Ddm/usc/16032007/1100/1a
अशोधित प्रति
प्रकाशनार्थ नहीं
राजस्थान
विधान सभा की कार्यवाही
का वृतान्त
अंक 7 बारहवीं
विधान सभा के सातवें
सत्र का सोलहवां
दिवस संख्या
12
शुक्रवार, 16 मार्च,
2007
राजस्थान
विधान सभा की बैठक 11:00 बजे
विधान सभा
भवन जयपुर, में
प्रारम्भ हुई।
(श्रीमती सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
(श्री
मंगलाराम गोदारा
व डा. श्रीगोपाल
बाहेती द्वारा
सदन कूप में धरना
व अनशन)
श्री
अध्यक्ष: अनिश्चितकालीन
भूख-हड़ताल पर
बैठे रहने वाले
माननीय सदस्यों
से मेरा निवेदन
है कि वार्ता चल
रही है, अच्छा
है, आप इस समय यदि
अपने-अपने स्थान
पर बैठ जाएं तो
ज्यादा उचित रहेगा।
मैं, चूंकि संख्या
भी बहुत क्षीण
है...।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): जिन माननीय
सदस्यों के सवाल
लगे हुए हैं, वे
सवाल पूछना भी
चाहते हैं और संख्या
भी पूरी है।
श्री
अध्यक्ष: उचित
रहेगा, अभी वार्ता
चल रही है, मैं समझती
हूं उचित रहेगा
आधे घण्टे के
लिये...।
श्री
सांवर लाल (सिंचाई
मंत्री): क्वश्चन-अवर
चलने दें।
श्री
घनश्याम तिवाड़ी
(शिक्षा मंत्री):
5 दिन से लगातार,
सारे राजस्थान
के लोगों के क्वशचंस
हैं। और क्वश्चन-अवर
चले तो कोई दिक्कत
नहीं है। वार्ता
चले, बैठ जाएं, रास्ता
निकाल लें। हम
सब उनके, मानननीय
मुख्य मंत्रीजी
भी आपसे कह चुकी
हैं। क्वश्चन-अवर,
मेरी तो आपसे प्रार्थना
है, बाकी तो जैसा
आप निर्णय लें।
बाकी क्वश्चन
अवर तो चलना ही
चाहिए।
श्री
अध्यक्ष: इसीलिये
मैं कह रही हूं
कि आधा घण्टे
के लिये, 11.30 तक के
लिये विधान सभा
की कार्यवाही स्थगित
की जाती है।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 11.02 बजे
11.30 बजे तक के लिये
स्थगित हुई।)
Vps/usc/16032007/1130/1d
(11.30 बजे)
(पुन: समवेत्
होने पर)
(श्रीमती
सुमित्रा सिंह,
अध्यक्ष, पदासीन)
(श्री
मंगलाराम गोदारा
व डा. श्रीगोपाल
बाहेती द्वारा
सदन कूप में धरना
व अनशन)
श्री अध्यक्ष:
सदन की कार्यवाही
एक घंटे, अर्थात्
12 बज कर 30 मिनट तक
के लिए स्थगित
की जाती है।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 11.30 बजे
12.30 बजे तक के लिए
स्थगित हुई।)
Spp/usc/12.30/1k/16.3.2007
(12.30 बजे)
(पुन: समवेत्
होने पर)
(श्रीमती
सुमित्रा सिंह,
अध्यक्ष, पदासीन)
(श्री मंगलाराम
गोदारा एवं डॉ0
श्रीगोपाल बाहेती,
माननीय सदस्यों
द्वारा सदन कूप
में धरना)
श्री अध्यक्ष : आमरण अनशन पर हो, हाथ तो जोड़ लिया करो। (व्यवधान)
अमराराम (धोद) : हाथ तो दोनों ही जोड़ रहे हैं।
श्री अध्यक्ष: माननीय मुख्य मंत्रीजी, डेडलॉक तोड़ने के लिये कुछ फरमायें आप।
श्रीमती वसुन्धरा राजे (मुख्य मंत्री): अध्यक्ष महोदय, बहुत भयंकर ओलावृष्टि हुई है राजस्थान के अंदर और जगह जगह पर पकी हुई खड़ी फसल नष्ट हुई है। हमने सोचा था कि इस सदन में इसके बारे में अच्छी चर्चा होगी, बहुत सारे सुझाव निकलकर आयेंगे, जिनको हम आगे चलकर अपनी क्रियान्विति में भी जोड़ने की कोशिश कर सकते हैं। पर दुर्भाग्यवश वह चर्चा नहीं हुई। इस भयंकर तबाही के अंदर मेरी सरकार की ओर से मैं आप सबको यह आश्वस्त करना चाहूंगी कि हम लोग कोई कमी या कोई कोर-कसर उनको मदद करने में नहीं छोड़ेंगे। इस भयंकर त्रासदी के अंदर जितनी मदद हमारी सरकार की ओर से हो सकती है, उसमें मैं फिर कहती हूं कि किसी किस्म की कमी हम लोग छोड़ेंगे नहीं। मैं आपको यह बताना चाहूंगी कि पहले दिन मैं खुद दौरा कर चुकी हूं। दो जगह मैं खुद होकर आई हूं। साथ में जो राज्य मंत्री थे, उनको तीन दिन के दौरे पर तुरन्त ही भेज दिया था, वह आज ही सब अपने क्षेत्र से वापस लौटेंगे। कलक्टर्स को भी दिशा-निर्देश कर दिये गये हैं कि वह भी जाये और सब इन्फोर्मेशन कलेक्ट करे। 17, 18 व 19 तारीख को तो आपने भी सब माननीय सदस्यों को उस दिन छुट्टी दी है ताकि हम लोग जाकर क्षेत्र के अंदर किसानों की डायरेक्ट बातचीत करके खुद इनके क्षेत्र में जाकर, देखकर इस विषय के ऊपर जितनी भी जानकारी ला सकते हैं, वह यहां ले आयें। मैं समझती हूं कि 20-21 तारीख तक पूरी जानकारी हमारे पास आ जायेगी और उसको देखते हुए जो बेस्ट से बेस्ट हम अपने किसानों के लिये कर सकते हैं उसमें जैसे मैंने आपको कहा है हम कोई कमी छोड़ेंगे नहीं । मैं यह कहना चाहूंगी कि अगर आप कम्पेरिजन करें पिछले तीन सालों के अंदर तो हम लोगों ने जो पैसा दिया है, करीबन 33 करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा दिया। और इन तीन-चार दिन के अंदर आलरेडी 13 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और मैं आपको यह विश्वास दिलाना चाहती हूं कि हम आगे भी कोई कसर नहीं छोड़ेंगे, इसलिये उसी से इंटेंशन जाहिर हो जाता है। किसानों के ऊपर किसी तरीके से मुसीबत आये, वह हम लोग पूरी तरीके से वहन करेंगे। हमारी सरकार किसानों की सरकार है और इसलिए यह हमारी बहुत बड़ी जिम्मेदारी हो जाती है कि उनकी मुसीबत के अंदर हम लोग पूरी तरह से दृढ़-संकल्पित होकर उनकी मदद करें।
श्री अध्यक्ष: माननीय नेता प्रतिपक्ष।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्यक्ष जी, पिछले दिनों राजस्थान के अंदर 3-4 दिन में भयंकर नुकसान किसानों का हुआ। ऐसा नुकसान राजस्थान में पहले कहीं देखने को नहीं मिला था, यह प्रथम बार है। नेचुरल कैलेमिटी है। नेचुरल कैलेमिटी को मीट करने के लिये राजस्थान सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिये हमें भी अनप्लीजेंट कठोर कदम उठाना पडा। हमारी पार्टी के दो माननीय सदस्यों को हमें बैठाना पडा कि आपका ध्यान आकर्षित हो। आप द्रवित हों और द्रवित होकर किसानों को मदद पहुंचाने के लिये वादा करें। हमने यह तो कहा ही नहीं, आप अभी किसानों को दे दीजिये। हम तो बात ही चाहते थे। आपने यह घोषणा की है कि आप आपके खजाने के सारे किवाड़ खोल देंगी और मुक्त हाथ से, मुक्त मन से उनकी आप भरपूर मदद करेगी। यह आपका आश्वासन ही हम चाहते थे और कोई बात थी नहीं। यह जब आप कह रही हैं तो गेन आपको मिल रहा है, हमें तो कुछ नहीं मिल रहा । हम तो उनके लिये संघर्ष कर रहे हैं और आप आश्वासन दे रहे हो । उस आश्वासन के मुताबिक किसानों को दे देंगी तो आप गेनर हो जायेंगे, हम तो इस मायने में लूजर रहेंगे। लूजर इस मायने में रहेंगे कि हमने संघर्ष किया, जब आप मानी हैं। हमने संघर्ष किया। ...(व्यवधान)...
श्रीमती वसुन्धरा राजे (मुख्य मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं इसमें क्लियर करना चाह रही हूं कि यहां अच्छी चर्चा होती तो बहुत अच्छा होता, परन्तु जहां तक सरकार का सवाल है वह पहले दिन से ही हम सब लोग चाहे मंत्री महोदय हो, चाहे पूरे हमारे माननीय सदस्य हों, सब अपने अपने क्षेत्र के अंदर अपना काम करने के लिये निकले हैं, हमें किसी की जरूरत नहीं हमारी ड्यूटी हमें बताने के लिये। हमारी जो ड्यूटी है उसको हम पूरी तरह से करेंगे। पहले भी किया है, फिर करेंगे।
श्री अध्यक्ष: नहीं-नहीं, अब कुछ नहीं। ..(व्यवधान)..
श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्यक्ष महोदय, जो चार दिन पहले लगातार किसानों की फसल नष्ट हुई है..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष: मुझे माननीय सदस्यों को सूचित करना है ..(व्यवधान)..
श्री अमराराम (धोद): चार दिन के बाद भी सरकार कोई बात सुनने के लिये तैयार नहीं है। ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष: नहीं, अब कुछ नहीं। ..(व्यवधान).. आप क्या कहना चाहते हैं? ..(व्यवधान).. कह दिया नेता प्रतिपक्ष ..(व्यवधान)..
एक माननीय सदस्य : इनकी तो कल मीटिंग हुई है 200 ..(व्यवधान).. इनका तो काम ही यह है ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष: क्या कहना चाहते हैं आप ? ..(व्यवधान).. क्या तरीका है?
श्री अमराराम (धोद): मैं तो मेरी बात कहूंगा। अध्यक्ष महोदय, जो भंयकर त्रासदी हुई है, 100 प्रतिशत फसल नष्ट हुई है। चार दिन के प्रतिवाद के बाद भी सरकार कोई मदद नहीं कर रही है, इसलिए मैं सदन से बहिर्गमन कर रहा हूं।
(श्री अमराराम (धोद), माननीय सदस्य द्वारा सदन से बहिर्गमन)
श्री अध्यक्ष: माननीय नेता प्रतिपक्ष, बात यह हुई थी कि आप यह भी माननीय सदस्यों को, जो आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं, आप उनसे आग्रह करते कि बात हो गयी है, मुख्य मंत्रीजी ने आश्वासन दे दिया है कि वह कोई कसर नहीं रखेंगी किसानों को सहायता पहुंचाने में, अब आप कृपया इनको कह दीजिये कि अपने अपने स्थान पर चले जायें। माननीय सदस्य, अपने स्थानों पर चले जायें।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैं प्रार्थना करूंगा। मुझे आपने बोलने नहीं दिया न । मुख्य मंत्रीजी के ठीक बाद में मैं यही रिक्वेस्ट करने वाला था और .. ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष: अनशन तो तुड़ाते बाहर अपने स्थान पर जाकर, यहां थोड़ी टूटेगा।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मुख्य मंत्रीजी को मेरी बात थोड़ी कड़वी लगी। मैंने कड़वी बात कोई दुर्भावना से नहीं कही है।
श्री अध्यक्ष: अब मीठी कह दो। अब मीठी कह दीजिये।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अगर आपको उससे ठेस पहुंची हो.. ..(व्यवधान)..
श्रीमती वसुन्धरा राजे (मुख्य मंत्री): आपकी बात तो हमेशा अच्छी लगती है हम सबको। हमें आपकी बात कभी कड्वी नहीं लगी है और जहां तक किसानों की राहत का सवाल है, अध्यक्ष महोदय, हम लोगों ने तो पहले ही जो पैकेज दिया, हमारे रिलीफ मंत्रीजी ने अच्छी तरह से बता भी दिया था कि हमने 12 तारीख से पहले वाला जो नुकसान हुआ, ओलावृष्टि के अंदर दिया है उसको हमने अन्तरिम पैकेज मानकर ..(व्यवधान)..
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): Don’t put it. Don’t misquote it. Madam I am sorry.
श्रीमती वसुन्धरा राजे (मुख्य मंत्री): हमने उसको अन्तरिम मानकर दिया हुआ है। ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष: सदन की नेता को समाप्त तो करने दें। ..(व्यवधान)..
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): The spirit we have to maintain it. If it is not in right spirit then what is this.
श्री अध्यक्ष: सदन की नेता को समाप्त तो कर लेने दें। ..(व्यवधान)..
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्यक्ष महोदय, मैंने तो मुख्य मंत्रीजी से कल भी निवेदन किया था, आज भी किया है और यह मानीं, इससे मुझे खुशी है, मेरी पार्टी को भी खुशी है। मैं आपको भी बताना चाहता हूं और आपको बताऊं चौधरी कुम्भाराम जी एक बार रेवेन्यू मिनिस्टर बने थे। उनके पास एक फाइल गयी। कुम्भाराम जी ने उस पर जो आदेश दिया था, उसकी टिप्पणी नीचे से प्रतिकूल आई। बोले, यह नियमों में है ही नहीं। कुम्भाराम जी ने उस फाइल पर लिखा ऐसा नियमों में नहीं है तो वह नियम बदल दिया जाये। यह मैंने आपसे कहा है।
Msr/usc/1240/1l/16032007
यह मैंने आपसे
भी कहा। मैंने
आपसे भी कहा है,
ऐसे नियमों को
आप बदल दें और जहां
नियम नहीं हैं
वो नियम किसानों
के बना दो। अध्यक्ष
महोदय, हम आपके
साथ हैं इस मामले
में।
श्री अध्यक्ष: आप बीच में क्यों बोलते हैं? चर्चा सदन की नेता प्रतिपक्ष के नेता के बीच की है, आप क्यों बोलते हैं?
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): जीरा, धनिया, प्याज, टमाटर, ईसबगोल सब किसानों की चीज हैं, मान्यवर। अब टमाटर तो साफ हो गया बेचारे का, तो इन सब को आप लीजिए और हम आपका आभार मानेंगे, किसान खुश होगा।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करते हुए मेरे प्रतिपक्ष के साथियों को, जिनको हमने बैठाया था, में अनुरोध करूंगा हमारे पी.सी.सी. प्रेसिडेंट से, शिवचरणजी माथुर साहब वहां जायेंगे और इनको, इनसे प्रार्थना करेंगे कि सीट पर बैठाएं इनको।
एक माननीय सदस्य: जूस पिलाएं।
श्री अध्यक्ष: सदन में नहीं पिलाया जायेगा, सदन से बाहर जाकर के आप इनका अनशन तुड़वाएं, जूस पिलाइये और जो कुछ करिये लेकिन आप सदन से बाहर जा कर के करें यह काम।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): धन्यवाद दे दें आप।
( श्री मंगालाराम
गोदारा एवं डा.
श्रीगोपाल बाहेती
द्वारा धरना समाप्त
)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप भी बता दो।
श्री घनश्याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): बजा देंगे।
श्री अध्यक्ष: बजा दी न, बजा तो दी।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मेरे दल के दो माननीय सदस्यों को हमने बैठाया था, कड़वी घूट थी, कदम बहुत सख्त था लेकिन आपने भी बात मानी तो फिर इन्होंने भी बात मानी। मैं आपका और मेरी पार्टी का, दोनों माननीय सदस्यों का और मेरी पार्टी का मैं आभार मानता हूं, शुक्रिया अदा करता हूं।
श्री अध्यक्ष: और आसन का आभार बिलकुल नहीं मानेंगे आप?
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आसन ने, अध्यक्ष महोदय, आपने जो सहृदयता दिखायी, अनेक बार गतिरोध पैदा हो गया फिर भी आप लगी रहीं। प्रतिपक्ष, सत्तापक्ष ने माना या नहीं माना मैं कह नहीं सकता लेकिन हमने तो मान लिया था और मुख्यमंत्रीजी अड़ी नहीं कहीं भी लेकिन उनके सलाहकार जो थे, उनके जो सलाहकार थे, बुरा मत मान जाना, एक साल पहले इसी सभा के अन्दर, इसी बजट सत्र में कहा था कि माननीय मुख्यमंत्रीजी, आपके सलाहकार जो बैठे हैं आपके आगे और पीछे और बराबर मैं, इनसे आप सावधान रहो, यही आपको डुबो देंगे। अब मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कि आप सावधान रहें। ... (व्यवधान)
स्थगन प्रस्ताव
पर अध्यक्षीय
व्यवस्था
श्री अध्यक्ष: मुझे माननीय सदस्यों को सूचित करना है कि निम्न स्थगन प्रस्ताव की सूचना प्राप्त हुई है:-
श्री रामनारायण मीणा, सदस्य की और से राज्य में विधि सचिव के पद पर पदस्थापन के सम्बन्ध में।
उपरोक्त प्रस्ताव ऐसा नहीं है कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोक कर इस पर विचार किया जा, अत: अनुमति देने में असमर्थ हूं।
वैसे भी इस मामले को मैंने राज्य सरकार को भेजा है टिप्पणी के लिए कि उनकी क्या टिप्पणी आती है और इसके अलावा बीस तारीख को जो न्याय प्रशासन की मांग है, उस पर भी माननीय सदस्य को यह प्रश्न उठाने की अनुमति होगी इसलिए मैं अनुमति देने में असमर्थ हूं।
नियम 295 के अन्तर्गत
प्राप्त विशेष
उल्लेख की सूचनाएं
प्रक्रिया के नियम 295 के अन्तर्गत जो सूचनाएं प्राप्त हुई हैं :-
(1) श्री खुशवीर सिंह, सदस्य की और से जिला पाली में पारम्परिक तरीके से ईंट कजावा व मिट्टी के बर्तन तैयार करने वालों को हो रही परेशानी के सम्बन्ध में।
(2) श्री हीरालाल मीणा, सदस्य की ओर से विधान सभा क्षेत्र बामनवास में सम्पर्क एवं लिंक सड़कों का निर्माण करने के सम्बन्ध में।
(3) श्री जालमसिंह रावलोत, सदस्य की और से जिला बाड़मेर एवं जैसलमेर के चिकित्सालयों में चिकित्सकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने के सम्बन्ध में।
(4) श्री हरलाल सिंह खर्रा, सदस्य की ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-11 स्थित रींगस कस्बे में ट्रोमा अस्पताल खोलने के सम्बन्ध में।
माननीय सदस्य, चूंकि आज इसमें से एक-दो तो ऐसे ही हैं इन्हें पढ़ा हुआ मान लिया जायेगा क्योंकि आज बहुत बहत्वपूर्ण मांग है जिस पर सभी माननीय सदस्य अपने विचार प्रकट करना चाहेंगे।
पर्ची तो बाद में, अभी थोड़ी। हां, चूंकि इन्हें पढ़ा हुआ मान लिया इसलिए मैं चाहूंगी कि जिन चार सदस्यों की पर्ची है उनको में चार मिनट का समय दूंगी एक-एक को बोलने के लिए क्योंकि इसके बाद हम प्रारम्भ करना चाहेंगे चिकित्सा और स्वास्थ्य की मांग को।
श्री अर्जुनलाल मीणा। कृपया बोलें आप।
पर्ची के माध्यम
से उठाये गये मुद्दे
मोहनलाल सुखाडि़या
विश्वविद्यालय
में आरक्षण विषयक
श्री अर्जुन लाल मीणा (सलूम्बर): अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री महोदय का ध्यान इस ओर दिलाना चाहूंगा।
श्री अध्यक्ष: इसके बारे में आपने प्रश्न जब पूछा था, उठाया गया था प्रश्न तो माननीय मंत्रीजी ने कह दिया था कि वो साक्षात्कार रोक दिये हैं। वही प्रश्न तो है आपका।
श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): नहीं, अध्यक्ष महोदय, नहीं रोगे।
श्री अर्जुन लाल मीणा (सलूम्बर): अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय ने सदन में जो आश्वासन दिया था उसके तहत मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय में जो प्रोफेसर के पदोन्नति में जो साक्षात्कार हो रहे हैं उनको रोका नहीं गया है।
अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से ध्यान दिलाना चाहूंगा कि 13.03.2007 से होने वाले प्राध्यापकों की पदोन्नति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के आरक्षण प्रावधानों की अवहेलना हो रही है।
अध्यक्ष महोदय, मैं यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि 45 पदों में से एक भी पद एस.टी. केन्डीडेट नहीं है और पिछले 2001 में जो विश्वविद्यालय में भर्ती हुई थी उसमें भी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के एक भी केन्डीडेट को भर्ती में नहीं लिया है।
अध्यक्ष महोदय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की गाइड लाइन के आधार पर यू.जी.सी. की जो गाइड लाइन 2006 के बिंदू संख्या 8 (ए) (4) में एस.सी., एस.टी. के आरक्षण के आरक्षण का प्रावधान है उसमें यह भी प्रावधान है कि जो बोर्ड, चयन करने का जो बोर्ड बनेगा उसमें एस.सी., एस.टी. का भी एक प्रतिनिधि होगा। मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय में जो भर्ती हो रही है उसमें एक भी केन्डीडेट, एक भी प्रतिनिधि एस.सी., एस.टी. वर्ग का शायद नहीं लिया है इसलिए, अध्यक्ष महोदय, मैं चाहूंगा कि मंत्री महोदय इस पर अपना जवाब दें।
श्री अध्यक्ष: माननीय मंत्रीजी, इसका जवाब देंगे जिस दिन शिक्षा की मांग होगी। आप नोट कर लीजिए, इसका जवाब दे दीजियेगा आप।
श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): प्रमोशन तो अभी हो रहा है, इन्टरव्यू वल रहे हैं ... (व्यवधान) कालेज खुल जायेंगे उसके बाद क्या होगा?
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्यक्ष महोदय, उसमें सलेक्शन कमेटी में जोधपुर यूनिवर्सिटी के एक्स वाईस चान्सलर प्रोफेसर श्यामलाल हैं उसमें जो शिड्यूल्ड कास्ट के हैं। उसके अन्दर हैं वो। ... (व्यवधान)
श्री घनश्याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, यह दो प्रकार के, पहले माननीय सदस्य ने उठाया था, 12 तारीख को जो साक्षात्कार हो रहे थे उनमें एस.सी., एस.टी. का बैकलोग नहीं था। यह सब्जैक्ट आपने उठाया था, उसको मैंने आपकी अनुमति से रोक दिया था।
यह जो है यह सी.एस. स्कीम के अन्तर्गत यह कार्यवाही हो रही है लेकिन इसमें भी मैं आपको इतना आश्वस्त कर सकता हूं कि यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन की जो-जो अहर्ताएं हैं और जो आवश्यकताएं हैं उसके अन्तर्गत यह कार्यवाही होगी। में आपको यह आश्वस्त करता हूं कि हम यह निर्देश उनको भेज रहे हैं कि साक्षात्कार के बाद लिफाफे बंद रखेंगे और उनसे सारी जानकारी प्राप्त करने के बाद में जो-जो मापदण्ड तय किये गये हैं उन्हीं के आधार पर होगा। शिड्यूल्ड कास्ट का आदमी, अपने सज्जन जो हैं वो उसमें साक्षात्कार में हैं और इसलिए जो भी प्रावधान होगा उस प्रावधान का पूरा पालन किया जायेगा, किसी प्रकार से एस.सी., एस.टी. के साथ अन्याय मैं नहीं होने दूंगा। मैं आपको यह आश्वस्त करता हूं।
श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): एक ही निवेदन करना चाहूंगा, अध्यक्ष महोदय। जो इन्टरव्यू ले रहा है वह खुद ही एप्लीकेन्ट है। जज कभी खुद का फैसला देता है ... (व्यवधान)
श्री घनश्याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): यह आदेश दे दिया है कि वो नहीं बैठेगा। रोक दिया है उसको।
श्री अध्यक्ष: श्री तगाराम चौधरी, बाड़मेर रिफाइनरी के सम्बन्ध में। (अनुपस्थित)
श्री हरीसिंह रावत।
आई.आई.टी. की
स्थापना उदयपुर
में करने विषयक
श्री हरीसिंह रावत (भीम): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं हमारे उदयपुर सम्भाग में इण्डियन टैक्नोलोजी ऑफ साईंस और आई.आई.टी. के बारे में कुछ मेरे सुझाव रखना चाहता हूं।
माननीय अध्यक्ष महोदय, आज विश्व में हमारा प्रदेश, हमारा देश चाहे चिकित्सा हो, चाहे टैक्नोलोजी हो, चाहे इन्जीनियरिंग हो हरेक में अग्रिम रहा है और इसका लोहा अमरीका के राष्ट्रपति मिस्टर बुश ने भी माना है और कहा है कि अमरीकियों, जागो, नहीं तो भारतीय आ जायेंगें।
Ars/usc/1250/1m/16032007/1
इसी के
अन्तर्गत आज हमारे
देश में भी आई आई
टी खुलने के आसार
हुए हैं जिसके
अन्तर्गत मैं
चाहता हूं कि आई
आई टी हमारे उदयपुर
में खुले। इसके
कारण कि हमारे
उदयपुर संभाग में
कहीं भी कोई भी
ऐसा बड़ा इन्स्टीट्यूट
नहीं है। आज अगर
हम देखें तो जोधपुर
में एम्स या लॉ
यूनिवर्सिटी है,
जयपुर में एम एन
आई टी एवं मेडिकल
यूनिवर्सिटी, कोटा
में टैक्निकल यूनिवर्सिटी
एवं ओपन यूनिवर्सिटी
तथा अजमेर में
लोक सेवा आयोग
एवं माध्यमिक
शिक्षा बोर्ड जैसी
राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय
स्तर की संस्थाएं
हैं लेकिन उदयपुर
में हमारी ऐसी
कोई संस्था नहीं
है। इसलिए मैं
आपके माध्यम से
मुख्यमंत्री
जी से निवेदन करना
चाहूंगा कि आई
आई टी का यह प्रावधान
जो है हमारे उदयपुर
में रखा जाए। इसके
कई हमारे बिंदु
हैं, हमारे यहां
पर इंटरनेशनल एयरपोर्ट
है और दो हाई वेज
हमारे यहां क्रास
करते हैं। दूसरी
सबसे बड़ी अहम
भूमिका जो हम देंगे
वह है जमीन की, हमारे
पास चार जगह ऐसी
जमीन है जो पांचसौ
हेक्टेअर से भी
अधिक है। जितनी
भी जमीन चाहिएगी
हम आपको उपलब्ध
कराएंगे और उसके
बाद भी अगर पैसों
की जरुरत पड़ेगी
तो हमारे पूरे
संभाग के जितने
भी हम विधायक और
सांसद हैं हमारे
फण्ड से देकर
जो भी कमी होगी,
हम पूर्ण करने
की कोशिश करेंगे।
अत: आपके
माध्यम से मैं
मुख्यमंत्री
जी से निवेदन करूंगा
कि आई आई टी हमारे
उदयपुर में स्थापित
हो। इस सन्दर्भ
में हमारे चपलोत
साहब भी कुछ बोलना
चाहेंगे। धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष: श्रीमती
वंदना मीणा।
श्री
शांतिलाल चपलोत
(मावली): माननीय
अध्यक्ष महोदय, मैंने इसी
बारे में पर्ची
दी है और यह मेरा
दुर्भाग्य है
कि मैंने पहली
बार पर्ची दी और
खुली नहीं। आई
आई टी उदयपुर में
होना नितान्त
आवश्यक है। राजस्थान
को एक आई आई टी केन्द्र
सरकार ने दी है ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: पर्ची
के माध्यम से
उसी को इजाजत दी
जाती है जिसने
पर्ची डाली हो।
...(व्यवधान)
श्री
शांतिलाल चपलोत
(मावली): एक मिनट
की बात है मेरी
...(व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): जोधपुर सबसे
बढि़या जगह है,
जोधपुर में आई
आई टी ...(व्यवधान)
जोधपुर में सबसे
बढि़या जगह है
...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्य, माननीय
सदस्य..... ...(व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): जोधपुर ठीक
है और हर दृष्टि
से जोधपुर में
आवश्यक है। ...(व्यवधान) जोधपुर सबसे
उत्तम जगह है
...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आसन
पांवों पर है, आसन
पांवों पर है, ...(व्यवधान)
आसन पांवों पर
है, ...(व्यवधान) आसन
पांवों पर है ...(व्यवधान)
अंकित नहीं हो,
अंकित नहीं हो।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): 000
श्री
शांतिलाल चपलोत
(मावली): 000
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): 000
श्रीमती
अनिता भदेल (अजमेर
पूर्व): 000
श्री
गोविन्द राम मेघवाल
(नोखा): 000
श्री
शांतिलाल चपलोत
(मावली): 000
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
अध्यक्ष: कृपया
स्थान ग्रहण करें
...(व्यवधान) कृपया
स्थान ग्रहण कर
लें, नौ, नौ, स्थान
ग्रहण करें, राजसमंद
से आने वाले माननीय
सदस्य, जिसकी
पर्ची होती है
केवल वही बोलता
है, यह गलत परम्पराएं
आप डाल रहे हैं,
उचित नहीं है।
श्रीमती वंदना
मीणा।
श्री
रामप्रताप कासनिया
(पीलीबंगा): माननीय
अध्यक्ष महोदय, इतना
गतिरोध हाउस में
हुआ है। मेरा आपके
माध्यम से मुख्यमंत्री
जी से निवेदन है
कि आई आई टी जो सीपेज
वाला क्षेत्र है
ग्रामीण बड़ोप्पल
टेन प्लस टू का
भवन ही उपलब्ध
नहीं है वहां बनाओ।
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण करें, श्रीमती
वंदना मीणा।
पंचायतों को पट्टे
जारी करने का अधिकार
देने विषयक
श्रीमती
वन्दना मीणा
(उदयपुर ग्रामीण):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मेरे उदयपुर
ग्रामीण में सत्रह
पटवार मण्डल व
इक्कीस पंचायतें
हैं और इन पंचायतों
में 67 गांव जो पैराफेरी
में आते हैं, यह
जो गांव पहले पंचायतों
में थे और उसके
बाद पैराफेरी में
आने की वजह से इन
गांवों में करीबन
बारह हजार परिवार
लाभान्वित होते
हैं। मैं माननीय
मुख्य मंत्री
जी से निवेदन करना
चाहूंगी कि इन
परिवारों को न
तो पंचायत पट्टे
दे सकती है क्योंकि
यह पैरा फेरी में
आने की वजह से पंचायत
कहती है कि यह पैराफेरी
में हैं इस वजह
से हम पट्टे नहीं
दे सकते हैं, यह
नगर विकास प्रन्यास
के द्वारा दिए
जायेंगे। यह रोक
पंचायतों ने लगा
रखी है। उन पंचायतों
में सभी मध्यम
वर्ग के व गरीब
परिवार रहते हैं।
मेरा
अनुरोध है कि इन
पंचायतों में इन
परिवारों को पट्टे
दिए जाएं और उसके
साथ साथ नगर विकास
प्रन्यास से विकास
कार्य भी करवाए
जाएं क्योंकि
वहां पर चाहे स्कूल
भवन हो, चाहे आंगनबाड़ी
भवन हो वह पंचायत
भी नहीं बना सकती
है जब तक यू. आई. टी.
एन. ओ. सी. नहीं देगी
तब तक वहां भवन
का निर्माण नहीं
होगा। ऐसी पंचायतों
में सरपंच जो ज्यादा
बोलने वाले होते
हैं वह तो काफी
चक्कर लगाकर एन
ओ.सी. लाते हैं तब
जाकर उसका निर्माण
होता है बाकी सीधे
सादे सरपंच होते
हैं उनके जूते
तक टूट जाते हैं,
वहां के अधिकारी
सुनने के लिए तैयार
नहीं हैं। माननीय
अध्यक्ष महोदय, ऐसी स्थिति
में मेरा निवेदन
है कि माननीय मंत्री
महोदय जी, इन पंचायतों
को जो पैराफेरी
के अन्तर्गत आती
हैं उनकी समस्या
का समाधान करें।
कहीं न कहीं इसका
रास्ता निकालना
पड़ेगा। यह बारह
हजार परिवार आपको
हमेशा के लिए याद
करेंगे। इसी आशा
के साथ मुझे बोलने
का मौका दिया इसके
लिए बहुत बहुत
धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष: श्री
तगाराम। हालांकि
आपको समय पर आने
की आदत डालनी चाहिए
लेकिन चूंकि यह
रिफाइनरी का मामला
है इसलिए मैं आपको
बोलने का मौका
दे रही हूं।
बाड़मेर
में तेल की रिफाइनरी
श्री
तगाराम चौधरी
(बाड़मेर): माननीय
अध्यक्ष महोदय, आपने
मेरे को समय दिया
इसके लिए मैं आपका
बहुत बहुत आभारी
हूं। मैंने आपकी
आज्ञा से पर्ची
के माध्यम से
बाड़मेर में तेल
की रिफाइनरी लगे,
इसके लिए मैं माननीय
मुख्यमंत्री
से और सदन से निवेदन
करना चाहूंगा,
जब से तेल निकला
है बाड़मेर में
तब से लेकर के और
माननीय मुख्यमंत्री
महोदय ने बहुत
प्रयत्न किया
है रिफाइनरी के
लिए, उसकी मैं भूरि
भूरि प्रशंसा करता
हूं। सर्वदलीय
बैठकें बुलाईं,
संकल्प पारित
किए और सभी ने एकजुट
होकर के बाड़मेर
जिले में रिफाइनरी
लगाने का तय किया
था और बड़ी खुशी
थी कि बाड़मेर
में ही लगेगी।
बीच में यहां से
दल भी गए अधिकारियों
के और वहां पर देखा
गया किस जगह उपयुक्त
है, क्या है।
मेरी
तो उसमें मांग
थी धौलपाडिया खाली
जमीन पड़ी थी उसमें
लगाने की,लीलाडा,
जादुओ की ढाणी
और बायतु में तय
कर दिया था टीम
ने और उसके कुछ
ही समय बाद में
भारत सरकार से
भी हरी झण्डी
मिल गई थी और रिफाइनरी
लगना तय हो गया
था। वहां पर राजनीतिक
कारण से कुछ प्रतिपक्ष
के नेताओं के इशारे
पर कहो, वहां के
बाड़मेर के उन्होंने
वहां कुछ वाद विवाद
भी उठाया था, टी.वी.
में भी कई बार आया
था, इस तरह की बातें
भी हुईं उसके उपरांत
मैं नाम किसी का
नहीं ले रहा हूं।
फिर बाद में भारत
में पैट्रोलियम
मंत्री जी बदल
गये और अभी जो वर्तमान
में मंत्री जी
हैं वह या किसी
कारण से यह जो मांग
उठी है दुबारा
इतनी रियायत देने
की, बड़ी भारी रियायत
देने की, यह समझ
में नहीं आ रही
है। जब तेल निकाला,
किसानों ने अपनी
जमीन दी है। माननीय
मुख्य मंत्री
महोदय ने मेरे
को आदेश फरमाया
था मंगला-1 के लोकार्पण
के दिन कि यह जमीन
देनी है और आप काश्तकारों
का मन बनाओ और यह
देश का भले का मामला
है, राजस्थान
के भले का मामला
है, इससे ज्यादा
कोई अवसर हो नहीं
सकता बाड़मेर के
लिए।
vns/usc/13.00/1n/16.3.2007
कि बाड़मेर
में रिफाइनरी खुले
तो बेरोजगारों
को रोजगार मिलेगा।
उद्योगपतियों
को उद्योग लगाने
का अवसर मिलेगा।
गाड़ी वालों को
तेल की ढुलाई का
अवसर मिलेगा और
कई तरह के फायदे
होंगे। राजस्थान
अकेले को ही नहीं
भारत को फायदा
है। फिर यह रिफाइनरी
आगे से आगे सरक
रही है जिससे तेल
का दोहन बीच में
कई बार इस तरह से
घोषणाएँ भी हुई
कि तेल का दोहन
2005 में कर दिया जायेगा।
फिर 2006 भी निकल गया,
2007 भी निकल गया। अब
वहां पर केयर्न
की मीटिंग कलेक्टर
साहब की अध्यक्षता
में हुई थी। केयर्न
वाले कह रहे हैं
2009 में हम करेंगे।
तो दिन-प्रतिदिन
वह दोहन भी अभी
बंद पड़ा है एक
प्रकार से। गाडि़यों
से, ट्रकों से यदि
लोडिंग करके कच्चा
तेल बाहर भी ले
जाते तो बहुत गाड़ी
वालों को फायदा
होता। आज के दिन
जो ट्रक युवा बेरोजगार
चलाते हैं उनको
काम मिलता नहीं
है, बहुत काम मिलता।
वहां पर भी रोजी
लगती और यह फायदा
ही फायदा है। मुझे
बहुत ही विश्वास
है माननीय मुख्यमंत्री
महोदया पर और पूरे
सदन पर कि यह काम
आप करवायेंगे।
मैं पुरजोर शब्दों
में मांग करता
हूं माननीय मुख्यमंत्री
महोदया से भी.
श्री अध्यक्ष:
वह जो गयीं।
श्री तगाराम
चौधरी (बाड़मेर):
कि आप अपना पूरा
प्रभाव काम में
ले करके यह रिफाइनरी
बाड़मेर में ही
लगवाएं। यह मेरी
प्रार्थना है पूरे
सदन से। पुरजोर
मांग है यह रिफाइनरी
नहीं खुलती है
तो मुझ कुछ भी करना
पड़े मैं करूंगा
और यह रिफाइनरी
खुलनी चाहिये।
श्री अध्यक्ष:
पुरजोर मांग ही
मत करो। आप सदन
से यह कहो कि सदन
इस सम्बन्ध में
संकल्प पारित
करके भेजे।
श्री तगाराम
चौधरी (बाड़मेर):
मैं आपके माध्यम
से...
श्री शांतिलाल
चपलोत (मावली): माननीय
अध्यक्ष महोदय, यह एक गंभीर
विषय है और हम सब
तगाराम जी के साथ
हैं। बाड़मेर में
ही रिफाइनरी खुलनी
चाहिये। जहां पर
माल पैदा हो वहां
नहीं खोल करके
दूसरी जगह जो षडयंत्र
किये जा रहे हैं
यह राजस्थान की
जनता कतई बर्दाश्त
नहीं करेगी। राजस्थान
में ही खुलेगी
और बाड़मेर में
ही रिफाइनरी खुलनी
चाहिये ऐसा मेरा
आपसे निवेदन है।
श्री तगाराम
चौधरी (बाड़मेर):
मैं आपकी आज्ञानुसार...
डा. जालम
सिंह रावलोत (शिव):
अध्यक्ष महोदय,
बाड़मेर में रिफाइनरी
नहीं हो इसके लिये
पूरे प्रयत्न
हो रहे हैं। जो
शर्तें रखी जा
रही हैं 26,000 करोड़
की शर्त वह निश्चित
रूप से एक ऐसी शर्त
है जो कोई सरकार
पूरा नहीं कर सकती
जबकि अटल बिहारी
वाजपेयी जी ने
मध्य प्रदेश में
और पंजाब में रिफाइनरी
खोलने के लिये
केवल 1500 सौ करोड़
रुपये की शर्त
रखी थी और वहां
रिफाइनरी चालू
हो गयी है। अध्यक्ष
महोदय, इसमें नयी
बात यह है मैं माननीय
सदस्य तगाराम
जी से कहना चाहता
हूं..
श्री अध्यक्ष:
पर्ची तो उनकी
है, बोल रहे हैं
आप।
डा. जालम
सिंह रावलोत (शिव):
कि वहां तेल भी
नहीं है। जहां
तेल नहीं है वहां
रिफाइनरी चालू
हो गयी है।
श्री संयम
लोढ़ा (सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, बहुत
अच्छा होता यहां
मुख्यमंत्री
और सरकार अभिभाषण
और बजट में इस पर
कोई बात कहतीं।
पूरे अभिभाषण और
बजट में एक शब्द
भी नहीं कहा रिफाइनरी
के लिये। यह सरकार
रिफाइनरी के प्रति
कितनी गंभीर है
यह इससे ही मालूम
पड़ जाता है।
डा. जालम
सिंह रावलोत (शिव): जहां तेल
है, कच्चा तेल
है वहां रिफाइनरी
नहीं हो इसके लिये
***
राजस्थान के बाड़मेर
जिले में रिफाइनरी
नहीं हो यह केवल
***। आप उसे रोकें।
मैं आपके माध्यम
से मुख्यमंत्री
जी को साधुवाद
देना चाहता हूं
उनका प्रयत्न
पूरा चल रहा है
लेकिन प्रतिपक्ष
के माननीय नेताजी
से निवेदन करना
चाहता हूं कि वह
अपने प्रयत्न
से केन्द्र सरकार
को समझाएं रिफाइनरी
बाड़मेर में ही
होनी चाहिये।
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आपकी पर्ची नहीं
है। मिस्टर रावलोत,
कृपया बिराज जाएं।
जैसलमेर से आने
वाले माननीय सदस्य,
कृपया बिराजे।
आपको इस पर्ची
पर अनुमति नहीं
है। स्थान ग्रहण
करें। तगाराम जी,
काफी बोल लिये
आप तो। बात कह दी
ना आपने अपनी।
श्री तगाराम
चौधरी (बाड़मेर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी आज्ञा से
पूरे सदन से और
विशेष तौर से मुख्यमंत्री
महोदया से निवेदन
करना चाहता हूं
कि पुन: पूरा सदन
इस बहुत ही जन कल्याणकारी
राजस्थान को आगे
बढ़ाने के लिये
और यहां के बेरोजगारों
को रोजगार मिले,
उद्योग मिले। बाड़मेर
पिछड़ा हुआ रहा
है बरसों से तो
वहां पर उद्योग
खुलें। इस तरह
का बहुत ही अच्छा
काम होगा इसके
लिये संकल्प व्यक्त
किया जाए सर्व
सम्मति से। मैं
आपके माध्यम से
यही निवेदन करना
चाहता हूं।
श्री टीकम
चन्द कान्त
(सिवाना): हम भी उम्मीद
करते हैं कि सदन
यह संकल्प पारित
करेगा कि बाड़मेर
में ही रिफाइनरी
खुलनी चाहिये।
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपने
इस मामले को उठाया
पर्ची के द्वारा
सरकार से संबंधित
जानकारी लेने के
बारे में ही चीज
उठायी जाती है
लेकिन तगाराम जी
ने तो प्रतिपक्ष
के ऊपर आरोप लगा
दिया कि हम तो कर
रहे हैं लेकिन
प्रतिपक्ष के लोग
इसका विरोध कर
रहे हैं..
श्री अध्यक्ष:
यह किसने कहा है
?
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
कहा है।
श्री तगाराम
चौधरी (बाड़मेर):
ऐसा बीच में हुआ।
मान्यवर, ऐसा
बीच में वहां पर
हुआ था।
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
मैं आपके माध्यम
से अनुरोध करूंगा
कि उस पर्ची के
तहत उन्होंने
जो आरोप लगाया
है उसको हटा दिया
जाए कार्यवाही
से।
श्री अध्यक्ष:
हटा देंगे। ऐसा
कहा है तो हटा देंगे।
अब मंत्री कुछ
कह रहे हैं। मंत्रीजी
कुछ कहना चाह रहे
हैं।
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जब तगाराम
जी ने यह बात कही
सदन की नेता हाउस
में उपस्थित थीं।
अगर वह पहल करतीं
और संकल्प लाने
की कोई बात करतीं
तो कोई बात बनती।
श्री अध्यक्ष:
संकल्प वैसे भी
आ सकता है। आ सकता
है संकल्प।
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, संसदीय
कार्य मंत्रीजी
बैठे हैं तो फिर
संकल्प, यह सही
है राजस्थान में
लगनी चाहिये। बाड़मेर
में लगनी चाहिये
इसमें किसी को
इल्तजा, किसी
को इंकार नहीं
है। पहल करिये
आप। इल्जाम लगाने
से क्या होता
है कि यह नहीं कर
रहे हैं, वह नहीं
कर रहे हैं।
श्री अध्यक्ष:
माननीय मंत्री
खड़े है। कुछ बोलना
चाह रहे हैं।
श्री लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं पर्यावरण
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष महोदय, मैं बाड़मेर
से आने वाले माननीय
सदस्य का आभार
प्रकट करना चाहता
हूं पर्ची के माध्यम
से राजस्थान की
साढ़े पाँच करोड़
जनता की धड़कन
की आवाज है, जो मांग
है उसके बारे में
उन्होंने ध्यान
आकर्षित किया इसके
लिये मैं इनको
धन्यवाद प्रेषित
करता हूं। माननीय
अध्यक्ष महोदय, राजस्थान
एक ऐसा पिछड़ा
प्रदेश है जिसमें
पिछले सौ साल में
चालीस साल तो अकाल
पड़ा। राजस्थान
में पेयजल की समस्या,
अकाल की समस्या
है। राजस्थान
में पहली बार प्रकृति
मेहरबान हुई पश्चिमी
राजस्थान में
यहां पर पैट्रोलियम
के अथाह भण्डार
मिले। पिछले तीन
साल के कार्यकाल
में 138 कुओं के छिद्रण
का कार्यक्रम हुआ
जिसमें 380 मिलियन
टन पैट्रोलियम
के डिपाजिट प्राप्त
हुए। पिछले 45-50 साल
के कार्यकाल में
111 कुओं के छिद्रण
का कार्यक्रम हुआ
और मात्र 20 मिलियन
टन डिपाजिट प्राप्त
हुआ। माननीय अध्यक्ष
महोदय, नवम्बर,
2004 में रिफाइनरी
की स्थापना के
लिये तेल कम्पनीज
की एक मीटिंग मैंने
आयोजित की थी जिसमें
ओ एन जी सी और तमाम
कम्पनीज थीं।
उनसे आग्रह किया
था कि कर्नाटक
की तर्ज के आधार
पर सेज, कर्नाटक
की तर्ज के आधार
पर रिफाइनरी पैट्रो
केमिकल्स काम्पलेक्स
आदि की स्थापना
राजस्थान में
की जानी चाहिये।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, हिन्दुस्तान
पैट्रोलियम कारपोरेशन
लिमिटेड की कम्पनी
ने रिफाइनरी के
लिये अपनी सहमति
दी थी और मीटिंग
के अन्दर यह प्रस्ताव
हुआ था। उसके बाद
एम ओ यू साइन होना
था। एच पी सी एल
और राजस्थान सरकार
के बीच में एम ओ
यू साइन होना था
परन्तु केन्द्र
सरकार के दखल के
कारण 98 के अन्दर
यह एम ओ यू साइन
नहीं हुआ। माननीय
अध्यक्ष महोदय, फिर मैंने
राजस्थान के तमाम
सांसदों को एक
पत्र लिखकर आग्रह
किया कि रिफाइनरी
की स्थापना के
लिये भारत सरकार
से आग्रह किया
जाये। माननीय अध्यक्ष
महोदय, 23 मई,
2005 को राजस्थान
की मुख्यमंत्री
जी ने भारत के प्रधानमंत्री
को राजस्थान में
रिफाइनरी लगाने
के लिये पत्र प्रेषित
किया और अक्तूबर,
2005 में राजस्थान
प्रवास के दौरान
ओ एन जी सी के चेयरमैन
सुधीर रॉ जो एम
ओ यू साइन होना
धौलपुर पावर प्लांट
के गैस आपूर्ति
के समझौते में
उसमें यहां के
चेयरमैन सुधीर
रॉ ने यह स्वीकार
किया था कि राजस्थान
में रिफाइनरी लगाने
के लिये प्रोपर
जगह है और इकोनामिकली
वायबल है। यह बात
ओ एन जी सी के चेयरमैन
सुधीर रॉ ने स्वीकार
की थी। यहां पर
उन्होंने यह भी
विश्वास दिलाया
था कि राजस्थान
में अगर परिस्थिति
अनुकूल रही तो
36 और 40 माह के बीच
के अन्दर रिफाइनरी
का कार्य कम्पलीट
कर दिया जायेगा
उसके बाद..
श्री अध्यक्ष:
आप तो यह बताओ कोई
उम्मीद है कि
नहीं ?
श्री लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं पर्यावरण
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष महोदय, ओ एन जी सी
द्वारा चाही गयी
आधारभूत सुविधाओं,
ओ एन जी सी के अधिकारियों
के साथ चर्चा के
लिये 30.11.2005 को एक मीटिंग
आयोजित की उसमें
आर के मदान एसोसियेट
प्रोफेसरान और
बिजनेस डवलपमेंट
और एच पी एस आहूजा
यह थे। मैं सभी
चीज अभी आपको बता
दूंगा। मुख्यमंत्री
द्वारा तेल कुओं
के फील्ड डवलपमेंट
प्लांट की स्वीकृति
के लिये रिफाइनरी
की स्थापना हेतु
केन्द्रीय पैट्रोलियम
मिनिस्टर को पत्र
प्रेषित किया
... (व्यवधान)
श्री रामनारायण
मीणा (नैनवां): माननीय
अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री
जी का गुणगान तो
थोड़ी बाद सब कर
लेंगे। अगर आज
करना है तो अध्यक्ष
जी ने यह निर्देश
दिया, आसन ने यह
निर्देश दिया है
कि आप लगाना चाहते
हैं कि नहीं ? आपका
सरप्लस बजट है।
पैसा देना है कि
नहीं ? आप एक बात
कह दो। पत्र प्रेषित
... (व्यवधान)
श्री कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी बाजार):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, राजनीतिक
भेदभाव के आधार
पर यह रिफाइनरी
राजस्थान में
नहीं लगाना चाहते
... (व्यवधान)
श्री रामनारायण
मीणा (नैनवां): जितनी
आपको, मुख्यमंत्री
जी ... (व्यवधान) राजस्थान
में किसान ... (व्यवधान)
अब तो कृपा करे
नाटक बंद ... (व्यवधान)
डा. जालम
सिंह रावलोत (शिव):
इनकी नीयत साफ
है। सरप्लस बजट
कोई रिफाइनरी लगती
है क्या ... (व्यवधान)
श्याम/चौहान 16.03.2007
13.10 1o
श्री जोगाराम पटेल (लूणी): रिफाइनरी लगाते हैं क्या, आपकी मंशा भी नहीं है ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप तो कृपया करके नाटक बंद करें ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्य गण, सत्ता पक्ष के माननीय सदस्य गण आसन का काम आप नहीं किया करें ...(व्यवधान) आपसे कह रही हूं आसन अपना काम करेगा, आप नहीं किया करें ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): हमें पता है सब, आप गुणगान करके राजस्थान का भट्ठा बैठा रहे हैं और यह तरीका ठीक नहीं है ...(व्यवधान) जनता सब जानती है और हम सब जानते हैं ...(व्यवधान)
डा. भंवरलाल राजपुरोहित (मकराना): आसन का कहना नहीं मान रहे हैं, स्टेटमेंट आ रहा है राज्य सरकार का ...(व्यवधान) यह कहना नहीं मान रहे हैं, बीच में ही ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप आसन का काम करने लगते हैं ...(व्यवधान) माननीय सदस्य, कृपया स्थान ग्रहण करें।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अध्यक्ष महोदय, यह तो प्रश्न भी नहीं पूछने देना चाहते हैं ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: मंत्री जी, आसन खड़ा हो तो आपको भी स्थान ग्रहण कर लेना चाहिए ...(व्यवधान)
श्री लक्ष्मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के उप नेता ने जिस तरह से बात पेश की, आज राजस्थान की मुख्यमंत्री जी ने पक्ष और प्रतिपक्ष की सर्वदलीय बैठक आयोजित की, यह प्रश्न राजस्थान के तमाम साढ़े पाँच करोड़ जनता के हक की बात है, ना तो प्रतिपक्ष और ना पक्ष, यह बात है तो कि सामूहिक रूप से एक निर्णय किया जाये। भारत सरकार से इस प्रकार से आग्रह किया जाये कि हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने आंध्र प्रदेश के काकानाड़ी के अंदर, वहां पर ओ.एन.जी.सी. ने कहा था कि इकोनोमिकल वाइबल वहां रिफाइनरी के लिए नहीं है लेकिन उन्होंने हस्तक्षेप करके वापिस इस मामले को पुर्नविचार के लिए आग्रह किया।
अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री जी ने 15.01.2007 को रिफाइनरी की स्थापना के लिए केन्द्रीय पेट्रोलियम मिनिस्टर को पत्र लिखा। मैं आज प्रतिपक्ष पर या किसी सरकार पर आरोप-प्रत्योराप नहीं करना चाहता। मैं तो आप लोगों से निवेदन करना चाहता हूं कि सकारात्मक तरीका आप अपनाकर राजस्थान के हित के लिए, राजस्थान की साढ़े पाँच करोड़ जनता के लिए राजस्थान में रिफाइनरी लगवायें। इसमें पक्ष और प्रतिपक्ष सामूहिक रूप से एक साथ होकर भारत के प्रधानमंत्री, भारत के पेट्रोलियम मंत्रि महोदय से आग्रह करूंगा। जहां जिस क्षेत्र में पेट्रोल निकला, राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र में पेट्रोल निकला, बाम्बे हाई में पेट्रोल निकला वहां रिफाइनरी लगी, गुजरात में पेट्रोल निकला तो गुजरात में रिफाइनरी लगी, आसाम में पेट्रोल निकला तो आसाम में रिफाइनरी लगी तो राजस्थान की तमाम जनता का अधिकार बनता है।
अध्यक्ष महोदय, मैं तो यहां तक कहना चाहता हूं कि हमारा एक संवैधानिक अधिकार है कि जिस पश्चिमी राजस्थान में, जिस रेगिस्तान में पेयजल की समस्या है, अकाल की समस्या है, ऐसा भौगोलिक क्षेत्र है तो रिफाइनरी के लिए अगर कोई न्यायोचित स्थान है तो राजस्थान है। राजस्थान भारत सरकार से आग्रह करता है। मुझे भारत के प्रधानमंत्री जी से मिलने का मौका मिला, मैंने उनसे भी आग्रह किया और पेट्रोलियम मिनिस्टर से भी, मैं धन्यवाद दूंगा हमारे पूर्व मुख्यमंत्री शिवचरण जी माथुर को जिन्होंने मुख्यमंत्री जी को आग्रह किया, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि यह पक्ष और विपक्ष की बात नहीं है। यह राजस्थान के हित की बात है। राजस्थान के अधिकार की बात है, इसलिए राजस्थान के तमाम दो सौ विधायक सभी मिलकर के एक राय से रिफाइनरी राजस्थान में कैसे लगे, राजस्थान में दस हजार करोड़ का इनवेस्टमेंट कैसे लगे, इस बात पर आज चर्चा करनी चाहिए।
श्री अध्यक्ष: लायें तो आप संकल्प, कौन ना कर रहा है ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मैं तो एक ही बात कह रहा हूं, आप शर्तें मान लो, भाषण नहीं, वह तो वोट के टाइम आप कर लेना ...(व्यवधान)
श्री लक्ष्मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): मैं अभी बताता हूं ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप शर्तें मान लीजिये ...(व्यवधान) बहुत दु:खी हैं ...(व्यवधान)
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): आपने मानी है क्या ...(व्यवधान) आंध्र प्रदेश में मानी है, गुजरात में मानी है कि पंजाब में मानी है, जो हम मान लें ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): हैलीकॉप्टर आपके काम आता है, एयरोप्लेन आपके काम आता है, आप जाइये बात करिये ...(व्यवधान)
डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): 26 हजार करोड़ की शर्तें नहीं मान सकते हैं ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): हम भी अख़बार पढ़ते हैं ...(व्यवधान)
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): इस प्रकार की अव्यावहारिक शर्तें लगाकर के राजस्थान में रिफाइनरी नहीं ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप इस प्रकार से राजस्थान का भला नहीं कर सकते ...(व्यवधान) आप बैठिये ...(व्यवधान)
डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): राजस्थान को विकसित राज्य बनाना हमारी सरकार का संकल्प है। राजस्थान अभी विकासशील है ...(व्यवधान) 26 हजार करोड़ संभव नहीं है ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मैं तो लंबी बात नहीं करूंगा, एक ही बात कहूंगा कि शर्तें बैठकर के नेगोसिएट करें, राजस्थान का भला करो, कहीं दूसरी जगह चली जायेगी। आई.आई.टी. आप नहीं दे रहे। दूसरे प्रांत में चली जायेगी। आपकी जो कार्य शैली है उसको ठीक करो, गति लाओ। लोगों से मिलना-जुलना शुरू करो और चिटठी-नत्री की बात कम करो और प्रेक्टिकल बात ज्यादा करो ...(व्यवधान)
श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): अध्यक्ष महोदय, शर्तें पहले तो थी ही नहीं, जिस समय हरी झंडी मिली थी दिल्ली से, उस समय शर्तें थी ही नहीं। अब शर्तें कहां से आयी ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप तो एनर्जेटिक हो। आप हर बात के लिए उधर क्यों देख रहे हो। आप बोलो हम चलेंगे, बात करेंगे लेकिन शर्तें तो माननी पड़ेंगी। अगर आप राजस्थान का भला चाहते हैं तो ...(व्यवधान) आप बैठकर सुनिये, जब हम बोल रहे हैं ...(व्यवधान) आपको थोड़ा सीखना चाहिए ...(व्यवधान)
डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): माननीय प्रतिपक्ष के उप नेता जब मंत्रि जी जवाब दे रहे हैं तो आप बार-बार क्यों उठ रहे हैं ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह क्या है, यह आप भाषण सुना रहे हैं ...(व्यवधान)
डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): माननीय मंत्रि जी पूरा चित्रण कर रहे हैं, आपकी काली करतूतें खोल रहे हैं। कांग्रेस राजस्थान में, बाड़मेर में रिफाइनरी खोलना नहीं चाहती है। शिवचरण जी माथुर जरूर लेते हैं ...(व्यवधान) लेकिन अशोक जी गहलोत नहीं आने दे रहे हैं यह मेरा आरोप है ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मंत्रि जी, आप तो कृपया करके शर्तें मान लो और जो कंडीशन हैं, हम दिल्ली बात करते हैं फिर चलेंगे ...(व्यवधान)
एक माननीय सदस्य: आप बैठ तो जायें, भाषण नहीं ...(व्यवधान)
श्री लक्ष्मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्यक्ष महोदय, 27 अक्टूबर, 2006 को ओ.एन.जी.सी. ने रिफाइनरी स्थापना हेतु इंसेंटिव की मांग की थी। 15 जनवरी, 2007 को माननीय मुख्यमंत्री जी के द्वारा पेट्रोलियम मंत्रि जी को पत्र लिखा गया और इस रिफाइनरी के अंदर दखल का आग्रह किया। अध्यक्ष महोदय, राजस्थान में 10 हजार का इनवेस्टमेंट रिफाइनरी का और 26 हजार करोड़ रूपये का इंसेंटिव, हमारे खान सचिव ने ओ.एन.जी.सी. के चेयरमैन को मांग की खुलासा के लिए पत्र प्रेषित किया और मांग की कि एस.बी.आई कैप के अंतर्गत फिजिबिलिटी रिपोर्ट जो है, वह हमें प्रेषित की जाये।
अध्यक्ष महोदय, ओ.एन.जी.सी. ने जो मांगा है वह सुपरिभाषित नहीं है और जो मांग का पैकेज पेश किया है वह बहुत अधिक है। जो उन्होंने पत्र लिखा है, जो इंसेंटिव उन्होंने मांगा है उसमें सूचनाओं का पूरा अभाव था और छूटों की राशि 26 हजार करोड़ या इससे अधिक की मांग थी। राज्य सरकार जानना चाहती है कि 10 हजार करोड़ रूपये का इनवेस्टमेंट और 26 हजार करोड़ की छूट मांगना कहा तक न्यायोचित है। इसके साथ में मांग की कि एस.बी.आई. कैप के द्वारा की गयी स्टेडी के आधार पर उसकी प्रति भी हमें उपलब्ध की जाये। उसका जो सर्वे किया है उसकी प्रति हमें दी जाये ताकि हम उसका जवाब दे सकें। इसके साथ में वैक्स क्रूड की प्राइज नॉन वैक्स क्रूड के बराबर है या नहीं है इसके बारे में भी हमें जानकारी दी जाये। यह भी बताया जाये कि ट्रांसपोर्टेशन की कुल राशि ओ.एन.जी.सी. वहन करे। रिफाइनरी का प्रोडेक्ट प्रोफाइल बताया जाये।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्यक्ष महोदय, आई एम पाइंट आफ ...(व्यवधान) मेरा निवेदन था कि या तो सरकार अलग से चर्चा करा ले, आप मर्जी से, यह सदन तो तय करेगा नहीं, तय करना है राजस्थान सरकार को और केन्द्र सरकार को तो वहीं जाकर के बात करें। इसमें सदन की क्या उपयोगिता हो सकती या तो गवर्नमेंट अपनी तरफ से अलग से रखे। आज पर्ची के माध्यम से चर्चा कराना उचित नहीं है।
श्री अध्यक्ष: अब आप अपना स्थान ग्रहण कर लें ...(व्यवधान) माननीय मंत्रि जी आपने कठिनाई तो बता दी लेकिन आसन ने आपसे पूछा था कि अब भी कोई उम्मीद है कि नहीं ...(व्यवधान)
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): इसके बारे में निश्चित रूप से राज्य सरकार को बताना चाहिए ...(व्यवधान)
श्री शिवचरण माथुर (माण्डलगढ़): अध्यक्ष महोदय, आपने एक पर्ची के द्वारा तगाराम जी को यहां पर बोलने की बात कही। मैं समझता हूं कि उन्होंने अपनी बात को बहुत प्रभावी तरीक से उठा दिया। जहां तक सवाल रिफाइनरी का है ...(व्यवधान)
श्री लक्ष्मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माथुर साहब, अब आपकी ही बात कर रहा हूं। जो आपने चिट्ठी लिखी है ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप सुन लें पहले ...(व्यवधान)
श्री शिवचरण माथुर (माण्डलगढ़): आप बैठें तो सही ...(व्यवधान) किसी को कोई एतराज नहीं है ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप माथुर साहब को सुन लें, फिर आप दे दीजिये ...(व्यवधान)
श्री शिवचरण माथुर (माण्डलगढ़): किसी को कोई एतराज नहीं है, मैं तो कह रहा हूं कि मैं तो इसके लिए कमिटेड हूं और मैंने तो मुख्यमंत्री जी से एक बार नहीं कई बार कहा। अभी यहां पर बहस इन्होंने छेड़ दी। ओ.एन.जी.सी. लगाने वाली पार्टी थी उसने कुछ मांग की। इसका मतलब यह नहीं है कि उन मांगों पर आप बात नहीं करें, मैंने तो अभी रिसेंटली एक पत्र मुख्यमंत्री जी को लिखा है और मैंने कहा है कि उनसे कि आप आठ हजार करोड़ रूपया इस रिफाइनरी के माध्यम से राजस्थान में पैदा कर सकती हैं और इस राजस्थान को टैक्स फ्री स्टेट बना सकती हैं।
श्री अध्यक्ष: टैक्स फ्री स्टेट बना सकती हैं।
श्री शिवचरण माथुर (माण्डलगढ़): यह मैंने कहा है। केवल भावना से बात नहीं कहता हूं। मैं तो इसके लिये आपके राम नाइक जी ...(व्यवधान)
श्री लक्ष्मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): मैं आपका जिक्र करूंगा ...(व्यवधान)
श्री शिवचरण माथुर (माण्डलगढ़): सुनिये तो सही। आज बहस हो रही है क्या इस पर।
श्री अध्यक्ष: आप बोलने दें उन्हें। आप बोलने दें उन्हें ...(व्यवधान)
श्री शिवचरण माथुर (माण्डलगढ़): बहस हो रही है क्या यह ...(व्यवधान) आपने ऐसे तथ्य यहां पर प्रस्तुत किये ...(व्यवधान)
श्री लक्ष्मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): मैं इनकी चिट्ठी का ही हवाला करूंगा ...(व्यवधान) अच्छी बात है स्वागत करता हूं ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप बोलने दें उन्हें ...(व्यवधान) पहले बोलने दें ...(व्यवधान)
श्री शिवचरण माथुर (माण्डलगढ़): आप मुझसे बहस कर रहे हैं ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: माथुर साहब, आप तो अपनी बात पर आयें ...(व्यवधान)
श्री शिवचरण माथुर (माण्डलगढ़): मैं तो राम नाइक का भी कहना चाहता हूं ...(व्यवधान) वह एन.डी.ए. के मिनिस्टर थे और जिस अच्छी तरह से उन्होंने व्यवहार किया। वहीं से मैं इस बात को शुरू करना चाहता हूं। आप भारत सरकार पर दोष लगा रहे हैं।
श्री लक्ष्मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): नहीं लगाया है।
श्री शिवचरण माथुर (माण्डलगढ़): लगाया है आपने। दोष लगाने से क्या होगा।
श्री अध्यक्ष: आप बैठे-बैठे क्यों बोल रहे हैं ...(व्यवधान)
श्री शिवचरण माथुर (माण्डलगढ़): दोष लगाने से आपकी क्या रिफाइनरी लग जायेगी।
जयगोविन्द/यूएस/16.3.7/13.20/1p
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप बैठे-बैठे
क्यों बोल रहे
हैं, सुन लें उनको।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़): मणिशंकरजी
अय्यर को मैंने
तैयार किया। मैंने
कहा लोक सभा में
जब इस प्रकार की
बात उठाई जा रही
है, मेहरबानी करके
आप इस में निर्णय
कीजिए। भारत सरकार
रिफाइनरी नहीं
लगा रही है, ओ एन
जी सी एक कॉमर्शियल
पार्टी है, उसने
कुछ शर्तों, कुछ
बातें रखी हैं,
उन पर चर्चा कीजिए,
वह शर्तें आपको
सूट नहीं करती
है तो हिन्दुस्तान
के अंदर दूसरे
प्लेयर्स भी हैं
उनको आप इन्वाइट
कीजिए। जरूरी थोड़े
है कि आप ओ एन जी
सी से ही इसमें
बात करें, आज बड़े-बड़े
कंसर्न हैं, ऐसे
कंसर्न हैं जो
दुनिया के दूसरे
देशों में एक बड़ी
पार्टी की तरह
कई स्टील प्लांट
खरीद रहे हैं, उनसे
आप बात कीजिए।
आप केवल ओ एन जी
सी को लेकर भारत
सरकार को दोष देने
की बात करें कि
उन्होंने 26 हजार
करोड़ का पैकेज
आपके सामने रख
दिया है। मैं समझता
हूं कि आप क्या
वातावरण पैदा कर
रहे हैं रिफाइनरी
लगाने का?
