Msr/usc/28032007/11.00/1a

 

अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

 

अंक 7 बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का अठाईसवां दिवस   संख्‍या 18

 

 

बुधवार, 28 मार्च,2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्हुई।

 

 

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री उपाध्‍यक्ष: राम राम सा, राम राम। श्री महीपाल मदेरणा।

 

स्‍थगित प्रश्‍न संख्‍या 152

अल्‍पसंख्‍यकों के उत्‍थान हेतु निर्धारित लक्ष्‍य

152. डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): क्‍या सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) अल्‍पसंख्‍यकों के उत्‍थान हेतु 15 बिंदु कार्यक्रम के सम्‍बन्‍ध में माननीय प्रधानमंत्री महोदय द्वारा दिनांक 10 सितम्‍बर, 2006 को माननीय मुख्‍यमंत्री के नाम लिखे गये पत्र के आधार पर राज्‍य सरकार द्वारा किन-किन कार्यक्रमों के तहत क्‍या-क्‍या लक्ष्‍य निर्धारित किये गये? उक्‍त निर्धारित लक्ष्‍यों के विरुद्ध अब तक क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गयी? जिलेवार व कार्यक्रमवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) सरकार द्वारा उक्‍त 15 बिंदु कार्यक्रम के अन्‍तर्गत वर्ष 2007 तथा 2008 में निर्धारित लक्ष्‍यों के विरुद्ध किस विभाग में कितनी राशि के क्‍या-क्‍या कार्य सम्‍पादित किये जाने प्रस्‍तावित हैं? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) राज्‍य सरकार द्वारा केन्‍द्र सरकार को कितने उर्दू अध्‍यापकों की भर्ती हेतु सहायता प्रदान करने का आवेदन किया गया? आवेदन की प्रति सदन की मेज पर रखें।

(4) सरकार द्वारा वर्ष 2004 से अब तक राज्‍य के मदरसों के सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण हेतु कितनी राशि के कौन-कौनसे कार्य सम्‍पादित किये गये? वर्षवार व जिलेवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

(स्‍थगित)

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय। यह जो सवाल है 152 नम्‍बर का यह तीन बार स्‍थगित हो चुका है और आप स्‍वयं गौर फरमाएं, इसके अन्‍दर कोई भी बिंदु ऐसा नहीं है जिसका सरकार जवाब देने में सक्षम नहीं हो और तीन बार स्‍थगित करने के बाद चूंकि इन्‍होंने प्रधानमंत्री द्वारा लिखे गये 15 बिंदु कार्यक्रम के अन्‍तर्गत न तो कोई योजना बनायी न किसी जिला परिषद को भेजी न कोई काम किया और न आगे इनकी कोई काम करने की मंशा है।

इसलिए, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे चाहता हूं कि आप मेरे को संरक्षण प्रदान करें, सरकार के ऊपर दबाव बनाएं कि यह जो सवाल है, जिसको तीन बार स्‍थगित किया गया है इसे सरकार इसी सत्र के अन्‍दर जवाब दे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, या तो सरकार यह स्‍पष्‍ट कर दे कि माइनोरिटी से सम्‍बन्धित कोई भी मामला है यह सरकार उस पर कंसीडर करने को ही तैयार नहीं है। इसमें ऐसा कोई ना लम्‍बा जवाब आना था, ना कोई दिक्‍कत होनी थी इसमें, पोस्‍टपोन करे जा रहे हैं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप सदन को यह आश्‍वस्‍त करें कि इसी चालू सत्र में इस सवाल का जवाब आ जाना चाहिए।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसी सदन में जवाब दिने का आश्‍वासन दें।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माइनोरिटी का कोई लेना-देना नहीं, काई सम्‍बन्‍ध नहीं, उठा कर के अल्‍पसंख्‍यकों के कल्‍याण से सम्‍बन्धित सवाल है और इसको बारबार स्‍थगित किया जा रहा है, यह सरकार की मानसिकता का परिचायक है। ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): तीन बार स्‍थगित हो चुका है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण कीजिए।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आप कम से कम माननीय मंत्रीजी से यह तो जानकारी दिलवा दें कि इसका जवाब कब देंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप सुनिये बात।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): हां।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह बात सही है कि यह प्रश्‍न दिनांक 14.03.2007 को सूचीबद्ध हो चुका था परन्‍तु सम्‍बन्धित विभागों से सूचना प्राप्‍त न होने के कारण इस विभाग से सम-संख्‍यक पत्र दिनांक 12.03.2007 द्वारा निवेदन कर स्‍थगित करवाया गया था।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप इसको स्‍वयं पढ़ें, इसमें ऐसी कौनसी सूचना है जो नहीं मिल सकती?

श्री उपाध्‍यक्ष: इस दिनांक के पश्‍चात् विभाग द्वारा पत्राचार एवं व्‍यक्तिश: सम्‍बन्धित विभागों से कई बार सम्‍पर्क किया गया ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह बात नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: और सूचना प्राप्‍त नहीं हो पाने के कारण ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): हकीकत में बात यह है, समाज कल्‍याण मंत्रीजी यहां बैठे हैं ...

श्री उपाध्‍यक्ष: सूचना प्राप्‍त नहीं हुई तो ज्‍यादा सूचना प्राप्‍त करने के लिए ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक प्रोग्राम में मैंने खुद ने सुना है, समाज कल्‍याण मंत्रीजी ने कहा कि मैं कोई हिन्‍दुस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यक मानता ही नहीं, न यहां कोई अल्‍पसंख्‍यक नाम की चीज है इसलिए यह इसका जवाब नहीं देना चाहते हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, मैंने व्‍यवस्‍था दे दी है, प्रश्‍न स्‍थगित हो चुका। माननीय सदस्‍य। ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): जिस मंत्री की इस तरीके कि मानसिकता हो, यह कभी भी इसका जवाब इस सदन में नहीं आने देंगे लेकिन हम आसन से प्रोटेक्‍शन चाहे रहे हैं कि आप आश्वस्त करें कि इसका जवाब आयेगा या नहीं आयेगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री महीपाल मदेरणा।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): हिन्‍दुस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यक हम मानते ही नहीं, सभी बहुसंख्‍यक हैं। टोटली बहुसंख्‍यक हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मैंने ई टी वी के प्रोग्राम में मंत्रीजी मौजूद हैं, इन्‍होंने कहा कि काई अल्‍पसंख्‍यक नहीं मानता हिन्‍दुस्‍तान में। ...(व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): हम अल्‍पसंख्‍यक मानते ही नहीं हैं किसी को। हिन्‍दुस्‍तान में रहने वाला हर व्‍यक्ति बहुसंख्‍यक है और हम अल्‍पसंख्‍यक किसी को मानते ही नहीं हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थगित कर दिया है इसको।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): हमने कहा कांस्टीट्यूशन में प्रोविजन है, इन्‍होंने कहा मैं कुछ नहीं ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अल्‍पसंख्‍यक किसी को मानते ही नहीं हैं। नहीं मानते अल्‍पसंख्‍यक किसी को।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन सुन लें।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, देखिये।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप तो सदन को यह आश्‍वस्‍त कर दें कि इस चालू सत्र में इसका जवाब आ जायेगा कि नहीं आयेगा या आयेगा ही नहीं इसका जवाब, यह बता दें आप तो।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): हिन्‍दुस्‍तान में रहने वाले सभी बहुसंख्‍यक हैं, सब को समान रूप से माना जाता है, कोई अल्‍पसंख्‍यक नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हम तो आसन से प्रोटेक्‍शन मांग रहे हैं। आसन इस बात का जवाब दे दे कि इसका जवाब इसी सेशन में आयेगा या नहीं आयेगा? ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, समाज कल्‍याण मंत्रीजी बतायें कि वो इस सत्र की समाप्ति से पहले-पहले इसका उत्‍तर देंगे कि नहीं? समाज कल्‍याण मंत्रीजी को कहना चाहिए, सारे विभाग यहां पर हैं राजस्‍थान में ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): आप लोगों को संकीर्ण मानसिकता के आधार पर ...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): ऐसा काई यह कठिन प्रश्‍न है नहीं कि वो जानकारी दे नहीं सकते।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): आप लोगों को खाली संकीर्ण मानसिकता पर समाज को तोड़ना चाहते हो और बारबार अल्‍पसंख्‍यकवाद इस सदन में उठाया जाता है जबकि देश में किसी प्रकार की कोई भ्रांति नहीं है। ...(व्‍यवधान)... 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): इसलिए, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, समाज कल्‍याण मंत्रीजी को बताना चाहिए कि वो जवाब देंगे या नहीं देंगे, आप खड़े होकर बता दें।

श्री उपाध्‍यक्ष: राजसमन्‍द से आने वाले, माननीय सदस्‍य। ...(व्‍यवधान)...  अंकित नहीं हो। अब अंकित नहीं हो रहा है।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप बीच में काहे के लिए बोल रहे हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इस पर कोई बहस नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बीच में नहीं।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, संभव होगा तो देंगे ...(व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। ...(व्‍यवधान)... अब अंकित नहीं हो रहा है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रश्‍न स्‍थगित हो चुका है। श्री संयम लोढ़ा।

माननीय सदस्‍य, आसन से व्‍यवस्‍था दी जा चुकी है। अब अंकित नहीं हो रहा है। ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: कोई अंकित नहीं हो रहा है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपके कहने से मैं नया कुछ नहीं ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण करें।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण करें।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण कीजिए, आप बिना परमिशन के अंकित नहीं होगा। बीच में, माननीय सदस्‍य, आप बिना परमिशन लिये क्‍यों बोल रहे हैं?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप हमें रोक रहे हो बारबार, प्रश्‍न हमारा है और तीन दफे स्‍थगित कर दिया।

श्री उपाध्‍यक्ष: एक बार स्‍थगित हुआ है, माननीय नेता महोदय, 14.03 को हुआ है लेकिन आज रखा गया था उसके बावजूद भी, पूरे प्रयत्‍न के बावजूद भी सूचनाएं प्राप्‍त नहीं हो पायी हैं।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): कब तक हो जायेगा?

श्री उपाध्‍यक्ष: अब कब तक हो जायेगा ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह वहां मुगदर घुमा रहे थे, तैयारी कहां कर रहे थे जवाब की।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): जवाब तो आ रहा है न, सुनो तो सही। क्‍यों स्‍थगित हो रहा है, मान्‍यवर, यह?

श्री उपाध्‍यक्ष: ज्‍यादा सूचनाएं हैं। होता है, कई बार होता है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): तो जवाब नहीं आ रहा है?

श्री उपाध्‍यक्ष: जवाब आया नहीं है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं आया?

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक भी सूचना ऐसी नहीं है जो ज्‍यादा हो। आप देखें।

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं आया और व्‍यक्तिश: भी एप्रोच हो गयी, पूरे प्रयत्‍न हो रहे हैं। ज्‍यादा सूचनाएं एकत्रित करनी थी। बहुत बार होता है ऐसा। ऐसी कौनसी प्रश्‍न के अन्‍दर, अगर प्रश्‍न आ जाए, अब आ जावे तो छिपाने की ऐसी क्‍या बात है? ऐसा काई नहीं है कि जानबूझकर के इसके अन्‍दर सरकार कोई तरह से लापरवाही कर दी गयी ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप आज क्‍या फरमाते हैं, यह बताओ।

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं, यही कहा कि आज स्‍थगित हुआ है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आज आसन की क्‍या व्‍यवस्‍था है?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): स्‍थगित कर दिया आसन ने।

श्री उपाध्‍यक्ष: अब यह तो जो सूचनाएं हैं, व्‍यक्तिश: भी कोशिश हो चुकी है। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप तो सदन को भी स्‍थगित कर के भाग जाओ लेकिन भागने नहीं देंगें हम। आपकी मंशा इसको भी स्‍थगित कर के ...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): पहले आप भागोगे उसके बाद हम, हमारी सोचना आप। आज तक तो निहाल किया नहीं आपने।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): एक भी बिंदु ऐसा नहीं है जिसका जवाब पाँच दिन में नहीं दे सकते हो। आप स्‍वयं गौर फरमाएं, जानबूझकर के सरकार गलत नीयत से इसका जवाब नहीं देना चाहती।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अख़बार लिखते हैं कि प्रतिपक्ष को विधान सभा ढ़ो रही है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपको इस सेशन में ज्‍यादा नहीं बोलना चाहिए, आपके साथ हमारी संवेदनाएं हैं इसलिए ज्‍यादा मत बोलो आप। हमने आपको संवेदना संदेश भेजा है, हमारे उसकी लिहाज रखो कुछ तो।

आसन की क्‍या व्‍यवस्‍था है, मान्‍यवर, आज की।

श्री उपाध्‍यक्ष: आज तो स्‍थगित कर दिया है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): स्‍थगित कर दिया। नहीं, आप आश्‍वासन दे रहे हैं न कि सरकार से जवाब मंगायेंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: अगर सूचनाएं प्राप्‍त हो गयीं तो इसी सदन के समय में ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जितनी सूचनाएं उपलब्ध हैं उतनी दिलवा दीजिए। जितनी भी उपलब्‍ध हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: अब जितनी का तो ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप के, इस सरकार के पास पूरी सूचना नहीं होंगी, जितनी उपलब्‍ध है वह कह दीजिए आप। क्‍या तकलीफ है?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थगित होते हैं। ऐसी परम्‍परा है। ...(व्‍यवधान)... इसमें कोई नयी बात नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपके पास जितनी सूचना उपलब्‍ध है उतनी सूचना कर दीजिए, बात खतम हुई।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपकी व्‍यवस्‍था के बाद में सरकार मजबूर हो जायेगी और वो देगी आपको। आप व्‍यवस्‍था दे दीजिए।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): वेश्म में मिलो।

श्री उपाध्‍यक्ष: कोशिश की जायेगी, माननीय नेता प्रतिपक्ष।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हैं?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय नेता प्रतिपक्ष, जवाब, कोशिश है बराबर, अगर सूचनाएं प्राप्‍त होंगी तो लगा दिया जायेगा। 14 तारीख से आज की तारीख निश्चित कर के लगाया था।

 

Ars/usc/1110/1b/28032007/1

 

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप अलाऊ तो कर दीजिए कि हम पूरी कोशिश करेंगे कि जवाब आए।

श्री उपाध्‍यक्ष: कोशिश करेंगे, बराबर कोशिश करेंगे, इसमें कोई टालने की नीयत थोड़े ही है। श्री संयम लोढ़ा।

जयपुर विकास प्राधिकरण क्षेत्राधिकार

की नीलामी योग्‍य सम्‍पत्ति हेतु गठित समिति

153. श्री महीपाल मदेरणा (भोपालगढ़) व श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): क्‍या नगरीय विकास एवं आवासन राज्‍य मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा प्राधिकरण क्षेत्राधिकार में नीलामी योग्‍य सम्‍पत्ति का ब्‍यौरा प्राप्‍त करने हेतु समिति का गठन किया गया है? यदि हां, तो उक्‍त समिति का गठन कब हुआ तथा उक्‍त की बैठकें किसकी अध्‍यक्षता में होती हैं ? उक्‍त समिति में कौन कौनसे अधिकारी सदस्‍य हैं ? नाम व पद सहित विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) माह अगस्‍त, 2006 से दिसम्‍बर,2006 तक उक्‍त समिति की बैठकें कितनी बार व कब कब हुई ?

(3) क्‍या यह सही है कि जोन संख्‍या- 9 के उपायुक्‍त द्वारा ग्राम टीलावाला योजना (जयपुर विकास प्राधिकरण कर्मचारी/अधिकारी योजना) के व्यावसायिक भूखण्‍डों की नीलामी हेतु भूखण्‍डों की सूची उक्‍त समिति की बैठकों में प्रस्‍तुत की गई है ?यदि हां, तो सूची कब व कौनसी बैठकों में प्रस्‍तुत की गई ? यदि नहीं, तो उक्‍त अधिकारी द्वारा करोड़ों की राशि के भूखण्‍ड की सूचना नीलामी हेतु अब तक क्‍यों नहीं दी गई तथा विभाग द्वारा उक्‍त उपायुक्‍त के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई ?

(4) जोन संख्‍या- 9 के उपायुक्‍त द्वारा उक्‍त अवधि के दौरान कितनी सम्‍पत्ति का ब्‍यौरा नीलामी हेतु दिया गया ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय (श्री प्रताप सिंह सिंघवी): (1) जी नहीं।

(2) प्रश्‍न के खण्‍ड एक के उत्‍तर अनुसार समिति का गठन नहीं होने से बैठक होने का प्रश्‍न ही नहीं है।

(3) जी नहीं, ग्राम टीलावाला योजना में व्यावसायिक भूखण्‍डों के लिए चार ब्‍लॉक सृजित हैं। इन ब्‍लॉकों को विस्‍थापितों/ हितधारकों को पुनर्वासित / क्षति पूर्ति स्‍वरूप देने हेतु आरक्षित किया हुआ है। खुली नीलामी हेतु इन व्‍यवसायिक ब्‍लॉकों को निर्धारित नहीं किया हुआ है। अत: उपायुक्‍त जोन 9 के विरूद्ध कार्यवाही करने का प्रश्‍न ही नहीं उठता है।

(4) माह अगस्‍त, 2006 से दिसम्‍बर, 2006 तक की अवधि में उपायुक्‍त जोन 9 द्वारा महल योजना के भूखण्‍ड संख्‍या सी- 43, 44, 70, 71, 89 ,150 ,152, 155, 156 ,160, 166, 171 व डी- 20, 70, 93, 94, 101, 192, 117 व 219 नीलामी शाखा को प्रस्‍तुत किये गये हैं। इनमें से भूखण्‍ड संख्‍या सी- 43, 44, 70, 71, 155, 156, 159, 160, 166 व 171 का नीलामी द्वारा निस्‍तारण किया जा चुका है। शेष भूखण्‍डों की नीलामी की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय,  मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि प्रश्‍न के पहले और दूसरे भाग में जो मैंने पूछा है उसमें मेरा पूरा स्‍ट्रेस नीलामी पर है और सिर्फ चार महीने की अवधि की जानकारी मैंने मांगी है और दोनों की जानकारी आपने जी नहीं, जी नहीं में दे दी। आपके जयपुर विकास प्राधिकरण की 15 दिसम्‍बर को जो बैठक हुई है उसके कार्यवाही विवरण की सिर्फ पहली तीन लाइनें मैं आपको सुना देता हूं। जयपुर विकास प्राधिकरण, जयपुर कार्यवाही विवरण, नीलामी हेतु सम्‍पत्तियों की समीक्षा के क्रम में आज दिनांक 15.12.06 को प्रात: 11.30 बजे आयुक्‍त महोदय की अध्‍यक्षता में मीटिंग का आयोजन किया गया। मीटिंग में उपस्थित होने वाले अधिकारियों की सूची परिशिष्‍ट- अपर संलग्‍न है। उसके बाद में पूरी डिटेल है।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बहुत स्‍पेसिफिक, बहुत पाइन्‍टेड नीलामी के बारे में बात पूछी थी और दोनों बात का उत्‍तर छिपाने के पीछे मंत्री महोदय की क्‍या मंशा है, यह तो वही बता सकते हैं।

दूसरा, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं यह टीलावाला योजना 2003 में बनी तो विस्‍थापितों को यह व्‍यावसायिक भूमि देने का फैसला जे. डी. ए. ने किस तारीख को किया और राज्‍य सरकार ने उसकी स्‍वीकृति किस तारीख को प्रदान की, दोनों पत्र एक साथ कापी टेबल पर रख देना, जवाब इसका दे देना और जिन लोगों को आपने इसमें यह व्‍यावसायिक भूखण्‍ड दिये हैं इसका क्‍या आपने कोई सर्वे करवाया था और करवाया था तो उसकी सर्वे सूची क्‍या है ? वह टेबल पर रख दो और सर्वे नहीं करवाया तो आपने जिन लोगों के पास कोई पट्टा नहीं था, जिन लोगों के पास स्‍वामित्‍व नहीं था, कोई अधिकार नहीं था, उनको भूखण्‍ड देने का फैसला आपने किस आधार पर किया?

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस प्रकार की कोई बैठक नहीं हुई है, समिति की मीटिंग नहीं हुई है। जिस प्रकार का मैंने प्रश्‍न में जवाब दिया है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): नहीं, मेरे पास है, उसकी माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इजाजत हो तो मैं टेबल कर दूं यह प्रोसीडिंग्स का पेपर।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): यह रुटीन की बैठक थी, समीक्षात्‍मक बैठक थी और जे. डी. ए. की सम्‍पत्तियों के चिन्‍हीकरण व निस्‍तारण बाबत थी।

दूसरा, आपने निवेदन किया कि किस प्रकार से टीलावाला योजना में यह जो जगतपुरा के विस्‍थापित हैं उनको जमीन किस प्रकार से आबंटित की गयी या किस प्रकार से दी गई। मैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपको निवेदन करना चाहूंगा कि धारा 44 में इस प्रकार के जे. डी. ए. को पावर हैं कि वह लैण्‍ड फार लैण्‍ड, दे सकता है, जमीन के बदले जमीन दे सकता है, इस प्रकार का है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): जमीन के बदले जमीन तो दे सकते हैं पर मालिकाना हक तो होना जरूरी है, बिना टाइटल के आप जमीन कैसे दे सकते हैं ?

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): मैं आपको बता रहा हूं ना ।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप पहले जवाब आने दीजिए।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पूरा सम्‍बन्धित मामला रेल्‍वे ओवर ब्रिज से है। जगतपुरा में जो ओवर ब्रिज बन रहा है वहां पर कुछ दुकानें और कुछ मकानात आ गये थे। हमको पब्लिक इंट्रेस्‍ट में उन दुकानों को और मकानों को हटाना आवश्‍यक था और इस स्‍ट्रक्‍चर को हटाने का निर्णय इन्‍हीं की सरकार के टाइम पर हुआ था। उपाध्‍यक्ष महोदय, इसमें 133 दुकानें और 38 मकानों का शेष चिन्‍हीकरण रह गया है बाकी सब हटा दिये हैं हमने और उसके बदले में हमने इनको जो भी आबंटित हैं इनको टीलावाला में पहले आओ पहले पाओ की नीति के आधार पर हमने इनको आबंटन किया है फिर भी मैं आपको यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि टीलावालामें कुल चार व्‍यवसायिक ब्‍लॉक में कुल क्षेत्रफल 4225.07 वर्ग मीटर भूमि में पच्‍चीस विस्‍थापितों को 749.62 वर्ग मीटर भूमि आबंटित की गई है बाकी चार को आनन्‍द विहार में 99.38 वर्ग मीटर व्‍यवसायिक भू खण्‍ड आबंटित किये गये हैं तथा दस विस्‍थापितों को महल विस्‍तार योजना में आवासीय भूखण्‍ड आबंटित किये गये हैं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह अलग अलग देने का निश्‍चय हमको इसलिए करना पडा कि उनकी खुद की चॉइस थी और पहले आओ और पहले पाओ की नीति के तहत उन्‍होंने जहां पर भी हमको भूखण्‍ड मांगा, उसको हमने दिया है। मैं माननीय सदस्‍य को यह निवेदन करना चाहूंगा कि इसमें किसी भी प्रकार की कोई गलती हमारी तरफ से नहीं रही है, ना ही जोन आयुक्‍त की बात कर रहे हैं डीसी 9 की, उस मामले को मैंने काफी गम्‍भीरता से देखा है, किसी प्रकार की गल्‍ती नहीं पाई है फिर भी माननीय सदस्‍य इस प्रकार का जो डी सी 9 के लिए बात कर रहे हैं कि उन्‍होंने इसमें कुछ गड़बडि़यां करके किसी को आबंटन में आगे पीछे किया है तो निश्चित रूप से वह मेरे को अवगत करा दें, अगर गलती पाई गई तो निश्चित रूप से कार्यवाही करूंगा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैंने दो पाइन्‍टेड सवाल पूछे हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: जवाब दे दिया ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, दो पाइन्‍टेड सवाल पूछे हैं। जयपुर विकास प्राधिकरण ने इन विस्‍थापितों को टीलावाला योजना में भूखण्‍ड देने का फैसला किस तारीख को किया, राज्‍य सरकार को किस तारीख को प्रस्‍ताव भेजा, राज्‍य सरकार ने किस तारीख को इसकी स्‍वीकृति प्रदान की? मैंने दूसरी सूचना पूछी है कि जब आपने कोई सर्वे नहीं करवाया, कोई सूची नहीं बनाई तो यह पहले आओ पहले पाओ में माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से सरकार का ध्‍यान आकृष्‍ट करने के पीछे वह सैकड़ों शिकायतें हैं जो भ्रष्‍टाचार इसके अन्‍दर हुआ है, मर्जी आए जिसको पैसे लेकर के जमीन दे दी, मर्जी आए जिसको आगे पीछे कर दिया, सारे लोगों के ....

श्री उपाध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछ रहे हैं या भाषण दे रहे हैं?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप बता दीजिए। उपाध्‍यक्ष महोदय, भाषण देने का कोई सवाल नहीं है, मैंने स्पेसिफिक पूछा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: स्‍पेसिफिक जवाब आ जाएगा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप बात तो सुनिये, जिन लोगों के पास कोई स्‍वामित्‍व नहीं था, कोई पट्टा नहीं था ...(व्‍यवधान) तो वही तो उपाध्‍यक्ष महोदय से कह रहा हूं तो सर्वे के अलावा कौनसा माध्‍यम हो सकता है उनको देने का ? यह खुद कह रहे हैं कि अगर हुई है तो मैं जांच करा लूंगा, यह क्‍या बात हुई ?

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने इस मामले को काफी गम्‍भीरता से देखा है, माननीय सदस्‍य का प्रश्‍न लगने के बावजूद मुझे किसी भी प्रकार की डी सी 9 की कोई गलती नहीं पाई गई है फिर भी माननीय सदस्‍य किसी स्‍पेसिफिक बात को मेरे को बताएंगे तो मैं निश्चित रूप से जांच करा लूंगा। जहां तक बैठक का सवाल है, बैठक में यह जो निर्णय हुआ है यह 22.12.06 को निर्णय हुआ और सरकार ने 27.9.2006 को ....

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उससे पहले तो आपने दे दिये, उससे पहले तो कब्‍जा करा दिया आपने वहां पर। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह प्रश्‍न मैं पिछले सत्र में भी लगा चुका हूं । दिसम्‍बर के अन्‍दर तो उन्‍होंने फैसला किया, दो महीने पहले यह फैसला भी तब हुआ...............

 

 

vns/usc/11.20/1c/28.3.2007/1

 

जब पिछले छठे सत्र में मैंने विधान सभा में प्रश्‍न लगा दिया था उसके बाद सिर्फ सारी कार्यवाही से बचने के लिये जे.डी.ए. के अन्‍दर यह फैसला कराया गया। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उससे पहले ही यह सारा भ्रष्‍टाचार हो चुका है। सारे पैसे हड़पे जा चुके हैं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस तरह से ... (व्‍यवधान) 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप कोई एक्‍सप्‍लेनेशन मांगना चाहे तो मांगिये बाकी जवाब आ चुका है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह कौनसी बात हुई ? 2003 की यह हो जाए और एक अन्‍दर फैंसला करा रहे हो ... (व्‍यवधान) 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय, यह बता दें कि क्‍या यह सच है कि 22 तारीख के पहले वहां पर लोग काबिज हो गये ? इसकी जांच करवा दें आप। खाली इसकी जांच करवा लें। आपने फैंसला 22 तारीख को किया है। 22.12 के पहले यदि वहां पर लोग काबिज हो गये, जिन लोगों को जिम्‍मेदारी थी कि वहां काबिज नहीं हो क्‍या उनके खिलाफ आप कार्यवाही करेंगे ?

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): अगर इस प्रकार का भी कोई प्रकरण है तो उसकी भी मैं जांच कराऊंगा। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जहां तक स्‍वामित्‍व की जांच है, जिन लोगों का स्‍वामित्‍व था उन लोगों की जमीन आबंटित की है। जिन लोगों को भूखण्‍ड आबंटित किये हैं उसके अलावा किसी और को नहीं दिये हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री सी.डी.देवल।

महिला एवं बाल विकास परियोजना

अधिकारी के पद पर पदस्‍थापित कृषि पर्यवेक्षक

154. श्री सी. डी. देवल (रायपुर): क्‍या महिला एवं बाल विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी(सी.डी.पी.ओ.) के पद पर प्रतिनियुक्ति पद अन्‍य विभागों से अधिकारी पदस्‍थापित किये जाते हैं ? यदि हां, तो किस-किस श्रेणी के अधिकारी व किस विभाग के अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर लगाये जाते हैं ? इस सम्‍बन्‍ध में जारी नियम व परिपत्रों की प्रति सदन की मेज पर रखे।

(2) क्‍या यह सही है कि महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी(सी.डी.पी.ओ.) के पद पर कृषि पर्यवेक्षकों को लगाया गया है ? यदि हां, तो सूची सदन की मेज पर रखें।

(3) क्‍या यह सही है कि कृषि विभाग से जिन कृषि पर्यवेक्षकों को महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी(सी.डी.पी.ओ.) बनाया गया है, उनके लिये कृषि विभाग से सहमति नहीं ली गयी ? यदि सह‍मति ली गयी तो सहमति पत्र की प्रति सदन की मेज पर रखें और यदि सहमति नहीं ली गयी तो क्‍यों ? इसके लिये कौन अधिकारी दोषी है ? सरकार इन दोषी अधिकारियों के विरुद्ध क्‍या कार्यवाही करने का विचार रखती है ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): (1) जी हां। निम्‍न श्रेणी के अधिकारी बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर प्रतिनियुक्ति पर लगाये गये हैं:-

क्रम संख्‍या

श्रेणी

विभाग जिससे अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर लिये गये

1 

राजस्‍थान शिक्षा सेवा  

माध्‍यमिक शिक्षा विभाग

2

राजस्‍थान आयुर्वेद सेवा

आयुर्वेद विभाग

3

राजस्‍थान कृषि सेवा   

कृषि विभाग    

4

राजस्‍थान सिंचाई सेवा  

सिंचाई विभाग  

5

राजस्‍थान चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य सेवा

चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य 

6

राजस्‍थान उच्‍च शिक्षा सेवा    

कॉलेज शिक्षा विभाग   

7

पशुपालन विभाग

पशुपालन विभाग  

 

नियमों की प्रति परिशिष्‍ट- पर संलग्‍न है।

(2) कृषि पर्यवेक्षकों को सहायक बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर प्रतिनियुक्ति पर लगाया गया है। वर्तमान में दो कृषि पर्यवेक्षक सर्वश्री अनोप सिंह व हनुवन्‍त सिंह, सहायक बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर प्रतिनियुक्‍त हैं, जिन्‍हें बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद के विरुद्ध अस्‍थाई तौर पर लगाया गया है।

(3) कृषि पर्यवेक्षकों को कृषि विभाग की सहमति से ही इस विभाग में बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर प्रतिनियुक्ति पर लगाया गया है (आदेशों की प्रति संलग्‍न है) विभागीय गतिविधियों के संचालन हेतु एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद रिक्‍त होने के फलस्‍वरूप वर्तमान में इन्‍हें बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद के विरुद्ध अस्‍थाई तौर पर लगाया हुआ है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जनना चाहता हूं कि आयुर्वेद विभाग, पशुपालन विभाग और कृषि विभाग के अधिकारियों को सहायक बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर प्रतिनियुक्ति पर लिया गया है। वह कौनसे नियम के तहत लिया गया है और सरकार ने नियमों में किस-किस सेवा से प्रतिनियुक्ति पर लेने का प्रावधान रखा है?

नम्‍बर दो, जब विभाग के अन्‍दर महिला पर्यवेक्षक उपलब्‍ध हैं जिनकी बीस-बीस साल से पदोन्‍नति नहीं हुई है और महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी का पद पदोन्‍नति का है तो इस पर फिर आपने प्रतिनियुक्ति पर क्‍यों लिया?

नम्‍बर तीन, प्रतिनियुक्ति पर रखने की अवधि आपके नियमों में कितनी है और जिन दो कृषि पर्यवेक्षकों का मैंने प्रश्‍न किया है इनको प्रतिनियुक्ति पर आये कितने साल हो गये हैं?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो पद रिक्‍त थे इस पर प्रतिनियुक्ति पर लगाया गया है व कृषि विभाग से लगाये गये हैं और वे दोनों ही 2002-2003 से लगाये गये हैं। इसके बाद हमने कभी भी इस प्रकार की नियुक्ति नहीं दी है। यह तो पद रिक्‍त थे। हमारी तकलीफ यह है कि महिला बाल विकास विभाग प्रतिनियुक्तियों पर लेकर ही चलाता है इसीलिए हमने ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इसीलिए मुख्‍य मंत्री को भी प्रतिनियुक्ति पर लिया है। ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): क्‍या?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इसीलिए मुख्‍य मंत्री को भी प्रतिनियुक्‍ति पर लिया है। ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा सवाल यह है कि ए.सी.डी.पी.ओ. का पद पदोन्‍नति का पद है तो उनके विरुद्ध आपने प्रतिनियुक्ति पर क्‍यों दिया? दूसरा, जो नियम है इस नियम के 32 में अर्जेंट अस्‍थाई नियुक्ति का प्रावधान है उसमें तीन साल है। इनको आपने 2002-2003 में लिया है तो इनको तीन साल पूरे हो गये। अब इनको आप कब हटाना चाहते हैं? वापस इनकी सेवाएं कृषि को कब भेजेंगे?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): मैं बताता हूं। ऐसा है कि जो इनको प्रतिनियुक्ति पर लिया गया है, रिक्‍त स्‍थान है, मूल वेतन पर उनको हमने, उसका लाभ वेतन पर नहीं दिया है और आपके समय का जब लगाया हुआ है, हमारे पद रिक्‍त हैं तो उसको उसी मूल वेतन पर कार्य संचालन की दृष्टि से लगाया गया है उससे हम काम ले रहे हैं और इसीलिए इसमें कहीं दिक्‍कत नहीं आ रही है, मूल वेतन पर ही हमने लगाया है उसको ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, नियम-32 जो परिशिष्‍ट में दिया है, वह बहुत स्‍पष्‍ट है कि प्रतिनियुक्ति की अवधि सिर्फ एक साल हो सकती है। अर्जेंट एक साल हो सकती है अधिकतम तीन साल हो सकती है तो इन दोनों कृषि पर्यवेक्षकों को तीन-तीन, चार-चार साल हो गये इस तरह और यह अनियमितता बरतने के दोषी है ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): कहीं पद का लाभ, सी.डी.पी.ओ. के पद का लाभ नहीं दिया है उसका पावर है वह भी डी.डी.ओ. के पास है, पावर भी नहीं दिया है । पद रिक्‍त होने के स्थिति में हमने इनको लगाया है। वह तब से ही लगे हुए हैं। उसके बाद हमने नहीं लगाया है। तब से ही लगे हुए हैं जब से आपने लगा रखा है। वह भी उसी मूल वेतन पर लगाया है। ऐसे नहीं लगाया है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): प्रश्‍न यह नहीं है, माननीय मंत्रीजी, मेरा प्रश्‍न यह नहीं है कि मूल वेतन पर लगाया या नहीं लगाया ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: अब आप हटाना चाहते हो? ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपने लगा दिया, हालांकि ए.सी.डी.पी.ओ. के पद जिस किसी ने भी लगाया, चाहे हमारी सरकार ने लगाया, चाहे आपने लगाया, जिन्‍होंने भी लगाया गलत लगाया। ए.सी.डी.पी.ओ. के लिए लेडीज सुपरवाइजर की नियुक्ति की जाए। जब इनकी अधिकतम अवधि तीन साल आपके नियमों में है तो नियम विरुद्ध तरीके से इनको क्‍यों रखा जा रहा है? इसके लिए आप क्‍या कर रहे हैं, क्‍यों नहीं हटाते इनको?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): मैंने वही निवेदन किया, माननीय सदस्‍य। पद रिक्‍त होने की वजह से समय-समय पर उसकी आवश्‍यकता को ध्‍यान में रखते हुए हमने अवधि बढ़ाकर रखी है और जब भी यह हमने प्रयास किये हैं ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अब नियम 32 है आपका। परमानेंट आप लगा ही नहीं सकते। अवधि बढ़ाने के ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): तो अभी जो प्रयास किये हैं आपको तो धन्‍यवाद देना चाहिए कि आपके सरकार के समय में ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): बिलकुल धन्‍यवाद देते हैं आपको कि आपने न्‍याय किया है।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): धन्‍यवाद देना चाहिए कि हमने दो सी.डी.पी.ओ. इनके ए.सी.डी.पी.ओ. और डी.डी.ओ. इनको पदोन्‍नत करके पहली बार इतनी संख्‍या में हमने लगाया है। ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): मैं आपको धन्‍यवाद देता हूं लेकिन यह आप नियम विरुद्ध कार्य क्‍यों कर रहे हैं? नियम विरुद्ध कार्य करने का क्‍या कारण है? आपने ही नियम बनाये। नियम 32 स्‍पष्‍ट है उसके अन्‍दर तीन साल से ज्‍यादा रह नहीं सकते। इनको तीन-तीन साल हो गये ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): नियम विरुद्ध नहीं है। विभाग की आवश्‍यकता के कारण होता है, पिछले साल तक की इसकी अवधि ... (व्‍यवधान) चार साल की अवधि तक के हम लेते हैं आवश्‍यकता पड़ने पर। ऐसी आवश्यकता है कि नियमित रूप से कार्य-संचालन की दृष्टि से हमने इसको लगाया है ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): एक आदमी ... (व्‍यवधान) कोई आवश्‍यकता नहीं है। ऐसी अर्जेंट आवश्‍यकता में अधिकतम तीन साल है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अर्जेण्‍ट आवश्‍यकता में अवधि तीन साल है अब आप इसको नियम विरुद्ध क्‍यों रखते हैं?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): अगर आप चाहते हैं कि आपके यहां पर खाली रहे, कोई काम नहीं हो तो फिर हमको कोई एतराज़ नहीं है, आप बतायें जैसा भी ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप खाली की बात करते हो। आपने जो नियमित आपके विभाग का सी.डी.पी.ओ. था उसको तो हटा दिया। ए.पी.ओ. कर दिया, उसकी जगह आपने जो कृषि पर्यवेक्षक था उसको चार्ज दिला दिया, यह कौनसा न्‍याय है आपका?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, जवाब आ चुका है1

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आज जब आपके विभाग का सी.डी.पी.ओ. है उसको आपने ए.पी.ओ. कर दिया ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय सदस्‍य, यह जो आपकी राजनीति चल रही है न उसी आधार पर ही हो गया है बाकी ऐसा नहीं है, आप नहीं चाहो, दूसरे माननीय सदस्‍य नहीं चाहे तो यह विवाद ही खड़ा नहीं हो या राजनीतिक स्‍टंट नहीं बनायें। ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): हम तो यह चाहते हैं कि जिनको तीन साल पूरे हो गये, नियम विरुद्ध काम कर रहे हैं उनको आप वापस विभाग में भेजिये। किसी को भी लगाओ आपकी मर्जी ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): यह विभाग की आवश्‍यकताओं को देखते हुए कि उसके ऊपर मूल वेतन पर कार्य-संचालन की दृष्टि से लगाया गया ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह कौनसा नियम है? नियम बता दें। ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): अगर आप नहीं चाहते कि आपके एरिया में यह खाली रहे, कार्य-संचालन नहीं हो तो फिर हमको कोई एतराज़ नहीं है, आप जैसा भी कहें। ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप नियमों से बंधे हुए हैं, नियम बता दें कि इसके तहत आप उनको रख रहे हैं, मुझे कोई एतराज़ नहीं है ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): अब तो बढ़ाई है अवधि, जैसी विभाग की आवश्‍यकता थी उसके अनुसार बढ़ाया है। ... (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मैं मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि देसूरी सी.डी.पी.ओ. को स्‍थानांतरण की रोक के बावजूद किस आधार पर हटाया गया और कृषि पर्यवेक्षक को वहां पर लगाया गया? ... (व्‍यवधान) मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि किस कारण से सी.डी.पी.ओ. को हटाया गया देसूरी में ? ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने यही निवेदन किया, माननीय देवल साहब और अन्‍य माननीय सदस्‍य अगर राजनीतिक भूमिका वहां पर नहीं रखें, कार्य सम्‍पादन की दृष्टि से, संचालन की दृष्टि से, तो मैं यह सोच रहा हूं कि हटाने का विषय नहीं था। एक दूसरे का यह विवाद चल रहा है कि इनको लगाना है। आज कल एक चपरासी, एक मामूली ड्राइवर और मामूली सी.डी.पी.ओ. के लिये अगर कोई माननीय सदस्‍य आपस में एक दूसरे को हटाना है, इसको नहीं लगाना, इस प्रकार का विवाद करें तो विभाग कैसे काम कर सकता है। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि इस प्रकार हमें राजनीति से ऊपर उठ कर काम करना चाहिये ... (व्‍यवधान) आपको धन्‍यवाद देना चाहिये था इसके लिये तो ... (व्‍यवधान) यह आपके द्वारा ही लगाया था ... (व्‍यवधान) हमारा विषय ही नहीं है ... (व्‍यवधान) 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): मेरा प्रश्‍न तो केवल यह है कि आपने नियमों के तहत इनको लगाया बहुत अच्‍छी बात है लेकिन इनको चार-चार साल हो गये। तीन साल से ज्‍यादा आपके इन नियमों के तहत कहीं प्रावधान नहीं है कि तीन साल ज्‍यादा आप बढ़ा सकते हैं ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: वह आ गया।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): तो आप इनको क्‍यों नहीं हटाते हो ? आप किसको लगाओ आप जानो हमने तो आपको न तो उस सी.डी.पी.ओ. को लगाने का कहा, न बाबू लगाने का कहा और न चपरासी लगाने का कहा। जो नियमानुसार है वह काम करें आप।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): रिक्तियों को ध्‍यान में रखते हुए किया। उस वजह से किया है ... (व्‍यवधान) 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): तीन साल हो गये, इनको हटाएं। मेरा तो प्रश्‍न सिर्फ यह था। या तो नियमों में संशोधन कर दे। आप या तो नियमों में संशोधन कर दें ... (व्‍यवधान) 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्री महोदय, या तो नियमों में संशोधन कर दें या इनको हटा दें ... (व्‍यवधान) 

श्‍याम/चौहान   28.03.2007   11.30   1d 

 

 

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): तीन साल के बाद से नये आदेशों से   प्रतिनियुक्ति की अवधि क्‍या बढ़ायी गयी है और बढ़ायी गयी है तो वह कितनी बढ़ायी गयी है, इसका जवाब आप दें ना ...(व्‍यवधान)  

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह लगाने और हटाने के लिए विधान सभा में सवाल लगाये गये हैं, यह स्‍वयं के हित से जुड़ा हुआ मामला है ...(व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): अवधि बढ़ाई है समय-समय पर, इसके आदेश भी मेरे पास यहां मौजूद हैं, अगर आप चाहें तो मैं पूरा पढ़ दूं ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह ट्रांसफर विधायक का कोई अधिकार नहीं है ...(व्‍यवधान) उपाध्‍यक्ष महोदय, क्‍या देख रहे हैं आप ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अवधि बढ़ाने की प्रति सदन के पटल पर रख दें ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह विधान सभा का उपयोग किस तरह से किया जा रहा है ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह विधान सभा नियमों के उपयोग के लिए हो रही है, डुबकी लगाने के लिए नहीं हो रही है ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बिराजें। जवाब आ गया है ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह इन नियमों के तहत हो रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह आप *** कर रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप जो गलत काम कर रहे हैं उसको रोकने के लिए यह विधान सभा है ताकि आप पर अंकुश लग सके और आपकी गलत ग‍तिविधियों पर अंकुश लग सके ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री प्रमोद जैन भाया ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): जो नियम हैं उनका पालन होना चाहिए, हमारा तो कहना इतना सा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, श्री प्रमोद जैनभाया

जिला खेल अधिकारी/कोच के रिक्‍त पद

155.श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): क्‍या युवा एंव खेलकूद मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) 33 वें राष्‍ट्रीय खेल 2007 में राज्‍य के खिलाडि़यों को कितने स्‍वर्ण पदक किस-किस खेल में प्राप्‍त हुए। विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) राज्‍य के किस-किस जिले में जिला खेल अधिकारी के पद कब-कब से रिक्‍त चल रहे हैं। विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) राज्‍य के किस-किस जिले में किस-किस खेल के कोच के कितने-कितने पद कब से रिक्‍त हैं। विवरण सदन की मेज पर रखें।

(4) राज्‍य के किस-किस जिला मुख्‍यालय एवं उपखण्‍ड मुख्‍यालय पर खेल स्‍टेडियम नहीं हैं। विवरण सदन की मेज पर रखें।

खेल मंत्री (श्री युनुस खान): (1) 33वें राष्‍ट्रीय खेल 2007 में राज्‍य के श्री जुबिन कुमार एवं कुमारी विशाखा विजय ने मिश्रित युगल टेबिल टेनिस खेल में स्‍वर्ण पदक प्राप्‍त किया है।

(2) राज्‍य के निम्‍नलिखित जिलों में खेल अधिकारी के पद रिक्‍त हैं:-

  क्र.सं.        जिले का नाम       रिक्‍त रहने की दिनांक     

  1.           अजमेर            01.05.2001

  2.          अलवर             13.03.2000

  3.          बांसवाड़ा           30.03.1999

  4.          बारां               05.08.2000

  5.          भरतपुर            05.05.1999

  6.          बूंदी               20.12.1997

  7.          धौलपुर            14.11.2000

  8.          दौसा              03.07.2001

  9.          डूंगरपुर            02.11.1994

  10.         हनुमानगढ़          14.11.2002

  11.          जैसलमेर           09.05.1988

  12.         जालौर             21.12.1995

  13.         करौली             17.07.2001

  14.         सिरोही             19.06.1999

  15.         बाड़मेर             22.04.2003

  16.         सवाई माधोपुर       15.12.2000

  17.         टौंक               30.06.1999

(3) राज्‍य में जिले वार प्रशिक्षकों(कोच) के पद स्‍वीकृत नहीं किये जाते हैं।

(4) राज्‍य में ऐसा कोई जिला मुख्‍यालय नहीं हैं जहां स्‍टेडियम नहीं है। परिशिष्‍ट संलग्‍न सूची में अंकित राज्‍य के उप खण्‍ड मुख्‍यालयों के अतिरिक्‍त अन्‍य उप खण्‍ड मुख्‍यालयों पर स्‍टेडियम नहीं है।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय के जवाब में जो बताया कि 33 वें राष्‍ट्रीय खेल प्रतियोगिता में राजस्‍थान को स्‍वर्ण पदक मिला। यह चीज हम सबके लिए एक सोच का विषय है, मणिपुर जो एक छोटा सा राज्‍य है जिसकी आबादी और क्षेत्रफल जयपुर शहर के बराबर है। वहां के खिलाडि़यों ने 51 स्‍वर्ण पदक प्राप्‍त किये। मैं इस संदर्भ में माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि 33 वें राष्‍ट्रीय खेलों में राज्‍य का पदक तालिका में 24 वां स्‍थान, स्‍वर्ण पदकों की संख्‍या एक, राजस्‍थान के रणबाकुंरों का सिर गर्व से उठेगा या झुकेगा, सदन को अवगत करायें।

