Ddm/usc/1a/1100/05102006

अशोधित प्रति/ प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

 

अंक  6    बारहवीं विधान सभा के छठे सत्र का तीसरा दिवस   संख्‍या  3

 

 

गुरूवार,

05 अक्‍टूबर, 2006

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11.00 बजे

विधान सभा भवन, जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

श्री अध्‍यक्ष: श्री बाबूलाल नागर।

विधान सभा क्षेत्र दूदू के विद्यालयों में अध्‍यापकों के रिक्‍त पद

 

19.श्री बाबूलाल नागर (दूदू): क्‍या शिक्षा मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) सर्व शिक्षा अभियान में भारत सरकार द्वारा तृतीय श्रेणी अध्‍यापकों के पदों की भर्ती हेतु वर्ष 2004-05, 2005-06 व 2006-07 में कुल कितने पद स्‍वीकृत किये गये तथा राज्‍य सरकार द्वारा वर्षवार सर्व शिक्षा अभियान में कितने पदों की भर्ती की गयी?

(2)वर्तमान में कुल कितने पद रिक्‍त हैं, इनमें से रोस्‍टर के अनुसार अनुसूचित जाति, जनजाति वर्गों के बैक लॉग रहित कुल कितने पद रिक्‍त हैं? रिक्‍त पदों को सरकार कब तक भरने का विचार रखती है?

(3)विधान सभा क्षेत्र दूदू में तृतीय श्रेणी अध्‍यापकों के कुल कितने पद स्‍वीकृत हैं तथा इनमें से वर्तमान में कितने पद रिक्‍त हैं, रिक्‍त पदों को कब तक भर दिया जायेगा?

(4)पंचायत समिति दूदू में कितने ऐसे विद्यालय हैं जहां एक ही अध्‍यापक कार्य कर रहा है? एकल अध्‍यापक वाले विद्यालयों में क्‍या सरकार प्राथमिकता से रिक्‍त अध्‍यापकों के पदों को भरने का विचार रखती है?  यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों? 

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री)(श्री घनश्‍याम तिवाड़ी,शिक्षा मंत्री के स्‍थान पर): अध्‍यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से, (1) सर्व शिक्षा अभियान के अन्‍तर्गत भारत सरकार द्वारा तृतीय श्रेणी अध्‍यापकों की भर्ती हेतु कोई पद स्‍वीकृत नहीं किये गये हैं, बल्कि सर्व शिक्षा अभियान के अन्‍तर्गत राज्‍य सरकार द्वारा तृतीय श्रेणी अध्‍यापकों के वर्ष 2004-05, 2005-06 एवं 2006-07 में स्‍वीकृत पदों की संख्‍या क्रमश: 15138, 7200 एवं 25303 हैं, जबकि वर्षवार क्रमश: 4554, 10990 एवं 821 तृतीय श्रेणी अध्‍यापकों की भर्ती की गई है। शेष पदों की भर्ती प्रक्रियाधीन है।

(2) वर्तमान में तृतीय श्रेणी अध्‍यापकों के 26741 पद रिक्‍त हैं, इनमें रोस्‍टर के अनुसार सिर्फ टी.एस.पी. क्षेत्र के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्गों के बैक लॉग के 890 पद सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्‍त नवीन सत्र 2006-07 हेतु राज्‍य सरकार द्वारा तृतीय श्रेणी अध्‍यापकों के 25303 पद स्‍वीकृत किये गये हैं, जिनके जिलावार आबंटन का कार्य भी चालू है। तृतीय श्रेणी अध्‍यापकों की भर्ती राजस्‍थान लोक सेवा आयोग के माध्‍यम से किये जाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

(3) विधान सभा क्षेत्र दूदू में तृतीय श्रेणी अध्‍यापकों के कुल 1055 स्‍वीकृत पदों में से 262 पद रिक्‍त हैं। राजस्‍थान लोक सेवा आयोग से चयनित आशार्थी उपलब्‍ध होने पर रिक्‍त पद भरे जा सकेंगे।

(4)पंचायत समिति दूदू में 58 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं जहां प्रत्‍येक विद्यालय में एक ही अध्‍यापक कार्यरत है। राजस्‍थान लोक सेवा आयोग से चयनित आशार्थी उपलब्‍ध होने पर रिक्‍त पदों को भरा जा सकेगा।  

श्री बाबूलाल नागर (दूदू):  अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से पूछना चाह रहा हूं, इन 3 वर्षों में स्‍वीकृत पद 47641 आपने बताये हैं और भर्ती किये आपने 16365 तो 3 वर्षों में स्‍वीकृत होने के बावजूद भी सरकार ने अभी तक 16300 पदों की भर्ती की है, क्‍या कारण रहे? दूसरा मैं यह निवेदन करना चाह रहा हूं, यह जो आपने भर्ती किये हैं 16365, इसमें भारत सरकार के बजट से तो इसमें कितनी राशि खर्च की है, आपने और राजस्‍थान सरकार के बजट से आपने कितनी राशि खर्च की है?

दूसरा, अध्‍यक्ष महोदय, यह मैंने रोस्‍टर के सम्‍बन्‍ध में निवेदन किया है, 05.07.85 तक वेकेंसी आधारित अनुसूचित जाति, जनजाति के रोस्‍टर का मॉडल बना हुआ था, 20.11.97 को जब प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी तब पद आधारित रोस्‍टर मॉडल का कार्मिक विभाग से एक परिपत्र जारी हुआ। अध्‍यक्ष महोदय, अनुसूचित जाति को संविधान प्रदत्‍त व्‍यवस्‍था है 16 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति को 12 प्रतिशत है। अब 20.11.97 को आपका रोस्‍टर मॉडल जारी हुआ है, उसमें 100 में 16 और 25 पर 4 पद..।

श्री अध्‍यक्ष: आप सारी इंफार्मेशंस तो दे रहे हैं उन्‍हें। उनसे क्‍या इंफार्मेशन लेंगे। (व्‍यवधान) प्रश्‍नकाल सूचना लेने के लिये होता है।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): अध्‍यक्ष महोदय, मैं सटीक पूछ रहा हूं। 20.11.97 को जो परिपत्र जारी हुआ है, रोस्‍टर के सम्‍बन्‍ध में उस परिपत्र में जो एक आपने निर्धारित किया है, उसमें 25 पर हिसाब से 4 पद होने चाहिए लेकिन इसमें 3 पद आते हैं। इसी तरह एस.टी. में 50 पर 6 आने चाहिए। (व्‍यवधान) प्रश्‍न पूछ रहा हूं मैं।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिये। (व्‍यवधान) नो, भाषण अलाऊ नहीं है। भाषण अलाऊ नहीं है। प्रश्‍न के फोरम में पूछिये।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): इसमें 50 पर 5 आते हैं। (व्‍यवधान) 20.11.97 को जो आपने जारी किया इसको वापस ठीक करने का मन रखते हैं क्‍या? क्‍योंकि जो 16 और 12 का आपने दिया है वह 16 और 12 की पूर्ति नहीं हो रही है। 16 प्रतिशत की पूर्ति नहीं हो रही है और 12 प्रतिशत की पूर्ति नहीं हो रही है। और अध्‍यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र में 58 विद्यालय ऐसे हैं, जहां एक अध्‍यापक काम कर रहा है।

श्री अध्‍यक्ष: आप उन्‍हें इन्‍फार्मेशन दे रहे हैं, यह प्रश्‍न होता है इन्‍फार्मेशन लेने के लिये। आप के पास जो जानकारी नहीं है, वह जानकारी प्राप्‍त करें। (व्‍यवधान)

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): अध्‍यक्ष महोदय, मैं इतना सा निवेदन करना चाह रहा हूं कि इन 58 विद्यालयों में एक अध्‍यापक है, ऐसे 58 विद्यालय, अभी टूर्नामेंट हुए, सब के सब विद्यालय बंद हो गये। यह 58 विद्यालय, जहां एक-एक अध्‍यापक पूरे राजस्‍थान में जहां भी हैं, यह कब तक भर दिये जाएंगे। यह मेरा निवेदन है। एक अन्तिम...। (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, एक अन्तिम, जो आपने नये विद्यालय खोले हैं, इनमें राजस्‍थान में कुल कितने पद सृजित किये। अभी मई से सेवानिवृत्‍त हुए हैं, उसमें कुल कितने सेवानिवृत्‍त हो गये और जब एक दिसम्‍बर 2003 से पूरे राजस्‍थान में कितने अध्‍यापक रिक्‍त थे, यह बता दें। इतना सा निवेदन करना चाह रहा हूं।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपने कहा कि कुल 56777 पद रिक्‍त हैं। मैंने स्‍वयं ने भी इसको स्‍वीकार किया है और उसमें से 33 हजार...।

श्री अध्‍यक्ष: 56 हजार नहीं, 26 हजार हैं।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): नहीं, टोटल मिलाकर, सब मिलाकर अब तक, जो वेकेंसीज बनती हैं, वह 56777 बनती हैं। इसमें से 35 हजार की भर्ती पहले कर चुके हैं और बाकी 25303 की भर्ती अभी प्रोसेस में चल रही है, आर.पी.एस.सी. को गयी हुई है। वहां से उसकी पूर्ति होने के बाद इन पदों की भर्ती होगी। जहां तक आपका सवाल है कि सरकार ने सारा जो है सर्व शिक्षा अभियान के पैसे से ही अध्‍यापक लगाये जा रहे हैं। ऐसा नहीं है। गैर योजना मद में भी 2004-05 में 7933, 05-06 में 8427 लगाये हैं और 06-07 में 267, इस तरह से 16627 पद नॉन प्‍लान में लगाये हैं। प्‍लान में लगाये हैं 2004-05 में 905, 05-06 में 1899 और 06-07 में सौ। इस तरह से प्‍लान में 2904 लगाये हैं। केवल यह कि सर्व शिक्षा अभियान के पैसे में से, जो हमने 35 हजार की भर्ती की है, उसमें 16365 लगाये हैं। तो नॉन प्‍लान में भी लगाये हैं, प्‍लान में भी लगाये हैं और सर्व शिक्षा अभियान में भी लगाये हैं। यह पिछले साल की जो भर्ती हुई, जिसमें 3 हजार विडो और वह था, और बाकी आर.पी.एस.सी. से था, वह जो 35 हजार के लिये था और इस साल जो हमने 25303 कीर स्‍वीकृति के लिये आर.पी.एस.सी. को भेजा हुआ है, आर.पी.एस.सी. में प्रोसेस में है, वह अपना काकम पूरा करके जब भर्ती करके हमको देंगे तो यह जो आपकी वेकेंसी 56777 है, इसको पूरा करेंगे। एक आपने जो दिया कि रोस्‍टर के पद हैं, शिक्षा विभाग में, मैं समझता हूं शायद पहला विभाग होगा, जिसमें आज की तारीख में कोई बैकलॉग नहीं है किसी भी प्रकार का। केवल एक बैकलॉग है वह एस.सी., एस.टी., जो हमारा शिड्यूल्‍ड एरिया है, उसके आठ सौ कुछ पद हैं, जिन पदों पर चयनित व्‍यक्ति वहां उपलब्‍ध नहीं होने के कारण से वह पद रिक्‍त हो गये। उनको हमने इस वेकेंसी में इस बार फाइनेंस से स्‍वीकृति लेकर आर.पी.एस.सी. के को भेज रहे हैं ताकि उनकी भर्ती पूरी हो जाए। तो शिक्षा विभाग में 100 प्रतिशत, जितना भी बैकलॉग है, वह सारा का सारा पूरा हो गया और यह बचा हुआ आठ सौ कुछ हैं, यह भी पूरा हो जायेगा। (व्‍यवधान)

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने निवेदन किया कि 20.11.97 को जो आपने रोस्‍टर का मॉडल दिया है, कार्मिक विभाग ने जारी किया है, उस के तहत संविधान प्रदत्‍त 16 प्रतिशत और 12 प्रतिशत की, न तो सीधी भर्ती में, न पदोन्‍नति में पूर्ति हो रही है। 25 पर उस रोस्‍टर के बिंदू के अनुसार 3 आदमी आते हैं जबकि 16 प्रतिशत पर 4 आदमी आते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न पूछें, भाषण नहीं।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): और इसी तरह एस.टी. में 50 में से 6 आदमी आने चाहिए, एस.टी. में 50 में से 5 आदमी आ रहे हैं। 

श्री अध्‍यक्ष: आप भाषण क्‍यों देना चाहते हैं। प्रश्‍न पूछिये। वह कह रहे हैं कर दिया पूरा, बैकलॉग है ही नहीं।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): मैंने यह निवेदन किया ...(व्‍यवधान) नहीं, कहां कर दिया। जब आपका यह परिपत्र है, रोस्‍टर का मॉडल है, गलत है, जब 16-12 का है, आप उल्‍लंघन कर रहे हैं, जब 16 और 12 की पूर्ति ही नहीं कर रहे हैं।

 


विष्‍णु/यू.एस./05.10.06/ 11.10/ 1b

जब आपकी वरीयता सूची ही गलत है, वरीयता सूची ही ठीक नहीं हो सकती तो फिर आपकी रोस्‍टर की पूर्ति कैसे होगी? तो मेरा निवेदन यह है कि पहले आप जो आपका यह 20.11.97 का कार्मिक विभाग ने रोस्‍टर का मॉडल जारी किया है उसको दुरुस्‍त करने का मन रखते हैं ? और जो 16, 12 के अनुसार संविधान प्रदत्‍त व्‍यवस्‍था है उसकी सरकार पूर्ति करना चाहती है? नहीं करना चाहती है तो आटो‍मैटिक ही रोस्‍टर का मामला ही खतम हो गया, जब हमारा 16 का नहीं बनता और न 12 का बनता। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सोचता हूं कि शिक्षा विभाग में भर्ती कोई 25 पर, 8 पर नहीं है जिसके कारण से 16 परसेंट को डिवाइड करने में कोई  परेशानी नहीं है। वहां हजारों पदों के ऊपर भर्ती हो रही है और इसके कारण से उसके जो 16, 12 का जो उनका हिस्‍सा बनता है वह सेंट-परसेंट इसकी पालना की और यहां तक कि इस भर्ती में जो पुराना बेकलॉग था उसको भी पहले पूरा करते हुए आज की तारीख में शिक्षा विभाग यह कहने की स्थिति में है कि उसका किसी भी प्रकार का बेकलॉग बाकी नहीं है। केवल टी.एस.पी. एरिया का क्‍योंकि हमारे पास अभ्‍यार्थी उपलब्‍ध नहीं थे तो वह पोस्‍ट हमारी जरूर खाली गयी है, उनको फिर हमने इस साल मिलाकर फाइनेंस से स्‍वीकृति के लिए भेजा है। वह मिलने के बाद आर.पी.एस.सी. को जाकर यह पद भी, अगर वहां टी.एस.पी. एरिये में ट्राइब के लोग हमें मिल जाएंगे तो उनको लेने के बाद हम यह कह सकेंगे कि हण्‍ड्रेड परसेंट कोई बेकलॉग और किसी भी प्रकार का 12, 16 परसेंट का जो हिस्‍सा है, उसमें कोई कमी नहीं रहेगी। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: डाक्‍टर चन्‍द्रशेखर बैद।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कई ऐसे पद हैं जो संख्‍या में कम स्‍वीकृत हैं। जो 100 से कम संख्‍या में स्‍वीकृत हैं। व्‍याख्‍याताओं के और सब्‍जैक्‍ट विषय के, विषयवाइज जो संख्‍या में कम है। मेरा प्रश्‍न इतना सा है। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप भाषण देते हैं। प्रश्‍न तो पूछ नहीं रहे हैं। आप प्रश्‍न तो पूछ नहीं रहे हैं और भाषण देने लग जाते हैं। 11 मिनट हो गये। प्रश्‍न पूछते नहीं है। केवल यह दिखा रहे हो आप तो। ... (व्‍यवधान)

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह इतना महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है। पूरे अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों के साथ जब आपकी पिछली सरकार, भारतीय जनता पार्टी की सरकार, जो पहले सरकार आयी थी, यह काला परिपत्र आपने जारी कर दिया और आरक्षण को इस परिपत्र के माध्‍यम से आपने 16, 12 को ही खतम कर दिया। मेरी जो मूल मंशा है कि इस परिपत्र को आप दुरुस्त करने का मन रखते हैं क्‍या? मेरा प्रश्‍न है कि इसको दुरुस्‍त करने का मन रखते हैं तो बता दें। 16, 12 की ही पूर्ति नहीं हो रही है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: डाक्‍टर चन्‍द्रशेखर बैद। विराजये, विराजिये।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): आपके रोस्‍टर की परम्‍परा ही गलत बनेगी। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो आपके हुक्‍म की पालना कर दूंगा लेकिन यह कोई साधारण बात नहीं है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज तक 16, 12 जो संविधान प्रदत्‍त व्‍यवस्‍था है, उसको भी इस सरकार ने जब यह पिछली बार सरकार में थे और इसने काला परिपत्र निकाल दिया और 16, 12 खतम कर दिया। ... (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): तो फिर आप बीच में पाँच साल आप पधारे थे न, शिक्षा मंत्रीजी को कहते, क्‍यों नहीं आपने विद्-ड्रा किया उसको? पाँच साल आप सरकार में रहे, अ‍ब कह रहे हो।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): इसको ठीक करो। अब मैं जो सरकार है उसको कह रहा हूं। जो सरकार ने, आपकी ने गलती की है इसको ठीक करो आप। आपने 16, 12 की व्‍यवस्‍था ही खतम कर दी।

श्री अध्‍यक्ष: आपको भी मौका था।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सी.पी.जोशी का किया हुआ काम हम ठीक नहीं करेंगे। ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): नहीं-नहीं, वह आपकी गलती है। आपको ही ठीक करना पड़ेगा। आपकी गलती को आप स्‍वयं ठीक कर करो इसलिए नहीं किया। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप विधायकों को धमका रहे हैं और उनको रोब दिखाते हैं। यह बात नहीं चलेगी। आपका यह दायित्‍व नहीं है। आपका दायित्‍व यह है कि आप हमें भी कॉ-आपरेट करें। आपका दायित्‍व यह है कि पूरा उत्‍तर दिलवाये। आज सबसे बड़ी समस्‍या अध्‍यापकों की कमी की स्‍कूलों में चल रही है और उसमें यह इम्‍पोर्टेण्‍ट क्‍वेश्‍चन है और जो सर्कुलर सरकार का विरोधाभासी है उस पर स्‍पष्‍टीकरण माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दिलवाइये। अब आपकी खुद की ... (व्‍यवधान)

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): जारी भारतीय जनता पार्टी सरकार ने 1997 में किया, भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया। ... (व्‍यवधान)

श्री रमेश खींची (कठूमर): आप इसको ऐसे ले रहे हैं, एस.सी., एस.टी. के मसले को ले जाते हो, आप जवाब दे दें कि यह जो रोस्‍टर बना है गलत, उसको आप ठीक करेंगे या नहीं करेंगे? बात इसकी है। ... (व्‍यवधान)

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): आप सही करवा दो इसको। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍वाभाविक है, सदन के सब लोगों को इस बारे में स्‍वाभाविक पीड़ा है कि जितने अध्‍यापकों की आवश्‍यकता है आज भी है, उतनी पूर्ति नहीं हो पायी, उसके कारण से आपका प्रश्‍न पूछना स्‍वाभाविक है लेकिन आपको यह भी विचार करना चाहिए कि पिछले पाँच साल में आपने केवल 443 अध्‍यापकों की भर्ती की। एक सैकण्‍ड, एक मिनट सुन लीजिए। ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): यह तो केन्‍द्र सरकार से पैसे आ गये इसलिए आपने किया है, आपने अपने ... (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सवाल भर्ती का नहीं है। आपने खुद ने कहा है ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): यह जो कुछ भी किया है यह सर्व शिक्षा अभियान का पैसा आया है इसलिए किया है। ... (व्‍यवधान)

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): हम किसी से भीख नहीं मांग रहे हैं। यह संविधान में व्‍यवस्‍था है 16, 12 की। ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): यह शिक्षा का पैसा केन्‍द्र सरकार से मिला इसलिए आपने यह किया। यह आपका काम नहीं है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक यह माननीय गृह मंत्रीजी ने जो ... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): यह आपका काम नहीं है।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): इनका ध्‍यान नहीं रखा गया है। क्‍या मंत्रीजी इनका ध्‍यान रखकर दुबारा से रोस्‍टर को वर्क-आउट करवाएंगे क्‍या? इतना सा है। आपने जितनी भर्ती की शिक्षा विभाग में इसमें 16 परसेंट और 12 परसेंट लेना था एस.सी. और एस.टी. का, उसके आधार पर यदि रोस्‍टर के आधार पर पूरे अगर कर्मचारी नहीं आये, अध्‍यापक नहीं आये तो क्‍या दुबारा से आप उस परिपत्र को दिखवाएंगे क्‍या ताकि उसके आधार पर पुन: भर्ती की जाए। क्‍या उसको पूरा करेंगे, इतना सा मेरा सवाल है। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: हां।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं बहुत आदर करता हूं गृह मंत्रीजी का जो शिक्षा मंत्रीजी के बिहाफ पर जवाब दे रहे हैं। मुझे इस बात का सख्‍त एतराज है कि आप गलत बयानी कर रहे हैं, नम्‍बर-1, सरकार के आते ही, पिछली सरकार के आते ही पहले वर्ष भी पाँच हजार अध्‍यापक लगाये गये थे, काइंडली करेक्‍ट द रिकार्ड, आप पता लगाइये। अब आपसे मैं दूसरी बात कहता हूं। 2001-2002, 2002-2003 में ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न के रूप में पूछिये। प्रश्‍न के रूप में पूछिये। आप यूं पूछिये कि क्‍या पाँच हजार नहीं लगाये गये थे? आप प्रश्‍न के रूप में पूछिये। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मैं बता रहा हूं आपको। पिछले तीन सालों के अन्‍दर, उस कार्यकाल के अन्‍दर आप फाइल देख लीजिए। कितने सेंक्‍शन पद थे। पी.ए.सी. को लिखा गया लेकिन स्‍टे आर्डर आ गया और यहां शिक्षा मंत्रीजी ने स्‍वयं स्‍वीकार किया है कि स्‍टे के कारण वह भर्ती नहीं हो सकी। फिर उसके बाद पैराटीचर्स को, 35 हजार पैराटीचर्स लगाये थे। आप यह कहते हैं कि आपने, जब अपनी वाहवाही लेते हैं तो जितने आपने लगाये हैं, मानदेय के ऊपर लगाये हैं, उन सबको तो आप गिनाते हैं कि हमने इतने लोगों को नौकरी दे दी, एक लाख लोगों को नौकरी देने की बात  थी और जब यहां पर यह आता है तो आप कहते हैं कि 427 लगाये हैं, यह बहुत ही अनुचित उत्‍तर है इसलिए मैं इसका विरोध करता हूं। इस उत्‍तर का यहां बैठकर, यह राजनीतिक से प्रेरित होकर उत्‍तर दिया जा रहा है। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको विरोध का मौका ही नहीं दूंगा कि आप विरोध कर सकें। मैं मौका ही नहीं दूंगा आपको। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍नकाल में विरोध करते हैं क्‍या? क्‍वेश्‍चन आवर में कोई विरोध करते हैं क्‍या? जो कुछ भी पूछते हैं उसके बाद उत्‍तर आ जाता है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं जो कुछ भी कह रहा हूं वह प्राथमिक शिक्षा के बारे में कह रहा हूं और प्राथमिक शिक्षा की भर्ती में मैं आपको एक-एक साल की सुनाने को तैयार हूं। आकड़ों के सहित सुनाने को तैयार हूं। 1998-99 में 2689 हुआ, यह हमारा कार्यकाल था और लास्‍ट में तीन-चार महीने आपके बचे थे। मार्च, अप्रैल ... (व्‍यवधान) एक मिनट विषय को सुन लो। उसके बाद 1999-200 में ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): नहीं आप 20.11.97 को जो रोस्‍टर का मॉडल जारी किया है, कार्मिक विभाग ने उसके बारे में जानना चाह रहे हैं आपसे ... (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): वह भर्ती आपने की है उसमें 12 और 16 परसेंट का वायलेट किया है। ... (व्‍यवधान)

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 16, 12 की जो संविधान प्रदत्‍त व्‍यवस्‍था है इसको आप दुरुस्‍त करना चाहते हैं क्‍या? जो आपकी सरकार ने गलती की है। ... (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): 16 परसेंट और 12 परसेंट का वायलेट किया है उसकी बात है। जो 16, 12 परसेंट में वायलेट किया है उसको पूरा करिये आप। ... (व्‍यवधान)

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों के साथ कुठाराघत किया है, यह अन्‍याय किया है आपकी पूर्ववर्ती सरकार ने, आप इसको ठीक करना चाहते हैं क्‍या? इतनी सा निवेदन है कि 16 और 12 परसेंट जो संविधान प्रदत्‍त व्‍यवस्‍था है, आप इसको ठीक करना चाहते हैं क्‍या? यह बात तो छोड़ दीजिए आप, कितने पद आपने भर्ती किये या नहीं करें, यह पूछना कौन चाह रहा है आपसे। ... (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): आपको बहुत-बहुत बधाई की आपने तृतीय श्रेणी अध्‍यापकों की भर्ती बहुत की है। पिछली सरकारों ने बिलकुल नहीं की लेकिन 12 परसेंट और 16 परसेंट का जो नियम वायलेट हुआ है आरक्षण का, रोस्‍टर के आधार पर भर्ती नहीं हुई है, उनको आप कब पूरा करेंगे? आप उस परिपत्र को दुबारा दिखवाइये। यह हमारा निवेदन है आपसे। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं क्‍योंकि आपने जो बात पूछी कि कोई रोस्‍टर के आधार पर कोई खाली है, एकदम मेरे पास इसकी परफेक्‍ट सूचना नहीं है, मैं आपको अधूरी सूचना देना उचित नहीं समझता। मैं कोई आपसे पक्ष और विपक्ष में भी नहीं हूं। पाँच हजार अध्‍यापकों की भर्ती हुई होगी, सैकण्‍डरी, हायर सैकण्‍डरी में भी हुई है। बाकी हुई है जो मेरे पास अभी है वह एलिमेण्‍टरी एजुकेशन में जो भर्ती हुई है उसकी मैं बात कर रहा हूं। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: पूछा भी एलिमेण्‍टरी का ही है । ... (व्‍यवधान)

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): अध्‍यक्ष महोदय, रोस्‍टर की बात मैंने पूछी है और मेरा निवेदन है खाली 20.11.1997 का जो परिपत्र निकाला है कार्मिक विभाग ने, इसमें संविधान प्रदत्‍त व्‍यवस्‍था को ही आपकी पूर्ववर्ती सरकार, जब आपकी सरकार थी, उसने खतम कर दिया है। 16, 12 का ही हमारा अधिकार ही खतम कर दिया है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): दूदू से आने वाले माननीय सदस्‍य ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सरकार तो आपकी भी आ गयी थी। ... (व्‍यवधान)

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): आपका रोस्‍टर ही सही नहीं बन सकता तो आप रोस्‍टर को लागू क्‍या करेंगे? आपकी वरीयता ही सही नहीं बन सकती। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): दूदू से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपकी पीड़ा मुझे समझ में आती है क्‍योंकि पाँच साल आपका ध्‍यान गया ही नहीं उस ओर और अब आपका आठ साल के बाद गया है तो हम जरूर विचार करेंगे इस पर। क्‍या इसमें कमी है पर मैं यह ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: : जब वे मंत्री बनने के चक्‍कर में थे।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  हमारा ध्‍यान नहीं गया। मंत्री महोदय, अब आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाह रहा हूं। आप इस 20.11.97 के परिपत्र को दुरुस्‍त करने का मन रखते हैं क्‍या? संविधान प्रदत्‍त व्‍यवस्‍था 16, 12 की है। इसकी आप पूर्ति करना चाहते हैं क्‍या?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं आपके इस पत्र को ठीक प्रकार से देखने के बाद, क्‍या इसमें कमी है, क्‍या इस कमी को दुरुस्‍त करने की, किस तरह से कोई रास्‍ता है, उसके बाद ही कोई जवाब दे सकूंगा। एकदम एट-रेण्‍डम मैं आपको कोई आश्‍वासन दे दूं वह ठीक नहीं रहेगा। मैं निश्चित रूप से आपकी समस्‍या और हमारी सबकी समस्‍या है, मैं सोचता हूं कि इस बात की पूरी हमने कोशिश की है और आपको यह सुनकर भी प्रसन्‍नता होगी कि इस बार सर्व शिक्षा अभियान में जो खर्चा हुआ, राजस्‍थान हिन्‍दुस्‍तान में नम्‍बर- एक पर रहा है, उसको इस बात का प्राइस मिला है। आपको प्रसन्‍नता होगी, यह ठीक है कि हमारी गति और तेज बढ़े, जिसके कारण से जो अध्‍यापकों की आवश्‍यकता महसूस हो रही है, उसकी पूर्ति हो, निश्चित रूप से आपकी है और इसीलिए यह जो 25 हजार पद जो हमने और लिये हैं, उसके बाद विधवाओं को भी देकर जो हमने अभी आपको कहा था, टोटल संख्‍या इस 56-57 हजार जो पोस्‍ट है, उसको भरने की कोशिश में है।

 

शिव/चौहान/11.20/1c/5.10.2006

 

और मैं सोचता हूं कि प्राथमिक शिक्षा की दृष्टि से हमारे पास बजट भी उपलब्‍ध है। हमारे पास सब प्रकार की तैयारी है और आने वाले कुछ समय में आर.पी.एस.सी. से सलेक्‍शन के बाद अध्‍यापक मिलेंगे। जहां तक आपके दूदू का सवाल है, दूदू में आपके प्राथमिक विद्यालय 200 हैं और उच्‍च प्राथमिक विद्यालय 106 हैं। इनमें सैकिण्‍ड ग्रेड की स्‍वीकृत पोस्‍ट 106 हैं उसमें से 60 पोस्‍ट खाली हैं । 106 स्‍वीकृ‍त में से सैकिण्‍ड ग्रेड की 60 पोस्‍टें खाली हैं और 1055 थर्ड ग्रेड की पोस्‍टें हैं उसके अंगेस्‍ट में 262 पद रिक्‍त हैं जो लगभग रिक्‍त 25 प्रतिशत के आस-पास जाती है, बहुत अधिक रिक्‍त है। इसमें कोई दो राय नहीं है और मैंने स्‍वयं ने स्‍वीकार किया है कि आपके 58 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं जहां केवल सिंगल टीचर लगा हुआ है। यह सच है, इसको स्‍वीकार करने में कोई दिक्‍कत नहीं है। हम कोशिश कर रहे हैं कि जो हमारे नोर्म्‍स हैं कम से कम प्राथमिक विद्यालय में दो अध्‍यापक हों। पहली बार यूपीएस बनने पर एक हैड मास्‍टर देते हैं, उसके साथ दो अध्‍यापक देते हैं, फिर दूसरे साल दो अध्‍यापक देते हैं, उसकी पूर्ति जितनी अभी होनी चाहिये वह नहीं हुई है। इस सबके मिलने के बाद हम इस स्थिति में होंगे कि 80 प्रतिशत हम इस पूर्ति को कर पायेंगे।

श्री अध्‍यक्ष : नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन, श्री खुशबीर सिंह जोजावर।

डॉ0 सी.पी.जोशी: यह पैसा राजस्‍थान सरकार ने लिया है यह 16 हजार अध्‍यापकों की सेलेरी में पैसा दिया है। आप यह बताइये कि भारत सरकार से आपको कितने पैसे मिले ? (व्‍यवधान) ... अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान सरकार को 40 हजार पदों का पैसा सर्वशिक्षा अभियान से मिला है । यह केवल मात्र फाइनेंस की व्‍यवस्‍था कर रहे हैं। (व्‍यवधान) ..... यह पैसा केवल मात्र सर्वशिक्षा अभियान का जो आपने चार्ज किया, वह अमाउंट है और आपको पैसा मिला 40 हजार का, उस फीगर को बताइये आप मंत्रीजी। डोंट कन्‍फ्यूज इट। आपको 40 हजार पदों का पैसा मिला है। नोन प्‍लान का ट्रांसफर करके 16 हजार पदों का पैसा बता रहे हैं, जो 40 हजार पदों का पैसा वसूल किया भारत सरकार से, उसको बताइये आप।

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया: अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने जो प्रश्‍न पूछा, उसका भी मैं आपको जवाब दूंगा। (व्‍यवधान) ...

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, मैंने नैक्‍स्‍ट प्रश्‍न पुकार लिया। 22 मिनट हो गये हैं। मैं एक प्रश्‍न को पूरा समय नहीं दे सकती।

डॉ0 सी.पी.जोशी: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 16 हजार पदों का पैसा नहीं मिला है। भारत सरकार से 40 हजार पदों का पैसा मिला है, यह केवल मात्र बजट की व्‍यवस्‍था करके बता रहे हैं। इस सदन को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। (व्‍यवधान) ... भारत सरकार से 40 हजार पदों का पैसा मिला है। 25 प्रतिशत पैसा जो राजस्‍थान सरकार को मिलाना है उस पैसा का एडजस्‍टमेंट करके यह फीगर बता रहे हैं। आप यह बताइये कि क्‍या भारत सरकार से 40 हजार पदों का पैसा मिला है कि नहीं मिला? यह बताइये आप । केवल मात्र फाइनेंस की बता बता रहे हैं आप।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया, अब यह कुछ नहीं बतायेंगे।

डॉ0 सी.पी.जोशी: माननीय मंत्रीजी, आप गंभीरता से बताइये कि भारत सरकार से राजस्‍थान सरकार को 40 हजार पदों का सर्वशिक्षा अभियान का पैसा मिला कि नहीं मिला ? उसके अंगेस्‍ट में 25 प्रतिशत पैसा आपको मिलाना था, आपने केवल मात्र 16 हजार पद जो बजट के एडजस्‍टमेंट है, उस फीगर को बता रहे हैं आप। कह रहा हूं बताइये आप। (व्‍यवधान) ....

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया। (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण) : उसके बावजूद हमारा क्‍वेश्‍चन नहीं आया। आपने कल भी क्‍वेश्‍चन पुकारा था, लेकिन हमारे क्‍वेश्‍चन का जवाब नहीं आया। (व्‍यवधान)....

श्री अध्‍यक्ष: जो प्रश्‍न माननीय सदस्‍य ने पूछा था उसका जवाब मंत्रीजी ने दे दिया। दे दिया उसका जवाब । (व्‍यवधान) ...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): जवाब इन्‍होंने पूरा नहीं दिया, आपने बीच में कट कर दिया। (व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया। उन्‍होंने जवाब दे दिया।(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी: नहीं दिया पूरा। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैंने पूरा प्रश्‍न पढ़ा है, आप कृपया प्रश्‍न पढ़ें। (व्‍यवधान) मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया। (व्‍यवधान)

श्री बाबूलाल नागर: सारा पैसा भारत सरकार दे रही है, स्‍कूलों की संख्‍या भारत सरकार दे रही है, अध्‍यापकों की सेलेरी भारत सरकार दे रही है, यह केवल खाली डींग हांकते हैं। (व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आपने जो प्रश्‍न पूछा था उसका माननीय मंत्रीजी ने जवाब दे दिया। अब जो सी.पी.जोशी साहब ने प्रश्‍न उठाया है वह प्रश्‍न में कहीं था ही नहीं। नई बात उठाई है, भाषण देने लगे। प्रश्‍न काल में इस तरीके से नहीं चलेगा। मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया माननीय मंत्रीजी। (व्‍यवधान)...

श्री बृजकिशोर शर्मा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कल भी आपने क्‍वेश्‍चन पुकार लिया था और उसके बावजूद मंत्रीजी ने जवाब नहीं दिया। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष) : अध्‍यापकों की व्‍यवस्‍था का मुद्दा है और उसके अंदर शिक्षा मंत्रीजी ने अधूरा जवाब दिया है।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: पूरा जवाब दिया है उन्‍होंने। आपको मालूम ही नहीं है। (व्‍यवधान)

श्री बाबूलाल नागर: अध्‍यक्ष महोदय, भारत सरकार के पैसे का दुरूपयोग कर रहे हैं। राजस्‍थान के अंदर भारत सरकार का पैसा बर्बाद कर रहे हैं । खाली डींग हांक रही है यह सरकार। कुछ नहीं करती है यह। (व्‍यवधान) ...

श्री सी.डी.देवल: यह अनुसूचित जाति-जनजाति के लोग ...(व्‍यवधान)

श्री बाबूलाल नागर: यह रोस्‍टर की बात करते हैं, रोस्‍टर को तो आपने खत्‍म कर दिया । संविधान का उल्‍लंघन कर दिया है। संविधान को मानने को तैयार नहीं हो आप।

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री सी.डी.देवल : ***

श्री बृजकिशोर शर्मा: ***

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल: ***

श्री संयम लोढ़ा : ***

श्री बाबूलाल नागर : ***

श्री रमेश खींची: *** 

श्री अशोक बैरवा: ***

श्री सी.डी.देवल: ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ : ***

डॉ0 सी.पी.जोशी: ***

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री जयराम जाटव : ***

श्री प्रद्युम्‍न सिंह : ***

डॉ0 सी.पी.जोशी: ***

श्री मदन दिलावर : ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ : ***

श्री बाबूलाल नागर : ***

श्री बंशीलाल खटीक : ***

श्री बद्रीलाल जाट : ***

श्री मदन राठौड़ : *** (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, सत्‍ता पक्ष के माननीय सदस्‍यगण, माननीय उद्योग मंत्रीजी, राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य, प्रश्‍न पूछते हैं माननीय सदस्‍य, उनका जवाब देते हैं मंत्रीजी। राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य आप क्‍यों खड़े हो जाते हैं खामाख्‍वाह ? मैं माननीय सदस्‍यों से एक निवेदन करना चाहूंगी कि प्रश्‍नों में सभी प्रश्‍नों का महत्‍व है और सारे ही विधायक महत्‍वपूर्ण हैं। एक प्रश्‍न के ऊपर आखिर कितना समय दिया जाये ? 28 मिनट हो गये एक प्रश्‍न में। जवाब पूरा है, जो कुछ पूछा है। यदि आपने इस प्रश्‍न को पढ़ा है तो माननीय मंत्रीजी ने उसका पूरा जवाब दिया है। गलत बात है और आपने प्रश्‍न पढ़ा भी है। प्रश्‍न जो पढ़ेगा, उसका पूरा जवाब दिया है। अब आप बात करने लगे जाते हो ...(व्‍यवधान)

डॉ.सी.पी.जोशी: ***  

श्री प्रद्युम्‍न सिंह : ***

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष) : आप पूछ लो इनको। राजेन्‍द्र सिंह जी ने एक प्रश्‍न खड़ा किया था उसके ऊपर मुझे जवाब देने में 57 मिनट लगे थे । अध्‍यक्ष महोदय ने मुझे अनुमति दी थी पूरा पढ़ने के लिये। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ : आप तो धीमी गति के समाचार हो। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी : इन्‍होंने त्राहिमाम् कर लिया कि मैं मेरे सवाल को वापस लेता हूं, मैं संतुष्‍ट हूं। ऐसा इन्‍होंने कहा था, पूछ लीजिये। (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह : माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बड़ा महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है प्राथमिक शिक्षा का।

श्री अध्‍यक्ष: सब प्रश्‍न महत्‍वपूर्ण होते हैं। (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: आप मेरा निवेदन सुन लें। स्‍कूल खाली पड़े हैं, भारत सरकार पैसा दे रही है सर्वशिक्षा अभियान के तहत और उसके बाद में यहां गलतबयानी हो रही है। 40 हजार अध्‍यापकों का पैसा मिला है, कमरों के निर्माण का पैसा मिला है, हण्‍डरेड पर्सेन्‍ट पैसा इनको मिला है। इनके पास 25 प्रतिशत पैसा भी नहीं हुआ है । इन्‍होंने नोन प्‍लान ...(व्‍यवधान) सदन को गुमराह कर रही है यह सरकार।

श्री अध्‍यक्ष: भाषण नहीं, यह प्रश्‍न काल है। भाषण देने का समय नहीं है। प्रश्‍न काल है यह ।

डॉ.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, 800 करोड़ रूपये भारत सरकार से मिले हैं।

श्री अध्‍यक्ष : श्री खुशबीर सिंह जोजावर, नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

डॉ.सी.पी.जोशी: 800 करोड़ रूपया मिला है सर्वशिक्षा अभियान के तहत। 40 हजार पोस्‍टों का पैसा लिया है इन्‍होंने, गलत सूचना दे रही हैं। आपने कमरे बनाये, उसका पैसा मिला है। पदों का पैसा मिला है।

 

महेन्‍द्र/चौहान/1d/1130/05102006

 

40 हजार पद का पैसा मिला है आपको, 25 परसेंट पैसा आपको मिलाना था, उस पैसे को एडजेस्‍ट कर के बता रहे हैं आप।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): तो क्‍या भारत सरकार इसलिए बनी हुई है कि राजस्‍थान को पैसा नहीं देगी? ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, शिक्षा मंत्रीजी, घनश्‍यामजी तिवाड़ी खुद शर्मसार हैं, वो इसका उत्‍तर दे नहीं सकते, शर्मसार हैं और गृह मंत्रीजी पूरा जवाब नहीं दे रहे। अध्‍यक्ष महोदय, आप हमारे को प्रोटेक्‍शन नहीं कर रहे, आप सरकार का बचाव सबसे ज्‍यादा कर रहे हैं।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, 27 हजार करोड़ में से तो एक रुपया नहीं दिलाया, सर्व शिक्षा अभियान में अगर पैसा दे दिया तो कोई अहसान कर दिया क्‍या भारत सरकार ने? ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सारा राजस्‍थान सुन रहा है आपको, आपका इलाका भी सुन रहा है कि स्‍कूलों के अन्‍दर क्‍या हालत हो रही है और आप इनका प्रोटेक्‍शन कर रही हैं। आप इनका जवाब क्‍यों नहीं दिलवातीं?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आप तो अपने कार्यकाल में पाँच साल में एक अध्‍यापक नहीं लगाया है, वो तो अच्‍छा काम हुआ और हमने 35 हजार ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): यह असत्‍य है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): एक पैसा नहीं दिया भारत सरकार ने, एक फूटी कौड़ी नहीं दी भारत सरकार ने। ...(व्‍यवधान)... भारत सरकार ने एक पैसा नहीं दिया, किस मुंह से बोल रहे हो। ...(व्‍यवधान)... एक पैसा नहीं दिया भारत सरकार ने। एक फूटी कौड़ी, एक पैसा नहीं दिया। ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 35 हजार पैराटीचर्स लगाये ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): 35 हजार पैराटीचर्स लगाये थे, यह असत्‍य आंकड़े हैं।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आप चाहें तो दिनभर की बहस रख सकते हैं। ...(व्‍यवधान)... आप जो सर्व शिक्षा काक कह रहे हो न, आपकी सारी की सारी जन्‍मपत्री मैंने ले रखी है। ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आपकी जन्‍मपत्री फर्जी जन्‍मपत्री है यह।

श्री अमराराम (धोद): मंत्री महोदय, क्‍या जन्‍मपत्री यह ही रखोगे क्‍या? ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): असली जन्‍मपत्री घनश्‍यामजी तिवाड़ी के पास है, आपके पास फर्जी जन्‍मपत्री है। ...(व्‍यवधान)...

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): क्‍या आपने सर्व शिक्षा में किया। 40 हजार सैंक्शन कर है, कर रहे हैं, उसमें क्‍या बात है, सारा चार्ट है, आप चाहो जहां ले लें। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आर्डर, आर्डर।

श्री अमराराम (धोद): स्‍कूल खुलें तीन महीने से ज्‍यादा हो गये।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, प्रतिपक्ष के नेता महोदय खड़े हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, आपकी उम्र, आपकी उम्र कटारियाजी की उम्र पाँच साल में तीन साल बीत गयी है।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, माननीय सदस्‍य, प्रतिपक्ष के नेता खड़े हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपकी उम्र स्टिक है और कटारियाजी की उम्र तीन साल बीत गयी है, दो साल बाकी और हैं, अब रोना रो रहे हैं पाँच साल पहले का, यह कोई बात हुई क्‍या? आज आपको तीन साल हो रहे हैं राज करते हुए, आपने क्‍या किया था, क्‍या किया था क्‍या नहीं किया, कोई बात नहीं ...(व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, सत्‍य बहुत कड़वा होता है। ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): यह भारत सरकार के पैसे थे, गुलछर्रे उड़ा रहे हो भारत सरकार के पैसे पर, उसको भी स्‍वीकार करना नहीं चाहते हो। ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: प्रतिपक्ष के नेता खड़े हैं औप आप बोल रहे हैं, प्रद्युम्‍न सिंहजी।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह हिन्‍दुस्‍तान की सरकार है, पाकिस्‍तान की सरकार है क्‍या? हिन्‍दुस्‍तान की सरकार है। ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): उस पर भी काम नहीं करना चाहते हैं और उस फंड का दुरुपयोग कर के नोन प्‍लान के अन्‍दर बता रहे हैं उसको।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मंत्री महोदय, आप शिक्षा विभाग के बारे में पूरी जानकारी नहीं दे रहे हैं, हम आपके जवाब से संतुष्‍ट नहीं हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): इसका अलग वो है, राजस्‍थान का हिस्‍सा है। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय ...(व्‍यवधान)... आप जवाब इनसे दिलवाना नहीं चाहती हैं, मंत्री महोदय, ऐसी स्थिति में हम आज की इस कार्यवाही का इस पाइण्‍ट के ऊपर हम बहिर्गमन कर रहे हैं और विरोध प्रदर्शन करवा रहे हैं कि आप मनमानी कार्यवाही करें, स्‍कूल खाली पड़े हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, मुझे बहुत अफसोस है कि प्रतिपक्ष के नेता इतनी बार चुन कर आये हैं और उसके बाद प्रश्‍न का है, यहां भाषणदेने के लिए नहीं है, यहां केवल प्रश्‍न पूछने के लिए है और अपनी असफलता की बात करते हैं। दर्द शुरू हो जाता है। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हां, सब स्‍कूल खाली पड़े हैं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): दर्द तो आपका शुरू हो रहा है। भारत सरकार के पैसे का उसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: भारत सरकार का पैसा है, कोई दान में नहीं दिया। ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): उस पैसे का भी उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): भारत सरकार के पैसे किसी के हैं क्‍या? ...(व्‍यवधान)... यह राजस्‍थान का हिस्‍सा है, कोई मेहरबानी नहीं है किसी की, राजस्‍थान की जनता का पैसा है, उसका शेयर है वह, किसी की मेहरबानी नहीं है और आपने क्‍यों नहीं किया? आप अयोग्‍य थे? पैसा उस समय भी था लेकिन वो भारत सरकार का पैसा काम में नहीं लिया। दिमाग नहीं था आप में। दिमाग नहीं था, दिमाग। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): हमने आपका उत्‍तर सुन लिया, आपका उत्‍तर संतोषजनक नहीं है, निहायत असंतोषजनक है, हम इसका विरोध करते हैं, पूरा जवाब  दिलाया जाए अन्‍यथा हम बहिर्गमन करते हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): खजाना खाली है, दिवालियाओं, खजाना खाली है इसके अलावा रोने के अलावा कुछ किया सिवाय रोने के? ...(व्‍यवधान)... कह दो तमा ते खाओ, तमा ते। ...(व्‍यवधान)... यह कहा होगा तमा ते खाओ।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): भारत सरकार के पैसे की पुरसगारी भी सही नहीं की, आपने भारत सरकार के भोजन को बिगाड़ दिया। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह पैसा भारत सरकार का है, यह पैसा सोनिया गांधीजी का है, सोनिया गांधी का, सोनिया गांधी का भेजा हुआ पैसा है, आपका इसमें कुछ नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं तो प्रतिपक्ष के नेता से एक ही रिक्‍वेस्‍ट करना चाहता हूं। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपका अंगूठा ...(व्‍यवधान)... वो टेक कर के पैसे ला रहे हो। ...(व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): भर पेट कर खाते हो और बाहर चिल्‍लाते हो ...(व्‍यवधान)... 16 हजार बता रहे हो।

एक माननीय सदस्‍य: थोड़ी देर में वाक आउट कर जायेंगये, इनको बहाना चाहिए रैली में जाने के लिऐ। ...(व्‍यवधान)...

