jyg/akt/1a/1100/06102006

अशोधित प्रति/ प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

 

अंक  6    बारहवीं विधान सभा के छठे सत्र का चौथा दिवस   संख्‍या  4

 

 

शुक्रवार,

06 अक्‍टूबर, 2006

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11.00 बजे

विधान सभा भवन, जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

 

श्री अध्‍यक्ष: श्री हरिमोहन शर्मा।

 

वर्ष 2006-07 में बाढ़ पीडि़तों की सहायतार्थ व्‍यय राशि

 

42. श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली), श्री प्रमोद जैन भाया (बारां) एवं            डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): क्‍या आपदा प्रबन्‍धन एवं सहायता मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) वर्ष 2006-07 में राज्‍य के विभिन्‍न जिलों के किन-किन गांवों में अतिवृष्टि होने से बाढ़ की स्थिति उत्‍पन्‍न हुई और उससे किस-किस जिले में कितना-कितना नुकसान हुआ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) उक्‍त अवधि के दौरान राज्‍य में किस-किस जिले के किस-किस गांव में कितने-कितने व्‍यक्तियों की बाढ़ एवं बिजली गिरने से मृत्‍यु हुई और कितने पशुओं की बाढ़ में डूबने से मृत्‍यु हुई? संख्‍या विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) सरकार द्वारा बाढ़ में मृतक व्‍यक्तियों एवं पशुओं के लिए कितनी-कितनी सहायता राशि उपलब्‍ध कराई गई एवं इसके क्‍या मानदण्‍ड रहे?

(4) अकाल राहत कोष तथा सी आर एफ में वर्ष 2005-06 व 2006-07 में कुल कितनी राशि किस-किस जिले में व्‍यय की गई? जीवन रक्षक उपकरण एवं अन्‍य आवश्‍यक उपकरणों को खरीदने के लिए कितनी राशि स्‍वीकृत की गई और कितनी राशि के सामान खरीदे गए?

(5) सरकार द्वारा केन्‍द्र सरकार से सहायतार्थ कितनी राशि के लिए मांग की गई तथा कितनी राशि राज्‍य सरकार ने इस कार्य हेतु उपलब्‍ध कराई? बाढ़ सहायता में उदासीनता एवं लापरवाही करने के आरोप में किस-किस जिले में किस-किस अधिकारी व कर्मचारी को दोषी पाया गया? उनके विरुद्ध सरकार द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई?

(6) क्‍या यह सही है कि डिजास्‍टर मैनेजमेण्‍ट एक्‍ट, 2005 के अन्‍तर्गत केन्‍द्र सरकार द्वारा राज्‍य सरकार को दिशा-निर्देश जारी किए गए थे? यदि हां, तो कब और उन निर्देशों के अनुसार राज्‍य सरकार ने क्‍या-क्‍या कदम उठाए? निर्देशों की प्रति सदन की मेज पर रखें। क्‍या डिजास्‍टर मैनेजमेण्‍ट एक्‍ट, 2005 की धारा 25 (1) के अनुसार डिस्ट्रिक्‍ट डिजास्‍टर मैनेजमेण्‍ट ऑथोरिटी राजस्‍थान में बनाई गई है? यदि हां, तो कहां-कहां?

(7) सी आर एफ, बाढ़ एवं अकाल राहत कोष की कितने-कितने प्रतिशत राशि किस-किस कार्य में खर्च की जाएगी? क्‍या राज्‍य सरकार द्वारा इसके लिए कोई दिशा-निर्देश जारी किए गए? यदि हां, तो क्‍या?

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री, (डा. किरोड़ी लाल): (1) वर्ष 2006-07 में राज्‍य के विभिन्‍न जिलों में अतिवृष्टि होने से बाढ़ की स्थिति जिन-जिन गांवों में उत्‍पन्‍न हुई उनका विवरण परिशिष्‍ट-1 पर संलग्‍न है। जिलेवार नुकसान का विवरण परिशिष्‍ट-2 पर संलग्‍न है।

(2) उक्‍त अवधि के दौरान जिलेवार एवं ग्रामवार बाढ़ एवं बिजली गिरने से मृत व्‍यक्तियों की संख्‍या एवं बाढ़ से डूबकर मरने वाले पशुओं की जिलेवार संख्‍या का विवरण परिशिष्‍ट-3 पर संलग्‍न है।

(3) राज्‍य सरकार द्वारा बाढ़ से मृतक प्रति व्‍यक्ति 50,000 रुपए मृतक के आश्रितों को सहायता दी जाती है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के एक परिवार के दो या दो से अधिक पशुओं के मृत होने पर लघु, सीमान्‍त कृषकों, खेतीहर श्रमिकों के व्‍यक्तियों के मृतक पशु की कीमत का 50 प्रतिशत अनुदान या अधिकतम 10,000 रुपए व अन्‍य परिवारों के पशुओं की कीमत का 30 प्रतिशत अनुदान या अधिकतम 7500 रुपए दिए जाते हैं। यदि एक ही पशु की मृत्‍यु हुई है तो सहायता अनुसूचित जाति एवं जनजाति के परिवार को अधिकतम 5000 रुपए की अनुदान राशि तथा अन्‍य परिवारों को 3750 रुपए है। दिशा निर्देशों की प्रति परिशिष्‍ट-4 पर संलग्‍न है।

(4) वर्ष 2005-06 एवं 2006-07 में राशि की उपलब्‍धता निम्‍न प्रकार रही है:-

1.4.2005 को अन्तिम शेष:                      359.45 करोड़ रुपए       

                    (under protest)

2005-06 की बचत                            51.53 करोड रुपए

2006-07 में सी आर एफ में कुल प्राप्तियां          436.42 करोड़ रुपए

2006-07 में एन सी सी एफ में कुल प्राप्तियां       100.00 करोड़ रुपए

कुल राशि                                     974.40 करोड़ रुपए

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आपदा प्रबन्‍ध एवं सहायता मद में वित्‍तीय वर्ष 2005-06 एवं 2006-07 (व्‍यय माह अगस्‍त, 2006 तक) में किए गए व्‍यय का मदवार व जिलेवार व्‍यय का विवरण क्रमश: परिशिष्‍ट- 5 व 6 पर उपलब्‍ध है।

जीवन रक्षक उपकरण एवं अन्‍य आवश्‍यक उपकरण एवं प्रशिक्षण हेतु उपकरण क्रय हुतु निम्‍न प्रकार राशि स्‍वीकृत की गई है:-

                    वर्ष 2005-06 में

महानिदेशक, पुलिस                                   25.00 लाख रुपए

 

                   

वर्ष 2006-07 में

विभाग का नाम 

स्‍वीकृति दिनांक

स्‍वीकृत राशि लाखों में

महानिदेशक, पुलिस     

10.5.06 

149.32 

महानिदेशक, पुलिस

16.6.06 

 58.70

उप महासमादेष्‍ठा गृह रक्षा

10.5.06 

 20.07

उप महासमादेष्‍ठा गृह रक्षा

7.7.06

  6.00

निदेशक स्‍थानीय निकाय (नगर निगम, जयपुर

14.6.06 

 93.00 

जल संसाधन विभाग

22.9.06

141.20  

कुल योग

 

468.29

वित्‍तीय वर्ष 2005-06 की स्‍वीकृत राशि के विरुद्ध महानिदेशक, पुलिस द्वारा राशि रुपए 14.47 लाख व्‍यय किए गए हैं। वर्ष 2006-07 में स्‍वीकृत राशि के विरुद्ध व्‍यय किए जाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

(5) राज्‍य सरकार द्वारा केन्‍द्र सरकार से सहायतार्थ विशेष पैकेज के जरिये 3200 करोड़ रुपए की मांग की गई एवं 3284.22 करोड़ रुपए का ज्ञापन भी प्रस्‍तुत किया गया।

राज्‍य सरकार द्वारा बाढ़ राहत व सहायता हेतु वर्ष 2006-07 में 550.29 करोड़ रुपए की राशि उपलब्‍ध कराई गई है। बाढ़ सहायता में उदासीनता एवं लापरवाही करने वाले अधिकारी/कर्मचारियों के विरुद्ध की गई कार्यवाही का विवरण परिशिष्‍ट-7 पर संलग्‍न है।

(6) केन्‍द्र सरकार ने डिजास्‍टर मैनेजमेण्‍ट एक्‍ट 2005 की प्रति के साथ एक पत्र प्रेषित किया जो कि राज्‍य सरकार को दिनांक 10.4.06 को प्राप्‍त हुआ है। इस पत्र के अनुसरण में प्रकरण का विधिक परीक्षण करवाया जा रहा है। वैसे भारत सरकार ने इस एक्‍ट की प्रथम अधिसूचना 25 जुलाई, 2006 को जारी की है, जिसकी प्रति राज्‍य सरकार को दिनांक 10.8.06 को प्राप्‍त हुई थी।

(7) सी आर एफ की राशि को व्‍यय करने के लिए केन्‍द्र सरकार द्वारा नोर्म्‍स जारी किए हुए हैं, उन्‍हीं के अनुरूप खर्च किया जाता है। राज्‍य सरकार द्वारा पृथक से कोई प्रतिशत निर्धारित नहीं किया जाता है। बाढ़, अकाल या अन्‍य प्राकृतिक आपदा के नोर्म्‍स अनुसार ही आपदा की गम्‍भीरता एवं प्रकृति को देखते हुए आवश्‍यकतानुसार व्‍यय किया जाता है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्रीजी से प्रश्‍न है कि जीवन रक्षक उपकरण और इससे सम्‍बन्धित सामान खरीदने के लिए आपने कुल 468.22 करोड़ रुपए का अलोटमेण्‍ट किया, 2005-06 में भी किया और 2006-07 में भी किया और इस बाढ़ की परिस्थिति को देखते हुए आपने इसमें से केवल मात्र 13 और 14 लाख रुपए खर्च किए।

श्री समर्थ लाल (राजगढ़): इतना विस्‍तृत सवाल है, इतना विस्‍तृत उत्‍तर है इसमें, सवाल पूछने का सवाल ही पैदा नहीं होता। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यहां कोई अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का मामला थोड़े ही है जो हर बात में आप ऐसे समर्थन करते रहो। वहां तो करना आपका वाजिब है। ...(व्‍यवधान)... आपने 4 करोड़ 68 लाख रुपए का अलोटमेण्‍ट जीवन रक्षक उपकरण खरीदने के लिए किया और जीवन रक्षक उपकरण खरीदने के लिए खर्च किया  14 लाख रुपए और स्‍थान-स्‍थान पर इस बाढ़ के समय में सार्वजनिक रूप से सरकार की इस बात के लिए आलोचना हुई है कि जीवन रक्षक उपकरण खरीदने में सरकार ने ढि़लाई की है। उसके पास पैसा था और उसने बाढ़ के हिसाब से जो भी जीवन रक्षक उपकरण थे वह आपने नहीं खरीदे, इसका क्‍या कारण है और इसमें विलम्‍ब क्‍यों हुआ।

दूसरा, डिजास्‍टर मैनेजमेण्‍ट एक्‍ट के तहत केन्‍द्र सरकार के डाइरेक्‍शन 10.4.6 को आना आप मानते हैं। डिजास्‍टर मैनेजमेण्‍ट एक्‍ट के तहत विस्‍तृत गाइड लाइन है कि आपको डिस्ट्रिक्‍ट लेवल पर क्‍या करना है, प्रदेश लेवल पर क्‍या करना है कैसे प्राधिकरण बनाना है और आप इसका जवाब आज यह दे रहे हैं कि अभी उस डाइरेक्‍शन का विधिक परीक्षण करवाया जा रहा है।

श्री अध्‍यक्ष: भाषण नहीं, प्रश्‍न पूछें आप, भाषण देने लग गए आप तो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हां, यही पूछ रहा हूं, उसका जवाब यह दे रहे हैं कि लॉ डिपार्टमेण्‍ट से उसको दिखवा रहे हैं, इतने महीने हो गए और आप लॉ डिपार्टमेण्‍ट से आज कि आपने पूरी जानकारी नहीं ली, इसका क्‍या कारण है।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, प्रश्‍न के फोर्म में पूछिए आप। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): तीसरा इसमें जो मेरा महत्‍वपूर्ण सवाल है।

श्री अध्‍यक्ष: घोटाला नहीं, आप तो प्रश्‍न के रूप में पूछे।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हां, हां, तीसरा प्रश्‍न ही तो पूछ रहा हूं, प्रश्‍न तो पूछ लें न, जो सूची आपने बाढ़ और बिजली गिरने से मरने वालों की दी है, उसकी आप व्‍यक्तिश: पुष्टि करते हैं या जो सूची आपको अधिकारियों ने दी है उसमें अगर कोइ जानबूझकर कोई नाम नहीं लिखा गया तो उसके जिम्‍मेदार आप हैं या आपके अधिकारी हैं, यह बता दें, इसके बाद में दूसरी बात करूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: यह क्‍या हुआ? आप प्रश्‍न ऐसे करने बैठेंगे तो इतने सारे प्रश्‍नों का उत्‍तर मंत्रीजी देंगे?

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वैसे तो मैंने पूरी जानकारी दे दी है। भारत सरकार का पत्र नोर्थ ब्‍लॉक, न्‍यू डेल्‍ही, डेटेड 7 अगस्‍त, 2006 का हमें प्राप्‍त हुआ, डिप्‍टी सेक्रेटरी टू दी गवर्नमेण्‍ट ऑफ इण्डिया, आर के सिंह का, यह है 28 जुलाई, 2006 का, यह 10.8.2006 को हमको प्राप्‍त हआ, इसका हम विधिक परीक्षण करवा रहे हैं। हमारे स्‍टेट में और जिलों में कौन-कौनसे डिजास्‍टर मैनेजमेण्‍ट को हम लागू कर सकते हैं उसका विधिक राय आने के बाद हम इसको जल्‍दी लागू कर देंगे। 8.10.2006 को हमें पत्र मिला है और हम इस पर विधिक राय ले रहे हैं, और कोई ज्‍यादा लेट नहीं हो रहा है।

 

Gpc/akt/06102006/1110/1b

 

10.8.2006 को जो प्राप्‍त हुआ है उसकी हम कानूनी राय ले रहे हैं। दूसरा आपने ..(व्‍यवधान)..

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): इसी संदर्भ में पूछना चाहता हूं बाद में कंफ्यूजन नहीं होगा। डिजास्‍टर मैनेजमेंट बिल राज्‍य सभा से 28 नवम्‍बर, 2005 को पास हुआ है। लोक सभा में यह पास हुआ है 12 दिसम्‍बर, 2005 को। 12 दिसम्‍बर, 2005 का आपदा प्राधिकरण का निर्माण करने का पार्लियामेंट एक्‍ट पास कर देती है। राज्‍य सरकार के पास में, पूरी दुनिया के पास में यह बिल आ जाता है, सूचना आ जाती है उसके आठ महीने व्‍यतीत होने के बाद भी न तो राज्‍य ने प्राधिकरण बनाने की दिशा में कोई काम किया और न आपदा प्रबंधन के लिए जो दिशा निर्देश उन्‍होंने जारी किये थे उसकी तरफ कोई काम किया क्‍योंकि इसमें महत्‍वपूर्ण यह नहीं है। इसमें महत्‍वपूर्ण यह है कि यदि आपदा प्राधिकरण का गठन कर दिया जाता और जिलो के अंदर इसका गठन कर दिया जाता है तो केन्‍द्र सरकार गठन के हिसाब से उसके अंदर समुचित राशि भी उपलब्‍ध कराती है तो अपने अगर जल्‍दी गठन कर देते या उस दिशा में कदम उठा लेते तो शायद केन्‍द्र सरकार से सही समय पर समुचित सहायता मिल जाती।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय सदस्‍य, एक्‍ट का जो टाइम आप बता रहे हैं जब एक्‍ट पारित हो गया, लेकिन भारत सरकार ने इसका नोटिफिकेशन 28 जुलाई, 2006 को किया, यह शायद आपके पास नहीं है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप स्‍वयं सहमत हैं कि जुलाई में नोटिफिकेशन हो गया था, जुलाई के बाद बाढ़ आई है। तो सरकार को जुलाई के बाद एक्‍शन लेने में क्‍या तकलीफ थी?

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): यह बात तो सही है लेकिन आप तो अनुभवी मंत्री रहे हो कितने प्रोसिजर से निकलता है और कानूनी राय भी इसमें लेना जरूरी है क्‍योंकि नेशनल डिजास्‍टर मैनेजमेंट ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपकी बात से बिलकुल सहमत हूं सरकार के पास आने के बाद भी हमारा अनुभव यह कहता है कि हमें अरजेंसी नहीं थी इसलिए हमने कोई कार्यवाही नहीं की।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  हर स्‍टेट में आपदा का अलग-अलग नेचर होता है। अब तक यहां अकाल पड़ता है तो कई जगह अकाल नहीं पड़ता। कब जगह भारी वृष्टि होती है तो कई जगह भारी वृष्टि नहीं होती। कई जगह भूकम्‍प आता है तो कई जगह नहीं आता। तो सबकी स्‍टडी करने की हमारी जिम्‍मेदारी थी, कौन-कौनसी इस एक्‍ट की धाराएं हमारे स्‍टेट में लागू करेंगे। इसलिए सब समय लगा है और अब इसकी कानूनी राय जैसे ही आ जाएगी हम इसे लागू करेंगे।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या माननीय मत्री महोदय यह बताएंगे कि चार करोड़ से ज्‍यादा जीवन रक्षा के उपकरण नहीं खरीदने से कितने लोगों की मृत्‍यु हुई? इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है?

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय सदस्‍य, जितनी भी डेथ हुई हैं आपको पता है, इसमें आप देख लें क्‍वश्‍चन के जवाब में कवास या मलवा में ज्‍यादा डेथ हुई है 109 । 109 डेथ वे हुई हैं जो रात को सो रहे थे और पानी घुस गया। हम सारे उपकरण भी खरीदकर बाड़मेर में रख देते या जयपुर में रख देते तो हम इनकी जान नहीं बचा सकते थे, पर फिर भी हमने 4 करोड़ 68 लाख रुपये का अब दिया और 25 लाख पहले दे दिया, 4 करोड़ 68 लाख की खरीदने की प्रक्रिया चल रही है, आगे कोई ऐसी बात होगी तो हम प्रयास करेंगे कि दुर्घटना से जनता को बचाया जा सके।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मंत्री महोदय, राजसमंद में 9 अगस्‍त को बागेरिका नाका पर एक बस में 56 सवार आदमियों की प्रोब्‍लम हो गई थी। डेढ़ बजे प्रशासन को सूचना मिल गई थी शाम को 6 बजे तक कोई व्‍यवस्‍था नहीं हुई, पानी रिसीड हुआ इसलिए आदमी बचे। यह घटना उसके बाद हुई है पाली वाली। यदि 9 अगस्‍त को जीवन रक्षा उपकरण आपके पास उपलब्‍ध होते तो क्‍या खारी की घटना होती? क्‍या आदमियों को नहीं बचाया जा सकता था?

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, ऐसा कौनसा उपकरण खारी की नदी में काम में नहीं लिया गया उनके प्राण बचाने के लिए क्रेन वहां पर थी, ट्रेक्‍टर वहां पर था, बड़ा ट्रोला वहां पर था, आर्मी के लोग वहां पर पहुंच गये थे। हेलीकोप्‍टर से वहां पर ट्राई की गई, गोताखोर वहां पर थे, आर्मी का एक आदमी बहकर चला गया एक बड़ी मुश्किल से बचा।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): वह वहां पर हेलीकोप्‍टर होता तो जान बच जाती उनकी। ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): सरकार यह मानती है कि राजस्‍थान में चार करोड़ रुपये के जीवन रक्षक उपकरण क्रय करने की आवश्‍यकता नहीं है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): क्‍यों मानती है?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): सब व्‍यवस्‍था आपके पास है, फिर भी आप बचा नहीं पाये। आपको जरूरत ही नहीं है। राजस्‍थान सरकार का यह मानस है कि चार करोड़ रुपये के उपकरण खरीदने की आवश्‍यकता नहीं है। उपकरण सब उपलब्‍ध है उसके बाद भी आदमी बह गये।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  सरकार यह भी बताए कि वहां जो हत्‍याएं हुईं उसके जिम्‍मेदारी यह लेती है या नहीं लेती है क्‍योंकि इनकी लापरवाही से और कोताही हुई है।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): हमको उपकरण खरीदने की आवश्‍यकता है इसलिए आवश्‍यकतानुसार 4 करोड़ 68 लाख की सेंक्‍शन निकाली है और आवश्‍यकता इसलिए पड़ी है कि अबकी बार जो स्थिति भयावह बाढ़ की बाड़मेर जैसी जगह बन गई, क्‍योंकि पहले कभी हम सोचते नहीं थे ऐसी बाढ़ आ जाएगी इसलिए हम ऐसे उपकरण खरीदने के लिए हमने सेंक्‍शन निकाली है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय मंत्रीजी, आपके तो लेटेस्‍ट हेलीकोप्‍टर आया है। उस हेलीकोप्‍टर में एक इंस्‍ट्रूमेंट लगाकर लिफ्ट नहीं कर सकते थे उसको प्रोक्‍योर करेंगे आप? आपने इतना बड़ा लेटेस्‍ट हेलीकोप्‍टर खरीदा है उसको इमरजेंसी में रेसक्‍यू करने के लिए एक इक्विपमेंट लगाने के बाद आप रेसक्‍यू कर सकते हैं। क्‍या राजस्‍थान सरकार ने सप्‍लीमेंट करने के लिए प्रोक्‍योरमेंट किया है? जब 25 करोड़ रुपये आप खर्च कर चुके तो ..(व्‍यवधान)..

श्री नवरतन राजोरिया (फुलेरा): वे कार को निकालना चाहते थे। क्‍या कार निकालेंगे?

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय मंत्रीजी यह कह रहे हैं कि इसकी जरूरत नहीं है। 1997 की 26 अगस्‍त को बांडी नदी के अंदर 18 आदमी बह गये उस समय भी आपकी सरकार थी तब भी आपको यह विचार नहीं आया कि हमको इन उपकरणों की जरूरत है और उसके बाद 10 महीने बाद आपकी सरकार चली गई और अब इस बाढ़ में जो लोग मरे हैं उनके पाप से भी आपकी सरकार चली जाएगी।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): रेस्‍क्‍यू के लिए हर हेलीकोप्‍टर या हर पायलट क्‍या ट्रेंड होगा?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपके पास जो लेटेस्‍ट इक्विपमेंट है, लेटेस्‍ट जो हेलीकोप्‍टर है उसमें एक इंस्‍ट्रूमेंट होता तो खारी नदी में जाकर वह लिफ्ट कर सकता था। वह इंस्‍ट्रूमेंट परचेज नहीं कर रखा आपने। आप बताओ कर सकते हैं या नहीं कर सकते? ..(व्‍यवधान)..

श्री नवरतन राजोरिया (फुलेरा): वे कोर को छोड़ना नहीं चाहते थे खुद ही।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): वह आप ले आना ट्रेक्‍टर।

श्री नवरतन राजोरिया (फुलेरा): कार को लिफ्ट लाएगी क्‍या?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हेलीकोप्‍टर की बात हो रही है ट्रेक्‍टर की बात कर रहे हैं। राजस्‍थान सरकार ने 25 करोड़ रुपया खर्च करके हेलीकोप्‍टर खरीदा है उसमें एक इंस्‍ट्रूमेंट और लगाने की आवश्‍यकता है, वह क्‍यों नहीं प्रोक्‍योर किया जा रहा है जिएऐ उसका उपयोग हो सके। इसका जवाब दीजिए आप। वह हेलीकोप्‍टर मल्‍टीपरपज काम में आ सकता है, ऐसे समय में रेस्‍क्‍यू के लिए काम आ सकता है, वह व्‍यवस्‍था हम क्‍यों नहीं कर रहे हैं।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष जी, माननीय दिगम्‍बर जी ने जो बात कही है हर पायलट उसका एक्‍सपर्ट नहीं हो सकता, मैं भी डाक्‍टर हूं, दिगम्‍बर जी भी डाक्‍टर हैं और डा. चन्‍द्रशेखर भी डाक्‍टर हैं। ये गायनोकोलोजिस्‍ट हैं, मैं गायनिक आपरेशन नहीं कर सकता। वे मेडिसन के एक्‍सपर्ट हैं मैं मेडिसन का एक्‍सपर्ट नहीं हो सकता। इसलिए हो सकता है वो पायलट एक्‍सपर्ट है या नहीं। एक्‍सपर्ट नहीं था इसलिए वह इंस्‍ट्रूमेंट उसमें नहीं था।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह तो वर्षों से हेलीकोप्‍टर है, आपको इसकी ट्रेनिंग देनी चाहिए थी।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): आठ किलोमीटर दूर एयरफोर्स का एयरपोर्ट था। क्‍या एक भी वहां पर पायलट नहीं था?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): एमबीबीएस तो तीनों डाक्‍टर हैं। डा. किरोड़ीलाल जी, डा. दिगम्‍बर सिंह, डा. चन्‍द्रशेखर बैद तीनों एमबीबीएस तो हैं। इसमें तो कोई तकलीफ तो नहीं है। बेसिक क्‍वालिफिकेशन एमबीबीएस की तो आप तीनों में है।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): मैं एक्‍सपर्ट नहीं हूं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): डा. साहब, यह उदाहरण जमा नहीं। आप यह कहें कि एक ड्राइवर है वह कार चला सकता है जीप नहीं चला सकता, क्‍वालिश चला सकता है बोलेरो नहीं चला सकता। यह काहे का उदाहरण दिया आपने?

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्रीजी, आप तो बता दें कि अब क्‍या विचार है आपका?

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 18 आदमी बांडी नदी में बह गये, उस समय भी कोई नहीं पहुंचा। जोधपुर से मात्र 50 किलोमीटर दूर है। ..(व्‍यवधान).. उस समय आपको ट्रेनिंग देनी चाहिए या नहीं। यह राजस्‍थान सरकार का हेलीकोप्‍टर है, आप लोगों के लिए बैठने के लिए नहीं है, लोगों की जान बचाने के काम आता है। तो आपकी सरकार की वाहवाही होती और इसी पाइंट पर कहते हो ड्राइवर जानता नहीं है। ..(व्‍यवधान)..

श्री भवानी सिंह राजावत (संसदीय सचिव): मैं हिण्‍डौली से आने वाली माननीय सदस्‍य को बताना चाहता हूं कि हमने तो हेलीकोप्‍टर का उपयोग बाढ़ पीडि़तों की मदद के लिए किया, लेकिन पंजाब के माननीय मुख्‍यमंत्री घर से सचिवालय भी हेलीकोप्‍टर से आते हैं। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी खड़े हैं, आप क्‍या बोल रहे हो? ..(व्‍यवधान)..

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपने हेलीकोप्‍टर का उपयोग अपने निजी स्‍वार्थों के लिए किया। 19 तारीख को क्‍या उपयोग था हेलीकोप्‍टर का, यह बताएं आप ताकि लोगों को पता चले 6 आदमी मर गये। आपका परिवार का एक आदमी डूबकर मरे तो आपको आंसू आ जाएंगे। ..(व्‍यवधान).. इससे पहले बांडी नदी में 18 आदमी मर चुके हैं 1997 में। इनको ट्रेनिंग देनी चाहिए थी और जोधपुर से 50 किलोमीटर दूर मरे थे और यह 105 किलोमीटर दूर है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): आप सुन तो लो। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: माननीय प्रतिपक्ष के सदस्‍यों को न तो जानकारी चाहिए, न आपको बाढ़ पीडि़तों के बारे में जानकारी चाहिए, न उन किसानों के बारे में जानकारी चाहिए। ये सब खड़े हो गये आप। ..(व्‍यवधान)..

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  राजस्‍थान सरकार के मंत्रियों को क्‍या हो गया? कभी यहां बात चलती है तो संसदीय कार्य मंत्री कश्‍मीर चले जाते हैं, अब संसदीय सचिव पंजाब चले गये। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या तरीका है यह?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): बात चल रही है राजस्‍थान और इनको कश्‍मीर और पंजाब घूमता नजर आ रहा है। आप राजस्‍थान की बात करो। कहां घूम रहे हैं? कभी गुजरात भी तो घूमा करो।

श्री भवानी सिंह राजावत (संसदीय सचिव): आपके समय कोटा में 30 आदमी बह गये थे। मुख्‍यमंत्रीजी 17 दिन बाद में कोटा पहुंचे थे, मृतकों के घर भी नहीं गये थे और फूटी कौड़ी की व्‍यवस्‍था भी नहीं की थी। आपका इतिहास उठाकर देखें, बहुत काला इतिहास है।

 

मोहन/अरूण/6102006/1120/1c

 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): वह मर गये, अच्‍छा होता वह हेलीकोप्‍टर आपकी खारी नदी पर आ जाता तो हम समझते कि आपमें संवेदनशीलता है। अगर सेना का नहीं आया, इन मंत्री जी ने कोशिश की, सेना का नहीं आया लेकिन आपका हेलीकोप्‍टर तो आपके पास था, वह हेलीकोप्‍टर आना चाहिए था। वह हेलीकोप्‍टर वहां पर नहीं आया और आपके वहां पड़ा रहा और आप संवेदनशीलता की बात करते हैं? ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): एक मिनट आप सुन लो फिर दे देना। ...(व्‍यवधान)...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): यह माननीय सदस्‍य फालना की घटना से ज्‍यादा उत्‍तेजित हैं, मैं उन्‍हें थोड़ी जानकारी दे दूं अगर ये तसल्‍ली से सुनें तो। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: वह जानकारी तो लेना नहीं चाहते।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): हम सब जानते हैं, इन्‍होंने मंत्री जी ने कोशिश की और हेलीकोप्‍टर नहीं आया लेकिन आपके हेलीकोप्‍टर का क्‍या हुआ, हम तो यह जानना चाहते हैं आपसे। ...(व्‍यवधान)... 19 तारीख को आपके हेलीकोप्‍टर का क्‍या हुआ ?

श्री अध्‍यक्ष: वह केवल शोर मचाएंगे। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कि आपने जो पर्ची ..

श्री अध्‍यक्ष: आप पहले तो अपने प्रतिपक्ष के लोगों को यह समझाएं कि जो मूल प्रश्‍नकर्ता हैं...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मेरी हैसियत क्‍या है, साहब ?

श्री अध्‍यक्ष: आप समझाइए न, एक साथ क्‍यों खड़े होते हैं ?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): वह तो नेता साहब समझाएंगे, मैं कैसे समझा सकता हूं ? या आप समझाओगे। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: इसका मतलब मैं यह समझती हूं कि ...(व्‍यवधान)... न भविष्‍य के लिए कैसे उपाय किए जाएं, न उसके बारे में आपको किसी तरह की चिंता है, आपको केवल शोर मचाने से मतलब है। एक साथ क्‍यों खड़े होते हैं आप ? एक एक खड़े होइए, पूछिए एक एक बात फिर देंगे जवाब ये।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): With due respect, शोर मचाने का इतना गंभीरतम प्रश्‍न है, राजस्‍थान का ही है। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हमारा काम शोर मचाने का ही है, हमारा काम राज करने का नहीं है, हमारा काम शोर मचाने का ही है। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप पूछिए, जवाब दिलवाऊंगी सरकार से लेकिन आप एक साथ खड़े होकर शोर मचाने लगते हैं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यही काम है हमारा। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): हमारा यह दुर्भाग्‍य है अध्‍यक्ष महोदय, कि हम सही प्रश्‍न पूछते हैं तो आप शोर समझती हैं, हम सही बात पूछ रहे हैं, पाली जिले के रहने वाले हैं और उसको आप शोर समझ रही हैं, यह हमारा दुर्भाग्‍य है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा जो सवाल है कि अभी हेलीकोप्‍टर की जो चर्चा हुई, बूंदी जिले में भी हेलीकोप्‍टर गया था, माननीय राज्‍य मंत्री जी भी होंगे और माननीय संसदीय सचिव भी होंगे या ना होंगे उस जिले का नाम बूंदी जिले में जहां पर आप बाढ़ पीडि़तों की सहायता करने के लिए हेलीकोप्‍टर से गये, आपने जो परिशिष्‍ट संख्‍या 2 सूची में दिया है उसमें जो वर्ष 2006-07 के विभिन्‍न जिलों में अतिवृष्टि, बाढ़ से नुकसान हुआ, उसमें बूंदी जिले का नाम क्‍यों गायब है। आप गये थे वहां आपने बांटी थी, वहां की स्थिति खराब थी, फिर आपने परिशिष्‍ट जारी किया तो इसमें बूंदी जिले का यह माननीय राज्‍य मंत्री जी पंचायती राज के बैठे हैं इसमें बूंदी को विशेष रूप से क्‍यों एक्‍सक्‍लूड किया आपने ? इसी प्रकार से आपने मृतकों की जो सूची दी है, ...(व्‍यवधान)... आप लाइटली मत लिया करो हमेशा ही दिलावर साहब, थोड़ा। आपने उस सूची में जानबूझकर उसको क्‍यों निकाला ? नम्‍बर दो, जो बूंदी के सत्‍तूर में बाढ़ से एक आदमी मरा, आपने उसका कहीं बाढ़ से मरने वालों में नाम नहीं लिखा। इसी प्रकार 28 जुलाई को बांकली

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछें, भाषण नहीं दें।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): नहीं भाषण नहीं दे रहा हूं, साहब, यह जो सूची है।

श्री अध्‍यक्ष: तो आप यों पूछिए क्‍या बूंदी से मरा आपने उसको भी किसी प्रकार की सहायता दी ?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): नाम ही नहीं है न इसमें। इसमें नाम तो हो।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): पूरे दिन इस विषय पर डिबेट हो चुकी है सदन के अन्‍दर। बाढ़ के संबंध में पूरे दिन यहां पर चर्चा हुई है इसलिए अब इस सवाल का महत्‍व नहीं रहा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर दुबारा चर्चा चाहते हैं, यह प्रश्‍न के अन्‍दर भाषण दे रहे हैं, प्रश्‍न में तो उत्‍तर हमारा भी तैयार है, यह 24 पेज का उत्‍तर हम भी दे सकते हैं ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मरने वालों की जो सूचीा अध्‍यक्ष महोदय, इसमें जो दी है उसमें नाम आना चाहिए न मृतकों का ? अब उसमें नाम ही नहीं है जहां से वह मरा है, बाढ़ में बहा है, उसका नाम नही है। 28 जुलाई को बांकली में 6 आदमी मरे, उनका नाम नहीं है। इनका नाम सूची में नहीं है, इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है, अलग अलग जगह जो बाबा गांव में एक मरा, उसका नाम नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: मैं कह रही हूं प्रश्‍न पूछिए। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मेरा यह पूछना है कि नाम नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: मोर देन हंडरेड पेजेज हैं ये।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): इन्‍होंने सूची दी है न साहब। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, यह नाम नहीं है, हम तो पूछ रहे हैं इसीलिए। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): इस सूची में नाम नहीं है मरने वालों का और यह जो गलत सूची आपने दी है उसके लिए जिम्‍मेदार कौन है ? उसके लिए किस अधिकारी की जिम्‍मेदारी है और उसके खिलाफ क्‍या कार्यवाही करोगे या आप स्‍वयं अपनी जिम्‍मेदारी लेते हो तो आप इसकी क्‍या कार्यवाही करोगे, आपने जवाब दिया है।

श्री अध्‍यक्ष: आप बिराज जाओ।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो कोटा बैराज का पानी खोला तो सवाई माधोपुर के खंडार व धौलपुर तक पानी भर गया था तो हमने उन गांवों को सावचेत किया कि गांवों में जो लोग हैं वे सुरक्षित स्‍थानों पर पहुंच जाएं, हमने भी पूछा है, वैसे बूंदी में जो मेज नदी है उसका पानी ज्‍यादा आया, चार पांच गांव घिर गये। वहां मैं खुद जाकर कलक्‍टर को लेकर खुद उन गांवों में पैकेट गिरा कर आया और मैंने बाद में मुख्‍य मंत्री जी को बुलाया, मुख्‍य मंत्री जी उतर कर गांव में सब से मिल कर आई और जो ये मरने की बात बता रहे हैं, वह जो आदमी है वह तालाब में डूबकर मरा है, बाढ़ के कारण नहीं मरा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): वह जो मरा है वह नदी में बाढ़ आने से मरा है, आपके डिस्ट्रिक्‍ट कलक्‍टर से पूछ लेना परन्‍तु इसकी यह जो सूची आपने दी है जहां चीफ मिनिस्‍टर साहब गई हैं और आप गये हैं तो फिर वहां नुकसान हुआ उसका इसमें क्‍यों नहीं इंद्राज किया आपने ? क्‍या बाबूलाल जी वहां गये थे ? इन्‍हीं के यहां सबसे ज्‍यादा नुकसान हुआ है, इस सूची में क्‍यों नहीं दिया ? ...(व्‍यवधान)...

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह खंडन कर रहा हूं कि गांधी सागर में जो पानी आया उसका जो ओवर-फ्लो हुआ वह केशोरायपाटन क्षेत्र में पूरा का पूरा आया। मैं यह निश्चित रूप से कन्‍फम कर रहा हूं सरकार के इस प्‍लेटफार्म पर कि किसी भी प्रकार की जनहानि किसी भी तरह की नहीं हुई है, कोई भी जनहानि केशोरायपाटन विधान सभा क्षेत्र में जो गांधी साहगर का पानी ओवर-फ्लो हुआ उसमें किसी भी प्रकार की जन क्षति नहीं हुई है। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): जनहानि की बात नहीं है।

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी बात तो सुनिए।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह जनहानि की बात नहीं है, नुकसान हुआ बाढ़ के कारण से उसकी बात है।

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): मैं दूसरी बात भी कर रहा हूं। मैं उस टाइम बाढ़मेर क्षेत्र के दौरे पर था, मेरी माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय से बात हुई, उस टाइम माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय मेरे विधान सभा क्षेत्र में गई।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): आप बाड़मेर में थे, मैं खण्‍डार में था, मेरी तो सुनें।

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): और जो 3-4 गांव घिर गये थे उसमें कांकरा गांव में इन्‍होंने हेलीकोप्‍टर से भोजन के पैकेट गिराए और सब लोगों की पूरी व्‍यवस्‍था की गई है। यह मैं निश्चित रूप से आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): नुकसान हुआ है अपने बाढ़ से और चम्‍बल के पानी से उसका नाम नहीं है, कितना नुकसान हुआ है, यह मैं कह रहा हूं। कोई नुकसान नहीं हुआ क्‍या बाबूलाल जी ? अगर आप यह कह दो ...(व्‍यवधान)... तो मुझे कुछ नहीं कहना । आप कह दो कि कोई नुकसान नहीं हुआ बूंदी क्षेत्र में ...(व्‍यवधान)... आप कह दो कोई नुकसान नहीं हुआ, मरे हैं ...(व्‍यवधान)...

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): जो नुकसान हुआ, जो खेती-बाड़ी का नुकसान हुआ उसके लिए निश्चित रूप से बूंदी प्रशासन से सर्वे कराने के लिए कहा गया है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): तो फिर नाम क्‍यों नहीं है ? अगर नुकसान हुआ है बाढ़ से तो नाम क्‍यों नहीं है ?

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): उसकी सर्वे रिपोर्ट जिला प्रशासन की तरफ से निश्चित रूप से भेजी गई है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मैं यही तो कह रहा हूं नाम क्‍यों नहीं है ? बाढ़ का नुकसान हुआ है तो नाम क्‍यों नहीं है ?

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): बूंदी प्रशासन की तरफ से निश्चित रूप से जो बाढ़ का नुकसान हुआ है तो उसकी रिपोर्ट यहां आई है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): तो गलती किसकी है ? आप कहो अब उनसे गलती किसकी है ? ...(व्‍यवधान)...

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): बूंदी जिले का नुकसान हुआ है।

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): जनहानि की बात कही है उन्‍होंने, जनहानि की उन्‍होंने बात कही है, किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। मैं इस चीज को कन्‍फर्म कर रहा हूं ।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): जनहानि की बात ही नहीं है, नुकसान की बात है।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): नुकसान का मुआवजा दे दिया क्‍या आपने .? ...(व्‍यवधान)...

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): आज जो ओवर-फ्लो हुआ है उससे किसी भी मकान का कोई नुकसान नहीं हुआ ...(व्‍यवधान)...

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनका कोई मुआवजा नहीं दिया ...(व्‍यवधान)...

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): जो अकाल राहत के अन्‍दर सामग्री दी जानी चाहिए थी वह सामग्री पहुंच गई है। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मंत्री जी, आपके जिले में नुकसान हुआ है कि नहीं हुआ ? ...(व्‍यवधान)... आपने सरकारी उत्‍तर में यह दिया है, बूंदी जिले का नाम नहीं , इसके लिए जिम्‍मेदार कौन है ? आपने जो उत्‍तर दिया है उसके अन्‍दर बूंदी जिले का नाम नहीं है, इसके लिए जिम्‍मेदार कौन है ? ...(व्‍यवधान)...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय सदस्‍य, उसमें तो सवाईमाधोपुर का भी नाम नहीं है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): नहीं है तो गलत है। जहां बाढ़ से नुकसान हुआ है तो फिर नाम क्‍यों नहीं है ?

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): सुन तो लो ...(व्‍यवधान)...

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): आपकी कांस्‍टीट्यूएंसी है उसका नाम नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, खण्‍डार में भी बाढ़ आई थी। मंत्री महोदय, आप तो एक ही सवाल का जवाब दे दो, आपने हेलीकोप्‍टर से जो भोजन के पैकेट गिराए, वहां लड़ाई करवा दी और लोगों को पूरे पैकेट ही नहीं बांटे।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आप तो पहुंच ही नहीं वहां।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): वहीं था मैं।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): मैं तो तीन बार जाकर आया।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): लाठी मारकर ए.डी.एम. को भगाया वहां से ...(व्‍यवधान)... गांव वालों ने भगाया।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आप तो एक बिसकिट भी नहीं ले गये।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): आप तो हेलीकोप्‍टर से ऊपर चले गये और नीचे लड़ाई करवा दी आपने। ...(व्‍यवधान)...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आप तो कुछ भी नहीं ले गये।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): और मुख्‍य मंत्री जी एक हैंडपम्‍प पास करके आई थी वह भी नहीं लगाया आज तक।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आप तो एक बिसकिट भी नहीं ले गये।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): एक हैंडपम्‍प पास किया था मुख्‍य मंत्री महोदय ने वह भी नहीं लगा।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): और मैं पूरा एक हेलीकोप्‍टर भरकर कोटा से ले गया था।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): पैकेट पर लड़ाईयां करवा दी आपने। ...(व्‍यवधान)... लोगों ने आपके अधिकारियों को मारा।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): लड़ाईयां करवाना तो आसान है, काम करना बड़ा टेड़ा काम है।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): आपके अधिकारियों को मारा, आपके कर्मचारी जान छुड़ाकर भागे वहां से।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): मैं भरकर दुबारा ले गया था।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): आप तो छोड़कर नीचे लडाईयां करवा दी आपने और कोई राहत नहीं मिली वहां पर, कोई मुआवजा नहीं मिला। एक हैंडपम्‍प पास किया था मुख्‍य मंत्री ने वह भी नहीं लगा। ...(व्‍यवधान)... वह हैंडपम्‍प भी नहीं लगा हमारे।

 

Skp/aky/06102006/1130/1d/1

 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपने जो मरने वालों की सूची दी है उसमें शाहपुरा के विधायक के दो आदमी सुमेरपुर की नदी में डूबकर 20.8.06 को मर गये उनका सूची में नाम नहीं है। नावी के अन्‍दर एक ब्राह्मण मरा उसका सूची में नाम नहीं है। एक आदमी सुमेरपुर का मरा उसका सूची में नाम नहीं है, एक आदमी दूजाणा का मरा उसका सूची में नाम नहीं है तो आखिर इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है? (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिये। भाषण नहीं दें, प्रश्‍न पूछिये। (व्‍यवधान) प्रश्‍न के रूप में पूछिये। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): मरने वालों का बता रहा हूं। इन आदमियों का नाम नहीं है सूची के अन्‍दर। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह सूची गलत है, गैर जिम्‍मेदाराना ढंग से तैयार की गई है। इसको कोई देखने वाला नहीं है। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): सूची में नाम नहीं हैं इनके। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आगे का सवाल इससे भी जरूरी है। (व्‍यवधान) ये सुनना चाहते नहीं हैं। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): विधान सभा के अन्‍दर जो माननीय मंत्री जी जवाब दे रहे हैं और उस जवाब में मरने वालों की सूची में नाम नहीं है। हम यही तो पूछ रहे हैं कि नाम नहीं हैं तो इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ....... यहां पर सूची में नाम देते। (व्‍यवधान) नाम नहीं देते हैं।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अधिकारी हैं या मंत्री जी हैं? (व्‍यवधान) और यह हमारा दुर्भाग्‍य है कि ये हमारे जिले के प्रभारी मंत्री और हैं और इनको यही मालूम नहीं है कि हमारे प्रभार वाले जिले में कौन मर गये। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, मैंने आपसे निवेदन किया, स्‍थान ग्रहण कर लें। स्‍थान ग्रहण करें। आप प्रश्‍न के रूप में पूछिये। आप प्रश्‍न के रूप में पूछते नहीं और भाषण देने खड़े हो जाते हैं। समस्‍या तो यही है। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम यही पूछ रहे हैं कि इन लोगों के नाम मृतकों की सूची में क्‍यों नहीं हैं? इन लोगों के नाम मृतकों की सूची में क्‍यों नहीं हैं? (व्‍यवधान)

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): देवल साहब, आप कैसे बच गये? इस नदी में आप क्‍यों नहीं आये? आप आ जाते तो यह सब..... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): जब कि यह हमारा दुर्भाग्‍य है कि ये हमारे प्रभारी मंत्री हैं। इनके आने के बाद अकाल है, इनके आने के बाद लोग मरे हैं। (व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): .....बेकार की बात करते हो आप। आपको 100 हैण्‍डपम्‍प मंत्री जी ने दिये हैं। (व्‍यवधान) 100 हैण्‍डपम्‍प मंत्री जी ने दिये हैं फिर भी.... (व्‍यवधान)

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): एक हैण्‍डपम्‍प मुख्‍य मंत्री वाला नहीं लगा। (व्‍यवधान) वो हैण्‍डपम्‍प आज तक नहीं लगा। (व्‍यवधान) आपकी बात नहीं है मंत्री महोदय, सिंचाई मंत्री जी की बात है। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): जो आदमी मर गये, हैण्‍डपम्‍पों को छोड़ो। (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मैं एक निवेदन करना चाहता हूं अध्‍यक्ष महोदय कि एक हैण्‍डपम्‍प नहीं लगा यह यहां असेम्‍बली में कहने की बात है? (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): .....लेकिन आदमी मर गये उनके नाम नहीं हैं उसके लिए कौन जिम्‍मेदार है? मंत्री जिम्‍मेदार हैं या अधिकारी जिम्‍मेदार हैं? (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: श्री रघुवीर सिंह मीणा।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): नहीं लगा बिल्‍कुल गलत बात है। मेरे को बिल्‍कुल कम दिये हैं। (व्‍यवधान) किरोड़ी लाल जी के ज्‍यादा लगे। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय गृह मंत्री जी। माननीय गृह मंत्री जी, आपका प्रश्‍न पुकार लिया है। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, जवाब तो आया ही नहीं और हर बार यही प्रक्रिया अपनाई जा रही है। हर प्रश्‍न का जवाब आये नहीं और फिर दूसरा प्रश्‍न पुकार लेती हैं। हम इनसे पूछते हैं कि जो आदमी मर गये हैं उनके नाम सूची में नहीं हैं उसके लिए कौन जिम्‍मेदार है? (व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): ये तसल्‍ली से सुने तो मैं जवाब देने को तैयार हूं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यदि आप जवाब से असंतुष्‍ट हैं तो और नियम हैं उन नियमों में आइये। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, नियम क्‍या हैं, इन्‍होंने जवाब दिया है वह जवाब बिल्‍कुल गलत दिया है इसलिए आप इनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं? (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: गलत दिया उसके लिए भी नियम हैं उन नियम में आइये। (व्‍यवधान)

 

 

जनजाति उप योजना क्षेत्र के आदिवासियों के विरुद्ध

आबकारी अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमे

43. श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): क्‍या गृह मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि सरकार द्वारा जनजाति उपयोजना क्षेत्र के आदिवासियों के विरुद्ध आबकारी अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमे वापस लेने की घोषणा की गई थी?

(2) क्‍या यह भी सही है कि आदिवासियों पर 20 (बीस) बोतल तक के दर्ज मुकदमे वापस लेने की घोषणा की गई थी? यदि हां, तो आदिवासियों के विरुद्ध दर्ज ऐसे कितने मुकदमे वापस ले लिये गये? सूची सदन की मेज पर रखें।

गृह मंत्री(श्री गुलाबचन्‍द कटारिया): (1) सरकार द्वार जनजाति उप योजना क्षेत्र के आदिवासियों के विरुद्ध दर्ज आबकारी अधिनियम के तहत 2 वर्ष की सज़ा तक के दर्ज प्रकरण तथा 20 बोतल तक के दर्ज मुकदमे वापस लेने की घोषणा की गई थी।

(2) जी हां। (सूची संलग्‍न है)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से मैं स्‍पेसिफिक सवाल पूछूंगा। मंत्री जी, मैंने तो सवाल पूछा था सब-प्‍लान इलाके का, आपने पूरे राजस्‍थान का जवाब दिया उसके लिए धन्‍यवाद। 1490 प्रकरण आपने वापस लिये बताये और राजसमन्‍द और बारां भी जोड़ दिये जो मैंने पूछा नहीं था। यह काटने के बाद 1414 मुकदमें आपने वापस लिये। मेरा पहला सवाल तो यह है कि ये मुकदमे कितनी अवधि के हैं, कब से कब तक के हैं?

दूसरा, इसमें पुलिस ने कितने मुकदमे दर्ज किये हैं और आबकारी विभाग ने कितने मुकदमे दर्ज कराये हैं? एक बार जवाब दे दें।

श्री अध्‍यक्ष: आपने तो आबकारी अधिनियम का ही पूछा है, पुलिस का नहीं पूछा है।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): मैं यह चाह रहा हूं कि पुलिस स्‍वयं भी मुकदमे दर्ज करती हूं उसने कितने मुकदमे दर्ज किये और आबकारी विभाग ने कितने मुकदमे दर्ज करवाये और कितनी अवधि है?

श्री अध्‍यक्ष: आपने पूछा उसमें पुलिस का नहीं है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ये मुकदमे वापस नहीं लेने चाहिए माननीय सदस्‍य?

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): मैं पूछूंगा वो ही जवाब देंगे तो फिर मंत्री जी क्‍या जवाब देंगे? (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय सदस्‍य, ये मुकदमे वापस नहीं लेने चाहिए थे सरकार को? आप विरुद्ध में हो न? बोलो, विरुद्ध में हो तो।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): मान्‍यवर, रुको, शांति रखो, अभी पूछने दो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): कम से कम काम्‍पीटेंट मिनिस्‍टर हो जब तो मत बोला करो। (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, सराड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य की जो भावना है, यह घोषणा थी कि आदिवासी क्षेत्र के इस प्रकार के जिसमें 20 बोतल से कम का आबकारी का कोई मुकदमा बना हुआ हो और एक लघु प्रकृति के हैं जिसमें तीन महीने, छह महीने या साल भर की सज़ा है इस प्रकार के प्रकरणों के बारे में यह घोषणा थी और अप्रैल तक का जो आंकड़ा हमारे पास था, जो अप्रेल तक के मुकदमे दर्ज थे हमारे पास इन जिलों के आबकारी के, बांसवाड़ा के 636 मुकदमे इस प्रकार के थे जो इस श्रेणी के आते थे.....

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): एक मिनट, मैं इंटरप्‍ट कर रहा हूं आपको। यह नहीं, ये जो आपने बताये हैं ये कितने सालों के प्रकरण हैं?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): ये उस तारीख तक, अप्रेल, 2006 गया इसके पहले से लेकर के अप्रेल, 2006 तक के जितने मुकदमे थे जो 20 बोतल से कम के मुकदमे दर्ज थे ऐसे बांसवाड़ा में 636 थे उनमें से 313 हटाये, बारां में 69 थे सहरिया क्षेत्र में उनमें से 39 हटाये, चित्‍तौड़ में 300 मुकदमे थे, ये सारे के सारे मुकदमे केवल आदिवासियों के हैं जो हटाये हैं। इन 300 में से 185....

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, 242 लिये हैं वापस चित्‍तौड़ में।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): डूंगरपुर में 225 में से 145, सिरोही में 320 में से 236, राजसमंद में 44 में से 37, उदयपुर में 1920 में से 478 और सारे मिलाकर के 3514 में से 1433 ये तो थे आबकारी से सम्‍बन्धित। इसी तरह से जो लघु प्रकृति के मुकदमे थे इन जिलों में इनमें बांसवाड़ा में 4119 थे उनमें से 2111 हटाये, बारां में 200 थे उनमें से 90 हटाये, चित्‍तौड़ में 1623 थे उनमें से 235 हटे, डूंगरपुर में 973 थे उनमें से 254 हटे, सिरोही में 636 थे उनमें से 388, राजसमंद में 83 में से 37, उदयपुर में 3896 में से 1012 और कुल 11530 में से 4227 मुकदमे लघु प्रकृति के थे वे हटे। तो आबकारी के और लघु प्रकृति के जो अप्रेल तक हमारे पास सूचना थी सारी जिनमें 20 बोतल से कम के मुकदमे थे या जिनमें लघु प्रकृति की सज़ा थी और उस समय तक के जो सारे मुकदमें थे उनमें से कितने हटाये यह मैंने आपके सामने रखा है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक्‍साइज के तो समझ में आ गये पर लघु प्रकृति पर आज थोड़ा सा प्रकाश डाल दें कि लघु प्रकृति में किस प्रकार के केसेज आते हैं। अगर इसकी जानकारी दे दें तो बेहतर होगा।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): ......... 341 और इसमें केवल मोटर यान को छोड़कर के इस प्रकार के या फिर ऐसे जिसमें सामान्‍य सज़ा सी है। कुछ सैक्‍शन हैं जिन सैक्‍शंस के तहत जो मुकदमे दर्ज हैं लघु प्रकृति के, ये वैसे सामान्‍यत: अपनी जिला लेवल पर जो अपने कमेटी बनाई हुई है डी जे की अध्‍यक्षता में, वो भी इस प्रकार के लघु प्रकृति के मुकदमे सम्‍पूर्ण राजस्‍थान के अन्‍दर भी इस प्रकार के मुकदमे हटाने की प्रक्रिया है और एक कमेटी बनी हुई है चार लोगों की वो भी उसमें समय समय पर बैठती है और जो इस प्रकार के छोटे किस्‍म के जिसमें सामान्‍य हजार रुपया, 500 रुपया या 50 रुपया जुर्माना है इस प्रकार के केस वे भी अपनी उस निरन्‍तर प्रक्रिया में हटाते हैं। इस क्षेत्र के लिए, जो आदिवासी क्षेत्र है उसमें अप्रेल तक जो भी इस प्रकार के मुकदमे हमने छांटे उनमें से जितने हम हटा पाये, अभी भी कुछ मुकदमे हैं क्‍योंकि उनकी या तो पेशी जिस दि न थी उस दिन अभियुक्‍त उपस्थित नहीं था या न्‍यायालय ने उस दिन बदल दिया तो जैसे-जैसे इनकी तारीख पेशी आती जाएगी वैसे-वैसे मुकदमे विद्ड्रा होते जाएंगे।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मात्र दो वर्ष 1.4.2004 से 31.3.2005 और 1.4.2005 से 31.3.2006 तक दो वर्ष तक के मुकदमों के बारे में निवेदन करना चाह रहा हूं। मैं सवाल बनाऊंगा इसका वापस इसलिए आप इंटरप्‍ट नहीं करें। कुल दर्ज हुए आपके उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्‍तौड़ और सिरोही में 3179, इस सरकार का ही जवाब है यह, उसमें से मात्र एस टी के 2410 मुकदमे दर्ज हुए। 3179 में से 2410 मुकदमे दर्ज हुए मात्र दो वर्ष में। अब मेरा सवाल यह है कि इतने में से इतने मुकदमे यानि 3179 में से 2410 मुकदमे दर्ज हुए तो क्‍या कारण है कि ये अधिकांश मुकदमे ट्राइबल्‍स के नाम से दर्ज हैं? दूसरा आप 20 बोतल की बात कर रहे हैं, मैं मात्र 10 बोतल तक की बात करूं, एक से 10 बोतल तक की बात करूं तो यह सरकार का ही जवाब है मेरे पास, इसमें उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्‍तौड़ का ही है, इन चार जिलों में 3022 मुकदमों में से 2006 मुकदमे दर्ज हैं, मैं 10 बोतल शराब के, 20 बोतल भी नहीं कह रहा हूं, इतने सारे ट्राइबल्‍स के नाम मुकदमे हैं इसका क्‍या कारण है? सरकार क्‍या महसूस करती है? क्‍या सरकार भविष्‍य में इसके बारे में कोई विचार रखती है कोई नीति बनाने की या कैसे दर्ज होने चाहिए?......

