श्‍याम/जयगोविन्‍द/09032007/1200-1240/1g

अशोधित प्रति/प्रकाशनार्थ नहीं

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

अंक 7       बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का दसवां दिवस   संख्‍या 7

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मंगलवार, 09 मार्च, 2007

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 12.00 बजे

विधान सभा भवन, जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

( श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन )

 

श्री अध्‍यक्ष: मुख्‍यमंत्री को मेरी बधाई।

एक माननीय सदस्‍य: एडवांस में ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अच्‍छा बजट पेश करें इसलिए बधाई दी है, क्‍या बात हुई इसमें ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपकी आशा पूरी हो ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या कॉम्बिनेशन है, सरकार के भी 12 बज रहे हैं और बजट भी 12 बजे हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): बजट सुनने के बाद आपके 12 बजेंगे, अभी सुन लेना थोड़ी देर में, सुनना जरा। दिल थामकर के बैठो ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: कृपया शांत रहें। थोड़ी देर में आपके 12 बजेंगे न। माननीय मुख्‍यमंत्री ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): महिलाओं के तो 12 बज ही गये और किसी के बजें या नहीं बजें ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अब कृपया शांत रहें, शुरू करने दें उन्‍हें।

आय-व्‍ययक अनुमान वर्ष 2007-08 का उपस्‍थापन

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से मैं वर्ष 2006-07 के संशोधित अनुमान तथा वर्ष 2007-08 के बजट अनुमान प्रस्तुत कर रही हँ।

2- अध्यक्ष महोदया, सर्व प्रथम मैं आपको, सदन के समस्त माननीय सदस्यों को, और सदन के माध्यम से प्रदेश के हर नागरिक को, होली की हार्दिक शुभकामनाएं देना चाहूँगी। यह त्यौंहार गिले-शिकवे पालने का नहीं, भूलने-भुलाने का है, forgive and forget का है, आपसी प्यार और सम्मान का है। इसलिए

'जी करता है कि आज निभा दूं सारे वादे होली में,

तू चाहे तो आज बता दूं अपने इरादे होली में,

एक दूजे पर रंग लगा दें आओ मिलकर होली में,

गिले-शिकवे दूर भगा दें आओ मिलकर होली में।'

3- राज्य के पश्चिमी क्षेत्रों में इस वर्ष अभूतपूर्व बाढ़ आई। 20 से 24 अगस्त, 2006 के मध्य बाड़मेर में इन तीन दिनों में हुई बारिश, वार्षिक औसत का 144 प्रतिशत थी। इस प्राकृतिक आपदा में 18 लाख रुपये की हानि अनुमानित है। राज्य के अन्य भागों में भी कहीं बाढ़ का प्रकोप रहा एवं कई क्षेत्रों में सूखे की मार रही। फरवरी माह में ओलावृष्ठि हुई। मैं सदन की ओर से बाड़मेर में हुई अतिवृष्टि एवं राज्य के दूसरे भागों में आई अन्य आपदाओं में जान-माल की हानि उठाने वाले सभी परिवारों के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट करती हूँ।

4- वर्ष 2006-07 अनेक मायनों में राजस्थान के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ है। हमने वित्तीय प्रबंध, कुशलता से करते हुए उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं, जिनसे मैं सदन को अवगत कराना चाहती हूँ:

-वर्ष 1991-92 के बाद पहली बार राज्य चालू वर्ष के संशोधित अनुमानों के अनुसार Revenue Surplus में आया है। स्मरण रहे कि जब हमने सरकार की बागडोर संभाली थी, तब राज्य सरकार का राजस्व घाटा, राजस्व आय का 30 प्रतिशत था।

-यह revenue surplus सेवानिवृत्ति पुन: प्रारंभ होने से पेंशन का भार लगभग 700 करोड़ रुपये से बढ़ने, एवं महँगाई वेतन पर 11 प्रतिशत महँगाई भत्ते सहित महँगाई भत्ते की सभी किश्तें जारी करने से हुई 600 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि के बावजूद achieve किया गया।

-इसी प्रकार, राजकोषीय घाटा इस वर्ष के अंत में राज्य के GSDP के 358 प्रतिशत के बराबर अपेक्षित है, जो कि वर्ष 2002-03 में 7.09 प्रतिशत था।

-इस कुशल प्रबंधन के कारण हमें न केवल वर्ष 2005-06 के दौरान देय हुए 309 करोड़ रुपये के debt waiver का लाभ मिला, बल्कि वर्ष 2006-07 के लिए भी राज्य debt waiver हेतु पात्र हो गया है।

-राज्य ने फरवरी 2004 के पश्चात् आज तक एक दिन भी ओवरड्राफ्ट नहीं लिया, व न कभी राज्य को ways and means advance का सहारा लेना पड़ा। राज्य में पूरे वर्ष पर्याप्त  liquidity बनाई रखी गई, जिससे प्रशासनिक विभागों को योजना एवं गैर-योजनागत व्यय करने में पूर्ण operational एवं financial स्वतंत्रता रही। निर्माण विभागों की credit limit भी अब माहवारी के स्थान पर तिमाही जारी करने की व्यवस्था की गई है।

-इस प्रदेश में 3 वर्ष पूर्व का वह समय भी याद है जब कर्मचारियों को अपनी बेटी की शादी करने के लिए अपने ही GPF खाते से राशि निकालने हेतु वित्त विभाग के चक्कर लगाने पड़ते थे, और works विभागों का अधिक समय वित्त विभाग से credit limit लेने में निकलता था।

-न केवल ऋण वृद्धि को नियंत्रित किया गया है, बल्कि अब ऋण consumption के लिए नहीं लिया जाकर, asset creation में लगाया जा रहा है। उदाहरण के लिए, वर्ष 2006-07 में लिया गया 100 प्रतिशत ऋण, पूंजीगत व्यय में खर्च होगा। वर्ष 2002-03 में यह प्रतिशत केवल 34 था।

-राज्य की इस वर्ष की अनुमोदित योजना, 8 हजार 501 करोड़ रुपये की है। वर्ष 2006-07 की योजना का आकार, दसवीं पंचवर्षीय योजना के प्रथम 20 माह में, पूर्व सरकार द्वारा किये गये कुल विनियोजन 6 हजार 700 करोड़ रुपये से सवा गुना है।

-हमने न केवल लंबे समय से चल रही अपूर्ण योजनाओं को पूरा किया, बल्कि ग्राम संपर्क अभियान के दौरान सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से हमारी सरकार के सत्ता में आने के बाद के सभी कार्यों का सत्यापन करवाया। मुझे हर्ष है कि इस सरकार के कार्यकाल के दौरान सृजित की गईं 4 लाख 10 हजार 399 परिसंपत्तियों में से 99.5 प्रतिशत परिसंपत्तियां अस्तित्व में पाई गईं।

5- मुझे अफसोस है कि हमारे भरपूर प्रयासों के बावजूद केन्द्र सरकार ने ग्यारहवें वित्त आयोग द्वारा चालू की गई Fiscal Reforms Facility के तहत राज्य को प्रोत्साहन राशि के रूप में मिलने वाली 438 करोड़ 25 लाख रुपये की राशि जारी नहीं की। इसी प्रकार बाड़मेर जैसी भीषण आपदा के लिए भी केवल 100 करोड़ रुपये की सहायता देना ही केन्द्र सरकार ने मुनासिब समझा। राज्य के हित में, मैं यह उम्मीद करती हूँ कि पूरा सदन एक होकर केन्द्र सरकार से FRF की बकाया राशि, एवं बाड़मेर में राहत कार्यों के लिए पर्याप्त राशि release करने हेतु बाध्य करने में, मेरा सहयोग करेगा।

6- मैंने गत् वर्ष outcome budget बनाने के राज्य के निर्णय से सदन को अवगत कराया था। वर्ष 2005-06 2006-07 के लिए, भारत सरकार की तर्ज पर, राज्य का outcome budget तैयार कर लिया गया है। इस अनुभव से हमें राज्य की योजनाओं के निर्माण, क्रियान्वयन एवं monitoring में मदद मिली है। परंतु भारत सरकार का format वास्तव में output ज्यादा दर्शाता है। अत: वास्तव में पानी की बनी हुई टंकी से पानी मिल रहा है अथवा नहीं, स्कूल में वास्तव में पढ़ाई हो रही है अथवा नहीं, जैसे outcomes को कैसे मापा जाये, अब अगले कदम के रूप में यह देखना आवश्यक है।

7- पिछले वर्ष हमने 6 विभागों में Gender Budgeting and Auditing का काम हाथ में लिया था। कृषि विभाग का अध्ययन करने पर पाया गया कि विभिन्‍न विभागीय योजनाओं में महिला लाभांवितों की संख्या 10 प्रतिशत से भी कम है। इस स्थिति में सुधार लाने के लिए वर्ष 2006-07 से, कृषि विभाग की अनुदान वाली विभिन्‍न योजनाओं के अंतर्गत महिलाओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। राज्य सरकार के इस निर्णय से वर्ष 2006-07 में 4 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हुई हैं।

8- वर्ष 2006-07 में 8 नये विभागों-ग्रामीण विकास, जनजाति क्षेत्रीय विकास, उद्योग, सहकारिता, उद्यान, पशुपालन, वन एवं स्वायत्त शासन विभाग के Gender Budgeting का काम हाथ में लिया गया। अब इनके भी परिणाम आने लगे हैं। ग्रामीण विकास विभाग में गत दो वर्षों (2004-05 एवं 2005-06) में व्यक्तिगत लाभकारी योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत से भी अधिक रही है। इंदिरा आवास योजना में तो वर्ष 2005-06 में 99 प्रतिशत आवास महिलाओं को आवंटित किये गये। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम के अंतर्गत महिला लाभार्थियों का प्रतिशत 58 से अधिक रहा है।

9- आगामी वर्ष 2007-08 की वार्षिक योजना का योजना आयोग द्वारा अनुमोदित आकार 11 हजार 638 करोड़ 86 लाख रुपये है। यह चालू वर्ष से 37 प्रतिशत अधिक है। मैं सदन को यह अवगत कराना चाहती हूँ कि यह वृद्धि 708 करोड़ 87 लाख रुपये की योजनाएं गैर-आयोजना मद में स्थानांतरित करने के पश्चात् है। वस्तुत: like to like basis पर देखें, तो वृद्धि 45 प्रतिशत तक बैठेगी।

10- मुझे यह कहते हुए हर्ष है कि हम राज्य की ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना, जो 2007-12 में लागू होगी, का आकार दसवीं पंचवर्षीय योजना के मूलत: अनुमोदित आकार 31 हजार 832 करोड़ रुपये के मुकाबले 68 हजार 422 करोड़ रुपये तक ले जा सकेंगे, जो दसवीं पंचवर्षीय योजना के आकार का 215 प्रतिशत होगा। मुझे विश्वास है कि जब हम इस योजना के आकार को अंतिम रूप देंगे, तब यह राशि कुछ और बढ़ेगी, घटेगी नहीं।

11 मैं NDA द्वारा भारत को वर्ष 2020 तक विकसित राष्ट्र की पंक्ति में लाने के vision से पूरी तरह सहमत हूँ। वर्ष 2004-05 हेतु अपना पहला बजट प्रस्तुत करते समय, मैंने राज्य के विकास एवं लोगों की सर्वांगीण उन्नति के लिए अपना vision statement प्रस्तुत किया था। हमारी ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना भी इस सोच को आगे ले जाते हुए निम्न चार मुख्य स्तंभों पर आधारित होगी:

-समाज के गरीब, vulnerable एवं disadvantaged वर्गों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना,

-राज्य के सामाजिक infrastructure की सशक्त नींव रखना एवं आर्थिक एवं सामाजिक विकास कार्यक्रमों का विस्तार करना

-राज्य के भौतिक infrastructure को पूर्ण करना एवं विकसित स्तर का बनाना, एवं

-राज्य के शासकीय एवं विकासीय ढांचे को पुनर्गठित कर उत्तरदायी प्रशासन उपलब्ध कराना।

महिलाएं एवं बच्‍चे:

12- कल महिला दिवस था, जो हमें यह सोचने पर विवश करता है कि राजस्थान में महिलाओं एवं बच्चों की सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक स्थिति आज भी शोचनीय स्तर तक पिछड़ी हुई है। अत: इस बजट को मैं महिला सशक्तिकरण एवं रोजगार को समर्पित...

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): महिलाओं की बात कह रहे हैं, कल कितने डंडे बरसे हैं ...(व्‍यवधान)

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): What is this ?

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): जो महिलाएं मुआवजा मांगने आयी थी, उन पर डंडे बरसाये गये, यह महिला दिवस पर कारनामा था, मुख्‍यमंत्री जी से मैं कहूंगी कि आप इस पर ध्‍यान दें।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): ....को समर्पित करते हुए पाँच सूत्रीय मुख्‍यमंत्री महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम की घोषणा करती हूं।

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अत्‍याचार हो रहे हैं महिलाओं पर ...(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, माफी मांगनी चाहिए ...(व्‍यवधान) अंर्तराष्‍ट्रीय महिला दिवस पर जिस बर्बरता से महिलाओं के पीटा गया है उसके लिए माफी मांगनी चाहिए।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): एक 5 सूत्रीय मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम की घोषणा करती हूं।  मैं सदन से अनुरोध करूंगी कि पूरा सदन एक मत से निम्‍न पाँच लक्ष्‍यों की ओर बढ़ने, और इन्‍हें 2011 तक substantiallyप्राप्‍त करने का संकल्‍प लें। आई विश आप लोग सुने क्‍योंकि यह महिलाओं का काम है, यह सब बातें तो आप लोग बाहर भी कर सकते हैं।

-बालिकाओं का शत-प्रतिशत enrollment,

-बालिकाओं में शिशु विवाह की पूर्ण समाप्ति,

-हर महिला को institutional delivery की सुविधा ,

-crude birth rate का 21 प्रति हजार तक लाना,

-महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करना जिससे आने वाले तीन वर्षों मे प्रत्येक जिले में कम से कम 1 हजार महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करवाया जा सके।

13- महिलाएं ''पुत्र जनै, जननी जनै, और मंगल गायें चार'' - दुर्भाग्यवश, यह मान्यता रही है हमारे समाज में। पर समाज की आधी शक्ति को यूं सीमित करने से, मेरी समझ में, हमारा विकास अवरुद्ध हुआ। स्त्री को सशक्त करना ही होगा, इस potential को तो exploit करना ही होगा।  क्‍योंकि

'बिजली जब चमकती है आकाश बदल देती है,

आंधी जब उठती है दिन-रात बदल देती है,

धरती जब दरकती है सीमांत बदल देती है,

नारी जब गरजती है इतिहास बदल देती है।'

14- इस कार्यक्रम को कारगर करने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा,पंचायतीराज, राजस्‍व, ग्रामीण विकास, रोजगार, गृह, परिवहन, कृषि और महिला और बाल विकास विभागों के विभिन्न कार्यक्रमों को समन्वित किया जाएगा, तथा राजस्‍थान Mission on Livelihood की मदद से क्रियान्वित किया जायेगा। विभिन्न विभागीय कार्यक्रमों  को dovetail करने के पश्‍चात् भी उपरोक्‍त लक्ष्‍यों को अर्जित करने में कोई gap रहता है अथवा अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता रहती है, तो इसके लिए पृथक से 30 करोड़ रुपये का corpus बनाया जायेगा।

15- महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु आर्थिक संपदाएं उनके नाम पर होना अत्यावश्यक है। वर्ष 2002-03 में महिलाओं के नाम मात्र 12 हजार कृषि भूमि के बेचान के दस्तावेज पंजीकृत हुए थे। कृषि भूमि पर स्टांप डयूटी की दर घटाकर 5 प्रतिशत की थी। इस कदम के उत्‍साहजनक परिणाम आए हैं। अब हर वर्ष एक लाख से अधिक पंजीयन महिलाओं के नाम होने लगे हैं। वर्ष 2004-05 से अब तक 3 लाख 67 हजार दस्तावेज पंजीकृत हुए हैं। अकेले वर्ष 2006-07 में ही, फरवरी माह तक 1 लाख 19 हजार दस्‍तावेज पंजीकृत हुए हैं।

16- राज्‍य में RAC  की 12 व मेवाड़ भील corps की एक, कुल 13 सशस्त्र बटालियन कार्य कर रही हैं। इन बटालियनों में महिला सशस्त्र सिपाहियों की संख्या बहुत कम हैं। मैं घोषणा करती हूँ कि महिला सशस्त्र सिपाहियों की एक exclusive, India Reserve Battalion वर्ष 2007-08 में बने, जिसका नाम Hadi Rani Armed Corps हो।

17- पुलिस फोर्स को महिलाओं के प्रति संवेदनशील बनाने एवं महिलाओं से संबंधित अपराधों के प्रभावी अन्वेषण हेतु पुलिस फोर्स में महिलाओं की संख्या बढ़ाना आवश्यक है। अभी राज्य में Constable से Sub-Inspector स्तर पर महिलाओं का अनुपात 0.49 से 3.93 प्रतिशत ही है। इन पदों पर नवीन नियुक्तियों में अभी 30 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए है, जिसका fulfillment सुनिश्चित करने हेतु नियमों में संशोधन इस प्रकार किया जायेगा कि महिलाओं के लिए आरक्षित पदों पर पुरूषों की नियुक्ति नहीं हो पाये।

18- राजस्थान पंचायती राज नियम के अंतर्गत वर्ष 1996 तक निर्मित मकानों के पट्टे, कब्जों के आधार पर जारी करने का प्रावधान है। गाँवों में ऐसे अनेक परिवार हैं जिनके पास रहने के लिए कोई भू-खण्ड नहीं है लेकिन उन्होंने वर्ष 1996 के बाद आबादी भूमि पर झोंपड़ी अथवा टापरी का निर्माण कर लिया है। ऐसे परिवार जिनके पास न कोई भू-खण्ड है और न ही कोई अन्य मकान है, उनके वर्ष 2003 तक के कब्जे नि:शुल्क नियमित कर दिये जायेंगे। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए मैं घोषणा करती हूँ कि नियमन करने पर पट्टे अब केवल महिलाओं के नाम से ही जारी किये जायेंगे।

19- बच्चों के स्वास्थ्य हेतु आवश्यक मेडीकल चैक-अप, पोषाहार एवं प्री-स्कूल की सुविधाएं समन्वित बाल विकास परियोजना के माध्यम से प्रदान की जाती हैं। वर्ष 2007-08 में 4 नई समन्वित बाल विकास परियोजनायें शुरू की जायेंगी एवं 1 हजार 500 नये आंगनबाड़ी केन्द्र खोले जायेंगे। मैंने गत् वर्ष, 2 वर्षों में 3 हजार आंगनबाड़ियों के लिए पक्के भवन बनाने की घोषणा की थी। इस वर्ष 2 हजार भवन बनाये जा रहे हैं। शेष रहे 1 हजार में, 2 हजार की अतिरिक्त संख्या जोड़ते हुए, मैं आंगनबाड़ियों के कुल 3 हजार पक्के भवन वर्ष 2007-08 में बनाने के लिए आवश्यक राशि उपलब्ध कराने की घोषणा करती हूँ।

20- E-मित्र कार्यक्रम का विस्तार करते हुए राज्य में अगले वर्ष 6,608 Common Service Centres स्‍थापित किए जाएंगे। मैं घोषणा करती हूँ कि यह सभी आवंटन महिलाओं को ही किये जायेंगे। इसी प्रकार मैं यह भी घोषणा करती हूँ कि राज्य में स्थापित विभिन्न डेयरी संगठनों द्वारा आइंदा dairy booth और parlour का आवंटन केवल महिलाओं के नाम ही किया जायेगा। साथ में, dairy parlour स्थापित करने पर deep freezer इत्यादि के लिए 5 हजार रुपये प्रति parlour की सामान्य सहायता को दुगुना कर 10 हजार रुपये किया जायेगा।

21- हम बालिकाओं में लक्ष्मी का स्वरूप देखते हैं, परंतु दुर्भाग्यवश हमारे प्रदेश में sex ratio अभी भी adverse है। मैं पुत्र रहित दंपत्तियों को एक या दो बेटियों के बाद terminal methods अपनाने पर प्रत्येक बालिका को 10 हजार रुपये प्रोत्साहन के रूप में देने के लिए, मुख्यमंत्री बालिका संबल, योजना की घोषणा करती हूँ। इस योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा 10 हजार रुपये का निवेश, पोस्ट आफिस अथवा बैंक में किया जायेगा, जिसका लाभ बालिका को 18 वर्ष की आयु पर देय होगा। सामान्यतया, परिपक्वता अवधि पर बालिका को लगभग 40 हजार रुपये प्राप्त हो सकेंगे।

22- शिक्षण स्थानों से दूरी बालिकाओं की शिक्षा में रुकावट नहीं बननी चाहिये। वर्तमान में जनजाति छात्राओं के लिए लागू नि:शुल्क साईकिल योजना को संशोधित रूप में, ग्रामीण क्षेत्रों की सभी छात्राओं पर भी लागू करने की मैं घोषणा करती हूँ। नवीं कक्षा उत्तीर्ण कर दसवीं कक्षा में प्रवेश लेने वाली ऐसी प्रत्येक छात्रा को, जिसका घर सबसे नजदीक सैकंडरी विद्यालय से 2 किलोमीटर से अधिक दूरी पर है, को एक नई साईकिल केवल 300 रुपये में देने की मैं घोषणा करती हूँ। शेष राशि राज्य सरकार वहन करेगी। इस योजना के लिए आवश्यकतानुसार धनराशि उपलब्ध कराई जायेगी।

