़ेगा
... (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
वह उस साल के
लिये कहा था ...
(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): It is a constitutional
requirement. It is a mandatory thing. मैंने
टी.एफ.सी. की
बात कही थी।
किसने अपाइंट
किया, किसने
अपाइंट नहीं
किया, नहीं
कही मैंने यह
बात तो It is a mandatory obligation. Constitutional obligation है।
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय,
मुझे तो हंसी
भी आ रही थी कि
उन्होंने
किया था। वह
नहीं होते,
कोई और नहीं
करता अपाइंट ?
तो उससे पहले
कांग्रेस के
प्रधानमंत्री
थे ... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): मैं फिर
टोक रहा हूं।
उनके टाइम में
हुआ था माननीय
प्रद्युम्न
सिंह जी ... (व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
उनके वक्त
में यह अपाइंट
हुआ था।
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, एक
बात यहां कहीं
डिरेल करने की
कोशिश कर रहे थे
कि अपनी बात
इफैक्टिव
तरीके से नहीं
कह पाये He was just trying to derail me that I
lose my temper and I conclude my speech. That was a modus operandi altogether.
श्री
उपाध्यक्ष:
आप लूज करते
नहीं है। आप
लूज करते नहीं
है ... (व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मैं भी बहुत
पुराना हूं। मैं
इनकी बातों से
... (व्यवधान) आपको
मैं निवेदन
करूं एह प्रश्न
यह उठाया कि
हमेशा डिवोल्यूशन
आफ ग्रांटस हर
साल में बढ़े।
तो मैं आपको
यहां से फिगर
देता हूं। एब्सल्यूट
टर्मस की जब
मैं बात करता
हूं, मैं 2000-01 से
शुरू करता
हूं। 2000-01 के अन्दर
राज्य में
राजस्थान को
5413 करोड़ 84 लाख
रुपया मिला और
नेक्सट ईयर
के अन्दर ही
2001-02 के अन्दर 4973
करोड़ रह गया।
जो मिला था
उससे भी कम हो
गया। आप जो कह
रहे थे कि
बढ़ा था तो
मैं उसके लिये
दोष नहीं देता
हूं। उस वक्त
जो अर्थव्यवस्था
देश की थी
उसके अन्दर जो
सेण्ट्रल
गवर्नमेंट के
टैक्स कलेक्शन
था वह पूअर
था। इस कारण
से नहीं वह दे
सके
अदरवाइज तो
कांस्टीट्यूशन
आब्लीगेशन
पूरा करने के
लिये देना
पड़ता यह फाइनेंस
कमीशन की
रिपोर्ट के
अनुसार। तो
मेरा कहने का
अभिप्राय यह
था कि उस साल
जो बढ़ रहा था
कभी 400 करोड़
रुपये, कभी 500
करोड़ रुपये
लेकिन यहां क्वांटम
जम्प हुआ है 1000
करोड़ रुपये
की गति से बढ़
रहा है। 2000 करोड़
रुपये की गति
से टैक्स
डिवोल्यूशन
बढ़ रहा है।
कहने का मेरा
अभिप्राय यह
था। फिर आपको
एडवांटेज
मिला
डैट् स्वेप
की स्कीम का।
डैट् स्वेप
के तहत जो हाई
इंटरेस्ट
रेट थी,
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय,
आपको सुनकर
ताज्जुब
होगा 14.50
प्रतिशत रेट
आफ इंटरेस्ट
थी आज 9.50, 7.50
प्रतिशत पर
राज्य सरकार
को डैट् स्वेप
के तहत लाभ
मिल रहा है तो
कितना बड़ा
फर्क आ गया ब्याज
के पेटे। यह
ब्याज का
राज्य को
चुकारा करना
पड़ रहा था
उसके अन्दर
एकाएक कमी
आयी। वह भी
भारत सरकार ने
योजना दी सारे
राज्यों की
माली हालत को
देखते हुए कि
राज्य
कठिनाई के अन्दर
हैं। उस चीज
को भूल गये।
यहां बैठकर
हमने ही किया
है सारा का
सारा, अब इसकी
जड़ में मैं
जाना चाहता
हूं। चाहे
डैट् स्वेप
की स्कीम हो...
श्याम/चौहान 29.03.2007
14.10 2d
अब
आपने
एफआरबीएम एक्ट
जो पास कर
दिया है, उस पर
मेरा मानना है
और यह चर्चा
का विषय है, यह मेरा
विचार हो सकता
है, इससे राज्यों
को समस्या
आने वाली है
कि 2008-09 तक आपको
रेवेन्यु
डेफिसिट को
समाप्त करना
पड़ेगा। लालच
क्या है,
टीएफसी की
रिपोर्ट है कि
आपको इंसेंटिव
मिलेगा,
इंसेंटिव
पाने के लिए
सबने होड़ मचा
रखी है। फिर
आपका यह है कि
सरटेन लोन्स
जो हैं राज्यों
के वह राइट ऑफ
हो जायेंगे।
उसकी होड़ मची
हुई है। लेकिन
मैंने जो पढ़ा
है, विचार चल
रहा है देश के
अंदर, एक वर्ग
कह रहा है कि
इससे देश के
और राज्यों
की जो विकास
की गति है,
गरीबों की जो
आकांक्षाएं
हैं, जब राज्य
सरकार सोशल
सेक्टर के
अंदर, इकॉनामी
सेक्टर के
अंदर पैसा
खर्च नहीं
करेगी तो गरीब
की
आकांक्षाएं
पूरी नहीं
होंगी।
उपाध्यक्ष
महोदय, उसके
दो-तीन उदाहरण
देता हूं। इस प्रकार
का सिमिलर
अमेरिका के
अंदर पास हुआ।
इसी प्रकार का
यूरोपियन
यूनियन के जो
देश हैं वहां
पास किया है
और जर्मनी
इसका सबसे
बड़ा
प्रवर्तक था
कि करिये और नतीजा
यह है कि आज
जर्मनी में और
फ्रांस में
रेफिसन आ गया।
फिर वहां
विचार हुआ कि
क्या होगा
इसके अंदर,
फिर वहां
अमेंडमेंट
हुए अमेरिका
के अंदर,
अमेंडमेंट इस
प्रकार के कर
दिये हैं,
डिफरेंट नाम
से एक्ट हैं
वहां पर, अगर
आप चाहें तो
मैं पढ़ देता
हूं “It may be useful here to look at the experience of
the countries that has passed the implementation the fiscal responsibility
legislation in the USA. The Gram Holding
Act of 1985.”
वहां पास हुआ
था। इसी
प्रकार से
यूरोपियन
यूनियन के
लोगों ने पास
किया था तो आज
मैं चाहता हूं
कि सरकार इसके
बारे में
माननीय मुख्यमंत्री
जी
अर्थशास्त्रियों
से चर्चा करें।
यह भविष्य के
लिए चेतावनी
है कि आप
अर्थशास्त्रियों
से चर्चा करके
इसके अंदर भविष्य
में किस
प्रकार के
अमेंडमेंट की
आवश्यकता
पड़ेगी। राज्य
के हित में और
गरीब के हित
में और राजस्थान
के विकास के
हित में इसमें
चर्चा की जाती
है। यह विचार
चल रहा है।
वेस्ट बंगाल
ने पास नहीं
किया, एफआरपीबी
एक्ट वेस्ट
बंगाल
गवर्नमेंट ने
पास नहीं
किया। यह मेरा
आपको सुझाव
है।
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
यहां मुख्यमंत्री
जी से एक बात
और कह दूं,
प्रधानमंत्री
जी ने मुख्यमंत्री
जी को पत्र
लिखा कि राज्यों
को भी महंगाई
पर काबू पाने
में सहयोग
देना चाहिए।
कह दिया कि
हमारे राज्य
की क्या जिम्मेदारी
है यह तो उनका
विषय है। यह
सोच गलत है। राज्य
भी तो
थोड़ा-बहुत
योगदान दे
सकते हैं। मैं
आपके सामने दो
बातें कहना
चाहता हूं कि
आपका पीडीएस
सिस्टम
अफेक्टिव है।
यह मेरा आरोप
है कि राज्य
में आपका
पब्लिक
डिस्ट्रिब्युशन
सिस्टम
करेप्सन की
भेंट चढ़ गया
है। सब मनों
में जान रहे
हैं कि क्या
हो रहा है। किस
प्रकार
मिट्टी के तेल
का क्या हो
रहा है, गेहूं
का क्या हो
रहा है। चारों
तरफ हाहाकार
मचा हुआ है। अगर
आप पब्लिक
डिस्ट्रिब्युशन
सिस्टम को
अफेक्टिव कर
देंगे तो
निश्चित रूप से
गरीब आदमी को
महंगाई से
राहत मिलेगी।
इसमें
असेंसियल
कमोडिटी एकट
के तहत, व्हिट
कंट्रोल
आर्डर आप ले
सकते हैं,
केन्द्र
सरकार ने छूट
दे दी। आप
चाहें इस तरफ
भी काम करें।
इसकी तरफ भी
आप कर सकते
हैं लेकिन अभी
तक राज्य में
व्हिट
कंट्रोल
आर्डर, प्लस
कंट्रोल आर्डर
किसी किस्म
का कोई आर्डर
नहीं है।
उपाध्यक्ष
महोदय, होल्डिंग
की सीमा तो
आपको तय करनी
पड़ेगी।
होल्डिंग की
सीमा जब तक आप
तय नहीं
करेंगे तो
राज्यों का
योगदान नहीं
होगा। आपने आठ
आने लीटर का
सेस लगा रखा
है, भारत
सरकार दो दफे
रेट कम कर
चुकी है। आपकी
सेल्स टैक्स
की रेट डीजल
पर, पेट्रोल
पर पहले से ही
ज्यादा है।
अगर आप इसमें
थोड़ी बहुत
राहत दे दें, 50
पैसे की जगह 25
पैसे कर दें
तो भी किसान
को इससे राहत मिलेगी,
राज्य सरकार
की नीतियों
से, अपने
प्रशासनिक
कदमों से
निश्चित रूप
से महंगाई पर
थोड़ी-बहुत
रोक लगेगी। बाकी
तो आप जानते
हैं हिन्दुस्तान
में खेती आज
भी बहुत बड़े
भू-भाग में
पानी पर
डिपेंड करती
है। पानी के
अलावा कहीं
बाढ़ आ जाती
है, कहीं ओले
पड़ जाते हैं,
अकाल पड़ जाता
है तो इसके
कारण से भी
कीमतों में
फलेक्चुवेशन
आता रहता है। कीमतें
बढ़ती रहती
हैं। मेरे कहने
का अभिप्राय
है कि मुख्यमंत्री
जी का यह कहना
कि महंगाई पर
कंट्रोल करने
में राज्य
सरकार का कोई
इफेक्टिव रोल
नहीं है। मैं
इससे सहमत
नहीं हूं।
उपाध्यक्ष
महोदय, दूसरी
बात रिफाइनरी
के बारे में
यहां पर कोई
चर्चा नहीं
हुई, राज्य
में ...(व्यवधान)
मेरी बात सुन
लीजिये ...(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
बीच में नहीं
बोलें।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
रिफाइनरी के
बारे में राज्य
से बाहर क्यों
जा रही हैं।
सवाल यह है कि
राज्य से
बाहर क्यों
जा रही है। जो
हमने अख़बार
में पढ़ा है,
बाकी किसी को
कांफिडेंस में
तो लिया नहीं,
कहा गया कि
जरूरत से ज्यादा
कनसेशन भारत
सरकार के
उपक्रम
ओएनजीसी मांग
रही है। यह
बात भी
निश्चित ही है
कि आज आपको
बात करनी
चाहिए थी
उनसे, आपकी
सोच के अंदर
फर्क था, आपने
यह सोचा चूंकि
तेल के कुए
यहां पर हैं,
तेल का उत्पादन
यही होगा तो
उनको झक मारकर
के रिफाइनरी
राजस्थान
में लगानी
पड़ेगी। इस
सोच की वजह से
आप पिछड़ गये।
आपसे कनसेशन
मांगें, मैं
आलोचना नहीं
करूंगा, मैं उदाहरण
देना चाहता
हूं राज्य के
अंदर हुंडई
मोटर कंपनी की
स्थापना हो
रही थी, प्लांट
लगने वाला था,
तत्कालीन
मुख्यमंत्री
सम्मानीय
भैरोंसिंह जी
शेखावत ने
उनको 13 साल का
टैक्स
कनसेशन देने
की बात की, 13 साल
तक टैक्स
आपके ऊपर नहीं
लगेगा। राज्य
एक दूसरे के
खिलाफ खिलाते
हैं। वह
मद्रास गये,
तत्कालीन
मुख्यमंत्री
मद्रास ने 18
साल का टैक्स
समाप्त कर
दिया। वह फैक्ट्री
वहां लग गयी।
आप यह भूल
जाते हैं कि
आपके राज्य
के अंदर आप
बात करते
कितना कनसेशन
मांग रहे हैं,
आप कनसेशन के
ऊपर आ गये कि
इतनी आमदनी
खत्म हो
जायेगी।
लेकिन आप भूल
गये कि कितनी
सारी सहायक
इंडस्ट्री
लगनी है,
सहायक उद्योग
कितने लगेंगे,
सर्विस सेक्टर
के माध्यम से
कितने हजार लोगों
को रोजगार
मिलेगा। आप यह
इनविसेज करने के
अंदर भूल गये।
कितने आदमी
वहां नौकरी
करेंगे। उनको
तनख्वाह
मिलेगी, उनकी
परचेजिंग
पावर बढ़ेगी।
उसके जरिये
टैक्स आपके
पास आयेगा।
मेरा आपसे
निवेदन है कि
हमारी पार्टी
आपके साथ इस
मामले में
खड़ी है। राजस्थान
का हित
सर्वोपरि है।
आपको
रिफाइनरी
लाने के लिए
उचित प्रबंध
करना चाहिए और
कुछ बातचीत के
जरिये हल
निकालना
चाहिए अन्यथा
राजस्थान के
लिए वह काला
दिन होगा अगर
राजस्थान के
अंदर
रिफाइनरी
नहीं लगती। आप
अपनी सोच को
बदलिये। आप यह
मत सोचिये कि
उन्हें
मजबूर होकर के
राजस्थान के
अंदर
रिफाइनरी
लगायेंगे।
आपको अपनी सोच
बदलकर के कुछ
ले-देकर के जो
मांग रहे हैं
उसमें कुछ
कम-ज्यादा
करके आपको
रिफाइनरी
लगाने के लिए
राज्य के
अंदर प्रयत्न
करना चाहिए।
यह मैं
रिफाइनरी के
बारे में आपसे
निवेदन करना
चाहूंगा।
उपाध्यक्ष
महोदय, अंत
में मैं एक
बात आपसे
निवेदन करना
चाहता हूं कि
धौलपुर में जो
बड़े उद्योग
हैं उनमें
दो-तीन उद्योग
हैं उनमें एक्सप्लोसिव
की फैक्ट्री
लगी हुई हैं
वहां पर एक्सप्लोसिव
पर राज्य में
साढ़े 12
प्रतिशत की दर
से वैट की
डयुटी है। यह
बात सही है कि
जो वैट की
फ्लो रेट तय
हुई थी उसका
वायलेशन राज्यों
ने बहुत किया
है। राजस्थान
भी उसका अपवाद
नहीं हो सकता
है। यहां भी किया
है। आपने एक
कमेटी बना दी,
एक्सट्रा संवैधानिक
कमेटी बना दी,
सत्यनारायण
जी गुप्ता की
अध्यक्षता
में, मैं उसको
एक्सट्रा
संवैधानिक
बॉडी कहता
हूं। वह रिकमंड
करती है और आप
करते हैं। मैं
उस विगत में
नहीं जाना
चाहता कि लोग
क्या बातें
करते हैं, क्या
बातें नहीं
करते हैं I do not want to
go in those details,
लेकिन आपने
फ्लो रेट का
इस मायने में
उल्लंघन
किया, वायलेशन
किया, वह बात
दूसरी है कि
आगे जाकर के
ऑल इंडिया की
मीटिंग होगी,
फाइनल एम्पावर्ड
कमेटी की तो
सारे देश के
बारे में क्या
व्यु लिया
जायेगा, यह
बात दूसरी है
कि सारे देश का
कितना होगा।
उस उद्योग को
बचाने के लिए,
वह उद्योग आज
बहुत परेशानी
में है और 900
परिवारों का
मामला है, 900
लोगों को
उसमें एम्प्लायमेंट
मिला हुआ है।
अगर वह बंद हो
गया, बड़ी
मुश्किल से
हमने उसको
चालू करवाया
था। वह बंद
होने के कगार
पर आ गया था।
उसको बड़ी
मुश्किल से
चालू करवाया
है। मैं
चाहूंगा कि इस
इंडस्ट्री
को बचाने के
लिए कुछ करना
चाहिए। राजस्थान
में बहुत
थोड़ी ऐसी इंडस्ट्री
हैं। ज्यादा
कोई भार भी
नहीं आयेगा और
नेबरिंग स्टेट्स
में कई जगह
इसी प्रकार के
वायलेशन किये हुए
हैं तो कृपया
भावना रखते
हुए आप उसको
चार परसेंट की
रेट में
लायें, मेरा
आपको यही
सुझाव है।
यहां पर एम्प्लायमेंट
की बात पर एक
ही बात कहता
हूं आखिर में।
jyg/akt/29.3.7/14.20/2e
मैनिफेस्टों
में कहा गया
कि एक लाख
लोगों को
रोजगार दिया जाएगा,
नौकरी दी
जाएगी। क्या
हुआ उसका? रिफायनरी
लगेगी नहीं,
भारत सरकार के
पैसों से आप
मास्टर लगा
रहे हैं, आपका
कुछ है नहीं,
आपने कहा दिया
कि हाड़ी रानी
आई आर खड़ी
करेंगे,
माननीय गृह
मंत्रीजी, आई
आर राजस्थान
में रहेगी
नहीं, आई आर का
पैसा भारत
सरकार देगी,
तनख्वाह के
पेटे, बड़ी
होशियारी से
वाह वाही पा
ली, ताली बजवा
ली आई आर पर, यह
नहीं कि आर ए
सी, आर ए सी
होती तो राजस्थान
को पैसा देना
पड़ता, बहुत
खूबसूरती से
कह दिया कि
रानी हाड़ी के
नाम पर आई आर,
महिलाओं को
खुश कर दिया
कि एक बटालियन
हजार महिलाओं
के करीब उसमें
नौकरी होगी,
पुलिस के लिए
आपको मिलती
नहीं है, उसी
सांस में मुख्य
मंत्रीजी कह
रही हैं, क्या?
जो पद पुलिस
में महिलाओं
के रिक्त हैं
उनको पुरुषों
से नहीं भरा
जाएगा, उन्होंने
खुद ने एडमिट
किया है कि
हमको महिलाएं
मिल नहीं रही
है इसलिए वह
रिजर्व रखे
जाएंगे।
दूसरी तरफ एक
हजार महिलाओं
की आई आर खड़ी
करने की बात
कह दी। कितनी
हार्ड लाइफ
होती है पैरा
मिलिटरी
फोर्सेज की,
आपके आर ए सी
भी एक तरह से
पैरा मिलिटरी
फोर्सेस की
श्रेणी में
आती है। देश
के कई कोनों
में कई आई आर
बाहर है, कहीं
त्रिपुरा में,
कहीं आसाम
में, कहीं
दिल्ली में
पड़ी हुई है,
आप भेजेंगे क्या?
