Lpm/akt/1100/1a/2232007

 

अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृतान्‍त

 

अंक 7    बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का बाईसवां दिवस      संख्‍या 15

 

गुरूवार, 22 मार्च,2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

श्री अध्‍यक्ष: श्री केसर देव बाबर।

लक्ष्‍मणगढ़ (सीकर) में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थान

211. श्री केसर देव बाबर: क्‍या तकनीकी शिक्षा मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) जिला सीकर में कितने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थान कब से कार्यरत हैं एवं उनमें किस किस विषय का प्रशिक्षण दिया जाता है? विवरण सदन की मेज पर रखे।

(2) क्‍या सरकार सीकर जिले में नये औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थान स्‍थपित करने का विचार रखती है? यदि हां, तो किस-किस स्‍थान पर कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

(3) क्‍या सरकार लक्ष्‍मणगढ़ कस्‍बे में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थान स्‍थापित करने का विचार रखती है? यदि नहीं, तो क्‍यों?

राज्‍य मंत्री, तकनीकी शिक्षा(श्री वासुदेव देवनानी): (1) जिला सीकर में वर्तमान में कार्यरत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थानों की सूची परिशिष्‍ट-1 पर संलग्‍न है।

(2) जी नहीं। वित्‍तीय संसाधनों की सीमितता के कारण राज्‍य सरकार निजी क्षेत्र में आई टी आई की स्‍थापना हेतु नि:शुल्‍क जमीन देने जैसी सुविधाएं प्रदान कर रही है।

(3) जी नहीं। राज्‍य सरकार द्वारा जारी योजना के अंतर्गत ऐसे पंचायत समिति क्षेत्र जहां औद्योगिक  प्रशिक्षण संस्‍थान नहीं है वहां निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थान हेतु राज्‍य सरकार नि:शुल्‍क भूमि उपलब्‍ध करायेगी। इस योजना के अंतर्गत लक्ष्‍मणगढ़ हेतु प्रस्‍ताव का चयन कर आशय पत्र जारी किया जा चुका है तथा भूमि आवंटित की जा चुकी है।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय ने जवाब ना में दिया है, परसों तो आप आई आई टी मांग रहे थे शेखावाटी क्षेत्र में...

श्री अध्‍यक्ष: आई आई टी नहीं आई टी आई।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं यही तो कहने जा रहा हूं (व्‍यवधान) मैं आई टी आई मांग रहा हूं और आप दो दिन पहले शेखावाटी क्षेत्र के लिए आई आई टी मांग रहे थे, इसलिए मैं आपका प्रोटेक्‍शन चाहता हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष जी को मांगने की जरूरत नहीं है, अध्‍यक्ष जी को हुकूम देना पड़ता है (व्‍यवधान)

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, हुकूम दे दिया अब पूरा करो (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करूंगा कि..

श्री अमराराम (धोद): जमीन तो तैयार है आप तो लागू करो।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): क्‍या यह सही है कि प्रत्‍येक तहसील में कम से कम एक आई टी आई खोलने की राज्‍य सरकार ने घोषणा की थी, यदि हां, तो सीकर जिले में शेष तहसीलों में कब तक खोलने का विचार रखती है? क्‍या यह सही है कि सरकार रोजगारोन्‍मुख शिक्षा पर जोर देना चाहती है? यदि हां, तो आई टी आई खोलने के लिए वित्‍तीय संसाधन कब तक उपलब्‍ध हो जाएंगे?

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍य सरकार ने यह घोषणा की थी कि प्रत्‍येक पंचायत समिति पर कम से कम एक आई टी आई हो, उसके अंतर्गत राजस्‍थान में 237 उपखण्‍ड है, 124 उपखण्‍डों पर गत वर्ष तक आई टी आई थे..

श्री अध्‍यक्ष: 237 उपखण्‍ड हैं।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): 113 ऐसी पंचायत समितियां थी जहां पर आई टी आई नहीं थी, उनमें से पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप, पी.पी. मोड़ के अंतर्गत 104 पंचायत समितियों पर आई टी आई के प्रस्‍ताव आ चुके हैं और उनको हमने आशय पत्र जारी कर दिये हैं। अब केवल 9 उपखण्‍ड ऐसे बचे हैं जिनको भी हमने दुबारा विज्ञापित किये हैं। इसके आधार पर हम जो राष्‍ट्रीय औसत पर एक लाख जनसंख्‍या पर 70 सीटे हैं, राजस्‍थान में केवल 40 सीटे थी, इस प्रस्‍ताव के आधार पर हम राष्‍ट्रीय स्‍तर को भी क्रोस कर जाएंगे। राजस्‍थान में हमने 498 आशय पत्र जारी कर दिये हैं। मैं समझता हूं उसके बाद जो अभी 22 हजार सीटे हैं उसमें 48 हजार की वृद्धि होकर के 70 हजार सीटे आई टी आई की राजस्‍थान में हो जाएंगी जो भूतो न: भविष्‍यति, आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ। जहां तक इनके सीकर जिले की बात है उसमें मैं बता दूं कि चार इनके पंचायत समितियों पर जिनमें से तीन में राजकीय और एक में प्राईवेट आई टी आई था, बाकी चारों के लिए भी आशय पत्र जारी कर हो गये हैं, जिनमें इनका भी लक्ष्‍मणगढ़ क्षेत्र आता है।

श्री हरीसिंह रावत (भीम): मंत्री महोदय, कोटा जिले में पंचायत समिति इटावा में क्‍या प्रस्‍ताव आये हैं? (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: प्‍लीज मूल प्रश्‍नकर्ता को पूछने दीजिए।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय ने जवाब दिया  है ...

श्री अध्‍यक्ष: आपके तो खुल गया न, अब कह दिया है उन्‍होंने, अब क्‍या पूछोगे?

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से आपके माध्‍यम से पूछना चाहूंगा कि आजकल आधुनिक युग है, सन् 1965 में जो विषय खोले गये थे सीकर में वो के वो विषय ही आज चल रहे हैं। इसलिए मैं आपके माध्‍यम से यह पूछना चाहूंगा, जी हां, आई टी आई चालू है सीकर में वहां मोबाइल, कम्‍प्‍यूटर, डीजल मैकेनिक आदि के विषय चालू करने में कितने वित्‍तीय संसाधनों की आवश्‍यकता रहेगी और ये वित्‍तीय व्‍यवस्‍था कब तक उपलब्‍ध हो जाएगी एक, दो आपने खण्‍ड-3  के उत्‍तर में भूमि आवंटन करने की बात कही है, मैं आपसे यह भी निवेदन करूंगा कि कितनी भूमि आवंटित की गई है और किस फर्म को यह भूमि आवंटित की गई है और कब तक शुरू हो जाएगा?

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार का यह विचार था कि पहले हम आई टी आई शिक्षा का विस्‍तार करे और साथ-साथ धीरे-धीरे उसका सुदृढ़ीकरण भी करें। हमने पिछली बार टोटल 81 ऐसे यूनिट थी जो एस.सी.वी.टी. में थी उसमें से हमने 51 यूनिट को एन.सी.वी.टी. में कन्‍वर्ट करके इनको क्रमोन्‍नत किया है और उसमें पाँच करोड़ रुपए राज्‍य सरकार ने व्‍यय किए हैं। जिसके कारण से आधुनिकतम के सारे उपकरण भी उसमें खरीदे गये हैं, 30 केवल एस.सी.वी.टी. के बाकी कोर्सेज यूनिट्स जिनको भी धीरे-धीरे सभी एन.सी.वी.टी. में बदलने का सरकार का विचार है। जहां तक इन्‍होंने पूछा प्रत्‍येक आई टी आई जो पी पी मोड में खोल रहे हैं उसमें पाँच बीघा जमीन राज्‍य सरकार नि:शुल्‍क उपलब्‍ध करा रही है। उसमें हमने एक कमेटी बना रखी है प्रिंसिपल सैक्रेटरी, टेक्‍नीकल एजुकेशन की अध्‍यक्षता में उसमें डायरेक्‍टर, टेक्‍नीकल एजुकेशन है, एकाउंट्स ऑफिसर है, ओएसडी है, जितने भी प्रस्‍ताव आते हैं उसमें प्रायोरिटी के आधार पर हमारे माप-दण्‍ड तय है, जिसको इण्‍डस्‍ट्री  चलाने का अनुभव है, उसका भी एजुकेशन बैकग्राउण्‍ड है और उनकी क्षमता है, फाइनेंसियल साउंडनैस है, ऐसे मुद्दों को देखते हुए हमने इतने सारे आई टी आईज. को जमीन उपलब्‍ध करा के आई टी आई आशय पत्र जारी कर दिये हैं।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मेरी बात जो मूल थी वह रह गई, क्‍या मोबाईल, कंप्‍यूटर, डीजल मैकेनिक आदि विषय चालू करने पर सरकार पर कितना वित्‍तीय भार पड़ेगा और यह कब तक चालू हो जाएंगे? सीकर में जो आई टी आई स्थित है उसके बारे में पूछ रहा हूं और दूसरा यह कि जो जमीन आवंटित की गई है, कौनसे फर्म या किस फर्म को की गई है?

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): अध्‍यक्ष महोदय, लक्ष्‍मणगढ़ में एक पारिवाला वोकेशनल ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्‍टीट्यूट है लक्ष्‍मणगढ़ का, उसे पीपी मोड़ में जमीन अलाट की गई है। जहां तक इनके सीकर के जो आई टी आई का प्रश्‍न है वहां पर छह आई टी आई चल रहे हैं, वहां जिन नये हमने आई टी आई को दिया है, उसमें सब आधुनिकतम व्‍यवसाय है। सरकार के इस आई टी आई के अंदर नये अभी हमने विस्‍तार किया है धीरे-धीरे यह विचाराधीन है, वित्‍तीय संसाधनों की उपलब्‍धता पर इनमें नये कोर्स भी शुरू होंगे लेकिन जितने भी नये आई टी आईज. खोल रहे हैं उन सब में इस प्रकार के मोबाईल और बाकी जो प्रकार के कोर्सेज आधुनिकतम है उन्‍हीं को ही हम प्रायोरिटी से दे रहे हैं और वहीं खोले जा रहे हैं।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मेरी बात का जवाब नहीं आया, एक तो मैं यह कहना चाह रहा  हूं कि जैसे इन विषयों को चालू करने में कितना खर्चा आ सकता है, एक जो लक्ष्‍मणगढ़ में...

श्री अध्‍यक्ष: खर्चें के बारे में पूछा ही नहीं आपने?

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): पूछा है अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पूछा है कि मोबाइल, कंप्‍यूटर और डीजल मैकेनिक इन तीन विषयों को खोलने में सरकार पर कितना वित्‍तीय भार बढ़ेगा? (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, पूरक प्रश्‍न है मेरा यह।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): हर ट्रेड के लिए अलग-अलग है, मोबाईल के लिए पाँच से दस लाख के बीच में आधुनिकतम उपकरणों की आवश्‍यकता होती है, हर ट्रेड का अलग-अलग है, कोई इलेक्ट्रिशियन का है, कोई कंप्‍यूटर का है, कंप्‍यूटर में सबसे कम होता है तो हमने कई जगह कंप्‍यूटर ट्रेस भी खोले हैं और सबसे पहले सरकार के पास प्रायोरिटी है कि यह आई टी आई की सुविधा हर जगह उपलब्‍ध हो जाए और साथ में जितने एस.सी.वी.टी. कोर्सेज है ये एन.सी.वी.टी. में कन्‍वर्ट हो जाए, उसके बाद हम धीरे-धीरे नये कोर्सेज बढ़ाएंगे।

श्री अध्‍यक्ष: श्री सी.पी.जोशी।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, एक निवेदन है मेरा (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपने तीन मिनट ले लिया (व्‍यवधान)

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपसे मैं प्रोटेक्‍शन चाहूंगा (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बैठिये राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य, मैं आपको बोलने का मौका दूंगी, पहले इनको बोलने दीजिए।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहूंगा कि सरकारी आई टी आई जो लक्ष्‍मणगढ़ क्षेत्र में है वो रिजर्व सीट है, वहां पर एससी, एसटी के लोग ज्‍यादा रहते हैं, पैसे वाले लोग नहीं रहते हैं। इसलिए सरकारी आई टी आई खुलेगी तभी वहां रोजगार बच्‍चों को मिलेगा। यह जो तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय है (व्‍यवधान) आपके माध्‍यम से मैं निवेदन करूंगा कि थोड़ा आश्‍वासन दे दे कि यह जो शेखावाटी क्षेत्र है इसमें सरकारी आई टी आई खोली जाएगी (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप बाद में बोल लीजिएगा।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहां आई टी आई नहीं खोले थे हमारी सरकार ने 20 नये आई टी आई सरकार क्षेत्र में गत वर्ष खोले हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आप एक साथ जवाब दे दीजिएगा। श्री सी.पी.जोशी।

 

Bhs/usc/22.3.07/11.10/1b

 

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या यह सच है ...।

श्री प्रभुलाल वर्मा (पीपल्‍दा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा भी प्रश्‍न है।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नाम सी.पी.जोशी का ले लिया। आप स्‍थान ग्रहण करें।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या यह बताने की कृपा करेंगे कि क्‍या यह सच है कि सत्र 2006-07 के बजट भाषण में सरकार ने पीपी मोड़ में आईआईटी लगाने की बात की थी? आपने खाली आशय पत्र जारी किये हैं । आप यह बतायें कि 2006-07 में कितने एक्‍चुअल आईआईटी लगे। नंबर-1. नंबर-2 भारत सरकार आपको कितना पैसा दे रही है जो आज दिन तक नहीं मिला उसकी राशि कितनी है? वो बता दें आप।

श्री लालचन्‍द मेघवाल (रायसिंहनगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से ...।

श्री अध्‍यक्ष: पहले जवाब आ जाने दो इसका।

श्री लालचन्‍द मेघवाल (रायसिंहनगर): मैं कब से हाथ खड़ा कर रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: बाद में। पहले जवाब आने दीजिये।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): सबका एक साथ ही आ जाएगा माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आप उसको उलझाना क्‍यों चाहते हैं? आप उसको उलझाना चाहते हैं ...(व्‍यवधान)... आप इसका स्‍पेसिफिक जवाब दीजिये।

श्री मोहनलाल गुप्‍ता (किशनपोल): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह पूछना चाहता हूं कि जयपुर शहर में कोई आईटीआई खोलने की योजना है क्‍या?

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): सरकार ने केवल मात्र पीपी मोड़ में केवल मात्र आशाय पत्र दिये हैं एक्‍चुअल में पीपी मोड़ में राजस्‍थान में सरकार की घोषणा करने के बाद में नहीं लगी संस्‍थान । - नंबर-1. नंबर-2 भारत सरकार आपको स्‍ट्रेन्‍थन करने के लिए जितना पैसा दे रही है उतने पैसे का भी हम उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से मैं यह पूछना चाहता हूं कि रेलमगरा तहसील में जिला राजसमंद में कब तक आईटीआई खोल देंगे। राजसमंद जिले में रेलमगरा में आज तक आईटीआई नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: मावली से आने वाले माननीय सदस्‍य, यह अलग से प्रश्‍न है आपका प्रश्‍न इस प्रश्‍न से संबंधित नहीं है।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): पीपी मोड़ में 2006-07 के अन्‍दर 11 आईटीआई प्रारंभ हो चुके हैं और बाकी आईटीआई जुलाई से शुरू हो जाएंगे।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मंत्री जी ने बताया कि हम सब जगह खोल रहे हैं तो रेलमगरा में कब तक खोलेंगे ...(व्‍यवधान)...

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): 149 की आपने आशय पत्र दिये हैं 149 के आपने जवाब दिया है। 149 के आपने आशय पत्र दिये हैं और उन 149 के अगेंस्‍ट में केवल 11 लगे हैं और उन 11 में भी अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं यह एक रैकेट है इसको समझने की आवश्‍यकता है जो लोग पीपी मोड़ में सरकार से जमीन को लेकर बुक कर रहे हैं और जमीन बुक करने के बाद जमीन की कोस्‍ट बढ़ जाएगी और दूसरे को जाकर सरेण्‍डर करेंगे । क्‍या सरकार यह एश्‍योर करेगी कि जिनको पीपी मोड़ में आईआईटी के लिए आप आशय पत्र दे रहे हैं यदि वो एक साल में या 6 महीने में नहीं लगायें तो उनको कैंसिल करेंगे? यह आपने फैसला किया क्‍या?

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): निश्चित रूप से सरकार ने जहां पर आईटीआई के लिए जमीन दी है उसका उपयोग आईटीआई के लिए होगा यदि कोई नहीं खोलेगा तो सरकार उससे जमीन जो है लेगी। 

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): कितने साल में? आप कितने समय में, 149 के आप आशय पत्र दे चुके हैं आपके इस साल तक 11 खुले हैं  बाकी जगहों पर जमीन बुक करवा दी लोगों ने और इसके करने के बाद एक भी जगह आईटीआई नहीं खुली है इसके लिए सरकार को नियम नहीं बनाना चाहिए क्‍या कि 6 महीने,8 महीने में आप ...(व्‍यवधान)...

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): आप शिक्षा से जुड़े व्‍यक्ति हैं आईटीआई के आशय पत्र जारी होने के पश्‍चात् आईटीआई के सारे प्रस्‍तावों पर एक कमेटी जिसमें भारत सरकार का प्रतिनिधि होता है उसका निरीक्षण करती है निरीक्षण करने के बाद उसकी अनुमति के बाद ही आईटीआई खुलता है वह प्रोसेस चालू है। निश्चित रूप से इस जमीन का दुरुपयोग नहीं होगा यह मैं आपसे कहता हूं।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय मंत्री जी, एक साल से कह रहे हो एक साल से बजट भाषण में घोषणा की है कि पीपी मोड़ में हम लगायेंगे। भारत सरकार अभी तो एक साल से ...(व्‍यवधान)... आपके नहीं आया।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): हमने नीति की घोषणा की थी उस समय आशाय पत्र कहां आये हुए हैं आशाय पत्र उसके बाद जारी हुए हैं वो प्रोसेस है।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): इसका मतलब सरकार जो घोषणा करती है और प्रैक्टिकल करने में दो साल लगते हैं?

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): दो साल नहीं हुए। एक साल भी पूरा नहीं हुआ है।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): राजस्‍थान की जनता को, पिछले बजट में घोषणा की अध्‍यक्ष महोदय, कि पीपी मोड़ में हायर एजुकेशन में जाएंगे, पीपी मोड़ में कॉलेज में जाएंगे, पीपी मोड़ में मेडिकल में जाएंगे, पीपी मोड़ में आईआईटी में जाएंगे और  राजस्‍थान सरकार की ये स्थिति है कि पिछले साल दस प्रतिशत जगह भी आपने न तो हायर एजुकेशन में, न टैक्निकल एजुकेशन में, न मेडिकल फील्‍ड में पीपी मोड़ में आप इंस्टिट्यूट खड़े कर सके, केवल मात्र लोगों ने जमीन अलॉटमेंट कराकर लाखों करोड़ों रुपये की जमीन को बुक कर लिया अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: कोई समय तो तय होना चाहिए ...(व्‍यवधान)... ये तो होना चाहिए।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजमसंद जिले में रेलमगरा तहसील है और पंचायत हैडक्‍वार्टर भी है..।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आशय पत्र जारी होने की तिथि के एक साल के अन्‍दर उसको खोलना है ।

श्री अध्‍यक्ष: प्‍लीज, वो बोल रहे हैं।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): पंचायत हैडक्‍वार्टर भी है वहां आप कब तक खोलने का विचार रखते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री जी जवाब दे रहे हैं और आप खड़े हैं।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): जिस तारीख को आशय पत्र जारी होगा ...(व्‍यवधान)... जिस तारीख को संस्‍था का आशय पत्र जारी होगा उसके एक साल के अन्‍दर वो खुलेगा।

श्री अमराराम (धोद): नहीं खुलेगा तो वो निरस्‍त हो जाएगा।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): नहीं खुलेगा तो फिर उस पर हम नियमानुसार कार्यवाही करेंगे।  

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नियमानुसार क्‍या है ...(व्‍यवधान)... आप यह कहिये कि एक साल में नहीं खुलेगा तो जमीन का आबंटन निरस्‍त करेंगे।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): ...(व्‍यवधान)... यह एक अहम मुद्दा है, आप रेलमगरा में में कब तक खोल देंगे?

श्री मोहनलाल गुप्‍ता (किशनपोल): .(व्‍यवधान)... जयपुर में आईआईटी खोली जाए उसके लिए जमीन चिह्नित की जाए और इसके साथ साथ चूंकि ये अन्‍तर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डा भी यहीं है । जयपुर में आईआईटी खोलने की मैं मांग करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री जी जवाब दे रहे हैं।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): ये आईआईटी का मुद्दा नहीं है आईटीआई का है, आईआईटी का कंफ्यूजन कर रहे हैं।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): ...(व्‍यवधान)... उनको तो आईआईटी दे दो आप जयपुर में।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): इनके सवाल का राजस्‍थान का इन्‍होंने जवाब दिया है मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं ...।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने जिसका नाम नहीं पुकारा उसका अंकित नहीं होगा।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री लालचन्‍द मेघवाल (रायसिंहनगर): 000

श्री अध्‍यक्ष: आपका नाम किसने पुकारा?

श्री लालचन्‍द मेघवाल (रायसिंहनगर): 000

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नहीं पुकारा। डॉ.चन्‍द्रशेखर बैद।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): 000

श्री अध्‍यक्ष: अब आप दूसरा प्रश्‍न करके जानना ये।  डॉ. चन्‍द्रशेखर बैद।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): 000

श्री अध्‍यक्ष: आज डिमाण्‍ड है एजुकेशन की यदि आप उससे अधिक कोई बात प्‍लीज, आज एजुकेशन की डिमाण्‍ड है शिक्षा की, तकनीकी शिक्षा भी उसमें है आपको यदि कोई और बात कहनी है तो उस वक्‍त कहियेगा आप। लेकिन इस एक प्रश्‍न के ऊपर बाकी प्रश्‍नों को आने नहीं दें यह कहां का तरीका है?

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):  000

श्री अध्‍यक्ष: जो अनुशासन नहीं मानेगा उसको बोलने का अवसर नहीं दिया जाएगा।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: जो अनुशासन में रहेगा उसी को अवसर दिया जाएगा।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):  000

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण करें।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण करें। ...(व्‍यवधान)...

पंजाब राज्‍य से सिंचाई हेतु उपलब्‍ध पानी

212. डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): क्‍या इंदिरा गांधी नहर मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

(1) वर्ष 2004 से अब तक इंदिरा गांधी नहर परियोजनान्‍तर्गत पंजाब से राज्‍य को कितना पानी उपलब्‍ध कराया गया? माहवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) वर्ष 2004 से अब तक उक्‍त परियोजनान्‍तर्गत फेज प्र‍थम तथा फेज द्वितीय -को सिंचाई हेतु कितना पानी उपलब्‍ध कराया गया? माहवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) उक्‍त योजनान्‍तर्गत कौन-कौनसी पेयजल योजना हेतु कितना पानी उपलब्‍ध कराया जा रहा है? माहवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

(4) वर्ष 2007 तथा 2008 में कौन-कौनसी नवीन सिंचाई तथा पेयजल योजनाओं हेतु कितना पानी उपलब्‍ध कराये जाने की योजना है? विवरण सदन की मेज पर रखें।

इंदिरा गांधी नहर मंत्री (श्री सांवर लाल) :  अध्‍यक्ष महोदय, (1) वर्ष 2004-05 से वर्ष 2006-07  (माह फरवरी तक) इंदिरा गांधी नहर परियोजनान्‍तर्गत राज्‍य को उपलब्‍ध कराये गये पानी का माहवार विवरण परिशिष्‍ट अ  पर संलग्‍न है।

(2) उपरोक्‍त अवधि में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के प्रथम चरण में बहाव क्षेत्र को 5.23 क्‍यूसेक्‍स/1000 एकड़ एवं जलोत्‍थान क्षेत्र को 3.90 क्‍यूसेक्‍स/1000 एकड़ जलांक के अनुसार पानी दिया जा रहा है तथा द्वितीय चरण के बहाव क्षेत्र में 3.00 क्‍यूसेक्‍स/1000 एकड़ एवं जलोत्‍थान क्षेत्र में 2.00 क्‍यूसेक्‍स/1000 एकड़ जलांक से दिया जा रहा है। वर्ष 2004-05 से वर्ष 2006-07 (माह फरवरी) तक दिये गये पानी का विवरण परिशिष्‍ट ब पर संलग्‍न है।

(3) उक्‍त योजनान्‍तर्गत पेयजल योजनाओं को उपलब्‍ध कराये गये पानी का माहवार विवरण परिशिष्‍ट स पर संलग्‍न है।

(4) उक्‍त परियोजनान्‍तर्गत वर्ष 2007-08 में 48000 हैक्‍टेयर क्षेत्र को सिंचाई हेतु खोलना प्रस्‍तावित है।  इसी परियोजना से जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी विभाग को वर्ष 2007-08 में 139 नवीन पेयजल योजनाओं के लिए लगभग 87 क्‍यूसेक पानी और उपलब्‍ध कराया जाना प्रस्‍तावित है।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि इसमें है  पंजाब से 2004-05 पानी मिला 4.31 एमएएफ, 2005-06 में मिला 6.21 एमएएफ, 2006-07 में मिला 4.67 एमएएफ अभी तक।  जब आपको पानी पंजाब से प्राप्‍त होना चाहिए यह आपको मालूम है पोंग डेम के लेवल के आधार पर आपको पानी की मात्रा तय की जाती है, पहला मेरा सप्‍लीमेंट्री क्‍वेश्‍चन यह है कि पोंग डेम के लेवल के आधार पर 2004-05,2005-06 और 2006-07 के अंदर कितने पानी की मात्रा राजस्‍थान को दिये जाने के लिए निर्धारण किया गया और उसके अगेंस्‍ट में आपको कितना पानी मिला? यदि पानी आपको कम मिला तो उसके लिए आपने पंजाब सरकार को कब-कब, क्‍या-क्‍या पत्र लिखे या क्‍या-क्‍या प्रयास किये?

सप्‍लीमेंट्री क्‍वेश्‍चन नं-2 है कि आपने किसानों के साथ 11 दिसम्‍बर, 2004 को समझौता किया उस समझौते के आधार पर आपने फेज-1 और फेज-2 को पानी का प्रतिशत वितरित किया वो उस समझौते के पहले कितना था और समझौते के बाद में कितना था? क्‍वेश्‍चन नं.3 कि आपने पेयजल योजनाओं के लिए 2005-06 के   अंदर ...।

श्री अध्‍यक्ष: आप एक-एक करके पूछें एक साथ करेंगे तो...।

श्री सांवर लाल: पूछो एक बार में। और पूछने दो। पूछो।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): पेयजल योजनाओं के लिए जो आपने परिशिष्‍ट ब के 1 खंड में जो आपने लिखा है कि 28076 क्‍यूसेक डेज और वो ही पानी 2006 के अन्‍दर 25202 क्‍यूसेक डेज कर दिया तो ये पेयजल योजनाओं में पानी की कटौती आपने क्‍यों की?

श्री सांवर लाल: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य से मैं अर्ज करना चाहता हूं कि पोंग डेम के लेवल एक्‍सपेक्‍टेड इनफ्लोज के आधार पर राजस्‍थान का जो हिस्‍सा है उसकी मांग हम करते हैं। 4 ग्रुप में से दो चल सकते हैं तो उसके आधार पर फर्स्‍ट फेज और से‍कंड फेज के लिए पानी लेते हैं। अगर पानी का हिस्‍सा उससे कम हमारे को लगता है तो तीन में से एक ग्रुप चलाकर उस हिसाब से पानी लेते हैं ...

 

कैलाश/    22.3.07  11.20  (1) 1c

 

मैं आपसे अर्ज करना चाहता हूं कुछ समय का फ्लेक्‍चुअलेशन आया हो, फ्लेक्‍चुअलेशन में कभी हमको ज्‍यादा पानी भी मिलता है कभी थोडा बहुत कम भी हो जाता है बाकी जितना पानी हमने मांगा है उसी हिसाब से यह पानी मिला है । दो पीरियड होते हैं एक तो फिलिंग पीरियड और एक होता है डिप्‍लेशन पीरियड । डिप्‍लेशन पीरियड में भी हमारी मांग के हिसाब से होता है और बांध में जितना पानी आने की संभावना है और जितना भर जाता है उन दोनों को देखते हुए फिर डिप्‍लीट करने के लिये 20 मई तक जो पानी लिया जाता है वह फैसलों के हिसाब से लिया जाता है । खरीफ में 21 मई से लगाकर 20 सितम्‍बर तक जो पानी है वह फर्स्‍ट स्‍टेज और सैकंड स्‍टेज में जितनी मांग करते हैं उसके आधार पर पानी देते हैं । उसी आधार पर पानी लिया गया और मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि जितना पानी हमने हमारे हिसाब से अनुमानित किया हमारे हिस्‍से का पूरा पानी हमको मिला है । इसके अलावा दूसरी बात आपने कही है कि 11 दिसम्‍बर को जेल में समझौता हुआ उसके पहले का वाटर अलाउंस प्रति हजार एकड का फर्स्‍ट स्‍टेज का 5.23 था, सैकंड स्‍टेज का 3 एकड प्रति है और लिफ्ट योजना है कंवर सेन का 3.9 है और बाकी दूसरी का 2 प्रति हजार एकड के हिसाब से पानी उपलब्‍ध करवा रहे हैं । इसमें मैं अर्ज करना चाहता हूं जो स्‍टेज है इसमें 5.43 लाख हैक्‍टेयर के लगभग एरिया है जिसमें पानी दिया जा रहा है । इसकी इंटेनसिटी भी 119 प्रतिशत है । सैकंड स्‍टेज का जो एरिया है उसमें लगभग 3 लाख 40 हजार हैक्‍टेयर पानी मिल रहा है और 3 क्‍यूसेक के हिसाब से हम पानी ले रहे हैं । इसमें जो अनुपात है वह जो मिल रहा था उसी हिसाब से मिल रहा है । आप अगर चाहे तो मैं आपको जानकारी दे सकता हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: जितना पूछा है उतनी ही जानकारी दो आप ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): 1999-2000 में फर्स्‍ट स्‍टेज को मिला टोटल 7 लाख 12396 और द्वितीय चरण को मिला 2 लाख 4500, लगभग 9 लाख । इसी प्रकार 2001-02 से भी हमारे पास डिटेल है । मैं यह कह सकता हूं कि पिछली सरकार के कार्यकाल में सैकंड स्‍टेज को जो औसत एरिया फीड हुआ 1 लाख 78248 हैक्‍टेयर और हमारे टाइम में हुआ 2 लाख 64849 हैक्‍टेयर । यह एरिया भी बढा है और इस वर्ष हवा लिफ्ट में लगभग 15 हजार एरिया को हमने पानी उपलब्‍ध कराया जाना प्रारंभ किया है । इसके अलावा पेयजल के लिये भी कहीं फ्लेक्‍चुअलेशन की बात अलग है बाकी ड्रिंकिंग वाटर कहीं सफर नहीं कर रहा है मैं आपको कह सकता हूं जिस जिस का हिस्‍सा है उसके हिसाब से पानी उपलब्‍ध कराया जा रहा है । आपकी जानकारी के लिये बता दूं रावतसर में लगभग 56 क्‍यूसेक हम देते हैं । इसी प्रकार कंवर सेन लिफ्ट को हम ढाई सौ देते हैं । उसमें भी कई बार हमको थोडा ज्‍यादा पानी देना पडता है । इसी प्रकार सावा लिफ्ट है उसमें 30 क्‍यूसेक दिया जाता है । जौधपुर लिफ्ट के लिये लगभग 155 क्‍यूसेक दिया जा रहा है और जैसलमेर के लिये 30 क्‍यूसेक पीने का पानी ग्रामीण क्षेत्र के लिये 70 क्‍यूसेक है । इसके अलावा गंगानगर हनुमानगढ का जो ग्रामीण और शहरी एरिया है उसको भी पानी उपलब्‍ध कराया जाता है ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): मैंने पहला सप्‍लीमेंट्री क्‍वेश्‍चन यह पूछा था जैसे पहले साल आपको 2004 में मिला 4.31 । आपने यह कहा कि जितना मांगा उतना पानी मिल गया । जब आपको अलाटेड 8 एमएएफ है तो आपका निर्धारण कितना किया गया था और आपको मिला कितना ? दूसरे साल में आपको मिला 6.21, तीसरे साल मिला 4.67 तो आपने कम पानी की मांग क्‍यों कि जबकि आपका हक 8 एमएएफ पानी पर है । पोंग डेम का लेवल पिछले दो साल से ठीक चल रहा था तो आपने कम पानी की मांग क्‍यों की । दूसरा जब समझौता आपने किया तो उस समझौते में आपने यह लिखा था कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में प्रतिवर्ष मिलने वाले कुल पानी 14100 क्‍यूसेक क्षमता वाली नहरों का वितरण प्रथम व द्वितीय चरण में 8200 और 5900 के हिसाब से किया जायेगा । समझौते के पहले जो आप पानी दे रहे थे फेज वन और फेज टू को, फेज वन को दे रहे थे 67.5, फेज टू को दे रहे थे 32.5 । इस प्रतिशत में पिछले तीन साल में कोई फर्क नहीं पडा । जितना फेज वन को मिल रहा था उतना ही फेज वन को मिल रहा है, जितना फेज टू को मिल रहा था उतना ही फेज टू को मिल रहा है और एक सब से महत्‍वपूर्ण चीज एक तरफ आप बार बार यह कह रहे हैं कि सतही जल का प्रयोग पेयजल योजनाओं के लिये किया जायेगा लेकिन आपने पेयजल योजनाओं के लिये यदि आप प्रतिशत निकाले तो टोटल प्रतिशत पेयजल योजनाओं में आप व्‍यय करते हैं उसमें पहले साल आपने दिया 3 प्रतिशत पानी । जितना टोटल पानी आपको मिला उसका 3 प्रतिशत आपने पेयजल में दिया ।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिये ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): दूसरे साल इन्‍होंने दिया 2.6 प्रतिशत । तो यह कटौती क्‍यों की गई जबकि पेयजल में आपको पानी ज्‍यादा आबंटित करना चाहिये ।

श्री अध्‍यक्ष: हां यह कहो कि कटौती क्‍यों की ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, एक तो माननीय सदस्‍य बडे विद्वान है ।

श्री अध्‍यक्ष: विद्वान तो आप भी कम नहीं हो ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आपने जो यह पढा है 12100 क्‍यूसेक को दो भागों में बांटने का जो पढा है इतना पानी नहीं चलाया जायेगा । हमने यह लिखा है कि उपलब्‍ध पानी को इतनी क्षमता की नहरों के माध्‍यम से उपलब्‍ध कराया जायेगा। जो शेयर डिसाइडेड होता है, पोंग में अवेलिबिलिटी प्‍लस इनफ्लोज के आधार पर जो आपके टाइम में यह समझौता हुआ 1981 का, टोटल अवेलिबिलिटी 17.17 एमएएफ मानते हुए ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): वह ठीक है साहब, मेरे को तो यह बता दो कि कितने पानी की मांग की और कितना पानी आपको मिला ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आपको ही बता रहा हूं और किस को बता रहा हूं पूरी जानकारी ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): जब 8 एमएएफ पानी मिलना चाहिये तो 4.31, 6.21, 4.67 यह कम क्‍यों मिला आपको, उसके लिये आपने क्‍या किया ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय सदस्‍य आपको मैं समझाने की कोशि‍श कर रहा हूं कम नहीं मिला और आप कहोगे तो पाँच साल के आंकडे भी बता दूंगा । मैं यह कह रहा हूं पानी की उपलब्‍धता जो भी पोंग डेम प्‍लस इनफ्लोज आयेगा फिलिंग पीरियड में 20 मई तक उसका हिसाब लगाकर फिर इसको भी हम मार्च में रिव्‍यु करेंगे । अगर हमने ड्राई पेटर्न पर अनुमानित किया उससे ज्‍यादा आयेगा तो फिर पानी की और मांग कर लेंगे । राजस्‍थान के हिस्‍से का पानी कम मांगे यह कभी संभव नहीं है । हर महीने हम हमारा डिमांड चार्ट देते हैं । 17.17 को अधिकतम पानी की संभावना मानी गई है । अवेलिबिलिटी पोंगे डेम, रणजीत सागर प्‍लस आपका इनफ्लोज Share of Punjab 4.22, share of Haryana 3.5, share of Rajasthan 8.6, Delhi water supply .2 mf, share of Jammu and Kashmir .65 mf यह समझौता होने के बाद ”Until such time as Rajasthan is in a position to utilize it full share, Punjab shall be free to utilize the water surplus to Rajasthan requirement. As Rajasthan will soon be able to utilize its share, Punjab shall make adequate alternative arrangements expeditiously for irrigation of its own land by the time Rajasthan is in a position to utilize the full share…” और पंजाब का शेयर होगा 4.82 उसके बाद हम मांग कर रहे हैं यह तो हमको नहीं मिला बाकी आपका यह कहना कि इस साल इतना कम क्‍यों मिला, इस साल ज्‍यादा क्‍यों मिला, माननीय सदस्‍य मैंने बताया कि अवेलिबिलिटी आफ वाटर होगी उसी को इस अनुपात में बांट कर लिया जा रहा है । उसमें राजस्‍थान के हिस्‍से का पूरा पानी लिया जा रहा है मैं सदन को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि एक क्‍यूसेक पानी भी कम नहीं ले रहे हैं और यह इंडिकेट करता है टेल एण्‍ड तक हमने पानी पहुंचाया है और इर्रिगेटेड एरिया का जो आंकडा हमने दिया वह भी लगातार बढ रहा है । इसलिए यह कहना बिलकुल उचित नहीं है कि पानी का पूरा हिस्‍सा हम नहीं ले रहे हैं ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): मैं आपकी थोडी सी मदद चाहता हूं । मैंने मौटे रूप में यह पूछा कि वर्ष 2004-05 व 2005-06 में राजस्‍थान ने कितने पानी की मांग की है और उसकी एवज में आपको कितना पानी मिला और दूसरा आपने पेयजल योजनाओं में पानी की कटौती क्‍यों की । क्‍योंकि जो चार्ट आपने दिया है उसमें आपने परिशिष्‍ट ब के पहले पृष्‍ट पर आप देखें टोटल पानी का आबंटन पेयजल योजनाओं के लिये किया है 28076 क्‍यूसेक डेज और उसके अगले साल 2006 में किया है 25202 क्‍यूसेक डेज । यह कटौती आपने क्‍यों की ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मैं आपसे यही अर्ज कर रहा हूं कि ड्रिंकिंग वाटर की जहां जहां जितनी जरूरत है पानी दिया गया । डिसाइडेड शेयर आपको बता दिया है । इसमें कई बार कंवर सेन लिफ्ट में ज्‍यादा देना पड सकता है उसकी वजह से वह ज्‍यादा दिया होगा इसलिए कभी आंकडा ज्‍यादा हो गया बाकी कहीं पर भी कोई कटौती नहीं की है । आरएलजीसी जौधपुर को पहले हम 110 देते थे अभी इन्‍होंने डिमांड की तो हमने 155 देना शुरू कर दिया । अगर ऐसा कहीं संकट आता है तो माननीय सदस्‍य उस एरिया के लोग बाग़ ड्रिंकिंग वाटर के लिये इस नहर पर निर्भर है तो ऐसी कोई स्थिति नहीं है यह मैं आपसे अर्ज करना चाह रहा हूं ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): 50 प्रतिशत एरिया राजस्‍थान का डार्क जोन में आ गया और पेयजल योजनाओं के लिये जो सतही जल उपलब्‍ध है उसमें आप कटौती कर दें और आप कह रहे हैं कि कटौती नहीं की । आप स्‍वयं ही देख लें आपने परिशिष्‍ट स (2) में जो चार्ट दिया है उसका टोटल लगाकर मैं बता रहा हूं, 28 हजार से कम कर के आपने 25 हजार क्‍यूसेक डेज कर दिया । मतलब 3 हजार क्‍यूसेक डेज कम कर दिया । जबकि आपको पेयजल योजनाओं के लिये पानी बढाना चाहिये और अभी मेरे पहले प्रश्‍न का जवाब भी नहीं मिला कि आपने मांग कितने की की थी और मांग की एवज में आपको कितना मिला ।

 

ans/usc  22.03.2007  11:30  1d

 

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मैं जब आपको बार-बार यह कह रहा हूं जितना मांग किया हर महीने उसी हिसाब से  पानी चलता है, तो पानी मिला आपको वह बता दिया, वही मांग है। आप और क्‍या पूछना चाह  रहे हो मेरे समझ में नहीं आ रहा।

श्री अध्‍यक्ष: अमराराम जी।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): आपके कहने का मतलब यह है कि टोटल पानी जो निर्धारित किया गया था वह 4.31 ही था क्‍या, टोटल 2004-5 में 4.31 ही निर्धारित किया था, 2005-6 में 6.21 ही निर्धारित किया  गया था, आपने इतनी मांग की और आपको इतना ही मिल गया, यह तीनों फीगर एक ही है क्या ?

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री):  डाक्‍टर  साहब, मैं आपको समझाने की पूरी कोशिश कर रहा हूं कि हर महीने यह निर्धारण होता है, हर महीने इनफ्लोज का हम स्‍टडी करते हैं उसके आधार पर अगर शेयर बढ़ जाता है तो उसी हिसाब से हम बढ़ाकर मांग करते हैं। अब आप पता नहीं क्‍या पूछना चाह रहे हैं।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): पूरे साल की, पूरे की बात कर रहा हूं।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अब आप बिराजिए, मैं एक मिनिट...(व्‍यवधान)

  डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): पूरे साल का जो टोटल है उसकी बात कर रहा हूं। पूरे साल का टोटल 4.31 ही था क्‍या आपका 2004-5 में, और 2005-6 में 6.21 ही था क्‍या ?

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री):आप बिराजिए, मैं बता रहा हूं आपको। 2004-5 में हमने  मांगा 21 लाख 75 हजार 352 और वह मिला फिर उसके बाद में मांग 31 लाख 32 हजार 647 और वह मिल गया। फिर मांगा 23 लाख 56 हजार 108 जो अभी वर्ष चल रहा है, मई तक और डिमांड करेंगे, मार्च में रिव्‍यू  करेंगे, अगर हमारा हिस्‍सा बढ़ जाएगा इनफ्लोज  की वजह से तो और बढा़कर मांग लेगे। अब आप क्‍या चाह रहे हो, मेरे समझ में नहीं आ रहा। आप क्‍या यह मान रहे हो क्‍या कि पहले साल का पानी...(व्‍यवधान)

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): उसमें आपने लिखा है, अब आप बता रहे हो क्‍यूसेक के हिसाब से आप यह बता दो जितना एम ए एफ मांगा उतना मिल गया क्‍या ?

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): यह क्‍यूसेक को हमने एमएएफ  में बदल दिया।

श्री अध्‍यक्ष: श्री अमराराम।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): क्‍यूसेक को हमने एमएएफ में इसलिए बदला, हमारे..(व्‍यवधान) 8 आया, 8 के बावजूद जो एवेलेबिलिटी है उसके हिसाब से हमारा हिस्‍सा 4.31 बना है वह हमको मिला, यह 6.3 बढ़ा वह हमको मिला और 4.67 अभी तक फरवरी तक का हमने दिया है उसके बाद और बढ़ेगा और जोड़ देंगे इसमें।

श्री अध्‍यक्ष: श्री अमराराम जी।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तारानगर से आने वाले...

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण कीजिए। ( व्‍यवधान)

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने अभी आंकड़ों के हिसाब से यह बताया कि....

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): 000

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नाम पुकारा है अमराराम।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा):000

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नाम पुकारा है अमराराम।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): 000

श्री अध्‍यक्ष: भादरा से आने वाले माननीय सदस्‍य, अंकित नहीं होगा। यह अंकित नहीं हो रहा। नहीं करना अंकित।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): 000

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि आपने अजमेर जेल में जो समझौता किया उसमें इस परियोजना के प्रथम और द्वितीय चरण  के रेगूलाइज को अलग करने के लिए प्रथम चरण का रेगूलेशन चीफ  इंजीनियर हनुमानगढ़ के पास रहेगा और द्वितीय चरण का रेगूलेशन चीफ इंजीनियर जैसलमेर के साथ रहेगा यह आपने उस समझौते में किया और वह इसलिए किया कि दोनों चरणों में फसल की किस्‍म अलग-अलग है, बुवाई का समय अलग-अलग है और इसलिए उस पानी का सदुपयोग हो सके इसलिए वहां के किसानों की संघर्ष समिति और व्‍यापारी संघर्ष समिति के साथ आपने दोनों चरणों का रेगूलेशन अलग-अलग करने का समझौता किया था। क्‍या आपने इनका रेगेलेशन आज तक भी अलग नहीं किया है ?(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में क्‍यों खड़े हो।  मंत्री जी, आप क्‍यों खड़ हो गए बीच में।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, पहला प्रश्‍न है कि आपने समझौते में रेगूलेशन अलग-अलग करने का समझौता किया था वह आज की तारीख तक भी, आपने उस समझौते को लागू नहीं किया है। दूसरा, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि आपने 48 हजार हैक्‍टेयर जमीन इस साल और प्रस्‍तावित है सिंचाई के लिए खोलने का, क्‍या मंत्री महोदय यह बताएंगे कि इस 48 हजार हैक्‍टेयर भूमि इस साल सिंचाई के लिए खोलेगे, इसके लिए अतिरिक्‍त पानी की कोई व्‍यवस्‍था की है या इन्‍हीं किसानों की,  जहां पानी के लिए मारामारी हो रही है उसी पानी में से काटकर इनके लिए सिंचाई की सुविधा करेंगे।  और यह जो आपने दिया है मैं समझता हूं 2005-6 में  इस डेम की फुल केपेसिटी इनफ्लो भी थी और आपने 6.21 एमएएफ पानी लिया है जबकि राजस्‍थान का हिस्‍सा 8.6 एमएएफ है, उसकी बजाए आपने केवल 6.21 एमएएफ ही लिया है। यह राजस्‍थान के हिस्‍से में, जबकि इसमें वह पानी भी है जो आखिरी पिलाई के लिए आपने पंजाब से दो  (व्‍यवधान) लिया।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप भाषण न दे, प्रश्‍न पूछ लीजिए।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): अध्‍यक्ष महोदय, एक सवाल..

श्री अध्‍यक्ष: जवाब आने दे। मिस्‍टर भाटी, जवाब आने दे।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि पानी का बंटवारा जमीन के आधार पर होना चाहिये।जितना रकबा जमीन फर्स्‍ट फेज में है तो उस हिसाब से पानी का बंटवारा आना चाहिये। सैकण्‍ड फेज में  जितना बीघे, जितना एकड जमीन है जमीन के हिसाब से पानी मिलना चाहिये, यही मेरा निवेदन है।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, बढि़या।मंत्री जी।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री):धोद से आने वाले सदस्‍य ने बहुत महत्‍वपूर्ण सवाला किया है, नोर्थ चीफ इंजीनियर और जैसलमेर चीफ इंजीनियर दोनों जगह यह रेगेलेशन, माननीय सदस्‍य सारे उसके मैम्‍बर है वहां पर जाकर, होता है, वह ही उसका नियंत्रण करते हैं। समझौता है हमने उसकी पालना कर दी है उसकी प्रति अगर आपको नहीं मिली, हालांकि हमने अख़बार में भी...(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): पानी का रेगूलेशन अलग अलग करने की बात है। रेगूलेशन अभी भी आज की तारीख में एक ही है महत्‍वपूर्ण बात है कि अलग-अलग सिंचाई है..

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मेरी बात तो सुनिये, आप अपनी ही अपनी..

श्री अमराराम (धोद): अलग-अलग कर दिया क्‍या ? 