दूसरा, 17 जिलों में आपने उत्‍तर में बताया है कि खेल अधिकारियों के पद रिक्‍त हैं, इसमें से जैसलमेर में 19 वर्षों से, डूंगरपुर में 13 वर्षों से, बारां में 7 वर्ष से खेल अधिकारी नहीं है, विभाग पदस्‍थापन के स्‍थान पर वर्षों से रिक्‍त पद रखकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्‍ड रिकार्ड में नाम दर्ज कराने की भावना से कार्य कर रहा है या अन्‍य कोई कारण से, सदन को अवगत करायें।

तीसरा, खिलाडि़यों का वर्ष दर वर्ष घटिया प्रदर्शन, 33 वें राष्‍ट्रीय खेलों में राजस्‍थान को प्राप्‍त स्‍वर्ण पदकों की कम संख्‍या के लिए दोषी कौन है। खेल नीति, संसाधन एवं प्रशिक्षकों की कमी या खिलाडि़यों के चयन में भाई-भतीजावाद या माननीय मंत्री महोदय के पास खेलों के विकास और नीति बनाने हेतु समय का अभाव, कृपया सदन को अवगत करायें।

श्री उपाध्‍यक्ष: इनका जवाब आने दें।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): इनका जवाब दिला दें ...(व्‍यवधान)

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, बारां से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो चिंता व्‍यक्‍त की है, यह बात सही है कि राजस्‍थान एक जमाने में खेलों का सिरमौर हुआ करता था और शनै:-शनै: राजस्‍थान की स्थिति खेलों की दृष्टि से कमजोर हुई। मात्र राजस्‍थान की ही नहीं, अगर हम ओलंपिक, एशियाड या किसी भी तरह की अन्‍तरराष्‍ट्रीय स्‍तर की प्रतिस्‍पर्धा देखें और आपने देखा होगा कि अभी-अभी वर्ल्‍ड कप हुआ है क्रिकेट का।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): हम तो हमारे प्रदेश की देखें। राष्‍ट्रीय स्‍तर पर जो, प्रदेश की स्थिति है उसमें बतायें आप तो ...(व्‍यवधान) वर्ल्‍ड कप की तो सबको याद है इंडिया की टीम ने जो दुर्गति की है वह तो सबके सामने हैं। आप तो अपने प्रदेश को तो संभालें, जिसके आप मालिक हैं ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आप सुनें पहले।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): क्रिकेट का तो कोई मैच ही नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, सब जगह खेलों की स्थिति भारत में खराब है और राजस्‍थान में भी यह कहा कि अभी 33वीं राष्‍ट्रीय खेलकूद प्रतियोगिता हुई उसमें जो स्‍टैंडर्ड रहा खेलों का उसमें भी चूंकि जिन लोगों ने पार्टिसिपेट किया उन्‍हीं में से चुन लिया। जहां तक राजस्‍थान का सवाल है, राजस्‍थान में खेल अधिनियम 2005 हम लेकर के आये। उसकी बदौलत ओलंपिक संघ ने राजस्‍थान के बहुत सारे खेलों पर प्रतिबंध लगा रखा है। हमारी राजस्‍थान की टीमें उसमें हिस्‍सा नहीं ले सकती हैं और राजस्‍थान की टीम जिसमें बास्‍केटबाल, वालीबाल और एथलीट जिनमें हमारे पास अन्‍तरराष्‍ट्रीय स्‍तर के भी प्‍लेयर हैं, जो अच्‍छा स्‍टैंडर्ड रखते हैं शूटिंग वगैरह में, उन लोगों को भी पार्टिसिपेट नहीं करने दिया है और आज हमारी बास्‍केटबाल और दो टीमें भी थी जो बाहर दूसरी प्रतिस्‍पर्धा में गयी हुई थी उसकी वजह से यह कमजोर रहा।

उपाध्‍यक्ष महोदय, यह बात सही है और माननीय सदस्‍य की चिंता भी सही है कि राजस्‍थान की स्थिति खेलों की दृष्टि से कमजोर है। पिछले वर्षों में यह देखा जाये तो बजट की कमी होना और दूसरे कारणों में खेल अधिकारियों, कोचेज की भी कमी रही क्‍योंकि पिछले कुछ वर्षों में भर्ती नहीं हुई। भर्ती नहीं होने का भी महत्‍वपूर्ण कारण यह है कि राजस्‍थान में खेल सेवा नियम नहीं बने हुए हैं और जो भर्ती पुराने समय में हुई थी उसके पश्‍चात नई भर्तियां नहीं हुई। हमने नये खेल सेवा नियम बनाये हैं उनके तहत हम अब भर्ती करेंगे। माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने अभी-अभी जो बजट इसी वर्ष में पेश किया है।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): भर्ती कब तक करेंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य बीच में नहीं बोलें।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): आप बैठें तो सही। अभी बजट जो पेश किया है उसमें पहली बार राजस्‍थान में खेलों के प्रति रूझान किसी वित्‍त मंत्रि के रूप में किसी ने रखा है तो हमारी माननीय मुख्‍यमंत्री जी वसुन्‍धरा राजे जी ने रखा है। गांवों तक खेलों को ले जाने के लिए, जिन गांवों में पाँच हजार की जनसंख्‍या है उनमें यह भर्तियां की जायेंगी। माननीय सदस्‍य ने कारण पूछा है, हमारा सबसे बड़ा कारण तो यह रहा है कि ओलंपिक संघ ने हमारी बहुत सारी टीमों को अलाऊ ही नहीं किया, जहां तक 33 वें राष्‍ट्रीय खेलों की स्थिति है क्‍योंकि हमारा पार्टिसिपेट यहीं से ही कम हुआ। इसमें स्‍वतंत्र रूप से खेल संघ अपनी टीमों को भेजते हैं और हमरे बार-बार आग्रह किया और इसी चिंता की वजह से इस बार शुरूआत से ही खेल संघों के साथ बैठकर और जो खिलाड़ी जिनमें दक्षता है, योग्‍यता है उनको चर्चा करके शुरू से ही प्रशिक्षण देंगे और नये प्रशिक्षक जब तक नयी भर्ती नहीं होंगे, अप्रैल, मई और अलग-अलग शिड्युल के मुताबिक हम कांट्रेक्‍ट पर भर्ती लेंगे। हर खिलाड़ी इस तरह से प्रशिक्षण लेगा जो राष्‍ट्रीय स्‍तर पर दक्ष हैं, उनको नये प्रशिक्षक लगाकर के हम प्रशिक्षण देंगे। जहां तक पदोन्‍नति और भर्ती का सवाल है, इस वर्ष तो हमारी यह मंशा है कि हम कांट्रेक्‍ट पर लेंगे और निश्चित रूप से नयी भर्ती भी 2007-08 में राज्‍य सरकार करने का प्रयास कर रही है। इसमें खेल सेवा नियम भी बन जायें और हमारी खेल नीति भी अंतिम दौर में है। उसके कुछ पार्ट माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने इस बजट में घोषित कर दिये हैं और माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने बजट के अंदर यह भी कहा है कि 30 जून तक हमारी यह खेल नीति सम्‍पूर्ण रूप से राजस्‍थान प्रदेश में आ जायेगी। पहली बार यह हमारी खेल नीति राजस्‍थान में लागू होगी जिससे खिलाडि़यों को प्रोत्‍साहन मिलेगा। राज्‍य सरकार का प्रयास है कि खिलाडि़यों को भी प्रोत्‍साहन मिले। खेलों का इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर भी विकसित करें। पिछले तीन सालों में सरकार ने इसका प्रयास किया है। आपने देखा होगा कि अंर्तराष्‍ट्रीय स्‍तर का इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर हमारे एस.एम.एस. स्‍टेडियम में है, वरन एस.एम.एस. स्‍टेडियम ही नहीं हमारे जितने भी डिवीजनल हैडक्‍वार्टर हैं उनमें बाकायदा ...(व्‍यवधान)

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): आपके तीन साल के प्रयास तो यह पदक तालिका बता रही है मंत्री महोदय।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बिराजें। बीच में नहीं बोलें ...(व्‍यवधान)

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): तीन साल का ही है आपका मंत्री महोदय ...(व्‍यवधान) कि इसमें राजस्‍थान की स्थिति क्‍या रही, आपको और हम सबको शर्म के मारे चुल्‍लू भर पानी में डूब कर मर जाना चाहिए ...(व्‍यवधान)

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): उनके लिए क्‍या कर रहे हैं, आप यह तो बतायें ...(व्‍यवधान)

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): चिंता करके राजस्‍थान को वापिस हम खेल जगत में ला रहे हैं। खिलाडि़यों को भी प्रोत्‍साहित कर रहे हैं। खेल की संस्‍था भी तैयार कर रहे हैं और आने वाले समय में, आने वाले वर्षों में जब भी राष्‍ट्रीय और अंर्तराष्‍ट्रीय स्‍तर की प्रतिस्‍पर्धा होगी उनमें हमारा स्‍टेट आगे आयेगा।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्रि जी से जानना चाहूंगा कि जो अंर्तराष्‍ट्रीय प्रतिस्‍पर्धाएं हैं, उनको क्रम वाइज गिनकर बतायें और उसके लिए आपने जो पैकेज दिया है वह भी बतायें। अंर्तराष्‍ट्रीय खेल प्रतियोगिता होती हैं उसकी सूची भी बतायें और उनके लिए हाल ही में जो पैकेज मुख्‍यमंत्री जी ने अनाउंस किया है वह बतायें। दूसरा, आप यहां राजस्‍थान के खेलों में बैलगाड़ी दौड़ाकर, सितोलिया खिलाकर और उनको प्रोत्‍साहित करके दूसरे खेलों को रोकना चाह रहे हैं।

 

jyg/akt/28.3.7/11.40/1e

 

रोक रहे हैं और रोकना चाह रहे हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न भी इसी से सम्‍बन्धित है। मैं माननीय मंत्रीजी से यह पूछना चाहता हूं कि अन्तरराष्ट्रीय स्‍तर के जो खिलाड़ी हैं, जो ओलम्पिक में पोजिशन ला सकते हैं, उनको आप ट्रेनिंग देने के लिए क्‍या कोई व्‍यवस्‍था कर रहे हैं? अगर कर रहे हैं तो आप यह बताएं कि कृष्‍णा पूनिया नाम से एक एथलीट है जो ओलम्पिक में लास्‍ट पोजिशन से दो मीटर पीछे रही है, उसको ट्रेनिंग के लिए आपके पास एक रिक्‍वेस्‍ट आई है उसको सैंक्‍शन कर रहे हैं कि नहीं कर रहे क्‍योंकि आपने बताया कि वित्‍त मंत्री, मुख्‍य मंत्री महोदय खेलों पर ध्‍यान दे रही हैं, कृपया स्‍पष्‍ट करें।

श्री राव राजेन्‍द्र सिंह (बैराठ): उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक पॉइण्‍टेड प्रश्‍न है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्रीजी से यही निवेदन कर रहा हूं कि यह अच्‍छी बात है कि आप राजस्‍थान को बड़ी अग्रणी पंक्ति में ले जाना चाहते हैं। आप मुझे यह बता देना कि वर्ष 2006 में राजस्‍थान के किसी भी जिले में आपके किसी भी कलेक्‍टर ने जिला क्रीड़ा समितियों की एक भी बैठक बुलाई है क्‍या?

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसी से जुड़ा हुआ एक छोटा सा सवाल है। माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने अपने बजट भाषण में जो पैकेज अनाउन्‍स किया है, चूरू डिस्ट्रिक्‍ट की राजगढ़ तहसील की कृष्‍णा पूनिया जो दोहा एशियाड गेम्‍स, 2006 के अंदर के अन्‍दर कांस्‍य पदक जीतकर आई है, उसको आप प्रोत्‍साहन के रूप में क्‍या देंगे। यह भी आप अभी घोषणा कर दें क्‍योंकि पैकेज तो आगे से लागू होगा। 2006 के अंदर जिसने कांस्‍य पदक जीता एशियाड के अन्‍दर कम्‍पीटिशन में, उसका आप बताएं कि क्‍या करने वाले हैं?

श्री राव राजेन्‍द्र सिंह (बैराठ): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, खण्‍ड चार पर परिशिष्‍ट में इन्‍होंने दिया है, उसका हैडिंग है निर्मित और निर्माणाधीन की सूची, 6 नम्‍बर पर शाहपुरा, जयपुर है। पहले तो माननीय मंत्रीजी, यह बता दें कि कंस्‍ट्रक्‍टेड में आता है शाहपुरा वाला स्‍टेडियम या अण्‍डर कंस्ट्रक्शन में आता है। अगर अण्‍डर कंस्‍ट्रक्‍शन में आता है तो कंस्‍ट्रक्‍शन का क्‍या टाइम पीरियड होता है, दस साल, बारह साल, छह साल, पाँच साल। स्‍टेडियम अगर अण्‍डर कंस्‍ट्रक्‍शन है तो इसका कोई समयावधि है या वैसे ही जमीन लेकर, एक्‍वायर करके आपने पटक रखी है। अगर उसको अण्‍डर कंस्‍ट्रक्‍शन आपने दिखा रखा है तो क्‍या कोई निश्चित समयावधि में उस स्‍टेडियम को बनाकर तैयार करने की परिस्थिति में है या नहीं है। इस वित्‍त वर्ष में जो एक अप्रैल के बाद चालू होने वाला है, क्‍या आप उस निर्माणाधीन स्‍टेडियम को पूरा करेंगे कि नहीं? निर्माणाधीन भी नहीं है और निर्माण किया हुआ भी नहीं है।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारे अलग-अलग जगह से आने वाले सम्‍मानित माननीय सदस्‍यों ने चिंता व्‍यक्‍त की है और खेलों के बारे में बातें कहीं हैं। मैं यह निवेदन करना चाहूंगा कि हमने पिछले तीन वर्षों में प्रयास किए हैं। जो हमारे परम्‍परागत खेल हैं उनका इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर भी तैयार किया है उनके कोचेज भी तैयार हों, यह बात सही है कि पिछले तीन साल में नई भर्तियां नहीं ली। सिर्फ हमारे पास अभी 18 कोचेज ऐसे हैं जो अस्‍थाई है, 5 कोचेज अभी भी..

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, यह इस प्रश्‍न के जवाब से डाइरेक्‍ट सम्‍बन्धित नहीं है इसलिए जवाब देने के लिए आप बाध्‍य नहीं हैं। आप तो शाहपुरा वालों का जवाब दे दीजिए।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): ...(व्‍यवधान)... आपका ही आ रहा है, लिखा हुआ है आपका। ...(व्‍यवधान)... मेरे पास जवाब है, मैं दे दूंगा।

  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कृष्‍णा पूनिया हमारी अंतराष्‍ट्रीय स्‍तर की एथलीट है और माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने उसकी ट्रेनिंग के लिए नियमों में कोई प्रावधान नहीं था उसके पश्‍चात भी अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर की प्रतिस्‍पर्द्धा की कोचिंग के लिए पाँच लाख रुपए की राशि जाने से पहले हमने उनको दी है और अभी जो बजट पेश किया गया उस बजट में जो एशियन, ओलम्पिक  और अन्‍य अंतर्राष्‍ट्रीय प्रतिस्‍पर्द्धाओं के बारे में एक पैकेज घोषित किया गया है, उस पैकेज में भी जो कमियां रही हैं लेकिन माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने अपने बजट में नीचे यह भी कहा है कि 30 जून तक इसमें संशोधन करके हम खेल नीति घोषित कर देंगे। जहां तक कृष्‍णा पूनिया का सवाल है, मैंने अभी-अभी इस हाउस में आने के बाद भी माननीय मुख्‍य मंत्रीजी को परसों ही लिखा है और अभी मुख्‍य मंत्री कार्यालय से जवाब आया है, और हम उसको अभी जो वर्तमान पैकेज है, जो कि माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने 2007-2008 के बजट में प्रस्‍तुत किया है उसी के मुताबिक जो मैडल लेकर आए हैं, हमारे एशियाड के अंदर 6 खिलाड़ी अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर के उनको उसी के मुताबिक देने का प्रस्‍ताव भी माननीय मुख्‍य मंत्रीजी के पास वित्‍त मंत्री के रूप में भेजा है। मुझे विश्‍वास है कि इसी 30 मार्च तक यह पैसा हम नए पैकेज के अनुसार उन खिलाडि़यों को देंगे, यह मैं सदन को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसी से जुड़ा हुआ, आप हाथोंहाथ ही बता देना।

एक डिसएबल्‍ड जो ओलम्पिक में स्‍वर्ण पदक जीतकर आया है उसका इसमें कोई जिक्र किया है, देवेन्‍द्र झाझडि़या जिसका नाम माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने अपने बजट भाषण में भी लिया है वह ओलम्पिक्‍स में स्‍वर्ण पदक जीतकर आया है, उसका उस पैकेज के अंदर कोई उल्‍लेख नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: यह प्रश्‍न से सम्‍बन्धित नहीं है।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): मैं जवाब दे दूंगा, कोई शंका नहीं रहे।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं दुबारा हाउस से निवेदन करना चाहता हूं कि माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने बजट में 3 चीजें मेंशन की है, उसमें लास्‍ट में नीचे एक और लाइन लिखी है कि 30 जून तक हम सम्‍पूर्ण रूप से खेल नीति, जिसको संशोधित करते हुए मैं आपको बता दूं कि ओलम्पिक खेल, एशियन गेम्‍स, एशियाड, सेफ गेम्‍स और इसी तरह कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स, सबको क्‍लासीफाइड करके 30 जून तक हम बिलकुल डिक्‍लेयर कर देंगे और उसी डिक्‍लेरेशन के मुताबिक ...(व्‍यवधान)...पैरा ओलम्पिक की जहां तक आपने बात कही है, देवेन्‍द्र झाझडि़या की बात कही है...।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): आप तो माननीय मंत्रीजी, यह बताने का कष्‍ट करें कि जिस कृष्‍णा पूनिया का नाम यहां जिक्र में आ रहा है उसने कांस्‍य पदक प्राप्‍त किया, उसकी प्रतिभा को निखारने के लिए उसकी जो मांग है 60 लाख रुपए के पैकेज की कोचिंग के लिए उसको स्‍वीकृत करने का आप विचार रखते हैं या नहीं रखते हैं?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह खेल विभाग पर जनरल डिस्‍कशन थोड़े हैं?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मंत्री महोदय, मैंने प्रश्‍न पूछा है।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): मैं आपका ही जवाब दे रहा हूं, यह आने ही नहीं देते आप तक तो।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कृष्‍णा पूनिया का मैंने आपसे पहले ही निवेदन किया कि उस पर हमारा पहले से ही ध्‍यान है क्‍योंकि वह अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर की एथलीट है और आज भी वह विदेश में कोचिंग ले रही है। उसका एक प्रस्‍ताव राज्‍य सरकार के पास आया है। प्रथमत: तो एशियाड में मैडल लाने पर जो भी नए पैकेज में प्रावधान है उसके अनुसार पारितोषिक देंगे। द्वितीय, उनका जो प्रस्‍ताव आया है, उन्‍होंने वैसे ही लिख दिया कि मेरे विदेश जाने के लिए 60 लाख रुपए है तो उनको हमने पूछा है कि कोचिंग के लिए कितना लगेगा, किराया कितना लगेगा, खाने-पीने में कितना लगेगा और कितने समय तक रुकेंगी, यह सारी डिटेल मंगवाई है और उनका यह सारा डिटेल प्रस्‍ताव आ जाएगा तो निश्चित रूप से मैं सदन को विश्‍वास दिलाना चाहता हूं कि कृष्‍णा पूनिया जो राजस्‍थान की ऐसी एथलीट हैं जो अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर मैडल ला सकती है उसके लिए हम प्रावधान करेंगे।

जहां तक तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने देवेन्‍द्र झाझडि़या की बात की, यह बात सही है कि पैरा ओलम्पिक का न तो राष्‍ट्रीय स्‍तर पर और न ही राज्‍य स्‍तर पर इस तरह का इन्‍द्राज है लेकिन हमने उसकी योग्‍यता को देखते हुए उसको रिकोग्‍नाइज किया और रिकोग्‍नाइज करके जब वह पहली बार पैरा ओलम्पिक के अंदर गोल्‍ड मैडल लेकर आया तो राज्‍य सरकार ने 11 लाख रुपए नकद और 25 बीघा भूमि आवंटन हेतु हमने यू डी एच विभाग को लिखा है चूंकि वहां भी इस तरीके का कोई प्रावधान नहीं है उसमें शिथिलता के लिए उनसे पुन: निवेदन किया है। कल ही मेरी बात हुई है।

जहां तक देवेन्‍द्र झाझडि़या और पैरा ओलम्पिक की बात है मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं कि जो संशोधित खेल नीति आ रही है उसमें भी उसका इन्‍द्राज रहेगा और वह अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर खिलाड़ी भी माना जाएगा क्‍योंकि वह विकलांग है और विकलांग होने के बावजूद भी उसकी परफोर्मेंस अच्‍छी है, उसकी परफोर्मेंस को देखते हुए हमने प्रस्‍ताव रखा था कि उसके कृत्रिम हाथ लगवाए जाएं, इसके लिए सरकार ने विशेष रूप से लगभग साढ़े तीन लाख रुपए के कृत्रिम हाथ लगवाए हैं और उसके प्रशिक्षण की व्‍यवस्‍था भी राज्‍य सरकार कर रही है या जो भी और सुविधाएं चाहिए।

शाहपुरा से आने वाले माननीय सदस्‍य की बात भी सही है कि शाहपुरा में पुराने समय में एक स्‍टेडियम का निर्माण हुआ था, चूंकि आपकी यह चिंता है कि वह अर्द्ध निर्मित है या निर्मित है। आपने बार-बार इस हाउस में अलग-अलग प्रावधानों के तहत पूछा है। यह बात सही है कि मुख्‍य अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग से हमने जांच करवाई है, उसकी जो जमीन वहां आवंटित हुई थी, उस आवंटित जमीन में खड्डे, हमारे पास जो रिपोर्ट आई है उसके मुताबिक जिला क्रीड़ा परिषद के अध्‍यक्ष, जयपुर जिला कलेक्‍टर हैं, उनसे भी हमने रिपोर्ट मंगवाई है, सार्वजनिक निर्माण विभाग के मुख्‍य अभियंता से भी रिपोर्ट मंगवाई है, हमने जांच भी करवाई है, उनका जवाब यह है कि जो पैसा अलोट हुआ था, उसके समतलीकरण में लगा है इसलिए शाहपुरा से आने वाले माननीय सदस्‍य की चिंता वाजिब है कि जो पैसा था वह स्‍टेडियम निर्माण में दर्शाया गया है लेकिन निर्माण हुआ नहीं है। मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं कि नए बजट में माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने घोषणा की है उसके अनुसार आपके इस स्‍टेडियम को भी लेंगे, आपके साथ चर्चा करके जो नए प्रावधान हैं उनके मुताबिक हम प्रावधान करके वहां स्‍टेडियम निर्माण करवाएंगे और आपकी चिंता वाजिब है, आप खेल प्रेमी है, खेलों के प्रति चिंता रखते हैं।

सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा, काफी जिलों में बैठकें हुई हैं, इसका मेरे पास अभी कोई विवरण नहीं है, मैं जहां-जहां बैठकें हुई हैं, उनकी रिपोर्ट मंगवाकर माननीय सदस्‍य, आपको प्रेषित कर दूंगा।

 

Gpc/usc/ 27032007/1150/1f

 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): एक जिले में एक भी बैठक नहीं हुई है। पूरे राजस्‍थान में सवा तीन साल में एक जिले के अंदर जिला क्रीडा परिषद की बैठक नहीं हुई है। पूरे राजस्‍थान में इन्‍होंने खेलों का भट्ठा बिठा रखा है। ..(व्‍यवधान)..

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसी से जुड़ा हुआ सवाल है। ..(व्‍यवधान).. माननीय मत्री जी ..(व्‍यवधान)..

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): बहुत ही सिम्‍पल सवाल है।

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): माननीय मंत्री महोदय, पिछले समय से कई ऐसे खिलाड़ी है जिन्‍होंने अर्जुन पुरस्‍कार, गोल्‍ड मैडल और एशियाड खेलों में पदक लिये हैं जो आज दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। चाय की थडि़यों पर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। क्‍या उनके लिए कुछ करने की चिन्‍ता रखते हैं?

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, क्‍या मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे 1998 से 2003 के दौरान विशेष प्रोत्‍साहन खिलाडि़यों के लिए और खेल के लिए किये गये थे, उनकी कोई सूची आपके पास में है? ये सारे के सारे प्रोत्‍साहन इसी सरकार में हो रहे हैं?

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूंगा ..(व्‍यवधान).. 

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर):  एशियाड खेलों में लालसिंह बांसवाड़ा का तीरंदाज था, उसने दो बार गोल्‍ड मैडल लिया है, स्‍वर्ण पदक भी लिया है और आज वह धनुष के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है। उसका धनुष डेढ़ से पौने दो लाख रुपये का है। क्‍या उसको आगे ओलम्पिक खेलों में भाग लेने के लिए उस धनुष की व्‍यवस्‍था करेंगे?

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूंगा ..(व्‍यवधान)..

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): अर्जुन पुरस्‍कार, गोल्‍ड मैडल लिये हुए हैं जो आज चाय की थडि़यों पर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं, उनके लिए आप कुछ करें।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से पूछना चाहती हूं कि बूंदी में बहुत बड़ा कुम्‍भा स्‍टेडियम है जिसमें जितने कार्यक्रम होते थे वे सब बंद हो गये हैं। 26 जनवरी और 15 अगस्‍त के कार्यक्रम हैं वे पुलिस परेड ग्राउंड में हो रहे हैं और आप कह रहे हैं 20 या 22 लाख का फण्‍ड दे रहे हैं स्‍पोर्टस और स्‍टेडियम के लिए। मैं पूछना चाहती हूं कि वह कुम्‍भा स्‍टेडियम के लिए दे रहे हैं या दूसरा स्‍थान आपने चयनित किया है?

दूसरी बात मैं पूछना चाहती हूं बूंदी में जो जेतसागर झील है उसमें वाटर स्‍पोर्टस के प्रोग्राम दो साल से ट्यूरिज्‍म डिपार्टमेंट करवाता है बूंदी उत्‍सव के समय। लेकिन वहां कमलजड़ों का ठेका इर्रिगेशन डिपार्टमेंट के जरिये दिया जा रहा है। क्‍या आपने जिला कलक्‍टर से पूछा कि वह इस बारे में ध्‍यान दे रहे हैं या नहीं? अगर कमलजड़े ही उसमें करना है तो वाटर स्‍पोर्टस कहां होगा? जिस स्‍पोर्टस की आप बात कर रहे हैं कि हम प्रोत्‍साहित करना चाहते हैं तो मैं चाहती हूं आप इन दोनों बातों का जवाब दें, स्‍टेडियम का पैसा कहां लग रहा है और दूसरा जेतसागर के बारे में आप क्‍या कर रहे हैं?

श्री उपाध्‍यक्ष:  एक साथ ही जवाब दे देना।

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूंगा ग्रामीण एरिया में नेहरू युवा केन्‍द्र के माध्‍यम से यूथ मण्‍डल बने हुए हैं और उन यूथ मण्‍डलों के द्वारा हर वर्ष ग्रामीण एरिया में जिला स्‍तरीय टूर्नामेंट्स करवाते हैं और उनमें ऐसी-ऐसी प्रतिभाएं हैं जिनको स्‍टेट लेवल पर चयनित किया जाता है। तो ग्रामीण एरिया के युवाओं को प्रोत्‍साहन देने का क्‍या खेल नीति में कोई प्रावधान कर रखा है कि ऐसे व्‍यक्ति को चयनित किया जाए नेहरू युवा केन्‍द्र के माध्‍यम से। साल में दो बार उनके टूर्नामेंट होते हैं ऐसे प्रतिभावान युवाओं को भी आप अपनी खेल नीति में सम्मिलित करें ऐसा मेरा निवेदन है।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय मंत्रीजी, कुम्‍भा स्‍टेडियम पर भू माफिया जबर्दस्‍त रूप से कब्‍जा कर रहा है। भू माफिया उस पर कालोनी काटने के लिए तैयार बैठा हुआ है। इसमें कुछ न कुछ एक्‍शन करना बहुत जरूरी है।

श्रीमती अनिता भदेल (अजमेर पूर्व): मैं एक प्रश्‍न पर मंत्री महोदय, आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगी। तोपदड़ा खेल स्‍टेडियम बहुत पुराना स्‍टेडियम है और कई अन्‍तरराष्‍ट्रीय प्रतियोगिताएं उस स्‍टेडियम पर हुई हैं, लेकिन आज की स्थिति में वह स्‍टेडियम इतनी जर्जर अवस्‍था में है कि वहां कोई प्रतियोगिता नहीं होती, जैसा कि माननीय बूंदी से आने वाली माननीय सदस्‍य ने कहा है कि भूमाफिया गलत रजिस्‍ट्रियां करवाकर उस खेल स्‍टेडियम की जमीन को बेच रहे हैं। माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने स्‍टेडियम निर्माण नीति की घोषणा की है कि एमपी या एमएलए लेड से यदि पैसा दिया जाए तो उस पर प्राथमिकता से विचार किया जाएगा। मैंने आपको लिखकर दिया है कि मैं अपने फण्‍ड से पैसा देने के लिए तैयार हूं, एमपी साहब भी पैसा देने के लिए तैयार हैं। क्‍या आप उस स्‍टेडियम के निर्माण की घोषणा करेंगे या इस प्रस्‍ताव में लेंगे? हम उस बेशकीमती जमीन को भूमाफिया से रोक सकें, आप अपने उत्‍तर में बताएं कि आप इसको प्राथमिकता से स्‍वीकृत करेंगे।

श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास (जोधपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री महोदय से यह जानकारी चाहूंगी पिछले साल जब इन्‍होंने खुद ने यह घोषणा की, जोधपुर के अंदर पुराने स्‍टेडियम के नाम से पहचाना जा रहा है और महाराजा उम्‍मेद सिंहजी का बनाया हुआ है। उनके नाम की इन्‍होंने स्‍वयं घोषणा की इसका नाम बदल दिया जाएबा और महाराजा उम्‍मेद सिंह स्‍टेडियम रखा जाएगा। मगर आज की तारीख में उसके ऊपर कोई अमल नहीं हुआ, इसका क्‍या कारण है। मैं आपके माध्‍यम से जानकारी देना चाहूंगी मंत्री महोदय इसका जवाब दें। ..(व्‍यवधान)..

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): मंत्री महोदय, आपने घोषणा कर रखी है ..(व्‍यवधान).. इसलिए परबतसर स्‍टेडियम में भी 25 लाख की स्‍वीकृति प्रदान करें। माननीय मत्री महोदय, परबतसर में विशाल कार्यक्रम में आपके श्रीमुख से घोषणा हुई थी, आज वापस नये बजट में घोषणा कर दें कि 25 लाख रुपये परबतसर स्‍टेडियम को दिया जाएगा।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उपाध्‍यक्ष महोदय, आप खुद भी खिलाड़ी रहे हैं ..(व्‍यवधान)..

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे भी किशनगढ़ में नागरिक स्‍टेडियम खेल मैदान के लिए यदि घोषणा कर दें, कई वर्षों से वह यों ही पडा है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मंत्री महोदय भी खिलाड़ी रहे हैं और अब भी दिलचस्‍पी ले रहे हैं यह खुशी की बात है और एक नई बात उन्‍होंने बतायी कि वसुंधरा जी राजे, एज ए फाइनेंस मिनिस्‍टर भी बहुत दिलचस्‍पी ले रही है। साढ़े तीन साल के दरम्‍यान मान्‍यवर, आपके 17 जिलों में खेल अधिकारी नहीं है, उन जिलों का क्‍या हाल होगा जहां 10-12 वर्ष से पद रिक्‍त पड़े हैं और आपके राजस्‍थान में जिलेवाइज कोच नहीं है। मैं मंत्री महोदय से चाहूंगा कि हर जिले के अंदर खेल अधिकारी हो और हर जिले के अंदर कोच हो। खेल अधिकारी आपके प्रति वफादार है, वह आपका कहना मानेगा, आपने जिला कलक्‍टर को चेयरमेन बना रखा है। आपकी क्‍या परवाह करता है जिला कलक्‍टर? जिला कलक्‍टर सिवाय मुख्‍यमंत्रीजी के किसी की परवाह ही नहीं करता। अब राजेन्‍द्र सिंह राठौड़ जैसे लोग तो राठौड़ी में मना लेंगे कोई बात, लेकिन आप तो बहुत सीधे, सिम्‍पल और भले इंसान हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): इसका क्‍या मतलब है? उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे एतराज है। ये सीधे, सज्‍जन या भले हैं और मैं राठौड़ हूं, मैं भला नहीं हूं। आप क्‍या कहना चाहते हो मैं भला नहीं हूं। इन्‍होंने यह सवाल खड़ा किया है ये सीधे, सज्‍जन और भले हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपके मामले में दिलावर साहब बताएंगे, आपको चक्‍कर में मत डालो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपको राठौड़ कहने में आपत्ति हो तो हम बंद कर देंगे। आप राठौड़ नहीं हो क्‍या?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): पक्‍का हूं, पर राठौड़ी की बात मत करो आप।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): चलो, नहीं कहूंगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: ये आप पर स्‍नेह रखते हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): वह तो मैं प्रेमवश आपको कह देता हूं, आपके प्रति मेरी दुर्भावना नहीं है। मंत्री महोदय, आप खेलों के लिए दो काम करवा दीजिए, हर जिले के अंदर खेल अधिकारी हो, हर जिले के अंदर एक कोच हो, उसके बाद में वे आपके प्रति दोनों जवाबदेह हैं और आपके प्रोग्राम को केरीआउट करेंगे। आज आपके पास खेल अधिकारी नहीं है, आपके पास कोच नहीं है, काहे से एशियाड में जाएंगे, काहे से दुनिया में जाएंगे, क्‍या कोच जाएंगे। जो जा रहे हैं वे ही बहुत हैं। खेल अधिकारी नहीं हो तो आपकी कोई व्‍यवस्‍था नहीं होगी।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, नेता प्रतिपक्ष ने खेलों के प्रति इस उम्र में चिन्‍ता व्‍यक्‍त की यह राजस्‍थान के खिलाडि़यों के लिए बहुत अच्‍छी बात है, पोजिटिव बात है कि आपने खिलाडि़यों के प्रति इतनी चिन्‍ता की। यह बात सही है और मैं माननीय नेता प्रतिपक्ष से एक अनुरोध और करूंगा आप इतनी चिन्‍ता कर रहे हैं यह हमारे लिए अच्‍छी बात है। केन्‍द्र के अंदर यूपीए की सरकार है, उस यूपीए सरकार ने 1.4.2005 से केन्‍द्र प्रवर्तित जितनी भी योजनाएं हैं, मैं यह कहूंगा कि खेल विभाग एकमात्र ऐसा विभाग है जिस विभाग को केन्‍द्र सरकार से 1.4.2005 से एक रुपया भी किसी भी तरीके का अनुदान नहीं मिला। मैं निवेदन करूंगा वह भी आप हमको दिलाएं। जहां तक 17 जिलों के खेल अधिकारियों की बात है ..(व्‍यवधान)..

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): यह तो दिख रहा है 17 पद रिक्‍त है। तीन साल से आप मंत्री हैं आपने आज तक इन पदों को नहीं भरा और आप केन्‍द्र की बात कर रहे हैं, आपने जो किया वह बताओ आपने क्‍या सोचा आज तक। खिलाडि़यों के लिए आपने क्‍या किया?

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य, बीच में नहीं, आप जवाब सुनें। जवाब सुनिए आप।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय को एक बात याद दिलाना चाहता हूं ..(व्‍यवधान).. एक परिवार था, दो भाई थे, एक भाई के लड़कियां ही लड़कियां होना शुरू हो गईं और दूसरे भाई के लड़के ही लड़के। दूसरे लोगों ने महिला से कहा कि तू इन बच्चियों को कैसे ब्‍याहेगी, क्‍या पढ़ाएगी। उसने कहा, सब करेंगे, हमने कोई जेठ के भरोसे बेटी नहीं जनी। यदि आप भारत सरकार से ही मदद लेकर खेलों को प्रोत्‍साहन देना चाहते हैं ..(व्‍यवधान).. फिर आप भारत सरकार का नाम लेकर बचना चाहते हैं। राजस्‍थान सरकार खेलों में व्‍यवस्‍था नहीं कर सकती।

श्री उपाध्‍यक्ष:  आपका सहयोग चाहते हैं ये तो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हम तो सहयोग देंगे। ..(व्‍यवधान)..

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य।

 

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/28032007/1200/1g  

 

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इस बात को टालने के लिए भारत सरकार का नाम ले रहे हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: इसमें आपका सहयोग चाहते हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हमको कहां जरूरत है भारत सरकार की ? ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: आपका सहयोग मिलेगा इनको।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): कोई योजनाएं भेजी हों तो आप बताओ हम उनके लिए चेष्‍टा करेंगे। आप हमें बताइए भारत सरकार को कोई योजना भेजी है क्‍या और भेजी है तो कब कब भेजी है तो हमको चिट्ठी दें, हम चेष्‍टा करेंगे।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह बात सही है कि जेठ के भरोसे बेटी नहीं जन्‍मी, जब ही तो तीन साल से हम राजस्‍थान में हमारे खुद के बलबूते पर पैसा खर्च कर रहे हैं और राजस्‍थान के खिलाडि़यों को दे रहे हैं, अन्‍तरराष्‍ट्रीय स्‍तर की प्रतिस्‍पर्धा चैंम्पियंस ट्राफी कराई, उबेर कप करवाया। ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): आप जो तीन साल से करवा रहे हैं उसका परिणाम क्‍या निकला ? यह माननीय मंत्री महोदय, खाली लीपापोती से जवाब देने से कुछ होने वाला नहीं है। ...(व्‍यवधान)... आप खिलाडि़यों के लिए चिंतित हो, खिलाडि़यों के हितों की रक्षा करें। यह शर्म की बात है कि हमारे राजस्‍थान का एक पदक प्राप्‍त कर रहा है खिलाड़ी। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष:  प्रश्‍न काल समाप्‍त, अंकित नहीं होगा।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां):  000

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): 000

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): 000

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण कीजिए, प्रश्‍न काल समाप्‍त।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, प्रश्‍न काल समाप्‍त।

स्‍थगन प्रस्‍तावों पर अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि निम्‍नांकित स्‍थगन प्रस्‍तावों की सूचना प्राप्‍त हुई है :-

1. श्री रणवीर सिंह गुढ़ा, सदस्‍य की ओर से जिला झुन्‍झुनूं की बिगड़ती कानून व व्‍यवस्‍था की स्थिति के संबंध में।

2 ­श्री महिपाल सिंह यादव एवं दो अन्‍य सदस्‍यों की ओर से जयपुर शहर में वर्ष जनवरी, 2006 से जनवरी, 2007 तक मंदिरों से करोड़ों रुपये की मूर्ति चोरी की वारदात होने के संबंध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव ऐसे नहीं हैं कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोक कर इन पर विचार किया जाए, अत: अनुमति देने में असमर्थ हूं । वैसे भी गृह विभाग की अनुदान की मांगों पर चर्चा के समय माननीय सदस्‍य श्री रणवीर सिंह गुढ़ा एवं श्री महिपाल सिंह यादव को बोलने का अवसर उपलब्‍ध था।

3.श्री मांगी लाल गरासिया एवं पांच अन्‍य सदस्‍यों की ओर से पंचायत समिति कोटड़ा की पांच पंचायतों को गोगुन्‍दा पंचायत समिति में नहीं मिलाने से उत्‍पन्‍न स्थिति के संबंध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव ऐसा नहीं है कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोक कर इस पर विचार किया जाए, अत: अनुमति देने में असमर्थ हूं। माननीय सदस्‍य श्री गरासिया को आज राजस्‍व विभाग की अनुदान की मांगों पर चर्चा के समय बोलने का अवसर है।

4. डा. सी0एस0 बैद एवं पांच अन्‍य सदस्‍यों की ओर से राज्‍य की विद्युत उत्‍पादन इकाईयों के संचालन में अनियमितता के संबंध में।

दिनांक 3 अप्रेल को बिजली की स्थिति पर चर्चा रखी गई है, अत: अनुमति देने में असमर्थ हूं।

5. श्री खुशवीर सिंह, सदस्‍य की ओर से जिला पाली में पारम्‍परिक तरीके से कजावा पद्धति द्वारा ईंट बनाने वालों को ओलावृष्टि से हुए नुकसान की सहायता राशि प्रदान करने के संबंध में।

इन्‍हीं माननीय सदस्‍य की इस विषयक सूचना दिनांक 16 मार्च को प्रक्रिया के नियम 295 के तहत सूचीबद्ध हुई थी, जिसे पढ़ा हुआ माना जाकर राज्‍यसरकार को भेजा जा चुका है। अत: इस पर अनुमति देने में असमर्थ हूं। 

6. डा. श्रीगोपाल बाहेती, सदस्‍य की ओरसे राज्‍य सरकार द्वारा इन्‍टरनेशनल कन्‍वेन्‍शन एवं होटलों के लिए जमीन दिये जाने में घोटाले के संबंध में1

प्रस्‍ताव का विषय अनुमान पर आधारित है कोई घटना विशेष का उल्‍लेख नहीं है, अत: अनुमति देने में असमर्थ हूं।

7. डा. बुलाकीदास कल्‍ला, सदस्‍य की ओर से ग्राम उण्‍डावासन तहसील देवगढ़, जिला राजसमंद के निवासियों पर जानलेवा हमला करने के संबंध में।

उपरोक्‍त स्‍थगन प्रस्‍ताव के संबंध में राज्‍य सरकार से जानकारी प्राप्‍त की जा रही है और जानकारी प्राप्‍त होने पर निर्णय लिया जाएगा।

8. मो0 माहिर आजाद एवं 12 अन्‍य सदस्‍यों की ओर से वन वीक सीरिज में प्रेस लाइन के बिना आपत्तिजनक उल्‍लेख करने के संबंध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव ऐसा नहीं है कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोक कर इस पर विचार किया जाए, अत: अनुमति देने में असमर्थ हूं। फिर भी माननीय सदस्‍य श्री माहिर आजाद को प्रस्‍ताव के विषय पर 2 मिनट बोलने की अनुमति होगी।

प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत प्राप्‍त विशेष उल्‍लेख की सूचनाएं

1. श्री मोहन मेघवाल, सदस्‍य की ओरसे जोधपुर शहर के बालोतरा की तरफ जाने वाली मुख्‍य सड़क के दायीं ओर अवस्थित कच्‍ची बस्‍ती को भूमाफिया के हाथयों नहीं उजड़ने देने के संबंध में।

2. श्री अर्जुन सिंह बामणिया, सदस्‍य की ओरसे तहसील बांसवाड़ा की कतिपय पंचायतों को जिला प्रतापगढ़ के स्‍थान पर जिला बांसवाड़ा में हीरहने देने के संबंध में।

3. श्री नाना लाल अहारी, सदस्‍य की ओरसे विधान सभा क्षेत्र खेरवाड़ा की अतिवृष्टि से क्षतिगस्‍त सड़कों एवं पुलियाओं की मरम्‍मत करने के संबंध में।

4. श्री जयराम जाटव, सदस्‍य की ओर से खैरथल में महाविद्यालाय खोलने के संबंध में।

5. श्री के0डी0 बाबत, सदस्‍य की ओर से लक्ष्‍मणगढ़ शहर के गंदे पानी की निकासी का स्‍थायी समाधान किये जाने के संबंध में।

6. श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र देसूरी की नहरों की मरम्‍मत कराने के संबंध में।

7. श्री सी0डी0 देवल, सदस्‍य की ओर से जिला पाली के धार्मिक स्‍थलों को डामर की सड़कों से जोड़ने के संबंध में।

8. डा0 जालम सिंह रावलोत, सदस्‍य की ओर से बाड़मेर एवं जैसलमेर जिलों में माह अगस्‍त में आई बाढ़ एवं अतिवृष्टि से ध्‍वस्‍त हुए मकानों की सहायता राशि बढ़ाने के संबंध में1

9. श्री नरेन्‍द्र नागर, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र खानपुर के सारेलकला सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में पेरा मेडिकल स्‍टाफ लगाने के संबंध में।

10. श्री अर्जुन लाल मीणा, सदस्‍य की ओर से सलूम्‍बर के सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र को 100 बेड का क्रमोन्‍नत करने के संबंध में1

11. श्री हीरा लाल, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र निवाई के अनावृष्टि, ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के संबंध में।

12. श्री मोहन लाल गुप्‍ता, सदस्‍य की ओर से जयपुर नगर निगम की हिंगोनिया गोशाला में चिकित्‍सा एवं चारे के अभाव से गायों की मौत होने के संबंध में।

माननीय सदस्‍यों को उनके द्वारा दी गई उपरोक्‍त विषयक सूचना को पढ़ने की अनुमति होगी।

माननीय श्री माहिर आजाद।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): उपाध्‍यक्ष महोदय, 25 तारीख को उण्‍डावासन गांव देवगढ़ तहसील के, राजसमंद जिले में वहां पर गुमानसिंह जो कांस्‍टेबल है, उसकी गाड़ी में 10-15 आदमी और एक प्राइवेट गाड़ी में अन्‍य 25 आदमियों ने मिलकर वहां पर ग्रामवासियों पर हमला किया 10 बजे के करीब उसके बाद उनहोंने उदयपुर में भूतपूर्व गृह राज्‍य मंत्री को यह इतिला दी कि ग्रामवासियों को अवैध खनन रोकने के कारण इन लोगों ने आकर मारा है, पीटा है और उसकी एफआईआर लॉज नहीं की जा रही है। ...(व्‍यवधान)... अगले दिन ...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बीच में नहीं।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): इस पवित्र सदन में असत्‍य बयान किया जा रहा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द):  000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बीच में नहीं, आपका अंकित नहीं होगा।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण कीजिए। ...(व्‍यवधान)... माननीय सदस्‍य, आपका अंकित नहीं हो रहा।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: राजसमंद से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपको काफी समय हो चुका है, आप बीच में बिना परमिशन के मत बोलें। ...(व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण कीजिए, आप बीच में नहीं।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर):  000

श्री उपाध्‍यक्ष: राज्‍य सरकार से जानकारी मांगी जा रही है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

 

सुरेन्‍द्र/अरुण/28.3.07/12.10/1h

 

(आसन द्वारा अंकित नहीं होने के निर्देश जारी)

श्री उपाध्‍यक्ष: गृह मंत्री जी दे देंगे।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय मंत्री जी जवाब देंगे। (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक सैकण्‍ड मैं आपकी शंका का निवारण कर देता हूं। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं बहुत नम्रतापूर्वक सदन के सभी माननीय सदस्‍यों से निवेदन करता हूं कि व्‍यक्तिगत झगड़े लेन-देन के, आपस में प्रोपर्टी के हो सकते हैं लेकिन इंडिविजुअल केस को अगर यहां हाउस में डिस्‍कस करेंगे तो यह परिपाटी गलत हो जाएगी, ठीक नहीं रहेगी।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं सोचता हूं कि अभी कोई इस तरह की बात है, एक-एक व्‍यक्ति के केसेज को यहां अगर डिस्‍कस करेंगे तो उचित नहीं होगा। बाकी जैसा आसन का रहेगा मैं उसके अनुसार पालना करने के लिए तैयार हूं। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, विराजिये, जानकारी प्राप्‍त की जा रही है। (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: यह कोई मामला नहीं है... (व्‍यवधान) गृह मंत्री जी ने कह दिया। (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: यह व्‍यक्तिगत मामला यहां नहीं। (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, जानकारी ली जा रही है। माननीय कल्‍ला साहब, आप स्‍थान ग्रहण करें। (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये। आप स्‍थान ग्रहण कीजिये माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। माननीय कल्‍ला साहब, यह कोई यहां पर व्‍यक्तिगत.... (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

  (माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय द्वारा संकेत से अंकित नहीं करने के निर्देश)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): 000

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, जानकारी प्राप्‍त की जा रही है। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: जवाब किस आधार पर देंगे माननीय सदस्‍य? (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह प्रकरण पिछले 5-6 दिन से चल रहा था किसी खनन को लेकर, किसी की भूमि में से अवैद्य खनने को लेकर। पहला मुकदमा देवगढ़ में हरिसिंह जी के भाई फतेहसिंह ने इनके खिलाफ दर्ज किया कि आप हमारी जमीन में से अवैद्य खनन लेकर के, उसका मुकदमा एक दर्ज हुआ। फिर उसके बाद यह 27 तारीख वाली, कल रात्रि में ही यह घटना घटित हुई और इसमें दोनों की तरफ से एक 86 नम्‍बर का मुकदमा.... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): ऐसा है, यह घटना रास्‍ते की है, इनके गांव की तरफ कोई रास्‍ता है जो भीम से कुछ दूर है वहां की घटना है। दोनों की तरफ से मुकदमे दर्ज हुए हैं एक की तरफ से नहीं। दोनों की तरफ से.... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): वो वहां कितने बजे पहुंचे, एग्‍जैक्‍ट टाइम मेरे पास इस समय नोट नहीं है लेकिन दोनों केस एक-दूसरे के विपरीत दर्ज हुए हैं। एक 86 नम्‍बर पर हुई है वह इनके परिवार के भाई ने कराई और 87 नम्‍बर लक्ष्‍मण सिंह के द्वारा की गई है। ये दोनों 27 तारीख की घटना है। मेरे को टेलीफोन पर जैसे ही सूचना मिली, एस. पी. से भी मेरी बात हुई, मैंने कहा कि किसी से भी झगड़ा नहीं हो, अपना काम है एफ आई आर दर्ज करके जो घटनाक्रम हुआ है उसकी कार्यवाही करना। मैं सदन को बताऊं कि न लक्ष्‍मण सिंह जी के कोई चोट है, न कुछ भी है। गाड़ी को रोकने का प्रकरण है एक दूसरे का। इनका कहना है कि उनके लोगों ने इनके घर पर हमला किया, उनका कहना है कि हमारी गाड़ी रोककर के हमको रास्‍ते में रोका। दोनों के मुकदमे दर्ज हैं। सारी तफ्तीश होगी। एग्‍जैक्‍ट समय नहीं है कि लक्ष्‍मण सिंह जी थाने पर कितनी बजे पहुंचे, जो भी समय होगा वह भी मैं आपको बता दूंगा। किसी के प्रति कोई सवाल नहीं है। जो भी, जिसका अपराध होगा जिसने किया होगा उसके खिलाफ कार्यवाही होगी, केवल मैं इतनी ही जानकारी दे रहा हूं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं निश्चित रूप से आपकी बात का पता करूंगा कि कब वो पहुंचे और कब एफ आई आर दर्ज हुई। मेरे पास अभी एग्‍जैक्‍ट समय नहीं है कि उनके पहुंचने के कितनी देर बाद दर्ज हुई है। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री माहिर आजाद। माननीय कल्‍ला साहब, अब नहीं। माननीय सदस्‍य, इस पर चर्चा नहीं। (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

 

Lpm/akt/1220/1j/2832007

 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):  000

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):  000

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य....

