जयगोविन्‍द/अरुण/06032007/1100/1a

अशोधित प्रति/प्रकाशनार्थ नहीं

 

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

 अंक : 7   बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का छठा दिवस   संख्‍या : 4

 

मंगलवार, 06 मार्च, 2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11.00 बजे

विधान सभा भवन, जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

( श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन )

 

श्री अध्‍यक्ष: श्री नन्‍दलाल पूनिया।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, जिस सरकार के कैबिनेट मंत्री पर विधान सभा के बिलकुल सामने हमला हो गया..।

श्री अध्‍यक्ष: आप क्‍वेश्‍चन ऑवर के बाद यह बात उठाइए। गलत बात है। क्‍वेश्‍चन ऑवर होने दीजिए। ...(व्‍यवधान)... क्‍वेश्‍चन ऑवर होने दीजिए।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मंत्रिमण्‍डल के सदस्‍य के ऊपर जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता हमला कर रहे हैं...। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: अंकित न हो।

श्री हीरालाल (निवाई):  000

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000 

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, प्रश्‍नकाल होने दीजिए। ...(व्‍यवधान)...

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित न हो।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: मैं आपसे कहना चाहूंगी कि यह सदन नियमों से चलता है, खण्‍डार से आने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): 000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित न हो।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): 000

श्री अध्‍यक्ष: आपकी तबीयत खराब है। आप आसन ग्रहण कर लें। आपकी तबीयत खराब है, स्‍थान ग्रहण करिए।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): 000

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण। आप प्रश्‍न काल होने दीजिए। प्रश्‍नकाल के बाद इन बातों को उठाया जाता है। ...(व्‍यवधान)...

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री रामलाल शर्मा (चौमूं): 000

श्री अध्‍यक्ष: श्री नन्‍दलाल पूनिया।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप लगातार चौथे दिन प्रश्‍नों की बलि क्‍यों चढ़ाए जा रहे हैं। आप स्‍थान ग्रहण करिए। ...(व्‍यवधान)... खण्‍डार से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप मुझे मजबूर न करें। आप चार दिन से प्रश्‍नों की बलि चढ़ाए जा रहे हैं। लोगों के इतने महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है। ...(व्‍यवधान)... मैंने कहा सिट डाउन। सदन के नियम हैं, आपको कोई भी महत्‍वपूर्ण बात, चर्चा करनी है तो आप प्रश्‍नकाल के बाद करिएगा। आप महत्‍व कम कर रहे हैं इस बात का इस समय उठा कर। जीरो ऑवर में उठाइए यह बात। उसके बाद उठा सकते हैं यह बात। प्रश्‍नकाल शुरू होते ही, चार दिन हो गए, मैं देख रही हूं ...(व्‍यवधान)... अब प्‍लीज बैठिए। श्री नन्‍दलाल पूनिया।

श्री नन्‍दलाल पूनिया (सादुलपुर): प्रश्‍न संख्‍या 38.

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

 

Gpc/akt/06032007/1110/1b

 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): 000

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): 000

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍नकाल है। आप तो बैठिए। आप विराजिए। ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री हीरालाल (निवाई): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री):  000

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): 000

                                                 

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/06032007/1120/1c

 

श्री महावीर प्रसाद जैन: 000  

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: 000  

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍यगण, सदन के कुछ नियम हैं, मैंने आपसे कहा था प्रारंभ में कि क्‍वेश्‍चन ऑवर हो जाने दीजिए। न किसी की पर्ची आई इस मामले में, यदि आप गंभीर थे इस मामले में, आपको यह प्रश्‍न उठाना था तो पर्ची के माध्‍यम से, स्‍थगन प्रस्‍ताव के माध्‍यम से ...(व्‍यवधान)... बीच में नहीं बोलेंगे, कोई नहीं बीच में बोलेगा। स्‍थगन प्रस्‍ताव के माध्‍यम से, पर्ची के माध्‍यम से आप इस प्रश्‍न को उठा सकते थे और मैं मंजूर करती उसे लेकिन तब तो किसी को भी यह याद नहीं आया, अख़बार सब ने पढ़ा, किसी को याद नहीं आया, यहां आकर सब शेर बन रहे हैं और सब अपनी अपनी जिसे कहना चाहिए लंग पावर का पूरा इस्‍तेमाल कर रहे हैं। अब प्रश्‍न काल होने दीजिए उसके बाद में इस बारे में आपके गृह मंत्री जी अपना वक्‍तव्‍य दे देंगे, बता देंगे लेकिन अब प्रश्‍न काल चार दिन हो गये हैं, अब प्रश्‍न काल होने दीजिए, अब बीच में न बोलें, प्रश्‍न संख्‍या एक, श्री नन्‍द लाल पूनिया।

 

कन्‍या उच्‍च प्राथमिक विद्यालय नेसल एवं डिगली (चूरू) का क्रमोन्‍नयन

 

38. श्री नन्‍दलाल पूनिय (सादुलपुर):क्‍या शिक्षा मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

(1) राज्‍य में कन्‍या माध्‍यमिक विद्यालय क्रमोन्‍नति/स्‍वीकृति के क्‍या मापदण्‍ड हैं?

(2) क्‍या यह सही है कि कन्‍या उच्‍च प्राथमिक विद्यालय नेसल एवं डिगली तहसील राजगढ़ उक्‍त मापदण्‍ड में आते हैं ? यदि हां, तो उक्‍त गांवों के कन्‍या उच्‍च प्राथमिक विद्यालयों को कब तक क्रमोन्‍नत कर दिया जावेगा ?

राज्‍य मंत्री, शिक्षा (श्री वासुदेव देवनानी): (1) विद्यालय क्रमोन्‍नति हेतु निर्धारित मापदण्‍ड की प्रति का परिशिष्‍ठ 'क' संलग्‍न है।

(2) राज्‍य सरकार के उपलब्‍ध वित्‍तीय प्रावधानों के तहत निर्धारित मानदण्‍ड की प्रति करने वाले विद्यालयों के प्रस्‍तावों पर गुणावगुण के आधार पर समग्र विचार करने के पश्‍चात् विद्यालय क्रमोन्‍नति की स्‍वीकृति प्रदान करती है। नेसल एवं डिगली के प्रस्‍ताव प्राप्‍त होने पर अन्‍य प्रस्‍तावों के साथ गुणावगुण के आधार पर समग्र विचार किया जाकर उपलब्‍ध वित्‍तीय प्रावधानों के तहत ही निर्णय लिया जाना संभव हो सकेगा।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय शिक्षा मंत्री जी, यदि मैं भूलती नहीं हूं तो यहां पर शिक्षा मंत्री जी ने घोषणा की थी, घनश्‍याम जी तिवाड़ी ने कि कन्‍याओं के जितने भी स्‍कूल हैं किसी भी स्‍तर के हों उन स्‍कूलों की क्रमोन्‍नति की जाएगी। यह घोषणा सदन में की थी और अब आप गुणावगुण पर आ गये।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन सुन लें। इन्‍होंने डिगली और नेसल के बारे में कहा है। डिगली की जनसंख्‍या केवल 1847 है, मानदण्‍ड के अनुसार ढाई हजार चाहिए।

श्री अध्‍यक्ष: उस समय जनसंख्‍या की बात नहीं थी, क्‍यों की फिर इन्‍होंने घोषणा?

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): नेसल के अन्‍दर हमने सीनियर सैकण्‍डरी स्‍कूल क्रमोन्‍नत कर रखा है।

श्री नन्‍दलाल पूनिया (सादुलपुर): नहीं, नेसल में मापदण्‍ड से ज्‍यादा है आपकी पापुलेशन।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): नेसल में मापदण्‍ड के आधार पर केवल सैकण्‍डरी स्‍कूल चाहिए था, हमने उसकी जगह सीनियर सैकण्‍डरी स्‍कूल जिसे चार हजार चाहिए केवल 2582 होने पर भी हमने यह सीनियर सैकण्‍डरी स्‍कूल बना दिया है, सारी छात्राएं वहां पढ़ रही हैं, किसी भी छात्रा को इस कारण से पढ़ाई में व्‍यवधान नहीं है, सरकार जो है वह बालिका शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उसके लिए हमने जितने कदम उठाये हैं, इस आधार पर विद्यालयों में नामांकन पिछले तीन वर्षों के अन्‍दर 18 प्रतिशत से बढ़कर 32.7 प्रतिशत हो गया है और 6 लाख से अधिक नामांकन हुआ है। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय ने जो कहा है उसका यह कोई जवाब नहीं है। अध्‍यक्ष महोदय  ने जो प्रश्‍न किया है उसका यह जवाब नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): निशुल्‍क साइकिलें पहले उपलब्‍ध कराई हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: मूल प्रश्‍नकर्ता पूछना चाहें तो पूछें, आपको क्‍या आवश्‍यकता है, जब बात हो गई, आसन ने कह दिया, आप क्‍यों खड़े हैं, बिराजिए, स्‍थान ग्रहण करिये, बीच में न बोलें। मुझे सपोर्ट की आवश्‍यकता नहीं है आपकी, आसन को आपकी कोई आवश्‍यकता नहीं है। मैंने याद दिलाया है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): हमको आसन की गरिमा को मेंटेन रखना है।

श्री अध्‍यक्ष: सुनिए, मैंने याद दिलाया है उन्‍हें लेकिन आप कहें हम आसन को सपोर्ट कर रहे हैं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आसन की गरिमा का प्रश्‍न है, यह आसन का आब्‍जर्वेशन है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, आपने कहा उसका जवाब कहां दिया है।

श्री अध्‍यक्ष: अब आपको गरिमा की याद आई और उस दिन तो शोकाभिव्‍यक्ति पर गरिमा की नहीं याद आई थी। ...(व्‍यवधान)...

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): अध्‍यक्ष महोदय, हमने 1262 पीएस को यूपीस में क्रमोन्‍नत कर दिया है। ...(व्‍यवधान)... यह 1262 गर्ल्‍स पीएस से यूपीस किये हैं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय मंत्री जी ने जो हाउस में कमिटमेंट दिया है उसके बारे में बोलिए, बाकी के बारे में क्‍या बोलते हैं ?

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): हां, हां, बोल देंगे हाउस में। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहले कहा था, आपने मेरी भावना ठीक से शायद, मैं समझता हूं, मैंने पहले कहा था कि जितनी भी लड़कियों के स्‍कूल हैं, उनको हम लगातार क्रमोन्‍नत करना चाहते हैं और इसलिए पहली बार हमने जितनी लड़कियों के प्राथमिक विद्यालय राजस्‍थान में थे इस बार एक आदेश से सारे के सारे प्राथमिक विद्यालयों को उच्‍च प्राथमिक विद्यालयों में बदल दिया है। इसमें कांग्रेस के विधायकों की भी कांस्‍टीट्यूएंसी है और बी.जे.पी. के विधायकों की भी हैं। इसी प्रकार से अब जो बजट आएगा।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): आपको मैं नाम से बता दूंगा, क्‍या बात करते हो आप ? बहुत प्राइमरी बालिकाएं अभी तक क्रमोन्‍नत नहीं की गई हैं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): नहीं हो गये हैं न आदेश। ...(व्‍यवधान)...

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): सभी बालिका विद्यालय क्रमोन्‍नत नहीं हुए हैं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): आप नहीं सुनना चाहते हैं, आप मत सुनें। ...(व्‍यवधान)... अध्‍यक्ष महोदय, सारे राजस्‍थान में प्राथमिक बालिका विद्यालय जितने भी हैं उनको उच्‍च प्राथमिक विद्यालयों में क्रमोन्‍नति के आदेश जारी हो चुके हैं।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): यह बिलकुल नहीं हुए हैं, मैं आपको नाम से बता दूं। ...(व्‍यवधान)... मेरे विधान सभा क्षेत्र में कम से कम 8-9 प्राथमिक विद्यालय हैं क्रमोन्‍नत नहीं हुए हैं1

श्री अध्‍यक्ष: ये प्राथमिक शालाओं के आये थे प्रस्‍ताव इनके पास उनको तो किया है। जिनके नहीं प्रस्‍ताव आ पाये वह नहीं हुए।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): नहीं, ऐसा नहीं है। ...(व्‍यवधान)... जोशी जी, सुनिए राजस्‍थान में जितने प्राथमिक विद्यालय लड़कियों के थे।

श्री अध्‍यक्ष: यह तो ठीक है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): 1500 बालिका विद्यालयों उनमें से 1200 के तो आदेश जारी हो चुके हैं, 300 जो बचे हैं उनकी संख्‍या कम थी उनके भी आदेश कर दिये हैं। इस साल का जो सत्र चालू होगा उस सत्र से वह भी उच्‍च प्राथमिक विद्यालय हो जाएंगे। ...(व्‍यवधान)... सुन लीजिए अग्रवाल साहब, पहले। नम्‍बर एक।

श्री अध्‍यक्ष: पूरी सुन लें।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): नम्‍बर दूसरी, तीन प्रकार के आदेश किये हैं, अध्‍यक्ष महोदय, नम्‍बर एक जितनी राजीव गांधी पाठशालाएं थी सारे राजस्‍थान भर में उन पाठशालाओं को उच्‍च प्राथमिक पाठशालाओं में परिवर्तित कर दिया गया है, नम्‍बर एक। जितनी संस्‍कृत, इनको प्राथमिक किया राजीव गांधी पाठशालाओं को, राजीव गांधी पाठशालाओं को सब को प्राथमिक पाठशालाओं में क्रमोन्‍नत कर दिया गया है सारे राजस्‍थान भर में । इसी प्रकार से, जितनी बालिका विद्यालय प्राथमिक थे उन सारे बालिका विद्यालयों को उच्‍च प्राथमिक में परिवर्तित कर दिया गया है। नम्‍बर तीन, संस्‍कृत की जितनी पाठशालाएं थी प्राथमिक की उन सब को भी उच्‍च प्राथमिक में परिवर्तित कर दिया गया है जिनमें अगर रूक गई हैं कोई किसी कारण से लड़कियों की संख्‍या कम अधिक होने से, उन स्‍कूलों को भी नया जो शिक्षा सत्र प्रारंभ होगा, उच्‍च प्राथमिक में परिवर्तित कर दिया जाएगा, सब विधान सभा क्षेत्रों में, एक। तीसरी बात मैं कहना चाहूंगा कि माध्‍यमिक शिक्षा के बारे में जो प्रश्‍न था, वैसे जो नेसल है, नेसल में वहां तो सीनियर सैकण्‍डरी स्‍कूल है और 256 बालिका वहां पर पढ़ रही हैं इसलिए पूनिया साहब, यह संभव नहीं है कि हर पंचायत पर लड़के और लड़कियों की दो अलग अलग सैकण्‍डरी और सीनियर सैकण्‍डरी रखें। फिर भी लड़कियों के लिए कोई व्‍यवस्‍था और करनी होगी। ...(व्‍यवधान)... 256 ....

श्री अध्‍यक्ष: यह तो कन्‍या उच्‍च प्राथमिक को माध्‍यमिक में क्रमोन्‍नत करने का प्रश्‍न है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): नहीं, नहीं, मैं भी यही कह रहा था। कन्‍या उच्‍च प्राथमिक को माध्‍यमिक चाहाते हैं लेकिन वहां पर आलरेडी सीनियर सैकण्‍डरी है जिसमें लड़के लड़कियां दोनों पढ़ रहे हैं और 256 लड़कियां उसमें आलरेडी पढ़ रही हैं तो सरकार के संसाधनों को देखते हुए यह संभव नहीं है, सब जगह जहां सीनियर और सैकण्‍डरी स्‍कूल हैं, सब जगह लड़के और लड़कियों के लिए अलग अलग किया जाय, संभव नहीं है लेकिन मैं आपको यह विश्‍वास दिला सकता हूं कि इस बार हम कोशिश करेंगे। भारत सरकार से प्रयत्‍न किया और मैं आपको सूचना देना चाहूंगा, अध्‍यक्ष महोदय, मुझे खुशी है कि जिस कमेटी का मुझे चेयरमैन बनाया था मानव संसाधन मंत्रालय ने, उस कमेटी की सिफारिशें भारत सरकार ने स्‍वीकार कर ली है और सैकण्‍डरी शिक्षा में भी इस बार ऊपर से हमको मदद मिलेगी तो पूरी कोशिश करेंगे जो सदन में मैंने बात कही थी आपके निर्देश पर उसकी पालना करने कर पूरा प्रयत्‍न करेंगे।

श्री नन्‍दलाल पूनिया (सादुलपुर): कोशिश नहीं, साहब, यह तो आप घोषणा ही करो। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय का ध्‍यान इस ओर आकर्षित करवाना चाहता हूं कि शिक्षाकर्मी जो विद्यालय हैं।

श्री अध्‍यक्ष: यह डिगली, नेसल का प्रश्‍न था। ...(व्‍यवधान)... नो, नो, डिगली और नेसल का सवाल था उसका जवाब उन्‍होंने दे दिया है।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): नहीं, जवाब पूरा नहीं आया है अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: श्री कैलाश त्रिवेदी। ...(व्‍यवधान)...

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): मेरा छोटा सा प्रश्‍न है।

श्री अध्‍यक्ष: मूल प्रश्‍नकर्ता।

 

Skp/akt/06032007/1130/1d/1

 

श्री नन्‍दलाल पूनिया (सादुलपुर): मेरा सवाल अधूरा रह गया है। जैसे डिगली का मामला है, डिगली में कन्‍या उच्‍च प्राथमिक विद्यालय और वहां पर प्राइमरी स्‍कूल बच्‍चों का है। छठी कक्षा में प्रवेश के लिए बच्‍चे दूसरे गांवों, सुलखनियां, नौरंगपुरा, थिरपाली बड़ी में जाते हैं तो क्‍यों नहीं उनको छठी कक्षा में उस कन्‍या स्‍कूल में एडमिशन दे दिया जाए। यह आप नहीं कह सकते तो कम से कम आठवीं की स्‍कूल खोल दीजिये बच्‍चों के लिए। कुछ तो करो साहब, मैं तीन साल से आपसे इस सम्‍बन्‍ध में निवेदन कर रहा हूं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): आप चाहते हैं कि लड़कियों की स्‍कूल को कॉमन कर दें?

श्री नन्‍दलाल पूनिया (सादुलपुर): जी सर।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): हां, कर देंगे। कोई दिक्‍कत नहीं है। उसमें क्‍या समस्‍या है, कर देंगे।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न संख्‍या 39 श्री कैलाश त्रिवेदी। श्री कैलाश त्रिवेदी। मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है।

चौधरी विनोद कुमार (हनुमानगढ़): जो विद्यालय क्रमोन्‍नत हुए हैं उनमें क्‍या अध्‍यापकों के पद सृजित किये गये हैं? मेरे ख्‍याल में नहीं किया गया है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है। श्री कैलाश त्रिवेदी।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): शिक्षा मंत्री महोदय, मेरा आपसे यह निवेदन है कि वजीरपुर में कन्‍या माध्‍यमिक विद्यालय है और पिछले 9 वर्ष से वह क्रमोन्‍नत नहीं हुआ है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मिस्‍टर त्रिवेदी। (व्‍यवधान) मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): वहां पर साढ़े तीन सौ लड़कियां पढ़ती हैं। आपने यह कहा है, आपने अपने उत्‍तर में परिशिष्‍ट में यह लिखा है कि सामान्‍य क्षेत्र में तीन हजार लड़कियां होनी चाहिए और ग्रामीण क्षेत्र में ढाई हजार लड़कियां होनी चाहिए। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है। (व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): लड़कियां नहीं, जनसंख्‍या। (व्‍यवधान)

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): जनसंख्‍या है तो मैं इसलिए आपसे यह पूछना चाहता हूं कि जहां..... (व्‍यवधान) कन्‍या माध्‍यमिक विद्यालय हैं और.... (व्‍यवधान)

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): उसमें साढ़े तीन सौ लड़कियां पढ़ती हैं। आपने मेरे बार-बार निवेदन करने के उपरांत भी उसको क्रमोन्‍नत क्‍यों नहीं किया? (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सहायता मंत्री प्‍लीज। स्‍थान ग्रहण करें। (व्‍यवधान)

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): वजीरपुर का मेरा निवेदन है आपसे। आप मुझे आश्‍वासन दे दीजियेगा। मैं कई बार कह चुका हूं। अध्‍यक्ष महोदय, मेरा जब डेलिगेशन इनके पास में गया तो इन्‍होंने यह कहा कि कांग्रेसी जमाने में क्रमोन्‍नत करवा लीजियेगा। (व्‍यवधान) तो यह कोई जवाब हुआ।

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण कर लीजिये। स्‍थान ग्रहण करें। गंगापुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण कर लीजिये। (व्‍यवधान)

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): अध्‍यक्ष महोदय, हमारी भी तो बात कहने दीजियेगा। हम यहां पर जो आये हैं, अपने क्षेत्र की समस्‍याओं को रखने के लिए आये हैं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: प्‍लीज। (व्‍यवधान) पूरे क्षेत्र की समस्‍या का प्रश्‍न नहीं है। यह केवल डिगली और नेसल का प्रश्‍न है और समस्‍या का प्रश्‍न बाद में उठाइयेगा।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): कन्‍या विद्यालय को क्रमोन्‍नत करने की बात है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: क्षेत्र की समस्‍या बाद में। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, यह जो जवाब दिया है मंत्री जी ने कि गुणावगुण के आधार पर किया जाता है तो गुण तो यह है कि बी जे पी के एम एल ए हों और अवगुण यह कि कांग्रेस का एम एल ए हो और उस आधार पर पूरे राजस्‍थान में कर रहे हो। पूरे राजस्‍थान में भेदभाव कर रहे हो आप। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपकी परिभाषा है, धन्‍यवाद। (व्‍यवधान) आपकी परिभाषा के लिए धन्‍यवाद आपको। (व्‍यवधान)

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): आपने यह बात कही है डेलिगेशन से। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सहायता मंत्री। बीच में नहीं बोलें। (व्‍यवधान)

विधान सभा क्षेत्र सहाड़ा के अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्‍त नहर/सड़कें

39. श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): क्‍या सहायता मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि विधान सभा क्षेत्र सहाड़ा में वर्ष 2006 में हुई अतिवृष्टि से नहरें, तालाब, सड़कें, पुलिया आदि क्षतिग्रस्‍त हुई हैं तथा सरकार द्वारा उनका सर्वे कराया जा चुका है? यदि हां, तो सर्वे रिपोर्ट की प्रति सहित विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍या सरकार इनकी मरम्‍मत कराने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

सहायता मंत्री (डा. किरोड़ी लाल): (1) जी हां, यह सही है कि विधान सभा क्षेत्र सहाड़ा में वर्ष 2006 में हुई अतिवृष्टि से नहरें, तालाब, सड़कें, पुलिया आदि क्षतिग्रस्‍त हुई हैं। जी हां, सर्वे कराया जा चुका है। सर्वे की रिपोर्ट संलग्‍न है। (परिशिष्‍ट-1)

(2) जी हां, प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की तत्‍काल मरम्‍मत कराने के लिए सी. आर. एफ. नार्म्‍स के अनुसार सहायता दी जाती है। इस दृष्टि से अतिवृष्टि से नुकसान की तत्‍काल सहायता हेतु जिला कलेक्‍टर भीलवाड़ा को 43 लाख रुपये की राशि आवंटित की गई थी जिसमें से जिला कलेक्‍टर द्वारा 42 लाख रुपये का व्‍यय किया जा चुका है। इन सम्‍पत्तियों का पुनर्निर्माण सम्‍बन्धित विभाग के स्‍तर पर उनके पास उपलब्‍ध राशि अनुसार ही किया जाता है।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): माननीय मंत्री महोदय, यह 43 लाख रुपये की राशि भीलवाड़ा जिला कलेक्‍टर को कब प्रदान की गई? नम्‍बर एक। आपने जो सर्वे रिपोर्ट दी है इसमें इर्रिगेशन के टैंक्‍स टूटे हैं, इर्रिगेशन के एनीकट्स टूटे हैं उसकी सर्वे रिपोर्ट भी इस जवाब के साथ नहीं है, सिर्फ दोनों पंचायत समितियों की है और पी डब्‍ल्‍यू डी की है। तो मैं आपसे यह पूछना चाहता हूं कि एक तो भीलवाड़ा जिला कलेक्‍टर को आपने यह 43 लाख रुपये की राशि कब दी और मेरे विधान सभा क्षेत्र की दोनों पंचायत समितियों में कलेक्‍टर द्वारा कितनी-कितनी राशि इस 43 लाख रुपये में से ट्रांसफर की गई? सहाड़ा पंचायत समिति में 35 तालाब और रायपुर पंचायत समिति में 58 तालाब टूटे, इनमें से कितने आज तक रिपेयर किये? 43 लाख रुपये में से कितना धन इन पंचायत समितियों को दिया गया और कितने अभी तक टूटे पड़े हैं? यह रिपोर्ट बतायें आप।

डा. किरोड़ी लाल  (सहायता मंत्री): माननीय सदस्‍य, यह 22.9.2006 के बाद राशि दिलाई गई। इसमें 23 एनीकट और 69 तालाब, 9 नहरें और 20 सड़कें हैं। सी आर एफ की जो गाइड लाइन है उसमें अतिवृष्टि से हुए नुकसान के लिए मरम्‍मत का पैसा नहीं दिया जाता है। जहां बाढ़ आई हो, बाढ़ग्रस्‍त जिलों में यह राशि दी जाती है और 12 जिलों में बाढ़ आई थीं वहीं पर सी आर एफ की गाइड लाइंस के हिसाब से राशि उपलब्‍ध कराई गई थी।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): तो भीलवाड़ा को आपने 43 लाख रुपये बाढ़ नहीं आई तो क्‍यों दिया? विधान सभा क्षेत्र सहाड़ा के अन्‍दर सबसे ज्‍यादा अतिवृष्टि और सबसे ज्‍यादा पानी गिरा है और जिले की सबसे ज्‍यादा बारिश वहां हुई है और उस बारिश की वजह से ऊपर से तालाब टूटता आया तो ठेठ तक तालाब टूटते गये। आज की तारीख में सारे टैंक टूटे हुए हैं। 80 तालाब जिस इलाके में टूटे हुए हों और आप कह रहे हो कि अतिवृष्टि नहीं हुई, इससे बड़ा मजाक मेरे इलाके के साथ में आप क्‍या करोगे।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछें, आप प्रश्‍न पूछें।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): आप यह तो बतायें कि 43 लाख रुपये में से हमारे यहां कितनी राशि गई?

डा. किरोड़ी लाल  (सहायता मंत्री): मैं मान रहा हूं, मैं मान रहा हूं अतिवृष्टि हुई है लेकिन बाढ़ नहीं आई।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): अतिवृष्टि का पैसा दिया वह हमारे को कितना दिया यही पूछ रहा हूं।

डा. किरोड़ी लाल  (सहायता मंत्री): बाढ़ का एक लैटर भारत सरकार ने हमको दिया था 28.6.2005 को। सी आर एफ की गाइड लाइंस के पैरा नम्‍बर तीन में आपदा जो परिभाषित की है उसमें तूफान है, सूखा है, भूकम्‍प है, अग्निकांड है, बाढ़ है, ओलावृष्टि है और भू-स्‍खलन है। ये चीजें कैटेगराइज की हैं। इसमें अतिवृष्टि नहीं है। अतिवृष्टि होती तो सहाड़ा में भी हम पैसा दे देते जो 12 जिलों को दिये हैं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): सी आर एफ की गाइड लाइंस से भीलवाड़ा को 43 लाख रुपये कैसे मिले? मतलब आप सी आर एफ की गाइड लाइंस की बात कर रहे हैं, सी आर एफ की गाइड लाइंस के अन्‍तर्गत पैसा अतिवृष्टि में नहीं मिलता है तो भीलवाड़ा में सी आर एफ के अन्‍तर्गत यह 43 लाख रुपये कैसे ट्रांसफर किये? (व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल  (सहायता मंत्री): वह हमने इस बात का दिया कि राजस्‍थान में 12 जिलों के अलावा जिन जिलों में मकान टूट गये हैं, कच्‍चे मकान ढह गये या पक्‍के मकान नष्‍ट हो गये या बिजली के कारण कोई मर गया और कोई इस ढंग की आपदा आ गई उस दृष्टि से यह 43 लाख रुपये का अकाउंट है। बाकी और तालाब... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मतलब आप सी आर एफ की गाइड लाइंस से पैसे नहीं दे सकते थे और सी आर एफ की गाइड लाइंस का वॉयलेशन करके 43 लाख रुपये भीलवाड़ा को दिये तो आपने दिये, कोई बात नहीं, आप यह बता दें कि क्‍या 43 लाख रुपये का उपयोग जैसा आप कह रहे हैं, केवल मात्र मकान गिरे उन्‍हीं पर खर्च हुए, सड़क और रिपेयर के अन्‍दर खर्च नहीं हुए?

डा. किरोड़ी लाल  (सहायता मंत्री): नहीं हुए।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ठीक है।

डा. किरोड़ी लाल (सहायता मंत्री): आप यह देख लेना। एक बात और आपको क्लियर कर देना चाहता हूं कि अब जैसे ओलावृष्टि हुई है, जहां 50 प्रतिशत से ऊपर का खराबा हुआ है वहाँ हम उनको मानते हैं लेकिन जहां बिजली गिर गई, कहीं भी गिर गई हो और उसके कारण से कोई मर गया उसको भी हम अनुग्रह सहायता देते हैं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपके नेता खड़े हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सी आर एफ की गाइड लाइंस में तो नहीं आता था तो अतिवृष्टि के कारण एक्‍सेसिव रेन की वजह से जो नुकसान हुआ, सरकार प्रोपर्टी डैमेज हुई उसकी लुक-आफ्टर करने में राजस्‍थान सरकार है या नहीं है? आपका भी बजट है या नहीं है? आपका भी खजाना है, आपका भरा हुआ है फिर क्‍या करोगे?

डा. किरोड़ी लाल (सहायता मंत्री): वह पहले बनाकर नहीं गये। हम तो आपको ही फॉलो कर रहे हैं। जो दिशा-निर्देश इस सी आर एफ की गाइड लाइंस में हैं उसके बाहर हम नहीं जा सकते। अबर आप इसमें रिलैक्‍स करा सकें तो बड़ी कृपा होगी।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपके फण्‍ड से क्‍यों नहीं जा सकते।

डा. किरोड़ी लाल (सहायता मंत्री): हमने भारत सरकार को भेज रखा है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह तो राजस्‍थान सरकार का काम है, भारत सरकार इसमें कहां आती है? (व्‍यवधान) आपके बाँध टूटे हैं, तालाब टूटे हैं...

श्री जीतराम (मालपुरा): हमारे भी बिजली गिरी है, आदमी मर गये हमारे तो। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सरकारी प्रोपर्टी डैमेज हुई है तो आप अपने खजाने से उनकी पूर्ति कराओ, उनकी मरम्‍मत कराओ। हर मामले में भारत सरकार की रट क्‍यों लगाते हो?

श्री अध्‍यक्ष: सी आर एफ तो भारत सरकार का ही है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह राजस्‍थान सरकार क्‍या कर रही है हमारे नेता महोदय का यह कहना है। आप अपने संसाधनों से कराइये जहां अतिवृष्टि हुई है। (व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल (सहायता मंत्री): आप बैठो तो सही। (व्‍यवधान) कर रहे हैं। मैं बता रहा हूं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वैसे तो सारी गाइड लाइंस भारत सरकार की तरफ से जारी की जाती हैं। मैं बोल रहा हूं। तदनुकूल सहायता दी जाती है लेकिन पिछली बार ओलावृष्टि हुई थी तो आपको ध्‍यान होगा कि राजस्‍थान सरकार ने अपने फण्‍ड से बिजली माफी की थी। जहां-जहां होता है, जितनी हम मदद करने की कोशिश करते हैं, हमारी मद से भी हम करते हैं ऐसी बात नहीं है लेकिन प्रतिपक्ष के नेता से मैं निवेदन करना चाहूंगा कि भारत सरकार को हम तीन पत्र लिख चुके, मुख्‍य मंत्री जी भी मिलकर के आ गईं, मैं भी मिलकर के आया हूं, थोड़ा सी आर एफ की गाइड लाइंस को रिलैक्‍ट करा दें। (व्‍यवधान) मैं इसको पॉलिटिकलाइज नहीं करना चाहता। थोड़ा भारत सरकार पर दबाव डालें तो यह रिलैक्‍ट हो सकता है। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप सी आर एफ गाइड लाइंस को रिलैक्‍ट कराना चाहते हैं, भारत सरकार से सी आर एफ गाइड लाइंस को अमेंड कराना चाहते हैं फिर आपकी सरकार का खजाना है उसका क्‍या होगा? उसमें हिस्‍सा नहीं है?

डा. किरोड़ी लाल (सहायता मंत्री): मैं बता तो रहा हूं उसका। आपको मैं बता रहा हूं।....

 

विजय/अरुण/06032007/1140/1e

 

मैं बताता हूं, 50 करोड़ रुपये तो हमने अकाल में दिये हैं और 32 करोड़ रुपये के हमने बिजली के बिल माफ किये हैं, यह सब बता दूं। (व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न यह था जिसका जवाब नहीं आया। सहाड़ा को 43 लाख रुपये में से कितना पैसा मिला और किसलिए मिला? यह बताओ ना आप। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप तो सुनिये।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍य सरकार ने केन्‍द्रीय सरकार से कितने पैसों की मांग की है और केन्‍द्रीय सरकार ने उसमें से कितना पैसा आपको दिया है, यह बोलिये। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कितने पैसों की आपने मांग की है और कितना पैसा दिया है केन्‍द्रीय सरकार ने? (व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सहाड़ा का मामला था। अध्‍यक्ष महोदय, 43 लाख रुपये भीलवाड़ा को मिले और 43 लाख रुपयों में से सहाड़ा को कितना पैसा मिला? (व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इनके सवाल का जवाब दे रहा हूं। मैं इनके सवाल का जवाब दे रहा हूं।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से यह पूछना चाहता हूं। मंत्री महोदय, एक मिनट। मंत्री महोदय, एक मिनट आप मेरी बात सुन लें, फिर जवाब दें। माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री महोदय से मैं यह पूछना चाहता हूं कि 79 तालाब, 19 एनीकट्स जो टूटे पड़े हैं, वे सी.आर.एफ. के नोर्म्‍स में नहीं आते हैं। क्‍या राज्‍य सरकार उनको ठीक करने की कोई व्‍यवस्‍था करना चाहती है तीन महीनों के अन्‍दर या ये टूटे ही रहेंगे, नम्‍बर एक?

नम्‍बर दो, 43 लाख में से इतनी भारी वर्षा से सहाड़ा विधान सभा क्षेत्र में सबसे ज्‍यादा मकान गिरे, उनको आपने कितनी राशि आवंटित की और अन्‍य जगहों पर कितनी की, यह तो बताइये। या यह बता दो, आपने कितना पैसा दिया? (व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): तो फिर तो यह पूरा ही बता देता हूं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तीन तरह के प्रश्‍न आये हैं। जौहरी बाजार से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा कि आपने ज्ञापन कितने का दिया।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): आप बात सहाड़ा की करो।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): मैं सभी का जवाब दे रहा हूं। हमने 3200 करोड़ रुपये का ज्ञापन दिया था, जिसमें मात्र 100 करोड़ रुपये हमको मिला। (व्‍यवधान)

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): अब देखो केन्‍द्रीय सरकार को। (व्‍यवधान) केन्‍द्रीय सरकार से हमने 3200 करोड़ रुपये मांगे और हमको 100 करोड़ रुपये मिला। (व्‍यवधान )

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपकी सरकार ने कितना दिया था जब अटल बिहारी जी वाजपेयी की सरकार थी? हमारी सरकार ने ज्ञापन दिया था, आपकी भाजपा की सरकार ने कितना दिया था? (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): जो ज्ञापन देते हैं आप मांगते हो? (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: हमने पूर्व में भी ज्ञापन दिया था, कितनी राशि का ज्ञापन दिया और कितना मिला। (व्‍यवधान)

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): हमने केन्‍द्रीय सरकार से 3200 करोड़ रुपये मांगे और भारत सरकार वहां राजनैतिक भेदभाव करती है। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): भारत सरकार की भी नीति है। हमारी सरकार ने जब ज्ञापन दिया था, अटल बिहारी जी वाजपेयी ने क्‍या दिया था? (व्‍यवधान) क्‍या बात कर रहे हो आप। आधी जानकारी दे रहे हो। आपको मालूम ही नहीं है। भारत सरकार इसी तरह से ज्ञापन लेती है और उसी तरह से पैसा देती है। नई बात कौनसी कह रहे हो? आपके अटल बिहारी जी प्रधान मंत्री थे, तब आपकी सरकार ने क्‍या किया था? आप फालतू की बात कर रहे हो। (व्‍यवधान)

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): अटलजी ने 33 लाख टन गेहूं दिया था, इतना गेहूं दिया था, आप उन गेहूं का पूरा उपयोग ही नहीं कर पाये थे, इतना गेहूं दिया था। (व्‍यवधान) 33 लाख टन गेहूं दिया था।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हिन्‍दुस्‍तान में आपके वित्‍त मंत्री थे, जसवंत सिंह थे, भारत सरकार में वित्‍त मंत्री थे, उन्‍होंने क्‍या किया था? (व्‍यवधान) जसवंत सिंह जी वित्‍त मंत्री थे, उस समय आपने क्‍या किया था? (व्‍यवधान) क्‍या बात कर रहे हो। पहले भी राजस्‍थान के वित्‍त मंत्री रहे हैं, उन्‍होंने क्‍या दे दिया? (व्‍यवधान) भारत सरकार के जो नियम हैं। जसवंत सिंह जी तो राजस्‍थान के थे, वे वित्‍त मंत्री थे, तब भी नहीं कर सके। अब आप क्‍या बात कर रहे हो? यह कोई नई बात नहीं है। फालतू बात करते हो? (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भारत सरकार ने पैसे लेने की जब भी बात आती है...(व्‍यवधान)

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): राजस्‍थान के साथ राजनैतिक भेदभाव के कारण कुछ नहीं दिया गया है। (व्‍यवधान) 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपकी सरकार ने क्‍या कर दिया। आप क्‍या नई बात कर रहे हो? (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): जब भी भारत सरकार से कुछ लेने की बात आती है तो आपको क्‍यों तकलीफ होती है? क्‍या आपकी है अकेले की भारत सरकार? 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप तो पहले भी मंत्री थे। पहले भी मंत्री थे। (व्‍यवधान) आपको तो जानकारी होगी। इस राजस्‍थान की सरकार को राजीव गांधीजी ने 800 करोड़ रुपये दिये। याद है आपको, कितने रुपये दिये हैं?

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, पहले सी.आर.एफ. के नोर्म्‍स थे। पहले सी.आर.एफ. के नोर्म्‍स थे। (व्‍यवधान) जब भी आपकी सरकार राजस्‍थान में बनी है, इस तरह की बात हुई है। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): प्रश्‍न संख्‍या 40

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): बात कर रहे हो खामख्‍वाह। सुबह-शाम माला जपो सोनियाजी की। (व्‍यवधान) खाली भाषण देने के लिए खड़े हो जाते हो। 

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): मैं बताऊं, क्‍या हुआ। (व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सहाड़ा को कितना पैसा दिया? इनके प्रश्‍न का जवाब नहीं आया।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न संख्या 40

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): यह पहले ही आ गया क्‍या?

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न का जवाब ही नहीं दिया है।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आपका जवाब आ जायेगा। भारत सरकार से पैसा आने पर फटाफट आ जायेगा।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): एक धेला भी नहीं दिया उन्‍होंने। 

श्री अध्‍यक्ष: यही जवाब है उनके पास।

श्री अमराराम (धोद): प्रश्‍न संख्‍या 40 (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: उन्‍होंने जवाब दे दिया है। मैंने नैक्‍स्‍ट प्रश्‍न पुकार लिया। मैंने नैक्‍स्‍ट प्रश्‍न पुकार लिया।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): अतिवृष्टि में कौनसा गुणावगुण है, यह भी बता दो। एक धेला नहीं दिया और इर्रिगेशन की तो सर्वे रिपोर्ट भी नहीं दी, इससे ज्‍यादा निकम्‍मापन और क्‍या होगा?

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नैक्‍स्‍ट प्रश्‍न पुकार लिया। मैंने नैक्‍स्‍ट प्रश्‍न पुकार लिया।

 

क्षेत्रीय जल प्रदाय योजना पडि़हारा(चूरू) से पेयजल आपूर्ति

 

40. श्री अमराराम (धोद): क्‍या जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) सरकार द्वारा ग्राम पडि़हारा जिला चूरू की क्षेत्रीय जल प्रदाय योजना कब स्‍वीकृत की गई एवं इस पर कितनी राशि व्‍यय की गई तथा इसे कब पूर्ण किया गया?

(2) इस योजना से कितने ग्राम लाभान्वित होने थे तथा कितने ग्रामों को कितने पेयजल की आपूर्ति की जा रही है? इस योजना को डिजाइन करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सरकार द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई?

(3) सरकार द्वारा इन ग्रामों को शुद्ध पेयजल उपलब्‍ध करवाने हेतु अब क्‍या योजना बनाई गई तथा इन्‍हें कब तक पर्याप्‍त पेयजल उपलब्‍ध करवा दिया जायेगा?

श्री सांवर लाल (जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी मंत्री): (1) क्षेत्रीय जल योजना आलसर-पडि़हारा, जिला चूरू की स्‍वीकृति माह दिसम्‍बर, 1995 में रुपये 216.10 लाख की जारी की गई। इस योजना पर कुल 236.54 लाख का व्‍यय किया गया तथा यह योजना माह जून, 1998 में पूर्ण की गई।

(2) उक्‍त योजना में कुल पाँच ग्राम लाभान्वित होने थे। वर्तमान में उक्‍त योजना से चार ग्राम पडि़हारा, पडि़हारी, जेगनिया बीकान एवं धातरी को लाभान्वित किया जा रहा है। विवरण परिशिष्‍ट-'अ' पर संलग्‍न है।

(3) दीमक की समस्‍या व इसके कारण लीकेज समस्‍या तथा इन्‍टरमीडिएट पम्पिंग स्‍टेशन पर काम विद्युत प्राप्ति को दृष्टिगत रखते हुए निदान हेतु दो संवर्द्धन जल योजनाएं क्रमश: संवर्द्धन योजना आलसर-पडि़हारा (आलसर, जेगनिया बीकान, धातरी, पडि़हारा व पडि़हारी ग्रामों हेतु) रुपये 149.63 लाख अनुमानित लागत व योजना लोहा-खोतड़ी-बुधवाली (लोहा, खोतड़ी, बुधवाली, भोजासर एवं सांवतिया ग्रामों हेतु) रुपये 53.88 लाख अनुमानित लागत पर वर्ष 2021 की पेयजल मांग रखते हुए माह दिसम्‍बर, 2005 में स्‍वीकृत की गई।

इन स्‍वीकृत योजनाओं को मार्च, 2008 तक पूर्ण कर इन ग्रामों को लाभान्वित किया जाना लक्षित है।

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि इस योजना पर 1995 तक 216.10 लाख रुपये स्‍वीकृत किये गये और उससे करीब 20 लाख रुपये से ज्‍यादा का खर्च किया गया। मंत्री महोदय, एक तो यह बताने की कृपा करें कि यह जो चार-पाँच गांवों को इस क्षेत्रीय जलदाय योजना से पानी मिलना था, यह 20 लाख रुपये योजना पर ज्‍यादा खर्चा करने के बाद भी वहां की जनसंख्‍या और पशुधन की संख्‍या को देखते हुए क्‍या पर्याप्‍त मात्रा में पानी मिला? और अगर नहीं मिला, अब आप कह रहे हैं कि यह उस समय भी वही क्षेत्र था, जिस समय आप दीमक की बात कर रहे हो, बिजली की कमी की बात कर रहे हो, मैं समझता हूं कि 1995 के बाद आज जो पडि़हारा की जनसंख्‍या 10 से 12,000 के करीब है, उसको आज तक शुद्ध पेयजल नहीं मिला और जो स्‍थानीय जल स्रोत है, उसमें फ्लोराइड की अत्‍यधिक मात्रा के कारण आज वहां पर 30 साल की उम्र के लोगों के जोड़ों का दर्द हो रहा है, इतना अत्‍यधिक फ्लोराइड है।

मैं आपके माध्‍यम से जानना चाहूंगा कि ऐसी योजना का फायदा जनता को ढाई करोड़ रुपये खर्च होने के बाद में भी नहीं मिला, इसके लिए कोई न कोई अधिकारी जिम्‍मेदार निश्चित रूप से होगा और यह आपने इनको पानी पिलाने के लिए 2005 में योजना स्‍वीकृत की और योजना पूरी होगी 2008 में, यानी तीन साल बाद में भी जहां इतने लोगों को, चार गांव के लोगों को फ्लोराइडयुक्‍त पानी पीना पड़ रहा है जिससे पूरा उनका जन स्‍वास्‍थ्‍य खराब हो रहा है तो क्‍यों नहीं आप 2008 के बजाय, इसी आने वाले छह महीनों के अन्‍दर, तीन साल के बजाय, तो मैं समझता हूं कि आगे आने वाले छह महीनों में इस योजना को पूर्ण करके, जितने मापदण्‍ड आपके विभाग के हैं, उनके अनुसार उन चारों गांवों को पानी मिल जायेगा और क्‍या इनमें बिजली पंपिंग स्‍टेशन पर बराबर मिलती रहे, इसके लिए प्‍लानिंग करने वालों ने उसकी योजना क्‍यों नहीं बनाई? क्‍या उसके लिए कोई दोषी है? इसका आप जवाब दें। (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य की चिंता से मैं बिल्कुल सहमत हूं और जिस प्रकार से राजस्‍थान में बरसात कम होने, अण्‍डरग्राउण्‍ड वाटर का दोहन ज्‍यादा होने से जितना भी भूगर्भ का जल है, वह लगभग खारा और फ्लोराइड का बचा हुआ है और चूरू जिले में इसीलिए आपणी योजना और दूसरी योजनाओं से नहर का पानी लाकर कई गांवों को लाभान्वित किया गया। अब यह पाँच गांवों की बात आपने की है, इनमें पाँच गांवों में कुछ समय पानी देने के बाद में आखिरी गांव में पानी नहीं गया। यह मैं आपको बताना चाहता हूं क्‍योंकि वास्‍तव में आप जैसा कह रहे हैं कि पानी की क्‍वालिटी पीने लायक नहीं है, इसको मिक्‍स करके इस पानी का उपयोग करते हैं और आखिरी जो गांव है, उस गांव में 2000 के बाद पानी नहीं गया। मेरी जानकारी में जब आया, उसके बाद मैंने कोशिश की, उस समय बीच में गया, फिर बन्‍द हो जाता है। लोकल सोर्स वहां पर ओपनवैल और कुछ कुए हैं, जिनके माध्‍यम से वे अपना काम चला रहे हैं। निश्चित रूप से लोगों को शुद्ध पानी मिले, इसमें हम प्रतिबद्ध हैं और माननीय सदस्‍य को मैं आपके माध्‍यम से माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बताना चाहता हूं कि काफी योजनाएं सरफेस वाटर की हमने इन तीन सालों में इसीलिए प्रारम्‍भ की है कि अण्‍डरग्राउण्‍ड वाटर शुद्ध नहीं मिलता है। जहां पर मिलता है, वहां पर उस सोर्स को हम काम में ले रहे हैं। इसीलिए मैं आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि कुछ समय इसमें जरूर लगेगा क्‍योंकि जब मैंने विभाग सम्‍भाला, चाहे 10 लाख की योजना हो, 20 लाख की योजना हो, उसका कम्‍प्‍लीशन पीरियड वही 18 महीने और 24 महीने होता था, अब उसको नौ माह कर दिया है। जो छोटी योजना है, उनका पीरियड घटाकर नौ महीने कर दिया है। अब यह योजना पहले, आते-आते ही स्‍वीकृत हुई थी इसलिए इनका समय कुछ ज्‍यादा हमने एक्‍जीक्‍युशन का रखा है पर मैं आपको आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि इसका मिनिमम समय कितना हो सकता है, उसके आधार पर कम से कम समय में इन गांवों को यह रतनगढ़ से सोर्स लाकर हमने किया है....

 

Jkj/akt/11.50/1f/6.3.2007

 

इन गांवों को लाभान्वित करें ऐसी मैं व्‍यवस्‍था करने की कोशिश करूंगा।  बाकी बिजली के लिए डेडिकेटेड फीडर की आवश्‍यकता होगी तो डेडिकेटेड लाईन हम डलवा देंगे जिससे कि व्‍यवधान नहीं हो और ड्रिंकिंग वाटर पर जहां-जहां हमारी जानकारी में आता है, राजस्‍थान में डेडिकेटेड फीडर के लिए हम पैसा देते हैं जिससे निर्बाध रूप से पेयजल व्‍यवस्‍थाएं चलती रहें।  अब यहां पर 216 और 236 लाख का सवाल है, अब टेण्‍डर होते हैं, आपकी जानकारी में है, टेण्‍डर में ऊंची रेट पर जाते हैं तो कास्‍ट अपने आप बढ़ जाती है और हम कोशिश करते हैं कि ज्‍यादा कहीं पुलिंग वगैरह या ज्‍यादा रेट नहीं हो, इस प्रकार का अंकुश लगाने के लिए सरकार करती है प्रयास।  अब पैसा लगाने के बाद भी शुध्‍द पानी धरती में से नहीं निकला और नहीं निकलने, कई जगह निकलने की गुंजाइश भी नहीं है, पर चूंकि पानी सबसे पहली आवश्‍यकता है, लोगों को पानी चाहिए, चाहे कहीं से भी मिले, कैसा भी मिले, मैं यहां की, बुधवाली गांव की बताना चाहता हूं कि जो पानी हम यहां से भेजना चाह रहे हैं वैसा पानी उनके गांव में है, कई बार वह यही कहते हैं कि आप तो इसको आप छोडि़ये, अब इसको ठीक मत करिये।  हमारे तो जो दूसरी योजना सेंक्‍शन करी है दो-चार महीने में वह पानी पहुंचा दीजिये, पानी पीने लायक होगा, बाकी ऐसा पानी जो वहां से आ रहा है वह हमारे पास भी है।  तो मैं इस आखिरी गांव के लिए तो आपको आश्‍वस्‍त करता हूं कि तीन-चार महीने के अंदर-अंदर मैं पानी पहुंचाने की कोशिश करूंगा और दूसरे जो गांव हैं उसमें योजना का समय कितना कम किया जा सकता है एक्‍जीक्‍यूशन में, वह करने का प्रयास करूंगा।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद(तारानगर): अध्‍यक्ष महोदय, इसी से जुड़ा हुआ एक सवाल है, चूरू का है यह, बहुत महत्‍वपूर्ण है, इसी से जुड़ा हुआ है।

श्री अमरा राम(धोद): अध्‍यक्ष महोदय, एक तो मैं जानना चाहूंगा कि मंत्री महोदय ने स्‍वीकार किया है कि 2000 से 2007, सात साल तक पानी वहां नहीं गया और मंत्री महोदय यह बतायें कि जहां आपने यह योजना बनाई है वहां तो यह फ्लोराइडयुक्‍त पानी नहीं है, फ्लोराइडयुक्‍त पानी है उन पाँच गांवों में जहां लोग फ्लोराइडयुक्‍त पानी पी रहे हैं, क्‍या जहां से आपने यह योजना बनाई है वहां अगर फ्लोराइडयुक्‍त है तो फिर सरफेस वाटर का ही बनाते, यह योजना आपने बनाई ही क्‍यों।  अगर उसका पानी ठीक है, वहां इन पाँच गांवों में फ्लोराइडयुक्‍त पानी है जो करीब-करीब पी रहे हैं, मैं यह कह रहा हूं कि पैसे ज्‍यादा क्‍यों लगे, मैं यह कह रहा हूं कि पैसे लगने के बाद भी 95 के बाद आज तक पडि़हारा जो बारह हजार की पोपुलेशन है उनको कभी भी पूर्ण पानी नहीं मिला, इसके लिए जिम्‍मेदार कौन है।  मतलब जितना आपने पैसा सेंक्‍शन किया उससे ज्‍यादा खर्च होने के बाद इस योजना से पडि़हारा गांव में पानी नहीं पहुंचा, इसके लिए जिम्‍मेदार कौन है और सात साल तक पानी नहीं मिला है और वह पानी पी रहे हैं, मजबूरी में पी रहे हैं, वहां जो लोकल सोर्सेज हैं कुआ या बावड़ी,वह तो मजबूरी है, वहां पर यह तो है नहीं कि बिलकुल मर जायेंगे और वहां जितना स्‍वास्‍थ्‍य खराब हो रहा है, आप खुद स्‍वीकार कर रहे हैं कि हमने, 2005 में आपके आने के बाद यह सेंक्‍शन हुई।  पाँच साल से पानी नहीं जा रहा...

श्री अध्‍यक्ष: अब आप भाषण तो दें नहीं और प्रश्‍न पूछ लीजिये, हां।

श्री सांवर लाल: अब, अध्‍यक्ष महोदय, आपके एक-एक बिंदु का जवाब दे दिया मैंने, और दे दूंगा।

श्री अमरा राम(धोद): अध्‍यक्ष महोदय, इनकी क्षमता यह है, इनकी सिकराना तालाब योजना जहां 22 ट्यूब वैल खुदे हुए हैं उनमें से मात्र तीन चल रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आप अपना प्रश्‍न पूछिये, क्षमता की बात न करें।

श्री अमरा राम(धोद): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से है कि यह आपके सिकराना क्षेत्रीय जलप्रदाय योजना जिसमें 22 ट्यूब वैल खोदे हैं और मात्र तीन चल रहे हैं, यह इनकी कार्यक्षमता है, इनके विभाग की, कि 22 ट्यूब वैल खोदकर के पैसा खर्च कर दिया और उनमें से मात्र तीन चल रहे हैं और उनमें भी इस तरह की घटिया किस्‍म की मोटरें, इन्‍होंने खुद ने स्‍वीकार किया है कि लगाई है जिससे आउट कम सबसे कम दे रहे हैं, जो पानी होते हुए नहीं दे रहे...