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आप अपनी तो कह चुके हो।

श्री अमराराम (धोद): माननीय सदस्‍य विधान सभा के सदस्‍य है,प्रधान है, प्रमुख है मैं इस बात पर नहीं जा रहा, आपने उनकी कमेटी की मीटिंग भी ली, मैं इसमें नहीं जा रहा। मैं इस बात को पूछ रहा हूं))

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मैं यही समझाने की कोशिश कर रहा हूं।

श्री अमराराम (धोद): कि आपने रेगूलेशन अलग-अलग करने के लिए(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, यह है कि  यहां कपास की बुवाई और वहां ग्‍वार की बुवाई होती है, वह अप्रैल में होती है, यह जुलाई में होती है और जो रेगूलेशन अलग-अलग चलते हैं, जब ग्‍वार की बिजाई नहीं होती जबकि द्वितीय चरण में जो आप पानी देते हैं..(व्‍यवधान)

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): जैसलमेर में कपास नरमा होता है किसने कह दिया ग्‍वार होता है। दूसरा, अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह कहना चाहता हूं(व्‍यवधान) सैकण्‍ड फेज और फर्स्‍ट फेज यह कब बने, सैकण्‍ड फैज चालू नहीं हुआ, सैकण्‍ड फेज में नहरों में पानी नहीं चला, सैकण्‍ड फेज में अलाटमेंट नहीं हुआ,नहरें नहीं बनी, पहले था सैकण्‍ड और फर्स्‍ट। अब तो पूरी नहरें कम्‍पलीट हो चुकी है, माइनर बन चुके। अब सैकण्‍ड फेज की लड़ाई यह राजस्‍थान में क्‍यों डाल रहे हैं।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा इसमें और भी निवेदन है, जब नहर का पानी लिमिटेड हो चुका है तो हम तो यह कहेंगे कि पानी पूरा नहीं हो रहा, तो नई-नई नहरें भी नहीं निकाली जानी चाहिये।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): बिराजे तो सही। माननीय सदस्‍य से मैं अनुरोध करना चाहूंगा कि मैंने स्‍पष्‍ट कहा है, लिखित में  भी बांटा हुआ है और लिखित में हमारे पास है, आदेश निकाला है, नोर्थ चीफ इंजीनियर हनुमानगढ़ वहां का रेगूलेशन जारी करता है और  वह सारी चीजे, माननीय सदस्‍य उसके मैम्‍बर हैं  वह उसके रेगूलेशन को देखते हैं, जैसलमेर वाला जारी करता है वह देखता है1 मैं बार- बार कहूंगा तो भी आपको  तो जो बात कहनी है वह तो कहेंगे ही। मेरी बात को भी समझने की कोशिश करो।सरकारें कोई समझौते करती है, अगर कोई लागू नहीं होता, यह पंजाब का और हमारा नहीं चल रहा कोर्ट के अंदर, सुप्रीम कोर्ट के अंदर रेफरेंस हुआ। अगर आपको कही लगता है तो पधारो ना, कौई मना थोड़े ही कर रहा है। मैं यह कह रहा हूं कि सरकार ने समझौते को लागू कर दिया। दूसरा यह कि पानी तो फिक्‍स है 8.6, अब आप सभी माननीय सदस्‍यों की भावना भी यही है, हमने सर्वसम्‍मति से यहां संकल्‍प भी पास किया, हमारे हिस्‍से का .6 एमएएफ जो नहीं दिया जा रहा वह दिया जाए, इसके लिए आप सबका मैं सहयोग चाहूंगा।बार-बार हम लिख-पढी करेंगे, दवाब बनाएंगे, निश्चित रूप से 8.6 के आधार पर हमारा जो हिस्‍सा है वह रेस्‍टोर हो जाएगा, यह हमको प्रयास करना चाहिये, ज्‍यादा पानी मिलेगा।

दूसरा, यह तो स्‍पष्‍ट है कि  जो पानी मिलना है वाटर अलाउंस जमीन के आधार पर तय है तो जैसे-जैसे एरिया डवलप होते जाएंगे उसी हिसाब से  वह पानी आपको उपलब्‍ध होता जाएगा। अभी सैकण्‍ड स्‍टेज के एरिया में बहुत कम खाले और दूसरे सिस्‍टम डवलप होने हैं, तो यह काम लगातार चल रहा है, जैसे ही डवलप हो जाएगा पानी जो पोंग डेम में भराव और उसके बाद इनफ्लोज पर आएगा हिस्‍सा उसके आधार पर दे देंगे। यह 48 हजार हैक्‍टेयर जो भी है उसको भी पानी दिया जाएगा। अ गर आप नहीं चाहते हो तो मुझे बता दीजिए, जो पानी उपलब्‍ध है उसमें से ही दिया जाएगा पानी तो, कोई नया बाँध तो आयेगा नहीं।

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री अमराराम (धोद): इसमें काटकर देंगे, यह तो कह रहे हैं कि जो हिस्‍सा है...(व्‍यवधान)

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): प्रश्‍न संख्‍या 213

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।(व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): किसी का हिस्‍सा नहीं कटेगा जब वाटर अलाउंस तय है तो, सबको अपना अपना एरिया खुलता जाएगा उसके आधार पर पानी उपलब्‍ध होगा वह मिलेगा

श्री अमराराम (धोद): कहां से आएगा, काटकर देंगे?

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): प्रश्‍न संख्‍या 213

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): बाँध में से आएगा बता दिया ना, घर में से थोड़े ही आएगा। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): सरकार यह बताए कि 8.6 एमएएफ केपेसिटी खड़ी कर दी..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपने केपेसिटी खड़ी क दी, हम आरोप लगाते हैं( व्‍यवधान) दो चीजे हैं, नम्‍बर एक, क्‍या राजस्‍थान सरकार ने अभी तक 1.6 एमएएफ पानी यूटिलाइज करने की केपेसिटी पैदा कर दी ? नम्‍बर दो, आप जो पंजाब से पानी ले रहे हैं.......

 


दुर्गा/चौहान 220307 1140 1e

 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हम पानी ले रहे हैं वह 8 एम.ए.एफ. के आधार पर ले रहे हैं या 8.6 एम.ए.एफ. के आधार पर मांग कर रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): नहीं, आप बैठो तो सही, मैं देता हूं जवाब।

श्री अध्‍यक्ष: काहे को बोल रहे हैं, मैंने दूसरा क्‍वश्‍चन पुकार लिया।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मेरी बात सुनिये। माननीय सदस्‍य ने यह सवाल उठाया है। यह पानी लेने के लिये हम सक्षम हैं। यह आपकी सरकार के टाइम भी लिखा है और हम भी ले सकते हैं। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): वही तो हम कह रहे हैं ना।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आज अगर पानी मिल जाता है तो हम पानी का उपयोग कर लेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वश्‍चन, श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): दूसरा यह है कि पानी जो मिल रहा है, वह 8 एम.ए.एफ. के हिसाब से मिल रहा है। (व्‍यवधान)

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): प्रश्‍न संख्‍या 213. (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यही तो कह रहा हूं मैं। अध्‍यक्ष महोदय, अभी तक राजस्‍थान को पानी 8 एम.ए.एफ. के आधार पर मिल रहा है, 8.6 एम.ए.एफ. के आधार पर नहीं मिल रहा है। हमारी मांग यह होनी चाहिए कि 8.6 के आधार पर पानी मिले तब 40 हजार हैक्‍टेयर की बात करें। (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): इसके लिये मैंने आप सबका सहयोग मांगा है कि आप सब सहयोग करें। भारत सरकार पर दबाव हम बनाएंगे। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): तो यह तो आप मांग ही नहीं कर रहे हैं। (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, मेन मुद्दा यह है कि राजस्‍थान सरकार को 8 एम.ए.एफ. के आधार पर ही पानी मिल रहा है जबकि हमारी पानी की मांग 8.6 एम.ए.एफ. के आधार पर करनी चाहिए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप जैसे विचार आपके नेताओं के नहीं हैं। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): कैसे नहीं हैं। (व्‍यवधान) आपके 3 साल हो गये। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप कैसे कह सकते हैं कि हमारे नेताओं के नहीं हैं। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, सरकार को फिर निवेदन करना चाहते हैं, हमने सर्वसम्‍मति से प्रस्‍ताव पास किया है, फिर निवेदन करना चाहता हूं, आज भी सरकार का स्‍टेण्‍ड यह होना चाहिए कि हमें 8.6 एम.ए.एफ. के आधार पर हमें पानी मिलना चाहिए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हम सहमत हैं। हम स्‍वागत करते हैं आपकी बात का। करो ना संघर्ष। (व्‍यवधान)

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): कांग्रेस के राज में किसानों को बिलकुल पानी नहीं मिला। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 3 साल से बैठे हुए हैं। (व्‍यवधान)

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): कांग्रेस के राज में पानी बिलकुल नहीं मिलता था पहले तो। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): पंजाब सरकार पानी लेकर बैठी हुई है, ये बोलते नहीं कुछ भी। (व्‍यवधान)

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): कांग्रेस के राज में किसानों को पानी बिलकुल नहीं मिला। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हम स्‍वागत करते हैं जोशी साहब आपकी बात का। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): और पंजाब में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के कारण अब 8.6 एम.ए.एफ....। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): 000

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): एक मिनट, 3 साल से क्‍या किया, यह भी मैं आपको अर्ज करना चाह रहा हूं। यह मामला 3 साल का नहीं है। माननीय सदस्‍य, 1981 में जो समझौता हुआ उसके बाद में हिस्‍सा डिसाइड होने के बाद सरेण्‍डर हुआ। मैंने आपको पढ़कर सुनाया। उसके बाद में बराबर दबाव बना रहे हैं। चिट्ठियां लिख रहे हैं। अब आप किस तरीके से चाहते हो। (व्‍यवधान) सरकार सरकार होती है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): 000

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन करना चाह रहा हूं, यह जो मोटी किताब आपको दिखा रहा हूं, यह पंजाब और राजस्‍थान से सम्‍बन्धित नहीं है। यह भारत सरकार के स्‍तर पर बैठक हुई है, वहीं पर यह निर्णय हुआ है। (व्‍यवधान) आप सुनिये, आप सुनिये।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): भारत सरकार को लिखा जाए कि भारत सरकार इंटरविन करे और राजस्‍थान को हिस्‍सा दिलाये। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

(व्‍यवस्‍था-सूचक-घण्‍टी)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): सरकार कांग्रेस की थी। (व्‍यवधान) राजस्‍थान के हिस्‍से के लिये भारत सरकार को इंटरविन करना पड़ेगा। भारत सरकार का निर्णय था। तत्‍कालीन मंत्रीजी के लेवल पर यह निर्णय हुआ था, सरेण्‍डर करने का, इसलिये भारत सरकार हस्‍तक्षेप करे और राजस्‍थान का 0.6 एम.ए.एफ. का हिस्‍सा दिया जाए। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, माननीय सदस्‍यगण...(व्‍यवधान) माननीय सदस्‍यगण, माननीय मंत्रीजी, (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍यगण, टोडरायसिंह से आने वाले माननीय सदस्‍य, एक बार आप स्‍थान ग्रहण करें। क्‍वश्‍चन-अवर, प्रश्‍नकाल इंफार्मेशन सीक करने के लिये होता है। आरोप-प्रत्‍यारोप करने के लिये बहुत समय है। आपको आगे भी मिलेगा, जब आप आरोप-प्रत्‍यारोप एक-दूसरे पर लगाते हैं। यह प्रश्‍नकाल जो है केवल इंफार्मेशन सीक करने के लिये होता है। इसलिये जो इंफार्मेशन इनके पास थी, वह उन्‍होंने दे दी। आरोप-प्रत्‍यारोप इस समय नहीं होना चाहिए।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): 000

श्री अध्‍यक्ष: No,no, next question. श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री अध्‍यक्ष: Please sit down.


विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली की क्षतिग्रस्‍त/शोल्‍डर रहित सड़कें

213. श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): क्‍या सार्वजनिक निर्माण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:

(1) विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली की कौन-कौनसी सड़कें कहां-कहां से, कब से व कितनी क्षतिग्रस्‍त हैं या उनके दोनों ओर के किनारे टूट चुके हैं? मय चैनेज प्रत्‍येक सड़क की लम्‍बाई का विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍यासरकार द्वारा राज्‍य में नई सड़कों के निर्माण के समय डामरीकृत सीमा के अलावा सड़कों के दोनों ओर शोल्‍डर निर्माण की नीति बनाई गई है? यदि हां, तो नीति की प्रति सदन की मेज पर रखें।

(3) गत पाँच वर्षों में विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली में कितनी नई सड़कों का निर्माण हुआ और उनके शोल्‍डर नहीं बांधे गये, जिस कारण सड़कें क्षतिग्रस्‍त होना शुरू हो गईं? ग्रामवार किलोमीटर सहित सूची सदन की मेज पर रखें।

(4) क्‍या यह सही है कि विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली में पूर्व में बनी सड़कों के शोल्‍डर नहीं बांधे गये थे, जिस कारण सड़कों के दोनों ओर काफी गहरे गढ्ढे हो गये और आये दिन दुर्घटना घटने का अंदेशा बना रहता है? क्‍या सरकार उनसभी सड़कों के शोल्‍डर बांधकर यातायात सुगम करने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

(5) क्‍या यह सही है कि पिछले पाँच वर्षों में सरकार द्वारा विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली की सड़कों के पुनर्निर्माण में ठेकेदार को ठेका देते समय सी.सी. या डामरीकृत क्षेत्र के अलावा सड़कों के दोनों ओर शोल्‍डर बांधे जाने की शर्तें भी शामिल की गई थीं। यदि हां, तो उक्‍त वर्षों में कितनी सड़कों का, कहां-कहां पर, कितनी दूरी तक पुर्ननिर्माण हुआ तथा किन-किन सड़कों के शोल्‍डर नहीं बांधे गये? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(6) क्‍या सरकार संबंधित ठेकेदार जिसने पुनर्निर्मित सड़कों के शोल्‍डर नहीं बांधे, जिसके कारण सड़कें पुन: क्षतिग्रस्‍त हो गई, के विरुद्ध कार्यवाही करने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

(7) क्‍या सरकार उक्‍त सड़कों की मरम्‍मत, पेचवर्क, कटे हुए किनारों को सही कराने व पुन: सड़कों का डामरीकरण करवाने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक?

सार्वजनिक निर्माण मंत्री (श्री राजेन्‍द्र राठौड़): (1) विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली की क्षतिग्रस्‍त सड़कों की लम्‍बाई, क्षतिग्रस्‍त भाग, टूटे किनारों की स्थिति मय चेनेज व कब से क्षतिग्रस्‍त है, इसका सम्‍पूर्ण विवरण परिशिष्‍ट पर संलग्‍न है।

(2) नई सड़कों के निर्माण के समय डामरीकृत क्षेत्र के अलावा सड़कों के दोनों ओर शोल्‍डर निर्माण किया जाना आवश्‍यक है। शोल्‍डर निर्माण की कोई अलग से नीति नहीं है। यह शोल्‍डर निर्माण सड़क का एक आवश्‍यक भाग है।

(3) गत 5 वर्षों में विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली में ऐसी कोई सड़क का निर्माण नहीं हआ है जिसमें शोल्‍डर नहीं बनाये गये हों। गत 5 वर्षों में विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली में 38 नई सड़कों (32 सड़कें सा.नि.वि. द्वारा व 6 सड़कें राज. राज्‍य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा)  का निर्माण किया गया है। इन सभी सड़कों पर शोल्‍डर का निर्माण किया गया है।

(4) जी नहीं। पूर्व में पुरानी निर्मित सभी सड़कों के निर्माण के समय मिट्टी के शोल्‍डर बांधे गये थे। यातायात के दबाव एवं कई वर्षों की बरसात के कारण कुछ सड़कों के शोल्‍डर डामर सड़क से नीचे हो गये हैं जिनमें ग्रेवल के शोल्‍डर निर्माण कार्य राज्‍य के उपलब्‍ध वित्‍तीय संसाधनों एवं पारस्‍परिक प्राथमिकता पर निर्भर करते हैं।

(5) जी हां। पिछले 5 वर्षों में सरकार द्वारा विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली की 26 (सा.नि.विभाग द्वारा 13 सड़कें व रा.रा.कृषि विपणन बोर्ड द्वारा 13 सड़कें) सड़कों के पुनर्निर्माण (नवीनीकरण) का कार्य मय शोल्‍डर बांधे जाने सहित किया गया। इन सड़कों के नाम, नवीनीकरण, लम्‍बाई मय चैनेज परिशिष्‍ट पर सलंग्‍न है। गत 5 वर्षों में ऐसी कोई सड़क का पुनर्निर्माण नहीं किया गया जिसमें शोल्‍डर नहीं बांधे गये हों।

(6) जी नहीं। ठेकेदार द्वारा सभी पुनर्निर्माण सड़कों के साथ शोल्‍डर का कार्य भी किया गया है।

(7) जी हां। विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली की क्षतिग्रस्‍त सड़कों का विवरण परिशिष्‍ट में दर्शाया गया है जिसमें क्रम संख्‍या 1 से 4 तक के कार्य आर.एम.यू.पी. फेज तृतीय में स्‍वीकृत हैं तथा कार्य प्रगति पर हैं क्रम संख्‍या 5 व 6 के कार्य नाबार्ड के आर.आई.डी.एफ.-XII में स्‍वीकृत हैं। जिसकी निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। क्रम संख्‍या 7 पर पावटा-नारेडा सड़क पर कि.मी. 0/0 से 7/0 तक सुदृढीकरण व नवीनीकरण कार्य आर.आई.डी.एफ.-XII में स्‍वीकृत हैं तथा निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। सभी स्‍वीकृत/प्रगतिरत कार्य वर्ष 2007-08 में पूर्ण होना सम्‍भावित है। शेष सड़कों की मरम्‍मत, पेचवर्क, कटे हुए किनारों को सही करने व पुन: सड़कों का डामरीकरण कार्य राज्‍य के उपलब्‍ध वित्‍तीय संसाधनों एवं पारस्‍परिक प्राथमिकता पर निर्भर करता है।

 

 

 

 

 

 

Vps-usc-22032007-1150-1f-1

 

 

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि क्‍या सड़कों के दोनों तरफ बांधे जाने वाले शोल्‍डर केवल मिट्टी के बांधे जाते हैं या ग्रेवल के बांधे जाते हैं या ईंटों से बाँध कर उनको किया जाता है?

दूसरी बात मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि माननीय मंत्री महोदय, आपने जवाब में परिशिष्‍ट में लिखा कि ऐसी कोई भी सड़क नहीं है जिसके शोल्‍डर नहीं बांधे गये। मैं यह बताना चाहता हूं कि फेज- 2003-04, 2004-05, 2005-06 में जितनी भी सड़कें बनीं और जितनी भी पुनर्निर्मित सड़कें हुईं उनके किसी के शोल्‍डर नहीं बांधे गये। आपने जो जानकारी दी है, यह जानकारी बिलकुल गलत है और निश्चित रूप से आप मौके पर अब देखेंगे इसकी स्थिति तो वास्‍तव में आपको यह पता लगेगा कि एक भी सड़क शोल्‍डर  बांधी हुई नहीं है तो आप कृपया, यह बताने की कृपा करें कि क्‍या इन सड़कों की स्थिति जो खराब है। इन सड़कों की जो स्थिति खराब है उस खराब स्थिति को सुधारने के लिए राज्‍य सरकार क्‍या करना चाहती है और सड़कों के दोनों तरफ जो शोल्‍डर बांधने की स्थिति है वह ग्रेवल या मिट्टी की है? यह बताने की कृपा करें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने मेरे उत्‍तर में पहले ही कहा है और माननीय सदस्‍य को जो परिशिष्‍ट उपलब्‍ध कराया है उसमें जिन सड़कों का जिक्र आपने किया है, जो नवीनीकरण और उन्‍नयन का कार्य जिनमें 2002-03 से जो शुरू हुआ है, उसमें भी लिखा है कि मिट्टी की पटरी बनायी गयी है। यह शोल्‍डर माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मिट्टी के भी बनाये जाते हैं और ग्रेवल के भी बनाये जाते हैं। जिन सड़कों का जिक्र आपने किया है, जिनका रिन्‍यूवल किया गया है उनमें सड़कें, सड़क पर मिट्टी के शोल्‍डर बनाये गये हैं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें कोई शक नहीं है कि जिन सड़कों का आपने जिक्र किया, वहां इन दिनों के अन्‍दर कुछ ऐसे प्‍लांट लग गये और कुछ ईंट के भट्टे लग गये कोटपूतली क्षेत्र में पावटा से नारेड़ा, दूदावास इन सब पर हरियाणा बोर्डर तक माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 26 बजरी के प्‍लांट लग गये और 9 स्‍टोन क्रेशर लग गये इनके कारण से यातायात का दबाव बढ़ा और यातायात के दबाव के बढ़ने के कारण से यह जो मिट्टी के शोल्‍डर, जो हमने यह पटरियां बांधी थीं इनके अन्‍दर निश्चित तौर पर नुकसान होना स्‍वाभाविक है और मैं माननीय सदस्‍य को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि आपके क्षेत्र में जितनी भी सड़कें बनी हैं, उन सड़कों का आप कहो तो मैं एक-एक सड़क का जिक्र कर दूं, अधिकांश सड़कों को हमने रिन्‍यूवल में भी ले लिया है और जहां शोल्‍डर जिनके खराब है, उनके भी निश्चित तौर पर हमारे संसाधन को देखेंगे, चूंकि मिट्टी की पटरी है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें कोई ग्रेवल बनायी नहीं गयी थी ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: उस पाँच साल में तो जो बनी है सड़कें, उनके तो आपने शोल्‍डर बनाये हैं। उसके डामरीकरण का काम हुआ तो ... (व्‍यवधान) वे तो पाँच ही साल की पूछ रहे हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ग्रेवल के। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 2002-03 में ... (व्‍यवधान)

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): यही मैं कहना चाह रहा हूं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यही कहना चाह रहा हूं कि पिछले तीन साल में या पाँच साल में जो सड़कें निर्मित हुई हैं उनमें ग्रेवल के शोल्‍डर बनाये जाने चाहिए थे जो नहीं बनाये गये और हालत यह हो गये कि वहां पर डेढ़-डेढ़, दो-दो फुट के गड्ढे सड़क के दोनों तरफ है। चौकी गोरधनपुरा से राजनोता सड़क जो जा रही है, एक परावपुरा से पाछुड़ाला सड़क जा रही है, पावटा से नारेड़ा सड़क जा रही है, इन सड़कों की हालत बड़ी दयनीय है और उसमें ग्रेवल के शोल्‍डर नहीं बनाये गये हैं। यह मैं कहना चाहता हूं कि आप मिट्टी ही मिट्टी के शोल्‍डर की बात कह रहे हैं इसमें ग्रेवल के शोल्‍डर बनाये जाने चाहिए थे जो नहीं बनाये गये हैं1

श्री अध्‍यक्ष: जानकारी कर लीजिए। जानकारी कर लीजिए, क्‍या दिक्‍कत है?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो यह सड़के बनीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो नयी सड़कें बनती हैं। माननीय सदस्‍य जिन सड़कों का जिक्र कर रहे हैं इन सड़कों का नवीनीकरण किया गया था 2002-03 में भी किया गया, 2003-04 में भी किया गया और अब भी किया गया। जो नवीनीकरण जिन सड़कों का किया उनका पहले जिनके शोल्‍डर बन गये थे ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: पर आप तो जवाब में दूसरी बात कह रहे हो। इन्‍होंने प्रश्‍न भी नई सड़कों का पूछा है और आपने जवाब भी नई सड़कों का दिया है, माननीय मंत्रीजी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं-नहीं।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, दिया है आपने।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने पाँच वर्ष की सड़कों का जिक्र किया था।

श्री अध्‍यक्ष: हां तो पाँच वर्ष में आपका भी योगदान है। आपका भी था। 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): तो पाँच वर्ष में दो केटेगरी है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन पाँच वर्षों के अन्‍दर जो 26 नई सड़कें बनी हैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उनके तो शोल्‍डर ग्रेवल के बने हैं और इन्‍हीं पाँच वर्षों में जो पुरानी सड़कें थीं, जिनका नवीनीकरण हमने किया है उन सड़कों के शोल्‍डर पूर्व में मिट्टी से बने हुए थे और उनमें कोई क्षतिग्रस्‍त हो गये है तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍य को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि किसी न किसी योजना में लेकर उन शोल्‍डर को हम ठीक करवा देंगे और प्राथमिकता भी माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इन से पूछ लूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): क्‍योंकि उनको ज्‍यादा जानकारी है।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है। नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। क्‍या?

श्री सुरेश मीणा (करौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं भी मंत्री महोदय से एक सवाल पूछना चाहता हूं। एक सवाल माननीय मंत्रीजी से पूछना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या पूछना चाहते हो? शोल्‍डर की बात कह दी मंत्रीजी ने। नो-नो।

श्री सुरेश मीणा (करौली): बहुत ही महत्‍वपूर्ण मामला है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत ही महत्‍वपूर्ण मामला है।

श्री अध्‍यक्ष: श्री नन्‍दलाल मीणा।

श्री सुरेश मीणा (करौली): मेरे एरिया में जो सड़कें बन रही है उनमें भयंकर घोटाला हो रहा है। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: श्री नन्‍दलाल मीणा।

श्री सुरेश मीणा (करौली): क्‍या  मंत्रीजी यह बतायेंगे कि हमारे एरिया में जितनी भी प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना में ... (व्‍यवधान)

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): क्‍या यह सही है कि राज्‍य सरकार ने सड़क निर्माण ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: श्री देवीशंकर भूतड़ा। अंकित नहीं हो। अंकित नहीं हो इनका कहा हुआ। मैंने नेक्‍स्‍ट प्रश्‍न पुकार लिया है। नो-नो, नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। करौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, करौली का सवाल नहीं है यह। करौली का सवाल नहीं है, आप विराज जाएं। करौली का सवाल नहीं है यह। नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री अध्‍यक्ष: ... (व्‍यवधान)  फिर मतलब क्‍या हुआ इसका? क्‍या बात कर रहे हो? ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप कृपया, स्‍थान ग्रहण कर लें। भदरा से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण कर लें। अंकित नहीं हो। अंकित नहीं हो। आप एक बार स्‍थान ग्रहण कर लें। अंकित नहीं हो रहा है। अं‍कित नहीं हो रहा। अंकित नहीं हो रहा। ... (व्‍यवधान)

करौली का सवाल नहीं है, माननीय सदस्‍य। यह तो कोटपूतली का सवाल है। उन्‍होंने कह दिया। वे संतुष्‍ट हो गये। प्रश्‍न काल सूचना प्राप्‍त करने के लिए होता है, उन्‍होंने कर ली और अब आप स्‍थान ग्रहण कर लें, प्‍लीज। 

प्रश्‍न संख्‍या- 214

श्री नन्‍दलाल मीणा।

(अनुपस्थित: कृपया आगे देखें।)

 

विधान सभा क्षेत्र ब्‍यावर में प्रस्‍तावित औद्योगिक क्षेत्र की भूमि पर अतिक्रमण

 

215. श्री देवीशंकर भूतड़ा (ब्‍यावर): क्‍या उद्योग मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:

(1) क्‍या यह सही है कि विधान सभा क्षेत्र ब्‍यावर में स्थित रीको औद्योगिक क्षेत्र में भूखण्‍ड रिक्‍त है? यदि हां, तो कितने व किस माप के और कहां-कहां?

(2) क्‍या सरकार विधान सभा क्षेत्र ब्‍यावर में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का विचार रखती है? यदि हां, तो कहां-कहां एवं कब तक?

(3) क्‍या यह सही है कि प्रस्‍तावित रीको क्षेत्र की भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है? यदि हां, तो सरकार इसे हटाने के लिए क्‍या कार्यवाही कर रही है?

(4) क्‍या सरकार विधान सभा क्षेत्र ब्‍यावर के औद्योगिक क्षेत्र की जर्जर सड़कों की मरम्‍मत करवाने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

उद्योग मंत्री (श्री नरपत सिंह राजवी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, (1) रीको औद्योगिक क्षेत्र ब्‍यावर द्वितीय चरण में एक भूखण्‍ड एवं तृतीय चरण में 6 भूखण्‍ड रिक्‍त हैं। विवरण परिशिष्‍ट पर संलग्‍न है।

(2) जी, हां। ग्राम नरबदखेड़ा में आवंटित राजकीय भूमि का कब्‍जा रीको को प्राप्‍त होने के उपरान्‍त औद्योगिक क्षेत्र विकसित करना सम्‍भव होगा।

(3) जी, हां। अतिक्रमण वाली भूमि को छोड़ते हुए शेष भूमि का कब्‍जा दिलाने एवं अतिक्रमण हटाने हेतु जिला प्रशासन को निगम ने निवेदन किया है।

(4) जी, हां। रुपये 128.41 लाख का बजट स्‍वीकृत किया गया है। रुपये 48.91 लाख के कार्यादेश जारी किये जा चुके हैं और इन्‍हें दिनांक 30.06.2007 तक पूर्ण करा लिया जाएगा। शेष कार्यों के लिए निविदाएं आमंत्रित की जाकर दिनांक 31.07.2007 तक सम्‍पूर्ण सड़कों की मरम्‍मत का कार्य पूर्ण करा लिया जाएगा।   

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है।

श्री देवीशंकर भूतड़ा (ब्‍यावर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि जो रीको को आवंटित भूमि है उस पर यह अतिक्रमण कब से है और यह अतिक्रमण है उसको हटाने के लिए अब तक कितने प्रयास हुए और इस अतिक्रमण के हटने में कोई सफलता मिलेगी या नहीं मिलेगी? यदि यह हटेगा तो कितना समय और लगेगा, इसके बारे में मंत्री महोदय थोड़ा बता दें।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, औद्योगिक क्षेत्र की स्‍थापना हेतु ग्राम नरबदखेड़ा की राजकीय भूमि खसरा नम्‍बर 727 की 62 बीघा 17 बिस्‍वा, 10 बिस्‍वा का आवंटन राज्‍य सरकार ने दिनांक 23.04.1996 में किया। इस भूमि की प्रिमियम राशि भी जमा दिनांक 23.09.1996 को करा दी। उसके बाद भूमि का अतिक्रमण नहीं हटने के कारण आज तक भूमि का कब्‍जा रीको को नहीं दिया गया है। 1996 से लेकर इस वर्ष के अन्‍त तक बीसों पत्र लिखे हैं, बीसों बार अधिकारी भी वहां पर गये हैं। अभी 14 तारीख को भी गये थे लेकिन प्रशासन वहां पर क्‍योंकि भीड़ अधिक एकत्रित हो गयी थी और वे अतिक्रमी राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े हुए हैं इसलिए भीड़ आस-पास से एकत्रित कर लेते हैं। छितरे हुए मकान हैं। छितरे हुए हैं एक अगर लॉट में हो, एक साथ हो तो हम उसको अलग अलॉट करके भी दे दें। प्रशासन को, हमने यह भी कोशिश की है कि इतना एरिया छोड़कर बाकी शेष जमीन दे दे तो उसमें कम से कम विकास कार्य हम आरम्‍भ कर दें। बारबार इनकम टैक्‍स डिपार्टमैंट को भी कमिटेड लायबिलिटी या प्रस्‍तावित खर्च के आधार पर दिया जाना, यह भी परेशानी का सबब है। इसमें यदि अगर आप लोग भी मदद करेंगे तो निश्चित तौर पर मैं इसको जल्‍दी से जल्‍दी इस अगले आने वाले वित्‍तीय वर्ष में विकास कार्य करके समर्पित कर दूंगा।

श्री देवीशंकर भूतड़ा (ब्‍यावर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय मंत्री महोदय ने कहा कि 1996 से यह आवंटित भूमि है।

spp/usc/12.00/1g/22.3.2007(1)

 

माननीय मंत्री महोदय से यह कहना चाहता हूं कि केवल 6 भूखण्‍ड ब्‍यावर में रीको के अंदर रिक्‍त है और ब्‍यावर के अंदर कम से कम 50 यूनिट वूल की आने को तैयार हैं और कोई क्षेत्र है नहीं तो जब तक यह कब्‍जा नहीं हटेगा तब तक सरकार कोई नया रीको क्षेत्र डवलप करने का विचार नहीं रखती है , यह कब्‍जा 1996 से चल रहा है। यह कब्‍जा जब हट भी जायेगा और माननीय मंत्री महोदय अपने उत्‍तर में यह भी स्‍वीकार कर रहे हैं कि यह जो कब्‍जा है उस जमीन को छोड़कर, यदि वह कब्‍जा 20-25 बीघा में कब्‍जा है और यदि वह 20-25 बीघा कब्‍जा छोड़ दिया तो बाकी शेष बचेगा क्‍या ? उसमें रीको का क्‍या डवलप हो जायेगा ? इसलिए माननीय मंत्री महोदय से जानकारी करना चाहता हूं कि कोई नया रीको डवलप करने के बारे में कोई कार्य योजना है या नहीं ?

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह कई जगह डिफिकल्‍टीज आती हैं और लैण्‍ड कोस्‍ट बढ़ने के कारण वास्‍तव में डिफिकल्‍टीज हैं । रीको को और इस विभाग को कोई आपत्ति नहीं है, नई जमीन के प्रस्‍ताव हम जिलाधीश को भेजकर इस पर अतिशीघ्र कार्यवाही कर देंगे।

श्री अध्‍यक्ष : प्रश्‍न काल समाप्‍त हुआ।

 

स्‍थगन प्रस्‍तावों पर अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि निम्‍नांकित स्‍थगन प्रस्‍तावों की सूचना प्राप्‍त हुई है :-

1. श्री रामनारायण मीणा, सदस्‍य की ओर से मंत्रिमण्‍डल के सदस्‍य द्वारा संविधान में वर्णित धर्मनिरपेक्षता का उल्‍लंघन करने के संबंध में।

  उपरोक्‍त प्रस्‍ताव अनुमान पर आधारित है। प्रस्‍ताव में पीडि़तों का माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय की शरण में जाने का भी उल्‍लेख है। नियमों के तहत स्‍थगन प्रस्‍ताव का विषय नहीं है, अंत: इस पर अनुमति देने में असमर्थ हूं।

2. श्री संयम लोढ़ा, सदस्‍य की ओर से ऋषभदेव पुलिस फायरिंग में मरे आदिवासी को दी गयी सहायता राशि में भेदभाव के संबंध में।

प्रस्‍ताव में उल्‍लेखित विषय पर इसी सत्र में दिनांक 8 मार्च, 2007 को पर्ची के माध्‍यम से विस्‍तृत चर्चा की जा चुकी है, अत:मैं इस पर पुन: अनुमति देने में असमर्थ हूं। 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): एक मिनट, अब आपने रूलिंग दे दी अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: सुनिये, जब तब आसन पांवों पर है, तब तक कृपया बैठें। उसके बाद यदि आपको कुछ कहना है तो आसन पांवों पर न रहे, तब आपको कहने का अधिकार है। कृपया करके बीच में ना खड़े हुआ करें।

3. श्री अमराराम धोद, एवं दो अन्‍य सदस्‍यों की ओर से रावला एवं अनूपगढ़ पुलिस द्वारा किसान आन्‍दोलन के नेताओं के साथ पुलिस कस्‍टडी में मारपीट की कार्यवाही के संबंध में।

घटना कब की है, इसका प्रस्‍ताव में कोई उल्‍लेख नहीं है। क्‍योंकि यह बहुत पुरानी घटना है रिसेंट, प्‍लीज डोंट स्‍टेंड। यह घटना बहुत पहले की है।

श्री अमराराम (धोद): ना-ना, घटना पहले की नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: नियमों के तहत ..(व्‍यवधान)... फिर, नो-नो, बीच में नहीं बोलेंगे आप। बीच में नहीं बोलेंगे। ..(व्‍यवधान)... नो-नो । आप बैठ जायें। उसके अलावा स्‍थगन प्रस्‍ताव की परिधि में भी नहीं आता है, लेकिन कल आपको पूरा मौका मिला था पुलिस की डिमाण्‍ड पर इन सब बातों को उठाने का, तब आप क्‍यों नहीं बोले ? , अत: अनुमति देने में असमर्थ हूं।

4. श्री श्रवण कुमार, सदस्‍य की ओर से ग्राम पंचायत सूरजगढ़ में चल रहे अकाल राहत कार्यों के भुगतान में सरपंच द्वारा अनियमितता करने के संबंध में।

सदन में 3 अप्रैल को इस बारे में विस्‍तृत चर्चा होगी और माननीय सदस्‍य को उस समय बोलने का निश्चित तौर पर मौका दिया जायेगा। अत: अनुमति देने में अमसर्थ हूं।

5. श्री बी.डी.कल्‍ला एवं तीन अन्‍य सदस्‍यों की ओर से जिला नागौर की तहसील जायल के ग्राम जालनियासर में एक बी.पी.एल. परिवार दम्‍पत्ति की भूख से मौत के संबंध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव राज्‍य सरकार को जानकारी हेतु भेजा जा रहा है और जानकारी प्राप्‍त होने पर अग्रेत्‍तर इस पर विचार किया जायेगा।

6. श्री भरत सिंह एवं अन्‍य दो सदस्‍यों की ओर से राज्‍य के वन्‍यजीव अभ्‍यारण्‍यों में अवैध शिकार, खनन व सुरक्षा के अभाव में वन्‍यजीवों के अस्तित्‍व को खतरा पैदा होने के संबंध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव भी ऐसा तो नहीं है कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोककर इस पर विचार किया जाये, अनुमति देने में तो असमर्थ हूं। फिर भी माननीय सदस्‍य, श्री भरत सिंह को दो मिनट बोलने का मौका दिया जायेगा।

 

नियम 295 के अन्‍तर्गत प्राप्‍त विशेष उल्‍लेख की सूचनाएं

1. श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास, सदस्‍य की ओर से जोधपुर नगर निगम की सीमा बढ़ाने के संबंध में ।    

2. श्री लक्ष्‍मीनारायण बैरवा, सदस्‍य की ओर से तहसील फागी में बिजली का 132 के.वी.ग्रिड स्‍टेशन स्‍थापित करने के संबंध में।

3. डॉ0 चन्‍द्रशेखर बैद, सदस्‍य की ओर से तहसील तारानगर में आपणी योजना में बड़े गांवों को घर घर पानी कनेक्‍शन देने के संबंध में।

4. श्री अशोक नागपाल, सदस्‍य की और से तहसील सूरतगढ़ के गांव संगीता एवं पाँच एस डी आई में आई सेम से निजात दिलवाने के संबंध में। गांव का नाम संगीता है क्‍या, कमाल है।

5. श्रीमती स्‍नेहलता, सदस्‍य की ओर से 10वीं एवं 12वीं बोर्ड के परीक्षार्थियों के सेशनल मार्क की व्‍यवस्‍था को समाप्‍त करने के संबंध में।

6. श्री हीरालाल, सदस्‍य की ओर से नगरपालिका निवाई द्वारा भूखण्‍ड आवंटन हेतु आवेदन करने वाले आवेदकों को भूखण्‍ड देने के संबंध में।

7. श्री रामकिशोर मीणा, सदस्‍य की ओर से खान विभाग के निदेशक द्वारा मैसर्स बृजेन्‍द्र मिनरल्‍स के खिलाफ रायल्‍टी चोरी की डिमाण्‍ड को खत्‍म कर देने के संबंध में।

8. श्री रामलाल शर्मा, सदस्‍य की ओर से चौमूं नगर पालिका क्षेत्र में कृषि भूमि पर बसी कालोनियों का नियमन करने के संबंध में।

9. श्री हीरालाल(बामनवास), सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र बामनवास में पेयजल का संकट होने के संबंध में।

10. श्री सुभाषचन्‍द्र शर्मा, सदस्‍य की ओर से कोटपूतली को जिला बनाने के संबंध में।

11. श्री लालचन्‍द मेघवाल, सदस्‍य की ओर से गंगनहर में बुर्जी संख्‍या 31 से 205 को पक्‍का करने के संबंध में।

12. श्री राकेश मेघवाल, सदस्‍य की ओर से परबतसर में नया पुलिस उप अधीक्षक का कार्यालय स्‍थापित करने के संबंध में।

माननीय सदस्‍यों को उनके द्वारा पढ़ने की अनुमति नहीं देकर सदन इन्‍हें पढ़ा हुआ मान लेगा, क्‍योंकि आज बहुत महत्‍वपूर्ण डिमांड है। श्री भरत सिंह।

स्‍थगन प्रस्‍तावों आदि पर चर्चा

रावला एवं अनूपगढ़ पुलिस द्वारा किसान आन्‍दोलन के नेताओं के साथ पुलिस कस्‍टडी में मारपीट

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं यह पुरानी घटना नहीं है। यह सोमवार को घटना हुई है। सोमवार को एक पंचायत समिति का मैम्‍बर मैंने लिखकर दिया है राजू जाट, यह सोमवार को हुई है। मुझे मंगलवार के बाद बुधवार को कल मुझे यह सूचना मिली है तो मैं कल गृह मंत्रालय की मांग पर मंगलवार को कहां से बोल लेता ? यह घटना सोमवार की है। मुझे बुधवार को पता लगा है । अध्‍यक्ष महोदय, मंगलवार को तो गृह मंत्रालय की मांग थी तो मेरा आपसे रिक्‍वेस्‍ट है । आपकी व्‍यवस्‍था शिरोधार्य है,लेकिन मुझे बुधवार को ही सूचना मिली है।

श्री अध्‍यक्ष: आपने अपने स्‍थगन प्रस्‍ताव में इस बात का उल्‍लेख नहीं किया है, इसलिए मेरी व्‍यवस्‍था यह है। ..(व्‍यवधान)..

श्री अमराराम (धोद): किया है। अध्‍यक्ष महोदय, पंचायत समिति का मैम्‍बर है जिसको जुडिशल करने के बाद .(व्‍यवधान)...

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कल आपने अकाल राहत के बारे में मुझे बताया ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: प्‍लीज स्‍थान ग्रहण करें। ..(व्‍यवधान)...

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): मैं यह कहना चाहता हूं अकाल राहत के बारे में नहीं बोलना चाहता, फर्जी मस्‍टरोल ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें। ..(व्‍यवधान)... स्‍थान ग्रहण करें। ..(व्‍यवधान)...आपने जो लिखकर दिया है ..(व्‍यवधान)...

श्री अमराराम (धोद): हो सकता है घटना की तारीख .. ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आपने कहीं नहीं लिखा है कि घटना रिसेंट अकरेंस की है। यह कहीं नहीं लिखा। ..(व्‍यवधान)...

श्री अमराराम (धोद): तारीख नहीं लिखी होगी, लेकिन घटना सोमवार की है। मुझे बुधवार को पता लगा है। ..(व्‍यवधान)...

श्री सी.डी.देवल : प्रतिपक्ष के भी हैं, सत्‍ता पक्ष ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आपको यह विशेषाधिकार किसने दिया कि जब चाहे आप खड़े हो जायें, आपको यह विशेषाधिकार किसने दिया ?

श्री सी.डी.देवल : नहीं सत्‍ता पक्ष का है ही नहीं। इसलिए अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या आसन के खड़े होने पर हमारे पर ही प्रतिबन्‍ध है ? सत्‍ता पक्ष के लोग कर रहे हैं, उनको आप कुछ नहीं कह रही हैं। ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: मैं आपसे कह रही हूं आप स्‍थान ग्रहण कर लें।

श्री सी.डी.देवल : आप हमें तो कह रहे हैं उनके लिये भी कोई व्‍यवस्‍था करिये। आसन की बात तो निष्‍पक्ष होनी चाहिये। प्रतिपक्ष को तो कह देते, आसन पैरों पर है और सत्‍ता पक्ष कैसे घूम रहा है ?  ..(व्‍यवधान)...

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक निवेदन करना चाह रहा था । मैं अकाल के बारे में नहीं बताना चाह रहा था, मैं यह कहना चाह रहा हूं कि अकाल राहत में गड़बड़ी .. ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आसन पाँव पर है। ..(व्‍यवधान)... अंकित नहीं हो।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): 000

श्री अध्‍यक्ष: पिलानी से आने वाले माननीय सदस्‍य, क्‍या तकलीफ है ? क्‍यों खड़े हैं आप ? आसन बैठे तब आप बोलियेगा ।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): 000

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष, क्‍या आपसे अपने जिले का आदमी भी नहीं सम्‍हलता?

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): 000

श्री सी.डी.देवल : 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: ऐसा है, आपने यह कहीं नहीं लिखा है और आपने यह लिखा है ..(व्‍यवधान)...

श्री सी.डी.देवल : 000    

Msr/usc/1210/1h/22032007

 

श्री अध्‍यक्ष: ऐसा है, आपने कहीं लिखा नहीं और आपने यह लिखा है। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): 000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो रहा है।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या फर्माया?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): 000

श्री अध्‍यक्ष: कई सदस्‍य पहली बार आये हैं, इन माननीय सदस्‍यों को नियमों की जानकारी नहीं है इसलिए गलती कर जाते हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: शिक्षा मंत्रीजी और गृह मंत्रीजी कभी नहीं करते हैं यह गलती।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मैं भी नहीं करता हूं। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप तो कभी-कभी कर जाते हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: आसन की व्‍यवस्‍था सब के लिए है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: सब के लिए है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: ऐसा है खरबूजे को देख कर खरबूजा रंग बदलता है इसलिए जब आप रोज यह काम करते हो तो कभी-कभी यह भी कर लेते हैं।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: सुनिये। मेरी बात सुन लीजिए पहले आप। आपने यह लिखा है ...

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): 000

श्री अध्‍यक्ष: नैनवां से आने वाले माननीय सदस्‍य।

माननीय सदस्‍य, आपने यह लिखा है कि मैंने इसकी सूचना ...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, सुनिये। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: आपने लिखा कि मैंने इसकी सूचना गृह मंत्रीजी को दे दी तो गृह मंत्रीजी अपने आप इस पर कोई न कोई कार्यवाही करेंगें।

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: क्‍यों लिख रहे हो? ...(व्‍यवधान)...

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: आज तो आसन व्‍यवस्‍था दे चुका है और कल आप लाइयेगा, वापस ले आइयेगा, कल आपको दो मिनट बोलने की अनुमति दे दूंगी। ऐसे आसन व्‍यवस्‍था नहीं बदलता है। नो, नो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, निर्वाचित जनप्रतिनिधि को पुलिस गिरफ्तार कर के ले जाए, वहां ले जाकर के थाने के अन्‍दर पिटाई करे, ऐसा आज तक बहुत कम देखने को मिला है और आपके गृह मंत्री होते हुए इस प्रकार की अव्‍यवस्‍था हो रही है, यह तो बहुत अशोभनीय बात है।

श्री अध्‍यक्ष: और आपके नेता प्रतिपक्ष होते हुए हो रही है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपको जानकारी कर के और उसको खुलासा करना चाहिए। निर्वाचित जनप्रतिनिधि, पंचायत समिति का सदस्‍य है जिसके गोली लगी हुई है आन्‍दोलन में, उसको पकड़ कर ले गये और थाने में पीटा, डीवाई.एस.पी. की मौजूदगी में पिटाई हुई।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय प्रतिपक्ष के नेता और माननीय सदस्‍य को कहना चाहता हूं, माननीय सदस्‍य, आप तो इस विषय को शायद आज दे पाये, मेरे को 17 तारीख को इसकी जानकारी जब मिली कि एक जूडिशियल कस्‍टडी में जेल से पेशी पर ले गये और रास्‍ते में ले जाकर उसको पीटा और फिर जेल में भर्ती कराया, इसके बाद उसका मेडिकल हुआ, उसके दस चौटें लगीं। मैंने तुरन्‍त क्राइम ब्रांच के एडीशनल एस.पी. जोधपुर को, उस एरिया में भी नहीं जांच रखी है, उसको जांच दी है।

मैं सदन को विश्‍वास दिलाता हूं घटना प्रत्‍यक्ष जो कुछ भी देखा है और समझा है, उसने बहुत बड़ी भूल की है लेकिन मैं केवल इन्‍तजार कर रहा हूं, उनको मैंने सात दिन का समय दिया आप जांच देओ और उसमें जो भी सख्‍त से सख्‍त सज़ा, वास्‍तव में उसने नियमों की भारी अवहेलना की, जूडीशियल कस्‍टडी में जो व्‍यक्ति है और पेशी पर लाया और वापस भेजने के बीच में उसने उसके साथ जो पिटाई की है वो वास्‍तव में अपराध किया है, मैं कठोर से कठोर जो सज़ा है, सारी जांच आने के बाद दूंगा। मेरा काम पहले ही कर लिया।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है। ठीक है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान मेरे स्‍थगन प्रस्‍ताव पर ...