 

vkj/akt/1140/1e

 

एक सवाल का जवाब आपने नहीं दिया। मुकदमे पुलिस ने कितने दर्ज किये थे, आबकारी विभाग वालों ने कितने दर्ज किये, यह आपने क्लियर नहीं किया है।

दूसरा यह सवाल है, क्‍या कारण है इतने मुकदमे ट्राइबलों के नाम दर्ज हैं?

तीसरा, मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि क्‍या जनजाति उपयोजना क्षेत्र में या ट्राइबल सब प्‍लान इलाके में....

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिये, आप तो भाषण देने लग गये। प्रश्‍न पूछिये।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): नहीं नहीं। क्‍या लिखकर फिर आगे पूछना शुरू किया है, तो जो आबकारी नीति अभी लागू है आपकी, क्‍या यह भारत सरकार के टेम्‍परेंस प्रोग्राम का उल्‍लंघन नहीं है या ट्राइबल के विकास के लिए या उसके अन्‍य उत्‍थान के लिए या अन्‍य गतिविधियों के उत्‍थान के लिए क्‍या सरकार यह महसूस नहीं करती है कि आबकारी नीति वहां ठीक नहीं है?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आबकारी नीति का जो निर्धारण होता है, वह किसी एरिये को या किसी व्‍यक्ति और जाति को देख‍कर निर्धारित नहीं होता। उसकी तो अपने सब पर एक समान एक्‍साइज एक्‍ट जो लागू होता है, वह है। ट्राइबल एरिया में चूंकि उनका एक ट्रेडिशनल है और वह महुए की शराब बनाकर अपने स्‍वयं के काम में लेते हैं। इसमें से भी अधिकांश तो मैं सोचता हूं, दर्ज करते नहीं हैं सामान्‍यत: लेकिन कभी-कभी किसी व्‍यक्ति विशेष पर या कोई अभियान में कोई मुकदमे दर्ज हो जाते हैं, वह मुकदमे हैं और हम भी यह महसूस करते हैं कि उनका ट्रेडिशनल है, इस प्रकार से शादी-ब्‍याह, मरण-मौत तक, उसको ही ध्‍यान में रखकर मैं सोचता हूं कि इसको लाने के पीछे जो मंशा है, वह यह है कि उनको कोर्ट के चक्‍कर नहीं लगाना पड़े, आर्थिक दृष्टि से उनको नुकसान नहीं भुगतना पड़े। समय समय पर यह अभियान होता है इस तरह से। पूर्व में भी इस प्रकार से 10 बोतल तक के शराब के मुकदमे हटाने का निर्णय पहले भी हुआ, उस समय तक जो पेंडिंग थे, उस समय जो हट सके, हमने जो निर्णय किया, वह अप्रैल, 2006 के पहले तक के जो हमारे पास पेंडिंग मुकदमे थे, उन मुकदमों को हटाने के लिए हमने प्रयास किये। इसका मतलब यह नहीं है कि कल कोई शराब इस तरह से निकालता हुआ मिल जायेगा तो उस पर मुकदमा नहीं बनेगा, वह बनेगा। यह जो अभियान में अभी तक जो हमने लिये, वह एक कट-आफ डेट तय की है। उस समय तक जो पेंडिंग मुकदमे हैं, वह तो हटाने का क्रम इसमें भी आ रहा है और लघु प्रकृति का मतलब जिसमें अधिक से अधिक दो साल की सज़ा होती है, उस तरह के सारे मुकदमे हैं, वह उसके अन्‍तर्गत समाहित किये हैं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय गृह मंत्रीजी, आप बिराजें। आपने एक बड़ी विचित्र स्थिति पैदा कर दी। आप एक्‍साइज के केसेज वापस लें, किसी को एतराज नहीं। आपने एक बात कही यहां पर कि 323 और 341 के केसेज भी आपने लिये हैं और आप ध्‍यान देंगे और जानकारी ले लीजिएगा कि दो आदिवासियों में झगड़ा हुआ, एक के साथ मारपीट हुई, पुलिस के अन्‍दर रिपोर्ट करने गया, उन्‍होंने 323 और 341 का केस दर्ज कर लिया। आपने, सरकार ने उस परिस्थिति में उसको तो न्‍याय मिला नहीं जो एग्रीव्‍ड पार्टी है। जो एग्रीव्‍ड पार्टी है, उसको तो न्‍याय मिला नहीं, सरकार कहां से बीच में आ गई केस विदड्रा करने के लिए। या तो सरकार कम्‍प्रोमाइज कराये, वहां तो समझ में आता है कि सरकार का कोई मैकेनिज्‍म है, आपकी जिला स्‍तरीय समिति है, वह कम्‍प्रोमाइज कराये, वहां तो समझ में आता है लेकिन दो आदिवासी में झगड़ा हुआ, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको एक उदाहरण देता हूं, किसी के साथ मारपीट हुई आदिवासी के संग और आदिवासी के खिलाफ उसने रिपोर्ट की तो कैसे उस केस को विदड्रा करोगे, यह है। (व्‍यवधान)

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): माननीय सदस्‍य, आपने तो पहले गिरफ्तार कराये हैं।

श्री अध्‍यक्ष: …. competent to withdraw the case.

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मुझे कुछ नहीं कहना नन्‍दलाल जी, मुझे अब कुछ नहीं कहना क्‍योंकि मैंने तो एक नीतिगत प्रश्‍न उठाया था। अगर आप नहीं चाहते कि मैं पूछूं, तो मैं नहीं पूछता क्‍योंकि मेरी आवाज तो उतनी तेज है नहीं जितनी आपकी आवाज तेज है।

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): नहीं, आप सवाल को बाई-पास कर रहे हैं

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): तो मैं आपसे इतना ही पूछ रहा हूं कि यह एक विचारणीय प्रश्‍न है, या तो आपको जानकारी विभाग ने सही दी नहीं है। जिला स्‍तरीय समिति जो डिस्ट्रिक्‍ट जज की अध्‍यक्षता में है, उसको कैसे कम्‍प्रोमाइज कराये, कि केस समाप्‍त कर दिया है, अदरवाइज एग्रीव्‍ड पार्टी के साथ यह नेचुरल जस्टिस के खिलाफ है, उसको न्‍याय कहां मिला? पुलिस ने चालान किया रिपोर्ट के आधार पर, आदिवासी की रिपोर्ट के आधार पर, आदिवासी के खिलाफ केस दर्ज हुआ है, उसको आप विदड्रा कैसे करोगे, मेरा प्रश्‍न यह है।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे सवाल का जवाब नहीं आया। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, अध्‍यक्ष महोदय। उदयपुर डिवीजन में यह जो 11000 केसेज रजिस्‍टर हुए हैं पुलिस के, क्‍या आपने कभी एनेलेसिस करने की कोशिश की, यह 11000 पेटी केसेज क्‍यों उदयपुर डिवीजन में लागू हुए हैं? 11000 केसेज जो उदयपुर डिवीजन में पेटी क्राइम में रजिस्‍टर हुए हैं, यह सबसे ज्‍यादा विशियस सर्किल है पुलिस का पैसा कमाने का, आदिवासियों के साथ अन्‍याय करने का। मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं विनम्र शब्‍दों में, आप एनेलेसिस करायें, आप नेक्‍सस बना हुआ है वकील और पुलिस वालों के बीच में और गरीब आदमी और आदिवासी के साथ में अन्‍याय हो रहा है। आपको इस बारे में एनेलेसिस करना चाहिए कि यह 11000 केसेज इस बात का इंडीकेशन है, ट्राइबल इलाके के आदिवासियों के लिए जैसा माननीय मंत्रीजी कह रहे हैं कि 323 में नहीं हो सकता है लेकिन वहां जबरदस्‍ती इस तरह के केसेज करके पुलिस वाले और वकील मिलकर वहां के आदिवासियों के साथ शोषण कर रहे हैं इसलिए आपको इस मामले में गम्‍भीरता से विचार करके, एनेलेसिस करके गांव के आदिवासियों को साथ लेने के बारे में निर्णय करना चाहिए और आदिवासियों के जो 10-20 बोतल वाले मामले हैं, आप ब्‍लेंकेट फैसला करिये। जो यह सराडा वाले माननीय सदस्‍य कह रहे हैं कि पहले वहां पर केवल मात्र गंगानगर शुगर मिल से ही शराब मिलती थी। अब आपकी सरकार आने के बाद आपने दूसरों को, प्राइवेट ठेकेदारों को भी अलाऊ कर दिया। आप तो खुद ही उस इलाके के हैं। कमीशनर की व्‍यवस्‍था नहीं हुई, आज आपके वहां पर प्राइवेट ठेकेदार शराब बेच रहा है तो आदिवासियों को कैरी-आउट कराकर क्राइम करवा रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: यह प्रश्‍नकाल है, यह प्रश्‍नकाल है। प्रश्‍नकाल है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): प्रश्‍नकाल में ही पूछ रहा हूं अध्‍यक्ष महोदय। माननीय मंत्री महादय ने उस इलाके में इस तरह के केसेज में साइंटिफिक एनेलेसिस करने का काम किया है? (व्‍यवधान) जो क्राइम धौलपुर में होते हैं, जो क्राइम जयपुर में होते हैं, वह क्राइम ट्राइबल इलाके में नहीं होते हैं। आप तो उस इलाके के हो।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, वे आदिवासियों के मुकदमे वापस लेने के खिलाफ हैं। (व्यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप मेहरबानी करके ये 11000 केसेज को एनेलेसिस करके, 11000 को बिलकुल ब्‍लेंकेट विदड्रा करने का काम करिये, यह सबसे बड़ा आदिवासियों के साथ न्‍याय होगा।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आदिवासियों पर जो मुकदमे लगे हुए हैं, उनको वापस लेने के ये विरुद्ध हैं। आप क्‍या चाहते हैं, यह तो स्‍पष्‍ट करें। क्‍या आदिवासियों के विरुद्ध मुकदमे वापस लिये, आप उनके खिलाफ हैं? (व्‍यवधान)

श्री गौतम लाल मीणा (लसाडि़या): जो उनके मुकदमे वापस लिये, क्‍या आप उनके खिलाफ हो क्‍या? ये मुकदमे वापस लिये हैं, क्‍या आप उनके खिलाफ हो क्‍या? (व्‍यवधान) वकील पैसा खा जाते हैं उसमें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आप क्‍या चाहते हैं, यह कृपया स्‍पष्‍ट करें। क्‍या आप उनके पक्ष में नहीं हो? आपके हिसाब से मुकदमे वापस नहीं लिये जाने चाहिए थे? (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मुख्‍य मंत्रीजी से हम मिले, आप नहीं मिले। मुख्‍य मंत्रीजी से हम मिले, नन्‍दलाल जी नहीं मिले। आपके भरोसे नहीं हैं। मुख्‍य मंत्रीजी से आप इस मामले में नहीं मिले हैं। (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय आपसे यह जानना चाहूंगा, शराब के जितने भी केसेज हुए हैं, उसमें पुलिस विभाग ही क्‍यों दर्ज कर रही है, आबकारी विभाग क्‍या कर रहा है? मेरे विधान सभा क्षेत्र में 90 प्रतिशत शराब के जो केसेज में मुकदमे दर्ज हुए हैं, आपका पुलिस विभाग कर रहा है, आबकारी विभाग एक प्रतिशत भी दर्ज नहीं कर रहा है और उसके पीछे कारण यह है कि पुलिस पैसों से बंधी हुई है।

श्री अध्‍यक्ष: श्री नन्‍दलाल मीणा। श्री नन्‍दलाल मीणा।

एक माननीय सदस्‍य: आपकी मंशा साफ है कि ये आदिवासी बरबाद हो जाये। (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मेरे यहां इतनी चोरियां हुई हैं पिछले एक साल के अन्‍दर, एक चोरी नहीं खुली है वहां मंत्री महोदय और मात्र वह शराब के तस्‍करों के पीछे और उनके कहने से, उनके इशारों पर आपकी पुलिस चल रही है। मेरे विधान सभा क्षेत्र से एक भी चोरी का मुकदमा आज तक नहीं खुला है और सिर्फ पुलिस का काम यह रह गया है कि शराब तस्‍करों के कहने से शराब के कैसे मुकदमे बनायें और लोगों को झूठा फंसायें।

श्री अध्‍यक्ष: आप कहां भाषण देने लग गये मिस्‍टर खुशवीर सिंह। (व्‍यवधान) नन्‍दलाल जी, आप बोलिये।

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं मंत्री महोदय को और भारतीय जनता पार्टी की सरकार को इस बात के लिए बहुत-बहुत बधाई अर्पित करता हूं कि उन्‍होंने आदिवासी और आदिवासी क्षेत्र के लोगों के जो मुकदमे हुए हैं...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्य: क्‍या बधाई दे रहे हो, गली-गली में अंग्रेजी शराब की दुकान खुलवा दी। क्‍या बधाई दे रहे हो।

श्री अध्‍यक्ष: यह बधाई देने का समय थोड़े ही है, यह प्रश्‍नकाल है। आप प्रश्‍न पूछिये।

एक माननीय सदस्‍य: अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍नकाल में बधाई चल रही है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मुख्‍य मंत्रीजी के घर पर नहीं थे आप, आप मुख्‍य मंत्रीजी के घर पर क्‍यों नहीं थे? मुख्‍य मंत्रीजी के घर पर क्‍या फैसला हुआ माननीय मीणा साहब?

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): आपकी हमेशा से नीयत रही है कि आदिवासियों के ऊपर ज्‍यादा से ज्‍यादा मुकदमे लगे।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): राजस्‍थान विधान सभा के अध्‍यक्ष की कमेटी बनने के बाद आज दिन तक भी फैसला नहीं किया। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विधान सभा के अध्‍यक्ष की कमेटी बनाई, हम मुख्‍य मंत्रीजी से मिले, उसके बाद फैसला होने की बात कर रहे हैं। (व्‍यवधान) राजस्‍थान विधान सभा में रहने वाले लोग भी ऐसी.... (व्‍यवधान)

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): मैं माननीय मंत्री महोदय से पूछना चाहता हूं कि....

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आदिवासियों को लडाने का काम किया है इन्‍होंने।

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह पूछना चाहता हूं माननीय मंत्री महोदय, जो अप्रैल, 2006 के पहले जो 11000 मुकदमे सरकार ने विदड्रा किये हैं, उसमें महुए से बनने वाली कच्‍ची शराब के हैं।

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद के साथ अब क्‍या प्रश्‍न पूछ रहे हो? आपने तो धन्‍यवाद दे दिया, अब क्‍या प्रश्‍न है?

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): मैं यह जानना चाहता हूं कि 11000 में से कितने ऐसे मुकदमे हैं जो मटके में महुए सड़ाये गये और उस समय उनको पकड़ लिया और आबकारी अधिनियम के अन्‍तर्गत उन पर मुकदमे बनाये हैं। अध्‍यक्ष महोदय, जब गाय-भैंस ब्‍याती है तो उनको बांटे के तौर पर महुआ दिया जाता है उसको सड़ाकर-गलाकर। आदिवासी क्षेत्र में, आदिवासियों के ऊपर इस तरह के मुकदमे भी बने हैं जो महुए मटकों में बिखरे हुए थे तो मंत्री महोदय यह बतायें...(व्‍यवधान) यह कांग्रेस पार्टी तो शुरू से ही खिलाफ रही है। और सी.पी. जोशीजी, आपको तो कम से कम हमारा साथ देना चाहिए।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मीणा साहब, आप कहां इनके चक्‍कर में आ गये, तो मंत्री नहीं बनोगे। तीन साल हो गये, इनके चक्‍कर में आओगे तो मंत्री नहीं बनोगे। इनके चक्‍कर में मत आओ।

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): मंत्री बनने में कुछ फायदा नहीं है। सवाल आपकी नीयत का है। कांग्रेस पार्टी की नीयत क्‍या है, यह दर्शाती है कि...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट प्रश्‍न, श्री अमराराम (धोद)। नैक्‍स्‍ट प्रश्‍न, श्री अमराराम (धोद)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): आबकारी का काम पुलिस कर रही है। इसमें क्‍या आप आबकारी विभाग को पुलिस विभाग में मर्ज करने का विचार रखते हैं। आबकारी विभाग को ही समाप्‍त कर दें।

श्री अमराराम (धोद): प्रश्‍न संख्‍या 44.

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, हमारे सवाल का जवाब नहीं आया है। हमारे सवाल का जवाब नहीं आया है। अध्‍यक्ष महोदय, हमने सवाल यह पूछा था...

 

 

 

 

 

Jkj/akt/11.50/1f/6.10.2006

 

श्री अध्‍यक्ष: आपने भाषण भी दे दिया, प्रश्‍न भी पूछ लिया, उसका जवाब भी दे दिया उन्‍होंने।

श्री रघुवीर सिंह मीणा: क्‍या भाषण दिया, प्‍वाइंटेड सवाल पूछा है, आप अन्‍याय मत करिये।  एक तरफ तो आधा घंटा एक क्‍वेश्‍चन के लिए दे देती हैं, एक तरफ दस मिनट नहीं देती है, क्‍या बात है, आदिवासियों का है। (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सवाल यह है, मैंने मंत्रीजी से पूछा कि आपकी वर्तमान आबकारी नीति के तहत भारत सरकार के टेम्‍परेंस प्रोग्राम का उल्‍लंघन नहीं हो रहा है क्‍या, एक।  दूसरा, आपने एक कमेटी बनाई थी सदन के माननीय सदस्‍यों की, अध्‍यक्षजी ने और हम स्‍वयं मुख्‍य मंत्रीजी से मिले, मुख्‍य मंत्रीजी ने हमारी बात सुनी, उन्‍होंने....

श्री अध्‍यक्ष: यह अलग से प्रश्‍न है। यह अलग से प्रश्‍न है।

श्री रघुवीर सिंह मीणा: अलग से प्रश्‍न नहीं है, इसी से जुड़ा हुआ है।  मुख्‍य मंत्रीजी ने हमको आश्‍वासन दिया था...

श्री अध्‍यक्ष: नो ।  नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री रघुवीर सिंह मीणा: कि 19 तारीख को मैं सदन में घोषणा करूंगी।

श्री अमरा राम(धोद): प्रश्‍न संख्‍या 44 ।

श्री रघुवीर सिंह मीणा: अध्‍यक्षजी, एक बात, मंत्रीजी जवाब तो दे रहे थे।

श्री अध्‍यक्ष: आपने जो प्रश्‍न पूछा, आपने पूछ लिया, उसका जवाब मंत्रीजी ने दे दिया, अब आप नीति की, और-और प्रश्‍नों पर चले गये, अब आप नीति पर आ गये। (व्‍यवधान) नीति की बात तो कहीं है नहीं। आपके प्रश्‍न में नीति की बात है नहीं कोई।

श्री रघुवीर सिंह मीणा: नहीं दिया है।  यह पूछा था कि कितने मुकदमे पुलिस के द्वारा दर्ज किये हैं, कितने आबकारी द्वारा दर्ज किये हैं।  पुलिस का धंधा बन गया कि आदिवासी इलाके में अपना टारगेट तय करने के लिए पुलिस घर-घर घूमती है और मुकदमे बनाती है, मैं यह पूछ रहा हूं कितने पुलिस ने दर्ज किये हैं और कितने आबकारी विभाग ने दर्ज करवाये, एक।  दूसरा, क्‍या राज्‍य सरकार इस बारे में कोई विचार कर रही है...

श्री अध्‍यक्ष: अब आप फिर भाषण दे रहे हैं। आप भाषण दे रहे हो।

श्री रघुवीर सिंह मीणा: क्‍या यह राजनीतिक द्वेष से मुकदमे बनाये गये हैं...(व्‍यवधान)

श्री बद्रीलाल जाट: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनसे यह पूछ लिया जाय कि आदिवासियों के यह मूल रूप से खिलाफ हैं क्‍या। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट प्रश्‍न। श्री अमरा राम धोद।

श्री अमरा राम(धोद): प्रश्‍न संख्‍या 44 ।

श्री संयम लोढ़ा(सिरोही): सिरोही में आपने नेग्‍लीजेंट ड्राइविंग से जो डेथ हुई है, वह मामला भी आपने इसमें विदड्रा किया है। (व्‍यवधान) मैं कह रहा हूं, किया है आपने।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया। आप नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन का जवाब दीजिये।

श्री संयम लोढ़ा: एक मामला नेग्‍लीजेंट ड्राइविंग से डेथ का, वह भी आपने विदड्रा किया है। जो सरकार का फैसला भी नहीं था। (व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा: सरकारी चाहती है कि आदिवासी किसी तरह बरबाद हो जाय, है वहीं का वहीं रहे, उसके बच्‍चे नहीं पढ़ें, उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हो इसलिए घर-घर में, गली-गली में शराब की दुकानें खोली हैं इस सरकार ने, यह हमारा आरोप है। (व्‍यवधान)

आपराधिक प्रकरणों में पीडि़त आरक्षित वर्ग के व्‍यक्तियों को आर्थिक सहायता

44. श्री अमरा राम(धोद): क्‍या समाज कल्‍याण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि राज्‍य में अनुसूचित जाति/जनजाति के व्‍यक्तियों की हत्‍या, बलात्‍कार एवं संगीन मारपीट के मामलों में आर्थिक सहायता दी जाती है? यदि हां, तो पिछले दो वर्षों में कितने मामलों में आर्थिक सहायता उपलब्‍ध करवाई गई? जिलेवार संख्‍या सूची सदन की मेज पर रखें।

(2) आर्थिक सहायता हेतु कितने मामले कितने समय से लम्बित हैं? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) आर्थिक सहायता उपलब्‍ध कराने हेतु जिलेवार कब-कब बैठकें आयोजित की गई तथा निस्‍तारण का प्रतिशत क्‍या रहा?

समाज कल्‍याण मंत्री(श्री मदन दिलावर): (1) जी हां।  487 मामलों में वर्ष 2004-05 में एवं 766 मामलों में वर्ष 2005-06 में आर्थिक सहायता उपलब्‍ध कराई गई है।  जिलों से प्राप्‍त जिलेवार संख्‍या सूची परिशिष्‍ट अ पर सदन की मेज पर रख दी गई है।

(2) आर्थिक सहायता हेतु जिलों में लम्बित मामलों का विवरण परिशिष्‍ट ब पर सदन की मेज पर रख दिया गया है।

(3) आर्थिक सहायता उपलब्‍ध कराने हेतु बैठक की आवश्‍यकता नहीं होती है।  आर्थिक सहायता जिला कलेक्‍टर द्वारा स्‍वीकृत की जाती है।  राज्‍य में पिछले दो वर्षों में कुल 1443 प्रकरण प्राप्‍त हुए हैं जिनमें से 1253 प्रकरणों में आर्थिक सहायता दे दी गई है जो प्राप्‍त प्रकरणों का 86.83 प्रतिशत है। (व्‍यवधान)

श्री सी.डी.देवल(रायपुर): जवाब भेज दें और पढ़ लें, हर मामले में आप अगला प्रश्‍न पुकार लेती हैं...

श्री अध्‍यक्ष: आपकी सलाह की आवश्‍यकता नहीं है आसन को, आपके कहने से नहीं चलने वाला आसन, आसन नियमों से चलेगा।

श्री सी.डी.देवल: आप हर मामले में अगला प्रश्‍न पुकार लेती हैं, हमारा जवाब ही नहीं आता है। नहीं आता है तो फिर प्रश्‍नकाल समाप्‍त कर दीजिये, यह आपका अधिकार है, आप अधिकारों के तहत खत्‍म कर दें।

श्री अध्‍यक्ष: आप अपना स्‍थान ग्रहण कर लें।

श्री सी.डी.देवल: ताकि न रहे बांस, न बजे बांसुरी।  न तो डिस्‍कशन हो और न कोई बात हो। हर मामले में आप अलगा प्रश्‍न पुकार लेते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: पधारो आप, ठीक है। (व्‍यवधान)

श्री सी.डी.देवल: कम से कम हमारे साथ आप न्‍याय करें अध्‍यक्ष महोदय, हर मामले में आप सरकार का प्रोटेक्‍शन कर रही हैं।

श्री संयम लोढ़ा: अध्‍यक्ष महोदय, मैंने कहा है कि नेग्‍लीजेंट ड्राइविंग से डेथ का मामला भी आपने विदड्रा किया है।

श्री सी.डी.देवल: अब तक जितने तीन जवाब आये हैं, तीनों मंत्री जवाब नहीं दे सकें और उसके बाद आपने शुरू कर दिया।

श्री अध्‍यक्ष: श्री अमरा राम धोद।

श्री संयम लोढ़ा: अमरा राम धोद तो यहीं विराजमान हैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप बीच में नहीं बोलें, वह प्रश्‍न पूछ रहे हैं, यह भी बहुत महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है। सभी प्रश्‍न बहुत महत्‍वपूर्ण हैं...

श्री संयम लोढ़ा: नेग्‍लीजेंट ड्राइविंग से डेथ का मामला भी इन्‍होंने विदड्रा किया है, नेग्‍लीजेंट ड्राइविंग से डेथ का, जो कोई अधिकार नहीं था।

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण कर लें, उचित होगा।

श्री अमरा राम(धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि यह जो एससी और एसटी के लोगों के साथ जो हत्‍या, बलात्‍कार और इस तरह की प्रकृति के जो अत्‍याचार होते हैं उनमें आर्थिक सहायता सरकार की तरफ से उनको, पीडि़त को यथाशीघ्र मिले, इस बात के लिए है।  मैं मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि जिन जिलों के 2004 से 2006 तक दो साल तक पेण्डिंग हैं, 2004 में कोई भी उसके साथ अत्‍याचार हुआ और 2006 तक उसका, जिसमें एक-एक जिले में, दौसा में 43 प्रकरण हैं, चित्‍तौड़गढ़ में 12 हैं, हनुमानगढ़ में 10 हैं और सीकर में 2005 से 22 प्रकरण हैं जो दो साल से ज्‍यादा के प्रकरण हैं जबकि मैं समझता हूं सरकार की भावना यह होगी कि जो भी दलित के साथ अन्‍य जाति के लोगों द्वारा प्रताड़ना होती है उसको तुरंत सहायता मिले तो कोई मकसद होगा।  तीन साल बाद में, चार साल बाद में होगा तो जिन अधिकारियों ने यह लापरवाही बरती है कि आज तक निर्णय नहीं किया, क्‍या उनके खिलाफ आप कार्यवाही करने का इरादा रखते हैं और इनको आर्थिक सहायता कब तक दिला देंगे?

दूसरा, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि आपने कहा है कि इसमें मीटिंग की आवश्‍यकता नहीं है, कलेक्‍टर केवल स्‍वीकृत करता है। तो क्‍या प्रोसीजर है कि जो भी एससी और एसटी के लोगों के साथ जो उत्‍पीड़न हो जाय उसका समाज कल्‍याण विभाग में पुलिस उसका प्रकरण भेजती है या पीडि़त को पक्ष भेजना पड़ता है क्‍योंकि एससी और एसटी के जितने भी मुकदमे हैं उनकी समीक्षा के लिए कलेक्‍टर की अध्‍यक्षता में एक समिति बनी हुई है जिसकी मीटिंग हर महीने होती है और मैं समझता हूं उसी में यह आर्थिक सहायता के भी मुद्दे आते हैं और आपने दिया है कि इसके लिए मीटिंग की आवश्‍यकता नहीं होती। मैं समझता हूं कि उसी में जिसमें समीक्षा होती है उसी के अंदर आर्थिक सहायता की भी समीक्षा की जाती है।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न पूछें आप, प्रश्‍न पूछें।

श्री अमरा राम(धोद): इसलिए मेरा आपके माध्‍यम से निवेदन है कि वह समीक्षा में यह होता है तो किस-किस जिले में, कितने-कितने अंतराज से मीटिंग हुई है और दो साल तक सहायता नहीं मिलने के क्‍या कारण हैं और जिन्‍होंने सहायता समय पर नहीं पहुंचाई, उनके खिलाफ आप क्‍या कार्यवाही करना चाहते हैं?

श्री अध्‍यक्ष: एक-दो जिलों में ही है, 2004 के तो एक-दो जिले में ही हैं, बाकी तो सब, 86 प्रतिशत..

श्री अमरा राम(धोद): एक-दो नहीं हैं। अध्‍यक्ष महोदय, दौसा में 43 प्रकरण हैं।

श्री अध्‍यक्ष: 86 प्रतिशत का तो निपटारा हो गया।

श्री अमरा राम(धोद): नहीं अध्‍यक्ष महोदय, इसके लिए तो यह है कि जितने मुकदमे दर्ज हुए हैं वह यहां सहायता तक पहुंचते ही नहीं है, वरना इतने मुकदमे नहीं हैं।  43 मुकदमे दौसा में है जो 2004 से पेण्डिंग हैं जिनको सहायता नहीं मिली है जबकि यह है कि जितनी राशि सहायता मिलनी चाहिए उसका 50 प्रतिशत मेडिकल आते ही वह सहायता, जैसे मर्डर में एक लाख रूपये है, बलात्‍कार में एक लाख रूपये है, वह 50 प्रतिशत दर्ज और मेडिकल होते ही मिल जानी चाहिए और 50 प्रतिशत चालान होते ही मिल जानी चाहिए थी, मैं समझता हूं दो साल तक अगर नहीं हुआ..

श्री अध्‍यक्ष: हां, तीन जिलों में ही ऐसा है, बाकी जिलों में तो ठीक है काम। तीन जिले हैं, दौसा, चित्‍तौड़गढ़ और हनुमानगढ़। तीन ही जिले हैं।

श्री अमरा राम(धोद): दौसा में 43 हैं, चित्‍तौड़गढ़ में 12 हैं, हनुमानगढ़ में 12 हैं और सीकर में भी 2005 से 22 प्रकरण हैं।

श्री अध्‍यक्ष: तीन हैं ऐसे, हनुमानगढ़, चित्‍तौड़गढ़ और आपका दौसा।

श्री कन्‍हैयालाल मीणा(बस्‍सी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा मंत्री महोदय से कि डीआईजी टंडन जिसने मल्‍लीदेवी अनु‍सूचित जनजाति की महिला थी उसके साथ बलात्‍कार किया था...

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिये। 

श्री कन्‍हैयालाल मीणा: बलात्‍कार हुआ उसके साथ में, अब तक न कोई उसको सहायता मिली है एक नया पैसा भी और न टंडन गिरफ्तार हुआ है, तो मैं निवेदन करना चाहूंगा कि उस व्‍यक्ति को, उस महिला को अब तक सहायता नहीं दिये जाने का क्‍या कारण है और अब कब तक उसको सहायता दे दी जायेगी और नहीं देने का क्‍या कारण है।

श्री जीतमल खांट(बागीदोरा): कानून बड़े लोगों के लिए नहीं है, छोटे लोगों के लिए है कानून वरना टंडन आज दिन तक पकड़ा जाता।

श्री कन्‍हैयालाल मीणा: पकड़ा भी नहीं गया, उसकी सम्‍पत्ति को कुर्क कर देते गरीब आदमी होता तो।  आज तक उसकी सम्‍पत्ति को कुर्क नहीं किया गया।

श्री अध्‍यक्ष: जवाब दीजिये।

श्री कन्‍हैयालाल मीणा: और यह सब, यह प्रतिपक्ष के राज में ही हुआ है, यह घटना जो घटी है, शेखावत साहब ने जरूर उसको सस्‍पैण्‍ड किया है। तो यह जो जनजाति की महिला के साथ में घटना घटी है मैं मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि इसको सहायता दी जाय। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान: अब तीन साल से क्‍या कर रहे हो।

श्री अमरा राम(धोद): तीन साल से हो आप और दो साल में भी नहीं पकड़ पाओगे।

श्री जुबेर खान: तीन साल से तो आप बैठे हो।

श्री रामनारायण मीणा: यह गृह मंत्रीजी तो प्‍लान कर रहे हैं...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान: और यह वाकया भी तत्‍कालीन मुख्‍य मंत्री भैरोंसिंहजी के समय का है, कांग्रेस के समय का नहीं है, आप यह गलत तथ्‍य मत दीजिये यहां।

एक माननीय सदस्‍य: कांग्रेस के समय का है, कांग्रेस का है...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान: भैरोंसिंहजी मुख्‍य मंत्री थे, तब यह मुकदमा दर्ज हुआ था। (व्‍यवधान)

श्री कन्‍हैयालाल मीणा: सस्‍पैण्‍ड किया था शेखावत साहब ने आते ही। शेखावत साहब ने आते ही सस्‍पैण्‍ड किया था, टर्मिनेट किया था उसको। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा: उसको कब तक गिरफ्तार कर लिया जायेगा?(व्‍यवधान)

श्री कन्‍हैयालाल मीणा: घटना आपके टाइम की है, बाद में ज्‍यों ही दूसरा राज शेखावत साहब का आया उन्‍होंने उसको टर्मिनेट किया । (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बस्‍सी से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपका प्रश्‍न तो अलग से प्रश्‍न है। हां, मंत्रीजी जवाब दीजिये। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा: नहीं, अलग नहीं है, यह इसलिए है कि इतने मामले पेण्डिंग हैं...(व्‍यवधान)

श्री कन्‍हैयालाल मीणा: अनुसूचित जाति की महिला है और दौसा जिले की रहने वाली है और बलात्‍कार से पीडि़त है, हां।

श्री रामनारायण मीणा: महिलाओं के साथ अन्‍याय हो.....(व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: आप जवाब सुनिये। (व्‍यवधान) आप माईक ऑन करिये अपना। (व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर: मैं बता दूंगा। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने काफी चिंता जाहिर की इस बात के ऊपर कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों पर जो अत्‍याचार होते हैं उनको राशि समय पर मिलनी चाहिए। परंतु इनका यह कहना था कि समय पर राशि नहीं मिल रही है। मैंने पहले ही मेरे जवाब में इनको बताया कि जो राशि देने का हमारा प्रतिशत है, 86 प्‍वाइंट समथिंग हमारा प्रतिशत है, यानि इतना प्रतिशत हम दे रहे हैं। यदि आप पुराना रिकार्ड उठाकर देखेंगी तो 2001-02...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बीच में नहीं। आप तो, माननीय मंत्री, उन्‍होंने प्रश्‍न पूछा है कि वह जो समिति बनी हुई है कलेक्‍टर की अध्‍यक्षता में, वह किस-किस जिले में...

श्री मदन दिलावर: चार-पाँच प्रश्‍न किये हैं, एक-एक करके दे रहा हूं सब।

श्री अध्‍यक्ष: कब-कब से नहीं हुई, यह बता दें आप तो सिर्फ। (व्‍यवधान)

श्री अमरा राम(धोद): मैंने 2001 का पूछा ही नहीं, यह 2001 का बता रहे हैं।

श्री मदन दिलावर: इन्‍होंने चार-पाँच प्रश्‍न पूछे हैं...

श्री अध्‍यक्ष: आप 2001  पर मत जाओ, 2004 से 2006 तक आओ आप तो।

श्री मदन दिलावर: आपने जो हुक्‍म किया है उसका बता देता हूं। आपने यह कहा है कि कमेटी की मीटिंग हुई कि नहीं हुई, होती है तो किसकी अध्‍यक्षता में होती है, उसका निस्‍तारण कैसे होता है, इसके बारे में डिटेल बतायें...

श्री अध्‍यक्ष: आप तो तीन बातों का जवाब दे दें। यह जो तीन जिले आपके हैं, जहां 2004 के मामले पेण्डिंग हैं....

 

भीम/अरुण/ 6.10.06/12.00/1g

 

 एक तो उनसे जल्‍दी कराओ दूसरा वो मीटिंग किसकी कब-कब नहीं हुई है कब से नहीं हो रही है यह बता दो बस दो ही बात पूछी है उन्‍होंने वो बता दो आप तो बस।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, उसका तो उत्‍तर ही टाल गये ये।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): अध्‍यक्ष महोदय, इसी में एक बात और पूछना चाहता हूं मंत्री महोदय आप तो ये बता दें कि ये जो मीटिंग होती है ये आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए क्‍या मीटिंग में निर्णय लिया जाता है या निर्णय पहले से होता है?

श्री अमराराम (धोद): ...(व्‍यवधान)... समय पर मीटिंग नहीं बुलाते हैं वो उत्‍तर ही टाल गये।

श्री अध्‍यक्ष: बताने दीजिये आप बताने दीजिये न।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): मंत्री महोदय, इसी में एक बात बताने का कष्‍ट करें।

श्री अध्‍यक्ष: लूणकरणसर से आने वाले माननीय सदस्‍य उनको जवाब देने दें आप।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): इसी से जुड़ा प्रश्‍न था।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो माननीय सदस्‍य यह पूछना चाह रहे हैं कि मीटिंग होती है उसका प्रोसेस क्‍या है और कैसे सहायता राशि स्‍वीकृत होती है। मैं यह बता दूं कि इसमें हमारे जो जिले में नोडल अधिकारी वहां के अतिरिक्‍त जिला कलेक्‍टर होते हैं वो सारी सूचनाएं जो एसपी उपलब्‍ध कराते हैं और उसको प्रोसेस करके जिला कलेक्‍टर के समक्ष वो प्रस्‍तुत करते हैं जिला कलेक्‍टर के समक्ष प्रस्‍तुत करने के बाद वो उसकी स्‍वीकृति जारी करते हैं और हर अपराध के बारे में नार्म्‍स बने हुए हैं अलग-अलग आप यदि हुक्म करें तो मैं डिटेल बता सकता हूं। आपने जो सारे आंकड़े बताये हैं सीकर जिले के उसमें बलात्‍कार, हत्‍या और अन्‍य अपराधों के भी हैं केवल ये बलात्‍कार और हत्‍या के ही नहीं है। बलात्‍कार के मामले में यह है कि चिकित्‍सा जांच के बाद में पचास प्रतिशत देना पड़ता है और जब पुलिस पूरी जांच कर लेती है उसके बाद पचास प्रतिशत का भुगतान करना पड़ता है पुलिस जांच में यह निष्‍कर्ष आ जाए कि वास्‍तव में इसके साथ बलात्‍कार हुआ है तो पचास प्रतिशत बाद में देना पड़ता है इसी प्रकार से हत्‍या के मामले में है हत्‍या हो जाती है तो उसको 75 प्रतिशत हम तुरंत देते हैं और हत्‍या के मामले में भी कमाने वाले का और नहीं कमाने वाले का अलग-अलग है तो कमाने वाले का दो लाख रुपये का 75 प्रतिशत तुरन्‍त देते हैं और नहीं कमाने वाले का एक लाख रुपया होता है उसका 75 प्रतिशत हम देते हैं उसके अलावा मैं आपको डिटेल बता देता हूं यदि डिटेल जानकारी चाहें तो अन्‍य अपराधों में किस-किस प्रकार की सहायता दी जाती है।

श्री अमराराम (धोद): डिटेल नहीं चाहिए आप तो नहीं मिल रही है वो बतायें न। अध्‍यक्ष महोदय, जोधाराम मीणा का अपहरण हुआ..।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): मैं वो ही बता रहा हूं उसमें सारे अपराध है।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍नकाल समाप्‍त हो चुका है अब आप सुन लीजिये।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये जो आंकड़े बता रहे हैं आप उसमें हत्‍या और बलात्‍कार ही नहीं है अन्‍य अपराध भी हैं और अन्‍य अपराधों में भी देने की प्रक्रिया अलग-अलग है इसलिए चाहें या तो पर्टीकूलर अपराध बता दें। दो का तो मैंने बता दिया या फिर मैं सारी सूची पढ़ देता हूं कि किस अपराध में किस-किस प्रकार से वो सहायता देते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: अब सारी सूची तो 12 बजकर 2 मिनट हो गये हैं।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): मैं निवेदन करूं दूसरी बात इसकी समीक्षा के लिए ...।

श्री अमराराम (धोद): जिन्‍होंने नहीं दिया दो साल से उनके लिए बताओ न आप तो। जिन्‍होंने दो साल तक नहीं दिया उसके खिलाफ क्‍या कार्यवाही करोगे? यह बतायें। अब सहायता क्‍या है वो हमको पता है। 

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): दो साल का ही बता रहा हूं दो साल का ही बता रहा हूं क्‍योंकि उसमें सब में तुरन्‍त देने का प्रावधान नहीं है कुछ में तो चालान पेश होने के बाद है कुछ में दोष सिद्ध होने के बाद है ।

श्री अमराराम (धोद): आप बता दो सीकर के लक्ष्‍मणगढ़ में जोधाराम मीणा का अपहरण हुआ, मर्डर हुआ उसका चालान हुआ और एक पैसा आज तक आपने नहीं दिया। जो चार साल पहले हुआ, अपहरण हुआ जोधाराम मीणा...।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): मेरे पास सारी सूची है।

श्री अमराराम (धोद): मर्डर हुआ और एक नया पैसा आज तक नहीं दिया।

श्री अध्‍यक्ष: चालान होने पर होता है भुगतान। चालान होने पर भुगतान हो जाना चाहिए था।

श्री अमराराम (धोद): नहीं हुआ मैं कह रहा हूं । जोधाराम मीणा जिसका अपहरण हुआ, मर्डर हुआ, चालान हुआ और एक नया पैसा आज तक नहीं दिया।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमको पुलिस सूचना उपलब्‍ध कराती है ...(व्‍यवधान)...श्री अध्‍यक्ष: खैर आप नोट कर लीजिये नहीं हुआ तो पूछिये । पता कर लें।

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय वो डीआईजी टण्‍डन वाले का चालान भी हो चुका है चालान होने के बाद भी उसको सहायता नहीं दी गयी है ...(व्‍यवधान)...

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ...(व्‍यवधान)... दो-दो साल से लेकर बैठे हो।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): ...(व्‍यवधान)... हुआ है और ...(व्‍यवधान)... हुआ है तो हम उसको सहायता एक महीने के अन्‍दर दिला देंगे।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): एससी/एसटी के लोगों से सद्भावना रखें मंत्री महोदय ...(व्‍यवधान)...

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): यदि उसका मर्डर हुआ है और जांच में प्रूव हुआ है कि अट्रोसिटी के अन्‍तर्गत यानी अनुसूचित जाति/जनजाति के अतिरिक्‍त लोगों ने उसका मर्डर किया है तो हम उसको ...।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): सीधी घोषण करें ...(व्‍यवधान)...

श्री अमराराम (धोद): अतिरिक्‍त ने किया है उनके लिए ही होता है एससी/एसटी वाले करते हैं उनका नहीं जाता है । एससी/एसटी का अदर कास्‍ट करती है वो ही प्रकरण है।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): मंत्री महोदय, सीधी घोषण करें जो बकाया है उनको भुगतान तुरन्‍त करें।

श्री अमराराम (धोद): चार साल पहले हुआ आज तक एक नया पैसा नहीं मिला और ये प्रकरण जो है इन जिलों में ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍नकाल समाप्‍त हुआ। प्रश्‍नकाल समाप्‍त हुआ।

शोकाभिव्‍यक्ति

माननीय सदस्‍यगण, शोकाभिव्‍यक्ति के इस अवसर पर मैं गत दिनों दिवंगत हुए इस विधान सभा के पूर्व सदस्‍य श्री हुकमाराम मेघवाल के प्रति संवेदना व्‍यक्‍त करते हुए यह शोक प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करती हूं।

पूर्व विधायक श्री हुकमाराम मेघवाल का जन्‍म 18 जुलाई, 1953 को बाड़मेर जिले के सिवाना कस्‍बे में हुआ। आपने प्राथमिक स्‍तर तक शिक्षा प्राप्‍त की । श्री हुकमाराम मेघवाल पांचवीं विधान सभा में सिवाना निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक रहे । विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप अनुसूचित जाति कल्‍याण समिति तथा यातायात, विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभागों की संसदीय परामशदात्री स‍मिति के सदस्‍य रहे । समाज सेवा में रुचि रखने वाले श्री मेघवाल विधान सभा में अपने क्षेत्र की समस्‍याओं के निराकरण के लिए निरन्‍तर प्रयत्‍नशील रहे।

श्री हुकमाराम मेघवाल का दिनांक 5 जुलाई, 2006 को निधन हो गया। मैं अपनी और से तथा इस सदन के सभी माननीय सदस्‍यों की आरे से दिवंगत श्री हुकमाराम मेघवाल को श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं और ईश्‍वर से प्रार्थना करती हूं कि दिवंगत की आत्‍मा को शांति प्रदान करे तथा उनके शोक संतप्‍त परिवार को उनके बिछोह को सहन करने की शक्ति प्रदान करे।

माननीय सदस्‍यगण, कृपया दो मिनट के लिए मौन खड़े होकर आत्‍मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।

(तदनन्‍तर सदन ने दो मिनट मौन खड़े रह कर दिवंगत आत्‍मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।)

 

स्‍थगन प्रस्‍तावों पर व्‍यवस्‍था

 

मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि निम्‍नांकित स्‍थगन प्रस्‍तावों की सूचना प्राप्‍त हुई है:-1. श्री हरिमोन शर्मा, श्री रामनारायण मीणा एवं 15 अन्‍य सदस्‍यों की ओर से सर्वे के नाम पर करोड़ों रुपया बेरोजगार युवकों से वसूल कर हजम करने के संबंध में।

 

प्रस्‍ताव का विषय समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार व अनुमान पर आधारित है। किसी विशिष्‍ट विषय तक सीमित नहीं है। आरोप भी अधिरोपित किये गये हैं, अत: इस पर अनुमति देने में असमर्थ हूं।

2.श्री बृजकिशोर शर्मा एवं 13 अन्‍य सदस्‍यों की ओर से जयपुर शहर के कर्बला व सांगानेर क्षेत्र में हज हाउस का निर्माण कार्य प्रारम्‍भ करने के संबंध में।

 

सांगानेर में तो हज हाउस के संबंध में तो इसी सत्र में चर्चा हो चुकी है। विषय भी न्‍यायालय के विचाराधीन है, अत: इस पर अनुमति देने में असमर्थ हूं। कर्बला में हज हाउस बनाने के संबंध में बोलना चाहें तो दो मिनट बोलने की अनुमति दी जा सकती है।

 

3.श्री मांगी लाल गरासिया एवं 9 अन्‍य सदस्‍यों की ओर से विधान सभा क्षेत्र गोगुन्‍दा के कोटड़ा में अतिवृष्टि से उत्‍पन्‍न हुई स्थिति के संबंध में।

 

अतिवृष्टि पर चर्चा हो चुकी है । दिनांक 9 अक्‍टूबर, 2006 को मौसमी बीमारियों पर चर्चा प्रस्‍तावित है, अत: पृथक से अनुमति देने में असमर्थ हूं।

 

प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत प्राप्‍त सूचनाएं

1.श्री जुबेर खान, सदस्‍य की ओर से जिला अलवर के रामगढ़ के लिए स्‍वीकृत 132 के.वी. जी.एस.एस. के लिए भूमि का अवार्ड जारी कर इसका शीघ्र निर्माण करने के संबंध में।

2.श्री संयम लोढ़ा, सदस्‍य की ओर से सिरोही व शिवगंज के राजकीय महाविद्यालयों में व्‍याख्‍याताओं के पद रिक्‍त होने के संबंध में।

3.श्री ज्ञानचन्‍द पारख, सदस्‍य की ओर से जयपुर में सवाई मानसिंह चिकित्‍सालय में हृदय के बाल रोगियों की एन्जियोग्राफी में आने वाली परेशानी के संबंध में।

4.श्री हरीसिंह रावत, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र भीम के पी.एच.सी. एवं सी.एच.सी. स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में दो वर्ष से रिक्‍त चल रहे चिकित्‍सा अधिकारियों के पद भरने के संबंध में।

5.श्री कन्‍हैयालाल पाटीदार, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र पिड़ावामें बीओटी के अन्‍तर्गत निर्मित रायपुर चंवली सड़क के बार बार उखड़ जाने के संबंध में।

6.श्री रणधीर सिंह भीण्‍डर, सदस्‍य की ओर से अफीम उत्‍पादकों की समस्‍याओं के संबंध में।

7.श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र टिब्‍बी में दिनांक 22.9.06 को हुई ओलावृष्टि से फसल को हुए नुकसान के संबंध में।

8.श्री धर्मपाल चौधरी, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र मुण्‍डावर के वन क्षेत्र को बचाने के लिए वन चौकी स्‍थापित करने के संबंध में।

9.डॉ.जालमसिंह रावलोत सदस्‍य की ओर से इंदिरा गांधी नहर के अंतिम चरण का गडरा रोड तक का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करवाने के संबंध में।

10.श्री बहादुरसिंह गोदारा, सदरू की ओर से विधान सभा क्षेत्र नोहर के ग्राम मुन्‍सरी में अति‍क्रमण के नाम पर तोड़फोड़ करने के संबंध में।

11.श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल, सदस्‍य की ओर से देसूरी के पुराने तहसील भवन को राजकीय उच्‍च प्राथमिक विद्यालय को आबंटित करने के संबंध में।

12.श्री हरज्ञान सिंह, सदस्‍य की ओर से शहीद सैनिकों के आश्रितों को उनकी योग्‍यतानुसार नियुक्ति दिये जाने का प्रावधान किये जाने के संबंध में।

 

माननीय सदस्‍यों को उनके द्वारा दी गई सूचना को पढ़ने की अनुमति होगी।

कैलाश     5.10.2006  12.10  (1) 1h

 

श्री बृज किशोर शर्मा ।

श्री कन्‍हैया लाल पाटीदार (पिड़ावा): अध्‍यक्ष महोदय, 295 मैंने भी दिया था ।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या फरमाया आपने ? 295 केवल 12 लगतेहैं इसलिए आपका नहीं आया और अब आपका 9 तारीख को आ जायेगा ।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका प्रोटेक्‍शन चाहता हूं मेरी पर्सनल नालेज के मुताबिक मैंने सदन में सूचना दी है, स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है कि हजारा बेरोजगार मेरे निर्वाचन क्षेत्र के कम से कम तीन हजार बेरोजगारों को ठगा गया है । 15-15, 20-20 हजार रुपये ।

श्री अध्‍यक्ष: अब तो मैंने नाम पुकार लिया है श्री बृज किशोर शर्मा ।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मेरी व्‍यक्तिगत जानकारी है आपके पास कहां से जानकारी आई और गृह मंत्री कितने मुकदमें दर्ज हुए हैं, कितने मुकदमों में एफआईआर दर्ज नहीं हो रही मैं यह नहीं कहना चाहता । मैं सरकार के बारे में कुछ नहीं कहना चाहता, उसके मंत्री मंडल के कितने सदस्‍य  इसमें शामिल है हम उस पाइंट पर भी नहीं जायेंगे । लेकिन बेरोजगारों के साथ ...

