msr/usc/1000/07042006/1a/[1]
अशोधित
प्रति/
प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
अंक 5
बारहवीं
विधान सभा के
पांचवें सत्र
का
उनतालीसवां
दिवस
संख्या 25
शुक्रवार,
7
अप्रैल, 2006
राजस्थान
विधान सभा की
बैठक 1000 बजे
विधान
सभा भवन, जयपुर
में प्रारम्भ
हुई।
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
सूचना
भ्रूण
हत्या के
स्टिंग
आपरेशन पर
कार्यवाही
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, ऑन ए
पाइंट ऑफ इन्फोर्मेशन।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से
सरकार से यह
निवेदन करना
चाहता हूं कि
जो भ्रूण हत्या
को लेकर
स्टिंग
आपरेशन हुआ था
उसमें परसों सहारा
टीवी पर जयपुर
के हास्पिटल
का दिखाया गया
और कल रात को
चित्तौड़ के
सरकारी अस्पताल
का दिखाया
गया। यह
सरकारी अस्पताल
के डाक्टर्स
पैसे लेते हुए
और यह कहते
हुए कि यह बच्चा
तो 6 महीने का
है, मैं इसको
बाहर निकाल
दूंगी जिंदा
लेकिन ले जाकर
तुम इसको गाड़
देना।
इस
तरह की घटनाएं
बहुत साफ उस
स्टिंग
आपरेशन में
दिखाया गया
है। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से
सरकार का ध्यान
आकृष्ट करना
चाहता हूं कि
उन चिकित्सकों
के खिलाफ
मुकदमा दर्ज
कर कार्यवाही
करे और उनको
तुरन्त वहां
से हटाएं।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, हमने कल
जैसे ही सहारा
टीवी पर इसको
देखा, उसके
साथ ही एस.पी.,
चित्तौड़ को,
क्योंकि
चित्तौड़ के
भी एक
हास्पिटल की
घटना उसमें
थी, उनसे
मैंने बात की है।उन्होंने
अपना, जो उसकी
जांच का दायरा
बनता है।उसको
उन्होंने
ढूंढ़ना
प्रारम्भ
किया है। अभी
वो महिला
जिसको उन्होंने
दिखाया, जो
उनके पास गयी
और जिसने कहा
कि मेरा इतना
है, उसको
ढूंढ़ रहे
हैं, उसके
बयान लेने के
बाद और बाकी
चीजें मिलने
के बाद जो भी
कार्यवाही हो
सकती है।वह
निश्चित रूप
से होगी।किसी
को भी कोई
बचाने का सवाल
नहीं है।
हमने
तो तुरन्त, जैसे
ही टीवी पर
देखा, देखते
ही हमने अपने
अधिकारियों
को इसके बारे
में सचेत कर
दिया कि वो इस
सारे केस की
छानबीन करें
और अगर इसमें
किसी का दोष है।वास्तव
में और
प्रमाणित
होतो है।तो
निश्चित केस
दर्ज कर
कार्यवाही
करेंगे।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक मिनट
मैं आपसे यह
गुजारिश करना
चाहता हूं कि
जो पी.सी. एण्ड
पी.एन.डी.टी. एक्ट
बना हुआ है, जो
एक जनवरी, 1996 से
लागू हुआ है।उसके
अन्दर साफ
तौर पर लिखा
गया है।कि इस
तरह की कार्यवाही
जैसे ही
प्रशासन की
नजर में आये
डाक्टर को
पाँच साल की
कैद, जो अभी
हरियाणा में
भी एक डाक्टर
को हुई है,
पाँच लाख
रुपया
जुर्माना और
उसका लाइसेंस
तुरन्त रद्द
करने का भी
प्रावधान है।
तो
जब यह चीज
उजागर हो गयी,
आपके सामने आ
गयी, टीवी पर
दिखा दी,
राजस्थान की
और देश की
सारी जनता ने
देख लिया और
वीरभूमि और
चित्तौड़गढ़
के अन्दर इस
तरह की
कार्यवाही
हुई है, और भी
यह दो-तीन डिस्ट्रिक्ट
का दिखाने
वाले हैं तो
क्यों नहीं
आप यह निर्देश
देते अपने
अधिकारियों
को कि इस तरह
की
गतिविधियों
में जो भी
लिप्त हैं
उन्हें
तुरन्त
निलम्बित
किया जाए और
उनका लाइसेंस
सीज किया जाए
और उनको इस
कानून के तहत,
यह जो पी.सी.,
पी.एन.डी.टी.
एक्ट है, इस
कानून के तहत
उनको मुजरिम
करार करते हुए
तुरन्त उनके
ऊपर मुकदमा
जारी किया
जाए।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
नहीं, जब
इसमें कानून
बना हुआ है।तो
एफ.आई.आर. दर्ज
क्यों नहीं
हुई? आपकी
नालेज में आ
गया, आपने इन्फोर्मेशन
कर दी तो इन्फोर्मेशन
करना ही सैफिसिएंट
है, एफ.आई.आर.
तत्काल होनी
चाहिए अगर
नहीं हुई है।तो
यह कानून के
खिलाफ है।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह टीवी
पर लगभग रात
को 9-10 बजे
जानकारी में
आया और 10 बजे
जानकारी आते
ही एस.पी. से
मेरी बात हुई
जिसके कारे
में जो भी हम
को कानूनी
कार्यवाही करनी
है।उसको
प्रारम्भ
करूंगा।
आज
सवेरे मैंने
उनसे दोबारा
बात की, उन्होंने
कहा कि इस
सी.डी. में जिस
महिला को
बातचीत करने
के लिए दिखाया
उसको हम
आइडेंटिफाइ
करने की कोशिश
कर रहे हैं,
अपनी तरफ से
कार्यवाही
हमने प्रारम्भ
कर दी है।लेकिन
उसके मिलने के
बाद, उसके
बयान लेने के
बाद, क्योंकि
इसमें कोई
घटनाक्रम
नहीं दिख रहा
था केवल दो की
बातचीत जरूर
दिख रही थी, अब
वो किसे भेजा
गया, कौन है,
वास्तव में
वह डिलेवरी भी
उसकी थी कि
नहीं थी, या कैसी
है।इन सब
चीजों की बात
है, अगर इसमें
तथ्य मिलेगा
तो हमारी तरफ
से तुरन्त
कार्यवाही
हमने प्रारम्भ
की है।और मैं
सोचता हूं कि
इसमें अगर आप
यह कहेंगे कि
नहीं, इसकी
एफ.आई.आर. दर्ज हो
जाए तो वह तो
उन्होंने
निश्चित रूप
से उसको देख
कर किया लेकिन
जब तक तथ्य
पूरी तरह से
सामने नहीं
आयें तब तक
आगे की कार्यवाही
करने में, अगर
हम करेंगे भी
सही और अगर
तथ्य ठीक तरह
से हमारे हाथ
में नहीं जुटा
पाये तो हम
शायद जो चाहते
हैं वह उसमें
नहीं मिल पायेगा
लेकिन हमने
कार्यवाही तुरन्त
शुरू कर दी।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
नहीं, स्वास्थ्य
विभाग को
प्रशासनिक
काम तो करना
चाहिए, साहब।
आपने अपना काम
कर दिया, स्वास्थ्य
विभाग क्यों
चुप बैठा है?
डाक्टर्स के
खिलाफ जो केस
दर्ज करना है।वो
आपको करना है,
होम
डिपार्टमेंट
को करना है।
सीकर
में
दिनदहाड़े
हुई हत्या के
बाद की स्थिति
श्री
अमराराम (धोद):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से एक
इन्फोर्मेशन
देना चाहता
हूं कि परसों
सीकर में दिन
दहाड़े एक व्यक्ति
की हत्या
हुई, बहुत ही
दयनीय है।लेकिन
उसके बाद चार
घंटे तक सीकर
के बाजार में
जिस तरह से
दहशत पैदा की
गयी, दुकानों
में तोड़फोड़
की गयी, बसों
की तोड़फोड़
की गयी, आम जनता
के जो भी
व्हिकल आये
उनको
तोड़फोड़ की
और उससे भी
दर्दनाक घटना
कल हमारी
सरकार के शिक्षा
राज्य
मंत्री,
देवनानीजी
वहां पधारे और
उन्होंने उन
उपद्रवियों
को धन्यवाद
दिया कि आपने
इसका जो
उपद्रव चार
घंटे तक किया
और पुलिस
बिलकुल मौन
रही। तमाम
अखबारों में
छपा है।- 'सीकर
की जनता में
खौफ लेकिन
मंत्री ने कहा
उपद्रवी धन्यवाद
के पात्र' ...(व्यवधान)...
सीकर की जनता...
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): आप तो
हत्यारों को
संरक्षण दे
रहे हैं। आप
तो हत्यारों
को धन्यवाद
दे रहे हैं।
श्री
अमराराम (धोद):
उपद्रवी किसी
के भी हों...
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): हत्यारों
को धन्यवाद
दे रहे हैं,
हत्यारों को
संरक्षण दे
रहे हैं और
हत्यारों को
प्रोटेक्ट
कर रहे हैं
आप।
श्री
अमराराम (धोद):
कौन?
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): आप।
श्री
अमराराम (धोद): मैं
कर रहा हूं कि
आप कर रहे हो?
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): आप कर
रहे हो हत्यारों
को प्रोटेक्ट।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
ऐसा नहीं कहा
है, यह बिलकुल
आपका गलत कहना
है। ...(व्यवधान)...
मुझे जानकारी
मिली कि आपके
द्वारा संरक्षण
प्राप्त है।
श्री
अमराराम (धोद):
राजस्थान की
सरकार का
मंत्री
उपद्रवियों
को धन्यवाद
दे ...(व्यवधान)...
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): हत्यारों
को प्रोटेक्ट
कर रहे हो।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा): ऐसा
कोई नहीं है।
...(व्यवधान)...
श्री
अमराराम (धोद):
सरकार किस बात
के लिए है?
राजस्थान की
जनता की ...(व्यवधान)...
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
यहां पर गलत
बात कह रहे
हैं। मैं वहां
पर था। मैं
वहाँ पर था,
प्रत्यक्ष
सारी ...(व्यवधान)...
मैं जानकारी
देना चाहूंगा,
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अमराराम (धोद):
नहीं, जानकारी
बाद में देना।
जानकारी, धन्यवाद
दे रहे हैं ...(व्यवधान)...
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
आप गलत आरोप
कैसे लगा सकते
हैं?
श्री
अमराराम (धोद):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इससे
शर्मनाक
राजस्थान के
इतिहास में
राजस्थान की
सरकार के
मंत्री
उपद्रवी ...
श्री
अध्यक्ष: माननीय
मंत्रीजी,
आपको मौका
दूंगी, जो बात है।उसे
आप स्पष्ट
कर दीजिएगा
उनकी बात खतम
हो जाए पहले।
लेकिन आप दो
मिनट में अपनी
बात समाप्त
करें।
श्री
अमराराम (धोद):
दो मिनट में,
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैंने
सात-आठ दिन
पहले भी गृह
मंत्रीजी का
ध्यान आकृष्ट
किया था, यह तो
गैंगस्टर
हैं, इनको और
कोई प्रोटेक्ट
नहीं कर रहा
राजस्थान की
सरकार
प्रोटेक्ट
कर रही है। जो
भी उपद्रवी
हैं, यह नहीं,
मंत्रीजी को
आज तो चिंता
हुई है।लेकिन
दस महीने पहले
विजयपाल की
राणोली थाने के
सामने हत्या
हुई, आज तक एक
भी गिरफ्तार
नहीं हुआ। 15
दिन पहले
शीशराम की हत्या
हुई, इनको कोई
चिंता नहीं
हुई
देवनानाजी को।
कानाराम का
दिनदहाड़े
उसी शहर से
अपहरण हुए आज 17
दिन हो गये आज
तक कोई नहीं
पकड़ा गया,
इनको कोई
तकलीफ नहीं।
अपहरण करें,
मर्डर करें,
उनको जला कर
उनके सबूत
मिटा दें,
उनकी कोई
चिंता नहीं
होती। एम.एल.ए.
के पति को
सरेआम बेइज्जत
ही नहीं करें
वह अपहरण करने
की कोशिश करें
जुलूस में
पुलिस की
मोजूदगी में,
इनको कोई चिंता
नहीं और उपद्रव,
चार घंटे तक
कर्फ्यू की
स्थिति, जो भी
आम जनता आयी
उनके वाहन
जलाने की,
दुकानें
जलाने की बात
है, क्या
अपराध था सीकर
के व्यापारियों
का, आम जनता का?
पुलिस बिलकुल
निश्चिंत,
किसी को नहीं
रोका। चार
घंटे तक सीकर
की जनता को इस
तरह खौफनाक,
उनकी दुकानों
को तोड़फोड़
करना, वाहनों
की तोड़फोड़
करना, आगजनी
करना और उनको
जाकर के हमारी
सरकार के
शिक्षा राज्य
मंत्रीजी धन्यवाद
देते है, कहते
हैं इसके लिए
तो धन्यवाद,
आपको और
खौफनाक करना
चाहिए था। जो
दंगाई पार्टी
का सबूत कल
राजस्थार
सरकार के
मंत्री ने
सीकर में जाकर
दिया है,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मेरी
आपके माध्यम
से मांग है।कि
अगर सरकार
जनता की
सुरक्षा
चाहती है।तो ऐसे
मंत्री से
तुरन्त इस्तीफा
लिया जाना
चाहिए। जो
राजस्थान की
जनता की
हिफाजत नहीं
कर सकती,
हिफाजत का नाम
लेकर सत्ता
में आयी है।ऐसी
सरकार के
मंत्री को
तुरन्त इस्तीफा
देना चाहिए और
जितने भी
अपराधी हैं,
मैंने गृह
मंत्रीजी से
कहा, उनको
प्रोटेक्ट
कर रहे हैं। 9
महीने से फाइल
यहां रखी,
सरकार ने
मंगायी।
अपराधियों के
नाम से तीन
दफे उस फाइल
को यहां
मंगायी गयी। 22
फरवरी को जाती
है, 23 फरवरी को
वापस मुख्यमंत्रीजी
के आदेश से
वापस आ जाती
है।
एक
भी अपराधी
नहीं पकड़ा
गया,
अपहरणकर्ता,
मर्डरकर्ता
खुलेआम हैं।
इसी कानाराम
को, जिन
अपराधियों पर
तीन-तीन
मुकदमें हत्या
के और अपहरण
के हैं, उनको
दिनदहाड़े,
कानाराम की
दुकान पर जाकर
दिनदहाड़े
अपहरण हो जाए, माननीय
अध्यक्ष
महोदय, इसलिए
मेरा आपके
माध्यम से
निवेदन है।कि
सरकार अगर
जनता में
अमन-चैन चाहती
है।तो ऐसे
मंत्री से
तुरन्त इस्तीफा
लिया जाना
चाहिए। मेरा
आपसे यही
निवेदन है।
श्री
अध्यक्ष:
मंत्रीजी,
आपको कुछ कहना
हो तो कहिये।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
बिलकुल,
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, जैसे ही
कल जानकारी
मिली, जिस व्यक्ति
की हत्या हुई
वह एक भला
आदमी और अच्छा
नागरिक था,
उसका किसी भी
तरह काई
गैंगस्टर से सम्बन्ध
नहीं था। उस
व्यक्ति की
हत्या हुई।
कल जब उसकी शव
यात्रा निकली,
पूरे सीकर शहर
के हजारों
नागरिक
सम्मिलित थे
यहां कि
गलियों की पान
इत्यादि की
दुकान तक बंद
थी। ऐसे भले
आदमी की मैं
शव यात्रा में
गया। वहां पर
यह पूछा गया कि
जो चार घंटे
पहले, वह जिन्होंने
हत्या की थी
उनके
समर्थकों ने
ही यह सारा
हुड़दंग
मचाया था और
मैंने उनको
कोई धन्यवाद
नहीं दिया।
मैंने तो जनता
को धन्यवाद
दिया कि उन्होंने
सारी स्थिति
को संयम के
साथ और सारी
स्थिति कल जिस
प्रकार से उन्होंने
रखा, उसके लिए
था ना कि
मैंने किसी
प्रकार के
तोड़फोड़
करने वालों को
दिया।
Ars/usc/1b/1010/07042006/
मैंने
आई जी से भी बात
की, एस पी से
बात की, कलैक्टर
से बात की
उनको दोषियों
को तुरन्त
पकड़ने के लिए
कहा और मैंने
सारी जानकारी
माननीय गृह
मंत्री जी को
दी वहाँ की
स्थिति में कल
परसों जो हत्या
हुई उसमें
आपका क्या
कहना है।। यह
उनको केवल हत्यारों
को सरंक्षण
देने वाले व्यक्ति
हैं, मैं
समझता हूं
संरक्षण देने
की तुलना में
आपको हत्या
की निंदा करते
हुए हत्यारों
को पकड़ने में
सहयोग करना
चाहिए। ऐसा
मेरा आग्रह है।।
श्री
अमराराम (धोद):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं अभी
भी कह रहा हूं
हत्या चाहे
गोपाल फोगावट
की हो लेकिन
जिस तरह से
पैरवी कर रहे
हैं उनको
तुरन्त
पकड़ा जाय
उनको जितनी
सज़ा दी
जाए(व्यवधान)
लेकिन जिनको
सही कह रहे
हैं ..
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): यह
सदन का दुरुपयोग
कर रहे हैं
माननीय सदस्य
।
श्री
अध्यक्ष: आप
क्यों खड़े
हैं तो ?
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): हत्यारों
को संरक्षण
देने के लिए
सदन का उपयोग
करवा रहे हैं
सदस्य, यह
गम्भीर
मामला है।।
श्री
अमराराम (धोद):
उनको पकड़ा
जाए, सख्त से
सख्त फांसी
की सज़ा दी
जाए लेकिन जिन
...(व्यवधान)
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): सदन
का उपयोग उनको
संरक्षण देने में
कर रहे हैं
शर्म नहीं आती
आपको ।
श्री
अमराराम (धोद):
मंत्री जी,
सुन लीजिए आप
भी उसी कैटेगरी
मेंहैं।
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): शर्म
नहीं आती क्या
आपको ?
श्री
अमराराम (धोद):
उल्टे शर्म
आए आपको ।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
इसलिए दबंग
आदमी भले आदमी
...(व्यवधान) की दिन
दहाड़े हत्या
हुई है।और आप
समर्थन कर रहे
हैं ...(व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
राजस्थान
में ...(व्यवधान)
सबसे बड़ा
शिक्षक संगठन है।उसके
अध्यक्ष
सुल्तान
सिंह का अपहरण
करके दोनों
हाथ और दोनों
पैर तोड़ने
में गोपाल
सिंह फोगावटहैं।
आज वह नहीं
रहा, मैं नहीं
कहना चाहता
जितनी शराब की
गैंगवार हुई है।...(व्यवधान)
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
यह बिल्कुल
गलत आरोप है।फिर
भी ...(व्यवधान)
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): जो
आदमी नहीं रहा
उसके बारे में
गलत टिप्पणियां
कर रहे हो ...(व्यवधान)
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
गलत आरोप लगा
रहे हो ...(व्यवधान)
गलत आरोप
लगाकर
राजनीति ...(व्यवधान)
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): यह उन
आदमियों का
समर्थन कर रहे
हैं जिन
आदमियों के
...(व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
यह अपराधियों
को पूरी तरह
से जानते हैं
और किस अपराधी
ने वह हत्या
की उस अपराधी
को भी यह
जानतेहैं।
श्री
अमराराम (धोद):
मैं किसी भी
अपराधी को
बचाने के पक्ष
में नहीं हूं
।
श्री
रामलाल
(बनेड़ा):
गोपाल सिंह
फोगावट की
निष्पक्ष
जांच होनी
चाहिए और
जिनका भी
समर्थन प्राप्त
है।।
श्री
अमराराम (धोद):
मैं न गोपाल
फोगावट के हत्यारे
को बचाने के
पक्ष में हूं
न विजयपाल को
बचाने के पक्ष
में हूं । मैं
कहता हूं सीकर
में जो कानून
व्यवस्था
नाम की चीज
नहीं रही है।जिस
गोपाल फोगावट
की कह रहे हैं
आज वह नहीं रहा
लेकिन उसका
रिकार्ड
निकालिए ।
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): इसका
मतलब उसकी हत्या
का समर्थन कर
रहे हो।
श्री
अमराराम (धोद):
वह सरकारी
कर्मचारी
होने के बाद,
उसके पाँच साल
का रिकार्ड
निकाल जाए तो
दस मुकदमे
उसके खिलाफ
हैं। ...(व्यवधान)
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री):
कितने चाँदी
के टुकडे आए
हैं उनका
समर्थन करने
में ...(व्यवधान)
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
आपका सारा वक्तव्य
उसकी हत्या
के समर्थन में
है।...(व्यवधान)
हत्यारों को
नहीं बख्शा
जाएगा ।
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): हत्यारों
की पैरवी कर
रहे हैं।
श्री
अमराराम (धोद):
एक नहीं दस
मुकदमे हैं,
लेकिन मैं यह
नहीं कहता कि
आज वह नहीं
रहेहैं। उन के
अपराधियों को
पकड़ें, यह
मैं मांग करता
हूं । उनको
बचाने का कहीं
सवाल ही नहीं।
अमराराम
गोपाल फोगावट
के हत्यारों
को पकड़ने की
मांग करता है,
उनको सख्त से
सख्त फांसी
दिलवाइये,
लेकिन
विजयपाल, कान्हाराम,
शीशराम ये
निर्दोष नहीं
हैं। ...(व्यवधान) जो दोषी
हैं उन की तो
पैरवी करते हैं
और जो आतंक
फैलाते हैं
उनको धन्यवाद
देतेहैं।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
मैंने किसी की
पैरवी नहीं की
है, माननीय
सदस्य महोदय,
आप पैरवी कर
रहे हैं। ...(व्यवधान)
आप हत्यारों
की पैरवी कर
रहे हैं।
मैंने किसी की
पैरवी नहीं की
है, यह आप की
आँख की
किरकिरी था ।
सदन का
दुरुपयोग कर
रहे हो आप ।
श्री
अमराराम (धोद):
हजारों लोगों
के बीच में
कहा, आतंक
फैलाया इसके
लिए आप को धन्यवाद
। लेकिन कम
फैलाया । ...(व्यवधान) यह
दंगाई पार्टी
होने का सबूत....
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा): दंगाई
पार्टी आप की
होगी । दंगाई
पार्टी का न
तो सदस्य था
न हमारी कोई
दंगाई पार्टी है।।
श्री
अमराराम (धोद):
...(व्यवधान) राजस्थान
की जनता कतई
माफ नहीं
करेगी आप को ।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
सीकर की जनता
आप को माफ
नहीं करेगी । उस
दिवंगत आत्मा
के समर्थन में
कल जिस प्रकार
की शव यात्रा थी,
ऐतिहासिक शव
यात्रा थी, यह
आप को बिलकुल
खटका इसलिए आप
सदन का
दुरुपयोग कर
रहे हैं।
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): वहां
सीकर के
चौराहे पर
खड़े हो कर
भाषण देना, आप
की* क्या
हालत बने ।
जाकर देना कि
मैं हत्यारों
का समर्थन कर
रहा हूं।
श्री
अमराराम (धोद):
आ जाना, आप* भी आ
जाना । ...(व्यवधान)
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): हत्यारों
का समर्थन कर
रहा हूं, ऐसा
भाषण देना ।
...(व्यवधान)
वहां जाकर
भाषण देना,
क्या हाल
बनाती है।
श्री
अमराराम (धोद):
वह सीकर है, आप
जैसे लोगों को
भी ठीक करती
है। ...(व्यवधान)
कोटा नहीं है।।
आप भी आ जाना,
देवनानी जी को
भी साथ ले आना
।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा): आ
जाऊंगा । आप
के धोद से
सरपंच हारा है।...(व्यवधान) उसकी
वजह से यह
बौखलाहट है।
...(व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
भारतीय जनता
पार्टी की
सरकार संरक्षण
दे कर आतंक
फैलाने का काम
करती है, उसको
कतई बर्दाश्त
नहीं करेंगे।
...(व्यवधान)
डा.
ओ. पी. महेन्द्रा
(केसरीसिंहपुर): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य ने अभी
कहा आप* भी आ
जाना, यह
असंसदीय शब्द
है, इसको
कार्यवाही से
निकाला जाना
चाहिए। जिन्होंने
अभी मंत्री जी
को कहा है।आप*
भी आ जाना,
इसको निकाला
जाए, इसको
बाहर निकाला जाए
।
श्री
देवीसिंह
भाटी (कोलायत):
अब चिन्ता मत
करो, विधान
सभा का स्तर
यही हो गया है।।
अब जूत बजने
बाकी हैं।
बाकी तू तू
मैं मैं की तो
परवाह ही मत
करो, दोनों
तरफ से चल रहा है।।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मुझे यह
स्वीकार
करने में कोई
संकोच नहीं है।कि
राजस्थान
में क्राइम कम
हुआ लेकिन
सीकर जिले में
सभी प्रकार के
क्राइम में
बढ़ोतरी हुई है।और
इसका मैंने
सदन में भी
कहा था । मुझे
अफसोस है।कि
जो परसों घटना
घटी 2.15 बजे पर और
शहर के बीच
में, गोली से
हत्या हुई,
दो गाडि़यों
में आये लोगों
ने फायरिंग की
और मेरी पुलिस
वहां इन
गाडि़यों को
पकड़ने में
असफल रही,
नाकाबंदी भी
ठीक प्रकार से
नहीं कर पायी।
अगर रात्रि
में कोई घटना
हो तो भी एक
किलोमीटर
नहीं तो
श्री
अमराराम (धोद):
मैं डिस्टर्ब
नहीं करता ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
बीच में नहीं
।
श्री
अमराराम (धोद):
वह जिन को
शरीफ कह रहे
हैं, तीन
मुकदमे हैं,
वह कितने साल
तक वहां ...(व्यवधान)
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
मेरी बात
सुनिये । ...(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): मंत्री
जी को सुनना
पड़ेगा, यह क्या
तरीका है।? ...(व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): मैं
किसी चीज को
छिपाना नहीं
चाहता हूं।
श्री
अध्यक्ष: सत्ता
पक्ष के
माननीय सदस्यगण,
यह काम आसन का है।उन्हें
रोकने का ।
आसन का काम आप
करने लग जाते
हैं I am
very sorry for that.
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): मैं
कोई चीज छिपा
नहीं रहा हूं।
इसमें जिसमें
राजेन्द्र
राजू ठेठ है। उसके
ऊपर कोई लगभग 17
प्रकरण दर्ज
हैं, चल रहेहैं।
एक दूसरी गैंग
है।मुखिया
मुकेश सेठिया,
जिसके ऊपर भी
लगभग काफी 15
केस हैं। पर
जिसके लिए
गोपाल के ऊपर
तो केवल तीन
मुकदमे दर्ज
हुए हैं ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
बैठे बैठे न
बोलें । सुनें
आप।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): तीन
मुकदमे दर्ज
हुए हैं गोपाल
पर, एक 1998 में हुआ
था, उसमें वह
बरी हो चुका है।107/2
में । एक और
मुकदमा यह 307 का
दर्ज हुआ
उसमें वह दोषमुक्त
हो चुका है।।
एक 98/5 वाला है, वह
अभी पैण्डिंग
चल रहा है।
वैसे इस का
कोई अपराधी
रिकार्ड इस
ढंग का नहीं
है, पर ये जो दो
गैंग हैं उन
की आपस में ...
श्री
अमराराम (धोद):
ये अपराधी जो
आप बता रहे हो,
इनमें सब में
वह बरी हो गये
क्योंकि
गवाहों का
अपहरण करते
हैं, उन को डरा
कर,
पैसे दे कर । ...(व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय, जितनी
भी गैंगवार आप
बता रहे हो, सब
में बरी हो
गयेहैं। ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप पूरा तो
करने दें। आप
बात पूरी तो
करने दें।
श्री
अमराराम (धोद):
वह बरी की बात
कर रहेहैं।
श्री
अध्यक्ष: आप
को कोई प्रश्न
पूछना हो इसके
बाद पूछियेगा
। बात तो पूरी
करने दें।
श्री
अमराराम (धोद):
इतने अपहरण
करके ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: अब आप
फिर बीच में
खड़े हो गये ।
आप उन्हें
अपनी बात पूरी
कहने दें।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यह
कोर्ट का
फैसला करने
लगे हैं।
श्री
अमराराम (धोद):
सब गवाहों को,
मर्डर वालों
को भी बदला
देते हैं, मैं
यही कह रहा
हूं इसलिए
इनको छूट दे
रखी है।। वह
सब बदला देते
हैं।
श्री
अध्यक्ष:
गवाहों को
होस्टाइल
करना यह थोड़े
ही चाहते हैं।
गवाहों को होस्टाइल
कौन करता है।? यह
थोड़े ही जाते
हैं, गृह
मंत्रीजी
थोड़े ही जाते
हैं।
श्री
अमराराम (धोद):
वह अपराधी
करते हैं, अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अध्यक्ष:
अपराधी करते
होंगे। ...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आप
शामिल हो उस
में ।
श्री
अमराराम (धोद):
विजयपाल के
चश्मदीद
गवाह भंवरलाल के
भाई का अपहरण
किया इस राजू
ठेठ वगैरह ने
...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): इसका
मतलब यह है।कि
अपराधियों से
इनका सम्बन्ध
है?
श्री
अमराराम (धोद):
जोधाराम का
मर्डर हुआ
उसमें सब बरी
हैं।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यह
पैरवी कर रहे
हैं। यह किसी
की पैरवी करने
का वो है।।
अपराधी
अपराधी होता है।।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): मैं
सोचता हूं कि
मेरी कोई मंशा
किसी को बचाने
की नहीं है।।
मैंने आप की
बात को ध्यान
में रखते हुए,
इस घटना के
साथ ही मैंने
सारे प्रकरण
मंगवाये हैं,
उस जिले में
हुए अपराध के
पिछले दो साल
के मैंने सारे
आंकड़े
मंगाये हैं,
उन सब को
देखने से भी
मैं इस बात से
सन्तुष्ट
हुआ कि राजस्थान
में सब दृष्टि
के अपराध घटे
हैं लेकिन इस जिले
में बढ़े हैं ....
श्री
अध्यक्ष:
पहले ही स्वीकार
किया उन्होंने
।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): और
इससे भी ज्यादा
दुःख मुझे इस
बात का हुआ कि
पाँच मिनट में
जिस गाड़ी को
पकड़ी जा सकती
थी, शहर के
बीचो बीच घटना
हो, हमारी
सारी फोर्स
वहां हो और
उसके बाद भी अपराधी
अगर पकड़ में
नहीं आए
नाकाबंदी में
तो यह वास्तव
में मेरे लिए
दुखद विषय था
और इस कारण से
मैंने उनको
लाइन हाजिर भी
किया और मैं
कोई सक्षम अच्छे
से अच्छा एस
पी ढूंढकर के
उस जिले में
लगाऊंगा ताकि यह
बढ़ती हुई
गुण्डागर्दी
को निश्चित
रूप से आने
वाले तीन चार
महीनों में
क्रश करके
छोडूंगा। यह
मैं आपको विश्वास
दिला सकता हूं।
श्री
अध्यक्ष: आप
अपने ही एस पी
एम एन दिनेश
को लगा देना सब
ठीक हो जाएगा
वहां ।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): उनका
तो कटारिया
साहब ने नाम
बदल दिया है,
मानता नहीं
दिनेश कर दिया
है।
श्री
अमराराम (धोद):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
मंत्री महोदय
से जानना
चाहता हूं
अपराधियों
में जो बरी हो
गये, मेरा गृह
मंत्री जी से
एक ही पूछना है।कि
यह अपराधी जो
गैंगवार है,
अपराध करके
मर्डर करके
लाश को जलाकर
सबूत नष्ट
करते हैं, जो
गवाह होते हैं
उनका अपहरण
करके डराते
हैं और उनको
सबको होस्टाइल
कर देतेहैं।
Vns/usc/1020/1c/7.4.2006
और
उसके लिये
पुलिस उनको
पकड़ती नहीं,
छूट देती है।
यह जो
विजयपाल,
जोधाराम का
मर्डर हुआ ... (व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अब आप
अगर चाहो तो
एक एक घटना का
मैं फिर
बताऊं, शुरू
करूं। क्या
मतलब है।इसका
? आप चाहते हो
कि एक-एक घटना
मैं निकाल कर
बातऊं कौन क्या
करता है।और
कौन किसके
प्रोटक्शन
में है, इससे
समस्या का हल
तो है। नहीं ...
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: अब
बात तो हो रही
है। अब बात तो
मंत्री के स्टेटमेंट
पर हुई है।
हां, बात तो
मंत्री के स्टेटमेंट
पर हुई।
मंत्री के स्टेटमेंट
की बात हुई है,
अब आप और-और
बातों पर जा
रहे हो। आपने
मंत्री के स्टेटमेंट
की बात की थी।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): क्या
मतलब, सम्बन्ध
है।? ऐसा लगता है।कि
प्रोटक्शन
बढ़ाने के चक्कर
में विधान सभा
का दुरुपयोग
कर रहे हैं यह ...
(व्यवधान) यह अपने
विशेष
अधिकारों का
दुरुपयोग कर
रहे हैं। यह
मंच नहीं है।अगर
किसी की पैरवी
करनी है।तो ...
(व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
एक मेरा आपसे
निवेदन है।कि
मंत्रीजी अगर
जाकर ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
एस.पी. को
उठाया, आपने
केवल स्टेटमेंट
का कहा था ... (व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
उपद्रवियों
को धन्यवाद
देकर उनका
हौसला बढ़ाया
उसमें
मंत्रीजी का
क्या कहना है।
वह तो बता
दें। ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
मंत्रीजी ने
जवाब दे दिया है।...
(व्यवधान) यह
स्पष्ट है।...
(व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
नहीं जवाब क्या,
हजारों लोगों
के बीच में
जाकर धन्यवाद
दिया है।कि जो
किया उसके
लिये धन्यवाद
लेकिन आपको
पूरे शहर को
जला देना
चाहिये, यह
अगर मंत्री
कहेंगे तो
राजस्थान की
क्या हालत
होगी ... (व्यवधान)
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा): यह
बिलकुल गलत,
गलत आरोप लगा
रहे हैं।
अमराराम जी,
माननीय सदस्य
जो हैं ... (व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
मंत्री अगर
बीच बाजार में
जाकर उपद्रव
करने वालों को
धन्यवाद
देते हैं
लेकिन आपने कम
किया । इस
प्रकार
मंत्रीजी
वहां करें ... (व्यवधान)
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
आप वहां थे क्या
? आप वहां थे ? आपकी
हिम्मत ही
नहीं थी वहां
आने की। अगर
होते तो आपको
सही स्थिति
मालूम पड़ती।
अगर वहां होते
तो सही स्थिति
मालूम होती। ...
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
यह नहीं कह
रहे हैं कि
हमने ... (व्यवधान)
उपद्रवियों
को कहा और आप
अगर सपोर्ट करने
की बात कर रहे
हैं ... (व्यवधान)
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
यह बिलकुल
असत्य है।
मैं वहां पर
था। मैंने
वहां पर किसी
भी ... (व्यवधान) केस
सब्मिट हुआ।
केस सब्मिट होने
के बाद पुलिस
वाले आये। उन्होंने
कहा, इस तरह
हुआ तो मैंने
एस.पी. को कहा
किसी भी
प्रकार
स्थिति को कण्ट्रोल
करो। स्थिति
कण्ट्रोल
करने में जिन
कार्यकर्ताओं
ने सहयोग किया
प्रशासन को
उनको धन्यवाद
दिया, न कि
किसी प्रकार
की तोड़फोड़
करने वालों को
धन्यवाद
दिया। आप वहां
पर होते तब
आपको मालूम
पड़ता कि सही
स्थिति क्या
थी। गली-गली
का छोटा बच्चा
आज उसके साथ
दु:खी था। वह
सभ्य और
सुशील नागरिक
था जिसकी कल
दिन दहाड़े ही
हत्या हुई
है। हत्यारों
को मत बचाइये।
हत्यारों को
गिरफ्तार
करने में
सरकार का
सहयोग करिये।
... (व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
कौन बचा रहा है
हत्यारों को?
बचाने का काम
सरकार करती
है, अमराराम
नहीं करता। किसी
का भी हत्यारा
है।लेकिन
पार्टी के लोग
वहां पर धन्यवाद
देंगे तो
अपराध
बढ़ेंगे।
यहां सरकार ने
अपराधियों को
बचाया है।
उनका
प्रशिक्षण
किया है।और
भारतीय जनता
पार्टी के
नेता ... (व्यवधान)
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
आप बचा रहे
हैं, नहीं तो
इस सदन में
इतनी पैरवी नहीं
करते। वहां पर
आप नहीं थे।
हिम्मत नहीं
थी वहां पर
आने की। यह
डबल स्थिति ...
(व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
भारतीय जनता
पार्टी के
नेता भू-माफियाओं,
शराब
माफियाओं के
संरक्षण में
करोड़ों रुपयों
को ... (व्यवधान)
यह मुख्य
मंत्री के
कार्यालय में
रिपोर्ट आ
चुकी है।कि
भारतीय जनता
पार्टी के लोग
भू-माफिया,
शराब माफिया
इन गेंगों का
उपयोग करते
हैं। मुख्य
मंत्री के
कार्यालय से
निकलवा लीजिए,
यह रिपोर्ट आ
चुकी है। यदि
आपकी नीयत थी
तो बचाने का
काम तो सरकार
नहीं करती ... (व्यवधान)
प्रो.
बीरूसिंह
राठौड़
(बनीपार्क):
माननीय
अमरारामजी,
मेरी बात
सुनिये आप।
कम्युनिस्टों
का इतिहास आप
पढ़ो। ... (व्यवधान)
श्री
अर्जुन सिंह
देवड़ा
(रानीवाड़ा):
सीटों के लिए
भूखे माननीय
सदस्य, आप ही
उनको संरक्षण
देते हैं। ... (व्यवधान)
प्रो.
बीरूसिंह
राठौड़
(बनीपार्क): 1917 से
लेकर 1954 तक दुनिया
के जितने भी
देश हैं लगभग
दस करोड़
लोगों की हत्या
की है, आप मेरे
से किताब ले
लीजिए। 1917 से 1954
तक पूरी
दुनिया में
कम्युनिस्टों
ने दस करोड़
लोगों की हत्या
की है।और 1913 में
124 मस्जिदों
में से 120
मस्जिदें
तोड़ी हैं
आपने, किताब
ले लीजिए मेरे
से आप। दस
करोड़ लोगों
की हत्या की है।और
+++... (व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
आपका इतिहास
तो कल का ही
है। दंगाई
पार्टी है। ...
(व्यवधान) यह
वह पार्टी है।जो
दंगा करने
वालों को
प्रोत्साहन
देती है,
अपराधियों को
संरक्षण देती है।अपने
व्यक्तिगत
स्वार्थों
के लिए। ... (व्यवधान)
श्री
रामलाल शर्मा
(चौमूं):
अमरारामजी, आप
दु:खी इसलिए है।कि
सीकर के जाट
बोर्डिंग में
आपने कार्यकर्ता
रहते हैं और
यह गोपाल फोगावट
उन
कार्यकर्ताओं
को बाहर करके
जो वहां पर
पढ़ने वाले
छात्र हैं
उनको प्रवेश
देना चाहता
था, यही थी न
वास्तविकता।
श्री
अध्यक्ष: हो
गयी बहस। ... (व्यवधान)
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, बहस तो
हो गयी लेकिन
एक बात जनता के
ऊपर जानी
चाहिए। किसी
पार्टी का हो,
कोई भी हो
लेकिन चार
घंटे तक यदि
लॉ लेसनैस रहे
सीकर में यह
दुर्भाग्यपूर्ण
है। हम किसी
के भी पक्ष
में नहीं हैं
लेकिन कहने से
काम चलता है।क्या?
सरकार असेम्बली
चल रही थी तो
चार घंटे तक
लॉ लेसनैस
नहीं रहे। आपका
ए.सी.पी. टी.वी.
में यह कहता है।कि
शराब
माफियाओं का
इसमें झगड़ा
है। यू.टी. के
अन्दर एस.पी.
लक्ष्मीनारायण
मीणा ने यह स्टेटमैंट
दिया है।कि
शराब
माफियाओं का
झगड़ा है।और
मंत्रीजी कह
रहे हैं कि वह
सभ्य आदमी
हैं तो कहीं
उनके सरकार के
अधिकारी की जो
सूचना है।और
आपकी सूचना है।उसमें
अंतर है। हम
तो यही निवेदन
करना चाहते
हैं कि सरकार
का धर्म बनता है।कि
सरकार लॉ
लेसनैस नहीं
पैदा करे।
इसके बारे में
हम फेल हुए इस
बारे में हमें
चिन्ता और
करने की आवश्यकता
है।कि भविष्य
में ऐसी घटना
किसी और जगह
पर नहीं हो। ...
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
श्री गुलाब
चन्द
कटारिया।
सदन
की मेज पर रखे
गये पत्र
प्रतिवेदन
सक्सैना
जांच आयोग का
जांच
प्रतिवेदन
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं (1)
जांच आयोग
अधिनियम, 1952 की
धारा 3 की
उपधारा (4) के
अन्तर्गत
सक्सैना
जांच आयोग का
जांच
प्रतिवेदन एवं
उस पर राज्य
सरकार की
कार्यवाही का
ज्ञापन; एवं
राजस्थान
राज्य मानव
अधिकार आयोग,
जयपुर
का वार्षिक
प्रतिवेदन
वर्ष 2003-04
(2)
मानव अधिकार
अधिनियम, 1993 की
धारा 28(2) के अन्तर्गत
राजस्थान
राज्य मानव
अधिकार आयोग
जयपुर के
वार्षित
प्रतिवेदन
वर्ष 2003 -2004 एवं 2004-2005
मय
क्रियान्विति
सदन की मेज पर
रखता हूं।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
इसके बारे में
कुछ निवेदन करना
चाहूंगा चाहे
बी जेपी की
सरकार हो,
कांग्रेस की
सरकार हो,
आयोग गठित
किये जाते हैं
उनकी रिपोर्टस
चार-चार,
पाँच-पाँच वर्ष
तक नहीं आती
हैं। उन
आयोगों का गठन
करने का कोई
मतलब नहीं रह
जाता है।इस
बारे में
सरकार को
सोचना
पड़ेगा। आखिर
उसके लिये क्या
उपाय होगा कि
जिस परपज के
लिये यह गठित
किये जाते
हैं, कोई
अधिकारी का
रिटायरमेंट
हो गया, किसी
का कुछ हो गया,
इसका मतलब क्या
है।? वह कितने
दिन बाद
रिपोर्ट
आयेगी ? समय समय
पर समय बढ़ाने
की मांग करते
आते हैं क्योंकि
तरह-तरह की
सुविधाएं
मिलती हैं इन
आयोग के चेयर..
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आपके पास
थी गृह मंत्री
के रूप में।
आप जांच करा
दें आपके पास
पूरी जांच आयोग
की रिपोर्ट को
अपने पास बस्ते
में बंद रखा।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
यह गलत बात
है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): सभी रिकार्ड
उठाकर देख
लें।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
यह काहे को
चर्चा कर रहे
हो आप ... (व्यवधान) इसे आप
ढाई वर्ष तक
क्या कर रहे
थे। आप देखिये
माननीय
मंत्रीजी ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
मानव अधिकार
की 2003-2004 और 2004-2005 की
है, यह क्या है।?
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे निवेदन
कर रहा हूं ... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): यह राजेन्द्र
सक्सैना
जांच आयोग की
बात कर रहे
हैं। शास्त्रीनगर
में उस वक्त
जो दंगा हुआ
था, उस पर जो
आयोग बैठा था,
उसकी जांच
रिपोर्ट की
बात कर रहे
हैं और हमसे
कह रहे हैं ... (व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
माननीय
संसदीय कार्य
मंत्रीजी,
मेरा ... (व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): आप तो यह
बताओ सब्मिट
कब हो गयी थी ? यह
जांच आयोग की
रिपोर्ट
सब्मिट कब हो
गयी ? आप ढाई
बाद क्यों
पेश कर रहे हो ? आप
दूसरे के ऊपर
इल्जाम लगा
रहे हो। आपके पास
सब्मिट कब हो
गयी ? जस्टिस
सक्सैना को
रिटायर हुए
कितना टाइम हो
गया, उसको रिपोर्ट
दिये कितना
टाइम हो गया ? ...
(व्यवधान)
खड़े होकर यह
कह देना आपकी
सरकार है।माननीय
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
से ... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): बता
देंगे। जब आप
राज में थे ना
तब सब्मिट हो
गयी थी ... (व्यवधान)
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
जब गृह मंत्री
थे तब सब्मिट
हो गयी थी ... (व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): फिर ?
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मेरी बात तो सुन
लो। यह यहां
पर कह कर कि
आपके समक्ष यह
बात आप गृह
मंत्री थे
आपके सामने
पेश हुई, इससे
तो जो समस्या
है।उसका
निदान तो
माननीय
संसदीय कार्य
मंत्रीजी,
होने वाला है।नहीं
... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आप अपनी
गलती स्वीकार
कर लें ... (व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मैं फिर आपसे
लौटकर यह कहता
हूं कि आपने
ढाई वर्ष तक
क्या किया ? ...
(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): जो आपने
पाँच वर्ष तक
किया।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): अब
देखिये यह
जांच आयेगी ...
(व्यवधान)
बैठे-बैठे बाप
बोला करें अगर
आप नियमों की
पालना नहीं
करेंगे उसका
मुझे ... (व्यवधान)
मैं सक्सैना
आयोग की बात
कर रहा हूं
अकेले की।
मेरा बेसिक
मूल प्रश्न
यह है, नीतिगत
प्रश्न है।कि
इसमें सरकार
क्या उपाय
करने जा रही है।?
जो आयोग गठित
किये जाते हैं
किसी स्पेसिफिक
परपज के लिये,
उनकी रिपोर्ट
समय के ऊपर आ
जाए, उनके ऊपर
कार्यवाही हो,
चाहे हमारी सरकार
नहीं करे,
आपकी सरकार
करे तो जो
परपज है।जिस
परपज के लिये
आयोगों का गठन
किया जाता है, आप
कहें कि आपने
यह नहीं किया।
मैं कहूं कि
आपने यह नहीं
किया। आप मेरे
ऊपर अरोप लगा
रहे हैं, गृह
मंत्री थे आप
लिये उसको
बैठे रहे, मैं कहूं
कि आपने ढाई
वर्ष तक क्या
किया ? तो यह
मतलब तो कुछ है।नहीं
इसलिये मेरा
आपसे निवेदन है।कि
मैं सरकार से
निवेदन करना
चाहता हूं इस
बारे में हम
सबको चिंतन
करना पड़ेगा
कि आयोगों का
गठन हो, स्वागत
के योग्य है।लेकिन
समय के ऊपर
रिपोर्ट आ जाए
इसके लिये हमको
कार्य करना
चाहिये। इसको
आप राजनीति
में घसीटना
चाहें आपकी
मर्जी है।आप
घसीटिये इसको
... (व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, सक्सैना
आयोग की
रिपोर्ट ... (व्यवधान)
श्री
देवीसिंह
भाटी (कोलायत):
मामला ठंडा
कैसे होगा ... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष
महोदय, प्रश्न
है।वह बहुत
गंभीर है। आप
यह सोच रही
होंगी सरकार कोई
भी हो, यह हो या
वह हो, दोनों
की जिम्मेदारी
होती है। उस
सरकार में
पड़ी रही तो
भी अच्छा
नहीं, आपके
पास ढाई साल
में पड़ी रही,
यह भी अच्छा
नहीं।
मान्यवर,
यह जो आयोग
बनते हैं, वह
स्वतंत्र
हैं अपनी
कार्य विधि
संचालन के
लिये। उनको
आजादी दी हुई
है। मैं आपकी
मार्फत यह मांग
करता हूं कि
कोई भी आप,
गवर्नमेंट
गठित करे उसकी
एक नियमावली
हो जानी चाहिये।
नियमों के तहत
वह चलना
चाहिये। आयोग
को यह अधिकार
नहीं होना
चाहिये कि वह
मर्जी आए जैसा
करे, वह स्वयं
अपनी विधि तय
करे। राज्य
सरकार को नियम
बनाने चाहिये
और उन नियमों
के तहत आयोग
को काम करना
चाहिये।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्यों ने
जो चिन्ता
जाहिर की है,
मैं सोचता हूं
सक्सैना
आयोग में तो
फिर भी अब क्योंकि
98 में आयोग का
गठन हुआ और 2001
में रिपोर्ट पेश
कर दी तब से
लेकर रिपोर्ट
आपके पास
विचाराधीन
रही, 2002 में अनवर
शाह बनाम राज्य
सरकार माननीय
उच्च न्यायालय
में 18.12.2000 को यथा
स्थिति कायम
रखने का आदेश
इस पर हुआ
उसके बाद डी
बी सिविल रिट
पिटीशन संख्या
8997 / 5
फिरोजुद्दीन
बनाम राजस्थान
राज्य सरकार
माननीय उच्च
न्यायालय ने
16.11.2005 को निर्देश
दिये। हमको वह
निर्देश 16.11.2005 को
प्राप्त हुए
। जांच
रिपोर्ट राज्य
सरकार को
प्रस्तुत की
गई और उसका
हमने नवम्बर
के महीने से
लेकर यह समय
इस सदन में
आने तक में
जरूर लगा ।
ssy/usc/1030/1d
नवम्बर के
महिने से लेकर
के यह समय इस
सदन में आने
में जरूर लगा
लेकिन इसके
पहले 2001 में
आपके पास आ
गयी, 2002
तक किसी भी
प्रकार की कोई
उस पर रोक
नहीं थी कोर्ट
की, आपको पेश
करना था नहीं
कर पाये ।
हमारे पास आने
के बाद, ग्याहरवें
महिने में
हमारे पास आयी
हमने यह रिपोर्ट
को पेश कर दी ।
वास्तव में
जब विचार करते
हैं तो यह
आयोगों की
रिर्पोटों की
जो भी हालात
हो रही है।उस
पर हम सबको
विचार करना
चाहिये, क्योंकि
वर्मा कमीशन
की जो रिपोर्ट
है।वह 5.12.91 को
मिली थी, 1996 को
यहां पटल पर
रखी गयी थी ।
भार्गव कमीशन
की रिपोर्ट 1993
में मिल गयी
और 1996 में जाकर
के यहां टेबल
हुई । टिब्बरवाल
कमीशन की 1995 में हमने
की थी । हमारा
शासन था, और 25.2.95
को रिपोर्ट प्राप्त
हुई और हमने 31.10.95
को हाउस की
टेबल पर रख
दिया । चौथा
लोढ़ा कमीशन
की रिपोर्ट 96
में बना था वह
अब 14.2.2005 को जाकर
के यहां टेबल
हो सकी। यह जो
एक परिपाटी है।जो
आपके समय में
भी रहीं, वास्तव
में इसका सही
उपयोग तो तभी है।जब
रिपोर्ट आती है।तो
उसके साथ ही
उसका हो ।
लेकिन यह जो
सक्सेना
कमेटी की
रिपोर्ट दर्ज
हुई इन्होंने
सीमा के बाहर
जाकर के ऐसी
कई रिकमंडेशन कर
दी जो इनके
परिव्यु में
नहीं थी । जो
इनको एरिया
दिया था जिसकी
रिपोर्ट देनी
थी उसके बाहर
निकलकर के भी
उन्होंने
रिपोर्ट दे दी
। उसके कारण
से मैं सोचता
हूं कि जब
हमको नवम्बर
में प्राप्त
हुई कोर्ट की
तरफ से
क्लियरेंस और
उसके बाद हमने
आज आपने सामने
रखा है।।
भविष्य में
जरूर हम इस
बात की कोशिश
करेंगे कि जो
भी आयोग गठित
हो वह समयबद्व
अपने काम को
पूरा करे और
समय पर उसकी
रिपोर्ट रखी
जाये ताकि आयोग
गठित करने का
जो हमारा मकसद
है।वह वास्तव
में सफल हो
सके ।
याचिकाओं
का उपस्थापन
श्री अध्यक्ष:
श्रीमती प्रतिभा
सिंह
याचिकाओं का
उपस्थापन
करेगी ।
श्रीमती
प्रतिभा सिंह
(नवलगढ़): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से कार्य सूची
में किये गये उल्लेख
के अनुसार दो
याचिकाओं का
उपस्थापन
करती हूं ।
विधायी
कार्य –
विधेयक का
प्रवर समिति
को निर्देशन
राजस्थान
समाज विरोधी
क्रियाकलाप
निवारण
विधेयक, 2006
श्री अध्यक्ष:
श्री गुलाब
चन्द
कटारिया,
राजस्थान
समाज विरोधी
क्रियाकलाप
निवारण
विधेयक, 2006 को
करेंगे ।
श्री गुलाब
चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से प्रस्ताव
करता हूं कि
राजस्थान
समाज विरोधी
क्रियाकलाप
निवारण
विधेयक, 2006 को प्रवर
समिति को
निर्दिष्ट
किया जाये ।
प्रवर समिति
के सदस्यों
के नामों की
सूची बाद में
प्रस्तुत की
जायेगी ।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
प्रश्न यह है।कि..