श्री अध्‍यक्ष: अब आप काहे को?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): राजस्‍थान का गृह मंत्री कन्विस्‍ड है कि उसके साथ ज्‍यादति हुई है, आप कठोर से कठोर सज़ा क्‍या देंगे, आप बरखास्‍त तो कर नहीं सकते, आपकी कलम में तो सस्‍पैण्‍ड करना है।

जब आप, राजस्‍थान का गृह मंत्री सैटिस्‍फाइड है कि मैं समझता हूं कि उसके साथ ज्‍यादति हुई है तो आप समझते हैं ज्‍यादति हुई है, उसके बाद में उस पर एक्‍शन नहीं होगा? यह तो बड़े दुःख की बात है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): एक्‍शन होगा।

श्री अध्‍यक्ष: तो जांच रिपोर्ट तो आने दो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): रिपोर्ट आ जायेगी, पता है न उनको।

श्री अमराराम (धोद): एक नहीं यह डीवाई.एस.पी., माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं धन्‍यवाद दूंगा गृह मंत्रीजी को लेकिन जिस तरह से यह डीवाई.एस.पी. एक नहीं कर रहा है इसने रावला थाने में इससे पहले पिटाई, जो मैंने आपको कहा इनको नहीं, मेरे को साढ़े तीन घंटे तक इसी डीवाई.एस.पी. ने थाने से ले जाकर राज्‍यासर थाने में साढ़े तीन घंटे तक, जिसका भी उत्‍तर गृह मंत्रीजी के माध्‍यम से आपके पास भेजा, बिलकुल असत्‍य है। इससे ज्‍यादा नाकारा डीवाई.एस.पी. नहीं हो सकता जो एक माननीय सदस्‍य के साथ कर सकता है।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने आपको बुलाया, इसीलिए मैंने आपको चिट्ठी लिखी कि जवाब यह आया है इसलिए आप मुझ से आ कर मिलें, आप मिले तो नहीं।

श्री अमराराम (धोद): नहीं, मिला है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके चैम्‍बर में आपने चिट्ठी पढ़ी, मैंने बिलकुल आपके सामने यह बात रखी। साढ़े तीन घंटे तक माननीय सदस्‍य को नाजायज रूप से, कोई केस नहीं होने के बाद यही डीवाई.एस.पी. थानेदार से ले जाकर के थाने में बैठाता है। आपको मैंने शिकायत की, आपने चिट्ठी दी, में आपके चैम्‍बर में आया। यही डीवाई.एस.पी. है निर्मल सिंह जो सरकार से और मैं समझता हूं गृह मंत्रीजी से ऊपर हो गया, इस सदन से ऊपर हो गया। इस सदन के माननीय सदस्‍य को, कोई भी ऐसा केस हो तो मेरे को जेल में दें, साढ़े तीन घंटे राज्‍यासर के थाने में, चार बजे से लेकर साढ़े सात बजे तक, न-केवल मेरे को बल्कि मेरे को लाने के लिए दो सदस्‍यों को, जो ड्राइवर थे उनको नंगा कर के तीन घंटे तक पीटा। इससे ज्‍यादा क्‍या हो सकता है और वो डीवाई.एस.पी. आज भी वहीं बैठा है। ...(व्‍यवधान)...

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): माननीय सदस्‍य के साथ इससे बड़ा अन्‍याय और क्‍या ...(व्‍यवधान)...

श्री अमराराम (धोद): अब गृह मंत्रीजी कह रहे हैं, गृह मंत्रीजी के कहने के बाद एस.पी. को मेरे सामने निर्देश दिये उसके बाद। जंगलराज हो रहा है। मैं समझता हूं गृह मंत्रीजी से ऊपर जो लोग बैठे हुए हैं वो यह कहना चाहते हैं ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आपने जो चिट्ठी लिखी थी ।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट।

श्री अध्‍यक्ष: प्‍लीज, नहीं, आप एक बार बैठिये।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): जब गृह मंत्रीजी अपने आप में सैटिस्‍फाइड हैं तो फिर जांच की जरूरत कहां है?

श्री अध्‍यक्ष: आपने जो चिट्ठी लिखी, मैंने गृह मंत्रीजी को चिट्ठी लिखी और मैंने लिखा कि बहुत गलत बात है इस तरीके से। इनकी चिट्ठी मेरे पास वापस, पुन: आयी और इन्‍होंने लिखा कि वो अपनी मर्जी से बैठे थे। ...(व्‍यवधान)...

सुनिये तो सही, अब आप कह रहे हैं यह बात लेकिन जो आयी कि वो अपनी मर्जी से बैठे थे। गृह मंत्रीजी की तरफ से यह चिट्ठी आए तो मैं तो यही मान कर चलूंगी कि आप अपनी मर्जी से बैठे थे। इन्‍होंने कहा हमने उनको डिटेन नहीं किया, वो अपनी मर्जी से बैठे थे, हमने उन्‍हें वहां चाय पिलायी है और वो अपने थाने में बैठे रहे दो-तीन घंटे। ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनको आपसे मिलना चाहिए अगर इनको एतराज था तो। आपने जब इतना प्रयास किया तो आपसे आकर मिलते यह। आकर कुछ कहते।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, चिट्ठी लिखी। चिट्ठी लिखी थी। ...(व्‍यवधान)... यह मैंने गृह मंत्रीजी को चिट्ठी लिखी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हर चीज का राजनीतिक मुद्दा बनाना, क्‍या वास्‍तव में यह अपनी मर्जी से बैठे थे कि नहीं बैठे थे, यह तो इनको पता है। अगर इनको एतराज था तो आपको आकर कहते कि मैंने आपको प्रार्थना पत्र दिया।

श्री अमराराम (धोद): मिला हूं मैं चैम्‍बर में आकर, कह कर गया हूं ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: चिट्ठी लिखी।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): जांच अधिकारी रहा है उनको पूछो न जाकर के कि आप वहां से मन से बैठे हो कि कैसे बैठे हो। ...(व्‍यवधान)...

श्री अमराराम (धोद): चैम्‍बर में आकर पूरी चिट्ठी को पढ़ कर के इनको पूरी स्थिति बता के गया हूं उसके बाद कोई नहीं है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इससे ज्‍यादा संवेदनशीलता क्‍या हो सकती है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने स्‍थगन प्रस्‍ताव को निरस्‍त किया और उसके बाद भी सहृदयता से गृह मंत्रीजी ने उठ कर सारी बात कह दी। इनको धन्‍यवाद देना चाहिए गृह मंत्रीजी को।

श्री अमराराम (धोद): नहीं, धन्‍यवाद, गृह मंत्रीजी को बारबार धन्‍यवाद दे रहा हूं लेकिन राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री अपनी मर्जी चला रही हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब इस मामले का राजनीतिकरण करना चाहते हैं, ऐसा नहीं चलेगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): क्‍या जांच करने वाले व्‍यक्ति ने इनको पूछा कि यह स्‍वेच्‍छा से गये थे या इनको जबरदस्‍ती बैठाया? ...(व्‍यवधान)... इनको पूछा क्‍या जाकर के? ...(व्‍यवधान)... इनको पूछा क्‍या, आप कन्‍फर्म करिये उनको।

श्री अध्‍यक्ष: आप मेरे से मिल कर गये थे और वहां पर ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपका थाना जो आपके भूतपूर्व डी.जी. ने मन्दिर बताया था, वो मन्दिर क्‍या वहां बैठने के लिए है? क्‍या लोगों की चौपाल बना रखी है जो कोई भी वहां आकर बैठ जाए? आप कह रहे हो अपनी मर्जी से बैठे, थाने में जाकर मर्जी से बैठे।

श्री अध्‍यक्ष: आप इनसे मिलने गये क्‍या?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): किस से मिलने गया?

श्री अध्‍यक्ष: मिलने गये  क्‍या?

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): दूसरे लोग, जो अरेस्‍ट थे उनके पास मिलने गये, उनके पास बैठे।

श्री अध्‍यक्ष: मिलने गये  थे इनसे?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मिलने जाने वालों को भी थाने से बाहर बैठाते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: मिलने गये थे? एम.एल.ए. को, आप और वो जाएं तो थाने के बाहर नहीं बैठा सकते आपको, अन्‍दर ही जाने देंगे।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मिलने वालों को  भी थाने के बाहर बैठाते हैं, जेल में मिलने वालों से भी जेल के बाहर बैठाते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: जेल थोड़ी थी तो वो, वो तो थाना था। ...(व्‍यवधान)...

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, थाने मेरे आने के बाद नये गठित होकर के व्‍यवस्‍था लागू हमने नहीं की, जब से देश आजाद हुआ तब से  थाने हैं। मन्दिर है या क्‍या है, आपने भी 42 साल तक उनको देखा है और मैं भी देख रहा हूं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): किस को?

श्री अध्‍यक्ष: थानों को।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): इस पर अधिक विवरण करने से कोई लाभ नहीं है। थाने मन्दिर हैं या नहीं हैं, आप भी जानते हैं पर आप में से अभी मेरे पास 150 चौकियों की केवल बजट में स्‍वीकृति मिली। Ars/usc/1220/1j/22032007/1

 

और शायद मेरे पास चारसौ की तो आवश्‍यकता आ गयी कि मेरे यहां खोलो। अगर यह मंदिर नहीं हैं तो फिर इनको खुलवाने की जरुरत काहे को महसूस करते हैं। कोई न कोई कारण होना चाहिए। पुलिस की उपस्थिति से थोड़ा बहुत उनको संतोष होता है इसलिए मांगते हैं। इसलिए थानों को मंदिर कहकर के हमने कोई पाप नहीं किया। यह मंदिर देश की आजादी के साथ ही बने हुए हैं और आप भी वहां बाहर लिखा हुआ बोर्ड है, हमारे योग्‍य कोई सेवा हो, वह मेरे टाइम पर नहीं लगा जबसे है तबसे है। क्‍या स्थिति है क्‍या नहीं है यह आप भी जानते हैं मैं भी जानता हूं, उसका विश्‍लेषण करने की जरुरत नहीं है। यह 17 तारीख की घटना है,यह आज इस विषय को उठा रहे हैं। मेरे ध्‍यान में जिस समय आया मैंने उसी दिन इसके खिलाफ कार्यवाही की है और मैं आपको कह रहा हूं क्‍योंकि जो घटना हुई क्‍योंकि जेल से ले जाकर पेशी पर लाना और पेशी पर वापस जाकर जेल में उसको जमा करा देना या उसको सुपुर्द कर देना यही काम है पुलिस का। इसके बीच में से अगर ले जाकर थाने पर पिटाई हुई यह बिल्‍कुल तथ्‍यों से प्रमाणित हो रही है।

फिर भी मैं यह चाहता हूं क्‍योंकि डी वाई एस पी स्‍तर का व्‍यक्ति भी उसमें है, बाकी है तो सही रिपोर्ट आने के बाद, मैंने आपको पहले से एडवांस में कह दिया कि इस प्रकार के अपराध को न मैं क्षमा कर सकता हूं, न सदन क्षमा कर सकता है, न मेरा पुलिस डिपार्टमैंट इसको कोई अच्‍छा मानता है। गलती हुई है मैा सोचता हूं कि मैंने एडवांस में आपके बिना कहे जांच पहले से ही एडिशनल एस पी जोधपुर को  क्राइम ब्रांच को दे दी है। रिपोर्ट आने के बाद जो भी सख्‍त से सख्‍त कार्यवाही हो सकती है वह उसके खिलाफ होगी। कहीं बचाने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है। ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपको कैसे पता चला कि उसके साथ ज्‍यादती हुई है, यह घटना हुई है, आपको कैसे पता चला ? राजस्‍थान के होम मिनिस्‍टर को यह कैसे पता चला कि उसको पीटा गया है, आपसे बड़ी एविडेंस और क्‍या होगी, आप विधान सभा के अन्‍दर एडमिट कर रहे हैं कि मैं कन्विन्‍स्‍ड हूं, उसको पीटा गया है फिर आप जांच करवा रहे हो। जांच करवाने से पहले सस्‍पैण्‍ड करो। उसके बाद जांच करवाओ ...(व्‍यवधान) हटाइये वहां से, उसको वहां रखकर के आप जांच करेंगे तो कौन एविडेंस देगा उसके खिलाफ, उसके खिलाफ बयान कौन देगा ...(व्‍यवधान) डी वाई एस पी के खिलाफ कोई बयान देगा ?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आपको यह लगता है कि उसको वहां से हटाकर जांच की जाए तो आज ही वहां से हटाकर के जांच करा देंगे। क्‍या समस्‍या है कोई समस्‍या नहीं है ।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): ठीक है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान मेरे स्‍थगन प्रस्‍ताव के मजमून की तरफ आकृष्‍ट करना चाहता हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, अब नहीं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप सुन तो लीजिए अध्‍यक्ष महोदय। आपने व्‍यवस्‍था दी मेरी बात तो सुन लीजिए।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍यों सुन लूं? जब इस पर चर्चा हो चुकी है और नियम है कि जिस विषय पर चर्चा हो चुकी है ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मेरा इश्‍यु दूसरा है अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: उस विषय पर दुबारा चर्चा नहीं हो सकती।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा इश्‍यु दूसरा है  ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपने जिन स्‍थगन को निरस्‍त फरमा दिया उन पर भी माननीय सदस्‍य अगर बोलते चले जाएं तो ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): कौन बोल रहा है, कौन बोल रहा है, मैं अध्‍यक्ष महोदय की जानकारी में ला रहा हूं उससे भी आप रोकोगे क्‍या ...(व्‍यवधान) उससे भी आप रोकोगे क्‍या?

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या ला रहे हैं आप?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप मेरी बात तो सुन लीजिए।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या सुनूंगी ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप मेरी बात सुन लीजिए उसके बाद अगर आप निर्देश देंगे कि मैं नहीं बोलूं तो मैं नहीं बोलूंगा। आप मेरी बात तो सुन लीजिए।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, आपकी आदत पड़ गई है कि जिस विषय को, स्‍थगन प्रस्‍ताव को यहां पर अनुमति नहीं दें उस पर भी एक आपकी आदत पड़ गई है दुराग्रह करते हैं आप ...(व्‍यवधान) जो कुछ भी हो आपको बोलना है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): पूरे एक महीने,एक तो अध्‍यक्ष महोदय ....

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा तो पढ़ लिया आपने।

श्री अध्‍यक्ष: आपका पढ़ लिया तो आपको मौका तीन तारीख को मिलेगा ना।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): तीन तारीख को मिलेगा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कितना बड़ा घोटाला है आप देख लो, आप खुद ही कह देंगे।

श्री अध्‍यक्ष: तीन तारीख को मिलेगा तो मौका ...(व्‍यवधान) अकाल पर चर्चा उसी दिन है।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): अकाल राहत में गड़बड़ी है क्‍या ? ...(व्‍यवधान) फर्जीवाड़े का काम किया है, फर्जीवाडे की बात कर रहा हूं मैं। मैं अकाल राहत की बात कर रहा हूं क्‍या, आप खुद ही देख लें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, मैंने इस स्‍थगन प्रस्‍ताव के माध्‍यम से आपकी जानकारी में यह बात लाई है कि यह उस आदिवासी को जो पुलिस की गोली से मरा है ....

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह सारी चीज रिकार्ड पर जा रही है। जिस विषय वस्‍तु पर स्‍थगन प्रस्‍ताव माननीय सदस्‍य ने दिया और आसन ने विचार करके उसको निरस्‍त कर दिया अब उसी पर अगर आप इनको बोलने की अनुमति दे रहे हैं, मैं समझता हूं ...(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, सारी चीज रिकार्ड पर जा रही है। आपने अनुमति निरस्‍त कर दी है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं आपकी जानकारी में अध्‍यक्ष महोदय, सिर्फ यह ला रहा हूं...

श्री अध्‍यक्ष: 8.3.07 की जो कार्यवाही है ....

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मेरा पाइंट तो सुन लीजिए आप उसके बाद आप जो व्‍यवस्‍था देंगी मैं मान लूंगा। मेरा इश्‍यु तो सुन लीजिए आप। ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आदिवासी को मुआवजा ...(व्‍यवधान) वही बात आपकी है ...(व्‍यवधान)

श्री सुशील कटारा (चौरासी): जो मामला ठंडा हो गया है, ऋषभदेव में कोई विवाद नहीं है, फालतू काम की है ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सहायता राशि में भेदभाव की बात कर रहे हैं।

श्री सुशील कटारा (चौरासी): बिल्‍कुल शांत हो गया, वहां पर किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं है ...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: मुश्किल से वह मामला ठंडा हुआ, उसको क्‍यों ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): 000

श्री अर्जुन लाल मीणा (सलूम्‍बर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): जो स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है उसके ऊपर आपने व्‍यवस्‍था दी है कि यह मामला पहले चिट के द्वारा उठाया जा चुका है ।

श्री अध्‍यक्ष: जी हां।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): और सदन के अन्‍दर आ गया, इस पर दुबारा चर्चा नहीं कराई जाती है। यह बात सही है लेकिन अध्‍यक्ष महोदय, दुबारा स्‍थगन प्रस्‍ताव आया तो आपको आपके आफिस से ही रिजेक्‍ट करके उनको सूचना दे देनी चाहिए थी। आपने यहां व्‍यवस्‍था दी।

श्री अध्‍यक्ष: दे दी ना और क्‍या दें।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं, नहीं यहां आपको घोषणा नहीं करनी चाहिए थी।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या नहीं घोषणा करनी चाहिए ?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उसको वहीं आप दफ्तर में ही, यहां तो वही बात आनी चाहिए जिसके बारे में हमें भी बोलने का अधिकार हो जाएगा क्‍योंकि आपने काग्‍नीजैंस ले लिया।

श्री अध्‍यक्ष: यह क्‍या नई व्‍यवस्‍था दे रहे हैं आप ?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैं ठीक कह रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आप नया सुझाव दे रहे हैं। आज दिन तक जो स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया जाता है उस स्‍थगन प्रस्‍ताव को पढ़कर सुनाया जाता है और उस पर अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था हो चुकी है। आज दिन तक यही परम्‍परा चली आ रही है और यही नियम है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): जब आप मानती हैं कि इसके ऊपर चर्चा हो चुकी है पर्ची द्वारा उसके बाद में आपको स्‍थगन प्रस्‍ताव नहीं मानना चाहिए था।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने व्‍यवस्‍था में यही तो लिखा है इसके अन्‍दर ।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपके आफिस को स्‍थगन प्रस्‍ताव नहीं मानना चाहिए था, आप अपने पास रिजर्व कर लेतीं।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने कहा है जब ही तो पढ़कर सुनाया।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): रिजर्व करने की महाराज परम्‍परा रही है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): 000

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री देवीशंकर भूतड़ा (ब्‍यावर): 000

श्री अशोक नागपाल (सूरतगढ़): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य गण, माननीय सदस्‍य गण।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): 000

श्री अध्‍यक्ष: कोई खास बात है कि आप खड़े रहेंगे ...(व्‍यवधान) पहले मुझे सुनिये, पहले मुझे सुनिये।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): 000

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, ठीक है आपकी बात सुन ली।

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): 000

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): 000

श्री अध्‍यक्ष: आपकी बात सुन ली। 

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो रहा है। 

vns/usc/12.30/1k/22.3.2007/1

 

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): 000

श्री अध्‍यक्ष: मिस्‍टर जीतमल खांट, आप कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें। आप स्‍थान ग्रहण कर लें। पहले आप स्‍थान ग्रहण करिये। आसन से जो व्‍यवस्‍था दी जाती है उसके बाद उस पर किसी तरह की टिप्‍पणी और किसी तरह की चर्चा नहीं होती लेकिन आपने जो मुद्दा उठाया है आप मेरे वैश्‍म में आकर मुझसे बात करें। फिर कोई रास्‍ता उसका निकालने की कोशिश करते हैं बाकी इस तरीके से अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था के ऊपर चर्चा करना और चर्चा के जरिये किसी प्रकार का आक्षेप लगाना उचित नहीं है।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण को मैं एक बात कह रही हूं जो अनुशासन में नहीं रहेगे और इस प्रकार से मर्जी आए जब खड़े होंगे मैं उन्‍हें बोलने का मौका नहीं दूंगी।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): 000

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं होगा।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री जयराम जाटव (खैरथल): 000

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

श्री मदन लाल मेघवाल (जायल): 000

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं ...

श्री अध्‍यक्ष: आपके माननीय सदस्‍य खड़े हैं पीछे।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सब बैठ गये। हमारी पार्टी के अध्‍यक्ष, इस सदन के प्रतिपक्ष के भूतपूर्व नेता और इस सदन के अब माननीय सदस्‍य उन्‍होंने स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है कि जायल के अन्‍दर एक बी पी एल दम्‍पत्ति पति और पत्‍नी भूख से मर गये। वह स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है। आपने उसको राज्‍य सरकार के पास भेज दिया। मान्‍यवर, उसको इतना हल्‍का मत लो, लाइटली मत लो। यह हमारे लिये प्रतिष्‍ठा का सवाल है। प्रतिपक्ष की प्रतिष्‍ठा का सवाल है कि हमारी पार्टी के अध्‍यक्ष के पास यह जानकारी आयी। कैसे भी आयी ... (व्‍यवधान) 

श्री मदन लाल मेघवाल (जायल):  000

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हम यह मान कर चलते हैं कि वह सही है।

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): 000

श्री जयराम जाटव (खैरथल): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप आसन का काम क्‍यों करते हो ? क्‍यों करने लग जाते हो ? प्‍लीज सिट डाउन।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सत्‍ता पक्ष के पास अदरवाइज कोई इनफोर्मेशन है तो वह रख सकते हैं। अभी रख दो हम सुन लेंगे। अगर नहीं है तो हमारी पार्टी के अध्‍यक्ष ने, इस सदन के प्रतिपक्ष के पूर्व नेता ने यह बात रखी है उस पर वज़न दिया जाना चाहिये। सत्‍ता किसी की हमेशा दासी नहीं रही है। यह दासी आती जाती रहती है। कोई जरूरी नहीं है कि डेढ़ साल बाद में आप सत्‍ता पक्ष में हो और यह इधर बैठने वाले इधर ही बैठे रहें। यह कोई संभावना नहीं है। कुछ भी हो सकता है।

श्री अध्‍यक्ष: हां, प्रतिपक्ष के नेता सदा काहू की ना रही, चढ़ी इकरंग, कभी उजाला होत है, कभी होत बदरंग

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपकी बात ठीक है अध्‍यक्ष महोदय। आपकी कहीं हुई बात तो कहीं प्रतिवाद का सवाल ही नहीं है। शिरोधार्य है लेकिन हमारे पक्ष को भी सुनिये आप।

श्री अध्‍यक्ष: इसीलिये तो कहा मैं। आपकी बात तो रखी उनको। नहीं तो है नहीं क्‍या आपको ... (व्‍यवधान) 

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हमारी पार्टी के अध्‍यक्ष और यहां माननीय सदस्‍य ने जिम्‍मेदारी के साथ में आपको प्रस्‍ताव दिया है कि भूख से मौत हुई है। अदरवाइज सत्‍ता पक्ष के पास सूचना है तो अध्‍यक्ष महोदय, पूछ लीजिये।

श्री अध्‍यक्ष: सुनिये ..

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अगर नहीं है तो ....

श्री अध्‍यक्ष: माननीय प्रतिपक्ष के नेता, इसीलिये मैंने कहा राज्‍य सरकार को भेजा है। राज्‍य सरकार इसके बारे में कल कह देगी। पूरी सूचना तो एकत्रित कर लें ना। ऐसे ही एटरेंडम तो नहीं बोल सकते वह ...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह तो रुटीन है।

श्री अध्‍यक्ष: आपने दिया है तो मैंने यही तो कहा है कि राज्‍य सरकार को भेजा है।

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर):  000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, कई बार आपने सदन में अगर आसन से आज्ञा भी हुई तो हमने उसी वक्‍त राज्‍य सरकार ने उत्‍तर दिया है। आपने चूंकि इस पूरे प्रकरण की महत्‍ता को देखते हुए राज्‍य सरकार के पास नोटिस भेजा है। इसमें मैं निवेदन करना चाहूंगा कि कुछ मसले होते हैं जो पूरे राजस्‍थान को कलंकित करने वाले होते हैं। उनमें सत्‍यता हो मामला उठाएं। कोई दिक्‍कत की बात नहीं पर इसी चीज में राजनीति करने का काम करें हम, अध्‍यक्ष महोदय, आपने अनुमति नहीं दी इसलिये मैं उसके तथ्‍यों की तरफ तो नहीं जाऊंगा पर मैं यह जरूर निवेदन करूंगा कि कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्‍यक्ष बहुत जिम्‍मेदार पार्टी के नेता हैं, अब प्रदेश अध्‍यक्ष है। आपके मुख से निकली हुई एक-एक चीज को राजस्‍थान के लोग विश्‍वास के साथ सुनते हैं, देखते हैं। अगर सत्‍यता नहीं निकली तो इस चीज की भी व्‍यवस्‍था होनी चाहिये कम से कम इस तरह के मामले के अन्‍दर कोई मामला उठे तो तथ्‍यों के साथ उठे। अध्‍यक्ष महोदय, तथ्‍य जो कह रहे हैं मैं जब आपके वैश्‍म में जाकर कहूंगा, बताऊंगा तो आप स्‍वयं कहेंगे और अच्‍छा रहे सदन में इस चीज के आने से पहले आप वैश्‍म में इनको भी बुला लें। हमें बुला लें। हम सारे तथ्‍य आपके सामने रखेंगे। माननीय सदस्‍य जो वहां से निर्वाचित हैं वह अपनी बात रखेंगे उसके बाद अगर आप सदन में लाएं तो लाएं।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है। वैश्‍म में आकर बात करें। आप भी आओ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मतलब राजस्‍थान को कलंकित करने की कोशिश करें हम राजनीति करने के लिये ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000 

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): 000

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, प्‍लीज सिट डाउन। यह सदन नियमों से चलता है। अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था हो चुकी है। मैंने आपसे निवेदन कर दिया वैश्‍म में आइये। मैं सरकार को भी बुलाऊंगी, आप भी आइये। यह ऐसे गंभीर यदि मामले हैं तो इनको इस तरीके से अब इस शोरगुल के अन्‍दर चर्चा करके क्‍या करना चाहते हैं ? इसका कुछ परिणाम आना चाहिये। बात की सत्‍यता पता लगनी चाहिये उसके बाद इसका इंतजाम होना चाहिये इसलिये मैं आपसे पुन: निवेदन करूंगी नेता प्रतिपक्ष मैं आपके अब हाथ जोड़ रही हूं। अब आप आगे चलें। भरत सिंह जी।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):  000

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मान्‍यवर, आप बहुत पुरानी इस सदन की माननीय सदस्‍य हैं। आपसे सीनियर यहां कोई नहीं है। आप 1952 में जब विधान सभा थी और 1952 में जो राजस्‍थान था आज वैसा नहीं है ...

श्री अध्‍यक्ष: नहीं है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आज इनफोर्मेशन टैक्‍नोलाजी में जो तरक्‍की की है, विकास किया है। राजीव गांधी ने जो नया सिस्‍टम कायम किया देश के अन्‍दर वह ऐसा है कि हर चीज इंटरनेट से ले सकते हैं, फैक्‍स से ले सकते हैं।

श्‍याम/चौहान    22.03.2007   12.40   1l  

 

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):टेलीफोन से ले सकते हैं, वायरलैस से ले सकते हैं, होम मिनिस्‍टर के पास साधन नहीं हैं क्‍या।

श्री अध्‍यक्ष: इसलिए तो वैश्‍म में बात कर रही हूं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपके वैश्‍म में बुलाइये आप ...(व्‍यवधान) आप हमें भी बुलाइये।

श्री अध्‍यक्ष: यही तो कह रही हूं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): होम मिनिस्‍टर साहब को भी बुलाइये।

श्री अध्‍यक्ष: आपको तो जरूर बुलायेंगे।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): राहत मंत्री को भी बुलाइये और आपके चैम्‍बर में बैठकर के इस पर फैसला होना चाहिए।

श्री अध्‍यक्ष: बिलकुल, बिलकुल। ठीक है, मान ली बात आपकी। आप बीच में ना बोलें। श्री भरत सिंह।

वन्‍यजीव अभयारण्‍यों में अवैध शिकार एवं खनन विषयक

श्री भरत सिंह (दीगोद): अध्‍यक्ष महोदय, जो 2 वर्ष पूर्व रणथम्‍भौर और सरिस्‍का में टाइगर्स की पोचिंग का प्रकरण उजागर हुआ था और राज्‍य सरकार ने एक टास्‍क फोर्स गठित की थी। टास्‍क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट 27.08.2005 को अपनी रिपोर्ट गवर्नमेंट को दी थी और मुझे भी सौभाग्‍य मिला था कि मैं इस टास्‍क फोर्स का एक सदस्‍य था। टास्‍क फोर्स ने जो अपनी रिपोर्ट दी उसमें वन्‍य जीवों के संरक्षण के संबंध में बहुत महत्‍वपूर्ण सुझाव दिये थे और एक उम्‍मीद बनी थी कि हमारे यहां के टाइगर्स की पोचिंग के बाद जब यह प्रकरण उजागर हो गया तो हमारा वन विभाग सतर्क होगा और इस प्रकार की व्‍यवस्‍था करेगा कि भविष्‍य में इस प्रकार के जो वन्‍य जीव अभयारण्‍य हैं उनमें शिकारी की घटनाएं नहीं घटेंगी।

अध्‍यक्ष महोदय, दुर्भाग्‍य से इस रिपोर्ट को आये डेढ़ साल हो चुका है और जैसा कि इसके प्रथम पृष्‍ठ पर इसके चेयरमैन ने यह आशंका प्रकट की थी कि यह रिपोर्ट वन विभाग के कार्यालय या दफ्तरों में धूल खाती हैं। उसके अलावा इस पर कोई कार्यवाही नहीं होती ह। यह आशका चेयरमैन ने स्‍वयं अपनी रिपोर्ट में प्रकट की थी और जैसी उनकी आशका थी वैसी की वैसी हकीकत में आज हो रही है। हमारे राजस्‍थान में जो सबसे अच्‍छे अभयारण्‍य थे उनके बारे में हाल ही में आडिटर जनरल ने जो रिपोर्ट दी है उसके 18 पेज सिर्फ वाइल्‍ड लाइफ, वन्‍य जीवों पर जो कदम उठाने चाहिए थे उसमें जो कमियां हैं इनको समर्पित हैं। मैंने इसको डिटेल में पढ़ा है। मुझे पता नहीं है कि वन मंत्री जी ने इसका अवलोकन किया है कि नहीं किया। मगर 18 पृष्‍ठ की इस रिपोर्ट के अंदर सिर्फ वन्‍य जीवों की दुर्दशा पर आशंका हैं और यह हमारे वह नेशनल पार्क हैं जिसकी रिपोर्ट में प्राथमिकता हैं। अगर यह हालत नेशनल पार्क की है तो आप कल्‍पना कर सकते हैं कि हमारे जो 25 अभयारण्‍य हैं उनकी क्‍या दशा होगी। हमारे कुल फोरेस्‍ट एरिये का दस हजार स्‍कवायर किलोमीटर से कम एरिया फोरेस्‍ट का वन्‍य जीव संरक्षण विभाग के पास है वाइल्‍ड लाइफ सेंक्‍चुरी के रूप में। अगर हम इस दस हजार स्‍कवायर किलोमीटर एरिये को भी यदि हम संरक्षित नहीं रख सकते हैं, जो रिकमंडेशन गवर्नमेंट ने दी हैं उसके ऊपर बुनियादी अमल नहीं हो, वाइल्‍ड लाइफ बोर्ड की बैठक जिसके बारे में रिकमंडेशन की है कि साल में दो बैठकें उसकी होना अनिवार्य है। शेर मर गये, टाइमर मारे गये। उसके बाद वाइल्‍ड लाइफ बोर्ड की बैठक नहीं बुलाई।

अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने रिक्रूटमेंट के संबंध में, मैं आपके सामने रखना चाहूंगा क्‍योंकि बजट में उल्‍लेख किया है कि हम एक हजार रिटायर्ड फौजियों को जो फौज से थके हुए हैं वह आकर के हमारे वन्‍य जीवों की अभयारण्‍य में सुरक्षा करेंगे। फौजियों का उपयोग कोई बैंक के सामने बंदूक लेकर उसकी सुरक्षा के लिए तो किया जा सकता है मगर जहां वन विभाग में समस्‍या यह है कि जहां अवरेज फोरेस्‍ट गार्ड की एज 45 साल है और वह अपनी बीट में घूमने में सक्षम नहीं है। उसकी संख्‍या वहां कम है उसमें आप सिर्फ एक लाइन मेंशन कर दूं कि हम एक हजार रिटायर्ड फौजियों को सुरक्षा के लिए एम्‍प्‍लाई करेंगे। कोई गारंटी नहीं है कि वह आपके पास आयेंगे। जो आदमी फौज से थका हुआ है वह आपके यहां जंगल में घूमने के लिए क्‍यों आयेगा। बैंक में गार्ड के लिए तो चल सकता है और इसमें रिपोर्ट की जो रिकमंडेशन है वह यह है कि इन अभयारण्‍य के पास जो ट्राइबल लोग रहते हैं, इनके इर्द-गिर्द जो लोग-बाग़ रहते हैं उनमें से लोगों को फोरेस्‍ट में सर्विस में लिया जाये ताकि उनका इनवाल्‍व हो, उससे जो प्रताडि़त होते हैं, वन्‍य जीव जो बाहर निकलते हैं उनसे जो दुर्दशा होती है वह लोग सुरक्षा कर पायें।

श्री अध्‍यक्ष: आप तो यह बतायें कि खनन तो कहां हो रहा है, आप यह बतायें कि अवैद्य शिकार में आपके बाघों की और दूसरों की कितना संख्‍या कम हो गयी है। यह है आपका विषय।

श्री भरत सिंह (दीगोद): अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो कोटा संभाग से आता हूं। यह तीन दिन से दरा अभयारण्‍य के बारे में जिसको इन्‍होंने नेशनल पार्क घोषित किया है। उसका नाम राजीव गांधी नेशनल पार्क था, इन्‍होंने कहा कि यह मुकुन्‍दरा हिल नेशनल पार्क होगा। अगर गधे को शेर कह दें तो उससे वह शेर नहीं बन जायेगा। नेशनल पार्क का ग्रेडिएशन उसका कर दिया। मगर हो क्‍या रहा है उसके अंदर, उसके अंदर शिकार होकर के गोश्‍त पक रहा है। यह इसके प्रकरण दर्ज हैं। जो घडि़याल सेंक्‍चुरी है उसमें एक घडि़याल नहीं है। उसमें घडि़याल का अस्तित्‍व खत्‍म हो चुका है। अवैद्य खनन हो रहा है। पिछली बार जब वन विभाग पर चर्चा थी मैंने गिना है 70 माननीय सदस्‍यों ने अवैद्य खनन को उजागर किया था। वन मंत्री जी आँख मीच लें और कहें कि वहां खनन नहीं हो रहा है। 500 करोड़ का इनका राजस्‍व 3-4 साल में बढ़ने का यह दावा कर रहे हैं। वह राजस्‍व कहां से बढ़ रहा है। वह पूरा वन क्षेत्र से हो रहा है।

श्री अध्‍यक्ष: उनका नाम लेते कि यह-यह हैं। जो कर रहे हैं वहां खनन।

श्री भरत सिंह (दीगोद): एक का बता दूं मैं।

श्री अध्‍यक्ष: हां, बताओ।

श्री भरत सिंह (दीगोद): वह जो भैंसरोडगढ़ में सेंक्‍चुरी के अंदर एक यहां सदस्‍य हैं जिनका उल्‍लेख अखबारों में आ रहा है, यहां के एक सदस्‍य हैं। उन्‍होंने उस सेंक्‍चुरी का एरिया दबा रखा है। एक का उल्‍लेख है उसी पर कार्यवाही कर लें, एक ही माननीय सदस्‍य हैं ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: कुछ करो वन मंत्री जी ...(व्‍यवधान)

श्री भरत सिंह (दीगोद): अध्‍यक्ष महोदय, अगली पीढ़ी को अगर हमें जानवर दिखाने होंगे तो टेलीविजन पर ही देखेंगे। अगर इस प्रकार की दुर्दशा होगी। मैंने शुरू में ही आशंका प्रकट की थी कि एक वन मंत्री उसी का खनिज मंत्री बना देंगे तो यह बिलाऊ के सामने छोटी सी चुहियां को रखने जैसा है। उसको चबा ही जायेगा यह और वह चबा गया, पूरे जंगल को साफ कर गया। पूरा जंगल इनकी आंखों के सामने नष्‍ट हो रहा है। इन्‍होंने कभी किसी जंगल को जाकर के देखा क्‍या। कभी कोटा गये, अभयारण्‍य की घोषणा कर दी। मैंने खुद ने कहा इस सदन के अंदर कि बहुत अच्‍छी बात करी कि आपने दरा अभयारण्‍य को बनाया है। कभी आकर के इन्‍होंने अभयारण्‍य को देखा है। उस अभयारण्‍य में पर्यटकों को ठगना है। दरा अभयारण्‍य की मैंने विधान सभा से रिपोर्ट ली है उसमें दस हजार तो गायें हैं और तीन हजार वन्‍य जीव बतायें हैं उसमें से दो हजार बंदर और पाँच सो मोर और उसके बाद पाँच सौ दूसरे जानवर हैं। वह क्‍या देखने आयेगा। दस हजार गायें देखने आयेगा। इस प्रकार की स्थिति उसकी हो रही है और वन खनन पूरे राजस्‍थान में, धौलपुर में रियासत के जमाने का वन विहार था, यह वन मंत्रि जी, वन विहार में जहां क्रोकोडाइल फार्म है उसके बगल में ही स्‍टोन पार्क है। रहीम दास जी कह गये हैं कि कैसे निभेगा कैर, बैर का संग, यह तो कैर भी यहां है और बैर भी यहां है। इसमें से एक ही डाल तो काटें आप। मुझे कहना है कि वन मंत्री जी को इतना जिम्‍मेदार होना चाहिए कि या तो यह अपना इस्‍तीफा दें और या वनों को नष्‍ट होने से बचायें। मुझे आपने इजाजत दी, धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने वन एवं जंगली जीवों के बारे में, नेशनल पार्क के बारे में, सेंक्‍चुरी के बारे में और विभाग में हो रहे अतिक्रमण के बारे में बहुत ही गंभीर चिंता प्रकट की है। अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहूंगा कि नेशनल पार्क सरिस्‍का में 1988 में सेंक्‍सेस की रिपोर्ट के आधार पर 45 बाघ थे। 1989 में जब सेंक्‍सेस हुआ 19 बाघ बताये गये। 1989 में जब 19 बाघ बताये गये, न तो एक अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ कोई जांच कमेटी बैठायी गयी ना उन लोगों के खिलाफ कोई कार्यवाही हुई, ना कमेटी का गठन किया गया ।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं मानता हूं कि शिकार हुए हैं और यह शिकार की घटनाएं मात्र इन तीन सालों के कार्यकाल में नहीं, मात्र राजस्‍थान में ही नहीं, पूरे हिन्‍दुस्‍तान में इस प्रकार की घटनाएं हर नेशनल पार्क और सेंक्‍चुरी में हुई हैं जो दु:खदायी हैं। हमारी मुख्‍यमंत्री जी ने भारत के प्रधानमंत्री को पत्र लिखा और चिंता प्रकट की है कि इस प्रकार से वन्‍य जीव-जंतुओं की हत्‍या करके उनकी खाल वगैरह को विदेशों में और तिब्‍बत का उदाहरण दिया कि तिब्‍बत में इस प्रकार के मार्केट लगते हैं। वहां पर टाइगर, पैंथर तथा अन्‍य जंगली जीवों की खालों का मार्केट लगता है। लोग उनकी खालों को पहनते हैं तो प्रधानमंत्री जी ने काग्निजेंस लिया। मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूं अहिंसा के पुजारी दलाई लामा को जिन्‍होंने तिब्‍बत में अपने शिष्‍यों को पत्र लिखा और उनको आव्‍हान किया, उनको ओथ दिलायी कि इनका उपयोग कोई नहीं करे और इनकी कोई खरीद-फरोख्‍त नहीं करें। इस प्रकार का वातावरण बना है।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि जब सरिस्‍का में इस प्रकार की घटनाएं हुई तो हमने 2005 और 2006 में 425 रेट्स लगाये, सरिस्‍का के अंदर अगस्‍त, 2005 में 342 और 250 लगाये और हमने कमेटी का गठन किया और उसकी सिफारिशें राजस्‍थान सरकार को की गयी। उसके आधार पर 250 होमगार्ड को वहां पर लगाया गया। इसी तरह से 100 पी.ए.सी. के जवानों को लगाया गया और राजस्‍थान में वनों की सुरक्षा के लिए वन्‍य जीव-जंतुओं की सुरक्षा के लिए राज्‍य सरकार ने 175 एडीसी कमेटी का फाउंडेशन किया।

अध्‍यक्ष महोदय, आपको जानकारी देना चाहता हूं कि राजस्‍थान में कमेटियों का गठन वन्‍य जीव सुरक्षा समितियों का गठन, 4661 वन सुरक्षा समितियों का गठन किया गया।

जयगोविन्‍द/अरुण/22.3.7/12.50/1m

 

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके अलावा राजस्‍थान में 32 एफ डी ए, वन विकास अधिकरणों का गठन किया गया है ताकि राजस्‍थान के लोगों में एक प्रकार की जब तक सहभागिता नहीं होगी, लोगों में एक प्रकार की जागृति नहीं होगी, वन विभाग अपना कार्य कर रहा है, हमारे अधिकारी अपना काम कर रहे हैं, हमारे जितने सीमित साधन हैं उनका उपयोग कर रहे हैं लेकिन जनता के अंदर इस प्रकार का वातावरण जब तक नहीं बनेगा वनों के प्रति, आज वास्‍तव में चिंता का विषय है, मात्र यह चिंता का विषय राजस्‍थान का ही नहीं है, यह भारत ही नहीं विश्‍व की चिंता का विषय भी है। चिंता के विषय दो हैं, एक बढ़ती हुई जनसंख्‍या और दूसरा पर्यावरण प्रदूषण। राजस्‍थान सरकार चाहती है कि समग्र विकास के साथ संतुलित विकास हो, ईश्‍वर ने प्रकृति और मनुष्‍य को एक दूसरे का पूरक बनाया है और उसने जब कभी भी प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की है तो प्रकृति ने मनुष्‍य का साथ देना बंद कर दिया, निर्णय हमारे सामने है, चेतावनी हमें मिल रही है, सुनामी लहरों का आना, ग्‍लेशियरों का पिघलना, ओजोन परत में छेद होना, वनों की कटाई और कुओं का जल स्‍तर गिरना एक प्रकार से मानव मात्र के लिए  जो हमारा जीवन आधार है वन जिससे हमें आक्‍सीजन मिलती है, अगर यह अवेयरनेस पूरे राजस्‍थान ही नहीं पूरे विश्‍व में अगर नहीं आई और लोगों ने इसके प्रति जागृति नहीं रखी तो आने वाले समय में जिस तरह से बिसलेरी की बोतल दस और बारह रुपए लीटर में मिलती है, हमें आक्‍सीजन की बोतल साथ में लेकर चलना पड़ेगा। इस प्रकार का वातावरण बना है। ...(व्‍यवधान)...

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको जानकारी देना चाहता हूं कि हमने ई डी सी का फोर्मेशन किया है। हमने इन कमेटीज की रिकमण्‍डेशन के आधार पर सूचना तंत्र को विकसित करने का कार्य किया है, सैंक्‍चुरी की दस किलोमीटर की परिधि में वहां पर जो लोग रहते हैं, इस प्रकार की गतिविधियां जिनकी है, जिन पर डाउट होता है उनको लाइसेंस के लिए, वन विभाग के द्वारा लाइसेंस लेने के लिए हमने इस प्रकार का प्रावधान रखा है।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी, मेरी भी सुन लो थोड़ा। आपकी यह बात बिलकुल ठीक है कि इकोलॉजिकल बेलेंस के लिए, यह तो उन्‍होंने फरमाया कि खनन आपके चल रहा है अभ्‍यारण्‍यों में और उन्‍होंने यह कहा कि वन्‍य जीवों की वहां संख्‍या कम हो रही है और आप इन दोनों बातों का जवाब दे दें कि कोई खनन नहीं चल रहा है, आप बता दो, नाम लिया है एक का कि वहां हो रहा है, यह बताओ आप, आप तो भाषण दे रहे हैं।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जिस भैंसरोडगढ का नाम लिया है, तथ्‍यों से बिलकुल झूठ और असत्‍य बात है। अगर माननीय सदस्‍य भैंसरोडगढ़ स्‍थान पर खनन की बात साबित कर दें तो आप जो भी कहें मैं करने को तैयार हूं। आपके पास पूरी सूचना नहीं है, आरोप लगाना चाहते हैं, आरोप लगाने के लिए आपके पास कोई तथ्‍य नहीं है1 ...(व्‍यवधान)... बेसलेस तथ्‍यों के आधार पर बात करना चाहते हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): वन्‍य जीव प्रदूषण से खतम हुए हैं क्‍या?

श्री अध्‍यक्ष: वह तो बंदर और मोर हैं और कोई है नहीं, बता रहे हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह कह रहे हैं कि पर्यावरण खराब हो गया, पर्यावरण तो खराब हो गया सबको पता है, प्रदूषण बढ़ रहा है लेकिन वन्‍य जीव तो प्रदूषण से खतम नहीं हुए न, वन्‍य जीव तो इसलिए कम हो गए कि आपकी सरकार की देखभाल ठीक नहीं है। आप मंत्री किस चीज के हो, आपने कभी जाकर किसी वन को देखा है क्‍या? आपका काम वनों की रक्षा करने का है, आपने एक भी अभ्‍यारण्‍य में जाकर नहीं देखा, एक भी आदमी को आपने सज़ा नहीं करवाई। बैठे हुए हैं यहां पर और हमें भाषण दे रहे हैं कि जागरूक हों।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य कह नहीं पाए अपनी बात लेकिन यह बात सही है कि आपके चम्‍बल के किनारे मृत मगरमच्‍छ मिला, लकडि़यों से भरी दो नावें जब्‍त हुई, दर्रा अभ्‍यारण्‍य में शिकार, शिकार के बाद मांस पकाया, 6 जने गिरफ्तार, सोरसन से लापता हो गए गोडावण तो यह बात तो वह कह नहीं पाए, कहनी तो उनको यह बात चाहिए थी, आप जवाब दें इनका।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के नेता ने जो बात की है, मैं आपको जानकारी देना चाहता हूं कि सरिस्‍का के अंदर पहली बार राज्‍य सरकार ने और हमने यह इच्‍छा प्रकट की है कि सेंसस रिपोर्ट जो आई उसको जनता के अंदर, सार्वजनिक करके सच्‍चाई जनता के सामने प्रस्‍तुत की।  1988 में 45 टाइगर और 1989 में 19 बताए, न तो आपने जांच कमेटी बनाई और न किसी अधिकारी और कर्मचारी की लाइबिलिटी फिक्‍स की, हमें जब यह जानकारी मालूम हुई तो हमने आर एन मलहोत्रा को डाइरेक्‍शन दिए और जांच करवाई और जांच में उदयराम, क्षेत्रीय वन अधिकारी, हनुमंत शर्मा, वनपाल, श्‍यामलाल, वनपाल, कल्‍याण सहाय, वृक्षपालक, राजाराम वृक्षपालक और बदनसिंह, बेलदार, इनको हमने निलम्बित किया। ...(व्‍यवधान)... माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके साथ में हमारे एडीशनल पी सी सी एफ जिसकी लापरवाही साबित हुई, उनको भी हमने निलम्बित किया। साथ में 20.7.2005 को...।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसको जाकर कहें हम, जो हैं उनको तो कहा नहीं।

श्री अध्‍यक्ष: वह नहीं सुनेंगे।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हम, हम की कहानी बना रखी है।

श्री अध्‍यक्ष: हम ही कहेंगे और क्‍या कहेंगे। आपका नाम कैसे लेंगे वह? वह तो यही कहेंगे कि हमने ऐसा किया।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): क्‍या किया?

श्री अध्‍यक्ष: जो कुछ किया वह बता रहे हैं न, सुनो तो सही।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इन्‍होंने खाया और *** किया, इसके अलावा कुछ नहीं किया।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या किया?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): *** किया, *** किया इन्‍होंने। ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, *** को कम आंकने का काम किया है। *** का कितना महत्‍व है, गाय हमारी संस्‍कृति में माता है, उससे निकला हुआ ***, *** तो हमारे लिए मैं समझता हूं कितना काम आता है, खाद के लिए, किसान के लिए तो *** अमृत है। आपने कैसे कह दिया कि *** किया।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): वह तो दर्रा की बात कह रहे हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान सरकार का कहीं नाम नहीं लिया। सरकार अकेले, हम नहीं हैं क्‍या? सरकार राजस्‍थान की है, हम-हम-हम लगा रखा है, क्‍या हम-हम करते हो?