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री मंडल के सदस्‍य इसमें शामिल है आप यह नहीं कह सकते या तो नाम बताइए वरना आपको यह कहने का अधिकार नहीं है । आप नहीं कह सकते ऐसे । यह कौनसा तरीका हुआ ।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप इजाजत दीजिए, बिलकुल ईमानदार से .. (व्‍यवधान)

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय,  ऐसे कैसे कह दिया हर मंत्री थोडे ही है ।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अध्‍यक्ष महोदय, आप संसदीय जांच करवा लीजिए । (व्‍यवधान)

हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): अध्‍यक्ष महोदय, आपने हाँ है कि वह अख़बार के आधार पर, अनुमानों के आधार पर लगाया है । अख़बार के आधार पर, अनुमान के आधार पर नहीं इस मामले में मुकदमें दर्ज हुए हैं उस आधार पर रखा है । यह तथ्‍यात्‍मक बात है । यह अखबारों के आधार पर नहीं है । पुलिस द्वारा मुकदमें दर्ज करवायें गये हैं उसके मामले हैं और करीब पूरे राजस्‍थान का 200 करोड रुपये का मामला है ।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण स्‍थान ग्रहण कर लें । माननीय सदस्‍यगण स्‍थान ग्रहण करें ।

हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): इसकी जांच सीबीआई से करवायी जानी चाहिये ।

श्री अध्‍यक्ष: महावीर जी आप अपने सदस्‍यों को कंट्रोल करें, सरकारी मुख्‍य सचेतक जी आप कंट्रोल करें । श्री राम नारायण मीणा जी ने जो बात कही है कि इसमें सदस्‍य शामिल है, मंत्री मंडल के सदस्‍य शामिल है या तो आप नाम लीजिए वरना सब पर आप सब पर आरोप नहीं लगा सकते । यह गलत बात है आपकी ।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): हां तैयार हैं । (व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी(गुढामालानी): अध्‍यक्ष महोदय, कल आरोप लगा था कि मंत्री तस्‍करी करते हैं उस समय आपने क्‍या व्‍यवस्‍था दी है । अध्‍यक्ष महोदय, कल यह आरोप लगा था कि मंत्रियों की गाडी में तस्‍करी हो रही है, अफीम बेचा जा रहा है उसके बारे में आपने कोई व्‍यवस्‍था नहीं दी । (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, जीरो आवर में पाइंट आफ आर्डर तो उठाया नहीं जा सकता ।

श्री हेमाराम चौधरी(गुढामालानी): अध्‍यक्ष महोदय, सत्‍ता पक्ष के सदस्‍य ने मंत्रियों की गाडी से तस्‍करी का आरोप लगाया था उसके बारे में सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया इसका मतलब यह मंत्री तस्‍करी में शामिल है ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, कल गंगानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने अपने कथन में यह कहा था कि मुझे मालूम है कि एक मंत्री की गाडी में अफीम की स्‍मगलिंग होती है तब आपने उस मंत्री का नाम क्‍यों नहीं पूछा, तब पूछना चाहिये था आपको । राम नारायण जी से पूछने का क्‍या हक है । तब क्‍यों नहीं पूछा आपने । आप रिकार्ड उठाकर देख लें । (व्‍यवधान)

हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय विधायक ने कल आरोप लगाया था कि राजस्‍थान सरकार के एक मंत्री की गाडी में स्‍मगलिंग होती है । कल की तारीख में लगाया था  और आपके सामने लगाया था । हम किसी पर आरोप नहीं लगा रहे हैं लेकिन जहां 200 करोड रुपये का मामला है सरकार को जांच करानी चाहिये । सैंकडों लोगों से हजारों करोडों रुपये .. (व्‍यवधान)

श्री कन्‍हैया लाल पाटीदार (पिड़ावा): आप लोग आरोप लगा रहे हो बिना कोई आरोप सिद्ध हुए .. (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): .. (व्‍यवधान) तब क्‍यों नहीं बोले क्‍या उनका आरोप सही था, तब बोलना चाहिये था आपको । अध्‍यक्ष महोदय, आप रिकार्ड उठाकर देख लें, प्रोसीडिंग देख लें कि कल आप के गंगानगर से आने वाले सत्‍त पक्ष के एक माननीय सदस्‍य ने ...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): .. ऐसा लगता है इजरायल के मामले में .. (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय नाम जानना चाहती है ।

 

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): अध्‍यक्ष महोदय, यह सरकार प्रापर्टी डीलरी कर रही है । करोडों किसानों को ठग रही है, यह भी ठगी है । कितने मुकदमें दर्ज हुए हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: सरकार किसको ठग रही है,  सरकार ने किसको ठग लिया जरा नाम बताओ सरकार ने किस को ठगा, आप कह रहे हैं सरकार ठग रही है ।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): हजारों किसानों को बरबाद कर दिया ।

श्री अध्‍यक्ष: सरकार ने किसको ठगा बताओ तो सही ।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): अध्‍यक्ष महोदय, हजारों किसान बरबाद हो चुके हैं । (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा विनम्र निवेदन है कि आप प्रोसीडिंग उठाकर देख दें कल गंगानगर से आने वाले सत्‍त पक्ष के एक माननीय सदस्‍य ने खुद ने यह कहा था कि मुझे मालूम है कि गंगानगर के एक मंत्री की गाडी में, लाल बत्‍ती की गाडी में अफीम की स्‍मगलिंग होती है, यह बात कही थी । एक मंत्री की गाडी में, आप प्रोसीडिंग उठाकर देख लें ।

श्री अध्‍यक्ष: गंगानगर का नाम नहीं लिया । नो नो  गंगानगर का नाम नहीं लिया उन्‍होंने । (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: अध्‍यक्ष महोदय, गंगानगर का नाम नहीं लिया  यह बात नहीं कही, यह नहीं कहा गया ।

श्री अध्‍यक्ष: उन्‍होंने क्‍या कहा था, उन्‍होंने यह कहा था कि मंत्री की गाडी .. (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: माननीय सदस्‍य यह बात आप असत्‍य कह रहे हैं ।

श्री अमराराम (धोद): उन्‍होंने कहा कि मंत्री की गाडी में स्‍मगलिंग होती है ।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): अध्‍यक्ष महोदय, सरकार के मंत्री की गाडी में तस्‍करी होती है यह कहा है ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर):  मंत्री की गाडी में तब आपने नाम क्‍यों नहीं पूछा । पहले उनका नाम बताइए उसके बाद आप हमसे बात कीजिए ।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): आप प्रोसीडिंग दिखवा लो, सरकार के मंत्री की गाडी में, लाल बत्‍ती की गाडी में तस्‍करी होती है यह प्रोसीडिंग में है ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): तब आपने नाम नहीं पूछा आप पूछे, प्रोसीडिंग देख लें उठाकर ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से निवेदन करना चाहता हूं .. (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): क्‍यों आप किसी मंत्री को नंगा करना चाहते हैं ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप आसन पर बैठी हैं .. (व्‍यवधान) यह
क्‍या बात हुई ।

श्री अध्‍यक्ष: आपकी बात सुन ली, पीएडी मिनिस्‍टर कुछ कहना चाहते हैं वह भी सुन लीजिए ।

हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): अध्‍यक्ष महोदय, आपको जो स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया और आपने यह कहा कि अखबारों के आधार पर है, वह अखबारों के आधार पर नहीं है बल्कि पुलिस में मुकदमें दर्ज हुए हैं और राजस्‍थान का 200 करोड का मामला है। इस मामले में स्‍थगन प्रस्‍ताव लगाया था ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, फिर हम भी बोलना चालू कर देंगे । अगर हाउस इसी तरह चलाना है तो फिर हम भी बोलना चालू कर देते हैं ।

हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): इस सारे मामले की जांच, इस सम्‍पूर्ण घोटाले की जांच जिसमें कई महत्‍वपूर्ण आदमी हैं इसलिए सीबीआई से करवाई जानी चाहिये । यह 200 करोड का मामला है । अध्‍यक्ष महोदय, इसकी सीबीआई से जांच कराई जानी चाहिये दुग्‍ध का दुग्‍ध और पानी का पानी हो जायेगा । जिसमें कौन आदमी था कौन नहीं था इससे किसी का कोई लेना देना नहीं है जो है वह चीज सामने आनी चाहिये । 200 करोड रुपये यहां के गरीब लोगों से ठग कर ले गये और साल भर से ठग रहे हैं, सालभर से वसूल किये जा रहे हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य आप हठधर्मी कर रहे हैं, आप हठधर्मी कर रहे हैं, कब तक बर्दाश्‍त करूंगी आपकी हठधार्मिता को ।

हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): सारा प्रशासन देख रहा है, सारी सरकार देख रही है 200 करोड रुपये उनसे छीन कर ले गये और कुछ नहीं किया जा रहा है यह सबसे गलत बात है ।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य आप हठधर्मी कर रहे हैं, आप हठधर्मी कर रहे हैं कब तक बर्दाश्‍त करूं आपकी हठधार्मिता को ।

हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपने यह फरमाया कि आपने अख़बार के आधार पर उठाया । हमने कहा है कि हमने अख़बार के आधार पर नहीं उठाया है एफआईआर दर्ज हुई है, पुलिस ने कुछ लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किये हैं और उससे यह चीज उजागर हुई है कि राजस्‍थान में करीब 10 जिलों में 200 करोड रुपया एक एनजीओ की तरफ से काम करने वाले व्‍यक्तियों ने लोगों से घर घर जाकर ठगा है और यह दुर्भाग्‍य की बात है उनियारा से आने वाले जो माननीय विधायक हैं वह इस परिस्थिति से वाकिफ हैं और उनको जानकारी है इस बात की कि किस प्रकार से यह लोग ठगे जा रहे हैं । उनकी जानकारी में है कि यह लोग कैसे ठग रहे हैं और उनके खिलाफ वह कार्यवाही करना भी चाहते हैं यह मैं जानता हूं लेकिन अध्‍यक्ष महोदय, इसकी जांच सीबीआई से होनी चाहिये । यह करोडों रुपये का घोटाले का मामला है ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह कोई तरीका है (व्‍यवधान) यह किन नियमों में बोल रहे हैं ।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): हजारों बेरोजगारों से ठगी हुई है माननीय मंत्री महोदय । (व्‍यवधान) उन गरीब बेरोजगारों की तरफ देखो । बैठ जाओ वापस । (व्‍यवधान)

श्री हीरालाल (निवाई): (व्‍यवधान) वह कांग्रेस के पदाधिकारी है । (व्‍यवधान)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): अध्‍यक्ष महोदय, इस सरकार में किसानों के साथ ठगी हो रही है । बेरोजगारों के साथ ठगी हो रही है ।

श्री हीरालाल (निवाई): ठगी करने वाले भी कांग्रेस के पदाधिकारी हैं । ठगी कर रहे हैं वह कांग्रेस के पदाधिकारी है ।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): करोडों रुपये ठग ठग कर के इकट्ठा कर रहे हैं, यह ठगों की सरकार है ।

श्री हीरालाल (निवाई): विनोद वर्मा और मिस्‍टर त्‍यागी, एक एनएसयूआई का है और एक युवक कांग्रेस का है । (व्‍यवधान)

 

दुर्गा/त्रिपाठी 061006 1220 1j

 

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यों से मैं निवेदन कर रही हूं, कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें। राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य, लूणी से आने वाले माननीय सदस्‍य, लूणी से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण करें। 

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): असत्‍य बातों के आधार पर विधान सभा चलाना चाहते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आप एक बार स्‍थान ग्रहण कर लें।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से मैं कुछ निवेदन करना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: इन लोगों ने इस तरह की धोखाधड़ी की है, उन्‍होंने मुकदमें दर्ज कराये हैं। और जो मुकदमें दर्ज हुए हैं उस आधार पर सरकार काम करेगी। अब आप इस बात को और क्‍या कहना चाहते हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): इसमें जो बात है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार ठीक से काम नहीं कर रही है। (व्‍यवधान) सैंकड़ों लोगों से, 9 जिलों में करीब 200 करोड़ रुपया वसूला गया है। एक एन.जी.ओ. के माध्‍यम से वसूला गया है और करीब एक साल से वसूला जा रहा है। (व्‍यवधान) यह सरकार की जानकारी में है। सरकार जानती है कि इस प्रकार की धोखाधड़ी चल रही है। (व्‍यवधान)

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ये क्‍या आरोपी को बचाना चाहते हैं। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): साल भर से सरकार चुप क्‍यों थी। सरकार की जानकारी में है यह। यह सरकार की जानकारी में है। इसलिये इसकी जांच सी.बी.आई. से कराई जानी चाहिए। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप आसन की व्‍यवस्‍था को मानने के लिये तैयार नहीं हैं। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): और सी.बी.आई. की जांच इनको स्‍वीकार करनी चाहिए। (व्‍यवधान) सी.बी.आई. से जांच कराये बिना यह मामला नहीं सुलझेगा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य। अंकित नहीं हो, अंकित नहीं हो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***[1]

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या मैं यह मानूं, हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपको आसन की व्‍यवस्‍था का बिलकुल पालन नहीं करना है। यह मानूं। आसन ने अपनी व्‍यवस्‍था दे दी। फिर बहुत मौके आते हैं, उसके बाद भी आप उठा सकते थे। आप रेलगाड़ी की तरह एक बात को प्रारम्‍भ करते हैं, फिर तेज गति पकड़ते-पकड़ते आपको अपने स्‍वास्‍थ्‍य का भी ध्‍यान नहीं रहता, स्‍वास्‍थ्‍य का भी ध्‍यान नहीं रखते।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली):  ***

श्री ओम बिरला (संसदीय सचिव): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री अध्‍यक्ष: हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, इतनी लिबर्टी मैं आपको नहीं दूंगी। अंकित नहीं हो, अंकित नहीं हो। अंकित नहीं हो रहा है।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): ***

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आसन ने एक व्‍यवस्‍था दे दी। माननीय सदस्‍य ने स्‍थगन प्रस्‍ताव के माध्‍यम से ध्‍यान आकर्षित करना चाहा। आपने स्‍थगन प्रस्‍ताव को खारिज कर दिया और उसके बाद जब आपने खुद ने आसन से व्‍यवस्‍था दी कि इन्‍होंने कुछ लोगों के नाम, आरोपियों के इसमें इंगित किये हैं। यह जो आपने, हम सब माननीय सदस्‍यों को राजस्‍थान विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली दी है, इसके 272 के तहत, अगर हिम्‍मत हो तो...।

श्री अध्‍यक्ष: 273 है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 273, अगर इनमें हिम्‍मत हो तो पहले ये नोटिस दें, उसके बाद हम जवाब देंगे।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):  ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्षजी ने कहा था कि आपने अपने नोटिस के अन्‍दर...(व्‍यवधान) आसन ने व्‍यवस्‍था दी है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री अध्‍यक्ष: रायपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य...। (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): ***

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, पहले मैं ही कह देती हूं, आपको कहने की आवश्‍यकता नहीं है। आपने जो स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है, माननीय 15 सदस्‍यों ने, दस्‍तख्‍त करके, उसमें आपने लिखा है, चर्चा का विषय यह है कि माननीय कृषि मंत्री के निजी गांव आवां में इस समस्‍त प्रक्रिया को चलाने वाले सूत्रधार रहते हैं। कृषि मंत्री का नाम तो नहीं लिया। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री अध्‍यक्ष: सुनिये, मेरे गांव में क्‍या हो रहा है, मेरे गांव में क्‍या हो रहा है, इसकी जिम्‍मेदारी मेरी भी है, मुझे पता रहता है। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): ***

श्री अध्‍यक्ष: सरकारी मुख्‍य सचेतक को सुनें। स्‍थान ग्रहण करें। सरकारी मुख्‍य सचेतक कुछ कहना चाह रहे हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य ने अपने स्‍थगन प्रस्‍ताव में तो यह कहा कि माननीय कृषि मंत्रीजी के गांव में इस प्रकार का सूत्रधार रहता है।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): नहीं, पर अपने भाषण में उन्‍होंने यह कहा कि...। (व्‍यवधान) और उन्‍होंने कार्यवाही के निर्देश दिये।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आपने अपने भाषण में निराधार आरोप लगाया। (व्‍यवधान) कल भी अपने भाषण में कहा। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): ***

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला):  ***

श्री अध्‍यक्ष: खण्‍डेला से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप तो आसन की व्‍यवस्‍था को मानते हैं, बिराज जाएं। आपको क्‍या कहना चाहते हैं, सुन लीजिये।

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): इन्‍होंने नाम नहीं लिया तो किसी को कुछ कहना भी नहीं है। (व्‍यवधान) यह घोटाला हुआ है, (व्‍यवधान) आपने नाम नहीं लिया, नाम नहीं लिया ना। (व्‍यवधान)

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप इनके बाद बोलना, जो कुछ बोलना, पहले ये कहेंगे। मैंने नाम पुकार लिया। आप उसके बाद कुछ कहना, कह देना।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री अध्‍यक्ष: अब आपको क्‍या तकलीफ हुई।

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): मैं मेरी एक बात कहना चाहता हूं। इस मामले में मुख्‍य आरोपी विनोद कुमार शर्मा है। अब विनोद कुमार शर्मा एन.जी.ओ. चलाता है और कोटा में उसका कार्यालय है। बूंदी और नावां, उधर तो कुछ कार्य किये।

 

विष्‍णु/यू.एस./06.10.06/12.30/ 1k

 

इनके गांव में, जो गांव का नाम पुकारा था, आवां में मुख्‍य आरोपी विनोद कुमार शर्मा के पिताजी आयुर्वेद में वैद्य हैं। अब उस वैद्य को गिरफ्तार भी कर लिया गया है अब मनीष नाम का एक लड़का है वह जाति से ब्राह्मण है, उस मनीष का नाम भी उन आरोपियों में है। ... (व्‍यवधान) सैनी नहीं है। मनीष शर्मा है। सैनी नहीं है। ... (व्‍यवधान)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): शर्मा है।

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): मनीष शर्मा है।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): अनुमति दे दी क्‍या इस पर बोलने की?

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): सही बात बता रहे हैं हम।

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): मनीष शर्मा है इसलिए आवां गांव में रहने वाले वैद्य ने कोई खुराफात की है।

श्री अध्‍यक्ष: आप क्‍यों खड़े हैं? ... (व्‍यवधान)

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): तो इसमें मंत्रीजी का क्‍या दोष है? हम तो मंत्रीजी का नाम नहीं ले रहे हैं लेकिन इनकी पार्टी के दस आदमी हैं, वे चाहते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आपने तो इसमें दस्तखत किये हैं। आपने इसमें दस्‍तखत किये हैं।  ... (व्‍यवधान) 

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला):... (व्‍यवधान) कि इसमें मंत्रीजी का नाम आये और मंत्रीजी को बदनाम करें इनकी पार्टी के ही आदमी करना चाहते हैं। हमारी पार्टी का कोई भी आदमी मंत्रीजी के ऊपर आरोप नहीं लगा रहा है। विनोद शर्मा आरोपी की,... (व्‍यवधान)  अब जानबूझकर कोई इनकी पार्टी के आदमी इनको बदनाम करना चाहे, इसमें हमारी पार्टी का क्‍या दोष है?

श्री अध्‍यक्ष: आप नाम दो। नाम लिखो आप। ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): लेकिन इसकी जांच सी.बी.आई. से होनी चाहिए ताकि जो भी प्रभावशाली कोई भी लोग हो, चाहे सरकार का मंत्री भी हो तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए और शंका का निवारण हो जाए। ... (व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): मंत्रीजी के लिए ऐसा नहीं कहा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): जांच सी.बी.आई. से कराने की मांग करते हैं। राजस्‍थान सरकार पर इस जांच में कोई विश्‍वास नहीं है क्‍योंकि एन.जी.ओ. जो है वह दिल्‍ली रहता है। दिल्‍ली के एन.जी.ओ. के मार्फत यह काम कर रहे हैं और इस प्रकार प्रभावशाली लोग उसमें मिले हुए हैं इसलिए जांच सी.बी.आई. से होनी चाहिए। राजस्‍थान सरकार इस पर लीपापोती कर रही है।

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): हम पूछना चाहते हैं ... (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य पूछ रहे हैं कि कौनसे मंत्री हैं जिसकी गाड़ी से तस्‍करी का काम होता है? नाम उनसे पूछ लो? उनसे पूछिये।

श्री अध्‍यक्ष: आपको जो कुछ कहना था हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, खण्‍डेला से आने वाले माननीय सदस्‍य आपने कह दिया और मैंने नाम पुकार लिया है बृजकिशोरजी शर्मा का कर्बला में हज हाउस के निर्माण के बाबत्। ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आपने व्‍यवस्‍था दे दी। गृह मंत्रीजी इस पर अपनी व्‍यवस्‍था दें।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या व्‍यवस्‍था दें?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): गृह मंत्रीजी कोई बात तो कहें इस पर। इतना गम्‍भीर मामला है। गृह मंत्रीजी खामोश बैठे हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या व्‍यवस्‍था होगी इस बोर में, व्‍यवस्‍था क्‍या? ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): जांच कराएंगे या नहीं कराएंगे? सी.बी.आई. को भेजेंगे या नहीं भेजेंगे? ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आप लोग तो इतने दिन बाद इस विषय को उठा रहे हैं। जैसे ही पुलिस के ध्‍यान में आया, मुकदमा भी दर्ज किया। उसमें से गिरफ्तारी भी हुई। आगे की जो भी प्रक्रिया है वह चल रही है। इसमें जो भी होगा वे सारे पकड़े जाएंगे। कोई कहीं सी.बी.आई. को भेजने की जरूरज नहीं, हम स्‍वयं सक्षम हैं और अपराधी को दण्‍ड देंगे। यह मैं आपको बताना चाहता हूं। क्‍या बात करते हो आप? ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): लेकिन मुदकमे दर्ज नहीं हो रहे हैं, माननीय गृह मंत्रीजी, हम आपसे आश्‍वासन चाहते हैं। मुकदमे दर्ज नहीं हो रहे हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: श्री बृजकिशोर शर्मा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आज की तारीख में भी हिण्‍डौली विधान सभा क्षेत्र में करीब चार सौ आदमी हैं जिनसे पैसे ले गये।

श्री अध्‍यक्ष: हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): चार सौ आदमी हैं और यह हमारा दुर्भाग्‍य है कि हम कृषि मंत्रीजी से मिले हुए हैं, यह हमारा दुर्भाग्‍य है। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य। आर्डर-आर्डर।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह आश्‍वासन चाहिए कि मुकदमे जो जा रहे हैं उनके सबके दर्ज हो। फैसला यह चाहे जो करें। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: कह तो दिया और क्‍या कहेंगे ?

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): सबके मुकदमे दर्ज हो गये?

श्री अध्‍यक्ष: कह दिया उन्‍होंने।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): सबके जो भी जाएगा थाने में, सबके मुकदमे दर्ज होंगे?

श्री अध्‍यक्ष: हां। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं समझ नहीं पाया हूं कि आपने तो विषय आज उठाया और जब पुलिस के ध्‍यान में यह सारा रैकेट का ध्‍यान में आया, हमने इसकी कार्यवाही प्रारम्‍भ कर दी।

श्री अध्‍यक्ष: आप तो बहुत बाद में उठा रहे हो। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): कुछ लोगों को हमने पकड़ लिया और अब उसके बाद जिस प्रकार से लिंक निकलेगी और जिस प्रकार से एविडेंस आएगी उसके आधार पर ही कार्यवाही करेंगे। आपके कहने से या मेरे कहने से तो मैं किसी भी को अभियुक्‍त नहीं बना सकता अगर उसका अभियुक्‍त का आचरण होगा तो अभियुक्‍त निश्चित रूप से बनेगा और उसके खिलाफ कार्यवाही होगी। यहां कह देने मात्र से आप हजार कह दो या दो हजार कह दो। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): गृह मंत्रीजी, हमारे पास दरख़्वास्तें आयी हैं कि मुकदमे दर्ज नहीं हो रहे हैं ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): ऐसा है कि समय लगता है। इस प्रकार की तफतीश एक दिन में नहीं पूरी हो सकती।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप जैसा गृह मंत्री हो, जिसके ऊपर राजस्‍थान काक भार है, आप तो बड़े मजबूत आदमी हो। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं सोचता हूं कि आप तो आज कह रहेक हो, मैंने यह कार्यवाही पहले कर दी।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप तो बड़े मजबूत आदमी हो, सबके मुकदमे दर्ज होने चाहिए। ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण):  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तारीख 2.3.06 को राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण के बहस में मैंने एक काबीना मंत्री ने ईद के शुभ अवसर पर दिल्‍ली बाई पास की ईदगाह पर पवित्र, ऐसी पवित्र जगह खड़े होकर घोषणा की थी कि राजस्‍थान-जयपुर के अन्‍दर दो हज हाउस का निर्माण किया जाएगा और जो एक हज हाउस पिछली सरकार ने, गहलोत सरकार ने मंजूद किया था जिसका शिलान्‍यास भी हो गया था, ह मेरे पिता श्री के पूर्व विधान सभा क्षेत्र जयपुर ग्रामीण में आता था। उसके नक्‍शे आज तक पास नहीं हुए हैं और काबीना मंत्री महोदय ने ईदगाह की उस पवित्र दरगाह से यह घोषणा की थी कि एक महीने के अन्‍दर ईदगाह के कर्बला क्षेत्र में जो हज हाउस बनेगा, उसके नक्‍शे पास कर दिये जाएंगे। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह 2001 में हुआ था इसका? इसका शिलान्‍यास 2001 में हुआ ?

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): 2003 में। न तो उसके नक्‍शे पास हुए हैं और न सांगानेर में जिस दूसरे हज हाउस की घोषणा की थी ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: दूसरे की बात के लिए मैंने आपको कह दिया है कि न्‍यायालय में विचाराधीन है। चर्चा हो चुकी है। ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं वह बात पढ़ रहा हूं जो मैंने अभिभाषण के टाइम पर कही थी। मैं इसके अलावा कोई भी अलग बात नहीं कर रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, आप कह चुके हैं। उसे दुबारा नहीं कहना चाहिए यहां पर। दौहराने की कोई आवश्‍यकता नहीं है। ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): इसी से संबंधित है इसलिए माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे बोलने दिया जाए। ... (व्‍यवधान)

उसके बाबत। माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने 4 तारीख को जवाब दिया था। इसी सदन में जवाब दिया था कि आपको बहुत चिन्‍ता हो गयी। यह कर्बला क्षेत्र के अन्‍दर हज हाउस और सांगानेर में दूसरे हज हाउस के नक्‍शों का क्‍या हुआ? हमें भी बहुत चिन्‍ता थी और जब सब लोग आये, हमने बात करने के लिए की है, उन्‍होंने कहा कि बड़ी मुश्किल से पाँच साल में रोने पीटने के बाद हम लोगों को हज हाउस के लिए एक जमीन दी, एक बीघा, वह भी बड़ी मुश्किल से। उन्‍होंने कहा कि हमें तो जरूरत है क्‍योंकि मैं हज मंत्री रह चुकी हूं, मैं जानती हूं कि हज का कितना बड़ा आपरेशन होता है इसलिए हमने यह तय कर लिया है कि सांगानेर के अन्‍दर पाँच बीघा जमीन, वह 20.12.05, एक रुपये के टोकन पर दे दी। अब मुझे कभी-कभी हंसी आती है, हम लोग कहते हैं क्‍योंकि हम ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: फिर आप उसी पर जा रहे हो। फिर उसी संबंध में जा रहे हो। ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): मैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो मुख्‍य मंत्रीजी ने जो जवाब दिया वह पढ़ रहा हूं। इसमें क्‍या गलत है?

श्री अध्‍यक्ष: मुख्‍य मंत्रीजी तो जवाब ही नहीं शिलान्‍यास भी कर आयी। ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): मैं वही बात निवेदन कर रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: वह तो न्‍यायालय में चली गयी बात। ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): आपने शिलान्‍यास कर दिया। हम शिलान्‍यास के विरोध में नहीं है। आपने बहुत अच्‍छा किया। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: इस बात को क्‍यों दोहरा रहे हैं आप? ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): मुख्‍य मंत्रीजी ने बहुत अच्‍छा किया लेकिन उसको बनाओ तो सही।

श्री अध्‍यक्ष: जब उन्‍होंने घोषणा के अनुसार शिलान्‍यास कर दिया ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): मैं वही तो निवेदन कर रहा हूं। आप काहे को बीच में बोल रही हैं? हमारी कोशिश यह है ... (व्‍यवधान)     

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आप व्‍यवस्‍था के विरोध में बोल रहे हैं।

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): आप विराज जाइये। आप विराज जाइये। देखिये, यह बीच में बोल रहे हैं। मुख्‍य सचेतक साहब को कहें कि बैठ जाएं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपकी व्‍यवस्‍था के विरोध में बोल रहे हैं और क्‍योंकि चर्चा हो चुकी है और सरकार ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनसे कहें कि यह विराज जाएं। यह व्‍यवधान मंत्री विरा जाएं। ... (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): सरकार बनाना चाहती है और सरकार की नीयत बिलकुल साफ है लेकिन हमारा प्रजातंत्र है, इस प्रजातंत्र में ... (व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍य मंत्रीजी द्वारा जो शिलान्‍यास कर दिया गया उस हज हाउस को उनके मंत्री नहीं मान रहे हैं, यह चिन्‍ता की बात है। ... (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह इन लोगों के विरोध के कारण ही ... (व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): सरकार की मुख्‍य मंत्री शिलान्‍यास कर रही हैं और उन्‍हीं के मंत्री उनका विरोध करते हैं यह दुर्भाग्‍यपूर्ण घटना है। इस पर सरकार उत्‍तर दें। ... (व्‍यवधान) आप इनको निर्देश दें कि सरकार ऐसे पवित्र और ... (व्‍यवधान)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): व्‍यवधान कर रहे हैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनको रोको। ... (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): सांगानेर में हज हाउस बनाना चाहते हैं लेकिन इस प्रकार के हालात कांग्रेस ने पैदा कर दिये हैं। इस प्रकार की भावनाएं कांग्रेस ने पैदा कर दी हैं ... (व्‍यवधान) मुझे सौभाग्‍य मिलेगा यदि टोंक के पास, टोंक के लोग मक्‍का और मदीना में ... (व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे और आपके माध्‍यम से सरकार को कहना चाहता हूं कि जिस मुख्‍य मंत्रीजी ने शिलान्‍यास किया उसी सरकार के मंत्री यह कहते हैं कि ... (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: शनिदेव महाराज बैठो। ... (व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): हम 100 साल तक हज हाउस नहीं बनने देंगे। यह सरकार का कौनसा चरित्र है? ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अजमेर से आने वाले माननीय सदस्‍य, कृपया स्‍थान ग्रहण करें।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह कह रहा हूं कि जो बात माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): व्‍यवधान मंत्री को बैठाइये। ... (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: शनिदेव को बैठाओ, माननीय अध्‍यक्षजी। ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, व्‍यवधान मंत्रीजी को बैठाओ। ... (व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): मुख्‍य मंत्रीजी के शिलान्‍यास करने के बाद ... (व्‍यवधान) मंत्री और मुख्‍य सचेतक यह कहते हैं कि सौ साल तक हज हाउस नहीं बन सकता। यह सरासर इस सरकार का दोहरा चेहरा है और जो लोग अल्‍पसंख्‍यक हैं उनके खिलाफ है। ... (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह गलत है। ... (व्‍यवधान) गलत बोल रहे हैं।... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): माननीय गृह मंत्रीजी पहले मुझे अपना बयान पूरा कर लेने दीजिए। माननीय गृह मंत्रीजी, पहले मुझे पूरी बात कह लेने दीजिए। अध्‍यक्षजी ने मुझे ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस हज हाउस को बनाने के बारे में जितने भी माननीय सदस्‍य चिन्‍ताजनक है, मुझे बहुत अफसोस है और मुझे आज बहुत दु:ख के साथ कहना पड़ रहा है ... (व्‍यवधान) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य पहले अपने गिरेबान झांके कि आपके उस समय के मुख्‍य मंत्री ने क्‍या सोचकर वहां भूमि पूजन किया था? जब उसका नक्‍शा पास नहीं था, उस पर लिटिगेशन के केस चल रहे हैं, केवल वोट- बटोरने के लिए आपने जाकर, आपके अध्‍यक्ष ने जाकर फहरा दिया। ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): यह काम तो आप कर रहे हैं न। यह काम तो आप कर रहे हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): क्‍या उस समय नक्‍शे पास थे? क्‍या उस समय जमीन को ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): सद्भावना खराब करने का काम आप कर रहे हैं।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): क्‍योंकि आपको यह ... (व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): जमीन चरागाह की है, यह कैसी बात है गृह मंत्रीजी, आप मुझे बताइये। ... (व्‍यवधान)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): गृह मंत्रीजी यह बताओ आप ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): केवल भूमि पूजन करके वहां पर आप ... (व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): जो बात आप कह रहे हो ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहले मुझे अपनी बात कहने दीजिए।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): नक्‍शा पास नहीं हुआ, केवल भूमि पूजन करके ... (व्‍यवधान) हमने वह काम नहीं किया। हमने जो काम किया वह नियम के तहत किया है और पूरी कार्यवाही करने के बाद किया है। ... (व्‍यवधान)

शिव/चौहान/12.40/1l/6.10.2006

अफसोस आपको होना चाहिये जब आपका नक्‍शा पास नहीं था, जमीन पर आपका अधिकार नहीं था, केवल चुनाव आ गये इसलिए भूमि पूजन करके जनता को गुमराह करके वोट बटोरने का काम आप लोगों ने किया। ...(व्‍यवधान)... हमने जो काम किया वह नियमों के तहत किया । ....(व्‍यवधान) .....

श्री महिपाल यादव : ...(व्‍यवधान) .... अयोध्‍या में क्‍या हुआ ? मंदिर वही बनायेंगे, तारीख आज तक नहीं बताई । ..(व्‍यवधान) .....

डॉ0 श्रीगोपाल बाहेती: मुख्‍य मंत्री महोदय ने किस प्रकार चारागाह की भूमि पर ... (व्‍यवधान) .... करना वाजिब है।  ...(व्‍यवधान) .......

श्री महिपाल यादव : फालतू की राजनीति कर रहे हैं । ...(व्‍यवधान) .......

श्री बृजकिशोर शर्मा: माननीय मंत्रीजी, आप बैठ जाओ ...(व्‍यवधान) .......

श्री महिपाल यादव : मंदिर वहीं बनायेंगे, तारीख आज तक नहीं बताई। ...(व्‍यवधान) ....... यह राजनीति तो आप कर रहे हो राम के नाम पर ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन: राम मंदिर बनेगा । ...(व्‍यवधान) .......

एक माननीय सदस्‍य: हिन्‍दू-मुसलमान मत करो, यह गलत बात है। ...(व्‍यवधान) .......

डॉ0 श्रीगोपाल बाहेती: यह बहुत खतरनाक बात है। ...(व्‍यवधान) .......

श्री महिपाल यादव: तारीख नहीं बताई, कब बताओगे ? ...(व्‍यवधान) .......

श्री बृजकिशोर शर्मा: आपके मुख्‍य मंत्रीजी की घोषणा पूरी करो। मैं यह चाहता हूं ...(व्‍यवधान) .......

श्री महावीर प्रसाद जैन: टोंक में जरूर बन सकता है। ...(व्‍यवधान) .......

श्री बंशीलाल खटीक: कर्बला में जो शिलान्‍यास किया, पहले उसका तो हिसाब देदो।...(व्‍यवधान) .......

श्री महावीर प्रसाद जैन: मैं गारंटी के साथ कह सकता हूं ...(व्‍यवधान) .......

श्री बंशीलाल खटीक: कर्बला में जो शिलान्‍यास करके आये, उसका क्‍या हुआ ? ...(व्‍यवधान) ....... पहले अपने गिरेबान में झांककर देखो।...(व्‍यवधान) .......

श्री रामप्रताप कासनियां : अध्‍यक्ष महोदय, दर्शक दीर्घा में जो लोग बैठे हैं, उनके कान फट गये, वह उठ उठकर बाहर जा रहे हैं। ...(व्‍यवधान) ....... उन्‍होंने सोचा विधान सभा में बहुत अच्‍छी बहस होगी और सुनने के लिये आये हैं और दर्शक वापस जा रहे हैं इसको सुनकर । ...(व्‍यवधान) .......

एक माननीय सदस्‍य: आप हमेशा ही बुद्धि विरोधी बात करते हो। ...(व्‍यवधान) .

श्री बृजकिशोर शर्मा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍य मंत्रीजी ने जो घोषणा की ...(व्‍यवधान) .......

श्री बंशीलाल खटीक : पहले कर्बला का हिसाब दो, कर्बला का शिलान्‍यास कैसे हुआ ? उसका हिसाब दो फिर हमसे हिसाब मांगो। ...(व्‍यवधान) ....... कर्बला में शिलान्‍यास कैसे कर दिया और वह पूरा क्‍यों नहीं हुआ, पहले उसको रोओ । ...(व्‍यवधान) .......

श्री बृजकिशोर शर्मा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍य मंत्रीजी ने आगे कहा था कि हमारी कोशिश यह है कि हम ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को सुरक्षित राजस्‍थान के अंदर विकसित करें और हम इस भूमि के अंदर जो हज हाउस है, उसके नक्‍शे तैयार हो चुके हैं। ...(व्‍यवधान) .......

श्री महावीर प्रसाद जैन : टोंक में हज हाउस बनवा लो, हवाई अड्डा भी बनवा लो और हज हाउस भी बनवा लो। ...(व्‍यवधान) .......

श्री बृजकिशोर शर्मा: जनवरी, 2006 के अंदर प्रस्‍तुत भी हो गये हैं । अगर वह पास भी हो गये हैं और बहुत ही जल्‍दी इसका काम चालू हो जायेगा। माननीय मुख्‍य मंत्रीजी की घोषणा के बावजूद नौ महीने निकल जाने के बावजूद कर्बला के अंदर हज हाउस का निर्माण नहीं हुआ है। मैं इस सदन के माध्‍यम से, आपके माध्‍यम से सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि कर्बला का हज हाउस जल्‍दी से जल्‍दी शुरू कराया जाये, धन्‍यवाद।

श्री हीरालाल : क्‍यों नहीं किया आपने, क्‍या ठेकेदारी है क्‍या ?

श्री अध्‍यक्ष: बहुत बढि़या। जुबेर खान 295.

श्री युनूस खान (यातायात राज्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जयपुर ग्रामीण से आने वाले माननीय सदस्‍य बार बार चर्चा कर रहे थे पिछले ईद की बात की । मैं आपको हज कमेटी के जो तत्‍कालीन अध्‍यक्ष हैं माननीय सलीम कागजी साहब, उन्‍होंने मेरे साथ मिलकर 2004 में माननीय मुख्‍य मंत्रीजी से निवेदन किया था। निवेदन यह किया था कि जो एक बीघा कर्बला में जमीन आवंटित की है वह विवादित भूमि है और वह पर्याप्‍त भी नहीं है, इसलिये हमारे को जयपुर एयरपोर्ट के पास जमीन आवंटित की जाये। उसके लिये उन्‍होंने यह बकायदा पत्र लिखा है 2004 में, माननीय मुख्‍य मंत्रीजी से मिले और जिस ईद की नमाज की आप बार बार चर्चा कर रहे हैं, मैं गया था उस नमाज में। मैंने नमाज पढ़ी थी और वहां मुसलमानों ने मांग की थी और हमने यह कहा था कि इंशा अल्‍लाह आपके के लिये एक महीने में प्रयास करके हम काम करेंगे।...(व्‍यवधान) ....... आप पूरी बात सुन लें ।

श्री अध्‍यक्ष: जिसका मुख्‍य मंत्रीजी ने शिलान्‍यास कर दिया, बाकी क्‍या रह गया आपके कहने के लिये ।

श्री युनूस खान : एक मिनट सुन तो लें अध्‍यक्ष महोदय। ...(व्‍यवधान) .......

श्री अध्‍यक्ष: कहने की आवश्‍यकता नहीं है। मतलब क्‍या निकलेगा ? ...(व्‍यवधान) .......

श्री बृजकिशोर शर्मा: आप बनाओ न, हम मना कब कर रहे हैं, हम मना नहीं कर रहे हैं, आप बनाओ। हम तो चाहते हैं। ...(व्‍यवधान) .......

श्री अध्‍यक्ष:  He has already laid the foundation stone.

श्री युनूस खान : आप एक बात सुन लें उसके बाद में ...(व्‍यवधान) .......

श्री महावीर प्रसाद जैन : यह तो वोटों के लिये आंतकवादियों की तारीफ करते हैं। ...(व्‍यवधान) .......

श्री बृजकिशोर शर्मा: आपकी तारीफ नहीं करूंगा आप आंतकवादी हो इसलिये। ...(व्‍यवधान) .......

श्री बंशीलाल खटीक : यह तो अफजल गुरू को छोड़ने की योजना बनाते हैं। ...(व्‍यवधान) .......

श्री महावीर प्रसाद जैन: यह तो वोटों के लिये आंतकवादियों के लिये कुछ भी कर सकते हैं। ...(व्‍यवधान) ....... वोटों के लिये कुछ भी कर सकते हो। यह तो हज हाउस की बात है। ...(व्‍यवधान) .......

श्री मदन दिलावर : अफजल को जो फांसी हो रही है, उसका समर्थन कर रहे हैं यह ...(व्‍यवधान) .......आंतकवादियों का समर्थन कर रहे हैं। ...(व्‍यवधान) .......

श्री बंशीलाल खटीक: संसद के ऊपर हमला करने वालों को भी यह बचाने वाले हैं।

श्री युनूस खान : पिछली ईद को हमारी हज की जितनी भी कमेटियां बनी हुई हैं, उनके सारे सदस्‍य और मैं करीब 500 लोगों के साथ माननीय मुख्‍य मंत्रीजी से मिलने गये थे। वहां पर यह तय हुआ कि एयरपोर्ट के पास यह जमीन है। माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने वहां स्‍पष्‍ट कहा था कि हम आपको एक बीघा जमीन कैंसिल करेंगे तो दूसरी जगह देंगे और वहां हज हाउस बनायेंगे, क्‍योंकि एयरपोर्ट के पास है तो यह बार बार कहना सिर्फ राजनीति करना, यह भी हज हाउस में कतई इन्‍टरेस्‍टेड नहीं है, यह लोग इसको राजनीति रंग देकर और यहां तक स्थिति को ला रहे हैं। इस प्रकार सरकार हज हाउस बनाने के लिये उनको अपनी राजनीति करनी है और मुसलमानों को बरगला कर 50 साल तक राजनीति करना चाहे, हमारी सरकार इस मामले में गंभीर है और माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने कहा है इस मामले में गंभीर हैं। इन्‍हें सिर्फ मुसलमानों के वोट पकाने हैं इसलिए इस तरीके से बार बार मुद्दा ला रहे हैं। अगर यह गंभीर होते तो यह काम करके दिखाते । आज तक इन्‍होंने कोई काम नहीं किया है। मुसलमानों के लिये जो इन्‍होंने काम किया है, उनको दबाने के लिये काम किया है। ...(व्‍यवधान) .......

श्री बृजकिशोर शर्मा: माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने इस पवित्र सदन में घोषणा की है, हम उसका क्रियान्‍वयन चाहते हैं । इसमें राजनीति कहां आ गयी ? आप द्वारा की गयी घोषणा का हम क्रियान्‍वयन चाहते हैं। ...(व्‍यवधान) ....... माननीय मंत्रीजी, आप कितने गंभीर हो वह तो बता दिया आपके मुख्‍य सचेतक जी ने कि 100 वर्ष नहीं बनेगा। ...(व्‍यवधान) .......

श्री श्रवण कुमार : आप नहीं करना चाहते और नाम उनका ले रहे हो, 100 साल तक नहीं बनेगा, इसका मतलब बनेगा ही नहीं ...(व्‍यवधान) ....... 100 साल नहीं बनेगा । ...(व्‍यवधान) .......

श्री अध्‍यक्ष: श्री जुबेर खान 295 पढि़ये। ...(व्‍यवधान) .......

श्री जुबेर खान : माननीय सचेतक जी, आप बैठ जाइये। बार-बार उठना, यह आपको शोभा नहीं देता। ऐसे पंतगें लग रहे हैं क्‍या आपके नीचे ? आप किसी को बोलना ही नहीं देना चाहते । आसन से व्‍यवस्‍था हो गयी 295 की और आप उछल उछल पड़ रहे हैं। ...(व्‍यवधान) ....... आप ही ज्‍यादा पहलवान हो क्‍या इस सदन में? ...(व्‍यवधान) .......

श्री महावीर प्रसाद जैन : हां, हैं पहलवान । ...(व्‍यवधान) .......

श्री जुबेर खान : आ जाओ बाहर  पहलवान हो तो । ...(व्‍यवधान) .......

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ : यह क्‍या है अध्‍यक्ष महोदय ? ...(व्‍यवधान) ....... यह किस तरह का आचरण है ...(व्‍यवधान) ....... यह किस तरह का आचरण है ...(व्‍यवधान)  अध्‍यक्ष महोदय, यह किस तरह का आचरण है? ...(व्‍यवधान) .......

श्री अध्‍यक्ष: कृपया सब अपना स्‍थान ग्रहण करें।...(व्‍यवधान) .......

श्री श्रवण कुमार : अध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा में लोग ऊपर से देख रहे हैं इससे बड़ी शर्म की बात और क्‍या हो सकती है ? ...(व्‍यवधान) .......

श्री जुबेर खान : 295 बोल दिये, मैं पढ़ने खड़ा हो रहा हूं और यह खड़े हो गये बीच में। मेरा आसन से निवेदन है कि आप गुजारिश करिये इनसे ...(व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर : यह आंतकवादियों के समर्थक और सिक्‍खों के हत्‍यारे हैं।...(व्‍यवधान) .......सिक्‍खों के हत्‍यारे और आतंकवादियों के समर्थक हैं।...(व्‍यवधान) .......

श्री जुबेर खान : मैं 295 पढ़ रहा हूं और यह फुदक रहे हैं। आपने मेरा नाम पुकारा 295 के लिये, यह बीच में उठते रहते हैं । इनको शर्म नहीं आती। ...(व्‍यवधान) .......

श्री श्रवण कुमार : इससे बड़ी दु:ख की बात और क्‍या होगी ? ...(व्‍यवधान) ...

श्री मदन दिलावर : जैसे गली का गुण्‍डा चेतावनी देता है, ऐसे चेतावनी दी है सदन में । ...(व्‍यवधान) ....... गुण्‍डा जैसा व्‍यवहार कर रहे हैं ।...(व्‍यवधान) .......

श्री अध्‍यक्ष: कृपया अपना  अपना स्‍थान ग्रहण करें।...(व्‍यवधान) .......

श्री जुबेर खान: यह क्‍या तरीका है इनका ? ...(व्‍यवधान) .......

श्री बंशीलाल खटीक: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदन में धमकी दी गयी , ऐसी कार्यवाही चलेगी क्‍या ? ...(व्‍यवधान) ....... नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय।...(व्‍यवधान) .......

श्री अध्‍यक्ष: आप दोनों को क्‍या हो गया ...(व्‍यवधान) .......क्‍या हो गया ? ...(व्‍यवधान) .......

श्री बंशीलाल खटीक : एक मिनट मेरा निवेदन है ...(व्‍यवधान) ....... नहीं, एक मिनट आप बिराजिये।

श्री अध्‍यक्ष: मैं हाथ जोड़ती हूं आप बिराजो। ...(व्‍यवधान) .......

श्री बंशीलाल खटीक: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक निवेदन है...(व्‍यवधान) ....... नहीं, आप बिराजो। ...(व्‍यवधान) .......

श्री अध्‍यक्ष: अब आप बिराजो । ...(व्‍यवधान) ....... मैं हाथ जोड़ रही हूं। ...(व्‍यवधान) .......

श्री बंशीलाल खटीक : आंतकवादी बैठ ...(व्‍यवधान) ....... आंतकवादी हो । ...(व्‍यवधान) .......मुख्‍य सचेतक जी को आज धमकी दी बाहर आने की । ...(व्‍यवधान) .......

श्री अध्‍यक्ष: मैं आपको अब नाम से पुकारूंगी । मैं नाम से पुकारूंगी।...(व्‍यवधान) .......

श्री बंशीलाल खटीक : सदन से बाहर आने की धमकी दे दी ...(व्‍यवधान) .......

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, बीच में न बोलें। चाहे प्रतिपक्ष हो ...(व्‍यवधान) एक बार बीच में न बोलें ।...(व्‍यवधान) ....... नहीं, अब मैं कुछ नहीं सुनूंगी। नो, मैं कुछ नहीं सुनूंगी। ...(व्‍यवधान) .......

श्री रामनारायण मीणा: संसदीय कार्य मंत्री उनको डांट रहे हैं।...(व्‍यवधान) .......

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण कर लीजिये। यह उनका दायित्‍व है कि यदि कोई सत्‍ता पक्ष का सदस्‍य आसन का उल्‍लंघन कर रहा हो तो उसको जाकर समझाने का उनका कर्तव्‍य है, इसलिए उसमें कोई गलत बात नहीं है। ठीक है, मैं यह निवेदन कर रही थी कि चाहे प्रतिपक्ष हो, चाहे सत्‍ता पक्ष हो नियमों की, आसन की अवज्ञा करके अपनी बात कहने की आप सब लोगों की आदत पड़ गयी है।

महेन्‍द्र/चौहान/1m/1250/06102006

 

यदि मेरे से बैटर तरीके से कोई चला सकता हो तो मैं तो बहुत दुःखी हो गयी, सच कहती हूं आपको।

अनेक माननीय सदस्‍य: छोड़ दो।

श्री अध्‍यक्ष: हां, छोड़ दूंगी, बिलकुल, मेरे को कोई वो नहीं है। बिलकुल, आप किसी को भी करें लेकिन नियमों का, जब तक इस आसन पर हूं जब तक नियमों में मैं आपको बाँध के रखूंगी और सदन की गरिमा का ख्‍याल रखूंगी और सदन की गरिमा को नहीं गिरने दूंगी। हां, और जो व्‍यवस्‍था दूंगी ...(व्‍यवधान)...

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): इनके पेट में दर्द हो रहा है कि आप, मुख्‍य पद पर एक महिला जो बैठ गयी।

श्री अध्‍यक्ष: आई एम वार्निंग यू। मैं आपको वार्निंग दे रही हूं। ...(व्‍यवधान)... मैं आपको वार्निंग दे रही हूं।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): आप क्‍या गरिमा रखेंगे?

श्री अध्‍यक्ष: मैं आपको वार्निंग दे रही हूं। स्‍थान ग्रहण करें। स्‍थान ग्रहण करें।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): सरकारी मुख्‍य सचेतक खड़े हो के यूं कर रहे हैं, दादा हूं, यूं कह रहे हैं, पहलवान हूं कह रहे हैं और आप आसन से देख रही हैं।

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें। ...(व्‍यवधान)...

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): क्‍या कंट्रोल करेंगी इस सदन को?

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण करें, माननीय सदस्‍य। (व्‍यवस्‍था सूचक घण्‍टी)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): सरकारी मुख्‍य सचेतक खड़े हो कर के ये कर रहे हैं, दादा कह रहे हैं अपने आप को ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: खुला चैलेंज दे रहे हैं, इन्‍होंने सदन की गरिमा तोड़ी है।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): ऐसे काम नहीं चलेगा। आप खाली बारबार विपक्ष को कहते हो, इनको कुछ कहते ही नहीं हो। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप कृपया  ...(व्‍यवधान)... व्‍यवहार करते हैं तो मुझे फिर सदन से निकालना पड़ेगा आपको। ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: सदन की कोई गरिमा नहीं होती क्‍या? ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें।

  मैं आपसे निवेदन कर रही थी कि यह आसन की और सदन की गरिमा को बनाये रखने की जिम्‍मेदारी केवल आसन की नहीं है बल्कि सभी माननीय सदस्‍यों की है और जब आप खड़े हो, कर एक साथ खड़े हो जाते हो, कितनी बार मैंने आप से कहा कि एक माननीय सदस्‍य खड़े हो कर के अपनी बात कहे तो उसका जवाब भी आयेगा सरकार की तरफ से। एक साथ चार-चार, पाँच-पाँच खड़े हो जाते हो।

स्‍थगन प्रस्‍ताव की व्‍यवस्‍था के बाद उसके बारे में जोर-जोरसे बोल कर के और फिर आप जिस तरह के आरोप लगाते हो और जो कुछ कहते हो, यदि किसी के खिलाफ कुछ है तो 273 नियम में आ कर के बाकायदा नोटिस दे कर के और सरकार को आप जो कुछ कहना है कहिये, कौन ना कर रहा है लेकिन वो भी नहीं करते, आप एक साथ खड़े हो कर के जो केयोस पैदा कर देते हैं सदन के अन्‍दर, मैं समझती हूं यह उचित नहीं है और मैं अब तक तो बिलकुल कुछ नहीं कर रही हूं लेकिन अब मैं जो इस तरह से आज्ञा का उल्‍लंघन करेंगा और आसन की नहीं मानेगा और आसन की बारबार अवज्ञा करेगा उसे मुझे सदन से निकालने के लिए कहना पड़ेगा और निकालना पड़ेगा, मैं आपको कह रही हूं। मैं सब को कह रही हूं, सत्‍ता पक्ष वालों को भी कह रही हूं कि सत्‍ता पक्ष के भी हठधर्मी करेंगे, उनको भी निकालूंगी। ...(व्‍यवधान)...

अनेक माननीय सदस्‍य: सरकारी मुख्‍य सचेतक को कहें।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, देखिये सरकारी मुख्‍य सचेतक का यह कर्तव्‍य है, देखिये सरकारी मुख्‍य सचेतक का यह कर्तव्‍य है।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): हम आपकी भावना की कद्र करते हैं, आप जो कह रहे हैं बहुत सही है। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: बीच में न बोलें, आप बीच में न बोलें। आपको यह ज्ञान नहीं है कि आसन पांवों पर है, आप खड़े हो रहे हैं। यह ज्ञान नहीं है आपको?

सरकारी मुख्‍य सचेतक का कार्य है कि सरकारी मुख्‍य सचेतक किसी समय भी अलावा लीडर ऑफ द हाउस और प्रति पक्ष के नेता के अलावा किसी समय भी खड़े हो कर के और किसी बात की ओर भी ध्‍यान दिला सकते हैं, नियमों की बात बता सकते हैं। यह सरकारी मुख्‍य सचेतक का कर्तव्‍य है। ...(व्‍यवधान)... सुनिये। लेकिन उनको भी यह अधिकार नहीं है कि वो छाती ठोकने लग जाएं और चैलेंज करने लग जाएं। यह अधिकार उनका भी नहीं है। यह उनको भी अधिकार नहीं है। लेकिन वो किसी भी समय खड़े हो कर के और नियमों की बात बता सकते हैं, यह अधिकार उनका अवश्‍य है। ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, जिस तरह का व्‍यवहार रामगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य ने किया, चुनौती भरे अंदाज में माननीय सदस्‍य ने कहा, अब यह क्षमा याचना करें।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से 295 पर निवेदन करना चाहता हूं। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आपने भी जिस तरीके से किया वो उचित तो नहीं है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जिस तरह का व्‍यवहार इन्‍होंने किया, अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान की विधान सभा के इतिहास के अन्‍दर इस तरह गरिमा तोड़ने का काम रामगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य ने किया है, इनको क्षमा याचना करनी चाहिए। नहीं, वो चुनौती भरी आवाज में कहा है, बाहर जाने के लिए बात कही, यह राजस्‍थान की विधान सभा है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक बात कहना चाहता हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): कोई जलेबी चौक नहीं है ...(व्‍यवधान)... इनको क्षमा याचना करनी चाहिए।

एक माननीय सदस्‍य: यह विधान सभा को बिहार की विधान सभा बना रहे हैं। सदन में चैलेंज किया है। ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): इनको प्रताडि़त करिये।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): मुख्‍य सचेतक और सचेतक की हालत यह है। ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मेरी प्रार्थना है, अनुरोध है कि इनको प्रताडि़त करना चाहिए। ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: यहां यह अखाड़ा बनाना चाहते हो, आ जाओ मैदान में ...(व्‍यवधान)...

श्री हीरालाल (निवाई): माननीय जुबेर खान ने सरकारी मुख्‍य सचेतक को यह कहा- आ जा बाहर, तो क्‍या यह शोभा देती है। ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, इस तरह का दृश्‍य राजस्‍थान विधान सभा में पैदा नहीं होना चाहिए और इनको क्षमा याचना करनी चाहिए, जिस अंदाज में गये हैं।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह सीधा आदेश दे रहे हैं। हां, यह संसदीय कार्य मंत्री सीधा आदेश दे सकते हैं क्‍या? ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): पहले क्षमा याचना उनसे करें। सरकार की मुखिया शिलान्‍यास करे और यह कहें कि एक साल नहीं बनेगा, इनसे कराओ पहले।

आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से 295 के मार्फत सरकार का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, आप कहें अवश्‍य लेकिन भविष्‍य में ऐसा व्‍यवहार न करें जैसा आज किया है। जैसा आपने आज व्‍यवहार किया है ऐसा व्‍यवहार भविष्‍य में न करें। पढ़ें अब आप। ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी व्‍यवस्‍था का मान-सम्‍मान करता हूं। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: अब आप स्‍थान ग्रहण करें। 

श्री जुबेर खान (रामगढ़): जिस तरह से आज ग्रृह मंत्रीजी को ही मुख्‍य सचेतक ने नहीं बोलने दिया, यातायात मंत्री अपनी सफाई दे रहे हैं, उनको नहीं बोलने दिया, ऐसा बेलगाम मत बनाइये इन्‍हें, इन पर भी कुछ अंकुश करिये। हम तो आप जो कहेंगी मान लेंगे मगर ऐसा नहीं हो सकता---

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): यह काम आपका है क्‍या, इस हाउस को---

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आपस की लड़ाई है पार्टी की उसको सदन में मत लडि़ये।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हमारी काहे कि लड़ाई है। मैंने तो अध्‍यक्षजी को ध्‍यान दिलाया है कि इनकी व्‍यवस्‍था यह घ्‍थी कि कर्बला पर बोलें ...(व्‍यवधान)... कर्बला के अलावा बोल रहे थे इसलिए ध्‍यान दिलाया।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपने प्रताडि़त कर दिया। अध्‍यक्ष महोदय, इनको आपने प्रताडि़त कर दिया न? प्रताडि़त कर दिया तो ठीक है।

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): माफी मांगें पहले। (भारी व्‍यवधान)

श्री हीरालाल (निवाई): पहले माफी मांगें नहीं तो नहीं पढ़ने देंगे हम। पहले माफी मांगें। ...(व्‍यवधान)... पहले माफी मांगें  इन्‍होंने जो व्‍यवहार किया है।

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): खेद प्रकट करें, माफी मांगें। ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: इनको खेद प्रकट करना चाहिए। पहले माफी मांगें, खेद प्रकट करें नहीं तो नहीं पढ़ने देंगे।

श्री हीरालाल (निवाई): माननीय सदस्‍य को खेद प्रकट करना चाहिए जो इस सदन से बांह चढ़ा कर बाहर चलने लग गये। ...(व्‍यवधान)...

