कैलाश/चौहान 23.3.07 11.00 (1)1a

 

अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृतान्‍त

 

अंक 7     बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का तेईसवां दिवस      संख्‍या 16

 

शक्रवार,  23 मार्च, 2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

तारांकित प्रश्नोत्तर

 

 

श्री अध्‍यक्ष: श्री मदन राठोड ।

पाली क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण हेतु योजना

232. श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): क्‍या पर्यावरण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि केन्‍द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पाली क्षेत्र को अत्‍यंत प्रदूषित क्षेत्र मानते हुए देश के 22 समस्‍याग्रस्‍त क्षेत्रों में शामिल कर दिया है ? यदि हां, तो गत 5 वर्षों में राजस्‍थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा इस संबंध में किए गए उपायों का विवरण सदन की मेज पर रखें ।

(2) क्‍या यह भी सही है कि वर्ष 2006 के अंत तक इस क्षेत्र में करोडों रुपये राज्‍य सरकार व उद्यमियों द्वारा व्‍यय करने के उपरांत भी प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं हो पाया है ? यदि हां, तो क्‍यों व अब सरकार प्रदूषण नियंत्रण हेतु क्‍या कार्यवाही करने का विचार रखती है ।

वन एवं पर्यावरण मंत्री (श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे): (1) जी हां । राजस्‍थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा पाली के जल प्रदूषण के निवारण हेतु गत 5 वर्षों में की गई मुख्‍य कार्यवाही का विवरण संलग्‍नक अ' पर उपलब्‍ध है ।

(2) यह सही है कि पाली स्थित तीनों संयुक्‍त उपचार संयंत्रों की तकनीकी एवं संचालन संबंधी खामियों के कारण संपूर्ण औद्योगिक उच्छिष्‍ट को निर्धारित मानकों तक उपचारित करना संभव नहीं हो पा रहा है । गैर औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत 246 जलप्रदूषक उद्योगों से हो रहे प्रदूषण के प्रभावी नियंत्रण के लिए राजस्‍थान राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जल अधिनियम, 1974 की धारा 33 ए के अंतर्गत बंद करने के निर्देश जारी किये थे, किन्‍तु उक्‍त निर्देशों के क्रियान्‍वयन के विरुद्ध संबंधित उद्योगों द्वारा माननीय उच्‍च न्‍यायालय से स्‍थगन आदेश प्राप्‍त कर रखें हैं ।

औद्योगिक क्षेत्र (प्रथम एवं द्वितीय) में कार्यरत 63 जल प्रदूषक उद्योगों को, जो संयुक्‍त उपचार संयंत्रों से नहीं जुडे थे को राजस्‍थान राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जल अधिनियम 1974 की धारा 33 ए के अंतर्गत बंद करने के निर्देश जारी किये, किन्‍तु राजस्‍थान राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के इन निर्देशों के क्रियान्‍वयन के विरुद्ध संबंधित उद्योगों द्वारा माननीय उच्‍च न्‍यायालय से स्‍थगन आदेश प्राप्‍त कर रखें है ।

इस समस्‍या के निवारण हेतु रुपये 18.865 करोड की स्‍वीकृति योजना में किये जाने वाले कार्यों का विवरण निम्‍न प्रकार है:-

a.                          तीनों संयंत्रों का उन्‍नयन

b.                          संयंत्र यूनिट नं.4 का नया निर्माण

c.                           नाला निर्माण

d.                          स्‍लज डिस्‍पोजल हेतु भूमि का विकास ।

पाली जल प्रदूषण नियंत्रण, परिशोधन एवं अनुसंधान फाउंडेशन पाली द्वारा करवाये जा रहे कार्यों का विवरण संलग्‍नक पर उपलब्‍ध है ।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह जानना चाहूंगा कि जब पाली देश के 22 समस्‍याग्रस्‍त क्षेत्रों में शुमार हो गया तो वह कौन कौन अधिकारी हैं जिनके कार्यकाल में उनकी लापरवाही से इतनी बडी मात्रा में अब तक इस प्रकार का प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयां स्‍थापित हो सकी और उनके विरुद्ध क्‍या कार्यवाही की जा रही है । दूसरा क्‍या यह सही है कि पाली में औद्योगिक क्षेत्र फेज तृतीय है, आपने अभी फैज प्रथम और द्वितीय का दिया है । फेज तृतीय में बहुत अधिक उद्योग स्‍थापित हैं । जहां भी जल प्रदूषण उद्योग स्‍थापित है यदि हां तो कितने हैं और उनके बारे में क्‍या विचार है । तीसरा आपके उत्‍तर में संलग्‍नक अ' के क्रम संख्‍या 1 के अनुसार उक्‍त अधिनियम 1974 कब लागू किया गया तथा नये उद्योग स्‍थापित करने हेतु सम्‍मति कब से नहीं दी जा रही है ।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, फेज तृतीय में कुल 325 उद्योग हैं । अध्‍यक्ष महोदय, तीनों संयंत्रों के अपग्रेडेशन हेतु दिनांक 12.12.05 को एडवेंट एनवायरो केयर टैक्‍नोलोजी प्राइवेट लिमिटेड  के द्वारा  8.283 करोड रुपये का एग्रीमेंट किया गया जिसमें फैज द्वितीय जो ट्रीटमेंट प्‍लांट है उसका कार्य पूर्ण हो चुका है । फेज प्रथम में ट्रीटमेंट प्‍लांट और तृतीय ट्रीटमेंट प्‍लांट इनका कार्य 31 मार्च, 07 तक पूरा हो जायेगा । अध्‍यक्ष महोदय, पिछले तीन वर्षों में राज्‍य सरकार द्वारा अधिक प्रदूषण बढने से रोकने के लिये जो नयी ईकाइयां लग रही हैं उन ईकाइयों को हमने अनुमति देने से इंकार कर दिया है । सीईटीपी के अपग्रेडेशन की कार्यवाही जो मैंने आपसे अर्ज की 31 मार्च, 07 तक पूरी कर दी जायेगी  और 12.12.05 को केयर टैक्‍नोलोजी प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा जो ठेका दिया गया था उसका काम 31 मार्च तक पूरा हो जायेगा । वास्‍तव में यह बात मानने में कोई गुरेज नहीं है कुछ तो ऐसे गैर औद्योगिक क्षेत्र थे 246 जो बिलकुल ही सीईटीपी से जुडे हुए नहीं थे । हमने जल अधिनियम की धारा 33 ए के तहत उनको नोटिस दिया और उन गैर औद्योगिक क्षेत्रों को बंद करने का नोटिस धारा 33 ए में दिया जो राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय द्वारा है, स्‍थगन आदेश उन्‍होंने प्राप्‍त कर लिया । इसी तरह 63 और ऐसे उद्योग हैं जिनको हमने 33 ए के तहत बंद करने की कार्यवाही की है परन्‍तु यह मामले राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय में विचाराधीन हैं । अध्‍यक्ष महोदय, पूर्व में यह सूती वस्‍त्र उद्योग रँगाई छपाई के उद्योग, इन वस्‍त्रों की रँगाई छपाई के प्रोसेस में कास्टिक सोढा काम में लिया जाता था । निरी नागपुर नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्‍टीट्यूट द्वारा संयुक्‍त उपचार संयंत्र के अध्‍ययन में यह पाया गया कि सीईटीपी में आने वाले कास्टिक युक्‍त पानी को उपचारित करने के लिये इसे न्‍युट्रलाइज करने के लिये एसिड के माध्‍यम से इसको न्‍युट्रलाइज किया जाये परंतु इस प्रक्रिया के लिये प्रयुक्‍त होने वाले सलफ्युरिक एसिड की कास्‍ट ज्‍यादा पडती थी इसलिए वस्‍त्र उद्योगों को प्रोत्‍साहित किये जाने के लिये एसिड बेस्‍ड वाटर जनित हो, यह एसिड बेस्‍ड वाटर सूची वस्‍त्र उद्योगों के जनित कास्टिक बेस्‍ड की प्रकृति को न्‍यट्रलाइज करने के लिये यह जितने भी उद्योग हैं इनमें न्‍युट्रलाइज करने का हमने कहा । अध्‍यक्ष महोदय, इसमें जो रँगाई छपाई होती है इनमें रँगाई छपाई के द्वारा इसको  सलफ्युरिक एसिड से ट्रीट किया जाता था । जो काटन होती थी उसको एसिड करने से उसका काटन जल जाती थी और इससे अमलीय एसिड निकलता था इसको बंद करने के लिये राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय द्वारा आदेश प्रसारित किये गये उसके द्वारा हमने इसको बंद करने का आदेश दिया । अध्‍यक्ष महोदय, सिंथेटिक कपडों का बढता चलन और मैकेनाइज प्रोसेस को काम में लेने के कारण पहले की तुलना में कई गुना अधिक सिंथेटिक कपडों की रँगाई छपाई होने लगी है । इसलिए अब जो सिंथेटिक कपडों को काम में लाया जा रहा है इसमें काटन नहीं है । ऐसे अनेक प्रकार के सिंथेटिक यान द्वारा कपड़ा बनाया जा रहा है इसलिए सलफ्युरिक एसिड का कम से कम मात्रा में उपयोग किया जाता है । मात्र इसको न्‍युट्रलाइज करने के लिये एसिड का उपयोग किया जाता है ।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे एक भी प्रश्‍न का उत्‍तर नहीं दिया इन्‍होंने । मैंने पहला प्रश्‍न पूछा था इतनी लापरवाही जिन्‍होंने की है उनके विरुद्ध क्‍या कार्यवाही करेंगे, उसका इन्‍होंने कोई उत्‍तर नहीं दिया । दूसरा मैंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र तृतीय में जो उद्योग स्‍थापित हैं उनके लिये आपने कोई नोटिस दिया, क्‍या किया, उसके लिये भी इन्‍होंने कोई उत्‍तर नहीं दिया । तीसरा मैंने पूछा कि अधिनियम, 1974 आपने कब लागू किया और सम्‍मति कब से जारी नहीं करने का निर्णय लिया है । अध्‍यक्ष महोदय, इन तीनों में से किसी एक का भी उत्‍तर नहीं दिया । पहले तीनों में से एक का तो उत्‍तर दें । मेरे पूरक प्रश्‍नों में से एक का भी उत्‍तर इन्‍होंने नहीं दिया ।

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके मार्फत मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहता हूं जब इनको पता है कि गवर्नमेंट ने जो आदेश दिया उसके खिलाफ....

श्री अध्‍यक्ष: पहले मूल प्रश्‍नकर्ता का जवाब आने दीजिए उसके बाद आपको मौका दूंगी ।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): तीनों में से एक का भी उत्‍तर नहीं आया अभी तो मेरे और पूरक प्रश्‍न हैं ।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपने सम्‍मति की जो बात की है यह 2006 में पाली जल प्रदूषण नियंत्रण परिशोधन अनुसंधान फाउंडेशन यह जो तीनों ट्रीटमेंट प्‍लांट है इनको बंद करने का, सम्‍मति नहीं देने का आदेश दिया था उसके पश्‍चात् ....

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): कारखाना स्‍थापित करने की सम्‍मति दी जाती है आपके बोर्ड के द्वारा, आपके बार्ड से यह सम्‍मति मिलती है तभी कोई कारखाना लगाया जा सकता है । परमिशन टू एस्‍टेबिलिशमेंट और फिर ओपरेट । एनओसी टू एस्‍टेबिलिशमेंट एण्‍ड एनओसी टू ओपरेशन ।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह जिस सम्‍मति की बात कर रहे हैं जो गैर औद्योगिक क्षेत्र इंडस्‍ट्री थी उनको जल अधिनियम, 1974 की धारा 33 ए के तहत हमने आदेश दिया था और उस आदेश के विपरीत उन्‍होंने राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय से स्‍थगन प्राप्‍त किया है ।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैं पूछ रहा हूं आपने यह लागू कब किया और कब से सम्‍मति नहीं दे रहे हैं । यह तो क्लियर करें कि लागू कब से किया और सम्‍मति कब से नहीं दे रहे हैं ।

               

ans/usc   11.10  1b   23.03.2007

 

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): 23  मार्च,1974 को लागू किया गया।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 1974 को, तो उसके बाद सम्‍मति देना कब से बंद किया और इसके दरमियान यदि सम्‍मति दी तो क्‍यों दी ? बिना सम्‍मति के उद्योग लगे उनके लिए क्‍या सोच रहे हैं आप ?  मैंने  पहला प्रश्‍न किया .... 

श्री अध्‍यक्ष: 1974 में तो आपका अधिनियम लागू हुआ, वह यह पूछ रहे हैं कि इसका मुताबिक 33-ए जो उसकी धारा है उसके मुताबिक  आपने उनको नोटिस कब दिया।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): हां, यह पूछ रहा हूं कि कब यह लागू  किया और कब से आपने सम्‍मति देना बंद किया। तीनों प्रश्‍नों के, उत्‍तर एक का भी नहीं आया।

श्री अध्‍यक्ष: उनके पास सूचना थी वह दे दी।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): यह भी सूचना नहीं है , तो उन अधिकारियों के खिलाफ क्‍या कार्यवाही करेंगे जिनकी लापरवाही से ऐसे  उद्योग स्‍थापित हो गए।  यह तो आप दे दें

श्री अध्‍यक्ष: आप सुनिये तो सही, आप मंत्री जी को सुनिये।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): मैं सुमेरपुर  के सदस्‍य को यह जानकारी देना चाहता हूं  बिना कन्‍सेंट के गैर औद्योगिक क्षेत्र के अंदर जो यूनिट थी..(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): नहीं औद्योगिक क्षेत्र में। मैं गैर औद्योगिक की बात नहीं कर रहा। उसका तो आपने दे दिया और उसमें हाई कोर्ट का स्‍टे भी हो गया। मैं औद्योगिक क्षेत्र की बात कर रहा हूं जो बिना सम्‍मति के लगे और जिन्‍होंने लापरवाही की उनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही करेंगे यह तो बताइये। उन अधिकारियों के खिलाफ...

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पुन: निवेदन करना चाहता हूं...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आप इसको टाल क्‍यों रहे हैं ? अध्‍यक्ष महोदय, यह टाल रहे हैं। जिनकी लापरवाही से या जिन्‍होंने सम्‍मति दी, आपने जब यह लागू  कर दिया अधिनियम, उसके बाद में भी जिन्‍होंने सम्‍मति दी उन अधिकारियों के विरूद्ध, जिन्‍होंने लापरवाही से सम्‍मति दी उनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही करेंगे, क्या उसकी जांच करेंगे, यह आप स्‍पष्‍ट तो करें।

श्री अध्‍यक्ष: जांच करेंगे..(व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य को पुन: जानकारी देना चाहता हूं फर्स्‍ट और सैकण्‍ड फैज में63 ऐसे उद्योग है..(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): फर्स्‍ट सैकण्‍ड तो आपने दे दिया और उसका हाईकोर्ट का स्‍टे भी आ गया।

श्री अध्‍यक्ष: आप सुनिये तो सही इन्‍हें। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): थर्ड फेज में जिसमें 325 उद्योग स्‍थापित है, पहले तो यह बताए, दूसरा जिन्‍होंने सम्‍मति  दी या जिनकी लापरवाही से ऐसे एसिडिक एफ्यूलेंट फैलाने वाली फैक्‍ट्रियां लग गई जबकि आपका ट्रीटमेंट प्‍लांट इसके लिए सक्षम नहीं था। जिन्‍होंने यह सम्‍मति दी ऐसे अधिकारियों के विरूद्ध जांच करके आप क्‍या कार्यवाही करने जा रहे हैं वह तो स्‍पष्‍ट करें।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं पुन: सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य से निवेदन करना चाहता हूं कि जिन लोगों को हमने सम्‍मति नहीं दी..(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैं लोगों की बात फिर भी नहीं कर रहा हूं, मैं इण्‍डस्ट्रियलिस्‍ट के खिलाफ में नहीं हूं, मैं फैक्ट्रियों के खिलाफ भी नहीं हूं। मैं यह कह  रहा हूं जिन्‍होंने लगाने दी उन अधिकारियों के विरूद्ध, उनका क्‍यों बचाना चाहते हैं यह समझ में नहीं आई।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप सुन ले। 

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, यह घुमा फिराकर वो ही कर रहे हैं। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि यह घुमा फिराकर फिर वही कर रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, 2004 से किसी उद्योग को हमने..(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): कोर्ट का स्‍टे उनके विरूद्ध नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप सुनिये, वह कह रहे हैं, जवाब दे रहे हैं, आप सुनिये। (व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): इसी क्‍वेश्‍चन का उत्‍तर आयेगा, इसी क्‍वेश्‍चन को रिपिट कर रहा हूं..(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): पार्टी मिटिंग के फैसले विधान सभा में  क्‍यों कर रहे हैं ?

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): मेरा क्‍वेश्‍चन यह है कि जब आपका ट्रीटमेंट प्‍लांट फैल था अकार्डिंग टू योअर आफिसर रिपोर्ट, ट्रीटमेंट प्‍लांट फैल था (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह क्‍या बात हुई ?

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): ट्रीटमेंट प्‍लांट फैल होने के बाद फिर उन थर्ड फैज में उन इण्‍डस्‍ट्री क्‍यों लगने दिया गया जब उनके पास बोर्ड की एनओसी नहीं थी, यह इनका क्‍वेश्‍चन है, जब ट्रीटमेंट प्‍लांट फैल की रिपोर्ट आ गई ट्रीटमेंट प्‍लांट फैल है तो फिर थर्ड फैज में उन लोगों को इण्‍डस्‍ट्री क्‍यों लगाने दी गई जिन इण्‍डस्‍ट्री पर एनओसी नहीं थी।

श्री अध्‍यक्ष: आप पाली वालों को पूछ लेने दीजिए। (व्‍यवधान) आप तो बिराजो, पाली वालों को पूछ लेने दो।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, क्‍योंकि यह उद्योग विभाग से संबंधित है, थोड़ा सा क्लियरिफाई करूंगा माननीय सदस्‍य को कि पहले काटन लेटेड यार्न बनता था उसकी प्रोसेसिंग होती थी उन्‍हीं इण्‍डस्‍ट्री को उन्‍होंने सिंथेटिक यार्न में कन्‍वर्ट किया  है उस प्रोसेस में कॉमन ट्रीटमेंट प्‍लांट का, ट्रीटमेंट फेसेलिटी वही रही जबकि उन्‍होंने सिंथेटिक यार्न किया इसलिए एसेडिक यह चेंज हुआ है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): बिल्‍कुल सही कह रहे हैं। मैं यही निवेदन कर रहा हूं, मैं यह जानना चाहता हूं कि जिनकी लापरवाही से....

श्री अध्‍यक्ष: जवाब दे दिया इन्‍होंने।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): इतने आदमी, एसिडिक फैलाने वाली फैक्ट्रियां लग गई उन अधिकारियों के खिलाफ  जांच करके आप क्‍या कार्यवाही करना चाहते हैं, एक तो यह क्लियर करें। दसूरा,आपने फर्स्‍ट और सैकण्‍ड को तो बना दिया और उनको आपने नोटिस भी दे दिया और उनको हाई कोर्ट से उन्‍होंने स्‍टे भी प्राप्‍त कर लिया लेकिन थर्ड फैज के कहीं कोई नोटिस नहीं, कोई स्‍टे नहीं। 

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मेरा इसी से संबंधित प्रश्‍न है।

श्री अध्‍यक्ष: श्री सुरेन्‍द्र गोयल।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 325 इण्‍डस्‍ट्रीज हैं उसका तो क्लियर कर दीजिए।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मुझे एक प्रश्‍न पूछना है..( व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): नहीं, पहले मेरा...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: श्री सुरेन्‍द्र गोयल।

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): मेरा नाम पुकार लिया।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मेरा तो आप क्लियर होने दें। मैंने तीन पूरक प्रश्‍न किए, जवाब एक का भी नहीं आया।

श्री अध्‍यक्ष: वह सबके जवाब एक साथ देंगे। आपने पूछ लिया, अब उनको भी पूछने  दो (व्‍यवधान) जवाब देंगे वह ।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैं यह जानना चाहता हूं क्‍या यह सही है कि मेयड़ा बाँध में पाली के कारखानों का प्रदूषित जल एकत्रित हो गया , उस बाँध में प्रदूषित जल एकत्रित हो गया, अगर हां तो क्‍यों, उसको रोकने का क्‍या उपाय है, जिन किसानों की भूमि बंजर हुई है उनको मुआवजा देने की क्‍या योजना है?(व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): इसी बाँध का पानी निकाला गया(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष:  ना-ना, मैंने आपका  नाम नहीं पुकारा।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): यह क्‍वेश्‍चन एक ही क्‍वेश्‍चन है, बाँध का निकाला गया..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैंने आपका नाम नहीं पुकारा। मत लिखना, अंकित नहीं हो।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): 000

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से यह निवेदन कर रहा हूं, जानना चाहता हूं कि हाई कोर्ट से स्‍टे कितने वर्ष पहले लिया गया  और हाई कोर्ट का स्‍टे लेने के बाद में क्‍या राज्‍य सरकार उस स्‍टे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गई है क्‍या , और सुप्रीम कोर्ट में नहीं गई तो..(व्‍यवधान)  तो इसके पीछे क्‍या कारण है और इतने सालों से लोगों के जान माल का नुकसान हो रहा है और पूरा पाली प्रदूषित हो रहा है, ऐसे हालात है कि वहाँ पर आदमी खड़ा नहीं रह सकता। रात को सो नहीं सकता। इस प्रकार का पोल्‍यूशन पूरे पाली में है। तो मेरा निवेदन है उस हाई कोर्ट का स्‍टे लिया हुआ है उसके खिलाफ कब राज्‍य सरकार सुप्रीम कोर्ट में जाकर के उस स्‍टे को वेकेट कराने की कार्यवाही कर रही है, नहीं कर रही है।

श्री अध्‍यक्ष: आप डी बी में गये क्‍या (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): स्‍टे के लिए 6-6 महीने बाद यह पत्र लिख रहे हैं। 5.1.2006 को लिखा फिर 8.1.2007 को लिख तो 6-6 महीने बाद में क्‍यों दे रहे हैं, तुरंत कार्यवाही क्‍यों नहीं होती है। प्रश्‍न का उत्‍तर दिलवाइये। (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): इस संबंध में मेरा..

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: मिस्‍टर देवल।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अधिकारियों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: पहले पाली के..(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):आपके तो सारे प्रदूषित हो गए, हमको बोलने दीजिए। अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि प्रदूषण बोर्ड का पाली में कोई आफिस है, है तो 2003 से7 तक कितने मामलों में उन्‍होंने चालान किया नम्‍बर एक, नम्‍बर दो, क्‍या यह सही है कि जिन जल प्रदूषण नियंत्रण संयंत्र कास्टिक युक्‍त पानी के लिए लगाये गए थे तो फिर उनमें एसिडिक पानी को छोडा गया और यह संयंत्र है इसका वहां पेरिनियल रिवर के लिए छोडा जाता है तो फिर यह बाणी नदी जो कभी कभी साल में एक दो बार ही आती है उसमें  क्‍यों छोड़ा जा रहा है। 

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न का उत्‍तर दिलावाइये ना।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, इसी से संबंधित है मैंरा।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री जी, खुशवीर सिंह जी को भी पूछ लेने दीजिए।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि सी ई पी टी के नोर्म्‍स बने हुए हैं वह नोर्म्‍स, जो मानक है वह पेरिनियल रिवर्स के  है या सीजनल रिवर के है, एक तो मुझे यह जवाब दें, एक जो प्रश्‍न पहले में आपने जो जवाब दिया है विवरण अ उसमें यह लिखा संयंत्र का संचालन 24 घंटे चालू रखने हेतु जनरेटर सैट 600 केवीए के लगाए गए, क्‍या वह जनरेटर सैट चल रहे हैं, या वह सिर्फ स्‍थापित किए इसका जवाब दें।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो जानकारी पूछी, मैं आपको जानकारी देना चाहता हूं 2004 से एडजेस्टिंग यूनिट थी उनको हमने सम्‍मति जारी नहीं की। दूसरा अध्‍यक्ष महोदय, मंडिया रोड स्थित इकाईयां चूंकि सीईपीटी से जुडी हुई है इसलिए उनको बंद करने का प्रश्‍न ही पैदा नहीं होता।(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): जब आपका सीईपीटी फैल है तो...(व्‍यवधान) जब आपके सीईपीटी फैल है...

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में नहीं बोले।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री):मैंने अभी कहा था यह सीईपीटी अपग्रेडेशन के कार्य जो एक तो सीईपीटी सैकण्‍ड  जिसका काम पूरा हो चुका हैं एक फर्स्‍ट और थर्ड है वह 31 मार्च,2007 तक पूरा हो जाएगा। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने हाईकोर्ट की जो चर्चा की, हाईकोर्ट ने जो डायरेक्‍शन दिये  हैंऔर कौनसी तारीख को डायरेक्‍शन दिये पाली डी पी रिट पीटिशन 559/2002 महावीर नगर विकास समिति बनाम राज्‍य सरकार ने एक   जो पी आई एल जो पेश  की उसमें राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय के द्वारा 9.3.2006 को निम्‍न आदेश दिए राज्‍य  में प्रदूषण नियंत्रण नये सिरे से पाली एवम आस पास के क्षेत्र  के वस्‍त्र उद्योग का निरीक्षण  करेगा दूसरा जो उद्योग प्रदूषण फैला रहे हैं उन्‍हें प्रदूषण नियंत्रण हेतु उचित व्‍यवस्‍था अपनानी चाहिये।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): यह इररिलेवेंट, मैं जो पूछ रहा हूं उसका तो जवाब नहीं दे रहे।

दुर्गा/चौहान 230307 1120 1c

 

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कार्बोनाइज्‍ड, जो इण्‍डस्‍ट्रीज इस याचिका में, उच्‍च न्‍यायालय ने दिनांक 14.05.2004 को यह निर्देश भी पारित किये हैं कि जो कार्बोनाइज्‍ड इंडस्‍ट्रीज हैं, उनको बंद की जाए तो उस पर हमने एक्‍शन लिया, 246 यूनिट्स को हमने 33-ए का नोटिस दिया, 63 यूनिट को हमने 33-ए का नोटिस दिया और 3 यूनिट को जो कार्बनडाइज्‍ड कर रही थीं उनको हमने 33-ए का नोटिस देकर तुरन्‍त कार्यवाही की। (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय मंत्री महोदय, स्‍टे वेकेट कराने के लिये आपने क्‍या कार्यवाही की?

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): एक यूनिट ने हाई कोर्ट को एश्‍योरेंस दिया है कि मैं कार्बोनाइज्‍ड नहीं करुंगा, सल्‍फरिक एसिड यूज नहीं करुंगा। इस कण्‍डीशन पर हाई कोर्ट ने उसको चलाने की अनुमति दी। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वास्‍तव में पाली के अन्‍दर प्रदूषण का मामला निश्चित रूप से गम्‍भीर है और हाई कोर्ट ने एक प्रकार का, एक्‍सपर्ट के द्वारा जांच कराने का आदेश दिया। हमने एक्‍सपर्ट को, एन.पी.सी. को नियुक्‍त किया और वह इस माह तक, उन्‍होंने कहा कि एक माह के अन्‍दर-अन्‍दर अपनी रिपोर्ट प्रस्‍तुत करेंगे, जो वहां पर प्रदूषण फैल रहा है, जिससे नुकसान हो रहा है, भूमि का जो परिवर्तन हो रहा है, इसके बारे में एक एक्‍सपर्ट जो दिल्‍ली के द्वारा है, वह अपनी एक माह के अन्‍दर एन.पी.सी. के द्वारा जो गठित की गयी कमेटी के द्वारा रिपोर्ट दे दी जाएगी और राजस्‍थान हाई कोर्ट में वह रिपोर्ट पेश की जाएगी। मामला उच्‍च न्‍यायालय के समक्ष विचाराधीन है, राज्‍य सरकार ने...। (व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): कब तक करेंगे?

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): निश्चित रूप से, यह भी माननीय सदस्‍य, जैतारण से आने वाले माननीय सदस्‍य... (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): स्‍टे वेकेट कराने के लिये क्‍या कार्यवाही हुई अब तक और जिन अधिकारियों ने नहीं करवाई उनके विरुद्ध आप क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं?

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): जो स्‍थगन आदेश राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय के द्वारा मिला है उस स्‍थगन आदेश के विरुद्ध हमने अर्जेण्‍ट हियरिंग की 2 बार एप्‍लीकेशन दी है और जब अर्जेण्‍ट हियरिंग के लिये निश्चित रूप से अपनी तरफ से हम प्रयासरत हैं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो समस्‍या है, जिसमें 3 सी.पी.टी. हैं, जिनकी क्षमता 22700 किलोलीटर है जबकि डिस्‍चार्ज उस यूनिट से 28800 किलोलीटर हो रहा है। उद्योगों के उत्‍पादन और प्रोसेस की जो व्‍यवस्‍था है इसके बदलने के कारण... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, एक भी सवाल का जवाब नहीं आया। मेरे एक सवाल का भी जवाब नहीं दे रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अब आप यह कह रहे हैं कि एक का जवाब नहीं दे रहे हैं। सब जवाब आपको दे चुका हूं।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैंने जब कहा कि जिनकी लापरवाही से...(व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): कौनसा ऐसा जवाब है जो नहीं, आपने हाइकोर्ट का पूछा, हाइकोर्ट का आपको बता दिया। अर्जेण्‍ट एप्‍लीकेशन लगी हुई है। हियरिंग की एप्‍लीकेशन दी है और हाइकोर्ट ने जो डाइरेक्‍शन दिये... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा पहला पूरक प्रश्‍न, पहले 3 पूरक प्रश्‍नों में से एक का भी जवाब नहीं दिया।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): हाई कोर्ट के डाइरेक्‍शन के आधार पर हमने एक्टिविटिज कीं, 33-ए की कार्यवाही की।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मुझे वह नहीं चाहिए, मुझे वह नहीं चाहिए। मुझे वह चाहिए कि पहला जो मेरा पूरक प्रश्‍न था कि पाली में प्रदूषण की समस्‍या आ गयी तो किन की लापरवाही से ऐसे उद्योग लगे, उनके विरुद्ध क्‍या कार्यवाही करना चाहते हैं। एक तो यह, इसका जवाब दें। दूसरा मैंने पूरक प्रश्‍न किया था। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, काश्‍तकारों को मुआवजे दिये जाने की भी बात करो। सैंकड़ों बीघा जमीन खराब हो गयी। मेयड़ा बाँध, यह लूणी से आने वाले माननीय सदस्‍य बता रहे हैं, उसकी वजह से सैंकड़ों बीघा जमीन खराब हो गयी है। क्‍या सरकार उन काश्‍तकारों को मुआवजा देने का विचार रखती है। क्‍या सरकार इन उद्योगों के लिये...(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैंने अगला प्रश्‍न किया, हां, मेरे प्रश्‍न का उत्‍तर तो आने दें। यह दे नहीं रहे हैं मंत्रीजी। मंत्रीजी, आप क्‍यों नहीं बोल रहे हैं, आप बतायें।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): मंत्री महोदय, क्‍या यह प्रदूषण की वीडियोग्राफी कराएंगे?

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): और यह अधिनियम आपने कब लागू किया और कब से सम्‍मति लेना बंद किया। लागू करने और सम्‍मति लेने के बीच जिनको दी गयी, उनके खिलाफ में क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं? (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 98 और रायपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा है तो निश्चित रूप से मैंने पूर्व में भी अपने अधिकारियों को डाइरेक्‍शन दिये हैं, जिस हिसाब से यह प्रदूषण की समस्‍या बढ़ रही है तो मैंने उनको डाइरेक्‍शन दिये और आज भी सदन में डाइरेक्‍शन दे रहा हूं कि एक माह के अन्‍दर जितनी यूनिट हैं, जो एक्‍सपान हो रहा है, इसकी निश्चित रूप से वीडियोग्राफी की जाएगी और जो आपने कहा है कि उनके मुआवजे के लिये क्‍या व्‍यवस्‍था है। यह तो हाइकोर्ट ने जो डाइरेक्‍शन दिये हैं, हाइकोर्ट के डाइरेक्‍शन से हमने एक्‍सपर्ट को एन.पी.सी. की, जिसने कि एक माह में रिपोर्ट पेशन करने का हमें आश्‍वासन दिया है, उनके अन्‍दर मुआवजा भी है, उसके अन्‍दर वहां पर जल प्रदूषण के बारे में पूरी रिपोर्ट प्रस्‍तुत कर हाइकोर्ट के अन्‍दर सब्मिट करने के बाद में जो अनुदान राशि और उच्‍च न्‍यायालय के जो आदेश प्राप्‍त होंगे, कमेटी का फोर्मेशन हो चुका है, एक माह में कमेटी अपनी रिपोर्ट प्रस्‍तुत कर रही है, रिपोर्ट के बाद में जो भी निर्णय होगा, निश्चित रूप से हम पालन करेंगे। (व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): एक क्‍वश्‍चन मेरा, पहले एक क्‍वश्‍चन है, मंत्रीजी। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): पहले 3 में से एक का भी उत्‍तर नहीं है। पहले अधिकारियों के बारे में जांच करने के की क्‍या कार्यवाही करेंगे, वह बोलें ना आप। (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने, जो सलफरिक एसिड की जो फेक्ट्रियां, मैंने आपको कहा है कि निरी के आदेश के द्वारा इसको न्‍यूट्रलाइज करने के लिये सलफरिक एसिड, कास्टिक सोडा और सलफरिक एसिड को न्‍यूट्रलाइज करने के लिये निरी ने आदेश दिये थे उसके आदेश के आधार पर सलफरिक एसिड, 20 प्रतिशत सलफरिक एसिड को काम में ले रहे हैं और उसके पश्‍चात, 20 प्रतिशत के अलावा जिन लोगों ने सलफरिक एसिड को काम में लिया, जिन यूनिट ने, तो निश्चित रूप से मैं इसकी जांच कराऊंगा।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): नहीं, गलत बात। बिलकुल ही गलत है।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न का जवाब नहीं दिया आपने।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): जिन अधिकारियों ने लगाने दी, आप देखिये, घुमाइये मत प्रश्‍न को। आप उन फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्यवाही करना चाहते हैं। (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, बिना कलक्‍टर के या बिना सक्षम अधिकारियों की कन्‍सेंट के एस्टिब्लिश नहीं हो सकती है। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): एन.ओ.सी. जिन्‍होंने दी, अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट, इसका जवाब दिला दें कि जिन्‍होंने, 20 प्रतिशत से अधिक एसिड आ रही है तो अधिक एसिड-युक्‍त पानी छोड़ने वाली फैक्ट्रियों को जिन्‍होंने एन.ओ.सी. दी, उनके खिलाफ जांच करके क्‍या कार्यवाही करेंगे, यह तो बतायें। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी के पास जो सूचना थी, वह उन्‍होंने दे दी।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर):  नहीं दी।

श्री अध्‍यक्ष: आप समझते हैं कि पूरी सूचना नहीं दी या अधूरी दी या गलत दी तो आप दूसरे माध्‍यमों से आइये।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): नहीं, गलत नहीं कह रहा हूं। ये टाल रहे हैं। मंत्री महोदय, आप इसका जवाब दीजिये। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: देखिये, आसन भी कम्‍पेल नहीं कर सकता है। आपका तो सवाल ही नहीं है। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): नहीं, नहीं, मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आसन भी मंत्री को कम्‍पेल नहीं कर सकता है जवाब देने के लिये।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे तीनों पूरक प्रश्‍नों में से एक का भी उत्‍तर नहीं है, वह कृपया दिलवायें। मैंने जो पहला सवाल किया। (व्‍यवधान) पहला, दूसरा, तीसरा, जो तीनों सवाल किये ..(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां):  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक सवाल, आपकी इजाजत हो तो.. (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप भी मन की निकाल दीजिये।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): मेरा निवेदन यह था कि सेक्‍शन 33 के तहत जो नोटिस इश्‍यू किये गये उनके खिलाफ स्‍टे आर्डर है।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, जब सम्‍मति दी नहीं तो कार्यवाही क्‍या करें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अच्‍छा सम्‍मति नहीं दी, या तो आप घोषणा कर दें कि नहीं दी, मंत्री महोदय, यह घोषणा कर दें। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, अब आप कृपया विराजें। उनका भी इस सम्‍बन्‍ध में प्रश्‍न है। एक सप्‍लीमेंट्री उनको भी पूछने दीजिये।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): इसी सम्‍बन्‍ध में है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक निवेदन करुं कि मंत्रीजी यह घोषणा कर दें कि इस प्रकार की सम्‍मति नहीं दी। यह कह दें तो मैं मान जाऊंगा। और सम्‍मति दी तो उनके खिलाफ कार्यवाही क्‍या करेंगे। दो छोटी सी बातें हैं। आप अधिकारियों को क्‍यों बचाना चाहते हैं और फैक्‍ट्री वालों के खिलाफ में क्‍यों कार्यवाही करना चाहते हैं। (व्‍यवधान) मैं फैक्‍ट्री वालों के खिलाफ नहीं हूं। मैं फैक्‍ट्री वालों के खिलाफ नहीं हूं। मेरा यह कहना है कि जिन्‍होंने सम्‍मति दी, या तो आप कहें कि बिलकुल नहीं दी। एसेडिक पानी फैलाने वाली फैक्ट्रियों को सम्‍मति नहीं दी, या तो यह घोषणा कर दें या फिर जिन्‍होंने दी, उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही करेंगे, यह सीधा सा सवाल है।

श्री अध्‍यक्ष: विराजिये, आप विराजिये।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्रीजी से एक बात जानना चाहूंगा। मंत्रीजी यह तो साफ है कि आपके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अतिरिक्‍त भारत सरकार के प्रदूषण्‍ं नियंत्रण बोर्ड द्वारा भी आज से काफी वर्षों पहले जोधपुर और पाली को चिह्नित किया हुआ है। राज्‍य सरकार जो भी बातें कर रही है, हम उसमें नहीं जाते। उसके बाद में उद्योग लगे, उसके बाद ट्रीटमेंट प्‍लाण्‍ट फेल हुए जो भी स्थिति है, मैं तो यही साफ प्रश्‍न करना चाहता हूं कि यह सब कुछ होने के बाद भी आपके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी एन.ओ.सी. दे रहे हैं, इण्‍डस्‍ट्रीज लग रही हैं। माननीय सदस्‍य यही जानना चाहते हैं कि गलती किसने की। पाली और जोधपुर प्रदूषित होते जा रहे हैं। आप कह रहे हैं, हमने कार्यवाही कर दी।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछ लीजिये, भाषण नहीं दें।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अब तक कार्यवाही नहीं करने का क्‍या कारण है और उसके लिये कौन दोषी हैं। यही हम जवाब चाह रहे हैं उसके ऊपर आप कब तक कार्यवाही कर देंगे। हमें तो इतनी सी बात बता दो और वह आथंटिक कार्यवाही होगी किस तरीके से, यह बता दो हमें।

श्री अध्‍यक्ष: हां, बता देंगे।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): मंत्री महोदय, प्रदूषण हो रहा है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: जवाब आने दीजिये ना आप उनका।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मंत्रीजी जवाब तो दे दें। मंत्रीजी जवाब दे दें। या तो यह कह दें कि सम्‍मति नहीं दी तो बात समझ में आ जाएगी। या दी, उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आप उनको कम्‍पेल नहीं कर सकते हैं।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं पुन: माननीय सदस्‍य से निवेदन करना चाहूंगा कि 2-3 प्‍लाण्‍ट हैं, जिनकी केपेसिटी 22 हजार कुछ है और डिस्‍चार्ज वहां 28 हजार का था। हमने अपग्रेडेशन के लिये प्रयास किये, 18 करोड़ रुपये की राशि स्‍वीकृत हुई, अपग्रेडेशन की कार्यवाही कम्‍पलीशन पर ही। एक प्‍लाण्‍ट सैकिण्‍ड स्‍टेज का कम्‍पलीट हो चुका है। फर्स्‍ट और थर्ड ट्रीटमेंट प्‍लाण्‍ट 31 मार्च तक कम्‍पलीट हो जाएंगे। जब यह कम्‍पलीट हो जाएंगे। हमने जहां पर कच्‍ची नालियों के द्वारा जहां पानी आता था उसके लिये हमने नाले का प्रबन्‍ध किया।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, फिर घुमा रहे हैं सवाल को। मैं सीधा ही सवाल पूछ रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आप 31 तारीख बता रहे हैं। आप 31.03.07 बता रहे हैं। उसके बाद भी विधान सभा चलेगी। तो 31 को आप श्‍योर तो हो लीजिये कि 31 तक कम्‍पलीट हो जाएगा, यह तो कर लीजिये आप।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): कम्‍पलीट हो जाएगा। अध्‍यक्ष महोदय, यह 31 मार्च तक, प्‍लाण्‍ट नम्‍बर 2 कम्‍पलीट हो चुका है और नम्‍बर एक व तीन 31 मार्च तक कम्‍पलीट हो जाएंगे।

 

Vps-akt-23032007-1130-1d-1

 

इनके के साथ में हमने हाईकोर्ट के एक डाइरेकशन से एन.पी.सी. की कमेटी बनायी, एक्‍सपार्ट्स की बनायी, जो नुकसान हो रहा है। पोल्‍यूटेड हो रहा है उसको कैसे रोके इस बारे में भी वह ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपने दिखवा लिया क्‍या?

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): सीधा सा सवाल है यह फिर छिपा रहे हैं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सीधा सा सवाल है कि या तो बतायें कि सहमति नहीं दी ... (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): और जितनी जिसकी केपेसिटी है, उसकी केपेसिटी बढ़ेगी। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपने इनको तो कह दिया कि 31 तारीख तक हो जाएगा। 31 तारीख तक हो जाएगा क्‍या? 31 तारीख कहा है आपने। ... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): और या दी है तो उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही करेंगे, यह सीधा सा सवाल है।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): जिन्‍होंने बिना कंसेंट, जिन्‍होंने बिना कंसेट के ... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): यह फिर घूमा करके, यह फिर घूमा रहे हैं सवाल को ... (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): जिन्‍होंने बिना कंसेंट के ... (व्‍यवधान)  औद्योगिक क्षेत्र के अन्‍दर जिन्‍होंने इंडस्‍ट्रीज लगायी है उनको हमने सहमति नहीं दी है और ... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): नहीं, जिन्‍होंने सहमति दी है ... (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): उनको केन्सिलेशन के लिए 33-ए के नोटिस दिये हैं। ऐसे 63 और यूनिट्स हैं जो बिना कंसेंट के हैं उनको 33-ए में नोटिस दिया है बंद करने का, लाइट-पानी काटने का। जो कार्बोनाइज ... (व्‍यवधान) इण्‍डस्‍ट्रीज थी उसको हमने बंद किया ... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): वह बात नहीं है। वह बात नहीं पूछ रहा हूं। जिन्‍होंने एन.ओ.सी. दी उनके खिलाफ क्‍या करना चाहते हैं? जिन्‍होंने एन.ओ.सी. दी, जिन्‍होंने सहमति दी वह तो उनका बताओ या तो यह बता दो कि सहमति नहीं दी। सीधी सी बात है।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): सहमति तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एन.ओ.सी. उन औद्योगिक क्षेत्रों को और उन इण्‍डस्‍ट्रीज को दी जाती है जिनका ट्रीटमैंट प्‍लांट के अन्‍दर बराबर वहां पानी, एफ्लुएंट पानी आता है, ठीक करने के लिए। क्‍या बात करते हो आप? ... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आपका ट्रीटमैंट प्‍लांट फेल है। फेल है ट्रीटमैंट प्‍लांट।  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जवाब नहीं दे रहे हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन श्री शंकर सिंह राजपुरोहित।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सीधा सा सवाल है। मेरा सीधा सा सवाल है।

श्री अध्‍यक्ष: 31 मिनट हो गये हैं1

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सीधा सा सवाल है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कृपया, कृपा करके यह किसानों के हितों की बात है ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: एक प्रश्‍न पर आधा घंटे से अधिक का समय हो गया है, नहीं। ... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): किसानों की भूमि बंजर हो गयी है। किसान बरबाद हो गये हैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इतना सीधा सा सवाल है। नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्‍लीज। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: एक प्रश्‍न पर 31 मिनट हो चुके हैं। नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): किसानों का मुआवजा का कह दिया और अब क्‍या होगा? कह दिया।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह तो मेरा अनुत्तरित रह गया।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): किसानों को मुआवजा दे रहे हैं और क्‍या होगा?

एक माननीय सदस्‍य: उनको मुआवजा मिल जाएगा, बात तो वही है न, क्‍यों रिपीट कर रहे हो?

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सीधा सा सवाल है। सीधा सवाल का उत्‍तर नहीं दे रहे हैं, अध्‍यक्ष महोदय। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। मैंने दूसरा प्रश्‍न पुकार लिया है।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जन स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ा हुआ, पर्यावरण, प्रदूषण का यह एक प्रश्‍न है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह क्‍यों बचाना चाहते हैं, यह समझ में नहीं आ रहा है? ... (व्‍यवधान)

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): जो राजस्‍थान के जन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए काफी महत्‍वपूर्ण है और इस पर मेरे ख्‍याल से आधा घंटा क्‍या, चाहे एक घंटा लग जाए, इस पर हर सवाल का जवाब आना चाहिए।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसका तो आप उत्‍तर दिलवाइये, प्‍लीज।

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। आप आपस में बातचीत बंद करें, जवाब सुनने दें।

 


जिला जालौर के धार्मिक स्‍थलों में चोरी की घटनाओं पर रोक

233. श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): क्‍या गृह मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) जिला जालौर के विभिन्‍न थानों में वर्ष 2003 से फरवरी, 2007 तक मंदिरों में हुई चोरियों के कितने मुकदमे दर्ज किये गये? थानेवार/ वर्षवार सूची सदन की मेज पर रखें।

(2)उक्‍त मामलों में कितने मुलजिम गिरफ्तार किये गये तथा कितनों में माल बरामदगी की गई? कितनों में माल बरामदगी शेष है तथा कितनों में चालान पेश कर दिये गये? थानेवार सूची सदन की मेज पर रखें।

(3)क्‍या सरकार मंदिरों में बढ़ती हुई चोरियों की वारदातों को रोकने हेतु कार्य योजना बनाने का विचार रखती है? यदि हां, तो क्‍या और नहीं, तो क्‍यों?