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, जो मेरे पास सूचना है 27.3.2007 को 8.15 पी.एम. पर (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उपाध्‍यक्ष महोदय, होम मिनिस्‍टर साहब (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, घटना जो हुई है वह 8.15 पी.एम. के बीच में है (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): प्रश्‍न यह है कि वह कितने बजे थाने पहुँचे, घटना जो मुझे दिया है उसमें 8.15 की घटना है, दोनों पक्षों के बीच में, दोनों ने एक ही दिनांक 27.3. को 8.15 पी.एम. श्री लक्ष्‍मणसिंह रावत पूर्व विधायक, भीम वगैरहा और श्री हरिसिंह रावत वर्तमान विधायक के परिजनों के बीच गांव नंदावट में आपसी विवाद हुआ। जिस संबंध में प्रार्थी श्री बन्‍नेसिंह पिता भूरसिंह नंदावट ने लिखित रिपोर्ट पेश की कि आज श्री लक्ष्‍मणसिंह पूर्व विधायक और उनका पुत्र अनुरागसिंह, दर्शनसिंह, सुदर्शनसिंह और गाडि़यां लेकर मेरे मकान के बाहर आये और सुदर्शन के हाथ में तलवार और लक्ष्‍मणसिंह के हाथ में रिवाल्वर था, उनके साथ गैंग थी, पीटीआई भगवानसिंह अध्‍यापक, दिलीपसिंह, मुकेशसिंह ये ये लोग उनके घर आये थे, हमला किया। यह रिपोर्ट तो लिखवाई है हरिसिंहजी के भाई ने और उन्‍होंने अपनी रिपोर्ट लिखवाई है इन लोगों ने हमारी गाड़ी के आगे गाड़ी देकर के और उनका भी समय ही है, उन्‍होंने जो लिखा है वह 87, 147, 148, 149, 36, 504, 352, इसमें भी समय वहीं लिखा है 27.3.07 को 8.15 पी.एम. श्री लक्ष्‍मणसिंह रावत पूर्व विधायक वगैरहा ने हरिसिंह रावत वर्तमान विधायक के परिजनों के बीच गांव नंदावट में आपसी विवाद हुआ। जिस संबंध में प्रार्थी श्री लक्ष्‍मणसिंह पिता फतेहसिंह ने नंदावट में लिखित रिपोर्ट पेश की कि 25.3.2007 को हुडावास ग्रामवासियों पर विधायक भीम के भाई-भतीजा 20-25 द्वारा हमला कर चोट पहुंचाने को लेकर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई देवगढ़ थाने में तथा वृत्‍ताधिकारी, यह जो घटना बता रहे हैं वह 8.15 पी.एम. की है और आप बता रहे हैं 8.11 पर यह रिपोर्ट दर्ज हुई। वह थाने पर कब पहुंचे और कब रिपोर्ट दर्ज हुई अगर उसमें कोई विलंब है, दर्ज करने में कोई बात है...

श्री उपाध्‍यक्ष: 2-3 घंटे तो करते हैं।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): दोनों रिपोर्ट लगभग एक ही समय दर्ज है, दोनों की, इनकी तरफ से भी और उनकी तरफ से भी रिपोर्ट दर्ज है इसको दिखवा लूंगा अगर 8.15 की घटना है, वह पहुंचे कब और जाकर के उन्‍होंने अपनी रिपोर्ट कब दर्ज कराई?

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय कल्‍ला साहब, अब देखो इसमें फिर आप (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: हमला हो गया तो बहुत बुरी बात है (व्‍यवधान) इसका इन्‍वेस्‍टीगेशन हो रहा है, माननीय कल्‍ला साहब आप स्‍थान ग्रहण कीजिए।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय कल्‍ला साहब अब आप स्‍थान ग्रहण करे, आपका अंकित नहीं हो रहा है। श्री मोहम्‍मद माहिर आजाद।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको एक जानकारी देना चाहता हूं कि मेरे क्षेत्र में सीताराम भगवान मंदिर पर देवस्‍थान में दर्ज है वह जमीन और उसमें कब्‍जा हो रहा है, 131 के तहत मैंने ध्‍यानाकर्षण दिया है, अभी सरकार को भेजा है या नहीं, वहां कानून व्‍यवस्‍था बिगड़ सकती है, मैं आपकी जानकारी के लिए निवेदन कर रहा हूं। इस आपने कोई व्‍यवस्‍था फरमायी नहीं।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप मेरे से चैम्‍बर में मिल लेना, मैं पूछकर के बता दूंगा आपको, चैम्‍बर में सम्‍पर्क कर लेना मेरे से बता दूंगा।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): कोई झगड़ा न हो जाए माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय वहां कानून व्‍यवस्‍था नहीं बिगड़े।

श्री उपाध्‍यक्ष: हां, बता दूंगा दो बजे।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक बहुत महत्‍वपूर्ण स्‍थगन है और मैं तो बहुत कम बोलता हूं वैसे भी हमारे जयपुर राजधानी में हर महीने (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपका जो है रिजेक्‍ट हो गया है, आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिए। श्री मोहम्‍मद माहिर आजाद, नहीं बीच में आप अपना बंद कीजिए माननीय सदस्‍य व्‍यवस्‍था दी जा चुकी है।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बहुत महत्‍वपूर्ण सवाल है और हर महीने चोरी हुई है न कि हर दिन (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: व्‍यवस्‍था दी जा चुकी है माननीय सदस्‍य, अंकित नहीं हो।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): 000

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: मैंने आपको कोई अनुमति नहीं दी है, अंकित नहीं हो रहा है, समय बरबाद नहीं करे माननीय सदस्‍य।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): 000

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य आप बीच में व्‍यवधान नहीं डाले, मैंने कह दिया आपको आपका अंकित नहीं होगा।

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य मैंने कह दिया आप बिना परमिशन के बोल रहे हैं अंकित नहीं हो रहा है।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): 000

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): 000

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण कीजिए माननीय सदस्‍य आपका अंकित नहीं होगा, आप क्‍यों समय बरबाद कर रहे हैं, सरकार को चिंता है आप स्‍थान ग्रहण कीजिए।

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: अब कोई सीधा प्रश्‍न नहीं है, अब कोई प्रश्‍न नहीं माननीय सदस्‍य अंकित नहीं हो रहा है आपका, आप स्‍थान ग्रहण कीजिए, कोई अंकित नहीं होगा आपका, आप स्‍थान ग्रहण कीजिए माननीय सदस्‍य। श्री मोहम्‍मद माहिर आजाद।

 

स्‍थगन प्रस्‍तावों आदि पर चर्चा

वन वीक सीरीज में प्रेस लाइन के बिना आपत्तिजनक उल्‍लेख करने विषयक

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले तो आपने मुझे जो बोलने का समय दिया उसके लिए मैं आपका आभारी हूं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जिस रोज पुलिस विभाग की डिमाण्‍ड थी उस रोज माननीय गृहमंत्री जी ने इस सदन को यह बात कही थी कि जब से यह गृहमंत्री बने है और सरकार बनी है राजस्‍थन में साम्‍प्रदायिक सदभाव कायम हुआ है, भाई-चारा बढ़ा है, साम्‍प्रदायिकता की घटनाओं में कमी हुई है। मैं उसी के परिप्रेक्ष्‍य में निवेदन यह करना चाहता हूं कि सब यह चाहते हैं कि राजस्‍थान का यह साम्‍प्रदायिक सदभाव और कौमी-एकता और भाईचारा बना रहे। सदियों से जो लोग आपस में मिल-जुलकर के रह रहे हैं, एक वर्ग दूसरे वर्ग की भावनाओं का सम्‍मान करें, किसी भी तरीके से उसको नुकसान पहुंचाने का काम न हो लेकिन एक सुपर वन वीक सीरीज के नाम से एक पासबुक जिसमें महर्षि दयानंद सरस्‍वती विश्‍वविद्यालय, अजमेर भी गैर कानूनी तरीके से छाप रखा है और द्वितीय वर्ष राजनीति की यह पुस्‍तक, पासबुक हमारे यहां यह कानून है कि अगर कोई एक हैंड-बिल और पर्चा भी छापेगा तो उस पर उसको प्रेस लाईन देनी पड़ेगी, प्रेस का नाम और पता देना पड़ेगा, यह पासबुक मैं सदन  पटल पर रख दूंगा और आदेश देंगे, निर्देश देंगे तो मैं माननीय गृहमंत्री जी को भी प्रस्‍तुत कर दूंगा। इसमें कहीं प्रकाशक का अपना नाम और पता नहीं है केवल लिखा है आरबीडी जयपुर, अगर इसकी हिन्‍दी का अर्थ भी लगाये तो राजस्‍थान बुक डिस्‍ट्रीब्‍यूटर जयपुर, कौन से बाजार में है? क्‍या दुकान का नम्‍बर है? कहीं कुछ नहीं दिया और यह नागौर में, भीलवाड़ा में, अजमेर में जो म‍हर्षि दयानंद सरस्‍वती विश्‍वविद्यालय का जहां भी कोर्स पढ़ाया जा रहा है वहां पर लोग, बच्‍चे आराम से पढ़ रहे हैं और पढ़ने के बाद इसमें जो आपत्तिजनक चीज़ें लिखी हैं केवल एक धर्म के लिए नहीं, इसमें हिन्‍दू धर्म के लिए भी, इसमें इस्लाम धर्म के लिए भी, इसमें सिक्‍ख धर्म के लिए भी, सब धर्मों के बारे में जो आपत्तिजनक बातें कहीं है, मैं संक्षिप्‍त में उसको यहां उद्धरित करना चाहूंगा। इस पासबुक के पृष्‍ठ संख्‍या 108 पर लिख रखा है कि सिक्‍ख और अकाली दल खालिस्‍तान की मांग कर रहे हैं, खालिस्‍तान बनाना चाहते हैं, इसमें नीचे लिख रखा है जमात-ए-इस्‍लामी उर्दू के लिए दबाव डाल रही है और मुसलिम मतदाताओं को भड़का रही है, इसके पृष्‍ठ संख्‍या 110 पर क्रम संख्‍या 9 पर लिखा है मुसलमानों की धर्मान्‍धता तथा धार्मिक कट्टरता भी राष्‍ट्रीय एकीकरण के मार्ग में बहुत बड़ी बाधा है। मुसलमानों में पृथक्‍करण, आगे हिन्‍दू धर्म की भी सुन लो जरा, फिर भी सही बोलना मैंने पहले कहा था यह ऐसी बीमारी है इस सदन को कभी गंभीरता से नहीं लेते हैं आप, जब मैंने पहले यह सारी बातें कहीं है, पहले ही कहा है अभी आगे जब सुनना जब भी कहना सही है अगर मैं हिन्‍दू धर्म को गलत बताऊं और आप मुसलिम को यही तो साम्‍प्रदायिकता फैलाने की बात है जरा गंभीरता से लेओ इस चीज को और सुनो क्‍या कह रहा हूं आगे इसमें लिखा है कि मुसलमानों की धर्मांधता तथा धार्मिक कट्टरता भी राष्‍ट्रीय एकीकरण के मार्ग में बहुत बड़ी बाधा है, मुसलमानों में पृथक्‍करण की भावना, मुसलमानों का आर्थिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़ेपन का कारण पाकिस्‍तान का दुष्‍प्रचार तथा षड्यंत्र.....

 

Bhs/akt/28.3.07/12.30/1k

 

और फिर लिखते हैं आगे कि हिन्‍दू धर्म भी इससे अछूता नहीं है। हिन्‍दू धर्म की संकुचित हिन्‍दू राष्‍ट्रवाद की भावना से भी जो अछूत जातियां हैं वो हिन्‍दू धर्म के साथ सक्रिय नहीं हो पा रही हैं। कह दो कि ये भी सही है ? अब बोली बंद क्‍यों हो गयी? मैं सबकी आपत्ति कर रहा हूं कि इसमें घोर आपत्तिजनक चीजें लिखी हुई हैं। फिर इसमें आगे लिखा है कि संकुचित हिन्‍दू राष्‍ट्रवाद आदि मुसलमानों की धर्मांधता के प्रमुख कारण हैं। इतना ही नहीं मुसलमान अपने को हिन्‍दुस्‍तान का नागरिक भी नहीं मानता है आज भी पाकिस्‍तान की जीत पर खुश होते हैं और पाकिस्‍तान की हार पर दुःखी होते हैं। आगे लिखा है कि आज भी हिन्‍दुस्‍तान का मुसलमान पाकिस्‍तान के कहे अनुसार कार्यों का संचालन कर रहा है। 

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सब एक से नहीं हो सकते। हो सकता है इस्‍लाम धर्म में भी दस बीस लोग ऐसे हों, मैं उससे इनकार नहीं करता जो इस तरीके की हरकत कर सकते हैं।  हिन्‍दू धर्म में भी सारे ठीक नहीं हो सकते। सिक्खों में दो-पाँच लोग खालिस्‍तान के समर्थक हो सकते हैं लेकिन पूरे समुदाय को पूरे धार्मिक लोगों के बारे में इस तरीके की भावना कही जाए मैं इसको उचित नहीं मानता। ये वो ही हिन्‍दुस्‍तान है जिसके मौलाना अब्‍दुल कलाम आजाद जब कलकत्‍ता की जेल में नजरबंद थे और उनकी बीवी का इंतकाल हो गया तो जेल सुपरिन्‍टेंडेंट ने जाकर कहा कि मौलाना बुरी खबर है आपकी बीवी का इंतकाल हो गया अगर आप चाहो तो दरख्‍वास्‍त दे दो हम पैरोल पर आपको जेल से जाने की इजाजत दे सकते हैं। मुझे फख्र है उस कायदे आजम पर उसने कहा कि मेरी एक की जगह चारी बीवियां भी होतीं तो मैं मुल्‍क की आजादी के लिए चारों को क़ुर्बान कर देता। मैं जेल छोड़कर माफी मांग कर किसी भी सूरत में उसके जनाज़े में शामिल होने के लिए नहीं जाऊंगा।  कैप्‍टेन अश्‍फाक उल्‍लाह खान का भी उदाहरण है, कैप्‍टेन अब्‍दुल हमीद का भी है। हिन्‍दू धर्म के भी सारे लोग राष्‍ट्र भावना से ओत-प्रोत हैं। सारे सिक्खों को खालिस्‍तान समर्थक नहीं कहा जा सकता। सुरेन्‍द्रपाल सिंह जी टीटी और गुरजंट सिंह जी भी यहां बैठे हुए हैं इसलिए मेरा आपसे निवेदन है मैं आपके माध्‍यम से माननीय गृह मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि मैंने ऐसे ही नहीं किया मेरा हवा में बात उठाने का मकसद नहीं  है। मैंने यह पता लगाने के लिए क्‍या किया कि आखिर यह आरबीडी कहां है मैंने मेड़ता के और भीलवाड़ा के जो लोग मेरे पास आये मैंने उनसे कहा कि पहले पता लगाओ कि ये मिल कहां रही है। वो बोगस व्‍यापारी दुकानदार बनकर गये तो चौड़ा रास्‍ता में दुकान नं.290, अजंता प्रकाशन के ऊपर यह सुपर वन वीक सीरीज मिली। उन्‍होंने कहा कि मेड़ता के अन्‍दर हमारी दुकान है और हमको यह वन वीकर सीरीज चाहिए तब उसने उनको ये किताबें दीं, तब वहां से मिली। बाकी इस पर कहीं प्रेस लाइन नहीं है । वहाँ का बिल लेकर आये हैं वो बिल भी मैं आपको प्रोड्यूस कर दूंगा आप भी किसी को भेज दो उसके पास ये मिल रही है इसको छाप रहा है । यहां पर शिक्षा मंत्री जी भी बैठे हैं, महर्षि दयानंद सरस्‍वती विश्‍वविद्यालय का इससे कोई संबंध नहीं है उसके बावजूद भी इसने छाप दिया महर्षि दयानंद सरस्‍वती विश्‍वविद्यालय, अजमेर तो न इसमें प्रेस लाइन है न यूनिवर्सिटी से यह रिकोग्‍नाइज्‍ड है न कोई मतलब है और इसमें इस तरीके की घोर आपत्तिजनक चीजें लिखी हैं इसलिए मैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय गृह मंत्री जी और शिक्षा मंत्री जी दोनों बैठे हैं, मैं यह चाहता हूं कि सदन के ज़रिये ये आश्‍वस्‍त करें कि इस पर तुरन्‍त प्रतिबंध लगाया जाए और जो प्रकाशक और बुक सेलर इसको बेच रहे हैं उनके खिलाफ प्रेस एक्‍ट के तहत कि इसमें बिना प्रेस लाइन दिये छापी है उसके खिलाफ कार्यवाही की जाए और राजस्‍थान के साम्‍प्रदायिक सद्भाव, भाईचारे और कौमी एकता को बरकरार रखने का काम किया जाए।

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, जो विषय सदन के ध्‍यान में लाया गया माननीय नगर से आने वाले विधायक ने, मैं इस किताब पर अपने अधिकारियों के साथ बैठ कर चर्चा करूंगा इसमें कहां-कहां, किन-किन धाराओं के तहत इस पर केस बन सकता है, क्‍या इसके खिलाफ कार्यवाही हो सकती है, जो आपने मंशा रखी वो तो सदन की प्रॉपर्टी बन गई, मैं अपने अधिकारियों के साथ बैठकर किन नियमों के तहत इस पर कौन सी कार्यवाही हो सकती है उसकी कार्यवाही करूंगा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): उपाध्‍यक्ष महोदय, आप कहें तो मैं इसको टेबल कर दूं, आप कहें तो मैं गृह मंत्री जी को दे दूं?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): गृह मंत्री जी को दे देना न।

श्री उपाध्‍यक्ष: नियम 295 के अन्‍तर्गत चर्चा।  श्री मोहन मेघवाल।

 

जोधपुर शहर के बालोतरा की तरफ जाने वाली मुख्‍य सड़क पर स्थित कच्‍ची बस्तियों को उजाड़ने विषयक

श्री मोहन मेघवाल (सूरसागर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं नियम 295 के अन्‍तर्गत आपके मार्फत माननीय नगरीय विकास, स्‍वायत्‍त शासन एवं आवासन विभाग राज्‍य मंत्री को निवेदन करना चाहूंगा कि जोधपुर शहर के बालोतरा की तरफ जाने वाली मुख्‍य सड़क के दायीं ओर एक बहुत बड़ी कच्‍ची बस्‍ती स्थित है। यह बस्‍ती राजीव गांधी कच्‍ची बस्‍ती पाललिक रोड के नाम से जानी जाती है। जिसमें लगभग 2600 गरीब अल्‍पसंख्‍यक, अनुसूचित जाति, जनजाति के परिवार निवास कर रहे हैं। राज्‍य सरकार के नियमानुसार इस बस्‍ती का भी वर्ष 1998 व 1999 में अन्‍य बस्तियों की तरह इसके नियमन बाबत सर्वे करवाया गया था।  इस सर्वे के आधार पर गत कांग्रेस सरकार ने इस बस्‍ती के नियमन में अपनी पुरानी परम्‍परा का निर्वाह करते हुए भेदभाव बरता एवं अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं व उनके समर्थकों के पाँच सौ कब्‍जों का तो नियमन कर पट्टे जारी कर दिये किन्‍तु गरीब, असहाय, अनुसूचित जाति व जन जाति के परिवारों को जानबूझ कर नियमन का फायदा नहीं दिया।  इस बस्‍ती का यह दुर्भाग्‍य रहा है कि इसके आसपास में धनाढ्य वर्ग की कालोनियां विकसित हो गईं जिससे इस क्षेत्र की भूमि की कीमत लगातार बढ़ती गई।  जिस कारण से इस कच्‍ची बस्‍ती के अधीन आने वाले मकानादि को येन केन हड़पने की साजिश रचनी आरंभ हो गई और इस कच्‍ची बस्‍ती में नियम से वंचित परिवारों को किस प्रकार बेदखल किया जाए इस पर अमल धनाढ्य व्‍यक्तियों, भूमाफियाओं व इनसे जुड़े स्‍थानीय निकाय के अधिकारी व कर्मचारी नए-नए तरीके इजाद करने लगे हैं।  इसी कड़ी में इन्‍होंने पहले तो इस क्षेत्र में बसी श्‍याम नगर आवासीय योजना का मानचित्र बिना किसी सक्षम प्रक्रिया अपनाये तब्‍दील किया एवं इस बस्‍ती के एक बड़े भूभाग को इसमें सम्मिलित करते हुए भूमि तस्‍करों के इशारों पर धनाढ्य वर्ग के लोगों को पट्टे जारी किये गये।  तत्‍पश्‍चात् श्‍याम नगर विस्‍तार योजना के नाम से बस्‍ती में घुसने की कोशिश की गई एवं यह निरंतर जारी है।  इनकी इस भावना व साजिश को स्‍थानीय राजीव गांधी कच्‍ची बस्‍ती के लोगों ने भी एकजुटता दर्शाते हुए इनका डटकर विरोध करना प्रारंभ कर दिया है।  कच्‍ची बस्‍ती के निवासी अपनी कुटिया का नियमन कराने को आतुर है तो भू‍माफिया उजाड़ने को।

मैं यह जानना चाहता हूं कि क्‍या सरकार इस कच्‍ची बस्‍ती में आबाद परिवारों को नियमन करने की दिशा में कोई ठोस कार्यवाही कर रही है? यदि कार्यवाही जारी है तो उसकी प्रगति से अवगत कराया जाये तथा यह प्रक्रिया कब पूर्ण कर ली जायेगी? तथा सरकार इस बस्‍ती में निवास करने वाले सर्वे से वंचित परिवारों को भी शामिल करने की मंशा रखती है?  मैं इस बस्‍ती के हजारों परिवारों के हितों की रक्षार्थ आपसे अपेक्षा करता हूं कि आप इस सदन में यह घोषणा करेंगे कि इस कच्‍ची बस्‍ती को किसी भी कीमत पर भूमाफियाओं के हाथों उजड़ने नहीं देंगे तथा इसके नियमन में बरती गई कोताही के लिये जिम्‍मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध ठोस कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री अर्जुनसिंह बामणिया। (अनुपस्थित) श्री नानालाल अहारी। (अनुपस्थित) श्री जयराज जाटव।

 

खैरथल में महाविद्यालय खोलने विषयक

श्री जयराम जाटव (खैरथल): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, नियम 295 के अन्‍तर्गत विधान सभा क्षेत्र खैरथल कस्‍बे में महाविद्यालय खोलने के क्रम में निवेदन है कि जिला अलवर का सबसे बड़ा कस्‍बा विधान सभा क्षेत्र खैरथल है। जिसकी आबादी लगभग पचास हजार है। खैरथल कस्‍बे के चारों तरफ विधान सभा क्षेत्र मुण्‍डावर, बानसुर व तिजारा का क्षेत्र लगता है। इस ग्रामीण अंचल में कोई कॉलेज नहीं होने के कारण इस ग्रामीण क्षेत्र के हजारों छात्र-छात्राएं जिनको आगे अध्‍ययन करने के लिए अलवर जाना पड़ता है। अलवर आने जाने में इनको बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। छात्र-छात्राओं का लगभग तीन चार घंटे का समय खराब हो जाता है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति व गरीब ग्रामीण छात्र-छात्राओं की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्‍हें शिक्षा से महरूम होना पड़ता है।

 

कैलाश/     28.3.07  12.40  (1) 1l

 

आज के युग में बढते हुए शिक्षा जगत में ग्रामीणों को आधुनिकतम युग में मिलने वाली शिक्षा मिले । इस बाबत मैं माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया से मांग करता हूं कि खैरथल कस्‍बे में इसी वित्‍तीय वर्ष में राजकीय महाविद्यालय खोलकर मुझे कृतार्थ करें । यदि सरकार खैरथल कस्‍बे मं महाविद्यालय खोलती है तो उक्‍त महाविद्यालय को भूमि उपलब्‍ध करा दी जायेगी, धन्‍यवाद ।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री अर्जुनलाल बामनिया । श्री के.डी बाबर (अनुपस्थित)

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, आपकी आज्ञा हो तो मैं बोल लूं ।

श्री उपाध्‍यक्ष: बोलिए ।

 

तहसील बांसवाडा की क‍तिपय पंचायतों को स्‍थानांतरित नहीं किये जाने विषयक

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, नियम प्रक्रिया 295 के अंतर्गत जिला बांसवाडा से बांसवाडा विधान सभा क्षेत्र दानपुर की पंचायतें जोघी लेजपुर, मकनपुरा, जहापूरा, छापनबडी बागतालाब खजूरी, गागरवा को नया जिला प्रतापगढ में मिलाने की प्रक्रिया की जा रही है । जिससे उपरोक्‍त पंचायतों की जनता को प्रतापगढ जाने के लिये काफी परेशानी आयेगी और जनता को बांसवाडा जिला मुख्‍यालय नजदीक एवं सड़क मार्ग से जुडा होने से यथास्थिति में ही रहने दिया जाने की कृपा करें, धन्‍यवाद ।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल ।

 

विधान सभा क्षेत्र देसुरी की नहरों की मरम्‍मत

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं विधान सभा प्रक्रिया नियम 295 के तहत आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगी ।

  उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधान सभा क्षेत्र देसूरी की भौगोलिक स्थिति इस प्रकार से है एक तरफ अरावली पर्वत माला से घिरा हुआ है दूसरी तरफ पूर्ण मैदानी भाग है । यहां पर छोडे बडे 20 बाँध आये हुए हैं जिससे सिंचाई विभाग से 9 व पंचायत विभाग से 11 बांधों से सिंचाई होती है । इस वर्ष अक्‍टूबर, 2006 को सभी बांधों पर चादर चलरी शुरू हुई जो सिंचाई के लिये नहरे नहीं खोलने तक चालू रही । वर्तमान में इन बांधों की नहरें व वितरिकाएं 40 वर्ष पूर्व निर्मित है जिनकी दशा काफी जर्जर अवस्‍था में है व इसकी वितरिकाएं पूर्णतया कच्‍ची है जि6नसे किसानों द्वारा स्‍वयं फावडों से कच्‍ची खालियां बनाकर अपनी फसल की पिलाई करते हैं जिससे पानी की अधिक बर्बादी होती है ।

  अंत: जल संसाधन मंत्री जी से निवेदन है कि इन नहरों की मरम्‍मत करावें तथा वितरिकाओं को पक्‍का निर्माण करावे ताकि पानी की बर्बादी को रोका जा सके एवं इसका वितरण सुचारु रूप से हो सके जिससे बांधों की क्षमता को देखते हुए उसमें इकट्ठा हुए पानी को एक वर्ष की बजाय दो वर्ष तक सिंचाई के लिये काम में लिया जा सकेगा, जिससे किसानों की खेतों में सिंचाई जैसी समस्‍या से निजात मिलेगी एवं राज्‍य में अच्‍छी फसल से उन्‍नति एवं खुशहाली आवेगी, धन्‍यवाद ।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री सी.डी.देवल ।

 

पाली जिले के धार्मिक स्‍थलों को डामर की सड़कों से जोड़ने विषयक

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं धार्मिक स्‍थलों को सड़क से जोडने हेतु प्रक्रिया के नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख करना चाहूंगा ।

उपाध्‍यक्ष महोदय, पाली जिले में बहुत सारे ऐसे धार्मिक स्‍थल आस्‍था के केन्‍द्र हैं जिनके लिये आगमन एवं जाने के लिए संपर्क सड़क उपलब्‍ध नहीं है और इन स्‍थलों पर मेले आदि भी भरते रहते हैं । जिनमें मुख्‍यत: रायपुर तहसील के बिराठियागांव में रामदेव जी का मंदिर बना हुआ है जिनमें वर्ष भर मेला सा लगा रहता है और अजमेर जिले के व मेवाड से आने वाले यात्रियों को बडी परेशानी होती है । जहां जनहित में झाला की चौकी से बिराठिया खुर्द की 7 किलो मीटर की दूरी में से केवल 2.5 किलो मीटर सड़क का डामरीकरण होना है । जिसे धार्मिक स्‍थलों को जोडने की घोषणा के अनुसार जोड दिया जाय ताकि श्रद्धालुओं को राहत मिल सके ।

सोजत तहसील के धारेश्‍वर महादेव को जाने के लिये भी यात्रियों को बडी परेशानी होती है । गुडा श्‍यामा से तीन किलो मीटर की दूरी पर धारेश्‍वर महादेव का ऐतिहासिक मंदिर आया हुआ है जहां हर सोमवार हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिये जाते हैं। यह पहाडी क्षेत्र में आता है इसलिए इस धार्मिक स्‍थल को गुडा श्‍यामा से डामर की सड़क से जोडा जाय एवं बीच में नालों पर सीडी वर्क कराया जाय ।

इसी प्रकार ब्‍यावर तहसील में दूधलेश्‍वर का मंदिर आया हुआ है जहां पाली जिले के विशेष कर मारवाड जंक्‍शन व सोजत तहसील के सैकडों लोग दर्शन के लिये आते हैं, जिनको ब्‍यावर होकर जाने में बडी परेशानी होती है । अंत: ग्राम सारण से दूधलेश्‍वर महादेव के बीच 7 किलो मीटर का टुकडा कच्‍चा है उसका डामरीकरण कराया जाये ।

इसी प्रकार मारवाड जंक्‍शन में गोदावास गांव में बायासा माताजी के मंदिर में काफी अच्‍छी तादात में महिलाएं आती हैं और पूर्णिमा पर महिलाओं का मेला लगता है इसलिए गोदावास गांव से मंदिर तक एक किलो मीटर सड़क का डामरीकरण कराया जाये ।

माननीय मुख्‍य मंत्री जी की विधान सभा में घोषणा के अनुरूप इन धार्मिक स्‍थलों को डमर की सड़क का निर्माण कराया जाये ।

श्री उपाध्‍यक्ष: डा. जालम सिंह रावलोत । (अनुपस्थित) श्री नरेन्‍द्र नागर (अनुपस्थित) श्री अर्जुन लाल मीणा ।

 

सलूम्‍बर के सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में शैयाओं की बढोतरी

श्री अर्जुन लाल मीणा (सलूम्‍बर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रक्रिया के नियम 295 के तहत सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र सलूम्बर को 50 बैड से 100 बैड में क्रमोन्‍नत करने बाबत आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा ।

उपाध्‍यक्ष महोदय, उपरोक्‍त विषय में निवेदन है कि उदयपुर जिला मुख्‍यालय से 70 किलो मीटर दूर दक्षिण में स्थित अरावली पहाडियों के बीच तथा एशिया की प्रसिद्ध सबसे बडी मीठे पानी की झील के पास सलूम्‍बर है । सलूम्‍बर वर्तमान में उप जिलाधीश कार्यालय है जिसमें तहसील सराडा, तहसील सलूम्‍बर तथा त‍हसील खैरवाडा का प्रशासनिक उपखंड कार्यालय मुख्‍यालय है । सलूम्‍ब्‍र में सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र संचालित है । वर्तमान में 50 बैड का हास्पिटल संचालित है । यह उप खंड मुख्‍यालय जनजाति बाहुल्‍य क्षेत्र है । यहां से 70 किलो मीटर की परिधि में कोई बड़ा हास्पिटल नहीं है । सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र सलूम्‍बर में पर्याप्‍त वार्ड भवन बना हुआ है । यहां पर वर्तमान में एएनएम प्रसाविकाओं का ट्रेनिंग सेंटर भी संचालित है ।

यह उदयपुर से बांसवाडा राज्‍य स्‍टेट हाइ वे पर स्थिति है । सलूम्‍बर में सार्वजनिक निर्माण विभाग, जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी विभाग, जल संसाधन उप खंड, खनन विभाग, कृषि विभाग, एडिशनल एसपी कार्यालय, सीआईडी कार्यालय सभी कार्यालय अधिशासी अभियंता स्‍तर के कार्यालय है । सलूम्‍बर उदयपुर जिले की सबसे बडी नगर पालिका क्षेत्र है । सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र सलूम्‍बर को 50 बैड से 100 बडे में क्रमोन्‍नत करने का प्रस्‍ताव चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य विभाग द्वारा भी भेजा जा गया है । राज्‍य सरकार के नोर्म्‍स के अनुसार सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र सलूम्‍बर 100 बैड में क्रमोन्‍नत होने की पात्रता रखता है । अंत: 100 बैड में क्रमोन्‍न्‍त करने की कृपा करावें, धन्‍यवाद ।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री हीरालाल ।

 

विधान सभा क्षेत्र निवाई के प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता

श्री हीरालाल (निवाई): उपाध्‍यक्ष महोदय, निवेदन है कि मेरा विधान सभा क्षेत्र में इस वर्ष पूर्णतया किसान अनावृष्टि, ओलावृष्टि से पीडित रहा है । मेरे विधान सभा क्षेत्र में ना ही कोई नहर है, तालाब एवं कोई बड़ा बाँध है । निवाई विधान सभा क्षेत्र पूर्णतया वर्षा जनित कृषि पर निर्भर है । इस बार रबी की फसल कम वर्षा से नष्‍ट हो गई है । जो बोयी वह ओलावृष्टि से नष्‍ट हो गई । साथ ही जिन किसानों ने अपने कुओं पर सरसों, अनाज बोया था वह ओलावृष्टि से नष्‍ट हो गया । जिन्‍हें सरकार आर्थिक सहाय‍ता उपलब्‍ध करा रही है इसके लिये धन्‍यवाद ।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, लघु सीमांत कृषक बरानी भूमि पर खेती करता है। परंतु वर्षा नहीं होने से रबी और खरीब की फसल नहीं बोई गई । अंत: मैं आपके माध्‍यम से सरकार से मांग करता हूं कि छोटे छोटे किसानों को जिनकी दोनों फसले ही खेतों में नहीं बोई गई अंत: ऐसे कृषकों को भी आर्थिक सहायता उपलब्‍ध कराने की कृपा करावें ताकि इन्‍हें भी राहत मिल सके , धन्‍यवाद ।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री मोहन लाल गुप्‍ता । 

 

जयपुर नगर निगम की हिंगोनिया गौशाला में चिकित्‍सा एवं चारे का अभाव

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं समुचित चिकित्‍सा व्‍यवस्‍था तथा चारे के अभाव में नगर निगम हिंगोनिया गौ शाला में प्रतिदिन लगभग दो दर्जन गायों के प्रतिदिन मृत्‍यु होने की ओर स्‍वायत्‍त शासन मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं ।

नगर निगम जयपुर द्वारा जयपुर में विभिन्‍न स्‍थानों से पकडी गई गायें, बछडे, बैल आदि को ट्रक में भरकर निगम द्वारा संचालित हिंगोनिया में स्थित गौशाला में लाकर रखा जाता है ।

हिंगोनिया स्थित गौशाला में अप्रैल, 2003 से अक्‍टूबर, 2006 तक 28 हजार 778 गायों को शहर से पकड कर गौशाला लाया गया जिनमें से 778 गायों को जुर्माने के बाद मालिक को सौंपा गया । इनमें से 70 प्रतिशत गौवंश हिंगोनिया गौशाला में दम तोड चुका है तथा यह सिलसिला अब तक 20000 गायों की मौत के बाद भी जारी है । इस आशय के समाचार पत्रिका के 4 नवंबर, 2006 व 8 दिसंबर, 2006 में प्रकाशित हुए है ।

हिंगोनिया की गौशाला में एवं दवाबखानों में सभी श्रेणी के गौवंश को एक साथ रखा जाता है जिससे बडे पशु छोटे एवं बीमार वंश को भौजन पानी आदि नहीं लेने देते जिसके कारण ज्‍यादतर भूख रह जाते हैं । कई बार नि:शक्‍त व छोटे बछडे गिर जाते हैं ।

 

ans/akt  12.50 1m  28.03.2007

 

 

और उन से बडे पशु गाय बैल खने को दौडते समय गु जरते हैं जिससे वो घायल हो जाते हैं ऐसे पशुओं को गौशाला के कर्मचारी रात के अंधेरे में आठ गायों को 7 दिसम्‍बर,2006 को सड़क पर डाल दिया इन मरणासन्‍न स्थिति में आ चुकी गायों को कुत्‍ते खाते रहते हैं इन गौवशं की पीडा का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता ।

प्रशासन द्वारा यह तर्क दिया ताता है कि जयादातर गायें सड़क पर प्‍लास्टिक की थैलियां खा जाती है जिससे उनकी मौत हो जाती है और दूसरा उनमें अधिकांश  गायें बीमार रहती है जिनके  कारण मौत होती है। मैं उपाध्‍यक्ष महोदय आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि 20,000 गायें जिनकी मौत हिंगोदिया की गौशाला में हुई उनमें से कितनी गायों का पोस्‍टमार्टम कराया गया और यदि इन गायों का पोस्‍टमार्टम कराया गया है तो उनकी पोस्‍टमार्टम की रिपोर्ट इन गायों के मरने के कारणों को सदन की मेज पर रखें।

मैं माननीय उपाध्‍यक्ष महादेय, आपके माध्‍यम से स्‍वायत्‍त शासन मंत्री महोदय से इन गौशालाओं व दवाबखानों में समुचित व्‍यवस्‍था हेतु तत्‍काल निम्‍नांकित आवश्‍यक कार्यवाही किये जाने हेतु निवेदन करता हूं:-

1. निगम की इन गौशालाओं में छोटे बड़े व बीमार  पशुओं को समुचित चारा दिया जाए इसके लिए कर्मचारियों को पाबन्‍द किया जाए कि वे भूसा समय समय पर पर्याप्‍त मात्रा में प्रतिदिन दे तथा दानदाताओं द्वारा भिजवाये जाने वाला हरा चारा गुड व बांट भी नियमित रूप से गौवंश को उपलब्‍ध करायें इसके लिए पर्याप्‍त बड़ी भूसास ट्राली कर्मचारियों को उपलब्‍ध कराई जाए।

2. इस गौशाला में कर्मचारी गौवंश को समय समय पर पर्याप्‍त चारादेते हैं अथवा नहीं इसकी निरिक्षण की भी समय समय पर व्‍यवस्‍था की जाए।

3. गिम की इन गौशालाओं व दबावखानों में छोटे शिशुओं एवं निर्बल गोवंश के लिए पृथक से समुचित व्‍यवस्‍था की जाए तथा बैलों व अन्‍य स्‍वस्‍थ गायों के लिए पृथक से बाड़ों की व्‍यवस्‍था की जाए।

4. बीमार तथ नि:शक्‍त गायों की समुचित चिकित्‍सा व्‍यवस्‍था की जाए तथा गायों के पेट से प्‍लास्टिक कीथैलियां निकालने की व्‍यवस्‍था चिकित्‍सक सुनिश्चित करें तथा चिकित्‍सक को वहीं रहने को पाबंद किया जाए। बीमार मरणासन्‍न गायों को गौशाला से निकालकर कर्मचारी उन्‍हें बाहर कुत्‍तों को खाने के लिए नहीं डाले और यदि ऐसा कृत्‍य कोई कर्मचारी करे तो उसके विरूद्ध सख्‍त अनुशाससनात्‍मक कार्यवाही की जाए।

5. इन गौशालाओं में बीमार व शिशु गायों बछड़ों  के कक्ष को जाली से कवर करवा दिया जाए ताकि कौएं इनकी आखें फोडकर मांस नोचकर वीभत्‍स रूप से इन्‍हें अकाल मृत्‍यु का ग्रास न बनावें।

6. निगम की गौशाला में प्रत्‍येक गाय जिसकी मौत गौशाला में हो उसके पोस्‍टमार्टम की व्‍यवस्‍थ्‍ज्ञा की जाए ताकि गायों की मृत्‍यु के कारणों का पाता लगाया जा सके और भविष्‍य में इन कारणों की रोकथाम के लिए निगम समुचित कार्यवाही करें ताकि इन गौशाला में भूख व बीमारी से इन गौशालाओं में गायों व बछड़ों की अकाल मौत नहीं हो।

7.बस्‍सी के हिंगोनिया गांव से निगम की गौशाला/दबावखाने तक ढाई किलोमीटर की सांभरिया तक जीर्ण शीर्ण व क्षतिग्रस्‍त सड़क बनाई जावे तथा उसकी मरम्‍मत कराई जावे।

8. इन गौशाला के पास के क्षेत्रों के सभी जंगली कुत्‍तो भेडियों को पकडकर निगम के जयसिंहपुरा स्थि श्‍वानघर में भिजवाया जाए।

9. हिंगोनिया गौशाला की और मुडने वाले सांभरिया मोड पर ईश्‍वर मार्केट के पास गौशाला के लिए कोई पथ प्रदर्शक साइन बोर्ड नहीं है, अंत: यहां सुगमस पथ प्रदर्शक शीघ्र लगाया जाए। धन्‍यवाद।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह गाय का,भूस का पार करके (व्‍यवधान) राजनीति की वैतरणी पार करने वालों के यहां 20,000 गायें मर गई।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह गायों के नाम पर वोट लेकर आए हैं (व्‍यवधान) डूब मरने की बात है, गायों की रक्षा नहीं कर सकते। 

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जंगली कुत्‍ते राजस्‍थान में है ही नहीं, आपकी जानकारी के लिए, जंगली कुत्‍ते राजस्‍थान में है ही नहीं । (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): जंगली कुत्‍ते राजस्‍थान में नहीं है । (व्‍यवधान) आपको गलतफहमी है इसको करेक्‍ट कर ली जिए, जंगली कुत्‍ते राजस्‍थान में नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह गायों के रखवाले हैं ? (व्‍यवधान) 

श्री उपाध्‍यक्ष: अंकित नहीं होगा।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: आपका अंकित नहीं हो रहा माननीय सदस्‍य।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: (व्‍यवधान) चर्चा बिल्‍कुल, कतई नहीं होगी। कोई रिकार्ड पर नहीं आएगा। 