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): पहले माफी मांगें। पहले माफी मांगनी पड़ेगी।

श्री हीरालाल (निवाई): अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍हें खेद प्रकट करवाइये इस सदन में ...(व्‍यवधान)...

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): पहले माफी मांगो। ...(व्‍यवधान)... (व्‍यवस्‍था सूचक घण्‍टी)

श्री अध्‍यक्ष: रामगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य के अतिरिक्‍त सब बैठ जाएं, अपना स्‍थान ग्रहण कर लें। मैंने कह दिया भविष्‍य में वो ऐसा न करें।

अनेक माननीय सदस्‍य: माफी मांगें।

श्री अध्‍यक्ष: माफी ...(व्‍यवधान)... छोडि़ये आप, बस कह दिया। कह दिया, हो गयी बात। अब आप क्‍या कहना चाहते हो, हो गयी न बात, भविष्‍य में ऐसा न करें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपने अच्‍छा किया आपने प्रताडि़त कर दिया, अब समझदार के लिए तो इशारा ही बहुत है, साहब।

 

नियम 295 के अन्‍तर्गत विशेष उल्‍लेख

विधान सभा क्षेत्र रामगढ़ में 132 के.वी. जी.एस.एस.

 

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं सदन की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन के नियम 295 के अन्‍तर्गत विशेष उल्‍लेख प्रस्‍ताव के जरिये निवेदन करना चाहता हूं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उपरोक्‍त विषय के सन्‍दर्भ में निवेदन है कि अलवर जिले के विधान सभा क्षेत्र रामगढ़ में गत वर्ष 132 के.वी. जी.एस.एस. स्‍वीकृत हुआ था। लगभग एक वर्ष से अधिक समय हो गया है परन्‍तु अभी तक भी वहां पर 132 जी.एस.एस. का कार्य प्रारम्‍भ नहीं हुआ है। रामगढ़ क्षेत्र में बिजली की अत्‍यधिक समस्‍या है जिसका कुछ समाधान वहां पर 132 जी.एस.एस. चालू होने से ही हो सकेगा।

श्री अध्‍यक्ष: बानसूर से आने वाले माननीय सदस्‍य, यह कौनसा तरीका है?

श्री जुबेर खान (रामगढ़): और जब तक वहां पर 132 जी.एस.एस. नहीं बनता है तब तक क्षेत्र के स्‍थान अलवाड़ा एवं नौगावां के 33 के.वी. जी.एस.एस. भी चालू नहीं किये जा सकते हैं। रामगढ़ के 132 के.वी. जी.एस.एस. के लिए भूमि अवाप्ति की कार्यवाही के सन्‍दर्भ में विद्युत विभाग द्वारा अवार्ड जारी नहीं किया जा रहा है जिससे भूमि की अवाप्ति नहीं हो पा रही है एवं वहां पर 132 के.वी. जी.एस.एस. का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।

मेरी सदन के माध्‍यम से सरकार से मांग है कि रामगढ़ (अलवर) के 132 के.वी. जी.एस.एस. के निर्माण हेतु भूमि का अवार्ड जारी कर के इसका कार्य शीघ्रातिशीघ्र शुरू कराया जावे जिससे क्षेत्र की लम्‍बे समय से चली आ रही परेशानी काक हल हो सके। धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: श्री संयम लोढ़ा।

 

Ars/usc/1300/06102006/1n/1

 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे प्रक्रिया के नियम 295 के तहत प्रस्‍ताव पढ़ने की अनुमति दी है, आपका धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: आपका अधिकार है कोई इसकी आवश्‍यकता नहीं है।

सिरोही व शिवगंज के राजकीय महाविद्यालयों में व्‍याख्‍याताओं के रिक्‍त पद

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): प्रक्रिया के नियम 295 के तहत सिरोही जिले में शैक्षिक समस्‍याओं के समाधान के सम्‍बन्‍ध में  सिरोही व शिवगंज के राजकीय महाविद्यालयों में व्‍याख्‍याताओं के रिक्‍त पदों से छात्रों के भविष्‍य पर पड़ रहे विपरीत प्रभाव की ओर ध्‍यान आकृष्‍ट करना चाहता हूं। राजकीय स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय सिरोही में 18 व शिवगंज के राजकीय महाविद्यालय में 10 व्‍याख्‍याताओं के पद रिक्‍त हैं। शिवगंज के राजकीय महाविद्यालय में वाणिज्‍य वर्ग में अधिकांश छात्रों को कंपार्टमैंट/पूरक परीक्षा का सामना करना पड़ रहा है। विषय का व्‍याख्‍याता न होने से यह स्थिति बनी है। सिरोही के राजकीय कन्‍या महाविद्यालय में भी पद रिक्‍त है।

इसी तरह माध्‍यमिक व प्रारम्भिक शिक्षा में भी रिक्‍त पदों को लेकर आम जनता में आक्रोश व्‍याप्‍त है। सर्व शिक्षा अभियान में भारत सरकार द्वारा दिए गए पदोंको भरनेके अलावा कोई पद राज्‍य सरकार द्वारा नहीं भरे जा रहे हैं । अनेक आंदोलन छात्र समुदाय द्वारा किए जा चुके हैं। कई प्राथमिक विद्यालयों में तो एक भी शिक्षक नहीं है। बार बार हमने आग्रह किया है लेकिन वैकल्पिक व्‍यवस्‍था तक नहीं की जा रही है। शिक्षा व उच्‍च शिक्षा मंत्री अपने विभाग के कामकाज पर ध्‍यान देने के बजाय मुख्‍यमंत्री के साथ कुश्‍ती में व्‍यस्‍त है। छात्रों का भविष्‍य बर्बाद हो रहा है।

श्री अध्‍यक्ष: अध्‍यापक ही नहीं है तो फिर स्‍कूल कैसे चल रही हैं ? एक भी अध्‍यापक नहीं है तो स्‍कूल कैसे चल रही हैं ?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): बंद पड़ी हैं 113 प्राइमरी स्‍कूलों में एक भी टीचर नहीं हैं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि सरकार में थोड़ी सी भी हो तो खड़े होकर कम से कम यह तो कह दें कि हम कोई वैकल्पिक व्‍यवस्‍था करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: सरकार बातों में व्‍यस्‍त है। सरकार बातों में व्‍यस्‍त नहीं रहे जवाब दें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कटारिया साहब पूरे सदन की व्‍यवस्‍था संभालकर विराजमान हैं, शिक्षा मंत्री भी रहे हैं कम से कम यह तो कह दें कि जिला स्‍तर पर कोई वैकल्पिक व्‍यवस्‍था कर देंगे यह तो कह दें। ...(व्‍यवधान) आप खुद सिरोही आए थे तो आपको क्‍या देखने को मिला था, बच्‍चों का समूह, नेताजी हमें शिक्षक चाहिए, वह तख्‍ती तो आपने देखी थी।

श्री अध्‍यक्ष: श्री ज्ञानचन्‍द पारख (अनुपस्थित) श्री हरीसिंह रावत(अनुपस्थित)श्री कन्‍हैयालाल पाटीदार। सुनो, आप बैठे हैं कम से कम कुछ आश्‍वस्‍त तो करो, यदि स्‍कूलों में एक भी अध्‍यापक नहीं होगा और स्‍कूलें यदि बंद पड़ी हैं तो कुछ तो फरमाए सरकार।

श्री अमराराम (धोद): सरकार सुस्‍त हो गई, आपके आदेश की भी पालना नहीं हो रही।

श्री अध्‍यक्ष: एक एक तो लगाओ।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपने जो बात कही, वह वास्‍तव में इंटीरियर क्षेत्र में स्‍कूलों में यह समस्‍या है। अभी सरकार इसके लिए प्रयास कर रही है। कलैक्‍टर और कुछ अधिकारियों को बैठाकर के जो कुछ भी हमारे पास उपलब्‍ध है उनको ठीक सैटल करें ताकि कम से कम जहां अधिक हैं वहां से कुछ हटाकर ...

श्री अध्‍यक्ष: स्‍कूल प्रारम्‍भ तो हो, स्‍कूल चल तो सके।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उसके लिए प्रयास कर रहे हैं लेकिन एकदम मेरे पास सारी जानकारी पूरीनहीं है तो मैं कोई ऐसी बात नहीं कह दूं जिसके कारण से ...

श्री अध्‍यक्ष: करिए, प्रयास करिये।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, शहरों में दस लड़के हैं दस टीचर हैं, इनके डी ओ ने जहां लगाए एक भी नहीं गया। इनके नेताओं ने वापस कैन्सिल करा दिए, सीकर में ऐसी स्‍कूलें हैं जहां दस लड़के हैं और दस ही टीचर हैं । जो पोस्टिंग ग्रामीण क्षेत्र में किया....

श्री अध्‍यक्ष: अनवान्‍टेडली पोस्‍टेड, जरुरत से ज्‍यादा स्‍टाफ है, सरप्‍लस स्‍टाफ है , सीकर में नहीं एवरी व्‍हेयर ।

श्री अमराराम (धोद): और तीन साल में उनका समानीकरण आज तक नहीं हुआ। कम से कम व्‍यवस्‍था तक तो लगा दें उनको कम से कम जब तक नहीं आते हैं व्‍यर्थ में बैठे हैं टीचर वहां तनख्‍वाह उठा रहे हैं । जनता के पैसे का उपयोग कर रहे हैं और दूसरी तरफ रोज स्‍कूलों में ताले लगते हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षित कर दिया।

श्री अमराराम (धोद): ग्रामीण क्षेत्र की स्‍कूलों में सीकर जिले में पाँच स्‍कूलों में रोज ताले लगते हैं जब बाकी उन जिलों का तो और भी बुरा हाल होगा जब सीकर झुन्‍झुनूं में स्‍कूलों में यह हाल है ।

श्री अध्‍यक्ष: शिव से आने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, झुन्‍झुनूं का मालूम नहीं है क्‍या, एक भी अध्‍यापक गया नहीं है जिनको रिलीव किया गया ...(व्‍यवधान)  जिनको लगाया गया आज तक कोई स्‍कूल में जाकर ज्‍वाइन नहीं किया है।

श्री अध्‍यक्ष: श्री कन्‍हैयालाल पाटीदार। ...(व्‍यवधान) 

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): स्‍कूलें खाली पड़ी हैं फिर फायदा क्‍या हुआ ...(व्‍यवधान) आपको सारा मालूम है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो वैकल्पिक व्‍यवस्‍था का काम है, समानीकरण का काम है वह कलैक्‍टर को सौंप दिया, आप राजनीतिक हस्‍तक्षेप खतम करके जिला कलैक्‍टरों को सौंप दो सब व्‍यवस्‍था ठीक हो जाएगी।

श्री अध्‍यक्ष: जिला परिषद को ?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): जिला कलैक्‍टर को।

श्री अध्‍यक्ष: हां, जिला कलैक्‍टर को।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): जो आपने अध्‍यापक लगाए, ज्‍वाइन नहीं करे जाकर ...(व्‍यवधान) सारे के सारे कैन्सिल कर दिए, इनकी ड्यूटी बनती है वहां इनकी ड्यूटी नहीं है क्‍या।

श्री अध्‍यक्ष: श्री कन्‍हैयालाल पाटीदार।

पिड़ावा (झालावाड़) में रायपुर चंवली सड़क का खस्‍ता हाल

श्री कन्‍हैया लाल पाटीदार (पिड़ावा): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र पिड़ावा(झालावाड़) में रायपुर चवली रोड दो साल पूर्व बी ओटी के अन्‍तर्गत निर्मित हुई थी इस रोड का काफी घटिया स्‍तर का काम हुआ जिसकी मैंने पूर्व में भी विभागीय अधिकारियों से इस रोड के घटिया निर्माण की शिकायत की उसके बावजूद भी ठेकेदार को टोलटैक्‍स प्रारम्‍भ करने की इजाजत दी गई। रोड निर्माण के एक वर्ष बाद ही जगह जगह बड़े बड़े गड्ढे हो गये । शिकायत करने के बाद गड्ढे भरे गये। इस वर्ष फिर उस रोड पर गड्ढे हो गये। उक्‍त रोड कोटा इन्‍दौर स्‍टेट हाईवे है जिस पर वाहनों का भारी दवाब है रोड पर गड्ढे होने से वाहन क्षतिग्रस्‍त होते रहते हैं और समय की बर्बादी होती है, दुर्घटना होने का भी पूरा अंदेशा बना रहता है । ऐसी स्थिति में भी ठेकेदार धडल्‍ले से टोलटैक्‍स वसूल रहा है।

श्री अध्‍यक्ष: यह बी ओ टी वालों की जिम्‍मेदारी है कुछ नहीं करोगे तो कैसे काम चलेगा, टोल टैक्‍स लेते हैं।

श्री कन्‍हैया लाल पाटीदार (पिड़ावा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से सार्वजनिक निर्माण विभाग के मंत्री महोदय सेअनुरोध है कि उक्‍त रोड का पुन: डामरीकरण कराया जाए और जब तक रोड कम्‍पलीट नहीं हो टोल टैक्‍स की वसूली रुकवाई जाए। धन्‍यवाद।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, 295 के माध्‍यम से माननीय सदस्‍य ने ....

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, सुनना चाहिए ताकि आप नोट करके कम से कम यह तो कर सको जो टोल टैक्‍स ले रहे हैं उन सड़कों को तो ठीक करो।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): निश्चित रूप से अध्‍यक्ष महोदय, न केवल उसको ठीक करवायेंगे बल्कि आपको रिपोर्ट भी दूंगा कि सड़क आज बिल्‍कुल ठीक है।

श्री अध्‍यक्ष: थैंक्‍यू। श्री रणधीर सिंह भिण्‍डर (अनुपस्थित) श्री धमेन्‍द्र कुमार मोची।

टिब्‍बी विधान सभा क्षेत्र में ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान

श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची (टिब्बी): अध्‍यक्ष महोदय, नियम 295 के अन्‍तर्गत विधान सभा क्षेत्र टिब्‍बी में दिनांक 22.9.06 को हुई ओलावृष्टि से किसानों की फसलों में हुए नुकसान के संबंध में निवेदन है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र टिब्‍बी जिला हनुमानगढ़ में हुई ओलावृष्टि से किसानों की फसलों में अस्‍सी प्रतिशत से अधिक खराबा(नुकसान) हुआ। अत: संबंधित कृषकों को ओलावृष्टि से हुए नुकसान से राहत दिलवाने की व्‍यवस्‍था की जाए।

अध्‍यक्ष महोदय, निम्‍न क्षेत्र में ओलावृष्टि से नुकसान का विवरण इस प्रकार है:

चक 1 बी आर डब्‍ल्‍यू, 2 बी आर डब्‍ल्‍यू, 3 बी आर डब्‍ल्‍यू, 1 नया पुराना 4 बी आर डब्‍ल्‍यू 641 आ डी (एल), 644 आर डी (एल), 650 आर डी (एल), 654 आर डी (एल) 1 जी जी आर ए (एल) जी जी आर(एल) ए प्‍लस बी, 1 जी जी आर, 1 टी एल डब्‍ल्‍यू, ए प्‍लस बी, 2 टी एल डब्‍ल्‍यू, 3 टी एल डब्‍ल्‍यू, 4 टी एल डब्‍ल्‍यू, 5 टी एल डब्‍ल्‍यू, 1 आर के 2 आर के, 2 जी जी आर, 3 जी जी आर, 1 के एच आर से 5 के एच आर, 1 एस बी एन से 4 एस बी एन एव मलड खेडा पंचायत के अन्‍तर्गत क्षेत्र में अस्‍सी प्रतिशत से ज्‍यादा फसलों में नुकसान अतिवृष्टि/ओलावृष्टि से हुआ है। कृपया संबंधित कृषकों को राज्‍य सरकार से राहत प्रदान करवाई जाए।

श्री अध्‍यक्ष: श्री धर्मपाल चौधरी, आप बातों में व्‍यस्‍त रहते हो, ध्‍यान नहीं रखते अपनी टर्न का।

मुण्‍डावर विधान सभा क्षेत्र के ग्राम बहरोड़ में पेड़ों की अवैध कटाई

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): अध्‍यक्ष महोदय, प्रक्रिया के नियम 295 के तहत मेरे विधान सभा क्षेत्र मुण्‍डावर ग्राम पंचायत बहरोड में पहाडी क्षेत्र है जहां पर बहुत बड़ा वन क्षेत्र है और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण्‍ं बहुत बड़े क्षेत्र में आबादी नहीं है। जिसके कारण वहां पर पेड़ों की अवैध कटाई की जा रही है आज पेड़ों के बिगड़ते पर्यावरण के कारण सरकार पेड़ लगाने हेतु पैसा खर्च कर रही है। स्‍कूलों में पेड़ लगाये जा रहे हैं गांवों में लोगों को पैड़ों को लगाने हेतु सरकार इसके प्रचार में पैसा खच्र कर रही है। अत: मैा आपके माध्‍यम से मंत्री जी का ध्‍यान इस अवैध कटाई की ओर दिलवा रहा हूं कि इस वन क्ष्‍ंेत्र को बचाने के लिए वहां पर वन चौकी स्‍थापित करने का रम करें। जिससे वन क्षेत्र को बचाया जा सके अगर इस वन क्ष्‍ंेत्र को बचाने हेतु कोई कार्यवाही नहीं की तो वहां के लोगों में इस वन क्षेत्र कटाई के प्रति बहुत बड़ा आक्रोश है कोई भी घटना वहां हो सकती है। अत: वहां पर वन कटाई को रोकने का इंतजाम करने का श्रम करें।

इन्दिरा गांधी नहर का गडरा रोड तक विस्‍तार

श्री अध्‍यक्ष: श्री जालम सिंह रावलोत।

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): अध्‍यक्ष महोदय, नियम 295 के अनतर्गत इन्दिरा गांधी नहर के अन्तिम चरण का गडरा रोड तक निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने के सम्‍बन्‍ध में निवेदन है कि इन्दिरा गांधी नहर को बाड़मेर जिले की शिव तहसील के गडरा रोड तक ले जाने का सपना प्रारम्‍भ से ही रहा है।  तथा इस हेतु सभी स्‍तर पर हमेशा योजनाएं बनायी जाती रही हैं कि इन्दिरा गांधी नहर को हर हालत में गडरा रोड तक ले जाया ही जाएगा । इन्दिरा गांधी नहर को गडरा रोड तक ले जाना देश की सुरक्षा, पश्चिमी राजस्‍थान में पेयजल का स्‍थायी स्रोत, बढ़ते हुए रेगिस्‍तान को रोकने के लिए तथा बाड़मेर एवं जैसलमेर दोनों ही जिलों में अकाल के स्‍थायी समाधान के लिए अति आवश्‍यक है। ऐसी जानकारी मिली है कि वन विभाग के डेजर्ट नेशनल पार्क के कारण सरकार के लिए इन्दिरा गांधी नहर का निर्माण कार्य पिछले दो वर्षों से बन्‍द कर रखा है तथा आगे गडरा रोड तक होने वाले नहर के अन्तिम चरण के निर्माण कार्य को बन्‍द करने का निर्णय लिया गया है।  ऐसा निर्णय लिये जाने से इन्दिरा गांधी नहर का पानी बाड़मेर जिले में प्रवेश नहीं कर पाएगा तथा जैसलमेर जिले का बहुत बड़ा भाग नहरी पानी से वंचित रह जाएगा । इस निर्णय से करीब तीन लाख हैक्‍टेयर से अधिक भूमि नहरी सिंचाई से वंचित रह जाएगी जिससे हजारों भूमिहीन काश्‍तकार परिवार भूमि आबंटन की आस लगाये बैठे थे उनको मुरब्‍बे नहीं मिल पाएंगे तथा मुख्‍य नहर की सिंचाई प्रभावित होगी।  जो निर्माण किया गया है उस की पानी की क्षमता अधिक है । कटौती से आधा पानी ही प्रभावित होगा जिससे सागरमल गोपा शाखा तथा अन्‍य शाखाओं के काश्‍तकारों को पूर्ण रूप से सिंचाई उपलब्‍ध नहीं होगी ।

आपके माध्‍यम से राज्‍य सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि बाड़मेर एवं जैसलमेर की गरीब जनता की हितार्थ एवं राष्‍ट्रीय सुरक्षा के लिए इन्दिरा गांधी नहर के अन्तिम चरण के निर्माण कार्य को अतिशीघ्र चालू कर नहर का पानी गडरा रोड तक पहुंचाया जाए।

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद । श्री बहादुर सिंह गोदारा।

 

vns/usc/13.10/1o/6.10.2006

 

नोहर के ग्राम मुंसरी में प्रशासन द्वारा हरिजनों के घरों में तोड़फोड़

श्री बहादुर सिंह गोदारा (नोहर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 295 के अन्‍तर्गत मैं सरकार का ध्‍यान मेरे क्षेत्र में हुए हरिजनों के घर जो बर्बाद हुए उनकी और दिलाना चाहता हूं। मेरे क्षेत्र में ग्राम मुन्‍सरी में हरिजनों के गांव के चिपते हुए एक जगह 1़5 घर बसे हुए थे, कच्‍ची बस्‍ती थी। एक-एक, दो-दो कोठे बने हुए थे उनको बिलकुल नेस्‍तनाबूद कर दिया और न उनको कोई टाइम दिया गया। इसी तरह ननाऊ एक ग्राम है जिसमें 51 घर....

श्री अध्‍यक्ष: आप पढ़ो ना, आप तो बोल रहे हो। आप इसको पढ़ो।

श्री बहादुर सिंह गोदारा (नोहर): मैं इसी को पढ़ रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं पढ़ रहे आप। आप बोल रहे हैं। 

श्री बहादुर सिंह गोदारा (नोहर):अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियमों के नियम 295 के अन्‍तर्गत निवेदन है कि ग्राम मुन्‍सरी में हरिजनों के 15 घर, ग्राम ननाऊ में 51 गरीब हरिजनों में घर, ग्राम किंकराली में भी सैकड़ों गरीब हरिजन व काश्‍तकारों के घर नोहर प्रशासन ने अतिक्रमण को हटाने के नाम पर भयंकर तोड़फोड़ कर दी। इन ग्रामों को मेरे द्वारा निरीक्षण करने 9पर देखा गया कि प्रशासन ने अतिक्रमण के नाम पर उपरोक्‍त गांवों में गरीब हरिजनों जो पीढ़ी दर पीढ़ी गांवों के चिपते बाहर बसे हुए थे तोड़फोड़ कर उनके आवासीय कोठे खतम कर दिये। बच्‍चे व महिलाएं रोते हुए पाये गये। वहां देखने से ऐसा लगता है जैसे भयंकर बमबारी हुई है। सामान खुले में पड़ा है। केवल टूटा फूटा मलबा नगर आ रहा है। गरीबों को नाजायज कब्‍जा तोड़ने के अभियान में सामान निकालने का मौका तक नहीं दिया गया। इनकी कोई प्रार्थना तक नहीं सुनी गयी।

मेरे क्षेत्र के सभी गांवों की जनता में बड़ा रोष है। एक सप्‍ताह में जांच, मुआवजे व पुनर्वास करने का सरकार क्‍या इरादा रखती है ? हाँ तो कब तक ? नहीं तो क्‍यों नहीं ?

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल।

देसूरी के पुराने तहसील भवन का राजकीय विद्यालय को आवंटन

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): अध्‍यक्ष महोदय, अनुरोध है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र देसूरी में पुराना तहसील भवन जर्जर हो जाने के कारण तहसील कार्यालय को नवनिर्मित भवन में स्‍थानान्‍तरित कर दिया गया है जिसके कारण उक्‍त भवन पिछले चार वर्षों से खाली पड़ा हुआ है। जिला प्रशासन द्वारा नजूल सम्‍पत्ति घोषित करके नीलामी की कार्यवाही करने जा रहा है। वर्तमान में उक्‍त तहसील भवन के पास में राजपूत कन्‍या छात्रावास आया हुआ है तथा ही राजकीय उच्‍च प्राथमिक विद्यालय स्थित है। विद्यालय को पूर्व में प्राथमिक विद्यालय से क्रमोन्‍नत करके उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय किया गया है जिसका भवन छात्रा संख्‍या के हिसाब से पर्याप्‍त नहीं है न ही इस भवन का विस्‍तार किया जा सकता है। विद्यालय में कक्षों के विस्‍तार करने के उद्देश्‍य से यदि तहसील भवन उक्‍त नजूल सम्‍पत्ति नीलामी प्रक्रिया से बाहर करते हुए विद्यालय भवन के विस्‍तार हेतु आबंटित किया जाना आवश्‍यक है। यदि राज्‍य सरकार द्वारा उक्‍त सम्‍पत्ति को विद्यालय को आबंटित कर दिया जाता है तो दानदाताओं द्वारा भवन का निर्माण करने हेतु प्रोत्‍साहित किया जा सकता है।

अत: देसूरी के पुराने तहसील भवन को राजकीय उच्‍च प्राथमिक विद्यालय को आबंटित करवाने हेतु निर्देश प्रदान करवाने का श्रम करें।

श्री अध्‍यक्ष: श्री हरज्ञान सिंह।

शहीद सैनिकों के आश्रितों को उनकी योग्‍यतानुसार नियुक्ति

श्री हरज्ञान सिंह गुर्जर (महुवा): अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीया मुख्‍यमंत्री महोदया को आपके माध्‍यम से धन्‍यवाद देना चाहता हूं जिन्‍होंने पूर्व सैनिकों, सेवारत सैनिकों एवं शहीद सैनिकों के कल्‍याणार्थ अनेक योजनाओं को लागू किया जिससे उनको अच्‍छी राहत मिली है। जैसे गेलेन्‍ट्री अवार्ड को दस गुना बढ़ाया गया, द्वितीय विश्‍व युद्ध के सैनिकों को एवं विधवाओं को 300 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये करना। लेकिन मुझे जहां तक पता चला है कि शहीद हुए सैनिकों के आश्रितों को केवल कारगिल युद्ध के बाद जो शहीद हुए हैं, उनके आश्रितों को नियोजन का प्रावधान किया है इससे पहले हिन्‍द पाक युद्ध 1965, 1971 के सैनिकों को तथा 1995 के पहले शहीद सैनिकों के आश्रितों को रोजगार का प्रावधान नहीं किया गया है।

अत: मेरा विशेष अनुरोध है कि जो स्‍वतन्‍त्रता के बाद विभिन्‍न लड़ाईयों एवं आतंकवादी गतिविधियों में जो सैनिक शहीद हुए हैं उनके आश्रितों को भी योग्‍यतानुसार नियुक्ति दिये जाने का प्रावधान किया जाना चाहिये जिससे कि शहीद के परिवार अपना जीवन-यापन सही दशा में कर सकें।

श्री अध्‍यक्ष: श्री हरीसिंह रावत।

भीम के राजकीय चिकित्‍सालयों में चिकित्‍सा अधिकारियों के रिक्‍त पद

श्री हरीसिंह रावत (भीम): अध्‍यक्ष महोदय, प्रक्रिया के नियम 295 के माध्‍यम से मेरे क्षेत्र में सभी पी.एच.सी. एवं सी.एच.सी. में 2 साल से चल रहे चिकित्‍सा अधिकारियों को अविलम्‍ब भरने के सन्‍दर्भ में।

महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र भीम के अन्‍तर्गत 110 किमी. का हिस्सा एन. एच.-8 पर से गुजरता है एवं 110 किमी. के एरिये में (1) छापली (2) दिबेर (3) बरार (4) देवगढ़ (5) भीम पी.एच.सी. एवं सी.एच.सी. स्थित हैं जहां पर आये दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं एवं चिकित्‍सकों की कमी की वजह से दुर्घटना में घायल हुए व्‍यक्तियों को पूर्ण्‍ं रूप से चिकित्‍सक एवं अन्‍य सुविधाओं के अभाव में रोज दो, चार व्‍यक्ति असमय ही मौत के मुंह में पहुंच जाते हैं। अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं निवेदन करना चाहता हूं कि पूर्व में भी चिकित्‍सा मंत्रीजी का ध्‍यान आकर्षित कर चुका हूं बावजूद अभी तक दो वर्ष से चल रहे रिक्‍त पदों को अभी तक नही भरा जा सकता है।

अत: नीचे लिखे अनुसार सभी प्रा.स्‍वा. केन्‍द्रों एवं सामुदायिक स्‍वा.केन्‍द्रों पर चल रहे रिक्‍त पदों को अविलम्‍ब भरने का आदेश करावें:-

(1) सामु; स्‍वा.केन्‍द्र भीम में 7 में से 6 जूनियर स्‍पेशलिस्‍टों से भरा जावे।

(2) प्रा.स्‍वा.केन्‍द्र दिबेर 1 पद है एवं वह भी खाली है।

(3) प्रा.स्‍वा.केन्‍द्र छापली 1 पद 1 खाली

(4) प्रा.स्‍वा.केन्‍द्र बरार 2 पद 1 खाली

(5) प्रा.स्‍वा.केन्‍द्र कुआथल 1 पद 1 खाली

(6) प्रा.स्‍वा.केन्‍द्र लसानी 1 पद 1 खाली

(7) प्रा.स्‍वा.केन्‍द्र ताल 1 पद 1 खाली

(8) प्रा.स्‍वा.केन्‍द्र बार 1 पद 1 खाली

सभी स्‍वा. केन्‍द्रों पर ए.एन.एम. एवं नर्सेज के रिक्‍त पदों को अविलम्‍ब भरने का निर्देश प्रदान करावें। माननीय अध्‍यक्ष महोदय मेरा क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से भी पहाड़ी क्षेत्र है। जहां पर यातायात साधन भी समय पर उपलब्‍ध नहीं हो पाता है जिसकी वजह से प्रसव के दौरान असमय ही कई महिलाओं की मृत्‍यु हो जाती है जिससे मेरे विधान सभा क्षेत्र की जनता में भारी आक्रोश व्‍याप्‍त हो रहा है। इन सभी रिक्‍त पदों को भराने का आपके माध्‍यम से चिकित्‍सा मंत्रीजी से अविलम्‍ब कार्यवाही चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: पर्ची। श्री अमराराम धोद।

पर्ची के माध्‍यम से उठाये गये मुद्दे

पुलिस द्वारा आंदोलनकारियों का दमन

श्री अमराराम (धोद): मैं आपके माध्‍यम से सदन और सरकार ध्‍यान इस और दिलाना चाहता हूं कि सरकार की जो पुलिस व्‍यवस्‍था है तय रूप से कानून, लॉ एण्‍ड आर्डर को मेन्‍टेन करना और अपराधियों को कानून के हवाले करना प्रमुख जो काम है और आपने गृह मंत्रीजी ने हर थाने में...

श्री अध्‍यक्ष: इस पर्टिकूलर मामले में तो बात हो चुकी है। अब आप इस पर्टिकूलर  मामले में जो आपने दिया है, बात मंत्रीजी से हो चुकी है।

श्री अमराराम (धोद): अब दो-तीन हैं उनमें हो गयी तो।

श्री अध्‍यक्ष: हां बोल दो। बोल दो। कोई बात नहीं। आप बोलो।

श्री अमराराम (धोद): मंत्रीजी ने सब थानों पर लिखा रखा है कि अपराधियों में भय और आम जनता में विश्‍वास।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या लिखा रखा है ? 

श्री अमराराम (धोद): अपराधियों में भय और आम जनता में विश्‍वास, कोटेशन है। लेकिन मैं समझता हूं पुलिस उलटा कर रही है। अपराधियों में तो कोई भय नहीं है लेकिन आम जनता को भयभीत करने के लिये आमजन, जनता कोई भी मांग लेकर आती है उनमें जिस तरह का भय है, न केवल आम जनता में बल्कि मीडिया में भी भय पैदा करने का काम राजस्‍थान की पुलिस कर रही है।

20 तारीख को राजस्‍थान विश्‍वविद्यालय में बीकानेर और दूसरे विश्‍वविद्यालयों से कई गुना फीस वृद्धि की और एक महीने तक लगातार विद्यार्थियों का आन्‍दोलन हुआ। मैं समझता हूं एडजोइनिंग झुंझुनूं और सीकर के पड़ौस के जिले के चूरू है वहां के विद्यार्थी को 370 रुपया देना पड़े और राजस्‍थान विश्‍वविद्यालय के विद्यार्थी को 790 रुपये परीक्षा फीस देनी पड़े तो नेचुरली उसकी हार्ट बर्निंग और उसके लिये उन्‍होंने अनशन किये, प्रदर्शन किये, धरने किये और आखिर में मजबूर होकर उन्‍होंने रास्‍ता रोकने का ऐलान किया। सीकर में पुलिस ने निश्चित रूप से कानून व्‍यवस्‍था करायी इसमें कोई ऐतराज नहीं है लेकिन जिस तरह से बढ़ाढ़र में, हरसावा में आठ जगह उन्‍होंने निर्ममता से लाठीचार्ज किया, अश्रु गैस छोड़ी और हवाई फायर किया। रास्‍ता खुलाया जहां तक भी मैं समझता हूं कि उनकी ड्यूटी में आता है। इसके बाद गांव में घर-घर में जाकर औरतों के साथ, बुजुर्गों के साथ, छह-छह साल के बच्‍चों की जिस तरह से निर्मम पिटाई की है मैं समझता कोई उदाहरण नहीं मिलेगा आपको। न केवल यहां तक आमजन की, घर में बैठे हुए लोगों की पिटाई की है बल्कि हरसावा में तो वहां के एस डी ओ ने, वहां के पंचायत के सरपंच...

श्री अध्‍यक्ष: आपकी पर्ची तो झुंझुनूं की है और आप हरसावा की बात कर रहे हो।

श्री अमराराम (धोद): झुंझुनूं की भी है, सीकर की भी है।

श्री अध्‍यक्ष: पर्ची तो केवल एक झुंझुनूं की है। पर्ची तो आपकी केवल 20, 21 सितम्‍बर, 2006 को पुलिस द्वारा आन्‍दोलनकारियों पर लाठीचार्ज व अश्रु गैस छोड़ने तथा मीडियाकर्मियों के साथ मारपीट तथा कैमरे छीनकर फोटोज नष्‍ट करने से उत्‍पन्‍न स्थिति पर। तो यह तो कैमरे तो वहीं थे ना झुंझुनूं में।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, 20 तारीख को सीकर में आठ जगह किया है। अब एक-एक का नाम लिखूंगा तो बहुत लम्‍बा हो जायेगा।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है।

श्री अमराराम (धोद): इसलिये मैं तो गृह मंत्रीजी का ध्‍यान इस और दिलाना चाहता हूं कि....

 

श्‍याम/चौहान     6.10.2006  13.20 (1)  1p  

 

पुलिस किस तरह से निर्मम और पशुवत हो गयी है। हरसरवा में एस.डी.ओ. और डिप्‍टी एस.पी. की उपस्थिति में वहां के सरपंच को इसलिए बुलवाया गया कि रास्‍ता खुलवाया जाये और टेंशन इतनी बढ़ रही थी कि पुलिस और ग्रामीण जनों के बीच टेंशन थी। सरपंच को बुलवाया गया और सरपंच को एस.डी.एम. की मौजूदगी में पीटा गया और एस.डी.एम. ने रोकने की कोशिश की तो एस.डी.एम. को भी पीटा जाये। मैं समझता हूं कि इससे ज्‍यादा पशुवत कार्यवाही नहीं हो सकती है और यही नहीं जब इस घटना का पता लगा, गृह मंत्री जी को भी इंटीमेट किया गया, वहां हमारी पार्टी के जनरल सेक्रेटरी वासुदेव शर्मा 7-8 लोगों को लेकर के घटना स्‍थल पर गये। आपके डिप्‍टी एस.पी. ने खुद ने उनके साथ जिस तरह से मारपीट की है। रास्‍ता खुला हुआ था, कोई वायलेंस नहीं था, पाँच लोगों को लेकर कोई भी घटना हुई है उसके अंदर एक राजनीतिक पार्टी का कोई भी नेता जाये और उस तरह से उसके साथ मारपीट की जाये, बदसलूकी की जाये और उसको गिरफ्तार करके अपमानित किया जाये तो राजनीति में फिर कोई किसी तरह से नहीं करेगा और ना केवल यही 21 तारीख को जिस तरह से माननीय अध्‍यक्ष महोदया कह रही हैं झुंझुनूं में हो गया था। पुलिस अपने कुकृत्‍यों को छिपाने

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

प्रेस मीटिंग में भास्‍कर के फोटोग्राफर से कैमरे को छीनकर उन फोटुओं को नष्‍ट करने का काम करे, इससे ज्‍यादा और क्‍या होगा कि कोई भी ऐसा कुकृत्‍य उसको प्रेस आम जनता तक रखने का काम करे और उसके कैमरे को छीनकर, उसके साथ मारपीट करके आज पूरे राजस्‍थान में पुलिस जहां भी जन आंदोलन में जाती है प्रेस को एक ही धमकी देती है कि बीकानेर वाली आप याद रखें वह कर देंगे। बीकानेर में जिस तरह से ई.टी.वी. के साथ हुआ, मैं समझता हूं प्रेस वह है जो किसी की भी, कोई भी कानून में विरोध करके उसको आम जनता के पास, सरकार के पास पहुंचाने का काम करती है और राजस्‍थान की पुलिस अगर यह धमकी दे कि बीकानेर वाली कर देंगे तो यह पुलिस का कर्तव्‍य नहीं है ना केवल वह यह कर रही है बल्कि 6 जून को सलूंडिया में, नोखा में मुख्‍यमंत्री की सभा थी, मैं समझता हूं कि राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री सभी की मुख्‍यमंत्री है, राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री है और उसमें जिला परिषद का मैम्‍बर गिरधारी मैया को उठाकर के जिस तरह से नोखा में ले जाकर दोनों पैर तोड़े गये अगर सरकार घोषणा कर दे कि मुख्‍यमंत्री राजस्‍थान में केवल भारतीय जनता पार्टी की है, राजस्‍थान की 6 करोड़ जनता की नहीं है तो बात समझ में आ जायेगी। लेकिन कोई भी जन-प्रतिनिधि जनता की मांग को रखने के लिए, बात सुनने के लिए अगर मुख्‍यमंत्री की सभा में जाता है और उसको पकड़कर नोखा थाने में ले जाकर जिस तरह से दोनों पैर तोड़े जायें यह जो कृत्‍य है राजस्‍थान की पुलिस का, मैं गृह मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि ऐसे पुलिस के अधिकारियों पर कार्यवाही की जानी चाहिए। ऐसे लोगों को अगर प्रोत्‍साहित करेंगे तो आने वाले समय में राजस्‍थान में जंगलराज की स्थिति होगी।

उपाध्‍यक्ष महोदय, इसमें मेरा आपसे इतना ही निवेदन है कि ऐसे जो कृत्‍य करते हैं, ऐसे जो काम करते हैं ऐसे अधिकारियों के खिलाफ निश्चित रूप से कार्यवाही की जानी चाहिए जिससे कानून-व्‍यवस्‍था भी बनी रहे, अपराधियों में भय हो, आम जनता में भय नहीं हो। आम जनता अपनी मांगों को लेकर के कहीं भी जाती है उसको केयरफुली हैंडिल किया जाये। ऐसे नेताओं के साथ, जन-प्रतिनिधियों के साथ इस तरह से अमानवीय व्‍यवहार किया जायेगा तो मैं समझता हूं कि ना वह सरकार के लिए ना राजस्‍थान के लिए ठीक है, इसलिए उन पर कार्यवाही की जाये।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल।

गंगापुर में मलेरिया का प्रकोप

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, अंग्रेजी में एक पुरानी कहावत है Precaution is better than cure.  यानि इलाज से बेहतर सावधानी बरतना है। मुझे दु:ख के साथ में निवेदन करना पड़ रहा है कि सरकार के मंत्रिगण और नौकरशाह इस मामूली सी बात को नहीं समझ पा रहे हैं। जब सिर से ऊपर पानी चढ़ जाता है और सब व्‍यवस्‍था बिगड़ जाती है तब इस सरकार के नौकरशाह जागृत होते हैं। वह कार्यवाही करते हैं।   जब तक वह कार्यवाही करते हैं तब तक सब कुछ बिगड़ जाता है।

उपाध्‍यक्ष महोदय, इस सिलसिले में मैं आपको एक घटना उदाहरण स्‍वरूप देना चाहता हूं, गंगापुर में जो कि मेरा विधान सभा क्षेत्र है, गंगापुर जिला सवाई माधोपुर वहां पर मलेरिया का आज से करीब 6 महिने पहले भारी प्रकोप हुआ। मच्‍छर बड़ी तादाद में हुए, आपको बताऊं कि मलेरिया से बहुत से लोग ग्रसित हुए और एक परिवार के पति-पत्नि के तीन बच्‍चे एक ही दिन सवेरे, दोपहर और शाम मलेरिया के कारण मृत्‍यु को प्राप्‍त हुए। पूरे गांव में, पूरे शहर में तहलका मच गया। सब आदमी दु:खी हुए और यहां तक कि लोगों ने यह सोचा कि पूरा रास्‍ता जाम करना चाहिए।, बंद करना चाहिए। मैंने उन लोगों को समझाया और तब यह स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के आदमी कुछ हरकत में आये। उन्‍होंने अल्‍पसंख्‍यक वर्ग का जो परिवार था, जहां पर वह लोग रहते थे, वहां जाकर के डी.डी.टी. का छिड़काव किया। तब मलेरिया कुछ काबू आया और एक तरह से मलेरिया उस समय समाप्‍त हुआ।

उपाध्‍यक्ष महोदय, अब अगस्‍त में फिर मलेरिया के मच्‍छरों ने प्रकोप पैदा किया। बड़ी भारी तादाद में मलेरिया से आदमी ग्रसित हुए। हमारे नगरपालिका के अध्‍यक्ष ने, चेयरमैन ने, हमारे नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारी ने सीएमएचओ सवाई माधोपुर को एक लैटर लिखा। 4 अगस्‍त को लैटर लिखा कि गगापुर सिटी में भयंकर रूप से मच्‍छर पैदा हो रहे हैं। आप कृपया कर समय रहते हुए मलेरिया को काबू में करने के लिए, डेंगू को काबू करने के लिए डी.डी.टी. का छिड़काव करा देंवे और अन्‍य मच्‍छर मारने की दवाइयों का छिड़काव कर दें। वहां से जवाब आया 14 अगस्‍त को, जवाब में यह आया कि गंगापुर सिटी हाई रिस्‍क एरिया नहीं है इसलिए डी.डी.टी. का छिड़काव कराना संभव नहीं है।

उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारे स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी यहां बैठे हुए हैं कृपया ध्‍यान देवें, यह लिखित में आया, इसकी कापी मेरे पास में है, आप यदि कह दो तो इसको पढ़कर के सुना दूं, इसमें मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी ने लिखा है कि गंगापुर सिटी नार्म्‍स के अनुसार हाई रिस्‍क एरिये में नहीं आता है अत: डी.डी.टी. स्‍प्रे किया जाना संभव नहीं है। यह लैटर है 14.08.2006 का, हम जन-प्रतिनिधि सक्रिय थे, गंगापुर में नगर पालिका कांग्रेस की है। चेयरमैन सक्रिय थे, ई.ओ. ने लैटर लिखा, किसी ने कोई कार्यवाही नहीं की। गर्ज यह कि दो महिने के अंदर-अंदर भयंकर रूप से मलेरिया फैला, दूसरी जो बीमारियां थी डेंगू और चिकनगुनिया इसकी वजह से सैकड़ों आदमी बीमार पड़े। हमारा जो सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र है वह पूरा मरीजों से भर गया, तिल धरने को जगह नहीं रही। फर्श पर जगह नहीं थी, बरामदों में जगह नहीं थी, लोग-बाग़ जयपुर भागे, एस.एम.एस. में भर्ती हुए और दूसरे प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती हुए, मैंने यसटरडे, कल भी सीएमएचओ से बात की, सीएमएचओ मिला नहीं, डिप्‍टी सीएमएचओ, गंगापुर जो कि गंगापुर में ही रहता है, उसको मैंने कहा कि आपने अन्‍याय कर दिया, लोग-बाग़ हजारों की तादाद में बीमार पड़े हुए हैं। पहले कुछ तो सक्रिय हुए, अब डी.डी.टी. का छिड़काव तो करा दो ताकि और मरीज नहीं मरें। उन्‍होंने मुझे जवाब दिया कि यह संभव नहीं है क्‍योंकि यह नार्म्‍स में नहीं आता है। गंगापुर हमारे हाई रिस्‍क एरिये में नहीं है। मैंने कहा कि आप कमाल करते हो। मैं इस बात को विधान सभा में रखूंगा और स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी से भी कहूंगा, उन्‍होंने कहा खूब कहो न, कौन परवाह करता है। आप कृपया नोट करें स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी, आपके डिपटी सीएमएचओ गंगापुर ने इस बात को कहा है और मैं इस सदन में कह रहा हूं,  मुझे दु:ख तो इस बात का है कि नौकरशाह इतने लापरवाह हो गये हैं उनको न तो स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री का डर है, न अख़बार का डर है और आज की तारीख में जो गंगापुर त्राहि-त्राहि कर रहा है, मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि सरकार को सक्रिय करें, मच्‍छर जो वहां भयंकर रूप से इक्‍ट्ठा हो गये हैं, पैदा हो गये हैं उनको मरवाने के लिए डी.डी.टी. का छिड़काव करवायें।

 

जयगोविन्‍द/6106/1330/1q

 

तो जनता को राहत पहुंचाएं। इस विषय में स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी कुछ कहनाचाहते हैं तो मैं निवेदन करना चाहता हूं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी से मेरा निवेदन है कि मेरे यहां भी कल की तारीख में हिण्‍डौली में तीन और चार आद‍मी डेंगू से मर गए हैं, अभी आज पूरे अख़बार बूंदी के इस खबर से भरे हुए हैं। आप वहां की व्‍यवस्‍था सुधारने के लिए कुछ कर सकें तो करें।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): आपके यहां नगरपालिका का बोर्ड किसका है, इनके तो कांग्रेस का, बताया न एक्टिव है।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): मंत्रीजी जो ट्राइबल एरिया है उसमें तो कम से कम डी डीटी का छिड़काव कराएं।

श्री सुरेश मीणा (करौली): करौली जिले में सबसे ज्‍यादा लोग डेंगू से मारे गए हैं।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): जैसे बांसवाड़ा और डूंगरपुर का जो ट्राइबल बेल्‍ट है वहां डी डी टी छिड़कवाएं, गरीब इलाका है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मरने से तो आप किसी भी जाति का हो सबको बचाओ चाहे ट्राइबल का हो चाहे नोन ट्राइबल का हो।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी को सभी का ध्‍यान है, आप सुनिए वे क्‍या कह रहे हैं।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मंत्रीजी, जो लोकल अख़बार आते हैं, जैसे राजस्‍थान पत्रिका का कोटा या बूंदी एडीशन उन सबको आप वेव साइट पर देख लो, आपको खुद को पता चल जाएगा कि रियलिटीज क्‍या है। वास्‍तविकता यह है कि इतनी भयंकर बीमारी की स्थिति पैदा हो रही है और उसको आप और आपका विभाग संभाल नहीं पा रहा है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं रोजाना राजस्‍थान के एक एक जिले की रिपोर्ट लेता है, उसको देखता हूं, अखबारों की रिपोर्ट पर विश्‍वास नहीं करता हूं। अब मैं आपको जो निवेदन कर रहा हूं उसको आप सुनो।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): फिर आपकी बात की पालना क्‍यों नहीं हो रही है?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप रिपोर्ट लेते हो बुहुत अच्‍छी बात है लेकिन अखबारों को भी पढ़ो तो घालमेल का पता चल जाएगा कि ऑफिसर्स क्‍या कर रहे हैं, आप अखबारों को नहींदेख रहे हैं यह आपने खुद ने कहा है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी, बजट ही नहीं है दवाई देंगे कहा से, दवाइयां ही नहीं है, हमको पता है कि आप क्‍या जवाब देंगे।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी क्‍या गंगापुर में बजट ही नहीं है, छिड़काव के लिए मना कर दिया, आप मेरी इस बात का जवाब दे रहे हैं क्‍या, यह मेरे पास डाक्‍यूमेण्‍ट है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैं आपके डाक्‍यूमेण्‍ट का ही जवाब दे रहा हूं, आप अगर सुन सकते हैं तो। मैं आपकी जानकारी के लिए ही बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। माननीय सदस्‍य जो गंगापुर से आए हैं आपके नगरपालिका में बोर्ड कांग्रेस का है, बहुत एक्टिव है, वहां चिकित्‍सा विभाग के कर्मचारी जो गे हुए हैं वह बी जे पी के हैं इसलिए इनएक्टिव हैं, एक तो मुझे आपकी बातों से यह लगा। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि नगरपालिका के चेयरमैन भी इस जिम्‍मेदारी से अपने आप को अलग नहीं कर सकते, यह केवल चिकित्‍सा विभाग की जिम्‍मेदारी नहीं है, चिकित्‍सा विभाग के साथ-साथ नगरपालिका और नगर परिषद की भी जिम्‍मेदारी है कि शहरी क्षेत्रों के अन्‍दर इसमें मॉस्किटो कण्‍ट्रोल के लिए, वेक्‍टर कण्‍ट्रोल के लिए एवं लार्वा कण्‍ट्रोल के लिए कोई मेजर्स करें। डी डी टी के लिए आपने जो बात कही, वह आपको निवेदन करना चाहता हूं कि उन्‍होंने आपको गलत नहीं कहा। यह हमारा निर्णय नहीं है, केन्‍द्र सरकार का निर्णय है कि डी डी टी का स्‍प्रे उन जगहों पर किया जाए जहां एनुअल पेरासाइट इण्‍डेक्‍स पाँच या पाँच से ऊपर हो और आपके गंगापुर में ए पी आई पाँच नहीं है। इस हिसाब से डी डी डी की सप्‍लाई हमें केन्‍द्र सरकार से होती है कि कितने जोन आपके पास है जहां पाँच से ज्‍यादा ए पी आई इण्‍डेक्‍स है। चूंकि इस बार हमारे बारह जिले बाढ़ से प्रभावित हुए और मास्किटो डेंसिटी पूरे राजस्‍थान  में, केवल राजस्‍थान ही नहीं, दिल्‍ली, हरियाणा और उत्‍तर प्रदेश वहां की डेंसिटी  हमारे यहां से भी बहुत ज्‍यादा है। हमने अपने प्रयासों में कोई कमी नहीं रखी है। आपकेयहां भी जब फीवर के केस, मैं आपसे निवेदन करूं, हमने स्‍प्रे भी करवाया है नोर्म्‍स के बाहर जाकर, क्‍योंकि डिप्‍टी सी एम एच ओ अपने स्‍तर पर यह निर्णय नहीं ले सकते थे, उन्‍होंने आपको मना किया, अगर उनका व्‍यवहार आपके प्रति या किसी जनप्रतिनिधि के प्रति गलत है तो आप मुझे बता देना, निश्चित रूप से उनके खिलाफ एक्‍शन करेंगे। मैं आपसे यह निवेदन करनाचाहता हूं कि केवल गंगापुर में टोटल स्‍लाइड कलेक्‍शन हुआ फीवर केसेज का वह 38440 हुआ और हमारे स्‍टाफ की टीमों ने कितना अच्‍दा काम किया इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि हमारे हॉस्पिटल्‍स में कलेक्‍शन हुआ है वह 15760 है और हमारी टीमें घर-घर घूमी है शहर में और उन्‍होंने जो कलेक्‍शन किया वह 199298है । ऐसा नहीं है, गंगापुर के एक एक घर में हमारी टीमें गई है और सर्वे किया है फीवर का, उनके ब्‍लड स्‍लाइड का कलेक्‍शन किया है, जांच करवाई जिसमें पोजीटिव केस निकले उनको मेडिकल ट्रीटमेण्‍ट दिया है। इसमें जो टोटल कलेक्‍शन हुआ है उसमें 190 प्‍लाजमोडियम वायवेक्‍स पोजीटिव थे और 10 पी एफ के केस थे जो हमारे डी डी टी या पारेथ्रम स्‍प्रे के नोर्म्‍स हैं, अगर किसी भी इलाके में प्‍लाजमोडियम फेल्‍सीपेरम का केस पोजीटिव निकलता है तो उसके आसपास के पचास घरों में स्‍प्रे करवाने के निर्देश केन्‍द्र सरकार के हैं और जिस इलाके में ए पी आई पाँच या उससे ज्‍यादा है...।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): स्‍प्रे केन्‍द्र सरकार करवाएगी क्‍या?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): केन्‍द्र सरकार नहीं करवाएगी श्रीमान् वह तो डी डी टी ही देगी। ...(व्‍यवधान)... आप मेरी बात सुनिए।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): उन लापरवाह लोगों को आप सेव कर रहे हैं  जो डी डी टी का स्‍प्रे नहीं करना चाहते और जो गैर जिम्‍मेदार हैं। ...(व्‍यवधान)...

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैंने आपको नोर्म्‍स बताए हैं जो आपको मालूम नहीं है।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): नोर्म्‍स की बात अलग है लोग बाग़ अगर मर रहे हैं तो नोर्म्‍स को चेंज करिए, सैंकड़ों आदमी बीमार पड़े हुए हैं और मच्‍छरों के कारण पड़े हुए हैं तो डी डी टी का स्‍प्रे नहीं करवाएंगे क्‍या?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): सारा डी डी टी गवर्नमेण्‍ट ऑफ इण्डिया से आता है।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): आप क्‍या नोर्म्‍स की बात करते हैं, आपकी ड्यूटी है अगर कोई आदमी बीमार है, आप खुद जाकर देखें, मैं आपकी निगाह में डाल रहा हूं, आप उनको सेव कर रहे हैं। ...(व्‍यवधान)...