फिर महिलाओं
के वैवाहिक
जीवन का क्या
होगा? एक उम्र
के बाद उनके
बाल बच्चों
का क्या
होगा? कौन
उनको पालेगा,
कौन उनको
रखेगा? यह एक
चिंतनीय विषय
है, यह एक ऐसी
योजना बना ली
जो शायद टेक
ऑफ ही नहीं कर
पाए, मेरी
भगवान से
प्रार्थना है
कि आप टेक ऑफ
करें, मैं
माननीय मुख्य
मंत्रीजी से
निवेदन
करूंगा कि वे
इस बारे में
विचार करें,
अगर आपने में
इतनी
सीरियसनेस है
तो आप आर ए सी
करा दीजिए और
उनको मिलिटरी
की तरह कोई
करवा दीजिए के
15 वर्ष, 20 वर्ष
में वह रिटायर
हो जाएंगी जिस
तरह से आर्मी
से सिपाही
रिटायर होकर आ
जाता है, नई
महिलाओं को भी
मौका मिलेगा
उससे लेकिन
आपके तो पैसा
दूसरों की जेब
से आता है,
तनख्वाह
भारत सरकार
देगी, वाह
वाही हम लेंगे
इसलिए उनको अपोइण्ट
करें।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, एक
यहां पर बड़े
जोरों से मेजें
टूटती-टूटती
बची।
ग्रेजुएट
अनएम्प्लायड
महिलाओं को और
लड़कों को
सरकार
बेरोजगारी
भत्ता देगी,
बहुत खुशी की
बात है, हमने
भी शुरू किया
था लेकिन राज
चला गया, टेक
ऑफ नहीं कर
पाए, आप करें।
अब आपने
ग्रेजुएट की
बात कही जो
एम्प्लायमेंट
एक्सचेंज
में 2 साल से
दर्ज हो, आजकल
एम्प्लायमेंट
एक्सचेंज
में 90 प्रतिशत
बेरोजगार नाम
ही दर्ज नहीं करवाते,
क्यों नहीं
दर्ज करवाते
क्योंकि
आजकल एम्प्लायमेंट
एक्सचेंज के
मार्फत कोई
महकमा सलेक्शन
के लिए
विज्ञापन ही
सालों से नहीं
छपाता और
सरकार ने कोई
नौकरी ही नहीं
निकाली है,
कोई एक चपरासी
नहीं लगाया
है, कोई एक क्लर्क
नहीं लगाया
है, सिवाय
पुलिस के जो
इनकी आवश्यकता
है कानून और
व्यवस्था
को मेंटेन
करने के लिए,
हर साल दो
हजार, बाईस सौ
आदमी रिटायर
होते हैं,
आपने उनकी
भर्ती के लिए
कह दिया, यहां
नम्बर
बढ़ाने के लिए
दो साल में
जितनी हर साल
रिटायर होंगे,
हम दो साल भी
भर्ती कर
देंगे, हमने भी
किया था, कहां
दिक्कत आ रही
है, तो आपने
वाहवाही लेने
के लिए 5 हजार लोगों
की भर्ती
करेंगे, नम्बर
बड़ा दिखे
इसलिए दो साल
का आपने
अनाउन्स अभी
कर दिया। बहुत
होशियारी और
बहुत
खूबसूरती के
साथ।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय,
मैं अपनी बात
समाप्त करने
से पहले यह
कहना चाहूंगा
कि माननीय
मुख्य
मंत्रीजी,
भारत सरकार के
लिए कम से कम
दो शब्द
तारीफ के तो
कह दीजिए। देश
की अर्थव्यवस्था
में जो बूम
आया है उसके कारण
से और भारत
सरकार जिन
आवश्यक मदों
में, जो आवश्यक
सेवाएं हैं,
चिकित्सा,
बिजली, पानी,
शिक्षा, सड़क
में मुक्त
हस्त से आपको
सहयोग दे रही
है, पैसा दे
रही है उसके कारण
से आपका यह
बजट इतना सुन्दर
बन सका है।
यही बात कहकर
मैं अपनी बात
को समाप्त
करता हूं, धन्यवाद।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय,
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने बहुत महत्वपूर्ण
योजनाओं का
जिक्र किया।
रिफायनरी के बारे
में माननीय
मुख्य
मंत्रीजी से
निवेदन करना
चाहता हूं कि
यह कोई ऐसी स्कीम
नहीं है जिसको
प्रतिष्ठा
का प्रश्न
बनाया जाए क्योंकि
मैंने हर क्वाटर
में इसकी
चर्चा की है।
मैं यह मानता
हूं कि अगर ओ
एन जी सी ने
आपको कोई ऐसा
ऑफर देने के लिए
कहा है तो
दूसरे बहुत से
लोग हैं, आप
लैटर ऑफ इन्टेंट
निकालिए, ग्लोबल
टेण्डर्स
इन्वाइट
कीजिए, मुझे
मालूम है कि आज
देश में ओ एन
जी से बड़े प्लेयर
मौजूद हैं
लेकिन आप यह
कहकर कि ओ एन
जी सी ने हमसे
बहुत सी ऐसी
छूटें मांगी
है जो सम्भव
नहीं है और कह
दें कि भारत
सरकार उसको
प्रोत्साहन
नहीं देना
चाहती है। मैं
समझता हूं कि
यह गलत है। 4.8
बिलियन टन्स
यहां पर तेल
भण्डार मिल
चुके हैं
जिनके आधार पर
आराम से 10
मिलियन टन कैपेसिटी
की एक
रिफायनरी आप 20
साल तक लगा
सकते हैं और
यह कहना कि
राजस्थान के
अंदर तेल
मिलता है तो
यहां लगानी
पड़ेगी यह
जरूरी नहीं है।
आज मथुरा में
कहां तेल
मिलता है,
भटिण्डा में
कहां तेल
मिलता है
इसलिए बहुत ढंग
से और मैं
सोचता हूं कि
व्यावसायिक
तरीके से इस
प्रश्न को
लेकर भारत
सरकार से
चर्चा करनी
चाहिए। मुरली
देवड़ाजी जो
केन्द्र में
मंत्री हैं वह
भी आपके प्रति
सहानुभूति
रखते हैं
लेकिन आप गाली
देते रहो,
आलोचना करते
रहो और सब कुछ
भारत सरकार पर
ही डालते रहो तो
मैं सोचता हूं
कि यह अच्छी
नीति नहीं है।
माननीय मुख्य
मंत्रीजी ने 21
जनवरी को एक
सर्वदलीय
मीटिंग बुलाई
थी, हमारे दल
की तरफ से मैं,
चौधरी साहब और
कल्लाजी गए
थे और उन्होंने
एक बात कही थी
कि हम आपको
पूरा अधिकार देते
हैं, जिससे भी
आप चर्चा करना
चाहते हैं करें,
आप हमारा जो
सहयोग लेना
चाहें, हम
सहयोग वह देने
के लिए तैयार
हैं। मैं आज
भी कहना चाहता
हूं कि मेरे
पर आंकड़े
हैं, मैं कोई
लम्बी स्पीच
नहींदे रहा
हूं, अगर स्पीच
दूं तो मैं
आपको कंवीस भी
कर देता कि
राजस्थान
में केवल 10
मिलियन टन की
ही नहीं 15
मिलियन टन
कैपेसिटी की
रिफायनरी लग
सकती है और और
देश के अंदर 375
मिलियन
रिफायनरी की कैपेसिटी
है, जो कम है,
उसको 10 मिलियन
टन के हिसाब
से हर साल
बढ़ाना
पड़ेगा वरना
तो आपको बाहर
भेजकर इम्पोर्ट
करना पड़ेगा।
आपका जो इम्पोर्ट
बिल है वह
इतना अधिक बढ़
रहा है कि 30
प्रतिशत यहां
पैदा होता है
और 70 प्रतिशत
आपको बाहर से
इम्पोर्ट
करना पड़ता
है, आपका
कितना फोरेन
एक्सचेंज
इसमें जा रहा
है। इसको बहुत
महत्वपूर्ण
समझ कर,
प्रतिष्ठा
का प्रश्न न
बनाकर और मुख्य
मंत्रीजी
अपने लेवल पर,
मैं चर्चा
नहीं करना
चाहूंगा कि
राजस्थान
में किस विभाग
ने इसमें
कितनी देर की
और किस प्रकार
की चर्चा यहां
हुई, लेकिन
मैं कहना
चाहूंगा एक
अनुरोध के तौर
पर जिसमें हम
सबका आप जो भी
सहयोग लेना
चाहें वह ले
सकते हैं।
मुख्य
मंत्रीजी को
मैंने अपने
तौर पर एक
पत्र भी लिखा
था, इसमें यह
कहा था कि 9
हजार करोड़ रुपए
कुल मिलाकर इस
रिफायनरी पर
लगेगा और कोई
भी गवर्नमेंट
21 जनवरी को
हमारी मीटिंग
हुई थी, उसमें
भी हमने यह
बता कही और
रामदासजी
अग्रवाल ने भी
यह बात कही कि 50
प्रतिशत से ज्यादा
कोई भी पार्टी
कंसेशन
मांगने के लिए
हकदार नहीं
होती है। 9
हजार करोड़
रुपए का मतलब
होता है साढ़े
चार हजार
करोड़ रुपए की
रियायत हम ओ
एन जी सी को कई
तरह से दे
सकते हैं।
मैंने दो-तीन
सुझाव भी
उसमें दिए थे
कि रॉयल्टी
एक साल की
हमने खो दी, जो 20
प्रतिशत
रॉयल्टी
हमें पहले साल
मिल सकती थी
उसका डेढ़
प्रतिशत कम हो
गया, साढ़े
अठारह
प्रतिशत हो गया,
एक साल निकलने
के बाद 17
प्रतिशत हो
जाएगा और दो
साल निकलने के
बाद में साढ़े
पन्द्रह
प्रतिशत हो
जाएगा। ऐवरी
डे राजस्थान
गवर्नमेंट
रॉयल्टी के
पैसों को जो
घर बैठे उसको
आ सकते हैं,
उसको खो रही
है और भी केवल
प्रतिष्ठा
का प्रश्न
बनाकर और यह
कहकर कि भारत सरकार
इसमें कुछ
नहीं करना
चाहती, ओ एन जी
सी एक
कॉमर्शियल
ऑर्गेनाइजेशन
है, उससे आप
बैठकर बात
कीजिए और आमने
सामने बैठकर
एक लेवल पर
बात होनी
चाहिए। आप
कहिए कि साहब,
विभाग के
अधिकारियों
से कह दीजिए,
वह उनसे बात
करें, मैं
समझता हूं कि
यह सम्भव
नहीं होगा। एक
लेवल होता है
हर चीज का,
माननीय मुख्य
मंत्रीजी स्वयं
बैठें और जो
कुछ भी सम्भव
हो, हम उनको हर
तरह से सहयोग
करने के लिए
तैयार हैं।
भारत सरकार के
स्तर पर अगर
कोई जरूरत हो
तो हम जाने के
लिए तैयार हैं
लेकिन
रिफायनरी का
राजस्थान
में होना बहुत
जरूरी है।
उससे करीब-करीब
इतना पैसा
यहां पर आएगा,
मैं तो कहता
हूं और कई बार
मैंने कहा भी
है कि राजस्थान
को आप टैक्स
फ्री स्टेट
बना सकते हैं,
एक पैसा टैक्स
लगाने की
जरूरत नहीं
है। इतना अच्छा
सुझाव देने के
बावजूद आप
उसको केवल
प्रतिष्ठा
का प्रश्न
बनाकर भारत
सरकार की आलोचना
करते रहे, यह
आपकी मर्जी
है, मैं फिर
आपसे अनुरोध
करना चाहूंगा
कि इस प्रश्न
को आप गम्भीरता
से लेकर एक व्यावसायिक
ढंग से
निपटाया जाना
चाहिए, तय
करना चाहिए,
उसकी कोशिश
राज्य सरकार
करे।
श्री
उपाध्यक्ष:
श्री प्रहलाद
गुंजल।
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय,
राजस्थान
विनियोग संख्या
2 विधेयक, 2007 और
राजस्थान
वित्त
विधेयक, 2007 पर आज
यहां सदन में
चर्चा हो रही
है। माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, 9
मार्च को राज्य
का बजट प्रस्तुत
करने के बाद
और अनुदान की
मांगों पर
चर्चा के बाद,
मुखबंद होने
के बाद पारित
हो गया, यह
विनियोग
विधेयक
जिन अनुदान
की मांगों को
सदन में पारित
किया है उसकी
पूर्ति के लिए
कंसालिडेट
फण्ड से
पैसों का
उपयोग करने के
लिए अधिकृत
करता है।
Gpc/akt/
29032007/1430/2f
वित्त विधेयक के बारे में मुझे माननीय उपाध्यक्ष महोदय, केवल इतना कहना है कि बजट भाषण में मुख्यमंत्रीजी ने जो कर प्रस्ताव किये हैं, करों में सरलीकरण या कुछ कर लगाये जाने का, वित्त विधेयक पारित होने के बाद विधिक रूप से राज्य में उसको प्रभावी रूप से लागू किया जा सकता है।
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, 9 मार्च को जबसे सदन में बजट पेश हुआ है बजट की चर्चा से लेकर अनुदान की मांग तक कई माननीय सदस्यों ने अपने सुझाव रखे और कई प्रकार के आरोप-प्रत्योरोप की राजनैतिक शैली का उपयोग भी किया गया। माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं इतना विश्वास के साथ कह सकता हूं कि जिस बजट को माननीय मुख्यमंत्री जी ने राजस्थान की विधान सभा में रखा है उस बजट पर प्रतिक्रिया का प्रसंग आया, चाहे वो सदन में चर्चा का अवसर आया हो, बजट में कोई कमी-खामी निकालने की बजाय माननीय प्रतिपक्ष के पास इसके अलावा कोई विषय नहीं है। मैंने अख़बार भी पढ़े और चर्चाएं भी सुनीं कि मुख्यमंत्रीजी ने केन्द्र की योजनाओं के आधार पर बजट बनाकर सावधानी से विकासोन्मुखी इसका दर्शन कराने का प्रयास किया है।
आज अभी राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्य चर्चा में भाग लेते समय कह रहे थे कि मुख्यमंत्रीजी को भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए कि बारहवें वित्त आयोग में भारत सरकार ने राजस्थान पर जैसे मानो कृपा की हो। माननीय उपाध्यक्ष महोदय, जब बारहवें वित्त आयोग का गठन हुआ तत्कालीन प्रधानमंत्री माननीय अटल बिहारी वाजपेयी ने पहली बार यह मंतव्य वित्त आयोग के सामने रखा कि बारहवें वित्त आयोग की तमाम सिफारिशों के अंदर उसका केन्द्र बिन्दु गांव और गरीब होगा। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मंशा के अनुरूप बारहवें वित्त आयोग ने हिन्दुस्तान के तमाम राज्यों को पैसा देने की व्यवस्था की और उसी का परिणाम है कि आज राज्यों को पैसा मिल रहा है।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): The Commission is a constitutional body. It is not on the mercy of the Prime Minister or someone else. यह बात सही है कि उस सरकार ने कांस्टीट्यूट का गठन किया, उसका अधिकार प्रधानमंत्री को ही होता है, लेकिन कांस्टीट्युशनल बाडी बनने के बाद उसको निर्णय लेने के लिए किसी प्रकार की गाइडलाइन की जरूरत नहीं है। ये जो सारी चीजें हैं वे कांस्टीट्यूशनल बॉडी के संबंध में प्रधानमंत्री ने कही हैं।
श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्डी): सरकार का मंतव्य ..(व्यवधान)..
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इन्होंने जो इन्फ्लेंस निकाला, मुझे कोई तकलीफ नहीं है, लेकिन सदन में चर्चा कर रहे हैं तो इसको समझें बाकी आप इन्फ्लेंस निकालें आपको छूट है, आप जो चाहे कहें, क्या तकलीफ है।
श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्डी): आप बहुत वरिष्ठ सदस्य हैं।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): टर्म्स एण्ड रेफरेंस तय होते हैं, उसके अंदर अपनी मंशा जाहिर की जा सकती है।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): राठौड़ साहब, मैं कांस्टीट्यूशन को कोट करूं क्या? कांस्टीट्यूशन कोट करने में ..(व्यवधान)..
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): कांस्टीट्यूशनल प्रोविजन है। उसमें प्रोविजन है, पर उसके टर्म्स एण्ड रेफरेंस भी तय होते हैं, कभी गाडगिल फार्मूला था, कभी दूसरी बात थी।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): फिर आप राठौड़ साहब, कम से कम चर्चा करें अच्छी चर्चा करें, सम्यक चर्चा करें, संवैधानिक चर्चा करें, यह अपना सबका कर्तव्य है। अपन पोलिटिकल लाइन पर बात करें उसमें भी कोई तकलीफ नहीं है। आज ज्युडिशरी हमने बनायी, कांस्टीट्यूशन का प्रोविजन है और ज्युडिशरी हमें गाइड कर रही है, कांस्टीट्यूशनल बॉडी बनाने का काम अपना है, बॉडी बनाने के बाद उसका जो नीयत पावर है उसके अंतर्गत वह अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र थे। मेरा निवेदन यह है कि आप अपना इन्फ्लेंस निकालें, माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कहा, धन्यवाद, उनकी गाइडलाइन है। फिर तो इस कांस्टीट्यूशन की जरूरत ही नहीं है, फिर तो किसी को आर्डर निकालकर पास कर दो, एडमिनिस्ट्रेटिव आर्डर कि ये काम करने हैं, वह काम हो जाता। उपाध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य आने वाले समय में वरिष्ठ सदस्य बनेंगे, हम तो चाहेंगे मंत्री बनें, पर वरिष्ठ सदस्य बनेंगे तो कम से कम यह चीज समझ लें कांस्टीट्यूशनल रिक्वायरमेंट में बॉडी बनाने के बाद it is purely on the wisdom of that constitutional body, जो रिकमण्ड करती है, मैं खाली यही निवेदन करना चाहता हूं बाकी आपकी इच्छा है जो आप निकालें।
श्री उपाध्यक्ष: माननीय सदस्य, तत्कालीन उस समय जो भी अथोरिटी होती है उसका रेफरेंस देने के अंदर ऐसी कोई बात नहीं होती है।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): रेफरेंस नहीं किया, इन्होंने तो कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने यह कमीशन लागू किया।
श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्डी): यह नहीं कहा मैंने।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप अपने आपको करेक्ट कर लें। ..(व्यवधान)..
श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्डी): मैंने कहा कि मंशा जाहिर की।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): I withdraw it, आप अपने विचार रखें, मुझे कोई तकलीफ नहीं है।
श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्डी): मैंने यह कहा कि मंशा जाहिर की।
श्री उपाध्यक्ष: अब आदरणीय मनमोहन सिंहजी का भी कोई रेफरेंस आये तो ऐसी कोई आब्जेक्शन वाली बात नहीं होती।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): Manmohan Singh or no Manmohan Singh, Atal Behari Vajpayee or no Atal Behari Vajpayee, it is the requirement of the Prime Minister. प्राइम मिनिस्टर कांस्टीट्यूट करता है। Whosoever is the Prime Minister, he will have to do it. That’s all. हम यह कहें कि मनमोहन सिंहजी कर रहे हैं या अटल बिहारी वाजपेयी जी कर रहे हैं, यह इश्यू नहीं है। संवैधानिक व्यवस्था इस तरह की है कि जो प्रधानमंत्री होंगे उनको कांस्टीट्यूट करना है, कांस्टीट्यूट करने के बाद जो उनका कांस्टीट्यूशन में प्रोविजन है वह डिवोल्युशन में फाइनेंशियल पावर होना चाहिए, यह बात मैं कह रहा हूं। बाकी आपकी इच्छा है, आप विचार रखें, मुझे कोई तकलीफ नहीं है।
श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्डी): मैं आभारी हूं ..(व्यवधान)..
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): सबको शिक्षा देंगे, सबको चिकित्सा देंगे, सबका इंतजाम करेंगे, लोगों को ..(व्यवधान)..
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मान्यवर, मैं यह नहीं कह रहा हूं आपको क्या समझाऊं, मैं कांस्टीट्यूशन की रिक्वायरमेंट बता रहा हूं, मैं कांस्टीट्यूशन के फंक्शन नहीं बोल रहा हूं। आप नहीं समझना चाहें तो आपकी इच्छा है, रखो, मुझे कोई तकलीफ थोड़े ही है।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): फंक्शन होते हुए भी आपने नहीं किये और अटल बिहारी वाजपेयी जी ने किया।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): फिर वही बातें कर रहे हैं। हर प्रधानमंत्री, अगर देवेगौड़ा जी प्रधानमंत्री होंगे तो उनको भी वही काम करना है, महावीर जी जैन होंगे तो उनको भी करना है. These are constitutional requirements जिसको फुलफिल करना पड़ता है। ऐसी कोई सरकार है जो कमीशन नहीं बनाती है? These are the compulsions.