मैंने
तो कल भी मुख्य
मंत्रीजी से निवेदन
किया कि इसमें
कटिंग अक्रोस
द पार्टी लाइन,
आपको विश्वास
दिला कर कहना चाहता
हूं कि भारत सरकार
के आज के मंत्री
मुरली देवड़ाजी,
उनसे भी मैंने
चर्चा की है, कहीं
पर भी उनका कोई
विरोध नहीं है।
आप मुझे माफ करें
मंत्री महोदय,
पता नहीं यह कहां
तक सच है लेकिन
आपने तो एक बार
यह भी कहा था कि
भटिण्डा से निकलने
वाली पाइप लाइन
है, मैं इसको नहीं
निकलने दूंगा,
उसको ब्लास्ट
कर दूंगा। आप कैसे
ब्लास्ट कर देंगे?
आपने नहीं कहा
होगा लेकिन यह
अखबारों में आया
था। ...(व्यवधान)...
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं पर्यावरण
मंत्री): मैंने
नहीं कहा था।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़): अगर
नहीं कहा था तो यह बहुत
अच्छी बात है
लेकिन यह अखबारों
में छपा था।
श्री
अध्यक्ष: अखबारों
में आया था।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़): अखबारों
में छपा था। रिफाइनरी
लगाने का यह कोई
तरीका नहीं है।
मैं आपको विश्वास
दिलाना चाहता हूं
...(व्यवधान)... मेरी
बात सुन लीजिए।
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं पर्यावरण
मंत्री): एच पी सी
एल और आई ओ सी की
लाइन निकल रही
है राजस्थान से
होकर, यह हमारा
अधिकार बनता है,
पहले एच पी सी एल
ने आवेदन किया
था, ओ एन जी सी ने
भी इसको टर्न डाउन
कर दिया और अपनी
खुद की मांग रख
दी थी।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़): भटिण्डा
की पाइप लाइन से
आपको फायदा है।
अगर 10 हजार करोड़
रुपए लगाकर 10 मिलियन
टन की फैक्ट्री
यहां पर लगाना
चाहते हैं और यदि
उसकी कैपेसिटी
आपको बढ़ानी है
तो भटिण्डा पाइप
लाइन से आप तेल
ले सकते हैं। आपको
तो उसका स्वागत
करना चाहिए। आपने
कहा कि मैं उसको
ब्लास्ट कर दूंगा,
इसलिए मैं आपसे
निवेदन करना चाहता
हूं।
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं पर्यावरण
मंत्री): ...(व्यवधान)...
आप ब्लास्ट शब्द
निकालें, वह किस
समाचार पत्र में,
किसी स्थान पर
यह बात नहीं आई
है, यह कोई आप मन
से पैदा कर रहे
हैं। यह ब्लास्ट
की बात, कोई आतंकवादी
थोड़े हैं जो ब्लास्ट
की बात कर रहे हो?
स्टेट के इण्टरेस्ट
में, जो राज्य
के हित में होगा,
राजस्थान सरकार
रिफाइनरी लगाने
के लिए कृत संकल्प
है।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़): माननीय
अध्यक्ष महोदय, मैं तो एक ही
बात कहना चाहता
हूं, 21 तारीख को मुख्य
मंत्रीजी ने एक
मीटिंग बुलाई।
विरोधी पक्ष के
नेता रामनारायणजी
चौधरी, मैं और कल्लाजी
कांग्रेस की तरफ
से गए थे। दूसरी
सभी पार्टियों
के लोग भी वहां
पर आए थे। एक राय
से हमने मुख्य
मंत्रीजी को कहा
कि हम आपको अधिकृत
करते हैं, इसमें
आप जो कुछ भी हमारा सहयोग लेना
चाहते हैं वह लीजिए,
कहीं दो राय नहीं
है, इसमें कहां
मतभेद है, लेकिन
उसके तरीके होते
हैं। आप भारत सरकार
को गाली देने में
लगे हैं, उसकी आलोचना
करने में लगे हैं। मुरली
देवड़ाजी ने कहा
कि कहा कि कहां
हमारी तरफ से इन्कारी
है, बैठें तो सही।
कल मुख्य
मंत्रीजी कह रही
थी कि मुरली देवड़ाजी
से मेरी बात हो
गई है, तय हो गया
है, हम बैठ कर बात
करेंगे। मैं आपको
विश्वास दिलाना
चाहता हूं कि मेरी
पार्टी की तरफ
से और व्यक्तिगत
रूप से भी मैं जितना
भी हमारा इसमें
सहयोग होगा, हम
रिफाइनरी बाड़मेर
में लगाकर रहेंगे,
यह मैं आपको कहना
चाहता हूं। ...(व्यवधान)...
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता, प्रतिपक्ष):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, पर्ची
के द्वारा इस मामले
को उठवा कर सदन
के अन्दर एक नई
बहस करवा रहे हैं
और माननीय मंत्रीजी
जिस तरह से जवाब
दे रहे हैं, यह बॉल
को अपने यहां से
केन्द्र में फेंकना चाहते हैं,
जब बॉल आपकी साइड
में है इसलिए है
कि ओ एन जी सी ने
जो शर्तें रखी....।
श्री
अध्यक्ष: इन्होंने
तो आपके पाले में
फेंक दी केन्द्र
को कहां भेजी, आपके
पाले में डाल दी।
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता, प्रतिपक्ष):
नहीं इनके पाले
में है। आप बैठकर
बात क्यों नहीं
करते जैसा माथुर
साहब ने कहा है,
आपको रियायतें
देनी पड़ेगी, आपको
रियायतें देनी
पड़ेगी। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: आप बीच
में न बोलें। विराजिए।
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता, प्रतिपक्ष):
अभी जैसे जौहरी
बाजार से आने वाले
माननीय सदस्य
उछल रहे थे, भाई
ऐसे थोड़े काम
चलेगा। आप तो व्यापारी
आदमी हो और ओ एन
जी सी भी व्यापारी
है, वह निगोशिएशन
करना चाहता है
सरकार के साथ, अगर
उसके साथ आपका
नहीं बैठता है
तो आप भारत सरकार
से बात करें, भारत
सरकार इन्टरवीन
करेगी, हम भी मिलकर
कोशिश करेंगे,
ऐसे मत कहो कि हमारे
मंत्रीजी ने लिख
दिया, प्रधान मंत्रीजी
को लिख दिया, चीफ
मिनिस्टर साहब
ने यह लिख दिया,
हम यह कहां पूछ
रहे हैं कि आपने
क्या फर्ज किया
और चीफ मिनिस्टर
साहब ने क्या
फर्ज किया, हमने
तो कहीं पूछा नहीं,
आपकी ही पार्टी
के मैम्बर ने
पूछा है तो आप यह
साबित करना चाहते
हैं कि आप तो पूरी
चेष्टा कर रहे
हैं लेकिन भारत
सरकार नहीं लगा
रही है, ऐसा मत करो।
...(व्यवधान)...
डा. एन.
एस. गुर्जर (टोडारायसिंह):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक मिनट,
आप बोल लेना बाद
में, आप तो जवाब
भी देंगे।
श्री
अध्यक्ष: आप प्रश्न
पूछ लें, वैसे पर्ची
पर ऐसा होता नहीं
लेकिन आप पूछ लें
प्रश्न। मैं ना
नहीं कर रही, आप
भी पूछ लीजिए।
डा. एन.
एस. गुर्जर (टोडारायसिंह):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह राजस्थान
की लाइफ लाइन है।
जिस इलाके के अंदर
अकाल पड़ता है
और जहां पर हजारों
करोड़ रुपए खर्च
कर चुके हैं, अगर
यह रिफाइनरी लग
गई तो राजस्थान
की आर्थिक स्थिति
की दिशा और दशा
बदल देगी। इसलिए
यह बहुत महत्वपूर्ण
मामला है। मैं
जानना चाहता हूं
कि जिस तरह से तेल
निकालने के मामले
में कुछ कम्पनियों
को हमने एकाधिकार
दिया हुआ था और
वर्षों तक दिया
हुआ रहा और मिडल
इस्ट के दबाव
में वे कम्पनियां
पाकिस्तान में
तेल निकालती रही,
बाकी जगह तेल निकालती
रही और हिन्दुस्तान
के बाड़मेर में
तेल नहीं निकाल
सकी जानबूझकर।
तो एक ओ एन जी सी
ही नहीं है। मैं
माथुर साहब की
बात से सहमत हूं।
एक ओ एन जी सी ही
नहीं है, इस समय
वर्ल्ड में ओपन
मार्केट हो गया
है, इसलिए आप अन्य
मल्टी नेशनल कम्पनीज
से भी चर्चा कीजिए,
चर्चा करके जो
भी हमारे राजस्थान
के हित में हो, जो
फायदा हो, उनसे
बात करके रिफाइनरी
लगाने की बात क्यों
नहीं करते। हमारी
पार्टी और सरकार,
हम दोनों इस बात
पर सहमत हैं कि
रिफाइनरी राजस्थान
में लगे, यह हमारी
पार्टी का कमिटमेंट
भी है लेकिन मंत्री
महोदय, इस मामले
में हमें सतर्कता
बरतनी होगी कि
एक ही पार्टी के
साथ, अगर उस पार्टी
ने कोई शर्त लगा
दी, उन शर्तों को
लेकर हम इसमें
डिले करें, मैंने
तो समाचार पत्रों
में पढ़ा था, आपने
भी पढ़ा होगा, मुझे
मालूम नहीं कि
फाइनेंस डिपाट्रमेंट
में कुछ अधिकारियों
के पास फाइल बहुत
दिनों तक पड़ी
रही। उन्होंने
देखा तक नहीं।
मुझे मालूम नहीं
है, यह सही है या
गलत है, अगर सही
है तो यह बहुत गम्भीर
बात है, सरकार को
इस बात को देखना
चाहिए, इतने सेंसेटिव
इश्यू जो राजस्थान
के हित से जुड़ा
हुआ है, उसमें भी
अधिकारी इस तरह
की टालमटोल करे
या उसको लाइट वे
में लें तो यह उचित
नहीं है
राजस्थान के
लिए। इसलिए मैं
चाहता हूं कि आप
जो भी कर सकें, प्रतिपक्ष
से बात करें, भारत
सरकार से बात करें,
इतनी भी मल्टी
नेशनल्स हैं जो
इस क्षेत्र में
काम कर रही हैं
उनसे आप चर्चा
करें और कोशिश
यह करें कि जैसा
आपने कहा टैक्स
फ्री, आप भी यह मानते
हैं कि टैक्स
फ्री हो सकता है,
टैक्स फ्री ही
नहीं, माननीय अध्यक्ष
महोदय, अगर
रिफाइनरी लग गई
तो टैक्स फ्री
ही नहीं, हमारी
इनकम इतनी बड़ी
हो जाएगी ...(व्यवधान)...
श्री
तगाराम चौधरी
(बाड़मेर): किसानों
की जमीन ओ एन जी
सी के नाम से अलॉट
हो रही है।
डा. एन.
एस. गुर्जर (टोडारायसिंह):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, केवल
टैक्स फ्री ही
नहीं मैं इससे
भी आगे की बात करना
चाहता हूं कि यदि
यह रिफाइनरी लग
गई तो उसके बाद
राजस्थान हिन्दुस्तान
के जो विकसित प्रदेश
हैं उनकी श्रेणी
में अग्रिम पंक्ति
में आकर खड़ा हो
जाएगा कुछ सालों
के अंदर और हमारे
लोगों को रोजगार
मिलेगा। इसलिए
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह मामला
गम्भीर है, मंत्री
महोदय, आप इसे गम्भीरता
से लीजिए और इसमें
जवाब तो जैसा आप
अपने अधिकारियों
से डिस्कस करके
आए हैं वह दे दीजिए
लेकिन इस विषय
को गम्भीरता से
लीजिए और रिफाइनरी
राजस्थान में
लगे इसका प्रयास
कीजिए, धन्यवाद।
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: आप जवाब
मत दो, आप सीधी बात
बता दो।
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं पर्यावरण
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष महोदय, मैं माथुर
साहब को धन्यवाद
प्रेषित करता हूं
कि इन्होंने मुख्य
मंत्रीजी को पत्र
लिखा, सोशल
पॉलिसी रिसर्च
इन्स्टीट्यूट
के कार्यक्रम में
मणि शंकरजी अय्यर,
तत्कालीन पेट्रोलियम
मंत्रीजी आए थे
उन्होंने भी इस
बात को स्वीकार
किया कि राजस्थान
के अंदर रिफाइनरी
लगाने के लिए पर्याप्त
माकूल परिस्थितियां
हैं। मैं आपको
यह भी धन्यवाद
प्रेषित करना चाहता
हूं कि आपने मुख्य
मंत्री को पत्र
लिखा। टेक्नो
इकोनोमिक स्टडी
जो केयर्न एनर्जी के साथ हुई
है उसमें 9 हजार
करोड़ रुपए के
इन्वेस्टमेंट
की आपने बात बताई,
इसके साथ आपने
7.5 एम एम टी पी ए की
रिफाइनरी जो 15-20 साल
तक चल सकती है अपने
प्रोडक्शन के
हिसाब से, डिपोजिट
के हिसाब से, उसके
साथ ही मैं धन्यवाद
प्रेषित करना चाहता
हूं कि आपने स्वयं
ने इस बात को इस
पत्र में जो माननीय
मुख्य मंत्रीजी
को प्रेषित किया
है उसमें इस बात
को स्वीकारा है
कि जो इन्सेंटिव
ओ एन जी सी ने मांगे
हैं वह पर्याप्त
नहीं है, जितने
हैं उसकी लागत
के 50 प्रतिशत तक
होने चाहिए। अगर
9 हजार करोड़ का
इन्वेस्टमेंट
होता है तो उसका
आधा 50 प्रतिशत इन्सेंटिव
मांगे जाने चाहिए।
जब 10 हजार करोड़
रुपए का इन्वेस्टमेंट
है, 9 हजार करोड़
रुपए का इन्वेस्टमेंट
है और 26 हजार करोड़
रुपए के इन्सेंटिव
मांगे जा रहे हैं
तो इसको जस्टिफाइड
आने भी नहीं माना
इसके लिए मैं आपको
बहुत-बहुत धन्यवाद
प्रेषित करना चाहता
हूं।
माननीय
अध्यक्ष महोदय, जो बात टोडारायसिंह
से आने वाले माननीय
सदस्य ने कही
कि फाइनेंस सेक्रेटरी
ने फाइल को इतने
दिन रखा। इतनी
बड़ी मांग उन्होंने
की है उसको जस्टीफाई
करने में और उसका आकलन
करने में समय लगता
है। हमारे खान
सचिव ने फरवरी,
2007 में चिट्ठी लिखी
थी...।
श्री
शिवचरण माथुर
(माण्डलगढ़): माननीय
अध्यक्ष महोदय, या तो इस पर
पूरा दिन बहस रख लीजिए। पर्ची
के आधार पर इस तरह
के मामले को उठा
रहे हैं यह अच्छी
बात नहीं है।
श्री
अध्यक्ष: अब मैं
क्या करूं? इतना
महत्वपूर्ण प्रश्न
था कि मैं आपको
नहीं रोक सकी तो
दूसरों को भी नहीं
रोक सकती।
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं पर्यावरण
मंत्री): 12 मार्च,
2007 को ओ एन जी सी के
चेयरमैन ने मीटिंग
करने के लिए पत्र
लिखा है तो इस पर
बैठकर चर्चा करेंगे।
हमने जो अपनी बात
है उनके सामने
प्रस्तुत करेंगे।
उन्होंने जो इन्सेंटिव
मांगे हैं उन पर
बैठकर चर्चा की
जाएगी। यह हमारी
साढ़े पाँच करोड़
जनता के अधिकारों
का प्रश्न है...
Gpc/akt/16032007/1330/1q
राजस्थान में रिफाइनरी लगेगी उसमें पक्ष और प्रतिपक्ष और संपूर्ण राजस्थान की 5.5 करोड़ जनता इस मामले में है और भारत सरकार से पूरा आग्रह है कि जिस हिसाब से यहां पर पेट्रोलियम के डिपोजिट लगातार मिलते जा रहे हैं इसलिए इकोनोमिकल वायबिलिटी के हिसाब से परीक्षण के बाद में जो पत्र हमारे खान सचिव ने लिखा है उसके आधार पर इनका रिप्लाई आने के बाद में बैठक करने के बाद निश्चित रूप से आगे निर्णय किया जाएगा, मैं घन्यवाद प्रेषित करता हूं।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): माननीय अध्यक्ष महोदय, पाइंट ऑफ आर्डर। ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष: श्री कालीचरण सर्राफ।
नसीराबाद
में छात्र-छात्राओं
के साथ यौन उत्पीड़न
की घटना
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): माननीय अध्यक्ष महोदय, केन्द्रीय विद्यालय, नसीराबाद की छात्राओं के साथ जो यौन उत्पीड़न की घटना हुई और उसको वहां की प्रिंसिपल ने उजागर किया उसका तबादला पंजाब कर दिया गया है। इतना ही नहीं उस प्रिंसिपल को जान से मारने की धमकी दी जा रही है और जो केन्द्रीय विद्यालय संगठन का जांच दल आया है वह पीडि़त छात्राओं के बयान बदलने की भी कोशिश कर रहा है। मेरा यह कहना है कि इससे राजस्थान में ही नहीं नसीराबाद, अजमेर जिला और राजस्थान में लोगों में आक्रोश है और महिलाओं में विशेष रूप से इस बात को लेकर आक्रोश है कि इस प्रकार के यौन उत्पीड़न को उजागर करने वाली महिला को इस प्रकार से स्थानान्तरित कर दिया जाए, उसको दण्डित करने का प्रयास किया जाए और जो पीडि़त छात्राएं हैं उनके बयान बदलने की कोशिश की जाए तो निश्चित रूप से इसमें राज्य सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए और दोषी लोग इसमें बचे नहीं इस बात के लिए राज्य सरकार को सदन को आश्वस्त करना चाहिए यह मेरा कहना है।
श्री अध्यक्ष: गृह मंत्री तो हैं नहीं। शिक्षा मंत्रीजी, आप हैं, आप कुछ कहना चाहेंगे। ..(व्यवधान).. अब आप स्थान ग्रहण करें।
श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): पाइंट ऑफ इंफार्मेशन।
श्री अध्यक्ष: नो पाइंट ऑफ इंफार्मेशन। पाइंट आफ आर्डर की व्यवस्था है, जवाब दे रहे हैं, मैं कह रही हूं प्लीज सिट डाउन।
श्री घनश्याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): अध्यक्ष महोदय, जौहरी बाजार से आने वाले माननीय सदस्य ने जो प्रश्न उठाया वह बड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है, एक तो मैं बता दूं केन्द्रीय विद्यालय संगठन के स्थानांतरण का काम भारत सरकार का नहीं है, उनके कमिश्नर का है, वे उनके स्थानांतरण का काम करते हैं। दूसरी बात, पुलिस में जो मामला दर्ज है उसमें मुस्तैदी से कार्यवाही हो रही है और मैं गृह मंत्रीजी को कहूंगा उसमें किसी भी प्रकार से हम बयान नहीं बदलने देंगे और जो भी संरक्षण दे सकते हैं सबको देंगे। साथ ही आज सुबह जो न्यूज आई थी, मैंने हमारे प्रमुख शासन सचिव श्री सुधीर भार्गव को कहा है कि वे केन्द्रीय विद्यालय संगठन के जो कमिश्नर है उनसे इस संबंध में बातचीत करें और आवश्यकता हुई तो मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मुझे बात करना आवश्यक हुई और पत्र लिखना हुआ तो मैं आपकी भावनाओं को भी और सदन की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए कहूंगा कि निश्चित रूप से एक महिला प्रधानाचार्य ने हिम्मत जुटाकर यह काम किया और इसको उजागर किया है उसको वास्तव में पुरस्कृत किया जाना चाहिए था उसकी बजाय उनको तिरस्कृत किया जा रहा है, इन भावनाओं से मैं निश्चित रूप से उनको अवगत कराऊंगा।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): जान से मारने की धमकी दी जा रही है उनको।
श्री घनश्याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): जहां तक जान से मारने की धमकी की बात है मैं गृह मंत्रीजी से कहूंगा कि जिस प्रकार की सुरक्षा की बात है उनसे पूछ लेंगे, बातचीत कर लेंगे, जो भी आवश्यक कदम उठाने होंगे राज्य सरकार निश्चित रूप से उठाएगी और इस काण्ड को किसी भी प्रकार से कोई दबाया नहीं जाएगा, कानूनी कार्यवाही उसमें की जाएगी और विद्यालयों में इस प्रकार का वातावरण नहीं बने चाहे वो केन्द्रीय विद्यालय संगठन के हों, चाहे प्राइवेट विद्यालय हों, चाहे सरकारी या अनुदानित हों, इसमें इस प्रकार का वातावरण नहीं बने इसके लिए हमने पहले कई कदम उठाये थे, मोबाइल पर प्रतिबंध लगाना, अश्लील एसएमएस आते थे उसके कारण से बारहवीं तक की सभी कक्षाओं में मोबाइल पर प्रतिबंध लगाया, लेकिन हमारे प्रतिबंध केन्द्रीय विद्यालय संगठन ने नहीं माने और मोबाइल के माध्यम से यह सारी कार्यवाही प्रारंभ हुई है। अब हम कोशिश करेंगे कि राजस्थान में जितने भी विद्यालय कार्यरत हैं चाहे वे केन्द्रीय विद्यालय हैं, चाहे प्राइवेट विद्यालय हैं, चाहे अनुदानित हैं, सरकारी हैं, बारहवीं तक की सभी कक्षाओं में मोबाइल छात्र-छात्राओं को लेकर आपने का प्रतिबंध हम कठोरता से लागू करेंगे ताकि इस प्रकार के कदम आइंदा कम होने की स्थिति में आये, यह मैं आश्वस्त कर सकता हूं।
श्री अध्यक्ष: माननीय मंत्रीजी ..(व्यवधान)..
श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): अध्यक्ष महोदय, ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष: स्थान ग्रहण करें। आसन पांवों पर। माननीय मंत्रीजी, मैं चाहूंगी कि यदि आवश्यकता हो तो इस बारे में आप मानव संसाधन मंत्रीजी को भी पत्र लिखें और इस प्रधानाचार्य का स्थानान्तरण इन परिस्थितियों में यहां से नहीं होना चाहिए और इसके अलावा इस बात की व्यवस्था की जाए उनके जान-माल को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचे इस बात की पूरी व्यवस्था की जाए।
श्री घनश्याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मानव संसाधन मंत्रीजी से व्यक्तिगत बात कर लूंगा और आपकी भावना के आधार पर उनको पत्र भी लिख दूंगा और कमिश्नर से भी बात करेंगे और गृह मंत्रीजी से कहूंगा उनकी सुरक्षा के बारे में चिन्ता करें।
श्री अध्यक्ष: ठीक है।
श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): अध्यक्ष महोदय, पाइंट ऑफ इंफार्मेशन। हम विधायकों को आपके सचिवालय द्वारा इस सदन का सदस्य नहीं माना गया है। एक परिपत्र इस विषय में आपके सचिव महोदय ने निकाला है इसमें यह लिखा है आप अपनी नेमप्लेट के आगे ..(व्यवधान)..
श्री घनश्याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): अध्यक्ष महोदय, विधान सभा सचिवालय के बारे में यहां चर्चा नहीं होती है।
श्री अध्यक्ष: मेरी बात सुनिए। ..(व्यवधान).. स्थान ग्रहण करें। मेरी बात सुनिए आप।
श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): इसमें यह लिखा हुआ है हम सदन के सदस्य नहीं होते ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष: मैं कहती हूं स्थान ग्रहण करें। आप स्थान ग्रहण करें।
श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): मैं तो बैठ जाऊंगा मैडम, आपका आदर करता हूं।
श्री अध्यक्ष: गंगापुर से आने वाले माननीय सदस्य, कृपया स्थान ग्रहण करें, मुझे सुनें उसके बाद आप बैठें प्लीज। ऐसा है कि हमारे नियम और परम्परा व प्रक्रिया है कि विधान सभा अध्यक्ष और विधान सभा सचिवालय के बारे में किसी को भी कोई शिकायत हो तो मेरे वैश्म में आकर मुझसे मिले, मुझे बताए क्या है, क्या नहीं है। सदन में चर्चा नहीं की जा सकती, यह नियम है। इसलिए स्थान ग्रहण करें। बैठे रहें और आकर मेरे चेम्बर में मुझसे मिल लीजिएगा।
श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): मेरा मामला नहीं है, पक्ष, विपक्ष के सभी सदस्यों का मामला है किस तरह के आदेश निकाले जा रहे हैं आपके यहां से। ..(व्यवधान)..
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्यक्ष महोदय, बहुत महत्वपूर्ण सूचना है।
श्री अध्यक्ष: बता दिया। ..(व्यवधान).. नो, नो, अंकित नहीं हो। अंकित नहीं होगा।
श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): 000
श्री अध्यक्ष: आप आसन की अवहेलना कर रहे हैं, आप आसन की अवमानना कर रहे हैं। स्थान ग्रहण कर लें। नेता प्रतिपक्ष, इन्हें स्थान ग्रहण करवाएं।
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्यक्ष महोदय, एक महत्वपूर्ण सूचना देना चाहता हूं।
श्री अध्यक्ष: अब आपकी क्या सूचना हो गई?
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्यक्ष महोदय, नगरपालिका, पीलीबंगा के अंदर माननीय उच्च न्यायालय के आदेश से बहुत ही गंभीर तोड़फोड़ होने वाली है।
श्री अध्यक्ष: कल उठा देना यह प्रश्न।
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): लोगों में हाकाकार मचा हुआ है। अध्यक्ष महोदय, नगरपालिका के पास न तो कोई साधन है और जो तोड़फोड़ होगी, रोड नई बनानी पड़ेगी, नालियां बनानी पड़ेगी और जो लोग इससे प्रभावित होंगे, गरीब लोग हैं उनको दूसरे स्थान पर सरकार बसाने के लिए कोई प्रयास करे। अध्यक्ष महोदय, यह बहुत महत्वपूर्ण सूचना है, लोगों में बहुत ही हाहाकार मचा हुआ है।
श्री अध्यक्ष: संपूर्ण राजस्थान में अतिक्रमण हटाये जा रहे हैं।
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): मैं यह नहीं कह रहा हूं। अध्यक्ष महोदय, उच्च न्यायालय के आदेश की पालना होनी चाहिए मैं इस बात को जानता हूं और पालना करनी पड़ेगी।
श्री अध्यक्ष: आप क्या चाहते हो कि अतिक्रमियों को प्रोत्साहन दिया जाए।
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्यक्ष महोदय, यह नहीं कह रहा हूं उच्च न्यायालय के आदेश की पालना करने के लिए नगरपालिका के पास संसाधन उपलब्ध नहीं है और नालियां टूट जाएंगी, सड़कें टूट जाएगी, लोगों का आना-जाना रुक जाएगा और जो लोग प्रभावित होते हैं उनको मैं प्रात्साहित करने के लिए नहीं कह रहा हूं। मैं इतना ही निवेदन कर रहा हूं कि जो लोग वाकई में गरीब हैं जिनके पास कोई रोजगार नहीं है, अगर नगरपालिका के पास जगह उपलब्ध है तो उनको दूसरे स्थान पर रियायती दर पर जगह उपलब्ध करा दे, मैं कोई मुफ्त में नहीं दिलवा रहा हूं। यह मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं, बहुत ही गंभीर विषय है, लोगों में हाहाकार मचा हुआ है।
श्री अध्यक्ष: आप वहां करें, आप सवयं भी तो नगरपालिका के सदस्य हो, वहां फैसला करो।
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): संसाधन नहीं है, पैसा नहीं है, सरकार से पैसे की मांग कर रहे हैं, लोगों को व्यवस्थित रूप से बसाने के लिए निवेदन कर रहे हैं।
श्री अध्यक्ष: याचिका का उपस्थापन। श्री जोगाराम पटेल।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): आप तो कहते रहते हैं पैसे की कमी नहीं है, खजाना भरा पडा है, अब क्या जरूरत पड़ गई मांगने की। ..(व्यवधान)..
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): मैं न तो खजाने का मालिक हूं और न मैंने कभी ऐसा कहा।
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्य, आपने अपनी बात कह दी, अब श्री जोगाराम पटेल याचिका का उपस्थापन कर रहे हैं।
याचिकाओं
का उपस्थापन
श्री जोगाराम पटेल (लूणी): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं विधान सभा क्षेत्र लूणी (जोधपुर) के ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर पशु चिकित्सालय खुलवाने बाबत पाँच व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षरित (2) विधान सभा क्षेत्र लूणी (जोधपुर) में कृषि उपज मण्डी समिति द्वारा निर्मित सड़कों का रिनेवल कराने व मण्डी समिति द्वारा नई डामर सड़कों के निर्माण बाबत पाँच व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षरित, (3) विधान सभा क्षेत्र लूणी (जोधपुर) की तहसील लूणी व उप तहसील झंवर के भवनों का निर्माण करवाने बाबत चार व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षरित, एवं
मोहन/अरूण/अशोधित
प्रति प्रकाशनार्थ
नहीं/16032007/1340/2a
एवं विधान सभा क्षेत्र लूणी (जोधपुर के उच्च माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान एवं वाणिज्य वर्ग खुलवाने तथा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय लूणी के जर्जर भवन की मरम्मत करवाने बाबत दो व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षरित याचिकाएं उपस्थापित करता हूं।
श्री अध्यक्ष: श्री हीरालाल।
श्री हीरालाल (निवाई): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से निवाई उपखण्ड के मूंडिया से भगतरामपुरा पंचायत सेदरिया तक मिसिंग लिंक रोड द्वारा ग्राम भगतरामपुरा को जोड़ने बाबत, एवं निवाई उपखण्ड के ग्राम पंचायत मुख्यालय अरनिया चुराड़ा निवाई से रामचन्द्रपुरा की ढाणी गुजरान को बड़ागांव देवडूंगरी तक सड़क निर्माण बाबत पांच व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षरित याचिकाएं उपस्थापित करता हूं।
श्री अध्यक्ष: श्री सुभाष चन्द्र शर्मा।
श्री सुभाष चन्द्र शर्मा (कोटपूतली): अध्यक्ष महोदय, मैं ग्राम राजनौता (कोटपूतली) में ढाणी जाटावाला रड़ा से ढाणी डाब्डाला तक ग्रेवल सड़क का निर्माण कराने बाबत चार व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षरित याचिका उपस्थापित करता हूं।
श्री अध्यक्ष: श्री दाताराम गुर्जर।
श्री दाताराम गुर्जर (खेतड़ी): अध्यक्ष महोदय, मैं राजकीय महाविद्यालय खेतड़ी का नाम स्वामी विवेकानन्द के नाम पर करने बाबत पांच व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षरित याचिका उपस्थापित करता हूं।
श्री अध्यक्ष: श्री वीरेन्द्र मीणा। अनुपूरक अनुदान की मांग।
अनुपूरक
अनुदान वर्ष 2006-07
की मांगों का उपस्थापन
श्री वीरेन्द्र मीणा (राज्य मंत्री, वित्त एवं करारोपण): अध्यक्ष महोदय, मैं वर्ष, 2006-07 के लिए राजस्थान शासन के व्यय हेतु अनुपूरक अनुदान की मांगों का उपस्थापन करता हूं।
घोषणा/प्रक्रिया
अनुदान की
मांगों पर कटौती
प्रस्ताव प्रस्तुत
करने की प्रक्रिया
श्री अध्यक्ष: मुझे माननीय सदस्यों को सूचित करना है कि अनुदान की मांगों पर विचार जब किया जाता है तो जिन माननीय सदस्यों के कटौती के प्रस्ताव यहां दिये जाने पर सदन में मान लिये जाते हैं और जिन माननीय सदस्यों के विभिन्न दलों के सचेतक महोदय नाम लिख कर भेजते हैं उनको बोलने में प्राथमिकता दी जाती है और उसके बाद में जब समय रहता है तो बाकी माननीय सदस्यों को भी दिया जाता है समय इसलिए और जिन माननीय सदस्यों ने अपने कटौती प्रस्ताव रखे हैं वह एक साथ उन्हें सदन के अन्दर उन्हें पेश कर दें ताकि बहस के दौरान माननीय मंत्री उनका जवाब दे सकें इसलिए समय का अभाव है इसलिए मैं उसी हिसाब से जिन कटौती प्रस्तावों के संबंध में माननीय सदस्यों को समयाभाव के कारण यहां पर उत्तर नहीं मिल सकेगा उनको लिखित उत्तर भेज दिया जाएगा। यह इस सदन की परम्परा रही है।
श्री दिगम्बर सिंह जी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री अनुदान की मांग रखें।
अनुदान की
मांग
मांग संख्या
26-चिकित्सा एवं
लोक स्वास्थ्य
और सफाई की प्रस्तुति
डा. दिगम्बर सिंह (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री): अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि मांग संख्या 26- चिकित्सा एवं लोक स्वास्थ्य और सफाई के संबंध में 31 मार्च, 2008 को समाप्त होने वाले रस में किये जाने वाले व्यय के निमित्त राज्यपाल महोदय को रुपये 14 अरब, 54 करोड़ 61 लाख 55 हजार तक की राशि प्रदान की जाए।
श्री अध्यक्ष: श्री मदन दिलावर।
मांग संख्या
51- अनुसूचित जाति
के कल्याण हेतु
विशिष्ट
संगठक योजना की
प्रस्तुति
श्री मदन दिलावर (समाज कल्याण मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि मांग संख्या 51 अनुसूचित जाति के कल्याण हेतु विशिष्ट संगठक योजना के संबंध में 31 मार्च, 2008 को समाप्त होने वाले वर्ष में किये जानो वाले व्यय के निमित्त राज्यपाल महोदय को रुपये 3 अरब 4 करोड़, 83 लाख, 43 हजार तक की राशि प्रदान की जाए।
मांग संख्या
26 व 51 पर विचार
श्री अध्यक्ष: श्री कालीचरण सर्राफ।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): माननीय अध्यक्ष महोदय, आज अनुदान की मांग संख्या 26 चिकित्सा एवं लोक स्वास्थ्य एवं सफाई और मांग संख्या 51 अनुसूचित जाति के कल्याण हेतु विभिन्न संगठक योजनाओं पर चर्चा हो रही है।
मैं मांग संख्या 26 चिकित्सा एवं लोक स्वास्थ्य एवं सफाई पर अपने विचार प्रकट करना चाहूंगा। माननीय अध्यक्ष महोदय, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में जितनी उपलब्धियां इस सरकार ने पिछले 3 साल में हासिल की हैं उतनी उपलब्धियां पिछली सरकार के पांच साल के कार्यकाल में हासिल नहीं की, यदि मैं यह कहूं तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। माननीय अध्यक्ष महोदय, चाहे चिकित्सा सुविधाओं पर खर्च की गई राशि का सवाल हो, चाहे नये चिकित्सालय खोले जाने की बात हो, चाहे हास्पिटल के भवन निर्माण कराये जाने की बात हो, चाहे पदों का सृजित कर नियुक्तियां दिये जाने का सवाल है, चाहे चिकित्सा सुविधा सहायता दिये जाने की बात हो, चाहे चिकित्साकर्मियों के आवास बनाये जाने के लिए राशि की स्वीकृति का सवाल हो, स्वास्थ्य सूचकांक में वृद्धि की बात हो, चाहे तकनीकी सुविधाओं के विस्तार की बात हो, चाहे औषधियों की उपलब्धता का साल हो, औषधि निर्यात में वृद्धि की बात हो और चाहे परिवार नियोजन का सवाल हो, हर बात में हमारी सरकार ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, पिछले तीन सालों में व पिछली सरकार की तुलना में कहीं ज्यादा हैं।
(श्री सुरेन्द्र
गोयल, सभापति, पदासीन)
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं तुलनात्मक आंकडे आपके सामने पेश करना चाहूंगा। चिकित्सा सुविधाओं पर समग्र व्यय, पिछली सरकार ने दो हजार 52 करोड़ रुपये पांच साल में खर्च किये और हमने 2424 करोड़ रुपये तीन साल में खर्च किये। राजस्थान हैल्थ सिस्टम योजना के अन्तर्गत निर्माण कार्य और दवाइयों हेतु हमने 285 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जबकि पिछली सरकार ने एक नये पैसे का भी प्रावधान नहीं हुआ। चिकित्सालयों की संख्या, हमने 138 चिकित्सालय नये खोले।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय सदस्य, इतनी असत्य बात तो नहीं कहें कि एक पैसे का भी काम नहीं हुआ।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): बैठिए, बैठिए, बिराजिए आप, अपना नम्बर आए जब बोलना।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): कि एक पैसा ही खर्च नहीं हुआ।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): मैं बता रहा हूं, आंकड़े दे रहा हूं, बैठिए प्लीज।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): क्या यह हो सकता है कि किसी मांग पर एक वित्तीय वर्ष में एक पैसा खर्च नहीं हुआ।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): नहीं हुआ, बैठिए।
अस्पताल में शैय्याओं के लिए आपके राज में 283 शैय्याओं की वृद्धि की पांच साल में और हमने 2349 शैय्याओं की तीन साल में । इसी प्रकार से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना का सवाल है, आपने अपने पांच साल के र्काकाल में एक भी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना नहीं की। हमने 51 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना की। इसी प्रकार से ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आपने केवल 13 ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना की और हमने तीन साल में 62 ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना की। इसी प्रकार से, उप स्वास्थ्य केन्द्रों का उच्चीकरण, आपके समय में एक का भी नहीं हुआ, हमने 8 का किया, उप स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना, आपके राज में 75 उप स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना की गई पांच साल में और हमने 686 उप स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना की तीन साल में। आपने अपने राज में एक भी ब्लड बैंक की स्थापना नहीं की। हमने 3 ब्लड बैंकों की स्थापना की। आपने राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थित जिला चिकित्सालय पर इमरजेंसी सेवाओं का सुदृढ़ीकरण एक में भी नहीं किया, हमने भरतपुर और सीकर दो जगह किया। इसी प्रकार से, राष्ट्रीय राजमार्गों पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर आपातकालीन सेवाओं का सुदृढ़ीकरण, आपने एक भी नहीं किया, हमने 6 का किया। जुबेर खान जी, सुनिए। इसी प्रकार से, आपने पांच साल में एक भी एम्बूलेंस उपलब्ध नहीं कराई, हमने 25 हास्पिटल्स में एम्बूलेंस उपलब्ध करवाई। सिटी-स्केन मशीन आपने पांच साल में एक भी उपलब्ध नहीं कराई, हमने 10 जगह उपलब्ध कराई। इसी प्रकार से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन का निर्माण, आपके समय में 16 भवनों का निर्माण हुआ, हमने 44 में किया। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन का निर्माण आपके समय में एक भी नहीं हुआ, हमने 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन का निर्माण किया। इसी प्रकार से उप स्वास्थ्य केन्द्रों के भवनों का निर्माण, आपके समय में 75 और हमारे समय में 454, चिकित्सकों के लिए आवास गृहों के भवनों का निर्माण, आपने एक का नहीं किया, हमने 40 का किया और नर्सिंग आवास गृहों के भवन का निर्माण, आपके समय में एक नहीं, हमारे समय में 42, ब्लड बैंक के भवन का निर्माण, आपके समय में जीरो और हमारे समय में दो और पदों के सृजन का जहां तक सवाल है, वरिष्ठ विशेषज्ञ, आपके समय में एक पद का सृजन किया गया और हमने 26 का किया।
सुरेन्द्र/अरुण/16.3.2007/13.50/2b/1
कनिष्ठ विशेषज्ञों के आपके समय में केवल चार पद सृजित हुए और हमने 162 किये। चिकित्सा अधिकारी स्नातकोत्तर निश्चेतन, नेत्र चिकित्सा, हड्डी रोग विशेषज्ञ आपके समय में एक भी पद का सृजन नहीं हुआ और हमने 94 किये। चिकित्सा अधिकारी का आपके समय में एक भी पद का सृजन नहीं हुआ, हमने 2457 पदों का सृजन किया। नेत्र सहायकों के पद आपके समय में जीरा, हमारे समय में 47, लेब टेक्नीशियन के आपके समय में जीरो, हमारे समय में 96, मेडिकल रिलीफ सोसाइटियों का गठन आपके समय में केवल 328 और हमारे समय में 1825, नोट कर लीजिये।
इसी प्रकार से चिकित्सा सुविधा सहायता की बात सुन लीजिये। मुख्य मंत्री रक्षा सहायता कोष से व्यक्तियों को चिकित्सा सुविधा आपके समय में पांच साल में 3090 और हमारे समय में 3594, मुख्य मंत्री सहायता कोष से लाभान्वित व्यक्तियों की संख्या आपके समय में पांच साल में 5970 और हमारे तीन साल में 7041 की संख्या रही। हर चीज में हम आपसे अव्वल हैं।
इसी प्रकार से बी. पी. एल. परिवारों को नि:शुल्क सहायता आपके समय में 28 लाख 67 हजार को दी और हमारे समय में 38 लाख को दी। राज्य में ग्रामीण एवं गरीब तबके के रोगियों तथा आपातकालीन मरीजों के लिए दवाइयां आपके समय में 78 करोड़ पांच साल में और हमारे तीन साल में 71 करोड़। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर टेलिफोनिक सुविधा आपके समय में जीरा और हमने 1488 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को दूरभाष की सुविधा से जोड़ा।
इसी प्रकार से आयुर्वेद का मामला ले लीजिये। नये औषधालय आपके समय में जीरो खोले गये और हमारे समय में 114 खोले गये। होम्योपैथिक औषधालय आपके समय में जीरो, हमारे समय में 14, स्पेशियलिटी क्लिनिक की स्थापना आपके समय में जीरो, हमारे समय में दो। एक छत के नीचे सभी प्रकार की चिकित्सा सुविधाएं आपके समय में जीरो और हमारे समय में 255 की गईं। माननीय सभापति महोदय, मैं आपके बताना चाहूंगा कि ग्रामीण क्षेत्र के औषधालयों में औषधियों की आपूर्ति के लिए आपने एक करोड़ रुपया खर्च किया और हमारे समय में 13.03 करोड़ रुपये का खर्चा हुआ।
श्री घनश्याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): आपके समय में रुपया जाता कहां था? यह तो बता दो।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): क्या पता कहां जाता था। इसी प्रकार से आपके समय में ‘ब’ श्रेणी से ‘अ’ श्रेणी में क्रमोन्नत हास्पिटल की संख्या जीरो और हमारे समय में 22 रही।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): तिवाड़ी जी, वो ही बता सकते हैं जो थे। (व्यवधान)
श्री सभापति: माननीय सदस्य।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): सुनो। इसी प्रकार से आयुर्वेदिक चिकित्सकों की नियुक्तियों का सवाल है, आपके समय में पांच साल में 142 आयुर्वेदिक चिकित्सकों की नियुक्ति की गई और हमारे तीन साल में, नेता प्रतिपक्ष, 357 आयुर्वेदिक चिकित्सकों की नियुक्ति की गई। इसी प्रकार से नये प्रशिक्षण केन्द्र आपके समय में जीरो प्रारम्भ किये और हमारे समय में 23 प्रारम्भ किये। आयुर्वेदिक कॉलेज आपके समय में एक भी नहीं खोला गया और हमारे समय में दो खोले गये। होम्योपैथिक कॉलेज आपके समय में जीरो, हमारे समय में पांच खोले गये। यूनानी कॉलेज आपके समय में जीरो, हमारे समय में दो और नर्सिंग प्रशिक्षण केन्द्र आपके समय में जीरो और हमारे समय में 14 खोले गये।
माननीय सभापति महोदय, इतना ही नहीं, चिकित्साकर्मियों के लिए आवास का जहां तक सवाल है, हमने चिकित्सा अधिकारियों के 818 आवासों का निर्माण किया, नर्सिंगकर्मियों के लिए 840 आवासों का निर्माण किया, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए 82 आवासों का निर्माण किया, यानि हमने कुल 1840 आवासों का निर्माण किया और आपके समय में बिल्कुल जीरो, एक भी आवास का निर्माण नहीं हुआ।
इसी प्रकार से स्वास्थ्य सूचकांकों का सवाल है, शिशु मृत्यु दर 75 प्रति हजार से घटकर हमारे समय में 67 प्रति हजार हुई यानि 10.67 की कमी की गई। मातृ मृत्यु दर 677 प्रति लाख थी आपके समय में और हमने उसको घटकर के 445 प्रति लाख हमारे राज में की यानि 34 प्रतिशत की कमी की। जन्म दर आपके समय में 30.4 थी और हमारे समय में केवल 29 प्रति हजार यानि 4.29 की हमने इसमें कमी की। मृत्यु दर आपके समय में 7.6 थी और वह आज 7 हो गई यानि राष्ट्रीय औसत से भी कम है, इसमें 7.89 प्रतिशत की कमी की है।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): ये पेपर टेबल पर रख दो, बताने की जरूरत नहीं है।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): मैं बता रहा हूं, आप सुनिये। बताने की कैसे जरूरत नहीं है, निश्चित रूप से जरूरत है।
माननीय सभापति महोदय, इतना ही नहीं, राजस्थान के इतिहास में पहली बार कई सालों से मांग की जा रही थी कि राजस्थान में मेडिकल विश्वविद्यालय की स्थापना होनी चाहिए। इनके राज में मेडिकल विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं हुई और हमारा राज आने के बाद हमारे राज में मेडिकल विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): ये किनको कह रहे हो?
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): अब आप तो सुनो साहब। आप बुजुर्ग आदमी हो, आपको क्या कहूं, आपका मैं आदर करता हूं। कृपया टोका-टाकी न करें।
श्री घनश्याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): कालीचरण जी, टोका-टाकी होती है वह वृद्धावस्था में ज्यादा होती है इस बात का ध्यान कर लेना आप।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): इतना ही नहीं, इस बार राजस्थान के इतिहास में पहली बार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं को सामान्य जनता तक ले जाने के लिए 1 दिसम्बर से 31 दिसम्बर तक हमने पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य चेतना अभियान चलाया और इस स्वास्थ्य चेतना अभियान में 9205 कैम्पों का आयोजन किया, 53 लाख 21 हजार लोगों ने इस अभियान में भाग लिया और 31 लाख 5 हजार लोग इससे लाभान्वित हुए और 2 लाख 85 हजार लोगों की इस अभियान के दौरान नि:शुल्क जांच की गई।
इसी प्रकार मैं हमारी मुख्य मंत्री जी और स्वास्थ्य मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने यह जो 2007-08 का बजट पेश किया उसमें भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं स्वास्थ्य और चिकित्सा से सम्बन्धित की गईं। इस वर्ष 365 संस्थाओं में डाक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ, उपकरण और आवासीय सुविधाओं की व्यवस्था की है और 24 घंटे खोले जाने की व्यवस्था की जाएगी। बड़े शहरों में ओल्ड-एज होम की स्थापना की जाएगी। 7502 ए एन एम, जी एन एम की नियुक्तियों की घोषणा की गई है। प्रदेश में हास्पिटल्स में मरीजों को लाने-ले जाने के लिए 100 एम्बुलेंसेज की व्यवस्था इस साल में की जाएगी। प्रदेश में ऐसे गांव जहां चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है वहां मोबाइल मेडिकल यूनिट द्वारा चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सभी संभागीय केन्द्रों पर मोबाइल सर्जिकल यूनिट की घोषणा की गई है। 130 उप स्वास्थ्य केन्द्र खोले जाएंगे, 30 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खोले जाने की घोषणा, 15 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में क्रमोन्नत किये जाने की घोषणा की है। पांच जिला स्तरीय चिकित्सालयों और 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर निजी दानदाताओं के सहयोग से खोलकर शैय्याओं में बढ़ोतरी किये जाने की बात की गई है। पांच जिलों हनुमानगढ़, राजसमंद, दौसा, बारां, धौलपुर में ए एन एम प्रशिक्षण कॉलेज खोलने की घोषणा, पैरा मेडिकल काउन्सिल के गठन की घोषणा, हास्पिटल के पुनर्निर्माण एवं जीर्णोद्धार के लिए 60 करोड़ रुपये का प्रावधान, राष्ट्रीय राजमार्गों पर दो ट्रोमा हास्पिटल की स्थापना की घोषणा की गई है। सभापति महोदय, मैं यह कहूं, इतना काम, इतनी घोषणाएं की गई हैं कि यदि मैं पूरी का वर्णन करूं तो पूरी रात हो जाएगी।
माननीय सभापति महोदय, इसी प्रकार जयपुर में स्थित चारों सैटेलाइट हास्पिटल को सुदृढ़ किये जाने का काम भी राज्य सरकार इस साल हाथ में लेगी। मानसरोवर में एक नये हास्पिटल का निर्माण किया जाएगा और बॉम्बे हास्पिटल के सहयोग से उसका संचालन किया जाएगा। इस बजट में 30 आयुर्वेदिक, 30 होम्योपैथिक और 10 यूनानी हास्पिटल खोले जाने की भी बात की गई है। माननीय सभापति महोदय, मैं यह दावे के साथ कह सकता हूं कि मुख्य मंत्री जी ने जो घोषणाएं की हैं स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में, वह नये आयाम स्थापित करेंगे और प्रदेश के नागरिकों को सस्ता और सुलभ इलाज उपलब्ध होगा, निश्चित रूप से इसमें ये बजट के प्रावधान सहायता प्रदान करेंगे।
माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से राज्य सरकार से कुछ जो व्यावहारिक कठिनाइयां चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आती हैं उनके बारे में भी कुछ जिक्र करना चाहूंगा।
vkj/akt/16032007/1400/2c
चाहे सरकार
भारतीय जनता पार्टी
की हो और चाहे अन्य
किसी पार्टी की
हो, हर सरकार की
यह मंशा रहती है
कि राजस्थान का
80 प्रतिशत व्यक्ति
गांवों में निवास
करता है इसलिए
गांवों में अधिक
से अधिक अस्पताल
खोले जायें, अधिक
से अधिक डाक्टर्स
वहां भेजे जायें
और अधिक से अधिक
ग्रामीण जनता को
चिकित्सा की सुविधा
मुहैया हो और इसी
बात को ध्यान
में रखकर इस बार
भी राज्य सरकार
ने कई अस्पताल
गांवों में खोले
जाने की घोषणा
की है परन्तु
मैं कहना चाहूंगा
कि हर सरकार सैकड़ों
की संख्या में
ग्रामीण क्षेत्रों
में अस्पताल खोलती
है, डाक्टर्स
की वहां नियुक्ति
करती है पर डाक्टर्स
जिस दिन उसकी ग्रामीण
क्षेत्र में नियुक्ति
होती है, उसी दिन
से वह शहरी क्षेत्र
में किस प्रकार
से वह अपना ट्रांसफर
करवाये, इस जुगाड़
में लग जाता है।
इतना ही नहीं, माननीय
सभापति महोदय,
यह भी देखने में
आया है कि वह केवल
महीने में एक दिन
गांव के अन्दर
जाता है और अपने
अधीनस्थ कर्मचारी
को हर तारीख की
अलग-अलग सी.एल. दे
देता है और जब कोई
यहां से इंसपैक्टर
जाता है या कोई
बड़ा अधिकारी जाता
है तो उस दिन की
सी.एल. वह अधीनस्थ
कर्मचारी उनके
सामने रख देता
है और कह देता है
कि डाक्टर साहब
छुट्टी पर है।
इस पर कोई एक्शन
नहीं होता है तो
ग्रामीण क्षेत्रों
में डाक्टर्स
अधिक से अधिक संख्या
में जायें, इसके
लिए मैं कुछ सुझाव
माननीय स्वास्थ्य
मंत्रीजी को देना
चाहूंगा। मेरे
दो-तीन सुझाव हैं।
पहला सुझाव है,
हर अस्पताल में
एक रजिस्टर मेन्टेन
किया जाये और उसमें
डाक्टर रोज अटेंडेंस
करे और जिस दिन
वह छुट्टी पर जाता
है, उसके पहले दिन
वह सी.एल. के लिए
उसमें नोट लगा
दे कि कल मैं छुट्टी
पर रहूंगा। यदि
यह हमने किया तो
वह एप्लीकेशन
पेश कर देता है,
वह नहीं हो पायेगा।
इसी प्रकार
से जब डाक्टर्स
से बात होती है
तो वह यह कह देता
है कि हमें गांवों
में जाने में कोई
तकलीफ नहीं है
परन्तु गांवों
में कोई रेजिडेंशियल
फेसेलिटी नहीं
है इसलिए मैं स्वास्थ्य
मंत्रीजी से यह
कहना चाहूंगा कि
आप जहां पर भी गांव
में अस्पताल खोले
जाने की घोषणा
करें, उसके साथ
ही साथ यह भी प्रबन्ध
करें कि वहां अस्पताल
के साथ-साथ उस डाक्टर्स
के रहने के लिए
रेजिडेंशियल फेसेलिटी
भी हो। यदि हम रेजिडेंशियल
फेसेलिटी औषधालय
में मुहैया करायेंगे
तो मुझे लगता है
कि डाक्टर वहां
जाकर रहने की कोशिश
करेगा।
इसी प्रकार
से आज यह व्यवस्था
है कि शहरों में
डाक्टर्स लगते
हैं उनको भत्ता
मिलता है। मैं
कहना चाहूंगा कि
डाक्टर गांवों
की ओर आकर्षित
हो, इसके लिए आप
इस प्रकार से व्यवस्था
करं कि जो शहर में
डाक्टर अपोइंट
होगा, उसको कोई
भत्ता नहीं और
जो गांवों में
जायेगा, उसको ग्रामीण
भत्ता देने की
यदि हम घोषणा करेंगे
तो निश्चित रूप
से डाक्टर गांवों
में जाने के लिए
आकर्षित होगा।
और एक बात मैं और
कहना चाहूंगा कि
डाक्टर जो गांवों
में जाते हैं, उनको
यह चिंता रहती
है कि उनके बच्चे,
अच्छी स्कूल
क्योंकि गांवों
में नहीं होती
है, उनके बच्चे
कैसे पढ़ेंगे तो
इसके लिए मैं यह
भी कहना चाहूंगा,
हर संभागीय केन्द्र
पर कम से कम डाक्टर्स
और जो मेडिकल डिपार्टमेंट
का स्टाफ है, उनके
लिए यदि हम होस्टल्स
की व्यवस्था
करें, जिन डाक्टर्स
की नियुक्ति गांवों
में हुई हैं उनके
लिए, उनके बच्चे
होस्टल्स में
रहकर अपनी पढा़ई
कर सकें तो निश्चित
रूप से इसमें इजाफा
होगा और गांवों
की ओर डाक्टर्स
आकर्षित होंगे।
माननीय
सभापति महोदय,
एक दूसरी समस्या
जो बड़ा गम्भीर
रूप प्रदेश में
धारण किये हुए
है, अल्ट्रासाउण्ड
के माध्यम से
जो लिंग परीक्षण
किया जा रहा है,
आज पूरे प्रदेश
में लगभग 1000 मशीनें
इस प्रकार से लगी
हुई हैं और जिस
तरीके से लड़के
और लड़कियों का
अनुपात निरन्तर
कम होता जा रहा
है, 1991 में जहां 1000 लड़कों
पर 909 लड़कियां थीं
राजस्थान में,
आज उनकी संख्या
घटकर 1000 पर 886 हो गई।
सोनोग्राफी और
अल्ट्रासाउण्ड
मशीनों के माध्यम
से यदि पता लग जाता
है कि लड़की है
तो उसकी भ्रूण
हत्या कर दी जाती
है तो मैं यह कहना
चाहूंगा कि सरकार
को गम्भीरता से
इस बात के लिए प्रयास
करना चाहिए कि
कड़ा कानून इसके
लिए बनाया जाना
चाहिए और जो दोषी
डाक्टर्स इसमें
मिले हुए हैं, उनके
साथ कोई रियायत
नहीं हो। अभी पिछले
दिनों सरकार ने
कार्यवाही की थी
और 63 डाक्टर्स
इसमें दोषी पाये
गये थे। यदि मैं
गलत होऊं तो मुझे
करेक्ट करेंगे,
परन्तु अभी तक
उन 63 डाक्टर्स
के खिलाफ कोई किसी
प्रकार की कार्यवाही
नहीं की गई कि जिससे
कि और डाक्टर्स
में इसका मैसेज
जाये। इसलिए मैं
कहना चाहूंगा
...
