lpm/usc/1a/1100/09102006

अशोधित प्रति/ प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

अंक  6    बारहवीं विधान सभा के छठे सत्र का सातवां दिवस   संख्‍या  5

 

 

सोमवार,

09 अक्‍टूबर, 2006

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11.00 बजे

विधान सभा भवन, जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट का अन्‍तर हो गया है आज।

श्री अध्‍यक्ष: क्षमा करना मैं लेट नहीं थी क्‍योंकि इन्‍होंने आते ही टोक दिया तो अपना जवाब देने के लिए मैंने सोचा, तैयारी की कि मुझे क्‍या कहना है? मेरे यहां एक माननीय सदस्‍य की अनुपस्थिति के लिया आया है और मुझे उन्‍होंने वहां दिया यहां जब मैं खड़ी थी और उनसे मैंने कहा कि क्‍योंकि एक दिन की कोई आवश्‍यकता नहीं है तो उन्‍होंने कहा कि नहीं वो तो पूरे ही सत्र नहीं आये तो मुझे इसलिए एक सैकण्‍ड की देरी हुई, क्षमा चाहती हूं।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे एक स्‍पष्‍टीकरण देना आपसे....(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: स्‍पष्‍टीकरण देना है तो क्‍वेश्‍चन आवर के बाद दीजिएगा।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): क्‍वेश्‍चन आवर के बाद में विधान सभा में क्‍या स्थिति बने, हाउस चले या नहीं चले।

श्री अध्‍यक्ष: हाउस क्‍यों नहीं चलेगा?

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): इससे पहले आप....(व्‍यवधान) आप दो मिनट का समय दे दें तो आपका आभारी रहूंगा...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह गलत परम्‍परा होगी। डेगाना से आने वाले माननीय सदस्‍य, यह गलत परम्‍परा हो जाएगी, ऐसा नहीं होता है पहले क्‍वेश्‍चन आवर होगा, क्‍वेश्‍चन आवर के बाद में.......(व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): क्‍वेश्‍चन आवर के तुरन्‍त बाद आप....(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: पहले सुनिये न आप बात,  पहले बैठिये, पहले बैठिये। क्‍वेश्‍चन आवर की समाप्ति के बाद जब मैं व्‍यवस्‍था दे दूं स्‍थगन प्रस्‍तावों पर, पर्ची के ऊपर उसके बाद मैं आपको बोलने का मौका दूंगी, उससे पहले नहीं।

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है....(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: फिर वहीं बात जब मैंने एक बार कह दिया अब क्‍वेश्‍चन आवर नहीं, आपको जो बात कहनी है.....(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): मेरा आपसे निवेदन है कि क्‍वेश्‍चन आवर को स्‍थगि‍त करके गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर में राजस्‍थान की सरकार के इशारों पर जिस तरह का आतंक पुलिस ने मचा रखा है, पुलिस ने ऐसा आतंक मचा रखा है जहां दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया है....(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपको अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। यह बहुत गलत है कि आप क्‍वेश्‍चन आवर के अन्‍दर खड़े हो जाए। आपको नियमों की जानकारी है, नियमों की जानकारी होते हुए आप नियमों का उल्‍लंघन करते हैं, उचित नहीं है, यह ठीक नहीं है।

श्री अमराराम (धोद): ..(व्‍यवधान) मैं तो आपसे रिक्‍वेस्‍ट करना चाहता हूं कि प्रश्‍न आवर स्‍थगित करके इस तरह के आतंक, सरकार के इशारों से पुलिस ने हनुमानगढ़ ....(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपने स्‍थगन प्रस्‍ताप दिया है, सॉरी, माननीय सदस्‍य मैं आपसे निवेदन कर रही हूं कि .....(व्‍यवधान) कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें, कृपया स्‍थान ग्रहण करें। आपने स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है, आपको कोई अधिकार नहीं बोलने का। आप बैठ जाएं। आई से सिट डाउन। श्री एमादुद्दीन अहमद खान ।

तहसील क्षेत्र तिजारा (अलवर) की

औद्योगिक इकाइयों में बकाया बिक्री कर की वसूली

63. श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): क्‍या वित्‍त मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि राज्‍य के अलवर जिले की तहसील तिजारा स्थित औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी, खुशकेडा, चौपानकी में स्थित औद्योगिक इकाइयों पर बिक्री कर के रूप में काफी राशि बकाया है, यदि हां, तो किस किस इकाई पर कब कब से कितनी-कितनी राशि बकाया है, विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍या यह सही है कि कई इकाइयों का बिक्री कर निर्धारण का कार्य बकाया है, यदि हां, तो क्‍यों, सरकार अब कब तक बकाया राशि का निर्धारण कर वसूली करने का विचार रखती है?

राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण (श्री वीरेन्‍द्र मीणा): (1) जी हां। सूची परिशिष्‍ट ए व बी पर संलग्‍न है।

(2) जी हां। वर्ष 2004-05 के कर निर्धारण प्रकरण निर्धारित समयावधि 31 मार्च, 2007 तक सम्‍पादित किये जाने हैं।

समस्‍त बकाया कर निर्धारण, निर्धारित समयावधि में सम्‍पूरित कर, नियमानुसार वसूली की कार्यवाही की जाएगी।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से राजस्‍थान सरकार का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि इन्‍होंने जो एक डिटेल  भिवाड़ी की दी है यह ढाई हजार इण्‍डस्‍ट्रीज् की है और जो इसमें मैंने जो फिगर्स देखे हैं उसमें यह डेढ सौ करोड़ रूपए के आउटस्‍टेण्डिंग्‍स इन्‍होंने बताये हैं। कुछ समय पहले जब इन्‍होंने जो जवाब में लिखा 2004-2005 से इन्‍होंने यह सूची दी है तो मैं जानना चाहता हूं कि इससे पहले के असेसमेंट्स पूरे हो गये हैं कि नहीं हो गये हैं और सभी फर्मों के 2004-2005 से पहले के हैं। दूसरा मैं जानना चाहूंगा कि यह बकाया वसूली के लिए क्‍या कार्यवाही हो रही है और इसमें इसके क्‍या नतीजे निकले हैं और अगर इसमें कोई कार्यवाही में कोई कमी है तो रिकवरी के लिए कोई लॉ में सरकार चेंज लाने का कुछ सोच रही है ताकि इसमें रिकवरी जल्‍दी हो सके। इसके साथ-साथ जो आपका अब तक सेल-टैक्‍स का एक्‍सपीरियंस रहा है रिकवरी का उसको देखते हुए अब आपने इस समय से वैट लागू कर दिया है अब वैट में आप जो लॉ लाये हैं तो उसमें इसको देखते हुए जो आपको परेशानियां हुई हैं रिकवरी में वह इस वैट के लॉ में आपने उसको इनकारपोरेट किया है कि आगे आने वाले समय में रिकवरी में आपको कोई परेशानियां नहीं आये। यह मैं जानना चाहूंगा।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय अध्‍यक्ष महोदय..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हां, आप भी पूछ लीजिएगा।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मानननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय, स्‍पीकर ने मुझे अलाउ कर दिया है।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्री इनको भी पूछ लेने दीजिए।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा):  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने कहा समय अवधि के अन्‍दर कर निर्धारण पूरा कर दिया जाएगा, कृपया यह बताने की कृपा करें मोटी-मोटी क्‍योंकि ढाई हजार इण्‍डस्‍ट्रीज् आपने बहुत होशियारी से आपने जो उत्‍तर दिया है उसमें कब से ....(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप भी उतनी ही होशियारी से दिया करते थे।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे प्रोटेक्‍शन चाहिए आपका।

श्री अध्‍यक्ष: पूछिए पूछिए हकीकत कई बार कहनी पड़ती है, पूछिए आप।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मुझे प्रोटेक्‍शन चाहिए आपसे, अब आप पुरानी बातें याद कराकर आप उनका मार्ग प्रशस्‍त नहीं करे आप। अब आप उनका मार्ग प्रशस्‍त नहीं करें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप कोई जमाना था जब यहां से बोलते थे, अब वहां से बोलते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में नहीं बोले, प्रश्‍न पूछने दें।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मैं आपसे यह पूछना चाहता हूं कि आखिर इसके अन्‍दर कर निर्धारण की अवधि क्‍या एक और आपने बहुत चतुराई से आपके विभाग में यह कब से पैण्डिंग है वह आपने इसमें कहीं नहीं बताया है। आपको यूनिटवाइज लिखना चाहिए कि आउटस्‍टेण्डिंग कहां से...(व्‍यवधान) आप खुद भी देख लें अध्‍यक्ष महोदय, समयावधि के अन्‍दर हम इसको पूरा देंगे। असल में इसके अन्‍दर पहले तो एक जवाब तो आप यह दे दे फिर मेरा नैक्‍स्‍ट सप्‍लीमेंट्री यह है कि उद्योग विभाग से आपका तालमेल का अभाव है। वित्‍त विभाग का कतई तालमेल नहीं है क्‍योंकि रिवाइवल का जो पैकेज जो इन्‍होंने दिया था आर.एफ.सी. ने दिया था, रीको ने दिया था, गवर्नमेंट ने इसके बारे में एक नियम बनाये थे कोई गाइडलाइंस बनायी थी कि सिक इण्‍डस्‍ट्रीज् को रिवाइज कैसे किया जाएगा? अगर आज आपका उद्योग विभाग से तालमेल होता तो रिवाइवल के पैकेज के तहत कितनी इण्‍डस्‍ट्रीज् रिवाइव हुई है वह आप कह देंगे यह तो मेरे महकमे का सवाल नहीं है इसका मतलब रिवाइव हो सकती थी इण्‍डस्‍ट्रीज पहले आप दो प्रश्‍न का जवाब दें दीजिए फिर मैं वैट से सम्‍बन्धित एक प्रश्‍न और पूछना चाहूंगा इनसे इसके बारे में आपसे जानकारी चाहूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: आप दो का जवाब दे दीजिए, आपकी ही ठेकेदारी नहीं है सारे सवालों की, आप दो का दे दीजिए।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी माननीय राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने और हमारे एमादुद्दीन साहब ने असेसमेण्‍ट के बारे में जो पूछा है असेसमेण्‍ट एक...(व्‍यवधान)

श्री समर्थ लाल (राजगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, क्‍वेश्‍चन आवर के अन्‍दर यह परम्‍परा है जो प्रश्‍नकर्ता होता है अगर वह कोई प्रश्‍न पूछे, उत्‍तर सुनने के बाद पहले उसका जवाब दिया जाता है और उसके बाद कोई सप्‍लीमेण्‍ट्री सदन में कोई भी माननीय सदस्‍य पूछे उसके बाद उसका उत्‍तर दिया जाता है। जो प्रश्‍नकर्ता होता है वह गौण हो जाता है और जैसा अभी-अभी भूतपूर्व वित्‍त मंत्री महोदय पूछ बैठे और उत्‍तर का सवाल मंत्रीजी उनका दे रहे हैं, प्रश्‍नकर्ता का जो सवाल था वो गौण हो गया।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍नकर्ता भी देंगे।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो उसी बात पर आ रहा हूं असेसमेंट एक प्रक्रिया है पूरा और इसके अन्‍दर असेसमेंट करके उसके बाद में असेसमेंट वर्ष समाप्ति के दो वर्ष के भीतर करना अनिवार्य होता है और असेसमेंट से पहले व्‍यापारी से हम किसी प्रकार की वसूली नहीं कर सकते। असेसमेंट होने के बाद उसको 30 दिवस का समय दिया जाता है। 30 दिवस के समय के अन्‍दर अगर वह राशि जमा नहीं कराता तो उसके बाद उसके ऊपर विभाग कोई कार्यवाही करता है और फिर अगर डिले होता है उसमें तो उसको उस व्‍यापारी को उस राशि का ब्‍याज है वह देना पड़ता है। कोई भी इसकी सीमा नहीं होती अगर 10 साल बाद भी किसी व्‍यापारी के प्रति कोई पैसा निकलता है तो विभाग उसके खिलाफ कार्यवाही कर सकता है,पहली बात तो यह है।

 

भीम/चौहान/9.10.06/11.10/1b

 

दूसरा माननीय एमादुद्दीन साहब ने जो प्रश्‍न उठाया है उसमें मैं आपको बताना चाहूंगा माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस सर्किल की आप बात कर रहे हैं जिसमें खुशकेड़ा, भिवाड़ी और चौपानकी उसमें निश्चित 146.31 करोड़ रुपये बाकी है और वो जिस-जिस हैड के अन्‍दर बाकी है उसके बारे में मैं आपको पूरी डिटेलवाइज बता दूं इसमें पहले तो है Demand is pending for want of declaration of forms.

उसमें 57.26 करोड़ रुपये बाकी है Demand relates to assumption under incentive scheme of 1987. Matter is pending before DLS. इसमें 4 करोड़ 43 लाख बाकी है इसके बाद Ex-party assessment order. Firm is closed.

इसमें 3.21 करोड़ रुपये बाकी है फर्म इज क्‍लोज्‍ड बंद फर्मों के 45 करोड़ रुपये बाकी है इसी प्रकार माननीय अध्‍यक्ष महोदय, Recovery proceedings share under process वो चल रहा है 13 करोड़ 47 लाख रुपये अंडर लिक्विडिशन 5.59 लाख रुपये अंडर रेक्‍टी‍फिकेशन 29 लाख रुपये, अंडर स्‍टे 6 करोड़ 75 लाख रुपये इसी प्रकार माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूरी राशि 146.31 करोड़ जो बाकी है इसके अन्‍दर पिछले पाँच वर्ष के अन्‍दर इसमें से वर्ष 2001-2002 में 33 करोड़ 55 लाख रुपये वसूल किये, वर्ष 2002-03 में हमने 69.61 करोड़ रुपये वसूल किये, 2003-2004 में 31.7 करोड़ वसूल किये, 55.85 करोड़ रुपये हमने 2004-05 में किये, 2005-06 में हमने 159.75 लाख रुपये वसूल किये, 2006-07 में हमने 126.79 लाख रुपये इस पर्टीकूलर सर्किल में वसूल किये हैं। फिर भी माननीय  अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍य सरकार ने अभी इसी वित्‍तीय वर्ष के अन्‍दर कुछ पोस्‍टें क्रियेट की हैं। अभी 2.9.06 को नोटिफिकेशन निकाल करके हमनें पाँच सीटीओज की पोस्‍टें क्रियेट की हैं। उसके अन्‍दर इस कर निर्धारण की प्रक्रिया, इस राशि को वसूल करने के लिए एक पोस्‍ट हमने भिवाड़ी में क्रियेट की है । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो फरमाया ढाई हजार इंडस्‍ट्रीज जिनके खिलाफ यह पैसा बाकी है उसमें एक पोस्‍ट पर्टीकूलर भिवाड़ी में कियेट की है और वो जल्‍दी से जल्‍दी जितना भी पैसा है सख्‍त से सख्‍त कार्यवाही करके और विभाग इसको वसूल करेगा। अभी राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य....।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): नहीं, मेरे सवाल का जवाब माननीय मंत्री महोदय, आप पिछले सालों की रिकवरी, यह तो सतत प्रक्रिया है हर साल असेस्‍मेंट होता है हर साल आता है आपने बड़ी खूबसूरती से जवाब दिया कि 2004-05 के कर निर्धारण की जो समयावधि है वो 2007 तक है तो क्‍या मैं आपसे पूछ सकता हूं यह जितना पैसा जितनी इंडस्‍ट्रीज हैं सबका असेस्‍मेंट 2004-05 में ड्यू था? पहले से चल रहा है आपका। सवाल यह है आपका पहले से चल रहा है। सीधा सवाल यह है कि आप इनसे वसूली, क्‍योंकि फर्मर्स क्‍लॉज होकर चली गयी, लोग बंद करके चले गये इंडस्‍ट्रीज घाटे में आयी। आपने जो इंसेंटिव स्‍कीम जो इन्‍होंने इंडिस्‍ट्रीज डिपार्टमेंट ने और जो बीडी के द्वारा अप्रूव है आपने उस इंसेंटिव, क्‍योंकि तालमेल का कतई अभाव है इंडस्ट्रिज के अन्‍दर और वित्‍त विभाग के अंदर अगर यह इंसेंटिव स्‍कीम के तहत आपने उनको रिवाइवल का पेकेज दिया यह मैं जानता हूं इंडस्ट्रिज बंद हुई हैं आरएफसी को, बिजली को इतना मिलेगा, इनकी बिक्री होगी, बिक्रीकर विभाग को इतना मिलेगा, कंसर्ड फाइनेंशियल इंस्टिटयूशन को इतना पैसा मिलेगा, मैं आपसे यह पूछ रहा था....।

श्री अध्‍यक्ष: भाषण नहीं प्रश्‍न।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): हां प्रश्‍न ही पूछ रहा हूं। इसके बारे में आपकी जानकारी में तो यह स्‍कीम होगी नहीं क्‍योंकि वहां जो बंद पड़ी हुई हैं  अध्‍यक्ष महोदय, आज हालत यह है कि जो बंद इंडस्ट्रिज हैं उनकी सारी मशीनरीज या तो लोग खोल करके ले गये, इनकी जमीन रह गयी है या चोरी हो गया वहां से सामान, जब आपको बकाया वसूलना था अगर दोनों में तालमेल हो तो इससे सरकार का जो रुपया बाकी पड़ा हुआ है क्‍योंकि इन्‍होंने कहा 2004-05 का 2007 तक हम कर देंगे, यह बताने की कोशिश की इसमें कितना पैसा और तारीख दी नहीं किस की, उसकी आगे की कब से बाकाया है उसके ऊपर जो लंबी समयावधि का पैसा बाकी रह गया है उसकी रिकवरी के लिए आपने क्‍या कारगर कदम उठाये हैं? यह बताने की आप कृपा करें। जो बहुत लंबे अर्से से दस वर्ष बाद भी कोई पेमेन्‍ट कर दे तो वो तो हर एक को मालूम है राज्‍य का पैसा आता है आप लेते हैं आउटस्‍टेंडिंग बाकी रहता है लेकिन जो लोग लंबी समयावधि का जो पैसा बाकी पड़ा हुआ है उसको वसूल करने की दिशा में आप क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं? यह आप बताने की कृपा करें।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक सप्‍लीमेंट्री है आप तो मंत्री जी, यह बता दें कि आपके आने के बाद सैल्‍स टैक्‍स के एरियर में वृद्धि हुई है या कमी हुई है?

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो प्रश्‍न उठाया है उसके बारे में मैं पूर्व में भी आपसे कह चुका हूं कि सैल्‍स टैक्‍स डिपार्टमेंट के अन्‍दर राज्‍य सरकार ने पोस्‍टें क्रियेट की हैं उसकी डिटेलवाइज मैं आपको और बताना चाहूंगा। ...(व्‍यवधान)... सुन तो लें आप मेरी बात तो सुन लें।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): पोस्‍ट एक और क्रियेट की है वो तो मालूम है आपने एक पोस्‍ट भिवाड़ी में और बढ़ा दी उसका तो मालूम है वो अभी तक उस पोस्‍ट पर कोई गया नहीं है वहां । आप फीगर्स की बात करिये।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): इस फाइनेंशियल ईयर के अन्‍दर माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस फाइनेंशियल ईयर में एडिश्‍नल कमिश्‍नर की 2 पोस्‍ट, डीसीज की 3 पोस्‍ट, एसीज की 4, सीटीओ के 5, एसीटीओ के 32 और इंस्‍पेक्‍टर्स की 32 पोस्‍टें हैं।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): पोस्‍ट से कोई मतलब नहीं है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): इस प्रकार की बातें से क्‍या मतलब है आप भिवाड़ी की बात करें आपने राजस्‍थान में इतनी पोस्‍टें क्रियेट कर दी हैं फलानीं जगह इतनी कर दी आप भिवाड़ी की बात करें। सवाल यह है कि भिवाड़ी में स्‍टे लिया था ...(व्‍यवधान)... इंडिस्ट्रियल एरिया का अध्‍यक्ष महोदय, और एक सबसे बड़ी समस्‍या क्‍या हुआ है कि वेट के तहत जिन आइटम्‍स का एग्‍जम्‍प्‍शन दिया जाता था जो कि आम सहमति  देश के स्‍तर के ऊपर बनी थी उसके परे हटकर के वेट की एक सुपर पॉवर कमेटी बना दी गई राजस्‍थान के अन्‍दर मंत्री जी का कोई लेना देना नहीं है वो जो कमेटी, ग्रिवेंसेज कमेटी के नाम से एक कमेटी बना दी गई ।

श्री अध्‍यक्ष: इस प्रश्‍न से क्‍या ताल्‍लुक है उसका?

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): एक मिनट सुन लें, आप कृपया सुन लें।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): नहीं मैडम, इससे वेट का ताल्‍लुक है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): ताल्‍लुक है इसका। अब इस उम्‍मीद में लोग बैठे हुए हैं असेस्‍मेंट क्‍यों नहीं करा रहे हैं वो भी प्रयत्‍न कर रहे हैं आइटम्‍स दस आइटम्‍स के ऊपर देश के अन्‍दर सहमति बनी थी स्‍टेट बेस नीड के आधार पर  वेट एग्‍जम्‍पशन स्‍टेट्स अलाउड किया हुआ था ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): बकाया का सवाल वेट का कहां है  ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): है वेट से है यह ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): वेट का ताल्‍लुक है। है क्‍यों नहीं ...(व्‍यवधान)...    अध्‍यक्ष महोदय, वेट का तो ताल्‍लुक है  सेल्‍स टैक्‍स की जगह वेट आया है ...(व्‍यवधान)... सैल्‍स टैक्‍स की जगह वेट लगाया है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): इसी उम्‍मीद के अन्‍दर लोग बैठे हुए हैं ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप सवाल पूछो न ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): क्‍या मतलब है? क्‍या मजाक है? Why you are trying to protect the Minister? मैं आपसे एक बात कह रहा हूं कि इस उम्‍मीद में लोग बैठे हुए हैं They are also making efforts. क्‍योंकि दस की सीमा को इस कमेटी ने पार कर दिया है वो इसका क्‍या हश्र होगा यह तो भविष्‍य बतायेगा।

श्री अध्‍यक्ष: यह बिक्री कर के संबंध में है।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): अध्‍यक्ष महोदय, वेट से संबंध है बिकॉज 2006-07 में वेट ही लगेगा न।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): 2006-07 में वेट लगेगा।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): फिर सेल्‍स टैक्‍स कहां लगेगा?

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा):। मैं आपसे कह रहा हूं कि इस उम्‍मीद में लोग बैठे हुए हैं कि हम भी प्रयत्‍न करेंगे कि सर्टेन टाइप की इं‍डस्ट्रिज को इस वेट से एग्‍जम्‍पशन करा लेंगे क्‍योंकि सैल्‍स टैक्‍स का स्‍थान वेट ने ले लिया। अब सेल्‍स टैक्‍स का स्‍थान ने ले लिया इसलिए मैं आपसे कह रहा हूं कि ये मामला इतना कम्‍लैक्‍स्‍ड है।

श्री अध्‍यक्ष: वेट में लेने के बाद की बात तो ...(व्‍यवधान)... की बात करें आप तो।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): चलिये मैं उसकी बात कर रहा हूं। आज मैं आपसे कह रहा हूं ....।

श्री अध्‍यक्ष: नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने रिलेवेंट प्रश्‍न पूछा कि आपके आने के बाद में उसमें कमी हुई या बढ़ोतरी हुई।

श्री नरपतसिंह राजवी(उद्योग मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कोआर्डिनेशन के अभाव की बात कही तो  आप भी वित्‍त मंत्री थे इंडस्ट्रिज मिनिस्‍टर भी थे, रिप्‍स भी इंडस्ट्रिज के नहीं हैं जो एडमिनिस्‍ट्रेटिव डिपार्टमेंट है वो फाइनेंश डिपार्टमेंट है और सिक यूनिट्स की जो स्‍कीम है उसका भी फाइनेंस डिपार्टमेंट ही है तो कोओर्डिनेशन के अभाव की बात नहीं है आप जिस तरह से घुमाना चाह रहे हैं प्रन को वेट पर लाना चाह रहे हैं वो नहीं...।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आपका को‍ओर्डिनेशन कैसा है वो हम अखबारों में सब पढ़ चुके हैं।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): अमाउंट बता दें साहब अमाउंट।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य जो बात पूछ रहे हैं एक तो वेट से है और एक जो पर्टीकूलर सर्किल की बात कह रहे हैं वो दोनों बात अलग अलग है।

दूसरा वेट में जहां तक इन्‍होंने कमेटी की बात की माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो केन्‍द्र की स्‍टेट एम्‍पावर्ड कमेटी है फाइनेंस मिनिस्‍टर्स की उसके अन्‍दर मैं अकसर जाता रहता हूं राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य भी उसके पहले मैंबर थे आप भी जाते रहते हैं । वहां पर..।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मैं अब नहीं जाता।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): पहले जाते रहते थे आप । आपको सारा पता है यह वेट की जो कमेटी प्रदेश में हमने बनायी माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहुत व्‍यपारियों से ...।

श्री अध्‍यक्ष: आप वेट के झगडे में क्‍यों जा रहे हैं? आप बिक्रीकर की बात करें।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): मेरा सवाल जो था उसका जवाब...।

श्री अध्‍यक्ष: वो तो एक्‍स फाइनेंस मिनिस्‍टर हैं। वो पूर्व वित्‍त मंत्री है।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): ... अध्‍यक्ष महोदय, उसका जवाब नहीं आया मेरे सवाल का ..।

श्री मदन राठौड़(सुमेरपुर): .... ...(व्‍यवधान)... दूसरा पूछना शुरू कर देता है मूल प्रश्‍नकर्ता तो वंचित ही है।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): मेरा एक सवाल जो मैंने शुरू में पूछा था उसका अभी तक जवाब नहीं आया कि इनका जो एक्‍सपीरियेंस है सेल्‍स टैक्‍स को लेकर कि इनकी सेल्‍स टैक्‍स की जो रिकवरी पूरी तरह से ठीक तरह से हो नहीं पा रही है उसका डेढ़ करोड़ रुपया पेंडिंग है अब जो नया वेट आया है उसमें इन्‍होंने क्‍या लॉ में प्राविजन रखा है ...

 

कैलाश/     9.10.2006  11.20  (1) 1c

 

जिससे  इसकी रिकवरी में देरी नहीं हो और टाइम पर रिकवरी हो जाये पहले भी और आगे आने वाले में भी । इसलिए वैट का इससे संबंध है मैडम ।

श्री अध्‍यक्ष: आपने यह प्रश्‍न तो कहीं नहीं पूछा ।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): क्‍यों नहीं पूछा । इसमें मैंने कोई ईयर तो दिया नहीं है मैंने तो शुरू से पूछा है और आज तक का पूछा है । इसमें मैंने अवधि तो दी नहीं कि कौनसे साल से कौनसे साल का है यह तो जनरल पूरे टाइम का है । उसमें जब सैल्‍स टैक्‍स नहीं रहेगा तो उसकी जगह आपने वैट लगा दिया है तो नेचुरली वैट भी इसमें कवर होगा ।

श्री अध्‍यक्ष: आपे प्रश्‍न में तो कहीं यह नहीं है ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): एक हजार करोड रुपये का एरियर बढा है, जवाब दें । मैं फीगर दे रहा हूं एक हजार करोड रुपये का । पिछली सरकार से इस सरकार के आने के बाद एक हजार करोड रुपये का सैल्‍स टैक्‍स का एरियर बढा है, मना कर दें ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप गलत कह रहे हैं ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): आप मना कर दें, फीगर बताये ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जब इन्‍होंने शासन छोडा था जब 1708 करोड का सैल्‍स टैक्‍स राजस्‍थान में बकाया था । आज की तारीख में यह 1954 करोड का है ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): आप करेक्‍ट कर लें । (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह रिकार्ड पर है । हाईपोथेटिकल बात करना नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य की आदत पड गई है ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, मैं 2005-06 की फीगर दे रहा हूं । मना करा दीजिए । 2005-06 के सीएजी की फीगर दे रहा हूं , आप मना कर दीजिए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मैं 2005-06 की फीगर दे रहा हूं आपको । 2336 करोड थे अगस्‍त तक 353 करोड वसूल हो गये और आज की तारीख में 1954 करोड 17 लाख रुपये राजस्‍थान का सैल्‍स टैक्‍स का बकाया है यह रिकार्ड पर रख देता हूं ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): एग्रीड ?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): एग्रीड ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): मैं फिर दुबारा कह रहा हूं 2005-06 की सीएजी की रिपोर्ट में पिछली कांग्रेस सरकार के शासन छोडने के बाद एक हजार करोड रुपये से ज्‍यादा सैल्‍स टैक्‍स का एरियर बाकी था । Still I am saying this. Let it be recorded .  मैं फिर दुबारा रिपीट कर रहा हूं 2005-06 की सीएजी की रिपोर्ट का फीगर दे रहा हूं ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं जिम्‍मेदारी से कह रहा हूं 1.4.03 को 1708 करोड 21 लाख रुपये बिक्री कर के बकाया थे । यह रिकार्ड पर है ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, में 2005-06 की कह रहा हूं मंत्री जी 2003 की कह रहे हैं बडी अजीब बात है । मंत्री जी मैं 2005-06 की कह रहा हूं  आप 2003 की कह रहे हैं, करेक्‍ट करें अपने आपको ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, देखों डांट रहे हैं । मेरे को डांट भी रहे हैं और मेरे को डरा भी रहे है ।

श्री अध्‍यक्ष: नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य आप कहने दें उन्‍हें, आपने अपनी बात कह दी उन्‍हें भी सुने ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, दो बात एक साथ कर रहे हैं मेरे को डांट भी रहे हैं और मेरे को डरा भी रहे हैं ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, मैं डांट नहीं रहा हूं पार्लियामेंट्री अफेयर मिनिस्‍टर मंत्री को बोलने नहीं दे रहे हैं । Let him say it.

श्री अध्‍यक्ष: डांटना और डराना तो एक ही बात है ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, यह सरकार कलेक्टिव रेस्‍पोसेबिलिटी को मानती है तो यह मंत्री जो जवाब दे रहे हैं वह फाइनेंस मिनिस्‍टर का जवाब है । आप जो जवाब दे रहे हैं वह फाइनेंस मिनिस्‍टर का जवाब है ? आप कहिए पहले यह जो जवाब दे रहे हैं वह फाइनेंस मिनिस्‍टर का जवाब मान लूंगा मैं । कलेक्टिव रेस्‍पोसेबिलिटी में आप कहिए कि यह फाइनेंस मिनिस्‍टर का जवाब है ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह कलेक्टिव रेस्‍पोसेबिलिटी के आधार पर जवाब है और ओथेंटिक जवाब है ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): फाइनेंस मिनिस्‍टर का जवाब है ?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): फाइनेंस मिनिस्‍टर मैं नहीं हूं पर कलेक्टिव रेस्‍पोसेबिलिटी के आधार पर मैं जो कह रहा हूं, अध्‍यक्ष महोदय, मैं टेबल कर सकता हूं ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):Madam let him say. अध्‍यक्ष महोदय, इनको हाउस में कहना पडेगा कि वित्‍त मंत्री की हैसियत से कलेक्टिव रेस्‍पोसेबिलिटी पर जवाब दे रहे हैं । (व्‍यवधान) स्‍टेट मिनिस्‍टर बैठे हुए हैं, यह क्‍या मतलब है । Let the State Minister say it.

श्री अध्‍यक्ष: एक मंत्री दूसरे मंत्री को असीस्‍ट कर सकता है । (व्‍यवधान)

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): नहीं दे सकता, अध्‍यक्ष महोदय, आप इनको अलाऊ करते पहले Why you have allowed the State Minister?

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय,  यह सरकार की तरफ से जवाब है और इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि सैल्‍स टैक्‍स की रिकवरी होनी चाहिये । सरकार इफेक्टिवली प्रयास करेगी । (व्‍यवधान)

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): यह बात नहीं है । आप तो बताइए कि पिछली सरकार से यह पैसा बढा है या घटा है, मंत्री जवाब दें इस बात का । Don’t side track it.  फाइनेंस मिनिस्‍टर जवाब दे ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह आपके विततीय प्रबन्‍धन की पोल खुल रही है जिसका बार बार आप कहते हो । (व्‍यवधान)

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, वित्‍त राज्‍य मंत्री को बोलने दें, किसने मना किया है । वित्‍त राज्‍य मंत्री खडे होकर बोलें । (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): दिल्‍ली की सरकार .. (व्‍यवधान) मैनेजमेंट में नंबर वन है ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): कलेक्टिव रेस्‍पोसेबिलिटी के आधार पर खडे होकर बोले । यह नंबर वन है या नंबर दो है, मंत्री खडे होकर जवाब दें ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): जो भी रिकवरी बाकी है राजस्‍थान सरकार इफेक्टिवली उसकी वसूली करेगी । (व्‍यवधान)

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):Prof. Saheb don’t side track.  आप फीगर पर आइए । पिछली सरकार के बाद एक हजार करोड कर एरियर बढा है आप मना करना चाहते हो इस बात को ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आपने एक हजार करोड का एरियर छोडा था । (व्‍यवधान)

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): यह कोई मुख्‍य मंत्री का मंत्री नहीं बोल रहा है यह राजस्‍थान का वित्‍त मंत्री बैठा है, वह बोले । फीगर मालूम नहीं खडे होकर बोल देते हैं। Don’t mislead the House. You are misleading the party and misleading the House.  आप पार्टी को भी मिसलीड कर रहे हैं और सरकार को भी मिसलीड कर रहे हैं, खडे होकर बोलिए आप । (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट श्री शिवजीराम मीणा ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, don’t protect this thing.

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा जवाब ही नहीं आया।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, पहले तिजारा से आने वाले माननीय सदस्‍य का जवाब आने दीजिए ।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री जी के पास जितनी जानकारी थी उन्‍होंने दे दी । (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मंत्री जी इतना महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है, किसानों पर पैनेल्‍टी लगाई जाती है और उद्योगों से पैसा वसूल नहीं किया जाता । अगर बिजली का बिल एक दिन लेट हो गया तो उस पर पेनेल्‍टी लगती है ... (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ... (व्‍यवधान) वसूली इफेक्टिवली तरीके से करेंगे।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, इनके पास जवाब नहीं है तो आप प्रश्‍न को स्‍थगित करवाइए ।

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, आप हमारी बात सुनिए । आप रोज स्‍थगित कर रही हैं इसको भी स्‍थगित कीजिए । आप स्‍वयं कह रही हैं कि इनके पास जितनी जानकारी थी वह दे दी ।

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण करें । आप स्‍थान ग्रहण करें ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, आप न्‍याय करें, सबके साथ समान व्‍यवहार करें ।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): आपके चार चार मंत्रियों ने जवाब दिया फिर भी जवाब सही नहीं हुआ । (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): वैट के माध्‍यम से लाखों रुपये का भ्रष्‍टाचार हो रहा है और उस ओर आप ध्‍यान नहीं दिलाना चाह रहे हो । सारे व्‍यापारी लुट रहे हैं । एक सुपर स्‍कीम बन गई इनकी । आप तो विधान सभा में वैट का प्रश्‍न ले आईं ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: रायपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य मंत्रीजी के पास जितनी जानकारी थी वह विस्‍तृत रूप से आपको दे दी ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, तो इसे स्‍थगित करवा दीजिए ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मंत्री जी को तो बोलने ही नहीं दिया । संबंधित मंत्री को तो बोलने ही नहीं दे रहे हैं दूसरे मंत्री । उनके पास जानकारी तो बहुत है लेकिन बोलने दे जब ना । (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन ।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): अध्‍यक्ष महोदय, मैं वाक आउट कर रहा हूं, मेरे सवाल का जवाब नहीं आ रहा है, मैं आपसे प्रोटेक्‍शन मांग रहा हूं और आप मुझे प्रोटेक्‍शन नहीं दे रहे हैं इसलिए मैं सदन से वाक आउट कर रहा हूं ।

(माननीय सदस्‍य श्री एमादुद्दीन अहमद खान द्वारा सदन से बहिर्गमन)

श्री अध्‍यक्ष: इतनी लंबी सूची देने के बाद तिजारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो प्रश्‍न पूछा है उसके साथ इतनी सूचनाएं दी गई हैं इससे भी यदि आप संतुष्‍ट नहीं हो तो मैं नहीं समझती .. (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, उसका तो कोई उल्‍लेख ही नहीं है इसमें । कहीं हो तो बता दीजिए आप । (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): ... बेकार सूचनाएं हैं जिससे कोई अभिप्राय नहीं है । मैंने इन्‍हें देखी है I have seen it. मैडम, आपके लिये हो सकती हैं मैं इसको समझता हूं इसके कहीं कोई तथ्‍य नहीं है यह हाउस को और मैम्‍बर्स को मिसलीड करने वाली सूचनाएं हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: मिसलीड करने वाली हैं तो आप दूसरे नियमों में आइए कौन ना करता है ।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): यह तो आज आखिरी दिन है नहीं हम तो सब ले आते, आज आखिरी दिन है ।

श्री अध्‍यक्ष: अगले सदन का कोई आखिरी दिन थोडे ही है उसके बाद फिर सैशन आयेगें ।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): बजट सैशन आयेगा तब लेंगे ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप जब इनके प्रश्‍न का जवाब नहीं देते हैं तो उसको आप स्‍थगित कर देते हैं, आप कम से कम स्‍थगित तो करवाइए ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): कोई स्‍थगित नहीं होगा ... (व्‍यवधान) उससे ज्‍यादा जानकारी दी है हमने ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपसे न्‍याय की अपेक्षा है आप न्‍याय तो करें । आप हमेशा उनका प्रोटेक्‍शन करती हो और विपक्ष को हमेशा दबाती हो ।

श्री अध्‍यक्ष: इनको बोलने दीजिए, इनका अंकित नहीं हो ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आसन के प्रति जो टिप्‍पणी माननीय सदस्‍य ने की है यह आसन का अपमान है इसे एक्‍सपंज करवाइए।

श्री अध्‍यक्ष: वह आइएएस आफिसर है वह चाहे जैसा बोलते हैं । (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):  ***

श्री अध्‍यक्ष: उन्‍हें सदन के नियमों की और आसन की गरिमा की जानकारी नहीं है ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

विधान सभा क्षेत्र जहाजपुर में गैर सरकारी संस्‍थाओं द्वारा लाभान्वित व्‍यक्ति

64. श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): क्‍या जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि विधान सभा क्षेत्र जहाजपुर में बायफ (गैर सरकारी संस्‍था) द्वारा किसी प्रकार के कार्य करवाये जा रहे हैं ? यदि हां, तो दिनांक 01 अप्रैल, 2001 से अब तक किये गये कार्यों की सूची सदन की मेज पर रखें ।

(2) क्‍या यह सही है कि बायफ द्वारा जहाजपुर क्षेत्र में व्‍यक्तिगत लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया है ? यदि हां, तो दिनांक 01 अप्रैल, 2001 से अब तक के व्‍यक्तिगत लाभार्थियों की ग्रामवार सूची सदन की मेज पर रखें ।

(3) क्‍या यह सही है कि सरकार द्वारा इन लाभार्थियों का भौतिक सत्‍यापन किया गया है ? यदि हां, तो दिनांक 01 अप्रैल, 2001 से अब तक के लाभार्थियों का कब कब भौतिक सत्‍यापन किया गया एवं उनमें क्‍या क्‍या कमियां पाई गईं ?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): (1) जी हां । बायफ संस्‍था द्वारा विधान सभा क्षेत्र जहाजपुर में दिनांक 1.4.2001 से निम्‍न विकास कार्य करवाये जा रहे हैं :-

1.     सामुदायिक चारागाह विकास कार्य

2.     पशुधन विकास केन्‍द्र 

3.     पैरावेट केन्‍द्र

4.     फलोद्यान विकास कार्यक्रम  

सूची परिशिष्‍ठ अ' पर संलग्‍न है ।

(2) जी हां । बायफ द्वारा जहाजपुर क्षेत्र में व्‍यक्तिगत लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया है । विभिन्‍न विकास कार्यों में दिनांक 1.4.2001 से ब तक की व्‍यक्तिगत लार्भा‍थियों की ग्रामवार सूची परिशिष्‍ठभ्‍ पर संलग्‍न है ।

(3) जी हां । दिनांक 1.4.2001 से जहाजपुर क्षेत्र में बायफ संस्‍थ्‍ंा को स्‍वीकृत कार्यों का भौतिक सत्‍यापन निम्‍नानुसार किया गया है :-

1. पैरावेट केन्‍द्र जालमपुरा एवं पशुधन विकास केन्‍द्र द्योड, लुहारीकलां, ऊँचा के लाभार्थियों का भौतिक सत्‍यापन माह नवम्‍बर, 2002 में किया गया । भौतिक सत्‍यापन में ंकार्य सही पाया गया ।

2. सामुदायिक चारागाह विकास कार्यों में से नमूना जांच के आधार पर ग्राम रतनपुरा, तीखी एवं मेडिया के चारागाह विकास कार्यों का भौतिक सत्‍यापन माह जुलाई, 2003 में किया गया । भौतिक सत्‍यापन में कार्य सही पाया गया ।

श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि फलोद्यान विकास कार्यक्रम में व्‍यक्तिगत लाभार्थियों को कितनी कितनी राशि किस किस फलोद्यान हेतु उपलब्‍ध कराई गई है ।  

 

विष्‍णु/ यू.एस./ 09.10.06/ 11.30/1d

 

मैं खण्‍ड 3 में यह जानना चाह रहा था कि क्‍या आपने कभी इन वैयक्तिक लाभार्थियों का भौतिक सत्‍यापन करवाया है? आपने जो सूचियां दी हैं वह केवल ... (व्‍यवधान) केन्‍द्र का और चारागाह की दी है। मैं आपसे यह भी जानना चाह रहा हूं कि आपके द्वारा व्‍यक्तिगत लाभार्थियों का कब-कब भौतिक सत्‍यापन किया गया है? दूसरा, मैं यह जानना चाहता हूं कि सामुदायिक चारागाह विकास कार्यक्रम में अब तक प्रथम एवं द्वितीय चरण में कितनी-कितनी राशि व्‍यय की गयी एवं यह कार्य श्रमिकों द्वारा करवाया गया या मशीनों द्वारा? तीसरा, मैं आपसे माननीय मंत्री महोदय, यह जानना चाहता हूं कि क्‍या यह कार्य मानव दिवस सृजित करने के लिए श्रमिकों से करवाये जाने का प्रावधान है या मशीनों से करवाये जाने का नियमों में प्रावधान है? नम्‍बर-4, मैं यह जानना चाहता हूं कि सामुदायिक चारागाह विकास कार्यक्रम चरण- 2 में अमरासियन-लोहारीकलां में क्‍या-क्‍या कार्य करवाये गये, कृपया सूचना देने का कष्‍ट करें। ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहाजपुर क्षेत्र के अन्‍दर जो कार्य करवाये गये हैं इसकी प्रगति और उसका भौतिक सत्‍यापन और कार्य किस प्रकार से किये गये हैं, यह तमाम जानकारी आपने चाही है इसके अन्‍तर्गत। मूल प्रश्‍न जनजाति क्षेत्र विभाग का, यह इस क्षेत्र के अन्‍तर्गत जो कार्य किये हैं उसमें फलोद्यान विकास कार्य इस विभाग से संबंधित है। शेष कार्य जो है वह पंचायती राज विभाग से सम्‍पन्‍न करवाये जा रहे हैं। इसके अन्‍तर्गत पहला है फलोद्यान विकास परियोजना और उसके अन्‍तर्गत यह जो उपलब्धि और उसका भौतिक सत्‍यापन यानि फलोद्यान विकास कार्य के अन्‍तर्गत वर्ष 2004-05 के अन्‍तर्गत उसका लक्ष्‍य 635 था, भौतिक उपलब्धि 635 थी। आवंटन उसका 28 था। वर्ष 2005-06 के अन्‍तर्गत लक्ष्‍य 1164 और उपलब्धि 1164 थी। ऐसे ही 2006-07 में 353 इसका लक्ष्‍य है, उसी प्रकार बंजर भूमि विकास के अन्‍तर्गत 2005 के अन्‍दर 555 और उपलब्धि 555, 2005-06 के अन्‍तर्गत 1294, 1294 उसकी उपलब्धियां हैं। पशुधन विकास केन्‍द्रों का संचालन, 2004-05 में 2 और उपलब्धियां भी 2, 2006-07 में इसकी उपलब्धियां, इसमें फलोद्यान में भी लगभग प्रति बाड़ी 1230, 300 रुपये उसका व्‍यय आता है और इसी तरह से यह कार्य जो है वह ग्राम विकास समिति के माध्‍यम से वहां जहां लोकल पंचायतबार किया जा रहा है, जिसकी परिशिष्‍ट 400 पेज में पूरी सूची चाही है, लाभार्थियां की इसके अन्‍तर्गत है।

श्री अध्‍यक्ष: हां, 400 पेज की सूची दे दी इन्‍होंने।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): उसके अन्‍तर्गत दी गयी है और इसी प्रकार आपने कहा कि यहां पर जहाजपुर में जो बायफ काम कर रही है, उसके अन्‍तर्गत रतनपुरा गांव के अन्‍तर्गत आपने कहा है लेकिन इसकी सूचना जो मेरे पास है वह निवेदन करना चाहूंगा कि भीलवाड़ा जिले की जहाजपुर तहसील में रतनपुरा में चारागाह प्रबंध समिति एवं ग्राम पंचायत समिति सरपंच के बीच में आपसी ताल-मेल कम है इससे यह स्‍पष्‍ट है कि चारागाह का भविष्‍य खतरे में है और इसके कारण से ग्राम पंचायत की भूमि एवं इनके कोष की राशि स्थानांतरित करना अनिवार्य हो रही है। ग्राम पंचायत समिति इसका विरोध करती है। ग्राम पंचायत समिति इसका विरोध करती है कि ... (व्‍यवधान) दोनों के चारागाह को ध्‍यान में रखते हुए ... (व्‍यवधान) यह पूरे लाभार्थियां की दे दी है। ... (व्‍यवधान)

श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): माननीय मंत्रीजी, यह ग्राम सभा की है। ग्राम पंचायत की कोई बात ही नहीं पूछ रहा हूं मैं आपसे। मैं तो आपसे यह निवेदन करना चाह रहा हूं कि आप तो आपके विभाग की बात बता दीजिए।

श्री अध्‍यक्ष: यह आपने 400 पेज की सूची तो दे दी इनको और क्‍या बाकी रह गया अब?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): और यह जो चारागाह, जिसके अन्‍तर्गत यह रतनपुरा जो जगह है वह 11 तारीख आने वाली 11 तारीख को एक मीटिंग इनकी रखी है। इसके अन्‍तर्गत यह पूरा उसका समाधान होना है ... (व्‍यवधान)

श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): झगड़े की तो कोई बात ही नहीं है, मंत्रीजी। झगड़े की कहां बात आ रही है इसमें? नहीं, झगड़े की तो कोई बात ही नहीं है। मैं तो आपसे यह निवेदन करना चाह रहा हूं ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: जहाजपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपको इतनी विस्‍तृत सूची दे दी, अब क्‍या बाकी रह गया?