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो आपके माध्‍यम से एक ही प्रतिपक्ष के नेता महोदय को कहना चाहता हूं कि राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने तो कभी ...(व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): अध्‍यक्ष महोदय, कांग्रेस की रैली है और यह अभी बहाना बना कर वाक आउट कर के रैली में चले जायेंगे ...(व्‍यवधान)... यह अभी बहाना बनायेंगे, वाक आउट कर के रैली में चले जायेंगे। ...(व्‍यवधान)...

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): बजट में पैसा नहीं दिया। जाओ, जाओ।

श्री अध्‍यक्ष: पधारो, पधारो, आपकी रैली है। रैली है, पधारो।

( कांग्रेस के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन से बहिर्गमन )

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक):  +++ जाओ। ...(व्‍यवधान)... जो पैसा काम में नहीं ले सके वो कांग्रेस निकम्‍मी है, जो पैसा काम में नहीं ले सके वो दिवालिया, सरकार को दिवालिया बताते हैं वो खुद दिवालिया हैं।

श्री अध्‍यक्ष: जाओ, जाने दो।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, मुझे बहुत अफसोस है कि प्रश्‍न काल ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: बैठो, बैठो। माननीय मंत्रीजी, माननीय सदस्‍य। ...(व्‍यवधान)...

सिंचाई मंत्रीजी, जवाब दीजिए।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, नये सिरे से चालू करूं वापस?

श्री अध्‍यक्ष: सुना नहीं हमने तो। आप बीच में नहीं बोलें। बारां से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप बीच में बैठे-बैठे नहीं बोलें।

 थोड़ी बहुत देर तो रहे होते बाहर।

 


ढारिया बांध (पाली) के निर्माण में व्‍याप्‍त अनियमितताओं की जांच

 

20. श्री खुशबीर सिंह जोजावर (खारची)  एवं श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी) : क्‍या सिंचाई मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

(1) सरकार द्वारा पाली जिले में देसूरी पंचायत समिति के धारिया बांध का निर्माण कार्य कब स्‍वीकृत किया गया ? इसके निर्माण में कितना समय लगा एवं यह कब बनकर तैयार हुआ ? बांध बनने के पश्‍चात् कितनी बार इस पर पानी की चादर चली ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) बांध का निर्माण कार्य सरकार द्वारा करवाया गया अथवा ठेकेदार द्वारा करवाया गया ? निर्माण कार्य के लिये क्‍या क्‍या शर्तें तय हुईं ? शर्तों की प्रति सदन की मेज पर रखें।

(3)  क्‍या यह सही है कि निर्माण कार्य चालू करने से पूर्व बांध की मिट्टी का परीक्षण करवाया गया था ? यदि हां, तो किस एजेन्‍सी द्वारा तथा जांच रिपोर्ट क्‍या रही ? प्रति सदन की मेज पर रखें।

(4) क्‍या यह सही है कि मानसून से पूर्व बांधों के रखरखाव दुरूस्‍ती के लिये जांच रिपोर्ट मंगवाकर कार्यवाही की जाती है ? यदि हां, तो उक्‍त बांध की जांच कब की गयी तथा क्‍या कमियां पाई गईं ? इसे दुरूस्‍त करने के लिये सरकार द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई ? विवरण सदन की मेज पर रखें ।

(5) क्‍या यह सही है कि बांध वर्ष 2006 में टूट गया ? यदि हां, तो कितनी जगह से व टूटने के क्‍या कारण रहे ? इसके लिये ठेकेदार के साथ साथ विभाग के कौन कौन अधिकारी/कर्मचारी दोषी हैं ? इनके विरूद्ध सरकार क्‍या कार्यवाही करने का विचार रखती है ? यदि नहीं, तो क्‍यों ?

(6) बांध के टूट जाने से किस किस गांव में कितना कितना नुकसान हुआ ? पीडि़तों को सरकार द्वारा क्‍या सहायता उपलब्‍ध करवाई गई या करवाने जा रही है ? विवरण सदन की मेज पर रखें ।

सिंचाई मंत्री (श्री सांवर लाल) : (1) पाली जिले के देसूरी विधान सभा क्षेत्र में स्थित धारिया बांध के निर्माण की स्‍वीकृति दिनांक 11.9.96 को राज्‍य सरकार द्वारा जारी की गई। बांध के निर्माण कार्य में पांच वर्ष का समय लगा। बांध वर्ष 2002 में बनकर तैयार हुआ। बांध बनने के बाद पहली बार 19 अगस्‍त, 2006 को बांध पूर्ण भराव क्षमता तक भरा तथा अधिक पानी आने के कारण चादर चली (ओवर फ्लो हुआ) तथा उसी दिन शाम को 6.30 बजे टूट गया।

(2) बांध का निर्माण् विभाग द्वारा विधिवत् रूप से निविदाएं आमंत्रित कर ठेकेदारों के माध्‍यम से करवाया गया। जिन शर्तों पर कार्य कराया गया उसकी एक प्रति परिशिष्‍ट अ पर संलग्‍न है।

(3) जी हां। बांध निर्माण से पूर्व मिट्टी का परीक्षण गुण नियन्‍त्रण इकाई पाली एवं जोधपुर तथा सिविल अभियांत्रिकी संकाय जेएनवी यूनिवर्सिटी जोधपुर से करवाया गया था । जांच में मिट्टी को बांध निर्माण के लिये उपयुक्‍त पाया गया। जांच रिपोर्ट की प्रतियां परिशिष्‍ट ब पर संलग्‍न है।    (4) यह सही है कि बांधों की वर्षा पूर्व रखरखाव दुरूस्‍ती के लिये संबंधित अधिकारियों द्वारा प्रतिवर्ष निरीक्षण किया जाता है और निरीक्षण के दौरान अगर कोई कमी पायी जाती है तो इसका निराकरण किया जाता है। उक्‍त बांध का निरीक्षण सहायक अभियन्‍ता जल संसाधन उपखण्‍ड पाली द्वारा संबंधित कनिष्‍ठ अभियन्‍ता के साथ दिनांक 4.6.2006 को मानसून पूर्व रखरखाव व दुरूस्‍ती हेतु किया गया, जिसमें कोई कमी नहीं पायी गयी। इसके बाद अधिशाषी अभियन्‍ता जन संसाधन खण्‍ड पाली द्वारा भी बांध स्‍थल का निरीक्षण 14.6.2006 को किया गया, जिसमें बांध की स्थिति संतोषजनक पाई गई।

(5) जी हां। बांध 38 स्‍थानों पर क्षतिग्रस्‍त हुआ । बांध के क्षतिग्रस्‍त होने के कारणों की जांच हेतु मुख्‍य अभियन्‍ता जल संसाधन के आदेश क्रमांक 1775 दिनांक 24.8.2006 द्वारा श्री जयपाल सिंह मुख्‍य अभियन्‍ता की अध्‍यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जा चुका है। जांच रिपोर्ट 31.10.2006 तक प्राप्‍त होना अपेक्षित है। जांच रिपोर्ट में दोषी पाये जाने वालों के विरूद्ध नियमानुसार आवश्‍यक कार्यवाही की जायेगी।

(6) बांध के टूट जाने से देसूरी तहसील के ग्राम डूठारिया, ईटन्‍तरा मेडतियान, ओडवाडिया एवं पाली तहसील के सेदरिया, हिरणखुरी, पादरली तुर्कान आदि ग्रामों में क्षति हुई। देसूरी तहसील में 367 मकान क्षतिग्रस्‍त हुए। इसी प्रकार पाली तहसील के 6 मकान क्षतिग्रस्‍त हुए। क्षतिग्रस्‍त मकानों के धारकों को 10,57,200 रुपये सहायता राशि का वितरण किया जा चुका है। 

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, अब तो इस सरकार की नाकों में चने चबा देंगे, आप देखना आज आगे। यह सरकार जिस तरह से चल रही है, जिस तरह से अन्‍याय कर रही है ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: और अपोजिशन भी जिस तरह से व्‍यवहार कर रहा है ...(व्‍यवधान)...

श्री हीरालाल (निवाई): पाँच मिनट तो बाहर रहो। क्‍या कर लोगे, बड़ी धमकियां देते हो।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, आप कृपा रखें बाकी सब ठीक है। ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, सरकार ने 600 तो उर्दू अध्‍यापक ही लगाये थे, 400 थर्ड ग्रेड के, 200 सेकण्‍ड ग्रेड के इसलिए गृह मंत्रीजी ने जो जवाब दिया कि केवल इतने अध्‍यापक लगाये थे, बिलकुल गलत जवाब दिया है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, 25 हजार राजीव गांधी पाठशाला के टीचर ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): पिछली सरकार ने तो 600 तो उर्दू अध्‍यापक ही लगाये थे। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, 25 हजार राजीव गांधी पाठशाला के टीचर, जिसका आप पक्ष ले रहे थे, वो सड़क पर घूम रहे हैं आज। ...(व्‍यवधान)... 25 हजार टीचर सड़क पर घूम रहे हैं, आपके कारण घूम रहे हैं सड़क के ऊपर। आश्‍वासन दिया था उनका। वोट लेने के लिए घुमाया था उनको। 25 हजार सड़क पर घूम रहे हैं। 25 हजार राजीव गांधी पाठशाला काअध्‍यापक तो सड़क पर घुमा रहे हैं ...(व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, पूर्व शिक्षा मंत्रीजी, पूर्व मुख्‍य मंत्रीजी इतने अयोग्‍य और नालायक थे कि जिसके कारण भर्ती नहीं हो सकी, पैसों का उपयोग नहीं हो सका। यह पूर्व शिक्षा मंत्री इतने अयोग्‍य थे।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह शिड्यूल्‍ड कास्‍ट और ट्राइब आपको उखाड़ कर फैंक देगी। इसी का राज कर रहे हो, आप जो राज कर रहे हो शिड्यूल्‍ड कास्‍ट, ट्राइब पर कर रहे हो। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): चीफ व्हिप है, उससे अयोग्‍य कम नहीं हैं। मेरा कोई काम्पिटिशन नहीं है, आपका जितना अयोग्‍य, जितने अयोग्‍य आप हैं उतना अयोग्‍य मैं भी हूं। जितना चीफ व्हिप अयोग्‍य है उतना आज से मैं भी अयोग्‍य हूं। यह मानने को तैयार हूं। इस सरकार का चीफ व्हिप जितना अयोग्‍य है उतना अयोग्‍य मैं भी हूं, मैं मानने के लिए तैयार हूं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): केवल कम्‍प्‍युटर खरीदने में इन्‍ट्रेस्‍ट लिया, इसमें कैसे गड़बड़ हो सकती है इसमें इन्‍ट्रेस्‍ट लिया। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): खुद तो सदन में आ गये और घनश्‍यामजी का सब्टिट्यूट बैठा दिया। कम से कम थोड़ी-बहुत तो आप शर्म करते, उनको भी साथ लाते। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, भारत सरकार ने 40 हजार शिक्षकों के पद का वेतन दिया है ---

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या बोल रहे हो आप बीच में? नौ, नहीं, माननीय सदस्‍य।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): और इसके बावजूद सिरोही जिले में 113 स्‍कूल हैं, टीचर नहीं है, आज एक भी टीचर नहीं है 113 प्राइमरी स्‍कूल में।

श्री अध्‍यक्ष: नौ, नौ, आप स्‍थान ग्रहण कर लें, मैंने दूसरा प्रश्‍न पुकार लिया।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह हालात राजस्‍थान के बना रखे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने दूसरा प्रश्‍न पुकार लिया है। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, 113 प्राइमरी स्‍कूल में एक भी टीचर नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदयश्‍, बीमारी दूसरी है, पंडाल खाली हैं इनका, यहां आज प्रदर्शन करने के लिए बुलाया था वो तो आये ही नहीं। ...(व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न को स्‍थगित करा दीजिए ...(व्‍यवधान)...

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान की जनता नहीं आ रही है, पंडाल खाली है इसलिए यहां पर ...(व्‍यवधान)...

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): बाँध का निर्माण करवाने का विचार रखते हैं?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सरकारी मुख्‍य सचेतक ...(व्‍यवधान)...

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): अध्‍यक्ष महोदय, तीन वर्ष पूर्व आप पैराटीचर्स के बारे में वकालत करते थे, अब क्‍या होगा? पैराटीचर तो आज भी भूखे मर रहे हैं।

श्री अमराराम (धोद): यह सचेतक महोदय बहिष्‍कार कर के जा रहे हैं क्‍या?

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, जिस विषय के ऊपर सदन का बायकाट करते हैं उस पर वापस आकर बोलने का अधिकार नहीं है आपको।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): पंडाल खाली हैं, हम क्‍या करें? प्रतिपक्ष के नेता महोदय, आपके पंडाल खाली हैं वहां, वहां लोग आये नहीं, अध्‍यक्ष महोदय ...(व्‍यवधान)...  वहां लोग आये नहीं, अध्‍यक्ष महोदय। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 2008 तक बोलने का अधिकार है, 2008 तक।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): नियमों का पालन कर रहे हैं। ...(व्‍यवधान)... आपके यह मुख्‍य सचेतक हर बार खड़े हो जाते हैं उसके बाद क्‍या सुनना है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): बिलकुल खाली पडा है वहां कोई 300-400 आदमी हैं, क्‍या मुंह लेकर जाएं ये वहां। 300-400 आदमी आये हैं, संकट यह है। ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): लाखों लोग आये हैं, लाखों लोग, राजेन्‍द्रजी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): प्रदर्शन करने वाले लोग आये नहीं इसलिए वहां जाएं कैसे अब। ...(व्‍यवधान)...

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रतिपक्ष के नेता का ध्‍यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं कि कम से कम न्‍याय की बात तो मत करो। ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप तो यहां पर बैठे हो ...(व्‍यवधान)... सबसे ज्‍यादा चूरू से आये हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री भवानी सिंह राजावत (संसदीय सचिव): सराहना कर रहे हैं और आप आलोचना कर रहे हो। ...(व्‍यवधान)... राजस्‍थान के शिक्षा जगत में जो क्रांतिकारी सूत्रपात हुआ है इसकी सराहना कीजिए।

 

Ars/usc/1140/05102006/1e/1

 

श्री अध्‍यक्ष: आपने अपना प्रोटेस्‍ट दर्ज करा दिया अब नैक्‍स्‍ट क्‍वश्‍चन चलने दीजिए ...(व्‍यवधान) जवाब आने दीजिए, बहुत महत्‍वपूर्ण है ।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): आप जब यहां बैठते थे यह कहते थे ....

श्री अध्‍यक्ष: अब आपका क्‍या हो गया ?

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): पैरा टीचर की वकालत करते थे अब क्‍या हो गया । पैरा टीचर के साथ अन्‍याय हो रहा है अब क्‍या हो गया पैरा टीचर का? अब भी पच्‍चीस हजार पैरा टीचर बाहर बैठे हैं और आप यहां बैठकर कहते थे पैरा टीचर के साथ अन्‍याय हो रहा है । आप भूल गये उन बातों को ...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: अध्‍यक्ष महोदय, पच्‍चीस हजार पैरा टीचर के साथ भारी अन्‍याय कर रही है सरकार ।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): सबसे ज्‍यादा हाउस के रिकार्ड में पैरा टीचर पर आप बोलते थे। रिकार्ड निकाल कर देख लो ...(व्‍यवधान) आज आपका मन कैसे बदल गया ? आप हाउस के अन्‍दर सबसे ज्‍यादा पैरा टीचर्स के लिए आप बोलते थे, अब क्‍या हो गया आपको ...(व्‍यवधान) याद नहीं है क्‍या आपको । आपकी सबसे ज्‍यादा सहानुभूति पैरा टीचर्स के प्रति ...(व्‍यवधान) और आज एक शब्‍द भी नहीं बोल रहे आप ...(व्‍यवधान)

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): आज वो ही अन्‍याय हो रहा है पैरा टीचर्स के साथ ...

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): ***

श्री अध्‍यक्ष: अंकित तो हो नहीं रहा क्‍यों खड़े हो आप ?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍नकाल केवल प्रश्‍न पूछने के लिए होता है भाषण देने के लिए नहीं एक बार जब प्रतिपक्ष वाक आउट कर जाता है ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ***

श्री अध्‍यक्ष: बात खतम हो जाती है और आगे नैक्‍स्‍ट कार्यवाही आ जाती है, नैक्‍स्‍ट बिजनस आ जाता है ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): *** श्री अध्‍यक्ष: अब आप स्‍थान ग्रहण करें ।

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप मुझे मजबूर नहीं करें ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री अध्‍यक्ष: सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, मैं आपका नाम लूंगी। अब यदि आप नहीं बैठेंगे तो मैं आपको नाम से पुकारूंगी ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): ***

श्री अध्‍यक्ष: आपको भी नाम से पुकार सकती हूं। यदि आप नहीं बैठेंगे तो आई विल कॉल योअर नेम ...(व्‍यवधान) नहीं अब आप कुछ नहीं। नैक्‍स्‍ट क्‍वश्‍चन।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मेरा मूल प्रश्‍न है । मैं पुछूंगा पहले, मूल प्रश्‍नकर्ता हूं मैं । हम बाहर नहीं गए थे ...(व्‍यवधान) हम यहीं बैठे थे आपकी नजरें बाहर गई थीं।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, उनकी तरफ हाथ नहीं करें आप। आप इधर संबोधन करें और मंत्री जी से जो पूछना है वह पूछें।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी):धारिया बांध मेरी कांस्‍टीट्यूएंसी का है मुझे पूछने दें पहले।

श्री अध्‍यक्ष: आप तो बहिर्गमन कर गये। बहिर्गमन करने के बाद दुबारा चांस थोड़े ही मिलता है।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): नहीं, बहिर्गमन नहीं किया, मैं यहीं बैठा था।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): इस सवाल पर थोड़े ही गये थे।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): मेरी विधान सभा का बाँध टूटा है मैं सरकार से कुछ निवेदन करना चाहती हूं। मुझे पूछने दें पहले ।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: पहले लक्ष्‍मी बारूपाल के प्रश्‍न का जवाब देंगे उसके बाद आपका जवाब देंगे क्‍योंकि वह पहले खड़ी हो गई थीं आप बाद में हुए।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, मैं कभी से खड़ा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, नहीं आप स्‍थान ग्रहण करें।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मैं तो आधे घंटे से खड़ा हूं यहां पर। मैं तो बैठा ही नहीं आया तब से ।

श्री अध्‍यक्ष: आसन ग्रहण करें। वह भी प्रश्‍नकर्ता हैं।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): क्‍यों नहीं देंगे ? यह क्‍या हो गया यह बिल्‍कुल गलत है। हमेशा आपने यह व्‍यवस्‍था दी है कि मूल प्रश्‍नकर्ता पहले बोलेगा तो पहले मूल प्रश्‍नकर्ता को बुलाया जाए उसके बाद देने दीजिए आप जवाब।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): मेरी विधान सभा का है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपकी विधान सभा का तो सत्‍यानाश हो गया।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): यह विधान सभा का मामला नहीं है। यह पूरे प्रदेश का मामला है । पूरे राजस्‍थान प्रदेश से संबंधित है विधान सभा से संबंधित नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ढाई साल बाद आपका क्‍या होना है यह तो सोचो।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): मैं हूं मूल प्रश्‍नकर्ता।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपकी पंचायत समिति चली गई ...(व्‍यवधान) आपको सड़क पर लाकर छोड़ दिया ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: रायपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य ..

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ढ़ाई साल बाद यह बाँध आपको ले डूबेगा यह ध्‍यान रखना।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): आप इतना उग्र मत बोलिए ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप जो कल बोल रही थीं धक्‍का देकर, ...(व्‍यवधान) राजस्‍थान में अभी धक्‍का देने वाला सी डी देवल को कोई पैदा ही नहीं हुआ है।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें। कृपया स्‍थान ग्रहण करें रायपुर सेआने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): धक्‍के तो आपको पब्लिक ने दिए हैं जो आपकी देसूरी पंचायत समिति चली गई, तीस साल तक आपकी रानी पंचायत समिति थी ...(व्‍यवधान)

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): आप अपने गिरेबान में झांक कर देखिए, आप कहां बैठते थे, आज इस विधान सभा में किसकी वजह से आए हैं यह आप सोचिए ...(व्‍यवधान) पैरों में बैठते थे आप ।

श्रीमती राजकुमारी शर्मा (सीकर): माननीय सदस्‍य ऐसी बातें करते हैं आप पुराने सदस्‍य कहलाते हैं और हमारी महिला को बोलने नहीं देते। अध्‍यक्ष जी, आप इनको बाहर निकलवाइये। ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): इसको बर्दाश्‍त नहीं किया जा सकता। 

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, मैं आपको नाम से पुकारूंगी ...(व्‍यवधान)

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): आप मेरे चाचा के पैरों में बैठते थे आज विधान सभा में उसी के कारण से हैं मुझे बता रहे हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: मैं आपको फिर कह रहीहूं आई काल यू नेम  मैं आपको नाम से पुकारूंगी।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): इन्‍होंने कहा, आप इनको तो नहीं कह रहीं इन्‍होंने कहा धक्‍के दे दिये ।

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण कर लें ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): इनकी हैसियत है धक्‍के देने की? इनको धक्‍के तो मैंने पंचायत समिति, म्‍युनिसिपैलिटी सबमें दिला दिए। ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें। नेता प्रतिपक्ष, क्‍या आपके माननीय सदस्‍य आपका बिल्‍कुल भी कहना नहीं मानते ?

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): इनको वहां पर घुसने नहीं दिया इसलिए ये गुस्‍सा सारा मेरे ऊपर निकाल रहे हैं ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपकी कहां हैसियत है धक्‍के देने की? ...(व्‍यवधान) आप पैदा ही नहीं हुई जब मैं धक्‍के दे रहा था ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप अपने माननीय सदस्‍यों को ...(व्‍यवधान) नहीं करवाते, हठधर्मिता पर उतर जाते हैं आप ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): निकाल दिया, इस बार विधान सभा से निकाल दूंगा ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): कोई जरूरी बात है ।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या जरूरी बात है ?

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): वापस विधान सभा में आ जाए तो मेरा नाम सी डी देवल नहीं ...(व्‍यवधान) 

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): आप भी नहीं आओगे, आप किसके बल पर आए हो ...(व्‍यवधान) मेरे चाचा के चरणों में बैठते थे आप । ...(व्‍यवधान) उनके जूते साफ करते थे आप । मैं तो जीतूंगी डंके की चोट पर जनता जिताएगी मेरे को तो आप अपना ध्‍यान रखो ...(व्‍यवधान)

श्रीमती राजकुमारी शर्मा (सीकर): आपको जन्‍म देने वाली औरत ही है, आप किसके बलबूते पर आए हो ?

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ...(व्‍यवधान) आपके पिता मेरे चरणों में बैठते थे।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): यह क्‍या जानें औरत का सम्‍मान करना ।

श्री अध्‍यक्ष: आप कुश्‍ती वहां लड़ना ना इलाके में, यहां क्‍या कुश्‍ती लड़ रहे हो ...(व्‍यवधान)

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): मेरे को लगता है यह मेरे सामने खड़े होंगे ...(व्‍यवधान) शिड्यूल्‍ड कास्‍ट होना पड़ेगा ...(व्‍यवधान) तब किसी के गोद आना पड़ेगा ...(व्‍यवधान)

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): महिलाओं से कुश्‍ती हम नहीं लड़ने देंगे।

श्री अध्‍यक्ष: भूतपूर्व आई ए एस आफीसर हो आप ...(व्‍यवधान)

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सरकार से पूछना चाहती हूं, मैं सरकार के जवाब से पूर्णतया संतुष्‍ट हूं और भविष्‍य में क्‍या यह बाँध पुनर्निमाण की इच्‍छा रखते हैं और पुनर्निमाण पक्‍का करवाने की इच्‍छा रखते हैं ? इतना बड़ा बाँध जब था तो वहां पर एक चौकीदार की भी व्‍यवस्‍था की जानी चाहिए । मेरे प्रश्‍न पूछने का यही था और मुझे उत्‍तर से संतुष्टि है । उन्‍होंने जांच आयोग बैठा दिया है उसका रिजल्‍ट आएगा, मुझे संतुष्टि रहेगी। सिर्फ मैं यही चाहतीहूं कि भविष्‍य में जब यह बाँध पु‍नर्निमाण हो तो पक्‍का पुनर्निमाण हो । सरकार से मैं इसका जवाब चाहतीहूं । इतना बड़ा बाँध है तो इसके ऊपर एक चौकीदार होना चाहिए, यह मैं चाहतीहूं । धन्‍यवाद।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, सरकार के जवाब से संतुष्‍ट हो जाते हैं उसके बाद कोई सप्‍लीमैंट्री नहीं पूछते हैं । जब सरकार के जवाब से संतुष्‍ट हो जाता है कोई सदस्‍य उसके बाद सप्‍लीमैंट्री नहीं पूछता है ...(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): धारिया बाँध बनने से कितने किसानों की भूमि सिंचित होती है ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इनको गाइड करो ।

एक माननीय सदस्‍य: आपसे तो आपके सदस्‍य संतुष्‍ट नहीं हैं ।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): दवाब में आकर के तो संतुष्‍ट हैं बोल देते हैं और अन्‍दर हीअन्‍दर ...(व्‍यवधान) यह कैसे संतुष्‍ट हैं?

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): कितने किसानों के कुए रीचार्ज होकर के कितने क्षेत्रफल में सिंचाई हो सकती है कृपया यह बतायेंगे ?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इनके डर से कह देते हैं हम संतुष्‍ट हैं और फिर सप्‍लीमैंट्री क्‍वश्‍चन ठोके जा रहीहैं । कोई बात होती है क्‍या, दुनिया के इतिहास में जहां भी पार्लियामैंट चलती है, सदन चलता है ....

श्री अध्‍यक्ष: आप बजाए इधर शिक्षा देने के उधर शिक्षा दो ।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इनको समझाओ आप।

श्रीमती राजकुमारी शर्मा (सीकर): आप अपने लोगों को समझाओ ।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैंने पूछा अध्‍यक्ष महोदय, कि बाँध बनने से लाभ है कि नहीं बनने से लाभ है ...(व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से प्रश्‍न का जवाब चाहता हूं जो मंत्री जी ने लिखित में हमें दिया है और एक इतनी बड़ी पुस्तिका भी दी उसके लिए तो धन्‍यवाद है ।

श्री अध्‍यक्ष: अब आपने भी धन्‍यवाद दे दिया। आपके नेता प्रतिपक्ष ने कह दिया कि धन्‍यवाद के बाद तो आवश्‍यकता नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, यह जो पुस्तिका दी है मैं इसके लिए धन्‍यवाद दे रहा हूं लेकिन मात्र किताब देने से जवाब नहीं आ सकता है ।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप नये सदस्‍यों को व्‍यवस्‍थाएं देकर समझा दीजिए कि ऐसा हो जाने के बाद सप्‍लीमैंट्री नहीं होती। एक उदाहरण हो जाएगा।

श्री अध्‍यक्ष: आप कुछ अपनी पार्टी वालों को प्रतिपक्ष को भी तो समझाओ कि हर बात पर खड़े होकर शोर नहीं मचाते हैं । उनको समझाओ आप ।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष का तो काम है आपको असिस्‍ट करने का। हम आपको मदद करते हैं आपकी रौनक बढ़ाते हैं, आप हमें कहते हैं कि इन्‍हें समझाओ। अगर हम आपकी रौनक नहीं बढ़ायेंगे, आपको कोई नहीं पूछेगा। आपको कभी घास नहीं डालेंगे। यह तो हमारी कृपा मानो आप आपके ऊपर कि हम आपकी रौनक बढ़ा रहे हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: और किसी से तो इस सदन की रौनक बढ़ती है कि नहीं बढ़ती है लेकिन नेता प्रतिपक्ष से रौनक बढ़ जाती है ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आसन पर कृपा की बात की इन्‍होंने । अध्‍यक्ष महोदय, मुझे इस बात पर एतराज है प्रतिपक्ष के नेता ने कहा किआप पर इनकी कृपा है । यह स्‍पष्‍ट करें कि आप पर इनकी कृपा है कि इन पर आपकी कृपा है । पता तो चले राजस्‍थान की जनता को ।

 

vns/usc/11.50/1f/5.10.2006

 

श्री अध्‍यक्ष: ऐसा है आप कृपा की बात छोडि़ये..

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप कहां आ गये दोनों के बीच में ?

श्री अध्‍यक्ष: लेकिन यह अभी भी रौनक बढ़ाते हैं। इस सदन के अन्‍दर और कोई रौनक बढ़ाता हो चाहे नहीं बढ़ाता हो माननीय नेता प्रतिपक्ष अवश्‍य रौनक बढ़ाते हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): लेकिन आज तो सदन की रौनक भवानी सिंह राजावत बढ़ा रहे हैं देखो कैसा कुर्ता पहनकर आये हैं सर्कस जैसा। आज की रौनक तो भवानी सिंह राजावत बढ़ा रहे हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इनको जलन क्‍यों हो रही है ? मैं आपका भी प्रशंसक हूं। मैं आपकी भी कई मामलों में प्रशंसा करता हूं। हमारे बुजुर्गों ने यह कहा था कि तलवार का घाव यदि बैरी का है तो भी उसकी सराहना की जानी चाहिये। कभी-कभी अच्‍छी बात कह देते हैं हम आपकी सराहना कर देते हैं। जब रात-दिन आप उलटा करते हो उसकी हम सराहना कैसे करें ? अध्‍यक्ष महोदय की हर बात की हम सराहना करते हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं-नहीं, मैंने तो पूछा कृपा किसकी किस पर है यह पता लग जाए थोड़ा सा। आपकी इन पर है कि इनकी आप पर है, इतनी सी बात थी बाकी तो...

श्री अध्‍यक्ष: इनकी मुझ पर है। इनकी मुझ पर है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इसमें आपको क्‍या ऐतराज है ? इसकी बराबरी, क्‍या जलन है ?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): फिर भी आप पर है...

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, इनकी मुझ पर है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): और जैसी इनकी है वैसी आपकी है कि नहीं ?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, इसको स्‍पष्‍ट करने के लिये, आप किसी भी चीज को आप अध्‍यक्ष महोदय को कह ही नहीं सकते। आपको कोई अधिकार नहीं है कि अध्‍यक्ष महोदय से क्‍लेरीफिकेशन मांगे।

श्री अमराराम (धोद): आप दोनों के बीच में कहां आ गये ?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मैं बीच में हूं।

श्री अध्‍यक्ष: यह अधिकार केवल नेता प्रतिपक्ष का है।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय, आपसे यह जानना चाहता हूं कि जिस स्‍थान पर उक्‍त धारिया बाँध का जो ओवरफ्लो बनाया गया, क्‍या एस्‍टीमेट में वह ओवरफ्लो उस पहाड़ी के पास था या नदी की मुख्‍य धारा पर था ? अगर वह पहाड़ी के पास नहीं था और मुख्‍य धारा पर था तो गलत स्‍थान पर क्‍यों बनाया गया ? और अगर एस्‍टीमेट में वह स्‍थान लिया गया तो क्‍या वह स्‍थान उपयुक्‍त था ?

मंत्री महोदय, दूसरा मेरा प्रश्‍न है कि आपने तकनीकी रिपोर्ट का जो इसमें हवाला दिया है कि मिट्टी की जांच करवायी गयी, मैं मानता हूं कि मिट्टी की जांच हुई होगी लेकिन उस मिट्टी की जांच में यह लिखा कि उपयुक्‍त पाया गया। मैं आपसे यह जानना चाहूंगा कि एक बाँध राजस्‍थान के इतिहास में आज दिन तक जितने भी बाँध टूटे हैं अतिवृष्टि से कोई भी बाँध मेरे ख्‍याल से 38 स्‍थानों से नहीं टूटा होगा और उसका एक मात्र कारण यह था कि वह मिट्टी उपयुक्‍त नहीं थी। वह रिपोर्ट गलत प्रस्‍तुत की गयी। जो भी टैस्‍ट रिपोर्ट आयी लेबोरेटरी से वह गलत रिपोर्ट प्रस्‍तुत की गयी।

तीसरा मेरा प्रश्‍न आपसे है बाँध के रख-रखाव के लिये मैंने पूछा कि क्‍या मानसून से पूर्व उनकी जांच करवायी जाती है ? वहां आपका एक अधीक्षण अभियन्‍ता बैठा है और मैं आपसे यह जानना चाहूंगा मंत्री महोदय कि आपने इसमें लिखा है कि हां, उसकी जाँच करवायी गयी। उसका निरीक्षण करवाया हमने मानसून से पूर्व। तो उस निरीक्षण की जो प्रति है कि किस दिन आदेश हुए और जो निरीक्षण किया उसकी रिपोर्ट क्‍या प्रस्‍तुत की गयी वह आप सदन के पटल पर प्रस्‍तुत करें।

मैं आपसे यह जानना चाहूंगा जो इसमें 38 स्‍थान बताये गये हैं कि 38 स्‍थानों से बाँध टूटा है तो क्‍या इसको खण्‍ड़ों में बांटा गया है। ब्‍लाक एक, ब्‍लाक दो ऐसे करके आपने खण्‍ड़ों में बांटा है इसको। इसकी यह रिपोर्ट आयी है और इसमें आप यह बतायेंगे क्‍ले कितना प्रतिशत होना चाहिये जो उस बाँध के बनाने के लिये उपयुक्‍त रहे ? यहां अलग-अलग प्रतिशत अलग-अलग खण्‍ड़ में दिये गये हैं। जो बाँध यहां जिन स्‍थानों से टूटा है वह पूरी जगह से उसमें क्‍ले की मात्रा अधिक थी, ग्रेवल की मात्रा अधिक थी इसलिये वह बाँध टूटा है तो इसकी आप दुबारा जांच करवाने का विचार रखते हैं ? उस जांच में और इस मिट्टी की जांच में अगर अंतर आता है तो आप उन दोषी अधिकारियों के विरुद्ध जिन्‍होंने उस वक्‍त यह जांच रिपोर्ट प्रस्‍तुत की थी, क्‍या कार्यवाही करने जा रहे हैं ? साथ ही इस आप कब तक इसका पुनर्निर्माण करेंगे ? इससे पूर्व आप यह भी विचार रखते हैं कि बाँध का केचमेंट एरिया जो भी है, पिछले 12 वर्षों का जो वर्षा का रिकार्ड है उसको भी आप ध्‍यान में रखते हुए उक्‍त बाँध को बनायेंगे या यूं ही बना देंगे ?

श्री अध्‍यक्ष: बस अब पूछ लिया..(व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सब बता दिया ना।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): शासन चाहे कांग्रेस का हो चाहे बी जे पी का हो बाँध टूटने से मतलब है। आपके शासन में भी टूटे होंगे और हमारे शासन में भी टूटे होंगे। कांग्रेस या बी जे पी वहां जाकर बाँध नहीं बनाती है।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप स्‍थान ग्रहण कर लें।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): आपके शासन में बना था..(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आपके राज में बना था तब ही तो भ्रष्‍टाचार हुआ है। कांग्रेस के राज में बनता तो भ्रष्‍टाचार ही नहीं होता ...(व्यवधान) बनाने वाले जो थे ठेकेदार आपके लोग थे।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ठेकेदार के भाई हो आप..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी जवाब देंगे। आप क्‍यों बोल रहे हैं बीच में ?

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍यों की चिन्‍ता बिलकुल स्‍वाभाविक है। कोई भी अगर वाटर हार्वेस्टिंग स्‍ट्रक्‍चर बनता है और चिन्‍ता का विषय है। मैं अभी यह कह सकता हूं कि जहां पर भी हैवी रेनफाल और बाढ़ की स्थिति थी, मैं सदन को बताना चाहता हूं कि दो साल, ढाई साल में जो भी स्‍ट्रक्‍चर सबने निर्माण किये हैं चाहे हार्वेस्टिंग स्‍ट्रक्‍चर हो चाहे डेम हो, कोई भी फुली डेमेज नहीं हुआ है। साइड में से कहीं-कहीं पानी निकल गया, बाकी सबमें पानी भरा हुआ है और 85 प्रतिशत के लगभग इर्रिगेशन तक की क्षमता का पानी आज की तारीख में मौजूद है। दो डूंगरपुर में टूटे हैं और एक धारिया बाँध टूटा है पाली जिले का। बदकिस्‍मती यह है कि यह बाँध तो पहली बार बनने के बाद उसी दिन भरा और शाम को टूट गया...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): कब बना यह ?

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): यह बना 2002 में और उसके बाद में लगातार..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप शांत रहें ना। शांत रहिये।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपका यह कहना कि इस बरसात में आज के समय के निर्माण का एक भी बाँध नहीं टूटा, शत-प्रतिशत असत्‍य है। आपके टाइम के निर्माण के अनेक बाँध टूटे हैं

श्री अध्‍यक्ष: हरिमोहन शर्मा। हिण्‍डोली से आने वाले माननीय सदस्‍य, यह कोई तरीका नहीं है आपका कि आप बीच में खड़े होकर और मंत्रीजी को डिस्‍टर्ब करते हैं। पूरा जवाब आने दीजिये उनका। यह कौनसा तरीका है ?

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अगर आपके पास कोई सूचना हो, ऐसी कोई सूचना हो कि इस ढाई साल में बना और जिस तरीके से धारिया टूटा वैसे कहीं पानी निकल आया हो तो मुझे देना, आपको मैं बता रहा हूं कि तत्‍काल ससपेंड करूंगा संबंधित अधिकारियों को। अब आप भी ऐसे ही...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): बता दो आप अमराराम जी टूटा है।

श्री अमराराम (धोद): मेरे यहां टूटा है। इस साल बनाया था और इसी साल टूट गया पूरा। आप ससपेंड करा दो।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आपके यहां तो बरसात ही नहीं हुई, वैसे ही टूट गया है।

श्री अमराराम (धोद): आखिरी में इतनी बरसात हुई और उसी से टट गया। इसी साल बना था। बता दो आप।

श्री अध्‍यक्ष: वह दूसरा प्रश्‍न है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह वाटर हार्वेस्टिंग का जो काम है ना, आपका वाटर हार्वेस्टिंग का अनेक टूट रहे हैं, हर जगह पर टूट रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: अनेक का जवाब नहीं देंगे यह। यह इसी का जवाब देंगे। हरेक के जवाब के लिये दूसरा प्रश्‍न कीजिये।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): केवल इर्रिगेशन से संबंधित जो कंस्‍ट्रक्‍शन है अभी उन्‍हीं की बात कर रहा हूं। बाकी स्‍ट्रक्‍चर्स कई एजेंसीज के द्वारा बनते हैं। तो माननीय सदस्‍य की चिन्‍ता है, मेरे पास जो जानकारी आयी है मिट्टी के टैस्‍ट की उसके सम्‍बन्‍ध में जानकारी दी है। अब क्‍योंकि आजकल आप सब भी जानते हैं जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता जा रहा है आदमी की बॉडी का टैस्‍ट आज से दस साल पहले कम होते थे आज हर चीज का टैस्‍ट होता है। आज यह बाँध तो बड़े-बड़े स्‍ट्रक्‍चर्स बनते हैं..(व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): नहीं, मंत्री महोदय क्‍ले का टैस्‍ट नहीं हुआ। गलत रिपोर्ट प्रस्‍तुत की गयी।

श्री अध्‍यक्ष: फिर आप यह क्‍या हो गया है ? यह कौनसा तरीका है ?

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मैं बता रहा हूं ना आप क्‍यों खड़े हो रहे हो। आपकी चिन्‍ता, मैं आपसे ज्‍यादा चिंतित हूं। तो मैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह कहना चाह रहा हूं कि जब यह बाँध बनना शुरू हुआ था उस समय भी एक टैस्‍ट जो होना चाहिये था, कर सकते थे, हमारे यहां पर फैसेलिटी थी आई डी आर में जो नहीं किया गया जिसको अंग्रेजी में कहते डिसपर्सिव सॉयल टैस्‍ट। अब अंग्रेजी में मैंने कोशिश की कि क्‍या होता है ? घुलनशील तत्‍व, घुलनशीलता की जाच। अब यह बाँध जिस तरीके से टूटा है...

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मुख्‍य बात यही है।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): 38 जगह से यह अंदर से ब्रिक्‍स हुआ और एक जगह से मेन पॉल टूटी है। अगर यह टैस्‍ट हो जाता तो मैं आपकी बात से बिलकुल सहमत हूं कि जिस तरीके से बाँध भरने के बाद कुछ ही घण्‍टों में मिट्टी घुल-घुल करके वह एक तरह से छेद जिसको गुल्‍ला हम मारवाड़ी भाषा में कहते हैं। जगह-जगह बाँध से गुल्‍ले लग गये और इस वजह से वह पूरा का पूरा पानी उसका निकल गया। यह हमारे लिये चिन्‍ता की बात है। मैंने जांच के चीफ इंजीनियर, नर्बदा श्री जयपाल सिंह की अध्‍यक्षता में कमेटी गठित कर दी है और एक महीने में हमने रिपोर्ट मांगी है और मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि जो भी इस बाँध के निर्माण में अधिकारी लगे हुए थे, सबकी जानकारी मैंने कर ली है और आज की तारीख में लगभग यह सब सेवा में हैं और इनके खिलाफ एक्‍शन होगा अगर यह दोषी पाये जायेंगे तो। निश्चित रूप से मैं सदन को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं राज्‍य का पैसा लगता है किसानों के लिये लगता है, किसान आशा करता है कि बरसात हो जाए पानी आ जाए...

श्री अध्‍यक्ष: बस ठीक है, हो गया।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): दो साल, चार साल, दस साल में तो कभी तो फायदा मिला। आज जवार्इ बाँध बारह साल बाद में भरा। आज धारिया में किस्‍मत है हमारी कि मारवाड़ में बाढ़ आ रही है और पहली बार बरसात हुई है...

श्री अध्‍यक्ष: सबको संतुष्‍ट कर दिया आपने अपने जवाब से। नेक्‍सट क्‍वेश्‍चन।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): तो यह मैं जांच करा कर उनके खिलाफ कार्यवाही करूंगा।

दूसरी बात यह आयी कि इसका री-कंस्‍ट्रक्‍शन, तो मैं सदन को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि वापस पानी रुके कैसे, इस बार बरसात हुई भगवान करे फिर अगली बार बरसात करे तो मानसून का पानी रोकने तक की स्थिति तो कर देंगे। उसमें सारे टैस्‍ट कराकर इस प्रकार से कंस्‍ट्रक्‍शन करायेंगे कि इससे फिर डेमेजेज नहीं हो। यह व्‍यवस्‍था हम करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: पूर्णरूपेण संतुष्‍ट हो गये। नेक्‍सट क्‍वेश्‍चन। श्री एमादुद्दीन।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): बाकी एक ओवरफ्लो वाली जो आपने...

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): आप निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्‍तुत...

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, वहां बरसात से पहले...

श्री अध्‍यक्ष: तो हम सब संतुष्‍ट हो गये, आसन भी संतुष्‍ट है, यह भी संतुष्‍ट है।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): और इंस्‍पेक्‍शन रिपोर्ट तो जैसे कोई भी अधिकारी ए ईएन, जे ईन, एक्‍स ईएन है यह उनकी प्रोपर्टी है। आज आप आपके घर में जाते हो तो सब एक-एक को टटोल रिपोर्ट थोड़ी बनाते हो वैसे ही इर्रिगेशन के डिपार्टमेंट वाले ..(व्‍यवधान)

श्‍याम/चौहान   5.10.2006   12.00(1)  1g 

 

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): यह घर नहीं सरकार है मंत्री महोदय ...(व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अब आप सुनें तो सही, सरकार कोई हर बार जा-जाकर कोई लॉग-बुक थोड़े ही भरेगी ...(व्‍यवधान) कि इस बाँध में यह हो गया ...(व्‍यवधान) अगर कोई ब्रीचेज वगैरह होती तो निश्चित रूप से इस पर कार्यवाही होती।

श्रीमती कृष्‍णेन्‍द्र कौर (नदबई): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी को यह सुझाव देना चाहती हूं कि जितने भी बाँध अभी पंचायत समिति में गये हैं।

श्री अध्‍यक्ष: वह अलग से प्रश्‍न है, आई एम सॉरी, अलग से प्रश्‍न है, इनसे आप वैसे ही बात कर लीजिये वह वैसे ही कर देंगे।

श्रीमती कृष्‍णेन्‍द्र कौर (नदबई): इन्‍होंने तो पंचायत समिति में ले लिया ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: इससे थोड़े ही संबंधित है ...(व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, कैबीनेट सब कमेटी बनी हुई है, मुख्‍यमंत्री जी ने इस संबंध में कैबीनेट सब कमेटी बनायी है। उसकी रिकमंडेशन के बाद मंत्रिमंडल विचार करेगा।

श्री अध्‍यक्ष: श्री एमादुद्दीन अहमद खान।

        साबी नदी(अलवर) पर पुल निर्माण

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): क्‍या सार्वजनिक निर्माण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि अलवर जिले की तहसील तिजारा व उपखण्‍ड कोटकासिम मुख्‍यालय पर रेवाड़ी से किशनगढ़बास, तिजारा वाया कोटकासिम व रेवाड़ी से भिवाड़ी वाया कोटकासिम रोड पर कोटकासिम कस्‍बे पर साबी नदी पर पुलिया न होने से भिवाड़ी, खुशकेड़ा, चौपानकी औद्योगिक क्षेत्र को नेशनल हाइवे नं.8 (जयपुर-दिल्‍ली) से वै‍कल्पिक मार्ग नहीं मिल पा रहा है?