(समय
समाप्ति सूचक घंटी)
अभी तो मैंने
शुरू किया है, शुरू-शुरू
के वक्ता को तो
कम से कम आधा घंटा
देओ साहब। तो सभापति
महोदय, मैं यह कहना
चाहूंगा कि कड़े
से कड़ा दण्ड
इस प्रकार के भ्रूण
हत्यारों को दिया
जाना चाहिए चाहे
वह कितना ही एप्रोच
वाला व्यक्ति
हो, यदि हम कड़े
कानून के द्वारा
इसको रोकने का
प्रयास नहीं करेंगे
तो यह नहीं रूकेगा।
एक बात और
कहना चाहूंगा माननीय
सभापति महोदय,
जब सड़क दुर्घटनाओं
में कोई व्यक्ति
की मौत होती है
तो उसके लिए पोस्टमार्टम
अनिवार्य होता
है। अब एक तो किसी
व्यक्ति की मौत
हुई और उस पर उसका
पोस्टमार्टम
अनिवार्य हो। सड़क
दुर्घटना में जिसकी
मौत हो गई, उसके
पोस्टमार्टम
की अनिवार्यता
को समाप्त किया
जाना चाहिए। इस
प्रकार से कानून
में संशोधन किया
जाना चाहिए कि
सीआर.पी.सी. की धारा
174 के अन्तर्गत,
जो पोस्टमार्टम
की अनिवार्यता
की धारा है, उसको
हटाया जाना चाहिए
और सड़क दुर्घटना
में जो लोग मरते
हैं, उनके पोस्टमार्टम
की अनिवार्यता
यदि समाप्त होगी
तो इससे कई लोगों
को राहत मिलेगी।
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): माननीय
सभापति महोदय,
इसमें एक निवेदन
है, जौहरी बाजार
से आने वाले माननीय
सदस्य जो कह रहे
हैं, वह सही कह रहे
हैं लेकिन आलरेडी
यह प्रावधान है
और लॉ सेक्रेटरी
के यहां से चिट्ठी
भी चली गई है कि
दुर्घटना में जो
मृत्यु होती है
और अगर वह नहीं
चाहते हैं तो पोस्टमार्टम
नहीं कराया जाये
लेकिन पुलिस इस
बात को नहीं मानती
है इसलिए इसको
कड़ाई से लागू
कराने की बात है।
आज ही एस.एम.एस. में
यह बात आई कि पुलिस
नहीं मानती है
जबकि डाक्टर्स
सहमत हैं, परिवार
सहमत है और नियम
यह कहता है लेकिन
यहां की जो पुलिस
है, वह अपने चक्कर
में कि वह चक्कर
में नहीं पड़ती,
जांच कैसे करेंगे
कि यह कैसे दुर्घटना
हुई, किसकी गलती
रही इसलिए पोस्टमार्टम
कराती है, इसलिए
इसकी व्यवस्था
होनी चाहिए। माननीय
सदस्य आम आदमी
की पीड़ा कह रहे
हैं।
श्री बंशीलाल
खटीक (राजसमन्द):
माननीय सभापति
महोदय, मैं एक सुझाव
देना चाहूंगा,
यदि वह एक्सीडेंट
किस प्रकार से
हुआ...
श्री सभापति:
बिराजिये। आपका
नम्बर आयेगा,
तब आप बोल लेना।
अब आप बिराजिये।
श्री बंशीलाल
खटीक (राजसमन्द):
...उसकी जांच करना
आवश्यक होगा कि
किसी के द्वारा
या किसी ने कोई
कुछ खिलाकर मारकर
डाल तो नहीं गया,
कोई जान-बूझकर
एक्सीडेंट तो
नहीं किया गया।
इसमें यह पोस्टमार्टम
तो आवश्यक रहना
चाहिए। उसको कोई
कष्ट नहीं हो,
परिवार को कोई
कष्ट नहीं हो।
यह जब तक पूरी जांच
नहीं हो जाये, तब
तक यह पोस्टमार्टम
तो होना आवश्यक
है।
श्री सभापति:
ठीक है, आप बिराजिये।
श्री कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी बाजार):
पोस्टमार्टम
की अनिवार्यता
समाप्त होनी चाहिए
क्योंकि इसमें
किस कारण से मौत
हुई, इसको बताये
जाने की जरूरत
नहीं पड़ती। उसका
कोई कारण नहीं
है इसलिए पोस्टमार्टम,
जिसकी एक्सीडेंट
से मौत हो, उनके
लिए पोस्टमार्टम
की अनिवार्यता
बिलकुल समाप्त
कर दी जानी चाहिए।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
नहीं, यह एक्सीडेंटल
क्लेम में एक
मेजर एविडेंस है,
इसलिए कोई वैसे
ही नहीं होगी, जब
तक कानून के प्रावधानों
में दुर्घटनाओं
के मामले में परिवर्तन
नहीं करोगे, वैसे
ही नहीं होगी यह।
श्री कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी बाजार):
इसलिए मैं कह रहा
हूं कि कानून में
संशोधन किया जाये,
यह मैं कहना चाहता
हूं।
माननीय
सभापति महोदय,
पूरे प्रदेश में
और विशेषकर बड़े
शहरों में निजी
अस्पताल चलते
हैं, प्राइवेट
अस्पताल हजारों
की तादाद में पूरे
प्रदेश में मिल
जायेंगे और इसी
प्रकार से प्राइवेट
डायग्नोस्टिक
सेन्टर्स भी आज
जगह-जगह खुल रहे
हैं परन्तु इनकी
फीस कि ये कितनी
फीस गरीब जनता
से वसूल कर रहे
हैं, इस पर सरकार
का कोई अंकुश नहीं
है। मैं माननीय
सभापति महोदय,
आपके माध्यम से
माननीय स्वास्थ्य
मंत्रीजी से यह
निवेदन करना चाहूंगा
कि जिस प्रकार
के प्राइवेट अस्पताल
हैं, जो प्राइवेट
डायग्नोस्टिक
सेन्टर्स हैं,
उनके बारे में
एक अलग से कानून
बनाया जाये कि
उनकी फीस कितनी
हो, कितनी फीस वह
मरीजों से लें,
इस प्रकार का स्पष्ट
प्रावधान होना
चाहिए जिससे कि
खुली लूट इन लोगों
ने मचा रखी है, उससे
गरीब जनता को निजात
मिल सके।
माननीय
सभापति महोदय,
एक बात और मैं कहना
चाहूगा, जयपुर
शहर में एक डिस्ट्रिक्ट
अस्पताल है, कांवटिया
अस्पताल है और
वह जयपुर के उत्तर
में शास्त्री
नगर में स्थित
है। आज जिस तरीके
से जयपुर शहर की
पापुलेशन बढ रही
है, यहां इस बात
की आवश्यकता है
कि एक डिस्ट्रिक्ट
अस्पताल जयपुर
के दक्षिणी क्षेत्र
में और हो। मेरे
इलाके में जयपुर
अस्पताल बना हुआ
है। अभी वह सेटेलाइट
अस्पताल है। वहां
अभी जो वर्तमान
स्थिति है। 7.5 एकड़
जमीन पर यह अस्पताल
बना हुआ है और इसमें
10594.47 वर्गमीटर कंस्ट्रक्टेड
एरिया है.....
Jkj/akt/14.10/2d/16.3.2007
जिसमें
दो डाक्टर्स के
क्वार्टर्स और
दो स्टाफ क्वार्टर्स
बने हुए हैं, 27 डाक्टर्स
इस समय वहां पोस्टेड
हैं और 59 नर्सिंग
और अदर पैरा मेडिकल
वर्कर्स वहां पर
पोस्टेड हैं और
वहां इस समय जनरल
सर्जरी, मेडिसिन,
गायनोकॉलॉजी, आप्थामोलॉजी,
आर्थोपेडिक्स,
पीडिएट्रिक्स,
एनेस्थेसेसिया,
पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी
और ई.एन.टी. का काम
हो रहा है। माननीय सभापति
महोदय, वहां के
यदि पेशेंट्स की
स्थिति देखी जाय,
रोगियों की, तो
2004 में जहां टोटल
1 लाख 47 हजार 792 रोगी
वहां पर आये उसकी
संख्या बढ़कर
2005 में 1 लाख 52 हजार
562 हो गई और 2006 में यह
बढ़ कर 1 लाख 71 हजार
497 हो गई।
इसी प्रकार से
वहां यदि इनडोर
पेशेंट्स की स्थिति
देखें तो 2004 में जहां
3521 थे, 2005 में 3584 हुए और
2006 में वह 5638 हुए। माननीय सभापति
महोदय, मेरे कहने
का मतलब यह है कि
वहां हर चीज में
वृध्दि हुई है। आपरेशंस
का जहां तक सवाल
है, 2004 में जहां 2847 आपरेशन
हुए, 2005 में 3733 और 2006 में
9918 आपरेशन वहां पर
किये गये। जिस तरीके
से जनसंख्या बढ़
रही है, यदि इसे
डिस्ट्रिक्ट
हास्पीटल बनाया
जाय तो दक्षिण
क्षेत्र की जनता
को इससे सुविधा
मिलेगी और एक बात
मैं और कहना चाहूंगा
कि जयपुरियाजी
ने, जिन्होंने
इस हास्पीटल का
निर्माण कराया
था उनसे भी मेरी
बात हुई है, उनका
कहना है कि यदि
सरकार इसको डिस्ट्रिक्ट
हास्पीटल बनाती
है तो जितनी उसके
लिए आवश्यकता
होगी भवन बनाने
की, वह भवन अपने
पैसे से बनाकर
सरकार को देने
के लिए तैयार हैं,
आपके ऊपर कोई फाइनेंशियल
बर्डन नहीं आयेगी। इसलिए मैं
पुरजोर शब्दों
में यह मांग करना
चाहता हूं कि जयपुर
शहर की बढ़ती हुई
जनसंख्या को देखते
हुए जिस प्रकार
जयपुर के उत्तर
में कांवटिया हास्पीटल
है उसी प्रकार
से जयपुर के दक्षिण
में जयपुरिया हास्पीटल
को डिस्ट्रिक्ट
हास्पीटल के रूप
में क्रमोन्नत
किया जाय। माननीय सभापति
महोदय, इसके साथ-साथ
मैं दो-तीन मेरे
क्षेत्र की जो
समस्याएं हैं
उनके बारे में
ध्यान आकर्षित
करना चाहूंगा,
आप घंटी मत बजायें,
मैं ज्यादा नहीं
बोलूंगा।
श्री सभापति:
अब आधा घंटे से
ज्यादा हो गया
है माननीय सदस्य। करीब पचास
माननीय सदस्य
बोलने वाले हैं।
श्री कालीचरण
सराफ: एक-दो मिनट। मालवीय नगर
सेक्टर 6 में हाउसिंग
बोर्ड ने डिस्पेंसरी
तो बनाकर दे दी
है और उसमें अभी
डाक्टर्स भी लगा
रखे हैं परंतु
अभी वह डेपुटेशन
पर हैं, वह डिस्पेंसरी
स्वीकृत नहीं
है इसलिए मैं स्वास्थ्य
मंत्रीजी से यह
भी कहना चाहूंगा
कि इस साल के बजट
में मालवीय नगर
की डिस्पेंसरी
6 नम्बर की, उसको
भी शामिल कियका
जाय। इसी
प्रकार से मेरे
क्षेत्र में माडल
टाउन और झालाना
बाईजी की कोठी
में लेडीज डाक्टर
नहीं है डिस्पेंसरी
में, उसकी सुविधा,
इस प्रकार की व्यवस्था
भी निश्चित रूप
से करनी चाहिए। दो सुझाव
मैं और देना चाहूंगा
कि आज पूरे प्रदेश
में डाक्टर्स,
कम्पाउण्डर्स,
नर्सेज, रेडियोग्राफर,
लेब असिस्टेंट,
यह पिछली सरकार
के समय से ही कांट्रेक्ट
पर चल रहे हैं, वह
अपना मन लगाकर
काम नहीं कर सकते। मेरी मांग
है कि इस प्रकार
जो कांट्रेक्ट
पर पूरे प्रदेश
में डाक्टर्स,
कम्पाउण्डर्स,
नर्सेज, रेडियोग्राफर,
लेब असिस्टेंट्स
लगे हुए हैं उनको
नियमित करने की
कार्यवाही भी निश्चित
रूप से प्रारम्भ
की जानी चाहिए। एक बात मैं
और कहना चाहूंगा
कि सरकारी हास्पीटल्स
में कापरेटिव की
दुकानें नहीं होने
के कारण सरकारी
कर्मचारियों को
बहुत दिक्कत होती
है, उनको दवाइयां
समय पर नहीं मिल
पाती हैं, इसलिए
मैं यह भी मांग
करना चाहूंगा कि
इस बात को देखे
सरकार और इस प्रकार
की व्यवस्था
करे कि प्रदेश
के हर हास्पीटल
में कापरेटिव की
दुकान निश्चित
रूप से हो। इस प्रकार
की यदि व्यवस्था
की तो निश्चित
रूप से उसका फायदा
भी प्रदेश की जनता
को मिलेगा। आपने
मुझे समय दिया
उसके लिए बहुत-बहुत
धन्यवाद। जय भारत।
श्री सभापति:
धन्यवाद।
श्री संयम
लोढ़ा: ऑन ए प्वाइंट
आफ आर्डर, सभापति
महोदय।
सभापति महोदय,
मैं आपके माध्यम
से निवेदन करना
चाहता हूं कि जयपुर
की कलेक्ट्री
में जो शराब के
दौर चले थे और जो
नृत्यांगनाओं
के नृत्य हुए
थे और यह मामला
विधान सभा में
हमारी और से उठाया
गया था, तब माननीय
गृह मंत्रीजी ने
यह आश्वासन दिया
था कि सात दिन के
भीतर संभागीय आयुक्त
से जांच करवाकर
रिपोर्ट पेश कर
दी जायेगी। माननीय
सभापति महोदय,
दस दिन हो गये उस
बात को और संभागीय
आयुक्त ने जांच
रिपोर्ट भी दे
दी है, मैं आपसे
निवेदन करना चाहता
हूं कि आप सरकार
को निर्देश प्रदान
करें कि वह रिपोर्ट
को टेबल करे।
श्री सभापति:
माननीय गृह मंत्रीजी
आ जायेंगे अभी,
बात करेंगे। मानीय श्री
मोहनलाल गुप्ता
(अनुपस्थित)। माननीय
श्री नवरतन राजौरिया
(अनुपस्थित) । माननीय
श्री बीरू सिंह।
डा.सी.पी.जोशी:
माननीय सभापतिजी,
पहले कालीचरणजी
को बुला दिया इसलिए
मोहनलालजी एबसेंट
रह गये।
प्रो.बीरूसिंह
राठौड़(बनीपार्क):
माननीय सभापति
महोदय, मैं मांग
संख्या 26 पर मेरे
विचार व्यक्त
करना चाहता हूं। सबसे पहले
तो मैं आपको यह
बताना चाहूंगा
कि विधान सभा क्षेत्र
बनीपार्क राजस्थान
का सबसे बड़ा विधान
सभा क्षेत्र है
जिसमें 5 लाख 8 हजार
मतदाता, नगर निगम
के 70 में से 20 वार्ड,
लगभग 10 हजार कालोनियां,
40 कच्ची बस्तियां,
12 गांव और 40 ढाणियां
हैं। इतने
बड़े विधान सभा
क्षेत्र में, इसकी
स्थापना 1967 के अंदर
हुई थी तो आज इस
सदन के माध्यम
से अब तक यहां पर
जितने भी विधायक
रहे हैं और उन्होंने
चिकित्सा सुविधा
बढ़ाने के लिए
जितने-जितने प्रयास
किये हैं उन सभी
का मैं आभार व्यक्त
करना चाहता हूं। अधिकांश
विधायक यहां पर
कांग्रेस पार्टी
के रहे हैं, बीजेपी
से यहां पर अब तक
केवल दो ही विधायक
रहे हैं। सबसे पहले
इस सदन के माध्यम
से मेरे जो महाध्यक्ष
हैं माननीय घनश्यामजी
तिवाड़ी, इनका
मैं विशेष तौर
से आभार व्यक्त
करना चाहूंगा जिन्होंने
मेरे विधान सभा
क्षेत्र में महिला
चिकित्सालय, सांगानेरी
गेट, जे.के.लॉन अस्पताल,
एस.एम.एस. अस्पताल
और जयपुरिया, यह
जो चार....
श्री सभापति:
एक मिनट माननीय
सदस्य। गृह मंत्रीजी
कुछ कहना चाहते
हैं।
श्री गुलाब
चन्द कटारिया
(गृह मंत्री): सभापति
महोदय, माननीय
सदस्य ने जो कलेक्ट्री
के परिसर की बात
कही, वह रिपोर्ट
प्राप्त हो गई,
मैं लगातार तीन
दिन से हाउस में
इस तैयारी के साथ
आ रहा हूं, जब भी
आप समय तय करें,
मैं उसके बारे
में स्टेटमेंट
सदन में देने को
तैयार हूं।
डा.सी.पी.जोशी:
रिपोर्ट ले कर
दें, जो पढ़ लेंगे,
फिर पूछ लेंगे।
जब रिपोर्ट आपके
पास आ ही गई है तो
सदन में ले कर लें,
उसको पढ़ लेंगे।
श्री गुलाब
चन्द कटारिया:
सामान्यत: आपने
भी, इतने साल देखा
है हमने, रिपोर्ट
का परपज यह है कि
उसमें किस का दोष
बनता है, किसका
नहीं, उस पर सरकार
का क्या वह है
उसको रखने का, मैं
सोचता हूं उसके
एक-एक बिंदु को
लेकर के यहां कोई
उसका पोस्टमार्टम
करने के लिए क्या
किसी का दोष है
कि नहीं, इस बात
को निर्धारित करने
के लिए संभागीय
आयुक्त को तय
किया और उसके आधार
पर जो भी स्टेटमेंट
है, मैं रख दूंगा,
उसमें आप और कुछ
पूछना चाहेंगे
तो मैं जरूर उसमें
से बात बताऊंगा,
बाकी यहां रिपोर्ट
रख करके उसके एक-एक
बिंदु को लेकर
के उस पर चर्चा
करना, मैं सोचता
हूं कि जिस भावना
से अपन ने काम किया,
वह उचित नहीं होगा। आप चाहेंगे
तो मैं रख दूंगा,
मुझे कोई एतराज
नहीं, लेकिन फिर
उसमें बहुत डिटेल
कई चीजें हैं उनके
बारे में कई प्रकार
के सवालों पर घंटों
अपन उसमें चलेंगे,
जिस परपज से हमने
जांच कराई उसमें
दोषी के खिलाफ
अगर कोई एक्शन
हो जाता है और हम
लोग संतुष्ट होते
हैं तो ठीक है। उसमें कोई
सवाल आपके खड़े
होंगे तो मैं उसके
अनुसार जवाब देने
को तैयार हूं, आप
जो भी समय तय करें,
मैं उस समय दे दूंगा।
श्री सभापति:
चार बजे दे दें।
श्री गुलाब
चन्द कटारिया:
चार बजे।
श्री सभापति:
ठीक है।
मोहम्मद
माहिर आजाद(नगर):
माननीय सभापति
महोदय, प्वाइंट
आफ आर्डर। माननीय गृह
मंत्रीजी से संबंधित
है, मैं एक मिनट
में निवेदन कर
रहा हूं।
श्री सभापति:
अब ऐसा है माननीय
सदस्य....
मोहम्मद
माहिर आजाद: जयपुर
के शास्त्री नगर
कब्रिस्तान बचाओ
कमेटी के लोग आठ
दिन से धरने पर
बैठे हैं, पहले
भी वहां छह-सात
लोगों की मृत्यु
हो गई थी, वह खाली
कराना चाहते हैं
कब्रिस्तान अतिक्रमियों
से, गृह मंत्रीजी
से वह मिले थे, माननीय
गृह मंत्रीजी ने
जिला प्रशासन को
निर्देश भी दे
दिये थे लेकिन...
श्री सभापति:
माननीय सदस्य,
यह मामला दूसरा
है।
मोहम्मद
माहिर आजाद: मैं
वही आपके माध्यम
से निवेदन कर रहा
हूं कि वह यहां
आये हुए हैं, चाहे
गृह मंत्रीजी अपने
कक्ष में उनसे
बात कर लें, इसका
समाधान हो, पहले
जैसी अनहोनी घटना
नहीं हो जाय, पहले
छह-सात लोगों की
वहां पर पुलिस
कीगोली से मृत्यु
हुई थी, जस्टिस
राजेन्द्र सक्सेना
आयोग बना, उसने
भी अपनी रिपोर्ट
दी है, आज मुर्दों
के रहने की जगह
जिंदा लोग रह रहे
हैं, आपसे मिले
भी हैं, आपने निर्देश
भी दिये हैं लेकिन
कोई कार्यवाही
नहीं हो रही है
आज आठ दिन होने
के बावजूद भी, यह
स्थिति बनी हुई
है।
श्री सभापति:
माननीय सदस्य।
माननीय सदस्य।
मोहम्मद
माहिर आजाद: दूसरा
एक प्रतिनिधि मण्डल
तोपखाना हजूरी
में जो बिजली गिरने
से एक व्यक्ति
की मृत्यु हुई
थी, वह भी आये हैं,
तो सरकार को चाहिए
कि उसकी जांच करा
कर मुआवजा जो आपको
देना है, वह दें,
आप खुद बड़े संवेदनशील
हैं...
श्री सभापति:
जानकारी में आ
गया गृह मंत्रीजी
के, अब आप विराजें।
मोहम्मद
माहिर आजाद: मैं
तो गृह मंत्रीजीसे
आपके माध्यम से
यही निवेदन कर
रहा हूं कि आपने
खुद ने जो निर्देश
दिये हैं, कम से
कम वह तो एग्जीक्यूट
हों। हमको कहने
की जरूरत ही नहीं
होती अगर यह स्थिति
होती तो।
श्री सभापति:
माननीय मंत्री
महोदय के जानकारी
में ला दिया आपने।
मोहम्मद
माहिर आजाद: सभापति
महोदय, आप स्वयं
जानते हैं, आपको
खुद को पता है कि
पहले किस तरीके
के हालात हुए थे
और कितने लोगों
की उसमें मृत्यु
हुई, कितने लोग
घायल हुए थे, मेरा
मकसद तो केवल इतना
सा ही है कि पुनरावृत्ति
ऐसी घटनाओं की
नहीं हो, समय रहते
हुए उसके ऊपर जिला
प्रशासन को और
पुलिस प्रशासन
को कार्यवाही करनी
चाहिए।
श्री सभापति:
ठीक है, कह दी आपने।
(व्यवधान)
श्री जुबेर
खान: गृह मंत्रीजी
इसमें सक्षम हैं,
कमीशन की जो रिकमण्डेशन
आई हैं, आपने स्वयं
ने स्वीकारा है
और उनको आप लागू
करवाइये, यह जो.....
Lpm/akt/1420/2e/16032007
शास्त्रीनगर
कब्रिस्तान है
जो जयपुर में है
इसके ऊपर जब गोलाबारी
हुई, गोली चली थी,
लोग मरे थे, सक्सेना
कमीशन बैठा उसने
रिपोर्ट दे दी
और मैं मानता हूं
कि आपकी जानकारी
है उसमें क्या
एक्शन लेना चाहिए
और सक्सेना कमीशन...
श्री
सभापति: अब आप बिराजे।
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
कमेटी ने जो रिपोर्ट
दी है, उसको आप लागू
कराइए।
डा. बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर):
सभापति महोदय,
इसमें एक चीज और
जो सदन में नहीं
आई है, मैं आपकी
आज्ञा से कहना
चाहूंगा..
प्रो.
बीरूसिंह राठौड़
(बनीपार्क): माननीय
सभापति महोदय,
ये बड़ी योजना
से जो नये विधायक
हैं उनकी भ्रूण
हत्या कर रहे
हैं ये लोग (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर): माननीय गृहमंत्रीजी
इसमें कोर्ट ने
भी (व्यवधान) कोर्ट
के डायरेक्शन
को आप फुलफिल कर
दें और जो कब्जे
वहां पर हैं, उनको
हटाकर के (व्यवधान)
और कब्रिस्तान
को अतिक्रमण से
बचाएं।
प्रो.
बीरूसिंह राठौड़
(बनीपार्क): माननीय
सभापति महोदय,
मैं पिछले तीन
साल से देख रहा
हूं कि बड़ी योजना
से जो नये विधायक
बोलते हैं, योजना
बनाकर के उनकी
भ्रूण हत्या करते
हैं ये लोग, यह उचित
बात नहीं है (व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
(व्यवधान) आपको
एन्क्रेज कर रहे
हैं आप बोलिए लेकिन
यह एक समस्या
ऐसी है लोग आये
हुए हैं (व्यवधान)
श्री
सभापति: अब आप बिराजे।
प्रो.
बीरूसिंह राठौड़
(बनीपार्क): जब मैं
बोलता हूं तब ही
आपको सारी बातें
याद क्यों आती
है, मेरी समझ में
नहीं आया (व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
जब गृहमंत्रीजी
थे नहीं, गृहमंत्रीजी
के आते ही हमने
अपनी बात उनको
कह दी (व्यवधान)
श्री
सभापति: अंकित
नहीं हो। माननीय
सदस्य, अंकित
नहीं हो।
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
000
प्रो.
बीरूसिंह राठौड़
(बनीपार्क): 000
श्री
सभापति: माननीय
सदस्य बीरूसिंहजी।
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
000
श्री
सभापति: मांग पर
चर्चा करे।
प्रो.
बीरूसिंह राठौड़
(बनीपार्क): 000
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
000
श्री
गुलाब चन्द कटारिया
(गृह मंत्री): इसमें
ऐसा है कि एकदम
तुरन्त मैं आपके
सामने सारा विषय
रख पाऊंगा यह तो
नहीं है, आपने विषय
मेरे सामने रखा
है, मैं उसकी आवश्यक
सामग्री को मंगाने
के बाद क्या उसमें
मुझे आपको जवाब
देना है, मैं तैयार
करके अगर आप चाहोगे
तो कल मैं उसके
बारे में आपको
बता सकता हूं (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
000
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): आप नियमों
में आइए ना, नियमों
और प्रक्रियाओं
के तहत आप नोटिस
देकर के आइए, यहां
थोड़े ही अचानक
पोइन्ट आफ आर्डर
में उसको उठा दिया
(व्यवधान)
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
000
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): सभापति
महोदय, यह सदन नियमों
और प्रक्रियाओं
में चलत है माननीय
सदस्य (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
000
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): यह कोई
तरीका थोड़े ही
हुआ (व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
000
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): नोटिस
देकर के आइए ना
(व्यवधान) पर आप
डिसक्शन ओपन नहीं
कर सकते, आप डिसक्शन
ओपन नहीं कर सकते,
यह थोड़े ही है
कि पोइन्ट आफ
आर्डर में उठा
दिया (व्यवधान)
एक सदस्य खड़े
हैं, दूसरे सदस्य
खड़े हो रहे हैं,
यह थोड़े ही होगा।
श्री
सभापति: ठीक है,
माननीय सदस्य।
प्रो.
बीरूसिंह राठौड़
(बनीपार्क): सभापति
महोदय, मैं आपसे
निवेदन कर रहा
था इस सदन के माध्यम
से मैं घनश्यामजी
तिवाड़ी, चिकित्सा
मंत्री दिगम्बरसिंहजी
और राजस्थान की
माननीय वसुंधरा
जी का, उनका विशेष
तौर से आभार व्यक्त
करना चाहूंगा कि
मेरे विधानसभा
क्षेत्र में स्थित
जो महिला चिकित्सालय
सांगानेरी गेट
है, जे.के.लोन अस्पताल
है, एस.एम.एस. और जयपुर
अस्पताल है 1967 से
लेकर 2003 तक बिलकुल
नाम मात्र के इन
अस्पताल में विकास
के काम हुए हैं
और पिछले तीन साल
में इन सभी के सहयोग
से एग्जेक्ट
तो मेरे पास आंकड़ा
नहीं है लगभग 300 करोड़
के काम स्टेट
गवर्नमेंट के द्वारा
इन चार अस्पताल
में कराये गये
हैं और आप किसी
भी एजेन्सी से
सर्वे करा ले तो
आज की तारीख में
जो चार अस्पताल
है उनका बिलकुल
काया-पलट हो गया
है। इसलिए विशेष
तौर से माननीय
मुख्यमंत्रीजी
और घनश्यामजी
तिवाड़ी का आभार
व्यक्त करना
चाहूंगा। इसके
अलावा विधानसभा
क्षेत्र बनीपार्क
में 22 डिसपेंसरी
हैं, 15 आयुर्वेदिक
चिकित्सालय है
और 8 हमारे हौम्योपैथिक
चिकित्सालय है।
मैं सरकार से निवेदन
करना चाहूंगा कि
यह जो अस्पताल
है इनमें कई प्रकार
की कमियां हैं,
अनेक प्रकार के
उपकरण यहां पर
नहीं है, अगर सरकार
इस नये बजट से जितने
भी डिसपेंसरीज
हैं इनके अंदर
भी नये उपकरण लगाए
जाए तो आसपास के
इलाके को इसके
अंदर फायदा हो
जाएगा और माननीय
घनश्यामजी तिवाड़ी
का मैं पुन: आभार
व्यक्त करना
चाहूंगा कि विधानसभा
क्षेत्र बनीपार्क
का जो वार्ड नम्बर-13
है मानसरोवर वहां
पर 50 करोड़ की लागत
से एस.एम.एस. के पैटर्न
पर एक नया चिकित्सालय
बन रहा है लगभग
300 बैड का यह चिकित्सालय
है और लगभग इसकी
बिल्डिंग बनकर
के तैयार हो गई
है तो इसके लिए
भी माननीय घनश्यामजी
तिवाड़ी का मैं
विशेष तौर से आभार
व्यक्त करना
चाहूंगा। मेरी
दो या तीन ही डिमाण्ड्स
हैं, मेरे विधानसभा
क्षेत्र में झोटवाड़ा
है वहां पर पंचायत
समिति की सात बीघा
जमीन है और 1984 में
पूर्व मुख्यमंत्री
माननीय हीरालाल
जी देवपुरा ने
यहां पर एक सैटेलाईट
अस्पताल का उदघाटन
हुआ किया
था और उनका पत्थर
भी वहां पर लगा
हुआ है और वर्तमान
में जो हमारा झोटवाड़ा
क्षेत्र है इसमें
मेरे विधानसभा
के वार्ड नम्बर-1,
वार्ड नम्बर-8,
वार्ड नम्बर-9,
वार्ड नम्बर-10,
वार्ड नम्बर आपका
7, वार्ड नम्बर-2
इसी प्रकार आपका
70, 68, 69 है इनको मैं उपनगर
के नाम से पुकारता
हूं और लगभग यहां
पर तीन लाख की आबादी
है और यहां पर मौटे
तौर पर गरीब आदमी
रहते हैं, मुसलिम
समाज के लोग भी
रहते हैं, एस.सी.
के लोग भी रहते
हैं, एस.टी. के लोग
भी रहते हैं। मैं
पिछले तीन साल
से प्रयास कर रहा
हूं हर साल सरकार
के माध्यम से
एक पत्र आ जाता
है कि सरकार के
पास इस समय पैसा
उपलब्ध नहीं है
इसलिए यहां पर
सैटैलाईट अस्पताल
खोल नहीं सकते।
इसलिए मेरी आपसे
डिमाण्ड है, एक
ही डिमाण्ड है
यहां झोटवाड़ा
के अंदर एक सैटेलाईट
अस्पताल खोल दिया
जाए तो मैं दावे
के साथ कह सकता
हूं कि माननीय
दिगम्बर सिंह
जी लगातार 15 साल
तक जितेंगे। नमस्कार,
भारत माता की जय।
श्री
सभापति: धन्यवाद।
माननीय श्री महादेवसिंह
खंडेला।
डा. सी.
पी. जोशी (नाथद्वारा):
(व्यवधान) यह क्या
तरीका निकाला है,
इसलिए क्या अच्छा
तरीका है राजेन्द्रजी
अस्पताल तो खुला
हुआ है जयपुर में
और जितोगे कुम्हेर
से, आप भी कोई तरीका
निकाले कुछ (व्यवधान)
एक माननीय
सदस्य: बिलकुल
लैटेस्ट टेकनीक
मैंने डवलप की
है साहब।
श्री
महादेव सिंह (खण्डेला):
माननीय सभापति
महोदय, (व्यवधान)
डा. सी.
पी. जोशी (नाथद्वारा):
अस्पताल की नींव
के पहले ही कांस्टीटुएन्सी
खत्म हो गई है
आप ध्यान रखना
(व्यवधान)
श्री
सभापति: आप बैठे-बैठे
बात नहीं करें।
श्री
महादेव सिंह (खण्डेला):
माननीय सभापति
महोदय, मेरे विधानसभा
क्षेत्र खंडेला
में सामुदायिक
स्वास्थ्य
केन्द्र है इसमें
लगातार तीन साल
से पूरे डॉक्टर
भी नहीं है और वहां
जो भवन बना हुआ
है वह भी बहुत ही
खराब स्थिति में
है। इसलिए मेरा
सरकार से निवेदन
है कि विधानसभा
क्षेत्र खंडेला जो कि नगरपालिका
क्षेत्र है और
वहां की आबादी
करीबन 30-35 हजार के
करीब है, गरीब लोग
निवास करते हैं,
वहां भवनों का
निर्माण करवाकर
सारे डॉक्टर पदस्थापित
करवाये जिससे वहां
के लोगों को चिकित्सा
का ज्यादा से
ज्यादा लाभ मिल
सके। विधानसभा
क्षेत्र खंडेला
में ही गोवाला
में सामुदायिक
केन्द्र है जिसमें
केवल दो डॉक्टर
काम कर रहे हैं,
गवाला के आसपास
में गांव है, ढाणियां
हैं और गांव और
ढाणियों के लोग
सीकर तक जो कि वहां
से करीबन 50 कि.मी.
पड़ता है, नीम का
थाना वहां से करीबन
30 कि.मी. पड़ता है
वहां वो जा नहीं
सकते, आपने सामुदायिक
स्वास्थ्य
केन्द्र तो खोल
तो दिया है लेकिन
डॉक्टरों की कमी
होने की वजह से
वहां के लोग चिकित्सा
के लिए लाभान्वित
नहीं हो सकते।
हमारे इलाके में
पहले तो गांवों
के अंदर अब भी बच्चा
जन्मता था दाइयां
काम करती थी लेकिन
अब दाइयां तो है
नहीं इसलिए बड़े-बड़े
गांव है, ढाणियां
है तो एएनएम वगैरहा
है कम संख्या
में एएनएम्स है
और जहां कहीं भी
आपने उप-स्वास्थ्य
केन्द्र खोल रखे
हैं उन उप-स्वास्थ्य
केन्द्रों में
भी सब जगह एएनएम्स
नहीं है इसलिए
वहां आज भी एएनएम्स
के रिक्त पद पड़े
हैं, उनको भरने
के लिए मैं आपसे
निवेदन करना चाहता
हूं।
सभापति
महोदय, गांवों
में, मेरे खुद के
गांव हौद में आपका
प्राथमिक स्वास्थ्य
केन्द्र है आज
तक वहां कोई डॉक्टर
नहीं है, सारा भवन
भी मतलब डॉक्टर
के अभाव में वहां
कोई मरीज नहीं
आता है और जब मरीज
नहीं आता है, डॉक्टर
नहीं है, हॉस्पिटल
खुलता नहीं है
तो वह सारा हॉस्पिटल
बर्बाद हो गया
है और जो डॉक्टर
के रहने का मकान
था वह मकान भी टूट
गया है इसलिए मेरा
निवेदन है कि राजकीय
प्राथमिक स्वास्थ्य
केन्द्र, हौद
पंचायत समिति खंडेला
में डॉक्टर पदस्थापित
किया जावे और वहां
के उस भवन के पुनर्निर्माण
के लिए ज्यादा
से ज्यादा राशि
दी जाए जिससे यहां
के आसपास के गावों
में, बाहर के गांवों
में लोगों को ज्यादा
से ज्यादा चिकित्सा
सुविधा मिल सके।
धन्यवाद, जयहिन्द।
श्री
सभापति: माननीय
श्री सुंदरलालजी
अनुपस्थित। माननीय
श्री हीरालाल रैगर।
श्री
हीरालाल (निवाई):
माननीय सभापति
महोदय, चिकित्सा
विभाग की मांग
संख्या-26 पर मैं
अपने क्षेत्र की
समस्याएं, वैसे
उपलब्धियां तो
हमारे माननीय कालीचरणजी
सर्राफ ने सारी
दी हैं, निवाई जयपुर
रोड एन.एच.-12 पर स्थित
है, आये दिन वहां
ऐक्सीडेंट होते
हैं। मैं चिकित्सा
मंत्री महोदय से
मांग करूंगा कि
निवाई में एक ट्रोमा
हॉस्पिटल स्वीकृत
किया जाए, दुर्घटनाओं
की यह स्थिति है
टोंक और निवाई
के बीच में दस-दस
मौतें एक-एक साथ
हो जाती है.....
Bhs/akt/16.3.07/14.30/2f
तो मैं पुरजोर शब्दों में चिकित्सा मंत्री महोदय से मांग करूंगा कि निवाई में ट्रोमा होस्पिटल खोला जाए। मेरे यहां होस्पिटल में पैरा मेडिकल स्टॉफ और एक चिकित्सक, एक वरिष्ठ चिकित्सक का पद रिक्त हे वो भरा जाए। दतवास एवं जिलाई जो पीएचसी हैं उनको सामुदायिक चिकित्सालय में क्रमोन्नत किया जाए साथ सिरोही, नटवाड़ा एवं खरवाड़ा बुजुड में पीएचसी खोली जाए। आपने मुझे समय दिया धन्यवाद।
श्री सभापति: धन्यवाद। माननीय श्री भागीरथ चौधरी।
श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): सभापति महोदय, मैं मांग संख्या 26 के जरिये निवेदन करना चाहता हूं वैसे तो मेरे किश्नागढ़ विधान सभा क्षेत्र में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की तरफ ऐ ऐसे कार्य हुए हें जो पिछले 56 वर्ष में कभी नहीं हुए। मेरे किशनगढ़ का जो यगनाम होस्पिटल है वो सौ बैड का था उसको डेढ़ सौ बेड में क्रमोन्नत कर दिया गया है और ट्रोमा यूनिट भी मेरे वहां खोली गयी है उससे जो हमारे किशनगढ़ में जो मार्बल मंडी है जो विश्वविख्यात है उसमें हम सबको बहुत ही इस सरकार ने जो यह तोहफा दिया है इससे हमारे किशनगढ़ की जनता इतनी प्रभावित है, खुश है कि जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता है, हर क्षेत्र में परन्तु सभापति महोदय, जो देता है उससे ही मांगी जाती है जो हम मांगे और मांग पूरी करे उन्हीं से ही मांगी जाती है । सभापति महोदय, मैं आज आपके माध्यम से मेरे किशनगढ़ स्थित ट्रोम यूनिट के नवीन भवन निर्माण एवं उसके सुचारू संचालन की आवश्यकता के लिए मैं राज्य सरकार से यह चाहूंगा कि हमारे जो राष्ट्रीय राजमार्ग पर किशनगढ़ स्थित है जिसमें गंभीर सड़क दुर्घटनाओं हेतु आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं दिलाने हेतु हमारे यहां तीन वर्ष पूर्व सितम्बर, 2004 में 6 स्थानों पर ट्रोमा यूनिट की स्थापना की गयी थी इनमें भीम, सोजत, देवली, महुआ, शाहपुरा, जयपुर एवं किशनगढ़ का चयन किया गया इनकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य हाईवे पर होने वाली गम्भीर दुर्घटनाओं में घायल रोगियों को शीघ्र उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना था। मान्यवर सभापति महोदय, मेरे किशनगढ़ स्थित यगनान चिकित्सालय में भी ट्रोमा यूनिट की स्थापना की गयी थी और केन्द्र सरकार द्वारा बजट आबंटन पश्चात् राज्य सरकार ने बीस लाख रुपये उपकरण एवं एंबुलेंस के लिए चिकित्सालय को दिये गये लेकिन इस ट्रोमा यूनिट के नवीन भवन निर्माण की प्रस्तावित लागत राशि साठ लाख रुपये की स्वीकृति आज तक प्राप्त नहीं हुई है जिससे यहां पर ट्रोमा यूनिट का सुचारू संचालन करने में काफी कठिनाई आ रही है जबकि इस चिकित्सालय परिसर में इस हेतु पर्याप्त भूमि उपलब्ध है और पर्याप्त चिकित्सक स्टाफ भी उपलब्ध है लेकिन नर्सिंग स्टाफ की कमी है अत: आपसे निवेदन है कि आप बजट आबंटन वर्ष 2007-08 में किशनगढ़ स्थित ट्रोम यूनिट के नवीन भवन निर्माण की राशि स्वीकृत करायें। सभापति महोदय, साथ ही इसके सफल एवं सुचारू संचालन में मदद करने हेतु आवश्यक मापदंडानुसार नर्सिंग स्टाफ एवं नवीन उपकरण की स्वीकृति जारी करावें ताकि असहाय दुर्घटनाग्रस्त लोगों को उपाचार की सुविधा मिल सके। सभापति महोदय, मेरे किशनगढ़ स्थित वायन अस्पताल में आईसीयू की स्वीकृति की आवश्यकता है। मान्यवर, किशनगढ़ अजमेर जिले का सबसे बड़ा उपखंड है यहां पर स्थित जैसा मैंने आपको बताया सौ बैड से डेढ़ सौ बैड किया गया यहां पर आसपास के विधान सभा क्षेत्र जैसे परबतसर, पुष्कर, नसीराबाद, भिनाय, मालपुरा एवं दूदू के ग्रामीण जन अपना ईलाज कराने हेतु आते जाते रहते हैं लेकिन आज वर्तमान में काफी संख्या में मरीज हार्ट पेशेंट होते हैं जिन्हें अपना ईलाज कराने में काफी कठिनाई आती है। किशनगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग क्षेत्र पर स्थित होने एवं किशनगढ़ भीलवाड़ा मार्ग, किशनगढ़ मालपुरा मार्ग, किशनगढ़ डीडवाना मार्ग एवं काफी आवागमन होने से काफी सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे रोगियों के लिए काफी असुविधा होती है अत: किशनगढ़ स्थित वायन अस्पताल में आईसीयू की आवश्यकता के मद्देनजर वित्तीय वर्ष 2007-08 में इसकी सक्षम स्वीकृति प्रदान करावें ताकि हार्ट पेशेंट मरीजों व दुर्घटनाग्रस्त मरीजों के ईलाज की पूर्ण सुविधा उपलब्ध हो सके। आईसीयू के भवन की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वर्तमान में यहां पर आरएचएसडीपी योजना में नवीन भवन निर्माण का कार्य प्रगति पर है लेकिन आईसीयू के साथ संचालनार्थ आवश्यक उपकरण एवं नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता भी सुनिश्चित करायें। सभापति महोदय, मरे किशनगढ़ सिटी डिस्पेंसरी में मातृ एवं शिशु कल्याण केन्द्र एवं महिला चिकित्सक के नये पद की भी आवश्यकता है अत: सभापति महोदय, आपके द्वारा मैं मंत्री महोदय से निवदेन करूंगा कि मेरे किशनगढ़ स्थित डिस्पेंसरी में मातृ एवं शिशु कल्याण केन्द्र एवं महिला चिकित्सक का नया पद सृजित करने की कपा करें क्योंकि जहां चालीस-पैंतीस हजार की आबादी है मेरे इस शहर में वहां पर चिकित्सा स्वास्थ्य व्यवस्था के रूप में केवल राजकीय सिटी डिस्पेंसरी संचालित है जिसमें केवल दो चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पुराने शहर में महिलाओं की चिकित्सा सुविधाओं हेतु न तो कोई राजकीय चिकित्सालय है न ही निजी चिकित्सालय है जिससे महिलाओं को अपने ईलाज, प्रसव कार्य आदि हेतु तीन चार किलोमीटर दूर जाना पड़ता है इसी प्रकार शहर के आसपास दस पन्द्रह किलोमीटर दूर के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित ग्राम पंचायत पाटन, सरगांव, डीडवाना, मालियों की बाड़ी, टीकावड़ा, वरना, मुंडोला, सिलोरा आदि के गांव, ढाणी, मजरों के लोगों, महिलाओं को भी अपना ईलाज कराने आना पड़ता है इसके लिए पुराने शहर में जरूर यह व्यवस्था हो जाए तो चालीस- पैंतालीस हजार की जो आबादी है उनको एक बहुत बड़ी राहत मिलेगी। सभापति महोदय, आखिर में मैं किशनगढ़ स्थित वायन अस्पताल में चिकित्सा एवं नर्सिग स्टाफ के आवास रिपेयर एवं नये आवास निर्माण की आवश्यकता के लिए भी मैं मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूंगा कि यदि इसकी समुचित व्यवस्था हो जाए तो हमारी जनता को बहुत राहत मिलेगी। आपने समय दिया उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री सभापति: धन्यवाद। माननीय श्रीमती ममता शर्मा। (अनुपस्थित) माननीय श्री वीरेन्द्र बेनीवाल।
श्री वीरेन्द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): सभापति महोदय, आज चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पर प्रस्तुत मांग के संदर्भ में आपने मुझे बोलने का समय दिया इसके धन्यवाद। मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि स्वास्थ्य की बेहतर व्यवस्था के लिए राज्य का हर वर्ग सरकार पर और सरकार द्वारा स्थापित चिकित्सालयों पर मुख्य रूप से आश्रित है। यह बात अलग है कि अनेकों ऐसे अस्पताल बड़े-बड़े नाम के साथ में भी हमारे राज्य में अलग अलग जगहों पर स्थापित हुए हैं जहां पर ईलाज के आधुनिकतम उपकरणों के साथ साथ एक बड़ी टीम सेवा में लगी है लेकिन फिर भी आज एसएमएस अस्पताल की अगर बात की जाए जिसको हम सुपर स्पेशियलिटी के नाम पर डवलप कर रहे हैं इसका मुकाबला नहीं किया जा सकता लेकिन समय समय पर देखते हैं कि उपकरणों के व्यवस्थित रूप से काम नहीं करने का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है और अनेकों बार मौतें तक हुई हैं मरीजों की। आज सरकार द्वारा चाहे वो केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के माध्यम से हो या राज्य के अपने स्रोत हों राशि का स्वास्थ्य के क्षेत्र में खर्चा किया जा रहा है और अस्पतालों की बेहतर व्यवस्था बनायी जा रही है लेकिन फिर भी हमारे को आज के समय में आवश्यकता है जयपुर शहर में एसएमएस अस्पताल पर बढ़ते हुए और इससे संबद्ध चिकित्सालयों में बढ़ते हुए बोझ को देखते हुए हम और जो अस्पताल हैं जैसे हमारे रेफरल होस्पिटल हैं कांवटिया और जयपुरिया होस्पिटल है इन अस्पतालों को भी अगर हम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध करें यहां पर रेजीडेंट डॉक्टर्स को उनकी सेवाएं वहां पर भी दें तो उन अस्पतालों के मरीज जो जा रहे हैं उनको पूरी सुविधा मिल पाएगी। यह मेरा आपके माध्यम से माननीय स्वास्थ्य मंत्री महोदय से निवेदन है। इसके साथ साथ मैं यह भी कहना चाहता हूं कि आज हमारे आसपास का जो क्षेत्र है इसके लिए बारबार मरीजों का यहां तक आने उनको ईलाज सही डॉक्टरों के माध्यम से मिले इसकी भी जो प्रक्रिया है उस प्रक्रिया को और सरलीकृत किया जाना चाहिए। आज पर्टीकूलर डॉक्टर्स से कोई पेशेंट ईलाज कराना चाहता है तो उसको उस डॉक्टर तक अप्रोच करने का माध्यम अस्पताल न होकर उसके घर से होता है और घर पर पहले मरीज अप्रोज करे तो निश्चित रूप से उसको कुछ डॉक्टर को व्यक्तिगत उसकी कुछ इच्छाओं की पूर्ति करनी पड़ती है।
कैलाश/अरुण 16.3.07
14.40 (1) 2g
तभी उसको
अस्पताल में भर्ती
किया जाता है यह
गरीब के इलाज के
नाम पर बहुत तकलीफ
दायक है । अनेकों
जिलों के उदाहरण
हमारे सामने हैं
। मैं बात को कम
शब्दों में करते
हुए यह निवेदन
करना चाहता हूं
कि पिछले समय पर
हमारे यहां पर
महामारी का प्रकोप
रहा । डेंगू, चिकनगुनिया
जैसा रोग हमारे
पूरे राज्य छा गया और
इसके चलते अनेकों
लोगों की मौत हुई,
अनेकों लोगों ने
कष्ट भोगे वह
अलग है। लेकिन
वह व्यवस्थाएं
एक दम से ना बन पाने
के कारण यहां पर
मरीजों की एक लंबी
कतार लग गई । मेडिकल
कालेज और भी है
हमारे राज्य में
लेकिन उन मेडिकल
कालेज में इलाज
की व्यवस्था
नहीं रही । हालांकि
उदाहरण दिये जाते
हैं मैं आपको एक
निवेदन करना चाहूंगा
कि हमारा संभागीय
मुख्यालय बीकानेर
वहां पर पीबीएम
अस्पताल है ।
वह अस्पताल कभी
अपने नाम के लिये
जाना जाता था और
आज का वक्त यह
है कि वहां पर मरीज
अगर इलाज के लिये
आते हैं तो उनको
महज प्रताड़ना
के अलावा और कुछ
नहीं मिलता । पिछले
समय में जब डेंगू
का प्रकोप फैला
सभापति महोदय,
हमारे वहां के
प्रिंसिपल, हमारे
वहां के सुप्रिडेंट
और हमारे वहां
के डिप्टी सुप्रिडेंट
विदेश यात्रा कर
रहे थे । मरीज दर
दर भटक रहे थे और
उनको अपनी विदेश
यात्रा से लौटकर
उनके इलाज की व्यवस्था
करने की कोई सोच
नहीं । वहीं दूसरी
ओर मरीजों को भर्ती
करने के नाम पर
अस्पताल में कोई
प्रक्रिया नहीं
थी । मरीजों को
सीधा रास्ता दिखलाया
जा रहा था कि आप
जयपुर जाये । कारण
कि वहां पर हमारे
पास इलाज की माकूल
व्यवस्था नहीं
है और माकूल व्यवस्था
के नाम पर उनको
आवश्यकता थी महज
एक सैल अपरेटर
की । जो मरीज डेंगू
रोग से पीडित है
उसको प्लेटवेट
की जरूरत होती
है एक सैल अपेरेटर
जो वहां वर्षों
से खरीदा हुआ था
उसको उस अस्पताल
में व्यवस्थित
तरीके से
लगाया नहीं जा
सका और नहीं लगाये
जाने के कारण यह
थे कि जो विभागीय
कमी पूर्ति करनी
थी उसके प्रति
वहां का प्रशासन
घोर अनदेखी कर
रहा था । दो वर्ष
पूर्व 2004 में उसके
लिये राशि आबंटित
हुई । 26 लाख रुपया
सांसद निधि से
उसको दिया गया
। उसके एक डेढ वर्ष
बाद फिर विभाग
को याद आता है कि
यह राशि कम पडती
है 13 लाख की और मांग
की जाती है । लेकिन
समय समय पर उसको
जो इंस्टाल करने
की कार्यवाही करनी
थी उस कार्यवाही
की तरफ ध्यान
नहीं दिया जाता
। वहीं उसके बाद
जब कभी भी टीम आने
की बात आती है कि
इसके लिये किसी
स्थान से कोई
जांच समिति आयेगी
तो वहां पर स्टाफ
की अनुपलब्धता
बताई जाती है ।
आज के समय वह स्टाफ
आप सीएमएचओ से
डेपुटेशन पर लाकर
कर रहें हैं तो
आपने उस समय क्यों
नहीं वह व्यवस्था
की । क्या गरीब
को यहां तक भेज
कर, एक एक मरीज का
हजारों रुपया खर्च
करा कर न जाने कितनों
ने अपनी अकाल मौत
का सामना किया
है कौनसा यश कमाना
चाहती है हमारी
यह सरकार यह बात
मेरी समझ से बाहर
है ।
सभापति
महोदय, इसके
साथ मैं यह निवेदन
करना चाहूंगा समय
समय पर वहां पर
प्रशासनिक अकर्मण्यता
के चलते अस्पताल
में आये दिन धरने
और प्रदर्शन, आये
दिन मरीजों की
मौत यह घटनाएं
वहां पर आम हो चुकी
है । अधीक्षक का
पद लंबे समय से
फोर ए ग्रांट चल
रहा है । आज के समय
में पुन: एक आदेश
जारी होता है उस
आदेश के तहत फिर
यह कह दिया जाता
है कि इंडेफिनेट
पीरियड के लिये
यही अधीक्षक काम
करेंगे । क्या
हमारे इतने बडे
अस्पताल में एक
अधीक्षक भी हमारे
को नहीं मिल सकता
है । सभापति महोदय,
मैं आपको यह निवेदन
करना चाहता हूं
अनेकों बार आये
दिन वहां पर मरीजों
को और उनके अटेंडेंट
को खुद इधर उधर
मशक्कत करनी पडती
है । वार्ड की हालत
यह है कि वार्ड
के आस पास के टायलेट
की हालत यह है कि
अगर एक स्वस्थ
व्यक्ति भी उनका
उपयोग कर लें तो
वह खुद बीमार हो
जाये । आज वहां
पर जो हमारे बेहतरीन
डाक्टर अपने आप
को बताते हैं उनके
इलाज की बानगी
मैं आपके सामने
रखना चाहता हूं
। वर्ष 2003 में एक अबोध
बालिका इलाज के
लिये पीबीएम अस्पताल
में आती है । घडसाना
से वह चलती है घडसाना
का डाक्टर उसको
रेफर करता है एक
जांच के लिये सरीन
लेबोरेट्री के
नाम पर । उस लेबोरेट्री
में जांच के लिये
वह व्यक्ति अपनी
पुत्री को ले कर
जाता है । उसकी
बायोप्सी की रिपोर्ट
वहां से दी जाती
है और उसमें बताया
जाता है कि उस बच्ची
को कैंसर है । सभापति
महोदय, पुन: वह व्यक्ति
यह रिपोर्ट लेकर
घडसाना के डाक्टर
सोनी के पास जाता
है । डाक्टर सोनी
रेफर करता है पीबीएम
अस्पताल के बहुत
बडे चिकित्सक
के नाम पर जो कि
वर्तमान में भी
वहां पर प्रिंसिपल
के पद पर पद स्थापित
है । वह उस प्राइवेट
जांच रिपोर्ट के
आधार पर उस बच्ची
का इलाज शुरू कर
देते हैं । कीमोथैरेपी
उसको दे दी जाती
है और वह बच्ची
बेहोश हो जाती
है। उसकी तबीयत
बिगडने परवह गरीब
व्यक्ति वापस
एप्रोच करता है
कि मेरी बच्ची
को क्या हो गया
। दूसरे कोई व्यक्ति
बताते हैं कि इसको
यह बीमारी नहीं
है । आप इसकी जांच
पुन: करवाइए । दूसरे
चिकित्सालय से
वह जांच कराने
की कोशिश करते
हैं कहीं पार नहीं
पडती । फिर उनको
बताया जाता है
कि आप दिल्ली
के अस्पताल से
जांच करा कर लाइए
। वह दिल्ली की
लाल लेबोरेट्री
से जांच कराते
हैं जिसमें पाया
जाता है कि बच्ची
को केंसर नहीं
है । सभापति महोदय,
उस रिपोर्ट के
आधार पर वही डाक्टर
रेफर करता है दूसरे
डाक्टर को और
वह दूसरा डाक्टर
पीबीएम अस्पताल
में ही एसपी मेडिकल
कालेज में उसकी
जांच करता है और
जांच में फिर पाया
जाता है कि उस बच्ची
को कैंसर नहीं
है । एक ऐसी बच्ची
जिसको डाक्टर
की लापरवाही के
कारण, ऐसा इलाज
करने के कारण आज
तक वह जिंदगी और
मौत से झूझ रही
है । सभापति महोदय,
मैं यह निवेदन
करना चाहता हूं
आज हमारा इतना
बड़ा अस्पताल
ऐसे डाक्टरों
के हाथ में है जिन
डाक्टरों की कर्मण्यता
का यह उदाहरण है
। क्या होगा ऐसे
अस्पतालों का,
क्या होगा ऐसे
मरीजों का । आज
हम व्यवस्था
की बात कर रहे हैं
। हमें उपकरण
देने के नाम पर
हम अच्छे से अच्छे
उपकरण दे सकते
हैं लेकिन जब तक
उनको उपयोग में
लेने वाले हाथ
उचित नहीं होगे
तब तक मरीज का हित
होने वाला नहीं
है । समय समय पर
अस्पतालों में
मशीनों की खराबी
की दुहाई दी जाती
है । कारण जो इसकी
आड में समझ में
आता है वह एक ही
समझ में आता है
कि प्राइवेट हास्पिटल
में पेशेंट जाये
और वहां पर इलाज
कराये । तो उन सरकारी
अस्पतालों का
क्या होगा । आज
करोडों रुपये की
मशीने वहां पर
लाई जा रही है लेकिन
उन मशीनों का उपयोग
नहीं किया जा रहा
है । सभापति महोदय
मैं निवेदन करूंगा
कि मंत्री महोदय
इन तथ्यों की
गहराई में जायेंगे,
क्या हो रहा है
इसको देखेंगे ।
गरीब को इलाज कराने
के नाम पर जो सरकार
अपनी सोच लेकर
चल रही है इस सोच
को वास्तविक रूप
से हम लागू कर पायेंगे
ऐसा शायद आने वाले
दिनों में संभव
हो, सभापति महोदय,
यह मैं आपके माध्यम
से मांग करता हूं।
इसके
साथ साथ मैं निवेदन
करना चाहता हूं
स्थानांतरण का
दौर चल रहा है हालत
यह है कि अनेक सीएचसी
हैं जहां पर डाक्टर
के 75 प्रतिशत पद
रिक्त चल रहे
हैं । वहां पर डाक्टरों
का दूर दूर तक पता
नहीं है । मैं उदाहरण
देना चाहूंगा हमारी
सीएचसी लूणकरणसर
का । वहां पर 6 पर
स्वीकृत हैं ज्युनियर
स्पेशलिस्ट
के, वर्तमान में
3 पद रिक्त हैं
। एक एसएमओ का पद
है उस पर पद स्थापित
हैं । एमओ का पद
रिक्त है । एक
डाक्टर वहां पर
डेपुटेशन पर चल
रहे हैं, नर्सिंग
स्टाफ वहां पर
डेपुटेशन पर चल
रहा है । आज हमने
पद स्थापित कर
रखा है वहां पर
उस अस्पताल से
अनेक डाक्टर डेपुटेशन
के नाम पर तनख्वाह
भी उठा रहे हैं
लेकिन वहां के
लोगों को व्यवस्था
नहीं दे पा रहे
हैं । एक प्राथमिक
स्वास्थ्य
केन्द्र भी वह
सुविधाएं दे सकता
है, खांसी जुकाम
की दवा तो वह भी
दे सकता है वहां
पर इतने डाक्टर
पद स्थापित करने
का कारण क्या
रह गया । इतना बड़ा
अस्पताल बना रहे
हैं, नेशनल हाई
वे पर अस्पताल
है लेकिन वहां
पर एबुलेंस की
सुविधा नहीं है
। ठीक इसी तरीके
की स्थिति हमारे
बीकानेर जिले के
नापासर कस्बे
की आती है । वहां
पर भी एक बहुत बड़ा
अस्पताल है ।
अनेकों पर आपने
वहां पर दे रखे
हैं लेकिन उन पदों
पर डाक्टर पद
स्थापित नहीं
है । महज दो डाक्टर
अपना वहां पर काम
चला रहे हैं । जबकि
उस अस्पताल को
वहां पर स्थापित
करने का उद्देश्य
था कि पीबीएम अस्पताल
के ऊपर सीधा लोड
ना पडे । आस पास
के गांव के लोग
वहां पर इलाज कराने
के लिये जाये ।
यह इस बात को जाहिर
करता है कि वास्तव
में हम व्यवस्था
तो करना चाह रहे
हैं लेकिन
उस व्यवस्था
की क्रियान्विति
ठीक तरीके से नहीं
हो पा रही है । सभापति
महोदय, एक तरफ अभी
हमने बजट में अनेकों
नये सामुदायिक
केन्द्र खोलने
की बात कर ली । एबुलेंस
देने की बात कर
ली, संभागीय मुख्यालय
पर हम मोबाइल डिसपेंसरी
चला देंगे यह सब
हमने बात की । मोबाइल
डिसपेंसरी समय
समय पर चलती रही
है, आज भी हम किसी
भी सीएमएचओ के
अंडर में देख लें
वहां उनके पास
लंबी चौडी गाडियों
की लाइन खडी है
लेकिन उनके पास
डाक्टर नहीं है
। जब तक हम डाक्टर
का पद स्थापित
नहीं करेंगे, जब
तक उनके लिये पद
सृजित नहीं करेंगे,
नई नियुक्तियां
नहीं करेंगे तब
तक उन अस्पतालों
का क्या करेंगे
यह बात मेरी समझ
से बाहर है । सभापति
महोदय, सबसे पहली
हमारी प्राथमिकता
है कि हम डाक्टर
को पद स्थापित
करें । पैरा मैडिकल
स्टाफ को पद स्थापित
करें । आज गांवों
में इलाज की हम
बात कर रहे हैं,
गांवों में इलाज6
की सुविधा नहीं
है यह बात सही है
1 मैं भी यह मांग
करूंगा कि मेरे
विधान सभा क्षेत्र
में प्राथमिक स्वास्थ्य
केन्द्र खोला
जाये लेकिन जब
आपके पास डाक्टर
नहीं है, डाक्टर
गांव में टिकना
नहीं चाहता है
तो उस प्राथमिक
स्वास्थ्य
केन्द्र का क्या
किया जायेगा ।
इस व्यवस्था
को सुधारा जाये
कि ग्रामीण क्षेत्र
में किस प्रकार
से चिकित्सकों
का और स्टाफ का
ठहराव हो । इसके
लिये हम उनको क्या
बेहतरीन सुविधा
दे सकते हैं । जौहरी
बाजार से आने वाले
माननीय सदस्य
ने भी सुझाव दिया
था कि हम डाक्टरों
को चाहे उनके हाउस
रेंट अलाउंस के
नाम पर या और दूसरे
अलाउंस दें जो
शहरों की तुलना
में अगर कहीं ज्यादा
होगा तो निश्चित
रूप से वहां पर
आदमी के रुकने
का विचार होगा
। आज यह एक नियम
तो है कि हर राजकीय
कर्मचारी और अधिकारी
जो वहां पद स्थापित
है अपने मुख्यालय
पर उसका रात्रि
ठहराव होना चाहिये
लेकिन इसकी तरफ
कोई भी नहीं देखता
। रात्रि ठहराव
नहीं करने वालों
के ऊपर कभी कोई
कार्यवाही नहीं
होती । डाक्टर
मैक्सिमम अप डाउन
करते हैं । सुबह
वह अपने नजदीकी
जिले से या नजदीकी
कस्बे से चलते
हैं ...