श्री अध्‍यक्ष: तो आप भाषण क्‍यों दे रहे हैं, प्रश्‍न पूछ लिया और वह बता दिया आपने। डाक्‍टर चन्‍द्रशेखर बैद। आप भी पूछ लीजिये, आप भी पूछ लीजिये।(व्‍यवधान)

डा. चन्‍द्रशेखर बैद: अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से यह पूछना चाह रहा हूं मंत्रीजी से...(व्‍यवधान)

श्री राजकुमार रिणवा(रतनगढ़): पडि़हारा की योजना जल्‍दी शुरू करवायें।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद: मेरे प्रश्‍न का भी साथ में जवाब दे देना आप। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी, उनको भी पूछने दें।

श्री सांवर लाल: अब आपके तो बहुत लम्‍बी हुकूमत रही चूरू तो आप क्‍यों खड़े हो रहे हैं।(व्‍यवधान)

डा.चन्‍द्रशेखर बैद: कि जो पाँच गांवों का नाम आपने लिया उसमें पडि़हारा गांव तो है नहीं, वह तो गैरआबाद गांव है और बुधवाली में आज तक पानी पहुंचा ही नहीं और जहां से पानी सप्‍लाई करना चाहते हैं वह फ्लोराइडयुक्‍त है।  मैं यह पूछना चाहता हूं क्‍या आप आपणी योजना का फेज-टू शुरू करके इन गांवों को, रतनगढ़ तहसील को और सुजानगढ़ तहसील को लाभान्वित करना चाहते हैं क्‍या।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है। उनको भी पूछ लेने दो।

श्री सांवर लाल: अध्‍यक्ष महोदय, मैंने निवेदन किया कि जो लाभान्वित करने का सवाल है...

श्री अध्‍यक्ष: उनका इलाका है, उनको भी पूछ लेने दो।

श्री सांवर लाल: केवल यह सरकार ही चाह रही है, नहीं तो इनके तो बहुत लम्‍बा कार्यकाल रहा, अब काहे को इतनी बातें कर रहे हैं आप लोग। आपको मैं निवेदन करना चाहता हूं, आप विराजिये, अभी भी मैं आपको कह रहा हूं कि हमने सारी शर्तें पूरी करके भारत सरकार के ग्रामीण मंत्रालय को भेज दिया, हमने मंत्रीजी से बार-बार रिक्‍वेस्‍ट किया है आपणी योजना फेज-टू सेंक्‍शन करने के लिए, अब फिर कह दोगे भारत सरकार। अब आप करो न वहां कार्यवाही कुछ, यहां बैठते हो कुर्सी पर, कुछ होता नहीं, वहां जाते हो कुछ करते नहीं हो और बातें करते हो केवल।

डा.चन्‍द्रशेखर बैद: आपणी योजना फेज-टू के लिए राजस्‍थान सरकार के सामने जो शर्तें रखीं वह शर्तें आपने मानी नहीं तो वह फेज-टू मंजूर कैसे करेंगे।

श्री राजकुमार रिणवा: अध्‍यक्ष महोदय, इस योजना को जल्‍दी शुरू करवायें।(व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल: एक मिनट, वह पूरा करने दें।

श्री अमरा राम(धोद): ऐसा ही पानी पिलाओगे, सात साल से पानी नहीं जाये और 22-22 ट्यूब वैल में से मात्र तीन चले हों और वह भी...

श्री सांवर लाल: एक मिनट, उनका कम्‍पलीट होने दें।

श्री राजकुमार रिणवा: वहां पानी की बहुत समस्‍या है, इस योजना को जल्‍दी शुरू करवायें आप। यह निवेदन है आपसे अध्‍यक्ष महोदय...(व्‍यवधान)

डा.सुरेश चौधरी(भादरा): तारानगर में अगर आज पानी की समस्‍या है तो उसके लिए जिम्‍मेदार कहीं न कहीं आप भी हैं।  आज अगर तारानगर में पीने के पानी की समस्‍या है और राजस्‍थान के वित्‍त मंत्री रहते हुए, बहुत काबिल वित्‍त मंत्री मैं कहूंगा, रहते हुए और आज अगर तारानगर, चूरू और राजगढ़ में पानी की समस्‍या है तो you are equally responsible for that.(व्‍यवधान)

डा.चन्‍द्रशेखर बैद: यह तो रतनगढ़ की बात है, रतनगढ़ की बात है, तारानगर की बात ही नहीं है भाई साहब। यह तो रतनगढ़ की बात हो रही है, तारानगर की बात ही नहीं है।(व्‍यवधान) नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: उनका इलाका है।

डा.चन्‍द्रशेखर बैद: चूरू के हैं, वह बैठे राजेन्‍द्र सिंह राठौड़, पूछो उनसे। चूरू के मंत्रीजी बैठे हैं, उनसे पूछो आप, तारानगर में पानी की कमी...(व्‍यवधान)

डा.सुरेश चौधरी: चूरू पूरे जिले में है और चूरू पूरे जिले की व्‍यवस्‍था सुधारने का जिम्‍मा काफी लम्‍बे समय तक आपके पास रहा है...

श्री रामनारायण मीणा: आप दोनों क्‍यों बात कर रहे हैं...

डा.सुरेश चौधरी: और सुधार सकते थे आप।

श्री रामनारायण मीणा: देखिये, यह तो सदन को मानना पड़ेगा, अध्‍यक्षजी, यह तो सदन को मानना पड़ेगा कि भूमिगत जलस्‍तर गिरता जा रहा है।  मेरे इलाके में साठ-साठ फीट पानी नहीं....

श्री अध्‍यक्ष: आप कहां, चूरू और पडि़हारा की बात हो रही है, आप अपने इलाके पर चले गये, क्‍या बात कर रहे हैं आप।

श्री अमरा राम(धोद): हमारा तो उत्‍तर दिला दें अध्‍यक्ष महोदय।

श्री रामनारायण मीणा: मैं इसलिए अर्ज कर रहा हूं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसलिए अर्ज कर रहा हूं कि भारत सरकार को आप योजना भेजते हैं...

श्री अध्‍यक्ष: उप नेता महोदय, आपके इलाके की बात नहीं है, यह चूरू के पडि़हारा की बात है।

श्री रामनारायण मीणा: स्‍वीकृति लेते हैं लेकिन आप बार-बार यह कैसे कहते हैं आपकी भारत सरकार। आप कैसे कह सकते हैं कि आपके मुख्‍य मंत्री। वह राजस्‍थान की मुख्‍य मंत्री हैं, वह केन्‍द्र की भारत सरकार है। अब आप तालमेल नहीं रखो, समय पर पैसा नहीं लाओ, इसलिए मंत्रीजी, आप तो सक्षम आदमी हैं, आपके सामने जो समस्‍या है, कृपा करके उसको ठीक कर दीजिये, पैसा दे दीजिये, योजना को चालू कर दीजिये।

श्री अध्‍यक्ष: रतनगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपको पूछना है तो आप भी पूछ लें। रतनगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपको पूछना है तो आप भी पूछ लीजिये। बस हो गया आपका तो। हां। माननीय मंत्रीजी, उनको भी पूछ लेने दो।

श्री राजकुमार रिणवा: अध्‍यक्ष महोदय, आपणी योजना को जल्‍दी लागू करवाने की कृपा करें और जो पडि़हारी की अब योजना आई है मंत्री महोदय के पास में उसको भी अतिशीघ्र, तीन साल से...

श्री अध्‍यक्ष: आपणी योजना तो अलग है तो इससे। वह अलग योजना है, वह इसमें थोड़े ही है।

श्री राजकुमार रिणवा: हां, वह अलग है। उसको तो, उसको अध्‍यक्ष महोदय, 2031 तक के लिए टाल दिया गया है, इतनी बड़ी समस्‍या हो जायेगी।

डा.चन्‍द्रशेखर बैद: आपणी योजना में जो फेज-टू है इसके लिए के.एफ.डब्‍लू. ने प्रस्‍ताव भेज दिया राज्‍य सरकार को, राज्‍य सरकार ने उन शर्तों को मंजूर नहीं किया और इसलिए उन्‍होंने लोन नहीं दिया और फेज-टू योजना रतनगढ़ और सुजानगढ़ के लिए लागू नहीं हो सकी।...

श्री अध्‍यक्ष: आप इनफोर्मेशन सीक कर रहे हैं या दे रहे हैं?

श्री राजकुमार रिणवा: वहां पर पीने के पानी की जबरदस्‍त समस्‍या है। दो साल, ढाई साल योजना को हो गये, उसको अतिशीघ्र पूरा करवाया जाय।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बोलिये। मंत्रीजी, मंत्रीजी। माननीय मंत्रीजी का जवाब सुनें, माननीय मंत्री का जवाब सुनें, बैठें अब आप।

श्री सांवर लाल: राजस्‍थान की जो स्थिति है पानी के संबंध में, सबको पता है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसीलिए गत वर्ष हमने जल चेतना यात्रा, वाटर कंजर्वेशन, सब के ऊपर ध्‍यान दे रहे हैं, वाटर लेवल ऊपर बढ़े, क्‍वालिटी उसकी ठीक हो, सारी चीजों के ऊपर राजस्‍थान सरकार बनने के बाद में काफी कुछ किया है। (व्‍यवधान) अब आप सुन तो लो, जनता कोई तीन साल से ही थोड़े पी रही है।

श्री अध्‍यक्ष: बैठे-बैठे नहीं बोलें, बैठे-बैठे नहीं।

श्री सांवर लाल: अब आप पूरी बात को सुनना ही नहीं चाहो, बीच-बीच में आब्‍सटेकल माननीय अध्‍यक्ष महोदय...

श्री कैलाश त्रिवेदी: आप क्‍या कर रहे हैं, सौ तालाब फूटे पड़ें हैं और वह तो एक विधान सभा के ठीक ही नहीं हो रहे हैं...

श्री सांवर लाल: *** सौ तालाब तो इसलिए फूटे हैं कि डेढ़ सौ को ठीक करा दिया हमने तीन साल में, बाकी पहले ध्‍यान रखते आप। कुछ पता तो है नहीं और पहली बार यों-यों कर रहे हैं आप।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यहां *** नहीं बोलते हैं। आप *** निकाल देना।

श्री सांवर लाल: अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सदन को अर्ज करना चाह रहा हूं...

श्री अध्‍यक्ष: *** शब्‍द बोला है वह निकाल देना।

श्री सांवर लाल: पीने के पानी की व्‍यवस्‍था के लिए, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहां पर भी जो व्‍यवस्‍था करने की जरूरत होती है हम कर रहे हैं बराबर।  आपने जो सवाल उठाया है उसके संबंध में भी हमने कार्यवाही कर ली है। अब आप कह रहे हैं पानी खारा पानी है लेकिन वहां पर पुराने जमाने से टांका बनाकर उसका पानी पीने के लिए पहली प्रेक्टिस इस्‍तेमाल करते हैं, फिर अगर पानी में कहीं कमी आती दिखती है तो जो खराब पानी और वह पानी है उसको मिक्‍स करके काम में लेते हैं, बाकी जानवर के लिए नहाने-धोने के लिए पानी काम में आता है। जहां-जहां पर...

श्री अमरा राम(धोद): मंत्रीजी, पाँच सौ रूपये टेंकर के हिसाब से पानी ला रहे हैं लोग।

श्री अध्‍यक्ष:अब आपका, उसको तो आने दो आप। आपके प्रश्‍न का जवाब, वह तो आने दो।

श्री सांवर लाल: अब यह सब बता रहा हूं मैं।

श्री अमरा राम(धोद): पाँच सौ रूपये प्रति टैंकर, हर दूसरे दिन पाँच सौ रूपये एक परिवार को खर्च करने पड़ रहे हैं वहां।

श्री सांवर लाल: यह दुर्भाग्‍य है कि वास्‍तव में खर्च करने पड़ते हैं और पीने का पानी पहली आवश्‍यकता है इसलिए आदमी बिसलरी की बोतल खरीद कर भी पीता है, आपको पता है। यह सारी चीजें हम जानते हैं पर...

श्री भंवरलाल शर्मा(सरदारशहर): तो बिसलरी पिलाओ फिर सब को। बिसलरी के चक्‍कर में आप आ गये, हां।

श्री सांवर लाल: आप तो गोल-मटोल हो रहे हो, विराज जाओ न, आपके *** का काम है...(व्‍यवधान)

श्री भंवरलाल शर्मा(सरदारशहर): यह मेरे उड़े हैं तो आप जैसे बिचौलियों से माथापच्‍ची करते हुए उड़े हैं, बिसलरी की बात कर रहे हैं, लोगों को भैंसों की पेशाब का पानी नहीं मिल रहा, बिसलरी की बात कर रहे हैं। मंत्री बनते ही नशा आ गया।

श्री सांवर लाल: माननीय अध्‍यक्ष महोदय: अगर उस जनता की चिंता होती तो आपका हुलिया कुछ अलग से लगता, दस-पन्‍द्रह वर्ष से मैं ही देख रहा हूं आपको यहां। अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि वाटर सेक्‍टर में...

श्री भंवरलाल शर्मा(सरदारशहर): ऐसा है, आपसे तो पार नहीं पड़ेगा, डेढ़ साल में हम कर लेंगे।

डा.किरोड़ी लाल: आप तो यह बताओ, गोल-मटोल कैसे हो रहे हो।

श्री भंवरलाल शर्मा(सरदारशहर): आप इनके चक्‍कर में मत पड़ो।

श्री सांवर लाल: वाटर सेक्‍टर में जितनी योजनाएं हमने सेंक्‍शन की है, जितनी शुरू की है, यह अपने आप में एक रिकार्ड है और इनके पूरे होने में, माननीय अध्‍यक्ष, कुछ समय तो लगेगा। आज बाड़मेर लिफ्ट है, पोकरण-फलसूण्‍ड है, पाली वाली है...

श्री अमरा राम(धोद): हम तो यह पडि़हारा की पूछ रहे हैं, आप कहां बाड़मेर जा रहे हैं, पडि़हारा का तो कल्‍याण कर दो आप, राजस्‍थान का कल्‍याण क्‍या करोगे, सात साल में एक बूंद नहीं गया, उसका कल्‍याण करों आप तो।

श्री सांवर लाल: पडि़हारा का तो हो जायेगा। अच्‍छा, आपको यही जानकारी चाहिए, पडि़हारा में आज की तारीख में 2001 के आधार पर जनसंख्‍या है 10069 ।

Lpm/akt/1200/1g/6032007

 

पटियारा में आज तारीख में 2001 के आधार पर जनसंख्‍या है 10,069, वर्तमान में है 11560 अब ये सेंसेक्‍स तो मेरे डिपार्टमेंट ने नहीं किये। मेरे पास आंकडे हैं जो बता रहा हूं और जो स्रोत से पानी मिल रहा है इनको 200 किलो पानी के हिसाब से प्रतिदिन मिल रहा है लीटर के हिसाब से।

श्री अमराराम (धोद): कितना मिलना चाहिए..

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): यह तो बहुत है, पर्याप्‍त है पानी, 200 तो शहरों में ही नहीं मिल पाता इतना...

श्री अमराराम (धोद): वह लोकल स्रोत से मिल रहा है जो खारा है अध्‍यक्ष महोदय लोक स्रोत से जो पीने लायक नहीं है उससे बता रहे हैं आप। जो आपकी योजना है उससे मिल रहा है मात्र 200 और लोकल स्रोत से मिल रहा है 768 मतलब तीन गुणा तो जो लोकल स्रोत हैं जो पीने लायक नहीं है उससे मिल रहा है यह तो...

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍नकाल समाप्‍त हुआ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, अगर आप मीठा निकाल सकते हो तो करोड़ दो करोड़ रूपए आपको सरकार की तरफ से दिलवा देता हूं मैं यह निवेदन करना चाहा रहा हूं...

श्री अमराराम (धोद): ...(व्‍यवधान) खारा है तो जब यह योजना कैसे बनाई आपने....

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): यह योजना जो बन रही है मीठे पानी की है  ...(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): हां तो उसी से देने की है लोकल स्रोत से  ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍नकाल समाप्‍त हुआ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मैं आपको यही बता रहा हूं कि यह मीठे पानी की है इसको एक्‍जीक्‍यूशन का टाइम घटा के टाइम से उनको पानी देने की कोशिश करेंगे।

श्री अमराराम (धोद): धन्‍यवाद।

स्‍थगन प्रस्‍तावों पर अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

 

श्री अध्‍यक्ष: बिराजे। मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि निम्‍नांकित स्‍थगन प्रस्‍तावों की सूचना प्राप्‍त हुई है :-

1.     श्री भरत सिंह (106) एवं दो अन्‍य सदस्‍यों की और से प्रदेश में समर्थन मूल्‍य पर सरसों की खरीद आरम्‍भ नहीं होने से उत्‍पन्‍न स्थिति के संबंध में।

2.    श्री खुशवीर सिंह (30) एवं श्री हेमाराम चौधरी (200) की और से राज्‍य में डोडा-पोस्‍त के क्रय-विक्रय मूल्‍य में भारी विसंगति के संबंध में।

      स्‍थगन प्रस्‍ताव के रूप में तो अनुमति देने में असमर्थ हूं फिर भी माननीय सदस्‍य श्री भरत सिंह एवं श्री खुशवीर सिंह को अपने प्रस्‍ताव के विषय में तीन-तीन मिनट बोलने की अनुमति होगी।

शून्‍यकाल

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): मेरा नाम नहीं लिया  ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बीच में नहीं No sit down, No please sit down डॉ. श्रीगोपाल बाहेती, सदस्‍य की और से  ...(व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): आपने मेरा नाम नहीं लिया  ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: ...(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष कहता है सीट डाउन तो सीड डाउन यह होती है बात प्‍लीज आप स्‍थान ग्रहण करें ...(व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): नहीं सिट डाउन का क्‍या अर्थ हुआ?*** सीट डाउन का क्‍या मतलब हुआ? मेरे भी नाम पर आपको व्‍यवस्‍था देनी चाहिए।  *** (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: प्‍लीज मुझे बोलने दीजिए, मैं बोल दूंगी, मुझे बोल लेने दीजिए  ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आसन के विरूद्ध इस तरह की टिप्‍पणी अशोभनीय है, मुझे पीड़ा है, यह सर्वोच्‍च आसन है, आसन के प्रति इस तरह की बात अध्‍यक्ष महोदय यह शब्‍द आसन के लिए आदर योग्‍य है यह आसन के लिए किस तरह की बात करते हैं  ...(व्‍यवधान)

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह धौंस शब्‍द निकाला जाए  ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):  आप जबरदस्‍ती करना चाहते हो  ...(व्‍यवधान) इन्‍होंने क्‍या अशोभनीय कहा है, ऐसा कुछ नहीं कहा है, आप जबरदस्‍ती आग लगाना चाहते हो  ...(व्‍यवधान) कुछ नहीं कहा है।

श्री अध्‍यक्ष: रायपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, रायपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें। गुढ़ामालानी से आने वाले माननीय सदस्‍य आप बहुत वरिष्‍ठ हैं, मैं मानती हूं कि मैं धौंस डरा नहीं रही हूं। मैं आपको नियमों की बात बता रही हूं कि स्‍थगन प्रस्‍ताव जो है वह आते हैं ऐसी इम्‍पोर्टेंट, इतनी महत्‍वपूर्ण बात होती हैं और ऐसी जो सदन में पूरी कार्यवाही को छोड़ करके और उस पर चर्चा की जाए। फिर भी इस विषय पर बोलने के लिए चूंकि यह किसानों से संबंधित मामला था मैंने फिर भी तीन तीन मिनट बोलने की अनुमति दी। यह केवल एक ही व्‍यक्ति को दी जाती है आपने साथ में किया आप खुशवीर सिंहजी नहीं चाहे आप बोल दीजिए मुझे क्‍या आपत्ति है लेकिन यह थोड़े ही है कि मैंने अनुमति दी इसका मतलब जितनो ने दिया मैं सबको बोलने का मौका दूं। स्‍थगन प्रस्‍ताव का पहले महत्‍व समझिए। आप नियम-50 का महत्‍व समझिये कि उसका महत्‍व क्‍या है? मैं तो फिर भी सदाशयता का परिचय देती हूं, धौंस-दपट का सवाल नहीं है लेकिन यह कोई आसन का करने लग जाएगा, आसन से बहस ही करने लग जाएगा तो आसन को भी आँख दिखानी पड़ती है Yes, you can sit here आराम से बैठिये कोई दिक्‍कत नहीं है, आराम से बैठिये आप। श्री भरतसिंहजी।

(कांग्रेसी सदस्‍य श्री हेमाराम चौधरी द्वारा सदन कूप में आकर बैठना)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, हेमारामजी अब आप मत उठ जाना, किसी हालात में नहीं उठना  ...(व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): संघर्ष करना उठना नहीं  ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या जबरदस्‍ती हो रही है सदन के अन्‍दर धक्‍कामुक्‍की हो रही है  ...(व्‍यवधान)

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (केसरीसिंहपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक नई परम्‍परा यहां पैदा की जा रही है प्रतिपक्ष के द्वारा इस तरह की नई परम्‍परा पैदा की जा रही है, आसन सर्वोपरि है, आसन का सम्‍मान करना नहीं जानते हैं ये  ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैं आपको बोलने से पूर्व एक सैकिण्‍ड आप बिराजे। डॉ. श्रीगोपाल बोहती सदस्‍य की और से जयपुर में मीडिया कर्मियों पर किये गये कथित हमले के संबंध में।  इस विषय पर सरकार की और से वक्‍तव्‍य दिया जायेगा। अत: इस पर अनुमति देने में असमर्थ हूं। लेकिन सरकार से उस समय आपको प्रश्‍न पूछने का निश्चित तौर से अवसर होगा। 

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): अध्‍यक्ष महोदय, तत्‍काल का मुद्दा है मुझे इस पर बोलने की अनुमति दी जाए, दो मिनट के लिए तत्‍काल का मुद्दा है, घटना कल ही हुई है कोई विलम्‍ब का मामला नहीं है और मीडिया कर्मियों पर हमला हुआ है, सामान्‍य बात नहीं है। मुझे बोलने की अनुमति दी जाए इसके ऊपर यह मेरा आपसे निवेदन है।

श्री अध्‍यक्ष: मैं आपको दो मिनिट का समय दूंगी आप अपनी बात कह दीजिएगा।  ...(व्‍यवधान)

श्री जितेन्‍द्र सिंह (अलवर): अध्‍यक्ष महोदय, आपसे निवेदन है कि ऐसी की ऐसी घटना 22 तारीख को अलवर में हुई थी  ...(व्‍यवधान)

 

नियम 295 के अन्‍तर्गत प्राप्‍त विशेष उल्‍लेख की सूचनाएं

 

श्री अध्‍यक्ष: मैं व्‍यवस्‍था दे रही हूं ना, प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत जो सूचनाएं प्राप्‍त हुई हैं:-

1.     श्री मुरारीलाल मीणा (122), सदस्‍य की और से विधानसभा क्षेत्र बांदीकुई के कस्‍बा बहिया कलां व गुढ़ाकटला के पास एनीकट का निर्माण करने के संबंध में।

2.    श्री मोहनलाल गुप्‍ता (124), सदस्‍य की और से जयपुर शहर के रसोई गैस धारकों की समस्‍या के संबंध में।

3.    श्री जोगाराम पटेल (146), सदस्‍य की और से राज्‍य के विभिन्‍न न्‍यायालयों में सहायक लोक अभियोजक, प्रथम एवं द्वितीय द्वारा नेक नीति से पैरवी नहीं करने के संबंध में।

4.    श्री रामनारायण मीणा (138) सदस्‍य की और से कानूनगो सर्किल करवर को यथावत तहसील नैनवां में रखने के संबंध में।

5.    डॉ. सुरेश चौधरी (186), सदस्‍य की और से सिद्ध मुख परियोजना के अंतर्गत चौकों की रीफिटिंग का कार्य त्‍वरित गति से करवाकर बराबन्‍दी लागू करने के संबंध में।

6.    श्री जीवाराम चौधरी (52), सदस्‍य की और से जिला जालौर एवं बाड़मेर की डोडा-पोस्‍त की सरकारी लाइसेंस फीस को कम करने के संबंध में।

7.    श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास (189), सदस्‍य की और से जोधपुर शहर के सुनियोजित विकास हेतु प्राधिकरण का गठन के संबंध में।

8.    श्री बंशीलाल खटीक (89), सदस्‍य की और से मार्बल कटर उद्योग को रायल्‍टी मुक्‍त करने के संबंध में।

9.    श्री भंवरलाल राजपुरोहित (102), सदस्‍य की और से मकराना में सत्र न्‍यायालय खोलने के संबंध में।

10.   श्री हेमराज मीणा (199), सदस्‍य की और से विधानसभा क्षेत्र किशनगंज के शाहबाद में ओलावृष्टि से प्रभावित व्‍यक्तियों को मुआवजा देने के संबंध में।

11.    डॉ. श्रीगोपाल बाहेती (167), सदस्‍य की और से पुष्‍कर एवं अजमेर का जवाहरलाल नेहरू रिन्‍युअल मिशन के तहत विकास करने के संबंध में। 

      माननीय सदस्‍यों को उनके द्वारा दी गई सूचना को पढ़ने की अनुमति होगी।

शून्‍यकाल

श्री जितेन्‍द्र सिंह (अलवर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि 22 तारीख को मीडिया कर्मियों के साथ कोर्ट के कुछ कर्मचारियों ने उनके कैमरे फेंक-फेंक कर तोड़ दिये थे  ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: डॉ. श्रीगोपाल बाहेती ने यह प्रश्‍न रख दिया और यह प्रश्‍न रख दिया अब आपको बोलने की अनुमति  ...(व्‍यवधान) स्‍थगन प्रस्‍ताव जब दिया जाता है जो अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था के समय उसके पास नहीं होती है आप प्‍लीज स्‍थान ग्रहण कर लें।

श्री जितेन्‍द्र सिंह (अलवर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि सरकार को इसके ऊपर वक्तव्य, जवाब दें...

श्री अध्‍यक्ष: सरकार के लिए कह तो दिया  ...(व्‍यवधान)

श्री जितेन्‍द्र सिंह (अलवर): यह अलवर का मामला है 22 तारीख का है, अलवर का मामला है  ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अलवर का मामला है आपको लिखित में देना चाहिए ऐसे नहीं उठता है अलवर का मामला है, मौके पर उठाइये। अब श्री भरतसिंहजी। 

श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्‍यक्षजी, आप  ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: उनको भी बोल लेने दो शून्‍यकाल तो है अभी आप कह देना, वह खड़े हो गये हैं।

स्‍थगन प्रस्‍ताव आि‍द पर चर्चा

प्रदेश में समर्थन मूल्‍य पर सरसों की खरीद आरम्‍भ नहीं होने से उत्‍पन्‍न स्थिति के संबंध में

 

श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्‍यक्ष जी, आपका मैं ध्‍यान दिलाना चाहूंगा कि पिछले एक महीने से कोटा क्षेत्र की मण्डियों में नई सरसों की उपज बाजार की मण्डियों में आ रही हैं। सरकार ने जो है 1715 रूपए समर्थन मूल्‍य सरसों का निर्धारित किया है और पिछले एक महीने से किसान को मजबूरी में समर्थन मूल्‍य पर खरीद चालू नहीं होने की वजह से अपनी उपज कम से कम 100-150 क्विंटल कम भाव से मंडियों में बेचनी पड़ रही हैं। आज राज्‍य सरकार को आवश्‍यकता है कि तत्‍काल सरसों की खरीद जो है समर्थन मूल्‍य पर आरम्‍भ करें। पिछले वर्ष एक मार्च से इसकी खरीद आरम्‍भ करी थी और आज 6 तारीख हो चुकी हैं। हमारी समर्थन मूल्‍य पर खरीद नहीं होने की वजह से किसानों को प्रतिदिन कोटा संभाग के अंदर ही कम से कम 25 लाख रूपए की आर्थिक हानि हो रही है और ओलावृष्टि और वर्षा से किसानों की फसल पहले ही प्रभावित हुई है और इस साल सरसों की उपज में जो पैदावार कोटा संभाग में बैठ रही है वह कम है संभव है कि राजस्‍थान के अन्‍य प्रदेश में भी कम बैठे और क्‍योंकि सरसों का रकबा इस साल ज्‍यादा है तो सरकार को आवश्‍यकता है कि तत्‍काल और मैं आपसे उम्‍मीद करता हूं कि इस पर कृषि मंत्रीजी जो है और संबंधित मंत्री वक्‍तव्‍य देंगे और केन्‍द्र सरकार के ऊपर बात नहीं टाली जाए। सरकार अपनी खरीद आरंभ करें और इसकी जो व्‍यवस्‍था पैसे के भुगतान की है वह केन्‍द्र से बात करके राजस्‍थान के किसान को नुकसान नहीं होना चाहिए। यह मेरी आपसे प्रार्थना है। धन्‍यवाद।

 

भीम/अरुण/6.3.07/12.10/1h

 

डॉ.ओ.पी.महेन्‍द्रा (सरकारी उपमुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह तो उलटा चोर कोतवाल को डांटे भारत सरकार को सरसों की खरीद शुरू करनी है राजस्‍थान सरकार सारी व्‍यवस्‍था कर चुकी है। नेफेड को करनी है। भारत सरकार सरसों की खरीद शुरू नहीं कर रही है ।

श्री अध्‍यक्ष: आप किस हैसियत से बोल रहे हैं?

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): अध्‍यक्ष महोदय, हमारा भी इसमें यही आग्रह है कि केन्‍द्र सरकार तुरंत इसमें हस्‍तक्षेप करके तुरंत खरीद शुरू करवायें सरसों की किसान परेशान है सरसों बाजार में सस्‍ते भाव में बेचनी पड़ रही है।

श्री शांतिलाल चपलोत: माननीय अध्‍यक्षजी, सरसों की खरीद बहुत गंभीर है।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): इसलिए हम तो प्रतिपक्ष के साथियों से सहयोग चाहेंगे कि आप लोग केन्‍द्र सरकार से कह कर और जल्‍दी से जल्‍दी स्‍वीकृति करायें और इसमें हम तो चाहेंगे कि ... ।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस सदन के माध्‍यम से...।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): ...इसमें आम सहमति बना करके और जल्‍दी से जल्‍दी सरसों खरीद के लिए केन्‍द्र सरकार पर दबाव बनाया जाए।

श्री भरत सिंह: ...(व्‍यवधान)... केन्‍द्र सरकार ने कभी मना नहीं किया ...(व्‍यवधान)...

श्री शांतिलाल चपलोत: हजारों क्विंटल सरसों प्रतिदिन आ रही है...।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सहकारिता मंत्री।

श्री शांतिलाल चपलोत: और अभी तक खरीददारी चालू नहीं हुई है मुझे लगता है कि...।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह किसानों से संबंधित मामला है गत वर्ष भी ...। आप कृपा करके ...।

श्री शांतिलाल चपलोत: अभी तक केन्‍द्र सरकार इस बारे में गंभीरता से नहीं ले रही है। केन्‍द्र सरकार को इसको गंभीरता से लेना चाहिए और सरकार जितनी सहायता दे सके देनी चाहिए। अबकी बार गये साल से भी डयोढ़ी सरसों हुई है । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, और अभी तक केन्‍द्र सरकार इस बारे में गम्‍भीर नहीं लग रही है और खरीद के लिए विशेष तैयारी उनकी लगती नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: सहकारिता मंत्री जी।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय अध्‍यक्षजी, यह मामला जितना गम्‍भीर है, मेरा जहां तक ख्‍याल है ...।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, केन्‍द्र सरकार ने स्‍पष्‍ट कहा है राज्‍य सरकारों को कि तुरन्‍त खरीद शुरू करें ।

श्रीमती ममता शर्मा: अध्‍यक्ष महोदय, केन्‍द्र सरकार ने पिछले वर्ष भी ढाई हजार करोड़ की सरसों खरीदी थी । खरीदने की जिम्‍मेदारी तो आपकी है पैसा देगी केन्‍द्र सरकार तो ।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): यह गलत बात कर रहे हो आप यह राज्‍य सरकार बिलकुल गम्‍भीर नहीं है इस मामले में।

श्रीमती ममता शर्मा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसानों का मामला है बहुत गंभीर मामला है सरसों की खरीद अभी तक शुरू नहीं हुई है और जब बात आती है ये केन्‍द्र सरकार पर टाल देते हैं।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): और राजस्‍थान का किसान लुट रहा है मंडियों में कोई व्‍यवस्‍था नहीं है सरकारी की तरफ से।

श्रीमती ममता शर्मा: केन्‍द्र सरकार केवल पैसा देगी खरीदने की व्‍यवस्‍था तो आप करें।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये जैसी प्रतिपक्ष की भावना है उस भावना को देखते हुए ...।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय कृषि मंत्री जी, माननीय सदस्‍यों की उत्‍तेजना को देखते हुए यदि आप इस बारे में कुछ कहना चाहें।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): एक मिनट मैं एक निवेदन करूं। एक मिनट।

श्री अध्‍यक्ष: अब क्‍या कहेंगे? बात हो गयी।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): मुझे परमीशन दें एक मिनट के लए।

श्री अध्‍यक्ष: जब मंत्री जी खड़े हो गये फिर क्‍या बात है?

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): कमाल यह है कि अध्‍यक्ष जी, कृषि मंत्री जी सहकारिता मंत्री जी भी हैं।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): एक मिनट एक निवेदन सिर्फ एक मिनट माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री शांतिलाल चपलोत: ...(व्‍यवधान)... अभी तक केन्‍द्र सरकार उस बारे में कोई गंभीरता नहीं ले रही है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): केन्‍द्र सरकार को गाली निकालने के लिए पैदा हुए हैं क्‍या अपन? अपन तो किसानों की समस्‍याओं के लिए ...(व्‍यवधान)...श्री जोगाराम पटेल (लूणी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सदन की पूरी भावना है।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्री जी, खड़े हैं और आप बीच में क्‍यों खड़े हैं? मंत्री जी खड़े हो गये हैं।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): एक मिनट आपकी परमीशन से एक मिनट।

श्री अध्‍यक्ष: बात तो आ गयी न?

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): आपकी परमीशन से।

श्री अध्‍यक्ष: बात आ गयी मंत्री जी खड़े हैं।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): एक मिनट। आधा मिनट कर दें।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या होगा? बात उठा ली उन्‍होंने।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): ...(व्‍यवधान)... आपकी पंचायती काहे की है? आपको काहे की पंचायती है? ...(व्‍यवधान)...श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, लूणी से आने वाले माननीय सदस्‍य, भरत सिह जी ने जो स्‍थगन प्रस्‍ताव जिस बात पर..।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): एक लाइन।

श्री अध्‍यक्ष: आप क्‍यों लेकिन? क्‍या मतलब?

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): एक लाइन निवेदन करना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: नौ-नौ, प्‍लीज सिट डाउन। हां माननीय कृषि मंत्री जी।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दीगोद से आने वाले माननीय सदस्‍य एवं अन्‍य माननीय सदस्‍यों द्वारा जो चिन्‍ता जाहिर की है वास्‍तव में यह वाजिब है और यह किसानों से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा है लेकिन मैं सदन को जानकारी देना चाहूंगा कि समर्थन मूल्‍य पर सरसों की खरीद भारत सरकार के नेफेड के द्वारा की जाती है और नेफेड को माननीय मुख्‍यमंत्री जी के द्वारा, सहकारिता मंत्री जी के द्वारा, राजस्‍थान सरकार के मुख्‍य सचिव के द्वारा कई पत्र लिखे, हम लोगों ने राजस्‍थान में सरसों क्रय करने हेतु आग्रह किया है लेकिन आज दिन तक भी नेफेड के द्वारा राजस्‍थान सरकार को सरसों क्रय की अनुमति नहीं मिल पायी है।  मैं आपको यह जानकारी देना चाहूंगा माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बिलकुल सही है कि राजस्‍थान में इस वर्ष लगभग 28 लाख हैक्‍टैयर में सरसों की बुवाई की गयी है और यह भी सही है कि 40-42 लाख मीट्रिक टन सरसों राजस्‍थान में इस वर्ष उत्‍पादित होगी।  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सदन को जानकारी देना चाहूंगा कि राजस्‍थान सरकार के द्वारा माननीय मुख्‍यमंत्री जी के द्वारा हम लोगों ने केन्‍द्र सरकार को नेफेड को 20 लाख मीट्रिक टन सरसों क्रय करने के लिए प्रस्‍ताव भेजे हैं और जो मित्रवत राजस्‍थान सरकार सहयोग कर सकती है किसानों के हित में, हम लोगों ने 263 केन्‍द्र चिह्नित करके भारत सरकार को भेजे हैं लेकिन सरसों क्रय की नेफेड के द्वारा अनुमति आज दिन तक हम लोगों को नहीं मिली। मैं सदन को आश्‍वस्‍त करना चाहूंगा कि ज्‍यों ही आप...।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप जाकर के मिले हो क्‍या? यह पत्र भेजे रोजाना अख़बार में पढ़ते हैं ये योजनाएं। कृपा  करके आम जनता का सभी पार्टियों के किसान हैं आप जाकर कब मिल रहे हैं? कृपा करके आप जाकर के बात करें।  आपके मुख्‍यमंत्री जी रोजाना दिल्‍ली जाती हैं आप उनको सजेस्‍ट करिये और आप जाकर के बात करिये बहुत गंभीर मसला है और आपके पास तो खजाना है बैंकों से लोन ले लीजिये बाद में पैसा मिल जाएगा आपको।

श्रीमती ममता शर्मा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह खरीदना तो चालू करें पैसा तो आ जाएगा केन्‍द्र सरकार से। आपने खरीद ही चालू नहीं की । आपने केन्‍द्र ही नहीं खोले अभी तक खरीद के पैसा देने को केन्‍द्र मना नहीं कर रही है लेकिन आप लोग खरीद ही चालू नहीं कर रहे हैं।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): पिछली बार खरीदा था ...(व्‍यवधान)... जिसके आंदोलन करके बैठ गये।

श्रीमती ममता शर्मा: किसान परेशान हैं अभी तक आपने खरीद चालू नहीं की और आप हर बात नेफेड और केन्‍द्र सरकार पर टाल देते हैं।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): तो यह बात केन्‍द्र सरकार को क्‍यों नहीं बताते हो?

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्री जी खड़े हैं।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तारीख तो बतायें कब से शुरू करेंगे?

श्री अध्‍यक्ष: पूरी बात तो सुनिये आप।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): वो केन्‍द्र सरकार से पूछें।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि बूंदी से आने वाली माननीय सदस्‍या ने यह कहा कि आप लोग ...।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं आप तो एक बात स्‍पष्‍ट कर दो कि जब तक नेफेड नहीं कहेगी हम नहीं कर सकते, यह बोल दो बस।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): नहीं इसके अलावा फिर भी मैं कहना चाहूंगा सदन को कि यह किसान से जुड़ा मुद्दा है इसमें राजनीति नहीं करनी चाहिए और हम सबको सदन में एक प्रस्‍ताव लाना चाहिए इस बात का कि नेफेड शीघ्र राजस्‍थान में सरसों का क्रय प्रारम्‍भ करे क्‍योंकि राजस्‍थान सरकार और ये सदन चाहे वो पक्ष हो या चाहे विपक्ष हो हम सब मिलकर चाहते हैं कि राजस्‍थान में किसानों की सरसों समर्थन मूल्‍य पर जो कृषि मूल्‍य एवं लागत आयोग द्वारा जो राशि निर्धारित की गयी है 1715 रुपये उसका निर्णय हम सब इस सदन के माध्‍यम से लेकर भारत सरकार से यह कहें कि आप शीघ्र राजस्‍थान में सरसों क्रय केन्‍द्र खोलने की अनुमति हमें दी जाए।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप सारे मंत्रियों का सर्टिफिकेट, कल अभिभाषण के समय सब मंत्रियों का जो केन्‍द्र के आये हैं उन्‍होंने आपकी जो तारीफें की हैं वो सब बांच चुके, आप अकेले जाकर नहीं करा कर ला सकते क्‍या?  आपने सबको पढ़ा।  आपने माननीय सदस्‍य ने अभिभाषण पर पढ़ा था कि फलां मंत्री ने आपकी तारीफ की सरकार की, मुख्‍यमंत्रीजी की की तो आप जाकर करवा लो न इसको।

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): हरिमोहन जी आप साथ जाएंगे तब होगा आप जाइये।

श्री अध्‍यक्ष: हर मामले में खड़े होना उचित नहीं है।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी: अध्‍यक्ष महोदय, किसानों के मामले में केन्‍द्र सरकार का सहयोग मिलता नहीं है यूरिया लेट दी, आपको एड देनी थी बाड़मेर को कम दी आपने। हर काम में आपकी सरकार असहयोग करती है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): किसानों कि मामले में जो अत्‍याचार इस सरकार ने किये हैं न टीटी साहब वो तो राजस्‍थान में मिसाल रहेगी। 17 आदमियों को क़तलेआम कर दिया। किसानों की बात करने वालों ने और आज किसानों के हितों की बात करते हो। खुद तो इंकंपीटेंट हो और बोझ दूसरे पर डालना चाहते हो।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी: आप किसानों को गुमराह करते हो एक भी किसान नहीं आपके कार्यकर्ता करते हैं सारा। कितने किसान आये थे आपके आंदोलन में दो सौ किसान नहीं आये।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ये युनूस खान जी पर भी हमारे कार्यकर्ताओं ने किया होगा हमला? थोड़ा बहुत तो शर्म करो।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा दीगोद से आने वाले माननीय सदस्‍य को कि इन्‍होंने बड़ा समसामयिक और बड़ा किसान से जुड़े मुद्दे को उठाया। कृषि मंत्री महोदय ने आपसे एक आग्रह किया है सरसों न्‍यूनतम मूल्‍य पर खरीद करें नेफेड खरीद करती है और राजस्‍थान सरकार ने सारा प्रबंध कर लिया है तो अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे आग्रह करूंगा कि एक प्रस्‍ताव सर्वसम्‍मत प्रस्‍ताव कृषि मंत्री महोदय ने जो रखा है उसके अनुसार सदन पारित करे अगर हम सारे किसानों के हितैषी हैं तो हम क्‍यों नहीं एक सर्वसम्‍मत प्रस्‍ताव पारित करके केन्‍द्र सरकार पर यह दबाव बनायें कि सरसों की समर्थन मूल्‍य पर खरीद करना प्रारंभ करें। अध्‍यक्ष महोदय, पिछले साले 1 मार्च से खरीद प्रारंभ हो गयी थी। इससे पहले 15 फरवरी को खरीद प्रारंभ हो गयी थी। आज किसान लुट रहा है। अध्‍यक्ष महोदय, आज किसान अपनी फसल को मंडियों में लेकर आ रहा है उसको 1650 रुपये प्रति क्विंटल बेचना पड़ रहा है इसलिए मेरा आग्रह है कि आप तो हमेशा किसानों के हितैषी रहे हैं एक प्रस्‍ताव आये...।

श्री अध्‍यक्ष: वो प्रस्‍ताव तो लाये।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): और मैं मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि प्रस्‍ताव रखें।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार बिलकुल इस मामले में गम्‍भीर नहीं है। सरकार तो आपस में लड़ रही है इनके जूतियों में खीर बंट रही है इनको कहां ध्‍यान है किसान का।

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष कुछ सुझाव दे रहे हैं आपको।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): यही हालत बिजली के मामले में रहा है यही हाल यूरिया और डीएपी के मामले में हुआ है।

श्री अध्‍यक्ष: आपके नेता खड़े हैं आप भी खड़े हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर साहब ने सदन के सामने एक प्रस्‍ताव रखा है इस संबंध में इसकी आवश्‍यकता नहीं है क्‍योंकि न तो मंत्री महोदय जाकर दिल्‍ली मिले हैं न मुख्‍यमंत्री जी जाकर वहां मिले हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मुख्‍यमंत्री जी ने पत्र लिखे हैं इन्‍होंने पत्र लिखे हैं। हमारा शिष्‍ट मंडल जाकर मिला है अगर इसकी आवश्‍यकता नहीं है तो मजबूती से कह दो न कि हम किसानों की सरसों समर्थन मूल्‍य पर खरीदी जाए इसके पक्ष में नहीं है और प्रस्‍ताव रख रहे हैं आप विरोध कर दें। आप बॉयकाट कर दो। रख रहे हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आवाज़ तो हम उठा रहे हैं और आप कह रहे हैं कि हम पक्ष में नहीं हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपकी अनुमति से प्रस्‍ताव रखने का अधिकार हमारा है अध्‍यक्ष महोदय, प्रस्‍ताव रख रहे हैं आप बॉयकाट कर दो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): अगर सरकार अपनी मर्जी से बिना स्‍थगन प्रस्‍ताव सरकार अपनी मर्जी से प्रस्‍ताव लाती 

कैलाश/चौहान     6.3.07  12.20  (1)  1j

 

तो पहल आपकी होती । आप तो कर नहीं रहे हो इधर से प्रस्‍ताव आया और आप उस पर बात कर रहे हो और किसानों के हितेषी बन रहे हो । सरकार को अपनी तरफ से प्रस्‍ताव लाना चाहिये था पहले। सरकार को अपनी बात कहनी चाहिये थी, सरकार को वक्‍तव्‍य देना चाहिये था । सरकार तो चुपचाप बैठ गई, सांप सूँघ गया सरकार को तो काम करने में और अब उसको राजनीतिक रूप देकर इधर उधर की बात कर के किसानों के हितैषी बनने का नाटक कर रही है सरकार ।

श्री जोगाराम पटेल: इधर उधर की नहीं मुद्दे की बात है, यह प्रस्‍ताव लाया जाये और केन्‍द्र सरकार को भेजा जाये यह मुद्दे की बात है । (व्‍यवधान) राजस्‍थान के किसानों के हितों की बात है तो यह पवित्र सदन आज ही प्रस्‍ताव लाकर केन्‍द्र सरकार को भेजे कि समर्थन मूल्‍य पर .. (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): राजस्‍थान की विधान सभा अपनी भावना गत टाइम पर प्रस्‍तुत कर चुकी है । उस प्रस्‍ताव के आधार पर ही जाकर मिल लो कि हम सब की भावना यह है हमने प्रस्‍ताव दिया था । (व्‍यवधान)

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): केन्‍द्र सरकार किसान पर कोई दया नहीं कर रही है। केन्‍द्र सरकार का समर्थन मूल्‍य पर खरीद करना आवश्‍यक है और केन्‍द्र सरकार उसका इंतजाम करें, नेफड के द्वारा उसका इंतजाम होना चाहिये । वह बात तो करते नहीं हो । पिछली बार जो सरसों की खरीद हुई उसका पेमेंट कितने दिन बाद मिला ।

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): किसान विरोधी हो इसीलिए तो विपक्ष में बैठे हो आप । आप तो बहुमत के आधार पर प्रस्‍ताव लाइए पारित करते हैं ।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): इसको संकल्‍प के रूप में लाना चाहिये, प्रस्‍ताव लाकर पास करना चाहिये । (व्‍यवधान)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): अध्‍यक्ष महोदय, यह सरकार किसानों के प्रति बिलकुल संवेदनशील नहीं है । (व्‍यवधान) यह सरकार आपस में लडने में जुटी हुई है और मंत्रियों को पिटवाने में लगी हुई है । (व्‍यवधान) किसान लुट रहा है । (व्‍यवधान) आपको तो लडने से फुर्सत नहीं है ।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): ... (व्‍यवधान) रिकार्ड तोड फसल खरीदी उसका तो पेमेंट किया नहीं, उसका पेमेंट आया एक साल बाद ... (व्‍यवधान) और आज प्रस्‍ताव लाने में दिक्‍कत आने लगी ।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): (व्‍यवधान) आप कहना क्‍या चाहते हो, संसदीय कार्य मंत्री जी ... (व्‍यवधान)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): आप कल तो कह रहे थे हमारा खजाना भरा हुआ है आप खरीद शुरू नहीं कर सकते आपके पास फूटी कोडी भी नहीं है क्‍या । आप खरीद शुरू करवाओ, आप घोषणा करो कि फलां तारीख से खरीद शुरू करेंगे ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ... (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, आपको नियम 306 के अंतर्गत अधिकार है कोई सदस्‍य, अध्‍यक्ष की सम्‍मति से प्रस्‍ताव कर सकेगा कि सदन के समक्ष किसी खास प्रस्‍ताव पर किसी नियम का लागू होना निलम्बित कर दिया जाये और यदि प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हो जाये तो वह प्रासंगिक नियम उस समय के लिये निलम्बित कर दिया जायेगा । इस नियम के अंतर्गत मैं आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा । (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, पहले भी प्रस्‍ताव लाये जाते रहे हैं और आपको याद होगा कि पंजाब में रानी व्‍यास के पानी के मुद्दे पर मुख्‍य मंत्री को अधिकृत किया गया था लेकिन पंजाब में जाकर मुख्‍य मंत्री ने  राजस्‍थान की विधान के द्वारा पारित किये गये प्रस्‍ताव के साथ धोखा किया और उन लोगों के लिये पंजाब में वोट मांगे जिन्‍होंने अपने घोषणा पत्र में यह कहा कि हम राजस्‍थान को पानी नहीं देंगे । धोखा किया राजस्‍थान की मुख्‍य मंत्री ने और इस पवित्र सदन का अपमान करने का काम किया । जिस सर्वसम्‍मत प्रस्‍ताव से मुख्‍य मंत्री को सशक्‍त किया गया अधिकार दिया गया उसके खिलाफ जाकर पंजाब में वोट मांगने का काम किया है । आप क्‍या सर्वसम्‍मत प्रस्‍ताव की बात करते हो । मुख्‍य मंत्री ने इस सदन के द्वारा पारित प्रस्‍ताव की भावना के साथ धोखा करने का काम किया है चुनावों में, कौनसे प्रस्‍ताव की बात करते हो आप । (व्‍यवधान) राजस्‍थान की जनता के साथ इस सदन के द्वारा दी गई .... (व्‍यवधान)

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): (व्‍यवधान) पंजाब में तब कांग्रेस का राज था (व्‍यवधान) केन्‍द्र में कांग्रेस का राज था (व्‍यवधान) दिल्‍ली और पंजाब में दोनों जगह कांग्रेस का राज था । (व्‍यवधान) और आज बादल का राज आये दो दिन नहीं हुए और आज दो दिन में आपको इतनी चिंता हो गई । (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): चिंता नहीं हुई हमारे प्रस्‍ताव का दुरुपयोग हुआ है। (व्‍यवधान) वहां जाकर पंजाब के चुनाव में (व्‍यवधान) जो आपकी पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र था उसका आपने समर्थन किया उसके आधार पर वोट मांगे, हमारे प्रस्‍ताव का दुरुपयोग किया। (व्‍यवधान) हमारी भावनाओं के खिलाफ पंजाब का चुनाव घोषणा पत्र लिखा गया तो उसमें कहा गया कि हम इसको परिवर्तन करेंगे, हमारी भावनाओं के विपरीत सर्वसम्‍मत प्रस्‍ताव के विरोध में माननीय मुख्‍य मंत्री जी ने पंजाब में जाकर प्रदर्शन किया है उससे बडे शर्म की बात... (व्‍यवधान)

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): ... (व्‍यवधान) यह कह कर आप काश्‍तकारों को गुमराह कर रहे हैं, सदन को गुमराह कर रहे हैं । (व्‍यवधान)

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): दो दिन में तो आपको इतनी चिंता हो गई (व्‍यवधान) दिल्‍ली और पंजाब में साल भर तक राज था तब नहीं बोले आप और आज दो दिन में बादल की चिंता हो गई । (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, माननीय सदस्‍यगण । सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍य मंत्री जी को सर्वसम्‍मति से अधिकार दिया था रानी व्‍यास के पानी के मुद्दे पर और अभी चुनाव में जाकर उन्‍होंने इस सदन के द्वारा जो ताकत उनको दी गई है...

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):  ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, माननीय सदस्‍यगण ।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): ****

श्री अध्‍यक्ष: सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य । (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): *****

श्री अध्‍यक्ष: प्‍लीज । (व्‍यवधान) आपने जो मुद्दा उठाया है वह एक अलग से प्रश्‍न है उसके साथ इसका कोई संबंध नहीं है ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):  ***

श्री अध्‍यक्ष: आसन पांवों पर, आसन पांवों पर है । लेकिन क्‍या इसमें कोई विवाद हो सकता है क्‍या कि यहां सरसों की खरीद आपके समर्थन मूल्‍य पर हो, यह तो कोई विवाद का विषय नहीं है । क्‍या दिक्‍कत है, विवाद का विषय है, क्‍यों है ?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ****

श्री अमराराम (धोद): ****

श्री अध्‍यक्ष: पहले बात सुनिए, आप पहले बात सुनिए ।

श्री अमराराम (धोद): ****

श्री अध्‍यक्ष: आर्डर, आर्डर ।

श्री अमराराम (धोद): *****

श्री अध्‍यक्ष: मैं यह पूछ रही हूं कि सदन यदि कोई प्रस्‍ताव पास करे....

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ****

श्री अध्‍यक्ष: हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, मेरे बात यह समझ में नहीं आ रही है कि यदि सदन इस संबंध में कोई सर्वसम्‍मत प्रस्‍ताव पारित करे कि सरसों की खरीद समर्थन मूल्‍य पर हो और यह समर्थन मूल्‍य हो तो उसमें कोई आपत्ति है क्‍या ?