।
श्री अध्यक्ष:
हां, हां, मैं
समझ गयी ।
डॉ.बुलाकीदास
कल्ला ।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): अध्यक्ष
महोदय, मेरा
एक स्थगन
प्रस्ताव है।पैराटीचर्स
के बारे में ।
श्री अध्यक्ष:
मैंने तो आपको
विधेयक पर,
आपका प्रस्ताव
है।जनमत
जानने हेतु,
उसके बारे में
पुकारा है।और
आप बात करने लगे
पैरा टीचर्स
की ।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
उसके बारे में
भी परमीशन दी
थी ।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): जा
रहा है।प्रवर
समिति को ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आज फैसला हो
गया था कि
जीरो ऑवर नहीं
होगा ...(व्यवधान)
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
आपने चैम्बर
में कहा था कि
पैरा टीचर्स
के बारे में
पाँच मिनट आप
कह दें ।
श्री अध्यक्ष:
विधायी कार्य
शुरू हो गया ।
अब आप बीच में
पैरा टीचर्स
ला रहे हैं।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
आपने तो उस
दिन परमीशन दी
थी न मुझे ।
श्री अध्यक्ष:
उस दिन की बात
उस दिन गयी ...(व्यवधान)
उस दिन की बात
उस दिन चल गयी
...(व्यवधान)
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): आप
लाइब्रेरी
वाला ला रहे
हो ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
नहीं, अब तो यह
समाज विरोधी
क्रियाकलाप का
जो सलेक्ट
कमेटी को
सुपुर्द कर
रहेहैं। आपने
जनमत जानने के
लिए अपना
अमेंडमेंट
दिया है।...(व्यवधान)
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): ठीक
है, प्रवर
समिति को सौंप
रहे हैं तो
फिर क्या
कहना है।...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आप क्यों कह
रहे हैं यह
बात ...(व्यवधान) लैट हिम
से ...(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मैं आपको नहीं
इनको कह रहा हूं
...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
यह कह सकते
हैं आप क्यों
बीच में बोल
रहे हैं ...(व्यवधान)
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
प्रवर समिति
को सौंपना है।तो
फिर ठीक है।...(व्यवधान)
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): सबका
वापिस मान
लिया जाये,
सबका वापस मान
लिया जाये ...(व्यवधान)
सबक जनमत के
प्रस्ताव
वापिस मान
लिया जाये और
प्रवर समिति
को दे दीजिये ...(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
जब प्रवर
समिति को ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आप बैठे-बैठे
निर्दिष्ट
करेंगे क्या
उन्हें ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
देखिये, मुझे
नाम पुकारा
पड़ेगा । आप न
बोलें आप कह
दीजिये । अब
यह कह सकते
हैं जब सलेक्ट
कमेटी को दे
दिया तो अब
मुझे
उस बारे में
कुछ नहीं कहना
है।। मुझे तो
नाम पुकारना
पड़ेगा ...(व्यवधान)
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
प्रवर समिति
को सौंप दिया
जाये तो मुझे
कोई प्राब्लम
नहीं है।।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, यह
प्रस्ताव भी
नहीं दिया था
कि प्रवर
समिति को
सौंपेंगे । यह
जो आज प्रस्ताव
किया है।...(व्यवधान)
इसका मतलब
सरकार ने कह
तो दिया था तो
फिर ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
फिर भी यदि
कोई बोलना
चाहे तो मुझे
नाम पुकारना
पड़ेगा ...(व्यवधान)
आप न बोलें तो
अलग बात है।...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अध्यक्ष
महोदय, इस बिल
में मैंने
अमेंडमेंट
दिया है।...(व्यवधान)
वह उस समय दे
दें ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
श्री प्रहलाद
गुंजल
(अनुपस्थित )
श्री जुबेर
खान
(अनुपस्थित )
श्री
प्रद्युम्न
सिंह ।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
यदि आसन की
इच्छा है।कि
सदन का समय
जाया किया
जाये तो हम
निश्चित रूप
से बोलेंगे ।
श्री गुलाब
चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): काहे
को जाया करो
...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
मेरी कोई इच्छा
नहीं है, मेरी
कोई इच्छा
नहीं है।...(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): मैं
तो आपकी मदद
कर रहा था ।
आसन कह रहा है।कि
नहीं आप कैसे
कह सकते हैं
दूसरों को ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
ससम्मान स्थान
ग्रहण करिये
...(व्यवधान)
श्री संयम
लोढ़ा ।
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय, मैं
अपना प्रस्ताव
जनमत जानने का
वापस लेता हूं
।
श्री अध्यक्ष:
श्री जोगाराम
पटेल ।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): अध्यक्ष
महोदय, मैं
जनमत जानने का
प्रस्ताव
वापस लेने की
अनुशंषा करता
हूं ।
श्री अध्यक्ष:
श्री
शांतिलाल
चपलोत ।
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली):
अध्यक्ष महोदय,
मैंने जो जनमत
जानने का
प्रस्ताव
दिया है।वह
वापस लेता हूं
।
श्री अध्यक्ष:
श्री जोगेश्वर
गर्ग ।
श्री जोगेश्वर
गर्ग (जालौर):
अध्यक्ष
महोदय, जब
सरकार स्वयं
ही इसको जनमत
जानने के लिए
परिचालित कर
रही है।तो मैं
अपना वापिस
लेता हूं ।
श्री अध्यक्ष:
जनमत जानने का
नहीं कर रही
है, सलेक्ट
कमेटी का कर
रही है।।
श्री गुलाब
चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
प्रवर समिति
का कर रही है।।
श्री जोगेश्वर
गर्ग (जालौर):
जनमत जानने और
प्रवर समिति
को निर्दिष्ट
करना दोनों एक
हीहैं। सरकार
प्रवर समिति
को भेज रही है।यह
भी सरकार का
कदम स्वागत
योग्य है।।
मैं जनमत जाने
वाला मेरा
प्रस्ताव
वापिस लेता
हूं ।
श्री अध्यक्ष:
श्री जालम
सिंह
रावलोत(अनुपस्थित)
श्री वीरेन्द्र
बेनीवाल ।
श्री वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
अपना जनमत
जाने वाला
प्रस्ताव
वापस लेता हूं
।
श्री अध्यक्ष:
श्री गोपाल
बाहेती ।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
अपना प्रस्ताव
जनमत जानने
हेतु वापिस
लेताहैं।
श्री अध्यक्ष:
प्रश्न यह है।कि
समाज विरोधी
क्रियाकलाप
निवारण
विधेयक,2006 को
जनमत जानने
हेतु
परिचालित
किया जाये ?
(अस्वीकृत)
विधेयक को
जनमत जानने
हेतु
परिचालित
करने का
संशोधन प्रस्ताव
अस्वीकार
किया गया ।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
अस्वीकार
किया गया ।
श्री अध्यक्ष:
मैंने अस्वीकार
ही किया है।।
प्रश्न यह है।कि
राजस्थान
समाज विरोधी
क्रियाकलाप
निवारण
विधेयक, 2006 को
प्रवर समिति
को निर्दिष्ट
किया जाये ?
(स्वीकृत)
राजस्थान
समाज विरोधी
क्रियाकलाप
निवारण
विधेयक, 2006 को प्रवर
समिति को
निर्दिष्ट
किया गया ।
नामों की
सूचना तो आप
बाद में दे
देंगे ।
श्री गुलाब
चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): हां, बाद
में दे देंगे ।
श्री अध्यक्ष:
सलेक्ट
कमेटी के
नामों की
सूचना बाद में
दे दी जायेगी
। विचारार्थ
लिये जाने
वाले विधेयक ।
राजस्थान
सूचना का
अधिकार
(निरसन) विधेयक,2006
माननीय गुलाब
चन्द
कटारिया जी ।
विधेयक
पर विचार
राजस्थान
सूचना का
अधिकार
(निरसन)
विधेयक, 2006
श्री गुलाब
चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से प्रस्ताव
करता हूं कि राजस्थान
सूचना का
अधिकार
(निरसन)
विधेयक, 2006 को
विचारार्थ
लिया जाये ।
श्री अध्यक्ष:
डॉ.एन.एस.गुर्जर
तो हैं नहीं ।
श्री हरिमोहन
शर्मा ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अध्यक्ष
महोदय, सूचना
के अधिकार का
जो विधेयक 2006 को विचारार्थ
लेने का जो
प्रस्ताव है।उसके
संबंध में मैं
निवेदन करना
चाहता हूं कि सूचना
का अधिकार ऐसा
महत्वपूर्ण अधिकार
है।कि जो भारत
सरकार ने
पार्लियामेंट
में इस विधेयक
को विस्तार
से पास किया है।।
मैं निवेदन
करना चाहता
हूं कि 10 मई, 2005 को
माननीय डॉ.मनमोहन
सिंह जी ने
पार्लियामेंट
के संबोधन में
जो कहा है।कि
आज की दुनिया
में हम बड़े
जटिल समाज के
साथ रह रहेहैं।
इन समाजों को
अपने
रोजमर्रा के
कामकाज में सरकारों
के व्यापक
भूमिका की
जरूरत पड़ती है।।
हमारे खुद के
पास में भी
सरकार द्वारा
कुल सकल घरेलु
उत्पाद का 33
प्रतिशत है।और
यह केन्द्र
सरकार, राज्य
सरकार, स्वायत्त
निकायों के
जरिये किया
जाता है।। इसके
अलावा अर्थव्यवस्था
के सामान्य
कामकाज में भी
सरकारों को
बहुत सी
परिस्थितियों
में मजबूरी
में दखल देना
पड़ता है।और
ऐसा अलग-अलग
नियामत और
संस्थानों
के माध्यम से
किया है।। साथ
ही उन्होंने
संक्षेप में
यह भी कहा कि
हम सभी जानते
हैं विकास की
प्रक्रिया
में कई कडि़या
आपस में जुड़ी
होती हैं। हम सब
यह भी जानते
हैं सबसे गरीब
तबके को मिलने
वाले लाभ उन तक
नहीं पहुंचतेहैं।
हमें यह भी
मालूम है।कि
गरीब और कमजोर
लोगों के लिए
खर्च किये
जाने वाले धन
को किस तरह
समाज का प्रभावी
तबका खा जाता है।।
मुझे उम्मीद है।कि
सूचना पाने का
अधिकार
सार्वजनिक धन
के दुरूपयोग
को रोकने के
लिए उन लोगों
के हाथ में एक
कारगर हथियार
देगा जो लोकहित
को सबसे ज्यादा
अहमियत देतेहैं।
अध्यक्ष
महोदय, जिस
भावना ...(व्यवधान)
श्री गुलाब
चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): जब
वापस ले रहे
हैं तो क्यो
इसमें ...(व्यवधान)
jyg/usc/746/1040/1e
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप वापस ले
रहे हैं न? यह
आप यह व्यवस्था
नहीं कर पा
रहे हैं। आप
इस विधान के
तहत, आप इस कानून
के तहत जो
भारत सरकार ने
बनाया है,
उसके तहत तो
राजस्थान
में व्यवस्था
नहीं कर पाए।
इसके लिए तो
मैं इस बात की
भी प्रशंसा
करूंगा कि भारत
सरकार ने तो
फिर भी अब
बनाया है, राजस्थान
के तत्कालीन
माननीय मुख्य
मंत्री श्री
अशोक गहलोत ने
तो सूचना का
अधिकार इस
सारे
परिप्रेक्ष्य
में समय से
पूर्व ही
राजस्थान
विधान सभा में
पास करके एक
रास्ता
दिखाया है।आप
लोगों को और
सारी जनता को
और सारे देश
को कि इस
प्रकार का
अधिकार जनता
को होना चाहिए
कि जहां
करोड़ों-अरबों
रुपए की
योजनाएं आप और
हम लोग बनाते
हैं और उनको
गरीबों तक पहुंचने
के जो रास्ते
हैं वे रास्ते
इतने
टेढे-मेढे और
कठिन हैं कि
उस गरीब को जब
तक अपना अधिकार,
उसके लिए
कितना पैसा
गया है, सरकार
क्या कर रही
है, किस
प्रकार के
आदेश
प्रसारित कर रही
है, किस
प्रकार की
कार्यवाही कर
रही है, उसको
जानने का महत्वपूर्ण
अधिकार दिया।
उस अधिकार के
मामले में मुझे
दु:ख के साथ
कहना पड़ रहा है।कि
राजस्थान की
सरकार पूरी
सोई हुई है। आपको
इस कानून को बनाए
हुए इतना समय
हो गया, उसके
आधार पर आपने
कितने ही स्थानों
पर सूचना के
अधिकारी तक
नियुक्त
नहीं किए। अगर
आपकी नीयत साफ
होती, अगर आप
जनता को और उस
गरीब तबके को
और सारे राजस्थान
के सभी
नागरिकों को
यह अधिकार,
राजस्थान की
विधान सभा के
सदस्य और
दिल्ली की
पार्लियामेण्ट
के सभी
सदस्यों को
प्राप्त यह
अधिकार, गरीब
तबके के पास
स्थानांतरित
हो। इसके लिए राजस्थान
की सरकार
चुपचाप सोई
पड़ी है।और
कुछ नहीं करना
चाहती बल्कि
जो अधिकार
दिया गया है।उस
पर कुठाराघात
कर रही है।
आपने मुख्य सूचना
आयुक्त,
जिसकी समय पर
नियुक्ति की
जानी चाहिए
थी, आपने आज तक
मुख्य सूचना
आयुक्त की
राजस्थान की
सरकार ने,
माननीय मुख्य
मंत्रीजी की
अध्यक्षता
में जो कमेटी
बनी उसकी एक
मीटिंग इतने समय
बाद आज तक
नहीं हुई और
आपने मुख्य
सूचना आयुक्त
की आज तक
नियुक्ति
नहीं की। यही
नहीं आपने राजस्थान
में जो आठ और
दस सूचना
आयुक्तों की
नियुक्ति
करनी थी, उन
सारे आयुक्तों
में से एक भी
आयुक्त आपने
आज तक कहीं पर
नियुक्त
नहीं किया।
होता क्या है।कि
स्थानीय स्तर
पर जो सूचना
अधिकारी हैं
वे जो फैसला
करते हैं और
उनके निर्णय
से जो असंतुष्ट
हैं, वह कहां जाएगा।
राजस्थान की
सरकार यह भली
भांति जानती है।कि
जिस प्रकार के
निर्णय इन ढाई
सालों में
अपने-अपने ढंग
से कानून की
परिधि से
हटकर, मनमाने
ढंग से विधि
को ताक पर
रखकर ले रही है,
सूचना का
अधिकार अगर
जनता के पास
चला जाएगा तो
आपने पूरे ढाई
साल में
जिस-जिस
प्रकार के
बड़े-बड़े कारनामे
किए हैं, उनकी
पोल खुल जाएगी
और वह आदमी
सड़क पर जाकर
कहेगा कि
राजस्थान
सरकार ने
ये-ये गलत काम
किए हैं जो
जनहित विरोधी
हैं, जनता के
विरोधी हैं,
गरीब विरोधी हैं।
इस प्रकार आप
जनता को सूचना
का जो अधिकार है,
नागरिकों को
नहीं देना चाहते
हैं। मैं आपसे
निवेदन करना
चाहता हूं कि
आपके सूचना
अधिकारी आज
कहीं भी
प्रार्थना
पत्र लेने की
स्थिति में
नहीं है। आप
यह बताइए कि माननीय
गृह मंत्रीजी,
सूचना के
अधिकार के तहत
किस-किस सूचना
अधिकारी के
पास किस-किस
स्थान पर,
किस-किस जिले
में
कहां-कहां,
किस-किस उप
खण्ड में
कितने-कितने
प्रार्थन
पत्र आए,
कितनों का
आपने डिस्पॉज
ऑफ किया और
आपने उसकी क्या
रेट
निर्धारित की,
किस प्रकार से
उनको ज्यादा फीस
बताकर
प्रताडि़त
कर रहे हैं, इन
सब, सारे
समग्र रूप में
जो अधिकार
सूचना के
अधिकार के तहत
दिया गया है,
उस सूचना के
अधिकार का लाभ
विधान होते
हुए भी राजस्थान
की सरकार गरीब
तबके तक
पहुंचाने में
सबसे बड़ी बाधक
है। इसलिए
मेरा आपसे
विनम्र
अनुरोध है।कि
एक ओर तो आप इस
विधेयक को
वापस लेने की
तैयारी कर रहे
हैं। मैं आपसे
पूछना चाहता
हूं माननीय
गृह मंत्रीजी,
इस विधेयक को
वापस लेने से
पहले आपने यह
नहीं सोचा कि
मुख्य सूचना
आयुक्त
नियुक्त कर
दें, आपने
नहीं सोचा कि
मुख्य सूचना
आयुक्त के
साथ सूचना
आयुक्त हैं
उनका निर्णय
कर लें, इसका
परिणाम यह आ
रहा है।कि
राजस्थान के
मामले में जो
भी स्थानीय
स्तर पर इस
सारे कानून के
प्रावधान के
हिसाब से जो
सूचना प्राप्त
करना चाहते
हैं जो सूचना
उनको उपलब्ध
नहीं हो रही
है, उन सूचनाओं
के लिए वह अपील
कहां जाकर
करे, किस से
जाकर कहे,
कहां जाकर सारी
बात करे। मेरा
आपसे विनम्र
अनुरोध है।और
प्रार्थना है।कि
यह सूचना का
अधिकार जिसका
विधेयक आप
वापस ले रहे
हैं, मेरी तो
मान्यता है।कि
इसको वापस
लेने से पूर्व
अगर इसके
प्रावधान जो
भी हमारे पास हैं
अगर आप मुख्य
सूचना आयुक्त
की नियुक्ति
नहीं कर पा
रहे हैं, आप
सूचना आयुक्तों
की नियुक्ति
नहीं कर पा
रहे हैं, आप
जनता को सही
लाभ नहीं
पहुंचा पा रहे
हैं, जनता के
अधिकारों की
रक्षा नहीं कर
पा रहे हैं,
जनता जो चाहती
है।सूचना
प्राप्त
करना, उनको आप
देना नहीं
चाहते, जान
बूझकर टाल रहे
हैं और इस
प्रकार इस
कानून के
प्रावधानों
के तहत जो
अधिकार मिला है।उसकी
उपेक्षा यह
राजस्थान की
सरकार कर रही है।इसको
तो वापस मत लो,
आप इसी को
रहने दो, इसी
के माध्यम से
जो काम हो
सकता है, विधि
से, लॉ
डिपार्टमेण्ट
से आप पूछ लें, आप
पहले व्यवस्था
कर दें फिर
वापस लें तो
ज्यादा अच्छा
होगा,। धन्यवाद।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): मैं बहुत
कुछ इस पर
चर्चा नहीं
करना चाहता,
क्योंकि गठन
के पीछे विधान
सभा में जो
विषय उठा था...।
श्री
अध्यक्ष: और
भी तो बहुत
बोलने वाले
हैं।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): एक
सैकण्ड। क्योंकि
जब मैं वापस
ले रहा हूं, तब
नहीं गठन हुआ था।
मेरे सामने ही
बात हो चुकी
थी कि मुख्य
मंत्रीजी और
नेता
प्रतिपक्ष..।
श्री
अध्यक्ष:
हां, इसके बाद
भी अगर कोई
बोलना चाहेगा
तो?
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): उत्तर
सबका एक साथ
देना।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): आगे
चलेंगे तो
कहेंगे।
श्री
अध्यक्ष: डा.
चन्द्रशेखर
बैद।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, सूचना का
अधिकार, राजस्थान
पहला राज्य
था जो सूचना
का अधिकार
विधेयक लाया, पिछले
कार्यकाल में,
कांग्रेस के
कार्यकाल में,
अब आप इस
अधिकार को
जनता से छीनना
चाहते हैं और
दूसरा अधिकार
देना नहीं
चाहते।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से
निवेदन करना
चाहता हूं कि
सूचना का अधिकार
विधेयक, 2005 लोक
सभा में कब
पारित हुआ, 11 मई
को, राज्य
सभा में कब
पारित हुआ, 12 मई
को, राष्ट्रपति
द्वारा इसका
अनुमोदन कब
किया गया, 13 जून
को और गजट
नोटिफिकेशन
निकल गया 21 जून
को। उसके अन्दर
साफ तौर पर
लिखा गया है।
मैं आपके माध्यम
से इसकी दो
लाइनें पढ़ कर
सुनाना चाहता
हूं, The
provision of sub-section (i) of Section 4, sub-section (i) and (ii) of Section
5. 12, 13, 15, 16, 24, 27 और 28
को छोड़कर
“The remaining provisions of this Act shall come into force in 120th
day.”मतलब 21 जून
को 120 दिन के अन्दर
आपको सूचना का
अधिकार
अधिनियम, 2005
राज्य में
लागू कर देना
चाहिए था,
उसका कमिशनर
बन जाना चाहिए
था, कमीशन का
पूरा गठन हो
जाना चाहिए
था, उसके
कमिश्नर के
नीचे जो इनके
कमिश्नर
होते हैं वह
बन जाने चाहिए
थे। आपने क्या
किया? आपने
सिर्फ एक
परिपत्र जारी
करके ए पी आई ओ
और पी आई ओ
नियुक्त कर
दिए। अलग-अलग
ब्लाक के अन्दर,
डिस्ट्रिक्ट्स
के अन्दर ए
पी आई ओ
नियुक्त कर
दिए और पी आई ओ
नियुक्त कर
दिए, अब किसी
व्यक्ति को
यदि सूचना का
अधिकार
अधिनियम, 2005 के
माध्यम से
कोई सूचना
लेनी है।और
उसे पूर्ण
सूचना नहीं
मिल पाती है,
उसे आधी अधूरी
सूचना मिलती है।अगर
उसे सूचना नहीं
दी जाती है।तो
वह किसे अपील
करेगा? क्या
आपने मालूम
किया कि आज
सैंकड़ों
हजारों अप्लीकेशनस
सिर्फ इसलिए
पड़ी हैं
निचले स्तर
तक उनको पूर्ण
सूचना नहीं
मिल पाई इस
सूचना के
अधिकार को
बनाया क्यों
गया था? इसके
एम्स और आब्जेक्टिव्स
क्या थे,
इसके एम्स
थे,
ट्रांसपेरेंसी
को मेनटेन
करना, करप्शन
को हटाना और
गवर्नमेण्ट
को अकाउण्टेबल
बनाया।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से
निवेदन करना
चाहता हूं कि
जब तक सूचना का
अधिकार
विधेयक, 2005 का
पूर्णतया गठन
न हो जाए तब तक
जो आल रेडी स्टेट
का सूचना का
अधिकार चल रहा
है।उसे लागू
रखा जाए।
आप
यह देखिए कि
आज से दो दिन
पहले मैं आपसे
यह निवेदन
करूं चार
अप्रैल को एक
लीडिंग टी वी
चैनल पर जो न्यूज
आई उसमें
राजस्थान
सरकार द्वारा
दिए गए सूचना
के अधिकार की
प्रशंसा की गई
और उसमें यह
बताया गया कि
बी पी एल
परिवारों के
गेहूं का गबन
करने वाले
लोगों को किस
तरह से इस सूचना
के अधिकार का
प्रयोग करके
उन लोगों ने
सूचना मांग कर
पकड़वाया। यह
सारी चीज होने
के बाद
सारे राज्यों
के अन्दर
जहां सूचना का
अधिकार
विधेयक, 2005 लागू
है, राजस्थान
पहला राज्य
होगा जहां कि
इस अधिकार से
लोगों को उससे
वंचित रखा
जाएगा। इससे
मंशा साफ नजर
आती है, आपने
जैसे बिना
टेण्डर के
ठेका देने की
किसी को सूचना
लेनी है, सूचना
नहीं ले
पाएगा, आपको
भूमि का आवंटन
करना है, हम
सूचना मांगना
चाहते हैं,
सूचना नहीं
मिल पाएगी,
इसी तरह से
यदि आप सारी
चीजें ठेके पर
रखना चाहते
हैं, जनता के
सामने उनके
सूचना के
अधिकार को छीनना
चाहते हैं। आपसे
विनम्र
निवेदन है।कि
पहले भी स्थगन
प्रस्ताव के
माध्यम से यह
मांग उठी थी
कि सूचना के
अधिकार का कमिश्नर
क्यों नहीं
नियुक्त
किया गया,
जवाब यह आया
कि जब
प्रतिपक्ष के
नेता उपलब्ध
होंगे तब तय
कर लिया
जाएगा। आज छह
महीने निकल गए
हैं, छह महीने
से ज्यादा समय
निकलने के
बावजूद आज तक
एक पत्र भी
माननीय मुख्य
मंत्रीजी
द्वारा प्रतिपक्ष
के नेता को
नहीं आया कि
हमें सूचना के
अधिकार का
कमिश्नर
नियुक्त
करना है।तो
इससे आपकी
मंशा साफ नजर
आती है।कि
सूचना का जो
पहला अधिकार
दिया था उसको
तो आप छीनना
चाहते हैं और
जो लोक सभा ने
देश में पहली
बार लोकतंत्र
की जड़ें राष्ट्र
के अन्दर
मजबूत करने के
लिए जो नया विधेयक
बनाया उससे आप
राजस्थान की
जनता को वंचित
करना चाहते
हैं। मैं इसका
घोर विरोध
करता हूं और
यह कहता हूं
कि जब तक आप
इसको पूर्ण
रूप से लागू
नहीं करते तब
तक राज्य में
चल रहे सूचना
के अधिकार को
जनता से न छीना
जाए, धन्यवाद।
07042006/1050/gpc/akt/1f
श्री
अध्यक्ष:
श्री सीपी
जोशी।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, मुझे
माननीय
मंत्रीजी का
ध्यान इस ओर
आकर्षित करना
है, जब
सेंट्रल लॉ बन
गया और स्टेट
का लॉ बना हुआ
था तो निश्चित
तौर पर पार्लियामेंट
के द्वारा जो
लॉ बना है।वह
प्रिवेल करता
है। इसका मतलब
यह हुआ कि 2005 में केन्द्रीय
सरकार ने जो
कानून बनाया
वह कानून 120 दिन के
बाद राजस्थान
में लागू हो गया।
जब 120 दिन बाद
में लागू हुआ
तो यह स्वत:
हो गया जिसको
आज विधान सभा
में निरसन
करने के लिए
ला रहे हैं वह
कानून की
दृष्टि से तो
वैसे ही
इनइफेक्टिव
हो गया चाहे
आप इसको हाउस
में लाते या न
लाते, क्योंकि
हमारे
संविधान की व्यवस्था
इस तरह की है।कि
जब सेंट्रल का
कानून बन जाता
है।और उस
कानून के बन
जाने के बाद
जब उसमें
मेंडेटरी लिख
दिया कि 120 दिन
में यह लागू
हो जाएगा तो मैं
यह मानता हूं
कि जून, 2005 के 120
दिन के बाद यह
जो कानून बना
हुआ है।सूचना
का अधिकार वह
राजस्थान
में लागू है।
अच्छा होता
यह सरकार 120 दिन
के पहले इस
कानून को
निरसन के लिए
सदन में लाती और
मैं नहीं
समझता कि आज
हम एक महीने
की असेम्बली
चलाने के बाद
आज हम इसको
लेकर आ रहे
हैं। आपकी जो
संवैधानिक
रिक्वायरमेंट
है, संवैधानिक
आवश्यकता है।कि
विधान सभा में
बिल को निरसन
कराना है।यदि
यही आवश्यकता
पूरी करनी है।तो
अलग बात है,
लेकिन कानून
की दृष्टि से
आपको यह निरसन
का बिल हाउस
में लाने की
आवश्यकता
नहीं थी।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, सबसे
विचित्र बात
यह है।जब यह
कानून 2005 में
लागू हो गया
तो इस कानून
के जो प्रोविजन
हैं, जिस
प्रोविजन का
प्रश्न
तारानगर से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने उठाया कि
आपको स्टेट
में चीफ इन्फोर्मेशन
आफिसर नियुक्त
करना है। 120 दिन
में जो आपका कर्तव्य
था, इसमें
लिखा हुआ है।गवर्नर
साहब अपाइंट
करेंगे ऑन दी
रिकमंडेशन ऑफ
दी कमेटी,
चेयर पर्सन
चीफ मिनिस्टर
है। जो ओनस है।120
दिन के अंदर
चीफ इंफार्मेशन
आफिसर अपाइंट
हो जाए। यह ओनस
लाइ करता है।चीफ
मिनिस्टर के
ऊपर। मुझे
कहते हुए
तकलीफ है।यह
सरकार सूचना
के अधिकार से
जनता को वंचित
करने के लिए 120
दिन के अंदर
मुख्यमंत्री
को जो अपने
कर्तव्य का
निर्वहन करना है।पार्लियामेंट
के इस एक्ट
के कर्तव्य
का निर्वहन
करने में असफल
रही है, मुख्यमंत्री
अपने दायित्व
का निर्वहन
करने में असफल
रही है। यह हम
सबके लिए चिन्ता
का मसला है।क्योंकि
राजस्थान वह
प्रदेश है।जिस
राजस्थान
प्रदेश में यह
मूवमेंट शुरू
हुआ। माननीय भैरोंसिंह
जी शेखावत
राजस्थान के
मुख्यमंत्री
थे तब अरुणा
राय ने एक
आंदोलन शुरू
किया था पंचायत
एक्ट के अंदर
यह प्रोविजन
किये गये थे,
एक लम्बा
आंदोलन चला,
लंबा आंदोलन
चलने के बाद
यह स्थिति बनी
कि राजस्थान
पहला स्टेट
बना कांग्रेस
के शासन में
जिसने राइट टू
इंफार्मेशन
का बिल
इंट्रोड्यूज
किया। बिल
इंट्रोड्यूज
करने के बाद
उसके अनुभवों
का लाभ उठाकर 120
दिन में यह
सरकार यदि
नियम और कानून
बनाती तो समझते
कि सरकार का
कमिटमेंट
राइट टू
इंफार्मेशन
के प्रति है,
लेकिन कहते
हुए तकलीफ है।यह
सरकार राइट टू
इंफार्मेशन
के बारे में
कमिटेड नहीं है।और
कमिटेड न होकर
राजस्थान की
जनता के साथ
जो कानून का
प्रोविजन
किया गया है।उससे
वंचित करने का
काम कर रही
है। इसलिए
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे निवेदन
करना चाहता
हूं कि माननीय
गृह मंत्रीजी जब
जवाब दें तब
यह बताएं
इसमें चेप्टर
में दी स्टेट
इंफार्मेशन
कमीशन के 15 नम्बर
का लिख रखा था- “The State Information Commission
shall consist of ……..”
इसमें
लिख रखा है-
“The State Chief Election Commissioner and the State
Information Commissioner shall,…..” the word ‘shall’ hai.It is not the
discretion of the Chief Minister. यह
राजाशाही नहीं
है।कि राजा का
मन होगा जब
कानून
बनाएंगे, राजा
का मन नहीं
होगा कानून
नहीं
बनाएंगे। यह ‘शेल’
वर्ड लिखा हुआ
है। चुनी हुई
सरकार के मुख्यमंत्री
का यह दायित्व
था कि
पार्लियामेंट
ने जो बिल पास
किया उस पार्लियामेंट
के बिल के
अंदर यह लिखा
हुआ है- “The State Chief Election Commissioner and the State
Information Commissioner shall be appointed by the Governor on the
recommendation of the committee consisting of the Chief Minister who shall be
the chairperson of he committee, the Leader of the Opposition in the Legislative
Assembly and the Cabinet Minister to be nominated by the Chief Minister. “
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, उस
दिन आपने
रूलिंग दी थी
तब भी मैंने यह
बात कही थी,
सरकार के
द्वारा यह
कहलाया गया कि
प्रतिपक्ष के
नेता के कारण
नहीं हो रहा
है। प्रतिपक्ष
के नेता तो 120
दिन पहले भी
कांग्रेस पार्टी
का था और
कांग्रेस
पार्टी के
प्रतिपक्ष के
नेता के कार्यालय
में आज दिन तक
मुख्यमंत्री
का कोई पत्र
नहीं गया।
मुख्यमंत्री
का पत्र गया
हो कि हम
मीटिंग करना
चाहते हैं आप
उपस्थित हों
उसके बाद नहीं
बनता तब तो यह ओनस
रहता कि
प्रतिपक्ष
अपना काम करने
में असफल रहा
है, लेकिन
दुर्भाग्य
यह है।कि
सरकार के
द्वारा आपके
माध्यम से यह
कहलाया गया कि
प्रतिपक्ष के
नेता की उपलब्धता
के कारण इसको
हम नहीं बना पा
रहे हैं। मैं
समझता हूं
सरकार अपने
उत्तरदायित्व
का निर्वहन
करने में असफल
रही है।और
राजस्थान की
जनता को वंचित
करना चाहती है।कि
जो पिछले
डेढ-दो साल
में जिस तरह
की स्थितियां
बनी हैं जिस
तरह की बातें
अखबार में आ
रही हैं, जिस
तरह की बातें
जनता के मन
में हैं, किस
तरह की लेण्ड
का यहां पर हम
कर रहे हैं,
किस तरह से हम
प्राइवेट सेक्टर
को पब्लिक
सेक्टर के
साथ पार्टनरशिप
कर रहे हैं,
रिडकोर के
अंदर, मैंने
अध्यक्ष
महोदय, उस दिन
भी कहा था 1000
करोड़ का ठेका
आपने दिया और
इक्विटी 5 करोड़
रुपये की रखी।
5 करोड़ की
इक्विटी में 1000
करोड़ रुपये
का काम मिल
रहा है। आज
पार्लियामेंट
अफेयर्स
मिनिस्टर
मौजूद नहीं
हैं, 35 करोड़
रुपये का
रिनोवेशन का
काम आमेर किले
का दे दिया
गया सुपरविजन
के अंतर्गत।
कोई टेंडर
नहीं किया
गया। जेडीए के
अंदर माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आश्चर्य
की बात है।जेडीए
के अंदर
चपरासी का
अपाइंटमेंट
है, पीए का
अपाइंटमेंट
है, अधिकारी
का
अपाइंटमेंट
है, जेडीए का
कमिश्नर
अपनी मनमानी
से चपरासी से
लेकर अधिकारी
तक लगा दे और
जेडीए के
अधिकारी बैठे
रह जाएं इससे
दुर्भाग्यपूर्ण
स्थिति इस
प्रदेश में बन
नहीं सकती। राजस्थान
की जनता को
कानून के अंदर
जो प्रावधान
दिये हुए हैं
उससे वंचित
करने का जो
षड्यंत्र
किया जा रहा
है, अपने
कर्तव्य का
निर्वहन करने
के लिए यह हम
सबके लिए चिन्ता
का विषय है।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आप
तो कामनवेल्थ
पार्लियामेंट्री
एफेयर्स
कमेटी की एक्जीक्युटिव
की मेम्बर बन
गई हैं, आपको
तो एग्जाम्पल
देना पड़ेगा
कि हमारे जो
अध्यक्ष हैं
वे अध्यक्ष
आज कामनवेल्थ
में
पार्लियामेंट्री
अफेयर्स की
एक्जीक्यूटिव
की मेम्बर
हैं और वो यदि
लीड लेकर
सरकार को यह
नहीं बताए कि
मुख्यमंत्री
यदि कमेटी
नहीं बनाये,
इंफार्मेशन का
बने ही नहीं
तो जनता कहां
जाएगी। जनता
के पास क्या
अधिकार बचा
है? मैं समझता
हूं यह प्रश्न
गंभीर प्रश्न
है। केवल मात्र
डिबेट नहीं
करनी है। मेरा
माननीय मत्री
महोदय से
सानुरोध
निवेदन है।कमिटमेंट
‘Commitment’, the word I am
using. इस
पवित्र सदन के
सामने कि Heavens are not going to fall. चीफ
मिनिस्टर
लीडर ऑफ
अपोजिशन की
मीटिंग
बुलाकर सबसे
इम्पोर्टेंट
जो इसमें स्टेट
चीफ
इंफार्मेशन
आफिसर बनाना है।उसका
अपाइंटमेंट
करें, 24 घंटे में
तब लगेगा कि
सरकार का
कमिटमेंट है,
प्रतिबद्धता
है, लोगों को
सूचना का
अधिकार देकर
ट्रांसपेरेंसी
के माध्यम से
सरकार का
गवर्नेंस
करना है, यदि
ट्रांसपेरेंसी
के बारे में
गवर्नेंस
नहीं करना
चाहते और हम
चाहते हैं
सरकार अपने
ढंग से चलाएं
तो यह जो
कानून बना है।उस
कानून का कोई
भी लाभ जनता
को नहीं
मिलेगा।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
इसके साथ
माननीय
मंत्रीजी का
ध्यान और
आकर्षित करना
चाहता हूं।
इसमें आगे जो आर्टिकल
लिखे हुए हैं
उसके सेक्शन
की तरफ माननीय
मंत्रीजी का
ध्यान
आकर्षित करना
चाहता हूं। 120
दिन के बाद
मान लो किसी
कारण से नहीं
कर पाये,
लेकिन इसमें
जो दूसरे क्लॉज
लिखे हुए हैं,
माननीय
मंत्रीजी
बताएं कि उन
क्लॉज को
फुलफिल करने
के लिए हमने
काम किया? मैं आपका
ध्यान
आकर्षित करना
चाहता हूं
सेक्शन 26 में – Section 26. “The appropriate
Goverrnment to prepare programme.
26(a) The appropriate government
may, to the extent of availability of financial and other resources, develop an
organized educational programme to advance the understanding of the public in
particular of dis-advanced communities as to how to exercise the rights
contained under this Act. “
यह
सरकार का उत्तरदायित्व
था. We encourage the public authorities to
participate in the development and operation of the programme, referred to in
clause (a) and to undertake such programmes themselves. (c) promote timely and
effective dissemination of accurate information by public authorities about
their activities and (d) train Central Public Information Officers or State
Public Information Officers, as the case may be, of public authorities and
produce relevant training materials for use of the public authorities
themselves. आपने
अपाइंट नहीं
किया और यह
काम जो आपको
करना था उसके
लिए तो आपको
किसी ने वंचित
नहीं किया था,
सरकार आगे आकर
यह काम करती
कि यह काम
हमें करना था।
सरकार ने वह
काम करने का
अपना कर्तव्य
था उसका भी
निर्वहन नहीं
किया। 27 की ओर
ध्यान
आकर्षित करना
चाहता हूं.
Section 27(2). “The in particular and without prejudice to
the geneses of the foregoing powers such rules may be provided for all or any
of the following matters namely;”
इसमें
लिख रखा है।the cost of medium of……kitna hoga यह
इसमें लिख रखा
है। आगे इसमें
लिख रखा है।कैसे
प्रोसिजर
बनेगा, कैसे
हम काम
करेंगे, यह सब
सरकार को करना
था। सरकार यह
काम करने में
भी सफल नहीं
हुई। सेक्शन
29 का पार्ट 2
कहता है.
Section 29(2) “Every rule made under this
Act by a State Government shall be laid as soon as may be after it is notified
before the State Legislature.”
इसका
मतलब यह हुआ
कि अभी तो
कानून बनाया
ही नहीं, नियम
बनाया ही नहीं
है, असेम्बली
में रखा ही
नहीं है।तो
इसका मतलब
अगली असेम्बली
जो 6 महीने बाद
आएगी, 6 महीने
तक इस एक्ट
का कोई ऑपरेशन
नहीं होगा।
मैं समझता हूं
कि इससे दुर्भाग्यपूर्ण
स्थिति नहीं
बन सकती कि
सरकार, मुख्यमंत्री
अपने दायित्व
का निर्वहन
नहीं करे, चीफ
इंफार्मेशन
ऑफिसर को
अपाइंट नहीं
करे और सरकार
उसके संबंध
में कोई नियम
और कानून नहीं
बनाये और जनता
को वंचित करे
तो इससे ज्यादा
दुर्भाग्यपूर्ण
स्थिति राजस्थान
के लिए, देश के
लिए नहीं हो
सकती। जो
राजस्थान
पायनीयर है।यह
राइट टू
इंफार्मेशन
एक्ट के
अंतर्गत करने
के लिए उस
पूरे मूवमेंट
को सबोटेज कर
दिया गया है।
अब यह लेजिस्लेटिव
असेम्बली
किसलिए बनायी
है, केवल
ग्रिवीएंसेज
का प्लेटफार्म
है, हम आकर
अपनी
ग्रिवीएंसेज
को वेंटीलेट
कर दें, यह
कानून बनाने
की, संविधान के
तहत सभा बनी
हुई है।उसमें
कानून जब भारत
सरकार ने
बनाया उस
कानून की
अवहेलना की
जाए और हम
लेजिस्लेटिव
असेम्बली के
मेम्बर है।तो
हम सबके ऊपर
भी प्रश्नचिन्ह
है।कि हम किस
तरह असेम्बली
में डिस्कस
कर रहे हैं।
मैं समझता हूं
इस मामले को
गंभीरता से
लिया जाना
चाहिए और
सरकार बताए कि
2005 का जो निरसन है।वह
तो
इनइफेक्टिव
हो गया इसलिए
आप चर्चा
करें, न करें
कोई मतलब नहीं
है, लेकिन हम
इस अपार्चुनिटी
का लाभ लेकर
यह बताना
चाहते हैं यह
सरकार इस
निरसन के नाम
पर जो सेंट्रल
एक्ट बनाया है।उस
एक्ट को भी
राजस्थान
में लागू नहीं
करके राजस्थान
की जनता के साथ
कानूनन
दृष्टि से एक
धोखा कर रही
है। इस धोखे
को रोकने के
लिए हम सबके
लिए गंभीर
चिन्ता का
प्रश्न है।
इसलिए माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से अनुरोध
करना चाहता
हूं इस निरसन
का कानूनन
दृष्टि से कोई
महत्व नहीं
है।
Mlb/akt/1g/1100/7.5.2006
लेकिन
इससे ज्यादा
महत्व यह है।कि
इन्होंने
अपने आक्जेक्टिव
में लिखा है,
अध्यक्ष
महोदय, जो सबसे
दुर्भाग्यपूर्ण
है।कि इसमें
आब्जेक्टिव
में लिखा है।कि
– “The Parliament has enacted
the Right to Information Act, 2005. The
law made by the Parliament is a comprehensive law on the right to information
and applicable to the whole of the
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण,
3 बजे आज हमें
इन तीनों
बिलों को पास
कर देना है।और
अब जब कह दिया,
आप संक्षेप में
अपनी बात कहने
का कष्ट
करें। माननीय
सदस्य, श्री
बुलाकीदास
कल्ला।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यह
सी.पी. जोशी
साहब हमारे
संस्कारों
से काफी
प्रभावित हो
रहे हैं, यह
बहुत प्रसन्नता
की बात है। ...(व्यवधान)...
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
मैं हो रहा
हूं या नहीं
हो रहा है।लेकिन
आपका जमीर जग
गया है।तो मैं
बहुत प्रसन्न
हूं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
लेकिन अफसोस
इस बात का है।कि
सरकार अपना
प्रभाव आप पर
आज तक कायम
नहीं कर सकी।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): हल्का
जमीर जगा है,
तीन दर्जन विधायक
इकट्ठे किये
हैं इन्होंने।
श्री
अध्यक्ष:
संक्षेप में
बोलो। ...(व्यवधान)...
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): अध्यक्ष
महोदय, मेरे से
पूर्व माननीय
सदस्यों ने
जो विचार व्यक्त
किये उसको आगे
बढ़ाते हुए
मैं कहना
चाहता हूं कि
राजस्थान
सूचना का
अधिकार निरसन
विधेयक जो 2006 ये
लाए हैं उससे
पहले राज्य
सरकार को यह
सोचना चाहिए
कि केन्द्रीय
सरकार ने जो
एक्ट पास
किया सन् 2005 में
उसकी लास्ट
डेट 21 अक्टूबर,
2005 थी। आपने 4
महीने में न
तो राज्य
सूचना आयोग की
नियुक्ति की न
अन्य आयुक्तों
की नियुक्ति
की और यह बात
कह कर अपना
पल्ला
झाड़ना चाहा
कि प्रतिपक्ष
के नेता को
समय नहीं था।
आपने कब
मीटिंग
बुलाने का
नोटिस जारी किया
वह सदन की मेज
पर रखें। एक
बार आपने मीटिंग
बुलाई नहीं और
लगभग यह कहना
चाहिए कि अक्टूबर
के बाद आप
नवम्बर,
दिसम्बर और
आज मार्च चला
गया 5 महीने
गुजार दिये,
मैं समझता हूं
कि एक्सपायरी
डेट के 5 महीने
बाद भी आप यह
फैसला नहीं कर
पाए कि राज्य
में केन्द्र
का सूचना केन्द्रीय
सूचना अधिकार
अधिनियम इम्प्लीमेंट
करने की आपकी
जिम्मेदारी
थी उसको भी
आपने पूरा
नहीं किया और
उनकी जो धारा 25
और 27 की पालना
करनी थी,
लोगों को
एजुकेट करना
था, सूचना का
अधिकार कैसे
प्राप्त
करें उनके लिए
जन शिक्षण का
कार्य करना
चाहिए था वह
भी काम आपने
नहीं किया।
अध्यक्ष
महोदय, हमारे
संविधान में
केन्द्रीय
सूची, राज्य
सूची और
समवर्ती सूची
ये तीन
सूचियां बनी
हुई हैं। जब
कोई केन्द्र
का कानून बन
जाता है।तो
राज्य में
कानून की आवश्यकता
नहीं पड़ती
लेकिन जब तक
आप केन्द्र
का कानून लागू
नहीं करें तब
तक कम से कम इस एक्ट
के माध्यम से
जो लोग लाभ ले
रहे थे उसको
भी आपने वंचित
कर दिया। इसका
मतलब यह है।कि
सरकार की
पारदर्शिता
की नीति नहीं है,
एकाउंटेंबिलिटी
की नीति नहीं
है। अध्यक्ष
महोदय, हमारी
कांग्रेस की
सरकार जब
राजस्थान
में थी तो
हमने प्रत्येक
ग्राम पंचायत
के कार्यों के
लिए लिख रखा था
कि हर ग्राम
पंचायत में
कितने का
कार्य है, कितने
मजदूर लगेंगे
और कोई भी व्यक्ति
जाकर वहां मस्टर-रोल
वगैरह देख
सकते थे, हमने
जो भी पब्लिक
से संबंधित
विकास के
कार्य थे उनके
प्रति
अकाउंटेबिलिटी
को बढ़ाया था
लेकिन यह
सरकार कानून
का पालन नहीं
कर रही है,
खुले आम केन्द्रीय
कानून की
धज्जियां उड़
रही हैं इसलिए
मैं समझता हूं
कि इसको
गंभीरता से
लेना चाहिए और
आपको नैतिक
आधार पर जब तक
आप केन्द्रीय
कानून को पूरी
मंशा के साथ
लागू नहीं करते
हैं तब तक इस
निरसन विधेयक
को आपको नहीं
लाना चाहिए था
और मैं उम्मीद
करता हूं कि
तत्काल केन्द्रीय
कानून का इम्प्लीमेंट
करेंगे और
उसके अनुसार
राज्य में
सूचना आयुक्त
की नियुक्ति
करके लोगों को
यह बताएंगे कि
आपका
पारदर्शिता
में विश्वास
है। मैं इस
अवसर पर कहना
चाहूंगा
पिछले महीनों
में सेज
प्रकरण आया,
बहुत सी ऐसी
जानकारियां
हमको स्वयं
को लेनी पड़ती
हैं। अध्यक्ष
महोदय, मैं आपको
कहना चाहता
हूं कई माननीय
सदस्य जो
प्रश्न
पूछते हैं उनके
जवाब 4,4-6,6 महीने
तक नहीं आते
लेकिन इस एक्ट
में ऐसा
प्रावधान है।कि
यदि कोई
अधिकारी
सूचना नहीं
देता तो उसके
खिलाफ
कार्यवाही की
जा सकती है,
उसके खिलाफ
अपील की जा
सकती है।इसलिए
प्रावधानों
का सरकार
जानबूझकर इस
एक्ट को
क्रियान्वित
नहीं करना
चाहती है, इसके
कारण से राज्य
का कानून वह
वापस ले रही है।और
क्यों कानून
लागू नहीं कर
रही है।इसलिए
दोनों तरफ से
सरकार जिम्मेदार
है।और मैं
आपके माध्यम
से कहना चाहता
हूं कि आपको
पब्लिक के
प्रति
एकाउंटेबिलिटी
दिखाने के
लिए,
पारदर्शिता लाने
के लिए तत्काल
केन्द्रीय
कानून को आपको
लागू करना
चाहिए और जब
तक आप केन्द्रीय
कानून का लागू
नहीं करते हैं
तब तक इस विधेयक
को राज्य में
जारी रखना
चाहिए। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
श्री संयम
लोढ़ा। ...(व्यवधान)...
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
मेरा प्रस्ताव
यह है।कि
निरसन विधेयक
को आप वापस
लेंवें।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): इसको
जनमत जानने के
लिए भेजें या
सिलेक्ट
कमेटी को
भेजें ?
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
इसको विदड्रा
करो।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): कल्ला
साहब, जब
निरसन विधेयक
वापस ले लेंगे
इसका मतलब तो
यह है।कि जो
सेंट्रल
कानून आया है,
लागू नहीं
करों। ...(व्यवधान)...
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
केन्द्रीय
कानून जिस दिन
लागू कर दें
उस दिन इसका निरसन
कर दीहिए। ...(व्यवधान)...