गृह मंत्री (श्री गुलाब चन्‍द कटारिया): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, (1) जिला जालौर में विभिन्‍न थानों में वर्ष 2003 से फरवरी, 2007 तक कुल 83 मुकदमे मंदिरों में चोरियों से संबंधित दर्ज हुए। वर्षवार व थानेवार सूची पिरिशिष्‍ट में संलग्‍न है।

(2) उक्‍त मामलों में 94 मुलजिम गिरफ्तार किये गये तथा 44 अभियोगों में माल बरामद किया गया, 39 अभियोगों में बरामदगी शेष है तथा 45 अभियोगों में चालान पेश न्‍यायालय में किये गये। थानेवार सूची परिशिष्‍ट में संलग्‍न है।

(3) मंदिरों में चोरियों की घटनाओं की रोकथाम पर स्‍थानीय पुलिस के स्‍तर पर प्रयास किये गये हैं एवं बीट पेट्रोलिंग व चोरी की घटनाओं में तत्‍परता से अनुसंधान एवं निस्‍तारण कर चोरियों की रोकथाम हेतु विशेष प्रयास किये जाते हैं।

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय का जवाब लगभग पूरा है लेकिन एक बात खाली, यह विषय है कि जिन चोरियों में माल बरामद नहीं हुआ उसके बावजूद भी वहां पर उस केस में एफ.आर. लगा दी गयी। मतलब उस केस को ही खतम कर दिया गया और उसमें यह मंदिरों वाला जो विषय है यह एक आस्‍था से जुड़ा हुआ विषय है और बहुत ही सेंसेटिव विषय है। अभी जैसे पिछले दिनों फरवरी में भीनमाल के शंकरी माता मंदिर में चोरी हुई और चोरी के साथ-साथ चौकीदार की हत्‍या कर दी गयी और माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी पिछले 6 महीने पहले शंकरी माता मंदिर के प्रांगण में एक मेला हुआ जिसमें एक लाख से अधिक वहां पब्लिक इकट्ठी हुई। भक्‍तगण इकट्ठे हुए एक लाख से अधिक, अब यह जन-भावना अगर कहीं इलाके में फैल गयी तो यह एक अशांति का वातावरण फैल सकता है और शंकरी माता मंदिर में चोरी हुई और चोरी के साथ-साथ चौकीदार की हत्‍या भी हुई। अभी तक उस केस की प्रोग्रेस नहीं हुई है और नहीं हुई है तो क्‍या कारण है और कितनी जल्‍दी कर पाएंगे और मुख्‍य विषय यह है कि जो बरामदगी, बिना बरामदगी के एफ.आर. लगा दी जाती है, उस विषय में आपका क्‍या कहना है?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): प्रश्‍न तो जालौर से संबंधित था, आपने भीनमाल के बारे में पूछा है।

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): जालौर जिला है न। जालौर जिला है, साहब। 

श्री अध्‍यक्ष: जिला जालौर का पूछा है। जिला जालौर, हां।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): जालौर जिले से था। जालौर जिले से था। इसमें वर्षवार सूची मैंने आपको दी है। जिसमें कुल कितने मुकदमे बने, कितने लोग गिरफ्तार हुए, जिनमें कोई मुलजिम नहीं मिलता है, एक लम्‍बे समय तक भी और बरामदगी के कोई अवसर नहीं होते हैं तो उसमें एफ.आर. लगाते हैं और यह प्रक्रिया हमेशा से यह एफ.आर. लगाने की है। जैसे मैं आपको 2003 से, सारे राजस्‍थान में भी अदम-वकुआ जिसमें कोई सबूत ही नहीं मिलता है उसमें एफ.आर. लगती है और कहीं पर ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, कितने समय बाद लगती है, यह बता दीजिए। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): क्‍या?

श्री अध्‍यक्ष: यदि कोई माल बरामद आपको नहीं हो तो कितने दिनों बाद लगा देते हो एफ.आर.? ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): कोशिश करते हैं, कई बार साल के अन्‍त तक तो फिर जाकर निर्णय करते ही हैं। जब जिस मुकदमे में साल भर तक तफतीश करने के बाद भी नहीं लगता है उसमें हम करते हैं, एफ.आर. देते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: तो सालभर में लगा देते हो?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): और फिर दुबारा जब कभी भी कोई घटना होती है तो उसके साथ उस केस को भी जोड़कर वैसे कोई एकदम समय की सीमा तो नहीं है लेकिन जितनी भी आपकी चोरियां हुई हैं उसमें से अधिकांश बरामद हुई हैं। माल भी बरामद हुआ है केवल दो में मूर्ति चोरी हुई, वह मूर्ति भी बरामद हुई है तो फिर भी छोटे-मोटे केस है, यानी जो आपको मैंने सारे प्रकरण आपके जिले के जो दिये हैं उनमें मैंने पूरी सूची में आपको, कितने का माल है, कितनी बरामदगी हुई। कितने उसमें से बाकी रहे हैं तो सारी की सारी सूची आपके साथ है। यह सारे प्रदेश में भी जिस प्रकार की जो मूर्ति चोरियां होती हैं उसमें भी बरामदगी की कोशिश तो करते हैं लेकिन कई बार जब सफलता नहीं मिलती है तो अन्‍त में जा कर उसमें अदम-तफतीश पूरी नहीं हुई उसमें हमने एफ.आर. जरूर लगायी है। फिर कभी नया केस खुलता है तो उसके लिए फिर उसको जोड़ते हुए मूर्ति चोरी के बारे में फिर से हम तफतीश प्रारम्‍भ करते हैं।

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जालौर में मूर्ति चोरी की घटनाएं बराबर हो रही हैं और अभी जो भीनमाल का आहोर से आने वाले माननीय विधायक ने मामला उठाया है, 6 महीने पहले चोरी होती है। फरवरी महीने में वहां पर चोरी के साथ में चौकीदार की हत्‍या कर दी जाती है और अब यह महीना भर हो गया, उसकी कोई, किसी तरह की कोई गिरफ्तारी नहीं, कोई पूछताछ नहीं और जहां हत्‍या हुई है उससे पचास मीटर पर आपकी पुलिस की चौकी, वायरलैस की चौकी है। वहां पर सिपाही सो रहे हैं। उसके बावजूद भी लोगों की हत्‍याएं हो जाती हैं। चोरी की घटनाएं जालौर जिले में बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है। आप इस पर गम्‍भीरता से सोचें, वहां के प्रशासन के बारे में नहीं तो ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: एक बार जवाब आप सुनिये।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): एक मिनट। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): भीनमाल का है। एक विषय थोड़ा सा भीनमाल का पहले मैं  ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बांसी में और गुढ़ादेवजी में ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह राजस्‍थान का सवाल है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): ऐसा है कि आपने यह वैसे भी पर्ची लगा रखी है उस पर बैठकर बाद में बात कर लेंगे। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): ठीक है, उसके बारे में, बांसी के मामले में तो आपसे बात कर लेंगे लेकिन ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नहीं-नहीं, यह चरण संख्‍या-3 है। यह चरण संख्‍या-3 में चोरियों के लिए आपने राजस्‍थान में क्‍या व्‍यवस्‍था की है, यह पूरे राजस्‍थान का है और जब आपका यह प्रश्‍न का चरण संख्‍या-3 है, यह पूछा है कि मंदिरों में चोरियों के संबंध में आपने क्‍या-क्‍या कदम उठायें? यह जालौर से संबंधित नहीं है, यह पूरे राजस्‍थान से संबंधित है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं बता रहा हूं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): और माननीय गृह मंत्रीजी, एक मिनट, मैं आपसे पूछ लूं। माननीय गृह मंत्रीजी, लगातार बूंदी जिले में इतनी चोरियां एक संगठित गिरोह के द्वारा मूर्तियों के लिए राजस्‍थान में कोई न कोई ऐसा संगठित गिरोह है जो करोड़ों रुपये की मूर्तियों को चुरा कर ले जाता है। आपको याद है बांसी में, अभी कुछ ही दिन पहले ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप बोल रहे हैं न बाद में ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बांसी में एक ऐसी कीमती मूर्ति चोरी हुई। लगातार धरना है, आज भी प्रतिनिधिमण्‍डल आपसे मिलने आया है। वहां पर एक आदमी को आत्‍मदाह करना पडा भावावेश में। भावावेश में उसने कह दिया कि मंदिर में मूर्ति की बरामदगी नहीं हुई तो मैं आत्‍मदाह करता हूं। केरोसीन छिड़क लिया और वह मर गया। मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह चर्चा यहां पर हो चुकी है। यह चर्चा हो चुकी है यहां पर ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): चर्चा तो हो चुकी लेकिन इससे रिलेटेड है न, साहब। मूर्ति तो बरामद ही नहीं हुई।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍यों बारबार दोहरा रहे हैं आप? बारबार क्‍यों दोहरा रहे हैं?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मूर्ति तो बरामद नहीं हुई। अभी भी धरना है। मूर्ति बरामद नहीं हुई है। मूर्ति तो बरामद करवा दो आप।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): एक बार जितने भी सवाल आये हैं उनका जवाब दे दूं। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बैठिये।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मूर्ति तो बरामद करा दो आप।  (व्‍यवधान) सारा ही काम चंगा हो जाएगा, आप मूर्ति बरामद करवा दो।

श्री अध्‍यक्ष: आप बारबार यह क्‍यों कह रहे हैं? ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यही नहीं वहां पर आपके गार्ड लगे हुए थे, पुलिस थी उसके बावजूद भी मस्जिद की दान पेटी में से ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप भाषण देना बंद करिये अब।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): चोर करके और आदमी चोरी का सामान, चोरी करके ले गये उसी गांव में ... (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक छोटा सा सवाल है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक बार पहले सवाल का जवाब दे दूं फिर आप पूछ लेना, कोई हर्जा नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: पहले जवाब दे दें।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): भीनमाल के बारे में आपने सवाल पूछा। 2003 से लेकर 2007 तक भीनमाल में 14 चोरियां हुई हैं। 14 में से 11 चोरियां बरामद हुई हैं। यह जो अभी 2007 वाली जो 3 चोरियां हैं, इसमें से केवल एक चोरी में हमको सफलता मिली, दो अभी भी पेंडिंग है इसमें अभी हमको सफलता नहीं मिली। जहां तक बूंदी के सवाल के बारे में आपने कहा कि बहुत चोरियां हुईं, ऐसा नहीं है। कुल बूंदी में 13 चोरियां 2004 से लेकर अब तक 2007 तक हुई हैं उसमें से 5 चोरियां बरामद हुई हैं बाकी अभी भी बरामद नहीं हुई हैं। 

 

spp/usc/11.40/1e/23.3.20071(1)

 

और जहां बांसी के बारे में कोई स्‍थगन या पर्ची कुछ लगाई हुई है, वैसे पहले मैंने जवाब दे दिया। यह विषय उठ चुका था। उसमें अभी तक हम बरामदगी नहीं कर सकते। आज हम निश्चित रूप से एक नई टीम गठित करके और लगायेंगे । वैसे भी हमने वहां जिले स्‍तर पर तो टीम गठित कर रखी है,लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली। निश्चित रूप से वहां चारभुजा के मंदिर के साथ लोगों का बहुत जुड़ाव है, लोग उद्वेलित हैं, धरना चल रहा है। आज कोई नई टीम लगाकर यहां से उसकी जांच करवायेंगे।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): एक बात बता दूं उस गिर्राज को पाँच लाख ..(व्‍यवधान)..

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हाँ, उस मृतक को हमारे पुलिस एक्‍ट के हिसाब से मदद करेंगे।...(व्‍यवधान)....

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आपने कहा था जब ओर जगह पाँच लाख रुपये दे रहे हैं, वह धार्मिक भावना से ओत-प्रोत होकर उसने इहलीला समाप्‍त की है, आत्‍महत्‍या नहीं की। आपके बिड़ला जी भी वहां गये हैं। आपसे भी बात हुई मेरी दो तीन दफा। कृपा करके उसको पाँच लाख रुपये देने का जो हमारा निवेदन है, वह दें। दूसरा आप टास्‍क फोर्स जयपुर से गठित करें इसलिए कृपा करके आप तो यह बता दीजिये कि जयपुर से टास्‍क फोर्स गठित करेंगे तो वहां वह रहकर काम करेगी, वह कहां से है, आन्‍ध्रा से है, उनकी बोली कहां की है, वह पकड़ा जाये। करौली के हैं, कहां के हैं ? यह बहुत ही भावना से जुड़ा हुआ मुद्दा है। इतना धरना कभी नहीं हुआ मंत्रीजी, इसलिये आप दोनों बात बता दो । एक तो पाँच लाख रुपये देने हैं, दूसरा यह जो फोर्स गठित करेंगे, इसका हैड किस स्‍तर का अधिकारी होगा और कब तक कार्यवाही करके आपको रिजल्‍ट दे देगा।

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया : अभी जो प्रश्‍न है, वह जालौर से संबंधित है। आपका प्रश्‍न आये तब आप उठाना। उसके बारे में फिर आपको बताऊंगा पाँच नहीं और ज्‍यादा कितना दे सकते हैं, आपने गलती से पाँच ही क्‍यों मांगे, आप 10-20 मांग लेते तो और अच्‍छा होता। आपने गलती की है। 

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हम पुलिस के प्रावधानों के हिसाब से उसकी आर्थिक मदद जरूर करेंगे तो क्‍या मदद करने क आपका इरादा है, आपने ही कहा था इस सदन में।

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया : अभी जो प्रश्‍न है वह जालौर से संबंधित है।

श्री समरजीत सिंह : माननीय मंत्री महोदय, मैंने आपका ध्‍यान आकर्षित किया कि मंदिर जो खेमगरी माता का मंदिर है, उससे 50-100 मीटर पर पुलिस की चौकी है और उसी की नाक के नीचे इस तरह की घटना हो जाये, चोरी हो जाये फिर मर्डर हो जाये और आपके जालौर जिले की पुलिस नारकोटिक्‍स के मामले बनाने में बिजी है। मैं खुला कहता हूं यह। यह मामले बनाने में लगी है, जो हकीकत काम है, उसको करने में कोई ध्‍यान नहीं है। आप इस तरफ ध्‍यान दें, मैं उम्‍मीद करता हूं।

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया : अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से भीनमाल से जो माननीय सदस्‍य आये हैं, आपको आमंत्रित कर रहा हूं, अगर आपको मेरी पुलिस के किसी अधिकारी के बारे में कोई भी शिकायत है आप दीजिये। जो कुछ मेरे से हो सकता है अगर वह गलत है तो मैं निश्चित रूप से जांच कराकर, अगर वह दोषी पाया जायेगा तो दण्डित जरूर होगा। बिना कुछ दिये तो मुझे सारी चीजों की जानकारी नहीं रहती। अगर आप किसी के बारे में पर्टीकूलर देंगे, कोई केस देंगे, उसका सबूत देंगे तो निश्चित रूप से उसकी जांच करके उसको उचित दण्‍ड देंगे।

श्री समरजीत सिंह: व्‍यक्ति पर मैं आरोप नहीं लगाना चाह रहा हूं। मैं कह रहा हूं कि इस तरह की घटनाएं हो रही हैं तब पुलिस की नाक के नीचे चोरी-मर्डर हो रहे हैं तो अपन को ध्‍यान रखना चाहिये।

श्री अध्‍यक्ष: अशोक कुमार नवलखा । नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

 

जिला चित्‍तौड़गढ़ में बाढ़ से क्षतिग्रस्‍त निर्माण कार्यों की मरम्‍मत

 

234. श्री अशोक कुमार नवलखा (निम्‍बाहेड़ा): क्‍या सहायता मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

(1) क्‍या यह सही है कि इस वर्ष हुई व्‍यापक वर्षा, अतिवृष्टि व बाढ़ से जिला चित्‍तौड़गढ़ के अनेक गांवों में व्‍यापक नुकसान हुआ है ? यदि हां, तो ग्रामीण क्षेत्र में कितनी सड़कें, तालाब, एनीकट, पुलिया तलाइयां आदि क्षतिग्रस्‍त हुईं। पंचायत समितिवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍या यह सही है कि सरकार द्वारा इस नुकसान का सर्वे करवाया गया है ? यदि हां, तो सर्वे रिपोर्ट की प्रति सदन की मेज पर रखें व सर्वे नहीं कराया गया, तो क्‍यों ?

(3) क्‍या यह सही है कि सरकार द्वारा पंचायत समिति/ग्राम पंचायतों को उनके क्षेत्र में हुए नुकसान का मुआवजा दिया गया है ? यदि हां, तो कितना व नहीं, तो क्‍यों ? पंचायत समितिवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

सहायता मंत्री (डा. किरोड़ी लाल): (1) जी हां, यह सही है। ग्रामीण क्षेत्र में सड़कें, तालाब, एनीकट, तलाइयां, पुलिया आदि के क्षतिग्रस्‍त होने का पंचायत समितिवार विवरण संलग्‍न है। (परिशिष्‍ट-अ)

(2) जी हां, उक्‍त नुकसान का सर्वे करवाया गया है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार पंचायत समितिवार नुकसान की सूची संलग्‍न है। (परिशिष्‍ट-ब)

(3) जी नहीं, क्‍योंकि सी.आर.एफ. नोर्म्‍स के अनुसार नुकसान का मुआवजा देय नहीं है। तात्‍कालिक मरम्‍मत हेतु राशि स्‍वीकृत की जाती है। इस हेतु जिले में क्षतिग्रस्‍त तालाबों की मरम्‍मत के लिये पंचायत समिति/ग्राम पंचायतों को आवंटित राशि का विवरण संलग्‍न है। (परिशिष्‍ट-स)

श्री अशोक कुमार नवलखा (निम्‍बाहेड़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय आपदा प्रबन्‍ध एवं सहायता मंत्रीजी से जानना चाहता हूं कि मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर के खण्‍ड-1 में जो चित्‍तौड़ जिले में व्‍यापक वर्षा, अतिवृष्टि और बाढ़ से नुकसान हुआ, उसकी जानकारी दी। उसकी सर्वे रिपोर्ट साथ में लगाई। लेकिन मैं यह जानना चाहता हूं कि क्‍या भारत सरकार के नोर्म्‍स में परिवर्तन करने के लिये उसमें शिथिलता देने के लिये जो आज ओलावृष्टि की बात की जा रही है, क्‍या चित्‍तौड़गढ़ जिले में भीषण बाढ़ आई थी, उससे सड़कें, पुलिया, तालाब, एनीकट जो क्षतिग्रस्‍त हुए थे, उनका मुआवजा देने के लिये भी भारत सरकार को लिखा है और लिखा है तो उसकी जानकारी देवें। मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि इस नुकसान की जो रिपोर्ट आपने दी है, उसके अन्‍तर्गत चित्‍तौड़गढ़ जिले में सड़कें, पुलियाएं जो नुकसानग्रस्‍त हुई हैं, उसका नुकसान हुआ है और 1317.75 लाख रुपये और एनीकट और नहरों का नुकसान हुआ है 1130.00 लाख रुपये, कुल 2447.75 लाख रुपये का नुकसान का सर्वे हुआ, आकलन हुआ और सरकार ने मदद दी 26.63 लाख रुपये, यानि एक प्रतिशत कुल मदद नहीं देते तो यह भी हम एम. एल. ए, एम.पी.कोटे से लगा देते। लेकिन चित्‍तौड़गढ़ जिले के साथ इतना अन्‍याय कि इतनी सड़कें, पुलियाएं, सारी क्षतिग्रस्‍त हो गयीं और राज्‍य सरकार ने मुआवजा दिया है वह भी तात्‍कालिक सहायता के रुप में 26 लाख रुपये का। मैं माननीय मंत्रीजी से निवेदन करना चाहता हूं कि भारत सरकार से आप इसका मुआवजा दिलवायें तथा राज्‍य सरकार से भी इसका मुआवजा दिलाने के लिये आप क्‍या करना चाहते हैं, वह आप हमें जानकारी दीजिये।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट, मेरा भी इससे जुड़ा हुआ सवाल है ओलावृष्टि का। मुझे मौका दिया जाये।

श्री अध्‍यक्ष: वह पूछ रहे हैं और आप बीच में ही खड़े हो गये।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): इनके बाद मौका दिया जाये।

श्री अध्‍यक्ष: बाद की बात और है। बैठे बैठे नहीं बोला करें।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): मंत्रीजी जवाब दे रहे हैं उससे पहले मुझे मौका दिया जाये।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जैसा पूछा सी.आर.एफ. नोर्म्‍स के लिये .. (व्‍यवधान) ..

श्री अध्‍यक्ष: आप इतनी जोर से बोलते हैं कि यहां तक आवाज आती है मिस्‍टर सुरेश। .......(व्‍यवधान) ...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): भारत सरकार को कई पत्र लिखे हैं रिवाइज करने के लिये, किन्‍तु चित्‍तौड़गढ़ में एक्टिविटीवाइज जो बजट अलॉट हुआ है फ्लड में, वह मैं थोड़ा सदन को बताना चाहूंगा।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मंत्रीजी, आपके पास से कितना देंगे, आप तो भारत सरकार की रट, राम-राम रट लेते तो वैतरणी पार हो जाते। आपके पास से कितना दे रहे हो, इसमें जोड़कर बता दो आप।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): मैं दे रहा हूं, बता रहा हूं।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आपके पास से कितना दे रहे हो, स्‍टेट गवर्नमेंट कितना दे रही है ? सी आर एफ, सी आर एफ बार-बार मत करो।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): मैं बता रहा हूं बैठो।

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली): सरकार दे रही है तो क्‍या निहाल नहीं कर रहे हो आप ? हमारा शेयर है, हम लेकर रहेंगे। आप निहाल नहीं कर रहे हो।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): कटारिया साहब होते, शिक्षा मंत्री घनश्‍याम तिवाड़ी होते तो निश्चित रूप से देते। ..(व्‍यवधान)... किसानों का भला हो जायेगा।

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली): हमारा शेयर है और हम लेकर रहेंगे।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप जान-बूझकर किसान का गला काट रहे हो। सही आदमी को चीफ मिनिस्‍टर नहीं बना रहे हो। ..(व्‍यवधान)..  

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली): तो सी आर एफ के नोर्म्‍स चेंज कर लो।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 28 करोड़ रुपये, आप करेक्‍ट कर लेना, 28 करोड़ रुपये दिये हैं। चित्‍तौड़गढ़ को 28 करोड़ रुपये ...(व्‍यवधान)...

श्री अशोक कुमार नवलखा (निम्‍बाहेड़ा): यह लाख रुपये लिख रखे हैं न।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): मैं बता देता हूं पी.डब्‍ल्‍यू.डी. रोड के लिये 150 ..

श्री अशोक कुमार नवलखा (निम्‍बाहेड़ा): मैंने पंचायत समिति के नुकसान का पूछा है, ग्राम पंचायत की।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): अब आप नोट कर लो पी डब्‍ल्‍यू डी को 150, रोड में कलक्‍टर को 158, म्‍युनिसिपैलिटी में 235, इर्रिगेशन डिपार्टमेंट को 571, डेम एण्‍ड टैंक के लिये 30.50 लाख, पंचायती राज संस्‍थाओं को 26.85 लाख, पी एच ई डी को चार लाख, इनपुट सब्सिडी को 900 और डेमेज हाउस के लिये 544, अदर सब्सिडी 83.90 एण्‍ड थ्रू कलक्‍टर अदर रिपेयर वर्क्‍स के लिये 20 लाख, ह्यूमन लोसेज के लिये 35 लाख, कैटल लोसेज के लिये 37 लाख, इस हिसाब से 2,805.83 लाख चित्‍तौड़गढ़ जिले को राज्‍य सरकार द्वारा दिये गये हैं।

श्री अशोक कुमार नवलखा (निम्‍बाहेड़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह पूछना चाह रहा था कि पंचाय‍त समितियों में जो ग्रामीण क्षेत्र में सड़कें क्षतिग्रस्‍त हुईं, पुलियाएं टूट गयीं, एनीकट टूट गये, नहरें टूट गयीं, तालाब टूट गये और उनका नुकसान का आकलन आपने 2447.75 लाख का किया है और उसके अंदर आने तो बताया है कि 26 लाख 63 हजार सहायता दी गयी। इसके अंदर एनीकट टूटे, नहरें भी टूटीं और टोटल 26 लाख की सहायता बता रहे हैं आप। अब इस सहायता से चित्‍तौड़ जिले के अंदर सारी भारी कैसे होगी ?

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): देखो एस्‍टीमेट तो टूट फूट का बढ़-चढ़कर आ जाता है, लेकिन जितना बजट अपने पास होता है उस हिसाब से आंवटित कर देते हैं। उसी हिसाब से हमने आपको आवंटित किया है।

श्री अशोक कुमार नवलखा (निम्‍बाहेड़ा): मैं यह निवेदन कर रहा हूं कि इस नोर्म्‍स में कुछ परिवर्तन करो।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): हां, करवाने के लिये भारत सरकार को लिख दिया है।

श्री अशोक कुमार नवलखा (निम्‍बाहेड़ा): राजस्‍थान सरकार से भी कुछ मदद दिलाओ। इतनी जो सम्‍पत्तियां सरकार की नुकसान हुई, वह भी पूरी हो।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): दिया है, राजस्‍थान सरकार से भी दिया है।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से पूछना चाहता हूं .(व्‍यवधान)....

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): भारत सरकार का आपने पट्टा ले रखा है क्या ? आपने जब राज किया तो दो रुपये अपनी जेब से दिये क्या ? ऐसी बातें कर रहे हो । आपके टाइम में भारत सरकार बनने के बाद जो नोर्म्‍स थे, उनको बदल दिये। इसलिए यह माननीय सदस्‍य को समस्‍या आ रही है। मीणा जवाब दे रहे हैं तो इसमें तकलीफ हो रही है क्या ?

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): किसलिये इर्रिटेड हो रहे हो मंत्रीजी ? ..(व्‍यवधान).. समझ क्‍या रखा है, हम तो ..(व्‍यवधान)... आप किसान के बेटे हो। ..(व्‍यवधान)...

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्रीजी से पूछना चाहता हूं कि आपने इसी सदन में यह बताया था कि अतिवृष्टि और अधिक बारिश से जो भी नुकसान हुआ, उन तालाबों को ठीक करने के लिये सी आर एफ के कोष में पैसा नहीं है तो आपने भीलवाड़ा जिले को एक पैसा नहीं दिया।

श्री अध्‍यक्ष: यह चित्‍तौड़ का प्रश्‍न है, भीलवाड़ा का नहीं है।

 

Msr/usc/1150/1f/23032007 

 

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): नहीं, चित्‍तौड़गढ़ का है लेकिन अतिवृष्टि का प्रश्‍न है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अतिवृष्टि है ...(व्‍यवधान)... और अतिवृष्टि में इन्‍होंने यह जवाब दिया है कि सी.आर.एफ. के नोर्म्‍स में नहीं आता और ...

श्री अध्‍यक्ष: क्‍वेश्‍चन है चित्‍तौड़ का बातें कर रहे हैं भीलवाड़ा की।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): लेकिन आपने पंचायत समिति चित्‍तौड़गढ़ में 26 लाख रुपये दिये और भीलवाड़ा जिले की पंचायत समितियों में आपने एक पैसा नहीं दिया। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: अलग से प्रश्‍न है।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): विरोधाभासी आपका बयान कैसे है?

श्री अध्‍यक्ष: अलग से प्रश्‍न है।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बयान कंट्राडिक्‍टरी नहीं है, आप विराजो।

श्री अध्‍यक्ष: भीलवाड़ा का पूछ रहे हैं।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): और आपने भीलवाड़ा में अतिवृष्टि से 2004-05, 2005-06 में पैसा दिया और उनकी स्‍वीकृति निकाली, वो मेरे पास है और 2006-07 में आपने एक पैसा नहीं दिया, यह ऐसा क्‍यों?

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आप विराज जाओ।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बयान कंट्राडिक्‍टरी नहीं है। मैंने कहा था कि हम आपदा में बाढ़ को मानते हैं, अतिवृष्टि को नहीं मानते। एक बात।

दूसरी चीज एस.एल.सी., जो स्‍टेट लेवल कमेटी बनी हुई है चीफ सैक्रेटरी की अध्‍यक्षता में उसने जो जिलों को सलैक्‍ट किया फ्लड में उसमें भीलवाड़ा नहीं था, चित्‍तौड़गढ़ है।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है। ...(व्‍यवधान)...

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): भीलवाड़ा नहीं था, तालाब, एनीकट जो टूटे उनको कैसे नहीं दिया आपने? ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। श्री हेमराज मीणा।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अगर अति‍वृष्टि को नहीं मानते हैं तो आपने ...(व्‍यवधान)...

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): अतिवृष्टि ही तो बाढ़ है, अतिवृष्टि बाढ़ आने पर ही होती है।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय हेमराज मीणा।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अतिवृष्टि कब होगी, जब बाढ़ आयगी तब अतिवृष्टि होगी। आपकी कमेटी ने नहीं माना तो यह आपकी कमेटी ने किस आधार पर सर्वे किया है? कमेटी ने गलत सर्वे किया है ...(व्‍यवधान)... आप उसको ठीक करने का विचार रखते हैं कि नहीं? ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह बता दें नगर पालिकाओं को अगर आप समझते हैं, अतिवृष्टि बाढ़ में नहीं है तो आपने नगर पालिकाओं को कैसे पैसे दिये? यह बता दें।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): अतिवृष्टि अगर बाढ़ से नहीं होती है, बाढ़ आयेगी तभी अतिवृष्टि होगी और 100 तालाब टूटेंगे, अगर 100 तालब टूटे, बाढ़ नहीं आयी तो अतिवृष्टि अपने आप कैसे होगी? मंत्रीजी, यह बताइये।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने दसूरा क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है। श्री हेमराज मीणा।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): हमने 3200 करोड़ रुपये का पैकेज भेजा है, उसको सेंक्‍शन करादो, दे देंगे। कराओ। मात्र पाँच करोड़ दिया है।

श्री अध्‍यक्ष: जब मैंने दूसरा क्‍वेश्‍चन पुकार लिया तो काहे को खड़े हुए आप ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपने कम भेजा, आप तो दस हजार करोड़ का बना कर के भेज दो।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): और दे दो, 6400 करोड़ का भेज देंगे। ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आप तो बढ़ा-चढ़ा कर के भेजते हो।

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। श्री हेमराज मीणा।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आप तो बढ़ा-चढ़ा कर के भेजते हो, कभी नहीं मिलेगा आपको इतना। आप इतना बढ़ा-चढ़ा कर भेज रहे हो।

श्री अध्‍यक्ष: श्री हेमराज मीणा के प्रश्‍न का जवाब कौन देगा? खड़े होइये। ...(व्‍यवधान)...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): इन्‍फ्रास्‍ट्रैक्‍चर के लिए तो हमने 800 करोड़ का भेजा है।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी, मैंने दूसरा क्‍वेश्‍चन पुकार लिया, आप अननैसेसरी खड़े हैं।


जिला बारां में जिला गरीबी उन्‍मूलन

कार्यक्रमान्‍तर्गत करवाये जा रहे कार्यों पर रोक

235. श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): क्‍या ग्रामीण विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

(1) क्‍या यह सही है कि बारां जिले में जिला गरीबी उन्‍मूलन कार्यक्रम (डी.पी.आई.पी.) योजनान्‍तर्गत विगत एक वर्ष पूर्व ढांचागत निर्माण कार्यों की स्‍वीकृतियां जारी की गयी थीं? यदि हां, तो कितनी-कितनी राशि की कहां-कहां के लिए? सूची सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍या यह भी सही है कि अभी ढांचागत निर्माण कार्यों की स्‍वीकृतियों पर गवर्निंग काउन्सिल द्वारा पाबंदी लगी हुई है? यदि हां, तो क्‍यों? पाबंदी, आदेश की प्रति सदन की मेज पर रखें।

(3) क्‍या यह भी सही है कि बारां जिला गरीबी उन्‍मूलन कार्यक्रम (डी.पी.आई.पी.) पर पाबंदी के कारण आवंटित राशि काम में नहीं ली जा सकी है? यदि हां, तो कितनी राशि?

(4) क्‍या सरकार उपरोक्‍त कार्यों हेतु पाबंदी हटाने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक?

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): (1) जी हां, बारां जिले में डी.पी.आई.पी. योजना अन्‍तर्गत विगत एक वर्ष के पूर्व ढांचागत निर्माण कार्यों की 1005 स्‍वीकृतियां जारी की गयी हैं। जारी की गयी स्‍वीकृतियों की ग्रामवार स्‍वीकृत राशि सहित सूचना परिशिष्‍ठ पर संलग्‍न है।

(2) जी हां। बारां जिले में सहरिया आवास हेतु 9.51 करोड़ रुपये अतिरिक्‍त राशि आवंटन के कारण बारां जिले में ढांचागत नये निर्माण कार्यों को स्‍वीकृत करने पर रोक लगाने के प्रस्‍ताव पर सप्‍तम गवर्निंग काउन्सिल ने सहमति व्‍यक्‍त की। आदेश की प्रति परिशिष्‍ठ पर संलग्‍न है।

(3) जी नहीं।

(4) जी नहीं।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि बारां जिले में डी.पी.आई.पी. में कितने गांव कवर्ड किये आपने और इन गांवों में ढांचा निर्माण के कार्य कितने हुए हैं और कितने गांव ऐसे हैं जो शेष रह गये, जिनमें ढांचा निर्माण के काम नहीं हुए? नम्‍बर एक सवाल।

दूसरा, क्‍या यह सही है कि सहरिया आवास के लिए डी.पी.आई.पी. द्वारा 9.5 करोड़ व्‍यय किया गया है? यदि हां तो ढांचा निर्माण में बारां जिले में कितना बजट आवंटन कब-कब किया गया व कितना बजट शेष व्‍यय हेतु रह गया?

नम्‍बर तीन, तीसरा और सुन लो। क्‍या यह सही है कि ढांचा निर्माण में अप्रैल, 2006 गवर्निंग काउन्सिल की बैठक में 9.5 करोड़ स्‍वीकृत किया गया था और, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी बैठक में उस पैसे पर खर्च करने पर पाबंदी लगा दी गयी और 9.5 करोड़ रुपया अभी वहां पर पडा हुआ है?

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, डी.पी.आई.पी. द्वारा ढांचा निर्माण करने की  क्‍या नीति है, क्‍या पॉलिसी बना रखी है आपने और कितने गांव मेरे शेष रहे?

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने कहा कि बारां जिले में कुल कितने गांव हैं, कुल 1073 गांव हैं ...

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): नहीं, गांव नहीं हैं, जो चिह्नित गांव हैं। कुल गांव में से चिह्नित पूछ रहा हूं।

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): मेरी बात सुन लो।

इसमें ढांचागत निर्माण कार्य 6027 गांव में हुआ और एन.जी.ओ. और संस्‍थाओं द्वारा और पंचायतों द्वारा कुल 828 गांवों को इनमें लाभान्वित डी.पी.आई.पी. योजना द्वारा करा लिया गया है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरी बात जो माननीय सदस्‍य ने कही है वो यह है कि कुल पैसा कितना सेंक्‍शन हुआ? मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि बारां जिले में डी.पी.आई.पी. के अन्‍तर्गत टोटल 75 करोड़ 14 लाख रुपये की राशि तय हुई थी। उसमें से मैं कहना चाहता हूं कि इन्‍फ्राइस्‍ट्रैक्‍चर के अन्‍तर्गत लगभग 18 करोड़ 47 लाख रुपये की राशि खर्च की जानी थी लेकिन फिर भी बारां जिले में चूंकि एक ऐसी स्थिति है जहां कि सहरियाओं की भी विकट स्थिति है, गरीबी की बहुत ज्‍यादा खराब स्थिति थी तो उस पर राज्‍य सरकार ने और विशेष कर मुख्‍यमंत्रीजी ने भी सहरिया आवास नीति भी जो वहां इस डी.पी.आई.पी. योजना के अन्‍तर्गत इन्‍क्‍लूड थी, उस पैसे को मिला कर 18.47 लाख रुपया खर्च करना था, उसके बावजूद 21.24 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा चुकी है।

इसलिए, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि विशेष कर किशनगंज शाहबाद में, जहां से माननीय सदस्‍य आते हैं, इसमें लगभग 42.64 करोड़ रुपये की राशि सिर्फ बारां जिले में इसी दो ब्‍लाक में खर्च की गयी है। चूंकि वहां की स्थिति के हिसाब से और सहरियाओं के हिसाब से मैं समझता हूं कि लगभग 56 प्रतिशत राशि बारां जिले का डी.पी.आई.पी. का हम दोनों ब्‍लाक पर खर्च किया है और पूरा जितना सेंक्‍शन था उतना पैसा हम खर्च कर चुके हैं।

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज):  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं कि जब इन्‍होंने ढांचा निर्माण में 21.5 करोड़ खर्च कर दिया तो 9.5 करोड़ रुपया दोबारा मन्‍जूर करने की ढांचा निर्माण में क्‍या आवश्‍यकता पड़ गयी? अब यह ढांचा निर्माण करने में 9.5 करोड़ यदि इन्‍होंने मन्‍जूर कर दिया तो इसी दिन की मीटिंग में, जिस गवर्निंग काउन्सिल की बैठक में मन्‍जूर किया उसी गवर्निंग काउन्सिल की बैठक में उस पर पाबंदी लगादी गयी। तो, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 6.5 करोड़ रुपया एक साल से बारां जिला में पडा हुआ है। अब 200 गांव ऐसे हैं जिन गांवों में ढांचा निर्माण का एक  भी काम नहीं हुआ। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रश्‍न में भी स्‍पष्‍ट है।

तो मैं तो यह चाहूंगा मंत्री महोदय यह कहें कि 6.5 करोड़ रुपये आप खर्च करने का प्रावधान या स्‍वीकृति कब जारी करेंगे या वो जारी करने की आप मन्‍जूरी दें।

श्री अध्‍यक्ष: 1005 स्‍वीकृति जारी की गयी है।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): इसी से जुड़ा हुआ डी.पी.आई.पी. का ही सवाल है।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी, जवाब दें उनको।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): एक मिनट, मैं डी.पी.आई.पी. का बोलूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप रहने दो। मंत्रीजी, आप जवाब दें।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): डी.पी.आई.पी. के अन्‍तर्गत चूरू जिला भी आता है और चूरू जिले के अन्‍दर जो आठ जिले डी.पी.आई.पी. के अन्‍तर्गत आते हैं उसके अन्‍दर ...

श्री अध्‍यक्ष: चूरू का कहां ताल्‍लुक है? सवाल बारां का है और आप चूरू पहुंच गये। मंत्रीजी, इर्रिलेवेंट क्‍वेश्‍चन। आप जवाब दें।

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को कहना चाहता हूं कि जो सहरिया आवास नीति भी जब यह डी.पी.आई.पी. का मूल आवंटन हुआ था सी.आर.एफ. में ...

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): गवर्निंग काउन्सिल का जवाब दें मेरे को।

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): यह गवर्निंग काउन्सिल का ही फैसला है कि सहरिया आवास भी इस 75.14 में ही बनाये जायेंगे। यह जो 28.08.03 का जो फैसला हुआ था गवर्निंग काउन्सिल का उसमें यह तय किया गया था कि जो सहरियाके लिए आवास बनेंगे वो भी इस पैसे में से बरेगा लेकिन चूंकि वहां स्थिति ऐसी बनी, वहां जो भुखमरी हुई, जो स्थिति बनी उसको देखते हुए मुख्‍यमंत्रीजी ने तय किया और इसके लिए अतिरिक्‍त राशि 9.51 करोड़ की बढ़ा कर और इसके लिए मेरे ख्‍याल से बजट भी हम लोगों ने काफी सेंक्‍शन किया है और मैं समझता हूं कि इसमें काफी ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: श्री केसर देव बाबर।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक सवाल है कि 9.5 करोड़ अतिरिक्‍त मन्‍जूर किया उसमें से 6.5 करोड़ बचत है।

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): जिस दिन मन्‍जूर किया उसी दिन पाबंदी लगा दी। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक तरफ तो मंत्रीजी कह रहे हैं ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: नो, नो। जवाब दें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक तरफ तो मंत्रीजी कह रहे हैं कि भुखमरी की स्थिति हुई और दूसरी तरफ स्‍वकृत पैसा आप रोक रहे हैं, यह क्‍या बात हुई?

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे सवाल का जवाब ही नहीं आया।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया। ...(व्‍यवधान)...

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 6.5 करोड़ रुपया एक साल से वहां बैंक में जमा है, 6.5 करोड़।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): लोग भूखे मर रहे हैं ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी, आप जवाब दीजिए। ...(व्‍यवधान)...

अंकित नहीं हो। श्री केसर देव बाबर।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

तहसील फतेहपुर (सीकर) में आरक्षित वर्ग के छात्रों हेतु छात्रावास

236. श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़):- क्‍या सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि जिला सीकर की तहसील फतेहपुर शेखावाटी में अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्र-छात्राओं के लिए कोई छात्रावास संचालित नहीं हैं? यदि हां, तो क्‍यों?

(2) क्‍या सरकार तहसील फतेहपुर शेखावाटी में अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्र-छात्राओं हेतु छात्रावास निर्माण का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): (1) जी हां।

(2) तहसील फतेहपुर (शेखावाटी) जिला सीकर में छात्रावास स्‍वीकृत कर दिया गया है। स्‍वीकृति की प्रति परिशिष्‍ट पर संलग्‍न है।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, छात्रावास खोलने की हां भरी है, मैं इसके लिए तो मंत्री महोदय का आभारी हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आप आभारी हैं तो बैठ जाओ।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): 000

श्री अध्‍यक्ष: श्री देवी शंकर भूतड़ा। ...(व्‍यवधान)...

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): 000

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): आप छात्रावास चाहते हैं, छात्रावास की स्‍वीकृति कर दी है ...(व्‍यवधान)...

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): 000

श्री अध्‍यक्ष: श्री देवी शंकर भूतड़ा।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): 000

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्‍यवाद मंत्रीजी को और आपको भी।

श्री अध्‍यक्ष: श्री देवी शंकर भूतड़ा।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): 000

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं और निवेदन करूंगा कि इसमें भवन की व्‍यवस्‍था भी ...(व्‍यवधान)...

 

Ars/usc/1g/1200/23032007/1

 

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): 000

प्रश्‍न संख्‍या 238

श्री अध्‍यक्ष: श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल ।

(अनुपस्थित: कृपया आगे देखें)

प्रश्‍न संख्‍या 239

श्री अध्‍यक्ष: डा0 चन्‍द्रशेखर बैद । 

(अनुपस्थित: कृपया आगे देखें)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): 000

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍नकाल समाप्‍त हुआ। ...(व्‍यवधान) प्रश्‍नकाल समाप्‍त हुआ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह आसन का सम्‍मान देखिये आप, विधान सभा को धर्मशाला बना रखा है इन अधिकारियों ने। ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपको चीफ सेक्रेटरी को लिखना चाहिए, यह क्‍या तरीका है।

श्री अध्‍यक्ष: पार्लियामैंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर Saheb, please go there and tell them.

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):Madam, you should direct the Chief Secretary. Why to these people? यह चीफ सेक्रेट्री की ड्यूटी है कि आफिसर गैलेरी में आफिसर बिहेव करें ढंग से। वहां जाकर क्‍यों बोलेंगे पार्लियामैंट्री मिनिस्‍टर You ask him that he should pass an order to the Chief Secretary.