(2) क्‍या सरकार उक्‍त पुलिया का निर्माण कर राज्‍य के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र को जयपुर-दिल्‍ली नेशनल हाईवे से वैकल्पिक मार्ग उपलब्‍ध करवाने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं तो क्‍यों?

श्री अध्‍यक्ष: आप जवाब दीजिये।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 1. जी हां। अलवर जिले की तहसील तिजारा व उपखण्‍ड कोटकासिम मुख्‍यालय पर रेवाड़ी से किशनगढ़वास तिजारा वाया कोटकासिम रोड़ पर कोटकासिम कस्‍बे में साबी नदी पर पुलिया नहीं होने से इस मार्ग में नदी का हिस्‍सा कच्‍चा होने के कारण वर्षा ऋतु में यातायात में बाधा आती है। लेकिन भिवाड़ी, खुशकेड़ा, चौपानकी औद्योगिक क्षेत्र को नेशनल हाईवे नंबर-8 से जोड़ने के लिए टपूकड़ा, बूढ़ी बावल, नन्‍दरामपुरवास, धारूहेड़ा वै‍कल्पिक मार्ग उपलब्‍ध है।

2. जी हां। किशनगढ़बास कोटकासिम बोलनी रेवाड़ी रोड पर कोटकासिम कस्‍बे के साबी नदी पर पुलिया(रपट) का कार्य राज्‍य सड़क निधि में विचाराधीन है।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने पार्ट एक में जो बताया है कि नेशनल हाईवे से जोड़ने के लिए टपूकड़ा, बूढ़ी बावल और जो रोड आपने बताया है यह रूट दिल्‍ली से होता है, जयपुर कैपिटल है और अगर जयपुर से जाना होता है तो यहां से बोलनी को पार करके बाद में कोटकासिम का है, बोलनी के साथ उसके बजाय धारूहेड़ा फिर भिवाड़ी, फिर टपूकड़ा और फिर पुष्‍करणा आना पड़ता है।

श्री अध्‍यक्ष: आप सीधा सा प्रश्‍न पूछें कि साबी नदी पर पुल बनाने का आपका इरादा है क्‍या? यही पूछ लीजिये ना। बात हो गयी खत्‍म।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): मैं यही पूछ रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: यही पूछ लीजिये आप।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): यह जो रूट है, यह दिल्‍ली वाले के बजाय जयपुर से ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: इसलिए कह रही हूं कि यह पूछ लीजिये ताकि जवाब दे देंगे वह।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): इसको जोड़ने के लिए रूट बनाने का आपका कब तक प्‍लान है?

श्री अध्‍यक्ष: वही तो मैं कह रहा हूं कि आप सीधा पूछ लीजिये।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): पार्ट दो में जो आपने पुलिया का बताया है तो 2005 में जब आप नवम्‍बर,2005 को जोडि़या पधारे थे कोटकासिम तहसील में तब आपने एक उदघाटन किया था, वहां पर आपने दो एलान किये थे, एक तो आपने दो किलोमीटर सी.सी.रोड साबी नदी का पुल बनाने का एलान किया था।

श्री अध्‍यक्ष: इन्‍होंने एलान कुछ भी किया हो, आपको जो बात पूछनी है वह पूछ लीजिये।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): दूसरा आपने कोटकासिम से किशनगढ़बास के हाईवे का आपने किया था।

श्री अध्‍यक्ष: समय हो गया है इसलिए पूछ लीजिये आप।

श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): उन बातों पर एक साल होने को आया है और अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है तो मेरा आपसे निवेदन यह है कि इसपर आप कब काम शुरू करेंगे और यह जो साबी नदी के पुलिया का मामला है या तो इसमें एस.आर.पी. से करवायें नहीं तो फिर एनएचएआई से अगर इसमें कोई स्‍कीम हो तो इसमें आप करवायें।

श्री अध्‍यक्ष: बनाने का इरादा हो तो बता दीजिए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, साबी नदी पर निश्चित रूप से काज-वे के निर्माण के लिए पूर्व में घोषणा की गयी थी, 144 लाख रूपया इसमें खर्च होगा और इसी वित्‍तीय वर्ष में जो पूर्व की घोषणा है, इसी वित्‍तीय वर्ष में इसकी स्‍वीकृति जारी करे और जो हमारी एस.आर.टी., राजस्‍थान सड़क निधि है इसके अंतर्गत स्‍वीकृति जारी करेंगे और इसको बनायेंगे, इसकी आवश्‍यकता है।

श्री अध्‍यक्ष: बहुत अच्‍छा है धन्‍यवाद। प्रश्‍न काल समाप्‍त हुआ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आसन पैरों पर है और अधिकारी जा रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आसन पैरों पर होता है तो सदन की जिम्‍मेदारी है, सदन के माननीय सदस्‍यों की जिम्‍मेदारी होती है। लेकिन परंपराओं में यह भी है कि ऑफिसर्स गैलेरी में भी वह स्‍थान नहीं छोड़ें। मैं समझती हूं कि वह भविष्‍य में ध्‍यान रखेंगे।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, आपको धमकाते हुए माननीय चीफ व्हिप इधर से निकल गये थे, आपने इसको नोट किया है, सबने नोट किया था। क्‍या कहा, उसको आपने पसंद कर लिया होगा लेकिन इस तरह से यह जो बिहेवियर है यह संसदीय परंपराओं के सौ प्रतिशत खिलाफ है।  कोई चीफ व्हिप आज तक के इतिहास में इस विधान सभा में मैंने नहीं देखा।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): क्‍या?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): कहीं दुनिया में नहीं देखा जो गवर्नमेंट चीफ व्हिप अध्‍यक्ष को धमकाता हुआ बाहर जा रहा है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैंने अध्‍यक्ष महोदय को धमकाया है, मेरे में हिम्‍मत कहां है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह आपके लिए शर्म की बात है, यह तो सत्‍ता पक्ष के लिए शर्म की बात है ...(व्‍यवधान) और हम लज्जित हैं कि हमारा गवर्नमेंट चीफ व्हिप ऐसा है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैं तो अध्‍यक्ष जी के हाथ जोड़कर रहता हूं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं, अध्‍यक्ष जी के हाथ जोड़ने से काम नहीं चलेगा। आपको अपने व्‍यवहार में इम्‍प्रूवमेंट करना पड़ेगा। आप कहिये कि आइंदा नहीं करेंगे। आप कहिये कि आइंदा नहीं करेंगे।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैं तो प्रतिपक्ष के नेता आपके प्रति भी समर्पित हूं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं, मेरे साथ नहीं, इधर कहें कि आइंदा नहीं करूंगा ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आसन को तो मैं सिर पर ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): कह दीजिये कि भूल हो गयी है, आइंदा नहीं करूंगा ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): वहां डंडा लगाने की सिफारिश करता हूं और अध्‍यक्ष महोदय, मैंने आसन का नहीं, मैंने यह कहा कि अपनी एक परंपरा है कि जब एक मुद्दे पर वाक आउट हो जाये तो उस मुद्दे पर पुन: चर्चा नहीं करते हैं। मैंने कहा कि मैंने कभी ऐसा विपक्ष ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप सीट से बोलते ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैंने कभी भी विपक्ष ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍य सचेतक जी अपनी सीट से बात कहते ...(व्‍यवधान) हम गैलेरी में यह बात कहते हुए ...(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष जी हमें कहते हैं कि अपनी सीट पर जायें ...(व्‍यवधान) और आपने अपनी सीट से यह बात नहीं कहीं ...(व्‍यवधान) मुख्‍य सचेतक बने हुए हैं आप ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): विधान सभा सदस्‍य जो कई बार चुनकर आये हैं ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सात बार, सात बार आये हैं प्रतिपक्ष के नेता ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): और जो इस सीट पर भी बैठे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: और एक निर्वाचन क्षेत्र से ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): वह नियमों के विपरीत करें इसलिए मैंने यह कहा कि मैं यह देख नहीं सकता हूं इसलिए जा रहा हूं।

श्री अमराराम (धोद): आपने वाक आउट किया था?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): वाक आउट नहीं किया था ...(व्‍यवधान) मैं यह अपनी आंखों से देख नहीं सकता इसलिए जा रहा हूं ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप अपनी सीट से बोलते यह बात ...(व्‍यवधान) आप रास्‍ते में बोलते हुए गये हो ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हम कभी अध्‍यक्ष जी को कहते हुए बाहर नहीं निकले। अपनी जिंदगी में नहीं निकले और फिर नहीं निकलेंगे। लेकिन आपका जो व्‍यवहार था ...(व्‍यवधान) एज चीफ व्हिप आपत्ति जनक था ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यदि एक शब्‍द भी अध्‍यक्ष जी के सम्‍मान के विरूद्व मैंने कहो हो ...(व्‍यवधान) प्रोसीडिंग में आप दिखा दें तो मैं आपसे आजीवन क्षमा चाहता हूं और आजीवन इस सदन में पैर नहीं रखूंगा, इस सदन में पैर ही नहीं रखूंगा।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह आपकी कांस्ट्टिवेंसी की चौपाल नहीं है, यह राजस्‍थान विधान सभा है जिसके आप गवर्नमेंट चीफ व्हिप हैं। आपके व्‍यवहार को हम देखते हैं और आपको हम फॉलो करते हैं और आप ऐसा करते हो। ऐसा नहीं होगा ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यदि अध्‍यक्ष महोदय के खिलाफ ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपका हर एक्‍शन लोग देखते हैं, नोट करते हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यदि आसन के प्रति मैंने कहा, ऐसा कुछ कहा ...(व्‍यवधान) तो मैं क्षमा प्रार्थी तो हूं ही ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय मुख्‍य सचेतक जी कहते हुए गये थे, उनको अपने स्‍थान से बोलना चाहिए था ...(व्‍यवधान) आप हमको कहते हुए ...(व्‍यवधान) अपने स्‍थान से बोलो ...(व्‍यवधान) लेकिन यह आपको कहते हुए गये। हमने अपनी आंखों से देखा। अगर गलत हो तो आप देख लेते, आप अपनी सीट से बोल सकते थे ...(व्‍यवधान) माननीय मुख्‍य सचेतक जी आप कहते हुए गये, आपको जो भी बात कहनी थी अपनी सीट से कहें ...(व्‍यवधान) आप हमको रोज ही यह निर्देश देते हो कि अपने स्‍थान से बोलें, आपने जो कुछ भी कहा आप भी अपनी सीट से कहते, आप कहते हुए गये जो आपके आचरण और सदन की परंपराओं के खिलाफ काम आपने किया है।

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): नियमों के खिलाफ है ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आपको अध्‍यक्ष जी प्रताड़ना दें या नहीं दें लेकिन आपको स्‍वयं ही अपने आचरण पर खेद व्‍यक्‍त करना चाहिए।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आपका ही प्रताड़ना मान लेता हूं मैं तो ...(व्‍यवधान)

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): आप बोलते ही नहीं गये, आप हाथ का इशारा करते हुए भी गये थे। यह सबसे बड़ी बात है जबकि यह हमारे मुख्‍य सचेतक हैं, बोले ही नहीं थे, आपको बोलना तो चाहिए था सीट से ले‍किन सीट छोड़कर बोल रहे थे और आप इशारा और कर रहे थे आसन की तरफ।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य गण, शोकाभिव्‍यक्ति के इस अवसर पर हाल ही में दिवंगत हुए इस विधान सभा के पूर्व सदस्‍य श्री उम्‍मेद सिंह एवं श्री अजीत सिंह के प्रति संवेदना व्‍यक्‍त करते हुए यह शोक प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करती हूं।

 पूर्व विधायक श्री उम्‍मेद सिंह का जन्‍म 5 अक्‍टूबर,1936 को बाड़मेर में हुआ। आपने महाराज कुमार कॉलेज, जोधपुर से बी.ए. की उपाधि प्राप्‍त की। श्री उम्‍मेद सिंह तीसरी तथा आठवीं राजस्‍थान विधान सभा में विधायक रहे। आप तीसरी विधान सभा के लिए बाड़मेर निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय सदस्‍य के रूप में तथा आठवीं विधान सभा के लिए शिव निर्वाचन क्षेत्र से जनता पार्टी के विधायक निर्वाचित हुए। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप प्राक्‍कलन समिति, याचिका समिति, अधीनस्‍थ विधान संबंधी समिति तथा गृह समिति के सदस्‍य रहे। विधान सभा में आप अपने क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर प्रयत्‍नशील रहे। 

श्री उम्‍मेद सिंह का दिनांक 29 सितम्‍बर, 2006 को निधन हो गया।

पूर्व विधायक श्री अजीत सिंह का जन्‍म 28 अगस्‍त, 1930 को सवाई माधोपुर जिले के सूरोठ ग्राम में हुआ। आपने इंटरमीडिएट तक की शिक्षा प्राप्‍त की। श्री अजीत सिंह पांचवीं तथा आठवीं राजस्‍थान विधान सभा में टौंक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित हुए।

 

(जयगोविन्‍द/अरुण/5106/1210/1h)

आपने पांचवीं विधान सभा में जनसंघ तथा छठी विधान सभा में जनता पार्टी का प्रतिनिधित्व किया। समाज सेवा में विशेष रुचि रखने वाले श्री अजीत सिंह अपने सार्वजनिक जीवन में टोडारायसिंह तहसील की बाबाड़ पंचायत एवं न्‍याय पंचायत के सदस्‍य रहे। आप वर्ष 1962 से 1972 तक टोंक जिला जनसंघ के अध्‍यक्ष तथा वर्ष 1969 में राजस्‍थान प्रदेश जनसंघ के उपाध्‍यक्ष रहे। श्री अजीत सिंह राजपूत सभा, टोंक के मंत्री भी रहे। श्री अजीत सिंह का दिनांक 28 सितम्‍बर, 2006 को निधन हो गया।

मैं अपनी ओर से तथा इस सदन के सभी माननीय सदस्‍यों की ओर से दिवंगत व्‍यक्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। ...(व्‍यवधान)... और ईश्‍वर से प्रार्थना करती हूं कि दिवंगत व्‍यक्तियों की आत्‍मा को शांति प्रदान करे तथा उनके शोक संतप्‍त परिजनों को उनका बिछोह सहन करने की शक्ति दे।

माननीय सदस्‍य कृपया दो मिनट मौन खड़े रहकर दिवंगत आत्‍माओं की शांति के लिए प्रार्थना करें। ...(व्‍यवधान)...

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): उनको सम्मिलित नहीं किया गया अध्‍यक्ष महोदय। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप बाद में कह सकते हैं यह बात, प्‍लीज। जब मैंने कह दिया कि दो मिनट खड़े हों तो खड़े रहें, उसके बाद आप को जो कुछ कहना है कहिएगा।

       

(तदनन्‍तर सदन ने दो मिनट मौन रहकर दिवंगत आत्‍माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तीन तारीख को जब शोकाभिव्‍यक्ति हुई थी तब आपने कहा था कि कामां को बाद में दो और माननीय सदस्‍यों की सूचना प्राप्‍त हुई है उनके साथ जोड़ लिया जाएगा, लेकिन आज जब आपने इन दो लोगों को शोकाभिव्‍यक्ति की। ...(व्‍यवधान)...

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): ...(व्‍यवधान)... और चार महीने से अभी तक आपके पास कोई सूचना नहीं है। 

श्री अध्‍यक्ष: एक समय में केवल एक ही बोले, जब वह बोल रहे हैं गृह राज्‍य मंत्रीजी तो आप कृपया बैठ जाएं उनके बाद आप अपनी बात कह दीजिएगा।

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हुकमारामजी मेघवाल, सिवाना के एम एल ए थे, उनका देहान्‍त हुए करीब चार महीने से ज्‍यादा समय हो गया है। इसकी खबर आपके यहां आनी चाहिए लेकिन अभी तक नहीं आई है।

श्री अध्‍यक्ष: अभी तक सूचना हमारे पास नहीं आई है। विधान सभा सचिवालय में सूचना नहीं आई है।

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): उम्‍मेद सिंह जी का स्‍वर्गवास हुए अभी सात दिन हुए हैं या आठ दिन हुए हैं, वह न्‍यूज तो आपके पास आई, वह तो अच्‍छा हुआ।

श्री अध्‍यक्ष: जब तक विधान सभा के कार्यालय में सूचना नहीं आएगी तब तक उनको श्रद्धांजलि अर्पित नहीं की जा सकती। ...(व्‍यवधान)...

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): नहीं, नहीं, यह आ गई है और उनका नाम नहीं आया। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): साल भर तक नहीं आए तो कलेक्‍टर की जिम्‍मेदारी होनी चाहिए।

श्री अमराराम (धोद): बाड़मेर कलेक्‍टर क्‍या कर रहा है? प्रशासन क्‍या कर रहा है, चार महीने तक सूचना नहीं भेजी।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे एक व्‍यवस्‍था चाहता हूं कि किसी भी विधायक की डेथ की सूचना तुरन्‍त देने का अधिकार कलेक्‍टर को है इसमें कोई लैप्‍स होता है तो कलेक्‍टर...।

श्री अध्‍यक्ष: अधिकार नहीं कर्तव्‍य है, सूचना देने का उसका कर्तव्‍य है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): भूतपूर्व विधायक के देहान्‍त की सूचना देने का कर्तव्‍य, ड्यूटी कलेक्‍टर की है, चार महीने हो गए कलेक्‍टर की सूचना क्‍यों नहीं आई। आपके दफ्तर में आ गई तब तो ठीक है।

श्री अध्‍यक्ष: हमारे कार्यालय में नहीं आई अभी तक।

श्री अमराराम (धोद): आपके मंत्री तो सूचना दे रहे हैं, या तो सरकार की जिम्‍मेदारी नहीं है, वह दे रहे हैं कि जिन्‍दा है नहीं, कलेक्‍टर ने सूचना नहीं भेजी, उस कलेक्‍टर के खिलाफ सरकार क्‍या कार्यवाही कर रही है वह तो बताओ, जब मंत्री सूचना दे रहा है, चार महीने पहले खतम हो गए, पूर्व विधायक थे, सरकार के स्‍टेट होम मिनिस्‍टर सूचना दे रहे हैं और आपका कलेक्‍टर सूचना नहीं दे, उसके खिलाफ क्‍या कार्यवाही करेंगे वह बताओ आप।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूर्व में सभी जिला कलेक्‍टरों को ...(व्‍यवधान)... ।

श्री अध्‍यक्ष: आप बात तो सुनने दें, बैठे-बैठे बोलते हैं, मुझे सुनने तो दें कि वह क्‍या कह रहे हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूर्व में सभी जिला कलेक्‍टरों को निर्देश दिए जा चुके हैं कि अगर कोई माननीय सदस्‍य, पूर्व सदस्‍य या इस तरह की कोई डिग्‍नीटरी का देहान्‍त हो तो सूचना हमें भी दे, सरकार के पास भी आए और विधान सभा सचिवालय के पास भी आए। मैं स्‍वयं इसको दिखवा लूंगा कि वह सूचना सदन में क्‍यों नहीं आई। अध्‍यक्ष महोदय, इस बारे में दुबारा निर्देश जारी करेंगे कि समय पर सूचना विधान सभा सचिवालय के पास पहुंच जाए, इस बारे में सख्‍त निर्देश जारी करेंगे।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप दुबारा निर्देश की बात मत करो। आप पहले निर्देश जारी कर चुके हैं, आपने पहले निर्देश दे रखे हैं उन निर्देशों के अनुसार, आपकी कोई मानता ही नहीं तो उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही की, आपको उनके खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए। ...(व्‍यवधान)...

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): इनके निर्देशों को कोई मानता ही नहीं है। इनके निर्देशों की कोई परवाह ही नहीं करता, उसका क्‍या करेंगे, उसका पता नहीं है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपने निर्देश जारी कर रखे हैं और कलेक्‍टर को सूचना देनी चाहिए, उसने सूचना नहीं दी तो कलेक्‍टर के खिलाफ क्‍यों नहीं कार्यवाही आप करते हो, आप यह कहो कि निर्देश जारी करेंगे, कलेक्‍टर की गलती है उसके खिलाफ कार्यवाही करो। ...(व्‍यवधान)...

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): यह कह रहे हैं कि निर्देश दे रखे हैं तो उनकी पालना नहीं की तो उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही की फिर?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तीन तारीख को जब आपने शोकाभिव्‍यक्ति कर दी पूर्व विधान सभा अध्‍यक्ष और अन्‍य सदस्‍यों की, उस वक्‍त भी यह मामला उठा था कि कामां में 27 अगस्‍त को एक बड़ा हादसा हुआ और उसमें 46 लोगों की मृत्‍यु हुई थी उनको भी सदन के तरफ से शोकाभिव्‍यक्ति होनी चाहिए। आपने कहा था कि दो और माननीय सदस्‍यों की सूचना देर से प्राप्‍त हुई है उनकी भी शोकाभिव्‍यक्ति करेंगे। उस वक्‍त इस मामले को देख लिया जाएगा लेकिन आज दो माननीय सदस्‍यों की शोकाभिव्‍यक्ति कर दी। उसके बाद भी कामां हादसे के अन्‍दर भोजन थाली कुश्‍ती दंगल में जिन 46 लोगों की मृत्‍यु हुई, एक ही दिन में एक ही स्‍थान पर जिनमें चार उत्‍तर प्रदेश के थे, एक हरियाणा का था उसमें मेरे खुद के विधान सभा क्षेत्र के चार लोग थे, 46 लोगों की मृत्‍यु हुई है। पहले भी एक तीर्थ यात्रा पर जाने वाली बस दुर्घटनाग्रस्‍त हो गई थी उसमें सवार 20 लोगों को सदन में श्रद्धांजलि दी गई थी, शोक व्‍यक्‍त किया गया था। मैं पुन: आपसे अनुरोध करता हूं कि इस कामां हादसे में एक ही स्‍थान पर इतनी बड़ी संख्‍या में लोगों की मृत्‍यु हुई है उनको भी सदन की तरफ से शोकाभिव्‍यक्ति दी जानी चाहिए।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण,सचमुच में इस तरह के हादसों में जिन लोगों की जानें चली जाती है, सबकी उनके प्रति संवेदना है लेकिन आज दिन तक इस सदन की यह परम्‍परा रही है कि नैचुरल कैलेमिटी में जिन लोगों की जान जाती है उनके प्रति हम यहां शोक संवेदना प्रकट करते रहे हैं लेकिन इस तरह से तो रोज दुर्घटनाएं होती है, आज दिन तक, मैंने पूरे दो दिन इसी बात पर पूरा रिकार्ड खंगाला है कि आज दिन तक क्‍या कोई किसी का इस प्रकार से दी गई है लेकिन नैचुरल कैलेमिटी के अलावा मुझे कोई एक इन्‍स्‍टांस ऐसा नहीं मिला वरना देने में कोई आपत्ति नहीं है। यहां बड़ा अफसोस है कि इस तरीके से इतने लोगों की एक साथ जानें चली गई लेकिन यह एक नई परम्‍परा होगी। ...(व्‍यवधान)... सुनिए प्‍लीज, देखिए मैं आपसे कई बार कह चुकी हूं कि आसन जब पांवों पर हो और आसन जब कुछ बोल रहा हो तो, कुछ कह रहा हो तो आपको बीच में खड़े नहीं होना चाहिए। कई बार आपसे निवेदन किया है, कृपया ध्‍यान रखें इस बात का भविष्‍य में । मैं यह निवेदन कर रही थी कि चूंकि मुण्‍े एक ही ऐसा इन्‍स्‍टांस नहीं मिला, मुझे कोई आपत्ति नहीं है लेकिन यह नई परम्‍परा प्रारम्‍भ हो जाएगी इसलिए मैंने उनको नहीं किया फिर भी मैं आपसे कहती हूं कि इस तरह के जो हादसा हुआ, दुर्भाग्‍यपूर्ण है, हमें उनके प्रति हमारी पूरी शोक संतप्‍त परिवारों के प्रति पूरी हमारी संवेदना है, उनके साथ हमारी पूरी जिसे कहना चाहिए हम उनके पूरी वेदना में लिप्‍त हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ठीक है, बस आपने कह दिया।

श्री अध्‍यक्ष: आप क्‍या करते हैं मिस्‍टर बैरवा? आप ध्‍यान नहीं रखते, आप दुबारा जीतकर आए हैं। 

 

                    अनुपस्थित अनुमति

 

  मुझे सदन को सूचना करना है कि श्रीमती वन्‍दना मीणा, सदस्‍य विधान सभा ने अस्‍वस्‍थता के कारण दिनांक 4 अक्‍टूबर, 2006 से सत्रांत तक सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुमति चाही है। क्‍या सदन की अनुमति है कि उन्‍हें सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुमति प्रदान की जाए?

                          (स्‍वीकृत)

  अनुमति प्रदान की गई।

 

 

  मुझे सदन को सूचना करना है कि श्री घनश्‍याम तिवाड़ी, शिक्षा मंत्री ने शारीरिक अस्‍वस्‍थता के कारण दिनांक 3 अक्‍टूबर, 2006 से सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुमति चाही है। क्‍या सदन की अनुमति है कि उन्‍हें सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुमति प्रदान की जाए? ...(व्‍यवधान)... तो क्‍या इस अनुमति का फैसला सदन के बहुमत से करें? ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): एक मेडिकल बोर्ड बैठा लिया जाए वह कोई बीमार नहीं है, वह राजनीतिक रूप से बीमार हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह बहुत शर्म की बात है, कल को आपके साथ भी ऐसा हो, हम यह नहीं चाहते।

श्री अध्‍यक्ष: वह किसी भी रूप से बीमार हो, कोई भी व्‍यक्ति किसी भी रूप से बीमार हो लेकिन जब उन्‍होंने छुट्टी चाही है तो सदन की शालीनता है कि सदन उनको अनुमति प्रदान करे, सर्वसम्‍मति से प्रदान करे, ऐसा मेरा निवेदन आपसे है।

श्री अमराराम (धोद): यह तो बताओ कि कब तक है?

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या अनुमति है?

                    (स्‍वीकृत)

  अनुमति प्रदान की गई।

  ...(व्‍यवधान)... मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचना करना है कि निम्‍नांकित स्‍थगन प्रस्‍तावों की सूचना प्राप्‍त हुई है। ...(व्‍यवधान)... अपन इस सदन को थोड़ी गम्‍भीरता से चलाएं तो मैं समझती हूं कि यह अधिक उपयुक्‍त होगा। छोटे बच्‍चे भी कई बार कार्यवाही देखने आते हैं, कल मेरे विधान सभा क्षेत्र के बच्‍चे भी यहां देखने आए थे।

 

Gpc/akt/05102006/1220/1j

 

और वे जब मुझसे मिले तो उन्‍होंने अपनी पीड़ा व्‍यक्‍त की कि हमें तो मालूम ही नहीं था कि हमारे विधायक ऐसा करते हैं। तो मैं समझती हूं आखिर हम सब लोग जिम्‍मेदार हैं, जन-प्रतिनिधि हैं, जनता के हित के लिए अपन यहां पर आये हैं, जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो यह आपका और हम सबका कर्तव्‍य है। इसका थोड़ा ध्‍यान रखें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आज हमारी रैली है।

श्री अध्‍यक्ष: आज आपकी रैली है इसलिए सब याद कर रहे हैं आपको। अब आप पधारो तो ठीक रहेगा। लोग याद कर रहे हैं आपको। ..(व्‍यवधान).. बैठे-बैठे नहीं। ..(व्‍यवधान)..

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): क्षमा चाहता हूं। क्षमा, क्षमा।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आप खड़ी हैं, ये खड़े हो गये। क्‍या तरीका है यह?

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): आप प्रताडि़त करो उनको।

स्‍थगन प्रस्‍तावों पर अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

श्री अध्‍यक्ष: मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि निम्‍नांकित स्‍थगन प्रस्‍तावों की सूचना प्राप्‍त हुई है:- ..(व्‍यवधान).. आज आपके नेता प्रतिपक्ष भी बड़े जोली मूड में हैं, इसलिए ठीक बात है। ..(व्‍यवधान).. 

                         1.श्री रिछपालसिंह मिर्धा एवं चार अन्‍य सदस्‍यों की ओर से जिला नागौर में वर्षा की अत्‍यधिक कमी के कारण अकाल की स्थिति पैदा होने के संबंध में।

                         2.श्री बृजकिशोर शर्मा एवं 10 अन्‍य सदस्‍यों की ओर से जयपुर शहर में व्‍याप्‍त गंदगी व सीवरेज लाइनों के चौक होने से फैली बीमारी के संबंध में।

                         3.श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल एवं तीन अन्‍य सदस्‍यों की ओर से बीपीएल चयनितों की सूची में अधिकांश पात्र व्‍यक्तियों के वंचित रह जाने के संबंध में।

                         4.श्री हेमाराम चौधरी, सदस्‍य की ओर से ग्राम पंचायत बायतू भीमजी में बीपीएल परिवारों के चयन में दिशा निर्देशों का स्‍पष्‍ट उल्‍लंघन होने के संबंध में।

दिनांक 9 अक्‍टूबर, 2006 को अकाल की स्थिति एवं मौसमी बीमारियों से उत्‍पन्‍न स्थिति पर सदन में चर्चा होगी तथा आज बीपीएल परिवारों के चयन के संबंध में मंत्री महोदय का वक्‍तव्‍य होगा। माननीय सदस्‍यों को चर्चा में भाग लेने का पूरा अवसर उपलब्‍ध होगा, अंत: पृथक से इन प्रस्‍तावों पर अनुमति देने में असमर्थ हूं।

                         5.श्री अशोक बैरवा एवं 13 अन्‍य सदस्‍यों की ओर से जिला सवाई माधोपुर के पुलिस थाना मानटाउन में दिनांक 30 सितम्‍बर, 2006 को चोरी के आरोप में गिरफ्तार किये गये युवक की मौत होने के संबंध में।

                         6.श्री संयम लोढा, सदस्‍य की ओर से जिला सिरोही की कानून एवं व्‍यवस्‍था की स्थिति के संबंध में।

                         7.श्री जुबेर खान एवं 6 अन्‍य सदस्‍यों की ओर से कामां कस्‍बे में कुश्‍ती दंगल के दौरान हुए हादसे के मृतक आश्रितों को पर्याप्‍त आर्थिक एवं अन्‍य सहायता उपलब्‍ध नहीं करवाये जाने के संबंध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव ऐसे नहीं है कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोककर इन पर विचार किया जाय अंत: इन पर अनुमति देने में असमर्थ हूं। फिर भी मैं चाहूंगी कि आप तीनों व्‍यक्ति आपने जिस संबंध में यह दिया है वे गृह मंत्रीजी से मिलें और गृह मंत्रीजी कृपया उनकी बात सुनकर उनके बारे में जो कुछ कार्यवाही अब तक हुई है और जो आप करने जा रहे हैं वह बता दीजिएगा।

                         8.श्री हरिमोहन शर्मा एवं 15 अन्‍य सदस्‍यों की ओर से कार्यशाला योजनान्‍तर्गत निर्मित की गई अनुसूचित जाति के लिए कार्यशालाओं की अनुदान राशि का आवंटन नहीं करने से उत्‍पन्‍न स्थिति के संबंध में।

                         9.श्री भरत सिंह एवं 4 अन्‍य सदस्‍यों की ओर से प्रदेश में सरसो के समर्थन मूल्‍य में 115 रुपयों की प्रस्‍तावित कटौती एवं किसानों को सहकारी बैंकों से कम ब्‍याज दर पर ऋण उपलब्‍ध करवाने के संबंध में।

                         10.डा. चन्‍द्रशेखर बैद एवं 8 अन्‍य सदस्‍यों की ओर से ग्रामोत्‍थान हेतु आरंभ की गई जलग्रहण योजना में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार के संबंध में।

                         11.श्री अमराराम, सदस्‍य की ओर से इंदिरा गांधी नहर परियोजना के प्रथम चरण के किसानों की अजमेर समझौता, 2004 को लागू नहीं करने से किसानों में व्‍याप्‍त असंतोष के संबंध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव भी ऐसे नहीं हैं कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोककर इन पर विचार किया जाय, अत: स्‍थगन प्रस्‍ताव के रूप में तो अनुमति देने में असमर्थ हूं, फिर भी माननीय सदस्‍य श्री हरिमोहन शर्मा, श्री भरत सिंह,  डा. चन्‍द्रशेखर बैद एवं श्री अमराराम को अपने-अपने प्रस्‍तावों पर सिर्फ दो-दो मिनट बोलने की अनुमति होगी।

प्रक्रिया के नियम 295 के अंतर्गत प्राप्‍त सूचनाएं

 

                          1.श्री रामनारायण मीणा, सदस्‍य की ओर से तहसील केशोरायपाटन के ग्राम कोडिजा की खसरा संख्‍या 274 की 600 वर्गफीट भूमि पर बने मकान का ध्‍वस्‍त कर भूमि विद्यालय भवन को आवंटित करने के संबंध में।

                          2.श्री जोगाराम पटेल, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र लूणी के क्रमोन्‍नत विद्यालयों में स्‍टाफ की कमी को दूर करने एवं भवन निर्माण हेतु बजट आवंटित करने के संबंध में।

                          3.डा. श्रीगोपाल बाहेती, सदस्‍य की ओर से जवाहरलाल नेहरू अरबन रिन्‍यूअल मिशन के तहत चयनित अजमेर-पुष्‍कर के प्रस्‍तावों को अंतिम रूप नहीं देने से उत्‍पन्‍न स्थिति के संबंध में।

                          4.श्री मोहन मेघवाल, सदस्‍य की ओर से जोधपुर शहर के महात्‍मा गांधी चिकित्‍सालय में मरीजों की बढ़ती संख्‍या को देखते हुए एक मेडिसन यूनिट और खोलने के संबंध में।

                          5.श्री हीरालाल (निवाई), सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र निवाई का तुरन्‍त सर्वे करवाकर अकाल राहत कार्य प्रारंभ करने के संबंध में।

                          6.श्री बृजकिशोर शर्मा, सदस्‍य की ओर से जयपुर ग्रामीण विधान सभा क्षेत्र स्थित कारकस प्‍लांट व बूचड़खाने को अविलम्‍ब बंद करने के संबंध में।

                          7.श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा, सदस्‍य की ओर से जिला नागौर में नये कृषि विद्युत कनेक्‍शन जारी करने के संबंध में।

                          8.श्री भरत सिंह, सदस्‍य की ओर से कोटा संभाग में वन क्षेत्र की लघु सिंचाई परियोजनाओं की वन भूमि का नेट प्रजेन्‍ट वेल्‍यू का भुगतान सरकार द्वारा करने के संबंध में।

                          9.श्री रामलाल शर्मा, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र चौमूं में बाईपास बनाने के संबंध में।

                          10.श्री नन्‍दलाल पूनिया, सदस्‍य की ओर से जिला चूरू की राजगढ़ तहसील के काश्‍तकारों की फसल बीमा का भुगतान करने के संबंध में।

                          11.श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा, सदस्‍य की ओर से कोटपूतली को जिला बनाने के संबंध में।

                          12.श्री राकेश मेघवाल, सदस्‍य की ओर से रानाबाई धाम ग्राम हरनांवा पट्टी से त्रिमूर्ति धाम ग्राम बडू तक डामर की पेवर सड़क बनाने के संबंध में।

माननीय सदस्‍यों को उनके द्वारा दी गई सूचना को पढ़ने की अनुमति होगी।

 मैं विधान सभा कार्यालय से यह कहना चाहूंगी कि जिस व्‍यक्ति का स्‍थगन प्रस्‍ताव भी आया है उसका 295 आ जाए, एक व्‍यक्ति को दोनों ही वक्‍त बोलने का मौका मिले इस बात का भविष्‍य में ध्‍यान रखें। श्री हरिमोहन शर्मा।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं हरिमोहन जी को रोकना नहीं चाहता, कामां के मामले में मैं और कुछ हमारे अन्‍य साथी विधायक ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: अपनी बात ही तो कहेंगे, रोकने का मतलब यहां एक घंटे भाषण देंगे वो? जो उनकी कार्यशाला है उनके अनुदान राशि का जो आवंटन है वह नहीं हुआ है, यह मंत्रीजी का ध्‍यान लाएंगे और मंत्रीजी बता देंगे, उसमें क्‍या बात हुई?

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मैं दूसरी बात निवेदन कर रहा हूं, आपने मेरी बात सुनी ही नहीं।

श्री अध्‍यक्ष: फिर क्‍या मतलब हुआ?

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मैंने दूसरी बात कही है, आप विराजें तो मैं कहूं। मैंने निवेदन किया था, हमने आपसे निवेदन किया था आपके चेम्‍बर में जाकर कि कामां के मामले में आपने अनुमति प्रदान कर दी, शायद आपके ध्‍यान में यह बात नहीं रही, पूर्व में यह व्‍यवस्‍था टाइप हो गई होगी, इसलिए आपके ध्‍यान से उतर गया होगा। आपने आश्‍वस्‍त किया था कि श्री जुबेर खां को भी आप दो मिनट बोलने का मौका देंगी।

श्री अध्‍यक्ष: 50-50 हजार रुपये दे दिये उन्‍हें। जांच चल रही है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मेरा निवेदन सुन लें। आपने यह बात वहां भी कही थी उसके उपरांत हमने अनुरोध किया था, आपने कृपापूर्वक उस अनुरोध को स्‍वीकार किया था।

श्री अध्‍यक्ष: आप ऐसा करें श्‍ंुरू होने दें उसके बाद में जब यह हो जाए उसके बाद ले लेंगे।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): ठीक है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: अब बीच में कुछ नहीं। नो। ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): नो-नो से काम नहीं चलेगा। अध्‍यक्ष महोदय, हमने स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है, हम नियमों से आये हैं। हम नियमों के आधार पर नहीं कहेंगे क्‍या?

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): मतलब क्‍या हुआ सदन में आने का?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): गृह मंत्रीजी से मिलने के लिए हमें विधान सभा के स्‍थगन पस्‍ताव की जरूरत नहीं है, वह तो हम भी मिल सकते हैं। हम अपनी बात कहना चाहते हैं। ..(व्‍यवधान)..

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): स्‍थगर प्रस्‍ताव लेकर गृह मंत्रीजी ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): बच्‍चे गायब हो रहे हैं और आप हमें मामला उठाने नहीं देना चाहती। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: डराकर, धमकाकर ..(व्‍यवधान).. क्‍या मतलब है आपका?

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): फिर भी गृह मंत्रीजी से आखिर हम मिले ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: आपका मकसद क्‍या है?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): हमारा मकसद है राजस्‍थान की चौपट हुई कानून-व्‍यवस्‍था पर चर्चा करना और राजस्‍थान के गृह मंत्री का ध्‍यान आकृष्‍ट करना, यह हमारा मकसद है। ..(व्‍यवधान)..

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): पुलिस हिरासत में मौत हुई है और पुलिस वालों का पूरा हाथ है। उसको मार-पीठकर अधमरा कर दिया और पुलिस ने उसको भर्ती कराकर तुरत-फुरत दफना दिया। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: हरिमोहन शर्मा, मैं मजबूर हूं। आपकी पार्टी के लोग आपको नहीं बोलने देते, मेरे पास कोई इलाज नहीं है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मैं तो तैयार हूं। ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): कानून-व्‍यवस्‍था पर ..(व्‍यवधान)..

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): वह छात्र था पढ़ने वाला। ..(व्‍यवधान).. उसको गिरफ्तार कर लिया। ..(व्‍यवधान).. उसको पुलिस ने ज्‍यादती करके बंद कर दिया।

 

 

Lpm/arun/1230/05102006/1k

 

 

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): वो नामजद मुलजिम नहीं था, एक बच्‍चा था, छात्र था पढ़ने वाला उसको पुलिस ने ज्‍यादती करके बंद कर दिया।

श्री अध्‍यक्ष: कानुन व्‍यवस्‍था इस स्‍थगन प्रस्‍ताव के .....(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मेरे जिले के सैकड़ों लोग बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस की रैली में प्रदर्शन कर रहे हैं इस चौपट हुई कानून व्‍यवस्‍था के खिलाफ कर रहे हैं।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): हालत इतनी खराब हो चुकी है अध्‍यक्ष महोदय, वहां पर मारपीट करके उस लाश को दफना दिया गया और पूरे परिजन को प्रताडि़त किया जा रहा है। अध्‍यक्ष महोदय, एक आदिवासी छात्र जो 11वीं कक्षा में पढ़ता हो उसको संदेह में पकड़ के लायें और रात में बेरहमी से मारा और पूरा थाना जो वहां पर मौजूद था। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मेरी अनुमति के बिना जो बोले उनको अंकित मत करियेगा।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार):***[1]

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप क्‍यों खड़े हो बीच में, मैंने कह दिया अलग से मिलिएगा।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री अध्‍यक्ष: आपको समस्‍या के समाधान से तो मतलब है नहीं आपको मतलब यहां बोलने से है जब मैंने कह दिया कि गृहमंत्रीजी से आप मिलिए और गृहमंत्रीजी आपकी समस्‍या का समाधान करेंगे।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): ***

श्री अध्‍यक्ष: प्रतिपक्ष के नेता आप अपने माननीय सदस्‍यों को थोड़ा कंट्रोल करें, प्रतिपक्ष के नेता मैं आसन पर खड़ी हूं आप अपने माननीय सदस्‍यों को थोड़ा कंट्रोल करें।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): ये सब माननीय सदस्‍य बोलने की कोशिश कर रहे हैं यह बात सही है कि जो भी आता है विधानसभा में वह आपकी सरकार में अपनी बात कहने का उसको अधिक से अधिक मौका मिले, उसमे उसको खुशी भी मिलती है और पब्लिसिटी भी मिलती है, अख़बार में नाम आता है, इलाके में उसको मदद मिलती है तो अब माननीय सदस्‍य जो बोले उनको एक-एक मिनट बोलने दो उसके बाद में क्‍या ये टाइम तो ऐसे ही पूरा हो जाएगा और बढ़वा दीजिएगा टाइम आप पाँच बजे बाद और बढ़वा दो, हम आपत्तिजनक कोई बात नहीं उठाएंगे।

श्री अध्‍यक्ष: आपसे अपेक्षा तो मैं कुछ और करती हूं और बात कर रहे हैं उसकी..

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***[2]

श्री देवीशंकर भूतड़ा (ब्‍यावर): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): ***

श्री अध्‍यक्ष: सी.पी.जोशी कैसे खड़े हैं जरा देखिए। (व्‍यवधान) प्रतिपक्ष के नेता।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, इस बात को तो आप भी अनुभव करती है, इलाके में जाती हैं, देखती है, राजस्‍थान में चारों तरफ सबसे अधिक घूमने वाली, अवसर जो आपको मिलता है, लोग-बाग़ सब आते हैं यह तो आप मानेंगी। आप अभिव्‍यक्ति नहीं करे मेरी बात को क्‍योंकि अभिव्‍यक्ति होगी तो वह सरकार के खिलाफ जाती है। माननीय गृहमंत्रीजी के कार्यकाल में त्राहिमाम-त्राहिमाम पूरे राजस्‍थान के अन्‍दर सब जगह हो रहा है। सब जगह, सब जगह त्राहिमाम-त्राहिमाम हो रहे हैं। आप एक सात्विक व्‍यक्ति है और भगवान महावीर के आप उपासक है लेकिन जो हालत इन दिनों में त्राहिमाम हो रही है यह एक इश्‍यू है आज तो माननीय सदस्‍य जो उठा रहे हैं उनको आप एक-एक मिनट बोलने की इजाजत दे दो, दो दिन की बात है फिर हम अपने-अपने घर चले जाएंगे। ये तो पक्षी हैं उड के आये हैं, चले जाएंगे, उड़ जाएंगे, वापिस उड़ जाएंगे।

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष आप सात बार इस विधान सभा की शोभा बढ़ा चुके हैं और (व्‍यवधान) बीच में नहीं बोले आप, और आप जानते हैं कि स्‍थगन प्रस्‍ताव अब तो  इस तरीके से आने लगे। कभी इससे पहले स्‍थगन प्रस्‍ताव इतनी तादाद में आते थे क्‍या और इस तरह की बातों पर जनरल बातों पर। कानून व्‍यवस्‍था की बिगड़ी हुई स्थिति क्‍या यह कोई स्‍थगन प्रस्‍ताव का विषय है मुझे आप बताइए जरा कि किस बात को मैं स्‍वीकार करूं और किस बात के लिए जिसे कहना चाहिए अवसर दूं। इसीलिए मैंने फिर भी मैंने कहा संवेदनशील होते हुए कि यदि आप चाहे तो मेरे कमरे में मैं गृहमंत्रीजी को बुलाऊं, आपको भी बुलाऊं आपकी अलग-अलग बात कराऊं जैसा कि कल मूसाखेड़ा के मामले में हुई थी और वो संतुष्‍ट हो गये जुबेर खां जी उसी तरीके से आप कहे तो मेरे चेम्‍बर में बुलाऊं, चाय भी पिलाऊंगी आपको साथ में और या फिर आप उनसे  वैसे मिल ले वो तो वैसे भी जैसा कि उनको दे दिया ही आपके प्रतिपक्ष के नेता ने कि बहुत सात्विक पुरूष है वो, इसलिए  कोई सात्विक आदमी तो गलत काम तो करता नहीं है लेकिन इसलिए मैं आपसे कह रही हूं कि आप इस बारे में पुन: विचार करें माननीय नेता प्रतिपक्ष कि स्‍थगन प्रस्‍ताव के जरिए किन बातों पर, हमको किन विषयों पर यहां पर सदस्‍यों को अनुमति देनी चाहिए अपनी बात कहने की। अगर आप मेरी बात से सहमत नहीं हो (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): ***

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सहमत हूं। लेकिन यह मौका सब माननीय सदस्‍यों को और मुझे भी यह मौका मिला है आपके सदारत में पहली बार मिला है, पहले मैं रहा हूं लेकिन यह मौका, जो आपका व्‍यापक सम्‍पर्क है राजस्‍थान में उसके आधार पर हर आदमी, हर माननीय सदस्‍य आशा करता है (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय मेरी बात को.....(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: देखिए जो इर्म्‍पोटेन्‍ट बात थी परसों की बात थी उस पर मैंने दिया। ये कार्यशाला की बात है इस पर मैंने दिया, जल ग्रहण योजना की बात है उस पर मैंने दिया समय और अमरारामजी को किसानों की समझौते की बात थी उस पर मैंने दिया जो इर्म्‍पोटेन्‍ट इश्‍यूज है, जनहित के इश्‍यूज है उनके ऊपर मैंने बोलने का मौका दिया है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह बात सही है कि उदार मन है आपका ले‍किन....(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): ***

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप बताइए मामला अण्‍डर इन्‍वेस्टिगेशन है। बीच में नहीं बोलिए।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: कब का मामला है ये।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): ***

श्री अध्‍यक्ष: वन एट ए टाइम।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: मुकदमा दर्ज करा लीजिए।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री अध्‍यक्ष: गृहमंत्रीजी माननीय गृहमंत्री। यदि मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है तो मुकदमा दर्ज करा लीजिए।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, ये जिस मॉडल टाउन

   सवाईमाधोपुर के थाने के बारे में विषय आपने उठाया है।

मोहन/अरूण/5102006/1240/1l

 

 

    अब्‍दुल कलाम ने एक रिपोर्ट दर्ज कराई, उसके कुछ सामान की चोरी हो गई और वह 141/6 मुकदमा 12 बजकर 20 मिनट पर दर्ज हुआ, कुछ समय बाद ही उसने वापस ...