जिस दिन
सेंट्रल
कानून लागू कर
दें उस दिन
इसको कर दीजिए।
...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): पार्लियामेंटरी
अफेयर्स
मिनिस्टर की
यह एफिशिएंसी है।?
इसके निरसन की
आवश्यकता थी
नहीं, सेंट्रल
एक्ट लागू हो
गया, अपने आप
ठीक हो गया था,
आप जबरदस्ती
अपनी
इनएफिशिएंसी
क्यों की आपने
? जरूरत ही
नहीं थी इस
बात की। ...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, वर्ष 2002
में राजस्थान
की जनता को जो
सूचना का
अधिकार मिला
था बहुत आसानी
से नहीं मिला
था। भारतीय
जनता पार्टी
की तत्कालीन
सरकार के वक्त
1998 से पहले
राजस्थान के
सामाजिक
कार्यकर्ताओं
ने अनेकानेक
धरने
प्रदर्शन और
आन्दोलन
करके जनमानस
में यह
वातावरण
बनाया था कि राजस्थान
की जनता को यह
अधिकार मिलना
चाहिए, वह अधिकार
मिला लेकिन
सरकार कानून
लेकर आती है,
अनेक फैसले
करती है।और उन
कानूनों का
लाभ और फैसलों
का लाभ इस बात
पर निर्भर
करता है।कि
...(व्यवधान)...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
प्रतिपक्ष के
नेता बोल रहे
हैं। ...(व्यवधान)...
जा रहे हैं क्या
?
श्री
अध्यक्ष: कोई
नहीं, जा रहे
हैं वह तो। ...(व्यवधान)...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मुझे
तो, अपने यहां
परम्परा है।कि
प्रतिपक्ष के
नेता खड़े हों
तो दूसरों को
बैठ जाना
चाहिए। जा रहे
हैं, अब मालूम
पड़ा न। ...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): मेरी
तो आपको भी
शुभकामना है,
कल जो आपके
निवास पर
मीटिंग
बुलाकर जो झंडा
बुलंद किया न,
आप भी एक चेयर
आगे आ जाओ
ताकि आप खड़े
होंगे तो मैं
बैठ जाऊंगा।
अब आप खड़े
होंगे तो मैं
बैठ जाऊंगा।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आप कल
पैरवी कर रहे
थे मीडिया
वालों की और
मीडिया वालों
से जिस प्रकार
आपने व्यवहार
किया उसके लिए
भी आपको बहुत
बहुत धन्यवाद।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, तो यह
अधिकार जो
मिला उसके बाद
में राजस्थान
सरकार ...(व्यवधान)...
skp/akt/7.4.06/1110/1h/1
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): जो
गुनाह करता है।उसकी
होती है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
हिम्मत वाले
हो आप।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
निवेदन करना
चाहता हूं कि यह
सरकार सूचना
के अधिकार के
प्रति कितनी
गम्भीर है,
गृह मंत्री जी
अगर मेरी एक
बात का जवाब दे
देंगे तो
राजस्थान की
जनता को सब
पता चल जाएगा।
राजस्थान
सरकार ने एक
आदेश जारी किया
था कि राज्य
सरकार का हर
विभाग हर
महीने सूचना
के अधिकार की
क्रियान्विति
के सम्बन्ध
में गृह विभाग
को सूचना
उपलब्ध
करायेगा।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपको
जानकर ताज्जुब
होगा कि राजस्थान
सरकार के गृह
विभाग के उस
आदेश की राज्य
सरकार के एक
भी विभाग ने पालना
नहीं की और
वसुन्धरा जी
के मुख्य
मंत्री बनने
के बाद एक भी
विभाग ने इस
बात की सूचना
गृह विभाग को
उपलब्ध नहीं
करवाई कि
कितने लोगों
ने
कितनी-कितनी सूचना
मांगी, क्या
उपलब्धि रही,
चाहे उपलब्धि
शून्य भी रही
हो तब भी यह
सूचना उपलब्ध
करवानी चाहिए
थी। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से यह निवेदन
करना चाहता
हूं कि यह
निरसन विधेयक
तो आना ही था
चूंकि भारत
सरकार ने नया
कानून पारित
कर दिया।
लेकिन आपको 12
अक्टूबर, 2005 तक
इस सम्बन्ध
में पूरा
तंत्र विकसित
करना था मुख्य
सूचना आयुक्त
की नियुक्ति
कर, वह आपने
नहीं किया। आज
कई महीने निकल
गये और अब मैं
इतना सा
निवेदन करना
चाहता हूं कि
जब हमारे
पड़ौस के राज्य
हरियाणा में
नियुक्त कर
दिया, पंजाब
में नियुक्त
कर दिया,
गुजरात में
नियुक्त कर
दिया तो आपको
क्या कठिनाई
हो रही है?
लगातार सरकार
में इस तरीके
की कार्य
प्रणाली चल
रही है।जो एक
के बाद एक
संदेह खड़े
करती है।
सरकार ऐसे-ऐसे
फैसले एक के
बाद एक कर रही है।कि
जानकारी देने
से उसके
बेनकाब होने
का सरकार के
सामने खतरा
बना हुआ रहता
है। इसलिए
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
माननीय गृह
मंत्री जी से
इतना ही
निवेदन करना
चाहता हूं कि
जब भी वो उत्तर
दें, इस बात का
उत्तर दें कि
भारत सरकार का
कानून आने के
बाद जो तंत्र
राजस्थान
में विकसित
किया जाना
चाहिए था और
हमारे अधिकारियों
की मानसिकता
यह बनाने के
लिए कि जनता
को जानकारी का
अधिकार मिले,
क्या
कार्यवाही
सरकार ने की है।उसकी
जानकारी दे
दें। धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष:
श्री मोहम्मद
माहिर आजाद।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं भी
अपने आपको
मेरे पूर्व जो
मेरे साथियों
ने विचार व्यक्त
किये हैं
उसमें
सम्मिलित
करते हुए आपके
माध्यम से
माननीय
मंत्री जी से
यह निवेदन
करना चाहता
हूं कि हम जब
भी किसी
विधेयक को वापस
लेते हैं तो
उसका अल्टरनेटिव
अरैंजमेंट
हमको करना
चाहिए। आज स्थिति
यह हो गई कि जब
से सवा दो साल
से भारतीय जनता
पार्टी की
सरकार राजस्थान
में सत्ता
में आई है, हर
क्षेत्र में
भ्रष्टाचार
नये आयाम छूने
लगा है। भ्रष्टाचार
में बढ़ोतरी
हुई है।और
भ्रष्टाचार
बढ़ने के कारण
सरकार को यह
खतरा है।कि यह
सूचना का
अधिकार जो
केन्द्र की
यू पी ए सरकार
ने देने का
वादा किया था
और प्रयास
किया है, कहीं
राजस्थान
में भी हमारी
पोल नहीं खुल
जाए इसलिए न
तो सूचना
आयुक्त की
नियुक्ति की है।बल्कि
इसको वापस ले
रहे हैं। आपको
इससे पहले क्या
वैकल्पिक व्यवस्था
करनी थी उसके
ऊपर इस सदन
में अपनी व्यवस्था
बतानी चाहिए
थी। इसलिए,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से निवेदन यह
करना चाहता
हूं कि यह सही है।कि
कितने लोगों
ने प्रयास
किये तब जाकर
के यह सूचना
का अधिकार
मिला नहीं तो
केवल हम कानून
में प्रावधान
बना दें और
किताबों में
लिख दें, नियम
बना दें उससे
व्यावहारिक
जामा अगर नहीं
पहनाया जाए तो
उससे उसका कोई
लाभ मिलता
नहीं है, उसकी
क्रियान्विति
नहीं की जा
सकती। आज भी
स्थिति यह है।कि
आपने कानून तो
बना दिया कि
कोई भी
जमाबंदी की
नकल लेना चाहेगा
या कोई भी जन्म-मृत्यु
का प्रमाण
पत्र लेना
चाहेगा या और
कोई भी किसी
भी तरीके की
कोई भी सूचना
जो प्रशासनिक
क्षेत्र में
लेना चाहेगा,
आज जयपुर
विकास प्राधिकरण
क्या कर रहा है।?
इसकी सूचना
मांगने पर मिल
रही है।क्या?
मंत्री को ही
नहीं मिल रही
है।
प्रतापसिंह
जी सिंघवी खूब
मांगते रहे
हैं, उनको ही
नहीं मिल रहा है।कि
जे डी ए की आगे
क्या योजना है।और
क्या नहीं कर
रहा है।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहता
हूं कि एक दिन
स्थिति यह बन
गई, जयपुर
ग्रामीण से
आने वाले
माननीय सदस्य
भी यहां
विराजमान हैं,
जल महल के पास
जो एक जमीन
बची हुई है।फैसेलिटीज
के लिए, पता
पडा कि आज
अख़बार में न्यूज
आई है।कि
जयपुर विकास
प्राधिकरण
उसको आज ऑक्शन
करने जा रहा
है। जब पता
पडा, लोग
इकट्ठे हो गये,
बड़ा आक्रोश
हुआ और इकट्ठे
होकर के हम
मुख्य
मंत्री जी के
पास आये, मुख्य
मंत्री
कार्यालय में
गये, उन्होंने
पता किया तो
मालूम पडा कि
आज तक उसका भू-उपयोग
परिवर्तन ही
नहीं हुआ है।और
गैर कानूनी
तरीके से उसको
आक्शन किया
जा रहा है। तब
मैं धन्यवाद
दूंगा कि मुख्य
मंत्री जी के सचिव
ने जयपुर
विकास
प्राधिकरण
आयुक्त
रोड-शो करने
के लिए दिल्ली
गये हुए थे, जब
उनसे बात की
कि आपने इसका
भू-उपयोग
परिवर्तन तो
कर लिया क्या
तो कहा कि
नहीं साहब,
अभी तो नहीं
हुआ तो फिर आप
इसको ऑक्शन
कैसे कर रहे
हो जब पता पडा
और तब जाकर के
उसको स्टे
करने का काम
किया। इसलिए
अगर यह सारी
सूचनाएं नहीं
मिल पायेंगी
और सूचना के
अधिकार से लोग
वंचित रहेंगे
तब आम आदमी की
क्या स्थिति
होगी इससे आप
अच्छी तरीके
से परिचित हो
सकते हैं।
इसलिए अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से यही निवेदन
करना चाहता
हूं कि आप
इसको निरसन करने
से पहले आपको
सूचना आयुक्त
की नियुक्ति
करनी चाहिए।
उस रोज यहां
हाउस में कहा
गया था कि
नेता,
प्रतिपक्ष और
सदन की नेता
और ये मिलकर
के लोकायुक्त
और सूचना
आयुक्त की,
इनकी सबकी
मिल-मिलाकर के
बात करके वो
कर लेंगे। अब
हाउस आज खतम
हो रहा है, आज
तक कोई मीटिंग
उसकी रखी
नहीं, कब आप
करेंगे, क्या
करेंगे, ये
चीजें आप
बतायें उसके
बाद में इसको
वापस लें।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यही
मैं आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहता
हूं।
श्री
अध्यक्ष:
श्री जोगाराम
पटेल।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से दो बातों
का निवेदन
करना चाहता
हूं। एक, यहां
यह बताया गया
अभी कि यह एक्ट,
राजस्थान का
इन्फार्मेशन
एक्ट है।वह
तो अपने आप ही
खतम हो गया क्योंकि
सैण्ट्रल
एक्ट फोर्स
में आ गया।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
फोर्स में
कहां आया ? फोर्स
में आया ही
नहीं।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): सुनने
की क्षमता
आदमी में होनी
चाहिए और
सुनने के बाद
अगर आप यह
कमेंट करें तो
मैं कमेंट
मानने को स्वीकार
हूं और बिना
सुने आप अगर
बैठे-बैठे
कमेंट करें तो
मैं तो समझता
हूं कि हमको
आप सही गाइड
लाइंस नहीं दे
रहे हैं। आपका
यह कहना है।कि
प्रभाव में
नहीं आया,
तारानगर से
आने वाले माननीय
सदस्य, इस
प्रोविजन को
आप देखें. पहला है।एक्ट
का नाम। सैकण्ड
है।– it
extends to the whole of India except Jammu & Kashmir. और
थर्ड है।– “The provisions of sub-section
(1) of section 4, section 5, 12, 13, 14, 16, 24, 70, 80 shall come into force
at once …. .” (व्यवधान)
.... Please hear me. We are in the august House. “ … and the
remaining provisions of this Act shall come into force on the 120th
day of this enactment.” So there are two types of provisions in this Act. One
part will come into force at once and the second part will come into force on a
particular date.
नैक्स्ट
है।एप्रोप्रिएट
गवर्नमेंट। The definition of appropriate
Government is, it means relating to public authority which is established,
constituted, owned, controlled and substituted …”
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
आपने कहा न कि 120
दिन। आपने ही
पढ़कर के
सुनाया one hundred and twentieth day of this enactment. तो 120
दिन कम्पलीट
हो गये 13 अक्टूबर
को।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): उस दिन
फोर्स में आ
गया।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
अब आपसे
निवेदन यह है।कि
आप सरकार पर
दबाव डालो।
माननीय मुख्य
मंत्री अध्यक्ष
हैं, इसके
कमीशन बनायें,
कमिशनर
बनायें, अपीलांट
अथोरिटी
बनायें तो यह
कानून लागू हो
और राजस्थान
का नाम ऊपर
हो।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): और मेरी
बात सुनने के
बाद जरा भी आप
में क्षमता है।तो
अपनी सैण्ट्रल
गवर्नमेंट को
आप यह बता
देना कि यह
डिफेक्टिव लॉ
है। अभी आप
मेरी बात सुन
लें कृपया। (व्यवधान)
और मैं यहां
हाउस के अन्दर
कह रहा हूं,
जिम्मेवारी
से कह रहा
हूं। (व्यवधान)
आप लड़ाओगे,
नहीं लड़ाओगे
यह आपके हाथ
में नहीं है।और
मैं जिस तरह
से लड़कर आया
हूं आपको अच्छी
तरह से ध्यान
है।कि उसका क्या
हुआ। जिस आदमी
की कानून में
सुनने की
क्षमता नहीं है।वो
कमेंट जरूर
करता है, मैं
कभी कमेंट्स
नहीं करता,
आपने जो बात
कही उसका जवाब
दे रहा हूं
अगर आप सुन
लें तो। (व्यवधान)
श्रीमान्,
सारी उम्र जो
काम किया वो
देखो, अभी 10
मिनट सुन लो
मुझे आप। आपने
यह कहा, अब है।एप्रोप्रियेट
गवर्नमेंट,
सैक्शन 28 क्या
कहता है।और
दूसरा है।ई-काम्पीटेंट
अथोरिटी. “The competent authority may by notification in the official
gazette make rules to carry out the provisions of this Act.” And who is the competent authority? The Speaker in the case of House of People or
a Legislative Assembly of a State or a
Union Territory having such Assembly and the Chairman in the case of the
Council of States or Legislative Council of the State; the Chief Justice of
India in case of the Supreme Court; the Chief Justice of High Court in case of
High Courts, the President or the Governor, as the case may be, in case of
other authorities established or constituted by or under the Constitution and
the Administrator appointed under Art. .. “
vkj/akt/1120/1j
ये
अथोरिटीज हैं
जो सेक्शन 28
में रूल्स
बनायेंगी और
इस काम्पीटेंट
अथोरिटी ने आज
दिन तक मेरी
इन्फोर्मेशन
के अनुसार I may be wrong, you may correct me.
कोई भी रूल्स
आज दिन तक
नहीं बनाये
हैं और यह
रूल्स जब तक
बने नहीं है।तो
स्टेट
गवर्नमेंट को
इसीलिए ब्लेम
नहीं कियाजाये
कि स्टेट
गवर्नमेंट ने
रूल्स नहीं
बनाये हैं। यह
आपका तर्क,
आपका आर्गुमेंट,
आपका विचार
बिलकुल गलत
है, पहला और आपने
कहा था, आप
कैसे मेरे ऊपर
हंस रहे थे और
आप कैसे कह
रहे थे कि यह
सेन्ट्रल
एक्ट
डिफेक्टिव है,
राजस्थान
सरकार का एक्ट,
राजस्थान स्टेट
का एक्ट है...
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
आपने कहा कि
एक्ट
डिफेक्टिव है।तो
मध्यप्रदेश
में, गुजरात
में क्यों लागू
किया आपने, राजस्थान
में क्यों
नहीं किया? वहां
मापदण्ड
आपके अलग है,
यहां अलग है।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): देखिये,
मैं अपनी बात
कह सकता हूं।
गुजरात की बात
गुजरात वाले
कहेंगे, मध्यप्रदेश
की बात मध्यप्रदेश
वाले कहेंगे।
उसकी जिम्मेदारी
मेरी नहीं है।पर
मेरी जिम्मेदारी
मेरी बात कहने
की है, जितनी
मुझे समझ में
आई।
दूसरा
यह है।कि
राजस्थान का
एक्ट पहले से
प्रभाव में था
। हर एक्ट का
पहला
प्रोविजन
होता है।in the end about repeal and saving.
और इस
एक्ट में
रिपील और
सेविंग का कोई
प्रोविजन
नहीं है।
राजस्थान का
एक्ट नीयरली यह
एक्ट बना
देने से रिपील
और सेविंग
नहीं हो जाता है।इसलिए
एक्ट बनाने
वाले ने यह
सूचना दे दी
कि रिपील और
सेविंग का क्यों
नहीं बनाया या
इसका
ओवर-राइडिंग
इफेक्ट क्यों
नहीं बनाया।
इस एक्ट के
प्रभाव में
आने के बाद स्टेट
के जितने भी एक्ट
होंगे या आज
के बाद के
जितने एक्ट
होंगे, वह
उसका
ओवर-राइडिंग
इफेक्ट
होंगे इसलिए
कानून के
अनुसार यह एक्ट
भले ही बना
दिया हो,
राजस्थान का
एक्ट अपने
आपमें रिपील
या सेविंग
नहीं रहता है।
या राजस्थान
का जो
इन्फोर्मेशन
का एक्ट है,
वह स्वयं ही
समाप्त नहीं
हो जाता है।
अगर आप इसका
जवाब दे दें
तो मैं मान
लूंगा और यह
भी मैं मान
लूंगा कि
मैंने जो बात
कही है।वह गलत
है। इसलिए
ओवर-राइडिंग
इफेक्ट नहीं
बनाया गया,
रिपील एण्ड
सेविंग नहीं
बनाया गया
इसलिएडिफेक्टिव
है।और अब
हंसकर मेरे को
जवाब दे देना,
तब मैं मान लूंगा
कि नहीं, जो आप
कह रहे हो, वह
सही है,
अदरवाइज तो
हंसने में कुछ
लगता नहीं है,
कुतर्क करने में
अपना कुछ लगे
नहीं लेकिन
लीगल टू द
पाइंट अगर बात
करें तो मैं
मान लूंगा कि
आप हो। इसका ओवर-राइडिंग
इफेक्ट नहीं
है। राजस्थान
स्टेट का एक्ट
आज भी प्रभाव
में है।और जब
तक राजस्थान
की माननीय यह
परिषद है, यह
राजस्थान की
सबसे बड़ी
पंचायत इसको
वापस नहीं
लेगी, तब तक
प्रभाव में
रहेगा।
माननीय
सी.पी.जोशी साहब
ने बहुत अच्छी
बात कही है,
शायद आपने
उनको सुना
नहीं, उन्होंने
कहा कि चूंकि
सेन्ट्रल का
एक्ट आ गया,
जनरल प्रेक्टिस
यह है।कि अगर
सेन्ट्रल का
एक्ट आ जाता है।तो
स्टेट का एक्ट
नहीं होना
चाहिए पर कई
ऐसे एक्ट हैं
जो सेन्ट्रल
में भी हैं और
स्टेट में भी
हैं और उनमें
यह प्रोविजन
किया जाता है।कि
अगर दोनों में
कोंट्राडिक्शन
है।तो जहां तक
सेन्ट्रल का
एक्ट है, वह
इफेक्टिव
रहेगा और जहां
तक
कोंट्राडिक्शन
नहीं है।तो वह
स्टेट का एक्ट
प्रभावी
रहेगा लेकिन
इसमें
करीब-करीब
प्रोविजन वही
हैं इसलिए यह
बाध्यकारी
था कि इसको
ओवर-राइडिंग
इफेक्ट
बनायें।
चूंकि इसको
ओवर-राइडिंग
इफेक्ट नहीं
बनाया है,
इसलिए यह
राजस्थान
सूचना अधिकार
निरसन नियम, 2006
लाया गया है।और
जैसाकि अभी
इसके एम्स
एण्ड आब्जेक्ट्स
पढ़े गये,
इसलिए एम्स
एण्ड आब्जेक्ट्स...
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, पाइंट
आफ आर्डर के
तहत मैं आपसे
एक निवेदन कर
रहा हूं कि यह
राजस्थान
भूजल विकास और
प्रबन्ध का
विनियम और
नियंत्रण
विधेयक, 2006 हमको
यहां सर्कुलेट
किया जा रहा है।तो
न तो यह आज की
लिस्ट में है।और
यह कार्यसूची
में भी नहीं
है। दूसरा, न
इसको पुर:स्थापित
करने के लिए
आपसे...
श्री
अध्यक्ष: यह
केवल पुर:स्थापित
होगा।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): ...आपसे
परमिशन भी
नहीं ली है।अभी
तक, आपसे
परमिशन ही
नहीं ली है।
आप इन्फोर्म्ड
हैं क्या?
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, सप्लीमेंट्री
मिल जायेगी
आपको लेकिन यह
केवल पुर:स्थापित
होगा।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): तो
माननीय अध्यक्ष
महोदय, वह
कागज हमको
मिला, आपसे पुर:स्थापित
करने की
परमिशन लेते,
तब जाकर यह
सर्कुलेट
होना चाहिए
था।
श्री
अध्यक्ष: वह
आपको मिल रहा है।अभी।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): तो यह
पहले
सर्कुलेट कर
दिया गया without pre-permission of the
Speaker. यह तो
नियमों के
विरुद्ध है,
नियम और परम्परा
के विरुद्ध है।यह
तो, आपसे अगर
परमिशन ली
जाती और आप
उसको कहते,
उसके बाद
होता, मतलब यह
हमको
सर्कुलेट कर
दिया गया।
श्री
अध्यक्ष:
हां, मेरी
परमिशन से ही
हुआ है।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): तब ठीक है,
आपकी परमिशन
से हुआ है।तब
ठीक है। मगर
आपकी परमिशन
हुई है।तो
इसके साथ में
वह कागज भी
हमेशा आता है।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): हम
लोगों को भी
सूचना होनी
चाहिए थी।
श्री
अध्यक्ष: वह
साथ में कागज
देना चाहिए
था, वह साथ में
कागज आना
चाहिए था।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): पहले भी
ऐसा होता रहा
है। एक नया
कागज है।वह
आता है। वह
कागज तो है।नहीं।
केवल यह किताब
हमको लाकर दे
दी। यह काहे
की बांट रहे
हैं। ऐसे ही
तो विधान सभा
में कल यह कोई
प्रचार, कागज
बांट देंगे।
यह विधान सभा नियम
और प्रक्रिया
और प्रथाओं से
चलती है।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): बिना
अध्यक्ष
महोदय की परमिशन
से कोई कागज
नहीं आ सकता।
यहां बिना परमिशन
से कुछ नहीं
हो सकता।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): नहीं
नहीं माननीय
मुख्य सचेतक
महोदय, अध्यक्षजी
को मेरे जो मन
में शंका थी,
उसको निवेदन
किया है,
लेकिन वह कागज
आना चाहिए
था।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य सचेतक):
नहीं, वह ठीक है।पर
यहां बिना
परमिशन कुछ
नहीं हो सकता
है।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): नहीं,
बिना परमिशन
के तो कुछ नहीं
होता, लेकिन
वह कागज आना
चाहिए था कि
इसको हम
पुर:स्थापित
कर रहे हैं।
क्या है, क्यों
है...
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
इसकी मेम्बर
को इन्फोर्मेशन
करने की जरूरत
नहीं है? पहले
हाउस को इन्फोर्म
करने की
ड्यूटी होनी
चाहिए।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): इसके एम्स
एण्ड आब्जेक्ट्स
क्या हैं,
इसके कंटेन्ट्स
क्या हैं, आज
हाउस का आखिरी
दिन है।इसलिए
क्यों यह
किया जा रहा
है, वह सारी
चीजें आनी
चाहिए थी। (व्यवधान)
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार):
हाउस को
पोपाबाई की
तरह मत चलाओ,
हाउस को हाउस
के आर्डर में
रहने दीजिये।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): हमारी
आपत्ति नहीं है।क्यों
किया जा रहा है।लेकिन
यह है।कि इसकी
कोई बताई जाती
ना वजह।
श्री
अध्यक्ष: इमरजेंसी
में कई बार
ऐसा हो जाता
है।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): नहीं,
आपको अधिकार है।लेकिन
वह कागज तो
साथ में आता
माननीय अध्यक्ष
महोदय, वह
कागज ही नहीं
है। वह है।क्या1
श्री
अध्यक्ष: अभी
कुछ और भी
आयेगा, मत
चिंता करो आप।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): इसका
मतलब यह है।कि
पहले यह
आयेगा, उसके
बाद में वह
कागज आएगा। वाह
भई वाह, बहुत
बढि़या काम है।माननीय
अध्यक्ष
महोदय। पहले
आभार व्यक्त
होगा, उसके
बाद में स्वागत
होगा। पी.ए.डी.
मंत्रीजी, अब
बोलो ना इस पर, क्या
है। क्या व्यवस्था
है। यह है।पी.ए.डी.
मंत्रीजी आपका?
आपने यह जो
गलती हुई है,
त्रुटि हुई
है, बड़प्पन
अगर आपका है।तो
आपको इसके ऊपर
माफी मांगनी
चाहिए। पहले
हमको कागज
सर्कुलेट
करना चाहिए।
(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह ईस्ट
इंडिया कम्पनी
का कानून नहीं
है। यह राजस्थान
विधान सभा
नियम और
प्रक्रिया से
चलती है। आप
बहुत दुहाई
देते हैं यहां
नियम और
प्रक्रिया की
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, आसन के
पास, सर्व
अधिकार
प्राप्त आसन
है। आपकी
अनुमति से
इसको सिर्फ
पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
ही ली है।
इसलिए इसमें न
तो कोई विचार-विमर्श
कर रहे हैं, न
इसको पारित
करवा रहे हैं।
(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): अध्यक्ष
महोदय, पहले
हमको कागज
दीजिये, क्या
है।यह?
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, सदन
में जो
कार्यवाही
होती है, उसकी
सूचना माननीय
सदस्य को
सेक्रेटेरिएट
से मिलती है।
आज की
सेक्रेटेरिएट
की सूचना में
इसका उल्लेख
नहीं है। आप
परमिशन कर
सकते हैं, आप
अधिकृत हैं पर
यह सूचना हमको
देनी चाहिए थी
आपके सेक्रेटेरिएट
की ओर से कि आप
यह ले करेंगे
या आपके
द्वारा यह
कहते कि भई,
मैंने
इमरजेंसी
पावर का उपयोग
करके ले करने
को कहा है, यह
भी आपको करना
चाहिए था।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आसन की
व्यवस्था
के अनुरूप ही है।अध्यक्ष
महोदय।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष की
व्यवस्था
नहीं है, यह
अध्यक्ष की
व्यवस्था
के बिना
सर्कुलेट हुआ
है।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मंत्री
महोदय,
सेक्रेटेरिएट
से पहले एक
कागज वितरित
होना चाहिए
था।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अगर
आसन की सुविधा
होती तो आपको
पहले ही कह
देते। (व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): यह कागज
हमको वितरित
होना चाहिए
था। यह तो सत्ता
पक्ष मानकर
चलता है।कि
यहां जो भी
कार्यवाही
करेंगे, आसन
उसका अनुमोदन
करेगा। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
इतने लोग एक
साथ बोल रहे
हैं, बात समझ में
ही नहीं आ रही
है। एक साथ
तीन खड़े हो
गये। एक-एक
करिये बोलिये
ना।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, हमारा
निवेदन तो यही
है।कि कोई बात
नहीं, इसका
डिसीजन आज
सुबह हाउस 10 बजे
हो गया 11 बजे की
बजाय, उसके
बाद लिया गया
तो वह सेक्रेटेरिएट
से यह हमको एक
कागज
सर्कुलेट करके
यह इन्फोर्मेशन
देते आपसे
परमिशन लेकर
कि इस तरह का
एक विधेयक
यहां पुर:स्थापित
किया जा रहा
है, अध्यक्षजी
ने अनुमति दी
है, उसके बाद
में यह पुस्तिका
वितरित होती।
पहले आप
पुस्तिका
सर्कुलेट कर
रहे हैं, उसके
बाद
सेक्रेटेरिएट
हमको इन्फोर्म
करेगा तो यह
तो नियमों के
विरुद्ध चीज हुई
है। यह
सेक्रेटेरिएट
यह मानकर चले
कि जो काम यह
कर देंगे,
उसको अध्यक्षजी
की अनुमति
होगी, यह अगर
इस तरह का
इंटेशन लेकर
चलेंगे तो
नहीं चलेगा।
श्री
अध्यक्ष:
अनुमति होगी,
मेरी अनुमति
के बाद दिया गया
है। पूछा है।मुझे
कि इसको
सर्कुलेट कर
दें, मैंने
कहा, कर दीजिये,
उसके बाद
सर्कुलेट हुआ
है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): यही मैं
कह रहा हूं,
यही मैं कह
रहा हूं।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): सर्कुलर
कहां है? Where is your circular? I want to know about your
circular.
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): नियम और
प्रक्रिया के
तहत अध्यक्ष
महोदय के पास
जो अधिकार है,
उन अधिकारों का
उपयोग करते
हुए आपने
सर्कुलेट
करवा दिया।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): I
agree. इस पर कोई
एतराज नहीं
है, अध्यक्षजी
को
सर्वाधिकार
प्राप्त है।
उन्होंने
परमिशन दी
लेकिन first you should circulate your circular. Where is your
circular? सर्कुलर
आपने दिया
नहीं और आप
पुस्तिका दे
रहे हो। (व्यवधान)
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): अध्यक्ष
महोदय, यह
परम्परा रही
है। यहां पर
चीफ व्हिप
महोदय खड़े
होकर कहते कि
नियम में
शिथिलन मैं
चाहता हूं,
नियमों में
शिथिलन देते
हुए आपकी
परमिशन
मांगते हैं, फिर
यह पुर:स्थापित
करने के लिए
सर्कुलेट
करते तो ज्यादा
अच्छा रहता
और इसमें
नियमों का उल्लंघन
हुआ है।इसलिए
आप सरकारी चीफ
व्हिप और
पी.ए.डी.
मंत्रीजी को
इस बात के लिए
सावधान करिये
कि आइंटा वह ऐसा
नहीं करेंगे।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यह
सर्वविदित
सत्य है।कि
बिना आसन की
परमिशन के,
बिना विधान
सभा सेक्रेटेरिएट
की परमिशन के
यहां कोई
कागज....
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
सावधान नहीं,
पी.ए.डी.
मंत्री को
क्षमा याचना
करनी चाहिए कि
भूल हुई है,
उसको सुधार
लिया जाये।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): ...एक
आपका पेपर
विधान सभा
सचिवालय से पहले
नहीं निकला,
यह पहले बिल
पहुंच गया,
इतना सा ही है,
बाकी न तो
संसदीय कार्य
मंत्री का इसमें
कोई रोल है, न
कोई...
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): आदमी बाद
में मरा है, श्रद्धांजलि
पहले दे दो,
बहुत बढि़या
बात है। मृत्यु
हुई नहीं है।और
आप
श्रद्धांजलि
पहले कर दो।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): हमारा
काम नहीं है।यह।
(व्यवधान) श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
सुनिये मेरी
बात। अनुपूरक
कार्यसूची
मेरे पास आ गई
थी।
Jkj/akt/1130/1d/07042006
मोहम्मद
माहिर आजाद:
उसकी कापी
हमको नहीं
मिली।
श्री
अध्यक्ष: आप
सुनिये तो सही
बात पहले। यह कापी
भी आपको साथ
ही जाती लेकिन
कोई और एक
सूचना या बिल है।जो
अभी तक यहां
प्राप्त हुआ नहीं
है, कुछ अमेण्डमेंट
हैं, यहां
प्राप्त
नहीं हुआ है,
इसलिए यह
कार्यसूची
मेरे पास पड़ी
हुई है। यह
बात है, सीधी
सी बात है।इसलिए
अदरवाइज यह भी
आपको दे देते।
मोहम्मद
माहिर आजाद:
यह भी तभी दे
देते।
श्री
अध्यक्ष: तो
उसमें यह क्या
करते, यह तो
आफिस का काम
है। वह
उसमें क्या
तो मुख्य
सचेतक करेंगे
और क्या
पीएडी मिनिस्टर
करेंगे।
इसलिए वह पडा
हुआ है, मेरे
पास पडा है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह:
एक बात सुन
लें आप। यह
पार्लियामेंट्री
अफेयर्स जो
डिपार्टमेंट
है..(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: इसमें
इनका कोई कसूर
ही नहीं है, यह
खेद प्रकट क्यों
करे। (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: यह बहुत
आब्जक्शनेबल
बात है।कि
विधान सभा
सचिवालय के
मामले में
यहां प्रश्न
उठाया जाय। न
नियमों में
परम्परा है,
परम्परा भी है।और
नियमों में भी
है।कि विधान
सभा सचिवालय
के मामले में
कोई क्वेश्चन
नहीं किया जा
सकता और इतने
पुराने सदस्य
हैं, जो बहुत
पुराने सदस्य
हैं और जो
मंत्रिमण्डल
में रहे कई
बार...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: मैं क्या
कह रहा हूं,
अभी बात कह ही
नहीं पाया
हूं, हल्ला
मचा रहे हैं
यह, मैंने कहा
क्या है।
श्री
महावीर प्रसाद
जैन: सरकार की
बात कह दें
लेकिन विधान
सभा...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: I
have not said anything. (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
पहले उनको बोल
लेने दो, फिर
बोल लीजियेगा
आप।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
और विधान सभा
सचिवालय के मामले
में...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: मैंने
कुछ कहा ही
नहीं है।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, विधान
सभा सचिवालय
के मामले में
कोई चर्चा
नहीं होती है।यहां। अब जब
अध्यक्षजी
ने कह दिया...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह:
मैंने कहा क्या
है।
मैंने कहा ही
नहीं है।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
कि यह विधान
सभा सचिवालय
का काम है।और
हमारे से यह
हो गया है...
श्री
अध्यक्ष:
आपको थोड़े ही
कह रहे हैं...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: देखिये,
मैंने तो कुछ
कहा नहीं ।
श्री
अध्यक्ष:
आपको थोड़े ही
कहा उन्होंने,
आपका नाम इन्होंने
लिया ही
नहीं।
आपका नाम
लेकर कहा क्या
उन्होंने।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: यह कहा
पुराने
मंत्री हैं,
और कौन हैं।
श्री
अध्यक्ष:
पुराने
मंत्री तो और
भी हैं, बहुत
बैठे हैं यहां
मंत्री।
अकेले आप नहीं
हो। (व्यवधान्)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: देखिये,
और बूढ़ा कौन है।मंत्रियों
में, भाई आजाद
मंत्री रहे
हैं क्या।
श्री
अध्यक्ष:
पुराने
मंत्री कल्ला
साहब नहीं
हैं? कल्ला
साहब नहीं हैं
पुराने
मंत्री,
रामनारायण
चौधरी नहीं है।पुराने
मंत्री?
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: अब आप
कृपया बैठें।
अब आप कृपया
स्थान ग्रहण
करें। वह
इशारा मेरी
तरफ करके कह
रहे थे।
अध्यक्ष
महोदय, आपके...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
अध्यक्ष
महोदय, मेरा
हर इशारा अपनी
तरफ नजर आता है। यह एक
बोर टोंक चले
गये थे...(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: अध्यक्ष
महोदय, मुझे
सख्त एतराज
है। (व्यवधान)
एक मिनट।
श्री
अध्यक्ष: आप
इस बात में समय
गंवा देंगे तो
तीन बजे अपने
को समाप्त कर
देना है..
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: समय
नहीं गंवा रहे
हैं अध्यक्ष
महोदय। एक
निवेदन सुन
लें। वैसे तो
आपकी व्यवस्था
सर्वोपरि है,
मैं कभी भी
आपके सचिवालय
के ऊपर न तो
कोई आक्षेप
लगा रहा हूं
लेकिन इतना जरूर
कहना चाहता
हूं कि समय के
ऊपर यह सारी
जिम्मेदारी
पार्लियामेंट्री
अफेयर्स
डिपार्टमेंट
की है।और इनको
पहले भेजना
चाहिए था, यह
अपने समय पर तो
सारे कागज
भेजते नहीं
हैं यहां पर,
लास्ट मिनट
पर आप से रिक्वेस्ट
करते हैं और
आप इनके ऊपर
उदारतापूर्वक,
आपकी उदारता
का नाजायज लाभ
उठा रहे हैं
यह।
श्री
अध्यक्ष: मैं
तो इनसे ज्यादा
उदार आपके
प्रति रहती
हूं। इनसे ज्यादा
उदार आपके
प्रति रहती
हूं मैं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: इनकी
उदारता का आप
इतना लाभ
उठाते हैं,
थोड़ा-बहुत
हमने उठा लिया
तो क्या हो
गया।
मोहम्मद
माहिर आजाद:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, हमने
सचिवालय पर
नहीं कहा,
हमने तो आपसे
जानकारी ली थी
कि क्या आपने
इनको परमिट कर
दिया।
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, मैंने
जानकारी दे
दी। अनुपूरक
कार्यसूची
मेरे पास
मौजूद हैं।
मोहम्मद
माहिर आजाद:
आपने कह दिया,
देट्स आल।
हमको तो, इतना
तो आप सहमत
होंगी कि यह
हमको भी
वितरित होनी
चाहिए थी, खत्म
बात।
श्री
अध्यक्ष: यह
ठीक है।
मोहम्मद
माहिर आजाद:
इसमें क्या
इतनी लम्बी-चौड़ी
बात करने की
बात कर रहे
हैं आप।
श्री
अध्यक्ष:
मैंने आपसे कह
दिया कि
अनुपूरक
कार्यसूची
मेरे पास है।मौजूद।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: हो गया
साहब, ठीक है,
आपने परमिशन
दे दी।
श्री
सी.डी.देवल:
अध्यक्ष
महोदय, इनसे
खेद तो प्रकट
करवाओ जो इन्होंने
गलत काम किया
है। यह तो
मानकर चलते
हैं कि जो यह
काम करेंगे
उसको अध्यक्ष
महोदय एप्रूव
ही करेंगी।
श्री
अध्यक्ष: अब
आपके इतनी देर
बात होने के
बाद भी नहीं
समझ में आये
तो मैं क्या
करूं इसका।
श्री
सी.डी.देवल:
इनको भविष्य
के लिए तो आप
चेतावनी दे
दें कम से कम।
आपने कुछ दी
ही नहीं। यह
आपकी उदारता
का नाजायज
फायदा उठा रहे
हैं।
श्री
अध्यक्ष:
श्री जोगेश्वर
गर्ग। श्री
शंकर सिंह
राजपुरोहित। (व्यवधान)
नहीं,
जोगारामजी
बोल लिये।(व्यवधान)
अच्छा,
जोगारामजी ने
समाप्त नहीं
किया क्या।
जोगारामजी,
तीन बजे तक
खत्म करना है।आज
सब काम।
साढ़े ग्यारह
बज गये हैं,
अभी तो दो बिल
और बाकी हैं
इसके अलावा।
श्री
जोगाराम पटेल:
अध्यक्ष
महोदय, आप
कहें तो मैं
समाप्त कर
दूं। मैं एक
निवेदन कर
दूं, इसके बाद
समाप्त कर
दूं कि जो आब्जेक्शंस
एण्ड रीजन्स
बताये गये
हैं, जैसा अभी
माननीय
सी.पी.जोशी साहब
ने पढ़कर
बताया था,
चूंकि यह
सेंट्रल एक्ट
काम्प्रेहेंसिव
आ गया था और इस
वजह से यहठीक
माना गया कि
इस एक्ट को
रिपील कर दिया
जाय, इसलिए
मैं बाकी
बातें, जो मैं
निवेदन करना
चाहता था, मैं
एक निवेदन
अवश्य
करूंगा,
माननीय सदस्यों
ने यह नहीं
बताया, इन्होंने
यह अवश्य कहा
कि सेक्शन 15
के तहत जो स्टेट
इनफोर्मेशन
कमीशन
मुकर्रर करना
था वह नहीं
किया, परंतु
यह नहीं बताया
कि सेक्शन 123
में जो
सेंट्रल
इनफोर्मेशन
कमीशन नियुक्त
करना था क्या
वह उन्होंने
कर दिया। सबजेक्ट
टू करेक्शन,
अगर कर दिया है।तो
बहुत धन्यवाद,
पर जहां तक
हमारी
इनफोर्मेशन
है, आपने नहीं
किया अभी तक। कर दिया है।तो
बता दें कब
किया और किस
को किया। जो भी
माननीय सदस्य
बोल रहे हैं
मैं उनसे
निवेदन करना
चाहूंगा कि यह
बता दें कि कब
किया और किस
को किया।
इसलिए जो
बैठे-बैठे ही,
मैंने पहले ही
निवेदन किया था
कि बैठे-बैठे
ही बिना एक्ट
के गो थ्रू
हुए जो कहते
हैं उसका
निवेदन नहीं
है, अपनी खुद
की लायबिलिटी
तो निभाई नहीं
और दूसरों को
उपदेश देते
हैं। इसीलिए
यह राजस्थान
सरकार की और
से इस एक्ट
को वापिस लेने
का जो
प्रोवीजन
लाया गया है, यह
जो एक्ट लाया
गया है, यह
वास्तव में
सही दिशा में
सही कदम है।और
इस कारण से
मैं इसकी ताईद
करता हूं और
मेरा जो प्रस्ताव
है।उसको मैं
विद्ड्रा
करता हूं। धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष:
श्री जोगेश्वर
गर्ग। श्री
शंकर सिंह
राजपुरोहित।
श्री
शंकर सिंह
राजपुरोहित(आहोर):
जनमत जानने के
लिए जो प्रस्ताव
किया है।उसको
मैं विद्ड्रा
करता हूं।
श्री
अध्यक्ष: ठीक
है। श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल।
श्री
जालमसिंह
रावलोत।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल: आपने
व्यवस्था
दी है।अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अध्यक्ष: बीच
में नाम रह
गया था, बीच
में पहले जालमसिंह
रावलोत का नाम
है।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल: आपको
जो आदेश है।
श्री
जालम सिंह
रावलोत(शिव):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
विद्ड्रा
करता हूं।
श्री
अध्यक्ष:
श्री वीरेन्द्र
बेनीवाल।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल(लूणकरणसर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
सूचना का
अधिकार
(निरसन)
विधेयक पर चल
रही चर्चा में
आपने मुझे
बोलने का अवसर
दिया इसके लिए
धन्यवाद।
अध्यक्ष
महोदय, आज के
समय में हर व्यक्ति
इस बात से पीडि़त
है।कि राज
द्वारा जो
कार्य किये
जाते हैं उन
कार्यों की
सही सूचना उन
तक नहीं मिल
पाती है। समय-समय
पर
अधिकारियों
द्वारा अपने स्तर
पर कोई भी
बदलाचव कर
दिये जाते हैं
और उन बदलावों
की अगर
जानकारी आमजन
चाहता है।तो
महज दफ्तरों
के चक्कर
काटते रहते
हैं।
अगर किसी
प्रकार की ऐसी
कोई समस्या
आती है।और
समस्या के
प्रति वह कहीं
अपनी बात पेश
भी करना चाहता
है।तो उनके
कोई तथ्य
नहीं होने के
कारण उनकी बात
को कोई महत्व
नहीं मिलता। इसी
क्रम में
पूर्ववर्ती
सरकार का भी
प्रयास रहा कि
आमजन को सूचना
का अधिकार
मिले और उसके
द्वारा
निर्धारित
प्रक्रिया की
पूर्ति करने
के बाद जो
उसको संबंधित
अधिकारी
द्वारा, संबंधित
विभाग द्वारा
दस्तावेज
उपलब्ध
कराये जायें,
उसकी
प्रमाणित
प्रति उसके
पास हो जिसको
कहीं पर वह
पेश करे तो एक
साक्ष्य के
रूप में काम
आये।
उसी क्रम में
केन्द्र
सरकार द्वारा
भी सूचना का
अधिकार
विधेयक पारित
किया गया। राज्य
सरकार द्वारा
भी न जाने क्यों
इसको करना तो
था सूचना का
अधिकार
विधेयक पारित
और यहां पर
निरसन विधेयक
के ऊपर चर्चा
चलने लगी कि
सूचना का
अधिकार(निरसन)
विधेयक यहां
पर पेश किया
जा रहा है।जिसको
पारित कराने का
प्रयास किया
जा रहा है।
मेरा यह
निवेदन है।अध्यक्ष
महोदय, इस
विधेयक के
लागू होने से
राज्य के
अंदर
लालफीताशाही
न सिर्फ हावी
होगी बल्कि आम
व्यक्ति को
जो सूचना चाहे
के लिए
तफ्तरों की
दर-दर उसको
ठोकरे खानी
पड़ेगी, दर-दर
भटकना पड़ेगा। अध्यक्ष
महोदय, अनेकों
ऐसे उदाहरण
हैं कि कोई व्यक्ति
राज का यह कह
लीजिये कि एक
घोषित नियम के
अन्तर्गत
कोई कार्य हो
रहा है।उस
कार्य में
अधिकारी
परिवर्तन कर
देता है, वह
परिवर्तन किन
नियम के अन्तर्गत
करता है, इसकी
जानकारी आमजन
को नहीं मिल
पाती और उसका
कहीं अगर इस
सब के ऊपर
उसको कुछ आशा
बंधी थी तो इस
विधेयक के अन्तर्गत
यह आशा बंधी
थी कि इस
विधेयक के
लागू होने से
उसको इस बात
की तो कम से कम
जानकारी मिलेगी
कि यह दस्तावेज
में फेरबदल
हुआ तो किस
आधार पर हुआ,
पूर्व के अंदर
क्या
प्रक्रिया
निर्धारित की
गई थी और
वर्तमान में
बदलाव हुआ है।तो
क्यों बदलाव
हुआ।
अध्यक्ष
महोदय, मैं
इसमें आपको
निवेदन करना
चाहूंगा कि
इसी के अन्तर्गत
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
के अंदर प्रधानमंत्री
ग्रामीण
योजना के अन्तर्गत
जो सड़कों का
निर्माण हो
रहा था, स्थानीय
स्तर पर
सड़कों के
अनेक
एलाइनमेंट
बदल दिये गये,
अब आमजन की
अगर कोई आशा
थी तो वह यही
आशा थी कि वह इसी
के अन्तर्गत
संबंधित
अधिकारी से
निवेदन करता
और इसकी कम से
कम एक तथ्यात्मक
जानकारी वह
प्राप्त कर
पाते।
तो मेरा
निवेदन है, जब
तक आमजन को
जानकारी
उपलब्ध
कराने के नाम
पर इस पेश
विधेयक को कोई
वैकल्पिक व्यवस्था
जब तक राज्य
सरकार नहीं कर
देती, तब तक यह
निरसन विधेयक
जो प्रस्तुत
किया
गया
है।इसको
पारित नहीं
किया जाय, ऐसा
मैं कहना
चाहता हूं।
बहुत-बहुत धन्यवाद,
आपने मुझे समय
दिया।
(श्री रामनारायण
विश्नोई, उपाध्यक्ष, पदासीन)
श्री
उपाध्यक्ष:
श्री मदन राठौड़।
श्री
मदन
राठौड़(सुमेरपुर):
उपाध्यक्ष
महोदय, जब
केन्द्र ने
सूचना का
अधिकार
अधिनियम 2005
लागू कर दिया
जो पूरे देश
में लागू है।तो
मैं सोचता हूं
कि राजस्थान
सूचना का
अधिकार की अब
कोई आवश्यकता
नहीं है।
इसलिए मैंने
प्रवर समिति
को सौंपने के
लिए जो निवेदन
किया था,
प्रस्ताव
किया था राजस्थान
सूचना का
अधिकार
(निरसन)
विधेयक, 2006, मैं
इसे वापिस
लेना चाहता
हूं।
श्री
उपाध्यक्ष:
श्री गुलाब
चन्द
कटारिया,
प्रभारी
मंत्री।
Bhs/akt/6.9.2006/1140/1l]
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): उपाध्यक्ष
महोदय,
सूचना का
अधिकार पहली
बार 1996 में
पंचायत राज में
सूचना का
अधिकार उस समय
के तत्कालीन
मुख्यमंत्री
जी ने सबसे
पहले इन्ट्रोड्यूस
किया ताकि
पंचायत राज के
बारे में ठीक
प्रकार से
संचालन कर
सकें उसका
प्रयास हुआ
उसके बाद 2000 में
फिर हम राजस्थान
में सूचना का
अधिकार का एक्ट
लेकर के आये और मैं
सोचता हूं कि
जो अधिकार
शिड्यूल 7 में है।उसकी
जानकारी हम
में से सब
सदस्यों को है।कि
शिड्यूल 1 में
केन्द्र
सरकार अगर
कानून बनाती है।शिड्यूल
7 के दो में
राज्य सरकार
बनाती है।और
समवर्ती सूची
में अगर उससे
बने तो मैं
सोचता हूं कि
चूंकि हमारा
जो 2000 का सूचना
का जो अधिकार
का एक्ट बना
हुआ था चूंकि 2005
में जब केन्द्र
सरकार ने इस
पर अपना
अधिनियम जब
बना दिया 15 जून,
2005 को तो
निश्चित रूप
से राजस्थान
का जो अभी जो
कानून है।वो
अपने आप ही
उसका प्रभाव
समाप्त होता है।लेकिन
चूंकि एक
प्रक्रिया है।कानून
को विदड्रा
करने की और
माननीय सदस्य
ने कहा कि
चूंकि 12, अक्तूबर
के दिन 120 दिन
पूरे होते ही
यह कानून
प्रभावी हो गया
लेकिन उसके
बाद सदन नहीं
चलने के कारण
से इसको हम इस
सदन के इस
सेशन में लेकर
आये कि इसको
हम वापस लेना
चाहते हैं। मैं
सोचता हूं कि 12 अक्तूबर
को जब 120 दिन
पूरे हुए हमने
3.10 को ही अपनी
तरफ से एक परिपत्र
जारी करके
पहले सूचना का
जिसको अधिकार है।उसको
मने बना दिया
उसकी फर्स्ट
अपील जिसके
पास होगी उसका
काम पूरा कर
लिया।
नीचे के स्तर
पर जहां कि
सूचना मांगना
चाहते हैं वो
वहां मिलेगी
अगर वो संतुष्ट
है।तो उसकी
अपील फर्स्ट
अपील भी वो
जहां करना
चाहे वो आज भी
कर सकता है।यह
अधिकार उसे
प्राप्त
है।
केवल स्टेट
लेवल की जो
सेकिंड अपील
का जो अधिकार है।इस
कानून के तहत
उसका गठन नहीं
हो पाया और
उसके लिए
चूंकि सदन में
भी इस सदन के
माध्यम से भी
इस विषय पर
चर्चा हुई थी
और यह बात तय हुई
थी इस सदन के
समाप्त होने
के बाद मुख्यमंत्री
जी...।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
...(व्यवधान)... Sorry for interruption. यह नहीं
हुआ था सदन के
समाप्त होने
के बाद उसमें
साफ तौर पर यह
कहा गया था
अध्यक्ष जी
ने यह व्यवस्था
दी थी कि जैसे
प्रतिपक्ष के
नेता को समय
मिलेगा उनके
सहूलियत के
अनुसार कर
दिया जाएगा।
प्रतिपक्ष
के नेता रोज
पधारते हैं यहां
पर सदन की
नेता रोज आती
हैं लेकिन जान
बूझ कर क्योंकि
इसका गठन नहीं
करना था इसलिए
नहीं हो रहा
है। आप
तो यह निवेदन
फरमा दें साहब
...।
श्री
उपाध्यक्ष:
इनके नेता जी
को भी समय
नहीं मिला
होगा।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
कि यह कब तब हो
जाएगा और क्यों
नहीं हुआ इसका
कारण बता दो?