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपका अंकित नहीं हो रहा, किसने परमीशन दी आपको बोलने की ? (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर):000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: अंकित नहीं होगा। श्री के डी बाबर ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, श्री के डी बाबर।

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप बिराजे।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍यों ने हिंगोनिया गौशाला की चिंता यहां जाहिर की, निश्चित रूप से गायें जो मर रही हैं सबके लिए चिंता का विषय है। मैं सी ओ नगरनिगम को कह रहा हूं वह जाकर वहां  स्थिति को देखे और जो भी उचित व्‍यवस्‍था हो करें। 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री के डी बाबर।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री के डी बाबर।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़):  उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के नियम 295 के तहत लक्ष्‍मणगढ़ शहर में गंदे पानी की निकासी का स्‍थायी समाधान किये जाने कके विषय विशेष का प्रस्‍ताव आपके सम्‍मुख प्रस्‍तुत कर रहा हूं।

महोदय, मैं पिछले तीन वर्षों से निरन्‍तर माननीय स्‍वायत्‍त शासन मंत्री जी से विशेष उल्‍लेख के प्रस्‍ताव, प्रश्‍न एवं ध्‍यानाकर्षण के माध्‍यम से लक्ष्‍मणगढ़ शहर में गंदरे पानी की निकासी का स्‍थायी समाधान करने हेतु निवेदन करता आ रहा हूं परन्‍तु आज तक भी लक्ष्‍मणगढ़ के निवासीगण गंदे पानी के एक स्‍थान पर जमा होने से हो रही परेशानियों से निरन्‍तर झूझ रहे हैं एवं अनेक व्‍यक्ति गंदे पानी से उत्‍पन्‍न बीमारियों से ग्रसित हो चुके हैं। बच्‍चों एवं बड़े-बूढ़ों को गंदे पानी की झील बन जाने के करण आवागमन में भी भारी परेशानी होती है। हालत यह है कि लक्ष्‍मणगढ़ शहर की आबादीसाठ हजार की है एवं वहां पर नगरपालिका  भी कार्यरत है परंतु शहर में गंदे पानी की निकासी की कोई समुचित योजना आज तक नहीं बन पाई हे, न क्रियान्वित हो पाई है। श्‍हार में जो अनुसूचित जाति की बस्‍तीहै वहां पर गंदरे एवं प्रदूषित पानी की झील बनी हुई हे जिससे संक्रामक रोगों का फैलाव होता जा  रहा है। बारिश के दिनों में  तो लोगों का जीना ही दुभर हो जाता है, सारे रास्‍ते अवरूद्ध हो जाते हैं1 शहर में चार बस्तियां अनुसूचित जाति की है, उन सभी में पानी की निकासी का कोई साधान नहीं है। अंत: लक्ष्‍मणगढ़ शहर के वाशिन्‍दों को इस समस्‍या से निजात दिलाया जाना अति आवश्‍यक है।

मैं राज्‍य सरकार एवं माननीय स्‍वायत्‍त शासन मंत्री से पुरजोर शब्‍दों में मांग करता हूं कि यह अत्‍यन्‍त लोक महत्‍व का विषय है, कृपया लक्ष्‍मणगढ़ शहर के गंदे पानी की निकासी का स्‍थायी समाधान किये जाने हेतु विशेष योजना कर स्‍थानीय लोगों को राहत प्रदान करने का कष्‍ट करें। धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री नानालाल अहारी।

 

विधान सभा क्षेत्र खेरवाड़ा में ओलावृष्टि से क्षतिग्रस्‍त सड़कों विषयक

श्री नानालाल अहारी (खैरवाड़ा): उपाध्‍यक्ष महोदय कार्य संचालन सबंधी नियम 295 के तहत  निवेदन है विधान सभा क्षेत्र खेरवाड़ा में ओलावृष्टि से कई सड़कों व पुलिया क्षतिग्रस्‍त हुई । विभाग द्वारा इनकी मरम्‍मत व रिपेयर के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग ने तखमीना के सथ 6.95 करोड की मांग की है मगर पूरा पूरा बजट में पैसा नहीं मिलने के कारण सारी सडके अभी भी क्षतिग्रस्‍त है। कई पंचायतों का आवागमन भी अभी रूका हुआ है। वहां की जनताके लिए ऐसी स्थिति में आवश्‍यक वस्‍तुओं को जुटाने में काफी  परेशानियां उठानी पड़ती है। मेरा सरकार एवं सार्वजनिक निर्माण मंत्री से आग्रह हैकि मेरे विधान सभा क्षेत्र में जितनी भी सड़के, पुलिया क्षतिग्रस्‍त हे उन्‍हें जल्‍दी से जल्‍दी बजट उपलब्‍ध करावाकर ठीक करवाई जाए ताकि जनता के आवागमन चालू हो सके एवं आवश्‍यक वस्‍तुओं को वे आसानी से ला सके साथ ही कई सड़के कृषि मण्‍डी से बनी हुई एवम टी ए डी से विधायक मद से सांसद मद से भी पुलिया एवं सडके बनी हुई है। इन सडकों एवं पुलिया को विभाग से मरम्‍मत नहीं करवाया जा सकता है ऐसी स्थिति में इन सडकों की देखभाल कोई नहीं कर सकता है। मेरे विधान सभा क्षेत्र में कई सडके व पुलियां है मेरा सार्वजनिक निर्माण मंत्री से निवेदन है कि आप इन सडकों का भी सर्वे कराकर सभी सडकों एवं पुलिया वापस निर्माण करावे ताकि वहां के आवागमन के साधन पुन: चालू हो सके और जनता को राहत मिल सके। ऐसी स्थिति में सार्वजनिक निर्माण मंत्री से आशा करता हूं कि आप शीघ्र ही हमारी मांगे स्‍वीकार करेंगे ताकि जनता की आवश्‍यकता पुरी होगी। धन्‍यवाद।

 

दुर्गा/त्रिपाठी 280307 1300 1n

 

पर्ची के माध्‍यम से उठाये गये मुद्दे

खेतड़ी में कृषि मण्‍डी की स्‍थापना

 

श्री उपाध्‍यक्ष: पर्ची के माध्‍यम से उठाये जाने वाले विषय। श्री दाताराम।

श्री दाताराम  गुर्जर (खेतड़ी): उपाध्‍यक्ष महोदय, किसानों को अपनी पैदावार बेचने के लिये दूसरी कृषि मण्डियों में जाना पड़ता है और खेतड़ी में कृषि मण्‍डी का अभाव है। इसकी वजह से मेरे क्षेत्र के किसानों को या तो नारनौल अपनी पैदावार बेचने के लिये जाना पड़ता है या फिर चिड़ावा जाना पड़ता है, या दूसरी पड़ोस में नीम का थाना, जो मण्‍डी लगती है उसमें जाना पड़ता है। मेरे क्षेत्र, जिसमें 80 प्रतिशत किसान हैं और करीब 38 ग्राम पंचायतों में फैला हुआ क्षेत्र है, भौगोलिक दृष्टि से पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह से वैसे ही पानी की कमी है। फिर भी जैसे-तैसे करके किसान अपनी फसल पैदा करता है उसका उसको उचित मूल्‍य नहीं मिल पाता है। न ही मेरे क्षेत्र में उचित मूल्‍य का कोई खरीद केन्‍द्र है। उसका भी अभाव है जिसके कारण से या तो सरसों बेचने के लिये उचित मूल्‍य के जो केन्‍द्र हैं उसमें चिड़ावा जाना पड़ता है या फिर नीम का थाना और कई बार किसानों को पर्ची नहीं मिलती वहां और उसके बाद वह अपनी पैदावार को लेकर दूसरी जगह जाता है, जहां पड़ोसी क्षेत्र नारनौल मण्‍डी लगती है, उसमें जाना पड़ता है। उपाध्‍यक्ष महोदय, जब हम राजस्‍थान में किसानों को, इस बजट के माध्‍यम से भी किसानों को काफी अरबों रुपये किसानों की सुविधा के लिये सरकार ने दिये हैं और नई कृषि मण्‍डी भी सरकार ने खोली हैं। मैंने पिछले साल भी मांग रखी थी कि मेरे क्षेत्र में कृषि मण्‍डी का अभाव है और 3 साइड में मेरा क्षेत्र विभक्‍त हो जाता है। एक साइड में नीम के थाना में लोग चले जाते हैं, दूसरे चिड़ावा में और तीसरे नारनौल मण्‍डी में। इसलिये उनका सही आकलन नहीं हो पाता है। कृषि मंत्रीजी से मैं मिला था। उन्‍होंने आश्‍स्‍त किया और जब सर्वे करवाया तो अधिकारियों ने गलत उनको गाइड करके यह बताया कि यहां किसानों की इतनी पैदावार नहीं होती है कि उनके यहां मण्‍डी खोलना उपयुक्‍त हो सके। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह बात कहना चाहता हूं कि हमारे क्षेत्र में जितने किसान हैं उनकी पैदावार का आकलन करके जिन-जिन मण्‍डियों में इनकी पैदावार को बेचा जाता है उसका आकलन किया जाए तो मेरे क्षेत्र के किसानों को कितना नुकसान होता है। 60-70 किलोमीटर किसान किसी ट्रेक्‍टर के माध्‍यम से या अन्‍य किसी साधन से अपनी पैदावार को लेकर जाता है तो उसके ऊपर जितनी मेहनत वह फसल पैदा करने में लगाता है, उससे ज्‍यादा अधिक तकलीफ उसको बेचने के लिये जब जाता है तो उसको इतनी अधिक असुविधा होती है और वह किसान निश्चित रूप से मायूस हो जाता है कि पहले तो जब खुले आसमान के नीचे फसल तैयार करता है, उसकी चौकसी करता है, रात-रात पानी देता है और दिन को उसकी चौकसी करता रहता है और जब बेचने के लिये जाए तो वहां भी उसको उचित मूल्‍य नहीं मिले तो उस किसान के साथ जो बीतती होगी, यह वहां का किसान जानता है। इस बारे में निश्चित रूप से सरकार को ध्‍यान देना चाहिए। आपके माध्‍यम से, उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं यह मांग रखना चाहूंगा कि सरकार जब किसानों के लिये इतनी चिन्‍ताशील है, इतना अरबों रुपये का बजट सरकार ने किसानों के लिये दिया है, किसान के लिये तरह-तरह की सुविधाएं देने का सरकार ने तय किया है।  किसानों को जिंसवार मण्‍डियां उपलब्‍ध करवाई हैं, कहीं धनिया मण्‍डी, कहीं जीरा मण्‍डी, कहीं लहसुन मण्‍डी, कहीं प्‍याज मण्‍डी तो क्‍यों नहीं हर उप खण्‍ड क्षेत्र के ऊपर कृषि मण्‍डी खोल दी जाए। एक तरफ तो वह किसान है जो अपनी सब प्रकार की फसलों के लिये दूसरी मण्डियों में जाता है उसका कितना किराया लगता है और एक तरफ जहां मेरे क्षेत्र में प्‍याज भी खूब उपलब्‍ध होता है, चना भी खूब पैदा होता है और सरसों भी खूब पैदा होती है। यह सारी फसलें, गेहूं भी खूब पैदा होता है, जौ भी पैदा होता है, तारामीरा भी पैदा होता है। जब सारी फसलें मेरे क्षेत्र में पैदा होती हैं तो हमारे क्षेत्र के साथ ही ऐसा व्‍यवहार क्‍यों। आजादी के पहले खेतड़ी में अनाज मण्‍डी होती थी लेकिन धीरे-धीरे इस आजादी के बाद में किसानों को एक तरह से गुलामी का पर्याय बना दिया गया है। किसानों को अपनी फसल बेचने के लिये कम रेट पर बेचने के लिये भी मजबूर होना पड़ता है। उपाध्‍यक्ष महोदय, जब राजस्‍थान के किसानों को हरियाणा में अपनी जिंस बेचने के लिये जाना पड़ता है, उसका वहां उचित भाव नहीं मिलता है और वह 3-3, 4-4 रोज तक, कई बार हफ्तों तक भी पड़े रहते हैं। लेकिन उसका सही मूल्‍य नहीं मिलता है। उनको कम दामों के ऊपर भी फसल बेचने पड़ती है। इसलिये उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे बड़ा दु:ख है कि जब किसानों के प्रति चिन्‍तनशील सरकार है और किसानों के प्रति इतना सब कुछ कर रही है तो क्‍यों नहीं खेतड़ी में भी एक कृषि मण्‍डी खोली जाए और खेतड़ी के किसानों को भी उचित मूल्‍य मिल सके। उसके लिये जो किसानों को खरीद केन्‍द्र खोला जाता है, तीन साल से मैं मांग कर रहा हूं। हमारे मंत्रीजी कह रहे हैं कि यह खरीद केन्‍द्र तो सेण्‍टर के यहां से खुलकर आते हैं तो तीन साल में हमारे क्षेत्र का कोई नम्‍बर ही नहीं आया। तीन साल से मैं बराबर मांग कर रहा हूं और अब जब फसल तैयार हो गयी है, जब भी मैं क्षेत्र में जाऊंगा तो जनता इस बात के लिये दुबारा मांग करेगी। पिछली बार भी बहुत से लोगों को चिड़ावा में काफी दिनों इंतजार करने के बाद में, फिर भी उनकी उचित मूल्‍य के ऊपर सरसों की बिक्री नहीं हो सकी थी। इसलिये उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्रीजी से यह निवेदन करना चाहता हूं कि इसी बजट में कृषि मण्‍डी खोली जाए या उसका सबटिट्यूट जो भी हो, वह किया जाए, सब-यार्ड वगैरह जो भी हो, खोल सकें, ताकि हमारे किसानों को उचित मूल्‍य पर वहां अपनी जिन्‍स बेचने के लिये, और उनको उचित मूल्‍य मिल सके और फसल के लिये जो भी बिक्री केन्‍द्र हैं, वह भी खोलने की व्‍यवस्‍था की जाए ताकि किसानों को उचित मूल्‍य पर अपनी सरसों, अपने चने, अपने गेहूं, जो भी उसके उपयोग में आने के अलावा, जो बिक्री के लिये होते हैं, उनका मूल्‍य मिल सके, यह मैं आपके माध्‍यम से मांग करना चाहता हूं। उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने समय दिया, उसके लिये धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री रामप्रताप कासनिया।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो मांग रखी है, उसकी तरफ ध्‍यान आकर्षित कर रहा हूं। खेतड़ी बहुत इम्‍पोर्टेण्‍ट जगह है झुंझुनूं जिले की और राजस्‍थान की। और किसानों की वह जमीन है, वह बहुत बढि़या जमीन है खेतड़ी की, झुंझुनूं जिले के अन्‍दर सबसे अच्‍छी जमीन खेतड़ी की है। वहां आपको कोई कठिनाई नहीं है खोलने में। आपका कोई बजट नहीं लगता है। कुछ पैदा होगी तो ज्‍यादा पैदा होगी, इसलिये आप यहां विचार करें।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): उपाध्‍यक्ष महोदय, खेतड़ी से आने वाले माननीय सदस्‍य ने और प्रतिपक्ष के माननीय नेता ने जो बात कही है, निश्चित तौर पर किसान को फसल बेचने के लिये मण्डियां उपलब्‍ध कराना सरकार का धर्म है लेकिन वर्तमान में खेतड़ी में गोण मण्‍डी यार्ड हमने घोषित कर रखा है और गोण मण्‍डी का जो यार्ड होता है, उसके अन्‍दर पहली शर्त यह होती है कि 15 लाइसेंस होल्‍डर होने चाहिए। 20 किलोमीटर तक कोई मण्‍डी नहीं होनी चाहिए और उसके अन्‍दर 40 हजार की रेवेन्‍यु इन्‍कम होनी चाहिए। लेकिन वर्तमान में वहां केवल एक लाइसेंस होल्‍डर है और उसने भी तीन साल से कोई काम नहीं किया है। इसलिये वहां जो आय है वह शून्‍य है और 10 किलोमीटर पर सिंघाना मण्‍डी, उसके पड़ोस में है। फिर भी हम माननीय प्रतिपक्ष के नेता की चिन्‍ता को ध्‍यान में रखते हुए, अगर वहां लाइसेंस होल्‍डर बढ़ेंगे ओर मण्‍डी की आय भी बढ़ेगी तो निश्चित रूप से हम इस मण्‍डी को आगे बढ़ाने में पूरा प्रयास करेंगे। लेकिन वहां लाइसेंस होल्‍डर एक है और आय जीरो है। थोड़े लाइसेंस होल्‍डर बन जाएं तो निश्चित तौर पर प्रयास करेंगे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मंत्री महोदय, सीकरी के अन्‍दर गोण मण्‍डी है। उसको पूरी मण्‍डी बनाने के लिये प्रस्‍ताव दिया है, कृषि मंत्रीजी को भी दिया है। सारी फाइल तैयार हो गयी, सीकरी में भी मण्‍डी बनाएं जल्‍दी से। वहां दुकानदार भी हैं, लाइसेंस होल्‍डर भी हैं। सीकरी में तो अच्‍छा खाद्यान्‍न आ रहा है, अच्‍छा कारोबार आ रहा है।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): ऐसा है, माननीय सदस्‍य ने जो कहा है, जो हमारी गोण मण्‍डी है, उसके लिये 15 लाइसेंसी और यह सीमा है। (व्‍यवधान)

श्री दाताराम  गुर्जर (खेतड़ी): आपने कहा सिंघाना मण्‍डी है। (व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): जब किसी भी मण्‍डी की आय 20 लाख हो जाती है तो उसको डी-मण्‍डी घोषित कर देते हैं और जब उसकी आय 75 लाख से ऊपर चली जाती है तो सी-मण्‍डी घोषित कर देते हैं। इसी तरह से डेढ़ करोड़ हो जाती है तो उसको ए-मण्‍डी घोषित कर देते हैं। उसके ऊपर, ढाई करोड़ के ऊपर सुपर क्‍लास मण्‍डी में चली जाती है। तो आपकी आय के हिसाब से, अगर वह अपग्रेड होने वाली मण्‍डी होगी तो निश्चित तौर पर करेंगे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): डी-क्‍लास ही कर दो आप तो। डी-क्‍लास की योग्‍यता रखती है वह। कृषि मंत्रीजी ने भी कहा है और डी-क्‍लास की योग्‍यता रखती है।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): अगर डी-क्‍लास की योग्‍यता रखती है और नार्म्‍स में आती है तो निश्चित तौर पर उस पर विचार करके कराएंगे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ठीक है, धन्‍यवाद।

श्री दाताराम  गुर्जर (खेतड़ी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सिंघाना मण्‍डी बताई है। सिंघाना में कोई मण्‍डी नहीं है, वह तो सूरजगढ़ में है मण्‍डी। और एक बात है, निजामपुर के नजदीक टीबा-बसई का जो मेरा किसान जाएगा, उसको 30-40 किलोमीटर पड़ता है। आपने 20 किलोमीटर का दायरा बताया है।

 

Vps-usc- 28032007-1310-1o-1

 

तो सिंघाना में तो कोई मंडी नहीं है अभी तक। आपके अधिकारियों ने गलत सूचना दी है आपको अधिकारियों ने कि झुन्‍झुनूं जिले में मंडियां हैं। जो भी चुनाव हुए सबको मालूम है कि सूरजगढ़ में मंडी है, चिड़ावा में मंडी है, नवलगढ़ में मंडी है और झुन्‍झुनूं में मंडी है। बाकी मंडियां हैं ही नहीं। ... (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: लाइसेंस तो करवा देंगे?

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री रामप्रताप कासनिया । वह आपको बता देंगे।

सूरतगढ़ में उपनिवेशन से सम्‍बन्धित बकाया प्रकरण

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, गंगानगर जिले की सूरतगढ़ तहसील के अन्‍दर टी.सी. का एक प्रकरण है आप उसको माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अलग-अलग मैं व्‍याख्‍या करूंगा, आप इस विषय को अलग मत मान लेना। यह एक टी.सी. से जुड़ा हुआ मुद्दा है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सूरतगढ़ तहसील, पीलीबंगा तहसील में और विशेष कर सूरतगढ़ में 47 गांव ऐसे हैं जहां पर उपनिवेशन क्षेत्र में उन गांवों को सम्मिलित कर लिया और कानून-कायदे उन गांवों में वही लागू है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो सिंचित एरिया में है और पीने के लिए वहां पानी नहीं है।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वर्षों से उन लोगों ने नहर के लिए मांग की, कोई कामयाबी हासिल नहीं हुई और पिछले दिनों एक आन्‍दोलन भी चला था। टेल और हैड, ... (व्‍यवधान) जिसका नाम है सिंचाई मंत्रीजी उस बात से वाकिफ हैं। कुछ लोगों ने गुमराह करके उनको आन्‍दोलन की राह पर लाकर खड़ा कर दिया। मैं भी गांवों में गया कि जब समय था तब चूक हो गयी। अब यह गांव, बहुत बड़ा खर्चा है, लिफ्ट की योजना है, एरिया समतल नहीं है तो यह आपके गांव जो हैं इनको पानी मिलना बहुत कठिन है अगर आप चाहो तो आपको सरकार डी-कोलोनाइजेशन करके और कम से कम नियमों में छूट दे सकती है जिससे आपके कीमत नहीं लगे। सीलिंग सीमा जो है वह ज्‍यादा हो।  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, डिवीजन की बैठक में माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय ने यह बात कही थी कि यह विषय बारबार मेरे सामने आते हैं। मैंने कई बार कह दिया कि इनका निस्‍तारण करो और उच्‍चाधिकारियों को यह निर्देश भी दिये थे कि टी.सी. जो है उसको पुख्‍ता किया जाए और कीमत कम करने की बात थी और एरिया जो गजट में है डी-नोटिफाई करने की बात थी, माननीय मुख्‍य मंत्रीजी की मंशा है फिर भी यह पत्रावलियां दफ्तरों के चक्‍कर काट रही हैं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, या तो मेरी भाषा कोई समझ में नहीं आ रही है। मैंने कई बार इस विषय को हाउस में उठाया है। यानी मेरा आपके माध्‍यम से सरकार से यह निवेदन है कि प्रथम तो आप उन 47 गांवों को अगर पानी दे सकते हो तो पानी दो पर मुझे पता है कि किसी भी तरह से पानी देने में सरकार सक्षम नहीं है तो उनको डी-कोलोनाइजेशन तो कम से कम करने में आपका कोई खर्चा नहीं लगता सरकार का। डी-कोलोनाइजेशन किया जाए।

दूसरा, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने बढ़े हुए जो रेट थे एक लाख से चार लाख रुपये कांग्रेस के टाइम जो किश्‍त बढ़ाई थी सिंचित एरिया की वह किश्‍त कम करने के आदेश दिये। ब्‍याज माफ किया पर इसका लाभ हमारे काश्‍तकार नहीं ले पाये। नहीं ले पाने का कारण है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वहां पर किलाबंदी हो रही थी। कुछ इलाकों में, यह जो 47 गांव हैं, यहां कोई किलाबंदी या मुरब्‍बाबंदी नहीं हो रही थी पर आवंटन पर रोक लग गयी। इस कारण से यह लोग वंचित रह गये। फायदा नहीं उठा पाएं, किश्‍त कम हुई, ब्‍याज भी माफ हुआ तो माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सरकार से यह निवेदन करना चाहूंगा कि उन काश्‍तकारों को पूर्व में जो माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने घोषणा की थी पुरानी दर जो 2001 में लागू थी प्रति बीघा चार हजार रुपये कमांड और तीन हजार रुपये बीघा अनकमांड, दो हजार रुपये बारानी, यह तो वर्तमान की रेट बोल गया मैं। अब जो रेट है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 16 हजार रुपये प्रति बीघा सिंचित और 3 हजार रुपये बीघा अनकमांड, दो हजार रुपये प्रति बीघा बारानी और 2001 में जो कीमत थी वह चार हजार रुपये प्रति बीघा के हिसाब से सिंचित और 750 रुपये प्रति बीघा अनकमांड, असिंचित और 500 रुपये बारानी यानी कोलोनाइजेशन से जो बाहर क्षेत्र है।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बड़ी विड़म्‍बना है कि इन गांवों को दस वर्ष की माली रकम लगकर, दस साला और पाँच साला टी.सी. आवंटन होता था आटोमेटिक ही काश्‍तकार को खातेदारी देने का प्रोविजन था। पर उपनिवेशन लागू होने के कारण से यह 47 गांव आवंटन नहीं करवा पा रहे हैं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इतना ही नहीं है, इन टी.सी. धारकों के अन्‍दर क्‍या हुआ है कि कइयों कि जमीन आवंटन है पटवारियों ने जानबूझकर उस रकबे को रकबा-राज में पकड़ लिया। कइयों की पत्रावली एस.डी.एम. के विचाराधीन थी। स्‍थगन आदेश हुए, स्‍थगन आदेश होते हुए भी गजट नोटिफिकेशन जारी करवा दिया।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हजारों काश्‍तकार ऐसे है, इस प्रकरण से संबंधित जिनका रकबा गजट में प्रकाशित हो गया। उनको हम बेदखल नहीं कर सकते। वह आवंटन करवाने की पात्रता रखते हैं। सरकार उनको बेदखल कर नहीं सकती और काश्‍तकार की इतनी एप्रोच नहीं है कि वह जयपुर तक आकर अपना रकबा गजट से निकलवा लें। इतनी हैसियत नहीं है। उसकी जो प्रक्रिया है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पहले तहसील में काश्‍तकार पटवारी के पास जाए, पटवारी के बाद तहसीलदार के पास आये, तहसीलदार के बाद एस.डी.एम. के पास आये, एस.डी.एम. के बाद कलक्‍टर के पास आये, कलक्‍टर से फिर डी.एस. के पास आये और फिर सैक्रेटरी के पास आये, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इतना गांव का काश्‍तकार, भोलाभाला कोई आकर अपना रकबा निकाल सकता है?

मैं फिर आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूंगा कि माननीय मुख्‍य मंत्रीजी के स्‍पष्‍ट निर्देश हैं कि काश्‍तकारों के जो बकाया मामले हैं उनका शीघ्र, अतिशीघ्र निस्‍तारण होना चाहिए। कीमत कम करने का भी मामला है। इसी से जुड़ा हुआ रायसिक्‍ख प्रकरण है। वह भी टी.सी. होल्‍डर है। उनको सरकार ने एक लाख 25 हजार रुपये मुरब्‍बा के हिसाब से आवंटन किया था। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पूर्ववर्ती सरकार ने, वह कोई 400-500 रायसिक्‍ख परिवार हैं। वहां पर आर.ए.सी. लगायी, कमिश्‍नर आये, पूरी पुलिस फोर्स यूज कर ली पर उनको सरकार बेदखल नहीं कर पायी उन लोगों का कोई गुनाह नहीं है। उनका काम था मजदूरी करना। 1955 की वोटर लिस्‍ट में नाम नहीं था उनका। वह इसलिए नहीं था कि उस समय राजनीतिक पार्टियां भी वोट बनाने के प्रति इतनी जागरूक नहीं थीं। वहां नहर नहीं थी। वह लोग मजदूरी का काम कर‍ते थे तो कई लोगों ने तो नाम वोटर लिस्‍ट में अंकित करवा लिये और कइयों ने नहीं करवाये तो 55 के बाद में उन्‍होंने टी.सी. आवंटन करवा लिया। 55 के सबूत के अभाव के कारण उनको पुख्‍ता आवंटन नहीं हो पायी। पूर्ववर्ती भैरोंसिंहजी की सरकार ने उनको एक लाख रुपये सामान्‍य कीमत पर और 25 हजार रुपये पैनल्‍टी लगाकर प्रति मुरब्‍बा आवंटन के आदेश दिये थे।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह बड़ी विड़म्‍बना है कि वह आवंटन एक टाइम बाउंड प्रोग्राम में होना था। यह था काश्‍तकारों से एप्‍लीकेशन मांग ली। दो महीने, तीन महीने का समय दिया और सरकार ने यह आदेश दिया कि छह महीने में आवंटन करके और सूचित करो वापस। कोई विशेष आवंटन नहीं हुआ। दो-चार-पांच पत्रावलियों में 1 लाख 25 हजार के हिसाब से आवंटन हो गया। उसके बाद में सरकार चेंज हो गयी। रेट बढ़ा दिये।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पाँच लाख रुपये प्रति मुरब्‍बा के हिसाब से आवंटन हो गया। पूरी किश्‍त जमा करवा दी। खातेदारी नहीं मिल रही है। खातेदारी नहीं मिलने के पीछे जो कारण है वह भी मैं निवेदन कर दूं कि यह आडिट वाले जो हैं उन्‍होंने कोई आडिट आक्षेप लगा दिया कि इसमें 7 करोड़ 25 लाख रुपये सरकार की हानि हुई है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अगर आडिट विभाग इतना ही सचेत है तो शहरों के अन्‍दर बहुत कुछ पड़ा है। गरीब काश्‍तकार से, कहां से अब खजाना भर रहे हो इनसे? सवा लाख रुपया तो बड़ी मुश्किल से यह जमा करवा पाएंगे तो इस आडिट पैरा के कारण से जिन लोगों ने किश्‍त जमा करा दी, पूरा पैसा जमा करा दिया और खातेदारी लेने के लिए मांग कर रहे हैं पर खातेदारी प्राप्‍त नहीं हुई, सरकार खातेदारी नहीं दे रही है वह इसलिए नहीं दे रही है कि आडिट पैरा बन गया।

 

spp/usc/13.20/1p/28.3.2007(1)

 

उपाध्‍यक्ष महोदय, जिस अधिकारी ने, जिस सरकार ने आवंटन आदेश जारी किये हैं, उसको फांसी चढ़ाओ, कार्यवाही करो, कुछ भी करो। उन बेचारे काश्‍तकारों का क्‍या दोष है जिनको दर दर की ठोकरें खानी पड़ रही है । सरकार को भी मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा, पूर्ववर्ती सरकार ने यह जोकाम किया, वह पिछड़ी जाति के रायसिक्‍ख के 400-500 परिवारों के लिये मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा गंगाराम जी को । उन्‍होंने उनकी पीड़ा जानकर यह आवंटन आदेश किये थे। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से पुन: सरकार से यह निवेदन करना चाहता हूं कि इस मामले को आप गंभीरता से लें। अभी कुछ लोग खाली बैठे हैं, कोई काम नहीं है। अभी मैंने जो डि-कोलोनाइजेशन वाला मामला बताया है, इसको टच कर रहे हो और कोई समस्‍या बाकी नहीं है गंगानगर जिले में । मैं समय रहते आपसे बड़े ही विनम्र शब्‍दों में निवेदन करना चाहता हूं कि एक तो मुझे पता लगा है उसको थोड़ा बहुत पता लग गया डिवीजन की बैठक में मुख्‍य मंत्रीजी ने निर्देश दिया है। डिकोलोनाइजेशन हो गया तो माइका लाल भूख हड़ताल पर बैठा है आज।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): कौन है ?

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): कोई हो, मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता। पर हमारे यहां राजस्‍थान में जो सस्‍ती लोकप्रियता चली है, कोई भी सरकार कार्य करे, इसकी थोड़ी सी भनक कानों में पहुंच जाये तो थोड़ी राजनीतिकरण करने का प्रयास किया जाता है। मैं उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से यह निवेदन करना चाहता हूं कि यह पूरा मामला डिकोलोनाइजेशन का ..(व्‍यवधान).. आपको पर्ची के माध्‍यम से मामला एक ही है मैटर।

श्री उपाध्‍यक्ष: ठीक है बात, समस्‍या वास्‍तव में गंभीर है।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): मेरा पुन: आपसे निवेदन है एक तो कीमत कम करना, दूसरा डिकोलोनाइजेशन करना और तीसरा गजट में जो गलती से रकबा पकड़ा गया है, उसको गजट से बाहर आप एक ही लाइन में कि सब काश्‍तकार, जो पात्र है, वह जयपुर तक आकर प्रार्थना पत्र नहीं दे सकते। जैसे गंगानगर में आपने दो अभियान चलाये थे, 600 फाइल एकमुश्‍त निकली थी, उसी तरह से हनुमानगढ़ जिले की और गंगानगर जिले की जितनी भी विशेष आवंटन पात्र लोगों की जो फाइल है, उनका गजट नोटिफिकेशन कर दिया जाये तो काश्‍तकारों को राहत मिलेगी और कीमत कम करने के लिये आपने जो पहले आदेश निकाले हैं, उसकी समयावधि बढ़ा दो और डिकोलोनाइजेशन होने से बारानी वालों को तो आटोमैटिक अपने आप ही खातेदारी मिल जायेगी। शेष बचे हुए लोगों के 2001 की रेट लगनी चाहिये गंगानगर जिले में । आज के दिन अगर काश्‍तकार का जमीन से संबंधित कार्य कार्य पेंडिंग है तो यह मैंने जो निवेदन किया है, यह कार्य है और इतने कार्य आपने कर दिये, काश्‍तकारों को राहत देदी तो यह भी आपके लिये कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे समय दिया, इसके लिये बहुत बहुत धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री कन्‍हैयालाल मीणा। ..(व्‍यवधान).. आज राजस्‍व की मांग होगी।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): उपाध्‍यक्ष महोदय, बहुत गंभीर मामला है।

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): सम्‍माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि ...

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): एक मिनट माननीय सदस्‍य, जवाब आ रहा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: कासनिया जी, मांग के समय विस्‍तृत जवाब दे देंगे।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): इन्‍होंने रखा तो है मांग के समय। उपाध्‍यक्ष महोदय, पीलीबंगा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो जमीन की बात की, जब कैनाल आई और उसके अंदर एरिये का नोटिफिकेशन किया तो ऐसी जमीनों को, एरिये को ले लिया गया। जहां बाद में पानी नहीं पहुंच सका और उसी के अन्‍तर्गत माननीय सदस्‍य ने जो चिन्‍ता व्‍यक्‍त की है और करीबन 47 गांव घोषित हो चुके हैं इस पीलीबंगा और सूरतगढ़ में।

श्री उपाध्‍यक्ष: कालोनी घोषित हो गयी।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): हां, कालोनी घोषित हो गयी। मगर 32 गांव ऐसे हैं जहां आज तक कोई एक पानी की बूंद भी नहीं पहुंची और 15 गांव ऐसे हैं जिनके अंदर आंशिक रूप से पानी लगा है। यदि हम हैक्‍टेयर के अंदर बात करें तो 81,180.175 हैक्‍टेयर जमीन कालोनी एरिये के अंदर ली गयी और उसमें 72,288.635 हैक्‍टेयर, जिसमें सिंचाई सुविधा नहीं है, यानि केवल नाम मात्र की जमीन को पानी की सुविधा मिली, मगर सारे कानून और कायदे वह कालोनी एरिये के लागू हो गये और यह मैटर सरकार के सामने भी आया और हम इस पर परीक्षण करवा रहे हैं बड़ी गंभीरता से और जो भी एकमुश्‍त जितने भी मैटर हैं, सभी पहलुओं पर इनका परीक्षण करवाकर परीक्षणोपरान्‍त जो भी डिकोलोनाइजेशन करना है और रेट वगैरह का जहां तक मामला है, अभी उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने उनका भी जिस स्‍तर पर काश्‍तकारों को किस प्रकार से, जो प्रभावित है, उनको सुविधा दी जा सके। एकमुश्‍त सारे मामले को लेकर हमन करने की कोशिश कर रहे हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, इसमें ऐसा करें ....(व्‍यवधान).. माननीय कासनिया जी एक मिनट।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): ...(व्‍यवधान).. बीच में नहीं आ जायें। माननीय मंत्री महोदय, आप थोड़ा सा ध्‍यान रखें । मुख्‍य मंत्रीजी तो इस प्रकरण के लिये तैयार हैं , यह मैं निवेदन कर दूं।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने विधि वाली बात भी कही, कहीं आडिट पैरा की भी बात कही। बहुत पुराना मामला है, उसमें किस प्रकार से उस सारे मामले को एग्‍जामिन किया जा सकता है और काश्‍तकार के हितों के अंदर, क्‍योंकि हमने पूर्व में जितने भी राजस्‍थान कोलोनाइजेशन सेंटर्स के जो मामले थे, हमने इस बात का प्रयास किया कि यह सारे जो-जो मैटर हैं, वह एक एक व्‍यक्ति का हिस्‍सा नहीं होकर एक ही नेचर के जितने मुद्दे हैं और यदि वह प्रभावित हैं उससे काश्‍तकार के इकजाही करके, उनके एक ही आदेश के अंदर आदेश दे दिये जायें। इस मामले के अंदर भी हमने पूर्व में इनकी किश्‍तों को कम करके, ब्‍याज माफी करके, मगर समय थोड़ा कम था, उसमें यह पूरे डील नहीं हो सके थे और आज माननीय सदस्‍य ने जो चिन्‍ता व्‍यक्‍त की है, मैं समझता हूं पूरे के पूरे मैटर को मंगा लिया गया । हमारे पास हमने रिपोर्ट भी मंगाई है, जिसके अंदर पूरी जमीन हैक्‍टेयर के अंदर बताई है और मेरे पास वह गांव भी हैं जो सिंचाई नहीं हुई है और आंशिक रूप में सिंचाई हुई हैं, यह सारा मामला हमारी सरकार के सामने हैं और सरकार इस पर गंभीरता से विचार करके जो वर्षों से जो समस्‍या काश्‍तकार भोग रहे हैं, उनका भी समाधान करेंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, इसमें कासनिया जी ने जो चिन्‍ता व्‍यक्‍त की है, वास्‍तव में यह गंभीर मामला है और मेरी आपको यह सलाह है कि आप इसको एक बार अलाटमेंट कर दीजिये, चकबंदी चाहे नहीं हो तो कोई बात नहीं। अलाटमेंट होकर किश्‍तों के मुताबिक पैसा बारानी रेट से भरवा लें और उससे यह करीब करीब स्‍थाई हो जायेगा और काश्‍तकार अपनी उस जमीन की देखभाल कर सकेगा। डिकोलोनाइजेशन से एक नुकसान हुआ कि कभी न कभी पानी उपलब्‍ध हो सकता है, फिर यह समस्‍या पैदा हो जायेगी और कई इसका विरोध करेंगे। इसलिए एक तो यह..

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): गांवों में जाकर मैं यह विषय उठा रहा हूं। मैंने जो गांव बताये हैं वहां पानी नहीं जा सकता उन गांवों में। उन लोगों की सहमति है... (व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: वहां की राजनीति का अपन को पता है। ..(व्‍यवधान)...

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): आपका कथन सही है, पर मैंने कोई राजनीति नहीं की। मैंने सब तरह के लोगों, जितनी पार्टियों से संबंधित है, उन सबकी राय लेकर हमने बैठक में सर्वसम्‍मति से यह निर्णय करके और डिकोलोनाइजेशन वाला फैसला करवाया है । मैंने हस्‍ताक्षर तक करवाये हैं सरपंचों से, डायरेक्‍टरों से। उपाध्‍यक्ष महोदय, आप तो समझते हो । जो क्षेत्र कोलोनाइजेशन में सम्मिलित नहीं है, कई गांव ऐसे हैं जहां पानी चला गया तो कोलोनाइजेशन में सम्मिलित हो गया। अगर पानी मिलेगा, सरकार की कोई योजना होगी तो बाद में दे देना । वह भी कानून कायदे बाद में लागू कर देना, पर वर्षों से, उपाध्‍यक्ष महोदय, आठ साल से लगातार अकाल पीडि़त हैं यह 47 गांव। इसलिए डिकोलोनाइजेशन करके आपने जो फरमाया हे, सही है। आवंटन होना चाहिये, यह सही है।

श्री उपाध्‍यक्ष: वह ठीक है बात। यह देखो, यह भी सरकार ने इस बात पर ध्‍यान रखकर 2004 में जो संशोधन किया है उस आधार पर इनका अलाटमेंट परमानेंट हो सकता है और परमानेंट होने के बाद में जब कभी पानी आयेगा, तब देखा जायेगा, पर ऐसी की ऐसी स्थिति हमारे फलौदी में भी 26 गांवों की है।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 2004 में तो उपाध्‍यक्ष महोदय, 16 हजार रुपये बीघा है रेट के मुताबिक सरकार ने ... (व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, इस बारे में आपसे ज्‍यादा कोई नहीं जानता। आप वैश्‍म में बुलाकर बात कर लेना। आपका ज्ञान बड़ा अपार है इस विषय पर।

श्री उपाध्‍यक्ष: सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है।

 

Msr/usc/1330/1q/28032007

 

2000 के, 4000 नियमों के संशोधन के मुताबिक सब को रिलीफ मिलेगा। पैसों का कमती-बत्‍ती किया जा सकता है। इसमें चकबंदी से पूर्व इस समस्‍या को हल करें तो ठीक है। चकबंदी में शायद और समय लग सकता है। 26 गांव ऐसे फलौदी के भी आये हुए हैं ...(व्‍यवधान)... पानी की जल्‍दी कोई लाभ नहीं है।

श्री लालचन्‍द मेघवाल (रायसिंहनगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसकी डेट बढ़ायी जाए। जो पुख्‍ता आवंटन की डेट 31.12.06 थी उसकी 31.12.07 कर दी जाए ताकि किसानों को राहत मिलेगी।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री कन्‍हैया लाल मीणा।

बस्‍सी में मूर्ति चोरी की बढ़ती घटनाएं

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से गृह मंत्रीजी का ध्‍यान आकर्षित कर निवेदन करना चाहता हूं कि राजस्‍थान में यह मूर्ति चोरी की कोई गैंग है, यह कहा जाए कोई बहुत प्रभावशाली गैंग है जो मेरे यहां क्षेत्र में, जैसे बूंदी में और करौली में हुई उसी तर्ज पर 26 जनवरी, 2007 की रात्रि को 8 अष्‍ट धातु की मूर्तियां जिनकी कीमत लगभग आंकी जो जा रही है, वैसे तो ज्‍यादा हो सकती है, करीब डेढ़ करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा बेशकीमती मूर्तियां थीं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो आठ मूर्तियां गयीं हैं उनमें पार्श्‍वनाथ भगवान की चार मूर्तियां, यह भी अष्‍ट धातु की हैं, महावीरजी भगवान की अष्‍ट धातु की एक मूर्ति गयी है, पदमावती माता की एक मूर्ति, शिव भगवान की एक  मूर्ति और 24 तीर्थंकर भगवान की एक मर्ति, इस प्रकार आठ मूर्तियां 26 जनवरी को बस्‍सी कस्‍बे से गयी हैं। इसमें उससे पूर्व भी चारभुजानाथ की तुंगा से, चारभुजानाथ की सामरिया गांव से, यह भी अष्‍ट धातु की मूर्तियां थीं ओर इस सिलसिले में जिस दिन चोरी हुई पूरा कस्‍बा बंद रहा। इसके बाद में पुलिस ने का वादा किया, उसके बाद फिर भी नहीं मिलने पर दोबारा से कस्‍बा गंद हुआ। अब पुन: कस्‍बे वाले, आम जनता इस बात पर उद्वेलित है कि जैन मन्दिरों की मूर्तियां और हिन्‍दू मन्दिरों की जो मूर्तियां चोरी हो रही हैं उन चोरियों के नहीं खुलने से, मूर्तियों के नहीं मिलने से लोगों में काफी आक्रोश हैं।

अभी एस.एच.ओ. और सब-इन्‍सपैक्‍टर चार सिपाहियों के साथ में बेसीणा गांव, टोडाभीम में गये और वहां से उन लोगों को पकड़ने की कोशिश की लेकिन वहां पर उस गैंग ने हमला किया और गोलियां तक क भी वहां चलीं और उस गोलियां चलने की वजह से एस.एच.ओ. और सब-इन्‍स्‍पैक्‍टर नियाज खान, यह घायल भी हुए और वो बेहोश होने के बाद में पूरे गांव में भी हमला कर के और पत्‍थरों से भी उनको बुरी तरह से मारा और यह कम स्‍टॉफ होने की वजह से बहुत भारी समस्‍या इन चोरियों को बरामद करने में लग रही है।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं इस अवसर पर गृह मंत्रीजी से निवेदन करना चाहूंगा कि उच्‍च स्‍तरीय किसी अधिकारी के निर्देशन में एक टीम का गठन कर के अधिक स्‍टॉफ लगा कर के दो-तीन टीमें बना कर के इन चोरियों को बरामद कराएं। इसमें पुलिस अपना सहयोग कर रही है लेकिन लोकली उनके पास केस, इतने मुकदमें हैं कि वो टाइम टु टाइम जा नहीं पाते, बराबर उस पर पूरी तरह से निगरानी नहीं रख सकते। आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि यह जो बेशकीमती मूर्तियां हैं और इससे वहां का जैन समाज ही नहीं हिन्‍दू समाज भी उद्वेलित है, पूरा कस्‍बा पूरी तरह से बंद रहा है और इसकी वजह से मैं चाहूंगा कि आप इसकी उच्‍च स्‍तरीय किसी अधिकारी को लगा कर के इन मूर्तियों को बरामद करने की आप कृपा करें। यह मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा।

इसी प्रकार से पूर्व में जो सामरिया की चारभुजानाथ की तुंगा से जो मूर्ति गयी थी उन मूर्तियों को भी बरामद करने की आप कृपा करें। धन्‍यवाद। जय हिन्‍द।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह सच है कि बस्‍सी थानान्‍तर्गत लगभग 2001 से 2007 तक 6 वारदात हुई हैं मूर्ति चोरी की। 2002 में तीन हुई थीं उसमें बरामदगी एक ही में हुई, दो अभी भी बाकी रह गयीं, जिनकी बरामदगी नहीं हुई। 2004 में दो वारदात हुई थीं मूर्ति चोरी की, एक में बरामदगी हुई एक में अभी भी नहीं हो पायी। अभी जो 2007 में जनवरी में वारदात हुई है निश्चित रूप से अष्‍ट धातु की मूर्तियां हैं, आठ मूर्तियां हैं, पुलिस ने प्रयास किया जैसा माननीय सदस्‍य ने भी कहा, हमने अलग से टीम का गठन किया और उस टीम ने जा कर के  करौली में जो पुराने मूर्ति चोर हमारी सुची पर हैं, उनको लाने का प्रयास किया। पुलिस पर हमला भी हुआ और पुलिस को चोट लगी लेकिन हमने दोबारा फिर अटेम्‍प्‍ट कियाक और उन लोगों को हम पकड़ कर भी लाये। उनसे कुछ चोरियां बरामद भी हुईं लेकिन उसमें यह जो बस्‍सी की चोरी है यह उसमें से बरामदगी अभी तक नहीं हो सकी। हमने अलग से टास्‍क फोर्स बनाया है और वो इस बात के लिए प्रयास कर रहा है निश्चित रूप से।