श्री अध्‍यक्ष: कौन सी तारीख को ?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): बता रहा हूं। 1.10.2006 को 12 बजकर 20 मिनट पर मुकदमा दर्ज हुआ। थोड़ी देर उसने फिर थाने पर टेलीफोन किया कि फलां आदमी मेरे इस माला को लेकर जा रहा है। पुलिस ने उस आदमी को माल सहित पकड़ कर थाने पर ले आए। लगभग यह एक बजे की घटना थी और 1.20 पर उसके उल्‍टी और कुछ हुई उसके कारण से उसको हॉस्पिटल भर्ती कराया, वहां पर शाम को ही मजिस्‍ट्रेट को बुला लिया, सात बजे उसके बयान लेने के लिए, मजिस्‍ट्रेट के सामने उसके बयान नहीं हो सके और उसकी कुछ ही देर बाद मजिस्‍ट्रेट की उपस्थिति में ही उसकी डेथ हो गई, मजिस्‍ट्रेट की उपस्थिति में ही उसका पोस्‍टमार्टम कराया, बोर्ड से कराया।

श्री अध्‍यक्ष: बयान नहीं दे पाया।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): नहीं दे पाया और उसका मुकदमा दर्ज हो गया। मुकदमा दर्ज हो गया ...(व्‍यवधान)...

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): *****

श्री अध्‍यक्ष: आप टोकिए मत।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार):  ***

श्री सुरेश मीणा (करौली): ****

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): ऐसा है कि आपके कहने से कुछ नहीं हो सकता, आप चिल्‍ला कर के अगर आप चाहो ...

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आपको सारे तथ्‍य बता रहा हूं।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ****

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): हल्‍ला करके आप इस तरह से करते हैं ?

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ****

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उसकी मृत्‍यु हुई है, मेडिकल बोर्ड ने अपनी कोई रिपोर्ट में कुछ नहीं कहा, एफएसएल की रिपोर्ट के आधार पर ही निर्णय करेगा, यह उसने अपनी फाइंडिंग पैंडिंग रखी, मुकदमा दर्ज हुआ और हमने सोचा कि उस थाने के लोग कहीं इस मुकदमे में दखलअंदाजी नहीं करें, चार लोगों को तुरन्‍त वहां से हटाया, डीवाई.एस.पी. को इसकी जांच दी है, जो इसकी जांच कर रहा है, एक तारीख की घटना है और आज 5 तारीख है।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): ****

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): ऐसे तो कोई इलाज नहीं है।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ****

श्री सुरेश मीणा (करौली): ****

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): **** उसकी एफआईआर दर्ज है और उसको माला सहित थाने पर ले आए जो उसने माल चोरी किया।

श्री सुरेश मीणा (करौली): ****

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ****

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आप क्‍या चाहते हो ? कार्यवाही चाहते हो न ? आप क्‍या चाहते हो यह बता दो न । ...(व्‍यवधान)...

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ****

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): वहां से चार लोगों को हटा दिया, जो जांच कर रहा है उसको हटा दिया, तीन कांस्‍टेबल वहां से हटा दिये, जांच डीवाई.एस.पी. को दे दी। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: खण्‍डार से आने वाले माननीय सदस्‍य और सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, नियमों का पालन करें, इस प्रकार से खड़े नहीं रहें।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ****

श्री अध्‍यक्ष: या तो स्‍थान ग्रहण करें या बाहर चले जाएं, मैं इस सदन को नियमों से चलाऊंगी, नो नो। आपकी हठधर्मिता नहीं चल सकती।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ****

श्री अध्‍यक्ष: आप भी जाओ उस प्रदर्शन में।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ****

श्री अध्‍यक्ष: आप जाओ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ****

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ****

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): *****

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): *****

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ****

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ****

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): *****

श्री अध्‍यक्ष: आप कौन से नियम में खड़े हैं, कौन से नियमों में बोल रहे हैं।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): *****

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): *****

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): ***

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ****

श्री सुरेश मीणा (करौली): *****

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आपने बात मेरी सुनी नहीं।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ****

श्री अध्‍यक्ष: गृह मंत्री जी, न तो वह बैठेंगे और न ही वे सुनेंगे। ...(व्‍यवधान)... आप काहे के लिए कह रहे हैं ? मैंने हरिमोहन जी का नाम पुकार लिया, पुकार लिया मैंने हरिमोहन जी का नाम, सुनने को तैयार नहीं हैं। क्‍या फायदा ? ...(व्‍यवधान)... वे एक मठ की तरह खड़े ही रहते हैं।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आपने यहां उसके पहले ही ...

श्री अध्‍यक्ष: उन्‍होंने फैसला ही कर लिया कि मुझे खड़े ही रहना है।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): ****

श्री अमराराम (धोद): ****

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मेरी शायद आपने बात सुनी नहीं इस आवाज में।

श्री अध्‍यक्ष: चार तो बदल दिये।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अब आपने विषय उठाया उसके पहले ही, यह एक तारीख की घटना है, आज अपन पांच तारीख में हैं, मैं यह सब कार्यवाही कर चुका हूं। मैंनो वहां के थाने के इंचार्ज से लेकर तीन सिपाही, चारों को उससे पहले ही कि इसमें जांच में कहीं दखलअंदाजी न हो उनको वहां से हटा दिया गया और एक एस.डी.एम. को जांच अधिकारी बनाकर के लगा दिया।

श्री अध्‍यक्ष: और क्‍या चाहते हो, फालतू में टाइम बरबाद कर रहे हो।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): और उसके बाद जब इसकी रिपोर्ट आएगी और सी.ओ. को उसकी जांच दी है, जांच रिपोर्ट आने के बाद ही और उसमें भी उन्‍होंने मेडिकल का जो बोर्ड बना उसमें उन्‍होंने अपनी कोई राय जाहिर नहीं की।

                                             

Skp/akt/05102006/1250/1m/1

 

बाहरी चोट कोई नहीं थी। (व्‍यवधान) एक सैकण्‍ड सुन लो, जल्‍दी क्‍या है? (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या कर रहे हो? बीच-बीच में खड़े होते हो, सुनते नहीं हो बात।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मेडिकल बोर्ड का जो निर्णय है वो उन्‍होंने अभी कैप्‍ट-इन-अबेयेंस रखा है और उन्‍होंने यह कहा कि एफ एस एल की जांच के बाद ही वह मेडिकल बोर्ड अपनी राय इसमें देगा कि क्‍या है। यह उन्‍होंने अभी नहीं दी है। यह सारी कार्यवाही मैंने कर ली है और आपको यकीन दिला रहा हूं कि किसी भी अपराधी को चाहे वो पुलिस का हो, चाहे कोई भी हो, अगर उसकी पिटाई के कारण से या कोई आंतरिक चोट के कारण से उसकी डैथ हुई है तो निश्चित रूप से मुकदमा दर्ज कर लिया है उनके खिलाफ, उनके खिलाफ मुकदमा नम्‍बर 17/06 अलग से दर्ज कर लिया है। जो भी कार्यवाही मुझे करनी है वह मैने की है अब आप बोलना चाहें तो मैं आपको रोक नहीं सकता। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): ***

श्री अध्‍यक्ष: अब क्‍या बताऊं क्‍या नहीं बताऊं, सारी बात तो बता दी। (व्‍यवधान)

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): ***

श्री सुरेश मीणा (करौली): ***

श्री अध्‍यक्ष: वह तो बता दिया। (व्‍यवधान)

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): ***

श्री अध्‍यक्ष: इसमें कोई इनका एक्‍शन ऐसा हो कि..... (व्‍यवधान) अब आप माननीय नेता, प्रतिपक्ष बात को कहां ले जा रहे हो। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): ..... मैं तो आपके.... (व्‍यवधान) आप फरमा दीजिये।

श्री अध्‍यक्ष: मेरे हो तो क्‍या हुआ? (व्‍यवधान) आप बात को कहां लेकर के जा रहे हैं। गलत बात है, मुद्दे पर आने दीजिये। उन्‍होंने जवाब दे दिया। इस मुद्दे से सम्‍बन्धित कोई बात हो तो आप कह दीजिये। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपके निर्वाचन क्षेत्र में, हमारे अध्‍यक्ष महोदय के निर्वाचन क्षेत्र में ऐसा है तो गृह मंत्री जी.... (व्‍यवधान) आपसे झुन्‍झुनूं के पत्रकारों का डेपुटेशन मिला और उन्‍होंने शिकायत की। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैं मेरी पैरवी करने में सक्षम हूं, आपको मेरी पैरवी करने की आवश्‍यकता नहीं है। मैं सक्षम हूं। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपके खुद के घर में जो ज्‍यादती हो रही है, मैं एज ए सिटीजन, एज ए एम.एल.ए., एज ए लीडर प्रतिपक्ष, आपकी अनुमति से पाइंट आउट कर रहा हूं कि इन्‍होंने क्‍या किया। इनसे डेपुटेशन मिला है। इतनी बेरहमी से किया, आप एक्‍शन तो करते नहीं हो इसलिए जो अराजकता का माहौल पुलिस के खिलाफ, आपके और आपकी सरकार के खिलाफ फैल रहा है वह आपकी एक्‍शन के अन्‍दर जो निष्क्रियता है उससे हो रहा है सारा। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: वहां आप जाकर के भाषण तो दो। (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): ***

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब मैं चालू करूं?

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: श्री हरिमोशन शर्मा, प्रारम्‍भ करें।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके निर्देशों के अनुसार प्रक्रिया के अन्‍तर्गत स्‍थगन प्रस्‍ताव पर जो आपने मुझे दो मिनट का समय दिया उस पर अपनी बात आपसे निवेदन करना चाहता हूं।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री अध्‍यक्ष: मैं किसी वेग विषय के ऊपर स्‍थगन प्रस्‍ताव को मंजूर करने में नियमानुसार मजबूर हूं। आपका वेग है कि सिरोही में व्‍यवस्‍था बहुत खराब हो गई। (व्‍यवधान) अब आप स्‍थान ग्रहण करें। स्‍थान ग्रहण करें। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं जो बात आपने सामने और सदन के सामने ला रहा हूं वह इतनी महत्‍वपूर्ण बात है कि उसका देखकर, उसको सुनकर सदन के रोंगटे खड़े हो जाएंगे कि....

श्री अध्‍यक्ष: रोंगटे खड़े हो जाएंगे?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ....वर्तमान सरकार जो अनुसूचित जाति की पक्षधर बनती है, जो अनुसूचित जाति के, उसी जाति के मंत्री हैं उनके कार्यकलापों के हिसाब से, सरकार के काम करने के तरीके से किस प्रकार से अनुसूचित जाति के लोग किस प्रकार से पूरे राजस्‍थान में परेशान हैं.....

श्री अध्‍यक्ष: मुद्दे पर आओ, भूमिका में रह जाओगे। मुद्दे पर आ जाओ आप, मुद्दे पर आओ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मुद्दे पर ही तो आ रहा हूं। बिना भूमिका के मुद्दे में जोश नहीं आता है।

श्री अध्‍यक्ष: मुद्दे पर आओ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मैं निवेदन करना चाहता हूं कि राजस्‍थान में बहुत समय पहले से एक कार्यशाला योजना चल रही है। उस कार्यशाला योजना के अन्‍तर्गत अनुसूचित जाति के व्‍यक्तियों को उनका कर्म करने के लिए, उनका व्‍यवसाय करने के लिए कार्यशाला के नाम से एक स्‍थान पर उनको निर्माण करने की इजाजत दी जाती है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहले उस पर 6 हजार रुपया अनुदान दिया जाता था और कुछ वर्षों से उस पर अनुदान 10 हजार रुपया दिया गया है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके सामने यह निवेदन करना चाहता हूं और यह पढ़कर के सुनाना चाहता हूं कि राजस्‍थान में इस समय गत चार वर्षों के आस-पास से यह वर्तमान सरकार, वर्तमान समाज कल्‍याण विभाग और वर्तमान समाज कल्‍याण मंत्री जो अनुसूचित जाति के हैं, ये या तो सेज के मामले में विवाद पैदा करते हैं या ये हज हाउस में विवाद पैदा करते हैं या इमानुअल में विवाद पैदा करते हैं या अपना सारा समय आर्थिक दृष्टिकोण से सम्‍पन्‍न होने की ओर लगा रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आप मुद्दे पर आओ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मेरा आपसे निवेदन है कि पूरे राजस्‍थान में मैं जिलेवाइज आपको पढ़कर के सुनाना चाहता हूं कि पूरे जिलों में गत चार वर्षों से अजमेर में 8 लाख 10 हजार, जिन लोगों ने अपना निर्माण काम पूरा कर लिया, जो वहां पर बैठे हुए हैं उनको अनुदान की राशि गत चार साल और तीन साल से, यह पूरी की पूरी राशि आज तक नहीं दे पा रहे हैं। वो पंचायत समिति का चक्‍कर काट रहे हैं, वो जिला कलेक्‍टर का चक्‍कर काट रहे हैं, वो समाज कल्‍याण विभाग का चक्‍कर काट रहे हैं और बार-बार परेशान होकर के इतने चक्‍कर काटने पर भी उनको कोई राशि नहीं मिली।

श्री अध्‍यक्ष: बारां से आने वाले माननीय सदस्‍य, बैठकर बात करें।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मैं निवेदन करना चाहता हूं कि अजमेर में इस समय 8 लाख 10 हजार की राशि बकाया है, अलवर में चार लाख की राशि बकाया है, भीलवाड़ा में 9 लाख की राशि बकाया है, भरतपुर में 10 लाख की राशि बकाया है, बीकानेर में 4 लाख की राशि बकाया है, बाड़मेर में 46 लाख 49 हजार की राशि बकाया है, बूंदी में 9 लाख की राशि बकाया है, बांसवाड़ा में 8 लाख 59 हजार की राशि बकाया है, बारां में माननीय मंत्री जी के घर में 3 लाख रुपये की राशि बकाया है, चित्‍तौड़गढ़ में 12 लाख 74 हजार की राशि बकाया है, चूरू में 19 लाख 22 हजार की राशि बकाया है, धौलपुर में 6 लाख 87 हजार की राशि बकाया है, डूंगरपुर में 10 लाख 8 हजार की राशि बकाया है, दौसा में 3 लाख 22 हजार की राशि बकाया है, और जयपुर में 79 लाख 63 हजार की राशि बकाया है, जोधपुर में 1 करोड़ 16 लाख 5 हजार की राशि बकाया है, जालोर में 19 लाख की राशि बकाया है, जैसलमेर में 6.23 लाख की राशि बकाया है, झालावाड़ में जहां माननीय मुख्‍य मंत्री जी निवास करती हैं वहां 23.60 लाख की राशि बकाया है, कोटा में 47 लाख की राशि बकाया है, नागौर में 54 लाख 90 हजार की राशि बकाया है, पाली में 32 लाख की राशि बकाया है, राजसमन्‍द में 10 लाख की राशि बकाया है, सवाई माधोपुर में 30 लाख की राशि बकाया है, गंगानगर में 38 लाख की राशि बकाया है, सिरोही में 8 लाख की राशि बकाया है, टोंक में 39 लाख की राशि बकाया है, उदयपुर में 28 लाख की राशि बकाया है, हनुमानगढ़ में 8 लाख की राशि बकाया है, करौली में 22 लाख की राशि बकाया है और इस प्रकार राजस्‍थान में अनुसूचित जाति के लोगों का जिन्‍होंने अपनी कार्यशाला का निर्माण कर दिया, पूरे राजस्‍थान में 7 करोड़ 19 लाख रुपया बकाया है। उन लोगों का क्‍या होगा? दूसरी ओर माननीय अध्‍यक्ष महोदय, खाली राशि ही बकाया नहीं है....

श्री अध्‍यक्ष: यह योजना कब प्रारम्‍भ हुई? यह योजना कब प्रारम्‍भ हुई? आप यह मेरा जवाब तो दें।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): लगातार यह अनुसूचित जाति की हमदर्दी करने वाली सरकार, कार्यशाला के जो भी टार्गेट हैं गत सरकार के मुकाबले में ये कार्यशाला के टार्गेट हर वर्ष कम करते जा रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: यह कार्यशाला की योजना कब प्रारम्‍भ हुई यह तो बताओ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): गरीबों का उत्‍थान करने के नाम पर अनुसूचित जाति पर जो अत्‍याचार हो रहा है, यह कांग्रेस की रैली इन प्रतिरोधों के खिलाफ है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बस हो गया। अब जवाब दे रहे हैं मंत्री जी। हो गया।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की आवाज है। यह पूरे राजस्‍थान की रैली इस बात के लिए है कि वर्तमान मंत्री, न तो इनका कर्म की ओर ध्‍यान है, पूरे राजस्‍थान में इनको पूरे बजट का एक प्रतिशत हिस्‍सा मिलता है....

श्री अध्‍यक्ष: कृपया समाप्‍त करें। कृपया समाप्‍त करें। श्री भरत सिंह। कृपया समाप्‍त करें।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): उस एक प्रतिशत हिस्‍से को खर्च करने की चिंता नहीं है। इनका अगर कोई ध्‍यान है तो साम्‍प्रदायिक उन्‍मान पैदा करने की तरफ ध्‍यान है, इनका कोई ध्‍यान है तो ईसाई संस्‍थाओं को बंद करने की तरफ ध्‍यान है।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया समाप्‍त करें।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): इनका अगर ध्‍यान है तो साम्‍प्रदायिक तनाव पैदा करने की ओर ध्‍यान है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो। अब अंकित नहीं हो रहा है। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

 

vkj/usc/1300/1n

 

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो रहा है। अब अंकित नहीं होगा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***  

श्री अध्‍यक्ष: आप अपनी ऊर्जा यूं ही खत्‍म कर रहे हैं। वह अंकित नहीं हो रहा है। अपनी ऊर्जा यूं ही खत्‍म कर रहे हो इसलिए स्‍थान ग्रहण कर लें। आप अपनी ऊर्जा को यूं खत्‍म मत करो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): *** (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी, इस बारे में कुछ कहना है तो आप यह भी बताइयेगा कि यह योजना कब प्रारम्‍भ हुई और यह पैसा कितने दिनों का बकाया है, इतना बता दीजिये कि कब तक हो जायेंगे, ताकि शांत ये हो जायें।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री अध्‍यक्ष: आपकी बात सुन ली। अब अंकित नहीं हो रहा है। अब अंकित नहीं होगा। अंकित नहीं हो रहा है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने कार्यशाला के बारे में...

श्री अध्‍यक्ष: हां, आप बोलिये। अब आप सुनिये मिस्‍टर हरिमोहन जी, सुनिये अब आप। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण कर लें, स्‍थान ग्रहण करें।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कार्यशाला के बारे में माननीय सदस्‍य ने तथाकथित रूप से चिंता जाहिर की है...(व्‍यवधान) हां, यह वास्‍तविक नहीं है, यह चिंता वास्‍तविक नहीं है इसलिए तथाकथित कहा है, यह तथाकथित है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री अध्‍यक्ष: आपको बार-बार उठने की अनुमति नहीं है। आप शब्‍द नहीं डाल सकते इनके मुंह में। आपको बार-बार उठने की अनुमति नहीं है। नो, अंकित नहीं हो, नो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कार्यशाला का पैसा लगभग चार साल पहले से बकाया बता रहे हैं, उसके कारण हैं। कारण है, कारण यह है कि...

श्री अध्‍यक्ष: यह योजना कब से हुई थी?

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): प्रारम्‍भ तो लगभग 15 साल पहले यह योजना हो गई थी। यह जो कार्यशाला के बारे में कह रहे हैं, इन्‍होंने सस्‍ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए प्रारम्‍भ की थी...(व्‍यवधान) तो अच्‍छी लोकप्रियता के लिए...

श्री अध्‍यक्ष: देखो, यह राजनैतिक भाषा नहीं बोलें। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली):  ***

श्री अध्‍यक्ष: Mister Hari Mohan, I call your name. मैं आपको नाम से पुकारूंगी। यह क्‍या तरीका है? जब मैंने कह दिया कि राजनैतिक भाषा का प्रयोग नहीं करें आप और बात का सीधे-सीधे जवाब दे दें तो आप बीच में खड़े हो गये, फिर उत्‍तेजित हो जाते हो। (व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): काफी रिच लोकप्रियता हासिल करने के लिए और इन्‍होंने किया क्‍या कि वहां अपने स्‍तर पर लोगों से कह दिया कि आप कार्यशाला बनाइये। कार्यशाला की स्‍वीकृति जारी हुई नहीं और कार्यशाला निर्माण मौखिक रूप से कहने पर लोगों ने कर ली। स्‍वीकृतियां निकली नहीं और अब लोग हमारे पास आते हैं कि हमने कार्यशाला निर्माण कर ली है और हमको भुगतान कीजिये। बिना स्‍वीकृति के कार्यशालाओं का भुगतान नहीं होता है, नम्‍बर एक। नम्‍बर दो यह है कि कार्यशाला निर्माण करने के लिए हम दो किश्‍तों में पैसा उपलब्‍ध करवाते हैं। पहली किश्‍त देते हैं, पहली किश्‍त का उपयोग करने के बाद हम दूसरी किश्‍त उपलब्‍ध करवाते हैं। पहली किश्‍त तो ले लेते हैं, उसका उपयोग नहीं करते हैं, उपयोगिता प्रमाण-पत्र नहीं देते हैं और दूसरी किश्‍त की डिमांड करने के लिए आ जाते हैं तो यह इस प्रकार की राशि है जिसने जहां पर कार्यशाला का निर्माण नहीं हो जाता और उसका उपयोगिता प्रमाण-पत्र हमारे प्रोजेक्‍ट मैनेजर के कार्यालय में या बी.डी.ओ. के कार्यालय में नहीं आ जाता, वहां तक दूसरी किश्‍त जारी नहीं की जा सकती है और इसलिए माननीय विधायक महोदय इस प्रकार की चिंता कर रहे हैं। इनको कानून एवं नियमों की जानकारी नहीं है। मैं चाहता हूं कि माननीय विधायक महोदय पूरा अध्‍ययन करके आये और फिर यहां सदन में इस प्रकार की चर्चा करें। मैं आश्‍वस्‍त कर रहा हूं इस सदन को कि जिन्‍होंने नियमानुसार कार्यशाला बनाई है, जिनको स्‍वीकृति जारी हुई है, उस किसी का भी पैसा एक भी नहीं रोकूंगा...

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

एक महीने के अन्‍दर-अन्‍दर सबको भुगतान हो जायेगा लेकिन इन्‍होंने जो सस्‍ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए झूठे आश्‍वासन देकर इनसे बनवा लिये हैं, उन्‍हें भुगतान नहीं होगा, किसी कीमत पर नहीं होगा। ये लोगों को भड़काते हैं, अन्‍याय करते हैं और....

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली):  ***

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): मुझे यह जानकारी मिली है कि माननीय सदस्‍य कुछ लोगों से यह वादा करके आये हैं, उन्‍हें कहा है कि पाँच प्रतिशत राशि मुझे दे देंगे तो मैं वहां से स्‍वीकृतियां निकलवा दूंगा। मुझे जानकारी मिली है कि पाँच प्रतिशत में सौदा करके आये हैं माननीय सदस्‍य कि पाँच प्रतिशत राशि इनको दे दी जाये तो ये यहां दबाव बनवाकर स्‍वीकृति करवा देंगे लेकिन यह सदन और मैं इनके दबाव में आने वाला नहीं हूं। नियमानुसार कार्यवाही करेंगे। इनकी आदत रही है कमीशन खाने की और लगातार कमीशन खाने की आदत रही है इनकी और यहां दबाव में कमीशन खाने की कार्यवाही करना चाहते हैं। यह किसी कीमत पर नहीं होने देंगे हरिमोहन जी...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): ऐसा है, मैं गरीब बाप का बेटा हूं। मैं कपड़े बेचता था, मैं सब्‍जी बेचता था, मैं मजदूरी करता था। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): ***

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): धन्‍य हैं मेरे मां-बाप जिन्‍होंने सारी विषम परिस्थितियों में भी मुझे पढ़ा-लिखाकर यहां खड़ा किया है। (व्‍यवधान) आपको कमीशन नहीं खाने दूंगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य। श्री भरत सिंह।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य। आप स्‍थान ग्रहण कीजिये। श्री भरत सिंह।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): ***

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***  

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य। श्री भरत सिंह।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): वह सब कर देंगे। एक माह के अन्‍दर इनका भुगतान कर देंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय श्री भरत सिंह। मैं आपको परमिशन नहीं दूंगा माननीय सदस्‍य।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): ***

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप दूसरे तरीके से आइये।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): ***

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): एक माह में कर देंगे। एक माह के अन्‍दर सारा भुगतान कर देंगे। एक माह के अन्‍दर भुगतान कर देंगे।

 

Jkj/usc/13.10/1o/5.10.2006

 

श्री अर्जुन लाल मीणा:  ***

श्री बृजकिशोर शर्मा : ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप अपना स्‍थान ग्रहण करें, आपका अंकित नहीं होगा।

श्री अर्जुन लाल मीणा: ***

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, श्री भरत सिंह।  माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा: ***

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री हरिमोहन शर्मा: ***

श्री अर्जुन लाल मीणा: ***

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री हरिमोहन शर्मा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। अंकित नहीं हो रहा है। (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य।        

श्री भरत सिंह। माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री हरिमोहन शर्मा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण करें।

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री भरत सिंह।  माननीय सदस्‍य, आप विराजें। आप क्‍यों समय खराब कर रहे हैं अपना। श्री भरत सिंह। माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान) नहीं।

श्री श्रवण कुमार: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं, मैंने नाम पुकार लिया सदस्‍य का, बीच में मैं आपको अलाउ नहीं करूंगा, नहीं, माननीय सदस्‍य।

श्री श्रवण कुमार: ***  

श्री बंशीलाल खटीक: ***  (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: हरिमोहनजी को समय दिया था...(व्‍यवधान) आपको अलाऊ नहीं करूंगा मैं।

श्री बृजकिशोर शर्मा :***

श्री श्रवण कुमार: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आपको समय दिया था दो मिनट का, मंत्री का जवाब आ गया, दूसरा तरीका अपनाइये। माननीय श्री भरत सिंह। इस पर बहस नहीं होगी लम्‍बी-चौड़ी।

श्री श्रवण कुमार: ***

डा. चन्‍द्रशेखर बैद: ***

श्री बृजकिशोर शर्मा : ***

श्री श्रवण कुमार: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आपका कोई अंकित नहीं हो रहा है।

श्री श्रवण कुमार: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: अब माननीय सदस्‍य का मैंने नाम पुकार लिया, आप उनको बोलने       दीजिये। माननीय सदस्‍य, आप बैठ जाइये, बीच में नहीं आप। माननीय सदस्‍य।

श्री बद्रीलाल जाट: ***

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री श्रवण कुमार: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये, माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य। 

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: कोई अंकित नहीं होगा। (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य।

श्री नन्‍दलाल पूनिया: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: अपने सदस्‍य को बोलने के लिए आप बीच में व्‍यवधान डालें, नहीं। (व्‍यवधान) आप पहले सदस्‍य को बोलने दीजिये, आप स्‍थान ग्रहण कीजिये। कोई अंकित नहीं हो रहा है।

श्री नन्‍दलाल पूनिया: ***

श्री अर्जुन लाल मीणा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। यह विषय अब समाप्‍त हो चुका है।

श्री अर्जुन लाल मीणा:  ***

श्री उपाध्‍यक्ष: हो गया।

श्री अर्जुन लाल मीणा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: अब मंत्रीजी का ...(व्‍यवधान)

श्री अर्जुन लाल मीणा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: यह अभी तय नहीं होने वाला है, माननीय सदस्‍य।

श्री अर्जुन लाल मीणा: ***

श्री नन्‍दलाल पूनिया: ***

श्री मांगीलाल गरासिया: ***

डा. चन्‍द्रशेखर बैद: ***

श्री अर्जुन लाल मीणा: ***

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, राजसमंद से आने वाले माननीय सदस्‍य, विराजें। माननीय सदस्‍य।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल: ***

श्री जोगेश्‍वर गर्ग: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान) कुछ भी अंकित नहीं हो रहा। माननीय सदस्‍य। श्री भरत सिंह।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल: ***

श्री बृजकिशोर शर्मा: ***

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री हरिमोहन शमा्र: ***

श्री बद्रीलाल जाट: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण कीजिये।

श्री अर्जुन लाल मीणा: ***

श्री हरिमोहन शर्मा :***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, दूसरे सदस्‍य भी...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा : ***

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये, माननीय सदस्‍य। श्री भरत सिंह। माननीय सदस्‍य।

श्री भरत सिंह(दीगोद): माननीय उपाध्‍यक्षजी, मैं इस सदन का ध्‍यान कृषि से संबंधित जो समस्‍याएं हैं प्रदेश के किसानों के सामने, उसकी ओर दिलवाना चाहूंगा।  रबी की हमारी प्रमुख फसल राजस्‍थान की सरसों की फसल है और कृषि में जहां लागत बढ़ रही है उसके अनुरूप आमद नहीं बढ़ रही मगर पिछले कुछ दिनों में समाचार प्रकाशित हुए कि जो सरसों का समर्थन मूल्‍य है उसमें 115 रूपये क्विंटल की कमी की जायेगी।  जब हमारी लागत बढ़ रही है और कोई भी समर्थन मूल्‍य इस प्रकार कम कर देना इस राजस्‍थान के किसानों के लिए सबसे चिंताजनक बात है। (व्‍यवधान) आप सुनिये मेरी बात, इसको उलझाइये मत बातों को।  कृषि स्‍टेट सब्‍जेक्‍ट है और प्राइसेस सेंट्रल गवर्नमेंट से जो है उसकी प्राइसेस का नियंत्रण वहां से होता है मगर कृषि है स्‍टेट सब्‍जेक्‍ट। अब इसके अंदर पक्ष और विपक्ष चूंकि मामला राजस्‍थान के किसानों से संबंधित है और राजस्‍थान की प्रमुख फसल रबी की प्रमुख फसल सरसों हैं और राजस्‍थान के किसानों की यह मजबूरी भी है कि हमारे पास पर्याप्‍त पानी नहीं है और प्रदेश में पर्याप्‍त बिजली भी नहीं है इसलिए कम पानी और कम बिजली से जो एक सिंचाई से हम फसल पैदा कर सकते हैं उसको इस प्रदेश के किसानों ने उस फसल को अपनाया है।  यह दुर्भाग्‍यपूर्ण बात है कि यह घोषणा आने के बाद भी राजस्‍थान सरकार की तरफ से किसी ने कोई एक बयान नहीं दर्ज किया कि यह समर्थन मूल्‍य क्‍यों कम किया जा रहा है, इसमें पक्ष और विपक्ष दोनों को मिलकर यह संकल्‍प पारित करना चाहिए कि इस प्रकार से समर्थन मूल्‍य कम नहीं किया जाय।

दूसरी चीज, जो हमारा सहकारी ऋण है, जो हम ब्‍याज देते हैं, सहकारी पर जो ऋण देते हैं, 2200 करोड़ रूपये का सरकारी हमारा कृषि का जो लोन है वह साढ़े ग्‍यारह प्रतिशत ब्‍याज दर से किसानों से ब्‍याज वसूल किया जाता है।  सहकारी का पूरा ऋण स्‍टेट सब्‍जेक्‍ट है और स्‍टेट गवर्नमेंट को यह अधिकारी है कि उस ऋण की मात्रा को कम किया जाय और मैं इस सदन के माध्‍यम से सहकारी मंत्री यहां विराजमान हैं, यह जो सहकारी का ऋण है, किसानों से सात प्रतिशत की दर पर ब्‍याज वसूल किया जाय, न कि साढ़े ग्‍यारह प्रतिशत की दर से जो किया जा रहा है और यह सेंट्रल केबिनेट का डिसीजन भी इसके ऊपर हुआ है, गवर्नमेंट ने डिसीजन भी लिया है कि हम एग्रीकल्‍चर के प्राइसेस कम करने के लिए, लोगों को राहत के लिए हम जो ऋण की रेट्स हैं उसको कम करेंगे और क्‍योंकि अधिकांश ऋण सहकारी विभाग के माध्‍यम से दिया जाता है और सहकारी विभाग टोटली स्‍टेट सब्‍जेक्‍ट है इसमें सेंट्रल गवर्नमेंट का कोई लेना-देना नहीं है, इसलिए यह सात प्रतिशत के ऊपर जो सहकारी मंत्री हैं इस बात का सदन को विश्‍वास दिलायें कि हम सहकारी का ऋण सात प्रतिशत पर किसानों को उपलब्‍ध करायेंगे।

तीसरी चीज, बुवाई का समय है और खाद की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था नहीं है, खाद की कालाबाजारी चल रही है।  इसकी भी व्‍यवस्‍था जो संबंधित विभाग है, वह इसके बारे में व्‍यवस्‍था करे ताकि किसानों को खाद मिले।  यह तीनों चीजें प्रदेश के किसानों से जुड़ी है और इसमें मैं चाहूंगा कि पक्ष और विपक्ष जो समर्थन मूल्‍य है उसमें कटौती न करने की बजाय बढ़ोत्‍तरी की जाय क्‍योंकि लागत बढ़ी है, खर्चा बढ़ा है इसलिए आमद, उसको बढ़ाने के लिए किसानों को उसके अंदर बढ़ोत्‍तरी की जाय और जो सहकारी का ऋण है उसमें कटौती की जाय और अगर सहकारी मंत्री समझें तो इसके बारे में अपना वक्‍तव्‍य दें और आपने मुझे इस महत्‍वपूर्ण विषय पर बोलने का, अध्‍यक्षजी ने समय दिया, उसके लिए मैं आपको धन्‍यवाद देता हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़(संसदीय कार्य मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह सही है जो माननीय सदस्‍य ने चिंता व्‍यक्‍त की है, सरसों के समर्थन मूल्‍य के घटने की और यह भी इन्‍होंने सही-सही कहा है कि यह पूरा काम नेशनल एग्रीकल्‍चर प्राइस कमीशन, भारत सरकार करता है।

 

भीम/अरुण/5.10.06/13.20/1p

 

जिसके चेयरमैन मिस्‍टर हक हैं मैं समझता हूं कि जिस तरह से इन्‍होंने चिन्‍ता व्‍यक्‍त की है आपका भी प्रभाव है आप प्रतिपक्ष के नेता को भी कहें ये भी केन्‍द्रीय सरकार से बात करें और किसानों का समर्थन मूल्‍य जो कम करने की साजिश रची जा रही है उपाध्‍यक्ष महोदय, कहां 1715 रुपये था समर्थन मूल्‍य उसको घटाकर 1600 रुपये किया जा रहा है इसलिए अगर...।

श्री अमराराम (धोद): मंत्री जी, संकल्‍प पास कराओ, संकल्‍प लेकर आइये हम तो कह रहे हैं इधर से।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ठीक है।

श्री अमराराम (धोद): संकल्‍प विधान सभा तो पास करके भेजे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ठीक है हम संकल्‍प लेकर आ रहे हैं।

श्री अमराराम (धोद): संकल्‍प करो।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सर्वसम्‍मत ला रहे हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह अभी मैं समझता हूं कि ...।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप सबकी मंशा है ..।

एक माननीय सदस्‍य : मंत्री जी, कल ही ले आइये।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अगर आपकी मंशा है तो सरकार संकल्‍प लाने के लिए तैयार है ।

एक माननीय सदस्‍य: मंत्री जी, संकल्‍प कल ही लाइये बोलिये सब।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अगर प्रतिपक्ष के नेता इसमें हां करें ...(व्‍यवधान)... संकल्‍प ले आते हैं उपाध्‍यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से संकल्‍प ले आएंगे।

एक माननीय सदस्‍य: हां, हां करिये प्रतिपक्ष के नेता महोदय संकल्‍प ले आते हैं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): संकल्‍प जुबानी कैसे लाएंगे लिखकर ढंग से लेकर आइये और अभी थोड़े ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: यह बहुत महत्‍वपूर्ण विषय है।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग: हां-हां, आप हां तो बोलें, हां बोलें आप।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप हां करें, हम संकल्‍प लेकर आते हैं विधिवत नियमों से उपाध्‍यक्ष महोदय, आपको मालूम है कि संकल्‍प अगर हम लाएंगे तो आपकी अनुमति लेनी पड़ेगी आसन को हमें लिखित में देना पड़ेगा संकल्‍प सर्वसम्‍मत हो इसलिए हमारा प्रस्‍ताव है कि प्रतिपक्ष के नेता इसको स्‍वीकार करते हैं तो हम आज ही संकल्‍प लेकर आने को तैयार हैं। प्रतिपक्ष के नेता स्‍वीकार करें इसको।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह सारी बात यहां नहीं होती है यह अध्‍यक्षजी, के वैश्‍म में सारी पार्टियों के ...(व्‍यवधान)...   

श्री जोगेश्‍वर गर्ग: क्‍यों यहां क्‍या, यहां क्‍यों नहीं हो सकती? यहां भी हो सकती है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ...(व्‍यवधान)... वैश्‍म के अन्‍दर आपका संकल्‍प लाना है तो क्‍या लाना है ...(व्‍यवधान)...

श्री जोगेश्‍वर गर्ग: यहां भी हो सकता है यहां नहीं कर रहे हो तो आपके मन में खोट है। यहां नहीं कर रहे हो मतलब आपकी नीयत में खोट है । यहां नहीं कर सकते मतलब आपकी नीयत में खोट है आप किसानों के हित में निर्णय करना नहीं चाहते ...(व्‍यवधान)...   

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मुझे प्रसन्‍नता इस बात की है कि भरतसिंह जी ने जो प्रस्‍ताव रखा है सरकार उसका समर्थन कर रही है । आप विरोध कर रहे हैं।  आप विरोध कर रहे हैं।  आप विरोध कर रहे हैं । ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ...(व्‍यवधान)... अध्‍यक्ष जी के चैम्‍बर में नेता प्रतिपक्ष, सदन की नेता ...(व्‍यवधान)...

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): आपसे यह अपेक्षा नहीं थी कि आप किसानों के मामले में ...(व्‍यवधान)... रोड़ा अड़ाएंगे किसानों के हित के मामले में ...(व्‍यवधान)...   

श्री जोगाराम पटेल: ...(व्‍यवधान)... किसानों के विरोधी बोलने लग गये। ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): उपाध्‍यक्ष महोदय, सदन की नेता कहां हैं यहां पर? सदन की नेता और प्रतिपक्ष के नेता अध्‍यक्ष जी के वैश्‍म में ...(व्‍यवधान)...

श्री जोगेश्‍वर गर्ग: अपने नेता को तो बोलने दो इतनी तो शर्म करो ...(व्‍यवधान)...  

श्री उपाध्‍यक्ष: आप सहमत हैं तो यह बात तय हो जाएगी।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप अपनी मर्जी से चलते हो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): उपाध्‍यक्ष महोदय, जो भरतसिंह जी ने बात उठायी है उसका मंत्री महोदय  से उत्‍तर दिलवाइये गवर्नमेंट की तरफ से।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग: उत्‍तर भारत सरकार को देना है समर्थन मूल्‍य उन्‍होंने कम किया है ...(व्‍यवधान)... उत्‍तर उनको देना है हमको तो निवेदन करना है आप उसमें शामिल हैं कि नहीं बोलिये।

श्री जोगाराम पटेल: भारत सरकार कम क्‍यों कर रही है?

श्री उपाध्‍यक्ष: पैसा भी समय पर मिलना चाहिए बहुत देरी से मिलता है ।

श्री जोगाराम पटेल: वो भारत सरकार नहीं दे रही है ...(व्‍यवधान)...माननीय प्रतिपक्ष के नेता किसानों का ध्‍यान करो ...(व्‍यवधान)...   

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो खानपुर से आने वाले माननीय भरतसिंह जी ने कहा है उसको हम स्‍वीकार करते हैं और यदि प्रतिपक्ष के नेता इसपर सहमति दें तो बैठकर ...(व्‍यवधान)...   

श्री जोगाराम पटेल: ...(व्‍यवधान)... हम आपकी किसान विरोधी नीति को बर्दाश्‍त नहीं करेंगे।

    श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आज ही हम सर्वसम्‍मत प्रस्‍ताव लाने के लिए तैयार हैं यदि प्रतिपक्ष के नेता महोदय स्‍वीकार करें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): सदन की नेता कहां हैं?

श्री भरतसिंह: हां, आप लाइये। आप लाइये।

श्री जोगाराम पटेल: आपके प्रतिपक्ष के नेता से कहलाओ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हम सब तैयार हैं ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): सदन की नेता कहां हैं?  ...(व्‍यवधान)... सदन की नेता कहां हैं ...(व्‍यवधान)...

श्री जोगाराम पटेल: ...(व्‍यवधान)... किसान विरोधी नीति है।

श्री भरतसिंह: आप लाइये।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हम जिम्‍मेदारी से कह रहे हैं हम जिम्‍मेदारी से कह रहे हैं।

श्री जोगाराम पटेल: प्रतिपक्ष के नेता से हां कराओ।

एक माननीय सदस्‍य: सहकारिता का सात प्रतिशत का क्‍या हुआ?

श्री सांगसिंह भाटी: समर्थन मूल्‍य कम न करने के बारे में आप बोलिये आप क्‍या चाहते हैं?

एक माननीय सदस्‍य: चर्चा कराओ क्‍यों कम किया यह सरसों का केन्‍द्र सरकार ने।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह भरतसिंह जी ने जो बात उठायी है सरसों की और उसके अन्‍दर जो निहित प्रश्‍न है किसानों की जो बात है उसका सरकार जवाब दे कि वो क्‍या कर रही है क्‍या करना चाहती है?

श्री उपाध्‍यक्ष: ये तो सहमत हैं आप बतायें ...(व्‍यवधान)...   

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, समर्थन मूल्‍य कम किया ...(व्‍यवधान)...  और अब कोई जवाब नहीं मिल रहा है इसलिए बोल रहे हैं ...(व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): ...(व्‍यवधान)... समर्थन मूल्‍य कम किया जा रहा है उसका प्रस्‍ताव लाना चाहिए हम इसको स्‍वीकार करते हैं यदि प्रतिपक्ष के नेता इस पर सहमति‍ देने के लिए तैयार हैं ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): सदन की नेता कहां हैं?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हम सदन की नेता की और से बोल रहे हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): सदन की नेता कहां हैं ...(व्‍यवधान)... सदन की नेता हैं यहां पर ...(व्‍यवधान)... आप कौन होते हैं?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सदन की नेता आ जाएंगी ...(व्‍यवधान)...   

श्री महीपालसिंह यादव: वो तो एरोप्‍लेन खरीदने गयी हैं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): संसदीय कार्य मंत्री महोदय, आपको मालूम है कि संकल्‍प कैसे आता है इस तरह से आता है क्‍या संकल्‍प?

श्री महीपालसिंह यादव: वो तो हवाईजहाज खरीदने में लग रही हैं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): संकल्‍प की अपनी प्रक्रिया है अपने नियम हैं अपना कानून हैं आप ऐसे ही खड़े होकर संकल्‍प ले आएंगे ...(व्‍यवधान)... नियमों को पढ़ें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सहमत होने पर संकल्‍प लाने को तैयार हैं ...(व्‍यवधान)...   

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी: आपके मन में अगर मन साफ है तो ...(व्‍यवधान)...

श्री जोगेश्‍वर गर्ग: ...(व्‍यवधान)... कांगेस किसान विरोधी है ...(व्‍यवधान)... किसान विरोधी है।

श्री सुरेन्‍द्रपालसिंह टीटी: आपको खुले रूप से कहना चाहिए ...(व्‍यवधान)... अगर आप बात को घुमा रहे हैं तो आप किसान विरोधी हैं ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आप तो उत्‍तर दिलवाइये। माननीय सदस्‍य भरत सिंह जी का उत्‍तर दिलवाइये संकल्‍प तो आता रहेगा।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी: अब आपको पता लग रहा है ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): Where is the Leader of the House? सदन की नेता कहां हैं? उनको बुलाएं पहले।

श्री भरतसिंह : माननीय उपाध्‍यक्ष जी, मेरी बात को  आप ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आ जाएंगी।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): सदन की नेता अपनी बात कहें उसके बाद अध्‍यक्ष के चैम्‍बर में बात होगी ...(व्‍यवधान)...

श्री जोगाराम पटेल: राजस्‍थान की जनता आपको देख रही है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ...(व्‍यवधान)... सहकारिता मंत्री जवाब दें

श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): There is no agenda in the House and then he has no right. मंत्री जी से जवाब दिलवाइये।

एक माननीय सदस्‍य: कृपया सहकारिता मंत्री जवाब दें किसानों को सहकारिता क्षेत्र में सात प्रतिशत ब्‍याज में दिया जाएगा ...(व्‍यवधान)... किसानों से सात प्रतिशत ब्‍याज लिया जाएगा कृपया सहकारिता मंत्री जवाब दें।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): संकल्‍प की क्‍या प्रक्रिया है वो आप देख लीजिये संकल्‍प की प्रक्रिया है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: बात सुनिये, आप माननीय नेता प्रतिपक्ष।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यदि प्रतिपक्ष के नेता महोदय ...(व्‍यवधान)...   