ans/akt 2h
14.50 16/3/2007
अस्पताल तक पहुंचते हैं जब तक आधा आउटडोर का समय निकल जाता है और दो-तीन घंटे रूककर वापिस चले जाते हैं। यह आपस में उन्होंने अपनी बारी बाँध रखी है, एक दिन अगर यह सीएसी की कहानी कर ले तो दो डाक्टर एक दिन आ जाएगे, दो डाक्टर एक दिन आ जाएंगे, इस तरीके की व्यवस्था चलती है तो फिर पद का क्या लाभ है।
सभापति महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि धन की कमी नहीं होने के बावजूद भी जब कभीकोई आवश्यकता बतलाई जाती है, उस आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा भी जो राशि दी जाती है उस राशि का समुचित उपयोग, आज के समय में व्यवस्थाओं के नाम पर कह लीजिए या अक्रमणिता के नाम पर कह लीजिए उसका उपयोग नहीं किया जा रहा है इस बात को भी माननीय मंत्री महोदय को दृष्टिगत रखना चाहिये।
इसके साथ-साथ मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि अस्पताल के अंदर समय-समय पर जो रिक्त पदों की बात की जाती है, इसको भरना चाहिये। लंबे समय से पीबीएम अस्पताल के अंदर जो लाइफ सेंविग मेडीकल स्टोर है वह बंद था, बंद का कारण क्या था महज एक दस बाई दस के कमरे की मरम्मत कराना, उस मरम्मत को कराने में महीनों लग गए। दर-दर मरीजों को भटकना पडा दवाओं के लिए। उस स्टोर की स्थापना का उदे्श्यय क्या था, इस बात को हम भूल गए। उचित दर पर दवा मिले, उचित स्थान पर दवा मिले, हर समय दवा मिले इसकी तरफ देखना किसी ने मंजूर नहीं किया। इसका अगर हम दूसरा पक्ष देखना चाहे तो निश्चित रूप से जिन लोगों ने व्यवस्था नहीं बनने दी शायद उनके अपने कुछ व्यापारिक हित रहे होंगे जिनके चलते हुए यह देखते रहे हो कि आस-पास के मेडीकल स्टोर पर अगर आम मरीज जाएंगे दवा के लिए तो शायद उनके हितों की ज्यादा पूर्ति होगी, इन सब बातों का ध्यान दिया जाना चाहिये।
मैं यह निवेदन करना चाहता हूं और उसके साथ यह कहना चाहता हूं,पूर्व में हमारा पीबीएम अस्पताल, कैंसर के रोगी वहां पंजाब और हरियाणा तक से आया करते थे। कैंसर का बहुत बड़ा सेंटर था और रीजनल कैंसर सेंटर नाम से भी जाना जाता है। वहां पर आज के समय में भी स्थिति यह है कि इलाज कराने के लिए अगर कोई व्यक्ति आता है तो सीधा जाता है वहां पर अधिकांश अगर पोस्टिग है तो रेडिएशन ओनकोलोजिस्ट की, जबकि एक मरीज को अगर इलाज के लिए जाना है तो सबसे पहले उसको, मेरी जानकारी कहती है, हो सकता है वह गलत भी हो क्योंकि अगर मेडीकल ओनकोलोजिस्ट के पास में जाएगा वो ही उसको बताएगा कि उसको फर्दर कोई सर्जरी की जरूरत है, किस तरीके की थेरेपी की जरूरत है और काई ऐसी आवश्यकता है या महज दवा से उसका काम चल सकता है, तो यह पदों को बढ़ाया जाना चाहिये। आज के समय में केवल एक पद है वहां मेडीकल ओनक्लोजिस जबकि रेडीएशन ओनक्लोजिस के वहां पर सात पद हैं।
इसी के साथ-साथ मैं यह भी कहना चाहता हूं कि वहां पर पूर्व के अंदर हमने यह देखा कि जो वहां पर सीसीओ था उसकी व्यवस्था ठीक नहीं थी। आइसीयू वहां पर लंबे समय से बंद रहा, इलाज के अभाव में1 लगभग दो साल तक आइसीयू बंद रहने के बाद, मरम्मत का पैसा आ जाने के बाद जब यह मरम्मत हो गई तो यह पाया गया कि उसके अंदर स्टाफ नहीं है इसके कारण हम इसको नहीं चला पाए। दो बैड का एक आइसीयू वहां चलता रहा1 राशि आने के बावजूद भी उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। यह बानगी मैं एक सम्भागीय मुख्यालय बीकानेर की न देते हुए मैं आपको पूरे राज्य की बताना चाहता हूं, अधिकांश स्थानों पर यही स्थिति है चाहे हम कोटा के मेडीकल अस्पताल की स्थिति ले लें चाहे हम जोधपुर के मेडीकल कालेज की स्थिति ले लें, उससे संबंद्ध अस्पताल की स्थिति ले लें। आये दिन मरीजो को इसीलिए, एक गरीब तबके का बड़ी आशा के साथ वहां इलाज कराने आता है, जब उसकी आशा की पूर्ति नहीं होती...
श्री सभापति: आप वाइडेंप करें।
श्री वीरेन्द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): तो उसके मन का आक्रोश वहां पर सामने आता है। मैं यह निवेदन करना चाहता हूं राज के, प्रावधान वर्तमान में किए उन प्रावधानों का उपयोग शायद तभी हो पाएगा जब हम इसके लिए सही पद स्थापित कर पाएंगे1 सही डाक्टरों की टीम को वहां पर ले पाएंगे, उनकी वह इच्छा जाग्रत कर पाएंगे जिस सेवा की भावना से उन्होंने इस प्रोफेशन में आने की बात की है, उन्होंने डिग्री को हासिल किया है, उनकी भावना वहां पर पूरी उस तरीके से रहे जिस प्रकार उन्होंने शिक्षा लेते हुए की। आशा करता हूं कि आने वाले समय में सरकार अपनी जिम्मेदारियों को समझेगी और इसी के अनुरूप कार्य करेगी।आपने समय दिया इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री सभापति: श्रीमती प्रतिभा सिंह। (अनुपस्थित)
श्री हेमराज मीणा।
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): सभापति महोदय, आज मांग संख्या 51 सामाजिक न्याय और मांग संख्या 26 चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के संबंध में मैं अपने कुछ विचार रखना चाहूंगा। सबसे पहले तो मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को बधाई दूंगा जिन्होंने सामाजिक न्याय में, बहुत दिनों से हमारी जबरदस्त मांग चल रही थी 2008 तक सारा बैकलॉग पूरा होगा। जब से मैं विधायक बना हूं, हमारे सारे एस.सी,एस.टी के विधायक हैं, सारे आफिसर हैं सबका बार-बार यह निरंतर यह दवाब रहता आया है कि चालीस हजार का हमारा बैकलॉग है लेकिन वह बैकलॉग, बार-बार यह सवाल उठता था कोई जवाब नहीं मिलता था, मुख्यमंत्री को बधाई दूंगा उन्होंने हमारी इस बात को स्वीकार किया, बहुत-बहुत बधाई देना चाहता हूं। राजस्थान का सबसे बड़ा काम हुआ है। इतना बड़ा काम आज दिन तक इसका कोई नहीं कर पाया। कांग्रेस का भी राज रहा, कांग्रेस वालों ने भी केवल आश्वासन दिया। केवल रिजर्वेशन के नाम पर वोट लिये लेकिन काम किसी ने नहीं किया। 2008 तक हमारे जो चालीस हजार कर्मचारियों का बैकलॉग है वह शून्य हो जाएगा इसके लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री जी, सरकार को, समाज कल्याण मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं। हमारा बहुत बड़ा काम हुआ है। सभापति महोदय, थोड़ी अडचन हमारे बीच में है। (व्यवधान)
श्री अशोक
बैरवा (खण्डार):
बकाया है, बैकलॉग
बाकी है उसको पूरा
करवा दो बधाई सबकी
स्वीकार कर लेना।(व्यवधान)
श्री सभापति: आप बिराजिए।
श्री अशोक बैरवा (खण्डार): अभी तो आधे से ज्यादा बैकलॉग बाकी है साहब (व्यवधान) बधाई देने से कोई फायदा नहीं है।
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): 2008 तक शून्य हो जाएगा यह आपके सामने बजट की किताब में आ गया। (व्यवधान)
श्री अशोक बैरवा (खण्डार): वाह-वाही मत करो। क्षेत्र में जाना है लोगों के बीच में जवाब देना है।
श्री सभापति: माननीय सदस्य।
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): तीन वर्ष संघर्ष के बाद मुख्यमंत्री ने जो सबकी बात सुनी और बहुत बड़ा काम कर दिया कोई नहीं कर सका आज दिन तक। सभापति महोदय, मेरा थोड़ा सा इस संबंध में सुझाव है कि इसमें हमें दिक्कत सी महसूस होती है मैं कुछ सुझाव देना चाहूंगा, जोन आफ कंसीड्रेशन के नाम पर जब बैकलॉग की बारी आती है तो एक से पाँच, अगर एक अफसर को लेना होगा तो पाँच को बुलाएंगे, अगर छठा-सातवां नम्बर है तो उसको नहीं बुलाएंगे, यह सबसे बड़ी अडचन है। अगर उपलब्ध है तो जोन आफ कंसीड्रेशन का ध्यान न रखते हुए उन अधिकारियों को आमंत्रित किया जाना चाहिये, तो यह बैकलॉग निश्चित रूप से भरेगा। हमारे जो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सामाजिक लोग हैं, संस्थाएं हैं, हमारे जो एमएलएज हैं, सारी जनता में इतना अच्छा मैसेज जाएगा क्योंकि बहुत बड़ा काम मुख्यमंत्री ने किया है।
सभापति महोदय , मैं एक निवेदन और करना चाहूंगा अनुसूचित जनजाति के जो गरीब लोग हैं, छोटी बस्तियों में रहते हैं,एस.सी के लोग हैं, बैरवा, मेघवाल हैं, सकड़ी गलियों में रहते हैं उन लोगों के पास जो रिहायशी मकान है, जो गांव में मकान बने हुए हैं, किसी के टापरी है, किसी के झौंपड़ी है, ऐसे छोटे-छोटे मकान बने हुए हैं लेकिन उनके पास अभी तक उनके पट्टे नहीं है। सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से कहना चाहूंगा कि गांव में जो छोटे-छोटे मकान बने हुए हैं अगर उनको पंचायत समिति के द्वारा अगर नि:शुल्क भू आवंटन किया जाए या पट्टे जारी कर दिये जाए तो निश्चित रूप से उनको मालिकाना हक मिलेगा। मालिकाना हक मिलने से वह बैक से ऋण ले सकते हैं। बैंक से और सुविधाएं मिल सकती है। निश्चित रूप से मैं चाहूंगा यह बहुत महत्वपूर्ण बात है इसको माननीय मंत्री जी सम्मिलित करेंगे।
सभापति महोदय, मैं एक निवेदन और करना चाहूंगा, बैकलॉग के बारे में मेरा एक बिन्दु छूट गया। कह रहा था, चालीस हजार बैकलॉग है, मैं कहना चाहूंगा कि बैकलॉग भरने के लिए जोन आफ कंसीड्रेशन को ध्यान में रखने के लिए एक समिति बनाई जा सकती है, इसको रिव्यू करने की एक कमेटी बने। कमेटी में पाँच आदमी हो। पाँच आदमी में एक एस.सी का हो, एक एस.टी. का हो और तीन अन्य के हो सकते हैं। तीन सामान्य के भी हो ताकि न एस.सी., एस.टी. का नुकसान होगा न सामान्य वर्ग का नुकसान होगा तब जाकर यह कमेटी लगातार रिव्यू करेगी, जब जाकर निश्चित रूप से यह 2008-9 तक पूरा भरा जाएगा।
सभापति महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि हमारे सामाजिक न्याय के द्वारा कई सारी योजनाएं चल रही है लेकिन आज योजनाएं सरकार बना रही हे, सरकार पैसा भी दे रही है लेकिन उन योजनाओं पर सुपरवीजन के लिए हमारे पास अधिकारियों की आवश्यकता है, समाज कल्याण में एक डिप्टी डायरेक्टर बैठता है हमारा पूरा जिला खाली हैं, तो मैं चाहता हूं कि सुपरवीजन के लिए जो तहसीलदार, एसडीओ हे इनको भी यह अधिकार दिया जाए ताकि हमारी जो अनुसूचित जाति की योजनाएं चलती है उन योजनाओं का यह सुपरवीजन कर सके, देख सके ताकि वह योजनाएं क्रियान्वित हो। जनता को उन योजनाओं का लाभ मिले। अधिकृत रूप से वैसे तो तहसीलदार, एसडीएम जाकर देखते हैं लेकिन उनको समाज कल्याण, हमारे सामाजिक न्याय विभाग की और से , सरकार की और से भी निर्देश हो ताकि उन एस.सी की योजनाओं पर सुपरवीजन करके उसका छोटे गरीब तबके तक उसका लाभ पहुंचे। सभापति महोदय, मैं कहना चाहूंगा एसडीएम, एडीएम ये सब वहां मौजूद हैं उनको यह दिया जाना चाहिये।
सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहूंगा कि मेडीकल कालेज, इंजीनियरिंग कालेज, इनमें छात्रावास , हमारे को इनमे छात्रवृति मिलती है लेकिन इंजीनियरिंग कालेज में छात्रवृति मिलने का प्रावधान है प्रति माह का है।
Ddm/usc 160307 15.00 2j
लेकिन मेडिकल
कॉलेज, इंजीनियरिंग
में छात्रवृत्ति
मिलने का प्रावधान
प्रति माह का है।
छात्रवृत्ति के
माध्यम से हर
महीने उनको पैसा
मिलना चाहिए। लेकिन
सभापति महोदय,
आज स्थिति यह है
कि उनको प्रतिमाह
नहीं मिलती है।
साल में एक बार
मिल जाए तो गनीमत
है। तो बजट का जो
केन्द्र सरकार
का आता ही नहीं
है, समय पर ग्राण्ट
नहीं आती, उसके
कारण से आज इंजीनियरिंग
और मेडिकल कॉलेज
के छात्र पढ़ रहे
हैं उन छात्रों
को बहुत दिक्कत
पैदा होती है।
मंत्रीजी, इस सम्बन्ध
में आपसे कहना
चाहूंगा कि आप
प्रयास करें, राज्य
सरकार की ओर से
ताकि सेण्ट्रल
गवर्नमेंट से बजट
समय से आये और इंजीनियरिंग
कालेज और मेडिकल
कालेज में जो विद्यार्थी
पढ़ रहे हैं उनको
छात्रवृत्ति समय
से मिले ताकि उनको
आर्थिक अभाव नजर
नहीं आये। सभापति
महोदय, आपके माध्यम
से मैं यह भी कहना
चाहूंगा कि मेडिकल
और इंजीनियरिंग
कालेज जो प्राइवेट
सहभागिता के अनुसार
चल रहे हैं, निजी
स्तर पर चल रहे
हैं, आज उनमें एस.सी.,
एस.टी. के जो विद्यार्थी
एडमिशन लेते हैं।
यानि उनकी जो कांउसिलिंग
होती है, कांउसिलिंग
के बाद मेरिट के
आधार पर उनको काउंसिलिंग
में इंजीनियरिंग
और मेडिकल में
कालेजों में भेजा
जाता है। कांउसिलिंग
के आधार पर तो कई
बार जब देखते हैं
तो उनकी फीस इतनी
तगड़ी है कि अनुसूचित
जाति और अनुसूचित
जनजाति के व्यक्ति
को उसको वहन करने
में बहुत मुश्किल
आती है।
तो सरकार की ओर
से प्रयास हो, माननीय
मुख्य मंत्रीजी
की तरफ से भी यह
प्रयास हो कि जितने
भी मेडिकल कालेज
और इंजीनियरिंग
कालेज हैं जिनमें
प्राइवेट कालेजों
में लड़के पढ़ते
हैं, काउंसिलिंग
के बाद जाते हैं,
उनकी 2-2 लाख रुपया
फीस है और सामान्य
कालेज की फीस 3 हजार
रुपया है। तो बहुत
अन्तर है। तो
उसमें भी कुछ रिलेक्सेशन
हो, ताकि गरीब और
छोटे तबकों को
इसका लाभ मिल सके।
सभापति महोदय,
मैं आपका ध्यान
इस ओर आकर्षित
करना चाहूंगा कि
हमारे सामाजिक
न्याय विभाग की
एक योजना है, एस.सी.
कारपोरेशन। एस.सी.
कारपोरेशन के माध्यम
से अनुसूचित जाति
और जनजाति लोगों
को वाहन दिलाना,
व्हीकल्स दिलाना
या रोजगार के साधन
तैयार करने के
लिये वाहन दिये
जाते हैं। लेकिन
मैं एक बात देखता
हूं कि जब उनका
साक्षात्कार
होगा तो लोग आयेंगे
200-300 और टार्गेट 2 या
3 होंगे, तो ऊँट के
मुंह में जीरा।
सभापति महोदय,
मैं आपके माध्यम
से कहना चाहूंगा
कि मंत्रीजी सेण्ट्रल
गवर्नमेंट से बात
करें। बात करके
इनके टार्गेट बढ़ें
ताकि लोगों को
रोजगार के साधन
मिलें। रोजगार
के साधन मिलेंगे
तो उनकी माली हालत
सुधरेगी। और उनका
आर्थिक आधार ठीक
होगा। सभापति महोदय,
मैं आपके माध्यम
से यह भी कहना चाहूंगा
कि सामाजिक न्याय
विभाग, समाज कल्याण
विभाग के हॉस्टल
चलते हैं और रेजीडेंशियल
कालेज भी हैं, स्कूल
भी हैं। अब हम देखते
हैं कि साधारणतया
इन होस्टलों में
वार्डनों के पद
बहुत सारे खाली
हैं। चूंकि मंत्रीजी
मेरे जिले के हैं,
सभापति महोदय,
तो मैंने कई बार
इनसे बात की कि
खाली पद भरें।
लेकिन समस्या
यह आ गयी सभापति
महोदय कि फाइनेंस
का नया अंड़गा।
मैंने मंत्रीजी
से बात की तो कहा
कि फाइनेंस में
फाइल चल रही है।
सभापति महोदय,
आज हमारे होस्टल
हैं, हम लगातार
होस्टल खोलते
जा रहे हैं। हम
चाहते हैं कि एस.सी;
एस.टी; के लड़के
ज्यादा से ज्यादा
लाभ लें, अच्छी
शिक्षा प्राप्त
करें। इनको हम
सरकार की कुछ अच्छी
सुविधा दें। लेकिन
समस्या आज यह
आ गयी कि हमारे
कई होस्टलों में
एक वार्डन के पास
4-4 होस्टलों का
जिम्मा है। उनको
वह सम्भालने में
उनकी बड़ी मुश्किल
हो जाती है। और
कई होस्टल तो
हमारे ऐसे हैं
जो चपरासी और चौकीदार
के भरोसे चलते
हैं।
(समय समाप्ति
सूचक घण्टी)
मैं चाहूंगा,
सभापति महोदय कि
मंत्रीजी इसकी
भर्ती करें ताकि
सरकार के पैसों
का सदुपयोग हो
और सरकार के पैसे
के सदुपयोग का
लाभ अनुसूचित जाति-जनजाति
के लोगों को मिले।
सभापति महोदय,
आप घण्टी बजा
रहे हैं। अभी तो
मैं एक ही डिमाण्ड
पर बोल रहा हूं।
अभी तो शुरू ही
किया है मैंने।
श्री सभापति:
टाइम पूरा हो गया।
श्री हेमराज
मीणा (किशनगंज):
सभापति महोदय,
आज छात्रावासों
में 550 रुपया, छात्रावासों
में 550 रुपया एक विद्यार्थी
को एक महीने के
लिये देते हैं।
मैं समझता हूं,
यह बहुत कम है।
चाय-नाश्ता उसमें,
खाना भी उसमें,
सुबह का खाना भी
उसमें। साबुन भी
उसमें, तेल भी उसमें।
तो मैं आपके माध्यम
से मंत्रीजी से
कहना चाहूंगा कि
इस राशि को बढ़ाकर
550 की जगह 700, मैं तो
चाहता हूं कि हजार
करें लेकिन 700 तो
आप निश्चित रूप
से करें ताकि उन
लोगों को लाभ मिल
सके। उनकी पढ़ाई
ठीक प्रकार से
हो सके।
सभापति महोदय,
एक निवेदन और करना
चाहूंगा सामाजिक
न्याय में। सभापति
महोदय, कई सारे
हमारे, जो रेजीडेंशियल
हमारे कालेज हैं,
रेजीडेंशियल स्कूल
हैं और कुछ छात्रावास
हैं जिनमें टेम्परेरी
रूप से रसोइया,
चौकीदार संविदा
पर रख रखे हैं।
ऐसे लोग हमने संविदा
पर रख रखे हैं।
लेकिन उनको 5-5 साल
हो गये हैं। आज
दिन तक उनको स्थाई
नहीं किया गया।
एक बार सुप्रीम
कोर्ट का फैसला
भी हुआ। सुप्रीम
कोर्ट का फैसला
हुआ कि जो संविदा
में कर्मचारी काम
कर रहे हैं वर्षों
से, उनको स्थाई
किया जाना चाहिए।
तो सभापति महोदय,
आपके माध्यम से
मेरा मंत्रीजी
से निवेदन है कि
संविदा में जो
कर्मचारी काम कर
रहे हैं, उन लोगों
को आप निश्चित
रूप से स्थाई
करें ताकि वह मन
लगाकर काम करें।
उन रसाइयों की
और जो चौकीदार
का काम कर रहे हैं,
उनकी तनख्वाह
भी बहुत कम है।
इतनी कम है कि वह
तो निशुल्क सेवा ही कर
रहे हैं। वह गरीब
आदमी का, वह इस आस
में काम कर रहा
है कि चलो कभी तो
मेरी नौकरी बन
ही जायेगी, कभी
तो मुझे पैसा मिलेगा
ही। मेरा रोजगार
इससे चल रहा है,
उस हिसाब से वह
काम करता है तो
सभापति महोदय,
मैं आपके माध्यम
से चाहूंगा कि
जब सुप्रीम कोर्ट
का फैसला भी हो
गया, हमारे मंत्रीजी
इस बारे में गहराई
से विचार करें।
गहराई से विचार
करके इसका मानदेय
भी बढ़ायें और
उनको स्थाई करने
के बारे में भी
विचार करें।
सभापति महोदय,
मैं मांग संख्या-26
के बारे में भी
थोड़ा सा निवेदन
करुंगा, ज्यादा
समय नहीं लूंगा,
थोड़ा सा आपका
समय लेना चाहूंगा।
श्री सभापति:
एक मिनट में पूरा
करें।
श्री हेमराज
मीणा (किशनगंज):
सभापति महोदय,
मांग संख्या-26
में चिकित्सा
में जितना किया
गया, मैंने देखा
है, मैं पिछली बार
89-91 में भी एम.एल.ए.
था लेकिन 3 सालों
में जितना काम
हुआ है, रिकार्ड
तोड़ सारे राजस्थान
में काम हुआ है।
और मेरे सहरिया
एरिये में तो सबसे
ज्यादा काम हुआ
है। काम की कोई
कमी नहीं है चिकित्सा
के क्षेत्र में।
आज मैं कह सकता
हूं कि जो राजस्थान
हैल्थ डवलपमेंट
सिस्टम जो राजस्थान
में, उसके माध्यम
से जो पैसा आया
है, ऐसा लगता है
कि शाहबाद में
भी ऐसा हास्पिटल
बना है, बारां जैसा
लगता है कि बारां
जैसा हास्पिटल
शाहबाद में बन
गया। तो इतना बड़ा
काम चिकित्सा
के क्षेत्र में
हुआ है। सभापति
महोदय, इसमें कोई
कमी नहीं रही है।
स्वास्थ्य
चेतना यात्रा,
कई सारी योजनाएं
हमने निकालीं।
लेकिन स्वास्थ्य
चेतना यात्रा की
विशेष बात यह रही
है कि बीमारी के
बारे में जनजागृति
होना। यह तो एक
प्राथमिक काम है
लेकिन स्वास्थ्य
चेतना योजना जिस
दिन गांव में आई
उसी दिन वहां पर
मेडिकल केम्प
भी आयोजित किया।
बीमारों को भी
देखा और बीमारों
को निशुल्क दवाई
भी दी। उनका इलाज
भी किया। ऐसा कोई
अभियान आज दिन
तक नहीं चला जिसका
तुरत-फुरत लाभ
जनता को मिला हो।
मैं इसके लिये
भी बधाई देता हूं,
साधुवाद देता हूं
कि हमारे स्वास्थ्य
मंत्रीजी ने मेडिकल
के क्षेत्र में
बहुत बड़ा अचीवमेंट
किया है। आर.एच.डी.सी.,
राजस्थान हैल्थ
डवलपमेंट सिस्टम
द्वारा पैसा लग
रहा है, काया-कल्प
ही हो गया। कभी
यह कल्पना नहीं
कर सकते थे कि सब
सेण्टर में पैसा
लगेगा। कभी यह
नहीं लगता था कि
सी.एच.सी., जो ऊपर
से बिलकुल नीचे
गिरने की स्थिति
थी, उसकी मरम्मत
हो जाएगी। आज सी.एच.सी.,
पी.एच.सी., सब सेण्टर,
ऐसे नये चमाचम
दिखने लग गये, जैसे
कोई पहले कभी किसी
ने इसके बारे में
विचार ही नहीं
किया। सभापति महोदय,
मेडिकल का बहुत
बड़ा काम हुआ।
औजारों के लिये
भी पैसा दिया।
आज नये-नये हॉस्पिटल
खुले हैं। नई-नई
तकनीक से चिकित्सा
प्राप्त हो रही
है। सभापति महोदय,
एक निवेदन और करना
चाहूंगा मंत्रीजी
को मैं तो एक सुझाव
देना चाहता हूं,
2-3 सुझाव हैं मेरे।
सभापति महोदय,
ट्राइबल के एरिये
से मैं आता हूं।
ट्राइबल सब प्लान
में डूंगरपुर,
बांसवाड़ा, उदयपुर,
उसके साथ ही यह
सहरिया एरिया।
तो मैं निवेदन
करना चाहूंगा कि
आप भर्ती भी खूब
कर रहे हैं लोगों
को नौकरी भी खूब
दे रहे हैं। ए.एन.एम.
की नौकरी भी दे
रहे हैं, कम्पाउण्डर
की भी दे रहे हैं,
डाक्टर की भी
दे रहे हैं। परमोशन
भी कर रहे हैं लेकिन
हमारी सबसे बड़ी
समस्या क्या
आ रही है कि आप या
तो भर्ती करें
तो हमारे इलाके
से वह बाहर नहीं
जाए। हमारे सामने
समस्या यह है
कि आपने हमारे
यहां पोस्टिंग
तो कर दी, पोस्टिंग
करने के बाद में
वह अपनी जुगत इस बात में
लगाता है कि जिस
दिन पोस्टिंग लेता
है कि मैं कैसे
तबादला करवाकर
के शाहबाद से चला
जाऊं। वह यह कोशिश
करता है। तो आप
यह तय करें कि या तो हमारे
जिले में, वहीं
के लोगों को अपोइण्टमेंट
दें और जिले से
बाहर उनका तबादला
न हो। सभापति महोदय,
मैं आपके माध्यम
से मंत्रीजी से
निवेदन करना चाहूंगा
कि अभी मेरे यहां
पर जो ट्रांसफर
हुए, 11 ट्रांसफर
हुए और वही किसी
न किसी एम.एल.ए. की
डिजायर करवा लेते
हैं और वह अपने
इच्छित स्थान
पर चले जाते हैं।
हमारे 11 का ट्रांसफर
हुआ और 3 आये, सारी
पी.एच.सी. खाली।
तो मैं निवेदन
करना चाहता हूं,
कोई ऐसी पाबन्दी
लगाइये आप। एक
मैं यह भी कहना
चाहता हूं कि ग्रामीण
क्षेत्र में आप
भर्ती करें तो
या तो उनको स्पेशल
ग्रामीण क्षेत्र
में काम करने का
भत्ता दें ताकि
वह उस लालच से वहां
रुकें।
Vps-usc-16032007-1510-2k-1
आज सहरिया एरिये में अगर कोई पी.एच.सी. बंद है, कल को कोई केजुअलटी हो गयी, कोई सहरिया की डेथ हो गयी तो कांग्रेसी तो बैठे हैं उठाने के लिए कि भूख से मौत हो गयी। अब आदमी बीमारी से मरेगा और भूख से मौत बताएंगे यह। जैसे इनके राज में हुआ। अशोक गहलोतजी के टाइम पर यह मेरे इलाके में 22 डेथ हुई, भूख से हुई, शुद्ध रूप से भूख से हई लेकिन उसका इन्तजाम मुख्य मंत्रीजी ने ऐसा किया कि अब उस इलाके में भूख से मौत हो ही नहीं सकती इसलिए नहीं हो सकती कि 35 किलों गेहूं मिल रहा है। रोजगार मिल रहा है। काम कर रहे हैं और मेडिकल की इतनी तुरत-फुरत व्यवस्था हो गयी कि आज मैं समझता हूं कि मैंने कभी नहीं देखा तो मैं जो यह कमी भर्ती की है इसको कैसे भी करके आप पूरा करें, यह मेरा निवेदन है। सभापति महोदय, संविदा की ... (व्यवधान)
श्री सभापति:
माननीय सदस्य,
धन्यवाद। श्री
ज्ञानचन्द
पारख।
श्रीमती
ममता शर्मा (बूंदी):
माननीय सभापति
महोदय, यह
पैसे दे-देकर सहरियों
से बुलवाते हो
आप लोग कि यह कहो
कि हमें 35 किलो गेहूं
मिल रहा है, यह मिल
रहा है और उसके
बाद वहां से एस.डी.ओ.,
पटवारी सब गायब
हो जाते हैं। पहले
आप लोग पैसे दिलवाते
हो। मैं गयी हूं
तीन बार आपके वहां
पर ... (व्यवधान)
श्री
हेमराज मीणा (किशनगंज):
इसका जवाब तो मैं
आपको दे दूंगा
अभी। आप बैठो तो
सही। ... (व्यवधान)
श्रीमती
ममता शर्मा (बूंदी):
क्या जवाब दोगे
आप? ... (व्यवधान) आपके
टाइम पर जितनी
मौते हुई हैं।
... (व्यवधान)
श्री
सभापति: माननीय
सदस्य।
श्री
हेमराज मीणा (किशनगंज):
इनके कांग्रेस
के महा मंत्री
गये हैं, अश्क
अली टांक। अब मैं
यहां खोलता हूं
पोल इनकी। इनके
राज में ... (व्यवधान)
हमारे राज में
... (व्यवधान) एक पोल
खोल देता हूं।
अश्क अलीजी टांक,
जो इनके प्रदेश
के महा मंत्री
हैं, अब वैसे नाम
तो नहीं लेना चाहिए
क्योंकि वे इस
सदन के सदस्य
नहीं हैं लेकिन
फिर भी कांग्रेस
के नेता है तो मैं
आपको बताऊं ... (व्यवधान)
श्री
सभापति: माननीय
सदस्य।
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): तो मैं आपको बताऊं कि वे एक गांव में गये मेरे यहां पर पिजना में। पिजना में एक लड़की को बुखार आ रहा था। उससे कहा, वह बैठी हुई थी। क्या हाल है तेरा? साहब, मैं बीमार हूं। तू तो यह कहना कि तू तो मरने की स्थिति में है। जबरदस्ती अश्क अली टांक ने खाट पर उठाकर उसको डाला और फिर अपना फोटो खिंचवाया, वीडियोग्राफी करवायी कि साहब, मैं तो मरने की स्थिति में हूं। भूखे मर रही हूं। यह मेरे पास वीडियो कैसेट है। मैं टेबल कर सकता हूं। मेरे पास वीडियोग्राफी की एक कॉपी है। मैं टेबल कर सकता हूं। करूंगा। करूंगा। वह वीडियोग्राफी की मेरे पास कैसेट है। ... (व्यवधान)
श्री अशोक बैरवा (खण्डार): टेबल करो न। माननीय सभापति महोदय, मनगढ़ंत आरोप लगाकर यह सदन को गुमराह करना चाहते हैं। ... (व्यवधान)
श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): कोई सी.डी. हो, सबूत हो तो आप दीजए न। हम तैयार है देखने के लिए ... (व्यवधान)
श्री अशोक बैरवा (खण्डार): फिर भी बी.जे.पी. वाले आपको शामिल नहीं कर रहे हैं। आप कितना भी इनका कर लो ... (व्यवधान)
श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): फिर भी कोई मतलब नहीं है। आप ज्यादा बटरिंग मत करो, कुछ नहीं होने वाला है। ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): सहरिया आदिवासी लोग भूख से मरे हैं। ... (व्यवधान)
श्री अशोक बैरवा (खण्डार): जवाब देना पड़ेगा क्षेत्र में। ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): माननीय सभापति महोदय, सहरिया आदिवासी भूख से मरे हैं। मैं खुद देखकर आया हूं वहां पर, भूख से मरे हैं। ... (व्यवधान)
एक माननीय सदस्य: आदिवासियों के हिमायती हो ? ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपके शासन में क्या हुआ था? आपके शासन में क्या हुआ था? भूल गये क्या आप? ... (व्यवधान)
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय सभापति महोदय, मैं आपको यह कह सकता हूं कि मंगलवार के दिन ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): हमारे शासन में कुछ नहीं हुआ था। ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जब आप यहां पर विराजते थे तो आपके शासन में क्या हुआ था?
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): हमारे मुख्य मंत्रीजी थे तब ... (व्यवधान) शासन में हुआ था तो आप ... (व्यवधान)
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): मंगलवार को जिस दिन सदन चलेगा, मैं वह सी.डी. टेबल कर दूंगा।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): लेकिन हमारे मुख्य मंत्रीजी ने ... (व्यवधान) वहां जाकर ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपके शासन में 30 से ज्यादा लोग मरे हैं। ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): आपके राज में तो सहरिया आदिवासी इतने मरे हैं कि ... (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): आपको तो भूख से मरने वालों से सम्पर्क तक नहीं हुआ है। ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): और रिकार्ड में आपका नाम लिखा गया ... (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): भूख से मरने के साथ-साथ आपने तो 17 लोगों को पुलिस थाने में भी बंद कर दिया। ... (व्यवधान)
श्री सभापति: अंकित नहीं हो।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): 000
श्री जोगाराम पटेल (लूणी): 000
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000
श्री मदन दिलावर (समाज कल्याण मंत्री): इनके लिए तो मैं अकेला ही बहुत हूं। यह सोचे कि भूख से मरे हैं पर 2003 से पहले मरे हैं। ... (व्यवधान) भूख से 2003 से पहले मरे हैं।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): 000
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000
श्री घनश्याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): हरिमोहनजी, यह भी आपकी खुशी के लिए किया है इन्होंने। ... (व्यवधान)
श्री सभापति: अब आप वाइंड-अप करिये।
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय सभापति महोदय, मैं दो मिनट में ही खतम कर दूंगा। दो मिनट चाहिए मेरे को।
श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): 000
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): 000
श्री सभापति: आपने काफी समय ले लिया। आपका समय समाप्त। माननीय सदस्य।
श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): 000
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय सभापति महोदय, मैं मंगलवार के दिन इनके प्रदेश महा मंत्रीजी की सी.डी. आपके यहां टेबल करके दूंगा। मेरे पास सी.डी. रखी हुई है कि यह क्या बयान दे रहे थे उसमें। ... (व्यवधान)
श्री सभापति: अब आप विराजिये। माननीय सदस्य, आपका समय समाप्त हुआ। ... (व्यवधान)
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय सभापति महोदय, मैं यह भी कहना चाहूंगा कि सहरियों की भूख से मौतें 2003 में हुई थी। उसके बीच में हमारी माननीय मुख्य मंत्रीजी ने ऐसा इन्तजाम किया है कि सहरिया कभी भूख से मर नहीं सकता। घर बैठे-बैठे ही वह दो रुपये किलो गेहूं, वह गेहूं भी उसको मिल रहा है और खूब खा रहा है और खूब खुश हो रहा है।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): यह गेहूं दिल्ली से आ रहा है। अपने फण्ड से नहीं दे रहे हो, वह दिल्ली से आ रहा है। ... (व्यवधान)
श्री सभापति: हिण्डौली से आने वाले माननीय सदस्य, आप बारबार टोकते क्यों हैं बीच में? ... (व्यवधान)
श्री जोगाराम पटेल (लूणी): हरिमोहनजी पैदा थोड़े ही कर रहे हैं। राजस्थान का काश्तकार पैदा कर रहा है। ... (व्यवधान)
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से एक बिन्दु और निवेदन करना चाहूंगा कि आपके मेडिकल स्टाफ के रूप में संविदा पर बहुत सारे कर्मचारी आपने लिये थे। वे काम कर रहे हैं। गरीब आदमी हैं। तनख्वाह उनको बहुत कम मिलती है और संविदा पर लिया हुआ कर्मचारी बड़ी ईमानदारी से काम कर रहा है। ए.एन.एम. है। टेक्निशियन है। रेडियोग्राफर है। मैं चाहूंगा कि माननीय सभापति महोदय, उनका आप, मैंने सुना है कि उनको नौकरी से निकाल रहे हैं, नौकरी से निकलाने की बात तो आप छोड़ दीजिए लेकिन मेरा आपसे यह आग्रह है कि आप उनको स्थाई रूप से नौकरी में लें ताकि उनको रोजगार मिले, इनके परिवार की माली हालत सुधरे, माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया, उसके लिए बहुत-बहुत बधाई और धन्यवाद।
श्री सभापति: माननीय श्री ज्ञानचन्द पारख।
श्री ज्ञानचन्द पारख (पाली): माननीय सभापति महोदय, यह तो सबको पता है कि हमारी वर्तमान सरकार ने चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत बड़ी-बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। ... (व्यवधान)
श्री सभापति: आप बैठे-बैठे बातें नहीं करें। ... (व्यवधान)
श्री ज्ञानचन्द पारख (पाली): इस क्षेत्र की जो आवश्यकता थी, हमारे चिकित्सा मंत्रीजी ने वह आवश्यकता पूरी करने का अपनी ओर से पूरा प्रयास किया। चाहे नये अस्पताल खोलने हो तो उसमें भी अपना रिकार्ड कायम किया। चाहे उप केन्द्र खोलने हो और चाहे नये उपकरण, चाहे सीटी स्केन मशीन सहित बड़े-बड़े कीमती उपकरण, जिनकी आवश्यकता आज हर जिला मुख्यालय पर प्रतीत होती है, हमारे चिकित्सा मंत्री ने बड़ी उदारता से उन उपकरणों की पूर्ति वहां पर की और आज मरीज को वहां बहुत बड़ा लाभ भी उन उपकरणों से मिल रहा है। चाहे रक्त जांच के उपकरण हो, वह भी बहुत उपलब्ध कराये और उससे भी बढ़कर जो हमारे प्रदेश के जो भी चिकित्सालय हैं, अस्पताल हैं, उनके भवन जो बहुत जर्जर अवस्था में हो गये थे, उनके पुनर्निर्माण और उनके नवीनीकरण के लिए करोड़ों रुपये उपलब्ध करवाये। आज जाए तो लगता है कि कोई अस्पताल है वरना तो ऐसा लगता था कि जैसे कोई खंडहर में आ गये। मरीज को भय भी कि पता नहीं कब छत गिर जाए। छत से बरसात के दिन पानी भी टपके लेकिन एक के बाद एक अस्पतालों के नवीनीकरण का एक जो काम चल रहा है उससे सरकारी अस्पताल की पैठ बहुत बढ़ी लेकिन मैं यह भी कहना चाहूंगा कि हमारी सरकार ने सड़क के क्षेत्र में बहुत बड़ी छलांग लगायी है। आज सड़क के मामले में हम हिन्दुस्तान में पहले नम्बर पर हैं। शिक्षा के क्षेत्र में, उसमें भी बहुत बड़ी छलांग। गांव-गांव में शिक्षा की व्यवस्था हो गयी अगर कोई पढ़ना चाहे तो नजदीकी स्कूल तैयार पड़ी है। चाहे उच्च प्राथमिक है, प्राथमिक है, शिक्षा वह आसानी से ले सकता है और चाहे जल संसाधन का क्षेत्र हो तो एक के बाद एक करोड़ों रुपये की योजनाएं लगातार स्वीकार हो रही हैं और उस पर काम चल रहा है। चिकित्सा क्षेत्र में भी उतनी लम्बी छलांग लगाने की आवश्यकता आज महसूस हो रही है। हमने बहुत किया है, यह बात सही है पर आज आवश्यकता कितनी है और उसके मुकाबले में हमारे पास संसाधन कितने हैं अगर दोनों पर दृष्टि डालेंगे तो उसमें बहुत बड़ा अन्तर स्पष्ट नजर आ जाएगा कि हमारी आवश्यकता तो इतनी है परन्तु हमारे पास संसाधन इतने कम। मेरा चिकित्सा मंत्री से बिलकुल आग्रह रहेगा कि उस अन्तर को कम कैसे किया जाए। अन्तर को पाटा कैसे जाए और उस दिशा में जो भी करना पड़े क्योंकि यह लोक महत्व का विषय है चिकित्सा, सबकी आवश्यकता है चिकित्सा। उस अन्तर को कैसे पाटा जाए, उस दिशा में जितना ज्यादा कार्य हो सके वह करना हमें पड़ेगा। आज गुजरात देख लें, महाराष्ट्र देख लें और कर्नाटक देख लें और वहां से हमारी तुलना करें तो हम थोड़े पीछे महसूस होते हैं। उसका कारण यह नहीं है कि हमने कोई कमी रख दी। पहले जिनका शासन था यदि उस समय वे उतना प्रयास करते जो हमारे चिकित्सा मंत्रीजी ने प्रयास किया तो शायद यह अन्तर कुछ कम होता। उन्होंने काम नहीं किया इसलिए हमें ज्यादा काम करने की आवश्यकता आज महसूस होती है और वह हमें करनी चाहिए। आज हालत क्या है? प्रदेश के दस हजार लोगों की बाई पास सर्जरी या ओपन हार्ट सर्जरी प्रति वर्ष राजस्थान के लोगों की होती है और पूरे राजस्थान में हमारे पास संसाधन है मात्र 600 ओपन हार्ट सर्जरी करने के। इतना बड़ा अन्तर। जिनके पास पैसा है, बॉम्बे जाकर करा आये, दिल्ली जाकर करा आये, थोड़ा कम पैसा है, राजस्थान के किसी प्राइवेट अस्पताल में करा आये लेकिन जो वास्तव में गरीब है और उसको कोई गम्भीर हृदय रोग हो गया और आपरेशन की आवश्यकता है।
spp/usc/15.20/2l/16.3.2007
वह पूरे
राजस्थान में
एकमात्र सवाई मानसिंह
अस्पताल की कार्डिक
युनिट सर्जरी ही
उसका ऑपरेशन कर
सकती है क्योंकि
बहुत कम खर्चे
में वहां ऑपरेशन
हो जाता है और मरीज
का नहीं के बराबर
पैसा लगता है।
मेरा उच्च शिक्षा
मंत्रीजी से बिल्कुल
आग्रह रहेगा कि
राजस्थान की बहुत
बड़ी आवश्यकता
है, आज की सबसे बड़ी
आवश्यकता है,
दस हजार रोगी जिनको
ऑपरेशन की आवश्यकता
है और संसाधन 600, और
उसमें जो गरीब
व्यक्ति हैं तो
कम से कम संसाधन
की वजह से चाहते
हुए भी वर्षों
तक अपना ऑपरेशन
नहीं करवा सकता
। मेरा आग्रह रहेगा
उनसे कि कार्डिक
सर्जरी यूनिट को
इतना बजट दें कि
कम से कम प्रतिवर्ष
दो हजार ऑपरेशन
आसानी से यहां
जो व्यक्ति कराना
चाहें, उतना तो
हो ही जाये। कम
से कम दो हजार, उसके
बिना आपकी युनिट
चल नहीं सकती।
साथ ही आज
जितने वाहन बढ़े,
उससे दुर्घटनाएं
बहुत ज्यादा बढ़
गयी। जितने भी
नेशनल हाइवे पर
अस्पताल हैं उसमें
ट्रोमा वार्ड की
आवश्यकता आज हर
व्यक्ति महसूस
कर रहा है। इतनी
सारी दुर्घटनाएं
हो रही हैं और हमारे
ट्रोमा वार्ड की
संख्या अभी भी
कम है। मरीज चाहे
तो भी राजस्थान
के अस्पताल में
ऑपरेशन करवाने
के लिये उसे कई
बार बहुत असुविधा
होती है और आज भी
हमारे आर्थोपैडिक
के जो कैसेज हैं,
उनकी पहली प्राथमिकता
अहमदाबाद या गुजरात
रहती है। मेरा
माननीय चिकित्सा
मंत्रीजी से अनुरोध
रहेगा, बहुत बड़ा
काम नहीं है, जो
भी एन.एच. पर अस्पताल
है वहां पर्याप्त
मात्रा में आर्थोपैडिक
सर्जन हो जाये
और जो हमारी ट्रोमा
यूनिट है, वह भी
इतनी सुदृढ़ हो
जाये कि हमारे
यहां के किसी मरीज
को चिकित्सा के
अभाव में राजस्थान
से गुजरात की ओर
मुंह देखना नहीं
पड़े, इस बात का
प्रयास करना चाहिये।
आज इसकी बहुत आवश्यकता
हो गयी है।
साथ ही मैं
जो टी.बी.के हमारे
रोगी हैं, टी.बी.
ऐसी बीमारी हैं
जिसको आसानी से
ठीक किया जा सकता
है, बिल्कुल ठीक
हो सकता है अगर
मरीज को सही इलाज
मिल जाये और उसके
लिये प्रयास भी
किये। डॉट कार्यक्रम
हम राजस्थान में
लाये। राजस्थान
के हर टी.बी. अस्पताल
में डॉट कार्यक्रम
लागू भी हो गया
पर एक बार डॉट कार्यक्रम
के जो परिणाम हैं
उस पर भी ईमानदारी
से नजर डालें तो
आसानी से हम सहज
कह सकते हैं कि
डॉट कार्यक्रम
के उतने अच्छे
परिणाम नहीं आ
रहे हैं। शायद
उसमें पर्याप्त
मेडिसिन नहीं है
या जितने दिन लेने
की आवश्यकता है,
उतने दिन वह दवाई
नहीं ली जाती और
हमारे कई टी.बी.
के मरीज एम.डी.आर.
में तब्दील हो
रहे हैं, उसके बाद
उसका कोई इलाज
नहीं। मेरा चिकित्सा
मंत्रीजी से आग्रह
रहेगा कि एक बार
डॉट कार्यक्रम
को पुन: दिखवायें।
आप देखिये, इसके
क्या परिणाम आ
रहे हैं ? कितने
मरीजों का डॉट
कार्यक्रम में
इलाज किया और उसमें
कुल कितने पूरे
ठीक हो गये ? कितने
बाद में सैकण्ड
कैटेगिरी में चले
गये ? कितने
बाद में एम.डी.आर.
में चले गये ? अगर
ईमानदारी से परिणामों
को देखें तो शायद
इसमें हमको कोई
नई पद्धति लागू
करने की आवश्यकता
निश्चित रूप से
महसूस होगी वरना
कई गरीब व्यक्ति
टी.बी. के पर्याप्त
इलाज के अभाव में
अभी भी मर रहे हैं,
यह हमारी सरकार
के लिये ठीक बात
नहीं है। जब हम
इतना अच्छा काम
करें, इतने अच्छे
प्रयास करें, हर
क्षेत्र में उपलब्धियां
हासिल कर रहे हैं
और ऐसी बीमारी
में मर जाये जिसमें
इलाज सम्भव है,
इसलिए मेरा बिलकुल
आग्रह रहेगा कि
इसको आप देखिये।
( समय
समाप्ति सूचक घण्टी
)
मैं चिकित्सा
मंत्रीजी की जानकारी
में यह भी लाना
चाहूंगा कि जो
ए.आर.वी. कुत्ते
काटने के इंजेक्शन
हैं, वैक्सीन
है, यह पहले सरकारी
अस्पतालों में
सारी वैक्सीन
नि:शुल्क उपलब्ध
करवाये जाते थे।
गरीब आदमी को कुत्ता
काट गया, बड़ा दर्द
भी होता था लेकिन
पेट में किसी प्रकार
14 इंजेक्शन वह
लगवा लेता था और
भारत की एकमात्र
फैक्टरी में वह
इंजेक्शन बनता
था, उसकी पूरे हिन्दुस्तान
में सप्लाई होती
थी। लेकिन पिछले
एक डेढ़ वर्ष से
वह फैक्टरी बंद
हो गयी। किसी भी
सरकारी अस्पताल
में कुत्ते काटने
के नि:शुल्क इंजेक्शन
आज की तारीख में
उपलब्ध नहीं होते।
मात्र बी.पी.एल.
के जो केसेज हैं
उनको सरकार हमारी
और से करवाती है,
वह अलग बात है।
लेकिन जो बी.पी.एल.
के ऊपर की श्रेणी
का व्यक्ति है,
अगर उसको कुत्ता
काट जाये तो उसके
लिये बहुत भारी
काम हो जाता है
क्योंकि एक इंजेक्शन
कुत्ता काटने
का 300 रुपये का आता
है और उसके कम से
कम 6 इंजेक्शन
लगाने पड़ते हैं।
मेरा यह भी आग्रह
रहेगा कि कुत्ता
काटने की जो वैक्सीन
है, ए.आर.वी.की, वह
सरकारी अस्पतालों
में किसी प्रकार
से नि:शुल्क या
बहुत ही रियायती
दर पर उपलब्ध
हो जाये ताकि जो
एक गंभीर समस्या
है उससे हमारी
मरीजों को थोड़ी
मुक्ति मिल सके।
साथ ही अस्पतालों
में सरकारी अस्पताल
हो चाहे प्राइवेट
अस्पताल हो, आज
एक आम आदमी की सोच
हो गयी कि यह सारे
लूट के केन्द्र
हो गये। चाहे जांच
हो इसमें भी कमीशन,
चाहे दवाई लिखनी
हो, उसमें भी कमीशन।
सरकारी अस्पतालों
में मरीज जाता
है इलाज कराने
के लिये, लेकिन
कई बार ऐसे चिकित्सक
के हत्थे चढ़
जाता है जो इलाज
के बहाने अनावश्यक
जांचें करवाकर
या ऐसी कमीशन वाली
दवाइयां लिखकर
उस मरीज को तो जरूर
ठीक कर देते हैं
लेकिन उसकी आर्थिक
स्थिति पूरी तरह
से बिगाड़ देते
हैं। इस लूट को
रोकने के लिये
भी प्रभावी कदम
उठाने की आवश्यकता
है। आज जनता महससू
कर रही है कि किसी
प्रकार यह लूट
कम हो जाये, बिलकुल
बंद हो जाये। इसलिए
मेरा आग्रह रहेगा
अधिकांश मरीज जो
आउट डोर या भर्ती
के मरीज हैं, वह
एक बार सरकारी
अस्पतालों में
आ गया तो उसकी सारी
जांचों की सुविधा
वहीं पर मिल जाये,
वहीं पर करवा दें
और भर्ती करने
के बाद भी कोई डॉक्टर
बाहर की जांचें
लिखता है तो कोई
न कोई ऐसा प्रावधान
करें आप कानून
में कि उस डॉक्टर
के खिलाफ भी कोई
कठोर कार्यवाही
हो सके। साथ ही
सही दवाई मिल जाये,
बिना कमीशन वाली
दवाई मिल जाये
और उसके लिये हमने
मेडिकल रिलीफ सोसायटी
अस्पताल में खोल
रखी है, उसकी दुकान
है जहां दवाइयां
मिलती हैं। पर
उन दवाइयों की
संख्या थोड़ी
है। हर प्रकार
की दवाई वहां नहीं
मिलती। इसके लिये
भी हम हमारी जो
मेडिकल रिलीफ सोसायटी
की दुकानें हैं
दवाइयों की, उनको
थोड़ा मजबूत करें,
थोड़ा सुदृढ़ करें।
उससे कमीशन की
जो लूट होती है,
उससे काफी हद तक
हमको मुक्ति मिल
सकती है। मेरा
यह भी आग्रह रहेगा
कि हम जितने भी
प्रयास कर सकें,
बीमारी होने के
बाद उसको ठीक करने
के लिये और वह हमने
किया है, हमारे
मंत्रीजी और प्रयास
करेंगे । लेकिन
साथ साथ बीमारी
की रोकथाम के लिये
जितने प्रयास हो
सकें, उसको भी करने
की आवश्यकता है।
अगर पहले ही रोकथाम
का अपन प्रयास
कर लें, वैसे हमारी
सरकार ने पूरा
प्रयास किया,जो
भी हमारे प्राथमिक
स्कूल हैं, उच्च
प्राथमिक स्कूल
हैं, वहां बच्चों
की मेडिकल जांच
होती हैं, बच्चों
को आइरन व विटामिन
की गोलियां समय
समय पर उपलब्ध
कराई जाती हैं,
उनकी आंखों का
टैस्ट भी होता
है और भी बीमारियों
की जांच होती है,
लेकिन उसके अलावा
भी आज लाखों की
संख्या में मात्र
जांच के अभाव में
परेशान हो रहे
हैं। उनको पता
ही नहीं कि उनको
शुगर है, बहुत बाद
में पता लगता है
उसको जब तक उसका
शरीर खोखला हो
जाता है। कई मरीजों
को पता नहीं कि
मुझे ब्लड प्रेशर
की बीमारी हे, जांच
कराने के बाद ही
पता होता है। एक
जन जागृति अभियान
चाहे इसमें सामाजिक
संस्थाओं का सहयोग
लेना पड़े, हम बीमारी
की रोकथाम के लिये
पहले जितने प्रयास
कर लें, हो सकता
है उसके बाद में
हमारे अस्पतालों
पर बोझ कम पड़े
वरना आज ऐसे किस्से
सुनने में आते
हैं । बैठा था आदमी
हार्ट अटैक हुआ,
मर गया, पता ही नहीं
लगा कि उसे यह बीमारी
थी। अगर पहले से
ही पता लग जाता
...