कारण क्‍या है कि अन्‍य कई स्‍थानों पर भी इसी प्रकार की वारदातें लगभग कहीं न कहीं, कहीं न कहीं हो रही हैं, काई न कोई बहुत बड़ी गैंग होनी चाहिए। अब से पहले कभी एक गैंग हाथ लगी थी तो कुछ चोरियां खुली थीं, विशेष कर के दूदू की 21 मूर्तियों की जो चोरी हुई थी वो बरामदगी हुई है, भीलवाड़ा की भी बरामदगी हुई है लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली।

मैं माननीय सदस्‍य को विश्‍वास दिलाता हूं कि निश्चित रूप से जो टास्‍क फोर्स हमने गठित की उससे भी और अगर अतिरिक्‍त और जरूरत पड़ेगी तो कर के हम सारे राजस्‍थान की इस प्रकार की घटनाएं हैं, उनको खोलने का प्रयास करेंगे।

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): मंत्री महोदय, हमारे उस थाने के जो एस.एच.ओ. और सब-इन्‍सपैक्‍टर गये हैं और चार सिपाही गये हैं और कोई अलग से टास्‍क फोर्स आपने गठित नहीं की तो मैं निवेदन करना चाहता हूं कि टास्‍क फोर्स अलग से आप गठित करें और आप गठित कर के उसमें से बनाएं।

श्री उपाध्‍यक्ष: हो रहा है, हो रहा है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): हम राज्‍य स्‍तर पर ही अलग गठित कर रहे हैं। मूर्ति चोरियों की वारदातें जैसा बूंदी की भी हुई हैं, आपके यहां हुई, टोंक में हुई है, दूदू में हुई है तो इन सब को करने के लिए एक अलग से ही टास्‍क फोर्स गठित कर के इन सब चीजों का पता चलेगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: हो रहा है। श्री रणवीर सिंह गुढ़ा।

जयपुर के जलमहल के गंदे पानी की निकासी

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय का ध्‍यान कानोता बाँध के अन्‍दर जो जल महल मैसर्स रिसोर्ट्स कम्‍पनी का जो सिवरेज का गंदा पानी है, जो उस मैसर्स कम्‍पनी को इस बात के लिए पाबंद किया गया था कि वो सिवरेज का पानी पहाडि़यों में निकाला जायेगा न कि कानौता बाँध के अन्‍दर। कानौता बाँध है, चार साल पहले जयपुर के लिए पेयजल संकट के समाधान के लिए उसका निर्माण हजारों श्रमिकों के योगदान से किया गया था और जे.डी.ए. और नगर निगम की लापरवाही से वो पूरा का पूरा जो जलदाय विभाग का पानी है वो पूरा का पूरा पानी दूषित हो गया। लाखों मछलियां उसमें मारी गयीं। उसके अन्‍दर सैंकड़ों गाएं, सैंकड़ों बकरियां, भेड़ें मारी गयीं उस पानी को पीने से।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से यह जानना चाहूंगा कि जो विभाग ने साफ-साफ यह दोषी माना है, जे.डी.ए. ने जल महल का सिवरेज कानौता बाँध के स्‍वच्‍छ पानी में छोड़ा। मत्‍स्‍य विभाग ने कहा हे, जे.डी.ए. की गलती से हुआ हादसा। इस प्रकार का एक तरफ तो सरकार बूंद-बूंद बचाने की बात करती है, राजस्‍थान के अन्‍दर जल चेतना यात्रा निकाली जाती है दूसरी तरफ पूरे जयपुर के अन्‍दर जल का जो संकट था उसका समाधान किया जा सकता था, उस पूरे के पूरे जल को इतनी बुरी स्थिति में ला दिया कि चो आज गंदे पानी का रूप ले लिया है। वो जल जो कानौता बाँध का पानी था, वो स्‍वच्‍छ पानी जो पूजा-अर्चना में काम लिया जाने लगा था, वहां पर्यटक स्‍थल बन गया था और वहां बड़ी संख्‍या में पर्यटक पहुंच रहे थे। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि एक मैसर्स कम्‍पनी को पत्र लिखने के बावजूद भी जिन्‍होंने जल महल को अधिग्रहण किया, जल महल को सरकार ने बेचा मैसर्स कम्‍पनी को और उसके खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय आज तक जो मत्‍स्‍य पालक सैंकड़ों परिवारहैं वो आज दर-दर की ठोकर खाते घूम रहे हैं, दो जून की रोटी उनको नसीब नहीं हो रही है। पूरा पानी खराब हो गया है।

एक तरह से तो हमारे कृषि मंत्रीजी बहुत अच्‍छे मंत्री कहलाते हैं और उसके बाद जो छोटे कृषक की इसमें आता है उसके लिए आपने कोई भी चिंता नहीं की। जो आपका अच्‍छा-खासा कानौता बाँध राजस्‍थान के अन्‍दर मछली पालन की दृष्टि से प्रति हैक्‍टेयर के हिसाब से सबसे बड़ा मछली उत्‍पादक बाँध, इस बार जो शिक्षक भर्ती परीक्षा थी उसके अन्‍दर भी यह प्रश्‍न आया था, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह जानना चाहूंगा कि यह सरकार क्‍या चाहती है, जयपुर के अन्‍दर इतना जल संकट है, लोग सिवरेज का पानी पीने के लिए मजबूर हो रहे हैं। मैं जलदाय मंत्रीजी से कहना चाहूंगा कि वो जो पानी है, आपके खुद इसके अन्‍दर जो अधिकारी हैं उनका कहना है, यह आपके जे.एस. यादव, सहायक निदेशक, मत्‍स्‍य विभाग हैं, इन्‍होंने कहा है, जल महल के पानी का खामियाजा कानौता बाँध को भुगतना पड़ रहा है। अभी बाँध से जयपुर को पानी देने का सपना धूमिल हो गया है। जे.डी.ए. अधिकारियों से बातचीत में तय हुआ था कि शहर का जल महल का गंदा पानी पहाडि़यों में छोड़ा जायेगा न कि कानौता बाँध में।

 

Ars/usc/1340/2a/28032007/1

 

इस प्रकार का जो आपका एग्रीमैंट भी हुआ था उसके बावजूद जे. डी.ए. और नगर निगम के खिलाफ आपने क्‍या किया? माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं मैसर्स कम्‍पनी से बड़ी रकम रिश्‍वत के रूप में माननीय बड़े बड़े अधिकारियों ने, जलदाय विभाग ने ली है और इसीलिए वहां मत्‍स्‍य पालकों ने बार बार इनसे आग्रह किया, मुआवजा देने के लिए आग्रह किया, उनको किसी प्रकार का मुआवजा नहीं दिया गया। जल महल का पानी पूरा का पूरा दूषित कर दिया। इसके अन्‍दर भी पूरी उदासीनता बरती गई है इसलिए मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि जो भी मत्‍स्‍य पालक हैं और जो भी भेड़, बकरियां, गायें मरी हैं वहां पर पूरा का पूरा आज कानोता बाँध का जो पानी है, मैं कहना चाहूंगा उसमें सिवरेज का पानी जाकर के वह पूरे गंदे नाले का पानी बन गया है। वह जलदाय विभाग का स्‍वच्‍छ पानी, मैं मंत्री महोदय से कहना चाहूंगा कि इतने ज्‍यादा पानी को खराब करने की जिम्‍मेदारी आपकी थी, आपने उसमें क्‍या कदम उठाया ?

आप इतने अच्‍छे मंत्री हैं तो एक घूँट पानी की पीकर के बता दें, मैं आपको सफलतम मंत्री मान जाऊंगा। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इतना बड़ा जयपुर के अन्‍दर पानी का संकट और संकट के समाधान के लिए राजस्‍थान की सरकार चिन्तित, पूरे राजस्‍थान प्रदेश में, मैं गुढ़ा के पानी की बात नहीं कर रहा हूं, मैं उदयपुरवाटी में पानी का जल स्‍तर जो नीचे जा रहा है, उसकी बात नहीं कर रहा हूं, फ्लोराइड की समस्‍या की बात भी नहीं कर रहा, जो हमारे पास में इकट्ठा पानी, जिस पानी से पूरे जयपुर की हीनहीं आस पास के छोटे कस्‍बों की भी प्‍यास बुझाई जा सकती थी लेकिन इतने पानी को खराब किया गया। राजधानी के बिल्‍कुल पास में, कानोता जो कि जयपुर के पास में है, कानोता बाँध के पानी के अन्‍दर वहां मत्‍स्‍य पालक जो मछली पालन का काम कर रहे हैं, आज लाखों मछलियां मरीं उस बाँध के अन्‍दर और अब तक जो सिवरेज का पानी जा रहा था वह नहर का रूप ले चुका है। जल महल से बराबर वह सिवरेज का पानी कानोता बाँध के अन्‍दर जा रहा है। मैं आपके माध्‍यम से माननीय पी एच ई डी मिनिस्‍टर से यह पूछना चाहूंगा कि आपने अभी तक उनके खिलाफ कोई कार्यवाही क्‍यों नहीं की ?

दूसरी तरफ कृषि मंत्री से भी मैं कहना चाहूंगा कि आप एक तरफ तो ओलावृष्टि, अतिवृष्टि के लिए किसानों को मुआवजा दे रहे हो, दूसरी तरफ आप यह भी कह रहे हो कि मत्‍स्‍य पालकों को बढ़ावा दिया जाएगा, मुर्गी पालकों को बढ़ावा दिया जाएगा। यह जो मत्‍स्‍य पालक हैं, बीस लाख से अधिक मछलियां मारी गयीं, इतना बड़ा मछली प्रोडक्‍शन का केन्‍द्र कानोता बाँध बन गया था, इतना स्‍वच्‍छ पानी खराब हो गया था उसके लिए जो जिम्‍मेदार अधिकारी हैं उनके खिलाफ आज तक कोई कार्यवाही क्‍यों नहीं की गयी? उपाध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले मैं मंत्री महोदय से यह अनुरोध करना चाहूंगा और जे. डी. ए. के खिलाफ, नगर निगम के खिलाफ क्‍या कार्यवाही की गयी, आपके माध्‍यम से पूछना चाहूंगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: अच्‍छा सुझाव है, माननीय मंत्री जी कोई .....

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस वर्ष कानोता बाँध के अन्‍दर पानी नहीं गया जैसा माननीय सदस्‍य कह रहे हैं। गत वर्ष और उसके पहले और जब बरसात के मौसम में यह मानसागर है, यह पूरा भर जाता है तब कानोता तक यह गंदा पानी मिल मिलाकर पहुंचता है। इस वर्ष जो हमारा जे. डी. ए. डिपार्टमैंट है, सिवरेज वाटर का ट्रीटमैंट प्‍लांट शुरू कर रहा है। अब यह आपकी चिंता निश्चित रूप से यह गंदा पानी जाता है, रास्‍ते के खेत वाले किसान इससे सिंचाई कर लेते हैं पर विगत वर्षो के अन्‍दर यह दुर्घटना हुई थी और उससे मच्छियां भी मरी हैं। यह मैं आपको आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि सरकार अब इस ओर धीरे धीरे, सारी चीजें जानकारी में आती हैं तो उस हिसाब से सिवरेज ट्रीटमैंट प्‍लाण्‍ट अब राजस्‍थान में लगना शुरू हुए हैं तो यहां जयपुर में भी लगेगा और उसके बाद में ट्रीटेड वाटर ही इस जल महल में जाएगा।

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): मंत्री महोदय, जल महल से ज्‍यादा इसमें यह बूचड़खाना जो लगा हुआ है ...(व्‍यवधान) जमवा रामगढ़ के पास में, उस बूचड़खाने का जो पानी है और बूचड़खाने का जितना भी खून है वह बहकर के ......

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य प्‍लीज।

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): कानोता में आता है तो बूचड़खाने के मरे हुए जानवर भी इसमें आ रहे हैं कानोता के अन्‍दर। इसलिए मैं निवेदन करना चाहता हूं जल महल से ज्‍यादा वह है बीमारी।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मैं आपसे यही अर्ज कर रहा हूं कि कानोता और इसके बीच में काफी दूरी है। जब बरसात से ओवर फ्लो वाटर होता है तब यह पानी पहुंच सकता है बाकी सामान्‍य परिस्थितियों में जब ड्राई है, अभी इस टाइम में कोई पानी नहीं पहुंच रहा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: डा. सी. पी. जोशी।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कृषि मंत्री जी से यह आश्‍वासन चाहता हूं ...

श्री उपाध्‍यक्ष: रणवीर सिंह जी कह दिया ।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): क्‍या कह दिया उपाध्‍यक्ष महोदय, जो लाखों मछलियां, इतना बड़ा मछली उत्‍पादक बाँध, लाखों मछलियां जो विभाग की गलती से मारी गयी हैं, उन मत्‍स्‍य पालकों के मुआवजे के लिए आपके पास में क्‍या कोई योजना है? उपाध्‍यक्ष महोदय, उनको मुआवजा नहीं दिया गया तो वह पूरा का पूरा बाँध आज जो बात की जा रही है कि उसमें रोक दिया जाएगा, अभी तक तो कोई पानी जाने से नहीं रुका है। आपसे मैं यह भी कहना चाहता हूं इस प्रकार से अनदेखी करके और जनता की आंखों में आप धूल झोंककर के राजस्‍थान के अन्‍दर लम्‍बे समय तक राज नहीं कर सकते। उपाध्‍यक्ष महोदय, कानोता बाँध इतना गम्‍भीर मामला है जयपुर की पूरी .........

श्री उपाध्‍यक्ष: इसकी चिन्‍ता मत करो आप।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): जनता के अन्‍दर इस बात को लेकर आक्रोश है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): बात तो चिन्‍ताजनक है, मंत्री जी ने जवाब भी दे दिया, आप तो इतना आश्‍वस्‍त कर दें कि बरसात में या बिना बरसात इसको जाने से रोका जाएगा। यह बात सही है कानोता बाँध में हमने भी श्रमदान किया उस वक्‍त मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत जी ने, सुब्‍बाराव जी जब आये, राष्‍ट्रीय युवा योजना का शिविर लगा, हम लोगों ने भी जाकर श्रमदान किया है। कानोता बाँध, जयपुर के बाहरी क्षेत्र के जो लोग हैं उनके लिए एक बहुत अच्‍छा बाँध बना है, पेयजल की भी उससे सुविधा हो सकती है तो आप तो यह कह दें कि कोशिश करेंगे, कैसे भी उसमें बरसात या बिना बरसात के गंदा पानी नहीं जाने दिया जाएगा।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने यही अर्ज किया कि ट्रीटमैंट प्‍लाण्‍ट लग जाएगा और लगाने जा रहे हैं, इस वर्ष शुरू कर देंगे उसके बाद तो ट्रीटेड वाटर ही जाएगा।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह जानना चाह रहा हूं ....

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं, माननीय सदस्‍य, आपको पूरा कहने का अवसर मिल गया, आपने पूरी कह दी माननीय सदस्‍य ।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): लाखों मछलियां उस पानी में मरी हुईं पड़ी हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: देखो गम्‍भीरता से ......

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पूरा आस पास का पाँच सात किलोमीटर का वहां का वातावरण प्रदूषित हो गया है, मैंने जाकर देखा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपकी बात के ऊपर पूरा गौर किया गया है, जवाब दे दिया, आप स्‍थान ग्रहण कीजिये। ...(व्‍यवधान)

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): वह गंदे पानी में तब्‍दील हुआ पानी ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: कह दिया आपने पूरा।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): क्‍या उस पानी को जयपुर की जनता को पिलाने का विचार रखते हैं ? इतना गम्‍भीर विषय है उपाध्‍यक्ष महोदय, जो मत्‍स्‍य पालक हैं ..

श्री उपाध्‍यक्ष: गम्‍भीरता से ले रहे हैं।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप कृषि मंत्री जी से आश्‍वासन दिलवा दीजिए कि जो मत्‍स्‍य पालक हैं, जिनकी पूरी की पूरी मछलियां मारी गयीं, वह सारे के सारे बर्बाद हो गये, उनके मुआवजे के लिए क्‍या आपने कुछ सोचा है, विचार किया है? एक तरफ तो आप बड़ी बड़ी बात करते हो, सारा सदन कृषि मंत्री जी की तारीफों का पुल बांधने से पीछे नहीं हटता है दूसरी तरफ इस प्रकार की जो बात हुई है निश्चित रूप से .........

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): जवाब नहीं दिया, यह कह रहे हैं जे. डी. ए. ट्रीटमैंट प्‍लाण्‍ट लगा रहा है। जे. डी. ए. जब तक ट्रीटमैंट प्‍लाण्‍ट नहीं बनाएगा तब तक वह गंदा पानी तो उसमें जाता रहेगा।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): वैसे भी उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कई बार अर्ज कर चुका हूं कि आपके राज में तो कभी बरसात हुई नहीं, गया ही नहीं पानी, इस बार भी इस साल बरसात नहीं हुई तो गया नहीं। जब ओवर फ्लो होता है तब स्‍पीड बनकर यह गंदा पानी वहां कानोता तक पहुंचता है। बाकी रास्‍ते में जगह जगह काश्‍तकार इसको सिंचाई के लिए काम में लेते हैं । तो मैं आपको आश्‍वस्‍त कर रहा हूं कि ट्रीटमैंट प्‍लाण्‍ट बनाने की कार्यवाही हमने चालू कर दी अब इसके अलावा तो .......

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): चालू कर देंगे ?

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): हां, इसी बजट में शुरू कर रहे हैं, भविष्‍य की हुई है और अभी वर्तमान में नहीं जा रहा।

श्री उपाध्‍यक्ष: नगरीय विकास मंत्री जी।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो मत्‍स्‍य पालक हैं वह सारे के सारे बर्बाद हो गये। आज सैंकड़ों परिवार उस बाँध के पीछे अपना पेट पालते थे। उनके लिए आपने क्‍या कोई मुआवजे की व्‍यवस्‍था रखी है, नहीं ...

श्री उपाध्‍यक्ष: आ गयी बात आपकी।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): रखी है इतना सा आश्‍वासन आपके माध्‍यम से चाह रहा हूं । माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इतना बड़ा ........

श्री उपाध्‍यक्ष: आपकी बात आ गयी माननीय सदस्‍य।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इतना बड़ा गम्‍भीर मामला, इतनी बड़ी भूल जो राजस्‍थान की सरकार के विभाग द्वारा की गयी है।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप सुनिये तो सही जवाब दे रहे हैं।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह और कहना चाहता हूं कि इस पूरे प्रकरण में ...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अब समाप्‍त कीजिए इसको।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): इस पूरे प्रकरण में मत्‍स्‍य विभाग ने ...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपने कह दी इस बात को।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, अभी दुनिया में कहीं मच्छियां मरने पर मुआवजे का प्रावधान नहीं है। आपकी चिन्‍ता है तो विधान सभा में विचार भी करेंगे और कोई ऐसा होगा तो ...

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): मैसर्स कम्‍पनी के खिलाफ ........

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अब अंकित नहीं होगा आपका।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय सिंचाई मंत्री जी आप गलत कह रहे हो, मेरे फिश पौंड के अन्‍दर मछलियां मरी थीं, मुझे मुआवजा मिला था, आप चाहेगें तो मैं जानकारी दे दूंगा।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आपने बीमा करवा लिया होगा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यस, यह कहो तो आप।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): बीमा तो जिसका कराओगे उसी का मिलेगा, बीमा कम्‍पनी से लो फिर सरकार से क्‍यों ...(व्‍यवधान)

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: कोई अंकित नहीं होगा।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अब आप इसमें अनुचित लाभ ...(व्‍यवधान) आप स्‍थान ग्रहण कीजिये। डाक्‍टर सी. पी. जोशी।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जैसी माननीय सदस्‍य ने चिन्‍ता जाहिर की है 2003-04 में कानोता बाँध का मछली का विकास और आखेट के लिए ठेका हुआ था और यह बात भी सही है उपाध्‍यक्ष महोदय, कि 9 जून और 2 जुलाई को इस प्रकार का पानी आने से वहां मछलियां मरी हैं लेकिन मैं सदन को जानकारी देना चाहता हूं ज्योंही विभाग को इसकी जानकारी मिली है ......

 

vns/usc/13.50/2b/28.3.2007/1

 

हम लोगों ने हमारे अधिकारियों को वहां भेजकर उसका मौका निरीक्षण भी कराया है और जहां तक मुआवजे की बात माननीय सदस्‍य कर रहे हैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, संवेदक से जिस प्रकार का कांट्रेक्‍ट था उसमें हम लोगों ने स्‍पष्‍ट लिखा है कि यहां अतिवृष्टि, अनावृष्टि या अन्‍य कोई कारण से कोई हानि होती है उसके लिये विभाग जिम्‍मेदार नहीं है। 

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यही नहीं विभाग ने उसी दन संवेदक को एक पत्र लिखकर यह भी बताया था यदि पोल्‍यूटेड वाटर से आपकी मछलियां मरी हैं तो निश्चित रूप से आप एफ.आई.आर. दर्ज कराइये। जो भी दोषी व्‍यक्ति होगा कार्यवाही जायेगी। विभाग ने जितनी भी समय रहते जो कार्यवाही करनी थी, हम लोगों ने करायी है। हम लोगों ने पानी का सैम्‍पल लेकर उसकी भी जांच करायी है। जांच में जो एनेलेसिस रिपोर्ट आयी है उसमें भी पानी के दूषित होने का कहीं भी किसी प्रकार का नहीं मिला है। मछलियों के मरने का जो कारण रहा, हम लोगों ने इनको यह भी सलाह दी कि पानी में आक्‍सीजन की कमी हो गयी है और उसके लिये आक्‍सीफॉर एक दवा आती है। लिखित में हम लोगों ने उस संवेदक को यह कहा था कि इसमें आप डालिये। डालने के बाद क्‍या हुआ ? इन्‍होंने उसको डाला नहीं। इसी कारण से मृत्‍यु हुई है। मुआवजा देने का प्रावधान न तो विभाग के पास कभी रहा, न ही हमारे किसी प्रकार यह कांट्रेक्‍ट में था।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा):   000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, और आगे नहीं ... (व्‍यवधान) आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: अब अंकित नहीं होगा। आप स्‍थान ग्रहण कीजिये। माननीय सदस्‍य, आपको अच्‍छी तरह से जवाब दे दिया गया। आप संतुष्‍ट नहीं होते हैं तो मत होइये। बैठ जाइये। माननीय सदस्‍य, बैठिये आप ... (व्‍यवधान) 

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, मैं अलाऊ नहीं करूंगा। कोई रिकार्ड पर नहीं जायेगा।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: तो आपको कोई परमीशन नहीं मिलेगी। माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण कर लें। डा.सी.पी.जोशी ... (व्‍यवधान) 

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: फिर आप बार-बार खड़े हो जाते हैं। आप बैठ जाइये। आपको समय दिया गया उसका दुरुपयोग करना चाहते हैं आप।

डा.सी.पी.जोशी, सभापति, जन लेखा समिति 2006-2007 समिति के आठ प्रतिवेदन उपस्‍थापित करेंगे।

समिति का प्रतिवेदन

जन लेखा समिति (सं0 187 से 194)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): सभापति महोदय, मैं आपकी अनुमति से जन लेखा समिति, 2006-2007 के निम्‍नांकित प्रतिवेदनों का उपस्‍थापन करता हूं:-

भारत के नियंत्रक महा लेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (राजस्‍व प्राप्तियां) वर्ष 2003-2004 एवं 2004-2005 में समाविष्‍ट राज्‍य आबकारी विभाग से संबंधित मामलों पर समिति का 187वां प्रतिवेदन।

जन लेखा समिति, 2004-2005 (12वीं विधान सभा) के 89वें प्रतिवेदन में समाविष्‍ट भू-राजस्‍व विभाग से संबंधित सिफारिशों पर शासन द्वारा की गयी कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक) समिति का 188वां प्रतिवेदन।

भारत के नियंत्रक महा लेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (राजस्‍व प्राप्तियां) वर्ष 2002-2003 में समाविष्‍ट भूमि एवं भवन कर विभाग से संबंधित मामलों पर समिति का 189वां प्रतिवेदन।

भारत के नियंत्रक महा लेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (राजस्‍व प्राप्तियां) वर्ष 1999-2000 में समाविष्‍ट भू-राजस्‍व विभाग से संबंधित मामलों पर समिति का 190वां प्रतिवेदन।

भारत के नियंत्रक महा लेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (राजस्‍व प्राप्तियां) वर्ष 2002-2003 में समाविष्‍ट पंजीयन एवं मुद्रांक कर विभाग से संबंधित मामलों पर समिति का 191वां प्रतिवेदन।

भारत के नियंत्रक महा लेखा परीक्षक के प्रति‍वेदन (सिविल) में समाविष्‍ट उच्‍च शिक्षा विभाग से संबंधित अंकेक्षण प्र‍तिवेदन वर्ष 2000-2001 का अनुच्‍छेद संख्‍या 6.1 तथा वर्ष 2003-2004 का 4.2.6 से संबंधित मामलों पर समिति का 192वां प्रतिवेदन।

भारत के नियंत्रक महा लेखा परीक्षक के प्रतिवेदन राजस्‍व प्राप्तियां) वर्ष 2001-2002 में समाविष्‍ट वित्‍त विभाग से संबंधित मामलों पर समिति का 193वां प्रतिवेदन।

 

भारत के नियंत्रक महा लेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (राजस्‍व प्राप्तियां) वर्ष 2002-2003 में समाविष्‍ट भू-राजस्‍व विभाग से संबंधित मामलों पर समिति का 194वां प्रतिवेदन।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री बनवारी लाल, सदस्‍य, विधान सभा एक याचिका उपस्‍थापित करेंगे।

याचिकाओं का उपस्‍थापन

श्री बनवारी लाल (धौलपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से धौलपुर शहर की नई कालोनियों में पाइप लाइन बिछवाकर पानी उपलब्‍ध कराने बाबत् पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित एक याचिका उपस्‍थापित करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री मदन राठौड़, सदस्‍य, विधान सभा एक याचिका उपस्‍थापित करेंगे।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से राज्‍य सरकार द्वारा पूर्व में निजी संस्‍था को सशर्त आबंटित भूमि पर मेडिकल कालेज का निर्माण करवाने बाबत् पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित एक याचिका उपस्‍थापित करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: डा.भंवरलाल राजपुरोहित, सदस्‍य, विधान सभा एक याचिका उपस्‍थापित करेंगे (अनुपस्थित)

श्री कालूलाल गुर्जर, प्रभारी मंत्री प्रस्‍ताव करेंगे कि राजस्‍थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2007 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की जाए।

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं इस बिल को वापस विदड्रा करना चाहता हूं। इसको दुबारा हम आगे ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): धन्‍यवाद। समझदारी की एक आपने। आपने पहली बार समझदारी का काम किया है। समझदारी की है ... (व्‍यवधान) 

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): समझदारी का काम किया है। नहीं तो यह जन विरोधी और एक काला कानून आ जाता। यह काला कानून गलत हो जाता और इस सरकार के गले की फांस बन जाता। सुबह का भूला शाम को घर आ जाता है तो भूला नहीं कहलाता। आपने वापस ले लिया। धन्‍यवाद।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): गले की फांस क्‍या बन जाता भारतीय जनता पार्टी ... (व्‍यवधान) 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): वापस ले लिया इसके लिये बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वापस ले लिया इसके लिये सदन से अनुमति तो ले लें।

श्री उपाध्‍यक्ष: पुर:स्‍थापित हुआ ही नहीं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मंत्रीजी, जिस घबराहट की वजह से आप यह नहीं ला रहे हो अपने जन-प्रतिनिधियों को काम-काज ठीक करने के लिये पाबंद करना उससे ज्‍यादा ठीक रहेगा आपका।

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): मैं तो आपको भी पाबंद करूंगा कि आप भी काम-काज ठीक करें।

श्री उपाध्‍यक्ष: अनुदान की मांगों पर विचार एवं मतदान। श्री रामनारायण डूडी, राजस्‍व मंत्री, अनुदान की मांग संख्‍या-8-राजस्‍व विचार एवं मतदान हेतु प्रस्‍तुत करेंगे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने प्रस्‍ताव किया है, सदन से अनुमति तो ले लें।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): विदड्रा की आज्ञा तो लें।

श्री उपाध्‍यक्ष: इन्‍होंने रखा ही नहीं है। पुर: स्थापित ही नहीं किया है।

अनुदान की मांग

मांग संख्‍या 8 - राजस्‍व की प्रस्‍तुति

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या 8-राजस्‍व के सम्‍बन्‍ध में 31 मार्च, 2008 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 2,47,61,73,000/- ( अक्षरे रुपये दो अरब सैंतालीस करोड़ इकसठ लाख तिहत्‍तर लाख) तक की राशि प्रदान की जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री प्रताप सिंह सिंघवी, नगरीय विकास राज्‍य मंत्री अनुदान की मांग संख्‍या 20-  आवास एवं मांग संख्‍या-29 नगर आयोजना एवं प्रादेशिक विकास विचार एवं मतदान हेतु प्रस्‍तुत करेंगे। 


मांग संख्‍या 20 आवास की प्रस्‍तुति

 

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या 20-आवास के सम्‍बन्‍ध में 31 मार्च, 2008 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 42,62,36,000/- (अक्षरे रुपये बयालीस करोड़ बासठ लाख छत्‍तीस हजार) तक की राशि प्रदान की जाए।

 

मांग संख्‍या 29 -  नगर आयोजना एवं प्रादेशिक विकास की प्रस्‍तुति

 

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या 29 - नगर आयोजना एवं प्रादेशिक विकास के सम्‍बन्‍ध में 31 मार्च, 2008 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 13,34,75,51,000/- (अक्षरे रुपये तेरह अरब चौतीस करोड़ पिचहत्‍तर लाख इक्‍यावन हजार) तक की राशि प्रदान की जाए। 

श्री उपाध्‍यक्ष: डा. किरोड़ी लाल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री अनुदान की मांग संख्‍या 32- नागरिक आपूर्ति को विचार एवं मतदान हेतु प्रस्‍तुत करेंगे।

मांग संख्‍या 32 - नागरिक आपूर्ति की प्रस्‍तुति

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या 32-नागरिक आपूर्ति के सम्‍बन्‍ध में 31 मार्च, 2008 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 43,27,62,000/-(अक्षरे रुपये तियालीस करोड़ सत्‍ताईस लाख बासठ हजार) तक की राशि प्रदान की जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री कालीचरण सर्राफ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं एक निवेदन कर रहा था कि तीन बड़ी महत्‍वपूर्ण मांगें हैं और शेष मांगों का पारण भी आप मुखबंद करके करेंगे। आज माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पुलिस का टेटू शो भी है इसलिये आप कृपया दोनों तरु से माननीय सदस्‍य बोलें इस तरह से रेगुलेट करें कि 5.00 बजे तक मंत्री महोदय का उत्‍तर अगर प्रारम्‍भ हाँ जाए तो जरा आपकी कृपा हो तो ठीक रहेगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन के सहयोग से ... (व्‍यवधान) 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): बाकी आपने पहले व्‍यवस्‍था दे रखी है 4.30 बजे मुखबंद का समय दे रखा है आपने। 4.30 बजे मुखबंद होकर मांगों का पारण होना है।

श्री उपाध्‍यक्ष: करेंगे। इस हिसाब से ही करेंगे ... (व्‍यवधान) 

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): वह तो हमेशा-‍हमेशा ही बढ़ता है।

(     बजे)

(श्री सुरेन्‍द्र गोयल, सभापति, पदासीन)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आपको ज्‍यादा जरूरी है हम यहां बैठे रहेंगे।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मुखबंद है क्‍या आज ? उसको हटाओ मुखबंद को। बहस चलने दो सुबह तक।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपने 4.30 बजे मुखबंद करने का समय तय कर रखा है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 4.30 बजे सुबह के हैं।

श्री सभापति: माननीय कालीचरण जी।

मांग संख्‍या 8,20,29 व 32 पर विचार

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): माननीय सभापति महोदय,  आज सदन में मांग संख्‍या 8, मांग संख्‍या 20, मांग संख्‍या 29 और मांग संख्‍या 32 पर चर्चा हो रही है। 

मांग संख्‍या 20-आवास एवं मांग संख्‍या 29-नगर आयोजना एवं प्रादेशिक विकास पर अपने विचार मैं प्रकट करना चाहूंगा। सबसे पहले मैं हमारे प्रदेश की यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री आदरणीय वसुन्‍धरा जी और नगरीय विकास मंत्री आदरणीय सिंघवी साहब को इस बात के लिये धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि नयी सरकार बनने के बाद उन्‍होंने जो नयी सोच के साथ जयपुर के चहुंमुखी विकास को जो नयी दिशा दी है उसी का यह परिणाम है कि पिछले तीन वर्षों में जयपुर शहर का चहुंमुखी विकास हुआ है। हमारे मुख्‍यमंत्री जी का यह सपना है कि पाँच साल में नया जयपुर बनाएंगे। जयपुर शहर को विश्‍व के मानचित्र पर सुन्‍दर शहर के रूप में विकसित करेंगे। 

माननीय सभापति महोदय,  आज यह सपना साकार होने लगा। अभी हाल ही में जयपुर शहर को एशिया के सबसे खूबसूरत दस शहरों में चुना गया है। माननीय सभापति महोदय,  हमारी सरकार यह लक्ष्‍य लेकर चल रही है कि जयपुर शहर के हैरिटेज स्‍वरूप को बरकरार रखते हुए हाईटैक सिटी के रूप में जयपुर शहर का विकास किया जाए और पिछले तीन साल में जिस दृढ़ निश्‍चय और नयी सोच के साथ हमारी सरकार ने जयपुर शहर के चहुंमुखी विकास का जो बीड़ा उठाया था।

श्‍याम/अरूण   28.03.2007  14.00  2c

 

आज उसमें हम सफलता की ओर अग्रसर हो रहे हैं। पिछले तीन साल में जयपुर शहर का जिस तेजी से विकास हुआ है, यदि मैं यह कहूं कि कांग्रेस के पिछले 45 साल के शासन में इतने विकास के काम नहीं हुए तो कोई अतिश्‍योक्ति नहीं होगी। चारदिवारी के बाहर की सभी प्रमुख सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने का काम चल रहा है। यातायात के दबाव को कम करने तथा निर्बाध गति से यातायात के लिए कहीं ओवर ब्रिज, कहीं अंडर ब्रिज, कहीं फ्लाई ओवर, कहीं रेलवे ओवर ब्रिज का जिस तेजी के साथ काम चल रहा हे, वह इस बात का द्योतक है कि जयपुर शहर का चहुंमुखी विकास हो रहा है। गत तीन वर्षों में हुए विकास कार्यों के कारण आज जयपुर शहर विश्‍व का प्रमुख पर्यटन केन्‍द्र बन गया है और विश्‍व के मानचित्र पर जयपुर शहर नये पेरिस के रूप में उभर रहा है।

सभापति महोदय, मैं जयपुर विकास प्राधिकरण की बात करूं, 1982 में जयपुर विकास प्राधिकरण की स्‍थापना हुई। स्‍थापना के बाद जे.डी.ए. कर्जे में डूबा रहता था, ओवर ड्राफ्ट की स्थिति सदैव बनी रहती थी। जे.डी.ए. में जो राजस्‍व प्राप्‍त होता था वह वहीं के कर्मचारियों के वेतन-भत्‍ते और रख-रखाव पर ही खर्च हो जाता था। विकास के लिए पैसा नहीं मिलता था। मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा राजस्‍थान की यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री वसुन्‍धरा राजे जी को और नगरीय विकास मंत्री जी को कि तीन साल पहले जब राजस्‍थान की जनता ने भारतीय जनता पार्टी को राजस्‍थान की सत्‍ता सुपुर्द की उसके बाद पिछले साल से जे.डी.ए. पर कोई ओवर ड्राफ्ट नहीं है। पिछले साल 2005-06 में जे.डी.ए. को 506 करोड़ 85 लाख का राजस्‍व प्राप्‍त हुआ, 84 करोड़ का जो जे.डी.ए. पर कर्जा था, वह जे.डी.ए. ने चुका दिया, 10 करोड़ रूपये कर्ज के पेटे सरकार को चुका दिये और 28 करोड़ रूपये जे.डी.ए. ने नगर निगम को दे दिये। इतना ही नहीं इस वर्ष जे.डी.ए. ने कुल 651.45 करोड़ की आय का अनुमान किया था, आज मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा कुशल वित्‍तीय प्रबंधन को कि जनवरी, 2007 तक 651.45 करोड़ रूपये की आय का जहां अनुमान था, जनवरी, 2007 तक 792.39 करोड़ रूपये जे.डी.ए. ने प्राप्‍त किये। 31 मार्च, 2007 तक कुल 821.15 करोड़ रूपये प्राप्‍त होने का अनुमान है।

सभापति महोदय, मैं यह कहना चाहूंगा कि इस वर्ष पिछले साल की तुलना में जयपुर के विकास के कामों पर दुगुने से ज्‍यादा राशि खर्च की जायेगी। जो कि अपने आपमें एक कीर्तिमान है और आने वाले वर्ष 2007-08 में तो जे.डी.ए. ने जो बजट पास किया है 891.30 करोड़ रूपये जयपुर के विकास पर खर्च किये जायेंगे। मैं मुख्‍यमंत्री जी को इस बात के लिए भी धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि कांग्रेस ने एक मुद्दा बना रखा था कि गृह कर समाप्‍त किया जाये, गृह कर समाप्‍त किया जाये। हमने उस समय भी कहा था कि भारतीय जनता पार्टी जो कहती है वह करती है और करती है वह कहती है।

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): तीन साल बाद किया है।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): आपने तो जो पाँच साल के लिए वादे किये थे वह तो एक दिन में पूरे कर दिये होंगे। भारतीय जनता पार्टी की सरकार को राजस्‍थान की जनता ने पाँच साल के लिए मेंडेट दिया है और पाँच साल के लिए 245 वादे भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किये थे, मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि उसमें से तीन साल समाप्‍त होने के बाद 231 वादे पूरे हो गये हैं केवल 14 वादें बाकी बचे हैं।

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): माननीय जौहरी बाजार से आने वाले सदस्‍य थोड़ा यह भी बताने का कष्‍ट करें कि आपने वादा किया था 18 रूपये रोज में मकान देने का उसका क्‍या हुआ।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): वह आप बता देना ...(व्‍यवधान) 

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आपका नम्‍बर आये तब बोलना ...(व्‍यवधान)

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): सभापति महोदय, कांग्रेस को पिछले तीन साल से जो मुद्दा मिला हुआ था, गृह कर समाप्‍त करो, गृह कर समाप्‍त करो, आज यह गृह कर समाप्‍त हो गया, अब तो आपके पास कोई मुद्दा ही नहीं रहा।

सभापति महोदय, बताने की आवश्‍यकता नहीं है जब-जब राजस्‍थान में कांग्रेस का राज आया है, जब-जब राजस्‍थान में कांग्रेस की सरकार बनी, जयपुर शहर में कोई विकास का काम इस सरकार ने नहीं किया। पिछली कांग्रेस की सरकार ने क्‍या किया, सड़कें चौड़ी करने के नाम पर, अतिक्रमण हटाने के नाम पर तोड़फोड़ की गयी पूरे शहर में और लगभग 20 हजार इस प्रकार के गरीब लोग जो फुटपाथ पर बैठकर के अपना व्‍यवसाय करते थे उनको वहां से बेदखल कर दिया और उनको बेरोजगार कर दिया। जिन 20 हजार लोगों को इन्‍होंने बेरोजगार कर दिया उनको कोई रोजगार मुहैय्या नहीं कराया, उसे इनकी सरकार में अतिक्रमण हटाने के नाम पर जो तोड़फोड़ की गयी उसके परिणाम स्‍वरूप आत्‍महत्‍या करने के लिए मजबूर होना पडा। आपके राज की बात बता रहा हूं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): इनके सारे एम.एल.एज. ने आत्‍महत्‍या कर ली, जयपुर से जो आते थे उन्‍होंने आत्‍महत्‍या कर ली।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): वह सब गये, एक बचे हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपने अपनी उपस्थिति का अहसास पहली बार कराया है दस दिन में ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): जब तीन-तीन मुख्‍यमंत्री इस सदन को सुशोभित करते हैं और उन सबकी उपस्थिति का लाभ इस सदन को मिल रहा है तो मैं समझता हूं कि मेरी उपस्थिति कोई मायने नहीं रखती है।

श्री सभापति: मायने नहीं रखती है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): जो काम आप करते थे वही का वही काम पूरे सदन में राजेन्‍द्र जी राठौड़ ने किया है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): वह तो हमारे बॉस हैं, करेंगे ही।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): बॉस हैं ...(व्‍यवधान)

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): आप टाइम मत जाया करें ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: अब आप प्‍लीज आपस में बातें नहीं करें ...(व्‍यवधान)

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): सभापति महोदय, कांग्रेस के राज में मुख्‍यमंत्री रोजगार योजना की घोषणा की गयी कि एक लाख कियोस्‍क पूरे प्रदेश में प्रतिवर्ष बनाये जायेंगे और बेरोजगार नौजवानों को रोजगार दिया जायेगा। क्‍या हुआ, आनन-फानन में आपने कियोस्‍क बना दिये और कियोस्‍क कहां बनायें। श्‍मशान घाट के बाहर, निर्जन स्‍थानों पर, नालों के किनारे और आज उसका परिणाम है कि आपके हजारों कियोस्‍क खाली पड़े हैं वहां पर कोई जाकर के धंधा नहीं करना चाहता। आज वहां यह स्थिति हो रही है कि या तो उसमें जानवर सोते हैं या वहां पर गलत धंधें होते हैं।

सभापति महोदय, जब-जब राजस्‍थान में कांग्रेस का राज आया है, भ्रष्‍टाचार की सारी सीमाएं इन्‍होंने लांघी हैं। मैं जयपुर की बात करूं, जब-जब कांग्रेस ने राजस्‍थान में राज किया मास्‍टर प्‍लान की जिस तरह से धज्जियां उड़ायी गयी, अपने चहेते लोगों को, अपने कार्यकर्ताओं को, अपने नेताओं को लाभ देने के लिए जिस मनमाने तरीके से लैंड यूज चेंज किया गया, उसके मैं तीन-चार उदाहरण आपके सामने पेश करना चाहता हूं, नम्‍बर एक, बिड़ला ऑडिटोरियम, स्‍टेच्‍यु सर्किल के कोने पर मास्‍टर प्‍लान में अर्द्व सरकारी भवनों के लिए यह जमीन आरक्षित थी, 99 साल की लीज पर एक रूपये प्रति माह में दे दी गयी क्‍योंकि बिड़ला जी राजस्‍थान से कांग्रेस के सांसद थे।

 

jyg/akt/28.3.7/14.10/2d

 

माननीय सभापति महोदय, इसी प्रकार बलदेव प्‍लाजा, कांग्रेस के नेता राम निवास मिर्धा के पुत्र ने बनवाया, मास्‍टर प्‍लान में इस रेंजिडेंशियल यूज था, भूमि अवाप्ति में भी था, फाइल गायब कर दी गई, फाइल आज तक नहीं मिली, इजाजत दे दी, कॉमर्शियल कॉम्‍प्‍लेक्‍स बन गया और आज तक उसकी फाइल नहीं मिली।

माननीय सभापति महोदय, स्‍टेशन रोड पर सौ करोड़ से भी अधिक की कीमती जमीन 24 हजार वर्ग मीटर जमीन, जिसे अटल वन के नाम से जाना जाता था, मास्‍टर प्‍लान में ग्रीन बेल्‍ट में थी, लैण्‍ड यूज चेंज नहीं हो सकता था, लैण्‍ड यूज चेंज कर दिया, वहां पर फाइव स्‍टार होटल बनाने के लिए परमिशन दे दी गई क्‍योंकि उस जमीन के मालिक जे के अटल, हमारे पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी के रिश्‍तेदार थे, इसलिए उनको परमिशन दी गई।

आदरणीय शिवचरणजी माथुर, जो यहां बैठे हैं, श्‍याम नगर में पूरी की पूरी जमीन अवाप्ति में थी, अवाप्ति से मुक्‍त कर दिया, क्‍योंकि वहां पूर्व मुख्‍य मंत्री शिवचरणजी माथुर की जमीन थी, उनकी जमीन भी वहीं पर है। चाणक्‍य ने कहा है माननीय सभापति महोदय, मैं उसका हिन्‍दी अनुवाद बता देना चाहता हूं कि पानी में रहते हुए मछली कब पानी पी जाती है, दुनिया का कोई वैज्ञानिक सिद्ध नहीं कर सकता।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): कौनसी जमीन मेरी थी, आप बताएंगे, डिटेल बताएंगे उसकी?

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): आप साहब अपना जब बोलें तब बोलना।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): गलत बात मत कहिए।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): विराजिए प्‍लीज, बैठिए, बैठिए, आप।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): मैं कैसे बैठूंगा।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): आपका मकान श्‍याम नगर में नहीं है? वह जमीन अवाप्ति में नहीं थी?

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): यह बहुत पुरानी बात है।  ...(व्‍यवधान)...

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): यह पुरानी बात है इसीलिए मैं बता रहा हूं। मैंने यह कहा है कि जब-जब कांग्रेस का राज आया है राजस्‍थान में तब-तब पूरे मनमाने तरीके से अपने लोगों को ऑब्‍लाइज करने की कोशिश की। आपने न मास्‍टर प्‍लान की चिंता की न आपने लैण्‍ड यूज की चिंता की। मैं यही कहना चाहता हूं कि श्‍याम नगर में आपके मकान को भूमि अवाप्ति से मुक्‍त करने के लिए पूरे श्‍याम नगर की जमीन को भूमि अवाप्ति से मुक्‍त कर दिया गया। ...(व्‍यवधान)...