श्री अध्‍यक्ष: हम ही कहेंगे और क्‍या कहेंगे, मैं कहूं तो आप फिर कहेंगे कि मैं कह दिया हमारी सरकार ही तो कहेंगे और क्‍या कहेंगे?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सरकार का नाम लो।

श्री अध्‍यक्ष: लेकिन आपने जो गलत शब्‍द का प्रयोग किया कृपया उसे वापस लो। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैं कह रहा हूं  आपसे कि मान्‍यवर, हम-हम-हम, क्‍या हम है? सरकार ही तो है यह, सरकार का नाम क्‍यों नहीं लेते कि हमारी सरकार ...(व्‍यवधान)... राजस्‍थान की सरकार नहीं है क्‍या? यह राजस्‍थान की सरकार नहीं है क्‍या? तो हम नहीं है क्‍या राजस्‍थान में, हम राजस्‍थान से बाहर जाएंगे तो क्‍या कहेंगे? हमारी सरकार।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मैं भी नहीं कहें और हम भी नहीं कहें तो आप बता दो साहब, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज इसका फैसला आप कर दीजिए। ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: हम जो जीत कर आए हैं पक्ष विपक्ष के सभी माननीय सदस्‍य उनकी सबकी सरकार है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): पिछले तीन सालों की गाथा मत गाओ आप, जो काम की बात है उसका उत्‍तर दो और काम की बात है उसको सुनो और आप आस्‍तीनें मत चढ़ाओ।

श्री अध्‍यक्ष: आप भी तो चढ़ा लेते हैं कई बार।   

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): हम गर्व से कहेंगे कि हमारी सरकार है। इसमें नाराज होने की आवश्‍यकता नहीं, हमारी सरकार है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हम क्‍या हुआ? मेरी समझ में नहीं बैठती, हम-हम-हम, कहो कि सरकार ने ऐसा किया, सरकार ने ऐसा किया, सरकार ने ऐसा किया।

श्री अध्‍यक्ष: देखिए, ऐसा है कि आप कोई शब्‍द तो उनके मुंह में डाल नहीं सकते।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के नेता का गरिमामय पद है।

श्री अध्‍यक्ष: प्रतिपक्ष के नेता ने जो *** शब्‍द का प्रयोग किया है उसको कार्यवाही से निकाल देना।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): प्रतिपक्ष के नेता अपनी भाषा शैली पर कण्‍ट्रोल करें। हर माननीय सदस्‍य इस बात को सहन करने के लिए तैयार नहीं है। प्रतिपक्ष के नेता जो चाहे वैसा कहने के लिए, हम सुनने के लिए तैयार नहीं है, इनको क्षमा मांगनी चाहिए, इस प्रकार की बात करते हैं। *** तो आपने किया है और इस बुढ़ापे में *** कर रहे हो, शर्म आने की बात है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मंत्रीजी, यह तो दर्रा अभ्‍यारण्‍य की बात कर रहे हैं। आप सरिस्‍का में समय खराब मत करो, वह दर्रा अभ्‍यारण्‍य की बात कर रहे हैं और आप पूरे राजस्‍थान की बात कर रहे हैं, आप दर्रा अभ्‍यारण्‍य की कहो।

श्री रामनारायण विश्‍नोई (फलौदी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक बात कहना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय कुछ कहना चाह रहे हैं।

श्री रामनारायण विश्‍नोई (फलौदी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह की यह स्थिति असम के काजीरंगा अभ्‍यारण्‍य के अंदर पैदा हुई थी। वहां के वन अधिकारियों ने यह कहा असम के लोगों को कि अगर वन और जीव रक्षा करनी है तो उनको विश्‍नोई बनना होगा।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या करना होगा?

श्री रामनारायण विश्‍नोई (फलौदी): विश्‍नोई बनना होगा।

श्री अध्‍यक्ष: हम सब बन जाते हैं विश्‍नोई, बिलकुल करेंगे रक्षा वनों की।

श्री रामनारायण विश्‍नोई (फलौदी): अगर वनों और अभ्‍यारण्‍यों की रक्षा करनी है, जीवों की तो विश्‍नोई बनना होगा यहां के लोगों को। मेरा निवेदन है माननीय मंत्रीजी, कि जो 250 गार्ड आपने लगाए हैं, उन 250 गार्डों की जगह 200 गार्ड भी वहां विश्‍नोई कम्‍यूनिटी के लगा दो और एक भी शिकार हो जाए तो हमें आप कह देना।

श्री अध्‍यक्ष: यह बात ठीक है।

श्री रामनारायण विश्‍नोई (फलौदी): सदन की भावना है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): भारत की संस्‍कृति में श्रेष्‍ठ ब्राह्मण हैं। उस ब्राह्मण की पूजा होती आई है और आज भी पूजा होती है, आज भी गांव में ब्राह्मण ने जो कह दिया वह शिरोधार्य है। मैं जाति-पांति की बात नहीं करता, स्‍वयं में विशुद्ध ब्राह्मण दवे साहब जो हमारे फोरेस्‍ट मिनिस्‍टर हैं, मेरे ख्‍याल से पण्‍डत ही हैं और पण्‍डत है और पण्‍डत होकर वहां आपने जो पढ़ा...।

श्री अध्‍यक्ष: मांस खाया।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हां, वह पढ़ा, वह इनकी मौजूदगी में हुआ तो इनको तो हट जाना चाहिए इस बात पर।

श्री अध्‍यक्ष: और ही मौजूद थे, यह थोड़े मौजूद थे?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपने जो कुछ पढ़ा है न यह इनको पढ़ा कर सुना देते तो इनका कोई धर्म नहीं है मंत्री रहने का और कोई मंत्री रहने का धर्म है? विश्‍नोई साहब ने कहा कि सब विश्‍नोई बनो।

श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने इनका ध्‍यान दो बातों की ओर दिलाया था। एक तो जो सैंक्‍चुरी है, आपकी जो रिपोर्ट है उसके अनुसार वहां स्‍टाफ अवेलेबल नहीं है और वहां स्‍टाफ 508 ही है और वन विभाग के नोर्म्‍स के अनुसार 1434 होने चाहिए, मैं सिर्फ वाइल्‍ड लाइफ सैंक्‍चुरी की बात कर रहा हूं।

 

Gpc/akt/ 22032007/1300/1n

 

1434 के अगेंस्‍ट 508 इनके पास स्‍टाफ है और इस कम स्‍टाफ में और वह भी 45 साल की एवरेज उम्र है, स्‍टाफ की भर्ती के बारे में इन्‍होंने क्‍या किया? क्‍योंकि उसके बिना नहीं होगा। अभी शिक्षा विभाग में 50 हजार अध्‍यापक ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: सुन लो आप। आपकी सुनी थी, अब आप उनकी सुनो।

श्री भरत सिंह (दीगोद): ये जवाब मुझे पर्यावरण का दे रहे हैं, वे पूरे खतरे को बता रहे हैं मैं तो वन्‍य जीव खतरे की बात कर रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: पर्यावरण खनन से होता है, पोचिंग से होता है, वही तो बता रहे हैं, और क्‍या कह रहे हैं?

श्री भरत सिंह (दीगोद): यहां पर वाइल्‍डलाइफ बोर्ड गठित है।

श्री अध्‍यक्ष: वाइल्‍डलाइफ के लिए कहना चाहते हैं।

श्री भरत सिंह (दीगोद): मुख्‍यमंत्रीजी की अध्‍यक्षता में वाइल्‍डलाइफ बोर्ड है जिसकी साल में दो बार उसकी बैठक होनी चाहिए। यह प्रकरण उजागर होने के बाद इसकी गंभीरता से इन्‍होंने कमेटी का नाम तो ले लिया कि हमने इतनी वन कमेटियां बनायीं, मैं उसकी बात नहीं कर रहा हूं, मैं उसमें उलझना भी नहीं चाहता, मैं तो वाइल्‍डलाइफ बोर्ड की बैठक जब इस प्रकार की घटना हो गई और आप लोगों को इन्‍वोल्‍व करना चाहते हैं तो स्‍टेट वाइल्‍डलाइफ की बैठकें क्‍यों नहीं हो रही है उसके बारे में प्रकाश डालें और जो भर्ती आप कर रहे हैं उसमें रिकमंडेशन है कि आप सेंक्‍चुरी के आसपास के लोगों को भर्ती करनें चाहे वो विश्‍नोई करें, पर नई करें, वे थके हुए फौजी उसको कैसे रोकेंगे?

श्री अध्‍यक्ष: विश्‍नोई बन जाओ यह कहा इन्‍होंने। विश्‍नोई बनो। आपको वनों की रक्षा करनी है तो विश्‍नोई बनो। विश्‍नोई तो रिलीजन कोई भी एडोप्‍ट कर सकता है, 20 और 9 जो 29 नियमों का पालन करे वो विश्‍नोई। कोई भी कास्‍ट बन सकता है विश्‍नोई इसमें क्‍या बात है?

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आसन की तरफ से आश्‍वासन मान लें कि विश्‍नोई की भर्ती करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: 29 नियमों को जो मानेगा वही तो विश्‍नोई होगा। उनमें एक नियम पेड़ की रक्षा करना भी है।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): वह जंभाजी के नियम हैं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): जाट तो उसमें आने चाहिए क्‍योंकि विश्‍नोई तो जाटों से ही बने हैं।

श्री अध्‍यक्ष: विश्‍नोई राजपूत भी हैं, विश्‍नोई ब्राह्मण भी है, विश्‍नोई बनिया भी है, कोई भी कास्‍ट बन सकती है। यह तो रिलीजन है, जो 29 नियमों का पालन करे वो विश्‍नोई।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  29 नियम में एक इस्‍लाम का भी लिया हुआ है।

श्री अध्‍यक्ष: होगा।

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  बिना राजपुरोहितों के राज नहीं चलता है और जहां राजपुरोहित नहीं होगा वहां पर अशुद्धता होती है। इसलिए राजपु‍रोहित को सर्वमान्‍य कहा गया है। पुराने समय से ऐसी धारणा है, ब्राह्मणों में भी रही है।

श्री अध्‍यक्ष: इनसे भी श्रेष्‍ठ हैं। दवे से भी श्रेष्‍ठ होता है राजपुरोहित, क्‍या बात कर रहे हो आप।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यही तो उपाध्‍यक्ष जी कह रहे हैं कि सारा सदन मान ले अपन विश्‍नोई बन जाएं, वन्‍य जीवों की रक्षा करें।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहता हूं शंकर सिंह जी राजपुरोहित को इस राज का राजपुरोहित बना दिया जाए।

श्री अध्‍यक्ष: देखो, आप मजाक में न लें। इस गंभीर विषय को आप इस तरह से मखौल न बनाएं।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  राजस्‍थान में पिछले तीन वर्षों में वन्‍य जीव-जंतुओं के अन्‍तरराष्‍ट्रीय मुलजिम थे, चाहे तो रानी गेहरा हो, चाहे आकाश गेहरा हो..

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): रानी गेहरा कौन है?

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): पुलिस के इन्‍वेस्टिगेशन में रानी गेहरा का जो कार्ड मिला है वो दिल्‍ली के अंदर अनुसूचित जाति (कांग्रेस) मोर्चे की महामंत्री बतायी है। संसारचंद्र को गिरफ्तार किया, नीमा अन्‍राष्‍ट्रीय तस्‍कर को गिरफ्तार किया, हीरा खटीक ..(व्‍यवधान)..

श्री भरत सिंह (दीगोद): क्‍यों इसको घुमा रहे हो। मैं तो पूछ रहा हूं बोर्ड की मीटिंग कब होगी उसके बारे में बताएं ..(व्‍यवधान)..

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): जितने मुलजिम थे वन्‍य जीव-जंतुओं के अन्‍तरराष्‍ट्रीय हत्‍यारे थे दो वर्षों में हमने एक्‍शन लेकर इनको सींखचों में भेजा ..(व्‍यवधान).. माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  एक प्रकार का वातावरण बना है, हम यह चाहते हैं सरिस्‍का के अंदर, सरिस्‍का के रिइंट्रोडक्‍शन के लिए राज्‍य सरकार ने योजना बनायी है और सबसे पहले भारत सरकार के द्वारा जो दिशा निर्देश दिया है उसमें जो गांव हैं उनको शिफ्ट करने का है। दो गांव है कांकनबाड़ी और एक गांव है, उनको शिफ्ट करने की कार्यवाही चल रही है, हम जल्‍दी से जल्‍दी प्रयास करेंगे कि पहले तीन फिमेल टाइगर्स और उसके बाद में दो टाइगर्स को सरिस्‍का में रिइंट्रोडक्‍शन करने के लिए एस्‍टेब्लिश किया जाए। एक प्रकार का वातावरण बना।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  इसके साथ में वन्‍य जीव-जंतुओं के द्वारा किसी व्‍यक्ति की हत्‍या हो जाती है, पहले 15 हजार रुपये उस परिवार को मिलते थे, हमने एक लाख की व्‍यवस्‍था की है।

श्री भरत सिंह (दीगोद): मैं खेत की बात कर रहा हूं आप खलिहान का जवाब दे रहे हैं। वाइल्‍डलाइफ बोर्ड की बैठक के बारे में क्‍या कर रहे हैं आप? खेत की बात करो, ख्‍ंलिहान का जवाब मत दो।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): आप विराजो तो सही।

श्री भरत सिंह (दीगोद): आप विराजो, आप बात को घुमाकर पता नहीं कौनसे जंगल में ले जा रहे हो।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  माननीय सदस्‍य ने जो चिन्‍ता प्रकट की है वास्‍तव में वन विभाग में कमी है और राज्‍य सरकार ने और मुख्‍यमंत्रीजी ने एक हजार रिटायर्ड सैनिकों को लेने की घोषणा की है। हम पूरे वन विभाग की तरफ से, मैंने भी मुख्‍यमंत्रीजी से चर्चा की है, मामला मुख्‍यमंत्रीजी के विचाराधीन है और निश्चित रूप से नई भर्ती के बाद में नौजवान आएंगे तो वन की सुरक्षा में और भी इजाफा होगा, मैं आपकी बात से सहमत हूं।

इसके साथ में वी.पी. सिंहजी की कमेटी के द्वारा जो रिकमंडेशन की है हमने अधिकांश रिकमंडेशन को मान लिया है और राजस्‍थान के अंदर पिछले दो साल के बाद में एक प्रकार की अवेयरनेस आई है, वन्‍य जीव-जंतुओं की हत्‍याओं पर जिस प्रकार से राज्‍य सरकार ने शिकंजा कसा है और फोरेस्‍ट के अंदर इल्‍लीगल माइनिंग के बारे में आपको जानकारी देना चाहता हूं इन तीन साल के कार्यकाल में फोरेस्‍ट में इल्‍लीगल माइनिंग पर जो कठोरता से कार्यवाही की, चाहे लेण्‍ड रेवेन्‍यू एक्‍ट के तहत हो, चाहे वन अधिनियम के तहत हो, हमने कार्यवाही करके इल्‍लीगल माइनिंग करने वालों में एक प्रकार का भय का वातावरण पैदा हुआ है, वातावरण बन रहा है।

मुकंदरा हिल की बात की है, निश्चित रूप से मुकंदरा हिल्‍स वहां के एक पर्यावरण प्रेमी थे वहां के ठाकुर थे, उनके नाम का एक बँगला बना हुआ था, आसपास में वे पर्यावरण प्रेमी थे इसलिए इसका नाम मुकंदरा हिल रखा था। आसपास में पहाडि़यां भी थीं, अच्‍छा वातावरण है इसलिए इसका नाम मुकंदरा हिल रखा है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं आपको आज सदन में विश्‍वास दिलाता हूं वन्‍य जीव-जंतुओं के हत्‍यारों पर शिकंजा कसा है और लगातार हम अपनी तरफ से मुस्‍तैदी से कार्य कर रहे हैं और फोरेस्‍ट के अंदर जहां कहीं भी इल्‍लीगल माइनिंग है और जहां कहीं भी फोरेस्‍ट में एनक्रोचमेंट है उसको सख्‍ती से निपटने का अपनी तरफ से पूरा प्रयास कर रहे हैं।

श्री भरत सिंह (दीगोद): वाइल्‍डलाइफ बोर्ड।

श्री अध्‍यक्ष: हो गया, काफी जवाब दे दिया।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  वाइल्‍डलाइफ बोर्ड की जो बात की है यह प्रक्रियाधीन है और माननीय सदस्‍य को विश्‍वास दिलाता हूं कि जल्‍दी से जल्‍दी वाइल्‍डलाइफ बोर्ड का गठन होकर इसकी मीटिंग भी हम जल्‍दी से जल्‍दी करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: श्री मोहम्‍मद माहिर आजाद।

पर्ची के माध्‍यम से उठाये गये मुद्दे

कब्रिस्‍तानों में अतिक्रमण

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं प्रदेश की एक बहुत ही गंभीर समस्‍या की ओर आपके माध्‍यम से सदन का, माननीय गृह मंत्रीजी का और माननीय राजस्‍व मंत्रीजी जो वक्‍फ के प्रभारी मंत्री हैं ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  आज से 50-60 साल पहले कब्रिस्‍तान हो या श्‍मशान हो या ग्रेवियार्ड हो, ये आबादी से दूर बाहर बनाये जाते थे, लेकिन आबादी के बढ़ने से कस्‍बों और शहरों के विकास के कारण आज ये कब्रिस्‍तान, श्‍मशान शहर की घनी आबादी के बीच आ गये हैं। जमीनों के भाव बढ़े और स्थिति यह हो गई कि वक्‍फ एक्‍ट, 1995 पार्लियामेंट ने अमेण्‍डमेंट करके पास किया है उसमें प्रावधान यह है कि कब्रिस्‍तान में केवल वो ही लोग निवास करेंगे जो मुर्दे दफनाने, गाड़ने और कब्र खोदने का काम करते हैं और वो भी टेम्‍परेरी, यानी कच्‍चे मकान बनाकर निवास करेंगे। लेकिन आज पूरे राजस्‍थान के कब्रिस्‍तानों की स्थिति यह हो गई कि एक-एक कब्रिस्‍तान में 200-200 मकान बन रहे हैं। आज घाटगेट, टांसपोर्ट नगर का कब्रिस्‍तान है वहां पर 25 हजार रुपये गज का भाव है तो जो लोग वहां कब्रिस्‍तान में रहते थे उन्‍होंने आगरा तक के दूर के अपने रिश्‍तेदारों को बुला लिया और वे आलीशान पक्‍के मकान बनाकर वहां रह रहे हैं। शास्‍त्री नगर कब्रिस्‍तान है उसमें भी 137 पक्‍के मकान बन गये। मुर्दों के रहने की जगह पर अगर जिंदा लोग रहने लग जाएंगे तो कब्रिस्‍तान तो रिहायशगाह बन जाएगा और आगे मुर्दे दफनाने के लिए जगह नहीं रहेगी। माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  इसी इश्‍यू को लेकर मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं

श्री अध्‍यक्ष: रजिस्‍टर्ड कब्रिस्‍तान है, यह तो वक्‍फ बोर्ड की प्रोपर्टी है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): वक्‍फ बोर्ड की भी है, वक्‍फ मंत्रीजी भी तो यहां बैठे हैं। मैं यही निवेदन कर रहा हूं आप सुनिए तो सही। 15 जुलाई, 2006 को, काफी दिनों से यह समस्‍या चल रही थी। जब शास्‍त्री नगर में लोगों ने कब्रिस्‍तान बचाओ, अतिक्रमण हटाओ का अभियान चलाया, फायरिंग हुई, उसमें 6 लोग मरे, 19 लोग घायल हुए। इस समस्‍या को लेकर वक्‍फ बोर्ड ने कई बार रेवेन्‍यू आफिसर्स और डिस्ट्रिक्‍ट ए‍डमिनिस्‍ट्रेशन को एप्रोच की कि आप हमको फोर्स उपलब्‍ध कराएं ताकि हम इन अतिक्रमणों से कब्रिस्‍तान को मुक्‍त करने का काम करें। यह इश्‍यू चल रहा था। 15 जुलाई, 2006 को ज्‍वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी जयपुर आई, लाल जान बादशाह, टीडीपी के आंध्रप्रदेश के एमपी हैं उनकी अध्‍यक्षता में कमेटी आई। इस कमेटी ने इन कब्रिस्‍तानों का मौका भी देखा, वक्‍फ बोर्ड में राजस्‍थान विधान सभा का प्रतिनिधि होने के नाते और दुर्रु मियां साहब भी उनके साथ थे, उस ज्‍वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी ने सचिवालय में मीटिंग की।

 

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/22032007/1310/1o

 

चीफ सेक्रेटरी और प्रिंसिपल रेवेन्‍यु सेक्रेटरी ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आपका पांच का समय है, आप 5 मिनट में समाप्‍त कर दें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अभी तो एक मिनट हुआ है, इतना गंभीर विषय है, आप सुनिए तो सही, बीच में आप टोकने लग जाते हैं, बैठ जाऊं या तो मैं फिर ? ...(व्‍यवधान)... पांच मिनट हो गये क्‍या ? दो मिनट तो हुए नहीं। आधे आधे घंटे लोग बोल लेते हैं तब कुछ नहीं होता। मैं एक ज्‍वलंत समस्‍या की तरफ ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आज एजुकेशन की डिमाण्‍ड है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): होगी, एजुकेशन की डिमाण्‍ड है तो यह हमारे लिए ज्‍यादा जरूरी है।

इसलिए मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं कि 12 फरवरी, 2007 को ज्‍वाइंट पार्लियामेंटरी कमेटी में चीफ सेक्रेटरी को, प्रिंसिपल सेक्रेटरी रेवेन्‍यु को दिल्‍ली बुलाया और जब जयपुर के सचिवालय में मीटिंग हुई, उस मीटिंग में यह निर्णय हुआ था कि रेवेन्‍यु डिपार्टमेंट, होम डिपार्टमेंट, डिस्ट्रिक्‍ट एडमिनिस्‍ट्रेशन और वक्‍फ डिपार्टमेंट मिलकर के ज्‍वाइंट अभियान चलाएंगे और एक समयबद्ध सीमा के अन्‍दर इन कब्रिस्‍तानों से इन अतिक्रमणों को मुक्‍त कराने काम करेंगे लेकिन फिर यह मीटिंग हुइ 15 जुलाई को और 15 जुलाई को निर्णय हो गया, चीफ सेक्रेटरी की अध्‍यक्षता जो राजस्‍थान के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी हैं उसके बाद कोई कार्यवाही नहीं हुई और लगातार मकान बनते चले जा रहे हैं। इसको लेकर के 7 मार्च से शास्‍त्री नगर में पुन: कब्रिस्‍तान बचाओ कमेटी के लोग धरने पर बैठे हैं और कोई सुनवाई नहीं हुई तो 17 मार्च से ...(व्‍यवधान)...

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): यह आप गलत कह रहे हैं कि कोई सुनवाई नहीं हुई ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मुझे मेरी बात पूरी कर लेने दीजिए फिर आप कहिए ...(व्‍यवधान)... मुझे मेरी बात पूरी कर लेने दीजिए।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): मैं उनसे मिल कर आया हूं और आज ही हास्पिटल में ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप सरकार हो क्‍या, ग़लतफ़हमी है क्‍या आपको ? ...(व्‍यवधान)... मैं कह रहा हूं आप सरकार हो क्‍या ? ...(व्‍यवधान)... आप अभी भी अपने आप को मेयर समझते हो क्‍या ? ...(व्‍यवधान)...

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): मैं वहां जाकर आया हूं और उन लोगों से मिल कर आया हूं, आपके जिस व्‍यक्ति ने अनशन कर रखा है उससे तो मैं हास्पिटल में मिल कर आया हूं। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, आपने इनको बोलने की इजाजत दी है और ये इनको बार बार डिस्‍टर्ब कर रहे हैं। ...(व्‍यवधान)... पांच मिनट तो यही खा जाते हैं और आपने अनुमति दी है इनको बोलने की और ये व्‍यवधान पैदा कर रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): मंत्री आपको बनाया नहीं और आप इस तरह से ...(व्‍यवधान)... आप मंत्री होते और जवाब देते तो समझ में आता। ...(व्‍यवधान)... आप जबरदस्‍ती इस तरह से करते हो। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करिए, माननीय सदस्‍य।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): आपको क्‍या मतलब है ? ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा विनम्र निवेदन यह है कि∙∙∙∙

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र का मामला है। ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): हम तो पूरे राजस्‍थान की बात कर रहे हैं ...(व्‍यवधान)... किसी एक स्‍थान की बात नहीं कह रहे हैं पूरे राजस्‍थान की ही यही स्थिति हो रही है। ...(व्‍यवधान)... 

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): घाटगेट कब्रिस्‍तान के अन्‍दर आपने पेपर्स में पढ़ा होगा कि जो छोटे बच्‍चे हैं मृत उनको दफना देते हैं, कुत्‍ते उनको निकाल कर के ले जाते हैं, लोगों से रोष हुआ, 4-5 हजार आदमियों ने जुलूस निकाला, नगर निगम गये, नगर निगम के मेयर ने एक लाख रुपये देकर उसका गेट लगवाने का काम किया, वक्‍फ बोर्ड ने भी किया। मेरा निवेदन, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह है कि आज 17 मार्च से जो लोग आमरण अनशन पर बैठे थे, कल उनकी हालत एकदम बिगड़ गई, मरणासन्‍न स्थिति में हो गये उनको अस्‍पताल में ले गये, खुद किशनपोल से आने वाले सदस्‍य जाकर उनसे मिल कर आये इसमें कोई दो राय नहीं है, सच्‍चाई है लेकिन आज भी उसकी स्थिति यह है कि वह मुंह से कुछ लेने के लिए खाने के लिए तैयार नहीं है और उसकी स्थिति मरणासन्‍न हो रही है, उसका रि-एक्‍शन होगा इसलिए मेरा आपके माध्‍यम से निवेदन यह है कि माननीय गृह मंत्री जी और रेवेन्‍यु मिनिस्‍टर साहब दोनों यहां बैठे हैं, आप दोनों मीटिंग करके और एक समयबद्ध सीमा तय करके राजस्‍थान में वक़्फ़ बोर्ड के जरिए एक अभियान चलाएं और खुदा के लिए यह कब्रिस्‍तान जो मुर्दों के रहने की जगह है इनमें जो जिंदा लोग रह रहे हैं, मुसलमान ही रहे रहे हैं, सारे लोग मुर्दों के रहने की जगह पर जिंदा लोग रह रहे हैं उनको वहां से हटाने का काम करें। केवल उनका रजिस्‍ट्रेशन जो कब्रों में खोदने और मुर्दे दफनाने का काम करते हैं, वह कच्‍चे मकानों में रहें बाकी के जिंदा लोग हैं उनको वहां से हटाने का काम करें, नहीं, पूरे कब्रिस्‍तान भर जाएंगे और नई समस्‍या आपके सामने खड़ी हो जाएगी, कानून और व्‍यवस्‍था की स्थिति खड़ी हो जाएगी इसलिए मेरा निवेदन है कि चाहे श्मशान हो या कब्रिस्‍तान हो उन पर जो लोग अतिक्रमण कर रहे हैं उनको सख्‍ती से निपट करके हटाने का काम दीजिए, आप राजस्‍थान की जनता को इस सदन के माध्‍यम से आश्‍वस्‍त करें कि शीघ्र ही इसके ऊपर आप कार्यवाही करेंगे ताकि विस्‍फोटक स्थिति नहीं बन जाए।

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद, बहुत अच्‍छा, धन्‍यवाद।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, गृ मंत्री जी ने आपको याद होगा एक दिन और यह मैटर उठा था। गृह मंत्री जी ने यह कहा था कि मुझसे भी यह शास्‍त्री नगर, जयपुर कब्रिस्‍तान वाले मिले थे, मैं एक दो दिन में जानकारी लेकर सदन को बताऊं। ये माननीय गृह मंत्री जी ने कहा था। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: सारी बात इन्‍होंने विस्तार से कह दी है। ...(व्‍यवधान)...

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह मेरे क्षेत्र का मामला है। ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदन में कोई मंत्री आश्‍वासन दे दे और उसकी पालना नहीं हो। माननीय गृह मंत्री जी ने कहा था कि मैं तथ्‍य इकट्ठे करके सदन को अवगत कराऊंगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शास्‍त्री नगर में कब्रिस्‍तान जो है वहां पर कब्रिस्‍तान बचाओ कमेटी के लोग वहां धरने पर बैठे हुए हैं। उन लोगों से मेरा निरंतर सम्‍पर्क है और वहां पर कब्रिस्‍तान के बाहर जो खम्‍भे लगे हुए हैं, उसके बाहर कुछ लोग बसे हुए हैं, करीब पांच सौ की संख्‍या है, पांच सौ परिवार वहां रहते हैं। उनके भी रहने की व्‍यवस्‍था हम लोग कर रहे हैं और उनसे वार्ता चल रही है। दोनों के बीच कार्डिनेशन बिठा कर और एक वार्ता चल रही है। माननीय सदस्‍य को मैं कहना चाहूंगा कि वार्ता चल रही है कि उनको भी वहां मकान मिल जाएं, वह भी एग्री हैं इस बात के लिए कि एक बाउण्‍डरी जो खम्‍भे लगे हुए हैं उसके बाहर उनको मकान बनाकर दे दिए जाएं और अन्‍दर पूरे कब्रिस्‍तान को खाली करा कर अतिक्रमण से मुक्‍त कर दिया जाए। इस बात की वार्ता चल रही है लेकिन इस विषय को ...(व्‍यवधान)... राजनीतिक विषय न बनाते हुए ∙∙∙∙  ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: बीच में नहीं बोलें, गलत बात है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): साहब, ये बीच में बोल रहे हैं, सरकार की तरफ से जवाब आ जाता, इनका जवाब क्‍या मायने रखता है ? ...(व्‍यवधान)...

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): यह तो मेरे स्‍तर पर प्रयास चल रहे हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: ये सही बात कह रहे हैं और अच्‍छी बात कह रहे हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): मैंने अनौपचारिक प्रयास किये हैं और यदि दोनों पक्ष वहां पर पहले गोली चल चुकी है। ...(व्‍यवधान)... मैं यह नहीं चाहता हूं कि मेरे क्षेत्र में किसी प्रकार का तनाव हो, आपस में लड़ें, झगड़ें इसलिए समन्‍वय की दृष्टि से मैं कहता हूं कि वहां के रहने वाले लोगों को जगह मिल जाए और कब्रिस्‍तान को भी अतिक्रमणों से मुक्‍त कर दिया जाए।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, ठीक है।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): इस प्रकार की व्‍यवस्‍था करने का प्रयत्‍न कर रहा हूं और मैं समझता हूं कि इस समन्‍वयकारी नीति से हम निश्चित रूप से  सरकार के पास में आज भी कलक्‍टर के यहां मीटिंग है।

श्री अध्‍यक्ष: किशनपोल से आने वाले माननीय सदस्‍य, ठीक है आपकी बात, आप प्रयास कर रहे हैं, ठीक है, अच्‍छा है, अब आप स्‍थान ग्रहण करें।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): अब मैं सरकार से भी निवेदन करना चाहूंगा कि वह अनशनकारियों का अनशन तुड़वाएं और आज ही शायद अनशन तोड़ देगा।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्‍लीज बैठें। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: माननीय जो संबंधित विधायक हैं, किशनपोल से उन्‍होंने अपनी बात कही और वह अच्‍छा प्रयास कर रहे हैं। ...(व्‍यवधान)... स्‍थान ग्रहण कर लें। उन्‍होंने तो ठीक बात कही कि वे इस तरह का प्रयास कर रहे हैं कि उस भूखण्‍ड को खाली करवाया जाए, कब्रिस्‍तान वाली जमीन को खाली करा कर कोई वैकल्पिक व्‍यवस्‍था जो लोग वहां बस गये हैं उनकी करें, ठीक है लेकिन राज्‍य सरकार क्‍या कर रही है, मैं पूछना चाहती हूं कि आप क्‍या कर रहे हैं ? जब आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं तो आपका भी कर्तव्‍य था कि आप उनका आमरण अनशन तुड़वाने के लिए कोई न कोई इस संबंध में कार्यवाही करते। आपने क्‍या किया ? बताएं आप।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट, यह किशनपोल की ही नहीं, पूरे राजस्‍थान की ही यह समस्‍या है, आपका उसका कोई समाधान निकालें। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: पर्ची पर आमरण अनशन की बात है। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): आमरण अनशन वाली बात तो इससे संबंधित मेरा मामला नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍यों नहीं है ? आपका डिपार्टमेंट है, वक़्फ़ की जमीन के ऊपर यदि कोई बसता है ...(व्‍यवधान)... मेरी सुनिए, अतिक्रमण करता है तो वक़्फ़ की जिम्‍मेदारी है। ...(व्‍यवधान)... आपकी जिम्‍मेदारी है उनकी रक्षा करने की, उनका संरक्षण करने की। ...(व्‍यवधान)... उसके आधार पर कोई आमरण अनशन पर बैठे हैं तो आपकी जिम्‍मेदारी पहले बनती है।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): अध्‍यक्ष महोदय, मैं सरकार के नुमाइंदे के रूप में अनशनकारियों से बात करने गया था सुबह, उनसे हास्पिटल में जाकर के मिला हूं और सरकार के प्रतिनिधि के रूप में ही मिला हूं इसलिए सरकार का कोई दोष नहीं है। यह सब कुल मिला कर हम जन समस्या का समाधान करने जा रहे हैं1

श्री अध्‍यक्ष: आपको मैं हाथ जोड़ती हूं, आप बीच बीच में चाहे जब खड़े हो जाते हैं, क्‍या करें ? ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, जो आपके माहिर आजाद साहब ने जो चिंता व्‍यक्‍त की और उस वक़्फ़ बोर्ड के ∙∙∙

श्री अध्‍यक्ष: आप तो यह बताओ वक़्फ़ की जिम्‍मेदारी आपकी है कि नहीं। ...(व्‍यवधान)... यह बताओ।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): मैं जो बात कह रहा हूं, अध्‍यक्ष महोदय, यह कब्रिस्‍तान जो नाहरी का नाका और शास्‍त्री नगर, जयपुर के अन्‍दर है और इस पर 108 लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है और 108 अतिक्रमण कर रखे हैं उनको हटाने का जब हमने वक़्फ़ बोर्ड की धारा 1995 की धारा 54 के अन्‍दर उनको नोटिस दिये, उनमें से 16 व्‍यक्तियों ने हाई कोर्ट से स्‍टे ले लिया। ...(व्‍यवधान)... मेरे पास जितनी इन्‍फार्मेशन है, ज्‍यादा तो मैं कर नहीं सकता और मंगा लेंगे यदि सूचना सही होगी तो उस आधार पर मंगा लेंगे और फिर बाद के अन्‍दर एक आदेश पारित किया 1995 धारा 55 के तहत जो वक़्फ़ बोर्ड की अलग से धारा है, जैसे अपने 91 की धारा है, वह वक़्फ़ बोर्ड में अलग से है तो उसके तहत हमने वक़्फ़ बोर्ड ने एस.डी.एम. के पास हटाने के लिए इनको जो 108 में जो 16 बचे हैं, 92 अतिक्रमियों को हटाने के लिए एसडीओ को कहा, हमने एप्‍लाई किया एसडीओ को कि आप इन अतिक्रमियों को हटाएं और उनके लिए सुरक्षा वगैरह जो कि जाब्‍ता फौजदारी, इमदाद वगैरह वह एस.डी.एम. मांगे।

 

सुरेन्‍द्र/अरुण/22.3.2007/13.20/1p/1

 

तो उनको दिया और उनको देने के बाद में यह सारी बात हो गई। अध्‍यक्ष महोदय, अभी तक वो अतिक्रमण हटे नहीं हैं। इस दरमियान अतिक्रमण हटाने के लिए संघर्ष समिति....

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एस डी ओ को एप्‍लाई करोगे या एस डी ओ को निर्देश दोगे? एस डी ओ को तो निर्देश देना चाहिए हटाने का, आप एप्‍लाई कर रहे हो एस डी ओ के पास।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): वक्‍फ बोर्ड ने एस डी ओ के पास एप्‍लाई किया है। रेवेन्‍यू और वक्‍फ बोर्ड अलग-अलग हैं। कानून व्‍यवस्‍था और अतिक्रमण हटाने की जो कार्यवाही है वह एस डी एम करेगा और एस डी एम जाब्‍ता वगैरह जो है वह होम डिपार्टमेंट से मांगेगा और इस प्रकार से कार्यवाही अभी चल रही है। इस दरमियान इन्‍होंने संघर्ष समिति बनाकर के एक व्‍यक्ति अनशन पर बैठ गया और अनशन वाली जो बात है, अभी मैं नहीं कहना चाहूंगा इसलिए कि माहिर आजाद साहब और.....

श्री अध्‍यक्ष: इन्‍होंने ही बिठा दिया क्‍या?

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): ...दोनों ही आप उसके मैम्‍बर हैं और मैम्‍बर होने के नाते इनकी भी पूरी कमेटी बैठती है समय समय पर, पूरे राजस्‍थान के अन्‍दर कहां-कहां किस प्रकार से वक्‍फ पर अतिक्रमण हो रहा है, बाकायदा इनकी चर्चा होती है और उसी के आधार पर डिपार्टमेंट को भेजा जाता है तो उस पर कार्यवाही की जाती है। अध्‍यक्ष महोदय, मेरे पास जितनी जानकारी आई है इस आधार पर कि 108 में से 16 का तो स्‍टे है, 92 को हटाने की कार्यवाही चल रही है। उस दरमियान इस प्रकार कब्रिस्‍तान....

श्री अध्‍यक्ष: और बातें तो ठीक हैं, सब ठीक है, आप तो उस आमरण अनशन को तुड़वाने वाली बात करो क्‍योंकि वही पर्ची का विषय है।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): उसमें वार्ता चल रही है। अध्‍यक्ष महोदय, अधिकारियों और उनके बीच में चल रही है।

श्री अध्‍यक्ष: आप आश्‍वासन दोगे तब ही तो होगा। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, आप मेरी पर्ची पढ़ लें। राजस्‍थान के कब्रिस्‍तानों से अतिक्रमण हटाना, यह मेरा उसमें है, इसी में यह आता है। मैं तो जैसा इन्‍होंने जिक्र किया इसलिए मैं यह कर सकता हूं कि वक्‍फ बोर्ड के जरिये हम यह सर्वे करवा लें कि कौन व्‍यक्ति जरूरी है, उसमें मुर्दे दफनाने का काम करने वाले जो हैं वो तो जायज है वहां रहने वाले और बाकी कौन अतिक्रमी हैं उनकी लिस्‍ट रेवेन्‍यू मिनिस्‍टर साहब और होम मिनिस्‍टर साहब को अवेलेबल करवा दें। आपसे तो निवेदन यह है कि आप समयबद्ध सीमा तय करके एक फोर्स बनाकर के एक अभियान चलाकर के इन अतिक्रमणों को हटाने का काम करें चाहे आपको सख्‍त कदम उठाने पड़े। मेरा तो यह निवेदन है कि वो आप कब तक कर देंगे? वो घोषणा कर दें आप तो।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, जहां-जहां भी आइडेंटिफाई हुए हैं और उनकी पूरी जितनी भी वक्‍फ की प्रोपर्टी है, कब्रिस्‍तान है या दूसरी भी है...

श्री अध्‍यक्ष: वक्‍फ बोर्ड हटाये न।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): वो वक्‍फ बोर्ड की प्रोपर्टी है, वक्‍फ बोर्ड अपने नियमों के अनुसार उन पर कार्यवाही करता है और उन पर कार्यवाही के लिए आगे कोर्ट में तो पार्टी जाती है मगर उनकी पैरवी वगैरह वक्‍फ बोर्ड करता है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): वक्‍फ बोर्ड के पास फोर्स थोड़े ही है। वक्‍फ बोर्ड तो आपको सूचना अवेलेबल करायेगा बाकी तो गवर्नमेंट का एडमिनिस्‍ट्रेशन ही तो उसको हटायेगा या वक्‍फ बोर्ड का कर्मचारी, वक्‍फ बोर्ड का मैम्‍बर जाकर के हटायेगा?

श्री अध्‍यक्ष: वक्‍फ बोर्ड का आपने लिखा है क्‍या?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): हां, लिखा है और जोइंट पार्लियामेंट्री कमेटी ने जो प्रस्‍ताव भेजा है और प्रिंसिपल रेवेन्‍यू सैक्रेटरी की अध्‍यक्षता में एक कमेटी बनी है जो अतिक्रमण हटाने के लिए कार्यवाही करेगी। तारीख बताइये हमें।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह मेरे पास जो अभी इन्‍फार्मेशन आई है वह मैं आपको पढ़कर के सुना देता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आप सुन तो लो उनको पहले। अब आप क्‍यों बीच में खड़े हो गये? सुन तो लो पहले।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं बताऊं आपको। मैं बता दूं आपको, पूरी फाइनल रिपोर्ट बता दूं आपको। एक साल 6 महीने में ये खुद ही हट जाएंगे वह अतिक्रमण नहीं हटेगा।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): आप तो बैठिये न। आप भी हटते आये हैं, हम भी हटते आये हैं, कभी इधर आये हैं कभी उधर आये हैं, क्‍या फर्क पड़ता है। काम कौन करता है? (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): विषय को डायल्‍यूट मत करो, हमारा जवाब आने दो, हमारी समस्‍या का समाधान होने दो। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, कब्रिस्‍तान नाहरी का नाका, शास्‍त्रीनगर, जयपुर के 108 अतिक्रमी थे जिनमें से 16 अतिक्रमियों ने....

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह तो बता चुके आप। आप इसी को रिपीट कर रहे हो, तीन बार बता चुके।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): माननीय राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय से स्‍थगन आदेश प्राप्‍त कर रखा है। बोर्ड द्वारा शेष 92 अतिक्रमियों, बोर्ड मतलब....

श्री अध्‍यक्ष: Mr. Meena, please don’t disturb.

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): जो अभी गठित बोर्ड है, 92 आदमियों को अतिक्रमण हटाने हेतु वक्‍फ अधिनियम, 1995 की धारा 54 के अन्‍तर्गत नोटिस दिये गये और उक्‍त अधिनियम के अन्‍तर्गत मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी, वक्‍फ बोर्ड द्वारा प्रकरणों की सुनवाई कर अतिक्रमियों के खिलाफ आदेश पारित कर वक्‍फ अधिनियम, 1995 की धारा 55 के तहत अतिक्रमियों को बेदखल कर वक्‍फ सम्‍पत्ति का कब्‍जा वक्‍फ बोर्ड अथवा वक्‍फ बोर्ड के प्रतिनिधि को दिलाने हेतु 92 प्रकरण उप खण्‍ड अधिकारी, जयपुर के यहां प्रेषित किये जा चुके हैं। एक अतिक्रमी का दौराने सुनवाई देहांत हो गया। उक्‍त प्रकरण में अतिक्रमियों को वक्‍फ सम्‍पत्ति से बेदखल करने की कार्यवाही उप खण्‍ड अधिकारी, जयपुर द्वारा की जा रही है।

श्री अध्‍यक्ष: आपने तो एस डी ओ को कौनसी तारीख को लिखा? (व्‍यवधान)

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): माननीय मंत्री जी, कब तक करेंगे? समय सीमा निर्धारित करिये कि कब तक करेंगे आप उसे? (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): सरकार बहुत चिंतित है। राजस्‍थान के अन्‍दर वक्‍फ प्रोपर्टी को बचाने के लिए, कब्रिस्‍तान को मुक्‍त कराने के लिए जो भी अतिक्रमी हैं, अध्‍यक्ष महोदय, अब दुकानें बना लीं। (व्‍यवधान) जो अभी रजिस्‍टर्ड की आप बात कर रहे हैं, सारे आइडेंटिफाई करायेंगे तो 108 में से कितने लोग वो निकलेंगे.... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह सब तो कर दिया, आप अनशन भी तुड़वा दो। कोई मर जाएगा तो मुसीबत हो जाएगी, उसका अनशन तुड़वायें।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): वह तो चल रहा है माननीय अध्‍यक्ष महोदय। (व्‍यवधान) अभी वार्ता चल रही है। अध्‍यक्ष महोदय, उस वार्ता के अनुसार अनुशन वाली बात भी कर रहे हैं और जैसा कि हमारे एम एल ए साहब इस क्षेत्र से आ रहे हैं इनका प्रयास चल रहा है और वह सारी बात को गंभीरता से देख रहे हैं। इस दरमियान जो अतिक्रमी हैं उनको हटाने के लिए एकदम तो, उनका सारा आइडेंटिफाई करना पड़ेगा और सारा हटाने के लिए....

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी आपने खुद ने अपने जवाब में पढ़ा है कि वक्‍फ बोर्ड ने मीटिंग करके नोटिस देश्‍कर अतिक्रमियों को चिह्नित करके और जो 16 को स्‍टे है उसके अलावा 92 की लिस्‍ट एस डी एम, जयपुर को दे दी। आज दिये हुए 16 महीने हो गये कि आप इन अतिक्रमणों को हटायें। सारा काम हो चुका, जांच हो चुकी और आप कह रहे हैं कि हम अभी भी चिह्नित करेंगे। आपने खुद ने ही जवाब पढ़ा है, आप देख लो। एस डी एम को आपने अतिक्रमियों के नाम की लिस्‍ट दे दी या नहीं दी? क्‍यों आप गलत जवाब दे रहे हो? सिर्फ 16 लोगों को है, 92 लोगों को नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: श्री रामनारायण मीणा।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, बहुत संवेदनशील मामला है। 1997 के अन्‍दर सक्‍सैना कमेटी बनी और उसके अन्‍दर जब अतिक्रमणों को हटाया तो वहां उस वक्‍त गोली चल गई थी। बहुत गंभीरता के साथ इस बात को हम ले रहे हैं। आप यह नहीं समझें कि सरकार....

श्री अध्‍यक्ष: हां, ठीक है। माननीय रामनारायण मीणा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप जस्टिस सक्‍सैना कमेटी की रिपोर्ट लागू कर दो न। जस्टिस सक्‍सैना आयोग की रिपोर्ट को लागू कर दो....

श्री अध्‍यक्ष: पर्ची के माध्‍यम से आपने एक प्रश्‍न उठाया और उसका जवाब मंत्री जी ने दे दिया। अब मैं दूसरी पर्ची वाले का नाम पुकारती हूं। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): गृह मंत्री जी, आपने सदन में कहा है....

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): गृह मंत्री जी, मैं एक मिनट बोल दूं उसके बाद बोल देना आप। एक मिनट। मंत्री जी, आप जवाब दे देना।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): शायद मेरी बात पहले आ जाए तो...

श्री अध्‍यक्ष: आपको कोई गलतफहमी हो तो बाद में पूछ लेना।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, निश्चित रूप से इस विवाद के कारण से पहले भी एक बहुत ही बड़ा हादसा यहां हुआ जिसमें कई लोगों की मौत हुई है। उसमें सक्‍सैना कमेटी की रिपोर्ट 2001 में आई, उसकी कार्यवाही उन्‍होंने शुरू की। जो मुद्दा मेरे सामने आया था, इस कमेटी के अध्‍यक्ष और कुछ लोग जो धरना दे रहे थे पिछली 5 तारीख को वो मेरे से मिले थे और उन्‍होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने के लिए यह धरना हमने लगाया हुआ है, आप इसमें कुछ करके किसी तरह से हमको राहत दिलायें। मैंने उसी दिन जिला कलेक्‍टर से व्‍यक्तिगत टेलीफोन भी किया और पत्र लिखकर के भी दिया कि आप इसकी कार्यवाही करें, कार्यवाही नहीं हुई। 13 तारीख को उन्‍होंने क्रमिक अनशन शुरू किया। 17 तारीख को उनके अध्‍यक्ष ने आमरण अनशन शुरू किया। कल 21 तारीख को उनकी तबीयत काफी खराब हुई, पुलिस ने उनको ले जाकर हॉस्पिटल में भर्ती कराकर के बचाने के लिए जो भी प्रयास हो सकते हैं वे प्रयास हम कर रहे हैं। विषय जहां तक है, मैंने कलेक्‍टर से बात करके मेरे एस. पी. से बात की और आज उनकी नगर निगम, जे डी ए, कलेक्‍टर, स्‍वयं हमारा एस पी, इन सब की मिलकर के मीटिंग चल रही है और वो निर्णय करेंगे कि हम किस तरह से इसको हटा सकते हैं। मैं यह तो नहीं कह सकता हूं कि कल ही इसकी कोई क्रियान्विति हो जाएगी लेकिन सरकार जब, आपने यहां सदन में भी इस विषय को उठाया था और मैंने कहा था कि मैं स्‍वयं इसके बारे में और कलेक्‍टर इसकी चिंता करे, हमसे जो मदद मांगेंगे वह मदद पूरी तरह से देंगे। .....