( समय
समाप्ति सूचक घण्टी
)
श्री सभापति
: अब आप वाइंड-अप
करें।
श्री ज्ञानचन्द
पारख (पाली): इसको
शुगर है, इसको हार्ट
अटैक हो गया, दूसरी
बीमारी है तो उस
दिशा में भी सरकार
की ओर से कोई न कोई
प्रयास हो।
बीमारी
रोकने के लिये
जो आज टीकाकरण
की आवश्यकता है,
टीकाकरण करें।
जहां पूर्व की
जाचं की कोई आवश्यकता
है, आप जांच करे
और हमारी मुख्य
मंत्रीजी ने इस
बार जगह जगह मेडिकल
कैम्प, मेडिकल
मोबाइल युनिटों
की स्थापना की
है। मुझे पूरा
विश्वास है कि
इस मोबाइल युनिट
के जरिये हम काफी
हद तक इस रोकथाम
की दिशा में अच्छा
प्रयास कर सकते
हैं।
Msr/usc/1530/2m/16032007
फिर
सरकार से बिलकुल
अंत में वापस यही
बात कहूंगा कि
जितनी आवश्यकता
है उसके मुकाबले
में संसाधन उपलब्ध
हो जाएं, उस दिशा
में जितनी तेज
छलांग आप लगा सको
वह लगाने का दोनों
माननीय चिकित्सा
मंत्रियों से आग्रह
है मेरा।
सभापति
महोदय, आपने मुझे
बोलने के लिए समय
दिया उसके लिए
बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री
सभापति: धन्यवाद।
श्री राकेश मेघवाल।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): सभापति
महोदय, आपने मुझे
बोलने का समय दिया
उसके लिए धन्यवाद।
(श्रीमती
सुमित्रा सिंह,
अध्यक्ष, पदासीन)
अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
की यशस्वी माननीय
मुख्यमंत्रीजी,
श्रीमती वसुंधरा
राजे के राज में
सभी विभाग राजस्थान
को प्रगति की और
अग्रसर कर रहे
हैं। जिस तरह राजस्थान
में गांव-गांव,
ढाणी-ढाणी में
राजस्थान की यशस्वी
माननीय शिक्षा
मंत्रीजी ने स्कूल
खेल कर भवन बना
कर शिक्षा जगत
में राजस्थान
को ए श्रेणी में
लाने का प्रयास
किया है उसी प्रकार
सभी गांवों को
सड़कों से जोड़
कर राजस्थान प्रथम
स्थान पर आया
है, उसके लिए मैं
माननीय मंत्री
महोदय, राजेन्द्र
सिंहजी राठौड़,
जो सार्वजनिक निर्माण
विभाग के मंत्री
हैं, बधाई के पात्र
हैं और राजस्थान
में ग्यारहवां
स्थान परबतसर
विधान सभा क्षेत्र
का आया है। (व्यवधान)...
सुन
लो खरी-खरी बात,
आपके समय में तो
खड्डे ही नहीं
बुरे थे।
श्री
हरिमोहन शर्मा
(हिण्डौली): माननीय
सदस्य, राठौड़
साहब में और स्वास्थ्य
मंत्रीजी में कोई
अन्तर नहीं समझते
हैं, चाहे उनको
धन्यवाद दो तो
भी मान लोगे।
श्री
अध्यक्ष: बीच
में व्यवधान नहीं
डालें, हिण्डौली
से आने वाले माननीय
सदस्य।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): वह आप नहीं
समझोगे, आप उस राज
में नहीं थे जब
राजेन्द्र सिंहजी
चिकित्सा मंत्रि
थे, आज पी.डब्ल्यू.डी.
मिनिस्टर हैं
और आज यह चिकित्सा
मंत्रि बन गये
हैं दिगम्बर सिंहजी।
फर्क इतना ही है
कि वो उधर बैठते
थे यह इधर बैठते
हैं। (व्यवधान)...
डा. सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): हैल्थ
मिनिस्टर वो ही
हैं आज भी, डी-जूरे,
डी-फैक्टो है,
हैल्थ मिनिस्टर
वो ही हैं। यह मालूम
है कि नहीं, आपको।
श्री
अध्यक्ष: यह इनको
पहले बताओ डी-जूरे
और डी-फैक्टो
का अन्तर बताओ।
(व्यवधान)... ऐसे
ही कह दिया डी-फैक्टो।
डा.
सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):
हां, यह ठीक है।
गलती हो गयी, साहब।
गलती हो गयी।
डा.
ओ. पी. महेन्द्रा
(केसरीसिंहपुर):
डी-जूरे भी यही
हैं डी-फैक्टो
भी यही हैं।
डा.
सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):
आपको लेट समझ में
आयी है, पहले बोल
देना चाहिए था।
डा.
ओ. पी. महेन्द्रा
(केसरीसिंहपुर):
मेरे को समझ है।
माननीय सदस्य,
मुझे इसकी पूरी
जानकारी है डी-फैक्टो
की डी-जूरे की।
डा.
सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):
अध्यक्षजी के
पहले ही बोल देते
न।
श्री
अध्यक्ष: डी-जूरे
है। जूरे है, जीरो
नहीं।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): आप ऐसा
करो, दोनों अध्यक्षजी
के चैम्बर में
जा करबात कर लेना,
मेरा समय क्यों
नष्ट कर रहे हो।
आप मेरे पुराने
दोस्त हो, सी.पी.
जोशी साहब। और
जुबेर खानजी वैसे
ही नहीं बोलेंगे
क्योंकि जुबेर
खानजी भारतीय जनता
पार्टी की सरकार
बनती है और मैं
जीतता हूं जब ही
जुबेर खानजी जीतते
हैं और मैं हारता
हूं तो जुबेर खानजी
हारते हैं।
श्री
अध्यक्ष: नाथद्वारा
से आने वाले माननीय
सदस्य, बहुत आब्जैक्शनेबल
बात है कि आपने
डी-फैक्टो कहा
किसी को। गलत बात
है।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): इसलिए
जुबेर खानजी तो
भारतीय जनता पार्टी
की खुद मन्न्त
मांगते हैं कि
भारतीय जनता पार्टी
आये और जुबेर खानजी
जीतें।
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
आप क्या चाहते
हो मैं अगली बार
जीतूं कि हारूं।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): अपन दोनों
आयेंगे जीत के।
(व्यवधान)... यह मन्नत
मांगना ख्वाजा
साहब की दरगाह
में कि राज हमारा
बने और आप विपक्ष
में, इस तरह बैठे
अच्छे लगते रहें।
श्री
अध्यक्ष: पार्लियामेंट्री
अफेयर्स मिनिस्टर,
आपकी अनुपस्थिति
में नाथद्वारा
से आने वाले माननीय
सदस्य ने आपको
डी-फैक्टो मुख्यमंत्री
कहा है। (व्यवधान)...
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): वो भी मेरे
भाषण में।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, नाथद्वारा
से आने वाले मानने
सदस्य के कहां
का दर्द कहां होता
है, इसका तो मेरे
पास कोई इलाज नहीं,
पूरे राजस्थान
के लोग जानते हैं
कि हमारी मुख्यमंत्री
न-केवल सक्षम है
बल्कि इन्हीं
मुख्यमंत्री
ने परिवर्तन रथ
पर आरूढ़ हुए तो
इन सब का ऐसा सफाया
किया, ऐसा सफाया
किया।
डा.
सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):
किसने कही यह बात,
मैंने तो यह बात
नहीं कही। आपके
लिए तो मैंने तो
यह बात नहीं कही।
अध्यक्षजी, मैंने
तो हैल्थ मिनिस्टर
डी-फैक्टो, डी-जूरे
की बात कही थी, आप
कह रहे हो सी.एम.
की ...(व्यवधान)...
मैं
समझता हूं, अध्यक्ष
महोदय, कि आपने
अपनी भावना अभिव्यक्त
कर दी, मैंने हैल्थ
मिनिस्टर के लिए
बोला था। ...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
के चिकित्सा मंत्रि
जो स्वयं चिकित्सक
हैं ...(व्यवधान)...
डा.
सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):
अब आप को करेक्ट
कर दो, माननीय डिप्टी
चीफ व्हिप, करेक्ट
कर दो इनको। ...(व्यवधान)...
श्री
रामप्रताप कासनिया
(पीलीबंगा): अध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
तो यह कहा था राजेन्द्र
सिंहजी और दिगम्बर
सिंहजी दो बदन
एक जान हैं।
डा.
सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):
यह बात कही थी।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): यही बात
कही थी क्या आपने।
डा.
सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):
आपको सी.एम. बनने
की लगी हुई है, क्या
बात कर रहे हो।
...(व्यवधान)... मेरे
पास इलाज नहीं
है।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): नहीं, इनको
हमारी दोस्ती
पर एतराज है क्या।
डा.
सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):
यह आपकी अनकांशस
में है। अनकांशस
में जो आपका दिमाग
काम कर रहा है वो
रिफलैक्ट कर रहा
है। ...(व्यवधान)...
श्री
हरिमोहन शर्मा
(हिण्डौली): इनकी
तो मिनिस्टरी
में ही दिक्कत
आ रही है, आप चीफ
मिनिस्टर की बात
कह रहे हो। मिनिस्टर
में ही दिक्कत
है।
श्री
अध्यक्ष: नाथद्वारा
से आने वाले माननीय
सदस्य तीन दिन
से कुंठित थे, बोल
नहीं पा रहे थे,
कुछ न कुछ बोलना
था इसलिए बोल दिया।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): आज बहुत
खुश हैं।
डा.
सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):
मेरी कुंठा को
आपने, अध्यक्षजी,
पहचाना, उसके लिए
बहुत-बहुत धन्यवाद।
दूसरों का उत्साह
मत बढ़ाओ। डी-फैक्टो
और डी-जूरे चीफ
मिनिस्टर, राजस्थान
का नुकसान हो जायेगी।
मेरी कुंठा की
तो मैं कर दूंगा
पर राजस्थान की
क्या
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्य, आपकी कुंठा
से मैं चिंतित
रहती हूं।
डा.
सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):
बहुत अच्छा, मुझे
खुशी है पर राजस्थान
की बी.जे.पी. इनकी
बहुत बड़ी महत्वकांक्षा
से कुंठित है, इनका
ध्यान कौन रखेगा
कि वर्चुली डी-फैक्टो
और डी-जूरे को चीफ
मिनिस्टर की लड़ाई
चल रही है वहां
पर। तो इसका उत्तर
है कुछ।
श्री
अध्यक्ष: विराजो
आप।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): जोशी साहब,
आप विराजो।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): विराजो।
इसका उत्तर आप
ही दे दो।
डा.
सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):
मेरा उत्तर है
...(व्यवधान)... घनश्यामजी
खड़े हुए न दिलावर
साहब खड़े हुए,
समझ गये, नमस्कार।
ना घनश्यामजी
खड़े हुए ना दिलावरजी
खड़े हुए। नमस्कार।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): सी.पी.जोशी
साहब, जब मेघवाल
बोलता है और भोला
मेघवाल हूं मैं
राजस्थान में
तो बीच में आपको
नहीं बोलना चाहिए।
श्री
अध्यक्ष: अब आप
बैठे-बैठे नहीं
बोलें।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): और जब मेघ
गरजता है तो बादल
बरसते हैं इसलिए
आप थोड़ा शांति
धारण कर लीजिए
धारीवालजी, जोशीजी
साहब।
एक
माननीय सदस्य:
जोशी को धारीवाल
बना रहे हैं।
श्री
अध्यक्ष: अब मेघ
बरस रहे हैं।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): इनमें
और उनमें कोई ज्यादा
फर्क नहीं है, दोनों
दोस्त हैं। वैसे
सी.पी. साहब तो मेरे
पुराने दोस्त
हैं, हम एक ही उपक्रम
समिति में हैं।
इनके अच्छे हैं
और बाहर से तो तारीफ
करते हैं राठौड़
साहब की अन्दर
पता नहीं क्या
इनके हो रहा है।
बाहर तो चिकित्सा
मंत्रीजी की भी
तारीफ करते हैं।
हमारी उपक्रम समिति
में सब हमारी सरकार
की तारीफ करते
हैं।
डा.
सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):
चेयरमैन रहे हुए
हैं।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): हां, अपने
चेयरमैन रहे हुए
हैं इसलिए तारीफ
करते हैं।
मैंने
यह कहा था, अध्यक्ष
महोदय, कि राजस्थान
में सड़कों के
मामले में अगर
राजस्थान पूरे
राजस्थान में
प्रथम आया है तो
मुझे भी इस बात
का गर्व है कि राजस्थान
में ग्यारहवां
नम्बर परबतसर
विधान सभा क्षेत्र
का आया है इसलिए
इनको यह बात बुरी
लग गयी। अब इनको
मैं खरी बात कहूं
तो डब्ल्यू.बी.एम.
सड़कें हमने 1998 में
भैरोंसिंहजी शेखावत
साहब जब मुख्यमंत्री
थे, डब्ल्यू.बी.एम.
सड़कें आप छोड़
कर गये थे वो डब्ल्यू.बी.एम.
सड़कें पांच साल
में नहीं बनायीं,
वो भी डब्ल्यू.बी.एम.
सड़कों को डामरीकरण
के लिए हमने किया
है। तो आपने तो
पाँच साल में सड़कों
को खड्डे कर-कर
के ही तोड़ा है।
मैं
एक बात यह कह रहा
था कि चिकित्सा
मंत्रि जब राजेन्द्र
सिंहजी थे, उस पर
सी.पी.जोशी साहब
बोले, उस समय नर्सों
की भर्ती हुई थी
और इन्होंने ही
नर्सों की भर्ती
करी थी। आपके पाँच
साल के कार्यकाल
में एक भी इतिहास
बता दो कि भर्ती
की थी क्या आपने।
श्री
कालूलाल गुर्जर (ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री): इनके
राज में बरसात
हुई नहीं तो सड़कें
टूटी नहीं।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): सड़कें
तो उन्होंने तोड़
दी न।
श्री
कालूलाल गुर्जर (ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री): बरसात
हुई नहीं, टूटी
नहीं इनकी तो।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): इन्होंने
गडारें डाल-डाल
के तोड़ी।
श्री
अध्यक्ष: आज तो
मेडिकल हैल्थ
की डिमाण्ड
है, सड़कों की भी
नहीं है और शिक्षा
की भी नहीं है।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): वो उन्होंने
याद दिला दी, साहब।
मेघवाल बोलते हैं
जब बीच में ज्यादा
बोलते हैं इसलिए
मैं इनसे निवेदन
करना चाहता हूं
आपके माध्यम से
कि राजस्थान का
भोला मेघवाल एक
राकेश मेघवाल बोलता
है तो बीच में टोका-टाकी
नहीं करें।
डा.
चन्द्रशेखर बैद
(तारानगर): नर्सों
के साथ राजेन्द्र
सिंहजी का नाम
लेकर आप क्या
कहना चाह रहे हो।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): भर्ती
इन्होंने की थी,
राजस्थान के मुख्यमंत्री
भैरोंसिंहजी शेखावत
ते और यह चिकित्सा
मंत्रि थे। ...(व्यवधान)...
आपने क्या किया।
आज
मांग संख्या
26, चिकित्सा एवं
लोक स्वास्थ्य
और सफाई पर जो मांग
है पर मैं राजस्थान
के यशस्वी माननीय
मंत्रि महोदय का
आभार प्रकट करना
चाहूंगा और राजस्थान
की यशस्वी, लोकप्रिय
मुख्यमंत्री,
जो पहली मातृ शक्ति
मुख्यमंत्री
हैं देश में, देश
आजाद होने के बाद
में।
श्रीमती
प्रतिभा सिंह
(नवलगढ़): क्या।
श्री
अध्यक्ष: बीच
में नहीं बोलें।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): क्यों
आप महिलाओं के
खिलाफ हैं क्या।
पहली मातृ शक्ति
बनी हैं मुख्यमंत्री,
आपने आज तक बनने
दिया क्या।
श्रीमती
प्रतिभा सिंह
(नवलगढ़): अध्यक्ष
महोदय, आप राजस्थान
की बात करिये, हिन्दुस्तान
में तो कई बनी हैं।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): मैं तो
राजस्थान विधान
सभा में राजस्थान
की ही बात कर रहा
हूं। बुरा लग रहा
है क्या।
श्रीमती
प्रतिभा सिंह
(नवलगढ़): देश की
कर रहे हैं।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): और पहली
मातृ शक्ति विधान
सभा की अध्यक्ष
बनी हैं और पहली
महामहिम प्रतिभाजी
पाटिल हैं, तो आपने
तो उनका भी सम्मान
नहीं किया, आप एक
महिला हेकर के
महिलाओं का सम्मान
करना सीखो।
2007-08
में 5502 ए.एन.एम की
भर्ती, जी.एन.एल.
की भर्ती, यह पहली
बार एक साथ हुआ
है। 130 उप-स्वास्थ्य
केन्द्र एक साथ
पहली बार खोले
जा रहे हैं। 30 प्राथमिक
स्वास्थ्य
केन्द्र और 15 प्राथमिक
स्वास्थ्य
केन्द्रों को
सामुदायिक स्वास्थ्य
केन्द्रों में
क्रमोन्नत किया
जा रहा है। पाँच
जिला स्तरीय जो
अस्पताल हैं उनको
क्रमोन्नत किया
जा रहा है। 12 सामुदायिक
स्वास्थ्य
केन्द्रों को
शैयाओं में क्रमोन्नत
किया जा रहा है।
यह राजस्थान के
माननीय मंत्री
दिगम्बर सिंहजी
की बहुत बड़ी उपलब्धी
है माननीय मुख्यमंत्रीजी
के सहयोग से।
श्री
जितेन्द्र सिंह
(अलवर): अध्यक्ष
महोदय, यह कह रहे
हैं इतने कर दिये
हैं, यहां तो हजारों
लोग तो इकट्ठे
हुए हुए हैं भूख
हड़ताल पर, मर रहे
हैं और इनके बारे
में तो कुछ बोल
नहीं रहे हैं कि
हम कितनी करेंगे
भर्ती। उकनो तो
सब को निकलवा दो,
उनको सब की सेवा
समाप्त करने के
लिए ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: आप तो
जो कटौती का प्रस्ताव
है उसी पर बोलेंगे।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): आप जिसका
कटौती प्रस्ताव
लगा है न उसी पर
बोलो, यह आम भाषण
नहीं है, आम बजट
नहीं है।
श्री
जितेन्द्र सिंह
(अलवर): मैं तो आपसे
कह करहा हूं। ..(व्यवधान)...
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): तीन साल
में तीन लाख लोगों
को रोजगार दिया
है, यह राजस्थान
की यशस्वी मुख्यमंत्री,
वसुंधरा राजे ने
दिया, आपने तीन
को नौकरी नहीं
दी। ...(व्यवधान)...
श्री
जितेन्द्र सिंह
(अलवर): सत्य बातें
बोल दिया करो।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): आप के समय
तो हमेशा एक ही
बात कहते थे कि
खजाना खाली है,
राज्य की माली
हालत खराब है।
उस भाषा में कहूंगा
जिसमें आप बोलते
थे, वो कहूंगा तो
फिर कहोगे, हां,
ठीक नहीं है।
क्या
किया, नव-युवकों
को नौकरी देने
का आपने वादा किया
था, दी की क्या
एक भी नौकरी ...(व्यवधान)...
श्री
जितेन्द्र सिंह
(अलवर): आपने बहुत
अच्छा काम किया
है, यह सब बहुत अच्छी
बात है लेकिन ...(व्यवधान)...
उनको भी भर्ती
करवा दो।
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्य।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): उनकी तारीफ
तो करो।
Ars/usc/1540/2n/16032007/1
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): इनकी तारीफ
तो करो ताकि दुबारा
और बजट बढ़ाया
जाए, तीन लाख लोगों
को तीन साल में
नौकरी दी है।
श्री
अध्यक्ष: आप भोले
मेघवाल को बार
बार डिस्टर्ब
नहीं करें वह कई
बार कह चुके हैं
कि भोले मेघवाल
को टोको मत।
एक माननीय
सदस्य: बिल्कुल
नहीं टोकेंगे।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): आप यह बताइये
एक साथ सौ एम्बुलैंस
दी हैं, अगर आप पिछले
कार्यकाल में सौ
दे देते तो अभी
हमको दोसौ देनी
पड़ती। आपने एक
भी एम्बुलैंस
नहीं दी। सभी अस्पतालों
में एम्बुलैंस
नहीं है और पिछले
कार्यकाल में जब
चिकित्सा मंत्री
राजेन्द्र जी
राठौड़ थे तो मेरे
परबतसर अकेले हास्पिटल
में दो दी थीं।
आपने क्या किया
पाँच साल में? नई
योजना चालू की
जो चिकित्सा चेतना
यात्रा, उसमें
गरीब को गणेश मानकर
एक एक गांव ढाणी
जाकर चिकित्सा
विभाग ने लोगों
की सेवा की है यह
भी एक बहुत बड़ी
उपलब्धि है । उसके
साथ साथ ही एक नई
योजना और अभी लागू
की है जो प्रत्येक
गांव, ढाणी तक डाक्टर
एक मोबाइल सेवा
जो चालू की है वह
भी बहुत बड़ी उपलब्धि
है।
श्री
अध्यक्ष: आप जो
भाषण दे रहे हो
वह मंत्री जी का
जवाब होना चाहिए।
आप अपने कट मोशन
पर बोलो। आपका
कोई कट मोशन हो
उस पर बोलो आप।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): मेरे कट
मोशन पर बोल रहा
हूं।
श्री
अध्यक्ष: क्या
कट मोशन है?
डा. सी.
पी. जोशी (नाथद्वारा):
कट मोशन तो सारे
कट हो गये, मोशन
रह गये। ...(व्यवधान)
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): यह उप स्वास्थ्य
केन्द्र में
...(व्यवधान) मौसम
बहुत अच्छा है
ना इसलिए कट मोशन
कट कर दिया। हर
चीज का आप बोलते
हो क्या अपनी
बात पर, आप भी तो
कभी पूरब में और
कभी पश्चिम में
चले जाते हो तो
हम तो उत्तर दक्षिण
में ही जा रहे हैं
...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप अपने
स्थान पर भी नहीं
हैं और बैठे हुए
बोल रहे हैं।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): माननीय
अध्यक्ष महोदय, मैं
आपके माध्यम से
माननीय मंत्री
जी से निवेदन करना
चाहूंगा कि माननीय
राजेन्द्र सिंह
जी राठौड़ जब चिकित्सा
मंत्री थे....
श्री
अध्यक्ष: आप नाम
नहीं लें। यहां
नाम नहीं लिया
जाता किसी का।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): माननीय
सार्वजनिक निर्माण
मंत्री उस समय
चिकित्सा मंत्री
थे तो एक बेसरोली
में हास्पिटल खोला
था, बीस लाख रुपए
की लागत लगाई थी
वह बीस लाख रुपए
की लागत से अस्पताल
बना था वह मेरे
विधान सभा क्षेत्र
परबतसर में है,
उसमें कुछ काम
बाकी रह गया था
और एक कोई ....
श्री
अध्यक्ष: तो आज
थोड़े ही डिमांड
है यह, सड़क की डिमांड
आज थोड़े ही है?
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): सड़क की
नहीं, मैं प्राथमिक
स्वास्थ्य
केन्द्र...
श्री
अध्यक्ष: तो आप
तो राजेन्द्र
राठौड़, राजेन्द्र
राठौड़ गा रहे
हो ...(व्यवधान)
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): माननीय
अध्यक्ष महोदय, आप थोड़ा
गौर से सुनें,आपका
ध्यान सी.पी.जोशी
की तरफ है। मैं
यह बोल रहा हूं
राजकीय प्राथमिक
स्वास्थ्य
केन्द्र बेसरोली....
श्री
अध्यक्ष: यह कब
की, दस वर्ष पहले
की बात है।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): यह उन्होंने
बनवाया था, अधूरा
रह गया, उसको पूरा
करने के लिए मांग
कर रहा हूं। आप
समझ नहीं रहे मेरी
बात को।
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): आप
क्यों *** कर रहे
हो?
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
...(व्यवधान) नाराज
हैं क्योंकि ससुराल
में खुलवा दीं।
श्री
अध्यक्ष: *** असंसदीय
शब्द है।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): *** का तो
खानदानी धंधा आपका
है, हमारा नहीं
है ...(व्यवधान) हम
तो मेघवाल हैं
*** नहीं करते हैं।
हम चाहे जिसको
राज कराते हैं,
*** का काम मेघवालों
का नहीं है। राजा
महाराजाओं को राज
करवाया मेघवालों
ने और आज भी सदन
में राज करवा रहे
हैं मेघवाल इसलिए
*** आपका काम है। मैं
जो बात कह रहा हूं
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मैं उस लाइन
पर बात कर रहा हूं....
श्री
अध्यक्ष: आप तो
इनकी बातों का
जवाब मत दो, आप तो
कट मोशन पर बोलो।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): राजकीय
प्राथमिक स्वास्थ्य
केन्द्र बेसरोली,
विधान सभा क्षेत्र
परबतसर 1996-97 में बीस
लाख रुपए सैंक्शन
हुए थे, उसका कार्य
अधूरा है जो माननीय
चिकित्सा मंत्री
जी से निवेदन करना
चाहूंगा कि वह
बिल्डिंग हैण्ड
ओवर, टेकन ओवर करके
उसमें पाँच लाख
रुपए और कम पड़
रहे हैं। वह देकर
उसको पूरा करवाया
जाए। यह कहना चाहता
हूं मैं तो।
श्री
अध्यक्ष: यह ठीक
बात है।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): यही कह
रहा हूं मैं तो,
क्या है कि आपका
ध्यान उधर चला
गया माननीय अध्यक्ष
महोदय,
आप
उधर प्रतिपक्ष
वालों को नहीं
देखे। दूसरा मैं
यह निवेदन करना
चाहूंगा कि यह
जो संविदा पर डाक्टर,
कम्पाउण्डर,
ए.एन.एम. लिए गए हैं
उनको परमानैंट
किया जाए ताकि
चिकित्सा स्वास्थ्य
में सुधार होगा
और उप स्वास्थ्य
केन्द्र हैं उनमें
सुलभ काम्पलैक्स
और लैट्रीन बाथरुम
की सुविधा नहीं
है। जर्जर अवस्था
में जो पहले के
उप स्वास्थ्य
केन्द्र बने हैं,
मैंने पच्चीस
लाख रुपए एम.एल.ए.
कोटे के देकर एक
उप स्वास्थ्य
केन्द्र में बीस
हजार, पचास हजार
देकर उनको मरम्मत
करवाया है। सरकार
से भी पैसा मिला
उनमें मरम्मत
का बीस बीस हजार
रुपए। मैं यह चाहता
हूं प्रत्येक
उप स्वास्थ्य
केन्द्र में लैट्रीन,
बाथरूम की सुविधा
हो और प्राथमिक
स्वास्थ्य
केन्द्र जो हैं
वहां सुलभ काम्पलैक्स
हो क्योंकि यहां
गांवों में इस
तरह की बहुत आवश्यकता
है और उसी से साफ
सुथरा हास्पिटल
रह सकता है और गरीबों
को और मरीजों को
उसमें सुविधा मिल
सकती है।
एक हमने
जिस तरह से गांव
गांव, ढाणी ढाणी
में स्कूलें खोलीं
उसी पैटर्न पर
क्यों नहीं प्रत्येक
गांव में और छोटी
ढाणी है उसमें
भी उप स्वास्थ्य
केन्द्र खोला
जाए जिससे ए.एन.एम.
वहां की आस पास
की दस ढाणियां
रहती हैं और राजस्व
गांव है उस लेवल
पर भी उप स्वास्थ्य
केन्द्र खोला
जाए। पंचायत मुख्यालय
पर उच्चीकृत उप
स्वास्थ्य
केन्द्र होगा
तो आस पास की ढाणियों
में ए.एन.एम. जा सकती
हैं, गांवों में
जा सकती हैं और
वह वहां का जो कम्पाउण्डर
है पंचायत मुख्यालय
पर बैठकर सुविधा
दे सकते हैं।
श्री
अध्यक्ष: बस आप
समाप्त करें।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): अभी तो
बोलना ही शुरु
किया है अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अध्यक्ष: आपको
बोलते हो गए हैं
तेरह मिनट।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): तेरह मिनट
में सात मिनट तो
विपक्ष ने ले लिए
हैं, सी. पी. जोशी
साहब ने ले लिए।
श्री
अध्यक्ष: आप कोई
ऐसी बात कहोगे
तो विपक्ष तो लेगा।
आप बात ही ऐसी कहते
हो।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): वह मेरे
गिनती नहीं होगा
अध्यक्ष महोदय।
माननीय चिकित्सा
मंत्री जी को मैं
मेरे क्षेत्र में
ले गया था 20 जनवरी
को और बहुत बड़ा
कार्यक्रम किया
था, पच्चीस हजार
की भीड़ थी।
श्री
अशोक बैरवा (खण्डार):
क्वालिस में।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): हां, क्वालिस
में ले गया, हैलीकाप्टर
में ले गया, आपके
पास क्वालिस है
नहीं, हम तो खानदानी
करोड़पति, अरबपति
हैं।
श्री
अध्यक्ष: बीच
में व्यवधान नहीं
डालें कृपया।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): हिन्दुस्तान
की सब गाडि़या
हैं आप तो ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप जरूरी
नहीं है कि उनकी
बात का जवाब दो,
आप अपना कहो।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): माननीय
अध्यक्ष महोदय, जो आदमी
अपने गिरेबान में
झांककर नहीं देखे,
अब इनके पास गाड़ी
नहीं है मोटर साइकिल
है तो उसका इलाज
मैं क्या करूं।
मैं खानदानी करोड़पति
हूं, इन्कम टैक्स
सबसे ज्यादा देता
हूं, सब गाडि़यां
हैं मेरे पास, हैलीकाप्टर
लाने की कोशिश
कर रहा हूं। अमेरिका
और लंदन से सौ लोग
आए थे उस कार्यक्रम
में और जिस दानदाता
ने पच्चीस लाख
रुपए की लागत से
बहुत बड़ा भवन
बनवाया था, पांचसौ
लोग मुम्बई से
आए थे तो इसलिए
जितने प्रवासी
राजस्थान से बाहर
रहते थे, अमेरिका,
यू.एस.ए. और लंदन
और मुम्बई में
उनके बीच में पच्चीस
हजार की जनसंख्या,
बहुत बड़ी भीड़
थी, उस भीड़ में
माननीय मंत्री
महोदय से श्रीमती
खेलीबाई जाजोरिया
अस्पताल का लोकार्पण
करवाया था ...(व्यवधान)
उस अस्पताल की
माननीय मंत्री
महोदय ने राजकीय
प्राथमिक स्वास्थ्य
केन्द्र को राजकीय
सामुदायिक स्वास्थ्य
केन्द्र में क्रमोन्नत
करने की घोषणा
की थी। मैं आपके
माध्यम से माननीय
चिकित्सा मंत्री
जी से निवेदन करूंगा
कि इसी बजट में
आपकी घोषणा की
क्रियान्विति
करते हुए उसको
सामुदायिक स्वास्थ्य
केन्द्र खेलीबाई
जाजोरिया राजकीय
प्राथमिक स्वास्थ्य
बाजवास को सामुदायिक
स्वास्थ्य
केन्द्र में क्रमोन्नत
किया जाए।
दूसरा
नवीन स्वास्थ्य
केन्द्र जितने
भी खोले हैं उनमें
ए.एन.एम. की भर्ती
की जाए और ए. एन. एम.
लगाई जाएं। राजकीय
सामुदायिक स्वास्थ्य
केन्द्र उसी दिन
परबतसर जो सामुदायिक
स्वास्थ्य
केन्द्र है उसको
भी क्रमोन्नत
करने की माननीय
मंत्री महोदय ने
घोषणा की थी उसको
क्रमोन्नत किया
जाए।
श्री
अध्यक्ष: सामुदायिक
स्वास्थ्य
केन्द्र को काहे
में करेंगे क्रमोन्नत
?
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): रेफरल
में कर देंगे, सौ
शैय्याओं में कर
देंगे, सेटेलाइट
से जोड़ देंगे।
श्री
अध्यक्ष: सैटेलाइट
छोड़ देंगे।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): आपका आशीर्वाद
रहेगा तो आप जो
कहोगे उसी में
क्रमोन्नत कर
देंगे लेकिन क्रमोन्नत
आप करवा देना मेहरबानी
करके। मैं आपके
माध्यम से निवेदन
करना चाहूंगा,
आप साक्षी हो गये।
एक माननीय अध्यक्ष
महोदय,
श्री
अध्यक्ष: अब आप
कन्क्लूड करें।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): अब माननीय
अध्यक्ष महोदय, समाज
कल्याण विभाग
में इनकी एक पोल
तो और खोल दूं साहब
मैं 1997-98 में माननीय
मदन जी दिलावर,
समाज कल्याण मंत्री
उस समय थे और मैं
एम एल ए था और माननीय
मुख्यमंत्री
भैरोंसिंह जी शेखावत
थे, समाज कल्याण
छात्रावास खोला
था और चालीस लाख
रुपए दिए थे 1998 में
चुनाव हार गया
और 1998 में छात्रावास
का ट्रांसफर हो
गया। आपने देखा
मास्टर का ट्रांसफर
होते देखा, जे ईएन,
ए. ईएन का ट्रांसफर
होते देखा लेकिन
इन कांग्रेस के
लोगों ने गहलोत
जी के राज में मेरे
उस छात्रावास का
ही ट्रांसफर कर
दिया। मैं वापस
2003 में आया तो छात्रावास
नहीं मिला फिर
माननीय मुख्यमंत्री
जी से एक निवेदन
किया तो वापिस
समाज कल्याण छात्रावास
गच्छीपुरा में
खोला और 42 लाख रुपए
की लागत से बिल्डिंग
दी उसके लिए भी
मैं माननीय मंत्री
महोदय का धन्यवाद
ज्ञापित करता हूं।
एक ओ.बी.सी.
छात्रावास जो ग्राम
भडू में उसमें
भी 42 लाख रुपए का
भवन दिया, उसके
लिए भी माननीय
मंत्री जी को और
माननीय मुख्यमंत्री
जी को धन्यवाद
देना चाहूंगा।
एक अनुसूचित जाति
के बच्चों के
लिए जो साढ़े पाँच
सौ रुपए है वह बहुत
कम हैं, ऊँट के मुंह
में जीरा है, कम
से कम हजार रुपए
होना चाहिए। गरीब
बच्चा है उसको
साफ सुथरा रहने
के लिए, खाने के
लिए अच्छा भोजन
मिल सके इसके लिए
हजार रुपए करने
की मेहरबानी करें।
समाज कल्याण विभाग
ने जो छात्रावास
अभी सौ छात्रावास
पिछले साल खोले
थे, इस बजट में बिल्कुल
नहीं दिए इसलिए
मैं माननीय मुख्यमंत्री
जी से निवेदन करना
चाहूंगा इस वर्ष
कम से कम पचास समाज
कल्याण छात्रावास
देने की मेहरबानी
करावें और बजट
में ........
vns/usc/15.50/2o/16.3.2007
समाज कल्याण
विभाग को और बजट
दिया जाए। बालिका
समाज कल्याण छात्रावास
परबतसर शहर में
नया खोला जाए यह
माननीय समाज कल्याण
मंत्रीजी से मांग
करना चाहूंगा।
माननीय
अध्यक्ष महोदय, आयुर्वेद
विभाग का ढांचा
खराब है। पुराने
जमाने की आयुर्वेद
की जो पद्धति थी
आप और हम जब आयुर्वेद
विभाग से दवाई
लेते थे। आज कल
आयुर्वेद विभाग
के दरवाजे पर कोई
जाना भी नहीं पसन्द
करते ..
श्री अध्यक्ष:
अब आप कृपया समाप्त
करें।
श्री राकेश
मेघवाल (परबतसर):
इसलिये उस ढाँचे
में सुधार करने
के लिये मैं आपसे
निवेदन करना चाहूंगा।
माननीय मुख्यमंत्री
महोदया से निवेदन
करना चाहूंगा और
माननीय आयुर्वेद
मंत्रीजी से निवेदन
करना चाहूंगा कि
एक अभियान चलाकर
आयुर्वेद विभाग
के इस पूरे सिस्टम
को सुधारने की
कृपा करावें, मेहरबानी
करावें ताकि राजस्थान
की परम्परागत
जो आयुर्वेद पद्धति
है उसको बढ़ावा
मिले और आयुर्वेद
पद्धति लागू की
जावे।
ए एन एम,
डाक्टर और कम्पाउंडर
सब अप डाउन करते
हैं। अध्यक्ष
महोदय, मेरा परबतसर
विधान सभा क्षेत्र
पुष्कर और अजमेर
की सीमा से लगता
है ...
श्री अध्यक्ष:
अब आप बस समाप्त
करें प्लीज।
श्री राकेश
मेघवाल (परबतसर):
तो इन सबका वहां
अप डाउन बंद करावे
और मुख्यालय पर
रहने के आदेश प्रदान
करावें ताकि गरीब
और हर वर्ग का इलाज
हो सके। नहीं तो
शाम को तीन बजते
ही अजमेर और सुबह
ग्यारह बजे से
पहले आना नहीं
पुष्कर से। मैंने
कहा पुष्कर में
पुष्कर सरोवर
में अगर नहाना
है तो नहा कर आ जाओ
लेकिन रहो तो कम
से कम परबतसर विधान
सभा क्षेत्र में
ही। अध्यक्ष महोदय,
आपने समय दिया
उसके लिये धन्यवाद।
श्री अध्यक्ष:
श्री रामलाल शर्मा।
श्री रामलाल
शर्मा (चौमूं): माननीय
अध्यक्ष महोदय, मांग संख्या
26 चिकित्सा एवं
लोक स्वास्थ्य
और सफाई की मांग
पर मैं अपने विचार
प्रकट करना चाहता
हूं।
अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
में सरकार ने पिछले
तीन वर्षों के
अन्दर चिकित्सा
के क्षेत्र में
उल्लेखनीय कार्य
किये है और उनका
जिक्र सभी माननीय
सदस्यों ने अपने-अपने
शब्दों में किया
है। सबसे पहले
मैं धन्यवाद देना
चाहूंगा राजस्थान
सरकार की मुख्यमंत्री
महोदया और चिकित्सा
मंत्री महोदय को
कि इन्होंने राजस्थान
में 2003 में जब सरकार
बनी उस समय चिकित्सा
में अनेकों पद
रिक्त थे और लगभग
731 पदों की भर्ती
करके, लगभग 1400 चिकित्सकों
की पदोन्नति करके,
लगभग 2500 पैरा मेडिकल
स्टाफ की भर्ती
करके राजस्थान
के अन्दर एक इतिहास
कायम करने का काम
किया है इसके लिये
मैं चिकित्सा
मंत्रीजी और माननीय
मुख्यमंत्री
महोदया को धन्यवाद
ज्ञापित करता हूं।
अध्यक्ष महोदय,
ज्यादा समय मैं
लेना नहीं चाहता
हूं। दो-तीन बातें
चिकित्सा के सन्दर्भ
में निवेदन करना
है।
चिकित्सा
का क्षेत्र एक
बहुत ही अति संवेदनशील
क्षेत्र है। हर
सरकार का प्रयास
रहता है कि मनुष्य
का स्वास्थ्य
ठीक रहे और इसके
लिये ग्रामीण क्षेत्र
के अन्दर चिकित्सा
की सुविधाएं दिला
सकें ऐसा प्रयास
सरकारें करती है।
निश्चित रूप से
विगत तीन साल के
अन्दर सरकार ने
अच्छे काम करके
चिकित्सा के क्षेत्र
में जिन पी एच सी
के भवन नहीं थे,
जिन सब सेण्टर्स
पर बिल्डिंग बनी
हुई नहीं थी या
बिल्डिंग बनी हुई
थी तो वह जर्जर
अवस्था में थी
उनको सुधारने का
काम किया है। जिन
सी एच सी के अन्दर
चिकित्सकों के
आवास बने हुए नहीं
थे उन चिकित्सकों
के आवास बनाने
का काम सरकार ने
किया है। मात्र
तीन-चार सुझाव
आज की मांग पर मैं
निवेदन करना चाहता
हूं।
मेरा सुझाव
है कि जब भी नेशनल
हाईवे रोड्स पर
दुर्घटनाएं घटित
होती हैं तो सबसे
पहले सूचना पुलिस
के पास आती है।
सरकार ने इस बजट
के अन्दर सौ एम्बुलेंस
देने की जो घोषणा
की है मेरा निवेदन
है कि इन एम्बुलेंसेज
का उपयोग यदि पुलिस
के माध्यम से
चिकित्सा विभाग
करे तो उससे कई
लाभ हैं। जहां
दुर्घटना घटित
होती है लोग आक्रोशित
होते हैं। रास्ता
जाम करने का प्रयास
करते हैं। रास्ता
जाम करने के बाद
में एम्बुलेंस
की यदि तुरन्त
सुविधा उन्हें
मिलती है तो प्राथमिक
उपचार के आधार
पर उस घायल अवस्था
में व्यक्ति के
प्राण बचाये जा
सकते हैं इसलिये
मेरा निवेदन है
कि क्या चिकित्सा
विभाग इन एम्बुलेंसेज
का उपयोग नेशनल
हाईवे रोड्स के
ऊपर दुर्घटना के
समय कर सकता है
?
दूसरा सुझाव
मैं और निवेदन
करना चाहता हूं
कि जननी सुरक्षा
योजना के तहत सरकार
ने जिन मापदंडों
के आधार पर प्रसव
के बाद जो सहायता
दी जाती थी उस सहायता
के बारे में कभी
राशन कार्ड, कभी
कहते हैं कि आपका
रेफरल कार्ड बना
हुआ नहीं है और
कभी उनको कहा जाता
है कि आपके टीके
सही समय पर नहीं
लगे इस आधार पर,
अध्यक्ष महोदय,
मैं निवेदन करूंगा
कि एक मात्र मेरे
चौमूं विधान सभा
क्षेत्र में आज
भी अप्रैल, 2006 से लेकर
फरवरी, 2007 तक लगभग
1500 प्रसव महिलाओं
को अभी तक भुगतान
नहीं मिला। कभी
उनको कहते हैं
कि आपका राशन कार्ड
दूसरी तहसील का
बना हुआ है हम आपका
भुगतान नहीं करेंगे।
कभी कहते हैं कि
आपका रेफरल कार्ड
बना हुआ नहीं है
इसलिये हम आपको
भुगतान नहीं करेंगे।
कभी उनको कहा जाता
है आपके टीके ठीक
समय पर नहीं लगाये
इसलिये आपका भुगतान
नहीं करेंगे। जिस
हास्पिटल के अन्दर
डिलीवरी हुई है,
जिस हास्पिटल के
अन्दर प्रसव हुआ
है उससे बड़ा प्रमाण
कोई हो नहीं सकता
चाहे वह किसी भी
विधान सभा क्षेत्र
की रहने वाली हो,
किसी भी तहसील
की रहने वाली हो
यदि उस चिकित्सालय
के अन्दर उसको
डिलीवरी हुई है
तो उसको जननी सुरक्षा
योजना के तहत सहायता
मिलनी चाहिये।
मेरा सुझाव
है माननीय अध्यक्ष
महोदय, जयपुर
के अन्दर सबसे
ज्यादा दवाब सवाई
मानसिंह हास्पिटल
के अन्दर रहता
है। क्या इस दवाब
को कम करने के लिये
जयपुर जिले के
आस-पास 30 किलोमीटर
की परिधि के अन्दर
पड़ने वाली सी
एच सी को यदि हम
सुविधायुक्त
बनाने का काम करेंगे
तो निश्चित रूप
से जयपुर के एस
एम एस हास्पिटल
का दवाब भी कम होगा
और उन 30 किलोमीटर
की परिधि में आस-पास
के पड़ने वाले
गांवों के अन्दर
एक अच्छी चिकित्सा
सुविधा उपलब्ध
रह सकेगी।
माननीय
अध्यक्ष महोदय, एक बात अभी
माननीय सदस्य
ने अपनी रखी थी
चिकित्सकों के
द्वारा प्राइवेट
जांचें करवाना
या प्राइवेट जाँचों
के बाद अनियमितता
कहूं या कोई खुद
के स्वार्थों
की बात कहूं यह
एक बहुत गंभीर
बात है। आज सरकार
के द्वारा जितनी
भी सी एच सी, पी एच
सी हैं वहां दवाइयों
के अपार भण्डार
भरे हुए हैं। वह
दवाईयां खराब हो
जाती हैं लेकिन
उनका वितरण नहीं
हो पाता है। मेरा
सुझाव है कि इसकी
भी एक मानीटरिंग
कमेटी बना कर उन
दवाइयों का सही
उपयोग हो सके इसके
लिये भी हम सबको
प्रयास करने की
आवश्यकता है।
चिकित्सा
के क्षेत्र में
उल्लेखनीय काम
माननीय चिकित्सा
मंत्रीजी ने किये
हैं ज्यादा कुछ
निवेदन नहीं करना
चाहता। मेरे विधान
सभा क्षेत्र के
अन्दर किशनपुरा
जो सब सेण्टर
है उस सब सेण्टर
के अन्दर पी एच
सी खुलना नितान्त
आवश्यक है क्योंकि
लगभग उसके 15 किलोमीटर
की परिधि के अन्दर
कोई दूसरी सी एच
सी नहीं है। हमारा
चौमूं का जो सी
एच सी हास्पिटल
है उस चिकित्सालय
को भी क्रमोन्नत
करने की आवश्यकता
है। राष्ट्रीय
राजमार्ग पर वह
हास्पिटल है। अब
की बार सरकार ने
इस बजट सत्र में
जो घोषणा की है
कि सभी चिकित्सालयों
में 24 घण्टे डाक्टर
उपलब्ध रहेंगे
निश्चित रूप से
ग्रामीण क्षेत्र
के अन्दर इस घोषणा
का असर पड़ेगा
और आपात काल में,
इमरजेंसी के अन्दर
जिन सुविधाओं की
आवश्यकता रहती
है उनको सुविधा
निश्चित रूप से
मिलेगी।
एक बार पुन:
चिकित्सा के क्षेत्र
में सरकार ने उल्लेखनीय
काम किये हैं उनके
लिये और आने वाले
समय में चिकित्सा
क्षेत्र में और
भी अधिक हम अब मिलकर
काम कर सकें। बहुत-बहुत
धन्यवाद आपने
मौका दिया।
श्री अध्यक्ष:
थैंक यू।
श्री संयम
लोढ़ा (सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके ध्यान में
लाना चाहूंगा कि
आसन से व्यवस्था
दी गयी थी कि जयपुर
के संभागीय आयुक्त
की जांच रिपोर्ट
के सम्बन्ध में
4.00 बजे गृह मंत्रीजी
वक्तव्य देंगे।
श्री अध्यक्ष:
दी गयी थी ?
शासकीय
वक्तव्य
जयपुर
कलेक्ट्रेट परिसर
में आयोजित डांस
पार्टी
श्री गुलाब
चन्द कटारिया
(गृह मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, दिनांक
2.3;2007 को कलेक्ट्रेट,
जयपुर परिसर में
होली स्नेह मिलन
के अवसर पर आयोजित
विवादास्पद डांस
पार्टी एवं दिनांक
5.3.2007 को कलेक्ट्रेट
परिसर में मीडियाकर्मी
एवं कर्मचारियों
के मध्य मार-पीट
की घटना की संभागीय
आयुक्त, जयपुर
से जांच करायी
गयी। जांच में
निम्न तथ्य सामने
आये।
दिनांक
2.3.2007 को कलेक्ट्रेट
परिसर में होली
मिलन समारोह आयोजित
हुआ था जिसमें
आर्केस्ट्रा
पार्टी, पेशेवर
नर्तिकाएं भी थी।
आर्केस्ट्रा
पार्टी विभागीय
समिति द्वारा बुलायी
गयी थी। कार्यक्रम
में कलेक्ट्रेट
कर्मचारी, अधिवक्ता,
जिला कलेक्टर,
अतिरिक्त जिला
कलेक्टर तृतीय,
सहायक कलेक्टर,
जयपुर एवं उप खंड
अधिकारी, जयपुर
ने भाग लिया। पेशेवर
महिलाओं के कार्यक्रम
प्रस्तुत करने
हेतु बुलाने से
विवादास्पद स्थिति
बनी एवं इसमें
कलेक्ट्रेट परिसर
की छवि भी दुष्प्रभावित
हुई है। आर्केस्ट्रा
पार्टी का आयोजन
करना एवं महिलाओं
को बुलाये जाने
में विभागीय समिति
के अध्यक्ष श्री
रामावतार भारद्वाज
एवं कलेक्ट्रेट
में कार्यरत कर्मचारी
श्रीमती गौरी देवी
की मुख्य भूमिका
रही। उसके अलावा
श्री अनिल जैन,
कनिष्ठ लिपिक
का आचरण भी अनुशासनात्मक
कार्यवाही के योग्य
रहा। दिनांक
3.3.2007 को समाचार पत्र
में प्रकाशित दृश्यों
में जिन चार कर्मचारियों
श्री विजय कुमार
गुप्ता, कनिष्ठ
लिपिक, श्री सुरेश
कुमार, कनिष्ठ
लिपिक, श्री मुन्ना
लाल, वाहन चालक
और श्री दामोदर
मीणा, वाहन चालक
भी पाये गये इनके
विरुद्ध जिला कलेक्टर
द्वारा अनैतिक
आचरण सम्बन्धी
कार्यवाही 16 सी
सी ए का नोटिस दिया
गया। जिला कलेक्टर
द्वारा श्री रामावतार
भारद्वाज, श्री
अनिल जैन और श्रीमती
गौरी देवी के विरुद्ध
कार्यवाही नहीं
की गयी। सभी सातों
कर्मचारी जो घटना
में किसी न किसी
प्रकार से लिप्त
पाये गये हैं।
श्याम/चौहान 16.03.2007
16.00 2p
इनके विरूद्व
अनुशासनात्मक
कार्यवाही के अतिरिक्त
उन्हें तत्काल
जयपुर से बाहर
स्थानांतरित
किया जायेगा। जिला
कलेक्टर जयपुर
ने विभागीय समिति
के अध्यक्ष एवं
कर्मचारियों के
आग्रह पर कुछ समय
के लिए कार्यक्रम
में भाग लिया था।
जिला कलेक्टर
को यह अवगत नहीं
कराया गया था कि
होली के कार्यक्रम
में नाच-गाने वाली
महिला नृत्यंगनाओं
को भी बुलाया गया
है। उनकी उपस्थिति
में कोई अभद्रता
या अश्लील हरकत
नहीं हुई थी। फोटो
में श्री मुन्नालाल,
वाहन चालक को शराब
की बोतल कमीज के
अंदर से निकालते
हुए दिखाया गया
है। यह फोटो कलेक्टर
परिसर के दूसरे
चौक की है जिसपर
बैडमिंटन दिखाई
दे रहा है। होली
मिलन समारोह में
शराब पीने वाले
किसी अन्य कर्मचारी
की पहचान नहीं
हुई। संभवतया:
जान-बूझकर के वाहन
चालक के फोटो को
समारोह से जोड़कर
समाचार में दर्शाया
गया है। समारोह
स्थल पर शराब
आदि पीने के संबंध
में कोई तथ्य
उपलब्ध नहीं है।
मदिरा सेवन के
बारे में आभास
यह है कि कुछ लोगों
ने अलग से जाकर
के मदिरा का सेवन
किया था।
अध्यक्ष महोदय,
दिनांक 5.3.2007 को कर्मचारियों
द्वारा समाचार-पत्रों
में होली मिलन
समारोह के आयोजन
के संबंध में प्रकाशित
आपत्तिजनक समाचारों
के स्वरूप मध्यान्ह
अवकाश समय मीटिंग
आयोजित की गयी
थी जिसमें मीडिया
कर्मियों द्वारा
फोटो खींचे जाने
पर कर्मचारियों
और मीडिया कर्मियों
के बीच झगड़ा और
विवाद उत्पन्न
हुआ। इस संदर्भ
में तीन प्रकरण
थाना बनीपार्क
में दर्ज किये
हैं। एक प्रकरण
श्री प्रमोद शर्मा,
प्रेस फोटोग्राफर,
दैनिक नवज्योति
द्वारा, दूसरा
प्रकरण श्री रामावतार
भारद्वाज, अध्यक्ष,
विभागीय समिति
कलेक्ट्रेट जयपुर
द्वारा और तीसरा
प्रकरण श्री जितेन्द्र
भारद्वाज, एडवोकेट
पुत्र श्री रामावतार
भारद्वाज द्वारा
दर्ज कराया गया।
तीनों प्रकरण दिनांक
5.3.2007 की घटना से संबंधित
हैं। इसमें अनुसंधान
की कार्यवाही जारी
है। अतिरिक्त
पुलिस अधीक्षक
इसकी कार्यवाही
कर रहे हैं। कुछ
गवाहों के बयान
हो चुके हैं, कुछ
अनुसंधान अभी अधूरा
है परन्तु अनुसंधान
होने के बाद पुलिस
कार्यवाही की जायेगी।
श्री संयम लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से माननीय
गृह मंत्रि जी
से यह निवेदन करना
चाहता हूं कि जो
2 तारीख को कार्यक्रम
हुआ उसकी पूरी
सी.डी. मौजूद है।
यह कार्यक्रम साढ़े
तीन बजे शुरू हुआ।
आपके जिला कलेक्टर
3 बजकर 45 मिनट पर उस
कार्यक्रम में
गये और 4 बजकर 40 मिनट
तक उस कार्यक्रम
में बैठे रहे।
6 गाने नृत्यांगनाओं
ने उनकी मौजूदगी
में पेश किया है
और यह सब सी.डी. में
मौजूद है, नम्बर
एक। नम्बर दो,
उसके बाद खबर अखबारों
में साया हुई और
फिर 5 तारीख को कलेक्ट्रेट
के उसी परिसर में
कर्मचारियों की
सभा हुई। भडकाऊ
भाषण दिये गये।
कर्मचारियों द्वारा
मारपीट करने की
बात की गयी। यहां
तक कि राजस्थान
पत्रिका के फोटोग्राफर
या कौनसे का है,
मुकेश शर्मा, उसने
कलेक्टर के चैम्बर
में घुसकर अपनी
जान बचाई है। इस
बसके बावजूद कलेक्टर
की कोई रेस्पोंसिबिलिटी
नहीं है। 45 मिनट
तक नृत्यांगनाओं
के नृत्य होते
रहे और होली के
अवसर पर कोई सांस्कृतिक
कार्यक्रम करना
भी चाहते हैं तो
कर्मचारी कार्यक्रम
पेश करें। पेशेवर
नृत्यांगनाओं
का कलेक्ट्रेट
में क्या औचित्य
है और खाली कलेक्टर
ही नहीं, आपका ए.डी.एम
वहां बैठा हुआ,
आपका एस.डी.एम. वहां
बैठा हुआ। अब सरकार
कौनसी संस्कृति
विकसित करना चाहती
है वह तो आपको तय
करना है। आज हमारी
दृष्टि में ...(व्यवधान)
श्री सांगसिंह
भाटी (जैसलमेर):
इस तरह से आप सरकार
पर आरोप लगा रहे
हैं। इस ढंग से
आप आरोप लगा रहे
हो ...(व्यवधान) सरे
आम मनगढंत बात
कर रहे हैं सदन
के अंदर, गलत बात
कर रहे हैं सदन
में ...(व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा
(सिरोही): हमारी
दृष्टि में जो
कुछ हुआ है वह किसी
भी रूप में गृह
मंत्रि जी, जिस
सांस्कृतिक परिवेश
से आप आते हैं ...(व्यवधान)
श्री सांगसिंह
भाटी (जैसलमेर):
संस्कृति आपसे
सीखें हम ...(व्यवधान)
आप खुद संस्कृति
देखकर के फिर बात
करना ...(व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा
(सिरोही): जिस संस्कृति
का आपने निर्माण
किया है ...(व्यवधान)
श्री सांगसिंह
भाटी (जैसलमेर):
यह सी.डी. गलत बनाकर
के पेश कर रहे हैं
आप सदन में ...(व्यवधान)
काहे की सी.डी. पेश
की है सदन में ...(व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा
(सिरोही): यह ठीक
नहीं है, एक मिनट
भी जयपुर का जिला
कलेक्टर अपने
पर कंटीन्यु करे
...(व्यवधान)
डा. सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): अध्यक्ष
महोदय, भारत की
संसद ने कुछ एम.पी.
को टी.वी. पर चैनल
में आने के बाद
कि क्वेश्चन
के लिए उन्होंने
पैसे लिये उनको
डिसक्वालिफाई
किया और उनकी जगह
चुनाव हुए। एक
तरफ हमारी संसद
अपनी गरिमा बनाने
के लिए उन सांसदों
को जिन्होंने
टी.वी. के चैनल के
माध्यम से जब
यह समाचार आया
कि इस तरह की घटना
हुई उस पर एक्शन
लिया। माननीय गृह
मंत्रि जी आपके
स्वयं के कथन
के अनुसार आप यह
मानते हैं कि वहां
पेशेवर नृत्य
हुआ। इसमें कोई
डिसप्युट नहीं
है। यह भी कोई डिसप्युट
नहीं है कि विभागीय
समिति ने होली
मिलन का कार्यक्रम
रखा और यह भी कोई
डिसप्युट नहीं
है कि कलेक्टर
से लेकर के नीचे
लेवल तक के अधिकारी
वहां मौजूद थे।
कलेक्टर की मौजूदगी
में यह घटना हो
जाये। कलेक्टर
को जानकारी थी
या नहीं थी, लेकिन
कलेक्टर की मौजूदगी
में यह घटना हो
गयी, टी.वी. पर आ गयी,
मैंने स्वयं ने
ई टी.वी. पर कमिश्नर
का, पार्लियामेंट्री
अफेयर मिनिस्टर
का स्टेटमेंट
सुना तब तक सरकार
ने कोई कार्यवाही
नहीं की। सरकार
ने कार्यवाही की
विधान सभा में
चर्चा करने के
बाद। विधान सभा
चल रही है, विधान
सभा के सदस्य
यहां पर मौजूद
हैं, ऐसा कृत्य,
जिस कृत्य में
मैं नहीं कहता
कि कलेक्टर इनवाल्व
है। लेकिन यह बात
तो सत्य है कि
5 बजे तक कलेक्टर
की डयुटी है। जब
कलेक्टर की डयुटी
में कोई घटना हो
जाये तब जिम्मेदारी
किसकी बनती है।
मैं समझता हूं
कि हमें इसको लाइटली
नहीं लेना चाहिए
I don’t want to question
about the credential of the Collector but simultaneously I am concerned about
this कि यदि आपने
इस तरह की चीजों
को एग्जम्पलरी
पनिशमेंट देकर
नहीं मैसेज दिया
तो ना आपके हित
में है, ना हम सबके
हित में है। जब
विधान सभा चल रही
है, इलेक्ट्रानिक
मीडिया में यह
चीज आ जाये। आप
और हम सब यह कहें
कि यह चौथा स्तंभ
है और उसके बाद
भी हम कार्यवाही
नहीं करें तो मैं
उसकी मेरिट में
नहीं जाना चाहता
हूं । यह मैं आप
पर छोड़ता हूं।
उस दिन भी मैंने
यह बात कही थी आपसे,
फिर रिपीट कर रहा
हूं कि 5 बजे के पहले
यदि कलेक्टर मौजूद
है तो कलेक्टर
अपनी जिम्मेदारी
से नहीं बच सकता
है। आप मुझे यह
बता दें कि कौनसे
नियमों के अंतर्गत
कलेक्टर सरकारी
काम में, एक लिबरल
तरीके से एक प्रोग्राम
कराये, वहां तक
तो समझ में आता
है लेकिन जब आप
खुद गृह मंत्रि
की हैसियत से यह
मान रहे हैं कि
वहां पेशेवर नृत्य
हुआ, 5 बजे के पहले
कलेक्टर मौजूद
था तो मुझे बता
दं कि कौनसे कानून
में कलेक्टर को
सज़ा नहीं मिलनी
चाहिए। मैं इसमें
डिसप्युट भी नहीं
करना चाहता। आप
खेड़े होकर के यह कह दें
स्वंविवेक कि
क्या हम सबकी
गरिमा के लिए, इलेक्ट्रानिक
मीडिया जो पीपुल
वाच का काम करता
है, प्रिंट मीडिया
जो लोगों को जानकारी
देता है। यदि उनकी
क्रेडिबिलिटी
को भी हम खत्म
कर देंगे तो इस
विधान सभा को बंद
कर देना चाहिए।
यदि हम यह मैसेज
भी नहीं देना चाहते
हैं। मैं फिर कह
रहा हूं कि मैं
उस कलेक्टर की
कांपिटेंस पर क्वेश्चन
मार्क नहीं कर
हाँ हूं, मैं सरकार
की क्रेडिबिलिटी
पर क्वेश्चन
मार्क कर रहा हूं
कि सरकार इस चीज
को टोलरेट कैसे
कर रही है।
अध्यक्ष महोदय,
मैं आपसे आशा करता
हूं कि आप खड़े
होकर सदन में आश्वस्त
करें कि हम इस पर
कार्यवाही करेंगे।
हम इससे ज्यादा
कुछ नहीं चाहते।
फिर आप भावनाओं
में बह जायेंगे
क्योंकि आपकी
भावना जब शुरू
होती है तो रूकती
नहीं हैं। अब तो
हमारा कोई दबाव
नहीं है। आपस सानुरोध
प्रार्थना है कि
आप स्वंविवेक
से खड़े होकर के
कह दें कि अपनी
भावना से, मन से
कह रहे हैं कि कलेक्टर
यहीं रहना चाहिए,
कोई कार्यवाही
नहीं होनी चाहिए।
सरकार ठीक कर रही
है। यदि हम एक शब्द
नहीं बोलेंगे और
यदि आपका मन यह
कहता है कि कलेक्टिव
रेस्पोंसिबिलिटी
है तो कलेक्टिव
रेस्पोंसिबिलिटी
में एक्शन नहीं
लेने में आप भी
पार्टी होंगे You can not search the
responsibility that I was not responsible as a Minister. कलेक्टिव
रेस्पोंसिबिलिटी
में मिस्टर गुलाब
चन्द कटारिया
हू प्रोफेस कि
मेरे संस्कार
हैं जो प्रोफेस
करते हैं कि मैं
संस्कार के कारण
राजनीति में हूं।
यदि वह टोलरेट
करते हैं तो मैं
समझता हूं कि यह
इतिहास आपको भी
माफ नहीं करेगा।
कटारिया जी, इसलिए
मैं आशा करता हूं
कि हम इसको विवाद
का विषय नहीं बनाना
चाहते हैं क्योंकि
डेमोक्रेसी में
ब्युरोक्रेसी
ही काम करती है।
वही आपका अंग होती
है, हमारा, सबका
अंग होती है। हम
यह भी नहीं चाहते
हैं लेकिन साइमनटेंसली
हमने इन चीजों
को नहीं रोका तो
हम ठीक काम नहीं
करेंगे। मैं आपसे
आशा करता हूं कि
आप खड़े होकर सदन
को आश्वस्त करेंगे।
जब सदन चल रहा है
तो सदन की गरिमा
बनी रहे, चौथे स्तंभ
की गरिमा बनी रहे।
राजस्थान की जनता
इस बात के लिए आश्वस्त
रहे कि यह सरकार
इस तरह के एक्शन
को पसंद नहीं करती
है और लाउड लेवल
पर यह मैसेज जाना
चाहिए कि यदि ऑफिस
ऑवर में यह काम
होता है तो उसके
बारे में सरकार
सख्त कदम उठाती
है। यह हम आपसे
आशा करते हैं।
आप कृपया इस पर
एक्शन के संबंध
में अपनी बात कहें।
मैं आपसे सानुरोध
निवेदन करना चाहता
हूं कि फिर भावनाओं
में नहीं बहें
क्योंकि भावनाओं
में बहने के बाद
हम दो बात कहेंगे
आप भावना में आयेंगे
फिर आप निर्णय
ले लेंगे कि मैं
भावना में, दबाव
में काम नहीं करता
हूं। सात दिन हो
गये, दबाव किसी
का नहीं है। आपका
स्वयं का यह जो
स्टेटमेंट है
कि यह पेशेवर नृत्य
था, आपका स्वयं
का यह कनफेक्शन
है कि कलेक्टर
वहां मौजूद था।
आप स्वयं भी डिनाई
करने की स्थिति
में नहीं है। पाँच
बजे बाद यह घटना
नहीं हुई है। आप
स्वयं डिनाई करने
की स्थिति में
नहीं हैं कि उस
दिन छुट्टी नहीं
थी। आप स्वयं
डिनाई नहीं कर
सकते हैं कि कलेक्टर
की सुपरविजन नेग्लीजेंस
नहीं है।
अध्यक्ष महोदय,
यदि यह सत्य बात
है तो मैं आपसे
आशा करता हूं कि
इस चैप्टर को
अभी बंद कर दें।
हमें कोई तकलीफ
नहीं है। हम डिबेट
नहीं करना चाहते
क्योंकि चार दिन
तक हाउस नहीं चला।
हम एक्सट्रीम
स्टैप लें, फिर
आप कहेंगे कि आप
हाउस को नहीं चलने
दे रहे हैं। हम
आप पर छोड़ते हैं।
आप यदि यह निर्णय
कर दें।
जयगोविन्द/यूएस/16.3.7/16.10/2q
माननीय अध्यक्ष महोदय, आप इस पर निर्णय करें लेकिन यदि एक्शन नहीं होता है तो हमारा प्रोटेस्ट बहुत स्ट्रोंग प्रोटेस्ट होगा। फिर आप हमको मत कहना कि सदन चलाने के लिए आप बात नहीं कर रहे हैं, ठीक भी नहीं रहेगा।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): नहीं, नहीं जिन कर्मचारियों को आपने 16 सी सी ए के नोटिस दिए...। श्री अध्यक्ष: बात तो आ गई पूरी।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): जिन कर्मचारियों को इन्होंने 16 सी सी ए के नोटिस दिए, दोषी माना, कम से कम उनको सस्पैण्ड तो करो, आप तो उनको दोषी भी मान रहे हो और कार्यवाही भी नहीं कर रहे हो। ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष: 16 सी सी ए का नोटिस कोई कम थोड़े होता है? ...(व्यवधान)...