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): उपाध्यक्ष महोदय, एक तो उन्होंने क्रियान्विती की और उसमें अपना एक विजन डालकर काम किया।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): धन्यवाद, ऐसा ही विजन रखना आप। बहुत अच्छा।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): एक आप थे जो केवल कांस्टीट्यूशन पढ़ते थे, किया कुछ नहीं आपने।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): प्रहलाद जी, आप बोलिए। भैंस के आगे तंदूरा बजाने से कोई मतलब नहीं। आप बोलें, गलती हो गई।
श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्डी): माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्य के प्रति आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने मुझे करेक्ट करने की कोशिश की। मेरे खयाल से मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा कि माननीय अटल बिहारी वाजपेयी ने बारहवें वित्त आयोग को डिक्टेट करके ऐसी व्यवस्था की। गरीब को गणेश की भारत सरकार की उस समय की प्राथमिकता थी। बारहवें वित्त आयोग ने उस मानसिकता को समझा और उसके अनुरूप प्रावधान तय करके हिन्दुस्तान के राज्यों के लिए राशि का अलोकेशन करने की बात तय की।
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन कर रहा था कि इस बजट की आलोचना का कोई विषय प्रतिपक्ष के पास नहीं बचा है। माननीय मुख्यमंत्री जी ने महिला दिवस के एक दिन बाद इस बजट को राजस्थान की विधान सभा में रखा। पहली बार ऐसा लगा कि राजस्थान की महिलाओं के कल्याण के बारे में धरातल पर किसी ने सोच खड़ी करने का प्रयास किया है। बजट में उसका व्यापक वर्णन है, मैं उन आंकड़ों में नहीं जाना चाहता। जिस प्रकार से चालू वित्त वर्ष की, आगामी वित्त वर्ष 2007-08 की वार्षिक योजना का आकार 11638.86 करोड़ अनुमोदित किया, मैं इसका जिक्र इसलिए कर रहा हूं कि किसी भी राज्य का विकास का आधार उसकी योजना बनती है।
मोहन/अरूण/अशोधित
प्रति
प्रकाशनार्थ
नहीं/29032007/1440/2g
उसकी वार्षिक योजना का आकार, उसकी पंचवर्षीय योजना का आकार विकास के मापदण्ड तय करता है और दुर्भाग्य से कई ऐसे भी उदाहरण राजस्थान में उपस्थित हुए कि इस पवित्र सदन ने जिन योजनाओं को पास किया, जिन वार्षिक योजनाओं को अनुमोदित किया उन योजनाओं का आकार घटा। माननीय उपाध्यक्ष महोदय, हमें जनता लोकतंत्र में चुन कर भेजती है और सरकार में हमको जनता के धन का ट्रस्टी बना कर भेजती है कि हम ईमानदारी से उसके धन का सदुपयोग करें और सदुपयोग करके राजस्थान में कल्याण की योजनाएं लागू करें। इससे बड़ी उदासीनता, इससे बड़ा दुर्भाग्य लोकतंत्र के इतिहास में दूसरा नहीं हो सकता कि हम जिस पवित्र सदन से जिस योजना को अनुमोदित कराया और सरकार उस योजना का आकार घटा दे। पिछले शासन में कई बार योजनाओं का आकार घटा। मैं उस वृत्तांत में आगे नहीं जाना चाहता लेकिन माननीय उपाध्यक्ष महोदय, जब से यह सरकार आई, योजनाओं का आकार बढ़ रहा है और राज्य का वित्तीय कुशल प्रबंधन ठीक तरीके से चल रहा है और उसका प्रभाव हमें इस बजट में देखने को मिला कि इन तीन साल में कुशल वित्तीय प्रबंधन का प्रभाव रहा कि बजट के अन्दर 214 करोड़ 77 लाख का राजस्व अधिशेष होने का अनुमान है और 12वें वित्त आयोग की सिफ़ारिशों के अनुरूप जहां 2003-04 में राजकोषीय घाटा आगामी वित्त वर्ष में 5321 करोड़ रुपये का अनुमानित है। अथशास्त्रियों की भाषा में राजस्व खाते में सरप्लस होना और राजकोषीय घाटा विकास की नीति को दर्शाता है और मुख्य मंत्री जी की इस सोच का परिणाम रहा उनका कुशल वित्तीय प्रबंधन राजस्थान को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने और योजना को निर्धारित समय पर लागू किया जाना, उसी से प्रभावित होकर योजना आयोग ने जो हमारी 11वीं पंचवर्षीय योजना का अनुमोदन किया, लोकतंत्र के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी योजना है। माननीय उपाध्यक्ष महोदय, इसको सब लोग बार बार कह चुके हैं लेकिन इसमें से जो बात मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहता हूं, हर बार हम यहां सदन में बजट पर चर्चा, अनुदान की मांगों पर चर्चा करते हैं, अपना नजरिया, अपना दृष्टिकोण रखते हैं लेकिन हमारे नजरिये और दृष्टिकोण से सरकार उस बजट और योजनाओं से राजस्थान के गांव और गरीब का कितना कल्याण होता हो, यह विश्लेषण भी ईमानदारी से होना चाहिए और जब हम इस विषय में विचार करते हैं, माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आजादी के आज 60 साल बाद भी हम राजस्थान के गांवों को ठीक तरीके से बिजली नहीं दे पाते हैं। जब कभी बिजली की चर्चा इस सदन में होती है, यह हम सब लोग जानते हैं कि बिजली के करंट के झटकों से सरकार बदलती है लेकिन जब बिजली की चर्चा होती है तो हम केवल 8 घंटे किसान के लिए बिजली मांगते हैं, कभी हमने आगे जाने की कोशिश नहीं की, माननीय उपाध्यक्ष महोदय, और आज राजस्थान में केवल खेत के लिए बिजली नहीं चाहिए, गांवों में कई प्रकार के लघु उद्योग चलते हैं, गांव में बैल्डिंग की मशीन लगा कर कोई रोजगार पैदा करता है, गांवों में कोई फ्लोर मिल चला कर कोई रोजगार पैदा करता, नाना प्रकार की योजनाएं जो रोजगार का आधार बनती, उनकी बिजली पर निर्भरता रहती लेकिन कभी हमने गांव के रोजगार को सुदृढ करने के लिए, गांव के उस लघु उद्योग, ग्रामोद्योग को सुदृढ़ करने के लिए बिजली देने की योजना नहीं बनाई, क्या हम किसान के कल्याण के लिए 8 घंटे बिजली मांगते रहे ? हमने कभी इस विषय पर विचार नहीं किया कि शहरों की तरह गांव को भी 24 घंटे बिजली मिलनी चाहिए और पहली बार इस दिशा में राजस्थान की सरकार ने प्रयास किया और 11वीं पंचवर्षीय योजना का 36 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा जो 25 हजार 221 करोड़ रुपये और 75 लाख रुपये का राजस्थान में बिजली उत्पादन के लिए तय किया है और इस आगामी वित्त वर्ष में 5320 करोड़ 80 लाख रुपये का प्रावधान किया। माननीय उपाध्यक्ष महोदय, यह राजस्थान के प्रति विकास की भावना को प्रदर्शित करता है कि 2010, 2012 तक राजस्थान में बिजली सरप्लस होगा और बिजली में सरप्लस होगा, रोजगार के अवसर जनरेट होंगे। किसी भी स्टेट के विकास का आधार पर्याप्त बिजली बनती है, चाहे वह उद्योग लगाने का मामला हो, चाहे किसान को बिजली देने का मामला हो और यहां तक, माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आज कम्पीटिशन का जमाना है, कई बार गांवों में हम लोग जाते हैं, इस प्रकार की शिकायतें सामने आती हैं लोग चिंता करते हैं, आज बोर्ड की परीक्षाएं हैं, 10वीं बोर्ड की परीक्षाएं हैं, 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं हैं और इस कम्पीटिशन के जमाने में जब गर्मियों में परीक्षाएं होती हैं तो गांव के बच्चे को भरपूर बिजली मिलनी चाहिए। आज बिजली सुविधा के लिए नहीं, बिजली आज जरूरत बन गई और इस जरूरत को हमने ठीक तरीके से समझने की कोशिश नहीं की और पहली बार इस बजट में ऐसा प्रतीत हुआ कि जिस बिजली को हम केवल सुविधा के रूप में गांव के सामने रखना चाहते हैं और जिस बिजली को केवल किसान की पूर्ति के लिए मांग करते थे, वह गांव की जरूरत है और उस जरूरत को पूरा करना किसी भी लोक कल्याणकारी सरकार के लिए आवश्यक होता है इसलिए आज मैं इस मौके पर राजस्थान के मुख्य मंत्री का आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि उन्होंने प्राइवेट निवेश के साथ साथ सरकारी निवेश को भी पहली बार इतना बिजली के क्षेत्र में बढ़ाया और राजस्थान इस दिशा में आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ता नजर आ रहा है। यह राजस्थान के विकास के शुभ लक्षण नजर आ रहे हैं। माननीय उपाध्यक्ष महोदय, जब कभी सदन में बजट पेश होता तो ऐसा लगता है कि बजट में कई करों का भार राजस्थान की जनता पर पड़ेगा पर कोई अतिरिक्त कर नहीं लगाये गये हैं और मैं इस मौके पर मुख्य मंत्री जी का आभार व्यक्त करना चाहता हूं, मैंने महामहिम के अभिभाषण पर चर्चा करते समय कहा था कि आज राजस्थान में एक भयानक समस्या खड़ी है, हम सरकारी दफ्तरों में जाते हैं तो अधिकारी यह कह कर हमको जवाब देते हैं कि फाइलों का अम्बार लग रहा है, मैन पावर की कमी है लेकिन उसी मैन पावर की कमी मिलती है और बाहर आकर हम सड़क पर बात करते हैं लाखों नौजवान बेरोजगार घूम रहे हैं। यह कौन सी नीति है कि बेरोजगार को संसाधन बनाने की जो चिंता मैंने अभिभाषण में की थी, मैं आज इस मौके पर माननीय मुख्य मंत्री जी का आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि मैंने निवेदन किया था कि ग्राम को ग्राम रोजगार के लघु उद्योग को ग्रामोद्योग तक पहुंचाओ और उन्होंने बजट में इस बारे में प्रावधान किया, परम्परागम उद्योग बुनकरी, हस्तशिल्प कला और बेरोजगारी भत्ते सहित कई प्रकार के अनाउंसमेंट किये और शिक्षा, चिकित्सा, पुलिस, कई क्षेत्रों में नौजवानों के लिए भारी रोजगार के अवसर पैदा किये। माननीय उपाध्यक्ष महोदय, बेरोजगारी भत्ते का अनाउंसमेंट किया, मैं आभार व्यक्त करना चाहता हूं, माननीय मुख्य मंत्री जी का फिर, इसलिए नहीं कि कोई अनाउंसमेंट हो गया, राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्य कह रहे थे कि हमारी सरकार के समय भी अनाउंसमेंट हुआ था लेकिन घोषणा हो गई उसका इम्प्लीमेंटेशन नहीं हुआ। मैं राजस्थान के मुख्य मंत्री को धन्यवाद देना चाहता हूं कि बजट में आपने नवाचार घोषणाओं को लागू करने के लिए 1251 करोड़ रुपये का प्रावधान किया, स्वागत योग्य कदम है और बजट में अतिरिक्त करों को फिर राजस्थान की जनता पर नहीं डाला, यह स्वागत योग्य कदम है, अब यह योजनाएं कोई हवा में तैरने वाली नहीं हैं।
सुरेन्द्र/अरुण/29.3.07/14.50/2h
इन
योजनाओं के
क्रियान्वयन
के लिए,
नवाचार
योजनाओं को
लागू करने के
लिए बजट के
प्रावधान बजट
में तय कर
दिये गये।
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं एक
और बात की ओर
आपका ध्यान
दिलाना चाहता
हूं कि राजस्थान
के साथ-साथ 28
फरवरी को देश
का बजट भी पेश
हुआ। अखबारों
में रोज
समाचार आ रहा
है, महंगाई को रोकने
के लिए केन्द्र
ने बजट में
कोई प्रावधान
नहीं किया।
अभी राजाखेड़ा
से आने वाले
माननीय सदस्य
चर्चा कर रहे
थे कि मुख्य
मंत्री जी ने
पत्र लिखा कि
केन्द्र
महंगाई की
जिम्मेदारी
राज्यों पर
डाल रहा है।
मैं प्रधान
मंत्री जी के
उस बयान को
पढ़कर के सुना
रहा हूं। ‘’आवश्यक
वस्तुओं की
कीमतों के
नियंत्रण में
राज्य सरकार
की अहम भूमिका
है और उसके
लिए उन्हें
सभी सम्भव
नियम-कानूनों
का इस्तेमाल
करना चाहिए-
डाक्टर
मनमोहन सिंह,
भारत के
प्रधान
मंत्री।‘’
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, भारत
के प्रधान
मंत्री जी और
वित्त मंत्री
जी ने अंजान
तरीकों से
राज्य
सरकारों से
महंगाई पर
नियंत्रण की
अपेक्षा कर
राज्य
सरकारों के
माथे पर
महंगाई का
ठीकरा फोड़कर के
बराबर की
भागीदार
बनाने की चेष्टा
प्रदर्शित की
जबकि हम सब
जानते हैं।
अच्छा होता
कि महंगाई
रोकने के
प्रबन्ध
करते। अन्तरराष्ट्रीय
नीति और गेट
समझौतों के
प्रभाव में
सरकार ने इस
दिशा में कोई
सार्थक कदम
नहीं उठाया।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, एक और
गंभीर बात जो
मैं आपके सामने
रखना चाहता
हूं कि मुद्रा
स्फीति की दर
बढ़ रही है,
जरूरी उपभोक्ता
वस्तुओं की
कीमतें
लगातार बढ़
रही हैं और देश
का मध्यम
तबका लगातार
प्रभावित हो
रहा है।
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, आपना
ध्यान
चाहूंगा,
मुद्रा स्फीति
की बढ़ती दरों
के कारण से
महंगाई की मार
से गरीब तबका
प्रभावित हो
रहा है। अच्छा
होता कि भारत
सरकार बजट में
चिंता करती, 80-80
रुपये किलो
दालें हो गईं
उस पर रोक
लगाने के
नियोजित
प्रयास करती।
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं एक
छोटी सी बात
आपके सामने पढ़कर
के कोट कर रहा
हूं कि यह किस
प्रकार की मानसिकता
का प्रदर्शन
करता है। मैं
वित्त
मंत्री जी के
बजट भाषण के
पैरा संख्या
137 का उल्लेख
कर रहा हूं।
मेरे पास कुत्ते
और बिल्ली
प्रेमियों के
लिए अच्छा
समाचार है।
मैं पालतू
जीवों के भोजन
पर शुल्क 30
प्रतिशत से
घटाकर 20
प्रतिशत करने
का प्रस्ताव
कर रहा हूं।
भारत के बजट
के पैरा नम्बर
137 पर इसका उल्लेख
है। माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, कुत्तों
के खाने पर,
विषय गंभीर नहीं
है, मानसिकता
की बात कर रहा
हूं। हिन्दुस्तान
के गरीब को
दाल नसीब
नहीं, हिन्दुस्तान
के गरीब को
तेल नसीब नहीं
है और
पूंजीपतियों
के बंगलों में
पलने वाले
कुत्तों को
उनके खाने पर
जो कस्टम
ड्यूटी लगती
है उसको घटाने
की चिंता भारत
सरकार के वित्त
मंत्री कर रहे
हैं, यह किस
मानसिकता का
परिचय देता है?
इससे बड़ी
शर्म की बात
नहीं हो सकती।
रईसों के कुत्तों
की चिंता हो
गई, उनके लिए
लगने वाले कस्टम
को कम करने की
भारत सरकार के
वित्त
मंत्री को
चिंता हो गई
लेकिन वह
राजस्थान का,
हिन्दुस्तान
का गरीब जो 80
रुपये किलो की
दाल नहीं खरीद
पा रहा, जो तेल
नहीं खरीद पा
रहा उसके
सामने खाने का
संकट खड़ा है।
महंगाई की मार
से उसका जीवन
त्रस्त हो
रहा है और
उसको सुधारने
के लिए भारत
सरकार ने कोई
चिन्ता नहीं
की।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, इतना
ही नहीं, आपने
बजट भाषण में
कहा कि हम कर
मुक्त आय को
एक लाख से एक
लाख दस हजार
कर रहे हैं।
महंगाई आसमान
छू रही है। 15
हजार रुपये
महीने के बिना
कोई साधारण
परिवार नहीं
चलता और कर
मुक्त आय एक
लाख से एक लाख
दस हजार करके
हिन्दुस्तान
कीजनता को
कौनसा
झुनझुना देना
चाहते हैं? अच्छा
होता कि भारत
के वित्त
मंत्री कर
मुक्त आय को
दोलाख की सीमा
तक पहुंचाते।
श्री
हेमाराम
चौधरी
(गुढ़ामालानी):
यह स्टेट का
मामला है? किस
पर बोल रहे हो
यहां? केन्द्रीय
बजट पर बोल
रहे हो या
राजस्थान के
विनियोग
विधेयक पर बोल
रहे हो?
श्री
उपाध्यक्ष:
उसी रेफरेंस
पर बोल रहे हैं।
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी):
उसी पर बोल
रहा हूं।
श्री
भागीरथ चौधरी
(किशनगढ़):
भारत सरकार के
कारनामे
उजागर कर रहे
हैं।
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी):
भारत सरकार ने
जो कृपा करने
की बात कही है
उसका जवाब दे
रहा हूं।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी (शिक्षा
मंत्री):
माननीय
हेमाराम जी,
माननीय प्रद्युम्न
सिंह जी ने
कहा था कि
सारा का सारा
भारत सरकार से
जुड़ा हुआ है
तो उसकी
समीक्षा कर
रहे हैं।
श्री
हेमाराम
चौधरी
(गुढ़ामालानी):
सारा का सारा
है तो फिर
आपके पास क्या
है?
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): आप
हो।
श्री
हेमाराम
चौधरी
(गुढ़ामालानी):
हां, हम हैं।
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं 2-3
छोटी-छोटी बात
भारत सरकार के
बजट की चर्चा
करना चाहता
हूं। भारत
सरकार का बजट
पेश होता है,
हिन्दुस्तान
का एक-एक व्यक्ति
उस बजट से प्रभावित
होता है। ऐसा
नहीं है कि
भारत सरकार के
बजट के
प्रावधान
राजस्थान पर
एप्लाई नहीं
होंगे या केवल
केन्द्र
शासित राज्यों
में एप्लाई
किये जाएंगे।
एक ऐसा निर्णय
जो किया है, मैं
वित्त
विधेयक भारत
सरकार का
पढ़कर के आपको
बताना चाहता
हूं जो लोक
सभा में पेश
हुआ है।
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, जिस
समय भारत के
वित्त
मंत्री जी ने
यह आय कर
अधिनियम की
धारा, मैं वाजिब
बात बता रहा
हूं, जो
संशोधन किया
उस पर चर्चा
करना चाहता
हूं। आपने
संशोधन किया
है कि हम एक
करोड़ रुपये
तक की कम आय
वाली कम्पनियों
से सरचार्ज
हटा रहे हैं।
आय कर के
इतिहास में
इससे बड़ी
विसंगति पिछले
50 सालों में
पैदा नहीं हुई
कि आप एक
करोड़ रुपये
की आय वाली
कम्पनी पर से
तो टैक्स हटा
रहे हो,
सरचार्ज हटा
रहे हो और
इंडिविजुअल
आय जिस व्यक्ति
की है 10 लाख पर
आप सरचार्ज
लगा रहे हो।
यह किस
मानसिकता से
आपने ऐसा
प्रावधान
किया? कम्पनी
एक करोड़
रुपये कमाये
उस पर सरचार्ज
नहीं लगेगा और
कोई व्यक्ति
10 लाख रुपये
कमाये उस पर
सरचार्ज
लगेगा यह भारत
सरकार के वित्त
मंत्री जी ने
अपने बजट भाषण
में कहा है।
श्री
हेमाराम
चौधरी
(गुढ़ामालानी):
अब की बार एम.
पी. बनकर के
चले जाओ। वहां
लोक सभा में
भाषण देना। आप
उसके लायक हो।
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी):
राजस्थान की
जनता पर भी
उसका प्रभाव
पड़ रहा है।
राजस्थान
में जिस व्यक्ति
की इन्कम 10
लाख रुपये है
उस पर सरचार्ज
है लेकिन जो
करोड़ रुपये
कमाने वाली
कम्पनियां
हैं, मैं आरोप
लगा रहा हूं
कि हिन्दुस्तान
के वित्त
मंत्री ने उन
कम्पनियों
की झोली में
बैठकर के आय
कर के इतिहास की
एक बड़ी
विसंगति कायम
की है। पहली
बार हिन्दुस्तान
के इतिहास में
ऐसा हुआ है।
करोड़ रुपये
की कमाई करने
वाली कम्पनियों
को सेस से
मुक्त कर
दिया और गरीब
आदमी जो
साधारण व्यक्ति,
व्यापारी 10
लाख रुपये
कमाता है उस
पर सरचार्ज लगाने
का प्रावधान
बजट में कर
दिया है। इतना
ही नहीं, यह
किस प्रभाव
में किया,
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
उल्लेख करना
चाहता हूं
आपके सामने।
आय कर अधिनियम
की धारा 292 (ख) में
संशोधन करते
हैं। संशोधन
क्या है?
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, आय कर
अधिनियम की
धारा 292 (ख) के पश्चात्
निम्नलिखित
धारा अन्त:स्थापित
की जाएगी।
संशोधन करें,
कोई तकलीफ
नहीं है। मैं
जो बात कहना
चाह रहा हूं, 1
अक्टूबर, 1975 से
लागू होगी।
मामला क्या
है? 292 (ग) में जहां
कोई व्यक्ति
लेखा बहियां,
अन्य दस्तावेज,
धन, बुलियन,
आभूषण, अन्य
मूल्यवान
वस्तु, चीज,
किसी तलाशी की
आस्तियां
दौराने व्यक्ति
के कब्जे या
नियंत्रण में
पाई जाती है
वो इस अधिनियम
के अधीन किसी
कार्यवाही की
उपधारणा की
जाएगी।
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं जो
आपसे निवेदन
करना चाह रहा
हूं..... (व्यवधान)
श्री
रामलाल
(बनेड़ा):
माननीय उपाध्यक्ष
जी, प्रहलाद
जी, थोड़ा
राजस्थान
सरकार का भी
ध्यान करो जो
डीजल पर डेढ़
रुपया
सरचार्ज लगा
रखा है। हिन्दुस्तान
के किसी भी स्टेट
में नहीं है।
आप इस पर भी
आकर्षित करो।
श्री
भागीरथ चौधरी
(किशनगढ़):
माननीय उपाध्यक्ष
जी, ये
प्रतिपक्ष
वाले बार-बार
टोक रहे हैं,
आपको पता है
कि हमारी
सरकार दिल्ली
में थी तब गैस
और ये, आपको
पता है गैस के
कनेक्शन
लेने में कभी
आपने सोचा है
कि आपकी जब
सरकार आती है
तो सब कुछ
बंटाधार हो
जाता है।
गरीब, गांव,
किसान और
मजदूर विरोधी
है आपकी सरकार।
आज दिल्ली की
सरकार आते ही
तबाही मच गई
है। गरीब को
दाल नसीब नहीं
हो रही है।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप बीच में
नहीं।
श्री
बद्रीलाल जाट
(कपासन):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, भ्रष्टाचार
बढ़ा है,
कालाबाजारी
बढी है, देश की
हमारी जो उपज
होती है उनकी
कमी मार्केट
में आई है। (व्यवधान)
श्री
भागीरथ चौधरी
(किशनगढ़):
कहते हैं कि
गरीब खाता है
दाल-रोटी
लेकिन
दाल-रोटी ही
नसीब नहीं हो रही
है। देश का क्या
हो रहा है? (व्यवधान)
आप खुश हो रहे
हो कि अगले
चुनाव में हम
जोर-शोर से आ
जाएंगे, आपकी
दिल्ली की
सरकार के
कारनामे आपको
डुबो देंगे।
(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
इसमें बीच में
नहीं।
श्री
भागीरथ चौधरी
(किशनगढ़): गैस
का क्या हो
गया पता है
आपको?