23- ग्रामीण क्षेत्रों में सैकंडरी विद्यालय कई गाँवों से 5 किलोमीटर से अधिक दूरी पर हैं। ऐसी स्थिति में छात्राओं के लिए साईकिल से विद्यालय जाना व्यावहारिक नहीं होगा। ऐसे गाँवों से विद्यालय जाने हेतु 5 या अधिक छात्राओं को सामूहिक निजी परिवहन की सुविधा प्रदान करने के लिए मैं एक transport voucher scheme की घोषणा करती हूँ। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र छात्रा को 5 रुपये प्रति स्कूल दिवस की दर से एक transport voucher दिया जायेगा। छात्राओं हेतु स्कूल जाने की इन दोनों योजनाओं के लिए खर्चे का प्रारंभिक आकलन 10 करोड़ रुपये वार्षिक है।

24- महिलाओं की निजता बनाये रखने एवं स्नान को सुविधाजनक बनाने के लिए नदियों एवं अन्य तालाबों के साथ घाट बनाने के लिए मैं, निर्मल घाट योजना शुरू कर रही हूँ। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2007-08 में 100 निर्मल घाट बनाने के लिए 2 करोड़ 50 लाख रुपये का प्रावधान किया जायेगा, जिसे आवश्यकतानुसार और बढ़ाया जायेगा।

युवा

अ. रोजगार:

25- सदन के माननीय सदस्यों को ज्ञात है कि हमारा देश एक ''युवा देश'' है, जहां youth का proportion अधिकतर अन्य देशों से अधिक है। इसलिए, रोजगार हमारे देश के लिए एक अहम मुद्दा बन गया है। देश की अर्थव्यवस्था के अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़ने एवं नई तकनीकों के विकास से युवा वर्ग की employability बढ़ाने के लिए उन्हें सही प्रकार की skills की आवश्यकता महसूस की जा रही है। साथ ही नियोक्ता एवं युवाओं के मध्य संवाद स्थापित कर placement facilitate करना भी आवश्यक है। हमने राज्य में इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए राजस्थान Livelihood Mission स्थापित किया है। मिशन 2006-07 में 10 हजार युवक-युवतियों को skill training placement उपलब्ध करा पाया है।

26- मिशन की सफलता को देखते हुए मैं इस कार्य को एक quantum jump देना चाहती हूँ। राज्य में पारंपरिक occupations यथा चर्मकार, रिक्शा-चालक, दस्तकार आदि का अध्ययन कर occupation specific strategies तैयार की जायेंगी। रोजगार निदेशालय का पुनर्गठन किया जायेगा। संपूर्ण ग्रामीण स्वरोजगार कार्यक्रम एवं प्रधानमंत्री रोजगार योजना का leverage कर, livelihood mission के माध्यम से, वर्ष 2007-08 में, 1 लाख युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 20 करोड़ रुपये का कार्यक्रम हाथ में लिया जाएगा।

27- आधुनिक आवश्यकताओं को देखते हुए animation जैसी skills सिखाने हेतु एक school of animation निजी सहभागिता से खोला जायेगा। GE द्वारा Computer Education on Wheels हेतु उपलब्ध कराये गये 5 वाहनों का अच्छा अनुभव रहा है। अत: आगामी वर्ष में निजी सहभागिता से प्रत्येक जिले में Computer Education on Wheels हेतु एक-एक वाहन उपलब्ध कराने की नई योजना लागू की जायेगी। इसके तहत राज्य सरकार बस और उपकरण हेतु 75 प्रतिशत तक का अनुदान देगी, बशर्ते कि निजी भागीदार एक निश्चित कार्यक्रम के अनुसार इन वाहनों से गाँवों तक कंप्यूटर शिक्षा उपलब्‍ध कराए। इस कार्यक्रम हेतु मैं 10 करोड़ रुपए की राशि आगामी वर्ष उपलब्ध करवाऊंगी।

28- राज्य में हजारों बुनकरों की आजीविका खादी वस्त्रों पर निर्भर है। बुनकरों की skills upgrade करके, उन्हें नये डिजाइन और अंतरराष्ट्रीय trends की जानकारी देकर, खादी उत्पादों को elite खरीददारों की पसंद बनाने की दृष्टि से हमने राज्य में एक नई पहल की है, जिसको मैंने fashion for development का नाम दिया है।अगर हमें अपने कामगारों की जिदंगी को बेहतर बनाना है और उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ करना है, तो हमें खादी एवं हैंडलूम के उत्पादन एवं विपणन को re-invent करना होगा और नई डिजाइन विकास, प्रशिक्षण व उन्नत तकनीकों को अपनाना होगा। इन initiatives हेतु आगामी वर्ष 4 करोड़ 50 लाख रुपये उपलब्ध करवाये जायेंगे।

29- राज्य का हस्तशिल्प पूरी दुनिया में मशहूर है। हस्तशिल्प कलाएं जैसे शाहपुरा एवं भीलवाड़ा की पेंटिंग, कोटा-बूंदी स्कूल व जोधपुर स्कूल की पेंटिंग व बीकानेर की प्रसिद्ध ऊँट की खाल पर सुनहरी पेंटिंग, विभिन्न कारणों से लुप्त होने के कगार पर है। इन्हें पुनर्जीवित करने हेतु गुरू शिष्य परंपरा के आधार पर प्रशिक्षण प्रारंभ किया जाना प्रस्तावित है। इन विधाओं एवं कलाओं के master craftsmen को ससम्मान एवं यथोचित मानदेय सहित अपनी कला सिखाने के लिए नियोजित किया जायेगा। साथ ही योग्य प्रशिक्षुओं का चयन कर उन्हें stipend सहित master craftsmen से प्रशिक्षण प्राप्त करने की व्यवस्था की जायेगी। इस कार्यक्रम की अनुमानित लागत 52 लाख 50 हजार रुपए होगी।

30- सेवानिवृत्ति बाद आय सुरक्षा की आवश्यकता केवल सरकारी अधिकारियों और organised labour को ही नहीं होती। गैर-संगठित कामगारों जैसे रिक्शा चालक, थड़ी वाले, चर्मकार आदि को भी पेंशन मिलनी चाहिए। अत: मैं घोषणा करती हूँ कि वर्ष 2007-08 से एक अनूठी पहल कर, मेरी सरकार इन कामगारों के लिए विश्वकर्मा contributory pension scheme लागू करेगी। इस योजना में राज्य सरकार एक हजार रुपये प्रति वर्ष की सीमा तक कामगार के योगदान के बराबर अपनी तरफ से योगदान करेगी। मेरी जानकारी में असंगठित गैर-सरकारी कामगारों के लिए contributory pension scheme लागू करने वाला राजस्थान देश का अग्रणी राज्य होगा। जो संगठित वोट बैंक नहीं है, उनकी भी सुनने वाला कोई होना चाहिए। कमजोर के लिए मेरा मन, तो यूं समझिये, बहुत ही कमजोर है। अत: मैं चाहती हूं कि

बनके साया आपकी हर शिकन मैं हरती चलूं

आपके उपवन में बनके वृक्ष मैं खुशियां फलूं

स्‍याह होना यदि कोई हो तो मिटाने के लिए

आपके आँगन में बनके दीप बाती मैं जलूं।

31- यह pension scheme 1 सिंतबर 2007 से प्रारंभ की जायेगी। इस कार्यक्रम पर प्रति वर्ष 50 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है।

32- बेरोजगार युवक की लाचारी दिल को छू लेने वाली होती है। जब तक ऐसे युवा अपनी skill upgrade कर रोजगार प्राप्त करें,या अपना स्वयं का कार्य कर, जीवन-यापन करने में सक्षम हों, मैं समझती हूँ कि राज्य द्वारा इनकी मदद करना आवश्यक है। बेरोजगारी भत्ता योजना को सभी वर्गों पर लागू करते हुए, मैं अब सभी ऐसे स्नातक बेरोजगार, जिनके माता-पिता की आय 1 लाख रुपये वार्षिक से अधिक नहीं हो, को जुलाई 2007 से चार सौ रुपये, और महिला स्नातक बेरोजगारों को 500 रुपये, मासिक भत्ता देने की घोषणा करती हूँ। विकलांग बेरोजगार स्नातकों के लिए मासिक भत्ते की राशि 600 रुपये प्रतिमाह होगी। इसके अलावा, बेरोजगार इंजीनियर्स को 10 लाख रुपये तक के कार्य बिना टेंडर के देने की योजना माह जुलाई तक घोषित की जायेगी।

33- ग्रामीण क्षेत्रों से उद्योग एवं सेवाओं के क्षेत्र में रोजगार हेतु ग्रामीण युवक-युवतियों एवं परिवारों को शहरों में रहने की काफी समस्या आती है। इसके समाधान हेतु राज्य सरकार rental housing को बढ़ावा देने के लिए BOT के आधार पर एक योजना बनाकर शीघ्र जारी करेगी। ये flats ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले BPL, Artisan अथवा किसान क्रेडिट कार्डधारी परिवारों के सदस्यों को किराये पर मिल सकेंगे।

34- सामाजिक समरसता एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत को दृष्टिगत रखते हुए, और अनुसूचित जाति-जनजाति तथा अन्‍य पिछड़ा वर्गों के आरक्षण में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं करते हुए, आर्थिक रूप से समाज के शेष पिछड़े वर्गों का चिन्हीकरण और उनकी आवश्यकताओं का आकलन करने हेतु सरकार ''आर्थिक पिछड़ा आयोग'' गठित करने की घोषणा करती है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): भंवरलालजी, अब तो आप ताली बजाओ। ...(व्‍यवधान)...

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे: ब. शिक्षा:

35- भारत सरकार ने आगामी वर्ष से उच्च प्राथमिक स्तर तक मिड-डे मील योजना को extend करने की घोषणा की है। लेकिन इसे शैक्षणिक रूप से पिछड़े blocks तक ही सीमित किया गया है। पर, हम ऐसे पक्षपात से सहमत नहीं हैं। अत: मैं घोषणा करती हूँ कि राज्य की जो पंचायत समितियां शेष बचेंगी उनमें आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को mid-day meal, राज्य सरकार अपने स्वयं के खर्चे पर उपलब्ध करायेगी। इस हेतु 40 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि उपलब्ध करवाई जायेगी।

36- सर्व शिक्षा अभियान को माध्यमिक दर्जे तक ले जाने की घोषणा केन्द्रीय वित्तमंत्री जी ने अपने बजट भाषण में अभी हाल ही की है। प्राथमिक शिक्षा के माफिक, राजस्थान इस सहायता को लेने में भी अग्रणी राज्य रहे, इस हेतु राज्यांश के रूप में मैं 150 करोड़ रुपये वर्ष 2007-08 के लिए उपलब्ध कराऊंगी। आगामी वर्ष में 1 हजार 500 उच्च प्राथमिक विद्यालयों को माध्यमिक विद्यालयों में,

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मुख्‍य मंत्रीजी, जरा एक बार यह आंकड़ा दुबारा बोलना। मुख्‍य मंत्रीजी यह आंकड़ा दुबारा बोलना।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे: आगामी वर्ष में 1 हजार 500 उच्च प्राथमिक विद्यालयों को माध्यमिक विद्यालयों में और600 माध्यमिक विद्यालयों को उच्च माध्यमिक विद्यालयों में क्रमोन्‍नत किया जाएगा।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): समानता से करेंगे या पक्षपात से करेंगे-

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): अब आपको मैं बताऊंगी पूरा। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप क्‍यों खड़े हो गए-

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): हमें विश्‍वास है इसमें पक्षपात नहीं होगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सभी दिल थाम के बैठे हैं क्‍या-

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे: पिछले वर्षों का क्रम जारी रखते हुए राज्‍य सरकार 12 हजार 300 शिक्षकों को नियुक्ति देगी।

37- माननीय सांसदों एवं विधायकों द्वारा अपने क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा हेतु नवीन विद्यालय खोलने एवं विद्यालयों को क्रमोन्नत करने की मांगों से मैं अवगत हूं। दुर्भाग्‍यवश, इस क्षेत्र में केन्‍द्र और राज्य सरकार के बीच ग्यारहवीं पंच वर्षीय योजना के दौरान हिस्सेदारी क्या रहेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। केन्द्रीय मानव संसाधन विभाग से यह संकेत निरंतर मिलते रहे हैं कि हिस्सेदारी 75:25 ही रहेगी, जबकि वित्तमंत्री जी ने अपने बजट भाषण में इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। हम केन्द्र सरकार से संपर्क में हैं और स्थिति स्पष्ट होने पर ही राजकीय प्राथमिक विद्यालयों को खोलने अथवा क्रमोन्नत करने पर view लिया जा सकेगा। फिलहाल, जिस नीति के अंतर्गत निजी सहभागीदारी से ITI खुली हैं, उसी नीति से प्राथमिक शिक्षा में नये स्कूल खोलने के लिए मैंने राज्यांश के रूप में 5 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

38- मदरसा बोर्ड प्रदेश के 2 हजार से अधिक मदरसों में करीब 1 लाख 75 हजार बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का कार्य कर रहा है। अल्पसंख्यकों के शैक्षिक उत्थान के लिए 1 हजार मदरसों में शिक्षा सहयोगी उपलब्ध कराने हेतु राज्य सरकार मदरसा बोर्ड को 1 करोड़ 15 लाख रुपये व 200 मदरसों में कंप्यूटर एवं आवश्यक साज-समान हेतु 50 हजार रुपये प्रति मदरसे के हिसाब से 1 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध करायेगी। 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सलाम वालेकुम। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: यह क्‍या कर रहे हैं आप ?

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे: 39- वर्ष 2005-06 में मैंने सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ को पूंजीगत कार्यों हेतु 2 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करवाई थी। इससे छात्रावास का निर्माण, सभागृह का पुनरुद्धार, खेल मैदान का सुधार आदि कार्य या तो पूर्ण कर लिये गये हैं या प्रगति पर हैं। राजस्थान के जरूरतमंद छात्रा इस स्कूल में सुविधापूर्वक पढ़ सकें, इस हेतु मैं यहाँ दी जाने वाली बाकी छात्रावृत्तियों में निम्न बढ़ोतरी करने की घोषणा करती हूँ:

पूर्ण छात्रवृत्ति - 9 हजार 100 रुपये से 15 हजार

तीन-चौथाई छात्रवृत्ति - 7 हजार 263 से 12 हजार

आधी छात्रवृत्ति - 5 हजार 425 से 9 हजार

चौथाई छात्रवृत्ति - 2 हजार 775 से 6 हजार

40- राज्य सरकार ने अनुदानित शिक्षण संस्थाओं की समस्याओं पर गौर किया है। अनुदानित शिक्षण संस्थाओं में गैर-अनुदानित शिक्षण कार्य भी होता है। इन संस्थाओं को फीस के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने का विकल्प, शिक्षकों को देय वेतन-भत्ते देने की छूट और सहायता को norm आधारित करना आदि जटिल मुद्दों पर गहन विचार आवश्यक है। मेरी सरकार राजस्थान अनुदानित शिक्षण संस्था अधिनियम 1989 में आवश्यक परिवर्तन करने के लिए विधेयक शीघ्र ही सदन में प्रस्तुत करेगी।

41- संस्कृत शिक्षा के विस्तार के लिए मेरी सरकार ने 16 जिलों में भी वेद-विद्यालय खोले हैं। मैं अब शेष 16 जिलों में भी वेद विद्यालय वर्ष 2007-08 में ही खोलने की घोषणा करती हूँ। संस्कृत विश्वविद्यालय की आय का एक निश्चित स्रोत विकसित करने के लिए मैं वर्ष 2007-08 में संस्कृत विश्वविद्यालय को 2 करोड़ 50 लाख रुपए की corpus grant देने की घोषणा करती हूं।

42- वर्ष 2005-06 के बजट भाषण में मैंने महिला महाविद्यालयों से वंचित 5 जिला मुख्यालयों पर नये महाविद्यालय खोलने हेतु निजी संस्थाओं को, भूमि एवं भवन के सरकारी सहयोग से, आमंत्रित किया था। इसके उत्साहजनक परिणाम आये। मैं समझती हूँ कि यह नीति महिला महाविद्यालयों के लिए सार्थक हो सकती है तो अन्य महाविद्यालयों के लिए भी उचित होनी चाहिए। अत:, ऐसी हर तहसील में जहाँ कोई महाविद्यालय नहीं है, मैं इस नीति के तहत भवन एवं भूमि उपलब्ध कराने की घोषणा करती हूँ। नि:शुल्क भूमि की नीति इंजीनियरिंग कालेज रहित जिलों के लिए भी लागू की जायेगी। लेकिन यह स्वीकार करते हुए कि कुछ क्षेत्रों की विशेष आवश्यकताएं हो सकती हैं, मैं सार्वजनिक क्षेत्र में भीम, जिला राजसमंद व उनियारा जिला टोंक में महाविद्यालय, झुंझुनू के राजकीय महाविद्यालय को PG Science तक क्रमोन्नत, भरतपुर में एक इंजीनियरिंग कालेज, लालसोट, जिला दौसा में एक कृषि महाविद्यालय और भिण्‍डर जिला उदयपुर में एक पशुपालन महाविद्यालय खोलने की भी घोषणा करती हूँ। बागवानी एवं वन महाविद्यालय Jain Irrigation Systems जैसे संस्थानों के साथ सहभागिता से नई कृषि पद्धति, जल संग्रहण्, एवं उपयोग, फल एवं सब्‍जी प्रसंस्‍करण tissue culture आदि विषयों पर नवीनतम और अंतरराष्ट्रीय स्तर के पाठयक्रम चालू करेगा। मेरी सरकार जन-सहभागिता के आधार पर विज्ञान संकाय और महिला छात्रावास खोलने के लिए सभी राजकीय महाविद्यालयों को सहायता प्रदान करेगी।

43- कोटा शिक्षा के एक बहुत बड़े प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में उभर कर आया है। कोटा में हजारों की तादाद में छात्र पूरे देश से आकर यहां रहते हैं। इनके शैक्षिक मनोरंजन एवं अन्य गतिविधियों के लिए कोटा में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का Students' Cultural Centre खोला जायेगा। यहां पर International Film Club, नाटकों एवं अन्य cultural programme आदि का आयोजन किया जा सकेगा।

 

Gpc/usc/09032007/1240-1300/1l-1m

 

स. खेलकूद:

44- युवाओं के सर्वांगीण विकास एवं upliftment में खेल-कूद की महत्ता को हमने हमेशा under-estimate किया है। राज्य में किशोरों एवं युवाओं के सर्वांगीण विकास एवं उनकी ऊर्जा एवं उत्साह के सर्जनात्मक उपयोग के लिए, एक किशोर एवं युवा नीति बनाई जायेगी। इसका मुख्य अंग हर पंचायत में एक खेल मैदान स्थापित करना, एवं इन खेलों के लिए आवश्यक खेल का सामान उपलब्ध कराना होगा। अगले 2 वर्षों में 5 हजार से अधिक आबादीवाले सभी गाँवों में खेल मैदान हेतु 25 हजार रुपये उपलब्ध करवाये जायेंगे और, सभी सांसदों एवं विधायकों से प्रार्थना की जायेगी कि वे अपने कोष से प्रत्येक ऐसे गाँव को 5 हजार रुपये प्रति गाँव की खेल सामग्री दिलवायें। प्रथम वर्ष में 7 हजार से अधिक जनसंख्या वाले 338 गाँव इस योजना में cover किये जायेंगे।

45- राज्य सरकार तहसील स्तर तक खेल स्टेडियम्स का विकास करने के लिए एक स्टेडियम विकास कार्यक्रम चलायेगी। इस कार्यक्रम के अंतर्गत संभाग स्‍तरीय, जिला स्‍तरीय एवं तहसील स्‍तरीय स्टेडियमों का निर्माण standardised type designs के अनुसार एक चरणबद्ध कार्यक्रम के तहत अगले तीन वर्षों में किया जायेगा। विधायकों व सांसदों द्वारा MLA-LAD या MP-LAD योजना, corporates एवं खेलों में रुचि रखने वाली संस्थाओं द्वारा वित्तीय सहयोग के आधार पर प्राथमिकता तय की जायेगी। इस योजना हेतु वर्ष 2007-08 के लिए 5 करोड़ रुपये उपलब्ध कराये जायेंगे, एवं आवश्यकता पड़ने पर और अधिक राशि उपलब्ध कराई जायेगी।

46- इसके साथ, मैं यह घोषणा भी करती हूँ कि एक नये कार्यक्रम के तहत, प्रथम चरण में TSP क्षेत्र की हर पंचायत समिति में एक ''ग्रामीण युवा केन्द्र'' खोला जायेगा। ये युवा केन्द्र स्टेडियम पॉलिसी के अंतर्गत स्थापित होने वाले खेल मैदानों का उपयोग कर सकेंगे। इन केन्द्रों के माध्यम से जनजाति के गाँव-गाँव में विभिन्न खेलों जैसे तीरंदाजी, वालीबाल, फुटबाल, हॉकी में talent search की जायेगी और युवा केन्द्रों के खेल मैदानों में इन talents को foster किया जायेगा। इन ग्रामीण युवा केन्द्रों पर युवाओं को एकत्रित कर social awareness के कार्यक्रम भी चलाये जा सकेंगे।

47- गांवों में खेल केन्‍द्र और युवा केन्‍द्रों के संचालन हेतु राज्‍य स्तर के बारहवीं कक्षा पास 349 छात्रों को स्थान-विशेष अनुबंध तहत संयोजक नियुक्त किया जायेगा। नि:संदेह, इन नियुक्तियों में पहली प्राथमिकता महिलाओं को दी जायेगी।

48- खेलकूद में महिलाओं को भी पीछे नहीं रहना चाहिये। मेरा विश्वास है कि अगर इनको अवसर मिले तो वास्तव में वे इस क्षेत्र में भी अब सबको पीछे छोड़ देंगी। जयपुर में हॉकी, बास्केटबाल, साईक्लिंग, शूटिंग, तीरंदाजी एवं घुड़सवारी की बहुत अच्छे स्तर की facilities हमनें दो-एक वर्ष में तैयार की है। इनके उपयोग में महिलाओं को प्राथमिकता तो दी ही जायेगी, मैं यह भी घोषणा करती हूँ कि:

-जयपुर में एक महिला बास्केटबाल अकादमी का गठन किया जायेगा जिससे कि पूरे प्रदेश से प्रतिभाशाली बालिकाओं को जयपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण मिल सके।

-ग्राम भारती सीनियर सैकंडरी स्कूल कोठयारी सीकर को National Institute of Sports से affiliate करवा, इसे एक sports school के रूप में विकसित किया जायेगा।

राज्य सरकार ढांचा विकास के लिए और प्रति खिलाड़ी के हिसाब से आवर्तक व्यय राशि उपलब्ध करायेगी।

49- राज्य के जो खिलाड़ी राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में जीत हासिल कर राज्य को गौरवान्वित करते हैं उन्हें वर्तमान नियमों में अधिकतम 50 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जा सकता है। प्रदेश के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से  individual events हेतु, मैं निम्न नई सीमाएं तय करती हूँ:

 

Games

स्‍वर्ण पदक

रजत पदक

कांस्‍य पदक

Olympic

15 लाख रु

10 लाख रु

5 लाख रु

Asian

5 लाख रु

3 लाख रु

1लाख 50 हजाररु

Commonwealth

5 लाख रु

3 लाख रु

1लाख 50हजार रु

National

1लाख 50 हजाररु

 

75 हजार रु

25 हजार रु

 

 

इस हेतु नियमों में माह जून 2007 तक आवश्यक संशोधन कर दिया जायेगा।

स्‍वास्‍थ्‍य:

50- पिछले वर्ष मैंने ''कृण्वंतो: विश्वमारोग्यम्'', (अर्थात् समस्‍त विश्‍व को हम निरोग करें) के उद्घोष के साथ प्रदेश को स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने का संकल्प व्यक्त किया था। मुझे सदन को यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि इस क्षेत्र में सार्थक परिणाम अब सामने आने लगे हैं:

-मातृ मृत्यु दर 1998 के 670 प्रति लाख से घटकर 2006 में 445

-शिशु मृत्यु दर 1996 में 86 प्रति हजार से घटकर 2005-06 में 65

-संस्थागत प्रसव 1998-99 में 17.3 प्रतिशत से बढ़कर 2005 में 32.2

-शिशु पूर्ण टीकाकरण 1998-99 में 21.5 प्रतिशत से बढ़कर 2005 में 26.5

51- उपरोक्त से उत्साहित होकर, हमने ग्यारहवीं पंच वर्षीय योजना में वर्ष 2012 के लिए निम्न महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य रखे हैं :

-शिशु मृत्यु दर को 67 से 32 प्रति हजार

-मातृ मृत्य दर को 445 से 148 प्रति लाख

-कुल प्रजनन दर 3.2 से 2.1,

52- नि:संदेह ये लक्ष्य बहुत महत्त्वाकांक्षी हैं, लेकिन मैं मानती हूँ कि महत्त्वाकांक्षा नहीं तो आशा नहीं। हम इस शिखर पर अवश्य पहुँचेंगे। क्‍योंकि:

धनुष से जो छूटता बाण कब पथ पर ठहरता है, 

देखते ही देखते वह लक्ष्‍य का भेद करता है,

लक्ष्‍य प्रेरित बाण हैं हम, ठहरने का काम कैसा,

लक्ष्‍य तक पहुंचे बिना पथ में पथिक विश्राम कैसा।

53- बीमारी कहकर नहीं आती और न ही उसके आने का कोई समय होता है। इसलिए राज्य को हर समय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने की तरफ अग्रसर होना पड़ेगा। राज्य सरकार द्वारा चरणबद्ध तरीके से चिन्हित 365 संस्थाओं में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, उपकरण और आवासीय सुविधाओं की व्यवस्था कर,  इन्हें 24 घंटे खोले जाने की व्यवस्था की जायेगी।

54- चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं को जन-सामान्य तक ले जाने के लिए मेरी सरकार ने 1 से 31 दिसंबर की अवधि में स्वास्थ्य चेतना यात्रा अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान 9 हजार 205 कैम्पों का आयोजन किया गया जिसमें 53 लाख 21 हजार लोगों ने भाग लिया व 31 लाख 5 हजार व्यक्ति लाभान्वित हुए। इसमें 19 लाख 2 हजार रोगी ऐलोपैथिक उपचार एवं 12 लाख 3 हजार रोगी भारतीय उपचार विधियों से लाभान्वित हुए। इन कैम्पों में 2 लाख 85 हजार जांचे भी हुईं। हम वर्ष 2007-08 में भी यह अभियान चलायेंगे।

55- बड़े शहरों में वरिष्ठ नागरिकों की आवश्यकताओं की ओर ध्यान देना भी जरूरी है। इन शहरों में वृद्ध आश्रमों की आवश्यकता है और ये स्थापित भी होने लगे हैं। जयपुर विकास प्राधिकरण के नियमों के तहत इनके लिए भूमि आवंटन भी किया जा सकता है। साथ ही यह भी आवश्यक है कि युवाओं, विशेष कर महिलाओं को geriatric care हेतु प्रशिक्षण दिया जाये। इस हेतु आगामी वर्ष चिकित्सा शिक्षा विभाग एक अभिनव योजना ''अभिलाषा'' प्रारंभ करेगा, जिससे प्रशिक्षित व्यक्तियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही प्रशिक्षित व्यक्तियों की उपलब्धता से old age homes की स्थापना को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

56- राज्य में प्रत्येक उप-स्वास्थ्य केन्द्र पर अभी एक ANM कार्यरत है। उप-स्वास्थ्य केन्द्रों पर सभी दिन एक ANM उपलब्ध रहे एवं field visit के लिए दूसरी ANM या GNM की सेवाएं उपलब्ध हो सकें इसके लिए मैं प्रत्येक उप-स्वास्थ्य केन्द्र पर एक अतिरिक्त GNM लगाए जाने की घोषणा करती हूँ। इस कार्यकम की आवश्‍यकता सहित 7 हजार 502 ANMs GNMs को नियुक्ति दी जायेगी।

57- सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर रोगियों को लाने ले जाने तथा बड़े अस्पतालों में रेफर करने पर उन्हें वहाँ transfer करने के लिए ambulance की आवश्यकता महसूस की जाती रही है। मैं राज्य के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर चरणबद्ध तरीके से ambulance सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा करती हूँ। इस व्यवस्था हेतु वर्ष 2007-08 में 100 ambulances उपलब्ध कराई जायेंगी।

58- राज्य के कुल 40 हजार गाँव हैं। राज्य में स्थापित स्वास्थ्य सेवाओं के बावजूद दूर-दराज के क्षेत्रों में प्रभावी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती। मैं राज्य के ऐसे unserved क्षेत्रों की ग्रामीण जनता को प्रत्येक माह की एक निश्चित तारीख को mobile medical unit के द्वारा चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की नई योजना ''डॉक्टर-आपके-द्वार'' की घोषणा करती हूँ। इसके लिए desert एवं tribal जिलों के लिए दो तथा अन्य जिलों के लिए एक, कुल 52 mobile medical units उपलब्ध कराई जायेंगी।

59- जयपुर से संचालित mobile surgical unit ने ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा कैंप आयोजित कर अपनी साख बनाई है। साथ ही उदयपुर एवं जोधपुर में भी mobile surgical unit कार्यरत हैं। इन तीनों mobile units को सुदृढ किया जायेगा। इसके अतिरिक्त, मैं राज्य के सभी संभागीय मुख्यालयों पर mobile surgical units के गठन की घोषणा करते हुए, इन सभी यूनिटों को एक scheme ''चरक-आपके द्वार'' के अंतर्गत लाने की घोषणा करती हूँ। इन mobile surgical units के कैंपों का कार्यक्रम इस प्रकार बनाया जायेगा कि राज्‍य के प्रत्‍येक ब्‍लॉक में वर्ष में कम से कम एक बार mobile surgical unit का कैंप लग सके।

60- वंचित को अर्पित इस बजट में स्वास्थ्य सेवाओं के फैलाव को बढ़ाने की दृष्टि से, वर्ष 2007-08 में 130 उप-स्वास्थ्य केन्द्र एवं 30 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खोलने, और 15 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में क्रमोन्नत करने की मैं घोषणा करने की मैं घोषणा करती हूं। इसके अलावा 5 जिला स्‍तरीय चिकित्‍सालयों एवं 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में निजी सहयोग से दानदाताओं के नाम पर, वार्ड खोलकर शय्याओं को बढ़ाने का प्रस्ताव है।

61- राज्य के मरूस्थलीय क्षेत्रों, जनजातीय क्षेत्रों एवं चंबल के डांग क्षेत्रों में paramedical staff की गंभीर समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि इन क्षेत्रों के स्थानीय लोगों को paramedical staff के रूप में ज्यादा से ज्यादा प्रशिक्षित किया जायेगा। बाड़मेर, डूंगरपुर और झालावाड़ जिले में चल रहे तीन GNM Nursing Colleges के अतिरिक्त, एक-एक और जनरल नर्सिंग प्रशिक्षिण केन्द्र के निर्माण हेतु भूमि और भवन निर्माण के लिए 30 लाख रुपये की राशि निजी promoters को उपलब्ध करवाई जायेगी। इसके अतिरिक्त राज्य के पांच जिलों यथा- हनुमानगढ़,राजसमंद, दौसा, बारां एवं धौलपुर- में इसी तर्ज पर ANM प्रशिक्षण कॉलेज खोले जायेंगे।

62- Paramedical Staff, चिकित्सक के साथ, रोग की पूर्ण एवं विस्तृत जांच, सही निदान, प्रभावी नियंत्रण एवं वांछित उपचार के लिए सक्षम हो और उसे सक्षमता का प्रमाण पत्र मिल सके इस हेतु यह भी आवश्यक है कि standards set करने और certification agency का कार्य करने हेतु, Paramedical Council का गठन किया जाये, जिसकी वर्ष 2007-08 में स्थापना की मैं घोषणा करती हूँ।

63- वित्तीय वर्ष 2007-08 हेतु विश्व बैंक संपोषित RHSDP परियोजना के माध्यम से 154 करोड़ रुपये का विनियोजन किया जायेगा। 238 अस्पतालों में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने, आवश्यक औषधियां एवं नवीन तकनीक के आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने हेतु आगामी वर्ष में 60 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। साथ ही, 5 जिला अस्पतालों, 23 रैफरल चिकित्सालयों एवं 58 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के पुनर्निर्माण, जीर्णोद्धार एवं मरम्मत करने हेतु 60 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों का भी प्रावधान किया गया है।

64- राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार के साथ द्रुत गति के वाहनों की संख्या में भी तेजी से विस्तार हो रहा है। जिससे सड़क दुर्घटना से होने वाली मृत्यु एवं घायल व्यक्तियों की संख्या बढ़ रही है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग एवं राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के समन्वय से BOO आधार पर अगले वर्ष fully equipped एवं ambulances से serviced दो ट्रोमा अस्पताल स्थापित करेंगे।

65- चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि राज्य में रोगियों को आवश्यक दवाइयां राजकीय अस्पतालों में ही मिले। राज्य में भी वर्ष 2007-08 से generic आधार पर आवश्यक दवाइयों का क्रय कर उपलब्ध करवाने की संभावनाओ की जांच की जाएगी। योजना लागू होने पर, राजकीय कर्मचारी, पेंशनर्स एवं बीपीएल परिवारों के लोग तमिलनाडू की तर्ज पर इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

66- राज्य के विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालयों एवं संबद्ध अस्पतालों के योजनाबद्ध विकास कार्यक्रम के अंतर्गत आगामी वर्ष 34 करोड़ 80 लाख रुपये व्‍यय किये जायेंगे। आगामी वर्ष कोटा में महाराव भीमसिंह अस्पताल के पुनरुद्धार के कार्यों पर 2 करोड़ रुपये तथा मेडिकल कॉलेज से संलग्न चिकित्सालय पर 7 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे। कोटा में 500 शैय्याओं के नये अस्पताल का निर्माण कार्य पूर्ण कर इसे प्रारंभ कर दिया जायेगा। इसके अतिरिक्त कोटा में राज्य सरकार के सहयोग से cath-lab की स्थापना भी की जायेगी।

67- Prevention is not only better than cure, it is also cheaper. गैर-संक्रामक बीमारियों की रोकथाम, शीघ्र निदान एवं उपचार हेतु आगामी वर्ष ‘’पातंजलि आरोग्‍य’’ योजना प्रारंभ की जायेगी। इस योजना के अंतर्गत मधुमेह, रक्तचाप, ह्नदय रोग तथा कैंसर आदि की रोकथाम, शीघ्र निदान तथा उपचार की दृष्टि से ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में विशेष कार्यक्रम क्रियान्वित किये जाएंगे।

68-  सवाईमानसिंह अस्‍पताल राज्‍य का  prestigious अस्पताल है। जयपुर में 4 सेटेलाईट अस्पताल भी हैं, परंतु इनमें कुछ कमियों के कारण सवाईमानसिंह अस्पताल एक referral अस्पताल नहीं बन पाया है। राज्य सरकार चारों सेटेलाइट अस्पतालों को सुदृढ़ करने की ओर कार्य करेगी।

69- राज्य सरकार मानसरोवर में एक नये अस्पताल का निर्माण करा रही है। वर्ष 2007-08 में इस अस्पताल के भवन का निर्माण पूरा हो जायेगा। राज्य सरकार बॉम्बे हास्पिटल जैसे बड़े एवं established अस्पताल से समझौता कर, इसका संचालन करेगी।

70- निरोगता रखने में आयुष पद्धतियों में मेरा अटल विश्वास रहा है। मैंने वर्ष 2007-08 में 20 वर्तमान औषधालय के भवन निर्माण, एक मोबाईल यूनिट, एक रसायनशाला और एक वनौषधि एवं जड़ी-बूटी उद्यान हेतु आवश्यक राशि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इसके अलावा वर्ष 2007-08 में 30 आयुर्वेदिक, 30 होम्योपैथिक एवं 10 नवीन यूनानी औषधालय खोले जायेंगे। भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी आम जनता तक ले जाने के लिए आरोग्य मेले संयोजित करना भी प्रस्तावित है।

समाज कल्‍याण:

71- नि:शक्त, निर्बल व निर्धन वर्गों को संबल देना प्रथम बजट से ही मेरी प्राथमिकता रही है। वर्ष 1997 के BPL census के अनुसार राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 20 लाख 97 हजार BPL परिवार थे। भारत सरकार ने केन्द्रीय सहायता एवं अन्य कार्यक्रमों हेतु राजस्‍थान के लिए 17 लाख 36 हजार की सीमा निर्धारित कर दी। इससे कई लाख परिवार इस श्रेणी को दी जा रही सुविधाओं से वंचित हो जायेंगे। अत: मैं घोषणा करती हूँ कि भारत सरकार द्वारा निर्धारित artificial सीमा के कारण इस श्रेणी से बाहर आये परिवारों को राज्य सरकार adopt करेगी और इन्हें गेहूं, बीपीएल मेडिकेयर कार्ड व मुख्यमंत्री जीवन रक्षा कोष की सुविधाओं का लाभ यथावत मिलता रहेगा।

किसी होंठों से हमको गुनगुनाहट छीनना आता नहीं,

हमें आते हुए कदमों की आहट छीनना आता नहीं,

आप इस आदत को चाहे कोई भी पहचान दें,

किसी चेहरे की हमको मुस्‍कराहट छीनना आता नहीं।

72- वंचित BPL परिवारों को उपरोक्त सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बजट में 24 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध करवाई जायेगी।

73- राज्य सरकार BPL परिवारों के लिए कई लाभकारी योजनाएं चला रही है परंतु गरीबी की रेखा से marginally ऊपर आय वाले परिवारों के लिए कोई विशेष योजना नहीं है। हम राज्य में poverty line से ऊपर रहने वाले 5 लाख परिवारों को और चिह्नित कर रहे हैं। इन 5 लाख APL परिवारों की छात्राओं को अपना अध्ययन, स्नातक स्तर तक जारी रखने के लिए प्रेरित करने हेतु, कक्षा 10 से 12 में पढ़ने वाली सभी बच्चियों को प्रत्येक वर्ष अपनी उत्तीर्ण करने के प्रमाण पत्र के साथ 2 हजार रुपये की FD दी जायेगी। इस राशि को बालिका graduation करने के पश्चात् निकाल सकेगी।

74- राज्य में वृद्धावस्था पेंशन 400 रुपये प्रतिमाह है परंतु विधवाओं अथवा विकलांगों की पेंशन 250 रुपये प्रतिमाह ही है। मैं विधवा एवं विकलांग पेंशन की राशि 250 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 400 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा करती हूँ। इसी प्रकार पालनहार योजना का विस्तार करते हुए, मैं निराश्रित पेंशन हेतु पात्र विधवाओं के बच्चों को भी इस योजना के तहत 675 रुपये प्रतिमाह की सहायता देने की घोषणा करती हूँ।

75- मैं समझती हूँ कि महिलाओं की वैधव्य अवस्था को समाप्त करना ज्यादा उपयुक्त है। अत:, मैं घोषणा करती हूं कि यदि वर्तमान पेंशन नियमों में हकदार विधवा महिला शादी करती है तो उसे शादी के मौके पर राज्य सरकार की ओर से 15 हजार रुपये का उपहार दिया जायेगा। इसी प्रकार, पेंशनधारी विकलांग व्यक्ति यदि स्वावलंबी बनने के उद्देश्य से अपना business करना चाहे, तो उसे मासिक पेंशन के स्थान पर एकमुश्त 15 हजार रुपये की राशि प्रदान की जायेगी।

76- Corporates NGOs के सहयोग से हमारी सरकार ने जरूरतमंद गरीबों को सस्ता लेकिन पोषक खाना उपलब्ध कराने के लिए अक्षय कलेवा योजना शुरू की है। राज्य में 58 शहरों में अक्षय कलेवा योजना में लगभग 10 हजार व्यक्तियों को 5 से 9 रुपये प्रति थाली भोजन उपलब्ध हो रहा है। इस कार्यक्रम को और बढ़ाने के लिए मैं घोषणा करती हूं कि यदि कोई भी मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर आदि शहरों के गरीबों को 5 या 6 रुपये प्रति थाली के हिसाब से भोजन देकर सहायता करना चाहे, तो राज्य सरकार उनसे सहभागिता करने को तैयार है। मैं सभी गणमान्य व्यक्तियों से भी अपील करूंगी कि वे अपने पूर्वजों की याद में सामर्थ्यनुसार केन्द्र चयनित कर एक दिन का भोजन अपने पूर्वजों के नाम से बंटवाने का पुनीत कार्य करें।

77- राज्य सरकार अनुसूचित जाति-जनजाति, सफाई कर्मियों व denotified tribes के बच्चों के अध्ययन को शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ावा देने के लिए छात्रावासों के निर्माण की एक नई योजना शुरू करेगी। राज्य के राजकीय अथवा गैर-राजकीय महाविद्यालय, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय यदि अपने परिसर में इन वर्गों के छात्रों के लिए अलग या सामूहिक छात्रावास बनाना चाहे तो राज्य 25 बच्चों के छात्रावास के निर्माण हेतु या इसके अनुपात में 10 लाख रुपये का पूंजीगत अनुदान देगा। साथ ही ऐसे प्रत्येक छात्रा अथवा छात्रा के लिए 400 रुपये प्रति माह भोजन एवं अन्य सुविधाओं के लिए अनुदान उपलब्ध करवाया जायेगा। राज्य सरकार,इस शीघ्र घोषित होने वाली नीति के तहत, 50 छात्रावासों के निर्माण एवं भोजनादि हेतु 10 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध करायेगी।

78- बच्चों का आपराधिक मामलों से जुड़ना एक सामाजिक failure है। इनका, अथवा अन्य असहाय बालकों का पुनर्वास हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। राज्य में केवल 6 संभागीय मुख्यालयों पर juvenile homes खुले हुए हैं। मैं घोषणा करती हूँ कि वर्ष 2007-08 में शेष 26 जिलों में भी juvenile homes खोले जायेंगे। इसी प्रकार राज्य में अभी केवल अजमेर में ही संप्रेषण गृह स्थापित है। राज्य सरकार वर्ष 2007-08 में राज्य के शेष सभी 6 संभाग मुख्यालयों पर संप्रेषण गृह खोलेगी। वर्तमान में इन गृहों के बालकों के खान-पान पर लगभग 700 रुपये प्रति बालक प्रति माह व्यय किया जाता है। इस राशि को बढ़ाकर सरकार ने 850 रुपये प्रति बालक प्रतिमाह करने का निर्णय लिया है। मैं यह भी घोषणा करती हूँ कि किसी भी नवजात शिशु को उसके natural parents किसी विवशता के कारण पालना नहीं चाहे, तो भगवान की इस अद्भुत देन का पालन-पोषण राजस्थान राज्य करेगा। इस हेतु मैं, जयपुर के अलावा 6 अन्य जिलों में शिशु गृह खोलने की घोषणा करती हूँ।

79- पिछली सरकार अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लगभग 21 हजार पदों का बैक लॉग छोड़कर गई थी। मैं आज संतोष से यह बता सकती हूँ कि विभिन्न विभागों द्वारा नियुक्तियां एवं पदोन्नति कर 10 हजार से अधिक बैक लॉग कम किया गया है। मेरा लक्ष्य है कि मेरी सरकार के प्रथम 5 वर्ष पूरे होते-होते यह संख्या शून्य के करीब पहुँच जाये।

80- डॉ बी.आर. अंबेडकर ने देश को ना केवल संविधान दिया बल्कि वंचित वर्गों को अपने अधिकार मांगने का मार्ग प्रशस्त किया। डॉ अंबेडकर की ज्ञानवर्धन एवं चिंतन की परंपरा को आगे बढ़ाना आवश्यक है। मैं जयपुर में अंबेडकर जी के सामाजिक, आर्थिक एवं बौद्धिक चिंतन को बढ़ावा देने के लिए, एक अंबेडकर पीठ एवं अंबेडकर पार्क की स्थापना करने के लिए राज्य सरकार द्वारा अपेक्षित सहयोग देने की घोषणा करती हूँ।

