गोपाल/अरुण/05032007/1100/1a
अशोधित
प्रति/प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
अंक
: 7
बारहवीं
विधान सभा के
सातवें सत्र
का पांचवां
दिवस
संख्या : 3
सोमवार, 05
मार्च, 2007
राजस्थान
विधान सभा की
बैठक 1100 बजे
विधान
सभा भवन,
जयपुर में
प्रारम्भ
हुई।
( श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष,
पदासीन )
श्री
उपाध्यक्ष: प्रश्नकाल।
माननीय सदस्यगण
..(व्यवधान)..
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
उपाध्यक्ष
महोदय, कोई
नई बात आज
नहीं हुई है,
जो बात 3 तारीख
को थी वही बात
आज है। जब तक
उपाध्यक्ष
महोदय, इस
मामले का
रिजोलुशन
नहीं होगा तब
तक सदन में
हमारा
प्रोटेस्ट
जारी रहेगा।
आपसे सानुरोध
प्रार्थना है
कि सबसे पहले
लोकतंत्र में
अपोजिशन को
अपनी बात कहने
का अवसर मिलना
चाहिए। यह
सरकार उन
पार्टी के
लोगों को
प्रोटेस्ट
करने का मौका
नहीं देना
चाहती।
लोकतंत्र में
हमारा अधिकार
है राइट टू
प्रोटेस्ट।
श्री
उपाध्यक्ष: माननीय
सदस्य।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
इस अधिकार को
खत्म करके
सरकार ..(व्यवधान)..
हम प्रोटेस्ट
जारी रखेंगे।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): उपाध्यक्ष
महोदय,
पूरा राजस्थान
देख रहा है,
राजस्थान की
जनता देख रही
है ..(व्यवधान)..
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
लोकतंत्र में
राइट टू प्रोटेस्ट
हमारा अधिकार
है। लोकतंत्र
में प्रोटेस्ट
करना हमारा
अधिकार है।
सरकार
लोकतंत्र में तानाशाही
की प्रवृत्ति
कायम करना
चाहती है,
इसको हम
लोकतंत्र में
बर्दाश्त
नहीं करेंगे।
..(व्यवधान)..
उपाध्यक्ष
महोदय,
सरकार अपनी
क्रिडेंशल्स
एस्टेब्लिश
करें कि
लोकतंत्र में
विश्वास है
या राजशाही
में विश्वास
है। ..(व्यवधान)..
पहले
गवर्नमेंट
अपनी
क्रिडेंशल्स
एस्टेब्लिश
करे। उपाध्यक्ष
महोदय,
बिना हाउस के
लोकतंत्र
नहीं चल सकता।
..(व्यवधान)..
लोकतंत्र की
व्यवस्था
ही नहीं है तो
उपाध्यक्ष
महोदय,
विधान सभा क्या
करेगी? विधान
और उपाध्यक्ष
की गरिमा
लोकतंत्र की
पद्धति के
अंदर है राजशाही
और तानाशाही
के अंतर्गत
नहीं है। यह तानाशाही
और राजशाही के
अंतर्गत राज
चलाकर
लोकतंत्र को
कुचलना चाहते
हैं तो विधान
सभा की आवश्यकता
क्या है?
इसलिए सबसे
पहले उपाध्यक्ष
महोदय, आप
इस हाउस ..(व्यवधान)..
उसके बिना
लोकतंत्र
नहीं चल सकता।
..(व्यवधान)..
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): उपाध्यक्ष
महोदय,
लोकतंत्र का
मखौल किसने
उड़ाया है? ..(व्यवधान)..
विधान सभा की
गरिमा किसने
गिरायी है ..(व्यवधान)..
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
उपाध्यक्ष
महोदय,
हमारा अधिकार
है, हम किसी की
मर्सी पर नहीं
आये हैं, जनता
ने हमको
निर्वाचित
करके भेजा है,
विपक्ष में
बिठाया है।
विपक्ष में
अपनी बात
कहेंगे। ..(व्यवधान)..
उपाध्यक्ष
महोदय, हम
अपनी बात को
कहेंगे।
उपाध्यक्ष
महोदय,
हमें जनता ने
जनता की बात
करने के लिए
चुना है, राज
करने के लिए
नहीं चुना है।
हम अपना राइट
टू प्रोटेस्ट
करने के लिए
मना नहीं
करेंगे। ..(व्यवधान)..
उपाध्यक्ष
महोदय, हम
अपने राइट टू
प्रोटेस्ट
को कंक्लूड
नहीं करेंगे।
लोकतंत्र में
अपनी बात करने
का अधिकार ..(व्यवधान)..
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय, क्या
यह लोकतंत्र
का तरीका है
महामहिम राज्यपाल
का अनादर किया
जाए, महामहिम
के सामने आकर
नारेबाजी की
जाए और उसके
बाद उनको भले
ही कुछ दिन के
लिए निकाल
दिया गया हो,
यह तो अध्यक्ष
महोदय की
सहृदयता है कि
उन्होंने
केवल माफी
मांगने के बाद
उनको अलाऊ करने
की बात कह दी,
मैं समझता हूं
यह शायद पहले
नहीं हुआ होगा
इनको सत्र के
लिए निकाला
गया हो ..(व्यवधान)..
श्री
अर्जुन सिंह
(दानपुर):
आदिवासियों
के हत्यारे
गृह मंत्री
जिन्होंने
ऋषभदेव में
गोलियां
चलवायीं।
आदिवासियों
के हत्यारे
हैं गृह
मंत्री ..(व्यवधान)..
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): इन्होंने
कृपा करके
केवल माफी
मांगने से
इनको अंदर
करने की इजाजत
दे दी ..(व्यवधान)..
महामहिम राज्यपाल
का अनादर हो
और सारा सदन
देखे और
लोकतंत्र का
तमाशा आपने और
हम सबने राज्यपाल
के अभिभाषण के
समय देखा ..(व्यवधान)..
उसके बाद भी
हम सब चाहते
हैं कि वो सदन
में आये और
सदन में आकर
अपने प्रतिपक्ष
का पूरा रोल
अदा करे। वे
सदन में आये
..(व्यवधान)..
श्री
अर्जुन सिंह
(दानपुर):
माननीय गृह
मंत्रीजी लोकतंत्र
के हत्यारे
आप हैं ..(व्यवधान)..
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): मैं
समझता हूं
इससे ज्यादा
और क्या होगा
..(व्यवधान).. आप
चाहते हैं हठधर्मी
चलेगी तो मैं
समझता हूं यह
कांग्रेस के लिए
भी उचित नहीं
रहेगा ..(व्यवधान)..
हम इस बात का
समर्थन करते
हैं प्रतिपक्ष
रहना चाहिए,
प्रतिपक्ष
अपनी बात कहे,
हम उनकी बात
से सहमत हैं,
लेकिन उन्होंने
जो कृत्य
किया उस कृत्य
की सज़ा केवल
अध्यक्ष
महोदय ने माफी
मांगने तक
सीमित कर दी
हो और उसके
बाद भी यह सदन
अड़ा रहे,
प्रतिपक्ष
अड़ा रहे तो
यह इस सदन का
सम्मान नहीं
होगा। मैं
सोचता हूं
इससे ज्यादा
कुछ किया नहीं
जा सकता। जो
अध्यक्ष जी
ने केवल
क्षमायाचना
पर उनको हाउस
में आकर अपनी
बात कहने के
लिए छोड़ दिया
..(व्यवधान)..
मैं आपसे
प्रार्थना
करता हूं कि
हम सबका धर्म
है कि यहां
ठीक प्रकार से
चर्चा हो और आप
इस चर्चा में
भाग लें,
लेकिन इतना
बड़ा अपराध
करने की सज़ा
अगर इतनी कम
करने के बाद
भी अगर हम उस
पर अड़े रहते
हैं तो यह इस
सदन का दुर्भाग्य
होगा ..(व्यवधान)..
श्री
अर्जुन सिंह
(दानपुर): आपने
जातिवाद को ध्यान
में रखकर
गोलियां
चलवायी हैं।
माननीय गृह
मंत्रीजी,
आपको इस्तीफा
दे देना
चाहिए। आपको
इस पवित्र सदन
में गृह
मंत्री के रूप
में बोलने का
कोई अधिकार
नहीं है। आपने
आदिवासियों
पर गोलियां
चलवायी हैं।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
बार-बार इस
प्रकार की घटना
होगी और लोग
इसी तरीके से
तमाशा
देखेंगे ..(व्यवधान)..
उनको सदन में
बुलाकर
लाएंगे तो यह
शायद इस
लोकतंत्र का
..(व्यवधान)..
अपने-अपने
दायरे से ऊपर
उठकर अगर ..(व्यवधान)..
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): गृह मंत्रीजी,
आप
प्रजातंत्र
का हवाला दे
रहे हैं आपसे
तो किसानों ने
पानी मांगा और
गोली दी है और
आप
प्रजातंत्र
की दुहाई दे
रहे हैं। शर्म
आनी चाहिए
आपको।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
विपक्ष का रोल
निश्चित रूप
से रहना चाहिए
और ..(व्यवधान)..
केवल क्षमायाचना
करने से
..(व्यवधान)..
हमने यहां कई
बार
क्षमायाचना
की, हमारे
किसी सदस्य
ने भी कुछ
किया, हमने स्वयं
ने उठकर क्षमा
मांगी। इस सदन
से सर्वोपरि और
कौन हो सकता
है? क्षमा
मांगने से कोई
आदमी की आयु
कम हो जाती है?
इतना बड़ा
अपराध
महामहिम के
सामने हुआ ..(व्यवधान)..
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): आपकी
पुलिस उनको
सदन में आने
नहीं दे रही
क्षमायाचना
कहां से
करेंगे?
श्री
अर्जुन सिंह
(दानपुर):
उपाध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
आदिवासियों
पर गोली
चलवायी है ..(व्यवधान)..
आप इस्तीफा
दो। आपने
जातिवाद को ध्यान
में रखकर ..(व्यवधान)..
श्री
उपाध्यक्ष: माननीय
सदस्य ..(व्यवधान)..
श्री
अर्जुन सिंह
(दानपुर): आपने
ऋषभदेव में
जातिवाद को ध्यान
में रखकर
आदिवासियों
पर गोलियां
चलवायीं।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
उपाध्यक्ष
महोदय,
लोकतंत्र में
लोक का गला
घोंटकर
लोकतंत्र नहीं
चलाया जा
सकता। खाली
राज्यपाल के
अभिभाषण का
अपमान करने की
बात नहीं है,
पूरे
लोकतंत्र का
अपमान किया जा
रहा है। लोकतंत्र
में राइट टू
प्रोटेस्ट
के अधिकार का
हनन किया जा
रहा है। ..(व्यवधान)..
राइट टू
प्रोटेस्ट
पर विरोध करना
हमारा अधिकार
है। लोकतंत्र
की मूल भावना
को ही खत्म
कर देना चाहते
हो। राज्यपाल
का अभिभाषण
विधान सभा तक
ही ठीक है ..(व्यवधान)..
किसानों पर
गोली चला रहे
हो, आदिवासियों
पर गोली चला
रहे हो, लोगों
से बात नहीं
कर रहे हैं, यह
लोकतंत्र है
क्या?
लोकतंत्र में
जिनका विश्वास
नहीं है ..(व्यवधान)..
यह नहीं हो
सकता उपाध्यक्ष
महोदय, ..(व्यवधान)..
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय,
श्रद्धांजलि
जब दी जाती है,
शोकाभिव्यक्ति
दी जाती है तब
तो सारा सदन
एक साथ सुनता है
और पहली बार
शोकाभिव्यक्ति
की जा रही थी
तब भी सारे
माननीय सदस्यगण
नारेबाजी कर
रहे थे। ..(व्यवधान)..
और यह
प्रजातंत्र
की दुहाई दे
रहे हैं ..(व्यवधान)..
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
लोगों से बात
नहीं करें यह
लोकतंत्र है
क्या? ..(व्यवधान)..
डा. ओ. पी.
महेन्द्रा
(उप मुख्य
सचेतक): उपाध्यक्ष
महोदय,
प्रश्न
पुकारें।
हमार
मंत्रीगण
तैयार बैठे
हैं ..(व्यवधान)..
एक-एक प्रश्न
पर कितना
खर्चा बैठता
है? आप प्रश्न
पुकारें
उपाध्यक्ष
महोदय। ..(व्यवधान)..
श्री नन्दलाल
बंशीवाल
(दौसा): यह बड़े
आश्चर्य की
बात है। इन
कांग्रेस
वालों को बाहर
निकाल दो आप। ..(व्यवधान)..
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
उपाध्यक्ष
महोदय,
सौ-सौ चूहे
खाकर बिल्ली
हज करने जा
रही है।
लोकसभा तो
चलने नहीं दे रहे
और यहां कह
रहे हैं।
लोकसभा में
प्रोटेस्ट
कर रहे हैं और
यहां भाषण दे
रहे हैं कि
गलत कर रहे
हो। ..(व्यवधान)..
श्री
कालूलाल गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं
पंचायती राज
मंत्री): सीपी
जोशी साहब, आप
भी लोक सभा का
बदला यहां ले
रहे हो ..(व्यवधान)..
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
उपाध्यक्ष
महोदय, ..(व्यवधान)..
एक तरफ ये
लगातार तीन
साल से कर रहे
हैं, लेकिन
उसके बावजूद
भी लोक सभा के
अध्यक्ष
सोमनाथ
चटर्जी ने एक
भी इनके आदमी
को बाहर नहीं
निकाला और इन्होंने
किया। ..(व्यवधान)..
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, जिस
प्रकार का
आचरण ये कर
रहे हैं,
पार्लियामेंट
नहीं चलने
देना चाहते
..(व्यवधान)..
फिर भी लोकसभा
के अध्यक्ष
ने एक भी
भारतीय जनता
पार्टी के
पार्लियामेंट
के सदस्य को
आज तक लोक सभा
की कार्यवाही
से निष्कासित
नहीं किया।
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय,
लोकतंत्र में
सदन नहीं चलने
का अधिकार ..(व्यवधान)..
ये बौछार का
सामना करने को
तैयार नहीं हैं
..(व्यवधान)..
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
अभिभाषण का
बहिष्कार ही
नहीं किया
बल्कि उनका
अपमान किया और
..(व्यवधान).. उस
तरह की बात
करके
लोकतंत्र की
दुहाई देकर
..(व्यवधान)..
मोहन/अरूण/अशोधित
प्रति
प्रकाशनार्थ
नहीं/05032007/1b/1110
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य, आप अपना स्थान
ग्रहण करें। ...(व्यवधान)...
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
और जो राज्यपाल
महोदय का
अपमान करता
है, यह इस तरह
की बात लोकतंत्र
की दुहाई देकर
उनका फेवर ले
रहे हैं। ...(व्यवधान)...
और फिर आप कह रहे
हैं कि ...(व्यवधान)...
केवल माफी
मांगने पर उन्हें
सदन में आने
के लिए अध्यक्ष
महोदय ने व्यवस्था
दे दी। वे सदन
में आएं और
माफी मांगें
तो यह सद उन्हें
माफ कर सकता
है। ...(व्यवधान)...
चोरी भी करें
और सीनाजोरी
भी करें। ...(व्यवधान)..
एक माननीय
सदस्य:
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय,
जनजाति
मंत्री महोदय
पर भ्रष्टाचार
का आरोप है।
...(व्यवधान)...
डा. ओ. पी.
महेन्द्रा
(सरकारी उप
मुख्य
सचेतक): इस
मुद्दाविहीन
प्रतिपक्ष के
पास किसी
प्रकार की
जनता की समस्याओं
से कोई सरोकार
नहीं है। ...(व्यवधान)...
हम जवाब देने
के लिए तैयार
हैं। ...(व्यवधान)...
श्री मदन
राठौड़
(सुमेरपुर): और
यदि कांग्रेस
के सदस्य
प्रश्न नहीं
पुकारते हैं
तो हमारे सदस्य
तैयार हैं और
मंत्रिमण्डल
के सदस्य भी
तैयार हैं उत्तर
देने के लिए।
आप प्रश्न
काल पुकारें,
उपाध्यक्ष
महोदय । यह तो
गैर जिम्मेदार
हैं।
कांग्रेस के
सदस्य नहीं
पुकारते हैं
तो हमारे सदस्य
तैयार हैं।
...(व्यवधान)... आप
आगे का प्रश्न
पुकारें।
हमारे सदस्य
प्रश्न करने
के लिए तैयार
हैं। ...(व्यवधान)...
श्री नन्दलाल
बंशीवाल
(दौसा): आप लोग
बाहर जाइए न,
हाउस को चलने
दो, पधारो आप
लोग। ...(व्यवधान)...
विरोध तो आपको
करना आता नहीं
है। ...(व्यवधान)...
बाहर जाइए आप।
उपाध्यक्ष
महोदय, इन
सब को बाहर
निकालो। ...(व्यवधान)...
श्रीमती
ममता शर्मा
(बूंदी):
लोकतंत्र का
गला घोंटना चाहते
हैं। ...(व्यवधान)...