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): हां, मैं चैलेंज करता हूं इसको, इसकी जांच करवा लीजिएगा आप और अगर आपका असत्‍य कथन हो तो आप सदस्‍यता छोड़ देना। क्‍या बात करते हैं आप? उटपटांग बातें कर रहे हैं।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): मैं उटपटांग बातें नहीं कर रहा हूं, मैं बिलकुल सही कह रहा हूं, आपका समय आए तब बता देना आप।

माननीय सभापति महोदय, मैं कह रहा था कि चाणक्‍य ने कहा था कि पानी में रहते हुए मछली कब पानी पी जाती है दुनिया का कोई वैज्ञानिक नहीं बता सकता। इसी प्रकार से कांग्रेस ने पिछले पचास सालों में ऐसी हजारों मछलियां पाली जो भ्रष्‍टाचार के रूप में कब पानी पी जाती है इसका पता नहीं चलता।

माननीय सभापति महोदय, कुछ दिन पहले हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य और तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने एक प्रेस कांफ्रेंस के जरिये यह आरोप लगाया वर्तमान सरकार पर कि जे डी ए द्वारा वर्ल्‍ड ट्रेड पार्क भूमि आवंटन में 9 सौ करोड़ रुपए का महा घोटाला किया है। माननीय सभापति महोदय, यह इनकी गलती नहीं है, कांग्रेस की संस्‍कृति भ्रष्‍टाचार की जननी है और इनकी जब-जब प्रदेश में सरकार थी तब-तब इन्‍होंने भूमि आवंटन में जमकर घोटाले किए थे, यह सबको मालूम है, बताने की आवश्‍यकता नहीं है। मैं पूछना चाहता हूं मेरे कांग्रेसी मित्रों से कि सुराणा मल्‍टीप्‍लेस, जहां आज एण्‍टरटेनमेंट पेराडाइज बना हुआ है जवाहर सर्किल पर, 17853 वर्ग मीटर जमीन केवल 1260 रुपए प्रति वर्ग मीटर की रेट से कॉमर्शियल लैण्‍ड मात्र सवा दो करोड़ रुपए में आवंटित कर दी। क्‍या कीमती थी उस जमीन की उस समय? माननीय सभापति महोदय, उस समय उस जमीन कीमत 20 करोड़ रुपए से ज्‍यादा थी, यदि रिजर्व प्राइस पर भी जमीन की कीमत का आकलन करें, उसको केवल सवा दो करोड़ रुपए में दे दी।

मैसर्स ग्रीन फायर हॉस्पिटल को 23535 वर्ग मीटर भूमि जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर केवल 1800 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से मात्र सवा चार करोड़ रुपए में आवंटित कर दी जबकि उस समय उस जमीन की कीमत 30 करोड़ रुपए से ज्‍यादा की थी। ...(व्‍यवधान)... मैसर्स ग्रीन फायर हॉस्पिटल, जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर जहां आज एस्‍कोर्ट हॉस्पिटल बना हुआ है।

इसी प्रकार से मैसर्स जी ई कैपिटल इण्डिया को जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर 11487 वर्ग मीटर जमीन मात्र 750 रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से केवल 86 लाख रुपए में आवंटित कर दी गई जबकि उस समय उस जमीन की कीमत 25 करोड़ रुपए से ज्‍यादा की थी।

माननीय सभापति महोदय, इसी प्रकार लाला चमनलाल एजूकेशन ट्रस्‍ट को बम्‍बाला संस्‍थानिक क्षेत्र में 22054 वर्ग मीटर जमीन केवल एक रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से आवंटित कर दी गई। कितने में? एक रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से। मजेदार बात देखिए जबकि यह ट्रस्‍ट राजस्‍थान में रजिस्‍टर्ड ही नहीं है, यह राजस्‍थान के बाहर रजिस्‍टर्ड है और इसकी कोई गतिविधि या क्रिया कलाप हमारे प्रदेश के किसी भी हिस्‍से में नहीं चलता है।

इसी प्रकर इण्डियन इन्‍स्‍टीट्यूट ऑफ मारवाड़ी एन्‍टरप्रिन्‍योर को 12991.75 वर्ग मीटर जमीन झालाना संस्‍थानिक क्षेत्र में कितने रुपए में दी? एक रुपए टोकन राशि पर दी।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): कौन है यह?

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): अब यह क्‍यों खुलवाते हो कि कौन है, आप सबको पता है कि कौन है। मत खुलवाओ, अब जो ऊपर चले गए उनका नाम मैं नहीं लेना चाहता हूं। ...(व्‍यवधान)... मैं कह रहा हूं जोशीजी का नाम मैं नहीं लेना चाहता क्‍योंकि वह ऊपर चले गए। हरिदेवजी जोशी का नाम नहीं लेना चाहता। ...(व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): उस समय रामनारायणजी थे, इनको पता है।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): मैं कह रहा हूं कि पता है इनको।

माननीय सभापति महोदय, इसी प्रकार से आल लैण्‍ड डवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, रेडिसन होटल, यानि होटल बन रही थी उनको 18 हजार गज जमीन आश्रम रोड, जवाहरलाल नेहरू सर्किल के पास आवंटित कर दी। कितने रुपए में? केवल 18 सौ रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से, यानि मैं कई उदाहरण बता सकता हूं। ...(व्‍यवधान)... 

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): माननीय सभापति महोदय, पिछली बार भी हाउस में हमने यह मामले उठाए थे, एक साल पहले भी कि जितने भी उनके समय के इललीगल अलोटमेंट हैं, चाहे वह ई पी का हो, आज भी ई पी ने सरकारी जमीन हजारों वर्ग मीटर जमीन कब्‍जे में कर रखी है और मंत्रीजी ने आश्‍वासन दिया था कि मैं कार्यवाही करूंगा। मैं अभी नहीं चाहता कि अभी आप जवाब दें लेकिन आप जब जवाब दें तो बताएं, उस समय क्‍लेरीफाई करें कि यह जो इललीगल अलोटमेंट हुए, करोड़ों रुपए की जनता की सम्‍पत्ति कुछ लोगों या व्‍यक्तियों को दे दी गई और आज भी जो सरकारी जमीन को दबाकर बैठे हैं इललीगल, उनके विरुद्ध क्‍या कार्यवाही करेंगे। पिछली बार आपने कहा था कि कार्यवाही करेंगे। अब तक क्‍या कार्यवाही हुई, उसकी सदन को जानकारी दे दें और अब आप आगे क्‍या करेंगे, यह सारे मामले हम सब कई बार उठा चुके हैं। ...(व्‍यवधान)...

प्रो. बीरूसिंह राठौड़ (बनीपार्क): ...(व्‍यवधान)... टोटल 119 मामले हैं।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): माननीय सभापति महोदय, यह तो पाँच-सात मामले मैंने बानगी के रूप में उठाए हैं। पूरे प्रदेश का यदि देखा जाए तो 5 साल के कांग्रेस के राज ने इसी प्रकार से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को, कांग्रेस के नेताओं को, कांग्रेसी नेताओं के रिश्‍तेदारों को, अपने चहेतों को, बेशकीमती जमीन कौडि़यों के मोल दे दी। हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य और तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर आरोप लगाया है

 

Gpc/akt/ 27032007/1420/2e

    कि हमने कम कीमत पर जमीन दे दी, अब आप वह भी देखिए। हमारी सरकार ने जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर वर्ल्‍ड ट्रेड पार्क और गोल्‍ड सूक को जमीन आवंटित की। किस रेट में की? इस समय आरक्षित दर है 6 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर और हमने उनको आवंटित की उस आरक्षित दर से चार गुना, यानी 25 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से हमने उनको अलॉट की। तो इसमें उनको भ्रष्‍टाचार नजर आ रहा है। 700 रुपये में जीई केपिटल को दी उसमें इनको भ्रष्‍टाचार नजर आ रहा है। रेडिसन होटल को 1800 रुपये में दी इनको भ्रष्‍टाचार नजर आ रहा है और हमने 25 हजार रुपये वर्ग मीटर की दर से जमीन आवंटित की, इनको भ्रष्‍टाचार नजर आ रहा है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह नीलाम क्‍यों नहीं की? ऑक्‍शन करना चाहिए था।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): जीई केपिटल को ऑक्‍शन नहीं करना चाहिए, रेडिसन होटल की जमीन को ऑक्‍शन नहीं करना चाहिए था। ईपी, जहां कामर्शियल काम्‍प्‍लेक्‍स बना है उसकी नीलामी करने की आवश्‍यकता नहीं थी। वर्ल्‍ड ट्रेड पार्क को तो नीलामी की आवश्‍यकता थी और आपके चहेतों को आपने जमीन दी उसकी नीलामी की आवश्‍यकता नहीं थी। 700 रुपये गज में, 1800 रुपये गज में 1100 रुपये गज में।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): रिजर्व प्राइस का नाम जहां भी आता है वह पब्लिक लेण्‍ड होती है ऑक्‍शन के लायक। जहां कहीं भी रिजर्व प्राइस पर दी है, डबल पर दी है, ट्रिपल पर दी है ..(व्‍यवधान)..

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): हमने तो विपक्षी दल के माननीय नेता जी, तब 6 हजार रुपये की रिजर्व प्राइस थी उससे चार गुना 25 हजार रुपये वर्ग मीटर में दी।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): वहां पर मार्केट रेट क्‍या है?

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): मार्केट रेट उस समय क्‍या थी जब आपने 700 रुपये में दी थी, 1100 रुपये में दी थी, 1800 रुपये में दी थी।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): आप तो साहूकार हो रहे हैं। आप तो साहूकार हो।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): हमने तो रिजर्व प्राइस के चार गुना रेट में दी है।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): इसीलिए आपने ..(व्‍यवधान).. आज क्‍या है?

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): यह तो जानने का अधिकार है ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप अनर्गल बोल रहे हैं।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): कोई अनर्गल नहीं बोल रहा हूं, मैं तथ्‍यों के आधार पर बोल रहा हूं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): क्‍योंकि हरिदेव जोशी का नाम आपने ..(व्‍यवधान).. हरिदेव जी जोशी के ऊपर आज आप बता रहे हो उस मामले में प्रतिपक्ष के तत्‍कालीन नेता भैरोंसिंह जी शेखावत, जो आज उपराष्‍ट्रपति हैं, उन्‍होंने अनगिनत आरोप लगाये थे और वे सब मिथ्‍या साबित हुए।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): आपका समय आये तब बता देना।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): वह तो समिति की जमीन थी। इसी तरह से आप शिवचरण जी माथुर साहब पर आरोप लगा रहे हो।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): गलत नहीं लगा रहा।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह भी सोसाइटी की जमीन थी। सोसाइटी की जमीन कन्‍वर्ट कर दी तो इन्‍होंने भी अपना प्‍लाट ले लिया। इसमें क्‍या बेईमानी हुई?

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): मैं बता रहा हूं, विराजिए आप।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): क्‍या बेईमानी हुई बैठे हैं आपके सामने, पूछ लो इनको। आपके सामने बैठे हैं, आप धड़ाधड़ आरोप लगा रहे हैं।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): इनका मकान नहीं है क्‍या? जमीन अवाप्ति में नहीं थी, क्‍या बात कर रहे हैं आप?

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य ..(व्‍यवधान)..

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): माननीय प्रतिपक्ष के नेता, मैं माननीय शिवचरण जी और माननीय हरिदेव जी जोशी के बारे में कुछ नहीं कहना चाहता, मैं तो जिन-जिन इंडस्ट्रियलिस्‍ट को जमीनें कम रेट में दी गई, ये इंडस्ट्रियलिस्‍ट न तो बीजेपी के हैं, न कांग्रेस के हैं, ये तो जहां उनको कमाई होती है उसके साथ चिपक जाते हैं पैसों के। इसलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं इन छोटी-मोटी चीजों में अपन आपस में उलझते हैं इसकी बजाय सभी दलों को चाहे हम हैं, चाहे आप हैं, ये जितने भी लोग हैं, चाहे आपके समय में हुआ हो तो आप यह कहकर इनको जस्‍टीफाई कर देंगे क्‍या? कहीं गलती से कोई कम में ले गया तो कह देंगे कि सारा ही जो बोल रहे हो सब गड़बड़ है। आपको यह कहना चाहिए कि आज भी ईपी ने हजारों वर्ग मीटर सरकार की जमीन पर कब्‍जा कर रखा है। क्‍या आप लोगों की यह ड्यूटी नहीं है कि आप मांग करो?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप सरकार में हैं।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): सरकार की ड्यूटी है, आपकी भी ड्यूटी है।..(व्‍यवधान).. आप उसको जस्‍टीफाई करने के लिए खड़े हो जाते हो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): किसान ने अपने जमीन सस्‍ती रेट पर दे दी। सोसाइटी की जमीन को आपने ले लिया ..(व्‍यवधान)..

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आपके समय यह अलॉट हुई, क्‍योंकि आपके समय अलॉट हो गई तो आप जस्‍टीफाई करने के लिए खड़े हो जाते हो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इसमें जेडीए, यूआईटी बहुत बेईमानी कर रही थी, किसानों को बर्बाद कर रही थी इसलिए किसानों ने अपनी जमीन सोसाइटियों को बेचना शुरू कर दिया।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): यह नहीं है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यही है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अगर आपके समय दे दी तो उनको जस्‍टीफाई कर रहे हो आप।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपने किसानों की जमीन जो सोसाइटियों को बेची वह इसलिए बेची कि सरकार उनको मार्केट प्राइस पर नहीं देना चाहती थी। ..(व्‍यवधान)..

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): यह आपके समय में हुई थी। आप जीई केपिटल ..(व्‍यवधान).. माननीय नेता प्रतिपक्ष के नाते आप इसका जवाब दे दीजिए क्‍या इससे सहमत हैं जो ईपी और जीई केपिटल को सस्‍ती रेट पर दी है और नाजायज सरकारी जमीन पर कब्‍जा कर रहे हैं ..(व्‍यवधान)..

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य ..(व्‍यवधान).. आपने अभी अपनी बात बता दी है ..(व्‍यवधान)..

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): सरकार आपकी है, सरकार क्‍या कर रही है?

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप जो कर रहे हैं वर्ल्‍ड ट्रेड सेंटर, इससे सहमत हैं आप? उस समय जो प्रिवलिंग रेट थी उसमें जीई को दिया। आज आपने वर्ल्‍ड ट्रेड को कितने में दिया?

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): मैं यही बता रहा हूं। बैठिए आप।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपका काम है कि वह बेचे वहां पर। वर्ल्‍ड ट्रेड के लिए आपने उसको दिया, वह सबलेट कर रहा है। यह ठीक है ..(व्‍यवधान).. कांग्रेस ने किया, तीन साल से सरकार में बैठे हो कार्यवाही करो ना। आप यह काम तो करते नहीं, कांग्रेस ने यह कर दिया, वह कर दिया। आप करिए अगर हिम्‍मत हो तो।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): बैठिए, बैठिए आप। यह भी करेंगे, बिलकुल करेंगे।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): किस मुंह से बोल रहे हो आप। पूरे जयपुर को बेच खाया, भाषण दे रहे हो।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अभी मैंने मांग की है कार्यवाही करो।

श्री सभापति: आप विराजें।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप मांग करिए कि वर्ल्‍ड ट्रेड सेंटर को पैसा दिया, वह सबलेट कर रहा है। आप रोकिए उसको। यह काम तो नहीं करेंगे और यहां पर भाषण देने खड़े हो गये।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): ईपी के लिए मैंने मांग की है कार्यवाही करने के लिए।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आज राजस्‍थान की जितनी भी आपने व्‍यवस्‍था की है वह राजस्‍थान की जनता के साथ कुठाराघात किया है। आप उन लोगों को पैसा कमाने के लिए फेसिलेटर का काम कर रहे हो। कोई एग्‍जाम्‍पल है आपके पास? सबलेट करवा रहे हो आप। हजारों करोड़ रुपये वह वर्ल्‍ड ट्रेड वाला कमाकर ले जाएगा राजस्‍थान से। आपकी हिम्‍मत होती तो आप नियम करते कि राजस्‍थान का इतना शेयर होगा और हम इसमें इक्विटी में पार्टनर बनेंगे। यह काम तो आपने नहीं किया, वर्ल्‍ड ट्रेड को जमीन देकर आपने सबलेट करके करोड़ों रुपये कमाने का मौका दिया उसको ..(व्‍यवधान)..

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): ये कह रहे हैं कि हमारे शासन में गड़बड़ी हुई तो उसको ठीक करने के लिए सत्‍ता दी है।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): बिलकुल करेंगे, बैठिए आप।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): उसको ठीक करने की बजाय ये हमारे से भी चार गुना ज्‍यादा ठोक रहे हैं। ये जनता का पैसा लूटकर खा रहे हैं। हमने खाया उससे भी कई गुना ज्‍यादा आगे और होड़ मची हुई है। आपका काम है हमने गलत किया ठीक कर देते। राज आपको क्‍यों सौंपा?

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): क्‍या स्‍वीकार कर रहे हो कि आपने लिया?

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): राज इसीलिए तो सौंपा कि हमने ठीक नहीं किया तो पाँच साल में सब ठीक-ठाक कर देते। कुछ करते नहीं और आप ठोकने में लगे हुए हो और खूब खा रहे हो। खा लो। आपके पास है क्‍या ..(व्‍यवधान)..

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): एक साल और है, और ठोक लो।

श्री सभापति: गुढ़ामालानी से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप विराजें।

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): आपने खाया यह स्‍वीकार कर रहे हो क्‍या?

श्री सभापति: आहोर से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपस में बात न करें।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): स्‍वीकार करें या न करें, अब सत्‍ता आपके पास है, अब आपका दायित्‍व है, आपका फर्ज है, हमने कोई गलत काम किया है उसको ठीक कौन करेगा। अब आपकी सरकार करेगी या हम करेंगे। हम तो विपक्ष में बैठे हैं, अब आप अगर उसको ठीक नहीं करेंगे ..(व्‍यवधान)..

श्री सभापति: अब आप विराजें। अंकित नहीं हो।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): 000

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): 000

श्री सभापति: माननीय सचेतक महोदय। अंकित नहीं हो रहा है। प्रतिपक्ष के माननीय सचेतक महोदय ..(व्‍यवधान).. माननीय सदस्‍य। ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सभापति: नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सभापति: आप प्‍लीज कंक्‍लूड करें।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): कंक्‍लूड करें, मैंने तो बात ही शुरू नहीं की, आप कह रहे हैं कंक्‍लूड करें। इन्‍होंने सारा टाइम खराब कर दिया। माननीय सभापति महोदय, मैं यह बताना चाहता हूं इन्‍होंने यह कहा कि ..(व्‍यवधान).. सुनिए, आप। बैठिए आप।

श्री सभापति: आप विराजिए।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): मैं यह बताना चाहता हूं कि इन्‍होंने इंटरटेनमेंट पैराडाइज को 1100 रुपये वर्ग मीटर में जमीन दी उस समय वहां आरक्षित दर थी 3 हजार रुपये।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): अब आप विराजें, इस तरह उत्‍तेजित न हों।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): बैठें आप।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, अंकित नहीं हो रहा है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सभापति: माननीय मंत्री महोदय। ..(व्‍यवधान)..

 

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/28032007/1430/2f

 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सभापति: माननीय नाथद्वारा से आने वाले सदस्‍य, अंकित नहीं हो रहा है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): आपका समय आए जब बोल लेना आप, बिराजिए। मैंतो केवल इतना कहना चाहता हूं कि जी ई केपिटल को 3 हजार रुपये आरक्षित दर उस समय दी, 700 रुपये में एंटरटेनमेंट पैराडाइज उस समय 3 हजार की आरक्षित दर, आपने दी 11 सौ रुपये में, उनमें तो भ्रष्‍टाचार नहीं और हमने आज 6 हजार रुपये आरक्षित दर है, हमने उसकी 4 गुना 25 हजार वर्ग मीटर में जमीन दी है उसमें यह भ्रष्‍टाचार नजर आ रहा है ?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): पिछली सरकारों ने नहीं किया सबलेट ?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आपका नम्‍बर आए तब बोल लेना।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सभापति: माननीय नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): कहां पर नहीं कर रहे हैं ? आज ईपी के अन्‍दर सबलेट नहीं किया, इसमें आपने कैसे दी इनको 1100 रुपये में ?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): फूडकोड सबलेट नहीं है ? बातें कर रहे हैं।

श्री सभापति: आप आसन को संबोधित करें, आप बिराजें।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): 000 ...(व्‍यवधान)...

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आप बार बार खड़े नहीं हों।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): 000

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): 000

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):  000

श्री सभापति: माननीय सचेतक महोदय।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): 000

प्रो. बीरूसिंह राठौड़ (बनीपार्क): 000

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): यह नौ सौ चूहे खाकर बिल्‍ली हज को चली, सुनिए राकेश जी।

श्री सभापति: परबतसर से आने वाले माननीय सदस्‍य ।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): यदि आपने रेडिशन होटल को जमीन सही तरीके से दी तो हाई कोर्ट ने उसको कैंसिल क्‍यों की ?

 डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): हाई कोर्ट ने स्‍टे कर दिया।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): कन्‍फर्म करके ही बोल रहा हूं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): इतना ही नहीं, माननीय सभापति महोदय, इन्‍होंने एक और काम किया।

श्री सभापति: यह सब चीजें जांच का विषय हैं, आप इस प्रकार से आपस में क्‍यों उलझ रहे हैं ? मेरे को समझ में नहीं आ रहा है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): आपका समय आए जब जवाब दे देना।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सभापति: माननीय सभी सदस्‍यों से मेरा निवेदन है कि आपस में वार्ता नहीं करें।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): कोई बात ही नहीं, जबरदस्‍ती उठ रहे हैं।

श्री सभापति: आधा घंटा हो गया।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): आधे घंटे में 15 मिनट तो इन्‍होंने खराब कर दिये, मैं क्‍या करूं ? ...(व्‍यवधान)... माननीय सभापति महोदय, इतना ही नहीं, अपने चहेतों को जमीनें सस्‍ती दरों पर देने के लिए और डिस्‍प्‍यूटेड मामले सुलझाने के लिए इन्‍होंने क्‍या किया कि जे.डी.ए., पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा समझौता समितियों के माध्‍यम से जे.डी.ए. और राज्‍य सरकार के करोड़ों की ही नहीं, अरबों की जमीन बेच कर इन्‍होंने कोडि़यों के भाव और अरबों रुपये अपने लोगों को फायदा पहुंचाया। आज मैं बताना चाहता हूं 2,4,5 बताना चाहता हूं, खातेदार श्री छोटूराम पुत्र प्रताप व अन्‍य ग्राम बीड़ ग्राम खातीपुरा के खसरा नम्‍बर 193/248, 194 कुल रकबा 60 बीघा 15 बिस्‍वा भूमि जो कि आज की तारीख में लगभग, सुनना जोशी साहब, दो सौ करोड़ की है, अल्‍सर एक्‍ट में अधिग्रहित होकर जयपुर विकास प्राधिकरण के नाम प चढ़ी हुई थी, समझौता समिति के राज्‍य सरकार के भूमि नियमन के आदेश 26.5.2000 की आड़ में चित्रकूट योजना में आरक्षित दर 1650 रुपये का 25 प्रतिशत 412.50 पैसे प्रति वर्ग मीटर की दर से मात्र 6 करोड़ रुपये में नियमन के आदेश दे दिये। कौन था यह छोटू राम ?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):  000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): आप अपना नम्‍बर आए तब बात कीजिए, बैठिए।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): समझौता समिति को हमने भंग कर दिया।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): इनको बहुत चिंता हो रही है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सभापति: माननीय नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य, जब आपका नम्‍बर आए बोलने का तब, खड़े होना आप।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): 000

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): ...(व्‍यवधान)... वाह साहब, बहुत बढि़या काम किया आपने, बहुत बढि़या भ्रष्‍टाचार का काम किया आपने, अब आप सुनिए।

माननीय सभापति महोदय, समझौता समिति में दिनांक 10 अप्रेल, 2002 को निर्णय दिया था लेकिन इससे पूर्व ही विगत सरकार ने 26.5.2000 के नियमन के आदेश में संशोध्‍न कर 16.2.2000 को आदेश ला चुकी थी जिसके अनुसार जिन योजनाओं में दो बीघा से अधिक राजकीय भूमि सम्मिलित है एवं 50 प्रतिशत से कम निर्माण है, ऐसा नियमन राज्‍य सरकार द्वारा गठित मंत्रि मण्‍डलीय समिति ही कर सकती थी लेकिन विगत सरकार द्वारा भू-माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए गठित समझौता समिति ने नियम विरूद्ध तरीके से नियमन के आदेश दे दिये। यह दूसरा उदाहरण है, अब और सुनिए। समझौता समिति ने दूसरे प्रकरण में बीड़ खातीपुरा में खसरा नम्‍बर 145/147 कुल रकबा 18 बीघा 12 बिस्‍वा जिसकी कीमत आज की तारीख में, सुनिए जोशी जी, आज की तारीख में सौ करोड़ से अधिक है, की भूमि को राज्‍य सरकार के नियमन के आदेश 26.5.2000 के अनुसार चित्रकूट योजना में आरक्षित 1650 रुपये प्रति वर्ग मीटर की चौथाई 412.50 पैसे प्रति वर्ग मीटर की दर से सौ करोड़ की 1 करोड़ 16 लाख रुपये में नियमन के आदेश दे दिये और ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं। पर यह समझौता समिति में ...(व्‍यवधान)... फिर आप खड़े हो गये ?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): आप बिराजें।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सभापति: माननीय नाथद्वारा से आने वाले सदस्‍य। ...(व्‍यवधान)... बोल रहे हैं, जवाब दे देना।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): बिराजें आप।

श्री सभापति: यह डिमाण्‍ड पर बोल रहे हैं, बोलने के लिए आसन ने आज्ञा दी है, यह बोल रहे हैं, आप अपना नम्‍बर आए तब बोल लेना।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): इनके पापों को उजागर कर रहा हूं, इनको बड़ी तकलीफ हो रही है।

श्री सभापति: अब आप प्‍लीज कान्‍क्‍लूड करें।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): इसीलिए 200 में से 124 सीटें आईं और आपकी 56 आई।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): अगली बार भी जीतें और डंके की चोट पर जीतेंगे।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): मुंगेरी लाल के हसीन सपने हैं, बिराजिए।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य ।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): मुंगेरी लाल के सपने देखना बन्‍द कर दो।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): 000

श्री सभापति: कृपया आपस में बात नहीं करें। माननीय आहोर से आने वाले सदस्‍य, आप बीच बीच में क्‍यों खड़े हो जाते हैं। मेरे को समझ में नहीं आता।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000 

सुरेन्‍द्र/अरुण/28.3.07/14.40/2g

 

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): माननीय सभापति महोदय, जो समझौता समिति ने गड़बड़ी की उसके कारण ही हमारी सरकार बनने के बाद....

श्री सभापति: अब आपने मुद्दे बहुत बता दिये।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): हमने 6 अगस्‍त, 2004 को इस समझौता समिति को भंग कर दिया। इस समझौता समिति ने कई कीर्तिमान स्‍थापित किये थे इसलिए हमने आते ही 2004 में उसको भंग कर दिया।

  माननीय सभापति महोदय, सेज के मामले में मैं कहूंगा। विपक्ष के कई माननीय सदस्‍यों ने समय-समय पर जयपुर में स्‍पेशल इकोनॉमिक जोन स्‍थापित किया गया उसके बारे में शंकाएं प्रकट कीं, उसके बारे में आलोचनाएं कीं। (व्‍यवधान) आप अपना टाइम आये तब बोल लेना, मुझे बोलने दो। (व्‍यवधान) आप चिंता क्‍यों कर रहे हो? माननीय सभापति महोदय, चाइना और अन्‍य देशों में....

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): चिंता तो इस बात की है कि आप पीछे के रिकार्ड तोड़ रहे हो।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): फिर खड़े हो गये। माननीय सभापति महोदय, चाइना और अन्‍य देशों का तीव्र आर्थिक विकास जिस प्रकार से हुआ है उसको देखते हुए हमारी केन्‍द्रीय सरकार ने भी यह निर्णय किया कि हमारे देश के विभिन्‍न शहरों में सेज की स्‍थापना की जाए और महिन्‍द्रा एण्‍ड महिन्‍द्रा के सहयोग से चेन्‍नई में सेज के माध्‍यम से जो विकास हुआ उसको देखते हुए हमारी सरकार ने भी यह फैसला किया कि जयपुर में सेज की स्‍थापना की जाए। अब आरोप लगाये जा रहे हैं कि महिन्‍द्रा एण्‍ड महिन्‍द्रा को सस्‍ते दामों पर जमीन दे दी। माननीय सभापति महोदय, मैं बताना चाहूंगा कि हमने डी एल सी की जो रेट है उस रेट पर सेज को जमीन दी है। यह भी कहा गया कि किसानों का बड़ा भारी विरोध है। माननीय सभापति महोदय, मैं बताना चाहूंगा कि राजस्‍थान के इतिहास में पहली बार और राजस्‍थान पूरे हिन्‍दुस्‍तान में एक इस प्रकार का स्‍टेट है कि जहां 25 प्रतिशत जमीन, 20 प्रतिशत रेजिडेंशियल और 5 प्रतिशत कॉमर्शियल, यह जमीन हमने किसानों को मुआवजे के रूप में दी है और आज उसी का यह परिणाम है कि कांग्रेस के कई नेता किसानों के पास गये कि विरोध करो, विरोध करो परन्‍तु कोई किसान इनके साथ विरोध करने को तैयार नहीं हुआ। आज यह स्थिति है हमारे जयपुर के आस-पास के किसानों की.....

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): एक ही किसान घनश्‍याम जी हैं।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): आप विराजो, फिर खड़े हो गये। आज किसानों की यह स्थिति है कि सब के तो बंगले हो गये, सब के पास स्‍कार्पियो गाड़ी हो गई। इतनी सम्‍पन्‍नता हमारे जयपुर शहर के आस-पास के किसानों को इस सेज के कारण मिली है कि आज सारे किसान इस सेज की भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे हैं और यह कह रहे हैं और आगे आकर के अपनी जमीन को सरेण्‍डर कर रहे हैं जबकि ये कह रहे हैं कि इसका विरोध हो रहा है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): लड़की कभी ससुराल गई नहीं और बहू कहलाई नहीं। आपने तो ग्रामीण क्षेत्र में चुनाव कभी लड़ा नहीं, ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा मंत्री जी ने चुनाव लड़ा है। शहर से तंग आकर के ग्रामीण क्षेत्र में आये हैं।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): आपने कभी शहरी क्षेत्र में चुनाव नहीं लड़ा।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): जो आप कह रहे हो वो इनसे कहला दो।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): इनका नम्‍बर आयेगा तो ये भी बोल देंगे। आप विराजो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): किया है तो आप करा दो इनका समर्थन।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): ठीक है, विराजो।

श्री सभापति: इन्‍होंने कई जगह से चुनाव लड़े हैं।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): माननीय सभापति महोदय, मेरा तो यह कहना है कि सेज की स्‍थापना के बाद 5 साल में लगभग 14 हजार करोड़ रुपये का इन्‍वेस्‍टमेंट होगा और प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष रूप से कम से कम एक लाख लोगों को इसमें रोजगार मिलेगा। मैं तो यह कहूंगा कि जिस प्रकार आपने जयपुर में सेज की स्‍थापना की है, बाकी बड़े शहरों में भी सेज की स्‍थापना निश्चित रूप से की जानी चाहिए।

माननीय सभापति महोदय, इसी प्रकार से हमारे विपक्षी मित्रों ने जे डी ए द्वारा लैंड बैंक स्‍थापित किया उसकी भी आलोचना की। मैं बताना चाहूंगा कि लैण्‍ड बैंक की स्‍थापना से 55430 बीघा जमीन....

श्री सभापति: प्‍लीज अब वाइंड-अप करें।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): माननीय सभापति महोदय, आधा टाइम तो इन्‍होंने खराब कर दिया। मुझे 15 मिनट ही हुए हैं बोलते हुए। आधा टाइम खराब कर दिया उन्‍होंने।

श्री सभापति: आप 5 मिनट में कन्‍क्‍लूड कर दें। आप फटाफट 5 मिनट में कर दें।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): कितना टाइम खराब कर दिया मैं क्‍या करूं। आप बोलने तो दो साहब।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सभापति महोदय, इनका परपज पूरा हो गया। जिस मकसद से ये कर रहे हैं वह पूरा हो गया आपका। अब बैठ जाओ आप।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): आप विराजो। आपके कहने से नहीं बैठूंगा। माननीय सभापति महोदय, लैण्‍ड बैंक में 55430 बीघा जमीन हमने चिह्नित की है। लैण्‍ड बैंक बनाया है उसमें 13293 बीघा जमीन आवासीय, 5215 बीघा जमीन कॉमर्शियल, 11547 बीघा जमीन संस्‍थानिक और 16549 बीघा जमीन वातावरण के लिए चिह्नित की है। अब जब भी हम कोई रेजिडेंशियल, कॉमर्शियल या इंस्‍टीट्यूशनल योजना बनायेंगे तो हमको जमीन ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी, हमने जो 55430 बीघा जमीन चिह्नित की है उसमें से हम उनको जमीन दे पायेंगे।

माननीय सभापति महोदय, अब मैं जयपुर शहर की कुछ जो महत्‍वपूर्ण समस्‍याएं जे डी ए से सम्‍बन्धित हैं उनके बारे में भी आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा। माननीय सभापति महोदय, पृथ्‍वीराज नगर योजना में 22 राजस्‍व गांवों की 11618 बीघा जमीन पूर्व में अवाप्‍त की गई थी। वर्तमान स्थिति में माननीय मुख्‍य मंत्री जी ने जुलाई, 2005 में इसका सर्वे कराया था तो 11618 बीघा जमीन में से मात्र 2800 बीघा जमीन खाली पड़ी है और बाकी जमीन पर मकान बन गये, प्‍लॉट बन गये। प्रजातंत्र में लगभग 8 हजार बीघा जमीन पर बने हुए मकानों को तोड़ा नहीं जा सकता इसलिए मैं आपके माध्‍यम से सरकार से अनुरोध करना चाहूंगा कि इनको अवाप्ति से मुक्‍त किया जाए और जो बने हुए प्‍लॉट हैं उनको कैम्‍प लगाकर नियमित किया जाए।

सभापति महोदय, इसी प्रकार से मेरे निर्वाचन क्षेत्र में आगरा रोड पर मास्‍टर प्‍लान में इकोलॉजिकल जोन दिखाया हुआ है। आज उस इकोलॉजिकल जोन की भी यह स्थिति है कि वहां हजारों मकान बन गये सोसाइटियों के माध्‍यम से। प्रजातंत्र में इतने मकान तोड़े जाना सम्‍भव नहीं है और हाई-कोर्ट ने भी यह कहा है कि इकोलॉजिकल जोन में नहीं बचा तो दूसरे स्‍थान पर इकोलॉजिकल जोन के लिए जमीन रिजर्व कर दी जाए। तो मेरा यह कहना है कि उस निर्णय के परिप्रेक्ष्‍य में जो इस प्रकार आगरा रोड पर कॉलोनीज बसी हुई हैं उनको इकोलॉजिकल जोन से मुक्‍त किया जाए और कैम्‍प लगाकर के उनका नियमन किया जाए।

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): इसी प्रकार से माननीय सभापति महोदय, जयपुर शहर में अभी जे डी ए ने सर्वे कराया था कोर्ट के निर्देश पर जिसमें 55440 इस प्रकार की व्‍यावसायिक गतिविधियां हैं जो रेजिडेंशियल एरिया में चल रही हैं। माननीय सभापति महोदय, दिल्‍ली में जिस प्रकार से सीलिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया और व्‍यापारियों में हड़कम्‍प मच गया, आज जयपुर में भी यह स्थिति आने वाली है। 55 हजार कॉमर्शियल एक्टिविटीज रेजिडेंशियल एरिया में चल रही हैं तो मेरा यह कहना है कि सरकार समय रहते मास्‍टर प्‍लान में इस‍के लिए जो भी परिवर्तन करना सम्‍भव हो वह परिवर्तन करके इस प्रकार की जो कॉमर्शियल एक्टिविटीज रेजिडेंशियल एरिया में चल रही हैं उनके बारे में निर्णय लें। मैं 5 मिनट और लूंगा, प्‍लीज 5 मिनट।

श्री सभापति: अब 5 मिनट नहीं।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): छठी मिनट नहीं लूंगा, पांच मिनट और लूंगा।

श्री सभापति: आप एक मिनट में बात समाप्‍त करें।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): इसी प्रकार से सहकारी समितियों के द्वारा जो कृषि भूमि पर काटी गई कॉलोनियां हैं, जे डी ए इनका समय-समय पर नियमन शिविर लगाता है उसके बाद भी अभी तक 1100 योजनाएं इस प्रकार की हैं जहां हजारों भूखण्‍डधारी नियमन से वंचित हैं और भूखण्‍डों का नियमन नहीं होने के कारण वहां के नागरिक बिजली, पानी, सड़क इत्‍यादि मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। पिछले महीने जे डी ए ने कैम्‍प लगाने की घोषणा भी की थी परन्‍तु राज्‍य सरकार के वित्‍त विभाग द्वारा अधिसूचना जारी की गई क्रमांक प.2 (26) वित्‍त/कर/98-124 दिनांक 3.2.07 को और उसमें यह कहा है कि पूर्व कैम्‍पों में भूखण्‍ड का पट्टा लेने से वंचित भूखण्‍डधारियों के आरक्षित दर पर इनका रजिस्‍ट्रेशन होगा।....

 

Lpm/akt/1450/2h/2832007

 

जबकि आज तक यह व्‍यवस्‍था थी कि नियमन की जो राशि थी उसके आधार पर रजिस्‍ट्रेशन होता था, मेरा यह कहना है कि इस अधिसूचना को वापस ले सरकार, इसी प्रकार से हाऊसिंग बोर्ड और रीको द्वारा जो ज़मीनें अवाप्‍त की गई थी, उनमें कॉलोनियां बस गई है वो जेडीए को एनओसी दे, उसके बाद ही इन कॉलोनियों का नियमन हो सकता है तो इस प्रकार की जो कॉलोनियां है उनकी हाऊसिंग बोर्ड और रीको एनओसी दे जिसके कारण उनका भी नियमन हो सके।

श्री सभापति: धन्‍यवाद। माननीय श्री ज्ञानचंद पारख।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): इसी प्रकार से, मैं पाँच मिनट के लिए कितना समय मेरा खराब किया है...

श्री सभापति: नहीं, माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य...

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): पाँच मिनट लूंगा बस...

श्री सभापति: देखो साढ़े चार बजे मुख बंद का प्रयोग करना है प्‍लीज, मैं रिक्‍वेस्‍ट कर रहा हूं आपसे।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): अच्‍छा, आपने समय दिया उसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद। (व्‍यवधान)

श्री सभापति: आपका ले रहे हैं अब इनके बाद।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): कब ले रहे हैं इन्‍होंने टाइम लिया इससे दुगुना ये ले लेंगे।

श्री सभापति: आप दस मिनट में खत्‍म करें प्‍लीज।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): माननीय कालीचरण जी अभी जो अवाप्ति से बाहर करनी है भूमि उसमें आपका मकान तो नहीं है।

श्री सभापति: आप बिराजे, आप मुद्दे की बात कर ले फटा-फट।

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज शहरी विकास पर चर्चा है और शहरी विकास एक ऐसा मुद्दा है जिसमें अधिकांश काम जो है वह स्‍थानीय निकायों के जिम्मे है। किसी व्‍यक्ति का हो सके राज्‍य सरकार से साल में या दो साल में एकाध बार काम पड़ता हो लेकिन शहर में रहने वाले हर व्‍यक्ति को स्‍थानीय निकाय से जरूर काम पड़ता है और इसलिए बहुत ज्‍यादा आवश्‍यक है इनको सहायता दे कोई दिक्‍कत नहीं, अधिकार भी दे, राशि भी दे उसमें भी दिक्‍कत नहीं है लेकिन राज्‍य सरकार के अनुरूप यह काम करे इसके लिए बहुत प्रभावी अंकुश लगाना भी आज की आवश्‍यकता हो गई। सारे लोग चाहते हैं कि शहर की सड़कें अच्‍छी हो, शहर सुंदर हो, व्‍यवस्थित बसा हो, गंदगी नहीं हो, सुंदर बग़ीचे भी हो, खेल के मैदान भी हो, कोई शादी समारोह करना है तो उसका भी स्‍थान हो, यह हर व्‍यक्ति चाहता है। कुछ बड़े शहर छोड़ दो आप राजस्‍थान के और उसके बाद में आप छोटे शहरों में चले जाओ तो इन सारी चीजों की, इन सारी सुविधाओं की आपको वहां कमी नजर आएगी। बहुत बड़ी-बड़ी बस्तियां बस गई, बहुत बड़ी बस्‍ती है, न बग़ीचा है, न कोई खेल का मैदान, न कोई शादी समारोह करने की कोई जमीन और इसके पीछे कारण एक ही है कि हमने सारा काम स्‍थानीय निकाय के जिम्मे सौंप दिया उस पर नजर नहीं रखी कि हमारे जो भी स्‍थानीय निकाय है वह जनता की आशा के अनुरूप काम कर रहे हैं या नहीं कर रहे हैं, सहायता के नाम पर जो छूट दी, जैसे जौहरी बाजार से आने वाले माननीय सदस्‍य कह रहे थे सहायता के नाम पर जो छूट दी उस छूट का लाभ जनता को मिलने की बजाय भ्रष्‍टाचार पनपाने को हो रहा है। आज भ्रष्‍टाचार के कारनामे आप देखो स्‍थानीय निकायों में तो शायद आँखें  खुली की खुली रह जाए। हमने दिया उनको अधिकार का काम का, हमारा काम करेंगे, हमें सुविधा देंगे, आवश्‍यकता होगी तो हमें सस्‍ती दर पर जमीन या प्‍लॉट देंगे, गरीब को और आवश्‍यकता हुई तो किश्‍तों में मकान देंगे, यह स्‍थानीय निकाय से एक व्‍यक्ति उम्‍मीद करता है लेकिन उम्‍मीद के विपरीत जब उसका पट्टाशुदा प्‍लॉट स्‍थानीय निकायों के चुने हुए जन-प्रतिनिधि उसमें भी फर्जीवाड़ा करके हड़पने का प्रयास करते हैं और उस समय भी स्‍थानीय निकाय अगर प्रभावी कार्यवाही नहीं कर सकता तो आप चाहे कितनी भी कल्‍पनाएं कर लो, कितनी भी छूट दो, कितने भी अधिकार दे दो, चाहे कितना भी पैसा दे दो जनता को उसका लाभ मिलने वाला नहीं है। यह नहीं है कि भ्रष्‍टाचार सिर्फ जयपुर में हुआ है, जिस शहर में चले जाओ भ्रष्‍टाचार के कारनामों की लंबी लिस्‍ट है और आज मैं यह कह सकता हूं कि उस लंबी लिस्‍ट में मेरा पाली नगर परिषद पहले नम्‍बर पर है, अगर आप जांच करवा दे ईमानदारी से तो हम भ्रष्‍टाचार के मामले में सबसे आगे पाली में है, सबसे आगे पाली में है नगर परिषद में जो भ्रष्‍टाचार ने जो रिकॉर्ड कायम किया फर्जी पट्टे बनाने में, रिकार्ड में हेराफेरी करने में, ओवर-राईटिंग करने में और यह मेरी बात नहीं एक नहीं, एक के बाद एक दस बार जिला कलक्‍टर को पाली की जनता के पाली के नागरिकों की ओर से ज्ञापन दिये गये कि साहब यह भूखण्‍ड मेरा है, मेरे पास इसका असली पट्टा है और कोई दूसरा व्‍यक्ति भी इसका पट्टा बना ले आएगा, नगर परिषद से महीनों तक अख़बार में आता है इस भूखण्‍ड का फर्जी पट्टा बन गया, इस रिकार्ड में हेराफेरी हो गई, इस प्‍लॉट में हेराफेरी हो गई, एक के बाद एक कई प्रकरण और जयपुर से भी जांच अधिकारी आते हैं और जांच अधिकारी जांच करते हैं और जांच जब करते है तो इसमें स्‍पष्‍ट पाते हैं वों देखते है वों कि वाकई में बहुत बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है, ओवर-राईटिंग की गई है रिकार्ड में, बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया और फर्जी पट्टे भी बन गये, यह मानते भी है वों लेकिन किसने बनाए? तो उस मामले में जांच का विषय कह कर अपने आपको अंजान बना देते हैं कि किसने बनाएं? जब इतनी बड़ी संख्‍या में रिकार्ड में हेराफेरी हुई है, रिकार्ड में ओवर-राईटिंग हुई है तो कोई ऑफिस में बैठकर वो काम नहीं हो सकता, ऑफिस का कोई रिकार्ड बाबू है (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अपना रजिस्‍टर घर पर तो भेजने वाला नहीं है (व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य आप बिराजे।

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): वह भी जांच का विषय है आप बिराजे।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह भी जांच का विषय है, इसकी भी जांच कराइए कि हेराफेरी किसने की है? पट्टे का रजिस्‍टर कौन घर पर ले गया है और 24 घंटे अपने पास रखकर के हेराफेरा किसने की? इसकी भी जांच कराइए।

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): जांच कराये चाहे हेराफेरी किसने भी की हो (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): एक बार तो जांच करा ली, एक दफे तो इसकी जांच हो गई...

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य..

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): और रोज करने से माननीय सभापति महोदय, रोज इनका एक ही रहता है

श्री सभापति: आप बिराजे।

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): माननीय रायपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य हेराफेरी किसने की है, वह चाहे किसी पार्टी का हो...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): जांच कराई जाए।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य आप आसन को संबोधित कर रहे हैं।

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): भ्रष्‍टाचार करने वाला, हेराफेरी करने वाला चाहे किसी भी पार्टी को, अगर आप चाहते हैं कि स्थानीय निकायों में भ्रष्‍टाचार खत्‍म हो, समाप्‍त हो, स्‍थानीय निकाय सही तरीके से सही काम करे तो चाहे हेराफेरी करने वाला किसी भी पार्टी से संबंधित हो उस और देखने की आवश्‍यकता नहीं, चाहे किसने भी की हो, उस गहराई तक आज जाए मान्‍यवर, एक नहीं दस मुक़दमे पुलिस में दर्ज होते हैं, दस मुक़दमे और दस में भी स्‍पष्‍ट बताते हैं कि इन-इन व्‍यक्तियों ने इस-इस तरीके से मुझ से पैसे की मांग की या हमसे यह कहा कि आप यह काम करें, हम आपका यह काम कर देंगे। स्‍पष्‍ट मुक़दमे दर्ज हैं पर मात्र हमारे जो जांच अधिकारी हैं यह पाने के बावजूद कि बहुत बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है, उस गड़बड़ी के लिए कौन-कौन जिम्‍मेवार हैं उस तक नहीं पहुंच पाते मात्र एक दो बाबुओं के ऊपर तलवार चलाकर अपनी कार्यवाही की इति कर देते हैं, वो एक दो बाबुओं के ऊपर , अब बाबू बेचारे का क्‍या दोष? अब बाबू से कोई रजिस्‍टर मांगे, कोई फ़ाइल मांगे, वह बाबू है किसी जिम्‍मेदार आदमी ने फाइल मांगी होगी, रजिस्‍टर मांगें होंगे घर पर मंगवाई होगी और उसकी हिम्‍मत नहीं होगी मना करने की, जैसे चाहे कोई भी हो आप बिलकुल जांच करवा ले ईमानदारी से जांच करवा दे माननीय रायपुर से आने वाले सदस्‍य आपको अच्‍छी तरह से पता है...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अगर यह हेराफेरी किस स्‍तर पर हुई है (व्‍यवधान)

श्री सभापति: रायपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, अंकित नहीं हो।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री सभापति: आप बीच में क्‍यों खड़े हो रहे हैं? माननीय सदस्‍य आप आसन को संबोधित कर रहे हो।

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): मैं तो इनको संबोधित कर रहा हूं मुझे टोक रहे हैं....