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
जिस बात को आज
रखना चाह रहा
हूं 1975 से लागू
होने की, आज भी
यह एक्ट का
प्रावधान
लागू है। किसी
व्यक्ति के
पास आय कर के
सर्वे के समय
कोई ऐसा कागज
मिलता है
Lpm/akt/1500/2j/2932007
जिसका
कोई जवाब नहीं
तो सात साल की
शास्ति उस पर
लगाई जाती है।
अब आपने कर
दिया 1975 से
लगाएंगे, किसी
के व्यापार
की उम्र 28 साल
नहीं हुई, 32 साल
व्यापार
करते हुए
जिसको 32 साल
नहीं हुआ कोई
कागज उसके पास
अनुत्तरित
मिल गया और आप
जिसके व्यापार
को 32 साल नहीं
हुई एक कागज
के टुकड़े के
आधार पर 32 साल
का टैक्स और
पेनल्टी
उससे वसूल
करोगे, इससे
बड़ा अन्याय
कोई करदाता के
साथ नहीं हो
सकता। करदाता
ईमानदारी से कर
का भुगतान
करता है औ देश
के भंडार भरता
है, खजाने
भरता है लेकिन
उस करदाता को
मोटिवेट करने
के बजाय कर
क़ानूनों में
सरलीकरण करने
के बजाय ताकि
वह ईमानदारी
से पैसा कमाकर
सरकार को पैसा
देने के बजाय
आपने उसका गला
पकड़ कर उसको
निचोड़ने का
जो कानून
बनाया है 1975 से
यह निंदनीय
था।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य
केन्द्र का
बजट पास हो
चुका है उसमें
ज्यादा आपको
टिप्पणी
करने की आवश्यकता
नहीं है।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): यह
जो भाषण है वह
राजस्थान
विनियोग
विधेयक,2007 का एक
भी शब्द उसके
बारे में नहीं
बोला है।
एक
माननीय सदस्य:
ललित किशोर जी
का जो भाषण था
वह इनको पकड़ा
दिया है।
श्री
उपाध्यक्ष:
आप बीच में क्यों
बोल रहे हैं?
श्री
टीकम चन्द
कान्त
(सिवाना):
उपाध्यक्ष
महोदय, केन्द्र
का हर कदम
प्रत्येक
प्रदेश को,
प्रत्येक
राज्य को
प्रभावित
करता है, उसका
बजट हमें
प्रभावित
करता है, यहां
के गरीब को
प्रभावित
करता है, स्वाभाविक
है जब बजट पर
कोई चर्चा हो
तो उसके अंदर
इसकी तुलनात्मकता
आनी ही चाहिए
क्योंकि
हमारा बजट
प्रभावित
होगा, राजस्थान
का एक-एक व्यक्ति
प्रभावित
होगा, गरीब
प्रभावित
होगा, ग्रामीण
प्रभावित
होगा जब भी
ऐसा अगर केन्द्र
का बजट रहा तो
हमारा कर्तव्य
बनता है कि
इसलिए हम यह
बात कहे और
अगर प्रतिपक्ष
यानी दूसरी
सरकार है
प्रतिपक्ष
वालों को उसके
प्रति
सहानुभूति है
तो उनको जाकर
के वित्तमंत्री
जी से कहना
चाहिए कि
राजस्थान का
गरीब इससे
त्रस्त हो
जाएगा।
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं एक
बात के लिए
भारत सरकार के
वित्तमंत्री
जी का आभार व्यक्त
करना चाहता
हूं कि उन्होंने
गेहूँ और चावल
को वायदा
कारोबार से
मुक्त कर
दिया, अच्छा
होता माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, तमाम
खाद्यान्न
और तिलहनों को
भी वायदा
कारोबार से
मुक्त करते,
वायदा
कारोबार के
कारण
बाज़ारों की
दरों में जो
फ्लेचिवलटी
बनती है,
रोजमर्रा की
चीजों के दाम
आसमान छूते
हैं लेकिन फिर
भी गेहूँ और
चावल को वायदा
कारोबार से
मुक्त करने
के लिए मैं
भारत के वित्त
मंत्री जी का
आभार व्यक्त
करना चाहता
हूं और आज
आपके माध्यम
से राजस्थान
सरकार की मुख्यमंत्री
जी से अनुरोध
करना चाहता
हूं कि हमने एक
गंभीर समस्या
है जिसकी ओर
ध्यान
दिलाना चाहता
हूं। विश्व
व्यापार
समझौते के तहत
हमने बहुराष्ट्रीय
कम्पनियों
को व्यापार
करने के लिए
लाइसेंस दे
दिये, बहुत
अच्छी बात है
हमारे पहले कई
अन्य
प्रांतों ने
यह लाइसेंस
दिये इसी आशा
और मंशा के
साथ कि किसान
का फायदा होगा
लेकिन उन प्रांतों
में चाहे वह
आंध्रा हो,
चाहे महाराष्ट्र
हो, किसानों
का फायदा हुआ
न हुआ लेकिन
किसानों की
आत्महत्या
की प्रवृत्ति
उन प्रांतों
में सबसे ज्यादा
बढ़ी है और यह
बात तो ठीक है
अपनी फसल को बेचने
के लिए किसान
के सामने खुला
बाजार मिल गया,
ऑप्शन मिल
गया लेकिन
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय,
कंपनियों के
वित्त का
दायरा बढ़ा है
इसलिए उनके स्टॉक
का दायर भी
बढ़ जाता है
और जब बड़ी
कंपनियों
अपना स्टॉक
बढ़ाती है तो
मांग और
आपूर्ति का
संतुलन बिगड़ता
है और इसका
सीधा का सीधा
प्रभाव गरीब आदमी
पर जाकर पड़ता
है।
इसलिए
मैं आपके माध्यम
से राजस्थान
सरकार से, माननीय
मुख्यमंत्री
जी से अनुरोध
करना चाहता
हूं कि केन्द्र
सरकार को वह
लिखे जरूरी हो
अगर कानून में
प्रावधान की
स्टेट इस
प्रकार का कोई
एक्ट बना
सकती है, भारत
सरकार इनकी स्टॉक
सीलिंग का
कानून बनाये,
बहु-राष्ट्रीय
कंपनियां
कितना स्टॉक
रख सकती हैं
और जब तक स्टॉक
सीलिंग का
कानून नहीं
बनेगा यह
बहु-राष्ट्रीय
कंपनियां
अपने स्टॉक
की मात्रा को
बढ़ाकर
एकाधिकार
करेंगी, मांग
और आपूर्ति का
संतुलन
बिगड़ेगा और
जब मांग और
आपूर्ति का
संतुलन
बिगड़ेगा तो
सबसे ज्यादा
प्रभावित
होगा...
श्री
टीकम चन्द
कान्त
(सिवाना): माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, गैट को
लाने वाले इस
देश में प्रवेश
करवाने वाले
और गैट के
कारण आज जो हम
भुगत रहे हैं
उसका पुरोधा
कहूं या
आमंत्रणकर्ता
कहूं माननीय
मनमोहन सिंह
जी थे।
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी):
बाजार दरों को
आम आदमी की
पहुंच के
अनुरूप रखने
के लिए स्टॉक
सीलिंग कानून
बनाना चाहिए
और माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, एक और
केन्द्र के
बजट में घोषणा
की है राष्ट्र
मण्डल खेलों
को बढ़ावा
देने के लिए
दिल्ली,
फरीदाबाद,
गुड़गांव,
गाजियाबाद के
होटलों को कर
मुक्त किया
जाएगा, स्वागत
योग्य कदम,
हमारी
लोकप्रिय मुख्यमंत्री
जी ने भी
पर्यटन और
होटल व्यवसाय
को बढ़ावा
देने के लिए
विशेष
प्रावधान किए
हैं और एक
होटल पालिसी
भी जारी की है
और माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, आप तो
जानते हैं
राजस्थान जो
हमारा मरू
प्रदेश है वह
हमारी
लोक-संस्कृति
और ऐतिहासिक
पहचान के कारण
देश का सबसे
बड़ा अन्तर-राष्ट्रीय
स्तर का
पर्यटन केन्द्र
बनता जा रहा
है, अच्छा
होता कि जो
देश के
अंतर-राष्ट्रीय
पर्यटन केन्द्र
के रूप में
हिन्दुस्तान
में विकसित हो
रहा है और ज्यादा
यह बढ़े,
राजस्थान की
सरकार की मंशा
के साथ भावना
जोड़ते हुए
भारत सरकार
राजस्थान के
होटल व्यवसाय
को भी कर
मुक्ति का
प्रावधान
करती तो निश्चित
रूप से सारे
राजस्थान की
जनता उनके इस
कदम का स्वागत
करती और
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, 2-3
छोटी-छोटी
बातों पर मैं
माननीय मुख्यमंत्री
जी का ध्यान
जो उन्होंने
बजट में जो
घोषणाएँ की है
उन पर करना
चाहता हूं यह
जो हमारी
योजना बनी
पंचवर्षीय
योजना, जिसमें
पैसा का जो
आवागमन है, सार्वजनिक
उपक्रम से 20,662
करोड़ रुपए,
उधार 25,948 करोड़,
राज्य के स्वयं
के संसाधनों
से 15,953 करोड़ और
केन्द्रीय
सहायता 5,858
करोड़ रुपए
चिंता का विषय
एक है माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, आज हम 18
करोड़ रुपए ब्याज
दे रहे हैं
रोजाना और जब
यह 5वीं
पंचवर्षीय
योजना समाप्त
होगी हमारी ब्याज
दर रोजाना की 22
से 23 करोड़
रुपए पहुंच
जाएगी और
इसलिए हमको
हमारे वित्तीय
संसाधन
बढ़ाने की
जरूरत है क्योंकि
जिस प्रकार की
स्थिति इसमें
है ऊर्जा पर
आपने बड़ा इन्वेस्टमेंट
36 प्रतिशत
किया है लेकिन
कृषि और सहायक
सेवाओं पर जो 1.85
का प्रोविजन
किया यह कमजोर
है, सुधार
करना चाहिए इस
पंचवर्षीय
योजना में कृषि
पर राशि के
प्रावधानों
को बदला जाना
चाहिए और हम
ईमानदारी से
जो विश्लेषण
इस पंचवर्षीय
योजना के बाद
निकल कर आ रहा
है जहां
पंचवर्षीय
योजना के बाद
भारत की विकास
दर 9 प्रतिशत
होगी, राजस्थान
की विकास दर 7.40
प्रतिशत
रहेगी। हम
भारत के माप-दण्डों
के अनुरूप अगर
खड़े हो जाए
तो हमको हमारी
समुचित
मुद्रा
बढ़ाने के लिए
कृषि पर भी
निवेश बढ़ाना
चाहिए। कृषि
पर पैसे का
प्रावधान
अधिक किया
जाना चाहिए 1.86
हमारी जीडीपी
का बहुत बड़ा
भाग कृषि है,
एग्री कल्चर
है और हमारी
आबादी का बहुत
बड़ा हिस्सा
जिसकी
आजीविका और
सारा का सारा
रोजगार अब प्लानिंग
कमीशन ने भी
पाँच साल पहले
अपनी एक रिपोर्ट
में कहा है अब
हिन्दुस्तान
में रोजगार के
साधन अगर कही
जनरेट करने
हैं तो डेयरी
फार्मिंग और
एग्री-कल्चर
है। इसलिए
हमारे एजेंडे
में ऊर्जा के
और पानी के
साथ-साथ
एग्रीकल्चर
को मोटिवेट
करके बहुत
बढ़ाने का भी
होना चाहिए
ताकि हमारी
विकास की दर
को हम जीडीपी
और सहारा
पूंजी बढ़ाकर
भारत के समकक्ष
लाकर 11वीं
पंचवर्षीय
योजना समाप्त
होते-होते हम
कर सके। ऐसी
उम्मीद मैं
राजस्थान की
मुख्यमंत्री
जी से करना
चाहता हूं।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, वैसे
तो सदन में
चर्चा करने का
विषय नहीं है
उपाध्यक्ष
महोदय जब मैं
यह बात कहना
चाहूंगा तो
शायद अभी
माननीय सदस्य
इस बात को
कहेंगे, आपने
भी फरमाया
केन्द्र का
बजट पारित हो
गया लेकिन मैं
जो बात आज राजस्थान
के सैकड़ों
किसानों के
सामने जो खड़ी
हो गई है उस पर
चर्चा कर रहा
हूं कि सरकार
भारत सरकार के
वित्तमंत्री
जी को पत्र
लिखे,
सीटीबीटी को
पत्र लिखे कि
जो अन्याय आयकर
विसंगति के
कारण हो रहा
है माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय पाँच
साल पहले आयकर
विभाग ने एक
आदेश जारी
किया है कि जो
होल्डिंग
रखेगा टेलीफोन
की होल्डिंग,
चार पहिया
वाहन की
होल्डिंग और
जिसके पास
किसी 25 हजार के
सदस्यता
वाली क्लब
मेम्बरशीप
होगी या हवाई
यात्रा करेगा,
उस व्यक्ति
को आयकर
विवरणी का
संधारण करना
पड़ेगा।
राजस्थान के
सैकड़ों
किसान
टेलीफोनधारक
है, राजस्थान
के सैकड़ों
किसान
चार-पहियाधारक
है और इन्कम
टैक्स ने
उनके टेलीफोन,
चार-पहिया
वाहन का
रिकार्ड लेकर
नोटिस देकर
उनका सर्वे
किया.. ........
Bhs/akt/29.3.07/15.10/2k
और
सर्वे करने के
बाद माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, आज
आप पता कर
लीजिये राजस्थान
के सैकड़ों
किसानों के
लाखों रुपयों
की पेनल्टीज
लगा दी कि आप
विवरणी ठीक से
दाखिल नहीं कर
पाए। आप अपनी
आय का ठीक से
उल्लेख नहीं
कर पाए जबकि
भारत के
संविधान में
एग्रीकल्चर
को सातवीं
अनुसूची में
दर्शाया है जो
केन्द्र का
सब्जैक्ट
नहीं है और
किसी भी
प्रकार से
केन्द्र
सरकार उसको
टैक्स के
परव्यु में
नहीं ला सकती
लेकिन इस
विसंगति के
कारण आज राजस्थान
के सैकड़ों
किसानों को,
मैं उसको
हजारों की
संख्या भी कह
सकता हूं,
पेनल्टी और
टैक्स की मार
झेलनी पड़ रही
है और इसलिए
इस पर भारत सरकार
के वित्त
मंत्री और
सीटीबीटी को
लिखा जाना
चाहिए कि जो
किसान केन्द्र
के आयकर के
परव्यु में आ
ही नहीं सकते
और जिसमें
केवल कृषि की आय
दर्शाने का ये
जो सरल फार्म
है इसके क्रम
संख्या 24 पर
लिखा है एड
एग्रीकल्चर
इनकम फार रेट परपजेज।
टैक्स का जो
स्लेब है वो
बढ़ाने के लिए
इन्कम टैक्स
में इसको
दिखाना जरूरी
है वरना
दिखाना भी जरूरी
नहीं है और आप
उन लोगों के
पेनल्टीज
लगाते जा रहे
हो।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, अब
मैं राजस्थान
की मुख्यमंत्री
जी से दो तीन
जो उन्होंने
बजट में
घोषणाएं की
हैं बहुत स्वागत
योग्य कदम और
बहुत राजस्थान
के लिए कल्याणकारी
साबित होंगी।
एक घोषणा की है
कि कृषि में पीएचडी
करने वाली
छात्राओं के
लिए दस हजार
रुपये तक की
वार्षिक
छात्रवृत्ति
दी जाएगी।
बहुत स्वागत
योग्य कदम है
लेकिन इसके
साथ मैं एक
अनुरोध करना
चाहता हूं कि
आज राजस्थान
के कितने
जिलों में, कितनी
स्कूलों में
एग्रीकल्चर विषय
पढ़ाया जाता
है । पचास
प्रतिशत
जिलों में एक
भी विद्यालय
में एग्रीकल्चर
विषय नहीं
पढ़ाया जाता।
मैं उम्मीद
करूंगा
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, कि
राजस्थान की
मुख्यमंत्री
जी जो इस बजट
में सैकण्डरी,
सीनियर सैकण्डरी
स्कूल खोल
रही हैं प्रत्येक
पंचायत समिति
मुख्यालय पर
अनिवार्य रूप
से एक एक
एग्रीकल्चर
के सब्जैक्ट
की स्कूल खोल
कर इस बात का
प्रावधान किया
जाना चाहिए।
दूसरी
बात मैं और
निवेदन करना
चाहूंगा कि
आपने जो
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय,
वेट धनलक्ष्मी
योजना लागू की
पैरा नंबर 22 और
वेट धनलक्ष्मी
योजना में
आपने लिखा है
कि वेट स्कीम
लागू होने के
उपरांत
उपभोक्ताओं
एवं
खरीददारों
द्वारा केश
मीमो पर खरीद को
प्रोत्साहित
करने के लिए
मैं वेट धनलक्ष्मी
नाम की एक
योजना आगामी
वित्तीय
वर्ष से
प्रारंभ करने
का प्रस्ताव
करती हूं। इस
योजना के तहत
सौ रुपये या
सौ रुपये से
अधिक के मूल्य
के माल वेट
इन्वोइस पर
लॉटरी द्वारा
उपभोक्ता को
उपहार दिया
जाएगा। बहुत
स्वागत योग्य
कदम है सौ
रुपये की इन्वाइस
पर देंगे। लोग
इन्वाइस
बनायेंगे
टैक्स का
दायरा
बढ़ेगा।
सरकार के पास
पूंजी बढ़ेगी
लेकिन माननीय
वित्त
मंत्री जी
बैठे हैं मैं
आपके माध्यम
से पूछना
चाहता हूं कि
जो आपने वेट
फार्म नं. 9ए
लागू किया है
उसमें उपभोक्ता
का नाम नहीं
है व्यवहारी
का नाम दर्ज
है। क्या आप
उस फार्म को
बदलेंगे
उसमें उपभोक्ता
का रखेंगे या
फिर उपभोक्ता
को लॉटरी में पार्टिसिपेट
करने के लिए,
आज राजस्थान
में तीन से
पाँच लाख व्यवहारी
पंजीकृत हैं
और सौ रुपये
की इन्वाइस
उसको जारी
होगी तो
रोजाना पचास
लाख इन्वाइस
जारी होगी, क्या
आप पन्द्रह करोड़
कूपन मंथली
प्रिन्ट
करवायेंगे? यह
योजना किस
प्रकार से व्यावहारिक
बनेगी इसके
बारे में भी
मैं उम्मीद
करूंगा कि
राजस्थान की
जनता के साथ
क्या
डिस्ट्रिक्टवाइज
प्लान में
लेंगे या किस
प्रकार से हम
कूपन जारी करेंगे
या फिर वेट
फार्म नं.9 में
उपभोक्ता का
नाम दर्ज करके
नया फार्म
जारी करेंगे? किस
प्रकार आधार
बनायेंगे? यह
भी मैं उम्मीद
करूंगा कि बजट
के समय माननीय
जो वित्त
मंत्री जी या
मुख्यमंत्री
जी जवाब देंगे
इस विषय में
जरूर प्रकाश
डालेंगे।
एक
और जो कमिश्नर
को आपने वित्त
विधेयक में जो
राजस्थान
सरकार के
उद्देश्यों
और कारणों में
सरकार की
शक्तियां
कमिश्नर को
देने का तय कर
लिया बहुत अच्छी
बात है।
फैसलों में
विलंब होता है
सरकार के पास
पत्रावली आने
में मंत्री को
समय होता नहीं
होता लेकिन
मैं इसमें दो
बात कहना
चाहता हूं
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, कि
अधिनियम की
धारा 21 की उप
धारा 3 राज्य
सरकार को
विवरणी प्रस्तुत
करने की तारीख
में बढ़ोतरी
करने या व्यवहारी
के, व्यवहारियों
के वर्ग द्वारा
कोई भी या
सशक्त
विवरणी फाइल
करने की
अपेक्षा से
अभिमुक्ति प्रदान
करने के लिए
सशक्त करती
है। बाढ़,
अग्नि या
दंगें इत्यादि
जैसे मामलों
में इस प्रकार
का आकस्मिक
घटित होता है
कि व्यवहारी
विहित समय
विवरणी दाखिल
नहीं कर
सकता । अपने
बहुत अच्छा
इसमें उल्लेख
किया है यह
पहले भी
प्रावधान था
कि कोई बाढ़,
दंगें और
उसमें अग्नि
की चपेट में आ
गया तो सरकार
की शक्ति जो
टैक्स
रिटर्न फाइल
करने की तारीख
बढ़ाने की और
तारीख बढ़ाने
के साथ-साथ
आपने कमिश्नर
को यह भी पॉवर
दे दी कि यह
जरूरी समझे तो
टैक्स भरे न
भरे, इस बात से
भी मुक्ति दे
सकता है। कोई
तकलीफ नहीं है
बहुत अच्छी
बात है लेकिन
मैं आपसे यह
निवेदन करना
चाहता हूं कि
बाढ़, अग्नि,
दंगें इत्यादि
में बाढ़,
अग्नि, दंगें
की बात तो समझ
में आती है
लेकिन इत्यादि
का आशय क्या
है? जब आप नियम
बनायें तो इस
बारे में स्पष्ट
उल्लेख करें
कि किस-किस
प्रकार की
परिस्थितियों
में कमिश्नर
को स्पेसिफिक
पॉवर होगी
वरना इस कानून
का कमिश्नर
के स्तर पर
कितना
दुरुपयोग
होगा इस बारे
में भी कल्पना
कर लेनी
चाहिए।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
कनक्लूड
करें।
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी):
कर रहा हूं।
दूसरी एक और
बात मैं कहना
चाहता हूं कि
राजस्थान की
मुख्य मंत्रीजी
ने इस बजट में
अंबार लगा
दिया और एक
सपना राजस्थान
को दिखाया है
कि पहली बार
किसी ने गरीब,
महिला,
नौजवान,
बेरोजगार,
आदिवासी के
साथ जुड़कर
विकास करने का
काम किया है
लेकिन दो चार
जगह जो विषय
बजट भाषण में
आया है कि हम
एनजीओ के माध्यम
से विकास करना
चाहते हैं।
मैं एक निवेदन
आपके माध्यम
से करना चाहता
हूं कि देश की
पृष्ठभूमि
में एनजीओ की
भूमिका ठीक
नहीं रही। भारत
सरकार में
कितने एनजीओ
काम कर रहे
हैं जो करोड़ों
रुपये की राशि
का आज किस
प्रकार से गबन
कर रहे हैं।
मुझे याद है
कि महामहिम
उपराष्ट्रपति
जब यहां राजस्थान
के मुख्यमंत्री
थे तो उदयपुर
के वन विभाग की
पन्द्रह
एनजीओज की
जांच करायी थी
वो एनजीओ कागज
में थी लेकिन
उनको संचालित
करने वाला व्यक्ति
कोई संसार में
नहीं था। मॉनिटरिंग
और उसके रजिस्ट्रेशन
की सुदृढ़ व्यवस्था
हो यह भी
निश्चित रूप
से आपकी इस
भावना में प्रकट
किया जाना
चाहिए और एक
अंतिम बात इस
बजट में बहुत
कुछ स्वागत
करते हुए वित्त
विधेयक ओर
विनियोग
विधेयक का,
अंतिम बात आज आपके
माध्यम से
मुख्यमंत्री
जी से विनती
करना चाहता
हूं और उम्मीद
करता हूं शायद वो
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
और कोटा संभाग
के सबसे बड़े
लघु उद्योग पर
कृपा करेंगी।
पिछले वेट एक्ट
में कोटा स्टोन
को चार
प्रतिशत और
साढ़े बारह
प्रतिशत की दो
प्रकार की स्लेब
में रख दिया । 15
एमएम से मोटे
पर चार प्रतिशत
और उससे पतले
माल पर साढ़े
बारह
प्रतिशत। इस
कारण हाड़ौती
का सबसे बड़ा
लघु उद्योग जो
लाखों लोगों
को रोजगार
जेनरेट करता
है जो लाखों
लोगों को
रोजगार देता
है वहां पूंजी
का निवेश बढ़
रहा है लगातार
इंडस्टीज आ
रही हैं। आज
रामगंजमंडी,
कोटा,
झालावाड़ में
मिलाकर एक
हजार से ज्यादा
कोटा स्टोन
की
फैक्ट्रियां
हैं। मैं
समझता हूं कि
कोटा के इस
सबसे बड़े लघु
उद्योग को
मोटीवेट करने
के लिए यह
वहां का पूंजी
आधार बन रहा
है कोटा का
मनी रोटेशन का
आधार बन रहा
है और वहां के
मजदूरों को
रोजगार का
आधार बन रहा
है इसलिए इसको
मोटीवेट करने के
लिए सारे के
सारे कोटा स्टोन
को चार
प्रतिशत की स्लेब
में रखा जाना
चाहिए। यही
बात कहते हुए
इस बहुत अच्छे
बजट वित्त
विधेयक,
विनियोग
विधेयक का
समर्थन करते
हुए, आपने
मुझे बोलने का
अवसर दिया
इसके लिए आभार
व्यक्त
करते हुए अपनी
बात को समाप्त
करता हूं
बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री
उपाध्यक्ष:
धन्यवाद।
श्री राव राजेन्द्र
सिंह।
श्री
राव राजेन्द्र
सिंह (बैराठ):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय,
सबसे पहले तो
आपका धन्यवाद।
आदरणीय उपाध्यक्ष
महोदय,
राजस्थान एक
विशाल प्रान्त
है। भौगोलिक
दृष्टि से
यहां
विसंगतियां
भी यहां अपनी
अपनी
विविधताओं
में मौजूद
हैं। इस समस्त
प्रदेश को
प्रगति के
मार्ग पर ले
जाना सरकार और
समाज दोनों के
लिए एक चुनौती
है । तीन वर्ष
से प्रजा के
आशीर्वाद से
जिस तंत्र को
प्रजातंत्र
के स्वरूप
में जिस
दक्षता से इस
चुनौती को स्वीकार
किया है मैं
आदरणीय मुख्यमंत्री
जी को इस बात
के लिए
साधुवाद देना
चाहता हूं। आदरणीय
उपाध्यक्ष
महोदय,
पिछले पचपन
साल से प्रत्येक
सरकार अपने
उत्तरदायित्व
का निर्वाह
करने के लिए
समस्त
प्रभावों ...