श्री
उपाध्यक्ष:
सदन की कार्यवाही
12.00 तक के लिए स्थगित
की जाती है।
(तदनन्तर
सदन की
कार्यवाही 11.12
बजे 12.00 बजे तक के
लिए स्थगित
हुई)
Skp/akt/05032007/1200/1g/1
(पुन:
समवेत होने
पर)
(12.00 बजे)
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्यक्ष महोदय, आपको बहुत-बहुत धन्यवाद हाउस की कार्यवाही शुरू नहीं कर रहे उसके लिए।
श्री अध्यक्ष: मैं 295 के लिए नाम पुकार रही हूं। श्री बाबूसिंह राठौड़। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके सामने जो स्थिति तीन तारीख को थी, आज भी वही स्थिति है। लोकतंत्र में विरोध पक्ष की आवाज दबाकर लोकतंत्र नहीं चल सकता अध्यक्ष महोदय। (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्यक्ष महोदय, अपनी बात कह सकते हैं। (व्यवधान) वो अपनी बात कहने के लिए तैयार नहीं हैं। (व्यवधान)
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): विधान सभा की गरिमा, अध्यक्ष पद की गरिमा, सरकार की गरिमा तब रहती है अध्यक्ष महोदय, जब विरोध पक्ष को अपनी बात कहने का अवसर मिले। यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है अध्यक्ष महोदय कि यह सरकार, लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार जिस तरह से कार्यवाही कर रही है न केवल तानाशाही में ऐसी कार्यवाही होती है, न केवल राजशाही में ऐसी कार्यवाही होती है। अध्यक्ष महोदय, किसान आंदोलन कर रहे हैं उसके ऊपर गोली चलायें, पानी मांगे तो गोली चलायें, आदिवासियों की समस्या के सम्बन्ध में सरकार ठीक ढंग से कदम नहीं उठा सके और आदिवासियों पर गोली चलानी पड़े, इससे बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति, माननीय अध्यक्ष महोदय, किसी भी लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार की नहीं। (व्यवधान) न बिजली की व्यवस्था हो और लोकतंत्र में अपनी बात कहने का अवसर भी नहीं मिले। अध्यक्ष महोदय, मैं समझता हूं, आप स्वयं को आगे आकर के यह बात करनी चाहिए कि लोकतंत्र मजबूत हो। यह तानाशाही.... (व्यवधान) राजशाही मनमानी कर सके.... (व्यवधान) अध्यक्ष महोदय, आपको फैसला करना चाहिए। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्य। नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्य। (व्यवधान)
(कांग्रेस
पार्टी के
माननीय सदस्यों
द्वारा सदन
कूप में
नारेबाजी)
ग्राम
देचू (जोधपुर) में अनाज उप
मण्डी यार्ड
स्थापित करने
विषयक
श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): अध्यक्ष महोदय, मैं आपको जोधपुर (अनाज) मण्डी क्षेत्र देचू में उप मण्डी प्रांगण की स्थापना एवं निर्माण हेतु भूमि का चयन/आवंटन के बारे में अवगत करवाना चाहूंगा कि:-
ग्राम देचू के आस-पास की घनी आबादी के गांव निवासी यहीं से दैनिक उपयोगी एवं आवश्यक सामान की खरीद करते रहने से यह एक व्यापारिक केन्द्र है।
देचू क्षेत्र चांदसमा, कलाऊ, जेठानिया, सेतरावा, तेना, सोमेसर इत्यादि गांवों में करीब 300-400 ट्यूबवैल होने एवं पास में से इन्दिरा गांधी नहर की नजदीकी एवं उपजाऊ जमीन होने से कृषि की बहुलता के कारण रबी एवं खरीफ की पैदावार भी प्रचुर मात्रा में होती है।
अभी हाल ही में ट्यूबवैल नये स्थापित होने से जीरा, रायड़ा, मिर्च, इसबगोल, इत्यादि फसल बहुतायत से हो रही है तथा आगे भी इनकी पैदावार एवं क्षेत्र में भी वृद्धि की संभावना है।
ग्राम देचू में कृषि जिन्सों की पैदावार एवं व्यापार की स्थिति को देखते हुए ग्राम देचू एवं उसके नजदीक के क्षेत्रों की कुल मण्डी शुल्क से वर्ष 2002 से दिसम्बर, 2006 तक औसल 44,352/- रुपये आय प्राप्त हुई है जो उप मण्डी यार्ड स्थापित करते हेतु दिये गये उक्त प्रकार का व्यवसाय निर्धारित मापदण्डों से अधिक है।
किसानों द्वारा उत्पादित फसलों को बेचने हेतु स्थानीय मण्डी नहीं होने के कारण उनका उचित मूल्य किसानों को स्थानीय व्यापारियों से नहीं मिलता है। इस कारण किसानों को अपनी फसल बेचने हेतु अन्यत्र कृषि मण्डी अर्थात् जोधपुर, ओसियां, फलौदी जाना पड़ता है। इस प्रकार फसल परिवहन पर व्यय होने के कारण किसानों के फसलों की लागत बढ़ जाती है एवं उन्हें आर्थिक हानि उठानी पड़ती है।
इस सम्बन्ध में कार्यालय कृषि उपज मण्डी समिति (अनाज) जोधपुर के सचिव ने प्रस्ताव पारित कर अपनी अनुशंषा क्षेत्रीय सहायक निदेशक, कृषि विपणन विभाग, जोधपुर को भिजवाई है एवं क्षेत्रीय सहायक निदेशक, कृषि विपणन विभाग, जोधपुर ने इस पर कार्यवाही करते हुए अपनी अनुशंषा श्रीमान् निदेशक महोदय, कृषि विपणन निदेशालय, राजस्थान जयपुर को अपने कार्यालय पत्रांक 295-96 दिनांक 18 जनवरी, 2007 द्वारा भिजवाई है।
अत: उक्त बिन्दुओं पर व्यक्तिगत रूप से गौर फरमाते हुए कृषि उपज मण्डी समिति अनाज, जोधपुर के मण्डी क्षेत्र के ग्राम देचू में उप मण्डी यार्ड स्थापित करवाकर स्थानीय कृषकों को राहत प्रदान करवाने का श्रम करावें।
(कांग्रेस पार्टी के माननीय सदस्यों द्वारा सदन कूप में नारेबाजी)
श्री अध्यक्ष: श्री रामलाल शर्मा।
ग्राम
पंचायत
खेजरोली तहसील
चौमूं में
ओलावृष्टि से
प्रभावित
किसानों को
मुआवजा दिलाने
विषयक
श्री रामलाल शर्मा (चौमूं): माननीय अध्यक्ष महोदय, निवेदन है कि दिनांक 10.2.2007 को चौमूं तहसील की ग्राम पंचायत खेजरोली में ओलावृष्टि से ग्राम पंचायत के सैकड़ों किसानों की गेहूं, जौ, सरसों की फसल चौपट हो गई। तहसील की गिरदावरी रिपोर्ट के अनुसार लगभग 453 किसान इस ओलावृष्टि से प्रभावित हुए तथा लगभग 458 हेक्टेयर भूमि की फसलों का नुकसान हुआ जबकि सरकार के द्वारा मात्र 168 किसानों को ही मुआवजा दिया गया। मुआवजा जिन मापदण्डों के अनुसार दिया गया उनमें भी संशोधन की आवश्यकता है। किसान चाहे किसी भी श्रेणी का हो, उसकी फसल का नुकसान तो हुआ ही है। अत: मुआवजे के मापदण्डों को संशोधित कर सभी किसानों को मुआवजा दिलवाने का श्रम करें तथा कई परिवार ऐसे हैं जिनका राजस्व रिकार्ड में संयुक्त खातेदारी के कारण भी मुआवजे से वंचित होना पड़ा।
अत: आपके माध्यम से राज्य सरकार से अनुरोध है कि ओलावृष्टि से प्रभावित सभी किसानों को मुआवजा दिलाने का श्रम करें। धन्यवाद।
श्री अध्यक्ष: 295 के प्रस्ताव जिन माननीय सदस्यों ने यहां पर प्रस्तुत किये हैं वो पढ़े हुए मान लिये गये। अब मैं एक बार आपसे भी कुछ निवेदन कर रही हूं। एक बार आपसे कुछ निवेदन कर रही हूं।
(कांग्रेस पार्टी के माननीय सदस्यों द्वारा सदन कूप में नारेबाजी)
मुदार्बाद तो करिये आप। (व्यवधान) आप मुझे मजबूर कर रहे हैं। माननीय सदस्य, मैं आपसे निवेदन कर रही हूं.... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्यक्ष महोदय, जब इस तरह से कर रहे हैं, ये मुर्दाबाद कर रहे हैं जिस तरह से.... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्य, मैं आपसे निवेदन कर रही हूं। इस सदन की गौरवमयी परम्पराएं रही हैं, इस सदन की गरिमा और प्रतिष्ठा बनाये रखने की जिम्मेदारी आपकी भी है, पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों की है। मैं आपसे फिर निवेदन कर रही हूं कि आप अपने स्थानों पर चले जाएं। आप मुझे मजबूर न करें। नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्य, नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्य, आप मुझे मजबूर कर रहे हैं। मैं आपसे फिर निवेदन कर रही हूं कि आप लोग अपने-अपने स्थान पर चले जाएं। आप लोग अपने-अपने स्थान पर चले जाएं। मैं आपसे निवेदन कर रही हूं, आप अपने-अपने स्थान पर चले जाएं। मैं आपसे फिर निवेदन कर रही हूं कि आप अपने-अपने स्थान पर चले जाएं। पर्ची किसकी है? (व्यवधान) मैं सदन को सूचना देना चाह रही हूं।
(कांग्रेस पार्टी के माननीय सदस्यों द्वारा सदन कूप में नारेबाजी)
सरकार तो बदल लेना आप, लेकिन मैं एक सूचना दे रही हूं वो सूचना सुन लीजिये आप। मैं सदन को सूचना दे रही हूं।
मुझे माननीय सदस्यों को सूचित करना है कि दिनांक 3.3.2007 को कस्बा नवलगढ़ में शांति भंग करने के प्रयास के आरोप में पुलिस थाना नवलगढ़ में रात्रि लगभग 10.05 बजे विधान सभा क्षेत्र गुढ़ा से विधायक श्री रणवीर सिंह गुढ़ा को 151 दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत गिरफ्तार किया गया। श्री रणवीर सिंह गुढ़ा नवलगढ़ कस्बा में प्रतिवर्ष धुलण्डी के अवसर पर निकाले जाने वाले गेर जुलुस के रास्ते को बदलने की मांग को लेकर कस्बे में लोगों को बरगलाने का प्रयास कर रहे थे और प्रयास करके दोनों सम्प्रदायों में साम्प्रदायिक सद्भावना को प्रभावित कर रहे थे। दिनांक 4.3.2007 को कस्बा नवलगढ़ में गेर निकलती है। अत: शांति भंग होने की सम्भावना को देखते हुए माननीय विधायक श्री रणवीर सिंह गुढ़ा को गिरफ्तार किया गया।
अब पर्ची पर बोलने के लिए मैं सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्य श्री मदन राठौड़ का नाम पुकार रही हूं।
(कांग्रेस पार्टी के माननीय सदस्यों द्वारा सदन कूप में नारेबाजी)
पर्ची
के माध्यम से
उठाये गये
मुददे
सुमेरपुर
सामुदायिक स्वास्थ्य
केन्द्र में
चिकित्साकर्मियों
का पदस्थापन
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्यक्ष महोदय, आपको बहुत-बहुत धन्यवाद कि आपने मुझे सदन में अपने क्षेत्र की समस्या रखने के लिए अवसर दिया।....
विजय/अरुण/05032007/1210/1h
अध्यक्ष
महोदय,
सुमेरपुर का
चिकित्सालय
सामुदायिक स्वास्थ्य
केन्द्र है
लेकिन मुझे इस
बात का बहुत
दु:ख है कि पहले
भी वहां का
प्रतिनिधित्व
कोई मंत्री ने
किया था जो
कांग्रेस
सरकार में
मंत्री थीं और
एक और आश्चर्य
की बात है कि
पाली जिले से
ही कांग्रेस के
राज में एक
चिकित्सा
मंत्री भी थे
और जो सोजत से
विधायक थे और
वह राजस्थान
के चिकित्सा
मंत्री भी थे
लेकिन
सुमेरपुर के
अस्पताल में
अभीडिस्पेंसरी
के निमित्त
जितने डाक्टर
होने चाहिए,
उतने ही डाक्टर्स
उन्होंने
लगाये।
सामुदायिक स्वास्थ्य
केन्द्र में
कम से कम 11 डाक्टर्स
होने चाहिए।
वहां पर निश्चेतन
का डाक्टर
होना चाहिए जो
वहां पर नहीं
लगाया गया।
वहां पर शिशु
रोग का कनिष्ठ
विशेषज्ञ
लगाया जाना
चाहिए, वह भी
नहीं लगाया
गया। वहां पर
ई.एन.टी. का
डाक्टर लगना
चाहिए था, वह
भी नहीं लगाया
और आर्थोपेडिक्स
का डाक्टर भी
नहीं लगाया
यानी इन्होंने
चार-चार डाक्टर
के पद भी
सृजित नहीं
किये, यह बड़े
आश्चर्य की
बात है।
सी.एच.सी. में जहां
11 डाक्टर
होने चाहिए,
वहां पर
सुमेरपुर में
केवल पाँच
डाक्टर
लगाये गये और
वहां पर केवल
चार नर्सेज
लगाई गईं जबकि
वह नेशनल
हाईवे पर
स्थित है,
राष्ट्रीय
राजमार्ग 14 पर
यह सुमेरपुर
का अस्पताल
स्थित है।
जहां पर आये
दिन
दुर्घटनाएं होती
रहती हैं, कई
मरीज वहां पर
आते हैं। यह
सब इसलिए किया
गया अध्यक्ष
महोदय, क्योंकि
पहले
कांग्रेस के
राज में जो
मंत्री थे या
वहां का जो
प्रतिनिधित्व
करती थीं,
उनका निजी
चिकित्सालयों
से सम्बन्ध
था। निजी
चिकित्सालयों
को लाभदिलवाने
के लिए वहां
पर इस प्रकार
के डाक्टर्स
की नियुक्ति
नहीं की गई।
यह बड़े
दुर्भाग्य
की बात है और
मैं मेरी
सरकार से भी
निवेदन करना
चाहूंगा कि अब
वहां पर जिस
प्रकार से
सी.एच.सी. पर
जितने डाक्टर्स
होने चाहिए,
वे पद सृजित
करवाने की
कृपा करें।
पूर्ववर्ती
सरकार गैर
जवाबदार रही
और बिलकुल
लापरवाही की
उन्होंने और
यह दृश्य वे
आज भी यहां
सदन में
उपस्थित कर
रहे हैं। ये
कांग्रेस के
लोग कभी भी
जवाबदार नहीं
हैं, गम्भीर
नहीं है। ये
चिंता नहीं
करते हैं,
जनता के हितों
की रक्षा करने
के लिए कतई
गम्भीर नहीं
हैं। आज भी कई
ऐसे महत्वपूर्ण
प्रश्न थे
जिन पर भी इन्होंने
चर्चा नहीं
चलने दी,
प्रश्नों को
नहीं आने
दिया। यह बड़े
दुर्भाग्य
की बात है और
आज मैं पर्ची
के माध्यम से
क्योंकि
हमारे प्रश्न
थे, बहुत गम्भीर
प्रश्न थे,
जिन प्रश्नों
को भी इन्होंने
नहीं उठाने
दिया। मैंने
आपसे निवेदन किया
कि पर्ची के
माध्यम से...(व्यवधान)
मैं कहना
चाहूंगा कि
सुमेरपुर में
आपका वहां पर
अस्पताल है,
सुमेरपुर के
सी.एच.सी. में
कम से कम 11 डाक्टर्स
होने चाहिए और
कम से कम आठ
पैरा-मेडिकल स्टाफ
होने चाहिए।
मैं धन्यवाद
देना चाहूंगा
चिकित्सा
मंत्रीजी को
कि जिन्होंने
अभी चार डाक्टर्स
के क्वार्टर्स
के लिए धन
उपलब्ध
करवाया। यही
नहीं, चार
पैरा-मेडिकल
स्टाफ के क्वार्टर्स
बनाने के लिए
इन्होंने धन
उपलब्ध
करवाया, इसके
लिए चिकित्सा
मंत्रीजी को
मैं धन्यवाद
देना
चाहूंगा। यही
नहीं, दो क्लास
फोर्थ
कर्मचारियों
के लिए और
लिपिक के लिए
रहने के लिए
सुविधा उपलब्ध
करवाने के लिए
इन्होंने धन
उपलब्ध
करवाया, इसके
लिए मैं इस
सदन के माध्यम
से चिकित्सा
मंत्रीजी को
धन्यवाद
देना
चाहूंगा।
मैं यह
भी चाहूंगा कि
यह सी.एच.सी. है,
नेशनल हाईवे पर
स्थित है,
जहां आये दिन
दुर्घटनाएं
होती रहती
हैं। कृपा
करके सी.एच.सी.
के निमित्त
जो सुविधाएं
हैं, वह
सुविधाएं आप
मुहैया करवाने
का कष्ट
करें। वहां पर
पाँच डाक्टर्स,
एक वरिष्ठ
चिकित्सक की
जरूरत है। चार
और डाक्टर्स
की आवश्यकता
है जो सी.एच.सी.
में होने
चाहिए। 11 डाक्टर्स
होने चाहिए
लेकिन पूर्व
की सरकार ने
वहां पर
भेदभाव रखा क्योंकि
सुमेरपुर नगर
ने पूर्व की
सरकार को कभी भी
समर्थन नहीं
दिया। पहले
वहां पर
सुमेरपुर नगर
में हमेशा
बोर्ड हमारा
रहा, इनका
बोर्ड नहीं
रहा....