श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे यह निवेदन करना चाहता हूं कि आप तो आपके विभाग की ही बता दीजिए मेरे को। आप तो यह बता दीजिए कि ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 400 पेज से भी ऊपर पूरी सूची है, इसके अन्‍दर एक-एक लाभार्थी को क्‍या-क्‍या सुविधा, क्‍या-क्‍या स्थिति है और माननीय, उसमें भौतिक सत्‍यापन की दृष्टि से भी मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): जिसके अन्‍तर्गत हमारा जो बी.डी.ओ. है उसने भी इसकी जांच की है।

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण करें।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): इसके अलावा बायफ संस्‍था के अधिकारियों द्वारा भी इसकी जांच की गयी है और उसका प्रशस्ति पत्र भी दिया है।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया, स्‍थान ग्रहण करें। वे जवाब तो दे रहे हैं आपको। ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): और माननीय सदस्‍य ने भी उनको प्रशस्ति पत्र दिया है। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण करें। जब मंत्री बोलते हैं तो सदस्‍य को स्‍थान ग्रहण कर लेना चाहिए। ... (व्‍यवधान)

श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): यह पूरी रिपोर्ट मेरे पास में है, जिसमें आप ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी जवाब दे रहे हैं,, आप स्‍थान ग्रहण करिये। ... (व्‍यवधान)    

श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  केवल आपके विभाग से संबंधित जानकारी दे दीजिए मेरे को। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: इतनी विस्‍तृत जानकारी के बाद  और क्‍या चाहते हैं आप?

श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): आपने फलोद्यान कार्यक्रम में जो कार्य करवाया है। आपने जिन लाभार्थियों की सूची दी है, उनको कितना-कितना भुगतान कर दिया और कब-कब किया यह बता दीजिए मेरे को। ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): आपने जो कहा है उसके अन्‍तर्गत मैंने निवेदन किया कि एक-एक का अगर आप पूछेंगे तो मैं पूरा ही आपके सामने यहां विवरण रख रहा हूं अगर आप चाहे तो पूरा एक-एक का मैं डिटेल दे सकता हूं। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अब आप काहे को डिटेल में जाने की बात कर रहे हैं? आपने तो विस्‍तृत जानकारी दे दी। ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): नहीं, यह चाहे तो मैं पूरा एक-एक करके पूरा बता सकता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: इतना लम्‍बा तो दे दिया। आज दिन तक आया ही नहीं इतना। इतनी लम्‍बी सूची कभी आयी ही नहीं।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): जिसके अन्‍तर्गत उस कार्य के अन्‍तर्गत पूरा उसमें ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, बैठिये। आपने काफी सूचनाएं उनको दे दीं। नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा।

श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): आप तो एक का ही बता दीजिए कि साहब आपने कब इसमें भुगतान किया इसको बता दीजिए।  आप तो एक बार का ही बता दीजिए कि कब भुगतान हुआ? एक आदमी का ही यह बता दीजिए मेरे को। आप तो केवल एक आदमी का ही बता दीजिए। ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): क्‍या चीज?

श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): फलोद्यान के लिए आपने कब भुगतान किया?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): एक आदमी हो तो, मैं तो पूरी सूची 400 पेज की, मैं आपको पढ़कर सुना दूं ?

श्री अध्‍यक्ष: एक-एक व्‍यक्ति का नाम तो दिया है आपको।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): यह 400 से ऊपर पेज की है। व्‍यक्तिगत, अब कोई जांच अगर करनी है, 400 पेज की है। जितने लाभार्थी है उसमें से स्‍पेसिफिक रेण्‍डम प्रणाली के आधार पर उसकी जांच की जाती है, उसके आधार पर हम इसकी जांच करवा सकते हैं और आप चाहे जो स्‍पेसिफिक बता दें, कोई एक व्‍यक्ति की हमारे यहां पर आवश्‍यकता है, उसकी जांच करवाकर मैं उसको देखकर आपको बता दूंगा।

श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): नहीं, मैं जांच की बात नहीं कर रहा हूं। मैं तो केवल यही निवेदन कर रहा हूं, मुझे एक आदमी का नाम बता दो, कब भुगतान किया उसका? ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा। आप स्‍थान ग्रहण करें, माननीय सदस्‍य।

श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): एक ही लाभार्थी का नाम बता दीजिए, जिसको आपने भुगतान किया ?

श्री अध्‍यक्ष: जहाजपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य। नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): इसकी पूरी सूची है।

श्री अध्‍यक्ष: सार्वजनिक निर्माण मंत्री। नहीं-नहीं राजस्‍व मंत्री। राजस्‍व मंत्री। राजस्‍व मंत्री।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज राजस्‍व मंत्रीजी का जन्‍म दिन भी है।

श्री अध्‍यक्ष: बधाई हो। आपको सम्‍पूर्ण सदन की और से जन्‍मदिन की बधाई।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप सभी का धन्‍यवाद और आपकी कृपा दृष्टि बनी रहे।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): बिना लड्डू के कोई बधाई दी जाती है क्‍या? लड्डू बटते हैं। दोनों पक्षों में बटते हैं। ... (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: अकाल पडा हुआ है।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): अकाल पडा हुआ है, अख़बार तो भरे हुए है बधाई से। ... (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): पहला सवाल तो यही है कि आप लड्डू खिलाओगे या नहीं?

श्री अध्‍यक्ष: यह क्‍या खिलाएंगे, पी.ए.डी. मिनिस्‍टर आप हैं, आप खिलाइये सबको।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप आसन से व्‍यवस्‍था दे रहे हैं तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज्ञा की पालना करेंगे। ... (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आसन ही व्‍यवस्‍था करेगा या आप भी अपने आप भी कुछ सोच लिया करो। ... (व्‍यवधान)

 

मेड़ता सिटी को जिले का दर्जा

 

65. श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा (मेड़ता): क्‍या राजस्‍व मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) राज्‍य में कितने नये जिले बनाने की सरकार की योजना है व इनको कब तक बना दिया जावेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

(2) क्‍या सरकार मेड़ता सिटी को जिला बनाने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं तो क्‍यों?

राजस्‍व मंत्री (श्री रामनारायण डूडी): (1) कोई संख्‍या निर्धारित नहीं है। नवीन जिलों के गठन के संबंध में दिनांक 18.3.2006 को अध्‍यक्ष, राजस्‍व मण्‍डल, अजमेर की अध्‍यक्षता में समिति का गठन किया गया है। समिति की रिपोर्ट प्राप्‍त होने पर ही नये जिले बनाने पर गुणावगुण के आधार पर विचार किया जा सकेगा।

(2) खण्‍ड संख्‍या-एक में उल्‍लेखित समिति की रिपोर्ट प्राप्‍त होने पर ही गुणावगुण के आधार पर निर्णय लिया जा सकेगा।

श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा (मेड़ता): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि यह समिति के गठन होने के बाद इसकी कितनी बैठकें हुईं और कब-कब बैठकें हुईं, इसकी रिपोर्ट बतायें। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अभी तो बनायी ही है कमेटी।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): कोई निश्चित अवधि तो आप बताओ। आपके कार्यकाल में रिपोर्ट ही नहीं आये तो फिर आप कैसे जिले बनाओगे?

श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा (मेड़ता): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि किन-किन नये जिलों के बनाने का यह प्रस्‍ताव रख रहे हैं?

श्री अध्‍यक्ष: अभी कह दिया न इन्‍होंने, जवाब दे दिया।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक फरवरी, 2002 के बाद में परिसीमन चुनाव आयोग का प्रतिबंध हटा था नये जिले बनाने का और करने का, उसके बाद के अन्‍दर और पहले से हमारे पास काफी जिला से संबंधित प्रार्थना पत्र आये हुए थे अलग-अलग जगह से और उनके बाद में एक समिति का गठन किया गया। फिर 18.3.2006 को एक समिति बनायी गयी और उस समिति में अध्‍यक्ष, राजस्‍व मण्‍डल, अजमेर, प्रमुख शासन सचिव, राजस्‍व विभाग, सदस्‍य है, प्रमुख शासन सचिव, वित्‍त सदस्‍य हैं और प्रमुख शासन सचिव, सामान्‍य प्रशासन विभाग, यह सदस्‍य, चेयरमैन रेवेन्‍यू बोर्ड की अध्‍यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया।

श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा (मेड़ता): बैठक हुई या नहीं हुई?

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): इसकी दो बैठकें हो चुकी हैं।


शिव/चौहान/11.40/1e/9.10.2006

 

और दो बैठकों के अंदर प्रथम बैठक 27 मार्च, 2006 को हुई और दूसरी बैठक 19.8.2006 को सम्‍पन्‍न हुई और इसमें रेवेन्‍यू बोर्ड के जितने भी प्रस्‍ताव आये या सरकार के पास सीधे प्रस्‍ताव आये कि अमुक जगह को जिला बनाया जाये, उन सब पर विचार किया जा रहा है और उनकी पूरी रिपोर्ट मंगाई जा रही है।

श्री अध्‍यक्ष: हां, कमेटी को रेफर कर दिया। वह सब कमेटी को रेफर कर दिये। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी: और कमेटी गठित कर दी है।

श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा : कमेटी निर्णय कब करेगी ? (व्‍यवधान) ....

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन अशोक कुमार नवलखा। (व्‍यवधान)...

श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा : अध्‍यक्ष महोदय, जवाब तो दिलाइये। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सुनवाई नहीं हुई। (व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: कमेटी को रेफर कर दिया। कमेटी की रिपोर्ट आयेगी, उसके बाद जिले बनेंगे। (व्‍यवधान) ... नहीं, कुछ नहीं । (व्‍यवधान) .. नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन श्री अशोक कुमार नवलखा।

श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा : रिपोर्ट कब आयेगी ? यह जवाब कब तक पेश करेंगे ? (व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा : माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से यह जानना चाहूंगा कि यह कमेटी का निर्धारित समय क्‍या है ? (व्‍यवधान) ...

श्री अध्‍यक्ष: आप बैठिये।

श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा : माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्रीजी से यह पूछना चाहता हूं कि यह अगली सरकार करेगी या यह सरकार करेगी ?

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन, कितनी बार कह दिया कि कमेटी को रेफर कर दिया, कमेटी बना दी, कमेटी की रिपोर्ट आयेगी, उसके अनुसार कार्य करेंगे। (व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा : यह सरकार करेगी या अगली सरकार करेगी? (व्‍यवधान)

श्री सांवरलाल : वसुन्‍धरा जी की सरकार करेगी ।  (व्‍यवधान) ....

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। सार्वजनिक निर्माण मंत्रीजी । (व्‍यवधान) श्री अशोक कुमार नवलखा।

जिला चित्‍तौड़गढ़ के धार्मिक/दर्शनीय स्‍थलों हेतु सड़क मार्ग

 

66.श्री अशोक कुमार नवलखा (निम्‍बाहेड़ा): क्‍या सार्वजनिक निर्माण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

(1) क्‍या सरकार की प्रमुख धार्मिक एवं दर्शनीय स्‍थलों को सड़क मार्ग से जोड़ने की योजना है ? यदि हां, तो इस वर्ष हेतु कितना बजट प्रावधान किया गया है? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍या सरकार निम्‍बाहेड़ा व छोटी सादड़ी तहसील के धार्मिक स्‍थानों को सड़क मार्गों से जोड़ने का विचार रखती है ? यदि हां, तो कौन-कौनसे धार्मिक स्‍थान चिन्हित किये गये ? इन स्‍थानों को कब तक सड़क से जोड़ दिया जायेगा?

सार्वजनिक निर्माण मंत्री (श्री राजेन्‍द्र राठौड़) : (1) जी हां। वर्ष 2006-07 में महत्‍वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटक स्‍थलों को सड़क से जोड़ने हेतु रुपये 20.00 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।

(2) जी हां। निम्‍बाहेड़ा व छोटी सादड़ी तहसील के धार्मिक स्‍थानों को सड़क मार्ग से जोड़ने का कार्य राज्‍य के उपलब्‍ध वित्‍तीय संसाधनों एवं प्राथमिकता पर निर्भर करता है।

श्री अध्‍यक्ष: आपने कौन-कौन से धार्मिक स्‍थान चिन्हित किये, यह बताये ही नहीं?

श्री अशोक कुमार नवलखा: माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं,  आपको इस बात के लिये तो धन्‍यवाद कि आपने धार्मिक एवं पर्यटन स्‍थलों को जोड़ने के लिये इस वर्ष 20 करोड़ रुपये का बजट रखा है और आपने खण्‍ड-2 में उत्‍तर दिया है कि एक तो मैंने पूछा था कि क्‍या सरकार निम्‍बाहेड़ा व छोटी सादड़ी के धार्मिक स्‍थानों को सड़क मार्ग से जोड़ने का विचार रखती है ? यदि हां, तो कौन-कौनसे धार्मिक स्‍थान चिन्हित किये गये ? एक तो माननीय मंत्री महोदय यह जो धार्मिक स्‍थान चिन्हित किये गये, कृपया वह बताने की कृपा करें कि आपने इस उत्‍तर में लिखा है कि सरकार के वित्‍तीय संस्‍थानों पर निर्भर करता है। जब आपने वित्‍तीय संसाधन इस बार 20 करोड़ रुपये बताये हैं तो मैं चाहूंगा कि 20 करोड़ में से निम्‍बाहेड़ा, छोटी सादड़ी विधान सभा क्षेत्र के लिये आप कितनी सड़कों का इसमें प्रावधान रखते हैं ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ : अध्‍यक्ष महोदय, जहां तक धार्मिक स्‍थानों का चयन करने का प्रकरण है। अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान तो एक ऐसी धरती है जहां घट-घट में राम भी है, ईश्‍वर भी है और धार्मिक स्‍थान भी हैं । अध्‍यक्ष महोदय, अगर हम बालाजी की बात भी करें तो करंट के बालाजी यहां हैं, लंगड़े बालाजी यहां हैं, घाट के बालाजी यहां हैं, पंचमुखी बालाजी यहां हैं, नहर के बालाजी यहां है, खड़े बालाजी यहां हैं, बैठे बालाजी यहां है ... (व्‍यवधान) ..

श्री अध्‍यक्ष: बालाजी को आप लंगड़ा तो मत करो कम से कम । (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ : नहीं, अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन कर रहा था कि धार्मिक स्‍थलों का अगर पूरा चयन करने की बात करें तो हर गांव में कोई न कोई धार्मिक स्‍थल है पर इसमें कोई शक नहीं कि कुछ हमारी धार्मिक मान्‍यताओं के आधार पर जहां बहुत बड़ी संख्‍या में धार्मिक लोग हैं उनको जोड़ने के लिये निश्चित रूप से पहली बार सरकार ने प्रावधान किया है। इसमें, अध्‍यक्ष महोदय, यही नहीं पिछली बार भी हमने इसमें कुछ राशि का प्रावधान किया था। पिछली बार 12 ऐसे स्‍थान चयनित किये और 7 करोड़ 52 लाख रुपये करके हमने इन धार्मिक स्‍थलों को जोड़ा और इस बार, अध्‍यक्ष महोदय, 50 ऐसे स्‍थान हैं, जिनके लिये 22 करोड़ की स्‍वीकृति हमने जारी कर दी है और निश्चित तौर पर सरकार की यह मान्‍यता है और इच्‍छा शक्ति भी है कि सरकार ऐसे धार्मिक स्‍थल, जो सड़क से जुड़े हुए नहीं हैं और जहां श्रद्धालु लोग ज्‍यादा जाते हैं उनका चिन्हितिकरण करके हम उनको शनै:-शनै: जैसे जैसे वित्‍तीय संसाधन उपलब्‍ध होंगे, हम उनको जोड़ेंगे।

श्री अशोक कुमार नवलखा : माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन कर रहा था निम्‍बाहेड़ा, छोटी सादड़ी मेरे विधान सभा की जो प्रमुख सड़कें थीं जैसे भम्‍भौरी से गंगेश्‍वर महादेव, पार्श्‍वनाथ भगवान का तीर्थ स्‍थान, बुलबुला महादेव आदिवासी क्ष्‍ज्ञेत्र का एक प्रमुख मंदिर है वह तथा निम्‍बाहेड़ा क्षेत्र के कनेरा से सीमला महादेव और 113 बाड़ी से रूसी रानी महल तक, यह ऐसे तीर्थ स्‍थान और ऐसे धार्मिक स्‍थल हैं जहां प्रतिवर्ष मेले लगते हैं और हजारों की संख्‍या में लोग आते हैं। इस प्रकार की यह सड़कें हैं माननीय मंत्रीजी। ..(व्‍यवधान) ...

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछें भाषण न दें।

श्री अशोक कुमार नवलखा : यह निवेदन कर रहा हूं कि इन धार्मिक स्‍थलों को भी इसमें चिन्हित किया जावे।

श्री अध्‍यक्ष: कह तो दिया । उन्‍होंने बता दिया न । (व्‍यवधान) ...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ : निश्चित रूप से छोटी सादड़ी में भी काफी ऐसे स्‍थान हैं, मैं इनसे चर्चा करके जहां बड़ी संख्‍या में श्रद्धालु जाते हैं, उनको करवायेंगे। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। श्री प्रमोद जैनभाया । (व्‍यवधान) ..

श्री सी.डी.देवल : अध्‍यक्ष महोदय, मेरा भी एक प्रश्‍न है। (व्‍यवधान) ..माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा के पटल पर माननीय देवस्‍थान मंत्रीजी ने एक धाणेश्‍वर महादेव की सड़क जोड़ने का आश्‍वासन दिया था। मेरी बात तो सुनिये। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: डॉ0 चन्‍द्रशेखर बैद। (व्‍यवधान)

श्री सी.डी.देवल: विधान सभा में देवस्‍थान मंत्रीजी ने आश्‍वासन दिया था कि तीन कि.मी. धाणेश्‍वर महादेव को जोड़ दिया जायेगा, तो इसको कब तक जोड़ दिया जावेगा ? फिर मंत्रीजी यहां विधान सभा में आश्‍वासन ही क्‍यों देते हैं ? (व्‍यवधान) इसके अंदर देवस्‍थान का वह मंदिर नहीं आया। (व्‍यवधान) ... 

श्री अध्‍यक्ष: आपका अलग से प्रश्‍न है बूंदी से आने वाली माननीया सदस्‍या। (व्‍यवधान) अंकित नहीं हो।

श्रीमती ममता शर्मा :  ***

श्री सी.डी.देवल : ***

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया। रायपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, कृपया सदन का समय खराब नहीं करें । मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया। डॉ0 चन्‍द्रशेखर बैद। (व्‍यवधान) ...

श्री सी.डी.देवल : ***

डॉ0 चन्‍द्रशेखर बैद : ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ : ***

श्री सी.डी.देवल : ***

श्री अध्‍यक्ष: प्रमोद जैन भाया कहां हैं ? (व्‍यवधान) ­­­... प्रमोद जैन भाया, प्रश्‍न पूछिये ना । (व्‍यवधान)...

भ्रूण हत्‍या पर रोकथाम हेतु कार्य योजना

66-क.  श्री प्रमोद जैन भाया (बारां) एवं डॉ0 चन्‍द्रशेखर बैद(तारानगर) : क्‍या चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

(1) प्रदेश में वर्ष 2004 से अब तक कितने भ्रूण हत्‍या के मामले प्रकाश में आये? वर्षवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) उक्‍त हत्‍याओं में किन-किन चिकित्‍सकों/चिकित्‍सालयों के विरूद्ध किन-किन धाराओं में कहां-कहां रिपोर्ट दर्ज करवाई गई एवं सरकार द्वारा अब तक क्‍या कार्यवाही की गयी ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) सरकार द्वारा उक्‍त प्रकार के कृत्‍यों को रोकने हेतु क्‍या कारगर कदम उठाये गये ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(4) विभागीय आदेशों के बाद भी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने में विलम्‍ब करने हेतु कौन-कौन मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी दोषी हैं ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(5) क्‍या यह सही है कि वर्ष 2006 में एक निजी टी.वी.चैनल द्वारा कन्‍या भ्रूण हत्‍या से संबंधित मामलों में नर्सिंग होम/चिकित्‍सालयों व चिकित्‍सकों को चिन्हित किया गया था ?

(6) क्‍या यह सही है कि उक्‍त निजी टी.वी.चैनल द्वारा सरकार को साक्ष्‍य उपलब्‍ध करा दिये गये हैं ? यदि हां, तो कब ?

(7) क्‍या यह सही है कि उक्‍त साक्ष्‍यों को सही मानते हुए सरकार द्वारा चिन्हित डाक्‍टरों व चिकित्‍सा संस्‍थाओं के विरूद्ध कार्यवाही की गयी है ? यदि हां, तो क्‍या व उक्‍त कार्यवाही के क्‍या परिणाम रहे ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(8) क्‍या यह सही है कि सरकार द्वारा उक्‍त प्रकरण में लिप्‍त चिकित्‍सकों का पंजीयन निलम्बित करने हेतु मेडिकल काउन्सिल ऑफ इण्डिया को अनुरोध पत्र लिखा गया है ? यदि हां, तो पत्र की प्रति सदन की मेज पर रखें तथा नहीं तो क्‍यों?

(9) क्‍या उक्‍त निजी टी.वी.चैनल कर्मियों द्वारा इस कुकृत्‍य को उजागर करने के लिये सरकार उन्‍हें पुरस्‍कृत करने का विचार रखती है ? यदि हां, तो कब तक व नहीं तो क्‍यों ?

चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री (डॉ0 दिगम्‍बर सिंह) : (1) प्रदेश में वर्ष 2004 एवं 2005 में इस प्रकार का मामला प्रकाश में नहीं आया है। वर्ष 2006 में उदयपुर की फतहसागर झील में तीन मृत कन्‍या भ्रूण पाये गये हैं, जिस संबंध में पुलिस द्वारा अनुसंधान किया जा रहा है।

(2) मृत कन्‍या भ्रूण मिलने के क्रम में मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी, उदयपुर द्वारा निम्‍न कार्यवाही की गयी :-

-  अपर्णा हास्पिटल एवं डायग्‍नोस्टिक सेन्‍टर, उदयपुर में अधिनियम के अन्‍तर्गत अभिलेख संधारण में कमियां पाये पाये जाने के कारण संस्‍थान की सोनोग्राफी मशीन एवं एमटीपी रजिस्‍ट्रेशन निलम्बित किया गया।-      कस्‍तूरबा मातृ मंदिर, उदयपुर में रिकार्ड का संधारण सही नहीं पाये जाने के कारण संस्‍थान की सोनोग्राफी मशीन को सील एवं सीज किया गया एव एमटीपी रजिस्‍ट्रेशन निलम्बित किया गया। उक्‍त संस्‍थान के विरूद्ध पी सी पी एन डी टी एक्‍ट, 1994 के अन्‍तर्गत इस्‍तगासा दायर कर दिया गया है।

- महावीर हॉस्पिटल उदयपुर द्वारा अधिनियम के विरूद्ध सोनोग्राफी करके एम टी पी करने के कारण संस्‍थान की सोनोग्राफी मशीन को सील एवं सीज किया गया एवं एम टी पी रजिस्‍ट्रेशन निलम्बित किया गया। उक्‍त संस्‍थान के विरूद्ध पी सी पी एम डी टी एक्‍ट, 1994 के अन्‍तर्गत एफ आई आर दर्ज करा दी गयी है।

(3) विभाग द्वारा कन्‍या भ्रूण हत्‍या रोकने हेतु विज्ञापनों, होर्डिंग्‍स, बैनर्स, पोस्‍टर्स आदि के द्वारा जन जन में समग्र प्रचार प्रसार किया जा रहा है। विभाग द्वारा भ्रूण हत्‍या हेतु लिंग चयन की प्रवृत्ति को रोकने के लिये केन्‍द्र सरकार द्वारा गर्भ धारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 दिनांक 1.1.96 से प्रभावशील किया। राज्‍य सरकार ने इस अधिनियम को राजस्‍थान प्रदेश में दिनांक 1.1.96 से लागू किया है। विभाग द्वारा उक्‍त अधिनियम की क्रियान्विति के संबंध में की गई कार्यवाही का विवरण परिशिष्‍ट-1 पर उपलब्‍ध है।

(4) विभागीय आदेशों के बाद भी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने में विलम्‍ब करने हेतु कोई भी मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी दोषी नहीं है, क्‍योंकि टी.वी.चैनल राष्‍ट्रीय सहारा समय द्वारा प्रकरण से संबंधित असम्‍पादित सी डी, पूर्ण साक्ष्‍य, दस्‍तावेज गवाहों के नाम, पते आदि अभी तक उपलब्‍ध नहीं करवाये जाने के कारण इस्‍तगासा एवं एफ आई आर दर्ज करवाने में विलम्‍ब हो रहा है।

(5) जी हां।

(6) उक्‍त निजी टी वी चैनल द्वारा सरकार को पूर्ण साक्ष्‍य उपलब्‍ध नहीं करवाये गये हैं। टी वी चैनल द्वारा वर्ष 2006 में गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 एवं गर्भ का चिकित्‍सकीय समापन अधिनियम 1971 के प्रावधानों की अवहेलना करने से संबंधित उजागर किये गये 55 सरकारी/निजी चिकित्‍सकों एवं एक प्रसाविका में से अभी तक केवल 20 सरकारी/निजी चिकित्‍सकों की असम्‍पादित सी डी उपलब्‍ध करवाई गई है।

 

महेन्‍द्र/चौहान/1f/1150/09102006

 

उक्‍त चैनल द्वारा शेष 35 सरकारी व निजी चिकित्‍सकों से सम्‍बन्धित असम्‍पादित सी.डी. अभी तक उपलब्‍ध नहीं करवायी गयी है अथा साक्ष्‍य के रूप में सभी सरकारी एवं निजी चिकित्‍सकों के सम्‍बन्‍ध में पूर्ण साक्ष्‍य, दस्‍तावेज, गवाहों के नाम, पते आदि अभी तक उपलब्‍ध नहीं करवाये गये हैं।

(7) टी.सी. चैनल द्वारा दिनांक 05.04.2006 से 23.04.2006 एवं 13.06.2006 को 'कोख में कत्‍ल' नाम शीर्षक से प्रसारित समाचारों के आधार पर विभाग द्वारा गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 के अन्‍तर्गत 55 सरकारी एवं निजी चिकित्‍सकों एवं एक प्रसाविका के विरुद्ध कार्यवाही की गई है। विभाग द्वारा की गई कार्यवाही का विवरण परिशिष्‍ट-2 एवं परिशिष्‍ट-3 पर उपलब्‍ध है।

(8) जी नहीं। गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 की धारा 23 (2) जो कि निम्‍न प्रकार उद्धत है:-"The name of the registered medical practitioner shall be reported by the Appropriate Authority to the State Medical Council concerned for taking necessary action including suspension of the registration if the charges are framed by the court and till the case is disposed of and on conviction for removal of his name from the register of the Council for a period of five years for the first offence and permanently for the subsequent offence."

इसको ध्‍यान में रखते हुए चूंकि अभी तक किसी भी चिकित्‍सक के खिलाफ कोर्ट में चार्ज फ्रेम नहीं हुआ है इसलिए निदेशालय द्वारा राजस्‍थान मेडिकल काउंसिल को चिकित्‍सकों के पंजीयन निलम्बित करने हेतु पत्र नहीं लिखा गया है परन्‍तु निदेशालय द्वारा सम्‍बन्धित मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों को 20 चिकित्‍सकों के विरुद्ध अधिनियम, 1994 के अन्‍तर्गत इस्‍तगासा दायर करने एवं 35 सरकारी एवं निजी चिकित्‍सकों के विरुद्ध अधिनियम, 1994 के अन्‍तर्गत इस्‍तगासा दायरकरने तथा एम.टी.पी. एक्‍ट, 1971 के अन्‍तर्गत एफ.आई.आर. दर्ज कराने सम्‍बन्‍धी पत्र क्रमांक 494 दिनांक 04.08.06 एवं क्रमांक 495 दिनांक 04.08.06 की प्रति राजस्‍थान मेडिकल काउंसिल को सूचनार्थ एवं आवश्‍यक कार्यवाही हेतु भिजवायी गयी है। उक्‍त दोनों पत्रों की प्रति परिशिष्‍ट-4 एवं परिशिष्‍ट-5 पर उपलब्‍ध है।

यह उल्‍लेखनीय है कि राजस्‍थान मेडिकल काउंसिल द्वारा उक्‍त चिकित्‍सकों से सम्‍बन्धित असम्‍पादित सी.डी. प्राप्‍त कर अपनी कमेटी में प्रकरण की जांच कर के इंडियन मेडिकल काउंसिल के अधिनियम के नियम 2002 के चैप्‍टर 8 (5) के अन्‍तर्गत 7 चिकित्‍सकों को सोनोग्राफी और गायनी के कार्य पर 6 महीने या जांच पूर्ण होने तक के लिए प्रतिबन्‍ध लगाया है जिसका विवरण परिशिष्‍ट-2 एवं परिशिष्‍ट-3 पर उपलब्‍ध है।

(9) टी.वी. चैनल द्वारा उजागर किये गये प्रकरणों के सम्‍बन्‍ध में अभी अनुसंधान जारी है तत्‍पश्‍चात् ही इस सम्‍बन्‍ध में विचार किया जावेगा।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय द्वारा खण्‍ड चार का जो जवाब दिया गया है वह बिलकुल तथ्‍यों के परे है। आपने कहा है कि -विभागीय आदेशें के बाद भी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने में विलम्‍ब करने हेतु कोई भी मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी दोषी नहीं है क्‍योंकि टी.वी. चैनल राष्‍ट्रीय सहारा समय द्वारा प्रकरण से सम्‍बन्धित असम्‍पादित सी.डी. या साक्ष पेश नहीं कराये गये हैं। जबकि खुद यह कार्यालय उप-मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी द्वारा थाने को जो रिपोर्ट लिखी गयी है, यह रिपोर्ट लिखी गयी है 29 तारीख को और वह जब जब यह प्रश्‍न तारांकित में लिस्‍टेड हो गया और उसमें इन्‍होंने स्‍पष्‍ट रिपोर्ट में थाने में सी.डी. और यह सब कापियां उपलब्‍ध करायी हैं तो जब सी.डी. और यह वहां है और यह चीज निदेशक के पत्र क्रमांक 2006/594 के द्वारा 04.08.06 को ही सी.एम.एण्‍ड एच.ओ. बारां को भ्जिवा दिये थे तो जब 04.08.06 को यह सी.डी. और यह सब बारां सी.एम. एण्‍ड एच.ओ. को जा चुकी थी तो 29 तारीख को एफ.आई.आर. दर्ज के लिए क्‍यों लिखी, इतने दिन तक दोषी जो अधिकारी है उसके लिए सरकार क्‍या कार्यवाही करेगी? और सदन में जो गलत तथ्‍य पेश किये गये हैं, इसके लिए आप क्‍या कार्यवाही करेंगे? कृपया सदन को अवगत करावें।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी से जुड़ा हुआ सवाल है, में साथ ही पूंछ लेता हूं।

एक तो आज 2004, जनवरी से लेकर अब तक आपने तीन सवालों के जवाब दिये हैं, 2004 में, 2005 में और 2006 बजट तक, आपने यह स्‍वीकार किया है कि कन्‍या भ्रूण हत्‍या राजस्‍थान राज्‍य में नहीं हो रही है। पहली बार आपने 7 अप्रैल, 2005 को इस पवित्र सदन में यह स्‍टेटमेण्‍ट दिया था, उसके बाद जो पीसीपीएनडीटी एक्‍ट है, 1994 अमेन्‍डेंट इन 2002, उसको आपने ध्‍यान से पढ़ा ही नहीं क्‍योंकि उसके अन्‍दर जो क्‍लॉज दे रखा है, क्‍लॉज नम्‍बर 16 (ए) उसमें साफ लिख रखा है कि स्‍टेट सुपरवाइजरी बोर्ड का गठन किया जायेगा और उस स्‍टे सुपरवाइजरी बोर्ड के अध्‍यक्ष कौन होंगे The Minister-in-Charge of Health and Family Welfare. अब इसका जनवरी, 2004 के बाद पहली बैठक आपने इसकी कब बुलायी? आपने इसकी पहली बैठक बुलायी 22.05.2006 को और उस बैठक में आपकी जो सीन्सियरिटी है पीसीपीएनडीटी एक्‍ट के प्रति वो इससे जाहिर होती है कि आपकी ही पार्टी की तीन महिला एम.एल.ए. साहिबान जो इसकी सदस्‍य हैं, तीनों ही उस मीटिंग के अन्‍दर एपसेण्‍ट थीं। साथ ही में मैं आपसे यह भी निवेदन करना चाहता हूं कि जो डिस्ट्रिक्‍ट एडवाइजरी कमेटीज हैउसका गठन अभी तक नहीं किया गया। ...(व्‍यवधान)... आपने पीसीपीएनडीटी एक्‍ट के अन्‍दर जो फार्म एफ भरते हैं ---

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): उस दिन हमारी महिला और बाल विकास कमेटी की बैठक थी और दोनों का टाइम एक क्रैश कर रहा थ इसकी वजह से नहीं आये थे हम।

श्री अध्‍यक्ष: आप थीं क्‍या उसमें एक? ...(व्‍यवधान)... आप भी हो क्‍या?

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): फार्म है, आप तो गायनोको‍लोजिस्‍ट हो, आप के यहां सारे फार्म एफ भरे जाते हैं, इसकी सख्‍ती से पालना आज तक नहीं की गयी ---

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिये।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): और लास्‍ट क्‍वेश्‍चन यह पूछ रहा हूं कि जो टी.वी. चैनल पर आपने कहा कि हम को सूचना उपलब्‍ध नहीं करायी, आपको 20 सी.डी. जो ओरीजिनल थीं, अभी तक उपलब्‍ध करा दी गयी हैं। उस 20 में से आपने कितनी कार्यवाही की? सिर्फ सात पर आपने कार्यवाही की। ऐसा क्‍यों?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य वैसे तो मेरे साथी चिकित्‍सक भी हैं पर ---

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहले मेरा भी जवाब दें, हुकुम, जिसमें सी.डी. आपको डेढ़ महीने पहले मिल गयी, रिपोर्ट भी नहीं की गयी और आप कह रहे हैं कि विभाग को सी.डी. नहीं मिली। गलत तथ्‍य दे रहे हैं आप सदन को।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैं आपको कोई गलत बात सदन में नहीं कह रहा हूं और आप अपनी गलत बात को सही साबित करने की कोशिश गलत ढंग से कर रहे हैं। मेरा सदन में ...  

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): या तो आपके यह विभाग के लैटर गलत हैं।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): बिलकुल सही हैं लैटर, बिलकुल गलत नहीं हैं।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): इसमें लिखा हुआ है सी.डी. और यह सब पेश कर रखी है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): लैटर गलत नहीं हैं। ...(व्‍यवधान)... लैटर भी गलत नहीं हैं, मेरी बात भी गलत नहीं है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको यह निवेदन करना चाहता हूं कि पहली बार राजस्‍थान में इस सरकार ने इस एक्‍ट को इतनी सख्‍ती से लागू किया, इतने एक्‍शंस हुए हैं, सरकार तो इससे पहले भी कर रही है। आज तक भ्रूण हत्‍या का प्रकरण गत जो सरकार थी उसके समय पर एक भी उजागर हुआ हो, एक पर भी एक्‍शन हुआ हो, ऐसा तो नहीं है ... 

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): टी.वी. चैनल में आने के पहले एक भी केस आपने दर्ज नहीं किया।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): आप मेरी बात सुन लें, माननीय सदस्‍य। ...(व्‍यवधान)... माननीय सदस्‍य, मेरी बात सुन लें। यह टी.वी. चैनल से पहले भी हमने एक्‍शंस लिये हैं, वह भी मैं आपको पहले इस सदन में बता चुका हूं और आज भी कहता हूं कि यह टी.वी. चैनल पर जो स्टिंग आपरेशन हुआ उससे पहले हमने एक्‍शंस लिये हैं और उसमें दो तो भरतपुर के इंस्टिट्युशन थे, जयपुर का एक इंस्टिट्युशन था, उसके खिलाफ हमने पहले भी एक्‍शन लिया, ऐसा नहीं है कि टी.वी. स्टिंग आपरेशन से पहले हमने इसमें कोई एक्‍शन नहीं लिये।

मैं आपसे निवेदन करना चाह रहा हूं कि ऐसा नहीं है कि ढ़ाई साल में यह लिंग परीक्षण का और यह काम शुरू हुआ हो या यह जो भ्रूण हत्‍या का काम शुरू हुआ हो, आपकी सरकार में तो बहुत लम्‍बे समय तक इतना बावेला मचा था, मुझे ध्‍यान में आपके ही एक साथी विधायक के घर में उनके परिवार में भ्रूण हत्‍या पुश्‍तैनी मतलब पीढि़यों से होती आयी हैं, आप इस चीज को ---

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या बात है, वो भ्रूण हत्‍या नहीं थी, वो जन्‍म के बाद हत्‍या थी इसलिए भ्रूण हत्‍या नहीं थी वो।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): वो फीमेल फीटिसाइड था वो।

श्री अध्‍यक्ष: वो अलग बात है, इट अज डिफरेंट।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, फीमेल  फीटिसाइड था।

मैं यह कह रहा हूं कि आज जितना लिंगानुपात अभी जो डीविएट हुआ है, ऐसा नहीं है क्‍योंकि इस राजस्‍थान की आजादी के बाद कितने साल आपकी सरकार सत्‍ता में रही है ...(व्‍यवधान)...

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): हमारी बात कर रहे हो, आप अपनी तो बताओ। आप यह बताइये, मंत्री महोदय।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): इसमें जो डिले हुआ है।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): जी मैम।

 

Ars/usc/1200/09102006/1g/1

 

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्री जी, मेरा एक आब्‍जर्वेशन है। प्‍लीज, मेरा आब्‍जर्वेशन यह है कि आपने निलम्बित तो कर दिया, जो सरकारी सेवा में थे उन्‍हें निलम्बित तो कर दिया। न एफ आई आर लॉज करवाई, न उनके कार्य पर रोक लगाई। आज भी वह काम तो कर रहे हैं ...(व्‍यवधान)

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, हमने एफ आई आर भी लॉज करवाई है...

श्री अध्‍यक्ष: आपने रिपोर्ट किया है नहीं, नहीं, नहीं दिया है। 

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): नहीं, मैं वह निवेदन कर रहा हूं ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: और आपने उनको काम करने से रोक नहीं लगाई ...(व्‍यवधान)

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): सीडी प्राप्‍त नहीं हुई इसलिए एफ आई आर दर्ज नहीं की गई जबकि एफ आई आर आपके डिप्‍टी सी एम एच ओ द्वारा पुलिस थाना....

श्री अध्‍यक्ष: इतना भंयकर अपराध है, इतना भंयकर पाप है यह और आपने उनके काम पर रोक नहीं लगाई। आपने उनकी एफ आई आर लॉज नहीं करवाई, इस्‍तगासा दर्ज नहीं किया।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको निवेदन करना चाह रहा हूं कि जो चिकित्‍सक लिंग परीक्षण में इनवाल्‍व थे ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप अब स्‍थान ग्रहण कर लें, शांति से सुनें उन्‍हें क्‍या कह रहे हैं।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): जिनके यहां पर सोनोग्राफी की मशीनें थीं ...(व्‍यवधान)

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी टी वी चैनल की रिपोर्ट पर ...

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण करें।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप सदन को गुमराह कर रहे हैं। आपको इस्‍तीफा देना चाहिए। जिस तरह से यहां पर हालत हो रही है। इसी टी वी चैनल की रिपोर्ट पर माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गुजरात गवर्नमैंट ने और मध्‍यप्रदेश .....

श्री अध्‍यक्ष: आप उस कमेटी में थीं क्‍या? ...(व्‍यवधान) अटेंड क्‍यों नहीं किया, आप उस कमेटी में थीं ? उस कमेटी में तो आईं ही नहीं आप।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): क्‍या, क्‍या नहीं मैं तो नहीं थी। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं नहीं थी मेरा दूसरी जगह हो गया था लेकिन माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी टी वी चैल की रिपोर्ट पर गुजरात गवर्नमैंट ने और मध्‍यप्रदेश गवर्नमैंट ने दोनों ने वहां हास्पिटल सील किए थे लेकिन आपने एक्‍शन क्‍यों नहीं लिया और चूंकि एक सरकारी अधिकारी का भाई उसमें इनवाल्‍व था इसलिए आपने पूरे सबूल डेस्‍ट्राय करने का मौका दिया। मुझे बताइये आपने क्‍यों नहीं एक्‍शन लिया अभी तक ?

श्री अध्‍यक्ष: आप एक पर्टिकूलर केस की बात कर रही हैं, मैं जनरल बात कह रही थी उसका जवाब आने नहीं दिया, खड़ी हो गईं।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जनरल बात ही है।

श्री अध्‍यक्ष: आई सैड सिट डाउन। जो मैंने आब्‍जरवेशन किया उसके बारे में जवाब दे रहे हैं आप।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आपने तो इनकी टाँग खींच दी। क्‍या जवाब है इनके पास कोई जवाब नहीं है इनके पास। लीपापोती, आपकी सरकार ने यह किया, आपकी सरकार ने वह किया, आपके जमाने में वह हुआ ...(व्‍यवधान) बात कर रहे हैं यहां बैठे हुए।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): हमारे पास पूरा जवाब है।

श्री अध्‍यक्ष: आप उनका जवाब सुनें। ...(व्‍यवधान)

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): और यह अपने लोगों को बचाते रहे, इस विषय को इन्‍होंने गंभीरता से नहीं लिया और जिन लोगों ने टी वी चैनल बनाया उन लोगों के खिलाफ कार्यवाही करने को तैयार हो गये  ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं होगा, केवल मंत्री जी बोलेंगे उनका अंकित होगा।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप मंत्री जी को सुन ही नहीं रहे हैं, आप सुन लीजिए पहले उसके बाद कोई आपको पूछना हो पूछ लीजिएगा। हां, वह बोल रहे हैं।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, इसमें दो तरह के प्रकरण थे। कुछ लोग जो केवल अल्‍ट्रासाउंड करते थे, जो लिंग परीक्षण के लिए ऐसे लोग पकड़े गये उनका कोर्ट में सीधा इस्‍तगासा करने के लिए हमने भी डाइरेक्‍शंस दिए, उनकी सोनोग्राफी की मशीनें सीज कीं और जो लोग ....

श्री अध्‍यक्ष: कितनी मशीनें सीज की हैं, यह बता दो आप टोटल ?

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): ***

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप सुनें तो सही उन्‍हें पहले। आप बोलें।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, रिपोर्ट आपके पास में आलरेडी है। इसमें सारे जो लोग एम टी पी करते थे ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: इस में हंसने की क्‍या बात हुई ?

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

श्री अध्‍यक्ष: यह तो सूचना है, पब्लिश की है उन्‍होंने । हंसने की क्‍या बात है ? ...(व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): ...(व्‍यवधान) बात अलग है, बाकी जवाब मेरे पास है । 

श्री अध्‍यक्ष: यह परम्‍परा इस सदन में सदैव से चली आ रही है कि इन्‍फार्मेशन मंत्री को सप्‍लीमेंट होती रही है। यह हमेशा की परम्‍परा रही है और नियमों में है। ...(व्‍यवधान) 

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 14 डाक्‍टर्स को सस्‍पैण्‍ड किया है। ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप सुन नहीं रहे हैं,  इनका जवाब तो सुन लीजिए । ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): ***

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): ***

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, 14 गवर्नमेण्‍ट के डाक्‍टर्स को ....

श्री अध्‍यक्ष: एक सैकिण्‍ड । ...(व्‍यवधान) .... बीच में मत बोलिये । वैसे प्रश्‍न काल खतम हुआ, लेकिन चूंकि यह इतना महत्‍वपूर्ण सवाल है और इतना जिसे कहना चाहिए पाप, इतना घृणित काम है कि मैं मंत्री जी से निवेदन कर रही हूं कि इन बातों पर...

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): ये सुनना नहीं चाहते ।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, यह सुनेंगे। अब आप जवाब दे दें।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: यह गलत बात है। (अध्‍यक्षपीठ द्वारा हाथ के इशारे से अंकित नहीं करने के निर्देश जारी)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): संतरी तो बने बनाये आप है, जबर्दस्‍ती हल्‍ला क्‍यों करते हो ? ...(व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): ***

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आप के माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि यह स्टिंग आपरेशन हुआ था जिस में 18 केस दर्ज हुए थे उस की जांच आगे इसलिए नहीं बढ़ पा रही कि स्टिंग आपरेशन करने वाले व्‍यक्ति का बयान हमने दसों बार सूचना देने के बाद भी बयान नहीं हुए। जिस महिला को उन्‍होंने दिखाया वह महिला आज दिन तक भी पेश नहीं हुई, उस के बयान नहीं हुए। फिर जो उन्‍होंने सी डी पेश की वह कटिंग की हुई है, हमने पूरी सी डी मांगी जिस में किसी भी प्रकार से कटिंग नहीं हो तब जाकर एफ एस एल में उस की जांच होगी।  ये तीनों चीजें उपलब्‍ध नहीं होने के कारण हम इस जांच की प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं । इसमें दोष हमारा नहीं है। स्टिंग आपरेशन करने वालों को जो चीजें हमें उपलब्‍ध करानी चाहिए, आज की तारीख तक हमें उपलब्‍ध नहीं है।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): ***

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप मंत्री जी का जवाब तो सुन लीजिए, मंत्री जी का जवाब तो सुन लें।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): आपने मुझे निर्देश दिया। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि चौदह डाक्‍टर्स को सस्‍पैण्‍ड किया, एक ए एन एम को सस्‍पैण्‍ड किया, छह सोनोग्राफीकी मशीनें सीज कीं....

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ***

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): चौदह सोनोग्राफी की क्लिनिक के रजिस्‍ट्रेशन कैन्सिल किये, सस्‍पैण्‍ड पाँच किये, आपरेशन थियेटर जो इसमें एम टी पी इन्‍वाल्‍व थे उन को सीज किया, इन्‍स्‍ट्रूमैंट आफ दी इंस्‍टीट्यूशंस, चार ऐसे थे जिनमें इन्‍स्‍ट्रूमैंट थे उनको सीज किया, रजिस्‍ट्रेशन नौ एम टी पी सैण्‍टर्स के हमने कैन्सिल किये। एफ आई आर हमनें बीस डाक्‍टर्स के और एक ए एन एम के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराई। चार कोर्ट में सीधे हमने केस इसमें पी एम डी टी एक्‍ट में चार्ज लगा दिए और हमने .....

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): ***

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): ***

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं आपको एक एक एफ आई आर....