 

vkj/akt/22032007/1330/1q

 

और हम चाहेंगे कि वक्‍फ बोर्ड की तरफ से और वहां के एस.डी.एम. के द्वारा जो भी हमसे सहायता मांगी जायेगी, हम देंगे और निश्चित रूप से सिद्धान्‍तत: सारी बातचीत में यह आया कि अतिक्रमी हैं, अतिक्रमी को हटाया जाना चाहिए। कब और कैसे हटाया जाये, इसकी प्‍लानिंग करने की दृष्टि से मैं सोचता हूं, ये सारे लोग बैठे हैं, आज कोई न कोई उनकी बातचीत में से कोई परिणाम निकलेगा और इस बात का भी प्रयास करेंगे कि उनको वहां से हटाने के बाद वहां का जो उपाध्‍यक्ष है उस कमेटी का, वह उसके बाद आमरण अनशन पर बैठा हुआ है इस समय। विषय गम्‍भीर है तो विषय सुलझना भी इतना आसान नहीं है, यहां भाषण देंगे और कल वहां समस्‍या सुलझ जायेगी, ऐसा नहीं है। ठीक तरह से और सही रचना करके, संतुष्‍ट करके, समस्‍या का समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं और मैं सोचता हूं कि आज की इस मीटिंग में कुछ न कुछ परिणाम निकलेगा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): राजस्‍थान के परिप्रेक्ष्‍य में भी दो शब्‍द कह दो। यह तो शास्‍त्री नगर का हो गया।

श्री अध्‍यक्ष: श्री रामनारायण मीणा। श्री रामनारायण मीणा।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): ऐसा है, मेरा काम तो वक्‍फ बोर्ड की तरफ से जो मेरे से मदद मांगेंगे, मेरी पुलिस वह मदद करेगी।

श्री अध्‍यक्ष: 20 मिनट पूरे हो गये हैं। एक बजकर सात मिनट पर शुरू किया था और एक बजकर 30 मिनट हो रहे हैं। (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): अध्‍यक्ष महोदय, आपने मेरा नाम पुकार लिया था। दो बातें आपके ध्‍यान में लाना चाहता हूं। एक तो रहमत खां जी का इंतकाल हुआ था तो मैं स्‍वयं शास्‍त्री नगर में उनके जनाजे में गया था। मैंने देखा कि बिलकुल कब्रों के पास में लोगों ने मकान बना लिये तो मैं यह जानना चाहता हूं कि  राजेन्‍द्र सक्‍सैना आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आप उन कब्रिस्‍तानों को कब तक खाली करवा देंगे?

श्री अध्‍यक्ष: वह बात तो हो गई सारी। अब बाकी क्‍या रह गया। सारी बात तो आ गई।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): दूसरी बात मैं यह कहना चाहूंगा कि माननीय न्‍यायालय ने भी समय-समय पर निर्देश दिये हैं कि कब्रिस्‍तानों को वेकेट किया जाये?

श्री अध्‍यक्ष: आपकी बात माहिर आजाद ने कह दी। अब और क्‍या बात रह गई?

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): नहीं, कोर्ट का मामला नहीं आया था, कोर्ट का मामला नहीं आया था। कोर्ट का निर्देश है, इसकी पालना भी सरकार नहीं कर रही है। क्‍या आपने भूख हड़तालियों ने कोई वार्ता की और वार्ता की तो उसमें क्‍या परिणाम आये? अध्‍यक्ष महोदय, पाँच-पाँच दिन तक भूख हड़ताल हो और राज्‍य सरकार वार्ता नहीं करे, यह बहुत गलत बात है, उनसे बात करके इसका समाधान निकाला जाये और राजस्‍थान में जितने भी कब्‍जे हैं श्‍मशानों में, उनको खाली कराया जाये।

श्री अध्‍यक्ष: आपको तो अपनी बात बोलनी है। श्री रामनारायण मीणा।

 

बूंदी जिले के करवर में गौशाला हेतु भू-आवंटन व सरसों खरीद केंद्र की स्‍थापना

 

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से गृह मंत्रीजी, कृषि मंत्रीजी और सहकारिता मंत्रीजी, तीनों से एक निवेदन कर रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: सहकारिता मंत्रीजी तो हैं नहीं।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): करवर में गौण मण्‍डी यार्ड में....

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, कृषि मंत्रीजी बैठे हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): कृषि मंत्रीजी के पास ही सहकारिता विभाग है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): वह मदन दिलावर जी से छीन कर, एस.सी. के आदमी से छीन कर इनको दे दिया है।

श्री अध्‍यक्ष: हां हां, बोलिये बोलिये।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, करवर में खसरा संख्‍या 2030 करवर, तहसील नैनवां जिला बून्‍दी में है, उसमें रकबा है 12 बीघा 10 बिस्‍वा गैर मुमकिन हाट बाजार, 12 बीघा 10 बिस्‍वा जमीन है अध्‍यक्ष महोदय, हाट बाजार की है और हाट बाजार को संचालित करना, वहां रेगुलराइज मण्‍डी करने की जिम्‍मेदारी कृषि उपज मण्‍डी समिति की है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ग्राम पंचायत करवर ने भी अपना प्रस्‍ताव 19.1.2007 को लेकर, प्रस्‍ताव संख्‍या 26, उसमें यह निर्णय लिया है कि खसरा संख्‍या 2030 की जमीन है, 12 बीघा 10 बिस्‍वा जमीन है, करवर में है, यह मुख्‍य सड़क पर मौजूद है। करवर से आंतड़ता जाने वाली और बिलकुल रोड से लगवां है। वहां आवागमन के संसाधन हैं, ट्रेक्‍टर-ट्रोली खड़े हो सकते हैं, सरसों का क्रय केन्‍द्र वहां चालू किया जाये, वहां हाट बाजार के प्‍लेटफार्म बने हुए हैं, क्‍वार्टर्स बने हुए हैं और इतनी अच्‍छी जगह है करवर में कि आसपास के गांवों में नहीं है।

(           )

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वहां चूंकि गाय एक धार्मिक भावना का पशु है। गांव के लोगों ने, सभी धर्मों के लोगों ने, सभी समाज के लोगों ने मिलकर एक गौशाला बनाई। मैंने विधायक की हैसियत से वहां दीवार बनाई, ट्यूबवैल दिया। वहां खेल बनी हुई है। मवेशी पानी पीते हैं, चारे-पानी का इंतजाम है और कोई भी श्रद्धालु आदमी एक ट्रक-ट्रोली भूसा डालता है। उस स्थिति में उसको यदि डिस्‍टर्ब किया गया तो वहां हालात खराब हो सकते हैं। धार्मिक भावना का मामला है। सरकार की बदनामी हो सकती है। कम से कम जो गौशाला चलती हुई है, 12 बीघा 10 बिस्‍वा जमीन है। बहुत छोटी जगह है। वहां ट्रेक्‍टर-ट्रोली खड़ी नहीं हो सकती है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय कृषि मंत्रीजी से मैंने निवेदन किया कि इनके पास बहुत फण्‍ड्स हैं। यदि वहां फेंसिंग हो जाये तो आप कर लें। एम.एल.ए. फण्‍ड है, एम.पी. फण्‍ड है, नगरपालिका का फण्‍ड है। मेरा आपसे निवेदन है उपाध्‍यक्ष महोदय, वहां के जिला प्रशासन के कुछ लोगों ने दखलन्‍दाजी करके, एक दबाव डाला जा रहा है कि इस गौशाला को खतम किया जाये। रजिस्‍ट्रेशन के लिए कागजात सहायक रजिस्‍ट्रार के यहां पड़े हुए हैं। सारे लोग एकमत हैं, पूरा गांव एकमत है, गांव वालों की मीटिंग हो गई कि गौशाला को यथावत रखा जाये। यदि वहां से गायों को निकाला गया, उनकी दशा खराब होगी, तरह-तरह की भ्रांतियां पैदा होंगी और सरकार के खिलाफ इस तरह की बातें होंगी। वहां के लोगों ने, वहां के निवासियों ने एक पत्र दिया उपखण्‍ड अधिकारी, नैनवां को। उन्‍होंने साफ लिखा है कि हमारे यहां मकर सक्रांति के दिन गौशाला समिति का गठन हमने किया है गांव वालों ने मिलकर, उसका हम रजिस्‍ट्रेशन करा रहे हैं। यह जो जगह है, वह विधायक ने बाउण्‍ड्री वाल बनवाई। वह गौशाला के लिए बनाई है। वहां पीने का पानी है। इसलिए वहां जो भी डिस्‍टर्ब कर रहे हैं, उनको पाबन्‍द किया जाये, उनको वहां डिस्‍टर्ब करने से रोका जाये और इनके खिलाफ कार्यवाही की जाये।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अंत में मेरा निवेदन है कि गौशाला, गाय जो निरीह पशु है, को वहां से निकालने की कार्यवाही जो जबरदस्‍ती से प्रशासन कुछ लोगों के लिए, प्रभावशाली लोगों के लिए कर रहा है, उनको रोका जाये। 12.50 बीघा जमीन है वहां, मैन रोड पर है। मैंने मंत्रीजी से अर्ज किया और मंत्रीजी भी इसमें उत्‍सुक हैं गायों के बारे में। वहां आसपास में कोई गौशाला नहीं है, चार-पाँच जो वहां कस्‍बे पड़ते हैं। न करवर में है, न इन्‍द्रगढ़ में है, न वहां जरखोदा में है इसलिए मेरा आपसे अर्ज करना है कि उसको डिस्टर्ब नहीं किया जाये। धार्मिक भावना से जुड़ा हुआ, गौ से संबंधित मामला है, छोटी सी जगह है।

अब वहां कांटा लगेगा, कृषि उपज मण्‍डी समिति का कांटा लगेगा। वहां सरसों तौल केन्‍द्र होना चाहिए, यह सही है। वह 12.50 बीघा जमीन में है। मैं उसमें क्‍या सहयोग कर सकता हूं, मैं भी करूंगा। मंत्रीजी से  भी निवेदन है, मंत्रीजी इंट्रेस्‍टेड भी हैं क्‍योंकि मण्‍डी यार्ड को डवलप किया जाये। वहां कृषि उपज मण्‍डी समिति में टैक्‍स की चोरियां हो रही हैं मंत्रीजी। वह डवलप होते ही वहां कल तुलेगा, दूसरे साधन भी तुलेंगे। वहां व्‍यापारी भी हैं, सारा का सारा सब कुछ ठीक हो जायेगा। मैं सहयोग करने को तैयार हूं। प्रशासन के ऊपर नाजायज दबाव है। प्रशासन को रोका जाये और मंत्रीजी, कृषि उपज मण्‍डी समिति के सेक्रेटरी से मेरी भी बात हुई है, आप भी इसमें मदद कर रहे हैं पर प्रशासन अपनी हरकत ठीक करे ताकि बदनामी नहीं हो और गौशाला में दस तरह की बातें होंगी, सरकार के ऊपर भी लांछन आयेगा। हमें भी एक तरह से कहा जायेगा कि आप अटकाने वाले हो इसलिए यह गौशाला हट रही है। हम पूरा सहयोग करेंगे। 2030 जो खसरा संख्‍या की जमीन है, हाट बाजार है और खाते में लिखा हुआ है, 978 में जमाबन्‍दी है, खसरा नम्‍बर है, गैर मुमकिन हाट बाजार है वहां। वहां सरसों तुलाई केन्‍द्र प्रारम्‍भ करने का आदेश सरकार करेगी, हमारी समस्‍या का स्‍वत: समाधान हो जायेगा। नई जमीन की जरूरत नहीं है। फर्श लदा हुआ है। वह बना हुआ है। पास में पीएचईडी का है। पीने का पानी है, सब कुछ ठीक है। यहां गायों के लिए छाया का इंतजाम है, सारा सब कुछ है जो दूसरी जगह है इसलिए गायों को डिस्‍टर्ब नहीं किया जाये। मण्‍डी में सरसों क्रय केन्‍द्र चालू किया जाये, मेरा आपके माध्‍यम से यह निवेदन है।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, नैनवां से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जिस प्रकार से चिंता जाहिर की है, इसमें तीन विभागों के अलग-अलग काम आपने बताये हैं। पहला, आपका यह कहना है कि अतिक्रमण है जिसको जिला प्रशासन के द्वारा हटाया जा रहा है। दूसरा, आपका यह कहना कि क्रय‍विक्रय सहकारी समिति के द्वारा जो वहां पर सरसों क्रय केन्‍द्र खोलने की बात कही है। अभी हाल ही में जिला कलक्‍टर, बून्‍दी से मेरी बात हुई है और उन्‍होंने मुझे यह बताया है वहां पर सरसों क्रय केन्‍द्र में काम प्रारम्‍भ कर दिया गया है और गत वर्ष जहां सरसों क्रय केन्‍द्र स्‍थापित किया गया है, उसी जगह वहां प्रारम्‍भ कर‍दिया गया है।

जहां तक गौशाला का प्रश्‍न है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जिला कलक्‍टर से जो वार्ता हुई है, उन्‍होंने यह बताया कि यदि भूमि आवंटन का कोई प्रकरण हमारे समझ आयेगा तो निश्चित रूप से गौशाला के लिए भूमि का आवंटन किया जायेगा और उन्‍होंने यह भी बताया माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जैसे पशुपालन विभाग के माध्‍यम से मैंने जानकारी ली है, आज की तारीख में गौशाला करवर में कोई पंजीकृत नहीं है। ज्‍योंही वह पंजीकृत होगी, निश्चित रूप से उनको कोई भी सिवाय चक भूमि उपलब्‍ध करा दी जायेगी और जो समस्‍या अभी सरसों क्रय केन्‍द्र की थी, वह चालू कर दिया गया है। यह सूचना अभी प्राप्‍त हुई है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन करना है कि गाय को चारा डालना गुनाह है मंत्रीजी?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, कौन कहता है गुनाह है। 

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह नहीं है। मैं विधान सभा में इस मामले को नहीं लाता, यदि जिला प्रशासन हठधर्मितापूर्वक, अन्‍यायपूर्वक तरीके से यह मामला नहीं रखता। आपकी सारी 12.50 बीघा जमीन है मंत्रीजी और वहां क्‍यों नहीं चालू करना चाहते? क्‍या आप जिला प्रशासन से डिक्‍टेट हो रहे हैं? जिला प्रशासन आपको मिस-लीड कर रहा है, मिस-गाइड कर रहा है? और आपके पास में 12.50 बीघा जमीन है, वहां चालू नहीं करना चाहते। जिला प्रशासन यह कह दें कि हम तो यह करेंगे, वह करेंगे, जिला प्रशासन से इतनी कमजोर कैसे हो गई सरकार?

 

Jkj/akt/13.40/2a/22.3.2007

 

मेरा आपसे निवेदन है माननीय मंत्रीजी, जिला प्रशासन में जो बैठे हैं अफसर, उनकी चलेगी कि सरकार की चलेगी कि जन प्रतिनिधि की भावना की बात होगी। वहां का बहुमत, आसपास के गांवों के लोग, मेरा मत स्‍पष्‍ट है कि सरकार अपनी क्षमता को समझे, अफसर जो कहे, हठधर्मिता बरते वह ठीक नहीं है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय। इसलिए आप कृपा करके जिला प्रशासन के ऊपर कंट्रोल करिये, मैं लगाम लगाने की बात नहीं कहता, लेकिन आप उससे इस तरह से डिक्‍टेट होकर के जवाब दे रहे हैं, यह आपकी आदत ठीक नहीं है, तरीका ठीक नहीं है। आप बताइये कि वहां साढ़े बारह बीघा जमीन का क्‍या कर रहे हैं आप। कोई अतिक्रमण नहीं है साढ़े बारह बीघा जमीन में।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री रामनारायण मीणा: हम करेंगे, आप दो बिस्‍वा में कैसे सरसों क्रय केन्‍द्र खोलने की बात करते हैं, आप कृपा करके....

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। नहीं, यह कोई बहस का, मंत्री महोदय ने जवाब दे दिया, इससे ज्‍यादा कुछ नहीं कह सकते।

श्री रामनारायण मीणा: मंत्रीजी, आप जाकर मौका देख लें। आप जाकर मौका देख लें। आप निर्णय करें, जिला प्रशासन का नाम नहीं लें। व्‍यक्तिगत निर्णय हो रहा है वह।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, करेंगे, करेंगे। डाक्‍टर श्रीगोपाल बाहेती।

श्री रामनारायण मीणा: वह जवाब दे रहे हैं।

श्री प्रभुलाल सैनी(सहकारिता मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्षजी, इस बारे में आपको, माननीय सदस्‍य को जानकारी देना चाहूंगा, जो हमारा सब यार्ड करवर में बना हुआ है उसके बारे में मंडी समिति से भी मैंने चर्चा की है और उसमें जिस प्रकार उन्‍होंने बताया कि वहां पर ऐसी कोई आधारभूत सुविधा उपलब्‍ध नहीं है, वहां जगह-जगह खड्डे पड़े हुए हैं, सरसों एकत्रित नहीं की जा सकती और ऐसी स्थिति में शीघ्र केन्‍द्र को चालू कराया जाना भी आवश्‍यक है, यदि हम उसको ठीक भी करा देंगे तो उसमें बहुत अधिक टाइम लगने की एक संभावना बन जायेगी, इसलिए मैं सदन को आपके माध्‍यम से जानकारी देना चाहूंगा, ज्‍यों ही यह सरसों केन्‍द्र का काम अभी चल ही रहा है उसके बाद जो हमारे सब यार्ड को ठीक करने का काम है, उसके प्रस्‍ताव बना कर जो भी स्थिति होगी माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उसकी मरम्‍मत का या सुधार का, यह हमारे विभाग के द्वारा कार्यवाही की जायेगी।

श्री रामनारायण मीणा: मेरा तो आपसे अर्ज करना है माननीय मंत्रीजी, आप इतने अक्षम कैसे हो गये....

श्री उपाध्‍यक्ष: आ गई बात माननीय सदस्‍य।

श्री रामनारायण मीणा: वहां पर हाट बाजार बना हुआ है, उपाध्‍यक्ष महोदय, वहां हाट बाजार बना हुआ है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीमहोदय ने जवाब दे दिया। अब बार-बार इसका जवाब नहीं हो सकता।

श्री रामनारायण मीणा: हाट बाजार बना हुआ है। यदि नहीं बना हुआ है तो बता दें कि हाट बाजार है या नहीं है। वहां फर्श बना हुआ है, वहां क्‍वार्टर बने हुए हैं, वहां पीने के पानी का इंतजाम है और आपसे जिला प्रशासन ने कह दिया, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय...

श्री उपाध्‍यक्ष: वह है उचित। सरकार उसको उचित स्‍थान समझेगी उसी जगह तो करेगी।

श्री रामनारायण मीणा: यह कल को वहां बात खराब होगी तब हमसे कहोगे कि आप जाकर के, मैं जाऊंगा कल वहां। वहां हालत खराब होगी और मंत्रीजी, आप चलिये मेरे साथ। आप एक व्‍यक्ति विशेष को खुश करने के लिए गायों का नुकसान पहुंचाना चाहते हैं, धार्मिक भावनाओं को भड़काना चाहते हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बिराजें। गायों के लिए बहुत चिंता है।

श्री रामनारायण मीणा: वहां बजरंग दल वाले आयेंगे, कल आरएसएस के आदमी आयेंगे। कल को कांग्रेस के लोग आयेंगे। आप कृपा करके मेरे साथ चलिये। आप क्‍या चाहते हैं, रात भर में कोई वहां पत्‍थर भी पडा हुआ है तो हम हटा देंगे। जब वहां फर्श बना हुआ है, वहां क्‍वार्टर बने हुए हैं...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपने अपनी भावना...(व्‍यवधान)

श्री कन्‍हैयालाल मीणा: नहीं तो रजिस्‍ट्रेशन क्‍यों नहीं कराते हो। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, रजिस्‍ट्रेशन कराने में क्‍या आफत आ रही है उनको।

श्री रामनारायण मीणा: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप इनसे कहिये, यह गुस्‍सा क्‍यों हो रहे हैं, आप मंत्री महोदय, कृपा करके आप चलिये। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री रामनारायण मीणा: विधान सभा में मामला आने के बाद आप जवाब नहीं दे पा रहे, कल को दूसरे लोग उस बात को रखेंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: जवाब दे दिया, माननीय सदस्‍य, आप क्‍या जवाब, आपके कहने के अनुसार थोड़े ही जवाब देंगे।

श्री रामनारायण मीणा: नहीं, मेरे कहने से नहीं। मैं जन प्रतिनिधि हूं, हम इनको राय देंगे, राय के बारे में सरकार को सोचना चाहिए, निर्णय लेना चाहिए, मेरा तो यह अर्ज करना है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। दे दिया निर्णय। कह दिया न। गौशाला की कोई जगह वहां पर है नहीं। किसी की की हुई, अलाटमेंट नहीं हुआ हुआ है।

श्री रामनारायण मीणा: हमें राय देने का अधिकार है। सरकारी कर्मचारियों की बात माने और हमारी बात नहीं माने, यह तो बड़ी शर्मनाक बात है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप संतुष्‍ट नहीं, आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये। आपने कह दिया।

श्री रामनारायण मीणा: मैं बिलकुल बैठ जाऊंगा। आप मंत्रीजी से कहलायें, कल को वहां झगड़ा होगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: कह दिया मंत्रीजी ने जो बात थी।

श्री रामनारायण मीणा: मैं इस सदन में कहना चाहता हूं, कल को लड़ाई-झगड़ा होगा, फिर गृह मंत्रीजी क्‍या कहेंगे उनसे।

श्री उपाध्‍यक्ष: मंत्रीजी ने जो आवश्‍यक थी वह बात कह दी।

श्री रामनारायण मीणा: कल को वहां लड़ाई-झगड़ा होगा, मैं जाऊंगा, मुझे जाना पड़ेगा क्‍योंकि धार्मिक भावना है। सारे लोग हमारे हैं, बीजेपी हमारी है, कांग्रेस हमारी है, बजरंग दल हमारा है, गाय के मामले में सब एक है वहां। वहां कोई अंतर नहीं है और वहां जिला प्रशासन कल को कोई बात होगी....

श्री उपाध्‍यक्ष: यह बहस का विषय नहीं है माननीय सदस्‍य।

श्री रामनारायण मीणा: यह विषय है।

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं है अभी।

श्री रामनारायण मीणा: एक जन प्रतिनिधि आपसे अर्ज कर रहा है, मंत्रीजी, आप मेरे साथ चलिये वहां।

श्री उपाध्‍यक्ष: आपने अपनी भावना प्रकट कर दी, मंत्री महोदय ने जवाब दे दिया और आप कोई उसमें संतुष्‍ट नहीं हैं तो मंत्रीजी से बात कर लेना।

श्री रामनारायण मीणा: प्रकट कर दी। कल को सदन में मेरे से क्‍वेश्‍चन किया जायेगा, कल को सदन में मेरे से पूछा जायेगा माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसमें क्‍या बात है, आप चलिये न मेरे साथ, शनिवार को चलिये, दीतवार को चलिये, क्‍या बात है माननीय, आप जब तक वहां खुलवाइये, आप क्‍या व्‍यवस्‍था चाहते हैं मैं करने को तैयार हूं, मेरे पास भी विधायक कोष है।

श्री उपाध्‍यक्ष: अभी कोई निर्णय इसमें, आप इस वक्‍त कोई निर्णय कराना चाहते हैं क्‍या इनसे। यह अपनी सहूलियत के हिसाब से एक्‍शन लेंगे।

श्री रामनारायण मीणा: मेरा तो एक निवेदन है कि कर्मचारियों से डिक्‍टेट नहीं हों, जनता की भावनाओं को समझें, एक-दो आदमियों से डिक्‍टेट नहीं हों और कृपा करके आप कोशिश करिये, मेरा तो यही अर्ज करना है।

श्री उपाध्‍यक्ष: डा.श्रीगोपाल बाहेती।

आक्‍सीटोसिन इंजेक्‍शन का दुरुपयोग

डा.श्रीगोपाल बाहेती(पुष्‍कर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सदन और सरकार का ध्‍यान एक बहुत ही क्रूअल क्राइम की ओर आकर्षित करना चाहता हूं। इस देश में हमने प्रकृति को पूजा है, पशु को पूजा है, पत्‍थर को पूजा है और अभी पूरा विश्‍व मानने लग गया है कि इको बैलेंस के लिए जितनी आवश्‍यकता इंसान की है उससे ज्‍यादा आवश्‍यकता पशुधन की है और प्रकृति की है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, समाज में कुछ लोग अपने लालच के लिए जिस प्रकार से दवाओं का दुरूपयोग करते हैं और उनका दुरूपयोग करके धन कमाना चाहते हैं वह सोसाइटी के लिए बहुत चिंता की बात है।  मैं आपका ध्‍यान आक्‍सीटोसिन इंजेक्‍शन का जो उपयोग हो रहा है पशुधन में और वनस्‍पतियों में, उसकी ओर आकृष्‍ट करना चाहता हूं। अभी कुद दिनों पूर्व अपने राजस्‍थान में बीस जगह छापे पड़े और गरीब सात लाख इंजेक्‍शन आक्‍सीटोसिन के मिले जो कि बेन किया हुआ ड्रग है और उस इंजेक्‍शन को पशुपालक गाय का दूध निकालने में उपयोग करते हैं, सब्‍जी को जल्‍दी बड़ा करने के लिए हाई ब्रिड करने के लिए सब्‍जी बोने वाले किसान उसको सब्‍जी में इंजेक्‍ट करते हैं और उसका परिणाम यह होता है कि ऐसा दूध जो आक्‍सीटोसिन से दुहा गया है या ऐसी सब्‍जी जो उससे पैदा हुई है उस सब्‍जी को काम में लेने से इंसान को भी कैंसर और इंपोटेंसी जैसी भयानक बीमारी भी हो सकती है।  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह इसलिए क्रूअल है कि जिस गाय को हम माता कहते हैं उस गाय का दूध दुहने के लिए जब आप यह इंजेक्‍शन लगाते हैं तो उसकी जो तड़पन होती है उसकी कल्‍पना नहीं कर सकते।  इतनी भयंकर तड़पन उस गाय को होती है दूध देते वक्‍त कि जिसकी कल्‍पना इंसान नहीं कर सकता है।  और तो और, इसके लिए हमने एजुकेट भी नहीं किया कि जो गाय दस साल दूध देती है, वह गाय आक्‍सीटोसिन के इंजेक्‍शन के बाद तीन से चार साल से ज्‍यादा दूध नहीं दे सकती। वह भी कोई फायदेमंद नहीं है। लेकिन चूंकि हमारी अज्ञानता, हमारी नालेज नहीं होना और हमारा लालच, और सरकार ने अपने काम की इतिश्री इसमें मान ली कि केन्‍द्र सरकार के सामाजिक अधिकारिता विभाग ने 2001 में एक इनको पत्र भेजा, उस पत्र की इतिश्री चाहे कोई भी सरकार तब रही हो या आज है, सरकार ने केवल एक निकाला सर्कुलर कलेक्‍टर के नाम पर और एनीमल हसबेंड्री के नाम पर और पत्र निकाल करके चुप हो गये, आज भी उस पर कोई प्रभावी रोक नहीं है।  जो ड्रग एच शिड्यूल में बेन है वह ड्रग आराम से मिल रही है और सात लाख की संख्‍या तो पकड़ी गई है छापे के अंदर, न जाने कितने लाख इंजेक्‍शन यह काम आते होंगे, जो आपके पशुधन को बरबाद कर रहे हैं और पशुधन को बरबाद करने के साथ-साथ जो जनरेशन वह दूध पी रही है उस पशु का, उसके अंदर अनाहूत रूप से ऐसे रोग पैदा कर रही है जिसकी कल्‍पना वह व्‍यक्ति आज नहीं कर रहे हैं। यही की यही स्थिति सब्जियों में है। सब्जियों में यह ड्रग का इंजेक्‍शन लगाकर के सब्‍जी पैदा करने वाले किसान यह सोचते हैं कि वह सब्‍जी ज्‍यादा पैदा कर रहे हैं, वह सब्‍जी बड़ी हो रही है, दाम बड़े मिलेंगे। क्‍योंकि आज जब समाज के अंदर आर्थिक दौड़ मची हुई है, ऐसी परिस्थितियों के अंदर यदि सरकार ने जागरूक रहकर के इस इंजेक्‍शन पर बेन नहीं लगाया और बेन ही नहीं, चाहे कोई आपको नया कानून बनाना पड़े, ऐसे क्रूअल क्राइम को रोकने के लिए सरकार को अपने कठोर से कठोर कदम उठाने चाहिए ताकि हम पशुधन को भी बचा सकें और साथ-साथ हम उन मनुष्‍यों को बचा सकें जो मनुष्‍य उस आक्‍सीटोसिन के इंजेक्‍शन के बाद का दूध और सब्‍जी काम में ले रहे हैं।  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं इस बात को आज सदन में इसलिए लेकर आया, यह कोई राजनीति की बात नहीं है, फिर भी मैं इसको लेकर आया, इसलिए लेकर आया कि यदि सोसाइटी के अंदर सदन में चर्चा नहीं होगी और सदन इस पर गंभीरता से विचार करके कोई ठोस कदम नहीं उठायेगा तो हमें आने वाली पीढि़यां माफ नहीं करेंगी क्‍योंकि जो दूध और जो सब्‍जी हम इंसान को पिलाना चाहते हैं या देना चाहते हैं वह उसके लिए नुकसानदायक है।  उसके लिए नुकसानदायक है और साथ ही साथ पशुधन के लिए हार्मफुल है। तो मैं सरकार को यह निवेदन करना चाहता हूं इस चर्चा के माध्‍यम से कि सरकार इस बात को बहुत गंभीरता से ले और आक्‍सीटोसिन इंजेक्‍शन के राजस्‍थान में आने पर बेन लगाये और जिन लोगों को छापों में पकड़ा गया है उन लोगों के साथ ऐसी कार्यवाही करे, ऐसी कार्यवाही करे कि आइंदा कोई व्‍यक्ति यह हिम्‍मत और हिमाकत नहीं कर सके कि गौ माता को कष्‍ट देने के लिए इसका उपयोग किया जाये। आपने मुझे समय दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

 

Lpm/akt/1350/2b/2232007

 

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जिस गंभीर समस्‍या की ओर ध्‍यान दिया है आज आप से और सदन से चाहूंगा कि हम सब का ध्‍यान एस ओ जी के उस प्रयत्‍न के बाद हुआ। हमने लगातार एस ओ जी टीम को लगाकर के इन लोगों को ढूंढने के लिए एक लंबे समय से प्रयास करती है... 

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): इसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद आपका।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): और आपने देखा होगा कि हमारी इस टीम ने राजस्‍थान के 17 ज़िलों में 60 स्‍थानों पर एक साथ रेड की और हमने तीन लाख इंजेक्‍शन उन लोगों से जो इसके अधिकृत विक्रेता नहीं थे उनसे हमने बरामद किये हैं। 24 लोगों को हमने गिरफ्तार किया है और इस सारे के सारे रैकेट को जो बिहार से और बाकी जगह से जुड़ा हुआ है उसका हमने पता किया है और आगे भी हम इसको और आगे बढ़ा रहे हैं। जो अधिकृत विक्रेता है वह ही इसका उपयोग करता है और वह केवल महिला को जिस समय प्रसव होता है उसमें किसी प्रकार का उसको कोई पेन न हो उसके लिए उसका उपयोग होता है लेकिन लोगों ने अपना धन कमाने के लिए उपयोग किया है तो आज सदन को इस घटना को आपके और अख़बार के सामने लाने का जो प्रयास एस ओ जी की टीम ने किया है, सदन उसे धन्‍यवाद देना चाहता है कि उसके सतत प्रयास से हमने इतनी बड़ी गंभीर समस्‍या को हमने पकड़ा है और उसके अंतिम छोर तक पहुंचने के लिए हमारी टीम गई हुई है और भी जहां किसी भी इस प्रकार की इन दवाइयों का चाहे दुधारू गायों के लिए हो रहा हो या चाहे सब्‍जी या और किसी के लिए हो रहा है, निश्चित रूप से कठोरतम कार्यवाही करेंगे। 24 लोग पकड़े हैं और भी इसमें गिरफ्तारी होगी इतना मैं विश्‍वास दिलाता हूं।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): एस ओ जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूं। उपाध्‍यक्ष महोदय लेकिन मैं बताना चाहता हूं कि गत सत्र में भी मैंने ऑक्‍सीटोसीन की बात उठाई थी और मैं धन्‍यवाद देता हूं उस बात के लिए (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह डिबेट की बात है क्‍या? माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय आप अगला नाम पुकारों (व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): आपके प्रयास ने और आपका जो एस ओ जी का प्रयास है वह वास्‍तव में तो तारीफ के काबिल है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): गृहमंत्री जी को कोई धन्‍यवाद दे तो भी आपको तकलीफ है क्‍या? (व्‍यवधान) वों धन्‍यवाद दे रहे हैं (व्‍यवधान) 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): गृहमंत्री जी को और उनके विभाग को बहुत-बहुत धन्‍यवाद, पर आपका ध्‍यान साथ में यह भी आकर्षित करना चाहता हूं कि मेडिकल जो दवाइयां हैं उसका दुरुपयोग नशे में हो रहा है, यह भी आवश्‍यक है कि यंग जनरेशन को बचाने के लिए जिस तरह से आपने इसमें प्रयास किये यह भी प्रयत्‍न करें कि इस तरह की गोलियां, उस तरह की दवाइयां जो नशे में बच्‍चे यूज में ले रहे हैं उसके भी रैकेट को तोड़े जिससे यह मैसेज जाए, आपके विभाग को बहुत-बहुत साधुवाद। आशा करते हैं इस संबंध में आप कार्यवाही करेंगे।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं सदन का भी आभारी हूं क्‍योंकि एस ओ जी के अभी हमारे पास एक टीम है अब के बजट में हमने दो टीम और ली है। इस प्रकार के और भी रैकेट है जो कबूतरबाजी में है या और किसी प्रकार में, इन सबको कसने के लिए ही इन टीमों को बनाया और वह सेपरेट इसी काम करेगी, जो इस प्रकार की गलत गतिविधियों में सरीक हैं।

श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं गृहमंत्री जी को धन्‍यवाद देने के साथ ही इस बात पर ध्‍यान दिलाऊंगा कि डायकोफ्लोनिक जो दवाई है दर्द निरोधक पशुओं में यूज होती है और उसके कारण जो मृत पशु है उनको गिद्धों के खाने की वजह से गिद्ध पक्षी मृतप्राय हो रहे हैं तो आप इस दिशा में भी इसके बारे में क्‍योंकि बैन तो लग गया है प्रदेश में मगर उसके ऊपर अमल नहीं हुआ है और पाँच करोड़ अपने आपमें ये पशु हैं जो खुले में सड़ रहे हैं तो अगर ये पक्षी लुप्‍त हो जाएगा तो यह एक बहुत बड़ी समस्‍या है। इसलिए इसके ऊपर भी आप जांच करावे और निश्चित रूप से यह बहुत बड़ी इस प्रदेश की जो है सर्वे करेंगे।

सदन की मेज पर रखे गये पत्र

अधिसूचना

कृषि विभाग

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की मेज पर रखे जाने वाले पत्रादि। श्री प्रभुलाल सैनी, कृषि मंत्री 24 अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कार्य सूची में किए गए उल्‍लेख के अनुसार कृषि विभाग की निम्‍नांकित 24 अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखता हूं:

अधिसूचना संख्‍या-प..6(6)कृषि/ग्रुप-2/99 दिनांक 21.6.2006 जिसके द्वारा मण्‍डी समिति, सवाई माधोपुर हेतु भूमि अवाप्‍त की गई है । 

अधिसूचना संख्‍या-प..10(39)कृषि/ग्रुप-2/76/III दिनांक 21.6.2006 जिसके द्वारा खैरथल मण्‍डी के लिए बाईपास निर्माण हेतु भूमि अवाप्‍त की गई है । 

अधिसूचना संख्‍या-प..10(8)कृषि/ग्रुप-2/86/II दिनांक 22.6.2006 जिसके द्वारा कृषि उपज मण्‍डी समिति, अलवर के अंतर्गत गौण मण्‍डी यार्ड प्‍याज की सीमाएं अधिसूचित की गई है ।  

अधिसूचना संख्‍या-प..6(2)कृषि/ग्रुप-2/99 दिनांक 27.6.2006 जिसके द्वारा कृषि उपज मण्‍डी समिति, उदयपुर को कृषि उपज मण्‍डी समिति (अनाज) उदयपुर से नामित किया गया है ।  

अधिसूचना संख्‍या-प..6(13)कृषि/ग्रुप-2/96 दिनांक 28.6.2006 जिसके द्वारा गौण मण्‍डी यार्ड, झालरापाटन की सीमाएं अधिसूचित की गई है ।

अधिसूचना संख्‍या-प..6(3)कृषि/ग्रुप-2/98/III दिनांक 29.6.2006 जिसके द्वारा कृषि उपज मण्‍डी समिति (फल सब्‍जी) जयपुर के अंतर्गत नवीन गौण मण्‍डी यार्ड, शाहपुरा की सीमाओं को अधिसूचित किया गया है ।  

अधिसूचना संख्‍या-प..6(3)कृषि/ग्रुप-2/98/III दिनांक 30.6.2006 जिसके द्वारा कृषि उपज मण्‍डी समिति (फल सब्‍जी) जयपुर के अंतर्गत नवीन गौण मण्‍डी यार्ड, बस्‍सी की सीमाओं को अधिसूचित किया गया है ।  

अधिसूचना संख्‍या-प..10(39)कृषि/ग्रुप-2/76/III दिनांक 1.7.2006 जिसके द्वारा कृषि उपज मण्‍डी समिति, खैरथल के नवीन यार्ड निर्माण हेतु भूमि अवाप्‍त की गई है । 

अधिसूचना संख्‍या-प..6(7)कृषि/ग्रुप-2/96/III पार्ट दिनांक 28.7.2006 जिसके द्वारा कृषि उपज मण्‍डी समिति (फल सब्‍जी) जयपुर द्वारा टर्मिनल मार्केट के निर्माण हेतु ग्राम केश्‍यावाला की भूमि अवाप्‍त की गई है ।  

अधिसूचना संख्‍या-प..10(5)कृषि/ग्रुप-2/88 दिनांक 6.8.2006 जिसके द्वारा नई कृषि उपज मण्‍डी समिति, देई की स्‍थापना की गई है ।

अधिसूचना संख्‍या-प..10(7)कृषि/ग्रुप-2/78/II दिनांक 15.9.2006 जिसके द्वारा कृषि उपज मण्‍डी समिति, लालसोट के अंतर्गत नये फल सब्‍जी मण्‍डी यार्ड हेतु भूमि अवाप्‍त की गई है ।   

अधिसूचना संख्‍या-प..10(2)कृषि/ग्रुप-2/75 दिनांक 15.9.2006 जिसके द्वारा ईमारती लकडी पर से मण्‍डी शुल्‍क हटाया गया है ।   

अधिसूचना संख्‍या-प..10(7)कृषि/ग्रुप-2/78-II दिनांक 9.10.2006 जिसके द्वारा समसंख्‍यक अधिसूचना दिनांक 15.9.2006 में संशोधन किया गया है ।   

अधिसूचना संख्‍या-प..17(69)कृषि/ग्रुप-2/89 दिनांक 13.10.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान राज्‍य कृषि विपणन बोर्ड के कर्मचारियों के जी.पी.एफ. नियमों में संशोधन किया गया है ।    

अधिसूचना संख्‍या-प..10(2)कृषि/ग्रुप-2/75 दिनांक 13.10.2006 जिसके द्वारा सूखा मेवे पर मण्‍डी शुल्‍क हटाया गया है ।    

अधिसूचना संख्‍या-प..6(7)कृषि/ग्रुप-2/96 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा जयपुर फल सब्‍जी मण्‍डी क्षेत्र निर्धारित किया गया है । 

अधिसूचना संख्‍या-प..10(2)कृषि/ग्रुप-2/75 दिनांक 19.10.2006 जिसके द्वारा ज्‍वार, बाजरा, मक्‍का पर मण्‍डी शुल्‍क की दर 100 रूपये पर 1.60 रूपये के स्‍थान पर 0.50 रूपये विनिर्दिष्‍ट की गई है ।    

अधिसूचना संख्‍या-प..10(2)कृषि/ग्रुप-2/75 दिनांक 19.10.2006 जिसके द्वारा मक्‍का, ज्‍वार व बाजरा पर 'क' वर्ग दलाल को संदेय कमीशन 2 प्रतिशत के स्‍थान पर 1 प्रतिशत किया गया है ।     

अधिसूचना संख्‍या-प..4(77)कृषि/ग्रुप-2/2003 दिनांक 23.10.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान कृषि उपज मण्‍डी (संशोधन) नियम, 2006 विरचित किये गये है ।     

अधिसूचना संख्‍या-प..6(14)कृषि/ग्रुप-2/2004 दिनांक 23.11.2006 जिसके द्वारा कृषि उपज मण्‍डी समिति, रामगंजमण्‍डी हेतु भूमि अवाप्‍त की गई है ।     

अधिसूचना संख्‍या-प..6(24)कृषि/ग्रुप-2/2003 दिनांक 1.2.2007 जिसके द्वारा गौण मण्‍डी यार्ड जावाल की सीमाएं निर्धारित की गई है ।     

अधिसूचना संख्‍या-प..10(64)कृषि/ग्रुप-2/79/II दिनांक 17.2.2007 जिसके द्वारा गौण मण्‍डी यार्ड  गुढाचन्‍द्रजी व नारौली को मण्‍डी समिति, हिण्‍डौन के अंतर्गत घोषित किया गया है ।     

अधिसूचना संख्‍या-प..10(42)कृषि/ग्रुप-2/79/III दिनांक 1.3.2007 जिसके द्वारा कृषि उपज मण्‍डी समिति (फल सब्‍जी) उदयपुर की सीमाएं निर्धारित की गई है ।      

अधिसूचना संख्‍या-प..10(39)कृषि/ग्रुप-2/76/III दिनांक 5.3.2007 जिसके द्वारा गौण मण्‍डी यार्ड किशनगढ़बास की सीमाएं निर्धारित की गई है ।      

 

प्रतिवेदन

राजस्‍थान वित्‍त निगम के लेखों वर्ष 2005-06 पर अंकेक्षण प्रतिवेदन

 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री नरपतसिंह राजवी, उद्योग मंत्री वित्‍त अधिनियम,1951 की धारा 37 (7) के अंतर्गत राजस्‍थान वित्‍त निगम के लेखों पर 31 मार्च,2006 को समाप्‍त हुए वित्‍तीय वर्ष के लिए अंकेक्षण प्रतिवेदन सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं वित्‍त अधिनियम,1951 की धारा 37(7) के अंतर्गत राजस्‍थान वित्‍त निगम के लेखों पर 31 मार्च,2006 को समाप्‍त हुए वित्‍तीय वर्ष के लिए अंकेक्षण प्रतिवेदन सदन की मेज  पर रखता हूं।

व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न

विभागों के वार्षिक प्रतिवेदनों का समय पर वितरण

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पॉइन्‍ट ऑफ ऑर्डर। आज सदन में शिक्षा की डिमाण्‍ड है और वह दुर्भाग्‍य है अध्‍यक्ष महोदय बार-बार सदन में यह कहने के बाद कि प्रतिवेदन समय पर आयेंगे, ये संस्‍कृत शिक्षा का प्रतिवेदन संस्‍कृत शिक्षा विभाग यहां आज इस टेबिल पर रखा गया है और माननीय शिक्षा मंत्री जी जितने कॉम्‍पीटेंट मंत्री जी इस विभाग के मंत्री हो और उसकी चर्चा हो और उसको आज सदन प्रारंभ होने के बाद में टेबिल पर रखा हो, मैं समझता हूं कि इस संबंध में एग्‍ज्‍म्‍पलरी अध्‍यक्ष महोदय उपाध्‍यक्ष महोदय नहीं, you have to set an example. एग्‍ज्‍म्‍पलरी आप पनिसमेंट नहीं देंगे तो यह मैसेज नीचे नहीं जाएगा कि सदन में चर्चा करने से पहले प्रतिवेदन हमारे पास आना चाहिए। मैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपसे आशा करता हूं कि मंत्री जी जो है या तो ऑन करें खुद या यदि उनकी गलती नहीं हुई है तो विभाग के जिन कर्मचारियों ने उन विभाग को बदनाम करने की कोशिश की, आपक कॉम्‍पीटेंस को इन-कॉम्‍पीटेंस बताने में कोशिश की, मंत्री जी खड़े होकर बताये कि क्‍या आप इतने इन-कॉपीटेंट है कि आपके विभाग का प्रतिवेदन आज हमको सदन में मिले और आप उस पर कुछ नहीं बोले, मैं समझता हूं कि आपको इस बारे में कुछ एक्‍शन लेना चाहिए।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य प्रयत्‍न हो रहा है (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): नहीं, अध्‍यक्ष महोदय, यह नहीं हो रहा है (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): संस्‍कृत शिक्षा और वह भी संस्‍कृत शिक्षा के ऊपर इस सरकार का रवैया जाहिर होता है कि संस्‍कृत के प्रति कितने संवेदनशील है?