श्री सभापति: नहीं, अब कहां टोक रहे हैं?

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): मुझे अफसोस है कि माननीय रायपुर से आने वाले सदस्‍य भ्रटाचारियों को संरक्षण दे रहे हैं, उनको शह दे रहे हैं, मैं आरोप लगा रहा हूं इनके ऊपर....

 

Bhs/akt/28.3.07/15.00/2j

 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री सभापति: आप विराजें।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): मैंने किसी का नाम नहीं लिया है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): 000

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री सभापति: आप विराजें। माननीय सदस्‍य, आप कनक्लूड करें।

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): मान्‍यवर, मेरा बिलकुल यह कहना है कि ये जो आपके स्‍थानीय निकाय हैं ये वो छेद वाली मटकी होती है न उसके समान है ऊपर से चाहे कितना भी पानी डाल दो अन्‍दर कि मटकी भर जाएगी पर मटकी में छेद होगा तो सारा पानी बह कर निकल जाएगा। अन्‍दर बचने वाला कुछ नहीं। राज्‍य सरकार कितना भी पैसा दे दे उनको चाहे शहरी रोजगार के नाम से दे दे, या कच्‍ची बस्‍ती विकास के नाम से दे दे या चुंगी के पुनर्भरण के नाम से दे दे या बड़ी-बड़ी राशि कुछ भी दे दे अगर आपने भ्रष्‍टाचार पर रोक नहीं लगायी, कोई प्रभावी अंकुश लगाने के लिए कोई प्रावधान नहीं किये और भ्रष्‍टाचारियों के खिलाफ यदि आपने कोई कार्यवाही नहीं की तो शहर हमारे सुन्‍दर हों, अच्‍छे हों इसका सपना सपना रह जाएगा लोगों का और लोग इसी प्रकार अपनी छोटी मोटी आवश्‍यकता जो होती है नगर परिषद से होती है जो उम्‍मीद करते हैं कि नगर परिषद हमारा यह काम करेगी उनकी उम्‍मीदें भी हम कभी पूरी नहीं कर सकते। 

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): नहीं मेरा जो मेन मुद्दा है जो राज्‍य सरकार से मेरी मांग है ..।

श्री सभापति: हां फटाफट मांग कर लो।

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): मेरी जो राज्‍य सरकार से मांग है माननीय मंत्री जी चले गये यहां से पता नहीं क्‍यों। मेरा पुन: वो ही, मैंने कहा कि हमारी पाली नगर परिषद भ्रष्‍टाचार के मामले में आज अगर ईमानदारी से जांच करके देखें तो शायद हम पहले नंबर पर होंगे इसलिए मेरा बिलकुल है कि ये भ्रष्‍टाचार समाप्‍त कैसे हो इसके लिए जो भी दोषी हैं जांच में भी दोषी पाया, जांच पूरी तो करें अधूरी जांच आपकी है मान लो ये हुआ लेकिन किसने किया, इस तह तक पहुंचने की जो आवश्‍यकता है वहां तक भी जाना जरूरी है। उसके बाद में अगर गहराई से जांच करोगे जैसे उदाहरण है फर्जी पट्टा बना 37-38 प्‍लॉट है नया गांव में भूखंड संख्‍या 37-38 का फर्जी पट्टा बना।  मान्‍यवर, जिसके पास असली पट्टा है जिसकी पत्रावली नगर परिषद में मौजूद, जिसकी रसीद बुक नगर परिषद में मौजूद उन सारे लोगों को इजाजतें मिलती हैं तीन चार महीने बाद और जिसका ऑरिजनल पट्टा गुम हो चुका है जिसकी मूल पत्रावली परिषद कार्यालय में उपलब्‍ध नहीं, रसीद बुक उपलब्‍ध नहीं, नक्‍शे से मिलान करें अगर मौके पर नक्‍शे से मिलान करें तो उसमें भी ढेरों विभिन्‍नताएं और उसके बावजूद भी यदि दस दिन में इजाजत मिल जाए और उसके बाद हमारे शक की सूई वहां तक नहीं पहुंचे। बाकी इजाजतें तीन चार महीने बाद जिनके पास ऑरिजनल पट्टा है उनको मिलती है तीन चार महीने बाद और जिसके पास फर्जी पट्टा है कोई रिकार्ड परिषद में नहीं और इजाजत मिल जाती है और जो उस फर्जी पट्टे पर बिना मिले पत्रावली, बिना रसीद बुक के बिना मौके पर जमीन मिलान किये इजाजत देने में जो भी भागीदार हैं उनके विरुद्ध कार्यवाही में भी हम किसी प्रकार की कोई जांच में स्‍पष्‍ट नहीं कर पाते। साथ ही पाली में इंटेक ऑफिस को बहुत बड़ी जमीन दे दी पाली नगर परिषद ने और उसमें शर्त संख्‍या-4 में स्‍पष्‍ट है बिन्‍दु संख्‍या 4 में स्‍पष्‍ट है कि ये भूमि सशर्त दी गई है इसका उपयोग मात्र कार्यालय के लिए किया जाएगा और आज मौके पर जाएं, हमारे जांच अधिकारी भी मौके पर गये तो बड़ा कॉम्‍प्‍लैक्‍स बना हुआ है 1 नहीं 6 दुकानें और किराये पर दे दी। वो 6 दुकानें कोई एक घंटे में या एक दिन में बनने वाली नहीं हैं। ये 6 दुकानें बनीं कई बार जनता ने शिकायतें की, शिकायतें करने के बाद भी नगर परिषद ने कोई कार्यवाही नहीं की तो उसके बाद तो कुछ मानेंगे आप कि नगर परिषद में कहीं न कहीं जान बूझ कर इस बात की अनदेखी की। यही नहीं नया गांव में भूखंड संख्‍या 5 का भी फर्जी बेचान हो जाए, दो साल बाद ये मुद्दा परिषद की बोर्ड की मीटिंग में उठा कि एक पार्षद ने इस प्‍लॉट का जो नगर परिषद का है इसका फर्जी बेचान कर दिया और जिसके नाम फर्जी बेचान किया वो महिला जो अनपढ़ है, गरीब है, बोर्ड की मीटिंग में आकर चिल्‍लाती है, हल्‍ला करती है कि ये प्‍लॉट मुझे इस व्‍यक्ति ने दिया है और उसके बाद में उसका पट्टा बनाने के नाम पर जो उसके बेचान के कागज हैं ऑरिजनल उसको धोखा देकर सभापति ले लेते हैं यह बात पुलिस रिकार्ड में है ले लेते हैं। उसके बाद भी हम कार्यवाही करने में हिचकते हैं। मेरा बिलकुल स्‍वायत्‍त शासन मंत्री से आग्रह रहेगा विपक्ष चाहे हल्‍ला करे या न करे अगर किसी ने भ्रष्‍टाचार किया है, किसी ने गड़बड़ की है, हेराफेरी की है, रिकार्ड में ओवरराइटिंग की है चाहे कोई भी हो चाहे बीजेपी का हो, चाहे कांग्रेस का हो, भ्रष्‍टाचारी भ्रष्‍टाचारी है और गलत काम करने वाला गलत काम करने वाला है सरकार की ओर से उसके विरुद्ध कार्यवाही की इस बात की...।

श्री सभापति: धन्‍यवाद। माननीय श्री बृजकिशोर शर्मा।

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): धन्‍यवाद। सभापति महोदय, आपने मुझे समय दिया उसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): माननीय सभापति महोदय, आज हम मांग संख्‍या 8,20,29,32 पर विचार कर रहे हैं और इसमें नगर आयोजना एवं प्रादेशिक विकास की भी चर्चा कर रहे हैं। मैं उसमें अपने आपको सम्मिलित करते हुए निवेदन करना चाहता हूं कि राजस्‍थान के 6 बड़े शहर जिनमें जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा, अजमेर में करीब चालीस प्रतिशत जनता शहरी जनता रहती है और अगर कुछ और बड़े शहरों को जोड़ लें तो करीब ये संख्‍या पचास-पचन प्रतिशत हो जाती है। अत: ये जरूरी है कि शहरी क्षेत्र की मूलभूत आवश्‍यकता तथा यहां पर चल रही गतिविधियों पर गंभीरता से विचार किया जाए। सबसे पहले जयपुर राजस्‍थान की राजधानी है और उसमें उसकी चर्चा की जाए और हालात जो सामने आये हैं और जो तथ्‍य उजागर हुए हैं वो बड़े चौंकाने वाले हैं।  जयपुर को अगर दो भागों में बांटा जाए जिसका संस्‍थापन जेडीए और नगर निगम करता है। सबसे पहले मैं जेडीए की चर्चा करना चाहता हूं। जेडीए में पिछले तीन वर्षों में सरकार जब से आयी है तब से आज तक कितने घोटाले हुए हैं उन सबका सोच कर ऐसा लगता है कि ये सरकार प्रापर्टी डीलर्स की सरकार या भूमाफियाओं की सरकार बन कर रह गयी हैं।  पिछले तीन सालों में 90 बी की कार्यवाही कितनी बार बंद हुई कितनी बार खुली यह सर्वविदित है और जयपुर ही नहीं राजस्‍थान की आम जनता इस बात को अच्‍छी तरह से जानती है लेकिन फिर भी मैं आपके माध्‍यम से सदन के ध्‍यान में लाना चाहता हूं कि 90 बी की कार्यवाही में किस तरीके से सरकार ने घोटाले किये हैं। किस तरीके से 90 बी की कार्यवाही कब खोली और कब बंद की। इसका उदाहरण मैं पेश करना चाहता हूं। 7 मार्च, 2005 को रोक लगी। 15 जुलाई, 2005 को रोक हटाई और 16 जुलाई, को फिर रोक लगा दी। क्‍या जरूरत आ गयी थी एक दिन के लिए रोक खोल दी और उसमें किसको किया पास, किसकी फाइलें पास की, किसकी 90 बी की कार्यवाही की वो मैं सदन के ध्‍यान में लाना चाहता हूं। ओमेक्‍स एक फाइल जिसमें आठ सौ बीघा जमीन की 90 बी की कार्यवाही करके उसको पास किया। क्‍या जरूरत थी, ओमेक्‍स सिटी जो आ रही है उसकी सरकार को क्‍या जरूरत थी उसको आठ सौ बीघा जमीन की 90 बी की कार्यवाही करने की? और इसी तरीके से पाँच सौ बीघा की फाइल वाटिका की एक दिन में की।  एक दिन में दो फाइलें मंजूर करने की खातिर 90 बी की कार्यवाही खोली और वो कार्यवाही पूरी होते ही 90 बी की कार्यवाही बंद। सरकार ने 90 बी की बदनामी से बचने के लिए जो पिछले तीन साल से बारबार होती रही उससे बचने के लिए  आप जानते हैं अच्‍छी तरीके से जयपुर में आम चर्चा है और जयपुर में ही नहीं राजस्‍थान में आम चर्चा है ....

 

कैलाश     28.3.07  15.10  (1) 2k

 

कि 90 बी की कार्यवाही में 3 से 5 लाख रुपये का खर्चा आता है और जब इसकी बदनामी हो गई और उस बदनामी से बचने के लिये सरकार एक भले, ईमानदार जेडीसी को ले आये। उस जेडीसी के आने के बाद सरकार को यह कैसे मंजूर होता, मंत्री जी को यह कैसे मंजूर होता कि एक ईमानदार जेडीसी कैसे इसमें आ जाये और 90 बी की कार्यवाही वह कैसे खोले । 10 दिन भी चार्ज लिये हुए नहीं हुए और 10 दिन में ही वापस 90 बी के अधिकार माननीय मंत्री जी ने ले लिये । बडी अच्‍छी बात है, यह समझ में नहीं आता कि मंत्री जी को 90 बी से ऐसा क्‍या मोह हो गया है, किस लिए । मैं और उदाहरण देना चाहता हूं आज जेडीए में 800 फाइलें जो करीब 25 हजार बीघा की है वह 90 बी के इंतजार में पडी है । क्‍यों, सब दुनिया जानती है और आप सब भी अंदाजा लगा सकते हैं कि जब तक 90 बी नहीं होगी, जब तक जिस तरह से ओमेक्‍स और वाटिका ने 90 बी एक दिन में करवाई वह भी अगर वही रास्‍ता अख्‍तियार कर लेंगे तो यह फाइलें भी जल्‍दी ही निकल जायेगी । 90 बी होने के कारण आज जयपुर शहर में 1350 कालोनियां, अभी जौहरी बाजार से आने वाले माननीय विधायक कह रहे थे 1100 कालोनियां है, लेकिन मेरी जानकारी के मुताबिक 1350 कालोनियां ऐसी हैं जिनका नियमन होना बाकी है और उनमें अधिकांश कालोनियों का सिर्फ इसलिए नियमन नहीं हो रहा कि वह 90 बी के इंतजार में पडी है और वह 90 बी कब हो, 90 बी के लिये जब तक उसकी वाजिब फीस, वाजिब खर्चा जब तक सरकार के पास नहीं पहुंचे तब तक वह 90 बी नहीं होगी और उन कालोनियों का रेगुलराइजेशन नहीं होगा ।

सभापति महोदय, इसी तरीके से आपके माध्‍यम से मैं सदन के ध्‍यान में लाना चाहता हूं अभी जौहरी बाजार से आने वाले माननीय सदस्‍य बडी सेज की बात कर रहे थे, ठीक है । सेज का मामला निश्चित रूप से केन्‍द्रीय सरकार का मामला है । केन्‍द्रीय सरकार की एक अच्‍छी योजना है । हम सेज का कोई विरोध नहीं कर रहे हैं लेकिन सेज में जिस तरीके से क्‍लाज डाला गया है कि अगर एम एण्‍ड एम तीन साल में सेज का कार्यक्रम ठीक नहीं चले, वह फेल हो जाये तो तीन साल में उस सेज की जमीन को बेच कर जा सकता है । ऐसा क्‍लाज शायद हिन्‍दुस्‍तान के इतिहास में कहीं भी नहीं लगा है । बडी अच्‍छी बात है वह जाने इस बात को । इस सरकार ने कैसे लुभावने कार्यक्रम घोषित किये वह मैं बताना चाहता हूं । स्‍पोर्ट सिटी, फिल्‍म सिटी, नोलेज कोरिडोर, वाटिका, ओमेक्‍स, अंसल, सन सिटी, आईटी, स्‍पेशल इक्‍नोमिक जोन, पार्कों की जमीन, डीएलएफ, सेज, जल महल योजना इन सब में सरकार ने कई तरह के घोटाले किये हैं । एक दो नहीं मैं उसके उदाहरण दे रहा हूं । इस स्‍पोर्ट सिटी में पहले घोषणा की थी कि स्‍पोर्ट सिटी 692 एकड़ में आयेगी और कहां आयेगी जयपुर दिल्‍ली रोड पर अचरोल के पास और अब क्‍या हुआ । यह फैसला है 20.10.06 का, अभी तो 6 महीने भी नहीं गूजरें और फैसला बदल दिया । 692 एकड़ जमीन में जिस किसान की जमीन आ रही थी उस किसान ने अपनी जमीन को आते हुए देख उस जमीन को ओने पोने भाव में बेच दी । किस को बेच दी, जो सरकार के प्रोपर्टी डीलर हैं ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय स्‍वायत्‍त शासन मंत्री जी को अगर आप यहां बुला  लें ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नोट कर रहे हैं ।

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): 692 एकड का जो फैसला हुआ था उसको 6 महीने भी नहीं हुए और 6 महीने में ही वह 400 बीघा पर रह गई । आपने जो पहले 692 एकड की घोषणा की थी आज 400 एकड पर किस तरीके से रह गई । उन किसानों ने जिन्‍होंने अपनी जमीन को ओने पोने भाव में बेच दिया उसके लिये कौन जिम्‍मेदार होगा और इस 400 बीघा जमीन में मात्र एक आदमी को लाभ पहुंचाने के लिये, एक चिह्नित आदमी को लाभ पहुंचाने के लिये कानून कायदे सब ताक में रख दिये । नये कानून बना दिये, जमीन देने का तरीका बदल दिया, डीएलसी की दरों में 99 वर्षों की लीज का 3 प्रतिशत में जमीन  देने का फैसला कर लिया और जब जेडीसी महोदय से इस बारे में पूछा गया तो जेडीसी महोदय का बहुत साफ बयान है कि यह मेरे द्वारा नहीं किया गया है यह तो सरकार का फैसला है । सरकार किस तरीके से चल रही है यह सब जयपुर का नहीं राजस्‍थान का आम आदमी जनता है कि सरकार जमीनों के मामले में कितने घोटाले कर रही है ।

जौहरी बाजार से आने वाले माननीय सदस्‍य बडी बात कर रहे थे, पार्क की बात कर रहे थे और तो छोडो इस सरकार को जमीन बेचने के मामले में जहां 20 हजार की आबादी रहती है सिर्फ 2902 स्क्वायर मीटर का पार्क है और उस पार्क में से 2062 स्क्वायर मीटर जमीन एक ट्रस्‍ट को बेच दी । पार्क में से जमीन बेच दी और सिर्फ कितने में, बडी जिक्र किया जा रहा था, 59 लाख 86 हजार में बेच दी । जबकि अगर आज इस जमीन का वास्‍तविक भाव बाजार में मालूम किया जाये तो शायद 25-30 करोड रुपये तक है ।

सभापति महोदय, आई टी और नोलेज कोरिडोर की बहुत घोषणा की गई है । आईटी बनायेंगे, नोलेज कोरीडोर बनायेंगे और वह आईटी, नोलेज कोरीडोर के नाम पर जिस समय घोषणा की गई थी वहां के किसानों ने उस जमीन को ओने पोने भावों में बेच कर इस सरकार के भू माफियाओं को बेच कर, सरकार के प्रोपर्टी डीलरों को बेच कर अपनी जमीन से हाथ धो बैठे । अंत में क्‍या हुआ, अंत में यह हुआ कि सरकार पीछे हट गई कि हम न तो आईटी बनायेंगे और न नोलेज कोरीडोर बनायेंगे और इस योजना को ही समाप्‍त कर दिया । आपको किसने कहा था कि यह घोषणा करो ।

श्री सभापति: अब आप समाप्‍त करें ।

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): सभापति महोदय, अभी 3-4 रोज पहले ओलावृष्टि के नाम पर सरकार किसानों की बडी वाह वाही लूट रही थी । बहुत अच्‍छी बात है, हम भी किसानों के पक्ष में है, कांग्रेस किसानों के पक्ष में है लेकिन यह सरकार कैसे पक्ष में है उसका मैं उदाहरण देता हूं । साढे 14 लाख हैक्‍टेयर जमीन जो इनके मंत्री मंडल में इस बात के लिये गई, मंत्री मंडल में भी इसका विरोध हुआ और साढे 14 लाख जमीन को 8 कम्‍पनियों को बेच दिया । किस लिये दे दिया, रतनजोत की खेती करने के लिये । कम्‍पनी रतनजोत की खेती करेगी या किसान करेगा ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): कौन कौन सी कम्‍पनियां है जरा नाम बता दीजिए ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): घनश्‍याम जी तिवाडी को मालूम है बराबर में पूछ लो ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह मंत्री मंडल का फैसला था । उस समिति की रिपोर्ट गई थी वहां पर यह क्लियर हुआ हुआ है ।

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): यह मंत्री मंडल का फैसला है मेरा फैसला नहीं है ।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अभी तक किसी कम्‍पनी को भूमि नहीं दी , बात जरूर चली थी ।

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): चली थी ना, चलो यही समझ लो ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): बात ही नहीं चली कभी ।

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): सभापति महोदय, यह राजस्‍थान का सर्वोच्‍च सदन है...........

 

ans/akt  15.20   2l 28.03.2007

 

इस तरह के असत्‍य आंकडे इस सदन के पटल पर नहीं रखे जाए तो बहुत ही जनता के हित में होगा। (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण):  माननीय सभापति महोदय, ऐसा ही मामला रिंग रोड का भी हुआ। बहुत बड़ी रिंग रोड़ , शायद जो हिन्‍दुस्‍तान के मैट्रोसिटिज हैं उन मेट्रोसिटिज में भी इतनी चौडी रिंग रोड का निर्माण आज दिन तक नहीं हुआ है। बहुत बहुआयामी योजना रिंग रोड की बनाई गई। 18 लेन की रिंग रोड बनाएंगे और उसकी अवाप्ति के लिए लोगों को नोटिस दे दिया, उसका नतीजा क्या हुआ, किसानों ने ओने पौने में अपनी जमीन बेच दी। बहुत पहले थे,आज बंगले हो गए, गाड़ी हो गई, होंगे ही लेकिन कुछ दिनों बाद मंत्री जी ने इसको 12 लेन की कर दी। जो 6 लेन आए थे, 6 लेन में जिनकी जमीनें आई थी वह बेचारे बरबाद हो गए।

लेन जमीन का मामला बड़े षड्यंत्र तरीके से किया गया और उस लेन जमीन में ऐसे आदमी का नाम लिया गया जो हिन्‍दुस्‍तान के लिए पूजनीय है, इनके लिए तो है ही, क्‍या नाम, दीनदयाल जी जैसे महान आदमी का नाम लेकर, उनके नाम से ट्रस्‍ट बनाकर करोड़ों रूपये की जमीन हडपने का षड्यंत्र रच दिया और हुआ क्‍या, आखिर सरकार को उसमें थूककर चाटना ही नहीं पडा उसको वापस लेना पडा, ऐसे इस सरकार के कारनामे हैं।

श्री सभापति: अब आप समाप्‍त करें।

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): माननीय सभापति महोदय, इसी तरीके से जलमहल के अंदर आज से ठीक दो साल पहले, मैंने इसी सदन में, इसी पवित्र सदन में जलमहल का मामला 295 के जरिये उठाया था । उसी कम्‍पनी को आज 47 हजार रूपये बीघा, जयपुर के अंदर किसी भी जगह पर 47 हजार मीटर जमीन नहीं मिलेगी और इस कम्‍पनी को 47 हजार रूपये बीघा में कितनी जमीन दे दी, 150 एकड जमीन दे दी। क्‍या हाल है, क्‍यों दे दी, और सिर्फ दो करोड रूपये सालाना लीज पर(व्‍यवधान) बाजार की कीमत का आप अंदाजा लगा लीजिए, 50 लाख, 1 करोड़ रूपये बीघा से कम की जमीन नहीं होगी जो तो 150 एकड जमीन आपने 47 हजार में दे दी, बहुत चार्ज लगाए जा रहे थे। 

(समय समाप्ति सूचक घंटी)

नाम भी बता दूं, कम्‍पनी का नाम भी बता दूं इंडिया हेरीटेज कारपोरेशन फाउण्‍डेशन, सैतालीस और साढ़े सैतालीस हजार रूपये  बीघा, 150 एकड जमीन और इसके मालिक का नाम भी बता दूं, कोठारी साहब।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): (व्‍यवधान) एक इसमें 4 लाख 70 हजार है।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य अब आप...

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): आज जयपुर में यातायात को देखकर पार्किंग की बड़ी समस्‍या है। पार्किंग के बारे में मंत्री जी ने दो बार सदन में, पवित्र सदन  में घोषणा की थी मैं पार्किंग पर, जिन लोगों ने सैटबैक नहीं छोडे हैं, जिन लोगों ने पार्किंग का इंतजाम पूरा नहीं किया, इस सदन में घोषण की थी कि मैं मल्‍टी स्‍टोरी पार्किंग बनाऊंगा और जयपुर शहर की यातायात की व्‍यवस्‍था को सुधारूंगा। क्‍या करें मंत्री जी, मंत्री जी की घोषणा तो घोषणा ही है। यहां तो मुख्‍यमंत्री जी की घोषणा नहीं चलती है, मुख्‍यमंत्री जी ने पिछले साल बजट के टाइम पर इस सदन में घोषणा की थी हज हाउस जल्‍दी बनाकर देंगे। आज तक उस हज हाउस पर एक ईंट तक नहीं रखी गई। हां मंत्री जी ने एक काम तो किया, क्‍या किया, रामलीला ग्राउण्‍ड   में पार्किंग का काम साथ में लिया। माननीय जौहरी बाजार वाले विधायक, किशनपोल के विधायक यहां बैठे हैं। 200 दुकानें, 1 रेस्‍टोरेंट, 375 कार की पार्किंग का फैसला किया, आर्डर दे दिया और जब राजनैतिक दबाव पडा तो 48 घंटे भी नहीं लगे उस आर्डर को वापस ले लिया, क्‍यों ? यह सरकार की किस तरीके की नीयत है इस बात को..(व्‍यवधान)

श्री सभापति: अब आप समाप्‍त करें।

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): माननीय सभापति महोदय, दो मिनट, दो मिनट में कनक्‍लूड करूंगा। जमीन के घोटाले तो  हमने बहुत सुने हैं, चारे के घोटाले भी बहुत सुने हैं लेकिन इस सरकार ने तो कचरे में भी घोटाला कर दिया। जहां 80 रूपये से 100 रूपये टन में कचरा उठा करता था इस सरकार के नगर निगम ने आज 480 से 500 रूपये तक कचरा उठाकर सारे कानून कायदे ताक में रखकर उसमें भी घोटाला कर लिया।

माननीय सभापति जी ,कफन का कमीशन खाने की बात तो बहुत सुनी, जग जाहिर है, सब जानते हैं इसमें क्या हुआ, क्‍या होता है ले‍किन माननीय सभापति जी आपको निवेदन करना चाहता हूं इस सरकार ने तो लावारिश लाशों को फूंकने के मामले में भी कमीशन खा लिया1 (व्‍यवधान) माननीय न्‍यायालय के आदेश के बाद, माननीय न्‍यायालय के आदेश के बाद अतिक्रमण हटाने का मामला हुआ। आज जयपुर में किस तरीके से अतिक्रमण हट रहे हैं, बढ़ रहे हैं, कौन अतिक्रमण हटा रहा है, जयपुर का एक एक जन, आदमी जानता है। माननीय सभापति जी, आपने मुझे बोलने का वक्‍त दिया उसके पहले एक बात और निवेदन करना चाहता हूं।

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): एक बात निवेदन करना चाहता हूं, माननीय मंत्री जी से आश्‍वासन चाहता हूं  जवाब देवे तब कि जयपुर को तो बेच दिया कुछ बचा खुचा थोडा छोडा है उसको तो कोई बात नहीं लेकिन राजस्‍थान को मत बेच देना। धन्‍यवाद, जयहिंद।

श्री सभापति: माननीय श्री मोहनलाल गुप्‍ता। (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, समय की सीमा है, दस मिनट में आप कन्‍क्‍ल्‍यूड करें, ऐसा नहीं, एक मिनिट भी ज्‍यादा नहीं बोलेंगे। साढ़े चार बजे मुख बंद का प्रयोग है..

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल):I will try my best.

श्री सभापति :  और तीन मंत्रियों को जवाब देना है।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल):माननीय सभापति महोदय  आज हम नगरीय विकास विभाग की मांग पर चर्चा के लिए यहां खड़े हुए हैं और मैं समझता हूं कि 74वें संविधान संशोधन के पश्‍चात नगर पालिकाओं को जो सुविधा दी जानी चाहिये थी, जो उनको अधिकार दिये जाने थे, वित्‍तीय और  प्रशासनिक अधिकार, उसके बारे में किसी ने नहीं सोचा। 74 वें संविधान संशोधन  हो गया, नगरपालिकाओं के  चुनाव भी हो गए लेकिन चुनाव होने के पश्‍चात वह नगरपालिकाएं अपने वित्‍तीय ढांचे को ठीक कर सकी, प्रशासनिक ढांचे को ठीक कर सकी, उनके पास में सफाई के लिए पैसा है, उनके पास में स्‍ट्रीट लाइट के लिए पैसा है, उनके पास पार्क लगाने के लिए पैसा है, उनके पास में विभिन्‍न प्रकार की  सुविधाए देने के लिए पैसा है क्‍या इस बारे में हमने सोचा।

मैं इस बहस को गैर राजनीतिक  आधार पर ले जाना चाहता हूं। पक्ष के सदस्‍य भी बैठे हैं, प्रतिपक्ष के सदस्‍य भी बैठे हैं और मैं समझता हूं कि  नगरीय विकास विभाग केवल जयपुर तक सीमित नहीं रहना चाहिये। 174 से हमारी ज्‍यादा जो हमारी म्‍युनिसिपिलिटीज है उनको भी अधिकार का प्रश्‍न है, शहरों में जो नागरिक रह रहे हैं उनके भी अधिकारों का प्रश्‍न है कि क्‍या उनको स्‍वच्‍छ वायु मिल रही है, क्‍या उनको स्‍वच्‍छ पानी मिल रहा है क्‍या उनको सस्‍ती दरों पर आवास मिल रहे हैं, क्‍या उन कच्‍ची बस्तियों में रहने वाले लोगों को अच्‍छी सुविधा मिल रही है, एक मूलभूत प्रश्‍न है।

निश्चित रूप से मैं माननीय नगरीय विकास मंत्री महोदय का ध्‍यानाकर्षित करना  चाहूंगा कि शहरों में आज बहुत सारे लोग रहते हैं। इतनी बड़ी जनसंख्‍या शहरों में रहती है, उस बड़ी जनसंख्‍या के लिए  आप निश्चित रूप से सफाई की व्‍यवस्‍था का प्रबंध करें, घर-घर के बाहर कचरा रहता है। पेड़ लगाए, कचरे की सफाई करें, कचरा परिवहन के लिए नये नवीनतम साधन आप लगाए। सुप्रीम कोर्ट ने व्‍यवस्‍था दी है कि किस प्रकार से म्‍युनिसिपिलिटी कचरे का निस्‍तारण करेंगी। आज यदि केवल एक काम आप कर दें, यहां अधिकारी  भी बैठे हुए हैं, केवल जमीनों के अलाटमेंट से शहरों की समस्‍याओं का समाधान नहीं होगा, केवल भ्रष्‍टाचार की चर्चा करने से समस्‍या का समाधान नहीं होगा। मैं चाहता हूं कि , आप भी, आपके लोग भी, स्‍वायत्‍त शासन मंत्री रहे हैं, शहरी समस्‍याओं के समाधान के संबंध में आपने क्‍या किया ? सुप्रीम कोर्ट ने डिसिजन दिया था कि कचरे का निस्‍तारण इस प्रकार से होगा, घर के बाहर कचरा बिल्‍कुल नहीं रहेगा, अस्‍पतालों में कचरा बिल्‍कुल नहीं रहेगा, विभिन्‍न सार्वजनिक स्‍थानों पर कचरा नहीं रहेगा।

 

दुर्गा/त्रिपाठी 280307 1530 2l

 

उसके लिये क्‍या व्‍यवस्‍था की है। स्‍ट्रीट लाइट्स की व्‍यवस्‍था, शहरों में अंधकार है तो आखिर उसकी व्‍यवस्‍था कौन करेगा। हमारे जो सी.इ.ओ. हैं नगर निगम में, जो म्‍युनिस्‍पल कारपोरेशन में और म्‍युनिस्‍पेलेटीज में जो म्‍युनिस्‍पल अधिकारी हैं, उनकी कोई सुनता नहीं है। उनकी कलक्‍टर तक नहीं सुनता है। उनको कोई अधिकार नहीं हैं। म्‍युनिस्‍पल कारपोरेशन के अधिकारियों का एक संघ बनना चाहिए। उनको बहुत अधिकार दिये जाने चाहिए ताकि वह शहरों की समस्‍याओं के सन्‍दर्भ में काम कर सकें। मैं समझता हूं कि कुछ-एक संघ बना भी था। लेकिन सरकार उनको सुनकर, उनको अधिकार देने, निर्वाचित प्रतिनिधियों को अधिकार देकर और निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्‍यम से यह 74वें संविधान संशोधन के तहत उनको अधिकार देकर उनसे काम करवाना, उनको सहयोग देना और उनके ऊपर डण्‍डा नहीं घुमाना, डण्‍डा नहीं घुमाना चाहिए, उनको सहयोग देना चाहिए। आपकी क्‍या समस्‍या है, आपकी समस्‍याओं के सन्‍दर्भ में मंत्रालय क्‍या कर सकता है, सरकार क्‍या कर सकती है। इस सन्‍दर्भ में हमको उनसे विचार-विमर्श करना चाहिए।

आज आवास की समस्‍या है। आज मैं कहता हूं कि जयपुर शहर में या उदयपुर शहर में या कोटा शहर में या अजमेर में या विभिन्‍न स्‍थानों पर जिस प्रकार से जमीनों के भाव बढ़ गये हैं, जिस प्रकार से जमीनों के लेन-देन का काम हुआ है, जिस प्रकार से जमीन के सौदागर यहां पर आ गये हैं, आम आदमी का जीना मुश्किल हो गया है। आम आदमी का जीना मुश्किल हो गया है। यह बहुत बड़ी चिन्‍ता का विषय है। मैं कहता हूं कि एक सामान्‍य आदमी यहां पर मकान लेकर नहीं रह सकता है। एक आई.ए.एस. अफसर भी, आई.ए.एस. अफसर की जितनी तनख्‍वाह है, उतनी तनख्‍वाह में वह स्‍वयं जयपुर में मकान लेकर नहीं रह सकता है। उसकी ई.एम.आई. नहीं दे सकता है। वह प्‍लाट तो नहीं खरीद सकता है, वह फ्लैट भी नहीं खरीद सकता है। आज दोगुने-तिगुने-चौगुने-दस गुने भाव हो गये तो क्‍या हमें उस समस्‍या का निदान नहीं करना चाहिए। मैं समझता हूं कि आवासन मण्‍डल को एन.आर.आई. के लिये मकान नहीं बनाना चाहिए। यह हमारा काम नहीं है। हमारा काम है आम आदमी को, आवासन मण्‍डल की स्‍थापना इसलिये हुई थी कि वह आम आदमी को सस्‍ते मकान उपलब्‍ध करायेगा, मध्‍यम वर्ग के लोगों को सस्‍ते मकान उपलब्‍ध करायेगा। क्‍या हमने करवाये। मैं समझता हूं कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर के हमें निश्चित रूप से इस बात पर विचार-विमर्श करना चाहिए कि आम आदमी को मकान मिले, सस्‍ता आवास मिले ओर वह उतनी इ.एम.आई. दे सके जितनी उसकी इन्‍कम है। अल्‍प आय वर्ग के लोगों के लिये, इ.डबल्‍यू.एस. वर्ग के लोगों के लिये हमने योजना बनाई है। मैं माननीय स्‍वायत्‍त शासन मंत्री महोदय को धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि उन्‍होंने मेरे क्षेत्र में एक बहुत बड़ी योजना को क्रियान्वित करने का निर्णय लिया है और मुझे गर्व है इस बात का कि जवाहरलाल अरबन रिन्‍यूअल मिशन के तहत किशनपोल में उन्‍होंने जयपुर शहर के लिये नहीं, राजस्‍थान भर का एक अनूठा प्रोजेक्‍ट लिया है। 175 करोड़ रुपये की योजना, कच्‍ची बस्‍ती वालों के लिये बनाई गई है। उसकी स्‍वीकृति अभी दस दिन पहले केन्‍द्र सरकार से प्राप्‍त हुई है तो कच्‍ची बस्‍ती वाले लोगों के लिये बारह हजार मकान बनाकर हम देंगे। बारह हजार मकान हम दे रहे हैं केवल दस हजार रुपये की कीमत पर। केवल दस हजार रुपये की कीमत पर, डेढ़ लाख रुपये की कीमत का मकान, केवल हम दस हजार रुपये में दे रहे हैं। इस प्रकार की योजनाएं जयपुर नगर निगम ने लागू की है। यह उदयपुर में बननी चाहिए, जोधपुर में बननी चाहिए, अजमेर में भी बननी चाहिए। छोटे-छोटे शहरों में बननी चाहिए। मैं समझता हूं कि इसके लिये विशेष अधिकारी नियुक्‍त करके इस प्रकार के सुलभ सस्‍ते, अच्‍छे आवास बनाने चाहिए। मैं यह कहना चाहूंगा कि आज घरौंदा योजना हमने की है, उसका स्‍वागत है। दस रुपये रोज में, पन्‍द्रह रुपये रोज में हम उनको मकान देंगे। लेकिन मध्‍यम वर्ग के लोग, मुनीम हैं, गुमाश्‍ते हैं, प्राइवेट काम करने वाले हैं, उन सब लागों के लिये भी मकान चाहिए। बहुत सारे लोग जयपुर शहर में काम करने के लिये आते हैं। उनको भी मकान चाहिए। अल्‍प आय वर्ग के लोगों के साथ मध्‍यम वर्ग के लागों के लिये भी मकान चाहिए। मैं समझता हूं कि आज की चर्चा के माध्‍यम से नगरीय आवासन मंत्री महोदय इस बात पर निश्चित रूप से घोषणा करेंगे कि अल्‍प आय वर्ग के साथ-साथ मध्‍यम आय वर्ग को भी हम निश्चित रूप से मकान देवें।

एक सूचना, जो मुझे अखबारों के माध्‍यम से मिली है। जब आवासन मण्‍डल में मकान लेने के लिये उच्‍च आय वर्ग के लोग गये तो उन्‍होंने कहा कि जितनी इ.एम.आई. आप ले रहे हैं, जितने का मकान दे रहे हैं, उच्‍च आय वर्ग के लोगों को उतनी तो हमारी तनख्‍वाह ही नहीं है। उस तनख्‍वाह से हम चुका ही नहीं सकते हैं। यह उच्‍च आय वर्ग का व्‍यक्ति कह रहा है।

माननीय सभापति महोदय, मैं यह कहना चाहूंगा कि जब उच्‍च आय वर्ग का मकान नहीं ले सकता है, आई.ए.एस. अफसर मकान नहीं ले सकता है, आर.ए.एस. अफसर मकान नहीं ले सकता है, एक एम.एल.ए. मकान नहीं ले सकता है तो बेचारा मुनीम, गुमाश्‍ता, प्राइवेट काम करने वाला व्‍यक्ति, स्‍कूटर पर चलने वाला व्‍यक्ति, साइकिल पर चलने वाला व्‍यक्ति, जयपुर शहर में मकान की क्‍या कल्‍पना कर सकता है। (व्‍यवधान) आज जो कीमतें बढ़ गयी हैं, इसके बारे में कह रहा हूं मैं।

श्री सभापति: समाप्‍त करें।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): माननीय सभापति महोदय, मैं यह कहना चाहूंगा कि एक कंसेसस बना करके, कांग्रेस सरकार के समय एक घोषणा की थी आप लोगों ने कि हम सारे सदन को बुलाकर के, एक विशेष सत्र बुलाकर के म्‍युनिस्‍पल एक्‍ट में संशोधन करेगे। 74वें संविधान संशोधन के तहत अधिकार देंगे। आप लोगों ने वह काम नहीं किया। माननीय मुख्‍य मंत्रीजी से मैं निवेदन करना चाहूंगा कि आप म्‍युनिस्‍पल एक्‍ट के तहत जो अधिकार म्‍युनिस्‍पेलेटीज को मिलने चाहिए, वह अधिकार निश्चित रूप से प्रदान करें। इसके लिये सदन की विशेष बैठक बुलाएं और बैठक बुलाकर बहुत सारे संशोधन उस एक्‍ट में होने हैं, निश्चित रूप से उन संशोधनों को करें।

जयपुर नगर निगम में एक एक्‍ट बनाना है। निश्चित रूप से उस एक्‍ट को भी आप बनायें। नगर निगम के एक्‍ट को बनायें। और मैं समझता हूं कि अधिकार अभी नगरीय विकास मंत्री महोदय ने म्‍युनिस्‍पेलेटीज के चेयरमैन को अधिकार दिये हैं, वित्‍तीय अधिकार दिये हैं। मैं उनका स्‍वागत करता हूं। कांग्रेस के समय वह सारे अधिकार खत्‍म कर दिये गये थे। मैं समझता हूं कि जिस प्रकार से जयपुर शहर में ही नहीं, अन्‍य शहरों में सहकारी समितियों की जमीनें हैं, आम व्‍यक्ति वहां रहता है। टाउनशिप में तो बहुत सारे लाग चले गये, वह 10 साल में बनेंगी, 15 साल में बनेंगी। यह केवल एक सट्टा बन रहा है उन टाउनशिप्‍स में लेकिन आम व्‍यक्ति सहकारी समिति की कृषि भूमियों पर रह रहा है। उस आम व्‍यक्ति को पट्टा देने के लिये जो हमने शिविर लगाये हैं उन शिविरों को तुरन्‍त लगायें, उनमें गति प्रदान करें। लाखों लोग ऐसे हैं जिनको पट्टा नहीं मिल रहा है। मैं समझता हूं कि निश्चित रूप से उनको पट्टा देने का भी हम निश्चित रूप से काम करें। जो लोग यहां जयपुर शहर में अपने नक्‍शे पास करवाने के लिये आते हैं, जे.डी.ए. और नगर निगम, दोनों मिलकर के इस प्रकार से कार्यवाही करें कि लोगों को चक्‍कर नहीं खाना पड़े। आम आदमी के पास जाइये, दफ्तर में देखिये कि वह व्‍यक्ति किस प्रकार से चक्‍कर खा रहा है। कितने चक्‍कर खा रहे हैं, वह छोटा सा नक्‍शा पास कराने के लिये, अपनी सफाई के लिये, अपनी बिजली की समस्‍या को दूर करने के लिये, अपनी अतिक्रमण की समस्‍या को दूर करने के लिये, अपने पार्कों की समस्‍या को दूर करने के लिये वह म्‍युनिस्‍पेलेटीज में कितनी बार चक्‍कर खा रहा है, वह जे.डी.ए. में कितनी बार चक्‍कर खा रहा है। हमारे अधिकारियों को चाहिए कि वह जाकर नीचे देखें, डाउन-टू-अर्थ बात करें। कितनी बार उसने चक्‍कर खाये, जे.डी.ए. में कितनी बार आ रहा है, कलेक्‍ट्रेट में कितनी बार आया है। आखिर उस आदमी के लिये कौन चिन्‍ता करेगा। उस आदमी की समस्‍या का समाधान कौन करेगा। हमने तो केन्‍द्र बना दिये। केन्‍द्र बना सकते हैं, हमने निश्चित रूप से केन्‍द्र बनाये हैं। लेकिन उन केन्‍द्रों पर भी तुरन्‍त न्‍याय हो, निश्चित रूप से, निर्णय हों और निर्णयों के बाद में हम कुछ कार्यवाही करें। माननीय सभापति महोदय, मैं एक बात जरुर कहना चाहूंगा। जयपुर ग्रामीण से आने वाले हमारे मित्र ने बहुत सारे आरोप लगाये हैं।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आपस में बातें न करें।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): मैं उनको एक झलक दिखाना चाहता हूं। आपने तो आरोप ही लगाये हैं। हमने आरोप नहीं लगाये हैं। मैं तो यह कहनाचाहता हूं कि कुछ बातें कांग्रेस की सिद्ध हुई हैं। रिश्‍वत लेते कैमरे में कैद, तीन-तीन मंत्री कांग्रेस के, रिश्‍वत लेते तीन-तीन मंत्री कैमरे में कैद। यह कांग्रेस के लोगों को, शक्‍तावतजी, तकउद्दीनजी। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): थोड़ा सा अपने राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष थे, उनका भी हवाला दे दो। (व्‍यवधान) नहीं, उनसे ठीक रहेगा।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): कोई बात नहीं। (व्‍यवधान)

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय सभापति महोदय, जो इस दुनिया में नहीं हैं, उनका नाम ले रहे हैं। जो इस दुनिया में नहीं हैं उनका क्‍या नाम ले रहे हैं, शक्‍तावतजी का, कुछ तो शर्म करिये। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): बंगारु लक्ष्मणजी। बंगारु लक्ष्‍मणजी की भी तो  याद कर लो। माननीय गुप्‍ता साहब। (व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, बीच में नहीं।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): भ्रष्‍टाचार की बात, जयपुर ग्रामीण से आने वाले माननीय सदस्‍य ने... (व्‍यवधान) हमारी सरकार ने जो भी निर्णय लिये हैं, पूर्णतया पारदर्शिता से लिये हैं। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): बंगारु लक्ष्‍मण, जार्ज फर्नांडीस, ममता जेटली, कितने नाम गिनाऊं। (व्‍यवधान)

श्री सभापति: अंकित नहीं हागा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आप विराजिये।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): यह किसने क्‍या कहा, यह बात तो ठीक है, आपके लिये कहा है। यह बात तो ठीक है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आप विराजिये।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): सी.एम. साहब भी पैसे लेते हैं। हां, हण्‍ड्रेड पर्सेण्‍ट पक्‍का। मेरे को जमीन देंगे। रेडिसन को जमीन दी है तो तेरे को भी देंगे।

श्री सभापति: बात समाप्‍त करें, प्‍लीज।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): स्‍टे उठाये बिना, चीफ मिनिस्‍टर की जान निकल जाएगी। ढाई अभी और ढाई, जिस दिन यहां से चली जाएगी उस दिन, पैसा मेरे दोनों ओर बह रहा है। मैं एम.एल.ए. बनकर क्‍या करुंगा। सोनिया गांधी ने भी कह दिया हागा कि जमीन अलाट कर दो। (व्‍यवधान) शनिवार को जारी इस सीडी में तत्‍कालीन नगरीय विकास राज्‍य मंत्री तकउद्दीन अहमद, उनके बेटे, प्रापर्टी डीलर और रघुवीरसिंह के बीच इस तरह से बातचीत सामने आयी है।

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): यह भ्रष्‍टाचार के नमूने हैं आपके। आप आरोप लगा रहे हैं। यह भ्रष्‍टाचार के नमूने हैं और साथ ही साथ..।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): यह सुप्रीम कोर्ट में कमलाजी के खिलाफ कहा है। लाल कोठी के प्रकरण में सु्प्रीम कोर्ट ने कमलाजी के खिलाफ कहा है।

श्री सभापति: माननीय श्रीमती सूर्यकान्‍ताजी व्‍यास।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): यह आपके स्‍वायत्‍त शासन मंत्री का इस प्रकार का निर्णय है। कोर्ट के निर्णय उद्धृत कर रहा हूं, मैं कोई गलत बात नहीं कह रहा हूं। मैं सी.डी. के निर्णय उद्धृत कर रहा हूं, मैं गलत बात नहीं कह रहा हूं।

 

Vps-usc-28032007-1540-2n-1

 

श्री सभापति: अब आप समाप्‍त करें।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): माननीय सभापति महोदय, यह भ्रष्‍टाचार का आरोप लगाने वाले अपने दामन में झांके। हमने जो काम किये हैं वह सही किये हैं। बीडी ने जो निर्णय लिया हैं वह सही निर्णय लिया है। पूर्णत: पारदर्शिता का निर्णय लिया है और जो बीडी आपने ही बनायी थी ... (व्‍यवधान)

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): यह बीडी आपने ही बनायी थी। यह एक ... (व्‍यवधान) आपने ही बनाया है। जिन लोगों को जमीन हमने दी है वह उसी निर्णय के आधार पर दी है जो निर्णय आपने किये थे। धन्‍यवाद। जय भारत।

श्री सभापति: थेंक्‍यू।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): जो नम्‍बर जोड़े हैं, कालीचरणजी के जोड़े या आपके जोड़े हैं? ... (व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह तो फैसला कर लो कि नम्‍बर किसे बढ़े दोनों में? नम्‍बर किसके बढ़े हैं दोनों में? नम्‍बर किसके बढ़े?  यह राठौड़ साहब खुद ही यह जांच करने वाले यही हैं, आज किसके लिए बोलेंगे? ... (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय सभापति महोदय, अब इसके लिए भी ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आज किसके लिए बोलेंगे? आज किसके लिए जाकर बोलेंगे? बता दो पहले ... (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय सभापति महोदय, इसके लिए अब जज बनाना पड़ेगा।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आज किसके लिए बोलेंगे? आज किसके लिए जाकर बोलेंगे? बता दो पहले। आज किसके लिए जाकर बोलोगे?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय सभापति महोदय, इसके लिए जज बनाना पड़ेगा और इसमें आपसे अच्‍छा जज कोई हो ही नहीं सकता। आप से अच्‍छा जज कोई नहीं हो सकता।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय सभापति महोदय, वह स्‍वायत्‍त शासन मंत्रीजी, नगरीय विकास मंत्रीजी कहां पर हैं?