श्री अध्‍यक्ष: गृह मंत्री जी कुछ कह रहे हैं सुन लीजिए उन्‍हें पहले ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य, गृह मंत्री जी का जवाब सुन लें, गृह मंत्री जी कुछ कह रहे हैं।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, 18 एफ आई आर दर्ज हुई हैं, एक एक का मैं नाम और नम्‍बर बताने को तैयार हूं। झालवाड़ में 182....

श्री अध्‍यक्ष: ना, ना, नाम मत बताइये। आप तो केवल ........

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): ***

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): यह 18 सबसे पहले दर्ज हुए हैं लेकिन इनके दर्ज मुकदमों की कार्यवाही तीन कारणों से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं ।

 

vns/usc/12.10/1h/9.10.2006

 

मैं चाहता हूं कि वह हमें यह उपलब्‍ध कराएं हम निश्चित रूप से उनके खिलाफ कार्यवाही करेंगे। जिस महिला को उन्‍होंने दिखाया, महिला के बयान तो हों। बस महिला को सामने दिखाकर उन्‍होंने स्टिंग आपरेशन किया, उसके बयान आज दिन तक नहीं हुए..

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): किसने यह स्टिंग आपरेशन किया वह स्‍वयं बयान देने नहीं आयी है और उन्‍होंने जो सीडी उपलब्‍ध करायी वह बंटी हुई है टुकड़ों में। हमने उसकी ओरिजनल सीडी मांगी थी जिसमें बिना कटिंग के हो तब तो एफ एस एल में उसकी जांच होकर पता लगेगा। एफ एस एल में जांच के लिये वह ओरिजनल सीडी अभी तक नहीं मिल पा रही है। हम बार-बार हमारी तरफ से प्रयास कर रहे हैं। उनको कई बार हमने सूचना दी है यह तीन चीजें हमें उपलब्‍ध करा दें हम निश्चित रूप से इन 18 मुकदमों का फैंसला करके जो भी अपराधी होगा इसमें उसको सज़ा देंगे। पर जब तक हमको कानूनी जा प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है वह पूरी नहीं होती है तो किसी किसी के खिलाफ कोई एक्‍शन लेने की स्थिति में कानूनन हमको यह अधिकार प्राप्‍त नहीं है। तीन चीजें आज भी मैं सदन के सामने, आप सबके सामने कह रहा हूं उपलब्‍ध हो जाएं, स्‍वयं के बयान उपलब्‍ध हो जाएं जिन्‍होंने स्‍वयं स्टिंग आपरेशन किया। जिस महिला को उन्‍होंने बात करते हुए दिखाया उस महिला के बयान हो जाएं और हमें कटिंग हुए बिना पूरी सीडी मिल जाए तो निश्चित रूप से जो भी अपराधी होगा उसमें खिलाफ कार्यवाही कर देंगे।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): ***

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो रहा है। अंकित नहीं हो रहा है। माननीय सदस्‍यगण..(व्‍यवधान) हिण्‍डोली से आने वाले माननीय सदस्‍य, अंकित नहीं हो रहा है। अंकित नहीं हो रहा है।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण करें। दीजिये मंत्रीजी। (व्‍यवधान) स्‍थान ग्रहण करें एक बार। आप कृपया स्‍थान ग्रहण करें।

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा):  ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, मान लीजिये स्टिंग आपरेशन जिसने किया है वह नहीं आयेगी और कोई बयान आपको नहीं देगी, आपके पास कोई ऐसी..(व्‍यवधान) बीच में नहीं। पहले बैठे आप। तो मैं आपसे निवेदन कर रही हूं कि आपके पास सी आई डी है। हर शहर में मालूम है कि किस क्लिनिक के अन्‍दर कौन डाक्‍टर यह काम करता है यह सबको मालूम है तो आप अपनी सी आई डी के जरिये भी तो इस काम को करवा सकते हैं। क्‍योंकि यह इतना भयंकर अपराध है कि इसके नतीजे बहुत खराब आयेंगे। कुछ सालों बाद भयंकर नतीजे होंगे इसके इसलिये आपप अपने लेवल के ऊपर सपोज करिये स्टिंग आपरेशन करने वाली नहीं आती, सीडी उपलब्‍ध नहीं होती तो क्‍या इन लोगों को ऐसे ही छोड़ दोगे आप जिन्‍होंने ऐसा भयंकर अपराध किया है। आप इस चीज को देखें।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): ***

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी भावना का सम्‍मान करता हूं और सदन की भावनाओं का सम्‍मान कर रहा हूं ...

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): ***

श्री अध्‍यक्ष: अब आप प्‍लीज बात का जवाब तो आने दें। ओफ ओह हद हो गयी क्‍या करूं मैं आपके आगे। हद हो गयी।(व्‍यवधान) क्‍या ? जो जवाब देने के लिये खड़े हो रहे हैं आप बीच में ही खड़े हो जाते हैं। मैंने बात पूछी वह उसका जवाब दे रहे हैं और आप बीच में खड़े हो रहे हैं।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): ***

श्री अध्‍यक्ष: अब आप प्‍लीज। सवाल होने से ही नहीं होता है कुछ भी..(व्‍यवधान) शांति से सुनें।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी भावना और सदन के सभी माननीय सदस्‍यों की भावना का पूरा सम्‍मान कर रहा हूं­­

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): ***

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अपराधी को दण्‍ड देना मेरा धर्म है मैं उसके लिये नकार नहीं रहा हूं पर मुझे जो अपनी कानूनी प्रक्रिया पुलिस के अन्‍दर दर्ज मुकदमों में जो कार्यवाही करने में मुझे अड़चन आ रही है वह केवल मैंने कहा है। मैंने यह नहीं कहा लेकिन इसके अलावा भी विभाग से संबंधित जितने भी अपराधी हैं और जिस-जिस हास्पिटल के बारे में इसमें सूचना एकत्र हुई है उन सबके खिलाफ जो कार्यवाही की जा सकती है वह कार्यवाही तो लेकिन कानूनी कार्यवाही एफ आई आर के माध्‍यम से मुलजिम पकड़कर उनको सज़ा दिलाने के लिये मुझे जिस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है उसमें अभी अधूरापन है। यह नहीं कि इन 18 में कार्यवाही नहीं हुई। डिपार्टमेंट के लेवल पर कार्यवाही हुई...

श्री अध्‍यक्ष: निलम्बित तो हुए हैं। निलम्बित तो कर दिया। ससपेंड तो कर दिया।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): पुलिस कार्यवाही में मुझे अड़चन आ रही है वह अगर मुझे मदद करें और मैं चाहता हूं अगर किसी को महिला को भय लगता है तो मैं उसकी सुरक्षा की गारण्‍टी लेता हूं। आप उसे पेश करें। मेरे कानून की जो पेचीदगियां हैं इसकी पूर्ति करें, निश्चित रूप से दण्‍ड मिलेगा, कोई भी अपराधी बच नहीं सकता मैं यह आपको गारण्‍टी देता हूं।

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): ***

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, आपने जो पर्टिनेंट क्‍वेश्‍चंस पूछे हैं उनका भी उत्‍तर गृह मंत्रीजी ने ठीक से नहीं दिया। अध्‍यक्ष महोदय, सबूत पेश करायेंगी या हम एम एल ए सबूत देंगे आपको, आपका गृह मंत्रालय होम मिनिस्‍टर किसलिये बैठा है ? हम सबूत देंगे ? आपकी जिम्‍मेदारी है बयान दर्ज करने की। अध्‍यक्ष महोदय, ने इस मामले में बिलकुल सही प्रश्‍न पूछे हैं उनका सरकार ने कोई ढंग से जवाब नहीं दिया हम असंतोषजनक रिप्‍लाई के विरोध में, भ्रूण हत्‍याओं को प्रोत्‍साहन दे रही है सरकार इसके विषय में वाक आउट करते हैं।

(कांग्रेस के माननीय सदस्‍यों का सदन से बहिर्गमान)

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा):  ***

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, भ्रेण हत्‍या के बराबर बड़ा पाप मेरे ख्‍याल से कुछ हो नहीं सकता। राज्‍य सरकार अपने स्‍तर पर पूरे प्रयास कर रही है कि इस तरह के कृत्‍यों में शामिल होने वाले चाहे डाक्‍टर्स हैं, चाहे कोई पैरामेडिकल स्‍टाफ है, चाहे कोई भी व्‍यक्ति हो उनको किसी भी हालत में बख्‍शा नहीं जायेगा और जो..(व्‍यवधान) जो यह बात कह रहे थे दूसरे प्रदेशों की तो जितने एक्‍शंस राजस्‍थान में हमने इनके खिलाफ लिये हैं मेरे ख्‍याल से किसी प्रदेश में इतने स्‍ट्रांग एक्‍शंस नहीं हुए हैं और इनकी सरकार में आज तक पता ही नहीं था कि यह एक्‍ट भी है क्‍या ? आज तक कभी नहीं देखा। आज तक जो मेल-फीमेल का रेश्‍यो जो डेवोट हुआ है इसके पीछे भी बड़ा कारण यही लोग हैं..

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): ***

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): ***


अनुपस्थिति-अनुमति

 

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, मुझे सूचित करना है कि श्री रामलाल जाट, सदस्‍य विधान सभा ने शारीरिक अस्‍वस्‍थता के कारण दिनांक 3 अक्‍टूबर, 2006 से सत्रान्‍त तक सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुमति चाही है। क्‍या सदन की अनुमति है इन्‍हें सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुमति दी जाए ?

(स्‍वीकृत)

अनुमति प्रदान की गयी।

स्‍थगन प्रस्‍तावों पर अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

 

मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि निम्‍नांकित स्‍थगन प्रस्‍तावों की सूचना प्राप्‍त हुई है:-1­ श्री मो. माहिर आजाद एवं 11 अन्‍य सदस्‍यों की और से आमेर तहसील के ग्राम लालवास व नाई की थड़ी में विगत 20 वर्षों से काबिज लोगों को नाजायज बेदखल करने के सम्‍बन्‍ध में।

2.श्री मांगीलाल गरासिया एवं 7 अन्‍य सदस्‍यों की और से विधान सभा क्षेत्र गोगुन्‍दा के कोटड़ा में मौसमी बीमारियों के सम्‍बन्‍ण में। (आज चर्चा हो रही है)3.श्री रामनारायण मीणा, सदस्‍य की ओर से जिला बूंदी के चम्‍बल सिंचित क्षेत्र एवं अन्‍य सिंचाई गांधों की नहरों की जर्जर स्थिति की दुरस्‍ती के सम्‍बन्‍ध में।

4.श्री खुशवीर सिंह एवं एक अन्‍य सदस्‍य की और से जिला पाली के विद्यालयों में अध्‍यापकों की कमी के सम्‍बन्‍ध में।5.श्री अमराराम धोद, सदस्‍य की और से इंदिरा गांधी नहर के प्रथम चरण के आन्‍दोलनरत किसान नेताओं की अवैधानिक गिरफ्तारी करके आन्‍दोलन को कुचलने के सम्‍बन्‍ध में। 

      उपरोक्‍त प्रस्‍ताव ऐसे नहीं हैं कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोककर इन पर विचार किया जाय, अंत: इन पर अनुमति देने में असमर्थ हूं।6.श्री संयम लोढ़ा, सदस्‍य की और से बाढ़ पीडि़त, निवासी-टेण्‍ट संख्‍या 64 सरकापार (बान्‍द्रा) जिला बाड़मेर, की बच्‍ची का इलाज नहीं करने से हुई मृत्‍यु के सम्‍बन्‍ध में।7.श्रीमती ममता शर्मा, सदस्‍य की और से प्रदेश में कन्‍या भ्रूण हत्‍या की घटना के सम्‍बन्‍ध में।

      सदन में आज चिकित्‍सा, मौसमी बीमारियों के सम्‍बन्‍ध में चर्चा हो रही है। चर्चा के दौरान माननीय सदस्‍य श्री संयम लोढ़ा व श्रीमती ममता शर्मा को अपने-अपने विषय को उठाने की अनुमति होगी। अंत: पृथक से अनुमति देने में असमर्थ हूं।

8.श्री हरिमोहन शर्मा एवं 7 अन्‍य सदस्‍यों की और से कोटा शहर के स्‍कूलों का मिड डे मील कार्य जीवन सम्‍बल चेरिटेबिल ट्रस्‍ट को देने से उत्‍पन्‍न स्थिति के सम्‍बन्‍ध में।9.डा चन्‍द्रशेखर बैद एवं 9 अन्‍य सदस्‍यों की और से राज्‍य के प्राथमिक विद्यालयों में संचालित भोजन कार्यक्रम में अनियमितता तथा भ्रष्‍टाचार के सम्‍बन्‍ध में।10.श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल एवं 6 अन्‍य सदस्‍यों की और से जिला शिक्षण प्रशिक्षण  संस्‍थान में प्रवेश हेतु ओ बी सी के छात्रों को अधिक अंक होने के उपरान्‍त भी सामान्‍य वर्ग में प्रवेश नहीं देने के सम्‍बन्‍ध में।

श्‍याम/चौहान   9.10.2006   12.20(1)   1j  

 

 

11. श्री जुबेर खान, सदस्‍य की ओर से अलवर के एम.आई.ए. (औद्योगिक क्षेत्र) स्थित फैक्ट्रियों में गैस का रिसाव होने से लोगों में भय एवं रोष व्‍याप्‍त होने के संबंध में।

12. डॉ. बुलाकीदास कल्‍ला, सदस्‍य की ओर से राज्‍य के पैराटीचर्स को नियमित करने का वादा पूरा नहीं करने के संबंध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव भी ऐसे नहीं हैं कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोककर इन पर विचार किया जाये, अत: इन पर अनुमति देने में तो असमर्थ हूं। फिर भी माननीय सदस्‍य श्री हरिमोहन शर्मा, डॉ. चन्‍द्रशेखर बैद, श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल, श्री जुबेर खान एवं डॉ. बुलाकीदास कल्‍ला को अपने-अपने प्रस्‍ताव के विषय पर सिर्फ दो-दो मिनिट बोलने की अनुमति होगी।

मैं माननीय सदस्‍य माहिर आजाद को कहना चाहूंगी कि चूंकि उनका जो विषय है वह कोर्ट में लंबित है इसलिए मैं उन्‍हें अनुमति देने में असमर्थ हूं।

 

प्रक्रिया के नियम 295 के अंतर्गत प्राप्‍त सूचनाएं

1. श्रीमती प्रतिभा सिंह, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र श्‍नवलगढ़ के ग्राम चैनगढ़ में पेयजल की व्‍यवस्‍था करने के संबंध में।

2. श्री नवनीत लाल नीनामा, सदस्‍य की ओर से माही विस्‍थापित किसानों का सर्वे करवाकर उनको जमीन दिलाने के संबंध में।

3. श्री श्रवण कुमार, सदस्‍य की ओर से ग्राम काजडा में प्रसूति गृह की स्‍थापना करने के संबंध में।

4. डॉ. ओ.पी.महेन्‍द्रा, सदस्‍य की ओर से श्रीगंगानगर शहर के बीच में स्थित शुगर मिल को शहर से बाहर ग्रामीण क्षेत्र में स्‍थानान्‍तरित करने के संबंध में।

5. श्री मांगीलाल गरासिया, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र गोगुन्‍दा में कृषि विपणन बोर्ड द्वारा निर्मित की गई सड़कों पर पेवर करने के संबंध में।

6. श्री अर्जुन लाल मीणा, सदस्‍य की ओर से उदयपुर संभाग में अनुसूचित जनजाति उप योजना क्षेत्र अंतर्गत संचालित आवासीय विद्यालयों में अध्‍यापकों के रिक्‍त पद भरने के संबंध में।

7. डॉ. कन्‍हैयालाल मीणा, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र बस्‍सी की क्षतिग्रस्‍त सड़कों का पुन: डामरीकरण करवाने के संबंध में।

8. श्री सी.डी.देवल, सदस्‍य की ओर  से जिला पाली में गरीब लोगों के मकानों व बाड़ों का नियमन करने के संबंध में।

9. श्री मदन राठौड़, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र सुमेरपुर में अतिवृष्टि से गिरे मकानों का पुन: निर्माण करने के संबंध में।

10. श्री महादेव सिंह, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र खंडेला में गोविन्‍दपुरा से बधाणों की ढाणी एवं ग्राम चला से चौकड़ी तक की सड़कों का जीर्णोद्वार व पुर्ननिर्माण करने के संबंध में।

11. श्री महीपाल मदेरणा, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र भोपालगढ़ की पंचायत समिति ओसिया की उचित मूल्‍य की दुकानों में राशन एवं खाद्यान्‍न आपूर्ति में भेदभाव होने के संबंध में।

माननीय सदस्‍यों को उनके द्वारा दी गई सूचना को पढ़ने की अनुमति होगी।

12. श्री सुखलाल मीणा, सदस्‍य की ओर से डांग क्षेत्र सपोदरा में विद्युत आपूर्ति हेतु ग्रिड स्‍टेशन स्‍थापित करने के संबंध में।

13. श्री रामकिशोर मीणा, सदस्‍य की ओर से सिकन्‍दरा के 132 के.वी. ग्रिड सब स्‍टेशन में 25-25 मेगावाट के दो नये ट्रांसफार्मर लगाने के संबंध में।

14. श्रीमती स्‍नेहलता, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र डग में चिकनगुनिया एवं वायरल बुखार अधिक फैलने से उत्‍पन्‍न स्थिति के संबंध में।

यद्यपि 12 ही 295 के अंतर्गत यहां पर अनुमति दी जाती है लेकिन चूंकि आखिरी दिन था इसलिए 14 माननीय सदस्‍यों को इस बात की अनुमति दी गयी है कि वह अपने विषय पढ़कर यहां सुना दें।

बिजली, मौसमी बीमारी पर आज सदन के चर्चा हो रही है, चर्चा के दौरान माननीय सदस्‍य श्री सुखलाल मीणा, श्री रामकिशोर मीणा एवं श्रीमती स्‍नेह लता को अपने-अपने विषय उठाने की अनुमति होगी। यदि वह नहीं बोलना चाहें तो मैं अनुमति दे दूंगी, बोलना चाहेते तो वह पृथक भी बोल सकते हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, मुझे बहुत तकलीफ के साथ यह कहना पड़ रहा है कि आपने प्रस्‍ताव को पढ़े बिना ही यह व्‍यवस्‍था दी है। जो हमने प्रस्‍ताव दिया है नियम 50 के अंतर्गत आपने पढ़े बिना ही यह व्‍यवस्‍था दी है ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): अध्‍यक्ष महोदय, वह भूख-हड़ताल पर बैठा हुआ है और उससे सरकार ने आज तक जाकर के नहीं पूछा है कि तुम मर रहे हो कि जी रहे हो ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: काहे के बारे में बोल रहे हैं आप।

श्री सुरेश मीणा (करौली): यह राजपाल मीणा भूख-हड़ताल पर बैठा हुआ है, एस.सी., एस.टी. के मुद्दे को लेकर के ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपने कहां लिखकर के दिया है ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): अध्‍यक्ष महोदय, पाइंट ऑफ आर्डर ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: कहां दिया है लिखकर के ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): वह लिखकर के आज ...(व्‍यवधान) उसकी स्थिति बहुत ज्‍यादा खराब है ...(व्‍यवधान) सरकार को इसलिए हम बताना चाहते हैं ...(व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप क्‍या कहना चाहते हैं ...(व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): मुझे स्‍पष्‍टीकरण देना है आपने कहा कि मैं व्‍यवस्‍था दे दूंगी उसके बाद में ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय रिछपाल जी कर देना ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): आठ बार तो ज्ञापन दे चुके हैं ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय रिछपाल मिर्धा आप बाद में ...(व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): दो मिनट ठहर जायें मुझे बोलने दें ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: ऐसा है मैं आपका अवसर दूंगी, लेकिन यह जो जीरो ऑवर है, पर्ची के बाद में दूंगी ...(व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): दो मिनट में मैं मेरी बात कह दूंगा, आपने कहा पहले ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: ऐसा है आप परंपरा ...(व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): दो मिनट का समय दे दें ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: पर्ची के बाद दूंगी ...(व्‍यवधान) दो की बजाय पाँच बोलना, पर्सनल स्‍पष्‍टीकरण पर आपका अधिकार है पाँच मिनट बोलना ...(व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): इतनी कोई लंबी-चौड़ी बात नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: पहले आप जीरो ऑवर को हो जाने दीजिये ...(व्‍यवधान) स्‍थगन प्रस्‍ताव, 295, उसके बाद पर्ची और उसके बाद आपको समय दूंगी ...(व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): मेरा निवेदन है मेरा आप पहले ले लें ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, पाइंट ऑफ इन्‍फार्मेशन ...(व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): क्‍यों यह जीरो ऑवर में समय खराब कर रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, पाइंट ऑफ इन्‍फार्मेशन ...(व्‍यवधान) अनुसूचित जाति, जनजाति के सैकड़ों लोग ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): अध्‍यक्ष महोदय, उसकी हालत बहुत खराब है ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): धरने पर बैठा हुआ है ...(व्‍यवधान) उनके बैकलॉग के मामले में सरकार कोई कार्यवाही नहीं कर रही है ...(व्‍यवधान) इसलिए कम से कम अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों के साथ ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): कम से कम सरकार को यह तो चाहिए कि भूख-हड़ताल पर बैठा हुआ ...(व्‍यवधान) 6 दिन से खाना नहीं ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): न्‍याय करने के लिए आप इनको कहें ...(व्‍यवधान) मंत्री जी कह दें कि बैकलॉग नहीं है जबकि इनका अरोप है कि बैकलॉग है ...(व्‍यवधान) आखिर इन लोगों के साथ न्‍याय कब होगा ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): उसके बारे में सरकार स्‍पष्‍टीकरण दे ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, इन लोगों के साथ में न्‍याय कब होगा ...(व्‍यवधान) एक व्‍यक्ति भूख-हड़ताल पर बैठा हुआ है ...(व्‍यवधान) अनुसूचित जाति, जनजाति के लोग भूख-हड़ताल पर बैठे हुए हैं, कोई उनकी सुनने वाला नहीं है ...(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष जी, गृह मंत्री जी को, संसदीय कार्य मंत्री जी को कहें कि वह मौके पर जायें और उनका बैकलॉग पूरा करें ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): अध्‍यक्ष महोदय, उसकी हालत बहुत ज्‍यादा खराब है ...(व्‍यवधान) खाली पदों को भरने के लिए ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: पाँच मिनट बोल लेना आप ...(व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): एस.सी., एस.टी. के अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा महामहिम राज्‍यपाल महोदय को ज्ञापन दिया गया है और आज सात दिन से भूख-हड़ताल पर बैठा हुआ है ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, यह राजस्‍थान की संवेदनहीन सरकार कोई ध्‍यान नहीं दे रही है ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): एस.सी., एस.टी. के बैकलॉग को पूरा करने के लिए मेरी मांग है उसका जवाब दे सरकार ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): भूख-हड़ताल पर बैठा हुआ है ...(व्‍यवधान) ना उनकी सुनने वाली है सरकार ...(व्‍यवधान) जबकि यह सरकार अनुसूचित जाति के वोटों पर राज कर रही है, सर्वाधिक लोग बैठे हुए हैं, आखिर उन लोगों के हित में कब राज होगा ...(व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अध्‍यक्ष महोदय, पाँच दिन से लगातार भूख-हड़ताल चल रही है और 83 हजार एस.सी., एस.टी. के पद बाकी हैं ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): उनकी तकलीफ को दूर करें ...(व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अभी तक सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की, हर सेशन में मामला उठाया जाता है। हम चाहते हैं कि सरकार यह वक्‍तव्‍य दे कि यह कब तक पूरे होंगे यही हमारा आग्रह है।

श्री सुरेश मीणा (करौली): कब तक सरकार बैकलॉग पूरा करेगी यह भी आश्‍वासन दे।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौड़ (राज्‍य मंत्री, सिंचाई): माननीय सदस्‍य जो पिछले सत्र में घनश्‍याम तिवाड़ी जी ने जो जवाब दिया था, क्‍या वह लागू नहीं किया ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): केवल जवाब आता है, काम नहीं होता है माननीय सदस्‍य ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): लागू नहीं किया ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): कोई काम नहीं होता है, केवल जवाब आता है ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: देखिये, कैसे खड़े हैं ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): अगर लागू नहीं हुआ फिर तो गलत है ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: लूणी से आने वाले माननीय सदस्‍य, लूणी से आने वाले माननीय सदस्‍य ...(व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): 6 दिन से आमरण अनशन पर बैठा हुआ है।

श्री अध्‍यक्ष: यह सदन का प्रांगण है, केवल एक व्‍यक्ति के अधिकार में होता है ...(व्‍यवधान) और वह जब खड़ा होता है तो दूसरों को बैठ जाना चाहिए। आप एक साथ खड़े हो जाते हैं।

श्री सुरेश मीणा (करौली): अध्‍यक्ष महोदय, कब तक यह ...(व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): अध्‍यक्ष महोदय, यह लंबे समय से हमारे साथ में अन्‍याय किया जा रहा है। एस.सी., एस.टी. के बैकलॉग को नहीं भरा जा रहा है ...(व्‍यवधान) कोई भी सरकार हो ...(व्‍यवधान) यह एस.सी., एस.टी. के साथ में ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): माननीय विधायक जी कृपया, अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान इस और दिलाना चाहता हूं कि पिछले सत्र में भी यह मामला उठा था।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या?

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): बैकलॉग का, एस.सी., एस.टी. के बैकलॉग को ...(व्‍यवधान) उस समय माननीय शिक्षा मंत्री जी ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बैकलॉग की बात कहां से आ गयी ...(व्‍यवधान) बैकलॉग की बात तो है नहीं ...(व्‍यवधान) मैंने नाम पुकारा है हरिमोहन शर्मा को।

जय गोविन्‍द/अरुण/9106/1230/1k

 (व्‍यवधान)

 

श्री अध्‍यक्ष: आपको बैकलॉग की बात उठानी है तो बाद में उठाइए। ...(व्‍यवधान)... आपको उठाना है तो बाद में उठाइएगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): मैं केवल यह निवेदन करना चाहता हूं आपसे  कि एस सी एस टी बैकलॉग के लिए ...(व्‍यवधान)... ।

श्री अध्‍यक्ष: आपको बात उठानी है तो इसके बाद उठाइए, मैंने नाम पुकार लिया है, व्‍यवस्‍था दे दी है, आप बैकलॉग की बात करते हो, उसके बाद उठाना। ...(व्‍यवधान)...

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): शिक्षा मंत्रीजी ने इसका यहां दिया था बयान ...(व्‍यवधान)... ।

श्री अध्‍यक्ष: अब अंकित न हो। ...(व्‍यवधान)...

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): ***

श्री सुरेश मीणा (करौली):

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, यह सदन नियमों से चलेगा, मैंने नाम पुकार लिया, ...(व्‍यवधान)... आप बैठिए, सुनिए, पहले सुनिए, जीरो ऑवर जैसे ही खतम हो वैसे ही आप अपना बैकलॉग की बात उठाएं। मैं आपको अनुमति दूंगी और मंत्रीजी जवाब देंगे लेकिन यह कोई तरीका नहीं है कि जब मर्जी आए तब खड़े हो जाओ और जो मर्जी आए सो बोलने लग जाओ। आपको बैकलॉग की बात उठाने से मैं ना नहीं करती लेकिन यह तरीका सही नहीं है, जब मैं समय दूंगी पर्ची खतम हो जाएगी, पर्ची के बाद दूंगी। ...(व्‍यवधान)... पर्ची के बाद समय दूंगी आपको। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा, प्‍लीज बिगन, प्‍लीज बिगन।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: मौसमी बीमारियों पर चर्चा होगी आज उस समय विस्‍तार से आप अपनी बात कहना, पूरी बात सुनेंगे और मंत्रीजी को बाध्‍य करें कि इस बारे में वह जवाब दें। यह जो उठा रहे हैं सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य कि एक लड़की डेंगू से पीडि़त थी और उसके इलाज में लापरवाही बता रहे हैं, उसकी वजह से मौत हो गई, मैंने कहा मौसमी बीमारियों पर चर्चा होगी बाद में तब आप अपनी बात उठा लेना।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री अध्‍यक्ष: अंकित न हो।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप सदन का समय यूं ही बरबाद कर रहे हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी):  ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): ***

श्री अध्‍यक्ष: नहीं आपको दूंगी। एक्‍सप्‍लेनेशन का समय, मैं आपको दूंगी जीरो ऑवर के बाद।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): ***

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, नहीं, जीरो ऑवर के बाद समय दूंगी। ...(व्‍यवधान)... जीरो ऑवर में स्‍पष्‍टीकरण नहीं होता है। जीरो ऑवर में नहीं हुआ करता है यह।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री अध्‍यक्ष: सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपको कोई अधिकार नहीं है ...(व्‍यवधान)... ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): ***

श्री अध्‍यक्ष: आपको मौका मिलेगा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप सदन का समय बरबाद कर रहे हैं।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): ***

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो रहा है। ...(व्‍यवधान)... आपको सदन का समय बरबाद करने का कोई अधिकार नहीं है। मैं अब आपको नाम से पुकारूंगी, अब मैं आपको नाम से पुकारूंगी। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री अध्‍यक्ष: मैं आपको नाम से पुकारूंगी। आप विराज जाएं। आप स्‍थान ग्रहण कर लें वरना मैं आपको नाम से पुकारूंगी।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):***

श्री अध्‍यक्ष: आज मौका है इनको बोलने का, मैं ना कब कर रही हूं। यह मौसमी बीमारियों पर ही बोल रहे हैं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ***

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, मैंने हरिमोहन शर्मा का नाम पुकारा है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):  ***

श्री अध्‍यक्ष: आप सुनिए। सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, यदि आपने जो स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है उसकी गम्‍भीरता को यदि आप गम्‍भीरता से लेते तो आप बोलने के बाद में खड़े होकर कहते कि मैं मेरा भी ऐसा ही मामला था और उस संवेदनशील मामले पर मैं दो मिनट में कुछ कहना चाहता हूं तो मैं शायद आपको समय देती लेकिन आप जिस तरह की हठधर्मिता करते हैं, आसन की व्‍यवस्‍था को मानते ही नहीं है, आप आसन की व्‍यवस्‍था को नहीं माने तो आसन के पास क्‍या उपाय है, क्‍या करे आसन, इसलिए मैं आपसे कह रही हूं। ...(व्‍यवधान)... जब मैंने आपसे कहा कि आपको अपनी बात पूरी कहने का मौका मिलेगा कि जिस तरीके से लड़की की आप बता रहे हैं कि मौत हुई है, मौसमी बीमारी न सही, आप हृदयहीनता की बात करते कि आप संवेदनहीन हो और लड़की के साथ यह हुआ, इसकी जांच करें, जांच करके दोषी लोगों के खिलाफ कार्यवाही करें तो मेरी समझ में आती आपकी बात लेकिन आप जिस तरह से हठधर्मिता करते हो, उससे आसन प्रभावित नहीं होगा।

 

Gpc/akt/09102006/1240/1l

 

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, आपके निर्देश और आसन का हुक्‍म हमारे सिर माथे पर, लेकिन मैंने उनसे कहा था ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: लेकिन परनाला वहीं पड़ेगा।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैंने कहा था कि अध्‍यक्ष महोदय को यह बात पहले ब्रीफ कर आओ, लेकिन उसमें चूक हो गई। दूसरे लोग-बागों को भी मैंने कहा था कि आप उनको ब्रीफ करके आओ तो उनको मौका पहले दे दिया। मैं आपसे प्रार्थना करता हूं ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: इसके बाद आप खड़े होकर कहते तो ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैं प्रार्थना कर रहा हूं ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: यदि आप खड़े होकर कहते तो मैं ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैं प्रार्थना कर रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: जो मैंने व्‍यवस्‍था दे दी ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैं खड़ा होकर प्रार्थना कर रहा हूं। कह नहीं रहा हूं, प्रार्थना कर रहा हूं, दो मिनट का समय एक भील लड़की है, बहुत मार्मिक मामला है, इसके साथ बड़ी ज्‍यादती हुई है, सरकार का पक्ष बहुत दयनीय रहा है, बड़ा आपत्तिजनक रहा है। तो आप दो मिनट उनको बोलने की अनुमति दे दें उसके बाद में आपकी व्‍यवस्‍था के हिसाब से ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: मैं अनुमति पहले तो नहीं दूंगी ..(व्‍यवधान).. नेता प्रतिपक्ष, मैं जीरो ऑवर में जब बाकी कार्यवाही खत्‍म हो जाएगी उसके बाद तीन मिनट का समय जरूर सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य को दूंगी नेता प्रतिपक्ष की अपील पर।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: मैंने अनुमति नहीं दी है इसीलिए अंकित नहीं हो रहा है। नहीं दी मैंने अनुमति। जो काई हठधर्मिता करे तो उसे देने का सवाल ही नहीं है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: कह तो दी आपने बात, बाकी क्‍या रखी है?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर):  ***

श्री अध्‍यक्ष: जब मैंने हरिमोहन शर्मा का नाम पुकार लिया तो दूसरों को अनुमति कैसे दूंगी।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, पहले सब पूरा होगा उसके बाद दूंगी।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: देखिए, सुनिए, मैं नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप नहीं थे, बहिर्गमन कर गये थे, उस समय मैंने कहा था कि चूंकि मामला अदालत में चल रहा है, कोर्ट में चल रहा है इसलिए मैं अनुमति देने में असमर्थ हूं क्‍योंकि यहां की कार्यवाही से कोर्ट प्रिज्‍युडिस होता है। इसलिए उसकी चर्चा नहीं की जा सकती।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: चल तो रहा है, कोर्ट में तो केस है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप बताएं चाहे और कोई बताए, कोर्ट में पेंडिंग है, यह बात हुई है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: यदि यह सदन फैसला करने लग जाएगा कि अतिक्रमी कौन है, जमीन का मालिक कौन है, जमीन का टाइटल किसके पास है, यह काम विधान सभा का नहीं है। यह फैसला अदालत करेगी, कोर्ट करेगी। उसके बारे में सदन में कोई चर्चा नहीं होनी चाहिए।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: हरिमोहन शर्मा, क्‍या आप बोलने में असमर्थ हैं? दूसरा नाम पुकारूं?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मैं खड़ा हूं।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: जो मामला कोर्ट में चल रहा है उसमें सरकार भी कुछ नहीं कर सकती।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): ***

श्री अध्‍यक्ष: सरकार के खिलाफ ..(व्‍यवधान).. यदि सरकार उसके विपरीत कर रही है तो कंटेम्‍प्‍ट आफ कोर्ट चलेगा, क्‍यों चिन्‍ता करते हो आप?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: सरकार बैठी है उनको आप कहो।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: सरकार के खिलाफ कंटेम्‍प्‍ट ऑफ कोर्ट चलेगा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप लोगों ने पौन घंटा बिना किसी डिस्‍कसन के अपने विचार बिना रखे यहां पर खो दिया 12 बजे से।

श्री अमराराम (धोद): ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री अध्‍यक्ष: जो लोग आसन की आज्ञा का उल्‍लंघन कर रहे हैं, मैं नहीं चाहती कि आखिर दिन मैं किसी तरह की कोई इस तरह की अप्रिय व्‍यवस्‍था दूं इसलिए मैं आप सबसे अपील कर रही हूं कि मेहरबानी करके अपना-अपना स्‍थान ग्रहण कर लें और हरिमोहन जी को बोलने दें।

श्री अमराराम (धोद): ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप मेरे वैश्‍म में आइएगा, मैं गृह मंत्रीजी को भी बुलाऊंगी और इनसे पूछूंगी क्‍या है, लेकिन मेरे खयाल से इसमें गृह मंत्रीजी नहीं बता पाएंगे क्‍योंकि राजस्‍व का मामला है। इसलिए मैं दोनों को बुलाऊंगी। दोनों को बुलाऊंगी, आपको भी बुलाऊंगी और बैठकर बात करेंगे।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: यह आसन जो व्‍यवस्‍था दे चुका है उसके विपरीत कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं हूं।

मोहन/अरूण/9102006/1250/1m

 

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): **** [1]

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो रहा है।

श्री अमराराम (धोद): ****

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ****

श्री अध्‍यक्ष: धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपकी पार्टी तो गरीब की हिमायती है, आप कहां इन ...

श्री अमराराम (धोद): ****

श्री अध्‍यक्ष: टेल पर तो पानी मिल नहीं रहा, टेल में पानी की समस्‍या और आप बात करते हो यहां पर उनकी पैरवी करते हो ?

श्री अमराराम (धोद): ****

श्री अध्‍यक्ष: आपको पैरवी करनी चाहिए उनकी, बाड़मेर और जैसलमेर वाले लोगों की, जो टेल पर बैठे हुए हैं। उनके पानी की समस्‍या है।

श्री अमराराम (धोद): ****

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): ****

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ****

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ****

श्री अध्‍यक्ष: मैंने इजाजत नहीं दी है, अंकित हो नहीं रहा है। ...(व्‍यवधान)... आप तो किसानों के हिमायती हो।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ****

श्री अमराराम (धोद): ****

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): ****

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): ****

श्री अध्‍यक्ष: जो किसान कुए से सींचता है, सीकर और झुन्‍झुनूं वाला ईमानदारी से यदि वह करता है खेती 5 हजार रुपया महीने का उसका बिजली का बिल आता  है। आप किसकी तुलना कर रहे हो ? ...(व्‍यवधान)...

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ****

श्री अध्‍यक्ष: किसकी पैरवी करते हो ?

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: आज सत्र का अन्तिम दिन है, मैं ऐसा कुछ नहीं चाहती । ...(व्‍यवधान)... अंकित नहीं हो रहा है इसलिए आप सदन का समय बरबाद कर रहे हैं। अंकित तो हो नहीं रहा है, अंकित नहीं हो रहा है। ...(व्‍यवधान)...

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): *** *

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप मुझे मजबूर रह रहे हैं।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): ***

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो। ...(व्‍यवधान)...

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: आपको सदन का समय बरबाद करने का कोई हक नहीं है। ...(व्‍यवधान)... सदन का समय कन्‍ज्‍यूम करने का कोई अधिकार नहीं है आपको अकेले को।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: नियमों में आइए, नियमों में बात करिए। इसका मतलब यह नहीं है, इनको भी चुनकर भेजा है। ...(व्‍यवधान)... इन सब को भी चुनकर भेजा है।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): ***

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर):***

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: सदन का समय क्‍यों बरबाद कर रहे हो ? ...(व्‍यवधान)...

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपको जो कहना था, आपने कह दिया। अब आप स्‍थान ग्रहण कर लें।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, अब स्‍थान ग्रहण कर लें। बरदाश्‍त बहुत कर ली, सदन के सब लोगों ने कर ली, आप अकेले नहीं चुनकर आए हैं, इनको भी सब को किसी ने नोमीनेट नहीं किया है। ये भी बाकायदा As elected as you are, …

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: … as duly elected as you are.

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ****

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर):  ***

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): ***

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, अंकित नहीं हो रहा है।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर):***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर):***

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर):***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): ***

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या हो गया ? ...(व्‍यवधान)... धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप मेरे धैर्य की परीक्षा नहीं लें तो उचित रहेगा। ...(व्‍यवधान)... कितना समय बरबाद किया आपने हाउस का ?

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, नहीं। गलत बात है यह, नो, अंकित नहीं।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप यों ही गला फाड़ रहे हैं, अंकित हो नहीं रहा है।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप समय बरबाद करने आए हैं, आप सदन का समय बरबाद करने आए हैं क्‍या ?

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर):***

श्री अध्‍यक्ष: राजस्‍थान में 5 करोड़ और 64 लाख लोग हैं, आप उनकी बात करिए।

 


Skp/akt/09.10.2006/1300/1n/1

 

श्री अध्‍यक्ष : आप उनकी बात करिये 5 करोड़ 64 लाख उपभोक्‍ता हैं.... (व्‍यवधान) आप केवल 22 लाख की बात कर रहे हो। (व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): ***

श्री जयराम जाटव (खैरथल): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: .......वहां एक मुझे ऐसा लगता है.... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सब के बाद में इनको दो मिनट का समय दे दें।

श्री अध्‍यक्ष: किस बात के लिए दे दूं? इसलिए कि हर व्‍यक्ति खड़ा होकर के हठधर्मी करे, बोला जाए, आसन की आज्ञा का पालन नहीं करे और समय दे दूं? क्‍यों दे दूं समय? क्‍यों दे दूं? जो आसन की आज्ञा का पालन करेगा, आसन की आज्ञा के अनुसार चलेगा उसको समय दूंगी। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): तालियां वो बजा रहे हैं.... (व्‍यवधान) वो तो पानी ले रहे हैं और जो पानी से वंचित हो गये उनकी बात वो उठा रहे हैं। पानी तो सारा राठौड़ साहब ने ले लिया। (व्‍यवधान) जो हैव्‍ज हैं उनके पास पानी है और जिनके नहीं हैं उनके लिए संघर्ष कर रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: तो आपको और मेरे को क्‍या आवश्‍यकता है यह बताओ न आप। आपको और मेरे का क्‍या आवश्‍यकता है? (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): तो दो मिनट का दे दो। (व्‍यवधान) मेरी किसानों के साथ हमदर्दी है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: छोटे किसान हैं उनके भी आवश्‍यकता है। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): जागीरदार तो नहीं हैं लेकिन जागीरदार के नाम पर उन्‍होंने मुरब्‍बे ले रखे हैं सबने। आज तो कोई जागीरदार नहीं है लेकिन पुरानी जागीर के आधार पर इन सब लोगों ने मुरब्‍बे ले रखे हैं। उसमें राठौड़ साहब भी हैं। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: जिनकी पैरवी ये कर रहे हैं उनके पास इनसे ज्‍यादा मुरब्‍बे हैं। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर भी हैं उसमें। (व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): ***

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप बैठो, आप बैठो। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हम तो निठ जीतकर आये हैं..... (व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): ***

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): कृपा करके दो मिनट का समय इनको बाद में दे देना। ये अपनी बात से हट रहे हैं और आपकी बात सर्वोपरि है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपका कहने का मतलब यह है कि जो कोई खड़ा होकर के इस तरीके से बोले और सदन की, आसन की परवाह नहीं करे उन सबको दो मिनट का समय दे दूं? (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): कोई भी नहीं है, अमरा राम जी कामरेड... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: यही कह रहे हो आप? मतलब आप प्रोत्‍साहित कर रहे हो। उन लोगों को आप प्रोत्‍साहित कर रहे हो जो आसन की आज्ञा का पालन नहीं कर रहे हैं। उनको आप प्रोत्‍साहित करना चाहते हो? (व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): ***

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये विधायक तो हैं लेकिन ये बहुत बड़ी पार्टी को रिप्रजेंट करते हैं और गरीबों और किसानों की आवाज को उठा रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री जयराम जाटव (खैरथल): ***

श्री अध्‍यक्ष: गरीबों की बात को? गरीबों की बात को उठा रहे हो? (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप औरों का समय काटकर के 2-5 मिनट इनको भी दे दो। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री गुरजंट सिंह बराड़ (संगरिया): ***

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सरदार जी, सारा पानी इनके पास जा रहा है। सारी पानी राठौड़ साहब ले जा रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: श्री हरिमोहन शर्मा।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री अध्‍यक्ष: आज आखिरी दिन है, मैं कोई कठोर कार्यवाही नहीं करना चाहती। आखिरी दिन है। मैं भी मजबूर हूं। (व्‍यवधान) आसन मजबूर है। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: .... यदि कानून व्‍यवस्‍था बिगड़ने की आशंका होगी तो ये भी किया जाता है। कानून और व्‍यवस्‍था के बिगड़ने की आशंका हो तो सरकार कुछ भी करती है। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: ये नेता प्रतिपक्ष जलती के अन्‍दर घी और डालते हैं। क्‍या करूं, क्‍या नहीं करूं। ये जलती में घी और डालते हैं। एक पूला और डाल देते हैं जलती में। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: श्री हरिमोहन शर्मा। If you are not interested in speaking, I will ….. (व्‍यवधान)

श्री जयराम जाटव (खैरथल): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सदन का ध्‍यान... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: ..... माध्‍यम खत्‍म हो गया है। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री अध्‍यक्ष: यह सदन का प्रांगण कब तक आपके कब्‍जे में रहेगा? आप मुझे तो यह बताइये। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: मैं अनुमति देने में असमर्थ हूं। यह व्‍यवस्‍था मैं बहुत पहले कर चुकी हूं। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: मैंने रिलेक्‍सेशन नहीं दिया। एक को मैंने मेरे वैश्‍म में बुलाया है और दूसरे को मैंने कहा है कि चूंकि आज मौसमी बीमारियों पर चर्चा होगी.... (व्‍यवधान) मैंने कोई चैंज नहीं किया, कोई चैंज नहीं किया। (व्‍यवधान) अब आप कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: अब आपको जो कुछ कहना था वह सब कह दिया, अब कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें। मैं हाथ जोड़ रही हूं आपके आगे।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: जब कभी ऐसा मौका आता है तो आप चूकते नहीं हो और वैसे आप बोलते नहीं हो। जब कभी ऐसा मौका आता है आपको बोलने का तो आप चूकते भी नहीं हो। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: .... माननीय सदस्‍य आज मौसमी बीमारियों पर, अकाल पर चर्चा नहीं करना चाहते? यदि आप नहीं चाहते तो फिर मैं क्‍या करूं? मैं सदन की कार्यवाही स्‍थगित कर दूं?

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: यदि आप नहीं करना चाहते तो क्‍या करूं? इतना महत्‍वपूर्ण विषय है। मौसमी बीमारियां फैल रही हैं। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री अध्‍यक्ष: लोग मर रहे हैं, सरकार को.... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप अपनी व्‍यवस्‍था में माननीय सदस्‍य को दो मिनट देकर के व्‍यवस्‍था में संशोधन करके कामरेड साहब को बोलने की इजाजत दे देना सब के बाद में। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय प्रतिपक्ष के नेता, आपका काम आसन को सहयोग करने का है और आप अग्नि के अन्‍दर घी डालकर के आहूति और डालते हो। (व्‍यवधान) 

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रतिपक्ष के नेता के पास आये नहीं, हाथा-जोड़ी की होती इनसे तो आपके लिए भी कह देते।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप कृपा करो, आप सबके बाद में कामरेड अमरा राम जी की बात को जो किसानों के हित में और किसानों के हकों के लिए लड़ रहे हैं, संघर्ष कर रहे हैं.....

 

vkj/akt/1310/1o 

 

पाँच मिनट आप बोलने का समय दे देना बाद में। आज नहीं, बाद में दे देना। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या बात कर रहे हो? क्‍या बात कही आपने? एक-आध मुरब्‍बा आपका भी है क्‍या? एक-आध मुरब्‍बा आपका भी है क्‍या? एक-आध मुरब्‍बा आपका भी है क्‍या वहां? एक-आध मुरब्‍बा इनका भी दिखता है? (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री):  ***

श्री अध्‍यक्ष: श्री हरिमोहन शर्मा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इस सदन के समक्ष मिड-डे-मील के मामले में जो अव्‍यवस्‍था है, जो भ्रष्‍टाचार है और जिस प्रकार से एन.जी.ओ. इस प्रकार की....