श्री सांवरलाल : संकल्‍प की प्रक्रिया अपना ली जाएगी प्रक्रिया करके करेंगे संकल्‍प।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यदि प्रतिपक्ष के नेता महोदय अपनी सहमति देते हैं तो सदन की नेता महोदय यहां आकर वो संकल्‍प ...(व्‍यवधान)...   मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): विपक्ष के नेता जो कहेंगे वो सारी बात मानेंगे क्‍या आप? यह क्‍या तरीका है आपका? ...(व्‍यवधान)... ये विपक्ष के नेता जो बात कही ...(व्‍यवधान)... मानी थी क्‍या आपने?

श्री जोगेश्‍वर गर्ग: इनकी सारी बात मानेंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री जोगाराम पटेल: आपको क्‍या पता है किसानों की पीड़ा क्‍या होती है।

एक माननीय सदस्‍य: आप तो जवाब दिलवाइये किसानों के ठेकेदारों ...(व्‍यवधान)...   

श्री जोगेश्‍वर गर्ग: समर्थन मूल्‍य कम करते हो और फिर किसानों की पैरवी करते हो।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सदन की नेता आ गयी अब करिये बात। ...(व्‍यवधान)...

श्री जोगेश्‍वर गर्ग: किसानों के ठेकेदारों समर्थन मूल्‍य कम करते हो और फिर किसानों की पैरवी करते हो कांग्रेस किसान विरोधी है भारत सरकार किसान विरोधी है ...(व्‍यवधान)...  

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): लो अब सदन की नेता आ गयीं अब आप सहमति दे दो हम संकल्‍प लाते हैं ।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। माननीय नेता प्रतिपक्ष, माननीय सदस्‍य ने बहुत ही महत्‍वपूर्ण सवाल उठाया है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सदन की नेता कुछ कह रही हैं साहब।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य ने किसानों के प्र‍ति...।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): आप आसन से क्‍या कमेंट्री कर रहे हो उपाध्‍यक्ष महोदय?

श्री उपाध्‍यक्ष: मैं कमेंट्री नहीं कर रहा हूं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): आप पढ़े-लिखे हो कानून को जानते हैं। जो बात भरतसिंह जी ने कही उसका तो जवाब नहीं दिलवाते कह दिया बड़ा महत्‍वपूर्ण है कौन सा महत्‍वपूर्ण है कहां है एजेंडे पर?

श्री उपाध्‍यक्ष: महत्‍वपूर्ण है महत्‍वपूर्ण नहीं है क्‍या ?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): There is no agenda like this. एजेंडा यह है।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): संकल्‍प लाने का तरीका होता है…. ...(व्‍यवधान)...

ऐसे नहीं आते हैं खड़े होकर संकल्‍प ले आएंगे। ...(व्‍यवधान)... आपको कानून प्रक्रिया पता है ...(व्‍यवधान)...   

श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): ...(व्‍यवधान)... आज का जो प्रश्‍न है हमारे भरतसिंह जी ने ...।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍यमंत्री): इतना इम्‍पोर्टेंट क्‍वेश्‍चन है मैं समझती हूं कि प्रतिपक्ष के नेता और यहां सब बैठे हुए माननीय सदस्‍यों की भी चिन्‍ता इस बात के ऊपर है और हम लोगों की भी है और इसलिए मैं तो समझती हूं कि अगर प्रतिपक्ष के नेता मान जाते हैं तो इम्‍पोर्टेंट सब्‍जैक्‍ट के ऊपर अपन तुरन्‍त ही संकल्‍प ले लें।

 

कैलाश/   5.10.06  13.30   (1) 1q

 

श्री जुबेर खान (रामगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, ओन ए पाइंट आफ आर्डर । मुझे बडे दुःख के साथ कहना पड रहा है कि सरकारी मुख्‍य सचेतक और संसदीय कार्य मंत्री सदन की नेता महोदया को यह भी नहीं बताते कि संकल्‍प इस तरह आता है क्‍या खडे होकर । संकल्‍प की अपनी प्रक्रिया है । आप नियम और कानून के ऊपर इस सदन को नहीं चला सकते । संकल्‍प लाने की प्रक्रिया है सदन की नेता महोदया । माननीय मुख्‍य मंत्री जी सदन में संकल्‍प लाने की प्रक्रिया है । (व्‍यवधान) संकल्‍प नहीं आ सकता ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नियम और प्रक्रिया हमें मालूम है । (व्‍यवधान)

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे(मुख्‍य मंत्री): माननीय सदस्‍य इतनी इम्‍पोर्टेंट चीज पर, माननीय सदस्‍य ..

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): उपाध्‍यक्ष महोदय, आप संकल्‍प की बात कर रहे हैं ..

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य आपको किसने परमिशन दी है । सदन की नेता बोल रही है आप स्‍थान ग्रहण करें । माननीय सदस्‍य सदन की नेता खडी हैं, माननीय सदस्‍य आप स्‍थान ग्रहण कीजिए ।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): उपाध्‍यक्ष महोदय, आप संकल्‍प की बात कर रहे हैं इस समय बिजाई का समय है एक बैग डीएपी की तो आप व्‍यवस्‍था कर नहीं सकते काहे का संकल्‍प ला रहे हो ।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य आप स्‍थान ग्रहण कीजिए । अंकित नहीं हो ।

(अध्‍यक्षपीठ ने संकेत द्वारा अंकित नहीं करने का आदेश दिया)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***  

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): .. (व्‍यवधान) कांग्रेस की रैली में मालूम पडेगा कि कांग्रेस पार्टी सरसों का समर्थन मूल्‍य बढाने के हक में नहीं है .. (व्‍यवधान) आप यही संकल्‍प लेकर जाना चाहते हो कि सरसों का समर्थन मूल्‍य बढना नहीं चाहिये । (व्‍यवधान)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***  

श्री उपाध्‍यक्ष: बानसूर से आने वाले माननीय सदस्‍य आप की कोई बात अंकित नहीं होगी । आप स्‍थान ग्रहण कीजिए ।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ****

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे(मुख्‍य मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह मैं इसलिए कह रही हूं आपने पाइंट आफ आर्डर उठाया है अभी और मैं आपको इतना ही याद दिलाना चाहूंगी यह तो चेयर की पावर में है अगर वह इसको रिलेक्‍स करना चाहे तो वह करवा सकते हैं और जब पानी के ऊपर, इतने इम्‍पोर्टेंट इश्‍यू के ऊपर किया है और क्‍योंकि आप भी इतने एक्‍सरसाइज्‍ड हो और हम लोग भी इतने एक्‍सरसाइज्‍ड हैं हम कुछ प्रक्रियाओं को वेव करते हुए किसानों को मुसीबत में राहत देने की सोचते हुए इसको तुरन्‍त ही निकाल सकते हैं ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मुख्‍य मंत्री महोदया आप जो बात कह रही हैं हमको इससे कोई आपत्ति नहीं है लेकिन आज तक कभी ऐसा हुआ है क्‍या कि इस सदन के इतिहास में सुओमोटो खडे होकर कभी संकल्‍प आया हो । संकल्‍प को लिस्‍ट में लाना पडता है, आपको कार्यसूची में डालना पडेगा, आपको दो दिन का समय देना पडेगा । आप बताइए संकल्‍प कैसे आयेगा । आप नियम 106 पढिये उपाध्‍यक्ष महोदय, इसके जो आपने प्रक्रिया और नियम बना रखे हैं कि संकल्‍प किस तरह से आयेगा । ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य आप बिना सहमति से बोल रहे हैं । (व्‍यवधान) अंकित नहीं हो ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): ***

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री सांगसिंह भाटी(जैसलमेर): ****

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य ।

श्री सांगसिंह भाटी(जैसलमेर): ***

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ****

श्री सांगसिंह भाटी(जैसलमेर): ****

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ****

 

(सदन में सत्‍त पक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा नारेबाजी)

 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य विपक्ष के नेता खडे हैं । माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य ।

श्री रामनारायण चौधरी(नेता, प्रतिपक्ष): यह सरकार किसान विरोधी है इसका प्रदर्शन ... (व्‍यवधान)

श्री सांगसिंह भाटी(जैसलमेर):  ***

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष पदासीन)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

श्री रामनारायण चौधरी(नेता, प्रतिपक्ष): आप किताब लेकर किस पर बोल रहे हैं ।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ****

श्री अध्‍यक्ष: प्रतिपक्ष के नेता यदि कोई बीच में औचित्‍य का प्रश्‍न उठा रहे हैं तो आप कृपया थोडा विराज लें ।

श्री रामनारायण चौधरी(नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, अभी जीरो ओवर चल रहा है ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): ****

श्री अध्‍यक्ष: आप इस सदन को नियमों से चलने ही कहां दे रहे हैं । माननीय सदस्‍य आप इस सदन को नियमों से चलने ही कब दे रहे हैं ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहता हूं कि आपने स्‍थगन प्रस्‍ताव की जो व्‍यवस्‍था दी, माननीय भरत सिंह जी ने अपने स्‍थगन प्रस्‍ताव के ज़रिये सरकार से यह मांग की कि सरसों का समर्थन मूल्‍य बढाया जा रहा है उसके बारे में सरकार को संकल्‍प लाना चाहिये कि किसानों को राहत देने के लिये .. (व्‍यवधान)

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): ***

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ****

श्री अध्‍यक्ष: आप सदन को नियमों से चलने कब दे रहे हैं ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): ***

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे(मुख्‍य मंत्री):  अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सिर्फ इतना ही कहना है कि अगर सैद्धान्तिक रूप से सब एग्रीड हैं तो औपचारिकता पूरी कर के इतनी इम्‍पोर्टेंट चीज है 115 रुपये का डिफरेंस है और मैं समझती हूं इसके ऊपर हम सब सैद्धांतिक रूप से तय कर लेते हैं तो इसको अपन औपचारिकता पूर्वक कर सकते हैं ।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सदन की नेता ने जो प्रस्‍ताव रखा है वह आपको मंजूर है क्‍या ? प्रतिपक्ष के नेता सदन की नेता ने जो प्रस्‍ताव रखा है वह आपको मंजूर है क्‍या ? आप किसान के लिये घडियाली आंसू बहाते हो । किसान का मामला है । 115 कम आ रहा है .. (व्‍यवधान) कीजिए सहमति ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): ***

 

दुर्गा/चौहान/051006 1340 2a

 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):  ***

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): ***

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): ***

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री भवानी सिंह राजावत (संसदीय सचिव): ***

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): ***

श्री रामकिशोर मीणा (सिकराय): ***

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि नियम 306 के अन्‍तर्गत, जिसमें आपको किसी नियम को निलम्बित करने का अधिकार है। उसके तहत मैं आपसे निवेदन करना  चाहता हूं कि यदि कोई नियम में कठिनाई है तो उसको निलम्बित करके और किसान के हित में जब किसान मर रहा है, उसकी कीमतें...। (व्‍यवधान) लागत बढ़ रही है तो उसके लिये संकल्‍प पारित करने के लिये यदि कोई नियमों में और कहीं निलम्‍बन करना पड़े तो उसकी अनुमति दे दें। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली):  ***

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): ***

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): ***

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री अध्‍यक्ष: आसन पांवों पर है, आसन पांवों पर है। आसन पांवों पर है। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट।

श्री अध्‍यक्ष: आपको अधिकार है, आसन को रोकने का?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं, मैं आसन से रिक्‍वेस्‍ट कर रहा हूं। आसन से किसी भी टाइम पर रिक्‍वेस्‍ट की जा सकती है। आसन से किसी भी स्थिति में रिक्‍वेस्‍ट की जा सकती है। आप बेहोश भी हो जाएं, तब भी हम आपके कान में कह सकते हैं। आपके कान में कह सकते हैं क्‍योंकि इस कुर्सी पर आप मालिक हो। मैं यह निवेदन करना चाह रहा था...। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, कितने शुभचिंतक हैं आपके। अध्‍यक्ष महोदय, आपके कितने शुभचिंतक हैं। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सरदारजी, आपके बस की बात नहीं है, बैठो। (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आप सहमत हो कि नहीं हो, यह बताओ आप तो। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): विवाद का, बोन आफ कण्‍टेंट, सुनो, भाई सुनो, आपने कह दी बात। और आप तोप उठा लाये। हमें पता था कि तोप यहां है और आप ले आएंगे। मुझे पता था कि जिस तोप को आप ला रहे हो, वह यहीं है और मैंने जिक्र किया था, इसलिये आप ले आये। हां तो ठीक है।

श्री अध्‍यक्ष: वे लीडर आफ द हाउस हैं। प्रतिपक्ष के नेता महोदय, वे तोप नहीं, वे लीडर आफ द हाउस हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): लेकिन हमारी बात तो सुनें। (व्‍यवधान) इस समय इस विधान सभा में वे सत्‍ता पक्ष की हैं, सदन की नेता हैं और सदन का नेता सर्वोपरि होता है।

श्री अध्‍यक्ष: सत्‍तापक्ष की नहीं, वे आपकी भी नेता हैं। वे आपकी भी नेता हैं, सदन की नेता हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं, नहीं, मेरी भी नेता हैं, सदन की नेता हैं, मेरी भी नेता हैं। मैं जब कहता हूं, मैं सदन में हूं, आप सबके अध्‍यक्ष हैं, ये सब की नेता हैं। मैं प्रतिपक्ष में हूं तो तमाम हमारे प्रतिपक्ष वालों का, सबका नेता हूं, मैं इन्‍कार नहीं कर रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: जो आपका कहना नहीं मानते, ये आपका कहना नहीं मानते हैं।

एक माननीय सदस्‍य: नहीं, नहीं, मानते हैं, सब मानते हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैं इधर बैठने वालों का, सबका नेतृत्‍व कर रहा हूं और सत्‍तापक्ष का नेतृत्‍व सदन का नेता कर रहा है। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): हम प्रतिपक्ष में हैं, इसलिये हमारे नेता हैं। प्रतिपक्ष के नेता, हमारे नेता हैं। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अब आप सुनिये, अब आप सुनिये, मान्‍यवर।

श्री अध्‍यक्ष: सुनिये, सुनिये, शांतिपूर्वक सुनिये अब।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह स्थिति इसलिये पैदा हुई, अध्‍यक्ष महोदया, आपने जो व्‍यवस्‍था दी, उसमें 2 मिनट के लिये माननीय श्री भरतसिंहजी को सरसों की स्थिति के ऊपर आपने स्‍थगन प्रस्‍ताव तो स्‍वीकार नहीं किया, लेकिन 2 मिनट में, संक्षेप में अपनी बात कहने का मौका आपने उनको दिया। और वह सारा मामला सहकारिता मंत्रीजी पर आता है। सहकारिता मंत्रीजी जवाब देने के लिये खड़े हो रहे थे। इतने में ही पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर ने हस्‍तक्षेप किया और उनको जवाब नहीं देने दिया। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मैंने इनकी अनुमति से जवाब दिया। मैंने इनकी अनुमति से जवाब दिया।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह मुझे मालूम है। मंत्री हैं, केबिनेट मिनिस्‍टर हैं, लेकिन वीकर सैक्‍शन के हैं, दलित हैं, डिप्रेस्‍ड हैं। ये राठौड़ों से, सिसोदियाओं से और सिंधियाओं से सर्वथा भयभीत हैं। (व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): मैं किसी वर्ग का नहीं हूं, मैं राजस्‍थान सरकार का मंत्री हूं, किसी वर्ग का नहीं हूं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सिंधियाओं ने इनको मिनिस्‍टर बना रखा है।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): आप राठौड़ों, राठौड़ों का शब्‍द मत यूज किया करें। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप विराजो, आप विराजो, मैं आपकी बात नहीं कर रहा हूं।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): नहीं, बैठो नहीं। (व्‍यवधान) नहीं, पहले आप बात करो, या तो अकेले राठौड़ कह बात करो। राठौड़ों का कैसे नाम लेते हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप राठौड़ नहीं हैं, आप राठौड़ नहीं हैं। इस भ्रम में मत रहना।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): क्‍यों नहीं हैं राठौड़, क्‍यों नहीं हैं राठौड़।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं, नहीं, नकली हैं आप। असली राठौड़ ये हैं, बैठो आप।

श्री अध्‍यक्ष: आप नकली हो, आप नकली हो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): असली राठौड़ ये बैठे हैं।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): मैं इसका दादा हूं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं, आप जमीन काश्‍त करने वाले जाट हो।

श्री अध्‍यक्ष: राठौड़ लिख रखा है, लेकिन नकली हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हल चलाने वाले जाट हो, मैं हूं और वह सरदारजी बैठे हैं, वह जाट हैं। आप और हम जमीन को सींचते हैं।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): मैं तो खेती में पूछ लूंगा आपको कि फलां बीज बीघे में कितना पड़ता है, आप बता नहीं सकेंगे।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): लेकिन असली राठौड़ ये हैं। और सिंधिया वंश से जन्‍मी मुख्‍यमंत्रीजी हैं।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): आप किसानों के नेता हो ना।

श्री अध्‍यक्ष: जब प्रतिपक्ष के नेता बोलते हों तो खड़े नहीं होना चाहिए। इनको बोलने दीजिये।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): तो राठौड़ों, राठौड़ों को, अध्‍यक्ष महोदय, बारबार, हमेशा ये लफड़ा लेकर खड़े हो जाते हैं। (व्‍यवधान) अच्‍छा, आप एक बात बता दो, किसानों के नेता हैं आप, चुकन्‍दर का बीज एक बीघा में कितना पड़ता है। मान गये हम आपको, दो जवाब।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): चुकन्‍दर की खेती गंगानगर में होती है, झुन्‍झुनूं में नहीं होती है। (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): सवाल बहुत सीधा-सीधा है, प्रतिपक्ष के नेता महोदय, जो आपने फरमाया कि स्‍थगन प्रस्‍ताव की अनुमति आपने दी और यह यहां पर परम्‍परा है कि स्‍थगन प्रस्‍ताव पर सरकार उसका जवाब दे सकती है, यदि देना चाहे तो दे देती है। अब इन्‍होंने प्रस्‍ताव किया कि 115 रुपये जो सरसों का मूल्‍य गिराया जा रहा है वह किसानों के ऊपर भंयकर अत्‍याचार है। उसकी कीमत बढ़ रही है, उसकी लागत बढ़ रही है और सरसों की कीमत कम हो रही है। हमारी मजबूरी यह है कि हमारे पास पानी कम है। इसलिये हम सरसों के अलावा कोई दूसरा बो नहीं सकते हैं। इसलिये हमको एक संकल्‍प लेना चाहिए, इसको जब हमने मान लिया ओर सर्वसम्‍मति से उनका प्रस्‍ताव मान लिया, अब यह समझ में नहीं आता है कि हमने पानी के मामले में एक होकर, और कोई व्‍यवस्‍थाओं के सवाल उठाये जा रहे हैं, कोई कांस्‍टीट्यूशन के सवाल उठाये जा रहे हैं। यह सर्वोच्‍च सदन है, इसमें सब प्रकार की और नियमों की बनाने की छूट देने की शक्ति प्राप्‍त है। अब मैं चाहता हूं कि जब हम पानी के मामले में कौनसे राज्‍यपाल महोदय को पूछने गये थे। गये थे क्‍या? पानी के मामले में इसी सदन में एक संकल्‍प पारित किया।  उसी प्रकार यदि कहीं नियमों में व्‍यवधान है तो आपको अधिकार है, 306 के अन्‍तर्गत, आप नियमों में रिलेक्‍स कर सकते हैं। जब सबकी मंशा एक है, किसानों को राहत मिलनी चाहिए। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): और जब घड़साना, सूरतगढ़ में पानी मांगा, तब गोली आपने चलाई। जब सोहेला में पानी मांगा तो गोली भी आपने चलाई। किसान विरोधी काम तो आप करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में नहीं बोलें। आप बीच में क्‍यों बोलते हैं। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): जब किसान का सवाल आता है, तब आप विरोध करते हैं, उन पर गोली चला देते हो। यहां आज किसानों की बात कर रहे हो। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर):  ***  

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): न इनको किसानों से मतलब है, न इनको...। (व्‍यवधान) ये तो अव्‍यवस्‍था कायम कर रहे हैं यहां पर। उन्‍माद पैदा करना हो तो माहिर आजाद को ले आओ, यदि किसान की बात करनी हो तो माहिर आजाद को ले आओ, यदि कोई नियमों की बात करनी हो तो माहिर आजाद को लाओ, कोई गड़बड़ की बात करनी हो तो माहिर...। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): तो कांग्रेस का प्रस्‍ताव है। कांग्रेस के प्रस्‍ताव पर हम संकल्‍प ला रहे हैं। अब मेरी समझ में नहीं आता कि यह कोई मतलब नहीं। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): रैली में चले मत जाना, लोग मारेंगे। (व्‍यवधान)

 

विष्‍णु/      / 5.10.06- 13.50/ 2b

 

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ***

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): ***

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री महीपाल मदेरणा (भोपालगढ़):***

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): ***

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): ***

श्रीमती राजकुमारी शर्मा (सीकर): ***

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): ***

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव):  ***

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): ***

 

(सदन में भारी शोर-गुल व नारेबाजी)

श्री अध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए अर्थात् 2 बजकर 25 मिनट तक के लिए स्‍थगित की जाती है, नहीं, 2.30 बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है। 2 बजकर 30 मिनट तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

( तदनन्‍तर सदन की बैठक 13.54 बजे 14.30 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई। ) 

 

 

शिव/चौहान/14.30/2f/5.10.2006

 

 

(समय : 14.30 बजे)

(पुन: समवेत् होने पर)

( श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन )

 

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की बैठक आधे घण्‍टे के लिये और स्‍थगित की जाती है। अब 3.00 बजे मिलेंगे।

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 14.30 बजे, 1500 बजे तक  के लिये स्‍थगित हुई।)

 

                          ''''''''''''''''

महेन्‍द्र/चौहान/15.00/2j/5.10.2006

 

 

(समय : 15.00 बजे)

(पुन: समवेत् होने पर)

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की बैठक आधे घण्‍टे के लिये और स्‍थगित की जाती है।

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 15.00 बजे आधे घण्‍टे के लिये स्‍थगित हुई।)

 

---

 

Ars/usc/1530/2m/05102006/1

 

(पुन: समवेत होने पर)

(समय 1530)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहूंगा कुछ आपसे कि ज्ञात हुआ है कि सदन की नेता महोदय एक संकल्‍प यहां प्रस्‍तुत करने जा रही हैं। हमारे प्रतिपक्ष के नेता महोदय, हमारे वरिष्‍ठ सदस्‍य सी पी जोशी गये थे और लोग भी थे तो वहां किन्‍हीं मुद्दों पर सहमति बनी थी कि संकल्‍प के विषय में आपने तीन दफा हाउस को एडजार्न किया है । अगर आप मुनासिब समझें तो एक दफा संकल्‍प हम देख तो लें। एबरप्‍ली यहां संकल्‍प आ जाएगा। हमारी बड़ी अजीब स्थिति बन जाएगी। कुछ चीजें तय हुई थीं उनकी भाषा एक मिनट देख लें । आधा घंटे में कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है ।

श्री अध्‍यक्ष: लीडर आफ दी हाउस यदि किसी तरह का संकल्‍प लाती हैं, कोई प्रस्‍ताव लाती हैं तो मैं समझती हूं कि वह राज्‍य हित में भी होगा, सदन के हित में भी होगा फिर भी यदि आपको कोई आब्‍जक्‍शनेबल बात लगे तो, you have the right to oppose that. इसमें क्‍या बात है ।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): यह अपोजिशन का सवाल नहीं है। अध्‍यक्ष महोदय, आज दिन तक इस प्रकार की समस्‍याओं के बारे में जो संकल्‍प आए हैं, जल के बारे में आए हैं उसके ऊपर भी आम सहमति बनी थी और आप एक नई परम्‍परा संकल्‍प के ऊपर तो सदन के अन्‍दर आज हम उसका विरोध करें और उसमें अमेंडमैंट लाएं यह एक उचित परम्‍परा नहीं होगी। मैं इसको मुनासिब नहीं समझता। मेरी आपसे करबद्ध प्रार्थना है और सदन के नेता महोदय से भी मैं निवेदन करना चाहता हूं, आप यहां विराजमान हैं । बेहतर यह होगा कि अगर आप हमारे नेता महोदय के संग, एक दो अन्‍य सदस्‍यों के साथ इस पर थोड़ी देर एक आधे घंटे के लिए हाउस एडजोर्न कर दें, तीन दफा हो चुका, आधा घंटे के अन्‍दर कोई दिक्‍कत नहीं आ रही है । कृपया चर्चा कर लें तो एक एम्‍ब्रेसिंग पोजिशन से हम लोग बच जायेंगे।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): कोई एम्‍ब्रेसिंग नहीं है ।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): देख लें, कहां दिक्‍कत आ रही है ।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, we were there. सी एम साहब खुद वहां से उठकर गये उसके बाद हमसे कम्‍युनिकेट नहीं हुआ है। फर्स्‍ट हाफ एन आवर में we don’t want to know what happened in the Chair. आपके चैम्‍बर में नहीं कहना चाहते हैं लेकिन यह डिमांड करती है कर्टसी कि आपने हमको बुलाया आपके चैम्‍बर में, मुख्‍यमंत्री जी वहां से उठकर गये उसके बाद हमसे कोई कम्‍युनिकेशन ही नहीं है। यह तो एक नई परम्‍परा प्रारम्‍भ कर रहे हैं संकल्‍प पर। संकल्‍प पहली बार नहीं आया है । राजस्‍थान की विधान सभा के इतिहास में पहली बार संकल्‍प नहीं आया है, संकल्‍प पहले भी आए हैं । आप विरोध में थे तब भी आया है आप सत्‍ता में थे तब भी आया है। मैं समझता हूं कि पार्लियामैंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर को माननीय मुख्‍य मंत्री जी को यह अवगत कराना चाहिए था कि आप दुबारा, तीन बार आपने हाउस एडजार्न किया है। आप हमको बुलाकर कहते कि आपने जो बात कही उसके बाद ये बातें हुई हैं और आपके चैम्‍बर में जब बात हुई थी तो यह इम्‍प्रेशन लेकर गये कि मुख्‍यमंत्री जी असेसमैंट कराकर वापस आएंगी और बताएंगी। मैं समझता हूं हमारी वह स्पिरिट आपके सामने अभी भी है और हम माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपसे निवेदन करना चाहते हैं कि आप सदन को एडजार्न करके आपके चैम्‍बर में विपक्ष को बुलाकर यदि कोई बात करने की एक परम्‍परा तोड़कर आप संकल्‍प लाना चाहते हैं तो फिर एक नई परम्‍परा आप प्रारम्‍भ करेंगे। सदन परम्‍पराओं से चलता रहा है । यह परम्‍परा कभी नहीं रही है कि संकल्‍प लाने के पहले जिस तरह की भूमिका बने, बैठकर वन साइडेड चर्चा करके हम संकल्‍प लाएं तो मैं समझता हूं अध्‍यक्ष महोदय, फिर हमें पाइंट आफ आर्डर उठाने दिया जाए कि यह संकल्‍प लाने के लिए जो नियम और कानून में व्‍यवस्‍था है उसका उल्‍लंघन करके कोई संकल्‍प लाए तो फिर हम वह बात करेंगे अपने पाइंट आफ आर्डर से। मैं समझता हूं हमारी जो स्पिरिट है उसको समझने की आवश्‍यकता है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, चाहे पहले पंजाब के जल पर या और किसी भी मामले पर जब सर्वानुमति बनती है तो उसका जो ड्राफ्ट बनता है प्रस्‍ताव का, संकल्‍प का वह सबको दिखाकर के बात बनती है। नेता प्रतिपक्ष को दिखाया नहीं गया, हमको पता नहीं क्‍या संकल्‍प आ रहा है और आप एट रेंडम हाउस के अन्‍दर संकल्‍प रखकर के हमसे कह दें हम सर्व सम्‍मति से उसको पास कर दें तो ऐसा तो नहीं होगा। इसलिए हमारा तो निवेदन यही है कि जो माननीय राजाखेड़ा से आने वाले और नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा है, आप अपने चैम्‍बर में उसका जो ड्राफ्ट प्रपोजल बनाया है वह मंगा लें। आप पार्लियामैंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर को बुला लें। हमारे भी चार पाँच मैम्‍बर हों, आप भी उसको देख लें, मैं समझता हूं आपने भी उसको नहीं देखा होगा, उसको देख लें उसके बाद उस पर सर्वानुमति बनें तब उसको हाउस में लाएं तब तो उसका कोई औचित्‍य रहेगा। अगर ऐसे ही एक तरफा लाकर पास करायेंगे तो ....

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, मैं सप्‍लीमैंट्री करना चाहता हूं आपके ज्ञान के लिए। जो संकल्‍प का कंटेन्‍ट था उसमें क्‍या बिंदु थे, बिन्‍दु यह था कि भारत सरकार सेजो सरसों की प्राइस है उसको बढ़ाने के लिए रिक्‍वेस्‍ट की जाए और राजस्‍थान सरकार का जो कोआपरेटिव का लोन है  वह ग्‍यारह प्रतिशत से सात प्रतिशत किया जाए। तीसरा था फर्टीलाइजर को अवेलेबल किया जाए। आज जो संकल्‍प का पार्ट है इसमें कोआपरेटिव में ग्‍यारह प्रतिशत से सात प्रतिशत स्‍टेट गवर्नमैंट लाएगी, यह फाइनैंस का बिल नहीं है, क्‍या आप अलाऊ करेंगे संकल्‍प में बिना गवर्नर की परमिशन लिए हुए यह जो इम्‍पलीकेशन पार्ट है इसका मालूम नहीं है हमें।

मैं समझता हूं कि माननीय पार्लियामैंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर आप बहुत ही गलत परम्‍पराओं का निर्वहन कर रहे हैं । जिस संकल्‍प पर फाइनेंशियल इम्‍पलीकेशन इन्‍वाल्‍व है उसमें गवर्नर का पार्ट होना जरूरी है और आपने भी हमें यह इम्‍प्रेशन दिया है कि हम इसको इन्‍क्‍लूड कर रहे हैं तब तो यह बात करें और हमसे बात नहीं करके आपको लाना है तो फिर पाइंट आफ आर्डर जिसको करना है ...(व्‍यवधान) बात खतम की जाए।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं ......

श्री अध्‍यक्ष: मैं पहले कह दूं फिर आप कहना, फिर कह देना। मैं जो इनसे कहना चाहती हूं स्‍थगन प्रस्‍ताव के जरिये इस मुद्दे को उठाया गया। स्‍थगन प्रस्‍ताव को एक महत्‍वपूर्ण विषय जानते हुए मैंने दो मिनट बोलने का समय दिया। उन्‍होंने अपनी बात कही और उसके ऊपर सरकार ने अपनी जिम्‍मेदारी समझकर कर्तव्‍य समझते हुए कि इस बारे में हमें कुछ करना चाहिए, इसलिए तो संकल्‍प ला रहे हैं । आज दिन तक कभी स्‍थगन प्रस्‍ताव के जरिए .....

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हम माफी चाहते हैं अध्‍यक्ष महोदय, don’t side track it. आपने हाउस एडजार्न किया है हमको बुलाया है अध्‍यक्ष महोदय ...(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, सरकार को अधिकार है, बहुमत है, सरकार का राज है जो चाहे जो व्‍यवस्‍था करे, कोई तकलीफ नहीं है लेकिन जो परम्‍परा थी आपके चैम्‍बर में हाउस एडजार्न होने के बाद आपने बुलाया है इससे कोई रेलेवेंसी नहीं है। इसलिए आप मेहरबानी करके सदन में यह परम्‍परा नहीं डालें। आप सीनियर पार्लियामेंटेरियन रहे हुए हैं।  आपको मालूम है कि संकल्‍प सरकार का बहुमत है सरकार चाहेगी जो निर्णय करेगी, सरकार चाहेगी जो बिल लाएगी....

श्री अध्‍यक्ष: आज दिन तक आया ही नहीं...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): लेकिन कम से कम आप इन परम्‍पराओं का निर्वहन नहीं करें। आप कष्‍ट करके यदि आपने चैम्‍बर में जिस स्पिरिट से हमको बुलाया है उसी भावना के अनुरूप हम आपसे निवेदन करना चाहते हैं कि आप के चैम्‍बर में माननीय मुख्‍यमंत्री जी दुबारा हमारे साथ तो मिली नहीं, आपके सामने उठकर गईं उसके बाद तो आईं नहीं। मैं समझता हूं यह अध्‍यक्ष महोदय, आप करेंगे तो हमें यह लेटीट्यूड दीजिए कि भविष्‍य में आपके चैम्‍बर में आकर प्रतिपक्ष को बात करने की आवश्‍यकता ही नहीं है, यह परम्‍परा डाल दीजिए आप बात खतम हुई। आपका बहुमत है आप मन में आए जो फैसला करिये ना फिर कहां तकलीफ आती है, किस बात की ....

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): सी पी साहब, माननीय मुख्‍य मंत्री जी ने सदन में यह कहा था कि इस विषय के ऊपर .....

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप बोल चुके, आपकी सारी शंका, आपको बोलने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): महावीर जी, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने यह कहा था कि हम चलिए यह मुद्दा बड़ा इम्‍पोर्टेंट मुद्दा है किसानों के हित का सवाल है और हम एक संकल्‍प लेकर आ रहे हैं यह बात हुई थी ।

श्री अध्‍यक्ष: हां।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): एक मिनट मेरी तो सुनें।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): संकल्‍प लेकर आते हैं , संकल्‍प था सरसों की खरीद के ऊपर भारत सरकार से यह मेरा मंतव्‍य जो मैं समझा था उसके बाद दो मुद्दे आपने और हमारे नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने ......

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके चैम्‍बर में बात हुई....

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): किसानों के कोआपरेटिव के ऋण हैं जो कि भरत सिंह जी ने मांग की थी , देखिए आप इस तरह से करेंगे, भरत सिंह जी की एक मांग थी कि किसानों के जो ऋण हैं कोआपरेटिव बैंक के भारत सरकार के अनुरूप जो भारत सरकार ने सात प्रतिशत कर दिया है तीन लाख तक के ऋण का उनकी भी ..

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह सरकार के ध्‍यान में है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): एडजार्नमैंट मोशन के अन्‍दर उसको भी आपने माना, डी ए पी की बात आई तो इन तीनों बातों को संग लेकर अगर आप हमें ड्राफ्ट दिखा देंगे तो ड्राफ्ट दिखाकर के जो सदन में पढ़ा जा सकता है तो ड्राफ्ट दिखाने के अन्‍दर कहीं कोई कठिनाई तो नहीं आनी चाहिए, कोई दिक्‍कत नहीं आनी चाहिए। आपने कृपापूर्वक तीन दफा सदन को डेढ़ घंटे के लिए स्‍थगित किया है तो एक आधे घंटे में या बीस मिनट के लिए आप कर दें एक दफा बैठकर बात हो जाए आपके चैम्‍बर में या मुख्‍यमंत्री जी के चैम्‍बर में बात हो जाए बैठकर कहीं दिक्‍कत तो नहीं है । एक नई परम्‍परा होगी।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): संकल्‍प का मतलब है ..

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): संकल्‍प जोआया है सदन के अन्‍दर संकल्‍प हमेशा प्रतिपक्ष को संग लेकर आया है । मेरा लम्‍बा पार्लियामैंट्री कैरियर है। मैंने बहुत जमाना देखा है । हमेशा संकल्‍प जो है दोनों पक्षों को लेकर आया है जब आम सहमति बनी है तब संकल्‍प आया है। इसके ऊपर बहस भी नहीं होती है। सब तरफ से समर्थन मिलता है ।

मेरा आपसे पुन: निवेदन है कि उस परम्‍परा को कृपया न तोड़ा जाए। संकल्‍प को हमें दिखा लें और निश्चित रूप से जनहित का संकल्‍प है, पारित करेंगे, सर्वसम्‍मति से पारित करेंगे इस सदन के अन्‍दर ।

 


vns/usc/15.40/2n/5.10.2006

 

और मैं  मुख्‍य मंत्रीजी से पुन: अनुरोध करूंगा कि डेमोक्रेसी के हित के अन्‍दर सदन की परम्‍पराओं के हित में कृपा करके आप यह स्‍वीकार करें और अध्‍यक्ष महोदय से आप कहें कि आधे घण्‍टे के लिये सदन को स्‍थगित करके पुन: आपसे बात कर लें, आपके चैम्‍बर में बैठकर संकल्‍प देख लें। कहां दिक्‍कत आ रही है इसके अन्‍दर ? आपने ही सुझाव दिया था ..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह आपकी डिमाण्‍ड पर ही तो संकल्‍प आया है। डिमाण्‍ड पर आया है संकल्‍प..(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): संकल्‍प वाली तो मंशा ही नहीं थी ..(व्‍यवधान)

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍यों की चिन्‍ता, मैं बार-बार सह कह रही हूं हम लोग सबको चिन्‍ता है और इश्‍यु जो उठाया गया था, जो हम लोग सबको आखिरी थी उस समय भी कि जो सरसों की खरीद के अन्‍दर पैसों की कमी हो रही है उसको बढ़ाने की, उसकी वृद्धि करने की जो बात हो रही थी उसके ऊपर हम लोगों ने यह तय किया था और हमने भी यह कहा था कि अगर आप लोग यह समझते हो कि इनप्रिंसीपल यह जो चीज होनी चाहिये तो हम लोगों को मिलकर उसमें संकल्‍प लाने में कोई प्राब्‍लम होनी नहीं चाहिये। अब आपने उसके अन्‍दर फिर कहा कि एक, दो इश्‍युज और हैं जिसके बारे में भरतसिंह जी ने बात उठायी थी और नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा क्‍योंकि फाइनेंस वाली बात है इसीलिये अपने को यहां लाने की जरूरत यानि बिना बातचीत किये हुए लाना नहीं चाहिये। मेरा तो सिर्फ इतना कहना है आप लोगों को कि किसानों की समस्‍याओं से सरकार पूरी तरह से सजग है। हम लोगों को उनके लिये चिन्‍ता लगी रहती है और हमने यह भी तय कर लिया है कि जो उद्योगपति हैं और शहर के जो निवासी हैं उनके लिये सस्‍ता कर्जा मिले और गांव वालों को सस्‍ता कर्जा नहीं मिले यह न्‍यायोचित नहीं है और इसीलिये कर्जे की दर की बात जो यहां उठायी गयी थी उससे तो कई दिन पहले हम लोगों ने यह निर्णय भी कर लिया था और किसानों को क्रॉप लोन का जो 75 परसेंट की दर से जो मिल रहा है यह आदेश हम लोगों ने कर भी दिये हैं। मुझे बड़ी खुशी है आपको बताते हुए तो हमारी तरफ से तो कोई कमी नहीं है। तो हम 11 परसेंट और 7 परसेंट की जो बात है वह हम लोगों ने तय भी कर लिया है और वह मामला हमने पास कर लिया है..(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अभी एक घण्‍टे पहले मंत्रि को पता नहीं है। एक घण्‍टे पहले बतायी है ना यह बात। सरकार को जानकारी नहीं है। एक घण्‍टे बाद मालूम पडा आपको और ताली बजा रहे हैं।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): माननीय सदस्‍य यह हम बताना चाहेंगे आपको कि वह चिन्‍ता हम लोगों को भी है ..(व्‍यवधान) आप सुन लें। जिस चीज के बारे में..(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपकी एक मिनट में मान लेते हैं। अध्‍यक्ष महोदय के चैम्‍बर में आपको जानकारी ही नहीं थी। आप एक मिनट में कह दो, मान लेते हैं हम। (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आपने सुनी नहीं।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): जिस चीज के बारे में आप चिन्‍ता कर रहे थे..(व्‍यवधान)

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): सदन की नेता खड़ी हैं पहले सुनो। प्रतिपक्ष के नेता का ध्‍यान रखते हो आप ?

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): मुझे खुशी से आपको यह बताना है कि वह आलरेडी पास हो चुका है और हम लोगों ने इस बात का निर्णय भी ले लिया है परन्‍तु अब बचा आपके शार्टेज आफ डी ए पी की बात है। डी ए पी के ऊपर शार्टेज की बात चल रही है उसके ऊपर तो मैं यहां यह कहना चाहूंगी क्‍योंकि इम्‍पोर्ट हुआ है व्‍हीट का इसकी वजह से आपके रेटस डाइवर्ट को रहे हैं और हमने तो चिट्ठी भी लिखी है केन्‍द्र सरकार को। हमने यह कहा भी है टेलीफोन के ऊपर और मैं ही आपको आग्रह करने के लिये कि हम उनको कहें कि यह रेलवे के रेटस वापस हम लोगों के डाइवर्ट कर दें ताकि हमारा जो खाद मिलना चाहिये वह सही समय पर हमारे किसानों को मिले ताकि उनकी स्थिति कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसी न बने। इसीलिये सही टाइम के दफपर हम लोगों को यह सब मिल जाए। साथ में जो लास्‍ट मामला है वह मामला आपका सरसों के समर्थन मूल्‍य का है। बस वही बचा है अगर उसके ऊपर आपको बैठकर कोई वर्डिंग के अन्‍दर कहीं कोई चेंजेज करने की जरूरत है तो मैं अध्‍यक्ष महोदय, समझती हूं कि उसको करने में कोई अपने को वह तो नहीं है। कर सकते हैं। कोई बात नहीं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, सदन की नेता ने बड़ी साफगोई से सारी बात रख दी। तीन-तीन इश्‍युज थे इसलिये यह पहले कापरेटिव लोन के बारे में जो फैंसला हुआ, जो सरकार पहले ही कर चुकी है। जो मांग आज कर रहा है, आज जागा है प्रतिपक्ष। उसकी मांग की पूर्ति मुख्‍यमंत्रीजी ने चिन्‍ता व्‍यक्‍त करते हुए पहले से ही कर दी और अब यह समर्थन..(व्‍यवधान) मैं समझता हूं इनको सबको मेज थपथपाकर यह ऐतिहासिक निर्णय हुआ है राजस्‍थान के इतिहास में..(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): दो घण्‍टे तक मालूम ही नहीं था आपको। काहे को हाउस एडजोर्न कराया आपने ? आज सरकार ऐसी अनभिज्ञ सरकार नहीं है कि दो घण्‍टे तक मालूम ही नहीं है और भाषण देने खड़े हो गये आप..(व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): कहीं नहीं है यह खबर।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): दो घण्‍टे पहले ही भी आपको जानकारी ही नहीं है और आप मंत्री बने हुए हैं..(व्‍यवधान) बहुत दुर्भाग्‍यपूर्ण स्थिति है कि पार्लियामेंट अफेयर मिनिस्‍टर को दो घण्‍टे पहले तक मालूम ही नहीं है। इससे बड़ा दुर्भाग्‍य और क्‍या होगा। सरकार को दो घण्‍टे पहले मालूम ही नहीं था कि हमने आर्डर निकाल दिया है। दो घण्‍टे बाद मालूम पडा है सरकार को इससे बड़ी और क्‍या स्थिति बनेगी इससे ज्‍यादा..(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हमें जानकारी थी। परन्‍तु आपकी बात पर रखकर नहीं किया है। यह आपकी बात पर नहीं किया..(व्‍यवधान) यह बात जो मुख्‍यमंत्रीजी ने फैंसला लिया है यह राजस्‍थान के किसानों की हालत पर लिया है, कोई इनकी बात पर नहीं लिया। इन्‍होंने तो बड़े-बड़े ..(व्‍यवधान) खड़ी कर दी.(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इससे ज्‍यादा सरकार की अकर्मण्‍यता नहीं हो सकती कि सरकार को दो घण्‍टे बाद मालूम पडा। ब्‍यूरोक्रेसी सूचना दे रही है आपको। काहे की पालिटिकल गगवर्नमेंट चला रखी है आपने..(व्‍यवधान)

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): पार्लियामेंट अफेयर मिनिस्‍टर साहब आप तरफदारी कर रहे हैं इतना कर दिया। क्‍या कर दिया ? कहीं अख़बार में नहीं आया..