81- निजी भागीदारी से सरकार के सीमित साधनों को leverage करने के लिए हमने नये Polytechnic और ITI खोलने, मिड-डे मील कार्यक्रम चलानेRajasthan Education Initiative, Water Initiative और प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के प्रबंधन में भागीदारी जैसी अनेक महत्त्वपूर्ण PPP पहल की है। इस नीति को योजना आयोग ने भी सराहा है।

 

मोहन/090307

 

82- इससे प्रेरित होकर, जहाँ भारत सरकार ने आर्थिक ढांचागत परियोजनाओं हेतु Viability Gap Funding योजना शुरू की है, मैं सामाजिक ढांचागत सुविधाओं के लिए Rajasthan Social Sector Viability Gap Funding Scheme शुरू की जाने की घोषणा करती हूँ। मैं विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से इस योजना के लिए 100 करोड़ रुपये उपलब्‍ध कराऊंगी। यह योजना हमारे इस  conviction पर आधारित है कि सामाजिक सेवाओं के विस्तार एवं delivery में समाज एवं सरकार की घनिष्ठ सहभागिता होनी चाहिए।हम इस योजना को ''पूंजीगत विनियोजन सरकार से व सेवा संचालन एवं प्रबंध समाज द्वारा'' के सिद्धांत पर बनायेंगे। इस योजना में सरकार विद्यालय, महाविद्यालय, छात्रावास, अस्पताल, स्वास्थ्य केन्द्र, आंगनबाड़ी, सामुदायिक भवन जैसी कोई भी सामाजिक आधारभूत सुविधा सृजित करने के लिए भूमि, भवन निर्माण या अन्य प्रकार के पूंजीगत व्यय हेतु viability gap के आधार पर सहायता उपलब्ध करायेगी।

अनुसूचित जनजाति विकास:

83- जनजाति उपयोजना क्षेत्रों में वेतन शृंखला 1 से 6 तक एवं ग्राम सेवक के पद की सीधी भर्ती की रिक्तियों का 45 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति एवं 5 प्रतिशत अनुसूचित जाति के स्थानीय सदस्यों के लिए आरक्षित है। राज्य सरकार इस आरक्षण का विस्तार करने के लिए यह व्यवस्था, राज्य सेवाओं को छोड़कर, अन्य सभी पदों पर लागू करना प्रस्तावित करती है। इसी प्रकार बारां जिले की शाहबाद एवं किशनगंज तहसीलों की रिक्तियों हेतु स्थानीय सहरिया आदिम जाति के अभ्यर्थियों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण विभिन्न सेवाओं की वेतन शृंखला 1 से 9 तक में लागू है। अब यह आरक्षण,राज्य सेवाओं को छोड़कर, सभी पदों के लिए लागू करना प्रस्तावित है।

84- जनजाति व सहरिया आदिम परियोजना क्षेत्रा में वर्ष 2007-08 में निम्न विकास कार्यक्रम चलाये जायेंगे:

सहरिया परियोजना क्षेत्र में पाँच नवीन आश्रम छात्रावासों (कस्बाथाना, आगर, खांडा सहरोल, विलासगढ़ एवं खंडेला) का संचालन।

-जनजाति परियोजना क्षेत्र में 150 माँबाड़ी भवनों का निर्माण, जिस पर 1 करोड़ 12 लाख रुपये व संचालन, जिस पर 3 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे।

-1 हजार 800 बेरोजगार जनजाति युवकों को रोजगारोन्मुख व्यवसायों में प्रशिक्षित कर स्वरोजगार हेतु आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराना, जिस पर 2 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है।

85- गत् तीन वर्षों में मुख्य ग्राम से जनजातीय बस्ती तक विद्युत तंत्र स्थापित करने हेतु 4 करोड़ 31 लाख रुपये व्यय कर 150 बस्तियों को विद्युतीकृत किया गया है। वर्ष 2007-08 में 2 करोड़ 95 लाख रुपये व्‍यय कर अनुसूचित क्षेत्र की 118 जनजातीय बस्तियों तथा फलों का विद्युतीकरण किया जाना प्रस्तावित है। वित्तीय वर्ष 2007-08 में माडा क्षेत्रा में C.D. works तथा Road निर्माण हेतु 2 करोड़ 25 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया है। इसी प्रकार बिखरी क्षेत्र में सड़क निर्माण हेतु 1 करोड़ 54 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया है। अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में कुएं खुदवाने एवं भूमि के समतलीकरण हेतु वित्तीय वर्ष 2007-08 में 50 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया है एवं कुओं को गहरा करवाने हेतु 25 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।

86- जनजाति उपयोजना क्षेत्र में निवास करने वाले BPL परिवारों की टापरी अथवा झोंपड़ी के आग लगने से नष्ट हो जाने पर केवल 2 हजार 500 रुपये की सहायता राशि मिलती है। इसे BPL परिवारों के लिए बढ़ाकर 10 हजार रुपये करने की मैं घोषणा करती हूँ। साथ ही, गैर BPL परिवारों को इस योजना में सम्मिलित किया जायेगा और उनकी रहवासीय झोंपड़ी के आग से नष्ट होने पर 5 हजार रुपये की सहायता दी जायेगी।

87- उदयपुर एवं अन्य क्षेत्रों की जनजाति जनसंख्या में बैणेश्वर धाम का विशिष्ठ स्थान है। इस धाम में मेरी स्वयं की भी विशेष आस्था है। अत: वित्तमंत्री होने का privilege इस्तेमाल करते हुए, इस धाम और उससे संबंधित सुविधाओं के जीर्णोद्धार एवं सुधार के लिए मैं कला एवं संस्कृति विभाग के माध्यम से 2 करोड़ रुपये उपलब्‍ध करवाने की घोषणा करती हूं।

ग्रामीण विकास :

88- राज्य के 6 जिलों बांसवाड़ा, डूंगरपुर,झालावाड़, करौली, सिरोही एवं उदयपुर में रोजगार गारंटी कार्यक्रम चल रहा है। इन जिलों के 15 लाख 7 हजार परिवारों ने रोजगार के लिए job card लिया है। 10 लाख 38 हजार परिवारों को माह दिसंबर तक रोजगार उपलब्ध कराया गया, जिस पर 449 करोड़ 12 लाख रुपये का व्यय किया गया। रोजगार गारंटी कार्यक्रम के क्रियान्वयन में राजस्‍थान की राष्‍ट्रीय स्‍तर पर सराहना हुई है।

89- वर्ष 2007-08 में राज्य के 6 और जिलों, यथा जैसलमेर, जालौर, बाड़मेर, चित्तोडगढ़, सवाईमाधोपुर एवं टोंक, के इस योजना में शामिल किया गया है। रोजगार गारंटी कार्यक्रम में सबसे ज्यादlabour राजस्‍थान के जिलों में लगी। यह हमारे प्रदेश में employment की अत्यन्त आवश्यकता को दर्शाता है। मेरा विपक्ष से पुन: अनुरोध है कि राजस्थान के सभी जिले इस कार्यक्रम में लेने हेतु भारत सरकार को निवेदन करें।

90- जनसहभागिता आधारित चालू की गई गुरू गोलवलकर जनसहभागिता योजना के उत्साहवर्द्धक परिणाम रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस योजना के अंतर्गत आवंटित पिछले वर्ष की राशि को बारह गुना करते हुए वर्ष 2007-08 हेतु 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाना प्रस्तावित है। इस योजना का लाभ अधिक से अधिक गाँवों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार का अंशदान कार्य की लागत का 70 प्रतिशत अथवा 3 लाख 75 हजार रुपये, जो भी कम हो, तक रहेगा। यदि चयनित कार्य District Plan में स्वीकृत कार्यों में से हैं तो राज्‍य सरकार का अंशदान 80 प्रतिशत या पाँच लाख रुपये जो भी कम हो, तक दिया जायेगा। आवश्यकता होने पर इस कार्यक्रम के लिए और अतिरिक्‍त प्रावधान किया जाएगा।

91- पिछले वर्ष गाँवों के समग्र विकास हेतु दीनदयाल उपाघ्याय आदर्श गाँव योजना प्रारंभ की गई थी व पचास गाँवों में इसे प्रायोगिक तौर पर लागू करने का लक्ष्य रखा गया। मुझे कहते हुए खुशी है कि इस योजना के अंतर्गत 128 गाँवों के प्रार्थना पत्रा प्राप्त हुए। पचास गाँवों का चयन किया जाकर उनकी विकास योजना तैयार करने का कार्य प्रगति पर है। वर्ष 2007-08 में इस योजना में 100 और गाँवों को लिया जायेगा।

92- राज्य में क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए मगरा, डांग एवं मेवात विकास बोर्ड के लिए चालू वर्ष के प्रावधान को बढ़ाकर प्रत्येक कार्यक्रम हेतु आगामी वर्ष में 5-5 करोड़ रुपये, करने की मैं घोषणा करती हूं।

93- जनजाति उपयोजना क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी व अनुसूचित जाति के परिवार आजादी के 60 वर्ष पश्चात् भी गरीबी की मार झेल रहे हैं। यद्यपि अधिकतर परिवारों के पास भूमि उपलब्ध है लेकिन मिट्टी के बहाव, सिंचाई की कमी आदि के कारण उत्पादकता बहुत कम है। राज्य सरकार इन परिवारों की भूमि को विकसित करने हेतु ''केशव बाड़ी'' योजना हाथ में लेगी। इस योजना से इनकी भूमि पर भू-संरक्षण, जल ग्रहण विकास व सिंचाई के साथ फलदार पौधारोपण के कार्य नि:शुल्क कराये जायेंगे। इस योजना से वर्ष 2007-08 में 50 हजार परिवारों के जीविकोपार्जन के स्थाई साधन उपलब्ध होंगे।

94- रतनजोत की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए हमनें एक विशेष योजना लागू की है। मेरा मानना है कि इस योजना की सफलता रतनजोत उत्पाद के remunerative दाम मिलने पर निर्भर करेगी। मैं घोषणा करती हूँ कि प्रदेश में पैदा होने वाली रतनजोत को अगले 3 वर्षों तक राजफेड 7 रुपये प्रति किलो के न्यूनतम समर्थन मूल्य से खरीदने के लिए तैयार रहेगा। इस हेतु कृषि विभाग तथा सहकारिता विभाग शीघ्र ही एक विस्‍तृत योजना जारी करेंगे।

95- राज्य में बायो-फ्यूल प्लांटेशन को बढ़ावा देने में वन विभाग भी वन भूमियों पर NREGS में उपलब्ध राशि का उपयोग कर,एवं तेल कंपनियों व आरएसएमएम से खरीद की गांरटी के आधार पर, रतनजोत के 1 करोड़ पौधे रोपित किये जायेंगे।

96- मरू विकास कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम का सबसे बेहतर उपयोग गांवों में पानी संग्रहण के structures बनाना है। इससे मजदूरी के साथ-साथ पानी की समस्या का भी समाधान होगा। हम इन दोनों कार्यक्रमों में जोहड़ एवं अन्‍य तालाबों के पुनरूद्धार को सम्मिलित करते हुए अगले वर्ष 1 लाख ऐसे कार्यों को हाथ में लेंगे।

97- संपूर्ण स्वच्छता कार्यक्रम के तहत वांछनीय स्वच्छता स्‍तर प्राप्‍त करने वाली पंचायतों को निर्मल ग्राम पुरस्‍कार दिया जाता है। मैं घोषणा करती हूँ कि निर्मल ग्राम पुरस्कार प्राप्त करने वाली पंचायतों को राज्य सरकार की ओर से 1 लाख रुपये का नकद पुरस्कार पंचायत क्षेत्रों में विकास कार्य करवाने हेतु दिया जायेगा। यदि किसी पंचायत समिति में 10 और किसी जिला परिषद में 30 से अधिक पंचायतों को यह पुरस्कार प्राप्त होता है, तो उस पंचायत समिति को 5 लाख रुपये तथा जिला परिषद को 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार अपने क्षेत्रा में स्थाई विकास कार्य करवाने के लिए राज्य सरकार द्वारा दिया जायेगा। यदि कोई जिला परिषद इस पुरस्कार के लिए पात्र बनती है एवं साथ में दो पंचायत समितियों में 10-10 गाँव यह पुरस्कार पाते हैं, तो ऐसे जिले को कम से कम 50 लाख रुपये पुरस्कार में मिलेंगे।

98- केरल के बाद राजस्थान भारत का दूसरा प्रदेश है जिसमें जनभागीदारिता पर आधारित District Plans तैयार किये गये हैं। इन योजनाओं को तैयार करने में ग्राम सभाओं के जन-प्रतिनिधियों ने सक्रिय भूमिका निभाई है। पहली बार स्थानीय विकास की प्राथमिकता, लोगों ने स्‍वयं इन योजनाओं के माध्‍यम ये तय की है। राज्‍य सरकार के इन प्रयासों की योजना आयोग द्वारा भूरी-भूरी प्रशंसा की गई। हमारा प्रयास रहेगा कि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होDistrict Plans में चिह्नित किये गये स्‍थानीय प्राथमिकता के स्‍थाई  संपत्ति प्रकृति के कार्यों को करने के लिए मैं प्रत्येक जिले को एक-एक करोड़ रुपये की untied grant देने की घोषणा करती हूं।

99- पंचायत सरपंचों, प्रधानों एवं प्रमुखों के honorarium व मीटिंग भत्ते की राशियों का निर्धारण अंतिम बार 1998 में हुआ था। उन्हें देय honorarium एवं मीटिंग भत्तों का संशोधन निम्न प्रकार किया जा रहा है:

- जिला प्रमुख का मानदेय 3 हजार से बढ़ाकर 4 हजार रुपये

- प्रधान का मानदेय 2 हजार से बढ़ाकर 2 हजार 600 रुपये तथा

- सरपंच का मानदेय 400 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये

साथ ही बैठक के लिए दिये जाने वाले भत्ते को भी लगभग डेढ़ गुना किया जा रहा है।

100- यह हम सबके लिए गर्व का विषय है कि देश में पंचायती राज व्यवस्था का प्रारंभ तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू जी ने वर्ष 1959 में नागौर जिले से किया। राज्य सरकार इस स्थल को पंचायती राज मेमोरियल के रूप में विकसित करेगी। इस हेतु आगामी वर्ष में 50 लाख रुपये उपलब्ध करवाये जायेंगे।

101- कृषि क्षेत्र मे extension का महत्त्व देखते हुए, वर्ष के दौरान ''किसान महोत्सव एवं कृषि योजनाएं आपके द्वार'' अभियान चलाया गया। Extension को cost effective बनाना हो तो तो इसके लिए प्रभावी अनुसंधान का support होना आवश्यक है। राज्य सरकार कृषि एवं अन्य तकनीकी क्षेत्रों में होने वाले अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने की दृष्टि से  Rajasthan Innovation Foundation की स्थापना करेगी। राज्य सरकार इसके Corpus हेतु 3 करोड़ रुपये का योगदान करेगी। यह Foundation, इस Corpus की आय से प्रति वर्ष अच्छे research projects एवं innovations को समर्थन देगा और cash award आदि देकर प्रोत्साहित करेगा। इस Foundation की विस्तृत योजना माह जुलाई तक जारी की जायेगी। इसी क्रम में कृषि के विषय में Ph. D. कर रही छात्राओं को 10 हजार रुपये प्रति वर्ष  छात्रृवृत्ति देने की मैं घोषणा करती हूँ। कृषि क्षेत्र में आधुनिकता नहीं लाने के social implications हैं, sex ratio पर भी प्रभाव पड़ता है। 

और मैं एक अर्थशास्‍त्री और इकॉनोमिस्‍ट जॉन केनिथ वॉलवेथ का एक कोट यहां पढ़ूंगी – “I identify this continuing poverty with primitive agriculture if you were a  poor farmer in India you would want as many as sons as possible, as your social security. You need those sons as your social security. They would keep you out of the hot sun and give you some form of subsistence in your old age. So you have this pressure for male children.”

102- कृषि क्षेत्र में पानी के सदुपयोग के बाद, मृदा की उर्वरकता बनाये रखना, दूसरी बड़ी चुनौती है। वर्ष 2007-08 में पंचायत समिति वार soil fertility mapping का कार्य पूर्ण कर, package of practices को agro ecological situation के आधार पर लागू किया जायेगा। चूंकि, अब कृषि विभाग के पास राज्य के सभी क्षेत्रों से मृदा परीक्षण के आंकड़े उपलब्‍ध हो गये हैं, हम राज्‍य का एक मृदा उर्वरकता मैप जारी करेंगे, जिसे GIS पर लगाया जायेगा। इससे राज्य के किसान, अनुसंधानकर्ता एवं खाद-बीज विक्रेता क्षेत्रवार पोषक तत्‍वों की आवश्‍यकता का समुचित आकलन कर सकेंगे और बेहतर तरीके से integrated nutrients management कर सकेंगे।

103- इस वर्ष मांग के अनुपात में उर्वरक की उपलब्धता कम होने से, कृषकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। मेरा अनुभव है कि जब भी प्रदेश में अच्‍छी वर्षा होती है, यह समस्‍या हमेशा ही उत्‍पन्‍न होती है। मेरा मानना है कि इसका मुख्य कारण हमारा केन्द्र सरकार पर पूरी तरह निर्भर होना है। आगामी वर्षों में इस निर्भरता को कम करने की दृष्टि से, उर्वरकों के अग्रिम भंडारण की व्यवस्था की जायेगी, जिसके लिए क्रय-विक्रय संघ द्वारा revolving fund स्थापित करवाया जायेगा। इसके अतिरिक्त, organic agriculture को बढ़ावा देने हेतु क्रय-विक्रय संघ एवं अन्य राजकीय विपणन संगठनों के माध्‍यम से राज्‍य में उत्‍पादित हो रहे organic products हेतु marketing की व्यवस्था भी की जायेगी।

104- हमने पिछले तीन वर्षों में उच्च गुणवत्ता के बीजों के वितरण में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्ष 2003-04 में 5 लाख 13 हजार क्विंटल बीज वितरण की तुलना में वर्ष 2006-07 में 8 लाख 58 हजार क्विंटल बीज वितरित किया गया। वर्ष 2007-08 में 10 लाख क्विंटल बीज वितरित किया जाना प्रस्तावित है। बीज उत्पादन व वितरण के क्षेत्रा में निजी क्षेत्रा को प्रोत्साहित करने हेतु नये बीज विधायन केन्द्र की स्थापना पर पूंजीगत लागत का 25 प्रतिशत back ended subsidy के रूप में दिये जाने की एक नई योजना माह जुलाई तक लागू की जायेगी।

105- राजस्थान के कृषि उत्पादन के विविधिकरण हेतु राज्‍य सरकार ने इजराईल की प्रसिद्ध कंपनियों से संपर्क कर महत्‍वाकांक्षी योजनाएं बनाई हैं।एक कार्यक्रम के तहत लगभग 200 हैक्टेयर भूमि पर जैतून की खेती का demonstration farm स्‍थापित किया जायेगा। और, एक अन्य कार्यक्रम के तहत, प्रांत के कृषकों को इजराईल में खेती के लिए अपनाई जा रही तकनीकों के बारे में जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण केन्‍द्र स्‍थापित किया जायेगा।

106- उद्यानिकी फसलों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उच्च गुणवत्ता की पौध उपलब्ध करवाना महत्त्वपूर्ण है। पौधा रोपण से फल प्राप्ति तक लगने वाली लंबी अवधि को देखते हुए पौध की गुणवत्ता सुनिश्चित करना आवश्यक हो जाता है। इस दृष्टि से आगामी वर्ष में Nursery Regulation Act लागू किया जाना प्रस्तावित है।

पशुधन:

107- राज्य में दुधारू पशुओं की उत्पादकता स्थाई रूप से बढ़ाने के लिए, हमें राज्य की चार प्रमुख native breeds यथा, थारपारकर, राठी, गिर एवं काकंरेज को संरक्षित रख, उनकी नस्ल को सुधारना होगा। इस हेतु नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना होगा। इस कड़ी में मैंने 2005-06 के बजट भाषण में progeny testing farm स्थापित करने की योजना का जिक्र किया था। अब इसमें breed confirmation, sperm selection और multiple ovulation and embryo transfer की तकनीकों पर आधारित ''कामधेनु'' योजना प्रारंभ की जायेगी। इसके तहत, उपरोक्त तकनीकों पर आधारित चारों नस्लों के लिए पशु प्रजनन फार्म स्थापित किये जायेंगे।

108- बैल हल चलाकर हमेशा से कृषि के लिए drought animal का कार्य करते रहे हैं, लेकिन कृषि कmechanisation से उनका उपयोग कम हो रहा है। कृषि यंत्राों का adopt कर, बैल-ट्रेक्टर बनाये गये हैं। गौ-शालाओं के माध्यम से demonstration कर, इस प्रयोग को popularise करने का प्रयास किया जायेगा।

109- गौ-शालाएं दूध एवं अन्य गौ-उत्पादों का processing कर, अर्क तथा दवा उत्पादित कर value addition भी कर सकती हैं। राज्य गौ-सेवा संघ राज्य में गौ-शालाओं में आधारभूत सुविधाएं विकसित करने हेतु सहायता प्रदान करता है। अब संघ की activities में बैल-टै्रक्टर demonstration o processing facilities की स्थापना को शामिल कर, गौ-सेवा संघ को आगामी वित्तीय वर्ष में2 करोड़ रुपये की सहायता दी जायेगी।