श्री अध्‍यक्ष: अंकित हो। मैंने नाम पुकारा है हरिमोहन शर्मा का और आप बीच में विघ्‍न-बाधा न पहुंचायें।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, सरकार से बात करिये। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मेरे बोलने के बाद खड़े हो जाना।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: सरकार से बात करिये। सरकार को बाहर ले जायें और बाहर ले जाकर सरकार से बात करिये। You are free. यह सरकार बैठी है यहाँ पर, सरकार को बाहर ले जाइये और करिये बात उनसे।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: मैं भी किसान की दुश्‍मन नहीं हूं, मैं भी किसान हूं और मैं गरीब किसान की पैरवी करती हूं। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: जिनको अरेस्‍ट किया, उनके पास कितने-कितने मुरब्‍बे हैं, जरा बताना तो सही। (व्‍यवधान) जिनको अरेस्‍ट किया, उनके पास कितने-कितने मुरब्‍बे हैं, जरा बताना तो सही। जरा बताना तो सही, उनके पास कितने-कितने मुरब्‍बे है?

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री अमराराम (धोद):  ***

अनेक माननीय सदस्‍य: ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री गुरजंट सिंह बराड़ (संगरिया): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण करिये। आ‍ज आखिरी दिन है। मैं नहीं चाहती कि मैं कोई एक्‍शन लूं। मैं क्‍या करूं?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): ***

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: अब आपको विनम्र निवेदन मैंने बहुत सुन लिया है। अब आप स्‍थान ग्रहण कर लें। बहुत सुन लिया। बहुत सुन लिया, अब आप बिराजें। स्‍थान ग्रहण कर लें।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): ***

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: आपने सीमा पार कर ली, आपने हद कर दी, सीमा पार कर ली। 40 मिनट से लगातार आप बोले चले जा रहे हैं और आपको कितनी बार मैंने कहा है, निवेदन किया है कि आप स्‍थान ग्रहण कर लें, स्‍थान ग्रहण कर लें, उसके बाद भी आप नहीं कर रहे हैं। अब आप यह चाहते हैं कि आखिरी दिन मैं आपका नाम लूं और आप सदन से बाहर जायें ताकि आपकी बातें जो अंकित नहीं हुई हैं, वह अखबारों में इस बहाने से सारी बातें आ जायें कि क्‍यों इनको बाहर निकाला है, यही चाहते हैं, यही मतलब है आपका, और क्‍या चाहते हैं आप?

श्री अमराराम (धोद):  ***

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री हीरालाल (निवाई): ***

श्री अध्‍यक्ष: श्री हरिमोहन शर्मा। श्री हरिमोहन शर्मा।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): ***

अनेक माननीय सदस्‍य: ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अशोक नागपाल (सूरतगढ़): ***

श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची (टिब्बी): ***

श्री अध्‍यक्ष: धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य, यह हाउस ऐसे नहीं चलेगा। अमरा राम जी, ऐसे नहीं चलेगा।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

अनेक माननीय सदस्‍य: ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप कौनसे नियम में बोल रहे हैं? आपको किसने नाम पुकारा, आपका नाम किसने पुकारा, किसने पुकारा नाम? स्‍थान ग्रहण करो।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

श्री अध्‍यक्ष: श्री हरिमोहन शर्मा।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं....

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

अनेक माननीय सदस्‍य: ***

श्री अशोक नागपाल (सूरतगढ़): ***

श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची (टिब्बी): ***

श्री अध्‍यक्ष: श्री हरिमोहन शर्मा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं....

अनेक माननीय सदस्‍य: ***

 

Jkj/akt/13.20/1p/9.10.2006 

 

श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची: ***

श्री अशोक नागपाल:  ***

श्री अमरा राम(धोद): ***

श्री हीरा लाल(निवाई): ***

श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची: ***

श्री अमरा राम(धोद): ***

श्री सांवर लाल : *** (व्‍यवधान)

श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची: ***

श्री अमरा राम(धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपके यहां तो मौस‍मी बीमारियां हैं नहीं, इसलिए आप दूसरे लोगों को भी मौका नहीं देना चाहते कि वह इस बारे में चर्चा कर सकें, इसलिए सदन का समय बरबाद कर रहे हो आप। बरबाद कर रहे हो। (व्‍यवधान)

श्री अमरा राम(धोद) : ***

श्री अध्‍यक्ष: अब यदि आपने फिर वही काम किया और फिर खड़े हुए आप, फिर बोलना शुरू किया तो मैं बहुत मजबूर हूं, मुझे नाम लेना पड़ेगा और कहना पड़ेगा सदन से बाहर चले जाइये, कहना पड़ेगा। इसलिए अब मैं आपसे हाथ जोड़ कर कह रही हूं, आपको जितना कहना था...(व्‍यवधान)

श्री अमरा राम(धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: आपको जितना कहना था, आपने सब कह लिया।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला: ***

श्री अमरा राम(धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: और आपको जितना कहना था कह दिया, अब आप प्‍लीज मेहरबानी करके...

श्री अमरा राम(धोद): ***(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप इतने वरिष्‍ठ सदस्‍य हो, आसन पांवों पर होता है, खड़े हो जाते हो, क्‍या बात हुई यह। (व्‍यवधान)

अनेक माननीय सदस्‍य: ***

श्री अध्‍यक्ष: श्री हरिमोहन शर्मा तो बोलने में असमर्थ हैं इसलिए मैं...(व्‍यवधान)

श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची: ***

श्री अमरा राम(धोद): ***

श्री अशोक नागपाल: *** (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: तो आप बोल ही नहीं रहे हैं। मैंने आपका नाम पुकारा है। जो आपको बीच में डिस्‍टर्ब करेगा उसको मैं देखूंगी, आप शुरू करिये, पहल करिये।

श्री हरिमोहन शर्मा(हिण्‍डौली): आप इनको....(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: देखिये, मैंने नाम पुकार लिया हरिमोहन शर्मा का। अब यदि आप बीच में डिस्‍टर्ब करेंगे तो फिर माफ करियेगा, मुझे कुछ न कुछ करना पड़ेगा।

श्री अमरा राम(धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: बात को सारे दिन आप कहेंगे क्‍या? जो आपको कहना था कह दिया, सारे दिन यही बात कहते रहोगे, यही बात होगी सारे दिन? और लोगों की कोई बात न हो?

श्री अमरा राम(धोद) :  ***

श्री अध्‍यक्ष: और लोगों के स्‍थगन प्रस्‍ताव कोई महत्‍वपूर्ण नहीं हैं?

श्री अमरा राम(धोद): ***

श्री सी.डी.देवल: ***

श्री अध्‍यक्ष: आपने पचास मिनट बरबाद किये सदन के, अब मैं दो मिनट छोड़, एक मिनट भी नहीं दूंगी आपको।

श्री अमरा राम(धोद): ***

श्री सी.डी.देवल: ***

श्री अध्‍यक्ष: दो मिनट छोड़, एक मिनट भी नहीं दूंगी।

श्री सी.डी.देवल: ***

श्री अमरा राम(धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: आपने कर दिया करबध्‍द निवेदन, मैं कर रही हूं आपको कि अब आप स्‍थान ग्रहण कर लें, बस।

श्री अमरा राम(धोद): *** (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: इतना संयम भी नहीं करते हैं।  संयम लोढ़ा करते हैं जिद्द, लेकिन आपने तो हद कर दी, सारी सीमाएं पार कर दी आपने।

श्री अमरा राम(धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: सारी सीमाएं पार कर दीं। आप जैसे वरिष्‍ठ सदस्‍य से मैं यह उम्‍मीद नहीं करती थी।  आप जैसे वरिष्‍ठ सदस्‍य से मैं यह उम्‍मीद नहीं करती थी, आप इस कदर......(व्‍यवधान)

श्री अमरा राम(धोद): ***

श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची: ***

श्री अध्‍यक्ष: हद हो गई।

श्री अमरा राम(धोद): ***

श्री हीरालाल (निवाई): ***

श्री गुरजंट सिंह बराड़: ***

श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची: ***

श्री अशोक नागपाल: ***

 

Lpm/akt/1330/09102006/1q

 

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): ***

श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची (टिब्बी):  ***

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): ***

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य अब या तो आप अपना स्‍थान ग्रहण कर लें और वरना मैं हाथ जोड़कर आपसे कह रही हूं सदन से बाहर चले जाएं क्‍योंकि आगे लोगों को बोलने दें और आगे भी कार्यवाही चलने दें। (व्‍यवधान...) नहीं मैंने कह दिया या तो आप बैठे रहें अपने स्‍थान पर, बैठे रहें वरना आप सदन छोड़कर चले जाएं .....(व्‍यवधान) फिर वहीं बात आसन पाँव पर है, आसन पाँव पर है, आसन पाँव पर है। मैं देख रही हूं, मैं आप सबको देख रही हूं कि सदन के नियमों का पालना कौन-कौन नहीं करता आसन जब पाँव पर हो, बिलकुल आसन जब पाँव पर होता है तो कभी खड़े नहीं होना चाहिए यह मैं आप सबसे कह रही हूं और में आपको अब कह रही हूं  कि आखिरी बार या तो अब आप उठना मत और उठो तो बाहर चले जाओ क्‍योंकि बहुत देर हो गई है आपने एक घंटे से ज्‍यादा समय सदन का बर्बाद कर दिया। लोगों को बहुत बातें कहनी है, बहुत ....(व्‍यवधान)।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप सदन का 1/200वां हिस्‍सा हो, आप सदन का 1/200वां हिस्‍सा है और बाकी 199 सदस्‍य भी हैं, इनको भी अपनी बात कहने का हक है। अकेले आपको नहीं है कि चाहे जितना बोलते चले जाएं, घंटेभर से आप जिद्द करते चले जाए और आसन की अवज्ञा करते चले जाए, यह अधिकार आपको भी नहीं है, क्षमा करना आप।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: आपने उस अधिकार का भरपूर उपयोग कर लिया जो अधिकार आपको है, जनता के प्रतिनिधि होने के नाते यदि आप इस सदन में आये हैं तो आपने उसका भरपूर उपयोग कर लिया। एक घंटे से अधिक समय तक आपने जद्दोजहद करके जो कुछ आपको कहना था सब कह दिया आपने अब और क्‍या चाहते हों आप?

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: मैंने कह दिया या तो बैठ जाए और या सदन से बाहर चले जाए मैंने आपसे कह दिया माननीय सदस्‍य या तो आप बैठ जाए या सदन से बाहर चले जाए।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): ***

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

श्री अध्‍यक्ष: Choice is yours. Choice is yours. आपको जो अच्‍छा लगे वो कर लें या तो आप बैठ जाए या सदन से बाहर चले जाए।

श्री अमराराम (धोद): ***[3]

एक माननीय सदस्‍य ***

श्री अध्‍यक्ष: आज आखिरी दिन है इस सत्र का आखिरी दिन है और मुझे....(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य ***

श्री अध्‍यक्ष: आज सदन का आखिरी दिन है। ढाई साल के अरसे में मैंने जिस सदाशयता के साथ इस सदन को चलाने का प्रयत्‍न किया है मैं नहीं चाहती हूं कि आज सदन के आखिरी दिन में इनको कहूं और निकालने के लिए मजबूर करूं, मैंने कह तो दिया लेकिन मैं मार्शल से यह बात कहूं और इन्‍हें हटाऊं, यह मैं नहीं चाहती हूं क्‍योंकि मुझे याद आता है एक शेर कि:- तमाम उम्र तो गुजार दी मौमिन बुतों को पूजते हुए, अब आखिरी वक्‍त क्‍या खाक मुसलमां होंगे।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: अब देखों गलत बात है। माननीय सदस्‍य हद हो गई, माननीय सदस्‍य हद हो गई है, अब माननीय सदस्‍य मैं कुछ नहीं सुनूंगी नहीं ...(व्‍यवधान) इतना कहने के बाद कोई समझदार आदमी, मैं आपको समझदार समझती हूं, ...(व्‍यवधान) आप बहिष्‍कार करों शौक से पधारो।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: तो आप बहिष्‍कार सरकार के खिलाफ क्‍यों कर रहे हैं मेरी व्‍यवस्‍था के खिलाफ करिएगा आपको जो कुछ करना है मैंने दी है यह व्‍यवस्‍था (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: ...(व्‍यवधान) चर्चा नहीं होती, वो कत्‍ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती मैं आपको यह शुद्ध कर रही हूं।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री सुरेश मीणा (करौली): ***

श्री अध्‍यक्ष: आपको मैंने निवेदन कर दिया था कि इसके बाद में जब जीरो आवर खत्‍म हो जाएगा उसके बाद आप अपनी चर्चा उठा लें मैंने कहा था आपसे।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सदन का ध्‍यान मिड-डे मील में अब तक हुई गड़बडि़यों की और और मीड-डे मील के माध्‍यम से जो वर्तमान में नए एन जी ओज् बने रहे हैं और जिस प्रकार का गठन किया जा रहा है उसमें व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार और अवैधानिक रूप से और कानूनी रूप से उन संस्‍थाओं को प्रश्रय देने की और दिलाना चाहता हूं।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): क्‍या चर्म रोग हो रहा है, आप ऐसे...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह गलत है, आप कृपया शांतिपूर्वक सुने फिर जवाब दे ऐसे नहीं...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): जब तक दोनों आंखें साबित नहीं हो दिखता नहीं है, दोनों आंखें साबित होनी चाहिए।

(श्री रामनारायण बिश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष पदासीन)

उपाध्‍यक्ष महोदय, गत सत्र में मीड-डे मील में हुए भ्रष्‍टाचार के सम्‍बन्‍ध में जिस प्रकार की व्‍यवस्‍थाएं हुई, जिन लोगों को, जिन संस्‍थाओं को बिना टेण्‍डर के करोड़ों रूपए मीड-डे मील के ऑर्डर दिए गए उन पर सदन में बहुत गंभीरता से , विस्‍तार से चर्चा हुई थी और सदन ने यह माना था कि इस प्रकार की, जिस प्रकार जो भ्रष्‍टाचार हुआ है, जिस प्रकार की व्‍यवस्‍थाएं की गई हैं, जिस प्रकार की संस्‍थाओं को लाभ पहुंचाने के लिए बिना टेण्‍डर के सामान सप्‍लाई करने का आदेश दिया है उसमें भ्रष्‍टाचार को देखते हुए व्‍यापक रूप से सदन ने यह फैसला किया था और फैसला  यह किया था माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कि उस समस्‍त भ्रष्‍टाचार की जांच यहां की समिति करेगी  कि किनको टेण्‍डर दिया गया, किनको यह लाभ पहुंचाया गया, लाभ देना उचित था या अनुचित था? सारी प्रकार की व्‍यवस्‍थाएं उस समय विधान सभा की समिति के द्वारा करना था माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे यह कहते हुए बड़ा दु:ख है कि उस समिति की मिटिंग इस सिलसिले में , इस व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार के सिलसिले में, इस गंभीर अनियमितता के सिलसिले में, इस अवैधानिकता के संबंध में आज तक भी उस समिति ....(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, जरा इन्‍होंने स्‍थगन जिस विषय को लेकर के दिया है उस पर आप मुलाहिजा फरमा लें, विषय क्‍या है और जा कहां रहे हैं? विषय यह है कोटा में जो जीवन मंगल ट्रस्‍ट है, चेरिटेबल ट्रस्‍ट है उसमें कोई अनियमितता की है। ये कहां पोषाहार की बात ले आये, मतलब इस स्‍थगन की आड़ के अन्‍दर चाहे जिस विषय पर बात छेड़ दें ..(व्‍यवधान) नहीं, मूल विषय पर आये आप।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): वो सीधा मुझे कोटा पर ले जाना चाहते हैं...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप पढ़ ले आपका स्‍थगन किस विषय पर है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मैं कोटा पर भी आऊंगा, आप तसल्‍ली तो रखो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):  आपके पास अवसर है, आपको मौका मिलेगा नहीं तो अध्‍यक्ष महोदय उनकी जुबान पर ताला लगा देंगे क्‍या मुझे यह बताओं आप। आपका उत्‍तर मिलेगा जवाब दे देना आप।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस गंभीरतम व्‍याप्‍त ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य आपको दो मिनट का समय दिया गया है आप कृपया दो मिनट के अन्‍दर ....(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): दो मिनट क्‍यों, घंटेभर का समय तो सभी ले गये।

श्री उपाध्‍यक्ष: ले गये, वह अलग बात है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं तथ्‍यों की बात कर रहा हूं, भ्रष्‍टाचार को उजागर कर रहा हूं, अनियमितता की बात कर रहा हूं तो बोलने से पहले ही रूकावट आ गई।  इसी संदर्भ में कह रहा हूं।

 

भीम/अरुण/9.10.06/13.40/2a

 

कि जिस प्रकार से जिन संस्‍थाओं को उस समय इन्‍वोल्‍व किया गया था वो संस्‍थाएं फिर अभी वर्तमान में इस प्रकार के प्रयास कर रही हैं कि एक ओर तो उनको  ब्‍लेकलिस्‍टेड किये जाने की कार्यवाही है और दूसरी ओर वो दूसरे नामों से इस प्रकार की व्‍यवस्‍था कर रहे हैं ।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यहां फाइव स्‍टार होटल में उन गरीब बच्‍चों को मिड डे मील देने के संबंध में माननीय मुख्‍यमंत्री जी की उपस्थिति में यहां पर फाइव स्‍टार होटल में उन एनजीओज को बुलाया गया और इस बात के प्रयास किये गये कि राजस्‍थान में गरीब बच्‍चों को मिड डे मील  एनजीओज के माध्‍यम से दिया जाएगा। उसकी महत्‍वपूर्ण, गरीबों के लिए जो दो रुपये तीन रुपये पर डाइट की व्‍यवस्‍था करने के लिए राजस्‍थान सरकार की माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने बहुत आलीशान फाइव स्‍टार होटल में एनजीओज की मीटिंग बुलाई । उस एनजीओज की मीटिंग में केन्‍द्र सरकार के निर्देशानुसार और केन्‍द्र सरकार के हिसाब से माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने यह फैसला किया कि अब जितना भी जो काम होगा वो हम एनजीओज को देंगे। एनजीओज को दें इसमें कोई आपत्ति नहीं है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, लेकिन उन एनजीओज को किस प्रकार से दिया जाए इसके मामले में केन्‍द्र सरकार के, राजस्‍थान सरकार के डाइरेक्‍शंस हैं, कितने ही वहां पर फाइव स्‍टार होटल में जो एनजीओज के नाम में जो व्‍यवसायी थे जो व्‍यवसाय करते थे जिनकी बड़ी-बड़ी मिलें थी वो एनजीओ बनाने के नाम से माननीय मुख्‍यमंत्री जी के पास आकर गम्‍भीरता से उन्‍होंने कहा कि इन गरीबों का मिड डे मील देने का काम हम करेंगे । माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको जो निवेदन करने जा रहा हूं कि और जिस संदर्भ में मैंने स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है मैं निवेदन करना चाहता हूं कि उनकी प्रेरणा के बाद माननीय मुख्‍यमंत्री जी की प्रेरणा के बाद माननीय मुख्‍यमंत्री जी से हुए विचार-विमर्श के बाद जो सेठ साहूकार जो करोड़पति फर्मे वहां पर एनजीओज के नाम से फाइव स्‍टार होटल में आनन्‍द उठाते हुए उन व्‍यवस्‍थाओं को करने के लिए जो आयी थी उन सब ने तत्‍काल आनन-फानन में अपने-अपने गांव गये, अपने स्‍थान पर गये और उन्‍होंने फैसला किया कि किसी भी प्रकार से एनजीओ का गठन हो जाना चाहिए। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि ऐसे का ऐसा गठन कोटा में जो अभी तत्‍काल यहां से जाने के बाद इन्‍होंने जो किया उसका रजिस्‍ट्रेशन एक जीवन चेरीटेबल ट्रस्‍ट के नाम से वहां पर कोटा में हुआ 17.6.06 को वो रजिस्‍ट्रेशन होने के बाद मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं उस रजिस्‍ट्रेशन के करने के पीछे कौन लोग हैं क्‍या वो ट्रस्‍ट सार्वजनिक रूप से उपयुक्‍त है और क्‍या उसके ट्रस्‍टी उचित आदमी हैं क्‍या वो समग्र स्‍थान को वो प्रति‍निधित्‍व करने वाले हैं? माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उसमें जो है वो ट्रस्‍टी तीन नाम हैं ट्रस्‍टी के तीन नाम हैं श्री राजेन्‍द्र अग्रवाल, दूसरा नाम है श्री आलोक पाराशर और तीसरा नाम है श्री सुधीर शर्मा।  सुधीर शर्मा श्री अग्रवाल साहब के साले हैं और ये जो आलोक पाराशर हैं ये पुरानी जो मील है उसके मैनेजर हैं इसके अलावा जो एसोसिएट्स बताये गये हैं उसमें बताया है मल्‍टीमेटल्‍स लिमिटेड वो कौन हैं मल्‍टीमेटल्‍स लिमिटेड में श्री राजेन्‍द्र जी अग्रवाल जो इसमें ट्रस्‍टी हैं वो राजेन्‍द्र जी अग्रवाल उस एसोसिएट्स में मल्‍टीमेटल्‍स की तरफ से करने धरने वाले हैं वो इसमें एसोसिएट्स हैं।  श्री हाड़ौती पूंजी विकास की जो एक संस्‍था है उसमें अल्‍पना अग्रवाल उनके परिवार की...।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री हरिमोहन शर्मा: मैंने स्‍पेसिफिक दिया है।

श्री उपाध्‍यक्ष: वो ठीक है ।

श्री हरिमोहन शर्मा: मैंने उसमें नाम लिखा है। मैंने नाम लिखा है इस ट्रस्‍ट का।

श्री उपाध्‍यक्ष: वो मिडडे मील के कुछ..।

श्री हरिमोहन शर्मा: मिड डे मील पर ही तो बता रहा हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: ...प्रबंध के अन्‍दर कोई शिकायत आपकी आयी हो वो बताइये।    श्री हरिमोहन शर्मा: आप सुनें तो सही। वो ही बता रहा हूं।  इसमें जो कोटा दाल मिल जिसमें शंभु अग्रवाल और कोटा दाल मिल वो दाल मिल है जिस पर गत विधान सभा के सत्र में यह आरोप लगा था, ये वो संस्‍था है जो मिलीभगत करके करोड़ों रुपयों के बिना टेण्‍डर के ठेके करके उनको माल सप्‍लाई किये जाने का जो ठेका था वो इनके पास है तो ठेकेदार भी ये ही हो गये ठेका लेने वाले भी ये हो गये माल की सप्‍लाई करने वाले भी ये ही हो गये और ये ही ट्रस्‍टी बन गये। ये ट्रस्‍टी बन गये और ट्रस्‍टी बनने के बाद जो 17.6 को जो ट्रस्‍ट का निर्माण हुआ उसमें केन्‍द्र सरकार और राज्‍य सरकार के सीधे निर्देश हैं कोई भी नया जिसको अनुभव नहीं होगा उसको किसी भी प्रकार का कोई इस प्रकार का नहीं दिया जाएगा लेकिन अफसोस है इस बात का इन सब उल्‍लंघनों के बाद जो 17.6 को इनका रजिस्‍ट्रेशन हुआ और माननीय कलेक्‍टर, कोटा ने दिनांक 7.07.06 क्रमांक मिड डे मील 2006/410 श्री सुधांशु पंत, निदेशक मिड डे मील कार्यक्रम राजस्‍थान, जयपुर को एक पत्र लिखा और पत्र लिख कर यह कहा कि यह संस्‍थान है तो नहीं अनुभव तो इसका नहीं है लेकिन इसकी वित्‍तीय स्थिति बहुत सुदृढ़ है और फाइनेंस के हिसाब से यह कोई हटने वाली नहीं है। उन्‍होंने यह लिखा कि इनकी इस संस्‍था को जो आइटम्‍स इसमें काम में लिये जाते हैं 29 आइटम्स उसमें कलेक्‍टर ने यह रिकमंड किया कि वेट से हण्‍ड्रेड परसेंट मुक्ति इस संस्‍था को तत्‍काल दे दी जानी चाहिए। इस प्रकार अनुभवहीन होते हुए उपयुक्‍त व्‍यवस्‍थाएं नहीं होते हुए प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बन गई। एक ओर आप एनजीओ की बात करते हो कि एनजीओ किस प्रकार की होनी चाहिए सामा‍जिक संस्‍थाएं किस प्रकार की होनी चाहिए और उसके बाद एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी सेठ साहूकार पैसे वाले  कमाने वालों की कंपनी बना ले और लिमिटेड बनने के बाद उसका ठेका ले और फिर कहें कि साहब जो है एनजीओज के माध्‍यम से तो इस प्रकार अवैधानिक रूप से नियमों के विपरीत इस प्रकार की अनेक कुकुरमुत्‍ती संस्‍थाएं माननीय मुख्‍यमंत्री जी के निर्देश से पूरे राजस्‍थान में ये एनजीओज इस प्रकार फर्जी एनजीओ गठित करके और इस प्रकार की व्‍यवस्‍थाओं को हड़पना चाहते हैं और कलेक्‍टर के माध्‍यम से राजनीतिक दबाव अनुभव न होते हुए भी उसकी रिकमंडेशन करा के वेट में मुक्ति दिलाकरके और इस सब प्रकार की व्‍यवस्‍थाएं कर रहे हैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है...।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, कोई विद्यालय की तरफ से आया हुआ है क्‍या कि मिड डे मील की व्‍यवस्‍था ठीक नहीं है या आप हवा में ही बात कर रहे हैं? कोई विद्यालय की तरफ ये आया है क्‍या कि इस संस्‍था के द्वारा मिड डे मील का कार्य सही नहीं चल रहा है ? आप ऐसे भ्रम में ही ...।

श्री हरिमोहन शर्मा: मेरा तो प्रश्‍न यह नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: आपका तो प्रश्‍न यही है।

श्री हरिमोहन शर्मा : नहीं-नहीं, आप पढ़ें उसको। एक बार पढकर सुनायें आप। मैं यह नहीं कह रहा हूं । आप पढ़कर तो सुनाओ उसको मेरा जो एडजोर्नमेंट मोशन है।    श्री उपाध्‍यक्ष: यह आपने ही दिया है...।

श्री हरिमोहन शर्मा: हां पढ़ो आप।

श्री उपाध्‍यक्ष: मिड डे मील को जीवन संबल ट्रस्‍ट को देने से उत्‍पन्‍न स्थिति के संबंध में।   कोई अव्‍यवस्‍था हो ... ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा: हां तो आगे पढ़ें तो सही आप। ...(व्‍यवधान)... मैं यही कह रहा हूं कि इस प्रकार से मुख्‍यमंत्री जी के दिशा निर्देशों में राजस्‍थान में फर्जी एनजीओ बनकर इस सरकार के माध्‍यम से प्रशासनिक अधिकारियों पर प्रभाव डालकर इस प्रकार फर्जी एनजीओ बनाये जा रहे हैं और मिड डे मील का सारा टेण्‍डर, सारा ठेका सारा काम एनजीओ के माध्‍यम से दिया जा रहा है। पूर्व में भ्रष्‍टाचार के पूरे आरोप लगे थे इस प्रकार यह राजस्‍थान सरकार यह मौजूदा विभाग भ्रष्‍टाचार को पनपाने के लिए अपने-अपने ढंग से अपने लोगों को एनजीओज में दाखिल करके और एनजीओज की परिभाषा को बदलकर उन लोगों को लाभ पहुंचाना चाहते हैं इसमें भ्रष्‍टाचार होगा सारा पैसा इसमें जो है 75 प्रतिशत पैसा केन्‍द्र ने दिया है सारा पैसा इसमें केन्‍द्र का है केवल मात्र 25 प्रतिशत पैसा देना पड़ता है और आप इनका रिकार्ड उठा करके देखें तो कई तो ये बच्‍चों की संख्‍या एक करोड़ कुछ एक लाख बता देंगे कई जब उनको देने की उनको गेहूं देने की बात आएगी तो 70-72 लाख बता देंगे, जब वास्‍तविकता में देंगे तो चालीस लाख बता देंगे।  इस प्रकार इस गेहूं के आबंटन को बच्‍चों की उपस्थिति कम होते हुए भी अधिक बताकर ये एनजीओज सारा भ्रष्‍टाचार पैदा करना चाहते हैं। इस प्रकार की जो व्‍यवस्‍थाएं, राजस्‍थान सरकार ने पहले भी कमेटी बनायी थी इस प्रकार की जो व्‍यवस्‍थाएं हैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि जो गरीबों के लिए पैसा आ रहा है जो बच्‍चों के लिए पैसा आ रहा है, जो बच्‍चों के लिए केन्‍द्र से गेहूं मिल रहा है जो फाइनेंसियल असिस्‍टेंस मिल रही है उस पैसे को सेठ साहूकार फर्जी तरीके से एनजीओज के नाम से काम करके खाना चाहते हैं और इसकी सारी जिम्‍मेदारी राजस्‍थान सरकार की है तो मैं राजस्‍थान सरकार से अनुरोध करूंगा कि नियमों के अनुसार ठीक प्रकार से कार्यवाही करें और इस प्रकार का अगर भ्रष्‍टाचार बढ़ता रहा तो हम भी पीछे नहीं रहेंगे और मुकाबला करेंगे इस भ्रष्‍टाचार को उजागर करने के लिए और जो लोग इस भ्रष्‍टाचार को प्रश्रय देते हैं उनको बेनकाब करेंगे।  आपने मुझे अवसर दिया उसके लिए धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री चन्‍द्रशेखर बैद।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, ...।

श्री उपाध्‍यक्ष: इनका तो जनरल था।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, मैं निवेदन करना चाहता हूं उपाध्‍यक्ष महोदय ।

श्री उपाध्‍यक्ष: जनरल भाषण ही दिया है इन्‍होंने।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं उपाध्‍यक्ष महोदय,उपाध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने कुछ स्‍पेसिफिक बातें की हैं सरकार की तरफ से अगर उत्‍तर कोई देना चाहे तो आपकी अनुमति हो तो, आसन की अनुमति हो ता?

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): मंत्री जी बैठे हैं ...(व्‍यवधान)...    श्री हरिमोहन शर्मा: अभी आप तसल्‍ली रखें अभी डाक्‍टर बैद को भी मोका है वो भी बोलेंगे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने आसन ने सही फरमाया था कि कुछ माननीय सदस्‍यों को हवा में बातें करने की आदत हो जाती है। हिण्‍डोली से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जिस जीवन संबल ट्रस्‍ट की बात कही उपाध्‍यक्ष महोदय, किसी भी तरह का कोई एमओयू न जिला स्‍तर पर न राज्‍य स्‍तर पर इस ट्रस्‍ट के साथ सरकार का हुआ है उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि मिड डे मील के रूप में राजस्‍थान के करोड़ों बच्‍चों को ....

 

कैलाश/अरुण      9.10;2006   13.50  (1) 2b

 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सुरुचिपूर्ण भोजन देने की जो नई पहल, जो अनूठी पहल ...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपके पास विभाग नहीं है ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उत्‍तर सुनो ना । नहीं है तो क्‍या हुआ मुझे अनुमति दी है ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप इस विभाग के मंत्री नहीं है । आपके विभाग के मंत्रियों से जवाब दिलवाओ ।

श्री उपाध्‍यक्ष: कोई भी मंत्री जवाब दे सकता है ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): उपाध्‍यक्ष महोदय, या तो विभाग के मंत्री जवाब देंगे या यह कहे कि हमारे विभाग के मंत्री जवाब देने की स्थिति में नहीं है इसलिए पार्लियामेंट्री अफेयर मिनिस्‍टर जवाब दे रहे हैं ।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य सरकार की तरफ से कोई भी मंत्री जवाब दे सकता है ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, पंचायती राज मंत्री आज जिला प्रमुखों का किशनगढ में सम्‍मेलन हो रहा है उसमें है इसलिए मैं आपकी अनुमति से निवेदन कर रहा था मैं निश्चित तौर पर मानता हूं कि सदन के एक एक मिनट का बड़ा उपयोग है पर हम कोई तर्क के आधार पर बात करें, कोई तथ्‍यों के आधार पर  बात करें, हम सिर्फ इस सदन में कुछ बोलना है इसलिए बात करें । उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से रिकार्ड पर लाना चाहता हूं कि जिस जीवन संबल चैरिटेबल ट्रस्‍ट, कोटा की इन्‍होंने बात की है .. (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह कलेक्‍टर का लैटर है जो आपको रिकमंड किया है, यह कलेक्‍टर का लैटर है । यह कलेक्‍टर का लैटर नहीं है या जिसने रिकमंड किया है ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह मेरे पास भी है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप सुनने की क्षमता रखिए । आप बीच में नहीं टोके ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन कर रहा था राजस्‍थान में एक अनूठी योजना माननीय मुख्‍य मंत्री जी के नेतृत्‍व में चली जिसकी भूरि भूरि प्रशंसा न केवल हिन्‍दुस्‍तान में बल्कि अन्‍तरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर हुई । उस योजना के बारे में कई माननीय सदस्‍यों को अच्‍छा नहीं लगा । यह जिस जीवन चैरिटेबल ट्रस्‍ट की बात कर रहे हैं निश्चित तौर पर एक नीति सरकार ने बनाई थी 2006 में किस तरह से एनजीओ को मिड डे मील से जोडा जाये । कई लोगों के प्रस्‍ताव आये थे । इसमें कोई शक नहीं है कि इस ट्रस्‍ट ने भी प्रस्‍ताव दिया था कि कोटा संभाग के जो छात्र हैं, लगभग 20 हजार छात्रों को जो सरकार की तरफ से मिड डे मील के रूप में पैसा मिलेगा उसके साथ अपना सहयोग करना चाहता है और विशेष तौर पर सेंट्रल आधुनिक किचन बनाना चाहते हैं । उपाध्‍यक्ष महोदय, हर चीज में हम राजनीति करें, राजनीतिक दल अलग अलग हो सकते हैं, विचारधारा अलग अलग हो सकती है पर निश्चित तौर पर कुछ ऐसे लोग मैं नाम नहीं लूंगा न जाने क्‍यों किस आधार पर विरोध किया और उस ट्रस्‍ट ने अपना प्रस्‍ताव वापस ले लिया । अगर मुख्‍य मंत्री जी की पहल पर कोई ट्रस्‍ट आगे आता है और अपना प्रस्‍ताव देता है उसकी भूरि भूरि प्रशंसा करनी चाहिये । ना कोई एमओयू हुआ, न कोई आध्‍ंार हुआ बिना आधार तरह का आरोप लगाना मैं समझता हूं बेबुनियाद है और सदन का समय बिना कारण से नष्‍ट करने की बात है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री चन्‍द्र शेखर बैद । माननीय सदस्‍य, नहीं इस पर आगे कोई चर्चा नहीं ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): उपाध्‍यक्ष महोदय, जब कलेक्‍टर ने रिकमंड कर दिया ।

श्री उपाध्‍यक्ष: कर दिया होगा ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): समाचार पत्रों के माध्‍यम से और टीवी के माध्‍यम से यह सारा भ्रष्‍टाचार उजागर होने को हुआ तो परसों के रोज जाकर इन्‍होंने दरख्‍वास्‍त दिलवाई है कि यह सरकार बदनाम हो जायेगी ।

श्री उपाध्‍यक्ष: कोई अंकित नहीं होगा ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली):  ***

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री चन्‍द्र शेखर बैद ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, पाइंट आफ इन्‍फोरमेशन ।

श्री उपाध्‍यक्ष: मैंने नाम पुकार लिया है श्री चन्‍द्र शेखर बैद । आप कृपया बैठ जाइए ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे सूचना देनी है आपको । उपाध्‍यक्ष महोदय, आपको मालूम है 11 तारीख से एसएमएस स्‍टेडियम में क्रिकेट के मैच होने जा रहे हैं और मैं आपको जानकारी देना चाहूंगा कि आज अखबारों में रचा पडा है जिस तरह से आरसीए द्वारा, राजस्‍थान क्रिकेट संघ द्वारा कुछ अखबारों को और मीडिया को जिसमें एनडी टीवी, राजस्‍थान पत्रिका, हिन्‍दुस्‍तान टाइम और पंजाब केसरी के जो स्‍थानीय संवाददाता हैं जिनके पास बीसीसीआई के पास बनकर आ गये और यहां आरसीए के अध्‍यक्ष द्वारा मना करने के बाद उनके पास नहीं दिये जा रहे हैं। इसकी प्रेस ने भारी निंदा की है, नोटिस दिये हैं । यह लगता है कि अगर अखबारों को नाराज कर के यहां पर इस तरह के क्रिकेट मैच होंगे तो उनके ऊपर असर पड सकता है और इसका कारण एक है कि गत माह जब आरसीए के अध्‍यक्ष के यहां इन्‍कम टैक्‍स का छापा पडा था तो एनडी टीवी, हिन्‍दुस्‍तान टाइम, राजस्‍थान पत्रिका और पंजाब केसरी ने यह खबर दी थी उसका बदला लेने के लिये, द्वेष भावना के लिये आरसीए और उनके पदाधिकारी और अध्‍यक्ष यह कार्यवाही कर रहे हैं यह बहुत अनुचित है । प्रेस की स्‍वतंत्रता है, प्रेस विधायकों के बारे में, मंत्री के बारे में, सरकार के बारे में कुछ भी लिख सकते है आरसीए इससे बड़ा नहीं है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य आप भाषण नहीं दें, माननीय सदस्‍य ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आप यह व्‍यवस्‍था करवाइए सरकार से .. (व्‍यवधान) प्रेस क्‍लब के अध्‍यक्ष और सैक्रेटरी का बयान आया है .. (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य,  कोई अंकित नहीं होगा । आप इन्‍फोरमेशन दे रहे हैं या भाषण दे रहे हैं ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

डा.बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर):  ***

श्री भवानी सिंह राजावत (संसदीय सचिव): ****

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री भवानी सिंह राजावत (संसदीय सचिव): ****

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, अखबारों के माध्‍यम से कोई बात यहां नहीं उठाई जा सकती ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री भवानी सिंह राजावत (संसदीय सचिव): ****

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ****

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य इस पर कोई चर्चा नहीं होगी ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ****

श्री उपाध्‍यक्ष: मैंने अलाऊ ही नहीं किया काहे का जवाब दिलवाऊं ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ****

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हां रिकार्ड करवा रहे हैं मीडिया के साथ किसी भी तरह का कोई पक्षपातपूर्ण व्‍यवहार नहीं होगा, रिकार्ड करवा रहे हैं ।

डा.बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर): ****

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप किस आधार पर कहते हो कि प्रेस को प्रवेश पत्र नहीं मिलेगा । समाचार पत्र के माध्‍यम से कोई बात सदन में उठाई जा सकती है क्‍या आप यह बता दो । आप तो पुराने सदस्‍य हो ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

डा.बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर): ****

श्री भवानी सिंह राजावत (संसदीय सचिव): ****

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री चन्‍द्र शेखर बैद ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मिड डे मील के बारे में अभी चर्चा हुई । मिड डे मील इतनी महत्‍वाकांक्षी योजना है जिसकी शुरूआत 15 अगस्‍त,1995 में तत्‍कालीन माननीय प्रधान मंत्री द्वारा की गई । उस योजना का संचालन राजस्‍थान राज्‍य में किस प्रकार से हो रहा है, उस योजना के लिये केन्‍द्र सरकार ने राज्‍य सरकार को कितने पैसे दिये और उस योजना के अंतर्गत कितना अनाज आपको प्राप्‍त हुआ और उसका मिस यूटिलाइजेशन किस तरीके से हो रहा है उसके बारे में मैं दो शब्‍द निवेदन करना चाहूंगा ।

  इसका रिवीजन करने के बाद लास्‍ट रिवीजन जो मिड डे मील स्‍कीम का हुआ है वह सितम्‍बर, 2004 में हुआ है और उसके अंतर्गत केन्‍द्र सरकार द्वारा यह निर्धारित किया गया कि प्रति बच्‍चे को 100 ग्राम गेहूं प्रतिदिन दिया जायेगा और साल में 220 दिन दिया जायेगा । साथ में उन्‍होंने यह भी निर्धारित किया कि प्रोटीन की मात्रा 8 से 10 ग्राम होगी और यह भी निर्धारित किया गया कि जो भी पका हुआ खाना आप बच्‍चों को उपलब्‍ध करायेंगे उसकी कैलोरिक वेल्‍यू 300 के कैलोरी होगी । अब एक तरफ राजस्‍थान के रूलर डवलपमेंट डिपार्टमेंट की प्रोग्रेस रिपोर्ट 2005-06 क्‍या बोलती है, वह यह कहते हैं कि कक्षा 1 से 5 तक कुल 74121 स्‍कूलों में अध्‍ययनरत 101 लाख छात्रों को मिड डे मील उपलब्‍ध कराया जा रहा है , यह आपकी प्रोग्रेस रिपोर्ट जो वार्षिक प्रतिवेदन 2005-06 है उसमें यह अंकित किया हुआ है । आपके जो डाइरेक्‍टर मिड डे मील है वह क्‍या फरमाते हैं, वह कहते हैं कि हमारे राज्‍य में 73 लाख 35 हजार बच्‍चों को मिड मील उपलब्‍ध कराया जा रहा है । पहली विसंगति तो यह हो गई सरकार के दो विभाग एक तो मिड डे मील के डाइरेक्‍टर जो यह कह रहे हैं कि 73 लाख 35 हजार और दूसरी तरफ रूलर डवलपमेंट डिपार्टमेंट का यह प्रतिवेदन जो कह रहा है 101 लाख, यह विसंगति । दूसरा मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं सरकार की रिपोर्ट में बिलकुल स्‍पेसिफिकली अंकित किया गया है पिछले सात साल के आंकडे देकर यह बताया गया है कि जो नामांकन होता है बच्‍चों और जो उपस्थिति होती है वह उपस्थिति 50 प्रतिशत होती है । आप यह देखिए 73 लाख 35 हजार बच्‍चों में से 50 प्रतिशत जब उपस्थिति होगी तो ड्राप आउट रेट हो गई 50 प्रतिशत और इसमें इसमें जो गेहूं केन्‍द्र सरकार ने आपको आबंटित किया 2005-06 में वह 116 लाख मैट्रिक टन गेहूं आबंटित किया । आपने उसमें से प्रयोग कितना किया, सिर्फ 58 हजार मैट्रिक टन गेहूं का उपयोग किया गया। बाकी 58 हजार मैट्रिक टन गेहूं का क्‍या हुआ सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं है ।

विष्‍णु/यू.एस./09.10.06/ 14.00/2c

 

इस तरह से पिछले साल और इस साल, पिछले साल 25 करोड़ का और इस बार 27 करोड़ का केन्‍द्र सरकार से गेहूं आबंटित हुआ। राज्‍य सरकार के पास पहुंचा। राज्‍य सरकार ने विभिन्‍न स्‍कूलों को जिनकी संख्‍या मैंने आपसे निवेदन किया 74121 है, वहां गेहूं भेज दिया। बच्‍चे वहां पर 50 परसेंट ही हैं। बाकी गेहूं का क्‍या हुआ? सरकारी विभागों ने मिलकर ठेकेदारों के साथ में पिछले साल 25 करोड़ का और इस बार 27 करोड़ के गेहूं का सीधा-सीध गबन किया है। यह सरकार के स्‍वयं के आकड़े बता रहे हैं और इसी का नतीजा है कि बारबार पिछले एक साल के अन्‍दर एक नहीं अनेकों बार यह खबरें आयीं कि मिड डे मील में लाखों की हेराफेरी का आरोप, भरतपुर के अन्‍दर आरोप लगा, धौलपुर के अन्‍दर लगा, उदयपुर के अन्‍दर लगा। मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि जिन छोटे बच्‍चों को स्‍कूल में कक्षा 1 से कक्षा 5 तक पढ़ाने के लिए केन्‍द्र सरकार की इतनी महत्‍वाकांक्षी योजना, जिसके अन्‍तर्गत यह निर्णय किया गया कि पढ़ने वाले बच्‍चों की संख्‍या बढ़े और वहां पर बच्‍चों में जो 50 परसेंट कुपोषण है वह कुपोषण दूर हो और बच्‍चों की ड्राप आउट रेट कम हो लेकिन ड्राप आउट रेट बजाए आपके प्रयासों के निरन्‍तर बढ़ती जा रही है। उसका कारण यह हेरा-फेरी है। साथ में मैं यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि इन्‍होंने राज्‍य सरकार ने यह माना है कि प्रति बच्‍चे को खाना पकाने के लिए केन्‍द्र सरकार की तरफ से एक रुपया दिया जाता है। एक रुपया राज्‍य सरकार देती है। आपने पिछले साल केन्‍द्र सरकार ने राज्‍य सरकार को 2004-05 में दिया 131 करोड़ रुपये और 2005-06 में दिया 114 करोड़ रुपये, टोटल आपको दिये 245 करोड़ रुपये और आपने खर्च कितने किये 235 करोड़ रुपये जबकि आपको 245 करोड़ रुपये अपनी तरफ से मिलाकर खाना पकाने पर व्‍यय किये जाने थे। इस प्रकार 250 करोड़ रुपये का, उधर आपने 75 और 75 दो साल के अन्‍दर मेरा कहने का तात्‍पर्य सिर्फ इतना है कि मिड डे मील स्‍कीम जो केन्‍द्र सरकार की शुरू की गयी है, केन्‍द्र सरकार के विभागों द्वारा, ठेकेदारों को बेवजह ठेका देने की वजह से वह बच्‍चों तक नहीं पहुंच पा रही है। सरकार को इस पर गम्‍भीरता से विचार करना चाहिए नहीं तो खाली आकड़े दिखाकर केन्‍द्र सरकार से पैसा लेना, केन्‍द्र सरकार से गेहूं लेना लेकिन जिस कारण से इस योजना की शुरूआत की गयी थी वह अपने मुकाम पर नहीं पहुंच पाएगी। सरकार को इस पर गम्‍भीर होना पड़ेगा। माननीय सार्वजनिक निर्माण मंत्रीजी अभी कह रहे थे कि यह बहुत बड़ी योजना है और मुख्‍य मंत्रीजी ने बहुत पहल की। मैं फिर कहता हूं कि माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने पाँच सितारा होटल के अन्‍दर जिन बड़ी-बड़ी संस्‍आओं के साथ में एम.ओ.यू. साइन किया है, उसके अन्‍दर भी यह स्थिति है कि 50 परसेंट पैसा सीधा-सीधा उनकी पॉकेट में जा रहा है। उस गरीब बच्‍चे के पेट में नहीं जा रहा है। यही मेरे को आपके माध्‍यम से निवेदन करना था। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल।

जिला शिक्षण प्रशिक्षण  संस्‍थान में प्रवेश हेतु ओ बी सी के छात्रों को प्रवेश में बरती जा रही अनियमितताएं

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका और सदन का ध्‍यान राजकीय शिक्षण प्रशिक्षण संस्‍थानों द्वारा किये जा रहे प्रवेश में बरती जा रही अनियमितता की ओर आकृष्‍ट करना चाहता हूं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह संस्‍थान डाइट के नाम से भी जाने जाते हैं और इन संस्‍थानों में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राएं एस.टी.सी. का कोर्स अपना करते हैं। गत समय 21.2.2005 को एक निर्देश जारी किया गया और निर्देश के तहत प्रवेश की प्रक्रिया का भी इसके अन्‍दर खुलासा किया गया और उसके तहत प्रवेश हुए। उसके बाद में माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 5.8.2006 को इस वर्ष के लिए उन्‍हें आवश्‍यक निर्देश जारी करते हुए प्रक्रिया का खुलासा किया गया, जिसके तहत प्रवेश होने थे। पूरे राज्‍य के उन सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्‍थान, मान्‍यता प्राप्‍त शिक्षण संस्‍थाएं, राजकीय संस्‍कृत शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालय, महापुरा, जयपुर एवं मान्‍यता प्राप्‍त संस्‍कृत शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालय में प्रवेश इनके द्वारा किये जाने थे।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रवेश-पत्र लिये गये। फार्म भरवाये गये। फार्म भरवाने के साथ ही इसकी प्रक्रिया को प्रारम्‍भ किया गया और गत 25 तारीख को इसके संबंध में, गत 29.09.2006 को एक लिस्‍ट लगायी गयी। जिस लिस्‍ट के तहत में 12.10.2006 तक फीस जमा करवानी थी। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उस लिस्‍ट को जो लगाया गया, उसके अन्‍दर वह आरक्षित वर्ग जिस आरक्षित वर्ग को इसमें प्रवेश देने के लिए अलग-अलग क्‍लासीफाई किया हुआ है, इसमें अनुसूचित जाति 16 परसेंट, अनुसूचित जनजाति 12 परसेंट, अन्‍य पिछड़ी जाति के आशार्थी 21 परसेंट और महिला आशार्थियों के लिए 40 परसेंट, इस प्रकार से अलग-अलग केटेगराइज किया गया था लेकिन जो सूची निकाली गयी उस सूची के अन्‍दर इन्‍होंने इस केटेगराइजेशन को बजाए इसके कि सामान्‍य अभ्‍यर्थियों की सूची और रिजर्वेशन की सूची, इसको जाना जाता, देखा जाता, उसको नहीं देखते हुए इन्‍होंने हर रिजर्वेशन की अलग मैरिट बनायी और उस मैरिट के बनते परिस्थिति यह उत्‍पन्‍न हुई कि जनरल मैरिट अगर 76 परसेंट पर आती है तो पर्टिकूलर रिजर्वेशन के बूते पर वह 86 परसेंट पर, मतलब रिजर्वेशन वाले का एडमिशन 86 परसेंट पर हो रहा है और जनरल वाले का 76 परसेंट पर हो रहा है। इस विसंगति की और ध्‍यान आकृष्‍ट करने का प्रयास किया गया लेकिन उसका कोई परिणाम माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सामने नहीं आया जबकि मैं निवेदन करना चाहता हूं कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट आफ इण्डिया के आदेश भी हो चुके हैं। उनकी तरफ से भी इसके बारे में फैसलें दिये जा चुके हैं। मैं हलावा देना चाहता हूं उसमें रितेश आर.शाह वर्सेज डाक्‍टर वाई.एल. यामनु, 1996 इसके अन्‍दर यह साफ-साफ दिया गया है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, “student who is entitled to be admitted on the basis of merit though belonging to the reserve category cannot be considered to be admitted against the seats reserved for reserved category.”