(कांग्रेस
पार्टी के
माननीय सदस्यों
द्वारा सदन के
कूप में
नारेबाजी व
व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: कृपया
समाप्त
करें। (व्यवधान)
कृपया समाप्त
करें।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ...ये ऐसे भेदभावपूर्ण तरीके से कार्य करते रहे। मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहूंगा कि जहां पर वहां जरूरत है अभी, एक पद सृजित होना चाहिए कनिष्ठ विशेषज्ञ निश्चेतन का, एक होना चाहिए आर्थोपेडिक्स के कनिष्ठ विशेषज्ञ का, एक होना चाहिए नेत्र विशेषज्ञ का, एक होना चाहिए ई.एन.टी. का, ये पद होने चाहिए। एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी का पद भी होना चाहिए और चिकित्सा अधिकारी के चार अन्य जिसमें डेंटिस्ट चिकित्सा अधिकारी, यह वहां पर हो। यह व्यवस्था
कृपा करके आप
करवाने का कष्ट
करें। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
कृपया समाप्त
करें। माननीय
सदस्य, कृपया
समाप्त
करें। (व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
मैं यह भी
निवेदन करूंगा
कि मेल नर्स
के पद जो कम
हैं, सी.एच.सी.
में होने
चाहिए। एक मेल
नर्स और पाँच
फिमेल नर्स के
और ए.एन.एम. का
पद एक कम है, जो
मैं आपके
सामने रख रहा
हूं। जो हैं,
वह आपने भर
दिये, इसके
लिए मैं आपको
बहुत-बहुत धन्यवाद
देना चाहूंगा
और मैं
मंत्रीजी से
भी निवेदन
करना चाहूंगा
कि कृपा करके....
श्री
अध्यक्ष:
कृपया समाप्त
करें।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
...सदन में यह
घोषणा करे ताकि
मेरे क्षेत्र
की जनता यह
समझे कि आपका
प्रतिनिधित्व
सफल रहा है और
आपको धन्यवाद
दे सके। (व्यवधान)
श्री
धर्मेन्द्र
कुमार मोची
(टिब्बी):
सोनियाजी को
रो रहे हो क्या?
सोनियाजी तो
राज़ी-खुशी
है, उनको रो
रहे हो क्या?
(व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ये
जनता के हितों
की रक्षा नहीं
कर रहे हैं, ये
केवल हाय-हाय
करने के लिए
कर रहे हैं।
(व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपका ध्यान
आकृष्ट करना
चाहूंगा कि यह
जो एक एम.एल.ए.
आये थे सी.पी.जोशी
साहब, इन्होंने
सदन में कहा
था, हम यहां
हाय-हाय करने
के लिए आये
हैं। बड़े
दुर्भाग्य
की बात है कि
इन्होंने
सदन में स्वीकार
किया कि हम
हाय-हाय करने
के लिए आये।
हम हाय-हाय
करने के लिए
नहीं, हम धन्यवाद
करने के लिए
और अपने
क्षेत्र के
हितों की
रक्षा करने के
लिए, सदन में अपनी
बात रखने के
लिए आये हैं
और इनके लिए
दुर्भाग्य
बना रहे, यह
शर्म इनको
नहीं आती,
इनको निश्चित
रूप से शर्म
आनी चाहिए। अब
मैं कृपा करके
मंत्रीजी से
निवेदन करना
चाहूंगा कि
कृपया यह घोषणा
करने का कष्ट
करें ताकि
मेरे क्षेत्र
की जनता आपको
धन्यवाद दे
सकें। (व्यवधान)
(कांग्रेस
पार्टी के
माननीय सदस्यों
द्वारा सदन के
कूप में
नारेबाजी एवं
व्यवधान)
डा.
दिगम्बर
सिंह (चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय....
श्री
अध्यक्ष:
चूंकि मैं कुछ
सुन नहीं पा
रही हूं इसलिए
सदन की
कार्यवाही दो
बजे तक के लिए
स्थगित की
जाती है। (व्यवधान)
आप जवाब दे
रहे हैं? दे
दीजिये। अब स्थगित
कर दिया, सदन
की कार्यवाही
स्थगित कर
दी।
(कांग्रेस
पार्टी के
माननीय सदस्यों
द्वारा सदन के
कूप में
नारेबाजी एवं
व्यवधान)
(सदन
की बैठक 12.16 बजे,
दोपहर दो बजे
तक के लिए स्थगित
हुई।)
Jkj/akt/14.00/5.3/2007/2c
(14.00
बजे )
पुन:
समवेत् होने
पर
(
श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष,
पदासीन )
श्री
उपाध्यक्ष:
सदन की
कार्यवाही
आधे घंटे के
लिए स्थगित
की जाती है।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 14.00
बजे आधा घंटे
के लिए स्थगित
हुई।)
Lpm/akt/1430/2f/5032007
(14.30 बजे)
पुन:
समवेत् होने
पर
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
श्रीमती
वसुन्धरा
राजे (मुख्य
मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय, सारे
देश की जनता
और वैसे सब
लोग जानते हैं
कि राजस्थान
की विधानसभा
का एक बहुत ही
गौरवशाली
इतिहास है और
यहां की जो
परम्परायें
हैं, गरिमा की
एक अलग ही
पहचान बनी है।
इसी विधानसभा
में महामहिम
उप-राष्ट्रपति
श्री
भैरोसिंहजी
शेखावत जैसे
व्यक्तित्व
ने बहुत लम्बा
समय निकाला और
आज के समय में
भी प्रतिपक्ष के
तीन माननीय
सदस्य श्री
अशोक गहलोतजी,
श्री माथूर साहब
और श्री जगन्नाथ
पहाडि़या जी
प्रदेश के
मुख्यमंत्री
रहे हैं। फिर
भी मुझे बहुत
अफसोस है कि
विगत तीन
दिनों में जिस
तरह का
वातावरण इस विधानसभा
में बना वह हम
सब के लिए
बहुत ही तकलीफदेह
है। सदन को
चलाने की जिम्मेदारी
अगर पक्ष की
है तो साथ में
प्रतिपक्ष की भी
है। यें
सर्वोच्च
सदन है और
यहां राजस्थान
की जनता का हम
सब
प्रतिनिधित्व
करते हैं।
यहां तार्किक
और रचनात्मक
बहस हो यह हम
सब का उद्देश्य
रहना चाहिए।
मैं तो यह
चाहूंगी कि यह
गतिरोध टूटे।
आसन और सदन के
प्रति सम्मान
रहे और अध्यक्ष
महोदया भविष्य
में भी ऐसी
बात फिर न हो,
इसके लिए मैं
निवेदन यह
करना चाहूंगी
कि एक कोड ऑफ
कॉन्डेक्ट
बने ताकि ऐसे
रेपिटेशन्स
फिर न हो और
मैं समझती हूं
कि इस पर
प्रतिपक्ष भी
सहमत होगी।
श्री
अध्यक्ष:
नेता
प्रतिपक्ष।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, 3-4 दिन से
जो चल रहा है
उस पर मुख्यमंत्रीजी
ने जो बात
कहीं है मैं
भी यह महसूस करता
हूं कि यह अच्छा
नहीं हुआ और
मुझे तो खुद
को इतना अफसोस
है कि इस
प्रकार की
घटना हुई।
इसको यही
समाप्त करके
और इनका निलम्बन
को वापस ले
लिया जाए।
श्री
अध्यक्ष:
घटना तो अशोभनीय
थी ना, अफसोस
तो जताओ थोड़ा
आप।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
घटना अशोभनीय
थी और मुझे इस
पर अफसोस है।
श्री
अध्यक्ष: ठीक
है, इसमें
हंसने की क्या
बात हुई? ठीक
बात कहीं है
उन्होंने
हँसे क्यों?
माननीय जो
सदस्य
निलम्बित हैं
पहले आप.. वो पहले
कैसे आयेंगे
जब तक आप
रिवोक नहीं
करोगे How
can कैसे
एंट्री होगी
उनकी?
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): तीन आ
रहे हैं या
चार...
श्री
अध्यक्ष: तीन
हैं, लेकिन
पहले आप रिवोक
करेंगे तब ही
क्षमा
मांगेंगे ना,
जो सदन में
उपस्थित होगा
एक्सप्रेशन
उसी का तो
रद्द होगा।
चौथे आ जाए, जब
वह आ जाएंगे
तो उनका भी हो
जाएगा।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अध्यक्ष
महोदय,
प्रक्रिया के
नियम 292 (2) के अन्तर्गत
प्रस्ताव ।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, दिनांक
1 मार्च,2007
को सदन द्वारा
प्रस्ताव
पारित किया
गया। जिससे
श्री अमराराम
धोद, श्री
सुरेश मीणा,
श्री
मुरारीलाल
मीणा सदस्य
राजस्थान
विधानसभा को
आसन के
निर्देशों की
लगातार अवहेलना
करने के कारण
महामहिम राज्यपाल
के संवैधानिक
पद की गरिमा,
मर्यादाओं एवं
सदन की स्वस्थ
परम्पराओं
का उल्लंघन
करते हुए
लगातार हौ-हुल्ला,
नारेबाजी एवं
अमर्यादित
आचरण के कारण
वर्तमान सत्र
की शेष अवधि
के लिए
निलम्बित
किया गया था।
राजस्थान
विधानसभा की
उच्च
गौरवशाली
संसदीय परम्परायें
रही हैं लेकिन
महामहिम राज्यपाल
के बजट
अभिभाषण के
समय सदन में
जो कुछ हुआ
उससे महामहिम
राज्यपाल
माननीय अध्यक्ष
महोदय, सदन के
नेता सहित
संपूर्ण सदन
के सदस्य
काफी आहत हुए
हैं। पक्ष और
विपक्ष के मध्य
सौहार्दपूर्ण
वातावरण बना
रहे, यह सदन
जन-आकांक्षाओं
के अनुरूप
कार्य करें और
इस सदन की गौरवशाली
परम्परायें
अक्षुण्ण बनी
रहें, इस हेतु
मैं प्रस्ताव
करता हूं कि माननीय
सदस्य श्री
अमराराम धोद,
श्री सुरेश
मीणा, श्री मुरारीलाल
मीणा द्वारा
अफसोस जाहिर
करने पर उपरोक्त
तीनों सदस्यों
का निलम्बन
नियम 292 के
परंतुक के अन्तर्गत
अब तक के
निलम्बन को
पर्याप्त
मानते हुए सदन
द्वारा यह
संकल्प किए
जाने के बाद
शेष निलम्बन
तत्काल
प्रभाव से
समाप्त किया
जाए। अत: मैं
धरिये क्षमा,
विवेक, कोप न किजे
प्रियतमा,
प्रस्ताव
करता हूं।
श्री
अध्यक्ष: आप
अपने इसमें
इतना और
संशोधन कर दें
कि यदि गुढ़ा
से आने वाले
माननीय सदस्य
भी अपना अफसोस
और खेद प्रकट
करते हैं तो
उनका भी निलम्बन
कर दिया जाएगा
रद्द, रद्द कर
दिया जाएगा।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी भावना से
पूर्णत: सहमत
हूं यदि
माननीय गुढ़ा
जी भी यहां पर
आकर अफसोस जाहिर
करते हैं तो
उनका भी निलम्बन
वापस लिया
जाता है।
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न यह है
कि जो प्रस्ताव
सरकारी मुख्य
सचेतक ने
प्रस्तुत
किया है उसे
स्वीकार
किया जाए?
(स्वीकृत)
प्रस्ताव
स्वीकार
किया गया।
अब
उन तीनों को
बुला लीजिए,
सदन में बुला
लीजिए ताकि वो
भी अफसोस
जाहिर कर दें।
बुलाइए... सदन
ऐसे बैठे नहीं
रह सकता इसलिए
कृपया
शीघ्रता करें।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं एक
प्रार्थना कर
रहा था कि शून्यकाल
के अन्दर कुछ
माननीय सदस्यों
को अपने विचार
प्रकट करने
थे, व्यवधान
के कारण प्रकट
नहीं कर पाये।
आपने तो इतनी
उदारता दिखाई
है तो कृपया
जो आज माननीय
सदस्य हैं
जिनकी पर्ची
निकली थी, जो
अपनी बात कुछ
कहना चाहते थे
आपके माध्यम
से उनको
अनुमति और
प्रदान कर दें
तो बड़ी कृपा
हो जाएगी
आपकी।
श्री
अध्यक्ष:
शून्यकाल
समाप्त हो
गया है, अब आप
आगे का काम
चलने दें।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): उनको
कल अगर मौका
दें दे तो
बड़ी कृपा हो
जाएगी आपकी।
श्री
अध्यक्ष:
श्री अमराराम
जी।
श्री
अमराराम (धोद):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जो
राज्यपाल के
अभिभाषण के
वक्त मैंने
और माननीय तीन
सदस्यों ने
राजस्थान की
जनता की
जन-भावनाओं को
रखने की कोशिश
की है और उसमें
भावेश में कोई
भी ऐसी चीज
हुई है तो
उसके लिए सदन
की गरिमा को
कोई ठेस
पहुंची है तो
उसके लिए मैं ,
माननीय चारों
सदस्यों की
और से अफसोस
जाहिर करता
हूं कि सदन की
परम्पराओं
के अनुसार
राजस्थान की
जनता की
भावनाओं पर
विचार हो और
सरकार उन पर
समाधान करें,
इसमें कोई भी
भावेश में कोई
चीज ऐसी हुई
है जिसमें
गरिमा को ठेस
पहुंची हो तो
उसके लिए तो
मैं अफसोस
करता हूं
लेकिन जो
भावनायें
राजस्थान की
जनता की हैं
वो हमने रखने
की कोशिश की हैं।
धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष: ठीक
है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय, आपने
बड़ी उदारता
दिखाई थी, हम
सभी लोग थे,
आपने यह कहा
था कि जो कुछ
हुआ सदन की गरिमा
के प्रतिकूल
हुआ। उसके लिए
माननीय सदस्य
अफसोस प्रकट
करेंगे। अब
इन्होंने
यदि शब्द
लगाकर हमने
भावनाएं
राजस्थान की
जनता की प्रकट
की थी, इनको
अधिकार है
राजस्थान की
जनता की
भावनाओं को
प्रकट करने के
लिए अध्यक्ष
महोदय यह
नियमों और
प्रक्रिया
में आते और
कुछ भी बात
कहते। अगर आज
आसन सर्वोपरि
है अध्यक्ष
महोदय आपके
सामने हम अगर
क्षमा-याचना
कर लें, हम कोई
बौने नहीं हो
जाएंगे अध्यक्ष
महोदय, इसलिए
अध्यक्ष
महोदय आप
निर्देश दें।
श्री
अध्यक्ष: हो
गया है, अफसोस
जाहिर कर तो
उन्होंने....