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): इसका
जितना जल्दी
से जल्दी
होगा चूंकि
मुख्यमंत्री
जी की अध्यक्षता
में मीटिंग
होगी और
प्रतिपक्ष के
नेता उसके
सदस्य हैं और
मंत्रिमंडल
से सांवरलाल
जी उसके मैंबर
हैं इन तीन
मैंबरों की
मीटिंग होने
के बाद हमारे
यहां के स्टेट
लेवल का जो
इसका कमिश्नर
बनना है।उसके
गठन होने के
बाद इसका गठन
पूर्ण हो जाता
है।। अब इसके
लिए ....।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अब तो समय
निर्धारित कर
दें कि 15 दिन
में, 20 दिन में,
कब आप कर
देंगे अब तो?
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): मैं
सोचता हूं कि
एकदम कोई
घंटा, मिनट तो
मैं तय नहीं
कर सकता हूं पर
मैं सोचता हूं
कि
शायद इस
अप्रैल के महीने
में हम इस काम
को पूरा कर
लेंगे अप्रैल के
महीने में इस
काम को पूरा
कर लेंगे
निश्चित रूप
से जिस मंशा
और भावना से
सूचना का
अधिकार इस
सरकार ने
पूर्व में भी 1996
में और आपने 2000
में जो एक
केन्द्र
सरकार के बिना
कानून के भी
हमने अपनी तरफ
से इस बात को
आवश्यक समझा
कि प्रशासनिक
तंत्र में अगर
स्वच्छता
लानी है।तो
निश्चित रूप
से इसका
अधिकार प्रत्येक
व्यक्ति को
हो और उसी
आधार पर लाये
और केन्द्र
सरकार जब इस
कानून को ले
आयी है।जिस
मंशा से लायी है।हमें
उसका पालन
करना है।उसका
पालन करने के
लिए हमने पहली
और फर्स्ट
अपील तक काम
पूरा कर लिया
...(व्यवधान)...
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
एक मिनट यह
लिख रखा है।27
में – “The
appropriate government may by notification in the official gazette make rules
to carry out the provisions of this Act.” जो आप नीचे
वाली बात कर
रहे हैं क्या
आपने गजट
नोटिफिकेशन
में यह लिख
दिया है।क्योंकि
आप ऑर्डर
निकालें उसका
मतलब नहीं है।। इस एक्ट
में प्राविजन है।कि
आपने चीफ इन्फोर्मेशन
ऑफिसर नहीं
बनाया है।तब
भी आपको जो
नीचे की
प्रक्रिया है।उसको
भी गजट
नोटिफिकेशन
करना है।क्या
गजट में
नोटिफिकेशन
कर दिया है?
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): गजट
नोटिफिकेशन
नहीं हमने 3.10 को
एक परिपत्र
जारी कर के
नीचे का गठन
किया है।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
माफ करें,
परिपत्र का कोई
कानूनी वजूद
नहीं है।जब तक
आप गजट
नोटिफिकेशन
में यह पार्ट
नहीं डालेंगे
। 27 में बहुत
क्लियर लिखा
हुआ है।
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): ठीक
बात है।वो कमी
है।वो इसका
गठन होने के
साथ ही बाकी
आगे की जो प्रक्रिया
है।उसको हम
अतिशीघ्र
पूरा करेंगे।
हमारी मंशा यह
है।कि जिस
कानून के तहत
हम अपनी स्वच्छता
को प्रमाणित
करेंगे उसमें
हमको कोई एतराज
नहीं है। हम
इसी अप्रैल के
महीने में ही
इस काम को पूरा कर
लेंगे और जो
बाकी जो आगे के
काम हैं उसको
भी हम निश्चित
रूप से यह बात
सही है।कि गृह
विभाग के पास
अभी तक जो
विभिन्न
डिपार्टमेंटों
से नियमों का
तो शायद बन
चुका है।लेकिन
इसकी पूरी
प्रक्रिया आ
जाए उसके बाद
ही पूरी होगी
जो सूचना का
जो संकलन
हमारे यहां आना
है।वो अभी तक
आना प्रारम्भ
नहीं हुआ और
लगभग 5-6 सौ इसके
अलग अलग
डिपार्टमेंट
हैं मैं सोचता
हूं कि इसके
ठीक ढंग से
आने में यह
पूर्ण गठन के
बाद ही इसको
प्रभावी ढंग
से हम कर
सकेंगे।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
इसमें एक चीज
आप यह और फरमा
दें माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से
पूछना चाहता
हूं कि जो
फाइनल
अपीलेंट आथोरिटी
है।उसके पास
में हजारों
एप्लीकेशंस
पेंडिंग पड़ी
हैं अभी वो
इसलिए पेंडिंग
पड़ी हैं कि न
तो कमीशन है।न
कमिश्नर है।उन
एप्लीकेशंस
का निस्तारण
आप किस प्रकार
से करेंगे क्योंकि
वो लोग तो
अपने अधिकार
से वंचित रह
गये और पुराना
आपने नियम हटा
दिया तो अब
उसका क्या
होगा? वो
हजारों एप्लीकेशंस
जो पड़ी हैं
उनका निस्तारण
कैसे होगा?
श्री गुलाबचन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
सेकिंड अपील
की स्टेज है।सेकिंड
अपील तो अभी
तक आना ही
प्रारम्भ
नहीं हुई अभी
तो फर्स्ट
अपील जहां
नीचे उनके
संबंधित
अधिकारी को होना
है।वो ही काम
पूरा हो रहा है।अभी
तक तो सेकिंड
अपील की स्टेज
तो किसी भी
केस में आयी
नहीं है। वैसे तो
हमने हर एक
में ...।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अभी तक मान्यवर,
फर्स्ट ही
नहीं आयी है।ऑल
प्रैक्टिकल
परपजेज जो अभी
तक सूचना का
अधिकार की
दरख्वास्तें
दी हैं वो
इर्रिलेवेंट
हैं उनका कोई
उपयोग नहीं है।जब
तक आप गजट
नोटिफिकेशन
करके यह
प्राविजन नहीं
करेंगे तब तक
उसका कोई वजूद
नहीं है।कानून
की दृष्टि से।
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): हमने
बता दिया कि
जो काम बचा है।उसको
हम पूरा कर
रहे हैं। अब उसको
बार बार करने
से कोई परपज
नहीं
निकलेगा।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
माननीय
मंत्री जी,
पंचायत समिति
पीसांगन में
सेकिंड अपील
की स्टेज आयी
हुई है।और एक
व्यक्ति गत 6
महीने से एप्लाई
किया हुआ है।अपील
किया हुआ है।उसको
आज तक राइट ऑफ
इन्फोर्मेशन
के तहत कोई
सूचना नहीं दी
गई है।
पंचायत
पीसांगन के
अन्दर।
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
मैंने पहले ही
बता दिया कि
अभी कोई हमारे
पास सारा रिकार्ड
संकलित नहीं है।मैं
एक-एक के बारे
में जवाब देने
की स्थिति में
भी नहीं हूं
अभी कि
पीसांगन में
क्या हुआ और
उसमें क्या
हुआ मेरे पास
कोई सूचना
संकलित नहीं
है।
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय,
पाइंट ऑफ इन्फोर्मेशन।
I am on a point of information. आज
एयरपोर्ट के
आसपास के
कालोनीवालों
में भय ब्याप्त
है।हजारों की
संख्या में
महिलाओं ने
विधान सभा में
प्रदर्शन किया
है।उनके मकान
टूटने के
नोटिसेज
प्राप्त हो
चुके हैं अत:
सरकार से मैं
आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहता
हूं कि सरकार,
स्वायत्त
शासन मंत्री
इस मामले में
स्पष्टीकरण
दें, सरकार स्पष्टीकरण
दे।
श्री
उपाध्यक्ष:
प्रश्न यह है।कि
राजस्थान
सूचना का
अधिकार
(निरसन)
विधेयक, 2006 को
जनमत जानने
हेतु
परिचालित
किया जाए?
(अस्वीकृत)
विधेयक
को जनमत जानने
हेतु
परिचालित
करने का
संशोधन प्रस्ताव
अस्वीकार
किया गया।
प्रश्न
यह है।कि
राजस्थान
सूचना का
अधिकार
(निरसन)
विधेयक, 2006 को
विचारार्थ
लिया जाए?
(स्वीकृत)
विधेयक
को विचारार्थ
लिया गया।
खण्डश:
विचार
खण्ड
2 – कोई
संशोधन नहीं।
प्रश्न
यह है।कि खंड 2
स्वीकार
किया जाए?
(स्वीकृत)
खण्ड
2 स्वीकार
किया गया।
खण्ड
1 अधिनियमन
सूत्र, नाम
आदि – कोई
संशोधन नहीं।
प्रश्न
यह है।कि खंड 1
अधिनियमन
सूत्र, नाम
आदि स्वीकार
किये जाएं?
(स्वीकृत)
खण्ड
1 अधिनियमन
सूत्र, नाम
आदि स्वीकार
किये गये।
श्री
गुलाबचंद
कटारिया,
प्रभारी
मंत्री प्रस्ताव
करेंगे कि
राजस्थान
सूचना का
अधिकार
(निरसन)
विधेयक, 2006 को
पारित किया
जाए।
विधेयक
का पारण
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से प्रस्ताव
करता हूं कि
राजस्थान सूचना
का अधिकार
(निरसन)
विधेयक, 2006 को
पारित किया
जाए।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, यह
मेरा अधिकार है।You can’t deny this. थर्ड
रीडिंग पर तो
मेरा अधिकार है।माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): ...(व्यवधान)...
अभी तो आपने
कहा हम सहयोग
कर रहे हैं अब।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): आपका
तो थर्ड रीडिंग
पर ही अधिकार है।अब।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मैं महावीर
जी, आपकी किसी
बात का उत्तर
अब दूंगा ही
नहीं ।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी (शिक्षा
मंत्री): आपकी
तरफ इशारा
किया इसलिए
नहीं दे रहे
हैं।
डॉ.
सी.पी. जोशी
(नाथद्वारा):
...(व्यवधान)... वो
प्रस्ताव
पढ़कर माफी
मांग लेंगे तब
देना आप।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
हां वो ठीक
रहेगा ...(व्यवधान)...
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
गृह मंत्री
महोदय से आपकी
मार्फत
निवेदन करना
चाहता हूं कि
आपने यह खबर
बार बार
अखबारों में
पढ़ी होगी कि
देश के जो
आईएएस कॉडर है।जो
आईपीएस से
बड़े अधिकारी
हैं वो इस
कानून से सख्त
खफा हैं ऐसी
खबरें बीसों
दफे अखबारों
में निकली
होंगी।
kas\akt\7-4-06\1150\1m
वह
नहीं चाहते थे
कि इस देश में
यह कानून लागू
हो । क्योंकि
जो उनकी
अथोरिटी है,
जो उनकी पावर है।जिसका
कि वह एप्स्युलेट
तरीके से
एंजाय करते
आये हैं, जो
निरंकुशतावादी
उनकी
प्रवृत्ति है।उसके
ऊपर इस कानून
के जरिये रोक
लगेगी और इस कानून
का हर स्तर
के ऊपर विरोध
किया गया ।
यही कारण है।कि
इस कानून के
तहत जिन उच्च
अधिकारियों
की, अधिकार
प्राप्त व्यक्तियों
की नियुक्ति
होनी थी उनकी
जानबूझ कर
नियुक्ति
नहीं कराई गई
। गृह विभाग
की जिम्मेदारी
थी, मैं कोई
मुख्य
मंत्री जी को
सपोर्ट नहीं
कर रहा हूं
यहां पर, आपका
दायित्व था ।
आपको गृह सचिव
समय समय पर
आगाह करते
रहते कि कृपया
इस पत्रावली को
निकलवाइए ।
यहां पर
विपक्ष के
नेता ने कहा कि
कभी उनको
मीटिंग के
लिये बुलाया
ही नहीं । अब
यहां कह देना
कि जब उनको
सुविधा हो यह
बडी हास्यास्पद
स्थिति है,
कोई स्वीकार
नहीं करेगा ।
कल आप पत्र लिख
देते उसके बाद
आपको कहने की
स्थिति बनती
कि हमने तो
आपको पत्र
लिखा था आप
नहीं आये ।
फिर प्रावधान है।अगर
यह नहीं आते
तो, पहले
माननीय कल्ला
साहब थे फिर
माननीय चौधरी
साहब आये यह
नहीं मीटिंग
में नहीं आते
आप सूचना दे
देते तो आज बोल
तो इनके कोर्ट
में होती । आप
इनके बिना गैर
हाजिरी के
बहुमत से निर्णय
ले लेते क्योंकि
एक मंत्री और
एक मुख्य
मंत्री, आप
नियुक्त कर
देते और वैसे
भी आपको
नियुक्त
करने का
अधिकार है।।
इनकी राय
मानने के लिये
आप बाध्य
नहीं है।क्योंकि
कमेटी का कम्पोजिशन
इस प्रकार का है।एक
मुख्य
मंत्री और
उनके द्वारा
मनोनीत एक
मंत्री । मैं
आपसे निवेदन
करना चाहूंगा
कि राज्य
सरकार की जैसा
कि मैं उन
बातों को
दोहराना नहीं
चाहता मेरे दल
के कई माननीय
सदस्य
माननीय कल्ला
जी, माननीय
जोशी जी, डा.बैद,
हरिमोहन जी सब
ने यह बात कही
मैं उन बातों
को दोहराना
नहीं चाहता
हूं लेकिन आप
यह बात ध्यान
में रखिए कि
यह बाबू लोग
अंग्रेजी
अख़बार लिखते
हैं इन आई ए एस
अधिकारियों
को, यह बाबू लोग
नहीं चाहते
हैं कि यह
कानून देश में
लागू होवे ।
सारे अखबारों
ने लिखा है।देश
के जितने भी
बडे अख़बार
हैं आपने
बहुतों ने यह
स्टोरी पढी
होगी कि यह
बाबू लोग नहीं
चाहते देश में
यह कानून लागू
हो और बिरला
जी आप कृपया
कटिंग मंगवा
लीजिए ..
श्री
ओम बिरला
(संसदीय सचिव):
सही बात है।यह
यह बाबू लोग
जब इधर बैठते
हैं तो इधर ही
इधर झांकते
हैं जब उधर
बैठते हैं तो
झांकते ही नहीं
है।जैसे आपको
भूल गये हों ।
यह तो ऐसा शो
करते हैं जैसे
आपको जानते ही
नहीं इधर ही
इधर झांकते
हैं और जब उधर
बैठ जाये तो
झांकते ही
नहीं है।।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मैं वही कह
रहा था । अब आप
विराजो ।
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
लोकायुक्त
के लिये कितनी
पाबंदी लगा
रखी है, यहां
तो विपक्षी दल
के नेता और यह
सब बातेंहैं।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): I can’t hear.
श्री
उपाध्यक्ष:
बाबू लोग ही
नहीं है।जो भी
भ्रष्ट
अधिकारी है।जो
इस भ्रष्टाचार
में लिप्त है।उनको
भी इस कानून
से बडी भारी
दुविधा पैदा
हो जायेगी ।
भ्रष्टाचार
को कम करने के
लिये इस बिल
का बहुत बड़ा
योगदान होगा ।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): स्व.
चौधरी कुम्भाराम
आर्य जी तो
चीफ
सैक्रेटरी को
भी बडा बाबू
कहते थे ।
श्री
उपाध्यक्ष:
भ्रष्टाचार
को कम करने के
लिये यह बिल
बहुत ही लाभदायक
सिद्ध होगा ।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
उपाध्यक्ष
महोदय, यह बाबू
लोग जो है।यह
रूलिंग
पार्टी आफ
इण्डिया के
मेम्बर है।। हम
रूल करें तो
हमारे साथ यह
रूल करें तो
इनके साथ ।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): स्व.
चौधरी कुम्भाराम
आर्य जी तो
चीफ
सैक्रेटरी को
भी बड़ा
बाबू कहते थे
।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
उपाध्यक्ष
महोदय, इसका मूल
कारण यह है।कि
अभी तो रूल
बनाने की ही
बात है।। क्या
आप इस सदन में
कहने की
स्थिति में
है, माननीय
गृह मंत्री जी
मैं आपका बहुत
आदर करता हूं
और मैं आपको
देख रहा हूं
कि आप बिलकुल
निष्पक्ष
तरीके से
हालांकि आपकी
विचारधारा
जिस
विचारधारा के
आप पोषक हैं
उससे मेरा कतई
मतभेद है,
मेरा कोई रिश्ता
नहीं है,
मतभेद है।लेकिन
एक व्यक्ति
की हैसियत से
जो आपके विचार
हैं आप निष्पक्ष
तरीके से काम
करने के हामी
हैं जिस तरह से
आपके वक्तव्य
आये हैं सदन
में गृह विभाग
के उनको देखते
हुए आपके
प्रति मन में
सम्मान बढा है।।
लेकिन मैं
आपसे कहना
चाहूंगा फिर
आप शिकार होंगे
इनके यह रूल
नहीं
बनायेंगे और
रूल की आड में
बहुत सारी ऐसी
चीजें हैं जो
कि साफ नहीं
हो पायेगी । जैसा
आसन ने अभी स्वयं
ने कहा है।और
आप सब समझ रहे
हैं यहां पर
इतने सारे
मेरे साथी माननीय
सदस्य यहां
बैठे हुए हैं
सब चाहते हैं
कानून लागू हो
क्योंकि
अखबारों में
अक्सर यह
खबरे आती रहती
हैं कि रूलिंग
पक्ष के विधायक
भी यह कहते
हैं, जब हमारा
राज था तो यह
कहते थे कि यह
अधिकारी
हमारी सुनते
नहीं है।। यह
आपके हाथ में
एक अधिकार
आयेगा कि आप
इस बाबू रूपी
अरबी घोडे के
ऊपरे कंट्रोल
कर सकोगे । यह
हल्के पतले
मंत्री को तो
वैसे ही पटक
देतेहैं। अगर
मंत्री
इफेक्टिव
नहीं हो,
लिखने पढने की
ताकत नहीं हो
तो ऐसा पटकते
हैं कि हड्डी
पसली टूट जाये
उसकी । उपाध्यक्ष
महोदय, मैं आपसे
निवेदन करना
चाहता हूं और
यहां पर सारे
प्रदेशों में
लागू हो गया ।
मेरे साथी
माननीय सदस्य
कह रहे थे कि
पडौसी राज्यों
में भी लागू
हो गया । यह
देश का कानून है।सारे
देश में लागू
हो गया है।।
सारी
प्रांतीय
सरकारों ने
इसको लागू कर
दिया विरोध के
बावजूद ।
विरोध हुआ था
प्रान्तों में
कि हमको ब्लैक
मेल किया
जायेगा, हम
काम नहीं कर
सकेंगे यह
बाबू लोगों की
नोटिंग है।हम
काम नहीं कर
सकेंगे, कोई
निर्णय नहीं
कर पायेंगे,
हम डर कर काम
करेंगे, हमारे
ऊपर तलवार लड़की
रहेगी । इन
बातों को क्या
जब भारत सरकार
ने कानून
बनाया था तब
कंसीडरेशन
नहीं रखा था । क्या
उनके
कंसीडरेशन
में यह बात
नहीं थी ।
मेरा आपसे
निवेदन है।कि
जब हिन्दुस्तान
के सारे
प्रान्तों
में यह कानून
लागू हो गया है।तो
आप भी इसको
जल्दी से जल्दी
लागू करें और
आप कब कानून
बना लेंगे ।
इसमें एक
प्रावधान है।रूल्स
विधान सभा के
समक्ष प्रस्तुत
किये जायेंगे
। क्या आप
बता सकेंगे
मेरी जानकारी
में नहीं है।कि
बिना विधान
सभा के समक्ष
रहे हुए वह
रूल इफेक्टिव
हो जायेंगे,
नहीं होंगे ।
फिर आपकी विधान
सभा की 6 महीने
की गाडी गई ।
क्या आप इसके
लिये विधान
सभा का एक स्पेशल
सत्र
बुलायेंगे क्योंकि
इतना महत्वपूर्ण
कानून है।जिससे
आपके विधायक,
राजस्थान की
जनता जिसका कि
यह अधिकार है।वह
इससे वंचित
रहेगी जब तक
आपके रूल नहीं
बन जायेंगे इस
कानून के तहत
तो क्या आप
इसके लिये
विधान सभा का
एक स्पेशल
सत्र
बुलायेंगे ।
चाहे वह दो
दिन के लिये
बुलाये, चाहे
एक दिन के
लिये बुलाए लेकिन
मेरा आपसे
अनुरोध है,
मेरा आपसे
निवेदन है।कि
आप विधान सभा
का सत्र
बुलाइए और इन
रूल को लाइए
विधान सभा से
अप्रुव कराइए
और इसमें आप
जितनी जल्दी
कर सकेंगे
उसके बारे में
आप कोई प्रकाश
डालने की कृपा
करें, धनयवाद
।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): रूल के
लिये विधान
सभा में आना
आवश्यक नहीं है।।
(व्यवधान)
रूल यहां नहीं
बनते हैं
विधान सभा की
कमेटी रूल को
एग्जामिनेशन
करती है।। (व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): गृह
मंत्री जी
बैठे हैं आप उनको
जवाब देने दें
। यह गृह
मंत्री बता
देंगे इनको
बताने की कहां
जरूरत है।।
उपाध्यक्ष
महोदय, इनके पास
कोई बात नहीं
। (व्यवधान)
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से
सरकार से
निवेदन करना
चाहूंगा । (व्यवधान)
उपाध्यक्ष
महोदय, मेरा
निवेदन यह है।कि
राजस्थान
सरकार सूचना
के अधिकार का
निरसन का
विधेयक लेकर
आई है।। और
इसके तहत उनका
तर्क यह है।कि
जब केन्द्र
में बन गया है।निरसन
कर रहे हैं,
मेरा निवेदन
आपसे यह है।कि
जब तक राजस्थान
में केन्द्र
सरकार द्वारा
लाया गया
विधेयक के
आधार पर पूरी
व्यवस्था
नहीं हो जाये
और जब तक
प्रत्येक
नागरिक को यह
अधिकार नहीं
मिल जाये कि
वह सूचना
प्राप्त कर
सके तब तक इस
विधेयक का
निरसन करना
नितांत
वर्जित होगी ।
क्योंकि इस
सरकार ने
हमेशा वादा कर
के असत्य
बोला है।।
इसका प्रमाण
हमारे पास है।।
इस सरकार ने
कहा था हाउस
टैक्स खत्म
करेंगे , इन्होंने
नहीं किया ।
इस सरकार ने
कहा था कि हम
जो अनुदानित
स्कूल हैं
उनका अनुदान
खत्म नहीं
करेंगे, इन्होंने
खत्म किया ।
यह सरकार जो
कहती है।वह
करती नहीं है।1
एक कवि ने
बहुत सही कहा है।कि
कहती कुछ थी
करती कुछ थी ।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य
।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं इसी
विधेयक पर बोल
रहा हूं कि जब
सरकार की कथनी
और करनी में
अंतर हो तो
निश्चित रूप
से शंका होती
है। इसलिए हम
यह चाहते हैं
कि इसके पहले
कि इस विधेयक
का निरसन किया
जाये पहले
इसकी पूरी व्यवस्था
हो और जैसा कि
अभी माननीय
गृह मंत्री जी
ने अपने बयान
में कह रहे थे
कि हमने फर्स्ट
स्टेज और
सैकण्ड स्टेज
पार कर ली है।।
मैं सरकार की
जानकारी में
लाना चाहता
हूं कि अजमेर
जिले में ऐसे 10-20
केस हैं
जिसमें पहली
अर्जी और
दूसरी अपील
दोनों का निस्तारण
नहीं हुआ है।क्योंकि
उन पर न कोई
नियम है।न उन
पर कोई दंड है,
न कोई दंड की
प्रक्रिया है।।
जिस प्रकार से
आज ब्यूरोक्रेसी
निरंकुश हो
रही है।और जिस
प्रकार से
जनता के राज
में जनता पर
यह हावी हो
रही है।यह
विधेयक ऐसा
विधेयक है।जिस
विधेयक के
माध्यम से हम
सही मायने में
लोकतंत्र को
उस व्यक्ति
के हाथ में दे
सकते हैं जो
ढाणी में बैठा
हुआ है।।
ans\akt\7.4.2006\1200\1n\1
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से सदन को
कहना चाहता
हूं कि
इस इश्यू के
ऊपर सदन को
हां पक्ष और
ना पक्ष में
नहीं
बांटे और
बिल्कुल
पूरी निष्पक्षता
के साथ, जिस
प्रकार
गृहमंत्री जी
सदाशयता और
ईमानदारी से
ध्यान देते
हैं उसका आचरण
अपने व्यवहार
पर भी
करें और वह
बताये
इस बात को कि
निरसन करने से
पहले हम यह व्यवस्था
कर रहेहैं। यह व्यवस्था
करने के बाद
यदि निरसन
करते हैं तो
हमें किसी को
इसमें आपत्ति
नहीं होगी ।
मैं कभी इस बात
का पक्षधर
नहीं हूं कि
हम गोद के बच्चे
को छोड़कर पेट
की आस करें ।
उपाध्यक्ष
महोदय, पेट का
बच्चा पेट का
ही बच्चा
होता है, गोद
का बच्चा
हमारे
सामने होता है।हम
पहले उसके
पालन पोषण को
देखे, देखें
उसकी व्यवस्था
क्या है।। मेरा
आपके माध्यम
से फिर यह
निवेदन है।और
पूरजोर अपील है।कि
बिना किसी
पक्षपात के
बिना किसी
राजनीति के
बिना सदन को
हां या ना में
बांटे हुए इस
पवित्र
विधेयक को इसी
दृष्टि से
लाये ।
श्री
उपाध्यक्ष :
माननीय सदस्य
आपकी बात, केन्द्र
के सरकार के
मुताबिक...(व्यवधान)
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
अभी गृहमंत्री
जी कह रहे थे
कि 96 में
बीजेपी लाई, 96
में बीजेपी
लाई और उपाध्यक्ष
महोदय मैं बात
यह कहना चाहता
हूं कि भगत सिंह
ने पार्लियामंट
में कही थी कि
बेरो को
सुलाने के लिए
धमाके की आवश्यकता
होती है।। यह
सरकार
गूंगी-बहरी
सरकार है।। न
सुनती है।न
समझती
है। जो कहती है।वह
करती नहीं ।
जो करती है।वह
बताती नहीं
।जो बताती है।वह
वहां पर नहीं
होता, इसलिए
बार-बार एक
बात को बोलना
पड़ता है।और
जोर से बोलना
पडता है।। मैं
उम्मीद करता
हूं कि यह सरकार
विधेयक का
निरसन नहीं
करेगी । धन्यवाद,
जयहिन्द ।
डा.
जालम सिंह
रावलोत (शिव): इस
सरकार ने ढाई
साल में जो
काम कराये वह
आपने 40 साल में
नहीं कराये ।
(व्यवधान)
श्री
टीकम चन्द
कान्त
(सिवाना):
उपाध्यक्ष
महोदय, भगत
सिंह के धमाके
की बात कर रहे
हैं तो यह खुद
तो (व्यवधान)
धमाका
नहीं करने
आये इसलिए गृहमंत्री
जी को चेता रहा
हूं कि कहीं
ऐसी गड़बड़ तो
नहीं है, देख
ले कम से कम ।
श्री
उपाध्यक्ष :
नहीं करेंगे ।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
उपाध्यक्ष
महोदय,
राजाखेड़ा के माननीय
सदस्य
विद्वान है।उन्होंने
जो आईपीएस
आफिसर्स की
मीटिंग की बात
रखी थी मैं इसमें
एक निवेदन
करना चाहूंगा
कि ऐसी गोपनीय
सूचनाएं जो
राष्ट्रहित
में, बाहर पता
नहीं चलना
चाहिये, ऐसी सूचना
देना रोकना
चाहिये, नहीं
दी जानी
चाहिये ।
द्वितिय विश्वयुद्ध
का एक दृष्टांत
है..(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
एक्ट में
प्रावधान है।कि क्या
सूचना नहीं दी
जाएगी, यह
लिखा हुआ है।।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): दी
जानी चाहिये
मेरा यही कहना
है।।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
लिखा हुआ है,
एक्ट में
लिखा हुआ है।कि
नहीं दी जाएगी
।
श्री
उपाध्यक्ष :
केन्द्र
सरकार आवश्यकतानुसार
संशोधन करती
रही...(व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने जो बात रखी
मैं सोचता हूं
कि अभी तक
विधायिका का
अपना प्रभाव
भी है, अपनी
ताकत भी है।और
लोकतंत्र में
यदि विधायिका
इतनी कमजोर हो
जाएगी
कार्यपालिका
के सामने हताश
हो जाएगी तो
शायद
लोकतंत्र का
मखौल हो जाएगा
। आपे दिमाग
में ऐसा कोई
कारण नहीं होना
चाहिये कि
हमने, कोई
कानून केन्द्र
ने बनाया उसको
हमने स्वीकार
किया है।उसके
अनुसार किसी
को अच्छा लगे
या नहीं लगे,
कोई हमसे खुश
हो या नाखुश हो
इससे कोई फर्क
पड़ने वाला
नहीं है।। इस
कानून की
पालना होगी यह
मैं आपको
निश्चित रूप
से विश्वास
दिला रहा हूं
।
दूसरा
जहां तक, हमने
नियम इसके बना
दिये हैं केवल
राज्य स्तर
का गठन ही
बाकी, बाकी
सारा काम हम पहले
ही कर चुकेहैं।
12.10 को ही जब यह,
वहां हमने 13
तारीख को गजट में
इसका
नोटिफिकेशन
भी हम नियमों
का कर चुके
हैं, हमारी
तरफ से पूरा
काम है। केवल
राज्य स्तर
का गठन है।वह
होते ही यह
पूर्णतया काम
करने लग जएगा
इतना मैं आपको
विश्वास
दिलाना चाहता
हूं ।
श्री
उपाध्यक्ष:
प्रश्न यह है।कि
राजस्थान
सूचना का
अधिकार
(निरसन)
विधेयक 2006 को
पारित किया
जाए ?
(स्वीकृत)
राजस्थान
सूचना का
अधिकार(निरसन)
विधेयक 2006
पारित किया
गया ।
श्री
गुलाबचंद
कटारिया,
प्रभारी
मंत्री यह
प्रस्ताव
करेंगे कि
राजस्थान
धर्म स्वातंत्र्य
विधेयक 2006 को
विचारार्थ
लिया जाए । (व्यवधान)
आप स्थान
ग्रहण कीजिए
पहले ।
विधेयक
पर विचार
राजस्थान
धर्म स्वातंत्र्य
विधेयक, 2006
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से प्रस्ताव
करता हूं कि
राजस्थान
धर्म स्वातंत्र्य
विधेयक 2006 को
विचारार्थ
लिया जाए।
श्री
उपाध्यक्ष :
श्री
शांतिलाल
चपलोत ।
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली): माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से राजस्थान
धर्म स्वातंत्र्य
बिल जो माननीय
गृहमंत्री जी
ने पेश किया है।उसमें
अपना एक
अमेंडमेंट
मूव कर रहा
हूं । माननीय
उपाध्यक्ष
जी, खण्ड 4 में
जो लिखा है।उसके
बाद खण्ड 4 को 4 वन
समझकर जो
परिशमेंट का है।उसके
बाद खण्ड 4 दो
इस प्रकार से
जोड़ा जाए,
खण्ड 4 के
विद्यमान
उपबंधों को
उसके उपखण्ड
(1) के रूप में.....
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
उपाध्यक्ष
महोदय, पहले
तो जनमत जानने
वाला है।उस पर
बोलेंगे जब
खण्डश: आयेगा
तो,
अमेंडमेंट तो बाद
में आना चाहिये
।
श्री
उपाध्यक्ष :
संशोधन थोड़े
ही पेश कर रहे
हैं आप ?
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली):
एक मिनिट, मैं
अपनी बात कह
देता हूं ।
पुन: संख्यांकित
किया जाये और
इस प्रकार
पुन: संख्यांकित
उपखण्ड(1) के
पश्चात निम्नलिखित
उपखण्ड (2)
जोड़ा जावे ।
तत्समय
प्रवृत्त
किसी भी अन्य
विधि में अन्तर्विष्ट
किसी बात के
होने पर भी
राजस्थान
सोसाइटी,
रजिस्ट्रीकरण
अधिनियम,1958 (1958 का
अधिनियम संख्या
28) या राजस्थान
लोक न्यास
अधिनियम,1959(1959
का अधिनियम
संख्या 42) के
अधीन रजिस्ट्रीकृत
किसी निकाय का
रजिस्ट्रीकरण
रद्दकरणीय
होगा यदि यह
पाया जाता है।कि
निकाय की
निधियों का
उपयोग
संपरिवर्तन
के लिए किया
गया है। या
किया जा रहा है।या
किया जाना
अनुध्यात है।।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैंने
जो परिचालित
करने के लिए
अमेंडमेंट
किया उसको तो
मैं विदड्रा
करता हूं ।
मैंने यह
संशोधन इसलिए
प्रस्तुत
किया है।कि कई
बार देखने में
आया है।कि कई
लोग धन का
दुरूपयोग
करतेहैं।
धर्म
परिवर्तन के
लिए धन का
दुरूपयोग
करते हैं, ऐसे
धन का
दुरूपयोग है।उसको
रोका जाना
चाहिये और
उसको रोके
जाने के लिए
किसी न किसी
प्रकार
प्रकार की एक
कानूनी सहायता
भी चाहिये ।
सोसाइटी रजिस्ट्रेशन
एक्ट के तहत
यदि आपने
सोसाइटी बना
रखी है।तो वह
और पब्लिक
ट्रस्ट एक्ट
के तहत यदि
आपने पब्लिक
ट्रस्ट बना
रखा है।और
उसके द्वारा
पैसा कलेक्ट
किया जा रहा
है, फोरेन मनी
आ रही है।या
यहां से आ रही है।और
धर्म
परिवर्तन में
लगे हुए हो तो
आपका सोसाइटी रजिस्ट्रेशन
एक्ट के तहत
जो सोसाइटी का
रजिस्ट्रेशन
है।उसको और
पब्लिक ट्रस्ट
एक्ट के तहत
यदि आपका
पब्लिक ट्रस्ट
बना हुआ है।तो
उसको केंसिल
किया जाना
चाहिये, निरस्त
किया जाना
चाहिये, उसी
के लिए मैंने
यह अमेंडमेंट
मूव किया है।।
मैं
समझता हूं कि
यह अमेंडमेंट
मूव किया जाना
नितान्त
आवश्यक है।।
जैसा कि आप
जानते हैं, कई
कोर्ट्स ने
सुप्रीम
कोर्ट ने भी तय किया है।।
सुप्रीम
कोर्ट ने मध्यप्रदेश
में जो एक्ट
आया है।उसको
भी वेलिड
मानकर तय किया
है।और इसी
तरीके से
गुजरात का भी
किया है।।
पहले
तमिलनाडु ने
भी इस प्रकार
का एक्ट पास
किया था उसके
बाद उन्होंने
रिपिल कर दिया
2004 में । उडीसा
में जो एक्ट
बनाया था उसको
1973-74 में जस्टिस
मिश्रा जी ने
उसको अल्ट्रावायर्स
घोषित किया,
उसके बाद
सुप्रीम कोर्ट
में सन् 1974 में
चीफ जस्टिस
एन.रे. ने यह
कहा है।कि
नहीं यह गलत है।और मध्यप्रदेश ने जो
कानून बनाया है।उसके
तहत उडीसा के
जो उन्होंने
जो अल्ट्रावायर्स
घोषित किया था
उसको भी उन्होंने
निरस्त कर
दिया है, उन्होंने
कहा नहीं यह
जो अल्ट्रावायर्स
घोषित किया जा
रहा है।वह गलत
है।। मैं
उसमें आपको
कुछ उद्धरण
इसलिए सुनाना
चाहता हूं यह एआईआर
1977 सुप्रीम
कोर्ट पेज 908,
मिस्टर
एन.रे. चीफ
जस्टिस,
एम.एच.बैग,
आरएस
सरकारिया, पी.
एन. सिंगल,
जसवंत जे.जे. मैं
निवेदन करना
चाहता हूं
एन्.रे. सन 74 में
चीफ जस्टिस
बने थे उस समय
तत्कालीन
प्रधानमंत्री
श्रीमती
इंदिरा गांधी
जी के कहने पर
वह बनाये गये
थे । उन्होंने
बहुत ही अच्छा,
बहुत ही
प्रोगेसिव थे
वह, बिल्कुल
उस प्रकार की
आइडोलोजी के
थे जो स्वतंत्र
और निर्भिक
आइडोलोजी
होती है,
उसमें उन्होंने
यह निर्णय दिया है।और
उसमें यह कहा है।उन्होंने....
Ddm/akt/070406/1210/1o
उन्होंने
यह कहा है।कि -
“(1) In Civil Appeals nos. 1489 and
1511 if 1974:
Re. Stainislaus, Appellant v. State
of
(A) Constitution of
“What
Article 25(1) grants is not the right to convert another person to one’s own
religion by an exposition of its tenets. It has to be remembered that Article
25(1) guarantees ‘freedom of conscience’ to every citizen, and not merely to
the followers of one particular religion, and that, in turn, postulates that
there is no fundamental right to convert another person to one’s own religion
because if a person purposely undertakes the conversion of another person to
his religion, as distinguished from his effort to transmit or spread the tenets
of his religion, that would impinge on the ‘freedom of conscience’ guaranteed
to all the citizens of the country alike.”
मैं
यह 25, आर्टिकल 25 (1)
जो कांस्टीट्यूशन
का है, मैं
उसको रीड आउट
करके आपके सामने
रखना चाहता
हूं। माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, फण्डामेंटल
राइट्स में
आर्टिकल 25 में
यह कहा है- Right to Freedom of Religion.
“25. Freedom of conscience and free profession, practice and propagation of
religion.- (1) Subject to public order, morality and health and to the other
provisions of this part, all persons are equally entitled to freedom of
conscience and the right freely to profess, practice and propagate religion.
(2) Nothing in this Article shall
affect the operation of any existing law or prevent the State from making any
law, -
·
regulating
or restricting any economic, financial, political or other secular activity which may be associated with religious practice;
·
providing
for social welfare and reform or the throwing open
of Hindu religious institutions of a public character to all classes and sections of Hindus.”
यह
उन्होंने
सारी बात कही
है। यह
आर्टिकल 25 का
मैंने आपको
पढ़कर के
माननीय उपाध्यक्षजी,
सुनाया है।
इसके बाद इसी
बात को कहकर
के इन्होंने
लास्ट में
जस्टिस रे
साहब ने कहा
है, कंक्लुजन
में, “We
have no doubt …” मैं पूरा
पढ़ूंगा तो
एक-डेढ घण्टा
लग जाएगा और
तीन बजे का
टाइम आपने
नियत किया हुआ
है।
We have no doubt that it is in this
sense that the word ‘propagate’ has been used in Article 25(1), for what the
Article grants is not the right to convert another person to one’s own
religion, but to transmit or spread one’s religion by an exposition of its
tenets. It has to be remembered that
Article 25(1) guarantees ‘freedom of conscience’ to every citizen, and not
merely to the followers of one particular religion, and that, in turn,
postulates that there is no fundamental right to convert another person to
one’s own religion because if a person purposely undertakes the conversion of
another person to his religion, as distinguished from his effort to transmit or
spread the tenets of his religion, that would impinge on the ‘freedom of
conscience’ guaranteed to all the citizens of the country alike.
और
लास्ट में माननीय
उपाध्यक्षजी,
जो ओपिनियन दी
है।वह बहुत ही
इम्पोर्टेण्ट
है, पैरा 24 में,
उसके लास्ट
का पैरा मैं
आपको पढ़कर
सुना रहा हूं
। “….. where it has been held that if a
thing disturbs the current of the life of the community ..” कि
यदि करण्ट आफ
लाइफ, कम्युनिटी
को डिसटर्ब
किया जाता है,
किसी प्रकार
का डिस्आर्डर
फैलने की
आशंका रहती है।“…. current of the life of the
community, and does not merely affect an individual, it would amount to
disturbance of the public order.”
इसलिये
उन्होंने
उड़ीसा में
जस्टिस मिश्रा
साहब ने जो
जजमेंट दिया
था उसको उलटकर
के यह कहा है।कि
पब्लिक आर्डर
में आयेगा,
कांस्टीट्यूशन
में आयेगा और
स्टेट को
पावर है।कि वह
इस प्रकार का
कानून ला सके।
आगे उन्होंने
लिखा है-
“ …… Thus, if an attempt is made to raise
communal passions, e.g., on the ground that someone has been forcible
‘converted’ to another religion, it would, in all probability, give rise to an
apprehension of a breach of the public order, affecting the community at
large. The impugned Acts therefore fall
within the purview of Entry 1 of List II of the Seventh Schedule as they are
meant to avoid disturbances to the public order by prohibiting conversion from
one religion to another in a manner reprehensible to the conscience of the
community. The two Acts do not provide for the regulation of religion and we do
not find any justification for the argument that they fall under Entry 97 of
List I of the Seventh Schedule.”आगे
कहा है-“In the result Civil Appeals nos. 1489 and 1511 of 1974
and Criminal Appeal No. 255 of 1974 fail and are dismissed while Civil Appeals
No. 344-346 of 1976 are allowed and the impugned judgment of the Orissa High
Court dated 24th October, 1972 is set aside. The parties shall pay
and bear their own costs in Madhya Pradesh appeals. The State shall pay the
respondents’ costs in the Orissa appeals according to previous direction.”
इसलिये
मेरा यह
निवेदन है।और
इसलिये मैंने
यह मूव किया है।कि
किसी प्रकार
का
एप्रिहेंशन
हो, डिस्आर्डर
होने की
स्थिति हो तो
सरकार उसके
लिये किसी न
किसी प्रकार
का कानून ला
सकती है।कि
धर्म
परिवर्तन
करना किसी
प्रकार से दाय
नहीं होगा,
किसी प्रकार
से स्वीकार
नहीं किया जा
सकता है।
इसलिये
सुप्रीम
कोर्ट ने भी
इसको माना है।
साथ ही,
गुजरात के हाई
कोर्ट ने गुजरात
के न्यायालय
ने और गुजरात
सरकार ने भी
इस प्रकार पास
किया है।और
उड़ीसा जो 1968 का
कानून है।वह
आज भी प्रिवेल
कर रहा है।
तमिलनाडु ने
यह जो कानून
बनाया था इसको
वापस 2004 में
रिपील कर दिया
है, इसको हटा
दिया है। उनके
अपने कोई कारण
रहे होंगे।
इसलिये जरुरत
बात अलग है।
वरना सभी स्टेट्स
ने अपने-अपने
हिसाब से
माननीय उपाध्यक्षजी,
इस प्रकार के
कानून बनायेहैं।
यह किसी
प्रकार से
जबरन, बाय
इंड्यूस, बाय
प्रापर्टी,
बाय लालच, किसी
प्रकार का
पैसा देकर के,
बाय थ्रेट
करके, किसी
प्रकार से
धर्म
परिवर्तन
नहीं कराया जा
सकता है।
इसलिये मेरा
यह निवेदन है।कि
यदि इस प्रकार
से किसी
प्रकार से
होता है।तो
उनकी
प्रापर्टी को
जब्त किया
जाना चाहिए।
सोसायटीज एक्ट
के तहत, यदि
उन्होंने
पैसा इक्ट्ठा
किया है।तो
सोसायटीज एक्ट
के तहत और
पब्लिक ट्रस्ट
के तहत यदि
उन्होंने
किसी प्रकार
की सम्पत्ति
अर्जित की है।तो
उस सम्पत्ति
को भी सरकार
फोरफिट कर
सकती है। इस
प्रकार करने
के लिये मैंने
इस प्रकार का
एक अमेंडमेंट
मूव किया है।
इसलिये मेरा
आपसे अनुरोध
है। मैं गृह
मंत्री से
पुरजोर शब्दों
में मांग
करुंगा कि
आपने इसमें यह
लेकुना रख
दिया है। मेरा
यह अनुरोध है।कि
आप मेरा यह
अमेंडमेंट
अलाऊ करें और
सरकार इस बात
के लिये
निश्चित करे
कि यह
अमेंडमेंट
अलाऊ करके
किसी प्रकार
का कन्वर्जन
या थ्रेट और
किसी प्रकार
से इंड्यूसमेंट
और बाय पैसे,
किसी प्रकार
का धर्म परिवर्तन
किया जा रहा है।तो
उस पैसे को,
चाहे वह फारेन
मनी है, चाहे
यहां से इक्ट्ठी
की गयी है,
सरकार को
फोरफिट करने
का, सोसायटी
रजिस्ट्रेशन
एक्ट के तहत
और पब्लिक
ट्रस्ट एक्ट
के तहत अधिकार
है। इसलिये
मेरा निवेदन है।कि
अमेंडमेंट को
माननीय उपाध्यक्षजी,
आपके जरिये,
गृह मंत्रीजी
से कहना चाहता
हूं, इसको
अलाऊ करें।
धन्यवाद।
श्री
उपाध्यक्ष:
श्री जुबेर
खान।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, आज गृह
मंत्रीजी ने
राजस्थान
धर्म स्वातंत्र्य
बिल, 2006 इस सदन में
प्रस्तुत
किया है। इसके
बारे में
मैंने प्रस्ताव
किया है।कि इस
बिल को जनमत
जानने हेतु
परिचारित
किया जाए।
मैंने यह
इसलिये किया
है, उपाध्यक्ष
महोदय, क्योंकि
मैं यह बात स्पष्ट
कर दूं, उपाध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से
सरकार को और
इस सदन को, मैं
धर्म परिवर्तन
के बिलकुल हक
में नहीं हूं।
मैं इस पक्ष
का आदमी हूं
कि कोई
प्रलोभन देकर
के, डरा-धमका
कर, जबरदस्ती,
किसी के सैक्ट
को या फैथ को
मानने वाले को
दूसरा फैथ
मानने को
मजबूर नहीं
किया जाए। मैं
इस मत का आदमी
हूं। लेकिन
मैं यहां यह
निवेदन करना
चाहूंगा कि आपने
बिल का नाम रख
दिया राजस्थान
धर्म स्वातंत्र्य
बिल। यह धर्म
की स्वतंत्रता
है। और आप
इसमें रोक रहे
हैं कन्वर्जन।
आपको नाम ही
रखना चाहिए था
कि एण्टी-कन्वर्जन
बिल या धर्म
परिवर्तन
निरोधक, रोक
का बिल।
बेसिकली बिल
तो, एक तरफ तो
आप हेडिंग में
कह रहे हैं कि
स्वतंत्रता,
धर्म की स्वतंत्रता
का बिल है।
यदि धर्म की
स्वतंत्रता
का बिल है।तो
फिर आप उस पर
रोक क्यों
लगा रहे हैं।
Vps/usc/7-4-2006/1220/1p/1
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं यहां
पर यह निवेदन
करना चाहूंगा
कि जिसका
रेफरेंस जो
कुछ-कुछ उनके
लिए सूट करते
थे मावली से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने दिये। भारत
के संविधान के
आर्टिकल 25 में
यह साफ है,
संवैधानिक
अधिकार है, हर
भारतीय
नागरिक को कि- freedom of conscience, and free
profession, practice and propagation of religion. यह
हमारे मूलभूत
संविधान में
आर्टिकल 25 में
एक भारतीय नागरिक
को यह स्वतंत्रता
है।कि वह कोई
भी प्रेक्टिस
करें, किसी भी
मंदिर में
जाए, मस्जिद
में जाए,
गिरजाघर में
जाए,
गुरूद्वारे
में जाए, उसके
ऊपर कोई स्टेट
की पाबंदी
नहीं होगी। यह
बिल की मूल
भावना, अगर यह
बिल सही मन से
लाया जाता कि जो
लोग जोर-जबरदस्ती
धन के प्रलोभन
से या अन्य
किसी बड़े
कारण से एक
नागरिक की
भावनाओं के विरुद्ध
में अगर धर्म
परिवर्तन कराते
हैं तो यह बिल
लाने में कोई
एतराज नहीं है।लेकिन
इस बिल को एक
राजनीतिक टूल
के रूप में इस्तेमाल
करने की कोशिश
की जा रही है।
आप यहां
पर देखिये कि
आपने कहा है।कि
धर्म से
अभिपार्य
होगा कि
पूर्व-वंशों
का धर्म, अब यह
कब होगा साहब? अगर
आप 200 कहिये, 1000
करोड़, यह
सृष्टि
हजारों-करोड़ों
साल पुरानी
है। इसकी सीमा
क्या रखेंगे
आप? 1947 रखते आप। 1950 रखते
आप। आप कोई
सीमा तो रखते।
आज यह है।कि इसमें
इस तरह का
प्रावधान रखा
गया है।कि अगर
कोई सिक्ख
वापस अपने
पूर्व धर्म,
हिन्दू धर्म
में या सनातन
धर्म में जाना
चाहे तो जा
सकते हैं। जैन
धर्म, अगर जैन
यह चाहता है।कि
मैं वापस अपने
पूर्वज धर्म
में चला जाऊं
तो जा सकता
है।
क्रिश्चियन
जा सकता है, बौद्ध
जा सकता है, यह
कुल मिलाकर
कहने का मतलब
यह है।कि यह
पूरी कोशिश की
गयी है।कि इस
बिल के माध्यम
से राजस्थान
में इसका
दुरुपयोग
करके जो अल्पसंख्यक
समुदाय के लोग
रहते हो, चाहे
वह सिक्ख
समुदाय से हो,
चाहे वह जैन
समुदाय से हो,
चाहे बौद्ध
समुदाय से हो,
चाहे मुसलमान
समुदाय से हो,
उनको यह
प्रताडि़त और
डराने का,
धमकाने का यह
काम करने के
लिए इस बिल को
लाया गया है।
मैं
यहां पर यह
निवेदन करना
चाहूंगा,
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, कि आप
कहना क्या
चाहते हैं? आपके
उड़ीसा में यह
कानून लागू
किया गया है।लेकिन
उड़ीसा में यह
कहा गया है।कि
अगर कोई व्यक्ति
स्वैच्छा
से अपना धर्म
परिवर्तन करना
चाहता हो तो
उसको जिलाधीश
के यहां पर
आवेदन करना
पड़ेगा। जैसे
अपने यहां पर
कोर्ट मेरिज या
लव मेरिज कहते
हैं, उसमें
प्रावधान है।नोटिस
जारी किये
जाएंगे कि यह
धर्म
परिवर्तन के
लिए हमारे पास
आये हैं। किसी
के परिवार को,
समाज के पड़ोसी
को, किसी संस्था
को कोई आपत्ति
तो नहीं है? तो
वह आपत्ति
वहां पर सामने
आये कि हमको
डराकर कराया
जा रहा है।
प्रलोभन से
करवाया जा रहा
है। कोई लालच
देकर करवाया
जा रहा है। आप
क्यों नहीं
देते इसमें यह
अधिकार? यह
बिलकुल आपने
एक तरह से इस
बिल को लाकर
यह बहुत गलत
काम किया जा
रहा है।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं एक
बात और कहना
चाहूंगा कि
यहां कि इस
बिल का
दुरुपयोग भी
होगा, खूब
होगा और यह
माननीय गृह
मंत्रीजी अच्छी
तरह से जानते
हैं कि इसका
दुरुपयोग
होगा। जब
कानून बनाया
था बलात्कार
के खिलाफ में
तो किसी ने
कल्पना की थी
क्या कि इसका
दुरुपयोग
होगा? जब
एट्रोसिटीज
एक्ट के
खिलाफ धारा-3
लगायी गयी थी
कि यह दलित और
पिछड़े लोग
एस.सी., एस.टी. के
लोगों के ऊपर
कोई अत्याचार
करेगा, कोई
अपशब्द कहेगा
तो उनके लिए
कठोर कानून
बनाया तो किसी
ने यह कल्पना
की थी क्या
कि इसका
दुरुपयोग
होगा? आज दहेज
के मामले में
आप नहीं मानते
क्या, गृह
मंत्रीजी
बहुत सी जगह
इसका
दुरुपयोग भी
होता है। ... (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): बीच
में बोलते
हैं, यह कोई बात
नहीं हुई। ... (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): गृह
मंत्रीजी,
आपसे ज्यादा
कोई नहीं जान
सकता। आज की
तारीख में
राजस्थान
में बहुत से
कानूनों को
जिनका
निर्माण किया
है, एक पिछड़े
लोगों को,
गरीब लोगों को,
पिछड़े वर्ग
के लोगों को
संरक्षण देने
के लिए यहां
लेकिन हम जैसे
अगड़े लोग
कहीं-कहीं
अपने
राजनीतिक
द्वेष के कारण
उनका दुरुपयोग
भी करते हैं।
आप अच्छी तरह
से जानते हैं।
यही काम इसमें
होगा। आज इसी
में भी यही
होगा। कोई भी
आदमी किसी के
खिलाफ कह देगा
कि मुझे इसने
प्रलोभन दिया
है। कि मुझे
इसने प्रलोभव दिया
है।कि आप धर्म
परिवर्तन कर
लो। उसके
खिलाफ मुकदमा दर्ज
हो जाएगा।
डीवाई.एस.पी.