इसी तरीके से एक दूसरा फैसला और हुआ है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जिसके अन्‍दर इंदिरा साहनी वर्सेज यूनियन आफ इण्डिया, यह भी फैसला इसी प्रकार का था जिसके अन्‍दर रिजर्वेशन केटेगरी की वह स्‍टूडेंट को मानते हुए प्रवेश नहीं दिया गया जबकि वह जनरल मैरिट में स्‍टेंड करती थी और उनको रिजर्वेशन केटेगरी में डालने का प्रयास किया गया। तीसरा इसमें फैसला हुआ डिवीजन बेंच राजस्‍थान हाई कोर्ट, अनिता वर्सेज स्‍टेट आफ राजस्‍थान, डेटेड 17.10.2002, इसके अन्‍दर भी यही खुलासा किया गया, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसमें साफ-साफ लिखा गया “reserved category against reserved seats in case they fall in merit in general list candidate should be considered as a general candidate.”

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उसके बाद चयन की प्रक्रिया प्रारभ कर दी गयी और 12 तारीख दे दी गयी। अब इस प्रकरण को जैसे ही यहां  सदन में रखने का प्रयास किया गया, उसके साथ एक आदेश जारी किया जाता है और वह आदेश जारी किया जाता है 7.10.2006 को। उस आदेश में यह लिखा जाता है, कार्यालय- आयुक्‍त, प्रारम्भिक शिक्षा, राजस्‍थान बीकानेर द्वारा समस्‍त प्रधानाचार्य, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्‍थान।  बी.एस.टी.सी. में सत्र 2006-07 में प्रवेश के संबंध में। उपरोक्‍त विषयान्‍तर्गत निर्देशानुसार लेख है कि बी.एस.टी.सी. के सत्र 2006-07 में प्रवेश के संबंध में माननीय उच्‍च न्‍यायालय द्वारा डी.बी. स्‍पेशल 1442/99, दिनांक 17.10.2002 में पारित निम्‍न निर्णय एवं राज्‍य सरकार के पत्रांक सच एण्‍ड सच, दिनांक 16.08.2003 द्वारा जारी आदेश की पालना कर अवगत करावें। डी.बी.स्‍पेशल 1442/99 का निर्णय निम्‍न प्रकार है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उन नियमों का हवाला जिस वक्‍त यह आदेश पारित हुए, उसमें लागू नहीं किया गया और अब The Government of Rajasthan vide its letter No. …such and such dated 16.08.03 has issued a clarification on reservation of seats for reserved category students. This letter states as under:

“I am directed to say that the Hon’bel  Division Bench have passed the decision in D.B. Special appeal No. 1442/99 on 17.10.2002 that meritorious students of reserved category falling in the merit of general category can not be treated as against the reserved category meaning thereby that they will be treated as General Category Candidates.”

 

शिव/चौहान/14.10/2d/9.10.2006

 

उपाध्‍यक्ष महोदय, आदेश के होने के बावजूद गत अनेक वर्षों से डाइट के अंदर छात्र-छात्राओं के प्रवेश के अंदर घोर अनियमितता बरती गयी। आज इस प्रकरण को दिनांक 6 को सदन में जैसे ही पेश किया गया उसके बाद दिनांक 7 को संशोधन जारी करने के लिये निर्देशित किया गया है। इस निर्देश की कितनी पालना होगी, यह मैं नहीं जानता। मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन है कि यह आदेश न सिर्फ डाइट के अंदर बल्कि अन्‍य शैक्षणिक संस्‍थाएं हैं उनके अंदर भी लागू हो। इस बात को हम पूरी तरीके से एन्‍श्‍योर करें, यह मेरा निवेदन है और अब तक यह कोताही क्‍यों बरती गयी, यह जांच का विषय है। इसकी जांच करायें। आप मुझे समय दिया इसके लिये बहुत बहुत धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री जुबेर खान।

अलवर के एम.आइ.(औद्योगिक क्षेत्र) स्थित फैक्‍टरियां में गैस का रिसाव

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सरकार के ध्‍यान में लाना चाहूंगा कि मत्‍स्‍य औद्योगिक क्षेत्र है अलवर के पास में, जहां उस औद्योगिक क्षेत्र में हाल ही में 26 सितम्‍बर, 2006 को गैस का रिसाव हुआ और दो तरह की गैस का वहां पर अक्‍सर होता रहता है। हर दूसरे-तीसरे महीने कभी न कभी किसी न किसी फैक्‍टरी में यह हादसा होता रहता है। अमोनिया गैस और क्‍लोरिन गैस, यह दो तरह की गैस का वहां पर लीकेज होता है । वहां पर काफी कैमिकल की फैक्‍टरियां हैं । वहां जो 26 सि‍तम्‍बर को गैस लीक हुई, उसमें 15 आदमी बहोश हो गये और पुलिस ने कार्यवाही की इसके लिये तो मैं कहूंगा कि पुलिस ने कार्यवाही की, प्रशासन ने कार्यवाही की। लेकिन मेरा सदन के माध्‍यम से निवेदन है कि उसके बाद दशहरे के मौके पर भी गैस लीक हुई और रास्‍ते चलती औरतें और बच्‍चे भी बहोश हो गये। इसमें जो उद्योग मंत्री हैं या उद्योग विभाग है उसको यह सुनिश्चित करना पड़ेगा कि जो कैमिकल की फैक्‍टरियां हैं उनसे जो गैस का रिसाव होता है उसका एक ट्रीटमेंट होता है चूने और पानी में से जाकर वह गैस अगर छूटेगी बॉयलर के थ्रू तो उसका असर नहीं रहता है। यह लोग खर्चा बचाने के लिये सीधी गैस को छोड़ देते हैं फैक्‍टरी से जिससे पशुओं पर असर पड़ता है, आदमियों पर असर पड़ता है। बड़ी-बड़ी फैक्‍टरियां हैं जिससे वहां पर लोगों में अक्‍सर भय व्‍याप्‍त रहता है कि अगर मान लो कभी अंधेरी रात में गैस लीक हो गयी, लोग सोते रह गये तो बड़ा हादसा हो सकता है। मैं आपके माध्‍यम से सरकार से निवेदन करूंगा कि बॉयलर इंसपेक्‍टर, फैक्‍टरी इंसपेक्‍टर और पोल्‍यूशन डिपार्टमेंट के लोग, यह सब लोग क्‍या करते हैं? जब इस तरह के हादसे वहां होते हैं वह इनकी देखरेख नहीं करते, रोक नहीं लगाते। मैं लम्‍बी बात नहीं कहते हुए यही निवेदन करना चाहूंगा कि कभी बड़ा हादसा नहीं हो, इसको देखते हुए सरकार को कोई न कोई ठोस कदम उठाना चाहिये । वहां से पोल्‍यूशन से पानी निकलकर नदियों में, तालाबों में जाता है पशु उस पानी को पीते हैं और पशु अक्‍सर मर जाते हैं। इसके ऊपर कोई कार्यवाही की जाये नहीं तो वहां कोई न कोई बड़ा जन आन्‍दोलन खड़ा हो जायेगा। लोगों में भारी रोष है कि पता नहीं कब गैस का रिसाव हो जाएगा, क्‍योंकि वहां तरह तरह की कैमिकल फैक्‍टरियां हैं, उनके ऊपर अकुंश लगाया जाये। आपने समय दिया इसके लिये धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: डॉ0 बुलाकी दास कल्‍ला ।

राज्‍य के पैराटीचर्स को नियमित करने का वादा विषयक

डॉ0 बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से राज्‍य सरकार का ध्‍यान इस ओर आकषित करना चाहता हूं कि पैरा टीचर्स जो वर्ष 2000 में लगाये गये थे, उन पैरा टीचर्स को जब लगाया गया था तो यह लक्ष्‍य सामने रखा गया था कि उनके माध्‍यम से साक्षरता का प्रतिशत राजस्‍थान का बढ़ेगा और उस लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने में तत्‍कालीन सरकार कामयाब भी हुई और अनेक लोग इसमें लगे। लगभग 37 हजार से ज्‍यादा पैरा टीचर्स राजस्‍थान में लगाये गये। भंयकर अकाल की विभिषिका के होते हुए भी हमने शिक्षा केन्‍द्र चलाये और उनके कार्य करने की अवधि सामान्‍य शिक्षकों की तुलना में लगभग दो घण्‍टे कम रखी जिसके कारण वे लोग काम करते रहे। उसके बाद जब आज जो लोग सत्‍ता में हैं, यह उस समय विपक्ष में थे । इन्‍होंने यह मांग उठाई कि इनकी तनख्‍वाह बढ़नी चाहिये। इनका यह होना चाहिये, इनका वह होना चाहिये। हमने कैसी भी आर्थिक स्थिति थी, उसको ध्‍यान में रखते हुए उनका वेतन बढ़ाकर दो हजार किया। प्रतिवर्ष 200 रुपये इन्‍क्रीमेंट समझिये लम्‍प-सम हर साल उनका 200 रुपया बढ़ेगा । आज उनको जो 2,000 पैरा टीचर्स लगे थे, उनको लगभग 3600 रुपये मिल रहे हैं और जो 2001 में लगे उनको 200 कम और 2002 में लगे उनको 200 रुपये और कम । इस प्रकार से उनको तनख्‍वाह मिल रही है। लेकिन अब उनसे काम लिया जा रहा है एक सामान्‍य शिक्षक की तरह । सुप्रीम कोर्ट के ऐसे निर्देश हैं समान काम समान वेतन, इसके आधार पर पैरा टीचर्स ने कई बार राज्‍य के शिक्षा मंत्रीजी, गृह मंत्रीजी का और अभी 5 तारीख को जब उनका प्रदर्शन था तब उन्‍होंने राज्‍य की मुख्‍य मंत्रीजी से मुलाकात की और हमें ऐसी जानकारी दी गयी कि सरकार ने उनको नियमित करने का वायदा किया है। मैं जानना चाहता हूं कि सरकार की पैरा टीचर्स के बारे में क्‍या योजना है ? क्‍या आप उनका नियमितिकरण करने जा रहे हैं ? क्‍या आप उनको रेगुलर पे-स्‍केल देने जा रहे हैं क्‍योंकि अब राज्‍य में जो शिक्षा केन्‍द्र थे प्राथमिक शालाओं के रुप में, उनको क्रमोन्‍नत कर दिया है तो क्‍या आप उनसे सामान्‍य शिक्षक का काम लेकर अभी भी उनको पैरा टीचर रखेंगे अथवा नियमित सामान्‍य शिक्षक का ग्रेड देंगे और देंगे तो कब तक देंगे ? क्‍योंकि पूरे राजस्‍थान में जो 37 हजार पैरा टीचर्स काम कर रहे थे, उनमें कुछ पैरा टीचर्स आर पी एस सी द्वारा सामान्‍य शिक्षकों की भर्ती की गयी तो उसमें कुछ लोग सलेक्‍ट हो गये थे तो अब कितने पैरा टीचर्स राजस्‍थान में हैं जिनका आप नियमितिकरण करने जा रहे हैं और नहीं कर रहे हैं तो क्‍यों नहीं कर रहे ? क्‍योंकि राज्‍य सरकार को यह ध्‍यान में रखना चाहिये कि सुप्रीम कोर्ट ने जो लोग अकाल में काम कर रहे थे 6 महीने तक, उन्‍होंने रिट लगाई कि हमने 6 महीने तक लगातार काम कर लिया, ऐसे केसेज में भी उनको नियमित रखने के आदेश एकाध मामलों में हुए हैं। इन बातों को ध्‍यान में रखते हुए मैं इस सरकार से यह जानना चाहूंगा कि यह पैरा टीचर्स के बारे में सरकार की क्‍या नीति है ? मैं आपके माध्‍यम से यह बताना भी चाहता हूं कि उन पैरा टीचर्स को जो काम दिया जा रहा है दूरस्‍थ गांवों में, ढाणियों में, मजरों में जहां कोई नहीं जाता था, वहां वह पैरा टीचर्स जाकर काम कर रहे हैं और उनकी स्थिति बहुत खराब है। पिछले दिनों में जब आप लोग विपक्ष में थे तो कहते थे आत्‍महत्‍या कर रहे हैं पैरा टीचर्स। आत्‍महत्‍या की स्थिति को तो हमने सुधारा क्‍योंकि हमने जब 2000 और 200 रुपये का इन्‍क्रीमेंट दिया तो उनकी स्थिति में काफी सुधार आया और सुधार आने के बाद अब वह अटके हुए पड़े हैं । आज सामान्‍य शिक्षकों को 4500 रुपये का ग्रेड मिलता है और आज जिन लोगों को 3600 रुपये का ग्रेड मिलने लग गया है मात्र 900 का फर्क है। इस वेतनमान के आधार पर उनको और बेनीफिट्स मिलते हैं उनको राज्‍य सरकार को देना चाहिये। मैं आपके माध्‍यम से सदन को अवगत कराना चाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने ... (व्‍यवधान) ..

श्री मदन राठौड़ : आप क्‍या कर रहे थे ? ..(व्‍यवधान) आप मगरमच्‍छी आंसू बहा रहे हो । .. (व्‍यवधान)...

डॉ0 बुलाकीदास कल्‍ला : हमने उनको 2000 रुपये और उसके बाद में 200 रुपये का इन्‍क्रीमेंट हमारे कारण ही मिल रहा है । .. (व्‍यवधान) ...

डॉ0 श्री गोपाल बाहेती: पहले इनकी बात तो सुन लो। .. (व्‍यवधान) ... क्‍यों बोल रहे हैं, पहले इनकी बात तो सुन लो । .. (व्‍यवधान) ...

डॉ0 बुलाकीदास कल्‍ला: उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह बताना चाहता हूं कि सरकार ने चुनाव से पहले यह वायदा किया था कि हम प्रतिवर्ष एक लाख लोगों को रोजगार देंगे । .. (व्‍यवधान) ...

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित: उपाध्‍यक्ष महोदय, यह भी बता दें कि उस समय कितने तरह के शिक्षक पैदा किये थे ? कहीं कल्‍ला टीचर, कहीं जोशी टीचर और कहीं पैरा टीचर्स, तरह तरह के तो शिक्षा के जंजाल फैला दिये थे। .. (व्‍यवधान) ...

श्री उपाध्‍यक्ष: बीच में नहीं बोलें । .. (व्‍यवधान) ...

श्री जालमसिंह रावलोत: पांच साल में एक भी अध्‍यापक की भर्ती नहीं की गयी। एक भी स्‍थाई अध्‍यापक की भर्ती उनके राज में क्‍यों नहीं हुई जबकि हम एक लाख अध्‍यापक भरने जा रहे हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बीच में नहीं । .. (व्‍यवधान) ...

डॉ0 बुलाकीदास कल्‍ला : उपाध्‍यक्ष महोदय, हमने तो पैरा टीचर रखें। अभी सरकार ने इनको पता नहीं इनकी सरकार ने पैरा कर्मचारियों की योजना शुरू की है उसमें गजिटेड अफसर, डॉक्‍टर्स, इंजीनियर्स, लेक्‍चरार्स, आर ए एस आफिसर, डी वाई एस पी और चपरासी से लेकर सारे गजिटेड आफिसर पैरा लगाने की योजना बनाई है। इसलिए पहले पूरी जानकारी करके बोलिये । हमने जो पैरा टीचर्स लगाये थे तत्‍कालीन अकाल की परिस्थिति को ध्‍यान में रखते हुए लगाये थे और मैं आपको यह भी जानकारी देना चाहता हूं कि हमने नियम बनाया था कि जो नये अध्‍यापक की भर्ती करेंगे उन नये अध्‍यापकों में से 75 प्रतिशत पैरा टीचर्स को नियमित किया जायेगा। लेकिन इसके लिये एक पब्लिक इंटरेस्‍ट लिटिगेशन हो गया और पब्लिक इंटरेस्‍ट लिटिगेशन के कारण उस पर स्‍टे आ गया, नहीं तो हम सारे के सारे पैरा टीचर्स को नियमित कर चुके होते । उसके बाद बी जे पी की राज्‍य सरकार आयी।

महेन्‍द्र/चौहान/2e/1420/09102006

 

सरकार बी.जे.पी. की आयी, उन्‍होंने इस केस को विथ्‍ड्रा किया और शिक्षकों की भर्ती की। मैं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि राजस्‍थान में नोन प्‍लान के कितने पद खाली हैं, शारीरिक शिक्षकों के कितने पद खाली हैं? मैं आपको मेरी जानकारी के अनुसार बताना चाहूंगा कि 60 हजार से ऊपर विभिन्‍न सेवाओं के शिक्षकों के पद राजस्‍थान में रिक्‍त पड़े हुए हैं, उन रिक्‍त पदों को भरने की सरकार की क्‍या योजना है? मैं तो चाहता हूं कि 37 हजार पैराटीचर्स में से लगभग आधे के करीब नियमित शिक्षक बन चुके हैं, अब जो पैराटीचर्स रह गये हैं उनका तत्‍काल नियमितीकरण करने का काम करना चाहिए नहीं तो यह पैराटीचर्स सारे के सारे आन्‍दोलन की राह पर हैं, कोई आत्‍म हत्‍या करेगा, कोई खुदकुशी करेगा और कोई सरकार के सामने आन्‍दोलन की स्थिति पैदा करेगा। इससे अच्‍छा है नोन प्‍लान की पोस्‍टों को भरना चाहिए और जो वादा आपने राजस्‍थान की जनता से किया था कि हम एक लाख लोगों को प्रति वर्ष रोजगार देंगे, तीन वर्ष में मात्र आपने अभी तक छ:-सात हजार पद मृत कर्मचारियों के आश्रितों को दिये हैं, रिक्‍त पदों को आप भर नहीं रहे हैं, सर्व शिक्षा अभियान में जो पद 41 हजार भरे हैं उसमें अधिकांश पैसा केन्‍द्र सरकार का है।

इसलिए मैं आपके माध्‍यम से सरकार से यह कहना चाहता हूं कि वह तत्‍काल जो भी रिक्‍त पद हैं, चाहे वो शारीरिक शिक्षकों के हैं, चाहे सामान्‍य शिक्षकों के हैं अथवा अन्‍य श्रेणियों के हैं उनको तत्‍काल भरें और पैराटीचर्स का तत्‍काल नियमितीकरण करें। धन्‍यवाद।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बीकानेर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जिस पैराटीचर्स के विषय को उठाया, में सोचता हूं कि उनको इसकी बहुत अच्‍छी तरह से जानकारी है, स्‍वयं ने ही इस योजना को लागू किया था, 1200 रुपये में उनसे काम लेने का उनका ही विचार था। जब चुनाव के दिन नजदीक आये और पैराटीचर्स ने अपनी मांग को थोड़ा जोर से दखा तो उन्‍होंने जुलाई, 2003 में यह बात सही है कि उन्‍होंने उनकी सैलेरी 2000 रुपये की और 200 रुपये प्रति महीना--

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): एक मिनट, मैं आपको करेक्‍ट कर दूं। सैलेरी तो हमने बहुत पहले ही बढ़ा दी थी, 2001-2002 में ही बढ़ा दी थी। सैलेरी उस समय बढ़ा दी थी, नियमितीकरण का काम उसमें किया था।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): नियमितीकरण करने का तो समस्‍या बढ़ती गयी, हम लोग भी जब उधर प्रतिपक्ष में बैठते थे तब हमने भी उनके इस विषय को बारबार उठाया कि इनको भी एक अध्‍यापक के रूप में वेतन मिलना चाहिए और सम्‍पूर्ण सदन का भी यह विचार था कि निश्चित रूप से इनका एज ए टीचर के रूप में जो तनख्‍वाह मिलनी चाहिए वो मिले लेकिन चूंकि कोर्ट में यह मामला जब चला गया और कोर्ट ने दो बार दो निर्णय विभिन्‍न अलग-अलग लोगों की रिट के ऊपर फैसला हुआ, एक 04.01.2005 को हुआ और एक 28.02.2005 को हुआ और इसलिए यह कोर्ट ने फैसला किया इनको आप नियमित टीचर के रूप में नहीं दे सकते। इस पाबंदी के कारण से, इनके प्रति सहानुभूति आपकी थी तो हमारी भी है लेकिन केवल सहानुभूति से काम नहीं चलता, न्‍यायालय के इस निर्णय की पालना, चाहे कोई भी सरकार रही होगी उसको निश्‍चित रूप से करनी पड़ेगी और इसके कारण से उनको हम अतिरिक्‍त नहीं, लेकिन फिर भी सरकार ने, जैसा आपने 200 रुपये प्रति वर्ष बढ़ाने की बात उस समय की तो इस साल एक अप्रैल, 2006 से हमारी सरकार ने 400 रुपये प्रति माह बढ़ाने का भी अपनी तरफ से आदेश जारी किया और मैग्जिमम 4500 जहां उनका तृतीय शृंखला वेतन का जो ग्रेड शुरू होता है वहां तक बढ़ाने की स्‍वीकृति दी है लेकिन जहां तक नियमित करने का सवाल है, सह संभव नहीं हो पा रहा न्‍यायालय के निर्णय की बाध्‍यता के कारण से।

लेकिन आप देखें, हमने पैराटीचर्स की इस बात को, इस कष्‍ट को समझते हुए यह किया कि आर.पी.एस.सी. से जो भर्ती हमारी हो रही है उसमें चाहे वो एज को क्रोस भी कर गया लेकिन वो जिस तारीख से हमारे यहां काम कर रहा था उसको एज का रिलैक्‍सेशन दे कर के उसको एप्‍लाई करने का अधिकार दिया और जो उस क्‍वालिफिकेशन को फुलफिल कर रहा है, ऐसे मुझे एग्‍जैक्‍ट संख्‍या तो नहीं कह सकता हूं लेकिन पिछली बार जितने पैराटीचर्स थे  उसमें से लगभग सात या आठ हजार लोग इस नियमित अध्‍यापक के रूप में आये हैं और इस बार भी हमने 25 हजार अध्‍यापकों की भर्ती के लिए आर.पी.एस.सी. को भेजा हुआ है, उसमें भी उनको यह छूट दी है कि यदि वो उसमें नियमित रूप में सलैक्‍ट हो कर के आ जायेंगे तो उन्‍हें एज ए अध्‍यापक के रूप में उनकी स्‍वीकृति हो जायेगी।

लेकिन हम चाहते हुए भी, इच्‍छा होते भी न्‍यायालय के इस निर्णय के कारण से उनको नियमित अध्‍यापक के रूप में नहीं रख सकते। इसके कारण से यह बाधा जरूर है। मैं सोचता हूं कि उनके काम के बारे में, उनके इसके बारे में ना आपको संदेह है ना हम को संदेह है लेकिन जो एज ए अध्‍यापक अध्‍यापक की मिनिमम क्‍वालिफिकेशन पूरी करता है, 28000 जो आज की तारीख में पैराटीचर जो काम कर रहे है इनमें से अगर क्‍वालिफिकेशन के आधार पर छाटेंगे तो कुछ ऐसे भी हैं जो एक अध्‍यापक के लिए बी.एड. या एस.टी.सी. होना चाहिए या जो क्‍वालिफिकेशन है वो भी पूरी नहीं करता है फिर भी हम ने उनको निकाला नहीं, हम चाहते तो न्‍यायालय के उस फैसले के आधार पर उनको नौकरी से निकाल देते लेकिन हम ने उनको नौकरी से नहीं निकाला, नौकरी पर वो आज भी है और पैराटीचर्स 17000 हैं, अतिरिक्‍त पैराटीचर्स 2331 हैं, महिला पैराटीचर्स 6685 हैं और शारीरिक पैराटीचर्स 600 हैं आज की तारीख में भी लेकिन हमने इस सारी बात को होते हुए भी किसी को भी सेवा से मुक्‍त नहीं किया है।

जहां तक वेकेंसी के बारे में है, अब यह आलोचना का विषय हो जायेगी, में सोचता हूं वेकेंसी कोई हमने क्रियेट कर दी कल की कल, ऐसा नहीं है, पाँच साल में आपके द्वारा जो कुछ न हो सका न्‍यायालय की तकलीफ हुई होगी या और कोई समस्‍या आपके पास आ गयी होगी या आपने पैसे बचाने के लिए सोचा होगा, भगवान जाने, आप  जानो आपका काम पर उसमें भर्ती नहीं हो पायी कम से कम थर्ड ग्रेड टीचर की, उसकी जगह हमने 35 हजार पिछली बार भर्ती किये और 25000 की रिक्‍वेस्‍ट हमने अभी भेजी हुई है आर.पी.एस.सी. में, वो सलेक्‍शन होगा तो निश्चित रूप से यह जो कमी है उसकी पूर्ति होगी।

यह जो है न, आप कह रहे हैं कि 60000 पद खाली हैं, मैंने एक प्रश्‍न के उत्‍तर में सारा दिया था, हमने नोन प्‍लान में भी भर्ती की है, प्‍लान में भर्ती की है और सर्व शिक्षा अभियान के तहत 15000 शिक्षक हमने सर्व शिक्षा अभियान में भरी हैं और 25000 अभी सर्व शिक्षा अभियान के तहत जो वेकेंसी है वो हमने आर.पी.एस.सी. को भेज रखी है।

आपकी, हमारी, सदन की, सब की भावना है कि उनकी मदद की जाए लेकिन न्‍यायालय के निर्णय के आगे न आपका बस चलेगा, न मेरा चलेगा, जो कुछ होगा इसी के तहत ही निर्णय होगा।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक सवाल अगर आपकी आज्ञा हो तो।

श्री उपाध्‍यक्ष: कहिये।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक सवाल खड़ा होता है, पूर्व में भी गृह मंत्रीजी यह प्रश्‍न यहां आया था, उस वक्‍त भी, माननीय तिवाड़ीजी हैं नहीं सदन में, मैंने उस वक्‍त उनसे यह निवेदेन किया  था कि हाई कोर्ट में सेटे असाइट जो मांग की इसलिए की कि आपके रूल्‍स इस बात की आपको परमिशन नहीं देते हैं, क्‍या रूल्‍स को अमेण्‍ड करने की सरकार की कोई मंशा है? रूल्‍स अमेण्‍ड हो जाएं जिससे उनकी नियुक्ति में बाधा न आये। सवाल यह देखिये। खाली वो हाई कोर्ट, आपके जो सर्विस रूल्‍स हैं इनके बारे में बनाये हुए, उनका इण्‍टरप्रिटेशन करता है। उसके आधार पर इन्‍होंने कह दिया कि रूल्‍स इस बात की परमिशन नहीं देते हैं कि इनकी नियुक्ति आप कर सकें क्‍योंकि हमने निर्णय लिया था, जैसे बीकानेर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा कि इनमें से उनके लिए जो पोस्‍ट एडवरटाइज की थी इनके लिए 75 परसेंट हमने पोस्‍ट रिजर्व की थी लेकिन वो कोर्ट के आदेश के आगे उनकी पालना नहीं हो सकी तो मेरा आपसे सुझाव है ---

श्री उपाध्‍यक्ष: ट्रेंड अध्‍यापकों को तो मौका मिल रहा है। ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मेरा निवेदन सुन लीजिए। आज भी सब मिला कर के करीब-करीब 26-27000 पैराटीचर बाकी रह गया है। नम्‍बर बहुत बड़ा है महिलाओं के Number is a big. और उनके अन्‍दर आज रोष है तो इसके बारे में जो बीकानेर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा है, देखिये. When there is a will, there is a way.  जब आपकी इच्‍छा शक्ति है तो आप रूल्‍स अमेण्‍ड कर के, क्‍योंकि सर्व शिक्षा अभियान के तहत हम को पैसा नहीं मिला था, टीचर्स की सैलेरी के पेटे आज आपको ईश्‍वर की कृपा से 75 परसेंट पैसा भारत सरकार दे रही है थर्ड ग्रेड टीचर्स के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत। हमारे सामने कठिनाई थी, लगातार अकाल पड़ रहे थे और हम ज्‍यादा नियुक्ति नहीं दे पा रहे थे।

तो इसलिए मैं आपसे निवेदन करूंगा कि आज तो वित्‍तीय स्थिति ईश्‍वर की कृपा से अच्‍छी है राज्‍य सरकार की और सब राज्‍य सरकारों की। यहां की नहीं, हिन्‍दुस्‍तानभर के सूबों का, आपके लिए, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज फर्स्‍ट टाइम इन द हिस्‍ट्री 25 हजार करोड़ रुपया राज्‍य सरकारों का रिजर्व बैंक में जमा है जिसको कि उठा नहीं पा रही हैं राज्‍य सरकारें, राजस्‍थान का कितना है यह मुझे जानकारी नहीं है इस बात की लेकिन आज वित्‍तीय स्थिति आपकी बहुत सुदृढ़ है सारे राज्‍यों की, ओवर ड्राफ्ट खतम हो गया सारे राज्‍यों का। सारे राज्‍यों का, राजस्‍थान भी उसमें है। वेज एण्‍ड मीन्‍स की आप लिमिट का इस्‍तेमाल नहीं कर रहे हैं। इस सारी स्थिति को ध्‍यान में रखते हुए 75 परसेंट पैसा मास्‍टरों की तनख्‍वाह का आपको सर्व शिक्षा अभियान के तहत मिल रहा है तो क्‍या रूल्‍स को अमेण्‍ड करने का अगर आपका इरादा हो तो तो इस समस्‍या का निदान हो सकता है वरना वो भी परेशान हैं इस मामले में उनके अन्‍दर  भी रोष है, बारबार प्रदर्शन करते हैं।

आपने यहां कह दिया कि नहीं कर सकते, कोर्ट के आदेश के आपने कह दिया, एक तरफ मुख्‍यमंत्री उनके डेलिगेशन से बात की, एक अफसरों की कमेटी बना कर के उनकी समस्‍याओं का निदान करने की बात कही है। इस पृष्‍ठभूमि में आप इस पर विचार करा लें अपने ला डिपार्टमेंट से कि अगर इनके रूल्‍स का अमेंडमेंट हो जाता है तो समस्‍या का निदान हो सकता है। यही मैं आप से कहना चाहूंगा।           

 

Ars/usc/1430/09102006/2f/1

 

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): पहले इनका दे दें फिर मेरा।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): जहां तक इच्‍छा शक्ति का सवाल है नापना पड़ेगा कि आपकी ठीक है कि हमारी ठीक है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आपकी ज्‍यादा है, मैं तो कह रहा हूं आपकी बहुत ज्‍यादा है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): क्‍योंकि आपको भी यह मौका मिला था इच्‍छा शक्ति का वह आप प्रकट नहीं कर पाए। अब आप हमसे उम्‍मीद एकदम कर रहे हैं कि आपकी है कि नहीं है। मैं सोचता हूं कि ....

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मैं इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहता हूं। चुनाव के पहले आपने वादा कर दिया था कि हम आपको रेगुलराइज कर देंगे। चुनाव में तो आपने उनको भड़काया और भड़काकर के इस उससे कि सरकार के खिलाफ में जाएं, हम आपको रेगुलराइज कर देंगे। अब वक्‍त आया तो आप कहते हैं कि हाई कोर्ट का आदेश है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): वादा किसने किया, इस विधान सभा की प्रोसीडिंग्‍स निकाल दें कि आपकी सरकार ने कितनी बार इनको नियमित शिक्षक बनाने का वादा किया है उसकी भी प्रोसीडिंग निकाल लें। तो इसको इस रूप में लेने से कोई लाभ नहीं है। निश्चित रूप से एक समस्‍या है और इस समस्‍या के बारे में बार बार सदन में आता गया है। मैं सोचता हूं कि इस बारे में बैठकर के क्‍या विचार हो सकता है, कारण क्‍या हैं इसमें कई चीजें उलझी हुई हैं। न्‍यायालय ने कोई इस पर रोक लगाई तो केवल इस कारण से नहीं कि पैसे कम हैं या ज्‍यादा हैं लेकिन कुछ नार्म्‍स होते हैं सलैक्‍शन के उनको भी ध्‍यान में रखकर के इसके कारण मैं सोचता हूं कि आपने सुझाव दिया, ठीक है आपका सुझाव हमारे ध्‍यान में आया है।

श्री उपाध्‍यक्ष: सरकार सहानुभूतिपूर्वक विचार कर रही है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय गृह मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं क्‍या शिक्षा कर्मी योजना के अन्‍तर्गत शिक्षा विभाग ने उनको नियमित किया था या नहीं किया था और यदि किया है तो फिर इनके लिए जैसा अभी राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा, इसके लिए क्‍या आपका रूल अमेंड करने का विचार है या नहीं ?

श्री उपाध्‍यक्ष: वह उन्‍होंने कह दिया।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): दूसरा मैं आपसे यह जानना चाहता हूं कि आप जो साठ हजार शिक्षकों के पद नोन प्‍लान में रिक्‍त हैं, एक तरफ सर्व शिक्षा अभियान में केन्‍द्र सरकार आपको प्रतिवर्ष अनुदान दे रही है। ऐसी स्थिति में क्‍या आप इन पैरा टीचर्स को नियमित करके उस अनुदान का लाभ देना चाहत हैं या नहीं ? आपकी क्‍या योजना है, आपने क्‍या आश्‍वासन दिया, कम से कम सदन को यह तो अवगत कराएं। मुख्‍यमंत्री जी ने उनके एजीटेशन को अभी तीन चार दिन पहले यह कहकर छोड़ा है कि हम आपके बारे में विचार करेंगे । मैं आपको एक सुझाव देना चाहता हूं कि माननीय सदस्‍यों की एक कमेटी बनाकर इस समस्‍या का क्‍या समाधान हो सकता है इसको कमेटी के माध्‍यम से हल करने के लिए क्‍या आप तैयार हैं ?

श्री उपाध्‍यक्ष: सरकार गंभीरता से ले रही है इसको। मंत्री जी ने कह दिया है।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): मैं भी गंभीरता से एक सवाल पूछना चाह रहा हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): दो बार मंत्री महोदय ने जवाब दे दिया। शिक्षा विभाग पर बहस थोड़े ही हो रही है। आगे पुकारो ना।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): उपाध्‍यक्ष महोदय, आधे मिनट का सवाल है, पिछले समय में पैरा टीचर राजीव गांधी पाठशाला, शिक्षा कर्मी इनमें से कुछ ब्रिज कोर्स करवाया था। जो दसवीं, ग्‍यारहवीं, बारहवीं पास हैं .....

श्री उपाध्‍यक्ष: छोड़ो लम्‍बी हिस्‍ट्री है इसकी। बता दिया मंत्री जी ने ।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): मैं कुछ पूछ रहा हूं । उदयपुर डिवीजन में राजसमंद से लेकर डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर तक जो बच्‍चे एस टी, एस सी, ओ बी सी के थे, जिन्‍होंने परीक्षा दी वह नब्‍बे प्रतिशत फेल हो गये, अनएलीजि‍बल कर दिये गये। तो क्‍या सरकार उस बारे में भी कोई विचार कर रही है क्‍या ? नब्‍बे प्रतिशत कैसे फेल हो गये ?

श्री उपाध्‍यक्ष: आ गया । श्रीमती प्रतिभा सिंह।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): सब जगह पास हुए, एस टी सी की योग्‍यता प्राप्‍त करने के लिए वह चार चार साल से पढ़ा रहे थे, पाँच पाँच साल से पढ़ा रहे थे और परीक्षा में फेल हो गये।

श्री उपाध्‍यक्ष: है समस्‍या है, उसका कोई निदान करने की कोशि हो रही है।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): सरकार इस बारे में क्‍या उनको बायस्‍ड होकर फेल किया गया था या कोई इस बारे में कुछ तो विचार करें।

श्री उपाध्‍यक्ष: सरकार के ध्‍यान में है, विचार कर रही है। श्रीमती प्रतिभा सिंह।

295 के अन्‍तर्गत विशेष उल्‍लेख

विधान सभा क्षेत्र नवलगढ़ के ग्राम चैनगढ़ में पेयजल की व्‍यवस्‍था

 

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, नियम 295 के अन्‍तर्गत सरकार का ध्‍यान आकर्षित करना चाहती हूं। विधान सभा क्षेत्र नवलगढ़ के अन्‍तर्गत ग्राम चैनगढ है वहां बहुत ही गरीब लोगों की करीब सौ घरों की बस्‍ती है। उनमें अधिकांश अनुसूचित जाति एवं अन्‍य पिछड़ा वर्ग के हैं। उक्‍त गांव में पीने के पानी का एक ट्यूबवैल बना हुआ था उसका निर्माण कार्य दोषपूर्ण होने के कारण वह करीब एक वर्ष से बंद पडा है। जलदाय विभाग के अधिकारियों द्वारा उक्‍त स्‍थान पर नया ट्यूबवैल निर्माण के प्रस्‍ताव तैयार किये गये उसके बाद माह जून 2006 में वहां ट्यूबवैल स्‍वीकृत किया गया। जिसका निर्माण करने हेतु अधीक्षण अभियन्‍ता पी एच ई डी सीकर द्वारा कार्यादेश दिनांक 4 अगस्‍त,2006 को जारी किये गये।

महोदय, जलदाय विभाग के अधिकारियोंकी लापरवाही से आज तक भी चैनगढ़ के लोगों को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। वहां आस पास में पीने के पानी की दूसरी कोई व्‍यवस्‍था नहीं होने के कारण पानी के टैंकर्स से बहुत मंहगी दर से पानी भिजवाया जाता है । अत: मेरा आपसे अनुरोध है कि इतनी लम्‍बी अवधि तक भी ग्रामीणों को पीने के पानी की व्‍यवस्‍था नहीं करवाने वाले अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही करवाकर चैनगढ़ में पीने के पानी की व्‍यवस्‍था करवाने की कृपा करें।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री नवनीत लाल नीनामा।

माही विस्‍थापित किसानों का सर्वे करवाकर उनको जमीन दिलाने के संबंध में

 

श्री नवनीत नीनामा (घाटोल): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, दक्षिणी राजस्‍थान जिला बांसवाड़ा में 96 गांवों के 3113 आदिवासी कृषकों को जमीन दिलाने बाबत नियम 295 के तहत निवेदन करता हूं कि वर्ष 1966 में जिला बांसवाड़ा में माही नदीपर बडाडेम (तालाब) का निर्माण किया गया है। जिसमें पानी भराव पेटा में 112 गांवों की जमीन डूब में आने से 4407 परिवार विस्‍थापित हुए हैं। यह है कि 112 गांवों में से 16 गांवों के 1111 ( एक हजार एक सौ ग्‍यारह) परिवारों को अन्‍य जगह भूमि अलॉट कर बसाया गया है।

व 96 गांवों के 3113 ( तीन हजार एक सौ तेरह) आदिवासी किसान परिवार आज भी बेघर बार भटक रहे हैं। अत: मेरा सरकार से निवेदन है कि बांसवाड़ा के राजस्‍व विभाग कलक्‍टर व वन विभाग के अधिकारियों पर राज्‍य सरकार द्वारा माही विस्‍थापितों के भटकते किसानों की सर्वे कराई जाकर बेरोजगार आदिवासी परिवारों को कृषि की जमीन दी जाकर शांति से रहने की व्‍यवस्‍था कराई जाए।

मान्‍यवर, जब डेम बना था उस वक्‍त केन्‍द्र और राज्‍य सरकार ने यह निर्णय लिया था कि माही विस्‍थापितों को वन विभाग की भूमि में बसाया जाए लेकिन आज वन विभाग भी उस पर ध्‍यान नहीं दे रहा है। न राजस्‍व विभाग ध्‍यान दे रहा है। अत: मेरा आग्रह है कि आज ही इस बारे में माननीय मंत्री महोदय यहां हैं, मुझे कुछ आश्‍वासन दें।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री श्रवण कुमार। (अनुपस्थित) श्री ओ पी महेन्‍द्रा ।

श्रीगंगानगर शहर के बीच में स्थित शुगर मिल को शहर से बाहर स्‍थानान्‍तरित करने के संबंध में

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (केसरीसिंहपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, शहर के बीचोंबीच में स्थित शुगर मिल को शहर से बाहर ग्रामीण क्षेत्र में स्‍थानान्‍तरित करने के सम्‍बन्‍ध में निवेदन है कि श्रीगंगानगर शहर के बीचोंबीच शुगर मिल स्‍थापित है, इस शुगर मिल से भारी प्रदूषण फैल रहा है । श्रीगंगानगर शहर के चार लाख लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। वायु प्रदूषण एवं मिल से निकलने वाली काली राख के कारण लोगों का जीना दुशवार हो रहा है। इसके अतिरिक्‍त किसानों को शहर में गन्‍ना लाकर शुगर मिल में तुलवाना भी भारी कष्‍टदायक है । उनको आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है। गंगानगर केसरीसिंहपुर, करणपुर, पदमपुर, सार्दुलशहर का ग्रामीण क्षेत्र गन्‍ना उत्‍पादक क्षेत्र है। गन्‍ना उत्‍पादक किसानों को गन्‍ना शहर में लाना घाटे का सौदा रहता है। शुगर मिल के पास लगभग 128 बीघा भूमि है जो शहर के बीच स्थित होने के कारण लगभग 100 करोड़ रुपये की है जहां नया नगर निर्माण आवश्‍यक है।

vns/usc/14.40/2g/9.10.2006

 

मेरा आपके माध्‍यम से सरकार से अनुरोध है कि गंगानगर शुगर मिल को शहर से बाहर ग्रामीण क्षेत्र में स्‍थानान्‍तरित कर आधुनिकीकरण करने के अनेक लाभ होंगे। प्रथम शहर के लाखों लोगों को प्रदूषण की भयंकर समस्‍या से निजात मिलेगी, द्वितीय किसानों को गन्‍ना शहर में लाने से आर्थिक क्षति उठानी पड़ेगी उन्‍हें अनावश्‍यक कठनाईयों से छुटकारा मिलेगा, तृतीय शुगर मिल क्षेत्राधिकार में लगभग 128 बीघा भूमि पर नया नगर निर्माण किया जा सकता है इससे प्राप्‍त धनराशि से नयी आधुनिक शुगर मिल स्‍थापित की जा सकेगी और किसानों द्वारा अतिरिक्‍त गन्‍ना उत्‍पादित किया जा सकेगा। गंगानगर का गन्‍ना उत्‍पादक किसान अतिरिक्‍त पानी की मांग करेगा जितना पानी पूर्व में आरक्षित है उसी से गन्‍ना उत्‍पादन बढ़ाया जा सकेगा।

मेरा राज्‍य सरकार से आग्रह है कि जिले की सर्वाधिक बड़ी इस समस्‍या का समाधान करवाकर कृतार्थ करें।

अनेकानेक धन्‍यवाद सहित।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री मांगीलाल गरासिया।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो मामला उठाया है वह मेरे विधान सभा क्षेत्र से संबंधित है। मैं उनकी बात से बिलकुल सहमत हूं कि शुगर मिल को बाहर हटाया जाए लेकिन इसके साथ ही...

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री मांगीलाल गरासिया।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): आपको ध्‍यान दिलवाना चाहता हूं...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपनी...

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): मेरी एज अर्ज सुन लो। इससे पहले भी यह मामला इन्‍हीं माननीय सदस्‍य ने उठाया था। गलतबयानी देकर गुमराह किया सदन को...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य यह बहस का विषय नहीं है।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): बहस का नहीं, मंत्रीजी बठे हैं इसलिये मैं कह रहा हूं कि उस दिन इन्‍होंने...श्री उपाध्‍यक्ष: आपको..(व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): तत्‍काल जवाब दिया था कि वहां पर आर एस रघुवंशी...