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): एक एक घर का सर्वे किया है, उसकी रिपोर्ट मेरे पास है।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): मैं कह रहा हूं कि डी डी टी स्‍प्रे के लिए मना कर दिया उनहोंने जबकि वह जान रहे हैं कि सैंकड़ों आदमी बीमार हैं और मच्‍छर बहुतायत में है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैंने आपको बताया और फिर एक निवेदन सुन लीजिए, यह आपकी गलतफहमी दूर कर लेना कि जब बुखार फैल रहा है तो डी डी टी स्‍प्रे करने से बुखार कम हो जाएगा।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): यह कोई बात नहीं है। मच्‍छर कैसे मारेंगे, यह बता दीजिए।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय सदस्‍य आप मेरी बात सुनिए। आपको अगर ध्‍यान होगा पहले डी डी टी का टोटल कवरेज होता था पहले डी डी डी टी का स्‍प्रे करते थे तो मच्‍छर उसके रेजीस्‍टेंस हो गए तो वहां बीएसीक स्‍प्रे होता था। गवर्नमेण्‍ट ऑफ इण्डिया ने मलेरिया उन्‍मूलन कार्यक्रम चलाया था, उसके नोर्म्‍स चेंज किए उसका मैंने आपको बताया कि पाँच और पाँच से ऊपर जो ए पी आई है  उस नोर्म्‍स के हिसाब से हमको डी डी टी सप्‍लाई होता है चूंकि इस बार ज्‍यादा फीवर हुई है इसलिए हमने उनसे अलग से सप्‍लाई मांगी है और कल एक बैठक केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी के यहां हुई थी वहां हमने अपनी पूरी डिमाण्‍ड रखी है कि हमारे राजस्‍थान भर में हमें क्‍या चाहिए, हम उनको बता कर आए हैं।

श्री रमेश खींची (कठूमर): सीधा प्रश्‍न है कि आप डी डी टी स्‍प्रे करवाएंगे कि नहीं, जिस तरह से माननीय सदस्‍य के साथ व्‍यवहार हुआ है उसके खिलाफ क्‍या कार्यवाही करेंगे।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): देखिए पुरानी बात तो आई गई, हमने मलेरिया फैलते हुए देखा है, डेंगू की बीमारी भी फैली है, इसलिए नियम कानूनों पर मत जाइए मंत्रीजी। ...(व्‍यवधान)...

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): भाषण का जवाब तो भाषण से दिया है।

श्री रमेश खींची (कठूमर): गंगापुर में क्‍या स्‍प्रे करवाएंगे और डिप्‍टी सी एम एच ओ ने जिस तरह से माननीयसदस्‍य के साथ व्‍यवहार किया उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही करना चाहेंगे यह बात बताइए।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैं उसी पर आ रहा हूं। स्‍प्रे करवा रहे हैं, मैंने कह दिया, आपने सुना नहीं उसमें गलती मेरी नहीं है। ...(व्‍यवधान)... यदि किसी की गलती है, किसी ने गलत व्‍यवहार किया है तो उसके खिलाफ एक्‍शन होगा, यह भी मैंने पहले ही कह दिया।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): मुझे तो आप सीधा सा जवाब दीजिए, दूसरा मैं यह चाहता हूं कि वहां पर डी डी टी स्‍प्रे करवाना चाहते हैं या नहीं।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैं तो पूरे राजस्‍थान में करवाने को तैयार हूं, हमें कहां दिक्‍कत है, हम तो करवाना चाहते हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): राजस्‍थान सरकार की जिम्‍मेदारी केवल मच्‍छर पैदा करने की है मारने की नहीं है, आपका कहा यही है कि मच्‍छर तो गंदगी से आप पैदा कराएंगे और दिल्‍ली आएगी उनको मारने के लिए, यह कोई बात हुई? जब आप पैदा करते हैं तो मारों भी उनको।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): राजस्‍थान की जनता जरूरत पड़ने पर सबको मार देगी। ...(व्‍यवधान)...

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): डी डी टी स्‍प्रे हमें दीजिए हम लोग छिड़कवा देंगे, इतना तो करिए। ...(व्‍यवधान)...

श्री सुरेश मीणा : करौली में सबसे ज्‍यादा डेंगू से लोग मर रहे हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मंत्रीजी, आपने इतना लम्‍बा चौड़ा भाषणदे दिया, एक लाइन की बात पूछ रहे हैं कि आप स्‍प्रे करवाएंगे कि नहीं, यह तो बताओ आप।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैंने बताया न। स्‍प्रे हम करवाएंगे लेकिन हमको डी डी टी की सप्‍लाई केन्‍द्र से होती है।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): आज की स्थिति देखिए, सब नोर्म्‍स से हटकर आपको डी डी टी का स्‍प्रे करवाना चाहिए, यह आपका कर्तव्‍य भी है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैं खुद इसके लिए तैयार हूं और मैं करा रहा हूं, जहां-जहां हमारे पास फीवर के ज्‍यादा केस आए हैं, उन सब जगहों पर स्‍प्रे करवाने की व्‍यवस्‍था कर रहे हैं। मैं तो चाहता हूं कि पूरे क्षेत्र का कवरेज हो।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): आप तो डिप्‍टी सी एम एच ओ और सी एम एच ओ के खिलाफ एक्‍शन लीजिए और इस तरह से इतनी तादाद में मरीज हो गए हैं, ऐसे में आपका अपने आप कर्तव्‍य बन जाता है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): आप मेरी बात सुनें। व्‍यवहार की बात अगर आप वहां के जनप्रतिनिधि हैं अगर आपके साथ व्‍यवहार में कहीं कोई गड़बड़ है तो उसके खिलाफ एक्‍शन लेंगे।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): मुझे आप जूत पड़वा दीजिए पर स्‍प्रे करवा दीजिए। मेरी जनता को बचवा दीजिए। इतनी सी बात है। ...(व्‍यवधान)...

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): माननीय मंत्रीजी, जब राजस्‍थान में लाखों लोग बीमारी से पीडि़त हैं और इस बीमारी की शुरूआत हुई थी सबसे पहले खण्‍डेला से आज से दो महीने पहले। ...(व्‍यवधान)...

 

Gpc/usc/06102006/1340/2a

 

खण्‍डेला का ऐसा व्‍यक्ति नहीं जो बीमार नहीं हुआ हो।

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य, यह खण्‍डेला की चर्चा नहीं हो रही है। बीच में नहीं। ..(व्‍यवधान)..

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): खण्‍डेला में जब दो महीने पहले बीमार हुए थे वे सारे के सारे बीमार आज भी बीमारी से ग्रस्‍त हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष:  यह सब आपने कह दिया।

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि आपके डिपार्टमेंट को, आपके डाक्‍टरों को यह भी पता नहीं है वास्‍तव में यह बीमारी क्‍या है। गांवों में इसको गोडातोड़ बीमारी के नाम से लोग पुकार रहे हैं। पहले सर्दी नहीं लगती है। मलेरिया का इसमें लक्षण नहीं है। आदमी के गोडो में दर्द होता है और आदमी एकदम से बीमार होता है और भयंकर दर्द होता है। आज से दो महीने पहले जो आदमी बीमार पडा था ..(व्‍यवधान)..

श्री उपाध्‍यक्ष:  मैंने नाम पुकार लिया। माननीय सदस्‍य ..(व्‍यवधान).. अंकित नहीं होगा। आप बता देना। ..(व्‍यवधान)..

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): ***   

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य। अंकित नहीं होगा।

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला):  ***

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): ठीक है, करा देंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष:  श्री जीतमल खांट। माननीय सदस्‍य, आप लिखकर दे दें, मंत्रीजी से मिल लें वे करेंगे व्‍यवस्‍था, कह रहे हैं।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से हमारे कार्यवाहक शिक्षा मंत्रीजी का ध्‍यान दिलाना चाहूंगा।

श्री उपाध्‍यक्ष:  जीतमल जी, काफी बार ध्‍यान तो हो गया कि अध्‍यापकों की कमी है।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): अभी तिवाड़ी साहब की जगह कटारिया साहब संभाल रहे हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष:  अब अध्‍यापकों की कमी है कोई तिवाड़ी साहब ..(व्‍यवधान)..

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): हमारी बात को कहने दें माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय। आप हमको प्रोटेक्‍शन देने का काम करें, हमारे मन की बात तो कम से कम सदन में आनी चाहिए।

श्री उपाध्‍यक्ष:  वह कह रहे हैं बताओ। समस्‍या चल रही है।

उदयपुर सम्‍भाग के विद्यालयों में अध्‍यापकों की कमी

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा बांसवाड़ा जिला, डूंगरपुर जिला और सूपर्ण रूप से हमारा उदयपुर संभाग लम्‍बे समय से पिछड़े हुए जिलों के रूप में और अशिक्षा के नाम पर हमारे माथे पर एक कलंक लगा हुआ है। जब भैरोंसिंह शेखावत इस सदन के माननीय मुख्‍यमंत्री थे उनके कार्यकाल में पूरे राजस्‍थान ..(व्‍यवधान).. उस समय पूरे राजस्‍थान में साक्षरता का आंदोलन चला और उस साक्षरता आंदोलन के माध्‍यम से हमारे जिले में तत्‍कालीन जिला कलक्‍टर डा. बी. शेखर के नेतृत्‍व में जिले भर में एक ऐसा साक्षरता का आंदोलन चला हम कोई इतनी अपेक्षा नहीं कर सकते थे कि आने वाले 10 साल के बाद में हमारे उदयपुर संभाग के इस बांसवाड़ा, डूंगरपुर में शिक्षा के प्रति लोगों में इतनी जागरुकता पैदा होगी कि इस मौके पर आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि सभी राजनैतिक दल चिंतित हैं, सदन में बार-बार इस पिछड़ेपन को दूर करने के लिए आदिवासी और अनुसूचित जाति के लोगों को आर्थिक रूप से स्‍वावलम्‍बी बनाने के लिए राष्‍ट्र की मुख्‍यधारा में जोड़ने के लिए अपनी-अपनी वचनबद्धता दोहराते रहे हैं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मेरे क्षेत्र बांसवाड़ा जिले के कुछ शिक्षा विभाग से जुड़े हुए हालात की तरफ आपका ध्‍यान दिलाना चाहूंगा। वर्तमान सरकार ने शिक्षा जगत में आमूलचूल परिवर्तन लाने के लिए जनजाति लोगों को शैक्षणिक दृष्टि से ऊँचा उठाने के लिए कई सारी कल्‍याणकारी योजनाएं, रोजवेज में छात्रों के फ्री पास हो, दुर्घटना बीमा हो, मिड डे मील हो, नि:शुल्‍क साइकिल वितरण हो, नि:शुल्‍क पाठ्य-पुस्‍तक कार्यक्रम हो, कई कार्यक्रमों को सरकार बखूबी अंजाम दे रही हैं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मेरे बांसवाड़ा जिले के जो गरीब से गरीब व्‍यक्ति किन हालातों में हैं, बच्‍चों को स्‍कूल तक पहुंचाने के लिए जो सरकार की योजनाओं का लाभ लेते हुए स्‍कूलों के अंदर पेरेंट्स बालक को भेज रहा है, मैं बताना चाहूंगा कि बांसवाड़ा जिले के अंदर 6 से 14 आयु वर्ग में कम से कम बांसवाड़ा जिले के 4 लाख 24 हजार छात्र-छात्राओं का नामांकन चल रहा है और वर्तमान में इतने छात्र अध्‍ययनरत हैं। इतना ही नहीं सीनियर सैकण्‍डरी और सैकण्‍डरी के छात्र-छात्राओं की संख्‍या 42524 है। मुझे यह कहते हैं अपने आप में बड़ी खुशी है और सरकार को भी धन्‍यवाद देना चाहूंगा पिछली सरकार हो, वर्तमान सरकार हो, शिक्षा जगत में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने के लिए किसी जमाने में बांसवाड़ा के इन सरकारी स्‍कूलों में पढ़ने और पढ़ाने के लिए बच्‍चों को घर से जबर्दस्‍ती निकालना पड़ता था। आज जो साक्षरता का आंदोलन चला इसी का परिणाम है कि संपूर्ण जिले के अंदर एक नया क्रांतिकारी परिवर्तन आया और उस परिवर्तन की देन से आज पूरे बांसवाड़ा जिले के अंदर छात्र-छात्राओं का एक ऐसा हुजूम उमड़ा है कि वहां पर बैठने के लिए जगह का अभाव, कक्षाओं का अभाव है और इतना बड़ा सरकार परिवर्तन लायी, वहां के स्‍थानीय लोगों की सोच में परिवर्तन आया और उसका परिणाम यह हुआ कि आज सीनियर सैकण्‍डरी और सैकण्‍डरी स्‍कूलों की संख्‍या 60 है जहां पर कितने शिक्षक किस तरह से बच्‍चों को अध्‍यापन करा रहे हैं।

मैं आपके माध्‍यम से सरकार का ध्‍यान दिलाना चाहूंगा कि संपूर्ण जिले के अंदर सैकण्‍डरी, सीनियर सैकण्‍डरी में 6 प्रिंसिपल के पद पाँच साल से रिक्‍त पड़े हुए हैं। हैडमास्‍टर के 30 पद पाँच साल से रिक्‍त पड़े हुए हैं, व्‍याख्‍याता के 155 पद रिक्‍त पड़े हुए हैं, वरिष्‍ठ अध्‍यापकों के 122 पद रिक्‍त पड़े हुए हैं, सेकण्‍ड ग्रेड के 90 पद रिक्‍त पड़े हुए हैं, थर्ड ग्रेड के अंदर 450 पद रिक्‍त पड़े हुए हैं, यूपीएस थर्ड ग्रेड में 145 पद रिक्‍त पड़े हुए हैं, 56 अन्‍य पद रिक्‍त पड़े हुए हैं। कुल मिलाकर बांसवाड़ा जिले में जो हमारे नन्‍हे-मुन्‍हे बच्‍चों का भविष्‍य संवारने वाले हैं जिनके पेरेंट्स के मन में बहुत बड़ी कल्‍पना है, यही बच्‍चा पढ़-लिखकर होशियार होगा और हमारे बुढ़ापे में हमारी सेवा करेगा, जीवन में एक अच्‍छा अधिकारी बनेगा, पढ़-लिखकर होशियार होगा, राष्‍ट्र की मुख्‍यधारा में जुड़ेगा। यह हमारे पेरेंट्स की कल्‍पना है, यह सरकार की भी तमन्‍ना है। मुझे यह कहते हुए खेद है कि संपूर्ण जिले के अंदर 1050 पद रिक्‍त पड़े हुए हैं। सीनियर सैकण्‍डरी से लगाकर प्राइमरी एजुकेशन तक यह हालत है।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करूंगा क्‍या बांसवाडा जिले के अंदर जिन लोगों की इस तरीके के विद्यालयों में जिन पेरेंट्स की तमन्‍ना है उसके मुताबिक स्‍कूलों में भेज रहे हैं। उनका क्‍या परिणाम निकलेगा? आज हम दसवीं और बारहवीं का रिजल्‍ट देखते हैं। मैंने सरकार से पूछा था, मैं परीक्षा परिणाम की ओर आपके माध्‍यम से सरकार का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा, 27 परसेंट, 13 परसेंट, 33 परसेंट, 9 परसेंट, 16 परसेंट, 17 परसेंट, 15 परसेंट, 11 परसेंट। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, क्‍या हम एक भीड़ को खड़ी करके भीड़तंत्र को इकट्ठा करके हमारे गरीब मांबाप के बच्‍चों को इस तरीके की शिक्षा देने का यही मन में ठाना है और सरकार इस आदिवासी क्षेत्र के लिए गंभीर नहीं बनती है। मैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से कहना चाहूंगा।

 

मोहन/चौहान/6102006/1350/2b

 

आने वाले समय में यही पीढ़ी जो अच्‍छे संस्‍कारों की हम कल्‍पना कर रहे हैं, अगर इनकी आधी अधूरी शिक्षा रही उसके इलाके अन्‍दर अच्‍छे संस्‍कार नहीं मिलेंगे, अच्‍छे नागरिक नहीं बनेंगे तो उस क्षेत्र के अन्‍दर अराजकता के हालात पैदा होंगे और माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से दो तीन स्‍कूलों का जिक्र करना चाहूंगा। हमारे दल के माननीय सदस्‍य जो वरिष्‍ठ नेता हैं, कुशलगढ़ के अन्‍दर 12 पद रिक्‍त हैं सी‍नियर सैकण्‍डरी के 12 पद, इतना ही नहीं हमारे आनन्‍दपुरी के अन्‍दर 14 पद रिक्‍त हैं। इसी तरीके से बांसवाड़ा के अन्‍दर 7 पद रिक्‍त हैं, ग्रामीण क्षेत्र का जितना भी इलाका है 12-12, 15-15 यह सारी सूची मेरे पास में है पूरे जिले की और ऐसे विद्यालय में जहां पर हमारे घाटोल से आने वाले माननीय सदस्‍य जिनके क्षेत्र में नरवाली, तलवाड़ा, मोटा गांव जितने भी हमारे इम्‍पोर्टेंट सब्‍जेक्‍ट हैं, अंग्रेजी है, साइंस है, मेथेमेटिक्‍स ऐसे सब्‍जेक्‍ट्स के अन्‍दर टीचर पांच साल से नहीं आ रहे हैं, इन विद्यालयों को कैसे चलाएंगे, इना बच्‍चों को कैसे शिक्षा मिलेगी, उच्‍च शिक्षा और अच्‍छे संस्‍कार कैसे मिलेंगे। वह आदमी किस तरीके से सीनियर सैकेण्‍डरी पास करेगा, वह कैसे इंजिनियर बनेगा, किस तरीके से टेक्निकल शिक्षा में आगे बढ़ेगा। मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि जिस इलाके के अन्‍दर घूमते हैं। हमारे माननीय कटारा जी चले गये, निशुल्‍क साइकिल वितरण कर रहे हैं, हम दुनिया भर में सारे कार्यक्रम चला रहे हैं लेकिन जब तब विद्यालय के अन्‍दर शिक्षकों के लिए हमारी वैकल्पिक व्‍यवस्‍था नहीं करेंगे, सम्‍पूर्ण उदयपुर संभाग में, यही बांसवाड़ा जिले की ही नहीं, सम्‍पूर्ण उदयपुर डिवीजन के यह हालात हैं। मैं आपसे आग्रह करना चाहूंगा कि इस अव्‍यवस्‍था को समय रहते दूर नहीं किया तो हालात बिगड़ेंगे और वहां का स्‍टूडेंट आए दिन तालाबंदी करता है, सड़कों पर उतरता है लेकिन कब तक सड़कों पर उतरता रहेगा, कब तक तालाबंदी करता रहेगा ? अभिभावकों में भी इस बात को लेकर रोष है, समय समय पर कटारिया जी, साहब, से हम निवेदन करते हैं, कटारिया जी, आप हमारे संभाग के प्रमुख व्‍यक्ति हैं, राजस्‍थान के गृह मंत्री भी हैं और पिछले समय आपने शिक्षा मंत्री रहते हुए आपको उस क्षेत्र के चप्‍पे चप्‍पे का काफी अनुभव है, हम हमारी पीड़ा को लेकर यहां सदन में बैठ जाएंगे, हमारे संसदीय मंत्री जी के सामने कुछ बात कह देंगे। यह बात यह गंभीर होकर सोचने का विषय है, समय रहते हम गरीब आदिवासी बालकों के साथ अगर न्‍याय नहीं करेंगे तो आने वाली हमारी जो पीढ़ी है वह बरबाद हो जाएगी, हम सब बरबाद हो जाएंगे और हम जिस राष्‍ट्र की मुख्‍य धारा में उनको जोड़ने की बात कहते हैं, हम काफी कुछ अलग-थलग पड़ जाएंगे, आने वाला समय हम सब को माफ नहीं करेगा इसलिए मैं आपसे हाथ जोड़कर निवेदन करता हूं, हमारी सरकार गंभीर होकर इस विषय पर चिंतन मनन करे, इन्‍हीं शब्‍दों के साथ मैं अपनी बात समाप्‍त करता हूं।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य की पीड़ा स्‍वाभाविक है। जो इन्‍होंने पदों के रिक्‍त की संख्‍या बताई वह वास्‍तव में हकीकत में है, रिकार्ड पर भी है, अध्‍यापक अभी तक जितने हमको उपलब्‍ध कराने थे हम नहीं करा पाए। एक तो उस ट्राइबल एरिया में अपने को 890 पद हमारे पास थे, ट्राइबल एरिया के लेकिन योग्‍य व्‍यक्ति कोई खाली नहीं था जो बी.एड. या एस.टी.सी. हो, इस कारण से उनके पद खाली रह गये और दूसरा यह है कि अभी जो हम 25 हजार पदों की पूर्ति कर रहे हैं, मैं सोचता हूं कि आर.पी.एस.सी. से हम बार बार इस बात का प्रयास कर रहे हैं कि जल्‍दी से वह भर्ती हो जाए तो इन 25 हजार अतिरिक्‍त अध्‍यापक मिलेंगे तो हम निश्चित रूप से 8-10 परसेंट जो रिक्‍तता है उसको हम पूरा कर पाएंगे। व्‍याख्‍याता की जो समस्‍या है, वह मैं जब शिक्षा मंत्री था तब भी थी, बीच में भी है और आज भी है और उसका कारण यह है कि जिसका भी हम परमोशन करके भेजते हैं, सब परमोशन को फोरगो करते हैं। 9,18,27 का ऐसा लाभ मिल गया कि व्‍यक्ति अपने घर बैठा रह कर भी उस सेलरी को प्राप्‍त कर लेता है, यह तो हम सब जनप्रतिनिधियों को इसके बारे में अपना मन बनाना पड़ेगा, एक। और दूसरा हम जो ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालय हैं जहां बहुत रिक्‍तता है, उसमें बहुत कुछ हम जनप्रतिनिधि दोषी हैं। हम अपने आदमी को तो सड़क लगाने के लिए आग्रह करते हैं और अपेक्षा करते हैं कि दूरदराज के बच्‍चे की आवश्‍यकता की पूर्ति के लिए तो हम सब लोगों को भी यह मन बनाना पड़ेगा कि अगर कहीं आधे अध्‍यापक हैं तो उसी अनुपात में कम से कम गांवों के पद भी भरे जाएं, शहरों में भी अगर चार पद रिक्‍त रह सकते हैं तो रख कर इस पूर्ति को करेंगे तो जो कुछ हमको उपलब्‍ध है उससे भी हम कम से कम आज की आवश्‍यकता को भर सकते हैं। मैं विश्‍वास दिला रहा हूं आपको कि इस बारे में जो कुछ हमारे पास आज उपलब्‍ध है उसको ठीक प्रकार से संयोजित करके उसको लगाने का प्रयास जरूर करेंगे ताकि कुछ कमी की पूर्ति कर सकें।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): यह समस्‍या हर स्‍कूल के अन्‍दर हो रही है।

श्री उपाध्‍यक्ष: समस्‍या है लेकिन प्रयास हो रहे हैं।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): थर्ड ग्रेड टीचर की जनहित से संबंधित है। थर्ड ग्रेड टीचर की जो भर्ती होती है उसके अन्‍दर आजकल बेरोजगारी इतनी है कि सारे टीचर एमए, बीएड मिलते हैं आपको, थर्ड ग्रेड की भर्ती हो गई, प्राथमिक स्‍कूल में भर्ती हो गई, प्राथमिक शिक्षा को नजरअंदाज करते हुए इन अध्‍यापकों की प्रतिनियुक्ति माध्‍यमिक और उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय में कर दी जाती है। इस पर क्‍या आप रोक लगाएंगे, क्‍या इससे प्राथमिक विद्यालय खाली हो गये और सर्वशिक्षा अभियान और मुख्‍य मंत्री शिक्षा सम्‍बल अभियान को ठेस लगी है तो इस पर रोक लगाई जानी चाहिए।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री रामनारायण मीणा। ...(व्‍यवधान)...

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): उपाध्‍यक्ष महोदय, पाईंट आफ इंफार्मेशन है मेरा। ...(व्‍यवधान)...

श्री फतेह सिंह (कुशलगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहूंगा कि जो अभी हमारे साथी ने आपके सामने जो गाथा गाई है कि अध्‍यापकों की कमी है उसमें सबसे पहले तो दिक्‍कत यह आ रही है, आपने जैसा बताया कि जो अध्‍यापक हमारे वहां पोस्टिंग कर रखे हैं जिले में, शहर के आसपास में और पूर्व में भी बात आई थी कि 10 अध्‍यापकों के ऊपर ही 10 मास्‍टर हैं। इस व्‍यवस्‍था का अगर सर्वे कराकर, कुछ छानबीन करके ऐसी जगह से हटाकर उनको वहां से लगाया जाए तो कुछ तो वह फर्क पड़ सकता है।

पिछली बार आर.पी.एस.सी. से जो सलेक्‍शन हुआ था, लड़कों का तो इन्‍होंने पता नहीं किस पालिसी के तहत बांसवाड़ा जिले के लड़के जो निकाले थे उनको अन्‍य जिलों में डाल दिया। अगर उन लड़कों को उस जिले में डाला होता तो यह इतनी दिक्‍कत नहीं आती। वास्‍तव में हमारे यहां की स्थिति खराब है। एक तरफ हम स्‍कूल क्रमोन्‍नत करते हैं, दूसरी तरफ अध्‍यापकों की कमी है और अभी जिला परिषद् और पंचायत समिति का समायोजन का कोई पावर नहीं है, पूरे राज्‍य सरकार ने अपने अधिकार में रखा है तो मैं चाहूंगा कि अगर यह समायोजन के लिए जिला कलक्‍टर को पावर दे दिया जाए तो मेरे ख्‍याल से कुछ समस्‍या का समाधान हो सकता है नहीं तो स्थिति हमारे सामने बिगड़ेगी और वहां आन्‍दोलन भी आए दिन होते रहते हैं, कई तरह का नुकसान भी होगा तो मैं उम्‍मीद करूंगा, कटारिया साहब से कि आपने पहले इस तरह की पालिसी बनाकर काम किया था उस स्थिति में अभी भी वर्तमान में मंत्री जी भी काम कर रहे हैं लेकिन वह आज मौजूद नहीं हैं, हम आपसे आशा करते हैं कि हमारे जिले की जो स्थिति बिगड़ी हुई  है और उस संभाग की, पूरे एरिया की जो स्थिति बिगड़ी है उसके ऊपर आप ध्‍यान देकर इस व्‍यवस्‍था को ठीक कराने का काम करेंगे, यह मैं उम्‍मीद करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री रामनारायण मीणा।

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): उपाध्‍यक्ष महोदय, पाइंट आफ इंफार्मेशन देना चाहता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: क्‍या इंफार्मेशन है ? ...(व्‍यवधान)...

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): बहुत इम्‍पोर्टेंट पाइंट चल रहा है। ...(व्‍यवधान)...

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): पाइंट आफ इंफार्मेशन के माध्‍यम से माननीय शिक्षा मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा, एक मिनट का समय दीजिए आप। जालौर जिले में भीनमाल पंचायत समिति के छाजाला गांव में एक घटना हुई, वहां प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ एक अध्‍यापक लगा हुआ है उसने शाम के समय उन सारे बच्‍चों को इकट्ठा किया, खुद के मित्रों को बुलाया और पार्टी की और पार्टी के बाद उन बच्‍चों को जबरन शराब पिलाई।

श्री उपाध्‍यक्ष: कब की बात है ?

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): यह अभी पिछले दिन की ही बात है।

श्री उपाध्‍यक्ष: कितने दिन हो गये ?

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): आज मीडिया में चल रहा है, आपको पता ही नहीं है, सरकार को ही पता नहीं है, पूरा इलेक्‍ट्रोनिक मीडिया कवर कर रहा है, उन बच्‍चों के इंटरव्‍यू चल रहे हैं उसके अन्‍दर, आपने दिन में तो मिड-डे-मिल है और रात को इवनिंग ड्रिंक शुरू करा दी, यह तो पता नहीं कब से घटना हुई है, नई घटना शुरू हो गई। छाजाला गांव मैं आपको स्‍पेसिफिक नाम देता हूं। छाजाला गांव में प्राथमिक विद्यालय में एक ही अध्‍यापक लगा हुआ है उसने शाम के समय.... ...(व्‍यवधान)...

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): उसको हटा दिया है।

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): नहीं हटा है। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ऐसे अध्‍यापक को हटाना ही केवल काफी नहीं है, ऐसे अध्‍यापक की जिस प्रकार से व्‍यवस्‍था बिगड़ी है और जिस प्रकार से सरकार को बदनाम करने के दृष्टिकोण से और आचरणविहीन कृत्‍य किया है उस आचरणाविहीन अध्‍यापक को हटाना ही नहीं उसको तत्‍काल सस्‍पैंड करके आप उसकी संवैधानिक कार्यवाही करो और अगर ऐसा घटनाक्रम हुआ है तो सरकार के सभी लोगों के लिए शर्म की बात है।

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): माननीय सदस्‍य, तत्‍काल कार्यवाही करने के लिए कार्यवाही हो चुकी है। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): और शराब पिलाकर किस राह पर ले जाना चाह रहे हैं? ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: आप कटारिया जी को बता दें। ...(व्‍यवधान)...

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): उस पंचायत के सरपंच ने पूरे गांववासियों ने जाकर रिपोर्ट कर दी बीईओ को, एसडीओ को।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मंत्री जी कुछ कह रहे हैं।

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): तहसीलदार ने जांच की, तहसीलदार की रिपोर्ट के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, क्‍योंकि एकदम मैं हाउस में सवेरे से बैठा हूं, मुझे इस विषय की जानकारी नहीं मिली थी, जो माननीय सदस्‍य कह रहे हैं, मैं अपने अधिकारियों को अभी आदेश दे रहा हूं कि इस सारी घटना का तुरंत पता करके आज हाउस समाप्‍त होने के पहले पहले हमको सूचना दें कि अगर विद्यालय में इस प्रकार की घटना हुई है।

Skp/akt/06102006/1400/2c/1

 

तो आज ही उसको सस्‍पैण्‍ड करे और उसके खिलाफ कार्यवाही करे।

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): पूरे गांव के लोगों ने जाकर के रिपोर्ट की है। मैं आपको यह सूचना दे रहा हूं। पूरे गांव के लोगों ने रिपोर्ट दी है, पंचायत ने दी है, आप कार्यवाही करें। जानकारी ही दे रहे हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): जब तक विषय की जानकारी नहीं करेंगे, जानकारी नहीं लेंगे, जानकारी लेने के बाद ही करेंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपनी जानकारी मंत्री जी को दे दे, पर्सनली मिलकर के भी बता दें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह पूरे पत्रिका में छपा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: उनको पर्सनल लेवल पर दे दें।

शिक्षा विभाग में बैकलॉग की स्थिति

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सरकार का ध्‍यान एक ऐसे मामले की तरफ ले जा रहा हूं जिसके बारे में आये दिन सदन में चर्चाएं भी होती हैं लेकिन उसका हल नहीं हो रहा है। यहां जयपुर में महात्‍मा गांधी का स्‍टेच्‍यू सर्किल है उस स्‍टेच्‍यू सर्किल के ऊपर पिछड़ा वर्ग, एस सी, एस टी, अल्‍पसंख्‍यक महासंघ के प्रदेश अध्‍यक्ष भाई राजपाल भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आज चौथा दिन है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सरकार के ध्‍यान में है। जैसे अभी ट्राइबल एरिया के बारे में बात आई, केन्‍द्र सरकार का नियम है, सरकार भी इस बात को जानती है कि शिड्यूल्‍ड कास्‍ट या शिड्यूल्‍ड ट्राइब्‍स के आदमी, रिजर्व क्‍लास के आदमी आदि क्‍वालिफाई नहीं किये जाते हैं तो एस टी की जगह एस सी को और एस सी की जगह एस टी को वाइस-वर्सा लिया जा सकता है लेकिन आपके यहां पद खाली रखे जाते हैं और आपके यहां वेटिंग लिस्‍ट कम बनाई जाती है। यही कारण है कि आज कोई भी विद्यालय अध्‍यापकों से भरा हुआ नहीं है। सब जगह खाली हैं। धरने, आंदोलन हो रहे हैं। मेरे पीपलिया में मुकदमे दर्ज हुए हैं, विद्यार्थियों ने किये थे। इसलिए, मान्‍यवर उपाध्‍यक्ष महोदय, 82 हजार पद जो एस सी, एस टी के आप जोड़ लीजियेगा, वो खाली पड़े हैं और दूसरी तरफ क्‍या हो रहा है कि पिछले दिनों संस्‍कृत विद्यालय में एक वैकेंसी निकली 8 पद थे एक पोस्‍ट के और शिड्यूल्‍ड कास्‍ट की एक भी वैकेंसी उसमें नहीं है। आखिर ऐसा क्‍यों हो रहा है? माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो परिस्थिति बन रही हैं ये कहां ले जाएंगी? आखिर सरकार की भावना क्‍या है? पिछले दिनों से ऐसा क्‍यों होता जा रहा है? कभी नॉमिनेशन होता है तो शिड्यूल्‍ड कास्‍ट का कोई आदमी नॉमिनेट नहीं होता, ट्राइबल्‍स का कोई आदमी नॉमिनेट नहीं होता है। आखिर भावना क्‍या है सरकार की यह तो सरकार जाने। अभी यह पिछले दिनों निकला, संस्‍कृत विद्यालय के प्रवेशिका अध्‍यापक, 15 कुल रिक्‍त पद, अनुसूचित जाति जीरो, उसकी महिला भी जीरो, ट्राइब्‍स का एक पद। कौनसी यह गणित है? पिछले दिनों पुलिस की भर्ती हुई। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बूंदी जिला, झालावाड़ जिला, ट्राइबल्‍स की काफी वहां पर संख्‍या है, शिड्यूल्‍ड कास्‍ट की काफी संख्‍या है पर वो पुराने स्‍टेट के जमाने का यदि कोई सिपाही भर्ती हुआ या 55-56 में कोई भर्ती हुआ, चूंकि उनकी संख्‍या ज्‍यादा थी, गांव वाले अनपढ़ थे तो उनको भी जोड़कर के कह दिया कि तुम्‍हारे तो पद भरे हुए हैं। उल्‍टा रिजर्वेशन, उल्‍टी गणित जो चल रही है यह बहुत भयंकर स्थिति है। इसलिए उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा तो आपसे यह अर्ज करना है कि कांस्‍टीट्यूशनल प्रोविजन के आधार पर सरकार को चलना चाहिए और कांस्‍टीट्यूशन में जो प्रोविजन हैं उन तबको के लिए जिनका रिजर्वेशन दिया गया है, जिनका भारत सरकार रिजर्वेशन दे रही है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय गृह मंत्री जी से अर्ज करना चाहूंगा कि जब भारत सरकार ने कह दिया जोन ऑफ कंसीडरेशन नहीं होगा, भारत सरकार में तो जोन ऑफ कंसीडरेशन नहीं है, आपकी मध्‍य प्रदेश सरकार में नहीं है, राजस्‍थान में है। आप कह देंगे कि कांग्रेस का राज था, बी जे पी का राज था, जनता दल का राज था, आखिर राज किसी का भी हो, आज की तारीख में हम चाहते क्‍या हैं? आपकी सरकार क्‍या चाहती है? ये जो चीजें हो रही हैं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अभी इन्‍होंने 9 तारीख को एक आर्डर निकाल है जयपुर डिस्‍कॉम ने, 7.9 को एक आर्डर निकाला है आर्डर नम्‍बर 913 जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, उसमें एक मिस्‍टर गिरिराज प्रसाद को रिवर्ट किया है, ए ईएन बना दिया गया था उसको जे ईएन में रिवर्ट किया है और उसको कब दिया था? 23.2.2005 को प्रमोशन दिया था। दूसरा एक आर्डर 7.9.2006 को ही निकला है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं स्‍पेसिफिक आर्डर आपके ध्‍यान में इसलिए ला रहा हूं कि ज्‍यादतियां हैं या सरकार की मंशा है, वह बनवारी लाल का प्रमोशन हुआ था 13 जून, 2003 को और पाँच आदमियों के साथ हुआ था उसको 7 सितम्‍बर, 2006 में रिवर्ट कर दिया। आखिर सरकार के प्रति सब की भावना है। हम आम जनता के साथ आते हैं, जीतने के बाद सरकार सब की होती है। इस तरह के आर्डर एक ही नहीं, कितने ही निकल रहे हैं और जब भर्ती की जाती है अध्‍यापकों की तो एम ए पास आपको मिलेंगे। मैं आर पी एस सी के ऊपर तौहमत नहीं लगाता और यहां न्‍यायालय के बारे में कुछ नहीं कहना चाहता। आदरणीय उपाध्‍यक्ष महोदय, न्‍यायालयों की स्थिति आपको भी पता है, कोई शिड्यूल्‍ड कास्‍ट, शिड्यूल्‍ड ट्राइब्‍स का आदमी वहां बैठा हुआ नहीं है, डिसीजन वो न्‍याय से देते होंगे, हम वो नहीं कह रहे हैं लेकिन स्थितियां ऐसी बन रही है कि आर पी एस सी कहती है कि यह इसका नहीं है। मेरा आपसे अर्ज करना है कि ट्राइबल के आदमी हैं, यदि आपके पास एम ए पास लड़का है और आपको थर्ड ग्रेड टीचर चाहिए, एस टी सी ट्रेंड है, बी एड ट्रेंड है, यदि वो लिखने में कहीं कमजोरी किसी की वजह से कुछ हो जाता है तो आप 10 परसेंट, 15 परसेंट नम्‍बर उनको दे सकते हैं। आपकी सारी पोस्‍ट भर सकती हैं, रिजर्वेशन का जो मामला है वह चल सकता है। यदि ऐसा नहीं होगा तो फिर लोगों में ग्रिवेंसेज पैदा होगी और ग्रिवेंसेज पैदा होने के बाद में आज तो भूख हड़ताल पर बैठे हैं आदमी, कल आप उनको हास्पिटल में ले जाओगे आपको सारा अधिकार है लेकिन मैं तो आपसे न्‍याय चाहता हूं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से कि जो अन्‍याय हो रहा है, जो लोग महसूस कर रहे हैं, सरकार को क्लियर करना चाहिए, स्थिति स्‍पष्‍ट करनी चाहिए। यह तो आपके आर्डर्स भी हैं, भारत सरकार के आर्डर्स देख लीजियेगा, यदि किसी को रिवर्ट करना हो, तो कास्‍ट, ट्राइब्‍स के आदमी को उस स्थिति तक सेफ किया जाएगा जिस स्थिति तक उनका कोटा यदि वहां फुलफिल नहीं हो रहा है। फिर उनको उसमें क्‍यों डाल दिया गया है। आप अधिकारी ऐसे बिठा देंगे, उनके खिलाफ एक्‍शन नहीं लेंगे, जयपुर डिस्‍कॉम का एम डी किस आधार पर बिठाया गया है? किस कारण से बिठाया गया है? क्‍या ट्रांसफार्मर में और सिंगल फेस के घोटाले करने के लिए है? उसकी जांच नहीं हो? वर्ल्‍ड बैंक का माध्‍यम हो, किसी का भी माध्‍यम हो, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस तरह की चीजें जो अधिकारी करें वो इस तरह की बातें करके आपको और हमको डॉक में खड़ा करें यह आम जनता के लिए, प्रदेश की जनता के लिए और शुद्ध वातावरण के लिए ठीक नहीं है। मेरा आपसे करबद्ध निवेदन है कि वो धरने पर बैठे हैं, आप जाकर के उनको विश्‍वास दिलाओ। आम जनता को कहो कि यह जो चीजें हो रही हैं, जो खाली पद हैं, मैक्जिमम खाली पद, अब ट्राइबल के एरिया में नहीं मिले तो दूसरे एरिया से ले लो और उनके लिए कर दो पर आप जनरल से मत लो, रिजर्व क्‍लास के ले लो, शिड्यूल्‍ड कास्‍ट के ले लो, दूसरे ले लो और फिर जब भी पद खाली हों आप वहां के लोगों को दे दो। आज ट्राइबल एरिया में बहुत से बेरोजगार लोग हैं, आखिर उनको क्‍यों नहीं लिया जा रहा है? 10 प्रतिशत, 15 प्रतिशत उन्‍हें मार्क्‍स का रिलेक्‍सेशन देकर के, माननीय गृह मंत्री जी, मैं आपकी भावना की कद्र करता हूं, सरकार में आप ऐसे व्‍यक्ति हैं जो इन चीजों को कर सकते हो और आपको करना चाहिए क्‍योंकि मंत्रिमण्‍डल में भी आप मजबूती से कुछ न कुछ कहते हो भले ही सरकार की मुखिया उसके बारे में कुछ अर्थ ले या न ले। उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे यही कहना है कि जो बातें हो रही हैं उससे मन खिन्‍न होता है, आम जनता में भावना ठीक नहीं बैठती। उस भावना को आप ठीक करें, यही मेरा आपसे कहना है। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, शिक्षा विभाग में जितना बैकलॉग आप समझ रहे हैं, इन सारे आंकड़ों को देखने के बाद में इस बात के लिए एक तरह से इनको धन्‍यवाद देता हूं कि इस डिपार्टमेंट में बैकलॉग नहीं के बराबर है। मतलब यही एक ऐसा डिपार्टमेंट होगा जिसमें शायद बैकलॉग की दृष्टि से अगर देखेंगे तो कम से कम है। केवल प्रधानाध्‍यापक सारे राजस्‍थान में जिनकी संख्‍या 2000 से भी अधिक हैं, बैकलॉग एस सी का केवल 102 का है और एस टी का 74 का है। इसी तरह से सैकण्‍डरी स्‍कूल जो हैं, एग्‍जैक्‍ट संख्‍या तो अभी नहीं है पर मैं सोचता हूं कि 8 हजार के आस-पास होनी चाहिए। उसमें से मात्र एस सी का 141 और एस टी का 151 का बैकलॉग है। आप अगर व्‍याख्‍याता की दृष्टि से विचार करेंगे तो व्‍याख्‍याता की दृष्टि से भी टोटल व्‍याख्‍याताओं की संख्‍या में एस सी का 752 और एस टी का 613 का बैकलॉग है। अगर आप इस दृष्टि से सैकण्‍ड ग्रेड में लें, मैं सोचता हूं कि इस विभाग में बीच-बीच में जब भी डी पी सी हुई या भर्ती का सवाल आया तो बैकलॉग को ध्‍यान में रखकर के भर्ती की। इसके कारण से अगर इसको परसेंटेज में लेंगे तो मैं सोचता हूं कि शायद एक या दो परसेंट बैकलॉग निकलेगा जो भी आगे जब कभी भी अवसर आयेगा तो इस बैकलॉग की पूर्ति निश्चित रूप से करेंगे। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: शिक्षा विभाग में स्थिति ठीक है। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मेरा अर्ज करना है कि 2000 में से 240 हैं वहां आपके 100 पद खाली हैं और 16 के हिसाब से 2000 में 320 होते हैं उनमें 141 खाली हैं तो 50 परसेंट खाली हैं माननीय मंत्री महोदय।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं आपको टोटल संख्‍या के आधार पर बता रहा हूं।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): टोटल संख्‍या तो आधे खाली हो गये न।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं टोटल संख्‍या के आधार पर बता रहा हूं कि एक परसेंट मुश्किल से निकलेगा इसमें बैकलॉग।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): 50 प्रतिशत खाली हो गया। इसको आप थोड़ा रिव्‍यू करवा लें, हम आपके ऊपर विश्‍वास करते हैं, आप इसको जरूर दिखवायें। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री रामनारायण जी डूडी।

श्री रमेश खींची (कठूमर): उपाध्‍यक्ष महोदय, आज जो भूख हड़ताल पर तीन रोज से इंजीनियम और कर्मचारी सिंचाई विभाग में है, पी एच ई डी विभाग में हैं, बात शिक्षा विभाग की नहीं है, वहां तीन रोज से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। मैं सरकार का ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं कि वे तीन दिन से भूख हड़ताल पर बैठे हैं, स्थिति उनकी नाजुक हो रही है, मैं समझता हूं कि कोई एक-आध कर्मचारी ईश्‍वर के नाम पर चला नहीं जाए। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से आग्रह करता हूं कि सरकार उनको जाकर के समझाये। 82 हजार पदों को लेकर के जो एस सी, एस टी के कर्मचारी, अन्‍य विभाग के जहां जहां पद खाली हैं, बात सिर्फ शिक्षा विभाग की नहीं है, सिंचाई विभाग में, पी एच ई डी विभाग में, अन्‍य विभागों में जो 82 हजार पद पूरे प्रदेश में एस सी, एस टी के रिक्‍त चल रहे हैं वो भरे नहीं जा रहे हैं। उनको लेकर के कर्मचारी-अधिकारी भूख हड़ताल पर बैठे हैं इसलिए मेरा निवेदन है कि आप उनको जाकर के समझायें और उनको उठवायें यह मेरा आपसे आग्रह है।

 

Lpm/arun/06102006/1410/2d

 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री रामनारायण डूडी राजस्‍व मंत्री राजस्‍व विभाग की 8 एवं उप-निवेशन विभाग की 3 अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखेंगे।

अधिसूचनाएं

राजस्‍व विभाग

 

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी आज्ञा से कार्य सूची

में किए गए उल्‍लेख के अनुसार राजस्‍व विभाग की 8 एवं उप-निवेशन विभाग की 3 अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखता हूं:-

  

1.

अधिसूचना संख्‍या-एफ.9(18)राज-6/2002/42 दिनांक 18.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान भू-राजस्‍व (सिनेमाघर, पेट्रोल पम्‍प, चिकित्‍सा सुविधा स्‍थापित करने हेतु कृषि भूमि का आवंटन एवं नियमितिकरण) नियम, 1978 में संशोधन किया गया है ।

2.

अधिसूचना संख्‍या-एफ10(8)राज-6/2001/पार्ट-43 दिनांक 2.5.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान औद्योगिक क्षेत्र आवंटन नियम, 1959 में संशोधन किया गया है । 

3.

अधिसूचना संख्‍या-एफ10(8)राज-6/2001/पार्ट-44 दिनांक 5.5.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान भू-राजस्‍व (ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि का अकृषिक प्रयोजनों के लिए संपरिवर्तन) नियम, 1992 में संशोधन किया गया है ।

4.

अधिसूचना संख्‍या-एफ 2(9)राज-6/2004 पार्ट/43 दिनांक 22.6.2006 जिसके द्वारा ग्रामदानी ढाकावाला उर्फ सरदारपुरा तहसील फुलेरा जिला जयपुर की कार्यपालिका समिति को विघटित किया गया है ।

5.

अधिसूचना संख्‍या-एफ.2(2)एसके/2002/49 दिनांक 17.7.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान गेलेण्‍ट्री अवार्ड्स (केश रिवार्ड्स और लैण्‍ड ग्राण्‍ट्स) नियम, 1966 में संशोधन किया गया है ।

6.

अधिसूचना संख्‍या-एफ.13(1)राज-6/2000/50 दिनांक 19.7.2006 जिसके द्वारा नॉन बैंकिंग फाईनेंशियल कम्‍पनीज को छूट प्रदान की गई
है ।

7.

अधिसूचना संख्‍या-एफ.6(2)राज-6/2001/52 दिनांक 24.8.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान भू-राजस्‍व (विंड फार्म स्‍थापना हेतु भूमि का आवंटन) नियम, 2006 विरचित किये गये हैं ।

8.

अधिसूचना संख्‍या-एफ.11(1)राज-6/2004 पार्ट-53 दिनांक 5.9.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान भू-राजस्‍व (औद्योगिक क्षेत्र आवंटन) नियम, 1959 में संशोधन किया गया है ।

 

 

उपनिवेशन विभाग

 

1.

अधिसूचना संख्‍या-प.4(16)उप/99 दिनांक 18.4.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.4(16)उप/99 दिनांक 26.11.2004 के संबंध में शुद्धि पत्र जारी किया गया है । 

 

2.

अधिसूचना संख्‍या-प.4(4)उप/98 दिनांक 3.8.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान उपनिवेशन (माही परियोजना क्षेत्र में भूमि आवंटन एवं विक्रय) नियम, 1984 में संशोधन किया गया है ।

 

3.

अधिसूचना संख्‍या-प.4(3)उप/2001 दिनांक 24.8.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान उपनिवेशन (मध्‍यम एवं लघु परियोजना के अंतर्गत भूमि आवंटन) नियम, 1968 में संशोधन किया गया है ।

 

 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री युनुस खां, यातायात मंत्री 3 अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): (श्री युनुस खां, यातायात मंत्री के स्‍थान पर) उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी आज्ञा से कार्य सूची में किए गए उल्‍लेख के अनुसार परिवहन विभाग की 3 अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखता हूं:-

(1) अधिसूचना संख्‍या-एफ.6(138)परि/कर/मु./03 दिनांक 16.2.2006 जिसके द्वारा श्री कल्‍याण आरोग्‍य सदन, सीकर के वाहन संख्‍या-आरजे 23जी-1399 को कर मुक्‍त किया गया है।

(2) अधिसूचना संख्‍या-एफ.6(252)परि/कर/एच.क्‍यू./05/11 दिनांक 16.2.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान मोटर वाहन कराधान नियम, 1951 में संशोधन किया गया है।

(3) अधिसूचना संख्‍या-एफ.6(96)परि/कर/मु./97/पार्ट-।। दिनांक 11.7.2006 जिसके द्वारा केन्‍द्रीय मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 88(8) के अंतर्गत जारी अनुज्ञा पत्रों पर दिनांक 24.7.2006 की अवधि में अन्‍य राज्‍यों से अजमेर शहर को आने-जाने वाली समस्‍त यात्री यानों पर कर में छूट प्रदान की गई है।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री वीरेन्‍द्र मीणा, वित्‍त राज्‍य मंत्री एक अधिसूचना सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): (श्री वीरेन्‍द्र मीणा, वित्‍त राज्‍य मंत्री के स्‍थान पर) उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से अधिसूचना संख्‍या प.7(1ए)वित्‍त-1(1)/आय-व्‍ययक/2005 दिनांक 26.6.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान राज वित्‍तीय उत्‍तरदायित्‍व और बजट प्रबंध नियम, 2006 में संशोधन किया गया है, सदन की मेज पर रखता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री गुलाब चन्‍द कटारिया, गृहमंत्री कोकजे जांच आयोग का जांच प्रतिवेदन एवं उस पर राज्‍य सरकार की कार्यवाही का ज्ञापन सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से जांच आयोग अधिनियम, 1952 की धारा 3 की उपधारा (4) के अन्‍तर्गत कोकजे जांच आयोग का जांच प्रतिवेदन एवं उस पर राज्‍य सरकार की कार्यवाही का ज्ञापन सदन की मेज पर रखता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री वीरेन्‍द्र मीणा, वित्‍त राज्‍य मंत्री भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के वित्‍त एवं विनियोग लेखें सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): (श्री वीरेन्‍द्र मीणा, वित्‍त राज्‍य मंत्री के स्‍थान पर) उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के वित्‍त एवं विनियोग लेखे वर्ष 2005-2006 सदन की मेज पर रखता हूं।

विधायी कार्य

श्री उपाध्‍यक्ष: विचारार्थ लिए जाने वाले विधेयक राजस्‍थान समाज-विरोधी क्रियाकलाप निवारण विधेयक, 2006 श्री गुलाब चन्‍द कटारिया, प्रभारी मंत्री प्रस्‍ताव करेंगे कि प्रवर समिति द्वारा प्रतिवेदित राजस्‍थान समाज-विरोधी क्रियाकलाप निवारण विधेयक, 2006 को विचारार्थ लिया जाए।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से प्रस्‍ताव करता हूं कि प्रवर समिति द्वारा प्रतिवेदित राजस्‍थान समाज-विरोधी क्रियाकलाप निवारण विधेयक, 2006 को विचारार्थ लिया जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री संयल लोढ़ा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जहां तक मेरी जानकारी है राजस्‍थान के माननीय गृहमंत्री राजस्‍थान की राजनीति में आपातकाल के उस दौर के संघर्ष की पैदाईश है, फिर मुझे समझ में नहीं आता कि उस तरह के संघर्ष से निकला हुआ व्‍यक्ति आज राजस्‍थन की इस विधान सभा में इस काले कानून को लाने के माध्‍यम कैसे बने रहे हैं?