प्रतिपक्ष के कई माननीय सदस्‍य: आपत्ति है, आपत्ति है ।

श्री अध्‍यक्ष: आप किसान के हित में काम नहीं करना चाहते ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, इसमें इनको आपत्ति है, यह विरोध करना चाहते हैं ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): ****

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): *****

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): *****

ans/usc   12.30  1k 06.03.2007

 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ***

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): ***

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ***

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर):***

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 306 में अध्‍यक्ष जी को अधिकार है। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ***

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (उप मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय राजस्‍थान विधान सभा प्रक्रिया एवं कार्य संचालन संबंधी नियम 306 में स्‍पष्‍ट प्रावधान है कि आप प्रस्‍ताव ला सकते हैं। कोई भी सदस्‍य प्रस्‍ताव ला सकते हैं, इसके संबंध में, 306 में यह स्‍पष्‍ट प्रावधान है।  विरोध कर दें(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):*** 

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी):***

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): प्रस्‍ताव का विरोध कर दो(व्‍यवधान) आपको अधिकार है। 

श्री अमराराम (धोद):***

श्री जुबेर खान (रामगढ़):***

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):***

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय.....(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री जी बोल रहे हैं(व्‍यवधान) बोलने दे ना उनको।

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): ***

श्री अध्‍यक्ष: उघोग मंत्री खड़े हैं, आप क्‍यों खड़े हो गए । (व्‍यवधान) 

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): यह आपने ध्‍यान नहीं दिया (व्‍यवधान) फूड पोमोइल पर कम कर दी है, खतम कर दी है, उसका आयात इतना यहां पर बढ़ेगा, सरसों की कीमत उसके आधार पर घटेगी यह कोई, कौन खरीदेगा, नेफेड के माध्‍यम से आज तक खरीदते आये हैं कौनसी नई बात है। (व्‍यवधान)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): आप खरीद शुरू करवाइये।( व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): प्रस्‍ताव आप लाये ना, बहुत प्रेम उमड रहा है भारतीय जनता पार्टी को। स्‍थगन प्रस्‍ताव तो पास करें क्‍या तकलीफ है। स्‍थगन प्रस्‍ताव पास करिये। आप सर्वसम्‍मति से पास करिये क्‍या तकलीफ है1 पास करें सर्व सम्‍मति से...(व्‍यवधान) प्रेम उमड रहा है। पास करिये। बहुत प्रेम उमड रहा है, किसानों का प्रेम उमड रहा है आपको।(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपने स्‍थगन प्रस्‍ताव पर अपनी व्‍यवस्‍था श्रीमुख से फरमा दी। आपने स्‍थगन प्रस्‍ताव निरस्‍त करते हुए..(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): बहुत प्रेम उमड रहा है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय मेरी प्रार्थना यह थी कि आपने स्‍थगन प्रस्‍ताव पर अपनी व्‍यवस्‍था श्रीमुख से फरमा दी थी, स्‍थगन प्रस्‍ताव को रद्द करते हुए माननीय सदस्‍य को दो मिनिट बोलने की अनुमति दी थी और उस पर कृषि मंत्री जी अपनी बात कही और फिर मैंने आपका ध्‍यान नियम 306 की और आकर्षित किया(व्‍यवधान) जिसमें नियमों को निलंबित करके शीतलता देकर आपको अधिकार है, हम आपकी अनुमति से, आपकी अनुमति से कृषि मंत्री महोदय इस सन्‍दर्भ में प्रस्‍ताव इसलिए रखना चाहते हैं कि राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री भारत सरकार के कृषि मंत्री से मिली, भारत सरकार के प्रधानमंत्री से मिली, पत्र लिखा। यह कह रहे हैं मिले नहीं। प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री दोनों से मुख्‍यमंत्री मिली, उसके बाद भी सरसों की खरीद प्रारम्‍भ नहीं होना, आज राजस्‍थान का एक कोने से दूसरे कोने तक बैठा  हुआ किसान इस मामले में दुःखी है इसलिए मेरी प्रार्थना है कि 306  के नियमों में आपको अधिकार है उसका प्रयोग करते हुए...(व्‍यवधान) 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):वह तो अपनी विदेश यात्रा की अनुमति के लिए मिली थी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सर्वसम्‍मत संकल्‍प आये।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): विदेश यात्रा की अनुमति के लिए मिली थी।(व्‍यवधान)  

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री):अध्‍यक्ष महोदय, अगर सर्वसम्‍मत संकल्‍प पारित नहीं हो तो ध्‍वनि मत से कराये, बहुमत से कराये और उसके बाद भी प्रतिपक्ष के नेता सहित अगर इस बात का विरोध कर रहे हम सरसों के समर्थन मूल्‍य पर खरीद के पक्ष में नहीं है तो बायकाट कर दें। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): विरोध नहीं कर रहे।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): विरोध नहीं कर रहे हैं। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह पार्लियामेंट अफेंस मिनिस्‍टर अपनी फेलियर को छिपाना चाहते हैं। आपको इतना प्रेम है, स्‍थगन प्रस्‍ताव आप पास करिये क्‍या तकलीफ है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपने...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): बहुत प्रेम उमड रहा है आपको किसान का। (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: स्‍थगन प्रस्‍ताव पर रूलिंग पहले ही दे दी, स्‍थगन प्रस्‍ताव पर अध्‍यक्ष महोदय रूलिंग् पहले ही दे चुके हैं।(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, तीस दिन से सरकार आपस में लड रही है,किसान हित का उन्‍हें ध्‍यान नहीं है। स्‍थगन प्रस्‍ताव कांग्रेस वाले लाये। इतने हितेषी है किसान के तो प्रस्‍ताव पास करें,क्‍या तकलीफ है। केवल हाथी के दाँत दिखाने के और व खाने के और। किसानों का इनमें प्रेम नहीं है, किसान के नाम से नेतागिरी करना चाहते हैं। यदि इनके मन में यह होता तो पिछली बार भी दीगोद वाले माननीय सदस्‍य स्‍थगन प्रस्‍ताव लेकर आये,अभी भी लेकर आये हैं। हम प्रस्‍ताव करते हैं(व्‍यवधान) स्‍थगन प्रस्‍ताव पास किया जाए।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): अध्‍यक्ष महोदय, पिछले साल केन्‍द्र सरकार ने 2700 करोड़ रूपये की सरसों खरीदी और इस बार भी राजस्‍थान सरकार को उन्‍होंने  तैयारी के लिए बोल रखा है, आप क्‍यों नहीं खरीद रहे हो। सरसों की खरीद में हमेशा...( व्‍यवधान) आप एक मिनिट सुनिये। राजस्‍थान सरकार सरसों खरीदती है उसको रिम्‍बर्स करती है,नैफेड के द्वारा रिम्‍बर्स किया जाता है। कहीं कोई मना नहीं किया है आपको सरसों खरीदने के लिए, इसलिए आप सरसों की खरीद शुरू करें, हम रिम्‍बर्स करायेंगे आपका। इन छोटी-छोटी बातों के लिए  विधान सभा का प्रस्‍ताव, इन छोटी-छोटी बातों के लिए....(व्‍यवधान) सदन का दुरूपयोग है।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): कहां दिक्‍कत है, आप आदेश लेकर आओ खरीद के लिए..(व्‍यवधान)  केन्‍द्र सरकार की इच्‍छा हे तो दो ना आप।

 श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): कांग्रेस पार्टी के अध्‍यक्ष यह कह रहे हैं कि सरसों की न्‍यूनतम मूल्‍य पर खरीद छोटी बात है। यह  सदन में नहीं आनी चाहिये। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): सरकार का ध्‍यान आकर्षित नहीं था, हमने आकर्षित किया, बडी बात होती...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): बहुत अच्‍छी भावना है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आप तो असत्‍य के पुलिंदे है, मैंने कभी नहीं कहा कि यह बात,चर्चा नहीं होनी चाहिये।(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): सरकार सो रही थी, नहीं तो प्रस्‍ताव पहले लाती।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह रिकार्ड पर है, आपने जो अभी शब्‍द इस्‍तेमाल किया है वह रिकार्ड पर है, छोटी बात है यह...(व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): मेरी सब बातें रिकार्ड पर है, मैं तो यह कहता हूं......

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): छोटी बात है सरसों की खरीद की बात ?

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): मैं तो यह कहता हूं कि  सरसों की खरीद हम करवाएंगे। 2700 करोड रूपये की सरसों पिछले साल खरीदी गई थी। (व्‍यवधान) एक मिनिट बिराजे। 2700 करोड रूपये की सरसों पिछले साल केन्‍द्र सरकार ने खरीदी, रिम्‍बर्स किया। मैं समझता हूं कि पूरे हिन्‍दुस्‍तान में जहां पाँच हजार करोड रूपये की सरसों खरीदी अकेला राजस्‍थान से, 2700 करोड की सरसों खरीदकर केन्‍द्र सरकार ने हमको सहयोग दिया। इनको धन्‍यवाद देना तो आता नहीं है। दूसरी बात, इस बार भी सरसों की खरीद के कहां मना  किया है आप बताइये। आप ख्‍वाम ख्‍वाह बिना बात की बात कर रहे हैं। कोई प्रस्‍ताव  लाना है तो आपके चैम्‍बर में सबको बिठाकर बात करिये।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): केन्‍द्रीय कृषि मंत्री जी ने, माननीय मुख्‍यमंत्री ने भरपूर तारीफ की है और उन्‍होंने भी उनकी की है अब क्‍या चक्‍कर पड़ रहा है1(व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनिट मेरे को पूरा करने दें1

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): हो गया, पूरा हो गया।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): एक मिनिट बिराजे आप। मेरा आपसे यह निवेदन है कि  इनको किसी ने मना किया क्‍या है क्‍या सरसों खरीदने के लिए, पत्र बताये हमको(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, सरसों की खरीद के लिए इनके पास भण्‍डार नहीं है1 इनके पास रखने के लिए जगह नहीं है। सरकार की कोई तैयारी नहीं है।

दुर्गा/चौहान 060307 1240 1l

 

यह जानबूझकर बिचौलियों को लाभ देने के लिये सरसों की खरीद शुरू नहीं कर रहे हैं। (व्‍यवधान) आपको शुरू करनी चाहिए और कहीं दिक्‍कत आती है तो हमारे विपक्ष के नेता शरद पंवारजी से, प्रधान मंत्रीजी से बात करेंगे और किसानों के लिये पूरा सहयोग करेंगे। (व्‍यवधान)

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली): एक मिनट, खाली एक करोड़ रुपये दिये हैं। क्‍या भरोसा कि आप सरसों के पैसे भी नहीं दो। सौ करोड़ रुपये दिये हैं, बाढ़ में खाली। (व्‍यवधान) तीन हजार करोड़ रुपये की डिमाण्‍ड थी।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): एक हजार करोड़ रुपया आया हुआ है। आप यह बात ..(व्‍यवधान) आपको मालूम नहीं है। नेचुरल केलेमिटी फण्‍ड में आपके पास एक हजार करोड़ रुपया आया हुआ है। सौ करोड़ रुपये तो एक्‍स्‍ट्रा दिये हैं।

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली): आज भी कवास में पानी भरा हुआ है और आप राजनीति कर रहे हो उसमें। (व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन आप से यह है, (व्‍यवधान) एक मिनट, आप मेरी एक बात सुन लें।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी खड़े हैं, मंत्रीजी को सुनें।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): किसान को लेकर इस सरकार की नीति और नीयत, दोनों में खोट है। पहले इन्‍होंने प्रस्‍ताव पास करने की बात कही पानी के लिये, उसका क्‍या हश्र हुआ, आपके सामने है। अब जब प्रोसेस शुरू करना चाहिए इनको वह शुरू करते नहीं है और केवल सेण्‍ट्रल पर डाल करके किसानों को गुमराह कर रहे हैं। आप कृपा करके उनसे कहिये कि खरीद चालू करें।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सदन से आग्रह करना चाहूंगा कि किसानों का जब भी कोई मुद्दा आता है सदन में पक्ष और विपक्ष को चिन्‍ता करनी चाहिए। एक छोटा सा विषय, सरसों की खरीद कब होगी...।

श्री अध्‍यक्ष: छोटा कैसे, बहुत बड़ा विषय है, बहुत बड़ा विषय है।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): इस विषय को लेकर आधा घण्‍टा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आधा घण्‍टा। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): अब सरकार बोल रही है, सरकार पर एतराज क्‍यों नहीं है। यह छोटा सा मुद्दा है, माननीय संसदीय कार्य मंत्रीजी। (व्‍यवधान)

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): निश्चित रूप से सर्वसम्‍मति से यह बात कहनी चाहिए। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): राजस्‍थान की सबसे ज्‍यादा बहुमूल्‍य फसल है।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर इसकी चिन्‍ता कांग्रेस के लोगों को होती तो निश्चित रूप से सर्वसम्‍मति से यह बात होनी चाहिए कि किसानों के हित में हमें निर्णय करना चाहिए। लेकिन एक इतने बड़े विषय पर किताबें निकल गयीं और किताबें निकलकर नियम कानून बताने लग गये, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इससे बड़ा दुर्भाग्‍य सदन के लिये नहीं हो सकता है। एक डिबेट का विषय बन गया। हम लोगों ने सद्भावना से यह आग्रह किया था कि आप सबसे कि निश्चित रूप से राजस्‍थान में सरसों के समर्थन मूल्‍य पर क्रय करने के लिये हम लोगों ने गोदाम की पूरी व्‍यवस्‍था की है, 22 लाख मीट्रिक टन की अब तक हम लोगों ने व्‍यवस्‍था की हुई है। इसके अलावा हमने क्रय केन्‍द्र स्‍थापित करने की व्‍यवस्‍था की हुई है। सारी व्‍यवस्‍था करने के बाद भी मैं आग्रह करना चाहूंगा, अध्‍यक्ष महोदय, गत वर्ष एक मार्च से सरसों क्रय करना प्रारम्‍भ किया लेकिन दुर्भाग्‍य का विषय है कि 3-3 महीने तक माननीय अध्‍यक्ष महोदय .... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): खजाना भरा हुआ है तो खरीद शुरू करो। (व्‍यवधान)

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली): खरीद शुरू कर दो, खरीदेगी तो नेफेड। (व्‍यवधान)

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): और किसानों को हड़ताल करनी पड़ी, धरने देने पड़े। इसलिये हम लोग सब मिलकर, हमारा सबका नैतिक दायित्‍व यह बनता है कि भारत सरकार को इस प्रकार का एक प्रस्‍ताव भेजें कि सरसों शीघ्र क्रय करने के लिये सरकार अनुमति दे। और ज्‍योंही अनुमति मिलेगी, मैं सदन को आश्‍वस्‍त करना चाहूंगा, दूसरे दिन से सम्‍पूर्ण राजस्‍थान में जो हमारे केन्‍द्र स्‍थापित हम लोगों ने किये हैं, सरसों का क्रय हम आरम्‍भ कर देंगे। यह मैं सदन को जानकारी दे रहा हूं। इसलिये मैं आपकी अनुमति से प्रस्‍ताव करता हूं कि राजस्‍थान में सरसों  को समर्थन मूल्‍य पर क्रय करने के लिये ..(व्‍यवधान) शीघ्र राजस्‍थान में सरसों की खरीद की जाए। धन्‍यवाद। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह कौनसा तरीका है प्रस्‍ताव का, अध्‍यक्ष महोदय, ऐसे आया है क्‍या प्रस्‍ताव। यह कौनसा तरीका है प्रस्‍ताव का, आज से पहले भी कभी ऐसे प्रस्‍ताव आये हैं क्‍या? (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि राजस्‍थान सरकार को आथोराइज किया जाए कि नेफेड से कहे कि खरीद लिया जाए, पैसा भारत सरकार से लायेंगे हम। करिये, प्रस्‍ताव पास करिये। करिये, प्रस्‍ताव, हम स‍मर्थन करते हैं आपको। खजाना बहुत है ना आपको। (व्‍यवधान)

डा. ओ.पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): बाढ़ के पैसे में सौ करोड़ रुपये दिये हैं पहले आप वह तो दिला दें। पहले वह 32 सौ करोड़ तो दिला दें।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपके पास तो वह खजाना भरा हुआ है। (व्‍यवधान) आपके पास खजाना भरा हुआ है, हम प्रस्‍ताव पास करते हैं कि राजस्‍थान सरकार को आथोराइज किया जाए कि सरसों की खरीद की जाए, जब तक नेफेड को कहीं से पैसा नहीं मिले, आप प्रस्‍ताव पास करिये, आप करिये प्रस्‍ताव। आपके पास बहुत पैसा पडा हुआ है, क्‍या तकलीफ है।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह सदन सरकार को अधिकृत करता है कि सरसों की खरीद शुरू की जाए। (व्‍यवधान) आप कराइये पास। (व्‍यवधान)

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): क्‍या केन्‍द्र अपनी जिम्‍मेदारियों से मुकर रहा है क्‍या? (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह सदन राजस्‍थान सरकार को अधिकृत करता है कि सरसों की खरीद तुरंत अपने पैसे से कराई जाए और बाद में केन्‍द्र सरकार से उसका पैसा वसूल किया जाए।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): केन्‍द्र अपनी जिम्‍मेदारियों से मुकर रहा है क्‍या। केन्‍द्र मुकर रहा है क्‍या अपनी जिम्‍मेदारियों से। (व्‍यवधान) केन्‍द्र अपनी जिम्‍मेदारियों से मुकर रहा है क्‍या। (व्‍यवधान)

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): केन्‍द्र सरकार इस सदन के ...(व्‍यवधान) आपके पैसों का पुनर्भरण करके, आपका एक पैसा बाकी नहीं रहेगा। (व्‍रूवधान) आप खरीददारी शुरू कर दीजिये।

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): ऐसा है, केन्‍द्र सरकार का काम भी राजस्‍थान सरकार करेगी क्‍या। (व्‍यवधान) आप लोगों की नहीं चलती, आप लोगों की। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, माननीय मंत्रीगण। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, ऐसे 300 करोड़ रुपये पेट्रोल और डीजल का राजस्‍थान सरकार वसूल कर रही है, 300 करोड़ की ख्‍ंरीददारी कीजिये। किससे परमीशन लेनी है आपको। 300 करोड़ रुपये आपके पास हैं। इस किसान के टैक्‍स का पैसा आ रहा है। (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): जोशीजी, एक हजार करोड़ रुपये रिजर्व बैंक से ब्‍याज खा रहे हैं बैठे-बैठे। सिक्‍योरिटी में जमा है एक हजार करोड़ राजस्‍थान सरकार का। (व्‍यवधान) उसका ब्‍याज खा रहे हैं, बैठे हुए ये।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): खरीदिये,  खरीदिये, आप। अब बोलिये। (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): और इनके पास पैसा नहीं है, कौन कह रहा है, एक हजार करोड़ रुपया, अध्‍यक्ष महोदय, रिजर्व बैंक के पास शोर्ट-टर्म सिक्‍योरिटी में इनका पडा हुआ है। जिसके ऊपर खर्चा नहीं कर रहे हैं, केवल ब्‍याज खा रहे हैं बैठे हुए ये।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): खरीदिये, उससे सरसों खरीदिये, क्‍या तकलीफ है।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, पूर्व में वित्‍त मंत्री रहे हुए हैं। क्‍याअ ाप यही व्‍यवस्‍था पहले कर सकते थे? नहीं कर सकते थे।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): कर सकते थे, नया नियम है, नया राज है।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): नया नियम कौनसा आ गया?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हौसलों से उड़ान भर रहे हैं। हौसलों से उड़ान भर रहे हैं, पंखों की जरुरत नहीं है। हौसलों से उड़ान भर रहे हैं हम लोग। हम तो हौसलों से उड़ान भर रहे हैं, क्‍या तकलीफ है। पंखों की जरुरत नहीं है, हम तो हौसलों से उड़ान भर रहे हैं। करिये हौसला। इसमें क्‍या तकलीफ है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर ने जिस नियम 306 का उदाहरण यहां पर दिया है, मैं उसका उपयोग तब करुंगी जब ऑल पार्टी, आप सारे, मीटिंग में बैठकर के सबको बुलाकर के और इस बारे में कोई निर्णय पर पहुंचे और उसके बाद मैं इस नियम के अन्‍दर अपना प्रयोग करके अधिकार का प्रयोग करते हुए आप इस सदन में लाइये और फिर उसे पास किया जायेगा।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): अध्‍यक्ष महोदय, पहले आपने कहा था कि वे बोल लें, उसके बाद बोल लूं, एक मिनट।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, नहीं, इसके बारे में अब आप कोई बात नहीं करेंगे।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): नहीं, इसके बारे में नहीं कहूंगा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, अगर इसके बारे में ये बात कहेंगे, फिर मैं भी कहूंगा। (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): मैं इसके बारे में कुछ नहीं कहूंगा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपने जो व्‍यवस्‍था दे दी, वह सर्वोपरि है।

श्री अध्‍यक्ष: ये कह रहे हैं तो नहीं कहेंगे। कह दिया ना, नहीं करेंगे। यह कह दिया।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): नहीं करुंगा।

आपने स्‍थगन प्रस्‍तावों के बारे में जो व्‍यवस्‍था दी है, स्‍थगन प्रस्‍ताव नियम 50 के अन्‍तर्गत दिये जाते हैं। उसमें कई बार सदन में 10-10 माननीय सदस्‍य एक साथ प्रस्‍ताव देते हैं और उसमें आप रिजेक्‍ट करते हैं तो 2-2 मिनट की अनुमति सबको देते हैं। आज हेमारामजी ने जो खुशवीरसिंहजी के साथ, खारची से आने वाले माननीय सदस्‍य के साथ स्‍थगन प्रस्‍ताव रखा, मैं आपको कई उदाहरण देकर के कह सकता हूं, आप भी यहां पर इस सदन में बहुत वर्षों तक सदस्‍य रही हैं, आप बहुत सीनियर, यहां इस सदन की सदस्‍य और मंत्री रही हैं, आज स्‍पीकर हैं, यहां सभी सदस्‍यों को, दस्‍तख्‍त करने वालों को, तभी तो लोग दस्‍तख्‍त करते हैं, उसमें हमको भी दो मिनट बोलने का मौका मिलेगा। यह आप एक नई परम्‍परा डाल रहे हैं। इस पर आप पुनर्विचार कर लें, यह मेरा आपसे निवेदन है।

श्री अध्‍यक्ष: बीकानेर से आने वाले माननीय सदस्‍य, स्‍थगन प्रस्‍ताव, मैं समझती हूं, कोई बहुत महत्‍वपूर्ण ऐसा प्रश्‍न हो कि जिस के ऊपर कभी दो या तीन को बोलने का मौका दिया गया हो, वरना नहीं दिया जाता है। 131 में, 127 में जो लोग हस्‍ताक्षर करते हैं, उनको तो अवसर मिलता है लेकिन स्‍थगन प्रस्‍ताव पर कभी नहीं मिलता है। फिर भी आप मुझे पूर्व का कोई इंस्‍टांस बताइये, यदि आप पूर्व का इंस्‍टांस बतायेंगे तो भविष्‍य में मैं इस बात का ध्‍यान रखूंगी। लेकिन यह जो आप कह रहे हैं, मुझे याद नहीं पड़ता है कि स्‍थगन प्रस्‍ताव के ऊपर इस प्रकार से कोई 10-10 को बोलने का मौका दिया गया हो।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): एक मिनट, यहां पर प्रथम सत्र में हम लोगों ने अकाल के बारे में जो स्‍थगन प्रस्‍ताव रखा था उसमें कम से कम 30-31 आदमियों ने दस्‍तख्‍त किये थे और आपने कम से कम 10-15 सदस्‍यों को अलाऊ किया थज्ञ।

श्री अध्‍यक्ष: अकाल और अफीम-डोडा एक ही बात है?

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): बात परम्‍परा की है, अध्‍यक्ष महोदय। स्‍थगन प्रस्‍ताव दो ही माननीय सदस्‍यों ने रखा है, उस पर आपको अनुमति देनी चाहिए। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में नहीं बोलें। 

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): अफीम भी किसान ही बोता है, वह किसान नहीं है क्‍या? (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: श्री खुशवीरसिंह। आप चाहें तो वे बड़े व्‍यथित हैं, आप उनको बोल लेने दें। काफी व्‍यथित नजर आ रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): एक-एक मिनट हम दोनों बोल लेंगे। आपने 3 मिनट की व्‍यवस्‍था दी है। एक मिनट मैं बोलूं, दो मिनट वे बोलें।

श्री अध्‍यक्ष: 3 मिनट नहीं। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, आप स्‍वयं सदस्‍य रहे हैं, 1998 से 2003 तक, जो बीकानेर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा, यदि वह नहीं है तो रिकार्ड चेक कर लें। स्‍थगन प्रस्‍ताव पर एक से ज्‍यादा सदस्‍यों को बोलने की परम्‍परा इस सदन में रही है। आप स्‍वयं अपोजीशन में बैठी हुई थीं, यह रिकार्ड उठाकर देख लीजिये। हमारे साथी, हेमारामजी नहीं बोलेंगे, आप रिकार्ड उठाकर देख लीजिये।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): एक बार अगर पिछले 5 साल में अनुमति दी हो। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, रिकार्ड मंगा लीजिये, अध्‍यक्ष महोदय, रिकार्ड मंगा लीजिये। उसके बाद ही बात कहेंगे, आप रिकार्ड मंगा लीजिये। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैंने कह दिया है, आप गलत कह रहे हैं। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हम सही कह रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य, पिछले 5 साल तक माननीय अध्‍यक्षजी भी मेम्‍बर थीं इस विधान सभा की और आप भी मेम्‍बर थे। 5 साल में स्‍थगन प्रस्‍ताव पर कितने लोगों को बोलने दिया। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हां देख लो, रिकार्ड देख लो। रिकार्ड देख लें ना। धर्मपालजी, आप तो बाय-इलेक्‍शन जीतकर आये हैं, विराजो आप। आप तो बाय-इलेक्‍शन जीतकर आये हैं। (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, आप रिकार्ड उठाकर देख लीजिये, नहीं हो तो हेमारामजी नहीं बोलेंगे। (व्‍यवधान)

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर):  हम भी तो कह रहे हैं, देख लें। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप रिकार्ड मंगा लीजिये, अध्‍यक्ष महोदय। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपने मेरी व्‍यवस्‍था नहीं सुनी। नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपने मेरी व्‍यवस्‍था सुनी नहीं थी ठीक से।

 

 

 

 

 

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मैंने यह कहा कि यदि आप मुझे इस तरह के इन्‍स्‍टांसेज कोई भी बताएंगे जो कि रिकार्ड देखकर तो मैं इस बारे में सोचूंगी कि आगे के लिए क्‍या करना है ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपका आदेश सर्वमान्‍य है पर आपने साथ में यह कहा कि यह सदस्‍य व्‍यथित है इसलिए पहले बोल लीजिए। यह कमेंट ठीक नहीं है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने यह कहा कि व्‍यथित है ... (व्‍यवधान) व्‍यथित क्‍यों है? इनका राइट है बोलने का। व्‍यथित किस बात का है? उन्‍होंने स्‍थगन प्रस्‍ताव पर साइन किये हैं। उनका अधिकार बनता है दो मिनट बोलने का। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: राइट तो नहीं है। ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): राइट है, साहब। अपनी परम्‍परा रही है, देख लीजिए आप। आप अपने उदाहरण, परम्‍परा देख लीजिए। ... (व्‍यवधान) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम सदन में, पूरे सदन में नहीं बोलेंगे, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूरे सदन में ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: ऐसे तो कोई भी माननीय सदस्‍य ... (व्‍यवधान) यूज कर सकता है, आप भी कर लेते हैं ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): किसका? ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: कोई भी यूज करता है ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपसे पिछली बार भी हमने प्रश्‍न उठाया है। स्‍थगन प्रस्‍ताव पर आप हरदम यह कर रहे हैं कि एक आदमी को बोलने का मौका दे रहे हैं जबकि सदन में पाँच आदमी साइन करते हैं। स्‍थगन प्रस्‍ताव पर पूर्व में भी मैं आज बोलना नहीं चाहता, माननीय पार्लियामैंट्री अफेयर मिनिस्‍टर और माननीय खाद्य मंत्रीजी, इसी सदन के मैम्‍बर थे, कटारियाजी भी मैम्‍बर थे, माननीय राजेन्‍द्रजी और किरोड़ीलालजी स्‍थगन प्रस्‍ताव पर तीन-तीन बार बोले हैं। रोज यह ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: खुशवीर सिंहजी, आपका समय जा रहा है। खुशवीर सिंहजी, आपका समय जा रहा है। आपका समय जा रहा है, खुशवीर सिंहजी। ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): समय जाएगा इसका मतलब क्‍या हुआ? ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: समय जा रहा है। ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): समय तो जा रहा है, साहब ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मतलब परम्‍पराओं के लिए पाइंट आउट करें तो आप ध्‍यान नहीं दें। आप स्‍थगन प्रस्‍ताव पर बोलने के बाद दो घंटे तक चर्चा करा लें। मतलब कोई एक माननीय सदस्‍य की भावना है, वह अपने अधिकार की बात कर रहे हैं तो ... (व्‍यवधान) करते नहीं है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज तो इनको बोलने दें और भविष्‍य में आपकी व्‍यवस्‍था जो होगी वह मान लेंगे। अभी तो आप इनको टाइम दे दीजिए। ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान) मैं तो, बोल लेंगे, एक मिनट ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): और इसके बाद रिकार्ड देख लीजिए।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने यह पाइंट आउट किया था कि ए.डी.सी. नहीं बोलता, इसमें रिकार्ड है, मैं लेकर दे रहा हूं और आपने कह दिया कि ए.डी.सी. एड्रस करता है। 1978 के बाद हाउस को एड्रस करता है मार्शल, यह इसमें पार्लियामैंट में प्रेक्टिस में है और आपने मुझे कह दिया कि ए.डी.सी. एड्रस करता है। हां, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कुछ परम्‍पराओं के निर्वहन की जिम्‍मेदारी आपकी और हमारी भी है। आपकी भावनाओं से सहमत हैं लेकिन आपको एक बार चैक करने में क्‍या तकलीफ है? यह इश्‍यू पिछली बार भी उठा था कि स्‍थगन प्रस्‍ताव पर ... (व्‍यवधान)

व्‍यवस्‍था

श्री अध्‍यक्ष: मैंने उस दिन भी व्‍यवस्‍था दी थी। तब भी मैंने यही कहा था कि पार्लियामैंट के अन्‍दर कौल एण्‍ड शकधर का जो आप हवाला दे रहे हो, 1978 से पहले ए.डी.सी. अनाउंस किया करते थे और उसके बाद फिर सैक्रेटरी अनाउंस करने लगे। उस दिन भी मैंने यह बात कही थी और आज फिर दोहरा रही हूं लेकिन विधान सभा के अन्‍दर आज दिन तक ए.डी.सी. ही यह घोषणा करते आये हैं, मार्शल ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मार्शल ... (व्‍यवधान) फिर बता दें, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इतनी देर में तो यह इतने पुराने माननीय सदस्‍य हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपके ही माननीय सदस्‍य समय ले रहे हैं, मैं क्‍या करूं? मैं क्‍या करूं? खुशवीर सिंहजी को तो बोलने दें। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मैं निवेदन करूं। आप तो बड़ी ... (व्‍यवधान) खुशवीर सिंहजी के बाद हेमारामजी को अलाऊ कर दीजिए। कहां फर्क पड़ रहा है दो मिनट में? खुशवीर सिंहजी के बाद हेमारामजी को अलाऊ कर दीजिए।

श्री अध्‍यक्ष: सवाल समय का नहीं है। ... (व्‍यवधान)

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): हेमारामजी और श्रवण कुमार की तो दिक्‍कत है। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सवाल इस बात का है, परम्‍पराओं का है और इस तरह की परम्‍परा पड़ जाएगी। फिर सब बोलने लगेंगे। ... (व्‍यवधान)

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): यहां पर दिक्‍कत हेमारामजी की और श्रवणकुमार की ही तो है। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आप विराजिये। एक मिनट। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर आप परम्‍परा की बात कर रही है तो आप 1967 में मेरे साथ मंत्री थीं सुखाडि़याजी की सरकार में। जीरो ऑवर पाँच-पाँच बजे तक चलता था और निरंजननाथजी आचार्य इतने एडजोर्नमैंट मोशन लगाते थे, कितने लोग बोलते थे? पूनमचन्‍दजी विश्‍नोई के समय के अन्‍दर कितने लोग एडजोर्नमैंट मोशन के ऊपर बोलते थे और एक-एक दिन में एक-एक मंत्री से तीन-तीन स्‍टेटमैंट दिलवाते थे तो परम्‍पराएं तो खुद निर्धारित करते हैं यहां पर। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: स्‍टेटमैंट सदन में ... (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आसन परम्‍पराएं स्‍वयं निर्धारित करता है लेकिन आप कभी-कभी बिलकुल रिजिड हो जाती हैं, यह मुझे ऐसा प्रतीत होता है। ऐसा मुझे प्रतीत होता है। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: ऐसा है, उस समय न तो पर्ची थी और न उस समय 295 था। अब तो 295 भी है और पर्ची भी है। उस समय नहीं था। उस समय केवल स्‍थगन प्रस्‍ताव था। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आपने इस प्रश्‍न का महत्‍व समझते हुए माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने अलाऊ किया। आम तौर पर एडजोर्नमैंट मोशन अलाऊ भी होता नहीं है। आपने स्‍वयं स्‍वीकार किया कि महत्‍वपूर्ण मुद्दा है, मैं अलाऊ करती हूं।

श्री अध्‍यक्ष: इसीलिए कर दिया। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आपके लिए आभार। आपके लिए आभार कि आपने सहृदयता, लेकिन सिर्फ हेमारामजी के बोलने के ऊपर ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैंने महत्‍वपूर्ण नहीं बताया। मैंने कहा किसानों से संबंधित मुद्दा है, यह कहा है मैंने। मैंने महत्‍वपूर्ण नहीं बताया था। मैंने महत्‍वपूर्ण नहीं बताया था। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): इतने वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं। किसानों की समस्‍याओं की जानकारी है। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: किसानों से संबंधित मुद्दा है इसीलिए मैं दो मिनट बोलने का समय दूंगी। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): लेकिन आप कभी कभी इतनी रिजिड हो जाती हैं, जितनी देर हम बहस-मुलाहजा कर रहे हैं, उतनी देर में तो बोलकर खतम हो जाता मामला अब तक ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बहस तो आप कर रहे हैं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): तो अब आप स्‍वीकार कर लीजिए।

श्री अध्‍यक्ष: फिर सोफ्ट कार्नर का चार्ज लग जाएगा।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): केवल साहब, हेमारामजी और श्रवणकुमार से दिक्‍कत है। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): निरन्‍जन नाथजी आचार्य यहां पर रिजैक्‍ट करते थे और रिजैक्‍ट करने के बाद वह बुलवाते थे। ज्‍यादा बुलवाते तो कहते कि यह परम्‍परा नहीं बनेगी। मैं एज ए स्‍पेसिफिक केस इसको बोलने की अनुमति देता हूं। आप भी कृपा करके ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह तो कहते थे न कि यह परम्‍परा नहीं बनेगी। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): वही परम्‍पराएं तो आप यहां कायम रख लीजिए लेकिन आप इसमें रिलेक्‍स कर दीजिए। यह परम्‍परा नहीं बनेगी। व्‍यवस्‍था दे दीजिए। हम मानेंगे उसको। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: इका मतलब यह हुआ कि आसन को दबा करके और आसन को विवश  करके और आप मर्जी आये जो करवाएंगे। परम्‍पराओं को भी तुड़वाएंगे और आसन को जिसे कहते हैं, सम्‍मान भी नहीं करेंगे। आसन की गरिमा भी गिराएंगे। गरिमा गिराएंगे, मतलब यही है न?

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): हम आसन का सम्‍मान करते हैं।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आसन तो इतना सक्षम है कि किसी को बोलने ही नहीं दिया जाए।

श्री विजय बंसल (भरतपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह समय क्‍यों बरबाद किया जा रहा है जब खुशवीर सिंहजी कह चुके हैं कि एक मिनट मैं बोलूंगा और दो मिनट वे बोल लेंगे फिर ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): इनको बुलवा दो आप। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: श्री खुशवीर सिंहजी को बोलने दें।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): और भविष्‍य में आप चाहे जैसी व्‍यवस्‍था दे दें। आज तो इनको बोलने का मौका दें। ... (व्‍यवधान)

श्री विजय बंसल (भरतपुर): व्‍यवस्‍था उन्‍होंने खुद ही कर ली है फिर बारबार बीच में भँवर-पंछी क्‍यों?

डोडा पोस्‍त क्रय ि‍वक्रय मूल्‍य में भारी ि‍वसंगि‍त

 

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस विषय पर लम्‍बी चर्चा चल गयी है, मैं आपसे अनुरोध करना चाहूंगा कि प्रदेश में, यहां पर सभी माननीय सदस्‍य विराजमान हैं और सभी की भावना है कि नशा मुक्ति एक जरूरी कदम है और उसमें सभी को सहयोग करना चाहिए कि प्रदेश के अन्‍दर जितने भी नशा, अलग-अलग तरी के जो नशे हैं। उससे मुक्ति कैसे हम दिला सकें, हमारा कर्तव्‍य बनता है और जन-प्रतिनिधि ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मुद्दे पर आइये। मुद्दे पर, मुद्दे पर आओ आप फटाफट । ... (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उसी मुद्दे की बात मैं कर रहा हूं कि ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: भूमिका बना रहे हैं आप तो ।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): किसानों से संबंधित मुद्दा है। किसान सरकार से परमिट लेकर डोडा-पोस्त की खेती करता है और उसके बाद किसान की जो उपज का सरकार ने मूल्‍य निर्धारित किया है, डोडा-पोस्‍त का, उस बारे में मेरा अनुरोध यह है कि मात्र 15 रुपये किलो किसान से खरीद मूल्‍य सरकार ने निर्धारित किया है और जो इसका उपभोग करने वाले हैं वे मुख्‍यत: पश्चिमी राजस्‍थान में बहुत अधिक है और वे लोग हैं जो बी.पी.एल. परिवार के हैं या गरीब हैं और वह है जो अपने जीवन के पचास बसंत पार कर चुके हैं। वे लोग इसके आदी हैं और मैं चाहूंगा आपके माध्‍यम से, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कि जो 15 रुपये किलो खरीद मूल्‍य सरकार ने रखा किसान से और जो वह गरीब उपभोक्‍ता है वह 600 से 900 रुपये प्रति किलो के हिसाब से आबकारी विभाग से परमिट लेता है और प्रति वर्ष नवीनीकरण के पैसे जमा करवाता है और मात्र उसको तहसील हैडक्‍वार्टर पर जाकर ही दुकान से खरीदना पड़ता है। मेरा आपसे अनुरोध यह है कि जो इतना क्रय और विक्रय में इतना भारी अन्‍तर है, उस अन्‍तर में जो अधिकांश इसमें पैसा है इस अन्‍तर का,  वह चंद लोगों के हाथ में जा रहा है। ठेकेदारों के हाथ में। न सरकार के पास आ रहा है और न गरीब को उससे राहत मिल रही है तो मैं यह चाहूंगा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से कि उन गरीबों को कम से कम 200 रुपये, एक मूल्‍य निर्धारित कर लिया जाए किसान को भी फायदा हो जाएगा, सरकार को भी उसका राजस्‍व बढ़ेगा और बिचौलिये हैं उनको जरूर नुकसान होगा। मैं आपका ध्‍यान आकर्षित कर निवेदन करना चाहूंगा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह अभी सरकार, अब न्‍यूज आयी है कि 212 करोड़ रुपये, 212 करोड़ रुपये शराब के ठेकेदारों के पास से सरकार के आज दिन तक वसूल नहीं हो पाये क्‍योंकि उन्‍होंने गलत हैसियत प्रमाण-पत्र जारी किये। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अब डोडा-पोस्‍त की बात पर बोलते-बोलते शराब पर आ गये आप। ... (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह चाह रहा हूं कि 212 करोड़ रुपये सरकार की गलत हैसियत प्रमाण पत्र देने से वह आज दिन तक सरकार वसूल नहीं कर पायी है। कई वर्ष हो चुके हैं तो मैं चाहूंगा कि गरीब लोगों को जो गरीब उपभोक्‍ता है, उनको कम से कम मूल्‍य में जो 600 और 900 रुपये मूल्‍य जो हैं, कोई निर्धारित नहीं किया हुआ है तो इनको सहकारी समितियों के माध्‍यम से जो लाइसेंस होल्‍डर्स हैं या परमिट होल्‍डर्स हैं, उनको सहकारी समितियों के माध्‍यम से मिनिमम कम से कम 200-250 रुपये के मूल्‍य से इनको उपलब्‍ध कराया जाए। यही मेरा अनुरोध है। धन्‍यवाद।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: 295, किसने नाम लिया आपका? किसने नाम लिया, किसने पुकारा? ... (व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): नाम तो नहीं लिया आपने। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या?

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): नाम तो आपने नहीं लिया लेकिन अगर किसानों के साथ अन्‍याय हो रहा है, जुल्‍म हो रहा है, उस जुल्‍म की बात सरकार के कानों में डाल दूं तो उससे कौनसा अनर्थ हो जाएगा? कौनसा पहाड़ गिर जाएगा और कौनसा आज विधान सभा में अनर्थ होकर ऐसा उदाहरण बन जाएगा जो कहेंगे कि ऐसा इतिहास में नहीं हुआ? आपने अपनी  *** (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अब आप यह बात करेंगे तो please sit down. I will not allow you.

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): मत बोलने दो, मत बोलने दो। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: I would not allow you.

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): यह क्‍या बात हुई? मैंने स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह क्‍या बात है? I would not allow.  295 श्री मुरारीलाल मीणा।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): दो हठ जब साथ हो जाती है, दो हठ जब साथ हो जाती है तो उनका विनाश होगा, विनाश होकर रहेगा। ... (व्‍यवधान)

 

शिव/चौहान/13.00/1n/6.3.2007

 

मैं निवेदन करना चाहता हूं सरकार 15 रुपये किलो में डोडे खरीद रही है और 600 से 900 रुपये के बीच में ... (व्‍यवधान).....

श्री अध्‍यक्ष: श्री मुरारीलाल मीणा, 295 पढ़ें। अंकित नहीं हो। (व्‍यवधान) अंकित नहीं हो। ... (व्‍यवधान).....

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह :  000

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): 000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो रहा। ... (व्‍यवधान).....

(व्‍यवस्‍था सूचक घण्‍टी)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, कह दी आपने बात। अब स्‍थान ग्रहण कर लें। गुढ़ामालानी से आने वाले माननीय सदस्‍य, अंकित नहीं हो रहा है। अंकित नहीं हो रहा है। श्री मुरारीलाल मीणा, आप बोलें। ... (व्‍यवधान).....

श्री हेमाराम चौधरी :  000

श्री अध्‍यक्ष: मैंने आपको कहा न मंत्रीजी जब वक्‍तव्‍य देंगे तो आपको उस समय बोलने का मौका दूंगी मैं। मंत्रीजी जब वक्‍तव्‍य देंगे तब मैं आपको बोलने का मौका दूंगी मिस्‍टर बाहेती।

श्री सी.डी.देवल : 000

श्री अध्‍यक्ष: मैं आपसे कह रही हूं जब मंत्रीजी वक्‍तव्‍य देंगे तब आपको बोलने का मौका दूंगी।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, यह पोस्‍त डोडा की जो स्थिति ध्‍यान में लाई गई है, स्‍टेटमेंट तो कराओ गवर्नमेंट का। सरकार का वक्‍तव्‍य तो दिलवाओ आप इस पर। ... (व्‍यवधान).....

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): अध्‍यक्ष महोदय, आप मुझे आश्‍वासन दीजिये, क्‍योंकि यह कल ही घटना घटी है और मैंने स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है। इसलिए आसन से मेरा निवेदन है। ... (व्‍यवधान).....

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): पोस्‍त डोडा पर स्‍टेटमेंट कराओ। बाहेती जी, आप एक मिनट बैठिये। ... (व्‍यवधान).....

श्री अध्‍यक्ष: जब आबकारी विधेयक आयेगा, 8 तारीख को आबकारी विधेयक आ रहा है उस समय दे देंगे इसका जवाब।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, जो माननीय सदस्‍य ने पोस्‍त डोडा की स्थिति ध्‍यान में लायी है, सरकार का वक्‍तव्‍य तो दिलवाओ आप। ... (व्‍यवधान).....

श्री अध्‍यक्ष: जब आबकारी विधेयक आयेगा 8 तारीख को उस समय उसका जवाब दे देंगे।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): लोग तो त्राहिमाम्-त्राहिमाम् कह रहे हैं। ... (व्‍यवधान).....

श्री अध्‍यक्ष: सदियों से हो रहा है, लोग आज त्राहिमाम् कर रहे हैं। ... (व्‍यवधान).....

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 600 रूपये किलो है, पहले 250-300 रूपये किलो मिलता था। ... (व्‍यवधान).....

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): आप इसका विरोध मत करो।  (व्‍यवधान).....

श्री अध्‍यक्ष: श्री मुरारीलाल मीणा। प्‍लीज, आप बोलें।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय सदस्‍य, जो जो विरोध कर रहे हैं, जनता विरोध कर रही है... ... (व्‍यवधान).....

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): जो आये, सो लूटे। ठेकेदार के सिवाय 100 ग्राम डोडा नहीं मिल सकता। डोडा पीने वालों को डोडा पीये बिना उसका काम चल नहीं सकता। बाड़मेर कलेक्‍टर के सामने डोडा पीने वाले वहां लेट गये थे। अख़बार के अंदर फोटो आज आपने देखा होगा। क्‍या हालत हो रही है बाड़मेर के अंदर ? (व्‍यवधान) ...

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो । (व्‍यवधान) ...बिना इजाजत के बोले, उनका कोई भी अंकित नहीं करें। (व्‍यवधान) ...

श्री हेमाराम चौधरी:  000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): 000

श्री सी.डी.देवल: 000

श्री अध्‍यक्ष: श्री मुरारी लाल मीणा । (व्‍यवधान) ...

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ : अध्‍यक्ष महोदय, आपने व्‍यवस्‍था दे दी, आबकारी का विधेयक 8 तारीख को आ रहा है।

श्री सी.डी.देवल : 000

श्री अध्‍यक्ष: श्री मुरारी लाल मीणा, पढि़ये 295.

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

श्री अध्‍यक्ष: मैं आपको मौका दूंगी, मैंने कह दिया न। जब वह स्‍टेटमेन्‍ट देंगे तब आप सवाल करना उनसे। आप बोलो न मुरारी लाल जी, 295. (व्‍यवधान)

 

नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख

बांदीकुई के कस्‍बा बडि़याल कलां व गुढ़ाकटला में एनीकट निर्माण

 

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): अध्‍यक्ष महोदय, प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 295 के तहत निवेदन करना चाहता हूं। विधान सभा क्षेत्र बांदीकुई में चार बड़े कस्‍बे हैं जिनमें से कस्‍बा बडि़याल कलां व कस्‍बा गुढ़ाकटला की आबादी करीब 15-15, 20-20 हजार है। जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा दोनों कस्‍बों में पीने के पानी की सुचारू सप्‍लाई पिछले 15-20 वर्षों से संचालित है। इन दोनों कस्‍बों के पास होकर सांवा नदी गुजरती है। पिछले 10-15 साल से वर्षा कम हो रही है व नदी से लगातार बजरी का दोहन किया जा रहा है। इस कारण से भू-जल स्‍तर बहुत अधिक गिर गया है। जमीन में करीब 150-175 फीट की गहराई के बाद कठोर परत (पलई) आ जाती है। इसके बाद जमीन में पानी है ही नहीं। अगर इस तरह से भू-जल स्‍तर गिरता रहा तथा नदी पर दोनों कस्‍बों के पास ''भांवता-बगदेडा के पास व चोरवाड़ा-बडि़याल के मध्‍य एनीकट'' नहीं बनाया गया तो बहुत जल्‍दी पीने का पानी उपलब्‍ध ही नहीं होगा।

अंत: एनीकट निर्माण हेतु इस अविलम्‍बनीय लोक महत्‍व के विषय की ओर मैं माननीय जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी मंत्रीजी का ध्‍यान दिलाना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: श्री मोहनलाल गुप्‍ता।

जयपुर शहर में रसाई गैस की समस्‍या

 

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): अध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियमों के नियम 295 के अन्‍तर्गत माननीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रीजी का ध्‍यान जयपुर शहर में रसोई गैस धारकों की समस्‍याओं की ओर आकर्षित करना चाहता हूं।

जयपुर शहर में घरेलू गैस कनेक्‍शनधारियों को गैस की बुकिंग कराने की कम्‍पनियों द्वारा 21 दिन की सीलिंग लगा रखी है। इसके कारण गैस एजेन्सियों द्वारा मनमानी की जा रही है और कई गैस एजेन्सियों द्वारा डेढ़-डेढ़ महीने से गैस सप्‍लाई की जा रही है, जिसके कारण आम जनता को बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है और इसी कारण गैस सिलेण्‍डरों की कालाबाजारी भी हो रही है।

महोदय, राज्‍य सरकार के रसद विभाग, गैस एजेन्सियों और गैस कम्‍पनियों के मध्‍य भी उचित सांमजस्‍य नहीं है, जिसके कारण भी गैस की सप्‍लाई में गैस एजेन्सियों द्वारा मनमानी की जा रही है। इसके साथ ही आम जनता से जुड़े एक महत्‍वपूर्ण बिन्‍दु की ओर राज्‍य सरकार का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा। किसी परिवार में शादी-विवाह या पारिवारिक समारोह में गैस सिलेण्‍डरों की आवश्‍यकता पड़ती है, इसके लिये उसे कई गैस सिलेण्‍डरों की आवश्‍यकता होती है, जिनकी पूर्ति उसके स्‍वयं के कनेक्‍शन के सिलेण्‍डरों से नहीं हो पाती है। मजबूरन उसे अन्‍य व्‍यवस्‍था करनी पड़ती है। इसलिये राज्‍य सरकार को गैस सप्‍लाई संबंधी बने नियमों एवं शर्तों में यह संशोधन करना चाहिये कि जिसके परिवार में कोई शादी-विवाह या अन्‍य समारोह हो, उसके निमन्‍त्रण पत्र आदि से सन्‍तुष्‍ट होकर गैस एजेन्‍सी को घरेलू गैस की दर पर समुचित गैस सिलेण्‍डर उपलब्‍ध कराने का प्रावधान किया जाना चाहिये। इस प्रकार की व्‍यवस्‍था से गैस सिलेण्‍डरों की ब्‍लैक मार्केटिंग पर रोक लगेगी, साथ ही जनता को भी राहत मिलेगी।

(     )

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

अत: मेरा माननीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री महोदय से निवेदन है कि प्रदेश में गैस एजेन्सियों द्वारा की जा रही मनमानी पर तुरन्‍त रोक लगाने संबंधी कार्यवाही एवं गैस सप्‍लाई संबंधी नियमों में संशोधन कर जनता को राहत प्रदान करने का श्रम करें।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री जोगाराम पटेल।

                                                   msr/usc/1o/1310/06032007

 

सहायक लोक अभियोजकों की प्रबन्‍ध व्‍यवस्‍था

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख के जरिये निवेदन करना चाहता हूं।

राजस्‍थान राज्‍य के विभिन्‍न न्‍यायालयों में राज्‍य सरकार की ओर से पैरवी करने हेतु सहायक लोक अभियोजक प्रथम व द्वितीय कार्यरत हैं। परिवादी व सरकार की ओर से पैरवी करने का पूरा दारोमदार इन सहायक लोक अभियोजकों पर ही है। राजस्‍थान राज्‍य में बढ़ते हुए अपराधों को रोकने व अपराधियों की अपराध प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने, अपराधियों को उनके अपराध के अनुसार सज़ा दिलाने का पूरा दायित्‍व व जिम्‍मेदारी सहायक लोक अभियोजक प्रथम व द्वितीय पर है।

दुर्भाग्‍य से अनेक सहायक लोक अभियोजकों द्वारा नियमानुसार नेक नियति से पूरी तरह पैरवी नहीं करने अथवा अन्‍य कारणों से अपराधियों को कठोर दण्‍ड नहीं मिल रहा है। इन परिस्थितियों में राज्‍य सरकार के अभियोजन विभाग का दायित्‍व बहुत बढ़ जाता है। इस सम्‍बन्‍ध में भ्रष्‍टाचार की भी बहुत शिकायतें मिलती रही हैं।

नियमानुसार कोई भी सहायक लोक अभियोजक अपने गृह जिलों में नियुक्‍त नहीं हो सकता परन्‍तु यह देखने में आया है कि अकसर सहायक लोक अभियोजक जैसे-तैसे तिकड़म भिड़ाकर अपने गृह जिलों में नियुक्‍त हो जाते हैं। इतना ही नहीं, कई ऐसे सहायक लोक अभियोजक हैं जो पिछले लम्‍बे समय से एक ही स्‍थान पर अपने प्रभुत्‍व से अथवा अन्‍य कारणों से कार्यरत हैं व अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। कई ऐसे सहायक लोक अभियोजक दिखाने के लिए तो इधर-उधर की नियुक्ति बता देते हैं परन्‍तु वास्‍तव में लम्‍बे समय से एक ही स्‍थान पर कार्यरत हैं व घुमा-फिराकर पुन: उसी स्‍थान पर नियुक्‍त हो जाते हैं जिससे सरकार व परिवादी की बराबर पैरोकारी नहीं हो पा रही है और अपराध प्रवृत्ति को रोकने पर अंकुश नहीं लग रहा है। इन विकट परिस्थितियों में अभियोजन विभाग की स्‍थापना जिस उद्देश्‍य व मंशा से की गयी थी उसकी पालना नहीं हो पा रही है जिससे राज्‍य सरकार व विभाग की साख को भी धक्‍का लग रहा है। अकसर यह भी देखने में आया है कि राजनैतिक प्रभाव रखने वाले अथवा सिफारिशी सहायक लोक अभियोजक अपनी मनमर्जी अनुसार नियुक्ति पा लेते हैं। सरकार बराबर पैरवी नहीं करने से सरकार की साख पर भी असर पड़ता है व अपराध प्रवृत्ति बढ़ती है। इस हेतु उचित कार्यवाही करना न्‍यायोचित है। धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद, जोगारामजी। श्री रामनारायण मीणा।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): आप तो उप नेता हो ...(व्‍यवधान)... पढ़ा हुआ हमेशा माना ही जाता है आपका तो।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मैं विपक्षी भी हूं। ...(व्‍यवधान)... विपक्ष का हूं, सरकार को चेताना मेरा काम है। ...(व्‍यवधान)...