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
संसदीय
मंत्री होने
के नाते सबकी
तरफ से आज खेद
व्यक्त कर
दीजिए।
श्री
अध्यक्ष: आप
काइको बोल रहे
हैं।
अधिसूचनाएं
श्री विरेन्द्र
मीणा।
श्री
वीरेन्द्र मीणा
(राज्य
मंत्री, वित्त
एवं करारोपण):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
कार्यसूची
में किए गए
उल्लेख के
अनुसार वित्त
विभाग की 42
अधिसूचनाएं
सदन की मेज पर
रखता हूं ।
|
|
अधिसूचना संख्या-एफ.12(43)वित्त/कर/2005-89 दिनांक 20.9.2006 जिसके द्वारा जयपुर-अजमेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर महेन्द्रा वर्ल्ड सिटी (जयपुर) लि. द्वारा स्पेशन इकॉनोमिक जोन (सेज) स्थापित करने के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा रीको के पक्ष में निष्पादित लीज-विलेख पर स्टाम्प ड्यूटी में छूट प्रदान की गई है । |
|
|
अधिसूचना संख्या-एफ.2(26)वित्त/कर/2006-90 दिनांक 25.9.2006 जिसके द्वारा वित्त अधिनियम के चेप्टर VII अर्थात् भूमि कर को 25.9.2006 से लागू किया गया है । |
|
|
अधिसूचना संख्या-एफ.2(26)वित्त/कर/2006-91 दिनांक 25.9.2006 जिसके द्वारा राजस्थान कर बोर्ड को रीवीजन ऑथोरिटी (भूमि कर) बनाया गया है । |
|
|
अधिसूचना संख्या-एफ.2(26)वित्त/कर/2006-92 दिनांक 25.9.2006 जिसके द्वारा राजस्थान भूमि कर नियम, 2006 विरचित किये गये है । |
|
|
अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-93 दिनांक 25.9.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-84 दिनांक 11.9.2006 में संशोधन किया गया है । |
|
|
अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-94 दिनांक 25.9.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-86 दिनांक 11.9.2006 में संशोधन किया गया है । |
|
|
अधिसूचना संख्या-एफ.2(30)वित्त/कर/2006-95 दिनांक 11.10.2006 जिसके द्वारा आवश्यक वस्तुओं पर नियंत्रण हेतु स्टाम्प अधिनियम की धारा 9 के अंतर्गत स्टाम्प ड्यूटी में कमी की गई है । |
|
|
अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-96 दिनांक 11.10.2006 जिसके द्वारा राजस्थान वेट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-II में संशोधन किया गया है । |
|
|
अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-97 दिनांक 11.10.2006 जिसके द्वारा रजिस्ट्रीकृत व्यवहारियों को कार के प्रयोग हेतु सशर्त कर 1 प्रतिशत की छूट प्रदान की गई है । |
|
|
अधिसूचना संख्या-एफ.12(14)वित्त/कर/2005-98 दिनांक 11.10.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(14)वित्त/कर/2006-137 दिनांक 8.3.2006 में संशोधन किया गया है । |
|
|
अधिसूचना संख्या-एफ.12(11)वित्त/कर/99-99 दिनांक 11.10.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-160 दिनांक 31.3.2006 में संशोधन किया गया है । |
|
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अधिसूचना संख्या-एफ.16(3)वित्त/कर/2004-पार्ट-I-100 दिनांक 11.10.2006
जिसके द्वारा आयुक्त वाणिज्यिक कर विभाग, राजस्थान जयपुर को राजस्व जिला भरतपुर की राजस्व तहसील पहाडी में सैण्ड स्टोन का खण्डा पर कर संग्रहण हेतु निर्देशित किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-101 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा पंजीकृत व्यवहारियों के सरसो, सरसों तेल के विक्रय पर कर की दर 1 प्रतिशत से बढाकर 2 प्रतिशत की गई है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-102 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा राजस्थान वेट अधिनियम,2003 की अनुसूची IV में संशोधन किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(103)वित्त/कर/2005-103 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा राजस्थान वेट अधिनियम,2003 की अनुसूची-I में संशोधन किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-104 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा राजस्थान वेट अधिनियम,2003 की अनुसूची-I में संशोधन किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-105 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-175 दिनांक 31.3.2006 (समय-समय पर यथासंशोधित) में संशोधन किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-106 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा राजस्थान वेट अधिनियम,2003 की अनुसूची-II में संशोधन किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-107 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा बुनकर संघ के कतिपय उत्पादों को कर मुक्त किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-108 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा राजस्थान स्टेट हैण्डलूम डवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, जयपुर के कतिपय उत्पादों को कर मुक्त किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.4(15)वित्त/कर/2003-109 दिनांक 18.10.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.4(15)वित्त/कर/2003-68 दिनांक 7.7.2006 में संशोधन किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.4(30)वित्त/कर/97-110 दिनांक 19.10.2006 जिसके द्वारा प्रति 40 टन चावल पर कर की राशि पर बोनस का परिहार किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(87)वित्त/कर/2006-111 दिनांक 14.11.2006 जिसके द्वारा कम्जोजीशन स्कीम टू ढाबा एण्ड भोजनालय-2006 लागू की गई है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.14(8)वित्त/कर/98-पार्ट-112 दिनांक 17.11.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.4(35)वित्त/ग्रुप-IV/87-38 दिनांक 6.7.1989 (समय-समय पर यथा संशोधित) में संशोधन किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.14(8)वित्त/कर/98-पार्ट-113 दिनांक 17.11.2006 जिसके द्वारा संख्या-एफ.4(35)वित्त/ग्रुप-IV/87-39 दिनांक 6.7.1989 (समय-समय पर यथा संशोधित) में संशोधन किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.14(8)वित्त/कर/98-पार्ट-114 दिनांक 17.11.2006 जिसके द्वारा संख्या-एफ.4(66)वित्त/ग्रुप-IV/82-40 दिनांक 6.7.1989 (समय-समय पर यथा संशोधित) में संशोधन किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.14(8)वित्त/कर/98-पार्ट-115 दिनांक 17.11.2006 जिसके द्वारा संख्या-एफ.4(66)वित्त/ग्रुप-IV/82-41 दिनांक 6.7.1989 (समय-समय पर यथा संशोधित) में संशोधन किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-116 दिनांक 27.11.2006 जिसके द्वारा द्वितीय तिमाही रिटर्न भरने की तिथि 30.11.2006 तक बढाई गई है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(80)वित्त/कर/2005-117 दिनांक 1.12.2006 जिसके द्वारा राजस्थान वेट अधिनियम, 2003 की अनुसूची-I में संशोधन किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(20)वित्त/कर/2005-पार्ट-118 दिनांक 1.12.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.4(1)वित्त/कर/99-266 दिनांक 21.1.2000 एवं अधिसूचना संख्या-एफ.4(1)वित्त/कर/2000-303 दिनांक 30.3.2000 निरस्त किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(58)वित्त/कर/2005-पार्ट-119 दिनांक 7.12.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(58)वित्त/कर/2005-पार्ट-40 दिनांक 6.5.2006 (समय-समय पर यथासंशोधित) में संशोधन किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-119 दिनांक 13.12.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-84 दिनांक 11.9.2006 में संशोधन किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-121 दिनांक 13.12.2006 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-86 दिनांक 11.9.2006 में संशोधन किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(142)वित्त/कर/2006-122 दिनांक 2.1.2007 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-67 दिनांक 5.7.2006 में संशोधन किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-123 दिनांक 8.1.2007 जिसके द्वारा वर्ल्ड फूड प्रोग्राम एजेंसी को कर में छूट प्रदान की गई है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.2(26)वित्त/कर/98-124 दिनांक 3.2.2007 जिसके द्वारा राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 90-ख के अंतर्गत स्थानीय निकायों में निहित एवं स्थानीय निकायों द्वारा ऐसी भूमि का जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1982 की धारा 5 से राजस्थान नगर विकास अधिनियम, 2959 की धारा 60 अथवा राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 1959 की धारा 80-क के अंतर्गत आवंटन अथवा नियमन का पट्टा जारी करने में मुद्रांक शुल्क घटाया जाकर कतिपय शर्तों के अधीन देय होगा । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.2(26)वित्त/कर/98-125 दिनांक 3.2.2007 जिसके द्वारा जयपुर विकास प्राधिकरण के पट्टों विलेखों पर मुद्रांक शुल्क घटाया जाकर बाजार दर के स्थान पर संशोधन कर 31.12.2007 तक बढाया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(63)वित्त/कर/2005-126 दिनांक 8.2.2007 जिसके द्वारा राजस्थान वेट अधिनियम,2003 की अनुसूची-IV में संशोधन किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.12(80)वित्त/कर/2005-127 दिनांक 8.2.2007 जिसके द्वारा राजस्थान वेट अधिनियम,2003 की अनुसूची-I में संशोधन किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.5(1)वित्त/कर/2005-पार्ट-I-128 दिनांक 12.2.2007 जिसके द्वारा अतिरिक्त आयुक्त (कर) एवं अतिरिक्त आयुक्त (विधि) को RVAT Act] 2003 की धारा 96 के अंतर्गत कर समझौता बोर्ड के पदेन सदस्य नियुक्त किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.4(1)वित्त/कर/2001-129 दिनांक 13.2.2007 जिसके द्वारा कतिपय वस्तुओं को राजस्थान वेट अधिनियम, 2003 की धारा 8(2) में अधिसूचित किया गया है । |
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अधिसूचना संख्या-एफ.2(13)वित्त/कर/2006-130 दिनांक 14.2.2007 जिसके द्वारा श्री गौरीशंकर सादाणी बीकानेर द्वारा आदर्श शिक्षण संस्थान, बीकानेर को उपहार स्वरूप भेंट की जा रही भूमि के दस्तावेज पर देय मुद्रांक शुल्क राशि रूपये 361065/- एवं पंजीयन शुल्क राशि रूपये 25000/- का परिहार किया गया है । |
श्री
अध्यक्ष:
श्री लक्ष्मीनारायण
दवे।
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं
पर्यावरण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं जल
अधिनियम-1974 की
धारा 39(2) के अन्तर्गत
राजस्थान
राज्य
प्रदूषण नियंत्रण
मण्डल 2005-06 सदन
की मेज पर
रखता हूं।
भीम/अरुण/5.3.07/14.40/2g
श्री अध्यक्ष: श्री गजेन्द्र सिंह।
श्री गजेन्द्र सिंह (राज्य मंत्री, ऊर्जा): अध्यक्ष महोदय, मैं कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 619-ए के अंतर्गत जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का छठा वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2005-06 सदन की मेज पर रखता हूं।
श्री अध्यक्ष: कार्य सलाहकार समिति के प्रतिवेदन का उपस्थापन एवं उस पर विचार। मि. महावीर प्रसाद जैन, I have called your name. कार्य सलाहकार समिति के प्रतिवेदन का उपस्थापन करना है आपको।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): माननीय अध्यक्ष महोदय, कर रहा हूं। माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं कार्य सलाहकार समिति के 16वें प्रतिवेदन का उपस्थापन करता हूं। अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि ...।
श्री अध्यक्ष: यह सदन कार्य सलाहकार समिति के 16वें प्रतिवेदन पर अपनी सहमति प्रकट करता है – यह बोलना है आपको।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): यह पूरा नहीं पढूं? संशोधन भी पढ़ूं न?
श्री अध्यक्ष: बोल दो।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): पूरा पढ़ूं न?
श्री अध्यक्ष: पूरा पढ़ लो। पूरा पढ़ो-पढ़ो।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): कार्य सलाहकार समिति की बैठक दिनांक 2 मार्च, 227 को मध्यान्ह पश्चात् 1.00 बजे माननीय अध्यक्ष के इनर हाउस के चैम्बर में हुई। समिति ने अपने 15वें प्रतिवेदन में संशोधन करते हुए निर्णय लिया कि दिनांक 5 मार्च, 2007 से 9 मार्च, 2007 तक सदन में लिये जाने वाले कार्य का बंटवारा निम्न प्रकार किया जाय:-
सोमवार,दिनाक 05 मार्च, 2007 - राज्यपाल महोदया के अभिभाषण पर प्रस्तुत
मंगलवार,दिनांक06 मार्च, 2007 धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा।
बुधवार,दिनांक 07 मार्च,2007 - राज्यपाल महोदया के अभिभाषण पर प्रस्तुत
धन्यवाद प्रस्ताव पर अग्रेतर चर्चा व सरकार की ओर से उत्तर।
गुरुवार, दिनांक 08 मार्च,2007 - 1. भारतीय भागीदारी (राजस्थान संशोधन)
विधेयक, 2007;
2. राजस्थान उपनिवेशन (संशोधन) विधेयक,
2007; एवं
3. राजस्थान आबकारी (संशोधन) विधेयक,
2007 – पर विचार एवं पारण।
शुक्रवार, दिनांक 09 मार्च, 2007 - आय-व्ययक अनुमान वर्ष 2007-2008 का
उपस्थापन।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि यह सदन कार्य सलाहकार समिति के 16वें प्रतिवेदन पर अपनी सहमति प्रकट करता है।
श्री अध्यक्ष: प्रश्न यह है कि यह सदन कार्य सलाहकार समिति के 16वें प्रतिवेदन पर अपनी सहमति प्रकट करता है?
(स्वीकृत)
सदन द्वारा प्रतिवेदन पर सहमति पद्रान की गयी।
विधायी
कार्य
श्री रामनारायण डूडी।
श्री रामनारायण डूडी (राजस्व मंत्री): अध्यक्ष महोदय, आपकी आज्ञा से मैं राजस्थान उपनिवेशन (संशोधन) विधेयक, 2007 को पुर:स्थापित करने की आज्ञा के लिए प्रस्ताव करता हूं।
श्री अध्यक्ष: प्रश्न यह है कि राजस्थान उपनिवेशन (संशोधन) विधेयक, 2007 को पुर:स्थापित करने की आज्ञा प्रदान की जाय?
(स्वीकृत)
विधेयक को पुर:स्थातिप करने की आज्ञा प्रदान की गयी।
प्रभारी मंत्री पुर:स्थापित करें।
श्री रामनारायण डूडी (राजस्व मंत्री): अध्यक्ष महोदय, मैं राजस्थान उपनिवेशन (संशोधन) विधेयक, 2007 को पुर:स्थापित करता हूं।
श्री अध्यक्ष: अब मैं राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर वाद विवाद प्रारम्भ करने के लिए श्री विष्णु मोदी का नाम पुकार रही हूं।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्यक्ष महोदय, पिछले चार दिन इन्होंने ही खराब कराये हैं और मुख्यमंत्री जी रहनी चाहिएं जिस दिन ये बोलें क्योंकि दो तारीख को मुख्यमंत्री जी पंजाब गयी थीं इसलिए सारा ये चार दिन का करा-धरा माननीय विष्णु मोदी जी के सर जाना चाहिए।
श्री अध्यक्ष: ऐसा है मैं श्री विष्णु मोदी अपना भाषण प्रारंभ करें उससे पूर्व समय का बंटवारा कर देती हूं।
डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्यक्ष महोदय, एक मिनट पहले प्रस्ताव तो रखवायें आप।
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): यह काम दो दिन पहले भी हो सकता था आज जो क्षमायाचना की तो तीन दिन पहले भी किया जा सकता था ।
श्री अध्यक्ष: अब टोकाटोकी न करें। सदन को आप आराम से चलने दें अब।
श्री विष्णु मोदी (मसूदा): माननीय अध्यक्ष महोदय, इस सत्र में एकत्रित हम, राजस्थान विधान सभा के सदस्यगण, राज्यपाल द्वारा इस सदन में दिये गये अभिभाषण के प्रति उनके आभारी हैं, और माननीय अध्यक्ष महोदय, ....।
घोषणा
राज्यपाल
के अभिभाषण पर
वाद विवाद के
लिए समय का
आबंटन
श्री अध्यक्ष: मैं समय का बंटवारा बता दूं बीच में आपको। मुझे सदन को सूचित करना है कि राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जो वाद विवाद होगा उसमें 12 घंटे उपलब्ध हैं इन 12 घंटों में मैं इस प्रकार से बंटवारा कर रही हूं :-भारतीय जनता पार्टी – 7 घंटे 16 मिनट, इंडियन नेशनल कांग्रेस – 3 घंटे 18 मिनट, इंडियन नेशनल लोकदल – 11 मिनट, जनता दल (यूनाइटेड) – 8 मिनट, बहुजन समाज पार्टी – 8 मिनट, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी – 4 मिनट, लोकजनशक्ति पार्टी – 4 मिनट, राजस्थान सामाजिक न्याय मंच – 4 मिनट और निर्दलीय – 47 मिनट। इस प्रकार से कुल 12 घंटे हमारे पास वाद विवाद के लिए हैं।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप सख्ती से पालन करवायें अध्यक्ष महोदय।
राज्यपाल
के अभिभाषण पर
धन्यवाद
प्रस्ताव
श्री विष्णु मोदी (मसूदा): राज्यपाल महोदय ने आकर के जो अभिभाषण प्रस्तुत किया उसके मैंने प्रस्ताव मूव किया है। माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं अपनी बात शुरू करूं, क्योंकि कोई भी सरकार जब शासन में आती है तो 60 महीने की सरकार होती है पाँच साल कहें या हम साठ महीने कहें हमारी सरकार ने चालीस महीने पूरा कर लिये। अब बस महीने बाकी हैं और इस बार जो महामहिम ने आकर जो अभिभाषण यहां दिया उसमें इस राजस्थान में जो पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से जिसमें कांग्रेस ने अधिकांश राज किया है उनका सारा कंपेरीजन का एक लेखाजोखा था। तो मैं तो यह मानता हूं कि जो कुछ भी सदन में हुआ उसका मैं जिक्र नहीं करना चाहता लेकिन उसमें कहीं न कहीं अन्दर खाने में कांग्रेस की यह मंशा रही थी कि इससे तो हम बिलकुल ही जो 11वीं पंचवर्षीय योजना का आकार मुख्यमंत्री जी ने तय कराया है और जो कुछ अलोकेशन इस साल के लिए हुआ है उससे वो बेनकाब हो जाएंगे तो कहीं न कहीं उनके मन में यह पीड़ा रही। माननीय अध्यक्ष महोदय, जब से श्रीमती वसुन्धरा राजे ने राजस्थान की सरकार की बागडोर संभाली उसमें विभिन्न, अभी दिल्ली में यूपीए की सरकार है कांग्रेस सरकार चला रही है और उनके प्रधानमंत्री से लेकर विभिन्न मंत्रियों ने राजस्थान सरकार के लिए क्या कहा है वो मैं आपको निवेदन करना चाहता हूं, ‘राजस्थान विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है, यह खुशी की बात है।’ – डॉ. मनमोहन सिंह, प्रधानमंत्री, भारत सरकार। समाचार जगत। ‘वसुंधरा राजे ने ऊर्जा निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान। सूरतगढ़ एवं कोटा में ढाई-ढाई सौ मेगावाट की दो इकाइयों का शिलान्यास कम समय में देश के किसी राज्य में नहीं हुआ। ऊर्जावान मुख्यमंत्री की ओर से धन्यवाद देता हूं।’ – सुशील कुमार शिंदे, केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री 11 जनवरी, 2007 प्रदेश में दूरदर्शिता रखने वाली मुख्यमंत्री पर उन्हें फख्र है जिन्होंने अपने कार्यकाल में गरीबों और किसानों के लिए ऊर्जा सुधार कार्यक्रम हाथ में लिया। अच्छी कामयाबी मिली। बिजली उत्पादन की ग्रोथ रेट 3 प्रतिशत से बढ़ कर 8 प्रतिशत हो गयी। इनके शासन में आने के बाद में हुई जो वाकई में सराहनीय है।’ – सुशील कुमार शिंदे, केन्दीय ऊर्जा मंत्री। माननीय अध्यक्ष महोदय, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में राज्य सरकार के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए भारत निर्माण कार्यक्रम में राजस्थान को अव्वल बताते हुए बायो डीजल में सरकार के प्रयासों को एक अच्छी शुरूआत बताई। श्री रघुवंश प्रसाद सिंह, केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री। राजस्थान की प्रगति अच्छी होने पर 512 करोड़ रुपये की मंजूरी, रोजगार गारंटी योजना 600 करोड़ रुपये खर्च। 6 जिलों में अच्छा कार्य हुआ। योजना में पहले से ज्यादा जिले शामिल होंगे। प्रदेश में बायो फ्यूल की दिशा में अच्छी शुरूआत की है।
कैलाश/अरुण 5.3.07 14.50 (1) 2h
वृद्धावस्था पेशन योजना लागू करने वाले राजस्थान समेत तीन राज्य हैं, रघुवंश प्रसाद सिंह, केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ।
अध्यक्ष महोदय, हमारा एक फैडरल स्ट्रक्चर है यूनियन आफ इण्डिया कहलाती है और हमारे संविधान के निर्माताओं ने पंच वर्षीय योजना के माध्यम से, कौन योजना का आकार तय करेगा, कौन एनवल एलोकेशन तय करेगा इसके लिये योजना आयोग बनाया और योजना आयोग के आज तक जो उपाध्यक्ष रहे हैं उन्होंने इस देश की तरक्की में अपना योगदान रखा है । अभी योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया हैं। उन्होंने कहा है कि हम आपकी उपलब्धियों से बहुत खुश हैं । आपके वित्तीय प्रबन्धन ....