श्री उपाध्‍यक्ष: देरी से आये है तो उसके ऊपर निश्चित कार्यवाही होगी (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ना, ना, let the minister make a comment. मंत्री जी खड़े होकर के बताये कि कोई टेक्‍नीकल गलती है, कोई आपका ऐसा अनअवाइडेबल कोई बात हो तो मान लेंगे लेकिन यदि आप यह मानते हैं कि यह मसला गंभीर है तो आपसे कम से कम आप तो खुद ही विधि मंत्री है अब यह कानून की पालना भी आप नहीं कर पाये, शिक्षा मंत्री जी भी आप है, सबसे पोपुलर शिक्षामंत्री आप है, रोज आपकी वाहवाही होती है, शिक्षकों की भर्ती कर रहे हो, स्‍कूले खोल रहे हो और इतने में ही आपका ध्‍यान नहीं रहा तो मैं समझता हूं कि आपका फेदर में जो कैप लगे हुए हैं उसमें यह दाग क्‍यों लग रहा है आपको? आप खड़े होकर मंत्री जी इस बारे में गंभीरता से सदन को अवगत कराये (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मंत्री की शह से अधिकारी और कर्मचारी आपको बदनाम तो करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: इतना बहम मत करो आप।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि हमारी सारी व्‍यवस्‍था में सदन को यह अधिकार है कि जब डिमाण्‍ड पर चर्चा होती है, उसके 48 घंटे या 24 घंटे पहले कम से कम विभाग का प्रतिवेदन माननीय सदस्‍यों के पास पहुंचना चाहिए जिसको देखकर वो बोल सके, यह बहुत जरूरी है। हमारे चार-पाँच प्रतिवेदन थे बाकी सारे प्रतिवेदन पहले पहुंच गये। आज सुबह जब यह प्रतिवेदन यहां रखा गया मैं भी यही बैठा था, यहां आने के बाद ही यह प्रतिवेदन आया, मुझे स्‍वयं को दु:ख हुआ इस बात का कि प्रतिवेदन इस समय वितरित क्‍यों किया जा रहा है? अंदर जाकर उसके तुरन्‍त बाद मैंने जानकारी प्राप्‍त की कि कहीं मेरी गलती तो नहीं है, वैसे तो विभाग की जो भी गलती है वह मेरी ही गलती है लेकिन मैंने पता किया कि 15 दिन पहले यह मेरे यहां से प्रमाणित होकर चला गया, उसके बाद इसको लिखना चाहिए था, टाईम पर देना चाहिए था, मैंने एक्‍सप्‍लेनेशन भी लिया लेकिन जो एक्‍सप्‍लेनेशन उन्‍होंने दिया है वह पर्याप्‍त नहीं है और इसलिए मैं चाहता हूं कि यह बहुत बड़ी गलती अधिकारियों के द्वारा हुई है और मुख्‍य रूप से इसलिए मैंने हमारे सुधीर भार्गव जो प्रमुख शासन सचिव है, उनको कहा है कि जो डायरेक्‍टर है उसको तुरंत आप ए पी ओ कर दीजिए और सात दिन में मुझे जांच करके बताइए कि किसकी गलती है? डायरेक्‍टर संस्‍कृत एजुकेशन को कि मैं गलती मानता हूं, इस गलती कके लिए ए पी ओ करके सेक्रिट्रेट में करते हैं और सात दिन में प्रमुख शासन सचिव से मैं कह रहा हूं कि वो निश्चित रूप से जांच करके रिपोर्ट दे, य‍द्यपि उन्‍होंने कहा है कि हमने इसको छपाने की पूरी कोशिश की है, उन्‍होंने कहा कि हमको कागज नहीं मिला, हमको प्रिटिंग प्रेस नहीं मिली, ये अपर्याप्‍त कारण थे। मैंने स्‍वयं ने जांच की है और मैं समझता हूं कि सदन सर्वोपरि है और सदन में परम्‍पराओं का निश्चित रूप से पालन किया जा रहा है। सरकार निश्चित रूप से पालन करेगी।

समिति का प्रतिवेदन

अनुसूचित जाति कल्‍याण समिति(सं0 3 व 4)

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री मोहन मेघवाल, सभापति, अनुसूचित जाति कल्‍याण समिति, 2006-2007 समिति के दो प्रतिवेदन उपस्‍थापित करेंगे।

श्री मोहन मेघवाल (सूरसागर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं अनुसूचित जाति कल्‍याण समिति,2006-2007 समिति के निम्‍नांकित दो प्रतिवेदन उप‍स्‍थापित करता हूं:-

1. गृह विभाग की विभिन्‍न सेवाओं में अनुसूचित जाति के व्‍यक्तियों को प्रदत्‍त आरक्षण (अवशेष) के कार्य-कलापों से संबंधित समिति का तृतीय प्रतिवेदन।

2. अनुसूचित जाति कल्‍याण समिति, 2004-2005 के प्रथम प्रतिवेदन (12वीं विधान सभा) में वित्‍त (कोष एवं लेखा) विभाग में पृथक-पृथक संवर्गों के चल रहे आरक्षण अवशेष (बैकलॉग) में समाविष्‍ट सिफारिशों पर शासन द्वारा की गई कार्यवाही विषयक समिति का चतुर्थ परिपालनात्‍मक प्रतिवेदन।

सरकारी आश्‍वासनों संबंधी समिति (सं0 2)

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री प्रद्यम्‍न सिंह, सभापति, सरकारी आश्‍वासनों संबंधी समिति, 2006-2007 वित्‍त, अल्‍प बचत, आयोजना, राज्‍य बीमा, आर्थिक एवं सांख्यिकी व प्रशासनिक सुधार विभागों के वर्ष 2001 के लंबित आश्‍वासनों से संबंधित समिति के द्वितीय प्रतिवेदन का उपस्‍थापन करेंगे।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सरकारी आश्‍वासनों संबंधी समिति, 2006-2007 वित्‍त, अल्‍प बचत, आयोजना, राज्‍य बीमा, आर्थिक एवं सांख्यिकी व प्रशासनिक सुधार विभागों के वर्ष 2001 के लंबित आश्‍वासनों से संबंधित समिति के द्वितीय प्रतिवेदनों को उपस्‍थापित करता हूं।

याचिकाओं का उपस्‍थापन

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री देवीशंकर भूतड़ा, सदस्‍य विधान सभा दो याचिकायें उपस्‍थापित करेंगे।

श्री देवीशंकर भूतड़ा (ब्‍यावर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निम्‍नांकित दो याचिकाएं उपस्‍थापित करता हूं:-

1  ब्‍यावर को जिला बनाने बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित याचिका

2 ब्‍यावर में स्‍टेडियम का निर्माण करने बाबत् पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित याचिका। 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री भागीरथ चौधरी, सदस्‍य विधानसभा एक याचिका उपस्‍थापित करेंगे।

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं किशनगढ़ (अजमेर) की ग्राम पंचायत कुचील एवं भांभोलाव में नवीन पशु चिकित्‍सालय खोलने बाबत् पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित एक याचिका उपस्‍थापित करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: डा. श्रीगोपाल बाहेती, सदस्‍य विधानसभा एक याचिका उपस्‍थापित करेंगे।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं ग्राम खोड़ा (ग्राम पंचायत-बुबानी) जिला अजमेर में आयुर्वेदिक चिकित्‍सालय खोलने बाबत एक याचिका उपस्‍थापित करता हूं।

वित्‍तीय समितियों के निर्वाचन के संबंध में प्रस्‍ताव

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री ओ.पी. महेन्‍द्रा, सरकारी उप मुख्‍य सचेतक वित्‍तीय समितियों के निर्वाचन के संबंध में प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करेंगे।

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (केसरीसिंहपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निम्‍नांकित प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करता हूं:-

1.       ‘’इस सदन के सदस्‍यों द्वारा

 

Bhs/akt/22.3.07/14.00/2c

 

राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के नियम 230 की क्‍लॉज-1 के द्वारा निर्दिष्‍ट रीति से समस्‍त सदस्‍यों की संख्‍या में से जनलेखा समिति, 2007-08 के लिए 15 सदस्‍यों का निर्वाचन किया जाय।

2. इस सदन के सदस्‍यों द्वारा राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के नियम 231 के साथ पढ़ते हुए नियम 232 की क्‍लॉज-1 के द्वारा निर्दिष्‍ट रीति से समस्‍त सदस्‍यों की संख्‍या में से प्राक्कलन समिति , 2007-08 के लिए 15 सदस्‍यों का निर्वाचन किया जाय।

3. इस सदन के सदस्‍यों द्वारा राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के नियम 231 के साथ पढ़ते हुए नियम 232 की क्‍लॉज-1 के द्वारा निर्दिष्‍ट रीति से समस्‍त सदस्‍यों की संख्‍या में से प्राक्कलन समिति , 2007-08 के लिए 15 सदस्‍यों का निर्वाचन किया जाय।

4. इस सदन के सदस्‍यों द्वारा राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के नियम 233 खा की क्‍लॉज-1 के द्वारा निर्दिष्‍ट रीति से समस्‍त सदस्‍यों की संख्‍या में से राजकीय उपक्रम समिति, 2007-08 के लिए 15 सदस्‍यों का निर्वाचन किया जाय।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस प्रस्‍ताव का पारण किया जाय।

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि वित्‍तीय समितियों के निर्वाचन के संबंध में जो प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किया है उसे स्‍वीकार किया जाय?

(स्‍वीकृत)

वित्‍तीय समितियों के निर्वाचन संबंधी प्रस्‍ताव स्‍वीकार किया गया।

वित्‍तीय समितियों के गठन के संबंध में प्रस्‍ताव

श्री ओ.पी. महेन्‍द्रा, सरकारी उप मुख्‍य सचेतक वित्‍तीय समितियों के गठन के संबंध में प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करेंगे।

 डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक):  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करता हूं कि राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के नियम 230 की क्‍लॉज-1, 231 सहपठित नियम 232 की क्‍लॉज-1, 232 खा की क्‍लॉज -1  द्वारा निर्दिष्‍ट रीति से समस्‍त सदस्‍यों में से क्रमश: जनलेखा समिति, प्राक्कलन समिति , प्राक्‍कलन समिति व राजकीय उपक्रम समिति प्रत्‍येक के लिए 15-15 सदस्‍यों का निर्वाचन किये जाने का प्रस्‍ताव सदन द्वारा अभिस्‍वीकृत किया गया है। सर्वविदित स्‍पष्‍ट परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए पूर्व अभिस्‍वीकृत प्रस्‍ताव के अधिलंघन में मैं यह प्रस्‍ताव करता हूं कि प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के नियम 306 के अध्‍यधीन प्रक्रिया के नियम 230 की क्‍लॉज-1, 231 सहपठित नियम 232 की क्‍लॉज-1, 233 खा की क्‍लॉज-1 को निलंबित कर यह सदन माननीय अध्‍यक्ष को यह अधिकार प्रदत्‍त करता है कि वे उपरोक्‍त समितियों का गठन आनुपातिक प्रतिनिधित्‍व के आधार पर एकल संकमणीय मत द्वारा चुनाव कराने के उद्देश्‍य की यथासंभव पूर्ति करते हुए प्रत्‍येक समिति में प्रत्‍येक दल अथवा समूह को उतना प्रतिनिधित्‍व दिया जाए जितना सभा में उनके सदस्‍यों का अनुपात है का मनोनयन करें।

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि वित्‍तीय समितियों ...।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं इस बारे में जो प्रस्‍ताव रखा महेन्‍द्रा जी साहब सरकारी उप मुख्‍य सचेतक ने उसमें निवेदन करना चाहता हूं कि कम से कम ये व्‍यवस्‍था की जाए कि राजनीतिक दलों के जो नेता अपने सदस्‍यों के नाम दें उसमें हेराफेरी नहीं हो।

श्री उपाध्‍यक्ष: कोई नहीं करता है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): बिलकुल सही बात है। पक्षपात हुआ है पहले। मैं यह आरोप नहीं लगाना चाहता लेकिन कम से कम आप यह व्‍यवस्‍था करें। यह प्रस्‍ताव तो ठीक है प्रस्‍ताव का मुझे विरोध नहीं है लेकिन राजनीतिक दल के नेता जिन सदस्‍यों के नाम भेजें उसके अन्‍दर हेराफेरी नहीं होनी चाहिए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍थओं पर सदन में चर्चा नहीं की जा सकती यह सर्वमान्‍य सिद्धांत है। मैं नहीं समझता कि माननीय सदस्‍य को यह बात कहनी चाहिए।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अगर सदन में प्रस्‍ताव आया है कोई एक प्रस्‍ताव आया है ..।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह नहीं कहना चाहिए।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): प्रस्‍ताव आया है सदन में उस प्रस्‍ताव पर बोल रहे हैं। मैं इस प्रस्‍ताव पर विरोध प्रकट कर सकता हूं।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय पार्लियामेंट्री मिनिस्‍टर साहब, उपाध्‍यक्ष महोदय, परम्‍परा यह रही है कि सत्‍ता पक्ष के चीफ व्‍हिप प्रतिपक्ष के नेता के साथ मिल कर चर्चा करने के बाद प्रस्‍ताव लाते हैं तो आपने वो प्रक्रिया की है तो हम सहमत हैं । आप यदि हमारे प्रतिपक्ष के नेता को नहीं पूछ कर ये प्रस्‍ताव लाये हैं तो हमारे माननीय सदस्‍य ने जो बात कही है उसको ध्‍यान में रखने की जरूरत है।

श्री उपाध्‍यक्ष: ऐसा नहीं है।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): नहीं बात ही नहीं की आपने। ये परंपरा नहीं है I am very sorry. मैं पार्लियामेंट्री मिनिस्‍टर महोदय, फिर आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि आपका जो प्रस्‍ताव है उस प्रस्‍ताव में पहले प्रतिपक्ष से चर्चा होने के बाद क्‍योंकि नियम ...।

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, नेता प्रतिपक्ष से चर्चा होने के बाद उनके हस्‍ताक्षर हो गये, सारी बात होने के बाद हुआ है।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): तब ठीक है।

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि वित्‍तीय समितियों के गठन के संबंध में जो प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किया है उसे स्‍वीकार किया जाय?

(स्‍वीकृत)

वित्‍तीय समितियों के गठन संबंधी प्रस्‍ताव स्‍वीकार किया गया।

श्री कन्‍हैया लाल मीणा, सदस्‍य, विधान सभा एक याचिका उपस्‍थापित करेंगे।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, I am on a point of order. उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि सदन में सरकार की तरफ से कोई माननीय मंत्री कोई बात कह दें तो उसका एक अर्थ होता है और ये जो कलेक्‍ट्रेट में जो प्रकरण होली के समय में हुआ था नृत्‍य-नाच हुआ, पत्रकारों की पिटाई हुई और माननीय गृह मंत्री जी ने अपने वक्‍तव्‍य के अंत में यह कहा था कि मेरी दृष्टि में कलेक्‍टर साहब पाँच बजे से पहले वहां मौजूद थे उनका उत्‍तरदायित्‍व है और उनको ...।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): और यह कहा था कि मैं मुख्‍यमंत्री जी से बात करके सदन को अवगत कराऊंगा तो मैं जानना चाहूंगा कि गृह मंत्री जी आज सात दिन से ज्‍यादा हो गये आप कब सदन को बतायेंगे कि आपके और मुख्‍यमंत्री के बीच क्‍या चर्चा हुई?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह पाइंट ऑफ ऑर्डर नहीं है।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): और क्‍या कार्यवाही उस कलेक्‍टर साहब के खिलाफ करना चाहते हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। अंकित नहीं हो।

श्री जुबेर खान (रामगढ़):  000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह पाइंट ऑफ ऑर्डर का क्‍या प्रश्‍न है इसमें ? 

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इसको दूसरे तरीके से उठाइये आप। पाइंट ऑफ ऑर्डर क्‍या है इसमें।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं आपकी शायद भावना नहीं समझ पाया और आपके कहने का अर्थ नहीं समझा। एक सेकिंड आप विराजें।  बहुत ज्‍यादा जोर से भी बोलने से कोई चीज का हल नहीं निकल सकता है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैंने कहा जो मेरे वर्डिंग निकाल लो। टेप में वर्डिंग निकाल लो।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैंने कहा था कि दो दिन में करेंगे तीन दिन में करेंगे मैंने ऐसा समय बताया? मैंने कोई यह नहीं कहा था कि मैं पाँच दिन में करूंगा ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैंने जो कहा है उसको आप निकाल लें और पढ़ लें। मैंने बहुत संयमित शब्‍दों में कहा है जिसको अभी भी निकाल कर दुबारा पढ़ लें आप।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री बंशीलाल खटीक: 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

डॉ.श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर):  000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इस पाइंट ऑफ ऑर्डर को मैं डिस्‍अलाऊ करता हूं। कोई डिस्‍कसन नहीं इसके बारे में।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: आज की तारीख दी थी क्‍या? 

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): एक बार प्रोसीडिंग पढ़ लेना आप फिर उसके बाद बात करना।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय अब इस विषय पर नहीं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: कहां धमका रहे हैं?

कैलाश/अरुण   22.3.07  14.10   (1)  2d

 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

डा.बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: यह डरते थोडे ही है ।

डा.बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य आप बिना परमिशन के बोल रहे हैं ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य आपकी कोई बात अंकित नहीं होगी।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री कन्‍हैयालाल ।

याचिकाओं का उपस्‍थापन

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मुख्‍य मंत्री सड़क योजना में तहसील बस्‍सी में काशीपुरा से रूपाहेडी तक सड़क का निर्माण करने बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित याचिका का उपस्‍थापन करता हूं ।

ध्‍यानाकर्षण प्रस्‍ताव

वन विभाग के अधिकारियों की पदोन्‍नति

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रक्रिया के नियम 131 के अंतर्गत श्री खुशवीर सिंह जोजावर, सदस्‍य विधान सभा वन विभाग के अधिकारियों की पदोन्‍नति के संबंध में वन मंत्री का ध्‍यान आकर्षित करेंगे ।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं विधान सभा की प्रक्रिया के नियम 131  के तहत वन अधिकारियों की पदोन्‍नति के बारे में वन मंत्री महोदय का ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं ।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह सही है कि वन विभाग में वन रक्षक और रेंजर फर्स्‍ट स्‍तर के अधिकारी और कार्मिकों की पदोन्‍नति में 20-22 वर्ष तक लग जाते हैं । साथ में मुझे इस तथ्‍य को स्‍वीकार करने में भी कोई गुरेज नहीं है कि सरकार में विभिन्‍न पदों पर कैडर प्रबन्‍धन ठीक नहीं होने के कारण बहुत से विभागों में अनेक पदों पर कार्यरत कार्मिकों को पदोन्‍नति के अवसर उपलब्‍ध नहीं होते हैं । उपाध्‍यक्ष महोदय, ऐसी परिस्थितियों में कार्मिकों के मनोबल को बनाये रखने के लिये बढती उम्र के साथ बढने वाली पारिवारिक जिम्‍मेदारियों के निर्वहन के लिये कार्मिकों को उच्‍च स्‍तर के पद सृजित नहीं होने के कारण राज्‍य सरकार ने और उच्‍च स्‍तर के वेतनमान देने के लिये वर्ष 1992 में राज्‍य सरकार ने ऐसे कार्मिकों के लिये चयनित वेतनमान देने का प्रावधान किया था और उस प्रावधान का लाभ अन्‍य विभागों के कार्मिकों की तरह ही वन विभाग के इन कार्मिकों को मिल रहा है । उपाध्‍यक्ष महोदय, वनों पर बढते जैविक दवाब, उनकी सुरक्षा और जिलों में बढते वन विकास के कार्य, वन्‍य जीव सुरक्षा की चुनौतियां आदि से वन कर्मियों के काम का दायित्‍व बढ गया है तथा देश आजाद होने के बाद से लेकर आज तक परिस्थितियां बदल रही हैं । अंत: बदली हुई परिस्थितियों को ध्‍यान में रखते हुए प्रशासन को वनों के विकास व सुरक्षा हेतु अधिक प्रभावी बनाने के लिये सम्‍पूर्ण प्रशासनिक ढांचे के पुनर्गठन की प्रक्रिया वन विभाग द्वारा प्रस्‍तावित की गई है और यह प्रक्रिया मात्र राजस्‍थान में है । हिन्‍दुस्‍तान में इस प्रकार के प्रशासनिक ढांच में परिवर्तन का प्रस्‍ताव आज तक पेश नहीं किया गया । यह प्रस्‍ताव प्रक्रियाधीन है और मैं आशा करता हूं कि इस प्रस्‍ताव के बाद निश्चित रूप से वन कर्मियों के कार्य वन अधिनियम व तदनंतर नियमों में उल्‍लखित के अनुसार वन विभाग द्वारा यह जो पदोन्‍नति की व्‍यवस्‍था है और प्रशासनिक ढांचे में जो परिवर्तन की बात है निश्चित रूप से की जायेगी ।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय वन मंत्री महोदय ने हमारी इस बात को माना है कि इन की पदोन्‍नति आवश्‍यक है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: अब और क्‍या क्लियरीफिकेशन चाह रहे हैं आप ।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं यह चाह रहा हूं वह मेरी बात से सहमत हैं लेकिन इनके अधिकारियों ने जो जवाब दिया है जो मैंने पूछा नहीं वह जवाब दे दिया । अभी वन मंत्री जी ने भी इसमें बताया कि इन अधिकारियों को 9-18-27 का वेतनमान का लाभ मिल रहा है । मैंने मंत्री महोदय वेतनमान के लाभ की बात नहीं की । मैंने उनके कार्य में दक्षता लाने के लिये उनके प्रमोशन की बात की है । मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा गृह मंत्री जी को, मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा सार्वजनिक निर्माण मंत्री जी को, सिंचाई मंत्री जी को जिन्‍होंने अपने विभाग में परसों ही घोषणा की है कि मैंने शत प्रतिशत प्रमोशन करवा दिये । माननीय सदस्‍य यह बिलकुल धन्‍यवाद के काबिल हैं और ईमानदार है, नेक हैं, कार्य में इनकी दक्षता है ।    मंत्री महोदय मैं आपसे यह चाहूंगा कि उनको लाभ देने की बात नहीं है, बात आती है प्रमोशन की । अभी कुछ देर पहले चर्चा चल रही थी दीगोद से आने वाले माननीय सदस्‍य ने मुद्दा उठाया था आज हजारों एकड आपकी वन भूमि पर अतिक्रमण हो रहे हैं ।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य यह इतनी ज्‍यादा बहस का विषय नहीं है ।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मेरी बात पूरी तरह नहीं रख पाया और आप कहते हो बैठ जाओ । उपाध्‍यक्ष महोदय, जब तक मैं इसकी मूल समस्‍या आपको नहीं बताऊंगा तब तक इसका समाधान नहीं हो सकता है और मूल समस्‍या यह है कि जो भी चर्चा चल रही है अभी इलेक्‍ट्रोनिक मीडिया में, प्रिंट मीडिया में जो बातें आप खुद देख रहे हैं, हम भी देख रहे हैं उसकी मूल समस्‍या का जब तक समाधान नहीं होगा तब तक इस समस्‍या का निदान नहीं हो सकता है । मंत्री महोदय मैं आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा कि अभी आपने जो बात कही है जितने भी अतिक्रमण हो रहे हैं...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य इसमें सारे मामले पर डिसकस नहीं हो सकता ।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): उपाध्‍यक्ष महोदय, आज स्‍टाफ की कमी है, उनका प्रमोशन नहीं होने के कारण उनमें फ्रस्‍ट्रेशन है । उपाध्‍यक्ष महोदय, यह मैं नहीं कह रहा हूं यह बात कह रहा है ...

श्री उपाध्‍यक्ष: आपके कहने पर वक्‍तव्‍य दिलवाया है ।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): उपाध्‍यक्ष महोदय, स्‍टेट एम्‍पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट मैं आपके समक्ष रख रहा हूं । नेशनल फोरेस्‍ट कमीशन की रिपोर्ट आपके समक्ष रख रहा हूं । (व्‍यवधान) उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरी बात पूरी तरह से प्रस्‍तुत नहीं करूं आप कहें तो बैठ जाता हूं ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ... (व्‍यवधान) इनके क्षेत्र में तो कोई जंगल है नहीं तो इनको फोरेस्‍ट का क्‍या ज्ञान है । इनको फोरेस्‍ट से कोई लेना देना नहीं है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री घनश्‍याम तिवाडी शिक्षा मंत्री अनुदान की मांग संख्‍या 24 शिक्षा, कला एवं संस्‍कृति पर विचार हेतु प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करेंगे ।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मेरी बात तो रखूं, यह तो कोई बात नहीं हुई । जब तक आप आधे घंटे की चर्चा नहीं करायेंगे..

श्री उपाध्‍यक्ष: इस में यह स्‍कोप नहीं है । आप दूसरे नियमों में आइए ।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने ध्‍यानाकर्षण प्रस्‍ताव लगाया है जब तक मैं मेरी बात पूरी नहीं रखूंगा तब तक कोई मतलब नहीं है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: आपकी बात आ गई है ।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): उपाध्‍यक्ष महोदय, आप कृपा कर के मुझे समय दें । सभी सदस्‍य इसकी सिफारिश कर रहे हैं ।

श्री उपाध्‍यक्ष: नियमों में इतना ही हो सकता है ।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): उपाध्‍यक्ष महोदय, सभी माननीय सदस्‍य इस बात पर सहमत हैं फिर कहां अड़चन आ रही है । मैं मेरी बात नहीं रखूंगा तो क्‍या रखूंगा । (व्‍यवधान) उपाध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने गलत तथ्‍य पेश किये हैं मैं आपको बता रहा हूं । इन्‍होंने यह कहा कि श्री एसएन गुप्‍ता, अध्‍यक्ष ,जन अभाव अभियोग निराकरण समिति, राजस्‍थान सरकार की अध्‍यक्षता में दिनांक 30.11.05 को बैठक आयोजित हुई थी । शासन सचिव वन, कार्मिक एवं वित्‍त विभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया । समिति द्वारा बैठक में उक्‍त 64 पदों को क्रमोन्‍नत करने की सहमति व्‍यक्‍त की गई ।                                    

 

ans/akt    14:20  2e  22.3.2007 

 

एक तरफ यह लिख रहे है  की गई, दूसरी तरफ मैं आपको बता रहा हूं उपाध्‍यक्ष महोदय, क्रमोन्‍नत करने के प्रस्‍ताव प्रेषित किये गये हैं और दूसरी तरफ मैं बता रहा हूं तत्‍कालीन प्रमुख शासन सचिव वित्‍त उक्‍त अपग्रेडेशन की अनुशंसा कर पत्रावली तत्‍कालीन वित्‍त मंत्री महोदय के पास भिजवाई थी। तब से उक्‍त पत्रावली अपग्रेडेशन की स्‍वीकृति के आदेश लंबित है यह मैंने कहा था और इन्‍होंने कहा यह सही नहीं है। अगर मैं असत्‍य हूं, यह सही नहीं है तो आप फाइल नम्‍बर 12/9/2003  की, जिसमें उस वक्‍त के वित्‍त सचिव की आप फाइल मंगवा ले और उनका नोट देख ले1 उन्‍होंने इसमें सिफारिश की थी इस प्रमोशन के लिए। उपाध्‍यक्ष महोदय, आज उसकी वजह से मैं आपको बता रहा हूं स्‍टेट फाइनेंस कमीशन की क्या रिपोर्ट है, वह आपको बता रहा हूं।

माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने बड़ी मुश्किल से स्‍टेट एम्‍पाव्ड कमेटी का गठन किया और उस गठन के बाद  लगभग एक वर्ष के बाद, एक वर्ष की मेहनत के बाद उन्‍होंने अपनी रिपोर्ट दी अपनी ,उस रिपोर्ट में भी इन्‍होंने माना है कि जब तक..

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण कीजिए।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): उपाध्‍यक्ष महोदय, जब तक उनको प्रमोशन नहीं देंगे उनमें प्रस्‍टेशन रहेगा और कार्य में दक्षता नहीं आयेगी और तब तक यह आई.एफ.एस. हे, मैं आपको बताना चाहूंगा...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप तो इसमें  बहस करने लगे1 नहीं ऐसा नहीं।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरी बात मैं प्रस्‍तुत करूंगा। इन्‍होंने आई.एफ.एस. की  जो लिस्‍ट है आपके प्रगति प्रतिवेदन में, उसमें प्रशासनिक सेवाओं के 112 पद माने हैं जिसमें इन्‍होंने 94 पद ही बताए1 12 पद बताए राज्‍य सरकार की प्रतिनियुक्ति और 4 पद बताए केन्‍द्र सरकार की प्रतिनियुक्ति पर। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं यह जानना चाहता हूं उसके बावजूद  इन आइ.एफ.एस. ने 5 पद रिक्‍त बता दिये। जब आपने 112 माने आई.एफ. एस. के, 112 पूरे हो रहे हैं, 96 पद भरे हुए हैं और 4 और12 यह 16 हो रहे हें 112 तो फिर 5 पद रिक्‍त क्‍यों बताए।

जब मैंने जानकारी हासिल की माननीय मंत्री महोदय से, तब यह बताया गया कि वो ए.सी.एफ . है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ए सी एफ, आई.एफ.एस. है इस वजह से इन्‍होंने कैडर भी रखा है।  उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा कि यह आई.एफ.एस. वन को खा रहे हैं, जंगली जानवर को खतम कर रहे हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष:कृपया स्‍थान ग्रहण कीजिए।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अपनी सुविधा बढ़ाने के लिए अधीनस्थ अधिकारियों का प्रमोशन  नहीं दे रहे।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण कीजिए।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): और एक्‍स कैडर क्‍या होता है(व्‍यवधान) जितने ए.सी.एफ; के पद, जो रिटायर हुए हैं...

श्री उपाध्‍यक्ष: आपने कह दिया, आपकी समस्‍या का समाधान कर देंगे। आपने भाषण देना शुरू कर दिया।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): उन ए.सी.एफ.का पद निरस्‍त करके आर.एफ.एस. में आई.एफ.एस. में पदोन्‍नति कर दी, बढ़ोतरी...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): उपाध्‍यक्ष महोदय, वह एक्‍स कैडर इन्‍होंने अलग से सृजित कर दिया। जब गार्ड कल रिटायर होगा, फोरेस्‍टर रिटायर होगा तब उस फोरेस्‍टर और गार्ड का भी एक्‍स कैडर करके उसकी जगह आई.एफ.एस. लगा दे, वह क्‍यों नहीं किया जा रहा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची):मैरे कहने कहा मतलब यह है कि एक्‍स कैडर के नाम से आई.एफ.एस अपनी पदोन्‍नति ले रहा है, अपने जीवन काल में वह 25 साल की सर्विस में 6 पदोन्‍नति लेता है, अधीनस्थ अधिकारी को 25 साल में एक भी पदोन्‍नति नहीं मिली। उनको लाभ पूरा मिल रहा है, वन विभाग के ऊपर किसी प्रकार का दोष नहीं आ रहा।

श्री उपाध्‍यक्ष: यह जनरल(व्‍यवधान) अंकित नहीं होगा माननीय सदस्‍य।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची):000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, मैं आपको अलाऊ नहीं करूंगा।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिए।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: मंत्री जी स्‍पष्‍टीकरण देना चाहेंगे तो दे देंगे, आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिए।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: आपने तो भाषण शुरू कर दिया।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपका अंकित नहीं होगा,आप समय बरबाद नहीं करें।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची):000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बिराजे।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: अंकित नहीं होगा यह।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप समय बरबाद कर रहे हैं।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थगन प्रस्‍ताव के महत्‍व को कमजोर कर रहे हैं।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अपना ध्‍यानाकर्षण का प्रस्‍ताव इस तरह से...

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपका अंकित नहीं हो रहा है,आप समय बरबाद कर रहे हैं।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप सदन का समय बरबाद कर रहे हैं।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, मैं अलाऊ नहीं करूंगा, अपना स्‍थान ग्रहण करं।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप सदन का समय बरबाद कर रहे हैं।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: यह भाषण देने की परमीशन किसने दी है आपको।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची):000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहले ही इस बात को स्‍वीकार किया है कि काडर प्रबंधन ठीक नहीं होने के कारण यह समस्‍या मात्र वन विभाग में ही नहीं है, यह समस्‍या अनेक विभागों में है जिनमें कार्मिकों की पदोन्‍नति का मामला है। इसी को ध्‍यान में रखते हुए 1992 में तत्‍कालीन भारतीय जनता पार्टी की सरकार और वर्तमान उप राष्‍ट्रपति महामहिम ने  1992 में चयनित वेतनमान की व्‍यवस्‍था की,9-18-27 और उसका लाभ वन कर्मचारियों को भी मिल रहा है।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: बता रहे हैं।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): मैंने सदन को अवगत कराया कि वास्‍तव में वनों के जैविक दवाब, वन्‍य जीव जंतुओं की सुरक्षा, अदालतों में पैरवी के लिए और अनेक वन विभाग की समस्‍याओं को देखते हुए प्रशासनिक ढांचे में परिवर्तन करने के लिए हमने एक प्रारूप तैयार किया है, वह राज्‍य सरकार के पास विचाराधीन है। उसमें काडर प्रबंधन की पूरी व्‍यवस्‍था है।(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, फिर बीच में, आप जवाब नहीं सुनना चाहते वह अलग बात है पर बीच में मत बोलिए।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): उसमें पदोन्‍नति, प्रमोशन, अपग्रेडेशन की भी व्‍यवस्‍था है। राज्‍य सरकार के पास यह व्‍यवस्‍था विचाराधीन है। 73 ए.सी.एफ. जिनके अपग्रेडेशन के लिए  हमने प्रस्‍ताव किया है, राज्‍य सरकार इस पर विचार कर रही है1 मैं आपको, सदन को आश्‍वस्‍त करता हूं कि अगर यह प्रशासनिक ढांचे में परिवर्तन का,इसमें राज्‍य सरकार ने विचार किया तो एक राजस्‍थान मॉडल और एक उदाहरण पेश होगा। वास्‍तव में राजस्‍थान में पिछले तीन वर्षों में वन्‍य जीव जंतुओं की हत्‍याओं पर प्रतिबंध लगा है। कठोरता से हमने काम किया है। आपने रणथम्‍भोर की बात की। मैं मारवाड़ जंक्‍शन से आने वाले माननीय सदस्‍य को जानकारी देना चाहता हूं कि रणथम्‍भौर में 14 कब्‍स और टाइगर सुरक्षित है, पूरी देखभाल की जा रही है।

 

दुर्गा/त्रिपाठी 220307 1430 2f

 

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): और प्रशासनिक ढांचें में परिवर्तन करने के लिये हमने वित्‍त विभाग से, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, फाइनेंस, हमारे प्रिंसिपल सेक्रेटरी, फोरेस्‍ट, चीफ सेक्रेटरी के बीच में चर्चा हुई है, इस पर विचार चल रहा है और अगर इस प्रशासनिक ढांचें को मंजूरी मिल जाती है तो निश्चित रूप से यह परिवर्तन आयेगा। मुख्‍य मंत्रीजी भी इस बारे में चिन्तित हैं। एक हजार गार्ड जो सेवानिवृत्‍त हैं उनको, घोषणा की है और नये गार्डों की भर्ती के लिये...।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य, आप बीच में टोकें नहीं। (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, बीच-बीच में टोका-टाकी नहीं।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये। माननीय सदस्‍य, मंत्री महोदय ने अपना स्‍पष्‍टीकरण दे दिया कि कर रहे हैं। (व्‍यवधान) बहुत सीधी सी बात है। (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय सदस्‍यों ने जो आई.एफ.एस. की बात की और उन्‍होंने रिक्‍त पदों की भी बात की।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: बीच में नहीं, बीच में नहीं।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, विराजिये।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो आई.एफ.एस. के बारे में इन्‍होंने चर्चा की, मैं आपको जानकारी देना चाहूंगा, सेण्‍ट्रल डेपुटेशन रिजर्व में 13, स्‍टेट डेपुटेशन रिजर्व में 17 और ट्रेनिंग रिजर्वेशन में 2, ऐसे कुल 101 और लीव रिजर्व जूनियर पोस्‍ट रिजर्व के लिये 11, यह 101 प्‍लस 11 टोटल 112 हो गये।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): यह क्‍लीयर किया ना मैंने।

श्री उपाध्‍यक्ष: मंत्री महोदय, यह प्रश्‍न-जवाब के बारे में नहीं है। आपने स्‍पष्‍टीकरण दे दिया कि हम कर रहे हैं, कार्यवाही, अब आप समाप्‍त कीजिये।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):  000

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वित्‍त विभाग भी नये पदों के सृजन के लिये चिन्तित है। माननीय मुख्‍य मंत्रीजी भी इस बारे में चिन्तित हैं। निश्चित रूप से यह मामला मुख्‍य मंत्रीजी और वित्‍त विभाग के पास विचाराधीन है और इस पर विचार कर मुख्‍य मंत्रीजी कोई न कोई निश्चित रूप से निर्णय लेंगी।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आवश्‍यक कार्यवाही हो रही है। अब यह फालतू...। (व्‍यवधान)

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): 000

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): यह परमोशन के पदों के लिये ए.सी.एफ. बनाने के लिये यह प्रस्‍ताव वित्‍त विभाग के पास विचाराधीन है। प्रक्रिया के अधीन मामला चल रहा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रक्रिया चल रही है।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): मैं अपनी तरफ से आप लोगों की भावनाओं और वन विभाग की भावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय से पुन: आग्रह कर, इस मामले में कोई न कोई निर्णय होगा, निश्चित रूप से मैं आपको आश्‍वस्‍त करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: घनश्‍यामजी तिवाड़ी। अनुदान की मांग।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बता दिया, आप पूछ लेना। आप मिलते रहते हैं, आप इनसे यह पूछ लेना।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह मेरी राय ही नहीं, पूरे फोरेस्‍ट विभाग की तरफ से प्रस्‍ताव बनाकर वित्‍त विभाग में भेजा हुआ है और हमारी राय है, जब हमने प्रस्‍ताव भेजे हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: अनुदान की मांग संख्‍या 24, विचार एवं मतदान।

अनुदान की मांग

मांग संख्‍या 24 - शिक्षा, कला एवं संस्‍कृति पर विचार

 

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या-24, शिक्षा, कला एवं संस्‍कृति के सम्‍बन्‍ध में 31 मार्च, 2008 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को 50,26,39,15,000/- (पचास अरब छब्‍बीस करोड़ उन्‍तालीस लाख पन्‍द्रह हजार) तक की राशि प्रदान की जाए।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): उपाध्‍यक्ष महोदय, पाइण्‍ट आफ आर्डर। अभी मुख्‍य मंत्रीजी ने जब बजट भाषण पढ़ा था, उन्‍होंने कला एवं संस्‍कृति विभाग का नाम कला, संस्‍कृति और साहित्‍य रख दिया। तो क्‍या साहित्‍य इसमें सम्मिलित है या नहीं है। इसको आप स्‍पष्‍ट करें।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मांग एक ही है सबकी, मांग संख्‍या 24 है। अब नाम मुख्‍य मंत्रीजी ने घोषित कर दिया, इसके बाद प्रश्‍न ही कहां पैदा होता है। अभी तक विभाग का नाम शिक्षा, कला एवं संस्‍कृति है। जब विभाग का नाम शिक्षा अलग रहेगा, कला एवं संस्‍कृति के साथ साहित्‍य और जुड़ जाएगा। यह कोई व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न नहीं है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न तो है। अब देखिये, पहले कला और संस्‍कृति था। अब कला, संस्‍कति और साहित्‍य होना चाहिए।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): वह अलग से, यह शिक्षा, कला एवं संस्‍कृति फिर शिक्षा, कला एवं साहित्‍य एवं संस्‍कृति भी हो जाएगा तो डिमाण्‍ड संख्‍या 24 ही रहेगी।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): नहीं तो फिर उनको साहित्‍य जोड़ना नहीं चाहिए था। नहीं, तो साहित्‍य उनको अलग नहीं करना चाहिए था।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): अभी तो वही है। अभी डिमाण्‍ड यही है, हेड यही है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): वह ठीक है लेकिन उस हेड को करेक्‍ट करना चाहिए।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): संशोधन करा देंगे। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री मोहनलाल गुप्‍ता।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मांग संख्‍या 24, जो शिक्षा, कला एवं संस्‍कृति के सम्‍बन्‍ध में हमारे शिक्षा मंत्रीजी ने जो प्रस्‍ताव रखा है उसके समर्थन में मैं खड़ा हुआ हूं और मैं यह कहना चाहूंगा कि गत 3 वर्षों में राजस्‍थान सरकार ने जिस प्रकार से शिक्षा क्षेत्र में काम किया है, वह अभूतपूर्व काम किया है। हमारी यशस्‍वी मुख्‍य मंत्री श्रीमती वसुन्‍धरा राजेजी ने स्‍वस्‍थ, हरित, शिक्षित और विकसित राजस्‍थान की कल्‍पना की है।

                         (     बजे)

(श्री सुरेन्‍द्र गोयल, सभापति पदासीन)

राजस्‍थान के सभी निवासी स्‍वस्‍थ हों, राजस्‍थान में हरित क्रान्ति हो, राजस्‍थान में सभी बच्‍चों को शिक्षा अच्‍छी मिले और इसी के साथ-साथ राजस्‍थान विकसित राज्‍यों की श्रेणी में आये, इस बात की कल्‍पना उन्‍होंने की थी। मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा हमारे माननीय शिक्षा मंत्रीजी को जो कि विद्वान हैं, उन्‍होंने हमारी मुख्‍य मंत्रीजी की सोच को अमली जामा पहनाया। उसमें उनका उद्देश्‍य यह रहा कि सभी बच्‍चे स्‍कूल में पढ़ें, सभी बच्‍चे स्‍कूल में ठहरें, सभी बच्‍चों को गुणवत्‍तायुक्‍त शिक्षा प्राप्‍त हो। इन तीन उद्देश्‍यों की पूर्ति उन्‍होंने की है। बच्‍चे पढ़ें, बच्‍चे ठहरें और गुणवत्‍तायुक्‍त शिक्षा प्राप्‍त करके अच्‍छे संस्‍कार प्राप्‍त करें।

 

Vps-usc-22032007-1440-2g-1

 

 ज्ञानार्थ प्रवेश और सेवार्थ प्रस्थान की भावना से बच्‍चे शिक्षा प्राप्‍त करके देश के अच्‍छे नागरिक बनें। उसके लिए उन्‍होंने लक्ष्‍य तय किया कि हर ढाणी में विद्यालय हो। शिक्षा मंत्रीजी ने तय किया। अमलीजामा पहनाने के लिए तय किया। हर ढाणी में विद्यालय हो, हर विद्यालय में भवन हो, हर विद्यालय भवन में शिक्षक हो और हर शिक्षक के पास में शिक्षण सामग्री हो। यह लक्ष्‍य तय किया क्‍योंकि यदि ढाणी में विद्यालय नहीं होगा तो हम सर्वशिक्षा अभियान को पूरा नहीं कर सकेंगे। विद्यालय का भवन नहीं होगा तो बच्‍चे कहां पढ़ेंगे? विद्यालय का भवन भी आवश्‍यक है और फिर शिक्षक भी आवश्‍यक है और शिक्षकों के पास में शिक्षण सामग्री भी आवश्‍यक है। इन लक्ष्‍यों की पूर्ति के लिए तिवाड़ीजी ने कदम आगे बढ़ाये और जो अधिकतर शिक्षा मंत्री करते हैं ट्रांसफर-पोस्टिंग पर ज्‍यादा ध्‍यान रहता है। इनका ध्‍यान शिक्षा की गुणवत्‍ता बढ़े, राजस्‍थान का प्रत्‍येक छात्र अच्‍छी शिक्षा प्राप्‍त करे, उसका सर्वांगीण विकास हो, उसकी ओर गया और मैं समझता हूं कि जिस प्रकार से स्‍वामी विवेकानन्‍द ने शिक्षा के बारे में कल्‍पना की, वह कल्‍पना इन्‍होंने भी की। स्‍वामी विवेकानन्‍द ने असतो मा सदगमय, तमसो मा ज्‍योतिर्गमय के साथ-साथ यह भी कहा कि हमें ऐसे बालकों का निर्माण करना है जिनके चेहरों पर आभा, बुद्धि में पांडित्‍य, शरीर में बल, मन में प्रचंड इच्‍छा शक्ति, जीवन में स्‍वावलम्‍बन, हृदय में शिवा, प्रताप, ध्रुव और प्रहलाद की जीवन गाथाएं अंकित हो और जिन्‍हें देखकर महापुरुषों की स्‍मृतियां आज झंकृत हो उठे। इस प्रकार के छात्र तैयार करने हैं और उस प्रकार के छात्र तैयार करनें की दृष्टि से राजस्‍थान आगे बढ़ रहा है। स्‍वामी विवेकानन्‍द के सपने को पूरा करने के लिए राजस्‍थान आगे बढ़ रहा है और मैं यह कहना चाहूंगा कि जिस प्रकार से शिक्षकों की नियुक्तियां की गयी हैं, एक लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्तियां, एक साथ 39 हजार से अधिक विद्यालयों की शुरूआत एवं क्रमोन्‍नयन, कम्‍प्‍यूटर शिक्षा के अन्‍तर्गत राजस्‍थान, एजुकेशन यूनिवर्सिटीज की स्‍थापना, विश्‍व आर्थिक मंच से संबंधित संस्‍थाओं से एम.ओ.यू. कर विद्यालयों में कम्‍प्‍यूटर शिक्षा के व्‍यापक प्रसार और उच्‍च शिक्षा में राष्‍ट्रीय औसत से ज्‍यादा राजस्‍थान का स्‍थान दिलाना, यह एक बहुत बड़ी पहल हुई है।

मैं हर उपलब्धि पर विस्‍तृत जाने से पूर्व जो नये काम, जो नये नवाचार हमारे शिक्षा के क्षेत्र में किये गये हैं उनका मैं वर्णन करना चाहूंगा। माननीय सभापति महोदय, एक अनूठी योजना चलायी- आपणी धरती, आपणा लोग, इतिहास संकलन की एक बहुत अच्‍छी योजना चलायी है और इस योजना के माध्‍यम से गांव-गांव में इतिहास के संकलन में लोग लग गये। हमारी संस्‍कृति, हमारा इतिहास, उस पर हमें गर्व है। यह अंग्रेजों का इतिहास, यह मुग़लों का इतिहास, यह हमारा इतिहास नहीं है। इससे पूर्व जो हमारी संस्‍कृति जब गांवों में बसती थी, रचती थी वह हमारे छात्र पढ़ें, अपने पूर्वजों पर गर्व कर सकें, अपनी ख्‍याति को आगे बढ़ायें, इस दृष्टि से जो प्रयास किया है वह बहुत ही अच्‍छा प्रयास है।

इन्‍होंने शिक्षण संस्‍थाओं में मोबाइल फोन को ले जाने पर रोक लगायी। पेप्‍सी और कोला जैसे शीतल पेय पदार्थ जो कि स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक है, उनको स्‍कूलों में ले जाने में पाबंदी लगायी और योग शिक्षा को शुरूआत करने वाला राजस्‍थान पहला प्रदेश, यह हमारा बन रहा है। योग शिक्षा स्‍वामी रामदेवजी के तत्‍वावधान में शिक्षकों को प्रशिक्षण दिलाया गया और उसी के साथ योग शिक्षक खड़े करके योग की शिक्षा प्रारम्‍भ की गयी।

माननीय सभापति महोदय, पारदर्शी तरीके से एक लाख लोगों को रोजगार दिया गया। एक लाख लोगों को और एक लाख लोग भी वह जिनको पूर्णतया वेतन मिलेगा, पूरे सरकारी कर्मचारी का। यह कोई ऐसे टेम्‍प्रेरी शिक्षक खड़े नहीं किये हैं। योग्‍य शिक्षक, शिक्षा के लिए आवश्‍यक है कि पढ़ाने वाला व्‍यक्ति योग्‍य हो। विद्वान हो। चरित्रवान हो। गांव में ऐसे किसी भी व्‍यक्ति को खड़ा कर दिया कि तू दसवीं पास है तो पढ़ा। तू बी.ए. पास है तो पढ़ा। तू नौवीं पांस है तो पढ़ा। इस प्रकार की यह टेम्‍प्रेरी व्‍यवस्‍था हमारे राजस्‍थान में लागू थी। यह हमारे शिक्षा मंत्रीजी ने योग्‍य शिक्षकों की भर्ती का बहुत बड़ा काम किया है। मैं उनको बहुत बधाई देता हूं और एक लाख शिक्षक आज गांव-गांव में हमारी वसुन्‍धराजी राजे सरकार को यह कह रहे हैं कि वास्‍तव में वसुन्‍धराजी ने जो कहा वह करके दिखाया और हमें रोजगार दिया।

माननीय सभापति महोदय, मैं यहां पर यह भी कहना चाहूंगा कि पूर्व में कांग्रेस सरकार के टाइम पर भी शिक्षा मंत्री थे वे भी विद्वान थे। हमारे शिक्षा मंत्री भी विद्वान हैं। वह भी अच्‍छे पार्लियामेंटेरियन हैं, हमारे शिक्षा मंत्रीजी भी अच्‍छे पार्लियामेंटेरियन हैं।

श्री सभापति: आप तो मुद्दे पर आ जाओ, साहब।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): वे भी शिक्षा मंत्री थे और यह भी शिक्षा मंत्री हैं लेकिन हमारे पंडित विद्वान साथी भाई घनश्‍यामजी उनसे बहुत ही आगे निकल गये शिक्षा के क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्‍थापित किये हैं। मैं इनको बधाई देता हूं, शुभकामनाएं देता हूं। एक लाख लोगों को रोजगार दिया। विधवाओं को रोजगार दिया। प्रत्‍येक एक किलोमीटर की परिधि में प्राथमिक विद्यालय खोला। एक किलोमीटर की परिधि में और दो प्राथमिक विद्यालयों पर एक उच्‍च प्राथमिक विद्यालय खोला।

ग्रामीण क्षेत्र की बालिकाओं के लिए नि:शुल्‍क बस यात्रा का प्रावधान किया और जनजाति क्षेत्र की 12255 बालिकाओं को नि:शुल्‍क साइकलों का वितरण किया। 39 हजार से अधिक विद्यालय खोले और क्रमोन्‍नत किये। यह इतनी बड़ी उपलब्धियां हैं जिसकी काई कल्‍पना नहीं की जा सकती है। बच्‍चों को साइकल देना, गांव-गांव में शिक्षा के प्रसार के लिए, उनके ठहराव के लिए, जाग्रत करना उनको पूरी सुख-सुविधाएं देना, मिड डे मील की व्‍यवस्‍था करना और अभी तो हमारे बजट में जहां-जहां पर मिड डे मील केन्‍द्र सरकार नहीं दे रही है वहां पर भी इसी प्रकार की व्‍यवस्‍था की है कि हमारी सरकार मिड डे मील देगी और इसके लिए चालीस करोड़ से ज्‍यादा का प्रावधान भी किया गया है।

मैं माननीय मुख्‍य मंत्रीजी को उसके लिए बधाई देना चाहता हूं। विद्यालयों में पेयजल की व्‍यवस्‍था, शौचालयों की व्‍यवस्‍था, अतिरिक्‍त कक्षा कक्षों की व्‍यवस्‍था और प्रदेश में एक भी विद्यालय भवनहीन नहीं है। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और मैं समझता हूं कि कांग्रेस के राज में जिस प्रकार से शिक्षा दी जा रही थी वहां पर कोई पता ही नहीं था कि विद्यालय कहां चल रहा है? पेड़ के नीचे विद्यालय चल रहा है। खाली आसमान में विद्यालय चल रहा है। विद्यालय में फर्नीचर की व्‍यवस्‍था नहीं है। टाट-पट्टी की व्‍यवस्‍था नहीं है। चॉक की व्‍यवस्‍था नहीं है। बिजली कनेक्‍शन की व्‍यवस्‍था नहीं है। इस प्रकार से हमारे यह विद्यालय चल रहे हैं लेकिन तीन साल में जिस पकार से भौतिक उपलब्धियां की हैं वह अभूतपूर्व है और मैं समझता हूं कि हमारी सरकार ने 1 अरब 68 लाख रुपये की नि:शुल्‍क पाठ्य पुस्‍तकें वितरित की हैं।  1 अरब 68 लाख रुपये की फ्री, नि:शुल्‍क। 1 अरब 68 लाख रुपया। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। 1 अरब से ज्‍यादा की पाठ्य पुस्‍तकें उपलब्‍ध कराना, यह वही इस बात का द्योतक करता है कि हम चाहते हैं कि बच्‍चे पढ़ें।

 

spp/Akt/14.50/2h/22.3.2007 (1)

 

सभी छात्र पढ़ें और उनका अधिकतम ठहराव हो। ठहराव की दृष्टि से मिड-डे-मील देना, पुस्‍तकें देना, साइकिलें देना और जयपुर शहर में और विभिन्‍न शहरों में यह व्‍यवस्‍था की कि उनको नि:शुल्‍क बसों के पास भी उपलब्‍ध कराये जा रहे हैं। अब चारों ओर शिक्षा का इस प्रकार का वातावरण बन गया कि प्रत्‍येक मां-बाप अपने बच्‍चे को निश्चित रूप से शिक्षा देना चाहता ही चाहता है। जो लोग नहीं पढ़ सकते हैं किसी कारण या कोई काम-धन्‍धा कर रहे हैं और नियमित रूप से विद्यालय में नहीं जा सकते हैं, उनके लिये बहुत ही अच्‍छी व्‍यवस्‍था की है, स्‍टेट ओपन स्‍कूल की व्‍यवस्‍था की है। मैं समझता हूं ओपन स्‍कूल के माध्‍यम से जो लोग पढ़ना चहाते हैं, ऐसे विद्यार्थियों की पढ़ाई की व्‍यवस्‍था कर रहे हैं और ऐसे विद्यार्थियों की संख्‍या 50 हजार है। 50 हजार विद्यार्थी आज ओपन स्‍टेट स्‍कूल में पढ़ रहे हैं। मैं समझता हूं जिस प्रकार से यह काम कर रहे हैं उससे हमारी साक्षरता का प्रतिशत बढ़ रहा है, लोगों का ठहराव बढ़ रहा है, लोगों में शिक्षा की जागरूकता बढ़ रही है ।

माननीय सभापति महोदय, विद्यार्थी सुरक्षा की दृष्टि से विद्यार्थी दुर्घटना बीमा योजना विद्यार्थियों के लिये लागू की गयी है और हमारे विद्यार्थी इन्‍टरनेशनल स्‍टेण्‍डर्ड के बनें। सरकारी स्‍कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी की भी निश्चित रूप से प्रारम्भिक शिक्षा अच्‍छी हो, सुदृढ़ हो। उसके लिये पहली कक्षा से ही अंग्रेजी के पढ़ाने की व्‍यवस्‍था की है।

वनवासी क्षेत्र में निजी स्‍कूलों की मान्‍यता के लिये आधा शुल्‍क लिया गया है। सरकारी विद्यालय के विद्यार्थियों की कम्‍प्‍यूटर फीस पचास प्रतिशत कर दी गयी है। संस्‍कृत शिक्षा के लिये पृथक से बजट का प्रावधान किया गया है। मैं इसमें माननीय शिक्षा मंत्रीजी को बहुत बधाई देना चाहता हूं । संस्‍कृत शिक्षा, जो हमारी मातृभाषा की शिक्षा है, उसके लिये आपने सोचा, उसके लिये क्रियान्वित किया और राजस्‍थान संस्‍कृत विश्‍वविद्यालय को पूर्णतया आत्‍मनिर्भर बनाने की दृष्टि से पूरी सरकारी सहायता उनको प्रदान कर रहे हैं।

माननीय सभापति महोदय, उच्‍च शिक्षा की दृष्टि से भी हमारा राजस्‍थान आगे बढ़ रहा है। जहां राष्‍ट्रीय औसत उच्‍च शिक्षा में 8 प्रतिशत है, राजस्‍थान में उसका औसत 11 प्रतिशत है। जहां 2003-04 में एक लाख साठ हजार विद्यार्थी पढ़ रहे थे, आज करीब चार लाख विद्यार्थी उच्‍च शिक्षा में पढ़ रहे हैं। यह शिक्षा के वातावरण से ही हुआ है। जब प्रा‍थमिक शिक्षा अच्‍छी होगी तो उच्‍च प्राथमिक शिक्षा भी अच्‍छी होगी। ..(व्‍यवधान)..