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): विपक्षी तो अपने दुर्भाग्‍य से हैं। आप तो उप नेता हैं।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): सुन लो, जोगारामजी, आप बन जाओगे जयब मुझे पढ़ने की ही जरूरत नहीं पड़ेगी, वैसे ही काम हो जायेगा। आप बनोगे तो नुक्‍ताचीनी करोगे, वो बनेंगे तो काम करेंगे किसान का।

 

नैनवां के कानूनगो सर्किल करवर को तहसील नैनवां में ही

यथावत सम्मिलित रखा जाना

 

उपाध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा क्षेत्र नैनवां के कानूनगो सर्किल करवर को यथावत् तहसील नैनवां में रखे जाने हेतु नियम 295 के तहत निवेदन करना चाहता हूं।

महोदय, बूंदी रियासत के समय तथा देश की आजादी के समय से अब तक कानूनगो सर्किल करवर की तहसील नैनवां एवं उपखण्‍ड नैनवां चला आ रहा है। इस क्षेत्र के समस्‍त निवासीगण तहसील नैनवां में रहना चाहते हैं तथा आम जनता का लगाव भी नैनवां तहसील में ही रहने का है। कानूनगो सर्किल की पंचायत समिति नैनवां है। सार्वजनिक निर्माण विभाग खण्‍ड मुख्‍यालय, उपखण्‍ड मुख्‍यालय, जयपुर विद्युत वितरण निगम के सहायक अभियन्‍ता का कार्यालय, जन प्रदाय विभाग के सहायक अभियन्‍ता का कार्यालय, उप अधीक्षक पुलिस के कार्यालय सहित विभिन्‍न कार्यालय नैनवां में ही लगते हैं। यदि इस कानूनगो सर्किल को तहसील इन्‍द्रगढ़ में मिला दिया गया तो इस क्षेत्र के बाशिन्‍दों के समक्ष काफी परेशानियां पैदा हो जायेंगी तथा नैनवां से पुराना ऐतिहासिक लगाव होने से मानसिक कष्‍ट भी होगा।

पिछले बजट सत्र के दौरान माननीय विधायक, पीपल्‍दा क्षरा नियम 295 के तहत प्रस्‍तुत एक प्रस्‍ताव के कारण बिना क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की तथा आम नागरिकों की राय जाने ही बूंदी जिले के प्रशासनिक स्‍तर पर एक रिपोर्ट राजस्‍व विभाग को भेजे जाने से एक प्रक्रिया के तहत करवर क्षेत्र को तहसील इन्‍द्रगढ़ में सम्मिलित करने के आदेश राजस्‍व मंत्रीजी के यहां से हो गये थे जिनका क्रियान्‍वयन रोकने से आम जनता की भावना का आदर हो गया है। सही तथ्‍य यह है कि कानूनगो क्षेत्र करवर में विधान सभा क्षेत्र पीपल्‍दा का एक भी गांव नहीं है। ऐसी स्थिति में माननीय विधायक पीपल्‍दा का यह कथन कि 'विधान सभा क्षेत्र की दृष्टि से भी यह क्षेत्र केशवरायपाटन क्षेत्र में सम्मिलित है तथा आने वाले समय में इस क्षेत्र के समस्‍त राजनीतिक समीकरण भी केशवरायपाटन के साथ ही जुड़ते हैं। वर्तमान में भी करवर क्षेत्र के लोगों के व्‍यावसायिक एवं पारिवारिक सम्‍बन्‍ध इन्‍ग्रगढ़ से ही है', पूर्णत: गलत है। वास्‍तव में करवर से केशवरायपाटन काफी ज्‍यादा दूरी पर है और सीधा कोई सम्‍बन्‍ध इस क्षेत्र का केशवरायपाटन से नहीं है। स्‍वयं विधायक पीपल्‍दा का अधिकतर क्षेत्र कोटा जिले में पड़ता है और पीपल्‍दा एवं करवर के बीच किसी भी तरह का कोई सम्‍बन्‍ध तथा लगाव नहीं है। तहसील नैनवां में आने वाली ग्राम पंचायत तलवास के मात्र चार ग्राम कोटड़ी केमला, हीरापुर एवं बांसी को तहसील एवं पुलिस थाना इन्‍द्रगढ़ में मिलाया जा सकता है।

अत: अनुरोध है कि कानूनगो सर्किल करवर को तहसील नैनवां में यथावत रखा जाने की कृपा करें। पुलिस थाना, देई के चार ग्राम कोटड़ी, केमला, हीरापुर एवं बांसी (ग्राम पंचायत तलवास की सीमा में आने वाले) को ही पुलिस थाना इन्‍द्रगढ़ तथा तहसील इन्‍द्रगढ़ में सम्मिलित किया जावे। पुलिस थाना, देई के अन्‍य किसी भी गांव को पुलिस थाना, इन्‍द्रगढ़ में नहीं मिलाया जावे। इसी मुताबिक आदेश संशोधित किए जाने की कृपा करें। धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद, मीणा साहब। डा. सुरेश चौधरी।

 

सिद्धमुख नहर सिंचाई परियोजना के अन्‍तर्गत चकों की रीफिटिंग का कार्य

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियम 295 के तहत राजीव गांधी सिद्धमुख परियोजना के अन्‍तर्गत चकों की रीफिटिंग का कार्य त्‍वरित गति से करवा कर बाड़ाबंदी लागू करने हेतु निवेदन करना चाहता हूं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहूंगा कि सिद्धमुख नहर सिंचाई परियोजना के 293 चकों का सिंचित कृष्‍य क्षेत्र (सी.सी.ए.) 84 हजार हैक्‍टेयर है जिसमें से लगभग 65 चकों का सिंचित कृष्‍य क्षेत्र (सी.सी.ए.) 18 हजार हैक्‍टेयर का रीफिटिंग कार्य पूर्व में भांखड़ा प्रणाली के अन्‍तर्गत हो चुका है। शेष 227 चकों का सिंचित कृष्‍य क्षेत्र (सी.सी.ए.) 66 हजार हैक्‍टेयर है जिससे लगभग सकल सिंचित क्षेत्र (जी.सी.ए.) 132 हजार हैक्‍टेयर होगा। रीफिटिंग का कार्य सकल सिंचित क्षेत्र का किया जाना है अत: इतने बड़े सिंचित क्षेत्र को रीफिटिंग (चकबन्‍दी/सर्व एवं किलाबन्‍दी) कार्य तकनीति प्रकृति का है जिसे अनुभवी एवं दक्ष कर्मचारियों के माध्‍यम से ही किया जाना सम्‍भव है अन्‍यथा इतने बड़े सिंचित क्षेत्र का रीफिटिंग कार्य कई वर्षों तक सम्‍भव नहीं हो पायेगा।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, चूंकि सिद्धमुख परियोजना का समस्‍त कार्य लगभग सम्‍पन्‍न हो चुका है, मोघे भी बन चुके हैं। हरियाणा राज्‍य द्वारा हमारा रीफिटिंग का कार्य पूरा न होने के फलस्‍वरूप हमें 30 प्रतिशत पानी ही दिया जा रहा है, शेष 70 प्रतिशत पानी का उपयोग हरियाणा व पंजाब राज्‍य कर रहे हैं। उपरोक्‍त 30 प्रतिशत पानी का उपयोग मात्र पेयजल व खाला निर्माण के लिये ही किया जा रहा है। यदि बाकी बचा 70 प्रतिशत पानी हमें मिल जावे तो इस क्षेत्र के किसानों की किस्‍मत बदल सकती है व राज्‍य सरकार को भारी मात्रा में राजस्‍व प्राप्ति हो सकती है।

माननीय मुख्‍यमंत्री महोदया ने घड़साना में आयोजित किसान सम्‍मेलन में नोहर-भादरा क्षेत्रों में रीफिटिंग का कार्य तुरन्‍त शुरू करवाने की घोषणा के फलस्‍वरूप राज्‍य सरकार ने 25 पटवारियों, तीन गिरदावरों व एक सहायक भूप्रबन्‍ध अधिकारी की नियुक्ति इस काम को अंजाम देने के लिए एक टीम रूप में गठित की है लेकिन कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है।

रीफिटिंग कार्य को त्‍वरित गति से कराये जाने के सम्‍बन्‍ध में मेरा सुझाव है कि भादरा-नोहर क्षेत्र में रीफिटिंग कार्य के अन्‍तर्गत पूर्व में सी.ए.डी. द्वारा कराये गये सर्वे में गलत पत्‍थर गढ़ी होने के कारण भूप्रबन्‍ध विभाग के पटवारियों, गिरदावरों को ब्‍लॉक के पत्‍थर न मिलने की वजह से रीफिटिंग कार्य में परेशानी आ रही है अत: इस कार्य हेतु सी.ए.डी., राजस्‍व व भूप्रबन्‍ध विभाग के उच्‍चाधिकारियों की एक सामूहिक बैठक बुलाई जाकर इस कार्य को त्‍वरित गति से सम्‍पादित कराया जाये।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इससे न केवल इस परियोजना का 70 प्रतिशत सिंचाई जल नोहर-भादरा क्षेत्र को मिल सकेगा अपितु वर्षों से लगातार अकाल की मार झेल रहे किसानों व खेतों की दिशा व दशा दोनों बदल जायेंगेयं जिससे क्षेत्र के विकास में नये आयाम स्‍थापित हो सकेंगे। आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। श्री जीवाराम चौधरी।


डोडा-पोस्‍त के उपयोग हेतु सरकारी लाइसेंस फीस

श्री जीवराम चौधरी (सांचौर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख के जरिये निवेदन करना चाहता हूं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जिला जालौर के विधान सभा क्षेत्र आहोर, जालौर, भीनमाल, रानीवाड़ा एवं सांचौर में कई सालों से सैंकड़ों लोग डोडा पोस्‍त के आदी हैं जिनमें किसान एवं मजदूर की संख्‍या ज्‍यादा है। इनके आदी हो चुके लोगों को रोज सुबह इसका सेवन करना पड़ता है वरना बिना सेवन किये ये लोग शारीरिक लाचार हो जाते हैं। पूर्व में डोडा पोस्‍त का भाव 150 रुपये से 200 रुपये के बीच में था मगर वर्तमान में सरकारी लाईसेंस फीस बढ़ाने के कारण जिला जालौर एवं बाड़मेर में डोडा का भाव 600 रुपये प्रति किलो है जो कि बहुत ज्‍यादा है। गरीब, मजदूरी करने वाले लोगों के लिए इस भाव से डोडा खरीदना सम्‍भव नहीं है। डोडा न मिलने की स्थिति में मनुष्‍य मर भी सकता है अत: मेरा सरकार से विशेष अनुरोध है कि उन गरीब लोगों की मांग के अनुसार जिला जालौर, बाड़मेर की सरकारी लाईसेंस फीस कम करवा कर उन गरीब लोगों को 150 रुपये से 200 रुपये प्रति किलो डोडा उपलब्‍ध हो, ऐसी व्‍यवस्‍था करवाने का कष्‍ट करें। धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास।

 

Ars/usc/1p/1320/06032007/1

 

जोधपुर शहर में सुनियोजित विकास की आवश्‍यकता

 

श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास (जोधपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष जी, मैं आपके माध्‍यम से प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत जोधपुर शहर में सुनियोजित विकास की आवश्‍यकता की ओर ध्‍यान आकृष्‍ट करना चाहती हूं।

जोधपुर राजस्‍थान का दूसरा बड़ा शहर है। पिछले कुछ वर्षो में बड़ी लाइन आने के पश्‍चात यहां पर्यटन उद्योग व हैण्‍डीक्राफ्ट उद्योग, खनिज उद्योग बढ़ने के साथ ही आबादी भी बढ़ी है। इस कारण शहर को एक सुनियोजित विकास की आवश्‍यकता है जिससे इन उद्योगों का और भी विकास हो और राज्‍य सरकार को भी इन उद्योगों से लाभ पहुंचे।

शहर के सुनियोजित विकास के लिए सबसे बड़ी आवश्‍यकता जयपुर की ही तर्ज पर जोधपुर विकास प्राधिकरण की स्‍थापना करने की है। यहां अभी नगर विकास न्‍यास कार्यरत है परन्‍तु न्‍यास की भी अपनी सीमाएं हैं। इसके वित्‍तीय संसाधन एवं अधिकार भी सीमित हैं। शहर में हो रहे विकास की आवश्‍यकता को दृष्टिगत रखते हुए न्‍यास से यह कार्य संपादित होना बहुत ही कठिन है। अत: मेरा आपके माध्‍यम से माननीय नगरीय विकास मंत्री से आग्रह है कि जोधपुर में भी जयपुर की ही तर्ज पर जोधपुर विकास प्राधिकरण की स्‍थापना की जाय।

शहर की दूसरी बड़ी समस्‍या है खस्‍ता हाल सड़कें। शहर का फैलाव होने व वाहनों की तादाद बढ़ने के साथ ही सड़कों के सुधार की महती आवश्‍यकता है। ए डी बी परियोजना में सीवर लाईन डालने के काम ने सड़कों की स्थिति पूरे शहर में दयनीय कर दी है। न तो नगर निगम और न ही नगर सुधार न्‍यास के पास इतने संसाधान हैं कि इन सड़कों का सुधार कर सके। मेरा आपके माध्‍यम से माननीय सार्वजनिक निर्माण मंत्री से आग्रह है कि शहर की सिवांची गेट चान्‍दपोल सड़क, जालोरी गेट सोजती गेट(वाया बाई जी का तालाब) सड़क, कन्‍दोई बाजार से नागौरी गेट सड़क व गुलाब सागर से सोजती गेट सड़क को सार्वजनिक निर्माण विभाग को हस्‍तानांतरित कर इस विभाग से सड़कों का सुधार करवाने की व्‍यवस्‍था करें।

इसके अतिरिक्‍त शहर में इधर उधर लटक रहे पुराने बिजली के तारों को भी ठीक करवाने की बड़ी आवश्‍यकता है जिससे दुर्घटनाओं विशेषकर बारिश के मौसम में होने वाली आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचा जा सके। मैं माननीय ऊर्जा मंत्री जी से निवेदन करूंगी कि शहर क्षेत्र में पुराने समस्‍त बिजली के तारों को बदलवाया जाय और जहां भी संभव हो वहां भूमिगत तार डाले जाएं।

इसके साथ ही शहर के सौन्‍दर्यीकरण हेतु गंगलाव तालाब व बाईजी का तालाब जैसे प्राचीन जल स्रोतों की सम्‍पूर्ण सफाई करवाकर यहां रिक्रियेशन पार्क विकसित करने की आवश्‍यकता है जिससे शहर के सौन्‍दर्यीकरण के साथ ही पर्यावरण का भी सुधार हो सके। मेरा माननीय नगरीय विकास मंत्री जी से अनुरोध है कि इस कार्य हेतु आवश्‍यकत धन राशि उपलब्‍ध करवाकर रिक्रियेशन पार्क विकसित करने की व्‍यवस्‍था करावें।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। श्री बंशीलाल खटीक।

 

मार्बल कटर उद्योग को रायल्‍टी मुक्‍त किया जाना

 

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय,मार्बल कटर उद्योग को रायल्‍टी मुक्‍त करने के संबंध में 295 के तहत निवेदन है कि राजसमन्‍द जिले के अन्‍तर्गत मार्बल रायल्‍टी का ठेका पुन: होने जा रहा है। पूर्व में स्‍थानीय जन प्रतिनिधियों एवं ठेकेदार के बीच में मध्‍यस्‍थता से ठेकेदार के साथ जिला कटर एसोसिएशन का समझौता हुआ जिसके आधार पर कटर वाले तैयार माल पर रायल्‍टी का भुगतान ठेकेदार को कर रहे हैं। तब कटर वालों को आश्‍वस्‍त किया गया था कि इसका स्‍थाई समाधार ढूंढा जायेगा।

पुन: मार्बल रायल्‍टी की निविदाएं होने जा रही हैं। मार्बल कटर वाले ज्‍यादातर माइन्‍सों का वेस्‍टेज काम में लेते हैं। यदि इन्‍हें रायल्‍टी से मुक्‍त कर दिया जाता है तो माइन्‍सों का समस्‍त वेस्‍टेज भी जल्‍दी उठ जाएगा। माइन्‍स अच्‍छी चलेगीं तो सरकार को भी राजस्‍व बढ़ेगा। वेस्‍टेज डालने के लिए जमीन की भी आवश्‍यकता कम होगी तथा पर्यावरण को भी नुकसान कम होगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। श्री भंवरलाल राजपुरोहित।

मकराना में सत्र न्‍यायालय की स्‍थापना

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय,राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख में निवेदन है कि मकराना नागौर जिले का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर है जहां सवा लाख से ज्‍यादा संख्‍या बसती है उसके पास ही बोरावड ग्राम की पंचायत भी नागौर की सबसे बड़ी पंचायत है। यहां ज्‍यादा संख्‍या की वजह एवं मजदूर संख्‍या ज्‍यादा होने से कई लिटिगेशन झगड़े होते रहते हैं। नागौर में सबसे ज्‍यादा मुकदमें दर्ज होते हैं । यहां पर इतने भारी मुकदमें निपटाने हेतु एक सिविल कोर्ट एवं एक ए सी जी एम कोर्ट संचालित है जबकि पड़ोसी परबतसर तहसील मुख्‍यालय में उपरोक्‍त सारे कोर्ट के अलावा एक अतिरिक्‍त सत्र न्‍यायालय एवं फास्‍टट्रेक कोर्ट स्‍थापित है। परबतसर की जनसंख्‍या पन्‍द्रह हजार से ऊपर नहीं है। नागौर की छोटी एवं अन्तिम एक छोर में तहसील स्थित है। यहां पर इतने बड़े दो न्‍यायालय स्‍थापित होने से जो सरकार का सस्‍ता एवं सुलभ न्‍याय दिलाने का दावा थोथा साबित हुआ है। कारण कि मकराना क्षेत्र एवं नावां तहसील क्षेत्र तक के मुकदमें हमारी दो तहसीलों के मुकदमों की पैरवी करने हेतु काफी दूर जाना पड़ रहा है। नावां कुचामन एवं परबतसर तहसील के दोनों के मिलाकर मुकदमें मकराना तहसील से ज्‍यादा नहीं हैं इससे अन्‍दाजा लगाया जा सकता है कि गरीब लोगों को एवं इफेक्‍टेड जनता को परबतसर जाना कितना मंहगा पड़ता है। माननीय लोकप्रिय मुख्‍यमंत्री महोदया जी को धन्‍यवाद देता हूं कि मेरी प्रार्थना पर मकराना में अतिरिक्‍त सत्र न्‍यायालय खोलने की माननीय उच्‍च न्‍यायालय जोधपुर की सिफारिश की है किन्‍तु अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं हो पाया है। सरकार पुन: माननीय उच्‍च न्‍यायाधीश जी को लिखे कि मकराना में जनता की न्‍यायोचित मांग पर पुन: विचार कर शीघ्र इसी वर्ष सत्र न्‍यायालय खोलने का आदेश प्रदान कर जनता को सस्‍ता सुलभ न्‍याय दिलाने की असीम कृपा करें।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। श्री हेमराज मीणा।

 


किशनगंज,शाहबाद एवं बारां जिले में ओलावृष्टि से उत्‍पन्‍न स्थिति

 

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत किशनगंज एवं शाहबाद बारां जिले में ओलावृष्टि से उत्‍पन्‍न स्थिति के संबंध में निवेदन है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र किशनगंज शाहबाद में दिनांक 28.2.07 एव 1.3.07 को ओलावृष्टि व जमकर वर्षा हुई इससे करीबन सत्‍तर गांव प्रभावित हुए। समरानिया, गदेरेटा, फरेदुआ, खोडा, सहरोल मुडीयर, बामोनी, राजपुर बैटा, रातई, ईश्‍वरपुरा, जालोदा, तेजाजी आदि गांवों में धनिये व सरसों की फसलें पूर्णतया नष्‍ट हो गई। अभी तक भी राज्‍य सरकार द्वारा किसानों के लिए मुआवजे की राशि का निर्धारण नहीं हुआ है और जो राशि किसानों को दी जाती है वह मात्र ऊँट के मुंह में जीरे के समान व कई महीनों के बाद किसान को राशि मिलती है। अत: मेरा निवेदनप है कि किसान को चार हजार रुपए प्रति बीघा के हिसाब से नष्‍ट फसल का मुआवजा मिलना चाहिए व नुकसान का सर्वे तुरन्‍त प्रभाव से हो। राजस्‍व, विद्युत वसूलियां, सिंचाई वसूली, व्‍यवसायिक बैंक, कोआपरेटिव बैंक आदि की वसूली दो वर्षो तक स्‍थगित की जावे, ब्‍याज में छूट दी जावे। ओलावृष्टि प्रभावित किसानों को बीमा कम्‍पनी से बीमे की राशि का भुगतान करवाया जाना चाहिए जिससे किसानों की माली हालत सुधर सके। फसल की तकनीकी कमियां हैं उन्‍हें दूर किया जावे, तहसील को यूनिट न मानकर ग्राम को यूनिट माना जावे।

अत: तत्‍काल मुआवजा दिलवाया जावे, सभी ऋण व राजस्‍व वसूली स्‍थगित की जावे। प्रभावित किसानों के साथ में उसकी जमीन व ट्रेक्‍टर आदि की नीलामीपर रोक लगाई जाए एवं मवेशियों के लिए चारा डिपो खोले जाएं एवं राहत कार्य उन प्रभावित गांवों में चलाए जाएं।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान और दिलाना चाहूंगा कि .....

श्री उपाध्‍यक्ष: यह अंकित नहीं होगा।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। डा. श्री गोपाल बाहेती।

जवाहर लाल नेहरू अरबन रिन्‍युअल मिशन

के तहत चयनित तीन शहरों के विकास प्रस्‍ताव

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रक्रिया के नियम 295 के तहत निवेदन है कि जवाहरलाल नेहरू अरबन रिन्‍युअल मिशन के तहत राजस्‍थान के तीन शहरों का चयन किया गया जिसमें जयपुर, अजमेर एवं पुष्‍कर हैं। इस मिशन के तहत करोड़ों रुपए केन्‍द्र सरकार का शहरी विकास मंत्रालय राजस्‍थान को प्रदान करेगा। इस मिशन के तहत ट्रेफिक, कच्‍ची बस्‍ती विकास सहित इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर, पर्यटन व हैरीटेज के विकास के काम कराए जा सकते हैं तथा नाम मात्र की राज की भागीदारी से करोड़ों रुपए आने को हैं। खेद है कि पुष्‍कर एवं अजमेर के विकास के लिए सरकार अब तक कोई प्रस्‍ताव तैयार नहीं कर पाई और प्रस्‍ताव अभी भी चर्चा में है जबकि जयपुर का ट्रेफिक प्रस्‍ताव शायद भेजा जा चुका है। अन्‍य राज्‍यों की तुलना में राजस्‍थान अभी भी पीछे है जबकि दूसरे प्रांत काम प्रारम्‍भ कर चुके हैं। जब केन्‍द्र सरकार की ओर से धन देने में न कोताही है और न कमी फिर समझ में नहीं आता कि सरकार कार्य योजना बनाकर क्‍यों नहीं भेजती है। जवाहर लाल नेहरू अरबन रिन्‍युअल मिशन का काम का स्‍कोप इतना विस्‍तृत है कि इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर के विकास में इन शहरों को बहुत लाभ मिल सकता है सिर्फ आवश्‍यकता है सरकार की ओर से मुस्‍तैदी की। पुष्‍कर अजमेर में इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर के विकास की काफी सम्‍भावना है तथा इसके विकास से एक ओर जहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा वहीं दूसरी ओर ऐतिहासिक व धार्मिक स्‍थलों का संरक्षण भी होगा। अजमेर और पुष्‍कर की झीलें आनासागर एवं पुष्‍कर झील दोनों की स्थिति सुधारने की भी त्‍वरित आवश्‍यकता है जिसके लिए भी इस मिशन में स्‍कोप है। जब यह काम सम्‍भव है तब क्‍यों विलम्‍ब किया जा रहा है, समझ से बाहर है। आशा है नगरीय विकास मंत्री जी इस ओर ध्‍यान देंगे तथा योजना शीघ्र बनवाकर काम प्रारम्‍भ करायेंगके। साथ ही सरकार यह भी व्‍यवस्‍था करे कि जमीन अथवा मकान अधिग्रहण के लिए धन का प्रावधान राज्‍य सरकार से कराया जाय क्‍योंकि न तो इस मिशन में इसका प्रावधान है और न ही स्‍थानीय निकाय आर्थिक रूप से इतने सक्षम हैं। 

 

vns/usc/13.30/1q/6.3.2007

 

पर्ची के माध्‍यम से उठाये गये मुद्दे

पुलिस सुधार हेतु कानून बनाने के सम्‍बन्‍ध में सर्वोच्‍च न्‍यायालय का निर्देश     

 

श्री उपाध्‍यक्ष: परची के माध्‍यम से उठाये जाने वाले विषय। श्री राव राजेन्‍द्र सिंह पुलिस रिफार्म्‍स पर सर्वोच्‍च न्‍यायालय द्वारा दिये गये निर्णय के सम्‍बन्‍ध में।

श्री राव राजेन्‍द्र सिंह (बैराठ): आदरणीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा सुप्रीम कोर्ट का निर्णय 22.9.2006 का जिसके माध्‍यम से राष्‍ट्र के समस्‍त प्रदेशों को यह निर्देश दिया गया है कि पुलिस बिल जो पुलिस बिल 1861 का है उसकी जगह एक नया पुलिस बिल लेकर आएं और इसके आधार पर प्रदेशों को बाध्‍य कर दिया गया है कि 31 मार्च के पहले-पहले य‍ह बिल प्रतिस्‍थापित करके और विधान सभाओं के माध्‍यम से इसको कानून का जामा पहना दिया जाए। कारण जो सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने दिये हैं आज मेरा सौभाग्‍य है कि आप बिराजे हुए हैं और कांस्‍टीट्यूशन के हरेक पहलू से आप वाकिफ हैं। यह जजमेंट जो सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने दिया है It is got too far reaching consequences. It is a direct infringement on the federal status of the
Constitution of this country.

श्री उपाध्‍यक्ष: डैड लाइन कौनसी नियुक्‍त की है अभी ?

श्री राव राजेन्‍द्र सिंह (बैराठ): डैड लाइन 31 मार्च है और 31 मार्च के पहले बाध्‍य कर दिया है लेजिसलेचर्स को कि उनको कानून बनाकर पेश करना है और कानून बनाकर पेश करने की लिबर्टी भी विधान सभाओं को नहीं दी है। उन्‍होंने अपने तरीके से एक मोटा सा जामा जिसको कहते हैं स्‍केलेटन बनाकर दे दिया है कि इसी स्‍केलेटन के ऊपर आप प्रेस और ब्‍लड स्‍थापित करेंगे। यानि लेजिसलेचर के लेजिस लेटर्स के विवेक को, कांस्‍टीट्यूशन के फैडरल स्‍टेटस को दोनों को इन्‍फरेंस किया। अगर यह बात हम लागू कर देते हैं तो हमारा हश्र वही होगा जो किसी एक ऐसी संवैधानिक मर्यादा का उल्‍लंघन करने पर होता है कि यह सर्वोच्‍च सदन जो किसी प्रदेश का सर्वोच्‍च सदन होता है इसी तरीके से अगर इसके अधिकारों पर न्‍याय के नाम पर सर्वोच्‍च न्यायालय अतिक्रमण करता रहा तो एक दिन वह आ जायेगा कि फैडरल स्टेटस की यह स्‍टेट्स एक टूथलैस ऑर्गन के रूप में ही काम करेगी। कानून कैसे बनाना है, लोगों के हित के लिये हमें क्‍या करना है यह अधिकार सर्वोपरि कांस्‍टीट्यूशन के माध्‍यम से यहां की जनता को है, जनता ही सबसे बड़ा सर्वोपरि सदन है और जन प्रतिनिधियों का यह सदन है। अगर इसको यह कहा जाए कि किस तरीके का कानून बनाया जाए, कैसे कानून बनाया जाए और कानून की परिधि को भी डिफाइन करके अगर इसके सामने रखा जाए तो ऐसा लगता है जैसे हमें बाध्‍य कर दिया गया है कि उनकी जबानी, उनका कहा हुआ सिर्फ हमारे मुख से निकले। इस तरह की बाध्‍यता न तो इस लेजिसलेचर्स को है और न ही हम इसको स्‍वीकार करेंगे। आज की जो महती आवश्‍यकता है आदरणीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वह यह है कि हमें दल से ऊपर उठकर बात करनी पड़ेगी। यह सदन इस बात को स्‍वीकार ना करे कि अगर बिल आया तो हमारी बाध्‍यता हो जायेगी हम सरकार में है इस बिल को पास करवाएं। इससे पहले आदरणीय अध्‍यक्षजी को इस बात के लिये सदन के समस्‍त वरिष्‍ठ नेताओं को, दल के नेताओं को बिठाकर इस बात पर विचार करना चाहिये कि क्‍या इस तरीके का स्‍ट्रक्‍चर जो सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने पास किया है उसको लेजिस लेचर स्‍वीकार करने के लिये बाध्‍य है या नहीं ? वरना इसको लाया जाए और सदन के पटल पर रखकर यहां डिफीट करा कर वापस सर्वोच्‍च न्‍यायालय को दिया जाए। हम इस तरीके का जो फैडरल स्‍ट्रक्‍चर पर जो कुठाराघात करेंगे वह बर्दाश्‍त नहीं कर सकते। मैं आदरणीय उपाध्‍यक्ष जी को एक बात कहना चाहूंगा कि जिसके आधार पर इन्‍होंने यह सारी की सारी चीज को आमूलचूल परिवर्तन करने के लिये सरकार को बाध्‍य किया है। उसमें क्‍योंकि यह अंग्रेजी में है इसलिये I ask your permission to quote it in English. “The Commission was required to…” यह नेशनल कमीशन है, नेशनल पुलिस कमीशन है 1977 में जिसको फार्म किया था रिकमंडेशन करने के लिये। एक बात और बताऊंगा 1861 के एक्‍ट पर उन्‍होंने प्रश्‍नचिंह लगाया है यह आप सबको विदित है कि जब 1950 में when Indian became Republic this Act was already 100 years old. You mean to say after another 50 years the Constitution will become 100 years old that the Supreme Court will have the  authority to ask the Parliament to change the Constitution. If you go behind this spirit, in fact, I will say that the Supreme Court has gone  cupboard in trying to actually justify certain things. They say:  “ The Commission was required to recommend measures and institutional arrangements to prevent misuse of powers by the police, by administrative or executive instructions, political or other pressures or oral orders of any type, which are contrary to law, for the quick and impartial inquiry…” That means we justify it that since last 100 years and 50 years of the Independence this country has got we have been passing the oral orders. Their political indifferences have been there. No justice has been given to the public at large. If you concede to this you also concede to this. That means we accept that there has been a corruption. We accept that there has been a corruption in the feelings, in the minds of the public representatives whether they are sitting in the Parliament or they are sitting here in the Legislative House. Again the reason for it. The petitioner himself  refers to a research paper ‘Political and Administrative Manipulation of the Police Published in 1979,”  Wonder research paper of science which probably codifies that there has been infringement in the workings of the police. We come out with the legislation. I will quote, in fact, if they need to do it, I want for a sort of quoting. “Here are some probings into the views of that segment of the society, which postulates judicial activism….” यह सिर्फ जुडिशियल एक्टिरिजिम के नाम पर सारा कुछ किया जा रहा है। इसमें इनके खुद के जो जजेज हैं, जस्टिस कुलदीप नायर क्‍या कहते हैं मैं उसको कोट कर देता हूं “So much so Justice Kuldip Singh, former judge of the Supreme Court of India, felt that ‘although the judiciary is independent, there may still skeletons in its cupboard. Judges too have their myopia and unworthy servants. These remarks by Justice PB Sawant are apt in this direction that ‘autocracy of the judges – is to be more dreaded than that of the politicians, for there is no recourse against it. The healer becomes the killer, the savior the captor.” These are the strictures in the comments of the Judges of the Supreme Court and here we have been asked to form a Bill and pass it before 31st March. Whose held you think the Supreme Court is to instruct the legislative functioning of this country to ask us what we want to do. At the given time frame we have been compelled to go to the public and ask for their goodwill and their renewal. You mean to say anything wrong that the Supreme Court does there can be a renewal of whatever misdeed they have done.  एक छोटा सा उदाहरण है जो इस पब्लिक के सामने है, यह सदन के सामने है। कुछ सालों पहले हाई कोर्ट आफ राजस्‍थान ने एनेक्‍सचर पास कर दिया था कि रामनिवास बाग़ में किसी तरह का ट्रैफिक नहीं जायेगा। वहां सड़कें बंद करके और घास उगा दी गयी थी। दो साल बाद वापस वहां ट्रैफिक जाने लग गया The same court. अगर पॉलीटिशियन ऐसा कर देता, अगर यह लेजिस लेचर ऐसा कर देता तो बाध्‍य कर देते यह सड़क पर ले जाकर और हमको कहीं का भी नहीं छोड़ते। इस तरीके की चीज और मेरा It is my humble submission. एक बात और अर्ज करना चाहूंगा I am running out of time.  

श्री उपाध्‍यक्ष: राव साहब यह तो नेशनल इश्‍यु हो गया है Every State is concerned with it.

श्री राव राजेन्‍द्र सिंह (बैराठ): यह नेशनल इश्‍यु हो गया है लेकिन राजस्‍थान का इतिहास इस बात को कहता है हमने अनेकों युद्ध लड़े। जरूरी नहीं कि हरेक युद्ध लड़ा लेकिन युद्ध सिद्वान्‍त पर लड़ा। यह आज लेजिसलेचर प्रोसेस का युद्ध है। इसमें अगर राजस्‍थान अग्रणी राज्‍य बनता है और इसको कंटेम्‍पट करता है तो हम इतिहास को पुन: सुनहरे अक्षरों में लिखेंगे यह मेरा आपसे कथन है। किसी सुप्रीम कोर्ट का स्‍ट्रक्‍चर या किसी सुप्रीम कोर्ट का सिर्फ यह कह देना मात्र कि आप इस तरीके का लॉ फ्रेम करें। उन्‍होंने यहां तक कह दिया कि अगर आप पुलिस कमीशन बनायेंगे तो कैसे बनायेंगे ? या तो नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन ने कहा है उसके प्रारूप में बनायेंगे या रिबेरो कमीशन ने कहा है उसके प्रारूप में बनायेंगे या ऐसा बनायेंगे जो उन्‍होंने लिखकर दे दिया। यानि They are trying to put the words in our mouths. What we are going to do here say yes what they say.

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): This is a very important issue..

श्री उपाध्‍यक्ष: Definitely.

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): यह राज्‍य की स्‍वायत्‍ता के अन्‍दर सुप्रीम कोर्ट के डायरेक्‍शन के तहत इंटरफियरेंस है।

 

श्‍याम/चौहान  06.03.2007  13.40  2a 

 

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): यह राज्‍यों की स्‍वायत्‍ता के अंदर सुप्रीम कोर्ट के डायरेक्‍शंस के तहत इंटरफियरेंस है।

श्री उपाध्‍यक्ष: यही आप कह रहे हैं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): इसलिए जो कह रहे हैं शाहपुरा से आने वाले माननीय सदस्‍य, यह बहुत भारी इम्‍पोर्टेंट इश्‍यु है, सारे राज्‍यों ने इसका विरोध किया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एक नहीं सुनी, यह राज्‍यों की ऑटोनामी के ऊपर हस्‍तक्षेप है। संवैधानिक व्‍यवस्‍था के ऊपर हस्‍तक्षेप है इसलिए मैं चाहता हूं कि आप जो कह रहे हैं इस पर सरकार को गौर करना चाहिए जो शाहपुरा से आने वाले माननीय सदस्‍य कह रहे हैं।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): यदि इस सदन की और अन्‍य सदनों की संवैधानिक ऑटोनामी है और संवैधानिक ऑटोनामी पर आघात जिस प्रकार आपने कहा कि हो रहा है तो फिर वह संविधान की मंशा की जहां तक बात करते हैं कि उसकी मंशा बराबर रहनी चाहिए। फिर तो उसकी मंशा पर भी आघात सुप्रीम कोर्ट का है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): क्‍या माननीय गृह मंत्री जी अपनी तरफ से जो भावनाएं हैं उसके हिसाब से राजस्‍थान पुलिस एक्‍ट का कोई नया मॉडल सब लोगों की भावनाओं के हिसाब से अलग बनाकर के पेश करेंगे ...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: वह आ रहा है, आ रहा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: गृह मंत्री जी इस पर प्रकाश डालेंगे।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, जो विषय शाहपुरा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने उठाया है, इस विषय पर केन्‍द्रीय गृह राज्‍य मंत्री ने भी सारे स्‍टेट्स के मुख्‍यमंत्री और गृह मंत्री के साथ में एक मीटिंग की और उसमें लगभग सभी स्‍टेट्स की एक ही राय थी कि कानून-व्‍यवस्‍था स्‍टेट का विषय है जिसमें किसी की भी दखलंदाजी ना तो संभव है और ना हम इसको होने देंगे। उसमें उन्‍होंने यह जरूर लिखा था कि आप अपने स्‍वयं का एक्‍ट लेकर के आयेंगे। यह 1861 वाला है यह इतना पुराना हो गया, कई कमीशन इस पर बैठ गये, लंबी-चौड़ी चर्चाएं हुई, इसका तुरंत हल निकाला जाना चाहिए। लेकिन उसके लिए उन्‍होंने जो समय सीमा दी वह बहुत कम दी थी।

श्री उपाध्‍यक्ष: हां, वह कम दी थी।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उसके लिए हम लोगों ने अपना रिप्रजेंटेशन दिया और उसके बाद उन्‍होंने चार वीक का समय और बढ़ा दिया। यह तो कोर्ट के लेवल पर है। जिस दिन यह फैसला हुआ, हमने आकर के राजस्‍थान में अपना एक्‍ट बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ की और हमने विभिन्‍न स्‍टेजों के जो भी लॉ के जानने वाले लोग हैं उनसे चर्चा की, अपनी विधान सभा के भी कई माननीय सदस्‍यों के साथ बैठकर के उसके ऊपर रीडिंग की है और उसमें जहां-जहां हमें लगा कि इसमें करेक्‍शन करना चाहिए वह की है और कोशिश यही कर रहे हैं कि यह सत्र समाप्‍त होने के पहले-पहले हम अपना जो एक्‍ट है वह हम स्‍वयं लेकर के आयेंगे और हाउस में आप सब लोगों के साथ डिस्‍कस करके उसमें जिस प्रकार से भी सब लोगों की राय बनेगी क्‍योंकि 1861 का कानून बदलकर के हम एक नया एक्‍ट ला रहे हैं तो निश्चित रूप से उसके बिन्‍दु जो रहे हैं  तो हम उसको कोई मॉडल रूप दे सकें इसके लिए प्रयासरत हैं। वैसे कई स्‍टेट्स ने तो कोर्ट के डिसीजन के कारण से जल्‍दी से निकालकर के  आर्डिनेंस भी जारी कर दिया, किसी ने कुछ किया लेकिन राजस्‍थान में हम इस बात का बराबर एक तरह से रेजिस्‍ट कर रहे हैं कि हम अपना स्‍वयं का मॉडल एक्‍ट लाकर के ही हाउस में पास कराकर के इसको आगे की जो कुछ भी आवश्‍यकताएं हैं उनकी पूर्ति करेंगे। 

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): उपाध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट ...(व्‍यवधान) जस्‍ट ए मिनट, यह राज्‍य के हित का प्रश्‍न है।

श्री उपाध्‍यक्ष: नेशनल इश्‍यु है, सारे ही चिंतित हैं इसमें ...(व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आपके प्रयत्‍नों की तो सराहना मैं करता हूं ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, इतना गंभीर विषय है अगर इसमें कोई विचार आता है तो पाँच-सात मिनट के लिए ...(व्‍यवधान) फिर मौका ही कहां मिलता है ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: हां, कर रखा है ...(व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आपकी सराहना करते हैं, गृह मंत्री जी आपने बड़े ओपन माइंड से इसमें कटिंग अक्रोस दी पार्टी लाइन, चाहे बीजेपी के लोग थे, चाहे कांग्रेस के लोग थे, सबकी राय को आपने बहुत ही अच्‍छी तरह से समावेश किया, गिवन ...(व्‍यवधान) के अंदर जो हालात हैं, उनकी तहत आपने बखूबी उसको रखा, यहां मैं उन बातों को कहना नहीं चाहता हूं, लेकिन यह इतना ज्‍वलंत मुद्दा है कि आज तो एक मुद्दे के ऊपर सुप्रीम कोर्ट का डायरेक्‍शन आया है, कल विभिन्‍न मुद्दों पर इस प्रकार से सुप्रीम कोर्ट का डायरेक्‍शंस आयेंगे और राज्‍यों की स्‍वायत्‍ता के अंदर क्‍योंकि पुलिस के कार्य-कलापों के लिए लोग आंसरेबल हैं। इस विधान सभा के लिए, राजस्‍थान की जनता के प्रति लेकिन अनेक विषयों में यह शुरूआत है Police is a very important department.अन्‍य में भी इस प्रकार का हस्‍तक्षेप अगर सुप्रीम कोर्ट का होता रहा तो जैसा बैराठ से आने वाले माननीय सदस्‍य कह रहे थे कि इसको रेजिश करने की स्थिति है नहीं, क्‍योंकि धीरे-धीरे करके सुप्रीम कोर्ट के डंडे के आगे सारे राज्‍य फॉल इन लाइन जिसको कहते हैं, आपने गिवन सर्कमचांशेज के अंदर, जनता की जवाबदेही के प्रति, जिस प्रकार से आपने बचाने की कोशिश की है उसके लिए तो आप धन्‍यवाद के पात्र हैं लेकिन मैं फिर भी आपसे निवेदन करूंगा कि आप बिल लेकर के आयेंगे और कई अच्‍छे सुझाव उसमें आयेंगे तो कृपया करके उनके ऊपर एक तरह से रीडिंग होगी यहां पर, आप उनको समावेश करने की चेष्‍टा करें। इसको यही अंत करूंगा क्‍योंकि यह राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर चर्चा चल रही है, मैंने आपका समय लिया मैं आपसे क्षमा चाहता हूं।

श्री राव राजेन्‍द्र सिंह (बैराठ): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहूंगा यह बात आप स्‍वीकार कर लें I mean if there is no other alternative left and probably we feel we are compelling to come up with the Bill then also make it very clear in your mind that you are redefining the democracy. Democracy vests on the substance of the civilian control. It does not vest on the judicial control. The civilian control in the hands of the general public at large.The general public exercise its civilian control through its elected representatives whether it is Vidhan Sabha or the Parliament of the country. If you are trying to take strictures and definitions and instructions from the Supreme Court who has gone and done something to erroneously try and target the federal structure of this country they have only done that but they have also question that they have definitions of democracy. It is not possible. It is not possible Sir. Why can’t you bring the Bill here without having any whip here. Let the Legislature decide whether they want to pass this Bill on the directions of the Supreme Court or they want that the Bill should be defeated on the Floor of the House. Let the whole House stand in contempt before the Supreme Court. Let us see what the Judge will put 200 Members of the Rajasthan Vidhan Sabha behind he locks. We will not give up like that. We have a history and civilery which dates back to ages. The Government of Rajasthan should take it up with the Leader of the Opposition cutting across the party line. We should bring the Bill. We are the Supreme Court. Yes we need to do something for the general public at large but we can not do it on the way which you want to do it.  We defeat the sentiments of this Well because we feel  it is an extra constitutional fail.

There is one thing which I want to put it on record. There is theInternational Organization called by the name ‘Transparency International” They do survey. I am quoting the survey of 2005.

“62% citizens according to the Transparency International feel that the first hand experience of paying bribe to the police.” Politician does not want to do. It is not because of the politician. The reason why the Supreme Court has given us is that because of the politicians inferring in the workings of the police. You mean to say that this bribe taken by the police on the inference of the politicians.

“3899 crores is the amount of petty bribes paid to the police according to the Transparency International.” These are the recorded facts which I have got from the Bureau of Public Research and Development which is not something that I have got it from somewhere else.

 “22389 department proceedings were pending against the policemen as on January.”  You mean to say that the politician has gone and done it.

 “5.2 lakhs exhibits were waiting of examination in the State and regional forensic.” Who is stopping them from doing that?The politician?

 “712 is the number of people per policeman in India.” Still want to police too. Where are these facts?Facts don’t match with the declaration of the Supreme Court.

 “70,000 applications every year.” The National Human Right Association says. Here is again policemen. You mean to say that the politicians are doing that. The very reason why this is there is trying to put the control over the legislative functions. I am again on the Floor of this House trying to put it up across to you clearly in loud words, the Constitution of India was not created to take directions from the Judiciary. We are the ones to give the birth to the Act. The Act has to be interpreted by the Judiciary. The Judiciary can not preempt an Act. The Act is the absolute right of the Legislature. The Legislature will see to it that the birth take place on the Floor of the House and not on the direction of the Supreme Court.

 I humbly submitted and I leave it to the wisdom of all the senior Members to accept it and put it across. Thank you very much.

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो बात कही है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय जोशी जी, गृह मंत्री जी ने स्‍पष्‍ट कर दिया है ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अब आप मेरी बात सुन लें। उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय गृह मंत्री जी ने जो बात कही है कि सुप्रीम कोर्ट ने डायरेक्‍शन दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा है कि आपके लेजिस्‍लेटर की पावर को हम विद्ड्रा करते हैं।

 

जयगोविन्‍द/यूएस/6.3.7/13.50/2b

 

दो चीजें हमें समझनी पड़ेगी। हम इतने टिमिड हो गए हैं कि उनके डाइरेक्‍शन पर हम घुटनों के बल नहीं हम तो साष्‍टाँग दण्‍डवत होकर चलना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट का जजमेण्‍ट जो पार्लियामेण्‍ट के मैम्‍बर्स को डिसक्‍वालीफाई किया था, उसमें भी कांस्‍टीट्यूशनल जजमेण्‍ट यह किया कि कानून बनाने का अधिकार असेम्‍बली और पार्लियामेण्‍ट को है किसी भी स्‍टेज पर सुप्रीम कोर्ट ने यह कहीं नहीं कहा कि कानून बनाने का अधिकार लेजिस्‍लेचर का नहीं है, कानून बनाने का अधिकार हमारा है, इस अधिकार को यह कहकर डाइरेक्‍शन दिया कि हम सबमर्ज कर दें और हम कह दें कि नहीं उन डाइरेक्‍शन को हमें मानना है, इस प्रश्‍न पर जो चिन्‍ता माननीय सदस्‍य ने व्‍यक्‍त की है उस पर हम सबको चिन्तित होना आवश्‍यक है क्‍योंकि हम वह करते हैं जिस जनता ने इलेक्‍ट करके हमें हाउस में भेजा, यह सोचकर भेजा कि कानून बनाने का काम यह लेजिस्‍लेचर करेगा उस कानून को बनाने के काम की जगह पर हम इतने कमजोर हो गए, इतने नि:शक्‍त हो गए, इतनी हमारी दुर्गति हो गई कि हम उस डाइरेक्‍शन के आधार पर इस अधिकार को भी खोना चाहते हैं तो इतिहास हमें माफ नहीं करेगा, न आपको करेगा, न हमको करेगा। कोई फर्क नहीं पड़ेगा, जैसा माननीय सदस्‍य ने कहा, दो ऑप्‍शन है, जैसा सुप्रीम कोर्ट ने कहा बिल लाएं और सब पोलिटिकल पार्टी इसमें व्हिप जारी नहीं करें और बिल को डिफिट कर दे। This is one option available. We have exhausted the directions given by the Supreme Court. The Supreme Court says only this thing कि हमारे डाइरेक्‍शन का पालन किया जाए। Let it be the wisdom of the House ki उन्‍होंने उस बिल को रिजेक्‍ट कर दिया है तो सुप्रीम कोर्ट उससे ज्‍यादा आगे कर सके इसकी सम्‍भावना को अभी हमने तलाशा नहीं है। हम भी यह मानकर चल रहे हैं क्‍योंकि पास्‍ट में भी ऐसा हो चुका है जब सुप्रीम कोर्ट के जजों की सेलरी का मामला था, उस सेलरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों और जजों ने यही निर्णय लिया और सारी लेजिस्‍लेचर ने उस बात को मान लिया। यह दूसरा प्रयास है हिन्‍दुस्‍तान के इतिहास में जब कोर्ट के डाइरेक्‍शन के आधार पर कानून बनाने का जो हमारा अधिकार है उसको हम सरेण्‍डर कर रहे हैं। एक ऑप्‍शन तो यह बचता है जैसा माननीय सदस्‍य ने कहा कि आप बिल लेकर आएं, आपकी जो गवर्नमेण्‍ट का काम है वह गर्नमेण्‍ट को सुप्रीम कोर्ट के डाइरेक्‍शन को मानना है, आपने पालन किया, यह आपका उत्‍तरदायित्‍व है उससे हम वंचित नहीं करते लेकिन हम निश्चित तौर पर जितनी भी पार्टी के चीफ व्हिप हैं जो पार्टी के लीडर हैं उनसे निवेदन करना चाहते हैं कि वह व्हिप जारी नहीं करे। Let it be on the Floor of the House. Let it be on the conscious of the Members of the House whether they want to surrender this right or not. If the Bill is rejected by the House then the Supreme court सुप्रीम कोर्ट हमें बाउण्‍ड करके सज़ा नहीं दे सकता है इसलिए निश्चित तौर पर माननीय गृह मंत्रीजी, आप अपने कर्तव्‍य का निर्वहन करें, उसमें हमें कोई तकलीफ नहीं लेकिन माननीय गृह मंत्रीजी, यह भी आवश्‍यक है कि हिन्‍दुस्‍तान की जनता ने यह जो अधिकार दिया है संविधान में उस अधिकार को हम सरेण्‍डर नहीं करें इसलिए निश्चित तौर पर इस बिल को यहां पर डिस्‍कस ओपन माइण्‍ड से करवाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का यह डाइरेक्‍शन है कि आप यह बिल लाएं आपको सुप्रीम कोर्ट ने यह डाइरेक्‍शन नहीं दिया है कि इसको पास करवाओ। यदि ऐसा डाइरेक्‍शन होता, पास करवाने का होता तो मैं समझता हूं कि हमें कहने की आवश्‍यकता है लेकिन व्हिप के आधार पर यदि हम पास करवाते हैं तो पहला ओनस आप पर जाएगा क्‍योंकि सरकार आपकी है, भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, आपकी सरकार व्हिप के आधार पर बिल पास करवाती है तो भारतीय जनता पार्टी की सरेण्‍डर कर रही है अपने कांस्‍टीट्यूशनल अधिकार को, इसके लिए दोषी निश्चित रूप से भारतीय जनता पार्टी होगी और हमारी पार्टी में भी हम चर्चा करेंगे कि क्‍या इस एक्‍स्‍ट्रीम पर जाया जा सकता है। दूसरा ऑप्‍शन जो अवेलेबल है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो माननीय सदस्‍य शाहपुरा से आए हैं जो कॉन्शियसली फील करते हैं, मैं भी उनकी भावनाओं में अपने आप को सम्मिलित करता हूं। एक अधिकार बनता है जिसको एक्‍सप्‍लोर किया जाना चाहिए कि एक मैम्‍बर की हैसियत से हम दुबारा सुप्रीम कोर्ट में अपने केस को लड़े कि मेरा जो अधिकार है एक एम एल ए का उस अधिकार को सुप्रीम कोर्ट विड्रा नहीं कर सकता। इस केस को हम दुबारा एम एल ए की हैसियत से भी कोर्ट में केस लड़े और राजस्‍थान सरकार उसके लिए पैसा दे। The word I am saying is different one. I don’t want to contest the case. As a Legislator on my own expenditure I want that this should be done at the state exchequer. The second option is available. एक बार दुबारा इस बात पर कांस्टीट्यूशनल बैंच के सामने जाकर हम यह बात करें कि कांस्‍टीट्यूशनल बैंच इस बात पर डाइरेक्‍शन करे कि या तो राष्‍ट्रपति का जो अधिकार है...।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह जो फैसला है वह संवैधानिक पीठ का ही है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): संवैधानिक पीठ का फैसला है राठौर साहब कि आपको निर्देश दिए हैं कि आप बिल बनाएं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अब किसको अपील करें? रिव्‍यू में चाहे तो जा सकते हैं। किसको अपील करें? सुप्रीम कोर्ट के डाइरेक्‍शन चार महीने के अन्‍दर एक्‍ट बनाकर उनके सामने प्रस्‍तुत करने का है।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): नहीं तो उसी को मान लिया जाएगा जो उन्‍होंने मॉडल दिया है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): नहीं, उन्‍होंने दो पार्ट किए हैं। एक तो पार्ट उन्‍होंने यह किया है कि आप एक्‍ट नहीं बनाए तब तक इन-इन डाइरेक्‍शन को फोलो करना है। ऑप्‍शन में दो चीजों को कंफ्यूज नहीं करें। आपके पास यह मेण्‍डेटरी है कि आप यदि कानून नहीं बनाते हैं तो बनाना मस्‍ट नहीं है इन दैट केस उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इन-इन डाइरेक्‍शन को फोलो करिए तो दैट ऑप्‍शन इज आलरेडी देयर, ऐसा नहीं है कि आपको कानून बनाने की स्थिति उन्‍होंने पैदा कर दी कि निर्देश को मानना कम्‍पलसरी है। यह हम मानते हैं क्‍योंकि हम सुप्रीम कोर्ट को सुप्रीम मानते हैं इसलिए निर्देशों को मानने के आधार पर कानून बनाए। हमें यह तो सरकमवेंट करना है कि कानून पास करने के लिए, एक आदमी उधार लेने के बाद कम्‍प्‍लशन करे कि मेरा पैसा चुका, उस तरह की स्थिति बनी हुई है इसलिए उपाध्‍यक्ष महोदय, निश्चित तौर पर इस पर किसी न किसी स्‍टेट को आगे आकर हिम्‍मत करनी पड़ेगी।