श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य सदन में अख़बार पढ रहे हैं तो अख़बार पढने की परम्परा तो सदन में है नहीं ।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): बढाई कर रहे हैं तो आपको बडी तकलीफ हो रही है । आपके लोगों ने ही बढाई की है ।
श्री अध्यक्ष: ऐसा है कि वह कोट कर रहे हैं कि किसने राजस्थान की सरकार के बारे में प्रशंसा के क्या क्या शब्द कहे हैं उसे कोट कर रहे हैं और कोट करने की अनुमति होती है, कोट किया जा सकता है ।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): आसन से व्यवस्था रहती है कि ओथेंटिसिटी अख़बार की ओथेंटिसिटी तो नहीं होती है यह वयवस्था तो आसन से अनेकों बार दी गई है । कोई ओथेंटिसिटी नहीं है अख़बार की । (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): अध्यक्ष महोदय, क्या आप हमको इस बात की इजाजत देंगे कि मंत्री मण्डल के माननीय सदस्यों ने माननीय मुख्य मंत्री जी के लिये क्या कहा उनको कोट कर दें, उनको कोट करने की इजाजत देंगे आप ।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): यह बातें यदि गलत हैं तो आप अपने भाषण में इसको कंट्राडिक्ट कर देना ।
श्री अध्यक्ष: वह तो कोट आप करने वाले हैं, इधर वाले करने वाले हैं आपका प्रतिपक्ष का काम है आप करते रहना । वह तो उनकी प्रशंसा में जो शब्द कहे हैं वह कह रहे हैं ।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): अध्यक्ष महोदय, इनको बडे मरोडे आ रहे हैं।
श्री विष्णु मोदी (मसूदा): अध्यक्ष महोदय, हम आपकी उपलब्धियों से बहुत खुश है आपके वित्तीय प्रबन्धन की जितनी प्रशंसा की जाये उतनी कम है । (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: अख़बार में रिबटल भी तो नहीं आया ना । उनका रिबटल भी तो नहीं आया वरना वह कहते कि हमने प्रशंसा नहीं की है । आपको समय मिलेगा आप कह देना सब बातें असत्य हैं ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): यह सब बाते सही हैं तो उसकी कापी सदन में रख दें हम भी पढ लेंगे ।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्यक्ष महोदय, यह बात सारा सदन मानता है ... (व्यवधान)
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): सदन में जिस चीज को कोट कर रहे हैं उसका पत्र ले करें जिससे हमें भी जानकारी में रहे । हम तो आपका एप्रिसिएशन कर रहे हैं आप जिनको कोट कर रहे हैं उनके पत्र सदन की पटल पर रख दें जिससे हम भी अपना ज्ञानवर्द्धन कर सकें ।
श्री राजेन्द्र राठौड (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्यक्ष महोदय, यह तो सारा सदन मानता है कि प्रतिपक्ष के नेता विद्वान भी हैं और अनुभवी भी हैं । इसलिए हम तो आपके माध्यम से प्रार्थना कर रहे हैं कि राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर प्रतिपक्ष के नेता के मौलिक विचार सुनने का हमें अवसर जरूर मिले ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): ठीक है हमारे मौलिक विचार जरूर मिलेंगे ।
श्री अध्यक्ष: अभी तो आप उनके गैर मौलिक सुन लो बाद में सुन लेना इनके मौलिक ।
श्री विष्णु मोदी (मसूदा): अध्यक्ष महोदय, पार्लियामेंट्री प्रेक्टिस क्या है उसका मुझे पूरा अनुभव है और जैसा आपने ठीक कहा है कि मैं सिर्फ कोट कर रहा हूं लेकिन अफसोस जो प्रतिपक्ष के लोग हैं, मैं भी बहुत दिनों तक उनके साथ रहा हूं....
श्री जुबेर खान (रामगढ़): लोग नहीं सदस्य हैं, लोग कौन हैं यहां, यहां तो माननीय सदस्य हैं ।
श्री अध्यक्ष: आपका हर बात पर टोकना भी कोई आवश्यक नहीं है । आप हर बात पर बीच में खडे हो जाते हैं टोकने के लिये ।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह लोग कहे उसके लिये भी नहीं टोंकेंगे, अध्यक्ष महोदय, हम तो आपका काम कर रहे हैं । यह लोग कहां का लोकतांत्रिक है ।
श्री विष्णु मोदी (मसूदा): अध्यक्ष महोदय, अगर यूपीए सरकार में राजस्थान विधान सभा के माननीय सदस्यों की नहीं चलती है तो इसका दोष तो वह किसी तरह से नहीं निकाल सकते हैं । मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने जो कहा है वह तो इनको सुनना ही पडेगा । हम आपकी उपलब्धियों से बहुत खुश हैं । आपके वित्तीय प्रबन्धन की जितनी प्रशंसा की जाये उतनी कम है। प्रदेश के वित्तीय एवं राजस्व घाटे में काफी सुधार हुआ है और कर राजस्व के अन्य संसाधनों में भी इजाफा हुआ है । अध्यक्ष महोदय, इतना ही नहीं योजना आयोग के जो माननीय सदस्य हैं जो अलग अलग कामों को देखते हैं उसमें बीएन युगांधर ने यहां तक कहा है कि इन परियोजनाओं को लागू कर लोगों को रोजमर्रा की समस्याओं से छुटकारा दिलाने के लिये आपको बधाई । जिला योजनाओं के क्रियान्वयन में राजस्थान जैसा काम बहुत कम राज्यों में हुआ है । अध्यक्ष महोदय, इस बात से तो मेरे को प्रत्यक्ष अनुभव है मैं इस सदन में दूसरी बार आया हूं, लोकसभा में भी रहा हूं लेकिन पहली बार डीआरडीए में डिस्ट्रिक्ट की ग्यारहवी पंच वर्षीय योजना के ऊपर विस्तृत रूप से चर्चा हुई है और अजमेर जिले का क्या प्रारूप होगा उसका हमने वहां जिला परिषद की मीटिंग में, 8 घंटे की मीटिंग में उसके प्रस्ताव को देखकर उसमें कांट छांट कर के हमने राज्य सरकार को भिजवाया है । यह खुशी की बात है और राजस्थान राज्य किसी एक पोलेटिकल पार्टी की बपौती नहीं है । आज हम राज में हैं कल आप भी आ सकते हैं । लेकिन जो अच्छी चीज है उसे अच्छा कहना भी एक प्रजातंत्र का हिस्सा है । एक और मैम्बर हैं सईदा हमीद उन्होंने कहा है कि प्रदेश में कुछ समय से सामुदायिक हित के लिये लाई गई योजनाओं के लिये आप बधाई की पात्र हैं और आपकी इसमें जितनी तारीफ की जाये उतनी कम है । अभीजीत सेन प्लानिंग कमीशन में एजुकेशन देखते हैं । उन्होंने कहा है कि शिक्षा क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों के लिये राजस्थान को और मुख्य मंत्री जी आपको बधाई है ।
अध्यक्ष महोदय, आप भी इस सदन की कई बार सदस्य रह चुकी हैं और भी कई लोग हैं, माननीय माथुर साहब के जमाने से चला आ रहा है कि बरसिंगसर में लिग्नाइट का कारखाना लगेगा । राजस्थान में लिग्नाइट के इतने भंडार हैं कि हम 25 हजार मेगावाट बिजली बना सकते हैं लेकिन मैं तो 93 से इस हाउस में आया उसके बाद से मेरे कान पक गये कि यह लिग्नाइट से बिजली कब बनेगी । दुर्भाग्य है इस राजस्थान का कि जब बीकानेर में महाराजा गंगासिंह जी का राज था तो पलाना में लिग्नाइट से बिजली बनती थी जो कि चूरू जिले तक आती थी । लेकिन आजादी के बाद से लिग्नाइट में पता नहीं क्या हुआ और अभी दासरीनारायण राव केन्द्रीय कोयला राज्य मंत्री उन्होंने कहा है कि राजनीति राजनीति की जगह है पर मैं यही कहूंगा कि मुख्य मंत्री जी राजस्थान प्रदेश को विकसित राज्य बनाने में कामयाब हो रही है । भारत में राजस्थान ही ऐसा राज्य है जहां विद्युत परियोजनाओं को कम समय में इतनी तेज गति मिली है । अन्य राज्यों को भी राजस्थान से सीख लेनी चाहिये ।
अध्यक्ष महोदय, यह कुछ बातें मैंने इसलिए कोट की है कि मैंने शुरू में कहा है कि हमने 60 महीने में 40 महीने का कार्यकाल पूरा कर लिया है तो हमें इस बात को राजस्थान की जनता को इस हाउस के माध्यम से पहुंचाने का हक है कि हमने पिछले तीन साल में राजस्थान को विकासशील बनाने में कोई कसर नहीं छोडी है और यह जो राज्यपाल महोदय का अभिभाषण है उसमें यह सब कुछ परिलक्षित है। अध्यक्ष महोदय, अभी जब ग्यारहवी पंच वर्षीय योजना का फाइनलाइजेशन हुआ तब उस वक्त भी योजना आयोग ने यह कहा कि हमें खुशी है इस बात की कि राजस्थान बीमारू प्रदेश नहीं रहा । आज तक आजादी के बाद से हमारे ऊपर एक लेवल लगा हुआ था कि राजस्थान बीमारू प्रदेश है लेकिन अब राजस्थान उस बीमारू श्रेणी से निकल कर एक प्रगतिशील, एक विकासशील राज्य बनने की कोशिश में पूरा लगा हुआ है और मैं तह दिल से मुख्य मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं, उनकी सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने इसमें कोई कसर नहीं छोडी ।
अध्यक्ष महोदय, योजना आयोग की बात है तो आप देखेंगी कि ग्यारहवी पंच वर्षीय योजना 68422.16 करोड़ रुपये की है और जो इस साल व्यय हुआ है, दसवीं पंच वर्षीय योजना के अंतिम तीन वर्ष में 22853 करोड़ रुपये का व्यय संभावित है जो कि नवीं पंच वर्षीय योजना के कुल व्यय ...
ans/akt 05.03.2007
2j/1500
श्री विष्णु
मोदी (मसूदा):
जो कि नवीं
पंचवर्षीय
योजना के कुल
व्यय 9567 करोड
रूपये से अधिक
है। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, ग्यारहवीं
पंचवर्षीय
योजना इतिहास
में अब तक
सबसे बड़ी
परियोजना है।
इस प्रकार ग्यारहवीं
पंचवर्षीय
योजना का आकार
आठवीं, नवीं,
दसवीं और ग्यारहवीं,
मतलब बीस साल,
चार
परियोजनाएं
और अब ग्यारहवीं
परियोयजना है,
उसका आकार उन
बीस सालों में
जिस
पंचवर्षीय
योजना के माध्यम
से राजस्थान
में विकास हुआ
उसके मुकाबले
में अगले पाँच
साल में उन
चारों
परियोजनाओं
से बड़ा आकार
बनाकर मुख्यमंत्री
जी इसको आगे
ले जाने की
कोशिश कर रही है।
2007-8 में जो
अलोकेशन हुआ
वह 11738.86 करोड
रूपये का हुआ
जो कि आठवीं
पंचवर्षीय
योजना के कुल
आकार का 11500 से भी
ज्यादा है।
इसके साथ ही
राजस्थान
में यह तीन
साल ऐसे गुजरे
हैं जबकि हमने
कोई
ओवरड्राफ्ट
नहीं लिया,
नहीं तो हमेशा
राजस्थान
में रिजर्व
बैंक से
ओवरड्राफ्ट
लेते रहे हैं।
कुल मिलाकर
मेरा यह कहना
है कि राजस्थान
में वसुन्धरा
राजे की सरकार
ने चाहे वह
विघुत का
कार्यक्रम हो,
सोशल सेक्टर
का हो,
एजुकेशन का
हो, मेडीकल
हैल्थ का हो,
कुल मिलाकर जब
बीमारू
प्रदेश ही
नहीं रहा, तो
समस्त
सर्वांगीण
विकास की तरफ
अगर पहली बार
मन से कोशिश
हुई है तो वह
इन पिछले तीन
सालों में हुई
है। ग्यारहवीं
पंचवर्षीय
योजना जब
समाप्त होगी
तो मैं समझता
हूं कि राजस्थान
हिन्दुस्तान
के उन्नतशील,
डवलप स्टेट
है उनके
मुकाबले में
आकर खड़ा हो
जाएगा, ऐसा
मेरा मानना
है।
इसके साथ
ही हमने frbm सिस्टम
अडोप्ट किया,
जिससे सारा
कन्सोलिडेशन
किया। बहुत ज्यादा
आंकड़ों में
तो जोशी साहब
बोलेंगे इसलिए
उनके लिए छोड़
देता हूं।( व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
बैठे-बैठे
नहीं बोले।
श्री विष्णु
मोदी (मसूदा):
पैराग्राफ आठ
में, पहली बार
मुख्यमंत्री
जी ने महिला
सशक्तीकरण
करने के लिए,
महिलाओं के
नाम पर रजिस्ट्री
होगी उसके
अंदर उसकी रेट
घटा दी। तीन
साल में 3.68 लाख
महिलाओं के
नाम रजिस्ट्रेशन
हुआ है। मैं
समझता हूं कि
महिला सशक्तीकरण
में इतना बड़ा
उदाहरण कोई हो
नहीं सकता। जब
जमीन और घर
महिलाओं के
नाम हो जाएंगे
तो महिला की
एक हैसियत हो
जाएगी। इस
मौके पर मैं यह
भी कहना
चाहूंगा कि
अभी यह रूरल
एरियाज में लागू
है, सरकार को
इस दिशा में
भी प्रयास
करना चाहिये
कि यह अरबन
एरियाज में भी
लागू हो जिससे
महिलाओं के
सशक्तिकरण का
जो बीडा है
उसमें गाड़ी
आगे बढ़ सके।
अभी कवास
में बाढ़ आई,
बीकानेर में
बाढ़ आई उसमें
अनुसूचित
जाति, जनजाति
के परिवारों
को 1.25 लाख की
लागत के मकान यह
सरकार निशुल्क
उपलब्ध करा
रही है, बाकी
जाति के लोगों
को 25 हजार रूपये
लेकर मकान
उपलब्ध करा
रही है। विडम्बना
यह है कि जब
प्राकृतिक
आपदा आई तो
राजस्थान
सरकार ने भारत
सरकार को
मेमोरेण्डम
दिया और 3284.22
करोड रूपये
मांगे, उसमें
उन्होंने
दिये कितने
मात्र 100 करोड
रूपये। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम से
माननीय
प्रतिपक्ष के
सदस्यों से
निवेदन करना
चाहता हूं कि
यह कोई बपौती
नहीं है केन्द्र
सरकार की, यह
स्टेट आफ
यूनियंस है,हम
फेडल स्ट्रक्चर
में है, यह
हमारा अधिकार
है और आप इस
अधिकार में
राजनीति
करेंगे तो यह
ठीक नहीं है।
ग्रामीण
विकास
कार्यक्रम
में हमने
एलोकेशन का 85
प्रतिशत से ज्यादा
पैसा खर्च
किया है। ऐसा
कोई विभाग
नहीं है
जिसमें हमने
बहुत
अचीवमेंट
नहीं किया हो।
रोजगार
गांरटी में तो
जितना
अचीवमेंट हुआ
है वह केन्द्रीय
मंत्री ने खुद
ने आकर यहां
सर्टिफिकेट दिया
है।
इंदिरा
गांधी आवास
हो, उसमें भी
हमने काफी
प्रगति की है।
जहां तक मिड डे मील
का सवाल है
मैं समझता हूं
कि हिन्दुस्तान
में, मुझे और
भी स्टेट्स
में जाने का
मौका मिलता
है, राजस्थान
में मिड डे
मील में जितना
बड़ा काम हुआ
है वह एक
मिसाल है। और
जब मैं.....( व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आपको मौका
मिलेगा जब बोल
लेना जो
बोलना है।
बैठे-बैठे
नहीं बोले।
श्री विष्णु
मोदी (मसूदा):
जो काम अच्छा
हो उसे अच्छा
कहने में संकोच
नहीं करना
चाहिये। आज
अक्षय कलेवा जैसी
योजना, जो
दूसरे मिड डे
मील की, यहां
जो सेन्ट्रलाइज
किचन बनी है,
मैवाड से आने
वाले सदस्य
है उन्होंने
तो देखा होगा
कि जब चित्तोड़
के पहले
निकलते हैं तो
हिन्दुस्तान
जिंक ने
कितनी
बड़ी किचिन
कितनी सेन्ट्रलाइज
किचन बनाई है
और किस तरह से
लोरीज के अंदर
गरम खाना, कितना
हाइजेनिक
खाना और कितना
बढि़या खाना
यहां मिड डे
मील के अंदर
राजस्थान
में मिल रहा
है वह एक
मिसाल है। कई
लोग तो यहां
इस
सारे सिस्टम
को देखने आते
हैं कि दूसरे
स्टेट में,
अपनी जगह
लागू
कर सके।
श्री अशोक
बैरवा (खण्डार):माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपको सूचना
देना चाहता
हूं1 पाइंट आफ
इनफोरमेशन बोल
रहा हूं।
माननीय गृह
मंत्री जी,
अभी हाल ही में
कलक्टर
परिसर जयपुर
में
पत्रकारों के
साथ मारपीट की
गई प्रशासन के
द्वारा और
पुलिस
मूकदर्शक बनकर
देख रही
है।(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय, यह
कौनसी
इनफोरमेशन है
?