श्री मोहन लाल गुप्ता (किशनपोल): माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने अन्य सदस्यों को बोलने का मौका दिया, माननीय अध्यक्ष महोदय, यह जयपुर से सम्बन्धित मामला है, मैं दो मिनट में अपने विचार रखना चाहता हूं।
श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्यक्ष महोदय, गृह मंत्रीजी ने 5 तारीख को इसी हाउस में कहा था कि 5 बजे तक यदि घटना हुई है ...(व्यवधान)... ।
श्री मोहन लाल गुप्ता (किशनपोल): माननीय अध्यक्ष महोदय ने मुझे समय दिया है। आप तो बोलते रहते हैं। आप विराजें।
श्री अमराराम (धोद): मेरा तो एक ही सवाल है, उसके बाद आप बोल लेना।
श्री मोहन लाल गुप्ता (किशनपोल): माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे समय दिया है, आप इन माननीय सदस्य को बैठाएं। यह काफी डिस्टरबेंस करते रहते हैं और बार-बार बोलते रहते हैं, अन्य लोगों को बोलने का मौका देते नहीं हैं। ...(व्यवधान)...
श्री अमराराम (धोद): गृह मंत्रीजी ने 5 तारीख को इसी हाउस में यह स्टेटमेंट दिया था कि ऑफिस टाइम में 5 बजे तक अगर प्रोग्राम हुआ, उसमें कलेक्टर शामिल हुआ है तो हम उस कलेक्टर पर कार्यवाही करेंगे। मैं समझता हूं कि गृह मंत्रीजी ने इसी हाउस में यह शब्द कहे थे, अगर उन पर वे कायम हैं तो निश्चित रूप से कलेक्टर जिसने जिम्मेदार पद पर रहते हुए यह कृत्य किया है उसके लिए उनको सज़ा की यहां घोषणा करनी चाहिए, अगर वह अपने शब्दों पर कायम है तो। ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष: बस ठीक है, अब आप पूछ लीजिए।
श्री मोहन लाल गुप्ता (किशनपोल): माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बहुत गम्भीर मामला है, होली का त्यौहार सभी दफ्तरों में मनाते हैं, सभी गली मौहल्लों में मनाते हैं। ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष: आप बीच में क्यों खड़े हो गए? बोलने दीजिए उनको।
श्री मोहन लाल गुप्ता (किशनपोल): यह जो होली का त्यौहार है, वह सब जगह मनता है लेकिन इसमें भी एक मर्यादा होती है और मर्यादाओं का पालन निश्चित रूप से समाज के सभी वर्गों को करना चाहिए। हम अपने को सभ्य समाज कहते हैं और कलेक्ट्रेट एक पावन स्थल है, निश्चित रूप से होली खेलते समय मर्यादाओं का पालन होना चाहिए चाहे वह कर्मचारी हो चाहे वह अधिकारी हो। आखिर हर चीज की एक मर्यादा होती है और मर्यादाओं के अंदर ही हम सब काम करते हैं, सारे पर्व मनाते हैं। आजकल तो रंग फेंकने या विभिन्न प्रकार के मजाक करने को भी सभ्य समाज में ठीक नहीं माना जाता है। इसलिए मेरा यह मानना है कि जिन भी कर्मचारियों और अधिकारियों ने इस प्रकार का कार्यक्रम किया, मीडिया ने उसको दर्शाया, शराब बाहर पी हो लेकिन किसी कर्मचारी के हाथ में, उसकी जेब में शराब की बोतल भी पाई गई। निश्चित रूप से यह अशोभनीय कृत्य है। मैं सोचता हूं कि निश्चित रूप से जो-जो लोग भी उसमें दोषी हैं, सरकार को उन पर कार्यवाही करनी चाहिए। हमें उसका कोई प्रोटेक्शन नहीं करना चाहिए। कलेक्टर वहां मौजूद थे, वह डाइरेक्ट इन्वॉल्व नहीं है लेकिन इसके बावजूद भी सुपरवाइजरी नेग्लीजेंसी उनकी बनती है, सुपरवाइजरी नेग्लीजेंसी को हम इग्नोर नहीं कर सकते हैं, हमें डिफेंड नहीं करना चाहिए और जब एक छोटे से छोटे कर्मचारी को उसकी सुपरवाइजरी नेग्लीजेंसी के नाम पर या कोई छोटी सी गलती के नाम पर उसको प्रताडि़त कर सकते हैं तो निश्चित रूप से बड़े से बड़े अधिकारी भी जिस प्रकार की सुपरवाइजरी नेग्लीजेंसी के लिए दोषी है, ठीक है, सीधे-सीधे उन्होंने नृत्यांगना नहीं बुलाई, कर्मचारी संघ के माध्यम से बुलाई लेकिन उनके व्यवहार से, उनके आचरण से जनता को यह मैसेज जाना चाहिए था कि जयपुर शहर के वह कलेक्टर हैं, उनका आचरण एक मर्यादित आचरण है, उनका व्यवहार एक मर्यादित व्यवहार है, यह जयपुर शहर की जनता को ही नहीं बल्कि राजस्थान की जनता को भी यह मैसेज जाना चाहिए। निश्चित रूप से कोई कार्यवाही करें या न करें, इस बारे में बात नहीं है लेकिन जयपुर शहर की जनता में एक मैसेज जाना चाहिए और प्रेस ने जिस प्रकार इस कृत्य को उजाकर किया है, कृत्य के बारे में जनता को जानकारी दी है उसके लिए मैं प्रेस को साधुवाद देता हूं, धन्यवाद देता हूं और साथ ही साथ माननीय गृह मंत्री महोदय के माध्यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति हो, इस सम्बन्ध में मैं समझता हूं कि कार्यवाही करे। धन्यवाद। ...(व्यवधान)...
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): एक सवाल गृह मंत्री महोदय से पूछना चाहता हूं। ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष: बात तो पूरी आ गई, अब क्या कहना चाहते हैं?
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): माननीय गृह मंत्री महोदय, क्या मीडिया की तरफ आपको कोई ज्ञापन प्राप्त हुआ है? यदि हां तो उस पर आपने क्या कार्यवाही की है? क्योंकि माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रकरण के बारे में तो सबने बता दिया, मैं उस पर नहीं जाना चाहता लेकिन मीडिया का फर्ज है कि किसी भी चीज की कमी को जनता तक पहुंचाए, मीडिया हमेशा जनता की आवाज हुआ करता है इसलिए मीडिया के साथ जो हुआ उस सम्बन्ध में क्या मीडिया ने आपको कोई ज्ञापन दिया है और ज्ञापन दिया है तो उसमें क्या मांग की गई है और उस पर आपने क्या कार्यवाही की है, इसकी भी सदन को जानकारी दे दें।
श्री रणधीर सिंह भीण्डर (वल्लभनगर): माननीय अध्यक्ष महोदय, एक सैकण्ड ...(व्यवधान)... ।
श्री अध्यक्ष: नहीं, अब बीच में नहीं, अब नहीं, सारी बात तो आ गई।
श्री रणधीर सिंह भीण्डर (वल्लभनगर): यह मर्यादा का पाठ पढ़ाने वालों के उस राज में भी होली आई थी और इनके गृह मंत्री के गृह जिले के गृह थाने में कालबेलिया नाच हुआ था, उनको भी पैसा दिया गया था और उस सी आई को प्रमोट करके इन्होंने डीवाई एस पी बनाया। उसके खिलाफ आपने क्या कार्यवाही की? ...(व्यवधान)...
श्री जुबेर खान (रामगढ़): कालबेलिया डांस के लिए तो मुख्य मंत्रीजी एक स्कूल खुलवा रही हैं। ...(व्यवधान)...
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हमने करवाया तो बंद करवाओ। ...(व्यवधान)... यह आपका राज है, हमने करवाया इसलिए आप भी करवाएंगे क्या? ...(व्यवधान)...
श्री जुबेर खान (रामगढ़): कालबेलिया नृत्य सिखाने के लिए तो आपकी सरकार स्कूल खोल रही है। यह राजस्थान की संस्कृति है। ...(व्यवधान)...
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य, आप उस समय हाउस में नहीं थे। माननीय गृह मंत्रीजी हाउस में थे। उस प्रकरण में कटारियाजी ने एक घण्टा भाषण दिया। आप उनसे बात करिए, उन्होंने जो बात कही वह हमें आज भी याद है। शायद उनको याद नहीं है। ...(व्यवधान)... मुझे तो याद है। आपने उस कृत्य को उस समय कंडेम किया था, आपने जब सदस्य के रूप में कंडेम किया तो एक मंत्री के रूप में आपसे अधिक अपेक्षा की जाती है।
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारी संस्कृति के अनुसार मामला नहीं है पर होली का समय है इसलिए इस बात को यही समाप्त कर देना चाहिए। मामला गम्भीर है, कलेक्टर दोषी है इसमें कोइ दो राय नहीं है पर इतनी बात तो सोचे कि होली ही थी, गलती हो गई। ...(व्यवधान)...
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने इस घटनाक्रम में कोई बात छुपाने की कोशिश नहीं की है। जैसे ही आपने विषय उठाया, मैंने दो मिनट में कहा कि संभागीय आयुक्त से जांच करवा लेते हैं। आपने जितना कहा सात दिन के समय में जांच करवाई, जांच की रिपोर्ट जो उन्होंने दी, उन सारी बातों को मैंने समाहित करते हुए आपकी सामने रखी न तो इसमें जो पेशेवर नृत्यागंनाएं आई उसको नाम नहीं कहा, न मैंने कलेक्टर की उपस्थिति नहीं है ऐसा भी नहीं कहा, कलेक्टर की उपस्थिति वहां है, जो बात अमरारामजी ने कही, समय साढ़े चार और पाँच के बीच है, निश्चित रूप से है, वह भी उसमें वेरीफाई हुआ है और जो उनकी उपस्थिति और कलेक्ट्रेट परिसर में घटना घटी है, निश्चित रूप से कलेक्टर भी उसमें नेग्लीजेंसी के लिए जिम्मेदार अवश्य है, इसमें कहीं भी किसी चीज को कोई छुपाने का कारण नहीं है। जब हम कोई चीज जनता के बीच में लेकर जाना चाहते हैं तो वह ठीक ढंग से जाए और भविष्य में इस प्रकार की घटना घटित न हो यह हमारा मकसद रहा है और मैं निश्चित रूप से आपकी भावना सम्बन्धित सी एम तक पहुंचा कर जो भी कलेक्टर के खिलाफ कार्यवाही हो सकती है वह उसके खिलाफ भी हो, इसमें किसी प्रकार का कुछ नहीं है।
श्री अध्यक्ष: श्रीमती ममता शर्मा। ...(व्यवधान)... डिमाण्ड शुरू, डिमाण्ड शुरू।
श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्यक्ष महोदय, गृह मंत्रीजी की भावनाओं को तो मैं धन्यवाद देता हूं लेकिन मुख्य मंत्रीजी ही उनको बचा रही हैं, वरना तो मैं समझता हूं कि आज 14 तारीख हो गई, जिस कलेक्टर को मुख्य मंत्री बचा रही है, गृह मंत्रीजी की भावनाएं....।
श्री मोहन लाल गुप्ता (किशनपोल): ऐसी बात करके आप सदन में तनाव पैदा करते हैं। कहां से मुख्य मंत्रीजी उसका बचाव कर रही हैं। मुख्य मंत्रीजी कहां बचाव कर रही है? आप अनावश्यक तनाव पैदा कर रहे हैं। ...(व्यवधान)...
श्री अमराराम (धोद): गृह मंत्रीजी की भावनाओं से हम सब सहमत हैं। ...(व्यवधान)...
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): जयपुर राजधानी है उसमें इतनी बड़ी घटना हो गई, सरकार भी उतनी ही दोषी है। सरकार ऐसे मामले में कोई कार्यवाही नहीं कर रही है, कार्यवाही सरकार को करनी चाहिए, नहीं तो ऐसा लगेगा कि सरकारी ऐसी घटनाओं को प्रोत्साहन दे रही है। ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष: लूणी से आने वाले माननीय सदस्य, आप हर बात पर खड़े हो जाते हैं।
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं कहना तो नहीं चाहता था लेकिन इस घटना के बारे में मैंने एक घण्टे भाषण दिया उस पर उस अधिकारी के खिलाफ एक रत्ती भर की कार्यवाही नहीं हुई उल्टा उसको परमोशन दिया। मैंने कम से कम आपकी भावनाओं की इज्जत करते हुए जो भी कुछ घटना हुई, मैंने उसको किसी तरह से कम ज्यादा नहीं किया और मैंने यह भी कहा था कि अगर घटनाक्रम पाँच बजे से पहले आएगा
Gpc/akt/16032007/1620/3a
और कलेक्टर
की उस परिसर में
समय की सीमा में
है तो निश्चित
रूप से उसकी भी
जिम्मेदारी बनती
है। मैंने यहां
राजनीति खेलने
का प्रयास नहीं
किया, मैं आपको
कहूं, लेकिन आपके
दल के अध्यक्ष
ने यह कहा कि हम
..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष:
बैठे-बैठे नहीं
बोलें धोद से आने
वाले माननीय सदस्य।
श्री गुलाब
चन्द कटारिया
(गृह मंत्री): मैं
यहां एक घण्टे
के लिए चिल्लाया
था उस कालबेलिया
घटना में, एक गरीब
की मौत हुई, आपके
गृह मंत्री होते
हुए भी उसका बाल
बांका नहीं किया
और उसको प्रमोशन
दिया। अफसोस है।
..(व्यवधान)..
डा. बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर):
ब्यावर में एक
आदमी की झौपड़ी
जल गई थी ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष:
अब कोई नहीं। अंकित
नहीं हो।
डा. बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर):
000
श्री अध्यक्ष:
अब कोई वाद-विवाद
नहीं।
डा. बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर):
000
श्री रणवीर
सिंह गुढ़ा (गुढ़ा):
000
श्री अध्यक्ष:
कृपया स्थान ग्रहण
कर लें।
श्री गुलाब
चन्द कटारिया
(गृह मंत्री): अपनी
सरकार की जन्म-पत्री
पढ़ लो और अपने
कारनामों को पढ़
लो और अपने द्वारा
दिये हुए नियमों
को पढ़ लो, अगर चाहो
तो उसी बात पर बहस
हो जाए कि आपने
क्या किया, हमने
क्या किया?
डा. बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर):
000
श्री गुलाब
चन्द कटारिया
(गृह मंत्री): इतना
ईमानदारी से, आज
दिन तक किसी सरकार
ने ऐसा ईमानदारी
से निर्णय नहीं
लिया, मैं 30 साल से
इस विधान सभा में
हूं केवल आपके
कह देने से नहीं
होगा। सरकार ने
कितनी सहृदयता
से और आप कह रहे
थे मुख्यमंत्रीजी,
मुख्यमंत्रीजी
के द्वारा जितनी
तत्परता से कार्यवाही
होनी चाहिए उसी
आधार पर मैंने
क्या किया? क्या
बात करते हो आप।
कलक्टर को सीएम
द्वारा ..(व्यवधान)..
क्या बात करते
हो आप? ..(व्यवधान)..
डा. बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर): 000
श्री गुलाब
चन्द कटारिया
(गृह मंत्री): चिल्लाने
से नहीं होगा, आप
उस समय कहां चले
गये थे जब मैं एक
घंटे तक चिल्लाया
था। एक गरीब की
बेटी की मौत हो
गई थी, कोई आपका
वहां नाच करने
के लिए ले गया था।
उस समय आपने कुछ
भी कार्यवाही नहीं
की, उसके खिलाफ
किसी प्रकार का
एक्शन नहीं हुआ
और यहां बोलने
के लिए खड़े हो
जाते हो। क्या
बात करते हो। हम
जो बात करते हैं
वह सही बात करते
हैं। सही बात को
गलत साबित करने
की कोशिश करते
हो। यह इस तरह से
बोलने से नहीं
होगा, कुछ आचरण
भी करना सीखो।
आचरण करके सीखो,
फिर बोलना सीखो।
आचरण तो करते हो
गंदा और बोलते
हो अच्छा, आदर्श
की बातें करते
हो ऐसा नहीं चलता
है।
डा. बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर):
000
श्री गुलाब
चन्द कटारिया
(गृह मंत्री): क्या
कार्यवाही की है?
डा. बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर):
000
श्री रणवीर
सिंह गुढ़ा (गुढ़ा):
000
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण करें।
स्थान ग्रहण कर
लें। ..(व्यवधान)..
श्री बंशीलाल
खटीक (राजसमन्द):
000
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
जो सामने खड़े
हैं ..(व्यवधान)..
राजसमन्द से आने
वाले माननीय सदस्य
..(व्यवधान).. नाम
से पुकारूंगी।
अब मैं नाम से पुकारूंगी।
मैं आपका नाम पुकारूंगी।
कृपया स्थान ग्रहण
करें। आप स्थान
ग्रहण कराओ। उप
मुख्य सचेतक जी,
जाओ उनके पास, उनसे
स्थान ग्रहण करवाओ।
स्थान ग्रहण कर
लें। स्थान ग्रहण
करें। ..(व्यवधान)..
आप इतने उत्तेजित
होकर और जो मर्जी
आये सो बोलने लग
जाते हो। यह आपकी
बहुत गलत बात है।
ममता शर्मा।
श्री बंशीलाल
खटीक (राजसमन्द):
000
श्री अध्यक्ष:
कृपया स्थान ग्रहण
करें। आपके बोलने
का कोई मतलब नहीं
है। मंत्रीजी ने
जवाब दे दिया, अब
आप बीच में क्यों
खड़े हो गये? ममता
शर्मा ..(व्यवधान)..
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): 000
श्री बंशीलाल
खटीक (राजसमन्द):
000
डा. ओ. पी. महेन्द्रा
(उप मुख्य सचेतक):
000
श्री सांगसिंह
भाटी (जैसलमेर):
000
श्री बंशीलाल
खटीक (राजसमन्द):
000
श्री अध्यक्ष:
राजसमन्द से आने
वाले माननीय सदस्य,
कृपया स्थान ग्रहण
करें। राजसमन्द
से आने वाले माननीय
सदस्य। अंकित
नहीं हो। अंकित
नहीं हो। ममता
शर्मा।
श्री सांगसिंह
भाटी (जैसलमेर):
000
श्री अध्यक्ष:
श्रीमान् बंशीलाल
जी, मुझे आपको नाम
से पुकारना पड़
रहा है। आप जानते
हैं सदन का नियम,
माननीय सदस्य,
आप कृपया स्थान
ग्रहण कर लें।
राजसमन्द से आने
वाले माननीय सदस्य,
इतना उत्तेजित
होकर और किसी भी
माननीय सदस्य
को इस प्रकार से
आप चाहे जो कुछ
कहने लग जाते हैं।
यह ठीक नहीं है,
नियमों के विपरीत
है, थोड़ा ध्यान
रखा करें नियमों
का। श्रीमती ममता
शर्मा।
श्री रणवीर
सिंह गुढ़ा (गुढ़ा):
000
श्री अध्यक्ष:
क्या चर्चा है,
इनकी क्या चर्चा
है। चर्चा आपकी
है, आप खामख्वाह
में खडे हो जाते
हो।
श्री मदन राठौड़
(सुमेरपुर): 000
श्री अध्यक्ष:
क्या कहना चाहते
हो? अंकित नहीं
हो।
श्री मदन राठौड़
(सुमेरपुर): 000
श्री अध्यक्ष:
इनके मंत्री ने
कुछ भी किया होगा,
यह विषय नहीं है।
नहीं, गलत बात है।
नो, गलत बात है।
..(व्यवधान)..
श्रीमती ममता
शर्मा (बूंदी): 000
श्री मदन राठौड़
(सुमेरपुर): 000
श्री अध्यक्ष:
बैठें आप। सुमेरपुर
से आने वाले माननीय
सदस्य, स्थान
ग्रहण करें। नहीं,
कुछ नहीं, स्थान
ग्रहण कर लें।
स्थान ग्रहण करें।
श्रीमती ममता शर्मा।
अनुदान
की मांग संख्या-26
एवं 51 पर अग्रेत्तर
विचार
श्रीमती ममता
शर्मा (बूंदी): माननीय
अध्यक्ष महोदय, मांग संख्या
26 पर आज चर्चा चल
रही है और बहुत
महत्वपूर्ण विषय
है चिकित्सा का,
सफाई और चिकित्सा।
मैं आपके माध्यम
से माननीय मंत्री
महोदय से कहना
चाहूंगी कि सरकार
की मंशा ऐसी लगती
है कि वह बहुत ज्यादा
रिफोर्म्स मेडिकल
में लाना चाह रही
है, ज्यादा क्रांतिकारी
कदम उठाना चाह
रही है, लेकिन ऐसा
महसूस होता है
कि सारी कुछ थाली
परोसकर एक जगह
दे दी गई है। पिछले
दिनों एसएमएस अस्पताल
भी देखा और एसएमएस
अस्पताल में करीब
200 करोड़ रुपये सरकार
द्वारा दिया गया।
वहां काम भी बहुत
हो रहा है, लेकिन
सबसे बड़ी बात
यह है कि यह तो एक
सफेद हाथी है और
इतना बड़ा जहाज
है कि जिसमें आप
जितना भी देंगे,
जो मूलभूत सुविधाएं
हैं वो पब्लिक
को नहीं मिल पाएंगी
उसका एक महत्वपूर्ण
कारण यह है कि आपका
कांवटिया होस्पिटल
भी है, आपका सैटेलाइट
होस्पिटल भी है
अगर आप इसमें स्पेशलाइजेशन
करके और अलग-अलग
पैसा देते हैं
किसी को हार्ट
होस्पिटल बना दें,
किसी को न्यूरोलोजी
का बना दें, जयपुर
इतना बड़ा हो गया
है, जैसे चंडीगढ़
में हुआ है और ऐसे
ही लखनऊ, यू.पी. में
किया गया है अगर
इस तरह का आप करते
तो शायद आम पब्लिक
है, जो मीलों दूर
रहती है, अजमेर
रोड की तरफ इतना
बढ़ गया, टोंक रोड
की तरफ बढ़ गया,
दिल्ली की तरफ
जयपुर इतना बढ़
गया तो एसएमएस
में जब वे लोग आते
हैं तो आप कुछ भी
कहें वे सुविधाएं
आज भी नहीं मिल
पा रही है क्योंकि
स्पेशलाइजेशन
है ही नहीं, स्पेशलिस्ट
है ही नहीं और जब
तक यह नहीं होगा
तब तक आपने जो पैसा
दिया है मेरा मानना
है कि इसका कोई
उपयोग नहीं हो
पा रहा है। अगर
आप इस पैसे को डिवाइड
करते हैं और दूसरे
स्टेट्स के पैटर्न
पर चलते तो शायद
हमारी पब्लिक को
ये सुविधाएं मिल
सकती थी। जयपुर
की पैराफेरी में
जितने होस्पिटल
हैं उनको आपको
देना चाहिए था।
दूसरी बात यह
है कि आज पार्किंग
प्रोब्लम है,
आज स्टाफ की प्रोब्लम
है, बड़े होस्पिटल
तो बढ़ रहे हैं,
लेकिन स्टाफ की
भर्ती नहीं कर
रहे हैं तो जो भी
आदमी आता है, अगर
आप यह सोचते हैं
कि यहां मध्यमवर्गीय,
उच्च वर्गीय लोग
आ रहे हैं उनको
लाभ मिल रहा है
तो आप यह भूल जाएं
यह बिलकुल नहीं
हो रहा है। जो प्राइवेट
होस्पिटल हैं,
जो लोग अफोर्ड
कर सकते हैं, जो
पैसा अच्छी तरह
दे सकते हैं वे
प्राइवेट होस्पिटल
में जा रहे हैं
तो आप क्यों नहीं
प्राइवेट होस्पिटल
से पब्लिक रिलेशनशिप
बढ़ाकर उनको अपने
साथ करते, क्यों
नहीं उनसे बात
की जाए। जिस तरह
से आंध्रा में
हुआ है और जिस तरह
से कर्नाटक में
हुआ है, कर्नाटक
भी आलरेडी कर चुका
है। मेरा मानना
यह है कि हमारी
राज्य सरकार है,
माननीय मंत्री
महोदय यहां नहीं
हैं, मैं उनसे कहना
चाहूंगी कि वो
कम से कम इस बात
पर विचार करते
तो शायद ज्यादा
अच्छा होता।
मोहन/अरूण/अशोधित
प्रति प्रकाशनार्थ
नहीं/16032007/1630/3b
एक बात मुझे
और कहनी है और यह
विडम्बना ही है
कि छोटे छोटे नर्सिंग
होम, जो प्राइवेट
नर्सिंग होम हैं,
जो बहुत बड़े नहीं
हैं उनको मान्यता
मिल चुकी है और
यह जो मान्यता
मिली है, यह अहमदाबाद
में मिल चुकी है,
दिल्ली में मिल
चुकी और दुर्भाग्य
इतना जबरदस्त
है कि हमारे जो
एम्प्लायज हैं,
जब वह बीमार होते
हैं तो आप एम्स
के लिए रेफर कर
देते हैं, एस्कोर्ट
में जब वह जाते
हैं तो उनको पैसा
मिल जाता है लेकिन
राजस्थान में
इतने बड़े हास्पिटल खुलने के
बाद भी, माननीय
अध्यक्ष महोदय, आज वह
सुविधा उपलब्ध
नहीं हुई है और
आपके स्टेट का
पैसा दूसरे स्टेट्स
में जा रहा है।
अगर यह सुविधाएं
आप दें, जैसा उदयपुर
में अमेरिकन हास्पिटल
खोला है, दो साल
से वह खुला हुआ
है लेकिन वहां
पर अगर आप यह सोचें
कि यह बहुत अच्छा
चल रहा है तो वह
नहीं चल रहा है।
हमारे जयपुर में
ही एस्कोर्ट भी
खोला गया, एस.के.
सोनी भी है, दुर्लभ
जी भी है, इनमें
सारी सुविधाएं
हैं, बाहर से डाक्टर्स
आ रहे हैं, सब हो
रहा है लेकिन अगर
आप सच पूछें तो
इलाज कराने आज
भी हमारा पेशेंट
बाहर जाता है, वह
इसलिए जा रहा है
कि आप लोग उसको
पैसा नहीं देते
हैं, हमारी गवर्नमेंट
से जो पैसा मिलता
है, वह हम उनको नहीं
देते यहां उनको,
दिल्ली जाएंगे
तो ले जाएंगे व
अहमदाबाद जाएंगे
तो ले जाएंगे लेकिन
अगर वह जयपुर में
चा रहे हैं कि वह
प्राइवेट हास्पिटल
में करा लें तो
वह नहीं कर पा रहे
हैं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण
स्थिति है और हमारे
जो प्राइवेट हास्पिटल्स
हैं अगर उनको फैसिलिटी
दी जाएगी तो मेरा
मानना यह है कि
हमारे जो सरकारी
लोग हैं, सरकारी
कर्मचारी हैं,
जो जाते हैं जिनको
आप पैसा देते हैं
या बी.पी.एल. हैं
उनके आने जाने
के खर्चे में उनमें
बहुत ज्यादा बचत
होगी। यह भी एक
बहुत सोचने वाला
मुद्दा है। माननीय
अध्यक्ष महोदय, मैं कहना
चाहूंगी कि माननीय
मंत्री महोदय से
कि मेडिकल पर बहुत
बड़ा इनवेंस्टमेंट
हमने करना चाहा
और किया भी और मेडिकल
ट्यूरिज्म की
भी हमने बात की,
सारा कुछ हुआ लेकिन
मंत्री महोदय,
आप मुझे यह बताएं
कि आपने आज तक इसको
टैक्स फ्री किया
क्या, कितने साल
हो गये जो प्राइवेट
हास्पिटल्स को
आप ट्यूरिज्म
की बात कर रहे हैं।
ट्यूरिज्म को
बढ़ावा देने के
लिए और हास्पिटल
को सब कुछ मिल जाए
तो यह जितने भी
हास्पिटल हैं इनको
आपने कभी टैक्स
फ्री किया है ? सच
पूछिए तो यह मैं
पूछना चाहती हूं
कि मेडिकल फैसिलिटी
के नाम पर ट्यूरिस्ट
को यहां कुछ मिला
है या ट्यूरिस्ट
जब भी कुछ होता
है, जो ट्यूरिस्ट
और मेडिकल दोनों
और सच पूछिए तो
इम्प्लीमेंटेशन
कहीं नहीं है तो
इसको बंद करेंगे,
ये कागजी जो घोषणाएं
हैं हमारी सरकार
की, यह कृपया बंद
करें और अगर घोषणा
करते हैं तो उसको
इम्प्लीमेंट
करने का भी पूरा
पूरा प्रयास करें।
तभी हमें कुछ मिल
पाएगा।
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
आज जो संविदा
पर लगे हुए कर्मचारी
हैं वह करीब 115 कर्मचारी
भूख हड़ताल पर
बैठे हुए हैं।
आपके पास लिखित
में ऐसा कुछ भी
नहीं है कि वह संविदा
पर हैं, सह कांट्रेक्ट
पर हैं, किस बेसिस
पर हैं और जो कांट्रेक्ट
बेसिस पर होता
है उनका ट्रांसफर
नहीं होता लेकिन उनके लगातार
ट्रांसफर भी हो
रहे हैं तो आखिर
राज्य सरकार क्या
चाहती है ? कल से
वह भूख हड़ताल
पर बैठे हुए हैं,
माननीय शिक्षा
मंत्री जी यहां
बिराजमान हैं और
स्टेट मिनिस्टर
माननीय जोशी साहब
भी है, कम से कम कोई
आदमी आपका जाकर
उनकी बात तो करे
और यह तो पूछे कि
आपके हाल क्या
हैं, आप क्या चाहते
हैं, उनको आपने
नोटिस दे दिया
31 मार्च को आप सब
को हटा दिया जाएगा।
और आप यहां बजट
में घोषणाएं ये
कर रहे हैं, हम नये
कर्मचारी रखेंगे,
नये नर्सिंग स्टाफ
रखें, आखिर जो हैं
उनका क्या है
? सात साल से वह आपके
पास काम कर रहे
हैं, सात साल से
सरकार को सेवाएं
दे रहे हैं तो कम
से कम ...(व्यवधान)...
आप कृपया आपके
बाहर की बात है
इसलिए थोड़ा सा
बैठ जाइए।
श्री अध्यक्ष:
आप संविदा को छोड़कर
अपने कट-मोशन पर
आइए।
श्रीमती ममता
शर्मा (बूंदी): तो
मैं यह कहना चाह
रही हूं, माननीय
अध्यक्ष महोदय, यह कोई
गलत नहीं है, इसमें
महिलाएं और पुरूष
दोनों हैं, जो 115 कर्मचारी
छोटे छोटे बच्चों
को लेकर बैठे हुए
हैं भूख हड़ताल
पर तो मैं इतना
कहना चाह रही हूं
कि उन्हें कोई
जाकर उनको किस
बेसिस पर आप निकाला
रहे हैं 31 मार्च
को जो नोटिस दिया
है, कम से कम उनको
यह तो कहें और आप
नई घोषणाएं करते
जा रहे हैं कि हम
और ले रहे हैं।
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मैं, मेरे
बूंदी की भी बात
करना चाहूंगी कि
बूंदी हास्पिटल
जिला हैड क्वार्टर
का एक बहुत बड़ा
हास्पिटल है और
चूंकि बूंदी नेशनल
हाई वे 12 पर है और
ट्यूरिस्ट बहुत
ज्यादा आता है
वहां लेकिन जब
भी कोई एक्सीडेंट
होता है या कुछ
होता है उसको कोटा
रेफर किया जाता
है या जयपुर रेफर
किया जाता है तो
ट्रोमा यूनिट नहीं
होने की वजह से,
कोई हार्ट यूनिट
नहीं होने की वजह
से वहां प्रोब्लम
यह होती है, पेशेंट
या तो कोटा जाते
जाते दम तोड़ देता
है या जयपुर आते
आते दम तोड़ देता
है तो हम एक तरफ
ट्यूरिज्म की
बात कर रहे हैं,
अब रोज एक्सीडेंट
होते हैं, मेरे
ख्याल से आल्टरनेटिव
डे एक न एक एक्सीडेंट
जरूर होता है और
जब हड्डी टूट जातीा
है या ब्रेन एंजरी
होती है तो पेशेंट
को दम ही तोड़ना
होता है, कोई मुश्किल
से 10 परसेंट केसेज
ऐसे होते होंगे
जो सरवाइव कर पाते
हैं तो मााननीय
मंत्री महोदय से
कहूंगी कि स्टाफ
की कमियां, इतनी
स्टाफ की कमी
है, जहां 37 लोगों
का होना चाहिए
वहां केवल इस वक्त
22 लोगों का स्टाफ
बूंदी में काम
कर रहा है। दूसरी
बात गाइनोकोलोजिस्ट
नहीं है, कितने
महीने से नहीं
हैं, हमने अवगम
कराया, नैनवां
में तो पता नहीं
कितने सालों से
नहीं हैं, बूंदी
जिला का जो नैनवां
है वहां तो पता
नहीं कितने सालों
से गाइनोकोलोजिस्ट
नहीं है तो मैं
माननीय मंत्री
महोदय से निवेदन
करना चाहूंगी कि
इन छोटी छोटी बातों
पर वह जरूर ध्यान
दें और सफाई का
जहां तक सवाल है।
श्री अध्यक्ष:
आप इतना ध्यान
दिला रही हैं, मंत्री
जी तो हैं ही नहीं।
...(व्यवधान)...
श्रीमती ममता
शर्मा (बूंदी): दूसरे
मंत्री जी बैठे
हुए हैं, माननीय
अध्यक्ष महोदय, और मंत्री
जी से कहना है लेकिन
कहना तो आपके माध्यम
से ही है। हास्पिटल
की सफाई की जो हालत
है वह इतनी खराब
है कि मैं आपको
बता नहीं सकता।
माननीय मंत्री
महोदय एक बार खुद
जाकर उसका अवलोकन
करें तो उनको पता
लगेगा कि ाचारों
तरफ गंदगी है और
हम बहुत प्रयास
भी करते हैं और
एनजीओ के जरिए
ही प्रयास करते
हैं, सब करते हैं
लेकिन बावजूद उसके
आपके जो स्टाफ
की लापरवाहियां
हैं, खास तौर से
जनाना हास्पिटल
की अगर आप हालत
देख लें तो उन महिलाओं
पर दया आती है।
आसपास कोई बावण्डरी
नहीं होने की वजह
से एक दो बार तो
ऐसे केसेज भी हुए
हैं कि छोटे जो
बच्चे होते हैं,
न्यू बोर्न बेबी,
उनको सूअर घसीट
कर ले गये। इससे
बड़ी और क्या
बात होगी ? तो मैं
यह चाहती हूं कि
हास्पिटल को ए-ग्रेड
अगर आप बनाते हैं
तो उसमें सारी
फैसिलिटीज मिलेंगी
और नेशनल हाई-वे
12 पर हैं और गांवों
की जो दशा है, गांवों
में भी मेरा आपसे
निवेदन है कि किसी
भी तरह से गांवों
में डाक्टर्स
और नर्सेज स्टाफ
पूरा करिए क्योंकि
गांवों में मृत्यु
हो जाती है लोगों
को पता ही नहीं
चलता है, बेचारे
किस तकलीफ में
लोग मर रहे हैं
तो हमारी संवेदनशीलता
की बात करने वाली
सरकार को मैं इतना
सा निवेदन करना
चाहूंगी आपके माध्यम
से कि इसमें भी
पूरा पूरा ध्यान
दें।
दूसरी जो मांग
संख्या- 51 है उसमें
एस.सी. के लिए, भगवा
कपड़े पहनते हैं
मंत्री महोदय तो
भगवा रंग छोड़कर
थोड़ा सा एस.सी.
की तरफ भी देखें
आप। बहुत बुरे
हालात हैं एस.सी.
हास्टल्स के
।
श्री अध्यक्ष:
भगवा कहां पहना
रखें हैं, उन्होंने
तो पिंक पहन रखे
हैं।
श्रीमती ममता
शर्मा (बूंदी): माननीय
अध्यक्ष महोदय, आज मेरा
दुर्भाग्य मान
लीजिए कि वह केसरिया
कपड़ों में नहीं
आए हैं।
श्री कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण विकास
एवं पंचायती राज
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
भगवा कपड़ों
से क्या है ? समाज
कल्याण पर ध्यान
नहीं दिया जा सकता
?
श्रीमती ममता
शर्मा (बूंदी): बाकी
तो वह रोज केसरिया
में ही आते हैं।
श्री कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण विकास
एवं पंचायती राज
मंत्री): इसमें
कपड़ों का क्या
लेना देना है ? ...(व्यवधान)...
श्रीमती ममता
शर्मा (बूंदी): और
एस.सी. के छात्रावासों
में छात्रवृत्ति
पूरी नहीं मिल
रही है।
श्री अध्यक्ष:
आप कपड़ों की ओर
ध्यान नहीं दिया
करें।
श्री मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): ये मेरी
दादी मां हैं, मेरा
सारा ध्यान रखती
हैं।
श्रीमती ममता
शर्मा (बूंदी): उसका
कारण मैं यह बता
दूं यह दादी मां
इसलिए कहते हैं
कि या तो आप बाल
रंग लो नहीं तो
मैं दादी मां कहूंगा।
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): अध्यक्ष
महोदय,
महिलाएं
कपड़ों का ध्यान
नहीं रखेंगी तो
कौन रखेगा ध्यान
? बताइए।
श्रीमती ममता
शर्मा (बूंदी): मैंने
कहा कि दादी मां
नहीं, आप परदादी
मां कहो। ...(व्यवधान)...
लेकिन बाल नहीं
रंगूंगी। ...(व्यवधान)...
डा. भंवरलाल राजपुरोहित
(मकराना): ये इनकी
पसंद के कपड़े
पहनें ? ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
तीन दिन में टेंशन
के वातावरण के
बाद आज सदन में
बहुत अच्छा वातावरण
है।
श्रीमती ममता
शर्मा (बूंदी): तो
मंत्री महोदय,
जो आपके छात्रावास
हैं एस.सी. के हम
चाहते हैं उनको
आप हैड क्वार्टर्स
पर कम से कम भवन
तो दें, वह जब कि
किराये पर चल रहे
हैं और उनके बच्चों
की भी इतनी बुरी
हालत है तो उन बच्चों
पर भी दया करें
और बड़े बड़े जो
कस्बे हैं उनमें
भी हमने जो दो कस्बों
में बड़े बड़े
भवन बनाये थे उसके
बाद आपने एक भी
स्वीकृति नहीं
दी तो मैं चाहता
हूं कि एक दो स्वीकृतियां
आपकी तरफ से आएं
और खास तौर पर बूंदी
शहर के लिए एक तो
छात्रावास होना
चाहिए क्योंकि
अब जो जागृति आ
रही है, इलेक्ट्रोनिक
मीडिया के माध्यम
से या प्रेस मीडिया
के माध्यम से
तो बहुत ज्यादा
लोगों में छोटे
बच्चों में बहुत
जागृति है और वह
यह चाहते हैं कि
हम पढ़ें लेकिन
उनको पूरी सुविधाएं
नहीं मिल पाने
की वजह से इन सारी
दिक्कतों का सामना
करना पड़ता है।
सुरेन्द्र/अरुण/16.3.2007/16.40/3c/1
मैं चाहती हूं
कि आप थोड़ा सा
इसमें करें। जहां
तक थोड़े बहुत
भ्रष्टाचार की
बात है, इसके लिए
मैं माननीय मंत्री
महोदय से यह जरूर
कहूंगी कि नर्सिंग
स्टाफ पर जरूर
आप रोक लगायें।
डाक्टर्स पर भी
लगायें, नर्सिंग
स्टाफ पर भी लगायें
क्योंकि कई बार
ऐसे फोन आते हैं
कि साहब, पैसे नहीं
दे रहे हैं इसलिए
हमको ऑपरेशन टेबल
पर नहीं ले रहे
हैं। कई बार ऐसे
फोन आते हैं कि
हॉस्पिटल का टाइम
है लेकिन डाक्टर्स
हॉस्पिटल में नहीं
हैं और घर पर प्राइवेट
प्रेक्टिस कर रहे
हैं। जब हम उनसे
कहते हैं, ट्रांसफर
की बात करते हैं,
कुछ करते हैं तो
वो रिजाइन करने
को तैयार रहते
हैं क्योंकि
4-4 मंजिल के हॉस्पिटल
ऑलरेडी वो अपने
बना चुके हैं।
जिस सड़क पर हिण्डौली
से आने वाले माननीय
सदस्य रहते हैं
उसी सड़क पर करीब
तीन हॉस्पिटल बड़े-बड़े
बन चुके हैं 4-4, 5-5 मंजिल
के। स्वायत्त
शासन मंत्री महोदय
नहीं हैं, इनसे
भी पूछिये कि जिलों
में भी बड़े-बड़े
शहर जो हैं उनमें
भी इजाजत लेने
का तो कीजिये कि
जिस तरह जे. डी. ए.
से इजाजत ली जाती
है उस तरह नगरपालिका
से इजाजत लें कि
कितनी मंजिल का
भवन कितनी जमीन
पर बन सकता है।
ये सब बातें सोचने
वाली हैं। अगर
आप चाहते हैं कि
पूरा राजस्थान
का ढांचा बदल दिया
जाए तो वह तभी बदलेगा
कि डाक्टर्स पर
पूरी-पूरी लगाम
आप लगाइये। टाइम
पर नहीं जाते हैं,
कई बार पेशेंट
को बहुत ज्यादा
इल-ट्रीट करते
हैं। तो ये सब बातें
हैं इन पर आप जरूर
ध्यान देंगे।
माननीय मंत्री
महोदय को मेरे
ख्याल से प्रोसीडिंग
में मिल जाएगा
कि मैंने ‘अ’ श्रेणी
अस्पताल की डिमांड
की है। मैं आपको
पूरा धन्यवाद
करूंगी, आप यह मत
समझियेगा कि मैं
सदन में धन्यवाद
करने से चूकूंगी,
मैं इसलिए नहीं
चूकूंगी कि जो
अच्छा काम करता
है उसको अच्छे
काम के लिए धन्यवाद
जरूर देना चाहिए।
मुझे लग रहा है
कि आप पूरे बूंदी
हॉस्पिटल के लिए
पूरे-पूरे संवेदनशील
रहेंगे। इतनी बात
कह कर मैं अपनी
बात समाप्त करती
हूं।
श्री अध्यक्ष:
थैंक्यू। श्री
शिवजीराम मीणा
(एबसेंट) श्री धर्मेन्द्र
मोची।
श्री धर्मेन्द्र
कुमार मोची (टिब्बी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मांग संख्या
26 पर बोलने के लिए
आपने मुझे मौका
दिया इसके लिए
मैं आपको धन्यवाद
देता हूं। मुख्य
मंत्री जी और चिकित्सा
मंत्री जी के कुशल
प्रबन्धन के कारण
प्रदेश स्वास्थ्य
में अग्रणी स्थान
ले रहा है इसके
लिए मैं इनको धन्यवाद
देता हूं। जो बजट
में मुख्य मंत्री
जी ने ग्रामीण
क्षेत्र में ए
एन एम के साथ-साथ
एक अतिरिक्त ए
एन एम और जी एन एम
की घोषणा की है,
मैं समझूंगा कि
ग्रामीण क्षेत्र
में उससे चिकित्सा
का सुधार होगा।
इसके साथ-साथ
ग्रामीण स्वास्थ्य
चेतना यात्रा का
आयोजन भी हुआ और
9250 कैम्प लगे तो
उससे ग्रामीण क्षेत्रों
में खूब लाभ मिला
और मैं उम्मीद
करूंगा कि भविष्य
में भी ऐसे कैम्पों
का आयोजन हो ताकि
ग्रामीण क्षेत्रों
में इसका लाभ मिले।
सामुदायिक अस्पतालों
में एम्बुलेंस
की घोषणा, दूर-दराज
के क्षेत्रों में
निश्चित टाइम पर
मोबाइल टीम की
घोषणा के लिए भी
मैं इनको धन्यवाद
दूंगा कि यदि ऐसी
व्यवस्था हो
जाए तो ग्रामीण
क्षेत्रों में
इसका खूब लाभ मिलेगा।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इसके साथ-साथ
मैं आपके माध्यम
से निवेदन करूंगा
कि मेरे विधान
सभा क्षेत्र के
रावतसर कस्बे
में सामुदायिक
हॉस्पिटल है और
एक बहुत बड़ा हॉस्पिटल
है। इसके 100 ग्राम
लगते हैं और दूर-दराज
का एरिया भी इस
क्षेत्र में आता
है, यह मेगा हाइवे
पर है तो इसको रेफरल
हॉस्पिटल बना दिया
जाए। इससे ग्रामीण
क्षेत्रों को खूब
लाभ मिलेगा। रावतसर
एस डी एम हैडक्वार्टर
है, नगरपालिका
क्षेत्र है तो
इसको रेफरल हॉस्पिटल
बनाने की मांग
करता हूं।
इसके साथ-साथ
टिब्बी कस्बे
में भी प्राथमिक
स्वास्थ्य
केन्द्र है। टिब्बी
एस डी एम हैडक्वार्टर
है, तहसील क्षेत्र
है, 30 पंचायतें लगती
हैं। दूर-दराज
के एरिया के अन्दर
दिक्कत आती है
क्योंकि मात्र
एक डाक्टर है।
तो मेरा आपसे निवेदन
है कि टिब्बी
हॉस्पिटल को भी
सामुदायिक स्वास्थ्य
केन्द्र बनाने
की स्वास्थ्य
मंत्री जी कृपा
करें। इसके साथ-साथ
तलवाड़ा, थालरका
बड़े ग्राम हैं
वहां मैं प्राथमिक
स्वास्थ्य
केन्द्र बनाने
की मांग करूंगा।
इसके साथ-साथ
रावतसर में 30 लाख
रुपये की लागत
से एक बिल्डिंग
स्वास्थ्य
विभाग की बेकार
पड़ी है तो मैं
स्वास्थ्य
मंत्री महोदय,
आपसे निवेदन करूंगा
कि उस बिल्डिंग
का उपयोग भी हो
जाए और वहां पर
आयुर्वेदिक हॉस्पिटल
भी खुल जाए।
इसके साथ-साथ
जिला हॉस्पिटल
में सी टी स्केन
की व्यवस्था
नहीं है तो मैं
आपसे निवेदन करूंगा
कि प्रत्येक जिले
के लिए आपने घोषणा
भी की है तो हनुमानगढ़
जिले में भी सी
टी स्केन की व्यवस्था
हो। इसके साथ-साथ
गंधेली ग्राम में
एक प्राथमिक स्वास्थ्य
केन्द्र काफी
दिनों से बिल्डिंग
रहित पड़ा है और
जगह-जगह इधर-उधर
लगवा रहे हैं तो
मेरा आपसे निवेदन
है कि उसकी बिल्डिंग
के लिए पैसा उपलब्ध
करायें। आपने
33 लाख रुपये रावतसर
हॉस्पिटल के लिए
दिये उसके लिए
मैं आपको धन्यवाद
देता हूं और आपने
ही अपने पिछले
कार्यकाल में टोपरिया
में एक प्राथमिक
स्वास्थ्य
केन्द्र दिया,
उसकी बिल्डिंग
दी उसके लिए बहुत-बहुत
धन्यवाद। इसके
साथ-साथ मैं आपसे
निवेदन करूंगा
कि रावतसर के अन्दर
एक्स-रे मशीन
भी स्वीकृत पड़ी
है, अभी तक नहीं
लगी है वह लगवाई
जाए। अध्यक्ष
महोदय, आपने समय
दिया उसके लिए
बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय भारत, जय हिन्द।
श्री अध्यक्ष:
वैरी गुड। बहुत-बहुत
धन्यवाद। श्री
लालचन्द मेघवाल।
श्री लालचन्द
मेघवाल (रायसिंहनगर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मांग संख्या
26 चिकित्सा एवं
स्वास्थ्य
पर चर्चा हो रही
है उसमें मैं अपने
आपको सम्मिलित
करते हुए यह कहना
चाहूंगा कि आज
से तीन वर्ष पूर्व
प्रदेश में ओजस्वी
मुख्य मंत्री
महोदया ने पद ग्रहण
किया और तब से जिस
तरह ग्रामीण क्षेत्र
के लोगों को चिकित्सा
सुविधाएं मिल रही
हैं, मैं कहना चाहूंगा
कि माननीय मंत्री
महोदय, समय-समय
पर जिस तरह ग्रामीण
क्षेत्र में जन
स्वास्थ्य
चेतना यात्रा के
माध्यम से लोगों
को लाभान्वित कर
रहे हैं, इसके साथ-साथ
मैं यह कहना चाहूंगा
कि जिस तरह ग्रामीण
क्षेत्र में उप
स्वास्थ्य
केन्द्र हैं,
प्राथमिक स्वास्थ्य
केन्द्र हैं तो
अगर हम उन केन्द्रों
पर किस तरह एक उप
स्वास्थ्य
केन्द्र पर एक
ए एन एम की पोस्ट
होती है, अभी मुख्य
मंत्री महोदया
ने बजट के माध्यम
से एक जी एन एम की
पोस्ट और स्वीकृत
की है। जब तक हम
ग्रामीण क्षेत्र
को सुदृढ़ नहीं
करेंगे, ग्रामीण
क्षेत्र के लोगों
के स्वास्थ्य
के बारे में नहीं
देखेंगे तब तक
इस देश का उद्धार
नहीं होने वाला
है क्योंकि आजकल
हर व्यक्ति सोचता
है कि मैं शहर में
जाऊं, अच्छे डाक्टर
के पास जाऊं, मेरा
स्वास्थ्य
अच्छा रहे। 75 प्रतिशत
पापुलेशन जहां
ग्रामीण क्षेत्र
में निवास करती
है और विशेष तौर
से मैं कहना चाहूंगा
कि मेरी कांस्टीट्यूएंसी
जो बिल्कुल हिन्दुस्तान
के डैड-लाइन पर
है, पाकिस्तान
से लगती हुई सीमा
के पास है रायसिंहनगर
क्षेत्र। रायसिंहनगर
सामुदायिक स्वास्थ्य
केन्द्र है और
वहां जो डाक्टर्स
की स्थिति है, मैं
मंत्री महोदय से
दरख्वास्त करूंगा
कि अब जो डाक्टरों
की स्थिति है, चाइल्ड
स्पेशलिस्ट,
गायनिक स्पेशलिस्ट,
सर्जरी, मेडिसन,
ये सारी पोस्टें
खाली पड़ी हैं।
आप समय-समय पर इस
तरह की व्यवस्था
करें ताकि जो बोर्डर
के नजदीक ग्रामीण
क्षेत्र और शहरी
क्षेत्र हैं उन
हॉस्पिटल्स में
डाक्टर्स की व्यवस्था
रहे।
इसके साथ-साथ
मैं विशेष तौर
से माननीय मंत्री
महोदय को धन्यवाद
ज्ञापित करूंगा
कि अभी आपने मेरे
रायसिंहनगर हॉस्पिटल
के पुनर्निर्माण
के लिए करीब 97 लाख
रुपये स्वीकृत
किये हैं और पूरा
हॉस्पिटल डिसमेंटल
होकर नया बनेगा।
मैं उसके लिए माननीय
मंत्री महोदय का
बहुत-बहुत शुक्र-गुजार
हूं। इसके अतिरिक्त
मेरे क्षेत्र के
अन्दर कंवरपुरा
है, खिंचिया है,
67एनपी है, समरेजा
है, मालसर है, भोमपुरा,
रामजीवाला, इन
सभी क्षेत्रों
में ए एन एम की पोस्टें
खाली हैं। ग्रामीण
क्षेत्रों में
उप स्वास्थ्य
केन्द्रों में
एक ए एन एम की पोस्ट
होती है वह भी खाली
होगी तो आमजन क्या
सोचेगा? मैं आपके
माध्यम से कहना
चाहूंगा कि जिस
तरह उप खण्ड स्तर
पर पांच मेल नर्स
की पोस्टें खाली
पड़ी हैं और जिस
तरह लैब टेक्नीशियन
की पोस्टें गंगवाला
ग्रामीण, समरेजा,
लक्खा, इस तरह
के ग्रामीण क्षेत्र
में जो पोस्टें
रिक्त पड़ी हैं
चाहे वह किसी भी
कैडर की पोस्ट
है, आप निश्चित
तौर पर ऐसी व्यव्था
करें कि जब भी आप
नये डाक्टर्स
की नियुक्ति करें
तो उनको ग्रामीण
क्षेत्र में लगायें
ताकि ग्रामीण क्षेत्र
के लोगों को जो
लाभ मिलना चाहिए
वह वास्तविक रूप
से मिले।
इसके साथ-साथ
मैं माननीय समाज
कल्याण मंत्री
जी का भी बहुत धन्यवाद
करूंगा क्योंकि
मेरे क्षेत्र में
विशेष तौर से इन्होंने
97 लाख का एक बहुत
बड़ा समाज कल्याण
का हॉस्टल था
उसकी बिल्डिंग
के लिए पैसे दिये।
हमने जगह उपलब्ध
करा दी, इन्होंने
बिल्डिंग के लिए
पैसे दिये। मैं
इनका बहुत-बहुत
शुक्र-गुजार हूं।
विशेष तौर से मैं
यह कहना चाहूंगा
कि जिस तरह समाज
कल्याण विभाग
में अभी जो ग्रामीण
क्षेत्र के बच्चों
को शिक्षा अच्छी
मिले इस तरह की
व्यवस्था कर
रहे हैं और जिस
तरह प्रति बच्चे
पर जा पैसे दे रहे
हैं अगर उनको हजार
रुपये तक कर दें
तो निश्चित तौर
पर ग्रामीण क्षेत्र
के बच्चों को
शिक्षा में अच्छी
क्वालिटी मिलेगी।
vkj/akt/16032007/1650/3d
और अगर
हम ग्रामीण क्षेत्र
के बच्चों को
वास्तव में शिक्षित
करना चाहते हैं
तथा हम अपने दायित्व
को निभाना चाहते
हैं तो हमें सोचना
पड़ेगा कि विशेष
रूप से जहां बालिका
विद्यालय है और
जहां आवासीय विद्यालय
है और जहां बालिकाओं
के होस्टल्स
हैं, उनमें भी आप
बिल्डिंग के पैसे
दें, बिल्डिंग
बनायें सरकारी
ताकि हमारा प्रदेश
विकसित हो और प्रदेश
विकसित तभी हो
सकता है जब शिक्षा
जिस प्रदेश में
अग्रणी होगी, तभी
प्रदेश का विकास
सम्भव हो पायेगा।
मैं आपके
माध्यम से माननीय
मुख्य मंत्री
महोदय का बड़ा
शुक्रगुजार हूं
कि आपने पूरे प्रदेश
में जहां भी जो
जिस चीज की जरूरत
है, चाहे मेडिकल
के मामले को ले
लें, चाहे एजुकेशन
का मामला हो, जहां
जिस चीज की जरूरत
है, टीचर्स की हो
तो निश्चित रूप
से समय-समय पर पूरा
करते हैं, ऐसी मेरी
धारणा है। इसके
साथ-साथ मैं यह
कहूंगा कि हमारे
इस गंगानगर जिले
में, जो इसी बजट
में, जो विशेष रूप
से गंगानगर जिले
का जो शुगर मिल
का मुख्य मुद्दा
था और जो शुगर मिल
बाहर स्थापित
करने की बात कही,
विशेष रूप से गंगानगर
जिले के हालात
ऐसे थे अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से कहना
चाहूंगा कि अगर
कोई व्यक्ति रात
को सोता था तो सुबह
जब वह उठता था तो
दो-दो इंच तक उस
पर राख जम जाती
थी, तो बड़ी दिक्कत
थी तो उसके लिए
भी मैं बहुत-बहुत
शुक्रगुजार हूं
मुख्य मंत्री
महोदय का, आपने
समय दिया, इसके
लिए बहुत-बहुत
धन्यवाद।
सदन
की कार्यवाही
विधान
सभा की बैठक के
निर्धारित समय
में वृद्धि
डा. ओ. पी.