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): इनको तो आप मदन दिलावर साहब से कहें दो दिन से यहां बहिष्‍कार कर रखा है आज समाज कल्‍याण पर प्रश्‍न है फिर भी सदन में नहीं हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: पार्लियामैंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर ...(व्‍यवधान) हाउस को आर्डर में रखें। यह उनकी ड्यूटी है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपने जो व्‍यवस्‍था दी है, यह सही बात है कि आसन का सम्‍मान करना जहां हम सभी माननीय सदस्‍यों का धर्म और फर्ज है, आफिसर गैलेरी में बैठे अधिकारी भी चूंकि इस सदन की परिभाषा में आते हैं इसलिए इनको भी इन नियमों की पालना करनी चाहिए। मैं आज ही अध्‍यक्ष महोदय, आपने जो यहां मुझे निर्देशित किया है मैं राज्‍य के मुख्‍य सचिव महोदय से भी कहूंगा कि जो अधिकारी आएं अधिकारी दीर्घा में वह जब तक आसन पांवों पर रहे तब तक किसी भी तरह की हलचल नहीं करें। अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी भावना से मुख्‍य सचिव महोदय को जरूर अवगत कराऊंगा।

श्री अध्‍यक्ष: आप लिखित में भेज दीजिएगा उन्‍हें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मैं लिखित में ही भेज दूंगा ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): समाज कल्‍याण मंत्री अपने उत्‍तरदायित्‍व का निर्वहन नहीं कर रहे हैं क्‍योंकि आज समाज कल्‍याण का प्रश्‍न था फिर भी मदन दिलावर नहीं हैं। अगर वह इन्‍ट्रस्‍टेड नहीं हैं तो हटाओ मंत्रीमण्‍डल से।

श्री अध्‍यक्ष: रायपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, आसन जब पांवों पर होता है तो बैठ जाना चाहिए ।

स्‍थगन प्रस्‍तावों पर अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

 

मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि निम्‍नांकित स्‍थगन प्रस्‍तावों की सूचना प्राप्‍त हुई है :-

(1) श्री हरिमोहन शर्मा एवं छह अन्‍य सदस्‍यों की ओर से जिला टोंक की निवाई नगरपालिका एवं ग्रामीण क्षेत्रों में राशन कार्डो की निर्धारित सीमा से अधिक कैरोसिन का आबंटन कर अनुचित लाभ उठाने के सम्‍बन्‍ध में।

सदन में 28 मार्च को नागरिक आपूर्ति विभाग की अनुदान की मांगों पर विचार होगा, माननीय सदस्‍य को उस समय बोलने का अवसर उपलब्‍ध है। अत: इस पर अनुमति देने में असमर्थ हूं।

(2) श्री एमादुद्दीन अहमद खान, सदस्‍य की ओर से राज्‍य के टैन्‍ट व्‍यवसायियों द्वारा वैट व अन्‍य अप्रासंगिक करों के लागू किये जाने के कारण हड़ताल पर होने से उत्‍पन्‍न स्थिति के सम्‍बन्‍ध में।

(3) श्री महिपाल सिंह यादव एवं चार अन्‍य सदस्‍यों की ओर से बहरोड़ के पास रुंध बडोद वन क्षेत्र को जे0सी0बी0 मशीनों से उजाड़े जोने से उत्‍पन्‍न स्थिति के सम्‍बन्‍ध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव भी ऐसे नहीं हैं कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोककर इन पर विचार किया जाय, अत: अनुमति देने में तो असमर्थ हूं। फिर भी माननीय सदस्‍य श्री एमादुद्दीन अहमद खान एवं श्री महीपाल सिंह यादव को तीन तीन मिनट बोलने की अनुमति होगी। तीन मिनट से अधिक नहीं।

(4) श्री जुबेर खान एवं छह अन्‍य सदस्‍यों की ओर से जिला चित्‍तौड़गढ़ में सामुदायिक जलोत्‍थान सिंचाई योजना में सरकारी धन का दुरुपयोग करने के सम्‍बन्‍ध में।

उपरोक्‍त स्‍थगन प्रस्‍ताव के सम्‍बन्‍ध में राज्‍य सरकार से जानकारी प्राप्‍त की जा रही है और जानकारी प्राप्‍त होने पर निर्णय लिया जाएगा। सत्र के दौरान।

(5) श्री संयम लोढ़ा एवं श्री सी0पी0 जोशी, सदस्‍य की ओर से ऋषभदेव में जैन समाज, आदिवासी समाज व अन्‍य समाज को हुए नुकसान का राज्‍य सरकार द्वारा मुआवजा न देने के सम्‍बन्‍ध में।

ऋषभदेव पुलिस फायरिंग में मरे आदिवासियों के साथ सहायता में भेदभाव के सम्‍बन्‍ध में स्‍थगन प्रस्‍ताव की सूचना कल इन्‍हीं माननीय सदस्‍य ने दी थी, जिस पर अनुमति नहीं दी गई। अत: कल दी गई व्‍यवस्‍था में परिवर्तन करना तो संभव नहीं है। फिर भी माननीय सदस्‍य ने पुन: प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत कर अन्‍य समाज जिनका नुकसान हुआ है की जांच करवाकर क्षतिपूर्ति करवाने की मांग की है। अत: प्रस्‍ताव राज्‍य सरकार को यथोचित कार्यवाही हेतु भिजवाया जा रहा है।

 

प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत प्राप्‍त विशेष उल्‍लेख की सूचनाएं

 

(1) श्री अर्जुन लाल जीनगर, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र गंगरार की सड़कों की स्थिति खराब होने के सम्‍बन्‍ध में।

(2) श्री सुखलाल मीणा, सदस्‍य विधान सभा क्षेत्र सपोटरा में पानी की समस्‍या के सम्‍बन्‍ध में।

(3) श्री जगसीराम कोली, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र रेवदर की भराणा सड़क का निर्माण करने के सम्‍बन्‍ध में।

(4) श्री संयम लोढ़ा, सदस्‍य की ओर से सिरोही जिला प्रशासन की उदासीनता व लापरवाही से दो भीलों की मौत के सम्‍बन्‍ध में।

(5)श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र मेड़ता में कृ‍षि विपणन बोर्ड द्वारा निर्मित की गई सड़कों के क्षतिग्रस्‍त होने के सम्‍बन्‍ध में।

(6) श्री नवनीत नीनामा, सदस्‍य की ओर से आदिवासियों की कब्‍जा काश्‍त जमीन वन बाउण्‍ड्रीवाल से बाहर निकालने के सम्‍बन्‍ध में।

(7)श्री दाताराम गुर्जर, सदस्‍य की ओर से केन्‍द्र सरकार से सी.एस.एस. में प्राप्‍त होने वाली राशि में राज्‍य में संचालित संस्‍कृत विद्यालयों में कार्यरत 32 अध्‍यापकों को आठ माह से वेतन का भुगतान नहीं होने के सम्‍बन्‍ध में।

(8) डा0 भंवरलाल राजपुरोहित, सदस्‍य की ओर से डेगाना एवं इसके आस पास 30 किलोमीटर परिधि में कोई रसोई गैस एजेन्‍सी नहीं होने के सम्‍बन्‍ध में।

(9) श्रीमती अनिता भदेल, सदस्‍य की ओर से अजमेर शहर की सड़कें दुरुस्‍त करने के सम्‍बन्‍ध में।

(10) श्री धर्मपाल चौधरी, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र मुण्‍डावर एवं अलवर जिले में वनों की हो रही कटाई के सम्‍बन्‍ध में।

(11) श्री कन्‍हैयालाल पाटीदार, सदस्‍य की ओर से जनता जल योजना के संचालनकर्ता का मेहनताना बढ़ाने के सम्‍बन्‍ध में।

(12) श्री सुरेश मीणा, सदस्‍य की ओर से करौली शहर में बड़ा बाजार स्थित मंदिर के स्‍वामित्‍व के सम्‍बन्‍ध में।

माननीय सदस्‍यों को उनके द्वारा दी गई सूचना को पढ़ने की अनुमति होगी।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान ।

स्‍थगन प्रस्‍तावों आदि पर चर्चा

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  आपने मुझे जो समय दिया उसके लिए मैं बहुत धन्‍यवाद देता हूं।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): माननीय अध्‍यक्ष जी, पाइन्‍ट आफ इन्‍फार्मेशन । इस सदन के सभी सदस्‍यों की जान पर खतरा है और वह इसलिए कि सदन में मच्‍छरों ने प्रवेश कर लिया है और मच्‍छरों के काटने से मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया हो सकता है जो कि जानलेवा है।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या फर्मा दिया आपने ?

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): इस राजस्‍थान विधान सभा के माननीय सदस्‍यों को, लोकतंत्र का एक स्‍तम्‍भ यहां है और एक स्‍तम्‍भ वहां है, इनकी जान को खतरा है यहां सदन में यह अभी मच्‍छर आया है, यहां सदन में मच्‍छरों ने प्रवेश कर लिया है और मच्‍छरों के काटने से मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया तीनों बीमारियां हो सकती हैं जो कि जानलेवा हैं ...(व्‍यवधान) इनकी व्‍यवस्‍था के लिए कौन जिम्‍मेदार है यह बताया जाए।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एम एल ए तो मच्‍छर प्रुफ हैं, इतना कमजोर नहीं है, मच्‍छर खाने से कुछ नहीं होता है।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): वह आप जैसे दो चार होंगे जो कई जगह घूम आये।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप तो डाक्‍टर हो।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, दिन में भी काटते हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन यह है कि मैंने जो स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है और जो करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है उसके मुआवजे के निर्धारण के लिए सरकार ने अभी तक कोई समति त‍क नहीं बनाई है तो आप कम से कम कृपा .....

श्री अध्‍यक्ष: आपने सुना ही नहीं, मैंने क्‍या कहा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह क्‍या बात होती है, लोगों का करोड़ों का नुकसान हुआ ...(व्‍यवधान)

ऋषभदेव पुलिस फायरिंग में मरे व्‍यक्तियों को मुआवजा

 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कल वाला इश्‍यु और आज का इश्‍यु आपने मिक्‍सअप कर दिया।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मतलब इस सदन में कुछ कह ही नहीं सकते हम।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, कल वाला इश्‍यु था कि ट्राइबल जिसकी डेथ हुई है उसके कम्‍पनसेशन के सम्‍बन्‍ध में सरकार ने बेन कर रखा है । आपने कल कहा चर्चा हो गयी, यह इश्‍यु नहीं है। उस घटना में सभी समाज के लोगों का करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ । राजस्‍थान सरकार ने अभी तक उनके मुआवजे के सम्‍बन्‍ध में कोई कमेटी नहीं बनाई कि कितना नुकसान हुआ।

एक तरफ हम चाहते हैं कि साम्‍प्रदायिक सदभाव बने दूसरी तरफ जिन आदमियों का नुकसान हुआ है वह नुकसान के सम्‍बन्‍ध में सरकार कुछ बोले ही नहीं, मैं समझता हूं इससे दुर्भाग्‍य की कोई स्थिति नहीं हो सकती है। कम से कम गृह मंत्री जी खड़े होकर बताएं, गृह मंत्री जी वहां पर गये थे, गृह मंत्री जी ने खुद ने मौका देखा है कि ऋषभदेव में कितने लोगों का नुकसान हुआ है।

श्री अध्‍यक्ष:  आप खड़े क्‍यों हैं Why are you standing? आपके पीछे खड़े  हैं संयम लोढ़ा उनसे कह रही हूं, आप क्‍यों खड़े हैं, वह बोल रहे हैं तो आप क्‍यों खड़े हैं ?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): गृह मंत्री जी स्‍वयं मौके पर वहां पर गये हैं, सदन यह जानना चाहता है गृह मंत्री जी से 

 

vns/usc/12.10/1h/23.3.2007/1

 

क्‍या राजस्‍थान सरकार इस बात के लिये भिज्ञ नहीं है कि ऋषभदेव में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। साधारण आदमी का नुकसान भी हुआ, बिजनेसमैन का भी नुकसान हुआ है और नुकसान होने के बाद सरकार आज दिन तक यह फैंसला नहीं कर पायी है उन लोगों के नुकसान के लिये मुआवजा करे कि नहीं करे ? हम आपसे निवेदन करना चाहते हैं कि साम्‍प्रदायिक सद्भाव आदिवासी और अन्‍य समाज के बीच में तब तक नहीं हो सकता जब तक सरकार आगे आकर एक ऐसा वातावरण नहीं बनाए कि जिनका नुकसान हुआ है उनके सम्‍बन्‍ध में सरकार कोई कम्पंसेशन दे।

माननीय गृह मंत्रीजी, आप स्‍वयं वहां पर गये थे। क्‍या आप सदन को यह बताने की स्थिति में हैं कि राजस्‍थान सरकार ने कोई मानस बनाया है उन लोगों को कम्‍पंसेशन देगी ? आप बता दीजिये। मैं समझता हूं कि इतनी बड़ी घटना होने के बाद यदि सरकार यह मैसेज देना चाहती है कि जिसका नुकसान हुआ उसका कुछ नहीं होगा। जिसका कम्‍पंसेशन है उस पर हम मनमर्जी करेंगे तो यह साम्‍प्रदायिक सद्भाव वहां नहीं बना पायेंगे। तो गृह मंत्रीजी, हम आपसे आशा करते हैं आप खड़े होकर सदन को इस बारे में बताएं कि राजस्‍थान सरकार की मंशा है ? जिन लोगों का नुकसान हुआ है उस नुकसान को आप कम्‍पंसेट करेंगे या नहीं करेंगे ? जिन आदिवासियों को आपने जो कम्‍पंसेशन दिया है, दूसरे जितने आन्‍दोलन हुए उससे कम आपने कम्‍पंसेशन दिया है क्‍या उस कम्‍पंसेशन को एनहांस करने के लिये आप व्‍यवस्‍था रखते हैं ? मैं समझता हूं कि आपको आगे आकर सदन को यह आश्‍वस्‍त करना चाहिये कि उसको जितना भी हम कम्‍पंसेट कर सकते हैं उतना कम्‍पंसेट करने के लिये आप आगे आयेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): गृह मंत्रीजी बोल रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: सुनिये मैं आपसे बताऊं जो भाषा शायद आपने सुनी नहीं है। मैंने इसमें लिखा है फिर भी माननीय सदस्‍य ने पुन: प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करके अन्‍य समाज जिनका नुकसान हुआ है, की जांच करवा कर क्षति-पूर्ति करवाने की मांग की है। अंत: प्रस्‍ताव राज्‍य सरकार को यथोचित कार्यवाही हेतु भिजवाया जा रहा है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): सरकार ने कुछ नहीं किया। कब घटना हो गयी है ? कब की घटना है ? यह घटना विधान सभा के पहले हो गयी है।

श्री अध्‍यक्ष: आसन इस तरह लिखेगा और उसके बाद भी सरकार कुछ नहीं करेगी यह कैसे मान लिया आपने ?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, आसन ने तो बहुत व्‍यवस्‍थाएं दी हैं। आसन ने व्‍यवस्‍था दी है कि मुख्‍यमंत्री जी भाषण देंगे 20 तारीख को, 23 तारीख को देंगे, स्‍टेटमेंट हो रहा है आज ? आसन ने व्‍यवस्‍था दी है, आसन की व्यवस्था के सम्‍बन्‍ध में आप कष्‍ट करके हमें याद नहीं दिलाएं। हम आपसे विश्‍वास चाहते हैं कि यह आपकी जिम्‍मेदारी है कि सदन में जो आश्‍वासन दिया है उनकी पूर्ति सरकार से आप करवाएं।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  जो ऋषभदेव की घटना हुई और जिन लोगों का भी नुकसान हुआ उसका असेसमेंट किया। 109 लोग हैं जिनका नुकसान हुआ है। उनको सूचीबद्ध किया है। लगभग 1 करोड़ 65 लाख समथिंग का नुकसान आंका गया है। विचाराधीन है। जो भी सरकार इसमें कर सकेगी वह निश्चित रूप से करेगी। अभी यत तय नहीं हुआ कि किसको कितना दे रहे हैं लेकिन असेसमेंट वह करके आ गया। विचाराधीन है, प्रक्रियाधीन है और निश्चित रूप से जो भी सरकार इनको मदद कर सकती है वह अपनी क्षमता अनुसार जरूर मदद करेगी।

श्री सुरेश मीणा (करौली): आदिवासियों को मारा गया है..

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उसको भी किया है।

श्री सुरेश मीणा (करौली): कितना पैसा दिया है ? एक लाख। आदिवासी मरता है तो एक लाख, दूसरा मरता है तो दस और पाँच लाख, इतना फर्क कैसे ?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, कल यह विषय उठाया था लेकिन मैं आज ... (व्‍यवधान) एक सैकिण्‍ड मेरी बात सुनें। यहां आदिवासी और कोई भी मरे इसमें कोई अंतर नहीं है। गलतफहमी क्‍या इस सदन में हो गयी कि जो घड़साना और रावला में जिनकी पुलिस फायरिंग में मौत हुई उनको पाँच लाख रुपया और नौकरी दी थी। उसके कारण से सबने सोचा कि शायद गोली से मरने के कारण से ...

श्री अध्‍यक्ष: कोई क्‍यों, सोहेला में भी दी है। सोहेला में भी दी है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उसका जो कारण रहा, कारण यह है कि हमारे यहां पर पहले इस प्रकार के नियम बने हुए हैं कि साम्प्रदायिक दंगे या इस प्रकार की जो घटनाएं घटती हैं उसमें राज्‍यसरकार ने 1990 से ही कुछ नार्म्‍स बना रखे हैं कि डैथ पर कितना देंगे, बाकी इंजर्ड पर कितना देंगे, वह सारा का सारा इसमें है और 1990 से लेकर इसमें लगातार कई बार संशोधन होते रहे। 1990 के बाद 1991 में फिर संशोधन हुआ, फिर 1992 में हुआ, 1993 में हुआ, 1997 में हुआ और 2002 में हुआ। उसमें केवल जो साम्‍प्रदायिक घटनाएं होती थी उसी के बारे में इस प्रकार सरकार अपने “Jaipur dated 23.11.02. Scheme for grant of monitory relief to the victims of communal riots or incidence” इसके तहत आर्डर निकले हुए थे और उसके तहत वह मदद मिलती थी। इसमें जो है “The scheme should be, probably, on those persons who are victims of out break and communal riots or incidence and not to the victims of stray and isolated cases even though persons belonging to the different communities are involved.” इस तरह के सरकूलर थे तो इसमें केवल जो साम्‍प्रदायिक उपद्रव में जिनकी इस प्रकार से मृत्‍यु होती थी वह हमारे अस आर्डर के तहत पहले से ही 1990 से ले करके एक लाख रुपये इसके तहत देते थे। हमने 2005 में इस सरकूलर को अमेंड किया और उसमें हमने साम्‍प्रदायिक दंगों, सामाजिक उपद्रवों के दौरान, दोनों को जोड़ लिया। क्‍योंकि यह जो घटना इस प्रकार की होती है। साम्‍प्रदायिक दंगों में जो लोग अगर मरते थे पुलिस फायरिंग से तो उनको केवल मिलता था, बाकी के लोगों नहीं मिलता था। 22 दिसम्‍बर, 2005 में इसमें अमेंड किया। इसमें साम्‍प्रदायिक दंगे, सामाजिक उपद्रवों के दौरान प्रभावित व्‍यक्तियों और परिजनों को आर्थिक सहायता सम्‍बन्‍धी योजना संचालन नियम 2005 ... (व्‍यवधान) एक सैकिण्‍ड ... (व्‍यवधान) 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह सरकूलर आपका 2005 का है तो 2005 और 2007 के बीच में राजस्‍थान सरकार इस सरकूलर के आधार पर कम्‍पंसेशन क्‍यों नहीं दिया ? आपने मुख्‍यमंत्री जीवन रक्षा कोष में क्‍यों दिया ? अब आप जहां कोट कर रहे हैं आपने स्‍वयं साम्‍प्रदायिकता के अलावा इन चीजों को इनक्‍लूड किया। यह इनक्‍लूजन आपने कर दिया 2005 में। 2005 के बाद में इस आदिवासी घटना के बीच में जितनी गोलियां चली हैं उसमें आपने इस सरकूलर के आधार पर कम्‍पंसेशन क्‍यों नहीं दिया ? आपने मुख्‍यमंत्री कोष के आधार पर पाँच लाख रुपये दिया है। यह हमारा प्रश्‍न है माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं आपको ... (व्‍यवधान) एक सैकिण्ड। मेरी बात आप पूरी सुन लें तो शायद आपके मन में कोई शक नहीं रहेगा। मेरी बात सुन लो उसके बाद ... (व्‍यवधान) 

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  एक बात है। केशोरायपाटन में मुसलमानों की सम्‍पत्ति जलायी गयी, आपने वहां एक नया पैसा नहीं दिया। यह राजस्‍थान में भेदभाव हो रहा है। नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य सही कह रहे हैं इन मामलों में जब तक आप नहीं लोगे साम्‍प्रदायिक सौहार्द्र नहीं बन सकता। इसके बारे में भी आप बताइये। 

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आपके जो ध्‍यान में है, मैं आपको स्‍पष्‍ट कर दूं उसके बाद कोई संदेह रह जाय तो आप जरूर पूछें मैं बताने को तैयार हूं।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): इसमें भी बता देना।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): जितनी घटनाएं हुई हैं वह 27.10.2004, यह सारी की सारी घड़साना और रावला से सम्‍बंधित है। फिर 27.10, 27.10, 27.10, 27.10 उसके बाद जो घटना घटी है जो अपने सोहेला में घटी है वह घटी है 13.6.2005, 13.6.2005, 13.6.2005, 13.6.2005, 13.6.2005, दस घटनाएं तो यह हैं। उसके बाद एक घटना है लादा पुत्र श्री लाला, निवासी कोटड़ा, इसकी जो डैथ हुई है 29.6.2004 को उस समय केवल साम्‍प्रदायिक घटना ही कवर होती थी। यह कवर नहीं था लेकिन इसमें भी मुख्‍यमंत्री सहायता कोष से न होते हुए भी उस समय दिया है। यह जितने दस लोगों को दिया है यह भी मुख्‍यमंत्री सहायता कोष से दिया है। हमारे होम डिपार्टमेंट का जो है उसमें साम्‍प्रदायिक दंगे में जिनकी गोली लगने से डैथ हो जाती है उसमें यह कवर नहीं हुआ है। उसके बाद देवेन्‍द्र सिंह, पुत्र श्री मंगलसिंह, जाति गुर्जर, निवासी थाना कंचनपुर, इसकी भी पुलिस गोली से हुई है 6.6.2005 को। 2005 का जो आदेश है इन घटनाओं के बाद हमने इसमें अमेंड किया कि केवल साम्‍प्रदायिक घटनाओं में ही लोगों को मिलता है पुलिस फायरिंग से, यह उचित नहीं है। कोई इस प्रकार की भी घटना हो जाए तो इसमें भी उनको मिले इसलिये इसमें थोड़ा सा हमने संशोधन साम्‍प्रदायिक दंगों, सामाजिक उपद्रवों को करके इसमें जोड़ा है। इसमें हमने बिलकुल लिखा है कि सामाजिक उपद्रव की घटना से तात्‍पर्य कानून और व्यवस्था की ऐसी स्थिति है जिसमें दो समुदाय या समुदायों के बीच संघर्ष के दौरान या ऐसे संघर्ष के नियंत्रण के दौरान या धरना, प्रदर्शन के समय कानून व्‍यवस्‍था स्‍थापित करने के दौरान जन धन की क्षति होती है। नितान्‍त व्‍यक्त्ति विवाद के दौरान जन धन की हानि का प्रकरण सम्मिलित नहीं है। ऐसा करके हमने 22 दिसम्‍बर को यह सरकूलर निकाला और सरकूलर के दौरान अब चूंकि यह ऋषभदेव का भी इसमें कवर हुआ और इसलिये इस फण्‍ड की सहायता से हमने एक लाख रुपया दिया। चार लाख रुपये में दो लाख वहां के स्‍थानीय लोगों ने, दो लाख मुख्‍यमंत्री जी ने अपनी तरफ से करके उसकी पूर्ति की पाँच लाख की। लेकिन कानून के तहत जो हमको अधिकार था वह यह एक लाख रुपया दस नये अमेंडमेंट के बाद हमको था। इसमें से दिया है तो हमने किसी प्रकार का भी कोई भेदभाव नहीं किया है। जिनको दिया है वह मुख्‍यमंत्री जी ने जो अपना स्‍व विवेक का फण्‍ड है उसमें से उनको दिया है। कोटड़ा वाला था वह भी इसमें कवर नहीं हुआ। वह उन्‍होंने अपने स्‍व विवेक के आधार पर 2004 की घटना में दिया है। तो किसी के साथ कोई भेदभाव करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है। जो नियमों में अधिकार था उससे भी बाहर निकल करके अन्‍य लोगों से मदद करके

 

श्‍याम/चौहान   23.03.2007   12.20   1j

 

हमने उसकी मदद भी करवायी और उसके साथ-साथ उसके परिवार के लोगों को भी उसी गांव में कोई आंगनबाड़ी के साथ जोड़ने के लिए मंत्री जी ने अपनी तरफ से भेजा है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय गृह मंत्री जी, यह बात सही है कि प्रिंसिपली आपने सर्कूलर निकाला, अमेंडमेंट किया, मैं उसकी मेरिट में नहीं जाना चाहता। लेकिन आपने एक वर्ग को जो इलिटरेट वर्ग है, कमजोर वर्ग है, जिस वर्ग को जानकारी नहीं है। उसको मुख्‍यमंत्री सहायता कोष से पैसा नहीं देकर के पार्टी से पैसा दिलवाया, मेरा जो बोन ऑफ कंटेशन है, आपने जो कंम्‍पनसेशन दिया वह इश्‍यु नहीं है, रावला घड़साना या सोहेला में जो आर्गेनाइज कम्‍युनिटी है या जो आर्गेनाइज आंदोलन है उसमें तो सरकार ने मुख्‍यमंत्री सहायता कोष से पाँच लाख रूपये दिये और यह गरीब आदिवासी को आपने पाँच लाख रूपये दिये, लेकिन दो लाख पार्टी से दिलवाये, दो लाख आपने अलग दिलाये। यह जो डिसक्रिएशन है या तो आप सब जगह पार्टी से दिलवायें। उस आदिवासी को आपने पार्टी से दिलवाये और मुख्‍यमंत्री सहायता कोष से बाकी नहीं दिलवाये। यह हमारा इश्‍यु है कि आपने मुख्‍यमंत्री सहायता कोष से पाँच लाख रूपये दिलवायें हैं तो मेरी आपसे सानुरोध प्रार्थना है कि आप इस इलाके के रहने वाले हैं, जो घटना क्रम हुआ है, मैं उसकी मेरिट में नहीं जा रहा हूं मंत्री जी, पर मैं ईमानदारी से यह कहना चाहता हूं, ना उस बच्‍चे को हम नौकरी दें, ना मुख्‍यमंत्री सहायता कोष से हम एक पैसा दें। हम पार्टी फंड से पैसा देकर के कम्‍पनसेशन करना चाहते हैं तो यह पॉलिटिकल मामले हैं लेकिन राज का जो धर्म बनता है उसमें मुख्‍यमंत्री सहायता कोष से भी उन आदिवासियों को आपको पाँच लाख रूपये देना चाहिए था और फिर आप पार्टी से भी पाँच लाख रूपये और देते। उसके लिए धन्‍यवाद आपको लेकिन आपने पार्टी के पैसे को मुख्‍यमंत्री सहायता कोष से क्‍युवेट किया है यह ठीक नहीं है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह बिलकुल नहीं है, थोड़ा सा आप इसको समझें। 22 दिसम्‍बर, 2005 के पहले इस प्रकार की घटनाएं इसमें कवर नहीं थी। इस आदेश के बाद जो हमने दिसम्‍बर, 2005 को निकाला, हमने घटना के बाद नहीं निकाला। पहले से ही निकला हुआ था। इसमें केवल सांप्रदायिक दंगे ही पहले जो आदेश थे उसमें कवर हो रहे थे। यह जो सोहेला और रावला घड़साना दोनों घटनाएं हुई हैं यह आज भी इन आर्डर के तहत कवर नहीं है। इसलिए जिस आर्डर के तहत कवर नहीं है उसको किसी अतिरिक्‍त फंड से ही सहायता दी जा सकती है इसलिए उनको मुख्‍यमंत्री के स्‍वंविवेक से दी थी।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):Why 5 lakh rupees? हम आपकी बात से सहमत हैं।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): एक सेकण्‍ड, एक सेकण्‍ड।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मैं तो आपकी बात से पूर्णत: सहमत हूं कि दिसम्‍बर, 2005 के बाद के अमेंडमेंट से यह सोहेला और रावला घड़साना की कवर नहीं होते हैं। यह समझ में आता है कि आपने डिस्क्रिएशन यूज किया मुख्‍यमंत्री कोष से पाँच लाख रूपये देने का, धन्‍यवाद। आपके अमेंडमेंट के बाद ऋषभदेव की घटना हुई इसलिए आपने एक लाख रूपये दिये बिलकुल समझ में आता है। मुझे तो आपसे यह पूछना है कि आपके अमेंडमेंट के बाद आदिवासियों को एक लाख रूपये मिलते हैं तो यह दो लाख रूपये जो उस फंड से देने के बनिस्‍पत यदि मुख्‍यमंत्री कोष से आप पाँच लाख रूपये देते तो उन गरीब आदमियों को सरकार के प्रति एक विश्‍वास बढ़ता बनिस्‍पत की पॉलिटिकली माइलेज लेना चाहिए। वह ठीक इसलिए नहीं है कि आपको स्‍वयं मालूम है कि कांग्रेस के वहां के विधायकों ने इर्रेसपेक्टिव ऑफ दी पार्टी लाइन सरकार के सहयोग में आगे आकर यह वातावरण बनाने की कोशिश की और वहां हम मुख्‍यमंत्री कोष से पैसा नहीं दिया और आपने एक लाख रूपया दिया। मैं उसकी मेरिट में नहीं जाता। नियम बनाया है वह भी ठीक है लेकिन आप उस आदिवासी इलाके में यह मैसेज क्‍यों देना चाहते हैं कि हम मुख्‍यमंत्री कोष से आपको पैसा नहीं देंगे। पार्टी के फंड से पैसा देंगे। यह मैसेज आपके लिये ठीक नहीं है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): यह नहीं है, मैं शायद समझा नहीं पा रहा हूं या तो ...(व्‍यवधान) एक सेकण्‍ड, आप या तो समझ नहीं पाये, यह इसके तहत नहीं है ...(व्‍यवधान) दो तरह के पैसे नहीं दिये हैं ...(व्‍यवधान) एक ही घटना में दो तरह का पैसा इसमें नहीं जा सकता है क्‍योंकि इस 2005 के आर्डर के बाद इस प्रकार के जो उपद्रव हैं वह भी कवर हो रहे हैं। पहले यह कवर नहीं था। इसको करने से मुख्‍यमंत्री सहायता कोष ही एकमात्र आधार था। अब इसके कारण से इस घटना के बाद इस आर्डर के तहत भी उसको एक लाख रूपये देने का इसमें अधिकार मिल गया है, वह हमारा होम डिपार्टमेंट का था वह उससे दिया। अब एक तो होम डिपार्टमेंट दे और चार मुख्‍यमंत्री सहायता कोष से दें, यह दोनों नहीं, जिसमें यह ऑलरेडी कवर है तो एक व्‍यक्ति को दो जगह से देने में दिक्‍कत आयेगी उसके कारण से हमने यह कंपनसेशन दिया।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): एक मिनट, गृह मंत्री जी एक मिनट।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): बे‍नेफिट ऑफ डाउट किसको मिलना चाहिए ...(व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, बड़ी अजीब स्थिति है, सरकार के दो डिफरेंट चैनल्‍स, गृह मंत्रालय और मुख्‍यमंत्री कार्यालय, सरकार तो एक, पैसा एक, यह रेसक्रिप्‍सन क्‍यों कर रहे हैं आप, आम आदमी नहीं समझता है कि मुख्‍यमंत्री सहायता कोष ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: प्‍लीज, आप जोर से ना बोलें।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): और गृह मंत्रालय की मदद का कोष आपको, पैसा तो गवर्नमेंट से ही आ रहा है। सरकारी पैसा है, आप कृपा करके ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मि. हरिमोहन, आप इतने जोर से बोल रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मेरा आपसे निवेदन है कि यह जो तरीके हैं, जनता नहीं समझती हैं। जनता समझती है कि सरकार ने पैसा दिया है। आप अपने मद में एडमिनिस्‍ट्रेटिव सुविधा के लिए कह दिया कि गृह मंत्रालय ने बनाया है, आपका सर्कूलर है इसके बारे में, नियम बनाया है तो वह आप रिलेक्‍स कर सकते थे। लेकिन अब दो अलग-अलग चैनलों से डिफरेंट जब होता हे तब कैसे दिया जाये। सरकार ने दिया है। लेकिन इस प्रकार का भेदभाव उचित नहीं है। कहीं आप पाँच लाख देते हैं, कहीं एक लाख देते हैं।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे फिर निवेदन कर रहा हूं कि आप भले ही स्‍वीकार ना करें इस बात को, जहां पर अगर आप चाहते तो आदिवासी का मामला था, वहां आपकी पार्टी ने कर दिया, कितना बड़ा मसला था, जिसको कि वहां के स्‍थानीय पार्टी के लोगों ने, कांग्रेस वालों ने, आपकी पार्टी के सब लोगों ने मिलकर के मामले को निपटा लिया, नहीं तो आपके रावला, घड़साना से बड़ा उपद्रव मच जाता आदिवासी इलाके में। जो आपके संभाले नहीं संभलता अगर जन प्रतिनिधि इसमें शरीक नहीं हुए होते। इस प्रकार का भेदभाव आपने जो किया है यह उचित नहीं है। इसको आप सुधारे, यह मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैंने आपसे पहले निवेदन किया, आप इसको भेदभाव समझ रहे हैं, भेदभाव नहीं है ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): भेदभाव नहीं, माननीय गृह मंत्री जी भेदभाव नहीं है। आप कृपया उस एक लाख के आर्डर को विद्ड्रा करिये। मुख्‍यमंत्री कोष से पैसे दिलवायें, बात खत्‍म हुई।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आप स्‍वयं बतायें कि एक ही व्‍यक्ति को दो हैड में से पैसे मिलनें चाहिए।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): नहीं, नहीं मिलना चाहियें ...(व्‍यवधान) निवेदन है कि आपने जो एक लाख दिये हैं उसको विद्ड्रा कर लिया जाये, वी डोंट नो ...(व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अगर आज आप इसको विद्ड्रा कर लेंगे और कल जो हमने दिसम्‍बर का आर्डर निकला, जहां कहीं भी आंदोलन होंगे, फायरिंग होगी वहां सब लोगों को फिर वही पाँच लाख आकर के खड़ा हो जायेगा। राज आप भी करोगे और हम भी करेंगे। आगे इस प्रकार की छोटी-मोटी भिडंतों में क्‍या फायरिंग होने के बाद इस प्रकार के पैकेज दे पायेंगे।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): नहीं, यह इश्‍यु नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैंने पहले नहीं बनाया है, यह दिसम्‍बर, 2005 का है ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): गृह मंत्री जी, एक मिनट ...(व्‍यवधान) हम आपको इस भावना से नहीं कह रहे हैं। यह जो आपने सर्कूलर इम्पिलमेंटेशन किया दिसम्‍बर, 2005 का, अच्‍छा होता कि, मैं यह नहीं कह रहा कि इस आदिवासी को नहीं देते, रूल्‍स पर हम कमेंट नहीं कर रहे हैं, हमारा बोन ऑफ कंटेंशन यह है कि आपने यह जो पार्टी के नाम से दिया है वह मैसेज ठीक नहीं जाता है ...(व्‍यवधान)

श्री भवानी जोशी (राज्‍य मंत्री, चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य): अध्‍यक्ष महोदय, पार्टी के नाम पर दो लाख रूपये दे सकते हैं ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): पार्टी के नाम पर पाँच लाख दे देंगे ...(व्‍यवधान)

श्री भवानी जोशी (राज्‍य मंत्री, चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य): दो लाख रूपये पार्टी के नाम पर दे सकते हैं ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हम सब पार्टी की बात करें ...(व्‍यवधान) तकलीफ में तो कांग्रेस का विधायक जायेगा और बाकी में बी.जे.पी. का जायेगा ...(व्‍यवधान) यह कोई आर्गुमेंट है ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आपकी पार्टी तो करोड़पतियों की पार्टी है ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपकी पार्टी तकलीफ में हो तब तो कांग्रेस का एम.एल.ए. जाना चाहिए, मदद करनी चाहिए और मदद करने के बाद बी.जे.पी. वाली ...(व्‍यवधान) यह कैसे होगा ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आपकी पार्टी तो गरीबों की पार्टी है जोशी जी ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हमारी पार्टी तो करेगी ...(व्‍यवधान) हमारी पार्टी करेगी तो सर्टिफिकेट लेकर के नहीं करेगी ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): कालूलाल जी, आप देखें ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आपकी तो अरबपतियों की पार्टी है ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, कोई विवाद की बात नहीं है। माननीय गृह मंत्री जी ने पूरी बात कह दी। अब माननीय सदस्‍य यह कहते हैं कि पार्टी के आधार पर जो सहायता दे दी ...(व्‍यवधान) उसका मैसेज ठीक नहीं है तो अध्‍यक्ष महोदय, अब आसन से व्‍यवस्‍था दे दी ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): राठौड़ साहब, आपको आधी बात मालूम है, आधी बात मालूम नहीं है, बोल रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह दो लाख दे सकते हैं ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): वहां जब दिक्‍कत हो तो कांग्रेस का एम.एल.ए. जाये ...(व्‍यवधान) दो बात नहीं हो सकती है ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय गृह मंत्री महोदय, आपसे यह निवेदन है कि एक पालिसी बन जाये कि मृतक को कितना पैसा दिया जायेगा ...(व्‍यवधान) एक पालिसी बन जाये पूरे राजस्‍थान में और अलग-अलग मापदंड बना दिये जाते हैं तो उस भ्रांति फैलती है ...(व्‍यवधान) गृह मंत्री महोदय ...(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): पाँच लाख रूपये मुख्‍यमंत्री सहायता कोष से कंचनपुर में जो 14 साल का बच्‍चा मरा, उसको पाँच लाख रूपये मुख्‍यमंत्री सहायता कोष से दिया। मंत्री जी गये, अब तक भी उसके परिवार को जो नौकरी आपने दी है, आज तक भी उस कंचनपुर के गुर्जर परिवार के डिपेंडेंट को नौकरी नहीं दी है।

श्री अध्‍यक्ष: यह कहां ले गये, इनकी तो आदत है। कहां बात चल रही थी, कहां ले गये ...(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, आपने दिया है, आपको बताया है कि कंचनपुर में जिसको पाँच लाख रूपये मुख्‍यमंत्री सहायता कोष से दिये लेकिन बाकी को नौकरी दी है और उसके साथ यह भेदभाव क्‍यों ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सदन में बहुत गलत परंपरा पड़ रही है। जो आसन से व्‍यवस्‍था दी जा चुकी है उसके ऊपर इस प्रकार से बहस हो और घंटा ही उसमें हो जाये। यह नियमों के विपरीत है लेकिन चूंकि आदिवासियों का मामला था इसलिए मैंने दो मिनट बोलने को समय दे दिया।

 

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लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इस पर चर्चा होती रहे, जब गृह मंत्रीजी ने कहा है, इस बारे में वह सोच विचार करेंगे।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान।

राज्‍य के टैन्‍ट व्‍यवसायियों द्वारा वैट व अन्‍य करों के लागू किये जाने के कारण हड़ताल पर होने से उत्‍पन्‍न स्थिति

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से गवर्नमेंट का ध्‍यान दिलाना चाहता हूं कि पिछले कुछ दिनों से टैण्‍ट  वालों की हड़ताल से एक विषम स्थिति पैदा हो गई है पूरे राजस्‍थान में। वैसे आपको मालूम है कि रेलवे स्‍टेशन पर, बस स्‍टेण्‍डों पर, हॉस्पिटलों के सामने और भी कई जगहों पर रैन बसेरे लगाए जाते हैं और इन टैण्‍ट वालों ने अपनी जो कोई परेशानियां थी उनकी ओर एक साल से गवर्नमेंट का ध्‍यान दिलाते हुए यह देखकर कि वहां उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है, अपने टेंट हटा लिए। जो गरीब लोग हैं और जो यात्री लोग हैं उनको इससे परेशानी उठानी पड़ रही है कि वह सड़क पर सो रहे हैं, खुले आसमान के नीचे सो रहे हैं और आपको मालूम है कि पिछले दिनों से किस तरह का मौसम चल रहा है, कभी ओलावृष्टि होती है और कभी बारिश होती है, इस वजह से मैं आपका ध्‍यान दिलाना चाहता हूं कि इनकी जो हड़ताल है उसको सरकार सीरियसली लेते हुए इन्‍होंने जो डिमाण्‍ड रखी है उसकी ओर ध्‍यान दिलाते हुए आपसे यह निवेदन करूंगा कि ऐसा लगता है कि सरकार टोटली कंफ्यूज्‍ड है। टैण्‍ट वालों को किस हैडिंग में माना गया है, यह लीजिंग सेवा संस्‍थान है, इस पर सर्विस टैक्‍स साढ़े बारह प्रतिशत लगाया गया है, इसके बाद वैट साढ़े बारह प्रतिशत लगाया गया है, मल्‍टीपल टेक्‍सेशन हो गया है। एक तरफ तो सर्विस माना है और एक तरफ सैल्‍स टैक्‍स की जगह वैट लगाया गया है, वह उन पर माना गया है। अब इस बजट भाषण में इन पर लक्‍जरी टैक्‍स का प्रस्‍ताव भी सरकार ने रखा है तो यह तीन-तीन तरह के टैक्‍स वह कैसे दे पाएंगे, क्‍या यह लीगली सही है? इसको लेकर यह लोग 2006 से सरकार को अपना रिप्रजेंटेशन दे रहे हैं। सरकार ने एक जो कमेटी बनाई है वैट को लेकर उसके सामने यह कई दफा पेश हुए हैं मगर एक साल से इसका कोई डिसीजन नहीं लिया गया है। अभी यह देखने में आता है कि तम्‍बू उखाड़े, 20 हजार प्रतिष्‍ठान बंद रहे, फिर उसके बाद अखबारों में आया कि सी एम हाउस से टैण्‍ट हटे, गणगौर मेले पर संकट, अभी आपने देखा होगा कि गणगौर मेले में जहां इतने पर्यटक आते हैं उन लोगों को कितनी परेशानी उठानी पड़ेगी कि वहां तम्‍बू, दरियों और कुर्सियों का इन्‍तजाम नहीं था, उसके साथ-साथ अब रामनवमी आने वाली है फिर उसके साथ और भी कई रिलीजियस फंक्‍शन होंगे, अभी शादियों का टाइम भी है। अगर इस पर जल्‍दी निपटारा और डिसीजन नहीं लिया गया इनकी मांगे जो मैं समझता हूं वाजिब है कि इनको मल्‍टीपल टैक्‍स से एक्‍जैम्‍प्‍ट नहीं किया गया तो...।

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, नहीं, आपका इस बारे में कोई नहीं है। आपका नाम है क्‍या?

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो टैण्‍ट है वह वैट उसमें आता ही नहीं है, टैण्‍ट का काम है वह वैट के अंदर आता ही नहीं है। टैण्‍ट एक बार लगता है और खुल कर चला जाता है वह बिक्री नहीं होता है इसलिए जो वैट लगाया गया है वह भी गलत है और विलासिता कर लगाने की जो बात की जा रही है, चूंकि एक चीज पर...।

श्री अध्‍यक्ष: आपका नाम नहीं है।

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ठीक है, मेरा नाम है फिर भी मेरा दायित्‍व बनता है कि मैं सदन में अपनी बात कहूं।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं तो फिर क्‍या बात हुई? स्‍थगन प्रस्‍ताव है, आप एप्रोप्रिएशन बिल पर बोलिएगा यह सब बात।

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): अध्‍यक्षजी, आप बिलकुल ठीक कह रहे हैं फिर भी मेरा आपसे निवेदन है कि सदन में मेरा दायित्‍व है कि मैं उस बात में कुछ बताऊं। जब टैण्‍ट का व्‍यापार बेचने के लिए नहीं है तो इस पर वैट लगाना गलत है और विलासिता कर लगाना उससे भी गलत है।

श्री अध्‍यक्ष: अच्‍छा ठीक है, गलत है, अब आप विराजो। आप समाप्‍त करो, आपने अपनी बात कह दी।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): एक पाइण्‍ट और रह गया कि हमारे जो नेबरिंग स्‍टेट है हरियाणा, पंजाब और दिल्‍ली, इनमें वैट लागू नहीं है तो इस वजह से मैं आपके माध्‍यम से उनकी रिक्‍वेस्‍ट रख रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: यहां पर स्‍टेट फाइनेंस मिनिस्‍टर भी बैठे हैं, और भी सीनियर मिनिस्‍टर बैठे हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपने पहले तो उनको जवाब देने नहीं दिया और अब कह रहे हैं कि आप दो न जवाब।

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): पहले वह जवाब दे रहे थे तो आपने जवाब नहीं देने दिया और अब जवाब नहीं दे रहे हैं तो जवाब मांग रहे हैं। यह कोई बात हुई?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह कह दो कि गलती सुधार रहे हैं, दिक्‍कत नहीं है।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तो मैं आपके माध्‍यम से रिक्‍वेस्‍ट करूंगा कि इन चीजों को सीरियसली लिया जाए। एक साल से उनकी मांगें पेंडिंग है, इस पर कोई ध्‍यान सरकार ने नहीं दिया है। जिसकी वजह से यह सिच्‍युएशन हो रही है और बहुत लोगों को परेशानी हो रही है और होने वाली है।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, लेना सीरियस स्‍टेट फाइनेंस मिनिस्‍टर। ...(व्‍यवधान)... उनको तो होगी कि नहीं होगी लेकिन चिंता तो हो जाएगी।

श्री महीपाल यादव।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): माननीय सदस्‍य ने जो टैण्‍ट व्‍यवसायियों...।

श्री अध्‍यक्ष: नो, नो, नो। आपको बीच में बोलने की कोई जरूरत नहीं, कोई आवश्‍यकता नहीं। जिस दिन फाइनेंस बिल आएगा तब सोचिए इस बारे में क्‍या है। ऐसे कोई जवाब दिया जाएगा?

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): जब वह जवाब दे रहे हैं तो दिलवा दीजिए, वह खड़े हो गए हैं जवाब देने के लिए।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): संसदीय कार्य मंत्रीजी ने कहा है कि वह जवाब देंगे।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): उन्‍होंने कहा है तो आप कैसे इन्‍कार कर सकते हैं?

श्री अध्‍यक्ष: एक गलत परम्‍परा डाल रहे हैं, माननीय सदस्‍य ने कह दिया और मंत्रीजी खड़े होकर बोलने लग जाते हैं, आवश्‍यकता ही नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हम आसन की आदेश से बोलने वाले लोग हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): जो आदेश की पालना करने वाले लोग हैं उनको भी हम जानते हैं।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आसन पैरों पर है फिर भी आप खड़े हैं और आपने उनको कहा है जवाब दिलवाएंगे, जवाब दिलवाओ। बहुत गम्‍भीर प्रोब्‍लम है, सारे टैण्‍ट बंद हो गए। मुख्‍य मंत्रीजी के यहां से टैण्‍ट हट गया। शादियां आने वाली है, लोग परेशान होंगे इसलिए कुछ न कुछ व्‍यवस्‍था तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय दिलवाओ।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है। ...(व्‍यवधान)... यह नियमों के विपरीत काम हो रहा है।

श्री महीपालसिंह यादव।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): नियम तो मैं आपसे ही सीख रहा हूं।

बहरोड़ के पास रुंध बडोद वन क्षेत्र को जे0सी0बी0 मशीनों से उजाड़े जोने से उत्‍पन्‍न स्थिति

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नेशनल हाई वे नम्‍बर 11, जयपुर और दिल्‍ली के बीच मात्र एक ही वन क्षेत्र है जो बहरोड़ से ठीक दो किलोमीटर अलवर रोड पर स्थित है। लगभग 223 हैक्‍टेयर भूमि में सैंकड़ों वर्षों से यह वन क्षेत्र है।

बड़े दुर्भाग्‍य की बात है कि अभी वहां दस-पन्‍द्रह जे सी बी लगा रखी है और पूरे वन क्षेत्र को उजाड़ा जा रहा है। वहां पर सैंकड़ों वर्ष पुरानी गौ शाला भी है। यह सरकार गौ के नाम पर बहुत प्रचार कर रही है कि गौ की रक्षा की जाए। वहां दो-तीन गौ शालाएं मुण्‍डावर, बहरोड, बानसूर, तीन-चार विधान सभा क्षेत्रों में सिर्फ सांस लेने के लिए दो फेफड़े यहां बचे हुए थे।

श्री अध्‍यक्ष: असली गौ पालक तो यादव ही होते हैं।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): गाएं भी वहां चरती थी उस वन क्षेत्र में, करोड़ों जीव जन्‍तुओं का घरौंदा आज नष्‍ट किया जा रहा है और किसानों की फसलों को वह जानवर नष्‍ट कर रहे हैं। रात और दिन एक करके पूरे वन क्षेत्र को, कल मंत्रीजी कह रहे थे कि हम वन क्षेत्र का बड़ा ध्‍यान रख रहे हैं, सरिस्‍का अभ्‍यारण्‍य का तो देख ही लिया हमने कि क्‍या दुर्दशा हुई, पूरा देश देख चुका है। अब एकमात्र दिल्‍ली और जयपुर के बीच का वन क्षेत्र को वहां पर जनप्रतिनिधियों की मीटिंग हुई है, जनता ने वहां ज्ञापन भी दिए हैं कलेक्‍टर को, मंत्रियों को भी सचूना दी है, माननीय मुख्‍य मंत्रीजी को भी फैक्‍स किया है और वहां पर हमारे बहरोड से माननीय विधायक चांदनाथ जी के शिष्‍य शंकरनाथजी की अध्‍यक्षता में वहां के धार्मिक लोगों की भी एक मीटिंग हुई है।

यह बड़ा दुर्भाग्‍य है कि सरकार वनों को लगा रही है या वनों को उजाड़ रही है। वन मंत्रीजी यहां बैठे हुए हैं, आप अगर इस कार्यवाही को नहीं रोकेंगे, कुछ जानकारी यह मिली है कि सरिस्‍का अभ्‍यारण्‍य से गांवों को उठाकर वहां बसाया जा रहा है तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अलवर जिले में हजारों एकड़ जमीन गोचर, पड़त, बंजर, सिवाय चक पड़ी हुई है, अगर गांवों को कहीं से उजाड़ कर, उठाकर उस जगह पर लाया जाता है तो वह जमीन अलॉट कराए अगर जमीन ही अलॉट करें तो वार विडोज, कितनी अलवर की शहादत हुई है, झुन्‍झुनूं के बाद अलवर का नम्‍बर आता है शहादत में, इस देश की जंगे आजादी के लिए और देश की सीमाओं की रक्षा के लिए कितने ही सैंकड़ों लोगों ने वहां शहादत दी है, उनकी वार विडोज को आप अलॉट करें। यह बड़े दुर्भाग्‍य की बात है कि वहां पर कोई भी हादसा हो सकता है। अभी वहां पर कोई मीटिंग हुई है परसों और सरकार को विधिवत रूप से ज्ञापन फैक्‍स किया जा चुका है, वहां लॉ एण्‍ड ऑर्डर की स्थिति खराब हो सकती है इसलिए मैं माननीय मंत्रीजी का ध्‍यान आकर्षित कर रहा हूं।

 

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आप उस वन क्षेत्र में जो दनादन जेसीबी चल रही है उनको या तो तुरंत रोके वरना वहां पर एक बहुत बड़ी लॉ एंड आर्डर की स्थिति पैदा हो जाएगी जिसकी जिम्‍मेदारी सरकार की होगी। मैं आपके माध्‍यम से इस वन क्षेत्र को जो सरकार उजाड़ रही है ..(व्‍यवधान).. यह सरकार बेनकाब हो चुकी है और वनों को लगाने की बजाय उजाड़ने का काम कर रही है। इनका चेहरा बेनकाब हो चुका है। आपने समय दिया, धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: वन मंत्रीजी।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  सरिस्‍का बाघ परियोजना क्षेत्र में जो गांव बसे हुए हैं भारत सरकार के डाइरेक्‍शन से इन गांवों को बहरोड़ के पास रुंझ क्षेत्र है वहां पर 222.67 हेक्‍टेयर जमीन चयनित की गई है और इसमें काकनबाड़ी और भगानी दो गांव हैं, इनको शिफ्ट करने के लिए वहां पर कार्यवाही चल रही है। यह तो गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया के आदेश हैं और एफसीआई एक्‍ट, 1980 के तहत इनका डाइवर्सन परिवर्तित करके यह कार्यवाही चल रही है और यह तो आदेश के अनुरूप हो रहा है ताकि सरिस्‍का का रिइंट्रोडक्‍शन कैसे किया जाए इस व्‍यवस्‍था में भारत सरकार ने जो डाइरेक्‍शन दिये हैं उसकी पालना हम कर रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: 295, श्री अर्जुनलाल जीनगर।

(अनुपस्थित)

श्री सुखलाल मीणा।

295 के अन्‍तर्गत विशेष उल्‍लेख

विधान सभा क्षेत्र सपोटरा में पानी की समस्‍या

श्री सुखलाल मीणा (सपोटरा): अध्‍यक्ष महोदय, प्रक्रिया के नियम 295 के तहत विधान सभा क्षेत्र सपोटरा में पानी की समस्‍या के संबंध में निवेदन करना चाहता हूं।

मेरा विधान सभा क्षेत्र सपोटरा में पीने के पानी की भयंकर समस्‍या है। मेरा क्षेत्र डांग एरिया है और आधे से अधिक लोग पहाड़ों पर रहते हैं। ये वे क्षेत्र हैं जो समस्‍त पश्चिमी राजस्‍थान के मवेशीपालकों को अपने यहां शरण देते हैं। सदियों से लाखों की तादाद में भेड़-बकरियां, गाय, ऊँट इत्‍यादि यहां पर आकर हर वर्ष अपनी प्‍यास, भूख बुझाते हैं। मेरे विधान सभा क्षेत्र में पीने के पानी का संकट आने का अर्थ सम्‍पूर्ण राजस्‍थान के पशुपालकों पर पानी का संकट आना है।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या पढ़ रहे हैं आप? आपने लिखकर तो कुछ और ही दिया है। क्‍या पढ़ रहे हैं?