110- राज्य में वर्तमान में 285 पशु औषधालय हैं जिनके प्रभारी veterinary assistants ही होते हैं। इन औषधालयों का लंबे समय से क्रमोन्नयन नहीं हुआ है। इन औषधालयों मेveterinary doctors की सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए इन सभी को phased manner में अगले दो वर्षों में क्रमोन्नत कर full fledged पशु चिकित्सालय बनाया जायेगा।

वन:

111- आगामी वर्ष में वानिकी विकास की योजनाओं के अंतर्गत 55 हजार हैक्टेयर भूमि में नया प्लाटेंशन किया जायेगा। जनजातीय क्षेत्रों में joint forest management pattern पर 40 हजार हैक्टेयर में closures विकसित किये जायेंगे।

112- ताल-छापर अभ्यारण्य को विकसित करने का कार्य प्रगति पर है। बढ़ते हुए शहरीकरण के कारण यह आवश्यक हो गया है कि नाहरगढ़ और झालाना जैसे संरक्षित वनों की सुरक्षा के लिए boundary walls बनाई जायें। आगामी वर्ष इस कार्य हेतु 1 करोड़ 28 लाख रुपये उपलब्ध करवाये जायेंगे। सरिस्का, रणथंभौर अभ्यारण्य और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान की आवश्यकताओं को देखतेहुए, इनके प्रबंध के लिए राजस्थान वन्य जीव प्रबंधन एवं विकास मंडल का गठन किया जायेगा। इसी प्रकार, eco-tourism को बढ़ावा देने की दृष्टि से eco-tourism policy शीघ्र ही जारी की जायेगी।

सहकारिता:

113- Short term credit देने वाली सहकारी समितियों को राज्य में पुनर्जीवित करने एवं उन्हें vibrant बनाने के लिए राज्य ने वैद्यनाथन समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए NABARD के साथ 14.11.2006 क़ो MoU किया है। इसके तहत कुछ शर्तों के पूर्ण होने पर राज्य की उपरोक्त सभी सहकारी संस्थाओं की संग्रहित हानियों की पूर्ति की जायेगी जिससे राज्य में सहकारी आंदोलन को और संबल मिलेगा।

आपदा प्रबंधन

114- माह दिसंबर 2004 में सुनामी त्रासदी से राष्ट्र के दक्षिणी हिस्सों, विशेषकर तमिलनाडू में जान-माल की भारी हानि हुई। राजस्थान की जनता ने त्रासदी से निपटने हेतु दिल खोलकर योगदान किया। इस राशि से तमिलनाडू के कांचीपुरम, विल्लूपुरम व कडलुर जिलों में 20 स्कूल भवन, 5 चिकित्सालय, 4 छात्रावास, 1 cyclone centre, 2 fish auction centre, 8 सामुदायिक केन्द्र एवं 12 अन्य भवन, कुल 52 निर्माण कार्य, जिनकी लागत 15 करोड़ 29 लाख रुपये है, के कार्य प्रारंभ किये। इन कार्यों पर अब तक 12 करोड़ 85 लाख रुपये व्यय हो चुके हैं एवं 19 निर्माण कार्यों को पूर्ण कर तमिलनाडू सरकार को सुपुर्द कर दिया गया है। सभी निर्माण कार्य अप्रेल 2007 तक पूर्ण कर लिये जायेंगे।

115- वर्ष 2006-07 में राज्य ने अनावृष्टि एवं अतिवृष्टि दोनों स्थितियों का सामना किया। वर्ष 2005-06 में अभावग्रस्त घोषित 15 हजार 778 गाँवों में 10 जुलाई तक अकाल राहत कार्य चलाये गये। 15 अगस्त 2006 के बाद बाड़मेर एवं राज्य के दक्षिणी-पश्चिमी जिलों के अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित होने पर राहत कार्य शुरू किये गये। वर्ष 2006-07 में अनावृष्टि के कारण 5 जनवरी 2007 को अधिसूचना जारी कर 10 हजार 529 गाँवों को अभावग्रस्त घोषित किया गया है। इनमें 11 जनवरी 2007 से राहत कार्य चालू किये गये हैं। ओलावृष्टि से प्रभावित 102 गाँवों में भी राहत प्रदान की जा रही है।

116- बाड़मेर में 109 मृतकों के परिवारों को 54 लाख 50 हजार रुपये, 1 लाख 400 क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 15 करोड़ 4 लाख रुपये, 9 हजार 871 मृत पशुओं के लिए 30 लाख रुपये, 71 हजार 540 कृषकों को 3 लाख 30 हजार 371 हैक्टेयर में फसल खराबे के लिए 14 लाख 31 हजार रुपये की कृषि आदान अनुदान सहायता उपलब्‍ध कराई गई। क्षतिग्रस्त infrastructure के restoration हेतु सड़कों के लिए 12 करोड़ 80 लाख रुपये, पेयजल योजनाओं के लिए 5 करोड़ 50 लाख रुपये, विभिन्न बाढ़ बचाव कार्यों के लिए 56 करोड़ 47 लाख रुपये सहित लगभग 90 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री सहायता कोष से भी 7 करोड़ रुपये व्यय कर, डूब से विस्थापित परिवारों को बसाने के लिए 563 मकान बनाने की योजना हाथ में ली।

117- वित्तीय वर्ष 2006-07 में आपदा प्रबंधन हेतु राज्य सरकार द्वारा लगभग 750 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे।

भौतिक आधारभूत ढांचे का विकास

ऊर्जा :

118- ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में ऊर्जा क्षेत्र का आउट-ले 25 हजार 221 करोड़ 75 लाख रुपये रखा गया है। यानि, कुल योजना का 36.86 प्रतिशत। वर्ष 2007-08 की वार्षिक योजना में ऊर्जा क्षेत्र के लिए outlay 5 हजार 320 करोड़ 80 लाख रुपये है, जो कि कुल वार्षिक योजना का 45.71 प्रतिशत है।

119- इस level के allocations 50 बरस से चली आ रही विद्युत shortage को permanently समाप्त करने की हमारी दृढ़ता को दर्शाता है। हमने जो कार्य योजना बनाई है और जिस प्रकार वित्त पोषण की व्यवस्था की है, मुझे पूर्ण विश्वास है कि हम 2008 तक एक power surplus राज्य हो जायेंगे। और, 2011 तक surplus की स्थिति peak load पर लगभग 1 हजार 400 मेगावाट प्रतिदिन तक पहुँच जायेगी। मैं जानती हूँ कि कई व्यक्ति इसे शक की निगाह से देखेंगे।

लेकिन  ‘’हमारे हौसलों की इम्‍तहां मत पूछिये साहब,

  बहुत ही दूर है मंजिल मगर मंजिल को पा लेंगे,

  हमारे बाजुओं में जोर है, संकल्‍प है मन में,

  कलेजा चीर कर चट्टान का रास्‍ता बना लेंगे।‘’

120- प्रसारण तंत्र को सुदृढ़ करने हेतु 400 के.वी. रतनगढ़- मेड़ता लिंक लाइन व धौलपुर-जयपुर लाइन का कार्य प्रगति पर है। 220 के.वी. क़े दो नये सब-स्टेशन खींवसर एवं धोरीमन्ना इसी माह चालू कर दिये जायेंगे। 132 के.वी. क़े तीन ग्रिड सब-स्टेशन बकानी, बसेड़ी और खाटूश्याम जी चालू कर दिये गये हैं तथा 9 ग्रिड सब-स्टेशनों का निर्माण कार्य इस माह के अंत तक पूर्ण कर, इन्हें चालू कर दिया जायेगा। वर्ष 2007-08 में सवाईमाधोपुर, भीलवाड़ा और बीकानेर में 400 के.वी. क़े तीन ग्रिड सब-स्टेशन, श्रीडूंगरगढ़, मंडावर, और नीमराना में 220 के.वी. क़े तीन ग्रिड सब-स्टेशन तथा 132 के.वी. क़े 12 ग्रिड सब-स्टेशन बनाना प्रस्तावित है।

121- राज्य के 8 हजार 475 ग्रामीण फीडर्स में 40 से 60 प्रतिशत तक के T&D losses थे। हमने इन फीडर्स में यह नुकसान अधिकतम 15 से 20 प्रतिशत तक सीमित करने के उद्देश्य से महत्त्वाकांक्षी श्यामा प्रसाद मुखर्जी विजय ज्योति फीडर सुधार अभियान हाथ में लिया है। 4 हजार 675 फीडर पर सुधार कार्यक्रम शुरू किया है। अब तक लगभग 1 हजार 884 फीडरों का सुधार कार्य हो चुका है। 20 प्रतिशत से कम छीजत वाले फीडर्स पर स्थित 800 गाँवों को वर्तमान में 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की जा रही है।

122- मैं यह भी घोषणा करती हूँ कि ऐसे फीडर्स पर जहाँ विद्युत छीजत 15 प्रतिशत से कम आयेगी, उन पर स्थापित कृषि उपभोक्‍ताओं को 1 रुपये 10 पैसे के प्रस्‍तावित rate से 40 पैसे प्रति यूनिट की रियायत देने के प्रस्ताव अगले दो माह में Rajasthan Electricity Regulatory Commission को प्रस्तुत किये जायेंगे। विद्युत क्षति को कम करने में योगदान देने वाले लोगों को incentive मिलना ही चाहिए।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): आपकी इस बात के कारण से अमरा राम जी सुस्‍त हो गये।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): खुश नहीं हुए?

श्री अमराराम (धोद): यह 15 से कम आयेंगे नहीं और उनको मिलेगा नहीं।

123- Non-conventional energy में दिसंबर 2003 तक 110 मेगावाट उत्पादन क्षमता थी जो वर्ष 2007 के समाप्त होते-होते बढ़कर 516 मेगावाट, 2008 तक 982 मेगावाट और 2011 तक 1 हजार 860 मेगावाट किये जाने का लक्ष्य है। पवन ऊर्जा के क्षेत्र में किये गये प्रयासों के फलस्वरूप, राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम को सर्वश्रेष्ठ सार्वजनिक उपक्रम का पुरस्कार मिला है। यही नहीं, संयुक्‍त राष्‍ट्र संगठन की Clean Development Mechanism योजना के तहत हमें अंतरराष्ट्रीय recognition मिला है: RSMM carbon credits अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने लगा है। भारत से carbon credit trading करने वाला यह पहला राज्य उपक्रम है।

सड़कें :

124- मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता है कि 1 हजार 53 किलोमीटर लंबाई की mega-highway परियोजना का 33 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है, तथा दिसंबर 2007 तक चार परियोजनाएं पूर्ण कर राज्य को समर्पित कर दी जायेंगी। लालसोट से कोटा की परियोजना मई, 2008 तक पूर्ण हो जायेगी।

125- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के क्रियान्वयन में राजस्‍थान देश भर में प्रथम स्‍थान पर रहा है। जून, 2008 तक, 2001 की जनगणना के अनुसार, रेगिस्तानी और जनजाति क्षेत्रों में 250 से अधिक आबादी और अन्य क्षेत्रों में 500 से अधिक आबादी के सभी गाँवों को पक्की सड़कों से मार्च 2008 तक जोड़ दिया जायेगा।

126- मैंने गत बजट भाषण में 17 R.O.Bs 25 उपमार्गों के निर्माण का कार्य प्रारंभ करने की घोषणा की थी। इन सभी के निर्माण हेतु स्वीकृतियां जारी कर दी गई हैं। 8 R.O.Bs 18 उपमार्गों के निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, तथा 2 R.O.Bs 5 उप-मार्गों के निर्माण का कार्य मार्च 2007 में प्रारंभ कर दियाजायेगा। शेष रहे 7 R.O.Bs के निर्माण का कार्य भारतीय रेल से स्वीकृति मिलते ही प्रारंभ कर दिया जायेगा।

127- चंबल नदी पर बूंदी में गेंता से मखीदा तक के बीच, राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्‍या 1 पर, पुल निर्माण की मांग हाड़ौती क्षेत्र से वर्षों से लंबित चली आ रही है। परंतु, इस 30 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले पुल के लिए पर्यावरण की दृष्टि से अनापत्ति आवश्यक है। अनापत्ति प्राप्त होते ही, CRF अथवा SRF से वित्त पोषण कर, इसका कार्य प्रारंभ किया जायेगा। अब पक्ष एवं विपक्ष दोनों से अनापत्ति प्राप्त करने में मदद अपेक्षित है।

128- सड़कों पर इतने विशाल निवेश के बाद भी ऐसे अनेक छोटे-छोटे टुकड़े रह जाते हैं, जिन्हें जोड़ने से तुलनात्मक रूप से बहुत अधिक लाभ मिल सकता है। इन missing links को जोड़ने के लिए मैं घोषणा करती हूँ कि सरकार एक missing link सड़क निर्माण योजना आगामी वर्ष से 2 वर्ष तक चलाई जायेगी। इस योजना में दो हजार किलोमीटर की सड़कें बनेगी। इस कार्यक्रम पर सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा 200 करोड़ रुपये और राजस्‍थान राज्‍य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा 100 करोड़ रुपये व्यय किये जाकर, कुल 300 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे।

पेयजल :

129- ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में पेयजल हेतु 5 हजार 86 करोड़ रुपये का outlay निर्धारित किया गया है जो कुल योजना का 743 प्रतिशत है। दसवीं पंचवर्षीय योजना में पेयजल पर 1 हजार 931 करोड़ 84 लाख रुपये के व्यय की तुलना में, ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना का outlay, 163 प्रतिशत अधिक है।

130- राज्य की जनता को जल की महत्ता से परिचित कराने के उद्देश्य से, मेरी सरकार ने दिसंबर 2005 से राज्य स्तरीय जल अभियान शुरू किया एवं 16 मई से जल चेतना यात्रायें शुरू की गई। 9 हजार 188 ग्राम पंचायतों के 18 हजार से अधिक गांवों में जल चेतना यात्राएं निकाली गईं। इन यात्राओं के माध्यम से एक लाख 26 हजार 31 जल संग्रहण एवं संरक्षण कार्य पूरे किये गये। 11 हजार 951 रैलियों, 1 हजार 958 फिल्म प्रदर्शन, 8 हजार 626 संगोष्ठियों, 4 हजार 387 नुक्कड़ नाटकों एवं 3 हजार 638 कला जत्थों के माध्यम से जल के सदुपयोग हेतु वांछित चेतना जगाने का कार्य किया। हम 2007-08 में भी ये चेतना यात्राएं आयोजित करेंगे।

131- बाड़मेर शहर तथा जिले के 573 गाँवों में पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए 652 करोड़ रुपये की Barmer Lift Canal Water Supply परियोजना हेतु इस वर्ष वित्त पोषण कर लिया गया है। इस योजना पर वर्ष 2007-08 में काम शुरू होगा। मैंने अगले वर्ष इस योजना हेतु 84 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया है। बाड़मेर जिले में ही एक अन्य योजना, उमेद सागर- धवा-समदड़ी-खण्डप भी अगले वर्ष शुरू की जा रही है। इस योजना पर 364 करोड़ रुपये व्यय होंगे, एवं इससे 171 कस्बों एवं गाँवों को पेयजल उपलब्ध कराया जा सकेगा। इस योजना के लिए 172 करोड़ 40 लाख रुपये का प्रावधान वर्ष 2007-08 में किया जा रहा है।

132- नागौर जिले के 1 हजार 373 ग्राम व 11 कस्बों एवं बीकानेर जिले के 111 ग्राम व 2 कस्बों हेतु पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नागौर लिफ्ट पेयजल परियोजना की अनुमानित लागत761 करोड़ रुपये है। इसके प्रथम चरण की स्वीकृति दिनांक 7 अगस्‍त, 2006 को जारी की जा चुकी है। प्रथम चरण में नागौर जिले के 502 ग्राम व 5 कस्‍बे लाभान्वित होंगे। साथ ही RSMM को जायल तहसील के मातासुख-कसनाऊ में मिले खारे पानी के भंडार को desalinate कर, मीठा पानी supply किया जायेगा।

133- हमने साबरमती बेसिन में उपलब्ध अतिरिक्त पानी को फतहसागर एवं पिछौला झीलों की तरफ मोड़ने के लिए देवास-द्वितीय परियोजना पर भी काम शुरू कर दिया है। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 140 करोड़ रुपये है। इस परियोजना से उदयपुर शहर के लिए पीने के पानी की उपलब्धता बढ़ सकेगी।

134- शहरों में पेयजल आपूर्ति का कार्य नगरपालिकाओं का होना चाहिये। 73वें संविधान संशोधन की मंशा भी यही है। मेरी सरकार शहरी जल प्रदाय योजनाओं को नगरपालिकाओं को हस्तांतरित करना चाहती है। हम वर्ष 2007-08 में 5 नगरपालिकाओं में इस हस्तांतरण का कार्य प्रारंभ करेंगे।

सिंचाई :

135- मेरी सरकार के दिसंबर 2003 में सत्तारूढ होने के समय, IGNP और नर्मदा को छोड़कर, राज्य में कुल 160 योजनाएं लंबित थीं। इनमें से 2 योजनाएं 70 के दशक से, 3 योजनाएं 80 के दशक से, और 135 योजनाएं पूर्व सरकार के कार्यकाल से लंबित थीं। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि 5 परियोजनाएं 2003-04 में ही, 52 परियोजनाएं 2004-05 में व 46 परियोजनाएं 2005-06 में पूर्ण की जा चुकी हैं। इस वर्ष 28 परियोजनाएं पूरी हो जायेंगी। मैं अगले वर्ष शेष 29 परियोजनाओं को पूरा करने का प्रावधान कर रही हूं। माने पूरा बैकलॉग पिछले तीन साल के अन्‍दर हमने पूरा किया है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): पांच साल का पूरा बैक-लॉग कर दिया प्रद्युम्‍न सिंह जी।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आपके नक्‍शे में सिरोही जिला भी कहीं है या नहीं? डेढ़ घंटे के भाषण में एक बार सिरोही जिले का नाम नहीं लिया है। डेढ़ घंटे के भाषण में एक बार सिरोही जिले का नाम नहीं लिया है। अध्‍यक्ष महोदय, आप तो पढ़ा हुआ मान लो। पढ़ा हुआ मान लो इसको। पढ़ा हुआ मान लो बजट को। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बीच में नहीं। (व्‍यवधान) सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, क्‍या हो गया आपको? (व्‍यवधान)

136- राज्य में उपलब्ध सतही जल के 71 प्रतिशत उपयोग हेतु संसाधन विकसित कर लिये गये हैं। इसे बढ़ाकर चरणबद्ध तरीके से ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना की अवधि में 80 प्रतिशत तक किया जाना प्रस्तावित है। इसी क्रम में निर्माणाधीन 2 मध्यम सिंचाई परियोजनाओ; यथा सुकली-सेलवाड़ा, जिला सिरोही..., सही टाइम पर बोले हैं। बहुत बढि़या टाइम पर।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह मेरे ध्‍यान दिलाने से ध्‍यान में आया है। आपको मैं बोलता नहीं तो ध्‍यान ही नहीं आता आपको। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, विराजें। (व्‍यवधान)

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): लोगों को यह लगेगा कि आप में और हमारे बीच में सांठ-गांठ है कि आपने उठकर यह पूछा और मैंने तुरन्‍त ही आपको जवाब दिया।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय मुख्‍य मंत्री जी, पूरा प्रतिपक्ष सुन्‍नपात में है। आपने एक के बाद एक घोषणा की है, सुन्‍नपात में है। चेहरे देखो। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ..... मदन दिलावर और साथी जरूर सुन्‍नपात में हैं हम हैं या नहीं हैं.... (व्‍यवधान) 

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): इसी क्रम में निर्माणाधीन 2 मध्यम सिंचाई परियोजनाओं यथा सुकली-सेलवाड़ा, जिला सिरोही तथा बांडी-सेंदड़ा जिला जालौर एवं 29 लघु सिंचाई परियोजनाओं को इस वर्ष पूर्ण करना प्रस्तावित है।

137- दो वृहद सिंचाई परियोजनाओं, परवन, जिला झालावाड़ एवं धौलपुर लिफ्ट, जिला धौलपुर तथा तीन मध्यम सिंचाई परियोजनाओं यथा राजगढ़, मनोहरथाना, जिला झालावाड़ एवं हथियादेह, जिला बारां को केन्द्रीय जल आयोग तथा केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार से मंजूरी प्राप्त कर आरंभ किया जाना प्रस्तावित है।

138- निम्न 9 नई लघु सिंचाई परियोजनाओं का कार्य भी इस वर्ष आरंभ किया जाना प्रस्तावित है:

- किशनपुरा लिफ्ट, जिला कोटा,

- कचनारिया, जिला बारां,

- खेरिया, जिला बारां,

- धणी, जिला पाली,

- कोट, जिला पाली,

- ढ़ोबरा, जिला झालावाड,

- देवान्चली, जिला दौसा,

- लक्षमणपुरा, जिला सीकर,

- फारसवाली ढ़ाणी, जिला सीकर।

139- माही एवं चंबल बेसिन में उपलब्ध पानी के समुचित उपयोग हेतु निम्न परियोजनाओं का सर्वे व feasibility report बनवाना प्रस्तावित है:

- चंबल बेसिन में कालीसिंध वृहद सिंचाई परियोजना,

- चंबल नदी के बाड़ी क्षेत्र से चंबल का पानी लिफ्ट कर धौलपुर जिले में ले जाने की सिंचाई योजना,

- माही बेसिन में भीखाभाई सागवाड़ा केनाल आरडी 78.50 से आरडी 125 किलोमीटर तक,

- पीपलखूंट क्षेत्र के लिए माही बांध की दांई छोर से एक high level नहर,

- नरवाली वितरिका एवं भूंगड़ा केनाल के मध्य क्षेत्र को सिंचित करने हेतु भूंगड़ा नहर का विस्तारीकरण