श्री अशोक
बैरवा (खण्डार):
सूचना है,
पत्रकारों को
पीट रहे हैं
इस राज में।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): यह कौनसी
इनफोरमेशन
हुई?(व्यवधान)
श्री अशोक
बैरवा (खण्डार):
पत्रकार
मुकेश शर्मा को
पीटा है,भास्कर
के निरंजन को
पीटा है....(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
इनफोरमेशन भी
आपको उठाना था
तो इनके भाषण
की समाप्ति के
बाद उठाना था।
श्री अशोक
बैरवा (खण्डार):
गम्भीर
मामला है।
पत्रकार
छटपटा रहे
हैं,परेशान है।
पत्रकारों के
साथ में....
श्री अध्यक्ष:
बीच में(व्यवधान)
कहां हो, बैठे
कहां हो। प्लीज
कंटीन्यू।
श्री
अमराराम (धोद):
लोकतंत्र का
चौथा स्तम्भ
भी...(व्यवधान)
श्री अशोक
बैरवा (खण्डार): नृत्य
नाटिकाओं के
बारे में कुछ
और जानकारी
चाह रहे थे... (व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
परिसर में
कर्मचारी एक
सभा कर रहे थे ..
श्री अशोक
बैरवा (खण्डार):
कलेक्टर
महोदय के
सामने जो नृत्य
नाटिकायें
चली थी उसकी
जानकारी चाह
रहे थे, उसमें
पत्रकारों को
पीटा।(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
धोद से आने
वाले माननीय,
जब वह बोल रहे
है तो आप बीच
में खड़े न
हो। एक समय
में एक ही
बोले।
श्री अशोक
बैरवा (खण्डार):
अध्यक्ष जी,
कलक्टर
महोदय के
सामने जो नृत्य
नाटिका प्रस्तुत
हुई थी उसकी
जानकारी लेने
के लिए
पत्रकार महोदय
गये थे और
प्रशासन ने
मिलकर पुलिस
के सामने
पीटा,कलक्टर
परिसर में। अब
आपकी मर्जी
है, गृह
मंत्री जी
चाहे तो इसकी
जानकारी हमें
दें कि इसमें
आप क्या
करेंगे। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
ठीक है,गृह
मंत्री जी ने
नोट कर लिया
आपकी बात को।
श्री विष्णु
मोदी
(मसूदा):माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मिड डे
मील में राजस्थान
में अच्छा
काम हुआ
है।मैं जिस
विधान सभा
क्षेत्र से आता
हूं उसे मगरा
क्षेत्र कहते
हैं औरे आजादी
के बाद से
लेकर आज तक
वहां मांग रही
थी कि मगरा
क्षेत्र को एक
अलग से, जैसे
में मेव व
डांग विकास का
एक इसका एरिया
बनना चाहिये
और उसका विकास
होना चाहिये,
मैं मुख्यमंत्री
जी को धन्यवाद
देनार
चाहूंगा कि
उन्होंने
मगरा विकास की
योजना शुरू की
और उसके अंदर
जो अलोकेशन
हुआ
उसमें 100
परसेंट खर्चा
हुआ। मैं इतना
ही कहना चाहता
हूं कि
मंगरा विकास
में,चूंकि वह
कई वर्षों से
पिछड़ा हुआ है
उसमें आप अलोकेशन
इस बार बजट
में जितना ज्यादा
करेंगी उतना
ही उन लोगों
को फायदा
मिलेगा ।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
के अंदर बारिश
की एक अजीब सी
साइकिल है। राजस्थान
के अंदर अच्छी
बारिश और खराब
बारिश। मैंने
मेट्रोलोजिकल
डिपार्टमेंट
से काफी इन्टरएक्शन
करके और उन्होंने
करीब करीब सौ
साल के आंकड़े
जो कुछ उपलब्ध
थे उनको
मिलाकर सुपर
कम्प्यूटर
है उसमें
डालकर राजस्थान
के मानसून का
पैटर्न
निकाला। उस
पैटर्न में
कहा जाता है
कि जब अच्छा
मानसून होता
है तो आठ साल
उसकी निरन्तरता
रहती है और आठ
साल में अच्छे
मानसून का
मतलब 70
प्रतिशत
एरिया में अच्छी
बारिश और 30
प्रतिशत में
खराब बारिश।
जब खराब मौसम
होता है
अकाल का,
सूखे का उस
वक्त 70
प्रतिशत में
खराब बारिश और
30 प्रतिशत में
अच्छी बारिश
और इतनी ज्यादा
बारिश की
कीमत.....
दुर्गा/त्रिपाठी
050307 1510 2k
और इतनी ज्यादा
जल क कीमत
राजस्थान के
परिप्रेक्ष्य
में है, तो
पिछले 5 साल
में 2465.46 करोड़
रुपया पिछले 5
साल में
कांग्रेस
शासनकाल में
खर्च किया,
पूरे पाँच साल
में। हमने 3
साल में 2650.8
करोड़ रुपया
खर्च किया है
और 3 लाख 82 हजार 670
हैक्टेयर की
अतिरिक्त
सिंचाई
क्षमता सृजित
की है। और 126
सिंचाई परियोजनाओं
को पूर्ण किया
है। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, नर्मदा
का पानी हमें
बहुत जल्दी
मिलने वाला
है। मैं धन्यवाद
देना चाहता
हूं सरकार को
कि उन्होंने
नर्मदा के
पानी को ड्रिप
इर्रिगेशन से या
स्प्रिंकलर
से काम करने
का फैसला किया
है। जब नर्मदा
का पानी
मिलेगा तो
जालौर और
बाड़मेर में
जो सिंचाई
होगी वह ड्रिप
या स्प्रिंकलर
से सिंचाई
होगी। मैं
बहुत साफ मन
से और दृढ़
इच्छा शक्ति
से आपके माध्यम
से सरकार को
कहना चाहता
हूं कि वह दिन
दूर नहीं है
जब राजस्थान
के अन्दर
पानी के लिये
संघर्ष होगा
और हुआ भी है।
राजनीतिक दल
अपना थोड़ा
नफा देखकर या
थोड़ी शोर्ट-टर्म
बात देखकर
उसको हवा देने
लग जाते हैं।
लेकिन मैं यह
मानता हूं कि
राजस्थान
सरकार को चाहे
रावी, व्यास,
सतलज, चम्बल,
माही जो कुछ
भी पानी के स्त्रोत
हैं, उनके ऊपर
फ्लो
इर्रिगेशन के
ऊपर, अभी से एक
कमेटी बनानी
चाहिए और किस
तरह से हम फ्लो
इर्रिगेशन को
रोक सकें क्योंकि
आज चाहे आस्ट्रेलिया
हो, चाहे
इजराइल हो,
चाहे गल्फ हो
जहां पर हमारे
जैसी
ट्रोपोग्राफिकल,
ज्योग्राफिकल
कंडीशंस हैं,
वहां वे भी
बहुत सारा
पैसा खर्च
करके योजनाएं
बनाकर पानी
लाये हैं
लेकिन कहीं भी
दुनिया में
फ्लो सिस्टम
से इर्रिगेशन
नहीं होती है।
तो मेरा यह
बहुत स्पष्ट
मानना है कि
यह तो बहुत
अच्छा एक काम
किया है
नर्मदा के
लिये लेकिन
आपको इसके
अलावा हमारी
जो और नदियां
हैं, जो और पानी
का हमारा
कमाण्ड
एरिया है उसके
लिये एक एक्सपर्ट
कमेटी बनाकर
उसके अन्दर
किस तरह से हम
उसमें बचाव कर
सकते हैं, किस
तरह से हम ज्यादा
से ज्यादा
उसका उपयोग कर
सकते हैं, यह
भी मेरा मानना
है।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
धन्यवाद
देना चाहूंगा
मुख्य
मंत्रीजी को
और सार्वजनिक
निर्माण
मंत्रीजी को।
(व्यवधान)
हां, उनमें ही
इन्क्लूड
हैं, मुझे
जानकारी है।
उनको तो दे ही
रहा हूं, उनकी
सरकार को दे
रहा हूं,
खासकर
सार्वजनिक
निर्माण
विभाग के जो
मंत्री हैं,
जो विभाग सम्भालते
हैं, उनको
विशेष रूप से
धन्यवाद
देना चाहता
हूं।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): इनकी
सुप्रीमेसी
मान ली है ना
अब?
श्री विष्णु
मोदी (मसूदा):
मैं तो शुरू
से मानता आया
हूं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
लेकिन
तिवाड़ी साहब
पहली दफा मुस्कराये
हैं, आपकी इस
बात पर। देख
लो भले ही आप।
श्री विष्णु
मोदी (मसूदा):
जितना काम
सड़क क्षेत्र
में पिछले 3
सालों में हुआ
है, आंकड़े भी
देख लें आप, 5 वर्ष
में 1904 करोड़
रुपये का
निवेश हुआ,
वहीं इन 3 सालों
में 4055 करोड़
रुपये का
निवेश हुआ।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): केन्द्र
सरकार का
कितना है, यह
भी ज्ञान दे
दो हम लोगों
को। इसमें
राजस्थान
सरकार का
कितना पैसा
लगा है।
श्री विष्णु
मोदी (मसूदा):
यह भारत सरकार
का पैसा हमारा
हिस्सा है,
हमारा अधिकार
है, आप वहां
कोई दान पुण्य
नहीं कर रहे
हैं, जो भारत
सरकार का
कितना है?
श्री
जीतमल खांट
(बागीडोरा): यह
इण्डिया
गवर्नमेंट ने
नींव डाली थी PMGSY की।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
बोलो तो सही
कितना हिस्सा
है आपका, भारत
सरकार ने क्या
दिया है, आप
बताओ तो सही।
आपका अधिकार
है, आपका हिस्सा
है, सही बात है
आपकी, आप
बताओ। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
बीच में नहीं
बोलें।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
आपके राज के
समय में भी अटलजी
ने दिया था
पैसा। आपने कब
यह माना कि
केन्द्र का
पैसा है। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
बीच में नहीं
बोलें।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
नहीं हम भारत
सरकार से अपना
हिस्सा
मांगें तो वह
दान है, वह भीख
है। और आप
मांगों तो
अधिकार है। जब
हम कहते थे कि
हमारा हिस्सा
है, हमको दें,
तब आप कह रहे
थे, माननीय
मुख्य
मंत्रीजी कह
रही थीं, भीख
मांग रहे हैं,
भीख का कटोरा
लेकर फिर रहे
हैं। और आप आज
कह रहे हो हमारा
अधिकार है।
अगर आज आपका
अधिकार है तो
उस समय भी
हमारा अधिकार
था। (व्यवधान)
एक माननीय
सदस्य: नहीं,
नहीं, सुनें,
पहले
वाजपेयीजी थे,
आज मनमोहनजी
हैं।
मनमोहनजी तो
देने वाले हैं
और वाजपेयीजी
भीख देने वाले
हैं।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
आपने तो भीख
मांगी। आपने कहा
कि हमारा
खजाना खाली
है, खजाना
खाली है, हमारे
पास कुछ नहीं
है।
श्री अध्यक्ष:
आपको क्या
प्राब्लम है?
श्री बत्तीलाल
(टोडाभीम):
किराये के
पैसे नहीं थे
इनके पास तो।
श्री अध्यक्ष:
आपके
मंत्रीजी
जवाब देंगे,
आपको क्या
तकलीफ है।
श्री विष्णु
मोदी (मसूदा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जितना
काम, क्योंकि
आप भी अपने
क्षेत्र में
और पूरे राजस्थान
में घूमती रही
हैं, आप
कहीं भी जाएं
तो सबसे पहले
सड़क, बिजली,
स्कूल, अस्पताल,
ये चार ऐसी
मूलभूत आवश्यकताएं
हैं कि मुझे
तो इस
राजनीतिक
जीवन में अभी
कोई 60 वर्ष की
आजादी के बाद
में, कोई भभ्सरकार
हो, किसी की भी
हो, यह मूलभूत
सुविधाएं भी
उपलब्ध न करा
पाई तो मैं
समझता हूं कि
हमने कोई न्याय
नहीं किया। तो
मैं
सार्वजनिक
निर्माण विभाग
में जितना अच्छा
काम इन तीन
वर्षों में
हुआ है, चाहे
मेगा हाइ-वे
हो, चाहे
प्रधान
मंत्री
रोजगार योजना
की सड़कें
हों, चाहे
मेटल से डबल्यू.बी.एम.
की हों, चाहे
मिसिंग लिंक
की रोडस हों, आंकड़े
तो बहुत हैं,
लेकिन मुख्य
रूप से जो बात
है,
इनमें अच्छा
काम हुआ है।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, इतना
ही नहीं, विजय
नगर जो मसूदा
विधान सभा
क्षेत्र का एक
हिस्सा है,
उसके बीच से
जब भी रेल्वे
लाइन निकली
होगी तब उस
वक्त
बीच शहर नहीं
होगा लेनिक अब
वह बीच
शहर हो गया।
जिसके बीच में
भी निकलती है,
दो-दो घण्टे
वहां
क्रासिंग बंद
रहता है। तो
वहां के अण्डर-ब्रिज
बनाने के लिये
चूंकि अभी
अजमेर से चित्तौड़
की ब्राड गेज
लाइन कन्वर्ट
हो रही है, हम
लोगों ने पहले
रेल्वे
मिनस्टर से
मिले, सबसे
मिले लेकिन
कहीं से कोई
आश्वासन
नहीं मिला।
उसके बाद में
हम डी.आर.एम. से
मिले तो
डी.आर.एम. ने
कहा कि एस्टीमेट
के 20 हजार
रुपये जमा
राएं तो हम
आपको एस्टीमेट
बनाकर देते
हैं कि इसके
कितने पैसे
लगेंगे। 20
हजार रुपये
विजय नगर की
जनता ने इक्ट्ठे
किये, रेल्वे
विभाग में जमा
कराये। उन्होंने
40 लाख और कुछ
रुपये
का एस्टीमेट
बनाकर दिया।
तो 40 लाख रुपये
में यह बात हुई
कि किस तरह से
यह बन सकता है
क्योंकि अभी
गेज परिवर्तन
के साथ में
अगर यह बन जाएगा
तो यह 40 लाख में
बन जाएगा और
गेज परिवर्तन
हो जाएगा तो
उसके बाद में
बनेगा तो 60 लाख
रुपये
लगेंगे। तो
मैंने माननीय
मंत्री महोदय
से निवेदन
किया। तो
उसमें बात यह
आयी कि अगर आप
आधा पैसा
एम.एल.ए. लेड
फण्ड से दे
दें तो आध्ंा
पैसा मैं आपको
स्वीकृत
करता हूं। तो
मुझे खुशी है,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
धन्यवाद
देना चाहता
हूं इस बात पर
कि मैंने आधा
पैसा एम.एल.ए.