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आप बोलने दो..(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): क्‍या बोलने दो। पालिटिकल गवर्नमेंट है कि ब्‍यूरोक्रेटिक गवर्नमेंट है। पालिटिकल है जिसको मालूम नहीं है कि दो घण्‍टे पहले तक आर्डर निकाल चुके हैं हम। दो घण्‍टे बाद मालूम पडा आपको। यह पालिटिकल गवर्नमेंट नहीं है, यह ब्‍यूरोक्रेटिक गवर्नमेंट है दो घण्‍टे बाद तो पता हुआ। जो आपको दो घण्‍टे पहले बताना चाहिये था कि हम घोषणा कर चुके हैं इससे बड़ा दुर्भाग्‍यपूर्ण स्थिति इस राजस्‍थान की नहीं हो सकती कि मंत्री इतना नाकरा हो। उनको मालूम ही नहीं है..(व्यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आपको यह ही पता नहीं है..(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मुझे टोकना नहीं चाहिये परन्‍तु किसान के पक्ष में इतना ऐतिहासिक फैंसला हुआ है वह भी नागवार गुजरा इनको। वह भी अच्‍छा नहीं लग रहा। राजस्‍थान का किसान..(व्‍यवधान)

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): मैं आपको सिर्फ इतना कहना चाहती हूं कि बहुत सारे डिसीशंस डेली सरकार राजस्‍थान के लोगों के हित के लिये करती है। हर चीज का डिसीशन यहां आकर किसी को खोलने की जरूरत नहीं है। वह डिसीशन हो गया है, कुछ दिन पहले ही हो गया है। मैं आपको अवगत करा रही हूं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): जब आपकी सरकार के केबिनेट मंत्री को मालूम ही नहीं है। आपके सहकारिता मंत्रीजी को मालूम ही नहीं है। खड़े होकर नहीं बोल सका, आप क्‍या बातें कर रहे हैं। इससे बड़ा दुर्भाग्‍यपूर्ण नहीं हो सकता। हाउस चल रहा था, आपके मंत्री को मालूम नहीं इससे बड़ा दुर्भाग्‍य क्‍या होगा..(व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): मैं जानकारी देने जा रहे था। मुझे जानकारी थी..(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): केवल हाउस को आप चलने नहीं दे रहे थे, हल्‍ला कर रहे थे, किसी की बात सुन नहीं रहे हो। आप किसी की बात सुनते ही नहीं हो, केवल अपनी बात कह रहे हैं। अध्‍यक्ष महोदय, इनको +++ है। (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, नाथद्वारा से आने वाले सदस्‍य को +++  है। न तो यह किसी की बात सुनने देते हैं, न खुद सुनते हैं, केवल आप ही थोड़े ही है इस हाउस के अन्‍दर..(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हम तो चैम्‍बर में जाकर मिले थे, हल्‍ला नहीं कर रहे थे। हम मुख्‍यमंत्रीजी के साथ चैम्‍बर में मिले थे, वहां भी नहीं बताया हमको। वहां भी नहीं कहा आपने। मुख्‍यमंत्रीजी से अध्‍यक्षजी के चैम्‍बर में मिले हैं वहां भी मुख्‍यमंत्रीजी ने नहीं बताया।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आज समस्‍या यह है..(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह दो घण्‍टे तक तो निर्णय ही नहीं कर पाये कि हम इस प्रस्‍ताव का समर्थन करें। दो घण्‍टे तक तो यह निर्णय ही नहीं कर पाये और इसके बाद यह कंडीशन लाये हैं..(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय संसदीय कार्य मंत्रीजी जब आपने यह फैंसला ले लिया..(व्‍यवधान) आप गुमराह हर रहे हो हाउस को..(व्‍यवधान) घटाकर इतना परसेंट कर दिया। अगर केबिनेट में फैंसला ले लिया तो कागज पर जारी करते..(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आज जो सारा मामला उठा है..(व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): जोशीजी, ऐसा है कि यदि खुद मुख्‍यमंत्रीजी ने अकेली ने फैंसला ले लिया तो आपको क्‍या तकलीफ हो रही है ?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):  तकलीफ यह है कि वह निर्णय दो घण्‍टे पहले बता देते तो हम धन्‍यवाद दे देते। हमें वह तकलीफ नहीं है। हम तो धन्‍यवाद देते ना इस पर।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): तो वह धन्‍यवाद अब दे दें।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हमें तकलीफ यही है सरकार पोपाबाई की सरकार नहीं है, कानून की सरकार है। कानून की सरकार कानून से चलती है।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौड़ (राज्‍य मंत्री, सिंचाई): आप उधर बात मत कीजिये। हमारे बहादुर मंत्रीजी बैठे हैं। उनकी तरफ इंगित मत करो।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): जोशीजी, आप किसके साथ टक्‍कर ले रहे हो..(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, इनको यह भी पता नहीं है कि सरकार का प्रोसीजर क्‍या है..(व्‍यवधान) और इस सदन में कोई गलतफहमी कर सकता है क्‍या..(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इनको मालूम नहीं है सहकारिता मंत्री को इससे बड़ा दुर्भाग्‍य नहीं हो सकता कुछ भी..(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): दो घण्‍टे तक तो यह निर्णय नहीं कर सके कि उनको इसका समर्थन करना है..(व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): अब धन्‍यवाद दे दो आप तो..(व्‍यवधान) 

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपने बहुत कह दिया..(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अब तो प्रतिपक्ष के नेता यह बता दो सहकारी बैंकों के ऋण की दरों में जो कमी है, सहकारी बैंक के ऋण के ब्‍याज की दरों में कमी की है उसके लिये आप धन्‍यवाद दे रहो हो कि नहीं ?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): काहे का धन्‍यवाद ?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उसके लिये नहीं दे रहे हो ?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह सरकार सिर्फ ब्‍यूरोक्रेसी के सहारे चल रही है। राजनेताओं को यह मालूम नहीं है, मंत्री को मालूम नहीं है वह। काहे हम धन्‍यवाद देते। यह सरकार राजनैतिक सरकार नहीं है। यह सरकार ब्‍यूरोक्रेसी की सरकार है..(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप अलग तरह का बोल रहे हैं))

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): जोशीजी, इनको नहीं मालूम है लेकिन यह आपके सामने तो जाहिर नहीं कर रहे। आपके सामने तो जाहिर नहीं होने दे रहे हैं कि इनको नहीं मालूम तो फिर आपको तकलीफ क्‍या है। धन्‍यवाद दो आप।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, वर्डिंग्‍स का सवाल है, आप देख लें मुझे कोई ऐतराज नहीं है। अभी माननीय मंख्‍यमंत्रीजी ने यह बात यहां सदन के अन्‍दर कहीं कि वर्डिंग्‍स के बारे में आप देख लें मुझे कोई दिक्‍कत नहीं है। मेरा बीच का आपको सुझाव है अभी जीरो आवर खतम नहीं हुआ है, आप जीरो आवर को कंटीन्‍यू करा दें तब तक हम जाकर बैठकर के इस वर्डिंग्‍स को देख लें।

श्री अध्‍यक्ष: श्रीमान, अभी तो उन्‍होंने केवल अपना डिसीजन बताया है। संकल्‍व जब आयेगा तो 306 यह उसकी छूट देनी पड़ेगी और छूट देने के बाद आयेगा। आप क्‍या कर रहे हो।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): फैंसला करना था वह तो हो गया। आप कहो केन्‍द्र सरकार का पार्ट है उस पर जो अपने को प्रस्‍ताव लेना है वह प्रस्‍ताव लेकर आये हैं अब इसमें आपको क्‍या करना है, इसमें तो विरोध की बात नहीं है। अब आपके प्रस्‍ताव पर जब हम इस बात पर स्‍वीकार कर रहे हैं..

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): बात को बढ़ा रहे हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हमने पहले ही कर दिया है और जो राजस्‍थान सरकार को करना था वह कर दिया। जो केन्‍द्र सरकार को करना है उसका प्रस्‍ताव देखना  चाहो देख लो। मैं दिखवाता हू आपको।

श्री अध्‍यक्ष: आप इनके बाद बोलो ताकि आवाज को मैं सुन लूं। वह जब चुप रहें तो बोलो आप।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपकी अनुमति से मैं यह बात कहना चाहता हूं..

 

श्‍याम/अरूण    5.10.2006   15.50(1)  2o 

 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा अनुरोध है कि प्रतिपक्ष की मंशा के अनुसार पहले से फैसला जो हो गया उसके बारे में मुख्‍यमंत्री जी ने घोषणा कर दी, नया फैसला नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप सुनें तो सही मंशा क्‍या है ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अब आप आज्ञा प्रदान करें, यह सरसों के समर्थन मूल्‍यों के बारे में राजस्‍थान का किसान चिंतित है, 115 रूपये भारत सरकार कम कर रही है। उसके लिये संकल्‍प लाये हैं और आप नियमों में शिथिलता देते हुए मुख्‍यमंत्री जी का नाम पुकारें ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): संकल्‍प की जरूरत नहीं है, आपका बहुमत है जो चाहे जो करें ...(व्‍यवधान) बहुमत तो मल्‍टीलेटरल होगा. It cannot be unilateral. आपके जो मन में आये ...(व्‍यवधान) जो आर्डर निकाला संकल्‍प मल्‍टीलेटरल होगा यूनिलेटरल नहीं होगा ...(व्‍यवधान)

श्री गुरजंट सिंह बराड़ (संगरिया): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है ...(व्‍यवधान) पहली दफा उन्‍होंने सोचा है भरत जी ने, हम उनको धन्‍यवाद देते हैं ...(व्‍यवधान) हम बैठे हैं, हम किसान के लिए बोलेंगे और बोलने के लिए ही यहां आये हैं ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपकी क्‍या बस की बात है ...(व्‍यवधान) बारह बज रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री गुरजंट सिंह बराड़ (संगरिया): आप यह बतायें कि किसान ने ...(व्‍यवधान) सात प्रतिशत या आज से तीन महिने पहले सी.एम.साहब ने उसका फैसला ले लिया।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): बारह बज गये बारह ...(व्‍यवधान)

श्री गुरजंट सिंह बराड़ (संगरिया): आज अगर सरसों का मूल्‍य घटाने का उन्‍होंने रख दिया, मैं तो उनका धन्‍यवाद देता हूं कि आप सारे लोग उनका समर्थन करें ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): चार बज रहे हैं सरदार जी, चार ...(व्‍यवधान)

श्री गुरजंट सिंह बराड़ (संगरिया): नीति बना रखी है जहां भी जायें किसानों की ...(व्‍यवधान) महावीर जी, एक मिनट, मेरी एक मिनट सुन लें आप।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): रखी है तो बता दें ...(व्‍यवधान)

श्री गुरजंट सिंह बराड़ (संगरिया): आप किसान का साथ नहीं देते हैं। अध्‍यक्ष महोदय, यह जहां भी जाते हैं चाहे वह कामरेड के साथ जाकर, कभी घड़साने में जाकर के झंडा खड़ा कर दिया, कभी हनुमानगढ़ में झंडा खड़ा कर दिया, कामरेड के साथ किसानों की मुखालफत करते हैं। लोगों को गलत गुमराह करते हैं ...(व्‍यवधान) और मैं आज आपको कहूंगा कि सदन को आज बहुमत से यह प्रस्‍ताव पास करना चाहिए कि हम किसान को जाकर के कह सकते हैं कि सारा सदन एक मत का है ...(व्‍यवधान) आज यह संकोच कर रहे हैं किसान से, मैं आदरणीय विपक्ष के नेता को विनती करूंगा कि आप बहुत बड़े किसान हैं, इसमें इनको पहल करनी चाहिए और यह विरोध कर रहे हैं। इस बात को यह सोचेंगे, चैम्‍बर में जायेंगे, किस बात को चैम्‍बर में जायेंगे आप ...(व्‍यवधान) फैसला करो सदन में आज, मेरी आपसे यही विनती है ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): बोलने तो दीजिये ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, कोई विषय ही नहीं बचा है। अब सिर्फ इतना सा है कि समर्थन मूल्‍य ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह इतनी गर्मायी मत करिये, इस हाउस को चल जाने दीजिये और यह तय करिये कि आप बड़े हैं कि सदन की नेता बड़ी हैं ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप गरिमामय पद पर ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): जब सदन की नेता महोदय ने कोई बात कह दी, आपको बीच में आग लगाने की ...(व्‍यवधान) यह क्‍या बात हुई।

श्री अध्‍यक्ष: प्रतिपक्ष के नेता खड़े हैं आप क्‍या बोल रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): बात तो सुनने दें ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): सदन की नेता महोदय ने कुछ कह दिया तो वह बीच में आग लगा रहे हैं ...(व्‍यवधान) कल भी आग लगायी है एक घंटे के लिए, आज भी इन्‍होंने आग लगायी है एक घंटे के लिए ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, यह माइक नहीं टूटे इसका इंतजाम करें ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, यह सारी एक्‍सरसाइज आपने ही करवायी है ...(व्‍यवधान) आपने कृपा करके भरत सिंह जी का प्रश्‍न स्‍वीकार कर लिया ...(व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): आज मूड में हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपने सुनकर के व्‍यवस्‍था दे दी कि दो मिनट वह बोल सकते हैं ...(व्‍यवधान) वह दो मिनट बोले, अच्‍छा बोले। सब बातें किसानों के हक में कहीं, उसका उत्‍तर इनको देना था, इनको उत्‍तर नहीं देने दिया पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर ने।

श्री अध्‍यक्ष: जोइंट रेस्‍पोंसिबिलिटी है ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सुनें मेरी बात ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या कह रहे हैं आप ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): पहले सुनें मेरी बात ...(व्‍यवधान) मैं देख रहा था सामने, सब मेरी आंखों के सामने हो रहा है ...(व्‍यवधान) यह गये वहां, उनको जाकर के क्‍या कहा, मुझे नहीं पता, चीफ मिनिस्‍टर के पास भेज दिया। वह वापिस आ गये, उनको उत्‍तर नहीं देने दिया। मैंने कहा कि इनसे उत्‍तर दिलायें, यह उत्‍तर देना नहीं चाहते थे बिना इनसे राय लिये।

श्री अध्‍यक्ष: यह पढ़ लो आप पहले, यह पढ़ लो आप पहले।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हां, वह है, सुनो आप। यह पढ़ाकर के वह यही तो करना चाहते हैं कि जो कुछ कर रहे हैं वह हम कर रहे हैं, हम कहते हैं कि जो कुछ करवा रहे हैं वह हम करवा रहे हैं ...(व्‍यवधान) झगड़ा इस बात का है कि जो कुछ आप कर रहे हैं वह हमारे दबाव की वजह से कर रहे हैं, क्‍योंकि भरत सिंह जी अगर वह प्रश्‍न नहीं उठाते ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): जब प्रतिपक्ष के नेता महोदय बोल रहे हैं ...(व्‍यवधान) प्रतिपक्ष के नेता महोदय बोल रहे हैं ...(व्‍यवधान) नेता महोदय खड़ी होंगी तो हम भी खड़े हो जायेंगे ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सुन तो लें ...(व्‍यवधान) यह जो संकल्‍प लाये हैं, इस संकल्‍प में यह दिखाना चाहते हैं कि यह सब हम ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप बोलेंगे तो हमको भी खड़ा होना पड़ेगा ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अब यह कह रहे हैं कि हमने कर दिया, क्‍या कर दिया, खाक कर दिया ...(व्‍यवधान) टट्टी कर दी आपने। क्‍या कर दिया ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अब कहते हो आप विरोध करते हो, खड़े होकर के कह दें कि किसान का समर्थन मूल्‍य जो सरकार घटा रही है, विरोध करो ना ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): क्‍या घटा रही है, आपको पता ही नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): करो ना विरोध ...(व्‍यवधान) करो ना विरोध ...(व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आग लगाते हो बैठे-बैठे ...(व्‍यवधान) आप तो अपनी राजनीतिक गोटियां सेकते हो वहां बैठे-बैठे ...(व्‍यवधान) आपकी नेता, मुख्‍यमंत्री जी ने यहां कह दिया है ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): सोयी हुई सरकार को कांग्रेस ने जगाया है ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): ब्‍याज की दर को कम किया ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं इस मामले में भरत सिंह दीगोद को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूं कि जिन्‍होंने इस मामले को यहां उठाया और अब  जो यह चारों तरफ से बहस हो चुकी है और उसके लिए मेरे ख्‍याल से विपक्ष भी तैयार है और पक्ष भी, अब फालतू में यहां राजनीति हो रही है ...(व्‍यवधान) मेरे ख्‍याल से तो अब ...(व्‍यवधान) वह भी तैयार हैं और यह भी तैयार हैं तो ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हां, राजनीति हो रही है, अभी राजनीति हो रही है ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): धन्‍यवाद भरत सिंह जी को दे रहे हैं हम तो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): राजनीति भी हो रही है ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): उन्‍होंने शुरूआत की है ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): राजनीति से ही देश चल रहा है ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप जनहित के मुद्दे की बात करने आये हो, राजनीति करने नहीं आये हो इस विधान सभा में राजनीति करो बाहर करो ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह छक्‍का है, रामनारायण जी यह छक्‍का है आपके ऊपर ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय मुख्‍यमंत्री जी, यह जो घोषणा करने वाली हैं इस संबंध में हमारे प्रतिनिधि हमारी पार्टी की तरफ से हमने नोमिनेट कर दिये थे आपके पास भेजे थे।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मान लो ना।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): बात तो सुनें आप ...(व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): उनको रोकिये ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मुख्‍यमंत्री जी, सबसे ज्‍यादा व्‍यवधान महावीर जी और राजेन्‍द्र जी इस सदन में करते हैं। यह चलने ही नहीं देना चाहते हैं इसको ...(व्‍यवधान) आप लोगों को बात संभालनी चाहिए उलटे आप आग लगाते हो ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैं अकेला ही काफी हूं आप सबके लिए ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में नहीं बोलें माननीय सरकारी मुख्‍य सचेतक ...(व्‍यवधान)  चूंकि प्रतिपक्ष के नेता  आप चैम्‍बर में नहीं आये थे तो मैंने सोचा कि आप बात को टालना चाहते हो औरों के जरिये इसलिए फिर बात करने की आवश्‍यकता नहीं समझी ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, यह कह रहे थे नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य कि नेता महोदय ने हमको आथोराइज्‍ड करके भेजा है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): वह मैंने आपको कनवे किया था।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह कनवे किया था आपको हमने ...(व्‍यवधान) यह कनवे किया था आपको हमने कि उन्‍होंने अधिकृत करके भेजा है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपके सेक्रेटरी पारीक जी को इतला करवायी थी कि हमारे चार प्रतिनिधि आ रहे हैं, अध्‍यक्ष जी को इतला करवा दें। उनके चैम्‍बर में मीटिंग होगी और उनकी अध्‍यक्षता में हो रही है, हम चार प्रतिनिधि भेज रहे हैं क्‍योंकि हमारी उधर रैली भी हो रही है।

श्री अध्‍यक्ष: आप क्‍यों नहीं पधारे ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): रैली में यह गये नहीं ...(व्‍यवधान) आप गये नहीं वहां ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उसमें आपको क्‍या दिक्‍कत है ...(व्‍यवधान) वह मेरी पार्टी ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आप वहां गये नहीं, आप इस डर से रैली में गये नहीं ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मेरी पार्टी है ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मूल्‍य पर विरोध किया है ...(व्‍यवधान) इसलिए उस डर से आप गये नहीं वहां ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): तो आपके पेट में क्‍यों दर्द हो रहा है ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): डर के कारण नहीं गये ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपके पेट में क्‍यों दर्द हो रहा है ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): वहां डर के कारण नहीं गये आप ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपके दर्द क्‍यों फैला ...(व्‍यवधान) आपके पेट में क्‍यों दर्द उठ रहा है ...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: यह सबक लिए बराबर है ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपके पेट में क्‍यों दर्द उठ रहा है कि मैं नहीं गया ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: पहले रूल्‍स को रिलेक्‍स करूंगी आप ऐसे कैसे पढ़ेंगी ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हां, 306 के तहत ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): जीरो ऑवर में, अध्‍यक्ष महोदय, इतना बड़ा फैसला है, आज तक जीरो ऑवर में कोई संकल्‍प आया है क्‍या ...(व्‍यवधान) जीरो ऑवर चल रहा है। उनका भाषण खत्‍म नहीं हुआ ...(व्‍यवधान) आप बीच में नया ...(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, ऐसे मत करिये ...(व्‍यवधान)

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): अगर संकल्‍प पारित होगा तो बहुत अच्‍छा मैसेज जायेगा राजस्‍थान की जनता में मैसेज जायेगा कि सभी मिलकर के राजस्‍थान के हितों को चाहते हैं। इसमें प्रतिपक्ष के नेता को क्‍या एतराज हो सकता है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मेरा आपसे निवेदन है कि अभी मुख्‍यमंत्री जी ने यहां कहा कि आप इस बात को देख लें ...(व्‍यवधान) मुझे शब्‍दों के बारे में कहीं दिक्‍कत नहीं है ...(व्‍यवधान) मेरा आपसे निवेदन है कि आप जीरो ऑवर चलने दें और हम भी तब तक देख लेते हैं। सदन भी स्‍थगित नहीं करना पड़ेगा। इसको देख लेते हैं उसके बाद संकल्‍प आ जायेगा, कहां दिक्‍कत है। संकल्‍प के लिए मना नहीं कर रहे हैं। संकल्‍प आप लाये आपका स्‍वागत है। संकल्‍प के विरोध में हम कहीं नहीं हैं. Let it be very clear. We are for sankalp. हम संकल्‍प चाहते हैं, संकल्‍प आये लेकिन अगर आप पुरानी परंपराओं का निर्वहन करें कृपया ...(व्‍यवधान) दवे साहब, प्‍लीज, नो कमेंट्री, आपने पानी के मामले में अपने चैम्‍बर में बुलाकर के स्‍वयं ने मीटिंग ली थी। आपने हमसे यह भी कहा था कि आप पंजाब चलने के लिए तैयार रहेंगे, आपमें से कुछ लोगों को लेकर के मैं पंजाब जाऊंगी ...(व्‍यवधान) आप निवेदन सुन लें, हम लोग तैयार थे कि आप जब कहेंगी हम चले चलेंगे। अभी मुख्‍यमंत्री जी ने स्‍वयं कहा, मुझे शब्‍दों के बारे में नहींख्‍बैठकर के देख लेते हैं, अगर आप अनुमति दें तो देख लेंगे। वैसे भी जीरो ऑवर चल रहा है। जीरो ऑवर आप चलने दें। बैठकर के इसको देख लेते हैं, कहां दिक्‍कत आ रही है इसके अंदर, अब जिद का सवाल है तो आसन को तो जिद पर नहीं आना चाहिए ...(व्‍यवधान)

 

जयगोविन्‍द/अरुण/5106/1600/2p

 

महावीरजी, मेरी आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि आप सबसे ज्‍यादा डिस ऑर्डर पैदा करते हैं इस सदन के अंदर। जब माननीय मुख्‍य मंत्रीजी खड़ी होती है तो रेयरली ही हमारी तरफ से कोई खड़ा होता है। हमारे नेता खड़े होते हैं, आप बीच में बहुतडिस्‍टर्ब करते हैं। यह परम्‍परा मत डालिए, यह अनुशासनहीनता होगी, अगर यह शुरू हो गया तो देखिए मुख्‍य मंत्रीजी की, सदन की नेता की एक गरिमा है।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): प्रद्युम्‍नसिंहजी, आपके नेता भी कुछ भाषा ऐसी बोल जाते हैं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): अब आपसे निवेदन है कि आप विराजे। आपने कल तो क्‍या भाषण दिया था और आप आप अपनी सफाई दे रहे हैं यहां पर, विराजो आप।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): नहीं, मैं हाथ जोड़कर आपसे निवेदन करता हूं कि आपके नेता भी तो अभी गुरूजंट सिंहजी बोले तो उसके अंदर कह दिया कि 12 बजे हुए हैं, कभी किसी की जाति पर कमेण्‍ट कर देते हैं कभी कुछ कह जाते हैं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): ...(व्‍यवधान)... इसको देख लेते हैं, इसमें कहां दिक्‍कत आ रही है। आप व्‍यवस्‍था दें कृपया, आप व्‍यवस्‍था दे दीजिए इसके ऊपर। ...(व्‍यवधान)... ।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): आप अपने नेताजी को भी समझा कर रखा करो।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप मुख्‍य मंत्रीजी के खिलाफ बोले थे उससे तो हमारे नेता ठीक ही बोलते हैं।

श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: अब क्‍या रह गया? आपने अपनी बात तो कह दी। ...(व्‍यवधान)... ऐसा है, आपने अपनी बात कह दी।

श्री भरत सिंह (दीगोद): मेरी बात पर ही तो पूरी बात चली है।

श्री अध्‍यक्ष: किसानों की बात समझते हुए, किसानों का नुकसान समझते हुए मैंने आपको इस बात की आज्ञा दी वरना स्‍थगन प्रस्‍ताव के जरिए मैं ना भी कर सकती थी। ...(व्‍यवधान)... अब आप क्‍या कहना चाहते हैं? सुनिए। संकल्‍प जीरो ऑवर के बाद आएगा, जीरो ऑवर खतम हो जाएगा उसके बाद संकल्‍प आएगा। अब आप विराज जाएं। ...(व्‍यवधान)... वह कैसे बोलेंगे? यह क्‍या तरीका है? यह बोल चुके हैं, जो बात आनी थी वह कह दी उन्‍होंने। श्री चन्‍द्रशेखर बैद।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय अध्‍यक्षजी, राजस्‍थान में चल रही जल ग्रहण योजनाओं के बारे जो भ्रष्‍टाचार व्‍याप्‍त है उसके बारे में मैं कुछ चीजें उजागर करना चाहता हूं। कल हमारे इस पावन सदन में बाढ़ के बारे में चर्चा हुई। यह चर्चा हुई कि बारह जिलों में भयंकर बाढ़ से कितने जान और माल की हानि हुई। इसी प्रकार राजस्‍थान के जो मरुस्‍थलीय जिले हैं जहां निरन्‍तर अकाल पड़ता है वहां केन्‍द्र सरकार ने 1993 में जल ग्रहण परियोजनाओं की शुरूआत की और इन जल ग्रहण परियोजनाओं के तहत विभन्‍न तरह की योजनाएं जिनमें ग्रामोथान योजनाएं हैं, जल संरक्षण योजनाएं हैं और जल संरक्षण से जुड़ी हुई विभिन्‍न एग्रीकल्‍चरल एक्टिविटीज हैं उसके अंदर पानी को कैसे रोका जाए, होर्टिकल्‍चर को कैसे डवलप किया जाए, छोटी-छोटी लघु सिंचाई योजनाएं कैसे बनाई जाए, इसका आरम्‍भ किया गया है और अभी 2003 के अंदर मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि तीन योजनाएं डीडीपी, डीपीएपी (ड्राट प्रोन एरिया प्रोग्राम) और इण्टिग्रेटेड वेस्‍ट लैण्‍ड डवलपमेण्‍ट प्रोग्राम, इन तीनों को मिलाकर हरियाली के नाम से नई योजना का प्रारम्‍भ किया गया है और इस योजना के अंतर्गत मैं आपके माध्‍यम से यह कहना चाहता हूं कि 1990 से लेकर 2006 तक राज्‍य में 24.75 लाख हैक्‍टेयर भूमि को इसमें लाभांवित किया जा चुका है और इसके अंतर्गत 10296 करोड़ रुपए केन्‍द्र सरकार की सहायता से खर्च किए जा चुके हैं। अब इसमें यह देखा जाए कि अपने इस राजस्‍थान राज्‍य में कितनी पंचायते हैं और कितने जिले इससे लाभांवित हो रहे हैं। मैं आपके माध्‍यम से यह कहना चाहेंगा कि अपने पूरे राज्‍य के अन्‍दर 208 पंचायतें इससे लाभांवित हो रही है और 4652 जल ग्रहण परियोजनाएं अभी क्रियान्वित की जा रही है। 7 दिसम्‍बर, 2004 को माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने स्‍वयं ने एक इसी तरह की योजना का सीकर में उद्घाटन किया था जिसकी लागत 2450 लाख रुपए थी। अब इस योजना के अंतर्गत जितनी भी योजनाएं पंचायतों को आवंटित की गई है उन योजनाओं में तकरीबन 30 लाख रुपए व्‍यय किए जा चुके है। इन 30 लाख रुपए में एक पंचायत में कई गांव शामिल करके लोगों को लाभांवित किया जाता है।

श्री अध्‍यक्ष: यह 30 लाख पाँच साल के लिए होते हैं।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): पाँच साल के लिए होते हैं तथा इसकी अलग-अलग राशि एक-एक साल के अंदर आवंटित की जाती है। मेरा आपसे निवेदन है कि इन 30 लाख रुपए से जो गांव के लोग लाभांवित होते हैं वह लाभांवित होने की जगह चूंकि इन योजनाओं में व्‍यय की जाने वाली राशि पर कोई अंकुश नहीं रह पाता इसलिए मेरा निवेदन है कि सरकार इस पर गम्‍भीरता से विचार करे और कोई ऐसा रासता निकाले जिससे कि इस पर खर्च की जाने वाली राशि पर अंकुश लगाया जा सके और वास्‍तव में राजस्‍थान की 4 करोड़ 22 लाख जनता जो गांवों में रहती है इससे लाभांवित किया जा सके, इसी बाबत कल मेरी माननीय मंत्रीजी से भी चर्चा हुई थी उन्‍होंने भी यह फरमाया कि इसके जो कानून कायदे हैं वह केन्‍द्र सरकार निर्धारित करती है हम इसके अंदर कुछ नहीं कर सकते, इसी बाबत यह जो केन्‍द्र सरकार के नियम हैं, वह मैं आपको चार लाइनें पढ़कर सुनाना चाहता हें जिससे यह क्‍लीयर हो जाएगा कि केन्‍द्र सरकार के कहने के बावजूद भी राज्‍य सरकार ने सम्‍पूर्ण अधिकार है कि इसकी इम्‍प्‍लीमेंटिंग एजेंसी में किस तरह से सह चेंज कर सकते हैं, “The Zila Parishads or the DRDAs shall normally be the authority competent to decide on the suitability, or otherwise, of the project implementing agency (PIA) for taking up the projects under the watershed development programme. However, the State Government may consider …..” The State Government may consider. “ …. changing the programme implementing agency in any of the projects.”

तो राज्‍य सरकार को सम्‍पूर्ण अधिकार दे रखे हैं कि इसमें व्‍यय की जाने वाली राशि में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार को रोकने के लिए प्रोग्राम इम्पिमेण्टिंग एजेन्‍सी को वह चेंज कर सकती है और प्रोग्राम इम्पिमेण्टिंग एजेन्‍सी के अन्‍दर जिन-जिन, जो-जो चैक पॉइण्‍ट लगाए हैं उन चैक पाइण्‍ट्स पर ऐसे कुछ अंकुश लगा सकती है जिससे कि इस योजना का सम्‍पूर्ण लाभ गांवों की जनता को मिल सके।

माननीय अध्‍यक्षजी, मैं आपके माध्‍यम से यह कहना चाहता हूं कि यह भ्रष्‍टाचार क्‍यों हो रहा है, इसका एक छोटा सा प्रमाण मैं प्रस्‍तुत करना चाहता हूं। 1993 से लेकर 2003 तक केन्‍द्र सरकार ने राज्‍य सरकार को उत्‍कृष्‍ट जल ग्रहण योजनाएं बनाने के लिए बारह बर पुरस्‍कार दिया और पिछले तीन सालों में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार को देखते हुए एक भी पुरस्‍कार नहीं मिला, यह इस बात का प्रमाण है कि इन योजनाओं में भ्रष्‍टाचार पर अंकुश लगाना निहायत ही आवश्‍यक है।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है। माननीय मंत्रीजी कुछ बोलना चाहें तो बोल दें। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह बहुत इम्‍पोर्टेण्‍ट मामला है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मेम, इस पर मेरे दस्‍तखत हैं।

श्री अध्‍यक्ष: वाटर शेड पर आपका नाम तो है नहीं, सी एस बैद और आठ अन्‍य।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): इस पर दस्‍तखत हैं मेरे।

श्री अध्‍यक्ष: देखें तो एक को ही बोलने की इजाजत देते हैं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): यह इतना महत्‍वपूर्ण मामला है।

श्री अध्‍यक्ष: दो मिनट में आपकी बात आ जाए।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): हां। इसमें बारह करोड़ रुपए आ चुके हैं 1993 से लेकर आज दिन तक। यहां के अधिकांश एम एल एज के यहां ये जल ग्रहण परियोजनाएं चल रही हैं, लेकिन किसी की कोई दखलंदांजी नहीं है न ही उनको जानकारी है। हम यहां बात कर रहे हैं इफेक्टिव कण्‍ट्रोल की। किसी न किसी रूप में आप इसमें विधायकों को शरीक कर देते हैं, भगवान जाने कौन कौनसी कमेटियां बनी हुई हैं, आपस में बैठकर वहां चुनाव कर लेते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: केवल घर वाले ही कर लेते हैं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): हां, आप स्‍वयं भुक्‍तभोगी हैं, आप हमारी व्‍यथपा को स्‍वयं कह रही हैं, घर-घर के लोग बैठकर चुनाव कर लेते हैं वहां बन्‍दरबांट हो जाती है, किसी को पता नहीं है।  It is a den of corruption. मेरा आपसे अनुरोध है कि कृपया आप निर्देश दें सरकार को और सरकार के मंत्रीजी से मेरा निवेदन है कि आप जिला परिषद के ऊपर इसको अकेले नहीं छोड़ें, जिला परिषद के मैम्‍बर्स को भी वह गांठते नहीं हैं, चुनाव कराकर वह स्‍वायत्‍त शासी संस्‍था बन जाती है अपने आप में, एक तरह के एन जी ओ बन गए, कई एन जी ओ अच्‍छा काम कर रहे हैं, लेकिन कई एन जी ओ इतना घोटाला कर रहे हैं सारे देश के अन्‍दर की जिसकी आप कल्‍पना भी नहीं कर सकते। मेरा आपसे निवेदन है कि आप हमारी पीड़ा को स्‍वयं आप अपने जिले में देख रही हैं, बारह हजार करोड़ रुपए, यह जनता का पैसा है। From 1993 to till date, the State Government has got Rs. 12,000 crores. ...(व्‍यवधान)... मैं गलत हो सकता हूं, सही कर दीजिए लेकिन हजारों करोड़ रुपए आए हैं। आप इसके ऊपर देखें।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, आप इसके ऊपर थोड़ा प्रकाश फरमा दें। ...(व्‍यवधान)... 

मोहन/अरूण/5102006/1610/2q

 

 

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य   ने जा मामला जल ग्रहण योजनाओं के बारे में यहां उठाया और यह कहा कि इसके ऊपर इम्‍प्‍लीमेंटिंग एजेंसी ऐसी हो जिसका अंकुश हो, मैं, इनका सुझाव अच्‍छा है, इनको धन्‍यवाद देता हूं। अध्‍यक्ष महोदय, इसमें मैं इतना कह सकता हूं कि पहले यह जल ग्रहण योजनाएं जब संचालित होती थी तो केवल मात्र वहां यूजर्स कमेटी बनाकर उनके माध्‍यम से काम होता था बाकी जिला परिषद् की किसी भी प्रकार की एजेंसी का इन पर कोई अंकुश नहीं था लेकिन अभी 2003-04 के अन्‍दर भारत सरकार ने जब हरियाली गाइडलाईंस दे दी और सब को हरियाली योजना के अन्‍तर्गत ले लिया, इन योजनाओं को, उसके बाद भारत सरकार ने यह कहा कि यह इन सब की इम्‍प्‍लीमेंटिंग एजेंसी चेंज करके अब पंचायतें कर दी। अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन यह करना चाहता हूं कि अब इसमें जो कमेटी बनेगी उसमें सरपंच और सरपंच के साथ साथ तीन विशेषज्ञ, एक कृषि विशेषज्ञ, एक पशुपालन विशेषज्ञ, एक इंजिनियरिंग का विशेषज्ञ और एक सामाजिक कार्यकर्ता, इस तरह चार आदमी इस कमेटी के मेम्‍बर होंगे और ये कमेटी भी अब पंचायत नहीं बनाएगी। इस कमेटी का अनुमोदन पंचायत समिति करेगी, यह हमने निर्देश देकर काम शुरू करवा दिया है। अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि जहां पहले कोई चेक तो था ही नहीं, उस जगह जिला परिषद्, पंचायत समिति का भी चेक है और जिला परिषद् के अन्‍दर हमने जल ग्रहण कमेटी भी बना रखी है, वह कमेटी भी इसके ऊपर चेक और बैलेंस करती है और इसके अलावा और फिर सरपंच हो या पंचायत तो कुल मिलाकर मेरा निवेदन यह है कि जो कुछ हमने अभी जो ये इनकी चेकिंग का जो सिस्‍टम बना रखा है, वह ठीक है और फिर भी उसमें कोई सुधार की कोई ...

श्री अध्‍यक्ष: आप तो यह बता रहे हैं कि विधायक को यदि आप इसमें सम्मिलित कर लें तो आपको क्‍या एतराज है ?

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): मैं पूरा कर दूं।

श्री अध्‍यक्ष: हां। तो क्‍या एतराज है ?

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने कल मुझे यह कहा था कि जल ग्रहण की जो कमेटी जिला परिषद् की है उसमें विधायकों को भी मेम्‍बर बनाया जा सकता है। मैंने कहा कि उसमें मेरे ख्‍याल से कोई दिक्‍कत नहीं आएगी, अगर आएगी तो हम भारत सरकार से परमिशन लेकर बना सकते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: तो फिर आपने सुना क्‍या, उन्‍होंने जो आर्डर पढ़कर बताया ?

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): नहीं, उसमें यह नहीं है कि कम से कम मेम्‍बर बनाएं, जल ग्रहण समिति के मेम्‍बर उन्‍होंने गाइडलाईन भी तय कर रखी हैं, पर उसके बावजूद भी अगर इन्‍होंने इम्‍प्‍लीमेंटिंग एजेंसी के बारे में कैसे इम्‍प्‍लीमेंट किया जाए, इस पर हमको सुविधा दी है तो उसका पूरा उपयोग करेंगे। मैं पूरे सदन को आश्‍वस्‍त करता हूं कि विधायकों को भी उसमें मेम्‍बर बनाने के लिए हम इसको ले लेंगे और निश्चित रूप से बनाएंगे।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): विचार करोगे तो सारा मामला हवा में उड़ जाएगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, एक आपने यह कहा कि 1993 से लेकर 2003 तक तो बहुत अच्‍छी संचालित हुई और इनाम भी मिला, पारितोषिक भी मिले और बाद में नहीं मिला। यह आपका कथन बिलकुल असत्‍य है। इस साल भी हमने भारत सरकार ने राजस्‍थान को प्रथम अजमेर के अन्‍दर एक वाटरशेड, उसको प्रथम पुरस्‍कार दिया है, इसके अलावा गत वर्ष भी दिया है। आप चाहोगे तो वह पुरस्‍कार कहां दिये हैं, क्‍या क्‍या उसमें दिया है, यह सारा मैं माननीय सदस्‍य को दे दूंगा। यह कहना गलत है कि 2003 के बाद में कोई इसमें काम नहीं किया, भ्रष्‍टाचार ज्‍यादा है, ऐसी बात नहीं है, भ्रष्‍टाचार तो, अध्‍यक्ष महोदय, इसके पहले ज्‍यादा था, 2003 से पहले क्‍योंकि इस पर कोई चेक नहीं था, यहां इम्‍प्‍लीमेंटिंग एजेंसी जो थी, वह यह मानते थे कि जैसे कोई हमारे ऊपर राजस्‍थान सरकार का नियंत्रण ही नहीं है, हम तो भारत सरकार से ही कार्य करवाने वाले हैं। इस तरह से मांग करके काम करवाने वाले थे। अब तो पंचायत के वार्ड पंच से लेकर जिला प्रमुख तक का भी चेक है और माननीय सदस्‍यों को मैं फिर आश्‍वस्‍त करता हूं कि हम इसमें आपको मेम्‍बर बनाएंगे और निश्चित रूप से आपका भी उसमें सहयोग रहे।

        एक माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी माननी प्रद्युम्‍न सिंह जी ने जो कहा कि घर घर में बैठ कर इस तरह की कमेटी बना लेते हैं। ये कमेटियां पहले यूजर्स कमेटी बनायी जाती थी उसमें गांव में जो बनाने वाले थे वह एक घर से भी हो सकते थे पर अब तो उसमें स्‍पेसिफाई कर दिया कि एक सरपंच के अलावा और कोई वहां लोकल आदमी होता ही नहीं, यह एक्‍सपर्टाइज उसी का रहेगा, वह कमेटी भी पंचायत समिति बनाएगी, न कि पंचायत बनाएगी इसलिए जो एक परिवार के लोगों को बनाने की जो ...

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या फर्क पड़ता है पंचायत कराएगी या पंचायत समिति कराएगी। ...(व्‍यवधान)...

श्री जितेन्‍द्र सिंह (अलवर): एक ही बात है, सरपंच बनाए या पंचायत समिति बनाए। येउ सारी बातें किताबों में अच्‍छी लगती हैं। अध्‍यक्ष महोदय, प्रेक्टिकल नहीं हो सकता यह।

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): कोई न कोई तो बनाएगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री जितेन्‍द्र सिंह (अलवर): यह कोई प्रेक्टिकल बात नहीं है। ...(व्‍यवधान)... अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रेक्टिकल में अच्‍छा नहीं लगता, यह पढ़ पढ़ कर बनाते हैं, यह अच्‍छा नहीं लगता है। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, यह सही नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: श्री अमराराम । कह दिया न कह तो दिया कि एमएलएज को बना देंगे।

श्री जितेन्‍द्र सिंह (अलवर): 5 परसेंट आप खाना और जितनों को जोड़ोगे तो सब खाते रहेंगे परसेंटेज और इसके द्वारा भ्रष्‍टाचार बढ़ता जाएगा।

श्री अध्‍यक्ष: तो एमएलए को नहीं जोड़ें ? आपका मतलब यही है क्‍या  कि एमएलए को नहीं जोड़ें, वह भी खाएगा। ...(व्‍यवधान)... कह तो दिया, आपने सुना नहीं ? कह दिया कि एमएलए को जोड़ेंगे उसमें।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपका कोई कंट्रीब्‍यूशन रहेगा क्‍या ? कोई कहीं कलम आपकी चलेगी क्‍या ? ...(व्‍यवधान)...

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): मेरा यही कंट्रीब्‍यूशन रहेगा कि आप लोगों को मेम्‍बर बनवाऊंगा। ...(व्‍यवधान)... अध्‍यक्ष महोदय  ने मुझे निर्देशित किया है और मैं बनाऊंगा, यह काम मैं करूंगा, यह मेरा कंट्रीब्‍यूशन होगा। आप इसमें और क्‍या कंट्रीब्‍यूशन चाहते हो और बता दीजिए।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप इसके अलावा और कुछ जोड़ दोगे क्‍या, यह बताओ।

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): भ्रष्‍टाचार को रोकने का प्रयास मैं करूंगा जितना मेरे से हो सकता है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप अगर जोड़ोगे तो हमें डर लगता है।

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): प्रतिपक्ष के नेता महोदय, आपको मेरे से क्‍यों डर लग रहा है ? मैं प्रतिपक्ष का नेता तो बनने से रहा, मेरे से क्‍यों डर रहे हो पता नहीं। ...(व्‍यवधान)...

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): जैसे प्रभुलाल जी सैनी ने बनाया था कृषि उपज मंडी में हमको मेम्‍बर वैसे ही तो नहीं बना दोगे ?