श्री सुखलाल मीणा (सपोटरा): मेरे क्षेत्र में वर्तमान में हैण्‍डपम्‍प सब ड्राई हो चुके हैं और मेरे क्षेत्र की अमरगढ़, कालागुडा, दौलतपुरा, निमेरा, राहिर, बहादुरपुर, कैलादेवी, भांकरी, गुरदेह, मोंगिपुरा, महाराजपुरा, नानपुर, चंदेलीपुरा ग्राम पंचायतों में पानी का भारी संकट है।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या पढ़ रहे हैं आप? इसमें कुछ और लिखा है, बोल कुछ और रहे हैं।

श्री सुखलाल मीणा (सपोटरा): यही लिखा है साहब।

श्री अध्‍यक्ष: लिख दिया।

श्री सुखलाल मीणा (सपोटरा): उपरोक्‍त ग्राम पंचायतों में एक-एक बोरिंग करवाना अति आवश्‍यक है जिससे पीने का पानी उपलब्‍ध हो सके। मेरे विधान सभा क्षेत्र में चंबल नदी से लिफ्ट से पानी जो करौली व सवाईमाधोपुर जिले के लिए पाइप लाइन से लाया जा रहा है। उससे मेरा विधान सभा क्षेत्र सपोटरा व करौली के हर गांव को जोड़ा जाए।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, धन्‍यवाद। श्री जगसीराम कोली।

 

विधान सभा क्षेत्र रेवदर की भराणा सड़क का निर्माण

श्री जगसीराम कोली (रेवदर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं आपके माध्‍यम से प्रक्रिया के नियम 295 के तहत जिला सिरोही के विधान सभा क्षेत्र रेवदर में आबूरोड से लगती हुई भराणा बोर्ड से मुनिजी की कुटिया जर्जर सड़क का निर्माण करवाने बाबत निवेदन करना चाहता हूं।

इस सड़क से लगभग 40 गांव लगते हुए हैं व इस सड़क पर आवागमन करने वाले वाहनों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। भराणा सड़क से गुजरात जाने वाले पत्‍थरों से भरे ट्रक चलते हैं। इस वर्ष भारी वर्षा होने से सड़क पूरी तरह से जर्जर हो गई है व सड़क पर दो-दो फीट के गहरे गड्ढ़े पड़ जाते हैं। मेरा आपके माध्‍यम से सार्वजनिक निर्माण मंत्री जी से निवेदन है कि रेवदर की जनता को ध्‍यान में रखते हुए भराणा सड़क का जल्‍दी निर्माण करवाने की अनुमति प्रदान करें।

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद श्री संयम लोढ़ा। अनुपस्थित। No, you lost your chance. श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं माफी चाहता हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): इन्‍होंने माफी की बात की और आपने माफ कर दिया और हंसकर किया।

 

सिरोही जिला प्रशासन की उदासीनता व लापरवाही से दो भीलों की मौत

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  प्रक्रिया के नियम 295 के अंतर्गत सिरोही जिला प्रशासन की उदासीनता व लापरवाही से दो भीलों की मौत के संबंध में निवेदन करना चाहता हूं। भूख व कुपोषण की वजह से सिरोही जिले के जावाल में देवाराम भील की गत माह व उसके चार वर्षीय बेटे की इस माह भूख से मौत हो गई। देवाराम का परिवार बीपीएल की सूची में था, लेकिन राज्‍य सरकार द्वारा गत वर्ष जारी की गई सूची में उसका नाम काट दिया गया। पूरा परिवार भूख व कुपोषण से पीडि़त है। मृतक की पत्‍नी दाखू व दो बच्‍चे सिरोही के अस्‍पताल में भर्ती हैं। दाखू का हेमोग्‍लोबिन 3.5 ही पाया गया है।

मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करता हूं कि राज्‍य सरकार को निर्देश प्रदान करें कि पीडि़त परिवार की चिकित्‍सा के लिए समुचित इंतजाम करें एवं परिवार के दो सदस्‍यों की भूख से मौत के लिए उन्‍हें सहायता प्रदान करें।

राज्‍य सरकार ने अभी जनवरी माह में ही ग्राम सम्‍पर्क व उससे पहले स्‍वास्‍थ्‍य चेतना अभियान चलाया था, इसके बावजूद उक्‍त परिवार की सुध नहीं ली गई। इसके लिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने का कष्‍ट करें। माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  ...

श्री अध्‍यक्ष: अब नहीं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं कोई इश्‍यू नहीं बनाना चाहता, सिर्फ इतना सा निवेदन है कि वह होस्पिटल में है। सरकार कह दे, इसमें कलक्‍टर के माध्‍यम से यहां बुला ले। यहां उनके इलाज की व्‍यवस्‍था करे।

श्री अध्‍यक्ष: ऐसे कैसे कह दे, 295 का पहले पता लगाएंगे।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं अवगत करा चुका हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपने निर्देश दिया है, मालूम कर लेंगे। जो कुछ सहायता संभव हो, समुचित सहायता भी देंगे, पर यह भूख से मरने वाली बात ठीक नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: जांच की जाएगी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): फिर भी आपने कहा है तो दिखवा लेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: उसके बाद सरकार करेगी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय सदस्‍य, अपन मिल लेंगे, आपकी भावनाओं से मुख्‍यमंत्रीजी को अवगत कराएंगे, पर भूख से मरने वाली हरेक चीज में नहीं होती।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): अध्‍यक्ष महोदय, बार-बार भूख से मरने की बात करते हैं, दिल्‍ली सरकार को जाकर कहना चाहिए कि गरीबों को मिलने वाले गेहूं का कोटा घटा दिया।

श्री अध्‍यक्ष: राजस्‍थान सरकार की भी जिम्‍मेदारी है।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): बार-बार भूख से मरने की बात होती है, गरीबों के प्रति इतनी हमदर्दी है तो दिल्‍ली जाकर भारत सरकार को कहना चाहिए। ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मुझे पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर साहब को इस कथन पर आपत्ति है उन्‍होंने अभी फरमाया कि अपन मिल लेंगे, पता कर लेंगे। अपन

मिल लेंगे, पता कर लेंगे बाहर। सदन की प्रोपर्टी है, यह उठ गया, अध्‍यक्षजी की अनुमति से उठा है, यहीं बात करिए कौनसी बात करेंगे। खुलासा करिए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अगर आप नहीं चाहते हैं तो कोई बात नहीं करेंगे। अब तो माफी दे दो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपने कहा है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मैं मेरे शब्‍द वापस ले रहा हूं, नहीं मिलेंगे, नहीं बात करेंगे, अब हुक्‍म करो आप।

श्री अध्‍यक्ष: पार्लियामेंट्री मिनिस्‍टर साहब, आप यहीं बात किया करें।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): ये आदी हैं, लेकिन कम से कम गरीबों के प्रति आपको पारदर्शिता रखनी है, वरना गरीबों का सारा का सारा गेहूं भारत सरकार ने काट दिया बीपीएल के नाम पर। आज घडि़याली आंसू बहाने का काम करते हैं इसलिए मेहरबानी करके ऐसे परिवार के साथ में आप न्‍याय करें।

श्री अध्‍यक्ष: श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा (अनुपस्थित)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं कोई पोलिटिकल इश्‍यू नहीं बनाना चाहता, मैं यही तो कह रहा हूं उनकी मदद कर दें आप।

श्री अध्‍यक्ष: श्री नवनीत निनामा।

 

आदिवासियों की कब्‍जा काश्‍त जमीन वन बाउण्‍ड्रीवाल से बाहर निकालने विषयक

श्री नवनीत नीनामा (घाटोल): अध्‍यक्ष महोदय, केन्‍द्र सरकार द्वारा 2006 में बने नये कानून के अनुसार राजस्‍थान में आदिवासी किसानों द्वारा कब्‍जा काश्‍त की जमीन का सर्वे ग्राम सभाओं द्वारा किये जाने के संबंध में नियम 295 के तहत प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करना चाहता हूं।

  उपरोक्‍त विषय में निवेदन है कि राजस्‍थान राज्‍य में आदिवासी किसान अपनी पुरानी परम्‍परा अनुसार जंगलों में मकान बनाकर कई वर्षों से आसमान से होने वाली वर्षा के आधार पर खेती करते हैं व पशुपालन के साथ अपना जीवन जीते हैं। आदिवासी किसानों व जनजाति के नाम से करोड़ों रुपया स्‍वीकृत व खर्च हो रहा है, परन्‍तु इन वनों में रहने वाले आदिवासयों को आज तक सही न्‍याय नहीं मिल रहा है।

 

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/23032007/1250/1m 

 

अभी हाल 2006 में केन्‍द्र सरकार द्वारा नया कानून बनाया जाकर जंगलों में रहने वाले आदिवासी जो वनों में रहते हैं, वन के सहारे वर्षा के आधार पर खेती करते आ रहे हैं लेकिन वन विभाग द्वारा वन आबाद रखने को बाउण्‍ड्रीवॉल का निर्माण कराया गया है। उस समय कई आदिवासी किसानों को कब्‍जा काश्‍त की भूमि वन विभाग द्वारा अपनी बाउण्‍ड्री में कर ली है, उसे नये कानून के अनुसार सन 2005 तक की जमीन कब्‍जा काश्‍त की ग्राम सभाओं द्वारा उप खण्‍ड स्‍तर पर बनी समितियों को नाजायज कब्‍जा विवरण की रिपोर्ट भिजवाने का प्रावधान है, के अनुसार राज्‍य सरकार जिला कलक्‍टरों को आदेश देवे कि आदिवासियों के कब्‍जा काश्‍त की जमीन वन बाउण्‍ड्रीवाल से बाहर निकालने की ग्राम सभाएं शुरू की जाएं।

श्री अध्‍यक्ष: श्री दाताराम गुर्जर अनुपस्थित ।

डा भंवरलाल राजपुरोहित अनुपस्थित।

पढ़े हुए मान लिए जाएंगे इनको।

श्रीमती अनिता भदेल अनुपस्थित, पढ़ा हुआ मान लिया गया।

श्री धर्मपाल चौधरी।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): साहब, यह कह रहे हैं, पढ़े हुए मान लें।

श्री अध्‍यक्ष: थैंक यू, वूरी मच। कन्‍हैया लाल पाटीदार।

 

जनता जल योजना के संचालनकर्ता का मेहनताना बढ़ाने विषयक

श्री कन्‍हैया लाल पाटीदार (पिड़ावा): अध्‍यक्ष महोदय, हमारे प्रदेश में जनता जल योजना विभिन्‍न गांवों में पेयजल उपलब्‍ध कराने हेतु संचालित की जा रही है। उक्‍त योजना को संचालित करने एवं रखरखाव की जिम्‍मेदारी संबंधित ग्राम पंचायत की है। इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ग्राम पंचायत को आर्थिक सहायता उपलब्‍ध कराती है। बिजली का बिल और पाइप आदि का भार जलदाय विभाग वहन करता है और योजना का संचालन कर्ता जो जीएलआर भरने के बाद मोटर बंद करता है, जीएलआर की सफालई करता है, पाइप लाइन के टूटने पर उसकी रिपेयर करता है, आदि कार्य संचालन कर्ता को करने पड़े हैं और उस संचालन कर्ता को मात्र 500 रुपये बतौर मेहनताना प्रति माह दिया जाता है जो 17 प्रति दिन के हिसाब से भी कम पड़ता है, ऐसी अवस्‍था में ग्राम पंचायतों के सामने इस योजना को चालू रखने में बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है क्‍योंकि इतनी कम राशि मात्र 500 रुपये प्रति माह में कोई भी व्‍यक्ति कार्य करने को तैयार नहीं होता है, आए दिन ये योजनाएं बंद पड़ी रहती हैं। एक सामान्‍य मजदूर को भी 50-60 रुपये मजदूरी के मिल जाते हैं तो 17 रुपये में कोई व्‍यक्ति इस योजना को चलाने के लिए तैयार नहीं होता। ग्राम पंचायतों के पास अपनी निजी आय के भी पर्याप्‍त साधन नहीं हैं कि ग्राम पंचायत अपनी निजी आय से संचालन कर्ता को भुगतान कर सके। जब से यह योजना हमारे प्रदेश में कार्य रूप में आई है तब से संचालन कर्ता हेतु 500 रुपये ही सरकार देती आ रही है। अत: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मुख्‍य मंत्री महोदया और जलदाय मंत्री महोदय से अनुरोध करना चाहूंगा कि ग्रामीण क्षेत्र की इस अत्‍यन्‍त ही उपयोगी योजना के संचालन कर्ता का मेहनताना 500 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 1000 रुपये प्रति माह करने का कष्‍ट करें ताकि जनता जल योजना को निर्बाध रूप से चलाये रखने में ग्राम पंचायत को काई असुविधा नहीं हो।

धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री जी, बात तो वाजिब है, कुछ बोलो, बात तो सही है। प्रोब्‍लम तो है कि 500 रुपये में कौन ...(व्‍यवधान)... सही बात है, सदन की भावना भी यही है ...(व्‍यवधान)... आसन की भी भावना है, सदन की भी भावना है।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, इसके ऊपर आज चर्चा है, मांग है तो उस समय बाद में जब भी होगा, बाद में कर लेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: हां, तो सदन का तो क्‍या पता, कोई चर्चा करे या न करे, आ गई न चर्चा, हजार से कम नहीं होना चाहिए, नहीं, हजार रुपये।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मैंने लिख लिया ।

श्री अध्‍यक्ष: श्री सुरेश मीणा अनुपस्थित, पढ़ा हुआ मान लिया गया।

चलिए, बिराजें।

श्री रामनारायण मीणा।

 

पर्ची के माध्‍यम से उठाये गये मुद्ये

चारभुजा मंदिर की मूर्ति चोरी विषयक

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से गृह मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षित करूंगा। गृह मंत्री जी, धार्मिक भावना से ओतप्रोत आप भी हैं, आम जन की तरह। आपके यहां जो मूर्तियां चोरी चोती हैं, किसी मूरत की कीमत तो बताई जातीा है 3 सौ, किसी की बताई जाती है पांच हजार। माननीय गृह मंत्री जी, बांसी में जो चारभुजा मंदिर की मूर्ति चोरी हुई है, वह मूरत अनमोल मूरत है, इसी तरह से क्‍योंकि विधि विधान से प्रतिस्‍थापित कोई भी मूरत हमारे लिए ईश्‍वर का रूप होतीा है इसलिए माननीय गृह मंत्री जी, 18 फरवरी की रात्रि को जो मूरत चोरी हुई, 19 फरवरी, 2007 को मुकदमा नम्‍बर 52 पुलिस थाना, देई में दर्ज हुआ। माननीय गृह मंत्री जी, तब से ही बांसी के लोग और आसपास के लोग वहां धरने पर बैठे हैं, मैं आपसे मिला हूं, आपने कहा, हमसे सदन में भी कहा कि इसके बारे में हम टीम गठित करेंगे और उस परिवार को माननीय गृह मंत्री जी, जो व्‍यक्ति उसने मौत का वरण किया है, इस भावना से जैसे चारभुजा जी नहीं हैं तो मैं रह कर क्‍या करूंगा। यह धार्मिक भावना का सवाल है, उसको आत्‍म हत्‍या नहीं कहा जा सकता, वह इतना गरीब आदमी, उसके पास एक बिस्‍वा जमीन नहीं, उसका पिता नहीं है, मां है, वह आंखों से अंधी है, बुजुर्ग है, चल नहीं सकती और माननीय गृह मंत्री उसके छोटे छोटे दो बच्‍चे हैं, ऐसी हालत में आपने कहा था, हम सहयोग करेंगे इसलिए मैं तो आपसे अर्ज करता हूं कि इसको उसी श्रेणी में रखा जाए, वह रावला, घड़साना की बात मैं नहीं करता, आदिवासी के मामले की बात नहीं करता लेकिन उसी श्रेणी के लायक केस है जिस श्रेणी में आप पांच लाख रुपये देते हो तो माननीय मंत्री जी, मेरा आपसे अनुरोध है कि जो यह भावना है उस भावना से ओतप्रोत मामले में आज भी बांसी के दो सौ आदमी आपके जयपुर में आए हुए हैं, आपसे मिलने की कोशिश कर रहे हैं, आप उनसे मिलेंगे, क्‍या कहेंगे लेकिन मैं तो आपसे अनुरोध करूंगा, बांसी का मामला बहुत अहम मामला है, ऐसा का ऐसा ही मामला पहले गुढ़ादेवजी में हुआ, सैकड़ों मूर्तियां राजस्‍थान में चोरी जा रही हैं, कई संगठित गिरोह हैं, हमने आपसे कहा और आप सेंट्रल स्‍तर पर, जयपुर स्‍तर पर टास्‍क-फोर्स जब तक गठित नहीं करोगे, कोई भी मूरत बरामद हो, हमारे लिए अनमोल मूरत है, मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि इस दुःखी परिवार को गिरिराज के परिवार को जो उसकी मां अंधी है, उसको पांच लाख रुपये दें और साथ ही आप जयपुर से ऐसी टीम गठित करें, माननीय गृह मंत्री जी, उसी की मूरत देवरिया में चोरी हुई, छत्र वगैरह चुराये गये, जो सी आई गोपाल लाल था उसको धन्‍यवाद देना चाहिए था।

श्री अध्‍यक्ष: आपका तो बांसी का है केवल।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): छत्र चोरी के बरामद हुए और इसमें जो आगे बढ़ रहा था, गृह मंत्री जी, जब मैं विधायक बना, उसके पहले पहले, राज हमारा होगा, दलाल बैठा करते  थे, आज वहां दलाल थानेदार जी ने खतम किये, जो सी आई ने खतम की है उसको आपने अलग कर दिया इसलिए मैं नहीं कहता, उसको आप रखो नहीं रखो, कृपा करके आप। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या आप जन प्रतिनिधि हैं वहां के, आपने समझाया नहीं ?

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप टीम गठित करें और पांच लाख रुपये उसको देंगे।

श्री अध्‍यक्ष: आपने समझाया नहीं ?

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मैं आपसे अनुरोध करूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: उसने सुसाइड कमिट किया, आपने समझाया नहीं ? जन प्रतिनिधि हो आप वहां के, क्‍या कर रहे थे ?

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मेरी आप सुनिए तो सही एक मिनट, मेरा आपसे अनुरोध है, इस मामले को गहनता से लें, जनता यहां आई हुई है, आप कृपा करके इसमें पांच लाख रुपये देने की और टीम गठित करके उस मूर्ति को बरामद करने की क्‍योंकि चारभुजा, वह आज का नहीं है, हजारों वर्षों पुराना है, बहुत अहम मूर्ति है, माननीय, इंटरनेशनल ब्‍यूरो है, आप कृपा करके हमें सहयोग करें, जन भावना का आदर करें।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, ठीक है। धन्‍यवाद।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): जैसी आपकी भावना है, टीम गठित करने के लिए वैसे पहले भी हमने वहां सी ओ नैनवा और सी ओ लाखेरी दोनों की टीम गठित की है, उन्‍होंने एक गैंग पकड़ी है, देवली की, उससे एकाध जगह की, दूसरी जगह की मूर्ति जरूर बरामद हुई है कुछ और उसमें कुछ रास्‍ते मिल रहे हैं। हो सकता है, यह चोरी उसने की, नहीं की लेकिन अभी उस गैंग पर बराबर हम काम कर रहे हैं ाफिर भी आपकी भावना के अनुसार मैं जयपुर से टीम गठित करके भेजूंगा और इसमें जितनी जल्‍दी से जल्‍दी बरामदगी हो सके उसका प्रयास में कोई कमी नहीं रखें, इतना मैं जरूर ∙∙∙∙  

श्री अध्‍यक्ष: श्री जुबेर खान।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): रहा सवाल सहायता का, यह सरकार के सोचने का विषय है कि जैसा भी संभव होगा, वह करेंगे। 

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप कृपा करके बता दीजिए न इसको सीक्रेट क्‍यों रखते हो ?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): ऐसा तो नहीं होगा।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप तो देवता के उपासक हो, माननीय, आप तो बता दो हमारे को, इसको सीक्रेट रख कर के क्‍या करोगे आप, जल्‍दी करिए, वहां लोग चाहते हैं, जन भावना है, यह मेरा आपसे निवेदन है।

श्री अध्‍यक्ष: सुन लिया, उन्‍होंने, धन्‍यवाद।

 

नगर पंचायत समिति के 132 के.वी. जीएसएस से हो रही परेशानी विषयक

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे अनुमति दी है इसलिए मैं आपको धन्‍यवाद देता हूं मैं ऊर्जा मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा, आपके माध्‍यम से, अध्‍यक्ष महोदय, जो इकाईयां बनाते हैं, वह इसीलिए बनाते हैं कि एक इकाई के जोग्राफिकली और दूसरे दृष्टि से लोगों को नजदीक से नजदीक चाहे वह पटवार सर्किल हो, उसके बाद आईएलआर सर्किल हो, तहसील हो, पंचायत समिति हो, जिला हो, मैं आपको ऐसा उदाहरण देता हूं, अध्‍यक्ष महोदय, अलवर जिले की पंचायत समिति लक्ष्‍मणगढ़ का, 14 पंचायतें हैं जो उप तहसील गोबिन्‍दगढ़ में आती हैं, वहां कुछ समय पूर्व विद्युत विभाग ने जो गोबिन्‍दगढ़ जीएसएस से 18 गांवों की लाइन थी वहां उस डिस्‍कनेक्‍ट करके वह लाइन भरतपुर जिले के नगर क्षेत्र के जालूकी जीएसएस जो जोड़ दी। अब परिस्थिति यह आती है, अध्‍यक्ष महोदय, कि वहां पर संचालन भरतपुर जिले का नगर पंचायत समिति का नगर 132 जीएसएस का तो हमारे लोगों को बहुत बड़ी परेशानी आती है।       

 

सुरेन्‍द्र/अरुण/23.3.2007/13.00/1n/1

 

टेल-एंड के गांव हैं और गोविन्‍दगढ़ से मुश्किल से एक किलोमीटर की दूरी पर गांव शुरू हो जाते हैं। हमारे यहां लक्ष्‍मणगढ़ जो पंचायत समिति हैडक्‍वार्टर है वहां 132 जी एस एस मौजूद है। इतना होते हुए भी आपने जो नगर के जी एस एस से जोड़ रखा है उससे परेशानी हो रही है। आपके विभाग से हम अनेकों बार वहां मिले तो वो यह कहते हैं कि क्‍योंकि गांव पांच हजार की आबादी में आ गया, उसके फीडर आ गये, रेल्‍वे लाइन पड़ती है तो हम दूसरा फीडर रेल्‍वे लाइन पर कैसे निकालें। हमने तो यहां तक भी कह दिया मंत्री महोदय, कि आप फीडर लगाने के लिए तैयार होइये जो भी खर्चा होगा विधायक कोटे से मैं देने के लिए तैयार हूं। वहां लोगों को परेशानी होती है, बिजली आती नहीं, रोज आंदोलन होते हैं, धरने होते हैं। तो मेरा आपसे निवेदन है मैं लम्‍बी बात नहीं कहूंगा, आप गोविन्‍दगढ़ इलाके के जो 18 गांव हैं जिनको आपने भरतपुर जिले के जी एस एस से जोड़ रखा है उनको अलवर जिले के जी एस एस से जोडि़ये और गोविन्‍दगढ़ 33 केवी जी एस एस को लक्ष्‍मणगढ़ 132 केवी जी एस एस से जोडि़ये ताकि लोगों को सुविधा मिले, बिजली अच्‍छी आये। क्‍योंकि लक्ष्‍मणगढ़ पंचायत समिति के लिए ही सिर्फ 132 का जी एस एस है। कठूमर में अलग है, एम आई ए में अलग है। जब आप पंचायत समिति की 40 पंचायतों में से 14 पंचायतों को अलग कर रहे हैं यह उचित नहीं है। इसलिए आप इस सम्‍बन्‍ध में जरूर आश्‍वस्‍त करिये कि इसको आप गोविन्‍दगढ़ का जो जी एस एस है इसको लक्ष्‍मणगढ़ से जोड़ देंगे और 18 गांवों को जो नगर वाले जी एस एस से जोड़ रखे हैं वो 33 केवी गोविन्‍दगढ़ से जोड़ देंगे। मैं आपये यह निवेदन करना चाहता हूं।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को यह बताना चाहूंगा कि 13 वर्ष से 132 जो नगर का सब-स्‍टेशन है यह आपके गोविन्‍दगढ़ से लगभग 23 किलोमीटर पड़ता है और लक्ष्‍मणगढ़ है वह 45 किलोमीटर पड़ता है तो जिलेवार हमें इसका नहीं करना चाहिए, जो आपसे क्‍लोजेस्‍ट है, आपको तो पर्याप्‍त सप्‍लाई से मतलब है।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गोविन्‍दगढ़ और लक्ष्‍मणगढ़ की दूरी अगर 15 किलोमीटर से ज्‍यादा दूर हो तो आप जो कहोगे मैं करने के लिए तैयार हूं। सिर्फ 15 किलोमीटर है। 7 किलोमीटर जालूकी और 7 किलोमीटर और। 15-16 से ज्‍यादा तो किसी भी सूरत में नहीं है गोविन्‍दगढ़ से लक्ष्‍मणगढ़ की दूरी। आप यह चैक करा लीजिये। लक्ष्‍मणगढ़ जी एस एस अभी 2-3 साल पहले ही बना है। यह बात सही है कि जब लक्ष्‍मणगढ़ में जी एस एस नहीं था, कठूमर में जी एस एस नहीं था खेड़ली में तब नगर से वहां बिजली आती थी लेकिन अब जब लक्ष्‍मणगढ़ में 132 केवी जी एस एस बन गया तो अब क्‍या औचित्‍य है कि उसको अभी भी नगर से रखने की बात की जा रही है।

श्री अध्‍यक्ष: 132 से सीधे थोड़े ही होगा, पहले 33 में होगा उसके बाद होगा। आपको बिजली की वोल्‍टेज पूरी मिलनी चाहिए, कहीं से भी आए, सवाल तो यह है न।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): नहीं मिलती इसीलिए तो तकलीफ है। अध्‍यक्ष महोदय, कहां तो नगर से और कहां उसी पंचायत समिति से आयेगी।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य की बातों से यह जाहिर होता है कि आपने दो इश्‍यूज रेज किये हैं। एक तो इन गांवों को पहले सप्‍लाई मिल रही थी वहां से उनको अलग क्‍यों किया गया और दूसरा आपका जो मुद्दा है वह यह है कि लक्ष्‍मणगढ़ से जोड़ा जाए। आप फरमा रहे हैं कि जो लक्ष्‍मणगढ़ की दूरी है गोविन्‍दगढ़ से, उतनी ही दूरी नगर की है। ज्‍योग्राफिकली आप यही बताना चाह रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: करेक्‍ट करना चाहते हैं, करेक्‍ट कर लीजिये।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): मेरा आपसे माध्‍यम से यह अर्ज है कि पहली चीज तो यह है कि जो जालूकी 33 का सब-स्‍टेशन है उससे ये गांव नजदीक पड़ते हैं ढाई किलोमीटर और यह जो कार्य हुआ है यह कार्य 31.7.2006 को हो गया था। यह जो आपका सेग्रिगेशन हुआ है यह 31.7.2006 को हो गया है यानि कि ऑलमोस्‍ट एट मंथ्‍स बैक। अब जो आपने अचानक यह मुद्दा उठाया है, आप मुझे पहले ही पत्र लिखकर के अवगत कराते तो मैं इमीजिएट एक्‍शन उसी वक्‍त में ले लेता।

दूसरी चीज यह है कि हमारी जो पॉलिसी है कि जब तक एफ आर पी पूरा नहीं हो जाए, we have to segregate villages. जो 5 हजार की पापुलेशन के कस्‍बे हैं उनसे हमें सेग्रिगेट करना है ताकि उनको सही बिजली मिले और आपके कस्‍बे को भी सही बिजली मिले। जो आप एफ आर पी, लगभग एक वर्ष के अन्‍दर इस क्षेत्र का आपका कम्‍पलीट हो जाएगा, सिंगल फेस के ट्रांसफार्मर लग जाएंगे तो आपको जो समस्‍या हो रही है यह एक टेम्‍परेरी चीज है। वहां पर बिजली जो मिल रही है मैंने आंकड़े लिये है कि बिजली की कोई शॉर्टेज नहीं है। यदि आपको सप्‍लाई में कोई समस्‍या है तो आप मुझे अवगत करायें और जो भी समस्‍या है उसका समाधान करने को तैयार हूं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मेरा तो इतना सा निवेदन है मंत्री महोदय कि जहां से फीडर वॉयफरकेट किया है वह मुश्किल से जी एस एस से पौन किलोमीटर है और वहां के बाद तो फीडर चल रहा है क्‍योंकि वह फीडर आपने अलग कर लिया 24 घंटे बिजली देने के लिए। जब मैं यह कह रहा हूं कि विधायक कोटे से वहां तक का खर्चा देने के लिए तैयार हूं तो आपको यहां से जोड़ने में क्‍या दिक्‍कत है? वहां परेशानी है, आप समझिये कि ट्रांसफार्मर के लिए नगर जाना पड़ता है और अलवर के आदमी को नगर के आदमी क्‍यों देंगे। वहां कोई असर नहीं है, कोई जन-प्रतिनिधि वहां का नहीं है तो पहली प्राथमिकता वो उनको देते हैं और हमारे लोग पिछड़ते हैं। मैं आपको व्‍यावहारिक दृष्टि से बता रहा हूं। अध्‍यक्ष महोदय, आप भी जानते हैं, अगर आपकी वहां पंचायत समिति अलग, जिला अलग तो वहां कौन सुनेगा। ट्रांसफार्मर नहीं मिलते।

श्री अध्‍यक्ष: आपके साथ बैठकर के समझा दीजियेगा। (व्‍यवधान)

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): मैं इसके अन्‍दर और डिटेल से चला जाऊंगा, आप विधायक कोष से भी पैसा देने को तैयार हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): विधायक कोष से पैसा दे रहे हैं तो आपको क्‍या आपत्ति है? विधायक कोष से यह सारा खर्चा उठा रहे हैं तो सरकार को इसमें क्‍या आपत्ति है?

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): आपत्ति खाली पैसे की नहीं है, हमें एडमिनिस्‍ट्रेटिवली सब कुछ देखना पड़ता है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): एडमिनिस्ट्रिटिवली क्‍या देखोगे?

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): आप जो बता रहे हैं उसके अन्‍दर बैठकर के देख लेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: नियमों के मुताबिक ही तो होगा।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 24 घंटे गांव को बिजली दी गई उससे पहले तो यहीं थे न।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय सदस्‍य सारा पैसा विधायक कोष से देते हैं तो आपके इंजीनियर्स को फायदा होगा, इनके गांवों में फायदा होगा, आपका नाम अच्‍छा होगा, आपका कुछ लगता नहीं।

श्री अध्‍यक्ष: पांच हजार से उनकी आबादी ज्‍यादा हो गई.....

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): अध्‍यक्ष महोदय, मैंने मना थोड़े ही किया है। मैं बैठकर के बात कर लूंगा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बात यह है कि इनके क्षेत्र में तो बिजली दे रहे हैं मेरे क्षेत्र से, जालूकी मेरी कांस्‍टीट्यूएंसी में है और मेरी कांस्‍टीट्यूएंसी के जो खोरी, बूड़ली और दूसरे झंझाड़ गांव हैं उनमें बिजली दे रहे हैं इनके क्षेत्र से। तो इससे तो आपस में बड़ा कनफ्लिक्‍ट पैदा हो रहा है इसलिए आप इसको सुधार करने का काम कर दें।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): बैठकर के डिस्‍कस कर लेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: बैठ जाना इनके साथ। ठीक है। श्री रामप्रताप कासनियां। पर्ची आपकी है घग्‍घर डिप्रेशन पर गांव सरदारपुरा से ठेठार के बीच में.....

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, पहले सूचना दी कि पर्ची नहीं  निकली है। अध्‍यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्‍यवाद, आज तो मेरी पर्ची निकल गई।

घग्‍घर डिप्रेशन पर सरदारपुरा से ठठेर के बीच पुल का निर्माण

अध्‍यक्ष महोदय, मैं सरकार का ध्‍यान मेरे क्षेत्र में गांव सरदारपुरा और ठेठार के बीच में घग्‍घर डिप्रेशन है। अध्‍यक्ष महोदय, पिछले 10-12 वर्ष से पक्‍की रोड बनी हुई है और यह रोड पल्‍लू तक जाती है। इसमें एक मिसिंग लिंक और है। इसी रोड में यह जो रास्‍ता अवरुद्ध है जिससे 30-35 गांव प्रभावित होते हैं। गुसाईंसर गांव से मोटेर तक यह 8 किलोमीटर इसमें मिसिंग लिंक है और एक यह पुल है।

श्री अध्‍यक्ष: 8 किलोमीटर की कोई मिसिंग लिंक होती है क्‍या कहीं?

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): रास्‍ते की बात बता रहा हूं। अध्‍यक्ष महोदय, यह पुल बनने से मेरा कहने का भावार्थ यह है कि 40-50 गांवों के आवागमन का रास्‍ता वर्षों से रुका हुआ है। अध्‍यक्ष महोदय, जब भी पंजाब के अन्‍दर, हरियाणा के अन्‍दर फैक्ट्रियों का गंदा पानी जो भी है, सारा का सारा घग्‍घर डाइवर्शन चैनल से से चलकर के मेरे इन डिप्रेशनों में आता है और इन डिप्रेशनों में पानी आने के कारण 35-40 गांवों का रास्‍ता बन्‍द हो जाता है। अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सरकार से निवेदन है कि पूरी बड़ी पुल नहीं बना सके तो कम से कम कॉजवे टाइप पुल जिसमें कम पानी आता है वो तो पाइप के माध्‍यम से नीचे से निकल जाता है। साइफन कह दो, कॉजवे टाइप पुल कह दो, उसका कोई ज्‍यादा खर्चा भी नहीं है। अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह भी कहना चाहूंगा कि अगर सरकार यह पुल बनाने का विचार रखती है तो 10-5 लाख रुपये मैं भी मेरे विधायक कोष से दे दूंगा। यह मैं निवेदन करना चाहता हूं और यह भी उम्‍मीद करता हूं कि मंत्री जी इस सम्‍बन्‍ध में कुछ कहेंगे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, जिस घग्‍घर डिप्रेशन से पुल की चर्चा माननीय सदस्‍य ने की है....

श्री अध्‍यक्ष: उस दिन तो की नहीं जिस दिन डिमांड थी और आज कर रहे हैं।

 

vkj/akt/23032007/1310/1o

 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 90 लाख रुपये अगर उस पुल का निर्माण करते हैं तो सरकार के लगते हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आदरणीय मंत्री महोदय ने इनका धर्म परिवर्तन करवा दिया अध्‍यक्ष महोदय, और उसके बाद में उनका ये काम नहीं करते हैं तो यह तो बेजा बात हो रही है।

श्री अध्‍यक्ष: धर्म परिवर्तन करा दिया तो क्‍या आपकी जिम्‍मेदारी है? अब आपकी जिम्‍मेदारी है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपने इनका धर्म परिवर्तन करके धर्म भ्रष्‍ट कर दिया। आपने इनका धर्म परिवर्तन करके धर्म भ्रष्‍ट कर दिया।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): नहीं, धर्म तो भ्रष्‍ट कर दिया कि नहीं कर दिया, वह तो मुझे पता है, आप तो धर्म रखोगे ना।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): इनका धर्म तो सदैव से इधर ही था। ये आज से नहीं है।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): और दुर्भाग्‍य है कि जब मौका आता है तो वह फूल मुझे नहीं मिलता है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): ये निर्दलीय के नाम से जीते हैं और अब ये पीले वस्‍त्र ओढ़ रहे हैं। अब इन पर दया करो। पीले वस्‍त्र ले रखे हैं आपको राज़ी करने के लिए। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपकी दया से काम उलटा भी हो सकता है। आप तो नहीं रखो दया।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मेरी दया इनके काम नहीं आयेगी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, न तो धर्म परिवर्तन हुआ है, मन परिवर्तन इनका सदैव से ही था और इन्‍होंने जितनी भी कांग्रेस के खिलाफ लड़ाई लड़ी है, मैं समझता हूं, सदन में बिरले ही सदस्‍यों ने लड़ी होगी।

अध्‍यक्ष महोदय, घग्‍घर डिप्रेशन में ठठेर से सरदारपुर के बीच में जिस पुल की बात इन्‍होंने की है, यह पुल पहले बनाया गया राजस्‍थान राज्‍य कृषि विपणन बोर्ड के द्वारा और 370 मिसिंग लिंक भी है और अगर इसको काजवे अप्रोच के रूप में बनाते हैं तो 90 लाख रुपये इस पर व्‍यय होंगे तो हम निश्चित रूप से इसी वित्‍तीय वर्ष के अन्‍दर करेंगे और माननीय सदस्‍य ने जो कहा है कि 10 लाख रुपये ये देंगे और बाकी हम कैसे भी, किसी तरह से भी हम व्‍यवस्‍था करके इस पुल का निर्माण करायेंगे। बरसों से इनकी यह मांग है, इस मांग को हम निश्चित रूप से पूरा करेंगे।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): धन्‍यवाद आपको।

श्री अध्‍यक्ष: श्री हेमराज मीणा।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से किसानों के एक विशेष मामले की ओर...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): धन्‍यवाद तो देओ।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): धन्‍यवाद तो दे दिया अध्‍यक्षजी को, सरकार को और आपने पैरवी की, सबको धन्‍यवाद दे दिया।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, काम तो इन्‍होंने किया है आपका।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): नहीं नहीं, सरकार को दे दिया धन्‍यवाद, मंत्री महोदय, सरकार को कह दिया, आप पीछे रह गये क्‍या।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): काम तो हमने किया और धन्‍यवाद इनको। (व्‍यवधान) उनके मार्फत नहीं। धन्‍यवाद सीधे दो। धन्‍यवाद सीधे दो।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): मैंने कहा, सरकार को सीधा दे रहा हूं। सीधा सीधा सीधा सीधा। जो काम करेगा, उसको धन्‍यवाद। जो उन्‍होंने पैरवी की, उसके लिए धन्‍यवाद कह रहा हूं।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय सदस्‍य, पहले आप जनता दल में थे। आपने कौनसा अहसान किया है।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): धन्‍यवाद तो आपको, सरकार कर रही है, मंत्रीजी कर रहे हैं। मंत्रीजी को तो धन्‍यवाद देना ही पड़ेगा।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): धन्‍यवाद अभी दो, सीधा दो, यह क्‍या बात हुई। इनकी जब इच्‍छा होगी, तब देंगे। (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): इन्‍होंने जो पैरवी की है, उसके लिए धन्‍यवाद। उसके प्रति पीड़ा तो थी। उन्‍होंने मेरी पैरवी तो की है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपके साथ सहानुभूति है। इन्‍होंने बड़ा दगा किया है आपके साथ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आप तो इनका काम बिगाड़ने के लिए खड़े हुए हो प्रतिपक्ष के नेता महोदय, पर मंत्रीजी ने फिर भी कर दिया।

श्री अध्‍यक्ष: आपकी ज्‍यादा सहानुभूति इनको नुकसान पहुंचा सकती है। आपकी ज्‍यादा सहानुभूति उनका नुकसान भी करती है नेता प्रतिपक्ष। इसलिए अब आप तो शांत ही रहो तो ज्‍यादा अच्‍छा है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हमने तो अपना धर्म निभाया है हमारा।

श्री अध्‍यक्ष: उनसे मिले हुए हैं? आपसे मिले हुए हैं वह? हां, आप बोलिये बोलिये।

अंतानगर में सोयाबीन के अमानक बीज का अनियमित विक्रय

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कृषि मंत्रीजी का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा कि किसानों का एक बहुत बड़ा मामला है। अंतानगर में 30.6.2006 को एक दुकानदार के यहां से अमानक बीज सोयाबीन का पाया गया जिस पर राजस्‍थान सीड कारपारेशन की टैग लगी हुई है लेकिन वह कट्टे खुले हुए थे। जब वहां किसानों को पता लगा कि सीड कारपोरेशन के कट्टे पड़े हुए हैं और वह खुले हुए हैं। जब पता लगा तो कलक्‍टर को शिकायत की, कमिशनर को शिकायत की।

श्री अध्‍यक्ष: यह अमानक सोयाबीन का बीज किसका था? सीड कारपोरेशन का था?