कैलाश 29.3.07
15.20 (1) 2l
से
इस जनता का
लालन पालन
करने की सत्यता
से चेष्टा
करती है । अगर
उन समस्त
सरकार का या
सियासी व्यवस्था
का इस सरकार
से तुलनात्मक
दृष्टि से अगर
हम एनलाइज
करना चाहे तो
ऐसी कौनसी
विशेषता है
जिसकी वजह से
हम यह बात महसूस
करते हैं और
हमें इस बात
का गर्व होता
है । उपाध्यक्ष
महोदय, आज
की सरकार, आज
का तंत्र, आज
की व्यवस्था
कोई महाजन का
बहीखाता नहीं
कि हरेक वित्तीय
वर्ष के
उपरांत हर
कारपोरेट
सैक्टर
आंकडों से
अपनी अर्थव्यवस्था
और अपनी
आर्थिक
स्थिति को
परिलक्षित
करता हो । कुछ
भावनाएं हैं,
कुछ
आंकाक्षाएं
हैं, कुछ
आशाएं हैं,
कुछ
अपेक्षाएं
हैं इनको हम
आंकडों से
नहीं कह सकते
।
( बजे)
(श्री
सुरेन्द्र
गोयल, सभापति,
पदासीन)
सभापति
महोदय,
मैं एक उदाहरण
देकर एक बात
आपसे निवेदन
करना चाहूंगा
किसी व्यक्ति
ने यह बात
पूछी कि आखिर
ऐसी कौनसी
विशेषता है इस
सरकार में कि
जिसके बारे
में आप सब
हर्षित और पल्लवित
महसूस करते
हैं । हमने
उनसे यह कहा
कि ऐसी बात
नहीं कि आज से
पहले कोई
सरकार रही हो
उन्होंने
जनता के प्रति
अपने उत्तरदायित्व
का निर्वहन
सही नहीं किया
हो । यह मान
लिया जाये कि
निवेश
पूर्ववर्ती
सरकारों ने भी
जनता की उन्नति
के प्रति किया, there was an investment in the shape of
funds.
तो आखिर हमने
क्या किया,
उस निवेश में
हमने विजडम आफ
एक्सपीरिएंस
लगा दिया । We invested with the wisdom of labour, with the
wisdom of reality. किसी ने यह
कहा है कि अगर
कोई दौलत के
साथ मेहनत लग
जाये तो उस
दौलत का अंजाम
और परिभाषा दोनों
बदल जाती है । That was the difference. They invested and they
achieved. We invested with the wisdom of reality, we invested with the wisdom
of dignity of labour. They passed their time. We are creating history. The
difference between the two is that. How you amplify it, how you define it, it
is up to you. किसी ने यह
पूछा कि ठीक
है और क्या
बात थी । आम
आदमी को राहत
महसूस हो, आम
आदमी राहत
महसूस करे,
आनंदित हो यह
बात पूर्ववर्ती
सरकारों में
भी कही ।
लेकिन आम आदमी
आनंदित हो,
राहत महसूस
करे और अंतर
आत्मा का जो
निवेश किया है
वह इस सरकार
ने किया है ।
जो आनंद अंतर
आत्मा से आता
है वह आनंद उन
सारे आनंदों
से ज्यादा है
जो सिर्फ अर्थ
संजन से नहीं
हो सकता,
भावनाओं से
नहीं हो सकता,
जागृति से
नहीं हो सकता
और चरित्र का
निवेश जब इसमें
हो जाता है तो
कहते हैं कि
आत्मा इस
तरीके से
पारदर्शित
होती है जिसको
हम यह कहते
हैं कि अंतर
आत्मा से छूटा
हुआ वह तीर
वाकई में जन
सामान्य के
मन को भेदता
है ।
किसी
ने कहा कि
आखिर इतनी
सारी स्कूलें
आपने भी खोली
पूर्ववर्ती
सरकारों ने भी
खोली थी ।
आखिर इन स्कूलों
के खोलने में
और आपके स्कूलों
के खोलने में
क्या अंतर था
। हमने कहा कि
इन स्कूलों
के माध्यम से
हम ज्ञान का
सृजन तो करा
रहे हैं,
पूर्ववर्ती
सरकारों ने भी
राजीव गांधी
पाठशालाओं के
नाम पर ज्ञान
का सृजन कराने
के लिये
पाठशाला तो
जरूर खोली लेकिन
चरित्र का
सृजन इन
पाठशालाओं को
जब हमने प्राथमिक
दर्जा देकर
सुव्यवस्थित
तरीके से यहां
अध्ययन की
कार्यशैली का
प्रतिपादन
किया तो हमने चरित्र
का निवेश किया
जो शायद उस पाठशाला
में पढने वाला
वह
विद्यार्थी
ग्रहण नहीं कर
रहा था । किसी
ज्ञान में अगर
चरित्र का निवेश
हो जाये तो वह
अपने आपको में
एक सर्वोपरि
हो जाता है ।
कहा
व्यापार, पंच
वर्षीय योजना
आती है,
वार्षिक योजना
आती है और हर
बार योजना का
आकार बढता है,
स्वाभाविक
है । अभी
राजगढ से आने
वाले सम्माननीय
प्रद्युम्न
सिंह जी ने भी
यह बात कही और
मैं इस बात को
महसूस करता
हूं लेकिन अगर
व्यापार में
कामर्शियल
एटीट्युट जो
होता है, जो कामर्शियल
निवेश होता है
उसमें नैतिक
मूल्यों का
समावेश हो
जाये तो उस व्यापार
का जो परिणाम
होता है वह
सिर्फ अर्थ
संचन नहीं
होता एक
सोशियल इक्नोमिक
कंस्ट्रक्शन
होता है । मैं
विस्तार से
तब बताऊंगा जब
सीडीएम का
आपको बताऊंगा लेकिन
बचपन से मैं
यह सुनता था
कि उदार
चरितानां वसुधैव
कुटुम्बकं न
तो मुझे समझ
में आता था कि
इसका मतलब क्या
है, इसका
अभिप्राय क्या
है लेकिन सूक्ष्म
परिभाषा में
यह बात समझाई
जाती थी कि
संपूर्ण
संसार हमारे
लिये एक
परिवार है
इसलिए अपनी चिंता
भी करनी
चाहिये और
संसार के उन
लोगों की भी
चिंता करनी
चाहिये और जो
कुछ भी हम कर
सके, चाहे हम
किसी भी
परिस्थिति
में हो, किसी
भी दशा में हो
हमें अपना उत्तरदायित्व
उनके प्रति
निभाना
चाहिये और
शायद जो क्लीन
डवलपमेंट
मैकेनिज्म
की बात इस बजट
भाषण में कही
है उसको
प्रतिपादित
कर के ही यह
बात कही गई है उदार
चरितानां वसुधैव
कुटुम्बकं की
परिभाषा को
हमने पूरा कर
के अपना
संसकारिक और
संस्कृति का
गौरव शास्त्रोचित
तरीके से हमने
पूरा किया है
।
किसी
ने कहा कि
साहब कालेज तो
पहले भी खोली
थी, साइंस की
फैकेल्टी
उनमें भी थी ।
आप भी मेडिकल
कालेज खोल रहे
हैं, मेडिकल
यूनिवर्सिटी
खोल रहे हैं
आखिर ऐसी कौनसी
बात है । डाक्टर
तो पहले भी
एमबीबीएस कर
के एमडी करते
थे और फिर स्पेशलाइज
के लिये जाते
थे । किसी ने
यह कहा कि अगर
साइंस के साथ
इंसानियत जोड
दी जाये तो उस
साइंस की
परिभाषा बदल
जाती है ।
डाक्टर पहले
भी थे, आप और हम
जो यह बात आज
कह रहे हैं कि
रूरल हैल्थ
सर्विसेज के
नाम पर डाक्टर
को गांवों तक
भेजने की जो इंसानियत
के स्वरूप
में हम पहल कर
रहे हैं इसमें
यह कहा जाये कि
साइंस के साथ
साथ हमने इंसानियत
का निवेश किया
। मैं निवेश
शब्द इसलिए
इस्तेमाल कर
रहा हूं कि
बजट की वोकेब्लरी
में कहीं कोई
मुझे यह नहीं
कह दे कि आखिर
आप बात किसी
चीज की कर रहे
हो । The budget
is all bout investment and ‘appropriation’ is all about spending. क्योंकि
सरकार की व्यवस्था
के बारे में
चर्चा हो रही
है इसलिए
सिर्फ नंबर से
बात नहीं हो
सकती । व्यवस्थाओं
के साथ साथ
भावनाओं के
साथ जब बात
होगी तब जाकर
कहीं उस नंबर
की या उस
अक्षर की
सार्थकता है ।
आखिर
में मैं एक
निवेदन करना
चाहूंगा कि
प्रजातंत्र
में सरकार का
प्रतिपादन
राजनीतिक
उद्देश्य के
परिपूर्ण
चरित्र के साथ
प्रतिपादित
होता है और हर
सरकार का कोई
न कोई
राजनीतिक
एजेंडा होता
है । लेकिन
अगर राजनीतिक
एजेंडा में
सिद्धांत का
निवेश हो जाये
तो वह राजनीतिक
एजेंडा वास्तविक
मानव छवि को
चरितार्थ कर
देता है । इन
सारे निवेशों
के साथ अगर
इसको एक
सूत्रधार में
बांधा जाये तो
यह कहना कतई
अनुचित नहीं
होगा कि अगर
इस सरकार का आकलन
इन शब्दों से
किया जाये कि
जनप्रतिनिधि
का वास्तविक
चरित्र उसके
परिणाम और
उसके कर्म पर आधारित
है और अगर
इनका समावेश
किसी सरकार
में देखते हैं
तो वर्तमान
में आदरणीय
वसुंधरा जी की
सरकार में
इसका निवेश
दिखता है ।
इसलिए हम यह
कहते हैं कि
कुछ हम में और
आप में फर्क
है । मैं एक
निवेदन करना
चाहूंगा कि
करुणा जनित
सहानुभूति का
उद्देश्य जनप्रतिनिधि
का सहज धर्म
है । पर
दुखार्दता
एवं परोपकार
में संलग्नता
उसका
क्रियात्मक
प्रतिफलन है ।
जन सामान्य
की व्यथा और
वेदना के
समाहार के
लिये जब उच्च
और पवित्र
मनोभावों से
प्रेरित,
प्रभावित और
संचालित होकर
पुण्य आत्माएं
और परोपकारी
जीव संग बंध
होते हैं और सामाजिक
संताप के
परिहार के
लिये सकारात्मक
कार्यक्रमों
का सृजन करते
हैं ....
ans/akt 15.30
2m 29.3.2007
तब जाकर कहीं प्रजातंत्र के वास्तविक स्वरूप का उदय होता है जो इस सरकार ने पिछले तीन वर्षों के अंदर यह पूरा करके आज यह कीर्तिमान स्थापित किया। आदरणीय सभापति महोदय, मैं एक बात निवेदन करना चाहूंगा कि 21वीं शताब्दी की यह सरकार आमजन को रोटी कपड़ा और मकान की परिभाषा तक सीमित रखेगी या उसका कहीं दायित्व उससे भी ज्यादा है, उससे भी परे किसी परिधि तक पहुंचने का है। आदरणीय मैं निवेदन करना चाहूंगा, एक छोटा सा उदाहरण दूंगा कुछ महीने पहले आदरणीय राष्ट्रपति महोदय का एक वक्तव्य था 21वीं शताब्दी के अंदर 2020 और 2030 के दशक के बीच के अंदर भारत का क्या स्वरूप कैसे प्रदान होगा और क्योंकि भारत के संघीय स्वरूप में राजस्थान का एक विशेष स्थान है और राजस्थान के विशेष स्थान के अंदर जो राजस्थान की अर्थव्यवस्था है और जिस तरीके से आंकी गई। है उसमें गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के जो आंकड़े हैं, क्योंकि हो सकता है कि राजस्थान गवर्नमेंट अगर यह आंकड़े दे तो कहीं न कहीं इसके ऊपर प्रश्न चिन्ह लग जाए। गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की तरफ से जो आंकड़े हैं वह यह है कि “With the Net State Domestic Product of 12.5 billion, Rajasthan’s economy is today the eighth largest economy of the country.” This is of Government of India’s website. “During the decade ending 2005, the State’s NSDP..” That is again the Net State Domestic Product. “… grew at a compoundable average growth rate of over 6 per cent, increasing from US $ 6.5 billion to $ 12.5 billion.” यह हम नहीं कह रहे, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंस की स्टेटिक्स कह रही है. “Rajasthan’s per capita income which stood at US $ 327 today stands at 522.” It is a quantum leap. “Industrial sector has grown by 6.9% and services by 7.4%. The GSDP stands at over 16%.” स्टेटिक्स गवर्नमेंट आफ इंडिया की है। अब अगर इसके साथ में जो आदरणीय राष्ट्रपति जी ने कहा वह जोड़ लिया जाए तो शायद हमें यह पता पड़ेगा कि आखिर राजस्थान सरकार का दृष्टिकोण क्या है, क्योंकि अंग्रेजी में है इसलिए I am forced to read it. “I have studied India’s scientific and technological work after independence. There has been some excellent areas of basic research in every advanced topic, right from 1950s to 1960s. For example, we had excellent work on aero science, material science and also excellent work on semi conductor research. Some world class scientists published papers also later in the liquid crystal display … areas of some original work was done by Raman Research Institution. We should now work to realise the world class material.” बाद में वह लिखते हैं – “However, when one studies the technology in commercial aspect of these areas, results have been not very commensurate. ऐरो स्पेस डवलपमेंट बहुत कम किया। एल सी डी, आज की तारीख में आप टी वी खरीदते हैं और यह पूछते हैं कि प्लास्मा है या एलसीडी है1 इसके बारे में जब आप बात करते हैं करें। यह रिसर्च हमारे यहां हुआ लेकिन इसके कामर्शियल यूटिलाइजेशन के लिए हम ऐसी कोई बात नहीं कर सके कि रिसर्च का कामर्शियली वायबल कर ले इसलिए ताइवान जैसे देश, कोरिया जैसे देश एलसीडी यह स्क्रिन बेच रहे हैं। ऐरोस्पेस में हमें आज तक एरोप्लेन और हैलीकाप्टर बाहर से खरीदने पड़े। 20,30,40 साल पहले जब इनकी स्पेस रिसर्च हुई थी क्योंकि कामर्शियल वायबिलिटी को हम जन्म नहीं दे पाए इसलिए जो रिसर्च हमने की वह हमारे यहां अर्थ संचन के काम में नहीं है। वह समय था निकल गया। उनका यह कहना है कि अगर आज हमें यह चीज करनी है तो .. “We never produced an indigenous aircraft until very recently. Also we have missed the micro electronic revolution of the 1970s. Similarly, in liquid crystal display, Taiwan and South Korea have become world leaders in commercial production of these things.” इन सारी चीजों का अगर हम ध्यान रखे तो it is indicating now, वह समय निकल गया जिसका जो समय था अगर उस वक्त हम पीछे रह गए तो हमें इस बात के लिए मायूस होने की जरूरत नहीं है – “Now we should not repeat the same mistakes but venture into nano-technology and the conversion of nano-technology with ICT and BT and do it.” और इस बात के लिए मैं यह निवेदन करना चाह रहा हूं कि जिस सरकार की हम बात कर रहे हैं बायो टैक्नोलोजी, माइक्रो टैक्नोलोजी, नेनो टैक्नोलोजी, कार्बन कैरिज जिसकी बात जिसकी सोच कभी किसी सरकार के आस पास नहीं थी हम न तो इसकी यह बात कर रहे हैं कि हम सिर्फ सोच रहे हैं। इसको करके, लागू करके राजस्थान को इसका अर्थ संचन भी मिले सिर्फ एक रिसर्च लेबोरेट्री न हो। रिसर्च लेबोरेटरी से कामर्शियल प्रोडक्शन भी हो इसके लिए हम कटिबद्ध है।
श्री सभापति: कृपया आप कनक्लूड करें।
श्री राव राजेन्द्र सिंह (बैराठ): वह तो मैंने, राठौड़ साहब का इशारा मैंने देख लिया। वैसे भी इन्होंने मुझे पिछले सात दिन से लगातार आगे करते करते आज तक ले आए। आज भी मैं तो चाह रहा था कि मेरे को चौथा-पाँचवाँ नम्बर पर बोलने को दे दिया जाए तो मुझे कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि बोल कर अपनी व्यवस्था को प्रतिष्ठापित करने की आदत मुझ में नहीं हे। अगर मैं कहीं इर्रिलेवेंट बोल रहा हूं और किसी चीज से बाहर बोल रहा हूं तो आप मुझे टोक दे। बहुत बड़े-बड़े लोग बाग़ बैठे हैं टोक दे, मुझे कोई बात नहीं है।
श्री सभापति: आप बिल्कुल रेलेवेंट बोल रहे हैं।
श्री राव राजेन्द्र सिंह (बैराठ): लेकिन संसदीय मंत्री से इतना संरक्षण तो यह चाहता हूं कि आपकी सोशल जाति का हूं इसका मतलब यह तो नहीं कि मेरा कोई हैण्डीक्रेप हो गया। आप फरमाए तो मैं तो कन्क्ल्यूड कर दूं।
श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): हम आपको सुनने ही आए हुए हैं। (व्यवधान)
श्री राव राजेन्द्र सिंह (बैराठ): I am not habitual of going against the rulings of the Chair.