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप तो ध्‍यान रखो पहले।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, व्‍यवधान नहीं डालें।

श्री सुरेश चौधरी : इतनी अच्‍छी चर्चा कर रहे हैं कि बड़े मगन होकर सुन रहे हैं, वह सो थोड़ी रहे हैं।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): माध्‍यमिक शिक्षा अच्‍छी होगी तो उच्‍च शिक्षा भी हमारी बढ़ेगी और मैं समझता हूं कि जिस प्रकार से यह बेस तैयार किया, राजस्‍थान में पढ़ाई का वातावरण तैयार किया है, उस आधार पर उच्‍च शिक्षा प्राप्‍त करने वाले विद्यार्थियों की संख्‍या बढ़ी है और मैं समझता हूं कि जहां चार लाख विद्यार्थी आज पढ़ रहे हैं, जिस प्रकार का वातावरण आज बन रहा है, निश्चित रूप से तकनीकी शिक्षा में, विभिन्‍न शिक्षा के आयामों में हमारा राजस्‍थान आगे बढ़ेगा। हमारा राजस्‍थान आगे होकर देश का नाम रोशन करेगा। इस बात के लिये मैं शिक्षा मंत्रीजी को बधाई देना चाहता हूं।

प्रत्‍येक जिले में एक महाविद्यालय खुले, इस बात की हमारी माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने घोषणा की है। 41 नये विधि महाविद्यालय प्रारम्‍भ किये गये हैं। महाविद्यालय में 308 नये रोजगारोन्‍मुखी कार्यक्रम प्रारम्‍भ किये हैं और रोजगारोन्‍मुखी कार्यक्रम के आधार पर हमें इस बात के लिये गर्व है कि आज राजस्‍थान की उच्‍च शिक्षा की द़ष्टि से कैम्‍पस इंटरव्‍यू प्रारम्‍भ हो गये। बड़े बड़े जो लोग हैं वह बड़ी बड़ी कम्‍पनियां कैम्‍पस इंटरव्‍यू के लिये आ रही है और हमारे राजस्‍थान के छात्रों को नौकरियां मिल रही हैं, अच्‍छी नौकरियां मिल रही हैं। महाविद्यालय में ई-नेटवर्क कार्यक्रम प्रारम्‍भ किया गया है और टैक्‍नीकल एजुकेशन की दृष्टि से जिस प्रकार से हमने काम किया है, वह बहुत ही अभूतपूर्व है। कोटा में तकनीकी महाविद्यालय की स्‍थापना की है। सेंटर फॉर ई-गवर्नेन्‍स की स्‍थापना की है। तकनीकी शिक्षण संस्‍थाओं में 15 हजार से अधिक सीटों की रिकार्ड वृद्धि हुई है। एक हजार करोड़ से अधिक का निवेश की पहल हुई है। एक हजार करोड़ से अधिक का निवेश इन तकनीकी शिक्षण संस्‍थाओं में हुआ है और माननीय सभापति महोदय, मैं कहना चाहूंगा कि भारत में आर एन डी एण्‍ड साइंस टैक्निशियन की अन्‍य देशों के मुकाबले संख्‍या कम है। पर थाउजेंड पापुलेशन जापान में 7.1 प्रतिशत है, जर्मनी में 4 है, इजरायल में 5.9 है, यू.एस.ए. में 4 है, कोरिया में 2.9 है, ब्राजील में 0.2 है, चाइना में 0.6 है,लेकिन भारत वर्ष में वैज्ञानिक और तकनीशियनों की एक हजार पर उपलब्‍धता केवल 0.3 है। पूरे विश्‍व भर में हमारे वैज्ञानिकों की, हमारे डाक्‍टरों की, हमारे इंजीनियर्स की, हमारे एम.बी.ए.करने वाले लड़कों की, हमारे कम्‍प्‍यूटर इंजीनियर्स की बहुत बड़ी डिमाण्‍ड है। इस डिमाण्‍ड को पूरा करने के लिये तकनी‍की शिक्षा, उच्‍च शिक्षा में निवेश निश्चित रूप से आवश्‍यक है और इस दृष्टि से जो प्रयास हमारी राजस्‍थान सरकार ने किया है, वास्‍तव में बधाई की पात्र है। मैं एक बात और कहना चाहूंगा कि इन्‍टरनेशनल लेवल पर जो एजुकेशन हो रही है और जिस प्रकार से हमारे माननीय शिक्षा मंत्री महोदय ने विभिन्‍न संस्‍थाओं के साथ एम.ओ.यूज.किये हैं, वह एम.ओ.यूज.कम नहीं हैं। वह एम.ओ.यूज. जो किये हैं वह विभिन्‍न संस्‍थाओं के साथ किये हैं जिसमें नन्‍दी फाउंडेशन, जिसमें अमेरिका की बहुत सारी कम्‍पनियां, कम्‍प्‍यूटर एडेड लर्निंग प्रोग्राम, अजीम प्रेमजी फाउडेंशन के सहयोग से संचालित है। माइक्रोसोफ्ट, यह बहुत बड़ी कम्‍पनी है। इससे भी हमने एम.ओ.यू. किया है । अमेरिकन इण्डियन फाउंडेंशन से हमने एम.ओ.यूज. किया है। एजुकेट गर्ल्‍स ग्‍लोबल इस संस्‍था से भी हमने एम.ओ.यूज.किया है। सिसको हॉल इन द वॉल, बच्‍चों के स्‍वंय के हाथों में सीखने के लिये भी यह किया है। इन्‍टेल 3600 सैकण्‍डरी विद्यालयों में प्रशिक्षण प्रदान कर रही है। बोध शिक्षा समिति, जो जयपुर शहर में असुविधा वाले क्षेत्रों में रहते हैं, उन बच्‍चों को शिक्षा प्रदान कर रही है। इससे भी एम.ओ.यूज. किया है। लर्निंग गारंटी प्रोग्राम, प्रेमजी फाउंडेशन, अब अजीम प्रेम जी फाउंडेशन छोटी-मोटी संस्‍था नहीं है, नन्‍दी फाउंडेशन कोई छोटी-मोटी संस्‍था नहीं है। सी आई आई, यह कोई छोटी मोटी संस्‍था नहीं है। सी आई आई अडाप्‍ट थ्री स्‍कूल्‍स। यह प्रोग्राम सी आई ए मिड ले मिल प्रोग्राम फ्री बुक डिस्‍ट्रीब्‍यूशन, पीरामल फाउंडेशन, इतने बड़े बड़े नाम है।

 

Msr/akt/1500/2j/22032007

 

अन्‍तरराष्‍ट्रीय क्षेत्र के विख्‍यात नाम, अन्‍तरराष्‍ट्रीय क्षेत्र में राजस्‍थान को चमकाने वाले नाम, अन्‍तरराष्‍ट्रीय क्षेत्र में राजस्‍थान के बच्‍चों को आगे बढ़ाने वाले नाम, आई.सी.आई.सी.आई., इन सब संस्‍थानों से और हमने एम.ओ.यू. कर के बालकों के सर्वांगीण विकास के प्रयास किये हैं। मैं शिक्षा मंत्री महोदय को इस बात के लिए बधाई देता हूं कि इन्‍होंने शिक्षा के क्षेत्र में अन्‍तरराष्‍ट्रीय स्‍तर के संस्‍थानों से एम.ओ.यू. किया और देश ही नहीं विदेश की शिक्षा भी उनको प्राप्‍त हो सके, आधुनिकतम शिक्षा प्राप्‍त हो सके इस बात के लिए प्रयत्‍न किया।

सभापति महोदय, मैं यह कहना चाहूंगा कि जिस प्रकार से ...(व्‍यवधान)...

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आप कन्‍क्‍लूड करें।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): मैं प्रथम वक्‍ता हूं, सभापति महोदय, आप बैठा देंगे तो मैं तो अभी बहुत तैयारी कर के आया हूं।

श्री सभापति: प्रथम वक्‍ता हैं तो समय की भी सीमा है।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): माननीय शिक्षा मंत्री महोदय ने गांव-गांव गोद लेकर के उनके तकनीकी संस्‍थानों को भागीदार बनाया और शिक्षा के क्षेत्र में जिस प्रकार से इन्‍होंने काम किये हैं, मैं समझता हूं कि इसकी एक रोजगार की राह  भी बढ़ी है।

राजस्‍थान देश का एक पहला राज्‍य है जहां पर शिक्षा क्षेत्र में सर्वाधिक निवेश हुआ है। सर्वाधिक निवेश, इसके आंकड़े देख कर के मुझे बहुत आश्‍चर्य हुआ कि यह निवेश किस प्रकार से हुआ है। उच्‍च शिक्षा क्षेत्र में 1413 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है, तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में 1000 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है, स्‍कूल शिक्षा में 1222 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है, सरकारी क्षेत्र में विभिन्‍न परियोजनाओं के अन्‍तर्गत 3500 करोड़ का निवेश हुआ है। इसी प्रकार से कुल मिलाकर के इस शिक्षा क्षेत्र में 7135 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। इसके लिए माननीय शिक्षा मंत्रीजी बधाई के पात्र हैं। माननीय मुख्‍यमंत्रीजी की जो एक दूर दृष्टि है, पक्‍का इरादा है, बधाई के पात्र हैं, 7135 करोड़ रुपयो करीब-करीब और मैं समझता हूं कि इस प्रकार से तीन वर्षों में 8135 करोड़ रुपये का निवेश हो गया जो कि राज्‍य की वार्षिक योजना के बराबर है।

माननीय सभापति महोदय, हमारे यहां साक्षरता की दर में भी रिकार्ड वृद्धि हुई है, 23 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है और राजस्‍थान में महिला साक्षरता की दृष्टि से जो पहले 20 परसेंट थी अब 43 परसेंट हो गयी। महिला साक्षरता 43 परसेंट। और मैं समझता हूं कि जिस प्रकार से महिलाओं को चांस मिल रहे हैं, महिला शिक्षा की ओर जब हमारा ध्‍यान जा रहा है, आज राजस्‍थान के तीन बड़े पदों पर महिलाएं हैं। हमारी मुख्‍यमंत्रीजी महिला हैं, विधान सभा अध्‍यक्ष महिला हैं, राज्‍यपाल महिला हैं और मैं समझता हूं कि जिस प्रकार से महिलाओं के ऊपर हम खर्च कर रहे हैं, महिला शिक्षा पर खर्च कर रहे हैं ...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप तो एक सिफारिश मेरी भी कर देना माननीय शिक्षा मंत्रीजी से कि अभी पूरी हिण्‍डौली विधान सभा क्षेत्र में एक भी सीनियर सैकण्डरी और सैकण्डरी में विज्ञान का विषय नहीं है। आप जिन इंजीनियरों की बात कर रहे हो न, तो वो वहां पैदा ही नहीं हो रहे इसलिए आप मेरी सिफारिश कर देना।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): आपके राज में तो बेसिक शिक्षा ही आप नहीं दे रहे थे। अभी मैंने आंकड़े बताये हैं, एक लाख 60 हजार विद्यार्थी आपके समय जब हमने चार्ज लिया था उच्‍च शिक्षा में पढ़ रहे थे, आज चार लाख विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मेरी विधान सभा का तो एक ही नहीं है। विज्ञान का विषय ही नहीं है पूरी विधान सभा क्षेत्र में एक भी स्‍कूल में, रिकार्ड है राजस्‍थान का।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): अब आपकी विधान सभा के आंकड़े माननीय शिक्षा मंत्रीजी देंगे।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आपका नम्‍बर आये जब बोल लेना आप।

प्रो. बीरूसिंह राठौड़ (बनीपार्क): कृपया बीच में बोल कर नये विद्यार्थियों की भ्रूण हत्‍या न करें। आपके हाथ जोड़ते हैं हम।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): और हरिमोहनजी, मैं आपका आशीर्वाद चाहता हूं, आपके क्षेत्र में भी जो किया है वो बता देंगे लेकिन पूरे राजस्‍थान का आंकड़ा मैंने दिया और मैं समझता हूं जब तक कि बेसिक शिक्षा का आंकड़ा पूरा नहीं होगा, बेसिक शिक्षा पूरी नहीं होगी उच्‍च शिक्षा किस प्रकार से प्राप्‍त होगी।

राजस्‍थान का रैबारी समुदाय जो कि बकरियां चरा कर के अपना जीवन यापन करता है उसको पढ़ने-लिखने की फुर्सत ही नहीं थी, उसको पढ़ाई-लिखाई के लिए विशेष व्‍यवस्‍था की गयी, झोली और झोली में किताबें। एक अनूठी योजना है यह। कहां-कहां से आप आइडिया लाते हैं, यह तो मुझे पता नहीं है लेकिन गरीब से गरीब विद्यार्थियों को  भी, दूर-दराज के विद्यार्थियों को भी, जो लोग स्‍कूल तक नहीं पहुंच सकते उनको  भी, जो स्‍कूल तक पहुंच कर छूट जाते हैं उनको भी स्‍टेट ओपन विद्यालयों के माध्‍यम से आपने जो पढ़ाई करने की योजना बनायी है उसका हार्दिक स्‍वागत और अभिनन्‍दन करते हैं।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): स्‍टेट ओपन स्‍कूलों में किताबें भेजीं आपने आठ महीने बाद। आठ महीने बाद भेजी हैं किताबें, यह माना है आपने और यह स्‍टेट ओपन स्‍कूल की बात कर रहे हैं।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): खुले तो हैं न यह?

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): भेजी तो है, आपने तो वो भी नहीं भेजी थीं।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, अब आप कन्‍क्‍लूड करें, बाइंडअप करें। तीस मिनट हो गये आपके।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): सभापति महोदय, हमारे सभी विद्यार्थियों को अचछी शिक्षा प्राप्‍त हो सके, तकनीकी शिक्षा प्राप्‍त हो सके, उच्‍च शिक्षा प्राप्‍त हो सके इसके लिए बहुत आगे कदम उठाये हैं लेकिन एक शिक्षा और है जिसके मंत्री भी हैं माननीय घनश्‍यामजी और वह है चिकित्‍सा शिक्षा। हमारी माननीय मुख्‍यमंत्रीजी ने चिकित्‍सा शिक्षा का विभाग अलग किया, उसके परिणाम सार्थक आये हैं और उस शिक्षा में जिस प्रकार से इन्‍होंने काम किया है, जयपुर में मेडिकल विश्‍वविद्यालय बनाया, उसके लिए विधेयक पास किया, नयी कैथ लैब सेवाएं जयपुर, अजमेर में करीं, एस.एम.एस. अस्‍पताल की कायाकल्‍प कर दी और वहां आज आप देखिये कि किस प्रकार से एस.एम.एस. अस्‍पताल में लोगों की सेवा की जाती है और एस.एम.एस. अस्‍पताल एक तरह से पूरे राजस्‍थान में ही नहीं, पूरे देशभर का एक अच्‍छा और आदर्श और मॉडल अस्‍पताल बन गया। वहां पर सेवा भाव से हमारे चिकित्‍सक काम कर रहे हैं और मैं समझता हूं कि चिकित्‍सकों की भर्ती, सीनियर रेजिडेंट्स के पद सृजित करना ओर 119 करोड़ रुपये की लागत से एस.एम.एस. से सम्‍बद्ध चिकित्‍सालयों की कायाकल्‍प की योजना माननीय शिक्षा मंत्रीजी ने बनायी है। इसी के साथ-साथ 40 करोड़ रुपये की लागत से मानसरोवर, जयपुर में एक बड़ा विद्यालय, चिकित्‍सालय प्रारम्‍भ कर रहे हैं आरोग्‍य सदन। में समझता हूं कि जयपुर शहर के लिए एक बहुत बड़ी गिफ्ट है, जयपुर शहर के लिए एक बहुत बड़ा आयाम है और सभी विद्यालय और मेडिकल कॉलेज और अस्‍पताल टैली मेडिसिन से जुड़े हैं, उसके लिए प्रयत्‍न किये हैं। इसके लिए मैं इनको बधाई देना चाहता हूं।

सभापति महोदय, जिस प्रकार से शिक्षा के क्षेत्र में काम हो रहा है और मैं यह भी कहना चाहता हूं कि पहले शिक्षा विभाग की योजना करीब 400 करोड़ की हुआ करती थी आज वो 1400 करोड़ की हो गयी और आज 1400 करोड़ की होने के साथ-साथ हमारे शिक्षा मंत्रीजी देश की सर्वोच्‍च कैब कमेटी के अध्‍यक्ष रहे और कैब कमेटी ने सिफारिश की है, अभी ऐसा लगता है कि केन्‍द्र सरकार इस योजना में फिफ्टी-फिफ्टी करना चाहती है कि जो सर्व शिक्षा अभियान है उसको माध्‍यमिक स्‍तर तक ले जाया जाए और उसमें राज्‍य का प्रतिशत 25 परसेंट ही रखा जाए। 50 परसेंट अगर रहेगा तो राज्‍य में चूंकि पहले ही पैसा कम है इसलिए इस अभियान के तहत केन्‍द्र सरकार उस पुरानी योजना को लागू करे और 75 परसेंट और 25 परसेंट की उस नीति को लागू कर के और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़े।

सभापति महोदय, हमारे राजस्‍थान को एक और बहुत बड़ी उपलब्धि प्राप्‍त हुई है और वह उपलब्धि प्राप्‍त हुई है कि राजस्‍थान को यूनेस्‍को पुरस्‍कार दिया है। शिक्षा क्षेत्र में बहुत बड़ा पुरस्‍कार दिया है। यूनेस्‍को का पुरस्‍कार प्राप्‍त करना यह अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है।

 

Ars/usc/2k/1510/22032007/1

 

पाकिस्‍तान को भी मिला है, बंग्‍लादेश को भी मिला है और अन्‍य देशों को भी मिला है लेकिन भारतवर्ष में सिर्फ राजस्‍थान को इस प्रकार से यह पुरस्‍कार मिला है, यूनेस्‍को पुरस्‍कार। दूर दूर तक शिक्षा को पहुंचाना, गांव गांव, ढाणी ढाणी में शिक्षा को पहुंचाना ...(व्‍यवधान)

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): पाकिस्‍तान से तुलना कर दी आपने।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): नहीं, मैं ऐसा नहीं कह रहा हूं, तुलना नहीं की है। जो है वह फैक्‍ट है एक राजस्‍थान में कई पाकिस्‍तान, कई बांग्‍लादेश आ सकते हैं ...(व्‍यवधान) मैं आपको यह कहना चाहता हूं कि जिस प्रकार से इतना बड़ा राजस्‍थान दूर दराज के क्षेत्र हैं, गांव गांव ढाणी ढाणी......

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): आप गुस्‍सा मत करो, विद्वान नहीं हैं हम लोग, हमें पता नहीं है इस कहानी का, आंकड़ों का इसलिए आप क्षमा करें पर तुलना आपने बांग्‍लादेश, पाकिस्‍तान से की तो हमारी तो सोच के हिसाब से कह दिया। आप तो पढ़कर बता रहे हो, पढ़ना हमें तो आता नहीं ...(व्‍यवधान)

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): और स्‍टेट्स में जिस प्रकार से काम किया उसमें राजस्‍थान अग्रणी रहा है। वह राजस्‍थान एक प्रदेश है ..

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): आपको यही टिप्‍पणी करनी चाहिए कि राजस्‍थान प्रदेश है जो ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आप बिना आसन की अनुमति के बीच बीच में खड़े न हों।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): आप पूरी बात सुनिये और मैंने पहले भी कहा है कि पूरे देश भर में हमारे छह राज्‍यों में राजस्‍थान को यूनेस्‍को का पुरस्‍कार प्राप्‍त हुआ है।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, अब आप वाइंड अप करें, समाप्‍त करें।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): मैं समझता हूं कि यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और इस उप‍लब्धि के लिए मैं माननीय शिक्षा मंत्री जी को बहुत बहुत हार्दिक बधाई, शुभकामनाएं देता हूं।

श्री सभापति: धन्‍यवाद, श्रीमती अनिता भदेल।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): मैं दो मिनट का समय और लेना चाहता हूं। जयपुर से मैं विधायक हूं और मैं यह कहना चाहता हूं कि जयपुर में आई. आई. टी. की स्‍थापना की जाय।

श्री सभापति: ठीक है।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): जयपुर एक अन्‍तरराष्‍ट्रीय शहर बन गया है और एशिया के दस शहरों में यह आ रहा है और जब केन्‍द्र सरकार यहां सब्‍सीड़ी दे रही है, केन्‍द्र सरकार का प्रस्‍ताव है राजस्‍थान में ....

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): आपकी बात का समर्थन करता हूं।

श्री सभापति: माननीय कोटपूतली से आने वाले सदस्‍य.....

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): जयपुर में अन्‍तरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डा है, जयपुर शिक्षा का केन्‍द्र बन रहाहै तो इसलिए आई आई टी जयपुर शहर में खोली जाए। इस बात की मैं मांग करता हूं।

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): इसी के साथ साथ माननीय शिक्षा मंत्री जी मैं कहना चाहूंगा कि आपने भौतिक सुख सुविधाओं का और भर्तियों का जाल बिछा दिया लेकिन जयपुर शहर में जो प्राइवेट स्‍कूल हैं उन पर भी आप कण्‍ट्रोल कीजिए। जितने प्राइवेट स्‍कूल हैं वहां पर जिस प्रकार से फीस ली जा रही है, जिस प्रकार से विद्यार्थियों का शोषण हो रहा है, जिस प्रकार से विद्यार्थियों के और उनके अभिभावकों के इंटरव्‍यू लिये जा रहे हैं वहां पर, बहुत बड़ी सोची समझी चाल है कि बड़े बड़े लोगों के बच्‍चे वहां भर्ती हों, मां बापों को परेशान किया जाए और भर्ती के नाम पर लूट की जाए। इस प्रकार से पारदर्शी नीति माननीय शिक्षा मंत्री महोदय आप बनाएं ताकि प्राइवेट विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को निश्चित रूप से अच्‍छी शिक्षा प्रदान करा सकें, सुलभ शिक्षा हो सके।

अभी दिल्‍ली में एक कानून बना है, हाई कोर्ट ने भी एक निर्णय दिया है कि दो किलोमीटर की परिधि में आने वाले जो बच्‍चे हैं ......

श्री सभापति: अब आप समाप्‍त करें प्‍लीज।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): उन्‍हीं का एडमिशन वहां होगा। मैं माननीय शिक्षा मंत्री महोदय, आपसे यह निवेदन करना चाहता हूं कि आप इस जयपुर शहर में ही नहीं बल्कि अन्‍य क्षेत्रों में भी जहां जहां भी प्राइवेट स्‍कूल्‍स हैं उन प्राइवेट स्‍कूलों में प्रवेश की नीति एक बनाएं, उनके एक्‍जामिनेशन की नीति बनाएं और नीति बनाकर के आम विद्यार्थी वहां पर पढ़ सके इस बात की निश्चित रूप से व्‍यवस्‍था करें।

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): मैं जब सुझाव दे रहा हूं ....

श्री सभापति: ऐसा कोई सुझाव नहीं है। अब आप ऐसा है आपको चालीस मिनट से ज्‍यादा हो गये।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): मेरे को करीबन तीस मिनट हुए हैं ...(व्‍यवधान) आप देख लीजिए दो तीन सुझाव हैं मेरे।

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): यह पहले वक्‍ता हैं।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): आपका आशीर्वाद चाहता हूं मैं, आपकी आज्ञा हो तो बोलूं, कुछ सुझाव देने हैं मेरे को।

श्री सभापति: बिल्‍कुल महत्‍वपूर्ण सुझाव दें।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): माननीय सभापति महोदय, मैं यह चाहता हूं कि सरकारी विद्यालयों में खेल की सुविधा के लिए वहां पर जो शारीरिक शिक्षक हैं उनकी नियुक्ति पर भी विशेष ध्‍यान दें। वहां पर नैतिक शिक्षा, आपने योग्‍य शिक्षा तो दे दी लेकिन नैतिक शिक्षायुक्‍त हमारे विद्यार्थी हों, इस बात के लिए भी आप प्रयत्‍न करें, पाठ्यक्रम में नैतिक सामग्री को आप शामिल करें। अभी कल ही केन्‍द्र सरकार ने एक अच्‍छा काम किया है, मैं प्रशंसा करना चाहूंगा उन्‍होंने एक कानून बनाया है वृद्ध जनों की सेवा के लिए, लड़के- लड़कियों को पाबंद करने का एक कानून बनाया है वृद्ध जनों की सेवा के लिए एक बहुत अच्‍छा कानून बनाया है। तो मैं समझता हूं वह कानून जिस प्रकार से बनाया है उसी प्रकार से यहां भी बच्‍चों में नैतिकता हो, अपने मां  बाप के प्रति, गुरुजनों के प्रति सम्‍मान का भाव पैदा हो और शिक्षा यही कहती है, हमारी संस्‍कृति भी यही कहती है कि उनमें शिक्षा का भाव पैदा हो, इस प्रकार की नैतिक शिक्षा आप प्रदान कराएं, उसका पाठ्यक्रम शामिल करें।

खेल की सुविधा के साथ साथ पीने का पानी, जल और टंकियां पानी की टंकियों को आप दिखवाएं, पानी की टंकियां जो सरकारी स्‍कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी हैं उनको शुद्ध जल भी प्राप्‍त होता है कि नहीं होता है। मैंने कई बार देखा है कि उन टंकियों में निश्चित रूप से पानी ठीक नहीं होता है, कीड़े होते हैं । इसलिए कृपा करके बहुत छोटे छोटे काम हैं। अगर छोटे छोटे काम हमने ठीक कर दिये, वहां शौचालय बना दिये, वहां पानी की टंकी ठीक कर दी, वहां फर्नीचर की व्‍यवस्‍था कर दी और आपने जिस प्रकार से विद्यालयों की समिति बनाई है छात्रों के साथ उन विद्यालयों की समितियों को खर्च करने के पावर देकर के विद्यालयों में सफाई हो, खेल का मैदान अच्‍छा हो, विद्यालय हरा भरा हो और मैं समझता हूं कि

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): जयपुर में एक महिला महाविद्यालय निश्चित रूप से आप खोलें और एक मिडि़ल स्‍कूल, आज हमारे सरकारी स्‍कूलों में पढ़ने वाले .

श्री जयराम जाटव (खैरथल): माननीय सभापति जी, नये सदस्‍यों में कई ऐसे बैठे हैं जिनको कई दिन से किसी भी विषय की डिबेट में नहीं बोलने दिया गया। आज आपसे निवेदन है कि अगर किसी सदस्‍य को बुलाएं तो बराबर का समय लेंगे। इस तरह की व्‍यवस्‍था आपके माध्‍यम से हम करवाना चाहते हैं।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): माननीय सभापति महोदय, दो मिनट में अपनी बात खतम कर दूंगा। ...(व्‍यवधान)

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): दस मिनट से ज्‍यादा का समय किसी भी सदस्‍य को नहीं दिया जाए, यह अध्‍यक्ष जी की व्‍यवस्‍था है । माननीय सभापति जी, दस मिनट से ज्‍यादा .....

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): शिक्षा के क्षेत्र में आप आगे बढ़ें, आगे बढ़ते हुए निश्चित रूप से राजस्‍थान को आगे ले जाएं।

श्री बाबूलाल खराड़ी (फलासिया): सभापति जी, हमारा क्‍या होगा, हम भी तो बोलना चाहेंगे ...(व्‍यवधान)

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): शारीरिक रूप से स्‍वस्‍थ हो, मानसिक रूप से बहुत शक्तिशाली ...(व्‍यवधान) व्‍यक्ति हो, आर्थिक रूप से वह बहुत ही भगवान को मानने वाले निश्चित रूप से सेवा करने वाला ज्ञानार्थ प्रवेश और सेवार्थ प्रस्‍थान करने वाला विद्यार्थी बने। इस बात की व्‍यवस्‍था करें। धन्‍यवाद, जय भारत।

श्री सभापति: माननीय श्रीमती अनिता भदेल।

श्रीमती अनिता भदेल (अजमेर पूर्व): माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या-24 शिक्षा, कला और संस्‍कृति के विषय में अपने कुछ विचार व्‍यक्‍त करना चाहती हूं। निश्चित रूप राजस्‍थान सरकार ने और हमारी यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री जी ने, विद्वान शिक्षा मंत्री जी ने पिछले तीन वर्षो में शिक्षा के क्षेत्र में जो काम किये हैं वह अनगिनत हैं और प्रशंसनीय हैं । चाहे वह बालिका शिक्षा हो या तकनीकी शिक्षा हो या फिर उच्‍च शिक्षा ही क्‍यों न हो। हमारे इतिहास और परम्‍पराओं के अनुसार यदि हम बात करें तो बच्‍चों को शिक्षा देने का दायित्‍व समाज का होना चाहिए क्‍योंकि जन्‍म से जब मानव पशुवत पैदा होता है तो शिक्षा के माध्‍यम से ही उसको संस्‍कारित कर समाज के अनुरूप बनया जाता है और जब सा शिक्षित होता है तो समाज का अभिन्‍न घटक कहलाता है। जो काम समाज के स्‍वयं के हित में हो रहा होता है यह समाज उसी काम के लिए पैसे की डिमांड करे, शुल्‍क यदि हम रोपित करें तो यह सर्वथा गलत बात होगी क्‍योंकि जब व्‍यक्ति शिक्षित होता है, स्‍कूल से जब बालक शिक्षित होकर के बाहर समाज में काम करने के लिए आता है तो वह समाज के लिए काम करता है और जो बालक समाज के लिए काम करता है तो फिर उससे शुल्‍क की किस प्रकार से हम मांग कर सकते हैं। एक यह बिंदु विचारणीय है। हमें इसके ऊपर सोचना चाहिए। माननीय शिक्षा मंत्री जी बहुत विद्वान हैं और उनमें यह क्षमता है क्‍योंकि जो व्‍यक्ति देता है, करता है समाज के लोगों की अपेक्षाएं उसी से बढ़ती हैं तो उनमें यह क्षमता है कि हमारी जो शिक्षा पद्धति है जो व्‍यक्तिवादी विचारधारा को प्रोत्‍साहित करती है । जब व्‍यक्ति स्‍कूल से निकलता है तो हम चाहते हैं कि वह समाज के लिए काम करे लेकिन समाज के लिए काम न करके वह व्‍यक्ति के लिए काम करता है तो इस विचारधारा को यदि हमें बदलना है तो ........

 

vns/usc/15.20/2l/22.3.2007/1

 

जो हमारी शिक्षा पद्धति है जो अँग्रेज़ों के माध्‍यम से हम पर थोपी गयी है जिसका सिर्फ एक ही उद्देश्‍य था कि र्क्‍लकों का निर्माण करना ताकि उनकी आवश्‍यकता की पूर्ति हो सके। उन्‍होंने तो अपनी आवश्‍यकताओं की पूर्ति कर ली पर हमारे समाज को बरबाद कर दिया। हमारी युवा पीढ़ी को बरबाद कर दिया इसलिये आज आवश्‍यकता है इस बात की कि हम ऐसी शिक्षा पद्धति का निर्माण करें जो हमारे समाज के अनुरूप हो, हमारी आवश्‍यकताओं के अनुरूप हो ताकि हमारे समाज में जो अव्‍यवस्‍था हुई है उसको हम सुधार सकें और पुन: संगठित समाज की परिकल्‍पना कर सकें और यह गुण मैं निश्चित रूप से शिक्षा मंत्री महोदय में देखती हूं। वह चरणबद्ध रूप से इस शिक्षा पद्धति को संवार कर भारतीय परम्‍पराओं के अनुसार एक नयी शिक्षा पद्धति का निर्माण करेंगे ऐसी मुझे उनसे आशा है।

मैंने जैसा पहले भी कहा कि इन तीन वर्षों में शिक्षा व्‍यवस्‍था सुधरे, सार्वजनिक शिक्षा हो। प्राथमिक शिक्षा को हम सार्वजनिक शिक्षा बना सकें, सार्वभौमिक शिक्षा बना सकें इसके लिये हमारी सरकार ने कई नीतिगत निर्णय लिये और उन नीतिगत निर्णयों का परिणाम था कि हमारी जो साक्षरता का प्रतिशत है वह 61.03 कुल साक्षरता का प्रतिशत हुआ बढ़कर जिसमें पुरुषों की साक्षरता है 76.46 प्रतिशत और महिला साक्षरता 44.34 प्रतिशत हुई।

इसके अलावा साक्षरता ही नहीं बढ़ी बल्कि शिक्षा की गुणात्‍मकता भी बढ़ी। शिक्षा किस प्रकार से हमारे लिये उपयोगी साबित हो, अच्छी शिक्षा दे सकें तो सर्व शिक्षा अभियान के माध्‍यम से भवनों का निर्माण करना। बालकों का नामांकन अधिक कैसे बढ़े इसके लिये मिड डे मील की व्यवस्था करना। बालक विद्यालय में रुकें, एक बार प्रवेश ले करके वापस न चले जाएं इसके लिये यह व्‍यवस्‍था करना और शिक्षा के वातावरण जो शिक्षा भवन हैं उनको उन बालकों के अनुरूप बनाना। हमारे बालक का जो अधिगम स्‍तर है उस स्‍तर तक जा करके शिक्षक कैसे शिक्षा प्रदान करें उसके लिये शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्‍यम से शिक्षकों को प्रशिक्षित करना। उन शिक्षकों को वह सामग्री उपलब्‍ध कराना जिसके माध्‍यम से हम बालक में अभिवृद्धि कर सकें। बालक के शैक्षिक स्‍तर को उठा सकें और उसके अधिगम स्‍तर तक जाकर उसके पढ़ने की व्‍यवस्‍था हम कर सकें यह सारे प्रयास हमारे माननीय शिक्षा मंत्री महोदय ने किये हैं। निश्चित रूप से इन प्रयासों की नियमित रूप से मानीटरिंग के ही परिणाम है कि आज प्रत्‍येक गांव में एक अच्‍छा विद्यालय उपस्थित हुआ है जो शिक्षा का काम करते हैं। हम विद्यालय के बाहर लिखते हैं कि ज्ञानार्थ और सेवार्थ प्रस्‍थान। इसका अर्थ यही है कि ज्ञान के लिये आप आइये और समाज की सेवा इन विद्यालयों से जाइये तो। 

मैं यह कहना चाहूंगी आपने शिक्षा के लिये बहुत सारे प्रयास किये हैं और शिक्षा की गुणवत्‍ता के लिये शिक्षा को उच्‍चतम स्‍तर पर पहुंचाने के लिये जो आपने प्रयास किये हैं उनका कुछ उल्‍लेख मैं करना चाहूंगी। जैसे शैक्षिक सत्र 2004-2005 के कक्षा एक से अंग्रेजी विषय का शिक्षण कराना। ग्रामीण क्षेत्र की बालिकाओं हेतु माध्‍यमिक और उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय में कक्षा 9वीं से 12वीं तक की अध्‍ययनरत बालिकाओं को घर से स्‍कूल की यात्रा निशुल्‍क बस की सेवा उपलब्‍ध कराना। माध्‍यमिक एवं उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालयों में स्‍व पोषित योजनान्‍तर्गत वर्ष 2005-2006 से कम्‍प्‍यूटर शिक्षा के लिये 50 प्रतिशत शुल्‍क राज्‍य सरकार द्वारा वहन किये जाने का निर्णय तथा 2006-2007 से बालिकाओं को कम्‍प्‍यूटर फीस में पूर्ण छूट प्रदान करना। राज्‍य में प्रथम चरण में 130 राजकीय बालिका माध्‍यमिक विद्यालय, राजकीय बालिका उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा के लिये आई सी टी परियोजनाओं के क्रियान्‍वयन का निर्णय लेकर उसको लागू करना। और भी अन्‍य बहुत सारे उपाय हमारे मंत्रीजी ने किये, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने किये है जिनके आधार पर हम यह कह सकने की स्‍थति में हैं कि आज राजस्‍थान में शैक्षिक स्थिति संतोषजनक है।

माननीय सभापति महोदय,  जिस प्रकार से प्राथमिक शिक्षा और माध्‍यमिक शिक्षा में काम हुए हैं उसी प्रकार से तकनीकी शिक्षा में भी काम हुए हैं। जैसे मैंने पहले कहा कि हमारी शिक्षा ऐसी होनी चाहिये जो हमारी आवश्‍यकताओं की पूर्ति कर सके तो आज आवश्‍यकता है ऐसे कामगार युवाओं का निर्माण करने की जिनके हाथ में कौशल हो और वह उस कौशल के माध्‍यम से अपनी जीविका उपार्जन का साधन उस कौशल को बना सकें, अपनी जीविकोपार्जन कर सकें। एक अरब की जनसंख्‍या वाले इस देश में जो संसाधन हमें बहुत सुगम तरीके से उपलब्‍ध हैं और जिसको हम कह सकते हैं कि जिसे उपयोगी बनाना बहुत आवश्‍यक है वह है मानव संसाधन। यदि इस मानव संसाधन को हमने शिक्षित कर लिया, श्रमशील बना दिया तो निश्चित रूप से जो सबसे बड़ा प्रश्‍न हमारे सामने खड़ा हुआ है उस प्रश्‍न का समाधान हम कर पायेंगे। उस प्रश्‍न का उत्‍तर हम ढूंढ़ पायेंगे और इसके लिये हमारी सरकार ने जो तकनीकी शिक्षा में प्रयास किये हैं उनकी कुछ बानगी आपके समक्ष प्रस्‍तुत करना चाहूंगी।

113 ऐसे पंचायत समिति क्षेत्र जहां औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थाओं की सुविधा नहीं थी वहां निजी क्षेत्र को बढ़ावा देकर, उन्‍हें आमंत्रित करके औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थानों की स्‍थापना हेतु चुनाव किया गया और 77 पंचायत समितियों में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थाओं की स्‍थापना हेतु निजी निवेशकों को आशय पत्र जारी किये गये। बाकी की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है और वह कार्यवाही में चल रहे हैं। इसी प्रकार तकनीकी शिक्षा के लिये भी कुछ नार्म्‍स तय किये हैं, कुछ नीतिगत निर्णय लिये हैं। जैसे कोटा में तकनीकी विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना की गयी। सेण्‍टर फार ई-गवर्नेंस की पहल की गयी। तकनीकी शिक्षण संस्‍थाओं में 15,000 से अधिक सीटों में हुई रिकार्ड वृद्धि। हमने उनकी सीटों को बढ़ाया ताकि बालक आएं और प्रवेश लें ऐसा न हो कि सीट के अभाव में योग्‍य बालक भी उसमें प्रवेश ना पा सकें। सभी जिलों में पॉलीटैक्निक और प्रत्‍येक पंचायत समिति में आई टी आई की स्‍थापना। एक हजार करोड़ से अधिक के निवेश की पहल हुई। 20 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थान तथा 5 राज्‍य पॉलीटैक्निक महाविद्यालयों की स्‍थापना इसके अन्‍तर्गत हमने की। औद्योगिक प्रशिक्षण केन्‍द्र उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्र में क्रमोन्नत किये गये। निश्चित रूप से कई बार हम यह कहते हैं बालक ने आई टी आई तो किया है, पॉलीटैक्निक तो किया है लेकिन आई टी आई करने के बाद भी उसके पास में वह कौशल प्राप्‍त नहीं हुआ जिसके आधार पर वह व्‍यवसाय का सके। तो इस कमी को देखते हुए उनको उन्‍नत बनाया गया। 70 प्रतिशत से अधिक छात्रों का कैम्‍पस प्‍लेसमेंट हुआ। यह बहुत बड़ी सोचने की बात है। यह परिणाम यदि आप देखेंगे तो नि‍श्चित रूप से मैं भूरि-भूरि प्रशंसा करूंगी कि 70 प्रतिशत बालकों का कैम्‍पस सलेक्‍शन हुआ। यह हमारी शिक्षा पद्धति, हमारी शिक्षा की योजनाओं का परिणाम है कि बालक का वहां से यदि प्‍लेसमेंट होता है तो दूसरे बालक भी उत्‍साहित होकर के प्रवेश लेते हैं और इस प्रकार एक बालक को यदि रोजगार मिलता है तब उसका सम्पूर्ण परिवार समृद्ध बनता है। जब परिवार समृद्ध बनता है तो मैंने कई बार कहा कि वह कड़ी लगातार जुड़ती रहती है और वह राष्‍ट्रीय स्‍तर पर हम उसको तय करते हैं। बजट को दुगुना किया गया। गांव गोद लेकर तकनीकी संस्‍थान बनेंगे और गांवों में उनकी भागीदारी तय की गयी। यह सब काम तकनीकी शिक्षा में हुए हैं निश्चित रूप से मैं इसके लिये माननीय शिक्षा मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देती हूं परन्‍तु इसके साथ एक सुझाव देना चाहती हूं कि हमारे आई टी आई में एन सी वी टी, एस सी वी टी दो प्रकार से कोर्सेज संचालित हैं। एन सी वी टी कोर्स से उत्‍तीर्ण छात्र राष्‍ट्रीय स्‍तर पर यदि वह आई टी आई में लैक्‍चरर बनना चाहे तो एप्‍लाई कर सकता है। यदि रेलवे में कोई आई टी आई होल्‍डर पद की वैकेंसी है तो उसमें वह एप्‍लाई कर सकता है लेकिन एस सी वी टी कोर्स के माध्‍यम से जो छात्र निकलता है वह दोनों ही जग एप्‍लाई नहीं कर सकता तो इस प्रकार हम उस बालक के साथ छलावा कर रहे हैं। इस कोर्स को करा करके हम उसका समय भी बरबाद कर रहे हैं, उसका पैसा भी बरबाद कर रहे हैं। या तो हमें यह कोर्स बंद करना चाहिये, नहीं तो फिर इन कोर्सेज को एन सी वी टी में क्रमोन्‍नत करना चाहिये ताकि उन छात्रों को लाभ मिल सके। उन आई टी आई होल्‍डर्स को लाभ मिल सके जो अपने रोजगार की तलाश में यह कोर्स करने के लिये प्रवेश लेते हैं।

 

श्‍याम/चौहान  22.03.2007  15.30  2m 

 

सभापति महोदय, इसी प्रकार जैसा मैंने पहले भी कहा कि उच्‍च शिक्षा के क्षेत्र में भी बहुत सारे नीतिगत निर्णय लिये गये और इसके आधार पर ही हम जहां महाविद्यालय नहीं थे, चाहे वह महिला महाविद्यालय हों या को-एजुकेशन वाले महाविद्यालय हों, कई जिला मुख्‍यालय उनसे वंचित थे, कई पंचायत समिति मुख्‍यालयों पर इस प्रकार के महाविद्यालय नहीं थे। लेकिन हमारी सरकार की सोच और पहल के लिए धन्‍यवाद देना चाहूंगी कि उन्‍होंने निजी निवेशकों को आमंत्रित किया और यह कहा कि जो इस प्रकार की शिक्षा में सुविधाएं उपलब्‍ध करनी थी कि वह आयें हमारे पास, हम उनको भवन भी देंगे, हम उनको भूमि भी देंगे और आप अपना महाविद्यालय वहां संचालित करें। जो उच्‍च शिक्षा के क्षेत्र में हमारा प्रतिशत राष्‍ट्रीय प्रतिशत से कम था और विशेषकर उच्‍च शिक्षा के लिए बालिकाओं को सुविधाएं प्रदान नहीं कर पाते थे। इस प्रकार की सुविधाएं भी उन क्षेत्रों के लिए प्रदान की है तो इसके लिए भी मैं आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देती हूं।

सभापति महोदय, मैं बालिका शिक्षा के विषय में विशेषकर बोलना चाहूंगी। मैं एक योजना का उल्‍लेख करते हुए कुछ बात अपनी कहना चाहूंगी कि हमारे शिक्षा मंत्री महोदय ने आपणी धरती आपणां लोग, नाम से इतिहास संकलन के लिए एक योजना बनाई और नाम दिया आपणी धरती आपणां लोग, इसका अर्थ जो मैं अपनी बुद्वि से निकालती हूं, वह यह हुआ कि हम हमारे इतिहास में जो लोग हुए हैं जिन्‍होंने आदर्श प्रस्‍तुत किये हैं, जो हमारे प्रेरक बने हैं, जिन्‍होंने जीवन में मूल्‍य तय किये हैं हम उनका इतिहास रचें। कोई व्‍यक्ति जब प्रेरणा लेता है तो हम उसको यह नहीं कह सकते हैं कि अब्राहम लिंकन ने ऐसा किया इसलिए तुमकों भी ऐसा करना है। लेकिन यदि हम उसको यह कहेंगे कि हाड़ी रानी ने ऐसा किया है इसलिए तुमको करना है तो वह इस बात को स्‍वीकार करेगा क्‍योंकि वह उसकी भूमि से पैदा हुई है। उसके जीवन मूल्‍यों में रची-बसी है। उसके समाज से निकली हुई है इसलिए हम इस बात को कह सकते हैं कि यह जो योजना आपने शुरू की है निश्चित रूप से मैं आपको इसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद देती हूं क्‍योंकि आने वाली पीढ़ी इस बात के लिए आपको याद रखेगी कि आपने हमे एक ऐसा इतिहास दिया जिसके माध्‍यम से हम हमारे पूर्वजों ने क्‍या किया उसका ज्ञान हमें प्राप्‍त हुआ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सभापति महोदय, सदन में इतनी महत्‍वपूर्ण मांग पर चर्चा हो रही है और आधे-आधे मंत्री बैठे हुए हैं। एक-आध पूरे मंत्री को बुलवायें। इतने कैबिनेट मंत्री हैं, सरकार में इतने कैबिनेट मंत्री हैं, एक-आध को तो बैठा कर रखें यहां पर ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: आप तो बिराजें ...(व्‍यवधान)