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से राजस्‍थान की इंदिरा कैनाल के प्रथम चरण के किसानों को जो उनके हिस्‍से का पानी मिलने की जो समस्‍या है इसके बारे में आपके माध्‍यम से सदन का और सरकार का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा कि 2004 में राजस्‍थान की इंदिरा कैनाल का प्रथम चरण के किसानों का संघर्ष हुआ और 11 दिसम्‍बर, 2004 को सरकार के साथ एक लिखित समझौता हुआ कि इसके अनुसार जो 14100 क्‍यूसेक्‍स की जो नहर है, प्रथम चरण का 8200 क्‍यूसेक्‍स और सैकण्‍ड फेज का 5900 क्‍यूसेक्‍स लगातार पानी मिलता रहेगा और इसके आगे के लिए एक स्‍थाई समिति बनाई जाएगी और जब तक यह लागू रहेगा तब तक समिति का नहीं आएगा लेकिन अध्‍यक्ष महोदय, जो 22 लाख परिवारों से संबंध जो प्रथम चरण का है, उस लिखित समझौते के बाद, जिस समझौते के पहले सरकार की ओर से वहां के 6 किसानों ने इस पानी की मांग के लिए सरकार की गोलियों के शिकार हुए, हजारों किसानों ने लाठियां खाईं और उसके बाद 11 दिसम्‍बर, 2004 को अजमेर जेल में राजस्‍थान की सरकार, एस.एन. थानवी जो सिंचाई सचिव हैं, उनका लिखित में यह समझौता है लेकिन इसके एक साल बाद फिर वहां के किसानों को आन्‍दोलन करना पड़ा क्‍योंकि जो सरकार ने 5.23 के हिसाब से 8200 क्‍यूसेक्‍स प्रथम चरण का पानी अलग करने का और अलग रेगुलेशन करने का जो लिखित समझौता किया था उसको लागू राजस्‍थान की सरकार ने नहीं किया और फिर वहां के किसानों को आन्‍दोलन करना पड़ा और वह आन्‍दोलन ही नहीं, इस पोंग डेम की फुल कैपेसिटी होने के बाद भी सरकार की अराजकता के कारण पानी का समान वितरण नहीं करने के कारण पिछली बार रबी की फसल में पुराने डेम की क्षमता के बाद भी रबी की फसल की आखिरी पिलाई के लिए हमारी राजस्‍थान की सरकार को केन्‍द्र सरकार और पंजाब की सरकार को निवेदन करना पड़ा और फसल की पकाई के लिए आखिरी पानी लेना पड़ा। और उससे पकाई और उसके बाद खरीफ की फसल की बुवाई 10 प्रतिशत भी नहीं हुई और इस साल तो फिर करीब करीब कैपेसिटी फुल होने के बाद सरकार ने अभी रेगुलेशन जारी किया कि 13 अक्‍टूबर से रेगुलेशन चालू होगा और 31 मार्च के बाद केवल पीने का पानी मिलेगा, डेम फुल होने के बाद केवल एक फसल होगी। दूसरी जो खरीफ की फसल है उसमें कोई बुवाई नहीं होगी, केवल पीने का पानी मिलेगा। इसका मूल मकसद यह है कि जो प्रथम चरण के किसान अपन हर साल जो 30 साल से पानी ले रहे थे उसको पूरा लेने की और जिस संघर्ष के कारण सरकार की जिस तरह दमनकारी नीति से सरकार को झुकना पड़ा।

Gpc/akt/05102006/1620/3a

 

उससे प्रथम फेज के किसानों से दुश्‍मनी निकालने का काम सरकार कर रही है क्‍योंकि जितना सिंचाई का पानी प्रथम फेज को मिलना चाहिए, जितना सेकण्‍ड फेज का है, प्रथम फेज का किसान कोई यह मांग नहीं करता कि सेकण्‍ड फेज का जितना पानी है वह प्रथम फेज को दे दिया जाए। उनका इतना ही समझौता था कि प्रथम फेज के रेजुलेशन को अलग कर दीजिए और मैं समझता हूं यह रेजुलेशन किया जाए तो एक नहीं दोनों फैसले हो सकते हैं। ड्रिंकिंग वाटर के लिए भी साफ लिखा हुआ है कि प्रथम चरण में जो योजनाएं हैं वह प्रथम चरण भोगेगा, सेकण्‍ड चरण में है वह सेकण्‍ड चरण भोगेगा और जो लोसेज होंगे वह भी दोनों चरणों के लोग भोगेंगे, लेकिन सरकार की मैं समझता हूं उस प्रथम चरण के किसानों की इस दमनकारी नीति से उसके बदले की भावना से वहां के किसानों को आज भी पिछले दो महीने से लगातार खाजूवाला, लूणकरणसर, घड़साना, रावला दो महीने से किसान इस बात के लिए पंचायतें करके सभा करके और आखिर में 30 सितम्‍बर को घड़साना में हजारों किसानों ने पूरे प्रथम चरण के रावला, घड़साना से लेकर रावतसर के किसानों ने एकजुट होकर यह पानी होते हुए भी हमारी फसल नहीं हो रही है इसके लिए मजबूर होकर सरकार द्वारा सुनवाई नहीं करने के कारण हमें मजबूर होकर उस घड़साना में उसी पानी के लिए छह किसानों ने अपने प्राण दिये थे। उन्‍हें फिर पड़ाव करना पड़ेगा, 10 अक्‍टूबर को पूरा रास्‍ता जाम करना पड़ेगा, इसलिए आज भी सरकार से आपके माध्‍यम से मेरा निवेदन है कि जो समझौता दिसम्‍बर, 2004 में किया हुआ है, आज दो साल हो गये उसको सही रूप से आज तक नहीं लागू किया गया और आज भी अगर पानी होते हुए किसान को नहीं मिलेगा, फिर किसान को आंदोलन में सड़कों पर आना पड़ेगा, मैं समझता हूं यह न राजस्‍थान की सरकार के हित में है और न किसान के हित में है क्‍योंकि राजस्‍थान की सबसे बड़ी परियोजना है, 1970-71 से लेकर आज तक सिंचाई होती आ रही है और इसी असफलता के कारण चार साल तक वे किसान तबाह हुए हैं। इसलिए मेरा आपके माध्‍यम से सरकार से एक ही निवेदन है कि सरकार ने न केवल 11 दिसम्‍बर, 2004 को बल्कि 8 सितम्‍बर, 2005 को अखिल भारतीय किसान सभा के सामने पूरे मंत्रिमण्‍डल और मुख्‍यमंत्री की मौजूदगी में यह कहा था कि जो दिसम्‍बर, 2004 में समझौता हुआ उसको पूर्ण्‍ं रूप से लागू करेंगे और उसे लागू करने में कोई कठिनाई आएगी तो किसान, मजदूर, व्‍यापार संघर्ष समिति के नेताओं के साथ सरकार वार्ता करेगी और सरकार की निष्क्रियता यह है कि एक साल से ज्‍यादा समय बीतने के बाद भी इसको लागू करने में सरकार जो कुछ कठिनाई महसूस करती है तो उस संघर्ष समिति के नेताओं के साथ सरकार ने जो वार्ता करने का वादा किया था 8 सितम्‍बर, 2005 को, आज अक्‍टूबर, 2006 में, 5 अक्‍टूबर है, लेकिन आज तक उनके साथ कोई चर्चा नहीं की गई है इसलिए आपके माध्‍यम से मेरा सरकार से एक ही निवेदन है कि जो राजस्‍थान की सरकार ने समझौता किया था उसको पूर्ण रूप से लागू करे और वहां के किसानों का जो असंतोष है उसको दूर करने का काम करे और राजस्‍थान के विकास के लिए उस असंतोष को दूर करके उनको पूरा उनके हक का पानी दिया जाएगा तभी वह असंतोष मिट पाएगा और किसान के हित में भी होगा और सरकार के हित में भी होगा। अगर सरकार नहीं करेगी तो किसान अपने खेत को तबाह होते हुए नहीं देख सकता, इसके लिए सड़कों पर आएगा, संघर्ष होगा, वह अनहोनी घटना दुबारा न हो मैं इस बात के लिए आपसे निवेदन करना चाहता हूं।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): अध्‍यक्ष महोदय, इसमें मैं एक बात मेरी भी निवेदन करना चाहता हूं ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: प्रथम चरण के किसानों की पैरवी करने वाले तो बहुत हैं आपको तो उनकी पैरवी करनी चाहिए जहां पानी नहीं है, जहां पानी पहुंचना चाहिए।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसी में एक बात निवेदन करना चाहूंगा ..(व्‍यवधान).. माननीय मंत्री महोदय, अभी जो रेजुलेशन तय किया गया 27 तारीख को जो मीटिंग हुई थी इसमें तय किया गया कि दो ग्रुप बनाये जाएंगे, लेकिन आज मौके पर वहां तीन ग्रुप बनाये गये हैं। तो फिर काश्‍तकार को 21 दिन के बाद में पानी मिलेगा।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं इस संबंध में निवेदन करना चाहता हूं, अमराराम जी की ईमानदारी पर कोई संदेह नहीं है, लेकिन इनकी पार्टी वहां पर जो कर रही है और चाहे सरकार की मंशा है दोनों की एक जैसी ही है।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): मंत्री महोदय, अभी जो रेजुलेशन तय किया गया है वह जो तय किया गया है उससे अलग पेश किया गया है।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): सरकार भी नहीं चेत रही और आपकी पार्टी के जो वहां के नेता हैं वे भी इसी स्‍तर के हैं।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी कुछ बोलने जा रहे हैं।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): आपने तो उल्‍टा उनको छुड़वा लिया यहां, नहीं तो पड़े सड़ते जेल में वे।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी बोल रहे हैं।

श्री अमराराम (धोद): यह सरकार का लिखा हुआ है, मेरा लिखा हुआ नहीं है।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): यही टीटी साहब चुनाव से पहले ..(व्‍यवधान).. ये आते-जाते थक गये थे और अब इनको कोई याद नहीं आ रहा। जब दुबारा मरेंगे या कुछ होगा फिर दूसरे मंत्री यहां से भागेंगे और वे सर्किट हाउस के सारे कमोड भर देंगे। इनको लेना, न कुछ देना।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य ने 11 दिसम्‍बर, 2004 को केन्‍द्रीय कारागृह, अजमेर में जो समझौता श्री हेतराम बेनीवाल, वल्‍लभ कोचर, साहिबराम पूनिया के साथ राजस्‍थान के शासन सचिव श्री एस.एन.थानवी के साथ हुआ उसका जिक्र किया। पहले तो माननीय सदस्‍य को और सदन को मैं आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि जो भी यह समझौता है अक्षरश: इसका पालन कर दिया गया है। इसका एक-एक कंटेंट मैं सुना दूं, इसमें बहस क्‍या करो, आप कहीं भी ले जाओ कोर्ट कचहरी में अगर पालना नहीं की तो। मेरा निवेदन यह है कि न तो इसको पढ़ते, न लिखते केवल जनता को वहां भ्रमित करने की कोशिश करते हैं। इसको मैं पढ़कर सुनाता हूं। ‘’पौंग डेम से इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र के प्रतिवर्ष मिलने वाले कुल पानी 14100 क्‍यूसेक की क्षमता वाली नहरों हेतु पानी का वितरण यथा प्रथम चरण की 8200 क्‍यूसेक तथा द्वितीय चरण की 5900 क्‍यूसेक की क्षमता वाली नहरों के माध्‍यम से प्रथम चरण में 5.23 क्‍यूसेक प्रति हजार एकड़ तथा द्वितीय चरण में 3.00 क्‍यूसेक प्रति हजार एकड़ के हिसाब से पानी दिया जाता रहेगा। इसी अनुपात से पानी आवश्‍यकतानुसार घटता-बढ़ता रहेगा। पीने का पानी आवश्‍यकतानुसार बता रहा हूं जारी रहेगा। अब इसका मतलब अगर आपको मैं एक-एक समझाऊं कि यह नहरों की क्षमता वाटर अलाउंस 5.23 क्‍यूसेक प्रति हजार एकड़ और 3 क्‍यूसेक प्रति हजार एकड़ के अनुसार पानी मिलना चाहिए वह मिल रहा है।

दूसरा, यह है कि यह तो हमने इसको जारी रखा नहीं तो आज जो प्रतिपक्ष में बैठे हैं पहले सरकार में थे उन्‍होंने उस समय मंत्रिमण्‍डल से फैसला कर दिया था कि प्रथम चरण का वाटर अलाउंस 5.23 क्‍यूसेक के स्‍थान पर प्रति हजार एकड़ के स्‍थान पर 3.5 एकड़ प्रति हजार रहेगा। इसको हमने कम नहीं किया और हमारा समझौता भी यही है इसलिए यह अक्षरश: बार-बार प्रचारित करना मैं उचित नहीं मानता हूं और एक नागरिक की हैसियत से जो हमारी जिम्‍मेदारी बनती है और एक विधायक की हैसियत से जिम्‍मेदारी बनती है जनता में कम से कम सही बात जानी चाहिए।

नम्‍बर दो, राज्‍य सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि सिंचाई हेतु उपलब्‍ध पानी सभी काश्‍तकारों को विशेष रूप से अंतिम छोर के काश्‍तकारों को समान रूप से निरन्‍तर मिलता रहे इसके लिए भी हमने बराबर प्रयास किया है और मैं यह दावे के साथ कह सकता हूं टेल एंड के काश्‍तकार हैं इन दो सालों में पानी मिला है उससे पहले पानी नहीं मिला उससे ज्‍यादा पानी मिला है। इसी का नतीजा है कि आज उस क्षेत्र के अंदर जो मस्‍टर्ड की बम्‍पर क्रोप हुई है और वसुंधरा जी जैसी मुख्‍यमंत्री है जिन्‍होंने हिम्‍मत करके ढाई-ढाई हजार करोड़ की सपोर्टिंग प्राइस पर खरीदी है। आज तक देश आजाद होने के बाद कोई भी रिकार्ड बता दें हमें कि इतनी कीमत की फसलें कभी भी इस राजस्‍थान में खरीदी गई हो। जब हम प्रतिपक्ष में थे राजस्‍थान में बाई दी वे मानसून ठीक हो गया, बाजरा पैदा हो गया उसको भी सरकार नहीं खरीद सकी थी। इसलिए दूसरे नम्‍बर की भी हमने पालना की है।

तीसरा है इस वर्ष डेम में जल की अत्‍यधिक कमी को देखते हुए राज्‍य सरकार विशेष प्रयास कर 12.12.04 के बाद तीन सप्‍तरोजा बारी उपलब्‍ध कराएगी। यह हमने करा दिया, उस समय की बात है। दोनों चरणों का वितरण जन-प्रतिनिधियों की अलग-अलग कमेटी तय करेगी जिसकी अध्‍यक्षता प्रथम चरण के लिए मुख्‍य अभियन्‍ता (उत्‍तर) हनुमानगढ़ तथा द्वितीय चरण के लिए मुख्‍य अभियन्‍ता, इंदिरा गांधी नहर, जैसलमेर करेंगे। इनकी मीटिंग करा दी गई है, यह काम बदस्‍तूर जारी है। राज्‍य सरकार उपायुक्‍त की एक समिति का गठन करेगी जिसमें सिंचाई, कृषि विशेषज्ञ तथा अन्‍य के साथ किसान संघर्ष समिति के चार प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह कमेटी भी गठित कर दी गई है। इसमें श्री हेतराम बेनीवाल, श्री वल्‍लभ कोचर, श्री साहिबराम पूनिया, श्री लेखासिंह को सदस्‍य बनाया गया। समिति की बैठकें हुईं और उसमें इन्‍होंने जान-बूझकर भाग नहीं लिया, मैं यही कहूंगा। अभी जो पानी की स्थिति है, माननीय सदस्‍य बिजली में ज्‍यादा एक्‍सपर्ट हैं, पानी के मामले में आपका इतना ज्‍यादा तजुर्बा नहीं है इसलिए पोंग डेम के लेवल से आप जैसी बातें करके गुमराह करें तो यह भी उचित नहीं है।

 

Skp/akt/05102006/1630/3b/1

 

एक पोंग डैम भरने से काश्‍तकारों को पर्याप्‍त पानी नहीं मिलेगा। इनके जो इन-फ्लोज होते हैं, साल भर पानी आता रहता है बर्फ पिघलती रहती है उनसे उनको जोड़ने के बाद में यह सारा कैल्‍कुलेशन हमने 20 मई आयेगी तब तक हमारा डिप्‍लीशन पीरियड उसके हिसाब से कैल्‍कुलेट किया। अगर कभी बैटर इन-फ्लोज हुए तो इसमें प्रावधान रख दिया है रेगुलेशन में कि नवम्‍बर के आखिरी सप्‍ताह में वापस री-असेस करके अगर पानी सरप्‍लस होगा तो और किसानों को दिया जाएगा।

  इसके अलावा गत साल की बात का भी जिक्र किया है। अध्‍यक्ष महोदय, गत साल इसीलिए आई थी कि हमने जो इन-फ्लोज कैल्‍कुलेट किये थे उसके हिसाब से इनफ्लो नहीं होने की वजह से आखिर में पानी का संकट आया। तब हमने हमारे सभी माननीय सदस्‍यों ने चाहे पक्ष या प्रतिपक्ष किसी भी पार्टी के हों, हमने भी यह रिक्‍वैस्‍ट की कि राजस्‍थान की उन नहरी क्षेत्रों की समस्‍या के समाधान का सवाल है, हम सब सबने मिलकर माननीय मुख्‍य मंत्री जी के नेतृत्‍व में एक संकल्‍प पास किया है, वहाँ पर बातचीत की और उस हिसाब से और पानी लेकर के हमने हमारे किसानों की व्‍यवस्‍था की। इसके लिए मुख्‍य मंत्री जी का और मैं आप सब का भी बहुत-बहुत आभारी हूं।

  अभी माननीय सदस्‍यों ने कहा कि रेगुलेशन आपने तीन में से एक किया। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक बात जरूरी है, रेगुलेशन हमारा तीन ग्रुप में से एक ग्रुप का 11 तारीख को खत्‍म होगा और 11 तारीख के बाद 12 तारीख से हमने चार में से दो ग्रुप चला दिये। अभी टेम्‍परेचर भी बहुत हाई है। अध्‍यक्ष महोदय, 40 डिग्री के लगभग टेम्‍परेचर है। मैं आपको आश्‍वस्‍त कराता हूं कि किसानों की बिजाई भी होगी और फसल पकाने के लिए पानी की व्‍यवस्‍था भी सरकार अपने प्रयास से करेगी। मैं तो आपके माध्‍यम से यही कहना चाहता हूं कि हमने जो समझौता किया है राजस्‍थान की सरकार ने केन्‍द्रीय कारागार, अजमेर में उसकी अक्षरश: पालना की गई है। एक-एक माननीय सदस्‍य को शंका है तो मैं और बता सकता हूं। मैं तो आप सबसे यही अनुरोध करना चाहता हूं कि जो गलतफहमियां उस क्षेत्र में फैलाई जा रही हैं, किसानों को जिस नाम से गुमराह किया जा रहा है उसका आपको सही प्रचार करना चाहिए। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): ..... पूरा डैम है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: विस्‍तार से मंत्री जी ने जवाब दे दिया है अब उसके बारे में कोई और प्रश्‍न पूछने की मैं अनुमति नहीं दूंगी। (व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने जवाब सही नहीं दिया है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सही नहीं दिया?

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): नहीं।

श्री अध्‍यक्ष: अब जैसा दिया वैसा दिया। (व्‍यवधान) धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपके सब प्रश्‍नों का जवाब दे दिया। (व्‍यवधान) अब और कोई शंका है तो आप और नियमों में आइये। (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ....... लोगों को गुमराह करने से काम नहीं चलेगा। (व्‍यवधान) मैंने हमेशा कहा है कि कोई भी शंका समाधान हो, संघर्ष समिति बात करना चाहती है तो सरकार के दरवाजे खुले हुए हैं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आसन पाँव पर है।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): मंत्री जी, आप क्‍यों चिल्‍लाये जा रहे हो? (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): गंगानगर के दौरे पर भी हमने कहा और आज भी आपको आश्‍वस्‍त करता हूं कि अगर किसी प्रकार की शंका है...... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आसन पैरों पर है। आप विराज जाएं। (व्‍यवधान) मंत्री जी, आपने जवाब पूरा उनको दे दिया है। (व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): ....न तो उनको पानी दिलवाना है। (व्‍यवधान) जब आपके भी समझ में नहीं आ रहा है तो क्‍यों..... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: गंगानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, अगर आपकी इजाजत हो तो एक निवेदन कर दूं।

श्री अध्‍यक्ष: नो-नो। जब मैं खड़ी हूं....

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आप यह कह दीजिये कि इजाजत नहीं दूंगी तो बैठ जाऊंगा।

श्री अध्‍यक्ष: हां, नहीं दूंगी।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आप कह कर, आपने यह कहा था कामां के बारे में कि आप बाद में कह देना। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: पहले मुझे आप प्रक्रिया के नियम करने दीजिये उसके बाद आप जो कुछ कहना हो वो कहियेगा।

  प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत जो सूचनाएं प्राप्‍त हुई हैं, मैं पढ़कर सु     ना देती हूं लेकिन आज इसे पढ़ा हुआ मान लिया जाएगा। पढ़ दिया, मान लिया जाएगा। अब सवाल आता है पर्ची का। पर्ची हमेशा दी जाती है किसी रीसेंट आकरेंस पर कि कोई बहुत अविलम्‍ब घटना हो, बहुत तुरंत की घटना हो, उस पर दी जाती है। माननीय सदस्‍यों ने अपने ही प्रतिनिधियों ने अपनी ही सुविधाओं के बारे में पर्चियां दी हैं। चारों पर्चियां एक ही हैं। मैं चाहूंगी मुख्‍य मंत्री जी से कि मुख्‍य मंत्री जी इस सम्‍बन्‍ध में, आपने जो 4-5 सदस्‍यों ने दिया है, आप कमेटी बना लें, मुख्‍य मंत्री जी से मिल लें, मुख्‍य मंत्री जी से इस बारे में....

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): अध्‍यक्ष महोदय, इस मामले में सभी विधायकों की पीड़ा एक ही है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बीच में नहीं। बैठिये तो सही अब आप। आसन पैरों पर है और आप खड़े हो जाते हैं।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): नहीं, मेरी पर्ची नहीं है वैसे तो। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आसन पांव पर है न।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): मैं बैठ गया।

श्री अध्‍यक्ष: तो इस सम्‍बन्‍ध में मुख्‍य मंत्री जी से मिल लें, उनसे मेरी बात हो गई है। वो जितना आपको सुनकर जो कुछ सुविधाओं के बारे में कर सकेंगी वह उन्‍हें सौंप दिया है।

  अब मैं राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियम 306 के अन्‍तर्गत उस नियम को निलम्बित करते हुए मुख्‍य मंत्री जी से निवेदन करूंगी कि वो अपना संकल्‍प प्रस्‍तुत करें।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय नेता महोदया, क्षमा चाहूंगा एक मिनट के लिए। एक मिनट के लिए प्‍लीज। अध्‍यक्ष महोदय, हम अपनी बात ही मुख्‍य मंत्री जी को नहीं कहेंगे तो मुख्‍य मंत्री जी विचार कैसे करेंगे? (व्‍यवधान) हम बतायेंगे कैसे मुख्‍य मंत्री जी को? (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: काहे पर बोलना चाहते हैं आप? क्‍या मंशा है आपकी? (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): हमारी तकलीफ है। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): पर्चियां हैं जो हमारी। बात ही नहीं कहेंगे तो मुख्‍य मंत्री जी को कैसे पता चलेगा। (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, जो तकलीफ है वो ही निवेदन करना चाहता हूं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): हमारी पर्ची निकली है।

श्री अध्‍यक्ष: जन प्रतिनिधियों की प्रोटोकाल एवं अन्‍य सुविधाओं के बारे में मैंने कह दिया है मुख्‍य मंत्री जी को कि कमेटी बना दीजिये वो कमेटी मिल लेगी मुख्‍य मंत्री जी से और मुख्‍य मंत्री जी इस सम्‍बन्‍ध में कुछ करके आपको बता देंगे।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, थोड़ा दो मिनट का समय तो दे दें।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): हम अपनी बात ही नहीं कहेंगे तो मुख्‍य मंत्री जी क्‍या कहेंगी? (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप सुविधाएं मांग रहे हो। (व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): अध्‍यक्ष महोदय, यदि आपकी सुविधाएं आज छीन ली जाए तो जरूर आप परमिशन देंगी। (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, आपकी सुविधाएं भी छिन जाए तो आज ही आप परमिशन दे देंगी। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़):  विधायकों के लिए नहीं है। मेरी पर्ची जन प्रतिनिधियों के लिए है एम एल ए के लिए नहीं है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष : लीडर ऑफ द हाउस खड़ी हैं। (व्‍यवधान)

संकल्‍प : शासकीय भारत सरकार द्वारा सरसों की खरीद का समर्थन मूल्‍य बढाने विषयक

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विधान सभा का यह सदन संकल्‍प करता है कि राजस्‍थान के किसानों के व्‍यापक हित को देखते हुए और राजस्‍थान की जलवायु, भौगोलिक स्थिति और जल संसाधनों को मद्देनजर रखते हुए अधिकांश क्षेत्र में वह जिंस बोये जाते हैं जिनमें कम से कम पानी की आवश्‍यकता है। इन्‍हीं कारणों से राजस्‍थान में करीब 27 से 30 लाख हैक्‍टेयर में सरसों की बुवाई होती है। देश में तिलहनों की कमी को दूर करने के लिए भारत सरकार द्वारा भी तिलहनों की खेती के लिए अनेक कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं एवं उचित समर्थन मूल्‍य निर्धारण किया गया है ताकि कृषक को उसकी लागत के प्रतिफल में उचित मूल्‍य प्राप्‍त हो सके। भारत सरकार की पहल को आगे बढ़ाते हुए राज्‍य सरकार ने रबी 2005-06 में सरसों की उत्‍पादकता बढ़ाने हेतु टार्गेट 20+ का कार्यक्रम चलाया जिसमें बहुत अच्‍छी सफलता प्राप्‍त की है। वर्षा की कमी और जल संसाधनों की कमी को देखते हुए सरसों के लिए इस वर्ष 27 लाख हैक्‍टेयर का लक्ष्‍य रखा गया है। भारतवर्ष की कुल सरसों के उत्‍पादन का 45 प्रतिशत उत्‍पादन राजस्‍थान में हो रहा है। इस प्रकार सरसों के उत्‍पादन में राजस्‍थान अग्रणी राज्‍य है। वर्ष 2006 में सरसों का समर्थन मूल्‍य 1715 रुपये प्रति क्विंटल था। कृषि लागत मूल्‍य आयोग ने अब 2007 के लिए इसको घटाकर 1600 रुपये प्रति क्विंटल करने का सुझाव दिया है। किसानों की बढ़ती लागत यानी बीज, पानी, खाद को देखते हुए मूल्‍य घटाना राजस्‍थान के कृषकों के हित में नहीं है। राजस्‍थान में किसानों को रेलवे रैक्‍स के अभाव में आवश्‍यकतानुसार डी ए पी और यूरिया उपलब्‍ध नहीं हो पा रहा है। इस वर्ष गत वर्ष के मुकाबले दो लाख मैट्रिक टन उर्वरक की अधिक आवश्‍यकता होगी। अभी राजस्‍थान में फसल बुवाई का कार्य तेजी से चल रहा है और इसमें लगभग साढ़े तीन लाख मैट्रिक टन डी ए पी की तत्‍काल सम्‍पूर्ण प्रदेश में भिजवाये जाने की आवश्‍यकता है। अत: राजस्‍थान विधान सभा का यह सदन भारत सरकार से अनुरोध करता है कि भारत सरकार द्वारा सरसों की खरीद का समर्थन मूल्‍य यथावत ही नहीं, अपितु बढ़ाकर 1800 रुपये प्रति क्विंटल करने की आवश्‍यकता है। साथ ही राजस्‍थान में रबी 2006-07 के लिए किसानों को उर्वरक समय पर उपलब्‍ध कराने के लिए रेलवे रैक्‍स की व्‍यवस्‍था भी सुनिश्चित किये जाने की आवश्‍यकता है। यह सब पूरे सदन की ओर से हम लोगों ने संकल्‍प पारित किया है। मैं सब माननीय सदस्‍यों को धन्‍यवाद देना चाहती हूं और मैं विश्‍वास करती हूं.....

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, पारित नहीं हुआ, आपने प्रस्‍तुत किया है। मुझे बोलने दें।

  प्रश्‍न यह है कि सरसों, खाद एवं उसके मूल्‍य के सम्‍बन्‍ध में जो संकल्‍प मुख्‍य मंत्री जी ने प्रस्‍तुत किया है उसे सर्वसम्‍मति से पारित किया जाए?

(स्‍वीकृत)

प्रस्‍ताव सर्वसम्‍मति से पारित किया गया।

 

vkj/akt/1640/3c

 

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, आपने कह दिया कि अपनी सुविधाओं के लिए पर्ची दी है। हम कोई बजट नहीं मांग रहे हैं, कोई पैसा नहीं मांग रहे हैं। प्रोटोकोल से सम्‍बन्धित काफी बातें हैं जो कि अध्‍यक्ष महोदय, आप अगर इजाजत दें तो मैं निवेदन करना चाहूंगा। (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, प्रोटोकोल के मामले में राजस्‍थान विधान सभा के सदस्‍य को चीफ सेक्रेटरी से ऊपर का दर्जा दिया गया है पर अध्‍यक्ष महोदय, हालत यह है कि....

श्री अध्‍यक्ष: सुनिये, इस प्रोटोकोल के बारे में, सुविधाओं के बारे में जैसाकि मैंने कहा, आप 5-7 अपने माननीय सदस्‍यों की एक समिति बना दें, वह समिति मुख्‍य मंत्रीजी से मिलेगी और मुख्‍य मंत्रीजी से मिलकर....(व्‍यवधान) समय समाप्‍त होने के बाद, जीरो आवर समाप्‍त हो गया।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, जो बात है वह बात तो सुनो।

श्री अध्‍यक्ष: यह कहकर आप क्‍या चाहते हो?

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): मैं कोई सरकार के खजाने पर वज़न नहीं बढ़ाऊंगा। अध्‍यक्ष महोदय....

श्री अध्‍यक्ष: वह सुन ही नहीं रही हैं, मैं किसे सुनाऊं? वह सुनें तब न।

पर्ची के माध्‍यम से उठाये गये मुददेविधायकों को प्रोटोकोल अनुसार सुविधायें दिये जाने विषयक

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): इनके कान बहुत हैं। सब तरफ से इनको सूचना मिलती है चाहे कुछ भी बोलो। पत्‍ता भी हिलता है तो मुख्‍य मंत्रीजी को पता लग जाता है, इतना तो मैं पढ़ा-लिखा जरूर हूं। अध्‍यक्ष महोदय, प्रोटोकोल में चीफ सेक्रेटरी से ऊपर दर्जा दिया है और हालत यह है कि जब सचिवालय के अन्‍दर जाते हैं तो पर्ची देनी पड़ती है। यह कहां का न्‍याय है, क्‍या प्रोटोकोल है?

श्री अध्‍यक्ष: आप अपना वह दिखाया करें, तब आपको मिल जायेंगे।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, यह सदन है, यह इस बात का साक्षी है। वह नहीं बोल रहे हैं तो मेरे बस.......

श्री अध्‍यक्ष: विधान सभा सदस्‍य का कार्ड आप दिखा दें।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि आज कोई रिटायर्ड अधिकारी हो, कोई आई.ए.एस. हो, कोई आर.ए.एस. हो, उसको दिल्‍ली के अन्‍दर रिटायर्ड को रूकने की सुविधा है और कोई एक्‍स-विधायक हो तो उसको एक घंटे की भी छूट नहीं है। यह क्‍या प्रोटोकोल है? एक्‍स-विधायक दुबारा विधायक बन सकता है, मंत्री भी बन सकता है, पर अधिकारी रिटायर्ड होने के बाद में अध्‍यक्ष महोदय, दुबारा अधिकारी नहीं बन सकता है। यह पीड़ा है।

इसके अलावा मैं यह निवेदन करना चाहूंगा, बत्‍ती के बारे में चर्चा चल रही थी लाल बत्‍ती की, हम कोई लाल बत्‍ती के भूखे नहीं है। अध्‍यक्ष महोदय, यह हमारे मान-सम्‍मान का सवाल है। एक रोड पर चलती हुई ये कारें आई.ए.एस. अधिकारी की पहचान है और एम.पी.-एम.एल.ए. की कोई पहचान नहीं है। ट्रक वाले, बस वाले दूर से ही कहते हैं कि यह गाड़ी आ रही है, यह सरकारी अधिकारी की है, उसको साइड देंगे और एम.एल.ए.-एम.पी. उस रोड से गुजर रहा है तो उसको टायर के नीचे दे देंगे, क्‍योंकि उसकी कोई पहचान नहीं है।

अध्‍यक्ष महोदय, इतना ही नहीं, आज प्रजेंट एम.एल.ए. की जो हालत है, हमने कोई सुविधाओं की मांग नहीं की पर कम से कम सर्किट हाउस में विधायकों को रूकने की सुविधा होनी चाहिए और 19.07.2006 को एक आदेश निकला है। आप ताज्‍जुब करेंगे, उसमें लिखा है कि एक माननीय सदस्‍य को जिला मुख्‍यालय पर सर्किट हाउस में कमरा तभी मिलेगा, उसका वहां स्‍थाई निवास नहीं होना चाहिए, उसका कोई दूसरा सरकारी बँगला आवंटित नहीं होना चाहिए। सरकारी बंगले वाली बात तो समझ में आती है अध्‍यक्ष महोदय। कइयों के दो-दो रूम हैं, पब्लिक ज्‍यादा आती है, कोई विधायक सर्किट हाउस में रूकना चाहे और उसके जिला मुख्‍यालय पर दो कमरे हैं, अगर वह सर्किट हाउस में कमरा मांगता है तो कौनसा गुनाह किया है? यह आदेश कर दिये हैं, अभी 19.07.2006 को यह आदेश हुए हैं। हमने प्रोटोकोल में इज्‍जत बढ़ाने की बात की और उल्‍टी इज्‍जत हमारी कम हो गई।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): दो तो हम खुद भुगतभोगी हैं अध्‍यक्ष महोदया, एक तो मेरे... नहीं, इस पर मेरे भी साइन है उसमें।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप बीच में खड़े हो गये। इनके बाद में आप बोल लीजिएगा। माननीय सदस्‍य, वे बोलकर बैठ जायें, उसके बाद बोल लीजिएगा।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, आप मेरे को तो बीच में डिस्‍टर्ब नहीं करें, बाद में आप अपनी बात कह दें।

अध्‍यक्ष महोदय, प्रोटोकोल की कहानी सुना रहा हूं। मेरे दायें-बायें सब बैठे हैं। जब हम किसी अधिकारी को टेलीफोन करते हैं तो अव्‍वल तो यह कह दिया जाता है कि सेक्रेटरी साहब मीटिंग में गये हुए हैं और यह मैं हकीकत बयान कर रहा हूं और वह अपने चैम्‍बर में बैठे रहते हैं और कभी कभी बात करते हैं तो जवाब क्‍या होता है अध्‍यक्ष महोदय, हम यह निवेदन करते हैं कि सचिव महोदय, काम नियमानुसार होने के लायक है और आपके जो अधीन अधिकारी हैं, वे इस कार्य को कर नहीं रहे हैं, नियमानुसार होने वाला है तो सामने से क्‍या जवाब मिलता है अध्‍यक्ष महोदय, दिखवायेंगे। कभी कभी सर भी कहते हैं, यह भी मानना पड़ेगा। यह नहीं कहेंगे कि अगर नियमानुसार सही है तो हम बिलकुल करवायेंगे। अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रजातंत्र के लिए बहुत बड़ा भारी खतरा है। अगर इस खतरे को हमने समय रहते हुए कंट्रोल नहीं किया तो माननीय सदस्‍य हो चाहे एम.पी. हो, यह सारे के सारे प्रजातंत्र में जितना भी पावर है, वह इन ब्‍यूरोक्रेट्स के पास चला गया। ज्‍यादातर तो 75 प्रतिशत तो चला गया, मैं दावे के साथ कह रहा हूं तो अध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह निवेदन है आपके माध्‍यम से, हम सरकार से कोई बजट नहीं मांग रहे हैं, कृपया करके कम से कम 11000 रुपये जो अधिकारी कर्मचारी ले रहे हैं, उसको तो सर्किट हाउस में रूकने की छूट है और हमें छूट नहीं है। यह कहां का न्‍याय है और प्रोटोकोल में आप चीफ सेक्रेटरी से ऊपर हो।

दूसरा, एक और निवेदन करना चाहूंगा लाल बत्‍ती के बारे में। प्रमुख का नम्‍बर है प्रोटोकोल में, वह 40वें नम्‍बर पर है और विधायक का नम्बर 21 है। इन 21 नम्‍बर वाले विधायकों की क्‍या हालत है। हम कोई प्रमुखों के विरोधी नहीं हैं पर एक तरफ तो हमें प्रोटोकोल की सूची में आप 21 नम्‍बर पर बता रहे हो और दूसरा आप जिला प्रमुखों से जो 40 नम्‍बर पर है, उसको आप गाड़ी पर लाल बत्‍ती लगाने की छूट दे रहे हो तो अध्‍यक्ष महोदय, 21 नम्‍बर वाले प्रोटोकोल का क्‍या होगा? यह कौन करवा रहा है? अध्‍यक्ष महोदय, इसमें सारे ब्‍यूरोक्रेट्स का हाथ है। राज चाहे कांग्रेस का हो चाहे बीजेपी का हो, अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रजातंत्र के लिए अच्‍छा संकेत नहीं है और ऐसी कई बातें हैं, मैं इस सम्‍बन्‍ध में कहना चाहूंगा और अध्‍यक्ष महोदय, जिला पूल से 10 दिन जो विधायकों को गाड़ी मिलती है, वह टूटी....(व्‍यवधान) जानता हूं भाई, मैं इतनी बात तो समझता हूं। भाषा का कोई फर्क हो सकता है पर प्रेक्टिकल में कोई फर्क नहीं आएगा। अध्‍यक्ष महोदय, जो गाड़ी हमें मिलती हैं, वह नीयतन, जान-बूझकर धक्‍का स्‍टार्ट गाडि़यां दी जाती हैं तो मैं आपके माध्‍यम से सरकार से यह निवेदन करना चाहूंगा, कम से कम इतना तो तुम रहम करो, हम भी विधायक हैं। हम कोई और सुविधा नहीं चाहते, जैसा मैं उदाहरण नहीं दे रहा हूं कि हरियाणा-पंजाब में दो-दो गनमैन हैं। क्‍या करेंगे, कौन रोड ठुकवायेगा? हमारे पास इतना सामान भी नहीं है। वह सुविधा हम नहीं चाहते जिससे सरकार पर कोई वज़न, खजाने पर कोई वज़न बढ़े। हम चाहते हैं, हमारी आन-बान और शान और इस प्रजातंत्र की रक्षा चाहते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आन-बान और शान की बात है। नहीं, आपके आन-बान और शान का सवाल है?

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): हां। अध्‍यक्ष महोदय, यह निवेदन करना चाहूंगा कि....

एक माननीय सदस्‍य: आपका भी है।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रजातंत्र की आन-बान और शान का सवाल है, न कि एक व्‍यक्ति का।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो कहा है, यह सही है कि मैं अनपढ़ हूं, कई बार चूक हो जाती है, मैं इस बात से सहमत हूं। यह प्रजातंत्र की आन-बान और शान का सवाल है अध्‍यक्ष महोदय। (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, आपने समय दिया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं वह बात नहीं कह रहा हूं जो पहले कह दी लेकिन इनकी भावना से मिलती है। आज स्थिति क्‍या है? आज विधायक के क्षेत्र में चाहे पानी का काम हो रहा हो, बिजली का काम हो रहा हो, सड़क का काम हो रहा हो, और कोई काम हो रहा हो, हमको यह अधिकार नहीं है कि हम महीने में एक दिन सम्‍बन्धित ब्‍लाक स्‍तर के अधिकारी को बुलाकर यह मोनेटरिंग कर सकें कि काम की प्रोग्रेस क्‍या हुई है? आज क्‍या आपत्ति है इस बात में राज्‍य सरकार को, जिस तरह से केन्‍द्र सरकार ने एम.पी. की अध्‍यक्षता में एक मोनेटरिंग कमेटी बनाई है........

Jkj/akt/16.50/3d/5.10.2006

 

 

उन योजनाओं के लिए जिनके लिए केन्‍द्र से पैसा आता है।  आज राज्‍य सरकार से जिन मदों में पैसा जाता है चाहे पी डब्‍लू डी में जाये, चाहे पीएचईडी में जाये, चाहे आरएसईबी में जाये, चाहे किसी में भी जाये, क्‍या विधायकों को यह नहीं है कि जनहित में यह मानीटरिंग कर सकें, एक पूछ सकें उन्‍हें बुला कर कि यह काम क्‍यों नहीं हो रहा है, इतना डिले किसलिए हो रहा है, यह काम क्‍यों नहीं पूरा हो रहा है।  और दूसरी बात अध्‍यक्ष महोदय, आपने दस दिन के लिए अलाउ किया है माननीय विधायकों को, जैसा उन्‍होंने कहा कि खटारा, क्‍या यह नहीं कर सकते कि एसडीओ अगर गाड़ी उपलब्‍ध नहीं है तो टैक्‍सी कराकर दे दे या कलेक्‍टर जैसे उदयपुर जिलाधीश ने कर रखा है, कांट्रेक्‍ट दे रखा है मिनिमम रेट पर टैक्‍सी वाले को, जब भी कभी आवश्‍यकता हो, एमएलए ले जाय, पेमेंट वहां से कलेक्‍ट्रेट के यहां से होगा।  और जिलाधीश यह क्‍यों नहीं कर सकते और तीसरा अध्‍यक्ष महोदय, आप हमारी सर्वप्रिय अध्‍यक्ष हैं, आप खड़ी रहें और एक राज्‍य मंत्री झण्‍डारोहण करे, आपको कैसा लगेगा?  आज एमएलए खड़ा रहे और तहसीलदार झण्‍डारोहण कर रहा है, तो मुख्‍य मंत्री मुख्‍य सचिव से क्‍यों नहीं कराती? जयपुर में मुख्‍य सचिव करे।  मंत्रियों की जगह प्रिंसीपल सैक्रेटरी करे और आप कहती हैं सुविधाओं की बात, यह मुख्‍य मंत्रियों को तो अधिकार है, क्‍या राजस्‍थान का मुख्‍य मंत्री जो पाँच साल रह ले उसको मकान की जरूरत है जयपुर में, आज एक-एक मकान घेर कर बैठे जा रहे हैं और आज छह-छह, सात-सात बार के विधायक, हमारे बीच में नहीं रहे नाथूराम अहारीजी, सात बार विधायक रहे, एक टूटी जीप के अलावा उनके पास कुछ नहीं था, ऐसे भी विधायक हैं।

श्री अध्‍यक्ष: छह बार, सात बार नहीं, छह बार।

श्री जुबेर खान: आज जब मंत्रियों को सुविधा दी जाती है, मुख्‍य मंत्रियों को बंगले दिये जाते हैं तो आपको आपत्ति नहीं होती और जब हम जन प्रतिनिधियों के लिए बात करते हैं, आप कहें मुख्‍य मंत्रीजी की कमेटी बन जायेगी, मुख्‍य मंत्रीजी तो उठ कर चली गईं, बात ही नहीं सुनना चाह रही थीं, उनकी कमेटी बनायेंगे आप?(व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर: कहां से...

श्री खुशवीर सिंह जोजावर: नहीं, सुनेंगी वह । (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान: हमारा आपसे निवेदन है, यह झण्‍डारोहण के आपको...

श्री अध्‍यक्ष: अपने चेम्‍बर में सुन रही हैं वह।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर: सचेतक महोदय, आप प्‍लीज बीच में नहीं बोलें। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान: देखिये, आज हमें याद है...(व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर: अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट मुझे दीजिये।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर: प्‍लीज, एक मिनट, आप बैठ जायें, बिराज जायें। ना-ना। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान: आज सर्किट हाउस की क्‍या हालत है, आज विधायक सात दिन से ज्‍यादा नहीं रूक सकता। विधायक सात दिन से ज्‍यादा नहीं रूक सकता। हम हमारे हैडक्‍वार्टर से पचास किलोमीटर से तो, सात से ज्‍यादा तो आपके वहां पर मीटिंग होती है।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर: हां, समय बढ़वाओ, समय बढ़वाओ।

श्री जुबेर खान: डीआरडीए में, जिला परिषद में, कलेक्‍ट्रेट में सात से ज्‍यादा मीटिंग होती है, आप सात दिन के बाद मार्केट रेट दीजिये और रिटायर्ड अधिकारी और एसडीओ और तहसीलदार दस-दस दिन रूक सकते हैं, यह कहां का न्‍याय है।

श्री महावीर प्रसाद जैन: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव कर रहा हूं...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान: आपको इसके ऊपर गंभीरता से सोचना पड़ेगा। (व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर: जुबेरजी, समय बढ़ा रहे हैं।

श्री जुबेर खान: मेरा निवेदन है आपके माध्‍यम से सरकार से...(व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर: मेरे बाप, अब बैठ जाओ।

श्री अध्‍यक्ष: समय तो बढ़ाने दो। समय तो बढ़ा लेने दो। (व्‍यवधान) 

                         सदन की कार्यवाही

             विधान सभा की बैठक के निर्धारित समय में वृध्दि

श्री महावीर प्रसाद जैन(सरकारी मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि आज की कार्यसूची पूरी होने तक सदन का समय बढ़ाया जाय।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या सदन की अनुमति है कि आज की कार्यसूची पूरी होने तक सदन का समय बढ़ा दिया जाय?

                           (स्‍वीकृत)

   सदन की अनुमति से समय बढ़ाया गया।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर: माननीय अध्‍यक्ष महोदयण्‍, एक मिनट मुझे दीजिये। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बैठे-बैठे नहीं बोलेंगे आप।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर(गंगानगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह पहले भी मामला एक बार विधान सभा में आया था।  मीडिया ने तो इसको और ही तरीके से उछाला कि विधायकों को चाहिए अति सुविधाएं।  जबकि विधायकों का इससे सुविधाओं को प्राप्‍त करने का आशय नहीं है, यह एक जन प्रतिनिधि के मान-सम्‍मान और यहां तक कि जान का भी सवाल है।  तो इसलिए यह हम लोग इसके लिए मांग रहे हैं लेकिन उस समय गृह मंत्रालय ने या मुख्‍य मंत्रीजी ने क्‍या जवाब दिया था, वह आज तक कानों में टन-टन करता है।  उस समय उन्‍होंने कहा कि एमएलएज को अगर बत्‍ती अलाउ कर दें तो यह स्‍मगलिंग करेंगे।  सारे एमएलए बैठे हैं यहां, यह स्‍मगलर हैं और मंत्री लोग, यह बिलकुल साफ धुले हुए हैं क्‍योंकि इनकी गाडि़यों में कोई गलत काम नहीं होता। मैं मंत्री का साबित कर दूंगा कि उसकी गाड़ी में स्‍मगलिंग होती है, अफीम बिकती है, लेकिन कोई इस चीज को सुनने वाला नहीं और हम हमारे ऊपर, मतलब विधायकों को, क्‍या हम में से ही मंत्री नहीं बनते।  तो मंत्री ब‍न गये तो हम साफ धुले हुए हो गये और मंत्री नहीं बने तो हम स्‍मगलर हैं, हम तस्‍कर हैं।  तो इसलिए आप मेहरबानी करें कि आप इस मामले में हमारा कम से कम, बोलो भई, हाथ खड़े करो, कितनी आदमी चाहते हैं,(व्‍यवधान) तो सब का...

श्री अमरा राम(धोद): यह मंत्री नहीं कर रहे हैं।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर: अब आप देख लो इसमें भी कितने लोग चाहते हैं...

श्री खुशवीर सिंह जोजावर: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दो मिनट का समय मुझे दिया जाय।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर: तो इसलिए आप हमारा, मतलब यह हमें दिलवाओ आप कि गाड़ी में बत्‍ती भी लगा रहे हैं, हम अपनी जेब से लगवा रहे हैं और जो कु्छ भी काम कर रहे हैं हमारी जेब से ही करेंगे, कोई सरकार से कुछ नहीं मांग रहे। लेकिन क्‍या मतलब बत्‍ती लगने से हमें साइड मिल जायेगी हाईवे पर तो सरकार के पेट में क्‍यों दुःख हो रहा है।  हरियाणा में, और में, (व्‍यवधान) हरियाणा में एमएलए को बत्‍ती लगाने की पावर है और यहां तक कि वह टोल टैक्‍स वाला भी उनको अपने राजस्‍थान में तो फ्री है लेकिन हम अगर हरियाणा में चले जायें, पंजाब में चले जायें, हमारा ऊपर टोल टैक्‍स लगता है।  तो न तो इस बारे में कोई सोचता है, न कोई और किसी मामले में और जो विधायकों की गति बना रखी है उसके लिए तो आप, मैं तो मेरे जीवन में विधायक भी पहली बार बना हूं लेकिन जो आज के इस 2003 के चुनाव के बाद में विधायकों की जो गति है वह मेरे ख्‍याल में...

श्री अध्‍यक्ष: दुर्गति बोलो। गति बता रहे हैं, दुर्गति बोलिये न।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर: दुर्गति नहीं, उससे भी गयी-बीती है। उससे ज्‍यादा कुछ नहीं हो सकती। आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद, आपने समय दिया। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सारी बातें तो आ गईं, अब क्‍या कहेंगे।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दो मिनट का समय दीजिये मुझे।

श्री अध्‍यक्ष: बोलिये-बोलिये। दो मिनट में समाप्‍त करें।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर: दो मिनट बोलूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: दो मिनट में बात समाप्‍त कर दें।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर(खारची): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज विश्‍व के अंदर अगर देखा जाय, 2002 तक जापान एक ऐसा देश था वहां पर सबसे अधिक नौकरशाही हावी थी लेकिन सन् 2000 और 2006 के बीच में अगर आप इस और ध्‍यान दें तो हिन्‍दुस्‍तान में आज सबसे अधिक नौकरशाही हावी है और...

श्री अध्‍यक्ष: आज राजस्‍थान की बात करें, हिन्‍दुस्‍तान की मत करें।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर: और उसके अंदर राजस्‍थान का प्रथम स्‍थान है माननीय अध्‍यक्ष महोदय।  आज जिस कदर, नौकरशाही का एक उदाहरण देता हूं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं पिछली बार स्‍वतंत्रता..

श्री अध्‍यक्ष: आप सुविधाओं की बात करते-करते नौकरशाही पर आ गये।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं हमारे अधिकारों की बात कर रहा हूं। मैं पिछली बार जब 15 अगस्‍त, स्‍वतंत्रता कार्यक्रम में भाग लेने को सवाई मानसिंह स्‍टेडियम पहुंचा, हमारे साथ में एक विधायक और थे, हमें एक कार्ड इश्‍यू किया गया और उस कार्ड पर लिखा हुआ था कि 23 नम्‍बर द्वार से आपको प्रवेश पाना है।  जब हम 23 नम्‍बर द्वार पर गये, वहां लाईन लगी हुई थी कम से कम दो सौ मीटर।  हम और माननीय सदस्‍य एक मेरे साथ, जो सदन में मौजूद हैं, हम दोनों खड़े रहे, आधे घंटे बाद में नम्‍बर आया और हम आगे गये तो बैठने के लिए कोई सुविधा नहीं थी और वहां पर हम देखें तो नौकरशाही, उनके बाकायदा सोफे लगे हुए थे और वहां विराजमान थे और मुख्‍य द्वार से वह जा रहे थे, इससे ज्‍यादा क्‍या दुर्गति हो सकती है इस प्रजातंत्र की माननीय अध्‍यक्ष महोदय।  बात इस सरकार की नहीं है, बात कांग्रेस सरकार की नहीं है, बात इस प्रजातंत्र की है, हमें एक बार पुन: विश्‍लेषण करना पड़ेगा इन साठ वर्षों की आजादी के पश्‍चात् भी आज प्रजातंत्र कितना मजबूत है और कहां प्रजातंत्र खड़ा है।  यह आपकी नौकरशाही ने यह आदेश निकाला है, यह उप शासन सचिव ने यह आदेश निकाला है अभी रिसेंटली कि विधायक जिसका हैडक्‍वार्टर पर मकान होगा, वह वहां सर्किट हाउस में नहीं ठहर सकता, क्‍यों?