श्री उपाध्‍यक्ष: समाज विरोधी तत्‍वों के खिलाफ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, आपका यह टिप्‍पणी करना समाज विरोधी क्रियाकलाप तो ठीक है लेकिन इस देश में आज राष्‍ट्रपति के सामने भी मौत की सज़ा प्राप्‍त व्‍यक्ति के लिए सज़ा माफी की गुहार लगाई जा रही है और हमें यह सोचना पड़ेगा कि जो कानून जिस तरह के अपराध को लेकर के आप यह कानून लेकर के आ रहे हैं क्‍या वर्तमान में जो कानून विद्यमान हैं वो कानून सक्षम नहीं है इन अपराधों की रोकथाम के लिए, इन अपराधों के मामलों में कार्यवाही करने के लिए, बहुत सक्षम है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय लेकिन हमारी इच्‍छा-शक्ति नहीं है। मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि यह विधेयक की शुरूआत में लिखा है शराब के चोरबाजारियों, खतरनाक व्‍यक्तियों, मादकद्रव्‍य अपराधियों, अनैतिक-व्‍यापार अपराधियों और सम्‍पत्ति हथियाने वालों का उनके लोक व्‍यवस्‍था बनाये रखने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले समाज-विरोधी और खतरनाक क्रियाकलापों का निवारण करने के लिए निवारक-निरोध किये जाने हेतु उपबंध करने के लिए विधेयक। अब यह लोक व्‍यवस्‍था पूरे इस कानून के अन्‍दर आपने लोक व्‍यवस्‍था को कई डिफाइन नहीं किया और जिस तरह के अपराधियों को लेकर के आप यह कानून लेकर के आ रहे हैं, अजमेर में व्‍यक्ति वह अपराध करेगा उस पर तो यह आपका कानून कार्यवाही करेगा, जयपुर में व्‍यक्ति अपराध करेगा तो अपका कानून कार्यवाही करेगा लेकिन अजमेर जिले के ब्‍यावर में अगर इसी तरह के अपराध कारित होंगे तो आपका यह कानून कार्यवाही नहीं करेगा, दौसा में अपराध कारित होगा तो आपका कानून कार्यवाही करेगा, कोटपूतली में इसी तरह के अपराध होंगे तो आपका कानून कार्यवाही नहीं करेगा, सिरोही में अपराध होंगे, इसी तरह के अपराध होंगे तो आपका कानून कार्यवाही करेगा, माउंटआबू में इसी तरह के अपराध होंगे तो आपका कानून कार्यवाही नहीं करेगा। इस पर कैसा कानून लेकर के आये हैं आप। पढ़ लेना पहले जाकर के सब तरह है कि नहीं है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि राजस्‍थान की विधानसभा को कोई बहुत बड़े मजाक का विषय नहीं बनाये और इस कानून को भी लोगों के बीच में राजस्‍थान की सरकार को हंसी का पात्र नहीं बनाये। कोई भी इस तरह का डिसक्रिमेनेट्री कानून यह क्रिमिनल आफेंस  के मामलों में आप कानून लेकर के आ रहे है इस तरह का डिसक्रिमिनेशन आप नहीं कर सकते। जो आप इस कानून के माध्‍यम से करने जा रहे हैं और मैं उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं आप तो स्‍वयं विधिवेत्‍ता है राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय के बहुत प्रतिष्ठित अधिवक्‍ता रहे हैं। धारा 302 के मामले में भी यदि किसी व्‍यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है, जो सबसे संगीन अपराध है, सबसे जघन्‍य अपराध है तो भी 24 घंटे के भीतर आपको पेश करना होता है और यह कानून यह कानून प्रावधान करता है कि किसी भी व्‍यक्ति को आप उसके एक ही तरह के मामले में अपराधों की शृंखला के कारण अगर आप उठाकर बंद कर देते हैं तो तीन दिन तक तो उसको बताने की जरूरत नहीं है कि तुम्‍हें किसलिए हमने बंद किया? इसी तरह के कानून का आप उदाहरण देते हैं, तमिलनाडू का उदाहरण देते हैं आप, महराष्‍ट्र का उदाहरण देते हैं आप, गुजराज का उदाहरण देते हैं आप, वो समुन्‍द्र से जुड़े हुए प्रदेश हैं वहां उसी तरह के अपराध घटित होते हैं, उस तरह की परिस्थितियां विद्यमान हैं लेकिन इसके बावजूद गुजरात के जितने भी ऐसे मामले हुए उसमें क्‍या हुआ? क्‍या सुप्रीम कोर्ट ने फैसलें दिए? हमने उससे भी कोई सिखने  की कोशिश नहीं की। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि आप जिला कलेक्‍टर ने उठाकर बंद कर दिया, तीन दिन में तो उसको आप कारण बताओगे फिर वो एक सलाहकार मण्‍डल के गठन का प्रावधान किया है जिसमें वो जाकर अपनी बात रख सकें और सलाहकार मण्‍डल में भी हाईकोर्ट के तीन रिटायर्ड जज होंगे। मुझे तो यह लगता है कि तीन रिटायर्ड जज आपको मिलना भी मुश्किल है।

श्री उपाध्‍यक्ष: मिल जाएंगे।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मिल जाएंगे तो अच्‍छी बात है। और उसमें भी प्रावधान क्‍या है? उन तीन रिटायर्ड जज के माध्‍यम से जिस व्‍यक्ति को आपने उठाकर बंद किया है वह वकील के माध्‍यम से अपनी बात नहीं कह सकेगा। वह व्‍यक्ति जिसको आपने उठाकर बंद किया है वह अनपढ़ हो, पढ़ालिखा नहीं हो, न हीं समझता हो, कानून को नहीं जानता हो, अपराधों की व्‍याख्‍या नहीं कर सकता हो, अपने अधिकारों को नहीं समझता हो तो उसको इस बात का कोई हक नहीं होगा कि वह वकील के माध्‍यम से उस सलाहकार मण्‍डल के सामने बात कैसे कहें? यह किस तरह का आप कानून लेकर के आये है? मैं यह कहना चाहता हूं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय न केवल संविधान प्रदत्‍त अधिकारों का यह कानून हनन करता है बल्कि मानवाधिकारों का भी हनन करता है। मानवाधिकार आयोग कहता है कि पुलिस जिस वक्‍त गिरफ्तार करेगी किसी भी व्‍यक्ति को उसके परिवार को सूचित किया जाएगा और राजस्‍थान की सरकार के द्वारा लाया गया यह काला कानून यह नहीं कहता है। मैं आपके माध्‍यम से निवदेन करना चाहता हूं कि अब उस सलाहकार मण्‍डल में अपील में चला भी गया तब भी उस सलाहकार मण्‍डल को यह अधिकार दिया है कि वह सात सप्‍ताह या 50 दिन के भीतर अपना नतीजा दें।

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अब 50 दिन के भीतर अगर सलाहकार मण्‍डल ने यह कह दिया कि आपने गलत किया है तो उस व्‍यक्ति का क्‍या मुआवजा होगा जिसने 50 दिन बिना, जो भी आपने कारण लिये हों, वह उसको जायज मानता हो या नहीं मानता हो, आपने उठाकर 50 दिन के लिए बन्‍द कर दिया और ब्रिटिश राज के टाइम से यह एक सोच चला आ रहा है कि उस जमाने में अधिकारियों को, अंग्रेजी हुकूमत के अधिकारियों को यह एक छूट दी जाती थी कि वह कोई भी कार्यवाही करेंगे, उनके खिलाफ कुछ नहीं होगा। अब आप दिल्‍ली से लेकर राजस्‍थान तक की हुकूमत उसी को लेकर चल रही हो, अधिकारी कुछ भी गलत कर देगा, आपने इसमें प्रोटेक्‍शन दे दिया कि उसके खिलाफ कुछ नहीं होगा, यह प्रजातंत्र है? आपको जिम्‍मेदारी तय करनी चाहिए। आपको इसमें यह लिखना चाहिए कि अगर यह बाद में गलत साबित हो गया सलाहकार मण्‍डल की राय के बाद में तो उस अधिकारी को जिम्‍मेदार ठहराया जायेगा, उस अधिकारी के खिलाफ किसी प्रकार की कार्यवाही की जायेगी, लेकिन नहीं। एक निरंकुश नौकरशाही की तरह आगे बढ़ना चाहते हो। क्‍या हाल है पुलिस का, हम जानते नहीं हैं क्‍या? किस तरह पुलिस बेलगाम है, हम जानते नहीं हैं क्‍या? एक प्रतिष्ठित से प्रतिष्ठित व्‍यक्ति के साथ किस तरह का आचरण पुलिस का रहता है, यह तो मामला अपराधों की श्रंखला का है। गुजरात के मामले में क्‍या हुआ? व्‍यक्ति को उठाकर बन्‍द कर दिया, सलाहकार मण्‍डल की अपील में गया, सलाहकार मण्‍डल में जो भी जज साहब बिराजमान थे, सरकार से प्रिविलेज होंगे, कह दिया कि सरकार ने जो किया, ठीक किया। सुप्रीम कोर्ट ने क्‍या किया? सुप्रीम कोर्ट ने कहा, नहीं, गलत किया आपने। 12 साल पुराने एक मामले में उठाकर के व्‍यक्ति को बन्‍द कर दिया। मुकदमे की उसकी श्रंखला वहां से चालू कर दी। इसलिए उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं, यह जो कानून लाया है राजस्‍थान की सरकार ने, इसमें बहुत सी कमियां रह गई हैं और इस बात का पूरा खतरा बना हुआ है कि सरकार इस कानून का दुरुपयोग करेगी। इसलिए मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। 

अब इसके अन्‍दर जो व्‍यक्ति अपराध कर रहा है और उसने कहीं से पैसा लिया है, वाजिब बताकर लिया है, कैसे बताकर लिया है तो उसको भी सपोर्ट मानते हुए उसको भी आप इसमें डाल देंगे, अपराध में सम्मिलित कर देंगे और मैं गृह मंत्रीजी, आपसे यह जानना चाहता हूं कि राजस्‍थान में ऐसी कौनसी परिस्थितियां बन गई हैं, ऐसे कौनसे अपराध घटित हो रहे हैं कि आपको इस कानून की जरूरत पड़ रही है कि जो वर्तमान कानून के जरिये भी आप उन अपराधों से पार नहीं पा सकते।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय गृह मंत्रीजी से यह निवेदन करना चाहता हूं कि मैंने उनकी जानकारी में कुछ बिन्‍दु लाये हैं, वे बिन्‍दु निश्चित तौर पर राजस्‍थान की आम जनता के लिहाज से बहुत महत्‍वपूर्ण हैं और सम्‍पत्ति लैण्‍ड ग्रेबर का जैसा मैंने जिक्र किया है, क्‍या नगरपालिका के कानून में प्रावधान नहीं है उसके लिए? राजस्‍थान में कितने ऐसे मामलों के अन्‍दर आपने कार्यवाही नगरपालिका अधिनियम के अन्‍तर्गत की है, वह आप देख लीजिये। शराब की कालाबाजारी का मामला लीजिये। क्‍या पुलिस की हालत बनी हुई है? इसी सदन में बार-बार आप जब गृह मंत्री नहीं थे, आपने कितनी बार चर्चा की है पुलिस और शराब के ठेकेदारी की मिलीभगत की। आज शराब के ठेकेदार के निशाने पर आम आदमी है। खुद शराब के ठेकेदार पुलिस को अपनी गाड़ी में ले जाकर शराब देते हैं और मुकदमा जिस व्‍यक्ति के खिलाफ में वह दर्ज करवाना चाहते हैं, उसके खिलाफ दर्ज कर दिया जाता है, क्‍या आप यह नहीं जानते। पुलिस का यह सारा आचरण आपकी जानकारी में होने के बाद भी मुझे समझ में नहीं आता और आप जैसा व्‍यक्ति जिसने उस दौर में, जब आपातकाल का दौर था, उस दौर में जिसने संघर्ष किया हुआ हो, वह इतने अधिकार किस आधार पर देने जा रहा है, किस आधार पर देने की सोच रखता है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे यह समझ में नहीं आता है। इसलिए मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि आप अपनी राजनैतिक इच्‍छाशक्ति को जाग्रत कीजिये और जो वर्तमान में कानून है, उन कानून को फोर्स में लाने की कोशिश कीजिये। आपने तो बहुत बड़ी-बड़ी बात इस सदन में पहले भी कही थी कि किसी भी थाना हल्‍के के अन्‍दर अगर यह चीज पकड़ी गई तो उस थानेदार को हटा दूंगा। कितने थानेदार हटा दिये राजस्‍थान में? अवैध वाहनों के चलन की बात हुई, जिस थाना हल्‍के के अन्‍तर्गत इस तरह की गतिविधियां पाई गईं तो उस थाना हल्‍के के अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। कितनों के खिलाफ कार्यवाही की? यह सारे कानून बने हुए हैं। ओवरलोडिंग को लीजिये। क्‍या कानून बना हुआ नहीं है। राजस्‍थान में ऐसी कौनसी तहसील है, कौनसा ऐसा नगरपालिका क्षेत्र है जहां... माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको पिंडवाड़ा का किस्‍सा बताता हूं। एक जीप का चालान हुआ तो उसमें 42 सवारियां भरकर उसने मजिस्‍ट्रेट के सामने पेश किया। मजिस्‍ट्रेट ने मानने से इन्‍कार कर दिया तो जब 42 सवारी भरी हुई गाड़ी चल रही है और कानून बना हुआ है, हम उसको रोक नहीं पा रहे हैं, उसको फोर्स में नहीं ला पा रहे हैं, अपने ही लोगों से उसकी पालना नहीं करवा पा रहे हैं तो यह शराब की तस्‍करी, यह जमीनों के मामले, इन सब के अन्‍दर इतने खतरनाक कानून की माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कोई आवश्‍यकता नहीं है। इसलिए मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि प्रत्‍येक व्‍यक्ति के अपने संवैधानिक अधिकार हैं, मानवाधिकार हैं, उन सबकी रक्षा करने के लिए, उनको कायम रखने के लिए इस कानून को जनमत जानने के लिए परिचालित किया जाये जिससे लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हो सके।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद लोढ़ाजी। श्री मोहम्‍मद माहिर आजाद (अनुपस्थित) श्री रामनारायण मीणा (अनुपस्थित) श्री प्रहलाद गुंजल।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान समाज-विरोधी क्रियाकलाप निवारण विधेयक, 2006 आज माननीय गृह मंत्रीजी ने सदन में पेश किया है और प्रवर समि‍ति में भी इस पर व्‍यापक चर्चा हुई है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता भी हैं। जब कभी कानून बनाने की आवश्‍यकता पड़ती है या कानून में संशोधन करने की आवश्‍यकता पड़ती है तो उसके पीछे उसका कारण उसका इतिहास बनता है। मेरे यह समझ में नहीं आ रहा है कि राजस्‍थान में ऐसी कौनसी परिस्थितियां पैदा हो गईं जिस कारण से आज इस बिल को लाने की आवश्‍यकता महसूस हो रही है? जो भावना इस बिल की प्रस्‍तावना में माननीय गृह मंत्रीजी ने व्‍यक्‍त की है, मैं आपको पढ़कर सुना रहा हूं। ''प्रवर समिति के प्रतिवेदन के बाद कतिपय समाज विरोधी व्‍यक्तियों की, जैसे शराब के चोर बाजारियों, मादक द्रव्‍य अपराधियों, खतरनाक व्‍यक्तियों, अनैतिक व्‍यापार अपराधियों और सम्‍पत्ति हथियाने वालों की गतिविधियां आम जनता में असुरक्षा का भाव और साथ ही आम जनता के जीवन और सम्‍पति को गम्‍भीर और व्‍यापक खतरा उत्‍पन्‍न कर देती है और जिससे राज्‍य में लोक व्‍यवस्‍था बनाये रखने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। चूंकि राष्‍ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980, स्‍वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985 और विदेशी मुद्रा प्रबन्‍ध अधिनियम 1999 के विद्यमान उपबन्‍ध ऐसे व्‍यक्ति को निरूद्ध करने के लिए अवलम्‍ब लेने हेतु पर्याप्‍त नहीं है...'' माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं, दो प्रकार की बात कही है। बहुत सारे अपराधों को जोड़कर जो समाज पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं और इनके लिए ऐसे कानून नहीं है जो अविलम्‍ब ऐसे लोगों को डिटेन कर दिया जाये। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून को आप पर्याप्‍त नहीं मानते। मैं आज आपके माध्‍यम से माननीय गृह मंत्रीजी से जानना चाहता हूं, मेरे पास यह राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून की कापी भी है और यह एक्‍ट भी है। आप दोनों को पढ़ लीजिये, मुलाहिजा फरमा लें। आपने राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून की काफी गहनतम स्‍टडी की होगी। केवल अगर दो मुद्दों को छोड़ दें कि राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून का अधिकार क्षेत्र पूरे हिन्‍दुस्‍तान में जम्‍मू-कश्‍मीर को छोड़कर होता है.........

Jkj/akt/14.30/2f/6.10.2006

 

  

और जो वर्तमान में आज कानून लाया जा रहा है इसका क्षेत्राधिकार राजस्‍थान होगा।  तमाम प्रकार की गतिविधियां, समान प्रकार का सारा कंडक्‍ट जो राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून में है, आपने उसकी कापी करके रख दिया और जब राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून इफेक्टिव रूप से काम कर रहा है और आज भी राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत समाज विरोधी गतिविधियां करने वाले गुण्‍डा तत्‍वों को आप निरोध कर रहे हो फिर अचानक ऐसी कौन सी आवश्‍यकता आ गई कि इस कानून को लाया जाय और आपने आधार बनाया कि हम ब्‍लेकियों को बंद करेंगे, आपने आधार बनाया स्‍वापक औषधि कानून को।  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, और इसको आधार बनाते समय आपने बहुत अच्‍छा समाज में संदेश देने के लिए दो चीजें इसमें जोड़ दीं, आभ्‍यासिक, आदतन अपराधी और लोक व्‍यवस्‍था को प्रभावित करना।  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह सारी की सारी डेफिनेशंस, यह सारी की सारी प्रक्रिया नारकोटिक ड्रग्‍स एण्‍ड साइकोटोपिक सब्‍सटांस एक्‍ट में भी यही प्रक्रिया है, क्‍या यह एक्‍ट पर्याप्‍त नहीं है।  आभ्‍यासित व्‍यक्ति को इस एक्‍ट के तहत आप एक साल बंद करना चाहते हो और आपका नारकोटिक, एनडीपीएस एक्‍ट आजीवन कारावास और अगर वह आभ्‍यासित करता है तो उसको मृत्‍यु दण्‍ड के प्रावधान की इजाजत दे रहा है।  आभ्‍यासिक व्‍यक्ति को आजीवन कारावास से लेकर मृत्‍यु दण्‍ड के प्रावधान की इजाजत दे रहा है और आप यह नया एक्‍ट लाकर उसको एक साल की सज़ा देकर कौन सी उपलब्धि प्राप्‍त करना चाहते हैं? आपको इस प्रकार के नारकोटिक एक्‍ट के, नारकोटिक ड्रग्‍स एण्‍ड साइकोटोपिक सब्‍सटांस एक्‍ट के प्रोवीजन का उल्‍लंघन करने वाले व्‍यक्ति की आजीवन कारावास और आभ्‍यासिक व्‍यक्ति की मृत्‍यु दण्‍ड जैसे प्रोवीजन कमजोर लग रहे हैं, इसलिए इस एक्‍ट की आवश्‍यकता पड़ गई?  आपको अनैतिक व्‍यापार अधिनियम,1956 जिसमें सारे का सारा पाँच वर्ष का कठोर कारावास, छह वर्ष का कठोर कारावास और अगर यह अनिच्‍छा से और नाबालिग जैसे लोगों के साथ घटित होता है तो आजीवन कारावास तक का प्रोवीजन किया गया है, यह जो इतना मजबूत कानून बना हुआ है, चाहे राजस्‍थान एक्‍साइज एक्‍ट का कानून हो, साधारण अपराध करने वाले और आभ्‍यासिक अपराध करने वाले, दोनों प्रकार के व्‍यक्तियों को, औषधि प्रसाधन और सामग्री अधिनियम, 1940, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप अधिवक्‍ता रहे हैं, आपका अनुभव हमसे ज्‍यादा है, ऐसा कौन सा कानून है जिसमें सामान्‍य प्रकार का अपराध और आभ्‍यासिक रूप से अपराध करने का प्रोवीजन इसमें स्‍पष्‍ट नहीं किया होता, जो आप कह रहे हैं, जो आदतन अपराधी होगा, इस प्रकार का आभ्‍यासिक होगा, उनको हम साल भर बंद रखेंगे और आपके जो पूर्व में विद्यमान कानून हैं, वह ऐसे अपराधियों को आजीवन कारावास और मृत्‍यु दण्‍ड तक का प्रावधान कर रहे हैं, मेरी समझ में नहीं आ रही कि ऐसी कौन सी परिस्थितियां पैदा हो गईं जिसके कारण से कानून के मृत्‍यु दण्‍ड और आजीवन कारावास जैसे प्रोवीजन आपको कमजोर नजर आ रहे हैं और आप कलेक्‍टर को सर्वशक्तिमान बनाकर शक्तियां देकर कौन सी उपाधि हासिल करना चाहते हैं और इसके पीछे की मंशा, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप इस एक्‍ट का, जिसमें परिभाषाएं दी गई हैं, धारा 2, परि‍भाषाओं में खतरनाक व्‍यक्ति की परिभाषा को आप जरा मुलाहजा फरमायेंगे।  खतरनाक व्‍यक्ति से आशय ऐसा कोई व्‍यक्ति अभिप्रेत है जो या तो स्‍वयं या किसी गिरोह के सदस्‍य या मुखिया के रूप में, मैं जिसकी ओर आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, भारतीय दण्‍ड संहिता 1860 का केन्‍द्रीय अधिनियम 45 के अध्‍याय 16 और 17, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अध्‍याय 16 और 17 के अधीन दण्‍डनीय कोई भी अपराध, आप एडवोकेट हैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, क्‍या है भारतीय दण्‍ड संहिता की धारा 16 और 17 के अधीन दण्‍डनीय कोई भी अपराध, आप मुझसे ज्‍यादा जानते हैं, इसके अन्‍तर्गत, मैं निवेदन करना चाहता हूं, 299 से लेकर, अध्‍याय 16- मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाली एक्‍टीविटीज, 299 से लेकर 377, शरीर के विरूध्‍द कृत्‍य, और अध्‍याय 17 में 378 से लेकर 462 तक अपराध आ गये।  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज समाज विरोधी गतिविधियां बनाने वालों के लिए आपने अलग से गुण्‍डा एक्‍ट बना रखा है, द कंट्रोल आफ गुण्‍डा एक्‍ट, आपकी सीआरपीसी की धारा 110 है, समाज का ऐसा कौन सा गुण्‍डा तत्‍व है जिसके खिलाफ तीन मुकदमे दर्ज होने के बाद 110 में कार्यवाही नहीं होती।  आज आप गुण्‍डों को जिला बदर भी करते हैं।  लेकिन इस एक्‍ट को जो आप ला रहे हैं इसके पीछे की भावना, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आज आपसे निवेदन करना चाहता हूं, आपने तय कर दिया सेक्‍शन, आईपीसी के चैप्‍टर 16 और 17 के अधीन जो भी अपराध होगा, माननीय माहिर आजादजी जनमत जानने के लिए परिचालित करने का दे गये और चले गये, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने इसमें परिभाषित किया है लोक व्‍यवस्‍था में, मैं पढ़ कर बता रहा हूं, धारा 3 की उपधारा 4 में लोक व्‍यवस्‍था को डिफाइन किया है।  आभ्‍यासित व्‍यक्ति वह जो लोक व्‍यवस्‍था को प्रभावित करता हो और लोक व्‍यवस्‍था में क्‍या दिया है, इस प्रयोजन के लिए किसी व्‍यक्ति को लोक व्‍यवस्‍था बनाये रखने के प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली किसी रीति से कार्य करना तब समझा जायेगा जब ऐसा व्‍यक्ति चाहे किसी शराब की चोरबाजारी या खतरनाक, यह जो भी उल्‍लेख करता है, के क्रियाकलापों में लगा हो या लगने की तैयारी कर रहा हो जिससे लोक व्‍यवस्‍था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़सकता है।  चार दिन पहले माहिर आजादजी का बयान आया है, हज हाउस नहीं बना तो सड़कों पर निपटेंगे, लोक व्‍यवस्‍था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना बन गई।  जब हम प्रतिपक्ष में थे, राजस्‍थान के मुख्‍य मंत्री कोटा में आये, हम कहा बिजली की दरें बढ़ी हुई हैं, मुख्‍य मंत्रीजी किसान के साथ अन्‍याय कर रहे हैं, आपको इस धरती पर नहीं आने दिया जायेगा, लोक व्‍यवस्‍था प्रभावित हो गई, एक दिन में चार मुकदमे दर्ज हो गये।  अब आपने कलेक्‍टर को और सरकार के मुखिया जो राजनीतिक द्वेषता निकालने की चेष्‍टा करेंगे, आपने भस्‍मी कड़ा उनके हाथ में दे दिया यह कानून बनाकर।  यह भस्‍मी कड़ा है।  आपको आईपीसी के चैप्‍टर 16 और 17 की सारी धाराएं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप कोट करते कि 302 के जैसे घृणित अपराध करने वाले लोगों को इसमें कवर किया जायेगा, आप करते कि हाईवे रॉबरी करने वाले लोगों को इसमें कवर किया जायेगा, आप उल्‍लेखित करते, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कि इसमें चोरी, डकैती, बलात्‍कार जैसे घृणित अपराध करने वाले लोगों को लिया जायेगा।  आपने आईपीसी के चैप्‍टर 16 और 17 की तमाम धाराएं, एक नाबालिग बच्‍चा जोर से मोटर साइकिल समाज में चलाना सीख रहा है, दो बार उसकी दुर्घटना हो गई, 337 का मुकदमा बन गया, किसी थानेदार के या किसी अधिकारी के बच्‍चे के साथ दुर्घटना हो गई, आप रख दीजिये उसको, दो बार एक्‍सीडेंट हो गया, आभ्‍यासित रूप से किया।  यह बहुत गम्‍भीर मामला है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आईपीसी के चैप्‍टर 16 और चैप्‍टर 17 के तहत जिन-जिन धाराओं को इसमें कवर किया गया है, आप पकडि़ये अफीम के स्‍मगलरों को, आवश्‍यकता नहीं पड़ेगी, आज आपने इतना खतरनाक कानून बना दिया कि माननीय उच्‍च न्‍यायालय और सर्वोच्‍च न्‍यायालय तक उनकी जमानतें लेने के बारे में गम्‍भीर है, इस प्रकार के अपराधियों को जमानत पर छोड़ा जाना समाज के लिए कितना असुरक्षित है, यह धारणा आज ज्‍युडिशियरी की बन गई और आपके सख्‍त कानून के चलते हुए इस प्रकार का अपराधी अगर एक बार आपके हत्‍थे चढ़ गया, कानून के हत्‍थे चढ़ गया तो फिर समाज में उसके दोबारा आने की गुंजाइश कई सालों तक नहीं बनती।  फिर आप एक साल का कानून कलेक्‍टर को क्‍यों देना चाहते हैं, क्‍यों देना चाहते हैं कलेक्‍टर को और फिर आप उसमें जोड़ रहे हैं चैप्‍टर 16 और 17 पूरा।  आप चक्‍का जाम करेंगे, कल राजनैतिक आंदोलन होंगे, रोज चक्‍का जाम की घोषणाएं होती हैं, रेलों के रोकने की घोषणाएं होती हैं और आपने फिर गुजरात का एक बहुत बड़ा उदाहरण देखा।  दो मुकदमों के आधार पर आदमी को डिटेन करके जेल में डाल दिया।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा यह, मुश्‍ताक जब्‍बर मियां शेख वर्सेज एम.एम. मेहता, कमिश्‍नर ऑफ पुलिस, गुजरात, 1995 में, केस नम्‍बर 237, 23.3.95 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप इस तरीके से परिभाषित नहीं कर सकते।  आपको अपराध की ग्रेविटी से ज्‍यादा वह अपराध समाज में कितना प्रभाव डाल रहा है यह आधार पहले खड़ा करना पड़ेगा।  कहां परिभाषित किया है आपने? किस पैरा में इस बात का उल्‍लेख किया है? अपराध की ग्रेविटी और अपराध की ग्रेविटी समाज के व्‍यापक हिस्‍सों को प्रभाव डालने के आधारों के निर्माण की प्रक्रिया क्‍या होगी? दो मुकदमे आपके किसी व्‍यक्ति के पास, एक से अधिक, मैं आपको बताता हूं, पढ़ कर सुनाता हूं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आभ्‍यासिक में उन समस्‍त व्‍याकरणिक रूपभेदों सहित ऐसे कार्य और लोप सम्मिलित हैं जो बार-बार निरन्‍तर प्रायोजित किये जाते हैं और जिसमें एक समान पुनरावृत्तिपूर्ण कार्य और लोपों की सूत्रबध्‍दता, हम चले गये सब, राजनैतिक दल के कार्यकर्ता हैं, कहीं बिजली के मामले का धरना-प्रदर्शन, सुपरिन्‍डेंटिंग इंजीनियर से कोई गरमा-गरमी कार्यकर्ता की हो गई.....

भीम/अरुण/6.10.06/14.40/2g

 

मुकदमा दर्ज हो गया कलेक्‍टर के पास हम इसी शिकायत लेकर चले गये और हमने कहा कि यह गलत परम्‍परा है यह ठीक बात नहीं है कि छोटे मोटे मामलों में मुकदमा दर्ज हो और दूसरा गर्मागर्मी में वहां भी मुकदमा दर्ज हो गया अपराध की सूत्रबद्धता बन गयी एक ही प्रवृत्ति है और आप बंद कर दीजिये। आपको कलेक्‍टर बारह दिन तक तो अपने अधिकार से रख लेगा, अपने प्रिविलेज से और बारह दिन बाद अगर अपील में जाने के बाद बोर्ड आपको छोड़े नहीं छोड़े वो उसकी मर्जी लेकिन बारह दिन तक कलेक्‍टर आपको रख लेगा। तीन दिन में आपको बतायेगा कि आपको क्‍यों डिटेन किया गया । संविधान आपको एक्‍ट बनाने की स्‍वतंत्रता देता है अनुच्‍छेद 22 और यह भी उल्‍लेखित करता है कि लोकहित में आप कोई जरूरी समझें उसको न बतायें ले‍किन आप बंद किये जाने वाले व्‍यक्ति को कारण भी नहीं बतायें तीन दिन तक। ये जो एक्‍ट लाया जा रहा है मैं आज आपके माध्‍यम से राजस्‍थान के माननीय गृह मंत्री जी से कहना चाहता हूं  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय गृह मंत्री जी पिछली सरकार राजनीतिक मंसूबों की पूर्ति करके राजनीतिक दुराग्रह के आधार पर इस एक्‍ट को लाना चाहती थी लेकिन नैतिकता के आधार पर चर्चा के बाद वो भी इसको लाने का साहस नहीं जुटा पायी। क्‍यों ठीकरा आप अपने माथे पर ले रहे हो? आपकी राजस्‍थान में एक साख है गरीब के प्रति दर्द की पहली धार आपके मन में लोगों ने देखी है। राजस्‍थान में गुलाबंचद कटारिया राजस्‍थान के गृह मंत्री की अपनी एक साख है यह सदन आपका आदर करता है लेकिन एक्‍ट को देखने के बाद ऐसा लगता है कि या तो आप ब्‍यूरोक्रेट से प्रभावित हो गये या कहीं ब्‍यूरोक्रेट्स की भाषा ने आपको प्रभावित कर दिया यह आपने सीख ली।  अगर इन भस्‍मासुरों को आप कड़ा दोगे, भोले भण्‍डारी मत बनो भोले भण्‍डारी बनकर भस्‍मी कड़ा हाथ में दोगे तो परिणाम आपने देखा है बीकानेर में पत्रकारों के साथ मारपीट हुई आपके हुक्‍मनामे के बाद मुकदमा दर्ज नहीं हुआ क्‍यों फिर भस्‍मी कड़ा देकर के आप इनको ताकतवर बनाना चाहते हो? ये बहुत सारी गंभीर विसंगतियां इस एक्‍ट में, इस एक्‍ट की मंशा इसको लाने के पीछे माननीय गृह मंत्री जी आपकी पवित्र हो सकती है लेकिन इस एक्‍ट का उल्‍लेख इस एक्‍ट की व्‍याख्‍या जो ताकत का कड़ा भस्‍मी कड़ा हाथ में लेकर बैठने वाले व्‍यक्ति किस रूप में लेंगे इसकी कल्‍पना आपके पास में होनी चाहिए। चूंकि आपने उसके दायरे को इतना व्‍यापक बना दिया, इतना बड़ा बना दिया कि आईपीसी के चैप्‍टर 16 और 17 की 299 से लेकर और 468 तक की सारी धारा के अपराध, रोडवेज के ड्राइवर से भी कलेक्‍टर साहब की नाराजगी होगी उनकी फैमिली को अगर कहीं उसने ठीक वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं दिया उनके किसी मिलने वाले को, दो एक्‍सीडेंट हो गये तो यूनूस खान जी तो सस्‍पेंड नहीं करेंगे लेकिन कलेक्‍टर साहब उसको चाहेंगे तो एक साल के लिए जेल में डाल देंगे चूंकि उसने 337  या 338 उसका एक्‍सीडेंट का मुकदमा कारित कर दिया, दो जानें ले लीं। यह  इसमें स्‍पष्‍ट रूप से उल्‍लेख होना चाहिए माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ..।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): ये बहुत गंभीर कानून बन रहा है आप कहेंगे तो मैं नहीं बोलूंगा लेकिन इस कानून के जो प्रभाव समाज में आने वाले हैं इस कानून की शक्तियों का जिस प्रकार का दुरुपयोग राजनीतिक मंशा के आधार पर होने वाला है उसकी कल्‍पना हमारे मन में होनी चाहिए और यह विचार करने की आवश्‍यकता है। ऐसा करते समय हम क्‍या कर रहे हैं ।

श्री उपाध्‍यक्ष: समाप्‍त कीजिये। कंक्‍लूड कीजिये।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट का समय लूंगा। आपको लगता है कि आप न्‍याय देने के लिए यह कानून बना रहे हो आपको लगता है कि आपने जो कानून बनाया है इस कानून के तहत जो भी अधिकारी इसकी पालना करेगा वो समाज के साथ न्‍याय करेगा तो फिर आप इस क्‍लॉज में जो धारा 17 है इसमें सद्भावनापूर्ण की गई कार्यवाही के प्रति किसी अधिकारी के खिलाफ कोई अपील नहीं होगी दूसरी कोई कार्यवाही नहीं होगी यह क्‍लॉज क्‍यों डाल रहे हो? आपने जब म्‍युनिसिपल एक्‍ट के अन्‍दर, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, म्‍युनिसिपल एक्‍ट की धारा ...। मैं निवेदन करना चाहता हूं म्‍युनिसिपल एक्‍ट और जेडीए एक्‍ट में और आपने यूआईटी एक्‍ट में प्राविजन कर दिया कि जिस अधिकारी को आप कोई कृत्‍य कारित करने के लिए रिलाएबल समझते हो, जिम्‍मेदारी दी है और उसने अपने काम में नेग्‍लीजेंसी बरती है तो उसके खिलाफ कार्यवाही होगी उसने सरकारी कर्त्‍तव्‍य का दायित्‍व जिस स्‍पेसिफिक काम के लिए लगाया है, पूरा नहीं किया तो फिर कार्यवाही होगी। क्‍यों नहीं इस सैक्‍सन 17 में ये प्राविजन करें कि अगर आपने किसी भी व्‍यक्ति के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण कार्यवाही की है और ऐसा पाया जाता है कि इंटेंसनली आपने कार्यवाही की है तो कार्यवाही कारित करने वाला अधिकारी पेनेलाइज होगा। आप अंग्रेजों के जमाने का कानून रखना चाहते हो । सारे ब्‍यूरोक्रेट्स जनता के ऊपर किस प्रकार से हावी हैं। मैं आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं कि जब यह एक्‍ट ड्राफ्ट हुआ था माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि शायद मुझसे पहले आप इसका विरोध करते लेकिन प्रवर समिति में हटा दिया कि इसमें 91 के तहत जो राजस्‍थान का किसान जिसको कई बार कलेक्‍टर और एसडीएम बेचारे को तीन-तीन महीने की सज़ा देते हैं जिनसे लाखों रुपये राजस्‍थान के किसान से अब तक वसूले जा चुके हैं उसको डिटेन करने की पॉवर भी देने जा रहे थे लेकिन प्रवर समिति में आपने हटा दिया । बहुत बड़ी कृपा राजस्‍थान के किसान पर की है मैं आपका आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं लेकिन माननीय गृह मंत्री महोदय मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि आप संविधान के अनुच्‍छेद 20 का वायलेशन नहीं करें एक्‍ट बनाकर। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, दो मुकदमों के आधार पर गुजरात में किया, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं आपके माध्‍यम से एक मुकदमे में सज़ा हो गयी एक चल रहा है दो मुकदमों को आधार बना रहे हो । आपका अनुच्‍छेद 20 और आईपीसी की धारा 300 यह कहती है कि न तो दो बार विचारण होगा न दो बार एक अपराध के लिए सज़ा होगी एक बार तो दोष सिद्ध होकर उसने सज़ा पा ली । दुबारा आप एक साल की सज़ा ठोक रहे हो एक राठौड़ी का कानून लगाकर उसके माथे पर। यह जो परम्‍पराएं जिस प्रकार के कानून और इनके इंटेंशन और इनके रिप्रगेशंस जो समाज के सामने आने वाले हैं वो हम सब लोगों को गंभीरता पूर्वक विचार करके पारित करने की आवश्‍यकता है। मैं तो यह कहना चाहता हूं लेकिन चूंकि मैं सत्‍ता पक्ष का सदस्‍य हूं और व्हिप से बंधा हूं इसलिए उपाध्‍यक्ष महोदय, जनमत जानने के मेरे उस प्रस्‍ताव को वापस लेने की इजाजत चाहता हूं।  बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री हेमराज मीणा।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो विधेयक माननीय गृह मंत्री जी लेकर आये हैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान समाज विरोधी  क्रियाकलाप निवारण विधेयक, 2006 जो लेकर आये हैं मुझे तो कहना यह था कि सरकार ने इतने कानून बना रखे हैं लेकिन उन कानूनों से काम नहीं चल रहा है हमारा? 107,151 का कानून है 107, 117 का कानून है यदि पुलिस कार्यवाही करना चाहे तो वो इतना बड़ा कानून है कि दुबारा आदमी उस अपराध को करने की हिम्‍मत नहीं करता। आज कौनसा एक्‍ट बना हुआ नहीं है आप देख रहे हैं राष्‍ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 जिसमें मीसा में बंद करते हैं इमरजेंसी में काला कानून बना था मीसा एक्‍ट लागू हुआ । उसमें कई राजनीतिक नेताओं को बंद कर दिया जिनकी कोई सुनवाई नहीं हुई 19-19 महीनों तक लोग जेल में बंद रहे मैं खुद भी 11 महीने तक जेल में बंद रहा था। जब जनता पार्टी की सरकार आयी तो उस कानून को सरकार ने विदड्रा किया फिर 1980 में वो दुबारा से इसको मीसा एक्‍ट के अन्‍तर्गत लाये। दुबारा कानून बनाया। एनडीपीएस एक्‍ट का कानून बना हुआ है आज उस एक्‍ट में कोई गिरफ्तार होता है तो उसमें कोई जमानत नहीं है साल-छ: महीने तक बंद रहता है उससे भी क्‍या बड़ा सख्‍त कानून होगा यह । आज शराबखोर के लिए कानून बना हुआ है । चार बातें जो इन्‍होंने कहीं है शराब की चोरबाजारी, मादकदृव्‍य अनैतिक व्‍यापार करने वाले, भूमाफिया गिरोह ऐसे लोगों के खिलाफ यह कार्यवाही होगी। मैं कहना चाहूंगा उपाध्‍यक्ष महोदय, क्‍या इसमें राजनीतिक लोगों के खिलाफ काम नहीं होगा? हमने जो कोर्ट का जो कानून है उस कानून को हम कलेक्‍टर के हाथ में दे रहे हैं। आज 302 का मूलजिम है 307 का मुलजिम है लेकिन उसके बाद भी उसकी सुनवाई डिस्ट्रिक्‍ट कोर्ट में होगी उसके बाद में भी डिस्ट्रिक्‍ट कोर्ट से पार नहीं पड़ेगी तो वह आगे भी जाएगा उसको न्‍याय मिलेगा लेकिन आज इसके लिए सबसे बड़ा एम्‍पॉवरफुल कलेक्‍टर बारह दिन तक तो गिरफ्तार करने के बाद उसकी कोई सुनवाई नहीं है उसके बाद में ज्‍यूडिशियरी के नाम से तीन सदस्‍यों की एक कमेटी अपाइंट करेंगे वो उसकी सुनवाई करेगी लेकिन उपाध्‍यक्ष महोदय, इतने सारे कानून बने हुए हैं। मैं तो गृह मंत्री जी को निवेदन करना चाहूंगा कि जितने कानून बने हुए हैं उन कानूनों को प्रभावी रूप से पुलिस लागू करे और पुलिस के नीचे लेवल पर कोई न कोई ऐसा परिवर्तन करें कि समाज को उसका लाभ मिले और समाज विरोधी जितनी गतिविधियां होती है यह कानून है उसके लिए पर्याप्‍त है  लेकिन प्रवर स‍मिति ने यह बात रखी है और प्रवर समिति ने बनाकर के बिल भी दे दिया। उपाध्‍यक्ष महोदय, आज चारों तरफ वातावरण ऐसा है अपन देखते हैं कि ब्‍यूरोक्रेसी इतनी हावी है कि मंत्री जी कोई आदेश देते हैं तो कोई सेकेट्री मानने के लिए तैयार नहीं है कोई एमएलए जाता है वो कल इस बात पर डिस्‍कस हो गया, वो परवाह नहीं करते कि एमएलए कौन है लेकिन आज हम ब्‍यूरोक्रेसी को फिर मजबूत कर रहे हैं कलेक्‍टर के हाथ फिर मजबूत कर रहे हैं चाहे जिसको पकड़कर धर देगा।

कैलाश   6.10.2006  14.50  (1)  2h

 

जिसका राज होगा उसका सिक्‍का चलेगा । मेरे से पहले वाले वक्‍ता ने भी बात कही कि बिजली के लिये किसान प्रदर्शन करता है, एक मुकदमा बनेगा, दो बनेंगे, तीन बनेंगे, उपाध्‍यक्ष महोदय, राजनीति में काम करते हैं जब कोई असहनीय बात होती है जब किसी भी प्रकार से कोई ज्‍यादती होती है तो राजनीतिक लोग उसके खिलाफ आंदोलन करते हैं, सरकार के खिलाफ आंदोलन करते हैं । एक मुकदमा बना, दो बने, तीन बने, कई सारे मुकदमें बनते हैं । सरकार ने यह भी पास किया कि अगर आप नेशनल हाई वे जाम करोगे तो आपके खिलाफ सरकार मुकदमा दर्ज करेगी। तो जनहित के मामले में मुद्दे उठेंगे लेकिन उसका राजनीतिक नुकसान यह होगा कि जो कलेक्‍टर और जो रूलिंग पार्टी है वह लोग उसका नाजायज फायदा उठायेंगे । जैसा मीसा में हुआ था, जैसा 1975-76 में आपातकाल के समय हुआ था राष्‍ट्रीय सुरक्षा अधिनियम बनाकर सारे राजनेताओं को जेल में डाल दिया था । इसलिए मेरा आग्रह है कि इसमें कलेक्‍टर को इतना पावरफुल न करे, डिस्ट्रिक्‍ट मजिस्‍ट्रेट को इतना पावरफुल न करें ताकि उसकी सुनवाई ही कोई न कर सके । जितने कानून बने हुए हैं उन कानून के आधार पर ही हम जनता को, समाज को सुरक्षा प्रदान करें और इस विधेयक को जो मैंने एक माह के लिये जनमत जानने हेतु परिचालित करने का प्रस्‍ताव दिया है जैसे मेरे से पूर्व के वक्‍ता ने कहा मैं भी रूलिंग पार्टी से बंधा हुआ हूं, व्हिप से बंधा हुआ हूं तो मैं अपने इस प्रस्‍ताव को वापस लेता हूं और आपसे आग्रह करता हूं कि आप इसे पास करें ।

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि प्रवर समिति द्वारा प्रतिवेदित राजस्‍थान समाज- विरोधी क्रियाकलाप निवारण विधेयक, 2006 को जनमत जानने हेतु परिचालित किया जाये ?

(अस्‍वीकृत)

विधेयक को जनमत जानने हेतु परिचालित करने का संशोधन प्रस्‍ताव अस्‍वीकार किया गया ।

प्रश्‍न यह है कि प्रवर समिति द्वारा प्रतिवेदित राजस्‍थान समाज- विरोधी क्रियाकलाप निवारण विधेयक, 2006 को विचारार्थ लिया जाये ?

(स्‍वीकृत)

विधेयक को विचारार्थ लिया गया ।

खण्‍डश: विचार

खण्‍ड 2 से 18 कोई संशोधन नहीं ।

प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 2 से 18 प्रवर समिति द्वारा प्रतिवेदित रूप में स्‍वीकार किये जाये ?

(स्‍वीकृत)

खण्‍ड 2 से 18 स्‍वीकार किये गये ।

खण्‍ड 1 अधिनियमन सूत्र, नाम आदि कोई संशोधन नहीं ।

प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 1 अधिनियमन सूत्र, नाम आदि प्रवर समिति द्वारा प्रतिवेदित रूप में स्‍वीकार किये जाये ?

(स्‍वीकृत)

खण्‍ड एक अधिनियमन सूत्र, नाम आदि स्‍वीकार किये गये ।

श्री गुलाबचंद कटारिया, प्रभारी मंत्री प्रस्‍ताव करेंगे कि राजस्‍थान समाज- विरोधी क्रियाकलाप निवारण विधेयक, 2006 को पारि‍त किया जाये ।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से  प्रस्‍ताव करता हूं कि प्रवर समिति द्वारा प्रतिवेदित राजस्‍थान समाज- विरोधी क्रियाकलाप निवारण विधेयक, 2006 को पारित किया जाये ।

उपाध्‍यक्ष महोदय, जिस प्रकार से माननीय सदस्‍यों ने इस कानून के प्रति अपनी शंका जाहिर की मैं सोचता हूं कि हमारा पहला उद्देश्‍य है कि प्रदेश की कानून व्‍यवस्‍था ठीक रहे और ऐसी कुछ गेंग बन गई हैं जिसके कारण समाज को आज सबसे ज्‍यादा तकलीफ बर्दाश्‍त करनी पड रही है । अगर राजस्‍थान में इस साल हुए अपराधों को अगर अपन सूचीबद्ध करें तो अधिकांश मर्डर तो कोई न कोई शराब गेंग ने एक गेंग ने दूसरे गेंग का किया है । आज अगर जयुपर में जितने मुकदमें दर्ज होते हैं उनमें अधिकांश मुकदमों का हिसाब लगाये तो प्रोपर्टी के एक प्‍लाट को किसी ने चार बार बेच दिया और चार लोगों को बेच दिया और एक तरह से सरकारी भूमि पर कब्‍जा कर के करोड़पति बनने का एक व्‍यवसाय जो चलाया है वह भी हम सब लोगों के सामने है । इसी प्रकार से आजकल इन्‍फोरमेशन टैक्‍नोलोजी के माध्‍यम से अपराध होते चले जा रहे हैं । इसी तरह के बाकी जिस प्रकार के अपराध हमने इसमें लिये हैं हमारी मंशा यह है कि हम किसी भी प्रकार से इसमें सब प्रकार के आयेंगे। कारण क्‍या है कि हमने इसमें कोई जल्‍दी नहीं की है और न हमारी ऐसी मंशा थी कि इस कानून को पास कर के अपने हाथ में कोई अधिकार लेने के इच्‍छुक हों, ऐसी कोई मंशा नहीं है । प्रदेश की कानून व्‍यवस्‍था अच्‍छी रहे और इस प्रकार की जो गेंगवार प्रारम्‍भ हो गई है और जो निरन्‍तर अपराध पर अपराध करते जा रहे हैं ऐसे लोगों को किस प्रकार से रोका जाये यह मंशा थी और इस कानून को बनाने की प्रक्रिया हमने कोई आज या काल शुरू नहीं की । पिछली सरकार में जब माननीय भैरोंसिंह जी शेखावत मुख्‍य मंत्री थे तब  8.3.96 को मंत्री मंडल समिति को यह ज्ञापन सौंपा गया था उन्‍होंने इस का प्रारूप बनाया था । उसके बाद पिछली गवर्नमेंट ने भी 21.8.02 को मंत्री मंडल के ज्ञापन द्वारा प्रस्‍ताव अनुमोदन करने के उपरान्‍त मंत्री मंडल की समिति गठन करने का निर्णय किया गया और उसे केन्‍द्र सरकार को प्रेषित किये जाने का निर्णय किया । उसके बाद 4.3.02 को विधेयक के प्रारूप का अनुमोदन किया गया और विधान सभा के चालू सत्र में अनुमति प्रदान की गई । उसके बाद 18.8.03 को भारत सरकार के गृह मंत्रालय से अनापत्ति पत्र प्राप्‍त किया । उसके बाद 4.9.03 को मंत्री मंडल का यह जो ज्ञापन है वह अध्‍यादेश लाने का निर्णय किया । यानि हम कम से कम अध्‍यादेश तो नहीं लाये । हम तो जब प्रवर समिति में लेकर आये हमने सोचा कि इसमें कहीं कोई कमी न रह जाये और कोई इसका दुरुपयोग न करे, हमारी मंशा है अपराधियों को किस प्रकार से कानून के शिकंजे में ला सके, हमारी किसी व्‍यक्ति के प्रति, किसी के प्रति कोई नाराजगी नहीं है कि हम उसका दुरुपयोग करना चाहते हैं । इसलिए पिछली सरकार तो इसे अध्‍यादेश के रूप में लाई । लेकिन आपने देखा कि चूंकि विधान सभा का सत्र समाप्‍त हु, उसको पेश नहीं किया गया वह अपने आप लेप्‍स हो गया । यही नहीं हमने महामहिम राष्‍ट्रपति को क्‍योंकि यह समवर्ती सूची में है इसके कारण उनसे भी अनुमति ली है और 15.10.03 को उनकी अनुमति ली । उसके बाद 16.10.03 को राष्‍ट्रपति की आज्ञा हमको प्राप्‍त हुई । उसके बाद 23.9.05 को मंत्री मंडल का ज्ञापन प्रस्‍तुत किया गया । 24.1.06 को आगामी विधान सभा सत्र के लिये यह निर्णय किया उसके बाद आपने देखा कि विधान सभा में 2 मार्च को लेकर आये । केवल पुर:स्‍थापित किया, उसके बाद पूरा समय देने के बाद 4.7 को जब अंतिम दिन था तब आप सब लोगों की राय से, सबकी सहमति से यह कहा कि इस कानून को परफेक्‍ट बनाने के लिये प्रवर समिति को दिया जाये और प्रवर समिति में मैं सोचता हूं इस सदन के विभिन्‍न दलों के माननीय सदस्‍यों ने भाग लिया और जिनको कानून का ज्ञान है उन्‍होंने अच्‍छी प्रकार से इसको देखने के बाद प्रवर समिति की चार मीटिंग होने के बाद यह प्रवर समिति से एप्रुव होकर जो प्रुव आपके पास आया है उसमें सबसे बडी जो शंका है आपको ...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): गृह मंत्री जी आप एक पाइंट का जवाब और दे देना, एक साल के लिये निरुद्ध आप इसको कर रहे हैं, एक साल के लिये आप इसको न्‍यायिक कार्यवाही के लिये भी नहीं जाने देंग, यह परफेक्‍ट कानून है क्‍या ।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं सोचता हूं दोनों में थोडा अंतर कीजिए । जो अपराध आईपीसी के होते हैं उसमें सज़ा का प्रावधान है इसलिए इसको निरोध करने का मतलब इसमें प्रिवेंशन यानि घटना घटे उसके पहले, इसके लिये सारी कमेटी ने बहुत विचार किया और विचार कर के कहा कि इस में किस प्रकार के लोग आये.. (व्‍यवधान) इसमें पहले यह नहीं था कि इसमें हैबिचुअल आफेंडर है या नहीं, पहले तो सामान्‍य अपराधी भी इस श्रेणी में आता था । समिति ने विचार कर के कहा कि नहीं, जो हैबिचुअल आफेंडर हैं इस प्रकार की कार्यवाहीं में, जो बार बार इस प्रकार की घटना करता ह, रिपीटली करता है उसको ही इसमें लिया जाये । इसका ध्‍यान रखकर इसको इस पर केन्‍द्रीत किया है ।

 

विष्‍णु/यू.एस./6.10.06. 15.00.2j

 

“Habitual, with all its grammatical variations, includes acts or omissions committed repeatedly, persistently and frequently having a thread of continuity stringing together similar repeated acts or omissions but shall not include isolated, individual and similar acts or omissions.”