फण्ड से दिया
और 50 प्रतिशत
का अंशदान
राजस्थान
सरकार ने दिया
और वह अजमेर
डी.आर.एम. के
आफिस में पैसा
जमा हो गया ओर
अगले एक महीने
के अन्दर
विजय नगर की
जो
वर्षों-वर्षों
की समस्या
थी, उससे
निजात मिल
जाएगी।
4668 किलोमीटर
सड़कों का
डामरीकरण हुआ
और मेगा हाइ-वे
तो इतना ज्यादा
राजस्थान के
कामर्शियल
आस्पेक्ट
को बदल देगा
कि जो गंगानगर
से किशनगढ़ तक
का जो हाइ-वे
बन रहा है
उससे सीधे
काण्डला से
और गुजरात में
जो पोर्ट हैं
जिनमें एक्सपोर्ट
हो रहा है,
पूरे नार्थ
इण्डिया का
सारा ट्रेफिक
है, वह सुगमता
से और कम पैसे
में वहां पहुंच
पायेगा। उससे
भी बहुत बड़ा
लाभ मिलेगा।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, इसके
माध्यम से ही
मैं माननीय
शिक्षा
मंत्रीजी का
भी बहुत बहुत
धन्यवाद
करना चाहता
हूं और उनका
अभिनन्दन और
साधुवाद करना
चाहता हूं।
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आप बीच में न
बोला करें,
हिण्डौली से
आने वाले
माननीय सदस्य।
श्री विष्णु
मोदी (मसूदा):
कॉलेज
एजुकेशन में
जहां हिन्दुस्तान
में 77 हजार की
पापुलेशन पर
एक कॉलेज है
वहां इन्हीं
का मादा था,
इन्हीं की
प्रेरणा थी कि
राजस्थान
में आज 63 हजार
की जनसंख्या
के ऊपर एक
कॉलेज है।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, ऐसा
किसी प्रदेश
में नहीं हुआ
कि जहां एक
शिक्षा सत्र
में 200 कॉलेज
खुले हों और
उसका मैं
प्रत्यक्षदर्शी
हूं कि मसूदा
जो एक एक
पंचायत है वहां
दो कॉलेज खुले
हैं। वहां पर 133
की संख्या
है। एक
लड़कियों का
कॉलेज है, एक
को-एड कॉलेज
है। मैं घन्यवाद
देना चाहता
हूं इस सरकार
को और शिक्षा
मंत्रीजी को
कि उन्होंने
एक दूरगामी
सोच रखी है।
Vps-usc-05032007-1520-2l-1
माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी जो भारत सरकार का बजट आया, जो कि लोक सभा में रखा गया है उसमें फाइनेंस मिनिस्टर ने 1.20 आफ जी.डी.पी., जो 1 परसेंट टैक्स सेस लगाया है एजुकेशन पर, जो पहले 2 परसेंट था, उसको बढ़ाकर 3 परसेंट कर दिया गया है। उसका मात्र कारण यह था कि देश के शिक्षाविद्, देश के इकॉनोमिस्ट यह कई वर्षों से मांग करते आ रहे थे कि आज की तारीख में चाइना के अन्दर 3 परसेंट जी.डी.पी. का एजुकेशन पर स्पेंडिंग है। आज अमरीका के अन्दर 6 परसेंट जी.डी.पी. का एजुकेशन पर खर्चा है। यह पहली बार हुआ कि भारत सरकार ने इस बात को रिलाइज किया और उन्होंने 1 परसेंट सेस बढ़ाकर इसको 1.20 आफ जी.डी.पी. से रिलेट किया, इसका तात्पर्य यह होगा माननीय अध्यक्ष महोदय, कि भारत सरकार वैरियस स्टेट को 35 हजार करोड़ रुपये शिक्षा के क्षेत्र में देगी।
राजस्थान सरकार इसलिए भी बधाई की पात्र है कि उन्होंने पिछले तीन साल में जितना मेचिंग ग्रांट देनी थी, उतनी पूरी मेचिंग ग्रांट देकर उन्होंने भारत सरकार का हिस्सा प्राप्त किया है। पिछले पाँच साल में जब कांग्रेस की सरकार थी तब वह भी मेचिंग ग्रांट नहीं दे पायी थी, वह भी भारत सरकार का जितना अपना अधिकार था वह भी नहीं दे पायी थी लेकिन इन्होंने मेचिंग ग्रांट दी और उन्होंने पूरा हिस्सा दिया और अभी इसी बजट में लोक सभा में फाइनेंस मिनिस्टर ने कक्षा 8 के बाद 9 में ड्रॉप-आउट हो जाता है, उसके लिए स्कॉलरशिप जारी की है और जो 11वां प्लान है, उसमें शिक्षा के क्षेत्र में पंचायत हैडक्वार्टर पर सैकण्डरी या सीनियर सैकण्डरी स्कूल खुले, इस बात के प्रयास किये हैं जिससे उनको, इस बार जो कॉलेज खोले इस राजस्थान की सरकार ने उसकी तरफ मैं वापस ले जाना चाहता हूं। आज जितने कॉलेज में जाने वालों की संख्या है वह अगले तीन साल के अन्दर चार गुणा से पाँच गुणा बढ़ जाएगी तो यह एक दूर-दृष्टिता का फैसला था कि इन्होंने प्राइवेट कॉलेज के लिए ल्युक्रेटिव स्कीम, प्राइवेट कॉलेज तो हमेशा से खुलते आये हैं लेकिन 200 कॉलेज एक साल में खुलना इसलिए कि इन्होंने उनको अध्ययन किया, उसकी समस्याओं को समझा और उसके बाद में कहा कि आप दो साल तक कहीं भी कॉलेज चलाइये, दो साल के बाद में, उस दौरान आपको हम नि:शुल्क भूमि देंगे। हम आपको जितना कंस्ट्रक्शन में पैसा लगेगा उसका भी पैसा हम वहन करेंगे। इसका कारण था कि एक साल में 200 कॉलेज खुले हैं।
माननीय अध्यक्ष महोदय, राजस्थान को सर्वाधिक प्रतिष्ठित यूनिस्को कन्फयूशस अवार्ड, वर्ष-2006 से राजस्थान को नवाजा गया। वर्ष 2006 में हनुमानगढ़ जिले को साक्षरता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सत्येन मैत्रेय पुरस्कार प्रदान किया गया।
माननीय अध्यक्ष महोदय, कप्यूटर की बात हो, स्कॉलरशिप की बात हो, कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां पर एजुकेशन डिपार्टमैंट ने अपना पेनिट्रेशन नहीं लिया हो। खाली इस दौरान ही मैं आपके माध्यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि शिक्षा मंत्रीजी, आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। आपकी सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है लेकिन जो नेशनल लेवल पर मैंने अभी एक कागज भी आपको भेजा है, आपको ध्यान होगा, माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी नेशनल लेवल पर एक सर्वे हुआ है और उस सर्वे में जेंडर डिफरेंस ऑफ एजुकेशन, मतलब महिलाओं के क्षेत्र में राजस्थान में पढ़ाई के अन्दर खूब काम हुआ और मैं तो कई बार कई जगह पर कहता हूं कि पहले, दूरदराज के क्षेत्रों में क्योंकि मुझे बांसवाड़ा, डूंगरपुर इधर पूरे बार्डर डिस्ट्रिक्ट्स में जाने का मौका मिलता है तो पहले वहां ए.एन.एम. या पुलिस में, ए.एन.एम. पर्टिकूलरी साउथ इंडिया की कैरलाइट्स लड़कियां हुआ करती थीं लेकिन आज सीकर, झुन्झुनूं और नागौर, उनकी लड़कियां आज चाहे पुलिस में हो ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: नागौर की नहीं, सीकर-झुन्झुनूं की ही हैं वह।
श्री विष्णु मोदी (मसूदा): नागौर का भी कुछ हिस्सा है, मैडम।
श्री अध्यक्ष: गलत बात। सीकर-झुन्झुनूं की है।
श्री विष्णु मोदी (मसूदा): हां, तो सीकर-झुन्झुनूं की अधिकांश लड़कियां आपको हर जिले के अन्दर, हर डिस्पेंसरी में, ए.एन.एम. मिल जाएंगी और हर पुलिस में। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: नागौर में एजुकेशन है ही कहां लड़कियों की? ... (व्यवधान)
श्री विष्णु मोदी (मसूदा): लेकिन उस रिपोर्ट में यह बताया गया है कि वुमैन और मैन में एजुकेशन का कितना डिफरेंस है. Countrywide where the women are more than men, it is north-east and Kerala. The gender difference in Rajasthan is less than Punjab and Haryana but it is quite significant.
श्री अध्यक्ष: इंडियन एवरेज से तो अभी भी पीछे है, महिला एजुकेशन। इंडियन एवरेज से अभी भी पीछे है महिला लिटरेसी।
श्री विष्णु मोदी (मसूदा): मैं यही कह रहा हूं, मैडम, कि पंजाब और हरियाणा से हम आगे हैं लेकिन हमारा जो परसेंटेज है जेंडर डिफरेंस का, नेशनल लेवल पर वह भी अभी हाई है। तो अब आपने, एजुकेशन को विस्तृत, बढ़ा रहे हैं लेकिन इसके साथ में शिक्षा में क्वालिटी एजुकेशन की तरफ भी अगर हम, यह टाइम है, आप देखिये कि आई.टी. बूम हुआ कंट्री में, राजस्थान को उसका हिस्सा नहीं मिला। अब चूंकि कुछ सोशल प्राब्लम्स हो गयी हैं तो चाहे इनफोसिस हो, चाहे विप्रो हो, चाहे सत्यम हो, चाहे हिन्दुस्तान की कोई बड़ी कम्पनी हो, जो आई.टी.सैक्टर में है उनको अब बाहर निकलना पड़ेगा क्योंकि उनके खिलाफ कनार्टक में, आंध्र में, इन जगहों पर एक सोशल बड़ा रिजेंटमैंट हो गया है और पॉलिटिकल रिजेंटमैंट भी हो गया है तो उसी का कारण है कि अब नॉर्थ में राजस्थान में जयपुर, यह कुछ आगे आने वाले दिनों में आई.टी. का बहुत बड़ा सेंटर बनने वाला है लेकिन एज ऑन टू डे हमारी जो एजुकेशन है वह इतनी परफेक्ट नहीं है कि हम उसमें राजस्थान के लोगों को भागीदारी मिल सके तो मैं आपके माध्यम से यह कहना चाहता हूं शिक्षा मंत्रीजी, शिक्षा को जैसे बढ़ा रहे हो, वैसे बढ़ाते रहो और साथ में एक नई पहल और करो कि जिसमें जेंडर डिफरेंस भी कम हो और क्वालिटी एजुकेशन की तरफ भी बात हो।
माननीय अध्यक्ष महोदय, इस मौके पर मैं एक बात और एड करना चाहता हूं कि राजस्थान के अन्दर सरकार ने जितना बड़ा काम एजुकेशन के क्षेत्र में किया है उससे प्राइवेट पब्लिक पार्टिसिपेशन भी पीछे नहीं रहा है। प्राइवेट पब्लिक पार्टिसिपेशन से भी राजस्थान के अन्दर काफी एजुकेशन के अन्दर काम हो रहा है लेकिन कुल मिलाकर ऐसा वातावरण नहीं बन जाए कि यह दोनों पहिये, दोनों पटरियां एक साथ आगे चलती रहे कि कहीं प्राइवेट पब्लिक पार्टिसिपेशन में कमी आ जाए या उनके कोई रोड़ा आ जाए तो मैं माननीय शिक्षा मंत्रीजी का उस ओर भी ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि आप इस बात को भी सुनिश्चित करें कि जो आप कर रहे हैं वह तो होता ही रहे इसके अलावा इस तरह के जैसे प्राइवेट कॉलेजज को आपने इंस्पायर किया उसी तरह से आप स्कूल और सैकण्डरी स्कूल एजुकेशन के लिए भी आप इंस्पायर करें।
माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी पार्लियामैंट के अन्दर इकॉनोमिक सर्वे सब्मिट हुआ। बजट से पहले हर साल इकॉनोमिक सर्वे पार्लियामैंट में जारी होता है। 1992 में एग्रीकल्चर का हमारी इंडियन इकॉनोमी में 38 परसेंट कंट्रिब्यूशन था जो 2006-07 में आकर 18 परसेंट रह गया। इसका तात्पर्य यह नहीं है कि खेती कम हो गयी है। खेती तो है लेकिन खेती के साथ इकॉनोमी के जो दूसरे फैक्टर्स थे वह बहुत ज्यादा आगे निकल गये लेकिन हमें इस बात को भी विशेष रूप से ध्यान रखना है और आपकी सरकार की तो उपलब्धता है कि पिछले दो साल में 12 लाख, 35 लाख टन सरसों आपने खरीदी और गत साल में आपने 14 लाख, 17 लाख मैट्रिक टन सरकार ने खरीद की। लेकिन आवश्यकता इस बात की है कि हम इसको कृर्षि क्षेत्र , जो कि हमारा पूर्व में सबसे मुख्य एक साधन रहा है इकॉनोमी का, उसकी तरफ भी हम नेग्लेक्ट नहीं हो। इग्नोर नहीं हो जाएं, इसको भी विशेष रूप से एक ध्यान में रखने की बात है।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं धन्यवाद देना चाहूंगा और आप तो जिस जिले से आती हैं उसमें बिजली के कुछ पाँच पैसे यूनिट या कितने पैसे यूनिट थे, मुझे ध्यान नहीं है, उठने के ऊपर कितना बड़ा आन्दोलन हुआ था और एक आदमी की जान भी चली गयी थी और पिछले पाँच साल में जब कांग्रेस सरकार 1998 से 2003 में थी तब चार बार बिजली के दाम बढ़ाये।
शिव/चौहान/15.30/2m/5.3.2007
और इस
सरकार ने, भारतीय
जनता की इस
सरकार ने, वसुन्धरा
राजे की सरकार
ने तीन साल
में एक पैसा
एग्रीकल्चर
टैरिफ के अंदर
एक पैसा यूनिट
नहीं बढ़ाया।
श्री
डा. सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
बिजली खरीदी,
करोड़ों की
बिजली खरीद
रहे हैं। (व्यवधान)
..
श्री
अध्यक्ष:
समाप्त करो।
श्री विष्णु
मोदी (मसूदा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, परमवीर
चक्र, अशोक
चक्र का हो
चाहे कम्प्यूटराइजेशन
करके खेती के
रिकार्ड देने
की बात हो, हम
सभी
क्षेत्रों
में प्रगति कर
रहे हैं, लेकिन
एक ही बात
सामने देखने
में बार बार
आती है कि
हमने जब पूर्व
में
जागीरदारी थी,
जब जागीरदारी
समाप्त हुई
थी तो कुछ
अलॉटमेंट कुछ
पूर्व
जागीरदारों
को उनकी जो
जागीरें मर्ज
हुईं, स्टेट
में उसके
अलॉटमेंट हुए
और दुर्भाग्य
है, अफसोस भी
है कि इतने
साल होने के
बावजूद भी आज
तक किसी को
पजेशन नहीं
मिला, किसी का
रेवेन्यू
रिकार्ड ठीक
नहीं हुआ और किसी
को तो
अलॉटमेंट भी
नहीं हुआ। मैं
आपके माध्यम
से सरकार से
पुरजोर
निवेदन करना
चाहता हूं कि
वह इस समस्या
को देखे और
कहां किस तरह
से इसमें
सुधार हो सकता
है, इसकी
कोशिश करे।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
माननीय गृह
मंत्रीजी को
भी धन्यवाद
देना चाहता
हूं कि हिन्दुस्तान
में राजस्थान
पहला राज्य
बना है जिसमें
41 थानों को
आई.एस.ओ.
सर्टिफिकेट मिला
है। आई.एस.ओ.सर्टिफिकेट
का मतलब यह है
कि वह सब इन्टरनेशनल
स्टेण्डर्ड
के अनुरूप हैं।
मैं उन
आंकड़ों में
जाना नहीं
चाहता परन्तु
सब तरह के
अपराध कम हुए
हैं, लेकिन नये
नये तरह के जब
से ई-मेल,
क्रेडिट
कार्ड और इस
तरह की कई तरह
की चीजें शुरू
हो गयीं तो
मैं समझता हूं
कि वह इस तरफ ध्यान
देंगे कि
इकोनोमिक
ओफेंड जो होते
हैं उनकी तरफ
विशेष रूप से
जैसे एस.ओ.जी.