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): हां, सीड कारपोरेशन की कट्टों पर टैग लगी हुई थी। अध्‍यक्ष महोदय, जब पता लगा काश्‍तकारों को, सीड कारपोरेशन के बीज है, सीड कारपोरेशन की टैग लगी हुई है, सीड कारपोरेशन के कट्टों में वह भरा हुआ बीज है और वह बीज को एक दुकानदार बेच रहा था। न उस दुकानदार के पास एग्रीकल्‍चर विभाग का लाइसेंस है। जब यह पता लगा तो कलक्‍टर को शिकायत की, मंत्रीजी को भी फोन द्वारा सूचना दी। डी.ई.ओ. को सूचना दी तो कोटा से एक टीम आई।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा कि वह टीम आने के बाद में उस सीड कारपोरेशन के फर्जी कट्टे थे, उन कट्टों को उन्‍होंने जब्‍त करने के लिए कहा। काश्‍तकार इकट्ठे हो गये लेकिन उन कट्टों को जब्‍त करके जो सीड कारपोरेशन के अमानक बीज थे, उस बीज के लिए कलक्‍टर ने एफ.आई.आर. दर्ज करने के लिए कहा कि एफ.आई.आर. दर्ज कराओ तो डी.ई.ओ. ने एफ.आई.आर. दर्ज कराई। वह जो बीज था उसको वह जो दुकानदार था, उसी के सुपुर्दगी में दे गये। उसी की सुपुर्दगी में देकर, ऊपर से एक सील लगा दी। अध्‍यक्ष महोदय, जब दुबारा टीम आई तो देखा कि गोदाम में एक भी कट्टा नहीं रहा। सारा माल काश्‍तकारों को उसने बेच दिया और यह भी प्रूव हो गया जांच में कि वह वास्‍तव में सीड कारपोरेशन के कट्टे थे। अब मैं कहना चाहूंगा अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से कि उसमें एफ.ई.आर. दर्ज नहीं हुई। एफ.आई.आर. दर्ज होनी चाहिए थी, क्रिमिनल मामला बनना चाहिए था कि वह दुकानदार के पास अमानक बीज कहां से आया? उसके खिलाफ क्‍यों नहीं मुकदमा दर्ज हआ। उस दुकानदार के खिलाफ जो धंधा कर रहा है।

अध्‍यक्ष महोदय, बहुत सारे घोटाले हो रहे हैं सीड कारपोरेशन में, ऐसे घोटाले भी पाये गये हैं लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि उन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई। केवल उन्‍होंने उसका ट्रांसफर किया है लेकिन अभी तक उसके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई। मैं चाहूंगा अध्‍यक्ष महोदय, बड़ा गम्‍भीर मामला है, किसानों से जुड़ा हुआ है। मेरे पास फोटो है कि वास्‍तव में सीड कारपोरेशन की ही टैग लगी हुई है, मेरे पास उसकी फोटो है। अध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहूंगा कि उस अधिकारी के खिलाफ, कौन उस समय था, किस-किस की मिलीभगत से यह हुआ। कोटा सीड कारपोरेशन के अधिकारी भी उससे मिले हुए हैं, बारां सीड कारपोरेशन के अधिकारी भी उससे मिले हुए हैं। वहां पर जो सीड कारपोरेशन का बीज अमानक के रूप से निकाला जाता है, उस बीज को सीड कारपोरेशन से मिलकर, कट्टों में भरकर काश्‍तकारों को बेचा जाता है, ऊंचे भाव में बेचा जाता है। यह मामला है अध्‍यक्ष महोदय, ऐसे लोगों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज हो, क्रिमिनल केस दर्ज हो और उनके खिलाफ बड़ी जांच हो। अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहूंगा, मंत्रीजी, उसके खिलाफ कठोर से कठोर कार्यवाही करें और उसको सस्‍पैण्‍ड करें। लेकिन वह लोग राजनीति में प्रभावशाली है। एक बार तबादला हो गया, दुबारा तबादला कराकर वहां फिर रहा है। उसके खिलाफ कठोर कार्यवाही हो, यह मेरा निवेदन है अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह कौनसी पार्टी का प्रभावशाली है? कांग्रेस ऐसे भ्रष्‍ट आदमी का साथ कभी नहीं देती। अब यह बीजेपी वालों से पूछ लीजिये।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अब आप बैठ जाओ। आपका मामला नहीं है। आप काश्‍तकार नहीं हो। बैठ जाओ नीचे।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप साफ कहिये। बेईमान पार्टी में मत जाओ, ईमानदार में बने रहो। (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहूंगा कि वह कट्टे जब्‍त नहीं हुए। सीड कारपोरेशन का गोदाम था उस दुकानदार के पास, उसी गोदाम को सील कर दिया और पीछे उन कट्टों को बेच दिया, पीछे से काश्‍तकार को बेच दिया। काश्‍तकारों को कितना बड़ा नुकसान हुआ है। वह सोयाबीन उगेगी या नहीं उगेगी? ऐसे लगभग 110 कट्टे सोयाबीन के पाये गये हैं। अध्‍यक्ष महोदय, सीड कारपोरेशन में पहले ऐसा होता आया होगा क्‍योंकि कई बार ऐसा होता आया है। वह तो एक मामला पकड़ा गया, इसलिए मामला प्रकाश में आ गया। मैं चाहूंगा कि मंत्रीजी उसके खिलाफ कठोर से कठोर कार्यवाही करें।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बात बिलकुल सही है कि 23.6.2006 को 110 कट्टे वहां पर जिला विस्‍तार अधिकारी आर.बी. सिंह और एक सीड ग्रोअर किसान, जिसके बीज अमानक होने के कारण से सीड कारपोरेशन के द्वारा उसको वापस लौटा दिया गया था और वह उस सीड ग्रोअर ने अपने मकान और टैंट हाउस की दुकान है, उसमें यह बरामद हुआ था। यह बिलकुल सही है लेकिन मैं इसके बारे में निवेदन करना चाहूंगा, जानकारी देना चाहूंगा, इसमें दो अधिकारियों को प्राथमिक जांच में हम लोगों ने दोषी पाया है। उसमें एक आर.बी.सिंह, वहां का जिला विस्‍तार अधिकारी, जो सी.ए.डी. में था, दूसरा वहां पर जो प्‍लांट मैनेजर था शांति वर्द्धन माथुर, उन दोनों के खिलाफ हम लोगों ने जांच भी कराई है, उनको नोटिस भी दिया है और अध्‍यक्ष महोदय, जो बीज उत्‍पादक मुतव्‍वली जिनके पास में बरामद हुआ है, उससे भी हम लोगों ने पूछा है कि यह आपके पास कट्टे कहां से आये? लेकिन इसमें दोषी प्राथमिक स्‍तर पर हमारा आर.बी.सिंह, जिला विस्‍तार अधिकारी है। वह इसलिए दोषी पाया गया अध्‍यक्ष महोदय, कि उनको ज्‍योंही कट्टे प्राप्‍त हुए थे, उनको एफ.आई.आर. दर्ज करानी चाहिए थी और उन कट्टों पर सील लगी हुई थी। उसको हटाकर उनको अपने कब्‍जे में लेना चाहिए था। इसलिए मैं सदन को जानकारी देना चाहूंगा अध्‍यक्ष महोदय आपके माध्‍यम से कि उस अधिकारी के खिलाफ शीघ्र ही 16 सी.सी.ए. की कार्यवाही प्रस्‍तावित कर कार्मिक विभाग को हम लोगों ने भिजवा दी है और जो दूसरा प्‍लांट मैनेजर शांति वर्द्धन माथुर था, उसका यह दोष रहा कि उसने आर.एस.एस.सी. के कट्टे हैं, अमानक घोषित होने के बाद जब उस काश्‍तकार को उसने लौटाये, उसकी राशि के 726 रुपये का नुकसान हुआ, उससे वसूली करवाई है और एक इन्‍क्रीमेंट असंचयी वृद्धि का हम लोगों ने रोककर उसका निर्णय किया जा चुका है और एक अभी विचाराधीन चल रहा है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शीघ्र ही कठोर से कठोर कार्यवाही उसके खिलाफ की जायेगी। (व्‍यवधान)

 

 

 

 

 

Jkj/akt/13.20/1p/23.3.2007

 

श्री सुभाषचन्‍द शर्मा: व्‍यापारी के खिलाफ एफआईआर क्‍यों नहीं दर्ज हो रही।(व्‍यवधान) व्‍यापारी के खिलाफ एफआईआर...

श्री हेमराज मीणा: मैं कह रहा हूं, अध्‍यक्ष महोदय, जो अमानक बीज बाजार में बेच रहा है दुकानदार, उसके खिलाफ भी तो कार्यवाही होती। दूसरा मैं कहना चाहूंगा अध्‍यक्ष महोदय, यह सीड कार्पोरेशन के अधिकारियों को और काश्‍तकारों को जो सीड बाजार से लेकर के और ग्रेडिंग करके जो देता है सीड कार्पोरेशन, उनकी मिलीभगत का मामला है, खाली कट्टे दे दो और उनको अमानक बीज को बेचते रहो। यह बहुत गंभीर मामला है।(व्‍यवधान)

श्री केसरदेव बाबर: अध्‍यक्ष महोदय, चूहा आ गया, चूहा।

श्री सुभाषचन्‍द्र शर्मा: यह तो किसानों के साथ सरासर अन्‍याय है कि किसान, उसको सुपुर्दगी उन अधिकारियों ने उसी व्‍यापारी को सुपुर्दगी दे दी जो नकली माल बेच रहा था...(व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा: केवल उनको नोटिस देने का काम किया है। किसानों का मामला है।

श्री केसरदेव बाबर: अध्‍यक्ष महोदय, चूहा आ गया।

श्री सुभाषचन्‍द्र शर्मा: तो उस व्‍यापारी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और उन अधिकारियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।

श्री हेमराज मीणा: अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न यह है..(व्‍यवधान)

श्री केसरदेव बाबर: विधान सभा में चूहा है।

श्री रामनारायण मीणा: मंत्री महोदय, आप अधिकारियों को मत बचाओ। वह कौन नेता है, किस पार्टी से संबंधित है जो उस अधिकारी को बचा रहे हैं। यह साफ नहीं करें जब तक आपको जवाब नहीं देना चाहिए। क्‍या वह भारतीय जना पार्टी के हैं या दूसरी पार्टी के हैं। यह भ्रष्‍टाचार कौन सी पार्टी के नेता कर रहे हैं, पहले यह बताओ आप।

श्री केसरदेव बाबर: अध्‍यक्ष महोदय, हाउस में चूहा आ गया।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या ?

श्री केसरदेव बाबर: चूहा।

श्री अध्‍यक्ष: तो क्‍या हो गया। भाग जायेगा। चला जायेगा।

श्री केसरदेव बाबर: अध्‍यक्ष महोदय, निकलवाओ उसको, इतना बड़ा चूहा है।

श्री रामनारायण मीणा: आप यह बताओ बीजेपी के नेता कितने भ्रष्‍ट हैं। (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया: भगवान आपको तरक्‍की देगा, काश्‍तकारों के काम में कंजूसी मत करो, जो दोषी है उसको बख्‍शो मत, एफआईआर दर्ज कराओ। 

श्री अध्‍यक्ष: हां-हां, सही है। दुकानदार के खिलाफ भी एक्‍शन लो।

श्री प्रभुलाल सैनी: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जैसा अभी...

श्री हेमराज मीणा: मेरा निवेदन है अध्‍यक्ष महोदय, आप एक बार बैठें। मुर्तबा अली जिसके यहां पकड़े गये, वह यही धंधा करता है तो उसके खिलाफ एफआईआर क्‍यों नहीं हुई और अधिकारी के खिलाफ क्‍यों नहीं एफआईआर हुई।

श्री अध्‍यक्ष: हो गई न बात। बात हो गई न।

श्री हेमराज मीणा: अधिकारी ने नहीं पकड़ा इसका मतलब उनकी मिलीभगत थी। डीओ वहां स्‍पॉट पर मौजूद है और उनको ही कट्टे सुपुर्द किये इसका मतलब उसकी भी मिलीभगत थी। केवल नोटिस देने से और उनको ट्रांसफर करने से थोड़ा न काम चलेगा अध्‍यक्ष महोदय, और कठोर कार्यवाही होनी चाहिए उसके खिलाफ।

श्री प्रभुलाल सैनी: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्‍य बार-बार यह कह रहे हैं, उस व्‍यापारी के खिलाफ कार्यवाही क्‍यों नहीं हुई...

डा. सुरेश चौधरी: माननीय मंत्रीजी, अकेले व्‍यापारी के खिलाफ..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हां।

श्री प्रभुलाल सैनी: मैं जानकारी देना चाहूंगा माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वह व्‍यापारी नहीं था, वह सीड ग्रोअर है जो वहां पर सीड कार्पोरेशन का बीज को उगाता है और उसकी अमानकता 110 जो कट्टे थे जिनमें 40 क्विंटल के लगभग जो बीज था...

डा.सुरेश चौधरी: सीड ग्रोअर नहीं, वह....

श्री अध्‍यक्ष: बीच में नहीं। (व्‍यवधान)

श्री सुभाषचन्‍द्र शर्मा: अमानक था, यह तो अमानत में खयानत हो गई...(व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा: अध्‍यक्ष महोदय, वह सीड ग्रोअर नहीं है, वह एक बीघा भी सोयाबीन का बीज पैदा नहीं करता है, वह बाजार से सोयाबीन खरीदता है, ग्रेडिंग करता है और सीड कार्पोरेशन के अधिकारियों से मिलकर के और टेग पैक करके काश्‍तकारों को बेचता है, यह काश्‍तकारों के साथ चीटिंग करता है, चार सौ बीस का मुकदमा उसके खिलाफ दर्ज किया जाना चाहिए। एक भी बीघा जमीन उसके खाते में नहीं है।(व्‍यवधान)

डा.सुरेश चौधरी: माननीय मंत्रीजी, वह चाहे सीड ग्रोअर हो, चाहे व्‍यापारी हो, लेकिन काश्‍तकारों को जो नुकसान हुआ है वह हुआ है उन अधिकारियों की मार्फत और कृषि विभाग में खास तौर से आपके इस विभाग में जो आपके अधिकारी हैं, वह इस तरह से आपस में मिला हुआ काकस है कि किसी भी भ्रष्‍ट अधिकारी की अगर शिकायत की जाती है तो शिकायतकर्ता लिखकर एफिडेविट तक देता है उनको ऊपर के अधिकारी जाकर के धमकाते हैं कि तू तेरा एफिडेविट ठीक कर।

श्री हेमराज मीणा: अध्‍यक्ष महोदय, सीड ग्रोअर के खिलाफ क्‍यों नहीं एफआईआर दर्ज हुई, उसने यह अमानक बीज तो बेचा है। कट्टे भी सीड कार्पोरेशन से जारी हुए हैं तो उसके खिलाफ भी...(व्‍यवधान)

डा.सुरेश चौधरी: तो उस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर हो। उस अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए। (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया: एक मिनट अध्‍यक्ष महोदय। सीधी-सीधी बात समझ नहीं पा रहे हैं, यानि जो अधिकारी उस कट्टे पर मोहर लगाकर उसको प्रमाणित करता है कि यह बीज है..

श्री अध्‍यक्ष: उनके खिलाफ तो हो न एक्‍शन।

श्री रामप्रताप कासनिया: वह और बेचने वाला दोनों, छोटी सी बात है, दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके कार्यवाही करिये। (व्‍यवधान)

डा.सुरेश चौधरी: माननीय अध्‍यक्षजी, आप खुद काश्‍तकार परिवार से हैं, काश्‍तकारों के साथ इस तरह का अन्‍याय हुआ है और उन भ्रष्‍ट अधिकारियों ने किया है तो आप आसन से इस तरह की व्‍यवस्‍था दें कि उन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाय।

श्री हेमराज मीणा: उसको सस्‍पैण्‍ड क्‍यों नहीं किया। (व्‍यवधान)

श्री प्रभुलाल सैनी: एक मिनट, बैठिये।

श्री अध्‍यक्ष: जवाब सुनिये आप पहले। जवाब तो सुन लीजिये।

श्री हेमराज मीणा: अध्‍यक्ष महोदय, सीड कार्पोरेशन के इतने पड़े-पड़ाये छाप लगी हुई है...

श्री अध्‍यक्ष: बैठे-बैठे नहीं बोलें।

श्री प्रभुलाल सैनी: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा अभी माननीय सदस्‍य ने कहा कि वह सीड ग्रोअर नहीं था, जैसी मुझे प्राप्‍त सूचना हुई है मैं आपको जानकारी देना चाहूंगा उसको तीन लाट, लाट नम्‍बर 115, लाट नम्‍बर 70 और लाट नम्‍बर 152, लाट नम्‍बर 115 में 110 बेग में 44 क्विंटल अमानक बीज पाया गया और बाकी 108 जो था वह भी मानक बीज पाया गया और मानक बीज का सारा भुगतान उसको, किसान को और सीड ग्रोअर को कर दिया गया है और जो अमानक था माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 110 कट्टे, उनको हमने सीज करने की कार्यवाही की लेकिन माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह कहा जाना बिलकुल गलत है कि किसानों के वह नकली बीज चला गया और उसका नुकसान हुआ। चूंकि वह उस सीड ग्रोअर के खुद के कब्‍जे से ही बरामद हुआ था इसलिए एफआईआर होने का प्रश्‍न नहीं उठता अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न यह उठता है कि अधिकारी ने लापरवाही करके उसके टेग को नहीं खोला और इसी बात को ध्‍यान में रखिते हुए माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 16 सीसीए की कार्यवाही हम लोगों ने प्रस्‍तावित की है और निश्चित रूप से कठोर से कठोर कार्यवाही होगी, यह सदन को मैं आश्‍वस्‍त करना चाहूंगा।

श्री हेमराज मीणा: नहीं अध्‍यक्ष महोदय, सीड कार्पोरेशन के टेग लगे हुए अमानक बीज, उसको बेचने वाले के खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए क्‍योंकि उसने तो काश्‍तकारों से महंगा पैसा वसूल कर लिया। सीड कार्पोरेशनद का जो महंगा बीज आता है उसका महंगा पैसा उस सीड ग्रोअर ने वसूल कर लिया, उसके खिलाफ क्‍यों नहीं कार्यवाही हुई, उसके खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए।

श्री रामप्रताप कासनिया: अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रमाण है कि उसने बेचा नहीं, अध्‍यक्ष महोदय, यह तो कोई प्रमाण सरकार के पास है नहीं। बेचा होगा, पता नहीं कितने कट्टे पहले बेच दिये होंगे, तो अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से यह निवेदन करना चाहूंगा कि जब सौ कट्टे तो आपने छापा मारा तब मिले, उससे पहले पता नहीं उसने कितने कट्टे काश्‍तकारों को बेच दिये। जो व्‍यक्ति सौ कट्टे प्रमाणित बीज नहीं है, फर्जी मोहर लगाकर अधिकारियों से मिल करके बाजार में ही तो सप्‍लाई करने के लिए, काश्‍तकारों को बेचने के लिए ही तो वह रखे हुए था, सौ तो आपके पकड़ में आ गये, हजारों जो बेच दिये...

श्री अध्‍यक्ष: विराजें। आप विराजें अब।

श्री रामप्रताप कासनिया: हजारों कट्टे बेच दिये।

डा.सुरेश चौधरी: माननीय मंत्रीजी, आप 16 सीसीए, 17 सीसीए का नोटिस तो अधिकारियों को ही देंगे न। उन अधिकारियों को पहले तो उस जिले से बाहर किया जावे। अगर वह अधिकारी वहां रह गये तो वह उन काश्‍तकारों को दबा लेंगे। (व्‍यवधान)

श्री प्रभुलाल सैनी: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दोनों अधिकारियों के ट्रांसफर जिले के बाहर कर दिये गये हैं, नम्‍बर एक।....

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, माननीय मंत्रीजी, मेरी बात सुनिये पहले आप। आप पहले मेरी बात सुनिये।

श्री हेमराज मीणा: नहीं, कार्यवाही करें आप।

श्री अध्‍यक्ष:ऐसा है कि जब वह कट्टे सील कर दिये थे तो फिर वह कट्टे कहां गये, सवाल यह है और कट्टे जब गये दूसरी जगह, इसका मतलब दोषी हो गया न।

श्री हेमराज मीणा: दोषी हो गया न। सीड ग्रोअर भी दोषी हो गया।

श्री प्रभुलाल सैनी: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम इसका गलत अर्थ लगा रहे हैं..

श्री अध्‍यक्ष: तो सील तो किया था न आपने, गये कहां फिर।

श्री प्रभुलाल सैनी: जिसके कब्‍जे में, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह माना कि वह लाइसेंसी नहीं था लेकिन अध्‍यक्ष महोदय, उसके पजेशन के उसके स्‍वयं के द्वारा उत्‍पादित वह बीज था, माना वह अमानक हुआ और अमानक होने के कारण से अधिकारियों का इतना ही दोष रहा माननीय अध्‍यक्ष महोदय कि उन्‍होंने टेग और उसके कट्टे खाली नहीं किये।

श्री अध्‍यक्ष: यह कम दोष है ?

श्री प्रभुलाल सैनी: तो इसलिए माननीय अध्‍यक्ष महोदय.....

डा.सुरेश चौधरी: चोर, चोर होता है, चाहे एक रूपये की चोरी करे, चाहे एक लाख की चोरी करे।(व्‍यवधान) इसलिए यह नहीं..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह क्‍या कर रहे हैं आप। (व्‍यवधान)

डा. सुरेश चौधरी: यह कहकर नहीं बचा जा सकता कि उसका इतना ही दोष है।

श्री हेमराज मीणा: सीड कार्पोरेशन का नहीं है बीज।(व्‍यवधान) सर्टिफाइड बीज तो बेच दिया उन्‍होंने...(व्‍यवधान)

श्री सुभाषचन्‍द्र शर्मा: जिसने अमानक बीज बनाया उसी को सुपुर्दगी में दे दिया।

श्री हेमराज मीणा: अमानक बीज को उसने बाजार में बेचा है। (व्‍यवधान महोदय, अमानक बीज को उसने, सीड ग्रोअर को बेचा है उसने, वही तो...

श्री संयम लोढ़ा: आपको जितना अधिकारियों ने कह कर भेजा है उतना ही बोलोगे क्‍या। अध्‍यक्ष महोदय ने कह दिया और आपको क्‍या दिक्‍कत हो रही है कार्यवाही करने में। (व्‍यवधान)

श्री सुभाषचन्‍द्र शर्मा: अध्‍यक्ष महोदय, इसमें मामला यह है कि जो अमानक बीज बना रहा था, अधिकारियों  उस माल को सीज करके उसी के कब्‍जे में वापिस सुपुर्दगी दे दी जो अमानक बीज बना रहा था और फिर उसने वह कट्टे उठवा दिये।  जब वह कट्टे उठवा दिये और अमानक बीज बनाने वाला जो जिम्‍मेदार था उसके खिलाफ अमानत में खयानत का मामला क्‍यों नहीं दर्ज होता। उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।(व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: अध्‍यक्ष महोदय, मेरा व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न है। (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, जो व्‍यक्ति सदन के अंदर नहीं है, एक बात थी, इन्‍होंने प्रारम्भिक जांच कराई, प्रारंभिक जांच के अंदर...

श्री अध्‍यक्ष: जीरो आवर में व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न तो होता नहीं न।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: मेरा निवेदन सुन लीजिये।

श्री अध्‍यक्ष: तो जीरो आवर में व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न नहीं होता है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: मेरा एक सिध्‍दाँत रहा है, मैं आपसे...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह कभी भी व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न करें, आप उनको अलाउ करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: मैं कह रही हूं कि जीरो आवर में व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न कहां होता है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: मेरी बात सुन लीजिये। जिस तरीके से, अब मैं कैसे अपनी बात कहूं। या तो आप मुझे कह दीजिये कि मैं अपनी बात कह दूं। मैं एक बात आपसे निवेदन कर रहा हूं कि यहां पर प्रारंभिक जांच हुई, प्रारंभिक जांच के अंदर उन्‍होंने कहा कि बीज जो था वह प्रमाणक नहीं पाया गया, लौटा दिया गया। आपने एक प्रश्‍न किया कि अब सील कर दिया था तो कट्टे कहां गये। (व्‍यवधान) हां-हां, यही कहा, सही है।(व्‍यवधान) एक मिनट रूको न अब आप। (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा: बीज अमानक था, वापिस लौटा दिया लेकिन सीड कार्पोरेशन के कट्टों में पेक करके टेग करके बीज को लौटाया इसका मतलब बदनियती सीड कार्पोरेशन की भी थी और वह जो काश्‍तकार था उसकी भी बदनियती थी और अधिकारियों की बदनियती थी कि मिलीभगत थी अधिका‍रियों की। सीड कार्पोरेशन के कट्टे हैं, उसके ऊपर लिखा हुआ था राजस्‍थान सीड कार्पोरेशन।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: मैं एक बात आपसे...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी, बोलिये।

श्री प्रभुलाल सैनी: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍योंकि किसानों से जुड़ा हुआ मुद्दा है और सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य ने यह भी कहा कि अधिकारियों ने जो कहा, मंत्रीजी बोल रहे हैं। आप अपडेट कर लें माननीय सदस्‍य, कभी भी मैं सदन में वह नहीं बोलता हूं जो किसी ने मुझे कहा है लेकिन जो वास्‍तविक तथ्‍य है,जो कानून, जो व्‍यवस्‍था बनी हुई है उसी के आधार पर मैं मेरे तथ्‍य प्रस्‍तुत कर रहा हूं अध्‍यक्ष महोदय, जब हमने कट्टे उसको लौटा दिये, वह उसने किसी को बेचे, किसी का ऐसा सबूत मिलता तो निश्चित रूप से उस व्‍यक्ति के विरूध्‍द एफआईआर दर्ज करने की कार्यवाही की जायेगी और इतनी भी आपसे, सदन को जानकारी देना चाहूंगा अध्‍यक्ष महोदय, निश्चित रूप से जिस सीड ग्रोअर ने इस प्रकार का कृत्‍य किया है उसको हम निश्चित रूप से, आज ही मैं इस सदन के माध्‍यम से घोषणा करता हूं कि उसको ब्‍लेक लिस्‍टेड करेंगे, उसके खिलाफ अलग से भी कार्यवाही करेंगे। लेकिन अध्‍यक्ष महोदय, 16 सीसीए में इतनी बड़ी ताकत हुआ करती है अध्‍यक्ष महोदय कि सेवा पृथक तक की कार्यवाही की जा सकती है अधिकारियों के विरूध्‍द। तो वह अभी विचाराधीन चल रही है, जब भी उसके परिणाम आयेंगे...

श्री अध्‍यक्ष: वह तो मान ली आपने। वह सवाल..

श्री प्रभुलाल सैनी: निश्चित रूप से अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: दुकानदार का सवाल है। जो दुकान पर बेच रहा है उसका भी तो सवाल है। (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा: अध्‍यक्ष महोदय, इतनी सी बात है कि जो सीड गोदाम में या सील कर दिया इन्‍होंने, डीओ ने गोदाम सील कर दिया, सील करने के बाद में वह जो काश्‍तकार था या इनका जो भी व्‍यक्ति था उसने उस बीज को अमानत में खयानत कर दिया, बीज को बेच दिया।

 

 

Lpm/akt/1330/1q/2332207

 

सीड कार्पोरेशन को महंगाई के अभाव में बेच दिया, उसके बाद उसके खिलाफ कार्यवाही क्‍यों नहीं हुई? उसके खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए और अधिकारी  को नोटिस देने के बाद में, जवाब देने के बाद 16 सी सी और 17 सी सी खत्‍म हो जाती है, सबको बचा दिया जाएगा।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय अध्‍यक्ष महोदय यदि (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): प्रमाणित नहीं हुई है किस काश्‍तकार ने वह नकली बीच लेकर के उससे कुछ पैदा किया हो या काश्‍तकार को नुकसान हुआ हो, अगर किसी काश्‍तकार को नुकसान हुआ है तो बताइए कि कितने काश्त कारों ने नकली ले लिए और उससे उसको कितना नुकसान हुआ है? जांच कर ली कह दिया, जांच कर रहे हैं, नोटिस दे रहे हैं (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): आप क्‍यों सपोर्ट कर रहे हो? 110 कट्टे फीड कार्पोरेशन के पास बिके हैं और जितने काश्‍तकारों ने वह खरीदे हैं, उतने काश्‍तकारों को नुकसान हुआ है (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): एक व्‍यक्ति विशेष के खिलाफ (व्‍यवधान) सदन का उपयोग इसलिए होता है यहां पर प्रश्‍न यह है (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): 110 कट्टे बिके हैं, यह रिकॉर्ड में लिखा हुआ है, यह मंत्री जी के जवाब में आया है (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या प्रमाण है? यह जिस तरह से माननीय सदस्‍य कहे थे जब काश्‍तकारों का नुकसान हुआ है (व्‍यवधान)

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): आपने एक सदस्‍य के ऊपर तो जोर लगा दिया (व्‍यवधान) मैंने...

श्री अध्‍यक्ष: एक मिनट बात सुनिये तो सही।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): मैंने कल आपको फर्जी मस्‍टरोल उनको तो फेंक दिया और एक फर्जी उस मामले को लेकर उठा दिया, मेरा मस्‍टरोल, कितना सरकार को घाटा हो रहा था, फर्जी मस्‍टरोल डाला गया, जांच करने पर पाया गया कि किसानों के साथ अन्‍याय हो रहा है और आपने मस्‍टरोल को दूर रख दिया (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, यह कैसे कह सकते हैं? यह तो गलत बात है अध्‍यक्ष महोदय, सारी चीज प्रमाणित है।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): प्रामाणिक चीज है, रिकॉर्ड में भी आया है लेकिन सीड चोर के खिलाफ कार्यवाही नहीं हुई, 110 कट्टे (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): ये पैरवी करना अच्‍छी बात नहीं है।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): 110 कट्टे उसने बाजार में बेच दिये काश्‍तकारों को, काश्‍तकार के साथ चिटिंग हुई है (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): और इस से अध्‍यक्ष महोदय, जो पेस्‍टी-साइड है न, उनके सेंपल लिए जाते हैं और आगे वह जो व्‍यापारी बेचने वाले हैं वह फेल करवा देते हैं, वह पास करवा देते हैं, सेंपल को यही होता है काश्‍तकारों के साथ वहां जाकर के पिटाई होती है। इस तरह से बीज में होती है, हम कोई सरकार पर आरोप नहीं लगा रहे हैं, वर्षों से ये अधिकारी जो इस तरह की व्‍यवस्‍था इन लोगों ने कर रखी है उस पर रोक लेगे, अध्‍यक्ष महोदय, हमारा आपके माध्‍यम से सरकार से इतना सा निवेदन है कि हम कोई यह नहीं कह रहे हैं कि सरकार ने कोई व्‍यवस्‍था लागू कर दी, वर्षों से चली आ रही परम्‍परा है यह और मैं उदाहरण दे दूं मैंने स्‍वयं मेरे गांव में देखा है कि बिना प्रमाणित (व्‍यवधान) आपको पीड़ा हो रही है तो हम बैठ जाते हैं।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): आपको पीड़ा हो रही है, काश्‍तकारों की हालत खराब कर दी है आपने (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): पर मामला बहुत गंभीर है, हजारों को फर्जी बीज मिलता है (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): कोई कार्यकर्ता हो तो उससे क्‍या मतलब चोरी करेगा तो चोर होगा, बेईमानी करेगा तो बेईमान होगा (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): यह कोई तरीका है क्‍या? आपको पीड़ा हो रही है फर्जी बीज की (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अध्‍यक्ष महोदय, सीड कार्पोरेशन का फोटो भी मैं टेबल करना चाहता हूं।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): वह कांग्रेस का कार्यकर्ता है जिसकी यहां चर्चा हो रही है (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): हद हो गई, हम कोई, सरकार का इसमें कोई दोष नहीं है (व्‍यवधान) 

एक माननीय सदस्‍य: बिलकुल पता करवा लो किसका कार्यकर्ता है

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह हाउस किसी से बदला लेने वाला नहीं है (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): यह व्‍यवस्‍था पिछले 40 वर्षों से बरकरार है, यह परम्‍परा डाली हुई है और इन अधिकारियों की आदत पड़ी हुई है, पिछले 40 वर्ष से है, यह कोई एक दिन का मामला नहीं है (व्‍यवधान)

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): राजस्‍थान सीड कार्पोरेशन एक्‍ट (व्‍यवधान) ऐसा मामला है (व्‍यवधान) किसानों के पास यह बीज पाया गया तो फिर वह बीज गया कहां?

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह तो अपनी पार्टी की मीटिंग में भी निपटा लेंगे, आपने बीजेपी का अखाड़ा बना दिया, ये यही मंत्री और यही मांगने वाले और आपने 45 मिनट लगा दिये, यह पर्चियों के माध्‍यम से (व्‍यवधान) और भी लोग बैठे हैं

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा):  अध्‍यक्ष महोदय, चलो विपक्ष की यह मांग है तो उनको बख्श दिया जाएगा इससे, यह पीड़ा है इनकी (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह अपनी पार्टी के साथ मीटिंग में निपटा लेंगे, यह पूरा सदन का समय इसलिए रह गया है?

श्री अध्‍यक्ष: अच्‍छा।

एक माननीय सदस्‍य: जुबेर जी आपने कांग्रेस के मुद्दे पर चार दिन विधानसभा नहीं चलने दी, यह काश्‍तकारों का मुद्दा है, आधा घंटा लग गया तो (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): आपने चार दिन विधानसभा चलने नहीं दी, किसानों से जुड़ा हुआ मामला है, कोई-न-कोई कार्यवाही उनके खिलाफ होनी चाहिए (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण करे, श्री घनश्‍यामजी तिवाड़ी। सदन की मेज पर रखे जाने वाले पत्रादि।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसानों को ओलावृष्टि से हुए नुकसान पर आज सरकार को वक्‍तव्‍य देना था माननीय अध्‍यक्ष महोदय (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, आपने व्‍यवस्‍था दी थी कि 23 तारीख को किसानों के मुआवजे के ऊपर सरकार वक्‍तव्‍य देगी, आपके सराहनीय प्रयासों से डेड-लॉक तोड़ा इसके बाद 20 तारीख तय की, सरकार ने 20 तारीख को कहा कि 23 तारीख को वक्‍तव्‍य देंगे, ओलावृष्टि के मुआवजे के लिए और कल सब कमेटी बना दी, आखिर सरकार वक्‍तव्‍य देना क्‍या नहीं चाहती? अध्‍यक्ष महोदय, आपने व्‍यवस्‍था दी थी (व्‍यवधान) 20 तारीख जब हमने आपको कहा था कि पैकेज की घोषणा कब करेंगे तब आपने कहा था, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने कहा था 23 को करेंगे, आज 23 तारीख हो गई, आज अख़बार पढ़ते हैं कि सब कमेटी बना रही है, आखिर सरकार इन किसानों के मुआवजे के पैकेज की घोषणा क्‍या नहीं करना चाहती? जब आसन से व्‍यवस्‍था हो गई कि 23 तारीख को सरकार पैकेज की घोषणा करेगी तो आज सरकार बैठी है क्‍या आपको...

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण करे, माननीय सदस्‍य स्‍थान ग्रहण करे।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): स्‍वयं इनको लताड़ना चाहिए, यह आपकी व्‍यवस्‍था थी 20 तारीख को हमने पूछा था, आपने 23 तारीख के लिए कहा था, इतना महत्‍वपूर्ण मुद्दा है अध्‍यक्ष महोदय, किसान का प्रश्‍न है (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: अध्‍यक्ष महोदय, लोग धरने पर बैठे हुए हैं अभी तक (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आज चक्‍का-जाम हो रहा है भीनमाल के अंदर और किसान का सब्र टूट रहा है, सरकार के ऊपर से भरोसा उठा रहा है (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मुख्‍यमंत्री जी ने किसानों के साथ दगा किया है (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): और माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बार-बार इस सदन में व्‍यवस्‍था दिए जाने के बाद भी आज की सरकार किसानों के प्रति बिलकुल गंभीर नहीं है (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: 20-20 लोग भूख हड़ताल पर बैठे हैं वो 15 तारीख से लगातार और आप तारीख पर तारीख दिए जा रहे हैं (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: एक बार आप बात तो सुन ले, मंत्री जी खड़े है, उनकी बात सुनो तो सही, यह क्‍या तरीका है आपका?

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): एडजोर्नमेंट मोशन दिया था आपने कहा सरकार वक्‍तव्‍य देगी, सरकार ने कोई वक्‍तव्‍य नहीं दिया, सरकार ने कोई घोषणा की नहीं (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप सुनिये, सरकार खड़ी है, आप बिराजे तो सही।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्री जी ने आज के लिए 23 के लिए कहा था।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप कृपया स्‍थान ग्रहण कर ले।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह सरकार नहीं है, सरकार गायब है अध्‍यक्ष महोदय (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): माननीय मंत्री जी आपके मुख्‍यमंत्री जी के पैकेज के बारे में कार्य सूची में कुछ नहीं है (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष:  जोइन्‍ट रेस्‍पोंसबिलिटी होती है, सरकार की जोइन्‍ट रेस्‍पोंसबिलिटी होती है।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): माननीय अध्‍यक्ष जी बात 23 तारीख की हुई थी और 23 तारीख रात को 12 बजे तक है, अभी कोई हाउस एडजोर्न नहीं हुआ है (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मंत्री जी उसी रोज खड़े हुए थे, यह बात हुई थी (व्‍यवधान) मुख्‍यमंत्री जी घोषणा करेगी, मुख्‍यमंत्री है नहीं आज, 20 तारीख को कहा 23 को करेंगे, 23 मार्च कहा था कि 23 अप्रैल कहा था यह तो बताओ कम से कम आप, जब किसान मर जाएगा तब घोषणा करोगे आप (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह संवेदनशील नहीं है, संवेदनहीनता है, आसन व्‍यवस्‍था के साथ मुख्‍यमंत्री जी नहीं है, अकाल राहत मंत्री जी नहीं है (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): ऐसा है अध्‍यक्ष महोदय, आपके सामने अध्‍यक्ष महोदय लाल-पीले हो गये राहत मंत्री की आज नहीं दूंगा, 23 को दूंगा, 23 को दूगां, सदन के अंदर आपके चैम्‍बर में मीटिंग हुई थी इन्‍होंने घोषणा की थी 23 तारीख को देंगे मतलब क्‍या है ये चाहते हैं कि 29 तारीख को वक्‍तव्‍य हो और सरकार भाग जाए, यह इनका स्‍टेटस है यहां पर (व्‍यवधान) यह नहीं चलने वाला है (व्‍यवधान) आप वक्‍तव्‍य दिलाइए, आपके बीच में यह बात हुई थी (व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): सरकार भागने वाली है, यह सरकार अब चलने वाली नहीं है (व्‍यवधान) यह सरकार किसानों को कुछ देना नहीं चाहती है, कुछ नहीं देना चाहती (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्री जी को बुलाओ हाउस में, मुख्‍यमंत्री जी को बुलाओ (व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): (व्‍यवधान) इस रास्‍ते से यह जा सकती है (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): बिना ओलावृष्टि का मुआवजा घोषित किए सरकार भागने की कोशिश कर रही है (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह बिलकुल गलत है, यह बिलकुल गलत है (व्‍यवधान)

(प्रतिपक्ष के सदस्‍यों द्वारा एक साथ खड़े होकर सदन में नारेबाजी)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): बिलकुल सही है, बिलकुल सही है (व्‍यवधान)  भागना चाहती है (व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): सरकार के पास देने को कुछ नहीं है, ***

(प्रतिपक्ष के सदस्‍यों द्वारा एक साथ खड़े होकर सदन में नारेबाजी)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): (व्‍यवधान) ये घडि़याली आंसू बहा रहे हैं (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सदन की बैठक 2 बजकर 30 मिनट तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 1.39 बजे 2.30 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)




Bhs/usc/23.3.07/14.30/2f

 

(पुन: समवेत होने पर)

(समय: 14.30)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री अध्‍यक्ष: हां आप क्‍या कहना चाह रहे थे?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो यह कहने खड़ा हुआ था कि ओलावृष्टि पर वक्‍तव्‍य पहले भी सदन में हम कह चुके हैं कि 23 तारीख को देंगे। प्रभारी मंत्री भी कह चुके हैं। अब समय निश्चित करना आसन का काम है आप जो समय निश्चित करेंगे सरकार वक्‍तव्‍य देने के लिए तैयार है इसलिए मेरी प्रार्थना है कि इस मामले में समय आप बातचीत करके निश्चित कर दें और इसमें वक्‍तव्‍य देने के लिए तैयार हैं।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): सरकार का मतलब मुख्‍यमंत्री जी।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): सरकार की मुखिया।

श्री अमराराम (धोद): वो तो कार्यसूची में आना चाहिए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, सरकार की तरफ से मुख्‍यमंत्री आयें सदन की नेता वक्‍तव्‍य दें या प्रभारी मंत्री वक्‍तव्‍य दें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता । हम राजस्‍थान के किसानों के लिए ...।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आपने उस रोज कहा था मुख्‍यमंत्री जी देंगी। पैकेज की घोषणा वो करेंगी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): एक मिनट। अध्‍यक्ष महोदय, इसमें थोड़ा सा विलंब इसलिए हुआ क्‍योंकि परसों कामां के अन्‍दर भी ओलावृष्टि हो गयी और मुख्‍यमंत्री जी यह चाहती थीं कि उसका भी इसमें समावेश कर कर लिया जाए । अध्‍यक्ष महोदय, इस चीज की गंभीरता को देखते हुए एक कैबिनेट सब कमेटी बनी। कैबिनेट सब कमेटी ने भी आज सुबह बैठ करके अपना काम पूरा कर लिया इसलिए मेरी आपसे प्रार्थना यही है कि वक्‍तव्‍य सरकार की तरफ से आ जाएगा, आप समय निश्चित कर दें और आगे की कार्यवाही प्रारंभ करें।

श्री अध्‍यक्ष: सच पूछिये तो अप्रत्‍याशित रूप से सदन में जो नहीं होना चाहिए था वो हुआ । मंत्री जी खड़े हुए, पार्लियामेंट्री मिनिस्‍ट खड़े हुए वो यह कहने के लिए खड़े हुए थे कि मुख्‍यमंत्री जी आ जाती हैं और उसके बाद में स्‍टेटमेंट हो जाएगा। मुख्‍यमंत्री जी यहां यदि विराजमान हों और मंत्री जी यहां पर वक्‍तव्‍य दें तो क्‍या दिक्‍कत है?

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): बहुत दिक्‍कत है।

श्री अध्‍यक्ष: बताइये क्‍या दिक्‍कत है?

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): बहुत दिक्‍कत यह है कि हमने अपनी बात, माननीय अकाल राहत मंत्री की बात हमने एक बार नहीं दो बार सुनी और जो हमारा प्रिंसिपल मुद्दा था वो यह मुद्दा था कि राजस्‍थान सरकार सीआरएफ नोर्म्‍स के अलावा अपने बजट से किसानों को क्‍या राहत देना चाहती है और यह अनप्रीसीडेंस चीज हुई है आज दिन तक हम सीआरएफ के नाम से लोगों को कंपेंसेशन देते रहे। हम यह राजस्‍थान सरकार से अपेक्षा कर रहे हैं कि सरकार के पास वित्‍तीय संसाधन की सुविधा है खजाना भरा हुआ है इसलिए सीआरएफ नार्म्‍स के अलावा जो केश क्रोप किसानों की नुकसान हुई है जीरा, धनिया, ईसबगोल, सब्‍जी और जो किसान के आपके जो अकाल राहत के जो रेवेन्‍यु विलेज को आधार मानकर के जो नुकसान में आप काउंट करते हैं वो उसमें काउंट नहीं किया जाए। क्रोप मिक्‍स क्रोप होती है ये जो आधार था इसलिए इसका फैसला मुख्‍यमंत्री जी को ही कर सदन को आश्‍वस्‍त करना था।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन कर रहा था कि मुख्‍ययमंत्री जी ने इसके लिए एक कैबिनेट सब कमेटी बना दी ।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं मंत्री जी यदि आपका देंगे और मुख्‍यमंत्री जी यहां बैठी हुई हों और फिर यदि आपकी कोई इस तरह की बात हो जो स्‍पष्‍टीकरण आप चाहें पूछ सकते हैं।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, इसलिए नहीं ...(व्‍यवधान)... नहीं अध्‍यक्ष महोदय, नहीं ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: Don’t……(Interruptions)

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): प्‍लीज अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट सुनिये बात। अध्‍यक्ष महोदय, आप सुनिये। यह गलत परम्‍परा चल रही है वित्‍त मंत्री और वित्‍त राज्‍य मंत्री यहां बैठे रहें ...(व्‍यवधान)... अध्‍यक्ष महोदय, सुनिये आप। अध्‍यक्ष महोदय, आप बात सुनिये। अध्‍यक्ष महोदय, ...(व्‍यवधान). नहीं चलेगा हाउस यह क्‍या तरीका है अध्‍यक्ष महोदय, लीडर ऑफ दी हाउस में नहीं आये ...(व्‍यवधान)... अध्‍यक्ष महोदय, लीडर ऑफ दी हाउस को सेक्रोसेंट है। आप हाउस में नहीं आते हैं इसके अन्‍दर ये वित्‍त राज्‍य मंत्री जो बिल पायलेट करें और पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टिर जवाब दें यह गलत परम्‍परा हम प्रारंभ कर रहे हैं। यदि राजस्‍थान के नार्म्‍स को लेकर कोई फैसला करना है तो मुख्‍यमंत्री को घोषणा करनी पड़ेगी। अकाल राहत मंत्री तो नार्म्‍स  की बात करते हैं या यह सरकार घोषणा कर दे इसी सरकार में गृह मंत्री जी कहते हैं कि कलेक्‍टर ने गुनाह किया, मुख्‍यमंत्री जी फैसला करेगी।  नयी-नयी परंपरा हम प्रारंभ कर रहे हैं तो हमसे पूछ रहे हैं आप।  यदि सरकार का मतलब मंत्री है मुख्‍यमंत्री नहीं है तो आप प्रूव कर करिये अपने आपको।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप दूसरों को तो बोलने दें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जोशी जी, एक मिनट। अध्‍यक्ष महोदय, निश्चित तौर पर ...।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): दूसरे बोलें या नहीं बोलें मेरा अधिकार है पार्लियामेंट प्रैक्टिसेज का साउट हो रहा है तो मैं अपनी बात कहूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: ...(व्‍यवधान)... लिखा भी है वो ये भी बोल सकें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन यह कर रहा था कि निश्चित तौर पर अध्‍यक्ष महोदय, ...।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, आपके चैम्‍बर में कल मीटिंग हुई थी आपके चैम्‍बर की मीटिंग के बाद हमने कहा कि मुख्‍यमंत्री बोलेंगी कि नहीं बोलेंगी। आपके मंत्री खड़े होकर बोल रहे हैं । आप अध्‍यक्ष महोदय,  अपने चैम्‍बर में मीटिंग बुलायें और लीडर ऑफ दी हाउस आये नहीं और आप हमको गुमराह करके बात करना चाहें, दो-दो बातें नहीं होती हैं अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, ...(व्‍यवधान)... यह कहां तक उचित है? ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, एक सेकिंड।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं मैंने पूरा भी नहीं किया। नहीं मैंने पूरी बात नहीं की।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): एक मिनट विराज जाते।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं एक मिनट नहीं। मैं आपको दूंगी मौका। इतने इंपेशेंट होकर आप खड़े हो गये। मुझे पूरी बात नहीं कहने दी। मैंने कहा यदि माननीय मंत्री जी देते हैं आपको वक्‍तव्‍य उसके बाद किसी प्रकार की कोई बात पूछनी है, कोई क्‍लेरीफिकेशन लेना है उनसे कुछ कहलवाना है तो वो यहां रहें और उस बारे में जवाब दे दें। क्‍या दिक्‍कत थी इस बात में...(व्‍यवधान)...

 डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): बिलकुल दिक्‍कत है‍फिर कह रहे हैं हम Don’t give wrong practice.

आप खुद इस लोकतंत्र की परंपरा को कमजोर करना चाहते हैं सदन के अन्‍दर हाउस में आज आवे नहीं मंत्री, मुख्‍यमंत्री कहां हैं, वित्‍त राज्‍यमंत्री हैं, वित्‍त राज्‍य मंत्री भी यहीं हैं इनमें से किसी मंत्री के पास वित्‍त के अधिकार नहीं है । वित्‍त के अधिकार मुख्‍यमंत्री में निहित हैं। दो परंपरायें करना चाहते हैं एक भी पैसे की घोषणा वित्‍त मंत्री की स्‍वीकृति के बिना ये पार्लियामेंट्री मिनिस्‍टर नहीं कर सकते।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सदन को आश्‍वस्‍त करना चाहूंगा ...(व्‍यवधान)... एक मिनट ।

श्री अध्‍यक्ष: आप मंत्री जी को सुन लें।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने इस सदन में कहा है कि यह बड़ा दुर्भाग्‍य है कि मैं सोनिया गांधी नहीं हूं कि सदन में बैठी रहूं। यह इस सदन का दुर्भाग्‍य है । 

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): ये नहीं कहा है ...(व्‍यवधान)...