- माही बांध के सेडल डेम से निकाल कर एक नई upper high level नहर

140- नन्दसमंद से राजसमंद बांध में पानी की आवक को बढाने के लिए 34 किलोमीटर लंबी खारी फीडर का जीर्णोद्धार एवं पुनर्वास कार्य, जिसकी लागत लगभग 6 करोड़ रुपये है, इस वर्ष आरंभ कर आगामी 2 वर्षों में पूरा किया जाना प्रस्तावित है। इस कार्य से राजसमंद झील में पानी की मात्रा में बढ़ोतरी होगी। पानी की आवक बढ़ने से राजसमंद शहर की पेयजल समस्या का निराकरण होगा एवं कृषकों को लाभ होगा।

141- इन्दिरा गांधी नहर परियोजना के बकाया कार्य पूर्ण करने एवं आधुनिकीकरण करने हेतु 300 करोड़ रुपये की लागत की चार वर्षीय योजना पर कार्य शुरू कर दिया गया है।

142- वर्ष 2005-06 में, पहली बार, केनाल संपदाओं के रख-रखाव के लिए 42 करोड़ रुपये का योजनागत प्रावधान किया गया। Assets के रख-रखाव की महत्ता देखते हुए, अब इंदिरा गांधी नहर एवं चंबल परियोजनाओं का चरणबद्ध तरीके से revamping किया जाना प्रस्तावित है। इसके तहत वर्तमान में संचालित इन परियोजनाओं के नहरी तंत्र में आवश्यक सुधार हेतु computerized जल वितरण प्रणाली सिस्टम, प्रभावी संचार माध्यम उपलब्ध कराने एवं नहरों के जीर्णोद्धार एवं पुनरूद्धार के कार्य किये जायेंगे। इन कार्यों के लिए इस वर्ष 50 करोड़ रुपये उपलब्ध कराये जायेंगे।

143- गंग नहर एवं इंदिरा गांधी नहर प्रणालियों को अधिक जल उपलब्ध कराने की दृष्टि से वर्षों से क्षतिग्रस्त फिरोज़पुर फीडर, मल्लेवाली हैड एवं इससे निकलने वाली बीकानेर नहर तथा इंदिरा गांधी फीडर की मरम्मत और जीर्णोंद्धार के कार्य कराये जाने प्रस्तावित हैं। इनसे गंग कैनाल में पड़ोसी देश को व्यर्थ बहकर जाने वाले 200 से 300 cusecs तथा इंदिरा गांधी फीडर को वर्षा ऋतु में 1 हजार cusec अतिरिक्त पानी मिल सकेगा। इन कार्यों के लिए आगामी वर्ष 3 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया जायेगा।

144- Rajasthan Community and Business Alliance on Water के तहत विभिन्न उद्यमियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं ने रुचि दिखाई है। इसके तहत अनेक प्रकार के कार्य जैसे लवणीय जल को शुद्ध करना, दूषित जल को शुद्ध कर पुन: उपयोग में लाना, तालाबों में से silt निकालना, भूमिगत टैंकों का निर्माण कार्य, और गंग- भाखड़ा कैनालों पर water courses को पक्का करने के कार्य किया जाना प्रस्तावित है। निजी जन-सहभागिता को प्रोत्साहित करने के लिए जल सहभागिता योजना भी आरंभ किया जाना प्रस्तावित है। इस वर्ष इन कार्यों के लिए 5 करोड़ रुपये उपलब्ध कराये जायेंगे।

145- इंदिरा गांधी नहर परियोजना के सिंचित क्षेत्र में निर्मित खालों को आंधियों के दौरान मिट्टी भरने से बचाने हेतु तीन वर्षों में विभिन्न संचालित योजनाओं के अंतर्गत प्राथमिकता देते हुए खाला कवरिंग के कार्य करवाये गये हैं जिससे काश्तकारों को सिंचाई हेतु निरंतर पानी मिल सका एवं बंपर फसलें हुईं। इस वर्ष भी इस कार्य पर 3 करोड़ रुपये का व्यय किया जाना प्रस्तावित है ताकि काश्तकारों को सिंचाई हेतु पानी निरंतर उपलब्ध होता रहे।

146- इंदिरा गांधी नहर परियोजना के स्वीकृत चकों में पूर्व में कराये गये खालों के निर्माण से शेष रहे मुरब्‍बों में भी चरणबद्ध रूप से खालें बनाये जाना आवश्यक है, जिससे परियोजना के द्वितीय चरण के अंतिम छोर के काश्तकारों को सुनिश्चित पानी मिले। इन कार्यों के लिए सामग्री-राशि राज्य सरकार उपलब्ध करायेगी, और श्रम अंशदान की व्यवस्था रोजगार गारंटी कार्यक्रम, राहत कार्यों, SGRY अथवा कृषक द्वारा स्वयं की जायेगी। इस कार्यक्रम पर आगामी वर्ष में 20 करोड़ रुपये उपलब्‍ध करवाये जायेंगे।

147- अगस्त 2006 में State Partnership Programme के तहत European Commission से लगभग 450 करोड़ रुपये का वित्तीय अनुबंध कर प्रथम किश्त की राशि 29 करोड़ 28 लाख रुपये प्राप्त की जा चुकी है। इस राशि से इस वर्ष में राज्य में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन हेतु पंचायती राज संस्थाओं तथा जल संग्रहण, एवं उपयोग से संबंधित सभी विभागों की क्षमताओं का सशक्तीकरण किया जायेगा एवं जल उपभोक्ताओं में जागरूकता पैदा की जायेगी।

148- राज्य में drip एवं sprinkler सिंचाई पद्धति को बढ़ावा देने के लिए वृहद एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं में चरणबद्ध तरीके से वांछित infrastructure जैसे डिग्गियों का निर्माण, भूमिगत पाईप्स डालने इत्यादि की व्यवस्था करना आवश्यक है। ऐसे infrastructure और खेतों पर लगने वाले drip एवं sprinkler सिंचाई पद्धति के लिए एक subsidy योजना सिंचाई एवं कृषि विभाग द्वारा तैयार की जायेगी जिसके तहत पहले चरण में बीसलपुर परियोजना से सिंचित क्षेत्र को लिया जायेगा।

शहरी विकास :

149- Jawaharlal Nehru National Urban Renewal Mission के अंतर्गत जयपुर शहर के लिए 469 करोड़ रुपये के Bus Rapid Transport System Project, 12 करोड़ रुपये के Global Art Sqare, 188 करोड़ रुपये के अजमेर बीसलपुर water supply प्रोजेक्ट, 200 करोड रुपये के sewerage system प्रोजेक्ट, 13 करोड़ रुपये की लागत से जयपुर के ठोस कचरा प्रबंधन एवं 6 करोड़ 38 लाख रुपये के heritage conservation project की सैद्धांतिक स्वीकृति भारत सरकार से प्राप्त कर ली गई है। साथ ही छोटे एवं मंझले कस्‍बों की विकास योजना  UIDSSMT  के तहत भी 18 शहरों की 78 करोड़ 78 लाख रुपये की परियोजनाओं की स्वीकृति भी प्राप्‍त कर ली गई है। एकीकृत आवास एवं slum विकास कार्यक्रम के अंतर्गत 15 शहरों की 59 करोड़ 45 लाख रुपये की योजनाएं स्‍वीकृत हुई हैं।

150- शहरी क्षेत्रों में बहुमंजिली इमारतों एवं flats के बढ़ते विकास को देखते हुए इनके मालिकों को स्वामित्व अधिकार प्रदान करने एवं इनके common areas facilities के समुचित रख-रखाव आदि हेतु एक कानून की आवश्यकता है। अत: इसी विधान सभा सत्र में राजस्थान apartments स्वामित्व विधेयक प्रस्तुत किया जायेगा। मुझे आशा है कि इस कानून से flats एवं apartments के स्वामियों एवं निवासियों को लाभ होगा।

151-  जयपुर शहर को एक सुगम एवं आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए Bus Rapid Transport System अपनाकर उच्च तकनीक की बसों को समर्पित लेन पर तीव्र गति से चलाया जायेगा। इस परियोजना के प्रथम  चरण में लगभग 42 किलोमीटर के कुल 4 corridors विकसित किये जायेंगे। इस परियोजना की कुल लागत 619 करोड़ रुपये है, जिसमें से बसों के संचालन हेतु आवश्यक 150 करोड़ रुपये निजी भागीदारी से उपलब्ध होंगे। इस योजना का क्रियान्वयन जून 2008 तक कर लिया जायेगा।

152- जयपुर देशी व विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहा है। कुछ माह पूर्व यहां पर आयोजित ICC Champions Trophy के मैचों ने जयपुर को world map पर ला दिया है। जयपुर एक महत्त्वपूर्ण व्यावसायिक केन्द्र भी है और इस क्षेत्र में SEZ जैसे initiatives लेकर इसमें बढ़ोतरी करनी है। इसलिए इस ओर एक कदम और बढ़ाते हुए मैं घोषणा करती हूँ कि जयपुर को चरणबद्ध तरीके से wi-fi सिटी बनाया जायेगा, जिससे कि शहर के विभिन्न भागों में कोई भी व्यक्ति internet को wireless के माध्यम से access  कर सकेगा।

153-  राज्य सरकार राज्य के अन्य बड़े शहर यथा उदयपुर, जोधपुर व कोटा में भी शहरीय परिवहन व्यवस्था का सुधार करना चाहती है। इस हेतु इन तीनों शहरों में city level transport companies  का गठन किया जा चुका है। कोटा शहर में उन्नत गुणवत्ता की बसों का संचालन दिनांक 26 जनवरी 2007 से प्रारंभ हो चुका है। शहरी या suburban transport हेतु बेरोजगार स्नातकों के स्वयं सहायता समूह यदि permit लेना चाहे तो सरकार अथवा स्थानीय निकाय द्वारा 40 हजार रुपये तक का अनुदान दिये जाने की एक योजना परिवहन विभाग शीघ्र ही जारी करेगा।

154-  शहरी एवं कई ग्रामीण क्षेत्रों में मृतकों के दाहकर्म के लिए जगह एवं अन्य सुविधाओं की कमी आने लगी है। मृतकों का गरिमामय दाह संस्कार ही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है। राज्य सरकार आगामी वर्ष में बैकुंठ द्वार मुक्तिधाम योजना प्रारंभ कर, इस हेतु 3 करोड़ रुपये की "seed money" उपलब्ध करा, नगरपालिकाओं और पंचायतों की सहभागिता से इस योजना का क्रियान्वयन करेगी। आवश्यकतानुसार योजना के लिए अतिरिक्‍त राशि उपलब्‍ध कराई जायेगी।

155-  विरासत एवं पर्यटन महत्त्व के लिए चयनित 30 शहरों हेतु दिसंबर 2004 में लागू की गई विरासत संरक्षण एवं विकास योजना में वर्ष 2005-06 में 22 शहरों को 9 करोड़ 90 लाख रुपये तथा वर्ष 2006-07 में 12 नगर निकायों को 5 करोड़ 50 लाख रुपये आवंटित किये गये। इस राशि से इन शहरों में संपर्क सड़कें, divider, median, signage, heritage स्थलों के आस-पास के क्षेत्र का विकास एवं सुविधाएं आदि के कार्य कराये जा रहे हैं। इस योजना में वर्ष 2007-08 में 10 करोड़ रुपये व्यय करना प्रस्तावित है।

156-  राजस्थान में कुल 2 हजार 653 सर्वेशुदा कच्ची बस्तियां हैं, जिनमें लगभग 5 लाख परिवार निवास करते हैं। ऐसी बस्तियों की भूमि को नियमित रिहायशी क्षेत्र में विकसित करने, और इन्हें पानी, बिजली आदि की व्यवस्था उपलब्ध करवाने की दृष्टि से, आवश्यक कानूनी सुधार कर, कच्ची बस्ती विकास कार्यक्रम क्रियान्वित करें।

157-  शहरों में रहने वाले कमजोर आय वर्ग के लोगों को 30 वर्ग मीटर के भू-खण्ड में निर्मित आवास उपलब्ध करवाने की दृष्टि से घरोंदा योजना अगस्त 2004 में जयपुर शहर में प्रारंभ की गई थी। जनवरी 2007 तक इस योजना का विस्तार 25 शहरों में किया जाकर 4 हजार 559 आवासों का निर्माण प्रारंभ किया गया। इसमें से 3 हजार 135 आवास पूर्ण कर, 3 हजार 111 आवासों का आवंटन किया जा चुका है। इस योजना के प्रति उपभोक्ताओं के उत्साह को देखते हुए वर्ष 2007-08 में इसे राज्य के 18 और छोटे कस्बों और नगरों में लागू किया जाएगा तथा भूमि की कमी को देखते हुए बहु-मंजिले आवासों के निर्माण को प्राथमिकता दी जायेगी।

158- सरकार द्वारा उदयपुर की पिछौला एवं फतहसागर, माउन्टआबू की नक्की एवं अजमेर की आनासागर एवं पुष्कर झीलों के सौंदर्यकरण व संरक्षण हेतु जल शुद्धिकरण, catchment area treatment एवं sewerage निकास के कार्य कराये जायेंगे। इन परियोजनाओं पर 225 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे।

159- गंगानगर शुगर मिल्स का चीनी कारखाना गंगानगर शहर के मध्य स्थापित है जिससे कि वहां के निवासियों को काफी असुविधा होती है। इसको वहां से हटाने की मांग निरंतर आती रहती है। मैं घोषणा करती हूँ कि इस मिल को वहां से हटाकर, एक नई मिल की स्थापना की जायेगी, और इस स्थान को एक बढ़िया रिहायशी-वाणिज्यिक परिसर के रूप में विकसित किया जायेगा।

उपभोक्‍ता एवं आपूर्ति:

160. उपभोक्‍ता संगठनों की लम्‍बे समय से यह मांग रही है कि उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण हेतु एक पृथक उपभोक्ता मामलात विभाग की स्थापना की जाये। वर्ष 2007 में उपभोक्ता एवं आपूर्ति विभाग को re-organise कर एक नये Directorate of Consumer Affairs की स्थापना की जायेगी। प्रत्येक जिले में उपभोक्ता सलाहकार समितियों का गठन भी किया जायेगा। मैं उम्मीद करती हूँ कि यह समितियां और उपभोक्ता संगठन वास्तव में उपभोक्ताओं में जागरूकता पैदा करेंगे, क्योंकि असली protection जागरूकता से ही हो सकता है।

निवेश व औद्योगिक विकास:

161-  राज्य में रोजगार के अवसर सृजित करने हेतु औद्योगिक विकास एवं निवेश को सरकार लगातार प्रोत्साहित कर रही है। सरकार की नीतियों एवं प्रयासों के कारण वर्ष 2006-07 में एक लाख रोजगार अवसर सृजन के लक्ष्य के विपरीत हमने माह जनवरी 2007 तक 1 लाख 20 हजार से अधिक रोजगार अवसर सृजित किये। Honda Siel जैसे बड़े निवेश का इकरार होने को है। साथ में, वर्ष 2006-07 में दिसंबर 2006 तक 10 हजार 640 नये लघु एवं कुटीर उद्योगों का स्थाई पंजीयन किया गया, जिसमें 450 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश हुआ है और करीब 44 हजार व्यक्तियों को रोजगार सुलभ हुआ है।

162-  हम रोजगार के लिए अति महत्त्वपूर्ण लघु उद्योग क्षेत्र में जाने-माने अनुभवी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से राय लेकर, एक एकीकृत एवं समग policy package आगामी वर्ष में लायेंगे। राज्य में औद्योगिकी विनियोजन को प्रोत्साहन देने के लिए चल रही Rajasthan Investment Promotion Scheme में भी और सुधार की आवश्यकता है। हम आंध्र प्रदेश एवं अन्य राज्यों की investment promotion policies का अध्ययन कर, आवश्यकतानुसार RIPS में संशोधन करेंगे।

163-  राज्य के दस्तकारों के उत्पादों के विपणन हेतु प्रदेश में 10 ग्रामीण हाट स्थापित किये गये जिनके जरिये गत तीन वर्षों में 44 हजार 219 लघु उद्यमियों एवं दस्तकारों को अपने उत्पाद सीधे विपणन करने के अवसर मिले हैं। ग्रामीण हाट विकास कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए राज्‍य के 12 जिलों-  बांसवाड़ा, बाड़मेर, चूरू, धौलपुर, झालावाड़, करौली, सवाईमाधोपुर, सीकर (खाटूश्यामजी),टोंक एवं बूंदी में ग्रामीण हाट स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। इन सभी ग्रामीण हाटों के लिए संबंधित जिलों में यथोचित स्थान पर भूमि उद्योग विभाग को आवंटित कर दी गई है।

164-  वर्ष 2005-06 के बजट में कोटा डोरिया साड़ी क्लस्टर;रंगाई एवं छपाई क्लस्टर, आकोला, चर्म रंगाई एवं चर्म उत्पाद क्लस्टर, बानसूर;हथकरघा क्लस्टर, दरीबा एवं पत्थर की मूर्तिकला क्लस्टर, तलवाड़ा व वर्ष 2006-07 में 10 क्लस्टर्स जैसलमेर स्टोन क्लस्टर, मूर्तिकला क्लस्टर, गोला का बास, कांच कशीदा क्लस्टर, धनाउ, हनी क्लस्टर, भरतपुर, आरी तारी क्लस्टर, नायला, गोटा लूम क्लस्टर, अजमेर, लेदर जूती क्लस्टर, भीनमाल, टाई एण्ड डाई क्लस्टर, जोधपुर, टेरा कोटा क्लस्टर, रामगढ़ एवं टेरा कोटा क्लस्टर, मोलेला को विकसित करने की घोषणा की गई थी। आगामी वर्ष 2007-08 में 10 और नये क्लस्टरों का विकास कार्य प्रारंभ किया जायेगा। इस हेतु 4 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

165-  राज्य में हस्तशिल्प विपणन को प्रोत्साहन देने हेतु जयपुर शहर की मिर्जा इस्माईल रोड़ पर एक भव्य Mall कार्यशील किया जा रहा है। इसी तरह जलमहल के सामने दिल्ली हाट की तर्ज पर एक वृहद क्राफ्ट हाट को भी इसी माह कार्यशील कर दिया जायेगा। आगामी वर्ष में हम दिल्‍ली, मुम्‍बई एवं उदयपुर के हैण्‍डलूम शो-रूमों के   पुनर्निर्माण का कार्य पूरा करेंगे। साथ ही, राजस्थली के नई दिल्ली स्थित शो-रूम का भी नवीनीकरण किया जायेगा।

166- भिवाड़ी नीमराना क्षेत्र में तेजी से औद्योगिक और integrated township का विकास होने की संभावना अब स्पष्ट रूप से प्रकट हो रही है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के इस महत्त्वपूर्ण इलाके का सर्वांगीण विकास हो सके, इस हेतु भिवाड़ी औद्योगिक विकास अभिकरण को वर्ष 2007-08 में नया mandate एवं अधिकार देकर पुनर्जीवित किया जायेगा।

167- राजस्थान वित्त निगम ने छोटे एवं first generation उद्यमियों को स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। निगम के ऋण देने की क्षमता को बढ़ाने की दृष्टि से, राज्य सरकार निगम को अतिरिक्त equity देने पर विचार करेगी।

पर्यटन, कला एवं संस्‍कृति:

168-  भगवान का स्मरण हमारे मार्ग को प्रशस्त करता है।  हालांकि हमारे समाज में धर्म पर आस्था का एक विशेष स्थान है, दुर्भाग्यवश हमारे मंदिरों का रख-रखाव हमारी इस आस्था को नहीं दर्शाता है। पिछले दो वर्षों से विभिन्न मंदिरों और धामों के जीर्णोद्धार और सुधारों के लिए मेरी सरकार ने भरपूर प्रयास किये हैं। नाथद्वारा, सांवलिया जी और त्रिपुरा सुंदरी मंदिरों का वर्तमान में चालू जीर्णोद्धार इसके उदाहरण हैं। आगामी वर्ष में भी मंदिरों के सुधार हेतु, गिर्राज जी की परिक्रमा मार्ग के सुधार और सौंदर्यकरण के लिए, और गौतम ऋषि धाम, सिरोही में सुधार हेतु, आदि सभी कार्यों हेतु 5 करोड़ रुपये उपलब्‍ध कराये जायेंगे।

169-  राज्य की होटल नीति 16 जून 2006 को जारी की गई एवं इस नीति के परिणामस्वरूप 500 करोड़ रुपये के प्रस्ताव अनुमोदित हुए हैं। इस होटल नीति में rural and heritage tourism को बढ़ावा देने के लिए संशोधन किया जायेगा।

170-  महिलाओं को, अकेले या समूह में, पर्यटन अथवा अन्य कार्य से, यात्रा करने को बढ़ावा देने हेतु मैं घोषणा करती हूँ कि यदि महिलाएं समूह में राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम से यात्रा करती हैं, तो उन्हें टिकटों पर 25 प्रतिशत छूट दी जायेगी। साथ ही, राजस्थान राज्य पर्यटन निगम के होटलों में महिला के अकेले या महिलाओं के समूह में ठहरने पर उन्हें कमरे के किराये में 25 प्रतिशत रियायत देय होगी।

171-  माननीय सदस्यों को विदित है कि हमारी सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक सम्‍पदा unique है, जो दुर्भाग्‍यवश उचित संरक्षण के अभाव में क्षतिग्रस्त हो रही है। पिछले 3 वर्षों में पुरा संपदाओं के जीर्णोद्धार, संरक्षण एवं सुरक्षा की ओर मेरी सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। Heritage Protection and Promotion Authority एवं Amer Development & Management Authority ने काम करना शुरू कर दिया है। जलेब चौक को Global Art Square मार्केट के रूप में विकसित करने के लिए वहां संचालित अधिकतर राजकीय व अन्य कार्यालयों को अन्यत्र स्थानान्तरित कर दिया गया है। वर्ष 2007-08 में यह market शुरू कर दिया जायेगा। इसी कड़ी में राज्य सरकार एक महत्त्वपूर्ण अध्याय जोड़ने जा रही है। हवामहल अथवा जलेब चौक में एक Institute of Heritage Conservation खोला जायेगा। यह संस्थान craftsmen and young professionals को पुरा संपदाओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन कार्यों में प्रशिक्षण देगा, सलाहकार सेवाएं प्रदान करेगा और अनुसंधान का कार्य भी करेगा।