इसमें हमने उन लोगों को बाहर रखा जो आइसोलेटेड हैं। अकेला है। कभी किसी ने अपराध किया, उसको जानबूझकर यह शब्‍द डालकर और जो निरन्‍तरी, रिपीटेडली बारबार जिस अपराध को करता है, उन्‍हीं लोगों को इसमें रखा है तो इस कानून का जो उस प्रवर समिति में सबसे बड़ी जो उपलब्धि रही। सबकी यह जो शंकाएं थीं, इस शंका को निकालने की दृष्टि से इस लाइन को डालकर हैबिचुअली आफेण्‍डर को ही जो बारबार इस प्रकार का, एक बार एक्‍सीडेंट हो गया या यह हो गया, पता नहीं अब आपने इसमें सोचा है 16, 17 को इसमें जोड़ा है, निश्चित रूप से लेकिन इस प्रकार के अपराधी जो जानबूझकर करते हैं और उसके साथ-साथ भी केवल करने से नहीं है, जब तक वे पब्लिक आर्डर को इफेक्‍ट नहीं करे तब तक इस कानून का कोई अर्थ नहीं, इसके साथ पब्लिक आर्डर जुड़ा हुआ है। जहां जनता में असंतोष पैदा हो, उसकी एक्‍टीविटीज से तब जाकर वह कानून का मतलब निकलता है अन्‍यथा केवल यह अपराध कर देने से भी उसको इसमें किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। जब तक कि जो पब्लिक आर्डर, जिसको हम कहते हैं, जनता को उद्वेलित करके, आन्‍दोलित करे या कोई अपराध या कोई इस प्रकार की स्थिति लाकर खड़ी करे उसके लिए ही इसको हमने रखने का प्रयास किया है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय गृह मंत्रीजी वह सशंकित है, उनके साथ जिस किस्‍म का व्‍यवहार किया जा रहा है तो कहीं गलत-सलत तो नहीं हो जाएगा। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं उनको आश्‍वस्‍त करता हूं कि मैं ही नहीं, मेरे जाने के बाद भी इस पद पर चाहे कोई भी व्‍यक्ति रहेगा, कोई भी सरकार आयेगी इसमें कोहीं भी इसका दुरुपयोग करने की उसको गुंजाइश नहीं छोड़ी है क्‍योंकि प्रवर समिति में इतना ज्‍यादा इसको एक-एक बिन्‍दु पर डिस्‍कस होने के कारण से मैं इसमें कोई लम्‍बी इतनी नहीं है, अब आपने एक शंका जाहिर की कि हमारे यहां पर ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: एक नीचे गिर गया कागज।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून है हमारे पास में पर यह राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून में यह सारी चीजें इसमें नहीं होती केवल उसमें राष्‍ट्रीय सुरक्षा से या राज्‍य की  किसी सुरक्षा से संबंधित मामले आते हैं। उतने तक ही उसमें कवर होते हैं और उसमें नहीं होते हैं। इसके अन्‍दर हमने उन सारे अपराधियों को लेने का प्रयास किया। जो इस प्रकार की गेंगवार बनाकर सम्‍पूर्ण राजस्‍थान की कानून-व्‍यवस्‍था को बिगाड़ने का एक अभ्‍यास ही बना दिया। जैसे वाइल्‍ड लाइफ है, अब लगातार एक के बाद एक वाइल्‍ड लाइफ की, वह मारता ही जा रहा है, मुक़दमे उस पर कई दर्ज होते जा रहे हैं उसके बाद भी जब कभी कोर्ट में पेश करते हैं तो कोर्ट में चूंकि कहीं न कहीं उसकी जमानत होकर बाहर आ जाते हैं इसको रोकने की दृष्टि से कि कम से कम उसको एक साल तक रहे। वह भी हमने ऐसा नहीं है, पहले हमने कहा कि सात दिन तक हम उसको डिटेन करेंगे। कमेटी की राय हुई कि सात दिन बहुत ज्‍यादा होता है, हमने उसको तीन दिन किया। बाकी स्‍टेट से भी इसकी तुलना करें कि यही कानून जो महाराष्‍ट्र में लागू है, गुजरात में है, तमिलनाड़ु में है, उनके अन्‍दर कम से कम सात दिन और पाँच दिन दिया। हमारी कमेटी ने विचार किया कि नहीं, कम से कम जो कलक्‍टर अपनी रिपोर्ट देता है वह तीन दिन के अन्‍दर वह सरकार के पास चली जाएगी और उस पर सरकार विचार करेगी। सरकार उन सब सवालों को पूछेगी जिसके आधार पर कलक्‍टर ने अपनी राय दी और उसके बाद भी सरकार को भी केवल 12 दिन इस पर विचार करने का अधिकार है। इससे ज्‍यादा नहीं है। उसके बाद तीन जजों की, पहले यह था कि हम, जज जो हैं किस प्रकार से बनायें तो हमने दोनों, जो सीटिंग जज हैं वह भी हो सकते हैं और जो रिटायर जज हैं, वे भी हो सकते हैं। हमने किसी व्‍यक्ति को नहीं डाला या हमने यह नहीं कहा कि हम कोई राजनीतिक अपाइंटमैंट करके किसी को रखकर इस, हमारा गठन जो मकसद है वह यह नहीं था, हम यह चाहते हैं कि यह परफेक्‍ट बने और इसमें ठीक प्रकार से हो। उसमें भी उनको समय दिया कि उनको पचास दिन से ज्‍यादा समय नहीं है। जिस प्रकार का उनको विचार करना है, पचास दिन में उसका उनको फैसला करना है। इसके बाद भी अगर सरकार के पास फिर से कोई रिप्रजेंटेशन आये और अगर उसे लगे कि इसमें कहीं कमी रही है तो उस पर पुनर्विचार करने का भी अधिकार है। ऐसा नहीं है, उसको बीच में भी छोड़ने का अधिकार है। उसको बीच में भी रिलीज किया जा सकता है तो मैं सोचता हूं कि जहां तक सम्‍भव हुआ, केवल मंशा जो इसके पीछे थी वह यही थी कि इस प्रकार के अपराध निरन्‍तर बढ़ रहे हैं और एक ऐसी गेंगवार तैयार हो रही है, जिसको आप, मैं अपने फील्‍ड में हमेशा इस बात को देख रहे हैं और कोर्ट में कई बार तो आदमी इतनी बार अपराध करने के बाद भी जब न्‍यायालय में जाता है तो दो दिन नहीं तो चार दिन बाद जमानत होकर बाहर आ जाता है। हम चाहते हैं कि इस प्रकार के समाज विरोधी जो लोग हैं उनको कम से कम यह अहसास तो हो कि इस कानून के द्वारा हम उसको कस तो सकें। इस बात को ध्‍यान में रखकर किया है। मैं सोचता हूं कि कोटा से, मण्‍डी से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो शंका जाहिर की है, मैं सोचता हूं कि इस प्रकार का कोई है नहीं और हमने इसको परफेक्‍टली देखा है और उसके बाद भी अगर आपको कहीं लगता है कि किसी प्रकार की कमी है तो मैं सोचता हूं कि अब जैसे आप कह दें आप कि 302 के मुकदमे में 24 घंटे में होता है, तो 302 का मुकदमा एक सज़ा की प्रक्रिया वाला मुकदमा है, यह तो पहले से ही डिटेंशन करने वाला मुकदमा है। दोनों में अन्‍तर है और इस कारण से हम कोई उसमें इस प्रकार से नहीं है। अब इसमें तीन हाई कोर्ट के जज जो हैं, उसमें वकील पैरवी नहीं कर सकेगा। मैं सोचता हूं कि तीन हाई कोर्ट के जज लगाये इसलिए है कि इन लोगों के सामने यह अपने केस को अगर ठीक तरह से फीड करेगा और उसमें अपने कोई ऐसे तथ्‍य देगा तो पचास दिन में उसका फैसला हो जाएगा। निरंकुश शासन हो जाएगा। मैं सोचता हूं कि क्‍या निरंकुश होना है। किसी को भी इसमें से क्‍या चीज मिलने वाली है? अगर इस प्रकार के जो बारबार अपराध करते हैं। बारबार अपराध करते हैं उन लोगों को भी अगर हम कानून के सीख़चे में नहीं डालकर उसको बचाने के लिए उनको हम एक साल अगर अन्‍दर नहीं रख देते हैं तो उसमें से मैं सोचता हूं कि किसी प्रकार का क्‍या नुकसान होने वाला है। मेरे को तो समझ में नहीं आयी। आपके मन में जो शंका है कि राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून का मैंने कह दिया।  अब नारकोटिक्‍स एक्‍ट है। यह तो नारकोटिक्‍स एक्‍ट तो सज़ा देता है। यह सज़ा नहीं देता है  लेकिन जो लगातार एक के बाद एक अफीम चोरी का काम ही करता है। एक केस हो गया, दो केस हो गया, सज़ा भुगत कर भी आ गया फिर उसके बाद उसी धंधे में लग जाता है, उसको कम से कम वह नहीं लगे, उसको हम रोक सकें कम से कम तो उसे यह तो लगेगा कि मैं कानून के दायरे में हूं और इस कारण से हमने उसको किया है और यह जो आपके मन में है कि किसी प्रकार से इसका दुरुपयोग होगा, कोई दुरुपयोग की गुंजाइश नहीं है। हम सब लोगों ने मिलकर इसके प्रत्‍येक बिन्‍दु को ठीक प्रकार से और फिर जो आपने बताया था लोक व्‍यवस्‍था का मतलब है, इसका यही अर्थ होगा जो उसे धारा 3 की उप धारा 4 के अधीन समाहित किया है। अब इसमें जो 4 है-

(4) इस धारा के प्रयोजन के लिए, किसी व्‍यक्ति को 'लोक व्‍यवस्‍था बनाये रखने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली किसी भी रीति से कार्य करना तब समझा जायेगा जब ऐसा व्‍यक्ति चाहे किसी शराब के चोरबाजारिये के रूप में या खतरनाक व्‍यक्ति या औषधि अपराधी या अनैतिक-व्‍यापार अपराधी या सम्‍पत्ति हथियाने वाले के रूप में किन्‍हीं भी ऐसे क्रियाकलापों में लगा हो या लगने की तैयारी कर रहा हो जिनसे लोक व्‍यवस्‍था बनाये रखने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है या प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की सम्‍भावना है।'

हमने इसको पब्लिक आर्डर को बहुत अच्‍छी तरह से डिफाइंड किया है कि इस प्रकार की व्‍यवस्‍था जो है इससे पैदा होगी ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आपने फिर इस स्‍पष्‍टीकरण में लोक व्‍यवस्‍था शब्‍द यूज कर लिया। लोक व्‍यवस्‍था डिफाइंड कहां हुई इसमें ? मैंने यह कहा आपको कि लोक व्‍यवस्‍था डिफाइंड कहां हुई? लोक व्‍यवस्‍था शब्‍द फिर स्‍पष्‍टीकरण में यूज कर दिया। लोक व्‍यवस्‍था के लिए हो, लोक व्‍यवस्‍था क्‍या, वह तो डिफाइंड करते न एक्‍ट में आप। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मतलब यह है जो हमने दिया लोक व्‍यवस्‍था में यही जो सेक्‍शन 3 का 4 भाग दिया है, इसमें हमने इसको क्लियर किया है कि लोक व्‍यवस्‍था का मतलब क्‍या है। इस तरह से लोक व्‍यवस्‍था का जो है, हमारी डिस्‍टर्ब हो सकती है तो मेरे हिसाब से और इसमें हमने हर कदम पर, जहां-जहां पर भी हमको लगता था कि इसमें किसी प्रकार का डिले है, जैसे उसमें पचास दिन की जगह 7 वीक लिखा तो हमने इसमें बिलकुल क्यिलरकट किया पचास दिन, यानि समय को भी उसी तरह से घटाया, अधिक से अधिक वह सरकार के पास 12 दिन से ज्‍यादा नहीं रहेगा।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): माननीय गृह मंत्रीजी, लोक व्‍यवस्‍था के भंग होने का जहां तक प्रश्‍न है, राजनीतिक आन्‍दोलनों में भी लोक व्‍यवस्‍था भंग होती है। कल को जनता के लिए संघर्ष करना छोड़ दे लोग। आप इसमें डिफाइंड करिये कि राजनीतिक आन्‍दोलनों के दौरान लगने वाले किसी भी प्रकार के मुकदमे को इसमें कवर नहीं किया जाएगा।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): इसीलिए हैबिचुअल कहा है, हैबिचुअल कहा है। हैबिचुअल कहा है। बारबार ... (व्‍यवधान)

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): एक आन्‍दोलन में जेलें भरनी पड़ती हैं। लगातार महीनों-महीनों तक आन्‍दोलन चलते हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मान लें और हम यह हैबिचुअल शब्‍द नहीं डालते तो आपकी मन की शंका होना स्‍वाभाविक है। हैबिचुअल डालना और इस प्रकार के अपराध में सम्मिलित रहना इन दो बातों को स्‍पष्‍ट करने के पीछे जिस कमेटी ने किसी एक विषय पर अपने को केन्द्रित किया कि किसी अनजाने आदमी के साथ कोई किसी को गलत समझकर किसी के साथ इस कानून का दुरुपयोग नहीं करें। इसको ध्‍यान में रखकर ही इस परिभाषा को जो सुप्रीम कोर्ट ने भी दी है ... (व्‍यवधान)

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): राजनीतिक कार्यकर्ता बारबार जनता के लिए संघर्ष करता है। उसको कोई कानून नहीं रोक सकता। आप बतायें कि उसको भी बंद करेंगे फिर। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): ऐसा है कि कानून हम ही बनाते हैं। कानून को बदलने का काम भी हम ही करते हैं। अगर आपको कोई लगता है कि इस कानून द्वारा राजनीतिक लोगों के साथ होगा तो हम लोग यहां पर बैठे हैं न, क्‍या इसको बदलने के लिए, हम नहीं बदल सकते हैं? मैं सोचता हूं कि ऐसा कुछ भी नहीं है, यह आपके मन में एक ... (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): 1974-75 में ईमरजैंसी में दो-दो साल और 18-18 महीने तक आप जेल में रहे और उसके बाद कानून बदला है  राज बदला जब, नहीं तो मीसा बदलता थोड़े ही। मीसा बदलता क्‍या?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आप क्‍या चाहते हो कि आप अफीम चोरते रहोगे और बारबार करते रहोगे और मुकदमे दर्ज होंगे और हम आपको छोड़ते रहेंगे?

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): लो हेमराजजी।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आप इसी तरह जमीन लोगों की हथियाते रहेंगे और हम आपको छोड़ते रहेंगे, यह जो इसमें है यह ... (व्‍यवधान)

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): माननीय गृह मंत्रीजी, आप जो कानून बना रहे हो ... (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय गृह मंत्रीजी, इसमें तो कानून अपना काम कर रहा है, जो जमीन का ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मेरे हिसाब से सही है। ... (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): जो जमीन पर कब्‍जा कर रहा है उसमें कानून काम कर रहा है। जो अफीम चोर रहा है उसमें भी कानून काम कर रहा है।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): आप सब लोगों की बात ... (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): जो अपराध कर रहा है उसमें भी कानून काम कर रहा है। ... (व्‍यवधान) जो माफिया गिरोह काम कर रहा है, उसमें भी कानून काम कर रहा है।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): आई.पी.सी. की 13,16 और 17, कुछ धाराएं हैं ... (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): उसके कानून बने हुए हैं। फिर इस कानून की आवश्‍यकता क्‍यों?

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): राजनीतिक इसमें इन्‍वॉल्‍व नहीं होंगे, यह कह दीजिए।

 

शिव/चौहान/15.10/2k/6.10.2006

 

श्री हेमराज मीणा: फिर इसके लिये इस कानून की आवश्‍यकता क्‍यों हो गयी? (व्‍यवधान) .......

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया: एक संदेह और जो आपको था ...(व्‍यवधान) .......

श्री संयम लोढ़ा: गृह मंत्रीजी, हमें यह समझ में नहीं आ रहा है कि एडवोकेट को आप अलाऊ नहीं करें सलाहकार मण्‍डल के सामने और ...(व्‍यवधान) .......

श्री हेमराज मीणा: यह प्रावधान रखने का क्‍या औचित्‍य है ? ...(व्‍यवधान) .......

श्री संयम लोढ़ा: आपको एडवोकेट अलाऊ करने में क्‍या कष्‍ट है ?

एक माननीय सदस्‍य: गृह मंत्रीजी, राजनैतिक लोग भी बार-बार अपराध करते हैं तो वह भी बंद होने चाहिये। ...(व्‍यवधान) .......

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया: बिलकुल होना चाहिये। ...(व्‍यवधान) ... एक और संदेह था कि चूंकि आपने इसमें जिला हैड क्‍वार्टर को ही इसमें लिया है ...(व्‍यवधान) ....

श्री हेमराज मीणा: गृह मंत्रीजी, यह अपनी सरकार के लिये काला कानून होगा...(व्‍यवधान) .... यह काला कानून होगा चाहे जिसको उठाकर बंद कर दोगे। ...(व्‍यवधान) .......

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया: यह कह रहे थे कि केवल जिला हैड क्‍वार्टर को ही इसमें क्‍यों शामिल किया ? ...(व्‍यवधान) ....... सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य का कहना था कि जिला हैड क्‍वार्टर को ही आपने इसमें क्‍यों लिया ? कमेटी का यह सोच था कि एक बार इसको जिला हैड क्‍वार्टर पर लागू करें कि इस कानून से कितना प्रभावी काम होगा, इसके बाद हम अपने क्षेत्रों को बढ़ा सकते हैं, लेकिन एक बार जो कम से कम जिला हैड क्‍वार्टर हैं, उसमें जान-बूझकर इसको सीमित किया कि इसको सारे प्रदेश में लागू न करके एक बार 31 जिलों में जो गैंगवार है, इसको हम इस कानून द्वारा कितना सक्षम रूप से रोक पायेंगे। उसके बाद जब लगेगा कि अब इस कानून का और फैलाव करने की आवश्‍यकता है तो इसके बाद किया जा सकता है।

श्री संयम लोढ़ा: माउंट आबू से ज्‍यादा कहीं प्रोपर्टी की वैल्‍यू है क्‍या ? माउंट आबू में लागू हो रहा है क्‍या? ...(व्‍यवधान) .......

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया: सवाल यह है कि माउंट आबू नहीं, अभी हमने केवल जिला किया है। ...(व्‍यवधान) .......

श्री संयम लोढ़ा : यह बिलकुल डिस्क्रिमिनेटरी है कि आप इसको सिरोही में लागू करो और माउंट आबू में नहीं करें। ...(व्‍यवधान) .......

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया: ऐसा है कि हमने कोई जगह देखकर नहीं किया। अभी इस कानून को किस रूप में कहां तक और कितने प्रभावी ढंग से हम इसको लागू कर पाते हैं, इसका क्‍या इम्‍पेक्‍ट आता है, अगर अपने को लगेगा तो इसका क्षेत्र बढ़ाया जायेगा।

श्री संयम लोढ़ा: आप तो जनता के विचार जान लो मेहरबानी करके ताकि यह...(व्‍यवधान) .......

श्री श्रवण कुमार: माननीय गृह मंत्रीजी, आप जो कह रहे हो, यह सही कह रहे हो।...(व्‍यवधान) .......

श्री हेमराज मीणा: आपका जो कानून है गृह मंत्रीजी, आपने 107, 151 का कानून भी आपकी पुलिस को प्रभावित करता है। पुलिस कितना प्रभावी ढंग से उस पर कार्यवाही करती है । कानून कुछ भी बना दो लेकिन प्रभावशाली एग्‍जीक्‍यूशन नहीं होगा तो आपका कानून क्‍या करेगा ? जिसने कानून बनाया उसका प्रभावशाली एग्‍जीक्‍यूशन नहीं है, प्रभावशाली एग्‍जीक्‍यूशन होना चाहिये ।...(व्‍यवधान) ....

श्री श्रवण कुमार : माननीय गृह मंत्रीजी, आप जो कर रहे हो यह न्‍यायप्रद है, मैं इसका समर्थन करता हूं और मैं कहता हूं ऐसे बदमाश लोगों को, ऐसे भू-माफिया और गुण्‍डों को सजा नहीं मिलेगी तो राजस्‍थान बिहार बन जायेगा। मैं आपको कहना चाहता हूं और आज जो राजस्‍थान की स्थिति बनी हुई है, वह केवल इसलिये बनी हुई है कि बदमाश लोगों को शह मिल रही है।...(व्‍यवधान) ....... काला कानून तो तब है जब उसको लागू नहीं करते हो। काला कानून तब बनता है जब उस पर इच्‍छा तो होती है, लेकिन इच्‍छा शक्त्ति नहीं होती । अगर राजस्‍थान के गृह मंत्री की इच्‍छा शक्त्ति होगी तो मैं कहता हूं बदमाश लोगों का, भू-माफिया लोगों का विनाश होगा। हरियाणा में चौटाला जी के समय में क्‍या हुआ था, बदमाशी होती थी और लोगों को लूटते थे और हुड्डा साहब के आते ही जो बदमाश लोग थे उनकी ऐसी हालत कर दी कि वह स्‍टेट छोड़कर चले गये। आज हरियाणा की हालत यह है कि बदमाश लोग यह बात भूल गये कि हरियाणा में रहना है क्‍या ? आप भी इसी इच्‍छा शक्ति को लागू करिये, हम भी आपके साथ हैं क्‍योंकि बदमाश लोगों को शरण नहीं मिलनी चाहिये। यह अभी कह रहे थे चुनाव में बदमाशी करेंगे। क‍हां जरूरत है बदमाशी करने की, बूथ कैप्‍चर करने की। अच्‍छा काम करिये जनता अपने आप वोट डालेगी। आप काम करते नहीं हो, पांच साल तो घूमते हो महलों में और उसके बाद वोट मांगने जाओ तो कौन वोट देगा आपको? आप बदमाशी करो, बूथ कैप्‍चर करना चाहते हो। आप इस कानून को लागू करवाइये और बदमाश लोगों को संरक्षण मत दीजिये। यह कोई तरीका नही है। कोई कानून बनता है उसका विरोध करना शुरू कर देते हैं । अच्‍छी बात यह है कानून भू-माफिया ...(व्‍यवधान) ...

श्री जीतमल : चौटाला जी के राज में हुआ क्‍या ? ...(व्‍यवधान)... क्‍या हुआ चौटाला जी के राज में ? ...(व्‍यवधान)...ऐसे नहीं ...(व्‍यवधान)... कैसे कह रहे हो...(व्‍यवधान)...हुड्डा जी के राज में नहीं हुआ, उनके राज में क्‍या हुआ ? ऐसे नहीं, यह ठीक नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा: हुड्डा के राज में वही हुआ जो वसुंधरा के राज में हो रहा है, जो चौटाला के राज में हो रहा था। ...(व्‍यवधान)...

श्री जीतमल: रहने दो ।...(व्‍यवधान)...

श्री दांताराम गुर्जर: गहलोत के राज में जो हुआ, वह हो रहा है। ...(व्‍यवधान)...

श्री श्रवण कुमार: मैं यह कहना चाहता हूं चौटाला जी के राज में, भजनलाल जी के राज में क्‍या हुआ, मुझे मालूम नहीं।

श्री जीतमल: आप कह रहे हो ना । ...(व्‍यवधान)...

श्री दांताराम गुर्जर: गहलोत के राज में हुआ, वह चौटाला जी के राज में हुआ।...(व्‍यवधान)...

श्री श्रवण कुमार: स्थिति यह है कि आज की तारीख में राजस्‍थान की बनिस्‍पत हरियाणा में शांति है और राजस्‍थान में आज मैं कहना चाहता हूं ...(व्‍यवधान)...

श्री जीतमल: हरियाणा में शांति है या अशांति है वह तो पता चल जायेगा चुनावों में। ...(व्‍यवधान)...

श्री श्रवण कुमार: हरियाणा मेरा लगता हुआ स्‍टेट है और मैं यह कहना चाहता हूं कटारिया साहब, आज जमीनों के भाव बढ़ने से इतने भू-माफिया है, आज से 10-15 दिन पहले पिलानी में एक मंदिर की जमीन पर 10-15 गुण्‍डों ने कब्‍जा कर लिया और उसमें हम पैरवी नहीं करते तो उन्‍होंने उस पर पूरा अस्तित्‍व जमा लिया था। उसके बाद में 212 में उसको कुर्क करवानी पड़ी। स्थिति यह हो गयी 10 आदमी चाहे जिस जमीन पर आकर बैठ जाते हैं तो इस तरह की बदमाशी करने वाले लोगों को सरंक्षण नहीं मिलेगा तो अच्‍छे लोग तो जीना बंद कर देंगे।

श्री हेमराज मीणा: ऐसे तो बहुत सारे कानून बनाने पड़ेंगे। ...(व्‍यवधान)...

श्री श्रवण कुमार: तो बनाओ फिर । ...(व्‍यवधान)...

श्री हेमराज मीणा: इम्‍प्‍लीमेंट क्‍यों नहीं होता? कानून तो बन जायेंगे लेकिन प्रभावी एग्‍जीक्‍यूशन होना ही सबसे बड़ा प्रभावी कारण होगा। कानून का प्रभावी एग्‍जीक्‍यूशन ही नहीं है।

श्री श्रवण कुमार: हम कब कह रहे हैं ? यह पूरा मंत्रिमण्‍डल बैठा है, पूरा प्रशासन बैठा है, लागू करो न कौन मना कर रहा है?  कोई मना कर रहा है क्‍या ?

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि प्रवर समिति द्वारा प्रतिवेदित राजस्‍थान समाज विरोधी क्रिया-कलाप निवारण विधेयक, 2006 को पारित किया जाये?

(स्‍वीकृत)

राजस्‍थान समाज विरोधी क्रिया-कलाप निवारण विधेयक, 2006 पारित किया गया।

विधेयक पर विचार

राजस्‍थान विधान सभा सदस्‍य (निरर्हता निराकरण)(संशोधन) विधेयक,2006

 

राजस्‍थान विधान सभा सदस्‍य (निरर्हता निराकरण)(संशोधन) विधेयक,2006, श्री राजेन्‍द्र राठौड़, प्रभारी मंत्री प्रस्‍ताव करेंगे कि राजस्‍थान विधान सभा सदस्‍य (निरर्हता निराकरण)(संशोधन) विधेयक,2006 को विचारार्थ लिया जाये।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ : उपाध्‍यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि राजस्‍थान विधान सभा सदस्‍य (निरर्हता निराकरण)(संशोधन) विधेयक,2006 को विचारार्थ लिया जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री मोहम्‍मद माहिर आजाद (अनुपस्थित) श्री हरिमोहन शर्मा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, The Rajasthan Legislative Assembly Members (Removal of Disqualification) (Amendment) Bill, 2006. पेश करने के लिये माननीय मंत्री महोदय को और इस राजस्‍थान की सरकार को क्‍यों बाध्‍य होना पड़ा, उस इतिहास पर चर्चा किये बिना राजस्‍थान सरकार की मंशा का और दुर्भावना का पता नहीं लग सकता।

श्री मदन दिलावर: केन्‍द्र सरकार का क्‍या हुआ?

श्री हरिमोहन शर्मा: अब मैंने यह सोचा है कि कुछ लोग जो मानसिक रुप से विचलित हैं उनकी हर बात का जवाब देना अकलमंदी की तारीफ में नहीं आता।

श्री मदन दिलावर : आप तो मेन्‍टल हॉस्पिटल से आये हो। ..(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा: नहीं, आप अपने लिये क्‍यों समझते हो। इसलिए ऐसे लोगों का बार बार जवाब देने से सदन की गरिमा गिरती है और जिनकी गरिमा ही नहीं है, जिनकी आदत पड़ गयी, उनका इलाज उपाध्‍यक्ष जी भी नहीं कर सकते। ...(व्‍यवधान)... लेकिन मैं तो जोश में भी विवेक रखता हूं, यह विवेक खो देते हैं। इसलिए आप इनको सलाह दो कि जोश रखो, लेकिन विवेक नहीं खोये और कपड़े फाड़ने की प्रक्रिया सदन में नहीं करे। यह आप इनको सलाह देदें।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हमने कुछ समय पूर्व महामहिम राज्‍यपाल महोदय के सामने एक याचिका पेश की थी कि राजस्‍थान सरकार ने भारतीय संविधान का उल्‍लंघन कर नियमों के विपरीत कुछ विधायकों को लाभ के पद पर बिराजमान कर दिया है और कांस्‍टीट्यूशन के आर्टिकल 191 और 192 के तहत यह विधान सभा की सदस्‍यता बनाये रखने के योग्‍य नहीं रहे हैं और इनको अयोग्‍य घोषित किया जाये और सीट वेकेंट की जाये। इसके पश्‍चात् माननीय महामहिम ने हमारी इस याचिका को और अन्‍य लोगों द्वारा की गयी याचिका को इलेक्‍शन कमीशन में भेज दिया और इलेक्‍शन कमीशन में उस मामले को दर्ज रजिस्‍टर कर लिया और इलेक्‍शन कमीशन ने इनको अयोग्‍य घोषित करने के संबंध में जो याचिका प्रस्‍तुत हुई थी उसका जवाब और

(श्री सुरेन्‍द्र गोयल, सभापति, पदासीन )

सुनवाई के लिये तिथियां निश्चित कर दी और वहां इनको जिन लोगों के खिलाफ हमने याचिका की थी उन विधायकों को वहां जाकर अपना जवाब देने के लिये बाध्‍य होना पड़ा। उन विधायकों ने, जो राजस्‍थान सरकार ने कानूनी विशेषज्ञों से राय लेकर जो वहां जवाब प्रस्‍तुत करवाया, उस जवाब में तो यह मानते ही नहीं कि यह कभी अयोग्‍य हो सकते हैं या जिस पद पर इनको बिराजमान किया गया था, उस पद पर नियुक्ति के बाद इनको अयोग्‍य घोषित नहीं किया जा सकता। यह दृढ़ मान्‍यता थी राजस्‍थान सरकार की ओर दृढ़ मान्‍यता होने के बाद और विधि विशेषज्ञों की राय लेने के बाद ......

 

महेन्‍द्र/चौहान/2l/1520/06102006

 

सारी सरकार का पूर्ण प्रयास कर के लगातार उन लोगों का सहयोग करने के दृष्टिकोण से विधि विशेषज्ञों की राय से इन्‍होंने वहां जवाब पेश किया जिसमें इन्‍होंने यह लिखा कि इस पद पर बने रहना अयोग्‍यता की तारीफ में नहीं आता। जब आप पूरी सरकार यह मानती है अपने जवाब में, या वो लोग जिनको आपने नियुक्‍त किया था, वो लोग यह मानते हैं कि इस प्रकार के पद पर नियुक्ति के आधार पर अयोग्‍य नहीं घोषित किया जा सकता तो क्‍या कारण है कि आपको यह विधेयक में अमेण्‍डमेंट लाने की आवश्‍यकता पड़ी? मूल रूप में आप स्‍वयं यह मानते हैं कि राजस्‍थान सरकार से ऐसी भयंकर भूल हुई है और वर्तमान में जिस प्रकार का आक्रोश, जन-आक्रोश सरकार में बढ़ रहा है, पनप रहा है और जिस प्रकार का प्रदर्शन इस विधान सभा के सामने कल कांग्रेस पार्टी ने प्रदर्शन किया और यहां पर सैंकड़ों की, हजारों की संख्‍या में आदमियों ने इस सरकार की जिस प्रकार से घोर आलोचना की तो आप विवेक खो बैठे और इस आशंका से कि अगर यह दो-तीन विधायक ---

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): सभापति महोदय, उसमें चार हजार लोग आये और उसमें भी दो हजार लोग तो ऐसे आये जिन्‍होंने यह नारे लगाये, अशोक गहलोतजी, जो हमारे पूर्व मुख्‍यमंत्री हैं, उनके खड़े होते ही और हूटिंग शुरू कर दी, हूटिंग।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): हमारे जोधपुर जिले में तो माननीय पूर्व मुख्‍यमंत्री ने मना कर दिया था कि किसी को नहीं आना है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): बैठ जाओ, बैठ जाओ, वो कहने के लिए आये थे कि, अशोक गहलोतजी, बैठो। यह कहने के लिए आये थे।

श्री सभापति: विराजें, विराजें।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): गला बैठ गया, आप तो बैठो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): जिस प्रकार का जन आक्रोश चाहे वो किसानों में हो, चाहे मजदूर में हो, चाहे बी.पी.एल. में नाम काटने के प्रति हो, जिस प्रकार का राजस्‍थान का वातावरण दूषित होता जा रहा है, जिस प्रकार से मंत्रिमण्‍डल के सदस्‍यों की खुलेआम एक-दूसरे के प्रति और मुख्‍यमंत्री के खिलाफ बगावत की सड़कों पर आ रहे हैं, यह मुख्‍य सचेतक मनमाने ढंग से अपने बयान दे कर जो भारतीय जनता पार्टी की मौजूदा सरकार के खिलाफ एक हमारे जनता का वातावरण बनाने में जिस प्रकार का सहयोग कर रहे हैं उसके आधार पर सरकार का यह मानस बना कि अगर यह दोनों पद या तीनों पद रिक्‍त हो गये तो आगे आने वाले चुनावों में हमारी क्‍या दुर्गती होगी और जनता की आवाज की पुष्टि इससे हो जायेगी, इस दृष्टिकोण से यह बिल लाने का प्रयास आपने किया।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): नहीं, सभापति महोदय, मेरे पर इन्‍होंने चार्ज लगाया कि मैं मतलब मुख्‍यमंत्रीजी के और वातावरण खराब करने में मेरा बहुत बड़ा योगदान है, वह क्‍या है योगदान?

श्री सभापति: आपको बोलने की जरूरत नहीं है, सब को पता है ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपका बहुत बड़ा योगदान नहीं था, बहुत थोड़ासा योगदान है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हां, कितना योगदान है? वो क्‍या है? वो मैं पूछना चाहता हूं। ऐसे अनर्गल और वेग आरोप न लगाएं। आरोप मतलब आपको नोटिस देने की जरूरत नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आपकी सबसे बड़ी गलती तो यह है कि आप पीछे बैठ कर मुख्‍यमंत्रीजी पर थूंकते बहुत हो बोलते-बोलते।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अब यह तो आपके मुंह में पानी नहीं है तो मैं क्‍या करूं। मैं तो यह पूछना चाहता हूं कि क्‍योंकि जवाब देने के लिए मैं यहां पर उपस्थित हूं इसलिए नोटिस देने की ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मुझे इस बात की बहुत खुशी है कि जो टीवी पर इन्‍टरव्‍यू दे कर के जो अपनी बात कही उस बात से आप हटना चाहते हो और अब इस पद पर बने रहने के दृष्टिकोण से मुख्‍यमंत्रीजी के प्रति अत्‍यधिक विनम्र भाव से अपने अपराध को स्‍वीकार करते हो तो मुझे आपत्ति नहीं है।

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मुख्‍यमंत्रीजी ने मेरी शिकायत आपसे की है क्‍या?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मुख्‍यमंत्रीजी बहुत बड़े हैं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह राजस्‍थान की जनता से, आप से शिकायत है चीफ व्हिप राजस्‍थान सरकार के होने के बाद जिस तरह का ई टीवी में आपने इन्‍टरव्‍यू दिया वह थोड़ीसी मुख्‍यमंत्रीजी के प्रति आपकी जो बात है वो सामने आती है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): क्‍या, क्‍या?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ई टीवी पर जा कर पूछना, रिकार्ड है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैंने कोई ऐसी बात आज तक न कही--

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): एक मिनट, महावीरजी।  You are a nominated by the Chief Minister as a Chief Whip. मानते हैं आप?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हां, वो तो हर मिनिस्‍टर।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मानते हैं। और चीफ व्हिप डेमोक्रेसी में चीफ मिनिस्‍टर का आईज और ईयर होता है, यह भी मानते हैं आप?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): बिलकुल होता है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): तो जो जितना विश्‍वास मुख्‍यमंत्रीजी ने आपके प्रति व्‍यक्‍त किया उस ट्रस्‍ट को क्‍या आप मेन्‍टेन कर के ई टीवी में इन्‍टरव्‍यू दिया आपने?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): बिलकुल।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपको रिजाइन कर के फिर इन्‍टरव्‍यू देना चाहिए था।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): ऐसा है कि मैं पूरा विश्‍वासपूर्वक कहता हूं कि मुख्‍यमंत्रीजी का जो मुख्‍य सचेतक है---

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आज अभी बोल दो, इस हाउस में बोल दो कि मैं ईमानदारी से, जैसे अपन (खमद खामला) करते हैं, बाद में कर लेना, ईमानदारी से, मन, वचन और कर्म से मैं मुख्‍यमंत्री के प्रति निष्‍ठावान हूं। आप बुलाओ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह कहने की कहां जरूरत है, मुख्‍य सचेतक हैं, यह कहने की कहां जरूरत है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह तो ई टीवी में मालूम है न। ई टीवी में बोले न ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, यह कहने की जरूरत कहां है। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप ठीक प्रोवोक करवा रहे हो कि यह  बोलें, यह नहीं बोलेंगे। यह इतने संस्‍कारित कार्यकर्ता हैं, नहीं बोलेंगे। ...(व्‍यवधान)...

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): इसका मतलब, राठौड़ साहब, आपके पास इनकी रिपोर्ट है कि यह क्‍या कर रहे हैं। रिपोर्ट आपके पास पूरी है। ...(व्‍यवधान)... 

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): राठौड़ साहब की नजदीकी और विश्‍वसनीयता इसीलिए तो कायम है कि यह ऐसा बोलते हैं इसलिए उनको शपथ नहीं लेने देते नहीं तो इनका मामला गड़बड़ होता है। ...(व्‍यवधान)...

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): राठौड़ साहब को यहां खड़ा होना पडा कि यह वास्‍तव में गड़बड़ है इन में।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मुख्‍यमंत्रीजी मतलब जो है वो निष्‍ठावान कार्यकर्ताओं को नहीं चाहतीं, यह कहना है क्‍या आपका?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): क्‍या? ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मुख्‍यमंत्रीजी ने बिना भेदभाव के आप जैसे निष्‍ठावान कार्यकर्ता पर भी विश्‍वास किया, आप उस विश्‍वास पर खरे नहीं उतर रहे।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): नहीं, आपने कहा कि आप निष्‍ठावान हैं इसलिए वो ऐसा नहीं कहेंगे ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): नहींDon’t put your words. रिकार्ड में है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अभी आपने कहा है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मैंने जो कहा है रिकार्ड में है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अभी आपने कहा, रिकार्ड में है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हां, रिकार्ड में है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): रिकार्ड में है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): चैक कर लो।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आपने कहा कि यह निष्‍ठावान हैं इसलिए निष्‍ठा से काम करेंगे, यह कहा है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ना, यह नहीं कहा है। चैक कर लो आप।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): देख लो। इसी पर शर्त हो जाए।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हां, शर्त हो जाए। आप चैक कर लो।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): कल की टीवी देख ली आपने, कल की वो रिकार्ड देख ली आपने? कल की तो माफी बाकी है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): किस के?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): वो टीवी देखी है आपने, उसका।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): देख ली। मैम से पूछ लो, देख ली।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हां तो देखो। अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था की।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): क्‍या कहा?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): या तो उनको माफी मांगनी चाहिए ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): जी हां, मैंने कहा कि यदि गलती होगी सदन में माफी मांगूंगा।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हैं?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): गलती की तो सदन में माफी मांगूंगा। गलती की तो मांग लेता मैं। ऐसी आदत नहीं है मेरी don’t mistake.  फिर कह रहा हूं मैं, मैं फिर रिपीट कर रहा हूं- एक संस्‍कारित कार्यकर्ता होने के बाद भी मुख्‍यमंत्री ने आप में विश्‍वास किया जिस पर आप खरे नहीं उतरे ...(व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): उसमें पहले आसन ने व्‍यवस्‍था दी कि अंकित नहीं होगा। अंकित नहीं होगा, यह आया कि नहीं? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब मैं मांग करता हूं कि आपने देख लिया और आपने देख लिया, जब यह आसन की व्‍यवस्‍था थी कि यदि उन्‍होंने अंकित होने के लिए पहले कह दिया था ---

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इस पर आओ, इस पर आओ। मुख्‍यमंत्री पर आओ, छोड़ो इसको। ...(व्‍यवधान)... इस पर जवाब दो पहले, डोण्‍ट साइड ट्रेक।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): इन्‍होंने माफी मांगने के लिए कहा, अब माफी मंगाओ।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): डोण्‍ट साइड ट्रेक। ...(व्‍यवधान)... मुख्‍यमंत्री के लोयल नहीं हो के चीफ व्हिप बनना ...(व्‍यवधान)... इस डेमोक्रेसी का सबसे बड़ा घपला है। एक मुख्‍यमंत्री का चीफ व्हिप यदि इन्‍टरव्‍यू में यह कहता है तो ...(व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मुख्‍यमंत्रीजी को एक ही कलम में लिखना पड़ता है कि इनको हटाया जाता है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह तो मुख्‍यमंत्रीजी का सहृदय है, मैं मुख्‍यमंत्री होता तो बाहर करता ...(व्‍यवधान)... हाउस से बाहर करता। ...(व्‍यवधान)...

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि माननीय मुख्‍य सचेतकजी ने अभी जो बात रखी, जब आसन से जो व्‍यवस्‍था हुई थी उस समय माननीय सी.पी. जोशीजी ने यह कहा था ---

श्री अध्‍यक्ष: यह कहा था।

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): कि अगर आसन की ऐसी व्‍यवस्‍था यह सही है तो मतलब मैं माफी मांगूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: वरनाये मांगेंगे।

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): हां, वरना ये मांगेंगे। तो आपने आसन की जो व्‍यवस्‍था की वो आपने देख ली अब जो भी फैसला देना है आपको इस सदन में देना चाहिए। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): देना चाहिए। ...(व्‍यवधान)... मैंने कहा उस पर आज भी स्‍टैण्‍ड हूं, आपने कहा वो रिकार्ड उठा कर देख लीजिए, जब हेमारामजी चौधरी बोल रहे थे तब आपने कहा कि अंकित नहीं हो, जब शिव से आने वाले माननीय सदस्‍य बोले तब आपने बोलने के बाद कहा अंकित नहीं हो, रिकार्ड में। यह सब रिकार्ड में है। ...(व्‍यवधान)... मैं ऐसी बात नहीं करता हूं।

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): नहीं, नहीं, माननीय जोशजी, आपने यह कहा था कि अगर माननीय सदस्‍य के बोलने के पहले अगर आसन की तरफ से यह व्‍यवस्‍था थी कि अंकित नहीं हो तो मैं मोफी मांगूंगा।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): बिलकुल, अभी भी मैं इस बात पर हूं। आपने, सभापति महोदय, जब हेमारामजी चौधरी बोल रहे थे तब आपने कहा कि अंकित नहीं हो, उसके बाद हेमारामजी चौधरी बोले हैं, उसके बाद शिव से आने वाले माननीय सदस्‍य बोले हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): मैंने उसके बाद और कहा है, जब यह बोलने लगे उसके पहले मैंने और कह दिया था।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): नहीं है, नहीं है, नहीं है और मैं अभी भी माफी मांगने को तैयार हूं। ...(व्‍यवधान)... टेप सुन लिया।

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): वो तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय फैसला करेंगी अभी।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हां, टेप सुन लिया, अध्‍यक्ष महोदय के चैम्‍बर में टेप सुन लिया है। शिव से आने वाले माननीय सदस्‍य के बोलने के पहले आपने बोला है। फिर माफी मांग लूंगा, में फिर स्‍टैण्‍ड करता हूं इसी बात पर।

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): आप और हम क्‍यों डिस्‍कस कर रहे हैं, वो तो अध्‍यक्ष महोदय को फैसला करना है। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): सभापति महोदय, मैंने टेप सुना है, ऐसी आदत नहीं है मेरी।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह अपोजिशन का पार्ट प्‍ले कर रहे हैं। अपोजिशन का पार्ट प्‍ले करते हैं यहां पर। यह वहां जा कर कुछ भी कह देंगे, यहां अपोजिशन का पार्ट प्‍ले करेंगे, ऐसे ही बोलेंगे।

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): नहीं, अध्‍यक्ष महोदय, आपने जैसा कहा है वो बात माफी मांगने की है। आपको इसमें फैसला तो देना पड़ेगा।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आपका फैसला स्‍वीकार है।

श्री अध्‍यक्ष: मैं, सरकारी मुख्‍य सचेतक महोदय, आपको यह कह रही हूं कि निष्‍ठा की आपको प्रमाण पत्र इनसे लेने की क्‍या आवश्‍यकता पड़ गयी। ...(व्‍यवधान)... तो फिर आप क्‍यों बारबार कह रहे हो निष्‍ठा, निष्‍ठा? इनसे आवश्‍यकता है आपको? ...(व्‍यवधान)... इनसे आवश्‍यकता है आपको निष्‍ठा की लेने की?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह बात, अध्‍यक्षजी, आप सही कह रही हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है आपसे कि इन्‍होंने आसन को, आसन की व्‍यवस्‍था को चैजेंज किया है इसलिए चाहे आसन पर अध्‍यक्ष महोदय विराजमान हों, चाहे उपाध्‍यक्ष महोदय विराजमान हों और चाहे सभापति विराजमान हों तो मेरा निवेदन है कि वो अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था है इसलिए आपको इसके बारे में निर्णय आज की तारीख में देना पड़ेगा। ...(व्‍यवधान)... उस दिन कहा था कि मैं कल देख कर के आपके सामने सदन को अवगत कराऊंगी।   

 

Ddm/usc 061006 1530 2m

 

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): आपने उस दिन कहा था कि मैं कल देखकर आपके सामने इस सदन को अवगत कराऊंगी, यह व्‍यवस्‍था की थी। इसका मतलब तो यह हुआ अगर मैंने पहले नहीं कहा हो तो मैं झूठा हूं और अगर कहा है..।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, आप सच्‍चे हैं। आपने पहले कह दिया था। इसको इन्‍होंने भी स्‍वीकार कर लिया है। लेकिन उनका तर्क यह है कि उन्‍होंने केवल अंकित नहीं हो पर्टिकूलर आदमी जो बोल रहे थे उनके लिये कहा है, जो बीच में बोल रहे हैं उनके लिये नहीं कहा है। यह उनका इण्‍टरप्रिटिशन है।

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): इण्‍टरप्रिटिशन नहीं था, सिर्फ एक बात पर था, सिर्फ एक बात पर था कि माननीय जालमसिंहजी रावलोत...।

श्री अध्‍यक्ष: आपकी बात मान ली।

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): बोल रहे थे और उन्‍होंने जो बयानबाजी की यहां पर उसके पहले मैंने कहा कि नहीं कहा। कोई भी यह जो माननीय सदस्‍य....।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, आपने कहा, आपने बिलकुल कहा, अंकित नहीं हो और जब एक बार चैअर से यह कह दिया जाता है कि अंकित नहीं हो, इसका मतलब जब तक चैअर वापस नहीं कहे कि अंकित हो तब तक अंकित नहीं होता है। ऐसा ही होता है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आप तो उदारमना हैं। आपका मन बड़ा विशाल है। आप तो क्षमा करें, अध्‍यक्ष महोदय। अब आगे का बिजनस लें। यहां तो क्षमा करें, अध्‍यक्ष महोदय।

 श्री जुबेर खान (रामगढ़): आज आपने असली पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर का काम किया है, पहली बार।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी):  आज तो आप भी बहुत उदार हो रहे हो।

श्री अध्‍यक्ष: चलो बोलने दो। (व्‍यवधान) लेकिन मैं मेरे चेम्‍बर में सुन रही थी। मुझे बड़ा अफसोस है, हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपने कहा इस सदन की कोई गरिमा है ही नहीं। इसलिये गरिमा क्‍या घटेगी। यह बहुत हाइली आब्‍जेक्‍शनेबल है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): नहीं, मैंने यह नहीं कहा।

श्री अध्‍यक्ष: आपने यह शब्‍द कहे।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): अगर यह शब्‍द हैं तो मैं आपके सामने....।

श्री अध्‍यक्ष: आपने बिलकुल यह कहा, मैंने सुना।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपने सुना होगा। जब आपने सुना है तो रिकार्ड भी हुआ होगा और अगर रिकार्ड हुआ है तो आप देख लें। तो मैं आपके सामने ही क्षमा याचना करुंगा।

श्री अध्‍यक्ष: यह रिकार्ड में है। ठीक है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह कोई विवाद की बात नहीं है। (व्‍यवधान) विवाद की बात नहीं है। (व्‍यवधान) यह तो कोई विवाद की बात नहीं है। (व्‍यवधान) नहीं, नहीं कहा, लेकिन मुझे दृढ़ विश्‍वास है कि मैं नहीं बोला।

श्री अध्‍यक्ष: हां, मैंने सुना है मेरे चेम्‍बर में।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपने सुना होगा लेकिन रिकार्ड में नहीं मिलेगा आपको।

श्री अध्‍यक्ष: आपने सुना होगा लेकिन मैंने नहीं कहा, यह कोई बात होती है।

एक माननीय सदस्‍य: ऐसे ही रिकार्ड में सुन लेते हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ऐसा मेरा विश्‍वास है क्‍योंकि मैं नहीं बोला था।

श्री अध्‍यक्ष: मैं प्रोसीडिंग देखूंगी और प्रोसीडिंग देखने के बाद, अगर यह आपके शब्‍द हैं तो क्षमा मांगनी पड़ेगी।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हां, क्षमा याचना करुंगा और अगर शब्‍द होंगे तो मैं अग्रिम में ही क्षमा याचना कर लेता हूं। निकले तो आप वहीं माफ कर देना। वह कोई विवाद की बात नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: बस ठीक है। बोलिये, बोलिये। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हां, वह कोई विवाद की बात नहीं है। सदन की गरिमा वाली अगर बात है तो मैं उसके लिये क्षमा याचना करता हूं, कोई विवाद की बात नहीं है।

अध्‍यक्ष महोदय, इनका यह जो बिल है उसके पहले आप डिस्‍क्‍वालिफिकेशन आफ मेम्‍बर्स, आर्टिकल 191, कांस्‍टीट्यूशन में जो लिखा है “if he holds any office of profit under the Government of India or the Government of any State specified in the First Schedule, other than an office declared by the Legislature of the State by law not to disqualify its holder.”  यह इनकी जो अयोग्‍यता क्‍यों हुई कि उस अयोग्‍यता के लिये डिस्‍क्‍वालिफिकेशन, कौनसा लाभ का पद माना जाएगा, उसके लाभ के पद की जो परिभाषा है, उस लाभ के पद की परिभाषा के हिसाब से यदि राज्‍य सरकार को यदि किसी सरकार को उनको नियुक्ति करने और हटाने का अधिकार है तो लाभ का पद माना जाएगा। उन्‍हें प्रशासनिक अधिकार है तो लाभ का पद माना जाएगा, उनको उस पद से......मिलता हो तो लाभ का पद माना जाएगा और उस पद से आर्थिक लाभ भी ये उठाते हों तो उनको लाभ का पद माना जाएगा और केबिनेट के मंत्री और उस मंत्री का दर्जा प्राप्‍त करते हों तो उसको लाभ का पद माना जाएगा। जैसे ही इलेक्‍शन कमीशन ने उस जांच को स्‍वीकार कर नोटिस जारी किये तो जैसा कि मैंने कहा कि ये अयोग्‍य घोषित हो जाते तो उनकी अयोग्‍यता को बचाने के लिये आपने इस बिल में यह अमेंडमेंट लाने का प्रयास किया है। आपका उद्देश्‍य न जनहित का है, न कोई संस्‍था को मजबूत करने का है, न कोई विशेष दृष्टिकोण है। आपका यह जो अमेंडमेंट है वह आपके द्वारा नियुक्ति में की गयी गम्‍भीर भूल के कारण, जो विधायक अयोग्‍य घोषित होते, उनकी अयोग्‍यता को बचाने का और आपके द्वारा किये गये अवैधानिक कार्य को समाप्‍त करने का एक आपने तरीका निकाला है। इसके कारण से यह अमेंडमेंट आपने इसमें निकाला है। मैं निवेदन करना चाहूंगा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय कि इन्‍होंने जो इसमें कारण लिखे हैं। (व्‍यवधान) आप बैठे-बैठे ही बोल रहे हैं और दूसरी जगह से बोल रहे हैं और हम आपको सुन रहे हैं, यह भी हमारी शालीनता है।

श्री अध्‍यक्ष: और आप कितनी बार बैठे-बैठे बोलते हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मैं तो आपकी आज्ञा से बोल रहा हूं। मुझे तो चैअर ने आज्ञा दी है। आप सुन रहे हो मेरी बात। आपके कहने से ही खड़ा हुआ हूं और बोल रहा हूं। बीच में तो वे बोल रहे हैं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने स्‍टेटमेंट आफ आब्‍जेक्‍ट्स एण्‍ड रीजंस, पूरा नहीं, जो आधार इन्‍होंने बताये हैं “Any questions as to disqualification are decided in the case of pre-election disputes by the courts through the election petition and post-election disputes by the Election Commission under Article 102 and 192 of the Constitution. Recently, approximately 40 or more members of the Parliament were facing disqualification proceedings on the ground of their holding office of profit. This necessitated for the Parliament to enact the parliament (Prevention of Disqualification) (Amendment) Act, 2006 to save the members from being disqualified. Similarly, in case of members of Rajasthan Legislative Assembly holding position of Chairman/Vice-Chairman/members of the committees mentioned above, there is likelihood of litigation flowing out of varied interpretation of the proviso of clause © of Section 3 of the Rajasthan Legislative Assembly Members (Removal of Disqualification) Act, 1956.” यह इसलिये लाये हैं। यह खुद ने स्‍वीकार कर लिया। मेरे बोलने की बात तो आपने इसमें स्‍टेटमेंट आफ आब्‍जेक्‍ट्स में आपने कहा कि हम तो जिसप्राकर से पार्लियामेंट के 40 मेम्‍बर्स को अयोग्‍य घोषित होने से बचाने के लिये जो संशोधन बिल वहां पर लाये हैं, हू-ब-हू हिन्‍दुस्‍तान की पार्लियामेंट, डाक्‍टर मनमोहनसिंह की गवर्नमेंट के द्वारा और कांग्रेस पार्टी के द्वारा लिया गया निर्णय सही निर्णय है और इनके शीर्ष नेताओं के, भारतीय जनता पार्टी की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी के द्वारा उसका विरोध करना और बायकाट करना अनुचित था। मनमोहनसिंह ने जो अमेंडमेंट किया, वह सही था, यह तो स्‍वीकार करो आप। आपको याद है, पार्लियामेंट का आप उदाहरण दे रहे हो।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): बिल स्‍वयं ही बता रहा है, बोलने की जरुरत ही नहीं है। बोलने की जरुरत ही नहीं है। वही बात है, पास करो फिर। क्‍यों बहस कर रहे हो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप तटस्‍थ बनकर इधर-उधर मोड़ने की कोशिश मत करो। आपकी तटस्‍थता से हम परिचित हैं।

तो जिस प्रकार से राष्‍ट्रीय स्‍तर पर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्‍व ने जिस आधार पर 40 पार्लियामेंट के मेम्‍बर्स को डिस्‍क्‍वालिफिकेशन से बचाने का, रेस्‍ट्रोपेक्टिव इफेक्‍ट से जो बिल लाये थे, एक तरपु तो आप राष्‍ट्रीय स्‍तर पर उसका विरोध करते हैं, आप यह तो स्‍वीकार करो। यह तो मन से कहो कि नहीं, हमारी राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी ने, हमारी पार्टी के अध्‍यक्ष ने....।

श्री अध्‍यक्ष: आप यहां विरोध कर रहे हो। आपकी पार्टी वहां कर रही है, आप यहां क्‍यों विरोध कर रहे हो?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मैं सुना रहा हूं ना साहब, मैंने क्‍यों विरोध किया और क्‍यों नहीं किया।

श्री अध्‍यक्ष: वही बात है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप अपने मन से कन्‍क्‍लूजन मत निकालो, साहब। पूरी बात सुन लो। और यूं तो आपका आदेश हमेशा ही सर्वोपरि है।

श्री अध्‍यक्ष: दोनों ही बातें कह रहे हो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): चलो, आप इनसे यह मंजूर करा दें कि हां, वहां हमारी पार्टी ने गलती की है। मैं यहीं बैठ जाता हूं। आप करवा दो, आप करवा दो। मैं इसी मिनट बैठता हूं। ये करें ना मंजूर। न तो इनमें नैतिक हिम्‍मत है....।

श्री अध्‍यक्ष: मैं तो यही कह रही हूं कि उनकी पार्टी ने वहां विरोध किया, आप यहां कर रहे हो। (व्‍यवधान)

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): ऐसा है कि मनमोहनसिंहजी ने, जब आपकी पार्टी ने दिल्‍ली में माना..।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप ऐसा अहसास मत होने दो हमको कि जैसे आप उनका पक्ष ले रहे हैं। ऐसा अहसास मत होने दें आप।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): ऐसा अहसास नहीं हो रहा। जब दिल्‍ली में आपकी पार्टी कर रही है तो आपको जयपुर में क्‍या तकलीफ है, राजस्‍थान में क्‍या तकलीफ हो रही है। वे 40 जनों को बचा रहे हैं, हम 3 जनों को बचा रहे हैं। यह मान रहे हो तब आप बिना मतलब टाइम खराब कर रहे हो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह पास तो होना ही है। मुझे तकलीफ नहीं है। मैं तो मेरे विचार रख रहा हूं। लेकिन जो...। (व्‍यवधान)

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): आप सोनिया गांधी के विचार को नहीं मानते हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): नहीं, पक्‍के।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): पक्‍के, तो जब 40 वहां बचे, सोनिया गांधी ने जब 40 को बचाया तो यहां 3 का मामला है।   

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हम सोनिया गांधी के विचार मानते हैं। हम सोनियाजी के विचार मानते हैं, समझ का अन्‍तर है। लेकिन अफसोस इस बात का है कि भारतीय जनता पार्टी की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी, पार्लियामेंट्री बोर्ड के निर्णय को आप नहीं मान रहे हैं।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): मानते हम भी हैं। कौन कहता है, नहीं मानते हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली):  शर्म तो यह है। शर्म की बात आपके लिये है, हमारे लिये थोड़े है।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): कौन कहता है कि नहीं मानते।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): शर्म की बात तो आपके लिये है कि आप राष्‍ट्रीय नेतृत्‍व की अवहेलना कर इस बिल को यहां पर ला रहे हो। तो मेरा विनम्र शब्‍दों में यह जो बिल है, जो इन्‍होंने अमेंडमेंट किया है, यह कुछ व्‍यक्तियों को लाभ के पद से, जो अयोग्‍य घोषित होने वाले थे, इलेक्‍शन कमीशन के पास यह जांच पेंडिंग थी।

 

Ars/usc/1540/06102006/2n/1

 

इनका कोई व्‍यापक उद्देश्‍य नहीं है और जो उद्देश्‍य इन्‍होंने लिखे हैं उस उद्देश्‍य से भी राज्‍य हित में इनका कोई वो नहीं है। इसलिए मेरा यह अनुरो है कि यह अमेंडमैंट बिल जो है जन प्रसार के लिए, एक महीने के जनमत जानने के लिए भेजा जाए।

श्री अध्‍यक्ष: श्री डाक्‍टर सी पी जोशी।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, जिस तरह की डिबेट चल रही है उसमें यह तो कोई दूध का धुला हुआ तो कोई है नहीं कि पार्टी लाइन में किसको विरोध करें या सपोर्ट करें क्‍योंकि यह तो सत्‍य है जिस तरह की पार्लियामैंट में प्रैक्टिसेज प्रिवेल कर रही हैं वह हम सबके लिए चिन्‍ता का विषय होना चाहिए और चिन्‍ता का विषय अध्‍यक्ष महोदय, इसलिए होना चाहिए कि जिन्‍होंने कांस्‍टीट्यूशन बनाया उन्‍होंने कभी एनविसेज नहीं किया कि किस तरह की परिस्थितियां बनेंगी। जब कानून बनेगा आदमी की शक्‍ल देखकर, आदमी को लाभ और हानि देखकर कानून बनाने की कल्‍पना की जाती है कि कानून का पालन कैसे किया जाएगा। कानून इसलिए नहीं बनाया जाता है कि कानून का वायलेशन करने वाले को लाभ कैसे दिया जाए।