के ऊपर जांच
चली जाएगी।
इससे
राजनीतिक जो
लोग हैं अपना स्कोर
भी सैटल करने
की कोशिश
करेंगे और
आपकी तो जमात
चली हुई है। कहीं
विश्व हिन्दू
परिषद के नाम
से, कहीं
आर.एस.एस. के
नाम से, कहीं
अजरंग दल से,
कहीं बजरंग दल
से, कहीं शिव
सेना से, यह जी
चाहेंगे,
जिसको परेशान
करेंगे, मिशनरीज
में जाएंगे,
गिराघरों के
लोगों को
परेशान करेंगे।
मदरसों वालों
को करेंगे।
गिरजाघर वाले लोगों
को करेंगे और
यह बौद्ध धर्म
के जो सेंटर्स
हैं उनको
करेंगे। आज
इसका क्या
मापदण्ड है?
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, आज कोई भी
आदमी एक दरख्वास्त
दे दें कि
मुझे इन लोगों
प्रलोभन
दिया। क्या
सफाई देगा
आदमी कि मैंने
नहीं दिया। इस
कानून के माध्यम
से अल्पसंख्यक
समुदाय के
लोगों को
भयभीत करने का
और डराने के
अलावा इसका
कोई उद्देश्य
मुझे नहीं
लगता है। मैं
यहां पर यह भी
कहूंगा गृह
मंत्रीजी, आप
तो स्वयं
मौजूद हैं, आज चार,
सवा चार महीने
पहले एक
इंसीडेंट हुआ,
मुसाखेड़ा
में आप अच्छी
तरह से जानते
हैं। मुझे कुछ
बताने की कोई
जरूरत नहीं
है। आज इसको
आप वाजिब
मानते हैं क्या
कि कुछ
परिवारों की
महिलाएं और
छोटे-छोटे बच्चे
आज चार महीनों
से रिश्तेदारों
के यहां पर रह
रहे हैं और
आपकी पुलिस-प्रशासन
उनको उनके
घरों में बसा
नहीं पा रही है।और
आपकी पुलिस के
15 जवान उनके घर
पर तालें लगाकर
बाहर बैठे हैं
इसको आप उचित
मानते हैं क्या?
यह ऐसी चीजें
हैं जिनका
आपकी आंखों के
सामने दुरुपयोग
कर रहा है।और
आपकी भावना है।कि
इनका
दुरुपयोग
रोका जाए। आप
नहीं रोक पा
रहे हैं क्योंकि
व्यवस्था
ऐसी हो गयी है।तो
आपको यह भी
देखना पड़ेगा
और इसी तरह से
आपको कोई, आप
इस अल्पसंख्यक
समुदायों को
जो अब यह सक्सैना
कमीशन बैठा
था, 1998 में जो
गोली काण्ड
हुआ था, शास्त्री
नगर, जयपुर के
कब्रिस्तान
पर, उसने
रिपोर्ट दे
दी। क्या
कार्यवाही इस
सरकार ने की,
आप बताइये।
आपने आज उसको
रखा भी है।उसकी
रिपोर्ट यहां
सदन में लेकिन
आपने जो करना
चाहिए था,
जिसकी वजह से
वहां छह लोगों
की मौत हुई और
काफी लोग घायल
हुए कि उस पर अतिक्रमण
हटे और उसकी
चारदीवारी
बने, उसका दुरुपयोग
रुके। ... (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य।
माननीय सदस्य,
आप इस विषय पर
आइये।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): वह तो
आपने किया
नहीं है।तो आप
इनका ... (व्यवधान)
आप प्लीज
मुझे सुन
लीजिए। मैं
कोई गलत इर्रेलेवेंट
बात नहीं कह
रहा हूं।
श्री
उपाध्यक्ष:
वह दूसरा विषय
है।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मेरा
आपसे निवेदन है।कि
आप पार्टी मत
बनिये। मैं
बड़े नियम
कानून से ... (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
हां, वह ठीक है।लेकिन
आप जनरल बोल
रहे हैं1
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
मावली से आने
वाले माननीय सदस्य
कहां-कहां के
उदाहरण दे रहे
थे अमेंडमैंट
पर बोल रहे थे,
तब आपने कुछ
बोला ? बिलकुल
गलत बात है।...
(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
नहीं-नहीं, वह
इसके बारे में
ही बोल रहे थे।
एक्ट के बारे
में ही बोल
रहे हैं और आप
दूसरे विषय
में बोल रहे
हैं। ... (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): मैं
एक निवेदन और
करूंगा कि आपको
बड़ी चिन्ता है।भारतीय
संस्कृति की
। हमको भी
चिन्ता है।कि
भारत जैसी
संस्कृति
दुनिया में
कोई हो नहीं
सकती लेकिन इस
संस्कृति का
क्या हो रहा
है? आज हम बच्चे-बच्चियों
की शादी करते
हैं। लड़का
लड़की को
देखेंगे।
कुण्डली
मिलाएंगे, लगन
लाएंगे। सगाई
करेंगे। पंडितजी
बुलाएंगे।
फेरे करेंगे।
विदाई करेंगे
और कुछ दिनों
बाद औरत 164 के
बयान में यह
कह दें कि
मुझे तो फलां
राम के साथ
नहीं फलां
सिंह के साथ
रहना है। आपकी
पुलिस उसको
उसके पास
छोड़कर आएगी।
कहां गयी
भारतीय संस्कृति?
उनके ऊपर क्यों
नहीं कानून
बनाते आप? क्यों
नियम नहीं
बदलते? आज
कितनी हमारी
सामाजिक
दृष्टि से ब्याह
शादियां होती
हैं और कोई भी
आज 60 साल की औरत
यह कह दें कि
मुझे तो दहेज
मांग रहा है।इसलिए
मैं तो इसके
साथ नहीं फलां
के साथ रहूंगी
और अदालत आदेश
देती है।कि
पुलिस
संरक्षण में
इसको फलां के
घर पहुंचाया
जाए। न तो कोई
तलाक हुई और न
उसमें कोई
डाइवोर्श हुआ
तो रह लो, कहीं
रह लो और
देखिये आज अखबारों
में पढ़ रहे
हैं एक नयी
संस्कृति आ
रही है।कि बिना
शादी के ही
बच्चे हो जा
रहे हैं।
लिविंग
टुगेटर। कल ही
अखबारों में
आया था कि
लिएण्डर पेस
और रिया पिल्लै का, उसके
पहले नीना
गुप्ता फिल्म
अभिनैत्री का,
आज यह क्या
भारतीय
संस्कृति का
हिस्सा नहीं
है, जो आज हो
रहा है? आज जिस
तरह के टी.वी.
सीरियल
दिखाये जा रहे
हैं, कोई भी
टी.वी. सीरियल
ऐसा नहीं है।जिसमें
किसी की पत्नी
किसी के साथ,
किसी की बेटी
किसी के साथ
नहीं दिखायी
जाती हो और
पूरे परिवार
बैठकर देखते हैं।
आज फैशन टी.वी.
की क्या
स्थिति है।और
आज संस्कृति
की दुहाई देते
हैं। यह फैशन
टी.वी. अलाऊ किसने
किया था? जब
आदरणीय सुषमा
स्वराजजी
सूचना-प्रसारण
मंत्री थीं जब
फैशन टी.वी. हिन्दुस्तान
में अलाऊ किया
गया तो मेरा
कहने का मतलब
यह है।कि आपकी
कहनी और करनी
में फर्क क्यों
समझते हैं? क्या
यह भारतीय
संस्कृति को
नहीं बिगाड़
रहे टी.वी.? यह
संस्कार
नहीं बिगाड़
रहे जो आज हो
रहे है? क्या
हमारे यह
वेद-पुराणों
में यह लिखा
हुआ है? इसलिए
मेरा आपसे
निवेदन है। कि
आप इस बिल को
जनमत जानने
हेतु भोजिये।
हम भी चाहते
हैं कि
प्रलोभन से,
ज्यादती से,
डराने से,
धमकाने से
किसी भी तरह
से किसी भी व्यक्ति
का धर्म
परिवर्तन कराना
ठीक बात नहीं है।लेकिन
इसके लिए आप
इतना आनन-फानन
में इसको पास
मत करिये कि
मान लीजिए कि
यह
पार्लियामैंट्री
मिनिस्टर ने
तो वह मोन्यूमेंट
का और
आर्कियोलॉजिकल
का पास करवा
दिया आपकी
मर्जी के
खिलाफ, आप
इसको जन
भावनाओं की
मर्जी के
खिलाफ जबरदस्ती
पास कराकर
इकुअल, बराबर
करना चाहते हैं।
आप इसको जनमत
जानने के लिए
भेजिये। इस पर
अच्छी तरह से
चर्चा
करवाइये।
आपने स्वयं
ने और ऐसी जल्दी
क्या है।आपको?
आपने स्वयं
ने गत सत्र
में जवाब दिया
है। माननीय
भरत सिंहजी के
सवाल के जवाब
में। क्या यह
सही है।कि
प्रदेश में
धर्मान्तरण
हो रहे हैं? धर्मान्तरण
हुए हैं? हुए
हैं तो इनकी
जानकारी सदन को
दें और आपने
कहा कि कोई
धमर्नान्तरण
नहीं हुआ। जब
धर्मान्तरण
नहीं हो रहा है।तो
आपको इतनी जल्दी
क्या है।कि
सीमा बाँध दी
कि तीन बजे तक
तीन बिल पास
करने हैं तो
इसको तुरन्त
पास करना
चाहते हैं। आप
इसको जनमत
जानने के लिए
भेजिये।
Spp/usc/7.4.2006/1230/1q (1)
लोगों
का इसमें
सलाह-मशविरा
लीजिये, लोगों
से पता करिये
कि वाकई में
हम लाना चाहते
हैं। कैसे एक ऐसा
बिल आये जिससे
किसी को
नुकसान नहीं
हो। समाज के
हित में हो,
प्रान्त के
हित में हो यह
हम आपसे निवेदन
करना चाहते
हैं। एक बात
और कहना चाहता
हूं (व्यवधान)..
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
समाप्त
कीजिये। आपकी
सब बात आ गयी।
आप रिपीट मत
कीजिये बात
को। (व्यवधान)..
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): नहीं
करूंगा चाहे
तीन बज जायें।
मैं अपनी
मर्जी से
बैठूंगा। (व्यवधान)..
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): क्योंकि
सदन का यह काम है।कि
कानून बने,
उनके ऊपर
माननीय सदस्य
अपनी ऐसी बात
कहें । कल को
आने वाली पीढी
यह नहीं कहे
कि बिल आ रहा
था तो अपनी
बात नहीं कही
गयी।(व्यवधान)..
श्री
उपाध्यक्ष: आप
उस बात को बार
बार रिपीट मत
कीजिये । (व्यवधान).. नहीं आप
रिपीट क्यों
करते हो बार
बार उस बात
को। (व्यवधान).. कोई
लिमिट तो होगी
न। (व्यवधान)..
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): मैं
नहीं बैठूंगा,
उपाध्यक्ष
महोदय, या तो
मुझे दो मिनट
में अपनी बात
कह लेने
दीजिये, मैं
कोई गलत बात
कह रहा हूं क्या?
मैंने कोई गलत
बात कही है।क्या?
श्री
उपाध्यक्ष: कोई
समय की पाबन्दी
तो होगी ना? आपने
कह दी अपनी
सारी बात।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): मैं
बोल रहा हूं,
मेरा अमेंडमेंट
है।और इसमें
कोई पाबन्दी
नहीं है। (व्यवधान)..
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): उपाध्यक्ष
महोदय, इतना
इम्पोर्टेन्ट
बिल है, पाबन्दी
किस बात की? (व्यवधान)..
श्री
उपाध्यक्ष:
पाबन्दी
नहीं कर रहा
हूं। मैंने
कहां कही ... (व्यवधान)..
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप ज्यादा से
ज्यादा कोई
रिपीट करें,
उसको रेगुलेट
कर सकते हैं।
(व्यवधान)..
श्री
उपाध्यक्ष:
हां, इसी बात
की पाबन्दी
कह रहा हूं।
(व्यवधान)..
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
समय सीमा नहीं
होगी तो तीन
बजे तक पारित
भी तो करना
है। उपाध्यक्ष
महोदय, तीन
बजे तक पारित
करना है। यह
लम्बा
खींचकर इसको
पारित नहीं
होने देना
चाहते । (व्यवधान)..
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): यह
रिपीटेशन
करते जाते
हैं। (व्यवधान).. बार बार
रिपीट करते जा
रहे हैं। आप
रिपीट क्यों
कर रहे हैं? आपने
एक बात कह
दी(व्यवधान)..
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): उपाध्यक्ष
महोदय, और लोग
भी बोलने वाले
हैं।(व्यवधान)..
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
नहीं, मेरा तो
यह कहना है।कि
रिपीट करते जा
रहे हैं। (व्यवधान)..
अपनी बात को
दोहराते जा
रहे हैं। जो
एक बार बात
कही दी उसको
दुबारा कहने
की क्या आवश्यकता
है? (व्यवधान)..
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): उपाध्यक्ष
महोदय, नहीं
तीन बजे की
कोई पाबन्दी
नहीं है। (व्यवधान)..
डा.
जालम सिंह
रावलोत (शिव): हिन्दुस्तान
में रहते हैं
और (व्यवधान)..
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
आज तीन बजे तक
का सदन है।
इसको आज पारित
करवाना है। यह
आप इसको लम्बा
खींचकर पारित
नहीं कराने की
योजना बना रहे
हैं। यह हम
सफल नहीं होने
देंगे। (व्यवधान)..
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): अपनी बात
पूरी कहेंगे
हम। ऐसा थोड़ा
गला घोटोगे आप
हमारा।
(व्यवधान)..
श्री
उपाध्यक्ष:
कोई पाबन्दी
थोपी थोड़ी जा
रही है, सहमति
से (व्यवधान)..
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): उपाध्यक्ष
महोदय, धारा 4
में एक बात
कही गयी है।
वह बात यह कही
गयी है।कि
इसमें दो वर्ष
से पाँच वर्ष
तक की सज़ा का
प्रावधान
होगा। उसके
आगे कहा गया है।दो
वर्ष से कम
नहीं होगी,
किन्तु पाँच
वर्ष से अधिक
की हो सकेगी
और ऐसे जुर्माने
को भी दायी
होगा जो पचास
हजार रुपये तक
का हो सकेगा। आज पचास
हजार को आप न्यायोचित
मानते हैं कि
किसी आदमी ने
दरख्वास्त
दे दी कोई
रजिंश में आकर
कि मेरा धर्म
परिवर्तन
करने के लिये
मुझे लालच
दिया और उस
आदमी पर पचास
हजार रुपये का
जुर्माना रखा
जाये। जो आदमी
गौ-हत्या कर
रहे हैं, उनके
ऊपर तो आप रखो
पाँच हजार और
जो आदमी झूठी
दरख्वास्त
कर दे, आज कोई
धर्म
परिवर्तन
करता है,
आसानी से,
उपाध्यक्ष
महोदय, आज आप
कह दें तो हम
धर्म
परिवर्तन कर
लेंगे, अगर
बाहुबल से और
धन से धर्म
परिवर्तन
होता ना तो
हिन्दू धर्म
इतना कमजोर
नहीं है, सनातन
धर्म में
कितने ही मुगल
आकर चले गये,
कितने ही
अंग्रेज आकर
चले गये और
बाहर की
विदेशी शक्तियां
आकर चली गयीं,
लेकिन यहां के
सनातन धर्मियों
को, हिन्दू
धर्म को हम
हिला नहीं सके
हैं। आज इसके
लिये इसकी जरूरत
पड़ गयी कि हम
हमारे धर्म के
लिये, जिसका
लोहा मानते हैं
पूरे विश्व
में, जो एक राह
दिखाता है।दुनिया
को, सदा
भाईचारे का,
सहिष्णुता
का, सर्व धर्म
सवभाव का,
पूरा विश्व
एक परिवार है।
आज उसके लिये
हम ऐसा प्रतिबन्ध
करें। माननीय
गृह मंत्री
महोदय, आप यह
जरूर अपने
जवाब में
बताइये कि
आपने सत्ता
संभाली है।8
दिसम्बर, 2003 से
आज तक क्या
कोई राजस्थान
प्रान्त में
धर्म
परिवर्तन हुआ है।?
आज इतना कमजोर
हमारे धर्म को
समझने की
कोशिश कर रहे
हैं कि आप
उसके लिये ऐसा
कानून ला रहे
हैं कि पचास
हजार का दण्ड
होगा, उसको
पाँच साल की
सज़ा होगी। क्या
इतने कमजोर
हैं हम लोग, जब
हमको इतनी
बड़ी
शक्तियां
नहीं झुका
सकीं, आज हमको कोई
प्रलोभन झुका
देगा? आज हम इस
स्थिति में
हैं कि हमको
धमका कर धर्म
परिवर्तन करा
देगा या लालच
देकर करा
देगा। यह हमारा
अपमान है।हिन्दू
धर्म के लोगों
का, जो मानते
हैं कि उनको
इतना कमजोर
समझ लिया कि
उनके लिये वह
कहीं धर्म
परिवर्तन
नहीं कर ले।
पचास हजार
रुपये का
जुर्माना,
पाँच साल की
सज़ा इतना
कमजोर मत
समझिये। जो
धर्म तलवारों
से नहीं टूटा,
तोपों से नहीं
झुका (व्यवधान)..
श्री
ओम बिरला
(संसदीय सचिव):
माननीय सदस्य,
आप इतने
चिन्तित क्यों
हो रहे हैं कि
परिवर्तन ही
नहीं होगा तो
पैसा भी नहीं
लगेगा। (व्यवधान)..
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): यह
धर्म पैसे से
कभी नहीं झुकेगा।
(व्यवधान)..
श्री
ओम बिरला
(संसदीय सचिव):
परिवर्तन ही
नहीं होगा तो
जुर्माना
नहीं लगेगा।
आप इतने क्यों
चिन्तित हो
रहे हो? हम सब
चाहते हैं कि
अपने अपने धर्म
में रहें, आप
इतने चिन्तित
क्यों हो रहे
हैं? जब
परिवर्तन ही
नहीं हो रहा है।(व्यवधान)..
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): जब
कोई धर्म
परिवर्तन ही नहीं
हो रहा तो आप
यह कानून क्यों
ला रहे हैं? (व्यवधान)..
श्री
ओम बिरला
(संसदीय सचिव): कानून
इसलिए ला रहे
हैं कि वह
अपने धर्म में
रहे। वह
परिवर्तन
नहीं करे।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): अभी
भी रह रहे हैं,
कौन परिवर्तन
कर रहा है? पिछले
पचास साल में
कोई बदला है।क्या?
(व्यवधान)..
श्री
कनकमल कटारा
(महिला एवं
बाल विकास
मंत्री): उपाध्यक्ष
महोदय, यह
इसलिए हो रहा है।(व्यवधान)..
मैं इसलिए
निवेदन कर रहा
हूं कि
बांसवाड़ा के
अंदर यह
स्थिति है।कि
जो कन्वर्ट
हो गये वह
ईसाई आदिवासी
अलग, एक
आदिवासी है।वह
अलग तो दोनों
झगड़ा-फसाद और
अलगाववाद
पैदा होता है।और
बड़ी तकलीफें
हैं, यह
स्थिति है।
मूल बात तो यह
है। इस बात को
समझो आप। यह
बात देखिये,
आप क्या बात
कर रह हैं? क्या
नहीं हो रहा
है, जो होने
वाला है।तो हो
रहा है। इसलिए
कह रहा हूं कल
पता नहीं क्या
स्थिति हो
जाये, कहीं
मांग करें अलग
से।(व्यवधान)..
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): आप
इसमें डाल
देते,
आदिवासियों
का आप हवाला
डाल देते। आप
हवाला डाल
देते और यह
किसी की
कमजोरी नहीं
है। (व्यवधान)..
श्री
कनकमल कटारा
(महिला एवं
बाल विकास
मंत्री): इसके
लिये सोचने का
विषय है। यह
बात कहकर
प्रभावी बात
कहते हो, इसके
पीछे बड़ा राज
है। (व्यवधान)..
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): एक
कैबिनेट
मंत्री होकर
और आदिवासी
क्षेत्र
उदयपुर के गृह
मंत्री होकर
भी धर्म
परिवर्तन हो
रहा है।तो
आपको चुल्लू
भर पानी में
डूब मरना
चाहिये। आपके
वहां होते हुए
कैसे हो जाएगा
धर्म
परिवर्तन?
श्री
कनकमल कटारा
(महिला एवं
बाल विकास
मंत्री): यह बात
कर रहे हैं, क्या
बात कर रहे हो? इसलिए
तो हम यह कर
रहे हैं। (व्यवधान)..
क्या बात कर
रहे हो यह ? (व्यवधान)..
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
यह सबसे बड़ा
अपराध है।उपाध्यक्ष
महोदय, कि
कैबिनेट
मंत्री की
जानकारी में
हो कि धर्म
परिवर्तन हो
रहा है।और फिर
भी एफ.आई.आर.
दर्ज नहीं
करें और पुलिस
में रिपोर्ट
दर्ज न करे।
(व्यवधान)..
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): यह इसलिए
हो रहा है।कि
आपने दलितों
और
आदिवासियों
को मैन हिन्दू
के बराबर का
दर्जा दिया ही
नहीं । उनकी
उपेक्षा की
है। इसलिए यह
हो रहा है। (व्यवधान)..
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आपको एफ.आई.आर.
दर्ज करानी
चाहिये थी
आपकी जानकारी
में है।तो । आपकी
जानकारी में है।तो
एफ.आइ.आर.दर्ज
क्यों नहीं
कराई धर्म
परिवर्तन की?
आपको जानकारी
है। आपकी
जानकारी में है।तो
रिपोर्ट दर्ज
करवाते।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
जुबेर खान जी
(व्यवधान)..
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): मंत्री
महोदय, आपकी
जिम्मेदारी
नहीं है।कि जन
प्रतिनिधि
होने के नाते
आपके क्षेत्र
में तो ऐसा
काम नहीं हो।
(व्यवधान)..
श्री
कन्हैया लाल
मीणा (बस्सी): इनको
पता है।यह
मीणा जाति से
थे । क्या
इनके पूर्वज
हिन्दू नहीं
थे, क्या
इनके सारे
पूर्वज मीणा
नहीं थे? आप
मीणाओं से कन्वर्ट
होकर यह सारे
जितने भी अलवर
में मेव हैं, यह
सब मीणा जाति
के थे। यह कन्वर्ट
हुए हैं सारे
। आपको तो
वापस मीणा बन
जाना चाहिये।
(व्यवधान)..
श्री
अमराराम (धोद): कन्हैया
लाल जी, आप
बताओ, आपके
पूर्वजों का
पता है।क्या,
क्या थे? (व्यवधान)..
श्री
कन्हैया लाल
मीणा (बस्सी): सारा
पता है।मुझे।
यह मेरे साथी
हैं। बिना
मतलब मोम्मडन
बना दिया । यह
मीणा जाति से
हैं। (व्यवधान)..
डा.
जालम सिंह
रावलोत (शिव): इसलिए
यह जो कानून
लाया जा रहा
है, सदन उसकी
सहमति व्यक्त
करता है। (व्यवधान)..
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): बस्सी
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने कहा मुझे
कोई आपत्ति
नहीं कि हमारे
पिताजी
राजपूतों से
कन्वर्ट हुए
थे और हमारी
माताजी मीणों
से हुई थी।
मुझे कहां
आपत्ति है।इस
बात को कहने
में, लेकिन
आपको आपत्ति
होगी जब हम
कहेंगे हमको
एस.टी. में
डलवा लीजिये
तो आपके
साथियों के
पंतगें लगेंगे।(व्यवधान)..
श्री
कन्हैया लाल
मीणा (बस्सी):
मीणा जाति में
वापस ले
लेंगे। (व्यवधान)..
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):
एस.टी. में ले
लेंगे। मीणा
बन जाओगे तो
एस.टी. में ले
लेंगे वापस।
(व्यवधान)..
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): (व्यवधान)..
आपको ही नहीं
लिया, क्या
ले लोगे आप ? (व्यवधान)..
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
उपाध्यक्ष
महोदय, आज मैं
मंदिर में
जाऊं, मस्जिद
में जाऊं,
गुरूद्वारा
में जाऊं,
गिरजाघर में
जाऊं, मेरी
वंशावली उससे
नहीं बदली जा
सकती। मेरा
सिजरा इससे नहीं
बदला जा सकता।
अगर मैं
सूर्यवंशी
हूं तो सूर्यवंशी
ही रहूंगा जब
तक मैं
मरूंगा। यह
कोई महत्वपूर्ण
बात नहीं है।
मेरी अलग बात है।कि
मैं मंदिर में
जाऊं, मस्जिद
में जाऊं, मैं
तो पाँच बार
शेरावाली मां
के यहां हो
आया वैष्णो
देवी, मैं तो
तीन बार
तिरूपति
बालाजी जा
आया, इससे क्या
है। यह हमारी
संस्कृति
है। यह भारत
की संस्कृति
है। मैं
मस्जिद में
जाता हूं
मुसलमान होने
के नाते,
लेकिन मैं सब
मंदिरों में,
सब तीर्थस्थलों
में जाता हूं
एक भारतीय और
भारतीय संस्कृति
को मानने के
नाते। आज मुझे
पीड़ा इसलिए है।कि
मेरे ख्याल
में आप भी
जानते हैं कि
सदन में मैंने
कभी ऐसी बात
नहीं की जिससे
यह लगे कि
साम्प्रदायिकता
की बात करते
हो, कभी
जातिवाद की बात
करते हो,
लेकिन आज मुझे
पीड़ा है।कि
आज हमारे हिन्दू
धर्म को,
सनातन धर्म को
इन लोगों ने
अपने राजनैतिक
स्वार्थ में
इतना कमजोर
बनाकर इस
परिप्रेक्ष्य
में पेश करने
की कोशिश की
जा रही है।कि
हमारे हिन्दू
धर्म के ऊपर
संकट आ रहा
है। आज क्या
हो सकता है।आज
इतने इतने जन
प्रतिनिधि
यहां बैठे हैं
आज इस सदन में,
क्या कोई
ईसाई समुदाय
का प्रतिनिधि है।क्या
? सिख समुदाय
के दो हैं, जैन
समुदाय के भी
चार-पाँच
होंगे, इस्लाम
समुदाय के भी
चार हैं। आज
क्या इतने 190
जन प्रतिनिधि
यहां बैठे
हैं....
msr/usc/07042006/1240/2a/[1]
25
जन प्रतिनिधि
देश की सबसे
बड़ी पंचायत
पार्लियामेंट
में बैठे हैं,
कितने ही
प्रधान बैठे
हैं, जिला
प्रमुख बैठे
हैं, सरपंच
बैठे हैं क्या
हमारी नैतिक
जिम्मेदारी
नहीं है।कि
कोई ऐसा काम
नहीं हो कि
किसी गलत
तरीके से धर्म
परिवर्तन हो
फिर हम इसमें
कानून बनाने
की और यह जो
प्रशासन के
हाथ में और
पुलिस के हाथ
में हथियार
देने की क्या
जरूरत पड़ गयी
कि जो इसका
दुरुपयोग
करे। ...(व्यवधान)...
श्री
ओम बिरला
(संसदीय सचिव):
ऐसा कोई कानून
नहीं है।जिसके
आधार पर
शिकायत करे
इसलिए
प्रमाणित चीजें
नहीं आयी हैं।
आप भी जानते
हैं हम भी
जानते हैं कि
कितने लोगों
ने धर्म
परिवर्तन
किया लेकिन
संवैधानिक
कानून अब तक
थे ही नहीं
इसलिए केस यह
दर्ज नहीं
हुए।
श्री
उपाध्यक्ष:
कन्क्लूड
कीजिए, माननीय
सदस्य।
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): अच्छी
बात कहने के
पीछे भी मन
में पाप छिपा
हुआ है। ...(व्यवधान)...
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): और
इससे बड़ा
दुर्भाग्य
क्या होगा
अगर राजस्थान
में कहीं सबसे
ज्यादा
मजबूत आर.एस.एस.
है।तो कोटा
में है।और
वहां भी धर्म
परिवर्तन
नहीं रोक रहे
हैं। ...(व्यवधान)...
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री):
सोनिया
गांधीजी के
इशारे पर आप बोल
रहे हैं। ...(व्यवधान)...
मजबूरी है।आपकी,
यह सोनिया
गांधीजी के
इशारे पर आपसब
को यह करना है।
मजबूरी है।अदरवाइज
नम्बर कम हो
जायेंगे, अगला
टिकट नहीं
मिलेगा। ...(व्यवधान)...
श्री
ओम बिरला
(संसदीय सचिव):
आप सब का कोटा
फिक्स है।दिल्ली
से ...(व्यवधान)...
दिल्ली
वालों ने कहा है।कि
इतना-इतना
धर्म
परिवर्तन
करने हैं। यह
दिल्ली
वालों ने कोटा
फिक्स किया है।...(व्यवधान)...
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, इससे
बड़ा
दुर्भाग्य
क्या होगा कि
जहां सबसे ज्यादा
बजरंग दल और
आर.एस.एस.
मजबूत कोटा
में है।वहां
धर्म
परिवर्तन हो,
इससे बड़ा डूब
कर करने की इन
संगठनों के
लिए क्या बात
हो सकती है।
श्री
ओम बिरला
(संसदीय सचिव):
आपके राज में।
...(व्यवधान)...
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
बजरंग दल के
कारण बचा है।...(व्यवधान)...
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
इसलिए इनकी
भावना धर्म परिवर्तन
को रोकने की
नहीं है, इनकी
भावना चाहे गऊ
माता हो, चाहे
मन्दिर हो,
चाहे धर्म हो
हर के पीछे
राजनीति और वोट
लेने की धारणा
है।इनकी। वो
बात है।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, आज इनकी
यात्रा आ रही है।और
वो कौनसी यात्रा
गयी थी कि
आतंकवादियों
को कश्मीर
जेल से छुड़ा
कर मेहमान बना
कर हवाई जहाज से
कंधार कौन
छोड़ कर आये
थे? वह कौनसी
सरकार थी, कौन
गृह मंत्री
था, कौन प्रधानमंत्री
था, कौन विदेश
मंत्री था, यह
मैं गृह मंत्रीजी
से पूछना
चाहता हूं वे
अपने जवाब में
दें।
आज
अगर सबसे ज्यादा
कहीं किसी भी
तरह से क्योंकि
इनके लिए
प्राथमिकता है।वोट,
इनके लिए
प्राथमिकता न
धर्म है।न
मन्दिर है।न
शिक्षण संस्थान
हैं इनको तो
ना देश है, ना
आतंकवाद है,
जो लोग
आतंकवादियों
के सामने
घुटने टेक दें
और आज वो इतने
बड़े, दुनिया
के सबसे
पुराने धर्म,
सनातन धर्म और
हिन्दू धर्म
की रक्षा की
बात करें,
इससे बड़ी
शर्म की बात
कोई हो नहीं
सकती।
श्री
उपाध्यक्ष: अब
कुछ लोढ़ाजी
के लिए छोड़
दीजिए आप।
श्री संयम
लोढ़ा।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): अंत
में, माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं इतना
ही निवेदन
करना चाहूंगा
कि, गृह मंत्रीजी,
आप देखिये
इसको जनमत
जानने के लिए
भेजें, कोई
नहीं यह अगले
सत्र में आ
जायेगा, इतना
कोई तूफान नहीं
हो रहा है।कि
गुलाबचंदजी
कटारिया के
गृह मंत्री
होते हुए
राजस्थान
सरकार में और
मदन दिलावरजी
के समाज कल्याण
मंत्री होते
हुए राजस्थान
में मैं विश्वास
कर सकता हूं
कोई धर्म
परिवर्तन
नहीं होगा इसलिए
आप अपनी काबिलीयत
को मत छिपाइये
इस बिल की आड़
में, आप इसको
जनमत जानने के
लिए भेजिये,
काफी
विद्वानों से
बात कराइये,
जन प्रतिनिधियों
से बात
कराइये, संस्थाओं
से बात कराइये
और उसके बाद
में नये ढंग से
एक अच्छा
मसौदा लेकर
आइये। हम भी
चाहते हैं कि
बिल बने लेकिन
वह पक्का बिल
होना चाहिए और
उसमें यह नहीं
होना चाहिए कि
हजारों साल
पहले अगर कोई
धर्म
परिवर्तन कर
ले तो इसको तो
आप धर्म
परिवर्तन
नहीं मानेंगे
और आज क्या
आप यह
छोटे-छोटे
धर्म हो हैं,
यह एक बड़ी
छतरी है।भारतीय
संस्कृति, यह
इसके साये में
पल रहे हैं,
इनको आप दबाने
की कोशिश मत
करिये, इनको
अपने साये में
पलने-फूलने दीजिए,
संस्कार आने
दीजिए। यही
मैं आपसे
निवेदन करना
चाहता हूं कि
इसको जनमत
जानने हेतु
भेजा जाए। माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, आपने
बोलने का मौका
दिया इसके लिए
धन्यवाद।
श्री
उपाध्यक्ष :
श्री संयम
लोढ़ा।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, राज्य
की विधान सभा
में सत्र चल
रहा है।और
कानून व्यवस्था
को लेकर
अनेकानेक
मामले सदन में
आते रहते हैं
और माननीय गृह
मंत्रीजी की
बहुत व्यस्तता
रहती है।उनकी
तैयारी की और
मुझे यह कहने
में कोई संकोच
नहीं है।कि हर
वक्त पूरी
तैयारी के साथ
वो समुचित
जवाब देते हैं
और उनकी इसी
व्यस्तता
के चलते मुझे
ऐसा लगता है।कि
यह जो विधेयक
इन्होंने
सदन में प्रस्तुत
किया इसको
पढ़ने का समय
नहीं मिला
वरना यह जो
विधेयक राजस्थान
धर्म स्वातंत्र्य
विधेयक, 2006 इसका
नाम नहीं रखते
इसका नाम रखते
अगर विधेयक
पढ़ लेते तो
राजस्थान
धर्म स्वातंत्र्य
हनन विधेयक, 2006 .
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, यह जो
विधेयक प्रस्तुत
किया है।गृह
मंत्रीजी ने,
मैं निवेदन
करना चाहता
हूं कि स्वाधीन
भारत में कन्वर्जन
को लेकर के
लेजिस्लेशन
के काम को अगर
हम समझने की
कोशिश करें तो
तीन चरणें में
हम इसको समझ
सकते हैं।
सबसे पहले
भारत की
पार्लियामेंट
में 1954 में एक बिल
लाया गया
इंडिया कन्वर्जन
रेगुलेशन एण्ड
रजिस्ट्रेशन
बिल। दूसरा
लाया गया
बैकवर्ड कम्युनिटीज
रिलीजियस
प्रोटेक्शन
बिल, 1960 लेकिन,
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, वह दोनों
बिल पारित
नहीं हो सके।
यह पहला फेज
था और दूसरा
फेज 1968 में आया
जब कई स्टेट्स
में
गवर्नमेंट
बदली। उड़ीसा
और मध्य
प्रदेश में एण्टी
कन्वर्जन लॉ
आया और तीसरा
फेज इक्कीसवीं
सदी में आया
कि जब सबसे
पहले
तमिलनाडु ने 2002
में इसका
प्रयास किया, 2003
में गुजरात ने
किया, 2005 में छत्तीसगढ़
ने किया और अब 2006
में राजस्थान
की वर्तमान
सरकार यह
विधेयक लेकर
आयी है।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं यहां
यह निवेदन
करना चाहता
हूं कि सर्वोच्च
न्यायालय के
जिस फैसले का, स्टेनीस्लॉस
वर्सेज मध्य
प्रदेश स्टेट
के बारे में
जिसका जिक्र
मावली से आने
वाले माननीय
सदस्य ने
किया है।उस
फैसले की
तुलना में यह
जो बिल सरकार
लेकर आयी है।वह
बहुत व्यापक है।और
इस बिल के अन्दर
बहुत मिसइन्टरप्रिटेशन
की गुंजाइश है।
सुप्रीम
कोर्ट का वह
फैसला जो मध्य
प्रदेश के
बारे में या
उड़ीसा के
बारे में दिया
गया है।वह
फैसला हमारे
कांस्टीट्युशन
के सन्दर्भ
में expression
allurement, fraud, force, inducement, fraudulent, fundamental rights of the
minorities to propagate their religion and freedom of religion, वह
फैसला उसके
सन्दर्भ में
नहीं है।लेकिन
आपने जो यह
विधेयक प्रस्तुत
किया है।इसका
प्रभाव बहुत
व्यापक है।और
इसकी व्याख्या
करने में
पर्याप्त
गड़बड़ी की
संभावना है।और
यह इस विधेयक
के माध्यम से
राजस्थान की
जनता के
संविधान
प्रदत्त
अधिकारों के
हनन को पूरा
खतरा भी पैदा
हो गया है।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से
निवेदन करना
चाहता हूं कि
यह जो बिल है।यह
फ्रीडम ऑफ स्पीच
एण्ड एक्सप्रेशन
संविधान के
अनुच्छेद 19(1)(ए)
और दूसरा
संविधान के
अनुच्छेद 25(1)
फ्रीडम ऑफ कन्साईस
और 25 (1) में ही freedom to profess, practice and
propagate religion, मैं यह
आपको जो हमारी
संविधान निर्मात्री
सभा थी उसके
बारे में
निवेदन करना चाहता
हूं कि यह
प्रोपोगेशन
का वर्ड कैसे
आया। माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, फण्डामेंटल
राइट सब कमेटी
ने इसके सम्बन्ध
में जो कांस्टीट्यूशनल
ड्राफ्ट में
जो टैक्स
दिया था वह यह
दिया था – “All citizens are equally entitled to freedom of conscience and to then right
freely to profess and practise religion in a manner compatible with public
order, morality or health.” इसमें
प्रोपोगेशन
शब्द नहीं
डाला गया था
लेकिन बाद में
कांस्टीट्यूशन
की फण्डामेंटल
राइट सब कमेटी
के देने के
बाद भी जब
माइनरिटी सब
कमेटी ने
डिफरेंट स्टैण्ड
लिया तो इसको
किस रूप में
शामिल किया
गया, में आपके
माध्यम से
निवेदन करना
चाहता हूं – “All persons are equally
entitled to freedom of conscience and then right freely to profess, practice
and propagate religion subject to public order, morality or health and to other
provisions of the Chapter.” यह
प्रोपोगेट
शब्द जो है।वह
माइनरिटीज सब
कमेटी के
द्वारा लिये
जाने पर
संविधान की
सम्बन्धित
सब कमेटी ने
शामिल किया।
अब
आपके जो बिल
के अन्दर
प्रावधान हैं
वो इस बात का
खतरा उत्पन्न
करते हैं कि
धर्म के
प्रचार के काम
को भी इस कानून
के तहत
अलगावपूर्ण
मान लिया
जायेगा। काई
भी एक धर्म का
व्यक्ति है,
दूसरे व्यक्ति
को अपने धर्म
के बारे में
बताने के लिए लोगों
को इकट्ठा
करता है, अपने
धर्म की बात
उनको बताता
है, आप अगर
उसका मुकदमा
दर्ज कर लोगो
तो कानून के
अन्दर क्या
इस बात की व्यवस्था
है।रोकने की
कि वह नहीं
रोका जायेगा?
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से
निवेदन करना
चाहता हूं कि
जो ऑब्जैक्ट्स
इन्होंने
दिये हैं
कानून व्यवस्था
के नाम पर संविधान
प्रदत्त स्वतंत्रता
को आप
प्रतिबंधित
नहीं कर सकते
और दूसरा जो
आपने हवाला
दिया है।लॉ
एण्ड आर्डर
काक तो मैं
कहना चाहता
हूं, माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, कि अगर इस
वजह से लॉ एण्ड
आर्डर की
प्रॉब्लम हो
रही है।तो
भारतीय दण्ड
संहिता के पन्द्रहवें
अध्याय में
आपके पास
पर्याप्त
अधिकार मौजूद हैं,
सी.आर.पी.सी. के
अन्दर आपके
पास अधिकार
आपको उपलब्ध
हैं अगर कानून
व्यवस्था
की कोई कठिनाई
है।तो उस के
तहत आप
कार्यवाही कर
सकते हो।
Ars/usc/2b/1250/07042006/1
फिर
आपने यह लिखा है।यह
तुरन्त
प्रदत्त
होगा एट वन्स,
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, सरकार
कई तरह के
कानून लाती है।और
इस बात की भी
व्यवस्था
कई बार की
जाती है।कि
गजट
नोटिफिकेशन
के माध्यम से
इसको प्रदत्त
किया जाएगा।
अब आप इस
कानून को एट
वन्स लेकर के
आए ऐसा क्या
हो रहा था, कोई
टाडा की बात
है, कोई पोटा
की बात है।जो
आप यह एटवन्स
का प्रोवीजन
लेकर के आए इसके
बारे में
सुप्रीम
कोर्ट ने भी
इस सम्बन्ध
में पूरी व्याख्या
दी हुई है।।
मैं तीसरा
आपके माध्यम
से यह निवेदन
करना चाहता
हूं, उपाध्यक्ष
महोदय, कि यह
जो लिखा है।इन्होंने
विधि विरूद्ध,
यह प्रोवीजन
इतना व्यापक है।कि
आप इसकी कुछ भी
व्याख्या
कर सकते हैं
और इस व्याख्या
के आधार पर
अल्पसंख्यक
समुदाय के लोग
संविधान
प्रदत्त
अधिकारों का
हनन करके उनको
आपराधिक कृत्य
में शामिल आप
बता सकतेहैं।
दूसरा आपने
दिया है।प्रलोभन,
अब यह प्रलोभन
इसकी चर्चा
सुप्रीम कोर्ट
के उस फैसले
में है।दी स्टीवेंसन
, मध्यप्रदेश
के बारे में
सुप्रीम
कोर्ट ने दिया
है।क्या
इसकी चर्चा
उसके अन्दर है।और
नहीं है।तो
आपने इस
विधेयक के
माध्यम से इस
दायरे को खुला
रख दिया है।यह
फिर चुनौती दी
जाएगी इसको।
सर्वोच्च न्यायालय
के अन्दर
जाकर गुहार की
जाएगी कि
राजस्थान की
सरकार किस तरह
के प्रावधान
को लेकर के आई है।।
तीसरा
आपने दिया है।ग
में सम
परिवर्तन, कन्वर्जन
अब इसमें री
कन्वर्जन तो
आपने अलाऊ कर
दिया। मतलब
मेरे पूर्वज
जो राजपूत थे,
चौहान वंश से
थे जो लोढ़ा
के रूप में
कन्वर्ट
होकर जैन
समुदाय में आए
आज अगर मैं
राजपूत में
जाकर हिन्दू
फिलोसोफी में
जाता हूं तो
यह भी कन्वर्जन
आप अलाऊ कर
रहे हैं, आपका
कानून अलाऊ कर
रहा है।
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहता हूं
सेक्शन-3 (ए) के
बारे में
जिसमें धर्म
प्रचार को भी
शामिल कर दिया
गया है।और जो
दूसरा इन्होंने
दिया है।तो
मैं यह पूछना
चाहता हूं,
आपने दिया है।अब
एक हिन्दू
महिला है,
मुसलिम
पर्सनल लॉ के
मुताबिक मेहर
की रकम तय
करके एक
मुसलिम के साथ
शादी करती है।अपना
धर्म
परिवर्तन
करती है।अब
उसको भी सम ए
में शामिल कर
लोगे, यह मेहर
क्या
प्रलोभन हो
गया ? इसलिए
मैं आपसे कहना
चाहता हूं कि
यह कानून जो
सरकार लेकर के
आई है।यह
लोगों की वैयक्तिक
स्वतंत्रता
और संविधान
प्रदत्त
अधिकारों के
ऊपर बहुत बड़ा
कुठाराघात
है। मैं
निवेदन करना
चाहता हूं
उपाध्यक्ष
महोदय, अब
आपने इसमें जो
दण्ड का
प्रावधान
किया है।क्या
किया है।आपने,
जो कोई व्यक्ति
या तो प्रत्यक्षत:
या अन्यथा
किसी भी व्यक्ति
का बल के
द्वारा या
प्रलोभन
द्वारा या
किन्हीं भी
कपटपूर्ण
साधनों
द्वारा एक
दूसरे से धर्म
परिवर्तन
नहीं करवाएगा
और करवाने का
प्रयत्न
नहीं करेगा न
ऐसा दुष्प्रयत्न
करेगा। मतलब
कन्वर्जन और
सज़ा क्या रखी
आपने इक्वल,
कन्वर्जन और
अटेम्प्ट
टू कन्वर्जन
दोनों के अन्दर
एक ही सज़ा का
प्रावधान है।
यह कौनसा
तरीका हुआ ? वो
ही सज़ा कन्वर्जन
कराने वालों
के लिए और वो
ही सज़ा अटेम्प्ट
टू कन्वर्जन
वाले के लिए
इसलिए यह
प्रावधान भी
आपका माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहता हूं कि
यह
विसंगतिपूर्ण
है।फिर दोनों
को फुटिंग पर
रखना यह
नैचुरल जस्टिस
के दृष्टिकोण
से भी गलत है।फिर
आपने पचास
हजार रुपए दण्ड
रख दिया। गृह
मंत्री जी आप
बताना अपने
अधिकारियों
से सलाह
मशविरा करके
रायटिंग
आफेंस में क्या
दण्ड है, क्या
जुर्माना है,
काजिंग डेथ
बाई नेग्लीजेंस
में क्या
जुर्माने का
प्रोवीजन है,
रोंग फुल रेस्ट्रेन
में क्या
जुर्माने का
प्रोवीजन है।?
इतने सीरियस
क्राइम के
मामले में भी
आपका प्रोवीजन
कहीं कम है।तब
फिर इस मामले
में आपको इस
तरह का
प्रावधान लोने
की क्या आवश्यकता
थी ?
फिर
इसका पाँचवाँ
सैक्शन है।उपाध्यक्ष
महोदय, इस
अधिनियम के
अन्दर कदीन
कोई अपराध
संज्ञेय और
जमानती होगा
का पुलिस का
डी वाई एस पी
से नीचे का
अधिकारी इन्वेस्टीगेट
नहीं करेगा ।
अब मुझे आप यह
बताओ कि आपका
कोई भी आर एस
एस का
कार्यकर्ता,
बजरंग दल का
कार्यकर्ता
किसी के खिलाफ
जाकर कोई
मुकदमा करवा
दे। दूसरे
राज्यों के
कानून भी आपने
देखे होंगे
उनके अन्दर
क्या व्यवस्था
है, जिला
प्रशासन की
अनुमति के
बिना कोई भी मुकदमा
दर्ज नहीं
होता दूसरे
राज्यों के
कानून के अन्दर
यह प्रावधान
है। आपने क्यों
हटा लिया
इसको, क्या
इस तरह की कोई
भी कम्प्लेन
आने पर राज्य
सरकार का जो
डिस्ट्रिक्ट
लेवल का
रिप्रजेन्टेटिव
है।क्या
उसको उसकी
जांच नहीं
करनी चाहिए ? आपने
धरते ही
मुकदमा दर्ज
कर लिया,
उठाकर बंद कर
देंगे, नोन
बैलेबल आफेंस
है। क्या इस
बात की कोई
जांच की व्यवस्था
नहीं होनी
चाहिए आफेंस
हुआ है।कि
नहीं हुआ है।अब
आप कहेंगे कि
हमने डी वाई
एस पी के इन्वेस्टीगेशन
का प्रोवीजन
रखा है, इन्वेस्टीगेशन
तो होता रहेगा
एक बार तो
मुकदमा दर्ज होने
के बाद भी आप
चाहोगे सरकार
आपकी है।कि इन
लोगों को
उठाकर बंद
करना है,
उठाकर धड से
बंद कर दोगे ।
मैं
उपाध्यक्ष
महोदय, यह
निवेदन करना
चाहता हूं
आपके माध्यम
से कि अब क्यों
इस बात की
परिस्थितियां
बनी हुई हैं
और सरकार की
क्यों नीयत
क्यों साफ
नहीं है।? 1935 के
अन्दर बाबा
साहब भीमराव
अम्बेडकर ने
एक बात कही थी
कि किस धर्म
में पैदा होऊं
मैं यह तो
मेरे अधिकार
में नहीं है।पर
मैं किस धर्म
में मरूं यह
मेरे अधिकार
में है।और 1935
में उन्होंने
एलान किया था
कि मैं धर्म
छोडूंगा । 1956 के अन्दर
बॉम्बे में
उन्होंने इस
बात का भाषण
दिया और
नागपुर के अन्दर
14 अक्टूबर को
लाखों की
तादाद में लोगों
के साथ उन्होंने
धर्म
परिवर्तन
किया । क्यों
करना पडा उनको
धर्म
परिवर्तन ? यह
सोचने का विषय
है।। आज आप
हिन्दू धर्म
के ठेकेदार
बनते हो, हिन्दू
धर्म की व्यवस्था
किस तरीके की
है, वह आप
देखने की
कोशिश करो । अन्याय
पर आधारित जो
व्यवस्था हम
ने हिन्दू धर्म
के अन्दर बना
रखी है, समाज
को हमने जड़
कर रखा है।जन्म
के आधार पर
लोगों के साथ
शोषण की जो व्यवस्था
कर रखी है,
बैलगाड़ी में
अगर एक कमजोर
तबके का आदमी
बैठता है,
उसको
बैलगाड़ी से
नीचे उतार
देते हो ।
उसका बच्चा
स्कूल में जा
कर पढ़ने के
लिए बैठता है,
उसको
टाट-पट्टी
बैठने के लिए
नहीं देते ।
स्कूल का एग्जामिनर
एस सी के बच्चों
की कापी
जांचने से
इनकार कर देता
है।।
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): आज तो
ऐसा महसूस हो
रहा है।कि
विदेश से आये
हुए पादरी
महोदय अपना
भाषण दे रहेहैं।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): एक
तालाब के अन्दर
एक भैंस पानी
पी सकती है।और
एक आदमी का
बच्चा उस में
पानी नहीं पी
सकता ।
सार्वजनिक नल
पर जहां...