श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): हम तो आपको सुनने के लिए ही बैठे हैं।
श्री राव राजेन्द्र सिंह (बैराठ): If he feels that I have overstepped my limits, I will pull back. …(व्यवधान) .. ऐसा है परमीशन मैं वहां से लूंगा, आपसे तो लूंगा नहीं। आपका तो एक्शन if that is converted into words, I have got the message. सभापति महोदय, मैं ज्यादा नहीं लूंगा because I don’t want to unnecessarily embarrass or harass anyone. दो-तीन चीजें हैं, आदरणीय वित्तीय राज्य मंत्री बिराजे हुए हैं । मैं सिर्फ दो-तीन चीजें नहीं समझ पाया क्योंकि इसमें हो सकता है कि बात मेरी समझ से परे हो।
एक तो हमने वैट के माध्यम से 4 प्रतिशत का जो पैकेजिंग मैटेरियल का हम टैक्स एक्सपोर्ट ओरियंटेंड यूनिट से ले रहे थे उसको हमने मांफ करने की बात, जहां तक मेरी जनरल नॉलेज है, I am subject to correction, I am not an authority to talk about it. This facility is already being availed by the exporters. इसको वापस क्यों रिप्रडयूज किया गया है यह मुझे नहीं मालूम।
दूसरा, पैरा 197 में, this is also subject to correction, जो कुछ मैं समझ पाया हूं इसका, वर्तमान में आढ़तियों द्वारा प्रिसिंपल का माल बेचने पर वेट चुकाने का दायित्व आढ़तियों का है जबकि इस माल का इनपुट टैक्स क्रेडिट प्रिसिंपल को मिलता है, अब नियमों में संशोधन कर माल पर वैट चुकाने का दायित्व भी प्रिसिंपल का किया जाना प्रस्तावित है ताकि आढ़तियों को रिफण्ड की समस्या, अब आढ़तियों को जहां तक मैं समझता हूं प्रिसिंपल तो फार्मर है। इसमें अगर और कोई कामर्शियल या टैक्नीकल लैंग्वेज है जो हम नहीं समझ पा रहे है, आढ़तिये तो मण्डी में है और मण्डियों में लाने वाला माल जो प्रिसिंपल है वह फार्मर है या एग्रीकल्चरिस्ट है, आप उसको वैट के कानून में लाना चाहते हैं वह वैट के इनवाइसेज रखेगा वह वैट के…. I don’t know, I fail to understand. In case this is something different from what I have said, I can correct it on that. यह दो चीजें ऐसी थी जो मुझे लगा जो ईपीसी की रिपोर्ट आई 2006 की उसमें बायोफ्यूल रूरल डवलपमेंट में बायोफ्यूल और दूर दराज के गांवों को सोलर एनर्जी से उनको इलेक्ट्रिसिटी पहुंचाने का है।
दुर्गा/त्रिपाठी
290307 1540 2n
75 remote villages have been electrified by RREC through 10 kw to 20 kw stand alone solar photo-voltaic systems. फोटो वोलेटिक सिस्टम के जो सेल्स हैं, their capacity is only 15 per cent. मैं इसलिये यह बात फिर कर रहा हूं कि हम क्योंकि सोलर रिन्यूएबल एनर्जी हैं, दो चीजें, फिर सोलर एनर्जी से अगर हम बिजली पैदा कर रहे हैं तो सी.डी.एम. के अन्दर हम क्वालिफाई कर रहे हैं। क्योटा प्रोटोकाल के उन नार्म्स को हम क्रेडिट करवा सकते हैं लेकिन जैसे टेक्नालाजी है, मैं फिर वहीं जाऊंगा कि अगर मैं टेक्नालाजी, जिसके आधार पर हम बिजली पैदा करके या सोलर बिजली को हम गांव तक पहुंचा रहे हैं, जिस टेक्नालाजी को हम यूज करना चाह रहे हैं उसमें इतना करना चाहूंगा कि keeping this requirement in mind, can we find an innovative solution for the use of nano-technology, using higher efficiency CNT based solar photo voltaic cells? अगर यह सी.एन.टी. कोटेड, कार्बन कोटेड अगर वोलेटिक सेल्स हैं, जो कि नहीं हैं, इसमें जो एनर्जी को कंजर्व करने का रेशो है, the efficiency is 45 per cent. उनमें 20 प्रतिशत है, 25 प्रतिशत है, आप खेंच लेंगे तो 30 प्रतिशत होगा। क्योंकि हम इसमें वेंचर कर रहे हैं, क्योंकि यह एक ऐसा सोर्स आफ एनर्जी है जिसकी पर्सेण्टेज ग्लोबल स्ट्रेन्थ पर, और आपके नेशनल स्ट्रेन्थ पर सिर्फ एक प्रतिशत है, बाकी जितनी एनर्जी प्रोड्यूस हो रही है और बगैर इलेक्ट्रिसिटी से आप 21वीं शताब्दी की कल्पना नहीं कर सकते हैं। Everything in the next decade or so will be based on electricity. But if the power you are producing is through renewable energy sources, you get credits into carbon market also और C.E.Rs. जो सर्टिफाइड इमेशन रिडूयसर्स हैं, उनकी परिकल्पना है कि जो 10 ट्रिलियन डालर्स का बिजनस है, जिसमें भारत का शेयर 12.5 प्रतिशत से 15 प्रतिशत के बीच में होगा, हालांकि चायना उसमें से 47 प्रतिशत लेकर जाएगा। उसमें से डेढ़ ट्रिलियन डालर्स का ट्रेड सिर्फ कार्बन क्रेडिट लिस्ट में होगा। यदि आपने यह गांव-गांव में प्रस्थापित कर दिये और सी.एन.टी. बेस कर दिये तो वह सारा का सारा क्रेडिट आप वापस रिफंडलिंग करके और गांव के विकास में रुरल डवलपमेंट में आप ले जा सकते हैं। This is one technology which probably Minister of Forests and Environment will need to go into. दूसरा, सेफ वाटर, आज मंत्रीजी मौजूद नहीं हैं, फ्लोरीन से कंटेमिनेटेड डिटोक्सीकेटेड डिसेलिनेशन, इसके लिये 50 प्रतिशत ऐसे उपभोक्ता हैं जो इस तरीके का पानी पी रहे हैं। कार्बन नेनो टयूब्स के फिल्टर प्लाण्टस, आप बना रहे हैं, आप लाएंगे, आप कह रहे हैं हम फ्लोराइड की कमी के लिये, डाक्टर साहब भी यहां पर विराजे हुए हैं, हर चीज के लिये, मैं डाक्टर साहब को एक निवेदन और करना चाहूंगा अभी मैं सुबह कोई चीज दिखा रहा था, अगर आपने इस चीज को, लेकिन आप यह करेंगे कैसे। अगर आपने विदेश से यह टेक्नालाजी लेंगे तो पेटेण्ट तो वह यू.एस.ए. में हो जाएगी और कामर्शियल प्रोड्यूस आपके यहां आएगा, मतलब you will have to pay through your nose. आ सिर्फ कंजूमर मार्केट हो जाएंगे। इस चीज के नीचे के लिये, रिसर्च के लिये आपको अलग से फण्ड क्रियेट करना पड़ेगा। यह रिसर्च भी यहां हो, यह पेटेण्ट भी राजस्थान में बने और राजस्थान से ही इसका कामर्शियल प्रोडक्शन चालू हो, जिसमें आपको तो फायदा हो ही हो, आपकी जनता को तो फायदा हो ही हो। आपकी अर्थव्यवस्था में भी चार चाँद लग जाएंगे। इसमें एक नेनो सांइस टेक्नोलाजी कंसोरिटम, which is at the national level and international level. The Government of Rajsthana should get itself accredited to this. आपको एक्रेडिटेशन मिल जाएगा। जितने आपके रिसर्च हो रहे हैं, इतन रिसर्च को ग्राण्ट की फंडिंग भी होगी. There are big trusts and NGOs who are prepared to do it. एक बात यह कह रहा था कि पेस मेकर हार्ट-पेशेंट्स के लिये लगता है और पेस मेकर सेल से चलता है। एक इजहार किया है इन्होंने जो आपके अभी एक्जीबिशन आफ सांइस कांग्रेस हुई थी उसमें कहा, through CNT tubes, pacemakers can work from the energy derived from the blood. हर ह्यूमन बीइंग में ब्लड है। ब्लड के फ्लो से जो एनर्जी आयेगी उससे वह पावर जनरेट कर लेगी और वह पेस मेकर उससे चल जाएगा। आपको बिजली के सेल से उस पेस मेकर लगाने, लाखों लोग आज की तारीख में इस बीमारी से ग्रस्त हैं, पेस मेकर लगवाते हैं, बारबार उसके सेल बदलाने का और दुनिया भर की चीजों का झंझट होता है। और यहां तक हिदायत दे दी जाती है कि सेल्यूलर फोन मत रखो। बिजली के खटके को ज्यादा सीधा हाथ नहीं लगाओ। अगर आप इस चीज को कर लेंगे तो यह भी एक अपने आप में है because these are the fields where innovations are involved and where initiation is required. अगर आप यह ले लेंगे जो ऐरो-स्पेस के सामने जो प्रसीडेंट आफ इण्डिया बात कर रहे थे, वह नहीं होगी। आपकी अर्थव्यवस्था पूरी तरीके से जाएगी।
(समय-समाप्ति-सूचक-घण्टी)
सभापति महोदय, आपकी लिबर्टी का मैंने बहुत ज्यादा अनुचित फायदा उठा लिया। एक बात मैं जरुर अर्ज करना चाहूंगा. This is directly related again to the revenue of this State. आपने महाराष्ट्र के अन्दर आपका जो सबसे बड़ा रेवेन्यु सोर्स है वह कामर्शियल टैक्सेज के माध्यम से है। और कामर्शियल टैक्सेज के अन्दर जो सबसे बड़ा सोर्स है, वह पेट्रोलियम प्रोडक्टस हैं। मैंने एक प्रश्न किया था, जिसका उत्तर आया। बड़ी विचित्र सी बात है, आल इण्डिया ग्रोथ स्टेण्डर्ड एवेरज 6 प्रतिशत के आसपास है, 5.5 आ जाती है, 6 हो जाती है। आपकी ग्रोथ जो राजस्थान की है, 2002 में ढाई प्रतिशत थी, 03-04 में 3.2 है, 04-05 में 2.7 है, 04-05 के पहले 3 महीने में 2.8 है और आखिरी में -4.5 हो गयी। रेवेन्यु के जब यह स्टेस्टिक्स देंगे तो उसमें बढ़ोतरी आयेगी। क्योंकि जब रेट बढ़ जाएगी तो अपने आप ही रेवेन्यु बढ़ गयी लेकिन ग्रोथ इन लीटर्स आपकी घट गयी। और आपके बगल वाले, अगर हरियाणा को ले लें तो उसकी ग्रोथ रेट जो आयी है, 13.2 प्रतिशत। आपकी इस साल बढ़ी है 6.2 प्रतिशत लेकिन 4.7 पर पहले माइनस हुई फिर उस से यह 6.2 प्रतिशत हो गयी, यानी एक्चुअल ग्रोथ रेट तो 2 प्रतिशत ही हुई और हरियाणा ने अपनी पिछली ग्रोथ रेट से साढे 13 प्रतिशत, 13.6 प्रतिशत की की है। यह आप ही का तो पेट्रोल है जो आपका आदमी हरियाणा जाकर ले रहा है। महाराष्ट्र में, इसमें यह प्राब्लम थी, उन्होंने करेक्ट कर दी। मुंबई, थाने और न्यू मुंबई का रेट रखा 28 प्रतिशत, बाकी का रखा 25 प्रतिशत। जब ड्यूल टैक्सेशन पालिसी महाराष्ट्र में हो सकती है, it’s a developed State तो यह पालिसी हम क्यों नहीं अडोप्ट कर सकते हैं। आप जोनल ब्लाक्स कर दें, जो नेबरिंग ब्लाक्स हैं उन ब्लाक्स की रेट अलग कर दें जिससे कम से कम वह आदमी बाहर नहीं जाए और रोज पकड़े जाते हैं, सैंकड़ों कृषक वहां से जाते हैं और ड्रमों के अन्दर डीजल भरकर लेकर आते हैं। बेरियल पाइण्ट से वह डीजल बिकता है। स्पुरियस डीजल होता है। आपकी रेवेन्यु लॉस हो रही है। और अगर यह रेवेन्यु लॉस है, हमें देखनी हो तो फिर एक अलग बात है। गवर्नमेंट आफ इण्डिया का एक सर्कूलर और आ गया है। आदरणीय मंत्रीजी, खाद्य आपूर्ति मंत्रीजी नहीं हैं, बेरियल पाइण्ट्स को बंद करने की इन्होंने कह दी है। अब आप बेरियल पाइण्ट बंद कर देंगे तो आप लोग, कारपोरेट सेक्टर आ रहा है इसमें। आई.ओ.सी. ने साढे तीन हजार आउटलेट्स बेरियल पाइण्ट की जगह तैयार करने के लिये पूरा नक्शा भी बना दिया है। एच.पी.सी. भी फालो करेगा, आई.बी.पी. भी फालो करेगा। जब बेरियल पाइण्ट को कारपोरेट वर्ग लेने जा रहा है, आप भी कर दो। एक काश्तकार को ईमानदारी से कमाने का कर दो। कारपोरेट वर्ल्ड वहां जाएगा, इससे तो बेहतर है कि अपने स्तर पर, क्योंकि लाइसेंसिंग आथोरिटीज सिविल एण्ड पेट्रोल सप्लाई गवर्नमेंट आफ राजस्थान है। अगर यह ले लेता है तो उसकी ग्रोथ आपकी हो जाएगी, किसी को ईमानदारी से, क्योंकि कोई राशन की दुकान से ईमानदारी से नहीं कमाकर खा सकता है। लेकिन अगर किसान विकास केन्द्र के नाम से अगर यह लग जाएंगे और यहां बेरियल पाइण्ट है वहां यह लग जाएगा, इसके साथ में चार चीज और क्लब की है। सभापति महोदय, मैं दो मिनट और लूंगा। इसके साथ में उन्होंने जो क्लब किया है, सर्टिफाइड सीड, सर्टिफाइड फर्टिलाइजर एण्ड पेस्टिसाइड, तीन चीजों को इसके साथ और क्लब किया है। तो यह तो एक ऐसी चीज है जो आप कर सकते हैं। कारपोरेट आइल कम्पनी अपने स्तर पर बैठकर मनमाने तरीके से इस चीज को दे रही है, उनकी अपनी फैसेलिटीज हैं, वह कैसे कम्प्रोमाइज होती है, उसके बारे में मैं ज्यादा बखान नहीं करना चाहता हूं। लेकिन अगर गवर्नमेंट आफ राजस्थान यह करने लग जाए तो एक आम आदमी, जिसको आज व्यवसाय की आवश्यकता है, स्वाभिमानपूर्वक जो व्यवसाय करना चाहता है, उसको आप यह करके बैठा दीजिए। वह और उसका परिवार आये दिन आपको वाह-वाही देता रहेगा।
Vps-usc-29032007-1550-2o-1
इस चीज को अगर, यह मालूम नहीं कि जब ऐसी कोई बात आती है तो why does the bureaucracy develop butterflies in the stomach? किसी आदमी को कोई लेना पड़ेगा, उसमें अगर कहीं कोई गलती हो जाए तो it is always… मैं तो एक किसी ने कहा है कि अगर हमको कुछ करना है तो you will have to take risks. And if you don’t take risks, you will be nowhere. और आखिरी में एक बात निवेदन करना चाहूंगा वैट के अन्दर आपने चार परसेंट पेकेजिंग मैटीरियल जो आप दे रहे हो वह तो आपने कर दिया। इस वैट के अन्दर 12.5 परसेंट आप टैक्स उनसे कलेक्ट कर रहे हो जो हंड्रेड परसेंट एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स हैं, जो नोएडा के सेज में रजिस्टर्ड है वह तो एक भी पैसा नहीं दे रहे हैं वहां से सर्टिफिकेट ले आएंगे। आपकी टोटल स्ट्रेंथ की पाइंट जीरो फाइव परसेंटेज रजिस्टर्ड है वहां और आपकी खुद की जो यहां हंड्रेड परसेंट एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स हैं, पहले आप उनसे कहते हो कि 12 परसेंट जमा कराओ। 12 परसेंट जमा कराने के बाद में तीन महीने के बाद जब उनका कंटेनर जाता है तब वे अपनी इंवाइसेज रेज करते हैं। इंवाइसेज रेज करके फिर आपको वे देते हैं। फिर एक महीने में या तीन महीने में आप रिफंड करते हो और क्योंकि उनको यह रिफण्ड नहीं मिला और उनकी इंवाइस रेज नहीं हुई तब तक उनको जो रॉ-मैटीरियल सप्लायर है वह भी इस कंसेशन का लाभ नहीं उठा सकता। तीन महीने तक उसका भी 12 परसेंट जमा रहता है। यह छोटे-छोटे लोगबाग हैं जो रॉ-मैटीरियल सप्लाई करते हैं और सब अन-आर्गेनाइज सेक्टर के अन्दर 8 से 10 लाख लोगबाग हैं जो इससे रोजगार कमा रहे हैं। I am not talking about these industrialists or these export houses but those people who are directly or indirectly dependant on these things. तो नोएडा में 1 परसेंट आप ले रहे हैं। आप 1 परसेंट लेकर छोड़ दो इनको। वे आपके कॉमर्शियल टैक्सेज के आफिस में जाएं, तीन महीने के बाद में इंवाइस रेज करवायें। इन्वाइस रेज करके पेश करें और फिर रिफण्ड के लिए चक्कर खाता फिरे इसकी क्या आवश्यकता है? और अगर वह एक्सपोर्ट अगर कर रहा है तो इस भारत के लिए ही तो विदेशी मुद्रा लेकर आ रहा है और जब लेकर आ रहा है तो इसमें प्रॉब्लम किसको है? आप इसको तीन महीने बाद छूट दे रहे हैं। आप दे दें और एक बात मैं तो कहते-कहते परेशान हो गया। पता नहीं किसी को समझ में आती है या नहीं आपने लोजेस्टिक पार्क क्यों नहीं बनाया ऐसा? जब वैट आ गयी, उसके बाद में यह जो हर रीजन पर, हर स्टेट में जो सी.एण्ड एफ. एजेंट्स हैं, यह खतम हो जाएंगे। सिर्फ रीजन्स में बट जाएगा। नोर्थ, वेस्ट, साउथ एण्ड ईस्ट और जो फर्स्ट स्टेज पर लॉजेस्टिक पार्क होगा, वह फर्स्ट स्टेज का जो लॉजेस्टिक पार्क है वह टैक्स लेता है। वैट का सारा टांजेक्शन टैक्स और जिस स्टेट में जाकर, जब वह वापस बिकता है तब वह वहां से वापस डिमांड रेज करता है। तीन-तीन महीने तक, चार-चार महीने तक आपके पास में बगैर इण्ट्रेस्ट का फ्लोटिंग केपिटल रहेगा। यह आये दिन चर्चा होती रहती है कि कभी हमको ओवरड्राफ्ट नहीं लेना पड़े। हम लोग यह कहते हैं कि हमने ओवरड्राफ्ट नहीं लिया। पिछली सरकार ने कई बार ओवरड्राफ्ट लिया। आपके पास में आपके खुद के एनुअल प्लान का फ्लोटिंग केपिटल क्रिएट हो जाएगा। तीन महीने बाद, चार महीने बाद जब वह डिमांड रेज करेगा तब आप जाकर उसको दोगे वरना आपके तो फर्स्ट पाइंट पर आपको टैक्स मिल गया, उसका कम्पलशन है, वह देगा यहां और जब वह रेज करेगा इंवाइस तब लेगा।
आदरणीय सभापति महोदय, कहने को तो बहुत कुछ था लेकिन अब आपकी जैसी मर्जी, एक बात क्योंकि आदरणीय माथुर साहब एक बात फरमा रहे थे ... (व्यवधान)
श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): नहीं-नहीं, आप बोलिये। आपको सुन रहे हैं हम ... (व्यवधान)
श्री राव
राजेन्द्र
सिंह (बैराठ):
एक मैं निवेदन
करना चाहूंगा इसमें,
मेरी कोई गलती
हो सकती है।
आपने रिफाइनरी
के लिए फरमाया
कि रिफाइनरी
के अन्दर
कामर्शियल
पोटेंशियलिटी
इतनी है कि
अगर हम ग्लोबर
टेंडर इंवाइट
करें तो there are
larger players than ONGC but मैं
एक बात निवेदन
करता हूं कि R.S.Sharma is supposed to be the Chairman of the ONGC. उन्होंने
एक बात कही है – “Describing his alternatives, he said that ONGC could think of
reducing the capacity of the refinery. Earlier it was declared that refinery in Barmer
would be of 7.5 million tonne capacity but in current situation, it could be of
3 million tonne capacity. This would reduce the cost also. However, the quality
of the Barmer crude is not good and will need extra realisations for setting up
the refinery in the desert. We are ready to negotiate but the Rajasthan
Government has to decide which way it wants to go. Sharma said adding that if
they come forward, Corporation will follow.
That is the reason, we have set up Rajasthan Refinery Limited. In the end, he
said that stocks will only last for 8 to 12 years.” 8 से 12 साल
का स्टॉक
ओ.एन.जी.सी. बता
रहा है।
श्री शिवचरण माथुर (माण्डलगढ़): It’s wrong. 4.8 billion tonnes. It will last for at least 15 years. As on today, only 30 per cent search has been done in the area. 70 per cent is still to be done. If this entire area is completely surveyed and implemented, Rajasthan could have 20 million tonne capacity refinery.