श्री सभापति: आप विराजिये।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): नहीं, कहीं यह संसदीय कार्य मंत्रीजी बाद में यह कह दें कि उनकी तो तबीयत खराब हो गयी और जवाब मैं दूंगा। हमें पहले से ही यह अंदेशा लग रहा है। कहां है मंत्रीजी? ... (व्‍यवधान)

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): नहीं, यह पूरी तैयार करके आये हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मुझे लग रहा है पहले ही।  कुछ न कुछ चक्‍कर तो नहीं है कहीं? भूमिका बना रहे हो, जैसे उस रोज आपने वित्‍त राज्‍य मंत्रीजी के टाइम में बनायी थी।

श्री सभापति: आप विराजिये, माननीय सदस्‍य। ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): जवाब तो वे ही देंगे न आकर?  यह नोट उन्‍हीं को दे दोगे आप, पक्‍का है? ... (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: बीच-बीच में यह खड़े हो जाते हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): नहीं, मैं यह कह रहा हूं कि उससे अच्‍छी, माननीय सी.पी.जोशी ने कहा कि किसका भाषण अच्‍छा है, इसका तो अब प्रमाण-पत्र की जरूरत ही नहीं है इसलिए नहीं है कि मुख्‍य मंत्रीजी का यह निर्णय सही साबित हो गया कि दोनों बाहर रहने पर बहुत ज्‍यादा बढि़या काम करते हैं।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद। आपको बहुत-बहुत बधाई। ... (व्‍यवधान)

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास (जोधपुर): माननीय सभापति महोदय, राजस्‍थान की मुख्‍य मंत्रीजी ने जो बजट पेश किया 2007-08 का ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): घनश्‍यामजी के मंत्रिमण्‍डल में भी जगह नहीं है। ... (व्‍यवधान) विराजिये। यहां पर नहीं है तो वहां पर भी नहीं है। ... (व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आप विराजिये।

श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास (जोधपुर): माननीय सभापति महोदय, मैं आपसे एक निवेदन करूं। मैं हालांकि बहुत कम बोलूंगी मगर मेरे को टोकना नहीं क्‍योंकि मैं मेरी बात भूल जाऊंगी अगर आप टोकेंगे तो । ... (व्‍यवधान)

श्री सभापति: आप दस मिनट में अपनी बात पूरी कर दें।

श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास (जोधपुर): माननीय सभापति महोदय, जब 9 तारीख को राजस्‍थान की मुख्‍य मंत्रीजी ने यहां बजट पेश किया और जब मैं जोधपुर वहां मेरे निवास पर पहुंची हूं तो रास्‍ते के अन्‍दर ही लोगों के फोन आने शुरू हुए और विशेष तौर से माननीय सभापति महोदय, मैं आपको बिलकुल सत्‍य बात बता रही हूं कि अगर एक कोई व्‍यापारी हो, एक उद्योगपति हो, उनको तो इस बजट से हो मगर एक जो सफाई करने वाला, जो बरतन साफ करने वाली औरत, जो सब्‍जी बेचने वाले लोग उनको क्‍या स्‍वार्थ होता है? वह मेरे घर पर इतनी बड़ी मात्रा में इंतजार कर रहे थे कि मैंने क्‍या सोचा कि क्‍या मालूम किसलिए इंतजार कर रहे हैं? पानी नहीं आया होगा। मेरे मन में एक ही बात रहती है या तो पानी या गंदगी, दो बात हो सकती हैं। मेरे को जाने के बाद वहां मालूम पडा कि इतनी तादाद में महिलाएं खड़ी थीं और वह भी बुर्जुग महिलाएं जो कोई 70, 80, 90 साल तक की, इस तरीके से खड़ी थीं और विजयराजे सिंधियाजी की तस्‍वीर लेकर पुष्‍प चढ़ा रही थीं कि क्‍या जननी पैदा की है और क्‍या बजट दिया है? बताओ आप ऐसे लोगों को, उन सब्‍जी बेचने वालों को, ऐसी महिलाएं वहां पर मौजूद हुईं और मुख्‍य मंत्री के बजट की जो सराहना की है मैं ... (व्‍यवधान) अब आप देखिये साहब, आपकी बात पर कभी मैं बोलती नहीं हूं। आप मेरी, मैं जो कहूं आप सुन लो, आपको अच्‍छा नहीं लगे तो नहीं लगे। माननीय सभापति महोदय, ... (व्‍यवधान)

श्री सभापति: सबको अच्‍छा लग रहा है इसीलिए तो हंस रहे हैं। ... (व्‍यवधान)

श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास (जोधपुर): माननीय सभापति महोदय, आज नगर विकास न्‍यास की बजट के अन्‍दर बात चल रही है। मैंने तो एक थोड़ा सा ट्रेलर बताया है आपको कि बजट से कितने लोगों को राहत मिली और मुख्‍य मंत्रीजी को कितने आशीर्वाद दिये हैं उसकी बात कही हैं मैंने। माननीय सभापति महोदय, ... (व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आपस में बात नहीं करें।

श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास (जोधपुर): माननीय सभापति महोदय, इस बजट, आज की जो मांग संख्‍या है उसके बारे में मैं मेरी बात कहना चाहूंगी। माननीय सभापति महोदय, अभी कई लोगों ने कई तरह के आरोप-प्रत्‍यारोप लगायें। माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से नगर विकास न्‍यास मंत्रीजी से यह निवेदन करना चाहूंगी कि जोधपुर शहर नगर निगम की सीमा, पहले और आज के बाद में कोई अन्‍तर नहीं है। मैं यह चाहूंगी कि इनकी सीमा को तुरन्‍त बढ़ायी जाए ताकि जोधपुर शहर का विकास हो सके, मगर माननीय सभापति महोदय, मेरे को बहुत अफसोस के साथ और दु:ख के साथ भी कहना पड़ रहा है कि हमारे जोधपुर शहर, जयपुर से दूसरा नम्‍बर है जोधपुर शहर का और तीन-तीन मुख्‍य मंत्री वहां से रह चुके हैं फिर भी जयपुर से जोधपुर बहुत पीछे है विकास की दृष्टि से। मैं चाहती हूं कि इन तीन साल के अन्‍दर जो विकास हुआ है, इसी तरीके से जो पहले मुख्‍य मंत्री तीन रहें उन्‍होंने अगर जोधपुर के बारे में सोचते तो आज जोधपुर न मालूम कहां पहुंच जाता?

माननीय सभापति महोदय, मैं यहां नगर विकास न्‍यास मंत्रीजी से यह निवेदन करना चाहूंगी कि जोधपुर एक शहर, बहुत बड़ा शहर है। उसे विकास की दृष्टि से, हम जयपुर से काफी पिछड़े हुए हैं। यहां सड़कें, सीवर लाइन्‍स व पानी की लाइन्‍स का अभाव है। बरसात के मौसम में पानी भीतरी शहर में ही नहीं बल्कि बाहरी कॉलोनियां- शास्‍त्री नगर, सरदारपुरा आदि सड़कों पर इकट्ठा हो जाता है जिससे काफी परेशानी होती है।

माननीय सभापति महोदय, सीवर लाइन्‍स और जल की, पानी की लाइन्‍स बदलने के लिए राजस्‍थान की मुख्‍य मंत्री ने करीब 10 करोड़ 75 लाख रुपये की योजना बनाकर दे दी और वह पानी की लाइन्‍स डालनी भी शुरू हो जाएगी मगर यहां जोधपुर नगर निगम की तरफ से हमें बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है क्‍योंकि वहां पर कांग्रेस का बोर्ड है और उन्‍होंने कभी यह नहीं सोचा है कि इस शहर को कैसे सुन्‍दर बनाया जाए। शहर के अन्‍दर गंदगी का भरमार रहता है। सीवर लाइन्‍स डटी हुई रहती हैं। वहां पर यह नगर, वहां की महापौर, वहां के अधिकारी कभी इस बात के ऊपर सोचते नहीं हैं। माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहती हूं कि यू.आई.एस.एम.टी. परियोजना में राज्‍य के स्‍थान के रूप में जोधपुर नगर के लिए न्‍यूनतम 70 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा जाए।

माननीय सभापति महोदय, वर्तमान बजट की जितनी तारीफ की जाए उतनी ही कम है। इस बजट में कई चीजें मसलन प्रत्‍येक शहर में एक-एक गौरवपथ का निर्माण करना, पाठशालाओं को नियमित करवाना, पानी की पुरानी पाइप लाइन्‍स को बदलना इसलिए इनका जितना उल्‍लेख किया जाए उतना कम है। माननीय सभापति महोदय, ... (व्‍यवधान)

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास (जोधपुर): सरकार द्वारा उदयपुर की पिछोला व फतेहसागर झील, माउंट आबू की नक्‍की झील व अजमेर की आना सागर व पुष्‍कर झीलों के सौन्‍दर्यकरण के लिए मैं सरकार का तो स्‍वागत करती हूं। इसी माध्‍यम से माननीय मुख्‍य मंत्रीजी से एवं मंत्री महोदय से आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगी कि जोधपुर शहर के अन्‍दर बाइजी का तालाब, आनासागर, बाईजी का तालाब है, क्‍या नाम है? भूल गयी। गंगलाब तालाब है उनके अन्‍दर इतना कचरा और गंदगी भरी हुई है कोई आस-पास रहना भी मुश्किल है उनकी सफाई के लिए और सौन्‍दर्यकरण के लिए आपको उनके बारे में विचार करना चाहिए और स्‍पेशल धनराशि उपलब्‍ध करानी चाहिए।

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास (जोधपुर): मैं कुछ बोली भी नहीं, माननीय सभापति महोदय, कभी नम्‍बर ही नहीं आता है और वैसे भी मैं तो बहुत डिस्‍टर्ब-सी हूं तो मेरे को मैं कुछ बात सोच-सोचकर बोलना चाहूंगी। मेरे शहर की समस्‍या कहूं, मैं कोई ऐसी बात थोड़े ही कर रही हूं। माननीय सभापति महोदय, मेरे को आप ऐसे कहेंगे, मैंने पहले भी आपको निवेदन किया कि मैं कुछ ... (व्‍यवधान) माननीय सभापति महोदय, आपको मैंने पहले भी निवेदन किया, आप मेरे को ऐसे मत करना, मैं तो ... (व्‍यवधान)

श्री सभापति: आप पिछोला पर आ गये थे। ... (व्‍यवधान)  इसलिए मैंने सोचा जोधपुर का सवाल नहीं है।

श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास (जोधपुर): मेरे को ऐसा मत कहना। माननीय सभापति महोदय, मैं विकास की दृष्टि से ही बात करना चाहती हूं। मैं जिस विधान सभा क्षेत्र से हूं, वह विधान सभा क्षेत्र इतना कंजेस्‍टेड और इस तरीके से है। उनके सौनदर्यकरण की बात कर रही हूं। जब बाईजी का तालाब है, गंगलाब तालाब है, मानसागर है, यह इस तरीके से है जहां के, वहां से खुद स्‍वयं मुख्‍य मंत्री रह चुके तत्‍कालीन अशोकजी गहलोत मगर उन्‍होंने कभी इस बारे में नहीं सोचा कि इस शहर को कैसे सुन्‍दर बनाया जाए। माननीय मुख्‍य मंत्रीजी से और आपके माध्‍यम से निवेदन करूं कि उनके लिए कुछ धनराशि उपलब्‍ध करायी जाए ताकि शहर की सुन्‍दरता बढ़ सके।

माननीय सभापति महोदय, मेरे जोधपुर सरदारपुरा क्षेत्र के विधायक अशोकजी गहलोत मुख्‍य मंत्री थे जब मैंने उनको स्‍पेशली, आपसे कह रही हूं कि मैंने उनसे निवेदन किया कि आप इनके बारे में जरा सोचिए मगर उन्‍होंने कभी इस बारे में ध्‍यान नहीं दिया। मैं आपके माध्‍यम से स्‍वायत्‍त शासन मंत्रीजी से यह कहना चाहूंगी कि आप इनके ऊपर ध्‍यान देकर इन सब चीजों के ऊपर ध्‍यान दें। जोधपुर शहर की सड़कों के बारे में ध्‍यान दें क्‍योंकि वह सड़कें बहुत संकरी हैं, वह नगर निगम के अलावा कोई नहीं बनाता है। अभी-अभी यहां पर काफी कुछ ऐसी चर्चा हुई, बिल्डिंग के बारे में।

 

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माननीय सभापति महोदय, मैं आपसे यह निवेदन करना चाहूंगी कि शहर के अंदर एक श्‍मशान है, वहां पर पूर्व मुख्‍य मंत्रीजी ने किस तरह से श्‍मशान के अंदर बिल्डिंग बनाने के लिये परमिशन दी है, उनकी आप तुरन्‍त इंक्‍वायरी करवायें, अगर हम गलत हो जायें तो हमें कहना। मगर श्‍मशान के अंदर अगर बिल्डिंगें बनेंगी, इससे ज्‍यादा और शर्म की बात क्‍या होगी ? अब लोग श्‍मशान को भी नहीं छोड़ते तो फिर आगे जाकर क्‍या होगा ? इससे ज्‍यादा और क्‍या हो सकता है ? तालाब के अंदर देखो तो अतिक्रमण करवा रहे हैं, और जगह अतिक्रमण करवा रहे हैं। अतिक्रमण का मतलब क्‍या समझते हैं, जहां अतिक्रमण हैं वहां तो कुछ हटवा नहीं रहे और अतिक्रमण हटवाने के नाम पर जाते हैं जो सीढ़ी है, वह हटायेंगे, बावडि़या हटायेंगे, यह जाकर काम करेंगे और इस तरह से जाकर जनता को परेशान करेंगे।

माननीय सभापति महोदय, जोधपुर नगर निगम में, यू.आई.टी में वर्तमान में टैक्निकल अधिकारियों की काफी कमी है। यू.आई.टी. है जो काम करना चाहती है मगर उनके पास अधिकारियों की बहुत कमी है। चीफ इंजीनियर तो है मगर सुपरिंटेंडेट इंजीनियर पूरे नहीं हैं, जे.ईएन.पूरे नहीं हैं। मैं मंत्री महोदय से आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगी कि कुछ ऐसी व्‍यवस्‍था करें जिससे शहर में सौन्‍दर्यीकरण हो सके। माननीय सभापित महोदय, जोधपुर नगर निगम का भगवान ही मालिक है। निगम का भवन काफी भव्‍य है परन्‍तु जन सुविधाओं एवं सफाई व्‍यवस्‍था में तो पोपाबाई का राज है। जगह जगह कचरे के ढेर लगे हैं, गटर के ढक्‍कन खुले हुए हैं, सड़कें टूटी हुई हैं, आवारा पशु पुलिस की घुमटियों में आराम फरमाते हैं। मेरी सफाईकर्मी बाइयों के पास पर्याप्‍त सामान नहीं है। सुरक्षा उपकरण का अभाव है।

पूर्व भाजपा शासित बोर्ड ने नगर निगम की सीमा विस्‍तार के प्रस्‍ताव राज्‍य सरकार को भेजे थे परन्‍तु सीमा विस्‍तार अभी तक नहीं हुआ है। उस समय तेल कम्‍पनियों ने अपना व्‍यापार निगम सीमा से बाहर शिफ्ट कर लिया जिसके कारण निगम की चुंगी आय में काफी कमी हो गयी। इसके कारण जोधपुर को चुंगी की जितनी राशि मिलनी चाहिये थी, उतनी नहीं मिली। माननीय सभापति महोदय, मैं एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण बात कहना चाहूंगी। जब कभी भी भारतीय जनता पार्टी का राज आया है, 1992 के अंदर जब भैरोंसिंह जी शेखावत का राज था, यहां बहुत पुराने सदस्‍य भी सामने बिराजमान हैं, मगर इन्‍होंने कभी अपने नेताओं के बारे में नहीं सोचा । स्‍व0 जयनारायण व्‍यास के नाम पर इन्‍होंने जोधपुर विश्‍वविद्यालय का नाम तक नहीं किया और हमारे भैरोंसिंह जी शेखावत, जो आज भारत के उप राष्‍ट्रपति हैं, उन्‍होंने तुरन्‍त इसके ऊपर मेरा प्रस्‍ताव आते ही एक्‍शन लिया और जोधपुर विश्‍वविद्यालय का नाम जयनारायण विश्‍वविद्यालय किया। अभी जब सरकार आई तो मुख्‍य मंत्री वसुन्‍धरा जी से मैंने निवेदन किया तो उन्‍होंने जितने स्‍वतन्‍त्रता सेनानी थे, उनके नामों के ऊपर रखा है किसी मार्ग का नामकरण करवाया, भले ही वह कांग्रेस वाले हों, उससे क्या मतलब हो गया। मगर उनकी जो भावना है, वह बता रही हूं। आज तक जो कुछ भी काम किया है बी.जे.पी.सरकार ने, हर में इस तरह से काम किया है। मगर इन्‍होंने स्‍व0 जयनारायण व्‍यास जैसों का नाम नहीं लिया।

श्री सभापति: अब आप समाप्‍त करें।

(समय समाप्ति सूचक घण्‍टी)

श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास (जोधपुर): माननीय सभापति महोदय, मुझे दो बातें और कहनी हैं। माननीय सभापति महोदय, जोधपुर शहर के अंदर गौशाला का बहुत बड़ा मैदान है और आज उसकी तरक्‍की में चार चाँद लग गये, इतना काम हो रहा है। नगर सुधार न्‍यास करवा रही है और जिलाधीश भी अपने फण्‍ड से दे रहे हैं। खूब काम हो रहे हैं। मगर मेरी आपके माध्‍यम से माननीय मुख्‍य मंत्रीजी से एक मांग है कि राष्‍ट्रीय खिलाड़ी शिवदत्‍त जबरू बोडा, उन्‍होंने राजेन्‍द्र जी राष्‍ट्रपति थे, उनके हाथ से प्राइज लिया है, उस जमाने में खेले थे। मैं चाहती हूं इस गौशाला का नामकरण उनके नाम से किया जाये तो एक बहुत ही अच्‍छी बात होगी।

श्री सभापति: धन्‍यवाद। डॉ0 श्रीगोपाल बाहेती।


डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय सभापति महोदय, चर्चा में भाग लेते हुए मैं मेरी बात एक शेर से प्रारम्‍भ करता हूं -

'' शुक्रिया अहले हुकूमत मेहरबानी आपकी, 

जनता समझती जा रही है हेरा-फेरी आपकी, 

हम भला ओढ़े-बिछाये या लपेटे, क्‍या करें, 

बिन पैसे सरके नहीं, कोई भी फाइल आपकी।''      

माननीय सभापति महोदय, यह शेर अपने आप में पर्याप्‍त है कि यह सरकार किस तरह का काम कर रही है। मैं भी राजस्‍थान की यशस्‍वी मुख्‍य मंत्री और चहुमुखी प्रतिभा के धनी नगरीय विकास मंत्री का बहुत बहुत धन्‍यवाद करना चाहता हूं इस बात के लिये, कि आईना में इन्‍होंने लिखा था कि जे.डी.ए. हमारा एक ब्रेंड नेम हो गया है। सही कहा इन्‍होंने जे.डी.ए. एक ब्रेंड नेम हो गया है। जे.डी.ए. एक ब्रेंड नेम हो गया है गरीब को कसकर उसकी जमीन औने-पौने एक दलाल की भूमिका बनाकर अपने आदमियों को बिकवाने का। इसके लिये बहुत बहुत धन्‍यवाद,शुक्रिया है कि इन्‍होंने जे.डी.ए. जैसी एक संस्‍था को जो ब्रेंड किया है भ्रष्‍टाचार से, यह अपने आप में एग्‍जाम्‍पल है। यह बात कर रहे थे कांग्रेस ने यह किया, कांग्रेस ने वह किया। मैं यह कहना चाहता हूं कि तीन साल आपके पास राज था, कानून आपके हाथ में था। अभी आप तस्‍वीर दिखा रहे थे, कहां गयी आपकी पुलिस, कहां गया आपका डिपार्टमेंट, कहां गये आपके मंत्रीजी, लेकिन आपके मंत्रीजी को यह फुर्सत नहीं कि 90 बी का हिसाब कब होगा, कौन लेगा, कहां लेगा, कैसे करेगा ? मैं यहां नाम नहीं लेना चाहता और न आरोप लगाना चाहता । माननीय सभापति महोदय, जे.डी.ए. की स्थिति यह है कि 90 बी होने केबाद हर वीक में हिसाब होता है। कितनी बीघा जमीन का हुआ, कितने रुपये लगे, कितने रुपये आये और रुपये कहां बंटते हैं, यह मंत्रीजी जानते हैं इस बात को, यह मैं नहीं कहना चाहता। सभापति महोदय, मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि जे.डी.ए.ने किस कदर इस जयपुर के अंदर जमीनों के भाव बढ़ाये हैं। आईना में यह भी छपा था कि माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय की प्रशस्ति के अंदर, उसमें लिखा आज ठेले वाला, पान वाला भी जमीनों के भाव पूछता है। किशनपोल से आने वाले माननीय सदस्‍य बता रहे थे कि जयपुर के अंदर एक सामान्‍य आदमी मकान नहीं ले सकता। क्‍या जे.डी.ए. भूमाफिया है ? अभी जौहरी बाजार से आने वाले सदस्‍य बता रहे थे कि जे.डी.ए. ने इतना पैसा कमाया। जे.डी.ए. कोई एजेन्‍सी है क्‍या पैसा कमाने की ? जे.डी.ए. बनाया गया था गरीबों को सस्‍ता मकान दिलाने के लिये। जे.डी.ए. ने वह काम नहीं करके जमीन बेचकर मुनाफा कमाकर और यह दिखाना चाहती है कि हम नफे में हैं। जो सरकार आपकी लोकतांत्रिक सरकार है, जनहित की सरकार है, उसका काम यह है ? यू.आई.टी.किसलिये बनी थी, यू.आई.टी.बनी थी गरीबों का काम करने के लिये। माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय, मैं पूछना चाहता हूं कि तीन साल में किसी भी यू.आई.टी. में नियमन हुआ, कृषि भूमि में नियमन हुआ, कच्‍ची बस्‍ती का नियमन हुआ ? आपने पहले कहा था हम नियमन के कानून बदलेंगे। कानून बदले, आपने कानून नहीं बदले। आपने यह बदला कि जो 500 मीटर की जमीन जिले में होती थी लैण्‍ड चैंज, वह आपने बना ली जयपुर में और जयपुर में कहां बना ली, अभी अख़बार में न्‍यूज आई थी इसका फैसला सी.एम.करेंगी । वह कौन बदलेगा मंत्री महोदय बदलेंगे या सी.एम.बदलेंगी ? क्‍या हम करप्‍शन को सिंगल विण्‍डो करना चाहते हैं, यह आपने किया। इसके अलावा आपको बहुत बहुत धन्‍यवाद है कि आपके विभाग के अंदर आपने भ्रष्‍टाचार का सिंगल विण्‍डो कर दिया है। आज जनता बहुत त्रस्‍त है । आपने हर बड़े शहर के अंदर वहां की जमीन को खुर्द-बुर्द करवा दी है। किसान को लुटवा दिया है और आप अपनी पार्टी के लोगों को और अन्‍य लोगों को लाभ देने के लिये आपने पता नहीं क्‍या-क्‍या किया ? सभापति महोदय, मैं आरोप नहीं लगाना चाहता, लेकिन चूंकि उन लोगों ने आरोप लगा दिये इसलिए मुझे इतनी बात कहनी पड़ी । मैं बताना चाहता हूं आप देखिये, इनके यहां देखिये ... (व्‍यवधान)... आप शांति रखिये। अभी क्या हुआ हाउसिंग बोर्ड में एक बहुत जोरदार बात है। जहां जहां हाउसिंग बोर्ड की स्‍कीम बनती है, वहां पर हाउसिंग बोर्ड की स्‍कीम के बाद, अब मैं फिर नाम लूगा, हल्‍ला करेंगे। ..(व्‍यवधान)..

एक माननीय सदस्‍य: लगाओ तो सही।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): लगा दूं । हाउसिंग बोर्ड के अंदर वहां के चेयरमैन साहब और कोई व्‍यक्ति हैं विशाल नाम का, वह मिलकर वहां जमीन परचेज करते हैं किसानों को दबाकर, कि तेरे यहां स्‍कीम आने वाली है और उसके बाद उस जमीन को वह मंहगे दामों में बेचते हैं। उसका उदाहरण मैं बताता हूं आपको। मानसरोवर में 15 हजार वर्ग मीटर जमीन हाउसिंग बोर्ड से डिएक्‍वायर कराई, कामर्शियल पट्टा लिया और 65 करोड़ रुपये में बेच दी। उसके बाद में हम बहुत पारदर्शी हैं। बहुत विकास कर रहे हैं, राजस्‍थान का बहुत विकास कर रहे हैं, जबरदस्‍त बात है।

 

Msr/usc/1600/2p/28032007

 

यही नहीं, इसी के पास 23 बीघा जमीन और करी थी एक्‍वायर जिसकी बोली चल रही है और 188 करोड़ रुपये उसके लग चुके हैं। अब यह तो मंत्रीजी अपने जवाब में बता दें कि यह आरोप झूठे हैं। भगवान करे झूठे निकलें। यह विशाल कौन है? यह चेयरमैन कौन है? यह क्‍या कर रहे हैं, यह क्‍या नहीं कर रहे हैं? क्‍या इसी काम के लिए नियुक्तियां होती हैं? यह भी देख लें क्‍योंकि मुझे कई बार लगता है कि इनके मुख्‍य सचेतक महोदय, जिन्‍होंने यह जो आरोप लगाया सरकार के ऊपर की ना सुचिता है और न सफाई है, वो सही साबित हो रहा है। और यू.डी.एच. ने तो यह साबित कर दिया है कि भ्रष्‍टाचार में आकंठ डूबी सरकार इस राजस्‍थान को इतना गर्त में डालना चाहती है कि जिसकी आप कल्‍पना नहीं कर सकते, सभापति महोदय।

सभापति महोदय, इसके अलावा और देखिये आप। टाउन प्‍लानिंग जो आज विषय है, बड़े आश्‍चर्य के साथ कहना पड़ रहा है मुझे कि टाउन प्‍लानिंग के काम करने को मंत्रीजी को फुर्सत नहीं है। आज भी टाउन प्‍लानिंग होता है अरबन इम्‍प्रूवमेंट रूल्‍स के आधार पर। टाउन प्‍लानिंग कहीं भी म्‍युनिसिपल एक्‍ट के आधार पर नहीं बनता है और जो टाउन प्‍लानिंग बनता है उसकी कोई गाइड लाइन इश्‍यू की हुई नहीं है। जो डी.टी.पी., जो एस.टी.पी., जिसका जो दिमाग है, चलती है वो कर लेता है और जो जहां भूमाफियाओं से एडजेस्‍ट हो जाता है वो जमीन का लैंड यूज जो बना देता है। यह हकीकत है। आज का मैं आपको उदाहरण देता हूं। आज भी भीलवाड़ा के अन्‍दर ड्राफ्ट मास्‍टर प्‍लान जारी हुआ पर उसमें आपत्तियां आयी लोगों की वह आपत्तियां ठीक नहीं की गयीं और ड्राफ्ट मास्‍टर प्‍लान के आधार के अन्‍दर लैंड यूज चैंज हो रहा है। तो यदि हमें लैंड यूज मर्जी से चैंज करना है तो हम यह ड्राफ्ट मास्‍टर प्‍लान नाम की जो तलवार है किसान पर क्‍यों लटकाते हैं हम?

सभापति महोदय, यह मास्‍टर प्‍लान इस डिपार्टमेंट के लिए एक ऐसा कमाऊ पूत है कि जिसकी भी आप कल्‍पना नहीं कर सकते क्‍योंकि मैंने इस विभाग में काम किया है इसलिए मैं आपको बात बता रहा हूं कि इस विभाग के अन्‍दर स्थिति यह है कि इस विभाग के अन्‍दर मास्‍टर प्‍लान बनता है उस एरिया का जिसके अन्‍दर आपका पैराफेरियल एरिया को काउंट करते हैं आप। अब आप क्‍या करते हो कि उस मास्‍टर प्‍लान के अन्‍दर पैराफेरियल एरिया में काश्‍तकार की जमीन के अन्‍दर आप सड़क का एक नेटवर्क डाल देते हैं। मेरी जमीन है, मैं काश्‍तकार हूं, उसमें सड़क आ गयी तो काई होशियार आदमी आया मेरे पास कि तेरी जमीन जा रही है सड़क में, तू मुझे दे दे। मैंने दे दी इनको, यहां गये जयपुर, जयपुर आकर जो आपकी लैंड यूज कमेटी है, सभापति महोदय, वो लैंड यूज कमेटी इतनी उस्‍ताद है कि जिसने यू.आई.टी. से पूछे बिना, बिना म्‍युनिसिपैलिटी से पूछे और रिपोर्ट लिये वे लैंड यूज चैंज कर देती है और यह कमायेंगे करोड़ों रुपये मुझे देंगे लाख रुपये। यह आपकी बहुत-बहुत तारीफ है, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद है।

यह स्थिति यहां पर खतम नहीं होती, सभापति महोदय, कितना बड़ा मखौल इस डिपार्टमेंट ने राजस्‍थान की जनता के साथ किया है, अभी कुछ दिनों पहले इनके डिप्‍टी सेक्रेटरी काक एक लैटर गया यू.आई.टी. में कि यू.आई.टी. का गठन नहीं हुआ है। अजमेर के प्रकरण में कह रहा हूं बात मैं, कि यू.आई.टी. का गठन नहीं हुआ है। अब मैं कहना चाहता हूं कि माननीय मुख्‍यमंत्रीजी किस को धोखा देना चाहती हैं? चेयरमैन आपने बना दिया, चेयरमैन गाड़ी काम में ले रहा है, स्‍टॉफ काम में ले रहा है, टेलीफोन काम में ले रहा है और सब काम में ले रहा है लेकिन वो यू.आई.टी. के काम नहीं कर सकता है। आपके डिप्‍टी सेक्रेटरी का लैटर गया हुआ है यू.आई.टी. के अन्‍दर कि यू.आई.टी. गठन नहीं हुआ है। इतना बड़ा मखौल जनता के साथ, इतना क्रूर मजाक और फिर भी आप कहो हम बहुत बढि़या आदमी हैं तो आपकी मर्जी है।

सभापति महोदय, यहीं बात खतम नहीं होती है, यू.आई.टी. के विरोध के बाद भी यह सरकार इस स्‍कीम एरिया से बनी यू.आई.टी. की स्‍वीकृति के या बिना रिकमण्‍डेशन के केवल प्राइवेट पार्टी के लैटर पर अपनी कमेटी में आउट ऑफ एजेंडा प्रस्‍ताव ले कर के और जमीन डी-एक्‍वायर कर देती है। कौनसा विकास कर रहे हैं अपन ऐसा कि डा. बाहेती को जमीन देकर आप कौनसा विकास कर लोगे? जो जमीन प्राइम लैंड है, अजमेर के अन्‍दर प्राइम लैंड कह रहा हूं आपसे मैं, वो जमीन कर दी डी-एक्‍वायर उसके बाद भी कह रहे हैं हम तो बहुत बढि़या आदमी हैं।

यह सब आरोप नहीं लगा रहा हूं मैं, यह बातें मैं तथ्‍य से बता रहा हूं और मैं चाहता हूं कि मंत्रीजी इन बातों का जवाब दें।

सभापति महोदय, एक बात और बताता हूं कि आपके पास ...

श्री सभापति: अब आप कन्‍क्‍लूड करें।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): सभापति महोदय, मेरे को थोड़ा टाइम और दीजिए बोलने के लिए, मैंने चालू किया है अभी तो।

श्री सभापति: आप दो मिनट में कन्‍क्‍लूड कीजिए।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): मैं आपसे यह कह रहा था उस बात को लेकर के कि आप देखिये.....

श्री सभापति: अब वो काल्‍पनिक है कि वास्‍तविक है, इनको कहने दो आप।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): आप यह देखिये, में आपसे एक बात कहना चाहता हूं कि लैंड यूज कमेटी को ...

श्री सभापति: यह कह रहे हैं कि काल्‍पनिक है, मैंने कहा काल्‍पनिक है या वास्‍तविक है, कहने दो उनको।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): सभापति महोदय, मैं बात काल्‍पनिक नहीं कह रहा हूं, आप चाहते हैं कि नाम रखूं, वो मेरे से मत कराओ आप। आप चाहते हैं आपके मंत्री फसें? वो वैसे ही फसे हुए हैं, मेरा यूज क्‍यों करना चाहते हैं आप? सभापति महोदय, मैं आपसे यही कहना चाहता हूं, मास्‍टर प्‍लान के अन्‍दर लैंड यूज कमेटी को

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैं आपका क्‍या उपयोग करूंगा ...(व्‍यवधान)... मैं तो व्‍यवस्‍था की बात कर रहा हूं कि यहां काल्‍पनिक बात नहीं की जा सकती, अपने नियमानुसार जब तक आपकी कोई नालेज नहीं हो, आपकी नालेज के आधार पर, तथ्‍यों के आधार पर बात की जाती है। 

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हम तो आपकी नालेज का ही फायदा उठा रहे हैं। जो नालेज आपने गैदर की है ओर जो वक्‍तव्‍य आप देते रहते हैं उसी का फायदा उठा रहे हैं। वो ही सेफिशिएंट है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): वो कह रहे हैं कि फसाना चाहते हैं।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): जितनी बात मैंने बोली है वो उसमें टेप है, आप मंगा लें और, माननीय मंत्रीजी, उसकी जांच करवा लें ...(व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): किस की जांच करायेंगे मंत्रीजी? मंत्रीजी किस की जांच करायेंगे, काल्‍पनिक बात। 

श्री जुबेर खान (रामगढ़): डा. बाहेतीजी, यह महावीरजी तो चाहते हैं कि इन मंत्रियों के नाम यहां पर रिकार्ड पर लाओ। यह यह चाह रहे हैं।

श्री जितेन्‍द्र सिंह (अलवर): शिक्षा मंत्रीजी जांच कर लें मंत्रीजी की, ठीक रहेगा।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): सभापति महोदय, लैंड यूज कमेटी को यह अधिकार तो है कि वो लैंड यूज चैंज करे, उसे यह अधिकार नहीं है कि लैंड यूज कमेटी पैसे उनसे वसूल करे। कोई उसका नियम नहीं है इसके बाद भी लैंड यूज कमेटी दादागीरी के अन्‍दर पैसे वसूल रही है। 73(क) में स्‍पष्‍ट प्रावधान है कि यदि मास्‍टर प्‍लान में लैंड यूज जो है उस लैंड यूज के ...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सभापति महोदय, बिलकुल कल्‍पनाओं के आधार पर बिना किसी तथ्‍यों के अनर्गल बोले जा रहे हें। लैंड यूज कमेटी को अधिकार है लैंड यूज तो चैंज करे परन्‍तु पैसे इकट्ठे नहीं करे। किसी मामले में पैसे, कोई तथ्‍य तो सामने रखें, यह कोई बात थोड़ी हुई, सभापति महोदय।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): नहीं, रख रहा हूं मैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप सब्र रखो, सारे तथ्‍य आयेंगे अभी।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): हां, मैं रख रहा हूं। मैं रख रहा हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सभापति महोदय, इस सदन का उपयोग इसके लिए होगा क्‍या?

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): मैं रख रहा हूं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप किस के पक्ष में बोल रहे हो? ...(व्‍यवधान)... पक्ष में बोल रहे हैं खिलाफ में बोल रहे हैं? सारे पक्ष में बोल रहे हो क्‍या? मदद करना चाहते हो इनकी? क्‍या कर रहे हो आप?

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): मंत्री महोदय, एक बात और दखिये आप। आज के अख़बार में पढ़ा होगा आपने, 250 करोड़ का फायदा दे रहे हैं डी.एल.एफ. को इन्‍टरनेशनल कन्‍वेन्‍शन और होटल नीति के लिए जबकि इनके मंत्रीजी ने आपत्ति की है उसके बाद भी डी.बी. की जुर्रत देखिये कि डी.बी. ने प्रस्‍ताव पास करक दिया कि हम दे देंगे और डी.एल.एफ. चाहती है कि पैसे और कम हो। इसके बाद आप कहते हो कि आरोप का सवाल है। यह आपके सामने रहा एक आरोप, यह लो आप इसका प्रमाण लो। एक यह है आपके, सभापति महोदय ...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सभापति महोदय, समाचार पत्रों के आधार पर आरोप लगाये जा सकते हैं ...(व्‍यवधान)...

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): समाचार पत्रों में कोई चीज छप गयी है उस आधार पर आरोप लगा रहे हैं यह। ...(व्‍यवधान)...

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): चलो नहीं लगाऊंगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): समाचार पत्रों का उद्धरण दिया जा सकता है सदन में?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): विज्ञापनों तथा मीडिया के ऊपर आपकी सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। करोड़ों रुपये।

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): समाचार पत्रों के आधार पर अगर मानते हैं तो आप लोग ...(व्‍यवधान)... (समय समाप्ति सेचक घंटी)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): सवाईमाधोपुर में था, किरोड़ी लालजी का आदमकद फोटो छप रहा था ...(व्‍यवधान)... आप तो अख़बार वालों को खूब खुश कर रहे हो और यहां अख़बार वालों की बात करें तो परेशानी होती है।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): सरकार का एक पैसा नहीं लगा है, एक पाई नहीं है सरकार की।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मैं यह नहीं कह रहा, अच्‍छा काम किया।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): और आप रो-रो कर मर गये, वहां 50 साल की मांग थी जनता की, भला हो वसुंधराजी का, सांवर मलजी का यह मांग पूरी हुई है। ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): हम तो कह रहे हैं अखबारों की तरफ ध्‍यान देते हो न।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): कार्यकर्ता खुशी मना रहे हैं उसमें क्‍या दिक्‍कत है, जनता खुशी मना रही है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह अखबारों का विरोध क्‍यों कर रहे हैं?

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): दर्द हो रहा है दिखता है?

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): दर्द तो किस के होगा, जब पता पड़ जायेगा।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): मैं समाप्‍त कर रहा हूं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मंत्री महोदय, नाराजगी नहीं है हमें तो इस बात की खुशी है।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): सभापति महोदय, डी.एल.एफ. को जो जमीन यह सरकार दे रही है वह जमीन है 337 करोड़ की और दे रही है 117 करोड़ रुपये के अन्‍दर। यह बहुत बड़ा मुद्दा इसके अन्‍दर है। वो कामर्शियल लैंड है, इनको चाहिए  था कि उसको आक्‍शन करते, उसकी नीलामी लगाते यह उसके बाद देते लेकिन नहीं, केवल एक पार्टी को लाभ देने के लिए यह ऐसा कर रहे हैं। इसके बाद भी यह कहते हैं कि हम बहुत पारदर्शिता से काम कर रहे हें। यह बात आपके ध्‍यान में लाना चाहता हूं।

श्री सभापति: धन्‍यवाद। अब आप समाप्‍त करें प्‍लीज।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): सभापति महोदय, मैं बताना चाहता हूं पक्षपात। पुष्‍कर में नगर पालिका का चेयरमैन जिसने करोड़ों रुपये की जमीन गवर्नमेंट की बेच दी। कलक्‍टर ने जांच करी, कलक्‍टर ने जांच रिपोर्ट भेजी है एफ.आई.आर. दर्ज कराने के लिए। आपका डी.एल. भी गया, उसमें कुछ नहीं हुआ क्‍योंकि उनकी पार्टी का है और दूसरी पार्टी के लोगों को यह फट करते हैं।

एक एजेंसी ऐसी है वियान सिटी, मैं नाम लेना चाहता हूं उस बात की, वह अजमेर में जमीन बेच रही है बिना 90 बी के। जमीन परचेज नहीं की और वो आज वहां मकान बेच रही है और पैसे इकट्ठे कर रही है और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है क्‍योंकि सरकार की इसमें पार्टनरशिप है, मंत्रीजी की इसमें पार्टनरशिप है। मैं आरोप लगाना चाहता हूं, मंत्रीजी, आप जवाब में यह भी बताइये।

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): मंत्रीजी, जवाब में यह भी बताएं कि यह विशाल कौन है और दूसरा कौन है? और मैं उम्‍मीद करता हूं ...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): किस आधार पर कह रहे हो आप, क्‍या तथ्‍य हैं आपके पास, क्या प्रमाण हैं आपके पास?

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): इसके तथ्‍य हैं मेरे पास।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह क्‍या बात हुई, सभापति महोदय।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): मेरे पास बहुत तथ्‍य हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हर कोई मामले में मंत्रीजी की पार्टनरशिप ...(व्‍यवधान)... यह क्‍या है, सभापति महोदय। ...(व्‍यवधान)...

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): मेरे पास तथ्‍य हैं, मेरे पास जानकारी है ...(व्‍यवधान)...

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आप बिना सबूत या बिना आधार के कोई भी इस तरह से ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह सुनने के लिए बैठे हैं, सभापति महोदय, हम यहां। ...(व्‍यवधान)...

 

Ars/usc/1610/2q/28032007/1

 

 श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय सभापति महोदय, वह अपनी जानकारी के आधार पर कह रहे हैं ...(व्‍यवधान) और कहसकते हैं उनके पास जानकारी है तो, और आपके पास सबूत है तो आप ...(व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): मेरी जानकारी है ।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): पूरा जयपुर बिक गया ...(व्‍यवधान) दलाल घाटे में ...(व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय सदस्‍य, जयपुर तो बिक गया अब राजस्‍थान को बेचना है ...(व्‍यवधान) आप अपने जवाब में बताएं ...(व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): जिस वियान सिटी का जिक्र कर रहे हैं उससे मेरा कोई लेना देना नहीं है ...(व्‍यवधान) या उसकी मैंने कभी शक्‍ल भी देखी हो ।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): मन्‍त्री जी, जयपुर तो बिक गया ...(व्‍यवधान) अब राजस्‍थान को बेचना है ...(व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): ...(व्‍यवधान) तो माननीय सदस्‍य ...(व्‍यवधान) मैं यहां पर छोड़ने को तैयार हूं। ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपका नाम तो लिया ही नहीं, मंत्री हैं इन्‍होंने तो यह कहा है मन्‍त्री हैं ...(व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय सभापति महोदय, टेबल करवाएं आप ...(व्‍यवधान) आरोप लगा रहे हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): प्रमाणित हो ना, टेबल पर रखवाओ ...(व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): मैं यह कहता हूं माननीय मंत्री जी ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: अंकित नहीं हो ।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर):000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): 000

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

श्री सभापति: ऐसा है, अंकित नहीं हो रहा है।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): 000

श्री सभापति: जो जो आरोप लगाये हैं और तथ्‍यों से परे हैं तो उनको देख लेंगे और उनको कार्यवाही से निकाल देंगे ...(व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): 000

श्री सभापति: मंत्री महोदय, मैंने कह दिया है ।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): 000

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): 000

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): 000

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): 000

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य, अंकित नहीं हो रहा है। माननीय मंत्री महोदय, बैठें आप ।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आप विराजें, अंकित नहीं हो रहा है।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): 000

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री सभापति: सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, बैठिये आप, विराजिये। टाइम बढ़ाना है, आप विराजें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री सभापति: विराजें, आसन पैरों पर है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री सभापति: अंकित नहीं हो रहा है, आप बैठिये।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री सभापति: आप आसन को आदेश कर रहे हैं, अंकित नहीं हो रहा है। माननीय सचेतक महोदय, इस प्रकार से .........

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री सभापति: आप विराजिये पहले ।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री सभापति: आप आसन के आदेश की पालना कीजिये, विराजिये आप। ...(व्‍यवधान) एक मिनट समय बढ़ा रहे हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): 000

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

श्री सभापति: अंकित नहीं हो रहा है।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

श्री सभापति: अब आप विराजें, अंकित नहीं हो।

 

सदन की कार्यवाही

विधान सभा की बैठक के निर्धारित समय में वृद्धि

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय सभापति महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि सदन का समय आज की कार्य सूची समाप्‍त होने तक बढ़ाया जाय।

श्री सभापति: प्रश्‍न यह है कि माननीय मुख्‍य सचेतक जी ने जो प्रस्‍ताव रखा है कि आज की कार्य सूची समाप्‍त होने तक सदन का समय बढ़ाया जाए ?

( स्‍वीकृत )

सदन का समय बढ़ाया गया।

 

मुखबंद के निर्धारित समय में वृद्धि

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय सभापति महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मुखबंद का समय जो 4.30 बजे है उसको 4.30 के बजाय 6.00 बजे तक मुखबंद का समय बढ़ाया जाए।

श्री सभापति: प्रश्‍न यह है कि आज जो मुखबंद का समय 4.30 बजे था उसकी जगह 6.00 बजे तक किया जाए ?

( स्‍वीकृत )

मुखबंद का समय 6.00 बजे किया गया।

 

 

अनुदान की मांगों पर अग्रेत्‍तर विचार

 

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): 000

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

श्री सभापति: माननीय विपक्ष के नेता।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सरकार के सारे मंत्री खड़े हो गये माननीय सदस्‍य को धमकाने के लिए यह उचित प्रतीत नहीं होता है। आप आस्‍तीनें चढ़ा रहे हैं उधर वो चढ़ा रहे हैं यह कोई कायदे की बात थोड़े ही हुई । विनम्रता दिखाओ।

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): 000

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्र&