 यह जो परम्‍परा हम विधायक चाहे वह विधानसभा के या पार्लियामैंट के हैं, यह जो नई परम्‍परा हम हिन्‍दुस्‍तान में प्रारम्‍भ कर रहे हैं उस परम्‍परा के कारण ही इस देश में जूडिशियरी ने अपनी लिमिट को एक्‍सीड करने की सोची। ऐसी मेरी मान्‍यता है क्‍योंकि कांस्‍टीट्यूशन में यह एनविसेज किया गया है कि एक बैलेंस होगा लेजिस्‍लेटर का, जूडिशियरी का और एग्‍जीक्‍यूटरी का और हरेक के अपने फंक्‍शंस वैल डिफाइन है। कांस्‍टीट्यूशन के अन्‍तर्गत विदिन दिस पैरामीटर पचास साल तक लोकतंत्र चल रहा था और इसीलिए संविधान के निर्माताओं ने आजादी के बाद जब संविधान बनाया तब इसमें आर्टिकल 191, डिसक्‍वालिफिकेशन फोर दी मैम्‍बरशिप का प्रोवीजो रखा । यदि उन्‍हें यह मालूम होता कि हमारे बाद जिन लोगों में यह लीगेसी मिलेगी वह लीगेसी मिलने वाले इतने काम्‍पीटैंट और क्‍वालिफाइड होंगे कि अपने निहित स्‍वार्थ के लिए कांस्‍टीट्यूशन को भी अमेंड कर सकेंगे तो शायद यह 191 क्‍लाज की आवश्‍यकता नहीं समझते।

191 क्‍लाज में लिखा है अध्‍यक्ष महोदय, “If he holds any office of profit under the Government of India or the Government of any State specified in the First Schduled” फर्स्‍ट शिड्यूल में स्‍पेसिफाई कर रखा है कि कौन कौनसे हैं जिनको हम आफिस आफ प्रोफिट में नहीं काउंट करेंगे ’other than an office declared by the Legislature of the State by law not to disqualify its holder.” अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रिविलेज यह इतिहास राजस्‍थान की विधानसभा को है हिन्‍दुस्‍तान में। हिन्‍दुस्‍तान में पहली बार इस क्‍लाज में राजस्‍थान की विधान सभा के चुने हुए सदस्‍य के खिलाफ हाई कोर्ट में केस होगा, उस हाई कोर्ट के निर्णय के बाद सुप्रीम कोर्ट के अनदर एक फैसला हुआ। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह कहा गया कि रिट्रोस्‍पेक्टिव डेट से यह लागू होगा और उसी को आधार मानकर जिसको कांता कथूरिया वर्सेज मानिक चंद सुराना केस कहते हैं, उस केस के आधार पर 1967 में हमारे उस समय के तत्‍कालीन जितने भी जिनका कमिटमैंट माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप भी सम्मिलित हैं। क्‍या 1967 में जब लैजिस्‍लेटर ने कानून बनाया तब एनविसेज क्‍यों नहीं कर लिया गया जो क्‍लाज हम आज अमेंडमैंट कर रहे हैं। यदि हमारा लैजिस्‍लेटर काम्‍पीटैंट है जिसमें हम अपनी लीगेसी की बात करते हैं, राजस्‍थान असेम्‍बलि की परम्‍परा की बात करते हैं, राजस्‍थान की असेम्‍बलि ने इतिहास बनाया है । यहां के इतिहास बनाने वाले आज हिन्‍दुस्‍तान की राजनीति में जहां चेयर पर्सन का काम कर रहे हैं उस समय एनविसेज क्‍यों नहीं किया गया। उस समय बिल लाकर जो अमेंडमैंट किया गया था यह अमेंडमैंट उस समय ही किया जा सकता था 1967 के सुप्रीम कोर्ट के उस रिट्रोस्‍पेक्टिव फैसले के बाद भी माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान की विधान सभा में यह चर्चा नहीं की गई कि ऐसे कौन कौनसे आफिस आफ दी प्रोफिट हैं जिनको हम क्‍वालिफाई कर दें। अच्‍छा होता यह कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजस्‍थान की विधान सभा उस समय उन आफिस आफ प्रोफिट को डिक्लियर कर देती कि ऐसे ऐसे आफिस आफ प्रोफिट को हम डिसक्‍वालिफिकेशन से बाहर निकालते हैं । एक इतिहास बनता राजस्‍थान का। आज राजस्‍थान की असेम्‍बलि उस ऐतिहासिक फैसले के बाद एक अपार्च्‍युनिटी खोकर एक काला अध्‍याय प्रारम्‍भ करने का काम कर रही है।

अध्‍यक्ष महोदय, यह डिसक्‍वालिफिकेशन का एक इश्‍यु कब शुरू हो गया था, डिस क्‍वालिफिकेशन का इश्‍यु होने के बाद भी राजस्‍थान की असेम्‍बलि आई थी, किसने रोका था कि आप असेम्‍बलि के अन्‍दर यह अमेंडमैंट नहीं लाते। आपको आवश्‍यकता इसलिए पड़ी कि कुछ माननीय सदस्‍यों ने इस कांस्‍टीट्यूशन प्रोवीजन के अन्‍तर्गत इलैक्‍शन कमीशन में अपील की। अपील करते समय तक राजस्‍थान की सरकार जब हिन्‍दुस्‍तान की सारी लेजिस्‍लेटर इस बारे में डिस्‍कस कर रही थी, यू पी के अन्‍दर कानून बन गया था, उसकी दूसरी स्‍टेट्स के अन्‍दर कानून बन गया था तब राजस्‍थान की विधान सभा के सत्‍तारूढ़ सदस्‍यों ने सोचा नहीं कि हमें राजस्‍थान की विधान सभा में भी ऐसा कानून लाना चाहिए। यह प्रश्‍न माननीय पार्लियामैंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर आपको देना पड़ेगा कि उस समय के आपके लीगल डिपार्टमैंट, आपका लॉ विभाग, लॉ विभाग में काम करने वाले अधिकारी हैं, क्‍या लॉ विभाग के अधिकारियों ने उस समय प्रोसेस नहीं किया कि राजस्‍थान के यह लोग जो पद पर हैं यह लोग भी डिस्‍क्‍वालिफिकेशन में आते हैं। यदि उस समय माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब हिन्‍दुस्‍तान की अलग अलग विधान सभाएं और पार्लियामैंट और इलैक्‍शन कमीशन इस बात पर सीज था कि इस मैटर के बारे में क्‍या ओपीनियन लें तब राजस्‍थान का लॉ विभाग नींद निकाल रहा था क्‍या, राजस्‍थान के कानून मंत्री नींद निकाल रहे थे क्‍या ? क्‍या राजस्‍थान के कानून मंत्री का धर्म नहीं बनता था कि राजस्‍थान विधान सभा के कुछ सदस्‍यों को जिन पदों पर रखा है उनको यदि हम डिस्‍क्‍वालिफिकेशन की इससे बाहर निकालना चाहते हैं तो एक आर्डिनैंस लाते। आप तो छोटी छोटी चीजों पर आर्डिनैंस ला रहे हैं। म्‍युनिसिपैलिटी में नाम जोड़ना है, घटाना है, आर्डिनैंस लाकर फैसला कर रहे हैं, आप हाई कोर्ट की छुट्टियों के लिए फैसला कर रहे हैं, आर्डिनैंस लाकर फैसला करते हैं। क्‍या राजस्‍थान की सरकार चलाने वालों को यह मालूम नहीं था कि इस बात को करने के लिए हम आर्डिनैंस ले आएं।

अच्‍छा होता इलैक्‍शन कमीशन में अपील जाने के पहले राजस्‍थान की सरकार आर्डिनैंस लाकर एक उदाहरण प्रस्‍तुत करती कि we have taken a conscious decision.  इस कांशस डिसीजनके आधार पर हमने फैसला कर लिया है कि ये ये पद हैं उसमें डिक्लियर कर दिए जाते हैं। आज भी अध्‍यक्ष महोदय, फैसला किया गया है शक्‍ल दे खकर तिलक काडने का। चेयरमैन, एडवाइजर, चेयरमैन बने उनको ध्‍यान रखेंगे, एडवाइजर बने उनको ध्‍यान रखेंगे।

माननीय पार्लियामैंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर, एक आया है पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप। पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप बनने के बाद जो सदस्‍य किसी को मौका मिलेगा, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप कम्‍पनी पर अध्‍यक्षता करने का, कमेटी की मैम्‍बरशिप में भाग लेने का, क्‍या उनको क्‍वालिफाइड करेंगे, डिसक्‍वालिफाइड करेंगे, हमने सोचा है। दस साल बाद फिर यह इश्‍यु उठेगा तो फिर दुबारा अमेंडमैंट लेकर आएंगे। यह हमारी काम्‍पीटैंस को कंसीव कर रहा है कि आगे फ्यूचर में क्‍या होने वाला है इसकी सोची है हमने ? हम तो वह काम कर रहे हैं तुरन्‍त काम करने का काम कर रहे हैं । यह कानून बनाने वाला जो सदन है यह एक सिग्‍नल दे रहा है कि यदि मर्डर करने के बाद यदि आप चुनाव जीतकर आ जाएं और मर्डर की सज़ा मिले तो हम कानून बनाकर आपको मुक्‍त कर देंगे, यह सिग्‍नल देना चाहते हैं ।

कानून की पालना कौन करेगा अध्‍यक्ष् महोदय, कानून बनाने वाला कानून तोड़ने के लिए कानून बनाकर अपनी रक्षा करना चाहे तो एक सामान्‍य आदमी जो कानून तोड़ेगा वह कानून की रक्षा करने के लिए क्‍यों अपने आपको कानून को समर्पित करेगा ? हम स्‍वयं एक सोसायटी में सिग्‍नल देना चाहते हैं। हम चुने हुए प्रतिनिधि जो जनता की सेवा की बात करते हैं वह अपने इंट्रेस्‍ट को प्रोटक्‍ट करने के लिए कानून में परिवर्तन करके अपने इंट्रेस्‍ट को प्रोटेक्‍ट करना चाहते हैं ।

अध्‍यक्ष महोदय, यह बी जे पी और कांग्रेस का सवाल नहीं है। मैंने आडवाणी जी की प्रोसीडिंग भी मंगवाई है, किस आधार पर उन्‍होंने विरोध किया है। पार्लियामैंट में भारतीय जनता पार्टी के नेता ने कांस्‍टीट्यूशन पद चेयर पर्सन आफ नेशनल कौंसिल क्‍यों इन्‍क्‍लूड किया है इस आधार पर विरोध किया है। उन्‍होंने यह विरोध नहीं किया कि कांस्‍टीट्यूशनल पद जितने भी हैं उनको डिसक्‍वालिफाई कर दो, इसका उन्‍होंने विरोध नहीं किया है। उन्‍होंने कहा है यह नेशनल कौंसिल चेयर पर्सन का पद श्रीमती सोनिया गांधी के लिए बनाया जा रहा है। यह कांस्‍टीट्यूशनल पद नहीं है, इस बात का मैं विरोध करता हूं । इस नाम पर वाक आउट किया है, वाक आउट इस नाम पर नहीं किया है। इसका मतलब भारतीय जनता पार्टी में डिफरेंस गवर्नैंस में डिफरेंस करने वाले लोग अपने मन में आए जब कानून और नियम तोड़ने की बात आती है तब उनकी भी वही बात रहती है । जब दूसरी पार्टी पर हम आरोप लगाते हैं इसका मतलब एक बात मान लेनी चाहिए भारतीय जनता पार्टी के लोग जो कांग्रेस के ऊपर, कांग्रेस के नेताओं पर, कांग्रेस के नियम और कानून बनाने वालों पर आरोप लगाते हैं वह अपने स्‍वार्थ के आने के बाद वही बातें करने लग जाते हैं जो उनके लिए सूट करती है।

इसका मतलब हम भी पालीटिकल क्‍लास में एक डिफरेंस बनाकर सोसायटी में नहीं जाना चाहते, हम भी सोसायटी का एक पार्ट बनकर सोसायटी के अन्‍दर जाना चाहते हैं तो मोरल वैल्‍यू की बात करने वाले, कल्‍चर हैरिटेज की बात करने वाले, कल्‍चर नेशनलिज्‍म की बात करने वाले उनके मन में यह प्रश्‍न नहीं आता कि हम मोरेलिटी के नाम पर भी फैसला कर लेते कि हम इसके साथ पार्टी नहीं बनेंगे। पार्लियामैंट में आपका बहुमत नहीं है, आप नहीं कर सकते थे, बहुमत पास होगा। आडवाणी जी ने यही स्‍टेटमैंट दिया कि हमारे विरोध्‍ं करने के बाद भी आप पास करोगे। इसलिए हम वाक आउट करते हैं। तो आप तो उसी लीगेसी की पार्टी हैं, आप बहुमत के आधार पर क्‍या पास करवा रहे हैं, वही पास करवा रहे हैं कि हमारे तीन आदमी जो हैं उनको इसमें डिस्‍क्‍वालिफाई कर दिया जाए। इलैक्‍शन कमीशन की पूरी हियरिंग होने के बाद जजमैंट की स्‍टेज पर यदि यह फैसला करते हैं तो यह कानून खोटा कानून है, गलत कानून है। इम्‍मोरल कानून बनाने की केटेगरी में आता है। उस आदर्श कानून की कैटेगिरी में नहीं आता है जिस कानून की व्‍यवस्‍था होती है। इसलिए मैं राजस्‍थान सरकार को यह कहना चाहता हूं ....

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, I don’t want to interrupt.

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप खुद पार्टी हैं ...(व्‍यवधान) 

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): I am not the party. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसलिए इंटरविन करना चाहता हूं, अभी नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने तीन आदमियों का नाम लिया, कांग्रेस पार्टी ने तीन आदमियों की शिकायत की है  just to keep the record straight मैंने आज तक जो कुछ भी वेतन, भत्‍ते या सुविधा ली है तो विधान सभा से ली है सरकार से कोई सुविधा नहीं ली है ।

 

vns/usc/15.50/2o/6.10.2006

 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपके एक्‍सप्‍लेनेशन के लिये धन्‍यवाद I am not an Election Commissioner. आपने किया, क्‍या नहीं किया you would have put up your arguments in front of Election Commission.  

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): The Election Commission has not asked so far.  यह तो कांग्रेस का फोबिया है कौन आफिस आफ दी प्रोफिट है और कौन नहीं है। जबसे सोनिया गांधी का रेजिंग्‍नेशन हुआ उसके बाद से यह तो चौंकने और लगे हैं आफिस आफ दी प्रोफिट के नाम से। चौंकने और लगे हैं। रात को सपना भी आता है तो यह चौंक जाते हैं islia to keep the record straight.

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): Keep the record straight एक अंग्रेजी वर्ड है। यह एक्‍ट पढ़कर नहीं आये। मैं सुना दूं। ध्‍यान रहे इनको। आप हैं कि नहीं हैं, यह तो आपने सरकार को क्‍यों नहीं बताया। पढ़ता हूं मैं। जो किया है वह पढ़ देता हूं मैं। ध्‍यान रहे आपको। आपके जो रिपोर्ट ध्‍यान रही...

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): मैं उसकी बात नहीं कर रहा हूं You have just said three persons and it is the Congress which has sent an application to the Election Commission you have mentioned my name. But you are mistaken. My dear friend you are highly mistaken.

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):”The Office of a Chairman…” Let me complete it. Yes I have said about three persons. I am proving it. (Interruption) Don’t intervene. You listen me carefully and I wish कि आप यहां नहीं बोलते तो अच्‍छा रहता I want to point out very categorically.  मंत्रीजी बैठे हैं मैं उनका ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं अपने माननीय सदस्‍यों की विद्वता को आगे चैक कर लेना। आपने जो अमेंडमेंट किया है वह बता रहा हूं फिर बाद में उस पर आऊंगा “The office of a Chairman or a Vice-charman or…” आगे पढ़ रहा हूं। दो ही हो गये ना। चेयरमैन, वाइस चेयरमैन आगे पढ़ रहा हूं मैं “the Member of a committee set up for the purpose of advising the Government” क्‍यों इनक्‍लूड करवाया इसमें ? आप तो आते ही नहीं है तो क्‍यों इनक्‍लूड किया ? काहे को लाकर एक्‍सेस करवाया इसमें एड।

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): यह गवर्नमेंट से पूछो आप।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह गवर्नमेंट से पूछो, यह गवर्नमेंट के सदस्‍य हैं ? भला कैसी अच्छी डेमोक्रेसी चल रही है कि एक सरकारी पार्टी का सदस्‍य मुझसे पूछ रहा है कि गवर्नमेंट से पूछो। आपको इस बिल में हां भरनी है। विरोध कर सकते हो ? व्हिप का उल्‍लंघन कर सकते हो ? आपकी ड्यूटी बनती थी कि आप सरकार का ध्‍यान आकर्षित करते कि मैं इसमें नहीं आता हूं इसको डिलीट किया जावे You are within the purview of this consideration. That”s why this was inserted otherwise there was no need of writing this thing. I think that मुझे मंत्री और क्‍लीयर करें और ज्ञानवर्धन करें कि आपकी पार्टी को अंधकार में रखकर यदि अमेंडमेंट पास करवाया तो ध्‍यान रखें  मैं फिर दुबारा पढ़ रहा हूं। आप तो अपने ढंग से इंटरप्रिएट करेंगे क्‍योंकि आप एल एल बी तो हैं नहीं लेकिन अब मैं तो एल एल बी कर चुका हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मैं भी एल एल बी कर चुका हूं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): कर चुके हो ना, आपने प्रेक्टिस नहीं की होगी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): प्रेक्टिस तो नहीं की।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हां तो इसलिये बैठो आप।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): पर आपने ?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मैं तो असेम्‍बली में प्रेक्टिस कर रहा हूं आपके सामने। बनाम मंत्री प्रेक्टिस कर रहा हूं मैं। जस्टिस कोर्ट में हो तो असेम्‍बली में कर रहा हूं मैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): वह तो मैंने भी वहां से की थी। वह जो प्रेक्टिस की आप बात कर रहे हो उस प्रेक्टिस के दौर से मैं भी गुजर गया हूं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): बिलकुल नहीं। विधान सभा में हर सरकार के बिल में पार्टिसिपेट कर रहा हूं एक एडवोकेट की तरह This is my training ground. This is for me to quote.  आप जैसा जज होगा तो मुझे मरवा देगा। मैं फिर दुबारा रिपीट कर रहा हूं। अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका भी ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं। इसमें अमेंडमेंट जो किया है....

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य मैं आपको टोकना नहीं चाह रहा था...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप बोल देना। जवाब में बोल देना।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): पर आप पढ़ लें 1957 का मूल एक्‍ट पढ़ रहे हो आप।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मैं पढ़ रहा हूं अब। आप पढि़ये..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह 1957 में दर्ज है आप बात कर रहे हो। यूं ही आप कह रहे हैं हमको पता ही नहीं है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप बिराजिये। यह मैं पढ़ रहा हू। मूल एक्‍ट ध्‍यान रहे आपको। मैं आधा नहीं पढ़ रहा हूं। निकालिये, पढि़ये। मूल पढ़ रहा हूं मैं। पढि़ये आप “the office of a Chairman or the Member of a committee” Why you put Vice-Chairman? मूल पढ़ रहा हूं मैं तो। अमेंडमेंट चाहे...(व्‍यवधान) मैं आगे पढ़ रहा हूं विद्वान महोदय।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अभी तो एडवाइजिंग आफ गवर्नमेंट की बात कर रहे थे।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आधा कानून नहीं पढ़ रहा हूं। मूल पढ़ रहा हूं पहले मैं जिसमें वाइस चेयरमैन नहीं है तो आगे पढ़ रहा हूं। मैं मूल पढ़ लूं फिर सुन लेना आप। आधा पढ़कर सदन को गुमराह कर रहे हो। हमें क्‍यों गुमराह कर रहे हो ?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): तो आगे पढ़ो ना फिर।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हमें गुमराह नहीं कर सकते। सरकार को करो जो ही काफी है। आर एस एस वाले दुखी हैं। हम सब दुखी हो सकते हैं। आधा पक्ष तो मत करो आप। पूरा पढ़ो। मैं पढ़ रहा हूं ओरिजनल “the office of a Chairman or the Member of a Committee set up for the purpose of advising the Government or any other authority in respect of any matter of public importance…”

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): “advising the Government”

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): सुनिये-सुनिये। यह ओरिजनल है ?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हां, ओरिजनल है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): फिर ?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): फिर अमेंडमेंट आ गया ना।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): तो फिर कहां जरूरत पड़ी माननीय सदस्‍य को यह कहने की कि मैं टी ए, डी ए नहीं ले रहा हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): वह बता देंगे। उत्‍तर देंगे जब आपको बता देंगे।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मैं आपसे जानकारी ले लूं। आप करेक्‍ट कर लें। सुप्रीम कोर्ट का जो नया जजमेंट है, पढ़ लें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): वह भी मेरे पास है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हां, तो वह पढ़ लें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सुप्रीम कोर्ट का जो जया बच्‍चन के मामले में फैंसला है वह पढ़कर बता दूंगा आपको।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): जी-जी। पढ़ लें आप उसको। They have defined it very categorically. इस राजस्‍थान विधान सभा में माननीय सदस्‍यों ने अपनी तनख्‍वाह पाँच साल में ली है। माननीय सदस्‍य आज कहें कि मैंने सुविधा नहीं ली, क्‍या गारण्‍टी है कि यह बिल नहीं आता तो पैसे नहीं उठाते यह ? आप गारण्‍टी दे रहे हैं ? इन्‍होंने लिखकर दिया है आपको ? हां, इनको लिखकर दिया है ? माननीय सदस्‍य ने लिखकर दिया है कि मैं पाँच साल में नहीं लूंगा ?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मैं मेरा जवाब दूंगा तब यह सिद्ध कर दूंगा कि आपके समय में आपने वायलेशन किया है। आपके बहुत से लोग जिन्‍होंने आफिस आफ प्रोफिट का फायदा उठाया। यह कानून तब भी विद्यमान था। हम तो उनको रेगुलराइज कर रहे हैं। आपकी किसी से अनबन होगी। डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मुझे तो आपकी इग्‍नोरेंस पर दया आती है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): काहे की दया आती है ?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): पाँच साल तक यहां आपके ध्‍यान में ही नहीं आया कि यह बिल में प्रोविजन था और विरोध नहीं किया। इतने तो सीधे नहीं हो आप कि अभी तक आपको ध्‍यान में नहीं आया। उलटा एक संकल्‍प के मुद्दे पर तो कल मुख्‍यमंत्रीजी को आकर फैंसला करवा लिया आपने आप यदि इतने विद्वान हो...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): चलो आप आगे बढ़ो।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): दो घण्‍टे तक हाउस को एडजोर्न करवा कर बैक डेट में कल आपने सात परसेंट किया है। आप इतना....

श्री अध्‍यक्ष: कनक्‍लूड करें।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप तो खुद हाउस में थीं पिछली बार कितने एक्टिव मैम्‍बर थे यह। इनको यह कानून की जानकारी नहीं थी। 1980 में राजस्‍थान के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री जगन्‍नाथ पहाडि़या ने 70 आदमियों को बनाया है, मालूम है आपको ? फिर आप तो बीच में भी आ गये सरकार में फिर कोई अमेंडमेंट क्‍यों नहीं किया आपने ? आधा सत्‍य कहने की आवश्‍यकता नहीं है। आधा सत्‍य यह है कि अपने को जब सूट करे तब अपन बात करें और अपने को सूट नहीं करे तब बात नहीं करें। मैं तो खाली यह कहना चाहता हूं जो ओरिजनल है उसमे भी वही है कि यह कोई आपके सरकारी कर्मचारी नहीं कि एक तारीख को तनख्‍वाह मिले। कुछ माननीय सदस्‍य ने कहा मैंने नहीं लिया है। बहुत अच्‍छी काम किया है। यह बिल नहीं आता वह ले लेते हैं क्‍या ? इन्‍होंने लिखकर दिया है कि मैं नहीं लूंगा, यदि माननीय सदस्‍य ने लिखकर दिया है कि मैं नहीं लूंगा रिकार्ड में राइटिंग में हो तो समझ में आता मेरे को। The intentions were there कि हम लेंगे कि नहीं लेंगे यह बाद में फैंसला करेंगे। आज भी इस कानून में जिन लोगों ने तनख्‍वाह उठा ली है उनको डिलीट कर रहे हैं क्‍या तनख्‍वाह को आप ?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): बता दूंगा मैं आपको।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हमें तो बताने की जरूरत नहीं है। मैं कहना चाहता हूं कि हम...

श्री अध्‍यक्ष: बता देना आप।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे कहने का कथन है यह जो 1957 का ओरिजनल एक्‍ट है..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, लग रहा है आज जोशीजी की सुई एक ही जगह अटकी हुई है। टेप अटक गया इनका। आगे बढ़ ही नहीं रहे, कोई पहली बार तो बता नहीं रहे हैं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): चलिये, बिल में बढ़ाने का है। इस बिल में क्‍या बढ़ाने का है ?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): वह बताऊंगा मैं आपको। आप आगे तो बढ़ो।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आरोप है आप पर यह अमेंडमेंट इसलिये नहीं लाये कि तीन आदमियों को बचाया है। यह अमेंडमेंट इसलिये लाये हैं कि यह सरकार जो शेखी सरकार है, गिरने वाली है इसको बचाने के लिये एम एल ए को टेम्‍पटेशन दें हम और आदमियों को हम यह पद देंगे तो वह आपके भगकर नहीं जावें। है बोलने वाला कोई अब ? कोई नहीं बोल रहे हैं क्‍योंकि कांस्‍टीट्यूशन में प्रोविजन कर दिया है कि जो मिनिस्‍टर है उनकी संख्‍या इतनी होगी। मिनिस्‍टर बना नहीं सकते क्‍योंकि अब हम मिनिस्‍टर बना चुके हैं अब यह एम एल एल जो रैस्‍टलैस हैं उनको क्‍या करेंगे ? रैस्‍टलैस एम एल ए को एकोमडेट करने के लिये इन तीन व्‍यक्तियों का या दो व्‍यक्तियों का जो भी कह रहे हैं इनको आधार बनाकर एक लालीपाप बनाने की व्‍यवस्‍था करने का कानून ला रहे हैं यह। इसलिये यह तीन आदमियों को बचाने का कानून नहीं है। यह ढाई आदमियों को बचाने का कानून नहीं है लेकिन यह पन्‍द्रह बीस आदमियों को एकोमडेट करने का है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह दो कह दें या तीन कह दें इनहोंने ढाई कैसे कहा ? ढाई भी आदमी हुआ है कभी ? आप दो कहते, तीन कहते, ढाई आपका किसकी तरफ इशारा है ? ढाई आदमी, आधा आदमी कौन है.

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ढाई आदमी का मतलब यह है कि पद तो है पैसे नहीं ले रहे हैं। पद पर तो हैं।

श्री अध्‍यक्ष: यह भी इस समय छेड़ने का काम कर रहे हैं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): तो वह ढाई हुआ। आधा आदमी हुआ। पूरा आदमी नहीं हुआ। पूरा पैसा लेते, पूरा आदमी। तीन में गिनती होती।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने मोदी जी की तरफ घूमकर ढाई आदमी कहा।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): हां तो मोदीजी आधे हमारी तरफ हैं और आधे आपकी तरफ हैं। आपके ढाई हो गये।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): आदमी हमारे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: पी डब्‍ल्‍यू डी मिनिस्‍टर को खेत सिंहजी की याद आ गयी वह उनका वाला काम कर रहे हैं आज।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, इस सरकार के सबसे जिम्‍मेदार मंत्री का कर्तव्‍य है कि इस अमेंडमेंट को जितना मैं एलोब्रेट करूंगा उतनी इनको ताकत मिलेगी। एम एल ए को शाम को बुलाकर कहने का कि आपको वह बना रहे हैं तब तो वह शांत रहेगा और बाकी मैं एलोब्रेट करूंगा तो मालूम ही नहीं पड़ेगा कि अमेंडमेंट दो आदमियों को एकोमडेट करने के लिये नहीं किया जा रहा है, माननीय सदस्‍य जिनको मंत्री नहीं बनाया जा रहा है उन आदमियों को अलग-अलग चेयर पर्सन बनाकर खुश करने की व्‍यवस्‍था करने का काम किया जा रहा है..(व्‍यवधान) अच्‍छा मना कर देना। लिख देना आप। जो हिसाब लिख देना आप। यह तो मालूम है हज हाउस में कितने आदमी, एम एल ए जयपुर के गये कि नहीं गये हैं ? एम पी गये हैं कि नहीं गये ? यह तो रिकार्ड में है। कुछ चीजें मुझे कहने की जरूरत नहीं है और माननीय बंशीलाल जी राजसमंद के मेरे मित्र, मुझे मत कहलवाओ कि मुख्‍यमंत्री राजसमंद आयी जब अपन गये कि नहीं गये ? सब जानकारी है मुझे।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): हां, गया हूं ना मैं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हां, गये हो ? सांसद के साथ गये हैं अपन। नहीं गये थे। मुझे मत कहलवाओ मैं आपका मित्र हूं। मेरे मित्रों, मुझसे मत कहलवाओ। मुझे सब जानकारी है।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): मैं अस्‍वस्‍थ था तो नहीं गया।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हां, अच्‍छा किया। ऐसे ही आगे अस्‍वस्‍थ होते रहना आप। ध्‍यान रखना मुझे जानकारी है...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ठीक है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मित्र अच्‍छे ढूंढते हो डाक्‍टर जोशी आप।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप मित्र नहीं हो ?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मैं तो हूं ही पर आज मालूम पडा आपको...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मेरे जिले के, मुख्‍यालय के माननीय सदस्‍य हैं मैं इनका सम्‍मान करता हूं। यह जनता से चुनकर बने हैं, मैं सम्‍मान करता हूं। जनता के चुने हुए माननीय सदस्य का मैं सम्‍मान नहीं करूंगा तो...

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): आप दिल से सम्‍मान करते हैं क्‍या ?

 

 

श्‍याम/अरूण    6.10.2006   16.00(1)   2p  

 

मैं दिल से सम्‍मान करता हूं, मैं चुने हुए प्रतिनिधियों को सम्‍मान दिल से करता हूं ...(व्‍यवधान) यह मेरे जिले के, मुख्‍यालय के एम.एल.ए. हैं, मैं सम्‍मान करता हूं दिल से ...(व्‍यवधान) मैं जो इलेक्‍टेड आदमी हैं जनता के द्वारा उसका सम्‍मान करता हूं, उसमें कहां तकलीफ है। मैं सरकार का सम्‍मान नहीं कर रहा हूं? मैं आप जैसे मंत्री का सम्‍मान नहीं कर रहा हूं ...(व्‍यवधान) मैं सबका सम्‍मान कर रहा हूं, कहां तकलीफ है ...(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय सी.पी.साहब, जब आप पंचायत राज मंत्री थे उस समय मैं सरपंच था, उस समय मेरे ऊपर कातिलाना हमला होने वाला था, गौ-रक्षा का कार्यक्रम चल रहा था। मैंने आपसे निवेदन किया कि आप पंचायत राज मंत्री हैं, मैं आपका सरपंच हूं, कृपया मुझे सहयोग कीजिये। आपके जिलाध्‍यक्ष जी आये थे तो उन्‍होंने कहा कि नहीं यह भारतीय जनता पार्टी का सरपंच है तो मुझे आपने टाल दिया। वहां आप कहते कि मेरे पंचायत राज का सरपंच है, वहां सहयोग करते तो मैं समझता ...(व्‍यवधान) यह तो हो गया कि कर दिया, वहां थोड़े ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपकी भावना समझ में आ गयी। आप ध्‍यान रखना राजेन्‍द्र जी राठौड़ आपको इस संबंध में प्रोटेक्‍ट कर लें तो बताना मेरे को, ठीक है मैं तो नहीं कर पाया और आपके मंत्री आपको प्रोटेक्‍ट कर लें तो बताना मेरे को, जब मुझे खुशी होगी। कानून को तोड़ने के बाद न मंत्री न कोई साथी, न कोई पार्टी का सदस्‍य ऐसा कर सकता है। कानून अपना काम खुद करता है। उसमें मैं क्‍या करूंगा, आपने किया ...(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): आप तो पंचायत राज मंत्री थे ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): पंचायत राज मंत्री ने यह कहा था कि सरपंच साहब गायें छुड़वाने ...(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): यह तो एक्‍ट बना हुआ है ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपका धर्म है आप करें अपना काम ...(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): गौ-रक्षा एक्‍ट बना हुआ था ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): देख लें आप, बीच में, बैठें आप ...(व्‍यवधान) इतनी अच्‍छी बात कही, समझ में नहीं आयी आपके, इतनी जोरदार बात कही समझ में नहीं आयी। अब आप बंद करें ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप इनको पूरा करने दें ...(व्‍यवधान) बीच में नहीं बोलें, कनक्‍लूड करें आप ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, मैं कनक्‍लूड करूंगा। अध्‍यक्ष महोदय, स्‍टेटमेंट ऑफ आब्‍जेक्टिव रीजन्‍स, मैं इसलिए कहना चाहता हूं कि –“The members of the Legislative Assembly, by virtue of their vast experience …” The word is ‘vast experience’. इसका मतलब पहली बार जीतकर आये उनको नहीं बनाओगे. “….vast experience in public life and grass root appraisal of problems of people prove to be extremely useful in providing advisory support to the Government as Chairman/members of such committees.” अध्‍यक्ष महोदय, अब वास्‍ट एक्‍सपेरिएंस का आब्‍जेक्टिव कैसे डिफाइन करेंगे। यहां उल्‍लेख सिम्‍पल एम.एल.ए. को करना है, Vast experience is a jugglery of word. इतना एडजेक्टिव लाकर के हम काहे का करना चाहते हैं, आप कहें कि सिम्‍पल आब्‍जेक्टिव यह है कि कानून की दृष्टि से विधान सभा के दस प्रतिशत से ज्‍यादा आदमियों को मंत्री नहीं बनाया जा सकता है। बाकी एम.एल.ए. सब रेस्‍टलैस होते हैं उनको अकोमेडेट करने के लिए हमें कानून लाना है, बात सीधी है, इसमें कोई तकलीफ थोड़े ही है। हमें ट्रांसपरेंट रखना चाहिए. Why are we hypocrites? हमें यदि हिप्‍पोक्रेसी रखनी है तो हिप्‍पोक्रेसी से तो कानून बनेगा नहीं।

अध्‍यक्ष महोदय, इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि यह दुर्भाग्‍य ना कांग्रेस का, ना बी.जे.पी. का कि जो मूल मुद्दे हैं वह आपने सामने फिर रखना चाहता हूं कि यह जुडिसियरी हमको कर रही है। हम ऐसे-ऐसे कानून बनाकर के जुडिसियरी को एंटरप्रिटेशन करने को देंगे तो जुडिसियरी अपने ढंग से इस कानून को एंटरप्रिटेट करेगी और यही सबसे बड़ा खतरा लोकतंत्र के सामने खड़ा हो गया है कि जुडिसियरी अपने संविधान में जो उनका फंगशन है उससे एक्‍सीड कर रही है। इसलिए जुडिसियरी ने यह कहा है कि असेम्‍बलि की प्रोसीडिंग को कोर्ट में चैलेंज नहीं किया जा सकता है लेकिन कोर्ट ने डायरेक्‍शन दिये हैं कि असेम्‍बलि में प्रोसीडिंग किस तरह की होगी, स्‍पीकर कैसे काम करेगा, what are the functions of the Speaker, कैसे काम करना है, यह भी कोर्ट ने डायरेक्‍शन देकर उत्‍तर प्रदेश और झारखंड में जुडिसियरी ने एक सिग्‍नल दिया है कि लेजिसलेटर अपना काम, अपने कर्तव्‍य का निर्वहन ठीक ढंग से नहीं कर रहे हैं। यह उसका एक और उदाहरण होगा।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि सरकार इनकी है, बहुमत इनका है, बिल इनको लाना है, मेरिटस इस बिल की कुछ हैं नहीं, सिर्फ राजनीतिक पार्टी अपने स्‍वार्थ के खातिर ऐसा बिल लाना चाहती हैं। यह आर्गूमेंट करके हमें प्रपोज करना चाहते हैं पर एज ए मैंम्‍बर हमारा राइट है और हम आपका ध्‍यानाकर्षित करना चाहते हैं, मेहरबानी करके आप ऐसी चीजों के अंदर पार्टी नहीं बनें और कोशिश करते आप कि यह कानून लाने की आवश्‍यकता नहीं पड़ती। यदि कानून लाना ही था तो यह कानून इलेक्‍शन कमीशन में पिटीशन गयी उसके पहले ले आते तो मैं समझता हूं कि हैल्‍दी प्रेक्टिश प्रारंभ होती। लेकिन एक अवसर को हमने खो दिया है और अब समाज में एक मैसेज देना चाहते हैं कि हम अपने आदमी को प्रोटेक्‍ट करने के लिए बिल ला रहे हैं, या अपने आदमियों को राजनीतिक कंपलसेशन गवर्नेस में स्‍ट्रेंथन करने के लिए क्‍योंकि हमारी कुर्सी वल्‍नरेबल हो गयी है। हम चीफ मिनिस्‍टर से हट सकते हैं। दूसरा आदमी मुख्‍यमंत्री बन सकता है, असंतोष भड़का सकता है। उसको रोकने के लिए हमें बिल लाना है तो मुझे कहना है कि इसके बनिस्‍पत यह है कि एक बार जनमत जानने के लिए और भेज देना चाहिए। दो सौ आदमी ही मिलकर के फैसला करें इसकी बनिस्‍पत 5 करोड़ राजस्‍थान की जनता है उनकी भी ओपेनियन सुन ली जावे तो वह ज्‍यादा अच्‍छा होगा। वह जो राय होगी, उस राय से हम जो कानून बनायेंगे वह कानून अच्‍छा बनेगा, मजबूत कानून बनेगा और संवैधानिक दृष्टि से लोग कह सकेंगे कि हमें जो अधिकार मिले थे उसका उपयोग करके हमने ऐसा कानून बनाया कि फ्युचर में जनरेशन भी कह सकेगी कि उस कानून का लाभ हम सबको मिल सकेगा। यही बात मुझे आप सबको कहनी है और यह जो कानून बनाया गया है और कुछ सदस्‍यों को लाभ के पद पर तनख्‍वाह देने के बाद भी प्रोटेक्‍ट करने का, इस पर तो चिंता की जानी चाहिए।

अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी, I am open to correction, अपने आपको, जब आप यह बिल पास कर रहे हैं तो उनकी तनख्‍वाह को भी रेगुलाइज करेंगे तो फाइनेन्‍स इनवाल्‍व है कि नहीं है, फाइनेन्‍स है तो फाइनेन्‍स बिल बना कि नहीं बना, अगर बना तो गवर्नर के पास क्‍यों नहीं गया।

 अध्‍यक्ष महोदय, मुझे पता नहीं, आप देख लें कि इस बिल के साथ में यदि फाइनेंसियल इम्पिलिकेशन जुड़ा हुआ है तो कंसोलिडेट फंड में जो पैसा उनको मिला हुआ है वह पैसा भी रेगुलाइज हो रहा है। पैसा अगर रेगुलाइज हो रहा है तो उस पैसे को रेगुलेट करने के लिए बिल के हिसाब से इसको गवर्नर के पास ले जाना चाहिए था। आपने गर्वनर से इसकी अप्रूवल क्‍यों नहीं ली, मैं समझता हूं इस पर अध्‍ययन कर लिया, मुझे नहीं मालूम कि जो यह बात कह रहा हूं इसमें तथ्‍य है या नहीं है। लेकिन आपकी मंशा उनकी तनख्‍वाह, क्‍योंकि एक ने तो पैसा लिया नहीं इसलिए वह तो बच गये। दो आदमियों ने तनख्‍वाह ली है। वह तनख्‍वाह उन्‍होंने उस हिसाब से भी ली है और तनख्‍वाह एम.एल.ए. के हिसाब से भी ली है। जब डबल तनख्‍वाह ली है, एक सरकारी कर्मचारी दो जगह से तनख्‍वाह लेता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही होती है और नौकरी से सस्‍पैंड होता है और यहां विधायक दो जगह से तनख्‍वाह लेकर के ऐसा प्रोटेक्‍ट करना चाहते हैं तो मैं समझता हूं कि यदि संवैधानिक दृष्टि से भी इसमें फाइनेंस इनवाल्‍व है तो इसके इम्पिकेशन के संबंध में भी गवर्नर से परमिशन लायें,  यदि हम यह बिल पास करते हैं तो यह संवैधानिक दृष्टि से भी ठीक नहीं होगा।

अध्‍यक्ष महोदय, इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि बिल राजनीतिक कंम्‍पलसेशन के कारण से लाया जा रहा है। यह बिल जनहित में नहीं लाया जा रहा है। यह बिल लोकतंत्र को कमजोर करके जुडिसियरी को एक सिग्‍नल देने का बिल है जिसमें यह मैसेज जाये कि हम अपने स्‍वार्थ के लिए कानून बनाते हैं, क्‍योंकि जज खुद अपनी ही गिल्‍टी को पनिशमेंट करने का काम करे तो जुडिसियरी पर से विश्‍वास उठ जायेगा। अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍हीं भावनाओं के साथ कहना चाहूंगा कि इसको जनमत जानने के लिए प्रचारित किया जाये।

श्री अध्‍यक्ष: श्री रामनारायण मीणा।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): आप दिल्‍ली वाले निर्णय के विरोध में हैं क्‍या? मैं तो इतना ही जानना चाहता हूं, लंबी-चौड़ी बात नहीं है ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): दिल्‍ली में इसका मौका नहीं मिला ...(व्‍यवधान) मुझे अपने विचार व्‍यक्‍त करने हैं तो दिल्‍ली में भी यही व्‍यक्‍त करूंगा मैं ...(व्‍यवधान)

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): माननीय सदस्‍य आप गलतफहमी में नहीं रहें। इसमें एक पैसा नहीं लिया, सिर्फ एम.एल.ए. की तनख्‍वाह ले रहे हैं, न कोई टी.ए., डी.ए. लेते हैं ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मैं तो न कोर्ट हूं, न इलेक्‍शन कमीशन हूं ...(व्‍यवधान) आप ले रहे हैं कि नहीं ले रहे हैं मुझे इससे क्‍या ...(व्‍यवधान) आप ले रहे हैं या नहीं ले रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): मैंने आपको यह सूचना इसलिए दी है कि कहीं गलतफहमी नहीं हो, हमने किसी ने कोई पैसा नहीं लिया।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मेरे को तो गलतफहमी नहीं है, आपके ड्राइवर की तनख्‍वाह कंसोलिडेटेड फंड से मिल रही है, यह तो है, यह जानकारी अपने को है कि नहीं है, आपने तनख्‍वाह नहीं ली होगी, जो गाड़ी चला रहा है ड्राइवर उसकी तनख्‍वाह कहां से मिल रही है, वह तनख्‍वाह आप घर से दे रहे हैं क्‍या? उसकी तनख्‍वाह राजस्‍थान के कंसोलिडेटेड फंड से मिल रही है। यह नहीं कि मैं तनख्‍वाह नहीं ले रहा हूं। आपने तनख्‍वाह नहीं ली लेकिन उसकी तनख्‍वाह पर भी बर्डन होता है। वह भी डिस-क्‍वालिफिकेशन में आता है। अपने आपको करेक्‍ट कर लें आप, इसलिए यह कहना सही नहीं है कि तनख्‍वाह नहीं ले रहा हूं।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विधान सभा सदस्‍य (निरर्हता-निराकरण) (संशोधन) विधेयक, 2006 के बारे में काफी चर्चा हुई और मैं आपके माध्‍यम से संसदीय कार्य मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि आप अपनी पार्टी का जो स्‍टैंड है, उसके खिलाफ जा रहे हैं और यदि जा रहे हैं तो यह संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। जनता के विश्‍वास को तोड़ने के बराबर है इसलिए मैं आपको एक बात अर्ज करना चाहता हूं, संसद का गठन हुआ था, विधान सभा का गठन हुआ था, विधान सभा में राजस्‍थान की पाँच करोड़ जनता के दु:ख-दर्द के बारे में और उनके हितों के बारे में चर्चा करने के लिए इक्‍टठा हुए हैं, लेकिन यह खेद की बात है कि आप तीन सदस्‍यों को बचाने के लिए इस तरह का तरीका अख्तियार कर रहे हैं ...(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, इसलिए मैं अर्ज करूंगा, मैं ज्‍यादा समय नहीं लेते हुए मैं आशा करूंगा, इस सरकार ने जो जनहित की बात करती है। उससे यह आशा करूंगा कि आप पाँच करोड़ से ज्‍यादा जनता के हितों की देखभाल करने के लिए आये हो। यह जो आप बिल लाये हो इसको जनमत जानने के लिए भेजें और उसके बाद में आप जो भी निर्णय करना हो वह सदन में बैठकर के करें। यही मुझे कहना है, धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: श्री संयम लोढ़ा। सब कुछ तो बोल दिया सी.पी.जोशी जी ने, अब क्‍या बाकी रहा, करायें ना इनसे।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, मुझसे नाराजगी है क्‍या?

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, कोई नाराजगी नहीं है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): पिछले तीन दिनों से मुझे ऐसा लग रहा है।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, कोई नाराजगी नहीं है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अब आपकी आज्ञा नहीं है तो मैं बैठ जाऊं।

श्री अध्‍यक्ष: आप बोलें। बोलने को थोड़े ही ना किया है, लेकिन संक्षेप में।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अध्‍यक्ष महोदय, मैं दो मिनट में अपनी बात इसलिए समाप्‍त कर गया क्‍योंकि संयम जी को बहुत कुछ बोलना है।

जय गोविन्‍द/अरुण/6106/1610/2q 

 

श्री संयम लोढ़ा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, संविधान के अनुच्‍छेद 191, 192 का हवाला देकर राजस्‍थान सरकार यह संशोधन बिल लाई है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह ऑफिस ऑफ प्रोफिट का इश्‍यू लम्‍बे समय के बाद हाल ही में चर्चा में तब आया जब एक नागरिक की याचिका की वजह से चुनाव आयोग ने राज्‍य सभा सदस्‍य, श्रीमती जया बच्‍चन की सदस्‍यता समाप्‍त कर दी और उसके बाद इस पर समग्र रूप से विचार शुरू हुआ कि क्‍या पहल की जाए। क्‍योंकि बहुत से लोग इसकी चपेट में आने वाले थे और सबसे खास तौर से देश के प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने अपना एक स्‍टेण्‍ड लिया जब रक्षा मंत्री, प्रणव मुखर्जी ने लोक सभा में कांग्रेस पार्टी के नेता के रूप में इस पर चर्चा शुरू की थी तो भारतीय जनता पार्टी ने यह कहना प्रारम्‍भ किया कि इस दिशा में जो भी पहल भारत सरकार कर रही है वह सिर्फ सोनिया गांधी की सदस्‍यता को बचाने के लिए ही कर रही है क्‍योंकि सोनिया गांधी न्‍यूनतम सांझा कार्यक्रम की राष्‍ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्‍यक्ष है।

श्री अध्‍यक्ष: आप तो यहां की बात पर आओ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं वही कह रहा हूं और इसके लिए यह सारी पहल की जा रही है। यह सारा आरोप लगाया गया कि सोनिया गांधी की सदस्‍यता को बचाने के लिए हिन्‍दुस्‍तान की सरकार यह सारी एक्‍सरसाइज कर रही है। उन पर हर तरह के राजनीतिक हमले भारतीय जनता पार्टी द्वारा करने की कोशिश की गई लेकिन माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजनीति में आदर्शहीनता के इस दौर में और राजनीति के इस नैतिक पतन के दौर में सोनिया गांधी ने एक बार फिर वह आदर्श प्रस्‍तुत किया, फिर वह उदाहरण प्रस्‍तुत किया, देश के सामने ही नहीं, दुनिया के सामने और लोक सभा की सदस्‍यता से सोनिया गांधी ने इस्‍तीफा दे दिया। पूरे हिन्‍दुस्‍तान की जनता ने देखा कि भारतीय जनता पार्टी के लगाए हुए सारे आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद थे।

श्री अध्‍यक्ष: आप तो इस अमेण्‍डमेण्‍ट पर आओ। आप तो कोई नई बात कहो।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): और इस आधार पर उन्‍होंने अपने खुद को बचाने की कोशिश नहीं की, उन्‍होंने कहा कि अगर देश का प्रमुख विपक्षी दल इस तरह की बात करता है, इस तरह का संदेह व्‍यक्‍त करता है, इस तरह की आशंका व्‍यक्‍त करता है तो मैं हिन्‍दुस्‍तान की जनता के बीच में जाऊंगी और रायबरेली की जनता के बीच में जाऊंगी। ...(व्‍यवधान)...

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): इस्‍तीफे की नौटंकी करके देश की जनता के करोड़ों रुपए खर्च करवा दिए चुनाव में।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): और उन्‍होंने इस्‍तीफा दिया। उस भारतीय जनता पार्टी ने जिसने वे सारे आरोप लगाए थे उसके उम्‍मीदवार विनय कटियार की जमानत जब्‍त करवाकर पाँच लाख वोटों से जीत कर वह हिन्‍दुस्‍तान की पार्लियामेण्‍ट में वापस पहुंची।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सोनिया गांधी पाँच लाख वोटों से जीती यह अमेण्‍डमेण्‍ट पूरा पढ़ा, मुझे तो कहीं दिखा नहीं।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने सोचा संयम लोढ़ा अमेण्‍डमेण्‍ट पर कोई नई बात बोलेंगे।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): पाँच लाख वोटों से जीती यह कह रहे हैं, आप भी ऐसा ही करो।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): बहुत अच्‍छा होता कि भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने जो आरोप लगाए थे...।

श्री अध्‍यक्ष: आप राजनीतिक भाषण दे रहे हैं, अमेण्‍डमेण्‍ट पर बोल रहे हो?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं यह कहना चाह रहा हूं कि मुझे विश्‍वास नहीं हो रहा है कि राजस्‍थान की इस विधान सभा के अन्‍दर...।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब से इनको खतरा हुआ है कि अगली बार इनको टिकट नहीं मिलेगा यह मौका लगते ही सोनिया गांधी की संस्‍तुति में लगे रहते हैं । बिल पर, अमेण्‍डमेण्‍ट पर तो बोल नहीं रहे। यह कौनसे सैक्‍शन में अमेण्‍डमेण्‍ट है? उस पर बोलो न आप।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): इनको तो अपने भाषण की प्रमाणित कॉपी दिल्‍ली भेजनी पड़ेगी ताकि अगला टिकट पक्‍का हो।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): संसदीय मंत्रीजी, आपको देखते हैं न इसलिए आपसे प्रभावित हो रहे हैं यह।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर मुझे टिकट नहीं मिलेगा तो कोई बात नहीं, मैं कोई सत्‍ता का भूखा नहीं हूं, एक साधारण कार्यकर्ता की तरह कांग्रेस पार्टी के लिए काम करूंगा, आपकी तरह जनता दल छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी में आने का काम, जो अपराध आपने किया वह मैं नहीं करूंगा। उसी पार्टी में रहूंगा जिसने मुझे राजस्‍थान के इस सर्वोच्‍च सदन में पहुंचने का मौका दिया भले ही टिकट मिले कि नहीं मिले। अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन कर रहा था ...(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): एक मिनट माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनका लालन पालन सब प्रकार से संस्‍कारित करने का पूरा प्रयास खर्चा वगैरह सब हमने किया। हमारे साथ रहे, हमारे साथ नेकर पहन कर शाखा गए और उसके बाद में पता नहीं कैसे भ्रमित हो गए, यह समझ में नहीं आया।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): हमारे पास तो है न यह प्रमाण, इनकी कथनी और करनी में खुला फर्क है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): और आज जो बदल रहे हैं इनका राजपुरोहित के साथ  किसी विषय पर विवाद हुआ और उन्‍होंने इनको प्रताडि़त किया किसी विषय पर और उसके बाद ये चले गए उधर। और वहां जाकर ब्‍याज समेत गुणगान में लग गए। लेकिन कोई बात नहीं। जब आपने राजेन्‍द्र जी के लिए कहा तो मुझे भी याद आ गया कि आप कहां थे आप क्‍यों भूल रहे हैं कि आप भी यहीं से गए हैं। यह भाषण कला आपने कहां से सीखी, हमसे सीखी, नहीं तो वहां तो कभी बोलना ही नहीं जानते थे। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह नहीं जाते तो आपके लखण कैसे पता चलते, यह तो आपकी जानकारी लेने गए थे।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): राजपुरोहित के सबसे ज्‍यादा गुणगान करते थे, सबसे ज्‍यादा उनके साथ घूमते थे गाड़ी में उनकी में।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): नहीं, नहीं, बहुत अच्‍छे आदमी हैं, बहुत अच्‍छे राजनेता है, गलत राजनीतिक दल है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह अपने निजी विचार कुछ भी व्‍यक्‍त करें।

श्री अध्‍यक्ष: हां, यह विचार गलत है या सही है यह तो बता दो, यह सत्‍य है या असत्‍य है?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं 1980 में शिवगंज के राजकीय उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय के छात्रसंघ का निर्वाचित अध्‍यक्ष था, 1989-80, 1980-81 में दो-दो साल और जब मैं मात्र 14 साल का था कांग्रेस के तत्‍कालीन विधायक देवीसहाय ने मेरे छात्रसंघ का उद्घाटन किया था। 1982 में मेरे फालना कॉलेज छात्रसंघ का उद्घाटन किया था तत्‍कालीन उप मंत्री अशोक गहलोत ने। किसे भ्रमित करने की बात कर रहे हैं?  

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): संघ की शाखा में कब गए थे? ...(व्‍यवधान)... ,

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं तो आपको जानता भी नहीं हूं। आपकी शक्‍ल मैंने इस विधान सभा में देखी है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): इमर्जेन्‍सी में जब हमारा वारण्‍ट था तो आपने मुझे अपने घर पर ठहराया कि नहीं ठहराया, यह क्‍यों भूलते हो आप।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): संघ के स्‍वयंसेवकों ने महात्‍मा गांधी की हत्‍या की है यह पता चला तो हमारे पास आ गए। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ऐसा कुछ भी नहीं है।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन दोनों में अटूट इतना प्रेम था वह आज हम सबको मालूम पडा कि इतना लम्‍बा प्रेम था।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): हां बहुत लम्‍बा प्रेम है, खूब रहता है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अपना प्रेम बनाए रखो। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे आज्ञा दी, मैंने निवेदन किया...।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप अमेण्‍डमेण्‍ट पर आओ।

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