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): क्या
कहना चाहते हो
? वह हमारा भाई है।।
जो कुछ हुआ
पहले हुआ
होगा, आज नहीं
होने देंगे ।
हमारे भाई हैं
सब, तोड़ने की
कोशिश मत
कीजिए, जोड़ने
की कोशिश
कीजिए । तोड़
रहे हो । ...(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर):
तोड़ना तो आप
का परम धर्म है,
आप ने कभी
जोड़ने की
कोशिश ही नहीं
की । अगर जोड़ते
तो आप के लोग
धर्म
परिवर्तन
करते ही नहीं
।
श्री
मदन दिलावर (समाज
कल्याण
मंत्री):
लेकिन आप जैसे
लोगों के काले
कारनामों के
कारण ...(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर):
हमेशा
अनुसूचित
जाति का अहित
देखा है।इसलिए
लोग पिछड़ते
जा रहेहैं।
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): आप
जैसे लोगों के
काले
कारनामों के
कारण ...(व्यवधान) अब जाग
गयेहैं। अब
हिन्दुस्तान
जाग गया है।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): आप
जैसे नेता हो
गये । धर्म
परिवर्तन आप
के वहां हो
रहा है।इसलिए
कि आप जैसे
नेताहैं।
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री):
समरसता की बात
करो । इस देश
में छुआछूत से
बड़ा कोई पाप
नहीं है।।
यहां कोई
ऊंच-नीच नहीं है।।
...(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): पाप
आप लोग ही कर
रहे हो जिसका
खामियाजा
दूसरे लोग
भुगत रहेहैं।
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री):
छुआछूत से
बड़ा कोई पाप
नहीं है।। इस
देश में
छुआछूत से
बड़ा कोई पाप
नहीं है।।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर):
छुआछूत आप
करते हो । आप
मंत्री बनने
के बाद
शिड्यूल्ड
कास्ट की
अवहेलना करते
हो । इसलिए
शिड्यूल्ड
कास्ट वहां
जा रही है।
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): कोई
पाप नहीं है।।
श्री
महिपाल सिंह
यादव: माननीय
गृह मंत्री
जी, आप इस
तुगलकी
विधेयक को क्यों
ला रहे हो ? क्यों
धर्म से
छेड़छाड़ कर
रहे हो ?
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
माननीय सदस्य
।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
यह साम्प्रदायिकता
की भावनाएं और
बढ़ेंगी
प्रदेश में,
क्या फायदा
होगा ...(व्यवधान)
हिन्दू धर्म
के ठेकेदार आप
ही बन रहे हो
क्या ? यह
हिन्दू शब्द
कहां से आया
तुमको यह भी
पता नहीं होगा
यह हिन्दू
शब्द जो है,
गर्व से कहो
हिन्दू हैं
...(व्यवधान)
श्री
हीरालाल
(निवाई):
पाकिस्तान
में हिन्दुओं
को दोयम दर्जे
का नागरिक
समझा जाता है।क्या
बात करते हो,
भाषण दे रहे
हो ।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
हिन्दू का
अर्थ भी जानते
हो ?
श्री
हीरालाल
(निवाई): हां
जानते हैं
हिन्दू का
अर्थ
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
क्या अर्थ है।?
श्री
हीरालाल
(निवाई): हिन्दुस्तानी
।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
हिन्दू का
अर्थ है।गुलाम,
चोर, बदमाश ।
श्री
हीरालाल
(निवाई): आप क्या
हो फिर ?
अनेक
माननीय सदस्य
: आप क्या हो
फिर ?
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
मैं भारतीय
हूं, मैं
भारतवासी
हूं।
श्री
हीरालाल
(निवाई): हम
हिन्दुहैं।
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): हिन्दू
को चोर, बदमाश,
गुलाम कह रहे
हैं यह गम्भीर
मामला है, यह
बर्दाश्त
नहीं करेंगे
...(व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
आप गुलामों का
देश बनाना
चाहते हो ...(व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): यह
हिन्दुओं को
चोर, गुलाम कह
रहेहैं। इन
शब्दों को
कार्यवाही से
निकाला जाए ।
...(व्यवधान)
Vns/usc/1300/2c/7.4.2006
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, यह
टिप्पणी
निकाली जाए।
इस प्रकार की
टिप्पणी
बोलने वाले का
इलाज कराओ ... (व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, यह
फारसी भाषा का
शब्द है। यह
शब्द न
रामायाण में
है, न गीता में है।और
न वेदों में है।...
(व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
आपके
पूर्वजों ने
सिखाया है।गुलाम
और चोर एक ही
बात है।... (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य
... (व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
इन्होंने
ऐसे इल्जाम
लगाये हैं
इनको
कार्यवाही से
निकाला जाना
चाहिये।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप स्थान
ग्रहण करिये।
हम देख लेंगे
ऐसी कोई भाषा
होगी तो हम
देख लेंगे ... (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): इसको
रखें, कोई
ऐतराज वाली
बात नहीं है।क्योंकि
इनका विचार है।...
(व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
उपाध्यक्ष
महोदय, यह क्या
बोल रहे हैं,
कुछ होश है? हिन्दू
शब्द का क्या
क्या अर्थ है।?
... (व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
हिन्दू का
अर्थ वही है।जो
... (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य
... (व्यवधान)
श्री
हीरालाल
(निवाई): आप
अपने बाप से
पूछकर आओ कि
हिन्दू क्या
है।? क्या
बोलते हैं ? जरा
समझकर तो बोलो
... (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष: माननीय
सदस्य, आप
अपना स्थान
ग्रहण
कीजिये। आप स्थान
ग्रहण कीजिये
... (व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, यह
हिन्दू शब्द
का अर्थ क्या
है।? यह क्या
बोले हैं,
इनको पता नहीं
है।फिर भी
खुले आम ... (व्यवधान)
यह कहा है।इन्होंने
... (व्यवधान)
पैदा किया है।और
कुछ भी जच गया
बोलना शुरू कर
दिया। थोड़ा बहुत
भी होश नहीं
है। इलाज
कराओ, इलाज ... (व्यवधान)
श्री
हीरालाल
(निवाई): अपने
बाप से पूछकर
आओ इस हिन्दू
का मतलब क्या
होता है।?
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, यह
पाखंडी लोग जो
हैं ... (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
स्थान ग्रहण
कीजिये ... (व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
इन पाखण्डी
लोगों को यह
पता नहीं है।...
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, इन्हें
एक साल के
लिये सदन से
बाहर निकाला
जाए। एक साल के
लिये इस सदन
की सदस्यता
से निलम्बित
किया जाए ... (व्यवधान)
अससंदीय शब्द
पाखण्डी लोग
हैं। यह हिन्दू
के साथ ... (व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): यह
जानते नहीं है।...
(व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
हिन्दू शब्द
से छेड़खानी
की है।... (व्यवधान)
सदन में
छेड़खानी कर
दी ... (व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
पाखंडियों
बैठ जाओ आप ... (व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
इन्हें
पागलखाने,
पागलखाने में
दिमाग का इलाज
कराओ ... (व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
हिन्दू शब्द
फारसी भाषा का
है। यह न
वेदों में है,
न रामायण में
है, न गीता में
है, न हुनमान
चालीसा में है।और
न सत्यनारायण
की कथा में है।...
(व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
कांग्रेस के
लोगों से पूछा
जाए वह इस बात
का समर्थन
करते हैं ? और
इनकी बात का
समर्थन करते
हैं तो ... (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
अंकित नहीं
हो। कोई अंकित
नहीं होगा ... (व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): ***
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): ***
श्री
नवरतन
राजोरिया
(फुलेरा): ***
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
कीजिये अपना।
आप बीच में क्यों
बिना परमीशन
के ... (व्यवधान)
आप स्थाग
ग्रहण कीजिये
... (व्यवधान) आप
बैठिये ... (व्यवधान) माननीय
सदस्य, अंकित
नहीं हो रहा
है। कोई अंकित
नहीं होगा ... (व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ***
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): ***
श्री
नवरतन
राजोरिया
(फुलेरा): ***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ***
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): ***
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, पाइंट
आफ आर्डर।
पाइंट आफ
आर्डर यह है।कि
कांस्टीट्यूशन
की धारा 102 में
सदस्यता ... (व्यवधान)
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
आर्टिकल मान
लो, यह ज्यादा
बुद्धिमान
हैं। सदस्यता
के लिये
निरर्हता
लिखी हुई है।
इसके ख में यह है।कि
यदि वह विकृत
चित्त हो गया
हो तो योग्यता
के काबिल नहीं
है। जो बानसूर
से आने वाले माननीय
सदस्य हैं वह
बिलकुल इसमें
विकृत चित्त
हो चुके हैं ...
(व्यवधान)
इसलिये
इन्होंने कहा
हिन्दू चोर
हैं। हिन्दू
बदमाश हैं।
इन्होंने
कहा कि आप
पाखण्डी।
मतलब, ऐसा वही
व्यक्ति कह
सकता है।जिसका
विकृत दिमाग
हो गया हो
इसलिये यहां
पर अपनी योग्यता
के योग्य
नहीं रहे हैं।
इनकी सदस्यता
समाप्त करने
का है।... (व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यह प्रमाण
पत्र यहीं
मिलेगा। या तो
आपको माफी
मांगनी पड़ेगी,
नहीं तो आपको
यहीं प्रमाण
पत्र दूंगा और
मैं दूंगा
प्रमाण पत्र ...
(व्यवधान)
श्री
हीरालाल
(निवाई): ***
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ***
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): ***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ***
श्री
उपाध्यक्ष: माननीय
सदस्य, बीच
में नहीं। स्थान
ग्रहण कर
लीजिये। ... (व्यवधान)
माननीय सदस्य,
आप स्थान
ग्रहण करें। ...
(व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री
नवरतन
राजोरिया
(फुलेरा): ***
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): ***
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): ***
श्री
उपाध्यक्ष:
कल्ला जी, एक
सेकिंड आप ... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ***
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): ***
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ***
श्री
नवरतन
राजोरिया
(फुलेरा): ***
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): ***
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा): ***
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): ***
ssy/usc/1310/2d
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): ***
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): ***
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ***
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य
बिराजें ...(व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): ***
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य
स्थान ग्रहण
करें ...(व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): ***
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): ***
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ***
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा): ***
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य
स्थान ग्रहण
करें ...(व्यवधान)
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): ***
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
मैं यही पूछ
रहा हूं ...(व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री
उपाध्यक्ष:
आप मुझे पूछने
दीजिये क्या
कहा इन्होंने
...(व्यवधान)
पहले पूछें तो
सही ...(व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): ***
श्री
उपाध्यक्ष:
मैं पूछूं
पहले इनसे ...(व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): ***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
***
श्री
उपाध्यक्ष:
अंकित नहीं हो
रहा है,
माननीय सदस्य
स्थान ग्रहण
करें ...(व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): ***
श्री
टीकम चन्द
कान्त
(सिवाना): ***
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य
बिराजें,स्थान
ग्रहण करें
...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): ***
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य
स्थान ग्रहण
करें ...(व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): ***
jyg/akt/746/1320/2e
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): ***
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): ***
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): ***
डा.
जालम सिंह
रावलोत (शिव): ***
प्रो.
बीरूसिंह
राठौड़
(बनीपार्क): ***
श्री
मोहन लाल गुप्ता
(किशनपोल): ***
श्री
कनकमल कटारा
(महिला एवं
बाल विकास
मंत्री): ***
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार): ***
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ***
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
कीजिए। ...(व्यवधान)...
माननीय सदस्य।
...(व्यवधान)...
माननीय सदस्य।
श्री
प्रेमसिंह
बाजौर
(नीमकाथाना): ***
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): ***
डा.
जालम सिंह
रावलोत (शिव): ***
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
बैठें।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): ***
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): ***
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्यगण, ...(व्यवधान)...
माननीय सदस्यगण,
...(व्यवधान)... ।
बानसूर से आने
वाले माननीय
सदस्य ने जो
कुछ कहा है,
मैं
प्रोसीडिंग्स
मंगवा रही
हूं, उन्होंने
क्या कहा है,
क्या नहीं
कहा है...।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): ***
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): ***
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): ***
श्री
मोहन लाल गुप्ता
(किशनपोल): ***
प्रो.
बीरूसिंह
राठौड़
(बनीपार्क): ***
श्री
प्रेमसिंह
बाजौर
(नीमकाथाना): ***
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण,
इतना उत्तेजित
होने की आवश्यकता
नहीं है। मैं
प्रोसीडिंग्स
देख रही हूं।
प्रोसीडिंग्स
में यदि सचमुच
में उन्होंने
कोई इस तरह की
बात कही है।तो
निश्चित तौर
पर ...(व्यवधान)...
आप सुनिए तो
सही। आप ही
फैसला देने लग
जाते हैं और
अध्यक्ष भी
बन जाते हैं,
मंत्री भी बन
जाते हैं। बात
सुनिए आप। तो
मैं कह रही
हूं कि यदि
उन्होंने
कोई इस तरह की
बहुत आब्जेक्शनेबल
बात कही है।तो
निश्चित तौर
पर केवल सदन
की कार्यवाही
से निकालने की
बात नहीं है,
उससे आगे की
बात भी मैं सोच
सकती हूं। ...(व्यवधान)...
आप शांत रहें।
डा.
जालम सिंह
रावलोत (शिव): ***
प्रो.
बीरूसिंह राठौड़
(बनीपार्क): ***
श्री
मोहन लाल गुप्ता
(किशनपोल): *** ...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन कर रहा
था कि सन् 1935 में
बाबा साहब अम्बेडकर
ने यह कहा... ...(व्यवधान)...
श्री
मोहन लाल गुप्ता
(किशनपोल): ***
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): ***
प्रो.
बीरूसिंह
राठौड़
(बनीपार्क): ***
श्री
अध्यक्ष: 1.26 हो
रहे हैं। ...(व्यवधान)...
कृपया शांत
रहें। सिरोही
से आने वाले
माननीय सदस्य,
प्लीज कन्कलूड,
इतनी देर हो
गई बोलते हुए।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, संविधान
निर्माता,
बाबा साहब अम्बेडकर
ने 1935 में कहा,
मैं किस धर्म
में पैदा हुआ
ह, यह तो मेरे
हाथ में नहीं
था पर मैं किस
धर्म में
मरूं, यह मैं
तय करूंगा और
उन्होंने
लगातार
प्रयास किए कि
हिन्दू धर्म
के अन्दर जो
जड़ता है, जो
शोषण आधारित
व्यवस्था
है, जो अन्यायपूर्ण
व्यवस्था
है, उसको खतम
करने का
प्रयास हो
लेकिन संविधान
की रचना के
बाद भी
संविधान
निर्मात्री
सभा के अध्यक्ष
के रूप में
देश को
धर्मनिरपेक्ष
संविधान देने
के बाद भी, अन्याय
मूलक संविधान
की संरचना
करने के बाद
भी वह उस लक्ष्य
को प्राप्त
नहीं कर सके।
हमारा अपना
हिन्दू समाज
अपनी
कमजोरियों को
दूर करने के
लिए तैयार
नहीं है।
श्री
अध्यक्ष: तीन
बजे तक आज सब
बिल पास कर
देने हैं। माननीय
सदस्य, प्लीज
शोर्ट में
कहें अपनी
बात। आपने 11.40 पर
बोलना शुरू
किया था, बीच
में शोर शराबा
भी हुआ। माननीय
सदस्य, आप
इसी हिसाब से
बोलें।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): मैं
आपकी आज्ञा का
पालन करूंगा।
1956 में जब उन्होंने
यह देखा कि
अपनी कमियों
को दूर करने
के लिए जिस
धर्म में
मैंने जन्म
लिया, उस धर्म
के लोग तैयार
नहीं हैं तब
पाँच लाख
लोगों की
उपस्थिति में
नागपुर के अन्दर
उन्होंने
बौद्ध धर्म
ग्रहण करने का
फैसला किया।
आज
आप बिल लेकर
के आए हैं
लेकिन अगर
आपका दामन साफ
है, आपकी हिन्दू
समाज के प्रति
प्रतिबद्धता है।तो
सबसे पहले
हिन्दू समाज
के अन्दर जो
विसंगतियां
व्याप्त
हैं, जो शोषण
की व्यवस्था
व्याप्त है,
जो अन्याय व्याप्त
है।उसको दूर
करने का काम
करना चाहिए।
आज भी, आज भी गांवों
के अन्दर वह
गरीब आदमी,
दलित समुदाय
का, आदिवासी
समुदाय में
जन्म लिया,
सिर्फ जन्म
के आधार पर
सवर्ण वर्ग के
लोग उसको
बराबरी पर
बैठने का मौका
नहीं देते,
उसके मकान के
बाहर चबूतरे
पर वह बैठ
जाता है।तो
उसको फटकार
दिया जाता है।
गृह
मंत्रीजी,
आपको तो ध्यान
होगा, आपकी
जानकारी में
होगा कि दलित
उत्पीड़न की
जितनी घटनाएं
देश के अन्दर
होती है।उसका
बीस फीसदी
राजस्थान
में होने का
शर्मनाक कलंक
हमारे माथे पर
है। मत
परिवर्तन
करना, तर्क
करना, विचार
करना, चर्चा
करना, यह हिन्दू
समाज का का एक
गौरवशाली भाग
रहा है। आदि
शंकराचार्य
ने क्या-क्या
चर्चाएं नहीं
की, क्या-क्या
शास्त्रार्थ
नहीं किया?
भगवान बुध ने
कैसे मत परिवर्तन
किया, उस समय
हिन्दू समाज
में जो हिंसा
व्याप्त थी,
जो अन्याय व्याप्त
था, जो शोषण व्याप्त
था, उसके
खिलाफ उन्होंने
देशना दी और
उस देशना के
आधार पर खाली
हिन्दुस्तान
ही नहीं
दुनिया के कई
मुल्कों को
बौद्ध धर्म से
जोड़ने का काम
महात्मा
बुद्ध ने
किया। माननीय
गृह मंत्रीजी,
भगवान महावीर
भी हिन्दू
थे, राजपूत
परिवार में
जन्म लिया था
लेकिन उन्होंने
ने भी, उस समय
हिन्दू समाज
के अन्दर बलि
की प्रथा थी,
जिस तरह
महिलाओं पर
अत्याचार,
जिस तरह शोषण,
जिस तरह जाति
और वर्ण के आधार
पर जुल्म,
गले में जूते,
आगे सिर
लटकाकर चलना,
कंधे पर कुल्हड़ी
लेकर चलना,
चप्पल नहीं
पहन सकना,
पगड़ी पहन नहीं
सकना, लाखों
करोड़ों
लोगों के साथ
जो जुल्म की
व्यवस्था
थी, उसके
खिलाफ उन्होंने
मत
प्रतिपादित
किया।
07042006/1330/gpc/akt/2f
और
आप जानते
होंगे भगवान
महावीर के
प्रमुख शिष्य
कौन थे, इन्द्रभूति
गौतम। वे किस
वर्ग से आते
थे, साकटान किस
वर्ग से आते थे।
हजारों
वर्षों का
हमारे मुल्क
का गौरवशाली
इतिहास है। जब
हजारों-हजारों,
लाखों-लाखों
लोग तर्क के
आधार पर दूसरे
धर्म से
प्रभावित
होकर दूसरे
धर्म से जुड़े
आज इस बिल को
लाकर हमारी उस
गौरवशाली व्यवस्था
को, भारत के
इतिहास की 5
हजार साल की
गौरवशाली
परम्परा को
नष्ट करने के
आरएसएस के
षड्यंत्र में
आप भी शामिल
होना चाहते
हैं।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, संविधान
के अंदर यह व्यवस्था
दी हुई है।एक
व्यक्ति को
अधिकार है।कि
वह किस धर्म
को ग्रहण करे।
आप उदाहरण लें
रसखान जब कृष्ण
के बारे में
गीत लिखते हैं
तब आपको क्या
महसूस होता
है? क्या उस
गौरवशाली
विरासत को नष्ट
करने की तरफ
राजस्थान को
आगे ले जाने
का काम आप
करना चाहते
हो? इसलिए
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहता हूं आप
और हम सबको
अपने गिरेबान
में झांककर
देखना चाहिए कि
हमारे हिन्दू
समाज में किस
तरह की जाति
व्यवस्था
है। एक जाति
की पंचायती एक
आदमी को सरेआम
सामाजिक तौर
पर बहिष्कृत
कर देती है।
जाति की
पंचायती पूरे
प्रशासन की
मौजूदगी में
होती है।और हजारों
लोगों की
मौजूदगी में 5-5
लाख का दण्ड
लगा देते है।
..(व्यवधान)..
श्री
सुरेन्द्र
सिंह राठौर
(श्रीगंगानगर):
इसका मतलब आप
हिन्दू धर्म
के खिलाफ हैं।
..(व्यवधान)..
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): मैं
सबसे बड़ा
समर्थक हूं,
इसलिए मैं कह
रहा हूं अपनी
कमियों को दूर
करें, दूसरे
पर दोष मत मढ़ो।
5-5 लाख दण्ड
करने वाले
लोग, सामाजिक
तौर पर बहिष्कृत
करने वाले लोग
हमारी
प्रायरटी में
नहीं है। हम
उनके खिलाफ
कोई
कार्यवाही
नहीं करना
चाहते। हम
अपने अंदर की
व्यवस्था
को ठीक नहीं
करना चाहते और
जब तक हम अपने
भीतर की व्यवस्था
ठीक नहीं
करेंगे हिन्दू
समाज को बेहतर
करने का काम
नहीं करेंगे,
हर व्यक्ति
को बराबरी का
हक नहीं देंगे
..(व्यवधान)..
मैं निवेदन
करना चाहता
हूं
आदिवासियों
की बात कर रहे
थे, मेरे जिले
के अंदर भी
आदिवासी
समुदाय के लोग
हैं, मेरे
क्षेत्र में
तो नहीं है।..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष: अब
कृपया समाप्त
करें।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): मैं
समाप्त कर
रहा हूं। मेरे
क्षेत्र में
तो नहीं हैं,
लेकिन मेरे
पड़ोस के
क्षेत्र में
तो हैं। 60 साल
के स्वाधीन
भारत में आज
भी मौताणे की
व्यवस्था
है। एक आदमी
को मार देते
हैं तो जाकर
उसका घर फूंक
देते हैं,
पूरे गांव के
गांव को जला
देते हैं,
लोगों को जला
देते हैं और
जब तक पैसे
नहीं मिलते,
उस मरने वाले
की कीमत नहीं
मिलती है।वे
लोग वहां से
हटते नहीं
हैं। लेकिन
हमारी प्राथमिकता
यह नहीं है।
हम हिन्दू
समाज में इस
आदिवासी समाज
में, आदिवासी
समुदाय में जो
पशुतापूर्ण
व्यवस्था
है, जो
पशुतापूर्ण
परम्परा चली
आ रही है।उसको
खत्म करने के
लिए हम कोई
ठोस
कार्यवाही
करें, हमारी
यह प्रायरटी नहीं
है। हम इस तरह
का
प्रोपेगंडा
वाले, घृणा
फैलाने वाले
हिन्दू समाज
के वोट को
संगठित करने
के लिए इस तरह
का धार्मिक
बिल लाना
चाहते हैं ..(व्यवधान)..
मैं चुनौती
देता हूं
आपको। ..(व्यवधान)..
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहता हूं
धर्मान्तरण
का विधेयक
आपकी
प्रायरटी है,
आप जवाब दें
तब बताना राजस्थान
में 60 साल के
अंदर जो हमारी
58 साल की हिस्ट्री
है, कितने
धर्मान्तरण
के मुकदमे हुए
(समय समाप्ति
सूचक घण्टी)
अध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहता हूं
आरएसएस को
बहुत साफ समझ
आ गया, गुजरात
का इन्होंने
प्रयोग किया
मुसलमानों के
खिलाफ हिंसा
का रास्ता
अख्तियार
किया, इनकी
समझ में आ गया
कि घृणा भुलाकर
हिन्दू
समुदाय के वोट
को संगठित
किया जा सकता है।लेकिन
..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष: अब
आप कृपया
समाप्त
करें। ..(व्यवधान)..
श्री
नवरतन
राजोरिया
(फुलेरा): हिन्दुस्तान
में सबसे ज्यादा
राज करने वाली
पार्टी आपकी
है। आपने मुसलमानों
को डराया,
आपने
अनुसूचित
जाति, अनुसूचित
जनजाति के
लोगों को
डराया तभी तो
आपने राज किया।
..(व्यवधान)..
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 1996 में
सरकारें बदली
थीं और संयुक्त
विपक्ष की
सरकारें थीं
..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष: अब
कृपया समाप्त
करें।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): मैं
दो मिनट में
समाप्त कर
रहा हूं।
श्री
अध्यक्ष: दो
मिनट?
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): डेढ़
मिनट में।
श्री
अध्यक्ष: तीन
बजे तक कैसे
काम चलेगा?
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): मेरा
क्या दोष है?
श्री
अध्यक्ष: तीन
बजे तक विधेयक
कैसे पास
होंगे?
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): मैं
डेढ़ मिनट में
खत्म कर रहा
हूं। मैं यह
निवेदन करना
चाहता हूं कि
गुराज के
प्रयोग के बाद
..(व्यवधान)..
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): यह
कांग्रेस पार्टी
का हिन्दुओं
के खिलाफ भाषण
हो रहा है।जो
सारी दुनिया
सुन रही है।
कांग्रेस
पार्टी का
हिन्दुओं के
खिलाफ भाषण
है। ..(व्यवधान)..
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): यह
हिन्दुओं के
हित में हो
रहा है, हिन्दू
समाज को ठीक
करने के लिए
हो रहा है। ..(व्यवधान)..
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): आपसे
यह अपेक्षा
नहीं थी कि आप
इसमें ..(व्यवधान)..
आप हिन्दू
राजनीति करना
चाहते हो। ..(व्यवधान)..
कोई भी व्यक्ति
हिन्दू समाज
के खिलाफ नहीं
है, लेकिन आप
नहीं चाहते कि
नाथूसिंहजी
का समारोह हो
यहां ..(व्यवधान)..
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर):
संगठन की बात
कहकर हिन्दुओं
को गाली दे
रहे हैं। ..(व्यवधान)..
श्री
अमराराम (धोद):
ये हिन्दुओं
के खिलाफ नहीं
हैं।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): यह
हिन्दुओं के
खिलाफ है।कांग्रेस
पार्टी।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): ये
मनुवादी सब के
सब ..(व्यवधान).. बी.डी.
कल्ला जी की
अध्यक्षता
में कांग्रेस
पार्टी हिन्दुओं
के खिलाफ भाषण
दे रही है।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर): पूरी
कांग्रेस
पार्टी हिन्दुओं
के खिलाफ है।और
भाषण दे रही
है। ..(व्यवधान)..
हिन्दू
बर्दाश्त
नहीं करेंगे
..(व्यवधान)..
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): हम
हिन्दू समाज
के खिलाफ नहीं
है।..(व्यवधान)..
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): आपकी
पार्टी का अध्यक्ष
अखिल भारतीय
हिन्दू नहीं है।इसलिए
सारे हिन्दू
चोर हैं, यह आप
कह रहे हैं।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
किसने कहा है?
..(व्यवधान).. आप
प्रोसीडिंग
पढ़ लें, कभी
नहीं कहा। आप
बार-बार कह
रहे हो। ..(व्यवधान)..
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): इनसे
ज्यादा पूजा
करने वाला,
पाठ करने वाला
आपकी पार्टी
में कोई नहीं
होगा। ..(व्यवधान)..
बी.डी. कल्ला
जी पूजा करते
हैं, पाठ करते
हैं, व्रत
करते हैं। ..(व्यवधान)..
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): हिन्दू
चोर थे? आप
समर्थन कर रहे
हो कि सारे
हिन्दू चोर
थे ..(व्यवधान)..
हिन्दुओं के
ऋषि हैं आपकी
पार्टी चोर
घोषित कर रही है।बी.डी.
कल्ला जी की
अध्यक्षता
में। बीकानेर
में भेज रहा
हूं मैं कागज।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): कोई
कुछ नहीं कह
रहा है, आप कह
रहे हो। आप
जिस तरीके से
दूसरे नाम का
प्रयोग कर रहे
हो ..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष:
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य। ..(व्यवधान)..
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य ..(व्यवधान)..
श्री
ओम बिरला
(संसदीय सचिव):
आपने हिन्दुओं
को चोर कहा
है। राजस्थान
की जनता
पूछेगी आपको।
..(व्यवधान)..
बड़ा आंदोलन
होगा। ..(व्यवधान)..
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
आपमें तो हिम्मत
नहीं है, खड़े
होकर यह कहना
कि हमारे
अवतार चोर
नहीं थे। कहिए
चोर नहीं थे,
आप कहिए हमारे
ऋषि चोर नहीं थे।
आप हिन्दू
धर्म मानते
हैं तो आप
नहीं कह सकते
..(व्यवधान)..
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): न तो
किसी ऋषि को
चोर कहा है, न
किसी देवता के
बारे में कोई
बात कही है।
आप अपने मुंह
से कह रहे हो
..(व्यवधान)..देवताओं
और ऋषियों के
बारे में कोई
गलत टिप्पणी
नहीं की गई
है।
श्री
ओम बिरला
(संसदीय सचिव):
दिल्ली के
दरबार ने भेजा
है।इनको ..(व्यवधान)..
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, ये कह तो
सकते हैं, पर
परतंत्र हैं।
..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष:
मुख्य सचेतक
कुछ बोलना चाह
रहे हैं।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आप
आसन पर नहीं
थे उस समय इस
विधेयक पर चर्चा
हो रही थी।
इसी दौरान कुछ
इस तरह के शब्द
कहे गये जो घोर
आपत्तिजनक ही
नहीं असहनीय
हैं और यदि वे
बाहर कहे जाएं
तो मैं समझता
हूं गदर हो
जाए। इसलिए
मैं समझता हूं
अपने कांस्टीट्युशन
में जो मैंने
पहले व्यवस्था
के माध्यम से
प्रश्न
उठाया था कि
धारा ..(व्यवधान)..
इग्लिश में
आर्टिकल 102,
हिन्दी में
अनुच्छेद 102
के ख में यदि
विकृत चित्त,
इसमें प्रयोग
किया गया है,
जो माननीय
सदस्य कौन
इसके अयोग्य
हो जाता है।माननीय
सदस्य उसमें
एक विकृत चित्त
भी है। तो कोई
भी माननीय
सदस्य जो इस
प्रकार की बात
करता है।मैं
समझता हूं
विकृत चित्त
के अलावा कोई
दूसरा व्यक्ति
नहीं हो सकता।
इसलिए मैं
प्रस्ताव
करता हूं कि
प्रक्रिया
नियम 292 के
अंतर्गत प्रस्ताव।
महोदय, आज
दिनांक 7
अप्रैल, 2006 को
सदन में राजस्थान
धर्म स्वातंत्र्य
विधेयक ..(व्यवधान)..
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
एक मिनट। अध्यक्ष
जी, आपने
प्रोसीडिंग
के लिए कहा है।..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष:
मेरे पास
प्रोसीडिंग आ
गई है।..(व्यवधान)..
मेरे पास
प्रोसीडिंग आ
गई है। ..(व्यवधान)..
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): फैसला आप
कर लें फिर यह
प्रस्ताव
बीच में ..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष:
अपना स्थान
ग्रहण कर लें।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): ये अध्यक्ष
की व्यवस्था
से संतुष्ट
नहीं है।
श्री
अध्यक्ष:
मेरे पास
प्रोसीडिंग आ
गई है।और
प्रोसीडिंग
मैं आपको
पढ़कर सुना
देती हूं।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, आपने
प्रोसीडिंग
देख ली है,
मेरा आपसे
सानुरोध
प्रार्थना है।कि
आपके चेम्बर
में हम आ जाते
हैं, एक बार
देख लेते हैं
उसके बाद
निर्णय करें
आप। ..(व्यवधान)..
एक
माननीय सदस्य:
यहां
सुनेंगे। अध्यक्षजी
पूरे सदन को
अवगत
कराएंगे।
श्री
ओम बिरला
(संसदीय सचिव):
राजस्थान की
जनता पूछेगी कि
हिन्दुओं को
चोर बताने
वाले इन कांग्रेस
के नेताओं से
राजस्थान की
जनता इनसे
सवाल पूछेगी।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अब आप
प्रोसीडिंग
पढ़कर सुना
दो।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, आप हमारा
निवेदन तो सुन
सकती हैं। अध्यक्ष
महोदय, सदन में
कोई भी कथन जो
असंसदीय या
किसी भावना
में कह दिया
..(व्यवधान)..
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): यह
असंसदीय नहीं
है, असहनीय
है। यह किसी
भी हालत में सहन
नहीं किया
जाएगा और इसका
निर्णय हाउस
के अंदर होगा।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, कितना भी
असंसदीय, असभ्य
है।यह देखने
का काम अध्यक्षजी
का है।
अनफोर्च्युनेटली
अध्यक्षजी,
आप खुद हाउस
में नहीं थे।
यह सदन चलाने
की जिम्मेदारी
भी सत्ता
पक्ष के लोगों
ने ले ली है,
इससे बड़ा
दुर्भाग्य
नहीं हो सकता।
गलती हमारी
तरफ से की
होगी, हम कब
मना कर रहे
हैं, लेकिन
सदन को आप ही
चलाएं, आप ही
फैसला करवाएं,
यह नहीं चल
सकता और आपको
करना है।तो
करवाएं, हमें
कोई तकलीफ
नहीं है। दो
चीजें नहीं हो
सकती हैं। अध्यक्ष
महोदय, जो आपने
व्यवस्था
दी कि सदन में
जो कुछ भी
चर्चा हुई मैं
देख लूंगी। आप
देख लें उसके
बाद कोई बात
हो तो हमें आपसे
बात करने में
क्या तकलीफ
है? हमें इसे
इश्यू बनाना है।क्या?
प्रस्ताव
लाने की बात
कहां से आ रही
है? ..(व्यवधान)..
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
अध्यक्ष
महोदय, किसी भी
सदस्य ने
असंसदीय,
अपमानजनक कोई
भाषा यहां पर
कही ..(व्यवधान)..
एक मिनट
तिवाड़ी जी।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): सारे
हिन्दू समाज
के लिए कहा,
सारे देवताओं
के लिए कहा,
सारे ऋषियों
के लिए कहा,
सारे
महापुरुषों
के लिए कहा।
यह क्या बात
हो गई?
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
आप विराजें एक
मिनट। आप बोलने
तो दीजिए।
श्री
घनश्याम तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): आप
विराजें, यह
क्या बात है?
क्या हम
इसलिए बैठे
हैं सारे
ऋषियों को चोर
कहेंगे?
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
आप गला तो मत
घोंटिए मेरा।
..(व्यवधान)..
Mlb/akt/2g/1340/7.5.2006
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय, आपने
प्रोसिडिंग्स
से प्रारंभ
किया था, आप
प्रोसीडिंग्स
सुना दें। ...(व्यवधान)...
आप सदन की
कार्यवाही
सुना दें। ...(व्यवधान)...
मेरी आपसे
प्रार्थना यह है।कि
सदन की
कार्यवाही
सुना दें। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: मैं
बोलूं तो तब
ना ...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): हां, वही
सुनाएं, बता
दें आप। ...(व्यवधान)...
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
माननीय
प्रद्युम्न
सिंह जी आप मत
सुनो ऐसा।
श्री
अध्यक्ष:
सुमेर से आने
वाले माननीय
सदस्य, कृपया
सुन लूं मैं
इन्हें
पहले।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):अध्यक्ष
महोदय, ....
श्री
अध्यक्ष:
हां।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
आपने पहले
यहां पर
फरमाया था कि
देखने के बाद
बताऊंगी, ठीक
है, आप महसूस करती
हैं, आसन यह
महसूस करता है।कि
सदस्य ने
अपमानजनक, आपत्तिजनक,
असंसदीय आचरण
यहां किया है,
आप उनसे शब्द
वापस लेने के
लिए कह सकते
हैं, माफी
मांगने के लिए
कह सकते हैं,
अगर आपके आदेश
की कोई अवहेलना
करे, आपके
आदेश की
अवहेलना करे
तब तो सज़ा का
प्रावधान हो
सकता है।लेकिन
उसके पहले ही,
कत्ल का जो
मुलजिम होता
है, उससे भी
अदालत पूछती है।तुझे
क्या कहना है।भाई,
उसका भी बयान
होता है, एकदम
आकर तलवार चलाने
की कोशिश करें
यह तो बड़ी
अलोकतांत्रिक
बात होगी,
अनपार्लियामेंटरी
बात होगी,
असंसदीय चीज
होगी, ऐसा तो
कभी नहीं हुआ
है, आप सत्ता
बल के आधार पर,
नम्बरों के
आधार पर आप इस
किस्म का
निर्णय
लेंगे। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: आप
बीच में क्यों
बोलते हैं ?
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
अगर आप सत्ता
बल के आधार पर,
नम्बरों के
आधार पर तो
यहां तो सदन
के अन्दर गला
घोटने वाली,
मैं गलत बात
कह सकता है,
सज़ा का
प्रावधान है, अगर
आप उससे कहें
कि आप वापस ले
रहे हैं या
नहीं अपने शब्द,
आप अपने आचरण
पर खेद प्रकट
करते हैं या
नहीं करते,
उसके बाद कोई
बात चले तो
चले और आप
उसके पहले ही
प्रस्ताव ला
रहे हैं, कोई
अनसाउंड
माइंड कह रहा
है, आप पढ़ें,
और आप अपना
निर्णय दें
उसके बाद कोई
प्रस्ताव
आएगा, पहले
प्रस्ताव
कैसे आ जाएगा?
...(व्यवधान)...
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
मैं माफी
चाहता हूं, अध्यक्ष
महोदय, मैं
महावीर जी चीफ
व्हिप साहब का
बहुत सम्मान
करता हूं और
जो आर्टिकल
कोट किया है,
अध्यक्ष
महोदय, उसका कोई
संबंध इससे
नहीं है, उसके
व्यवहार,
उसके आचरण,
उसके कथन पर
प्रस्ताव
लाने का आपको
अधिकार है।लेकिन
जो संविधान का
आपने उल्लेख
किया है, यह
डिटरमिनेशन
करने का
अधिकार हाई
कोर्ट को है,
सुओ-मोटो हाई
कोर्ट का भी
अधिकार आप ले
लें, डिक्लेयर
कर दें, यह ऐसा
आदमी है, यह तो
चीफ व्हिप साहब,
अन्याय कर
रहे हैं आप,
हाई कोर्ट का
काम आप नहीं
कर सकते
इसलिए
अध्यक्ष
महोदय, मैं फिर
निवेदन करना
चाहता हूं,
जैसा अभी राजाखेड़ा
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने कहा यदि
ऐसा कोई ऐसा
कथन है।तो आप
उसको मौका
दीजिए, आपकी
बात नहीं माने
फिर प्रस्ताव
लाएं, पहले ही
प्रिज्युडिस
हो रहे हैं,
इसका मतलब,
सुनवाई का कोई
मतलब ही नहीं है।लोकतंत्र
में ? मैं
समझता हूं कि
आप बहुमत में
हैं, बहुमत
में आपका
अधिकार है,
पास करने का,
निकालने का सब
अधिकार है।लेकिन
संसदीय परम्पराओं
में कुछ नियम
और कानून भी
हैं, कुछ यह भी व्यवस्था
है।कि कोई बात
हो गई है।तो
कैसे रास्ता
निकले, क्या
सज़ा दें,
प्रावधान क्या
है, आपके अन्दर
सब अधिकार
हैं, अध्यक्ष
महोदय, आपने देख
लिया है, यह
बात है।तो आप
निर्णय करिए
कोई कि क्या
करना है।बनिस्बत
कि प्रस्ताव
लाकर हम पहले
से ही क्यों
प्रिज्युडिस
होना चाहते हैं?
...(व्यवधान)...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
उलझना नहीं
चाहता और
कांस्टीट्यूशन
की गलत व्याख्या
भी नहीं करना
चाहता, मैं तो
केवल यही
निवेदन करना
चाहता हूं कि
यदि माननीय
सदस्य ने कोई
इस प्रकार का,
क्योंकि मैं
ऐसा मानता
हूं, यह बात
ठीक है, आपने
यह भी सही कहा है।कि
कोर्ट निश्चय
करेगा पर आप
यह जानते हैं
कि यह सर्वोच्च
अदालत है,
मैंने इसलिए
कहा है।कि यह
जो सदन है, यह
सर्वोच्च
अदालत है।और
इसके फैसले को
कोर्ट भी चेंज
नहीं कर सकता, कोर्ट
को सुनने का
अधिकार नहीं है।इसलिए
उससे बड़ी
अदालत है।और
इस बड़ी अदालत
का कोई चेलेंज
नहीं हो सकता, उस
अदालत को तो
फिर भी चेलेंज
हो सकता है।इसलिए
मैंने आपसे
निवेदन किया है।कि
जिन शब्दों
का प्रयोग
किया, आप स्वयं
देख रही हैं।
श्री
अध्यक्ष: देख
लिया मैंने।
...(व्यवधान)...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): वह स्वयं
अध्यक्ष जी
पढ़कर
सुनाएंगी।
मैं जो प्रस्ताव
लाऊंगा तो
सुनाऊंगा
इसलिए ये जो
शब्दों का
प्रयोग किया है।वह
मैं, अध्यक्ष
जी, आपसे यह भी
चाहता हूं इस
निर्णय में कि
क्या जो बात
यहां पर
संविधान में
विकृत चित्त
जो कहा गया है,
क्या विकृत
चित्त के
अलावा कोई
दूसरा व्यक्ति
ऐसे शब्दों
का प्रयोग कर
सकता है।क्या
? मैं आपसे यह
भी व्यवस्था
चाहता हूं।
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, हिन्दू
के लिए जो भी
कुछ कहा है।वह
गलत तो कहा है।लेकिन
इसको आगे क्यों
बढ़ा रहे हो?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मेरी एक
प्रार्थना
है। अध्यक्ष
महोदय, मेरी
प्रार्थना यह है।कि
आपने स्वयं
ने आसन से यह
व्यवस्था
दी कि आपने
प्रोसीडिंग्स
देख ली है, यह
सदन जानना
चाहता है, ये
सभासद जानना
चाहते हैं कि
इस
प्रोसीडिंग
में क्या क्या
है।? आपसे
इतनी ही
प्रार्थना
है।
श्री
अध्यक्ष: मैं
बताऊंगा, मैं
तो जब बताऊं
ना जब बोलने
वालों का
तांता खतम हो।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष
महोदय, आपने व्यवस्था
दे दी कि आप
प्रोसीडिंग्स
देखेंगी, क्या
कहा गया है,
अपमानजनक है।कि
नहीं,
अपमानजनक है।तो,
किस हद तक है।और
जो व्यवस्था
आप देंगी वह
व्यवस्था
बता दीजिए
उसके पहले
दूसरा प्रस्ताव
कैसे आएगा? ...(व्यवधान)...
नहीं, नहीं,
कैसे आएगा ? अध्यक्ष
की व्यवस्था
ही नहीं आई, जब
अध्यक्षीय
व्यवस्था आ जाएगा
कि यह तो
अपशब्द हैं,
ऐसा नहीं है,
इतना बड़ा एक्शन
नहीं लेना है।तो
आप कैसे लाओगे
प्रस्ताव?
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यह भी
निर्णय करने
का अधिकार तो
उनको ही है।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष की
व्यवस्था
से पहले आप
कोई प्रस्ताव
नहीं ला सकते
इस मामले में।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अध्यक्ष
जी आपको पढ़कर
सुना रही हैं।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
अगर है।तो
प्रोसीडिंग्स
में निकाल कर
आप कह सकते
हैं कि माफी
मांगो, शब्द
वापस लें,
प्रोसीडिंग
से निकाला
जाता है।
श्री
अध्यक्ष:
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य,
अब आप अपनी
बात कह चुके,
अब स्थान
ग्रहण कर लें।
मुझे माननीय
सदस्यों को,
जो
प्रोसीडिंग्स
मुझे प्राप्त
हुई है।उसको
देखने के बाद
में मैं आपको
पहले सुनाती हूं।
“श्री
महीपाल सिंह
यादव: माननीय
गृह मंत्री
जी, इस तुगलकी
विधेयक को क्यों
ला रहे हो, क्यों
धर्म से
छेड़छाड़ कर
रहे हो?‘ खैर, ये तो
कोई बात नहीं
है। ‘ये
साम्प्रदायिक
भावनाएं और
भड़केंगी,
इससे प्रदेश में
क्या फायदा
होगा, हिन्दू
धर्म के
ठेकेदार आप बन
रहे हो क्या? ये
कहा’
और उसके बाद
में जब बीच
में हीरालाल
निवाई वालों
ने कुछ कहा तो
उसके बाद
महीपाल सिंह
यादव ने कहा ‘अर्थ
भी जानते हो
हिन्दू का,
हिन्दू का
अर्थ है।गुलाम,
चोर, बदमाश।
...(व्यवधान)...
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): ये
कांग्रेस पार्टी,
बी.डी. कल्ला
ले भी इसका
समर्थन किया
है।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
मैंने कोई
समर्थन नहीं
किया, कोई समर्थन
नहीं किया।
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
सुनिए, मंत्री
जी। ...(व्यवधान)...
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): आपने
समर्थन किया
खड़े होकर
यहां पर, आपने
समर्थन किया
इस बात का। ...(व्यवधान)...
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
फालतू की बात
कर रहे हो। ...(व्यवधान)...
कोई समर्थन
नहीं किया।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): आप
खंडन करो इसका।
...(व्यवधान)...
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): ये
शब्द हमने
नहीं सुने, यह
कहा हमने।
मैंने कहा ये
शब्द हमने
नहीं सुने।
...(व्यवधान)...
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): आप
खंडन करो इसका।
...(व्यवधान)...
खंडन करो इस
बात का। ...(व्यवधान)...
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): इन
शब्दों में
हमारा कोई
विश्वास
नहीं । ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण।
एक
माननीय सदस्य:
जनता के बीच
में भी जाकर
कह कर देख लो।
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य।
...(व्यवधान)...
मैं आपको कह
रही हूं। ...(व्यवधान)...
माननीय सदस्यगण,
माननीय सत्ता
पक्ष के
माननीय सदस्यगण..
...(व्यवधान)...
प्रतिपक्ष के
माननीय सदस्यगण।
...(व्यवधान)... आप
आसन को इतना
असहाय न बनाया
करें, कई बार
एक साथ खड़े
होकर जिस
तरीके से आपस
में आप बोलते
हैं, तो आसन
बिलकुल असहाय
हो जाता है।
मैं समझती हूं
कि मेरा, आसन
का काम, कोई असंसदीय
भाषा का इस्तेमाल
कर दे तो वहां
आसन का काम है।एक्सपंज
करने का, एक्सपंज
कर दे लेकिन
यह हिन्दू की
परिभाषा कहां
से आई? मेरे यह
बात समझ में
नहीं आई, यह
सचमुच में कोई
विकृत
मानसिकता का
आदमी ही हिन्दू
की यह परिभाषा
कर सकता है।
...(व्यवधान)... आप
एक जाति को
चोर, बदमाश और
गुलाम कह रहे
हो, एक जाति विशेष
को कह रहे हो,
मैं समझती
हूं, माननीय
सदस्य, इससे
बढ़कर कोई
अपराध नहीं हो
सकता, इस सदन
के अन्दर
बैठे हुए, आप
एक जाति विशेष
के ऊपर उसको
चोर, बदमाश,
गुलाम, हिन्दू
की परिभाषा
आपने यह कर दी,
मुझे बड़ा
अफसोस है।इस
बात पर इसलिए
माननीय सदस्य,
मैं आपको क्या
सज़ा दी जाए,
मैं केवल आपको
यह कहूं कि आप
इसे एक्सपंज
करें, आपने तो
पूरी जाति का
अपमान किया है,
मैं इस बारे
में थोड़ी देर
बाद, कुछ देर
बाद व्यवस्था
दूंगी, मैं व्यवस्था
देने में इस
समय असमर्थ
हूं, मेरे दिमाग
को मुझे एप्लाई
करने दीजिए कि
मैं इस बारे
में क्या व्यवस्था
दूं, व्यवस्था
दूंगी मैं
थोड़ी देर बाद
में लेकिन यह
आपने जो कुछ
कहा है।हाइली
आब्जेक्शनेबल
है, इससे
बढ़कर सदन का
अपमान नहीं हो
सकता, किसी
जाति विशेष का
अपमान नहीं हो
सकता, जो अपमान
आपने किया है।और
मैं चाहती हूं
कि सदन निर्णय
ले इसमें कि सदन
को क्या करना
चाहिए, मैं
केवल ...(व्यवधान)...
श्री
मोहन लाल गुप्ता
(किशनपोल):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपका
निर्णय बहुत
अच्छा है,
बिलकुल नेक
निर्णय है।और
सदन ही इस
विषय में
निश्चित रूप
से निर्णय करेगा।
...(व्यवधान)...
एक
माननीय सदस्य:
नहीं बोलने
देंगे।
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): अब क्या
करें तो अध्यक्ष
महोदय? ...(व्यवधान)...
एक
माननीय सदस्य:
अध्यक्ष
महोदय, ये
अपराधी हैं,
इनको नहीं
बोलने दिया
जाए। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण।
...(व्यवधान)...
मुख्य सचेतक
महोदय, अपने
सदस्यों को
नियंत्रित
करें। ...(व्यवधान)...
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय.....
श्री
अध्यक्ष: यह
परिभाषा आपने
हिन्दू की
कहां पढ़ी थी?