172-  राज्य में विभिन्न भाषाओं के विकास के लिए अकादमियां बनाई गई हैं। लोक-कलाओं को प्रोत्साहन देने के लिए लोक-कला अकादमी है। इन अकादमियों एवं कला मंडलों का प्रशासनिक नियंत्रण कई विभागों में बंटा हुआ है। मैं साहित्य, भाषा विकास एवं लोक कलाओं के प्रोत्साहन हेतु बनी सभी अकादमियों एवं कला मंडलों को कला एवं संस्कृति विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में लाने की घोषणा करती हूं। इसके फलस्‍वरूप कला एवं संस्‍कृति विभाग का नाम भी कला, साहित्य एवं संस्कृति विभाग हो जायेगा। साथ ही, मैं पंजाबी अकादमी का मुख्‍यालय गंगानगर करने की घोषणा करती हूं।

173-  कालबेलियों का नृत्य हर व्यक्ति को मुग्ध करने वाला है। दुर्भाग्यवश यह एक dying art प्रतीत हो रहा है। इसके सरंक्षण ओर पुनर्जीवन के लिए मैं घोषणा करती हूँ कि जयपुर में हाथियों के गाँव के पास एक कालबेलिया स्कूल ऑफ डांस का वर्ष 2007-08 में स्थापित किया जायेगा। आने वाले वर्षों में इस स्कूल का विस्तार कर अन्य कलाओं को भी लाभान्वित एवं प्रोत्साहित किया जा सकेगा। इस क्रम में, मैं यह भी कहना चाहूंगी कि Traditional Arts and Crafts को प्रोत्साहित करने हेतु और इस युग में relevant रखने की दृष्टि से Indian Institute of Crafts and Designs  को निजी भागीदारी से strengthen किया जायेगा।

खान एवं पेट्रोलियम:

174-  राजस्थान खनन प्रधान राज्य है। राज्य के कई माइनिंग क्षेत्रों में सड़कों की हालत अच्छी नहीं है। मैं माइनिंग क्षेत्रों  में सड़कें सुधारने का कार्यक्रम क्षेत्र की माइनिंग एसोसियेशन के साथ 50:50 पार्टनरशिप आधार पर मिलकर चलाना चाहती हूँ। इस कार्यक्रम के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान वर्ष 2007-08 में किया जायेगा। आवश्‍यकता होने पर और धनराशि उपलब्‍ध कराई जायेगी।

Governance एवं प्रशासनिक सुधार:

175-  राज्य की नगरपालिकाएं वित्तीय दृष्टि से सशक्त बन सकें, इसके लिए उनके द्वारा अपनी करारोपण व राजस्व शक्तियों का उपयोग करते हुए स्वयं का राजस्व इकट्ठा करना आवश्यक है। राज्य सरकार नगरपालिकाओं को स्वयं के संसाधन विकसित करने के लिए incentivise करना चाहती है। मैं घोषणा करती हूँ कि वर्ष 2007-08 में अर्जित किये स्वयं के tax and non-tax आमदनी में 2006-07 की अपेक्षा प्रत्येक अतिरिक्त रुपये की आय का 50 प्रतिशत incentive के रूप में इन नगरपालिकाओं को राज्य सरकार अतिरिक्त अनुदान के रूप में देगी। चूरू नगरपालिका को 2 करोड़ 50 लाख रुपये का विशेष अनुदान दिया जायेगा।

176-  पंचायती राज नियमों में पात्र वर्गों के परिवारों को नि:शुल्क रिहायशी भू-खण्ड आवंटन का अधिकार केवल राज्य सरकार को ही है। पंचायतों को सशक्त करने की दृष्टि से राज्य सरकार गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रहे परिवारों को नि:शुल्क भू-खण्ड आवंटन करने की शक्तियां पंचायतों को देगी।

177-  पुलिस एवं यातायात व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण हेतु निम्न प्रावधान किये जायेंगे:-

- उपखंड स्तर पर निरीक्षक स्तर के थाने

- विभिन्न श्रेणी की कुल 150 नई चौकियां। प्रत्येक चौकी पर 1 Sub-Inspector 6 Constable के पद होंगे,

- यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए 750 होमगार्ड्स

- होमगार्ड्स का duty भत्ता बढ़ाकर मैंने पिछले वर्ष 100 रुपये प्रतिदिन किया था। आने वाले वित्तीय वर्ष से इसे 110 रुपये प्रतिदिन करने की घोषणा करती हूँ।

178-  वर्ष 2003-04 से पूर्ववत अनेक वर्षों मे कांस्टेबलों की भर्ती नहीं की गई थी। पिछले दो वर्षों में 6 हजार कांस्टेबल भर्ती करने की सहमति सरकार दे चुकी है। अब पुराने रिक्त पदों और सेवानिवृत्ति से खाली हुए पदों को ही भरने की आवश्यकता है। अत: मैं घोषणा करती हूँ कि अगले दो वित्तीय वर्षों में 5 हजार 200 कांस्टेबलों की भर्ती की जायेगी, जो कि 1300-1300 की चार खेपों में जून 2008 तक पूरी की जायेगी।

179-  राज्य में हवाला के माध्यम से अपराधियों एवं षडयंत्रकारियों की धन पूर्ति और counterfeit money को रोकने के लिए पुलिस अधीक्षक की अध्यक्षता में एक विशेष सैल, आवश्यक man power और सुविधाओं सहित, स्थापित किया जायेगा।

180- जिस प्रकार पुलिस में कांस्टेबल की कमी उत्पन्न हुई उसी तरह राज्य की जेलों में भी प्रहरियों की भर्ती नहीं होने से उनकी कमी जेल की सुरक्षा को खतरा पैदा कर रही है। राजस्थान राज्य के हजारों युवक सेना में कार्यरत हैं। इनमें से सैंकड़ों 40 वर्ष से कम उम्र में सेवानिवृत्त होकर वापस राजस्थान आ जाते हैं। इनको पुन: नियुक्ति देने और जेलों की सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दृष्टि से नियमों में संशोधन कर यह प्रावधान किया जायेगा कि 40 वर्ष से कम उम्र के सेवानिवृत्त सैनिकों की नियुक्ति इन पदों पर हो सके, जो कि 50 वर्ष में सेवानिवृत्त हो जायेंगे। इससे सैनिकों को 10 से 12 वर्ष का नियोजन मिल पायेगा और इनकी fitness के कारण और पचास वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने के कारण जेलों की सुरक्षा अधिक तत्पर हो जायेगी। इसी तर्ज पर, stationary duties के लिए पुलिस में भी 800 भूतपूर्व सैनिकों की भर्ती की जायेगी।

181-  काफी समय से नई भर्ती नहीं होने से वनों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त forest guards उपलब्ध नहीं हैं। अत: वन विभाग को पुलिस और जेल विभाग की तर्ज पर भूतपूर्व सैनिकों से forest guards के अधिकतम 1 हजार पद भरने की कार्यवाही की जायेगी।

182-  राज्य में नये जिले बनाने की मांग उठती रही है। विभिन्न प्रस्तावों का परीक्षण एक expert committee द्वारा किया जा रहा है। राज्य में अभी विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन के प्रभावी होने की तिथि अधिसूचित नहीं हुई है। इन कारणों से नये जिलों की मांगों पर निर्णय लिये जाने के लिए यह उपयुक्त समय नहीं है। परंतु, प्रदेश में जनजातियों की विशेष आवश्यकताओं एवं आकांक्षाओं का आदर करते हुए, मैं प्रतापगढ़ को नया जिला बनाने की घोषणा करती हूँ।

183-  न्यायालयों में बढ़ते हुए मुकदमों की संख्या को देखते हुए आगामी वर्ष में 8 नये सिविल अथवा ACJM कोर्ट निम्न स्थानों पर स्थापित किये जायेंगे:

मांडल, भीलवाड़ा

जालौर

श्रीमाधोपुर, सीकर

मनोहरथाना, झालावाड़

बाड़ी, धौलपुर

केकड़ी, अजमेर

कुम्हेर, भरतपुर

झालरापाटन, झालावाड़

184-  आम आदमी और देश व विदेशी निवेशकों को वास्तविक रूप में सस्ता और जल्दी न्याय मिले, प्रदेश की प्रगति के लिए यह सुनिश्चित कराया जाना अति आवश्यक है। केवल नये न्यायालय खोलना पर्याप्त नहीं है। देरी के कारण जानने, पुराने कानून और नियमों को चिन्हित करने, alternative dispute mechanism को सशक्त करने, और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुधारने के लिए मेरी सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। मुझे आशा है कि इस समिति की सिफारिशों के आधार पर, हम प्रक्रियात्मक एवं मूल सुधार ला सकेंगे।

विज्ञान, सूचना एवं प्रौद्योगिकी:

185-  राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा एक Incubation Center स्थापित करने पर 1 करोड़ 19 लाख रुपये व्यय करना प्रस्तावित है। राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी शिक्षा को रोजगारोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से बिरला इंस्टीटयूट आफ साइंटिफिक रिसर्च के सहयोग से जयपुर में एक Bio-Informatics Center के लिए राज्य सरकार द्वारा एक करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जायेगी।

186-  राज्य सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन जोधपुर स्थित state remote sensing application centre राज्य में सुदूर संवेदन तकनीक के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के विकास व विभिन्‍न योजनाओं के निर्माण में अपनी सहभागिता निभा रहा है। इस  वित्तीय वर्ष में हिन्दी में राज्य आयुर्वेदिक मेडिसनल प्लांट एटलस प्रकाशित की गई है। राज्य के सभी जिलों के प्राकृतिक संसाधनों-- भूमि उपयोग, मृदा भू-जल, सतही जल आदि का digital database आगामी वित्तीय वर्ष में पूर्ण कर लिया जायेगा।

187- राजकीय शैक्षणिक संस्थानों में कम्‍प्यूटर कैफे, ट्रेनिंग व कोचिंग इत्यादि की सुविधाएं विकसित करने के लिए शिक्षण संस्थानों की भूमि को निजी अथवा एनजीओ क्षेत्र की संस्थाओं को लीज़ पर दिया जा सकेगा। राजकीय कार्यालयों में e-kiosk, ATM, फोटो कोपिंग, फार्म वितरण इत्यादि की सुविधाएं निजी क्षेत्र की भागीदारी से  विकसित की जा सकेगी। इससे जनता को सुविधा भी होगी और इन संस्थानों के रख-रखाव हेतु कुछ निजी आय भी मिल सकेगी।

188-  मैंने आज अनेक नये कार्यक्रमों की घोषणा की है। इनकी अनुमानित लागत 1 हजार 200 करोड़ रुपये है। कोई यह न समझे कि ये खोखली घोषणाएं हैं। मैंने अगले वर्ष के लिए 1 हजार 251 करोड़ रुपये का एकमुश्त प्रावधान नवाचार योजनाओं को लागू करने के लिए कर दिया है। अत: ये सभी योजनाएं पूर्ण रूप से वित्त पोषित हैं।

कर प्रस्‍ताव:

189- अध्यक्ष महोदया, आपकी अनुमति से मैं अब सदन के समक्ष कर प्रस्ताव प्रस्तुत कर रहीं हूँ।

वैट:

190-  सदन को विश्वास में लेकर हमने राज्य के उद्योग, व्यापार एवं निर्यात के हितों को दृष्टिगत रखते हुए, 1 अप्रेल, 2006 से राज्य में वैट व्यवस्था लागू की थी। मुझे सदन को यह बताते हुए प्रसन्नता है कि हमने वैट व्यवस्था में सफलतापूर्वक एवं सकारात्मक परिणामों के साथ switch over कर लिया है। वैट योजना लागू करने के उपरान्त राज्य में पंजीकृत व्यवहारियों की संख्या बढ़ी है। 2006-07 में पिछले वर्ष की तुलना में बिक्री कर से आय में 20 प्रतिशत वृद्धि होने की  सम्भावना है।

191-  नई प्रणाली में switch over करने पर उत्पन्न होने वाली प्रारम्भिक कठिनाइयों को मध्य नजर रखते हुए, हमने राज्य स्तर पर एक समिति का गठन एक वर्ष के लिये किया था। मुझे सदन को यह अवगत कराते हुए हर्ष है कि इस समिति ने राज्य में वैट व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

192-  वैट स्कीम लागू होने के उपरान्त, उपभोक्ताओं एवं खरीददारों द्वारा cash memo पर खरीद को प्रोत्साहित करने के लिये मैं वैट धन लक्ष्‍मी  नाम से एक योजना आगामी वित्तीय वर्ष से प्रारम्भ करना प्रस्तावित करती हूँ। इस योजना के तहत 100 या 100 रूपये से अधिक मूल्य के माल के VAT invoice पर lottery द्वारा उपभोक्ताओं को उपहार राशि दी जायेंगी।

वैट सरलीकरण:

193-  हमारी सरकार का सदैव यह प्रयास रहा है कि कर संबंधी प्रक्रियाएं सरल एवं सुविधाजनक रहें। किसी भी व्यवस्था में बदलाव होने पर teething problems आना स्‍वाभाविक है। वैट व्‍यवस्‍था लागू होने पर हमने समय-समय पर आयी समस्याओं का निराकरण किया। यह एक निरन्तर प्रक्रिया है। इसी क्रम में सरलीकरण हेतु मैं निम्न और प्रस्‍ताव कर रही हूं।

194-  वैट प्रावधानों के अधीन विभिन्न प्रकार के घोषणा पत्रों को प्रस्तुत करने की समय सीमा बढ़ाने की व्यवस्था नहीं है। उद्योग व्यापार द्वारा यह निरन्तर मांग की जा रही है कि घोषणा पत्रों को प्रस्तुत करने की समय सीमा को बढ़ाया जावे, जिससे कि उन्हें अनावश्यक कर एवं ब्याज का भार नहीं उठाना पड़े। अत: 31 मार्च, 2007 तक पारित कर निर्धारणों से संबंधित घोषणा पत्रों को 30 जून, 2007 तक प्रस्तुत करने की सुविधा दिया जाना प्रस्तावित है। साथ ही वाणिज्यिक कर आयुक्त को, आवश्यक होने पर, घोषणा पत्र प्रस्तुत करने की अवधि को एक वर्ष तक बढ़ाने के लिये अधिकृत करना भी प्रस्‍तावित है।

195-  व्यवहारियों द्वारा returns प्रस्तुत करने की समय सीमा को बढ़ाने बाबत वर्तमान में राज्य सरकार को अधिकारिता प्राप्त है। व्यवहारिक कठिनाइयों को दृष्टिगत रखते हुए राजस्थान वैट अधिनियम की धारा 21 में संशोधन किया जाकर, यह अधिकार वाणिज्यिक कर आयुक्त को दिया जाना प्रस्तावित है।

196- Returns के साथ संलग्न करने वाली विभिन्न सूचनाओं तथा return forms की विभिन्न प्रविष्टियों के संबंध में व्यवहारियों से ज्ञापन प्राप्त हुए हैं। इनके परीक्षण पश्चात return forms में आवश्यक संशोधन किये जा रहे हैं तथा profit & loss account प्रस्तुत करने की समय सीमा बढ़ाई जा रही है। profit & loss account अब कम्पनियों द्वारा वित्तीय वर्ष समाप्ति के 9 माह में एवं अन्य व्यवहारियों द्वारा वित्तीय वर्ष समाप्ति के 6 माह में प्रस्तुत किया जा सकेगा।

197-  वर्तमान में आढ़तियों द्वारा principal का माल बेचने पर वैट चुकाने का दायित्व आढ़तियों का है। जबकि इस माल का input tax credit principal को मिलता है। अब नियमों में संशोधन कर माल पर वैट चुकाने का दायित्व भी principal का किया जाना प्रस्तावित है। ताकि आढ़तियों की refund की समस्या का समाधान किया जा सके।

198-  पेट्रोल, डीजल प्रथम बिन्दु पर कर योग्य होने से वैट की परिधि से बाहर है, जबकि पेट्रोल पम्प के धारकों द्वारा वैट योग्य वस्तुओं की बिक्री भी की जाती है। अत: पेट्रोल पम्प धारकों द्वारा उनके द्वारा डीजल एवं पेट्रोल  से भिन्‍न अन्‍य वस्‍तुओं की बिक्री पर composition scheme की मांग की जाती रही है। पेट्रोल पम्प धारकों की इस व्यवहारिक कठिनाई को देखते हुए मैं उनके द्वारा lubricant, yellow cloth, fan belts, आदि की बिक्री पर composition scheme लागू करने का प्रस्‍ताव कर रही हूं। 

199-  वैट अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, उच्चस्थ न्यायिक निर्णयों के अधीन रिमाण्ड प्रकरणों के निष्पादन हेतु कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है। मैं ऐसे रिमाण्ड प्रकरणों के निष्पादन हेतु दो वर्ष की समय सीमा निर्धारित किया जाना प्रस्तावित कर रहीं हूँ ।

 

Jkj/akt/9.3.2007/2c /14.00

 

कृषि:

200- कृषि क्षेत्र में काम आ रहे sprayer वर्तमान में कर-मुक्त है जबकि इनके parts & accessories पर 12.5 प्रतिशत कर आकर्षित हो रहा है। मैं कृषकों के हित में sprayer के parts & accessories को भी कर-मुक्त करने का प्रस्ताव कर रही हूँ।

201- विशेषज्ञों का यह मानना है कि कृषकों का सब्जियों की और कम रूझान होने का एक महत्‍वपूर्ण कारण राज्‍य में इन पर मण्‍डी शुल्‍क......(व्‍यवधान)

श्री मंगलाराम गोदारा(श्रीडूंगरगढ़): घोषणा करो मुख्‍य मंत्रीजी, पूरे राजस्‍थान का किसान देख रहा है आपकी तरफ।  पूरे राजस्‍थान का किसान आपकी तरफ नजर रखे हुए है। (व्‍यवधान) आप घोषणा करो। (व्‍यवधान) पूरे राजस्‍थान का किसान आपके भाषण की तरफ देख रहा है।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, कृपया स्‍थान ग्रहण करें।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे(मुख्‍य मंत्री): और आढ़त का अधिक होना है। crop diversification और कृषकों की आय बढ़ाने के लिए, यह आवश्यक है कि सब्जियों के तहत क्षेत्रफल बढ़े।  राज्‍य में औषधीय उत्‍पादों को भी बढ़ावा देने की आवश्‍यकता है। अत: मैं सब्जियों और औषधीय उत्पादों पर देय मण्डी शुल्क को 0.5 प्रतिशत और सब्जियों पर मण्डी आढ़त को 3 प्रतिशत किये जाने की घोषणा करती हूँ ।

उद्योग:

202- राज्य में उद्योगों के विकास हेतु मेरे निम्न प्रस्ताव है -

- Rajasthan Investment Promotion Scheme, 2003 की अवधि मार्च, 2008 में समाप्त हो रही है। राज्य में उद्योगों में निवेश को प्रोत्साहित करने हेतु इसकी अवधि 31 मार्च, 2009 तक बढ़ाई जानी प्रस्तावित है। साथ ही इस योजना के तहत रूग्ण औद्योगिक ईकाईयों को कुछ लाभ प्रदान किये गये थे बशर्ते वे ईकाईयाँ अपना revival process 31 मार्च 2006 तक प्रारम्भ कर देती। अब मैं यह लाभ 30 सितम्बर, 2007 तक रूग्ण घोषित औद्योगिक ईकाईयों को भी प्रदान करना प्रस्तावित करती हूँ, बशर्ते ये इकाईयाँ अपना revival process 31 मार्च, 2008 तक प्रारम्भ कर देती हैं। मुझे आशा है कि राज्य की शेष रूग्ण औद्योगिक ईकाईयाँ इस सुविधा का लाभ उठायेगी।

- सांगानेर, बालोतरा, पाली आदि के रंगाई-छपाई उद्योग की एक अलग ही पहचान है । इस उद्योग से बहुत से श्रमिक एवं व्यवसायी जुड़े हुए है। इस उद्योग को और प्रोत्साहित करने की दृष्टि से, बिना सिली हुई बैडशीट (unstitched bedsheets) को कर-मुक्त किया जाना प्रस्तावित है।

- राज्य में छाता उद्योग को प्रोत्साहित करने हेतु छातों एवं उनके parts एवं assessories को CST से मुक्त किया जाना प्रस्तावित है।

- राज्य में उद्योगों द्वारा विनिर्माण में विभिन्न प्रकार के chemicals कच्चे माल के रूप में काम में लिये जा रहे है किन्तु कुछ ही chemicals को 4 प्रतिशत से कर योग्य अनुसूचि में अंकित किया गया है। मैं सभी प्रकार के chemicals को 4 प्रतिशत से कर योग्य किये जाने का प्रस्ताव कर रही हूँ।

- Gelatin एवं इससे बने capsule पर वर्तमान में 12.5 प्रतिशत कर देय है, जिसे घटा कर 4 प्रतिशत किया जाना प्रस्तावित कर रही हूँ।

- कच्चे माल के रूप में toulene, o-xylene और mixxylene भी काम में आते है। इनको भी 125 प्रतिशत कर श्रेणी से हटा कर 4 प्रतिशत कर श्रेणी में लाया जाना प्रस्तावित है।

- Biodiesel के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिये इसके कच्चे माल रतनजोत एवं उससे बनने वाले 100 प्रतिशत biodiesel को कर-मुक्त किया जाना प्रस्तावित है।

- समीपवर्ति राज्यों में दलहन कर-मुक्त होने के कारण हमने 31 मार्च, 2007 तक के लिए दलहन की कर-दर को 4 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत किया था। राज्य के उपभोक्ताओं एवं दलहन उद्योग के हित में मैं 1 प्रतिशत की इस कर-दर को 31 मार्च, 2008 तक बढ़ाना प्रस्तावित कर रही हूँ।

- वैट व्यवस्था में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग अथवा राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड में पंजीकृत 13 प्रकार के ग्रामाद्योगों को कर मुक्ति का लाभ प्रदान किया गया है। इस क्षेत्र से यह निरन्तर मांग की जा रही है कि वैट को लागू करने से पूर्व जिन ग्रामोद्योगों को कर-मुक्ति का लाभ मिल रहा था, उन्हें वैट व्यवस्था में भी कर से मुक्त किया जावे क्योंकि उन्होंने ये ग्रामोद्योग इस आशा से लगाये थे कि उन पर कर देय नहीं होगा। इस व्यवहारिक कठिनाई को दृष्टिगत रखते हुए यह प्रस्तावित है कि 31 मार्च, 2006 तक KVIC अथवा राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड में पंजीकृत ऐसी ग्रामीण औद्योगिक ईकाईयां जो पूर्व में कर-मुक्‍त थी, के द्वारा विनिर्माण कर बेचे जा रहे उत्पादों को 31 मार्च, 2008 तक कर-मुक्त कर दिया जाऐ, ताकि ये ग्रामोद्योग वैट व्यवस्था लागू होने के दो वर्ष की इस अवधि में अपने आप को करयुक्तव्यवस्था हेतु सक्षम एवं प्रतिस्पर्धात्मक  (competetive) बना सके।

- राज्य के निर्यातकों द्वारा विदेश में निर्यात की गई वस्तुओं में प्रयुक्त किये गये packing material पर दिये गये कर पर वर्तमान में refund देने की व्यवस्था नहीं है। राज्य से निर्यात को प्रोत्साहन करने की दृष्टि से मैं निर्यात की गई वस्तुओं में उपयोग किये गये packing material पर दिये गये कर को refund योग्य बनाने हेतु वैट अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित कर रही हूँ।

- राज्य में सोने एवं चाँदी के वर्क बनाने वाले कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित करने हेतु इन वस्तुओं की कर दर को 12.5 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत किया जाना प्रस्तावित है।

अन्‍य कर दर:

203- Woven label tapes, elastics, nylon tapes एवं lacesवर्तमान में 4 प्रतिशत से कर योग्य है। इन उत्पादों को कर-मुक्त किया जाना प्रस्तावित है।

204- राज्य के युवाओं द्वारा दुपहिया वाहनों के बढ़ते हुए उपयोग को देखते हुए मैं यह उचित समझती हूँ कि, उनकी सुरक्षा की दृष्टि से, हेलमेट को कर-मुक्त किया जावे। अत: तदनुसार प्रस्तावित है।

205- वर्तमान में second hand मोटर कारों एवं अन्य secondhand मोटर वाहनों की बिक्री दर में भिन्नता हैsecond hand मोटर वाहनों की बढ़ती हुई बिक्री को देखते हुए तथा इनकorganized sector में बिक्री को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से, मैं सभी प्रकार केsecond hand मोटर वाहनों के बचान पर एक सामान 4 प्रतिशत कर लगाना प्रस्तावित कर रही हूँ। यह कर second hand मोटर वाहनों की खरीद एवं विक्रय मूल्य की अन्तर राशि पर देय होगा!