महेन्द्रा (केसरीसिंहपुर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं प्रस्ताव
करता हूं कि मांग
संख्या-26 चिकित्सा
एवं लोक स्वास्थ्य
और सफाई एवं मांग
संख्या-51 अनुसूचित
जाति के कल्याण
हेतु विशिष्ठ
संघटक योजना के
माननीय मंत्रीगणों
के रिप्लाई तक
सदन का समय बढ़ाया
जाये।
श्री
अध्यक्ष: पारित
तो आप 12 बजे तक कराओगे।
कोई समय तो निश्चित
होना चाहिए। 8-9 बजे,
कुछ तो करो। आप
तो ऐसे 12 बजे तक कर
दोगे। (व्यवधान)
पहले आप 7-8 बजे, कोई
समय तो करो।
डा. ओ. पी.
महेन्द्रा (सरकारी
उप मुख्य सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जितना सम्भव
होगा क्योंकि
तीन दिन की छुट्टी
है, जितना सम्भव
होगा, जल्दी करवा
देंगे। (व्यवधान)
रिप्लाई तो करना
पड़ेगा ना। जितना
जल्दी होगा। माननीय
अध्यक्ष महोदय,
रिप्लाई तक तो
बढ़ाना ही पड़ेगा।
जितना जल्दी होगा,
करवा देंगे।
श्री
अध्यक्ष: आप 7-8 बजे,
जो कुछ चाहो, समय
बढ़ाओ। फिर देख
लेना।
डा. ओ. पी.
महेन्द्रा (सरकारी
उप मुख्य सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, 7 बजे तक के
लिए समय बढ़ाया
जाये।
श्री
अध्यक्ष: क्या
सदन की अनुमति
है कि सदन का समय
7 बजे तक के लिए बढ़ाया
जाये?
(स्वीकृत)
7 बजे तक
समय बढ़ाया गया।
श्रीमती
प्रतिभा सिंह।
अनुदान
की मांग संख्या-26
एवं 51 पर अग्रेत्तर
विचार
श्रीमती
प्रतिभा सिंह
(नवलगढ़): माननीय
अध्यक्ष महोदय,
मैं आपका धन्यवाद
करती हूं कि आपने
मुझे वक्त दिया।
श्री
अध्यक्ष: नहीं,
आवश्यकता नहीं
है धन्यवाद की,
यह आपका राइट है।
It is your right.
श्रीमती
प्रतिभा सिंह
(नवलगढ़): मैं अनुपस्थित
थी उस समय, दुबारा
आपने मौका दिया,
इसके लिए धन्यवाद
करती हूं। (व्यवधान)
मैं मांग संख्या-26
चिकित्सा एवं
लोक स्वास्थ्य
और सफाई पर अपने
विचार रखना चाहूंगी
कि स्वास्थ्य
को डब्ल्यू.एच.ओ.
में इस तरह से परिभाषित
किया है कि - "A state of complete physical, mental
and social well being, and not merely an absence of disease or infirmity." यानी
कि किसी भी राष्ट्र
या राज्य के लोगों
के शारीरिक, मानसिक
एवं सामाजिक सुधार
के साथ ही बीमारियों
की समाप्ति हेतु
पूर्व सुधार करना
चाहिए, यह एक मुख्य
बात है। इसके लिए
सामान्य विज्ञान
वह है, जो बीमारियों
के होने से पहले
उसकी रोकथाम करे
जबकि हम तब जागते
हैं जब बीमारियां
महामारी बन जाती
हैं। इसको प्रिवेंटिक
एंड सोशल-मेडिकल
इपेटोमोलोजी कहते
हैं, सरकार इस तरह
कोई ध्यान नहीं
दे रही है क्योंकि
इन्टरनेशनल स्टैण्डर्ड
स्टडी है, जोकि
स्वास्थ्य
समस्याओं को नियंत्रित
करना सिखाती है।
महामारी जैसे येलो
फीवर, डेंगू फीवर,
चिकनगुनिया और
काफी अन्य हैं।
ये महामारियां
हर वर्ष फैलती
हैं किन्तु उनकी
रोकथाम के लिए
चरणबद्ध योजना
हमारी सरकार कभी
भी हाथ में नहीं
लेती है। जब यह
एक महामारी, बहुत
भयंकर समस्या
बन जाती है, तब इस
ओर हम कंट्रोल
करने की तरफ अपने
कदम रखते हैं।
सरकार रथयात्राओं
का तो आयोजन करती
है, अभी किया था
स्वास्थ्य
के क्षेत्र में
लेकिन जो अन्तरराष्ट्रीय
मापदण्ड हैं स्वास्थ्य
के क्षेत्र में,
उनको अपनाकर रचनात्मक
कार्य नहीं कर
रही है ठोस, जिनके
दूरगामी असर हो
आने वाली पीढि़यों
पर भी। जहां हमें
जनसंख्या के नियंत्रण
का काम सबसे पहले
हाथ में लेना चाहिए।
हमारी सारी योजनाएं
वहां आकर फेल हो
जाती हैं और रथयात्राओं
के कैम्प हमने
लगाये, उनकी जगह
हम लोगों के अन्दर
ऐसे कैम्प लगाते
कि जो way
of living
हमें बताते और
यह बताते कि हमें
क्या खाना चाहिए,
किस प्रकार का
फूड लेना चाहिए
ताकि हम बीमारियों
की रोकथाम कर सकें।
डम्पिंग एरिया,
कैचमेंट एरिया
शहर और गांव से
बाहर हो ताकि मच्छर
नहीं पनपें और
साथ ही जिस समय
इनके लार्वा उत्पन्न
हों, तभी फोगिंग
करवाई जानी चाहिए
टाइमली ताकि हम
लोक स्वास्थ्य
को बचा सकें, समय
पर कारगर योजना
बनाकर जन-धन हानि
को काफी हद तक बचाया
जा सकता है।
माननीय
अध्यक्ष महोदय,
मैं आपके माध्यम
से एक निवेदन करना
चाहूंगी कि जेनेरिक
आधार पर औषधियां
लिखने की घोषणा
अभी तक हमारे यहां
कोरी कागजी रही
हैं क्योंकि इनके
मोनेटरिंग की कोई
पर्याप्त व्यवस्था
हमारे सिस्टम
के अन्दर नहीं
हैं। जो भी दवाई
डाक्टर पर्ची
पर लिखता है, उसका
इन्द्राज आउटडोर
रजिस्टर में भी
हो और उच्चाधिकारी
के द्वारा पूरे
राज्य के अन्दर,
स्टेट के अन्दर
समय-समय पर आउटडोर
रजिस्टर की जांच
की जाये ताकि जो
डाक्टर्स जेनेरिक
के अलावा अन्य
दवाइयां लिखते
हैं, उन पर कठोर
कार्यवाहियां
होनी चाहिए क्योंकि
जेनेरिक आधार पर
हम जब औषधि लिखते
हैं तो उनकी कीमत
आलमोस्ट 40 प्रतिशत
कम आ जाती है इसलिए
आम आदमी को, गरीब
आदमी को इसकी सुविधा
मिले, उसको लाभ
पहुंचे, इसके लिए
यह जेनेरिक औषधि
लिखने के हमारे
मोनेटरिंग सिस्टम
को बहुत स्ट्रेंथन
करना चाहिए।
दूसरी
चीज, मैं मंत्री
महोदय, आपका ध्यान
आकर्षित करना चाहूंगी
कि चिकित्सा और
पैरामेडिकल स्टाफ
जो मुख्यालय पर
पदस्थापित है
या गांव में है,
वह वहां पर निवास
नहीं करते हैं।
इस कारण रोगी मजबूर
होकर चाहे वह बड़ा
शहर हो चाहे वह
गांव हों, कस्बे
हों, उनको प्राइवेट
डाक्टर्स जो प्रेक्टिस
करते हैं, उनके
यहां पर मजबूर
होकर जाना पड़ता
है।
माननीय
अध्यक्ष महोदय,
मैं आपके माध्यम
से सरकार का ध्यान
आकर्षित करना चाहूंगी
मंत्रीजी, हमें
कन्या भ्रूण हत्या
को भी रोका जाना
चाहिए। नहीं तो
आने वाले समाज
में, आने वाले वक्त
में हमारे यहां
पर बहुत बड़ी सोशल
प्रोब्लम होने
वाली है कि लड़कों
का जो जेण्डरवाइज
हमारा रेशो कम
आ रहा है कि लड़कों
को विवाह के लिए
पर्याप्त लड़कियां
ही उपलब्ध नहीं
होंगी तो समाज
के अन्दर एक तरह
से क्लेश उत्पन्न
होगा।
माननीय
अध्यक्ष महोदय,
आपके माध्यम से
मेरा आग्रह है,
मैं मेरे क्षेत्र
की बात करूंगी।
नवलगढ़ क्षेत्र
में प्राथमिक स्वास्थ्य
केन्द्र गोठड़ा
एक ऐसी जगह है जहां
पर डाक्टर का
पद पिछले 4-5 महीनों
से खाली पडा हुआ
है और वहां अभी
तक डाक्टर की
कोई व्यवस्था
नहीं है। सामुदायिक
स्वास्थ्य
केन्द्र, नवलगढ़
की स्थिति भी बहुत
दयनीय है। डाक्टर
के बैठने की वहां
पर कोई प्रोपर
व्यवस्था नहीं
है तो जब डाक्टर्स
के लिए ही नहीं
है तो रोगियों
की तो आप छोडि़ये।
वहां बजट मिल चुका
है लेकिन जमीन
उपलब्ध नहीं हो
रही है इसलिए उस
अस्पताल को स्ट्रेंथन
करने के लिए भी
आप थोड़ा मंत्री
महोदय से निवेदन
है।
डा. दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री): जमीन की
व्यवस्था आप
करवा देंगे?
श्रीमती
प्रतिभा सिंह
(नवलगढ़): वह है नहीं
टाउनशिप के अन्दर
तो कहां करें।
उसको डबल स्टोरी
की मंजूरी दे दें
आप वहां सिटी में
तो जमीन के अभाव
में वह हो नहीं
पा रहा है।
मैं माननीय
अध्यक्ष महोदय
के माध्यम से
चिकित्सा मंत्रीजी
से अनुरोध करूंगी
कि नवलगढ़ क्षेत्र
के ग्राम कोलसिया
के प्राथमिक स्वास्थ्य
केन्द्र, ग्राम
चारण की ढाणी, धायलों
का बास, नेहरा की
ढाणी, तुर्काणी
ढाणी जोहड़ी, मिल
नगर और ढूढियों
के बास, मिठारवालों
की ढाणी, पूनियों
की ढाणी, खरीतों
की ढाणी काफी दूर-दूर
तक है और इसमें
चिकित्सा की कोई
सुविधा नहीं है,
अत: यहां उप स्वास्थ्य
केन्द्र स्वीकृत
करें।
Jkj/akt/17.00/3e/16.3.2007
एक जो हमारे
बीपीएल की दवाइयां
जाती हैं या और
जो अन्य सरकारी
दवाइयां जाती हैं
उनमें जो भ्रष्टाचार
का सिस्टम है
वह इतना, हमने अब
भ्रष्टाचार को,
समाज ने एक तरह
से स्वीकार्य
कर लिया है कि यह
चीज तो असेंसियल
है, यह तो जानी ही
नहीं है। जैसे, माननीय
अध्यक्ष महोदय,
किस तरह से भ्रष्टाचार
हमारे समाज में
स्थापित हुआ है,
मैं आपका ध्यान
आकर्षित करना चाहूंगी
कि पहले किसी के
यहां रिश्वत का
रूपया आता था और
उससे कोई चीज खरीद
ली थी तो समाज में
छिपाते थे कि भाई
यह अलग से कहां
से इनकम आई और दिखाने
से डरते थे। आज लड़की
का संबंध करते
हैं और पूछते हैं
कि लड़की का संबंध
कहां करा, लड़का
क्या कर रहा है
तो कहते हैं कि
फलां नौकरी में
है, लेकिन नहीं-नहीं,
वह तनख्वाह पूछते
हैं तो कहते हैं
कि नहीं, तनख्वाह
नहीं, ऊपर की इनकम
बहुत ज्यादा है। तो जब हम बेटी
को, लड़की को भ्रष्टाचारी
को देने से नहीं
चूक रहे हैं तो
इस तरीके से धीरे-धीरे
समाज के अंदर भ्रष्टाचार
ने अपनी जड़ें
जमा ली है, इस चीज
को भी हमें देखना
होगा। और
एलोपैथी के साथ-साथ
माननीय मंत्री
महोदय, हमें आयुर्वेद
व यूनानी जो पध्दतियां
हैं हमारी, उनका
प्रचार-प्रसार
भी करना चाहिए
ताकि उनका भी लोगों
को लाभ मिल सके। अब मैं माननीय
मंत्री महोदय का
संविदा के कर्मचारियों
पर ध्यान आकर्षित
करना चाहूंगी कि
संविदा पर काफी
संख्या में चिकित्साकर्मी
कार्यरत हैं, इनकी
नियुक्ति भी नियमित
कर्मचारियों की
जो प्रणाली है,
जो एक सिस्टेमेटिक
मेथड है उसी तरीके
से हुई थी और जब
इनको संविदा पर
रखा तो इनके साथ
कोई रिटन कांट्रेक्ट
नहीं हुआ सरकार
के पास और यह बराबर
नियमित कर्मचारियों
की तरह ही पिछले
काफी वर्षों से
कार्य कर रहे हैं,
इनका स्थानांतरण
इनके इच्छित स्थानों
पर हम नहीं कर रहे
हैं और इन्हें
मूलभूत सुविधाएं
जैसे प्रसूति अवकाश,
क्षतिपूर्ति अवकाश,
चिकित्सा अवकाश
आदि से वंचित किया
जा रहा है जो मैं
सोचती हूं कि सामाजिक
न्याय का जो सिध्दाँत
है, उसके प्रतिकूल
है और राज्य सरकार
यदि इनको नियमित
करती है तो किसी
प्रकार का वित्तीय
भार भी सरकार पर
नहीं आने वाला
है क्योंकि यह
जो संविदा पर कर्मचारी
हैं इनकी वेतनवृध्दि
हर वर्ष टेन परसेंट
तो आटोमेटिकली
हो रही है और ज्यादातर
जो कर्मचारी हैं,
नियमित कर्मचारियों
के बराबर वेतन
ले रहे हैं और अपनी
सेवाएं भी यह निष्ठापूर्वक
दे रहे हैं। इसलिए
मेरा मंत्री महोदय
से आग्रह है कि
इनको नियमित करें,
स्थानांतरण की
सुविधा दें और
जो एक जनरल सोसियल
साइंस का जो नियम
है, सामाजिक न्याय,
उसके तहत इन्हें
भी सुविधाएं प्रदान
करें।
माननीय
अध्यक्ष महोदय,
मैं मांग संख्या
51- अनुसूचित जाति
के कल्याण हेतु
जो है उस पर अपने
विचार रखना चाहूंगी
कि हिन्दुस्तान
के संविधान में
सभी नागरिकों को
सामाजिक, आर्थिक,
राजनैतिक, न्यायिक,
विचारों की स्वतंत्रता,
आस्था, विश्वास,
पूजा, अवसर की समानता
के अधिकार दिये
गये हैं। आर्टिकल
46 कहता है कि राज्य
में जो कमजोर वर्ग
विशेषकर एससी और
एसटी के लोगों
की विशेष देखभाल
करे, यह राज्यों
का और राष्ट्र
का कर्तव्य है
और उनकी शिक्षा
और आर्थिक स्थिति
में सुधार के
प्रयास करने का
कार्य राष्ट्र
का और राज्य का
आवश्यक रूप से
है, ऐसा हमारे संविधान
में लिखा हुआ है। आर्टिकल
274, विशेष राशि की
व्यवस्था केन्द्र
और राज्यों के
द्वारा की जाती
है ताकि एससी.एसटी.
वर्ग के कल्याण
की योजनाएं बनाई
जाए। सरकार
को चाहिए कि एससी
और एसटी के कल्याण
हेतु एक एडवाइजरी
कौंसिल का गठन
करे ताकि हम खाली
दिखाने के लिए
नहीं, निष्ठापूर्वक
इन लोगों के लिए
कार्य कर सकें। अध्यक्ष
महोदय, सरकार को
यह स्पष्ट करना
चाहिए कि अनुसूचित
जाति के विकास
के लिए कौन सी नई
योजनाएं वह ला
रही है जो इनके
कल्याण के लिए
प्रभावी हों। बीपीएल परिवारों
के लिए, मैं एक विसंगति
की तरफ आपके माध्यम
से सरकार का ध्यान
आकर्षित करना चाहूंगी
कि बीपीएल परिवारों
के लिए एसजीआरवाई
की जो योजना है
उसमें लाभ दिया
जाता है और शर्त
यह लगाते हैं कि
उसके पास जमीन
नहीं हो और दूसरी
ओर व्यक्तिगत
लाभ देने हेतु
जब हम किसी बीपीएल
परिवार के व्यक्ति
को चयनित करते
हैं कुआ गहरा कराने
के लिए, तो एक तरफ
तो हम कह रहे हैं
कि उसके पास जमीन
नहीं होनी चाहिए,
और दूसरी तरफ कुआ
काहे पर बनायेगा,
जमीन पर ही बनायेगा,
तो इस तरीके की
जो विसंगतियां
हमारे सिस्टम
में है उसको हमें
दूर करना चाहिए
और इस बीपीएल की
जो यह चीज है इसको
पुन: परिभाषित
करके करना चाहिए
ताकि इसका अधिक
से अधिक लाभ मिल
सके। अनुसूचित
जाति के अभ्यर्थी
को लाभ मिले, इस
हेतु हमें बीपीएल
की सीलिंग को भी
हटाना चाहिए कि
भाई, इन्हीं लोगों
को मिलेगा, बहुत
से ऐसे लोग उसके
अबोव रह जाते हैं
जो वंचित रह जाते
हैं और वह कमजोर
आय वर्ग के व्यक्ति
होते हैं। केन्द्र
सरकार से अनुसूचित
जाति के कल्याण
हेतु विशेष संगठक
योजना है , जो बजट
आवंटित किया जाता
है हर राज्य सरकार
को, वह राज्य सरकार
द्वारा विभागों
में जब....
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्या,
पन्द्रह मिनट
हो गये, अब कृपया
आप कन्क्लू्ड
करें।
श्रीमती
प्रतिभा सिंह:
अध्यक्ष महोदय,
दो मिनट, मैं बस
कन्क्लूड ही
कर रही हूं। वह राज्य
सरकार द्वारा विभागों
में जब आवंटित
किया जाता है तब
यह स्पष्ट आदेश
नहीं होते हैं
और इन नियमों की
भी पालना नहीं
होती कि योजना
में प्राप्त यह
राशि अनुसूचित
जाति के लोगों
को ही मिल रही है
या अन्य लोगों
को, यह सुनिश्चित
नहीं है। जैसे हास्पीटल्स
में है या पशुओं
के हास्पीटल्स
में है, जो बजट हम
देते हैं, एक तो
वह एससी.एसटी. के
लोगों को ही मिले,
ऐसा उसके अंदर
क्लियर नहीं होता
है तो इस और हमारा
ध्यान होना चाहिए। इन योजनाओं
में रूपया सही
खर्च हो, सदुपयोग
हो तो इसके लिए
कड़ाई से हमें
इनकी मानीटरिंग
करनी चाहिए, जितनी
भी सरकारी योजनाएं
ग्रामीण या शहरी
क्षेत्र में चलाई
जा रही हैं उनमें
एससी. और एसटी. के
व्यक्तियों को
लाभ मिले और रोजगार
भी मिले, उनको इकोनोमिकली
इन्डिपेंडेंस
मिलनी बहुत जरूरी
है। माननीय
अध्यक्ष महोदय,
अंत में मैं आपका
ध्यान आकर्षित
करवाना चाहूंगी,
आपके माध्यम से
सरकार का ध्यान
आकर्षित करवाना
चाहूंगी कि जिस
क्षेत्र में हमें
बहुत विशेष जरूरत
है वह एससी और एसटी
की महिलाओं की
स्थिति है, वह वाकई
में ही बहुत, वैसे
तो पचास प्रतिशत
महिलाओं की ओवरआल
चाहे वह ओबीसी
हो, मुसलिम हो या
जनरल हो, सभीकी
दयनीय है लेकिन
उसमें एससी और
एसटी की तो जो है
वह करेला और नीम
चढ़ा हम कह सकते
हैं, उन हेतु हमें
विशेष प्रोग्राम्स
बनाने चाहिए और
मैं आपका ध्यान
आकर्षित करना चाहूंगी
मंत्री महोदय कि
आप हर डिपार्टमेंट
में महिलाओं के
लिए जेन्डर बजटिंग
रखें और उस बजट
को ईयरमार्क भी
करें ताकि साल
के अंदर हमें यह
कन्क्लूजन आ
जाये कि महिलाओं
के लिए कितना पैसा
खर्च हुआ है और
उसका सम्पूर्ण
लाभ उन लोगों को
मिल सके। माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं आपका
बहुत-बहुत धन्यवाद
करूंगी कि आपने
मुझे वक्त दिया,
धन्यवाद।
श्री अध्यक्ष:
धन्यवाद आपको
बहुत-बहुत। श्रीमती
लक्ष्मी बारूपाल।
(व्यवधान) अब बैठी
नहीं बोलेंगी आप,
प्लीज। बैठी हुई
नहीं बोलेंगी,
बोल लिया काफी,
सतरह मिनट बोल
लीं।
श्रीमती
लक्ष्मी बारूपाल(देसूरी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं आज मांग
संख्या 26- चिकित्सा
और लोक कल्याण
और सफाई और मांग
संख्या 51- अनुसूचित
जाति के कल्याण...
श्री अध्यक्ष:
आप बैठे-बैठे इतने
जोर से न बोलें
कि मैं भी डिस्टर्ब
होऊं, वह भी डिस्टर्ब
हों।
श्रीमती
लक्ष्मी बारूपाल:
हेतु विशिष्ठ
संघटक योजना के
संबंध में अपने
विचार व्यक्त
करना चाहती हूं। माननीय अध्यक्ष
महोदय, जब राजस्थान
में वसुंधराजी
ने राज सँभाला
था उस समय के पीरियड
को और आज के समय
को तीन वर्ष हो
गये हैं, उन्होंने
बारी-दर-बारी पहला
बजट, दूसरा बजट,
तीसरा बजट और चौथा
बजट, इस प्रकार
से बजट के माध्यम
से उन्होंने एक
पूरे राजस्थान
को अच्छा करने
को जो घोषणाएं
बजट के माध्यम
से पेश कीं, उसके
अनुरूप काम हुआ। विपक्षी
माननीय सदस्य
जिनको सिर्फ विपक्ष
में बोलना है उनकी
नजरों में यह कागजों
का पुलिंदा होगा
मगर जो आज यह बजट
मेरे सामने पडा
है, चौथा बजट, इसमें
भी कई अच्छी घोषणाएं
हुई हैं और लास्ट
में 82 पेज पर 188 का
कालम हैं, ममताजी,
सुनते जाइये.
Lpm/akt/1710/3f/16032007
आपने कहा
कि ये कागजों का
पुलिंदा है, हमारी
वसुंधरा जी ने
स्पष्ट रूप से
कह दिया कि मैंने
जो घोषणाएं की
हैं ये केवल मात्र
घोषणाएं नहीं हैं,
इसके लिए मैंने
अलग से प्रावधान
कर लिए हैं और इसके
लिए विशेष रूप
से रखा है। इसका
गवाह है पूरा राजस्थान,
पूरे राजस्थान
से आने वाले हम
सभी विधायक, हम
विधायकों के क्षेत्र
में होने वाले
काम, चाहे किसी
भी क्षेत्र में
देख ले, शिक्षा
के क्षेत्र में
देख ले, चाहे सड़कों
के क्षेत्र में
देख ले, चाहे कोई
भी आप सबजेक्ट
उठा के देख ले, कोई
क्षेत्र उठा के
देख ले, आज ग्रामीण
इलाकों में वास्तविक
रूप से विकास के
मायने लोगों को
समझ में आये हैं,
वास्तविक रूप
से इस सरकार को
इस सत्ता में
लाने के जो मायने
थे वह समझ में आये
हैं और सरकार को
सभी धन्यवाद दे
रहे हैं। बजट पर
इन्होंने कोई
चर्चा नहीं की
क्योंकि बजट पर
इनके पास बोलने
को कुछ था ही नहीं,
इतना अच्छा बजट
पेश किया और चिकित्सा
के मामले में मैं
बताना चाहूंगी
कि अभी कुछ दिनों
पहले अप्रैल में
बाढ़ आई थी उस समय
भी सरकार की तरफ
इतने अच्छे और
पुख्ता प्रबंध
हुए थे, बाढ़ के
समय पर जो चिकनगुनिया
और जिस प्रकार
की बाढ़जनित और
वर्षाजनित बीमारियां
हुई उसमें भी सरकार
ने बड़ी संवेदनशीलता
के साथ में और चिकित्सा
विभाग ने बहुत
अच्छे तरीके से
अपना सहयोग दिया
और उसमें चाहे
कोई भी जिला देख
लो वहां पर सब जगह
दवाइयों की व्यवस्था
की, इसके लिए मैं
धन्यवाद देना
चाहूंगी वसुंधरा
जी को क्योंकि
गांव में इसके
लिए सभी धन्यवाद
दे रहे हैं। जस्ट
उसके बाद में चिकित्सा
स्वास्थ्य
चेतना यात्रा चली,
स्वास्थ्य
चेतना यात्रा का
वह समय भी सही चुना।
जस्ट बाढ़ के
बाद में ही वह समय
था और उसमें जितने
भी लोगों को लाभान्वित
किया जाना था, उसमें
वो लाभान्वित हुए
और गांव, ढाणी, मगरी
में बैठा हुआ आदमी
उस चीज से लाभान्वित
हुआ। चाहे सड़कों
का देख ले, सड़कों
के मामले में आज
पाली जिला और राजस्थान
की तो सब जगह प्रशंसा
हो ही रही है, पाली
जिले में तो बहुत
जबरदस्त काम हुआ
है। मैं मांग संख्या-26
जो आज का विषय है
चिकित्सा और लोक-स्वास्थ्य,
इसके बारे में
आपके माध्यम से
हमारे चिकित्सा
मंत्री जी और माननीय
मुख्यमंत्रीजी
साहिबा से कुछ
निवेदन करना चाहती
हूं कि वैसे तो
पूरे राजस्थान
में जो चिकित्सालयों
की जर्जर अवस्था
थी उसको सुधारने
के लिए, डॉक्टरों
की व्यवस्था
के लिए सभी जगह
पर समान बजट दिया
गया मगर मेरा इस
मौके पर एक और निवेदन
है कि नाड़ौल जो
प्राथमिक स्वास्थ्य
केन्द्र है मेरे
यहां पर, उसको सामुदायिक
स्वास्थ्य
केन्द्र में क्रमोन्नत
करावें क्योंकि
नाड़ौल की आबादी
15 हजार है और वर्तमान
में वहां का आउटडोर
2004 में 14,286 था और 2005 में
14,896 था और 2006 में 17,273 था
अगर यहां नाड़ौल
में प्राथमिक स्वास्थ्य
केन्द्र को सामुदायिक
केन्द्र में क्रमोन्नत
कर दिया जाता है
तो इससे, मैं कल
माननीय वसुधंरा
जी, मुख्यमंत्री
जी से मिली और इससे
पहले मैंने माननीय
चिकित्सा मंत्री
जी से भी इसके बार
में निवेदन किया
था कि वहां पर हमारे
दानदाता चिकित्सा
के क्षेत्र में
भवन बनाने के लिए
भी तैयार है और
इससे हमारी 40 से
50 गांव, ढाणियां
जो इससे जुड़ी
हुई हैं इसमें
14 पंचायतें हैं,
14 पंचायतों में
40 से 50 गांव है जिसमें
नाड़ौल पंचायत,
सालरिया, कोटड़ी,
आना, दादयी, ढलोन,
किशनपुरा, सावलदा,
निपल, देवली, पाबूजी,
केसुलिन, नारलाई,
बड़ौद, जीवनकलां
ये 14 ग्राम पंचायते
हैं। इन ग्राम
पंचायतों में
50 से 60 गांव हैं, ये
सभी गांव लाभान्वित
होंगे और इसमें
चारो तरफ आवागमन
से तो एकदम सही
स्थिति हो गई है
मगर इस प्राथमिक
स्वास्थ्य
केन्द्र को अगर
सामुदायिक स्वास्थ्य
केन्द्र में क्रमोन्नत
कर दिया जाता है
तो वैसे भी सरकार
ने इस बजट में निजी
सहयोग को आमंत्रित
किया है और निजी
सहयोग करने के
लिए हमारे दानदाता
तैयार है। इसी
प्रकार से मेरे
सादड़ी में भी
30 बैड है और 30 बैड
को 50 बैड करने की
मैं आपके माध्यम
से चिकित्सा मंत्री
जी से और वसुंधरा
जी से मांग करती
हूं। क्योंकि
वहां पर भी भवन
आलरेडी बना हुआ
है और वहां पर भी
जो आउटडोर वैसे
आंकड़ें मंत्री
महोदय मंगाये तो
मिल सकते हैं 2004 में
57,534 था और इंडोर 1963, मेजर
ऑपरेशन हुए 593, माइनर
ऑपरेशन हुए 628, डिलेवरी
हुई 204 और बैड यूटिलिटी
थी 136.21 प्रतिशत, आप
सोच सकते हैं और
30 बैड है और 30 बैड
पर मरीजों को बिठाने,
सुलाने के अलावा
भी नीचे मरीजों
को सुलाया जाता
है। यह स्थिति
है जो बैड यूटिलिटी
थी। इसी प्रकार
से 2005 में 62,552 आउटडोर
और इंडोर 2,278, मेजर
ऑपरेशन हुए 864, माइनर
ऑपरेशन हुए 457, डिलीवरी
361 और बैड यूटिलिटी
थी 159 प्रतिशत, 2006 में
आउटडोर था 79,170, इंडोर
था 2,890, मेजर ऑपरेशन
हुए 837, माइनर ऑपरेशन
हुए 704, डिलीवरियां
हुई 561 और बैड यूटिलिटी
थी 163.94 प्रतिशत। मेरे
कहने का तात्पर्य
यह है कि जब इतना
अच्छा हो रहा
है तो इस विभाग
की तरफ से भी सादड़ी
में जो 30 बैड है उसको
50 बनाने के लिए भी
सारे प्रस्ताव
विभाग के भी शायद
आपके पास आ गये
होंगे। इसलिए मेरा
निवेदन है अध्यक्ष
महोदय, आपके माध्यम
से सरकार से है,
चिकित्सा मंत्री
जी से है कि कृपया
करके इसे सादड़ी
में 30 से 50 बैड में
क्रमोन्नत किया
जाए। सादड़ी हमारे
देसूरी का एक मैन
स्थल है और यहां
पर भी दानदाताओं
के द्वारा भवन
बना हुआ तैयार
है सिर्फ आपको
बैड क्रमोन्नत
करने हैं और मैं
इतना विश्वास
दिलाती हूं कि
दानदाताओं और निजी
सहयोग का मैडम
ने इसमें घोषणा
कर दी है, इतना विश्वास
दिलाती हूं कि
जब भी आपको एक्स्ट्रा
मेडिसंस की आवश्यकता
होगी तब भी इसमें
पूरा सहयोग हमारे
दानदाता करने के
लिए तैयार रहेंगे।
क्योंकि हमारे
क्षेत्र का गोड़वाड
का जो क्षेत्र कहा जाता
है वहां के दानदाता
पूरे बोम्बे की
अर्थव्यवस्था
पर कब्जा रखते
हैं और जब भी किसी
प्रकार की विपत्ति
होती है चाहे कवास
में हुई, चाहे पाली
में अकाल पडा जब
भी वो लोग आकर के
अपनी तरफ से सहयोग
करते हैं। इसलिए
मेरा आग्रह आपके
माध्यम से यही
रहेगा कि सादड़ी
में भी 50 बैड क्रमोन्नत
किए जाए। इसके
साथ ही बिजौवा
में नया प्राथमिक
स्वास्थ्य
केन्द्र खोला
जाए। इस गांव की
आबादी आठ हजार
के करीब है और वहां
पर एक ए एन एम है
और बिजौवा गांव
भी एक आदर्श गांव
है और वहां पर ए
श्रेणी के आयुर्वेदिक
हॉस्पिटल भी है,
इसके साथ ही घाणेराव
में भी मैं नया
प्राथमिक स्वास्थ्य
केन्द्र खोलने
के लिए आग्रह करूंगी।
इस गांव की आबादी
भी 7500 के करीब है,
यहां पर भी केवल
एक ए एन एम है और
ए श्रेणी का आयुर्वेदिक
हॉस्पिटल है। यहां
पर सैकण्ड्ररी
स्कूल है, यहां
पर मिनी सहकारी
बैंक है, घाणेराव
में मुछला महावीर
तीर्थ और पंच तीर्थ
है जहां पर स्वयं
गुलाब जी जो अपने
गृहमंत्री जी है,
वह भी आकर के गये
हैं और इससे जुड़ता
ही आदिवासी इलाका
पड़ता है। अत: यहां
पर भी प्राथमिक
स्वास्थ्य
केन्द्र खोला
जाए ऐसा मेरा निवेदन
है। इसके साथ ही
मैडम ने जब इस बजट
में हमारी माननीय
वसुंधरा जी ने
जब इस बजट में 7502 ए
एन एम की घोषणा
की है, पहले भी कई
ए एन एम को लगाया
है, डॉक्टरों
को लगाया है और
इस बजट में भी इसकी
घोषणा की है तो
मैं माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपके माध्यम
से मांग करती हूं
कि मेरे सावलदा
जो कि खुद ग्राम
पंचायत है, घाणा
जो भी ग्राम पंचायत
है, गिराली जहां
पर तो दानदाताओं
ने भवन भी बना दिया
है और मैंने उसका
उदघाटन भी इसी
शर्त पर किया था
और चिकित्सा मंत्री
जी से बात करके
कि मैं उदघाटन
उसी समय करती हूं
भाई साहब, जब आप
यहां पर ए एन एम
लगाएंगे क्योंकि
जब मैं गांव में
जाऊंगी तो ए एन
एम वो मांगेंग,
इसलिए आप कहे तो
मैं उसका उदघाटन
तो कर दूं लेकिन
लोग कह रहे हैं
इन्होंने उस समय
फोन पर कहा था कि
आप कर दो, वहां पर
ए एन एम आपके लिए
जरूर, अवश्य ही
ए एन एम ऑफिस खोल
दूंगा। वहां पर
भवन बना हुआ है
सिर्फ पोस्ट क्रियेट
करनी है। सभी पंचायत
मुख्यालय और गिराली
में जैसा कि मैंने
निवेदन किया कि
दानदाताओं ने चाहे
मेरा कोई भी गांव
उठा के देख ले दानदाता
एडवांस में हम
को सहयोग देने
के लिए तैयार है,
वो इसलिए कि राजस्थान
की स्थिति सुधरी
है। वसुंधरा जी
राजस्थान की पहचान
बहुत अच्छी बनाई
है, जो पहचान पूर्व
की सरकार ने बिगाड़
दी थी, जो खोखली
हो गई है, यह हो गया
है, वह हो गया है,
इसलिए प्रवासी
भी आकर्षित हो
रहे हैं.....
Bhs/akt/16.3.07/17.20/3g
सहयोग करने के लिए आकर्षित हो रहे हैं यह इसी का परिणाम है इसलिए आप इससे मुझको मत झुकाइये और दे ही दीजिये।
श्री अध्यक्ष: कपया समाप्त करें।
श्रीमती लक्ष्मी बारूपाल (देसूरी): मैडम दो मिनट और।
श्री अध्यक्ष: आपने 5.08 बजे बोलना शुरू किया था 12 मिनट बाल लिये।
श्रीमती लक्ष्मी बारूपाल (देसूरी): दो मिनट और। मैं मांग संख्या 51 के संबंध अनुसूचित जाति और कल्याण हेतु विशिष्ट संगठन योजना जो है इसके संबंध में भी कुछ अपने विचार रखना चाहूंगी। मैं धन्यवाद देना चाहूंगी पूरे राजस्थान के एससी/एसटी वर्ग के लोगों की तरफ से जिन्होंने अनुप्रति योजना जिसके माध्यम से सिविल परीक्षाओं में उनको सरकार ने कोचिंग करने के लिए जो सुविधा दी एक लाख की और पैंतालीस हजार की आईएएस के लिए और आरएएस के लिए अलग अलग उसके लिए भी मैं वसुन्धरा जी का बहुत धन्यवाद करना चाहूंगी मन से धन्यवाद करना चाहूंगी। साथ ही अब के बजट में भी यह उन्होंने घोषणा की और करके दिखाया एससी/एसटी का बैकलॉग बीस हजार छोड़ गये थे वो दस हजार पूरा किया और आने वाले समय में भी वो पूरा किया जाएगा ऐसा उन्होंने संकल्प लिया है तो निश्चित रूप से हमें विश्वास है कि वसुन्धरा जी ने जो भी राजस्थान की जनता के सामने जो भी घोषणा की निश्चित रूप से उनको पूरा किया है और इसी पूरा करने की प्रक्रिया से सभी का विश्वास प्रगाढ़ से प्रगाढ़ होता जा रहा है। मैं एक बात के लिए और धन्यवाद देना चाहूंगी अम्बेडकर पीठ पार्क के निर्माण की जयपुर में जो घोषणा की गयी है निश्चित रूप से पूर्व की सरकार ने अपने नाम से भवन बनाये अशोक जी ने अपने नाम से अशोक उद्यान बनाया। बाहेती जी आपके अजमेर में भी बना हुआ है उधर से आती हूं तब देखती हूं जोधपुर में भी बना हुआ है। मगर मैं धन्यवाद देना चाहती हूं... ...(व्यवधान)... वो नाम के सम्राट थे सम्राट तो ये हैं । सम्राट तो वो होते हैं जैसा गांव में भावना होती हैं कि सम्राट वो होता है जो जनता की आम जरूरतों का ध्यान रखती है उन्होंने आम जरूरतों का ध्यान नहीं रखा इसलिए आज वो क्या हैं आप अच्छी तरह से जानते हैं। सम्राट तो वसुन्धरा जी हैं।
श्री अध्यक्ष: सम्राट तो वो होते हैं जो दिल में समाये रहते हैं।
श्रीमती लक्ष्मी बारूपाल (देसूरी): मेरी नजर में सम्राट वसुन्धरा जी हैं जिन्होंने प्रत्येक वर्ग का अबके बजट में ध्यान रखा, महिलाओं का ध्यान रखा, जेंडर बजटिंग पेश किया। महिलाओं का रेश्यो सभी विभागों में अच्छा रहे इसके लिए सब कुछ किया और सबसे बड़ी चीज एससी/एसटी वर्ग का पूरा ध्यान रखा जिस मुद्दे को आप लोग भी बहुत हवा देते रहे बेकलॉग पूरा करवाओ, बैकलॉग पूरा करवाओ। बेकलॉग पूरा करवा दिया और हमारे पास में बोलने को बहुत जगह है और हमारे समाज वाले हमारे एससी/एसटी वर्ग वाले इस सरकार के साथ में जुड़ेंगे और मजबूती के साथ जुड़ेंगे देखना आने वाले समय में आपको बतायेंगे आपने हम लोगों का मिसयूज किया है उसका खामियाजा आपको भुगतना जरूर पड़ेगा। वर्षों-वर्षों तक भुगतना पड़ेगा। ये तो आपने बीच में टोक दिया।
डॉ.श्रीगोपाल बाहेती (पुष्कर): आप उनका जेंडर मत बदलो उनको साम्राज्ञी बोलो सम्राट मत बोलो।
श्रीमती लक्ष्मी बारूपाल (देसूरी): इसमें भी क्या स्त्रीलिंग और पुल्लिंग थोड़े होता है सम्राट सम्राट होता है कोई हो। बजट इतना बढि़या पेश किया इस पर कुछ आप बोले नहीं ।
श्री अध्यक्ष: अब आप समाप्त करें।
श्रीमती लक्ष्मी बारूपाल (देसूरी): एक मिनट जवाब तो दे दूं, नहीं तो ये समझेंगे कि बोलना नहीं आता महिलाओं को।
श्री अध्यक्ष: ऊट पटांग बातों का जवाब देना आवश्यक नहीं है।
श्रीमती लक्ष्मी बारूपाल (देसूरी): हुकुम आप विराजें हैं, आप भी सर्वोच्च पद पर विराजे हुए हैं कभी कभी इनके मन में होता है कि महिलाएं आगे कहां पहुंच गयी हैं इसलिए जवाब देना आवश्यक है।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): देसूरी से आने वाली माननीय सदस्या, हम तो मानते हैं कि महिलाएं इतनी शक्तिशाली हैं कि इस पूरे सदन में 6-7 ही हैं तो यह हमारी हालत है अगर अब तैंतीस प्रतिशत होंगी तो क्या हालत होगी हम जानते हैं।
श्रीमती लक्ष्मी बारूपाल (देसूरी): तैंतीस प्रतिशत तो आप कराओ। आप हमेशा महिला दिवस पर ...। ये तो मैं जवाब दे रही हूं इससे हटकर महिला दिवस पर आपने खूब रोना रोया कि महिलाओं की यह हो रही है वो हो रही है।
श्री अध्यक्ष: वो हाल तो हमने देखा है। वो हमने देखा है हाल दिन से। महिलाएं तो केवल दो थीं लेकिन पुरुष ने जो हंगामा किया तीन तक देख लिया हमने।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्यक्ष महोदय, हमारे साथ एक ही महिला थी अगर 15-20 होतीं तो क्या हालत होती।
श्री अध्यक्ष: आपके साथ दो थीं।
श्रीमती लक्ष्मी बारूपाल (देसूरी): ये ढोंग तो यह रचते हैं कि हम महिलाओं के समर्थक हैं लेकिन ये सबसे बड़े विरोधी हैं।
श्री घनश्याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): आपके साथ महिला एक थी तो वो तो पुरुष थी बाकी आप सारा काम वो कर रहे थे।
डॉ.श्रीगोपाल बाहेती (पुष्कर): महाभारत और रामायण एक ही महिला ने करवाया था आप चिंता मत करो बहुत हैं।
श्री शंकरसिह राजपुरोहित: अध्यक्ष महोदय, ये तीन दिन का जो नजराना हुआ उसमें हरिमोहन जी को बेलन युद्ध सहन करना पडा घर पर कि वसुंधरा जी के विरोध में क्या कर रहे हो ये बेलन युद्ध हो गया उनके। यह उन्होंने कहा है मेरे को। हरिमोहन जी ने कहा है।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): इसीलिए ठंडे पड़े हैं आज।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): किसी भी पड़ोसी की आलोचना नहीं करनी चाहिए और हमारी पड़ोसी बोल रही हैं तो मुझको तो ठंडा रहना ही है।
श्रीमती लक्ष्मी बारूपाल (देसूरी): ये इतना अच्छा माहौल बना रहे हैं तो निश्चित रूप से लगता है कि सदन में आने की कुछ सार्थकता सिद्ध हुई नहीं तो इतने दिन से तो ऐसा लग रहा था कि सभी चर्चा कर रहे थे कि क्या हो रहा है करोड़ों रुपयों का नुकसार हो रहा था और आप सबको देख देख कर जो प्रशासनिक लॉबी है वो भी कंट्रोल से बाहर हो जाएगी इसलिए सुधर जाओ, सभी सुधर जाओ। सभी का इसी में फायदा है इसलिए ...।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): हम सुधरे हुए हैं इसमें भी शक है क्या आपको। कमाल करते हो।
श्रीमती लक्ष्मी बारूपाल (देसूरी): नहीं-नहीं, मैंने तो आपकी हां में हां मिलायी है।
श्री अध्यक्ष: देसूरी से आने वाली माननीय सदस्या, आज आपने अख़बार में नहीं पढ़ा क्या, ये नहीं सुधरेंगे।
डॉ. एन.एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): हरिमोहन जी, इस उम्र में आकर सुधरे कि नहीं सुधरे बराबर हैं।
श्रीमती लक्ष्मी बारूपाल (देसूरी): धन्यवाद, मैडम।
श्री अध्यक्ष: श्री प्रहलाद गुंजल।
श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्डी): माननीय अध्यक्ष महोदय, चिकित्सा एवं लोक स्वास्थ्य एवं सफाई की मांग संख्या- 26 अनुसूचित जाति के कल्याण हेतु विशिष्ट संगठन योजना की मांग संख्या 51 पर चर्चा हो रही है। माननीय अध्यक्ष महोदय, जब चर्चा प्रारम्भ हुई और जौहरी बाजार से आने वाले माननीय सदस्य ने चर्चा प्रारम्भ की और पिछले पाँच सालों की तुलना वर्तमान सरकार के तीन सालों से करते हुए सारा चित्रण सदन के सामने रखा। इतनी गम्भीर मांग पर चर्चा है लोक स्वास्थ्य राष्ट्र की धरोहर है और मनुष्य समाज व्यवस्था का वो घटक है कि उसकी कार्यक्षमता पर समाज की आर्थिक और सामाजिक उन्नति निर्भर करती है और इसलिए यह चिंतन केवल राजस्थान के स्तर पर नहीं है पिछले लंबे अर्से से विश्व के मानचित्र पर भी इसकी चर्चाएं हुईं। चाहे वो अलमाटा घोषणा हो और अलमाटा घोषणा के बाद प्रत्येक व्यक्ति को प्राथमिक चिकित्सा का लाभ मिले इसलिए राष्ट्रीय चिकित्सा नीति भी बनी। मैं यह बात इसलिए कह रहा हूं माननीय अध्यक्ष महोदय, कि भारत सरकार ने जो 1982 में राष्ट्रीय चिकित्सा नीति बनायी राजस्थान में 1983 में उसका अनुसरण हुआ और उसका अनुसरण होने के बाद जिस सरकार के समय यह चिकित्सा नीति बनी 1983 से लेकर 1990 तक और 1998 से लेकर 2003 तक वो शासन में रही। आश्चर्य होता है माननीय अध्यक्ष महोदय, कि हम चिंता कर रहे हैं कि हमारी चिकित्सा नीति इस प्रकार की है कि प्राथमिक चिकित्सा प्रत्येक व्यक्ति को गांव तक मिले और हमारी रफ्तार उसको चिकित्सा उपलब्ध कराने की ....।
कैलाश/अरुण 16.3.07
17.30 (1) 3h
कितनी
बनी है यह आंकडे
प्रदर्शित कर रहे
हैं । वर्तमान
सरकार के तीन वर्षों
में खोले गये स्वास्थ्य
केन्द्रों की
संख्या और विगत
सरकार के पाँच
वर्षों में खोले
गये स्वास्थ्य
केन्द्रों की
संख्या । उप स्वास्थ्य
केन्द्र तीन साल
में 686 और विगत सरकार
के पाँच सालों
में 75 । सामुदायिक
स्वास्थ्य
केन्द्र वर्तमान
सरकार में तीन
साल में 51 और विगत
सरकार के पाँच
वर्षों में शून्य
। यह चेहरा बताता
है कि चिकित्सा
आम ग्रामीण जन
जीवन को मिले इसके
बारे में इनका
दृष्टिकोण, इनका
नजरिया, इनकी नीति
किस प्रकार की
रही है । अध्यक्ष
महोदय, मैं
इस अवसर पर दो तीन
बातों की चर्चा
करना चाहता हूं
। पिछले दिनों
राजस्थान में
स्वास्थ्य
चेतना यात्रा प्रारंभ
की गई और एक महीने
तक राजस्थान की
माननीय मुख्य
मंत्री जी के आह्वान
पर पूरे राजस्थान
के गांव गांव तक
स्वास्थ्य
चेतना यात्रा गई
। अध्यक्ष महोदय, मुझे आज भी
याद आता है कि मैंने
कई कांग्रेस पार्टी
के वरिष्ठ नेताओं
के बयान पढे कि
स्वास्थ्य
चेतना यात्रा राजनीतिक
यात्रा है । यह
पोस्टर छपाओ प्रतियोगिता
हो रही है और गांव
गांव तक पोस्टर
पहुंचाये जा रहे
हैं । लेकिन आज
इस अवसर पर मैं
धन्यवाद देना
चाहता हूं माननीय
मुख्य मंत्री
जी को और चिकित्सा
मंत्री जी को, अध्यक्ष
महोदय, मैं
गांव से आता हूं
और मुझे आज भी गांव
के दूरस्थ इलाके
में बैठे हुए व्यक्ति
की तकलीफ की ठीक
से जानकारी है
जिसके मन में चिकित्सा
स्वास्थ्य
के बारे में अवेयरनेस
नहीं है और आज भी
जिसके मन में यह
कल्पना नहीं है
कि वह जिस साधारण
बीमारी से ग्रसित
है सामान्य तरीके
से उसका उपचार
कराया जा सकता
है । अगर कोई आदमी
उम्र के पडाव पर
बैठा हुआ बीमार
होता है उससे जाकर
तकलीफ पूछते हैं
जवाब मिलता है
कि यह सब उम्र की
बीमारियां हैं
अब यह साथ जाने
वाली हैं । गांव
के दूरस्थ इलाके
में बैठा हुआ जो
व्यक्ति जिसकी
तकलीफ का इलाज
संभव है, समाधान
संभव है अवसर नहीं
है उम्र की बीमारी
के साथ जोड कर हताश
होता है, समझौता
करता है उस राजस्थान
के गरीब व्यक्ति
के दरवाजे पर जाकर
उसकी तकलीफ को
दूर करने का पहली
बार लोकतंत्र के
इतिहास में एक
अवसर राजस्थान
की सरकार ने खड़ा
किया है । अवार
खड़ा किया है राजस्थान
सरकार ने जो गांव
का व्यक्ति सामान्य
बीमारी से ग्रसित
है या कोई गंभीर
बीमारी से ग्रसित
है उसका इलाज गांव
में होगा और गांव
में तुरंत उसकी
बीमारी का इलाज
संभव है तो वहां
पर होगा अगर गंभीर
बीमारी है जिसका
इलाज जिला चिकित्सालय
पर संभव नहीं है
तो उसको उस बारे
में मार्ग दर्शन
दिया जायेगा ।
अध्यक्ष महोदय, आप कल्पना
करोगे राजस्थान
में एक प्रकार
के वातावरण का
निर्माण होगा कि
एक के बाद एक पंचायत
में जब चिकित्सा
चेतना रथ जाने
लगा तो होड लग गई
मरीजों की और यह
आंकडे जो राजस्थान
की सरकार ने प्रदर्शित
किये हैं कि कोई
31 लाख लोगों ने आकर
उसमें अपना इलाज
कराया । मैं समझता
हूं कि कोई अतिशयोक्ति
नहीं कि संख्या
इससे भी ज्यादा
बढ गई हो । अध्यक्ष
महोदय, दूसरा
जो कार्यक्रम इन
तीन सालों में
हुआ बच्चों का
स्वास्थ्य
परीक्षण का । कोई
राजनीतिक बात कहे
कोई तकलीफ नहीं
है । हम बहुत ईमानदारी
से जब स्वास्थ्य
के बारे में चर्चा
करते हैं कोई भी
देश समग्र और शक्तिशाली
देश तब बन सकता
है जब उसका लोक
स्वास्थ्य
सुदृढ हो । उसकी
आने वाली पीढी
का स्वास्थ्य
मजबूत और सुदृढ
हो । उसकी कार्य
क्षमता में दो
गुना, चार गुना
इजाफा हो । स्वास्थ्य
के आधार पर तब राष्ट्र
की क्षमता नापी
जाती है । केवल
भौतिक आधार पर
और अन्य तरीकों
से कोई जीडीपी
के आधार पर, जीडीपी
तब क्रिएट होगी
जब उसके नागरिक
की कार्य क्षमता
का विस्तार होगा
और उसका नागरिक
जो कल बनने वाला
है अध्यक्ष महोदय, मुझे बहुत
प्रसन्नता हुई
इस अभियान में
और तकलीफ हुई एक
दिन मैं समाचार
पढ रहा था रामपुर
मेरे विधान सभा
क्षेत्र का एक
विद्यालय है वहां
जब बच्चों के
स्वास्थ्य परीक्षण
का कार्यक्रम प्रारंभ
हुआ और अगले दिल
डाक्टर का बयान
था कि एक विद्यालय
में तमाम शत प्रतिशत
बालिकाएं एनिमिया
की बीमारी से पीडित
है । कोई कल्पना
नहीं कि हम इस बीमारी
से ग्रस्त है,कहीं
खून की कमी है ।
यह जो घर के दरवाजे
से चलकर उसके पास
जाकर उसको अवेयरनेस
पैदा कर उसके जीवन
को सुधारने, संवारने,
चिकित्सा उपलब्ध
कराने की जो पहल
है मैं खुद गया
एक स्वास्थ्य
परीक्षण के अवसर
पर तीसरी चौथी
क्लास के बच्चे
जिनको पता नहीं
कि मैं किसी बीमारी
से ग्रसित हो सकता
हूं और मेरे विधान
सभा क्षेत्र बावडीखेडा
के प्राइमरी स्कूल
में जब बच्चों
की आंखों का परीक्षण
हुआ तो 15 से 20 प्रतिशत
बच्चों की आखें
कमजोर पाई गई ।
अध्यक्ष महोदय, अगर इलाज नहीं
होता, समय पर उनको
चश्में जैसी सुविधा
उपलब्ध नहीं होती,
चिकित्सकीय मार्ग
दर्शन नहीं मिलता
तो निश्चित रूप
से यह बीमारी जाकर
बडी बीमारी बनती
। अध्यक्ष महोदय, मैं पिछले
तीन सालों से लगातार
जब भी इस सदन में
चिकित्सा की मांग
करता हूं तो दो
प्रकार की बाते
सामने आती हैं
शहरी चिकित्सा
और ग्रामीण चिकित्सा
। हम शहरी चिकित्सा
को सुदृढ करने
की बात करते हैं
। हम जयपुर के हमारे
एसएमएस को सुपर
स्पेशलिटी के
क्राइटेरिया में
लाने की बात करते
हैं । निश्चित
रूप से करनी चाहिये
यह बहुत जरूरी
है । लेकिन आज केवल
जयपुर के एसएमएस
को सुपर स्पेशलिटी
में लाने से काम
चलने वाला नहीं
है । अध्यक्ष
महोदय, शायद
आज हमने अपने आपको
थोडा लिमिटेशन
में किया है कि
जिन जरूरी चीजों
की आवश्यकता स्वास्थ्य
के क्षेत्र में
सरकार को करनी
चाहिये चाहे वह
संभागीय हैड क्वार्टर
पर बाई पास सर्जरी
की सुविधा हो या
फिर न्यूरोलोजी
की यूनिट प्रत्येक
डिस्ट्रिक्ट
हैड क्वार्टर
या संभागीय हैड
क्वार्टर में
पूरी तरह से स्थापित
करने की आवश्यकता
हो । कभी कभी हम
देखते हैं शहरी
क्षेत्रों में
जो निजी क्षेत्र
का निवेश हुआ है
कोटा में आप चले
जाएं तीन तीन, चार
चार निजी क्षेत्र
के अस्पतालों
में बाई पास सर्जरी
की सुविधा है और
कोटा का महाराव
भीमसिंह चिकित्सालय
जो मैडिकल कालेज
से संबद्ध है वहां
पर इसकी सुविधा
नहीं है । आज हमको
कम से कम यह बात
तय करनी पडेगी
कि केवल कार्डोलोजिस्ट
लगाने से, फिजीशियन
लगाने से काम चलने
वाला नहीं है ।
सर्व सुविधा युक्त
एक एक यूनिट कम
से कम डिस्ट्रिक्ट
हैड क्वार्टर
पर बाई पास सर्जरी
की संभव नहीं है
तो कम से कम हमको
विज्ञान के महाविद्यालय
जिन संभाग मुख्यालयों
पर कार्यरत हैं
वहां पर हमको यह
विचार करना पडेगा
और ग्रामीण स्वास्थ्य
के बारे में जब
हम विचार करते
हैं अध्यक्ष महोदय, यह बात आती
है कि गांवों में
डाक्टर नहीं जाते
। कई बार यह चिंता
सदन के सारे माननीय
सदस्यों ने की
लेकिन मुझे इस
बार बहुत प्रसन्नता
है कि राजस्थान
के चिकित्सा मंत्री
ने इस बात को समझा
कि आखिर गांव में
डाक्टर के ठहराव
के लिये क्या
जरूरी है । मैं
हर साल कहता हूं
मेरे रामगंज मंडी
के सामुदायिक स्वास्थ्य
केन्द्र को 100 बैड
के अस्पताल में
प्रमोट करो और
जवाब आता है कि
चूंकि वहां पर
हर महीने 100 की क्षमता
नहीं होती इसलिए
नहीं होता । अध्यक्ष
महोदय, मैं
हर बार कहता हूं
कि उस सामुदायिक
स्वास्थ्य
केन्द्र में आप
कैसे 100 लोगों को
भर्ती करोगे जिसमें
एनेस्थीसिया
का डाक्टर नहीं
है, जिसमें सर्जरी
करने वाला डाक्टर
नहीं है, जिसमें
गायनोलोजिस्ट
नहीं है, जिसमें
आर्थोंपेडिक्स
का कोई सर्जन नहीं
है और यह सब है तो
जिसमें सर्जरी
के लिये ओपरेशन
थियेटर नहीं है,
इक्युपमेंट नहीं
है उन अस्पतालों
को आप किस प्रकार
से कल्पना करोगे
कि उसमें इतने
इतने पेशेंट आ
जाये और फिर वह
क्राइटेरिया फिलअप
करने के बाद आप
उनको 100 बैड के अस्पतालों
में प्रमोट करो
। अध्यक्ष महोदय, लेकिन आज मुझे
प्रसन्नता है
राजस्थान के चिकित्सा
मंत्री जी को मैं
धन्यवाद देना
चाहता हूं कि उन्होंने
राजस्थान के तमाम
सामुदायिक स्वास्थ्य
केन्द्रों में
अब की बार सर्जरी
के चिकित्सा लागू
करने का प्रयास
किया और प्रयास
ही नहीं किया डाक्टर
वहां रहे और वहां डाक्टर
टिक कर काम करें
इसलिए अध्यक्ष
महोदय, शायद
इस सदन के माननीय
सदस्यों ने इस
बात का अनुमान
नहीं लगाया होगा,
कल्पना नहीं की
होगी डाक्टरों
को गांव में रहने
के लिये, स्टाफ
को गांव में रहने
के लिये प्राथमिक
चिकित्सा केन्द्र
और सामुदायिक चिकित्सा
केन्द्र पर रहने
के लिये जितने
आवासों के निर्माण
की स्वीकृति गत
वित्तीय वर्ष
में जारी हुई है
50 साल के लोकतंत्र
के इतिहास में
जितनी स्वीकृति
हुई उसके बराबर
अकेला एक वित्तीय
वर्ष में हुई है
। यह इतना बड़ा
महत्वपूर्ण योगदान
कि 1947 के बाद 50 साल
के राजस्थान के
इतिहास में जितने
डाक्टर के और
स्टाफ के जितने
आवास बने उतने
आवासों की स्वीकृति
केवल मात्र एक
साल में .....
ans/akt 17.40
3j 16.03.2007
इसलिए माननीय
अध्यक्ष महोदय,
मैं आज आपके माध्यम
से निवेदन करना
चाहता हूं कि केवल
इतना ही नहीं हम
गांव में जाते
हैं, गांव में जाते
हैं हमेशा उप स्वास्थ्य
केन्द्र पर जाएंगे,
उसको उच्चकृत
स्वास्थ्यय
केन्द्र में प्रमोट
करने की बात करते
हैं। हमारे यहां
केवल एक एएनएम
है, डाक्टर नहीं
है, तो कम से कम एक
जीएनएम लगाइये।
मैं आज इस मौके
पर राजस्थानके
चिकित्सा मंत्री,
मुख्यमंत्री
जी को धन्यवाद
देना चाहता हूं
कि आज आपने बजट
के अंदर राजस्थान
के 7502 उप स्वास्थ्य
केन्द्र के अंदर
जीएनएम या एएनएम
की एक अतिरिक्त
पोस्ट सृजित की
है, अगले चरण में
राजस्थान के दस
हजार जो टोटल होते
होंगे मैं समझता
हूं, उम्मीद करूंगा
कि आज इस अवसर पर
चिकित्सा मंत्री
जी कहे कि 7502 जो लगभग
एडपोस्ट सेंटर
के रूप में स्थापित
हो जाएंगे, जहां दो-दो
का नर्सिंग स्टाफ
कायम हो जाएगा।
आने वाले वित्तीय
वर्ष में सारे
राजस्थान के सब
सेंटर एडपोस्ट
सेंटर के रूप में
उच्चकृत स्वास्थ्य
केन्द्र के रूप
में स्थापित हो
जाएंगे, मैं समझता
हूं कि राजस्थान
के अंदर चिंकित्सा
के क्षेत्र
में एक बड़ा कीर्तिमान
स्थापित होगा।
यह सिलसिला लगातार
बढ़ना चाहिये इसके
लिए माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से राजस्थान
के चिकित्सा मंत्री
जी से अनुरोध करना
चाहता हूं। मैंने
कई बार यह बात कही
है कि मेरे यहां
100 बैड का अस्पताल
होना चाहिये, चेचक
में सामुदायिक
स्वास्थ्य
केन्द्र होना
चाहिये लेकिन आज
अगर हम ईमानदारी
से बात करेंगे
तो लोक स्वास्थ्य
के सामने हम केवल
हमारे हमारे कटमोशन
की बात है, कटमोशन
के माध्यम से
सरकार के पास पहुंचती
है। हमें यह ईमानदारी
से विचार करना
पड़ेगा कि हम समुचे
राजस्थान को यहां
पर चर्चा करके,
कोई नीति संगत
तरीके से, युक्तिसंगत
तरीके से, किस प्रकार
से लोक स्वास्थ्य
के सामने आने वाली
गम्भीर चुनौतियों
से निपटने का रास्ता
बना रहे हैं और
इसलिए इस अवसर
पर कहना चाहता
हूं कि लोक स्वास्थ्य
के लिए केवल मौसमी
बीमारी नहीं, केवल
सामान्यतया आने
वाली बीमारियां
नहीं, हमें आज इस
दिशा में विचार
करना पड़ेगा कि
आज जिस प्रकार
से नशे की प्रवृति नौजवान पीढ़ी
में पड़ रही है,
नौजवान पीढ़ी में
जिस प्रकार से
नशे की प्रवृति
बढ़ती जा रही है,
नशे के आदि होते
जा रहे हैं...