...(व्यवधान)...
skp/akt/7.4.06/1350/2h/1
श्री राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आपने
अनुमति दी है।क्या
इनको ? नहीं दी
तो फिर क्यों
बोल रहे हैं ?
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, मैंने
कोई अनुमति
नहीं दी है।
(व्यवधान)
नहीं लिखें।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आपने अनुमति
नहीं दी तो
ठीक है। ये क्यों
बोल रहे हैं ?
आपने अनुमति
थोड़े ही दी है।इनको।
एक
माननीय सदस्य:
उनको बिल्कुल
नहीं
सुनेंगे। ये
माननीय शब्द
के योग्य
नहीं हैं। ये
माननीय शब्द
के योग्य
नहीं हैं।
श्री अध्यक्ष:
मैंने आपको
अनुमति नहीं
दी है। (व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
ऐसे व्यक्ति
को बिल्कुल
नहीं
सुनेंगे। (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपकी
व्यवस्था
के बाद में विकृत
सिद्ध हो चुके
हैं। (व्यवधान)
एक
माननीय सदस्य:
इनको बोलने का
अधिकार नहीं
दिया जाना
चाहिए। इनको
हम सुनेंगे भी
नहीं और ये
बोलने के योग्य
भी नहीं हैं।
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): इनको
यहां रहने का
अधिकार नहीं
है। इनको
अधिकार नहीं है।यहां
रहने का। कोई
अधिकार नहीं
है। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण
कीजिये। (व्यवधान)
अंकित नहीं।
स्थान ग्रहण
कर लें। (व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण कर लें।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री):
जिसको सदन
अपराधी मानता
है, एक अपराधी
कैसे बोल सकता
है।सदन में ?
(व्यवधान)
एक
माननीय सदस्य:
प्रद्युम्न
सिंह जी, मत
समझाओ।
प्रद्युम्न
सिंह जी, आप
समझाने की
कोशिश मत करो।
पागल को समझाने
से कोई फायदा
नहीं होगा।
(व्यवधान)
अपराधी को
बोलने का मौका
नहीं दिया
जाना चाहिए।
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
....प्रोसीडिंग
से निकालना
चाहते हैं।
श्री
अध्यक्ष: आप
कृपया स्थान
ग्रहण कर लें।
(व्यवधान)
एक
माननीय सदस्य:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, विकृत
मानसिकता के
सदस्य को
बोलने का कोई
अधिकार नहीं
है। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: मैं
इस बारे में
नहीं देती हूं
अनुमति। मैं
अपनी व्यवस्था
दूंगी उसके
पहले मैं कुछ
नहीं सुनना
चाहती।
माननीय सदस्य,
मैं चाहती हूं
कि जब तक सदन
इस पर फैसला
करे, आप कृपया
उठकर के सदन
से चले जाएं।
(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, कोई
माफी मांग रहा
है।और अपने
शब्दों को
वापस ले रहे
हैं। (व्यवधान)
एक
माननीय सदस्य:
कोई माफी
नहीं। (व्यवधान)
एक
माननीय सदस्य:
.... यह कांग्रेस
क्या चाहती है।?
(व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जो कोई
भी अपराध करता
है, अपराध करने
वाले को फांसी
की सज़ा भी
होती है।लेकिन
स्पष्टीकरण
तो मैं समझता
हूं कि किसी
भी सदन, किसी भी
अदालत में
अपराध करने
वालों को अपना
स्पष्टीकरण
देने का
अधिकार तो है।
(व्यवधान)
एक
माननीय सदस्य:
आप तो
अपराधियों को
संरक्षण देने
वाले हैं। धोद
से आने वाले माननीय
सदस्य, आप तो
अपराधियों को
संरक्षण देने
वाले हैं। (व्यवधान)
आप तो मर्डर
करने वालों को
संरक्षण देने
वाले हैं।(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): ...
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इस
प्रोसीडिंग
के बाद उन्होंने
कहा है।कि मैं
इस्तीफा दे
दूंगा। (व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपने
माननीय सदस्य
को आदेश दिया
सदन छोड़ने के
लिए तो सदन
छोड़ दिया।
मैं आपसे इतना
ही निवेदन
करना चाहता हूं
कि माननीय
सदस्य ने
किसी एक धर्म
विशेष के लिए
बहुत
अपमानजनक शब्द
कहे हैं... (व्यवधान)
एक
माननीय सदस्य:
सदन की
कार्यवाही
आगे बढ़ाई
जाए। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
बिल के लिए
कुछ भी कह
सकते हैं। (व्यवधान)
बिल के बारे
में आपको सब
बातें कहने का
अधिकार है।लेकिन
किसी जाति
विशेष को चोर,
बदमाश और
गुलाम कहने का
किसी को
अधिकार नहीं
है। (व्यवधान)
हिन्दू धर्म
को ही कह दिया।
(व्यवधान) कि
हिन्दू चोर
हैं, हिन्दू
गुलाम हैं,
हिन्दू
बदमाश हैं।
(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, सारी
प्रोसीडिंग
देखिये, इन्होंने
कहा कि
मुसलमान की औलाद
है, इनके
मां-बाप नहीं
है। उनको भी...
(व्य
वधान)
उनको भी आप
निकलवाइये।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: अब
आप स्थान
ग्रहण कर लें।
स्थान ग्रहण
कर लें। (व्यवधान)
स्थान ग्रहण
कर लें, मैं कह
रही हूं। (व्यवधान)
एक
माननीय सदस्य:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, हिन्दू
के लिए तो
सुप्रीम
कोर्ट ने कहा है।कि
हिन्दू कोई
जाति नहीं,
हिन्दू कोई
धर्म नहीं है...
(व्यवधान)
भारत की सभ्यता
और संस्कृति
है। (व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): उनको
भी निकालिये
इसमें प्रोसीडिंग
से। वो
गालियां बोल
रहे हैं उनको
आप कुछ नहीं
करो और... (व्यवधान)
उसको आप सज़ा
दे रहे हैं।
(व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
माननीय सदस्य
ने एक धर्म
विशेष के लिए
कहा है।उसके
बारे में नहीं
कह रहा हूं,
मैं कह रहा
हूं कि आपने
आदेश दिया, वो
बाहर चले गये।
(व्यवधान)
लेकिन कोई भी
अपराधी को
अपना स्पष्टीकरण
देने का तो
अधिकार है।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
कितनी
गालियां
बोलीं, अध्यक्ष
महोदय,
प्रोसीडिंग
का पूरा
अवलोकन करें और
उनको भी
विलोपित करें,
आप
प्रोसीडिंग
से उनको भी
निकालिये। (व्यवधान)
आप उसके बाद
की
प्रोसीडिंग
लाते। (व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
आप इस पर
निर्णय करने
से पहले, कठोर
से कठोर सज़ा
दें लेकिन कम
से कम आप उनकी
भावनाओं को
सुनने का उनको
मौका दें
जिससे अपनी
भावनाएं और
अपना जो कुछ
भी था उसके
बारे में... (व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): आप
उसकी बात ही
नहीं सुनना चाहते,
उसका स्पष्टीकरण
नहीं सुनना
चाहते, बहुमत
के आधार पर
हिन्दुओं का
ठेकेदार... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
प्रतिपक्ष के
नेता कुछ बोल
रहे हैं।
श्री
जोगेश्वर
गर्ग (जालौर): 98
करोड़ हिन्दुओं
का अपमान करके
उन्होंने
अपनी भावना
बता दी। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
शांत रहें,
प्रतिपक्ष के
नेता कुछ फरमा
रहे हैं। (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आप पैरवी
कर रहे हो ? आप
सही मान रहे
हो न इसको ? (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: पी
ए डी मिनिस्टर,
आपको तो ख्याल
रखना चाहिए,
प्रतिपक्ष के
नेता खड़े
हैं।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
भूल रहे हैं
सब कुछ। (व्यवधान)
आज कट्टर हो
रहे हैं
कट्टर। (व्यवधान)
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): ऐसे
आदमी की पैरवी
मत करिये जिन्होंने
90 करोड़ हिन्दुओं
का अपमान किया
है। उसकी कोई
पैरवी करने की
आवश्यकता
नहीं है। (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
आप सुनेंगे भी
क्या किसी का
? दो बात तो
सुनो।
श्री
अध्यक्ष: आप
न बोलें। आप
उन्हें
बोलने तो दें
कि क्या कहना
चाहते हैं। आप
बोलने दें उन्हें।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, सदन के
माननीय सदस्य
जिसको आपने
बाहर भेज दिया
है, जो बात कही,
एक धर्म विशेष
के मामले में,
उससे आपको
आघात लगा।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): आपको
नहीं लगा क्या?
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
बात तो सुनो।
(व्यवधान)
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री): आपको
भी लगा या
नहीं लगा? अन्तर-आत्मा
से कहिये कि
आपको भी आघात
लगा या नहीं ?
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: सत्ता
पक्ष के
माननीय सदस्य
क्यों उत्तेजित
हो रहे हैं ? प्लीज
आप सुनें।
नेता,
प्रतिपक्ष को
सुनें, बीच में
नहीं बोलें आप
और बीच में
टोकें नहीं।
बीच में नहीं
बोलें।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
इस सदन में आप
और हम
माइनोरिटी
वालों को छोड़कर
के हम
सब हिन्दू
हैं। हिन्दू
धर्म में
हमारा अटूट
विश्वास है।
हिन्दू धर्म
में अच्छाइयां
हैं लेकिन
बुराई है।वो
जातियों के
आधार पर है... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: वो
चोर भी हो गये
साथ में ? चोर,
बदमाश भी हो क्या
आप? चोर, बदमाश
हो क्या आप?
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
हमारा हिन्दू
धर्म में पूरा
विश्वास है।हम
जो हिन्दू
हैं उनका और
हम हिन्दू को
बदनाम करने
की, हिन्दू
धर्म को बदनाम
करने की हमारी
कोई मन्शा
नहीं है।और अब
आप कहो कि
कट्टर हिन्दू
कुछ की तरह जो
आपकी तरफ बैठे
हैं... (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): कट्टर
और अकट्टर है।वह
छोड़ो, उन्होंने
जो आचरण किया है।वो
ठीक किया है।क्या
? (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
मुख्य सचेतक
जी, शांति से
बैठ जाइये।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
हम सब धर्मों
का सम्मान
करते हैं। (व्यवधान)
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): आप
सुन नहीं रहे
हैं, फैसला
आपको देना है।या
इनको देना है?
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
हम सब धर्मों
का सम्मान
करते हैं,
सर्व धर्म के
मानने वाले
हैं। हिन्दू को,
मुसलिम को,
क्रिश्चियन
को, ईसाई को और
सिख को, ये जो
सब धर्म हैं
वे सब हमें
सर्वमान्य
हैं और हिन्दू
के बारे में
जो अपशब्द
कहने के जो
शब्द कहे गये
हैं, आप राज़ी
हो जाओ तो उन शब्दों
को मैं वापस
लेता हूं और
खेद व्यक्त
करता हूं। (व्यवधान)
उनके मुंह से
अनायास निकल
गया। वो कहना
कुछ चाहते थे..
(व्यवधान)
बात तो सुनो।
कहना कुछ चाहते
थे, वो कहना
चाहते थे कि
हिन्दू धर्म
में कुछ
विसंगतियां
हैं... (व्यवधान)
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): उन्होंने
कहा कि हिन्दू
चोर हैं, हिन्दू
बदमाश हैं,
हिन्दू
गुलाम हैं, यह
सारा कहा है।उन्होंने।
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
हिन्दू धर्म
को मानने वाले
चोर भी हैं... (व्यवधान)
हर धर्म के
अन्दर...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मुझे
माफ करें,
प्रतिपक्ष के
नेता, उसके
बाद जो बोले
हैं उसको भी
पढ़ लें। उनका
मतलब
जान-बूझकर उन्होंने
कहा है, उन्होंने
यह भी कहा है।कि
हां, मैं इस्तीफा
देकर के चला
जाऊंगा। (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
हर धर्म में,
मेरी बात तो
कहूंगा, आप क्यों
बोल रहे हो ? (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): ... मैं
बाहर
निकालूंगा तो
उन्होंने
कहा कि मैं
सदस्यता से
इस्तीफा दे
दूंगा और मैं
अपनी बात पर
कायम हूं। यह
भी उन्होंने
कहा है। आप
प्रोसीडिंग
पढ़ लीजिये।
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
वह तो आपने
निकाल दिया
बाहर, बाहर
निकाल दिया।
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आपने
मान लिया ?
छुट्टी हो गई।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
मानकर गये हैं
न बाहर। (व्यवधान)
बाहर चले गये
न।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): तो
मेरा प्रस्ताव
मान लो न आप।
(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
उन्होंने
माफी मांग ली,
माफी मांगने
के लिए खड़ा हुआ
और आप हल्ला
मचाने लगे। वो
माफी मांग रहा
था, उसने शब्द
भी वापस... (व्यवधान)
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): माफी
मांग ली। (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आप
उसको तोड़
मरोड़कर पेश
कर रहे हैं।
अपनी संसदीय
परम्परा में
यदि शब्दों
को तोड़
मरोड़कर कोई
पेश करता है।तो
उसके...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह (राजाखेड़ा):
वो माफी मांग
रहा था, माफी
मांग ली। (व्यवधान)
शब्द वापस ले
लिये लेकिन आप
उसको हल्ला
मचाकर बोलने
नहीं देना
चाहते थे।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): ... उसमें
दो महीने की
सज़ा है। (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं स्पष्ट
करता हूं कि
माननीय सदस्य
को उन शब्दों
का इस्तेमाल
नहीं करना
चाहिए।
श्री
अध्यक्ष:
आपके पीछे वो
ही खड़े हैं,
वो ही नहीं
मानते आपका।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
इस्तेमाल
नहीं करना
चाहिए था
लेकिन उनके
मुंह से निकल
गया और आप
उनकी बात नहीं
सुनना चाहते।
आप फांसी दे
रहे हो, फांसी
देने वाले से
भी उसकी अंतिम
इच्छा पूछते
हैं। आपने तो
फांसी से ही
ज्यादा
हुकुम दे दिया
फिर भी हमने
मान लिया, अध्यक्ष
जी ने कह दिया
बाहर चले जाओ,
हम बाहर चले गये।
यह तो कोई बात
नहीं हुई।
फांसी देने
वाले को भी
पूछते हैं,
फांसी देने का
हुकुम हो जाने
के बाद उसकी
अंतिम इच्छा
पूछते हैं।
यहां ऐसा
गुलोटिन लगा
रहे हो, उसका
गला घोंट रहे
हो, बहुमत के
आधार पर गला
घोंट रहे हो।
बहुमत तो सब
का रहा है।लेकिन
कभी ऐसा
उदाहरण आया
है? अध्यक्ष
महोदय, आप तो
बहुत पुरानी
हैं...
श्री
अध्यक्ष: आज
दिन तक कभी
किसी ने इस
तरह की बात भी
किसी धर्म के
लिए नहीं कही
है।
vkj/akt/1400/2j
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): मैं
कह रहा हूं कि
यह गलत कहा
लेकिन सुनना
तो चाहिए। मैं
मानता हूं इस
बात को कि गलत
कहा है।लेकिन
माननीय
प्रतिपक्ष का
नेता माफी
मांग रहा है,
अपराधी भी
माफी मांग रहा
है, फिर क्या
चाहते हो, आप
क्या मर्डर
करोगे उसका
और, क्या
करना चाहते
हो, बताइये
आप। मांग ली
ना माफी, बोलने
का मौका नहीं
देते, खड़े
होने की बात
भी नहीं है,
विपक्ष का
लीडर माफी
मांग रहा
है...(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
इससे भी खराब
बात, हमारे आज
के देश के
सर्वमान्य
उप राष्ट्रपतिजी
हैं, उनको स्वर्गीय
नाथूरामजी, जो
इस सभा में थे,
वह भी थे, उन्होंने
वह शब्द कहे
थे जो कोई
नहीं कह सकता
था, मैं उनको
दोहरा नहीं
सकता, अब आप क्या
कहेंगे, उनको
भी माफ किया
गया था। माफ
ही नहीं किया
गया था, उनको
इग्नोर किया
गया था। काग्नीजेंस
तक इस हाउस
में नहीं लिया
गया था, ऐसे अपमानजनक
शब्द कहे
थे...(व्यवधान)
आप बात सुनिये
मेरी। तो
देखिये जो
होगा जो बहुमत
चाहेगा। होगा
वही जो
मेजोरिटी
चाहेगी लेकिन
अल्पमत को भी
आपको सुनना
पड़ेगा। यह
पार्लियामेंट्री
डेमोक्रेसी है।और
आप यह चाहते
हैं कि हम
बहिष्कार
करके चले
जायें बाहर तो
हम लोग जा
सकते हैं। हम
लोग जायें, हम
कह दीजिये कि
हम लोग
जायें...(व्यवधान)
जब आप हमारी
बात ही नहीं
सुनना चाहते हो,
अध्यक्षजी
ने व्यवस्था
दी, हमारा
आदमी बाहर चला
गया, हमने
उसके ऊपर कोई
रीएक्शन
नहीं किया, हम
भी उठकर जा
सकते थे लेकिन
हमने समझदारी
से काम किया,
हमारी अक्ल
जैसी थी वैसा
काम किया
लेकिन हम आपसे
निवेदन कर रहे
हैं कि आप क्यों
कठोर बन रही
हैं? निकल गई
कोई ऐसी बात
उनके मुंह से।
अब आप हर बात
को मेरे सामने
मत लाइये।
मेरी बात सुनिये।
(व्यवधान)
श्री
मोहन लाल गुप्ता
(किशनपोल):
माननीय
विपक्ष के
नेताजी, क्या
कांग्रेस
पार्टी इनकी
बात का समर्थन
करती है? क्या
कांग्रेस
पार्टी से आप
इनको
निकालेंगे?
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
देखिये, बात
पर बात कहेंगे
तो उसका कोई
अंत नहीं है।
महावीरजी,
मैंने आपकी
बात को बड़े
ध्यान से
सुना है।और आप
फांसी लगाना
चाहते हो तो
वह आप लगा
सकते हो। इसकी
अपील कहीं
होती है। अगर
आप यहां फांसी
लगा दो यहां
बुलेटिन लाकर
इनको फांसी पर
चढ़ा दो, चढ़ाओ
इनको फांसी क्योंकि
आपके पास
बहुमत है,
पुलिस मंगा
लोगे चाहे,
अध्यक्ष का
आदेश है, वह भी
आप कर सकते हो
कि हमारा फैसला
है। ऐसा मत
करो। जब हमने
यह कह दिया कि
माननीय सदस्य
के मुंह से
स्लिप हो गया।
स्लिप हो
जाती है।बात।
स्लिप हो जाती
है, वह तो आपने
उनको सुना
नहीं और आप
यूं ही अपना
फैसला करते
हो।
श्री
अध्यक्ष: यह
तो स्लिप होने
वाली बात तो
नहीं है। नेता
प्रतिपक्ष, यह
तो कोई स्लिप
होने वाली बात
तो नहीं थी।
यह तो मत कहो
आप। यह मत
कहो।
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी):
माननीय सदस्य
को फांसी चढ़ा
दो, और क्या
करोगे आप, क्या
बात कर रहे हो
आप।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
फिर भी अध्यक्ष
महोदय, आपने
व्यवस्था
दे दी, वह हमने
मान ली। आपने
कह दिया कि
माननीय सदस्य,
आप विदड्रा हो
जाइये, वह
विदड्रा हो
गया। अब उसके
बाद में क्या
बाकी रह गया।
अब आप और क्या
सज़ा सुनाना
चाहते हो,
हमको बता दो,
वह तो हम भी
सोचेंगे कि
मानें कि नहीं
मानें? और
नहीं मानें तो
क्या करना
चाहिए? अब
कृपा करके
इसको यही क्लोज
करो और इग्नोर
करो। सदन में
अच्छी परम्पराएं
कायम होंगी
वरना बहुमत के
आधार पर जो भी
निर्णय
करेंगे, वह तो
माना ही जायेगा।
(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से निवेदन
करना चाहता
हूं, इस सदन के
अन्दर यह इस
प्रकार की बात
पेश की जा रही
है, जैसे कि
कांग्रेस
पार्टी कोई
हिन्दू धर्म
की विरोधी है।
हमारी हिन्दू
धर्म में आस्था
है, सम्मान है।और
हम सब हिन्दू
धर्म को मानने
वाले लोग हैं
अधिकांश यहां
पर, इसलिए यह
कहना कि
कांग्रेस
पार्टी को, यह
बात भी सही है।कि
इस राजनीति के
कारण बाहर
संदेश देने की
बात हो कि
कांग्रेस
हिन्दू धर्म
की विरोधी है।
एक माननीय
सदस्य ने कोई
बात कह दी। एक
माननीय सदस्य
ने कोई बात कह
दी, उसके लिए
वह माफी
मांगना काफी
है। (व्यवधान)
श्री
मोहन लाल गुप्ता
(किशनपोल): आप
निकलवाइये
कांग्रेस
पार्टी से। आप
कांग्रेस
पार्टी से
निकलवाइये
उनको क्योंकि
माननीय कल्लाजी
ने उनका
समर्थन किया
है। क्या
कांग्रेस
पार्टी से आप उनको
निकालने का
समर्थन करते
हैं? (व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
माफी मांग ली,
उसके बाद आप यह
आदेश देना
चाहते हैं और
बाद में अध्यक्ष
महोदय, आप
उसकी बात भी
नहीं सुनें,
उसकी माफी
मांगने से,
उसने माफी
मांगी, माफी
मांगने के लिए
खड़ा हुआ, हल्ला
मचाने लगे, आप
शोर मचाने
लगे, यह तो
उचित परम्परा
नहीं है। मेरा
आपसे निवेदन है।कि
माननीय सदस्य
की माफी को ध्यान
में रखते हुए
जो इन्होंने
अपने शब्द
वापस लिये
हैं, आप अपना
निर्णय
देंगे। आसन अपना
निर्णय दें
पहले तो।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
बहुत ही
विनम्रतापूर्वक
निवेदन करना
चाहता हूं कि
विपक्ष के
नेताजी और माननीय
प्रद्युम्न
सिंह जी ने
बात कही है।पर
मूल बात यह है।कि
न तो हम बहुमत
के आधार पर
फैसला करना
चाहते हैं, न
बहुमत के आधार
पर फैसला करके
किसी के खिलाफ
कार्यवाही
करना चाहते
हैं, ऐसा मतलब
नहीं है। उसके
सार को जब आप
पढ़ेंगे तो
पढ़ने से
हमारा जो
संविधान है, उस
संविधान की
मूल भावना के
खिलाफ यह केवल
हिन्दुओं का
नहीं हैं, इस
देश में रहने
वाले सभी लोगों
के खिलाफ इन
शब्दों का
प्रयोग हुआ है।क्योंकि
सर्वोच्च न्यायालय
ने एक फैसला
किया जिसमें
लिखा है।कि
हिन्दुत्व
का मतलब क्या
है? उस हिन्दुत्व
के मतलब में
मुसलमान भी
शामिल हैं,
ईसाई भी शामिल
हैं, बौद्ध भी
शामिल हैं। इस
देश में जो परम्परा
पैदा होकर आज
मानव जाति के
काम में आ रही
है, उस चीज का
नाम हिन्दुत्व
है। उस हिन्दू
को सारे को
चोर कह देना,
उस हिन्दू के
सारे
देवी-देवताओं
को चोर की
श्रेणी में
खड़ा कर
देना...(व्यवधान)
आप सुनो तो
सही।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): .... इनके
नेतृत्व में
हिन्दू को
चोर कहा है।क्या?
इनके शब्दों
को तो आप
प्रोसीडिंग्स
से बाहर
निकालिये।
उन्होंने
कहा कि
मुसलमान की
औलाद हो। किसी
ने कहा कि
तेरे मां-बाप
मुसलमान हैं।
उन सबको बाहर
निकालिये। (व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): आप
बात तो सुनो।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): ...इन
शब्दों पर
सदन को आपत्ति
नहीं हुई, उस
समय तब आप हिन्दू
नहीं थे?
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, विपक्ष
के नेता
महोदय...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
तिवाड़ी साहब,
यह देवी-देवताओं
की और
ऋषि-मुनियों
की बात आप
कहां से लेकर
आये। जब यह
प्रोसीडिंग
में नहीं है।और
कहा नहीं है।तो
आप यह कहां से
लाये हैं
प्रोसीडिंग? आप
बिना मतलब के
खुद की मर्जी
से शब्द ला
रहे हो यहां
पर, अपने
विचार थोंपना
चाहते हो आप।
(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): ...आज तक
इस पर
कार्यवाही नहीं
की। मैंने
इनको पूरी
किताब पेश की है।जिसमें
इनके शिवजी,
ब्रह्माजी,
विष्णु, सबके
खिलाफ
गालियां लिखी
हैं और अपशब्द
लिखे हैं।
मैंने माननीय
गृह मंत्रीजी
को दी है। क्या
कार्यवाही की है।आपने
10 दिन में? आज तक
कोई
कार्यवाही
नहीं की और एक
हिन्दू शब्द
की बात कह दी,
उसने माफी
मांग ली, क्या
आप गला काटोगे
उसका? आप
माननीय सदस्य
का गला काटोगे
क्या? (व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): अब आप
इसको बढ़ाना
चाहते हो या
मिटाना चाहते
हो? आप इनको
बैठाओ ना अध्यक्ष
महोदय। न तो
कोई गला काटना
चाहता है। माहिर
साहब, बैठिये
आप।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): नहीं अध्यक्ष
महोदय, हम तो
यह समझ पा रहे
हैं कि आप
प्रोवोक करके
इस बिल को
हमको वाक-आउट
कराके पास
करवाना चाहते
हो। अगर यही
मंशा है।तो हम
इस पर राय
नहीं दें तो
आपकी मर्जी की
बात है। जब
नेता
प्रतिपक्ष ने
कह दिया, अध्यक्षजी
ने व्यवस्था
दे दी, फिर आप
इसको री-ओपन
करके, नहीं आप
आखिर इसको
री-ओपन करके
क्या कह रहे
हो? (व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जब
नेता
प्रतिपक्ष
ने...
श्री
अध्यक्ष:
मैंने अपनी व्यवस्था
अभी नहीं दी
है। केवल
मैंने उन्हें
बाहर जाने को
कहा है। व्यवस्था
नहीं दी मैंने
अभी। (व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): माननीय
सदस्य ने
आपके आदेश को
माना।
श्री
अमराराम (धोद):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आदेश
तो दिया है।आपने।
आपने कहा कि
बाहर चले जाओ।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): अगर इस
बिल को पास
कराना ही उद्देश्य
है।तो आपकी
मर्जी की बात है।तो
हो गया इसमें।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
बोल रहा हूं।
अध्यक्ष
महोदय, मैं
बोल रहा हूं।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): ...तो आप भत्तों
का बिल पास
कराना चाहते
हो, इसके लिए
कोई राजनीति
करते हैं क्या?
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
मैंने सारे
हालात का
वर्णन कर
दिया। हम सब
हिन्दू हैं।
हिन्दू धर्म
में, सब
धर्मों में
हमारी आस्था
है। अपमान
करने की कोई
बात ही नहीं
थी। माननीय
सदस्य के
मुंह से स्लिप
हो गई, आपने
उसको विदड्रा
करने के लिए
कह दिया...(व्यवधान)
अब मान्यवर,
ऐसा मालूम
होता है।कि
सत्ता पक्ष
नहीं चाहता कि
हम इस डिबेट
में पार्टिसिपेट
करें तो हम भी
अब शेष अवधि
के लिए यहां से
विदड्रा हो
रहे हैं, जय
हिन्द।
श्री
अध्यक्ष:
पधारो,
विदड्रा कर लो
आप।
(कांग्रेस
पार्टी के
माननीय
सदस्यों
द्वारा सदन से
बहिर्गमन)
श्री
घनश्याम तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): आप
हिन्दू धर्म
के खिलाफ कहे
गये शब्दों
में समर्थन
में वापस बाहर
जा रहे हैं।
(व्यवधान) श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): यह बहिर्गमन
यह माना
जायेगा कि
जिन्होंने
हिन्दू धर्म
का अपमान किया
है...(व्यवधान)
पूरी कांग्रेस
पार्टी हिन्दू
धर्म का अपमान
करने वाले
माननीय सदस्य
के समर्थन में
बहिर्गमन कर
रही है। (व्यवधान)
जिन्होंने 38
करोड़ हिन्दुओं,
38 करोड़ लोग
जिस धर्म को
अपना रहे हैं,
जो हिन्दुस्तान
की पवित्र आत्मा
है, उस आत्मा
पर चोट करने
वाले माननीय
सदस्य है,
उसका समर्थन
करने के लिए
कांग्रेस
पार्टी बहिर्गमन
कर रही है। (व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): अध्यक्षजी
ने व्यवस्था
दे दी, यह क्या
बात हुई, आप
हमारी बात ही
नहीं सुनना
चाहते। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
श्री हरिमोहन
शर्मा जी गये,
श्री बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण) गये,
डा. सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा)
गये, डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर)
गये, डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर)
गये, डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर)
गये। श्री मदन
राठौड़।
देखिये,
तीन बजे तक
करना है।अपने
को, इसलिए
मेरी आपसे
गुजारिश है।कि
अब आप इसको
विदड्रा कर
लें तो ठीक
रहेगा।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मुझे
और कुछ नहीं
कहना हैं, मैं
तो विदड्रा
करने के लिए
ही खड़ा हुआ
हूं।
श्री
अध्यक्ष: ठीक
है।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
विदड्रा तो
करने दा, विदड्रा
कर रहा हूं।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: अब
आप बीच में क्यों
बोल रहे हैं।
श्री जोगेश्वर
गर्ग (जालौर)।
श्री
जोगेश्वर
गर्ग (जालौर):
मैं इस प्रस्ताव
को वापस लेता
हूं।
श्री
अध्यक्ष: श्री
शंकर सिंह
राजपुरोहित
(आहोर)। डा.
जालम सिंह रावलोत
(शिव)। श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी)।
श्री
शंकर सिंह
राजपुरोहित
(आहोर): मैं इस
प्रस्ताव को
वापस लेता
हूं।
डा.
जालम सिंह
रावलोत (शिव):
मैं इस प्रस्ताव
को विदड्रा
करता हूं।
श्री
अध्यक्ष:
श्री अमराराम
धोद। (व्यवधान)
अब बीच में मत
बोलो आप।
श्री
अमराराम (धोद):
माननीय अध्यक्ष
महोदय...
श्री
अध्यक्ष: तीन
बजे तक माननीय
सदस्य अपने
को करना है।इसलिए
बहुत संक्षेप
में, बहुत
संक्षेप में
अपनी बात
कहें।
श्री
अमराराम (धोद):
अभी तो दो बजे
हैं अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अध्यक्ष: तो
तीन बजे तक तो
एक और करना है।ना।
एक बिल और
करना है।पास।
तीन बिल हैं
अभी। तीन बिल
और पास करनेहैं।
एक ही नहीं है,
तीन हैं।
kas\akt\7-4-06\1410\2k
श्री
अमराराम (धोद):
अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
धर्म स्वातंत्र्य
विधेयक, 206 को
जनमत जानने के
लिये मैंने
प्रस्ताव
दिया । यह जो
विधेयक लाया
गया है, जो
कारण बताये
गये हैं कि
इससे राजस्थान
में विभिन्न
धर्मों के बीच
में बडी व्याधि
पैदा हो रही है।और
उनके लिये आपस
में कानून व्यवस्था
की स्थिति खडी
हो रही है,
जबकि असलियत
यह है।कि
राजस्थान
में आज तक कोई
भी बलात रूप
से प्रलोभन
देकर, डराकर
कोई भी आज तक
धर्म
परिवर्तन
नहीं हुआ है।।
लेकिन सरकार
जिस मानसिकता
से आरएसएस के
हिडन एजेंडा
के अनुसार अल्पसंख्यकों
के प्रति जो
नजरिया रखती है।उनको
भयभीत करने के
लिये इस
विधेयक को
लेकर आई है।।
जहां संविधा
में किसी भी
व्यक्ति को
अपने धर्म को
मानने में,
उसको प्रचारित
करने में सब
कुछ स्वतंत्रता
है, बोलने की
धर्म को मानने
की, धर्म का
प्रचार करने
के लिये लेकिन
उन अल्पसंख्यकों
के प्रति एक
द्वेषपूर्ण
कार्यवाही
करने के लिये
जिस तरह से
राजस्थान
में पिछले
सालों से अल्पसंख्यक
समुदाय विशेष
तौर से क्रिश्चन
के खिलाफ जिस
तरह का माहौल
बनाया जा रहा
है, जिस तरह से
उनके धार्मिक
आयोजनों पर
बलात हमला
किया जा रहा
है, एक बहाना
बनाकर पूरे
राजस्थान के
क्रिश्चन जो
बहुत ही कम
संख्या में है,
शायद अल्पसंख्यकों
में भी सबसे
कम संख्या
में है।जो अल्पसंख्यक
हैं उनके
खिलाफ जिस तरह
का माहौल बनया
जा रहा है,
उनको
प्रताडित किया
जा रहा है,
उनको अपनी
आवाज बुलंद
करने से रोकने
का राजस्थान
में प्रयास
किया जा रहा
है, उनकी संस्थाओं
पर तोडफोड की
जाती है।। मैं
समझता हूं यह
विधेयक उसी की
परिणति के रूप
में लाया जा
रहा है।कि किस
तरह से उनको
प्रताडित
किया जा सके,
किस तरह से
उनको अपमानित
किया जा सके
इस विधेयक की
मूल मानसिकता
यह है।। वरना
किसी भी व्यक्ति
को अपना धर्म
मानने, प्रचार
करने की पूर्ण
स्वतंत्रता है।लेकिन
इसके माध्यम
से उन लोगों
को प्रताडित
करने के लिये
यह विधेयक
लाया गया है।।
मैं समझता हूं
अगरी कहीं हो
भी रहा है।तो
निश्चित रूप से
आम जनता की
राय ली जानी
चाहिये, इसको
प्रचारित
किया जाना
चाहिये आम
लोगों के बीच
में लाकर क्योंकि
आज इस तरह की
कोई स्थिति
राजस्थान
में नहीं है।अल्पसंख्यक
समुदाय को
प्रताडित
करने के लिये
यह विधेयक
लाया गया है।।
मैं इसका पुरज़ोर
शब्दों में
विरोध करता
हूं और उम्मीद
करता हूं कि
सरकार इसको
जनमत जानने के
लिये तीन
महीने के लिये
प्रचारित
करेगी,
।
श्री
अध्यक्ष: श्री
जयराम जाटव,
प्लीज वापस
ले लें ।
श्री
जयराम जाटव
(खैरथल): अध्यक्ष
महोदय, मैं इस
प्रस्ताव को
वापस लेता हूं।
श्री
अध्यक्ष:
श्री दाताराम
गुर्जर, आप भी
ले लें ।
श्री
दाताराम गुर्जर
(खेतड़ी): अध्यक्ष
महोदय, मैं अपने
प्रस्ताव को
वापस लेता हूं
।
श्री
अध्यक्ष:
श्री रामचन्द्र
सराधना
(अनुपस्थित)
श्री सुभाष
चन्द्र
शर्मा, प्लीज
आप भी ।
श्री
सुभाष चन्द्र
शर्मा
(कोटपूतली): अध्यक्ष
महोदय, मैं एक
शब्द में ही
कह रहा हूं ।
अध्यक्ष
महोदय, इस प्रस्ताव
को तो मैं
वापस लेना
चाहता हूं
आपकी अनुमति से
पर मैं एक
निवेदन करना
चाहता हूं कि
इस सदन में
जिस प्रकार का
माहौल हम देख
रहे हैं, आप
सम्माननीय
हैं, आसन सबसे
बड़ा है।और आप
लोगों का जो
मार्गदर्शन
और जो आदेश
होते हैं वह
निश्चित रूप
से इस सदन के
सभी माननीय
सदस्यों को
माननीय है।।
जिस प्रकार से
आज माहौल बना
और पिछले डेढ
महीने में सदन
में जैसा
माहौल रहा, आज
के माहौल में
जिस तरह से
बानसूर से आने
वाले माननीय
सदस्य ने जो
हिन्दू शब्द
के खिलाफ और
हिन्दुओं के
खिलाफ जिस
प्रकार की
टिप्पणी की
वह अशोभनीय
है, मैं उसकी
निंदा करता हूं
। लेकिन
निश्चित रूप
से मैं यह भी
कहना चाहूंगा
कि सदन में कई
प्रकार से
बहुत सारे
माननीय सदस्यों
ने किसी ने
हिन्दू की
औलाद, किसी ने
मुसलिम की
औलाद, किसी ने
ईसाई की औलाद
और किसी ने
कुछ शब्द इस
तरह से कहे ।
आपस में यह
माननीय सदस्यों
के लिये
अशोभनीय
बातेंहैं।
अध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहता हूं इस
बात के लिये
कि इस सदन का
गरिमापूर्ण
वातावरण बने
और गरिमापूर्ण
माहौला बना
रहे और सदन
चाहता है, जिस
प्रकार से
सरकार चाहती है।निश्चित
रूप से वह
कार्यक्रम
किया जाये
लेकिन
गरिमापूर्ण माहौल
में यह माहौल
होना चाहिये ।
जैसा यहां सदन
में हुआ और जो
बातें सामने
आई लगता है।इससे
निश्चित रूप
से सदन को भी
खेद हुआ और
पूरे माननीय
हिन्दू समाज
के लोगों को
भी पीडा होगी
। लेकिन फिर भी
हिन्दू समाज
बड़ा उदार दिल
रखता है।और
हमारा सदिया
से .. (व्यवधान)
आप मेरी बात
को तो सुनो
मैं क्या कह
रहा हूं, आप
वैसे ही बोले
जा रहे हो । आप
बोलने पर
पाबंदी थोडे
ही लगा सकते
हो । मैं भी हिन्दू
हूं, मैं आपसे
ज्यादा
समर्थक हूं
हिन्दुओं का,
आप बात कह रहेहैं।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
बीच में नहीं
बोले ।
श्री
सुभाष चन्द्र
शर्मा
(कोटपूतली):
मेरा आशय इस
बात का नहीं है।कि
किसी गल्ती
करने वाले को
बचाया जाये,
मेरा आशय इस
बात का है।कि
इस सदन में गरिमापूर्ण
वातावरण
बनाने की जिम्मेदारी
हम सभी सदस्यों
की है।। यहां
जो भी सदस्य
बोले वह बहुत
जिम्मेदारी पूर्वक
बोले, बहुत
समझदारी
पूर्वक बोले ।
किसी के ऊपर
टीका टिप्पणी,
डाइरेक्ट
किसी के मां
बाप को
ललकारना, किसी
के खून को ललकारना
या किसी के
समाज को
ललकारना या
किसी के धर्म
को ललकारना इस
प्रकार की जो
टीका टिप्पणी
सदन में हमारे
माननीय सदस्य
करते हैं
निश्चित रूप
से यह सदन के
लिये और स्वस्थ
लोकतंत्र के
लिये भी किसी
भी प्रकार से
हित में नहीं है।।
मैं निवेदन
करूंगा कि
आपके आसन पर
विराजमान रहते
हुए हम इन
गरिमापूर्ण
आपके आदेशों
की पालना
करेंगे और
निश्चित रूप
से सभी समाजों
की एक दूसरे
के प्रति भावना
जागृत होगी,
एक दूसरे को
जोडने का काम
करेंगे जो
हमारे हिन्दुस्तान
की संस्कृति
रही है।। इसी
के साथ मैं
मेरा प्रस्ताव
वापस लेता हूं
।
श्री
अध्यक्ष: डा.
एन.एस.गुर्जर,
ले लें वापस ।
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
प्रस्ताव
वापस लेता हूं
।
श्री
अध्यक्ष:
श्री टीकमचंद
कान्त, आप भी
वापस ले लें ।
श्री
टीकम चन्द
कान्त
(सिवाना): अध्यक्ष
महोदय, मैंने
प्रस्ताव
दिया था प्रवर
समिति को
निर्दिष्ट
करने के लिये
। मैं इस पर
थोडी व्यापकता
चाहता था ।
हालांकि मैं
प्रस्ताव
वापस ले रहा
हूं लेकिन
यहां धर्म
परिवर्तन के
साथ राष्ट्र
के प्रति
श्रद्धा भी
परिवर्तित हो
जाती है।। इसी
कारण मैं
चाहता था कि
यह थोडा व्यापक
हो क्योंकि यहां
सिर्फ धर्म
परिवर्तन
नहीं होता ।
सिर्फ आध्यात्मिक
संबंधों में
तो हम स्वतंत्र
है।भगवान के
प्रति व्यक्ति
किसी भी
प्रकार की
श्रद्धा रखे
लेकिन यहां
धर्म परिवर्तन
के साथ जब
राष्ट्र के
प्रति भावना
भी परिवर्तित
हो जाती है।इसलिए
इस देश को
खतरा रहता है।।
इसी कारण मैं
चाहता था कि
यह विधेयक व्यापक
बनकर आये ताकि
इस देश में इस
देश की सुरक्षा
भी हो सके ।
अध्यक्ष
महोदय, डा.अम्बेडकर
की बात कहना
चाहूंगा ।
डा.अम्बेडकर
मैं कहता हूं
वास्तव में
एक हिन्दू थे
और हिन्दू
समाज को ही
सर्व रूप से
वह सुधारना
चाहते थे ।
लेकिन उन्होंने
कहा कि कहीं
थोडी बहुत जो
जडवादिता है।इसमें
सुधार नहीं आ
रहा है।तो मैं
धर्म
परिवर्तन
करूंगा लेकिन धर्म
परिवर्तन की
बात जब उन्होंने
कही तो
हैदराबाद के
नवाब से लगाकर
सारे के सारे
इस्लामिक
देशों के
लोगों तक ने
यह कहा कि
डा.अम्बेडकर
इस्लाम
ग्रहण करें और
ठेठ वेटिंग्टन
सिंटी से पोप
पोल का यह
समाचार आया कि
डा.अम्बेडकर
ईसाई बन जाये
। डा.अम्बेडकर
ने धर्म
परिवर्तन के
साथ वह इतने
बडे राष्ट्रवादी
थे उन्होंने
कहा कि मैं
धर्म परिवर्तन
जरूर करूंगा
लेकिन मैं
अपना श्रद्धा
केन्द्र
वेटिंग्टन
सिंटी नहीं
बनाऊंगा और न
मैं मक्का
बनाऊंगा । उन्होनं
जो धर्म
परिवर्तन कर
रहे थे उन
लोगों से भी
कहा कि आप
अपना धर्म
परिवर्तन कर
कुछ नहीं कर
रहे हो सिर्फ
कुछ ज्यादा
संख्या में
अपने सिर
वेटिंग्टन
सिंटी की तरफ
झुका रहे हो
या मक्का की
तरफ झुकाने की
सिर्फ संख्या
बढा रहे हो ।
इससे देश का
भला नहीं
होगा, इससे
समाज का भला
नहीं होगा ।
धर्म
परिवर्तन मैं करूंगा
इस देश के
जितने भी धर्म
थे उन धर्मों
का उन्होंने
अध्ययन किया,
शास्त्रों का
अध्ययन किया
और उसके बाद
कहा जिस धर्म
की जडे इस देश
से जुडी हुई
हैं, जिस धर्म
का श्रद्धा
केन्द्र
भारत देश है।उस
भारतीय धर्म
को ग्रहण
करूंगा और उन्होंने
उस बौद्ध धर्म
को ग्रहण किया
जो भारत का
धर्म थ, जिसकी
जडे इस भारत
में थी ।
इसलिए महान
राष्ट्रवादी
डा.अम्बेडकर
थे । सिरोही
से आने वाले
माननीय सदस्य
बता रहे थे
उनकी बात के
जवाब के रूप
में मैं कहना
चाह रहा था और
मैं चाहता भी
हूं कि यह
विधेयक आये
इसलिए प्रवर
समिति को
निर्दिष्ट
करने के लिये
मैंने जो प्रस्ताव
दिया था उसे
वापस लेने की
मैं आपसे
आज्ञा चाहता हूं,
धन्यवाद ।
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न यह है।कि
राजस्थान
धर्म स्वातंत्र्य
विधेयक, आप
उत्तर देंगे,
आप बाद में दे
दीजिए इस स्टेज
को तो पास
होने दीजिए ।
प्रश्न
यह है।कि
राजस्थान
धर्म स्वातंत्र्य
विधेयक, 2006 को
जनमत जानने
हेतु
प्रचारित
किया जाये ?
(अस्वीकृत)
विधेयक
को जनमत जानने
हेतु
प्रचारित
करने का
संशोधन प्रस्ताव
अस्वीकार
किया गया ।
Bhs/akt/6.9.2006/2l/1420
प्रश्न
यह है।कि
राजस्थान
धर्म स्वातंत्र्य
विधेयक, 2006 को
प्रवर समिति
को निर्दिष्ट
किया जाए?
(अस्वीकृत)
विधेयक
को प्रवर
समिति को
निर्दिष्ट
करने का
संशोधन प्रस्ताव
अस्वीकार
किया गया।
प्रश्न
यह कि राजस्थान
धर्म
स्वातंत्र्य
विधेयक, 2006 को
विचारार्थ
लिया जाए?
(स्वीकृत)
विधेयक
को विचारार्थ
लिया गया।
खण्डश:
विचार
खण्ड-2
प्रभारी
मंत्री ।
संशोधन रखा है।आपने।
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): खंड-2
संशोधन के
उपखंड ग में स्पष्टीकरण
के विद्यमान
अभिव्यक्ति
अपने
पूर्वजों का,
के पश्चात और
अभिव्यक्ति
धर्म
अभिप्रेत है,
के पूर्व शब्द
‘मूल’
प्रस्थापित
किया जाए।
वैसे
यह आपका था न
आप बोलें न।
श्री
अध्यक्ष:
श्री जोगेश्वर
गर्ग।
तो आपका तो
मान लिया फिर
आप क्या
बोलेंगे? मान
रहे हैं न ये।
अब इन्होंने
मान तो लिया।
श्री
जोगेश्वर
गर्ग (जालौर):
एक मिनट।
श्री
अध्यक्ष: 2.21 हो
गये हैं।
श्री
जोगेश्वर गर्ग
(जालौर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह
संशोधन क्यों
लाना पडा उसके
संबंध में मैं
एक मिनट केवल
आपका लेना
चाहूंगा।
मेरे पूर्वज
कोई सात पीढ़ी
पहले बृटिश
फौज में सुबेदार
थे सिरोही
जिले के
शिवगंज में
छावनी थी वहां
रहते थे । चार
बेटे थे । एक
बेटे को किसी
दिन जोरदार
डांट दिया
फौजी स्टाइल
में तो
वो नाराज होकर
घर से चला गया।
आठ-दस साल बाद
जब वो लोट कर
आया तो पता
नहीं किस
परिस्थिति
में वो इस्लाम
धर्म ग्रहण कर
चुका था और
अपने साथ बीवी
बच्चे भी
लेकर आया और
आकर के माफी
मांगी कि मुझे
वापस ले लो
मैं वापस हिन्दू
बनने को तैयार
हूं, मेरी पत्नी
भी तैयार है।लेकिन
वो फौजी थे
मेरे दादाजी
वो नहीं माने
और वो इस्लाम
में रह गये और
उनके बाल बच्चे
भी आज तक
वो इस्लाम
धर्म के
अनुयायीहैं।
मान लीजिये
किसी दिन हम
लोग जाकर कहें
उनसे, उनसे
निवेदन करें
और उस लहू को
पुकारें और हम
उनसे कहें कि
भई आ गले लग जा
और उनका भी
मानस बन जाए और
वो भी लोट कर
आने को तैयार
हो जाएं, ऐसी
परिस्थिति
में यह कानून
किसी दिन उनके
आड़े आ सकता था
और इसलिए वो
परिस्थिति
नहीं बने और
सहजता से ऐसा
कोई भी होना
हो परिवर्तन
तो वो सहजता
से हो सके
उसके लिए यह
शब्द अन्दर
स्थापित
करना बहुत
आवश्यक था और
उसके लिए
मैंने प्रस्ताव
किया था और
मुझे बहुत
खुशी है।कि
सरकार ने मेरे
प्रस्ताव को
मेरे सुझाव को
स्वीकार
किया है।और
इसलिए मैं
सरकार का धन्यवाद
करता हूं और
आपने अवसर
दिया उसके लिए
धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न यह है।कि
खण्ड -2 में जो
संशोधन
प्रभारी
मंत्री ने
प्रस्तुत
किया है।उसे
स्वीकार
किया जाए?
(स्वीकृत)
संशोधन
स्वीकार
किया गया।
प्रश्न
यह है।कि खण्ड-2
संशोधित रूप
में स्वीकार
किया जाए?
(स्वीकृत)
खण्ड-2
संशोधित रूप
में स्वीकार
किया गया।
खण्ड-3
–
कोई संशोधन
नहीं।
प्रश्न
यह है।कि खण्ड-3
स्वीकार
किया जाए?
(स्वीकृत)
खण्ड-3
स्वीकार
किया गया।
खण्ड-4
प्रभारी
मंत्री
संशोधन प्रस्तुत
करेंगे।
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली):
अध्यक्ष
महोदय, मैंने भी
...।
श्री
अध्यक्ष: हां
आपने भी लेकिन
पहले प्रभारी
मंत्री । श्री
गुलाबचन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): आपने
रखा, मैं स्वीकार
कर रहा हूं। आपने
रखा वो स्वीकार
कर रहा हूं।
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली):
हां ठीक है।
श्री
अध्यक्ष:
श्री शातिलाल
चपलोत और श्री
शंकरसिंह राजपुरोहित
का संशोधन है।जिसको
प्रभारी
मंत्री स्वीकार
कर रहे हैं।
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): खण्ड-4
के विद्यमान
उपबंधों के
उपखण्ड-1 के
रूप में
पुनर्ख्यापित
किया जाए और
इस प्रकार
संख्याकित
के उपखण्ड-।
के पश्चात
निम्नलिखित
उपखण्ड
जोड़ा जाए
अर्थात 2. तत्समय
पृवृत्त
किसी भी अन्य
विधि में अन्तर्विष्ट
किसी बात के
होने पर भी
राजस्थान
सोसायटी
रजिस्ट्रेशन
अधिनियम, 1958, 1958 का
अधिनियम संख्या-28
या राजस्थान
लोक न्यास
अधिनियम, 1959, 1959 का
अधिनियम
संख्या-42 के
अधीन रजिस्ट्रीकृत
किसी भी निकाय
का रजिस्ट्रीकरण
रद्दकरणीय
होगा यदि वह पाया
जाता है।कि
निकाय की
निधियों का
उपयोग
संपरिवर्तन
के लिए किया
गया है।या
किया जा रहा है।या
किया जाना
अनुज्ञात है।
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न यह है।कि
खण्ड-4 में जो
संशोधन
प्रभारी
मंत्री ने
प्रस्तुत
किया है।उसे
स्वीकार
किया जाए?
(स्वीकृत)
संशोधन
स्वीकार
किया गया।
प्रश्न
यह है।कि खण्ड-4
संशोधित रूप
में स्वीकार
किया जाए?
(स्वीकृत)
खण्ड’4
संशोधित रूप
में स्वीकार
किया गया।
खण्ड-5
एवं 6 –
कोई संशोधन
नहीं।
प्रश्न
यह है।कि खण्ड-5
एवं 6 स्वीकार
किये जाएं?