206- Self Help Groups को प्रोत्‍साहित करने के लिये उनकेs द्वारा विनिर्माण कर बेची जाने वाली हस्त-निर्मित वस्तुओं को  कर-मुक्त किया जाना प्रस्तावित है।

विलासिता कर:

207- राज्य में वैवाहिक एवं अन्य पार्टियों के आयोजन में banquet hall, marriage and party places, आदि के उपयोग के बढ़ते प्रचलन को देखते हुए, इनके उपयोग पर कर लगाया जाना प्रस्तावित है। इस हेतु आवश्यक संशोधन वित्त विधेयक में प्रस्तावित किये जा रहे है।

प्रवेश कर:

208- ग्वार, ग्वार दाल एवं ग्वार गम पर 2 प्रतिशत की दर से प्रवेश कर देय है। इन्हें प्रवेश कर से मुक्त किया जाना प्रस्तावित है।

209- PP/HDPE woven fabric पर 4 प्रतिशत प्रवेश कर लगाया जाना प्रस्तावित है।

210- प्रवेश कर के निर्धारण से छूट जाने की स्थिति में सही करारोपण करने से पूर्व व्यवहारी को notice दिये जाने का प्रावधान है। यह notice कर वर्ष की समाप्ति से 8 वर्ष तक की समय सीमा में दिया जा सकता है। notice देने की इस समय सीमा को वैट अधिनियम के प्रावधान के अनुरूप 5 वर्ष किया जाना प्रस्तावित है ।

मनोरंजन कर:

211- सिनेमा आम जन के मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण साधन है। हमने मनोरंजन कर की दर अप्रेल, 2004 में 70 प्रतिशत से घटाकर50 प्रतिशत की थी। अब मैं इसे 35 प्रतिशत करना प्रस्तावित कर रही हूँ।

परिवहन:

212- पिछले वर्ष मैने उप-नगरीय परिवहन व्यवस्था में सुधार करने की घोषणा की थी। किन्तु जिला मुख्यालयों पर बस स्टेण्ड के लिये उचित स्थान नहीं मिलने एवं बसों को शहर पार करने की अनुमति नहीं होने के कारण, आम जनता को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। अत: प्रस्तावित है कि आगामी वित्तीय वर्ष से उप-नगरों को न केवल जिला मुख्यालयों से बल्कि जिला मुख्यालय के अन्य उप-नगरों से भी जोड़ा जाये। इस प्रकार उप-नगरीय मार्ग एक उप-नगर से प्रारम्भ होकर एवं जिला मुख्यालय से होता हुआ, इसी जिला मुख्यालय के अन्य उप-नगर को जोड़ सकेगा।

213- राज्य में पर्यटन व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिये पिछले वर्ष पर्यटक अनुज्ञा पत्रों से भिन्न संविदा अनुज्ञा पत्रों पर संचालित वाहनों को विशेष पथ कर में कुछ छूट दी गई थी। अब केन्द्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय, IATA एवं RATO, तीनों से मान्यता प्राप्त tour operators द्वारा, conducted tour के माध्यम से पर्यटन को प्रोत्साहित करने हेतु, उनके द्वारा उपयोग में ली जा रहीं पर्यटक अनुज्ञा पत्रा से संचालित वाहनों पर, विशेष पथ कर में 50 प्रतिशत की छूट आगामी वित्तीय वर्ष से दिया जाना प्रस्तावित है। यह छूट राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अधीन इस के लिए गठित एक उच्च स्तरीय समिति की अनुशंसा पर देय होगी।

214- मोटर वाहन कर अपवंचन रोकने की दृष्टि से अगले वित्तीय वर्ष से सभी श्रेणी के नये तिपहिया वाहनों, 3000 किलोग्राम GVW तक के नये भार वाहनों एवं चालक सहित 5 बैठक क्षमता के नये तिपहिया यात्री वाहनों के लिये एक मुश्त कर अनिवार्य किया जाना प्रस्तावित है।

215- नवम्बर, 2004 से construction equipment vehicles भारत सरकार द्वारा गैर परिवहन यान वर्गीकृत किये गये। अन्य राज्यों में पंजीकृत गैर परिवहन यानों का उपयोग राजस्थान राज्य में बिना कर चुकाये 30 दिन तक किया जा सकता है । इस प्रावधान के दुरूपयोग को दृष्टिगत रखते हुए, राजस्थान मोटर वाहन कराधान अधिनियम, 1951 में संशोधन कर इन वाहनों पर 30 दिवस से कम दिन भी राजस्थान राज्य की सड़के उपयोग करने पर पथ कर लगाने के प्रावधान किये जाने प्रस्तावित है।

216- वर्तमान में भार वाहनों पर देय कर में कुछ विसंगतियाँ है जिनके कारण कई वाहनों पर देय कर उसी श्रेणी के उससे अधिक कीमत वाले वाहनों पर देय कर से भी अधिक है। साथ ही श्रेणीयों की संख्या भी बहुत अधिक है। इस प्रकार की विसंगतियाँ को दूर करते हुए एवं श्रेणीयों की संख्या में कमी कर भार वाहनों पर देय कर युक्तियुक्त किया जाना प्रस्तावित है।

पंजीयन एवं मुद्रांक:

217- वर्ष 2000 में ऐसे कृषकों जिनकी कृषि भूमि भू-अधिनियम,1894 के तहत अधिग्रहित की गई हो को ग्रामीण क्षेत्रों में उनके द्वारा कृषि भूमि क्रय करने पर, पंजीयन हेतु 7 प्रतिशत रियायती स्‍टाम्‍प शुल्‍क निर्धारित किया था। पंजीयन शुल्‍क की दर  से कमी के पश्चात भी इस दर में कमी नहीं की गई है। मैं ऐसे कृषकों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि क्रय करने पर स्‍टाम्‍प शुल्‍क में 50 प्रतिशत की छूट प्रस्तावित करती हूँ। यह छूट ऐसे कृषकों का मुआवजा प्राप्‍त होने की तिथि से 6 माह के भीतर पंजीयन हेतु विक्रय पत्र प्रस्तुत करने पर देय होगी। यह छूट उनके द्वारा मुआवजा राशि तक की भूमि के मूल्य तक सीमित होगी।

218- इसी प्रकार कुछ वर्षों से परिवार के संबंधियों के पक्ष में निष्पादित दान-पत्र पर स्टाम्प शुल्क हेतु रियायती 5 प्रतिशत दर निर्धारित है। उसके पश्चात conveyance पर स्टाम्प शुल्क में तो कमी की गई है किन्तु संबंधी के पक्ष में दान-पत्रा पर स्टाम्प शुल्क में कमी नहीं की गई । अत: उपरोक्त संबंधियों के पक्ष में दान-पत्र निष्पादित करने पर देय स्टाम्प शुल्क conveyance हेतु निर्धारित स्टाम्प शुल्क का 50 प्रतिशत करना प्रस्तावित करती हूँ।

219- गत वर्ष जयपुर शहर में ''कहीं भी पंजीयन योजना'' लागू की गयी थी जिसके तहत आमजन को उनके निकटतम पंजीयन कार्यालय में दस्तावेज पंजीयन की सुविधा प्रदान की गयी। भारत में सर्वप्रथम लागू इस योजना के उत्साहजनक परिणाम आये हैं। यह दृष्टिगत रखते हुए ''कहीं भी पंजीयन योजना'' को अगले वित्तीय वर्ष में राज्य के शेष सभी जिलों में लागू किया जायेगा।

भूमि कर:

220- इस वर्ष से राज्य सरकार द्वारा कुछ श्रेणी की भूमियों पर भूमि कर लगाया गया है । भूमि कर को युक्तिसंगत बनाने के लिए मैं निम्न प्रस्ताव करती हूँ । Rock phosphate -धारित भूमियों पर भूमि कर संशोधित कर 100 रूपये प्रति वर्ग मीटर, lead-zinc एवं तांबा-धारित भूमियों पर इसे संशोधित कर 10 रूपये प्रति वर्ग मीटर, SMS एवं cement grade चूना पत्थर-धारित भूमियों पर इसे 4 रूपये प्रति वर्ग मीटर और जिप्सम-धारित भूमियों पर इसे 2 रूपये प्रति वर्ग मीटर प्रस्तावित करती हूँ। साथ ही sandstone-धारित भूमियों पर भूमि कर लागू किये जाने की दिनांक से इसकी दर 10 पैसे प्रति वर्ग मीटर करना प्रस्तावित करती हूं।

अन्‍य:

221- शहरी भूमियों के स्वामित्व को लेकर विवादों की बढ़ती संख्या को दृष्टिगत रखते हुए हमारा यह प्रयास है कि हम शहरी भूमियों का guaranteed title प्रदान करने की व्यवस्था स्थापित करें।  इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रथम कदम के रूप में वर्ष 2007-08 से कुछ शहरों में lease hold सम्पत्तियों को free hold सम्पत्तियों में परिवर्तित किया जा सकेगा। यह सुविधा प्रथम चरण में जयपुर एवं राज्य के 10 बड़े शहरों, जहाँ नगर सुधार न्यास स्थापित है, में उपलब्ध कराई जायेंगी। इस हेतु राजस्थान नगर सुधार अधिनियम, जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम एवं राजस्थान नगर पालिका अधिनियम में संशोधन आवश्यक है। ये संशोधन वित्त विधेयक में सम्मिलित कर लिये गये है।

222- वर्तमान में उच्च मूल्यांकित दावों पर Court Fees बहुत अधिक निर्धारित है। आम आदमी को न्याय सुलभ कराने हेतु आवश्यक है कि इन्हें तार्किक बनाया जाये। अत: तदनुसार संशोधन हेतु प्रस्ताव वित्त विधेयक में प्रस्तुत किये गये हैं।

223- इन कर प्रस्तावों द्वारा लगभग 60 करोड़ रूपये की राहत दी गई है तथा भूमि कर से आगामी वर्ष में इतनी ही अतिरिक्त आय होना अनुमानित है। अत: कर प्रस्तावों का प्रभाव शुन्य होने की सम्भावना है।

 

वर्ष 2006-07 के संशोधित अनुमान:

224- वर्ष 2006-07 के बजट अनुमानों में कुल राजस्व आय 23 हजार 991 करोड़ 35 लाख रुपये, राजस्व व्यय 24 हजार 34 करोड़ 35 लाख रुपये एवं राजस्व घाटा 43 करोड़ रुपये अनुमानित किया गया था। इस वर्ष के संशोधित अनुमानों में राजस्व व्यय 25 हजार 337 करोड़ 12 लाख रुपये है, जो बजट अनुमानों की तुलना में 542 प्रतिशत व गत वर्ष के वास्तविक व्यय से 1785 प्रतिशत अधिक है। इस वर्ष के संशोधित अनुमानों में राजस्व आय 25 हजार 433 करोड़ 57 लाख रुपये है, जो बजट अनुमानों की तुलना में 601 प्रतिशत व गत वर्ष की राजस्व आय से 2205 प्रतिशत अधिक है।परिणामत: संशोधित अनुमानों के अनुसार राजस्व आधिक्य 96 करोड़ 45 लाख रुपये है। बारहवें वित्त आयोग ने वर्ष 2008-09 में राजस्व घाटा समाप्त करने की सिफारिश की थी। हमने राजस्व घाटा वर्ष 2006-07 में ही समाप्त कर दिया है।

225- वर्ष 2006-07 के बजट अनुमानों में राज्य का राजकोषीय घाटा 5 हजार 140 करोड़ 58 लाख रुपये था। संशोधित अनुमानों में राज्य का राजकोषीय घाटा 5 हजार 2 करोड़ 74 लाख रुपये है। संशोधित अनुमानों के अनुसार राजकोषीय घाटा राज्य के अग्रिम GSDP अनुमान का 358 प्रतिशत है। FRBM Act में वर्ष 2008-09  में राज्य का राजकोषीय घाटा GSDP के 3 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य है। हम इस लक्ष्य के बहुत नजदीक पहुँच गये हैं।

226- वर्ष 2006-07 के दौरान राज्य को राजस्व व पूंजीगत कुल 32 हजार 496 करोड़ 63 लाख रुपये की प्राप्तियां होने का अनुमान है एवं 32 हजार 467 करोड़ 87 लाख रुपये का कुल व्यय अनुमानित है। इस प्रकार वर्ष के कार्य-कलापों से राज्य में 28 करोड़ 76 लाख रुपये का बजट अधिशेष अनुमानित है।

227- वर्ष 2006-07 के संशोधित अनुमानों का संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है:-

(निकटतम लाख रुपये में)

1 राजस्व प्राप्तियां      25 हजार 433 करोड़ 57 लाख

2 राजस्व व्यय        25 हजार 337 करोड़ 12 लाख

3 राजस्व खाते में आधिक्य 96 करोड़ 45 लाख

4 पूंजीगत प्राप्तियां (लोक लेखे की शुद्ध प्राप्तियों सहित): 7 हजार 63 करोड़ 6 लाख

5 पूंजीगत व्यय        7 हजार 130 करोड़ 75 लाख

6 राजकोषीय घाटा      5 हजार 2 करोड़ 74 लाख

7 वर्ष का बजट अधिशेष 28 करोड़ 76 लाख

 

वर्ष 2007-08 के बजट अनुमान:

 

228- वर्ष 2007-08 के बजट अनुमानों का संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है:-

(निकटतम लाख रुपये में)

1 राजस्व प्राप्तियां      28 हजार 599 करोड़ 49 लाख

2 राजस्व व्यय        28 हजार 384 करोड़ 72 लाख

3 राजस्व खाते में आधिक्य 214 करोड़ 77 लाख

4 पूंजीगत प्राप्तियां(लोक लेखे की शुद्ध प्राप्तियों सहित): 7 हजार 820 करोड़ 17 लाख

5 पूंजीगत व्यय        7 हजार 675 करोड़ 99 लाख

6 राजकोषीय घाटा      5 हजार 321 करोड़ 52 लाख

7 वर्ष का बजट आधिक्य 358 करोड़ 95 लाख

229- आगामी वर्ष का राजस्व आधिक्य कुल राजस्व प्राप्तियों का 075 प्रतिशत रहना अनुमानित है।

230- मैं वर्ष 2007-08 का वार्षिक वित्तीय विवरण सभा पटल पर रख रही हूं। साथ ही राजस्थान राजवित्तीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंध अधिनियम 2005 की अपेक्षानुसार मध्यकालिक राजवित्तीय नीति विवरण, राजवित्तीय नीति युक्ति विवरण एवं प्रकटीकरण  विवरण, मैं सभा पटल पर रख रही हूं। अन्य बजट पत्रों के साथ अनुदान की मांगे भी प्रस्तुत की जा रही हैं।

231- हमारा यह  आय-व्ययक अनुमान राज्य के समग्र एवं त्वरित विकास, बेहतर governance एवं fiscal उत्तरदायित्व की भावना से प्रेरित है। अच्छे वित्तीय प्रबंध के लिए उत्तरदायित्व पूर्ण व दीर्घकालीन दृष्टिकोण आवश्यक है। समय की मांग short term populism नहीं statesmanship है। सरकार स्वयं पर नियंत्राण रखे, इस दृष्टि से मैं FRBM Act में, वित्त विधेयक के माध्यम से, संशोधन प्रस्तावित कर, राजस्थान विकास एवं गरीबी उन्मूलन निधि के सृजन का प्रस्ताव रख रही हूँ। इस फण्ड में वर्ष 2006-07 में 100 करोड़ रुपये और वर्ष 2007-08 में 200 करोड़ रुपये का transfer प्रस्तावित है।

232- वर्ष 2006-07 एवं 2007-08 में राजस्थान विकास एवं गरीबी उन्मूलन निधि में उपरोक्त transfer व वर्ष 2007-08 में 1 हजार 251 करोड़ रुपये का, नवाचार योजनाओं को लागू करने हेतु एकमुश्त प्रावधान आदि से योजना का संशोधित आकार 2006-07 में 8 हजार 755 करोड़ रुपये व वर्ष 2007-08 में 12 हजार 820 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

233- मेरी सरकार ने राजस्थान को एक विकसित प्रदेश बनाने का सपना देखा है। कई प्रकार की रोक-टोक के बावजूद हमनें इस लक्ष्य की ओर बढ़ने का प्रयास किया है। हमनें नि:शक्त एवं जरूरतमंद को ही परमेश्वर माना है। इस बजट में भी, इस वर्ग के विकास के लिए, और कमजोर को समर्थन देने के लिए हमनें अनेक योजनाएं प्रारंभ की हैं। क्योंकि, अगर कालीदास जी के शब्दों में कहा जाये तो जिस प्रकार ''सहस गुना बरसाने को ही, सूर्य खींचता जल पृथ्वी से'', हम उसी भावना से आम व्यक्ति, विशेषकर वंचितों, के कल्याण हेतु कई गुना देने का कार्य कर रहे हैं। यही मेरी कोशिश रही है।

 

Lpm/usc/1420/2e/9032007

 

पर मैं यहां रुकने वाली नहीं हूं We shall not rest our owns laurels. और अभी तो इस जीवन के परिन्‍दे की कितनी उड़ान बाकी है जमीन तो नाप ली हमने पर आसमान बाकी है हर इम्तिहान से गुजरूं तो लगता है ऐसे जिन्‍दगी तेरे ऐसे कई इम्तिहान बाकी है। धन्‍यवाद।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह शेर पंजाब के बादल सिंह तक भी पहुंचना चाहिए जो स्‍टेटमेंट दे रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: पुर:स्‍थापित करें। वित्‍त विधेयक पुर:स्‍थापित करें।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): महोदय, मैं राजस्‍थान राज्‍य के आय-व्‍ययक अनुमान वर्ष 2007-08 का उप-स्‍थापन करती हूं। 

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है (व्‍यवधान) वित्‍त विधेयक क्‍या नहीं किया?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, प्रस्‍ताव तो रखवाओ।

विधायी कार्य: विधेयक का पुर:स्‍थापन

राजस्‍थान वित्‍त विधेयक, 2007

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से राजस्‍थान वित्‍त विधेयक,2007-08 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा के लिए प्रस्‍ताव करती हूं।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि राजस्‍थान वित्‍त विधेयक,2007-08 को पुर:स्‍थापित  करने की आज्ञा प्रदान की जाए।

(स्‍वीकृत)

विधेयक को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की गई।

पुर:स्‍थापित भी कर दें।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री):अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से राजस्‍थान वित्‍त विधेयक-2007 को पुर:स्‍थापित करती हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आपको बहुत-बहुत बधाई देते हुए सदन की बैठक सोमवार दिनांक 12 मार्च,2007 के प्रात: 11 बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 14.22 बजे सोमवार, 12 मार्च,2007 के 11.00 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)