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): इतने महत्‍वपूर्ण विषय पर इस प्रदेश का किसान बरबाद हो चुका है आपको समय तय करने में क्‍या दिक्‍कत आ रही है? बतायें समय।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, ओलावृष्टि की पहली घटना नहीं है सरकार की संवेदनशीलता देखें अध्‍यक्ष महोदय, 36 करोड़ का पैकेज पहले दे दिया और अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि आज जो पैकेज की घोषणा होगी वो भूतो न भविष्‍यति होगी ...(व्‍यवधान)...

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): हम इस बात को नहीं मानते । ...(व्‍यवधान)... अध्‍यक्ष महोदय, ये भाषण दें यह कोई तरीका नहीं है यहां पर आप हाउस को चलाना चाहते हैं? मत चलाइये।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): राजस्‍थान का खजाना खुला है अध्‍यक्ष महोदय, भूतो न भविष्‍यति इस तरह के पैकेज की घोषणा होगी अध्‍यक्ष महोदय।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): इस सदन के अन्‍दर मुख्‍यमंत्री आकर भाषण देंगी।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय शिक्षा मंत्री।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ... एक मिनट सुनें। आप विराजें।  ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: बाड़मेर से आने वाले माननीय सदस्‍य, नौ-नौ । बोल रहे हैं शिक्षा मंत्री ...(व्‍यवधान)...

श्री तगाराम चौधरी: ...(व्‍यवधान)... मैं भी सुना दूं दो बात।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): आप विराजें तो सही।

श्री अध्‍यक्ष: आप इनके कहने से बोलेंगे कि आसन के कहने से बोलेंगे? इनके कहने से बोलेंगे? क्‍या मतलब है जब मैंने पुकार लिया शिक्षा मंत्री को तो आप क्‍यों खड़े हो गये बीच में?

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो बात कही उसका एक फर्क है वो मैं आपको निवेदन करना चाहता हूं। जब यह कहा था कि 23 तारीख को सरकार वक्‍तव्‍य देगी, उसके बाद कल मुख्‍यमंत्री जी ने पाँच मंत्रियों की एक कमेटी गठित करके सारी रिपोर्ट का जायजा लिया और उसके लिए राज्‍य के संसाधनों से और किसी संसाधन से उनको व्‍यवस्‍था करनी थी वो व्‍यवस्‍था की और सरकार ने सारी कार्यवाही करके इसको तैयार कर लिया। मुख्‍यमंत्री जी यहां उपस्थित रहेंगी। सरकार का मंत्री वक्‍तव्‍य देगा सारा सामूहिक रूप से जो भी तय करना है किसान के हित में बहुत बड़ा पैकेज तय किया है इसके लिए किसान का नुकसान क्‍यों कर रहे हैं कि मंत्री बोलें कि मुख्‍यमंत्री बोलें ...(व्‍यवधान)... बोल रही है सरकार बोल रही है।  सरकार बोल रही है अध्‍यक्ष महोदय।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): ...(व्‍यवधान)... मत करिये। मत करिये। आप  ने हमको विश्‍वास में लिया है। आपने हमको विश्‍वास में लिया है कहा कि मुख्‍यमंत्री बोलेंगी। आपने विश्‍वास में लिया है हमको कि मुख्‍यमंत्री बोलेंगी।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): और जो मुख्‍यमंत्री जी रहेंगी तो जवाब भी देंगी इसलिए अध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहूंगा कि राजस्‍थान के किसान के हित में उनका स्‍टेटमेंट कराया जाए ...(व्‍यवधान)...

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): ...(व्‍यवधान)... हमको मुख्‍यमंत्री का विश्‍वास देकर बात की ...(व्‍यवधान)... आप मत करिये। मत करिये कोई तकलीफ नहीं है। आपने खुद ने आश्‍वस्‍त किया है ।

 

कैलाश/     23.3.07   14.40  (1) 2g

 

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍य को आपके माध्‍यम से जानकारी देना चाहता हूं, नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ...श्री हेमाराम चौधरी(गुढामालानी): हम तो श्रीमुख से सुनना चाहते हैं, श्रीमुख से फरमा देंगे तो क्‍या नुकसान हो जायेगा, क्‍या अहित हो जायेगा ।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, उनका जो मुख है वही मेरे मुख से बोल रहा है, वही किरोडी लाल जी के मुख से बोलेगा, वही बोलेगा जो सरकार की भावना है । अध्‍यक्ष महोदय, उसको सुनना चाहिये ।

श्री हेमाराम चौधरी(गुढामालानी): अगर श्रीमुख खुल जायेगा तो उससे ... (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य को बताना चाहता हूं कि आपने जो कहा है कि ...

श्री अध्‍यक्ष: माननीय शिवचरण जी माथुर कुछ कहना चाह रहे हैं ।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, ओलावृष्टि के संबंध में जो स्थितियां राजस्‍थान में बनी मैं समझता हूं कि वह सब की चिंता का विषय है, कोई इससे इंकार नहीं कर सकता । लेकिन जिस तरह से सरकार ने उसको टालने वाली बात की... (व्‍यवधान) मेरी बात सुन लीजिए आप, 12 तारीख से लगा कर 15 तारीख तक स्‍टेलमेट रहा, आपके बीच में बातचीत चलती रही । अंत में जहां तक मेरी जानकारी है आपको भी मालूम होगा कि यह तय हुआ था कि माननीय मुख्‍य मंत्री जी यहां आकर एक घोषणा करेंगी । उन्‍होंने कहा था कि मैं खुद किसानों के हित में घोषणा करूंगी । उन्‍होंने घोषणा की और उसके बाद हमारे नेता ने भी उसका समर्थन किया । वह जो स्‍टेलमेट टूट था वह उनकी घोषणा के बाद हुआ था । इसलिए मैं समझता हूं कि वाजिब बात है कि यहां आकर वक्‍तव्‍य भी वहीं दें । अकाल राहत मंत्री जी कहीं भी आपके सामने की बातचीत में मौजूद नहीं थे और जैसा कि नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा है कि मान लीजिए एन मौके पर मुख्‍य मंत्री जी को कोई घोषणा करनी हो वह उनका अधिकार है ।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): आप जो प्रश्‍न पूछेंगे उनका जवाब देंगी ।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): मैं आपको फलाना तारीख को, फलाने दिन, क्‍या हमने कहा, क्‍या भैरोंसिंह जी ने कहा, क्‍या सुखाडिया जी ने कहा यहां तो नहीं कह सकता, ऐसे मौके पर हम लोग आया करते थे और जो सदन की चिंता होती थी उसको मिटा कर घोषणा किया करते थे । इसमें ऐसी क्‍या बात है सदन को सर्वोपरि मानकर मुख्‍य मंत्री जी को घोषणा करनी चाहिये ।

श्री अध्‍यक्ष: मुख्‍य मंत्री जी तीन बजे स्‍वयं स्‍टेटमेंट दे देंगी ।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): ठीक है, खत्‍म हो गई बात ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आसन की आज्ञा सर्वोपरि है ।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, अभी मुझे ताडना मिल रही थी कि आप अभी जोर जोर से कह रहे थे कि मुख्‍य मंत्री जी घोषणा करेंगी । मैं बच गया ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ... (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य गांव को इकाई मानकर सहायता किसानों को नहीं दी जायेगी, सहायता इंडिज्‍युअल फार्मर को....

श्री अध्‍यक्ष: श्रीमान घनश्‍याम तिवाडी ।

प्रतिवेदन

राजस्‍थान कृषि विश्‍वविद्यालय बीकानेर का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2005-2006

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान कृषि विश्‍वविद्यालय बीकानेर अधिनियम, 1987 की धारा 32(4) के अंतर्गत राजस्‍थान कृषि विश्‍वविद्यालय बीकानेर का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2005-2006 सदन की मेज पर रखता हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: श्री कालीचरण सर्राफ ।

 

प्राक्‍कलन समिति 2006-07 का 15वां से 18वां प्रतिवेदन

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): अध्‍यक्ष महोदय, मैं कार्यसूची में किये गये उल्‍लेख के अनुसार प्राक्‍कलन समिति 2006-07 के निम्‍नांकित चार प्रतिवेदनों का उपस्‍थापन करता हूं :-

 

I

सरिस्‍का, केवलादेव राष्‍ट्रीय वर्ड सेन्‍चुरी एवं रणथम्‍भौर बाघ परियोजना से संबंधित समिति का 15वां प्रतिवेदन ।

II

प्राक्‍कलन समिति 'क', 2005-2006 के 11वें प्रतिवेदन में समाविष्‍ट नगरीय विकास एवं आवासन विभाग से संबंधित सिफारिशों पर शासन द्वारा की गई कार्यवाही विषयक् समिति का 16वां प्रतिवेदन ।

III

प्राक्‍कलन समिति 'क', 2005-2006 के 12वें प्रतिवेदन में समाविष्‍ट स्‍वायत्‍त शासन विभाग से संबंधित सिफारिशों पर शासन द्वारा की गई कार्यवाही विषयक् समिति का 17वां प्रतिवेदन ।

IV

प्राक्‍कलन समिति 'क', 2005-2006 के 13वें प्रतिवेदन में समाविष्‍ट सामान्‍य प्रशासन विभाग से संबंधित सिफारिशों पर शासन द्वारा की गई कार्यवाही विषयक् समिति का 18वां प्रतिवेदन ।

 

 

श्री अध्‍यक्ष: श्रीमती सुर्यकांता व्‍यास ।

 

महिलाओं एवं बालकों के कल्‍याण संबंधी समिति, 2006-07 का नवां एवं दसवां प्रतिवेदन

श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास (जोधपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं महिलाओं एवं बालकों के कल्‍याण संबंधी समिति, 2006-07 समिति के नवें एवं दसवें प्रतिवेदन का उपस्‍थापन करती हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: श्री हरलाल सिंह खर्रा ।

 

प्रश्‍न एवं संदर्भ समिति, 2006-07 का चतुर्थ एवं पंचम प्रतिवेदन

श्री हरलाल सिंह खर्रा (श्रीमाधोपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रश्‍न एवं संदर्भ समिति, 2006-07 के चतुर्थ एवं पंचम प्रतिवेदन का उपस्‍थापन करता हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: श्री शकर सिंह राजपुरोहित याचिका का उपस्‍थापन करेंगे (अनुपस्थित) श्री रामनारायण मीणा ।

 

याचिकाओं का उपस्‍थापन

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍तावित बीसलपुर-उनियारा पेयजल परियोजना से नैनवा तहसील के 50 गांवों को पेयजल उपलब्‍ध कराने बाबत् याचिका का उपस्‍थापन करता हूं । 

अनुदान की मांग

मांग संख्‍या 27 - पेयजल योजना एवं मांग संख्‍या 46 सिंचाई(इंदिरा गांधी नहर सहित) की प्रस्‍तुति

श्री अध्‍यक्ष: श्री सांवरलाल, जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी मंत्री अनुदान की मांग संख्‍या 27 और 46 प्रस्‍तुत करेंगे ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या 27 पेयजल योजना के संबंध में 31 मार्च, 2008 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 31,10,75,55,000/-( अक्षरे इकत्‍तीस अरब दस करोड पिच्‍च्‍तर लाख पचपन हजार) तक की राशि प्रदान की जाये ।

  अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या 46 सिंचाई(इंदिरा गांधी नहर सहित) के संबंध में 31 मार्च, 2008 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को 19,9,9574,000/-(अक्षरे उन्‍नीय अरब नोक रोड पिचानवें लाख चौहत्‍तर हजार) रुपये तक की राशि प्रदान की जाये ।

श्री अध्‍यक्ष: श्री बाबू सिंह राठौड ।

 

अनुदान की मांग संख्‍या 27 एवं 46 पर विचार

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 27 पेयजल योजना व मांग संख्‍या सिंचाई  46 पर बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं आपने मुझे समय दिया इसके लिए मैं आपका आभारी हूं । कल 22 मार्च को विश्‍व जल दिवस था और विश्‍व जल दिवस के ऊपर मैं रहीमन जी का एक दोहा कहना चाहूंगा । 

रहीमन पानी राखिए बिन पानी  सब सून

पानी गये ना  ऊबरे   मोती मानस चून ।

मैं यह कहना चाहूंगा कि पूरे विश्‍व में सन 1993 से विश्‍व जल दिवस मनाया जा रहा है। हमारे यहां भी कल विश्‍व जल दिवस मनाया गया । हालात क्‍या है और हालात की स्थिति क्‍या है उसके बारे में अगर हम चर्चा करें तो आज धरती के ¾ क्षेत्रफल में पानी है लेकिन उस पानी में से केवल मात्र ढाई परसेंट पानी ही मीठा है और जनता के पीने के लिये भी श्री अध्‍यक्ष:.8 परसेंट पानी ही मीठा है और पीने के लिये वह मिलता है । खास तौर से मैं कहना चाहूंगा कि धरती पर जो पानी है उसमें 97.5 परसेंट पानी महानगरों में है और महानगरों का पानी खारा है । पेयजल की गुणवत्‍ता में भी भारत का स्‍थान 120वां है व जल उपलब्‍धता में भारत का स्‍थान 133वां है । भारत में जल स्‍तर में लगातार गिरावट हो रही है। इसमें 60 के दशक के बाद तक 15 से 60 मीटर तक गिरावट दर्ज की गई है । प्रतिवर्ष 8760 घंटों में से 100 घंटे ही यहां बरसात होती है । भारत में प्रतिवर्ष जल उपलब्‍धता जल संसाधनों से 1951 में 52 लाख लीटर थी और आगे की अगर हम गणना करें तो 2050 तक 11 लाख 40 हजार लीटर हो जायेगी । मतलब सन 1951 में 52 लाख लीटर थी और 2050 तक अगर गणना करेंगे तो 11 लाख 40 हजार लीटर हो जायेगी । यह स्थिति पानी की बन रही है इसलिए मैं कह सकता हूं कि 

आसमान  निगल गया  या समुद्र पी गया,

दरिया तलाश करता है पानी किधर गया ।

पानी के यह हालात हो गये । मैं आपसे कहना चाहूंगा कि आज के जो हालात हैं पूरे भारतवर्ष में अगर हम औसतन देखें तो पानी के लिये महिलाएं जो अपना समय खराब कर रही हैं वह सवा दो घंटे से लगाकर ढाई घंटे तक प्रतिदिन दूरस्थ स्‍थान से पानी लाने के लिये उसका समय खराब हो रहा है । भारत की 14 प्रमुख नदियों में 80 प्रतिशत पानी दूषित है और पीने योग्‍य नहीं है । भारत की 9 प्रमुख नदियों के घाट के आस पास रहने वाली करीब 20 करोड की जनसंख्‍या गंभीर जल संकट से आज भी जूझ रही है । भारत नदियों के जल को दूषित करने वाले खतरनाक जैविक रसायन सबसे अधिक बहाने वाले देशों में तीसरे स्‍थान पर है । तेल 20वीं सदी का सबसे अधिक मुनाफा देने वाला व्‍यवसाय रहा लेकिन जो 21वीं सदी आ रही है हम कह सकते हैं कि जो हालात और जो आंकडे आ रहे हैं उससे 21वीं सदी में जो हमारा पानी होगा वह तेल से भी महंगा होगा और पानी सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाला, सबसे ज्‍यादा व्‍यवसाय करने वाला होगा । आज मैं कह सकता हूं कि अपने भारतवर्ष में पाँच साल में बोतल बंद पानी की खपत तीन गुना व चीन में दो गुना बढी है । भारत में 4 करोड बोतले केवल मात्र मिनरल वाटर की बिक रही है । जिससे करोडों रुपये का मुनाफा हो रहा है और 21वीं सदी में जायेंगे तो तेल से भी ज्‍यादा मुनाफा पानी से होने लगेगा । यह पानी के हालात हैं और वास्‍तव में मैं कह सकता हूं कि पानी की जिस प्रकार की समस्‍या आज हमारे पूरे देश में है उसी को देखते हुए कर्नल टाड ने यह कहा था 

 

ans/usc   14.50  23.03.2007  2h

 

कि तीसरा विश्‍व युद्ध होगा तो वह तीसरा विश्‍व युद्ध पानी को लेकर होगा इसलिए अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहूंगा कि हमारे राजस्‍थान, हमारे भारतवर्ष में 73 प्रतिशत आबादी को साफ  पानी नहीं मिलता है और हर साल पाँच वर्ष से कम आयु के पचास हजार से डेढ़ लाख तक बच्‍चों की मौत का कारण दूषित पानी है।

राजस्‍थान के अगर हालात हम देखे तो राजस्‍थान के अंदर भौगोलिक क्षेत्र 3.42 लाख वर्ग किलोमीटर जो देश के कुल क्षेत्रफल का दसवां प्रतिशत है। राजस्‍थान की जनसंख्‍या देश की 5.40 प्रतिशत है, पशुधन 18.70 प्रतिशत है, सिंचित क्षेत्र 13.88 प्रतिशत, खाद्यान्‍न उत्‍पादन 6.55 प्रतिशत है इसके बावजूद सतही जल संसाधन  केवल 1.16 प्रतिशत है, यही कारण है कि प्रदेश की लगभग 94 प्रतिशत पेयजल योजनाएं भूजल पर आधारित है। आज की स्थिति, आज के हालात यह है, ऐसी हालत है पेयजल के लिए हो रहा है, भूजल दोहन के मात्र 8-10 प्रतिशत ही भूजल का उपयोग पेयजल के लिए हो रहा है, शेष खेती व अन्‍य उपयोग के लिए आ रहा है।

देश के कुल 227 मरू क्षेत्र के विरूद्ध राजस्‍थान में 85 ब्‍लाक देश के 23495 लवणीय है वह हेबीटेशन के विरूद्ध राजस्‍थान में5488 लवणिय हेबीटेशन हे। देश के 31306 फ्लोराइड ग्रस्‍त हेबीटेशन के विरूद्ध राजस्‍थान में 8900 फ्लोराइड ग्रस्‍त हेबीटेशन है जिन्‍हें विभाग ने समयबद्ध कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्‍न वृहद एवम घरेलू डिफ्लोरोडेशन सेंटर लगाकर लाभान्वित किया जा रहा है।

प्रदेश के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा काफी अधिक है, देश का सबसे अधिक प्रभावित राज्‍य, प्रदेश, हमारा राजस्‍थान है। बढ़ती आबादी, घटता भूजल, गिरती गुणवत्‍ता यह सारे कारण है, इससे हम कह सकते हैं कि फ्लोराइड वाले क्षेत्रों में फ्लोरोसिस की बीमारी हो जाती है। हालत  यह है कि जहां फ्लोराइड की स्थिति है वहां स्‍थानों पर पानी पीने से लोगों के दाँत पीले पड़ जाते हैं चाहे वह वृद्ध हो चाहे युवा हो चाहे बच्‍चे हो चाहे वह गरीब हो, हर वर्ग फ्लोराइड से अछूता नहीं रहता और उन्‍हें फ्लोरोसिस की बीमारी हो जाती है जिससे कम उम्र के अंदर  उनको मरना पड़ता है, यह हालत है।

वास्‍तव में जो फ्लोराइड की समस्‍या हमारे राजस्‍थान में बनी हुई है यह गम्‍भीर और चिंतनीय समस्‍या है। मैं इसलिए खास तौर से कहना चाहूंगा इस पानी के ऊपर दो-तीन लाइनें हमने जोड़ी है कि ' ईश्‍वर से संसार बनाया उसमें पहले भी पानी था, जीवन की रचना थी जिसमें वह भी तो केवल पानी था, नदियां, झीलों, तालाबों में भी पानी था, तीर्थों, धामों, झरणों में, आंखों में भी पानी था, कहां गया वह पानी सारा क्‍या धरती निगल गई है या मानव की करतूतों से सारी हालत बिगड़ गई है, सूखी नदिया शुष्‍क सरोवर झरने क्‍यों मौन हुए है, पानी पानी की पुकार से पत्‍थर छाती पिघल गई' ।

आजादी आई तो सोचा गांव-गांव गंगा आएगी, सूखे रेतीले खेतों में हरियाली फिर से छाएगी, यह आजादी आई और उसके बाद भी हरियाली नहीं आई। इतने समय तक राज करने वालों के लिए कह रहा हूं। अब मैं कह रहा हूं, मां-बहनो को  पानी हेतु अब दूर नहीं जाना होगा पर किसने सोचा था पानी की धारा संकट लाएगी, पानी की धारा संकट आ रहा है लेकिन वसुन्‍धरा जी के राज में अब यह समस्‍या नहीं रहेगी। पानी की समस्‍या का समाधान होगा, इसके लिए मैं कहना चाहूंगा कि जो आज हालात, इस जल विश्‍व दिवस के ऊपर हम चर्चा कर रहे हैं। वह हालात बने हैं उस हालात को और दूरगामी परिणाम हो रहे हैं या होने वाले हैं। दूरदृष्टि परिणाम होने वाले हैं1 उन दूरदृष्टि परिणाम को देखते हुए राजस्‍थान की यशस्‍वी सरकार ने और राजस्‍थान की यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री जी क नेतृत्‍व में बहुत बड़े अभियान चलाये गये, कई नीतिगत निर्णय इसमें लिए गए। मैं खासतौर से यह कहना चाहूंगा कि हमारे यहां जल चेतना यात्रा और किसान महोत्‍सव..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: एक  मिनिट में अपनी बात समाप्‍त कर दीजिए। आज किसी को भी दस मिनिट से अधिक समय नहीं दिया जाएगा।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): किसान महोत्‍सव  चलाया गया और उस महोत्‍सव के माध्‍यम से कई लोगों को प्रभावित किया गया। खासतौर से मैं राजस्‍थान पत्रिका का भी आभारी हूं कि उन्‍होंने भी अमृत जलम अभियान चलाकर इसमें नई चेतना...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मंत्री भी वक्‍तव्‍य पढ़ रहे हैं और इनके अधिकांश एमएलए भी पढ़ रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आपके जैसे तो सब अनुभवी नहीं है, एक्‍सपीरियंस (व्‍यवधान) आप तो वरिष्‍ठ हो बिना पढ़े ही बोल देते हो। पहली बार आने वाले को छूट होती है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अब ही यह परम्‍परा पड़ी है।

श्री अध्‍यक्ष: पहली बार आने वाले को छूट होती है, आप क्‍यों एतराज करते हो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हैल्‍दी ट्रेडिशनंस रही है इस सदन की वह यह है कि मंत्री पाइंटस लेता है और फिर जवाब देता था, अब मंत्री क्‍या करते हैं कि सारा विभाग लिखकर दे देता है वो का वो ही पढ़ रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आप अपने से तुलना मत करिये।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):  उसका कोई अंत नहीं है। हमारे बहुत विद्वान है शिक्षा मंत्री जी, कहां चले गए, हमारे राठौड़ साहब बहुत विद्वान है लेकिन सब वो के वो ही पढ़ रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: बस दो ही विद्वान है और कोई नहीं है क्‍या, दो ही विद्वान है यहां ?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सभी विद्वान है, एमएलए साहब भी बहुत विद्वान है।

श्री अध्‍यक्ष: अकाल मंत्री नहीं है विद्वान ?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सभी विद्वान है।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैंने अखबारों की कटिंग में से भी लिया है, कोई मंत्री लिखकर देते हैं वो  नहीं है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): एमएलए साहब भी बहुत विद्वान है लेकिन विभाग से आपने लिया वह पढ़ रहे हैं।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूछ रही है वह स्‍वंय विद्वान है कि नहीं, आप बताइये। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूछ रही है कि वह भी विद्वान है कि नहीं, आप बताइये।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप तो है ही विद्वान।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): (व्‍यवधान) प्रतिपक्ष  नेता तो बोलना चाहते नहीं है, और जो बोलना चाहते हैं उनको बोलने नहीं देते।

श्री अध्‍यक्ष: एक मिनिट में बात समाप्‍त कर ले।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): मैं खासतौर से जल चेतना के बारे में चर्चा कर रहा था, अगर जल चेतना यात्रा का महत्‍व देखा जाए तो (व्‍यवधान) राजस्‍थान के अंदर पश्चिमी राजस्‍थान में, पश्चिमी राजस्‍थान में खासतौर से मारवाड़ के अंदर जहां जल को किस प्रकार से भगवान मानकर पूजा जाता है और इसकी किस प्रकार से रक्षा की जाती है पश्चिमी राजस्‍थान के अंदर हमने यह हालात देखे हैं और जो हमारे पूर्वज थे उन्‍होंने  हालात देखे हैं  कि मारवाड़ के अंदर विशेष तौर से चाहे जोधुपर हो चाहे बाड़मेर हो  चाहे जैसलमेर हो यहां पर घरों में किस प्रकार से पानी को रखा जाता था और किस प्रकार से पानी को संजोकर रखा जाता था1 दो टांके रखते थे, एक में खारा पानी होता था और एक में मीठा पानी होता था। वह कभी यह नहीं भूलते थे कि हाथ धोना है तो खारा पानी लाना होगा और पीना है तो मीठा पानी लाना होगा, इस प्रकार से कार्य होता था।

मैं निवेदन करना चाहूंगा कि जल चेतना यात्रा के माध्‍यम से जो जनचेतना लाई गई है उसके अंदर 16 मई, 16 जून 2000 तक जल चेतना, किसान महोत्‍सव का आयोजन हुआ 357 मोबाइल वैन, 1800 गांव व 60 लाख लोगों ने इसमें सभी रूप से भाग लिया और 12 हजार,  1 लाख 26 हजार से अधिक, 31 जल संरक्षण कार्य लोगों की भागीदारी से कराये गए जो एक रिकार्ड है इसके लिए मैं मंत्री महोदय और मुख्‍यमंत्री का आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं।। 11951 रैलिया, 1958 फिल्‍म प्रदर्शन..

श्री अध्‍यक्ष: कृपया समाप्‍त कीजिए।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): यह इतने सारे काम हुए इसलिए मैं माननीय मंत्री महोदय और मुख्‍यमंत्री जी को बहुत बहुत धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि आपने जल चेतना के माध्‍यम से इतना शानदार काम कराया। मैं कहना चाहूंगा कि आज नीतिगत निर्णय हो रहा है, उन नीतिगत निर्णयों के अंदर भूजल के साथ साथ आपने स्थिति देखी कि भूजल कम हो रहा है ले किन आपने जो नीतिगत निर्णय किए उसके अंदर आपने सतही योजनाएं बनाकर बहुत बड़ी महत्‍वपूर्ण योजना बनाई है1 उसके अंदर मैं कहना चाहूंगा दिसम्‍बर 2003 से अक्‍टूबर 2006 तक की अवधि में 9308 करोड रूपये की अनुमानित   लागत कुल 1184 पेयजल योजना स्‍वीकृत कीगई जिनमें 5336 करोड रूपये की लागत की 26 नई वृहद योजनायें हागी इसके लिए हम आभारी है आपके। विशेष तौर से जोधपुर के लिए मैं कहना चाहूंगा जोधपुर के अंदर लिफ्ट परियोजना का कार्य पूर्ण करने से कुल 12.50 एमसीएफटी जल प्रतिदिन प्राप्‍त किया गया जिसके कारण शहर में पर्याप्‍त जल वितरण सम्‍भव हो सका है1

अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहूंगा वास्‍तव में हालात यह थे कि जोधपुर शहर सारा पलायन करने को था लेकिन नहर का पानी आने से जोधपुर के दिन सुधरे हैं। जो नहर का पानी  आया है उसी नहर के पानी  में हमारे विधान सभा क्षेत्र में ऐसी बड़ी बडी जलपर्द्धो  योजना  बनने लगी है। मेरे यहां भी बहुत बड़ी बड़ी योजनाएं बनी1 शेरगढ़ तहसील में भी दो बड़ी योजना बनी, पानी पहुंचाया जा रहा है1

मैं कहना चाहूंगा खासतौर से हमारे प्रतिपक्ष को कि इन्‍होंने वहां पर शिलान्‍यास किए लेकिन वह योजना मंजूर नहीं थी अब वह योजना मंजूर हु ई है तो उसके लिए भी मैं बहुत-बहुत आभार व्‍यक्‍त करना चाहूंगा। खास तौर से..

श्री अध्‍यक्ष: अब बहुत हो गया।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़):खासतौर से दो-चार सुझाव मैं देना चाहूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: पहले तो आप कविताओं में फंसे रहे और अब आप कह रहे हो।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): मैं मेरे विधान सभा क्षेत्र के जो मुद्दे हैं कटमोशन के माध्‍यम से उठाना चाहूंगा। पानी की जो समस्‍या थी उस समस्‍या के लिए यह कहना चाहूंगा समुन्‍द्र में लहरें उठे और आवे है ज्‍वार धोरा त्राही त्राही करें पानी तेरी महिमा अपरम्‍पार। वास्‍तव में समुंद्र में तो बहुत पानी है वहां  लहरे उठती है, ज्‍वार आता है लेकिन धोरा त्राही त्राही करती  है उसकी तरफ अगर किसी ने ध्‍यान दिया तो राजस्‍थान की यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री  वसुन्‍धरा जी ने, सांवरलाल जी ने  कि इतनी महत्‍वपूर्ण योजना बनाकर हमारे यहां इतने काम आपने किए हैं।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया समाप्‍त करें।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): पेयजल के सुधार के लिए कुछ सुझाव देना चाहूंगा। 4-5 मेरे सुझाव है वह  आप ले लें। अभी बोलना बहुत था लेकिन अध्‍यक्ष महोदय, नये नये लोग जब खड़े  होते हैं तो इसी प्रकार से आपकी घंटियां बजती है। मैं तो यह निवेदन करना चाहूंगा कि समयबद्ध तरीके से, टाइमबांड हमारे काम हो। मैं निवेदन करना चाहूंगा कि जिला मुख्‍यालय पर पहली बार  जो अधिकार दिये हैं वह अधिकार पहले चीफ इंजीनियर को 8 लाख तक पावर इस बार दिए, पहले यह पावर नहीं थे कि आठ लाख तक की स्‍वीकृतियां निकाल सके। दो लाख के एडीशनल चीफ को दिए हैं।

 

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श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि इन अधिकारों को बढ़ाते हुए आप एक्‍स.ईएन. को भी पावर दें और एस.ई. को भी पावर दें। मुख्‍य अभियंता को जो 8 लाख की पावर आपने जिला मुख्‍यालय पर दिये हैं उसको 25 लाख करें और अतिरिक्‍त मुख्‍य अभियंता को 2 लाख से बढ़ाकर 10 लाख करें। अधीक्षण अभियंता, एस.ई. की 5 लाख करें और अधिशासी अभियंता-एक्‍स.ईएन. के 2 लाख करने की जरुरत आज है। मैं आपका आभारी हूं।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अब आप समाप्‍त करें। माननीय सदस्‍य, समाप्‍त करें। माननीय सदस्‍य, बस कृपया समाप्‍त करें। (व्‍यवधान)

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): बस, 2-4 सुझाव दे दूं, बस।

श्री अध्‍यक्ष: सुझाव, बोल लिये ना आप, काफी बोल लिये। हर बात पर बोलते हैं।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, सुझाव, इसलिये मैं आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि आपने तकनीकी स्‍वीकृति को बढ़ाते हुए, एक्‍स.ईएन. को 7 लाख के 30 लाख किये, एस.ई. के 25 लाख से एक करोड़ 20 लाख किये, एडिशनल चीफ के 50 लाख से ढाई करोड़ किये, चीफ के एक से 5 करोड़ किये। यह तकनीकी स्‍वीकृतियां हो रही हैं लेकिन ए.एण्‍ड एफ. निकालने के लिये कुछ पावर्स और कुछ अधिकार और बढ़ाने की जरुरत है। मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: बहुत हो गया, बस, माननीय सदस्‍य।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती 15 वर्षों से नहीं हुई है। उसको आपको करना चाहिए और कनिष्‍ठ अभियंता 1988 से और डिप्‍लोमा की 1982 से भर्ती नहीं हुई है।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, 10 मिनट ही पढ़ने की अनुम‍ति होगी, उसके बाद पढ़ने की अनुमति नहीं होगी।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): बस, दो मिनट। पेयजल योजनाओं के लिये आपने कई हैण्‍ड-पम्‍प, ट्यूबवेल, मैं कह सकता हूं कि पिछले 50 साल में शेरगढ़ तहसील में जितने नहीं हुए, उतना पेयजल का काम हुआ है और राजस्‍थान के अन्‍दर पूर्ववर्ती सरकार के 5 साल में नहीं हुआ, उतना 3 साल में आपने काम करके दिखाया है। इसलिये मैं कहना चाहूंगा कि जनता दल योजना जो चल रही है, जनता दल योजना का जो मानदेय होता है, वह शुरू से ही 500 रुपये महीना मिल रहा है और 400 रुपये उसको ठीक कराने के लिये आप दे रहे हैं। सब जगह, चाहे वह पेरा टीचर्स हों, चाहे संविदा पर लगे हुए हों।

श्री अध्‍यक्ष: अब टीचर्स पर कहां चले गये आप।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): सबका मानदेय बढ़ा है। लेकिन जनता दल योजना में काम करने वालों का मानदेय अभी तक नहीं बढ़ाया गया। इसलिये मैं निवेदन करना चाहूंगा कि इन पेयजल योजनाओं को सुचारु रूप से चलाने के लिये आप 500 से 1500 रुपये जनता दल योजना में उस आदमी को दें और 400 से बढ़ाकर उसको आप हजार रुपये करें। यही मेरा आपसे खास तौर से निवेदन रहेगा, और पानी के लिये खास तौर से आखिरी में निवेदन होगा, जो मैं चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप कृपया स्‍थान ग्रहण करें, माननीय सदस्‍य।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, कि जो आपने काम किया है उस काम के बारे में थोड़ा आखिरी में कह दूं, आँख के आंसूं से दिल घबरा गया, खैर-ओ किश्‍ती में पानी आ गया। बहुत-बहुत धन्‍यवाद कि आपने हमारे क्षेत्र में पानी के लिये बहुत अच्‍छा काम किया।

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद, आपको बहुत-बहुत। मोहम्‍मद माहिर आजाद।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, यह सदन आज मांग सख्‍या-27 पेयजल और मांग संख्‍या-46 सिंचाई, इन्दिरा गांधी नहर सहित, मांगों पर विचार कर रहा है। मैं इन मांगों पर अपने विचार रखने से पहले इस सदन को एक शैर सुनाना चाहूंगा। एक शायर ने सही कहा है।

श्री अध्‍यक्ष: आजकल सब पद्य में बात क्‍यों करने लगे। सब लोग पद्य में बातें करने लगे आजकल, गद्य छोड़कर। कोई तो शैर सुनाता है, कोई कविता सुनाता है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मुख्‍य मंत्री भी करती हैं और आप भी कई बार करते हैं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक शायर ने सही कहा है, शिक्षा मंत्रीजी जरा, तशनगी के भी मकामात हैं क्‍या-क्‍या, तशनगी मतलब प्‍यास।

तशनगी के भी मकामात हैं क्‍या-क्‍या या‍नी

कहीं दरिया नहीं काफी और कहीं कतरा है बहुत।

एक तरफ राजस्‍थान में अपार पेयजल है, सिंचाई के लिये भी खूब पानी है तो दूसरी तरफ ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां न पीने के लिये पानी मयस्‍सर है, न धरती माता की प्‍यास बुझ पा रही है। इसलिये मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि यह सही है कि आज राजस्‍थान देश का सबसे बड़ाराज्‍य है और इसका क्षेत्रफल 3.42 लाख वर्ग किलोमीटर, जो देश के क्षेत्रफल का लगभग 10 प्रतिश्‍ंत है और जो भू-जल उपलब्‍ध है वह राजस्‍थान में केवल 1 प्रतिशत है। यानी क्षेत्र 10 प्रतिशत और जो पानी हमें अवेलेबल है वह केवल एक प्रतिशत। प्रदेश भर में 222 नगर और 4 हजार के करीब गांव। जो पानी उपलब्‍ध है, उस पानी में भी कहीं क्‍लोराइड, कहीं फ्लोराइड और कहीं नाइट्रेट, यही स्थिति पेयजल की है। मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि आज भी जो प्रोग्रेस रिपोर्ट आपने दी है, यह हकीकत है कि राजस्‍थान के लोगों को जो पेयजल मुहैया कराया जा रहा है, उसमें सबसे बड़ा स्‍त्रोत और हिस्‍सा है तो वह हैण्‍ड-पम्‍पों के जरिये हम पीने का पानी लोगों को सुलभ करा रहे हैं। यह बात सही है कि मंत्रीजी हैण्‍ड-पम्‍प और बोरिंग देने के मामले में उद्धार हैं। जब कोई उनके समक्ष जाकर मांग रखता है तो उसको मान लेते हैं और दे देते हैं। लेकिन अध्‍यक्ष महोदय, स्थिति यह है कि हैण्‍ड-पम्‍प जितनी गहराई में होना चाहिए चाहे वह ठेकेदारों की कमी हो, चाहे अधिकारियों की। उसमें पहले ही जहां पानी का चुआ आ जाता है, वहां पर हैण्‍ड-पम्‍प छोड़ देते हैं। वह थोड़े दिन तो पानी आता है उसके बाद में पानी आना बंद हो जाता है। आज जो हैण्‍ड-पम्‍प है उनकी स्थिति यह है कि उसमें से कितने ड्राइ हो गये, कितने अबन्‍डन हो गये। जब हम गांवों में जाते हैं तो इन पर काला रंग पोत रखा है, क्रास लगा रखा है। हमने पूछा जे.ईएन. और ए.ईएन. से कि इसका मतलब क्‍या है। कहने लगे कि साहब अब ये वापस नहीं चालू हो सकते हैं। यहां तो पानी बिलकुल नीचे चला गया और अब हमारे क्राइटेरिया और हमारे बजट में नहीं है कि हम इसको गहरा कर सकें। यह स्थिति हैण्‍ड-पम्‍पों की है। जहां तक पेयजल योजनाओं का सवाल है, मैं आपके माध्‍यम से कुछ निवेदन करना चाहता हूं कि मंत्री महोदय, यह मैं नहीं कह रहा हूं, यह आपकी जो जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी विभाग की 2006-07 की जो पुस्तिका आपने जारी की, इस पुस्तिका का आप खुद अध्‍ययन कर लें, इस पुस्तिका से यह साफ जाहिर हो जाएगा कि जो पेयजल योजनाएं बनीं उन पेयजल योजनाओं का उदाहरण देखें कि जो विगत शासनकाल में 1998-99 की पेयजल योजनाएं हैं, चाहे वह फ्लोराइड नियंत्रण योजना, भिनाय-मसूदा की हो, जो आपके क्षेत्र की है, चाहे वह चूरू और बिसाऊ की परियोजना हो, चाहे वह चम्‍बल, धौलपुर, भरतपुर की परियोजना हो, चाहे मानसी वाकल परियोजना हो, जो 2001 में बनी, चाहे चम्‍बल, सवाई माधोपुर की योजना हो, चाहे जो भी योजना हो उन योजनाओं की स्थिति क्‍या होगी कि जो आपने 2004-05 और 2006 की योजनाएं बनाई उनका कार्य तो तेजी के साथ चल रहा है। हम तो आज तक यह सुनते थे कि हाकम बदल जाता है लेकिन हुक्म नहीं बदलता है। लेकिन क्‍या कारण रहा, मंत्री महोदय, मैं आपसे जानना चाहता हूं कि आपके द्वारा बनाई हुई योजनाएं हैं वह तो घोड़े की तेज चाल से दौड़ रही हैं और जो कांग्रेस शासन की योजनाएं बनी थीं, उन योजनाओं की स्थिति मैं कुछ बानगी आपके सामने पेश करना चाहता हूं। यह फ्लोराइड नियंत्रण परियोजना, नसीराबाद का द्वितीय चरण और फ्लोराइड नियंत्रण परियोजना, भिनाय-मसूदा क्षेत्र प्रथम चरण स्‍वीकृत हुए, अक्‍टूबर, 1999 में, अनुमानित लागत 43.99 करोड़ और मार्च, 2000 में इसको रिवाइज करके आपने 9.87 करोड़ और जोड़ दिये। तो यह 53.86 करोड़ होनी चाहिए थी। इसका जो कवरेज एरिया था वह 232 फ्लोराइड प्रभावित गांवों को 95 तहहसील भिनाय के और 137 आपके विधान सभा क्षेत्र मसूदा के थे। 2 कस्‍बे विजय नगर और गुलाबपुरा भी इसमें थे। लेकिन आज दिसम्‍बर, 2006 तक 55 करोड़ रुपये, यानि 53 के अगेंस्‍ट में 55 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी केवल 53 गांव जुड़े हैं। वह ही इससे लाभान्वित हो सके हैं, क्‍या वजह रही। दूसरा उदाहरण मैं देना चाहूंगा उस जिले का चूरू और बिसाऊ, माननीय अध्‍यक्षजी भी उस जिले से आती हैं। हमारे नेता, प्रतिपक्ष भी उस जिले से आते हैं। मई, 1998 की हमारी यह योजना बनी और अनुमानित लागत 119 करोड़ थी और प्रभावित कवरेज एरिया 169 गांव जिसमें 89 गांव चूरू जिले के और 85 गांव झुंझुनूं जिले के थे। 3 कस्‍बे इसमें थे। एक चूरू, एक रतननगर, जिसको थेलासर कहते हैं और एक बिसाऊ। स्थिति यह है कि दिसम्‍बर, 2006 तक इसमें से केवल 77 गांव और 2 कस्‍बे ही लाभान्वित हो सके हैं। पैसा भी खर्च, 108 करोड़ हुआ है। क्‍या वजह रही कि 1998 से अब तक यह नहीं हुआ। तीसरा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो चम्‍बल, धौलपुर और भरतपुर जल प्रदाय योजना थी। जिसका उस वक्‍त के तत्‍कालीन मुख्‍य मंत्री और तत्‍कालीन जल संसाधन मंत्री स्‍वर्गीय रामसिंहजी विश्‍नोई की उपस्थिति में पहाडि़याजी थे, हम लोग थे, सब थे, उसका उद्घाटन हुआ। उसकी स्थिति और भी खराब है। मतलब जितनी बदतर से बदतर स्थिति हो सकती है, मैं समझता हूं इससे ज्‍यादा खराब स्थिति नहीं हो सकती। जुलाई, 99 में यह योजना प्रारम्‍भ हुई, 166.5 करोड़ इसकी अनुमानित लागत रखी गयी और 212 गांव, जिसमें 143 गांव भरतपुर के, 69 धौलपुर के और एक कस्‍बा भरतपुर को भी इससे पानी मिलना था। आज क्‍या स्थिति है, यह स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी आपके पास आकर बैठ गये हैं। मित्रता तो निभाते हैं लेकिन एक बार भी इन्‍होंने आपको कहा कि भरतपुर को आज भी पानी नहीं मिल रहा है, इस योजना का क्‍या हुआ।                                         

 


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इस योजना का क्‍या हुआ? हमने पिछली बार भी आपसे बात की और जब आपने विधायकों की सम्‍भागवार मीटिंग बुलायी थी उस मीटिंग में भी यह बात आपके सामने रखी। आपने कहा कि पहले  का यह जो ठेकेदार था वह फेल हो गया। अब हमने इसके दूसरे टेंडर कर दिये हैं और अब काम प्रगति के आधार पर हो जाएगा लेकिन आज तक स्थिति यह है कि इसमें ऊँट के मुंह में जीरा भी नहीं हुआ और कोई काम शुरू नहीं हुआ।

अगर तीसरा उदाहरण दूं, बीसलपुर-दूदू-फुलेरा योजना का। जून, 2002 में यह शुरू हुई। 216 करोड़ रुपये का इसमें बजट रखा गया लेकिन आज तक स्थिति यह है कि इसका कार्य जो है अभी तक चल ही रहा है, प्रगति पर ही है। यह स्थिति है और चम्‍बल-सवाईमाधोपुर-नादौती परियोजना, वह मंत्री भी आपके पड़ौस में बैठते हैं। अगल-बगल वालों का ध्‍यान भी आपको नहीं है। इसमें स्‍वीकृति जून, 2002 में हुई। अनुमानित लागत 240 करोड़ रुपये थी और स्थिति यह है कि इस परियोजना से सवाईमाधोपुर-करौली के 636 गांवों को और सवाईमाधोपुर शहर को लाभ मिलना था लेकिन अभी तक दिसम्‍बर, 2006 तक 240 में से केवल 44 करोड़ रुपये आपने खर्च किये हैं और अभी तक स्थिति यह है कि इसके अन्‍दर जो आपका काम होना था, जो लाभ मिलना चाहिए था वह लोगों को नहीं मिल पाया। यह मैं कुछ उदाहरण आपके समक्ष इसलिए रख रहा हूं क्‍योंकि मैं यह जानना चाहता हूं, इसी तरीके से आपकी जयपुर-बीसलपुर योजना है। जयपुर-बीसलपुर योजना, जिससे जयपुर शहर को पानी मिलना था। अक्‍टूबर, 1999 में यह लागू, इसकी अनुमति लागत 1100 करोड़ रुपये रखी गयी और इससे जयपुर शहर को भी पानी मिलना था लेकिन आज तक स्थिति यह है कि 85 करोड़ रुपये मात्र दिसम्‍बर तक खर्च हुए हैं और इसके 8 पैकेज कर लिये, 6 पैकेज कर लिये लेकिन न जयपुर शहर को लाभ मिला, न और दूसरी योजनाओं का लाभ मिला।

इसी तरीके से आपकी और योजनाओं को हाल है। मैं कुल मिलाकर माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि आखिर यह फर्क क्‍यों‍किया जा रहा है? आज स्थिति यह है कि आपकी बिसाऊं और चूरू की योजना थी। केवल बिसाऊं से जो झुन्‍झुनूं जिले के चार-पाँच गांव निरादनु गांग्‍यासर, आस-पास के जो गांव हैं, आपके उन पाँच गांवों को भी केवल उसका लाभ नहीं मिल पाया। बिसाऊं कस्‍बा तो आज तक जो है लाभान्वित हुआ नहीं। ... (व्‍यवधान) क्‍या हो गया? तो मैं यह आपसे निवेदन कर रहा था ... (व्‍यवधान) बात कर रहे हैं, मंत्रीजी, जरा नोट तो करें।

ऐसी ही स्थिति जो है आपकी दूसरी योजनाओं की है तो मेरा आपसे निवेदन यह है कि कुल मिलाकर आप इस स्थिति के ऊपर ध्‍यान देंगे और देकर इसके आधार पर इसको तुरन्‍त प्रभावी ढंग से लागू करने का काम करेंगे।

जहां तक पाइप लाइनों का और हैण्‍डपम्‍पों का सवाल है, मैंने आपको पिछली बार भी कहा था, चाहे स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी के गांव की बरखेड़ा फौजदार की योजना है, मेरे यहां की एक आपके नीम की सोमकी की योजना है। आपके बनेनी की योजना है, कोई आपकी टेक्निकल कमेटी में है, कोई एफ.सी. कमेटी में है। कई बार कहने के बाद भी आज तक उन योजनाओं का लाभ नहीं हुआ। न आज चम्‍बल से भरतपुर को पानी मिल रहा है। न जो है पूरे तरीके नगर कस्‍बे को पानी मिल रहा है उससे और हमारी चार-पाँच तहसीलें डींग, नगर, पहा़ड़ी, और कामां, इसके अन्‍दर तो इतना दूषित पानी है कि इसमें ज्‍यादातर गांवों के अन्‍दर बहुत ज्‍यादा फ्लोराइड है और हैण्‍डपम्‍प के अलावा आपके पास कोई साधन नहीं है। आज भी वहां पर जो है टेंकरों से पानी सप्‍लाई किया जाता है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि आप हैण्‍डपम्‍प देते हैं। आप बोरिंग देते हैं लेकिन स्थिति यह है कि फरवरी और मार्च तक वह कम्‍प्‍लीट हो जाने चाहिए ताकि अप्रैल, मई और जून के अन्‍दर गर्मी में उसका लोगों को लाभ मिल जाए लेकिन आप उठाकर देख लें। जुलाई और अगस्‍त के अन्‍दर काम शुरू होता है। जब लोगों की जो पानी की पीड़ा है वह पूरी तरीके से लोग परेशान हो जाते हैं उसके बाद कहीं सम्‍पर्क करते हैं तो कहते हैं कि पाइप नहीं है। कहीं कहते हैं कि रिंग नहीं है। कहीं मशीन नहीं है। आपकी स्थिति यह है कि जो पहाड़ी क्षेत्र है, मैं उदाहरण के तौर पर आपको कहना चाहता हूं कि मेरे यहां खोरी और बुढ़ली जो पहाड़ी क्षेत्र है वहां पर ड्रीलिंग मशीन की जरूरत पड़ती है। जब भी बात करोगे तो आज मशीन भीलवाड़ा गयी है। वह मशीन वहां से आएगी तब जाकर उसका काम होगा तो वह ... (व्‍यवधान) अभी तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान)

(समय-समाप्ति-सूचक-घंटी)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी। 12 मिनट हो गये हैं माननीय सदस्‍य, आपको बोलते। आप दो मिनट में समाप्‍त कर दें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): तो क्‍या हो गया? अभी तो सिंचाई पर तो मैं आया ही नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी तो पेयजल ही चल रहा है तो यह तो ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नहीं आएंगे आप तो। आप नहीं आएंगे लेकिन आपके सचेतक ने मुझे लिख कर दिया है। ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): नहीं, यह नियम आज ही लागू हुआ है या रोज रहेगा? एक-एक घंटे तक बोलते रहते हैं लोग तो। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपके सचेतक महोदय ने लिख कर दिया है कि किसी को भी दस और पन्‍द्रह मिनट से ज्‍यादा बोलने का मौका नहीं दें इसलिए मैंने आपको 12 मिनट के बाद टोका है। दो मिनट में आप समाप्‍त करें। ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अभी तो समय बाकी है। पूरा होने के बाद बताते न आप। तो मैं माननीय मंत्रीजी, आपको एक शेर के माध्‍यम से ... (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप भी सम-दृष्टि रखो। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप कई माननीय सदस्‍यों को तो 30-30 मिनट दे देते हो और फिर बाकी पीछे वालों को पाँच-पाँच मिनट देते हो आप।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, मैं कहां दे रही हूं?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): नहीं, मेरे पर आपत्ति है क्‍या आपको यह? नहीं, क्‍या है फिर ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, मैं कहां दे रही हूं? लेकिन आपने देखा नहीं था? आपने अभी पहले पूर्व में माननीय सदस्‍य को देखा नहीं था? कितनी बार घंटी बजायी? क्‍या असर पडा उसका? उसी तरीके से 12 मिनट हो गये। अब मैं कह रही हूं कि भाई, दो-तीन मिनट में अपनी बात समाप्‍त कर दें। अब यह कह रहे हैं कि मैंने तो शुरू ही किया है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): शुरू ही किया है।

श्री अध्‍यक्ष: आपके दोस्‍त जो हैं। ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍य मंत्रीजी का आज ही है या कल है?