श्री अध्यक्ष:
समाप्त करें।
5.26 पर शुरू किया था
और 5.42हो गए हैं।
श्री प्रहलाद
गुंजल (रामगंजमण्डी):
दो मिनिट में समाप्त
करता हूं। आज जो
मैं आपसे निवेदन
करना चाहता हूं
कि जिस प्रकार
नौजवान में नशे
की प्रवृति बढ़ती
जा रही है, घायल
होता जा रहा है
उसके कारण खाली उसके
स्वास्थ्य
पर ही विपरित असर
नहीं पड़ रहा समाज
की व्यवस्था
चरमरा रही है1 उसकी
आदतें खराब हो
रही है। कानून
व्यवस्था के
लिए चुनौती बन
रही है और उसके
लिए मैं समझता
हूं कि राजस्थान
की सरकार ने करीब,माननीय
अध्यक्ष महोदय,
केन्द्र की मदद
से 6-7 नशा मुक्ति
केन्द्र स्थापित
किये गये। मैं
इस अवसर पर यह कहना
चाहता हूं कि हम
नौजवान पीढ़ी को
नशे की लत से बाहर
निकाले। आज भी
हम इन नशामुक्ति
केन्द्रों के
माध्यम से जो
नौजवान
चपेट में आ गया
है उसको दस प्रतिशत
से ज्यादा बाहर
नहीं निकाल पा
रहे। 80-90 प्रतिशत
नौजवान वापिस भागते
हैं और नशे की लत
को पकड़ लेते हैं।
उसको स्थाई रूप
से इस खतरे से बाहर
निकालने के लिए
दीर्घकालीन पूर्नवास
केन्द्रों की
स्थापना राजस्थान
में की जानी चाहिये
और खासतौर से उन
जिलों में जो मध्यप्रदेश
की सीमा से जुडा
हुआ झालावाड़ जिला
है उसका असर आज
कोटा पर आने लगा
है। वहां पर स्मैक
और अफीम की तस्करी
के कारण
चाहे बारां जिला
हो, नौजवानों की
हालत खराब होती
जा रही है।
जिस प्रकार
से नशे की लत के
कारण व्यक्ति
का जीवन खराब हो
जाता है, माननीय
अध्यक्ष महोदय,
कई बार नशे पर चर्चा
करते समय लोग यह
कहते हैं कि अगर
किसी देश से बदला
निकालना है, किसी
देश से कोई दुश्मनी का हिसाब-किताब
चुकाना हो तो फौज
लेकर संघर्ष करने
की आवश्यकता नहीं
है उस देश की नौजवान
पीढ़ी को स्मैक
पीने की लत लगा
दो, उस देश की नौजवान
पीढ़ी को इस प्रकार
का कोई घातक नशा
करने की लत लगा
दो वह देश किसी
भी सूरत में नहीं
उभर सकेगा। आज
इस प्रकार का घातक
नशा जो राजस्थान
की नौजवान पीढ़ी
में बढ़ता जा रहा
है यह चुनौती भरा
सवाल लोक स्वास्थ्य
के सामने खड़ा
है। आज हमको भी
बहुत गम्भीरता
पूर्वक इस विषय
पर विचार करना
पड़ेगा। जब यह
विचार करेंगे तो
कई प्रकार की सामाजिक समस्याओं
का समाधान होगा।
कानून व्यवस्था
की स्थिति सुदृढ़
होगी। स्वास्थ्य
की, लत के कारण जिस
प्रकार की चोरियां,
कई प्रकार की सामाजिक
गतिविधियां जो समाज में
होती है उस पर भी
नियंत्रण होता है और
लोक स्वास्थ्य
में सुधार आयेगा।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं समझता
हूं कि अगर हम इन
सारे विषयों पर
विचार करके चले,
लोक स्वास्थ्य
में, जो मिलावट
है खान पीन की,आज
किस स्तर की मिलावट
हो रही है अध्यक्ष
महोदय मैं आपके
माध्यम से मंत्री
जी से कहना चाहता
हूं, मंत्री महोदय,स्वास्थ्य
निरिक्षक के पद
राजस्थान में
आधे से ज्यादा
खाली पड़े हैं,
उन पदों को भरने
के बारे में आज
सदन में आपको निश्चित
रूप से यह कहना चाहिये
कि हम लोगों को
बेहतर स्वास्थ्य
देना चाहते हैं।
बेहतर स्वास्थ्य
देने के लिए उनको
किसी प्रकार की
खानपान में मिलावटी
चीजें नहीं मिले1
बेहतर खानपान की
चीजें मिले। अगर
कोई मिलावटी चीज
मिलती है तो सरकार
का दायित्व बनता
है इस प्रकार की
मिलावटी चीजों
पर नियंत्रण करें1
उस पर नियंत्रित
करने की ठोस व्यवस्था
करें। मैं समझता
हूं कि इस दिशा
में अगर राजस्थान
सरकार कदम उठाएगी
तो जिस प्रकार
का सकारात्मक
आंदोलन चिकित्सा
मंत्री जी आपके
नेतृत्व में राजस्थान
में चल रहा है चाहे
वह नये स्वास्थ्य
केन्द्र खोले
जाने का मामला
हो, चाहे उप केन्द्र
खोले जाने का मामला
हो, चाहे जीएनएम
की भर्ती का मामला
हो, चाहे सरकारी
आवास बनाने का
मामला हो। मैं
पिछली बार भी एक
निवेदन आपसे कर
चुका था। माननीय
अध्यक्ष महोदय,
दो मिनिट में समाप्त
करूंगा।
पिछली बार भी
मैंने एक निवेदन
इस सदन में किया
था। माननीय चिकित्सा
मंत्री जी हर स्वास्थ्य
केन्द्र पर जरूरी
नहीं कि आप सीमित
संसाधनों के चलते
हुए एनिथिसिया
का डाक्टर लगाओ,
जरूरी नहीं कि
आप उप स्वास्थ्य
केन्द्र, स्वास्थ्य
केन्द्र, सामुदायिक
स्वास्थ्य
केन्द्र के स्तर
पर कोई गाइनिकी
डाक्टर लगा पाओ लेकिन
जो आपका वर्तमान
का स्टाफ बैठा
है, जितने डाक्टर
आपके सामुदायिक
स्वास्थ्य
केन्द्र पर बैठे
हैं , जितने डाक्टर
आपके प्राथमिक
स्वास्थ्य
कन्द्र पर बैठे
हुए हैं आप तय करके
किसी को एनीथिसिया
की ट्रेनिंग दिलाये,
आप तय करके किसी
को रेडियोलोजिस्ट
की ट्रेनिंग दिलाए,
तय करके किसी को
गाइनिकी की ट्रेनिंग
दिलाइये। जब आप
इस प्रकार का वातावरण
का निर्माण करेंगे,
गांव के सामुदायिक
स्वास्थ्य
केन्द्र के डाक्टर
को आप गाइनोलोजिस्ट
की तरह प्रशिक्षित
करेंगे, आप उसको
रेडियोलोजिस्ट
की तरह प्रशिक्षित
करेंगे, आप उसको
एनिथिसिया की तरह
प्रशिक्षित करेंगे
तो उसकी सेवाओं
का लाभ एक तरह से
विशेषज्ञ चिकित्सकों
की तरह गांव के
व्यक्ति को मिलेगा।
भर्तियां कब
होगी, सीमित संसाधनों
में कब सारी पूर्तिया
होगी, कब गांव-गांव
को डाक्टर मिलेगा
लेकिन हम एक सामान्य
स्वास्थ्य
केन्द्र जो पंचायत
समिति में निश्चित
रूप से एक केन्द्र
अनिवार्य रूप से
होता है उस स्तर
पर अगर हम इस प्रकार
की चिकित्सा सुविधाएं
क्रियेट कर दे,
इस प्रकार की स्पेशलिटी
ट्रेनिंग दिलाकर
कायम कर दे तो गांव
के व्यक्ति को
निश्चित रूप से
बेहतर चिकित्सा
मिल पाएगी, इतना
आज आपके माध्यम
से अनुरोध करना
चाहता हूं।
आपसे अनुरोध
करना चाहता हूं,
एक बहुत महत्वपूर्ण
विषय है भ्रूण
हत्या। पिछले
दिनों जिस प्रकार
से वातावरण का
निर्माण हुआ मीडिया
में, ऐसा लगा सारी
मानवता कलंकित
हो रही है...
श्री अध्यक्ष:
यह महत्वपूर्ण
पहले ही कह देते।
आपने समय तो ले
लिया कम से कम 25 मिनिट।
5.26 पर बोलने लगे थे
अब 5.47....
श्री प्रहलाद
गुंजल (रामगंजमण्डी):आपकी
कृपा की जरूरत
है।
श्री अध्यक्ष:
महत्वपूर्ण सबसे
पहले कहना था ना।
श्री प्रहलाद
गुंजल (रामगंजमण्डी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जिस प्रकार
से भ्रूण हत्या
के समाचार राजस्थान
के पत्रों में
छपे, जिस प्रकार
के दृश्य पढ़ने
को मिले ऐसा लगता
है सारी मानवता
शर्मा गई, कलंकित
हो गई। हमारे पास
ठोस कानून है लेकिन
उन ठोस कानूनों
से हम इस प्रवृति
पर नियंत्रण नहीं
कर पा रहे ।
श्री अध्यक्ष:
जिक्र कर दिया
आपने भ्रूण हत्या
का,बस अब समाप्त
करें।
श्री प्रहलाद
गुंजल (रामगंजमण्डी):
21वीं सदी में हम
समाज की इस प्रकार
की मानसिकता को
देखते हैं तो हमें
तकलीफ होती है
कि हम किस दिशा
में जा रहे हैं
इसलिए इसको कानून
के बजाए एक समग्र
आंदोलन
खड़ा किया जाए।
समाज में इस प्रकार
का क्रांतिकारी
परिवर्तन लाने
के लिए सारे सदस्यों
को मिलकर एक आंदोलनात्मक
भूमिका का निर्माण
समाज में करना
पड़े .......
श्री अध्यक्ष:
कृपया समाप्त
कीजिए।
श्री प्रहलाद
गुंजल (रामगंजमण्डी):
इस दिशा में आगे
बढ़े तो निश्चित
रूप से हम राजस्थान
के साथ न्याय
दिला पाएंगे।
श्री अध्यक्ष:
आप सदन के साथ भी
न्याय करो।
श्री प्रहलाद
गुंजल (रामगंजमण्डी):
अध्यक्ष महोदय,
आपने मुझे कृपा
पूर्वक बोलने का
समय दिया मैं अपनी
बात को विराम देने
से पहले
आभार व्यक्त
करता हूं कि कोटा
के मेडीकल कालेज
के लिए माननीय
मुख्यमंत्री
जी ने बजट में प्रावधान
किया है।
श्री अध्यक्ष:
आगे बढ़ते जा रहे
हैं।
श्री प्रहलाद
गुंजल (रामगंजमण्डी): मेरे विधान
सभा क्षेत्र पर
भी कृपा करेंगे।
श्री अध्यक्ष:
अब हो गई कृपा पूरी।
चलिये...
श्री प्रहलाद
गुंजल (रामगंजमण्डी):
आपने अवसर दिया
बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री अध्यक्ष:
श्री चन्द्रशेखर
बैद। स्थान पर
बैठा करो।
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): माननीय
अध्यक्ष महोदय,
मांग संख्या
26 के ऊपर आज जो चर्चा
चल रही है इस पर
मैं सदन का ध्यान
कुछ महत्वपूर्ण
बातों की तरफ आकर्षित
करना चाहता हूं1
आपके माध्यम से
मैं सर्वप्रथम
यह बताना
चाहता हूं कि इस
बार बजट में स्वास्थ्य
सेवाओं के लिए
जो बजट एस्टीमेट
रखा गया है 2007-8 का,
वह रखा है 1237.61 करोड़
रूपये का और यह
स्वास्थ्य
सेवाओं के लिए
जो पिछले साल....
श्री अध्यक्ष:
1200 नहीं 1400,
1400 अरब है।...
दुर्गा/त्रिपाठी
160307 1750 3k
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): मेम,
मैं राजस्थान
की तरफ से जो बजट
रखा गया है, इसमें
सेण्ट्रल स्पोंसर्ड
स्कीम्स को शामिल
नहीं किया गया
है।
श्री अध्यक्ष:
अच्छा, आज तो आपसे
रुपये मांग रहे
हैं 14 अरब, सवाल उसका
है। सेण्टर का
और यहां का नहीं।
यह जो मांग रखी
गयी है 14 अरब, मोर
देन 14 अरब है। उस
पर बोलें आप।
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): पिछले
साल जो इन्होंने
बजट रखा था राजस्थान
की जनता के लिये
वह था 1106.72 करोड़ रुपये।
पिछले साल के मुकाबले
132 करोड़ रुपये का
अधिक प्रावधान
राजस्थान सरकार
की तरफ से अपने
संसाधनों द्वारा
रखा गया। जब यह
अपने संसाधनों
द्वारा रखा गया
तो इसमें देखना
यह जरुरी है कि
इसमें आपने कौनसी-कौनसी
मदों में अधिक
पैसा खर्च करने
का प्रावधान रखा।
जब इसकी तरफ नजर
डालते हैं तो मालूम
पड़ता है कि नॉन
प्लान के अन्दर
105 करोड़ रुपये..।
श्री अध्यक्ष:
यह बजट भाषण की
बात है। कटौती
प्रस्तावों पर
आएं आप।
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): मेम,
मैं थोड़ी भूमिका
तो बाँध दूं।
तो 105 करोड़
रुपये अधिक रखे।
यह 105 करोड़ रुपये
तो सिर्फ आपके
डाक्टरों की,
पैरा मेडिकल स्टाफ
की तनख्वाह के
अन्दर जो बढ़ोतरी
होगी उसी पर खर्च
हो जायेगा। और
सिर्फ जो दूसरे
प्रावधान आपने
रखे हैं, 25 करोड़
रुपयों के, उसमें
बहुत सारी जो नेशनल
स्कीम्स चल रही
हैं, सेण्ट्रल
स्पोंसर्ड स्कीम्स
का पैसा आ रहा है,
नेशनल रुरल हैल्थ
स्कीम का पैसा
आ रहा है उसमें
जो 25 करोड़ रुपये
अधिक आपको मिल
रहे हैं, पिछले
साल की बनिस्पत,
उनको शामिल किया
गया है। मेरे कहने
का तात्पर्य यही
है कि इस बार माननीय
मुख्य मंत्रीजी
ने स्वास्थ्य
के लिये जो बजट
का प्रावधान किया
उसमें राजस्थान
की गरीब जनता के
लिये एक भी पैसा
एक्स्ट्रा नहीं
रखा।
माननीय
अध्यक्षजी, मैं
आपके माध्यम से
यह बताना चाहता
हूं कि दवाइयों
के लिये, आज जो दवाइयां
एक ग्रामीण क्षेत्र
में या अरबन क्षेत्र
में मरीजों को
उपलब्ध कराई जाती
है उस दवाई के लिये
आपने टोटल बजट
रखा है उसमें एक
भी पैसे की आपने
बढ़ोतरी नहीं की।
माननीय चिकित्सा
मंत्रीजी, आप बजट
भाषण माननीय मुख्य
मंत्रीजी का उठाकर
देखें। जबकि वास्तविकता
यह है कि दवाइयों
के दाम में पिछले
साल की बनिस्पत
20 प्रतिशत की बढ़ोतरी
हुई है।
श्री अध्यक्ष:
यस, यस।
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): तो
जब 20 प्रतिशत की
दवाइयों के दाम
में बढ़ोतरी हो
गयी तो कहने का
मतलब यह हो गया
कि इस बार राजस्थान
की जनता को पिछले
साल के मुकाबले
20 प्रतिशत दवाइयां
उपलब्ध कराई जाएंगी।
जब दवाइयों के
बजट की तरफ आप देखते
हैं तो टोटल प्रावधान
आपने रखा है 25 करोड़
रुपये का। इसके
अन्दर राजस्थान
की पापुलेशन जो
आज की तारीख में
आंकी जाती है, 6 करोड़
50 लाख। 6 करोड़ 50 लाख
में प्रति व्यक्ति,
प्रति साल सिर्फ
3 रुपये 84 पैसे दवाइयों
के ऊपर खर्च किये
जाएंगे। उसमें
भी विसंगति है
कि आप रुरल और अरबन
के अन्दर डिवाइड
करके देखें तो
बहुत ही भयावह
फिगर आता है। वह
इस ग्रामीण जनता
के लिये जो कि 4 करोड़
30 लाख है राजस्थान
के अन्दर, सिर्फ
93 पैसे प्रति व्यक्ति,
प्रति साल दवाइयों
के लिये रखे गये
हैं। जो कि सर्वथा
अनुचित है। आशा
यह की जा रही थी
कि इस बार दवाइयों
के लिये और दूसरे
चिकित्सा संसाधनों
के लिये ग्रामीण
जनता के लिये ज्यादा
प्रावधान किया
जाएगा। लेकिन उसमें
बढ़ोतरी नहीं करना
यह इस चीज को दर्शाता
है कि आप अपने संसाधनों
से ग्रामीण लोगों
को लाभान्वित नहीं
करना चाहते हैं।
सिर्फ सेण्ट्रल
स्पोंसर्ड स्कीम्स
हैं या जो वर्ल्ड
बैंक के अनुदान
से स्कीम्स चल
रही हैं, उसके माध्यम
से ही आप लोगों
को लाभान्वित करना
चाहते हैं।
एक बहुत
अच्छा प्रोग्राम
शुरू किया था।
3 साल हो गये उसकी
रट लगाते हुए कि
राजस्थान के जितने
भी बच्चे हैं,
अब आप खुद ही मानते
हो कि मिड-डे मील
के अन्दर आप एक
करोड़ 2 लाख बच्चों
को मध्याह्न भोजन
करवाते हैं। यह
बच्चे जो सर्व-शिक्षा
अभियान के अन्तर्गत
कवर होते हैं, इनकी
संख्या एक करोड़ 2 लाख है।
और यह है पहली क्लास
से लेकर पांचवीं
क्लास तक के।
अगर आप पहली क्लास
से बारहवीं क्लास
तक के, जैसे कि मुख्य
मंत्रीजी ने घोषणा
की कि राजस्थान
के स्कूल के सारे
बच्चों का स्वास्थ्य
परीखण किया जाएगा,
सारे बच्चों को
हैल्थ कार्ड इश्यू
किया जायेगा और
सारे बच्चों के
अन्दर अगर कोई
बीमारी आती है
तो उनका इलाज किया
जायेगा। आज तीन
साल हो गये लेकिन
आज तक स्कूल के
अन्दर बच्चों
का स्वास्थ्य
कार्ड नहीं बना।
और चुनिन्दा स्कूलों
को छोड़कर अधिकांश
स्कूलों में सिर्फ
अध्यापकों ने
बच्चों का स्वास्थ्य
परीक्षण किया है
जो कि अनुचित है।
क्योंकि स्वास्थ्य
परीक्षण होना चाहिए
डाक्टरों के द्वारा।
डाक्टरों के द्वारा
स्वास्थ्य
परीक्षण नहीं किया
गया। और यह स्थिति
इसलिये और ज्यादा
इम्पोर्टेण्ट
हो जाती है कि आज
राजस्थान के अन्दर
जो एस.एस.ए. का सर्वे हुआ
उसके अन्दर 46 प्रतिशत
बच्चे कुपोषित
पाये गये। उनका
वेट साधारण वेट
से कम था। उनके
अन्दर खूून की
मात्रा एक साधारण
हैल्दी बच्चे
में जितनी होती
है उस से कम थी।
इसकी जो ग्रोथ
थी, वह कम थी। तो
बच्चों के प्रति
तो और ज्यादा
संवेदनशील होना
था। और एक जो कार्यक्रम
अच्छा आपने शुरू
किया था उसको अंजाम
तक पहुंचाते तो
राजस्थान के ढाई
करोड़ बच्चों
को लाभान्वित किया
जा सकता था, जो कि
नहीं किया गया।
यह उनकी सोच अच्छी
हो सकती है लेकिन
प्रशासनिक शिथिलता
और आपकी दृढ़ इच्छा
शक्ति की कमी के
कारण इस कार्यक्रम
को अंजाम तक नहीं
पहुंचाया जा सका।
माननीय अध्यक्षजी,
मैं आपके माध्यम
से यह बताना चाहता
हूं कि एक ग्रामीण
इलाके के अन्दर
जो एक्रेडिटेट
सोशल हैल्थ एक्टिविस्ट
की पोस्ट, एन.आर.एच.एम.
के अन्दर राज्य
सरकार को दी गयी
उसके अन्दर भी
एक तरफ आपको केन्द्र
सरकार से इन सुविधाओं
के लिये शत-प्रतिशत
पैसा उपलब्ध करवाया
जा रहा है, इसके
बावजूद आप अगर
अपने निर्धारित
लक्ष्यों को,
अपने जो टार्गेट
अचीव्ड हैं, उनसे
कम्पेयर करें
तो मालूम पड़ता
है कि जो मिशन 2005 में
शुरू किया गया
और जिस मिशन को
2012 तक कम्पलीट होना
है, 2007 तक आपको इन
आशा सहयोगिनियों
में 37492 आशा सहयोगिनियों
को भर्ती करना
था और आपने भर्ती
कितनों को किया,
33202 को। मतलब इसमें
भी आपने 5 हजार कम
आशा सहयोगिनियों
को भर्ती किया
जबकि इसका सारा
पैसा केन्द्र
सरकार से राज्य
सरकार को उपलब्ध
कराया जाता है।
इसमें एक जो महत्वपूर्ण
चीज उभरकर सामने
आयी है कि बच्चों
को और ग्रामीण
इलाके को कौनसा
विधायक अपने क्षेत्र
को डवलप नहीं करना
चाहता। मैं भी
करना चाहता हूं,
मंत्री महोदय भी
करना चाहते हैं,
मुख्य मंत्री
भी करना चाहती
हैं। लेकिन आप
इस पूरे राजस्थान
का आंकड़ा अगर
उठाकर देखें तो
झालावाड़ के अन्दर
जहां कि इनको भर्ती
करनी थी 940, आपने भर्ती
1113 की की। पूरे राजस्थान
के अन्दर जितनी
भर्ती की जानी
थी उनमें से आपने
5 हजार कम आशा सहयोगिनियों
को भर्ती दी। यह
इस चीज को दर्शाता
है कि मुख्य मंत्रीजी
का हलका है तो आपने
उसमें ज्यादा
की। लेकिन वह मुख्य
मंत्री सिर्फ झालावाड़
की नहीं हैं, पूरे
राजस्थान की हैं।
तो राजस्थान के
अन्दर चूरु भी
आता है, भरतपुर
भी आता है। सब जगह
जो निर्धारित लक्ष्य
हैं उनकी पूर्ति
की जानी चाहिए
थी। एक माननीय
मुख्य मंत्री
महोदय ने अपने
बजट भाषण, 2006 के अन्दर
यह घोषणा की कि
पंचामृत, मुख्य
मंत्री पंचामृत
योजना की शुरूआत
करती हैं। बड़ी
अच्छी योजना है।
योजना क्या थी
कि गांवों में
जाकर ग्रामीण लोगों
को, ग्रामीण बच्चों
को पोषण के हिसाब
से पाँच प्रमुख
सुविधाएं उपलब्ध
करवाई जाएंगी और
उन्होंने कहा
था, अपने पैरा नम्बर
46 में, इसके माध्यम
से दूरस्थ गांवों
तक स्वास्थ्य
एवं पोषण की 5 प्रमुख
सुविधाएं उपलब्ध
हो सकेंगी। और
इन 5 प्रमुख सुविधाओं
के अन्दर यह जानकर
बड़ा दु:ख हुआ कि
इस पंचामृत योजना
की शुरूआत की गयी
जनवरी, 2005-06 के अन्दर।
तीन महीने तक इस
अभियान को चलाया
गया। इसके लिये
पूरे राजस्थान
के बजट के अन्दर
से एक पैसे का भी
प्रावधान नहीं
रखा गया। यह आया
है, आपने लिखकर
दिया है कि इसके
लिये एक भी पैसे
का प्रावधान नहीं
रखा गया। दूसरा,
इसमें खर्चा कितना
किया, 32 जिलों के
अन्दर जिस अभियान
को आपने चलाया
उसमें सिर्फ 17 हजार
रुपये खर्च किये।
और वह भी किस लिये
कि वह यह कागज छापने
के लिये, जिसमें
कि वहां का चिकित्सक
अपनी रिपोर्ट लिखकर
दे सके।
Vps-akt-16-03-2007-
18.00-3l-1
डा. चन्द्रशेखर बैद (तारानगर): तो यह तो मैं स्थिति तब बताना चाहता हूं कि आप सिर्फ घोषणा करते हैं। आप सिर्फ यहां पर माननीय मुख्य मंत्री की तारीफ कर करके उनको पोदीने के झाड़ पर चढ़ाते हो और उस योजना का अन्जाम क्या होता है यह भी आपने कभी देखा कि आपके क्या-क्या योजनाएं शुरू की थीं और किसको कहां तक पहुंचाया?
ऐसे ही माननीय मुख्य मंत्रीजी ने एक पन्ना धाय जीवन बीमा योजना की शुरूआत की और यह योजना यह सोचकर शुरू की गयी कि इंश्योरेंस कम्पनी के माध्यम से, यह लाइफ इंश्योरेंस कारपोरेशन आफ इंडिया के माध्यम से ग्रामीण हल्के के अन्दर जो बी.पी.एल. परिवार हैं, उन परिवार का कोई सदस्य अगर बीमार हो जाता है या किसी परिवार के सदस्य की आकस्मिक मृत्यु हो जाती है तो उसे सरकार की तरफ से बीमा कम्पनी के माध्यम से मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा और इसका हश्र क्या हुआ? इसका हश्र यह हुआ कि यह बिलकुल ताजा जो मेरे प्रश्न के जवाब में आया है कि आज भी, यह योजना शुरू की गयी थी 15 अगस्त, 2006 को और उसके बाद में आपके 1441 प्रकरण अभी भी लम्बित पड़े हैं। लोगों की मृत्यु हो गयी। आकस्मिक मृत्यु हो गयी, राजस्थान के 32 जिलों के अन्दर और आपने आज तक उनको मुआवजा उपलब्ध नहीं कराया। यह सोच सकते हो कि एक ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जिनको उपलब्ध कराया, उनका भी बता दीजिए।
डा. चन्द्रशेखर बैद (तारानगर): उनकी संख्या है 123, 123 ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): गलत।
डा. चन्द्रशेखर बैद (तारानगर): यह आपके ही द्वारा दिया गया जवाब है। साहब, आप खुद के जवाब को ही गलत कह रहे हो? खैर, मैं इस विवाद में नहीं पड़ना चाहता। क्योंकि यह कागज मेरे पास मौजूद है। आप चाहोगे तो मैं टेबल कर दूंगा। आप अपने बगल मैं बैठे मंत्रीजी से पूछ लीजिए। ... (व्यवधान)
यह है पन्ना धाय जीवन बीमा योजना और दूसरा, मैं आपके माध्यम से यह बताना चाहता हूं कि जब आपने अखबारों में एडवरटाइजमैंट दिया, जब आपने पूरे प्रदेश के अन्दर यह प्रचार किया कि आकस्मिक मृत्यु पर जो मृत्यु पर डिपेंडेंट होगा, उसको 50 हजार रुपये एकमुश्त उपलब्ध कराये जाएंगे और यह जो सूची मुझे मिली है उसके अन्दर आपने सिर्फ 30 हजार रुपये प्रति व्यक्ति उपलब्ध कराये हैं। कहां गये 20 हजार रुपये? प्रचार तो आपने 50 हजार का किया था। फिर 30 हजार रुपये आपने कैसे उपलब्ध कराये?
मैं आपके माध्यम से एक यह निवेदन करना चाहता हूं कि एक तरफ जहां सारी सरकार लगातार बारबार अलग-अलग मंचों से यह प्रचार-प्रसार करती है कि आई.एम.आर. कम करेंगे, एम.एम.आर. कम करेंगे। कैसे कम करेंगे आप? आपने कहा था कि हम आने वाले सालों के अन्दर प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों पर, सामुदायिक चिकित्सा केन्द्रों के ऊपर हम यह सेवाएं, प्रसूति की सेवाएं 24 घंटे उपलब्ध कराएंगे और तीन साल से लगातार बारबार राज्यपाल के अभिभाषण में और अपने मुख्य मंत्री की बजट की स्पीच में आप हमेशा से यह कहते हो कि चिह्नित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को हम यह उपलब्ध कराएंगे। आज तक आप इतने विधायक यहां पर बैठे हैं। कोई भी यह बता दें कि उसके विधान सभा क्षेत्र में 24 घंटे डिलीवरी की सर्विसेज उपलब्ध है तो आप जो चाहे वह मैं करने को तैयार हूं। एक भी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर 24 घंटे इमरजेंसी टेकल करने के लिए और डिलीवरी सर्विसेज आपने उपलब्ध नहीं करायी जबकि आप ... (व्यवधान) आपका समय आये तो बोल देना। मेरे को बीच में क्यों इंटरप्ट करते हो? ... (व्यवधान)
डा. दिगम्बर सिंह (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री): यह एम.एम.आर. ... (व्यवधान) माननीय अध्यक्ष महोदय, यह एम.एम.आर. इतना ड्रास्टिकली रिड्यूज हुआ है। आई.एम.आर. रिड्यूज हुआ है तो यह वैसे ही हो गया। ... (व्यवधान)
डा. चन्द्रशेखर बैद (तारानगर): आप विराजिये। उसके बाद बताता हूं मैं।
श्री अध्यक्ष: आपको समय मिलेगा न, आप बैठिये। ... (व्यवधान)
डा. चन्द्रशेखर बैद (तारानगर): एम.एम.आर. और आई.एम.आर. जो रिपोर्ट हुआ है, जो अभी रिपोर्ट आयी है नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे के अन्दर, वह पुरानी रिपोर्ट के मुकाबले में आयी है उसमें आधा समय हमारा था, आधा समय आपका था, उसके लिए छाती ठोकने की जरूरत नहीं है। उस पर दोनों का कंटीब्यूशन है। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप ठोक लो छाती, क्या दिक्कत है। अब मैंने कहा आप ठोक लो छोती। छाती ठोकने में क्या दिक्कत है?
डा. चन्द्रशेखर बैद (तारानगर): बी.पी.एल. के लिए मैं आपके माध्यम से यह निवेदन करना चाहूंगा कि पिछले कई सालों से ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: तो ठोक लो, क्या बात है? ... (व्यवधान)
डा. चन्द्रशेखर बैद (तारानगर): पिछले कई सालों से सवाई मानसिंह चिकित्सालय में और मेडिकल कॉलेज से जुड़े हुए अन्य चिकित्सालयों के अन्दर एक सुविधा इन्होंने उपलब्ध करायी थी कि जो गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोग इलाज कराने आएंगे और उन्हें दवाइयां उपलब्ध नहीं होंगी तो दवाइयां लोकल परचेज करके उनको उपलब्ध करायी जाएंगी। पिछले डेढ़ साल से इस सुविधा को बिलकुल बंद कर दिया गया है जो कि बिलकुल गलत है क्योंकि आज आप यह देखें कि कितने वी.आई.पीज. के ट्रीटमैंट में कितना पैसा खर्च होता है और एक गरीब आदमी जो गरीबी की रेखा के नीचे रहने वाला है उसके इलाज में आप कितना पैसा खर्च करते हो? यह सूची है मेरे पास, जिसमें लाखों रुपये जो अपने सारे के सारे मिनिस्टर्स हैं, विधायक हैं, आई.ए.एस. आफिसर्स हैं, आई.पी.एस. आफिसर्स हैं, उनको उच्च स्वास्थ्य केन्द्रों में रेफर करने में खर्च किये जाते हैं लेकिन एक एग्जाम्प्ल है ऐसा जहां बी.पी.एल. के मरीज को ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट में रेफर किया गया, वह भी मैंने जिद करके करवाया और उसका पैसा अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया। मेरा आपसे निवेदन यह है कि आप चाहे दूसरे लोगों की सेवाओं में कितना भी पैसा खर्च करें लेकिन ध्यान उस गरीबी की रेखा के नीचे रहने वाले ग्रामीण आदमी की तरफ भी देना निहायत जरूरी है।
आपने यह कहा था कि साहब, हम गरीबों के लिए अलग-अलग प्राइमरी हैल्थ सेंटर पर कम्युनिटी हैल्थ सेंटर पर, डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल्स पर लाइफ लाइन स्टोर खोलेंगे जिसमें कि कम दामों के अन्दर दवाइयां उनको उपलब्ध करायी जाएंगी। मैं आपके माध्यम से यह जानना चाहता हूं कि आज तक आपने कितने ऐसे प्राइमरी हैल्थ सेंटर्स हैं, जहां फ्लूड स्टोर की स्थापना करके उसकी शुरूआत की है।
एम्बुलेंसेज के बारे में माननीय मुख्य मंत्रीजी ने घोषणा की। बहुत प्रशंसनीय काम है। आपने घोषणा की लेकिन आज भी आपके खुद के मापदंडों के आधार पर 168 चिकित्सा केन्द्र ऐसे हैं जहां कि एम्बुलेंसेज होनी चाहिए और एम्बुलेंसेज उपलब्ध नहीं हैं और हर समय यह कहा जाता है राजस्थान पूरे देश का सबसे बड़ा प्रदेश है। यहां दूरियां बहुत अधिक है, इतनी अधिक दूरियां होने के बावजूद यदि एम्बुलेंसेज उपलब्ध नहीं हैं तो एक गांव में रहने वाला आदमी तो कहां जाएगा? मैं आपके माध्यम से यह भी अनुरोध करना चाहता हूं कि कई विधायक हैं जो अपने प्राइमरी हैल्थ सेंटर पर एम्बुलेंसेज उपलब्ध कराना चाहते हैं। सरकार को उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर यह कहना चाहिए कि यदि कोई विधायक अपने प्राइमरी हैल्थ सेंटर पर एम्बुलेंस देना चाहता है तो 50 परसेंट पैसा हम देंगे, 50 परसेंट पैसा विधायक कोष से उपलब्ध होगा, इस प्रकार ज्यादा से ज्यादा प्राइमरी हैल्थ सेंटर्स पर इम्बुलेंस की सुविधाएं उपलब्ध हो पाएंगी। ... (व्यवधान)
श्री जोगेश्वर गर्ग (जालौर): मैंने इस वर्ष दो एम्बुलेंस उपलब्ध करवायी है। ... (व्यवधान)
डा. चन्द्रशेखर बैद (तारानगर): मैं तो जनरल बात कर रहा हूं। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: बहुत अच्छी बात है। ... (व्यवधान)
श्री जोगेश्वर गर्ग (जालौर): मैंने अपने विधायक कोष से दिलवायी है, आप भी यह कर सकते हैं। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: बहुत अच्छी बात है।
डा. चन्द्रशेखर बैद (तारानगर): आज माननीय चिकित्सा मंत्रीजी, आज 1200 डाक्टरों की पोस्टें खाली पड़ी हैं। आप कैसे उनको ग्रामीण इलाके में चिकित्सा उपलब्ध कराएंगे जिसमें से 64 परसेंट, 64 परसेंट गायनोकॉलोजिस्ट की पोस्ट है। आज हर जगह यह शिकायत है, हर विधायक यह कहता है कि हमारे हल्के के अन्दर गायनोकॉलोजिस्ट को भेजो। चाहे वह पुरुष हो, चाहे महिला हो लेकिन इनकी ज्यादा से ज्यादा भर्ती करके इनको कम से कम सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और चुनिंदा, आपने ही अपने घोषणा-पत्र में यह कहा है, माननीय मुख्य मंत्री ने अपने भाषण में यह कहा है कि हर पंचायत समिति के अन्दर एक आइडियल प्राइमरी हैल्थ सेंटर की स्थापना की जाएगी तो ऐसे आइडियल प्राइमरी हैल्थ सेंटर के अन्दर तो आपको एम्बुलेंसेज उपलब्ध करवानी चाहिए।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से यह बताना चाहता हूं कि एक नेशनल रूरल हैल्थ स्कीम के अन्तर्गत जो योजना शुरू की गयी थी, जननी सुरक्षा योजना, इसकी जो शर्मनाक हालत दो साल के अन्दर हुई है और जिसके अन्दर जितना पैसा आपने खर्च किया है और जब आपका ध्यान इस ओर आकृष्ट किया गया, केन्द्र सरकार द्वारा जननियों को मिलने वाले पैसे के अन्दर बढ़ोतरी की गयी तब जाकर यह योजना आगे चलनी शुरू हुई है नहीं तो आपका तो हश्र यह था कि आपने कितने करोड़ रुपये, आपने 3 करोड़ 32 लाख रुपये में से शुरू के दो साल में सिर्फ 3.5 लाख रुपये खर्च किये थे। ... (व्यवधान)
डा. दिगम्बर सिंह (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं बीच में टोकना नहीं चाहता। इस वित्त वर्ष में 5 करोड़ का प्रावधान रखा था, 50 करोड़ रुपया इसमें पेमेंट हो गया, इस वर्ष के अन्दर। 5 के अगेंस्ट में 50 करोड़। ... (व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): बीच में खड़े हो जाते हो, रिप्लाई क्या दोगे? ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: रिप्लाई देने को बहुत है। बहुत कुछ है। बहुत इश्यूज उठाये हैं। उन पर सब पर देना है जवाब तो, बहुत उठाये हैं। ... (व्यवधान)
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): एक,
आपका जो बेसिक
सेंटर है वह प्राइमरी
हैल्थ सेंटर है
और उस प्राइमरी
हैल्थ सेंटर के
अन्दर यह आपके
माननीय विधायक
द्वारा ही पूछा
गया प्रश्न है।
spp/usc/18.10/3m/16.3.2007(1)
प्रश्न
पूछा गया है उसके
उत्तर में यह
आया है कि 142 प्राइमरी
हैल्थ सेंटर ऐसे
हैं जिनके अंदर
कोई चिकित्सक
आज तक उपलब्ध
नहीं है तो आपने
प्राइमरी हैल्थ
सेंटर्स को खोल
क्यों रखा है
? हर बार माननीय
मुख्य मंत्रीजी
से यह घोषणा क्यों
कराते हो कि यह
इतने प्राइमरी
हैल्थ सेंटर खोलेंगे,
इतने कम्युनिटी
हैल्थ सेंटर खोलेंगे।
क्या करेंगे इनको
खोलकर ? (व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष:
आप जैसे लोग डॉक्टर
यहां आ-आकर विधायक
बन गये। मजबूरी
है कि डॉक्टर्स
यहां आ-आकर विधायक
बन गये। ...(व्यवधान)...
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
अध्यक्ष महोदय,
यह बात सही है।
...(व्यवधान)...
एक माननीय
सदस्य : यह तो विधायक
हैं । ...(व्यवधान)...
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
डॉक्टर विधायक
ही नहीं, डॉक्टर
हैल्थ मिनिस्टर
भी बन गये। इसलिए
भी समस्या पैदा
हुई है। ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
यह विधायक थे,जब
ही तो मंत्री बने।
...(व्यवधान)...
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
बिना विधायक के
भी बन सकते हैं
छह महीने तक।
श्री राकेश
मेघवाल (परबतसर):
इसलिए तो पद रिक्त
हो गये। ...(व्यवधान)...
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): अध्यक्षजी,
मैं आपके माध्यम
से यह विनम्र अनुरोध
करना चाहता हूं
कि एक बार पिछले
विधान सभा सत्र
के अंदर माननीय
चिकित्सा मंत्रीजी
ने यह एडमिट किया
था एक प्रश्न
के जवाब में, कि
सवाई मानसिंह चिकित्सालय
में कितने उपकरण
खराब पड़े हैं
और उनको कब तक ठीक
करा लिया जायेगा
और आज स्थिति यह
है कि साल भर व्यतीत
हो गया लेकिन अभी
भी आपने उनमें
से अधिकांश उपकरणों
को ठीक नहीं कराया
है। आपने 42 उपकरणों
की सूची दी थी जिसमें
से 35 उपकरण खराब
पड़े थे। अब इसका
अंदाज इससे लग
सकता है कि जो प्रीमियर
इंस्टीट्यूशन
है सवाई मानसिंह
हास्पिटल, जिसको
कई बार यह कोशिश
की जा चुकी है कि
इसको ऑल इण्डिया
मेडिकल साइंस में
कन्वर्ट किया
जाये। वहां पर
उपकरणों की यह
हालत है तो फिर
तो कैसे काम चलेगा
और फिर तो बाकी
इलाके में क्या
होगा, यह तो भगवान
ही मालिक है।
आपने यह
घोषणा की थी कि
टेली-मेडिसिन के
माध्यम से कम्युनिटी
हैल्थ सेंटर को
जोड़ा जायेगा क्योंकि
टेली-मेडिसिन का
सबसे ज्यादा लाभ
कम्युनिटी हैल्थ
सेंटर पर हो सकता
है लेकिन आज तक
आपने एक भी सामुदायिक
स्वास्थ्य
केन्द्र को टेली-मेडिसिन
के माध्यम से
नहीं जोड़ा है।
आपने यह घोषणा
की थी पिछली बार
कि संजीवनी योजना
की शुरूआत करेंगे
जिससे सीनियर्स
डॉक्टर्स को जो
डिस्ट्रिक्ट्स
पर उपलब्ध हैं
उनको प्राइमरी
हैल्थ सेंटर पर
ले जाकर जो लोग
प्राइमरी हैल्थ
सेंटर से डिस्ट्रिक्ट
हास्पिटल पर जाने
में असमर्थ हैं,
उनको समुचित चिकित्सा
सुविधाएं उपलब्ध
कराई जायेंगी।
लेकिन आप तो यह
गिना दो कि आपने
कितने प्राइमरी
हैल्थ सेंटर पर
सीनियर्स डॉक्टर्स
को ले-जाकर इस तरह
की संजीवनी योजना
की शुरूआत की है।
यह भी माननीय मुख्य
मंत्रीजी ने घोषणा
की थी।
पापुलेशन
ग्रोथ के बारे
में छोटा-सा निवेदन
करना चाहूंगा आज
यह चीज हर जगह उजागर
होती है कि जब तक
पापुलेशन को कंट्रोल
नहीं किया जायेगा,
तब तक आप कितनी
ही सुविधाएं जुटा
लें, वह ग्रोथ रहेगी।
अब 1991 से लेकर 2001 के
सेन्सस तक पापुलेशन
ग्रोथ थी 28 प्रतिशत,
2001 का सेन्सस हुआ
राजस्थान की पापुलेशन
थी 5 करोड़ 65 लाख और
आज की तारीख में
2007 में राजस्थान
की पापुलेशन है
6 करोड़ 50 लाख और
2010 तक यह पापुलेशन
जो होगी, उसके अदंर
ग्रोथ आज की तारीख
में जो आंकी गयी
है, वह 26 प्रतिशत
है और सरकार की
तरफ से बार-बार
कहने के बावजूद
कि हम जन मंगल योजना
को सुदृढ़ करेंगे
लेकिन मंशा वह
नहीं है। मंशा
इसलिए नहीं है
कि ऊपर से सुदर्शन
जी का निर्देश
आता है कि पापुलेशन
बढ़ाओ, हिन्दू
कम हो रहे हैं, मुसलमान
बढ़ रहे हैं। आपने
कभी इस ओर ध्यान
नहीं दिया कि पापुलेशन
को कंट्रोल किया
जाये।
2004 से पहले
बजट भाषण में माननीय
मुख्य मंत्रीजी
ने कहा था कि राजस्थान
के अंदर स्वस्थ
बच्चे पैदा हों
और स्वस्थ जननियों
को रखा जाये। इसके
लिये दस हजार दाइयों
को जो पारम्परिक
रूप से काम करती
हैं, उनकी ट्रेनिंग
कराई जायेगी। आज
तीन साल व्यतीत
हो गये, लेकिन आपने
सिर्फ पौने तीन
हजार दाइयों की
ट्रेनिंग करवाई
है। यह घोषणा 2004 में
की, 2005 में की और कल
जो आपने प्रतिवेदन
दिया है, उसके अंदर
यह लिखा है कि सिर्फ
तीन हजार दाइयों
की ट्रेनिंग आपने
आज दिन तक कराई
है।
डा. दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री): आपके पास
सूचना गलत है।
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): आपने
किताब में गलत
लिखा है तो मैं
क्या करूं, आपने
जो किताब उपलब्ध
कराई है, उसी से
तो सूचना लेंगे
और किससे लेंगे
? आपने यह भी घोषणा
की थी कि राज्य
सरकार हर प्राथमिक
स्वास्थ्य
केन्द्र पर और
उप स्वास्थ्य
केन्द्र पर धन
उपलब्ध करवाने
में असमर्थ है
इसलिए प्राइवेट
पार्टनरशिप में
करके इनका उद्धार
किया जायेगा और
नई निवेश प्रोत्साहन
नीति बनाई जायेगी
तो घोषणा तो आपने
2004 में कर दी, नीति
तो आज तक बनाई नहीं
और वह जो सब सेंटर
और प्राइमरी हैल्थ
सेंटर जहां थे,
वहीं पड़े हैं।
2006-07 में माननीय
मुख्य मंत्रीजी
ने कहा था कि राजस्थान
में अंधे लोगों
की संख्या 9 लाख
है और हम एक जीरो
केटरेक ऑपरेशन
शुरू करेंगे जिसका
सुझाव मैंने ही
दिया और उसके अन्तर्गत
हम ऐसा प्रयास
करेंगे कि राजस्थान
के अंदर इनकी संख्या
.34 प्रतिशत हो जाये
जिससे कि वह जीरो
प्रतिशत हो जाये,
लेकिन एक साल
( समय
समाप्ति सूचक घण्टी
)
के अंदर आपने
साढ़े चार लाख
की जगह आपने लक्ष्य
निर्धारित किया
ढाई लाख और ढाई
लाख में से भी आपने
कितने अंधों का
उपचार किया सिर्फ
एक लाख साठ हजार।
इस तरह से ऑपरेशन
जीरो केटरेक का
लक्ष्य 2008 तक आप
कैसे हासिल कर
पायेंगे? यह भी
आप बताने की कृपा
करें जब आप अपना
उत्तर दें।
डॉक्टर्स
के लिये आपने घोषणा
की थी कि 558 डॉक्टर्स
भर्ती करेंगे और
इस बार 100 डॉक्टर्स
बोला है पिछले
साल कि 100 डॉक्टरों
की भर्ती करेंगे।
आप घोषणा कर चुके
हैं 458 डॉक्टरों
को भर्ती करने
की,जबकि भर्ती
हुई है सिर्फ 373 डॉक्टर्स,
तो जो लक्ष्य
आप निर्धारित करते
हो, उसको कभी पूरा
नहीं कर पाते।
यह बात मानने में
दिक्कत कहां है?
आपके खुद के ही
आंकड़े बता रहे
हैं कि आप सिर्फ
घोषणा करते हो,
उसको पूरा नहीं
करते। अगर इस तरह
से आप करते रहे
माननीय मुख्य
मंत्री के अधीनस्थ
में काम तो इनको
पाँच साल पूरे
होते होते नया
लेबल लग जायेगा
कि यह घोषणा मुख्य
मंत्री है, यह सिर्फ
घोषणाएं करती हैं,
इनको पूरा कभी
नहीं करती।
माननीय
अध्यक्ष जी, मैं
आपके माध्यम से
यह बताना चाहता
हूं कि पिछले कुछ
दिनों में कई लोगों
ने कई प्रकार से
मीडिया के माध्यम
से कई चीजें उजागर
हुईं औरउन चीजों
के अंदर जो एक बहुत
ही हास्यास्पद
चीज उजागर हुई
उसके अंदर माननीय
मुख्य मंत्रीजी
ने किसी मंत्री
का कान पकड़ रखा
है और मंत्रीजी
यह कह रहे हैं - ''मैया
मेरी, मैं नहीं
माखन खायो, तो माखन
कुण खायो, फिर माखन
कुण खायो'' इसका
जवाब आज या तो सरकार
को अपनी स्थिति
स्पष्ट करनी
चाहिये थी, उसका
खण्डन करना चाहिये
था, न तो आपने स्थिति
स्पष्ट की, न
उसका खण्डन किया
तो आम जनता जो यह
जानने को उत्सुक
है कि माननीय चिकित्सा
मंत्रीजी, नीचे
सारे अधिकारी,
फार्मास्युटिकल
कम्पनी के लोग
इन्तजार कर रहे
और आप कमरे के अंदर
किस आदमी से क्या
गुफ़्तगू कर रहे
हैं । यह तो मैं
कहता हूं कि भला
हो उस फार्मास्युटिकल
के मालिक का, जिसने
अपने पत्र के अंदर
ईमानदारी से सत्य
को उजागर करते
हुए यह कहा है कि
फलाना आदमी जो
पहले 15 प्रतिशत
मांग रहा था, उसका
15 प्रतिशत हमारा
शेयर उसके अंदर
नहीं रहा तो अब
आपको जो पैसा है
5 प्रतिशत, यह आपको
वहन करना पड़ेगा
तो इन सब चीजों
का जवाब सरकार
को देना चाहिये
था क्योंकि इससे
आम जनता की नजर,
मैं किसी पर कोई
आरोप नहीं लगा
रहा , लेकिन आम जनता
की नजर इस बात पर
उठती है कि इसका
क्या स्पष्टीकरण
हे। एक तरफ जिस
फार्मास्युटिकल
कम्पनी को आप
यह कहते हो कि यह
फर्जी कम्पनी
है, फर्जी दवाइयां
बनाती हैं । सरकार
केस लड़ती है, सरकार
का अधिकारी उसकी
पैरवी करता है
और वही अधिकारी
उस फार्मास्युटिकल
कम्पनी के सारे
जो प्रमाण पत्र
वह देता है, उसको
स्वीकार कर लेता
है और जो उस कम्पनी
की क्षमता ही नहीं
है दवाई बनाने
की, वह दवा बनाकर
राजस्थान सरकार
को तिगुने दाम
के अंदर सप्लाई
कर दी जाती है, यह
कहां तक उचित है।
एक तरफ तो बजट में
प्रावधान बढ़ाओ
मत और दूसरी तरफ
जो लोगों को, आम
आदमी को दवाइयां
उपलब्ध होने वाली
हैं, उसके अंदर
इस तरह का उन्होंने
यह भी आरोप लगाया
कि कोटा से आने
वाले तीन ही है
भारतीय जनता पार्टी
के विधायक, वह कहते
हैं दोनों सचेतक
जी हैं। अब जनता
तो यह जानने को
उत्सुक है कि
कौनसे सचेतक जी
के कहने से आपने
इस कम्पनी को
क्या काण्ट्रेक्ट
दिया ?
श्री अध्यक्ष:
सचेतक कहां हैं
वह ?
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): संसदीय
सचिव हैं।
श्री अध्यक्ष:
सचेतक कहां है,
हां, तो संसदीय
सचिव बोलो।
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): मैं
आपसे सादर अनुरोध
करूंगा इस तरह
से जो दवाइयां
करोड़ों रुपये
का घोटाला अख़बार
में उजागर हुआ,
उसकी तरफ सरकार
या तो कोई स्पष्टीकरण
दे या उसका खण्डन
करे या जो पत्र
उसके अंदर जारी
किये गये, उन पत्रों
का खण्डन करके
जनता के सामने
यह स्पष्ट करे
कि उनकी गाढ़ी
मेहनत की कमाई
इस तरह के कुछ चुनिन्दा
लोगों की पॉकेट
में नहीं जा रही
है।
राजस्थान
एड्स कंट्रोल सोसायटी,
अब आपको मालूम
है आज तो आज अंदाज
लगा रहे हो कि एड्स
के कितने मरीज
होंगे।
Msr/usc/1820/3n/16032007
पूरे हिन्दुस्तान के अन्दर 52 लाख एच.आई.वी. पोजीटिव हैं उसमें राजस्थान के अन्दर जो आंकलन लगाया गया है, डेढ़ लाख एच.आई.वी. पोजीटिव हैं और 2000 मरीजों का ईलाज करवा रहे हैं अभी तो इन मरीजों के ईलाज के लिए जो पैसा नाको के माध्यम से आपको उपलब्ध कराया जाता है उस पैसे का दुरुपयोग नहीं हो, इसकी तरफ भी आपने ध्यान दिया। आज जो ज्यादातर एड्स की बीमारी हो रही है वो हो रही है मजदूर को, वह हो रही है ग्रामीण महिलाओं को। वो इसलिए हो रही है कि आपका जो एडवरटाइजमेंट है वो शहर तक सीमित है, वह सिर्फ पाँच सितारा होटलों और बड़े-बड़े अखबारों में एडवरटाइजमेंट देने तक सीमित है। आपने इसका पैनेट्रेशन जो है वो ग्रामीण इलाके के अन्दर जो सेक्सुअली एक्टिव परसन्स हैं उनके अन्दर नहीं किया, मजदूरों में नहीं किया, अनपढ़ लोगों में नहीं किया तो आने वाले समय में जो राजस्थान राज्य के अन्दर डेढ़ लाख एच.आई.वी. पोजीटिव हैं और वो जब एड्स की बीमारी में कन्वर्ट होंगे तो स्थिति कितनी भयावह होगी। आप तो चिकित्सक भी हैं और चिकित्सा मंत्री भी हैं तो इस ओर भी जरा वीजन डाल कर देखो और इसको कंट्रोल करने के कुछ साधन अपनाओ जिससे कि जो पैसा, करोड़ों रुपया जो नाको के माध्यम से आपको उपलब्ध कराया जाए उसका सदुपयोग किया जा सके।
(समय समाप्ति
सूचक घण्टी)
आखिर में मैं छोटीसी बात कह कर अपनी बात समाप्त करना चाहूंगा कि जो निविदा के अन्दर पैरामेडिकल स्टॉफ, जो कि आलरेडी ट्रेंड है, जिनका काफी शोषण हो चुका है इसके बावजूद जब यह ओन्दोलनरत हैं और आपको नयी भर्तियां करनी है तो क्यों नहीं इन पैरामेडिकल स्टॉफ को प्राथमिकतादी जाए क्योंकि यह एक्सपीरियंस लोग हैं और इस तरह के एक्सपीरियंस लोगों को प्राथमिकतादी जायेगी तो इससे स्वास्थ्य का जो पूरा ढांचा है वो सूदृढ़ ही होगा, कमजोर नहीं होगा।
और इसके बाद लास्ट में, मैं इसके पहले कि अपनी बात समाप्त करूं, एक बात और कहना चाहता हूं कि एक बड़ा अच्छा धार्मिक स्थल है चूरू के अन्दर सालासरजी और उसके अन्दर एक ही आपने वहां डाक्टर लगा रखा है और उस डाक्टर के अगेंस्ट में एफ.आई.आर. दर्ज हो गयी, उसका वहां से ट्रांसफर हो गया। लोगों ने शिकायत कर दी और आज तक उस डाक्टर को एक बार पाँच दिन के लिए ट्रांसफर कर के वापस आपने वहीं पदस्थापित कर दिया तो जब लोगों का इतना आग्रह है, वहां पूरे देश के लोग आते हैं ऐसी स्थिति के अन्दर आपको इन छोटी-छोटी बातों पर भी ध्यान देकर वहां पर किसी नये, अच्छे डाक्टर को लगाएं जिससे कि राजस्थान की बदनामी दूसरे प्रदेशों में नहीं हो।
अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे समय दिया इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री अध्यक्ष: थैंक यू।
श्री सुभाष चन्द्र शर्मा (कोटपूतली): अध्यक्ष महोदय, मेरा कट मोशन है ...(व्यवधान)
समय मिल जाए, आशीर्वाद मिल जाए आपका तो।
श्री अध्यक्ष: दूंगी मैं आपको भी समय। श्री अशोक नवलखा।
श्री अशोक कुमार नवलखा (निम्बाहेड़ा): अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से जो मैंने कट मोशन मांग संख्या 26 और मांग संख्या 51 पर दिये हैं उसके सम्बन्ध में मैं अपने विचार व्यक्त करना चाहता हूं।
माननीय अध्यक्ष महोदय, राजस्थान की जमारी लोकप्रिय मुख्यमंत्रीजी और हमारे लोकप्रिय चिकित्सा मंत्रीजी के नेतृत्व में पिछले तीन वर्षों में जो चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाये गये हैं उसकी मिसाल आज सदन में जो चर्चा हो रही है उसके माध्यम से सुनने को मिल रही है। पिछले तीन वर्षों में सरकार ने चाहे उपस्वास्थ्य केन्द्र खोलने का मामला हो चाहे प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खोलने की दिशा में कदम उठाना हो, चाहे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खोलने हों, चाहे चिकित्सालय भवनों के अन्दर भवन निर्माण कराना हो उन सब दिशा के अन्दर सरकार ने चहुमुखी विकास के काम किये हैं।
चूंकि आज सदन के अन्दर जो सरकार द्वारा तीन वर्षों में विकास के काम करवाये गये हें उसके बारे में विस्तारपूर्वक काफी चर्चा हो चुकी है, मैं इस अवसर पर माननीय चिकित्सा मंत्रीजी का आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि उन्होंने पिछले तीन वर्षों के अन्दर जो विकास के काम करवाये उससे हमारा चित्तौड़गढ़ जिला और मेरा विधान सभा क्षेत्र भी अछूता नहीं रहा।
आज हमें इस बात की खुशी है कि वर्षों से जिन चिकित्सा भवनों के अन्दर भवन का अभाव था, डाक्टर लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रुकते नहीं थे, उन सब की सुध लेकर के हमारे माननीय चिकित्सा मंत्रीजी ने जो कोर्य किये हैं और उसी का परिणाम है कि आज गांव के अन्दर चिकित्सा की अलख जगी है। जब गांव के अन्दर स्वास्थ्य चेतना यात्रा ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंची और चिकित्सा क्षेत्र में लोगों जो जानकारियां मिलीं, यह बात सही है कि è