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): आधे और पूरे क्‍या होते हैं।

एक माननीय सदस्‍य: आपके सुनने वाले भी तो आधे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: आप बीच-बीच में बात नहीं करें ...(व्‍यवधान)

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): देवनानी जी कुछ बोलेंगे वह हो जायेगा क्‍या ...(व्‍यवधान)

श्रीमती अनिता भदेल (अजमेर पूर्व): माननीय सदस्‍य, आप प्‍लीज मुझे बोल लेने दीजिये फिर आप जितना चाहें उतना बोल लेना ...(व्‍यवधान) मुझे अपना विषय खत्‍म कर लेने दीजिये फिर आप बोल लेना ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, बिराजें ...(व्‍यवधान)

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): देवनानी जी कुछ बोलेंगे वह हो जायेगा ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, बिराजें ...(व्‍यवधान)

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): देवनानी जी तो वही बोलेंगे, कागज पर लिखकर के पकड़ा देंगे और क्‍या करेंगे ...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: आपको बहनों से एलर्जी तो नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): कृपया महिला शक्ति को डिस्‍टर्ब नहीं करें ...(व्‍यवधान)

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): सभापति महोदय, इन्‍हें बैठायें प्‍लीज ...(व्‍यवधान) इनको शांति से बैठाइये माननीय सदस्‍य को ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: पिलानी से आने वाले माननीय सदस्‍य बिराजें ...(व्‍यवधान)

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): अच्‍छा बोल रही हैं सुनें शांति से ...(व्‍यवधान)

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): सबसे ज्‍यादा कद्र महिलाओं की मैं ही करता हूं ...(व्‍यवधान)

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): तभी बार-बार बीच में उठ जाते हो ...(व्‍यवधान) सबसे ज्‍यादा डिस्‍टर्ब आप ही करते हो ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, बिराजें ...(व्‍यवधान)

श्रीमती अनिता भदेल (अजमेर पूर्व): आप मुझे बोलने दीजिये, प्‍लीज ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सभापति महोदय, कैबिनेट मंत्री को तो हाजिर करो आप ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: आप बिराजें।

श्रीमती अनिता भदेल (अजमेर पूर्व): हां, हां, वह मेरी बात सुन रहे हैं। आप चिंता मत करें, मुझे बोलने दीजिये ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: बीच-बीच में क्‍यों खड़े हो रहे हैं। आपका ही नम्‍बर आ रहा है ...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: व्‍यवधान विधायक जी, कृपया शांत बैठें ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: अब आप कनक्‍लूड करें, प्‍लीज ...(व्‍यवधान)

श्रीमती अनिता भदेल (अजमेर पूर्व): सभापति महोदय, मैं बालिका शिक्षा के विषय में कुछ बहुत महत्‍वपूर्ण बात आपको बताना चाहूंगी कि बालिका शिक्षा की क्‍या महत्‍ता है। भारतीय समाज और भारतीय जीवन पद्धति, परिवार और जीवन के मूल्‍य सम्‍पूर्ण विश्‍व में श्रेष्‍ठतम माने जाते हैं और यही कारण है कि विश्‍व के अनेक देश हमारे भारतीय परिवार कैसे हैं, भारतीय समाज की संरचना कैसी है इसको जानने के लिए और इसका अनुसरण करने के लिए भारत आते हैं। भारत के समृद्ध और गौरवशाली इतिहास के, आदर्श के अनेक पृष्‍ठ भरपूर हैं। हमारे पास वह इतिहास है जिसमें मातृत्‍व की साक्षात प्रतिमा के रूप में जीजा बाई, नेतृत्‍व में लक्ष्‍मी बाई , प्रदत्‍त में देवी अहिल्‍या और हाड़ी रानी को कोई नहीं भूला सकता है। यह उदाहरण हमको बताते हैं कि भारतीय इतिहास में, भारतीय धर्म, परंपरा में, भारतीय समाज में महिलाओं का बहुत उच्‍च स्‍थान था और उसके कारण से हमारा समाज समृद्ध था। समाज समृद्ध होने के कारण से ही हमारा राष्‍ट्र सोने की चिड़िया कहलाता था। यदि हम राष्‍ट्र को पुन: सोने की चिड़िया कहलाने का गौरव दिलाना चाहते हैं तो निश्चित रूप से हमें शिक्षा में उन सभी बातों पर विचार करना चाहिए जिसके माध्‍यम से हम उस उद्देश्‍य की प्राप्ति कर सकें।

श्री सभापति: अब आप समाप्‍त करें।

श्रीमती अनिता भदेल (अजमेर पूर्व): मैं समाप्‍त कर रही हूं। यह विषय खत्‍म करके मैं समाप्‍त करूंगी। अंग्रेजो के पूर्व जो हमारी शिक्षा पद्वति थी वह हमारी आवश्‍यकताओं की पूर्ति करती थी और एक बात मैं कहना चाहूंगी शिक्षक होने से भी कि शिक्षा मनुष्‍य के नैसर्गिक गुणों का विकास करती है। हम सिर्फ साक्षर हो जायें उसी से शिक्षा का उद्देश्‍य पूरा नहीं हो जाता है। हमारे अंदर जो गुण हैं, जो प्रकृति ने हमें दिया उनके विकास का माध्‍यम शिक्षा होती है। शिक्षा के माध्‍यम से हम उन गुणों का विकास करते हैं और यह भी कहना चाहूंगी कि स्‍त्री शब्‍द को हम लिंग वाचक रूप में पहचानते हैं। लेकिन मैं अपनी अवधारणा के अनुसार यह कहूंगी कि यह शब्‍द लिंग वाचक शब्‍द नहीं है। यह शब्‍द गुण वाचक शब्‍द है। जहां दया, करूणा, ममता, श्रम और कष्‍ट सहने की देह है, जिसमें यह सारे गुण हों, जिस देह में यह सारे गुण हों वह स्‍त्री कहलाती है। यह गुण वाचक शब्‍द है और शिक्षा का उद्देश्‍य होना चाहिए कि इस नैसर्गिक गुणों का वह विकास करे। उस पराकाष्‍ठा तक उन गुणों को लेकर के जायें। जब तक स्‍त्री के इन गुणों का विकास नहीं होगा तब तक हम यह कह सकते हैं कि वह शिक्षित नहीं होगी। मैं तो यह कहूंगी कि कई लोग कहते हैं कि स्‍त्री में शारीरिक सामर्थ्य नहीं होता है। लेकिन मैं यह कहूंगी कि उसकी वाणी में इतना सामर्थ्‍य है कि यदि उसका उचित मंच पर, उचित जगह उपयोग किया जाये तो वह समाज में और परिवार की दिशा को मोड़ देती है।

सभापति महोदय, एक घटना, सिर्फ एक घटना मैं सुनाना चाहूंगी, माननीय मोहनलाल जी गुप्‍ता ने विवेकानंद जी की बात का उदाहरण दिया था। विवेकानंद जी की शिक्षा के बारे में कहा लेकिन विवेकानंद जी को किसने शिक्षित किया। यह मैं आपको बताना चाहूंगी। एक घटना उनके जीवन की सुनाऊंगी। जब विवेकानंद जी छोटे थे और उनका नाम नरेन्‍द्र था, कई बार पुराने घरों में यह प्रचलित होता था कि बच्‍चे आपस में मिलकर के खेल खेलते थे और तय करते थे कि मैं डाक्‍टर बनूंगा, मैं इंजीनियर बनूंगा, मैं वकील बनूंगा, मैं यह बनूंगा। सारे बच्‍चे पूरी कॉलोनी के आकर के उसके घर में खेल रहे थे और खेलते हुए आपस में तय कर रहे थे कि किसको क्‍या बनना है। अचानक जब नरेन्‍द्र की बारी आयी तो नरेन्‍द्र से दूसरे बच्‍चे ने पूछा कि तुम क्‍या बनोगे नरेन्‍द्र। नरेन्‍द्र का अनायास ही जवाब था, क्‍योंकि बच्‍चा जैसे देखता है वैसे ही वह सोचता है। उसके आसपास में अंग्रेज घोड़ा बग्‍घी से बहुत निकला करते थे। उस समय अंग्रेज घोड़ा बग्‍घी में बैठकर के आने-जाने का काम करते थे तो उसने जैसा देखा वैसा ही कहा, उसने कहा कि मैं तो जो घोड़ा बग्‍धी चलाता है कोचवान वह बनूंगा। मां पीछे खड़ी हुई यह सारी घटना सुन रही थी। मां ने सोचा कि सभी बच्‍चे तो कोई डाक्‍टर बन रहा है, कोई इंजीनियर बन रहा है और मेरा बच्‍चा घोड़ा गाड़ी चलाने वाला कोचवान बनेगा क्‍या। लेकिन उसका दिमाग देखिये और उसके विचार देखिये और जो उसने बोला वह सुनिये। उसने अपने बच्‍चे का हाथ थामा और अपने ड्राइंग रूम में लेकर के गयी, वहां एक चित्र लगा था उसको देखकर वह बताती है, वह चित्र था कृष्‍ण का और अर्जुन का, कृष्‍ण अर्जुन का रथ खींच रहे थे, उसने उस और इशारा करते हुए कहा कि देख बेटा, तुझे कोचवान बनना है ना तो तुझे निश्चित रूप से कोचवान बनना है, डाक्‍टर, इंजीनियर नहीं बनेगा। कोचवान ही बनेगा पर तुझे कोचवान बनना है तो कृष्‍ण के जैसा कोचवान बनना। यह भाव, यह विचार उस बालक के ह्रदय में इस प्रकार से अंकित हुए कि बड़ा होकर के वह विश्‍व में धर्म गुरु के नाम से प्रसिद्व हुआ और उन्‍होंने राष्‍ट्र को एक दिशा प्रदान करके, शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रयास किया जिसका परिणाम आज हम देखते हैं।

सभापति महोदय, यह मैं कहना चाहूंगी कि महिलाओं को शिक्षित करने का उद्देश्‍य केवल यह नहीं है कि उनको साक्षर करना है या पुरूष के बराबर लाकर के खड़ा कर देना है। महिलाओं को शिक्षित करने का उद्देश्‍य है कि राष्‍ट्र को उत्‍तम स्‍थान की और ले जायें और मैं तो माननीय मुख्‍यमंत्री जी को भी इस बात के लिए धन्‍यवाद देती हूं कि उन्‍होंने हाड़ी रानी के नाम से एक फोर्स के गठन की बात कही है। इससे निश्चित रूप से राजस्‍थान की महिलाओं को प्रेरणा मिलेगी। 

 

जयगोविन्‍द/यूएस/22.3.7/15.40/2n

 

और हमारे राजस्‍थान की महिलाएं, हमारे समाज में जो व्‍याप्‍त बुराइयां हैं उनको समाप्‍त करेगी और ऐसी बालिकाओं का निर्माण हम हमारे इन विद्यालयों से करेंगे।

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्रीमती अनिता भदेल (अजमेर पूर्व): माननीय सभापति महोदय, मुझे जो बोलना था वह तो बोल दिया, पर मैं मेरे विधान सभा क्षेत्र और कुछ सुझावों की ओर आना चाहूंगी जो बहुत महत्‍वपूर्ण सुझाव हैं।

श्री सभापति: अब क्‍या सुझाव रह गए?

श्रीमती अनिता भदेल (अजमेर पूर्व): प्‍लीज। मैं दो मिनट में अपनी बात को समाप्‍त कर दूंगी। ...(व्‍यवधान)...

हमारी सरकार ने मुझे ध्‍यान है कांग्रेस के टाइम में कम्‍प्‍यूटर शिक्षा के लिए बहुत बवाल मचा था। पता नहीं उन्‍होंने कौनसा करप्‍शन किया था, उसके लिए सब व्‍यक्तियों के मुख पर वह बात थी।

श्री सभापति: अब एक मिनट में अपने सुझाव दीजिए, एक मिनट में।

श्रीमती अनिता भदेल (अजमेर पूर्व): माननीय सभापति महोदय, हां, वह यही सुझाव हैं। मैं यह कहूंगी कि कम्‍प्‍यूटर शिक्षा सत्र 2001-2002 में प्रारम्‍भ हुई। प्रारम्‍भ में राज्‍य सरकार और माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा 4 एजेंसियों जिनमें सबसे प्रमुख कॉम्‍प्‍यूकॉम था, उससे विद्यालयों में कम्‍प्‍यूटर शिक्षा के लिए पाँच वर्ष का अनुबंध किया गया, बाद में जिसको एक वर्ष के लिए और बढ़ा दिया गया तो वह 2007 तक उन्‍होंने कम्‍प्‍यूटर शिक्षा को कंटीन्‍यू रखा लेकिन चूंकि अब 2007 समाप्‍त होने वाला है तो मैं माननीय शिक्षा मंत्रीजी से आग्रह करूंगी कि वह जब अपना वक्‍तव्‍य दें तो यह बताने की कृपा करें कि आगामी समय में कम्‍प्‍यूटर की क्‍या व्‍यवस्‍था होगा, इनकी वयवस्‍था कौन देखेगा, क्‍या नियम होंगे उस व्‍यवस्‍था के लिए और वर्तमान में जो कम्‍प्‍यूटर जिस कम्‍पनी ने छोड़े हैं विद्यालयों में वह किस स्थिति में है, विद्यालयों को कैसे उनको मेनटेन करना है।

दूसरी, नि:शुल्‍क पाठ्यपुस्‍तकों वाली बात है। हमने कक्षा एक से बारहवीं तक के छात्र-छात्राओं को नि:शुल्‍क पाठ्यपुस्‍तकें प्रदान की। पिछले सत्र की 50 प्रतिशत पुरानी पुस्‍तकें वापस जमा कर और चालू सत्र की 50 प्रतिशत नई पुस्‍तकें मिलाकर वितरित की जाती है, यह व्‍यवस्‍था है हमारी। लेकिन छात्रों द्वारा जो पुरानी पुस्‍तकें लौटाई जाती है वह काफी फट जाती है तथा सभी छात्र नवीन पाठ्य पुस्‍तकें लेना चाहते हैं। अत: वितरण में भेदभाव की संभावना रहती है क्‍योंकि पुरानी पुस्‍तकें सभी छात्रों से प्राप्‍त कर जमा की जाती है इससे 50 प्रतिशत पुस्‍तकें प्रत्‍येक कक्षा की जमा होने पर विद्यालयों में पुस्‍तकों का ढेर लग जाता है। उनके उचित संधारण में, श्रम शक्ति व्‍यय न हो, स्‍थान न घिरे और कम कक्षा कक्ष वाले विद्यालयों में जहां पहले से ही कक्षा कक्ष कम हैं तो इस प्रकार की पुस्‍तकें जो इकट्ठी हो जाती है उनको रखने की अलग व्‍यवस्‍था करते हैं, यह एक तरह से कैश है, चूंकि करोड़ों रुपए हम इस पर खर्च करते हैं तो किसी न किसी दिन इस पर ऑडिट आब्‍जेक्‍शन भी होगा तो विभाग के सारे अधिकारी परेशान होंगे इसलिए अभी नियम बना दें कि इसके लिए क्‍या व्‍यवस्‍था होनी चाहिए और यह तय कर दें...।

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्रीमती अनिता भदेल (अजमेर पूर्व): यह सारे सुझाव ही हैं। मैं खतम कर रही हूं अपनी बात को इसलिए मैं कह रही हूं...।

श्री सभापति: माननीय श्री संयम लोढ़ा। आप विराजें, अब नहीं।

श्रीमती अनिता भदेल (अजमेर पूर्व): बस खतम कर रही हूं। एक सैकण्‍ड, संयमजी, मैं खतम कर रही हूं।

मैं मिड डे मील के लिए कहना चाहूंगी कि इसके लिए जो केन्‍द्रीयकृत व्‍यवस्‍था की बात हम करते हैं तो हमारे विधायक फण्‍ड से पैसा देने के लिए तैयार हैं। यदि आप इस प्रकार की व्‍यवस्‍था करें तो जरूर इस विधायक फण्‍ड से इस मद में पैसा देंगे।

कर्मचारियों की बात मैं कहूंगी कि कई बार हमारे शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के मेडिकल बिल हमारे पास आते हैं तो करोड़ों रुपयों के और बजट होता है हमारा बहुत न्‍यूनतम तो कई बार यह परेशानी हो जाती है कि किसको दें और किसको नहीं दें, किसी को दें तो कितना दें। मेरा सुझाव है कि जिस प्रकार से भैरोंसिंहजी की सरकार ने एक बार जीरो बजट आवंटित किया था और उसके साथ जितने भी हमारे मेडिकल बिल थे वह समाप्‍त हो गए थे तो इस प्रकार से बजट आवंटित किया जाए।

हमारी पंचायत समिति मुख्‍यालयों पर एक मॉडल विद्यालय उच्‍च माध्‍यमिक स्‍तर का बनाया जाए। जिस प्रकार से आपने अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में बनाए हैं और वहां अनुशासित और योग्‍य शिक्षकों की नियुक्ति की जाए जिससे वह विद्यालय पूरे पंचायत समिति क्षेत्र के विद्यालयों की मोनिटरिंग करे और हमारा काम सुगम हो जाए, हम प्रस्‍तुत कर सकें आदर्श कि हमारा यह एक मॉडल विद्यालय है।

हमारे जो नवीन विद्यालय हैं उनमें अभी तक भी कई जगहें खाली पड़ी है, यदि इन खाली जगहों को नहीं भरेंगे तो हमारे विद्यालयों की रनिंग ठीक ढंग से हो पाएगी क्‍योंकि जिस प्रकार से उच्‍च प्राथमिक विद्यालयों में सर्व शिक्षा अभियान के तहत माध्‍यमिक स्‍तर पर अभी बजट में घोषणा हुई है माध्‍यमिक स्‍तर तक हम शायद इसको लेकर जाएंगे यदि यह योजना वास्‍तव में इम्‍प्‍लीमेंट होती है तो निश्चित रूप से हमारे माध्‍यमिक विद्यालयों को इसका फायदा मिलेगा।

अंत में मैं यह कहना चाहूंगी कि हमारे जो पद रिक्‍त हैं, यदि उन रिक्‍त पदों को पदोन्‍नति द्वारा क्‍योंकि उन्‍हें 9-18-27 का चयनित वेतनमान मिल रहा है, हमारे ऊपर कोई अतिरिक्‍त भार नहीं आएगा, उन पदों को प्रमोशन दिया जाए तो तृतीय श्रेणी अध्‍यापकों की हमारी इतनी बड़ी संख्‍या में भर्ती हो रही है वह भर्ती हम कर सकते हैं और उनको हम क्रमोन्‍नत करके उन खाली पदों को भरेंगे तो हमारी जो समस्‍या है उसका समाधान हो जाएगा और हम लोगों को रोजगार उपलब्‍ध करवा पाएंगे।

इसी तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में अध्‍यापकों के जो पद रिक्‍त हैं, शहरी क्षेत्रों में तो बहुत सारे अध्‍यापक बैठे हुए हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में कमी है यदि हम इनका समानीकरण करते हैं तो निश्चित रूप से ऐसे कई विद्यालयों में हम नियुक्ति कर पाएंगे और नए शिक्षक जो अतिरिक्‍त बैठे हैं उनके बोझ से भी हम बच पाएंगे। आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया उसके लिए धन्‍यवाद।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय सभापति महोदय, शिक्षा कला एवं संस्‍कृति के मांग पर आपने मुझे बोलने का अवसर दिया है, मैं आपका आभारी हूं और यह आशा करता हूं कि जिस तरह से मेरे पूर्व वक्‍ताओं के ऊपर आपका दिल उदार बना रहा, मेरे प्रति भी आपकी यह सहृदयता रहेगी।

श्री सभापति: आप 20-25 मिनट में बात समाप्‍त कर दें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं अपनी पार्टी का टाइम ले रहा हूं।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): हमारा भी ध्‍यान रखा जाए।

श्री सभापति: सबका ध्‍यान रख रहे हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय सभापति महोदय, शिक्षा मंत्रीजी की जो आज की स्थिति है उसका मौजूं अपने विद्यालय जीवन में सुना हुआ एक शेर मुझे याद आता है।

वो कत्‍ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती

हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम

माननीय सभापति महोदय, राजस्‍थान की माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने किस सफाई के साथ राजस्‍थान के शिक्षा मंत्रीजी के पर काटे हैं...।

श्री सभापति: आप मुद्दे की बात कहो।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय मुख्‍य मंत्रीजी द्वारा पढ़ा गया बजट भाषण उसका परिणाम है। माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से जानकारी में लाना चाहूंगा कि राजस्‍थान की तमाम अकादमियां चाहे वह साहित्‍य अकादमी हो, चाहे दूसरी अकादमियां हो, वह माननीय घनश्‍यामजी तिवाड़ी से लेकर कला संस्‍कृति महकमे में डाल दी गई। क्‍या अंदाज है, कितनी खूबसूरती से, माननीय सभापति महोदय, मैं यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि मेरे से पूर्व वक्‍ताओं ने आज इस मांग पर अपने विचार रखते हुए यूनेस्‍को के पुरस्‍कार का जिक्र किया और बांग्‍लादेश, पाकिस्‍तान, मोरक्‍को इन देशों का भी जिक्र किया। माननीय सभापति महोदय, क्‍या यह सही नहीं है कि यह पुरस्‍कार प्रदान किया जाता है वह इसलिए प्रदान किया जाता है कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद अगर आपने उस क्षेत्र में शिक्षा की व्‍यवस्‍था की है तो उसके आधार पर चयन करके यह पुरस्‍कार प्रदान किया जाता है और माननीय सभापति महोदय, मैं माननीय शिक्षा मंत्रीजी से जानना चाहता हूं कि जिस यूनेस्‍को पुरस्‍कार की वजह से आप गौरवान्वित हो रहे हैं, आप अपना साक्षात्‍कार पर साक्षात्‍कार दिए जा रहे हैं, जरा राजस्‍थान की जनता को यह बताएं कि राजीव गांधी पाठशालाओं को कंवर्ट करने के अलावा कितने नए प्राथमिक विद्यालय आपने खोले हैं? इस यूनेस्‍को पुरस्‍कार का श्रेय अगर किसी को जाता है, जिसको जाता है तो राजस्‍थान के तत्‍कालीन मुख्‍य मंत्री अशोक गहलोत को जाता है जिन्‍होंने गांव-गांव और ढाणी-ढाणी में विषम परिस्थितियां होने के बावजूद, अकाल की भयावह मार होने के बावजूद राजस्‍थान शिक्षा के क्षेत्र में आगे कैसे बढ़े और राजस्‍थान का नाम देश के अग्रणी प्रदेशों की पंक्ति में कैसे आए उसके लिए जीवटता के साथ प्रयास किया और 2006 का यह यूनेस्‍को पुरस्‍कार तत्‍कालीन कांग्रेस पार्टी की सरकार के प्रयासों का परिणाम है। माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि राजस्‍थान की यशस्‍वी मुख्‍य मंत्री ने जो अपना बजट भाषण प्रस्‍तुत किया, इस सरकार ने जो अपना अभिभाषण पढ़ा, क्‍या नहीं कहा....।

 

Gpc/usc/ 22032007/1550/2o

 

अशोक गहलोत कटोरा लेकर भीख मांगते हुए घूमते थे और हमने राजस्‍थान में इतना बेहतरीन वित्‍तीय प्रबंध किया, आज हमारा खजाना भरा हुआ है। निश्चित रूप से। माननीय सभापति महोदय, 8500 करोड़ रुपये की पिछले साल की योजना 11638 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।  मैं पूछना चाहता हूं शिक्षा मंत्रीजी कि 35 फीसदी योजना का आकार बढ़ने के बाद राजस्‍थान की यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री की निगाह में और उनके ध्‍यान में मानव संसाधन कौनसे नम्‍बर पर है। माननीय सभापति महोदय, मैं पूछना चाहता हूं योजना का आकार इतना बढ़ने के बाद भी यह कौनसा कारण है कि राजस्‍थान सरकार के इस साल की जो वार्षिक योजना प्रस्‍तुत है उसमें प्‍लान का पैसा आपने घटाया है। जब 35 फीसदी योजना का आकार बढ़ा है तो यह प्रारंभिक शिक्षा पर जो प्रावधान आपने किया उसके अनुरूप वह नहीं बढ़ना चाहिए था?

माननीय सभापति महोदय, 2006-07 के बजट एस्‍टीमेट में 41293 लाख रुपये का प्रावधान था और प्रारंभिक शिक्षा के प्‍लान में इस वर्ष के बजट एस्‍टीमेट में 34454 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है जो पिछले साल की तुलना में 16 परसेंट कम है। किस बात का गुणगान कर रहे हो, किस बात के लिए अपनी पीठ ठोक रहे हो? राजस्‍थान का शैक्षिक जगत इस सरकार के लिए क्‍या मायने रखता है यह प्‍लान का आपका प्रोविजन जाहिर करता है।

इतना ही नहीं, सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं माध्‍यमिक शिक्षा के अंदर 2006-07 के बजट एस्‍टीमेट थे 3196.82 लाख रुपये और इस वर्ष उसको भी घटाकर 2427.88 लाख रुपये इन्‍होंने कर दिया। इसमें भी 24.1 परसेंट की कटौती प्‍लान हैड के अंदर इस सरकार के द्वारा की गई है।

सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं जो सामान्‍य शिक्षा का महा योग है उसका भी 2007 का प्‍लान का एस्‍टीमेट है 47343.15 लाख रुपये। वह भी घटकर 2007-08 में 39541.57 लाख रुपये हो गया है। इस तरह से सामान्‍य शिक्षा के महा योग में प्‍लान में जो कटौती है वह कुल मिलाकर 16.5 प्रतिशत है। मैं चाहूंगा कि जब शिक्षा मंत्रीजी जवाब दें तो इस बात का खुलासा करें कि आयोजना के मद में यह कटौती क्‍यों हुई है या आप इस इंतजार में बैठे हुए हैं भारत सरकार का कोई जलजला आये और आप रिवाइज बजट एस्‍टीमेट करके बाद में उसकी पूर्ति करने की कोशिश करे, लेकिन राजस्‍थान की जनता इस बात को भली-भांति समझेगी कि अपनी गांठ से राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री क्‍या देना चाहती है और भारत सरकार क्‍या दे रही है। जो आपका सपना है, जो आप क्रेडिट लेना चाहते हो 1500 सैकण्‍डरी स्‍कूल खोलने की, 600 सीनियर सैकण्‍डरी स्‍कूल खोलने की यह राजस्‍थान की जनता भली-भांति समझ जाएगी कि‍यह किसके द्वारा हो रहा है, किस बात में हो रहा है और आपने इसमें क्‍या प्रावधान किया है।

माननीय सभापति महोदय, मैं निवेदन करना चाहूंगा बहुत महिमामण्‍डन हुआ इस सदन में और हमारे एक मित्र जिन्‍होंने भारतीय जनता पार्टी की ओर से आज की चर्चा की शुरूआत की उन्‍होंने जब तकनीकी शिक्षा की बात की तो अमरीका, मोरक्‍को, पता नहीं किस-किस देश के उदाहरण लाकर इस सदन में अपनी बात रखने का प्रयास किया। मैं इतना दूर नहीं जाना चाहता। माननीय सभापति महोदय, मैं सिर्फ भारत की तरफ ही दृष्टि डालना चाहता हूं और भारत सरकार की वेबसाइट पर सर्व शिक्षा अभियान के बारे में जो स्थिति है वह मैं आपके नोटिस में लाना चाहता हूं कि राजस्‍थान देश के दूसरे राज्‍यों की तुलना में किस मुकाम पर खड़ा है 

माननीय सभापति महोदय, वर्ष 2006 तक सर्व शिक्षा अभियान में राजस्‍थान को 86516 शिक्षकों की भर्ती करनी थी, लेकिन सभापति महोदय, राजस्‍थान की यह अकर्मण्‍य, शिथिल और उदासीन सरकार मात्र 31896 शिक्षकों की भर्ती कर पायी। इसके विपरीत आप देश के दूसरे प्रांतों का उदाहरण लें आंध्रप्रदेश ने 95 फीसदी शिक्षकों की भर्ती कर दी, 36300 की उनको भर्ती करनी थी, 34676 की उन्‍होंने भर्ती कर दी। छत्‍तीसगढ़ का लीजिए 50 हजार की भर्ती करनी थी, 80 परसेंट से ज्‍यादा शिक्षकों की भर्ती कर दी।

(       बजे)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

मध्‍यप्रदेश जहां पर इनकी पार्टी की सरकार है 90 हजार शिक्षकों की भर्ती करनी थी उन्‍होंने 80 हजार शिक्षकों की भर्ती कर दी। उड़ीसा का उदाहरण लीजिए, जिनको 64 हजार शिक्षकों की भर्ती करनी थी और उन्‍होंने 55 हजार शिक्षकों की भर्ती कर दी। उत्‍तर प्रदेश का उदाहरण्‍ं लीजिए जहां 2,33,583 शिक्षकों की भर्ती होनी थी, उन्‍होंने 2,15,950 शिक्षकों की भर्ती कर दी। आपका क्‍या हाल है? राजस्‍थान के उस बेरोजगार ..(व्‍यवधान)..

श्री मोहन मेघवाल (सूरसागर): आपने अपने कार्यकाल में क्‍या किया?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): हमने अपने कार्यकाल में क्‍या किया उसकी सज़ा हम भुगत रहे हैं। ..(व्‍यवधान).. मेरे से बड़ा शुभचिन्‍तक आपको नहीं मिलेगा जो आपको समय से पहले आगाह कर रहा है कि अपने निकम्‍मेपन से उबर जाओ और भारत सरकार जो पैसा दे रही है उसका फायदा राजस्‍थान के उस गरीब बेरोजगार नवयुवक को दो जिसके परिवार वालों ने आपके वायदे पर भरोसा करके राजस्‍थान में पहली बार आपकी पार्टी को पूर्ण बहुमत के साथ सत्‍ता में लाने का मौका दिया।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  इसके अलावा Opening of Schools, इसका जो देश के अंदर टार्गेट दिया गया है राजस्‍थान सरकार को 37118 स्‍कूलें पिछले साल तक ओपन करनी थी उसकी तुलना में ये 28 हजार स्‍कूलें ओपन कर पाये। जबकि इनके मुकाबले दूसरे प्रदेशों ने, उत्‍तर प्रदेश ने 28 हजार के टार्गेट के विपरीत 27 हजार स्‍कूलें खोल दीं। झारखण्‍ड ने 16 हजार के टार्गेट के विपरीत 20 हजार स्‍कूलें खोल दीं। जम्‍मू-कश्‍मीर ने 6156 के टार्गेट के विपरीत 6154 स्‍कूलें खोल दीं और आंध्र प्रदेश ने 7011 के टार्गेट के विपरीत 7961 स्‍कूलें खोल दीं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  अंदाजा लगाइए इस सरकार ने राजस्‍थान को किस मुकाम पर लाकर पटक दिया। देश के दूसरे राज्‍य सर्व शिक्षा अभियान में भारत सरकार द्वारा दिये हुए पैसे का पूरी प्रतिबद्धता के साथ उपयोग कर रहे हैं और इस बात की कोशिश कर रहे हैं कि अपने प्रदेश को आगे कैसे बढ़ाएं।

एडिशनल क्‍लास रूम, टार्गेट के मुताबिक राजस्‍थान को 40 हजार का निर्माण करना था, लेकिन 12200 बनाये। इसके विपरीत अगर दूसरे राज्‍यों का आकलन करें तो देश के दूसरे राज्‍यों की तुलना में राजस्‍थान बहुत पीछे है। 

माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  इसी तरीके से जो फण्‍ड यूटिलाइजेशन का काम है, फाइनेंशियल स्‍टेटस, उसके अंदर भी राजस्‍थान बहुत पीछे है। राजस्‍थान की तुलना में मिजोरम, जम्‍मू-कश्‍मीर और अंडमान निकोबार जैसे छोटे राज्‍य भी आगे खड़े हुए हैं। देश के दूसरे राज्‍यों की तुलना में राजस्‍थान इस मुकाम पर खड़ा हुआ है।

शिक्षकों की भर्ती का परसेंटेज अगर मैं आपको बताऊं तो राजस्‍थान में टार्गेट के विपरीत सिर्फ 37 प्रतिशत शिक्षकों की भर्ती हुई है। जबकि देश के दूसरे राज्‍यों में अंडमान निकोबार 73 परसेंट, आंध्र प्रदेश 96 परसेंट, अरुणाचल प्रदेश 74 परसेंट, असम 72 परसेंट, छत्‍तीसगढ़ 80 परसेंट, दमन एण्‍ड दीव 95 परसेंट, गुजरात 90 परसेंट, हरियाणा 79 परसेंट, हिमाचल 81 परसेंट, जम्‍मू-कश्‍मीर 92 परसेंट। यह आपकी उपलब्‍ध है देश के दूसरे राज्‍यों की तुलना में।

सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा इस सरकार ने जो प्रगति प्रतिवेदन हमें उपलब्‍ध कराया है कहां तो आपका यह वादा था कि हर साल एक लाख नवयुवकों को सरकारी नौकरियां देंगे और यह आपके द्वारा उपलब्‍ध कराया हुआ प्रगति प्रतिवेदन हमको यह जानकारी देता है कि आज राजस्‍थान के अंदर 83713 शिक्षकों के पद रिक्‍त पड़े हुए हैं।

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/22032007/1600/2p  

     

प्रथम वेतन श्रृंखला में 30, द्वितीय वेतन श्रृंखला में 11560 और कुल अध्‍यापक शिक्षा विभाग एवं पंचायती राज में 72123 और जब भर्ती का काम आपने किया है तीन सालों का आपने फीगर दिया हुआ है वह बहुत कम है। जितनी इसकी तुलना के अन्‍दर आपने लगातार स्‍कूलें खोली उसके अनुरूप आपने यह व्‍यवस्‍था नहीं की भारत सरकार का चाहे 2003-04 का हो, 2004.05 का हो, 2005-06 का हो और 2006-07 का हो, हर साल में जितना पैसा आपको दिया गया, आप उस पैसे को लेकर बैठे रहे और राजस्‍थान के उस आम आदमी के बच्‍चे को पढ़ाने की जो बेहतर व्‍यवस्‍था हो सकती थी वह करने का काम आपने नहीं किया। राजस्‍थान के बेरोजगार युवकों को जो पढ़ने के बाद एक सपना लेता है कि सरकारी नौकरी में आकर उसको राजस्‍थान की जनता की सेवा का मौका मिलेगा, वह सेवा का मौका भी आपने नहीं दिया। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं, इनकी जो विभागीय कार्य प्रणाली है, आपकी उसकी क्‍या हालत है ? ये विभागीय जांच के भी आपने इसमें आंकड़े दिये हुए हैं, कितने प्रकरण निस्‍तारित किये, आपने प्राथमिक जांच के 481 में से सिर्फ 26 सीसीए 17 के 203 में से सिर्फ 16, सीसीए 16 के 309 के सिर्फ 16 और निलम्‍बन के 60 में से सिर्फ 5, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, महीने महीनों हो जाते हैं चार्जशीट देने का काम नहीं करते, कोई सस्‍पेंड हटाए तो सस्‍पेंड 10-10 महीने बैठा रहता है, कोई एपीओ बैठा है तो बैठा रहता है, कोई चार्जशीट नहीं, कुछ नहीं, किसी तरह की कोई मानीटरिंग नहीं और उसी का नतीजा है कि राजस्‍थान के शैक्षणिक जगत के अन्‍दर एक अराजकता का माहौल बना हुआ है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं राजस्‍थान की मुख्‍य मंत्री ने पिछले बजट भाषण में भी कहा था कि यह स्‍त्री शिक्षा को समर्पित है और इस बार तो उन्‍होंने और मुखर होकर के कहा कि यह महिलाओं को समर्पित है लेकिन बजट को कागजों में समर्पित करने से कुछ नहीं होता। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी इस पुस्‍तक के माध्‍यम से बताना चाहता हूं जो आपने हमको इसी महीने में उपलब्‍ध कराई है। मूक बधिर और नेत्रहीन बालिकाओं हेतु आर्थिक सबलता पुरस्‍कार क्‍या लिखा है वर्ष 2006-07 में 97 बालिकाओं के प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए जिनको आर्थिक सहायता देने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। पूरा साल खतम हो रहा है, अभी प्रक्रिया ही चल रही है आपकी ? इस तरीके से आप सम्‍बल देना चाहते हो उन नेत्रहीनों और मूक बधिर बच्चियों को? यह आपका कमिटमेंट है उस दीनहीन और कमजोर और ईश्‍वर के द्वारा मैं समझता हूं अन्‍याय का शिकार हुई बच्चियों के प्रति ? आपकी बेटी योजना, यह मैं नहीं कह रहा हूं, आपके द्वारा भेजा हुआ यह विवरण कह रहा है, सत्र 2006-07 की दिनांक 7 फरवरी, 2006 तक कुल 10836 बालिकाओं के प्रस्‍ताव प्राप्‍त हैं जिनको आर्थिक सहायता देने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। यह जानकारी है, यह आपकी उपलब्धि है, आप चाहें अपनी पीठ थपथपाइए, हमको कोई एतराज नहीं है लेकिन यह कागजों में इस तरीके से या तो आपकी चलती नहीं मुख्‍य मंत्री ने अधिकारियों को इशारा किया हुआ होगा, मानना मत इनकी और निचले स्‍तर तक यह ठप करने का वातावरण चल रहा है और उसकी सज़ा भुगत रहे हैं वह बच्‍चे और बच्चियां जो इस उम्‍मी में अपने प्रस्‍ताव देते हैं, अपने फार्म भरते हैं कि यह सरकार तत्‍परता से कार्यवाही करके उनको फायदा पहुंचाएगी और अध्‍यक्ष महोदय, मैं जानकारी में लाना चाहता हूं नन्‍हीं कली योजना, उक्‍त योजना में कुल व्‍यय लगभग एक करोड़ 80 लाख रुपये होगा और अभी तक मात्र 36 लाख रुपये की किश्‍त एक प्राइवेट फाउण्‍डेशन ने उपलब्‍ध कराई है यह तो आपकी बच्चियों के प्रति जो आपने योजनाएं प्रस्‍तावित की हुई हैं, एक के बाद एक उनका हाल किस कदर बेहाल हो रहा है ? यह आपका अपना प्रगति विवरण कह रहा है, यह मैं नहीं कह रहा हूं और माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं, मंत्री जी, जब आप अपना उत्‍तर दें, मैं समझ नहीं पा रहा हूं, आप इसको स्‍पष्‍ट जरूर करना, यह जो निशुल्‍क पाठ्य-पुस्‍तक वितरण योजना में जो वित्‍तीय एवं भौतिक प्रगति है, इसमें 2006-07 में आपने जो विवरण दिया है, 2005-06 में जहां 51232 लाख पुस्‍तकों का वितरण किया गया है और 2006-07 के अन्‍दर आपने 35863 का आंकड़ा दिया है, अब इसमें क्‍या रहस्‍य है, वह आप बेहतर बता सकते हैं इसलिए मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि इस बारे में जो भी वास्‍तविकता है वह आप बताने का कष्‍ट करें। अब मैं आता हूं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह मेरा सौभाग्‍य है कि आप आसन पर पधार गई हैं क्‍योंकि राजस्‍थान के मुख्‍य मंत्री ने मातृ शक्ति को यह बजट समर्पित किया है, विशेष महिला शिक्षण शिविर, क्‍या हालत है इनकी ? आपके बाड़मेर में आपको 125 लगाने थे, आप कितने लगा पाये ? मात्र सौ, सिरोही में आपको 325 लगाने थे, आप 30 ही नहीं लगा पाये और पाली की हालत तो और भी बुरी है कि जहां आपको 250 शिविर लगाने थे और आप मात्र 161 शिविर लगा पाये।

श्री अध्‍यक्ष: तो आपको मदद करनी थी सिरोही में कम से कम।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ये इतने भी लगे हैं यह मेरी वजह से लगे हैं, अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रयासों से लगे हैं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): अगर ये नहीं होते तो 300 ही लग जाते, इनकी वजह से ही 30 लगे हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): और टोंक की स्थिति देखिए 150 शिविर आपको लगाने थे, 87 ही लगा पाये और बड़े हिमायती आप आदिवासी बच्चियों को स्‍कूटी देकर वाहवाही लेना चाहते हो, सस्‍ती लोकप्रियता लेना चाहते हो ? क्‍या हालत है डूंगरपुर की 50 शिविर आप नहीां लगा पाये वहां पर।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 25 हजार की स्‍कूटी दी है, सस्‍ती कहां दी है ? सस्‍ती लोकप्रियता क्‍यों है ?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): स्‍कूटी के लिए नहीं कहा है, सस्‍ती तो लोकप्रियता के लिए कह रहे हैं।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): वह लोकप्रियता 25 हजार रुपये की है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): लोकप्रियता पैसों से नहीं आंकी जाती है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): बांसवाड़ा के अन्‍दर 83 शिविर यह सरकार नहीं लगा पाई और माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जालौर जो कि राजस्‍थान का सबसे बैकवर्ड डिस्ट्रिक्‍ट है उसके अन्‍दर 50 शिविर, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सरकार नहीं लगा पाई।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): अध्‍यक्ष महोदय, मुझे एतराज है, ये मेरे जालौर को बदनाम कर रहे हैं, जालौर सबसे बैकवर्ड जिला अब नहीं रहा, आपके जमाने में था, अब आगे बढ़ गया जालौर।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): जालौर का तो पता नहीं, आप जरूर बहुत आगे बढ़ गये। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि सरकार ने यह फैसला किया था कि हर हर पंचायत समिति में दो दो व्‍यावसायिक उन्‍नयन शिविर लगाएंगे और क्‍या स्थिति है, इसका कोई ध्‍यान भी देता है क्‍या ? घोषणा करने के बाद उन कागजों को कोई पढ़ता भी है क्‍या ? अलवर में 28 शिविर आवंटित किये थे, 14 पंचायत समितियों को लगाये कितने, 3 बधाई दूं आपको ? भरतपुर का उदाहरण लीजिए, 18 शिविर लगाने थे, लगाये कितने मात्र 3, जोधपुर लगाने कितने थे 18 और लगाये कितने 2, पाली लगाने कितने थे 20 और लगाये कितने 5, यह माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस सरकार ने एक के बाद एक रिकार्ड तोर्ड उपलब्धियां हैं, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि यह डीपीईपी का सैकण्‍ड फेज इसमें उसको पैसा देना था वार्षिक योजना 2006-07 में 89 करोड़ का प्रावधान था, खर्चा कितना किया ? मात्र 43 करोड़ रुपये और जो स्‍टेट शेयर जारी करना था वह आपने स्‍टेट शेयर पूरा जारी नहीं किया। आपने मात्र 4 करोड़ 31 लाख रुपये उसके अन्‍दर जारी करके आपने छुट्टी की और उसी का नतीजा है 13 करोड़ 48 लाख रुपये राज्‍यांश था और आपने जारी किये 4 करोड़ 31 लाख रुपये। अगर यह सरकार प्राथमिक शिक्षा के प्रति गंभीर है तो आपको अपना शेयर उसके अन्‍दर क्‍यों जारी नहीं किया ? यही अपने आप में यह जाहिर करता है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्राथमिक विद्यालय जो भवन रहित, अब यह मैं नहीं कह रहा हूं, शिक्षा मंत्री जी, यह आपके द्वारा अनुमोदित आपका प्रगति विवरण कह रहा है जो कल, परसों में ही आपने हमको पहुंचता किया है, इसमें विद्यालय भवन रहित में आपने बहुत मजबूत दावे के साथ लक्ष्‍य रखा था, 714 का, यह साल पूरा हो रहा है, कितने बना लिये आपने ? मात्र 57 भवन आपने पूरे किये, यह आपकी प्रोग्रेस है ? अतिरिक्‍त कक्षा कक्ष, आपने क्‍या लक्ष्‍य रखा था 29039, पूरे कितने किये 4464 ?

सुरेन्‍द्र/अरुण/22.3.2007/16.10/1q/1

 

और उच्‍च प्राथमिक विद्यालय जो भवन रहित हैं, आपको 103 बनाने थे। आपने कितने बना दिये? मात्र 8 बनाये। शौचालय आपको 2005 बनाने थे और मात्र 662 आप बना पाये। प्रधानाध्‍यापक कक्ष आपको 403 बनाने थे और मात्र 5 बना पाये। एन पी जी एल योजना में आपको जो एडिशनल क्‍लास रूम बनाने थे वो 186 बनाने थे और आप मात्र 4 बना पाये। यह आपकी सारी उपलब्धियां हैं। एन पी जी एल कार्यक्रम में प्रोग्रेस, 1806.28 लाख रुपया आपके पास उपलब्‍ध था और आप मात्र 321 लाख रुपया खर्च कर पाये। मतलब 20 प्रतिशत से भी कम यह आपकी उपलब्धि है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि सर्व शिक्षा अभियान में भी जो मैं महत्‍वपूर्ण बात आपके ध्‍यान में लाना चाहूंगा, इस सरकार को जो पैसा रिलीज करना था 264 करोड़ रुपये और उसकी जगह मात्र इन्‍होंने 140 करोड़ रुपये रिलीज किये और जनवरी में आपने 100 करोड़ रुपया रिलीज किया। अगर आप इसके प्रति गंभीर होते तो आप समय पर पूरा पैसा रिलीज करते जिससे भारत सरकार भी अपना पूरा कंट्रीब्‍यूशन कर पाती और आप सर्व शिक्षा अभियान के काम को लक्ष्‍य के अनुरूप आगे ले जा पाते लेकिन आपका यह मंतव्‍य नहीं है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हल्‍का सा आपका ध्‍यान में नामांकन और मिड-डे मील की तरफ ले जाना चाहता हूं। इसमें मैं पूरे स्‍टेट के फीगर नहीं देना चाहता हालांकि एक एन जी ओ ने राइट-टू-इन्‍फार्मेशन में आपसे सूचना लेकर के पूरे राजस्‍थान के अंदर मिड-डे मील में क्‍या हो रहा है उसका पूरा विश्‍लेषण प्रस्‍तुत किया है और मैं चाहूं तो उसको भी पढ़कर के आपको सुना सकता हूं कि लगातार आपके नामांकन तो बढ़ गये पर प्रति बच्‍चे जो आप वितरण कर रहे हो वह लगातार घट रहा है। खासतौर पर मैं सिरोही जिले का आपको फीगर देना चाहता हूं कि 2002-03 में नामांकन 1,54,090 था, 2003-04 में 1,57,548 हुआ, 2004-05 में फिर कम हो गया और 1,35,000 हो गया, 2005-06 में 1,22,000 हो गया और अब 2006-07 में 1,06,000 हो गया। यह आपका ऑफिशियल फीगर है यह मुझे आपने दिया है। कौनसे कारण है कि सिरोही जिला यों पिछड़ रहा है? क्‍या आपका विभाग कर रहा है? यह लगातार गिरावट क्‍यों आ रही है? जब आप एक तरफ एक करोड़ का आंकड़ा लेकर के जा रहे हो....

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): आप कोशिश करो बढ़ाने की।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं तो पूरी कोशिश कर रहा हूं लेकिन आप राजनीतिक आधार पर सारे फैसले करते हो, भेदभाव करते हो। प्राइमरी स्‍कूल खोलना होता है उसमें आपको तीन रंग का झंडा और दो रंग का झंडा अलग-अलग दिखते हैं। मिडिल स्‍कूल खोलना होता है वहां आपको राजनीति दिखती है, सैकण्‍डरी स्‍कूल खोलनी होती है वहां आपको राजनीति दिखती है, सीनियर सैकण्‍डरी स्‍कूल खोलनी होती है वहां आपको पॉलिटिक्‍स दिखती है। शिक्षा मंत्री जी, मैं कहना चाहता हूं कि अगर आपका दामन साफ है, आपकी सरकार का दामन साफ है, इस मामले में आप भेदभाव अगर नहीं कर रहे हैं तो आप विधान सभा क्षेत्रवार इस सरकार के आने के बाद में कितने-कितने स्‍कूल किस-किस विधान सभा क्षेत्र में खुले हैं, आप इसका आंकड़ा इस सदन की टेबल &#