श्री राव राजेन्द्र सिंह (बैराठ): इसलिए मैं यह निवेदन करना चाहूंगा कि इससे ओ.एन.जी.सी. का जो टेम्परामैंट है यह पता लगता है, very well refuted by the hon’ble member there. They just don’t to set it up. जब वह पब्लिकली डिनाउंस कर रहे हैं कि केपेसिटी ही नहीं है। हम साढ़े सात मिलियन टन की लगाएंगे ही नहीं, हम तो तीन की लगाएंगे वरना हमारे तो आठ से 12 साल में पूरा खनिज भण्डार ही खतम हो जाएगा। जब हाइड्रोकार्बन्स के बारे में वे यह कर रहे हैं, अब हमारे लिए यह कौनसी मुश्किल है, जैसा आपने फरमाया, let us invite global tenders. If we have the capacity, there will be 101 people coming to you. They will not only look towards your economic gains and commercial gains, they will also give you social and economic obligations. और आखिरी में एक बात और है, मैं तो कुछ दिन पहले एक अख़बार पढ़ रहा था। आदरणीय उद्योग मंत्रीजी कलकत्ता पधारे थे for promotion of industrial investment in Rajasthan. वहां एक बात सामने आयी कि पहले कोई कल्पना नहीं कर सकता था कि बाड़मेर के अन्दर इतना ऑयल मिल जाएगा। फिर किसी ने कल्पना नहीं करी कि बाड़मेर में बाढ़ आ जाएगी। उन्होंने तो इससे भी आगे कर दिया कि 1977 से 80 के दशक के अन्दर आदरणीय भैरोंसिंहजी ने यह बात कही थी कि बाड़मेर में समुद्री बंदरगाह भी बन सकता है।
श्री शिवचरण माथुर (माण्डलगढ़): It is a fact.
श्री राव राजेन्द्र सिंह (बैराठ): अब यह जब बंदरगाह बन सकता है तो जब हम सब बैठ कर इस बात पर विचार क्यों नहीं करते कि कच्छ के मार्शी लैंड से 100 किलोमीटर अन्दर लेकर आना है उस पानी को। आपके रिकार्ड में यह सौ किलोमीटर है। नक्शा भी है उसका। इसमें यह थार में बनेगा समुद्री बंदरगाह, इसका था और इसमें यह लिखा है कि- 1977-80 के प्राथमिक अध्ययन में कराया गया है। इसके बारे में तकनीकी ज़रूरतों के लोड-फेक्टर वगैरह की सारी जानकारी की गयी है और जिस वक्त यह चर्चा हुई अभी यह 26.11 का है, 26.11 ... (व्यवधान) चर्चा हुई तो दो कारपोरेट हाउसेज ने तुरन्त इस चीज को स्वीकार किया कि हम इसका सर्वे करेंगे तो मैं यह चाह रहा हूं कि यह रिफाइनरी भी लग जाए और अगर इस सरकार के समय में यह बंदरगाह की भी बात हो जाए तो बाड़मेर जिसको कभी लोग सिर्फ देखने आते थे कि वहां पर कैसे धोरें हैं, कैसे सेंड-ड्यूंस हैं, अपने आप में टूरिस्ट वेंचर पाइंट ही नहीं, पूरा का पूरा एक कामर्शियल वेंचर पाइंट हो जाएगा। आपने मुझे समय दिया, इसके लिए माननीय सभापति महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री सभापति: माननीय श्री बी. डी. कल्ला।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): माननीय सभापति महोदय, मैं राजस्थान विनियोग (संख्या-2) विधेयक, 2007 और वित्त विधेयक, 2007-08 के बारे में अपने विचार रखता हूं और इसके विरोध में कुछ तथ्य प्रस्तुत करता हूं।
किसी भी प्रदेश का और देश का विकास उसकी विकास दर के ऊपर निर्भर करता है। माननीय सभापति महोदय, वर्ष 1998-99 से लेकर 2003-04 तक पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार रही। उस वक्त जब हमने यह सरकार छोड़ी थी उस वक्त राजस्थान के विकास की दर 26.75 प्रतिशत थी। जो आज घटकर 12.66 प्रतिशत रह गयी। मुझे यह माननीय मुख्य मंत्रीजी करेक्ट कर दें यदि इसमें एक परसेंट भी कोई असत्यता हो तो वह करेक्ट कर दें। इसका मतलब साफ है कि राजस्थान का विकास कांग्रेस के राज की तुलना में लगभग आधे से कम हो गया।
दूसरा, किसी भी प्रदेश और देश का मानवीय संसाधन का विकास कैसा है, उसके ऊपर निर्भर करता है कि वह प्रदेश कैसे आगे बढ़ रहा है। हमारे वक्त में साक्षरता का प्रतिशत निरन्तर बढ़ा लेकिन मुझे कहते हुए दुःख है कि अभी तीन साल और चार महीनों में राजस्थान का साक्षरता का प्रतिशत 3 प्रतिशत कम हो गया और उसके कारण राजस्थान में बेरोजगारी, किसी जिले में दो प्रतिशत, किसी में 3 प्रतिशत, किसी में चार प्रतिशत और किस में पाँच प्रतिशत तक बेरोजगारी बढ़ गयी। यह तथ्य मैं इस आधार पर दे रहा हूं कि राजस्थान में आजीविका मिशन बना, उसके लिए 35 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया और बड़े जोर-शोर से कहा गया कि 1 लाख लोगों को प्रतिवर्ष रोजगार देने के लिए यह आजीवका मिशन काम करेगा। 35 करोड़ का बजट, 1 लाख लोगों को रोजगार देने की बात कही गयी लेकिन वही ढाक के तीन पात। आज तीन वर्ष और चार महीने का विश्लेषण करें तो रोजगार के अवसर कोई आपके अकाल में और इनमें इनको छोड़ दीजिए और सर्व-शिक्षा अभियान को छोड़ दीजिए, जो केन्द्र सरकार का है, जिसके अन्तर्गत 41 हजार अध्यापक लगे हैं और उसके बाद अब आपके अध्यापक और उसमें लगने वाले हैं आगे और लगेंगे लेकिन राज्य सरकार ने कुछ पुलिस के कांस्टेबल की भर्ती और कुछ मृत कर्मचारियों के आश्रितों के अलावा कुछ भी नहीं किया।
spp/akt/16.00/2p/29.3.2007 (1)
और
यह कहा था -
'रोजगार
मिलेगा हर घर
के लिये और
कहां
रोजगार मयस्सर
नहीं है शहर
के लिये।यहां
दरख्तों के
साये में धूप
पड़ती है,कहीं
और चलें उम्र
भर के लिये।।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): कितनी
बार सुना
दिया। सभाति
महोदय, पन्द्रहवीं
बार सुना
दिया।
एक
माननीय सदस्य:
एक रोजगार
उपलब्ध नहीं
कराया।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आपने अभी भी
बीच में गड़बड़
करने का सबक
नहीं सीखा क्या
? आपको सीखना
चाहिये, समझना
चाहिये कि बीच
बीच में नहीं
बोलना चाहिये,
नहीं तो क्या
स्थितियां
बनती हैं ?
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): आज
प्रद्युम्न
सिंह जी ने कह
दिया मक्खनबाजी
में सारे
रिकार्ड
संसदीय कार्य
मंत्रियों के
तोड़ दिये
आपने कि आप
कितने मक्खनबाज
हो, यह सारा
सदन देख रहा
है। मैंने
शुरू ही नहीं
किया, उससे
पहले ही आपने
व्यवधान
शुरू कर दिया।
आपका नाम व्यवधान
मंत्री रख दें
तो कोई अतिश्योक्ति
नहीं होगी।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): मैंने
तो आपने
सड़ा-गला शेर
सुनाया, इसलिये
कहा।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
नहीं,
सड़ा-गला शेर
नहीं है। आपने
वादा किया था
कि एक लाख
लोगों को
प्रतिवर्ष रोजगार
देंगे। कहां
गया वह वादा ,
कितने लोगों को
नौकरी दी आपने
स्टेट सैक्टर
में ?
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री): एक
लाख से ज्यादा
दी है।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
चिकित्सा
मंत्रीजी,
पहले तो आप
अपने स्थान
से बोलो तो ज्यादा
अच्छा
रहेगा। मेरी
गणित आप
देखोगे, मैं
ऐसे आंकड़े
लेकर आया हूं
कि आपकी सारी
पोल खोल
दूंगा। सभापति
महोदय, अब इन्होंने
अपने योजना के
आकार की बात
की कि पिछले वर्ष
की योजना 8500
करोड़ की थी,
जिसको इन्होंने
11,638 करोड़ की
योजना बना दी
और 37 प्रतिशत
वृद्धि की।
मैं आपके माध्यम
से इनको बताना
चाहता हूं कि
वर्ष 1998-99 में 1,964
करोड़ रुपये
केन्द्रीय
करों में अंशदान
मिलता था, जो
बढ़कर अभी 8002
करोड़ रुपये
हो गया, लगभग
चार गुना।
उसके बाद केन्द्रीय
सहायता के इस
हैड में हमको 1322
करोड़ रुपये 1998-99
में मिले थे
और इनको मिल
रहे हैं 4301
करोड़, लगभग
तीन गुने से
ज्यादा।
हमारे
कार्यकाल की
तुलना में
आपको चार गुना
केन्द्रीय
करों में हिस्सा
बढ़ गया, तीन
गुना केन्द्रीय
सहायता में
हिस्सा बढ़
गया। इसके
बावजूद भी
आपकी जो योजना
है, वह 37
प्रतिशत
बढ़ी। मैं
समझता हूं कि
इसका आपको खुद
आत्मविश्लेषण
करना चाहिये
कि इन योजनाओं
में वृद्धि की
बार बार आप जो
बातें कर रहे
हैं, यह बातें
मैं समझता हूं
कि बिलकुल
थोथी हैं और
फिर आपको मैं
बताना चाहता
हूं हमारी
ग्रामीण स्वास्थ्य
सेवाओं के ऊपर
आपने इस चालू
वित्तीय
वर्ष के बजट
में 51 लाख
रुपये की कमी
की है और स्वायत्त
शासन विभाग के
बजट में लगभग 500
करोड़ की कमी
की है। जब एक
तरफ आप योजना
का आकार बढ़ा
रहे हैं तो
दूसरी तरफ
शिक्षा, ग्रामीण,
स्वास्थ्य
सेवाएं, स्वायत्त
शासन विभाग,
इनकी योजनाएं
कम क्यों हो
रही हैं ? इसका
मतलब रुपया
कहां जा रहा
है ? इसकी
बातें मैं आगे
करूंगा।
अब
मैं आपको
बताना चाहता
हूं कि राजस्थान
ऋणग्रस्तता
का शिकार हो
रहा है, इनडैटनैस
का। उसका कारण
क्या है कि
हम लोग जो
कर्जा लेते
हैं, कर्जा
लेकर उत्पादन
करना कोई बुरी
बात नहीं है,
लेकिन ऋण लेकर
घी खाना, ऋण
लेकर विकास
नहीं करना या
ब्याज
चुकाना, यह
उचित नहीं है।
ऋणग्रस्तता
से उबरने के
लिये राजस्थान
को सबसे पहले
ब्याज की
अदायगी को कम
करने का
प्रयास करना
चाहिये। इसके
लिये कर्जे कम
लिये जायें और
जो ब्याज पर
पैसे लिये हुए
हैं, उसका
भुगतान ज्यादा
किया जाये।
हमारे वित्त
आयोग ने इनसे
एक वादा लिया
हुआ है। वह
वादा यह है कि
आप 2009-2010 तक राजस्थान
में रेवेन्यू
रिसीप्ट्स
और ब्याज
अदायगी जो
करते हैं,
इसका अनुपात 15
प्रतिशत तक ले
आयें । इस
वर्ष तक यह 23.52
प्रतिशत है।
सभापति महोदय,
केवल मात्र
पिछले वर्ष की
तुलना में
पाइंट 32
प्रतिशत कम
हुआ है । इसका
मतलब साफ है कि
अब 2007-08, 2008-09 और 2009-10 तीन
साल हैं। इन
तीन वर्षों
में इसी गति
से यदि हम
अनुपात को कम
करना चाहेंगे तो
32 साल की जगह आप
पाइंट 5 से भी
गिन लो तो आप 1.5
प्रतिशत यह कम
करेंगे। यह 23.52
का मतलब 22
प्रतिशत से ज्यादा
यह अनुपात
नीचे नहीं
आयेगा। मेरे
कहने का तात्पर्य
यह है कि जब तक
आप अपने
रेवेन्यू
रिसीप्ट्स
और ब्याज के
भुगतान का
दोनों का
अनुपात कम
नहीं करेंगे
तब तक
निश्चित रूप से
राजस्थान
आगे नहीं
बढ़ेगा और
केवल कर्ज के
बोझ से बढ़ता
चला जायेगा।
इसके
साथ साथ मैं
आपसे यह कहना
चाहता हूं कि
राज्य में सी
ए जी की जो अभी
रिपोर्ट आई,
उसके अन्तर्गत
हमारी 472
योजनाएं लम्बित
हैं और उन
योजनाओं में
लगभग 3,459 करोड़
की राशि
अवरूद्ध हुई
है और इनमें
भी यदि आप
जायें तो
पिछले वष्र की
जो योजनाएं
हैं, वह 298 हैं और
तीन वर्ष और 4
महीने का
कार्यकाल आपका
है। इसका मतलब
जो योजनाएं
अवरूद्ध हो
चुकी हैं,
मतलब योजनाएं
नई नई आती
रहती हैं, लेकिन
पीछे कोई उनको
संभालता नहीं
है जिसके कारण
योजनाओं पर जो
पैसा खर्च
होना चाहिये,
जो योजनाएं
पूर्ण होनी
चाहिये, उसकी
जगह योजनाएं
अधूरी पड़ी
हुई हैं और
उनका पैसा ब्लॉक
होता जा रहा
है। इसके
अलावा सी ए जी
की रिपोर्ट ने
एक बहुत अच्छा
तथ्य दिया है
कि 56 हजार से
अधिक लोगों को
बीकानेर,
हनुमानगढ़,
उदयपुर और
पाली इन जिलों
में 6-6 महीनों
तक, सभापति महोदय,
जो अकाल
पीडि़त लोग
थे, उनका
भुगतान नहीं हुआ।
यह बहुत ही
दु:खद विषय है,
चिन्ता का
विषय है कि
जिस प्रदेश
में 6-6 महीनों
तक अकाल
पीडि़तों के
लिये पैसे का
भुगतान नहीं
हो और सरकार
यह कहे कि
हमारा
फाइनेंशल मैनेजमेंट
बहुत अच्छा
है, कहां से
अच्छा है ? अच्छा
होता तो
भुगतान करते ।
हमारे वक्त 15
दिन में जैसे
ही हफ़्ता
पूरा हुआ, हम
वहां पेमेन्ट
करवा देते थे
और निश्चित
पेमेन्ट
कराते थे,
पूरा पेमेन्ट
कराते थे
लेकिन यह आपके
फाइनेंशल
मैनेजमेंट की
पोल खोलता है
कि आप क्या
कर रहे हैं ? इसके
अलावा आपने
कहा हमने फूड स्टॉम्प
बांटे। फूड स्टॉम्प
बांटने के बाद
फिर
जालमियारसर
में अर्जुन सिंह
की मौत क्यों
हुई, फगल कंवर
की मौत क्यों
हुई ? आपके
सहरिया
आदिवासी क्यों
मरे ? हिण्डौली
में लोग क्यों
मरे और अन्य
अनेक स्थानों
पर मरे । अभी
करौली में एक
व्यक्ति भूख
से मारा गया। सभापति
महोदय, कहने
का तात्पर्य
मेरा यह है कि
...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): सभापति
महोदय, मैं
टोकना नहीं
चाहता, पर यह
किसकी बात कर
रहे हैं ? यह
जिस फगल कंवर
की बात कर रहे
हैं, आप
लगाइये न उस मोशन
को और यह करें
न बहस। हम
प्रमाणित कर
देंगे कि भूख
से मौत नहीं
हुई है। मतलब
पूरे राजस्थान
में इस तरह की
सनसनीखेज
बातें उठाकर
हम किस तरह की
छवि पेश करना
चाहते हैं।
....(व्यवधान)...
श्री
सभापति: आप
सही फरमा रहे
हैं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): नहीं,
आप जिम्मेदार
आदमी हो। एक
नेशनल पार्टी
के सदस्य हो।
....(व्यवधान)...
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
सभापति महोदय,
यहां बैठे
बैठे बात कर
रहे हैं मेरे
साथ, यह चलें
उसकी मां जिन्दा
है, उसकी बेटी
जिन्दा है,
कम से कम
सैंकड़ों
लोगों के
सामने, उसकी 80 वर्ष
की मां असत्य
नहीं बोलेगी।
उन्होंने
मुझे कहा मेरा
लड़का भूख से
मरा है। आप चलें
मेरे साथ ।
मैं चलूंगा
आपके साथ। आप
हाउस की कमेटी
लेकर चलें।
....(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): सभापति
महोदय, मैं
चुनौती देता
हूं इनको और
आप समय तय कर
दें। अगर फगल
कंवर
और अर्जुन
सिंह की मौत
की बात कर रहे
हैं, अगर
सिद्ध हो जाये
। सभापति
महोदय, वह
बी.पी.एल. में
चयनित था,
उसको 70 किलो
गेहूं, यह
प्रमाणित है
रिकार्ड के
अंदर, उसने 20
दिन पहले 70
किलो गेहूं लिया
है, 15 दिन पहले
उसको 600 रुपये
पेंशन मिली
है, यह
रिकार्ड पर
है।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
देखिये, फिर
आप बीच में
बोलोगे तो हम
भी टोकेंगे।
आप अपने जवाब
में कह देना।
यह गलत
रिकार्ड
बनाया है
आपने। ....(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): गलत तथ्यों
के आधार पर
कोई भी कह
देना ....(व्यवधान)...
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
आपने गलत
रिकार्ड
बनाया है। ....(व्यवधान)...
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): गलत
तथ्य तो आप
पेश कर रहे
हैं बीकानेर
से आने वाले
माननीय सदस्य,
पूरी नीचे से
लेकर रिपोर्ट
है, एस.डी.एम. की
रिपोर्ट है,
ए.डी.एम.की
रिपोर्ट है,
सारी रिपोर्ट है
उसमें और
बी.पी.एल. का
गेहूं उठाया
हुआ है उसने
और वह लगातार
टिकटों से
गेहूं उठाते
रहे हैं। गलत
तथ्य तो पेश
मत करो आप। ....(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): दमे से
पीडि़त था,
इलाज कराया उस
डॉक्टर का
सर्टिफिकेट
है, जिस ए.एन.एम.
ने उसको दवाई दी
है उसका
सर्टिफिकेट
है, ए.डी.एम. की
जांच रिपोर्ट
है, एस.डी.एम.की
जांच रिपोर्ट
है, कलक्टर
की जांच
रिपोर्ट है,
मतलब हर किसी
मौत को, राजस्थान
में जो मृत्यु
दर है, उस मृत्यु
दर में जितने
लोग मरते हैं,
वह सारे ही
भूख से मरते
हैं। ....(व्यवधान)...
श्री
कनकमल कटारा
(महिला एवं
बाल विकास
मंत्री): ....(व्यवधान)...
सहरिया घास खा
रहे हैं। हम
स्वयं गये
वहां पर ....(व्यवधान)...
किसी ने असत्य
बात कह दी । ....(व्यवधान)...
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप सहरिया की
बात करते हो,
अशोक जी गहलोत
के समय में
सहरिया में
भूख से ....(व्यवधान)...
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
कोई तथ्य नहीं
हैं आपके पास।
असत्य बयान
कर रहे हो इस
पवित्र सदन
में। आपके पास
तथ्य हों तो
पेश करो।
श्री
सभापति:
राजसमंद से
आने वाले
माननीय सदस्य।
....(व्यवधान)...
अंकित नहीं
करें।
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
सभापति: आप
बिराजें। आप
बिना आसन की
अनुमति के
खड़े नहीं
हों।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
माननीय
सभापति महोदय,
मैं सदन की कमेटी
के साथ वहां
जालमियासर
जाने के लिये
तैयार हूं ।
उसकी मां
जिंदा है, आठ
वर्ष की बेटी
जिंदा है। उन्होंने
जो बयान दिये,
उसके आधार पर
मैंने सदन में
यह बात रखी है
और निश्चित
रूप से मैं यह
कह सकता हूं
कि सरकार वहां
पर अभी भी
प्रबन्ध
नहीं करेगी,
उन ढाणियों
में बहुत-से
ऐसे लोग हैं
जिनके पास
खाने के लिये
अन्न नहीं
है, पानी 300
रुपये टंकी
में बिक रहा
है। लोग कैसे
जीयेंगे ? इसलिए
सभापति महोदय,
इन सब बातों
के बारे में
ध्यान देने
की आवश्यकता
है । यहां पर
किसी को बीच
में डिस्टर्ब
करने से या व्यवधान
करने से कोई
बात रूकेगी
नहीं, इसलिये
इसके ऊपर ध्यान
देने की आवश्यकता
है।
Msr/akt/1610/2q/29032007
मुझे
तो बड़ा आश्चर्य
है कि आज तक
वहां पर कोई
मंत्री नहीं
गया और जाकर
के उनको सँभाला
नहीं कि उस
ढाणी में क्या
स्थिति है।
आपको जाना
चाहिए, वहां
पर जाकर देख
कर आते। कोई
जावे नहीं,
बैठे-बैठे
यहां पर, मैं
जिस दिन गया
था वहां पर
कलेक्ट्रेट
की तरफ से 2000
रुपये की
सहायता दी गयी
थी। हमने तत्काल
वहां 15 हजार
रुपये की
सहायता
प्रदेश कांग्रेस
कमेटी की ओर
से ...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): सभापति
महोदय, दो
तारीख को सदन
होगा, दो
तारीख को आप समय
निश्चित कर
दें और इस पर
बहस करा लें
आप। यह अपनी
बात तर्कों के
आधार पर कह
दें और हम अपनी
बात तर्कों के
आधार पर कह दें।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): हां,
हां करवा
लेना।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आप समय
निश्चित कर
देना दो तारीख
को।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): हां,
कर दो न, क्या
दिक्कत है।
हां, कर दीजिए
न।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): कर दो,
साहब।
श्री
सभापति: अकाल
और बिजली पर
चर्चा होगी उस
समय यह कह रहे
हैं अकाल की
मौत हो रही है
और बिना भोजन
के मौत हो रही
है।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): अकाल
की मौत का
नहीं, स्पेसिफिक
मौत के बारे
में है
और यह बड़ा सीरियस
मामला है। कल्ला
साहब जैसे
वरिष्ठ व्यक्ति
को ...