श्री उपाध्‍यक्ष: करीब-करीब सभी स्‍टेट इसमें कंसर्ड है और उन गाइड लाइन पर नया एक्‍ट वगैरह बनाया गया है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍यों की सोच है वह वास्‍तव में सब लोगों की एक ही तरह की है कि यहां क्‍योंकि सुप्रीम कोर्ट के डाइरेक्‍शन के आधार पर हम कानून बनाए यह लोक तंत्र में सम्‍भव नहीं है अगर इसके लिए आग्रह भी है तो हम उसके अनुरूप जिस ढंग से भी कानूनी दृष्टि से लड़ा जा सकता है वह अपनी जगह लड़ेंगे लेकिन यह बात सच है कि यह फैसला बहुत ही आश्‍चर्यजनक है कि जब तक आप नया कानून नहीं बनाए तब तक आपको इस डाइरेक्‍शन का पालन करना पड़ेगा, अगर इसकी पालना हो जाए तो फिर तो लोकतंत्र की हत्‍या ही हो गई एक तरह से वह जो डाइरेक्‍शन दे उसके आधार पर यहां की कानून व्‍यवस्‍था चलाएं यह सम्‍भव नहीं है लेकिन चूंकि अब सुप्रीम कोर्ट सब से ऊपर मानी जाती है सारे राज्‍यों ने बैठकर इस पर विचार किया। सबने अपना-अपना रिव्‍यू फाइल किया हरेक ने, कानून की लड़ाई अपनी जगह लड़ी जाएगी लेकिन उस बात को ध्‍यान में रखकर जो एक्‍ट बनाने के बारे में केवल इन्‍होंने ही नहीं पूर्व में भी कई बार यहां पर हाउस में भी चर्चा करते हैं कि यह 1861 का कानून कब तक चलेगा तो निश्चित रूप से यह भी बहाना मान लीजिए और हम अपना स्‍वयं का  कानून बनाकर उसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने मना नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप अपना कानून बनाए लेकिन यह जरूर राइडर उन्‍होंने डाला कि जब तक आपका कानून नहीं बनता है एक समय सीमा बांधी कि तब तक आप इन गाइड लाइन के अनुसार चलेंगे। हमने इन गाइड लाइन को नहीं माना हमने अपना रिव्‍यू पिटीशन किया और समय बढ़ाने के लिए जो समय दिया था उसमें बढ़ाने का था लेकिन अभी भी चार सप्‍ताह का केवल समय बढ़ाया और चार सप्‍ताह में यह नहीं बनेगा, सम्‍भव ही नहीं है कि चार सप्‍ताह में हम उसकी लाइन को भी क्रोस कर गए हैं आज की तारीख में कानूनन चाहे तो हमारे खिलाफ कार्यवाही हो सकती है, हमने उसको स्‍वीकार नहीं किया अगर कोई कार्यवाही भी करेगा तो हम उसको फेस करेंगे लेकिन हम अपनी स्‍वयं की समझ से और सब लोगों की राय से जो भी अच्‍छा कानून तैयार हो सकता है उसको हम हाउस में लाएंगे, सब लोगों से विचार विमर्श करेंगे क्‍योंकि यह कानून न तो पार्टी के लिए बन रहा है, यह सारे के सारे प्रदेश के लॉ एण्‍ड ऑर्डर के लिए बन रहा है, उसमें हर जगह जहां कहीं भी खामी नजर आती है उसको ठीक करके परफैक्‍ट बनाएंगे ताकि आने वाली कई पीढि़यों तक यह कानून काम आ सके इसी मंशा को ध्‍यान में रखकर हम कई बार बैठे भी हैं और हम इसके लिए कोई बाध्‍य नहीं है कि उन्‍होंने जो डाइरेक्‍शन दिए हैं उसका हम अक्षरश: पालन करेंगे और यहां तक कि हमारे चीफ सेक्रेटरी को तो इस बात का नोटिस भी मिला हुआ है तो भी उन्‍होंने इस बात को स्‍वीकार किया कि नहीं, जल्‍दी में हम कोई कानून बनाकर ले आएंगे और कानून पास कर देंगे यह सम्‍भव नहीं है और हमको यह कहा गया था कि नहीं आप ऑडिनेंस लाकर भी करो, हमने कहा कि ना हम ऑर्डिनेंस नहीं लाएंगे।  यह कानून है और इस कानून को ठीक परफैक्‍टली सब लोगों की राय से मैं तो चाहता हूं कि लॉ को जानने वाले भी और जो कोई लोग हों उनसे भी राय लेकर अगर इसमें कहीं कोई कमी खामी है तो निश्चित रूप से उसका प्रयास करके परफैक्‍टली यह कर रहे हैं। इस सत्र की समाप्ति के पहले-पहले हम इस कानून को लेकर आएं, इस प्रक्रिया में हम चल रहे हैं। मैं माननीय सदस्‍य, शाहपुरा से आने वाले और नाथद्वारा से आने वाले और बाकी माननीय सदस्‍यों, आप ही नहीं, मैं सारे सदन की और लोकतंत्र की तरफ से यह विश्‍वास दिलाता हूं कि हम अपने पावर को कभी भी इस तरह से किसी के हाथों में सुपुर्द करके इस व्‍यवस्‍था को स्‍वीकार नहीं करेंगे। इसके बारे में हम कमिटेड हैं और हमेशा रहेंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। डाक्‍टर सुरेश चौधरी।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट सुन लीजिए।  इतनी महत्‍वपूर्ण चर्चा हुई है, माननीय राव राजेन्‍द्र सिंह जी, शाहपुरा से नहीं, बैराठ से सदस्‍य हैं। रिकार्ड में यह कोट हो जाए क्‍योंकि गृह मंत्रीजी ने शाहपुरा कहा है, इसके स्‍थान पर बैराठ लिख दिया जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: वह कर देंगे अपने आप।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): बैराठ से आने वाले माननीय सदस्‍य, क्‍योंकि आने वाले समय के लिए यह महत्‍वपूर्ण डिबेट है, ऐतिहासिक चर्चा मानी जाएगी इसलिए आप शाहपुरा के स्‍थान पर बैराठ करा दें।

श्री उपाध्‍यक्ष: कर लेंगे, कर लेंगे, वह ध्‍यान रखते हैं।

 

सिद्धमुख नहर सिंचाई परियोजना में निर्धारित पूरा पानी देना

 

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पर्ची के माध्‍यम से मुझे बोलने का मौका मिला, आपने अनुमति दी, उसके लिए धन्‍यवाद। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं जिस विधान सभा क्षेत्र से आता हूं वह विधान सभा क्षेत्र राजस्‍थान के उन दो जिलों के उस ब्‍लॉक में पड़ता है जो कृषि प्रधान माने जाते हैं और सिंचाई के पानी से परिपूर्ण माने जाते हैं जबकि नोहर भादरा चूरू जिले के नजदीक लगता है और आज तक हम हमेशा सूखा और अकाल झेलता रहा और जहां पानी के नाम की कोई चीज नहीं है। 1989 में पहली बार 1982 का भारत सरकार का सिंचाई मंत्रालय था उसका रावी व्‍यास बेसिन का रावी व्‍यास समझौता हमारा हुआ उसमें राजस्‍थान के हिस्‍से में 8.6 एमएएफ पानी राजस्‍थान के लिए निर्धारित किया।

 

Gpc/akt/06032007/1400/2c

 

उसमें हनुमानगढ़, गंगानगर जिले के उस रेगिस्‍तानी इलाके के लिए भादरा, नोहर की उस असिंचित भूमि को, उस प्‍यासी भूमि को सिंचित करने के लिए .47 एमएएफ पानी सिद्धमुख नोहर सिंचाई परियोजना के लिए आवंटित किया गया था। उस समय स्‍वर्गीय राजीव गांधी जी ने 1989 में भादरा में हरियाणा सीमा के नजदीक झांसल के पास सिद्धमुख नोहर भिवानी हैड के पास सिद्धमुख नोहर परियोजना की आधारशिला रखी, उसका काम चालू हुआ। उसमें सिद्धमुख, नोहर और भादरा, राजगढ़, तारानगर के हजारों, लाखों काश्‍तकारों ने एक सपना संजोया था कि जल्‍दी ही यह कार्य पूरा हो जाएगा और उसमें हमारा जो इलाका है, जो आज तक डेजर्ट इलाके के रूप में माना जाता रहा है वह भी एक ग्रीन बेल्‍ट के रूप में जैसा संगरिया, हनुमानगढ़, पीलीबंगा, साधुसर, घड़साना, रावला, अनूपगढ़, गंगानगर, केसरीसिंहपुर का एरिया होता था उसी तरह का हो जाएगा, लेकिन 16-17 साल बाद भी हम उस .47 एमएएफ पानी को आज भी लेने में कामयाब नहीं हुए हैं। मैं किसी सरकार को दोष नहीं दे रहा, मैं किसी पार्टी या पूर्व सरकार, किसी भी पार्टी की सरकार या किसी पार्टी, किसी संगठन या जन-प्रतिनिधियों को चाहे कोई भी रहे हों में किसी को दोष नहीं देना चाहता। जिसका भी दोष रहा है निश्चित रूप से यह कहा जा सकता है आज से पूर्व जो भी रहे, चाहे कांग्रेस की सरकार रही, चाहे बीजेपी की सरकार रही, चाहे जनता दल और जनता पार्टी मिलजुलकर आपस में रहे, भारतीय जनता पार्टी, जनता दल (दिग्विजय) आपस में मिल-जुलकर रहे, जो भी रहे किसी न किसी का दोष निश्चित है। पानी आग बुझाने के काम आता है और इस सदन में पानी में आग लगाने वाले सदस्‍य भी मौजूद हैं और मेरे पड़ोस में घड़साना, रावला में पानी में आग लगाने की कोशिश की और पानी में आग लगायी भी गयी। मैं नहीं चाहता हमारा जो शांत एरिया है सिद्धमुख नोहर, तारानगर, राजगढ़, भादरा और इंटरस्‍टेट बोर्डर के काफी लंबे-चौड़े एरिया में आपस में सीमाएं लगती हैं उस एरिया में भी कोई पानी में आग लगाये।

मैं टोहाना, जहां से सिद्धमुख नोहर सिंचाई परियोजना शुरू होती है वहां तक सिंचाई विभाग के अधिकारियों को लेकर गया। वहां हमारा करीब 850 क्‍यूसेक पानी सिद्धमुख नोहर परियोजना के लिए निर्धारित है। उस समय 8.6 एमएएफ पानी 1982 में रावी व्‍यास समझौते में, कांग्रेस सरकार उस समय राजस्‍थान में थी, दिल्‍ली में भी कांग्रेस सरकार थी, उस समय जो समझौता हुआ उस समय 8.6 एमएएफ पानी आवंटित हुआ। उसमें .6 एमएएफ आज भी हम लेने में नाकाम हैं। उस समय नाकाम थे, कारण समझ में आता है कि उस समय इसलिए थे कि हमारा कैनाल सिस्‍टम डवलप नहीं था, हमारी नहरी परियोजनाएं पूरी विकसित नहीं थीं और हम हमारा 850 क्‍यूसेक पानी लेने की स्थिति में नहीं थे या हमारा 8.6 एमएएफ पानी लेने की स्थिति में नहीं थे, लेकिन चूंकि आज 8.6 एमएएफ में .47 एमएएफ पानी सिद्धमुख नहर परियोजना का सिफ राजगढ़, तारानगर, नोहर, भादरा का है और वहां पर करोड़ों रुपये, अरबों रुपये लगाकर सिंचाई परियोजना विकसित की जा चुकी है। आज मौका है वह .17 एमएएफ पानी जो करीब 300 क्‍यूसेक बनता है वह आज हम टोहाना हैड पर ले सकते हैं। मैं मेरे प्रतिपक्ष के माननीय साथियों से, चूंकि सदन में हम बीच के आदमी हैं तो लेफ्ट में भी और राइट में भी दोनों से हाथ जोड़कर निवेदन है कि यहां पर पार्टी लाइन से ऊपर उठकर हरियाणा में आपकी सरकार है, हरियाणा में आपके मुख्‍यमंत्री हैं और टोहाना में जिस जगह मैं जाकर आया हूं उससे अपस्‍ट्रीम में कांग्रेस के आपके मुख्‍यमंत्री माननीय हूडा जी रोहतम में यह कैनाल ले जाने का प्रयास कर रहे हैं जो कि एक सराहनीय प्रयास है। रोहतक, भिवानी के काश्‍तकारों की जमीन भी सिंचित हो। हमारे अपस्‍ट्रीम में से पानी वे ले रहे हैं, एक कैनाल निकालेंगे। मैं टोहाना हैड पर गया, भाखड़ा मेन ब्रांच, फतेहाबाद डिस्‍ट्रीब्‍युटरी, फिरथला डिस्‍ट्रीब्‍युटरी उसके बाद फतेहाबाद ब्रांच, सिद्धमुख नोहर फीडर मैन डिस्‍ट्रीब्‍युटरी और घिंगताना लिंक चैनल ये टोहाना हैड से निकलने वाली कैनाल्‍स हैं, लेकिन इसका जो अपस्‍ट्रीम है उसके करीब एक किलोमीटर के एरिया में उस अपस्‍ट्रीम में और लोअरस्‍ट्रीम में पड़ने वाला प्रांत राजस्‍थान है, पंजाब नहीं है, हरियाणा नहीं है। वहां इस समय आपत्ति हम कर सकते हैं। कांग्रेस, बीजेपी और सभी माननीय सदस्‍य जो इस पवित्र हाउस में हैं वे सभी मिलकर इसमें आपत्ति कर सकते हैं कि जब तक .17 एमएएफ करीब 300 क्‍यूसेक पानी सिद्धमुख नोहर सिंचाई परियोजना का नहीं दिया जाएगा तब तक हमारी अपस्‍ट्रीम में से आपको कोई भी लिंक चैनल नहीं निकालने देंगे। कोई बड़ी बात नहीं है वह पानी हम आने वाले कुछ महीनों में लेने में कामयाब हो जाएं।

इसके अलावा जो पुराना भाखड़ा सिस्‍टम है सीपी-फाइव, कांटेक्‍ट पाइंट फाइव, हरियाणा और राजस्‍थान की सीमा नोहर और आदमपुर की सीमा है, हरियाणा और राजस्‍थान प्रांत की वहां पर कांटेक्‍ट पाइंट फाइव है वहां पर भाखड़ा का जो पुराना सिस्‍टम है वहां पर स्‍वचालित गेज रिकार्डर लगा हुआ है। हमें किसी को बिठाने की आवश्‍यकता नहीं है, उस स्‍वचालित गेज रिकार्डर से ही पता चल जाएगा कि हमारा हरियाणा से पानी आ रहा है और जो राजस्‍थान को अमर सिंह सब ब्रांच के माध्‍यम से आगे नोहर भादरा को दिया जा रहा है वह पानी पूरा हमारा 255-300 क्‍यूसेक नहीं है वह पूरा उस गेज रिकार्डर से पता चल जाता है। मेरा इस पवित्र सदन के माध्‍यम से, पर्ची के माध्‍यम से इस मामले को उठाने का मौका दिया तो उसमें भी मैं कहना चाहूंगा कि चूंकि सिद्धमुख नोहर फीडर का करीब 49 किलोमीटर और 38 किलोमीटर का करीब 87 किलोमीटर का हिस्‍सा सिर्फ हरियाणा से होकर गुजरता है और उसका पूरा का पूरा मेंटिनेंस का काम पूरा हरियाणा पर है और हरियाणा जहां राजस्‍थान को सिद्धमुख नोहर फीडर के नाम से पानी देता है वह काजल हेड और वहां का सीपी फाइव है, मेरा सदन के माध्‍यम से मांग है, माननीय सिंचाई मंत्रीजी भी सुन रहे हों तो उनके भी ध्‍यान में आ जाए जिस तरह से पुरानी भाखड़ा सिस्‍टम पर आटोमैटिक गेज रिकार्डर लगाया हुआ है उसी तरह से सीपी-फाइव या काजल हैड पर जहां पर हरियाणा से हमें पानी मिलता है, करीब 87 किलोमीटर में तो पूरी नहर है जो 850 क्‍यूसेक चलती है और वहां राजस्‍थान की सीमा में आकर राजस्‍थान के सिद्धमुख नोहर जैसे प्‍यासे इलाके को कितना पानी देंगे वह हमारे पास रिकार्ड ही नहीं है। हम कहते हैं हमें 850 क्‍यूसेक मिलना चाहिए और वे करीब 750 क्‍यूसेक ही देकर कह देंगे, हमारे पास गेज रिकार्डर है नहीं, वे 750 देकर कह देंगे कि हमने 85; दे दिया तो हमें मानना पड़ेगा। वहां सिद्धमुख फीडर इनकी डिस्‍ट्रीब्‍युटरी है रतनपुरा डिस्‍ट्रीब्‍युटरी और बोर्डर माइनर। आज उस सिद्धमुख फीडर में पूरा पानी जितना हम पिछले चार महीने से छोड़ रहे हैं उतना पानी पिछले 10 सालों से नोहर भादरा क्षेत्र के काश्‍तकारों को नहीं मिला, लेकिन इस मेन फीडर में जो करीब 650 क्‍यूसेक की है और यह रतनपुरा डिस्‍ट्रीब्‍युटरी और बोर्डर माइनर निकल रही है इसमें हमने अनधिकृत रूप से पम्‍प से पानी डालकर फीडर से ले जाना पड़ता है जहां क्रोस रेगुलेर नहीं लेंगे, गेज नहीं लेंगे। आज समझ में आता है एक मकान बनाओ, भव्‍य मकान बनाओ, आप महल बना दो, लेकिन उस महल में खिड़कियां नहीं है, आज हवामहल विश्‍व प्रसिद्ध है तो अपने झरोखों, खिड़कियों की वजह से है। हमने वह नहर बना दी, लेकिन उस नहर में आज तक आउटलेट नहीं लगाया। हमने नहर बना दी, उसमें क्रोस रेगुलेटर नहीं लगाया। आज 350 क्‍यूसेक पानी मिल रहा है। 300 क्‍यूसेक हमने पीछे से नहीं दिया, 350 क्‍यूसेक रतनपुरा डिस्‍ट्रीब्‍युटरी का फुल वाटर लेवल है, उसके हिसाब से उसका आउटलेट दो फीट पर लगा दिया। हम 65 क्‍यूसेक की बजाय 22 क्‍यूसेक पानी छोड़ रहे हैं और 22 क्‍यूसेक में दो फीट नीचे पानी जा रहा है। कैसे उस आउटलेट में पानी जाएगा, कैसे उस रतनपुरा वितरिका का काश्‍तकार पानी ले पाएगा। जब तक गेट नहीं लगाएंगे, जब तक क्रोस रेगुलेटर नहीं लगाएंगे तब तक इस समस्‍या का समाधान नहीं हो सकता। इसमें सबसे बड़ा कारण जो अब तक 17 साल के प्रयास के बावजूद भी नहर में पानी नहीं आना उसका सबसे बड़ा कारण रहा कि नोहर भादरा में जो क्षेत्र पड़ता है उस जमीन की मुरब्‍बाबंदी नहीं हुई, किलाबंदी नहीं हुई और जो माइनर डिस्‍ट्रीब्‍युटरी है वह बिना हैड रेगुलेटर व क्रोस रेगुलेटर के है। इसमें मेरा एक सुझाव है सिद्धमुख नोहर सिंचाई परियोजना की माइनर डिस्‍ट्रीब्‍युटरी के गेट व क्रोस रेगुलेटर और खालों के आउटलेट तुरंत प्रभाव से लगाये जाएं। सिद्धमुख फीडर की सर्विस रोड को ठीक किया जाए। मैं टोहाना तक गया, 85 और 20 करीब 105 किलोमीटर का एरिया है हमारे सिद्धमुख हैड से लेकर। कहीं भी दोनों बैंक, एक फतेहाबाद ब्रांच और सिद्धमुख नोहर ब्रांच का मिलता है, लेकिन दोनों के जो दूसरे बैंक हैं, दूसरे जो किनारे हैं, दूसरे जो पड़ेट हैं उस पर वाहन चलाने की स्थिति नहीं है। वहां का सिंचाई विभाग, वहां का सीएडी विभाग, वहां का गृह विभाग चाहकर भी उसकी पेट्रोलिंग नहीं कर सकता, क्‍योंकि पटड़े पर चलने के लिए हमारे पास जगह ही नहीं है। इसी तरह माइनर और चकवाइज काश्‍तकारों की जल उपभोग समितियां हैं, हमने प्रयोग भी किया है वहां सिद्धमुख नोहर सिंचाई परियोजना क्षेत्र में।

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/06032007/1410/2d

 

अभी फाइनल बाराबंदी जब तक हमारी रिफिटिंग नहीं होगी, चक प्‍लान नहीं होगा, खसरा पर चक प्‍लान सुपर इम्‍पोज करके जब फाइनल चक प्‍लान हमें नहीं मिल जाएगा, रिफिटिंग सर्वे चकबंदी का नहीं मिल जाएगा तब तक हमारे पास एक मात्र रास्‍ता था भाईचारे की चकबंदी। मैंने खुद रातों दिनों में 24-24 घंटे काश्‍तकारों के बीच में जाकर के उनको उनकी माइनर्स की, उनके चक की वाटर यूजर्स कमेटी एक अनाधिकृत रूप से बना कर एक भाईचारे की बाराबंदी हमने लागू करवाई तो मेरा यही है कि सिंचाई विभाग पर बार बार आरोप लगते हैं, सरकार सपर बार बार आरोप लगते हैं, सीएडी के अधिकारियों पर बार बार आरोप लगते हैं कि बाराबंदी सही नहीं होती है, बाराबंदी में पानी देने के मामले में इंजिनियर और अभियंता लोग यह जो भी हैं वह भ्रष्‍टाचार करते हैं तो इसका सबसे बढि़या रास्‍ता है कि वहां वाटर यूजर एसोसिएशन हर माबइनर्स पर हर वितरिका पर हर चक पर बना करके चाहे उसकी बाराबंदी का काम हो, चाहे उसकी नहर का रखरखाव का काम हो, खालों का रखरखाव का काम हो, चाहे उनसे आबियाना लेने का काम हो, वह पूरा का पूरा अगर काम उसको वाटर यूजर्स एसोसिएशन को सौंप दिया जाए तो मेरे ख्‍याल से काफी कुछ हद तक इसमें निदान मिल सकता है और एक दूसरा, पुरानी भाखरा सिस्‍टम का एक ड्रेनेज था, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अब मैं आधा मिनट में कन्‍क्‍लूड कर रहा हूं। इसमें 22 क्‍यूसेक्‍स की एक नहर थी जो अमरसिंह ब्रांच पुरानी भाखरा का जो सिस्‍टम था उसमें झांसल माइनर निकलती थी। अब झांसल माइनर जो निकलती है 22 क्‍यूसेक्‍स की, वह साढ़े छह सौ क्‍यूसेक्‍स की सिद्धमुख के एकदम जो पश्चिमी किनारा है उसके नीचे निकलती है। एक तरु तो वह करीब 50 फीट ऊँचा सिद्धमुख फीडर साढ़े छंह सौ क्‍यूसेक्‍स का दूसरी तरु मात्र 22 फीट में छोटा सा चैनल, वहां पशु जाते हैं वहां पर बरसात होती है, बरसात में धारे गिर गये, धोरे में आ गया, वह पूरा का पूरा सातवें दिन सिल्‍ट से भर जाता है, पानी नहीं मिल पाता। वह 22 फीट क्‍यूसेक्‍स पानी, मेरी एक मांग ंहै सदन के माध्‍यम से कि वह 22 क्‍यूसेक्‍स पानी हमारे झांसल माइनर को रद्द कर दिया जाए, झांसल माइनर को अमरसिंह ब्रांच से सीसी पाइप से जहां उधराण गांव के पास से निकलती है उसको खतम कर दिया जाए और वह 22 क्‍यूसेक्‍स पानी हमें सिद्धमुख फीडर में देकर झांसल का जेएसएल 1,2,3,4, 3ए, 3 बी झांसल माइनर का 5,6,7,8 जितना भी चक है उन सारे चकों का पानी सिद्धमुख फीडर में 22 क्‍यूसेक्‍स देकर और सिद्धमुख फीडर में डाइरेक्‍ट आउटलेट देकर उन काश्‍तकारों को पानी दिया जाए। आपका बहुत बहुत धन्‍यवाद। जयहिन्‍द।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद, सुरेश जी। श्री प्रभुलाल वर्मा। चम्‍बल सीएडी कोटा के सुदृढ़ीकरण के संबंध में।

कोटा की चम्‍बल सीएडी की नहरों का मरम्‍मत कार्य करवाने विषयक

 

श्री प्रभुलाल वर्मा (पीपल्‍दा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कोटा की चम्‍बल सीएडी की नहरों के बारे में प्रकाश डालना चाहता हूं। कोटा नगरी शैक्षणिक नगरी व औद्योगिक नगरी से जानी जाती है। इसका कारण सिर्फ चम्‍बल और चम्‍बल की नहरों से है। अगर वहां पर चम्‍बल नहीं होती तो कोटा का नाम आज देश विदेश में नहीं होता। चम्‍बल की नहरें करीब 40 वर्ष पुरानीा हैं और इन नहरों के रखरखाव के लिए पूर्व सरकार ने कोई ध्‍यान नहीं दिया। ये नहर इतनी लम्‍बी चौड़ी और इतनी जीवन दायिनी है कि तीन जिलों को कोटा, बूंदी और बारां को सिंचित करती है। साथ ही, मध्‍य प्रदेश को भी पानी जाता है। इन नहरों में, मैं आपको कोट करना चाह रहा हूं दांयीं मुख्‍य नहर की लम्‍बर राजस्‍थान में 124 किलोमीटर और इसका सिंचित एरिया 2.29 हजार हैक्‍टेयर है। इसी तरह से, बांईं मुख्‍य नहर की लम्‍बाई 2.4 किलोमीटर है तथा इससे 4 ब्रांचें निकलती हैं, कापरेन ब्रांच, पाटन ब्रांच, बूंदी ब्रांच और केशोरायपाटल ब्रांच। इस तरह से करीब इसकी लम्‍बाई भी डेढ़ सौ किलोमीटर निकलती है। सिंचित क्षेत्र एरिया इसका 1.2 हजार हैक्‍टेयर है। माइनरों की संख्‍या आरएमसी में 336 है और इसकी लम्‍बाई 210 किलोमीटर है। एलएमसी में 184 माइनर हैं और जिनकी लम्‍बाई 739 किलोमीटर के लगभग है। इसी तरह से 27 डिस्‍ट्रीब्‍यूट्रीज आरएमसी से निकलती हैं जिनकी लम्‍बाई 268 किलोमीटर है, एलएमसी में से 26 डिस्‍ट्रीब्‍यूट्रीज निकलती हैं जिनकी लम्‍बाई 343 किलोमीटर है।

मान्‍यवर, मेरा यहां सब कुछ बताने का कारण चम्‍बल की नहरों से किसानों की जीवन रक्षा करना है। यह किसानों की रीढ़ की हड्डी है। वहां के किसान केवल खेती पर ही निर्भर करते हैं लेकिन 40 साल गुजर जाने के बाद भी इन नहरों की दशा पूर्व सरकार ने नहीं सुधारी है और वह नहरें आज जर्जर हो गयी हैं। एक फूटी कोड़ी तक पैसा नहीं दिया नहरों के रखरखाव पर। माननीय यह एक कुठाराघात है किसानों के लिए, किसानों के साथ इतना बेईमानी करना पूर्व सरकार का अच्‍छी बात नहीं है। आज मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूं मुख्‍य मंत्री महोदया को, माननीय सिंचाई मंत्री जी को जिन्‍होंने सरकार में आते ही ....

श्री जुबेर खान (रामगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह भाषण कर रहे हैं या कोई मैटर रेज कर रहे हैं ? यह भाषण कर रहे हैं या कोई महत्‍वपूर्ण मुद्दा सदन के माध्‍यम से सरकार का ध्‍यान आकर्षण करा रहे हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: अपनी समस्‍या बता रहे हैं।

श्री प्रभुलाल वर्मा (पीपल्‍दा): नहरों का सुदृढ़ीकरण कराया और नहरों की दशा सुधारी।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह परम्‍परा नहीं रही है कि जीरो ऑवर में पर्ची के माध्‍यम से पुरानी सरकारों ने यह किया, सरकार को धन्‍यवाद देने की आप नई परम्‍परा डालें, आप स्‍पेसिफिक बताइए कि यह मुद्दा सदन के माध्‍यम से राजस्‍थान सरकार के सामने लाना चाहते हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय जुबेर खान जी अलग अलग कहने के तरीके हैं, आप वाला तरीका नहीं आता उनको।

श्री प्रभुलाल वर्मा (पीपल्‍दा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह बताना चाहता हूं।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): वह नहरें बनी उसमें यह ए.ईएन. और जै.ईएन. थे ये खुद ही।

श्री प्रभुलाल वर्मा (पीपल्‍दा): 17 साल तक नहरों में पानी नहीं पहुंचा था।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): उन नहरों में इन्‍होंने कितना चूना मिलाया है यह पूछो ना।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, नई नई परम्‍पराएं मत बनाइए। ...(व्‍यवधान)... और फिर आप आज की तारीख याद रख लीजिए, आप आगे भी लोगों को अलाउ करिए।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): इन्‍होंने कितना चूना लगाया और जर्जर हो रही हैं। उस जर्जर के होने में आपका कितना योगदान है, यह तो बताएं जरा।

श्री उपाध्‍यक्ष: सभी का कहने का अलग अलग तरीका होता है।

श्री प्रभुलाल वर्मा (पीपल्‍दा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस वर्ष नहरों को चलाने के लिए सुचारू रूप से व्‍यवस्‍था की गई। नहरों के रखरखाव के लिए तुरन्‍त 17 करोड़ रुपये दिये गये और 104 करोड़ की जो योजनाएं बनी हुई हैं उसके लिए भी विचार विमर्श किया जा रहा है। मैं माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय और सिंचाई मंत्री जी को बार बार धन्‍यवाद देता हूं और वहां की जनता गीत गा गा कर यह कह रही है कि 17 साल में पहली बार पानी पहुंचा है। मंत्री हो तो ऐसा हो।

आज इस मौके पर आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको बार बार धन्‍यवाद । साथ ही लास्‍ट एक बात और कहना चाहूंगा कि हमारे क्षेत्र में नहरें चल रही हैं, पानी खूब है लेकिन ड्रेनेज सिस्‍टम जो है वह खराब हो चुका है। ड्रेनेज सिस्‍टम  नहीं होने की वजह से आज वाटर लागिंग की स्थिति आ गई है, पहले वहां पर ड्रेनेज डिवीजन हुआ करता था लेकिन मई 83 में वहां ड्रेनेज डिवीजन टूट गई है तो ड्रेनेज के सिस्‍टम को ठीक किया जाए। इसके लिए मैं माननीय मंत्री महोदय से आग्रह करूंगा कि ड्रेनेज की वहां पर सफाई हो जाती है, डि-सिल्टिंग हो जाती है ड्रेनेज की तो वाटर लागिंग की स्थिति बिलकुल नहीं आएगी और फसलें भी और ज्‍यादा अच्‍छी होंगी। दूसरा, इस बार पानी पहुंचने से टेलों पर करीब करीब दो ढाई करोड़ रुपये का किसान डीजल फूंकते थे वह डीजल बचा है। यह धन्‍यवाद देना चाहते हैं आपको, पूरी सरकार को, वहां की जनता। मैं इस मौके के बाद में अब आपसे अंत में एक लाइन और पढ़ना चाहता हूं।

मां भारती के भल की बिंदिया वसुंधरा,

और तेज की कहूं तो दुर्गा समान है।

धन्‍यवाद, आपने मुझे समय दिया।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): प्रताप सिंह सिंघवी से आगे आ गये आज आप।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री हरिसिंह रावत। समाज कल्‍याण विभाग के नियमों में संशोधन के संबंध में।

Skp/akt/06032007/1420/2e/1

 

समाज कल्‍याण विभाग की योजनाओं में संशोधन

 

श्री हरीसिंह रावत (भीम): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज पर्ची के माध्‍यम से समाज कल्‍याण विभाग के जो कुछ नियम और योजनाएं हैं उनमें मैं कुछ संशोधन चाहता हूं। उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारे समाज कल्‍याण विभाग के अन्‍तर्गत कई ऐसी योजनाएं हैं जिनमें असहाय और गरीब लोगों को सहायता दी जाती है। इनमें कुछ विसंगतियां हैं उनके सम्‍बन्‍ध में मैं कुछ संशोधन प्रस्‍ताव देना चाहता हूं। हमारे यहां पर विकलांगों के लिए ट्राई-साइकिल दी जाती है। उस ट्राई साइकिल के जो दाम हैं वह तीन हजार रुपये हैं लेकिन सरकार केवल दो हजार रुपये उसके लिए देती है जिसकी वजह से यह एक हजार रुपये की कमी के कारण विकलांगों को परेशानी होती है। अभी हमारी सरकार ने ग्राम सम्‍पर्क योजना चलाई तब मैं गांव-गांव घूमा तो मुझे महसूस हुआ कि ट्राई साइकिल के लिए विकलांग लोग थे वो आये लेकिन दो हजार का ही सरकार का प्रावधान होने की वजह से कई लोगों को साइकिल नहीं मिल सकी। मेरा निवेदन है कि इसमें कुछ संशोधन करके दो हजार की जगह तीन हजार रुपया कराया जाए।

इसी सम्‍बन्‍ध में राज्‍य सरकार के सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अन्‍तर्गत राष्‍ट्रीय वृद्धावस्‍था पेंशन योजना में भी कुछ विसंगतियां हैं। इसके अन्‍तर्गत राज्‍य सरकार केस सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत राष्‍ट्रीय वृद्धावस्‍था पेंशन प्राप्‍त करने के पात्र व्‍यक्तियों की वार्षिक आय 1500 रुपये मानी है जो बहुत ही कम है। यानि प्रतिदिन करीब 4 रुपया 10 पैसे आय मानी गई है तथा विधवा पेंशन एवं वृद्धावस्‍था पेंशन के लिए 30 रुपये प्रतिमाह मानी गई है जो एक विचारणीय बिन्‍दु है। उपाध्‍यक्ष महोदय, उक्‍त आय बहुत ही कम है। इसलिए इस परिधि में कोई भी पात्र नहीं होता। लेखाविज्ञ माह जनवरी, 2002 के पेज नम्‍बर 108-109 पर एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के पत्र क्रमांक एफ.4-6 आरपीजी/एनएलएपी/97/1136 दिनांक 8.9.98, इसमें यह कोट किया गया है। तो मेरा यह निवेदन है कि इसमें कुछ संशोधन करके कुछ और राशि बढ़ाई जाए ताकि गरीब लोगों को ज्‍यादा राहत मिल सके।

तीसरा है पालनहार योजना। पालनहार योजना में पीडि़त बालक के माता-पिता दोनों की मृत्‍यु हो जाती है और सर्टिफिकेट देने पर पालनहार योजना के अन्‍तर्गत उसको लिया जाता है। उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारे राजस्‍थान में ही नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष में कई ऐसे समाज हैं जिनमें पति अगर मर जाता है तो वह नाता प्रथा के माध्‍यम से दूसरी शादी कर लेती है। जब दूसरी शादी कर लेती है तो वह जो बच्‍चा या बच्‍ची होती है वह अकेला पड़ जाता है और उसको कोई नहीं होता है जिसके कारण से जो पालनहार योजना होती है उसका उन बच्‍चों को फायदा नहीं मिल पाता है। इसलिए उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है कि इसमें संशोधन किया जाए। जो इस टाइम की जातियां हैं, जिनमें जो नाता प्रथा होता है जिसकी वजह से वह मां दूसरी शादी कर लेती है, पुनर्विवाह कर लेती है तो वह बच्‍चा अनाथ हो जाता है तो इसमें भी कुछ संशोधन किया जाए।

तीसरा, राजस्‍थान सरकार की तरफ से विधवा के साथ-साथ परित्‍यक्‍ता महिलाओं को भी लाभान्वित करने का भी हमारी सरकार का वादा है लेकिन इसमें भी कई ऐसी महिलाएं हैं या हमारे समाज में कई ऐसी जातियां हैं जिनमें कोई भी विधवा या परित्‍यक्‍ता हो जाती है तो कोई रिकार्ड नहीं होता है। यह केवल सिटी में या पढ़े लिखे लोग ही होते हैं जो कि इसका रजिस्‍ट्रेशन करवाते हैं और जब इसका रजिस्‍ट्रेशन होता है तब ही इसका फायदा मिलता है। लेकिन कई ऐसे समाज हैं जिनमें ऐसी कोई विधवा या परित्‍यक्‍ता हो जाती है तो उसका कहीं रजिस्‍ट्रेशन होता नहीं है जिसकी वजह से उनको कोई लाभ नहीं मिलता है। इस प्रकार की कोई ऐसी विधवा या माता-बहनें हैं जिनको लाभ नहीं मिल पाता है इसलिए इसमें भी कुछ संशोधन करके नियमों में चैंज किया जाए ताकि ऐसी विधवा या ऐसी परित्‍यक्‍ता महिलाओं को इसका लाभ मिल सके।

उपाध्‍यक्ष महोदय, समाज कल्‍याण के सम्‍बन्‍ध में ही निवेदन करना चाहूंगा कि एस सी, एस टी के पैटर्न पर राजस्‍थान में ही नहीं बल्कि भारतवर्ष में भी ओ बी सी का है तो मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा कि ओ बी सी के भी बच्‍चे-बच्चियों के लिए आवासीय छात्रावास का किया जाए ताकि हमारे ओ बी सी के छात्र-छात्राएं भी आवासी विद्यालयों का लाभ ले सकें और अपनी पढ़ाई सुचारू रूप से कर सकें।

दूसरा, एक छत के नीचे सभी प्रकार के विकलांग व्‍यक्तियों को नि:शुल्‍क शिक्षा देने के सम्‍बन्‍ध में भी स्‍वयंसेवी संस्‍थाएं/सहायता ऐसी आती है लेकिन यह केवल शहरों तक ही सीमित है। मेरा निवेदन है कि इस टाइप की सहायता गांवों में भी सुचारू रूप से चालू की जाए या हर पंचायत हैडक्‍वार्टर पर ऐसी योजना बनाई जाए तो कई ऐसे नि:शक्‍त लोग हैं उनको भी उसका पूरा-पूरा फायदा मिल सकेगा।

उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र में फ्लोराइड का प्रचुर मात्रा में पानी है जिसकी वजह से मेरे क्षेत्र में काफी लोग विकलांग हैं और विकलांग होने की वजह से उनके पास रोजी-रोटी का जरिया भी नहीं है और वह अशिक्षित रह जाते हैं। तो मेरा निवेदन है कि मेरे भीम क्षेत्र में भी ऐसा एक विकलांग आवासीय स्‍कूल चालू किया जाए ताकि वो उसका पूरा फायदा ले सके। वैसे तो कैम्‍प लगते हैं, कैम्‍प केवल 6 माह के लिए लगते हैं पर 6 माह के बाद वह बच्‍चा कहां जाएगा? तो 6 माह का जो गवर्नमेंट का पैसा खर्च होता है उसका औचित्‍य नहीं है। मेरा यह निवेदन है कि इस टाइप का हर विधान सभा क्षेत्र में विकलांग आवासीय शिविर या विकलांग आवासीय स्‍कूल खोला जाए ताकि जो विकलांग बच्‍चे होते हैं उनको उसका पूरा लाभ मिल सके। कई ऐसे परिवार हैं जिनके बच्‍चे-बच्‍ची विकलांग हैं और वो उनको कुछ हैल्‍प करने में सक्षम नहीं हैं तो मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा कि सरकार ऐसे विकलांग आवासीय स्‍कूल खोलें ताकि उन बच्‍चों का भविष्‍य उज्‍ज्‍वल हो सके।

तीसरा, सम्‍भाग स्‍तर पर ओल्‍ड एज कैम्‍प की जो व्‍यवस्‍था है वह शहरों में है। मैं इसके ऊपर भी प्रकाश डालना चाहूंगा कि यह ओल्‍ड एज जो कैम्‍प है यह सारे विधान सभा क्षेत्र में भी लगाये जाएं ताकि हमारे जो वृद्ध या इस तरह के असहाय लोग हैं वो भी उनका पूरा फायदा उठा सकें। इसी आशा के साथ, जय भारत, धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद।

ध्‍यानाकर्षण

पैरा टीचर्स की सेवा शर्तों में सुधार

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय शिक्षा मंत्री जी का ध्‍यानाकर्षित करना चाहता हूं कि आज विधान सभा के बाहर करीब 22 हजार पैरा टीचर अपनी नौकरी के स्‍थायित्‍व के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप शिक्षा मंत्री जी और आप सब जब विपक्ष में थे, जब यहां विपक्ष भूमिका निभा रहे थे तो आपके इनके यह वादा किया था कि कैसी निकम्‍मी सरकार है जो इतने कम पैसों में आपको शोषण कर रही है, अगर सरकार बदली और हम उस स्‍थान पर आये तो आपका स्‍थायीकरण करेंगे और नियमित रूप से आपको पे-स्‍केल देंगे। आप अपने वायदे से मुकर रहे हैं। आज भी अगर ये राजीव गांधी पाठशालाएं नहीं खोली जातीं तो केन्‍द्र से मिलने वाली सहायता आपको नहीं मिलती। अगर इन पैरा टीचर्स की नियुक्ति नहीं की जाती तो केन्‍द्र से मिलने वाली आपको सहायता नहीं मिलती। मेरा विनम्र अनुरोध है कि इस परिस्थिति में जहां 22 हजार लोग सड़कों पर हैं, आंदोलनरत हैं और इनके पुराने भाषणों को सड़कों पर याद करके इन्‍हीं से याचना कर रहे हैं कि जो वादा आपने हमसे किया था उस वादे को निभाओ। मैं माननीय शिक्षा मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि जो भी पैरा टीचर नियमित टीचर नहीं बन सके उन सब पैरा टीचर्स को उसी स्‍थान पर नियमित करके नियमित ग्रेड उनको उपलब्‍ध करवायें।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय शिक्षा मंत्री जी।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो बिन्‍दु यहां पर रखा है और समाज कल्‍याण से सम्‍बन्धित जो मामला यहां सदन में रखा है वह बहुत ही गंभीर मसला है। चाहे पालनहार योजना हो, चाहे विधवा पेंशन योजना हो, मैं मंत्री जी से चाहूंगा कि....

श्री उपाध्‍यक्ष: मंत्री महोदय ने नोट कर लिया है। (व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): ऐसे गरीब, दलित और पिछड़े हुए लोगों की यह जो व्‍यथा है और सदन में इस मामले में, आप मंत्री जी बैठे हुए हैं, आपसे मैं व्‍यवस्‍था चाहूंगा कि मंत्री जी कम से कम अपनी व्‍यवस्‍था तो दें कि वहां उन्‍होंने गरीब और पिछड़े हुए लोगों के हित की बात की है।

श्री उपाध्‍यक्ष: मंत्री महोदय ने नोट कर लिया है। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, पिछले तीन साल से जिस तरह के तौर-तरीके इस सरकार के रहे हैं, 19 जगह पर इन पैरा टीचर्स पर लाठी चार्ज किया है और उदयपुर में गोली चलाई है। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): और उसी से व्‍यथित होकर, उसी से आंदोलित होकर राजस्‍थान की जालिम और भ्रष्‍ट सरकार के खिलाफ हजारों की संख्‍या में पैरा टीचर वहां प्रदर्शन कर रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपका अंकित नहीं होगा। मैंने आपको परमिशन नहीं दी है। आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये। अंकित नहीं हो। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):  ***

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़):  ***

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली):***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप बैठिये। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

विजय/अरुण/06032007/1430/2f

 

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): ****

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ****

श्री उपाध्‍यक्ष: आप नियमों में बोलिये। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ****

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): ****

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ****

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य की बात ध्‍यान में आ गई है। नोटिस में आ चुका है। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ****

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ****

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य, आप बिराजें। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): *****

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): ****

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): *****

श्री उपाध्‍यक्ष: शिक्षा मंत्रीजी ने नोटिस ले लिया है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ****

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ****

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): ****

श्री उपाध्‍यक्ष: सीट ग्रहण कीजिये। शिक्षा मंत्रीजी ने आपकी बात को सुन लिया है। माननीय शिक्षा मंत्रीजी। (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य।

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): ****

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ****

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ****

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य। माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान) सीट ग्रहण कीजिये, प्‍लीज। मंत्रीजी इससे पूरी तरह से वाकिफ हैं।

शासकीय वक्‍तव्‍य

शिक्षा मंत्री का पैराटीचर्स की स्थिति पर वक्‍तव्‍य

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पैराटीचर्स के बारे में हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य और सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य ने ध्‍यान आकर्षित किया है। मैं कुछ तथ्‍यों की ओर आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं। पैराटीचर्स की नियुक्ति के समय दो प्रकार के पैराटीचर्स की नियुक्ति हुईं। पहले सर्वशिक्षा अभियान के अन्‍तर्गत पैराटीचर्स में बिना ट्रेंड पैराटीचर्स की नियुक्ति हुई। यह राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय के आदेश के पश्‍चात् पैराटीचर्स में जो बी.एड. और एस.टी.सी. थे, उनकी नियुक्ति हुई। इसके बाद में तत्‍कालीन सरकार ने एक नौकरियों का विज्ञापन निकाला था पैराटीचर्स के लिए रिजर्वेशन का 7500 नौकरियों का विज्ञापन निकाला, उसमें 75 प्रतिशत रिजर्वेशन पैराटीचर्स का किया था, उस पर राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय का स्‍थगन आदेश आ गया और उसके बाद में उसका फैसला हुआ कि रिजर्वेशन पर आप रिजर्वेशन नहीं कर सकते। इस कारण से पैराटीचर्स को नहीं लगाया गया। जब मैंने आर.पी.एस.सी. के माध्‍यम से भर्ती की प्रक्रिया शुरू की तो मुझे अच्‍छी तरह से ध्‍यान है, राजाखेड़ा से आने वाले महान हमारे जो विद्वान और वित्‍तीय मामलों के जानकार सदस्‍य हैं, उन्‍होंने यहां खड़े होकर चुनौती दी, चेतावनी दी कि मैं कह रहा हूं नहीं हो सकता। यह कह दें तो फिर काम कैसे हो जाये। मैंने कहा विनम्रता से कि हो जायेगा साहब, इतना गुस्‍सा मत करो लेकिन फिर भी हमने उनको एडजस्‍ट करने के लिए इसमें एक प्रावधान किया कि एक जनवरी, 1999 को जिसकी जो उम्र थी, उस उम्र को मानकर उसको परीक्षा में बैठने की छूट दी। इसके कारण से पहली बार जो आर.पी.एस.सी. की 38,000 अध्‍यापकों की नियुक्ति हुईं, उनमें 10 से 12,000 तक जो हमारे, 14,000 होंगे, जितने हमारे पैराटीचर्स थे, एग्‍जेक्‍ट संख्‍या मुझे याद नहीं है, उनकी नियुक्ति भी परमानेंट उसके अन्‍तर्गत हो गई। उसके पश्‍चात् हमारे सामने दूसरा बड़ा मुद्दा था। मैं एक-एक बात क्लियर कर देता हूं। उसके बाद में यह जो भर्ती की प्रक्रिया हमने शुरू की तो पैराटीचर्स ने रिट याचिकाएं कीं और वे सर्वोच्‍च न्‍यायालय तक रिट याचिकाएं गईं और सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने जब यह फैसला किया कि this is the way it should be और पैराटीचर्स को कोई अधिकार नहीं है और राज्‍य सरकार उनको नियुक्ति रिजर्वेशन देकर नहीं कर सकती। यह सुप्रीम कोर्ट का फैसला हुआ। उसके बाद में नियमित वेतन उनको या टीचर्स के रूप में नियुक्ति देने का प्रश्‍न सम्‍भव नहीं था लेकिन उनकी बात हमारे ध्‍यान में थी कि उनको फिर से कैसे न कैसे एडजस्‍ट किया जाना चाहिए। मैं उनकी सेवाओं की तारीफ करता हूं, उनके कारण से शिक्षा का विस्‍तार हुआ, इसको भी मैं ना नहीं करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: कई बार आपके सामने वह पेश भी हुए, सुनवाई भी हुई है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): मैं बता रहा हूं, बात सुन लें, मेरे पास आए हैं। उसके बाद में फिर उन्‍होंने मांग की तो हमने इस बार भी जो अभी आर.पी.एस.सी. की परीक्षा हुई है, उसमें भी एक जनवरी, 1999 को जो उम्र थी, वह उम्र मानकर उनको परीक्षा में बैठने की छूट दी है और इस बार भी अधिकांश पैराटीचर्स उस परीक्षा में बैठे हैं तो मुझे आशा है, बहुत से लोगों का उसमें फिर नम्‍बर आ जाएगा और इसके बीच में हमने उनसे एक समझौता किया कि जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला हो गया और उनको हम नियुक्ति नहीं दे सकते तो हमने फैसला किया कि धीरे-धीरे उनके वेतन को बढ़ाकर, जो मानदेय मिलता है, उसको तृतीय वेतन श्रंखला के मानदेय के बराबर लेकर आएंगे। इसके हिसाब से हमने उनकी दो किश्‍तें बढ़ा भी दी, दो किश्‍तें दे भी दी। इस बार फिर हम आग्रह करेंगे कि आज हमारी एस.एस.सी. की मीटिंग दिल्‍ली में हो रही है। जो एस.एस.सी. की मीटिंग हो रही है, उसमें भी उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान खींचना चाहता हूं। एक सबसे बड़ी समस्‍या इस समय राज्‍यों के सामने आ रही है। वह यह आ रही है कि एस.एस.सी. में हमारा 10वीं पंचवर्षीय योजना तक 75 और 25 का रेशो था भारत सरकार का और राज्‍य सरकारों का। इस बार का जो बजट आया है, चिदम्‍बरम साहब ने जो पेश किया है, उसमें उसको घटाकर उन्‍होंने 50-50 प्रतिशत कर दिया है। 50 प्रतिशत पैसा राज्‍य सरकारों का होगा और 50 प्रतिशत पैसा भारत सरकार का होगा। जो भी अब बढने वाला काम है, वह सारा बोझ राज्‍य सरकारों पर आने वाला है। फिर भी मैं आपको बहुत स्‍पष्‍ट शब्‍दों में आग्रह करना चाहता हूं कि कुल मिलाकर 94,000 लोगों को, यह जो प्रक्रिया अभी आर.पी.एस.सी. की प्रारम्‍भ हुई है, वह खतम होगी, जब तक राजस्‍थान के 94,000 लोग विभिन्‍न पदों पर नियमित रूप से सर्विस में आ जायेंगे, जो शिक्षा विभाग में अपने आपमें एक रिकार्ड है और इसीलिए हमने इस समस्‍या का समाधान किया। हमने समाधान इनका ही नहीं किया, शिक्षाकर्मी जो 11,000 की संख्‍या में है, जिनका समय समाप्‍त हो गया था, उन्‍होंने भी विधान सभा पर प्रदर्शन किया था, उनका टाइम खतम हो गया था, उनका समय खतम हो गया था। नया शिक्षाकर्मी बोर्ड बनाकर 11,000 लोगों में से 6,000 को 8,500 की वेतन श्रंखला देकर उन्‍हें नियमित किया है। लोक जुम्बिश के जो लोग थे, उनको समाहित किया है। मैं माननीय सदस्‍यों को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि पैराटीचर्स की सेवाओं के बारे में किसी भी प्रकार से पैराटीचर्स को हटाया नहीं जायेगा, नम्‍बर एक। उनकी वेतन वृद्धि नियमित रूप से करके उनको तृतीय वेतन श्रंखला के बराबर करेंगे। उनको सरकारी कर्मचारी तो नहीं मान सकते, उनको परमानेंट तो नहीं कर सकते लेकिन उनकी वेतन वृद्धि करके, वह बच्‍चों को पढ़ा सके मानसिक रूप से संतुष्‍ट होकर, यह उसकी व्‍यवस्‍था करेंगे। इसीलिए मैं सदन के माध्‍यम से आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि राज्‍य सरकार उन सारी समस्‍याओं का समाधान करना चाहती है और मुझे आशा है कि यह जो 38,000 की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है, इसमें बहुत से पैराटीचर्स आ जायेंगे। जो बच जायेंगे, उसके बाद में भी उनका जो भी कल्‍याण किया जा सकता है, निश्चित रूप से कल्‍याण करने के लिए सरकार सोचेगी और इसलिए सदन के सामने मैंने सारी सूचना रख दी। बहुत-बहुत धन्‍यवाद। मानदेय बढ़ा दिया। सबका मानदेय एक-सा कर दिया। 400 रुपये एक साथ बढ़ाये। प्रतिवर्ष 200 रुपये बढ़ने वाले थे, उसको 400 रुपये किया। एक साथ बढ़ाने की आवश्‍यकता पड़ेगी, उस पर भी विचार करेंगे और जितने बच जायेंगे, उनको भी करेंगे। निश्चित रूप से मैं चाहूंगा, अच्‍छे, पढ़े-लिखे ट्रेंड टीचर्स हमारे बच्‍चों को पढ़ायें। इसलिए आपने यह मुद्दा उठाया, धन्‍यवाद, नमस्‍कार।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य। सदन की मेज पर रखे जाने वाले पत्र। (व्‍यवधान) कोई बहस नहीं इसमें।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): इसमें आपने फिक्‍स कर रखा है। इसमें आपने 2200 पर फिक्‍स कर रखा है तो फिर आपने इनको महान कैसे कहा?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इसमें बहस का मुद्दा नहीं है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): मैंने जो कहा है, वह सही है। महान मैंने इसलिए कहा है, ये अभी कह रहे थे कि मैं फाइनेंस भी सबको पढ़ा सकता हूं, कानून भी सबको पढ़ा सकता हूं, सारा काम स्‍वयं कर सकते हैं तो महाराज तो महान ही होते हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, आप महाज्ञानी कह सकते हो। (व्‍यवधान) महाज्ञानी कह सकते हो आप।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): उपाध्‍यक्ष महोदय, देखिये, मेरा नाम लेकर इन्‍होंने कहा है। मेरा नाम लेकर कि राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य के बारे में इन्‍होंने कुछ टिप्‍पणी की है। आप कृपया मेरा निवेदन सुन लें। जिस समय यह चर्चा चल रही थी, मैंने कभी भी यह नहीं कहा था कि आप नहीं कर सकते हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: अच्‍छा काम किया है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): यह कहा था।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आप सुन लीजिये। रिकार्ड निकलवा लीजिये।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): रिकार्ड मंगवा लें।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): तो फिर मैं माफी मांग लूंगा।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): मैं माफी मांग लूंगा।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मैंने यह कहा था कि रूल्‍स में बिना अमेंडमेंट किये आप इन पैराटीचर्स की समस्‍याओं का निदान नहीं कर पायेंगे। यह आपने स्‍वयं स्‍वीकार किया था।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): चलिये आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): तो इसलिए आप यह एडजेक्टिव लगाकर आप जो वह कहते हो, बात बढ़ा-चढ़ाकर आप कह रहे हो, आपकी महारत के लिए मैं आपको बधाई देता हूं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): महाराज, आप तो महान ही हो। महाराज, आप महान हो। (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आपकी महारत के लिए पंडितजी महाराज, मैं आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): उपाध्‍यक्ष महोदय, उपाध्‍यक्ष महोदय।

Jkj/akt/14.40/2g/6.3.2007

 

डा.सी.पी.जोशी: उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्रीजी, मैं आपको साधुवाद देता हूं, धन्‍यवाद देता हूं लेकिन दो-तीन चीजों को इस सदन के सामने स्‍पष्‍ट करना चाहता हूं। नम्‍बर एक, राजीव गांधीजो पाठशालाएं थीं वह पांचवीं क्‍लास तक थीं, अब आप बार-बार कहते हैं कि राजीव गांधी पाठशालाओं को हमने पांचवीं तक क्रमोन्‍नत कर दिया, तो जो पांचवीं तक आलरेडी पढ़ाई कर रहे थे उनको क्रमोन्‍नत नहीं किया, आपने खाली एक काम किया है कि पिछली सरकार ने जो उसको शिक्षा के केन्‍द्र के रूप में भारत सरकार से पैसा लिया था वह वहां पर सूचना शिक्षा केन्‍द्र के नाम पर थी या पांचवीं क्‍लास चल रहीथी। तो एक तो हमें स्‍पष्‍ट कर दें, यदि वह शिक्षा केन्‍द्र के रूप में राजस्‍थान सरकार नहीं करती तो 26 हजार....