श्री अध्‍यक्ष: आज। आज।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): कितने बजे?

श्री अध्‍यक्ष: अभी इनका भाषण समाप्‍त हो जाए उसके बाद।

एक माननीय सदस्‍य: तीन बजे।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ठीक है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्रीजी को यह निवेदन करना चाहता हूं कि माननीय मंत्रीजी, इस तरीके का भेदभाव ठीक नहीं है। एक शायर ने सही कहा है कि-

दुश्‍मनी जमकर करो, मगर यह गुंजाइश रहे,

जब कभी फिर हम एक हो तो शर्मिंदा न होना पड़े।  

इसलिए आप जो यह भेदभाव मत कीजिए। पहले भी एक थे, आगे भी एक हो सकते हैं इसलिए यह जो हमारी योजनाएं 1998-99 में शुरू हुई हैं उनको जरा गम्‍भीरता से लेओ और उनको शीघ्र शुरू कराने का काम करो। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह आ सकते हैं न हमारे साथी, क्‍या दिक्‍कत आ गयी? ... (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): पहले भी आप हमारे साथ थे, अब फिर आ सकते हो। ... (व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): हां, जनता दल के वह दिन याद आ रहे हैं आपको।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब यह समय काट दें, आठ-दस मिनट जो डिस्‍टर्ब हुआ जो तो।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब समय कम है तो मैं सिंचाई के बारे में आपसे निवेदन करना चाहता हूं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान में एक तरफ इंदिरा गांधी नहर है। एक तरफ भाखड़ा, एक तरफ माही, एक तरफ चम्‍बल, एक तरफ गंग केनाल और इन नदी और नहरों के मुकाबले में आप जरा पूर्वी राजस्‍थान को देखें। पूर्वी राजस्‍थान, जिसमें सात जिले आते हैं। भरतपुर, अलवर, करौली, धौलपुर, सवाईमाधोपुर और दौसा। मुझे जरा आप बता दें अपने जवाब में कि वहां पर एक भी कोई योजना सिंचाई की या पेयजल की आपने आपके सत्‍ता में आने के बाद बनायी है क्‍या? वह आप मुझे बता दीजिए। मैं निवेदन यह करना चाहता हूं कि इनके मुकाबले इन सात जिलों की स्थिति देखें। धौलपुर में पार्वती डेम, हिण्‍डौन में जगर का बाँध, जयपुर में जमवारामगढ़, अलवर में जयसमंद और भरतपुर में बंध-बारेठ, यह स्थिति है जो सब रियासत काल के बने हुए हैं। इनका पानी भी आप पेयजल के रूप में दूसरी जगह ले रहे हैं। जब सन् 1956 में और सम्‍वत् 1962 में अकाल पडा तब भी यहां के सिस्‍टम को यूनिक माना जाता था और यहां किसी तरह की समस्‍या उत्‍पन्‍न नहीं हुई। आज स्थिति क्‍या हो गयी कि गम्‍भीर और बाणगंगा और रूपारेल, तीन नदियों से, माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी, आप मदद करने के बजाए इनको बातों में और लगा रहे हो। मैं तो आप ही की वकालत कर रहा हूं। तो मैं यह निवेदन कर रहा हूं कि गम्‍भीर, बाणगंगा और रूपारेल से पानी मिलता था। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष उधर भी देख रहे हैं। 

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): भरतपुर को इन तीन नदियों से पानी मिलता था जो संसार का यूनिक सिस्‍टम था। अब गम्‍भीर पर आपने पांचना का बाँध बना लिया। उससे पानी मिलना बंद हो गया। आपने एक एनीकट बनाकर बाणगंगा का, उसका रोक दिया और रूपारेल का पानी जो है, आ ही नहीं रहा है जब से तरुण सेवक समाज ने वह बनाया था। कुल मिलाकर यह है कि हमारा जो सीकरी सिस्‍टम था, वह बिलकुल गड़बड़ा गया और जो पानी ककड़ा बाँध तक या सीकरी सिस्‍टम में यह अचेवर वाली नहर से मिलता था, एक बूंद पानी नहीं मिल रहा है इसलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि गुड़गांव केनाल का जो पानी आप हरियाणा से लेते है उस पानी को आगे बढ़ाकर सीकरी सिस्‍टम में डालने की योजना बनायें ताकि नगर और डींग और भरतपुर के दूसरे जो क्षेत्र हैं उनको इसका पानी मिल सके और वहां का काश्‍तकार बरबाद नहीं हो, यह मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कुल मिलाकर स्थिति यह है सिंचाई की कि जो आप राजस्‍थान को, हिस्‍सा जो राजस्‍थान का दूसरे स्‍टेटों से मिलता था, रावी और व्‍यास से, सतलज- भाखड़ा से,  चम्‍बल से, माही से, नर्बदा से, और यमुना से, यह दूसरे प्रदेशों से जो राजस्‍थान को सिंचाई के लिए पानी मिलता था आज स्थिति यह है, मैं नहीं जाना चाहता कि पोंग बाँध की और हरि के बेराज की स्थिति, कल तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने यह बात यहां पर रख दी लेकिन आज आशंका यह है कि चूंकि पंजाब में जब चुनाव हुए और अकाली दल ने और भारतीय जनता पार्टी ने संयुक्‍त रूप से मिलकर चुनाव लड़ा और उस चुनाव में दोनों ने संयुक्‍त घोषणा-पत्र जारी किया और उस घोषणा-पत्र पर माननीय मुख्‍य मंत्रीजी भी पंजाब में जाकर और वोट मांगकर आयीं उसमें अकाली दल और बी.जे.पी. ने यह कहा था कि अगर हमारी सरकार बनी तो हम राजस्‍थान को एक बूंद पानी नहीं देंगे। आज यह आशंका जताई गयी है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, संयुक्‍त घोषणा-पत्र में नहीं है। संयुक्‍त घोषणा-पत्र में यह नहीं है। गलत तथ्‍य पेश कर रहे हैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): संयुक्‍त घोषणा-पत्र में नहीं है। संयुक्‍त घोषणा पत्र देखे आप। ... (व्‍यवधान)  घोषणा-पत्र टेबल कर दें आप, संयुक्‍त घोषणा-पत्र में है या नहीं है पता लग जाएगा। ... (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): हां, अकाली दल के घोषणा-पत्र में यह ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण कर लें। माननीय सदस्‍यगण, कृपया, स्‍थान ग्रहण करें। माननीय सदस्‍यगण।

 

spp/usc/15.20/2l/23.3.2007(1)

 

श्री रामप्रताप कासनिया : गलत तथ्‍य पेश कर रहे हैं। अध्‍यक्ष महोदय, गलत तथ्‍य पेश कर रहे हैं। ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, स्‍थान ग्रहण कर लें। ..(व्‍यवधान)... माननीय सदस्‍यगण, कृपया स्‍थान ग्रहण करें। ..(व्‍यवधान)...राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍यगण, कृपया स्‍थान ग्रहण करे। ..(व्‍यवधान)... माननीय सदस्‍य, अब आप कृपा करके एक मिनट में कंक्‍लुड करें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कंक्‍लुड कर रहा हूं दो ही मिनट में, सिर्फ दो मिनट में। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन कर रहा था कि जिस इंदिरा गांधी नहर से हनुमानगढ़, गंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और जोधपुर को पेयजल का पानी मिलता है । अगर हमको पंजाब से यह पानी नहीं मिला तो पश्चिमी राजस्‍थान के पाँच जिले बरबाद हो जायेंगे और इसलिए मैं निवेदन कर रहा हूं कि पंजाब में अकाली दल और बी जे पी की सरकार ने यह घोषणा की है कि हम राजस्‍थान को एक बूंद पानी नहीं देंगे और उस स्थिति में जब हमारी मुख्‍य मंत्री वहां जाकर वोट मांगकर आईं कि उनके चुनाव घोषणा पत्र के आधार पर मैं यह जानना चाहूंगा कि मंत्री और मुख्‍य मंत्रीजी इस सदन के माध्‍यम से राजस्‍थान की जनता को यह आश्‍वस्‍त करें ...(व्‍यवधान)... 

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (केसरीसिंहपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बिलकुल गलत कथन कह रहे हैं न ही भारतीय जनता पार्टी के किसी घोषणा पत्र में है, न ही संयुक्‍त रूप से जो अभी आया है उसमें है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मैं वह भी बता दूंगा आपको। मुख्‍य मंत्रीजी कहें, यह बात कि इन्‍होंने वोट मांगे या नहीं मांगे। वहां संयुक्‍त रूप से मिलकर चुनाव लड़े हैं। राजस्‍थान की मुख्‍य मंत्री पंजाब जाकर ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य : आपके प्रधान मंत्री भी गये हैं ...(व्‍यवधान)...

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय सदस्‍य, आपको बताऊं ।...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप अपने जवाब में कह दीजिये यह बात। ...(व्‍यवधान)... आप अपना जवाब दें तब कह दीजिये। आपको मौका मिलेगा । अभी मेरे टाइम में क्‍यों बोल रहे हैं ?  ...(व्‍यवधान)... मेरा समय क्‍यों ले रहे हैं ? ...(व्‍यवधान)... हाउस मेरे पजेशन में है ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आपकी हर शंका का समाधान किया जायेगा। ...(व्‍यवधान)...राजस्‍थान की जनता का कोई अहित नहीं होने देंगे हम।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मैं यह चाहता हूं कि मुख्‍य मंत्रीजी खुद यह बातें कहें कि भले ही हमने पंजाब में संयुक्‍त रूप से सरकार में वोट मांगा हो, लेकिन अगर अकाली दल पानी रोकेगा तो हम उससे लड़ाई लड़ेंगे और राजस्‍थान की जनता को उसका हक‍दिलायेंगे। मैं यह तो निवेदन करना चाह रहा हूं । आप यहां पर संयुक्‍त प्रस्‍ताव लाने की बात करते हो, फिर इसमें कहां दिक्‍कत आ गयी ? ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: कृपया अब आप समाप्‍त करें।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अब आपको सारी बात बता देंगे ने । आपके मुख्‍य मंत्री तो कभी खड़े होकर बोले ही नहीं, पाँच साल हमने देखा है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): जब मैं बनूंगा तब खूब बोलूंगा, सुन लेना आप। मैं बनूंगा तब आपसे ज्‍यादा बोलूंगा, सुन लेना आप।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया समाप्‍त करें। माननीय सदस्‍य, अब कृपया समाप्‍त करें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप भी ऐसे ही देखते थे। कोई नहीं सोच सकता था आपको। हां, आप भी ऐसे ही देखते तो आपको कोई उम्‍मीद थोड़े ही थी।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आप वापस हमारे साथ आ जाओ। ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): राजनीति में कुछ नहीं होता है। राजनीति में सब समय पर मिल जाता है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपके युनूस खान की हालत देख लो, इनका क्‍या करोगे ?  ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): सत्‍ता का अंहकार नहीं करना चाहिये। सद्दाम हुसैन 1700 एकड़ के बंगले में रहता था, वह 10 फीट की कोठी में भी उसको रहना पडा। इसलिए राजेन्‍द्र जी सत्‍ता के अंहकार में मत रहिये। 'जो होवे घमण्‍डी तो वह बेगो होवे खण्डित'

श्री रामप्रताप कासनिया : यह बात सही है आपकी, समय का पता नहीं लगता है। हमारे लिये भी कभी हैलिकॉप्‍टर तैयार थे ।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप कृपा कर समाप्‍त करें। आपने बहुत समय ले लिया है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मैं यह निवेदन करना चाह रहा था सिर्फ एक मिनट लूंगा। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब हाउस को कंट्रोल करना तो आपका जिम्‍मा हे, मेरा तो है नहीं।

श्री अध्‍यक्ष: आप कहिये न अपनी बात।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि अन्‍तरराज्‍यीय यमुना जल बंटवारे के तहत यमुना जल में से राजस्‍थान का हिस्‍सा 119 बी सी एम तय किया गया है जिसमें से राजस्‍थान को वर्षाकाल में 3198 क्‍यूसेक पानी मिलेगा। इसके उपयोग हेतु 500 क्‍यूसेक क्षमता की गुडगांवा नहर का निर्माण किया जा चुका है। गुड़गांवा नहर के शेष कार्यों को यमुना जल परियोजना भरतपुर में सम्मिलित किया गया है।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप तो पढ़ने लग गये।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि अगर भरतपुर को यमुना का पानी गुड़गांवा कैनाल से उसकी क्षमता सुधार कर देना चाहते हैं तो मैं आपका बहुत बहुत आभारी रहूंगा। अन्‍त में मैं आपकी एक योजना पर ..

श्री अध्‍यक्ष: अब नहीं।   

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): सिर्फ आधा मिनट । आपकी जो जवाहर रोजगार योजना है पेज 68, जरा इसका अवलोकन माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप भी करतीं तो अच्‍छा होता। इसमें कुल स्‍वीकृत कार्य अजमेर जिले में 151 थे, आपके जिले से ही शुरू कर रहा हूं, जहां से आप आते हैं। उसमें से 2006 तक केवल आपने 64 कार्य पूर्ण किये हैं, 87 बाकी हैं। आधे से ज्‍यादा, यह तो आपके जिले का हाल है। अब बाड़मेर में 21 में से 20 बाकी हैं, धौलपुर में 78 में से 45  बाकी है, श्रीगंगानगर में बड़े जोर से बोल रहे थे अभी कृषि राज्‍य मंत्री बड़े जोर जोर से बोल रहे थे 15 के 15 अधूरे पड़े हैं। एक भी पूरा नहीं हुआ। आपको शर्म आनी चाहिये मुझे कहने से पहले, अपने देखो आप उठाकर। करौली में 3 के 3 बाकी पड़े हैं। आपके नागौर में 68 में से 41 पेंडिंग हैं। क्‍या स्थिति है, यह कब पूरे होंगे ? आखिर 98 से लगाकर 2006 तक यह पेंडेंसी आपकी है। इसलिये मैं निवेदन करना चाहता हूं । अंत में

श्री अध्‍यक्ष: अब कोई निवेदन नहीं। अब आप समाप्‍त करें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): इस पेयजल और सिंचाई पर जो ठेकेदार समय पर अपना काम पूरा नहीं करते हैं, उनके साथ नरमी का व्‍यवहार नहीं करिये, सख्‍ती का व्‍यवहार कीजिये। उनको ब्‍लैक लिस्‍टेड कीजिये। बढि़या सामग्री लगवाइये और राजस्‍थान के आने वाले गर्मी के मौसम में लोगों को पर्याप्‍त और स्‍वच्‍छ पेयजल उपलब्‍ध करवायें। जब ही जाकर यह माना जायेगा कि वाकई में आपने अच्‍छा काम किया । आपने मुझे बोलने के लिये समय दिया, उसके लिये बहुत बहुत धन्‍यवाद।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपने आदेश दिया था कि ओलावृष्टि पर वक्‍तव्‍य।

श्री अध्‍यक्ष: हां-हां, दिया है मैंने।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सदन की नेता दें, मेरी प्रार्थना है कि प्रभारी मंत्री महोदय भी बैठे हैं । अगर आप इजाजत दें तो पहले यह कहे वरना आपकी आज्ञा है तो यह दे रहे हैं। आप नाम पुकार लें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आज्ञा क्‍या मांग रहे हो, अध्‍यक्ष जी ने कह दिया था मुख्‍य मंत्रीजी तीन बजे देंगी।

श्री अध्‍यक्ष: नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य, जैसे मैंने कहा है बैठिये।

शासकीय वक्‍तव्‍य

राज्‍य में ओलावृष्टि से हुए नुकसान का मुआवजा

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मुझे बहुत ही आश्‍चर्य है कि आज सदन को इसलिये स्‍थगित करना पडा है कि जो स्‍टेटमेंट हमने तय कर लिया था कि 23 तारीख को हम देने वाले हैं । आपको भी इन्‍फोर्मेशन हमने दी थी, उसको हम देने वाले ही थे, परन्‍तु इस चीज के ऊपर यह हाउस स्‍थगित कर दिया गया, सिर्फ इसी वजह से कि मैं दूंगा वक्‍तव्‍य कि डॉक्‍टर साहब देंगे वक्‍तव्‍य। मुझे समझ में नहीं आ रहा है जब यह तय हो गया था कि हम लोग आज वक्‍तव्‍य देंगे, नेचुरली जो प्रभारी मंत्री हैं, वह वक्‍तव्‍य देंगे । फिर भी नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने बहुत सारी बार यहां मंत्रिमण्‍डल की कलक्टिव रेस्‍पांसिबिलिटी की बात हमारे सामने रखी है। मैं मानती हूं कि यह है भी, कि मंत्रिमण्‍डल की कलक्टिव रेस्‍पांसिबिलिटी होती है। इसलिए हमने यह तय करा दिया था कि मंत्रीजी अच्‍छी तरह से अपना पूरा वक्‍तव्‍य बनाकर सदन के सामने अपनी बात रखेंगे, परन्‍तु इसी के ऊपर आज सदन का समय खराब हुआ है । प्रतिष्‍ठा का प्रश्‍न बनाकर इसके ऊपर सदन का समय आप लोगों ने खराब किया, यह कहां तक उचित है।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे यहां कहना चाहूंगी कि सदन के सामने और आसन के सामने हम सब छोटे पड़ जाते हैं और आपने जो भी व्‍यवस्‍था दी, हम वक्‍तव्‍य देने के लिये पूरी तरह से तैयार हैं और मैं यह कहना चाहूंगी कि ओलावृष्टि की घटना इसी शासन में नहीं हुई है, परन्‍तु मैं आपको यह भी बताना चाहूंगी ओलावृष्टि हुई। किसान की पीड़ा हम लोगों ने समझने की कोशिश की। इनके दर्द को मालूम नहीं, आप लोगों ने समझा कि नहीं समझा, परन्‍तु हम लोगों ने समझा, क्‍योंकि हम तो खुद भी गये। सुबह 6 बजे तक ओलावृष्टि हुई थी, हम लोग 11-11.30 बजे निकल गये थे। मैं भी खुद गयी थी। उस दिन प्रभारी मंत्री भी वहां पहुंचे थे और उसके तुरन्‍त बाद आप लोगों को बताकर हमारे राज्‍य मंत्री, फिर हमारे मंत्री, हमारे सेक्रेट्रीज, पूरे अगले 6 दिन के अंदर जगह-जगह घूमकर वहां से खबर लाकर वापस आये और तत्‍काल हम लोगों ने 14 तारीख को इन्‍टरिम रिलीफ के नाते अनाउंसमेंट कर दिया। घोषणा करके हमने पीडि़त किसानों को कुछ राहत पहुंचाने की कोशिश भी की और यह मैं आपको बताना चाहूंगा कि जो भी हमारे संसाधन हैं, अध्‍यक्ष महोदय, क्‍योंकि यह किसानों की सरकार है, यह संसाधन भी किसानों के ही हैं । हमारे पास जो पैसा है, वह हमारे अकेले का पैसा नहीं है, हमारी जनता का पैसा है, हमारे किसानों का पैसा है। इसलिए उन तक पहुंचाने की हमारी कोशिश रहेगी। सी.आर.एफ. के निर्धारित नोर्म्‍स के अंदर हम संशोधन कब से कराने की कोशिश कर रहे हैं। मैंने गृह मंत्री को चिट्ठी भी लिखी। प्रधान मंत्री के स्‍तर पर चिट्ठी लिखी। जाकर मैं उनसे मिलकर आयी। 2005 के अंदर हम लोगों को यह आश्‍वस्‍त किया गया था कि नोर्म्‍स को फिर से हम लोग अपग्रेड कर रहे हैं।

 

Msr/usc/1530/2m/23032006

 

2005 से लेकर अब एक साल निकल गया परन्‍तु हम तक यह खबर नहीं आयी है कि सी.आर.एफ. के नोर्म्‍स कुछ बदले हैं कि नहीं बदले हैं।

मैं तो यह मानती हूं कि माननीय सदस्‍य अपनी पार्टी के लोगों को थोड़ा सा प्रोत्‍साहित कर के यह कोशिश करें कि इतनी सारी मुसीबतें राजस्‍थान के किसान उसमें से गुजर रहे हैं तो उनको कुछ तो मदद सेण्‍ट्रल गवर्नमेंट करे। मैं समझती हूं कि सरकार के अन्‍दर और हम लोग सब उनके बहुत ही आभारी होते कि आज तक अगर इन्‍होंने एक भी चिट्ठी लिख दी होती या उन तक जाकर यह बात भी पहुंचा दी होती। हमारी बात अभी तक गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया ने मानी नहीं है और क्‍या होता है 800 रुपया, क्‍या होता है 10,000 रुपया। मैं समझती हूं कि बेचारी किसान की अपन यहां बात उठाते हैं परन्‍तु एक्‍चुअली फील्‍ड के अन्‍दर क्‍या करते हैं वो सब के सामने है, किसी से छिपी हुई बात नहीं है इसलिए अपन कितनी भी भाषणबाजी यहां कर लें, कितनी भी नाटकबा‍जी करने की अपन कोशिश करें, कितनी भी बात हम एक-दूसरे के सामने रखने की कोशिश करें परन्‍तु जो सत्‍यता है वो किसान को अच्‍छी तरह से मालूम है।

और मैं आज यहां कहना चाहती हूं कि सी.आर.एफ के मापदण्‍ड के अन्‍दर जो सहायता आती है वो तो राज्‍य सरकार देगी ही देगी परन्‍तु उन संसाधानों से आगे बढ़ कर के जो घोषणा मैं करने जा रही हूं वो मैं यह कहना चाहती हूं कि आज तक ओलावृष्टि से जो प्रभावित किसान हैं उनको नहीं दी गयी है और उदाहरण के तौर पर  मैं आपको यह बताना चाहूंगी कि माननीय सदस्‍यों की सरकार के समय जबकि तीन ओलावृष्टि हुई थी, डेढ़ करोड़ रुपया उन लोगों ने उन तीन ओलावृष्टि के अन्‍दर दी थी, आज तीन साल के अन्‍दर हमारी सरकार ने तीन ओलावृष्टि के अन्‍दर 33 करोड़ रुपये अभी तक दिये हैं। जो कह रहे हैं न हम को, अगर इतना .....

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): प्रद्युम्‍न सिंहजी, सोओ मत। सोना नहीं है सुनना है।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): बहुत ही गौर से सुन रहे हैं। नहीं, बहत ही गौर से सुन रहे हैं। हमारी बात वो गौर से सुनते हैं।

मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगी कि यहां आपने बहुत भाषणबाजी की, बहुत सारी बातें हम को सुझायीं और हम उस सीख से मैं समझती हूं कि थोड़ा सा ज्ञान भी पायेंगे परन्‍तु अगर यह ज्ञान अपने समय में थोड़ा सा किसान के ऊपर इस्‍तेमाल ही कर देते, उनको लाभान्वित कर देते तो आज वो स्थिति हम लोगों को देखने को नहीं मिलती जो हम को गरीबी की स्थिति जगह-जगह देखने को मिल रही है।

यह एक्‍सपेक्‍टेशन हम से की जा रही है कि हमारे हाथ में वो जादू का डण्‍डा है कि 50 साल के नुकसान करने के बाद हम वो जादू का डण्‍डा ऐसे ही फेर दें और तीन साल के अन्‍दर वो सब मुसीबतें एक साथ हटा दें। यह तो होने वाला नहीं है परन्‍तु मैं यह एक जरूर कहना चाहूंगी कि हमने जो पैकेज अभी घोषणा की है, सी.आर.एफ की तरफ इन्‍पुट सब्सिडी जो आपके अनइर्रिगेटेड लैंड्स है उसको 1000 रुपये दिया जाता है, हम लोग अब 3000 रुपये अनाउंस कर रहे हैं। जो इर्रिगेटेड लैंड है और जिसको बिजली मिल रही है उस इर्रिगेटेड लैंड के अन्‍दर या जो कैनाल की जमीन है, जिसको सी.आर.एफ के अन्‍दर 2500 रुपये मिलते थे उनको हम लोग अब 4000 रुपये देने वाले हैं। जो इर्रिगेटेड लैंड है और जिसके ऊपर डीजल इस्‍तेमाल किया जाता है उसको 2500 रुपये मिलते होंगे, अब हम उसको 6000 रुपये देने जा रहे हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मुख्‍यमंत्रीजी, यह पर हैक्‍टेयर है या पर एकड़, यह तो बताएं।

श्री अध्‍यक्ष: सुनिये। आप सुनिये।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): आप सुन लीजिए। सुन लीजिए, उसके बाद आपको जो बोलना है बोलिये।

इसी तरीके से इसके अन्‍दर आ जाता है क्‍योंकि सी.आर.एफ. के अन्‍दर आता है, जीरा है, ईसबगोल है, वीट है, मस्‍टर्ड है, सब्‍जी है, फल है यह सब सी.आर.एफ. के अन्‍दर कवर होते हैं, जो भी कुछ एडीशनल है वो सब हम स्‍टेट फंडिंग के द्वारा उसको कवर करेंगे। हमने यह भी तय कर दिया है कि जो सी.आर.एफ. के अन्‍दर गेहूं किसी को मिला नहीं करता था वह 50 किलो पर परिवार पर महीने दो महीने के लिए हम देने वाले हैं। इसी तरीके से जहां तक बिजली की बात है, कोई सी.आर.एफ. के अन्‍दर रिलीफ नहीं मिलती थी, हमने फर्स्‍ट मार्च को यह आलरेडी इन्‍टरिम रिलीफ के अन्‍दर अनाउंस कर दिया था कि दो महीने की बिजली को हम माफ करते हैं परन्‍तु अब हम दो और महीने की बिजली माफ करने जा रहे हैं तो टोटल हुआ पूरे चार महीने ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): चार महीने हो गये, साहब, मुबारक हो।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): चार महीने हो गये पूरे। इसी तरीके से किल्‍हीं-किन्‍हीं लोगों ने ठेका प्रथा की बात हमारे सामने रखी, जो वास्‍तविक काश्‍तकार है और जिसके पास प्रमाण है, प्रमाण के आधार पर स्‍थानीय समिति में वो चला जाए, स्‍थानीय समिति हम वहां बनाने वाले हैं और उनकी रिकमण्‍डेशन पर उनको मुआवजा दिया जायेगा, उनको मदद कर दी जायेगी। स्‍टेट का मैं आपको यहां बताना चाहूंगी कि करीबन 100 करोड़ से ज्‍यादा पैसा हम लोग एडीशनली दे रहे हैं सी.आर.एफ. का ...(व्‍यवधान)... सी.आर.एफ. के 70 करोड़ और एडीशनल 100 करोड़ से ज्‍यादा पैसे हम उसमें लगाने जा रहे हैं। यह पहली बार ऐसा हुआ है। क्‍योंकि टोटल अफेक्‍टेड एरिया जो है और जो टोटल अफेक्‍टेड किसान हैं वो तीन लाख हैं, जो टोटल अफेक्‍टेड एरिया है वो करीबन 2.86 लाख हैक्‍टेयर है।

मैं यह भी बताना चाहूंगी आपको कि 27 और 28 फरवरी को, 24 और 25, 25 फरवरी को, 11 से 14 मार्च को औरे फिर अब 21 मार्च को कामां के अन्‍दर यह ओलावृष्टि हुई है। हमने पहला आर्डर तो 24, 25 तक दे ही दिया था जिसके अन्‍दर दो महीने के बिजली के बिल हमने माफ कर दिये थे, अब हमारा यह सैकण्ड आर्डर निकलने जा रहा है जिस को आप समझिये 13 तारीख, 13 तारीख से लेकर आज 23 है, 10 दिन के अन्‍दर हम लोगों ने नया पैकेज हमारा घोषित किया है। मैं समझती हूं कि It is extraordinary.

और इसमें मैं यह भी कहना चाहूंगी कि यह जो सी.आर.एफ. नोर्म्‍स है पर हैक्‍टेयर के हिसाब से होता है तो जो भी हम अनाउंसमेंट अभी कर रहे हैं वो भी पर हैक्‍टेयर के हिसाब से हम लोग करने जा रहे हैं।

मैं समझती हूं कि यह जो पैकेज, जिसकी घोषणा मैंने आपके सामने रखी है, कोई क्‍लरिफिकेशंस हैं तो माननीय रिलीफ मंत्री यहां उपस्थित हैं, वो आप लोगों को पूरी ही डिटेल्‍स दे सकते हैं।

मैं समझती हूं कि इसमें कोई कोताही नहीं बरती जायेगी और इस पैकेज से आपके ध्‍यान में यह बात आ रही होगी कि किसानों के लिए कोई कमी नहीं बरतेगी। यह सरकार का पैसा नहीं है यह जनता का पैसा है ओर आप लोग जो पहले किया करते थे, कहा करते थे कि हमारा खजाना खाली है, खजाना खाली है और आप लोगों ने यह बारबार कहा परन्‍तु हमारे हिसाब से हमने कभी नहीं कहा है और जब भी पैसे की जरूरत है, चाहे दिल्‍ली की सरकार ने हम को दिया है या नहीं दिया है, हमने फिर भी चला कर के हमारे किसानों को दिया है, हमारी गरीब जनता को दिया है और देते रहेंगे। धन्‍यवाद।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब तो आपकी तरफ से धन्‍यवाद होना चाहिए। ...(व्‍यवधान)... माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आसन की तरफ से धन्‍यवाद देना चाहिए और मैं समझता हूं प्रतिपक्ष के नेता, आप भी खड़े होकर के कहो, ऐसा पैकेज जो मुख्‍यमंत्रीजी ने घोषणा की है उसके लिए आपको धन्‍यवाद देना चाहिए। अब तो धन्‍यवाद दे दो, अब तो आभर व्‍यक्‍त कर दो। ...(व्‍यवधान)...

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: अब क्‍या रह गया बाकी?

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी):  क्‍या हो गया? ...(व्‍यवधान)... मैं प्रश्‍न पूछना चाहता हूं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मुख्‍य मंत्रीजी से जानना चाहता हूं कि ओलावृष्टि से जो नुकसान हुआ है तो आप मुआवजा देंगे तो हमारे पश्चिमी राजस्‍थान में ईसबगोल और जीरा में फसल को नुकसान ...(व्‍यवधान)...  से भी हो जाता है, बिना ओलावृष्टि के भी ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: बैठो। क्‍या है, स्‍टेटमेंट दे दिया, क्‍या चाहते हो अब?

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निर्दलियों की तरफ से सरकार को बहुत-बहुत बधाई देना चाहता हूं और मैं ईश्‍वर से यह कामना करता हूं कि यह सरकार दिन प्रतिदिन बढ़ती जाए और तरक्‍की करती जाए। ...(व्‍यवधान)...

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): मैं यही तो पूछना चाहता हूं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोई कमाल नहीं किया। हरियाणा में तो 5000 रुपये हैक्‍टेयर‍दिया है, आपने 4000 रुपये देकर क्‍या कमला कर दिया? हरियाणा में 5000 रुपये एकड़ दिया है। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: सदन की नेता खड़ी हैं ...(व्‍यवधान)... सदन की नेता खड़ी हैं, आपको यह भी ध्‍यान नहीं है।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसमें एक ओर क्‍लेरिफिकेशन करना चाहूंगी। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे मालूम था कि सबसे पहले, चूंकि इनके पास कुछ कहने को नहीं है, सबसे पहले यह कहने वाले हैं कि हरियाणा के अन्‍दर क्‍या होने जा रहा है। हरियाणा के अन्‍दर कभी अकाल नहीं होता है, बहुत कम ओलावृष्टि होती है और हरियाणा इतना छोटासा स्‍टेट है, राजस्‍थान एक लम्‍बा-चौड़ा छेत्र है, पाँच करोड़ जनता है और हमेशा अकाल के अन्‍दर जूझता रहता है। कोई हमारे जो नोर्म्‍स हैं उन नोर्म्‍स के अन्‍दर हम लोग रहने की कोशिश करते हैं और हमारे जितने सीमित संसाधन हैं उसको हम पूरी तरह से अपनी जनता के बीच में बांटते हैं।

मैं समझती हूं कि इसके ऊपर और कुछ बहस करने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि माननीय सदस्‍य ने और इनकी सरकार ने कभी भी ऐसा पैकेज आज तक दिया नहीं है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): इन्‍होंने कभी दिया है क्‍या। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय। हेमाराम जी, एक मिनट। ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं ...(व्‍यवधान)... आप बोलो।

श्री अध्‍यक्ष: देखिये, मुख्‍य मंत्री जी ने स्‍टेटमेंट दे दिया, अब आप क्‍या चाहते हो? अब क्‍या बोलोगे?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपने पूछना अलाऊ किया है।

एक माननीय सदस्‍य: प्रतिपक्ष के नेता को सुनिये।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍य मंत्री जी ने स्‍टेटमेंट दे दिया, राज्‍य की ओर से क्‍या चाहते थे यह बता दिया। पाँच साल में केवल डेढ़ करोड़ रुपया दिया और 170 करोड़ का आज एक साथ दे दिया, इसके बाद क्‍या जानकारी बच गयी?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय शिक्षा मंत्रीजी, नेता प्रतिपक्ष बोल रहे हैं और आप खड़े हो गये।

 

Ars/usc/1540/2n/23032007/1

 

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय शिक्षा मंत्री जी, आपका तो पूरा जीवन जो कुछ मिल गया है उससे संतोष करने का रहा है पूरा जीवन ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, नहीं पूरा बिल्‍कुल पूरा संतोष करें आप ...(व्‍यवधान) मैंने सोचा आप धन्‍यवाद देने खड़े हुए हो ...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): अब काहे का धन्‍यवाद इसमें?

श्री अध्‍यक्ष: मैंने तो यही सोचा कि आप धन्‍यवाद देने खड़े हुए हो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): किसी को मार मार कर उसकी जय जयकार करवाना चाहते हो तो वह बात दूसरी है लेकिन मुख्‍यमंत्री महोदय ने जिस वातावरण में हमारे से यह बात की थी उस वक्‍त भी आपको थोड़ी सी तकलीफ हुई थी। मैंने कहा मुख्‍यमंत्री महोदय, हमने आपके ऊपर दबाव बनाया है ...(व्‍यवधान) और आपका ध्‍यान आकृष्‍ट किया ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह राजस्‍थान के किसान का दबाव है मुख्‍यमंत्री जी पर, राजस्‍थान की जनता का दबाव है, आपका कोई दबाव नहीं है ।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय नेता प्रतिपक्ष, मुख्‍यमंत्री तो उस पीडि़त किसान के दबाव में आयी हैं बाकी किसी के दबाव में नहीं आयी हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): किसान के घर से आयी हैं किसान हैं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप बैठ जाएं, विराजो आप। अध्‍यक्ष महोदय, आपने कह दिया फिर क्‍या मतलब है। आप हमारी भावना व्‍यक्‍त करोगे ? हमारी भावना भी आप व्‍यक्‍त करेंगे क्‍या ?

श्री अध्‍यक्ष: बोलो, बोलो।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): नहीं, तो यह अजीब है हमारा कोई लीडर बोले तो भी आप भावना व्‍यक्‍त करेंगे। *** हमारा लीडर ही बोलेगा हमारी भावना को।

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (उप मुख्‍य सचेतक): आपके लीडर बोल रहे हैं, अब तो आपके लीडर ही बोल रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपके दबाव में आयी.... ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, हमारे दो माननीय सदस्‍य यहां आपके सामने आमरण अनशन पर बैठे थे, मैंने तो उनको राय दी कि मत करो फिर भी वह आमरण अनशन पर बैठ गये और मैं कहता हूं कि अगर आप पैकेज नहीं मानते ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप सुनिये तो सही, आप सुनिये इनको।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हमने जो पैकेज आपको सुझाया था वह नहीं मानतीं आप तो निश्चित रूप से उनमें से एक तो निपट जाता ।

श्री अध्‍यक्ष: मर जाता ? ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यही नहीं हमारे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्‍यक्ष बैठना चाहते थे। मैंने कहा तू मर जाएगा पण्डि़त तो उसने कहा रामनारायण जी, मुझे मरने का दुःख नहीं है ...(व्‍यवधान) तो मैंने उनसे कहा कि सब कुछ आपने जिन्‍दगी का प्राप्‍त कर लिया क्‍या तो वह बोले कि नहीं, और क्‍या करेंगे, जनता के लिए मरेंगे ही । मरने की जरुरत नहीं पड़ेगी आप मत बैठना, इतना दृढ़ संकल्‍प मत करो, अभी अपना प्रेशर चल रहा है, दबाव चल रहा है, उस दबाव का असर होगा और होता है।

श्री अध्‍यक्ष: होता है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): एक बार माननीय हरिदेव जोशी चीफ मिनिस्‍टर थे और उनके मंत्रीमण्‍डल में मैं भी था तो शराबबंदी के ऊपर हमारे गोकुल भाई भट्ट ने आमरण अनशन की चेतावनी राज्‍य सरकार को दे दी थी और वह पत्र उन्‍होंने पढ़ा जोशी जी ने तो मैंने कहा कि यह डोकरा मर जाएगा।

श्री अध्‍यक्ष: आप ऐसी भाषा ही बोलते हैं ?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): क्‍या ?

श्री अध्‍यक्ष: आप यही भाषा बोले ?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): जोशी जी को मैंने कहा कि डोकरा मर जाएगा तो रास्‍ता निकाला कि कैसे मर जाएगा। मैंने कहा कि उनसे मिलो आप विनोबा भावे से तो हमने उनको विनोबा भावे के पास भेजा, विनोबा भावे ने सारी बात सुनकर उनको बताया कि यह हमारी स्‍कीम है। हम ऐसे ऐसे करना चाहते हैं, बोले यह तो ठीक है, काफी है तो फिर गोकुल भाई को बुला रखा था तो बोल भाई गोकुल भाई, बोले साहब जिन्‍दगी थोड़ी सी बची है और इस जिन्‍दगी में मेरी इच्‍छा है कि राजस्‍थान की जनता के लिए उसको अर्पित कर दूं तो बोले तुम्‍हारे पास ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, ऐसी फालतू बात नहीं करते।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): तो हमारे पास इस जीवन में ही सब कुछ करना है, अगले जीवन के लिए कुछ रखोगे कि नहीं, सब कुछ इसी जीवन के लिए करोगे तो आगे के लिए क्‍या करोगे। तो आप मान्‍यवर, हमें यह उम्‍मीद थी कि जिस दरियादिली के साथ आप राजा के घर में पैदा हुईं, राजा के घर में ही आप गयीं, जो राजा का दिल होता है वैसा आपका दिल।

श्री अध्‍यक्ष: लोकतंत्र में तो मुख्‍यमंत्री रहने दो। राजा वाजा की बात मत करो। 

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): कठोर दिल है आपका। आप हमें मार मार कर तो कैसे निकलेगा, मार मार कर थोड़े ही निकलेगा। मान्‍यवर, हमने आपको छह घंटे का बिजली का ....