श्री उपाध्‍यक्ष: अब अंकित ही नहीं है...(व्‍यवधान) 

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर):  ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सयदस्‍य, इसका जवाब अलग से दे दिया जायेगा।

विधान सभा क्षेत्र गोगुन्‍दा में कृषि विपणन बोर्ड द्वारा निर्मित की गई सड़कों पर पेवर करने के संबंध में।

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा):विधान सभा संचालन प्रक्रिया नियम 295 के अन्‍तर्गत कृषि विपणन सड़कें गोगुन्‍दा क्षेत्र में क्षतिग्रस्‍त होने से पेवर करने तथा मिसिंग लिंक सड़कों को पक्‍का कराये जाने के सन्‍दर्भ में।

मान्‍यवर, विधानासभा क्षेत्र गोगुन्‍दा(उदयपुर) के अन्‍तर्गत कृषि विपणन की सड़कें जो अभी वर्तमान में अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्‍त हो गयी है और पुलिया आदि टूट गयी और आने-जाने तथा परिवहन की भयंकर समस्‍याओं का समाना करना पड़ रहा है। कृषि विपणन की सड़कें इस तरह से हैं:-(1) सड़क-काछबा से पाटिया मोरवला

(2) सड़क पदराड़ा से चित्रावास(3) सड़क-छाली उण्‍डीयल(4) सड़क-तिरोला 

इस तरह से और भी कृषि विपणन सड़क क्षतिग्रस्‍त हो गयी हैं उन्‍हें पेवर कराया जावे। इसी तरह से आज एक जिले कोदूसरे जिले एवं एक तहसील से दूसरे तहसील मुख्‍यालय को मिलाने वाली सड़कें हैं:-

इन्‍हें मिसिंग या मुख्‍यमंत्री सड़क योजना से जोड़ा जाए जो इस तरह से हैं:-(1) सड़क केड़ेच से कोयलवाव (गोगुन्‍दा)(2) सड़क-तिसभा (बरावली) से पांबा(3) सड़क गायफल से रोयड़ा (गोगुन्‍दा)(4) सेनवाड़ा से फलासिया (झाड़ोल)(5) सड़क बेरठा से भीमाणा (कोटड़ा)(6) सड़क तेजाका वास-भीमाणा (कोटड़ा)(7) काम्‍बा से रधकपुर रोड़ (गोगुन्‍दा)

धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री अर्जुन लाल मीणा।

उदयपुर संभाग में अनुसूचित जनजाति उप योजना क्षेत्र अंतर्गत संचालित आवासीय विद्यालयों में अध्‍यापकों के रिक्‍त पद भरने के संबंध में।

श्री अर्जुन लाल मीणा (सलूम्‍बर): नियम प्रक्रिया 295 के तहत उदयपुर ांभाग में अनुसूचित जनजाति उप योजना क्षेत्र के अन्‍तर्गत संचालत आवासीय विद्यालयों एवं जनजाति छात्रावासों के अध्‍यापकों के रिक्‍त पदों को भरने बाबत।

महोदय, उपरोक्‍त विषय में निवेदन है कि उदयपुर संभाग में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा संचालित जनजाति उप योजना क्षेत्र में जिला उदयपुर में मेरे विधान सभा क्षेत्र में संचालित आवासीय विद्यालय बालिका सख्‍या 200 का है कक्षा दसवीं में 30 छात्राएं अध्‍ययनरत हैं से मात्र 8 छात्राएं पास हुई1 केवल 26 प्रतिशत परिणाम रहा। इसी तरह से नीचे लिखे निम्‍न आवासीय विद्यालयों का परीक्षा परिणाम न्‍यूनतम रहा है:-

जिला     आवासीय विद्यालय का नाम    10वीं का प्रतिशत    उत्‍तीर्ण प्रतिशत  

1 बांसवाड़ा           कुशलगढ़            48    5          10.42

2 डूंगरपुर           सीमलवाड़ा           47    6          12.77

3 उदयपुर           सलूम्‍बर (छात्रा)      30    8          26.77

                   खैरवाड़ा             42    12         28.57

                   कोटड़ा              15    1           6

4 चित्‍तौड़गढ़        प्रतापगढ़             27    1          66.00

5 सिरोही            आबूरोड़             13     -           -

 

--------------------------------------------------------------------------------    उपरोक्‍त विद्यालयों का दसवीं का परीक्षा परिणाम न्‍यूनतम रहा है, इसके पीछे मुख्‍य कारण उक्‍त विद्यालयों में विषय अध्‍यापकों की कमी का परिणाम है।

अंत: मेरा सरकार से अनुरोध है कि या तो जनजाति क्षेत्रीय विभाग द्वारा अध्‍यापकों की भर्ती आवासीय विद्यालयों के लिए अलग से जाए या शिक्षा विभाग द्वारा प्रतिनियुक्ति पर रिक्‍त पदों को शीघ्र भरा जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री कन्‍हैयालाल मीणा।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर):  ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, दे देंगे। उनसे मिलकर बात कर लें।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: मंत्रीजी से बात कर लें। मंत्री जी से आप उनके चैम्‍बर में बात कर लें।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आपकी बात सुन ली ना, यह बात कर लेंगे। अंकित नहीं होगा।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): ***

विधान सभा क्षेत्र बस्‍सी की क्षतिग्रस्‍त सड़कों का पुन: डामरीकरण करवाने के संबंध में।

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): उपाध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 295 के तहत ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं कि जयपुर जिले में विधान सभा क्षेत्र बस्‍सी में कृषि उपज मण्‍डी द्वारा 15 से 20 वर्ष पहले बनायी गयी रोड की हालत बहुत ही खराब है। सड़कों पर एक-एक फीट के गहरे गड्डे हो जाने की वजह से लोग रोड पर नहीं चलकर रोड के साइड में कच्‍चे रास्‍ते से चलने को मजबूर है। रोड्स की इन हालत के कारण रोडवेज की जो बसें नियमित रूप से चलती थीं वे सब बंद हो चुकी हैं। रोड्स पर किसी भी तरह के यातायात के साधन नहीं चल पा रहे हैं। रोड की उक्‍त दुर्दशा के बारे में सरकार को बारबार अवगत करवाया गया है लेकिन आज तक इन रोड्स पर पेचवर्क का कार्य भी नहीं करवाया गया है।

अत: आपसे निवेदन है कि इन सड़कों का पुन: डामरीकरण करवाये तथा साथ ही इन सड़कों के रखरखाव का जिम्‍मा पी.डब्‍ल्‍यू.डी. के पास था जिसे सरकार ने वापस ले लिया था, को वापस पी.डब्‍ल्‍यू.डी. विभाग के पास रहने दिया जाए जिससे समय समय पर सड़कों का डामरीकरण हो सके।

मेरे विधान सभा क्षेत्र में निम्‍नलिखित सड़कें क्षतिग्रस्‍त हैं:-

1. पिलिया से करणगढ़ वाया खतैपुरा, रूपपुरा, मोरीन्‍डी- 5 किलोमीटर2.    बांसखोह से भटेरी बाया पाटन 6 किलोमीटर

3. तुंगा से देवगांव बाया दणाऊकलां 9 किलोमीटर

4. पाटन से भूडला वाया लालपुरा 3.50 किलोमीटर

5. नायला रोड से बैनाड़ा वाया कुथाडा, हरड़ी 6 किलोमीटर

6. बैनाड़ा से भूज रोड़ वाया सेवापुरा घाटी 1 किलोमीटर

7. गुमानपुरा से रोजवाड़ी वाया माधोगढ़ 5 किलोमीटर

8. कृषि उपज मंडी बस्‍सी से दुदली 3 किलोमीटर

9. दुदली से दोलकी झर 3 किलोमीटर

10 आगरा रोड़ से रायसर पालावाला वाया दुदावाला 5 किलोमीटर

11 .मोधोगढ़ से तेली का तबारा 1 किलोमीटर

12 .तेली का तबारा से लालसोट तूंगा रोड़ वाया जयराम का बास 7 किलोमीटर

13. आगरा रोड़ से जटवाड़ा वाया गिरधरवास की ढाणी 2 किलोमीटर

14. आगरा रोड़ से भटेरी दौसा रोड़ वाया हॅसमहल, खेड़ला, कानेटी 6 किलोमीटर

श्‍याम/चौहान    9.10.2006   14.50 (1)  2h 

 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री सी.डी.देवल।

जिला पाली में गरीब लोगों के मकानों व बाड़ों का नियमन करने के संबंध में।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम 295 के अंतर्गत निवेदन है कि राजस्‍थान के पाली जिले में मरू विकास कार्यक्रम चल रहा था इसलिए जमीनों के अतिक्रमणों के नियमन पर रोक थी और आबंटन पर रोक थी। पूर्व मुख्‍यमंत्री माननीय श्री अशोक गहलोत ने मरूस्‍थलीय जिलों में आबंटन एवं नियमन पर लगे प्रतिबंधों में शिथिलता देने के लिए 2001 में परिपत्र जारी कर छूट दे दी साथ ही यह भी एक अन्‍य परिपत्र 28.05.2002 को जारी कर नियमन एवं आबंटन योग्‍य जमीनों को चिह्नित करने के लिए कमेटी बना दी। लेकिन पाली जिले में आज तक इस संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की, विशेषकर जो जैतारण, रायपुर, सोजत, खारची, देसूरी, बाली का पहाड़ी क्षेत्र है जिसमें गरीब तबके के लोग निवास कर रहे हैं और उन्‍होंने पहाड़ी क्षेत्रों में अलग-अलग मकान बना रखें हैं। कृषि जोत छोटी होने के कारण कई जगह कृषि भूमि पर भी अतिक्रमण हो रहा है और राजस्‍व विभाग के पटवारी और तहसीलदार उन अतिक्रमियों पर जुर्माना लगा रहे हैं तथा कहीं पर सज़ा की भी व्‍यवस्‍था कर रहे हैं जिससे किसान वर्ग परेशान है। राजस्‍व अधिकारी जान-बूझकर आबंटन, नियमन की प्रक्रिया नहीं अपना रहे हैं।

उपाध्‍यक्ष महोदय, ऐसी परिस्थिति में राज्‍य सरकार तुरंत एक अभियान चलाकर इन गरीब लोगों के रहने के मकानों व बाड़ों का नियमन करावे और जिन लोगों के पटवार रेकार्ड में अतिक्रमण दर्ज नहीं हैं किन्‍तु 40-50 वर्ष से उस स्‍थान पर रह रहे हैं तो शपथ-पत्र के आधार पर उन कब्‍जों का नियमन किया जावे ताकि गरीब लोगों को राहत मिल सके। हर साल होने वाले जुर्माने व जेल की सज़ा से काश्‍तकार बच सके।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री मदन राठौड़।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): मंत्री जी, कुछ तो बोलें ...(व्‍यवधान) जिले का तो आश्‍वासन दे दें ...(व्‍यवधान) आज 5-10 साल हो गये हैं, लोगों का नियमन नहीं हो रहा है और आप खुद जानते हो कि पहाड़ी क्षेत्र में लोग रहे रहे हैं, गरीब आदमी हैं। चाहे गरासिया हों, चाहे महणा हो, चाहे रावत हो, चाहे मेरात हो।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आपने बोल दिया ना ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): कम से कम आप आश्‍वासन तो दे दें कि अभियान चलायेंगे ...(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): यहां पढ़ने के अलावा भी बोल सकते हैं क्‍या ...(व्‍यवधान) आप पढ़ने के अलावा थोड़े ही बोल सकते हैं ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप आश्‍वासन तो दे दें कि अभियान चलायेंगे, सरकार के आदेश की पालना नहीं हो रही है राजस्‍व मंत्री जी, इससे गलत काम क्‍या हो सकता है। राजस्‍व विभाग के परिपत्र 2002 के हैं।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): समय-समय पर अभियान चलाये गये हैं, जो नियमों के अंतर्गत आते हैं उनका सबका हो रहा है, जो नियमों में नहीं आते हैं ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): वह कमेटी बना रखी है, 2002 में निकायों की, उस कमेटी की भी मीटिंग नहीं हो रही है। आप अभियान चलाकर के कर दीजिये, गरीब लोगों पर रोज जुर्माना हो रहा है। पटवारी रिकार्ड में दर्ज नहीं करते हैं। कहीं पर तहसीलदार सज़ा दे रहे हैं। भ्रष्‍टाचार के जरिये उनसे पैसा लिया जा रहा है। आप अभियान चलाकर के जो सरकार की नीति है उसके अनुसार कार्यवाही कर दें। हम आपसे यह तो कहते हैं नहीं कि आप किसी का जबरदस्‍ती कर दें। 40-50 साल से रह रहे हैं और वह कह देते हैं कि आपका नाम नहीं है। आप कुछ तो आश्‍वासन दीजिए।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपने यह पढ़ लिया।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप भी काश्‍तकार के बेटे हो और पाली जिले से जुड़ता हुआ आपका इलाका है ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): विधायक रायपुर कह रहे हैं कि 40-50 साल का मामला है तो मुझे अभी तो दो साल का वक्‍त है, मैं सारी बातों को देखकर ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप चिह्नित नहीं करेंगे तो कहां से होगा ...(व्‍यवधान) आप चिह्नित करवा दें, मैं आपसे यह थोड़े ही कह रहा हूं कि आप नियमित कर दें, आप चिह्नित करवा कर कार्यवाही कर दें ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री मदन राठौड़।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): आप तो लायबिलिटी ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): चाहे पाँच दिन, पंद्रह दिन, दो महिने, चार महिने लगायें, कुछ तो आश्‍वासन सदन में दे दें ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य आ जायेगा, जवाब आ जायेगा। श्री मदन राठौड़।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): क्‍या मंत्री जी हद हो गयी ...(व्‍यवधान)

विधान सभा क्षेत्र सुमेरपुर में अतिवृष्टि से गिरे मकानों का पुन: निर्माण करने के संबंध में।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन संबंधी नियमों के नियम 295 के अंतर्गत निवेदन है कि सुमेरपुर क्षेत्र में इस मानसून की भयंकर वर्षा से आई बाढ़ के कारण क्षेत्र के अत्‍यंत गरीब लोगों के मकान गिर गये, य‍द्यपि राज्‍य सरकार ने नियमानुसार राहत तो दी लेकिन इससे उनके गिर हुए मकानों का पुन:निर्माण संभव नहीं है। उनके सिर ढकने योग्‍य छत निर्माण करवाना आवश्‍यक है। अत: आपके माध्‍यम से सरकार से निवेदन करता हूं कि कृपया उन गरीब नागरिकों के मकानों के निर्माण हेतु विशेष पैकेज घोषित करने की कृपा करें।

उपाध्‍यक्ष महोदय, इस अत्‍यधिक वर्षा एवं बाढ़ के कारण सुमेरपुर क्षेत्र की सड़कों की भी अत्‍यधिक क्षति हुई है। जिसमें कृषि उपज मंडी समिति सुमेरपुर के अंतर्गत आने वाली सड़कों में 114.64 किमी. सड़कें क्षतिग्रस्‍त हुई हैं जिनकी मरम्‍मत के लिये 8.44 करोड़ रूपये की आवश्‍यकता है। ठीक इसी प्रकार सार्वजनिक निर्माण विभाग की 1158 किमी. सड़कें भी क्षतिग्रस्‍त हुई है जिनकी मरम्‍मत के लिए 11.14 करोड़ रूपये की मांग की है, यही नहीं क्षेत्र के 73 पुल टूट चुके हैं जिनकी मरम्‍मत के लिये 7.36 करोड़ रूपये की मांग है। अंत: यह राशि भी संबंधित विभाग को आबंटित की जावे।

नेशनल हाइवे नंश्‍पर सुमेरपुर-शिवगंज के बीच जंवाई नदी पर पुल टूट चुका है जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है। अभी अस्‍थाई व्‍यवस्‍था से एकतरफा यातायात चल रहा है लेकिन कई किलोमीटर तक ट्रकों के खड़े रहने से रास्‍ते जाम हो जाते हैं। यात्रियों को भी भयंकर परेशानी हो रही है। कृपया इसका पुर्ननिर्माण भी शीघ्र करवाया जावे। राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण तो 2007-08 में बनने वाले चार लेन मार्ग का इंतजार कर रहा है जो ठीक नहीं है, तब तक इसे लटकाया नहीं जाना चाहिये।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): पूरे जिले की मांग कर लेते आप।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आप जिलाध्‍यक्ष हो एक पार्टी के ...(व्‍यवधान) मैं जिलाध्‍यक्ष नहीं हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री महादेव सिंह।

विधान सभा क्षेत्र खंडेला में गोविन्‍दपुरा से बधाणों की ढाणी एवं ग्राम चला से चौकड़ी तक की सड़कों का जीर्णोद्वार व पुर्ननिर्माण करने के संबंध में।

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों के नियम 295 के अंतर्गत निवेदन है कि मेरे निर्वाचन क्षेत्र खण्‍डेला, जिला सीकर के ग्राम गोविन्‍दपुरा से राष्‍ट्रीय राजमार्ग सं.11 की तरफ बधाणों की ढाणी(पलसाना) तक की 4 किमी. सड़क तथा ग्राम चला से चौकड़ी तक की सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्‍त हो गयी है तथा जगह-जगह पर पत्‍थर निकल कर गढ़ढे पड़ गये हैं। इस कारण इस क्षेत्र के निवासियों को अवागमन में भारी समस्‍या का सामना करना पड़ रहा है। सड़क खराब होने से वाहनों को भी हानि पहुंचती है तथा पैदल चलने वालों को भी आने-जाने में काफी असुविधा हो रही है।

अत: विशेष उल्‍लेख प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत कर सदन के माध्‍यम से सरकार का ध्‍यान इस अत्‍यंत लोक महत्‍व के विषय की ओर आकृष्‍ट कर निवेदन है कि गोविन्‍दपुरा से बधाणों की ढाणी (पलसाना तक) एवं ग्राम चला से चौकड़ी तक की सड़कों का जीर्णोद्वार व पुर्ननिर्माण करवाया जाये।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री महीपाल मदेरणा। (अनुपस्थित)

  श्री सुखलाल मीणा, श्री रामकिशोर मीणा एवं श्रीमती स्‍नेहलता, माननीय सदस्‍य गण, अगर आप इस समय मौका लेना चाहते हैं बोलने का तो फिर आज जो मौसमी बीमारियों और बिजली पर जो चर्चा होगी उसमें समय नहीं दिया जायेगा।

श्री रामकिशोर मीणा (सिकराय): मेरा दूसरा है ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: अगर आप समय लेना चाहते हो तो अब तो ...(व्‍यवधान)

श्री रामकिशोर मीणा (सिकराय): अभी बोलना चाहता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री सुखलाल मीणा।

डांग क्षेत्र सपोटरा में विद्युत आपूर्ति हेतु ग्रिड स्‍टेशन स्‍थापित करने के संबंध में।

श्री सुखलाल मीणा (सपोटरा): मैं पहले बोल दूं। पहले मैं बोल दूं।

उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के नियम 295 के अंतर्गत निवेदन है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र सपोटरा का विस्‍तार दो उपखंडों में है परन्‍तु क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति हेतु एक भी 132 के.वी. ग्रिड स्‍टेशन स्‍थापित नहीं है। जिससे क्षेत्र के किसानों को पर्याप्‍त मात्रा में कृषि हेतु बिजली नहीं मिल पाती है। 05 जून,2006 को क्षेत्र के ग्राम गज्‍जूपुरा में जल चेतना रथ यात्रा एवं किसान महोत्‍सव के अवसर पर आयोजित आम सभा में माननीय मुख्‍यमंत्री महोदया द्वारा उपखण्‍ड-सपोटरा में 132 के.वी. स्‍टेशन स्‍थापित करने हेतु घोषणा की गयी थी परन्‍तु घोषणा के अनुरूप इस संबंध में आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। अंत: मेरा आग्रह है कि सपोटरा में शीघ्र 132 के.वी. स्‍टेशन स्‍थापित करवाया जावे तथा किसानों को नियमित रूप से 6 घंटे बिजली उपलब्‍ध कराई जावे।

                                                 

जयगोविन्‍द/यूएस/9106/1500/2j

 

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा विधान सभा क्षेत्र सपोटरा पूर्णत: डांग क्षेत्र है। यहां की अधिकांश जनता दूर दराज के गांवों में निवास करती है जो किसी भी प्रकार के आवागमन के साधनों अथवा दूर संचार के साधनों से जुड़े हुए नहीं हैं। जिससे ये विकास की दृष्टि से भी अत्‍यधिक पिछड़े हुए हैं। प्रधान मंत्री सड़क योजना एवं मुख्‍य मंत्री सड़क योजना इन गांवों के विकास के लिए वरदान साबित हुई है। परन्‍तु वन विभाग दूर दराज में बसे हुए गांवों के लिए बनने वाली सड़कों के निर्माण कार्य में गतिरोध पैदा करता है ऐसी स्थिति में अनेक सड़कें जो राज्‍य सरकार द्वारा स्‍वीकृत हैं वन विभाग के गतिरोध के कारण या तो निर्माण कार्य प्रारम्‍भ ही नहीं हुआ है अथवा अधूरा पडा हुआ है। अत: मेरा सरकार से आग्रह है कि क्षेत्र के सम्‍पूर्ण विकास को देखते हुए इन सड़कों के निर्माण में वन विभाग के गतिरोध को दूर किया जावे।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री रामकिशोर मीणा।

सिकन्‍दरा के ग्रिड स्‍टेशन में दो नये ट्रांसफार्मरों की स्‍थापना

श्री रामकिशोर मीणा (सिकराय): उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र  सिकराय के अन्‍तर्गत ग्राम सिकन्‍दर निहालपुरा में बिजली की समस्‍या के समाधान हेतु राज्‍य सरकार द्वारा 132 के वी ग्रिड सब स्‍टेशन बनाया गया है। इस ग्रिड स्‍टेशन के अंतर्गत 33 के वी के 6 सब स्‍टेशन आते हैं जिनकी कुल विद्युत भार क्षमता 50 मेगावॉट की होती है। इस आधार पर उक्‍त 132 के वी ग्रिड सब स्‍टेशन की  25-25 मेगावॉट क्षमता के दो ट्रांसफार्मर्स लगाया जाना अत्‍यंत ही आवश्‍यक है जबकि विभाग द्वारा उक्‍त ग्रिड सब स्‍टेशन को चार्ज करने हेतु मात्र 12.5 मेगावॉट का ट्रांसफार्मर ही लगाया गया है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राज्‍य सरकार का ध्‍यान इस ओर आकर्षित करना चाहूंगा कि क्षेत्र में बिजली की बड़ी दिक्‍कत एवं बड़ी विकट समस्‍या है। 12.5 मेगावॉट के ट्रांसफार्मर्स पर ओवर लोड है जिससे व्‍यवस्‍था गड़बड़ा जाती है जिससे आए दिन विद्युत लाइन फाल्‍ट हो जाती है। क्षेत्रवासी मात्र 12.5 मेगावॉट के लगाए जाने से अत्‍यंत आक्रोशित हैं। आने वाली रबी की फसल के लिए किसानों को और अधिक बिजली की आवश्‍यकता होगी जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।

अत: मैं राज्‍य सरकार का ध्‍यान इस ओर आकर्षित कर निवेदन करना चाहूंगा कि सिकराय विधान सभा क्षेत्र में नव निर्मित सिकन्‍दरा 132 के वी के ग्रिड सब स्‍टेशन हेतु 25-25 मेगावॉट क्षमता के दो नए ट्रांसफार्मर्स लगाने हेतु विभाग को अति‍शीघ्र आदेश देने का श्रम करें जिससे किसानों को एवं वहां की जनता को राहत महसूस हो सके।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्रीमती स्‍नेहलता।

डग में चिकनगुनिया एवं वायरल बुखार अधिक फैलने से उत्‍पन्‍न स्थिति

श्रीमती स्‍नेहलता (डग): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख के जरिये निवेदन करना चाहती हूं कि माह अगस्‍त से लेकर अभी तक मेरे डग विधान सभा क्षेत्र में वायरल एवं चिकगुनिया बुखार सभी के चल रहा है इसके लिए पूरे क्षेत्र में डी डी टी पाउडर का छिड़काव करना अति आवश्‍यक हो गया है। दूसरा यह है कि दवाइयां तो सरकार द्वारा उपलब्‍ध कराई जा रही है परन्‍तु मरीजों की संख्‍या बहुत अधिक होने से दवाइयां कम पड़ती है। दिन भर में चार-पाँच सौ मरीज आते हैं। मेरा निवेदन है कि दवाइयों की मात्रा बढ़ाई जाए। तीसरा यह है कि डग जो महला भवानी मण्‍डी को छोड़कर पूरे ग्रामीण एरिया में चिकित्‍सक पार्टी को भेजकर शिविर लगाया है जिससे ग्रामीण एरिया को इस खतरनाक बीमारी से राहत मिल सके।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसी कड़ी में मैं माननीय मुख्‍य मंत्री एवं चिकित्‍सा मंत्रीजी से निवेदन करना चाहूंगी कि भवानी मण्‍डी राजकीय कमरूद्दीन चिकित्‍सालय के ठीक सामने एक प्राइवेट हॉस्पिटल श्री शांति नर्सिंग होम चलता है। दूसरा दांई तरफ सिद्धार्थ हॉस्पिटल चलता है। यह भी प्राइवेट है। सरकारी डाक्‍टर इन प्राइवेट हॉस्पिटलों से मिले हुए हैं। छोटी-छोटी बीमारियों की जांच हेतु इनके पास भेज दिया जाता है। आपरेशन के लिए भी प्राइवेट अस्‍पताल में भेज दिया जाता है। सरकारी डाक्‍टर का इन प्राइवेट डाक्‍टरों से प्रतिशत बंधा हुआ है। अत: मैं आपके माध्‍यम से चिकित्‍सा मंत्रीजी से निवेदन करना चाहूंगी कि तुरन्‍त प्रभाव से सरकारी अस्‍पताल के पास से ये दोनों प्राइवेट अस्‍पताल हटाए जाएं जिससे गरीब जनता का सही इलाज समय पर हो सके।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): माननीय मंत्रीजी, जवाब दो, कहां-कहां कमीशन है?

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री संयम लोढा, माननीय सदस्‍य, बाढ़ पीडि़त, निवासी टैण्‍ट संख्‍या 64, सर का पार, जिला बाड़मेर की बच्‍ची का इलाज नहीं करने के विषय पर दो मिनट बोलेंगे।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): मेरी पर्ची का क्‍या हुआ?

श्री उपाध्‍यक्ष: अभी आ रही है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आएगी, आएगी, मेरे बाद, मेरा स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया हुआ है।

श्री उपाध्‍यक्ष: इनके बाद आपका ही नाम है।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): शून्‍यकाल समाप्ति के बाद कहा था, यह पढ़ी हुई नहीं मान ली जाए।


बाड़मेर की बाढ़ पीडि़त बच्‍ची की इलाज के अभाव में मृत्‍यु

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बाड़मेर जिले में अगस्‍त महीने में अप्रत्‍याशित रूप से बाढ़ से जल प्‍लावन की स्थिति बनी। बड़ी संख्‍या में लोगों को जान से हाथ धोना पडा, लाखों लोग घर से बेघर हो गए और एक ऐसा ही आदिवासी परिवार जो सरका पार का रहने वाला था, वहां टेण्‍ट संख्‍या 64 में शरण लिए हुए था, जैताराम भील, जिसकी बच्‍ची का नाम रूपा था, वह बीमार हुई और 14 सितम्‍बर को बाड़मेर के अस्‍पताल में उसको दिखाने के लिए ले गए। वहां उसका इलाज शुरू हुआ लेकिन स्थिति खराब देखकर वहां के चिकित्‍सा अधिकारियों ने उसको जोधपुर के लिए रैफर किया। वह जोधपुर पहुंचे, उम्‍मेद अस्‍पताल में दिखाया और 22 सितम्‍बर को उस बच्‍ची को उम्‍मेद अस्‍पताल में भर्ती किया गया, 24 सितम्‍बर को वह बच्‍ची बेहोश हो गई, तब चिकित्‍सकों ने यह कहा कि पाँच-पाँच हजार रुपए के पाँच इन्‍जेक्‍शन लगेंगे, आप इसके पैसों की व्‍यवस्‍था करें, इन्‍जेक्‍शन की व्‍यवस्‍था करें और वह भील परिवार जो गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाला, बरसात में जल प्‍लावन में, पानी में उसका बी पी एल का कार्ड बहकर चला गया और बाड़मेर के अस्‍पताल के अधिकारियों ने, स्‍वयं सेवी संस्‍थाओं के सहयोग करके उसको जोधपुर रैफर किया लेकिन जोधपुर के उम्‍मेद अस्‍पताल के प्रशासन ने उस बजाय उस बच्‍ची का इलाज करने उसको वहां से चलता कर दिया1 उसके बाद वह बच्‍ची को लेकर डाक्‍टर चितलांगिया के पास गया, डाक्‍टर चितलांगिया ने यही कहा कि इलाज उम्‍मेद अस्‍पताल में ही हो सकता है। लेकिन पैसा नहीं होने के कारण वह जैताराम भील उस बच्‍ची को लेकर वापस बाड़मेर चला गया अपने टेण्‍ट में। चार दिन बाद 29 सितम्‍बर को टेण्‍ट में जब नेहरू युवक केन्‍द्र के जिला समन्‍वयक भुवनेश जैन और एक सामाजिक कार्यकर्ता, हरीश चौधरी पहुंचे और पीडि़त परिवार ने अपनी पीड़ा उन्‍हें बयान की। तब उन्‍होंने दस हजार रुपए उस जैताराम भील को दिए, एक गाड़ी करके दी और वह लेकर के वापस जोधपुर पहुंचे। जोधपुर के गोयल अस्‍पताल में उसको भर्ती कराया और इनबिटविन उन सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जोधपुर के सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी सूचित किया।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 2 अक्‍टूबर को जोधपुर के संभागीय आयुक्‍त से प्रगतिशील शिक्षक संघ के प्रदेश मंत्री, रामनिवास बाला और राहुल पाराशर मिले कि इस बच्‍ची की यह स्थिति है और इसको इलाज के लिए जयपुर भेजना आवश्‍यक है। संभागीय आयुक्‍त ने उनको अगले दिन बुलाया। 3 तारीख को जब वह दोनों वापस संभागीय आयुक्‍त के पास गए, संभागीय आयुक्‍त ने स्‍पष्‍ट इन्‍कार कर दिया कि इलाज कराना है तो पैसे हॉस्पिटल में जमा कराओ और यहीं पर इलाज होगा, हम नहीं भेज सकते उसको। गोयल हॉस्पिटल में 30228 रुपए का बिल बन चुका था और एक ऐसा परिवार जिसका मकान बह चुका है, जिसके जीवन के सारे साधन बह चुके हैं और वह 7 हजार रुपए जो उसको नुकसान होने की वजह से प्रशासन ने दिए थे, वह 7 हजार रुपए भी इन 20 दिनों के इलाज की भाग दौड़ में खर्च हो चुके थे। गोयल हॉस्पिटल में इलाज का खर्च वहन करने की स्थिति में वह नहीं था लेकिन इसके बावजूद भी जोधपुर के संभागीय आयुक्‍त ने इस ओर कोई ध्‍यान नहीं दिया और उसके बाद इसकी जानकारी कांग्रेस के महासचिव अशोक गहलोत को भी दी गई और जोधपुर से ट्रेन से उस बच्‍ची को लेकर रवाना हुए और अशोक गहलोतजी ने यहां एस एम एस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल से भी बात करके एक एम्‍बुलेंस की व्‍यवस्‍था हॉस्पिटल से रेलवे स्‍टेशन के गेट के बाहर तक करवाई लेकिन उससे पहले, उस ट्रेन के पहुंचने से पहले वह बच्‍ची दम तोड़ चुकी थी।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि अभी-अभी हरियाणा का एक किस्‍सा हमने देखा कि एक प्रिंस नाम का बच्‍चा जो गढ्ढे में फंस गया था, हरियाणा की सरकार ने बॉम्‍बे से एक्‍सपर्ट बुलाकर उस बच्‍चे की जान को बचाने का काम किया और यहां एक बाढ़ से पीडि़त बच्‍ची अस्‍पताल प्रशासन की जानकारी में आ गई, बाड़मेर के कलेक्‍टर की जानकारी में आ गई, जोधपुर के संभागीय आयुक्‍त की जानकारी में आ गई, इसके बाद भी इलाज की कोई व्‍यवस्‍था नहीं और वह भी तब जब वह बी पी एल परिवार की सदस्‍य थी, उसका परिवार गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाला था। क्‍या एक गरीब आदमी की बेटी की जान की कोई कीमत नहीं? मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि यह तो प्रशासन का चेहरा है, सत्‍तारूढ़ पार्टी का चेहरा है। कभी तो भारतीय जनता पार्टी के विधायक बाड़मेर में मरने वालों को मूर्ख कह देते हैं और कभी इलाज के लिए एक पीडि़त परिवार दर दर की ठोकरें खाता रहता है, उसकी कोई सुनने वाला भी नहीं मिलता है। मुख्‍य मंत्री कहने को तो यहां क्रिकेट के चक्‍कर में जवाहर लाल नेहरू मार्ग और दस मार्गों पर ठीक कराने के लिए दौरे कर लेती है लेकिन सैंकड़ों की तादाद में यहां हॉस्पिटल के अंदर पेशेंट बीमारियों का सामना कर रहे हैं।

 

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मौसमी बीमारियों का सामना कर रहे हैं, डेंगू जैसी बीमारियों का सामना कर रहे हैं उनकी सुध लेने की कोई फुर्सत नहीं मिलती। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि अगर चिकित्‍सा मंत्रीजी नहीं संभाल पा रहे हों तो बहुत अच्‍छा होगा कि अपने राज्‍य मंत्री को इसका प्रभार सौंप दे जिससे ये गरीब भीलों के क्षेत्र से आते हैं, आदिवासियों के क्षेत्र से आते हैं यह उनकी पीड़ा को समझ सकते हैं। इससे ज्‍यादा दर्दनाक बात क्‍या होगी कि आपके अस्‍पताल में बीपीएल के दो आदमी अपनी बच्‍ची को लेकर चला गया और उसके बाद भी 20 दिन का वक्‍त भी आपको मिला उसके बचाने के लिए आप कुछ नहीं कर सके।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): गवर्नमेंट की इंटेंशन का मामला है। यह गवर्नमेंट का मामला नहीं है। पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर, आप इतने एक्टिव हैं हर बात में ध्‍यान रखते हैं जब सरकार के नोटिस में यह चीज आ गई थी तो क्‍या सरकार को इस पर एक्‍शन लेना चाहिए था या नहीं लेना चाहिए था और कोई इश्‍यू नहीं है इसमें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): गहलोत साहब के नोटिस में आ गया तो उन्‍होंने क्‍या किया? एम्‍बुलेंस कराकर नहीं दे सकते वो।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अशोक गहलोत के नोटिस में आया, वह सरकार थोड़े ही है। वहां व्‍यवस्‍था आपने क्‍या की? उससे क्‍या संबंध है? अशोक गहलोत से मुकाबला कर रहे हो क्‍या? सरकार चला रहे हैं। अशोक गहलोत से मुकाबला कर रहे हो या सरकार चला रहे हो? सरकार चला रहे हो या मजाक कर रहे हो? ..(व्‍यवधान).. काहे को कर रहे हो?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अशोक गहलोत के नोटिस में आ गया।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): काहे का नोटिस में आ गया? यह सरकार की संवेदनहीनता का सूचक है।

श्री उपाध्‍यक्ष:  आप जवाब तो देने दीजिए।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): क्‍या आपको बीपीएल के कार्ड का मालूम नहीं था। आगे बढ़कर काम करना चाहिए था। आप इसको तो मानने को तैयार नहीं हैं। यह डिबेट का इश्‍यू थोड़े ही है। यह डिबेट का इश्‍यू नहीं हे। यह डिबेट का इश्‍यू है कि आपके नोटिस में आ गया तो आपको इसमें त्‍वरित कार्यवाही करनी चाहिए थी, यह मामला है। अशोक गहलोत के नोटिस में आ गया या नहीं आ गया। सरकार की फेल्‍योर है। सरकार चार-चार दिन तक ध्‍यान नहीं देती। आप खाली बात करना चाहते हो।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अपनी जिम्‍मेदारी से बचने का प्रयास मत करो। एक बच्‍ची की मौत हुई है। ..(व्‍यवधान)..

श्री उपाध्‍यक्ष:  मंत्रीजी जवाब देना चाहते हैं, आप सुनें।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, चिकित्‍सा विभाग का अपना चार्ज भवानी जोशी को संभला दो तो शायद राजस्‍थान में इतनी मौत न हो। इससे कुछ नहीं हो सकता। ..(व्‍यवधान)..

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): सरकार को अशोक गहलोत जी का फोबिया है क्‍या? रात में भी सपने में अशोक गहलोत नजर आते हैं इनको।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैंने अभी खत्‍म नहीं किया मंत्रीजी।

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य। माननीय सदस्‍य।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस सरकार को अशोक गहलोत जी का फोबिया हो गया। रात को उनसे सपने में डरते हैं। ..(व्‍यवधान)..

श्री उपाध्‍यक्ष:  क्‍या कहना चाहते हैं आप? आपको जवाब नहीं सुनना। माननीय मत्री महोदय का जवाब आने दीजिए, आपने अपनी बात कह दी। बात तो सुनिए आप माननीय लोढ़ा साहब।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): क्‍लीनिक चलाकर फीस वसूल कीजिए। आप भवानी जोशीजी को इसका चार्ज दिला दीजिए ताकि कुछ लोगों की व्‍यवस्‍था हो जाए। मैंने बात खत्‍म नहीं की मंत्रीजी। ..(व्‍यवधान)..

श्री उपाध्‍यक्ष:  आपने कह दी बात। ..(व्‍यवधान).. क्‍या बाकी रह गया?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आज बाड़मेर के उस विपदाग्रस्‍त क्षेत्र के अंदर सैकड़ों की तादाद में स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं ने और दानदाताओं ने लाखों, करोड़ों रुपये इन लोगों की मूदद के लिए दिया है और जिन लोगों की मदद के लिए लोगों ने पैसा दिया है उनकी जिंदगी से खिलवाड़ करने का काम यह सरकार कर रही है?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): आप अपनी बताओ, आपने बाड़मेर में जाकर क्‍या किया?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उनके जीवन से खेलने का काम यह सरकार कर रही है। मैं आपके माध्‍यम से मांग करना चाहता हूं कि उस पीडि़त परिवार को पाँच लाख रुपये की सहायता ..(व्‍यवधान)..  जो आपके अधिकारियों की लापरवाही की वजह से आपकी संवेदनहीनता की वजह से, आपकी अकर्मण्‍यता की वजह से इस सरकार के निकम्‍मेपन की वहज से मौत का शिकार हो रहे हैं उसको पाँच लाख रुपये की सहायता दीजिए।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): केवल भाषण देकर ..(व्‍यवधान).. क्‍या किया आपने?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): जिस संभागीय आयुक्‍त ने अपने कर्तव्‍य का निर्वहन नहीं किया है, अपनी जिम्‍मेदारी का निर्वहन नहीं किया है उसके खिलाफ सख्‍त कार्यवाही की जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष:  आपको जवाब नहीं सुनना है? ..(व्‍यवधान).. माननीय संयम जी, आपकी बात सुन ली। ..(व्‍यवधान)..

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): किसी गरीब की मदद करना आपका मकसद नहीं है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक इंसान की जिंदगी की बहुत कीमत है।

श्री उपाध्‍यक्ष:  आपने अपनी बात कह दी। पहले जवाब आने दीजिए।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यहां का प्रशासन लगातार लोगों की उपेक्षा कर रहा है।

श्री उपाध्‍यक्ष:  कह दिया, आप जवाब आने दीजिए।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): पाली जिले के अंदर पाँच लाख जो दलित थे, हरिजन थे, जो मौत का शिकार हुए वे इस सरकार की लापरवाही और सरकार के निकम्‍मेपन की वजह से हुए।

श्री उपाध्‍यक्ष:  आप जवाब सुनिए।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): नियमपुरा के अंदर दो बच्‍चे एक के बाद एक घटना में ..(व्‍यवधान)..

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य, बार-बार आप उस बात को कह रहे हैं ..(व्‍यवधान)..

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): इनका उद्देश्‍य केवल हल्‍ला मचाना है। आप बात सुन सकें तो मेरी बात सुन लीजिए। ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): एक के बाद एक ऐसी कडि़यां हैं, लगातार शृंखला है जो इस सरकार की विफलता के प्रमाण हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष:  आपने एक पर्टीकुलर ..(व्‍यवधान)..

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): गरीब की मदद की है। हमने गरीबों की मदद की है, बाढ़ पीडि़तों की मदद की है हमारे विधायकों ने, हमारे विधायक ने।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): जब बाढ़ विषय पर चर्चा हुई तो आप उस समय तो बोल नहीं रहे थे। आप केवल यहां घडि़याली आंसू बहा रहे हो। ये किस विषय पर बात कर रहे हो, कहां की चर्चा कहां ले जाना चाहते हो?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): इस बच्‍ची के बारे में पूरी जानकारी देना चाहता हूं।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): खारी नदी की बात करते हो आपको पता है खारी नदी में क्‍या हुआ था? वहां पर ट्रक बहकर तीन किलोमीटर चला गया तो क्‍या औकात थी किसी व्‍यक्ति की।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): आप मेरी बात भी सुन लीजिए।

श्री उपाध्‍यक्ष:  आप सुनो तो सही। आप जवाब सुनिए।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ठीक है, अपने विषय की बात करो, लेकिन दूसरे विषय पर लाकर यों ही घुमाने की कोशिश कर रहे हो।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह रूपा नाम की बच्‍ची करीब दो-ढाई साल की उम्र है इनके पिताजी जेताराम जी भील और ये सर का पार गांव की रहने वाली है, टेंट संख्‍या 64 में ये लोग रहे रहे थे और ये दिनांक 22.9.2006 को सुबह अस्‍पताल में भर्ती हुई बाड़मेर में जिसका रजिस्‍ट्रेशन नम्‍बर था 7456। अस्‍पताल में डा. महेश्‍वरी, जो वहां के पीडिएट्रिशियन हैं, उन्‍होंने इसको देखा, सारी दवाएं, सारा इलाज इनका फ्री किया। चाहे इनके पास बीपीएल कार्ड थया या नहीं था क्‍योंकि बाढ़ग्रस्‍त क्षेत्र है, बाढ़ पीडि़त लोगों के लिए हमने दवाइयों की उपलब्‍धता इतनी ज्‍यादा करवायी हुई है कि किसी को दवाई खरीदने की जरूरत वहां नहीं पड़ती और उसी समय वहां पर डा. प्रमोद शर्मा, जो मेडिकल कालेज से वहां टीम में गये हुए थे, जोधपुर मेडिकल कालेज के पीडिएट्रिशियन हैं उनको भी वहां पर उस बच्‍ची को दिखाया गया। उसके बाद सरकारी एम्‍बुलेंस से इस बच्‍ची को जोधपुर के लिए रेफर किया गया और इस बच्‍ची को गुलनबेरी सिंड्रोम था, उसको कोई डेंगू या कोई मलेरिया नहीं था। गुलनबेरी सिंड्रोम में क्‍या होता है, अभी डा. बैद साहब है नहीं, आप उनसे समझ लेना, वे समझा देंगे क्‍या चीज होती है। यह कोई इंफेक्‍शन डिजीज नहीं है गुलनबेरी सिंड्रोम और जाधपुर में भी इस बच्‍ची के इलाज के लिए हमारे संभागीय आयुक्‍त ने वहां के बाड़मेर के कलेक्‍टर ने जोधपुर सम्‍पर्क कर पूरी व्‍यवस्‍थाएं करायी। इन्‍होंने अशोक गहलोत जी का नाम लेकर ऐसे कह दिया जैसे कोई गब्‍बर सिंह का नाम ले दिया हो। क्‍या हम डर जाएंगे अशोक गहलोत जी का नाम लेने से। जो हमने कराया है और मैं निवेदन करना चाहता हूं आप बात कर रहे हैं बाड़मेर की। बाड़मेर में कितने दिन हम लोग रहे हैं, कितने दिन हमारे विधायक रहे हैं, कितनी सहायता हमने की है और कितने दिन ये लोग रहे हैं। केवल यहां हल्‍ला मचाने के लिए ..(व्‍यवधान)..

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): कहां थे आप लोग? ..(व्‍यवधान)..

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): सर्किट हाउस में कौनसी गोठ खा रहे थे? वहां रहकर काम किया है, यह नहीं कह सकते। हमने 50 ट्रक सामग्री और आज भी हमारे डाक्‍टरों की टीम काम कर रही है वहां पर। क्‍या बात करते हो आप? आप तो वहां गोठें जीम रहे थे। आपको पता ही नहीं है। कहां-कहां दावतें खा रहे थे आप। आपने क्‍या काम किया? आपके कुछ मिनिस्‍टरों को तो भागना पडा वहां पर। ..(व्‍यवधान).. आपके मंत्रियों को कई जगह से भागना पडा। हम लोगों ने वहां चार-चार बार जाकर काम किया है और सेवा की है और आप लोगों ने वहां दावतें खायी हैं।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मेरी बात सुनिए। ..(व्‍यवधान).. केवल हल्‍ला मचाना चाहते हैं आप।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): हमने वहां जाकर सेवा का काम किया है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): आज भी 66 ग्राम पंचायतों में चिकित्‍सा टीम काम कर रही है और हमारे विधायक एक-एक घर में एक-एक टेंट में ..(व्‍यवधान)..

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): इस बच्‍ची के बारे में आप कह रहे हो एक एक्‍स चीफ मिनिस्‍टर डिवीजनल कमिश्‍नर और डाक्‍टर को कहें कि इसको दिखवाना है और इसके बाद कोग्‍नीजेंस नहीं लें यह बहुत शर्म की बात है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अशोक गहलोत का नाम लेकर क्‍या आप हमको डराना चाहते हैं?

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): नहीं, हम डराना नहीं चाहते, हम आपकी संवेदनहीनता को दर्शाना चाहते हैं। ..(व्‍यवधान)..

श्री सुरेश मीणा (करौली): एससी, एसटी के बैकलॉग को लेकर ..(व्‍यवधान)..