श्री उपाध्‍यक्ष: जोशीजी, इनका...

डा.सी.पी.जोशी: नहीं, उपाध्‍यक्ष महोदय, स्‍पेसिफिक आना चाहिए, उपाध्‍यक्ष महोदय, आप सुन लीजिये अब, उपाध्‍यक्ष महोदय, सबको स्‍पेसिफिक, उपाध्‍यक्ष महोदय, सदन में पूरी बात स्‍पष्‍ट आ जानी चाहिए, पूरी बात।

श्री उपाध्‍यक्ष: मंत्रीजी स्‍टेटमेंट दे चुके।

डा.सी.पी.जोशी: आप पहले पूरी बात सुन लें उपाध्‍यक्ष महोदय, बात सदन में सामने आनी चाहिए। 26 हजार वह शिक्षा केन्‍द्र यदि उस समय की सरकार नहीं लिख कर भेजती तो 26 हजार के दो पद जिसको आज प्राथमिक विद्यालय केनाम पर आप राजीव गांधी का नाम हटा कर प्राथमिक विद्यालय कर रहे हैं उनको 52 हजार पद जो आये हैं वह शिक्षा केन्‍द्र के नाम के कारण आये हैं। नम्‍बर एक। नम्‍बर दो, मान्‍यवर, पिछले पाँच साल में आपके लगभग तीन से पाँच हजार टीचर रिटायर हो रहे हैं प्‍लान में, थर्ड ग्रेड केटीचर। उनका भी लगभग बैकलाग आज के दिन, प्‍लान का कह रहा हूं मैं, सर्व शिक्षा अभियान, उनकी संख्‍या भी पच्‍चीस से तीस हजार से ज्‍यादा हो गई उपाध्‍यक्ष महोदय।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय जोशीजी, इनका..

डा.सी.पी.जोशी: उन प्‍लान की पोस्‍ट के अगेंस्‍ट में राजस्‍थान सरकार ने थर्ड ग्रेड का एक भी पद नहीं भरा है। उलटा सर्व शिक्षा अभियान के 75 प्रतिशत का जो पैसा आया है, 25 प्रतिशत आपको लगाना है, उस 75 प्रतिशत के पैसे के अगेंस्‍ट में जितने पद क्रियेट किये हैं, उतने पद भी आपने नहीं भरे।  इसलिए माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको साधुवाद देता हूं लेकिन यह बात भी आपके सामने निवेदन करना चाहता हूं कि आप पिछली सरकार के और सर्व शिक्षा अभियान का जो पैसा आ रहा है उस सर्व शिक्षा अभियान के नाम पर तृतीय श्रेणी के अध्‍यापक जो प्राइमरी एजुकेशन को पढ़ाने के लिए लगाये गये हैं उनमें से बी.ए., बी.एड. लोगों को आप सैकण्‍डरी स्‍कूल में लगा रहे हैं, वह सर्व शिक्षा अभियान का बिलकुल खुला उल्‍लंघन है।  इसलिए, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं आपसे, आपको साधुवाद है...

श्री उपाध्‍यक्ष: विराजिये जोशीजी।

डा.सी.पी.जोशी: लेकिन भारत सरकार 34 प्रतिशत पैसा अब भी बढ़ा रही है सर्व शिक्षा अभियान में, आपको वोल्‍यूम आफ अमाउंट जो है वह पैसा मिलने वारला है फिफ्टी-फिफ्टी करने के बाद भी, जितना पैसा आपको अभी 75 प्रतिशत मिला है उससे ज्‍यादा पैसा आपको मिलेगा।  इसलिए, मान्‍यवर, यह एक बता दें आप, क्‍या राजस्‍थान सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान में 75 प्रतिशत जो भारत सरकार ने दिया है उसके अगेंस्‍ट में जितनी पोस्‍ट है, क्‍या उतनी पोस्‍ट भर दी है?

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद जोशीजी।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: नहीं, मैं एक मिनट।

श्री उपाध्‍यक्ष: अब  आप....

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: नहीं, सदन में सब बातें साफ-साफ रहनी चाहिए ना।

श्री उपाध्‍यक्ष: डिमाण्‍ड होगी तब बता देना।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: सदन में, यह बात सही है, मुझे इसमें स्‍वीकार करने में कोई आपत्ति नहीं है कि यह जो शिक्षा गारंटी केन्‍द्र थे जिनको आपने राजीव गांधी पाठशालाएं नाम दिया था यह सब पांचवीं तक नहीं थीं, यह कोई दूसरी तक थीं, कोई तीसरी तक थीं, कोई पांचवीं तक थीं।  लेकिन यह भी सही है कि अगर यह शिक्षा गारंटी केन्‍द्र नहीं होते तो इतनी प्राथमिक पाठशालाओं में हम इनको नहीं बदल सकते थे। इसमें कोई मीनमेख ही नहीं है। एक।  इनको बदलने से हमको फायदा हुआ, इसमें केवल पैरा टीचर्स थे अब इनके स्‍थान पर हमको हर जगह दो-दो ट्रेंड टीचर्स उपलब्‍ध होंगे और पैरा टीचर्स रहेंगे। साथ ही साथ यह जो भवन और बिल्डिंग की कमी है उसको बनाने का काम भी होगा।  लेकिन जो दूसरी बात आपने कही वह यह कही कि वर्तमान सरकार आने के बाद में जब 58 से बढ़ाकर 60 साल कर दिया तो इस पीरियड में नान प्‍लान के लोग रिटायर नहीं हुए और कहा अब रिटायर हुए हैं, तो अब जो रिटायर होना शुरू हो रहे हैं उनका तो अगले बजट में हम प्रावधान करने की कोशिश करेंगे, हमारे आने के बाद में नान प्‍लान के टीचर्स रिटायर नहीं हुए, दो साल का कार्यकाल बढ़ने के कारण से, यह बाकी दूसरी बात जो थी कि 75 प्रतिशत में, तो 300 करोड़ रूपये की योजना थी जब इस सरकार ने चार्ज लिया था सर्व शिक्षा अभियान का, इस साल 1400 करोड़ की योजना हुई है और इसलिए राजस्‍थान सरकार ने अपना जो पूरा अंशदान दिया है उसके बाद भी इस साल सौ करोड़ रूपये हमको भारत सरकार से कम मिला है हमारे अंशदान के अगेंस्‍ट में, उसके लिए हमने उनको डिमाण्‍ड कर रखी है और हम फिर मांग कर रहे हैं आज भी, आज भी मैंने मानव संसाधन मंत्रीजी से बात करी है कि राज्‍यों पर यह बहुत बोझ बढ़ जायेगा फिफ्टी-फिफ्टी होने के कारण, उन्‍होंने इसको कहा है कि मैं केबिनेट में लेकर जाऊंगा, क्‍योंकि यह जो पैसा भारत सरकार दे रही है, इस पर राज्‍यों का हक है।  यह जो सेस लगाया जा रहा है, इस सेस में से हमको हिस्‍सा राशि नहीं मिलती है, सब टैक्‍स में राज्‍य सरकार का हिस्‍सा है तो जो तीन प्रतिशत सेस है उसमें राज्‍यों का हक भी है। इसी प्रकार से बाहर से जो पैसा आता है उसमें भी भारत सरकार का पैसा अनुदान के रूप में आता है इसलिए हमने फिर पुरजोर शब्‍दों में मांग की है और मैं ही नहीं, सिर्फ राजस्‍थान ने नहीं, हिन्‍दुस्‍तान के सारे शिक्षा मंत्री और मुख्‍य मंत्री, कांग्रेस, बीजेपी, कम्‍युनिस्‍ट किसी भी पार्टी से संबंधित हों, सब लोग यह मांग कर रहे हैं कि सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत 75 और 25 का जो रेश्‍यो है वह ग्‍यारहवीं पंचवर्षीय योजना तक चलते रहना चाहिए और मैं आपको आश्‍वस्‍त करना चाहती हूं कि हमने जो दूसरी मांग की थी, इस सैकण्‍डरी एजुकेशन में भी सर्व शिक्षा अभियान लागू किया जाना चाहिए उसके लिए भारत सरकार ने स्‍वीकृति दी है, उसके लिए हमने उनको धन्‍यवाद दिया है। इसलिए उसमें कोई दिक्‍कत की बात नहीं है, आपने जो ध्‍यान खींचा है मैंने उसको दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: आप ब‍हुत तिलमिलाते है...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद।

प्रतिवेदन

 अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड का 11वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2005-2006

श्री गजेन्‍द्र सिंह, ऊर्जा राज्‍य मंत्री राजस्‍थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड का 11 वां वार्षिक प्रतिवेदन सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री गजेन्‍द्र सिंह(राज्‍य मंत्री,ऊर्जा): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कम्‍पनी अधिनियम, 1956 की धारा 619-ए के अंतर्गत राजस्‍थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड का 11वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2005-2006 सदन की मेज पर रखता हूं।

 

विधायी कार्य : विधेयक का पुर:स्‍थापन

आबकारी (संशोधन) विधेयक, 2007

श्री उपाध्‍यक्ष: पुर:स्‍थापित किये जाने वाला विधेयक।  श्री वीरेन्‍द्र मीणा, प्रभारी मंत्री प्रस्‍ताव करेंगे कि राजस्‍थान आबकारी (संशोधन) विधेयक, 2007 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की जाय।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा(राज्‍य मंत्री,वित्‍त): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान आबकारी (संशोधन) विधेयक, 2007 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा के लिए प्रस्‍ताव करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि राजस्‍थान आबकारी (संशोधन) विधेयक, 2007 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की जाय?

                         (स्‍वीकृत)

विधेयक को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की गई।

प्रभारी मंत्री विधेयक को पुर:स्‍थापित भी करेंगे।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा(राज्‍य मंत्री, वित्‍त): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान आबकारी (संशोधन) विधेयक, 2007 को पुर:स्‍थापित करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर वाद-विवाद। श्री टीकम चन्‍द कांत। (व्‍यवधान) बीच में नहीं।

डा.श्रीगोपाल बाहेती: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, गृह मंत्रीजी का जवाब आना था उस पर, मीडिया कर्मियों के हमले पर, पहले उस पर चर्चा हो जाय। मीडिया कर्मियों पर जो हमला हुआ है, यह व्‍यवस्‍था दी गई थी...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अभी बीच में नहीं, अभी मैंने शुरू कर दिया है।

डा.श्रीगोपाल बाहेती: यह व्‍यवस्‍था, बीच में ही घोषणा कर गये थे इस बात की।

श्री जुबेर खान: बीच में कैसे नहीं। यहां से व्‍यवस्‍था दी थी अध्‍यक्ष महोदय ने कि शून्‍य काल के तुरंत बाद गृह मंत्रीजी वक्‍तव्‍य देंगे। मंत्रीजी के ऊपर हमले के ऊपर भी और यह मीडिया कर्मियों के ऊपर हमला हुआ, उस पर भी। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: गृह मंत्रीजी दे देंगे। (व्‍यवधान) दे देंगे।

डा.श्रीगोपाल बाहेती: स्‍पीकर साहब से बात हुई थी इस बात की। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: दे देंगे वह, चलने दीजिये। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍य मंत्री की सुरक्षा को खतरा है और हम चार घंटे से इंतजार कर रहे हैं...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान: आसन से व्‍यवस्‍था हुई थी शून्‍य काल खत्‍म होने के तुरंत बाद गृह मंत्रीजी वक्‍तव्‍य देंगे। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: वह तैयार हैं, दे देंगे वक्‍तव्‍य, थोड़ा तसल्‍ली रखिये।

श्री संयम लोढ़ा: अब हम और ज्‍यादा इंतजार नहीं कर सकते। सरकार का...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: वक्‍तव्‍य देंगे, आप स्‍थान ग्रहण कीजिये। (व्‍यवधान)

डा.श्रीगोपाल बाहेती: नहीं, अध्‍यक्ष महोदय ने यह...

श्री संयम लोढ़ा: बहुत गम्‍भीर मामला है यह...

श्री अमरा राम(धोद): आसन से व्‍यवस्‍था हो गई कि जीरो आवर के जस्‍ट बाद मंत्री वक्‍तव्‍य देंगे। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: एक मंत्री के ऊपर हमला हुआ है और इसलिए हुआ है कि वह मुख्‍य मंत्री का नजदीकी मंत्री है। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: वक्‍तव्‍य दे देंगे। अभी आप तसल्‍ली रखिये जरा। वह दे देंगे।(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान: यह इनडाइरेक्‍टली हमला मुख्‍य मंत्री के ऊपर हुआ है। यह इनडाइरेक्‍टली मुख्‍य मंत्री के ऊपर हमला हुआ है इसलिए जवाब देना चाहिए, आप जवाब दिलवाइये।

श्री उपाध्‍यक्ष: दे देंगे।

श्री धर्मपाल चौधरी: संसद पर हमला हुआ तब कहां चले गये थे अफजल को फांसी नहीं देने में। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आप पहले कार्यवाही चलने दीजिये। (व्‍यवधान)

श्री धर्मपाल चौधरी: मंत्री की बहुत चिंता लग रही है, अफजल के बारे में क्‍या कहते हो। (व्‍यवधान)

श्री अमरा राम(धोद): उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय तैयार हैं।(व्‍यवधान)

श्री धर्मपाल चौधरी: संसद पर हमला हुआ, पूरे देश के जितने सांसद थे उनको खतरा था और अफजल को फांसी देनी थी उसमें क्‍या हुआ महाराज। (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: वोट चाहिए वहां तो, वोटों में नुकसान हो जायेगा।(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा: उस एवज में इनको फांसी पर चढ़ाना है क्‍या? (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: उपाध्‍यक्ष महोदय, हम आपके माध्‍यम से यह जानना चाहते हैं कि कल यातायात मंत्री पर हमला होने के बाद सरकार ने मुख्‍य मंत्री की हिफाजत के लिए क्‍या-क्‍या इंतजाम किये हैं, वह जानना चाहते हैं क्‍योंकि हमें पूरी आशंका है कि अगला हमला आर.एस.एस. और विद्यार्थी परिषद की और से मुख्‍य मंत्री पर हो सकता है...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप इस तरह से...(व्‍यवधान) मंत्री महोदय दे रहे हैं...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: पूरी आशंका है हमको यह। पूरा खतरा बना हुआ है मुख्‍य मंत्री के लिए। यह बहुत गम्‍भीर बात है, कोई साधारण बात नहीं है।(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: गृह मंत्रीजी वक्‍तव्‍य दे देंगे।(व्‍यवधान)

श्री जितेन्‍द्र सिंह: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इनको मुख्‍य मंत्री की चिंता नहीं है, हमें चिंता है मुख्‍य मंत्री की।

एक माननीय सदस्‍य: गृह मंत्रीजी का वक्‍तव्‍य कराया जाय।(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये। (व्‍यवधान) वक्‍तव्‍य दे रहे हैं। स्‍थान ग्रहण कीजिये। (व्‍यवधान) गृह मंत्री महोदय वक्‍तव्‍य दे रहे हैं, स्‍थान ग्रहण कीजिये आप।

श्री संयम लोढ़ा: राजस्‍थान की पाँच करोड़ जनता को चिंता है इस बात की।(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण कीजिये। (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, बैठिये-बैठिये, माननीय सदस्‍य। बीच में नहीं।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग: मुझे सूचना मिली है उपाध्‍यक्ष महोदय, संयम लोढ़ाजी ने कुछ आरएसएस स्‍टाइल की नेकरें सिलवाई हैं उनको पहना कर अपने कार्यकर्ताओं को भिजवा कर हमला करवायेंगे। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: यह है असली षडयंत्र।

श्री जितेन्‍द्र सिंह: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सिरोही से आने वाले सदस्‍य ने सिर्फ मुख्‍य मंत्रीजी की सुरक्षा के बारे में जानकारी चाही है, इनको तो किसी को चिंता नहीं है मुख्‍य मंत्री की सिक्‍योरिटी की। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा: यह जालौर से आने वाले माननीय सदस्‍य कह रहे हैं कि संयमजी ने नेकरें सिलवाई हैं, आपने ठेका ले लिया क्‍या नेकरें पहनने का। (व्‍यवधान)

Lpm/akt/1450/2h/6032007

 

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य ने यह कहा है कि अब आशंका है कि मुख्‍यमंत्रीजी पर हमला होगा तो इनको कैसे पता? क्‍या आपने करवाया है हमला, आपके पास सारी जानकारी है ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): चोर को भी चोरी करने के लिए कहते हैं और मकान मालिक को कहते हैं कि सावधान रहो। यह योजना इनकी है। इनकी प्‍लानिंग ही कि यह सब कुछ हो रहा है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: मीणा साहब आप बैठिये, वह वक्‍तव्‍य दे रहे हैं आप बाद में कहना ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं एक लाईन में बात करना चाहूंगा कि परिवहन मंत्रीजी पर हमला तो हुआ है, हमला करने वाले आर एस एस, बजरंग दल के लोग हैं पर मंत्रीजी आपसे भी तो किसी न किसी का लगाव होगा। खेमे दो हैं एक गृहमंत्री का और एक मुख्‍यमंत्री का। इसलिए कृपा करके ऐसी कोई बातें नहीं आने दें, आप इनकी सुरक्षा करें ...(व्‍यवधान) बदले में कितने को पकड़ा और कितनों को पकड़ेंगे यह बता दीजिए।

 

गृह मंत्री का जिला कलेक्‍ट्रेट जयपुर में कर्मचारियों और पत्रकारों के मध्‍य हुए विवाद के संबंध में वक्‍तव्‍य

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कानून तोड़ने वाला न हिन्‍दू होता है, न मुसमान होता है, न आरएसएस होती है, न बीजेपी होती है, न कांग्रेस होती है, जो कानून तोड़ता है कानून उसके खिलाफ कार्यवाही करता है इसमें आपको कहीं संदेह करने की जरूरत नहीं। केवल बात के लिए बात कहना है तो एक अलग बात है जिसने अपराध किया वह दण्‍ड पायेगा चाहे वह मैं हूं, चाहे कोई भी हो, उसमें क्‍या फर्क पड़ने वाला है। उपाध्‍यक्ष महोदय, जिला कलेक्‍ट्रेट जयपुर में कर्मचारियों और पत्रकारों के मध्‍य हुए विवाद के संबंध में दिनांक 2.3.07 सायंकाल के लगभग 5 बजे जिला कलेक्‍ट्रेट कर्मचारियों की विभागीय समिति द्वारा होली की पूर्व संध्‍या पर होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में कुछ समय के लिए जिला कलेक्‍टर और अन्‍य अधिकारी भी सम्मिलित हुए थे। अधिकारियों के प्रस्‍थान के उपरान्‍त इस कार्यक्रम के दौरान कुछ कर्मचारियों द्वारा आर्केस्‍ट्रा की महिलाओं, कलाकारों के साथ नृत्‍य करने, उन्‍हें रूपए इत्‍यादि देने एवं परिसर में नशे की हालत में पत्रकारों से गाली-गलौच करने आदि के आरोप सहित कुछ समाचार पत्रों में दिनांक 3.3.07 को प्रकाशित हुए थे तथा कुछ फोटोग्राफ भी प्रकाशित हुए थे। इस आशय की शिकायत प्राप्‍त होने पर जिला कलेक्‍टर द्वारा मौखिक आदेश प्रदान कर अतिरिक्‍त जिला कलेक्‍टर (प्रथम) से तथ्‍यात्‍मक प्रतिवेदन लिया गया। इस तथ्‍यात्‍मक प्रतिवेदन में चार कर्मचारियों के द्वारा कार्यालय परिसर में अशोभनीय आचरण करने के आरोप में अनुशासनात्‍मक कार्यवाही प्रस्‍तावित की गई तथा यह भी अंकित किया गया कि कुछ कर्मचारियों द्वारा शराब का सेव किया गया। जिसकी विस्‍तृत जांच किया जाना प्रस्‍तावित किया गया है। इस तथ्‍यात्‍मक प्रतिवेदन को प्राप्‍त होने पर जिला कलेक्‍टर द्वारा चारों  कर्मचारियों के विरूद्ध 166 सी.सी. के अंतर्गत आरोप पत्र जारी किये तथा कुछ कर्मचारियों द्वारा कलेक्‍ट्रेट में शराब पीने अथवा शराब पीकर कलेक्‍ट्रेट परिसर में आने के संबंध में अतिरिक्‍त जिला कलेक्‍टर (द्वितीय) को एक जांच और दी है। दिनांक 5.3.07 को कलेक्‍ट्रेट कर्मचारियों द्वारा अपरान्‍ह् डेढ़ बजे एक बैठक का आयोजन कर होली मिलन समारोह के बारे में समाचार पत्रों में छपे समाचारों का विरोध प्रकट किया था। लगभग दो बजे कर्मचारी कलेक्‍ट्रेट परिसर में नारे लगाते आये।

(     बजे)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष पदासीन)

जहां लगभग 200 कर्मचारी एकत्रित हुए। कुछ कर्मचारी ऊपर की मंजिल के बरामदे में भी खड़े होकर देख रहे थे तथा कुछ पत्रकारों और फोटोग्राफर इस संपूर्ण गतिविधि का कवरेज कर रहे थे। पत्रकारों द्वारा फोटो खींचने का आरोप कर्मचारियों द्वारा चिल्‍लाकार विरोध किया तो ऊपर और नीचे मौजूद कर्मचारी और पत्रकारों के बीच में विवाद हुआ। पत्रकारों और समाचार पत्रों के फोटोग्राफरों से कलेक्‍ट्रेट कर्मचारियों के द्वारा मारपीट और धक्‍कामुक्‍की की स्थिति बनी। इस विवाद के उपरान्‍त कर्मचारीगण अपने कार्यालयों में चले गये और पत्रकार एकत्रित होकर कलेक्‍टर जयपुर को ज्ञापन देने गये। ज्ञापन देने के उपरान्‍त कर्मचारियों के विरूद्ध नारेबाजी, नारे लगाते हुए, कर्मचारियों के विरोध में नारे लगाते हुए पत्रकारों से कलेक्‍ट्रेट के एक अधिवक्‍ता की भी झड़प हो गई। इस पूरे घटनाक्रम में कर्मचारी, पत्रकार और एक अधिवक्‍ता द्वारा आपसी मारपीट, लड़ाई-झगड़े, कैमरा, फलैस और मोबाईल आदि छिनने लगे, के संबंध में कुल तीन मुकदमे थाना बनीपार्क जयपुर शहर (दक्षिण) में दर्ज कराये गये। जो निम्‍नलिखित है:-

मुकदमा संख्‍या 42/07 अपराध अंतर्गत धारा 147, 149, 342, 323, 392 समय 4.30 पी.एम. दिनांक 5.3.07 यह अभियोग श्री प्रमोद शर्मा, पत्रकार दैनिक नवज्‍योति एवं अन्‍य पत्रकार प्रेस फोटोग्राफरों की रिपोर्ट पर उनके साथ कर्मचारियों द्वारा मारपीट और कैमरा इत्‍यादि छीनने के संबंध में दर्ज हुआ।

मुकदमा नम्‍बर-43/07 अपराध अंतर्गत धारा 143, 341, 323 समय 5.45 पी.एम. दिनांक 5.3.07 यह अभियोग श्री जितेन्‍द्र भारद्वाज एडवोकेट जो कि कर्मचारी नेता श्री रामावतार भारद्वाज के पुत्र हैं, की रिपोर्ट पर उसके साथ मीडिया-कर्मियों द्वारा तथाकथित मारपीट और धरने के आरोप की शिकायत पर दर्ज कराया गया।

मुकदमा नम्‍बर- 44/07 अपराध अंतर्गत धारा 143, 353, 504 समय 8.00 पी.एम. दिनांक 5.3.07 यह अभियोग कर्मचारी नेता श्री रामावतार भारद्वाज, अध्‍यक्ष, मंत्रालयिक कर्मचारी संघ और अन्‍य की रिपोर्ट पर पत्रकारों और प्रेस फोटोग्राफर के विरूद्ध गाली-गलौच और राज कार्य में बाधा डालने की शिकायत पर दर्ज किया गया।

इन तीन मुकदमों का अनुसंधान एल.एल.एन. शर्माजी ने रात को मुझे टेलीफोन किया था लगभग साढे 8-9 बजे अच्‍छा हो कि यह एडीशनल एस.पी. स्‍तर से इस मुकदमे की जांच कराई जाये। उनकी बात को उसी समय एलीफोनिक कह कर के यह मुकदमा एडीशनल एस.पी. को दिया है और इसमें जिनके खिलाफ जो मुकदमें बने हैं उसके आधार पर जो भी कार्यवाही करनी होगी वह निश्चित रूप से हम कार्यवाही करेंगे। इसमें किसी को किसी प्रकार का संदेह होने का कोई कारण नहीं है, चाहे वह मेरे द्वारा हुआ अपराध या किसी के द्वारा, मैं इस बात के हमेशा पक्षधर रहा हूं कि अगर किसी ने गलती की है तो उसे निश्चित रूप से दण्‍ड मिलना चाहिए, उसको बचाने की कोई न मंशा है, न कभी विचार है और उसके बाद भी अगर किसी को कोई संदेह लगता है कि इस जांच में कहीं कोई कमी है तो उसको ठीक करने की जिम्‍मेदारी मेरी है, मुझे आप बताइए, मैं उसको उस आधार पर भी आगे बढ़ाने के लिए प्रयास करूंगा।

श्री सुरेश मीणा (करौली): आप कार्यवाही कर रहे हैं लेकिन कलेक्‍टर के सामने तक ये सारे काम हुए। कलेक्‍टर के खिलाफ क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं आप?

श्री अध्‍यक्ष: पहले आप उनको बोलने दें।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो कलेक्‍टर के बारे में आपकी जो सोच है कि कलेक्‍टर को बुला लाये थे और कलेक्‍टर आया था और जैसे ही थोड़ी देर बाद ही कलेक्‍टर वहां से चला गया। उसकी उपस्थिति में जो रिपोर्ट मेरे सामने आई है उस रिपोर्ट में कलेक्‍टर के जाने के बाद....

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय अध्‍यक्ष महोदय ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप उसको बोलने दीजिएगा। अजमेर से आने वाले माननीय सदस्‍य अभी सुन लें आप, बैठ जाइये आप।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): कलेक्‍टर के जाने के बाद यह जो भी अश्‍लील नृत्‍य हो सकते हैं या रूपये उताकर करके उनको देना का और यह उसके बाद हुआ। जो मेरे पास अभी तक रिपोर्ट है अगर इसमें कोई कमी-खामी है तो इसको भी देखा जा सकता है। इसमें कोई यह नहीं है कि इसमें कोई बचाने का सवाल है कुछ नहीं है। जो रिपोर्ट मुझे आज मुझे प्राप्‍त हुई है उसको मैंने आपके सामने  रखा है अगर इसमें कहीं गलती है तो आप में से बताये तो उसके आधार पर भी उसको देखने का हमारा काम है।

श्री सुरेश मीणा (करौली): उस प्रोग्राम में कलेक्‍टर साहब मौजूद थे इसलिए ...(व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सरकार का ध्‍यान इस और आकर्षित करना चाहता हूं कि यह कोई पहला मौका नहीं है कि जब पत्रकार पीटे हो और हमेशा सरकार मूकदर्शक बनी रही हो। इस पूरे प्रकरण के अन्‍दर जितने जिम्‍मेदारवाईज कलेक्‍टर हैं, सबसे ज्‍यादा जिम्‍मेदार वह व्‍यक्ति है जिस कलेक्‍ट्रेट के अंदर डांस पार्टी हो, शराब पार्टी हो, जिस कलेक्‍ट्रेट में पत्रकारों को पीटा जाए, उसमें कलेक्‍टर को स्‍पीयर करके आप जांच कराएंगे। यह कैसे पोसिबल है? या तो कलेक्‍टर वहां से हटे फिर आप जांच करायें। क्‍योंकि यह पहला हादसा नहीं है। ऐसे हादसे अजमेर में भी हुए हैं, ब्‍यावर में भी हुए हैं, पुष्‍कर में भी हुए हैं, अलवर में भी हुए हैं और हमेशा सरकार इसको मूकदर्शकता से इसको देखती रही । इजराइली बालाओं ने डासं किया पुष्‍कर में तो आपने कलेक्‍टर को हटाया, अजमेर से वह बाहर हुआ था। यह कैम्‍पस के अन्‍दर हुआ है। क्‍या उसको उचित मानते हैं कि सरकारी कार्यालय अयासी के अड्डे बनें, इसको आप ठीक मानते हैं कि शराब के अड्डे बनें, इसको आप ठीक मानते हैं कि जो पत्रकार आज का चौथा स्‍तंभ है उसको लाठी के बल से दबाया जाए? सरकार इसमें क्‍यों नहीं गंभीर होती है कि जो जिम्‍मेदार अफसर हैं, आप छोटी-मोटी मछलियों को फंसाकर के यह सब बरी होना चाहते हैं। कैसे बात चलेगी? एक एडीशनल एस.पी. या ए.डी.एम. क्‍या जांच करेगा कलेक्‍टर के होते हुए? जब तक कलेक्‍टर को आप वहां से नहीं हटाएंगे आप उसको हटाकर के जांच नहीं कराएंगे तब तक न तो आप न्‍याय करेंगे पत्रकारिता के साथ और जो पत्रकारों के साथ आपने न्‍याय नहीं करोगे तो कहीं-न-कहीं यह प्रहार इन-डायरेक्‍टली लोकतंत्र पर होगा। पत्रकार आपकी बात को उजागर करता है। आज चूंकि पत्रकार आईना के माध्‍यम से या दूसरे माध्‍यम से आपकी बातों को उजागर कर दें तो आप होस्‍टाइल हो गये। उनके साथ गाली, लड़ाई आप करो, छापे अख़बार, आप हो जाए होस्‍टाइल यह बात चलने वाली नहीं है। पत्रकारों की सुरक्षा बहुत जरूरी है तो मेरा आपसे निवेदन है कि कलेक्‍टर पर कार्यवाही की जाए पहले, उसके बाद जांच कराई जाए अन्‍यथा यह लोकतंत्र में अपराध निरन्‍तर होते रहेंगे। हमने अजमेर में देखा है अजमेर में तो पीटने वाले आपके अनुसरण वाले लोग थे, पूरा अजमेर बंद रहा, कोई कार्यवाही नहीं हुई, ब्‍यावर म्‍यूनिसिपल्‍टी में पीटा कर्मचारियों को, वो कर्मचारी थे, कोई कार्यवाही नहीं हुई पत्रकारों पर, पत्रकारों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई।

 

भीम/अरुण/6.3.07/15.00/2j

 

तो यह कुल मिलाकर आपने जो सिस्‍टम बना लिया है इसको ठीक करें आप।

श्री देवीशंकर भूतड़ा (ब्‍यावर): ...(व्‍यवधान)... कांग्रेस के लोगों ने ही पीटा है पत्रकारों को ...(व्‍यवधान)...

डॉ.श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर):  वो तो अख़बार बता रहे हैं।

श्री देवीशंकर भूतड़ा (ब्‍यावर): राष्‍ट्रीय कांग्रेस के लोगों ने ही वहां के लोगों ने पत्रकारों को पीटा और दूसरे दलों को बदनाम करने का षडयंत्र रचा है पत्रकारों को पीटा है वास्‍तव में गलत पीटा है लेकिन पीटा आपने ही है। पीटा आपने ही है।

डॉ.श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर):  वो अलग बात है। उसकी भी जांच कराओ आप।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): उसकी भी कार्यवाही करवाओ ...(व्‍यवधान)...

डॉ.श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर):  आपके लोग ही कर रहे थे। अब वापस आंदोलन आपके लोग ही कर रहे हैं।

डॉ.श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर):  मैं यह इसलिए कह रहा हूं कि पत्रकारों पर हमला एक संस्‍था पर हमला है और संस्‍था पर हमला किसी लोकतंत्र में ठीक नहीं है।

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य का जो सोच है पत्रकारों को सुरक्षा और उनका ध्‍यान रखना चाहिए इसमें कोई दो राय हो नहीं सकती और किसी का दो मत हो नहीं सकता। अब तक जितनी घटनाएं घटी हैं घटनाओं को मैं एक्‍शन लेने के बाद भी मैं यह गारंटी नहीं कर सकता हूं कि इसके बाद कोई घटना घटेगी ही नहीं। न आप कर सकते हो न मैं कर सकता हूं। सरकार में आप रहो या मैं रहूं कोई भी रहे कोई भी यह गारंटी नहीं कर सकता । अपराध होने के बाद अपराधी को सज़ा दिलाना यह मेरा कर्तव्‍य है और मैंने इस कर्तव्‍य को जब-जब भी अवसर आया बिना किसी लाग लपेट के बिना किसी बात के मैंने इस बात की कोशिश की कि जिसका जो अपराध है वो अपराध का दंड भुगतेगा वो चाहे मेरा व्‍यक्ति हो, भाई हो मैंने इस बारे में नहीं की। मैं इतना कह सकता हूं कि जो रिपोर्ट जो दी है अब आप और मैं सब जानते हैं कि होली के फंक्‍शन में और होली के कार्यक्रम में आप भी सार्वजनिक जीवन जीते हो और मैं भी जीता हूं कभी आपको किसी ने बुला लिया और बुलाने के बाद पर्दे से अचानक कौन सामने आ जाए अब आपने पूरी लिस्‍ट तो नहीं पढी पहले कि यहां क्‍या कार्यक्रम होने वाला है पर जैसे ही ध्‍यान आया व्‍यक्ति ने अगर एक्‍शन ले लिया तो उसका मन उस एक्‍शन के साथ जुड़ा हुआ नहीं है।

डॉ.श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर):  गृह मंत्री फिर क्‍या दोष था अजमेर कलेक्‍टर का जो इजराइली बालाओं के डांस पर आपने उसको ट्रांसफर किया ? क्‍या दोष था अजमेर कलेक्‍टर का ? क्‍या दोष था एसडीओ का?

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं सोचता हूं कि ये पहली बार कार्यवाही हुई है चार लोगों के खिलाफ पुलिस ने बयान लेकर के ...।

डॉ.श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर):  जिस कलेक्‍ट्रेट के अन्‍दर जिस कलेक्‍ट्रेट में कार्यक्रम हो रहा है और आप कलेक्‍टर को सस्‍पेंड कर दें, कैसे बात चलेगी?

श्री सुरेश मीणा (करौली): अजमेर में कलेक्‍टर एसटी का था इसलिए कर दिया उसको। यहां एससी/एसटी का होता तो हटा देते अब तक।

डॉ.श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर):  कलेक्‍ट्रेट में हुआ यह काम कलेक्‍ट्रेट में हुआ। कलेक्‍ट्रेट के अन्‍दर काम हुआ यह।

श्री सुरेश मीणा (करौली): हटाया जाए कलेक्‍टर यहां से।

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): जिसके खिलाफ कार्यवाही करनी थी कलेक्‍टर के खिलाफ भी कार्यवाही की है, ऐसा नहीं है...।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): मंत्री जी, एक मिनट। इसमें जो मैन मुद्दा है वो यह है, होली और यह नहीं है, जयपुर जो राजधानी का प्रमुख शहर है, असेंबली चल रही है और असेंबली चलने के बाद क्‍या आपके नोटिस में है कि जिलाधीश महोदय की प्रजेंस में जिलाधीश कार्यालय के समय में यह घटना हुई या नहीं हुई? मतलब यह आप केस रजिस्‍टर कर रहे हैं और केस रजिस्‍टर करने में जिसके खिलाफ कार्यवाही करें वो अलग इश्‍यु है। प्रेस का अपना काम है प्रेस ने जाकर एक चीज को हाइलाइट किया। हाइलाइट करके इलेक्ट्रानिक मीडिया में आया, इलेक्‍ट्रानिक मीडिया में आने के बाद यदि कलेक्‍टर का इंटेंशन क्लियर होता तो वेरी फर्स्‍ट डे उसके टीवी में आने के बाद उनको एक्‍शन ले लेना चाहिए सुओमोटो। कलेक्‍टर ने एक्‍शन नहीं लिया जिस दिन की घटना हुई उस दिन शाम को ईटीवी पर नेक्‍स्‍ट डे अख़बार में सब आ गया तब तक कलेक्‍टर ने इसके ऊपर किसी पर एक्‍शन नहीं लिया तो first onus, exemplary punishment के लिए आप गृह मंत्री जी, आपकी आत्‍मा से उठाकर कह दो यदि कलेक्‍टर के पाँच बजे के टाइम के अन्‍तर्गत यह कार्यक्रम हुआ है तो first responsibility goes to the Collector and please don’t send wrong signals.  आप तो संस्‍कार के आदमी हैं संस्‍कारित आदमी हैं आप  किस तरह के संस्‍कार देना चाहते हैं कि ऑफिस टाइम में इस तरह की मीटिंग होगी इस तरह के कार्यक्रम होंगे और कार्यक्रम होने के बाद हम कह दें कि पाँच बजे के बाद घटना हुई है यदि मान लो कर्मचारियों ने कार्यक्रम किया होली पर ऐसा कार्यक्रम होता तो कोई तकलीफ नहीं है कार्यक्रम होने के बाद क्‍या कलेक्‍टर का धर्म नहीं बनता था कि कलेक्‍टर के जब नोटिस में आ गया कि ईटीवी पर राजस्‍थान की पाँच करोड़ जनसंख्‍या ने देख लिया कि वहां पर शराब का एक कर्मचारी टीवी पर आया हुआ है और वहां पर कलेक्‍टर बैठा हुआ है डांस हुआ है टीवी पर आ चुका है जब यह विजुअल्‍स आ चुका है तो सरकार का धर्म नहीं बनता है कि सुओमोटो एक्‍शन ले । आज दिन तक हिन्‍दुस्‍तान के अन्‍दर जब जब भी इलेक्‍ट्रानिक मीडिया में कोई चीज आयी है गवर्नमेंट ने सुओमोटो एक्‍शन लिया है। राजस्‍थान सरकार सुओमोटो एक्‍शन नहीं लेकर इस तरह से यदि प्रोटेक्‍ट करना चाहती है तो हम क्‍या सिग्‍नल देना चाहते हैं?

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं आपकी बात से सहमत हूं केवल एक ही जगह है जिसमें टाइमिंग के बारे में जो भी कैमरे चले हैं उसमें सब में टाइम होगा उसको देखने से स्‍पष्‍ट हो जाएगा कि यह घटना ऑफिस टाइम में थी या ऑफिस टाइम के बाद थी । बहुत स्‍पष्‍ट हो जाएगा क्‍योंकि उससे बड़ा एवीडेंस कोई नहीं हो सकता और वो एवीडेंस हम कलेक्‍ट कर रहे हैं अगर वो उस पीरियड के अन्‍दर था तो निश्चित रूप से कलेक्‍टर की जिम्‍मेदारी बनती है इसमें कोई दो राय नहीं है।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): कलेक्‍टर का ऑफिस टाइम नहीं है कलेक्‍टर का काम ऑफिस टाइम का नहीं है. Collector is the head of the district. उसका जो कंडक्‍ट है वो 24 घटे कंडक्‍ट इस तरह का होना चाहिए कि जो एग्‍जम्‍पलरी हो समाज के सामने । यदि कलेक्‍टर का एग्‍जम्‍पलरी नहीं है तो निश्‍चित तौर पर आप अधिकार नहीं देते फिर तो काहे को आप कलेक्‍टर को करते आप मंत्री भी नचवाइये क्‍या तकलीफ है? मंत्री के खिलाफ एक्‍शन मत लीजिये यदि आप यह मेसेज देना चाहते हैं तो क्‍या तकलीफ है?

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): गृह मंत्री जी यह कार्यक्रम विधान सभा में भी हो जाए।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय गृह मंत्री जी, न तो आप बहुमत के आधार पर ....।

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): नहीं-नहीं, कोई बहुमत नहीं।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): न तो आप बहुमत के आधार पर अपनी सरकार की छवि को ठीक कर सकते न बहुमत के आधार पर ब्‍युरोक्रेसी में यह सिग्‍नल दे सकते हैं कि आप जैसा होम मिनिस्‍टर होने के बाद यदि इस तरह की घटनाएं होती हैं तो कटारिया जी, आपका भाषण सुना है मैंने यहां विरोध में बैठ कर आपकी आत्‍मा प्‍लीड करती है तो आप कह दीजिये हम बैठ जाएंगे. You appreciate it? आप यह पसंद करते हैं कि राजस्‍थान के अन्‍दर इस तरह की घटनाएं हो जाएं और 48 घंटे तक सरकार कोई एक्‍शन नहीं ले और मैं कलेक्‍टर को छोड़ देता हूं मैं सबसे पहले ऑनेस्‍ट होता गवर्नमेंट का गवर्नमेंट सुओमोटो आकर एक्‍शन लेना चाहिए और कहना चाहिए कि बात खतम हो गयी। आपने आज दिन तक पत्रकार की पिटाई हो जाए दो बार पिटाई हो जाए पत्रकार की तब तक सरकार ने काई एक्‍शन नहीं लिया दुर्भाग्‍यपूर्ण है। एक तरफ चौथा स्‍तम्‍भ कहते हैं हम और पत्रकारों की पिटाई हो जाए, इतनी बड़ी घटना हो जाए और सरकार अभी तक यह असर्टेन नहीं कर पाई कि पाँच बजे के पहले हुई कि पाँच बजे बाद हुई। मैं समझता हूं कि आपको विधान सभा में आने के पहले असर्टेन कर लेना चाहिए था कि यह घटना पाँच बजे की है या पाँच बजे बाद की है और घटना के बाद आपको खुद को आकर कहना चाहिए कि ठीक है इस तरह की घटनाओं में कलेक्‍टर का रोल नहीं हो सकता है लेकिन एक मेसेज देने के लिए कि नीचे लेवल के सरकारी कर्मचारी इस तरह का काम नहीं करें यह मेसेज तो सरकार को विधान सभा चल रही थी तब देना चाहिए यही विधान सभा का मतलब है। विधान सभा नहीं चलती तो छ: महीने तक आपके बीच में नहीं आते हम । हाउस चलने के बाद यदि इस तरह की घटना जयपुर में हो जाए मंत्री जी मैं समझता हूं कि इस सरकार को इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए और यदि सरकार गंभीरता से नहीं सोचती है तो मैं समझता हूं कि माननीय गृह मंत्री जी आप जैसा संस्‍कारवान गृह मंत्री यदि राजस्‍थान में संस्‍कारों को बिगड़ते हुए देखता है और विधान सभा में यह भाषण देता है तो इससे बड़ा दुर्भाग्‍य राजस्‍थान का नहीं हो सकता है। आपको खुद को आकर एग्‍म्‍पलरी पनिश्‍मेंट हाउस के सामने खड़े होकर देना चाहिए।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): एक बात मैं आपसे और पूछना चाहता हूं. ADM was present there. Why type of inquiry are you getting conducted by the ADM? आप एडीएम्‍ से इंक्‍वायरी, पहली इंक्‍वायरी एडीएम से जो वहां मौजूद था दूसरी इंक्‍वायरी एडीएम से किसी और मुद्दे पर जो पार्टी है इसके अन्‍दर वो इंक्‍वायरी कर रहा है। किसी प्रकार की आप इंक्‍वायरी करा रहे हैं?

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैंने आपको...। शायद मेरी भावना आप समझे नहीं है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मेरा निवेदन सुन लें आप । आप रिप्‍लाई तो पूरा देंगे ही। मैं उन बातों को दुहराना नहीं चाहता जो नाथद्वारा से आने वाले सम्‍माननीय सदस्‍य ने कही हैं।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): एक मिनट। संभागीय आयुक्‍त ने कमेंट कर लिया प्रेस में. I have heard it. सबसे दुर्भाग्‍यपूर्ण यह है इसके बाद संभागीय आयुक्‍त ने ईटीवी पर लाइव कमेंट किया है और फिर आप एडीएम से जांच करवा रहे हैं। राजेन्‍द्रजी राठौड़, पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर का ईटीवी पर लाइव कमेंट है. I have heard on Etv what the Parliamentary Affairs minister said. आपने जनता को आश्‍वासन दिया ...(व्‍यवधान)... आज यहां मंत्री जी हैं आपने जनता को आश्‍वासन दिया है कि मैं दिखवाऊंगा और यह कार्यवाही करूंगा और आप मंत्री बैठे हुए हैं आपके मन में नहीं हुआ कि 48 घंटे हो गये और हम कार्यवाही करें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): कार्यवाही हो रही है।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): कौनसी कार्यवाही हुई है? बताइये। पाँच बजे तक जानकारी नहीं है कि कार्यवाही हो रही है क्‍या कार्यवाही ? आप गृह मंत्री जी के सामने बोल ही नहीं रहे हैं। आपका ईटीवी पर इंटरव्‍यु है, Mr. Rajendra Singh Rathore, as the Parliamentary Affairs Minister. That we have heard. आपने 48 घंटे निकल गये 48 घंटे बाद आपकी जिम्‍मेदारी बनती थी कि जनता के सामने आप उदाहरण प्रस्‍तुत करते. You want to justify it? कटारिया जी, मैं समझता हूं कि या तो आपको इन सब चीजों की जानकारी नहीं है कि ईटीवी ...।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): Mr. Parliamentary Affairs Minister, let me complete.

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा):....में कैसे इंटरव्‍यु आया कैसे पार्लियामेंट्री मिनिस्‍टर का इंटरव्‍यु आया है ये सब ईटीवी पर लाइव आ चुका है इसके बाद माननीय गृह मंत्री जी, मैं समझता हूं अध्‍यक्षजी आप भी बैठे हुए हैं मैं समझता हूं कि गृह मंत्री जी आपसे मैं अपेक्षा करता हूं कि आप एग्‍जम्‍पलरी पनिश्‍मेंट आप कुछ मुद्दों पर तो हाइकमान के पास गये हैं कुछ मुद्दों पर मुख्‍यमंत्री जी से शिकायत की आपने, यह मुद्दा नहीं बनता क्‍या जिस पर हाइकमान से जाकर शिकायत करें यह मन में नहीं आता? मैं समझता हूं कि सरकार को कुछ तो सोचना चाहिए कि हम किस तरह की बातें कर रहे हैं। मैं समझता हूं कि आप खुद आगे बढ़कर एक उदाहरण प्रस्‍तुत करें जिससे राजस्‍थान की जनता कह सके कि इस सरकार में संस्‍कारवान आदमी है नहीं तो बहुत बड़ा गलत मैसेज जाएगा जिसमें आप भी पार्टी बनेंगे और और आपको यदि नहीं जगती कटारिया साहब, तो मैं समझता हूं कि संस्‍कारों की बात नहीं करनी चाहिए।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं कि आप कैसे इंक्‍वायरी करा रहे हैं? एडीएम जो मौजूद था आपने इंक्‍वायरी कलेक्‍टर साहब ने एडीएम को दे दी। एडीएम की रिपोर्ट आ गयी कि कुछ लोग पीये हुए थे । आगे खतम मत करो एग्‍जनोरेट मत करो नहीं और उधम मचेगा. He is a very clever fellow. आपने दूसरी इंक्‍वायरी एडीएम (सिटी) को दे दी जो सारे के सारे पार्टी हैं । जो लोग पार्टी हैं आप उनसे इंक्‍वायरी करा रहे हैं अगर आप में माननीय गृह मंत्री जी, जैसा कह रहे थे कि आप संस्‍कारवान हैं मैं जानता हूं कि आपका मन साफ है लेकिन आप दबाव के अन्‍दर इस सदन की समिति से जांच कराने के लिए तैयार हैं, अगर आपका चेयरमेन हो हम लोग माइनोरिटी में हो तो आप करायेंगे सदन की समिति से ? यह कोई आदमी करने वाला नहीं है इसके अन्‍दर जिसमें आपके अधिकारियों को बचाने के लिए और कर्मचारियों को दोनों को बचाने के लिए सब लोग लग जाएंगे।

 

कैलाश/    6.3.07  15.10 (1) 2k

 

देखिए, अख़बार वाले कुछ चीजों को उजागर करते हैं, समाज में नैतिकता है । कारण आज यह भी है कि जो आपका इलेक्ट्रोनिक मीडिया है उनमें आपस में इतना कम्‍पीटिशन है कि वह स्‍कूप करना चाहते हैं कि कौनसी खबर कौन पहले दे रहा है । आप ठोक रहे हैं, पीट रहे हैं सब कुछ कर रहे हैं यह तो मुनासिब नहीं है । It is all farce. It is all farce. इस इन्‍क्‍वायरी में कम से कम मुझे और मेरी पार्टी को तो कोई भरोसा नहीं है । अगर आपको करानी है... (व्‍यवधान) मैं कहता हूं कि आपकी अध्‍यक्षता में कमेटी बना लीजिए । हम आपकी अध्‍यक्षता में काम करने को तैयार हैं। आप बनाइए और कराइए जांच इस सदन में हम 7 दिन में रिपोर्ट दे देंगे । कहां दिक्‍कत आ रही है इसमें ।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैंने अपनी बात कहते समय भी आपको कहा था शायद वह शब्‍द थोडे होंगे, मैंने कहा कलेक्‍टर की कभी अगर कहीं कोई कमी खामी आयी तो हम उसकी भी जांच करा कर उसके बारे में भी निर्णय लेंगे, यह मैंने अपने शब्‍दों में कहा है एक लाइन में । ऐसा नहीं है कि मैंने कहीं उसको बचाया है । मैं सोचता हूं कि आपकी और हमारी सब की मंशा है कि अगर कोई गलत चीज हुई है तो उसका निदान होना चाहिये और भविष्‍य में दुबारा रिपीट न हो उसकी व्‍यवस्‍था होनी चाहिये । उसमें किसी प्रकार का किसी को कोई संदेह नहीं है । (व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): जो जिम्‍मेदार लोग हैं उनको दण्‍ड दो ।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): पुष्‍कर से आने वाले माननीय सदस्‍य एक मिनट । निश्चित रूप से यह जो एक संदेह का बिन्‍दु है कि जो वहां मौजूद था वही उसकी जांच कर रहा है यह एक संदेह का बिन्‍दु है । कले‍क्‍टर की उपस्थिति है, नहीं है, कितना है कितना नहीं है, उसके कैम्‍पस में जो कुछ भी बातचीत हुई निश्चित रूप से, मैं संभागीय आयुक्‍त को इसकी जांच देकर... (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): सदन की कमेटी बनाने में क्‍या दिक्‍कत है आपको ।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं कोई जांच अधिकारी बनकर जांच करुंगा और रिपोर्ट लाऊंगा यह तो मेरे लिये संभव नहीं है ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): रिपोर्ट नहीं, हम तो आपको जांच और एक्‍शन के लिये ओथराइज्‍ड करते हैं । हम आपसे कोई रिपोर्ट नहीं मांगते हैं आप जांच कर के एक्‍शन लें । आपको लगता है नहीं हुआ है तो मत लें । आपको लगता है घटनाक्रम नहीं हुआ है तो आप एक्‍शन मत लीजिए इसके लिये भी आपको अधिकृत करते हैं ।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): सारे बिन्‍दु को देखने के लिये ....