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
वहां जाकर आया
हूं, घनश्यामजी।
...(व्यवधान)...
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): आ
सुनिये। कल्ला
साहब, आप जाकर
आये होंगे। आप
जाकर आये तो
भी इस प्रकार
का बड़ा गम्भीर
चार्ज लगाना
कोई मामूली
बात नहीं है
इसलिए माननीय
संसदीय कार्य
मंत्रीजी ने
कहा है कि इस
पर उस दिन
चर्चा तय कर
दीजिए, स्पेसिफिक
इस पाइण्ट पर
तय कर दीजिए
ताकि बात हो
जाए।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): हां, करिये
आप।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर):
हां, हां कर
लें।
श्री
सभापति: ऐसा
है नियमों में
यह मूव कर
देंगे, चाहे 50
में ...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आप आसन
से व्यवस्था
कर दो न।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
मैंने
एडजोर्नमेंट
मोशन दिया हुआ
है ...(व्यवधान)...
श्री
सभापति: सरकार
यह वक्तव्य
दे सकती है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): कल्लाजी
की यात्रा
धर्मराज
युधिष्ठिर की
यात्रा है क्या? आप
तय कर दो न।
श्री
सभापति:
धर्मराज
युधिष्ठिर की
यात्रा की बात
नहीं है, यह
नियमों में
मूव कर देंगे
उसके आधार पर
आप जवाब दे
देना।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): आप
से तो धर्मराज
युधिष्ठिर ही
हूं आपका और
मेरी तुलना
करो तो ...(व्यवधान)...
राजस्थान की
जनता की
वोटिंग करवा
लेना।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): हां,
फैसला तो धर्मराज
ही करेगा।
डा. बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): आप
बन जाना
धर्मराज।
सभापति
महोदय, मैं
आपसे यह कह
रहा था कि
सरकार एक तरफ
से यह कहती है
कि हमारा
फाइनेन्शल
मैनेजमेंट
बहुत अच्छा
है लेकिन
सामाजिक
सेवेाओं के
ऊपर इनका व्यय
60 प्रतिशत कम
हुआ है,
नोन-डवलपमेंटल
एक्टिविटीज
पर इनका खर्चा
बढ़ा है और
डवलपमेंटल
एक्टिविटीज
के ऊपर खर्चा
कम हुआ है।
मैं
आपको दो-तीन
आंकड़े देता
हूं। पेयजल
आपूर्ति एवं
सफाई पर 34
परसेंट राशि
ही यह दिसम्बर,
2006 तक खर्च कर
पाये। ओ.बी.सी.,
एस.सी., एस.टी. के
कल्याण के
लिए मात्र 34
परसेंट राशि
ही खर्च कर
पाये। पूंजीगत
खाते में
मात्र 47
परसेंट राशि
दिसम्बर, 22006 तक
खर्च हो पायी।
इसके अलावा
राज्य सरकार
ने अपने राजस्व
घाटे में जो
कमी करना बता
रही है वो
डवलपमेंट
एक्टिविटीज
को कम करने के
कारण है और
कोई दूसरा
कारण नहीं है
इसलिए कोई
फाइनेन्शल
सुधार नहीं
किया है। इनकी
बकाया राशि को
यदि आप देखें
तो लगभग 31
मार्च, 2006 तक 2984
करोड़ और 79 लाख
रुपये की
बकाया थी
उसमें ओर बिक्री
कर से 2336.12 करोड़
रुपये, खनन से 59.31
करोड़, ग्रामीण
एवं शहर जल
आपूर्ति से 61.88
करोड़, वाहन
कर से 21.62 करोड़,
मुद्रांक और
पंजीयन शुल्क
के माध्यम से
76.80 करोड़। यह जो
बकाया लगभग 3000
करोड़ रुपये इसके
लिए कौन जिम्मेदार
है?
जैसा
मैंने आपको
बताया एस.सी.,
एस.टी., ओ.बी.सी.
है इसके डवलपमेंट
के लिए जो
राशि खर्च की
गयी थी दिसम्बर,
2006 तक मात्र 34
परसेंट राशि
खर्च की गयी।
अब डवलपमेंटल
एक्टिविटीज
आप करो नहीं
और फिर कह दो
हमने
राजकोषीय
घाटा कम किया
है तो यह
कोई
होशियारी
नहीं है। इसमें
राजकोषीय
घाके को कम
करने के लिए
उनको और उपाय
करने चाहिए
थे। यह यदि
बकाया वसूली
कर लेती और
डवलपमेंट पर
खर्च कर देते
तो मैं समझता
हूं कि यह अच्छा
मैनेजमेंट
होता। लेकिन यह
कर नहीं पाये।
पाँच सामान्य
सेवाओं का व्यय
बढ़ाया गया
है। अब,
सभापति महोदय,
सामान्य
सेवाओं का व्यय
ज्यादातर ब्याज
चुकाने के लिए
होता है, 6700 से
अधिक करोड़ ब्याज
यह
चुकायेंगे।
तो इससे साबित
होता है कि नोन-डवलपमेंटल
व्यय इनका
बढ़ा है और
डवलपमेंट का
व्यय कम हुआ
है।
अब मैं
और कुछ आंकड़े
आपको बताना
चाहूंगा। इस
सरकार ने वर्ष
2006 और 2007 में
शिक्षा, कला
और संस्कृति
के ऊपर 102.18 करोड़
रुपये का बजट
कम किया। सामान्य
शिक्षा में 99.12
कम। यह 2006-07 का
आंकड़ा दे रहा
हूं मैं आपको,
जो बजट एस्टीमेट
दिया है और जो
रीयल एस्टीमेट
आया था उसमें
यह जो एक्चुअल
एस्टीमेट
आये हैं उसके
फर्क बता रहा
हूं। स्वास्थ्य
एवं परिवार
कल्याण में 25.48
करोड़ कम किये
गये। पोषण में
48.37 करोड़ रुपये
कम किये गये।
फसल एवं
कृषिकरण में .38
करोड़ रुपये
कम किये गये।
पशुपालन में 3.52
करोड़ रुपये
कम किये गये।
वानिकी तथा
अन्य प्राणी,
इसमें 13.67 करोड़
रुपये कम किम
गये। अब
बढ़ाया कहां,
सचिवालय एवं
आर्थिक सेवाएं,
इसमें 99.19 करोड़
रुपये की
वृद्धि करदी
गयी। यह कोई
डवलपमेंटल
एक्टिविटीज
नहीं हैं।
मैंने
यह सिद्ध किया
है आंकड़ों के
माध्यम से,
सभापति महोदय,
कि सरकार ने
अपने कोष को
नोन-डवलपमेंटल
एक्टिविटीज के
लिए उपयोग में
लिया,
डवलपमेंटल
एक्टिविटीज के
लिए उपयोग में
नहीं लिया।
अभी मृदा तथा
जल संरक्षण
में भी 3.79 करोड़
का बजट घटा
दिया।
अब बजट
घोषणाओं को
लीजिए आप,
देखने में
बड़ी-बड़ी
सुन्दर-सुन्दर
लगती हैं, ‘निर्बल
घाट योजना’,
इस सदन में 100
गांवों में
निर्बल घाट
योजना के लिए
ढाई करोड़
रुपये का
प्रावधान
किया गया और 100 जगह
100 गांवों में
बनेगा।
गांवों की
संख्या,
सभापति महोदय,
41 हजार है और यह 41
हजार गांव में
निर्बल घाट
योजना लागू
होगी तो 410 वर्ष
लगेंगे। अब 410
वर्ष तक कब आप
योजनाओं को पूरा
करेंगे, क्या
करेंगे, पता
नहीं कौन
रहेगा, क्या
रहेगा। इसका
कोई अता-पता
नहीं है लेकिन
यह योजना दे
दी, ‘निर्बल
घाट योजना’
ढाई करोड़ की
लागत से। मैं
आपको ढाई
करोड़ की एक
और योजना
बताता हूं जो
पहले इन्होंने
बनायी थी,
मेवात
क्षेत्र की
आवासीय
बालिका विद्यालय
के लिए ढाई
करोड़ की
योजना बनायी।
क्या हुआ
उसका, ढाई
पैसे नहीं
खर्व कर पायी
सरकार। ढाई
पैसे नहीं
खर्च कर पायी।
तो
कहने का तात्पर्य
मेरायह है कि
जब आप योजनाओं
को बनाओ तो कम
से कम सोचो तो
सही कि उसके
लिए ढाई पैसे
भी खर्च नहीं
करो तो इसी
प्रकार से इन
योजनाओं का
हश्र होने
वाला है।
सभापति
महोदय, आप
ग्रामीण
बालिकाओं को
सेकण्डरी
एवं सीनियर
सेकण्डरी
में पढ़ती हैं
उन्हें
ट्रांसपोर्ट
बाउचर देंगे
आप। यह जो
ट्रांसपोर्ट
बाउचर हम लोग
पहले भी देते
थे लेकिन अब
आपने सीमित कर
दिया। क्या
सीमित किया?
पाँच
बालिकाओं का
समूह होगा तब
आप ट्रांसपोर्ट
बाउचर देंगे।
मान लो तीन
लड़कियां
होंगी, दो
लड़कियां
होंगी, चार
लड़कियां
होंगी तो वो इनको
कोई सुविधा नहीं
मिलेगी?
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): नहीं,
उनको पास दिया
न, 18 हजार
बच्चियों को
इस बार हमने
फ्री रोडवेज
का पास दिया।
उसके पहले तो
आपने कभी नहीं
दिया। अब वो
जहां नहीं है
वहां पर पाँच
हो जायेंगी जो
बस के अलावा
उस पर चल जाए
तो उस पर भी
चली जायेगी।
एक्स्ट्रा
सुविधा है,
इसमें आपको क्या
दिक्कत है?
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
नहीं, शिक्षा
मंत्रीजी, जो
घोषणा हुई है
उसमें कहा है
कि पाँच या
उससे अधिक
बच्चियां
होंगी उनको
ट्रांसपोर्ट
बाउचर मिलेंगे।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): वो तो
एक्स्ट्रा
सुविधा है
रोडवेज की बस
या उस बस के
अलावा तो
उसमें कोई दिक्कत
थोड़ी है, वो
एक साथ मिल कर
चली जायेंगी,
वो तो समूह में
रहेंगी। वो
आपको आपत्ति
हो तो वापस कर
देंगे।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
नहीं, आपत्ति
नहीं है, मैं
कह रहा हूं
फिर चार
बच्चियां
होंगी उनको
जाने की सुविधा
होगी क्या? तो
क्लीयर कर
दें मुख्यमंत्रीजी,
तीन बच्चियां
होंगी, दो
बच्चियां
होंगी तो उनको
जाने की ...
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): एक को
भी, मुख्यमंत्रीजी
की जरूरत ही
नहीं है, इतना
छोटासा काम तो
मैं ही कर
दूंगा। एक को
भी सुविधा है।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
रोडवेज वाले
आपके आदेश मान
लेंगे तो बहुत
बढि़या बात
है। इसका मतलब
आपके सम्बन्ध
इम्प्रूव
हुए हैं।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): हां,
बहुत अच्छे
हुए हैं।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): चलो,
अच्छा है।
...(व्यवधान)...
सभापति
महोदय, गो
सेवा संघ को
दो करोड़ का
बजट दिया गया
है। राजस्थान
में अनेक
गोशालाएं हैं
जो रजिस्टर्ड
हैं, उनको एक
रुपया नहीं
दिया गया। आज
वहां पशु सेवा
शिविर राजस्थान
में एक भी
नहीं हैं
लेकिन गो सेवा
संघ को जो
आपकी पार्टी
से सम्बन्धित
है उसको दो
करोड़ रुपये,
यह ठीक नहीं है।
आप फैसले ऐसे
करो जो लगते
हैं कि
जस्टिस,
इक्विटि और
गुड कांशसनैस
के आधार पर हो
और वो पूरे के
पूरे प्रदेश
में एक जैसे
हों जिससे
लगता है कि
क्षमता, विवेक
और आम न्याय
के फैसले हों
लेकिन सरकार
ने जो फैसला
किया है उसमें
दो करोड़
रुपये केवल गो
सेवा संघ को
देना, यह
पक्षपात का
निर्णय है।
इसके
अलावा आपने एक
मुक्ति धाम की
योजना दी।
मुक्ति धाम
में मैं समझता
हूं कि गीता
में एक श्लोक
आता है-
जातस्य
ही दुर्वो जन्मम्,
दुर्मम
जन्मम् मृत्युसज:,
तस्मातपरिहार्य
ते,
नत्वम्
सोची तु महर्सि’
जिसका
जनम हुआ है
उसकी मृत्यु
निश्चित है।
कोई श्मशान
में जाता है,
कोई कब्रिस्तान
में जाता है,
कोई गिरजाघर
में जाता है
लेकिन उसमें
भेद कर रहे हो
आप। केवल आपको
यह घोषणा करनी
चाहिए कि
इसमें
कब्रिस्तान
और गिरजाघर
वगैरह सब
सम्मिलित
हैं। उन सब के
उत्थान के
लिए काम किया
जायेगा नहीं
तो यह एक पक्षीय
आपकी घोषणा
होगी।
एक
योजना आपने और
बनायी। ...(व्यवधान)...
श्री
सभापति:
माननीय सदस्य,
आप विराजें।
श्री
भागीरथ चौधरी
(किशनगढ़):
उनके नाम पर
एक कौड़ी नहीं
दी। पहले दफे
इस सरकार ने
दिया है, मुख्यमंत्रीजी
को बहुत-बहुत
धन्यवाद
इसके लिए।
पहले मुक्ति
धाम के लिए
जमीन नहीं दी।
श्री
सभापित:
माननीय सदस्य,
विराजें आप।
श्री
भागीरथ चौधरी
(किशनगढ़):
बढि़या काम
किया उसकी
आलोचना कर रहे
हो आप।
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री): यह
गिरजाघर में
तो यह काम
होता हनीं जो
आप पुकार रहे
हैं।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर):
गिरजाघर में
दफनाया जाता
है, उनके सुधार
की जरूरत है।
श्री
भागीरथ चौधरी
(किशनगढ़):
पहले दफे, देश
में आजाद होने
के बाद कभी भी
मुक्ति धाम के
नाम पर एक ईंच
जमीन नहीं दी,
उनको सुविधा
नहीं दी।
श्री
सभापति:
किशनगढ़ से
आने वाले
माननीय सदस्य।
...(व्यवधान)...
श्री
भागीरथ चौधरी
(किशनगढ़): पहले
दफे माननीय
मुख्यमंत्रीजी
ने यह बजट में
लिया है इसके
लिए परेशानी
हो रही है
आपको।
श्री
सभापति:
माननीय सदस्य,
विराजें।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
नहीहं, यह
मुक्ति धाम
योजना पर स्वास्थ्य
मंत्रीजी ही
क्यों बोल
रहे हैं, क्या
कैजुअलिटी ज्यादा
हो गयी क्या?
श्री
सभापति: हिण्डौली
से आने वाले
माननीय सदस्य,
आप बीच-बीच
में क्यों व्यवधान
कर रहे हैं?
Ars/usc/1620/3a/29032007/1
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
माननीय
सभापति महोदय, एक इन्होंने
मन्दिरों के लिए
पाँच करोड़ की
योजना बनायी।
नाथद्वारा, सांवलिया
मन्दिर,
त्रिपुरा
सुंदरी का
मन्दिर, अच्छी
योजना है
लेकिन इसमें
भी मेरा यह
सुझाव है कि
हमारा कांस्टीट्यूशन
एक सैकुलरिज्म
को प्रोत्साहन
देने वाला
कांस्टीट्यूशन
है। इसमें
सर्व धर्म
सम्भाव जब ही
आएगा जब आप इसमें
गरीब नवाज को
और अन्य
धर्मो के स्थानों
को भी
सम्मिलित
करेंगे तो यह
योजना व्यापक
होगी और इससे
राजस्थान
कम्युनल
हारमनी और
हमारी कौमी
एकता मजबूत
होगी ...(व्यवधान)
श्री
सभापति:
माननीय सदस्य,
आप बैठे बैठे
क्या बात कर
रहे हैं आपस
में ?
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): एक
आपने घोषणा की
है दो
किलोमीटर से
अधिक दूरी पर
नवीं और दसवीं
कक्षा की जो
बालिकाएं
जाती हैं उनको
तीनसौ रुपये
में साइकिल दी
जाएगी। अब
तीनसौ रुपये
में तो कोई
साइकिल
सभापति महोदय,
हमको तो बाजार
में दिखी
नहीं, सरकार
को कहीं मिल
रही है तो मैं
कह नहीं सकता।
ऐसी बच्चियां
करीब एक लाख
बत्तीस हजार
हैं। ...(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): सब्सिडाइज
करेंगे।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): बाकी
रुपये सरकार
देगी। तीनसौ
रुपये तो बच्ची
देगी और बाकी
रुपये सरकार
देगी ...(व्यवधान)
डा. ओ.
पी. महेन्द्रा
(केसरीसिंहपुर):
माननीय
बीकानेर से
आने वाले सदस्य,
आपसे तो यह
उम्मीद नहीं
थी। आप तो कम
से कम पूरा
अध्ययन करके
और पढ़कर,
बाकी तो पैसा
सरकार देगी, तीनसौ
रुपये का तो
शेयर है।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
जिसके पास
तीनसौ रुपये
होंगे तो वह
तो साइकिल
तीनसौ रुपये
और कहीं से
लाकर ले लेगा
...(व्यवधान)
लेकिन सवाल इस
बात का है,
उसके लिए प्रावधान
आपने क्या
किया है एक
लाख बत्तीस
हजार
बच्चियों के
लिए क्या
आपका
प्रावधान सही
है ? प्रावधान
बिल्कुल ऊँट
के मुंह में
जीरे के बराबर
है। तो यह
घोषणाओं के
लिए थोथी और
हवाई घोषणाएं
जो की गयी हैं,
उसका मैं
विरोध करता
हूं।
उसके
बाद आप आइये
विधवा विवाह,
विधवा विवाह
जो होंगे
उसमें सरकार
पन्द्रह
हजार प्रति
विवाह देगी।
सभापति महोदय,
जनसंख्या के
और इनके
आंकड़ों को
मैंने देखा,
राजस्थान में
बीस से तीस
वर्ष की
विधवाएं लगभग
चार लाख हैं
और उसमें एक
लाख विधवाएं
भी अगर विवाह
करती हैं तो
आपको एकसौ
पचास करोड़
रुपये की
जरुरत एक साल
में होगी। क्या
आपने इसका
प्रावधान
किया है और
नहीं किया है
तो फिर आपको
ऐसी थोथी
घोषणाएं नहीं
करनी चाहिए।
उसके
बाद मैं आपसे
कहना चाहता
हूं इन्होंने
एक घोषणा यह
कर दी कला और
संस्कृति
विभाग का नाम
कला, संस्कृति
और साहित्य
विभाग होगा।
अब यह घोषणाओं
में एक पैसा
लगा नहीं,
हींग लगे न
फिटकड़ी और
रंग आवे चौखा,
इस तरह की
घोषणाएं हैं
इसमें ।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): क्या
बुराई है ?
श्री
सभापति: आप
विराजें।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): यह
घोषणा के लिए
घोषणा है। इन
घोषणाओं से
राज्य को,
राज्य के
लोगों को यह
तो एडमिनिस्ट्रेटिव
एक तरीके से
चैन्जेज
हैं। मैं कहना
यह चाहता हूं
कि सभापति महोदय,
घोषणाओं के
लिए घोषणाएं
नहीं की जानी
चाहिए।
अब
इसमें रोजगार
की स्थिति के
बारे में मैं
आपको बहुत
रियलिस्टिक
आंकड़े बताना
चाहता हूं। वर्ष
2005-06 में
अनुसूचित
जाति के
बेरोजगारों
का रजिस्ट्रेशन
हुआ था 29,676 उसमें
रोजगार मिला
मात्र 1482 को, आदिवासियों
का रजिस्ट्रेशन
हुआ 26,868, उसमें रोजगार
मिला मात्र 1249
को, ओ. बी. सी. का
रजिस्ट्रेशन
60 हजार 81 का हुआ
और
( बजे)
(
श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन )
रोजगार मिला मात्र 2210 को, आई. आई. टी. होल्डर इनका रजिस्ट्रेशन था 4346, रोजगार मिला केवल मात्र 195 को, विकलांगों का रजिस्ट्रेशन हुआ 3850 का और रोजगार मिला केवल 91 को। कुल मिलाकर 3.7 परसेंट लोगों को रोजगार राजस्थान में मिला। अल्