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): ये बाड़मेर के विधायक हैं इनसे तो पूछ लीजिए। ..(व्‍यवधान).. जो वहां के विधायक हैं इनसे तो पूछ लीजिए। हेमाराम जी बैठे हैं, इनसे ईमानदारी से पूछ लीजिए हमने वहां क्‍या किया है। हेमाराजी यहां बैठे हैं ये वहां के रहने वाले हैं, वहां के विधायक हैं, आप इनसे पूछ लें कितना काम हमने किया है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्रीजी ने बाड़मेर पर अभी जो कहानी सुनायी है वह सही है। आपने बाड़मेर के जो तथ्‍य रखे हैं बिलकुल सही है ..(व्‍यवधान).. जोधपुर जाने के बाद क्‍या हुआ वह बताओ आप। जोधपुर जाने के बाद क्‍या हुआ वह जानकारी दो आप सदन में।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्रीजी, यह आपके अधिकारियों की लापरवाही है। 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मुझे इससे इंकार नहीं है, बाड़मेर का मैंने भी जिक्र किया है।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): वह बीमार थी और उनको क्‍या बीमारी थी वह बता रहे हैं। ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): जिस होस्पिटल में उसको दिखा गया, जिसको रेफर किया गया है, जोधपुर जाने के बाद जो संवेदनहीनता प्रशासन ने दिखायी है और उस बच्‍ची को मौत का शिकार होना पडा है उसकी पूरी जिम्‍मेदारी आपके ऊपर है। ..(व्‍यवधान)..

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): कितने बार बाड़मेर का दौरा किया आपने? ..(व्‍यवधान).. वह बता दीजिए कौनसे घर में गये आप। ..(व्‍यवधान).. आप मुझे मेहरबानी करके बता दीजिए कि पूरे बाढ़ के टाइम पर आप बाड़मेर में कितने घरों में गये?

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): स्‍वामियों के घर में कितने लोग मरे। ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आपके कलक्‍टर को पूछो हम कितने गये बाड़मेर में। पूछो अपने कलक्‍टर को आप। आपकी कोई हाजिरी देने नहीं आये वहां पर।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): सर्किट हाउस में मुर्गियां उड़ा रहे थे कांग्रेस के लोग। ..(व्‍यवधान)..

 

मोहन/अरूण/9102006/1520/2l

 

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): आपको तो पता नहीं है, जानते नहीं है, यहीं बातें करते हो, खाली में वाहवाही लेने के लिए चले गये थे, क्‍या लेना देना है ? ये हेमाराम जी अपने हृदय पर हाथ रख कर कह दें कि हम लोगों ने कोई काम नहीं किया हो तो ...(व्‍यवधान)...

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): मैंने मेरी जेब से भी उनके इलाज के लिए जो भी मैं दे सकता था, दिया था।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): ये अमरा राम, जी आप अपने हृदय पर हाथ रख कर कह दो कि कांग्रेस वालों ने काम नहीं किया था।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप कल्‍ला साहब को तो डरा सकते हैं अशोक गहलोत का नाम लेकर, हमें नहीं डरा सकते, कल्‍ला साहब डरते होंगे गहलोत साहब से। ...(व्‍यवधान)...

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): कांग्रेस वालों ने जो काम किया वह आप कभी जिन्‍दगी में ही नहीं कर सकते ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): जो काम बाड़मेर में हुआ है वह कांग्रेस के कार्यकताओं ने किया है। ...(व्‍यवधान)...

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): कांग्रेस के ही लोग उनके बीच में गये हैं, आप तो राजनी‍ति में उलझे रहे ...(व्‍यवधान)... आप तो नशे में रहे। ...(व्‍यवधान)... बीच में तो कांग्रेस के ही लोग थे।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आपकी मुख्‍य मंत्री से ज्‍यादा टाइम हमने दिया है। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री):  ***

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): *****

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ****

श्री उपाध्‍यक्ष: तगाराम जी।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): *****

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):  ***

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): *****

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। सभी माननीय सदस्‍यों ने अपना कर्तव्‍य पालन किया है, सभी ने अपना समय दिया है, यह विवाद का विषय नहीं है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप शुरू कीजिए, तगाराम जी। ...(व्‍यवधान)... कोई अंकित नहीं होगा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय लोढ़ा जी, आप समाप्‍त कीजिए, आगे नहीं चलेगा। श्री तगाराम चौधरी। ...(व्‍यवधान)...

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री तगाराम चौधरी1

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: समाप्‍त कीजिए।

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं शून्‍यकाल चल रहा है। ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): ***

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): ***

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): ***

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): ***

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): ***

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री तगाराम चौधरी।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, समय बरबाद न करें। ...(व्‍यवधान)... माननीय सदस्‍य, कोई अंकित नहीं होगा। मैंने तगाराम जी का नाम पुकार लिया। ...(व्‍यवधान)... तगाराम जी। ...(व्‍यवधान)...

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी):  ***

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अंकित नहीं हो रहा है आपका।

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण कीजिए। कुछ भी अंकित नहीं हो रहा है। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: मैं अलाउ नहीं करूंगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री तगाराम चौधरी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): ****

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): ****

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): *** 

 

Skp/akt/09.10.2006/2m/1/1530

 

(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: तगाराम जी।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। नहीं, नहीं माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर):  ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय लोढ़ा जी। (व्‍यवधान) आपका रिकार्ड में.... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: .... आप कोई बात बार-बार बोले जा रहे हैं। (व्‍यवधान) 20 बार कह दिया आपने। (व्‍यवधान)

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। यह जनरल भाषण के लिए आपको समय नहीं दे रहा हूं। श्री तगाराम जी। माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान) आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये। (व्‍यवधान) आप हठधर्मी कर रहे हैं। (व्‍यवधान) आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान) मैं बार-बार आपको कह रहा हूं। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): ***

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): ***

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री):

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अंकित नहीं कर रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):  ***

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय रावलोत जी, बैठिये। (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, आप अपने स्‍थान पर बैठ जाइये पहले। आप अपनी सीट पर जाएं। (व्‍यवधान)

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण कीजिये। माननीय सदस्‍य, आप अपने स्‍थान पर जाइये पहले।

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप अपनी सीट पर जाइये पहले। (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप चर्चा करना ही नहीं चाहते। (व्‍यवधान)

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (केसरीसिंहपुर): ***

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आसन पैरों पर है। माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण कीजिये। माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): ***

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): ***

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान) आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये। (व्‍यवधान) आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये पहले। (व्‍यवधान) माननीय रावलोत जी, आप स्‍थान ग्रहण कीजिये। (व्‍यवधान) मंत्री खड़े हैं आपके। (व्‍यवधान)

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपको बोलना है तो आप पहले स्‍थान ग्रहण कीजिये। (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण कीजिये, बीच में नहीं। आसन पैरों पर है। आप स्‍थान ग्रहण कर लीजिये। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर):  ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। माननीय सदस्‍य, आप अपनी सीट पर चले जाइये। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, पहले आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये। (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण कर लीजिये। माननीय सदस्‍य, आप बैठिये पहले। (व्‍यवधान)

 

vkj/akt/1540/2n

 

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

अनेक माननीय सदस्‍य: ***

(कांग्रेस के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन से बहिर्गमन)

श्री ओम बिरला (संसदीय सचिव): ***

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): ***

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): ***

अनेक माननीय सदस्‍य: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: बैठिये माननीय सदस्‍य।

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): ***

श्री सुरेश मीणा (करौली): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। पर्ची के माध्‍यम से उठाये जाने वाले विषय। श्री तगाराम जी चौधरी। श्री तगाराम जी चौधरी। बाड़मेर जिले में बाढ़ के पानी के.... (व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): ***

श्री सुरेश मीणा (करौली): ***

अनेक माननीय सदस्‍य:  ***

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आपको बोलने का मौका देंगे। आपको जीरो आवर के बाद समय देंगे। (व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: अब शून्‍यकाल चल रहा है। अभी शून्‍यकाल चल रहा है। वह पर्ची पर बोल रहे हैं। (व्‍यवधान) मौका देंगे। बोलने का समय देंगे। बैठिये आप। श्री तगाराम जी चौधरी।

पर्ची के माध्‍यम से उठाये गये मुद्दे

कवास (बाड़मेर) में बाढ़ के रुके हुए पानी का सदुपयोग

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): मान्‍यवर, हमेशा से बाड़मेर जिला अकाल की चपेट में रहा है, पीने के पानी की गम्‍भीर समस्‍या से वह जूझता रहा है और वर्षा के पानी पर निर्भर था और अभी प्रकृति ने हमारी ओर यह ध्‍यान दिया है कि जिस क्षेत्र में बाड़मेर में, जैसलमेर में जहां कम से कम वर्षा होती थी, वहां इस वर्ष अधिक से अधिक वर्षा हुई, नदियां चलीं और तीन बहुत ब‍ड़ी नदियां हैं तो दो नदियां बडियाला से और एक नदी रिसाला से, ये नदियां कवास पहुंची और कवास कस्‍बा वह नमण में बसा हुआ है, गहराई में बसा हुआ है और वहां पर इतना पानी आया, इतना पानी आया कि आज तक मैंने नहीं देखा। पानी आगे प्रवाहित किया गया, नौ गांव आगे भी वहां जलमग्‍न हो गये परन्‍तु कवास में पानी बहुत था, अभी है पर कवास के पास ही उत्‍तरलाई जहां पर हवाई अड्डा भी है तो वहां पर भी है परन्‍तु सदियों से पहले से ही उत्‍तरलाई के पास जिसको हम लाणी बोलते हैं, उसमें रबी भी होती है, होती रही है और कवास में भी विक्रम संवत 2047 में इसी तरह से उस समय कवास डूब गया था और उत्‍तरलाई का हवाई अड्डा भी डूब गया था और कई दिन लग गये थे उस पानी को सोखने में और कितने ही महीने, बाद में जाकर गर्मियों में वह पानी खत्‍म हुआ था, तब जाकर के हवाई अड्डे का पानी भी खत्‍म हुआ। मैं आपके माध्‍यम से माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया और जल संसाधन मंत्री महोदय को सुझाव के रूप में निवेदन करना चाहूंगा कि जिस कदर नदियों ने अपना रास्‍ता तय किया है कवास के आगे और आगे, कवास के आगे वह पानी प्रवाहित किया जाता है तो लूणी नदी है, वहां से लगभग 70 किलोमीटर दूर है, उसके बीच में धोरे भी हैं, आबादी है, खेत है, सब कुछ है तो मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया और जल संसाधन मंत्री महोदय से निवेदन है कि वहां पर कवास के पानी को खेती और पेयजल के सम्‍बन्‍ध में उपयोग में लाने के लिए विशेषज्ञों को भेजकर सर्वे करवाने के लिए मैं सुझाव के रूप में निवेदन कर रहा हूं आपके माध्‍यम से सरकार से कि वहां पर सर्वे करवाई जाये और भविष्‍य में वहां पर इस प्रकार का पानी आये तो कवास कस्‍बा पहले से ही अभी इस बात के लिए तैयारी कर चुका है, बाड़मेर के पास में ऊँचाई पर बाड़मेर-आगोर पंचायत में वहां पर बसना चाहता है और कार्यवाही शुरू कर दी है राजस्‍थान सरकार ने और सभी विभाग, उसमें सम्‍बन्धित विभाग और जिला प्रशासन है, वह रात-दिन लगा हुआ है पुनर्वास के लिए और राजस्‍थान आवासन मण्‍डल भी लगा हुआ है, उसको देखते हुए यहां पर वृहद रूप से बाँध बनाकर के उत्‍तरलाई का पानी है लाणी का, वह भी कवास से, बाड़मेर से उत्‍तरलाई और कवास, वह ढलान में है उत्‍तरलाई से कवास, इसलिए वहां पर बाँध बनाकर पेयजल और सिंचाई का भी साधन हो जायेगा क्‍योंकि बाड़मेर जिला बहुत बड़ा जिला है 1976 से और वहां पर कोई बाँध नहीं है, कोई नहर नहीं है तो पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए यदि यह योजना बन जाये और क्रियान्वित हो जाये तो नदी आयेगी क्‍योंकि अब उम्‍मीद है हमको कि उस क्षेत्र में प्रकृति ने अभी बरसात का मन बनाया है और उसका यह परिणाम है कि इस बात के लिए तो मुझे दु:ख हुआ कि मेरे क्षेत्र में 109, उनमें से कुछ बाहर के भी थे, लेकिन अधिकतर मेरे क्षेत्र के भाई-बहिन हैं, वे संसार छोड़ गये, उसकी मुझे चिंता है, मैं बार-बार उनको श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं लेकिन इसके उपरान्‍त भी भविष्‍य के लिए और राजस्‍थान के हित में कृषि को बढ़ावा देने के लिए, पेयजल की व्‍यवस्‍था करने के लिए यह योजना बनाई जाये। आपने समय दिया क्‍योंकि लोढ़ाजी ने पहले मुझे बदनाम करने की कोशिश की, मेरा गला काम नहीं दे रहा है, इसलिए आपने मुझे समय दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। वह तो आपको जान-बूझकर कह रहे हैं। श्री रामप्रताप कासनिया।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया, उसका तो क्षेत्रीय विधायक विरोध कर रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक तो कह रहे हैं कि बाँध बनाकर पानी वहां रखा जाये और आपने पानी निकालने की बात की है।

 

Jkj/akt/15.50/2o/9.10.2006

 

और आपने पानी निकालने की बात की, आप इनकी बात सुनते ही नहीं हो क्‍या।  आपने तो इनके खिलाफ फैसला कर दिया।

श्री उपाध्‍यक्ष: बीच में आप काहे को..

श्री अमरा राम चौधरी: यह आगे, भविष्‍य के लिए इन्‍होंने सजेशन दिया है।  अभी तो जैसे-जैसे निकल रहा है, चैनल, इसमें तो इनका कोई एतराज थोड़े ही है।

श्री उपाध्‍यक्ष: भविष्‍य के लिए कह रहे हैं।

श्री हेमाराम चौधरी: अच्‍छा, भविष्‍य का।

श्री अमरा राम चौधरी: इसीलिए तो चैनल बना है। यह तो भविष्‍य के लिए कि क्‍या होना चाहिए, वह बताया आपने। वह तो टेक्‍नीकल इंजीनियर वगैरह जो राय देंगे, वही होगा और आप कहेंगे वैसे ही करेंगे।

श्री हेमाराम चौधरी: अभी वाला पानी निकाल देंगे और भविष्‍य वाला पानी आयेगा, इसकी बात है क्‍या।

श्री तगा राम: गुढ़ामालानी से आने वाले माननीय सदस्‍य क्‍या फरमा रहे हैं, मेरे समझ में नहीं आया।

श्री उपाध्‍यक्ष: वह आ गया, समझ गये आप।

श्री हेमाराम चौधरी: वह आपके समझ में आना ही नहीं है।

श्री तगा राम: भविष्‍य के लिए, इस वर्ष क्‍या किया, क्‍या कर रहे हैं..

श्री उपाध्‍यक्ष: वह समझ गये, समझ गये।

श्री तगा राम: उससे आगे भविष्‍य के लिए निवेदन कर रहा हूं, सुझाव दे रहा हूं आपको।  जचे तोआप जैसा मन बनावें वैसा करें, सरकार को यदि यह मेरा सुझाव अच्‍छा लगे, सार्थक लगे तो करवाये। मेरा तो सुझाव देना है।

श्री हेमाराम चौधरी: मैंने तो आप की ही पैरवी की, यह मलवे के भले के लिए, इन्‍होंने आपकी बात नहीं मानी, इसलिए कह रहा हूं।

श्री तगा राम: सब के भले के लिए और ईश्‍वर को साक्षी रखते हुए मैं सुझाव दे रहा हूं, बाकी कोई राजनीति खेले तो न तो मैंने राजनीति मेरे जीवन में की है और न मैं सीखा हूं। मैं तो जो बात है वह कह रहा हूं। किसी को अच्‍छी लगे, बुरी लगे, कुछ भी करे, तगाजी को चिंता ज्‍यादा होगी बाड़मेर की और मैं वहां था ही नहीं, वह तो वहां की जनता मेरे लिए साक्षी है...

श्री हेमाराम चौधरी: मैंने तो दिगम्‍बर सिंहजी, डूडी साहब से कहा है, मैंने इनसे यही कहा बाड़मेर एमएलए साहब कहें वैसा करो और यह कहां कर रहे हैं। यह तो दूसरी बात कह रहे हैं, यह आपकी दोनों मंत्री बात नहीं सुन रहे हैं।

श्री रामनारायण डूडी: वह तो अपनी बात कह रहे हैं।  भविष्‍य के अंदर जो मलवा और लो एरिया है और तीन नदियां आ रही हैं और आगे के लिए बात कर रहे हैं। आप इनकी बात में कहां से फंस रहे हैं।

श्री तगा राम: वहां कितनों को राहत बांटी है...

श्री हेमाराम चौधरी: आप दोनों कह दो कि इनकी बात से सहमत, आपने तो फैसला उलटा किया इनके।

श्री अमरा राम चौधरी: नहीं-नहीं।

श्री हेमाराम चौधरी: बिलकुल उलटा किया। आपने तो पानी वहां से निकालने..

श्री अमरा राम चौधरी: फैसला तो इमरजेंसी फैसला था किस प्रकार से पानी निकाला जाय, यह जो भविष्‍य के लिए उन्‍होंने यह योजना बनाने की जो बात कही है उसमें आप भी सम्मिलित होंगे और आप की राय को भी मान करके किया जायेगा। ऐसे क्‍या।

श्री तगा राम: मैं भविष्‍य के लिए कह रहा हूं।

श्री हेमाराम चौधरी: भविष्‍य के लिए बाँध भले ही बना दें, लेकिन अभी जो पानी है उस कवास के अंदर, उसके बारे में क्‍या राय, अभी जो पानी कवास में भरा पडा है उसके बारे में क्‍या राय है, यह भी तो राय दें न क्षेत्रीय विधायक होने के नाते।  यह इसके बारे में राय नहीं देते, अभी तो आज की सोचो न।

श्री अमरा राम चौधरी: सर्वसम्‍मति से जो फैसला हुआ उसमें आप भी साथ थे। (व्‍यवधान)

श्री राम प्रताप कासनियां: अगर राजनीतिज्ञ लोग बहस करना छोड़ दें और विशेषज्ञों के ऊपर छोड़ दे काम कर लें, वह अपने आप कर देंगे।

श्री अमरा राम चौधरी: 15 दिन के बाद पानी-पानी सब करेंगे, सब खेती होगी उससे बढि़या। (व्‍यवधान)

श्री तगा राम: सदस्‍य साहब, क्‍या मेरे से सलाह लेना चाहते हो, मैं तो आप जब फरमाओ तब देने को तैयार हूं, क्‍या लेना चाहते हो, बोलो, मेरी सलाह आप मानोगे तो मैं तो दूंगा।

श्री हेमाराम चौधरी: आप इनको दो, यह नहीं मानते। मैं तो आपकी बात को, इनको पूछो, मैंने कहा क्षेत्रीय विधायक की क्‍या राय है, बताओ तो सही, यह इनकी राय का आज पता लगा।  हमें तो इतने दिन, आज दिन तक पता नहीं पडा की इनकी क्‍या मंशा है और क्‍या राय है, आज इनकी मंशा प्रकट हुई, राय यहां सदन में आई।

श्री तगा राम: आप मेरी बात का समर्थन कर रहे हो तो बहुत अच्‍छी बात है।

श्री नरपत सिंह राजवी: इतने दिन तो आपने बात ही नहीं की इनकी।

श्री तगा राम: आपने तो टी.वी. पर बोला था वह भी नहीं सुना होगा, मैं वहां..(व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी: इसका मतलब आपने इनकी राय को दरकिनार किया, गौर नहीं किया इनकी राय पर। (व्‍यवधान)

श्री नरपत सिंह राजवी: इतने दिन तो आपने इनकी बात ही नहीं मानी।  उपाध्‍यक्ष महोदय, इतने दिन तक तो आपने इनकी बात ही नहीं मानी, आज मनाने जा रहे हो। तगारामजी वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं...(व्‍यवधान)

श्री तगा राम: मेरी क्‍या राय रही है वह भी आपको पता नहीं होगा, क्‍योंकि मैं तो सेवा करने में लगा हुआ हूं और मैंने पूरा जीवन समर्पित कर रखा है इसलिए वहां जनता के बीच में था और रहूंगा।  मेरे तो वह है साक्षी। आप चाहे कह दो कि इन्‍होंने कुछ नहीं कहा, कुछ नहीं किया।(व्‍यवधान)

श्री नरपत सिंह राजवी: आपको सारा ढलान का बता दिया, उसके बाद भी समझ में नहीं आवे तो क्‍या करें। इनकी सलाह पूरी माननी चाहिए। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी: जनता के बीच में ही नहीं, इनकी ढाणी भी बाढ़ के बीच में आई हुई थी और घर में से जो श्रीमतीजी थीं वह बाढ़ के अंदर थी। इनका मतलब आधा पोर्शन चला गया, पूरे का पूरा खेत बह गया, आपने देखा ही नहीं। आप ब्‍याहीजी की ढाणी भी देख लेते। (व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी: खेत मेरा भी बह गया है।

श्री रामनारायण डूडी: जब हम गये तो हमारी गाड़ी फंस गई थी, अब इन्‍होंने धक्‍के मार कर, सिणियां लगाकर, कुछ करके जैसे-तैसे बाड़मेर ढाणी में पहुंचे।  आप जरा पहुंच जाते तो ठीक रहता उनको।

श्री हेमाराम चौधरी: आपने इनकी बकरियां, गायें भी तो निकाली थीं न। बकरियां भी तो आपके जवानों ने, अमरा रामजी ने बकरियां भी तो निकाली थीं न इनकी। (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनियां: बाढ़ जैसे विषय पर दां-पेंच नहीं खेलें तो उचित रहेगा।

श्री सभापति: यह तो इनके घर की बात है, कोई दांव-पेंच नहीं है।

श्री रामप्रताप कासनिया: मूल बात तो परची दी हुई है उस पर बोलने दें तब ना।

श्री उपाध्‍यक्ष: हां, साहब। गांव बड़ोपल में राजकीय उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय का भवन निर्माण करने हेतु।

श्री रामप्रताप कासनिया(पीलीबंगा): थोड़ा-बहुत इधर-उधर हो जाय तो माफ कर देना उपाध्‍यक्ष महोदय।

श्री उपाध्‍यक्ष: थोड़ा-बहुत इधर-उधर नहीं।

पीलीबंगा के गांव बड़ोपल में माध्‍यमिक विद्यालय का भवन निर्माण

श्री रामप्रताप कासनिया: उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र पीलीबंगा के अंदर गांव बड़ोपल बहुत पुराना गांव है, पाँच हजार से ऊपर की जनसंख्‍या है।  वहां पर सेम के कारण से गांव के अंदर जो विद्यालय का भवन बना हुआ था, वह भवन पूर्णत: नष्‍ट हो गया।  उस गांव के अंदर राजकीय उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय है और राजकीय उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय में चार सौ- साढ़े चार सौ बच्‍चे हैं और भवन नहीं है।

(श्री सुरेन्‍द्र गोयल, सभापति, पदासीन)

सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सरकार से यह निवेदन करना चाहूंगा कि राजकीय उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय का भवन गांव के लोग नहीं बना सकते और उनमें इतनी हैसियत भी नहीं है, पिछले पच्‍चीस-तीस वर्ष से उनके लिए खाने के लिए अनाज तक नहीं है, गांव के लोग जन सहयोग करने में असमर्थ हैं और इतना बड़ा भवन न तो कोई पंचायत बना सकती, न पंचायत समिति बना सकती और सभापति महोदय, इस विद्यालय से इर्द-गिर्द के दस-बारह गांव जुड़े हुए हैं जिनके बच्‍चे इस बड़ोपल गांव के अदंर उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय के अंदर शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं और सभापति महोदय, मैं यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि पेड़ के नीचे बैठकर बच्‍चे आज के इस युग में उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।  सभापति महोदय, पूर्व में माननीय भैरोंसिंहजी शेखावत जब मुख्‍य मंत्री थे उस समय सेमग्रस्‍त इलाके के अंदर जो भी गांव थे उन सब को भवन बनाने के लिए पैसा दिया था।  परंतु बड़ोपल गांव के अंदर किसी कारणवश वह भवन का निर्माण नहीं हो पाया।  सभापति महोदय, मैं सरकार से बड़े ही नम्र शब्‍दों में निवेदन करना चाहूंगा कि यह विषय बहुत गंभीर है, सुबह परची की बात आई तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय ने कहा कि कैसे-कैसे विषय पर परची दे देते हैं, तो सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सरकार से यह निवेदन करना चाहूंगा कि यह विषय वह बाढ़ वाली सी हालत है, इससे ज्‍यादा विषय कोई गंभीर हो नहीं सकता, साढ़े तीन सौ, चार सौ बच्‍चे हैं, सीनियर सैकण्‍डरी स्‍कूल है और भवन रहित है।  प्राइमरी स्‍कूल के अंदर तीन कमरे बने हुए हैं, वहां सारे बच्‍चे बैठ नहीं सकते और पेड़ों के नीचे बच्‍चे बैठते हैं और एक मैं निवेदन और करना चाहूंगा कि पिछले दिनों में गांव में आंदोलन चला था, आंदोलन में हमारे जैसे राजनीतिज्ञ लोग घुस गये, मैं जयपुर आया हुआ था सभापति महोदय, वहां दस गांवों के लोग इकट्ठा हुए और लगातार दस दिन तक धरना रखा और मैंने जाते ही गांव के लोगों से मिला और उनसे पूछा कि इस समस्‍या का समाधान अगर वाकई में ही करवाना चाहते हो तो हमारे राजनीतिक दलों के चक्‍कर में मत आओ और क्रमिक अनशन पर दस आदमी बैठे थे, मैंने उनको यह कहा था मैं आपकी बात सरकार तक पहुंचाऊंगा और मुझे ऐसा भरोसा है कि संवेदनशील सरकार है और आपके भवन का निर्माण होगा, कृपा करके आप धरना उठा दीजिये, तो उन्‍होंने मेरे कहने से वह धरना भी उठा दिया और भाषण देने वाले लोग जो हैं, वह आगे तारीख 13 रखी हुई थी, वह इंतजार करते ही रह गये।  पुन: मैं सरकार से निवेदन करना चाहूंगा कि यह विषय बहुत ही संवेदनशील है, उस गांव की हालत बहुत ही दयनीय है और मैं गांव के नाम तक बता दूं।

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्री रामप्रताप कासनिया: उस विद्यालय से जो गांव जुड़े हुए हैं, मैं गांव की संख्‍या बता दूं।

श्री सभापति: गांवों की संख्‍या बताने की जरूरत ही नहीं है।

श्री रामप्रताप कासनिया: बड़ोपल, माणकथेड़ी, 2 एलबीएम, ठाकरूवाला चक, 8 एसपीडी, लबाणा चक, 19 एसपीडी, 20 एसपीडी, 18 एसपीडी, 11 एसटीपी, ओडावाला चक, पोलता वाली ढाणी...

श्री सभापति: आपने बड़ोपाल के लिए परची दी थी, बड़ोपल के लिए।

श्री रामप्रताप कासनिया: हैं जी?

श्री सभापति: बड़ोपल के लिए आपने परची दी थी और उसके बारे में आपने बता दिया सारा कुछ।

 

भीम/अरुण/9.10.06/16.00/2p

 

श्री रामप्रताप कासनियां: बता तो दिया पर सभापति महोदय, मुझे...।

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): सभापति महोदय, यह बात बहुत सही है वास्‍तव में 1990-91 से लेकर के यह विद्यालय सेम के कारण से नष्‍ट हो गया और विद्यालय के बच्‍चों की आज भी चार कमरों में बैठकर के शिक्षा पूरी हो रही है। इसके लिए जमीन का अलॉटमेंट है वो तो हो गया। बिल्डिंग बनाने के लिए भी जो पीडब्‍ल्‍यूडी से हमने एस्‍टीमेट मंगाया वो लगभग 1.81 लाख का बना। मैं सोचता हूं कि कोई माध्‍यमिक और उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय में सीधे ही कोई भवन निर्माण का पैसा मिलता नहीं है पर जैसे अभी प्राइमरी स्‍कूल में आपका जो विद्यालय चल रहा है चार कमरों में, सर्वशिक्षा अभियान में प्राथमिक और उच्‍च प्राथमिक के लिए तो कमरे बनाने की कुछ अपने को सुविधा उपलब्‍ध है। मैं सोचता हूं कि उसी में अभी कुछ कमरे बनाकर के और जो टैम्‍प्रेरी आपकी आवश्‍यकता है उसकी पूर्ति तो होगी लेकिन ये जो टोटल पैसा है यह या तो जनसहभागिता से या सरकार कोशिश करेगी किसी स्‍कीम में यह कवर हो । समस्‍या बहुत ही जिनाइन है इसमें कोई दो राय नहीं है पर हम जो प्राथमिक विद्यालय अभी चल रहा है, सर्वशिक्षा अभियान में कुछ पैसा लेकर उसी प्राथमिक विद्यालय में और कमरे बनाकर के इनकी जितनी मिनि‍मम आवश्‍यकता की पूर्ति हम कर सकते हैं वो हम करेंगे।

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्री रामप्रताप कासनियां: धन्‍यवाद। बहुत-बहुत धन्‍यवाद। इसके लिए सरकार को मैं बधाई देना चाहता हूं।

श्री सभापति: माननीय श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल।

उपनिवेशन तहसील पूगल को मर्ज कर रेवेन्‍यु रिकार्ड ट्रांसफर करने विषयक

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): धन्‍यवाद सभापति महोदय। सभापति महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र की उपनिवेशन तहसील पूगल के एक चरण का लंबे समय से प्रयास चल रहा था कि उपनिवेशन तहसील को मर्ज कर दिया जाए। इसके एक चरण के मर्ज की प्रक्रिया प्रारंभ करते हुए और कुछ समय पहले आदेश जारी किये और उसके एक चरण को रेवेन्‍यु तहसील में मर्ज कर दिया गया लेकिन उपनिवेशन विभाग ने अपना रिकार्ड ट्रांसफर कर दिया रेवेन्‍यु विभाग को उस रिकार्ड का उपयोग रेवेन्‍यु विभाग इसलिए नहीं कर पा रहा है कि अभी राज्‍य सरकार से उसका गजट नोटिफिकेशन नहीं किया जा सका और स्‍पष्‍ट आदेश रेवेन्‍यु डिपार्टमेंट को नहीं मिल पाये। आज लगभग डेढ़-दो महीने का समय हो रहा है आम काश्‍तकार अपने लंबित प्रकरणों का निस्‍तारण करने के लिए अगर उपनिवेशन कार्यालय में जाना चाहे तो वहां से चूंकि रिकार्ड ट्रांसफर हो चुका है इसलिए वो विभाग कोई सुनवाई करने को तैयार नहीं है और रेवेन्‍यु डिपार्टमेंट क्‍योंकि स्‍पष्‍ट  आदेश उनके पास नहीं आये इसलिए उस रिकार्ड को खोलकर के अभी तक काम करना प्रारम्‍भ नहीं कर पा रहा है। इस हेतु मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय निवेदन करूंगा कि इसके अन्‍दर कोई स्‍पष्‍ट आदेश शीघ्र जारी किये जाएं जिससे जो सोच हमारी रही है काश्‍तकारों को राहत प्रदान करने के लिए, उस सोच की पूर्ति हो सके।

दूसरा मैं निवेदन करना चाहूंगा कि इसी का द्वितीय चरण है उपनिवेशन तहसील पूगल का इसमें वर्तमान समय में अलॉटमेंट के कार्य रुके हुए हैं और इससे पहले अलॉटमेंट का जब प्रोसेस थोड़े दिन पहले शुरू किया गया था, लोगों को नोटिस दिये गये थे। जिन लोगों द्वारा अपने अलॉटमेंट के लिए एप्‍लीकेशंस लगायी गयी थी उनके अलॉटमेंट शुरू करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके लिए मीटिंग भी एसीसी के स्‍तर पर बुलाई गई। किस दर पर उनको आबंटन हो यह स्‍पष्‍ट नहीं था। पूर्व के वर्षों में वर्ष 2001 के आबंटन की दर को आधार बनाते हुए आबंटन किया जा रहा था जो 2005 तक प्रभावी रहा। वर्ष 2006 में जब आबंटन करने के लिए संबंधित काश्‍तकारों को नोटिस दिये गये तो उसमें एक लाइन लिखी गई कि आगामी आदेशों को ध्‍यान में रखते हुए राज्‍य सरकार द्वारा लिये गये निर्णयों को ध्‍यान में रखते हुए दर का निर्णय लिया जाएगा।  तो मेरा निवेदन है कि माननीय मंत्री महोदय, वहां के जिन हालात को देखते हुए 2001 से 2005 तक वर्ष 2001 की दर पर ही जो आबंटन किया जा रहा था उन हालातों में आज भी कोई बदलाव नहीं आया है। नहरी पानी इस स्‍तर का नहीं मिलने लगा है कि हम यह सोचें कि वहां पर बहुत ज्‍यादा लोगों को उपलब्‍धता हो रही है और हालात भी अकाल के लगातार वहां पर बने आ रहे हैं तो मेरा निवेदन है कि वो आने वाले समय में आपने जो एक अलॉटमेंट पर बेन लगाया है इस रोक को हटाया जाए और दर को भी निश्चित किया जाए कि वो 2001 की दर पर आबंटन हो। दूसरा मेरा निवेदन है कि ये जो रोक लगायी गयी थी इस रोक को लगाये जाने का आदेश कार्यालय आयुक्‍त, उपनिवेशन द्वारा 26-6-06 को जारी किया गया और उसके अन्‍दर हवाला दिया गया, माननीय राजस्‍व एवं उपनिवेशन मंत्री महोदय राजस्‍थान सरकार की अध्‍यक्षता में बीकानेर में संपन्‍न बैठक 22.6.06 में गहन विचार विमर्श होने के पश्‍चात यह निश्चित किया गया कि गृह विभाग में दिनांक 14.4.06 की बैठक में लिये गये निर्णयानुसार इंदिरा गांधी नहर उपनिवेशन क्षेत्र में विशेष आबंटन एवं सील बिड मूल्‍य प्रक्रिया से भूमि विक्रय हेतु अधिसूचित सूचियों को आगामी अन्‍य आदेश तक इन भूमियों का आबंटन एवं बिक्रय स्‍थगित रखा जाएगा क्‍योंकि इनको फायरिंग रेंज के 62 गांवों के विस्‍थापितों के लिए आरक्षित किया जाना है। मेरा निवेदन है सभापति महोदय, कि ये जो आदेश जिस आदेश के तहत वहां पर रोक लगायी गयी है फील्‍ड फायरिंग रेंज के संभावित गांवों का अभी वहां पर कोई जिक्र नहीं है और अगर है तो माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि क्‍या ऐसी प्रक्रिया कोई शुरू हो चुकी है, क्‍या गांवों को उठाये जाने का निर्णय लिया जा चुका है? अगर लिया जा चुका है तो इनका निस्‍तारण कब तक होगा, कब तक वो गांव उठेंगे और अगर ऐसा नहीं है तो यह एक लोगों में संशय है लोगों में भय है आम जन इस बात से चिंतित है कि वो अपने उस घर में रह पाएगा कि नहीं रह पाएगा। सेकड़ों वर्षों पुराना उनका गांव है वो काश्‍तकार भयभीत है जो काश्‍तकार नयी जगह पर जमीन चाहता है उसको जमीन नहीं मिल पा रही है तो कृपया इस के बारे में एक उचित आदेश प्रसारित करवायें। इसके साथ-साथ आपने एक बहुत अच्‍छी प्रक्रिया शुरू की थी कि ऐसे कृषि स्‍नातकों को एक्‍सपेरीमेंट करने के लिए अपनी ली गई डिग्री का उपयोग करने के लिए आपने उनको मुरब्‍बे आबंटित करने की प्रक्रिया शुरू की थी और लगभग साढ़े छ: सौ से ज्‍यादा कृषि स्‍नातकों को आपने ये मुरब्‍बे आबंटित किये। आज लगभग सात सौ से के आसपास कृषि स्‍नातकों के आपके पास आवेदन लंबित है वो आपसे मुरब्‍बे उसी प्रकार से चाहते हैं जैसे पूर्व के कृषि स्‍नातकों को दिये गये कृपया इनको भी आप आबंटन की प्रक्रिया शुरू करायें यह मेरा निवेदन है। सभापति महोदय, आपने मुझे समय दिया बहुत-बहुत धन्‍यवाद। 

मंत्री महोदय से आशा करूंगा कि मंत्री महोदय इसमें कोई प्रभावी आदेश करेंगे। दो शब्‍द मेहरबानी करके इसके बारे में कुछ कहने का कष्‍ट करेंगे मेरा निवेदन है आपसे।

श्री सभापति: धन्‍यवाद।  माननीय श्री बत्‍तीलाल।  मंत्री महोदय, आप बोल रहे हैं? एक मिनट मंत्री जी जवाब दे रहे हैं पहले।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): सभापति महोदय, लूणकरणसर से आने वाले विधायक जी ने चार पाइंट पर्ची के माध्‍यम से उठाये। पहला विशेष आबंटन वाला था और दूसरा पूगल को राजस्‍व तहसील में मिलाने वाला था तीसरा बेरोजगार जो कृषि स्‍नातक हैं उनको भू आबंटन के मामले में था और चौथा आबंटन पर रोक का था।  जहां तक पहले बिंदु का मामला है इसके आदेश जारी कर दिये हैं सभापति महोदय, केवल अधिसूचना जारी होनी है क्‍योंकि उनकी चकबंदी वगैरह में पूरी तरह डिटेल में इसका सारा होता है इसलिए माइनूटली देखते हैं  करीबन 20 तारीख तक इसकी भी अधिसूचना जारी कर देंगे।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल: धन्‍यवाद।

श्री रामनारायण डूडी: दूसरा जो आपका राशि वाला मामला है विशेष आबंटन वाला तो इसकी पूरी 2001 से लगाकर 2002 से लगाकर और इसके बीच के अन्‍दर उनकी राशि निर्धारित की जाए, किस दर पर जमीन का मूल्‍य लिया जाए इस संबंध में भी दस प्रतिशत की बढ़ोतरी और इस प्रकार का निर्णय लेकर के हम बहुत जल्‍दी ही यह आदेश निकालने वाले हैं और यह हमारा सारा मामला एग्‍जामिन हो चुका है। चौथी बात आपने जो रोक वाली बात कहीं है यह रोक वाली बात सभापति महोदय, 56 गांव और एमआरएफएफ के अन्‍दर देने का हमारे पास भारत सरकार से प्रस्‍ताव आया था डिफेंस का तो हमने सारा उनका कर लिया उनके 56 गांवों को हम उठायेंगे और 56 गांव उठने के बाद में हमने उनको कहां-कहां जमीन देनी होगी, किस कलस्‍टर के अन्‍दर देनी होगी यह सारा एग्‍जामिन करने के लिए थोड़ी रोक लगायी थी यह बात सही है रोक लगायी गयी थी, मगर अब हमारे पास उस जमीन को आबंटन करने के लिए उनको बसाने के बाद इतनी जमीन हमारे पास उपलब्‍ध है जो एप्‍लीकेशन वगैरह आ रही हैं तो वो भी हमने उस रोक को हटा दिया है जहां तक सवाल बेरोजगार स्‍नातकों को ....

कैलाश/   9.10.2006  16.10  (1) 2q

 

भूमि देने का मामला है एक्‍सपेरीमेंट के तौर पर उसमें काफी एप्‍लीकेशन आई हैं, कितनी एप्‍लीकेशन आई हैं इतनी तो मेरे पास डिटेल अभी आई नहीं है ।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): 700 के करीब हैं ।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): आपके अनुसार आई होगी । इस मामले में इतना ही निवेदन करना चाहता हूं कि इसमें एक कंडिशन है कि जो लड़का स्‍नातक करने के बाद सर्विस में जाना चाहेगा उनको जमीन नहीं मिलेगी । यह सारा एग्‍जामिन कर के देख लेंगे जो मैरिट पर होता है उनको देने ऐसा कोई मामला नहीं है आगे से चलता आ रहा है, ऐसा कोई मामला नहीं है ।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): धन्‍यवाद मंत्री जी ।

श्री सभापति: माननीय श्री बत्‍तीलाल जी ।

अध्‍यापकों की भर्ती करने विषयक

श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम): सभापति महोदय, शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने शिक्षकों की भर्ती, विद्यालयों को खोलना और कक्षों का निर्माण में जो कीर्तिमान स्‍थापित किये हैं वह आने वाले समय में आने वाली सरकारों के लिये और सम्‍पूर्ण देश के लिये प्रेरणा के स्रोत का कार्य करेंगे । मान्‍यवर, पिछले 5 साल में एक अध्‍यापक की भर्ती नहीं हुई और अब एक लाख अध्‍यापकों की भर्ती जारी करना, 16 हजार स्‍केलों का खोलना, 35 हजार अतिरिक्‍त कक्षों का निर्माण करना यह इस बात का द्योतक है कि यह सरकार कितनी दायित्‍वपूर्ण है, इसकी कितनी कार्यक्षमता है, इसकी कितनी कार्य कुशलता है यह मात्र एक शिक्षा के क्षेत्र से ही घोषित होता है । मान्‍यवर, यह कहा जाता है कि आदिवासी की बच्‍ची मर गई, आदिवासी अशिक्षित है, यह सोची समझी चाल में ऐसा रचा गया है । मान्‍यवर, 19 विधान सभा क्षेत्र आदिवासियों के हैं वहां आज तक 60 साल में एक आईएएस पैदा यह नहीं कर सके क्‍योंकि 5वीं क्‍लास से ज्‍यादा यह आदिवासी पढे नहीं, गरीबी बनी रहे ताकि इनके वोट लेने का और सदन में आने का मौका मिल सके । ज्‍यादातर कांग्रेस के नुमाइंदे बांसवाडा में रहे । हरिदेव जोशी जी के रूप में या फिर उदयपुर में रहे माननीय सुखाडिया जी के रूप में या भीलवाडा में रहे माननीय माथुर साहब के रूप में । मान्‍यवर, सबसे गई बीती स्थिति है आ, आज आदिवासी नंगा है, भूखा है, गरीब अशिक्षित हैं तो बांसवाडा में है । सबसे ज्‍यादा गया बीता है तो उदयपुर में है या फिर भीलवाडा में है । यह ऐसा क्‍यों हुआ 60 साल में यह इसलिए हुआ कि इन्‍होंने कभी इनको शिक्षित नहीं करना चाहा। अब आप अंदाजा लगाइए कि कोटडा जैसी गई बीती जगह पर इन्‍होंने कभी स्‍कूल नहीं खोला, कभी ऐसी उच्‍च शिक्षा की कोशिश नहीं की । हमारी सरकार ने कालेज खोला कोटडा में ठेठ आदिवासी क्षेत्र में ।

श्री सभापति: आपको टोडाभीम के बारे में बोलना है ।

श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम): खैरवाडा में और थानागाजी में  । (व्‍यवधान) मान्‍यवर, आप सुन लीजिए देखो मैं आपके बीच में डिस्‍टर्ब नहीं करता हूं । मैं अच्‍छी तरह मेरी समस्‍याओं को रखूंगा, मैं बोलने के लिये स्‍वतंत्र हूं मैं क्‍या बोलूं, आप सुन लीजिए आप डिस्‍टर्ब ना करें ।

मान्‍यवर, मैं सरकार को धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि सरकार ने एक योजना बनाई है कि वास्‍तव में सही नीति से कैसे गरीब को शिक्षित किया जाये, कैसे उसकी आर्थिक मदद की जाये, कैसे उनको ऊँचा उठाया जाये । इसीलिए हायर एजुकेशन्‍ल कालेज खोले गये हैं वह बिलकुल आदिवासी क्षेत्रों में खोले गये हैं । एक सेनापति की तरह हमारी स्‍वयं मुख्‍य मंत्री जी ने किस तरह अपनी फौज को तैनात किया है, किस तरह अपने मंत्रियों को तैनात किया है, किस तरह अपने कार्यकर्ताओं को तैनात किया है, प्रत्‍येक गरीब को टच किया है हर रूप में । उनका खाना देखिए जानवरों को चराये जाने वाले भोजन को यह मिड डे मील के रूप में देते थे । उससे आधे बच्‍चे तो वैसे ही बीमार हो जाते थे । जिन बच्‍चों का खाना जानवरों से गया बीता हो उससे हम अपेक्षा कर सकते हैं कि वह भारत का स्‍वस्‍थ नागरिक बन सकता है, बुद्धिमान नागरिक बन सकता है या कम्‍पीटिशन में हम वर्ल्‍ड लेव पर आ सकते हैं । मान्‍यवर, इसी दौरान आपने मुझे एक कालेज बख्‍शीश किया ठेठ आदिवासी क्षेत्र टोडाभीम में । टोडाभीम में पूर्वी राजस्‍थान में एक नगर पालिका है जो केवल आदिवासियों की है । मैं प्रार्थना करना चाहूंगा आपने उसमें एक कंडिशन लगा दी कि वह जन सहभागिता से खोला जाये । वहां इतने गरीब लोग हैं कि अपनी जनसहभागिता उसमें वह अदा नहीं कर सकते । मान्‍यवर, मैं आपके माध्‍यम से सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि उसका पूरा दायित्‍व जेसा आपने और आदिवासी क्षेत्रों में दिया है खैरवाडा में दिया है, थानागाजी में दिया है, कोटडा में दिया है वैसे पूरे सरकारी खर्चे पर उस कालेज को बनाया जाये । मैं जानता हूं माननीय मुख्‍य मंत्री वसुंधरा राजे जी ने इसकी बजट में घोषणा की है । माननीय मुख्‍य मंत्री जी के मुंह से जो निकल गया, बजट में घोषित हो गया वह शत प्रतिशत अक्षरशः: पालन होना है । पर उसको जल्‍दी कार्यान्वित कर दिया जाय, जल्‍दी वहां भर्ती चालू कर दी जाये तो मैं इसके लिये बहुत ज्‍यादा आभारी रहूंगा । हमारी मुख्‍य मंत्री जी जिनकी कथनी और करनी समान है, जो कहती हैं वह करती हैं इसमें तो हमको पूरा विश्‍वास  है । हम जिस नाव में बैठे हैं उसका नाविक इतना मजबूत है, राजस्‍थान की हर गरीब जनता यह सोचती है कि हमारा मुख्‍य मंत्री हमारे साथ है । इसीलिए जिस तरह उनका वित्‍तीय प्रबन्‍धन कुशल है उसी तरह उनका बाढ प्रबन्‍धन भी कुशल है  इसको पूरा हिन्‍दुस्‍तान मान गया । यदि सही प्रबन्‍धन नहीं होता तो लोग यहां से पलायन कर जाते । एक भी आदमी आज जयपुर में आकर धरना नहीं दे रहा बाढ के आधार पर, एक भी आदमी बाहर नहीं गया । लोगों का इतने अल्‍प समय में इस तरह सुयोग्‍य तरीके से वापस आ जाना यह कोई साधारण आदमी का काम नहीं है । मैं तो यह कहूंगा वास्‍तव में मुख्‍य मंत्री के रूप में राजस्‍थान में वसुंधरा राजे जी वरदान है और एक तरह से साक्षात देवी का अवतार है जिन्‍होंने इस तरह का काम किया है ।

मान्‍यवर, मैं ज्‍यादा समय नहीं लूंगा, मैं आपके माध्‍यम से ...