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय गृह मंत्री जी जिन कर्मचारियों को आपने 16 सीसी का नोटिस दिया है आपने तो अभी तक इतने बडे घटनाक्रम में उन कर्मचारियों को मुअत्‍तल करने की भी सोची । 16 सीसी का नोटिस किस काम का है। इमीजिएटली आप उनको सस्‍पेंड तो करो ।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आप एक बात सुन लो आप यहां हाउस के दवाब में अगर मुझसे कुछ कार्यवाही कराना चाहोगे तो मैं कभी नहीं करूंगा । दवाब में नहीं करूंगा जो करूंगा वह सही करूंगा इतना विश्‍वास दिला सकता हूं लेकिन दवाब के कारण से मुझे आप मजबूर कर के मुझ से कोई कार्यवाही यहां कहलवा दो यह कभी संभव नहीं है ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप दवाब में तो मत करो लेकिन कम से कम उन कर्मचारियों को सस्‍पेंड तो करो । आपने तो सस्‍पेंड करने लायक भी नहीं समझा। जिन कर्मचारियों को आपने 16 सीसी का नोटिस दिया है ... (व्‍यवधान)

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (केसरीसिंहपुर): ... (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, इस चर्चा को अब बंद करवाया जाये ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आप नैतिकता के आधार पर तो करो दवाब में मत करो ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपने नोटिस दिया है ना उन कर्मचारियों को नोटिस दिया है आपने, आपने उनको प्राइमरी दोषी माना है उनको सस्‍पेंड तो करो । हम यह थोडे ही कह रहे हैं कि आप दवाब में यह करो, कलेक्‍टर को गिरफ्तार करो। हम यह कह रहे हैं कि जिन कर्मचारियों को आपने 16सीसी के अंतर्गत दोषी माना है, नोटिस दिया है उनको सस्‍पेंड तो करो । उनको सस्‍पेंड क्‍यों नहीं कर रहे हैं आप ।

श्री जितेन्‍द्र सिंह (अलवर): माननीय गृह मंत्री जी यह बात उचित है क्‍या कि एडीएम कलेक्‍टर की जांच करेगा । क्‍या सिपाही एसपी की जांच कर सकता है क्‍या ? गृह मंत्री जी यह बताइए कि एक एडीएम कलेक्‍टर की जांच करेगा ? यह तो न कहीं सुनी है न कोई सोचने की बात है ।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि गृह मंत्री जी आवेश में आकर, गुस्‍से में आकर इस बात को डिफ्युज कर रहे हैं यदि यह ठीक समझते हैं कि यह ठीक हुआ है, यह डांस ठीक हुआ है, यह कृत्‍य सरकारी दफ्तर में ठीक हुआ है तो हमें आपको यह कहना है कि आप यह आर्डर निकल दीजिए कि हर कलेक्‍ट्रेट में यह डांस हो । लेकिन कृपा कर के यह बता दीजिए जो कलेक्‍टर इसमें इनवाल्‍व है उसके खिलाफ आप कार्यवाही करने में कोताही क्‍यों भरत रहे हैं । उसको आप एपीओ कीजिए, आपको यह थोडे ही कह रहे हैं कि आप उसको सस्‍पेंड कीजिए । आप उसको एपीओ करके इसकी जांच करवाइए ताकि जांच तो प्रभावित नही हो । अन्‍यथा जैसा हमारे दूसरे साथियों ने आपको प्रपोज किया है कि आप एक एसेम्‍बलि की पार्लियामेंट्री कमेटी बना दीजिए वह जांच कर के लावे इसमें कहां दिक्‍कत आ रही है ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): गृह मंत्री जी आप यह गुस्‍सा तो खा रहे हो पर पूरे राजस्‍थान में आपकी सरकार ने यह सांस्‍कृतिक वातावरण दिया है । यह कैट वाक से लेकर लिप लोक तक के जो कारनामे राजस्‍थान में यह सरकार करती जा रही है उसी का नतीजा है कि आज यह कलेक्‍ट्रेट तक के लोग इस तरह की गतिविधियों में इनवाल्‍व हो रहे हैं । आपकी सरकार में इपीआरसी की बैठक हुई रात को उसमें शराब पिलाई गई । आपकी सुराज  की मीटिंग हुई उसमें जेडीए ने बीओ के बिलों के पेमेंट किये और उसी का नतीजा है कि आप जगह जगह पर राजस्‍थान के जिलो में कलेक्‍टर इस तरह की गतिविधियों में इनवाल्‍व हो रहे हैं । यह आपकी सरकार के बनाये हुए सांस्‍कृतिक वातावरण का नतीजा है और आप कोई जिम्‍मेदारी नहीं उठाना चाहते । (व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): मेरी बात सुनो माननीय सदस्‍यो, जो कैट वाक करे, जो लिपलोक करें शर्म तो उसको आवे इनको शर्म क्‍यों आयेगी, शर्म हमें आयेगी, कैसी बात करते हैं आप ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय गृह मंत्री जी इमोशनल हो गये हैं । अध्‍यक्ष महोदय, भावनाओं से तो राज चलता नहीं है तथ्‍यों पर चलता है । माननीय मंत्री जी हम कोई दवाब नहीं बनाना चाहते हैं तथ्‍य आपके सामने है । आज प्रेस में कोई चीज आ जाये, इलेक्‍ट्रोनिक मीडिया में हजारों आदमी देख लें उसके बाद तो सरकार का धर्म बनता है माननीय मंत्री जी इसमें तो कोई दवाब नहीं है । यह तो सरकार की फेलियोर माननी पडेगी कि इलेक्‍ट्रोनिक मीडिया में आ जाये, आपका कमिश्‍नर कमेंट कर दें, आपके मंत्री कमेंट कद दें अब एडिशनल एसपी और एडीएम जांच करेगा । मैं कहता हूं कि इसमें दवाब की आवश्‍यकता नहीं है । हम आप पर छोडते हैं, आप खडे होकर यह कह दीजिए कि 24 घंटे में मैं इसका फैसला कर के दे दूंगा ।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं यह कह रहा हूं कि इस सारे प्रकरण की जांच संभागीय आयुक्‍त को देकर इस सारे प्रकरण की जांच करवा लेंगे और जो भी उसमें बात निकल कर आयेगी...

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): आप खाली यह जांच कर लें कि 5 बजे के पहले की घटना में कलेक्‍टर मौजूद था या नहीं, इसका फैसला कर लें बात खत्‍म । माननीय मंत्री महोदय कमिश्‍नर कमेंट कर चुका है, कमिश्‍नर की जांच की अब कोई वैलिडिलिटी नहीं है । कमिश्‍नर ई टीवी पर लाइव कमेंट कर चुका है इस घटना के संबंध में ।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): किसी न किसी की तो जांच करानी पडेगी।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): हम राजस्‍थान के गृह मंत्री जी गुलाब चंद कटारिया को ओथराइज्‍ड करते हैं कि आप 24 घंटे में इस फैक्‍ट को देख लें, एक्‍शन ले लें नहीं होता है तो नहीं करें हम कुछ नहीं बोलेंगे । we leave it अध्‍यक्ष महोदय, फिर आप हम पर छोड दीजिए हम तैयार हैं इससे बड़ा ओनेस्‍ट आप क्‍या चाहते हैं । हम न दवाब डालना चाहते हैं, न भावना में जाना चाहते हैं हम निश्चित तौर पर चाहते हैं कि जिस सरकार में आप मंत्री हैं वह राजस्‍थान की जनता को एक मैसेज दें कि प्रेस अपने धर्म का निर्वहन कर रहा है, प्रेस किसी चीज को जनता के सामने लाये और सरकार अपने कर्तव्‍य में फैल रही है क्‍योंकि सरकार ने 48 घंटे तक कोई काम नहीं किया है यह सरकार की फैलियोर है । यह प्रेस के प्रति सरकार का संवेदनहीनता का मुद्दा है । इसलिए आपको निश्चित तौर पर इस पर आगे आकर, हम आप पर छोडते हैं कोई जांच नहीं होम मिनिस्‍टर गुलाब चंद कटारिया जी जो कभी दवाब में नहीं आते हैं, जो संस्‍कार और भावना की बात करते हैं वह 24 घंटे में जांच कर के कल हाउस में बता दें हम आप पर छोडते हैं ।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आज तक ऐसी घटनाओं की कभी मंत्री ने जांच की है क्‍या ?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, अब तक जो परिपाटी रही है मेरे को भी हाउस में कई बार रहने का मौका मिला है आज दिन तक कभी भी किसी जांच के लिये किसी मंत्री को ओथराइज्‍ड नहीं किया गया कि आप जांच कर के दे दो और न आज दिन तक किसी मंत्री के द्वारा की गई जांच यहां हाउस में डिसकस हुई है । मैं सोचता हूं ऐसी परिपाटी न डाले जो संभव नहीं है । लेकिन मैं आपको यह विश्‍वास दिला सकता हूं कि जल्‍दी से जल्‍दी इस जांच को पूरा कर के इसमें जो भी दोषी पाया जायेगा उसको किसी को बचाने का कोई सवाल ही नहीं चाहे कलेक्‍टर ही क्‍यों न हो, चाहे और कोई व्‍यक्ति क्‍यों न हो किसी को बचाने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता लेकिन प्रोसेस में ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): 7 दिन में ?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): एक सप्‍ताह में ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): ठीक है ।

श्री अध्‍यक्ष: महामहिम राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर वाद विवाद ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): अभी तो युनूस खान हैं, परिवहन मंत्री, खेलकूद मंत्री ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, आपने स्‍वयं ने फरमाया था कि जीरो आवर के बाद कह देंगे ।

शासकीय वक्‍तव्‍य

यातायात मंत्री एवं उनके अंगरक्षक पर हमला

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍यों में जो एक आक्रोश था वह स्‍वाभाविक है । मैं भी सदन का सदस्‍य हूं और अगर किसी मंत्री के साथ इस प्रकार की घटना घटती है तो मैं भी आपके उस आक्रोश में सम्मिलित हूं। जो कुछ भी घटना हुई वह हुई है उससे कोई ना नहीं कर रहा है और जिनके खिलाफ एक्‍शन करना है जो कुछ भी इस केस के बारे में 10-20 लाइने संभव हुई....

 


ans/usc  15:20  2l   06.03.2007

 

 इसके बारे में 5.3.2007 को साढ़े सात बजे के लगभग युवा खेल एवम यातायात मंत्री श्री युनूस खान जी एमएमएस स्‍टेडियम गये थे तब उनके गनमैन श्री अनवर खन एवम चालक अखिल भारतीय विघार्थि परिषद के कार्यकर्ता श्री राजेन्‍द्र सुरपूरा और चार-पाँच अन्‍य कार्यकर्ता आये तथा मंत्री जी सेमिलने की इच्‍छा जाहिर की। मंत्री महोदय ने गनमैन के माध्‍यम से इनसे 15-20 मिनिट बाद मिलने के लिए सूचित किया, इससे वह संतुष्‍ट नहीं हुए तथा  उन्‍होंने हर हालत में मंत्री से मिलने का निश्‍चय जाहिर किया, शोर शराब किया। बाद में मंत्री महोदय टाटा सफारी में बैठकर जा रहे थे तो गाडी़ को   अन्‍य 20-25 कार्यकर्ताओं ने घेर लिया, सरकारी वाहन के साथ तोड़फोड़ की,गनमैन के साथ धक्‍कामुक्‍की हुई, मोबाइल तोड़ दिया। शोर मचने पर यह लोग मोटरसाइकिल और कार से बैठकर भाग गये । गनमैन श्री अनवर खान और चालक जगदीश चंद यादव की रिपोर्ट पर मुकदमा 43/7 धारा 147,149,341,323,427,379,332,353 व 3 पीडीपी एक्‍ट की, रात्रि 10 p.m पर पंजीबद्व किया। अनुसंधान पुलिस उप निरिक्षक शिवदयाल सिंह के द्वारा किया जा रहा है1 इस अभियोग में आज सुबह दो अभियुक्‍त राजेन्‍द्र सुरपुरा और लक्ष्‍मीकांत भारद्वाज को  गिरफ्तार कर लिया गया और बाकी आगे की सारी जांच के बाद जो बाकी अभियुक्‍त है इसमें उन सबके खिलाफ कार्यवाही होगी।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो धाराएं आपने लगाई है और उन्‍होंने जो जानलेवा हमला किया है तो इसमें 307  आप और लगाइये1 माननीय मंत्री जी पर जानलेवा हमला  उन सब लोगों ने मिलकर किया।  

श्री अध्‍यक्ष: (व्‍यवधान) मंत्री पर थोड़े किया, गनमैन पर किया है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): तो इसमें धारा 307 क्‍यों छोड़ दी गई। गनमैन पर नहीं, मंत्री गाड़ी में बैठे थे। आप कैसी बात कर रहे हैं।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार):राजस्‍थान सरकार का मंत्री बच गया ।(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मंत्री जी गाड़ी में बिराज रहे थे, मंत्री जी....

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री पर...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हां, पूछो आप । मंत्री जी गाड़ी में बिराज रहे थे।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): मंत्री जी बिराज रहे है, उनसे पूछे आप। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): कहा मेरे साइड का कांच नहीं टूटा...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): गनमैन पर किया तो भी 307 बनता है।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारी मंशा गम्‍भीर है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): गनमैन पर भी 307 बनता है ( व्‍यवधान) उन आदमियों को बचाने की कोशिश मत करो।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मंत्री ने खुद ने कहा मेरी तरफ का कांच नहीं टूटा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): कुछ नहीं होने वाला इसमें जल्‍दी जमानत हो जाएगी।

श्री अमराराम (धोद): मंत्री जी बिराज रहे हैं, मंत्री जी कह  दे कि उन पर हमला नहीं था।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): अगर इन पर हमला नहीं हुआ तो हमें कोई चिंता नहीं है।

श्री अमराराम (धोद): उस गाड़ी  पर हमला हुआ, उनका मोबाइल टूटा है, खड़े होकर कह दे कि हमला नहीं हुआ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मंत्री जी उसमें बिराजमान थे। धारा... (व्‍यवधान) अगर कोई दूसरा आदमी करता तो 307 लगा देते,308 लगा देते।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी से मिलने की वजह से झगडा हुआ, न मिलने की वजह से, इसलिए मंत्री जी  का नाम, मंत्री जी झगडा इसलिए हुआ है..(व्‍यवधान) एफआइआर में साफ लिखा हुआ है कि वह मंत्री से मिलना चाहते थे।

श्री अध्‍यक्ष: अख़बार की कटिंग...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): एफआइआर में साफ लिखा हुआ है कि वह मंत्री से मिलना चाहते थे । दूसरा मंत्री जी का कल स्‍टेटमेंट है कि मेरी तरफ का कांच नहीं टूटा नहीं तो पता नहीं क्‍या हो जाता, दोनों स्‍टेटमेंट है1(व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): जिधर मैं बैठा था उधर का शीशा नहीं टूटा अन्‍यथा बहुत  गम्‍भीर हादसा हो सकता था।(व्‍यवधान) 

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं सोचता हूं हममे से अधिकांश लोग यहां वकील बैठे हैं। (व्‍यवधान) सदन में कई माननीय सदस्‍य वकील पेशे से आये हैं आप सबको भी अनुभव होगा यदि तफ्तीश करने के बाद यदि कोई ऐसी बात निकलकर आती है कि धारा 307 लगती है, तो ही लग सकती है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): लगने के बाद यदि तफ्तीश नहीं आती है तो हट भी सकती है, आप लगाइये ना। जब जानलेवा हमला हुआ है तो 307 की प्राइमरी इन्‍क्रीडियंट से वह बनती है, आप यदि तफ्तीश में नहीं मानों तो साल-छह महीने में हम ठंडे हो जाए तो उसे छोड़ देना। (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मेडीकल रिपोर्ट भी कुछ होती है। मेडीकल रिपोर्ट भी होती है कि नहीं ?  

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): कोई जरूरी नहीं है मेडीकल रिपोर्ट होना। (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): जरूरी नहीं है। गोली फायर करें, गोली लगे ही नहीं तब भी 307 लगती है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): फायर तो करें।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): इंजरी आना जरूरी नहीं है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): सैक्‍शन कब लगेगा यह तफ्तीश आने से ही कोई बात ...( व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 307 में इंजरी आना जरूरी नहीं है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह मेडीकल जाने लायक हो जाएंगे तब लगेगा क्‍या। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 307 में चोट आना जरूरी नहीं है, इंटेन्‍शन जरूरी है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सरकार क्‍या चाहती है यह  होस्पिटल                 में ले जाने की स्थिति में आये तब  लगाओंगे, तब लगाओंगे क्‍या ? (व्‍यवधान)

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): अध्‍यक्ष महोदय, मामला गम्‍भीर है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप कह रहे हैं, मेडीकल रिपोर्ट  की बात कर रहे हो तो क्‍या हास्पिटल में ले जाने की स्थिति के लायक होंगे तब लगाएंगे।(व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): यह पिटवाना चाहते हैं, पिटने दो, इनका मंत्री है, यह पिटवाना चाहते हैं तो आप क्‍या करेंगे।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपके आपसी  अन्‍तर्द्वन्‍द का कारण है कि आप 307 नहीं लगा रहे।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आपको कुछ कहने का अवसर आ गया तो आपने पूरा ही (व्‍यवधान) जो कार्यवाही हमको करनी है, हमने न विघार्थी परिषद देखी न व्‍यक्ति देखा। जो कुछ भी अब तक उन्‍होंने रिपोर्ट लिखाई उसके आधार पर जो धाराऐ बनती है वह धाराएं लगाई। मैं  सोचता हूं कि  अगर इसके बाद भी आपके मन में  रह जाती है तो अब आपकी इच्‍छा है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप जिद क्‍यों करते हैं लगा दीजिए ना इसमें क्या बात है। आप प्रभाव में तो नहीं आ रहे कहीं । (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष:  महामहिम राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर अब चर्चा शुरू होगी। सबसे पहले ...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): पाइंट आफ आर्डर इस पर।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या?

 


व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न

अभिभाषण व आय-व्‍ययक पर चर्चा हेतु

माननीय सदस्‍यों को साहित्‍य का समय पर वितरण

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): महामहिम के भाषण पर। अध्‍यक्ष महोदय,  आप जो डिबेट करवा रहे हैं उस डिबेट के संबंध में हमें न तो विधान सभा में, राज्‍यपाल के भाषण का जो उदे्दश्‍य है उसमें कोल एंड शकधर में लिख रखा है – “It contains a review of the activities and achievements of the Government during the previous year and its policy with regard to important internal and current international problems.” दो दिन से राज्‍यपाल के भाषण पर चर्चा हो रही है, राजस्‍थान सरकार में अनफोरच्‍युनेटली यह परिपाटी बनी हुई है कि राज्‍यपाल के भाषण के पहले और बजट के पहले जो रेलेवेंट डाक्‍यूमेंट सदन के सदस्‍य को मिल जाने चाहिये वह हमें मिलते नहीं है। हम चर्चा करते हैं। आज दिन तक, दो दिन हुए हमें जो भी एनुअल रिपोर्ट मिली है वह बिजली विभाग की मिली, बीज निगम की मिली और किसी की मिली है1 पिछली सरकार ने, जो पिछले एक साल के अचीवमेंट है जिसके आधार पर गवर्नर के धन्‍यवाद के भाषण यपर चर्चा कर रहे हें, अध्‍यक्षमहोदय यह तो व्‍यवस्‍था करिये कि अनके बारे में सरकार का जो ओथेंटिक है डाक्‍यूमेंट हमारे पास आ जाए। उनको पढ़े उसके बाद चर्चा करें।

अध्‍यक्ष महोदय, मुझे यह कहते हुए भी तकलीफ है बजट की जो डिसकशन करेंगे नौ तारीख को, बजट के संबंध में भी इसमें लिखा हुआ है, बजट के अंदर 2005-6 के आय व्‍यय के संबंध में सीएजी ने अपनी रिपोर्ट सबमिट कर दी, आज दिन तक सीएजी  रिपोर्ट को हमने ले नहीं किया। नौ तारीख को मुख्‍यमंत्री जी बजट पेश करेंगी, 10-11 को छुट्टी है, 12 तारीख को हम डिबेट शुरू कर देंगे ।अध्‍यक्ष महोदय, अब मुझे बताइये मुख्‍यमंत्री जी को बजट भाषण में तैयारी करने के लिए एक दिन का समय चाहिये इसलिए हमने रिशिडयूल किया और माननीय सदस्‍यों को चर्चा करने के लिए कोई कागज नहीं चाहिये और हम डिबेट करना चाहते हैं, मैं समझता हूं कि यह पार्लियामेंट प्रेक्टिस के  हिसाब से ठीक नहीं है। मेरी आपसे सअनुरोध प्रार्थना है कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी कल गवर्नर स्‍पीच पर रिप्‍लाई देगी उसके पहले  हमारे पास कल भी यदि राजस्‍थान सरकार के रेलेवेंट अचीवमेंट के संबंध में जो डाक्‍यूमेंट है वह हमको सप्‍लाई कर दे तो कम से कम रेलेवेंट प्रश्‍न तो मुख्‍यमंत्री जी के सामने खड़े कर सके, जिससे उनका जवाब दे सके।

अध्‍यक्ष महोदय, आप जानकर आश्‍चर्य करेंगे कि frbm  एक्‍ट के अंतर्गत, जिसको हमने विधान सभा में पास किया उसमें पाँच और छह के एक्‍चुअल मेंशन कर रखे हैं और राजस्‍थान की विधान सभा को  हम सीएजी के एक्‍चुअल्‍स नहीं देना चाहते। बजट पर डिसकशन करना चाहते हैं1 अध्‍यक्ष महोदय, कम से कम मैं आपसे आशा करता हूं कि आप परम्‍पराओं की बात कर रहे हैं,  यह परम्‍परा राजस्‍थान में बनाइ जाए। यदि पास्‍ट में नहीं हुआ, अभी पार्लियामेंट अफेंस मिनिस्‍टर खड़े होकर कह देंगे कि पास्‍ट में ऐसा नहीं हुआ, नहीं हुआ होगा पर कम से कम हम डिबेट को सार्थक बनाने के लिए राज्‍यपाल महोदय के भाषण के पहले सरकार के जितने अचीवमेंट है, अलग-अलग विभाग के उनके डाक्‍यूमेंट हमारे पास आ जाए और बजट के डिसकशन के पहले एक्‍चुअल्‍स जो सीएजी ने किये , सिविल के संबंध में, कामर्शियल के संबंध में राजस्‍थान सरकार की जो स्थिति है वह तो  हमारे सामने आ जाए जिससे हम बजट पर सार्थक चर्चा कर सके। इसके संबंध में तो अध्‍यक्ष महोदय आपको कोई व्‍यवस्‍था करनी चाहिये जिससे हम फल डे डिबेट  कर सके अन्‍यथा एक रिचुअल हो  जाएगा, आप अध्‍यक्षता कर रहे हैं, परम्‍पराओं की बात कर रहे हैं, नियमों की बात कर रहे हैं। राज्‍यपाल को धन्‍यवाद भी दे देंगे, बहुमत इनका है, इनके अचीवमेंट का गुनगान भी हो जाएगा, सार्थक रूप में ह म इसमें कन्‍ट्रीब्‍यूट नहीं कर पाएंगे इसलिए मैं आपसे सअनुरोध प्रार्थना करना चाहता हूं कि इस संबंध में आप व्‍यवस्‍था करें जिससे डिबेट, चाहे राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषणक की हो चाहे बजट की हो ,दस और ग्‍यारह तारीख के बाद हमें समय मिले हम डिसकस करके उसमें पार्टिसिपेट कर सके। इस संबंध में  आपको व्‍यवस्‍था देनी चाहिये। पिछली बार भी आपने व्‍यवस्‍था दी । अनफोरच्‍युनेटली पिछली बार की व्‍यवस्‍था के बाद भी  बजट आने के पहले सीएजी की रिपोर्ट प्रस्‍तुत नहीं होती है तो मैं समझता हूं कि  आपकी इस व्‍यवस्‍था के बाद भी हम किस तरह की  सार्थक डिबेट करेंगे। यह राजस्‍थान की जनता को यह मेसेज देना चाहते हैं राजस्‍थान के 200 एमएलए बिना पढ़े लिखे, तिबना सरकार की उपलब्धियों की अचीवमेंट की चर्चा किये हुए  हमडिबेट कर रहे हैं फिर डिबेट किस बात की कर रहे हैं । फिर तो धन्‍यवाद दे दें, बहुमत है, सरकार राज कर रही है राज चलता रहे, इसलिए मैं समझता हूं कि पोस्‍टेरिटी जब आप एक एक चीज को लिखते हैं, रिकार्ड होती है तो पोस्‍टेरिटी यह भी याद रखेगी कि राजस्‍थान की विधान सभा में माननीया सुमित्रा सिंह जी जो अध्‍यक्ष है,नौ बार तक मैम्‍बर रहे हैं उनके  अनुरोध के बाद भी यदि यह स्थिति बन रही है इससे बड़ा दुर्भाग्‍य राजस्‍थान की विधान सभा का नहीं होगा इसलिए  मेहरबानी करके इस संबंध में आप कुछ न कुछ निर्णय ले।

 

दुर्गा/त्रिपाठी 060307 1530 2m

 

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य भी राज की पार्टी में बहुत लम्‍बे समय तक रहे हैं और इस विधान सभा में रहे हैं। अब तक की सूची जारी कर दी जाए कि कब-कब यह सब काम राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण से पहले-पहले कौनसी प्रगति रिपोर्ट आ गयी है, एक।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): नहीं हुआ, खुद ही कह रहा हूं।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): और बजट आने के पहले, आपकी जो रिपोर्ट है वह पहले आ गयी हो। अब तक इस विधान सभा में इसी ढंग की प्रक्रिया चल रही है। इसमें सुधार की गुंजाइश है, आपके सुझाव के आधार पर। पर यह केवल हमारे पर मत थोप दो कि केवल हम ही इसकी पालना नहीं कर रहे हैं। ऐसा नहीं है। यह लगातार इस चीज की पालना नहीं हो रही है। अगर इसकी हो जाए तो ज्‍यादा अच्‍छा है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मैंने यह नहीं कहा। मैंने कहा यह आपकी पार्टी का नहीं है,यह तो हम सबकी जिम्‍मेदारी है। आप भी विरोध में रहे, सत्‍ता में रहे। हम भी सत्‍ता में रहे, विरोध में रहे। लेकिन इन परम्‍पराओं को कहीं न कहीं तोड़कर ऐसी स्‍वस्‍थ परम्‍परा भी बनानी चाहिए जिससे हम डिबेट सार्थक कर सकें। यह मेरा आपसे निवेदन है।

व्‍यवस्‍था

माननीय सदस्‍यों को साहित्‍य का

समय पर वितरण हो ताकि सदन में सार्थक बहस हो सके

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो प्रश्‍न उठाया है, उसके बारे में मुझे निवेदन करना है कि पिछले 50 साल में तो यह रिपोर्ट इसी तरह से आती रही हैं जैसा कि गृह मंत्रीजी कह रहे थे। लेकिन यह बात सही है कि सिस्‍टम सुधरे। व्‍यवस्‍था सुधरे, ताकि सार्थक बहस हो सके। उसके लिये आवश्‍यक और उचित तो है कि उससे पहले अचीवमेंट की, क्‍योंकि राज्‍यपाल महोदय का अभिभाषण इस बात का ही तो होता है कि पिछले वर्ष का अचीवमेंट और आगे की नीति निर्धारण सरकार क्‍या करने जा रही है। इसी का होता है। इसलिये उससे पूर्व में यदि सभी विभागों की रिर्पोट आ जाए अचीवमेंट की तो ज्‍यादा सार्थक बहस हो सकेगी। इसलिये प्रयत्‍न कीजिये। इस बार तो नहीं हो पाया लेकिन अगले वर्ष ऐसा हो सके, वह रिपोर्ट पहले तैयार होकर समय पर वितरित की जासकें तो मैं समझती हूं कि इससे सिस्‍टम सुधरेगा।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): सी.ए.जी. रिपोर्ट।

श्री अध्‍यक्ष: सी.ए.जी. की रिपोर्ट के बारे में पिछले साल भी बात हुई थी। आपने जो प्रश्‍न उठाया, मैंने और असेम्‍बलीज  से भी पूछा, विधान सभाओं से पूछा। कोई एक-आध ऐसी विधान सभाएं हैं जहां पहले करा पाते हैं। बाकी कहीं पर..।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): एक मिनट, एक मिनट। (व्‍यवधान) नहीं, एक मिनट, एक मिनट, एक सेकिण्‍ड, मेरी बात तो सुन लें।

श्री अध्‍यक्ष: आपकी बात को मैंने बहुत ध्‍यान से सुना था। (व्‍यवधान) अब आप बीच में, अब इस आदत को थोड़ा सुधारें। (व्‍यवधान) नहीं, मैं नहीं सुनूंगी आपकी बात।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): पहले FRBM एक्‍ट किसी विधान सभा में नहीं था। आपकी बात में एड कर रहा हूं खाली। पहले FRBM एक्‍ट नहीं था, इसलिये जरुरी नहीं था। अब FRBM  एक्‍ट में एक्‍चुअल को कम्‍पेयर करते हैं। इसलिये सी.ए.जी. की रिपोर्ट हाउस में नहीं रखकर कम्‍पेयर करें। (व्‍यवधान) यह ठीक नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: मैं उसको ना थोड़े ही कह रही हूं। मैंने खुद कह दिया। लेकिन जैसा कि मैं कह रही हूं कि अन्‍य विधान सभाओं में भी समय से पूर्व नहीं दे पाते हैं, बाद में ही देते हैं। पिछली बार यह बात आयी थी कि सी.ए.जी. की रिपोर्ट बजट प्रस्‍तुत करने से पूर्व दी जाए ताकि सार्थक बहस हो सके, पता लग सके कि कितना किसमें खर्च हुआ। मैं चाहूंगा देख लीजिये, यदि सी.ए.जी. रिपोर्ट पहले आप दे सकें तो बहुत उचित होगा।

धन्‍यवाद प्रस्‍ताव पर वाद विवाद

श्री टीकमचन्‍द कान्‍त।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मसूदा से आने वाले माननीय विधायक विष्‍णुजी मोदी ने जो महामहिम राज्‍यपाल महोदय ने इस सदन में आकर के अभिभाषण दिया, उसके बदले उनको धन्‍यवाद देने का प्रस्‍ताव रखा है, उसका मैं समर्थन करता हूं। मैं बहुत सारे डाकूमेंट्स तो नहीं पढ़ पाया लेकिन इस बजट भाषण को 2-3 बार उलटपुलट कर देखा है, सॉरी, राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण को मैंने उलट-पुलट कर देखा है और इससे एक निर्णय सामने आता है कि एक तुलनात्‍मक अध्‍ययन है 5 साल का और 3 साल का कि किन विभागों में, किन क्षेत्रों में कितना क्‍या हुआ और 3 साल का जो कार्यकाल है वह राजस्‍थान के विकास के लिये कैसा रहा। मैं उसके विषय में कहूं तो इससे तो यह प्रमाणित हो रहा है कि विकास हमारा चहुंमुखी है, सर्व-व्‍यापी और सर्व-स्‍पर्शी विकास हो रहा है। विकास सभी क्षेत्रों में हो रहा है। शहरों का सुधार हो रहा है, गांवों की गरिमा बढ़ रही है, ढाणियों का ढंग बदल रहा है, धोरों में धन की वर्षा हो रही है, पहाड़ों की प्रशंसा-वृद्वि हो रही है। आदिवासी अंचल में नई आशा जगी है, श्रमिक की सम्‍भाल ली जा रही है, किसान की कीर्ति बढ़े और उसकी समृद्धि बढ़े, यह प्रयत्‍न किये जा रहे हैं। (व्‍यवधान) बताऊंगा मैं, आदिवासियों के कुछ बिंदू मैंने लिये हैं, उन पर बात करुंगा। सारी योजनाओं का मैंने हिसाब-किताब देखा इसके अन्‍दर तो कोई-कोई योजना 85 प्रतिशत पूर्ण हो चुकी है, कोई 90 प्रतिशत पूर्ण हो चुकी है, किसी पर व्‍यय 95 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसलिये कहा जा सकता है कि राज्‍य और केन्‍द्र की जो भी योजनाएं थीं उनको पूर्ण करने का प्रयत्‍न पूर्णतया हो रहा है। और फिर इसके अन्‍दर एक चीज रही, कुछ विभाग, सारे विभाग प्रगति कर रहे हैं। सारे विभाग अपनी ओर से इस राजस्‍थान के विकास में पूर्णतया प्रयास कर रहे हैं। अभी 2-3-4-5 बात बताऊं तो शिक्षा में अगर देखो तो नये आयाम हैं, नई दिशा है, नायाब विस्‍तार है और नये रिकार्ड कायम किये हैं। चिकित्‍सा सेवा में सुविधाओं की वृद्धि हुई है, विस्‍तार हुआ है। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने तो राजस्‍थान की सूरत में निखार ला दिया। निरुत्साहित हुए उद्योग नये प्रोत्‍साहन से पनप रहे हैं। वनों का विकास, और खानें सोना अगलने को तैयार हैं।  जल संसाधन क्षेत्र के अन्‍दर जबरदस्‍त प्रगति इंगित हुई है। अगर मैं कुछ रिकार्ड देखने की बात करुं तो राजस्‍थान के इस अभिभाषण के अन्‍दर, राजस्‍थान में विकास के अन्‍दर और अपने व्‍यय के अन्‍दर और प्रगति के अन्‍दर कहें कि जो रिकार्ड कायम किये हैं, वह 5-7 रिकार्ड मैं आपको बताने का प्रयत्‍न करुंगा।

अध्‍यक्ष महोदय, किसी भी प्रदेश का विकास, उसकी योजना कितनी विस्‍तृत है और योजना का आकार क्‍या है, उस पर आधारित है। मुझे मालूम है कि माननीय भैरोंसिंहजी शेखावत मुख्‍य मंत्री थे तो 3 हजार करोड़ की योजना थी, पूर्व सरकार की और उसके बाद में वह 11 हजार की बनी। और उसके बाद के अन्‍दर राजस्‍थान ने विकास करना प्रारम्‍भ किया। ग्रामीण क्षेत्र का विकास हुआ, सड़कों का विकास हुआ, बिजली का विकास हुआ। अनुसूचित जाति और गरीबों की तरफ दृष्टि गयी। और उसी प्रकार से आज जो आकार मैं देख रहा हूं, इसकी राशि 68422.16 करोड़ की राशि है, जिस प्रदेश की योजना बढ़ी है और जिस प्रदेश की योजना के अन्‍दर से पूर्ण व्‍यय होता है, यह सबसे बड़ी बात है। पूर्ण व्‍यय हो गया, अब कल कह रहे थे, योजना तो सबकी बढ़ती है। बिलकुल ठीक बात है। हर पंचवर्षीय योजना 10-20 प्रतिशत बढ़ती है। लेकिन यह आवश्‍यक है कि पिछली योजना के अन्‍दर पूर्ण व्‍यय किया या नहीं। अगर पूर्ण व्‍यय नहीं किया है तो फिर योजना छोटी हो जायेगी और उसके ऊपर जो प्रतिशत बढ़ेगा, वह थोड़ा होगा। इन तीन वर्षों के अन्‍दर उस योजना का सारा व्‍यय करने का प्रयास किया गया है। बाकी पूर्व सरकार के वित्‍त मंत्रीजी अभी विराज रहे थे। उनको याद होगा कि 3 वर्षों तक लगातार उस योजना का आकर, 10वीं योजना के अन्‍दर से लागातार उसके अन्‍दर कमी करते रहे, योजना को घटाते रहे, कभी 1500 करोड़ की, कभी हजार करोड़ और उसका असर यह आया कि राजस्‍थान पिछड़ गया। राजस्‍थान कप विकास ठहर सा गया। तब सड़कों में इतने खड्डे पड़ गये थे कि हमारी सड़कें कह रही थीं, जैसे बिहार से लोहा ले रही हैं, बिहार की सड़कों से लोहा ले रही हैं। बिहार की सड़कें भी शर्म खाने लग गयी थीं। इस तरह की स्थिति आ गयी थी राजस्‍थान की। इसलिये विकास के अन्‍दर जहां तक बात है, उसकी योजना बड़ी होनी चाहिए, और इस योजना का आकार तो बहुत बड़ा है।  

 

Vps-akt-060307-1540-2n-1

 

हालांकि, ठीक है यह 8वीं, 9वीं और 10वीं योजना की सम्‍पूर्ण राशि के जितनी ही बड़ी राशि की यह योजना है तो इससे एक आशा बनती है, एक उम्‍मीद बनती है और एक विश्‍वास बैठता है और जिस प्रकार का तीन साल का जो इन्‍होंने लेखा हमारे सामने प्रस्‍तुत किया है उससे यह लगा है कि यह व्‍यय भी होगा। इन पाँच वर्षों के अन्‍दर, पंचवर्षीय योजना के अन्‍दर और राजस्‍थान आगे बढ़ेगा, विकास करेगा और कभी-कभी हमने जो उम्‍मीद की थी कि राजस्‍थान इस देश के 16 राज्‍यों के अन्‍दर कहीं ऊचाइयों पर तीसरे, चौथे, पांचवें नम्‍बर पर, दूसरे, तीसरे नम्‍बर पर पहुंच जाए और उम्‍मीद करता हूं कि यह पहुंचे। लोग चर्चा कर रहे हैं। सामान्‍य जनता चर्चा कर रही है कि यह वह राजस्‍थान है जिसका दिवाला निकल गया था। क्‍या यह वह राजस्‍थान है जिसकी सड़कों के अन्‍दर खड्डे थे। कारगिल का युद्ध चल रहा था, जोधपुर से बाड़मेर तक सरहद पर जाने वाली सेना के ट्रक और टेंक वगैरह जा रहे थे और मुझे उस दिन दूंदारा जाना था। मैं इस जोधपुर की सड़क पर चल रहा था तो सेना के जो ट्रक और टेंक वगैरह जो चल रहे थे उनको धीमी गति से चलना पड़ रहा था और मैंने कहा और उस समय किसी ने कमेंट्स किया कि यह सेना इस प्रकार जा रही है। इतनी धीमी गति से जाना हो रहा है। सड़क इतनी खराब पड़ी है, यह खड्डे नहीं, यह न मालूम किसकी कब्रें खोद कर यह राजस्‍थान में रख ली है। यह स्थिति थी। आज वह सड़क सार्वजनिक निर्माण मंत्रीजी, आज वह सड़क ठीक है। आज सेना वहां से अच्‍छी ढंग से जा सकती है। सरहद पर जल्‍दी पहुंच सकती है। मतलब इस प्रकार की कुछ चीजें थीं। अब रिकार्ड की मैं जहां तक  बात कह रहा था राजस्‍थान, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह गरीब लोगों की तरफ, यह बीस सूत्री कार्यक्रम तो इंदिरा गांधीजी के समय का है न, गरीबों के लिए है, अनुसूचित जाति, जन जाति, उनके लिए है और इस बीस सूत्री कार्यक्रम में, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम इस चौथे साल भी अव्‍वल है। प्रथम नम्‍बर पर है इसलिए राजस्‍थान गरीबों के कार्यक्रम के अन्‍दर, गरीबों के कार्यक्रमों के अन्‍दर उसका बिलकुल उसी श्रद्धा से वह कार्य पूर्ण करती है और इसके कारण यह राजस्‍थान आज चौथे वर्ष भी बीस सूत्री कार्यक्रम के अन्‍दर अव्‍वल है। हिन्‍दुस्‍तान में प्रथम है। और याद करें, मैं उस पाँच साल को याद करता हूं। ... (व्‍यवधान)

(समय-समाप्ति-सूचक-घंटी)

श्री अध्‍यक्ष: आपको ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): असत्‍य कथन के लिए तो आप निर्देश दे सकती हैं।  ... (व्‍यवधान) 

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): हां, करो न। कर लेना, मुझे बाद में टोक लेना। टोक लेना बाद में, टोक देना। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अव्‍वल है? नहीं-नहीं। आप कृपा करके, आप तो बड़े सम्‍मानित सदस्‍य हैं। अव्‍वल है? कौनसा सर्वे हुआ है? क्‍या भारत सरकार की विवरणिका निकली है या आपने निकाली है? कृपा करके ऐसा नहीं बोलें। ... (व्‍यवधान) 

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): हां, वह बता देना उस समय आप। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपको जब समय मिले तो आप बता दीजिएगा।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): हां, वह बता देना। बता देंगे। बता देंगे। बैठ जाओ। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप उनको सुन लीजिए।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): सैल्‍फ सर्टिफिकेशन है।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): सब चीजें यहां की कहने पर भी माननी होगी। ... (व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): सैल्‍फ सर्टिफिकेशन है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): केरोसीन में ही इतना पैसा बढ़ा दिये आपने और बजट कर दिया। मैं गया था आपके क्षेत्र में। आपदा राहत में ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप नम्‍बर पर है। बता देना। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): सारे राजस्‍थान को खा गये आप। ... (व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आप हमारे पास आओ, आपको भी देंगे, साहब। ... (व्‍यवधान)

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): अब आप विराजिये, मुझे क्‍यों डिस्‍टर्ब कर रहे हो बैठे-बैठे? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा इस वित्‍तीय व्‍यवस्‍था को। इस प्रबंध को। कई बार इस राजस्‍थान ने और राजस्‍थान की सरकार ने, पूर्व की सरकार ने रिजर्व बैंक से कई बार उसको मार्गदर्शन दिया गया, कई बार उसको चेतावनियां दी गयीं कि ओवर-ड्राफ्ट हो रहा है और मैं धन्‍यवाद दूंगा, यह तीन साल, 2004 के बाद आज तक ओवर-ड्राफ्ट नहीं हुआ और रिजर्व बैंक ने कोई मार्ग-दर्शन भी इनको नहीं दिया। इनको धन्‍यवाद दिया। 

(समय-समाप्ति-सूचक-घंटी)

श्री अध्‍यक्ष: अब आप बोल तो बहुत अच्‍छा रहे हैं लेकिन मेरी मजबूरी यह है कि टाइम आपका केवल पाँच मिनट है। ... (व्‍यवधान)

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): मुझे ऐसा मत करो। मुझे मालूम है, ठीक है, साहब, थोड़ा मैं उधर से ले लूंगा। मुझे उधर से थोड़ा दे देंगे। दे देंगे थोड़ा उधर से। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: कैसे जोड़ दूंगी? ... (व्‍यवधान)

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): दे देंगे, दे देंगे थोड़ा सा। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: ऐसे कैसे जोड़ देंगे? आप तो इंडिपेंडेंट हो। ... (व्‍यवधान)

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): दे देंगे। ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): राठौड़ साहब की तारीफ करें और फिर नहीं मिले तो फिर क्‍या? ... (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हमारे समय में से कुछ कटौती करके इनको दे दो। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: तो फिर ठीक है। फिर ठीक है। इन्‍होंने अपना समय दे दिया, ठीक है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): हमारा बोलने का समय तो लेट आएगा न?

श्री अध्‍यक्ष: हां, इसीलिए मैंने घंटी बजा दी दो बार कि आपका टाइम पूरा हो गया। ... (व्‍यवधान)

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): मैं कुछ रिकार्ड बता रहा हूं। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): हमारे बोलने का समय तो लेट आएगा न। यह बाद में बोल लें। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: उप नेता महोदय, प्‍लीज, आप बीच में डिस्‍टर्ब नहीं करें। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मैं तो आपकी आज्ञा का पालन कर लूंगा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन वास्‍तविकता है कि ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बस तो आप विराज जाओ। मेरे आदेश का पालन करो तो विराज जाओ। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): हमारा नम्‍बर बाद में आएगा।

श्री अध्‍यक्ष: मेरे आदेश का पालन करो तो विराज जाओ। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह तो शासन वाले हैं1 ... (व्‍यवधान)

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस ग्रामीण क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के अन्‍दर और ग्रामीण विकास विभाग के अन्‍दर इस वर्ष जितनी राशि खर्च हुई है, उतनी राशि खर्च होना एक रिकार्ड है। पिछले सालों को देख लें, ग्रामीण विभाग के द्वारा इतनी राशि एक वर्ष में कभी खर्च नहीं हुई। मैं आपको बता दूं कि कुल राशि तय थी 1468.59 करोड़ और उसमें से 1254.34 करोड़ रुपये हमने व्‍यय कर दिये हैं। यह बनता है 85.62 परसेंट। यह रिकार्ड है एक प्रकार का। अच्‍छा, मैं धन्‍यवाद दूंगा उस सोच को कि इस देश के अन्‍दर एक रोजगार गारंटी योजना चल रही है। प्रधान मंत्री की। हां, प्रधान मंत्री की, ठीक है। प्रधान मंत्रीजी को धन्‍यवाद दे दूं। इस सोच को धन्‍यवाद दे दूं। राजस्‍थान के 6 जिलों में यह चल रही है और हिन्‍दुस्‍तान के 200 जिलों में चल रही है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि रोजगार गारंटी इसलिए है कि गरीब को कम से कम 100 दिन का रोजगार मिले। रोजगार गारंटी इसलिए है कि वह गरीब, वह मजदूर, वह श्रमिक जिसको समय पर रोजगार नहीं मिल पा रहा है, उसको कम से कम 100 दिन का रोजगार मिले तो वह अपना पेट भर सके। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन 200 जिलों के अन्‍दर यह राजस्‍थान प्रथम है, उस रोजगार गारंटी योजना के अन्‍तर्गत हमने गरीब को रोजगार दिया है।

परिसम्‍पत्तियां निर्माण होती हैं, दिखती हैं। कहते हैं कागजों में आती है। परिसम्‍पत्तियों का सामाजिक अंकेक्षण, यह सबसे बड़ी बात है। यह साहसिक काम है अगर सामाजिक अंकेक्षण होता रहे। प्रति वर्ष होता रहे। कितना खर्च हुआ, कितनी परिसम्‍पत्तियां बनीं, कितनी मौजूद है, कितनी दिखाई दे रही है, कितनी प्रमाणित की जा रही है तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो बातें उठती हैं कि कागजों के अन्‍दर कभी नहर बन गयी थी, पैसा उठ गया और नहर बनी ही नहीं। तालाब की खुदाई हो गयी, कागजों के अन्‍दर खुदाई हो गयी, सामने तालाब दिखा ही नहीं। लगाये करते थे पहले आरोप ऐसे आया करते थे लेकिन माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 4 लाख 10 हजार परिसम्‍पत्तियों का सामाजिक अंकेक्षण इस बार यह ग्रामीण सम्‍पर्क योजना के तहत हुआ है और यह प्रयोग है, यह नया प्रयोग है। यह रिकार्ड है और आज तक यह सामाजिक अंकेक्षण, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नहीं हो पाया।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गरीब लोग, कुपोषित लोग, पोषण उनका नहीं हो रहा है, पेट में बराबर भोजन उनको नहीं मिल रहा है, ऐसे लोगों को घूघरी खिलाया करते थे। वह घूघरी आपके वक्‍त खिलाते थे। ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: घूघरी तो बंद कर दी। ... (व्‍यवधान)

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): साहब, वह गेहूं को उबाल कर फिर वह बच्‍चों को वह खिलाते थे। घूघरी खिलाते थे। मिड डे मील अब जो हो गया वह ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अब तो बंद कर दी घूघरी। ... (व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): पैसे तो आप खर्च कर रहे हो न ... (व्‍यवधान)

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): एक मिनट रुको तो सही। एक मिनट रुको। अब वह घूघरी के लिए मैंने साहब, कहा। लोगों ने बहुत विरोध किया कि यह घूघरी मत खिलाओ बच्‍चों को। बच्‍चे खाते नहीं है। एक दिन खा ली, दो दिन खा ली और तीसरे दिन घर में मवेशियों के सामने रख देते हैं। लक्ष्‍मीजी, आपको मालूम है न? है ध्‍यान में। नहीं-नहीं, है उनको ध्‍यान में इसलिए कह रहा हूं। ... (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): जलवा पूजते है न गांवों में तो घूघरी ही बनाते हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): घूघरी ही बनाते हैं न तो हां, तो वही घूघरी बनाते हैं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह घूघरी से कितना पोषण बच्‍चों को मिलता था? इस घूघरी से इस प्रदेश की एक भावी पीढ़ी कितनी पोषण पाती थी? कितनी शक्तिशाली और स्‍वस्‍थ बनने वाली थी और इस घूघरी के लिए जो इस सरकार के आने के बाद में सोचा, मिड डे मील की एक ऐसी योजना बच्‍चों को, ऐसा भोजन मिले जिससे उनको पोषण मिले। बच्‍चों को ऐसा एक व्‍यवस्थित भोजन मिले, ऐसा स्‍वादिष्‍ट भोजन मिले कि बच्‍चे उसको खाये ताकि कुपोषित बच्‍चों को पोषण मिले और मैं तो वहां पर स्‍कूलों में गया था, उस समय मैंने लोगों से पूछा था और लोगों ने तारीफ की।

 

शिव/अरूण/15.50/2o/6.3.2007(1)

 

और लोगों ने बताया सात दिन का भोजन किस प्रकार से बनता है। उनके घर में भी नहीं बनता होगा। (व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): नहीं-नहीं, यह कुपोषण का गेहूं आ कहां से रहा है, इस पर भी थोड़ा-सा प्रकाश डाल दो।(व्‍यवधान)...

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): किसानों के खेतों से आ रहा है।(व्‍यवधान)...

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): अमरीका से आ रहा है। अभी मंगा लिये अमरीका से आपने, पी एल 480 याद करो। अगर याद है तो इस देश के अंदर पी एल 480 का गेहूं जिस प्रकार आया था, जिसके अंदर एक अलग गंध आती थी, जिसको इस प्रदेश ने खाया था, इस हिन्‍दुस्‍तान ने खाया था।

श्री अध्‍यक्ष: हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, प्‍लीज बीच में व्‍यवधान नहीं डालें। (व्‍यवधान)...

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): आज वह दिन याद दिला दिया हरिमोहन जी आपने। देश के अंदर पी एल 480 की तरह छोटे, लाल गेहूं आज हिन्‍दुस्‍तान के ए पी एल के लोगों के लिये आ रहा है। (व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: दौसा से आने वाले माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण करें।   

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): अध्‍यक्ष महोदय, जितना आवंटित पिछले वर्ष था, उसका 10 प्रतिशत, 16 हजार मीट्रिक टन गेहूं राजस्‍थान को मिल रहा है। उसका 90 प्रतिशत गेहूं आज बंद कर दिया। हिन्‍दुस्‍तान की हालत को किस स्‍तर पर रख दिया आपने ? हिन्‍दुस्‍तान का गेहूं कहां चला गया? हमने अमरीका से पी एल 480 से मुक्ति पा ली थी। कहां चला गया, किसने यह निर्णय ले लिया ? यह कौन अर्थशास्‍त्री था इस देश का, जिसने यह निर्णय ले लिया कि इस देश का गेहूं बाहर चला जाये।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): इतनी तारीफ तो भारतीय जनता पार्टी के एम एल एज ने भी नहीं की।

श्री अध्‍यक्ष: हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप बार-बार उठते हैं, क्‍या गड़बड़ है? (व्‍यवधान)...