एक माननीय सदस्‍य: मकान नहीं, पैतृक निवास भी।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर: पैतृक निवास अगर है तो भी वह वहां नहीं ठहर सकता है। इससे ज्‍यादा क्‍या दुर्भाग्‍य होगा माननीय अध्‍यक्ष महोदय। आज विधायक...

श्री अध्‍यक्ष: यह तो गलत है आपका आर्डर।  मिस्‍टर कटारा, यह आर्डर तो गलत है आपका।

श्री अमरा राम(धोद): इनको पता नहीं, वह अधिकारी ने निकाल दिया।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर: अमरा रामजी, एक मिनट, प्‍लीज। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज प्रजातंत्र है, आज जनता साठ वर्ष की, चार सौ साल की गुलामी के पश्‍चात् जनता ने यह सोचा देश आजाद होगा और जनता का शासन होगा, हमारे द्वारा चुने गये हमारे जन प्रतिनिधि जो आज यहां विराजमान हैं, जो आज हजारों लोग आये हैं और हर वक्‍त विधायक के पास में मिलने बीस-तीस लोग आते हैं, वह होटलों में ठोकरें खाते हैं और आज विधायक के ठहरने के लिए अधिकारियों के सर्वेन्‍ट क्‍वार्अर जैसे क्‍वार्टर मिले हुए हैं, और इनको आलीशान कोठियां मिली हुई हैं, अंग्रेजी हुकुमत की क्‍या कमी है आज इस शासन व्‍यवस्‍था में।  मैं इस सरकार की बात नहीं कर रहा हूं, मैं साठ वर्ष की बात कर रहा हूं।  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इससे ज्‍यादा हमारा क्‍या दुर्भाग्‍य होगा कि प्रोटोकाल की वरीयता लगा दी केन्‍द्र सरकार की तरफ से.....

 

भीम/चौहान/5.10.06/17.00/3e

 

और हमें इक्‍कीसवें स्‍थान पर रख दिया माननीय अध्‍यक्ष महोदय, और उसके बावजूद..।

श्री सुरेन्‍द्रसिंह राठौर: मैं तो इंतजार कर रहा हूं साहब।

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें।

श्री सुरेन्‍द्रसिंह राठौर: उनका इंतजार कर रहा हूं साहब ।

श्री अध्‍यक्ष: आपको दुबारा बोलने का मौका नहीं दूंगी मैं।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मैं बीच में नहीं बोला आपके।  

अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि आज जो प्रोटोकोल की जो बात माननीय सदस्‍यों ने उठायी है मेरे ख्‍याल में इतिहास में इस राजस्‍थान विधान सभा के इतिहास में आज से पूर्व कभी नहीं उठायी होगी और सभी पक्षों और सदस्‍यों ने एक राय होकर यह बात रखी और उसके बाद अगर इन विधायकों की सही बात जो इस जनता के लिए करते हैं हम जनता के मूल्‍यों पर खरा उतरने का वादा करके आते हैं आज हम उस जनता को ठोकरें खिलाते हैं होटलों की, क्‍यों? और इनको आलीशान कोठी किस बात की ? आज लालबत्‍ती की बात है विधायक को लालबत्‍ती क्‍यों नहीं मिलनी चाहिए। मैं यह बात नहीं करता हूं लेकिन प्रोटोकोल की वरियता में विधायक इनसे ऊपर है या तो वरियता बदल दीजिये और एक मैं चाहूंगा कि आज मुख्‍यमंत्री जी के लालबत्‍ती है आपके लालबत्‍ती की गाड़ी है और एक कलेक्‍टर और एसपी के लालबत्‍ती की गाड़ी है इससे ज्‍यादा और क्‍या दुर्भाग्‍य हो सकता है। हम कैसे पहचान करेंगे कि हमारा नेता आ रहा है जनप्रतिनिधि आ रहा है जनतंत्र के अन्‍दर या एक नौकरशाह निकल रहा है इससे ज्‍यादा क्‍या दुर्भाग्‍य हो सकता है । अगर उनकी आप करें तो पीली बत्‍ती लगाइये और हमारे को नहीं चाहिए लालबत्‍ती लेकिन मंत्रियों के, मुख्‍यमंत्री के और आपके लालबत्‍ती रहनी चाहिए। अधिकारियों की पीली बत्‍ती जिससे हम यह अन्‍तर महसूस कर सकें कि ये जनप्रतिनिधि है और ये नौकरशाह है।     माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज माननीय विधायक पूर्व विधायक आज सर्किट हाउस और राजस्‍थान हाउस में नहीं ठहर सकते और इन्‍होंने किया उनके हाथ में सब कलम है इन्‍होंने आदेश निकाल दिया कि 12000 की जो पे स्‍केल वाला है वो राजस्‍थान हाउस में ठहर सकता है चाहे वो एलडीसी हो चाहे यूडीसी हो और आज विधायक और माननीय मंत्री महोदय आप उस तरफ देख रहे हैं घड़ी की तरफ लेकिन मंत्री महोदय, आप भूतपूर्व होंगे तो पाँच दिन ही रुक सकते हैं राजस्‍थान हाउस में और ये अधिकारी जो रिटायर होने के बाद दस दिन रुक सकेंगे । मैं आपकी सुविधा की भी बात कर रहा हूं आप तो वापस मंत्री और मुख्‍यमंत्री भी बन सकते हैं लेकिन ये रिटायर होने के बाद दुबारा वापस अधिकारी नहीं बन सकते आज मंडलों के अन्‍दर आज निगमों के अन्‍दर जो पॉलिटिकल पोस्‍ट होती है उसके अन्‍दर आज सभी अधिकारी बैठे हैं आप और हम तो सेकेट्री नहीं बन सकते लेकिन वो आज, क्‍यों? क्‍योंकि उनके हाथ के अन्‍दर है।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया समाप्‍त करें।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपसे हम व्‍यवस्‍था चाहेंगे और यह बात हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री मानें और सभी माननीय सदस्‍यों ने दस्‍तख्‍त किये हैं इससे जयादा मैं आपको क्‍या निवेदन कर सकता हूं। धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: सब बातें आ गयी हैं अब मैं ...। श्री वीरेन्‍द्र मीणा 105 अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौड़: अध्‍यक्ष महोदय, मैं थोड़ा सा निवेदन करूंगा मामूली सा कि अभी पिछले दिनों हरियाणा के भारतीय जनता पार्टी के अध्‍यक्ष गंगानगर में आये और उन्‍होंने बयान दिया कि राजस्‍थान में जो वसुन्‍धरा राजे हैं उसका ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: श्री वीरेन्‍द्र मीणा।

श्री वीरेंद्र मीणा (वित्‍त राज्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं निम्‍नांकित अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखता हूं।

 

 

अधिसूचना संख्‍या-प.4(1)/एफडी/टैक्‍स/2001 पार्ट-117 दिनांक 17.2.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.4(8)वित्‍त/ग्रुप-4/94-72 दिनांक 7.3.1994 में संशोधन किया गया है ।

 

 

 

अधिसूचना संख्‍या-प.4(1)/एफडी/टैक्‍स/2001 पार्ट-118 दिनांक 17.2.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.4(1)/एफडी/टैक्‍स/ 2001 पार्ट-146 दिनांक 15.1.2003  में संशोधन किया गया है ।

 

 

 

अधिसूचना संख्‍या-प.4(1)/एफडी/टैक्‍स/2001 पार्ट-119 दिनांक 17.2.2006 अधिसूचना संख्‍या-प.4(1)/एफडी/टैक्‍स/2001 पार्ट-147 दिनांक 15.1.2003 में संशोधन किया गया है ।

 

 

 

अधिसूचना संख्‍या-प.2(11)/एफडी/टैक्‍स/2003-120 दिनांक 17.2.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या - प.2(11)वित्‍त/कर/ 2003/109 दिनांक 2.1.2006 में संशोधन किया गया है ।

 

 

 

अधिसूचना संख्‍या-प.12(79)/एफडी/टैक्‍स/2005-121 दिनांक 20.2.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान विक्रय कर नियम, 1995 के नियम 19 में संशोधन किया गया है ।

 

 

 

अधिसूचना संख्‍या-प.12(79)/एफडी/टैक्‍स/2005-122 दिनांक 20.2.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान विक्रय कर (राजस्‍थान)  नियम, 1957 के नियम 4 में संशोधन किया गया है ।

 

 

 

अधिसूचना संख्‍या-प.2(25)/एफडी/टैक्‍स/2005-123 दिनांक 20.2.2006 जिसके द्वारा मेजर राज्‍यवर्द्धन सिंह राठौड़ को राज्‍य सरकार द्वारा आवंटित आवास संख्‍या-612227, प्रतापनगर, सांगानेर, जयपुर को कन्‍वेएन्‍स/परिपिचुएल लीज डीड पर देय स्‍टाम्‍प शुल्‍क एवं रजिस्‍ट्रेशन फीस से परिहार किया गया है ।

 

 

अधिसूचना संख्‍या-प.7(1)/एफडी/टैक्‍स/2003-124 दिनांक 1.3.2006 जिसके द्वारा राज्‍य/केन्‍द्रीय सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को, उनके कर निर्धारित प्रकरणों के मामलों में अधिसूचना में दिये गये तरीकों व शर्तों के अनुसार कर देयता में उनके भूमि या भवनों या दोनों की कर में कमी की गई है ।

 

अधिसूचना संख्‍या-प.7(1)/एफडी/टैक्‍स/2003-125 दिनांक 1.3.2006 जिसके द्वारा भूमि एवं भवन कर अधिनियम, 1964 की धारा 2(2) में परिभाषित कर अधिसूचना में अंकित अधिकारियों को उनके सम्‍मुख क्षेत्र के अनुसार कर निर्धारण अधिकारी की हैसियत से अधिकृत किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.7(1)/एफडी/टैक्‍स/2003-126 दिनांक 1.3.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.14(21)वित्‍त/ग्रुप-4/74 दिनांक 21.12.1990 को प्रत्‍याहरित किया गया है । 

   

अधिसूचना संख्‍या-प.10(3)/एफडी/टैक्‍स/1995-127 दिनांक 3.3.2006 जिसके द्वारा निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा दिनांक 5.3.2006 को राजमंदिर सिनेमा में प्रात: 9.00 बजे ''लज्‍जा'' फिल्‍म का एक शो कर से मुक्‍त किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(85)/एफडी/टैक्‍स/2005-128 दिनांक 4.3.2006 जिसके द्वारा मै. बिरला इंस्‍टीट्यूट ऑफ टैक्‍नोलोजी एण्‍ड साइंस, पिलानी द्वारा उनके शक्षिक एवं अनुसंधान कार्य हेतु अधिसूचना में उल्‍लेखित माल को उसकी सीमा तक प्रवेश कर से छूट प्रदान की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(86)/एफडी/टैक्‍स/2005-129 दिनांक 4.3.2006 जिसके द्वारा मै. इण्डियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ क्राफ्ट्स एण्‍ड डिजाइन, जयपुर को उनके प्रोजेक्‍ट "In the path of the sun and moon - universal being" के लिए रूपये 11.00 लाख तक के स्‍टोन ब्‍लॉक व अन्‍य उपकरणों को राजस्‍थान विक्रय कर में छूट दी गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.2(26)/एफडी/टैक्‍स/1998-130 दिनांक 7.3.2006 जिसके द्वारा सूचना रूपान्‍तरण/नियमन/आवंटन पत्र (धारा-9) जारी पट्टे (लीज-डीड) पंजीयन हेतु प्रस्‍तुत होने पर पूर्व की अवधि दिनांक 31.3.2006 को दिनांक 30.9.2006 तक बढाया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.2(26)/एफडी/टैक्‍स/1998-131 दिनांक 7.3.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.2(26)/एफडी/टैक्‍स/1998-15 दिनांक 9.6.2004 में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.4(4)/एफडी/टैक्‍स/2001-151 दिनांक 16.3.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.4(4)/एफडी/टैक्‍स/2001-107 दिनांक 17.12.2005 में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.43(2)/एफडी/टैक्‍स/2006-152 दिनांक 27.3.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान दिवस समारोह दिनांक 21-30 मार्च के अवसर पर फिल्‍म फैस्‍टीवल में दिखाई जाने वाली निशुल्‍क फिल्‍मों को मनोरंजन कर से मुक्‍त किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-1 दिनांक 1.4.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-172 दिनांक 31.3.2006 में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-2 दिनांक 11.4.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-159 दिनांक 31.3.2006 को अतिष्ठित करते हुए उस व्‍यवहारी को कर संदाय के लिये विकल्‍प दिया है, पर 0.25 प्रतिशत की दर से कर लागू होगा ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-3 दिनांक 11.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर अधिनियम में संलग्‍न परिशिष्‍ट-। में संशोधन किये गये है ।

 

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-4 दिनांक 11.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर अधिनियम में संलग्‍न परिशिष्‍ट-।।। में संशोधन किये गये है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-5 दिनांक 11.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर अधिनियम में संलग्‍न परिशिष्‍ट-IV में संशोधन किये गये है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-6 दिनांक 11.4.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-172 दिनांक 31.3.2006 में संशोधन किया गया है । 

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-7 दिनांक 13.4.2006 जिसके द्वारा कैंटीन स्‍टोर्स डिपार्टमेंट और रेजीमेंटल या मिलट्री इकाइयों द्वारा संचालित कैंटीन इकाइयों को सशर्त कर में छूट प्रदान की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-8 दिनांक 13.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर अधिनियम में संलग्‍न परिशिष्‍ट-।। में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-9 दिनांक 13.4.2006 जिसके द्वारा किसी पंजीकृत व्‍यवहारी द्वारा कैंटीन स्‍टोर्स डिपार्टमेंट (इण्डिया) को किये गये विक्रय पर 3 % से अधिक राशि पर सशर्त कर में छूट प्रदान की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-10 दिनांक 15.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर अधिनियम में संलग्‍न परिशिष्‍ट-।। में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-11 दिनांक 15.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान राज्‍य पथ परिवहन निगम को बेचे गये या इसके द्वारा खरीदे गये हाई स्‍पीड डीजल को 13 प्रतिशत से अधिक की कर दर में सशर्त छूट प्रदान की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-12 दिनांक 15.4.2006 जिसके द्वारा भारतीय रेलवे को बेचे गये या इसके द्वारा खरीदे गये हाई स्‍पीड डीजल को 4 प्रतिशत से अधिक की कर दर को सशर्त छूट प्रदान की गई है।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-13 दिनांक 18.4.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-11 दिनांक 15.4.2006 में संशोधन कर शुद्धि पत्र जारी किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-14 दिनांक 18.4.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-12 दिनांक 15.4.2006 में संशोधन हेतु शुद्धि पत्र जारी किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-15 दिनांक 18.4.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-12 दिनांक 15.4.2006 में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-16 दिनांक 19.4.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-172 दिनांक 31.3.2006 में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-17 दिनांक 19.4.2006 जिसके द्वारा ड्यूटी, एंटाईटलमेंट पास बुक, विशेष लाईसेंस आदि के संबंध में केन्‍द्रीय बिक्री कर 0.5 प्रतिशत की दर से बिक्री कर देय होगा बशर्ते 'सी' या 'डी' फार्म प्रस्‍तुत कर दिया गया हो ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-18 दिनांक 19.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वेट अधिनियम,2003 की अनुसूची-। में संशोधन किये गये है ।

 

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-19 दिनांक 19.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वेट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-IV में संशोधन किये गये है । 

   

अधिसूचना संख्‍या-प.9(1)वित्‍त/कर/2006-20 दिनांक 22.4.2006 जिसके द्वारा पूर्व में जारी ऐसे सभी आदेश/अधिसूचनाओं को अतिष्ठित करते हुए राजस्‍थान वाणिज्यिक कर  सेवा के अधिकारियों की कैडर स्‍ट्रेन्‍थ को पुनर्गठित किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.9(1)वित्‍त/कर/2006-21 दिनांक 22.4.2006 जिसके द्वारा पूर्व में जारी ऐसे सभी आदेश/अधिसूचनाओं को अतिष्ठित करते हुए राजस्‍थान वाणिज्यिक कर अधीनस्‍थ सेवा में वाणिज्यिक कर निरीक्षकों की कैडर स्‍ट्रेन्‍थ को पुनर्गठित किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-22 दिनांक 25.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-।। में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-23 दिनांक 25.4.2006 जिसके द्वारा भारतीय खाद्य निगम द्वारा राज्‍य सरकार को SGRY स्‍कीम के तहत बेचे गये गेहूँ को भूतलक्षी प्रभाव से दिनांक 1.4.2006 से सशर्त कर में छूट प्रदान की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-24 दिनांक 26.4.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.12(14)वित्‍त/कर/2006-137 दिनांक 8.3.2006 में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-25 दिनांक 27.4.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-12 दिनांक 15.4.2006 में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-26 दिनांक 28.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वैट अधिनियम की अनुसूची-।। में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-27 दिनांक 28.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान राज्‍य वि.उ.लि., अजमेर वि.वि.नि.लि., जयपुर वि.वि.नि.लि. को बेचे गये या खरीदे गये विद्युत शक्ति को उत्‍पादन, संचार एवं वितरण के लिए 4 प्रतिशत से अधिक कर दर पर सशर्त वैट अधिनियम में छूट प्रदान की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-28 दिनांक 28.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वैट नियम,2006 के नियम 17(2) में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-29 दिनांक 28.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वैट अधिनियम की अनुसूची-। में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-30 दिनांक 28.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वैट अधिनियम की अनुसूची-IV में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-31 दिनांक 29.4.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वैट अधिनियम की अनुसूची-।। में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-32 दिनांक 29.4.2006 जिसके द्वारा वे व्‍यवहारी जो अनुसूची-।। में क्र.सं. 9 पर अंकित है को, सशर्त लाभ दिया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.4(52)वित्‍त/कर/99-33 दिनांक 5.5.2006 जिसके द्वारा रूग्‍ण औद्योगिक कम्‍पनी अधिनियम के तहत BIFR  AAIFR द्वारा रूग्‍ण घोषित डीलर्स को 8 प्रतिशत की दर से व अन्‍य पर 12 प्रतिशत की दर से वैट लागू होगा ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-34 दिनांक 5.5.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान मूल्‍य वरिवर्धित कर (द्वितीय संशोधन) नियम,2006 जारी किये गये है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-35 दिनांक 5.5.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-175 दिनांक 31.3.2006 में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-36 दिनांक 6.5.2006 जिसके द्वारा पूर्व में जारी कतिपय अधिसूचनाओं को आहरित किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-37 दिनांक 6.5.2006 जिसके द्वारा 'जेम्‍स एवं स्‍टोन्‍स के लिए कम्‍पोजिशन स्‍कीम, 06' जारी की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-38 दिनांक 6.5.2006 जिसके द्वारा 'ईंट भट्टों के लिए कम्‍पोजिशन योजना, 2006' जारी की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-39 दिनांक 6.5.2006 जिसके द्वारा 'सर्राफा डीलर्स के लिए कम्‍पोजिशन योजना, 2006' जारी की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(58)वित्‍त/कर/2005-पार्ट-40 दिनांक 6.5.2006 जिसके द्वारा मै. अराफास पेट्रोकैमिकल्‍स प्रा.लि. को उनके द्वारा अंतर्राज्‍यीय व्‍यापार और वाणिज्‍य के दौरान POY, PKT Chips, PSFs, Acrylic Cord Yarn, Nylon Yarn, Methnol, Tyre Cord Yarn  तथा फैब्रिक के विक्रय पर 0.50 प्रतिशत से आधिक्‍य की कर दर को अधिसूचना में अंकित शर्तों पर केन्‍द्रीय विक्रय कर की छूट प्रदान की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.4(2)वित्‍त/कर/2004-41 दिनांक 6.5.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-।। में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.4(2)वित्‍त/कर/2004-42 दिनांक 6.5.2006 जिसके द्वारा 7 वर्ष के लिए 75 प्रतिशत तक के कर दायित्‍व के लिए मैं. बालकृष्‍ण इण्‍डस्‍ट्रीज लि. को कर में सशर्त छूट प्रदान की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.4(2)वित्‍त/कर/2004-43 दिनांक 6.5.2006 जिसके द्वारा 7 वर्ष के लिए 75 प्रतिशत तक के कर दायित्‍व के लिए मैं. बालकृष्‍ण इण्‍डस्‍ट्रीज लि. को कर में सशर्त छूट प्रदान की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-44 दिनांक 6.5.2006 जिसके द्वारा मैं. जयन्‍ती कोल्‍ड स्‍टोरेज को उनके उत्‍पादों के विक्रय को केन्‍द्रीय विक्रय कर की 1 प्रतिशत से अधिक कर दर को सशर्त छूट प्रदान की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-45 दिनांक 8.5.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-IV में संशोधन किया गया है ।     

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-46 दिनांक 8.5.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-।।। में संशोधन किया गया है ।     

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-47 दिनांक 8.5.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-। में संशोधन किया गया है ।     

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-48 दिनांक 8.5.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-।। में संशोधन किया गया है ।     

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-49 दिनांक 8.5.2006 जिसके द्वारा भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति द्वारा गरीब परिवारों को सुपुर्द करने के लिए काम आने वाले कृत्रिम लिम्‍ब्‍स, कैलीपर्स व क्रचेज के लिए काम आने वाले कच्‍चे माल पर सशर्त कर में छूट प्रदान की गई है।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-50 दिनांक 8.5.2006 जिसके द्वारा भगवान महावीर सहायता समिति की कतिपय शाखाओं को उनके द्वारा निर्मित किये गये सामानों हेतु खरीदे गये कच्‍चे माल पर कर में सशर्त छूट प्रदान की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-51 दिनांक 8.5.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-IV में संशोधन किया गया है ।     

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-52 दिनांक 18.5.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-11 दिनांक 15.4.2006 में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.2(23)वित्‍त/कर/2004-53 दिनांक 20.5.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना में उल्‍लेखित राज्‍य सरकार का एस.बी.बी.जे. से करार किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-54 दिनांक 1.6.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की धारा 8 की उपधारा 21 की अनुसूची-। में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-55 दिनांक 1.6.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-।।। में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-56 दिनांक 1.6.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-IV में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-57 दिनांक 1.6.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-175 दिनांक 31.3.2006 में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-58 दिनांक 1.6.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-17 दिनांक 19.4.2006 में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-59 दिनांक 5.6.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-7 दिनांक 13.4.2006 में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-60 दिनांक 9.6.2006 जिसके द्वारा  राजस्‍थान वैट नियम,2006 में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-61 दिनांक 9.6.2006 जिसके द्वारा  राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 के अंतर्गत सेज में औद्योगिक या ओरिएंटेड यूनिट के लिए भारत से बाहर से निर्यात किये जाने वाले सामान पर कर में छूट प्रदान की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-62 दिनांक 5.7.2006 जिसके द्वारा  राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-। में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-63 दिनांक 5.7.2006 जिसके द्वारा  राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-IV में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-64 दिनांक 5.7.2006 जिसके द्वारा  अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-38 दिनांक 6.5.2006 में संशोधन किया गया है ।   

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-65 दिनांक 5.7.2006 जिसके द्वारा  अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-37 दिनांक 6.5.2006 में संशोधन किया गया है ।   

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-66 दिनांक 5.7.2006 जिसके द्वारा  राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-।। में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-67 दिनांक 5.7.2006 जिसके द्वारा  खादी एवं ग्रामोद्योग की 6 इकाईयों को कर में छूट प्रदान की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-68 दिनांक 7.7.2006 जिसके द्वारा  राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 के अंतर्गत मै. हिंदुस्‍तान जिंक लि. को अधिसूचना में उल्‍लेखित कतिपय उपकरणों के लिए प्रवेश कर में छूट प्रदान की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-69 दिनांक 11.7.2006 जिसके द्वारा  अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-171 दिनांक 31.3.2006 में संशोधन किया गया है ।    

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-70 दिनांक 11.7.2006 जिसके द्वारा लघु सीमेंट प्‍लांट के लिए कम्‍पाउण्‍डेड लेवी स्‍कीम , 2006 जारी की गई है ।  

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(10)वित्‍त/कर/2005-71 दिनांक 11.7.2006 जिसके द्वारा  मै. बाइस्‍कोप प्रा.लि. को मनोरंजन कर से मुक्ति प्रदान की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.10(47)वित्‍त/कर/97-72 दिनांक 21.7.2006 जिसके द्वारा संस्‍कृत फिल्‍म 'मुद्राराक्षसम' को एक वर्ष के लिए शत-प्रतिशत मनोरंजन कर (अतिरिक्‍त मनोरंजन कर सहित) छूट प्रदान की गई है ।   

   

अधिसूचना संख्‍या-प.4(67)वित्‍त/कर/2004-73 दिनांक 29.7.2006 जिसके द्वारा  मोटरयान अधिनियम, 1988 के अधीन यान के लिए दिनांक 12.3.97 से 11.7.2004 तक की अवधि में निष्‍पादित विक्रय प्रमाण-पत्र प्रभार्य स्‍टाम्‍प शुल्‍क से इस शर्त के साथ छूट प्रदान की गई है कि उक्‍त प्रकरण के किसी प्रकरण में अदा किये जा चुके मुद्रांक कर का प्रतिदाय (रिफण्‍ड) देय नहीं होगा ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-74 दिनांक 1.8.2006 जिसके द्वारा  प्रथम तिमाही की बिक्री विवरण प्रपत्र को प्रस्‍तुत करने की अवधि दिनांक 30.7.2006 से 31.8.2006 बढाई गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.43(1)वित्‍त/कर/2006-75 दिनांक 1.8.2006 जिसके द्वारा  फिल्‍म 'डॉ. बाबा साहेब अम्‍बेडकर' को एक वर्ष की अवधि तक मनोरंजन कर से मुक्‍त किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.4(6)वित्‍त/कर/2003-76 दिनांक 5.8.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-प.4(6)वित्‍त/कर-अनु/2003-पार्ट-29 दिनांक 28.4.2003 में संशोधन किया गया है ।    

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-77 दिनांक 11.8.2006 जिसके द्वारा  राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-। में संशोधन किया गया है । 

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-78 दिनांक 11.8.2006 जिसके द्वारा  राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-IV में संशोधन किया गया है । 

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-79 दिनांक 11.8.2006 जिसके द्वारा  राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-।। में संशोधन किया गया है । 

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-80 दिनांक 11.8.2006 जिसके द्वारा  राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की धारा 8(3) के अंतर्गत रजिस्‍ट्रीकृत डीलर्स को कतिपय शर्तों के अधीन कर के भुगतान के लिए परिहार किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-81 दिनांक 11.8.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की धारा 20(3) के अंतर्गत अवार्डर या उसके द्वारा अधिकृत अन्‍य व्‍यक्ति को अधिसूचना में उल्‍लेखित ठेकेदार द्वारा किये गये कार्य के 3 प्रतिशत के समकक्ष राशि डिडक्‍ट करने को अधिकृत किया गया है । 

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-82 दिनांक 25.8.2006 जिसके द्वारा मै. महिन्‍द्रा द्वारा रीको के लिए स्‍थापित किये जाने वाले वर्ल्‍ड सिटी सेज के लिए भूमि स्‍थानान्‍तरण करने पर लीज पर नियमानुसार स्‍टाम्‍प ड्यूटी चार्ज किये जाने का उल्‍लेख किया गया है ।   

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-83 दिनांक 11.9.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान वैट नियम, 2006 में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-84 दिनांक 11.9.2006 जिसके द्वारा  कतिपय माल पर कर की दर निर्धारित की गई है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-85 दिनांक 11.9.2006 जिसके द्वारा  राजस्‍थान वैट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-।। में संशोधन किया गया है ।

   

अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/2005-86 दिनांक 11.9.2006 जिसके द्वारा कतिपय माल पर शुल्‍क में छूट प्रदान की गई है । 

   

अधिसूचना संख्‍या-प.8(14)वित्‍त/कर/99-87 दिनांक 12.9.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान जनजातीय क्षेत्रीय विकास सहकारी संघ लि. उदयपुर को भूमि एवं भवन कर एवं ब्‍याज में रूपये 4,34,956/- की छूट प्रदान की गई है ।    

   

अधिसूचना संख्‍या-प.4(30)वित्‍त/कर/97 पार्ट-88 दिनांक 15.9.2006 जिसके द्वारा  अधिसूचना संख्‍या-प.12(63)वित्‍त/कर/75-23 दिनांक 25.4.2006 में संशोधन किया गया है ।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, झंडारोहण भी एक एसडीएम करता है और विधायक खड़ा-खड़ा, सांसद खड़ा-खड़ा देखता रहता है इससे ज्‍यादा क्‍या दुर्भाग्‍य होगा।

श्री सुरेन्‍द्रसिंह राठौड़ ...(व्‍यवधान)... राजशाही का भी खून है और जनशाही का भी खून है तो राजशाही और जनशाही दोनों को मिलाकर इसलिए उसका अच्‍छा अनुशासन है।

श्री अध्‍यक्ष: श्री नन्‍दलाल मीणा।

श्री सुरेन्‍द्रसिंह राठौड़: राजशाही की इस प्रकार से अभी भी प्रजातंत्र में तारीफ हो रही है तो इससे बड़ा दुर्भाग्‍य नहीं होगा।

समिति का प्रतिवेदन

अनुसूचित जनजाति कल्‍याण समिति (सं0 3)

श्री नन्‍दलाल मीणा: अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से राज्‍य सरकार के माध्‍यम से समाज कल्‍याण विभाग द्वारा संचालित राजकीय एवं अनुदानित छात्रावासों/नारी निकेतनों के संबंध में अनुसूचित जन जाति कल्‍याण समिति, 2006-07 का तृतीय प्रतिवेदन उपस्‍थापित करता हूं।

डॉ.जालमसिंह रावलोत: अध्‍यक्ष महोदय, ...(व्‍यवधान)... हमारे को सामान्‍य सम्‍मान से भी हेंडल नहीं करते। जब भी कोई मुख्‍य सचिव आता है तो उनको रेल्‍वे स्‍टेशन पर लेने जाते हैं और वापस छोड़ने जाते हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: नौ। मैंने आपको ... ...(व्‍यवधान)...

डॉ.जालमसिंह रावलोत: अध्‍यक्ष महोदय, मेरी पर्ची थी बिना पर्ची के लोग बोले हैं अध्‍यक्ष महोदय, पर्ची में जिन लोगों के नाम थे उसमें मेरा था और मेरे अलावा बहुत सारे बोले हैं मैं केवल एक मिनट में अपनी बात रखना चाहता हूं कि पूरा सदन में समस्‍त माननीय सदस्‍यों ने पक्ष और विपक्ष के सदस्‍यों ने अपना सारा जो ध्‍यान आपका आकृ‍ष्‍ट किया है मुख्‍य रूप से सदन के सदस्‍यों का और सांसदों का पूरा सम्‍मान होना चाहिए और राजस्‍थान में नौकरशाही जो ज्‍यादा हावी हो रही है उस पर अंकुश लगना चाहिए कलेक्‍टर और अन्‍य सचिव लोग हमारा कोई ध्‍यान नहीं रखते हैं। हमारा जो विधायक कोष है वो केवल 60 लाख रुपये है उसको बढ़ाकर एक लाख करने के लिए हम पिछले दो साल से ....।

श्री अध्‍यक्ष: वित्‍तीय कार्य। वर्ष 2000-2001,2001-2002 एवं 2002-2003 के लिए अतिरेक मांगों पर मतदान होगा।

डॉ.जालमसिह रावलोत: .. कि साठ लाख रुपये बढाकर एक करोड़ किया जाए क्‍योंकि विकास की जो सारे काम हैं वो हमको हमारी जनता की अपेक्षा के अनुरूप करने पड़ते हैं । मुझे पूरा विश्‍वास है कि आज जिस तरीके से सदन की भावनाएं आयी हैं आप हमें पूरी तरह आश्‍वस्‍त करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: अब मैं पुकार रही हूं।  सदन की भावना जान ली माननीय विधायकों की भावना भी जान ली मुख्‍यमंत्री जी आपने चैम्‍बर में सुन रही हैं सारी कैबिनेट ने सुन ली अब सुनकर उसके अनुसार तदनुसार कुछ करेंगे ये और आपको बतायेंगे क्‍या करने जा रहे हैं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): कोई रियेक्‍शन तो हो।

 

मुख बंद

अतिरेक मांगों (वर्ष 2000-01) का पारण

 

श्री अध्‍यक्ष: मैं पहले  2000-2001 को ले रही हूं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): नहीं अब क्‍यों नहीं बोलते?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ...(व्‍यवधान)... कह रहे थे कि हम कमेटी बनवा देंगे फलानां करवा देंगे संसदीय कार्य मंत्री जी कहो न यहां ।

श्री सुरेन्‍द्रसिंह राठौड़: वैसे तो उनकी दायीं और बायीं आँख और दोनों कान यहीं मौजूद हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): राजेन्‍द्र राठौड़ जी, अब कहो न खड़े होकर कमेटी बनाकरके विचार करेंगे।  यह क्‍या होता है, आप खड़े क्‍यों नहीं हो रहे हैं दो सौ-दो सौ एमएलएज की ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि अतिरेक मांग संख्‍या 15 पेंशन व अन्‍य सेवानिवृत्ति लाभ के संबंध में 31 मार्च,2001 को समाप्‍त हुए वर्ष में किये गये व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 33,31,38,171/-(अक्षरे रुपये तैंतीस करोड़ इकत्‍तीस लाख अड़तीस हजार एक सौ इकहत्‍तर) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

प्रश्‍न यह है कि अतिरेक की मांग संख्‍या- 16 पुलिस के संबंध में 31 मार्च, 2001 को समाप्‍त हुए वर्ष में किये गये व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 6,02,389/-(अक्षरे रुप्‍ये छ: लाख दो हजार तीन सौ नवासी) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

प्रश्‍न यह है कि अतिरेक की मांग संख्‍या- 17 कारागार के संबंध में 31 मार्च, 2001 को समाप्‍त हुए वर्ष में किये गये व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 58,01,025/- (अक्षरे रुपये अठावन लाख एक हजार पच्‍चीस) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

प्रश्‍न यह है कि अतिरेक की मांग संख्‍या- 21 सड़कें एवं पुल के संबंध में 31 मार्च, 2001 को समाप्‍त हुए वर्ष में किये गये व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 21,54,81,165/- (अक्षरे रुपये इक्‍कीस करोड़ चौवन लाख इक्‍यासी हजार एक सौ पैंसठ) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

अतिरेक मांगों (वर्ष 2001-02) का पारण

प्रश्‍न यह है कि अतिरेक की मांग संख्‍या- 1 राज्‍य विधान मंडल के संबंध में 31 मार्च, 2002 को समाप्‍त हुए वर्ष में किये गये व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 5,87,601 (अक्षरे रुपये पाँच लाख सतासी हजार छ:सौ एक) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

प्रश्‍न यह है कि अतिरेक की मांग संख्‍या- 16 पुलिस के संबंध में 31 मार्च, 2002 को समाप्‍त हुए वर्ष में किये गये व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 1,85,420/- (अक्षरे रुपये एक लाख पिचासी हजार चार सौ बीस) तक की राशि और प्रदान की जाए?

ये तो सब कांग्रेस सरकार के समय की अतिरेक मांगें हैं हां तो बोल दीजिये।

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

प्रश्‍न यह है कि अतिरेक की मांग संख्‍या- 17 कारागार के संबंध में 31 मार्च, 2002 को समाप्‍त हुए वर्ष में किये गये व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 22,54,184/- (अक्षरे रुपये बाईस लाख चौवन हजार एक सौ चौरासी) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

प्रश्‍न यह है कि अतिरेक की मांग संख्‍या-23 श्रम और रोजगार के संबंध में 31 मार्च, 2002 को समाप्‍त हुए वर्ष में किये गये व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 41,49,759/- (अक्षरे रुपये इकतालीस लाख उनचास हजार सात सौ उनसठ) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

प्रश्‍न यह है कि अतिरेक की मांग संख्‍या- 49 स्‍थानीय निकायों और पंचायती राज संस्‍थाओं को मुआवजा और समनुदेशन के संबंध में 31 मार्च, 2002 को समाप्‍त हुए वर्ष में किये गये व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 31,25,600 (अक्षरे रुपये इकत्‍तीस लाख पच्‍चीस हजार छ: सौ) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

अतिरेक मांगों (वर्ष 2002-03) का पारण

प्रश्‍न यह है कि अतिरेक की मांग संख्‍या- 21 सड़कें एवं पुल  के संबंध में 31 मार्च, 2003 को समाप्‍त हुए वर्ष में किये गये व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 101,39,02,723/-(अक्षरे रुपये एक सौ एक करोड़ उनतालीस लाख दो हजार सात सौ तेईस) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

प्रश्‍न यह है कि अतिरेक की मांग संख्‍या- 34 प्राकृतिक आपदाओं से राहत के संबंध में 31 मार्च, 2003 को समाप्‍त हुए वर्ष में ...

 

कैलाश/चौहान   5.10.06  17.10 (1) 3f

 

किये गये व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 6929846(अक्षरे उनहत्‍तर लाख उन्‍तीस हजार आठ सौ छियालीस) तक की राशि और प्रदान की जाये?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई । प्राकृतिक आपदा पर तो हां कर देते ।

प्रश्‍न यह है कि अतिरेक की मांग संख्‍या 51 अनुसूचित जातियों के कल्‍याण हेतु विशिष्‍ट संघटक योजना के संबंध में 31 मार्च, 2003 को समाप्‍त हुए वर्ष में किये गये व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 192500 (अक्षरे उन्‍नीस लाख दो हजार पाँच सौ) तक की राशि और प्रदान की जाये ?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई ।

विधायी कार्य

विधेयकों का पुर:स्‍थापन, उन पर विचार एवं पारण ।

राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-3) विधेयक, 2006 

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे ।

 

विधायी कार्य: विधेयक का पुर:स्‍थापन

राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या 3), 2006

श्री वीरेन्‍द्र मीणा(राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-3) विधेयक,2006 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा के लिये प्रस्‍ताव करता हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-3) विधेयक, 2006 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की जाये ?

(स्‍वीकृत)

विधेयक को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की गई ।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा(राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-3) विधेयक, 2006 को पुर:स्‍थापित करता हूं।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, आप अगर परमिट करें तो ।

श्री अध्‍यक्ष: हां हां क्‍यों नहीं करूंगी ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): आप तीनों बिल एक साथ रखवा दें उसके बाद एक ही साथ डिबेट करा दें ।

श्री अध्‍यक्ष: तीनों बिल एक साथ रखवा लूं, रख दीजिए । आपने अभी संख्‍या-3 रखा है 4 भी रख दीजिए ।

राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या 4), 2006

श्री वीरेन्‍द्र मीणा(राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-4) विधेयक,2006 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा के लिये प्रस्‍ताव करता हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-4) विधेयक,2006 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की जाये ?

(स्‍वीकृत)

विधेयक को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की गई ।

अब 5वां भी कर दें आप ।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा(राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-4) विधेयक, 2006 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा के लिये प्रस्‍ताव करता हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: 4 नहीं 5 करो, 4 तो कर दिया आपने ।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा(राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा के लिये कर रहा हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: हां वह कर देंगे, कर देंगे ।

राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या 5), 2006

श्री वीरेन्‍द्र मीणा(राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-5) विधेयक, 2006 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा के लिये प्रस्‍ताव करता हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-5) विधेयक, 2006 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की जाये ?

(स्‍वीकृत)

विधेयक को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की गई ।

अब इन दोनों को आप पुर:स्‍थापित भी कर दो । आप विनियोग संख्‍या-4 और विनियोग संख्‍या-5 को आप पुर:स्‍थापित कर दो ताकि मैं इनको बोलने का अवसर दूं मैं 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में तय हुआ था जब एक्‍सेस डिमांड इन्‍हीं के टाइम की है और इन पर चर्चा पहले हुई हुई है ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): सैक्रेटरी साहब के कमरे में यह भी तय हुआ था कि जब विधायक और पूर्व विधायक की सुविधा की चर्चा चलेगी तो आप खडे होकर यह प्रस्‍ताव करेंगे कि इस संबंध में एक कमेटी बनाकर रिव्‍यु किया जायेगा । तो फिर जिस पर हां करते हो उस पर क्‍यों बदल जाते हो हाउस में आकर । खडे होकर कहो ना यहां पर आप, बाहर तो बडी बडी बातें करते हो । (व्‍यवधान)

श्री वीरेन्‍द्र मीणा(राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-4) विधेयक, 2006 को पुर:स्‍थापित करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: 5 को भी कर दो ।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा(राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-5) विधेयक, 2006 को पुर:स्‍थापित करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: पुर:स्‍थापित कर दिया लेकिन जब विचारार्थ के लिये बोलेंगे तब बोलोगे ना । लेकिन ऐसा है कि जब यह फैसला हो गया था तो इसे कर दो पास, आपके समय का है और अतिरेक है, करना है ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): समय और न समय की बात नहीं है जो काम हमारा लेजिस्‍लेटर का है उस काम को तो हम डिसकस नहीं करना चाहते हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: अच्‍छा बोलिए, बोलिए आप ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): आप प्रस्‍ताव रखवाइए ।

श्री अध्‍यक्ष: तीनों विधेयकों को आप विचारार्थ लेने के लिये अपना प्रस्‍ताव रख दीजिए । विनियोग संख्‍या-3, विनियोग संख्‍या-4, विनियोग संख्‍या-5 ।

विधेयक पर विचार

राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या 3), संख्‍या 4) व संख्‍या 5), 2006

श्री वीरेन्‍द्र मीणा(राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से प्रस्‍ताव करता हूं कि राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-3,4 एवं 5)विधेयक, 2006 को विचारार्थ लिया जाये ।

श्री अध्‍यक्ष: डा.सी.पी.जोशी ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): पहले राठौड साहब ।

श्री अध्‍यक्ष: राठौड साहब क्‍यों बोलेंगे । आपको कुछ बोलना है, बोलिए ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, अभी सदन में कई माननीय सदस्‍यों ने अपनी सुविधाओं के लिये अपने अधिकारों की बात यहां पर कही है ।

श्री अध्‍यक्ष: सुविधा की बात एक गाडी की करी आपने और तो आपने सब आन, बान और शान की करी है, एक गाडी गाडी की बात सुविधा की करी है।

हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): गाडी का तो आलरेडी आर्डर है ।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर(खारची) हम जनता की समस्‍या के लिये गाडी की मांग कर रहे हैं ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍यों की आन, बान और शान से संबंधित जो बातें यहां पर कही इस पर आप अगर कोई समिति का गठन करना चाहे, वैसे तो विधान सभा की गृह समिति बनी हुई है । गृह समिति विचार कर लें अगर आप उपयुक्‍त समझेंगे तो इनसे चर्चा के लिये अलग अलग दलों के एक-एक, दो-दो माननीय सदस्‍यों को नामजद कर देंगे तो इन सबसे बात करने के बाद कोई कंसोलिडेट प्रस्‍ताव लेकर ...

श्री अध्‍यक्ष: लेकिन इनकी आन, बान और शान रहनी चाहिये ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): इनकी आन, बान और शान रहेगी ।

खुशवीर सिंह जोजावर(खारची): आन, बान और शान प्रजातंत्र की, हमारी नहीं।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी आज्ञा से और यह जानते हुए कि यह परम्‍परा रही है कि एक्‍सेस पर डिसकशन नहीं होता है, पर मेरी सभी माननीय सदस्‍यों से सानुरोध प्रार्थना है और मैं चाहूंगा कि यह जो बार बार रिपोर्ट में जो चीज मेंशन हो रही है उस चीज पर माननीय सदस्‍य का ध्‍यान जाना चाहिये । 

श्री अध्‍यक्ष: एक तो आप धीरे भी बोले और जो टोके तो आप उत्‍तेजित ना हो, आप आराम से अपनी बात कहिए ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक निवेदन करना चाहूंगा आज जिन अतिरिक्‍त मांगों की चर्चा हो रही है और जिस कमेटी ने इन सबको जांचा है, परखा है, देखा है उसके आप ही चेयरमैन हैं ।  यह परम्‍परा नहीं रही कोई भी व्‍यक्ति किसी समिति से जुडा हुआ हो वह इस सदन में उन विषयों पर बोले, उन्‍हीं की सिफारिशों पर एक्‍सेस डिमांड की हम  चर्चा कर रहे हैं और यही बोल रहे हैं तो आप देख लें अध्‍यक्ष महोदय, यह एक नई परम्‍परा हो जायेगी ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): माननीय पार्लियामेंट्री अफेयर मिनिस्‍टर मैं पीयूसी का मेम्‍बर था जिस पीएसी ने रिकमंडेशन की उसका मेम्‍बर नहीं था, आप अपने आप को करेक्‍ट कर लें । यह जो डिसकशन हो रही है वह रिकमंडेशन पीएसी की है जिसमें मैं मेम्‍बर नहीं था । I was a Member of PUC. You don’t want to speak.

श्री अध्‍यक्ष: उस समय आप पीयूसी के मेम्‍बर थे ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): आप सब एमएलए को इग्‍नोरेंट क्‍यो रखना चाहते हो What is truth? Let us share with it.

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): बोलो, बोलो ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, मैं सबसे पहले माननीय सदस्‍यों का ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं कांस्‍टीट्युशन के आर्टिकल 205 पर । Supplementary, additional or excess grants. (1) The Governor shall

 (a) if the amount authorized by any law made in accordance with the provisions of Article 204 to be expended for a particular service for the current financial year is found to be insufficient for the purposes of that year or when a need has arisen during the current financial year for supplementary or additional expenditure upon some new service not contemplated in the annual financial statement for that year, or

(b) if any money has been spent on any service during a financial year in excess of the amount granted for that service and for that year, cause to be laid before the House or the Houses of the Legislature of the State another statement showing the estimated amount of that expenditure or cause to be presented to the Legislative Assembly of the State a demand for such excess, as the case may be.

 अध्‍यक्ष महोदय, हमारी विधान सभा के माननीë