श्री सभापति: धन्‍यवाद ।

श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम): मैं यह निवेदन करना चाहूंगा कि प्रकृति से लडने की क्षमता किसी में नहीं हो सकती चाहे वह सरकार कोई भी हो । अब ऐसा कौन क्‍या जापता करें कि बाडमेर जहां हमेशा सूख पडता था वहां बाढ आ गई । लेकिन सवाल यह है कि उनकी कार्यक्षमता देखिए आप कि किस तरह का प्रबन्‍धन किया कि हर परिवार को टच किया, हर व्‍यक्ति को टच किया, हर गरीब को टच किया और वास्‍तव में जो सब से ज्‍यादा इन्‍होंने कार्य किया है वह यह किया है उन्‍होंने एक संबल पैदा कर दिया कि वसुंधरा राजे जी की सरकार, वसुंधरा जी के कार्यकर्ता, उनके मिनिस्‍टर हमारे साथ है इससे गरीब में एक आत्‍म विश्‍वास पैदा हो गया कठिनाई से लडने के लिये और इस विभीषिका से निकले के लिये । मान्‍यवर, हमारे देश का एक ढांचा है कि हम क्‍या करते हैं, हम केवल देखते हैं ।

श्री सभापति: अब आप समाप्‍त करें ।

श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम): सोनिया गांधी जी देखकर चली गईं और शर्म की बात है कि एक रुपया देकर नहीं गई । यह क्‍या करते हैं कि मुम्‍बई में आतंकवादियों ने विस्‍फोट किया वह वहां पर देखने चली गई, सहानुभूति दिखाई ...

श्री सभापति: अब आप समाप्‍त करें ।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): सभापति महोदय, इनका भाषण बड़ा प्रभावी हो रहा है तो कृपया थोडा समय दे दें ।

श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम): सभापति महोदय, बडी मुश्किल से तो मेरे बोलने के लिये लाटरी खुली है । मुम्‍बई में विस्‍फोट हुए सबसे पहले यह लोग पहुंचे  लेकिन यह लोग नहीं चाहते कि आतंकवाद पर किसी तरह का अंकुश लगाया जाये ।, यह आतंकवाद मिटे । यह आतंकवाद को मजबूत करते हैं और केवल झूठी सहानुभूति दिखाते हैं कि लोग मर गये इसका हमको भारी दुःख हो रहा है । दुःख क्‍या हो रहा है, आपने जो कानून अटल बिहारी वाजपेयी जी ने बनाया था उसको वापस ले लिया । क्‍या अधिकार है आपको कब्‍जा करने का, आप यह चाहते हैं एक तुष्‍टीकरण की नीति के तहत यह लोग एक समुदाय विशेष के हैं इनका वोट हमको लेना है इसलिए आतंकवादी हो, हिन्‍दुस्‍तान की जनता मरे तो मरे लेकिन इनकी सहानुभूति हमारे साथ रहनी चाहिये । यह इनके दिखावे की नीति है यह करना कुछ नहीं चाहते । मैं विवेकानंद जी को पढ रहा था । ...

श्री सभापति: अब आप समाप्‍त करें ।

श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम): उसमें यह था भारतीय संस्‍कृति और पाश्‍चात्‍य संस्‍कृति में क्‍या अंतर है । विवेकानंद जी ने यह लिखा है कि पाश्‍चात्‍य संस्‍कृति में लोगों में दया, सहानुभूति और करुणा नहीं होती है । यही प्रदर्शन सोनिया गांधी जी ने किया । इनमें मानवतावाद की चीज नहीं है ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): इनका भी ध्‍यान रखें मंत्री मंडल के विस्‍तार में यह बहुत जरूरी है,ध्‍यान रखना ।

श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम): मैं आपसे पहले इस सदन में आया हूं आपसे ज्‍यादा पढा लिखा हूं आप मेरी बात को सुनिए । आप सुनने को तैयार नहीं हैं ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): मैं तो आपकी पैरवी कर रहा हूं मेरे से पहले आये हो इसीलिए आपको मंत्री बनाने की पैरवी कर रहा हूं ।

श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम): .. (व्‍यवधान) आपने इस देश का भट्ठा बैठा दिया । (व्‍यवधान) लोग आपके नाम से नफरत करते हैं । आप 10-20 साल सत्‍ता में दुबारा आने के लिये भूल जा, यह तय शुदा है । आपने जो किया है वह राजस्‍थान की जनता जान रही है कि आपने क्‍या किया है । आप एक आइएएस का नाम बता दीजिए, आज आदिवासी आदिवासी करते हो, आप बताइए आपने वहां कितने आईएएस और आईपीएस पैदा किये । हमने हमेशा कांग्रेस का विरोध किया इसलिए पूर्वी राजस्‍थान के आदिवासी आज सबसे आगे हैं और वहां लोग जो आपको वोट देते रहे हैं, जिन लोगों ने आपको वोट दिया है उन लोगों की यह हालत है कि एससी आपको छोड गये... (व्‍यवधान)

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): राजेन्‍द्र जी, कैबिनेट मिनिस्‍टर बनाना है या स्‍टेट मिनिस्‍टर बनाना है फैसला कर लें । (व्‍यवधान)

श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम): बडी मुश्किल से मेरे बोलने का मौका आया है और यह बीच में डिस्‍टर्ब कर रहे हैं । आप अच्‍छी तरह सुन लीजिए ...

श्री सभापति: टोडाभीम से आने वाले माननीय सदस्‍य बत्‍तीलाल जी आप विराजे।

श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम): धन्‍यवाद साहब ।

श्री सभापति: माननीय श्री रिछपाल जी मिर्धा ।

व्‍यक्तिगत स्‍पष्‍टीकरण

विधान सभा की कार्यवाही देखने हेतु मेहराम के लिए पास बनवाने हेतु की गई अनुशंषा में नाम की भ्रांति विषयक

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): सभापति महोदय, मैं यह स्‍पष्‍टीकरण इसलिए देना चाहता हूं कि यह विधान सभा की कार्यवाही देखने से संबंधित एक मामला आया है। 8 तारीख के समाचार पत्र  दैनिक नवज्‍योति में एक खबर आई है । रिछपाल सिंह मिर्धा ने बनवाया महराम का पास । जयपुर,7 अक्‍टूबर नागौर के बाबूलाल हत्‍याकांड में वांछित महराम का विधान सभा का पास नागौर जिले के डेगाना विधान सभा क्षेत्र के विधायक रिछपाल सिंह मिर्धा की अभिशंषा पर बनाया गया था । महराम को जयपुर शहर और नागौर पुलिस ने शुक्रवार को यहां अलवर जिले के लक्ष्‍मणगढ विधान सभा क्षेत्र के विधायक जगत सिंह के सरकारी आवास से गिरफ्तार किया था ।

श्री सभापति: अख़बार पढने की जरूरत नहीं है ।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): इसको नहीं पढूंगा तो जो बात मेरे को कहनी है वह नहीं आयेगी । इसमें तारीख का आया है अभी मैं पूरी बात स्‍पष्‍ट करूंगा ।

 

Lpm/usc/1620/09102006/3a

 

मेहराम नाम के व्‍यक्ति ने विधान सभा की कार्यवाही देखी थी और उसका पास रिछपाल सिंह मिर्धा की सिफारिश पर बनाया गया था। मगर पास बनाने की प्रक्रिया में कोई गलती नहीं हुई उन्‍होंने बताया कि पुलिस की और से विधान सभा सचिवालय में भेजी अवांछित तत्‍वों की सूची में मेहराम नाम के किसी व्‍यक्ति का नाम नहीं, विधान सभा सचिवालय से उसी व्‍यक्ति का पास बनाया जाता है जिसका नाम असामाजिक तत्‍वों की सूची में शामिल नहीं हो और किसी विधायक ने उसकी अभिशंसा की हो। विधान सभा सदस्‍य एक दिन में दो व्‍यक्तियों के पास बनवा सकता है। मेहराम के इस प्रकरण ने पुलिस की कार्य प्रणाली पर भी प्रश्‍नचिन्‍ह् लगा दिया। हत्‍या काण्‍ड में वांछित अपराधी का सूची में नाम तक शामिल नहीं। माननीय सभापति महोदय, मैंने जिस नाम के व्‍यक्ति के पास जारी होने के फार्म पर साईन किये वह मेहराम पुत्र रामकरण चौधरी, ब्‍लॉक संदर्भ केन्‍द्र प्रभारी सर्वशिक्षा अभियान, नागौर में है, अभी कार्यरत है और वह मेरे पास आये थे अपने हार्ट का ऑपरेशन करवाके और उन्‍होंने मेरे को कहा कि मुख्‍यमंत्री जीवन रक्षा कोष से मेरे को कुछ मदद मिल सकती है क्‍या? तो मैंने उनको यह बात कहीं आप अपने कागजात देते हैं, मैंने एक चिट्ठी मुख्‍यमंत्रीजी को लिखी और चार तारीख को उसी व्‍यक्ति का पास बनाया मैं रवाना होते समय उसने कहा विधान सभा की कार्यवाही देखनी है, साईन कर दिए चार तारीख को ही मैं मुख्‍यमंत्रीजी से यहां मिला उनके कक्ष में और यहां उनके कागजात दिए जो अभी उनके सचिवालय में मौजूद होंगे। इसमें लिखा है कि उसको पास जारी किया गया छह तारीख को। इसलिए मैं स्‍पष्‍ट करना चाहता हूं कि मैंने जिस मेहराम नाम के व्‍यक्ति का मैंने पास के लिए साईन किया वो मेहराम अभियुक्‍त नहीं था यह तो एक अध्‍यापक है और चार तारीख को विधान सभा की कार्यवाही देखी है, न कि छह तारीख को देखी है। इसका पास भी 29 नम्‍बर पर बना है मैंने जिसको साईन किये हैं और वह पास भी अभी यहां विधान सभा में मौजूद हैं। चाहे तो विधान सभा अध्‍यक्ष महोदय इस पूरे प्रकरण की जांच करा लें। इसलिए मैं स्‍पष्‍ट करना चाहता था कि यह अभियुक्‍त नहीं है और मैंने जिस      व्‍यक्ति का पास बनाया उसका हार्ट का ऑपरेशन हुआ था। उसने चार तारीख को विधान सभा की कार्यवाही देखी है, न कि छह तारीख को देखी है। यह जो इस समाचार पत्र में यह खबर आई है, सदन में और मीडिया में जो भ्रांति हुई उसका स्‍पष्‍टीकरण देने के यह आपके समक्ष यह बात रखी है। आपने समय दिया धन्‍यवाद।

श्री सभापति: धन्‍यवाद। अब आप क्‍या कहना चाहते हैं?

अनुसूचित जाति और जनजाति की कार्यशाला योजना में राशि स्‍वीकृत करवाने के एवज में कमीशन लेने का आरोप लगने विषयक

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मेरा भी एक्‍सप्‍लेंडेशन है स्‍पीकर साहब ने अलाऊ किया है। माननीय सभापति महोदय, दिनांक 5.10.2006 को स्‍थगन प्रस्‍ताव के माध्‍यम से मैंने अनुसूचित जाति और जनजाति की कार्यशाला योजना में सात करोड़ उन्‍नीस लाख रूपए जो राज्‍य सरकार में उन लोगों को 3-4 साल से देने बाकी हैं इस मामले में अपने विचार प्रकट किए थे। उसके बाद माननीय मंत्रीजी श्री मदन दिलावर ने जो इसमें वक्‍तव्‍य जारी किया जो यहां पर स्‍टेटमेंट दिया, वह स्‍टेटमेंट मुझे यह जानकारी मिली है कि माननीय सदस्‍य कुद लोगों से यह वादा करके आये हैं, उन्‍होंने कहा है कि 5 प्रतिशत राशि मुझे दे देंगे तो वहां से स्‍वीकृतियां निकवा दूंगा, मुझे जानकारी मिली है कि 5 प्रतिशत में सौदा करके आये हैं माननीय सदस्‍य की 5 प्रतिशत राशि इसको दे दी जाएं तो ये दबाव बनाकर स्‍वीकृति करवा देंगे लेकिन यह सदन और मैं इस दबाव में आने वाला नहीं हू। नियमानुसार कार्यवाही करेंगे, इनकी आदत रही है कमीशन खाने की और लगातार कमीशन खाने की आदत रही है। इनकी और से यहां दबाव में कमीशन खाने की कार्यवाही करना चाहते हैं, मैं किसी भी कीमत पर नहीं होने दूंगा, यह माननीय मंत्री महोदय ने यहां दिया है और बिना किसी ठोस आधार के, बिना किसी नोटिस के माननीय मंत्रीजी ने जो दिया है मैं इनको असत्‍य, गलत और भ्रामक मानता हूं। मेरे तीन विकल्‍प हैं, या तो माननीय मंत्री महोदय इसको वापस ले लें और इसको डिलीट कर दें। दूसरा, यह कि माननीय गुलाबजी कटारिया की अध्‍यक्षता में समिति इन आरोपों की जांच करें और जांच  करने पर अगर मैं दोषी पाया जाता हूं तो मैं सदन से त्‍यागपत्र दू अगर माननीय मदनजी दिलावार असत्‍य पाये जाते हैं तो वो सदन से त्‍यागपत्र दें। इसमें जो भी विकल्‍प आप चाहें, वह विकल्‍प आप चुन लें।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): अगर सोनिया गांधीजी से जांच करा ली जाए यदि ये निर्दोष साबित हो जाते हैं तो मेरे शब्‍दों को वापिस ले लूंगा, मैं सदन में वादा करता हूं मेरे शब्‍द वापस ले लूंगा..........(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय सभापति महोदय, ये मंत्री का नमूना देखिए आप, ये नमूना देखिए मंत्रियों का, माननीय सभापति महोदय, ये क्‍या कह रहे हैं सोनिया गांधीजी से जांच करा लीजिए ........(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ...(व्‍यवधान) नहीं तो आप इस्‍तीफा दोगे।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): माननीय सदस्‍य ने बिना सोचे-समझे मेरे ऊपर यह कहा कि मैं मेरी आर्थिक स्थिति सुदृढ करने में लगा हुआ हूं और यहां तक भी मैंने सुना है या इसमें कार्यवाही में है या नहीं है कि एक प्रतिशत लेते हैं। मैं समझता हूं कि इन शब्‍दों को यदि वापिस रिबेटिड किये जाते हैं .....(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हां, एक प्रतिशत शब्‍द का न तो मैंने कहा, न किसी रिकार्ड में है। इसलिए वापिस लेने का सवाल ही नहीं है।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): एक प्रतिशत के लिए कहा है आपने...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य। 

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): अगर एक प्रतिशत रिकार्ड में दर्ज है तो मैं वापस लेता हूं लेकिन एक प्रतिशत का मैंने कहा ही नहीं है, इसमें है ही नहीं....(व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): रिकार्ड में नहीं है तो मैं भी इनको विलोपित करने की अनुशंसा करता हूं।

श्री सभापति: प्‍लीज आप बिराजिए, खत्‍म हुआ यह मामला, इनको स्‍पष्‍टीकरण देना था दे दिया। श्री रघुवीर सिंह मीणा।

सरकारी विभागों में बैकलाग भरने विषयक

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): राष्‍ट्रीय पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अल्‍पसंख्‍यक महासंघ के अध्‍यक्ष, कर्मचारी संघ के अध्‍यक्ष राजपाल मीणा पिछली दो तारीख से गांधी सर्किल पर हड़ताल पर है और चार तारीख से भूख हड़ताल पर हैं। आमरण अनशन पर है, उनके साथ सात आदमी और हैं पिछले 3 दिन से उनकी हालत भी खराब हो रही है, सरकार के ध्‍यान में लाया गया यह ईश्‍यू है, सरकार की तरफ से कोई भी जानकारी नहीं ली गई है, प्रशासन की तरफ से उनकी कोई केयर नहीं की गई है इसलिए हमारी तरफ से निवेदन यह है कि आपके माध्‍यम से सरकार उनकी बात सुनें, उनकी क्‍या मांगे हैं? उनकी जानकारी लें। मैं यहां आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाह रहा हूं कि उनकी मुख्‍य 5-7 मांगे हैं, एक तो राज्‍य में 82 हजार बैकलॉग को भरने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, मैं यह नहीं कह रहा हूं कि इस सरकार के समय का है, किसके समय का है यह डीबेट का विषय नहीं है परन्‍तु 82 हजार का जो बैकलॉग है उसको पूरा करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, एक मांग यह है, दूसरी, पदोन्‍नति में जोन ऑफ कन्‍सीडरेशन को हटाया जाए, तीसरी मांग है भर्ती एवं पदोन्‍नति के नियम एवं उप-नियम आरक्षित वर्ग के हितों के अनुकूल तथा संविधान सम्‍मत होने चाहिए। आर.के.सब्‍बरवाल बनाम भारतसंघ’’ में माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय की पीठ ने आरक्षण के पद आधारित कर दिए हैं एवं आरक्षित वर्ग के पद को सामान्‍य वर्ग से नहीं भरा जा सकता। सर्वोच्‍च न्‍यायालय का निर्णय कानून का रूख ले चुका है परन्‍तु उसकी अनुपालना नहीं की जा रही है, चौथा जनस्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी विभाग में अधिशासी अभियंताओं, सिंचाई विभाग में कनिष्‍ठ अभियंताओं, सिविल डिप्‍लोमा, जयपुर विद्युत वितरण निगम विभाग, सूचना एवं प्रौधोगिकी विभाग एवं समस्‍त विभागों में पदोन्‍नति व आरक्षित पदों को शीघ्र भरें, पाँचवाँ, आरक्षित वर्ग के लिए बिने नियमों का उल्‍लंघन करने वालो को दण्डित करने का प्रावधान किया जाए, छठा, 10.10.2002 के सेवा-नियमों को प्रभावी रूप से लागू करने तथा आरक्षित पदों को आरक्षित वर्ग द्वारा ही भरा जावें, सातवां 20.10.2000 के कार्मिक विभाग के सर्कुलर को प्रभावी रूप से लागू करना। ये मुख्‍य उनकी मांगे हैं। सभापति महोदय, एक बात तो और उदाहरण के तौर पर कहना चाह रहा हं कि जो अब एम डी एच यूनिवर्सिटी, अजमेर में इन्‍टरव्‍यू चल रहे हैं उसमें 80 टीचिंग स्‍टाफ के लिए भर्ति चालू है, आठ तारीख से दस तारीख तक भर्ती है उसमें इन्‍टरव्‍यू हो रहे हैं, एक भी पद एस.टी., एस.सी., ओ.बी.सी. किसी भी वर्ग के लिए आरक्षित नहीं किया गया है, 80 के 80 पद सामान्‍य वर्ग से भरे जा रहे हैं इसलिए मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाह रहा हूं कि सरकार जिस तरह से इन वर्गो के अधिकारों का ध्‍यान नहीं रख रही है, इन वर्गों के कर्मचारियों के हितों की अनदेखी हो रही है इसका पूरी तरह से ध्‍यान नहीं रख रही है, हमारा सबका आक्रोश है कि राजस्‍थान में ये सरकार जो बनी है इन वर्गों के अधिकांश इन वर्गों के मतदाताओं के आधार पर, मत के आधार पर राज में आई है और आज अगर इनके अधिकारों के साथ खिलवाड़ होगा तो निश्चित तौर पर इन वर्गों का दिल टूटेगा, इन वर्गों का विश्‍वास इस राज के प्रति हटेगा तो इसका खमियाजा तो इस राज को भुगतना ही है परन्‍तु आज जिन लोगों को यह उम्‍मीद है कि हमे हमारा अधिकार मिलना चाहिए। 

दुर्गा/चौहान  09102006 1630 3b

 

उन अधिकारों के प्रति भी हम सभी जिम्‍मेदारी नहीं निभा रहे हैं इसलिये मैं चाहूंगा कि सरकार अपनी स्थिति स्‍पष्‍ट करे कि यह जो भूख-हड़ताल पर बैठे हैं, आमरण-अनशन पर बैठे हैं, उनकी बातें सुनकर, और इन वर्गों के अधिकारों के साथ जो खिलवाड़ हो रहा है, उसके प्रति सरकार क्‍या करना चाह रही है। आपके माध्‍यम से सरकार से मैं  स्थिति स्‍पष्‍ट कराना चाहूंगा। (व्‍यवधान)

श्री सभापति: आ गयी ना बात।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): सभा‍पति महोदय, मैं निवेदन करना चाह रहा था कि पूरे राजस्‍थान में 82 हजार पद बैकलॉग के बकाया हैं।

श्री सभापति: वह बात आ गयी ना, इन्‍होंने बता दी।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): मैं निवेदन करना चाहूंगा, हम पिछले 3 बार, 3 साल से हम लगातार इस हाउस में इस बात को रखते आये हैं।

श्री सभापति: आप विराज जाएं।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): जब भी सेशन आता है, तब हम छोटी-मोटी पर्ची देकर इस मामले को उठाते हैं और पिछली बार जब विधान सभा का सत्र था, माननीय घनश्‍यामजी तिवाड़ी, जो हमारे शिक्षा मंत्रीजी हैं, उन्‍होंने यह आश्‍वासन भी दिया था कि हम जल्‍दी ही बैकलॉग भरेंगे। लेकिन अभी तक उसकी कार्यवाही प्रारम्‍भ नहीं हुई है। इसी तरह से आर.एस.इ.बी. में भी, हमने विधान सभा में मामला उठाया। आर.एस.इ.बी. में एक कमेटी, उसमें एस.टी., एस.सी. के मेम्‍बर भी लिये गये। उस कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद भी आर.एस.इ.बी. में अधिशासी अभियंताओं के परमोशन नहीं किये गये हैं। तो सभापति महोदय, लगातार टालमटोल किया जा रहा है। एक जोन आफ कंसीडरेशन का मामला है। उसमें अगर 3 परमोशन करने हैं तो उसके हिसाब से लिया जाता है। अगर नीचे एस.सी.,एस.टी. का है तो उसको नहीं लिया जाता। इसके कारण से जान-बूझकर टालमटोल किया जा रहा है। सभापति महोदय, एक बार विभाग वाइज जितने विभागों में, जितने बैकलॉग के पद हैं उन पदों को अभियान चलाकर भर्ती की जाए और सरकार को निवेदन करना चाहूंगा कि हर बार आश्‍वासन तो हमको मिला है लेकिन आश्‍वासन के बाद आगे कार्यवाही नहीं बढ़ी है। सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सरकार से आग्रह करना चाहूंगा कि इस मामले को आगे बढ़ाया जाए।

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): सभापति महोदय, इस सम्‍बन्‍ध में मेरा एक निवेदन और है कि अभी जयपुर डिस्‍कॉम के अन्‍दर 35 सहायक अभियंताओं का रिवर्शन कर दिया गया, उसमें एस.सी.,एस.टी. का साथ में रिवर्शन कर दिया जबकि नियम ऐसा है कि यदि हमारी पोस्‍ट बकाया है तो हमारा रिवर्शन नहीं कर सकते।

श्री सभापति: आ गयी ना बात।

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): जबकि हाल ही में 7 ए.इन. को जे.इएन. बना दिया गया। जबकि जयपुर डिस्‍कॉम के मामले में उस समय मंत्री महोदय ने आश्‍वासन दिया था कि सबका परमोशन करेंगे, बैकलॉग भरेंगे। बैकलॉग के परमोशन तो अलग रहे, जो उनका 4 साल पहले, जो रेगुलर 4 साल से ए.इएन. थे, सहायक अभियंता के पद पर कार्य कर रहे थे, उनका अभी हाल ही में रिवर्शन कर दिया गया। इस सम्‍बन्‍ध में भी मंत्री महोदय कुछ जानकारी दे दें।

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): माननीय सभापति महोदय, 3 सालसे, जब भी कोई बजट या दूसरा सत्र होता है तो माननीय सदस्‍य मिलकर यह मांग उठाते हैं कि बैकलॉग भरा जाना चाहिए और हर बार सरकार की तरफ से बहुत पोजिटिव जवाब मिलता है कि बैकलॉग भरने की सरकार की मंशा है। और मुझे यह कहते हुए खुशी भी है, गर्व भी है कि शिक्षा विभाग ने तो लगभग सारा बैकलॉग पूरा कर दिया था, पिछली भर्ती तक। अब नई भर्ती में जो होगा वह और जो होगा, वह मिलेगा। (व्‍यवधान) शिक्षा मंत्रीजी ने कई बार यहां घोषणा कर दी, आंकड़े दे दिये आपको, 19-20 फर्क होगा तो वह भी हो जाएगा। मुख्‍य बात यह है कि बाकी विभागों में बैकलॉग की पूर्ति इसलिये नहीं हो पा रही है कि जो परमोशन के पद हैं उसमें जोन आफ कंसीडरेशन आड़े आ जाता है। पहले राजस्‍थान में नियम था कि....। (व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आप बैठे-बैठे क्‍यों बोल रहे हैं, बारबार।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): पहले यह नियम था कि जितनी कुल वेकेंसी होती हैं उसके 5 गुना को कंसीडर करते थे, उसमें बैकलॉग और आरक्षित पद पूरे नहीं हो पाते थे। फिर सरकार ने 5 से 7 गुना कर दिया। अब 7 गुना का नियम है। राजस्‍थान सरकार में यह नियम है। लेकिन मैं इस सदन के माध्‍यम से सरकार की जानकारी में लाना चाहता हूं कि भारत सरकार में बैकलॉग भरने के लिये, परमोशन करने के लिये यह 5 गुना-7 गुना जैसी कोई व्‍यवस्‍था नहीं है। जितने भी एलिजेबल केंडिडेट होते हैं, योग्‍य पात्र होते हैं उन सबको कंसीडर किया जाता है और इस तरह से वहां बैकलॉग भरा जाता है। खुद मैंने एक केस डील किया था टेलिकॉम डिपार्टमेंट में, बी.एस.एन.एल. जो बाद में हो गया। टेलिकॉम डिपार्टमेंट में अपने यहां एक मीणा थे, जो ए.इन. से एक्‍स.इएन. बनने थे और जोन आफ कंसीडरेशन के कारण उनको वंचित किया जा रहा था। पोस्‍ट खाली थी, एलिजेबल थे, फिर भी नहीं ले रहे थे। मैंने उस केस की पेरवी की थी। उस केस को भारत सरकार ने कंसीडर किया और उस केस में जो ट्रिब्‍यूनल है भारत सरकार का, उस ट्रिब्‍यूनल ने फैसला दिया कि यह एस.सी.,एस.टी. के मामले में जोन आफ कंसीडरेशन नाम की कोई चीज नहीं होनी चाहिए। जितने भी एलिजेबल हैं, सबको अवसर देना चाहिए। ऐसा ही कुछ और प्रदेश सरकारों में भी हैं। जो प्रमाण इस सदन में भी पेश हो चुके हैं, सरकार के सामने भी पेश हो चुके हैं। यह आपके माध्‍यम से इस सरकार से निवेदन है कि वही नियम, जो भारत सरकार में है और वही नियम जो अन्‍य 4-5 स्‍टेट्स में है, वह राजस्‍थान सरकार भी लागू करे और यह जोन आफ कंसीडरेशन की समस्‍या खत्‍म करे। जितने भी एलिजेबल कंडीडेट हों, उन सबको कंसीडर करे। ताकि यह बैकलॉग की स्थिति पूरी हो सके। कहने को तो हमने आरक्षण दे रखा है, 16 प्रतिशत एस.सी. को और 12 प्रतिशत एस.टी. को। लेकिन यदि आप सर्वे करवाएंगे राजस्‍थान सरकार के सारे विभागों का या भारत सरकार के सारे विभागों में 15 और साढे सात के हिसाब से सर्वे करवाएंगे तो उस रेशो में, उस अनुपात में एस.सी.,एस.टी. के कर्मचारी नहीं हैं और उसका एक मात्र कारण यह बैकलॉग है। यह बैकलॉग इसलिये नहीं भरा जाता है कि जोन आफ कंसीडरेशन आड़े आता है। इस पर सरकार पुनर्विचार करे और पोजिटिव निर्णय जल्‍दी करे, तो यह असंतोष अधिक बढ़ने से रुक सकेगा। ऐसा मेरा निवेदन है। (व्‍यवधान)

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): सभापति महोदय, आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं। (व्‍यवधान)

श्री जगत सिंह (लक्ष्‍मणगढ़): सभापति महोदय, मुझे निवेदन करना है। (व्‍यवधान)

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): सभापति महोदय, बिजनस तो पूरा कराइये आज का, बिजनस तो पूरा कराइये। (व्‍यवधान) आप यह इस डिबेट को...। (व्‍यवधान) नहीं, नहीं, एक मिनट, मैं आपको यह नहीं कह रहा हूं कि आप इसकी डिबेट बंद करें। (व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): आप बैठ जाइये।

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): आप कौन होते हैं मुझे बैठाने वाले। (व्‍यवधान) नहीं तो बताओ, क्‍या हम नहीं हैं क्‍या शुभ-चिंतक एस.सी.,एस.टी. के, जो आप बैठाएंग, बैठाएंगे, बोलते हैं आप। आप उधर बात करिये, सभापतिजी से बात करिये।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): माननीय सभापति महोदय, मैं सिर्फ इस बात पर हूं कि जो बिजनस है, पहले बिजनस पूरा कराइये, उसके बाद में यह 6 घण्‍टे बहस शुरू करिये, मुझे इसमें कतई एतराज नहीं है।

श्री सभापति: सुन लिया मैंने, विराजिये आप।

श्री जगत सिंह (लक्ष्‍मणगढ़): माननीय सभापति महोदय, मैं आपसे सवाल पूछना चाहता हूं।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आप विराजिये। (व्‍यवधान) आप विराजिये। आप विराजिये।

श्री जगत सिंह (लक्ष्‍मणगढ़): माननीय सभापति महोदय, मैं नहीं बिराजने वाला हूं। मैं एक सवाल पूछना चाहता हूं आदरणीय होम मिनिस्‍टर साहब से कि जो मेरे निवास पर 2 दिन पहले जो यहां....। (व्‍यवधान) नहीं, बिलकुल नहीं।

श्री सभापति: आप बीच में नहीं बोलेंगे। आप बीच में नहीं बोलेंगे।

श्री जगत सिंह (लक्ष्‍मणगढ़): जो मेरे घर के अन्‍दर नाटक हुआ है उसका जवाब दें। जब मैं यहां बैठा था, विधान सभा के अन्‍दर। (व्‍यवधान)

श्री सभापति: आप विराज जाएं। आप विराजें।

श्री जगत सिंह (लक्ष्‍मणगढ़): नहीं, मैं बिलकुल नहीं विराजने वाला। आप मुझे जवाब दीजिए कि 300 पुलिसकर्मियों को विधायक नगर के अन्‍दर मेरे घर के...। (व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, अंकित नहीं हो रहा है, आप विराजिये। अंकित नहीं हो, आप विराज जाएं।

श्री जगत सिंह (लक्ष्‍मणगढ़): ***

श्री सभापति: आपको मैंने बोलने की अनुमति नहीं दी है, आप विराजें। (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, आप मुझे नाम से बोलने के लिये मजबूर न करें। (व्‍यवधान)

श्री जगत सिंह (लक्ष्‍मणगढ़): ***

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, अंकित नहीं हो रहा है, आप विराजिये। आप विराजिये।

श्री जगत सिंह (लक्ष्‍मणगढ़): ***

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से हमारी राजस्‍थान सरकार का ध्‍यान इस ओर दिलाना चाहता हूं कि बारबार सत्‍तापक्ष और प्रतिपक्ष, सभी एस.सी.,एस.टी., ओ.बी.सी....(व्‍यवधान)

श्री सभापति: आप मुद्दे की बात बोल दें। आप टाइम देखिये, 4.38 हो गये।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): हम सभी चिन्तित हैं। तो मैं यह जानना चाहता हूं कि बारबार जब भी हमारी विधान सभा आहूत की जाती है, हम लोगों का पर्ची के माध्‍यम से सवाल उठता है और हमें आन्‍सर दे दिया जाता है। मैं आपसे आग्रह करुंगा कि सरकार हमारी गम्‍भीर है तो इतना लम्‍बा समय, ढाई साल हो गया, बारबार हम इस बात को उठाकर रह जाते हैं। हम चाहते हैं कि आप उस पर, हमारे मंत्रीजी बैठे हैं, उसका हम सब को जवाब दें ताकि पूरे प्रदेश में एक अच्‍छा संदेश जाए, और एस.सी.,एस.टी. के प्रति जो आपका एक लगाव है और हम लोगों को भी यह लगेगा कि सरकार हमारी, अनुसूचित जाति-जनजाति, ओ.बी.सी. की सीटों को भरने के लिये तत्‍पर है। आपके माध्‍यम से मैं चाहूंगा कि सरकार जवाब दे।

श्री सभापति: एक मिनट, मंत्रीजी जवाब दे रहे हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सभापति महोदय, माननीय सदस्‍यों ने राजकीय सेवा में एस.सी.,एस.टी. के बैकलॉग के बारे में चिन्‍ता की है। सभापति महोदय, यह समस्‍या कोई आज की समस्‍या नहीं है और यह समस्‍या बहुत पुरानी है। जिन राजस्‍थान अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी संघ के अध्‍यक्ष के आमरण-अनशन पर बैठने की बात कही है, सरकार उनसे वार्ता करने के लिये तैयार है। कोई शिष्‍ट मण्‍डल ने अभी तक एप्रोच नहीं किया है। मैं यह जरुर निवेदन करुंगा कि जिस तरह जालौर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा....।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आपस में खड़े-खड़े बात न करें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): कि शिक्षा विभाग में इसी सरकार के चलते एस.सी. और एस.टी. का बैकलॉग 14471 पूरा हुआ। 

 

विष्‍णु/यू.एस./09.10.06/ 16.40/3c

 

और इसी तरह से माननीय सभापति महोदय, आयुर्वेद के अन्‍दर संविदा स्‍तर पर जो भर्ती हुई उस समय 100 एस.सी. और 6 एस.टी., जो चिकित्‍सा विभाग में प्रसाविका की भर्ती की उसमें भी एस.सी. के 69 और एस.टी. के 56 और माननीय सभापति महोदय, जो जोन आफ कंसीडरेशन की बात यहां पर चल रही थी, पहले जोन आफ कंसीडरेशन में पाँच तक का था उसको सात तक करने का आदेश भी 5.8.20204 को इसी सरकार ने किया है। मैं तो यही आश्‍वस्‍त करना चाहूंगा कि जिन-जिन संवर्ग में जो-जो भर्ती होगी, बेकलॉग को पूरा करने का प्रयास पहले भी सरकार ने किया है, आगे भी सरकार करेगी और सरकार की कथनी और करनी में अन्‍तर इसलिए नहीं है कि शिक्षा विभाग में जो अभी हाल ही में भर्ती के लिए अभ्‍यर्थना भेजी गयी है, 28939 की आर.पी.एस.सी. में उसमें भी बेकलॉग को पूरा करने की दृष्टि से जितना बेकलॉग बनता है उसको पूरा करने की दृष्टि से उसी तरह भेजी गयी है इसलिए मैं निवेदन करना चाहूंगा कि माननीय सदस्‍य की चिन्‍ता सरकार की चिन्‍ता है और सरकार संवेदनशील है और माननीय जो इनके अध्‍यक्षजी बैठे हैं आमरण अनशन पर, उनसे सरकार को बातचीत करने में कतई गुरेज नहीं है और मैं आपसे ही कहूंगा कि आप भी उनसे बातचीत करने के लिए क्‍योंकि अभी तक तो किसी ने एप्रोच किया नहीं। ... (व्‍यवधान) आप वह वार्ता किसी भी स्‍तर पर करना चाहे तो ले आइये, उनसे वार्ता करने में कोई दिक्‍कत नहीं है। ... (व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): शिक्षा विभाग के लिए कोई तकलीफ नहीं है। शिक्षा विभाग से भरे जा रहे हैं लेकिन और अन्‍य विभागों के अन्‍दर जो पद खाली पड़े है, उनके संबंध में ... (व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): टाइम दे दिया, कब बात करेंगे ? ... (व्‍यवधान)

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): माननीय सभापति महोदय, मैं भी निवेदन करना चाहता हूं ... (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): बात कर लें1 आप उनको अभी पाँच बजे, 6 बजे, जब कभी भी लाना चाहे, आप चाहे ... (व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): अभी बुला लेते हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हां, बुला लो। ... (व्‍यवधान)

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): जयपुर डिस्‍काम में कर दिया, उनके बारे में भी बतायें। ... (व्‍यवधान)

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): नहीं, एक मिनट में मैं, माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूंगा कि जिस प्रकार से 213 व्‍यक्तियों को जे.ईन. से ए.ईन. बना दिया गया सिंचाई विभाग में और इनको बेक डोर एण्‍ट्री  से विभिन्‍न तरीके अपना कर उनको 213 को उसमें बना दिया गया। साथ ही जबकि अनुसूचित जाति, जनजाति का एक भी व्‍यक्ति उसमें  नहीं लगाया गया है। उसी प्रकार से सूचना-प्रौद्योगिकी विभाग में 25 सीटों पर, 25 व्‍यक्तियों को भर्ती किया गया है। उसमें एस.टी. का एक व्‍यक्ति था और एस.सी.के 10 थे उनमें भी एक भी व्‍यक्ति को नहीं लिया गया है। इसके साथ ही जबकि वह तरीका अपने जोन आफ कंसीडरेशन का नहीं लेकर विभिन्‍न तरीके से उनको ए.ईन. के पदों पर पदोन्‍नति दे दी गयी है। इस प्रकार से पी.एच.ई.डी. डिपार्टमैंट में भी 28 लोगों को क्रमोन्‍नत कर दिया गया है, उनमें भी किसी भी व्‍यक्ति को नहीं लिया गया है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अचानक मामला उठा है।

श्री सभापति: बहुत बोल लिय। धन्‍यवाद।

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): विद्युत मण्‍डल में भी 46 व्‍यक्तियों को ले लिया गया, उसमें भी एक भी एस.सी., एस.टी. के व्‍यक्ति को नहीं लिया गया है।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, माननीय मंत्रीजी ने कह दिया अब ... (व्‍यवधान) बेकलॉग पूरा भरा जाएगा। ... (व्‍यवधान)

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): नहीं, मैं जालौर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो कहा है, मैं मंत्री महोदय से निवेदन कर रहा हूं कि 16 और 17, जोन आफ कंसीडरेशन वाला सुप्रीम कोर्ट ने इसको खतम कर दिया है। जोन आफ कंसीडरेशन सुप्रीम कोर्ट ने इसको खतम कर दिया है।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): सभी को चिन्‍ता है एस.सी. और एस.टी. की। माननीय सभापति महोदय, पीड़ा समझो, यह तो सत्‍ता पक्ष के सदस्‍य हैं, इनकी पीड़ा को समझो आप सभी ... (व्‍यवधान)

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): और यह 16 और 12, एस.सी. और एस.टी. का वह लागू होना चाहिए। जोन आफ कंसीडरेशन को खतम कर दिया गया है। इसमें मैं यही निवेदन करना चाहता हूं। ... (व्‍यवधान)

 

श्री सभापति: धन्‍यवाद। सदन की मेज पर रखे जाने वाले पत्रादि। श्री राजेन्‍द्र सिंह राठौड़ ।

श्री सुरेश मीणा (करौली): माननीय सभापति महोदय, हमारा काम नहीं हुआ है।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): सरकार के ध्‍यान में यह बात और लाना चाहते हैं कि ... (व्‍यवधान)

श्री सभापति: अब विराजिये आप। श्री राजेन्‍द्र सिंह राठौड़

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ( श्री कालूलाल गुर्जर, पंचायती राज मंत्री के स्‍थान पर) माननीय सभापति महोदय, मैं अधिसूचना संख्‍या एफ 4(2) आर.डी./ आर.ई./ आर.आर.ई.जी.एस./06, दिनांक 13.10.2005 जिसके द्वारा राजस्‍थान ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, 2006 लागू की गई है, सदन की मेज पर रखता हूं।

श्री सभापति: माननीय श्री वीरेन्‍द्र मीणा।

अधिसूचनाएं

वित्‍त विभाग

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): माननीय सभापति महोदय, मैं कार्य सूची में किये गये उल्‍लेख के अनुसार वित्‍त विभाग की निम्‍न 11 अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखता हूं:-

1.

अधिसूचना संख्‍या-एफ.4(31)वित्‍त/आब/2005 दिनांक 20.1.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-एफ.1(17)वित्‍त/आब/82 दिनांक 22.1.1986 में संशोधन किया गया है ।

2.

अधिसूचना संख्‍या-एफ.4(31)वित्‍त/आब/2005 दिनांक 20.1.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान आबकारी (संशोधन) नियम, 2006 विरचित किये गये है ।

3.

अधिसूचना संख्‍या-एफ.4(44)वित्‍त/आब/2005 पार्ट-। दिनांक 28.2.2006 राजस्‍थान आबकारी नियम, 1956 में संशोधन किया गया है ।

4.

अधिसूचना संख्‍या-एफ.4(15)वित्‍त/आब/2005 दिनांक 1.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान आबकारी तृतीय (संशोधन) नियम, 2006 विरचित किये गये है ।

5.

अधिसूचना संख्‍या-एफ.4(44)वित्‍त/आब/2005 दिनांक 1.4.2006 जिसके द्वारा समय-समय पर यथा संशोधित अधिसूचना संख्‍या-एफ.4(62)वित्‍त/आब/96 दिनांक 31.3.1997 में संशोधन किया गया है ।

6.

अधिसूचना संख्‍या-एफ.4(44)वित्‍त/आब/2005 दिनांक 1.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान आबकारी (ग्राण्‍ट ऑफ होटल बार/क्‍लब बार लाईसेंस)(संशोधन) नियम, 2006 विरचित किये गये है ।

7.

अधिसूचना संख्‍या-एफ.4(44)वित्‍त/आब/2005 दिनांक 12.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान आबकारी (द्वितीय संशोधन) नियम, 2006 विरचित किये गये है ।

 

 

8.

अधिसूचना संख्‍या-एफ.4(44)वित्‍त/आब/2005 पार्ट-।। दिनांक 26.4.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-एफ.4(12)वित्‍त/आब/ 2002 दिनांक 1.4.2002 में संशोधन किया गया है ।

9.

अधिसूचना संख्‍या-एफ.4(44)वित्‍त/आब/2005 पार्ट-।। दिनांक 26.4.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-एफ.4(17)वित्‍त/आब/ 2004 दिनांक 1.4.2005 में संशोधन किया गया है ।

 

10.

अधिसूचना संख्‍या-एफ.4(44)वित्‍त/आब/2005 पार्ट-।। दिनांक 11.5.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान आबकारी (तृतीय संशोधन) नियम, 2006 विरचित किये गये है ।

 

11.

अधिसूचना संख्‍या-एफ.4(44)वित्‍त/आब/2005 पार्ट-।।। दिनांक 12.5.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान स्‍टेट ब्रेवरीज कॉर्पोरेशन लि. से क्रय की गई शराब पर 'बिल कम ट्रांसपोर्ट पास' जारी किये गये है ।

 

श्री समर्थ लाल (राजगढ़): माननीय सभापति महोदय, यह जो बेकलॉग का मामला चल रहा है।

श्री सभापति: अब वह टाइम चला गया।

श्री समर्थ लाल (राजगढ़): सुनिये आप सुनिये। यह बड़ा सीरियस मामला है। आपने दूसरा बिजनस ले लिया। बेकलॉग का अर्थ क्‍या है? बेकलॉग का अर्थ यह है जो मेरी समझ में आया है कि उनके स्‍थान पर दूसरे लोग ले लिये गये और उनको पीछे रख दिया गया और 82 हजार तक की संख्‍या बेकलॉग के माध्‍यम से पहुंच गयी राजस्‍थान सरकार के अन्‍दर।  चाहे इस सरकार का दोष हो, चाहे पिछली सरकारों का दोष हो, हिन्‍दुस्‍तान के अन्‍दर जितनी भी सरकारें हैं, इन हिन्‍दुस्‍तान की सरकारों का बेकलॉग आप देख लीजिए, राजस्‍थान में सबसे ज्‍यादा बेकलॉग है। इसका कारण क्‍या है? इसका निराकरण होना चाहिए। राजेन्‍द्र राठौड़जी ने इसका बयान दे दिया, उत्‍तर दे दिया इससे एस.सी., एस.टी. के सदस्‍य और राजस्‍थान की जनता संतुष्‍ट नहीं है। यह मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं। ... (व्‍यवधान)

श्री सभापति: धन्‍यवाद। समिति के प्रतिवेदन का उपस्‍थापन। श्री विष्‍णु मोदी।

प्रतिवेदन

याचिका समिति, 2006-07 ग्रामीण विकास, सिंचाई, सावर्जनिक निर्माण एवं सिंचित क्षेत्र विकास विभाग से संबंधित याचिका समिति के तृतीय प्रतिवेदन

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): माननीय सभापति महोदय, मैं याचिका समिति, 2006-07 ग्रामीण विकास, सिंचाई, सावर्जनिक निर्माण एवं सिंचित क्षेत्र विकास विभाग से संबंधित याचिका समिति के तृतीय प्रतिवेदन का उपस्‍थापन करता हूं।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): सभापति महोदय, सीनियर लीडर ने जो बात अभी कही है ... (व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): माननीय सभापति महोदय, एक बात सुन लीजिए आप ... (व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): सीनियर लीडर ने जवाब दिया कि ... (व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): एम.डी.एस. यूनिवर्सिटी में, आज भर्ती चालू है ... (व्‍यवधान) 80 पद है, इन 80 पदों में से एक पद एस.सी., एस.टी. और ओ.बी.सी. के लिए ... (व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): यह 82 हजार पद हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): सरकार चाहती क्‍या है? सरकार कोई उत्‍तर दें।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): 82 हजार पद का, ... (व्‍यवधान) कोई मामूली बात नहीं है। ... (व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): आप क्‍या करेंगे? नहीं-नहीं, अभी सरकार के ध्‍यान में लाये हैं हम कि एम.डी.एस. यूनिवर्सिटी में आज इन्‍टरव्‍यू चल रहे हैं ... (व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): सरकार खुद जवाब नहीं देती है तब तक हम इस बात को आगे नहीं बढ़ने देंगे। ... (व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): वहां पर एस.सी. और एस.टी. के पदों पर उनको भर लिया जा रहा है ... (व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): 80 पद है, 80 पदों के खिलाफ एक पद भी एस.सी., एस.टी. और ओ.बी.सी. के लिए, किसी के लिए नहीं रखा है और रिजर्व क्‍लास के लिए नहीं रखा है। ... (व्‍यवधान) सरकार की मंशा क्‍या है, स्‍पष्‍ट करें। वह तो स्‍पष्‍ट करें। ... (व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, एक मिनट आप विराजिये। माननीय सदस्‍यगण, मेरा निवेदन है कि मंत्री महोदय ने आपको पूरा स्‍पष्‍ट कर दिया है। उस बात को लेकर आप संतुष्‍ट हो गये। ... (व्‍यवध&