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): नहीं, मैं सत्‍य चीज देख रहा हूं। आज 14 लाख मीट्रिक टन का गेहूं बाहर से मांगना पड़े और वह गेहूं बारीक, वह गेहूं लाल, वह गेहूं एक प्रकार की गंध लिये हुए है और उस गेहूं को कैसे लोग खायेंगे, उसको लोग पसन्‍द नहीं करते। उनको अच्‍छा गेहूं दिलवाओ न, जाओ कहो न उनको।

मैं घूघरी की बात पर आ रहा हूं। मिड डे मील में क्‍या मिल रहा है ? अध्‍यक्ष महोदय, सुनने लायक बात है। आप भी कभी स्‍कूल में गये होंगे। मैंने पूछा सोमवार को क्‍या बनता है? सात दिन का आपने मीनू बना रखा है। सोमवार को हम रोटी-सब्‍जी देते हैं। मंगलवार को क्‍या देते हैं? हम तो दाल-रोटी देते हैं। बुधवार को खिचड़ी, गुरूवार को चावल या सब्‍जी रोटी, जो भी मर्जी हो और शुक्रवार को दाल-बाटी और जब मेरे क्षेत्र के अंदर मीठे चावल को सुदरणा कहते हैं, शनिवार को हमारे वहां स्‍कूल के अंदर मीठे चावल बनते हैं, सुदरणा बनता है। यह भोजन है। अब वहां बच्‍चे आ रहे हैं। हां, एक बात जरूर कहूंगा। महिपाल जी, मैं एक बात जरूर कह रहा हूं कि शिक्षकों के ऊपर जो इसको पकाने का और व्‍यवस्थित करने का जो भार है, अगर सामाजिक संस्‍थाओं को किसी प्रकार से जोड़ दिया जाये, वैसे किचन में काम करने वाली एक-दो औरतें होती हैं, लेकिन यूं नहीं मास्‍टरों को उससे थोड़ा बाहर निकालो। शिक्षको को उससे फ्री करो, वह यहां जुड़ जायें। लोग-बाग जुड़ जायें, मौका भी है। लोग-बाग चाहते भी हैं, कोई न कोई इसमें जुड़ें।

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): जोधपुर में 423 स्‍कूलों के अंदर खाना बनाकर, खाना वहां स्‍कूल में नहीं बनता, वहां से टिफिन आते हैं और टिफिन डबल होते हैं, एक को देकर दूसरा टिफिन ले आते हैं।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): आपके वहां हैं, उसकी कह रहा हूं मैं, उसको हटाओ। अब 237 ब्‍लॉक है। इनमें डार्क जोन में 141 हैं, पानी नहीं हैं, पानी चला गया है, पानी में फ्लोराइड आ गया, पानी का टी डी एस बढ़ गया है और ऐसी स्थिति के अंदर वास्‍तव में सही बात है, ऐसा दिख रहा है, मैं तो लोगों से कहता हूं तुम पैसे इकट्ठे कर रहे हो, लोग-बाग़ कमाई करने जा रहे हैं, प्रदेश में जा रहे हो, बाहर जा रहे हो, करोड़ों कर लोगे लेकिन जिस दिन पानी नहीं होगा तो क्या होगा ? आज बिसलरी की एक बोतल 10 रुपये में खरीदोगे तब उसके दो हजार रुपये की कीमत हो जायेगी। अगर पीने का पानी नहीं होगा तो मुश्किल हो जायेगी। यह आपका पैसा उस समय उसमें चला जायेगा। पैसा काम नहीं आयेगा। पानी को वापस किस प्रकार से हम इकट्ठा करें। इस धरती के गर्भ के पानी का हमने दोहन कर लिया, शोषण कर लिया, उस पानी का भरण हम कैसे करें? योजनाएं हैं, केन्‍द्र की भी हैं, हमारी भी हैं, लेकिन आज यह जनता तक बात पहुंचे कैसे, हम तो दुश्‍मन बने बैठे हैं। मुझे पाँच बीघा की खेती नहीं चाहिये, मुझे दस बीघा पिलाना है, मुझे बीस बीघा पिलाना है, मुझे पच्‍चीस बीघा पिलाना है। मैं उसको खोदता जा रहा हूं, उसमें से पानी निकालता जा रहा हूं। उसको पिलाता जा रहा हूं और कई लोग ऐसे हैं जिनके घर के बाहर तक पानी गया कि नहीं गया, मैं स्‍नान करूं तो ढोलूं जब तक। तब तक मैं पानी ढोलता हूं घर के बाहर पानी गया कि नहीं गया। ऐसे भी इस जल के दुश्‍मन बैठे हैं।

जल चेतना यात्रा, बहुत अच्‍छा निर्णय है। कई लोग कहते हैं इससे क्‍या होगा? नहीं, इससे बहुत असर होता है साहब। ''करत-करत अभ्‍यास के जड़मति होत सुजान रसरी आवत जात है सिर पर पड़त निशान'' अगर बार-बार कहेंगे, लोगों को बार-बार समझायेंगे, हम समझायेंगे। हमारी आने वाली पीढि़यां प्‍यासी नहीं रह जाये, बिना पानी के तड़प-तड़प कर मर नहीं जायें। इसी कारण से हम सबकी यह जिम्‍मेदारी बन जाती है, कर्तव्‍य बन जाता है कि हम उस पानी के लिये चेतना जागृत करें। यह सरकार ने किया। 60 लाख लोगों से रूबरू, 18 हजार गांवों से सम्‍पर्क बहुत अच्‍छी बात है। (व्‍यवधान) पानी के लिये कर्जे की बात मत करो।

शिक्षा मंत्रीजी अभी हैं नहीं, कल उनको धन्‍यवाद दे चुके हैं। शिक्षा में बहुत क्रान्ति हुई है। एक रिकार्ड कायम हुआ है। 77 हजार राष्‍ट्रीय औसत, जिसके अंदर एक महाविद्यालय । राष्‍ट्रीय औसत में केरल भी शामिल है, उसमें महाराष्‍ट्र शामिल है, राष्‍ट्रीय औसत जब निकाला गया तो शिक्षित प्रदेश पूना भी शामिल है, लेकिन राजस्‍थान ने इस बार रिकार्ड तोड़ा। एक क्रान्ति हुई है कि हमारे 63 हजार की जनसंख्‍या पर एक महाविद्यालय है, यह रिकार्ड है। हम आगे बढ़ रहे हैं। राजस्‍थान आगे बढ़ा है। एक यूनेस्‍को कन्‍फ्यूशियस अवार्ड राजस्‍थान को मिला है। यह सामान्‍य अवार्ड नहीं है, शिक्षा क्षेत्र के अंदर बहुत ही प्रतिष्ठित अवार्ड है। यह सम्‍मान राजस्‍थान ने प्राप्‍त किया है। (व्‍यवधान) .... वहां सत्‍येन्‍द्र मित्रेय है।

अब सही बात है, आठ घण्‍टे बिजली की वास्‍तव में घोषणा हुई थी, नहीं दे रहे हैं। केन्‍द्रीय गृहों से आवंटित बिजली हमको नहीं मिली। पंजाब से मांगी, पंजाब से बिजली नहीं दी। केन्‍द्रीय गृहों ने हमारी बिजली रोक दी, वह नहीं दे रहे हैं। हमें तो विश्‍वास है, लिखित समझौता हुआ था, वह कहां गया और ऐनवक्‍त पर जब किसानों को बिजली की आवश्‍यकता थी उस समय उनके वायदे पूरे नहीं हुए और हमको बिजली नहीं मिल पायी। फिर भी हर बार, वह ठीक है, उन्‍होंने कहा कि बिजली की कीमत बढ़ानी चाहिये। मैं सरकार को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि किसान अभी तक सक्षम नहीं हुआ है, किसान की खेती बहुत मंहगी होती है। इसलिए बिजली का सरकार ने भार ओढ़ा है तो ठीक है, कोई बात नहीं, किसान के हक में ओढ़ना भी चाहिये। तीन वर्षों में 1400 करोड़ रुपये बिजली के लिये सरकार ने किसानों के लिये अलग से खर्च किये हैं, अतिरिक्‍त खर्चा किया है। धन्‍यवाद देता हूं मैं। (व्‍यवधान)... कोई बात नहीं, फिर भी एक रिकार्ड है। 1028 लाख यूनिट विद्युत की आपूर्ति का अब तक का सर्वाधिक रिकार्ड है। किसान भी संतुष्‍ट हैं। आठ घण्‍टे बिजली मिलनी चाहिये, दस घण्‍टे बिजली चाहिये किसान को। मैं भी चाहता हूं कि बिजली मिले। पाँच घण्‍टे बिजली और उसमें भी ट्रेप होने के कारण किसान दु:खी है। यदि राजस्‍थान को समर्थ देखना चाहते हो तो किसान को समर्थ देखो।

 

msr/usc/2p/1600/06032007

 

राजस्‍थान को प्रगतिशील देखना चाहते हो तो प्रगतिशील किसान को प्रगतिशील बनाओ, राजस्‍थान को विकास की राह पर देखना चाहते हो तो किसान विकास की राह पर पहले चलना चाहिए तभी यह राजस्‍थान विकसित बनेगा। लेकिन फिर भी यह रिकार्ड है, देख लें, माननीय, रिकार्ड में मिल जायेगा।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब बधाई देता हूं और धन्‍यवाद देता हूं, ऊर्जा मंत्री तो मुख्‍यमंत्रीजी हैं, राज्‍य मंत्रीजी को भी, यहां के इन्‍जीनियर्स को भी, वगैरह को भी, भैरोंसिंहजी आये थे, एक सपना देख रहे थे, पवन ऊर्जा लाएं, यह कोयला, यहां से, जो लिग्‍नाइट है उससे ऊर्जा बनाएं। पानी का प्रवाह हमारे पास कहीं नहीं है लेकिन अपने माउंटआबु से पानी गिरता है जिस समय के अन्‍दर उसमें शायद अपन बिजली पैदा करें। एक सपना भैरोंसिंहजी ने देखा था। बाड़मेर भी आये थे। बाड़मेर में 1998 के समय में यहां आये थे घनश्‍यामजी। ...(व्‍यवधान)... आगोरिया नहीं, घनश्‍यामजी की बात कर रहा हूं, एक सम्‍मेलन में आये थे तो उन्‍होंने कहा था, चिंता मत करो, किसानों, एक सोच निकली है वह सोच ऐसी है कि धरती के भूगर्भ में से बिजली पैदा होगी, गैस से बिजली पैदा होगी, यहां जो भरा हुआ कोयला है बाड़मेर में उससे बिजली पैदा होगी और यह जो क्षेत्र है वह ठेठ वहां से लगा कर के खुला आसमान है जहां से बिजली पैदा होगी, उसमें पवन ऊर्जा पैदा होगी और चिमनी बहुत बड़ी बनेगी वहां पर नजमा, क्‍या नाम था, वह प्रधानमंत्री थीं न, भुट्टो, भुट्टो ...(व्‍यवधान)... बेनजीर भुट्टो। वह कि चिमनी इतनी ऊंची बनेगी, हेमारामजी को भी मालूम है, भैरोंसिंहजी ने कहा था कि उसके ऊपर अगर आप बाड़मेर वाले लोग चढ़कर देखोगे तो बेनजीर भुट्टो भी नजर आयेंगी। ...(व्‍यवधान)... हां, उस समय प्रधानमंत्री थीं, भाई।

तो मैं जो कह रहा था कि 28 तारीख को मन बहुत प्रसन्‍न हो गया। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 28 तारीख को मेरा मन बहुत प्रफुल्लित हुआ।

श्री अध्‍यक्ष: आपने पूरे 20 मिनट ले लिये हैं Please conclude your speech within two or three minutes.

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): थोड़ासा।

श्री अध्‍यक्ष: आधा घंटा ले लिया आपने।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): बहुत थोड़ासा और। तो उस समय मन बड़ा प्रफुल्लित हुआ।

श्री अध्‍यक्ष: आपका समय घट रहा है। आपके बोलने वाले बहुत हैं, आपका समय घट रहा है। ...(व्‍यवधान)...

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): 28 तारीख को इस राजस्‍थान के अन्‍दर एक ऐतिहासिक कार्य हुआ, स्‍वर्ण अक्षरों में लिखा जाए, हजारों वर्षों से पडा हुआ लिग्‍नाइट बाड़मेर की धरती के अन्‍दर और वह लिग्‍नाइट जिसकी कल्‍पना करते थे कि एक दिन उससे बिजली पैदा होगी ...

श्री अध्‍यक्ष: आप उधर क्‍या देखते हैं, अध्‍यक्ष की तरफ देख कर बोलें न।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): नहीं, मैं अध्‍यक्षजी की तरफ ही देखता हूं। वैसे मैं यों करता हूं तो भी आंखें उधर ही रहती है, साहब।

श्री अध्‍यक्ष: आप तो बारबार उधर देखते हो, उनका एप्रिशिएशन ...(व्‍यवधान)...

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): तो उस दिन 125 मेगावाट की बिजली ...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह तो इधर इसलिए देखते हैं कि आप लोग जो अभी तक बोले उनसे सबसे अच्‍छा आपकी तारीफ मैं कर रहा हूं और आप कुछ काम के नहीं हो।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): हां, हरिमोहनजी, मैं आपकी भी कर रहा हूं , आप भी बहुत अच्‍छा बोलते हैं वैसे।

हां तो 125 मेगावाट बाड़मेर की धरती में 28 तारीख को वह प्रारम्‍भ हो गयी बिजली का उत्‍पादन, में धन्‍यवाद देता हूं और वह धन्‍यवाद मैं ही सिर्फ नहीं देता, वहां की जनता देती है और केन्‍द्र से आये राज्‍य मंत्री, दासारी नारायण राव बहुत प्रसन्‍न हुए, बहुत खुश हुए क्‍योंकि वहां 125 मेगावाट का उद्घाटन करने से पूर्व वह आये थे कि 1000 मेगावाट, वह हमारे तगारामजी के वहां है, मैंने ऊर्जा मंत्रीजी का नाम दे दिया उनको, कहां हैं तगारामजी, नहीं हैं।

श्री अध्‍यक्ष: फिर आप उधर देखने लगे। फिर उधर देखने लगे आप। ...(व्‍यवधान)...

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): वह तो उनके क्षेत्र में था और यह था इनके जालम सिंहजी के, अब जालम सिंहजी ने तगारामजी को समय पर नहीं बुलाया वह बात एक अलग है लेकिन 1000 मेगावाट इधर और वह एक यूनिट तो शुरू हो गयी तो सात-आठ महीने में दूसरी यूनिट और एक 125 की शुरू हो जायेगी, हजार मेगावाट वहां दूसरा और लिग्‍नाइट पर बनेगा और वास्‍तव में दासारी नारायण रावजी ने जो शब्‍द कहे थे वह मैं सुन रहा था। उन्‍होंने कहा था कि राजनीति की जगह है पर मैं यही कहूंगा कि मुख्‍यमंत्री वसुन्‍धरा राजे प्रदेश को विकसित राज्‍य बनाने में कामयाब हो रही हैं। बहुत सुन्‍दर, मुझे बहुत अच्‍छा लगा और वैसे भी वो बहुत अच्‍छे मंत्री हैं बोलचाल में, मिलने में हंसते हैं, करते हैं, बढि़या आदमी हैं। बिलकुल ठीक कहा उन्‍होंने। उन्‍होंने कहा, राज्‍य में विकास के नये आयाम स्‍थापित करने के लिए मुख्‍यमंत्री वसुन्‍धरा राजे की तारीफ की है। और आगे उन्‍होंने कहा कि भारत में राजस्‍थान ही एक ऐसा राज्‍य है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहां विद्युत परियोजनाओं को कम समय में इतनी तेज गति मिली, दो साल में ही तैयार हो गया। दो साल में और इसीलिए ...(व्‍यवधान)... यों मत टोका करो, मुझे देखने दो जरा ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप तो फ्लो तोड़ो ही मत, आप तो चालू रखो।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): लिग्‍नाइट बेस की पहली विद्युत परियोजना शुरू हो रही है जिसे स्‍वीकृति के बाद चालू करने में राज्‍य सरकार ने तमाम औपचारिकताएं पूर्ण करने में सिर्फ दो वर्ष का समय लगाया। उन्‍होंने कहा, मुख्‍यमंत्री की यह सोच थी कि जहां कोयला निकले वहीं बिजली पैदा हो, बहुत अच्‍छा है। राजस्‍थान का विकास हमें दृष्टिगोचर हो रहा है, राजस्‍थान विकसित हो रहा है और इन हाथों में कोई माने या नहीं माने, किसी को बुरा लगे, लगता होगा, वसुन्‍धरा राजे के इन तीन वर्षों में यह साबित करक दिया है। एक सोच, मन में उमंग, एक दृढ़ निश्‍चय, एक आत्‍म-विश्‍वास है यह राजस्‍थान, जिसकी बागडोर मेरे हाथ में है, यह लगाम मेरे हाथ में है वहां वास्‍तव में राजस्‍थान विकसित होना चाहिए, प्रगति पर चलना चाहिए, देश में नाम करना चाहिए।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके साथ ही अभी बहुत सारी बातें थीं लेकिन आप समय देंगी नहीं इसलिए मैं कहूंगा नहीं, में एक जरूर कहता हूं कि नशा बहुत बुरी चीज है। दारू पूरे विश्‍व के अन्‍दर स्‍वीकार है। नहीं, वो क्‍या कहते हैं मिलाते हैं जो गिलास में? ...(व्‍यवधान)... वो च्‍यूज करते हैं कि क्‍या करते हैं?

एक माननीय सदस्‍य: आपको पता नहीं है क्‍या?

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): नहीं, मुझे मालूम नहीं है। लेकिन, साहब यह अफीम जहर है, विश्‍व के अन्‍दर जहर है। दवाइयां बनाने के काम आती है, सब कुछ है और चीन ने जब अफीम खाया तो चीन दुनिया में पीछे रह गया और जिस दिन से उसने अफीम छोड़ी चीन आज विश्‍व के अन्‍दर और देशों को पीछे छोड़ने की बात कर रहे हैं। लेकिन, साहब हमारा रेगिस्‍तान है, उधर पश्चिमी राजस्‍थान है, आदत उसकी पड़ी हुई है। गांव के लोग इकट्ठे होते हैं, काम तो होता नहीं, बरसात एक बार होती थी, उसके अन्‍दर लोग इकट्ठे होते थे, सुबह मिलते थे, बैठ जाते थे। उसके बाद क्‍या करें? या तो बीड़ी पीओ, चिलम पीओ, हुक्‍का पीओ, बंद हो गया और बाद में धीरे-धीरे अफीम तो कम कर दी उन्‍होंने डोडा पोस्‍त पीना शुरू किया और कोई जरूरी नहीं है, थोड़ा पीते हैं और आता है, सिगरेट बीड़ी पीते हैं, हम को भी थोड़ा लगता है, थोड़ा पीते हैं, पीने से ठीक लगता है। लोग आदी हो गये। अब मेरा ख्‍याल है बंद करोगे जब बंद करोगे या फिर जितना भी उत्‍पादन डोडा का होता है इसमें किसी दिन नष्‍ट करोगे, वह बात अलग है लेकिन उसको इक्‍ट्ठा कर के अपने पास में सात गोडाउन है, सात वेयरहाउस हैं, ठीक है दारू के तरह इसमें भी अभी माफिया को कम कर दिया आपने, बहुत ठीक बात है। वो एक बार ही 27-27 जिलों का एक साथ ही डोडा का भी ठेका लेते थे और कब भाव बढ़ता है, कब कैसे होता है, कब कम करना है, कम ज्‍यादा करना है वह सारा होता था लेकिन अब वो उसमें से तो निकाल दिया लेकिन राजस्‍थान का डोडा खतम हो गया। मुख्‍यमंत्रीजी से बात की कि डोडा खतम हो गया और लोगबाग यों कर रहे हैं, क्‍या करोगे? तो कहा कि अच्‍छी बात है डोडा खतम हो गया औरे लोगबाग नशा नहीं करेंगे। मैंने कहा, साहब, मेरा किसान वर्ग जो यह डोडे पीता है, आदी हो चुके हैं, उसके बिना वो नहीं चल सकता तो उन्‍होंने कहा, ऐसी बात है। मैंने कहा, हां और मैं धन्‍यवाद दूंगा मुख्‍यमंत्रीजी को कि उन्‍होंने उसी समय कहा कि वह फाइल जो पड़ी है मध्‍य प्रदेश से डोडा मंगाना बाकी है। क्‍योंकि लोग आदी हो गये, एडिक्‍ट हो गये उसके इसी कारण से आवश्‍यक है। मैं धन्‍यवाद दूंगा, हालांकि मोरल की दृष्टि से कितना ठीक है, कितना ठीक नहीं है आप विचार करें लेकिन अभी हेमारामजी ने भी मांग की थी, उन्‍होंने भी मांग की है क्‍या खुशवीर सिंहजी ने भी? हां, यह डोडों की मांग की  थी ...(व्‍यवधान)... सबने तो की है। अच्‍छा, पश्चिमी राजस्‍थान के सब कर रहे हैं, साहब।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): भाव भी क्‍या हैं डोडा के? उन डोडा वालों से पैसे कितने ले रहा है ठेकेदार, यह मालूम है आपको? ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: क्‍यों बारबार बोल रहे हो?

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): बहुत ज्‍यादा है। नहीं, पैसा बहुत ज्‍यादा है, साहब, पैसा सरकार कम कर जाए तो बहुत अच्‍छी बात है।

 

Ars/usc/1610/2q/06032007/1

 

आप कहेंगे किरोड़ीलाल जी, आप कहना डोडों का पैसा थोड़ा कम हो जाए, कहना जरा सिफारिश करना पश्चिमी राजस्‍थान के लोगों के लिए। अब एक बात कहकर मैं अपनी बात पूरी कर रहा हूं। एक चीज बहुत मेरे दिल को लगती है। मैं कल्‍ला साहब आपका ध्‍यान भी चाहूंगा इस तरफ, माननीय अध्‍यक्ष महोदय तो मुझे देख ही रही हैं,नसबंदी के अन्‍दर प्रोत्‍साहन राशि हमने डबल कर दी। डबल कर दी प्रोत्‍साहन राशि नसबंदी करवाने वालों को ।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): कल्‍ला साहब का क्‍या मतलब है इसके अन्‍दर? कल्‍ला साहब ने क्‍या कर दिया ?

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): मैं दूसरी बात कह रहा हूं जनसंख्‍या का विस्‍फोट हमें खा जाएगा, प्रगति खा जाएगा।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, ना ना।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): विकास को निगल जाएगा।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): कल्‍ला साहब ने क्‍या कर दिया उनके पीछे क्‍यों पड़े हो आप?

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): सभी को मिलकर एक निर्णय पर जाना है ।

श्री अध्‍यक्ष: आप उल्‍टी बात कह रहे हैं संस्‍थागत डिलीवरी प्रसव में की है डबल राशि। जो कोई किसी इंस्‍टीट्यूशन में जाकर के डिलीवरी कराएगी उन महिलाओं की डबल की है।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): महिलाओं के लिए तो 1400 कर दी है। ग्रामीण महिला अगर वहां आएगी तो 1400 रुपए और शहरी महिला अगर आएगी तो हजार रुपए । दो लाख महिलाओं ने अब तक लाभ उठा लिया। वह बात अलग है, मैं नसबंदी की बात पूरी करूंगा, जल्‍दी करूंगा, पुरूष नसबंदी की बात, जनसंख्‍या का विस्‍फोट हमें ले डूबेगा, हिन्‍दुस्‍तान को ले डूबेगा, राजस्‍थान को ले डूबेगा, विकास को यह खा जाएगा और प्रगति को यह पी जाएगा हालात ऐसे हैं। ऐसी स्थिति के अन्‍दर, अध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहूंगा सभी लोग विचार करें यह जो वातावरण बाहर फैलता है हिन्‍दू क्‍यों करवाएं नसबंदी जबकि मुसलमान नहीं करवाता और मुसलमानों ने कहा कि क्‍यों कम करवाते हो तुम तुम्‍हें नसबंदी नहीं करवानी चाहिए, जनसंख्‍या बढ़ानी चाहिए कल हिन्‍दुस्‍तान का राज हमको लेना है। हमारी सारी की सारी चीजें फेल होती जा रही हैं, हम सारे के सारे लोगों में जो विचार रख रहे हैं वह फेल होते जा रहे हैं और लोग अब धीरे धीरे नसबंदी से वापस आ रहे हैं कि मुसलमान नहीं करवाते तो हम क्‍यों करवाएं।

मैंने एक दिन पाकिस्‍तान का टी वी देखा, मैं दूसरी बात रख रहा हूं इसको उस रूप में नहीं लेवें, हिन्‍दु मुसलमान के रूप में नहीं लें। मैं क्‍या पता मंदिर जाता हूं कि नहीं जाता हूं, देवता को मानता हूं या नहीं मानता हूं, मैं अलग टाइप का हूं लेकिन राष्‍ट्र को मानता हूं मैं । मेरे कहने का तात्‍पर्य है ...

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह बहुत गम्‍भीर विषय है आप इस तरह से धार्मिक भावना नहीं भड़का सकते। मेरा तो एक ही अर्ज करना है कि आप कानून पास करिए ना आपकी सरकार है कानून पास करिए।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): यही तो मैं कह रहा हूं यह केन्‍द्र से होगा।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): कहते कहते बुड्ढे हो गये आप ...(व्‍यवधान) बता दें चार बीघा जमीन दिला दी क्‍या एस सी को ...(व्‍यवधान)

श्री मोहन मेघवाल (सूरसागर): 1977 के अन्‍दर जब भैरोंसिंह जी की सरकार आई थी उस वक्‍त शराब बंद की थी और आपने चालू कर दिया इससे क्‍या मतलब है, आप क्‍या कर रहे हो, आप क्‍या करोगे वह बताओ ना।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): क्‍या करेंगे सरकार आएगी तब कल्‍ला साहब कर देंगे। साल भर बाद सरकार आने दो ...(व्‍यवधान) एक मुख्‍य मंत्री हो गया और दूसरा उप मुख्‍यमंत्री हो गया ...(व्‍यवधान)

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): मैं यह निवेदन कर रहा था अध्‍यक्ष महोदय, कि कभी मौका मिले तो पी टी वी देख लेना, पाकिस्‍तान टी वी और उसके अन्‍दर हमेशा आता है कुनबा छोटा करो, कुनबा छोटा करो। यानि पाकिस्‍तान भी पीछे नहीं है, वह भी चाहता है कि यहां जनसंख्‍या वृद्धि इतनी नहीं होनी चाहिए कि पाकिस्‍तान पिछड़ जाए। हिन्‍दुस्‍तान को निर्णय लेना पड़ेगा, राजनीति से अलग जाकर हमें सोचना पड़ेगा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपका कहना यह है कि माननीय सुदर्शन जी का इरादा और उनका दोनों का सोच एक है, यह कहना चाहते हो क्‍या आप? सुदर्शन जी का फरमाना और पाकिस्‍तान का फरमाना एक जैसा है क्‍या ?

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): हरिमोहन जी, बात अलग है आप दूसरे रूप में जा रहे हो, आप सिर्फ यहां यही बात करो, आप गहराई में नहीं जा रहे ...(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): सुदर्शन जी को ...(व्‍यवधान) देर लगेगी, सुदर्शन जी को पहचानने में टाइम लगेगा।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): मेरे कहने का तात्‍पर्य अलग है। इस गहराई में जाने की आवश्‍यकता है। यह इम्‍बेलेंस इस देश के अन्‍दर कभी भी हो गया तो वैसे भी हम नुकसान में रहेंगे। हिन्‍दु भी जीएं, मुसलमान भी जिएं कोई तकलीफ नहीं। हमारा हिन्‍दुस्‍तान है हम सबका हिन्‍दुस्‍तान है, इसमें कहीं कोई तकलीफ नहीं है लेकिन हम कहीं न कहीं इन चीजों से इस हिन्‍दुस्‍तान को बचाएं।

कुल मिलाकर बहुत सारी बातें थी इस अभिभाषण के अन्‍दर लेकिन कह नहीं पाया। आपने जितना भी समय दिया उसके लिए मैं आपको बहुत बहुत धन्‍यवाद देते हुए अपनी बात समाप्‍त करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: श्री गोबिन्‍द मेघवाल ( अनुपस्थित) श्री शंकरसिंह राजपुरोहित।

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, महामहिम राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर धन्‍यवाद प्रस्‍ताव पर आपने जो मुझे बोलने के लिए आदेश फरमाया है मैं आपका आभारी हूं । साथ में महिला दिवस, जब महिलाओं का जो हित चिन्‍तक का माहौल जो चल रहा है उस दिन जिस प्रकार से म‍हामहिम पधारे और जैसी स्थिति में सदन का माहौल माननीय सदस्‍य द्वारा किया गयाऔर कांग्रेस के सदस्‍यों द्वारा मूक दर्शक होते हुए उसे देखा गया और यह दूसरी बार हुआ है महामहिम के इस अभिभाषण पर। मैं इस घटना की निंदा करते हुए कुछ बातें पचानी पड़ेंगी और जिस तरह से प्रतिपक्ष के बंधुओं हरिमोहन जी और पुष्‍कर से आने वाले आदरणीय बाहेती जी ने जिस प्रकार के आरोप लगाए जिनका कोई औचित्‍य नहीं है। पाँच वर्ष और तीन वर्ष कहीं पर भी किसी प्रकार से किसी भी योजना में आप हाथ नहीं पकड़ सकते। बात स्‍वीकार करनी पड़ेगी, योजना आपने कहा हर वर्ष बढ़ती है लेकिन इतनी आपकी पिछली तीन तीन योजनाओं से इसका आकर इतना बड़ा किया गया, उससे भी डबल कर दी गई यह अपने आप में एक इतिहास है। जैसा अभी सभी माननीय सदस्‍यों ने फरमाया कि एक वित्‍तीय मैनेजमैंट जिसके कारण सरकार की भूरि भूरि प्रंशंसा केन्‍द्र में बैठे हुए कांग्रेस के बंधुओं ने और उसमें मनमोहन सिंह जी करें तो ठीक है लेकिन सुशील कुमार शिंदे जी करें, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं उनको महाराष्‍ट्र की राजनीति से जानता हूं  लेकिन उस आदमी ने जब प्रशंसा की वसुन्‍धरा जी की और उस सरकार की तो वास्‍तव में तारीफ के काबिल है। अब इस बात को स्‍वीकार हरिमोहन जी नहीं कर रहे थे।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मीरा कुमार का याद रहा आपको उनका याद रहा।

श्री अध्‍यक्ष: कोई आवश्‍यकता नहीं है कि हर बार खड़े हो जाएं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): वह पूछ रहे हैं ना साहब।

श्री अध्‍यक्ष: आप नहीं, बिराजें, बिराजें।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): उन्‍होंने पूछा तो मेरा फर्ज था कि मैं कहूं कि मुझे तो मीरा कुमार जी का वक्‍तव्‍य याद रहा जो यहां दिया था कि राजस्‍थान की सरकार गरीबों की, अनुसूचित जाति की विरोधी है।

श्री अध्‍यक्ष: आप सदन के सितारे हो इसलिए आपका ही नाम याद रह गया।

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): अनुसूचित जाति में क्‍या किया क्‍या नहीं किया यह तो हम बतायेंगे। एक एक बात का जवाब दूंगा मैं आपको। योजना का आकार बढ़ा, ओवर ड्राफ्ट नहीं हुआ यह सारी बातें बहुत अच्‍छी हैं लेकिन इसके साथ साथ एक एक विषय को अगर अपन लें .....

 

vns/usc/16.20/3a/6.3.2007

 

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान उस और लाऊंगा कि कल जिस प्रकार हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य हिरमोहन जी ने मंत्री महोदय पर प्रहार किया, मतलब महिला वर्ग के ऊपर जो प्रहार किया। हमारे देश की संस्‍कृति और सभ्‍यता यह कहती है कि जहां नारी की पूजा होती है वहां देवता रमते हैं। मान्‍यवर, यह क्‍या जानेंगे आपकी सर्वोच्‍च लीडर इटली से हैं। इटली से मैं मान्‍यवर...(व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): ऑन ए पाइंट आफ आर्डर। जो माननीय सदस्‍य इस सदन के सदस्‍य नहीं है उनके बारे में कोई टीका टिप्‍पणी करने का इनको अधिकार नहीं है। फिर हम सुदर्शन के बारे में और इनके बारे में जो जनसंख्‍या का विस्‍तार करने के लिये देश की राष्‍ट्रीय नीतियों के खिलाफ बोलते हैं, हम भी बोलेंगे। यह क्‍या मतलब है। एक राष्‍ट्र की गरिमा है।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): इटली से आयी हैं इसको कैसे नकारोगे आप ?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): तो हम यह कहें कि आडवाणीजी पाकिस्‍तान से आये हैं उनको मानते हो। कोई पाकिस्‍तान से आया है, कोई कहां से आया है।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): तो फिर हम यह कहें कि वसुन्‍धरा जी राजस्‍थान की नहीं हैं। वसुन्‍धरा जी राजस्‍थान में पैदा हुई थीं ? राजस्‍थान की बहु हैं। वसुन्‍धरा जी राजस्‍थान में पैदा हुई हैं क्‍या ?

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): अभी तो जो सत्‍य है वह इटली से हैं इसीलिये हम कह रहे हैं..(व्‍यवधान) क्‍वात्रोची से हैं अभी तक..(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आपको तो यह भी पता नहीं है कि वह कहां, बम्‍बई में पैदा हुई हैं। बॉम्‍बे की है क्‍या..(व्‍यवधान) थोड़ी बहुत गरिमा रखा करो।

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): बताता हूं। बताता हूं।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): वह तो इटली से आयी हैं इसको कैसे नकारोगे आप ? उनका पीहर है। इटली उनका पीहर है..(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): और स्‍पीकर महोदया, आपसे भी निवेदन है कि आप जरा आसन की गरिमाओं को रखते हुए आप भी कभी-कभी विरोध कर दिया कीजिये।

श्री अध्‍यक्ष: आप बिराजिये। आप बिराजें। (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): इसको नकार रहे हैं इटली का है। इटली से क्‍यों नकारते हो ? हैं वहां की।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मान्‍यवर, मैं...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, आप भी एक बार बिराज जाइसे। माननीय सदस्‍य, हम प्रजातन्‍त्र में जी रहे हैं। हमारा देश प्रजातांत्रिक है और जो व्‍यक्ति कहीं से भी निर्वाचित होकर चाहे विधान सभा से निर्वाचित होकर के यहां वसुन्‍धरा राजे आयी हों ता वह राजस्‍थान की हैं और यदि सोनिया गांधी भी कहीं से जीत करके और पार्लियामेंट में पहुंची हैं तो वह हिन्‍दुस्‍तान की हैं। अब आप यह कह कर ख्‍वामखाह में क्‍यों करते है कौन कहां का है ? निर्वाचित होकर आया है खतम हुई बात।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): और माननीय सदस्‍य अपना कद देखा करो। कद के हिसाब से तुलना किया करो। आपका यह कद नहीं है कि आप सोनिया गांधी जी के बारे में यहां ऊटपटांग बात करें। हम भी बात करेंगे। जबान हमारे भी है। हम नहीं बख्‍शेंगे फिर। ऐसी बात मत कहो।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप बैठे।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): सुनिये..(व्‍यवधान) हम यहां की पैदाइश हैं, वह बाहर की पैदाइश हैं। हमारे सामने कोई भी कद नहीं है। हिन्‍दुस्‍तान की पैदाइश के सामने विदेशी पैदाइश कोई नहीं टिकती। हमारे बराबर नहीं टिकती है। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): चुप बैठ जाओ आप तो। एक तो इनको कण्‍ट्रोल करिये अध्‍यक्ष महोदय..(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): क्‍या बात कर रहे हैं। इटली में पैदा हुई हैं। इसको कैसे नकारोगे वह तो इटली की हैं..(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ऐसे नहीं चलेगा सदन। यह सारी मर्यादा हमारे लिये नहीं है। नये माननीय सदस्‍य, कोई सीनियर व्‍यक्ति हो और कोई कमेंट करे तो बात समझ में आए। अभी बिलकुल ही कुछ जानकारी ही नहीं परम्‍पराओं की बीच में कुछ भी बोलने लग जाते हैं।

श्री मोहन मेघवाल (सूरसागर): संघ चालक जी का नाम आपने लिया कल वह क्‍या करोगे आप। सदन के सदस्‍य थे क्‍या ? हमारे संघ चालक जी का नाम कैसे लिया ?

श्री अध्‍यक्ष: राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य, हर बार बीच में बोलना जरूरी नहीं है हर बात पर। (व्‍यवधान) आप बैठे-बैठे नहीं बोलें।

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने यह बात इसलिये कही है कि जिनकी सोच में महिलाओं के प्रति क्‍या सोच है, आखिर सोच एक ऊपर से आती है। मैं एक उदाहरण देना चाहूंगा इटली के चर्चा का जीता जागता जुबेर खान जी। जिस चर्च के अन्‍दर दो कपल्‍स 31 दिसम्‍बर को आपस में इंट्रोड्यूज करते हैं। वह कहते हैं यह मेरे बच्‍चे हैं, यह मेरी पत्‍नी के बच्‍चे हैं। यह हम दोनों के बच्‍चे हैं। यह मेरे बच्‍चे जब मैं किसी और के साथ था। यह मेरी पत्‍नी के बच्‍चे जब मेरी पत्‍नी किसी और के साथ थी और यह अब हम दोनों के बच्‍चे हैं। यह वहां का कल्‍चर है। इस देश का कल्‍चर यह है कि यह मेरी पत्‍नी है, यह मेरा भाई है, यह मेरी बहन है, यह मेरी माता है। मैं इस बात को जाहिर करता हूं...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आपकी सरकार के मंत्रियों और मुख्‍यमंत्री की जो कल्‍चर है हमसे कहलवाना चाह रहे हो क्‍या ?

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): वह भी कहिये ना। हम आपकी हर बात का जवाब देंगे।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): कहां-कहां क्‍या करते हैं वह जगह भी बताना चाहते हो क्‍या कि हम यहां सदन..(व्‍यवधान) जनता को बतायें कि  *** यह बतवाना चाहते हो हमसे।

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): बिलकुल।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): इसलिये अपनी *** सीमाओं में रहिये।

श्री अध्‍यक्ष: रामगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य। हाईली आब्‍जेक्‍शन ..(व्‍यवधान) हाईली आब्‍जेक्‍शन..(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह क्‍या तरीका हुआ ? क्‍या कहना चाहते हो आप ? यह क्‍या बात हुई ? कुछ भी बोल देंगे यह ?...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: गलत बात है यह। यह क्‍या तरीका हुआ आपका ?

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, आपसे निवेदन है आप इनके साथ मिलिये मत। आप आसन के रूप में सर्वोपरि हैं, पूज्‍यनीय हैं। आप इनकी ओछी हरकतों के साथ अपने आपको सम्मिलित नहीं करें..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह क्‍या बात हुई...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह किस तरह का आचरण कर रहे हैं..(व्‍यवधान)

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): पेश करो ना वह। आपके पास जो सबूत हैं वह टेबल पर रख दो अभी आपका फैंसला हो जायेगा। (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): इतनी *** थी। *** बता दी। इतनी ही *** थी..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य, कृपया स्‍थान ग्रहण करें।

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विपक्ष के सचेतक महोदय अपने पास जो सबूत हैं..(व्‍यवधान) आप सबूत पेश करना (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण कर लें...(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): अध्‍यक्ष महोदय, जो आरोप लगाया इनकी ओछी मानसिकता का परिचय है ..(व्‍यवधान) तंदूर कांड, नैना साहनी के हत्‍यारे..(व्‍यवधान) उस महिला को जिंदा काटकर जला दिया। क्‍या बोलने का अधिकार रखते हो। इन्‍होंने तो तंदूर में जला दिया..(व्‍यवधान)

डा.बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आप इनको कहें अपने स्‍थान से बोलें..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप बैठे-बैठे बोलेंगे नहीं और यदि आपको बोलना है तो अपने स्‍थान पर। यहां बैठे रह सकते हैं लेकिन आप बोलेंगे नहीं। बोलना है तो अपने स्‍थान पर जाइये..(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): यदि इनके पास कुछ कहने को है तो सदन के पटल पर रखें, नहीं तो माफी मांगे..(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माफी मांगे। ऐसे यह नहीं समझें कि आपका जैसा व्‍यक्तित्‍व है..(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मैंने कोई ऐसी बात नहीं कही है जिससे माफी..(व्‍यवधान)

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (उप मुख्‍य सचेतक): यह आचरण बिलकुल निंदनीय है। इस तरह का आचरण सदन में बिलकुल नहीं होना चाहिये। बिलकुल गलत है। सदन में इस तरह का आचरण निंदनीय होना चाहिये..(व्‍यवधान)

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली): आप इनसे माफी मंगवाइये..(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): रामगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य, बड़े आदर्श की बात बताओ..(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): आपको माफी मांगनी होगी। आपने यह कह दिया, सदन में जिस प्रकार की बात कही है सदन में माफी मांगो..(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): सदन में जिस प्रकार की बात कही है, आप अपने जैसा सबको नहीं समझें। आप दोहरे चरित्र के हो सकते हैं..(व्‍यवधान) आप जैसा *** आदमी..(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): प्रस्‍ताव लायें। इनको निलम्बित करने का प्रस्‍ताव लाये। निलम्‍बन का प्रस्‍ताव लाएं। इनको बाहर निकाला जाए..(व्‍यवधान) 

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री के बारे में जो टीका टिप्‍पणी की है उनसे माफी मंगवाइये, खेद प्रकट करवाइये। (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): नैना साहनी के हत्‍यारों, आपने महिला को काट कर तंदूर में जला कर खाने वालों। नैना साहनी के हत्‍यारों..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य, मुझे कह लेने दीजिये सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य। प्रतिपक्ष के सचेतक के मुंह से  एक ऐसा गैर जिम्‍मेदाराना वाक्‍य निकल गया जो मैं समझती हूं उन्‍होंने कहा कि आपके मुख्‍यमंत्री और आपके मंत्रि कहां-कहां जाते हैं हम यह बतायें क्‍या ? यह बहुत गलत बात है। यह आपको इस तरह से नहीं बोलना चाहिये। हां, तो बताइये कहां-कहां जाते हैं वरना आपने कैसे बोल दी यह बात..(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): इसका गलत अर्थ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह आपने कहा। बैठे हैं..(व्‍यवधान) यह क्‍या बात हुई ? यह कोई तरीका नहीं है आपका। गलत बात है। यह क्‍या बात हुई ? (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, इसको कार्यवाही से निकालें..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप खड़े होकर कहिये गलत बात है आपकी..(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माफी मांगे..(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): एक्‍सपंज कराइये इसको। इसको कार्यवाही से निकालें। इसको एक्‍सपंज करायें अध्‍यक्ष महोदय..(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माफी मांगे सचेतक..(व्‍यवधान) माफी मांगे। हम बर्दाश्‍त नहीं करेंगे..(व्‍यवधान)

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (उप मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसको कार्यवाही से निकाला जाये। इसको एक्‍सपंज किया जाये। (व्‍यवधान)  जो माननीय सदस्‍य ने कहा है उसको एक्‍सपंज किया जाये। उसको कार्यवाही से निकाला जाये..(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माफी मांगे यह.....(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): इन्‍होंने जो बात कही माननीय मुख्‍यमंत्री जी और मंत्रियों के लिये..(व्‍यवधान) माफी मंगवाइये..(व्‍यवधान) इन्‍होंने जो बात कही है इनसे माफी मंगवाइये। माफी मांगे नहीं तो बाहर..(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माफी मांगे नहीं तो बाहर निकालो..(व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस सदन की स्‍वस्‍थ परम्‍परा रही है..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सिट डाउन प्‍लीज। आप बैठे-बैठे बोल रहे हैं। बैठिये-बैठिये..(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आपने फरमाया कि..(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह सदन किससे चलता है ? सदन नियमों से चलता है..(व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): यह सदन स्‍वस्‍थ परम्‍पराओं से चलता है..(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): आज तक के इतिहास में इस प्रकार की घटिया बातें नहीं की हैं..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: वह वापस लेने के लिये खड़े हुये हैं आप बोलने ही नहीं दे रहे। वह अपने शब्‍द वापस लेने के लिये खड़े हुये हैं आप बोलने नहीं दे रहे उन्‍हें।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, आपने फरमाया देखिये मैंने कोई जगह का नाम नहीं लिया। क्‍या मुख्‍यमंत्री दिल्‍ली नहीं जाते।

 

श्‍याम/अरूण   6.03.2007  16.30  3b 

 

(व्‍यवधान) नागपुर नहीं जाती ...(व्‍यवधान) मेरा कहने का मतलब यह है कि आर.एस.एस. हैडक्‍वार्टर नागपुर जाते हैं कि नहीं जाते बतायें ...(व्‍यवधान)

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, बहुत ही अशोभनीय टिप्‍पणी है इनकी ...(व्‍यवधान) बहुत ही अशोभनीय और बहुत ही अनर्गल टिप्‍पणी है ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मुख्‍यमंत्री नागपुर जाती हैं या नहीं जाती हैं ...(व्‍यवधान)

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): जिस तरीके से कहा गया ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मैंने कोई गलत नहीं कहा ...(व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): आप यह खेद प्रकट करें ...(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): नागपुर और राजस्‍थान ...(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): सब्‍जी मंडी नहीं है ...(व्‍यवधान) हाउस के अंदर आप गरिमापूर्ण बात करेंगे, सदन की गरिमा की बात करें ...(व्‍यवधान)

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, हाउस में इस तरह से गैर जिम्‍मेदाराना अनर्गल ...(व्‍यवधान) बहुत ही गलत है, सदन की गरिमा के प्रतिकूल है।

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): मुख्‍यमंत्री जी के बारे में जो इन्‍होंने टीका-टिप्‍पणी की है, आप खेद प्रकट करें फिर हाउस में बोलने का मौका दिया जाये ...(व्‍यवधान)

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): माफी मांगे।

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): आये जो ही अनर्गल बातें कह दे ...(व्‍यवधान) चाहे जिसके बारे में कुछ भी कह दें ...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: इनको प्रताडि़त किया जाये ...(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): अध्‍यक्ष महादेय, यह माफी मांगे ...(व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): इनको प्रताडि़त किया जाये ...(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): यह अनर्गल बकवास कर दें किसी के लिए भी कुछ बोल दें, यह कोई बात नहीं हुई ...(व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): अध्‍यक्ष महोदय, प्रताडि़त किया जाये। इनको प्रताडि़त किया जाये, खेद प्रकट कराया जाये ...(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): जब से सदन चल रहा है, आप प्रस्‍ताव लायें और इनको बाहर निकलवायें और इस प्रकार का व्‍यक्ति सदन में रह नहीं सकता है, ऐसा घटिया व्‍यक्तित्‍व का,  *** इस प्रकार का अनर्गल आरोप लगाने वाला व्‍यक्ति और मैं सोचता हूं कि इनका मतदाता भी शर्मसार हो रहा होगा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक निवेदन करना चाहता हूं ...(व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): कैसे मतदाता ने इनको सदन में जिताकर भेज दिया ...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मैं एक निवेदन करना चाहता हूं ...(व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): जनता के विरोधी, किसान के विरोधी, सरकार के विरोधी, नारी के विरोधी, इनको प्रताडि़त किया जाये, खेद प्रकट कराया जाये।

एक माननीय सदस्‍य: अपनी गिरेहबान में झांककर के देखें, आपका चिट्ठा खुलवाना है, मैं खोलने को तैयार हूं, मेरे पास है इतिहास आप सबका ...(व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): माननीय सरकारी उप मुख्‍य सचेतक इनको बाहर निकालने का प्रस्‍ताव लाया जाये। सदन के बाहर निकालने का प्रस्‍ताव लाया जाये और बहुमत से पारित किया जाये।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें, कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें ...(व्‍यवधान) आप स्‍थान ग्रहण कर लें, निवेदन नहीं ...(व्‍यवधान) नहीं, नहीं, कुछ नहीं, बैठें आप। रामगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य जिस लहले में और जिस रेफरेंस में जो अपमानजनक बात आपसे निकल गयी, आपको खेद प्रकट कर देना चाहिए।

श्री जुबेर खान (रामगढ़):  रेफरेंस में मैंने तो कहा है।

श्री अध्‍यक्ष: गलत बात, गलत बात, नहीं, नहीं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, आप प्रोसीडिंग निकलवा लीजिये ...(व्‍यवधान)

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (केसरीसिंहपुर): पूरे हाउस ने सुना है और आपने सुना है ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आप प्रोसीडिंग निकलवा लीजिये ...(व्‍यवधान) तो मैं खेद व्‍यक्‍त कर दूंगा ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: प्‍लीज, सीट डाउन ...(व्‍यवधान) हां, मैं देख लेती हूं, हां, हां, देखती हूं, अभी देखती हूं, सिट डाउन, आप कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें, मैं देख लेती हूं लेकिन मैंने स्‍वयं अपने कानों से सुना है, आपने कहा ...(व्‍यवधान) आप भी।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): स्‍पीकर महोदय क्‍या सुना, यही सुना ना कि कहां-कहां जाते हैं, यही कहा ना, इसके अलावा मैंने क्‍या कहा।

श्री अध्‍यक्ष: आप सुने तो सहीं, आप बिराजें तो सही ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): नागपुर नहीं जाती, चंडीगढ़ नहीं जाती ...(व्‍यवधान) देहरादून नहीं जाती हैं ...(व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): यह इस लहजे में नहीं था ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अमेरिका नहीं जाती हैं, इंग्‍लैंड नहीं जाती है ...(व्‍यवधान) कहां नहीं जाती हैं।

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): बदनीयती से कहा ...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): बहुत अच्‍छा, कोई गलत नहीं है, घबराये मत ...(व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): यह आप खेद प्रकट करें, नहीं तो सदन के बहार निकलवायें ...(व्‍यवधान)

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, इनसे खेद व्‍यक्‍त करायें ...(व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): आसन से जो व्‍यवस्‍था हो गयी उसकी पालना हो।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): जिस रेफरेंस में माननीय सदन ने कहा है ...(व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): कोई रेफरेंस नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): आसन की व्‍यवस्‍था सर्वोपरि है ...(व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): वह रेफरेंस दिया था ...(व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): इनसे खेद व्‍यक्‍त करायें ...(व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): आवर सन, वह क्‍या रेफरेंस था, यह बतायें फिर।

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): आसन की व्‍यवस्‍था की पालना हो।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): वह रेफरेंस भी देख लें फिर ...(व्‍यवधान)

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (केसरीसिंहपुर): इनसे खेद व्‍यक्‍त करायें।

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): यह खेद प्रकट करें।

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): आपने जो निर्णय किया है उसकी पालना करायें ...(व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): जो निर्णय दिया है उसकी पालना हो ...(व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने यह कहा है, कहां-कहां जाते हैं यह नहीं है सवाल, सवाल यह है कि जिस प्रकार का लहला और हाव भाव है वह अपमानजनक था ...(व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): यह भी कहा कि अध्‍यक्ष महोदय इसमें शामिल नहीं हैं ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप सदन में नहीं थे ...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: आपकी मुख्‍यमंत्री और मंत्री कहां-कहां जाते हैं ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप सबको खड़े होने की क्‍या आवश्‍यकता है ...(व्‍यवधान) माननीय मंत्री जी आप चूंकि सदन में नहीं थे ...(व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं सुन रहा था ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: जिस परिप्रेक्ष में जो रेफरेंस चल रहा था ...(व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): इसलिए मैं कह रहा हूं ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): और उन्‍होंने किस रेफरेंस में कहा ...(व्‍यवधान) उनसे तो पूछिये उन्‍होंने सोनिया गांधी जी के लिए किस रेफरेंस में कहा ...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: इन्‍होंने संस्‍कृति की बात कही है ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): उन्‍होंने किस रेफरेंस में कहा है ...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): जिस रेफरेंस में वह कह रहे थे उस रेफरेंस के साथ जोड़ रहे थे तो वह रेफरेंस क्‍या था और वह क्‍या बोले थे ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य ...(व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): क्‍या हो गया इसमें ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): वह रेफरेंस ठीक था क्‍या ...(व्‍यवधान)

श्री नन्‍दलाल बंशीवाल (दौसा): अध्‍यक्ष महोदय, आप इनको निलंबित कीजिये ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आप उनसे कह दीजिये उनका रेफरेंस ठीक था क्‍या ...(व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): माफी मांगे, खेद प्रकट करें।

श्री अध्‍यक्ष: आसन पांवों पर है, आसन पांवों पर ।

श्री नन्‍दलाल बंशीवाल (दौसा): मैं आपसे मांग कर रहा हूं आप इनको निलंबित करें ...(व्‍यवधान) मेरी मांग है।

श्री अध्‍यक्ष: आसन पांवों पर है, आसन पांवों पर है, दौसा से आने वाले माननीय सदस्‍य आसन पावों पर है। मैं यह निवेदन कर रही हूं उन्‍होंने सोनिया जी के खिलाफ कोई टिप्‍पणी नहीं की, इटली की सभ्‍यता के खिलाफ टिप्‍पणी की, सुनिये प्‍लीज ...(व्‍यवधान) बीच में कोई नहीं बोलेगा, उन्‍होंने इटली की संस्‍कृति के बारे में आलोचना की, कुछ शब्‍द कहे, वहां की क्‍या संस्‍कृति है और सोनिया का उन्‍होंने नाम भी नहीं लिया था। केवल इतना ही कहा था ...(व्‍यवधान) प्‍लीज, बीच में क्‍यों बोलते हैं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह कहा है इनकी नेता।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): नाम लिया।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): उनके अलावा कोई और भी है कि हमारी नेता ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेता तो आपकी मैं भी हो सकती हूं न ...(व्‍यवधान) क्‍या बात हुई ...(व्‍यवधान) अरे, सुने तो सही ना, अंकित नहीं होगा। किसी का अंकित नहीं होगा, आसन के अलावा किसी का अंकित नहीं होगा। मैं यह निवेदन कर रहा हूं कि उन्‍होंने जो कहा है, आपकी नेता शब्‍द कहा, उसके अलावा बाकी आगे कुछ नहीं कहा, उन्‍होंने संस्‍कृति बतायी इटली की और भारत की, लेकिन आपने उसी परिप्रेक्ष में जो चल रहा है उसमें आपने कह दिया आपकी नेता और आपके मंत्री, आपकी मुख्‍यमंत्री ...(व्‍यवधान) आप बीच में मत बोलिये।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी):  000

श्री अध्‍यक्ष: आपकी मुख्‍यमंत्री और आपके मंत्री कहां-कहां जाते हैं बताऊं क्‍या, यह कहा है ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): 000

श्री नन्‍दलाल बंशीवाल (दौसा): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री अध्‍यक्ष: सत्‍ता पक्ष के माननीय सदस्‍य मेरा निवेदन है कि आसन का काम आप नहीं करें ...(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द):000

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें। माननीय रामगढ़ से आने वाले सदस्‍य, कई बार आदमी भावावेश में कुछ ऐसे शब्‍द कह देता है और कहने के बाद किसी को भी बुरा लगे, अपमानजनक और चरित्रहनन वाली बात नहीं, किसी को यदि थोड़ा-बहुत पीड़ा भी हो।

जयगोविन्‍द/अरुण/6.3.7/16.40/3c

 

किसी की आत्‍मा को थोड़ी बहुत पीड़ा भी हो, अच्‍छा भी नहीं लगे तो भी आदमी को इस बात में किसी भी व्‍यक्ति को, किसी भी माननीय सदस्‍य को थोड़ी बहुत भी हिचक नहीं होनी चाहिए कि वह कहे कि भाई यदि मेरे यह कहने से आपकी आत्‍मा को ठेस पहुंची हो तो, आपकी भावना को ठेस पहुंची हो तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं। क्‍या बात है इसमें? वह ऐसा करने से, कितनी ही बार हुआ है, कितनी ही बार सदन में आया है।

श्री जुबेर खान (रामगढ़):  000

श्री अध्‍यक्ष: रामगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़):000

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या बात कर रहे हो, आपने जिस भाषा में, जिस लहजे में बात कही है।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री अध्‍यक्ष: हां, आप तो नहीं कर सकते।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री):000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री अध्‍यक्ष: अब आप बात को घुमाओ मत, बात की झूठी सफाई मत दो।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप विराजो।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍य मंत्रीजी सदन की नेता हैं, मुख्‍य मंत्री होने के साथ सदन की नेता भी हैं और यह बिलकुल स्‍टेब्लिश प्रोसीजर है कि कोई भी किसी मंत्री या मुख्‍य मंत्री के खिलाफ या किसी विधायक के खिलाफ भी कोई टिप्‍पणी करनी है तो उसका प्राय: नोटिस देना पड़ता है। यहां पर एक प्रिजम्‍प्‍शन की लड़ाई हो रही है कि आपका भावावेश कैसा था। मुख्‍य मंत्री, सदन की नेता का या किसी भी मंत्री का अपमान करने का कोई प्रश्‍न ही पैदा नहीं होता, ...(व्‍यवधान)... महामना, खुशामद की भी एक सीमा होती है। एक सीमा है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्‍यक्षजी, मैं तो कोई सोच भी नहीं सकता, अभी इन्‍होंने कहा है। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आजकल ऐसे ही माननीय सदस्‍य, ऐसे ही काम कर रहे हैं जिनकी आप सोच भी नहीं सकते और हमें भी अफसोस हो रहा है कि ऐसे कर्म हो रहे हैं यहां पर जिनकी कोई सोच भी नहीं सकता।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आपसे मेरी करबद्ध प्रार्थना है, उन्‍होंने कहा कि मैं कोई सोच भी नहीं सकता, मैं कहता हूं न इनकी कोई इच्‍छा थी, अगर इनसे किसी की भावना आहत हुई है...। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: अच्‍छा, अभी देख लेते हैं, पूरी प्रोसीडिंग देख लेते हैं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): नहीं, नहीं, मैं माफी मांगने को तैयार हूं, मैं निजी तौर पर और पार्टी की तरफ से, क्‍या बात कर रहे हैं आप।