श्री अध्‍यक्ष: छह घण्‍टे का चार महीने का कर दिया।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): छह महीने का आपको दिया था कि आपको छह महीने का बिल जो है माफ करना चाहिए और भी हमने दिया था। चलो आपने हमसे नहीं पूछा कुछ भी, आप पूछते तो हम आपको और कन्विंस करते लेकिन आपने पहले दिन ही कह दिया था कि हम किसी के कहने से नहीं करेंगे ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बीच में मत बोलो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हम किसी के कहने से नहीं करते हैं तो मैं तो चुप रहा क्‍योंकि आपने फर्मा दिया था कि कहने से नहीं करते हैं। चलो सुओ मोटो दे रहे हैं तो बहुत अच्‍छी बात है। आपने जो पैकेज दिया है, जो घोषणा की है, मान्‍यवर यह राजस्‍थान की जनता की आशा और अपेक्षा के अनुकूल नहीं है और बहुत कम है और आपने जो दिया है वह ऊँट के मुंह में जीरे के समान है। राजस्‍थान की जनता बहुत तादाद के अन्‍दर आहत हुई है, बहुत बड़ा नुकसान हुआ। उसकी पूर्ति आपकी इससे कुछ भी नहीं होगी। मैंने मेरे दल से मशविरा किया था।

श्री अध्‍यक्ष: इस पर तो दया करो आप।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उस मशविरे के हिसाब से हम आपके इस पैकेज को किसान के हित में पूरा नहीं मान रहे हैं। इसको संशोधित करने के लिए आप हमें आश्‍वासन दो अन्‍यथा हम आपकी बातों के विरोध में वाक आउट करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: करो तो वाक आउट।

( कांग्रेस दल द्वारा सदन में नारे )

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, केन्‍द्र सरकार को 3200 करोड़ का ज्ञापन दिया है और यहां पर सौ करोड़ रुपए की घोषणा की है, 3200 करोड़ के ज्ञापन के बदले केवल सौ करोड़ रुपये दिये हैं।

( कांग्रेस दल द्वारा सदन से बहिर्गमन )

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, साढ़े बारह हजार रुपये प्रति हेक्‍टेअर के हैं और चार हजार रुपये दिये हैं इसके लिए मैं भी इस अधूरी घोषणा के खिलाफ वाक आउट करता हूं।

( सी पी एम दल द्वारा सदन से बहिर्गमन )

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): राजस्‍थान के इतिहास में आपके कहने से राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री ने 170 करोड़ रुपया राजस्‍थान के किसानों को दिया है। पाँच साल तक लगातार राज करने के बाद इन्‍होंने किसानों का शोषण किया, एक महीने का बिजली का बिल कभी माफ नहीं किया। पहली बार राजस्‍थान के इतिहास में चार महीने का बिल बिजली का माफ हुआ है। पहली बार राजस्‍थान के इतिहास में अध्‍यक्ष महोदय, तीन साल के शासनकाल में एक पैसा किसान की बिजली का नहीं बढ़ाया और सारा का सारा पैसा राज्‍य सरकार चुका रही है। आज तक राजस्‍थान के इतिहास में किसान के हित में इतना बड़ा न किसी मुख्‍यमंत्री ने, न किसी सरकार ने किया है। इसके बाद अपनी झेंप मिटाने के लिए, अपने पापों पर पर्दा डालने के लिए और सदन की कार्यवाही में जो बाधा डाली है उससे जनता को धोखा देने के लिए कांग्रेस पार्टी ने किसान का अहित तो किया ही है प्रजातंत्र की पीठ में भी छुरा घोंपा है और किसान के साथ अत्‍याचार किया है।

मैं अध्‍यक्ष महोदय, आप साक्षी हैं इस बात के कि राजस्‍थान की जनता, बारह सौ गांवों में कितना नुकसान हुआ है तुरन्‍त सहायता दी है, हमारे राहत मंत्री बोले तुरन्‍त पहुंचा दी, आज तक सबको सहायता चली गयी और पहली बार सी आर एफ के अलावा सौ करोड़ रुपए का एक साथ प्रावधान किसान के लिए किया है। यह सारा काम कांग्रेस पार्टी का यह वाक आउट अपनी उस असफलता को छिपाने के लिए और अपनी गलतियों पर पर्दा डालने के लिए, राजस्‍थान का किसान और राजस्‍थान की जनता मुख्‍यमंत्री की इस घोषणा के पीछे हैं और हम आपको भी अध्‍यक्ष महोदय, कहना चाहेंगे, आसन ने भी, नौ बार आप आयीं, आपने भी सब राज देखे हैं, ओलावृष्टि भी देखी है, किसी भी राज ने आज तक ऐसा काम नहीं किया था जो माननीय मुख्‍य मंत्री जी ने किया है ...(व्‍यवधान) 

 

vns/usc/15.50/2o/23.3.2007/1

 

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं बता रहा हूं, क्लीयर कर रहा हूं। ... (व्‍यवधान) माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, चार या पांच स्‍कोर राजस्‍थान में ओलावृष्टि का है। जैसे ही ओलावृष्टि हुई राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री इस दुःख की घड़ी में जनता को संभालने निकलने गयीं और कुछ तो हम विधान सभा में व्‍यस्‍त थे। राजस्‍थान के सारे स्‍टेट के मिनिस्‍टर को किसान के पास भेज दिया। आपने तीन दिन की छुट्टी की थी। तीन दिन की छुट्टी में केबिनेट का प्रत्‍येक मिनिस्‍टर और हमारे माननीय सदस्‍य किसानों के खेतों तक जाकर आए हैं। उनके हालचाल पूछकर आए हैं। जैसा रिकार्ड, जितना नुकसान माननीय मुख्यमंत्री ने बताया है और जो पैकेज की घोषणा की है। मैंने अध्‍यक्ष महोदय, यह कहा था सदन में कि ऐसा पैकेज विधान सभा में आयेगा जो प्रतिपक्ष है वह निरुत्तर हो जायेगा। यह निरुत्तर होकर वाक आउट कर गया है। इन्‍होंने राजस्‍थान के किसानों के साथ सदा कुठाराघात किया है। राजस्‍थान राज्‍य में मात्र 1 करोड़ 56 लाख ओलावृष्टि का पैसा दिया है, हम अब तक 33 करोड1 दे चुके हैं और अब 100 करोड़ से ज्‍यादा का यह पैकेज आज मुख्‍यमंत्री जी ने घोषणा की है वह है। मैं पूरे सदन की और से माननीय मुख्‍यमंत्री जी का बहुत-बहुत आभार प्रदर्शन करना चाहता हूं। यह पहली बार है मुख्‍यमंत्री जी ने सदाशयता बरतते हुए कि डीजल से जो किसान खेती करते हैं उनको भी पहली बार प्राथमिकता दी है उसके लिये भी बहुत-बहुत धन्‍यवाद। यह सारा जो पैसा है 100 करोड़ से ज्‍यादा का, ब.स.पा. के यहां बैठे हैं, इ.ने.लो. के बैठे हैं, खांट साहब भी यहां पर है। इन्‍होंने भी बीच में इनके साथ आए थे, यह सारा का सारा पैसा 100 करोड़ से ज्‍यादा का भार पड़ेगा वह राज्‍य सरकार वहन करेगी सी.आर.एफ. के अलावा। सी.आर.एफ; का कई बार पत्र लिखने के बाद भी भारत सरकार ने परवाह नहीं की। एक दर्जन से ज्‍यादा पत्र लिख दिये। मुख्‍यमंत्री जी भी मिल आई। मैं भी मुख्‍यमंत्री जी के साथ जा आया लेकिन भारत सरकार ने राजस्‍थान के किसानों की चिन्‍ता नहीं की। उन्‍होंने राजनीतिक आधार पर किसानों की चिन्‍ता की। महाराष्‍ट्र, कर्नाटक, केरल और आंध्र को 70,000 करोड़ दे दिये और हमारे पास इतनी जबरदस्‍त आपदा बाड़मेर और 12 जिलों में आयी, इन्‍होंने 8 करोड़ के अलावा एक पाई यहां पर नहीं दी ... (व्‍यवधान) 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह शायद भूल गये जिन मुद्दों को लेकर इन्‍होंने जो ज्ञापन दिया था इस ज्ञापन के अन्‍दर जो कुछ इन्होंने अंकित किया था वह बात भी यह भूल गये। क्‍योंकि आदत पड़ गयी है कांग्रेस पार्टी को घड़ियाली आंसू बहाने की। आप कहो कि इनकी पहली यह मांग थी कि जिन किसानों के बिजली के कनेक्‍शन नहीं है उन्‍हें डीजल के खर्चे का उचित मुआवजा दिया जाए। भूतो न भविष्‍यति अध्‍यक्ष महोदय, पहली बार इस चीज की पीड़ा को समझकर मुख्‍यमंत्री ने मुआवजा दिया है। इनकी दूसरी मांग थी गेहूँ, चना, मेथी, सरसों, धनिया, प्‍याज, सभी सब्जियां, जीरा, ईसबगोल आदि का नुकसान जहां हुआ वहां मुआवजा दें। इनके कहने से नहीं दिया, यह राजस्‍थान के किसानों की पीड़ा समझ वह बात भी मुख्‍यमंत्री जी ने पूरी की। अध्‍यक्ष महोदय, कच्‍चे-पक्‍के मकानों की बात कही, ओलावृष्टि में राहत काम चालू करने की बात कही। इन्‍होंने जो मांग पत्र दिया था, हालांकि यह मांग पत्र चूंकि यह किसान के सच्‍चे प्रतिनिधि नहीं है। यह उनका प्रतिनिधित्‍व भी नहीं करते पर मुख्‍यमंत्री जी ने जो खुद किसान की पीड़ा को देखकर आयी हैं ओलावृष्टि होते ही तुरन्‍त ओलावृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में गयी थी। उनकी पीड़ा का दूर करने का जो काम किया है अच्‍छा रहता इनमें से कई ऐसे माननीय सदस्‍य हैं। यह गुढ़ामालानी से आने वाले माननीय सदस्‍य किसान के समर्थन में बैठे हैं। किसान के दर्द को जानते हैं ... (व्‍यवधान)  उनकी यह पीड़ा नहीं जानते। घड़ियाली आंसू बहाने का काम किया है ... (व्‍यवधान) 

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी):  आप दो मिनट बोलने का मौका तो दो ना। आप मौका ही नहीं देते हो। अध्‍यक्ष महोदय, यह किसानों की ... (व्‍यवधान) आप दो मिनट मेरे को मौका दे दो, मैं कोई गालियां तो निकाल नहीं रहा। मैं कोई सुझाव दे दूं उससे क्‍या पहाड़ तो नहीं आ जायेगा। अध्‍यक्ष महोदय, मैं दो मिनट में ... (व्‍यवधान) 

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, दो मिनट के लिये निवेदन करता हूं ... (व्‍यवधान) 

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर):  अध्‍यक्ष महोदय, केन्‍द्रीय सरकार को ज्ञापन देओ 3200 करोड़ का और यहां चर्चा करो 100 करोड़ की। उसमें वाहवाही लूटना चाहते हो। आपने केन्‍द्र सरकार को 3200 करोड़ रुपये का ज्ञापन दिया है और 100 करोड़ रुपये दे रहे हो आप यहां पर और उसमें वाहवाही लूटना चाहते हो ... (व्‍यवधान) 

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): ईसबगोल, जीरे को जो नुकसान हुआ है बरसात से। ओलों से नहीं, बरसात से जो ईसबगोल और जीरा पूरी तरह से समाप्‍त हो गया है उनको आप मुआवजा देंगे कि नहीं देंगे ? मैं एक आपसे निवेदन कर रहा हूं कि बिना ओलों के खाली बारिश से जीरा और ईसबगोल पूरी तरह हंडरेड परसेंट खराब हो चुका है उनको आप मुआवजा देंगे कि नहीं देंगे। यह बात आप बता सके हो और मैं नहीं पूछ रहा ... (व्‍यवधान) 

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आप आसन पर बैठ जाओ ... (व्‍यवधान) मुरारी लालजी आपके यहां ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): गुढ़ामालानी से आने वाले माननीय सदस्‍य यह बात कह रहे हैं ... (व्‍यवधान) 

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): गले उतरे तो आप देओ, नहीं गले उतरे तो कोई बात नहीं ... (व्‍यवधान) 

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): क्‍या यह सही है कि आपने 3200 करोड़ रुपये का ज्ञापन दिया है। केन्‍द्र सरकार को 3200 करोड़ के नुकसान का ज्ञापन दिया है और यहां 100 करोड़ रुपये की घोषणा करके वाहवाही लूटना चाहते हैं। केन्‍द्र सरकार को 3200 ... (व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): ओलावृष्टि का बहाना बता करके उनको कोई मुआवजा नहीं दिया जायेगा यह मेरा सरकार पर आरोप है। सरकार इस बारे में स्‍पष्‍ट करे कि बरसात से जीरा और ईसबगोल की जो फसल नष्‍ट हुई है उसको आप मुआवजा देंगे कि नहीं देंगे ? ... (व्‍यवधान) 

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई):माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  क्षेत्र का दौरा हुआ। माननीय मंत्रीजी ने क्षेत्र का दौरा किया ... (व्‍यवधान) वहां की जो हालत थी वह दयनीय थी और सब किसान यह सोच रहे थे कि सरकार क्‍या मुआवजा देगी। पहले उन्‍हें मिलते थे डेढ़ सौ से दो सौ रुपये, तो मैं यह कहना चाहूंगा कि जो इस बार घोषणा की है माननीय मंत्री महोदय ने, माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय ने उसके लिये तो वह धन्‍यवाद के पात्र हैं। साथ ही एक मांग और करूंगा कि‍जिस क्षेत्र में पूरे ब्‍लाक में मेरे बांदीकुई विधान सभा क्षेत्र के पूरे ब्‍लाक में 212 गांवों में ओलावृष्टि हुई, वहां अकाल राहत के कार्य कृपा करके खोले जाएं ताकि लोगों को रोजगार मिल सके।

(     बजे)

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आपके इलाके में ही नहीं राजस्‍थान भर में पचास परसेंट से ऊपर जहां भी ओलावृष्टि से खराबा हुआ है सभी जगह अकाल राहत काम खोल दिये जायेंगे।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट के लिये ... (व्‍यवधान) 

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप जानते हैं कि ईसबगोल, जीरे के लिये ओलावृष्टि की जरूरत नहीं है बिना ओलों के भी ईसबगोल और जीरा मामूली बारिश से बिलकुल खराब, सौ प्रतिशत खराब है। हंडरेड परसेंट खराबा हो चुका है ईसबगोल और जीरे का। ओलों से नहीं खाली बारिश से आप उसको मुआवजा देंगे ? आप बार-बार ओलावृष्टि ओलों का नाम ले रहे हैं और हमारे वहां पर ओलों की जरूरत नहीं है। बिना ओलों के मामूली बूँदाबाँदी से ही ईसबगोल और जीरे की फसल सौ परसेंट से ज्‍यादा खराबा हो गया है उसको आप मुआवजा देंगे कि नहीं देंगे ? ... (व्‍यवधान) 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण कीजिये ... (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, दो मिनट के लिए ... (व्‍यवधान) 

श्री उपाध्‍यक्ष: आपको मौका देंगे। आप स्‍थान ग्रहण कीजिये।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): इनके बाद मेरे को ... (व्‍यवधान) 

श्री जीतराम (मालपुरा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान प्रदेश के ... (व्‍यवधान) 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह बहस का सब्‍जेक्‍ट नहीं है ... (व्‍यवधान) 

श्री जीतराम (मालपुरा): ओन्‍ली एक मिनट मेरी बात कहूंगा ... (व्‍यवधान) 

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, खुद मुख्‍यमंत्री जी ने यह कहा था कि आपको कोई सवाल पूछने हों तो आपदा प्रबंधन मंत्रीजी से पूछ लें तो मैं आपके माध्‍यम से यह पूछ रहा हूं कि आपने केन्‍द्र सरकार को कितने करोड़ रुपये के नुकसान का ज्ञापन दिया है ? केन्‍द्र सरकार को आपने 3200 करोड़ रुपये का ज्ञापन दिया है और यहां 100 करोड़ रुपये के नुकसान की घोषणा कर रहे हो आप। आपने केन्‍द्र सरकार को कितने करोड़ रुपये के नुकसान का ज्ञापन दिया है जानना चाहता हूं आपसे ... (व्‍यवधान) 

श्री जीतराम (मालपुरा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ऐसा पैकेज दिया था ... (व्‍यवधान) 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य ... (व्‍यवधान) 

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह जवाब दे रहे हैं ना। मंत्रीजी कुछ कहेंगे तो सुन लो आप ... (व्‍यवधान) 

श्री उपाध्‍यक्ष: मेरी पहले बात सुनिये। आप स्‍थान ग्रहण कीजिये। माननीय सदस्‍य, आपसे मेरा निवेदन है आप स्‍थान ग्रहण करिये। मंत्री महोदय बोल रहे हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मंत्रीजी कुछ जवाब दे रहे हैं।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): मैं इनके सवाल का जवाब दे दूं ... (व्‍यवधान) 

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से एक बात और निवेदन कर रहा हूं कि मुख्‍यमंत्री जी ने बहुत घोषणाएँ की, बहुत अच्‍छी बात है। बहुत-बहुत आभार। मैं इनसे निवेदन कर रहा हूं कि कुम्‍हार जो बासन बर्तन बनाते हैं, ओलावृष्टि से इतना नुकसान हो गया है उनके पूरे जीवन की कमाई खतम हो गयी है इसलिये मेरा निवेदन है कि उन लोगों को भी उसमें शामिल किया जाए।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): कुम्‍हारों के बासन, बर्तन, कपड़े जो भी खतम हो गये हैं उनके लिये भी पैसे देंगे।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्री महोदय, जो अपने पारम्‍परिक तरीके से ईंट बनाते हैं, जो पारम्‍परिक तरीके से ईंट बना रहे हैं उनको नुकसान हुआ उसके बारे कोई घोषणा भी आप करें ईंटों के बारे में ... (व्‍यवधान) 

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): यह ईट सही नहीं है। बहुत भाव बढ़ा दिये ईंटों के। जरूरत नहीं है इस बात की।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): आपके यहां पर भट्टे से ईंट बनाते हैं, हमारे यहां किसान पारम्परिक तरीके से ईंट बनाता है इसके बारे में कह रहा हूं पश्चिमी राजस्‍थान के बारे में ... (व्‍यवधान) 

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, भट्ठा वालों ने कीमत बढ़ा दी तीन-तीन सौ रुपये। कोई जरूरत ही नहीं है।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): वहां बात भट्टे की नहीं है। मंत्री महोदय, जो पारम्‍परिक तरीके से किसान ईंट बनाते हैं अपने खेत में उनके बारे में मैं चाहता हूं आप कुछ भी घोषणा करें।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): मैं एक मिनट माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान) 

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): मंत्री महोदय, मैं आपसे यह जानना चाहता हूं ... (व्‍यवधान) 

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा):  आपने बहुत पूछ लिया ... (व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): कहां पूछ लिया ? एक ही बात है। एक ही सवाल चल रहा है। ओलावृष्टि से जिनका नुकसान हुआ उनको आप देंगे और बरसात से जिनका ईसबगोल और जीरे की फसल पचास परसेंट से ज्‍यादा खराबा हो गया है उनको आप मुआवजा देंगे, आप कहेंगे ओलों से नुकसान हुआ है तो देंगे बरसात से हुआ तो नहीं देंगे। एक व्‍यक्ति चाहे वह बंदूक की गोली से खतम हुआ, चाहे वह धार से खतम हुआ, चाहे वह लाठी से खतम हुआ हो, आदमी मर चुका है।

श्‍याम/अरूण    23.03.2007   16.00  2p  

 

तो मुकदमा 302 का लागू होता है इसलिए ओलों से जो वह फसल बरबाद हुई है 50 प्रतिशत से ज्‍यादा और जो बरसात हुई क्‍योंकि इसबगोल और जीरा की फसलों के लिए ओलों की जरूरत नहीं है, यह आपके मंत्री जी अमराराम जी और आपके सत्‍ता पक्ष के बहुत सदस्‍य बैठे हैं और उपाध्‍यक्ष महोदय भी इसके जानकार हैं। हमारे पश्चिमी राजस्‍थान में इसबगोल और जीरा है ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बिराजें ...(व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): बरसात से उनका नुकसान हुआ है। हमारे प्रभारी मंत्री पाली जिले में दौरा करके आये हैं ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बिराजें ...(व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): प्रभारी मंत्री ने स्‍वयं ने इसको देखा है ...(व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): उनको देंगे कि नहीं देंगे यह क्लियर करें ...(व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): मेरे साथ ही मिल गया ...(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): एक मिनट सुन लें ...(व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): एक मिनट सुन लें, मेरे भाई ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, मेरा आपसे आग्रह है ...(व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): उपाध्‍यक्ष महोदय, इसके साथ में एक साल का जवाब और दें आप ...(व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): उपाध्‍यक्ष महोदय, आसन की व्‍यवस्‍था में हम जितनी आपकी पालना करते हैं और भी माननीय सदस्‍य हैं, लेकिन हम आपकी परंपराएं और नियमों और सदन की जो व्‍यवस्‍था बनी हुई उस पर चलते हैं ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): धन्‍यवाद दे देना, आप एक साल का जवाब तो आ जाने दें पहले ...(व्‍यवधान)

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, पाँच बार यह अनुशासन के हिसाब से हमेशा बैठते रहे हैं। हमेशा बैठते रहे हैं, इनको दबाना थोड़े ही चाहिए ...(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): एक मिनट सुन लें ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य बिराजें ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह है ना मेरा ...(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): इसके बाद में मेरा ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इनकी बात सुनें आप ...(व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): मैं एक सवाल पूछ लूंगा ...(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): सवाल बाद में पूछ लेना ...(व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): यह तो तारीफ करेंगे और क्‍या करेंगे ...(व्‍यवधान) जीतू भाई, जीतू भाई ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बीच में नहीं ...(व्‍यवधान) वह बोल रहे हैं आप बैठें ...(व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से राजस्‍थान सरकार ने ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: उसमें क्‍या तकलीफ है ...(व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): किसान, मजदूर को ...(व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): हम यह पूछना चाह रहे थे कि चार महिने की बिजली माफ कौनसी की है, कौनसे चार महिने थे वह ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह कह देंगे ...(व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): यह तो क्लियरिफिकेशन होने दें ...(व्‍यवधान) वह चार महिने कौनसे थे ...(व्‍यवधान) आगे आने वाले होंगे, पीछे वाले होंगे ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: इनकी भावना से आपको कोई ...(व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): आप काश्‍तकार नहीं हो ...(व्‍यवधान) चार महिने के बिजली के बिल माफ किये हैं वह चार महिने कौनसे थे ...(व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान सरकार ने पीडि़त किसानों की जो तकलीफ को सुना है, दर्द को सुना है और पीडि़त किसान ...(व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): आगे आने वाले चार महिने में, पीछे वाले चार महिने में ...(व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): स्‍वागत करता हूं, धन्‍यवाद देता हूं ...(व्‍यवधान) लेकिन साथ में मैं यह कहना चाहूंगा कि 45 साल तक घडि़याली आसूं दिखाकर के गरीबों के साथ में ...(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): इनको जवाब देने की जरूरत नहीं है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): समस्‍या तो है नहीं धन्‍यवाद देना ...(व्‍यवधान) उपाध्‍यक्ष महोदय, हमने तो स्‍पेशिफिक सवाल यह पूछा है कि एक तरफ तो सरकार यह मान रही है कि 3200 करोड़ रूपये का नुकसान हुआ है और केन्‍द्र सरकार को मेमोरेंडम दे रही है वह 3200 करोड़ का दे रही है और दूसरी तरफ 100 करोड़ रूपये ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आप नहीं बोलें माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य एक सदस्‍य बोल रहे हैं बीच में मत बोलें आप।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): उसमें कितने करोड़ रूपये आपने मांगे हैं, कितने का नुकसान आपने माना है वह तो आप बतायें सदन को ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय माहिर साहब, आप बिराजें ...(व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): 43 साल तो ...(व्‍यवधान) मैं एक ही बात कहना चाहूंगा ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप बिराजें ...(व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): राजस्‍थान में ओलावृष्टि में 3200 करोड़ का नुकसान हुआ है।

श्री उपाध्‍यक्ष: सुनना नहीं चाहते हैं कोई ...(व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): 3200 करोड़ का नुकसान बताया है राजस्‍थान सरकार ने और 100 करोड़ रूपये देकर के बात कर रहे हैं ...(व्‍यवधान) 3200 करोड़ की रिपोर्ट भेजी है ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आप बीच में क्‍यों बोल रहे हैं। नहीं, आप बीच में नहीं बोलें। आप स्‍थान ग्रहण कीजिये ...(व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): केन्‍द्र सरकार ने 3200 करोड़ रूपये की रिपोर्ट भेजी है और अब 100 करोड़ की बात कर रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: मैंने जब परमिशन दी है ...(व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, आप बिना परमिशन के बोल रहे हैं, अंकित नहीं हो ...(व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़):  000

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): आपको अगर इतना दर्द है तो दिल्‍ली की सरकार जो बी.पी.एल. के अंदर ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): 000

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): 000

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): मामा बालेश्‍वर दयाल ने कभी ...(व्‍यवधान) कोई समझौता नहीं किया, मामा बालेश्‍वर दयाल ने कभी कांग्रेस के साथ में समझौता नहीं किया ...(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): 000

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): 000

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: अंकित मत कीजिये ...(व्‍यवधान) माननीय माहिर साहब बिराजें ...(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, समाप्‍त कीजिये ...(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: आ गयी ना बात आपकी। आप स्‍थान ग्रहण कीजिये ...(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बिराजें, माननीय सदस्‍य हेमाराम जी आप स्‍थान ग्रहण करिये ...(व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): 000

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): 000

 

jyg/akt/23.3.7/16.10/2q

 

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): 000 ...(व्‍यवधान)...

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, पहले स्‍थान ग्रहण कीजिए। मेरा आपसे निवेदन है कि माननीय मुख्‍य मंत्रीजी और अकाल राहत मंत्रीजी की तरफ से जो पैकेज घोषित किया गया है उसके लिए आइन्‍दा कोई मौका, 3 तारीख को अकाल राहत पर फिर बहस होगी, किसी सदस्‍य को कोई बात कहनी होगी तो कह देना, अभी इसके ऊपर में चर्चा अलाऊ नहीं करूंगा और अनुदान की मांगों पर चर्चा शुरू हो गई है। नरेन्‍द्र नागर।  ...(व्‍यवधान)... कोई प्रश्‍न नहीं, कुछ नहीं होगा। कोई प्रश्‍न नहीं होगा।

डा. किरोड़ी लाल (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जमवारामगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य ने पूछा था कि बिजली के कौन-कौनसे बिल माफ किए, मई, जून के नहीं कर रहे हैं, नवम्‍बर, दिसम्‍बर, जनवरी और फरवरी के किए हैं, बजाओ ताली।

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): 000

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000

डा. किरोड़ी लाल (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): देसूरी से आने वाले माननीय सदस्‍य ने यह पूछा कि बिजली गिरने से अगर कोई मर जाए तो कितना देंगे, मृतक के परिवार को पचास हजार रुपए। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: वह पहले से है।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): 000

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): उसके अतिरिक्‍त कोई व्‍यक्ति गम्‍भीर घायल हो जाए, पशु मर जाए... ...(व्‍यवधान)..।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: व्‍यक्तिगत मामले बाद में होंगे। अभी आज आपका आने वाला नहीं है। हर कोई व्‍यक्ति का इण्डिजुअल केस का तय होगा क्‍या? किसी आदमी ने एकदम से तय नहीं होगा, हालात को देखते हुए किया जाएगा।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: क्‍या आज ही कर देंगे क्‍या फैसला? इसका पहले असेसमेंट होगा।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, पहले मंत्रीजी कह रहे हैं उनका जवाब सुनो। ...(व्‍यवधान)... माननीय सदस्‍य, पहले मंत्रीजी की बात सुनो। ...(व्‍यवधान)...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): इस ओलावृष्टि में पशुधन भी मरा है, दो या दो से ज्‍यादा पशु मरने पर दस हजार एस सी, एस टी के लिए है और अन्‍य वर्गों के लिए साढ़े सात हजार, ...(व्‍यवधान)... एक के लिए पाँच हजार। यदि कोई मृतक है तो उसके परिवार को पचास हजार रुपए, उसका मकान ध्‍वस्‍त हो जाए तो दस हजार और पूरी तरह से कच्‍चा मकान ध्‍वस्‍त हो जाए तो छह हजार।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माहिर आजादजी ने पूछा है कि आपने कितने का ज्ञापन दिया? हमने बाढ़ में ज्ञापन दिया था 32 सौ करोड़ रुपए का। उस मौके पर देखने के लिए सब आए, सोनियाजी भी आई, प्रणव मुखर्जी भी आए, उनके ज्‍यादा नाम गिनाने की जरूरत नहीं है और आकर सबने आश्‍वासन दे दिया, आश्‍वासन‍के बाद सौ करोड़ रुपए अभी मिले हैं, वह भी इस कण्‍डीशन के साथ कि अगली बार बाढ़ आवे तो काम में लेना है। ...(व्‍यवधान)... यह पैसा भारत सरकार ने दिया है, भारत सरकार ने यह कण्‍डीशन लगा दी कि अगली बार काम में लेना है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिए। आप उनसे पूछ लेना।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): 000

श्री नन्‍दलाल पूनिया (सादुलपुर): 000

 

अनुदान की मांगों पर अग्रेत्‍तर विचार

श्री उपाध्‍यक्ष: अनुदान की मांगों पर चर्चा शुरू हो रही है। श्री नरेन्‍द्र नागर। ...(व्‍यवधान)... श्री प्रभुलाल वर्मा।

श्री नरेन्‍द्र नागर (खानपुर): मैं बोल रहा हूं साहब, मैं खड़ा हुआ हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अभी कोई अंकित नहीं होगा, न कोई जवाब होगा। श्री नरेन्‍द्र नागर।

श्री नरेन्‍द्र नागर (खानपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज इस सदन में मांग संख्‍या 27 पेयजल, मांग संख्‍या 46 सिंचाई पर चर्चा चल रही है। इस चर्चा में अपने आप को सम्मिलित करते हुए मैं माननीय मुख्‍य मंत्रीजी और माननीय सिंचाई मंत्रीजी का आभार व्‍यक्‍त करते हुए उनको धन्‍यवाद देता हूं कि आपने गत वर्ष जल चेतना यात्रा चला कर पूरे राजस्‍थान की जनता को बहुत बड़ा फायदा दिया है जिससे बहुत बड़ा लाभ मिला है। इसका एक उदाहरण मैं प्रस्‍तुत कर रहा हूं। झालावाड़ जिले में जल चेतना यात्रा में सम विकास की राशि से किसानों को कुओं के जल पुनर्भरण के लिए 2700 रुपए प्रति कुए के हिसाब से छूट राशि दी गई उससे पूरे झालावाड़ जिले के किसानों को फायदा मिला और कुओं में जल पुनर्भरण हुआ जिससे वाटर लेवल में वृद्धि हुई है। साथ ही मैं माननीय सिंचाई मंत्री महोदय को धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि राजस्‍थान में यह पहली ऐसी सरकार है जिसने किसानों के लिए ध्‍यान दिया है। झालावाड़ राजस्‍थान में चेरापूंजी के नाम से जाना जाता है और बरसात का पानी हमेशा झालावाड़ जिले से बहकर निकल जाता है। पहली बार माननीय मुख्‍य मंत्रीजी और माननीय सिंचाई मंत्रीजी ने परवन प्रोजेक्‍ट के लिए बिफोर लास्‍ट इयर बजट में प्रोविजन किया, 650 करोड़ रुपए की कार्य योजना बनाई और उसी वित्‍तीय वर्ष में 2 करोड़ रुपए सर्वे के लिए दिया गया, सर्वे का काम लगभग पूरा हो चुका है और इस वित्‍तीय वर्ष में, इसी बजट में माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने कीर्तिमानी घोषणा की है कि परवन बाँध सिंचाई परियोजना को केन्‍द्र सरकार के पास पहुंचा दिया गया है।

 

Gpc/akt/ 23032007/1620/3a

 

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस योजना को मंजूर होने के बाद पूरे हाड़ौती का नक्‍शा बदल जाएगा। किसानों में वास्‍तव में दिनोंदिन जिस प्रकार की स्थिति बन रही है, जिस प्रकार से पानी का दोहन हो रहा है और जिस गति से पानी का स्‍तर नीचे जा रहा है इससे लगता है कि आने वाले कुछ समय बाद इस प्रकार की स्थिति हो जाएगी कि किसानों को पीने के पानी की भी दिक्‍कत आ जाएगी। वास्‍तव में मैं मानता हूं कि वृहद सिंचाई योजना में परवन डेम यदि बनता है तो खानपुर के 70 गांवों को इसका लाभ मिलेगा, साथ ही पूरे हौड़ौती को एक वरदान के रूप में यह योजना साबित होगी।

इसके साथ ही मैं माननीय सिंचाई मंत्रीजी के सामने अपनी मांग सिंचाई के लिए   रखना चाहता हूं और साथ ही कुछ एनिकट आपने बनाये उसके लिए धन्‍यवाद देना चाहता हूं। आपने पूंगाहेड़ी और गोलाणा में एनिकट बनाये इसके लिए माननीय सिंचाई मंत्रीजी आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद, बहुत-बहुत आभार। साथ ही मैं अपने एक मांग रखना चाहता हूं। आलनपुर उजा नदी में भगवानपुरा पंचायत में आता है, इसमें आप एक एनिकट का निर्माण कराएं इससे क्षेत्र की जनता को बहुत लाभ होगा।

साथ ही मांग संख्‍या 27 में आपका ध्‍यान आकर्षित कर रहा हूं, अभी नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा कि पिछली सरकार ने कुछ किया, वर्तमान सरकार ने कुछ नहीं किया। मैं मेरे विधान सभा क्षेत्र का एक प्रत्‍यक्ष उदाहरण देना चाह रहा हूं कि 1999 में खानपुर में दूषित पानी पीने से पीलिया रोग हुआ और उस पीलिया रोग से लगभग 4-5 आदमियों की मृत्‍यु हुई। पिछली सरकार ने, कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार ने किस प्रकार से क्षेत्र की जनता की सुध ली और किस प्रकार ध्‍यान दिया कि वहां पर प्रशासन पहुंचकर अतिक्रमण को तोड़ना शुरू किया। पानी से मृत्‍यु हुई है, पानी के लिए सरकार को कुछ करना चाहिए था, सरकार ने अतिक्रमण तोड़ना शुरू किया। उसके अलावा एक रुपया उस कस्‍बे को नहीं दिया और उस क्षेत्र की जनता को, उन गरीब आदमियों के मकान तुड़वा दिये जिससे क्षेत्र की जनता को और नुकसान हुआ और क्षेत्र की जनता में बहुत रोष उत्‍पन्‍न हुआ।

राजस्‍थान में भारतीय जनता पार्टी सरकार आने के बाद माननीय मुख्‍यमंत्रीजी का आभार व्‍यक्‍त करता हूं, माननीय पेयजल मंत्रीजी का आभार व्‍यक्‍त करता हूं कि आपने खानपुर कस्‍बे के लिए एक पुनर्गठित पेयजल योजना बनायी, भीमसागर 12 करोड़ की योजना बनाकर आपने खानपुर को पेयजल उपलब्‍ध करने के लिए मई, 2005 में उसका शिलान्‍याय किया। साथ ही आपने बीच में जो 10 गांव उसमें आते हैं उनको भी इसमें सम्मिलित किया। माननीय मंत्रीजी, मैं आपका ध्‍यान आकर्षित कर रहा हूं कि इस पेयजल योजना को आप तुरंत पूरा कराएं क्‍योंकि इसकी गति में बहुत व्‍यवधान है, इसकी गति बहुत कमजोर है। नवम्‍बर में यह पूरी होने वाली थी उसके बाद इसका कार्यकाल फरवरी तक बढ़ गया, पर अभी तो लगता है यह 15 मई तक पूरी हो जाएगी, पर मैं आपको विश्‍वास के साथ कहता हूं, दावे के साथ कहता हूं कि यह 15 मई तक भी यह योजना पूरी नहीं होगी। इसको आप तुरंत पूरा कराएं ताकि क्षेत्र की जनता को लाभ मिल सके।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्रीजी का आभार व्‍यक्‍त करता हूं इस योजना को चालू करने में लगभग दो साल लगे इसके लिए माननीय मत्री जी ने तुरंत व्‍यवस्‍था करके खानपुर के पास बेसार गांव पड़ता है उससे 25 लाख की योजना बनाकर तुरंत खानपुर को पानी मुहैया कराया जा रहा है, खानपुर की जनता को तुरंत रिलीफ मिल सके। जो स्थिति 1999 और 2000 में थी उससे अभी बहुत ज्‍यादा रिलीफ है।

माननीय मत्री महोदय, मैं आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाह रहा हूं कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में अकलेरा में पीएचईडी का एक उपखण्‍ड कार्यालय है और उसमें मनोहरथाना और खानपुर दोनों विधान सभा क्षेत्र एक ही उपखण्‍ड में आते हैं। वहां पर जो एईएन बैठते हैं वे इतनी सारी योजनाएं जो पूरे जिले में चल रही हैं, इस उपखण्‍ड में चल रही है उनकी देखरेख नहीं कर पाते हैं। इसी से ये योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। इसलिए आपसे निवेदन है कि एक उपखण्‍ड कार्यालय खानपुर में गठित करें जिससे उस क्षेत्र की जनता को लाभ मिल सके।

माननीय मत्री जी, आपको धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि यह पहली सरकार है जिसने अपने विधायकों से, यहां सभी माननीय विधायक पक्ष और विपक्ष के बैठे हैं आप सभी का ध्‍यान दिलाना चाहता हूं कि यह पहली सरकार है, पहले माननीय मंत्री हैं एक भी विधायक ने अपने विधायक कोष से हैण्‍ड पम्‍पों में पैसा नहीं दिया।

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): दिया है।

श्री नरेन्‍द्र नागर (खानपुर): आपने फिर हैण्‍ड पम्‍प ज्‍यादा लगाये होंगे। आवश्‍यकता के अनुसार जितनी भी क्षेत्र की जनता को आवश्‍यकता थी उनके अनुरूप माननीय मंत्रीजी ने हैण्‍ड पम्‍पों के लिए पैसा दिया है। पहली बार विधायक कोष से हमने हैण्‍ड पम्‍पों के लिए राशि नहीं देनी पड़ी, फिर भी माननीय मंत्रीजी, आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाह रहा हूं बहुत से गांवों में इस प्रकार की स्थिति है कि वहां का वाटर लेवल लगभग 250 फीट तक पहुंच गया है। अब वहां हैण्‍ड पम्‍प भी चलना संभव नहीं है। वहां हर साल एक गांव में 5-5 हैण्‍ड पम्‍प आप लगाते हो और एक हैण्‍ड पम्‍प लगभग 50 हजार रुपये के आसपास पड़ता है और 2.5 लाख रुपया उस गांव में खर्च कर रहे हो। 2.5 लाख की एवज में आप या तो वहां सिंगल फेस मोटर लगाएं ताकि वह कंटीन्‍यू वहां चलती रहे और जिन लोगों को पानी निकालने में परेशानी आये उससे गांव की जनता को उन गरीब महिलाओं को लाभ मिल सके और पानी अच्‍छी तरह से मुहैया हो सके।

उपाध्‍यक्ष महोदय, छोटे-छोटे गांवों में, मैं मानता हूं कि 1500 की आबादी वाले सारे गांवों को आपको पेयजल की योजना से जोड़ना चाहिए, पनघट की योजना से जोड़ना चाहिए ताकि उसका लाभ मिल सके। मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं मेरे यहां बड़गाल्‍या गांव है, उस गांव की योजना लंबित है। उसकी संख्‍या कम है, बड़गाल्‍या गांव में पिछले तीन साल से हम प्रयास कर रहे हैं, पर प्रयास करने के बावजूद कितने ही बोरिंग वहां करवा लिये, पर वहां पानी उपलब्‍ध नहीं हुआ। स्‍वजलधारा के रूप में वहां पर स्‍वीकृति हुई, पर उसका भी उपयोग नहीं हुआ, उसमें ट्यूबवैल में पानी नहीं निकला। वह योजना भी फेल हो गई। हमने योजना बनाकर आपके कार्यालय में भेजी है। मैं मानता हूं कम संख्‍या के चक्‍कर में वह कहीं अधूरी न रह जाए। माननीय मंत्रीजी, आपसे निवेदन कर रहा हूं कि उस योजना को आप स्‍वीकृति देंगे। मेरे विधान सभा क्षेत्र में केवल एक ही ऐसा गांव है बड़गाल्‍या जिसमें पानी की दिक्‍कत है वरना तो पीने के पानी की दिक्‍कत नहीं है और पूरे क्षेत्र में एक भी टैंकर नहीं चलता है। साथ ही एक खुशी की बात है कि पूरे क्षेत्र में एक भी टैंकर आपको नहीं चलाना पड़ता है तो कहीं एक टैंकर चलाकर कहीं इस प्रकार का नाम न हो जाए।

मैं माननीय मंत्रीजी को धन्‍यवाद देता हूं कि अकलेरा नगर में भी आपकी योजना चल रही है वह भी इसी साल पूरी हो जाएगी उससे भी अकलेरा की जनता को लाभ मिलेगा। आपने पिछले सालों की तुलना में तीन साल में जो काम किये हैं वास्‍तव में मैं पूरे क्षेत्र की जनता की तरफ से आपका बहुत-बहुत आभार व्‍यक्‍त करता हूं, धन्‍यवाद देता हूं। माननीय उपाध्‍यक्ष जी, आपका भी आभार व्‍यक्‍त करता हूं, धन्‍यवाद देता हूं आज बीच में आपने एक बार भी घण्‍टी नहीं बजायी। बहुत-बहुत धन्‍यवाद, आभार, जयहिन्‍द।

श्री उपाध्‍यक्ष:  श्री प्रभुलाल वर्मा।

श्री प्रभुलाल वर्मा (पीपल्‍दा): उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा माननीय सदस्‍यों से निवेदन है कि पहली बार चुनकर आया हूं, कृपया मुझे डिस्‍टर्ब न करें तो आपकी बड़ी कृपा होगी। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मांग संख्‍या 27 व 46 पर आज चर्चा हो रही है। पक्ष और विपक्ष मिलकर वाद-विवाद कर रहे हैं। किसी भी देश या राज्‍य को सर्वांगीण विकास की तरफ बढ़ाने के लिए पानी, बिजली, सड़क और शिक्षा की अहम भूमिका होती है।

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/23032007/1630/3b

 

इसमें पानी भी है, महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता, हमें सोचना चाहिए, हमें चिंता करनी चाहिए कि पानी दिनों दिन घटता जा रहा है, पानी का वाटर लेवल नीचे डाउन होता जा रहा है। यह एक आदमी का विषय नहीं है, पूरे हिन्‍दुस्‍तान का विषय है, सब की चिंता का विषय है लेकिन हमारी सरकार तो चिंता कर ही है, पूर्ववर्ती सरकार जो पिछले 40-45 साल से राज करती आ रही है इस पर कभी विचार नहीं किया गया। बड़े शर्म की बात है, मैं आंकड़ों के माध्‍यम से भी बता सकता हूं कि इतना महत्‍वपूर्ण जल जिसके जरिए आज हम जिंदा हैं, आज ये बता रहे थे, यह किया, वह किया, यह नहीं किया, मैं आंकड़ों के माध्‍यम से यह बताना चाहता हूं कि इन्‍होंने पिछले वर्षों में क्‍या किया, पेयजल योजना पर राज्‍य मद में कुल व्‍यय इन्‍होंने 5 साल में 1343 करोड़ रुपये खर्च किये हैं और हमारी सरकार ने माननीय मुख्‍य मंत्री की दया से माननीय मुख्‍य मंत्री के उच्‍च सोचे से, माननीय सिंचाई मंत्री जी के आशीर्वाद से 1129

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): दया नहीं है।

श्री प्रभुलाल वर्मा (पीपल्‍दा): वे दयावान हैं, गरीबों पर दया करती हैं, गरीबी की रेखा से नीचे बैठे आदमी की परवाह करती हैं, ऊपर वाले को कम देखती हैं। शहरी क्षेत्र की योजनाओं पर औसतन प्रति वर्ष व्‍यय इन्‍होंने 3 साल में खर्च किया 126 करोड़ रुपये, हमारी सरकार ने तीन साल में 161 करोड़ रुपये, ग्रामीण क्षेत्र की पेयजल योजनाओं पर औसतन प्रति वर्ष पांच साल में इन्‍होंने खर्च किये 142 करोड़ रुपये, हमारी सरकार ने 228 करोड़ रुपये। मैं आगे भी और बता रहा हूं, सुनने की क्षमता रखिए। समग्र मद पेयजल पर सभी मदों में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में व्‍यय किया इन्‍होंने पांच साल में 2497 करोड़ रुपये, तीन साल में सरकार ने अभी तक तीन साल पूरे हुए हैं, 21602005 करोड़ रुपये खर्च किये हैं, पेयजल पर औसतन प्रति वर्ष तीन साल में 449 करोड़, पांच साल में इन्‍होंने खर्च किये, हमारी सरकार ने तीन साल में 745 करोड़ रुपये खर्च किये। इसी तरह से हैण्‍डपम्‍प के मामले में भी हमने दूर दृष्टि रखी है। जहां हैण्‍डपम्‍प नहीं थे, तुरन्‍त हैण्‍डपम्‍प लगाये गये। माननीय मंत्री महोदय मैं चाहता हूं कि जितने भी हैण्‍डपम्‍प मांगे तुरन्‍त उसी टाइम दिये, ट्यूबवैल में भी किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई और जगह जगह हमने हैण्‍डपम्‍प पेयजल योजनाएं, सारी योजनाएं स्‍वीकृत करके चालू भी की हैं। आज मैं नवीन योजनाओं के बारे में भी आपको बताना चाह रहा हूं। फ्लोराइडयुक्‍त गांवों में 5 साल में इन्‍होंने एक भी योजना स्‍वीकृत नहीं की है। हमारी सरकार ने आते ही 1443 जगह पर फ्लोराइडयुक्‍त ट्यूबवैल लगाये हैं। माननीय मंत्री महोदय, मैं आपको धन्‍यवाद देन चाहता हूं कि आपने उच्‍च सोच के साथ ईमानदारी से गरीब को गणेश माना कर सारी जनता का ध्‍यान रखाते हुए काम किया है, किसी भी राज्‍य को विकास के आगे बढ़ाने के लिए चिंता करनी चाहिए कि पानी की रोकथाम कैसे हो, पानी का वाटर लेवल ऊपर कैसे आए। इसके लिए हमारी सरकार ने पूरा पूरा ध्‍यान दिया है। इसके लिए एनीकट का निर्माण करवाना अत्‍यन्‍त जरूरी है। एनीकट के निर्माण होने से वाटर लेवल ऊपर आएगा, पानी की सतन ऊपर आएगी तो हमारे जो हैण्‍डपम्‍प बंद पड़े हैं, कुए जो सूख चुके हैं, उनमें भी पानी आएगा। मेरा सुझाव है, मेरे विधान सभा क्षेत्र में तीन नदियां बहती हैं, काली सिंध, परवल और चम्‍बल, तीनों नदियों का पानी बह कर के चला जाता है। अगर इन तीनों नदियों पर जगह जगह पर एनीकट बना दिये जाते हैं तो मैं समझता हूं कि पानी की सतह तो ऊपर आएगी ही आएगी, उन किसानों को भी फायदा होगा, सिंचाई भी कर सकेंगे, पेयजल में भी काम आएगा और ज्‍यादा से ज्‍यादा हमारे किसान को भी मिलेगा। मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा माननीय मुख्‍य मंत्री जी को, सिंचाई मंत्री जी को जिन्‍होंने कांग्रेस के समय में 160 परियोजनाएं जो लम्बित पड़ी हुई हैं, उनकी सुध ली और चालू कराने की सोची, 5 परियोजनाएं 2003-04 हमने चालू करायी, 52 परियोजनाएं 2004.05 में चालू करवाई, 46 परियोजनाओं को 2005-06 में पूर्ण किया तथा शेष 28 परियोजनाएं जो बाकी हैं वह चल रही हैं। इसके अलावा, 29 परियोजनाओं का कार्य पूर्ण करने हेतु बजट में प्रावधान कर दिया गया है। इनकी 160 परियोजनाओं जो वर्षों से लम्बित पड़ी हुई थी, माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय ने ध्‍यान देकर माननीय सिंचाई मंत्री जी ने ध्‍यान देकर उनको पूरा करने की योजना बनाई है। पेयजल में भी हमने काफी सफलता प्राप्‍त की है। 11वीं पंचवर्षीय योजना में पेयजल पर इन्‍होंने 1931 करोड़ 84 लाख रुपये खर्च किये। इसकी तुलना में 163 परसेंट हमारे प्रयास आगे हैं। जल चेतना रैली 16 मई से जल चेतना रैली बना कर के हमने 9188 ग्राम पंचायतों के 186 से अधिक गांवों में रैली निकाली और रैली का असर क्‍या हुआ ? रैली का असर यह हुआ कि जगह जगह पर रैली निकालने से गांवों के गांव में उस गरीब जनता ने, गरीब किसान ने पानी को रोकने की चिंता की। जगह जगह अपने मेड़बंदी करना शुरू कर दिया, अपने खेत के अलावा 5 बीघा में अगर आधे बीघा का भी गड्ढ़ा कर लेते तो वह उसमें भर लेता है, आज वह सिंचाई के काम आता है और दूसरे जल संग्रहण मंत्री भी हमने बहुत कुछ काम किया है। 1 लाख 26 हजार जल संग्रहण हमने बनाये, 11951 रैली बना कर जगह जगह प्रचार प्रसार किया, 1958 हमने फिल्‍म प्रदर्शन किये, 8626 संगोष्ठियां की, 4387 नुकड़ नाटक करवाए, 3638 कला नृत्‍यों के माध्‍यम से जल चेतना को जगह जगह तक पहुंचाया और उसकी जानकारी दी। इसके लिए मैं माननीय सिंचाई मंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूं, मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूं माननीय मुख्‍य मंत्री जी को कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में वर्षों से मांग थी। मांगरोल बहुत बड़ा कस्‍बा है, पानी की कमी रहती है, हैण्‍डपम्‍पों में पानी गंदा आता है, ट्यूबवैल से भी जो पानी था वह ज्‍यादा ठीक नहीं था। मांगरोल कस्‍बे के लिए 560 लाख की पेयजल योजनाएं स्‍वीकृत करा कर वह चालू करा दी है इसलिए माननीय मुख्‍य मंत्री जी और सिंचाई मंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूं। दो परियोजनाएं हमारे गांव पीपल्‍दा के पास में ऐसे गांव हैं जो नदियों के किनारे होते हुए भी प्‍यासे रहते हैं, वहां प फ्लोराइडयुक्‍त पानी है, गर्मी के दिनों में उस पानी को पीते ही दस्‍त लग जा&