(स्वीकृत)
खण्ड-5
एवं 6 स्वीकार
किये गये।
खण्ड-1
अधिनियमन
सूत्र, नाम
आदि –
कोई संशोधन
नहीं।
प्रश्न
यह है।कि खण्ड-1
अधिनियमन
सूत्र, नाम
आदि स्वीकार
किए जाएं?
(स्वीकृत)
खण्ड-2
अधिनियमन
सूत्र, नाम
आदि स्वीकार
किये गये।
पारित
करने का प्रस्ताव
करें।
विधेयक
का पारण
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं आपकी
अनुमति से
प्रस्ताव
करता हूं कि राजस्थान
धर्म
स्वातंत्र्य
विधेयक, 2006 को
संशोधित रूप में
पारित किया
जाए।
श्री
अमराराम (धोद):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जिस
प्रस्ताव के,
जिस भावना से
लाया गया है।और
राजस्थान की
सरकार बहुमत
के आधार पर आम
जनता की
भावनाओं को
सदन में नहीं
रखने देना
चाहती इसलिए
मैं आपके माध्यम
से कहना चाहता
हूं कि इस सदन
का मैं इस
प्रस्ताव और
इस विधेयक के
खिलाफ वाकआउट
करता हूं।
(
माननीय सदस्य
श्री अमराराम
(धोद) द्वारा
सदन से
बहिर्गमन। )
श्री
गुलाबचन्द कटारिया
(गृह मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय, यह केवल
एक भ्रम है।मैं
सोचता हूं कि
बिल का नाम ही
धर्म
स्वातंत्र्य
बिल है।यह
किसी एक धर्म
की स्वतंत्रता
के लिए नहीं है।इसमें
सभी प्रकार के
धर्म समाहित
हैं अगर कोई भी
किसी भी धर्म
में लोभ से,
लालच से, कपट
से, छल से, दबाव
से अगर धर्म
परिवर्तन
करने का
प्रयास करेगा तो
उसके साथ यही
दण्ड है।सबके
लिए किसी अलग
अलग धर्म के
परिवर्तन के
लिए कोई अलग
अलग दण्ड का
कोई प्रावधान
नहीं किया है।और
यह कोई हम
पहली बार लाये
ऐसा नहीं है।
यानी हिन्दुस्तान
में अब तक यह
छठे राज्य
में हम ला रहेहैं।
मध्यप्रदेश के
पहले उड़ीसा
में 1967 में यह ला
चुके थे । 1968 में
मध्य प्रदेश
में आया।
तमिलनाडू में
2002 में आया, गुजरात
में 2003 में आया
और छत्तीसगढ़
में 2005 में आया
और अब 2006 में हम
राजस्थान
में इस कानून
को ला रहे हैं
लाने के पीछे
जो मंशा है।वो
केवल इतनी है।कि
कोई अगर स्वेच्छा
से, समझ से, अपनी
बुद्धि से अगर
अपने धर्म को
स्वीकार
करना चाहे तो
हमें कोई
एतराज नहीं है।लेकिन
किसी तरह से
षडयंत्रपूर्वक
उसकी गरीबी
का, उसकी
अशिक्षा का या
उसके अभावों
का लाभ उठाकर
अगर कोई इस
प्रकार का काम
करेगा तो उसे
जरूर हम इस
कानून के तहत
रोकने का काम
करेंगे। जिसके
कारण से मैं
सोचता हूं कि
लगभग सभी राज्यों
में जिस
प्रकार के
प्रावधान हैं
उनमें से कोई
नया परिवर्तन
हमने नहीं
डाला । जैसा
माननीय सदस्य
ने कहा कि
हमारी स्वतंत्रता
के अधिकार पर
इसमें रोक है।मैं
सोचता हूं कि
इस मध्य
प्रदेश और
उड़ीसा के
कानून पर पहले
ही कोर्ट में
केस जा चुका है।मैं
चूंकि ज्यादा
समय नहीं लेना
चाहता एक
विधेयक और अभी
आपके सामने
विचाराधीन है।और
उसमें
सुप्रीम
कोर्ट ने...।
श्री
अध्यक्ष: तीन
हैं अभी
विचाराधीन।
तीन और हैं।
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
सुप्रीम
कोर्ट ने जो
जजमेंट दिया
था जिस जजमेंट
का मावली से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने यह कहा था
कि इसमें कोई
स्वतंत्रता
का किसी भी
प्रकार से कोई
हनन नहीं हो
रहा है।। किसी
प्रकार को कोई
हनन इसमें से
नहीं है।न
सुप्रीम
कोर्ट के
फैसले में भी
कोई एक जज
नहीं चीफ
जस्टिस से
लेकर
पाँच जजों का
एक बोर्ड बैठा
है।और उस
बोर्ड में उन्होंने
उड़ीसा और मध्य
प्रदेश के इस
कानून के
खिलाफ जो गये
थे और जो फैसला
वहां की
हाइकोर्ट ने
किया उसको उन्होंने
अपहेल्ड
किया और यह
कहा कि नहीं
इससे किसी भी
प्रकार का
हमारा स्वतंत्रता
का जो अधिकार है।सैक्शन
-25 के तहत उसमें
किसी भी
प्रकार का
इसमें हनन नहीं
होता है।
Jkj/akt/1430/2m/07042006
और
इस तरह से
आपने देखा
होगा कि धर्म
स्वात्रंत्य
बनाने का राज्य
सरकार को है।कि
नहीं, इस बारे
में कहा कि
राज्य सरकार,
तो इस बारे में
भी उन्होंने
अपहेल्ड
किया कि नहीं,
यह राज्य
सरकार के
अधिकार
क्षेत्र में
आता है।क्योंकि
कानून-व्यवस्था
बिगड़ने का जो
भय रहता है।उसको
सुचारू रूप से
करना, यह राज्य
सरकार का अपना
अधिकार है।और
इसलिए
शिड्यूल 7 के 2
में हमको जो
अधिकार है।उस
अधिकार का
प्रयोग
किया।
यह कोर्ट ने
भी इसको इसके
खिलाफ जब गये
थे कि राज्य
को यह अधिकार
नहीं है, उसको
भी नहीं किया। मैं
सोचता हूं कि
जो भावना
इसमें है, यह एक
जबरदस्ती का
भ्रम फैलाया
जा रहा है।कि
यह किसी व्यक्ति
विशेष के लिए,
किसी धर्म
विशेष के लिए,
ऐसा नहीं है।क्योंकि
पिछले एक लम्बे
समय में, आपने
देखा होगा
विधान सभा में
कई प्रश्न
आये थे, उन
प्रश्नों
में लगभग
पिछले एक-डेढ़
साल में ऐसे
कई आपसी तनाव
आये थे जिन
तनावों में
यद्यपि कोई
टकराव नहीं
हुआ, कोई बात
नहीं है,
लेकिन टकराव
जरूर हुआ,
चाहे वह कोटा
का कार्यक्रम
रहा हो जहां
इस प्रकार के
लोगों को
बुलाकर वहां
आंध्र प्रदेश
से और बाकी से,
जब उनको स्टेशन
पर उतार कर
उनके बयान
लिये और
वीडियोग्राफी
की तो यह कहा
था कि हमको
ढाई सौ रूपये
महीने की
पेंशन मिलेगी,
हमको साइकिल
मिलेगी, यह मिलेगा
और इसके आधार
पर उन लोगों
को लाकर के
जिस प्रकार का
थामस ने वहां
जो कार्यक्रम
रचा और अब आज
तो यह है।कि
सारे का सारा
मतलब अमेरिका
से वह इतना
अधिक फंड
मंगाता है।जिस
फंड के आधार
पर करोड़ों
रूपये हर साल
आते हैं और वह
इसी काम में
लगाता है।कि
लोगों को किस
तरह से धर्म
परिवर्तन
करे।
अपने
विद्यालय में
रख कर, अपने
संस्थान में
रख कर
छोटे-छोटे बच्चों
को बुलाता है।और
बुलाने के बाद
वह उसको धर्म
की दीक्षा दे
करके उसके
प्रचारक
बनाकर भेजता
है, मैं सोचता
हूं यह हमारे
लिए नहीं, सम्पूर्ण
देश को इस
बारे में
सोचना होगा कि
यह जो इस
प्रकार से
लगातार जो धन
आ रहा है।और
उस धन के कारण
से देश में इस
प्रकार की
गतिविधियां
चल रही है।उस
पर भी
प्रतिबंध
लगे।
मैंने, वास्तव
में मावली से
आने वाले सदस्य
का मैं आभारी
हूं कि उन्होंने
यह रखा कि इस
प्रकार की
संस्थाएं जो
अपने पैसे इस
प्रकार के
कामों में लगाती
है, उस संस्था
पर भी प्रतिबंध
किसी तरह से
लगे और उसको
मैंने उनकी भावनाओं
को ध्यान में
रख करके स्वीकार
किया।
मैं राज्य
के सभी धर्म
के मानने वाले
अनुयायियों
को इस बात के
लिए आश्वस्त
करता हूं कि
जबरन किसी पर
नहीं, स्वेच्छा
से अगर कोई
धर्म
परिवर्तन
करना चाहे तो
उसे पूर्णत: छूट
है, वह कर
सकेगा लेकिन
इन तरीकों से
जिनको मैंने
बाधित किया है।इस
कानून
के सेक्शन 3
के तहत, उसको
अगर करेगा तो
निश्चित रूप
से वह दण्डनीय
अपराध होगा और
इसलिए मैं
विपक्ष के
माननीय सदस्य
नहीं हैं,
नहीं तो और
विस्तृत जो
उन्होंने
सवाल खड़े
किये, उन
सवालों का मैं
जवाब देता,
मैं निश्चित
रूप से सदन के
सभी माननीय
सदस्यों को
आश्वस्त
करता हूं आपके
माध्यम से,
राजस्थान के
सम्पूर्ण
धर्मों को
मानने वालों
को भी आश्वस्त
करता हूं कि
अपने-अपने
धर्म का स्वतंत्रतापूर्वक
पालन करें,
कोई उसमें
विध्न
डालेगा तो
निश्चित रूप
से वह भी इसी
प्रकार से दण्ड
का भागी
बनेगा।
यही कहकर
मेरी प्रार्थना
है।कि आप इस
बिल को पास
करायें।
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न यह है।कि
राजस्थान
धर्म स्वातंत्र्य
विधेयक, 2006 को
संशोधित रूप
में पारित
किया जाय?
(स्वीकृत)
राजस्थान
धर्म स्वातंत्र्य
विधेयक, 2006
संशोधित रूप
में पारित
किया गया।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी।
विधेयक पर
विचार
राजस्थान
सार्वजनिक
पुस्तकालय
विधेयक, 2006
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी(शिक्षा
मंत्री) : अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से प्रस्ताव
करता हूं कि
राजस्थान
सार्वजनिक
पुस्तकालय विधेयक,
2006 को
विचारार्थ
लिया जाय।
श्री
अध्यक्ष: यह
सार्वजनिक
पुस्तकालय
विधेयक
विचारार्थ
लिया जाय,
उससे पूर्व
आसन की और से
मैं कहना
चाहूंगी कि
चूंकि आज हमारे
सत्र का अवसान
होने जा रहा
है, मैं नहीं चाहती
कि आपस में
सत्ता पक्ष
के या आसन के
खिलाफ
प्रतिपक्ष की
के कोई किसी
भी प्रकार की
कटुता मन में
जाये इसलिए
मैं चाहती हूं
कि वापिस उन्हें
बुला लिया जाय
क्योंकि
प्रतिपक्ष के
नेता ने इस
संबंध में खेद
प्रकट कर दिया
है।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: ठीक
है।
श्री
अध्यक्ष: यद्यपि
उन्होंने
आगे भी बहुत
कहा, पाखण्डियों
बैठ जाओ,
लेकिन फिर भी
चूंकि आखिरी
दिन है।और
प्रतिपक्ष के
नेता ने इस
बारे में अपनी
और से...(व्यवधान)
हां, स्वयं
भी, मैं
चाहूंगी कि स्वयं
भी आकर कहें
कि मेरी कोई
मंशा नहीं थी,
मेरे मुंह से
भी कुछ इस तरह
का शब्द
निकला हो तो
उसके लिए मुझे
खेद है, तो मैं
समझती हूं कि
वापिस उन्हें
बुला लिया जाय
ताकि इस बिल
के ऊपर उनके
भी सुझाव कुछ
आ सकें।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़(संसदीय
कार्य
मंत्री): आपकी
आज्ञा के
अनुसार मैं
जाकर उन्हें
आपकी भावनाओं
से अवगत करा
रहा हूं।
श्री
अध्यक्ष:
मुख्य
सचेतकजी, आप
भी पधारें।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: इसको
तो कराओ,
विचारार्थ तो
खत्म कराओ,
पारित
करेंगे।
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, घनश्यामजी
का जो आपका
सार्वजनिक
पुस्तकालय
विधेयक,2006 है,
इसमें जो जनमत
जानने हेतु, श्री
शांतिलाल
चपलोत। आप
देखिये, हमारा
बहुत कम समय
है।
श्री
शांतिलाल
चपलोत(मावली):
मैं अपना
वापिस लेता
हूं जनमत
जानने हेतु
परिचालित
करने का प्रस्ताव।
श्री
अध्यक्ष: ठीक
है, थेंक यू।
श्री जुबेर
खान, संयम लोढ़ा,
बुलाकीदास
कल्ला, मदन
राठौड़।
श्री
मदन
राठौड़(सुमेरपुर):
प्रस्ताव
वापिस लेता
हूं।
श्री
अध्यक्ष:
थेंक यू। श्री
जोगेश्वर
गर्ग।
श्री
जोगेश्वर
गर्ग(जालौर):
मैं यह प्रस्ताव
वापिस लेता
हूं।
श्री
अध्यक्ष:
थेंक यू। श्री
शंकर सिंह
राजपुरोहित।
श्री
शंकर सिंह
राजपुरोहित(आहोर):
मैं यह प्रस्ताव
वापिस लेता
हूं।
श्री
अध्यक्ष:
थेंक यू। डा.
जालम सिंह
रावलोत।
डा.
जालम सिंह
रावलोत(शिव):
मैं यह प्रस्ताव
वापिस लेता
हूं।
श्री
अध्यक्ष:
थेंक यू। श्री
प्रहलाद
गुंजल।
श्री
प्रहलाद
गुंजल(रामगंज
मंडी): अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
प्रस्ताव
वापिस लेता
हूं।
श्री
अध्यक्ष :
थेंक यू। श्री
अमरा राम(धोद)
हैं नहीं। श्री
जयराम जाटव
श्री
जयराम जाटव:
मैं मेरा
वापिस लेता
हूं।
श्री
अध्यक्ष:
थेंक यू। श्री
हरिमोहन
शर्मा,
सी.पी.जोशी,
श्री
सुभाषचन्द्र
शर्मा।
श्री
सुभाष चन्द्र
शर्मा(कोटपूतली):
निश्चित रूप
से मैं एक बात
के लिए, इस
प्रस्ताव को
तो मैं ले ही
रहा हूं,
लेकिन मैं एक
बात के लिए
आपका धन्यवाद,
आपका धन्यवाद
आधे मिनट (व्यवधान),
जब तक वह
पहुंचेंगे,
इतनी देर में
तो मैं धन्यवाद...
श्री
अध्यक्ष: तीन
बजे करना है।
श्री
सुभाषचन्द्र
शर्मा: मैं
आपका धन्यवाद
और आसन का धन्यवाद
यह करना
चाहूंगा कि
आपने बड़ा दिल
और उदार दिल
रख कर...
श्री
अध्यक्ष: इसके
बाद भी दो और
बिल बाकी
हैं।
श्री
सुभाष चन्द्र
शर्मा: और
माननीय सदस्य
की गलती को
आपने ध्यान
में रखकर के
भी आपने बड़ा
उदार दिल रखते
हुए आपने एक
ऐसा उदाहरण
पेश किया है।आज,
निश्चित रूप
से राजस्थान
के इतिहास में
यह याद रहेगा
और माननीय सत्ता
पक्ष के सदस्यों
का भी, जिस तरह
से आपने आश्वस्त
किया और भविष्य
में मुझे उम्मीद
है।इस बात के
लिए कि आसन की
गरिमा बनी
रहेगी और इस सदन
की गरिमा बनी
रहेगी। आपका
बहुत-बहुत धन्यवाद
और इसके साथ
ही मैं इस
प्रस्ताव को
वापिस लेता
हूं।
श्री
अध्यक्ष: धन्यवाद।
डा.एन.एस.गुर्जर।
डा.एन.एस.गुर्जर:
मैं इस प्रस्ताव
को वापिस लेता
हूं।
श्री
अध्यक्ष:
थेंक यू।
प्रभारी
मंत्री।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी:
मैंने रख दिया
था विचारार्थ
का, ना कराकर
इसकी हां
कराओ,
विचारार्थ की
हां तो कराओ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया: वह
तो जनमत जानने
के लिए था।
श्री
अध्यक्ष: अच्छा,
जनमत का है।यह
तो।
प्रश्न यह है।कि
राजस्थान
सार्वजनिक
पुस्तकालय
विधेयक, 2006 को
जनमत जानने
हेतु
परिचालित करने
का प्रस्ताव
स्वीकार
किया जाय?
(अस्वीकृत)
विधेयक
को जनमत जानने
हेतु
परिचालित
करने का
संशोधन प्रस्ताव
अस्वीकार
किया गया।
अब
आप करें।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी:
मैंने रख दिया
था साहब, अब आप
करें।
श्री
अध्यक्ष:
आपने
विचारार्थ रख
दिया?
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: हां।
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न यह है।कि
राजस्थान
सार्वजनिक
पुस्तकालय
विधेयक, 2006 को
विचारार्थ
लिया जाय?
(स्वीकृत)
विधेयक
को विचारार्थ
लिया गया।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से प्रस्ताव
करता हूं कि
राजस्थान
सार्वजनिक
पुस्तकालय
विधेयक, 2006 को
पारित किया
जाय।
श्री
अध्यक्ष:
पहले आपका वह
तो कर दूं,
पारित से
पहले।
श्री
घनश्याम तिवाड़ी:
हां, सारी।
श्री
अध्यक्ष: खण्ड
2 से 27 - कोई
संशोधन नहीं।
प्रश्न
यह है।कि खण्ड
2 से 27 स्वीकार
किये जायं?
(स्वीकृत)
खण्ड
2 से 27 स्वीकार
किये गये।
खण्ड
1 अधिनियमन,
सूत्र,
नामादि
- कोई संशोधन
नहीं।
प्रश्न
यह है।कि खण्ड
1 अधिनियमन,
सूत्र, नामादि
स्वीकार किये
जाएं?
(स्वीकृत)
खण्ड
1 अधिनियमन,
सूत्र, नामादि
स्वीकार किये
गये।
विधेयक
का पारण
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी(शिक्षा
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से प्रस्ताव
करता हूं कि
राजस्थान
सार्वजनिक
पुस्तकालय
विधेयक, 2006 को
पारित किया
जाय।
श्री
अध्यक्ष: प्रश्न
यह है।कि
राजस्थान
सार्वजनिक
पुस्तकालय
विधेयक, 2006 को
पारित किया
जाय?
(स्वीकृत)
राजस्थान
सार्वजनिक
पुस्तकालय
विधेयक, 2006
पारित किया
गया।
(व्यवधान)
श्री
हेमराज मीणा:
यह महावीरजी
इधर बैठ गये
साहब।
श्री
रामप्रताप
कासनिया: ना
कैसे बोल गये
आप।
श्री
अध्यक्ष: वह
बिलकुल ठीक
बैठे हैं। जब आसन
पांवों पर
होता है।तो
कोई भी माननीय
सदस्य इधर से
उधर नहीं जा
सकता इसलिए वह
जहां थे वहीं
बैठ गये,
बिलकुल ठीक
काम किया उन्होंने।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़(संसदीय
कार्य
मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय, आपकी
आज्ञानुसार
मैं और मुख्य
सचेतकजी ने
जाकर उनसे
आपकी भावनाओं
से अवगत करा
दिया।
नेता
प्रतिपक्ष ने
कहा है।कि वह
अपने साथियों
से
विचार-विमर्श
करके और उसके
बाद में ही
कोई निर्णय
लेंगे।
हमने उनको यह
भी कह दिया कि
सदन के अंदर
जो आज उत्तेजना
हुई, उत्तेजनावश
जो माननीय
सदस्य ने
कहा, उन सारी
बातों को लेकर
अध्यक्षजी
ने कहा है।कि
एक बार वह सदन
में आ जायें,
कुछ वह खुद भी
खेद व्यक्त
कर दें और मैं
समझता हूं कि
हमारी
प्रार्थना पर
निश्चित तौर
पर वह विचार
करेंगे। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
पुर:स्थापित
किये जाने
वाला
विधेयक। श्री सांवर
लाल।
विधेयक
का पुर:स्थापन
राजस्थान
भूजल विकास
एवं प्रबंधन
का
विनियमन
और नियंत्रण
विधेयक, 2006
श्री
सांवर
लाल(सिंचाई
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से राजस्थान
भूजल विकास
एवं प्रबन्ध
का विनियमन और
नियंत्रण
विधेयक, 2006 को
पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
के लिए प्रस्ताव
करता हूं।
ans\usc\7.4.2006\1440\2n\1
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न यह है।कि
राजस्थान
भू-जल विकास
और प्रबन्ध
का विनियमन और
नियंत्रण
विधेयक, 2006 को पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
प्रदान की जाए
?
(स्वीकृत)
विधेयक
को पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
प्रदान की गई
।
प्रभारी
मंत्री जी (व्यवधान)
पुर:स्थापित
तो कर देने
दीजिए ।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से राजस्थान
भू-जल विकास
और प्रबन्ध का
विनियमन और
नियंत्रण
विधेयक,2006 को पुर:स्थापित
करता हूं ।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
कह रहा था कि आपके
उदार भावनाओं
को, सबको मद्देनजर
रखते हुए,
इतनी अप्रिय
घटना के बाद
भी मैं अपने
उस प्रस्ताव
को और जो
प्रतिपक्ष के
माननीय सदस्य
आपसे बार-बार
आग्रह कर रहे
थे कि 22 और 24
तारीख की जो
घटना है।उस
प्रस्ताव
में भी संशोधन
किया जाए,
उसके लिए मैं
तैयार था और
यदि मान
लीजिए
वह नहीं
चाहते हैं तो
मैं क्या कर
सकता हूं ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री):
प्रस्ताव
रख दो ।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आज का
तो कर ही देतेहैं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): उस दिन
का भी कर दो ।
श्री
अध्यक्ष : उस
दिन का तो
उनकी एबसेंस
में क्यों कर
दो if
they don't come. फिर क्या
मतलब है।करने
का । आते है।तो
कर देना । आते
ही नहीं है।तो
फिर क्या
करेंगे, आने दो. Let them come.
श्री
राजेन्द्र
सिंह राठौड़ ।
राजस्थान
विधान
सभा(अधिकारियों
तथा सदस्यों
की परिलब्धियां
और पेंशन)
(संशोधन)
विधेयक, 2006
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से राजस्थान
विधान
सभा(अधिकारियों
तथा सदस्यों
की परिलब्धियां
और पेंशन)
(संशोधन)
विधेयक, 2006 को
पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
के लिए प्रस्ताव
करता हूं ।
श्री
अध्यक्ष :
प्रश्न यह है।कि
राजस्थान
विधान
सभा(अधिकारियों
तथा सदस्यों
की
परिलब्धियां
और पेंशन)
(संशोधन)
विधेयक,2006 को
पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
प्रदान की जाए
?
(स्वीकृत)
विधेयक
को पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
प्रदान की गई
।
विधेयक
पर विचार
राजस्थान
विधान सभा
(अधिकारियों
तथा सदस्यों
की परिलब्धियां
और पेंशन)
(संशोधन)
विधेयक,2006
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से प्रस्ताव
करता हूं कि
राजस्थान
विधान सभा
(अधिकारियों
तथा सदस्यों
की
परिलब्धियां
और पेंशन)
(संशोधन)
विधेयक,2006 को
विचारार्थ
लिया जाए ।
श्री
अध्यक्ष :
प्रश्न यह है।कि
राजस्थान
विधान सभा
(अधिकारियों
तथा सदस्यों
की परिलब्धियां
और पेंशन)
(संशोधन)
विधेयक,2006 को
विचारार्थ
लिया जाए ?
(स्वीकृत)
विधेयक
को विचारार्थ
लिया गया ।
खण्ड-2
से 12 कोई
संशोधन नहीं ।
प्रश्न
यह है।कि खण्ड-
2 से 12 स्वीकार
किये जाए ?
(स्वीकृत)
खण्ड-2
से 12 स्वीकार
किये गये ।
खण्ड-
1 अधिनियम,
सूत्र, नाम
आदि
काई संशोधन
नहीं ।
प्रश्न
यह है।कि खण्ड-1
अधिनियमन
सूत्र, नाम
आदि स्वीकार
किये जाए ?
(स्वीकृत)
खण्ड-1
अधिनियमन
सूत्र, नाम
आदि स्वीकार
किये गये ।
विधेयक
का पारण
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से प्रस्ताव
करता हूं कि
राजस्थान
विधान सभा
(अधिकारियों
तथा सदस्यों
की
परिलब्धियां
और पेंशन)
(संशेधन)
विधेयक, 2006 को
पारित किया
जाए ।
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न यह है।कि
राजस्थान
विधा सभा
(अधिकारियों
तथा सदस्यों
की
परलिब्धियां
और पेंशन)
(संशोधन)
विधेयक, 2006 को
पारित किया
जाए ?
(स्वीकृत)
राजस्थान
विधान सभा
(अधिकारियों
तथा सदस्यों
की
परिलब्धियां
और पेंशन)
(संशोधन)
विधेयक, 2006
पारित किया
गया । राठौड़
साहब ।
विधेयक
का पुर:स्थापन
राजस्थान
मंत्री वेतन (संशोधन)
विधेयक, 2006
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से राजस्थान
मंत्री
वेतन(संशोधन)
विधेयक, 2006 को
पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
के लिए प्रस्ताव
करता हूं ।
श्री
अध्यक्ष :
प्रश्न यह हे
कि राजस्थान
मंत्री वेतन
(संशोधन)
विधेयक, 2006 को
पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
प्रदान की जाए
?
(स्वीकृत)
विधेयक
को पुर:स्थापित करने की
आज्ञा प्रदान
की गई ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से राजस्थान
मंत्री वेतन
(संशोधन)
विधेयक, 2006 को
पुर:स्थापित करता
हूं ।
विधेयक
पर विचार
अध्यक्ष
महोदय, मैं
प्रस्ताव
करता हूं कि
राजस्थान
मंत्री वेतन
(संशोधन)
विधेयक,2006 को
विचारार्थ
लिया जाए ।
श्री
अध्यक्ष :
प्रश्न यह है।कि
राजस्थान
मंत्री वेतन
(संशोधन)
विधेयक,2006 को
विचारार्थ
लिया जाए ?
(स्वीकृत)
विधेयक
को विचारार्थ
लिया गया ।
खण्ड-2
कोई संशोधन
नहीं ।
प्रश्न
यह है।कि खण्ड-2
स्वीकार
किया जाए ?
(स्वीकृत)
खण्ड-2
स्वीकार
किया गया ।
खण्ड-1
अधिनियमन सूत्र,
नाम आदि कोई
संशोधन नहीं ।
प्रश्न
यह है।कि खण्ड-1
अधिनियम,
सूत्र, नाम
आदि स्वीकार
किये जाए ?
(स्वीकृत)
खण्ड-1
अधिनियमन
सूत्र, नाम
आदि स्वीकार
किये गये ।
विधेयक का
पारण
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से प्रस्ताव
करता हूं कि
राजस्थान
मंत्री वेतन
(संशोधन)
विधेयक, 2006 को
पारित किया
जाए ।
इसके साथ ही
अध्यक्ष
महोदय मैं
निवेदन करना
चाहूंगा कि
माननीय मुख्य
मंत्री जी ने ..
श्री
अध्यक्ष :
मैं ही कह
दूंगी यह तो ।
प्रश्न यह है।कि
राजस्थान
मंत्री वेतन
(संशोधन)
विधेयक,2006 को
पारित किया
जाए ?
(स्वीकृत)
राजस्थान
मंत्री वेतन
(संशोधन)
विधेयक, 2006
पारित किया गया
।
मैं
इस संबध में
यह निवेदन
करना चाहूंगी
कि माननीय
मुख्य मंत्री
जी ने अपने 12
महीने का जो
सैंचुरी
अलाउन्स अधिक
बढाया गया है।शायद
पाँच हजार
रूपया है।उनका,
इसको पूरे साल
भर तक वह बच्चों
को जो मिड डे
मिल दिया जाता
है।उस मिड डे
मिल के अंदर
वह देंगी ।
मैं भी अपना एक
महीने का
सैंचुरी
अलाउन्स उस
बारे में
दूंगी और मैं
माननीय
मंत्रियों से
भी अपील
करूंगी कि वह
अपना एक एक महीने का
सैंचुरी
अलाउन्स जो
बढ़ाया गया है।उसे
मिड डे मिल
में दे दें ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): पूरे मंत्रियों
की तरफ से आप
घोषण ही कर
दें ।श्री कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
आप घोषणा कर
दीजिए ।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): अध्यक्ष
महोदय, आपका
आदेश
शिरोधार्य है।।
श्री
अध्यक्ष :
इसके अलावा ,
(व्यवधान)
हां वह एक ही
बात है, स्पीकर,
डिप्टी स्पीकर,
मंत्री आ गए
तो सारे ही
उसमें मंत्री
का वेतन लेने
वाले, सभी आ गए
जिनका सैंचुरी
अलाउन्स
बढ़ा है।।
सूचना
पंचम सत्र का
लेखा-जोखा
मैं
आपको सदन में
कुछ सूचना
देना चाहती
हूं कि 12 वीं
राजस्थान
विधान सभा का
पंचम सत्र में
28 फरवरी,2006 से प्रारम्भ
हुआ था, आज
दिनांक 7
अप्रैल, 2006 को
सत्र अनिश्चिकाल
के लिए स्थगित
हो रहा है।।
इस सत्र में
कुल 25 बैठकें
हुई । सदन की
बैठकें अपने
निर्धारित
समय से कुल 46
घंटे 20 मिनिट
तक अधिक चली।
इस
सत्र में
माननीय सदस्यों
से 2033 तारांकित,
1813 अतारांकित, 1
अल्प सूचना
प्रश्न की
सूचना प्राप्त हुई ।
कुल 397
तारांकित
प्रश्न
सूचीबद्ध हए
जिनमें से 90 प्रश्नों
पर सदन में
चर्चा हुई । 847
अतारांकित
प्रश्न
सूचीबद्ध हुए
।
किसी
सदस्य का कोई
नोटिस नहीं
होने पर भी
विषय की अहमियतता
को देखते हुए
एवम नियमों
में शिथिलता
देते हुए एक
प्रश्न पर
आधे घंटे की
चर्चा उठाने
का अवसर भी
प्रदान किया
गया ।
माननीय
सदस्यों से
प्रक्रिया के
नियम -50 के
अंतर्गत 79 स्थगन
प्रस्तावों
की सूचना
प्राप्त हुई
। राज्यपाल
महोदय के
अभिभाषण, बजट
पर सामान्य
वाद-विवाद एवम
अनुदान की
मांगों पर
चर्चा के समय
विषयों को
उठाने का
पर्याप्त
अवसर उपलब्ध
होने तथा स्थगन
प्रस्ताव की
परिधि में नहीं
आने के कारण
भी उन सभी स्थगन
प्रस्तावों
पर तो अनुमति
प्रदान नहीं
की, फिर भी 4 विषयों
पर मंत्री का
वक्तव्य
कराया गया एवम
21 विषयों पर
संबंधित
माननीय सदस्यों
को उनके प्रस्तावों
पर बोलने का
अवसर प्रदान
किया गया ।
जैसा कि
माननीय सदस्यों
को ज्ञात है, स्थगन
प्रस्तावों
की सूचना
प्रतिपक्ष के
माननीय सदस्यों
द्वारा ही दी
जाती है।
मानननीय
सदस्यों से
प्रक्रिया के
नियम-295 के
अंतर्गत
प्राप्त 237
विशेष उल्लेख
की सूचनाओं को
पढ़ने की
अनुमति दी गई
और उक्त सभी
सूचनाएं राज्य
सरकार को उत्तर
भिजवाने हेतु
भेजी गई है।जिनमें
से 96 सूचनाओं
के संबंध में
राज्य सरकार
से जानकारी
प्राप्त हु ई
।उक्त नियम
के अंतर्गत 131
प्रस्तावों
की सूचनाएं
प्राप्त हुई
जिनमें से 128
प्रस्ताव
राज्य सरकार
को जानकारी
हेतु भेजे गए
।उनमें 87 के उत्तर
प्राप्त हो
गयेहैं। 3
प्रस्ताव अस्वीकृत
किये गये ।
इनमें से 6
प्रस्ताव
सदन में
संबंधित
मंत्री का ध्यान
आकर्षित करने
हेतु कार्य
सूची में
सूचीबद्ध
किये गये ।
इनमें से 5
प्रस्ताव
प्रतिपक्ष के
माननीय सदस्यों
के व एक प्रस्ताव
सत्तापक्ष
के माननीय
सदस्य का था
।
लोक
महत्व के 5
विषयों पर
संबंधित
मंत्रियों
द्वारा वक्तव्य
दिये गये ।
राज्यपाल
महोदय के
अभिभाषण पर
धन्यवाद
प्रस्ताव पर
हई चर्चा में 35
माननीय सदस्यों
ने भाग लिया,
उनमें 16
प्रतिपक्ष के
व 19 सत्ता
पक्ष के थे ।
Ddm/usc/070406/1450/2o
आय
व्ययक
अनुमान वर्ष 2006-07
पर हुए सामान्य
वाद-विवाद में
37 माननीय सदस्यों
ने भाग लिया।
इनमें 15
प्रतिपक्ष के
एवं 22 सत्तापक्ष
के सदस्य थे।
विभिन्न
विभागों से
सम्बन्धित 17
अनुदानों की
मांगों पर सदन
में चर्चा
हेतु 8 दिवस
नीयत किये गये
। अनुदान की
मांगों पर 2021 कटौती
प्रसताव सदन
में प्रस्तुत
किये गये।
अनुदानों की
मांगों पर
विभिन्न
तिथियों को
हुई चर्चा में
कुल 111 सदस्यों
ने भाग लिया।
सत्र
में कुल 12
विधेयक पारित
किये गये। इन
विधेयकों पर
माननीय सदस्यों
से 169 संशोधन
प्राप्त हुए
जिनमें से 140 स्वीकार
किए गए एवं 29
अग्राह्य किए
गए। एक विधेयक
प्रवर समिति
को निर्दिष्ट
किया गया।
प्रतिदिन
शून्यकाल
में माननीय
सदस्यों को
ज्वलंत समस्याओं
और विभिन्न
जनहित के
मुद्दे उठाने
का अवसर उनके
द्वारा दी गई
पर्चियों आदि
के आधार पर
दिया गया, 162
माननीय सदस्यों
को उनके
द्वारा दी गई
पर्ची के आधार
पर बोलने का
अवसर प्रदान
किया गया।
यहां यह भी
उल्लेख करना है।कि
पर्ची के माध्यम
से उठाये जाने
वाले विषयों
पर राज्य
सरकार की ओर
से उत्तर
दिया जाना
आवश्यक नहीं
है, फिर भी
पर्ची के माध्यम
से उठाये गये
अधिकांश
विषयों पर तत्काल
राज्य सरकार
द्वारा
स्थिति स्पष्ट
की गई।
12वीं
विधान सभा के
पूर्व सत्र के
2 संकल्प
लम्बित थे तथा
वर्तमान सत्र
में 4 गैर
सरकारी संकल्प
और प्रस्तुत
किये गये।
इनमें से 2
संकल्प सदन
द्वारा पारित
किये गये एवं 4
संकल्पों पर
चर्चा लम्बित
रही।
सदन
में
प्रतिपक्ष के
सदस्यों
द्वारा
बार-बार राज्य
में अकाल एवं
बिजली की समस्या
के सम्बन्ध
में चर्चा के
लिए मांग किये
जाने पर इस
विषय की
अहमियत को
देखते हुए इस
पर पूरे एक
दिन के लिए
चर्चा रखी गई
जिसमें 25 सदस्यों
ने भाग लिया।
इनमें
प्रतिपक्ष के
113 सदस्य एवं
सत्ता पक्ष
के 12 सदस्य
थे।
इस
सत्र में आसन
के आदेशों की
बार-बार
अवहेलना करने,
शोर शराबा कर
व्यवधान उत्पन्न
करने, एवं सभा
कक्ष में धरना
अधि की कुछ
अप्रिय
घटनाएं भी
हुई। नियमों
के तहत सदन की
कार्यवाही को
सुचारू रूप से
चलाने के आशय
से आसन को कुछ
कठोर अनुशासनात्मक
कार्यवाही
करने पर मजबूर
होना पडा। आसन
को माननीय
सदस्यों को
नाम से
पुकारना पडा,
सदन से बाहर
चले जाने का
आदेश देना
पडा, और ऐसा
नहीं करने पर
सदन में प्रस्तुत
किए गए प्रस्ताव
पर 7 माननीय
सदस्यों को
निलम्बित
करने की
कार्यवाही भी
करनी पड़ी।
उक्त
कार्यवाही
अपने आप में
दुखद अवश्य
थी, लेकिन सदन
की गरिमा को
बनाए रखने के
लिए आवश्यक
मानी गई। सभी
माननीय सदस्यों
को इस संबंध
में आत्ममंथन
करना चाहिए
ताकि इस तरह
की स्थिति पर
अंकुश लग सके।
इस
सत्र में अध्यक्ष
को पद से
हटाने के लिए
संकल्प की
सूचना तो दी
गई, परंतु
संकल्प पर
हस्ताक्षर
करने वाले
किसी भी
माननीय सदस्य
ने उनका नाम
पुकारे जाने
पर संकल्प को
लेने के लिए
सदन की अनुमति
हेतु उसे प्रस्तुत
नहीं किया।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहता हूं।
(व्यवधान) दो
मिनट में ही है।हमारा
तो, पिलानी से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने ए.सी.
प्रेशर पाइप
में घोटाले के
सम्बन्ध
में स्थगन
प्रस्ताव
दिया था और
कुछ चर्चा के
दौरान फिर
आपने निर्देश
दिया था कि इस
सम्बन्ध
में (व्यवधान)
सदन की
कार्यवाही
विधान सभा की
बैठक के
निर्धारित
समय में वृद्धि
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
प्रस्ताव
करता हूं कि
जो सदन का समय 3
बजे तक है, वह
इस पूरी
कार्यवाही तक
थोड़ा सा
बढ़ाया जाए।
श्री
अध्यक्ष: क्या
सदन की अनुमति
है।कि सदन का समय
कार्यवाही
होने तक
बढ़ाया जाए?
(स्वीकृत)
सदन
का समय इस सदन
की कार्यवाही
होने तक
बढ़ाया जाता
है।
श्रीमती
राजकुमारी
शर्मा (सीकर):
माननीय अध्यक्षजी,
सीकर में अभी
तक विवाद फैला
हुआ है। 3 दिन
पहले...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
पहले, आप
मंत्रीजी को
कम्पलीट कर
लेने दें, फिर
आपको अवसर दे
देंगे।
शासकीय
वक्तव्य
मैसर्स
योगेश पाइप पर
भ्रष्टाचार
निरोधक ब्यूरों
की कार्यवाही
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, दिनांक
03.06.05 को माननीय
विधायक, पिलानी
से एक शिकायत
मुख्य सचिव
को प्राप्त
हुई थी कि
मैसर्स ए
इंफ्रास्ट्रक्चर
द्वारा योगेश
पाइप की फैक्टरी
में निर्मित 100
एम.एम. व्यास
के पाइप सप्लाई
कर विभागीय दर
संहिता की
शर्त संख्या
10.1 एवं 19 का उल्लंघन
किया जा रहा
है। शिकायत
प्राप्त
होते ही
दिनांक 03.06.05 को
मुख्य
अभियंता एवं
अन्य
अधिकारियों
की टीम द्वारा
मैसर्स योगेश
पाइप, विश्वकर्मा
इण्डस्ट्रियल
एरिया, जयपुर
की फैक्टरी
का निरीक्षण
किया गया।
मैसर्स योगेश
पाइप फैक्टरी
के निरीक्षण
के दौरान यह
पाया गया कि
उक्त फर्म
द्वारा
मैसर्स ए इन्फ्रास्ट्रक्चर
के ब्राण्ड
नेम कीर्ति के
नाम से 100 एम. एम.
व्यास के
पाइपों पर
ब्राण्ड एंव
निरीक्षण
एजेंसी ई.आई.ए.
की सील लगायी
जा रही थी।
उसी समय भ्रष्टाचार
निरोधक ब्यूरो
के
अधिकारियों
की टीम द्वारा
भी योगेश पाइप
की फैक्टरी
पर छापा डाला
गया तथा उपलब्ध
रिकार्ड को
जब्त कर लिया
गया। उक्त शिकायत
के सम्बन्ध
में फर्म
मैसर्स ए इन्फ्रास्ट्रक्चर
प्रस्तुत
किये गये
प्रत्युतर
उनके द्वारा
मेसर्स योगेश
फर्म की फेक्टरी
से कोई सप्लायी
नहीं की गयी।
फर्म द्वारा
उन पर लगाये
गये दर संविदा
के समस्त
आरोपों को भी
नकारा गया।
निरीक्षण
एजेंसी मैसर्स
एक्सपोर्ट-इंसपेक्शन
एजेंसी, नई
दिल्ली, जो
भारत सरकार की
संस्था है,
ने अपने प्रत्युतर
द्वारा अवगत
कराया कि उनके
द्वारा मैसर्स
योगेश पाइप
जयपुर में कोई
निरीक्षण
नहीं किया गया
है। पाइपों के
ट्रकों,
मेसर्स योगेश
पाइप की फैक्टरी
से पाइपों की
ट्रकों के साथ
गुड्स रिसीव्ड
इन्वाइस कम
डिलेवरी
चालान कन्साइनी
को प्राप्त
हुए थे। विभाग
द्वारा उक्त विवादित
पाइपों का कोई
भी भुगतान नहीं
किया गया है।
समस्त
रिकार्ड
भ्रष्टाचार
निरोधक ब्यूरो
द्वारा जब्त
कर लिया गया
है। जांच के
निर्णय
प्राप्त
होने पर इस
प्रकरण में
कार्यवाही की
जा सकेगी।
भ्रष्टाचार
निरोधक ब्यूरो
से प्राप्त
सूचना अनुसार
ब्यूरो
द्वारा
मैसर्स योगेश
पाइप के यहां
से जब्त पाइप
के सेम्पल की
जांच हेतु
सेम्पल 03.02.06 को
मध्य प्रदेश
की लेबोरेटरी
में भेजा गया
है। क्योंकि
फोरेंसिक
लेबोरेटरी,
जयपुर में उक्त
सुविधा उपलब्ध
नहीं थी,
जिसकी
रिपोर्ट आना
बाकी है।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आश्वस्त
करना चाहता
हूं, जैसे ही
भ्रष्टाचार
निरोधक ब्यूरो
की रिपोर्ट
आयेगी उसके
अनुसार तत्काल
कार्यवाही की
जाएगी और किसी
प्रकार की अनियमितता
होगी तो
निश्चित रूप
से
नियमानुसार
कार्यवाही की
जायेगी। (व्यवधान)....
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): उनका लड़का,
(व्यवधान)
ठेकेदार हैं
कि नहीं। यह
चर्चा हुई थी उस
समय।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): हां
है, माननीय
विधायक का
लड़का
ठेकेदार है,
रजिस्टर्ड
ठेकेदार, सीकर
अधीक्षण
अभियंता के
अण्डर में
काम कर रहे
हैं।
बधाई
भारतीय
क्रिकेट टीम
को
श्री
अध्यक्ष:
मुझे माननीय
सदस्यों को
यह सूचित करते
हुए बहुत हर्ष
हो रहा है।क्योंकि
एक-दिवसीय जो
हमारा
क्रिकेट मैच
था उसमें दिल्ली,
फरीदाबाद,
गोवा और
कोच्चि में
भारत की टीम
जीत गयी है। 7
में से 4 मैच
जीत लिये हैं।
उसके अलावा भी
बाद में स्कोर
का पीछा करते
हुए अब तक 14 मैच
जीतने का रिकार्ड
था, 15 मैंच
जीतकर के
हमारी टीम ने
विश्व का
रिकार्ड भी
तोड़ दिया है।
मांग
सीकर में
कानून-व्यवस्था
की स्थिति में
सुधार की मांग
श्रीमती
राजकुमारी
शर्मा (सीकर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, 3 रोज
पहले सीकर में
एक कार्यकर्ता
और जाट महासभा
का अध्यक्ष
हैं और फिर
सरकारी पद पर
थे और सामाजिक
कार्यकर्ता
थे। उनकी
सरेआम हत्या
कर दी गयी ।
उसके बाद में 2
घण्टे तक शहर
इतना शांत रहा
लेकिन उसके
बाद इतनी
तोड़फोड़ हुई
है, पता नहीं
किन ने की है।
यह मैं आपके
माध्यम से
माननीय गृह
मंत्रीजी को
बताना
चाहूंगी कि
उसकी जांच
करायी जाए कि
किनने इतनी
तोड़फोड़ की
कि जनता तो
उसमें इन्वाल्व
ही नहीं थी।
जनता का उसमें
कुछ दोष भी
नहीं था। पहले
तो मेरा हेडक्वार्टर
सीकर है,
उसमें पुलिस
की भर्ती सबसे
ज्यादा की
जाए। 200 से भी कम
पुलिस वाले
हैं जबकि हेडक्वार्टर
पर तो 500 के आदमी
चाहिए। आये
दिन कभी मेला
होता है, कभी
सभा होती है।और
छोटे थोड़े
बहुत रहते
हैं, वह उनमें
हो जाते हैं।
न मेरे यहां
पेट्रोलिंग
की कोई गाड़ी है।जिसमें
एनी टाइम कोई
खड़ा रहे और
किसी चीज को
पकड़ लें। कम
से कम, अभी कल
ही इसी तरह की
वारदात हुई,
पूरे दिन शहर
बंद रहा लेकिन
आज शहर थोडा
सहमा-सहमा सा
खुला था और
उसके 12 बजे बाद
में, ऐसी खबर
मिली है, मुझे
खबर मिली और
मैंने फोन
करके पूछा तो पता
चला है।कि
वापस इसी तरह
की दहशत सीकर
में हो रही
है। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से बताना
चाहूंगी कि
ए.एस.आई और
एस.आई., 12 मेरे इंचार्ज
हैं, अभी तक
लगे हुए नहीं
हैं और न ए.एस.आई.की
कोई पोस्टिंग
है। मेरा आपसे
निवेदन है।कि
शहर की
खुशहाली के
लिये, शहर
इतना दहशत में
है।कि औरतें
मंदिर तक नहीं
जा रही है।
मैं आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहूंगी
कि एक तो
पुलिस की काफी
व्यवस्था
की जाए और जिन
अधिकारियों
को बदलो, किसी
को भी बदलो,
मुझे कुछ नहीं
है। लेकिन जो
अधिकारी
भेजें वे पूरी
तरह से जांच
करके भेजें। सीकर
का वापस इस
दहशत से बचायें,
मेरा आपसे यही
निवेदन है।
धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष:
मुझे माननीय
सदस्यों को
सूचित करना है।कि
महामहिम राज्यपाल
महोदया 3.55 बजे
यहां
पधारेंगी।
मैं चाहती हूं
कि 3.55 तक आप लोग आ
जाएं। आप अपना
स्थान यहां
पर ग्रहण कर
लें। (व्यवधान)
इनके आने का
इंतजार करें।
समारोह इसी
हाउस में
होगा, समारोह
यही पर होगा।
श्रीमती
राजकुमारी
शर्मा (सीकर):
गृहमंत्रीजी
कुछ कहें।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): आप थे
नहीं, मैंने
सवेरे ही जवाब
में कह दिया
था कि वास्तव
में जिस तुरन्त
गति से वहां
कार्यवाही
होनी चाहिये थी,
नहीं हो पायी।
एस.पी. को हमने
तुरन्त बदला है।और
बाकी भी जिन
अधिकारियों
को हमें भेजना
है, पूरी
कोशिश करेंगे
कि सीकर के
टैम्परामेंट
को ध्यान में
रखकर जो मेरे
पास बेस्ट
उपलब्ध है....।
Vps/usc/7-4-2006/1500/2p/1
उन
लोगों को
लगाकर सीकर को
एक बार कानून-व्यवस्था
की दृष्टि से
ठीक करने के
लिए पूरी
कोशिश करेंगे,
इतना विश्वास
दिलाना चाहता
हूं।
श्रीमती
राजकुमारी
शर्मा (सीकर):
अभी फिर ऐसा
ही माहौल हो
रहा है।कि
वहां वापस
दुकानें बंद
करवायी जा रही
हैं।
श्री
अध्यक्ष: और
कोई बिजनस ?
सदन की
कार्यवाही
तीन बजकर दस
मिनट तक के
लिए स्थगित
की जाती है।और
उसके बाद यहां
आकर पुन:
मिलेंगे।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 1501
बजे 1510 बजे तक के
लिये स्थगित हुई।)
Spp/usc/7.4.2006/1510/2q
(समय :
15.10 बजे)
(पुन:
समवेत होने
पर)
(श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष,
पदासीन )
श्री
उपाध्यक्ष:
सदन में 3 बजकर 20
मिनट पर वापस
मिलेंगे।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 15.10
बजे 15.20 बजे तक के
लिये स्थगित हुई)
msr/usc/07042006/1520/3a/[1]
(समय:
1520 बजे)
(पुन:समवेत्
होने पर)
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
श्री
अध्यक्ष: सदन
की कार्यवाही
अनिश्चितकाल
के लिए स्थगित
की जाती है।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 1521
बजे
अनिश्चितकाल
के लिए स्थगित
हुई।)
राष्ट्र-गान
जन
गण मन अधिनायक
जय हे, भारत
भाग्य
विधाता।
पंजाब
सिन्धु
गुजरात मराठा द्राविड़
उत्कल बंगा।
विन्ध्य
हिमाचल यमुना
गंगा उच्छल
जलधि तरंगा।
तव
शुभ नाम जागे तव
शुभ आशिष
मांगे।
गाहे
तव जय गाधा। जन
गण मंगलदायक
जय हे ।
भारत
भाग्य
विधाता। जय
हे, जय हे, जय हे
।
जय
जय जय जय हे।
*****
* शब्द अध्यक्षपीठ के आदेशानुसार प्रतिस्थापित किया गया।
+++ अभिव्यक्ति अध्यक्षपीठ के आदेशानुसार अपलोपित की गयी।
*** अध्यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।
*** अध्यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।
*** अध्यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।
*** अध्यक्षपीठ
के
आदेशानुसार
अंकित नहीं
किया गया।
*** अध्यक्षपीठ
के
आदेशानुसार
अंकित नहीं
किया गया।
*** अध्यक्षपीठ
के
आदेशानुसार
अंकित नहीं
किया गया।
*** अध्यक्षपीठ
के
आदेशानुसार
अंकित नहीं
किया गया।