बनाया, बड़ा
अच्छा काम
किया और इन्होंने
इतनी बड़ी
बड़ी जो कुछ
घटनाएं हुई
हैं, उनको
खोलने में
इनका प्रयास
रहा।
इकोनोमिक
ओफेंस का भी शायद
हैड क्वार्टर
में है कोई
अलग से, लेकिन
उसको अगर और
ज्यादा
इक्विप
करेंगे तो मैं
समझता हूं कि
राजस्थान
में अमन, चैन
और शांति कायम
करने में मदद
मिलेगी।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, अरबन
इन्फ्रास्ट्रक्चर
के लिये सबसे
पहले तो मैं
माननीय मुख्य
मंत्रीजी को
धन्यवाद
देना चाहता
हूं कि उन्होंने
गृह-कर समाप्त
किया।
श्री
अध्यक्ष: आप
राज्यपाल
महोदय को धन्यवाद
दीजिये, इन
मंत्रियों को
क्यों धन्यवाद
दे रहे हैं।
आप खड़े तो
हुए हैं राज्यपाल
महोदय के धन्यवाद
अभिभाषण पर। आप
राज्यपाल
महोदय को धन्यवाद
दीजिये।
श्री
विष्णु मोदी
(मसूदा): मैडम,
जब मैं कन्क्लुड
करूंगा तब
दूंगा, लेकिन
यह राज्यपाल
महोदय ने ही
अपने अभिभाषण
में इस सरकार
की जो
गतिविधियां
रही हैं, जो इस
सरकार की उपलब्धियां
हैं, वह खुद ही
बखान करके गयी
हैं और उन्हीं
का एनालेसिस
कर रहा हूं।
इनको तो मैं
बहुत बहुत
कोटि-कोटि धन्यवाद
दूंगा जब मैं
कन्क्लुड
करूंगा।
श्री
अध्यक्ष:
दीजिये-दीजिये,
कोई रह न
जाये।
श्री
विष्णु मोदी
(मसूदा): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, अगेन
अभी हमारे जो
राष्ट्रपति महोदय
हैं, अब्दुल
कलाम आजाद
साहब, उन्होंने
एक किताब
लिखी- 'विजन
इण्डिया 2020' उन्होंने
उसमें अरबन
इन्फ्रास्ट्रक्चर
को बहुत इलेबोरेटेड
डील किया और
आज 2006-07 में अरबन
पापुलेशन 26-27
प्रतिशत है वह
2020 में It is going to cross 50% plus. और आज
दुर्भाग्य
है कि अरबन
इन्फ्रास्ट्रक्चर
में कोई बहुत
बड़ा काम नहीं
हुआ और वर्ल्ड
वाइड, ओनरेबल
स्पीकर, चाहे
न्यूयार्क शहर
है, चाहे
वाशिंगटन है,
चाहे वह लंदन
है, चाहे वह पेरिस
है, चाहे वह
डूसलड्रोफ है,
जहां कहीं भी डवलप्ड
नेशन के अंदर
अरबन इन्फ्रास्ट्रक्चर
डवलप हुआ है
वह पब्लिक
प्राइवेट
पार्टिसिपेशन
के बगैर नहीं
हुआ है। सरकार
ने जब यह
आंकड़े आये
उसके बाद में
जवाहर लाल
नेहरू रिन्युअल
एक प्रोग्राम
शुरू किया है
भारत निर्माण
के तहत और
उसमें बहुत
बड़ी राशि
अगले कुछ वर्षों
में खर्च होने
वाली है।
लेकिन मैं
नहीं समझ पाया
कि पिछले
दिनों में ही
मैंने अख़बार
में पढ़ा था
क्योंकि दो
बातों से,
जैसे मैंने
लिग्नाइट के
लिये कहा कि
मैं पिछले 25-30
सालों से सुनता
आ रहा हूं कि
लिग्नाइट से
बिजली बनेगी,
वैसे ही पिछले
20 साल से सोलिड
बेस्ड डिस्पोजल,
शहर में जो
गंदा कचरा है,
उसके डिस्पोजल
का प्लान्ट
लगेगा और उससे
बिजली बनेगी।
लेकिन आज तक
उसके प्रारूप
ही बनते रहे
और सब कुछ
होता रहा, लेकिन
उसमें कोई ठोस
कदम नहीं उठा
पाये और दूसरा
अरबन इन्फ्रास्ट्रक्चर
अभी रामलीला
ग्राउंड के
लिये पढ़ा था
कि जयपुर में
पार्किंग की
बहुत बड़ी समस्या
है और उसमें
एक कम्पनी का
टेण्डर आया
और उस कम्पनी
को वर्क आर्डर
भी हो गया,
लेकिन उसके
बाद में
दुर्भाग्य
है इस राजस्थान
का, कि इस
राजस्थान के
अंदर जो
समाचार पत्र
है, वह भी इतना
गैर-जिम्मेदाराना
व्यवहार
करते हैं कि
कोई अता नहीं,
पता नहीं और ऐसी
स्टोरी
छापते हैं
जिसके अंदर एक
अलग से नई
बाधा आनी शुरू
हो जाती है। मैंने
एक अख़बार में
पढ़ा कि 300
करोड़ की जमीन
कौडि़यों में
बेच दी। जबकि रामलीला
ग्राउंड के
अंदर
पार्किंग
बनाने का ठेका
दिया था, जमीन
बेचने का काम
नहीं था। मैं दावे
से कह सकता
हूं कि आपने
भले ही कैंसिल
कर दिया हो,
मैं उसकी
डिटेल में नहीं
जाना चाहता,
लेकिन अगर आप
जयपुर शहर के
पिछले तीन साल
में ट्यूरिज्म
के आंकड़े
उठाकर देखें
तो उन आंकड़ों
में पहले साल
में 30 प्रतिशत
की वृद्धि हुई
है, फिर उसके
बाद में 30
प्रतिशत को
समाहित करते
हुए 45 प्रतिशत
की वृद्धि हुई
और पिछले साल
में उसको
समाहित करते
हुए 46 प्रतिशत
की वृद्धि हुई।
आज नोर्थ
इण्डिया का
सबसे बड़ा
एट्रेक्शन
जयपुर शहर बन
गया है और
उसके अंदर आप
छोटी-मोटी
बातों को ध्यान
में रखें। आज
न्यूयार्क
दुनिया का
सबसे मंहगा
शहर है। उन्होंने
ट्रांसहारबर
लिंक बनाया
समुद्र के ऊपर
से और न्यूजर्सी
मैन लैण्ड से
जोड़ दिया। जो
आदमी आज
अफोर्ड कर
सकता है वह न्यूयार्क
में आकर काम
करता है और न्यूजर्सी
के अंदर जाकर
एक-दो एकड़ के
अपने आलीशान
मकान में रहता
है। वह सब
इसलिए हो पाया
कि वहां
पब्लिक
प्राइवेट
पार्टिसिपेशन
हुआ और यह कुछ
फ्लाई ओवर
बने, कुछ
आर.ओ.बी. बने।
इसके अलावा
जयपुर शहर में
जे.डी.ए. काफी
विकास कराने
की कोशिश कर
रहा है। पहले
जब हम अजमेर
जाते थे तो
रात को आठ बजे
आने की हिम्मत
नहीं होती थी।
अब जब से सिक्स
लेन रोड बनी,
यह भी पब्लिक
प्राइवेट
पार्टिसिपेशन
का एक जीता
जागता उदाहरण
राजस्थान
में है कि आज
एक घण्टे के
अंदर 100 कि.मी. का
सफर तय हो
जाता है और आज
अजमेर जाना तो
ऐसा लगता है
कि जैसे
एम.आई.रोड पर जाकर
खाना खाकर आ
रहे हैं। इसमें
आज आवश्यकता
इस बात की है
कि हम पब्लिक
प्राइवेट
पार्टिसिपेशन
को और जवाहर
लाल नेहरू
अरबन रिन्युअल
प्रोग्राम को
ज्यादा से ज्यादा
उपयोग में
लेकर हम इन
शहरों का इन्फ्रास्ट्रक्चर
विकास करें क्योंकि
2020 में, आज की जो
आबादी है,
उससे दुगुनी
हो जायेगी। आज
जो कुछ भी
सुविधाएं हैं
वह भी बहुत कम
पड़ जायेंगी।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, अभी
यूनियन बजट
में भी टैक्स
होली-डे दिया गया
टू स्टार,
थ्री स्टार,
फोर स्टार
को, 2010 में कॉमन
वैल्थ गेम
होने वाले
हैं, उसके बाद
में फिर इवेंट
होने वाला है
और जयपुर में
भी आज स्थिति
यह हो गयी है
कि आप सितम्बर
से मार्च तक
कोई-सी ऐसी
मेडिकल की
ब्रांच नहीं
है जिसकी कान्फ्रेन्स
नहीं हो। चाहे
होटल इण्डस्ट्री
की कान्फ्रेन्स
हो, चाहे किसी
इण्डस्ट्री
की कान्फ्रेन्स
हो जिसकी कोई
कान्फ्रेन्स
यहां न होती
हो।
हमने
होटल नीति
बनायी। मुख्य
मंत्रीजी की
यह दूरदृष्टि
थी कि उन्होंने
होटल नीति
बनाकर यह कहा
कि राजस्थान
में होटल ज्यादा
से ज्यादा बने,
स्वागत योग्य
कदम है। इसमें
मैं सिर्फ
इतना ही कहना
चाहूंगा कि ट्रांसपेरेंसी
की बात हम
हमेशा करते
आये हैं,
लेकिन चाहे वह
होटल हो, चाहे
वह दूसरा कोई
अलॉटमेंट हो,
चाहे वह कोई
और कान्ट्रेक्चुअल
अवाड्र हो,
अगर हम बिडिंग
सिस्टम से डेवियट
हो जायेंगे,
मैडम, मैं
इसलिए यह बात
कहना चाहता
हूं कि
इंटेंशन तो
मैं नहीं
समझता कि कभी
किसी
गवर्नमेंट की
खराब रही हो,
लेकिन जब इम्प्लीमेंटेशन
का पार्ट आता
है तो उसमें
अलग सैक्शंस
हैं, जो उसमें
अपना लाभ,
अपनी हानि,
अपना नफा-नुकसान
इस तरह की
चीजें देखने
की बात करते
हैं तो यह टाइम
टैस्टेड चीज
है कि हम चाहे
अरबन इन्फ्रास्ट्रक्चर
हो, चाहे रोड
इन्फ्रास्ट्रक्चर
हो, चाहे होटल
पॉलिसी हो और
चाहे दूसरा और
कोई भी स्टेट
गवर्नमेंट से
रिलेटेड कोई
भी काम हो,
उसमें हम
बिडिंग सिस्टम
से डेवियट
नहीं हों। अगर
हम बिडिंग
सिस्टम से
डेवियट होंगे
तो हमारी इंटेंशन
तो ठीक है,
लेकिन जो
परसेप्शंस
हो जाता है, उस
परसेप्शंस
का जवाब बड़ा
मुश्किल हो
जाता है।
msr/usc/1540/2n/05032007
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, इस राज्यपाल
के अभिभाषण
में ग्रामीण
विकास, भारत
सरकार के बजट
में ग्रामीण
विकास, राज्य
सरकार का भी
बजट आने वाला
है, उसमें भी
ग्रामीण
विकास के ऊपर
अच्छा-खासा
लोकेशन हुआ
लेकिन आज हम
उस स्थिति को देखें
कि ग्रामीण
विकास के
इम्प्लिमेण्टेशन
में क्या
स्थिति है1 आज
पंचायत और
पंचायत समिति
सबसे बड़ा
ग्रामीण विकास
का माध्यम है
विकास का और
उनके पास उनका
बी.डी.ओ. नहीं, बी.डी.ओ.
कहां से
आयेगा?
डेपुटेशन से
आयेगा, चाहे इर्रिगेशन
डिपार्टमेंट
से आयेगा या
शिक्षा डिपार्टमेंट
से आयेगा या
एग्रीकल्चर
डिपार्टमेंट
से आयेगा। आज
इन्जीनियर्स
की यह स्थिति
है कि कोई
पंचायत समिति
ऐसी नहीं है
कि जिसके अन्दर
रिक्वायर्ड
स्टॉफ इन्जीनियरिंग
स्टॉफ है और
उसमें भी
दुर्भाग्य
है कि वह स्टॉफ
भी एग्रीकल्चर
का अधिकांश
है। उनकी अपनी
सर्विस
एनामोलीज
हैं। मुझे यह
बताया गया सब्जैक्ट
टु करेक्शन,
एज ओन टुडे, 2600
करोड़ रुपये
के ग्रामीण विकास
के कार्यक्रम
इस साल राजस्थान
में हाथ में
लिये गये हैं
जो कि
करीब-करीब पूर्ण
होने में हैं
इस मार्च तक।
अगर पी.डब्ल्यू.डी.
और इर्रिगेशन
में देखें तो
हम दस करोड़ रुपये
पर एक्स.ईएन.,
एस.ई. और इतनी
बड़ी एक फौज
है, एक जमात है
जबकि ग्रामीण
विकास जो कि थ्रश
है, भारत
सरकार का भी
है, राजस्थान
सरकार का भी
है, जिसकी
आवश्यकता भी
है, उसकी
स्थिति यह है
कि आज उनका
कोई कैडर नहीं
है। न बी.डी.ओ.
का कैडर है, ना
इन्जीनियरिंग
सेक्शन का
कोई कैडर है।
ग्राम सेवक तो
है लेकिन पूरे
नहीं हैं तो
मैं, माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से यह
निवेदन करना
चाहता हूं कि better late than
never. जो हो
गया सो हो गया
लेकिन आप कम
से कम तुरन्त
प्रभाव से
जितना जल्दी
से जल्दी हो
सके उतना आप
यह ग्रामीण
विकास का कए
कैडर बना
दीजिए जिसमें
बी.डी.ओ. भी हो,
जिसमें इन्जीनियरिंग
सैक्शन भी हो
जिससे कि यह
मूलभूत
सुविधाएं जो
कि वहां उपलब्ध
होने वाली है,
उनकी क्वालिटी
ठीक हो सके,
उनका टाइमली
इम्प्लिमेंटेशन
हो सके।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, जितना
अरबन इम्प्रूवमेंट
की तरफ ध्यान
देना है लेकिन
उसमें जो मेरा
एक पर्सनल एक्सपीरिएंस
रहा है कि अगर
उसमें सबसे ज्यादा
सत्यानाश
किसी ने किया
है तो टाउन प्लानिंग
डिपार्टमेंट
ने किया है।
मतलब, अगर हमारे
शहरों का सौन्दर्यकरण
के लिए या जो
कुछ भी अगर
कहीं सत्यानाशी
हुई है तो
उसमें सबसे
बड़ा योगदान I may be wrong.
Subject to correction. लेकिन वह
टाउन प्लानिंग
डिपार्टमेंट
का है। तो आज
आवश्यकता इस
बात की है कि
हम बीमारू
राज्यों से
निकल गये हैं,
विकसित राज्य
बनने वाले हैं
और हम वो ही
ढाक के तीन
पात, वो ही
एस.टी.पी.,
डी.टी.पी. और जो
कुछ जिस तरह
के आब्जैक्शन
लगा कर जिस
तरह से वो सत्यानाश
करते हैं तो
अब It is a high time. We must realize how we can see that the
implementation should take place in a right manner.
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैंने
अभी जिक्र
किया था सेज
के बारे में
भी इस देश में
एक बहुत लम्बी-चौड़ी
बहस छिड़ी हुई
है और मैं
समझता हूं कि
देश की कोईसी
पालिटिकल
पार्टीज के
बड़े से बड़े
नेता ने अपने
विचार इस पर
व्यक्त
नहीं किये
हों, हर आदमी
ने अपने विचार
व्यक्त
किये हैं और
अलग-अलग
पत्र-पत्रिकाओं
में इतने सारे
लेख छपे हैं,
अच्छाई में
भी छपे हैं,
खिलाफ में भी
छपे हैं लेकिन
मैं धन्यवाद
देना चाहूंगा
राजस्थान
सरकार को कि
जहां वेस्ट
बंगाल में नन्दीग्राम
और दूसरा
कौनसा है?
श्री
अध्यक्ष:
सिंगूर।
श्री
विष्णु मोदी
(मसूदा):
सिंगूर।
सिंगूर और नन्दीग्राम
में जिस तरह
से पुलिस के
बल का प्रयोग
हुआ, इस तरह से
वहां आन्दोलन
चले, में धन्यवाद
देना चाहता
हूं इस सरकार
को कि मुझ को
यह बताया गया
है कि 80 परसेंट से
ऊपर के लोग जो
सेज के अन्दर
जमीन है वह
अपने आप लोगों
ने सरेण्डर
की है जे.डी.ए.
में। जो
25 परसेंट तक का
आपने मोडल पेश
किया है देश
के सामने कि
हम सेज के भी
पक्षधर हैं तो
हम किसान के
भी पक्ष में
हैं और आपने जो
25 परसेंट का
पट्टा देने की
बात की है उसी
का नतीजा है
कि आज सिंगूर
और नन्दीग्राम
जैसी हालत
नहीं बनी है।
जयपुर में जो महिन्द्रा
का का सेज
बनने वाला है
उसके अन्दर 80
परसेंट से ऊपर
की ज्यादा
जमीन लोगों ने
अपने आप सरेण्डर
कर के जे.टी.ए.
के पट्टे ले
लिये लेकिन,
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
गांव में
कहावत है कि
'बेटी अभी बाप
के घर ही है', अभी
सेज को बनना
है तो उसमें
मैं इस सरकार
को क्वेश्चन
नहीं कर रहा
लेकिन इस तरह को
मैं कहना
चाहता हूं कि
वह थोड़ासा
कोंशस रहें कि
एक तो भारत
सरकार के जो
नोर्म्स हैं,
जरूरी नहीं है
राजस्थान
सरकार को कि land is their subject कि
उसमें वह एज
इट इज फॉलो
करे। जो कुछ
भी सेज में
कामर्शियल,
रेजिडेन्शल,
अदर देन
इंडस्ट्रियल,
जो कोई भी
लैंड आप ट्रांसफर
करने वाले हैं
तो आप कृपा कर
के उसका जो
कन्वर्जन
चार्जेज हैं
वह चाहे
जे.डी.ए. है या
नगर निगम है
या जो भी कोई
लोकल सैल्फ
बॉडी है उसके
अन्दर आप जमा
करायें, आप
सीधा राज्य
सरकार से आदेश
पारित नहीं
करें क्योंकि
हमारी यह संस्थाएं
अगर सक्षम
नहीं होंगी तो
सेज आने से भी
कोई बहुत ज्यादा
विकास नहीं
होने वाला है।
सेज भी आये, काश्तकारों
को भी लाभ
मिले और इसके
अलावा लोकल
बॉडीज भी
हमारी सेफिशिएंट
हों। क्योंकि
जो कुछ आप रोड
पर पैसा खर्च
करने वाले हैं,
जो कुछ आप
बिजली पर पैसा
खर्च करने
वाले हैं वो
ऐसा नहीं है,
एक दूसरा एग्जाम्पल
है कि रिलायंस
हरियाणा में
सेज ला रही है
और महाराष्ट्रा
में लेकर आ
रही है,
गवर्नमेंट ने
एक स्ट्रिप ऑफ
लैंड जो मैन
रोड पर थी, वो
उन्होंने
एक्वायर कर
के दे दी बाकी
का कहा कि आप
जानो और काश्तकार
जाने लेकिन
चलो जो कुछ
हमारे यहां
हुआ वह भी एक
रोल माडल है
और वह भी एक
अच्छा
उदाहरण है कि
जिसमें 80
परसेंट से ऊपर
ज्यादा
जमीनें अपने
आप सरेण्डर
हो गयीं। ...(व्यवधान)...
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, अभी
पंजाब और उत्तराखण्ड
के चुनाव हुए,
वहां पर जो
सरकारें थीं
उनकी सरकार
बदल गयीं।
मेरा यह मानना
है कि जिस
किसी सरकार ने
विधान सभा को
जितना कम
चलाया उतनी ही
इनकम्बेंसी
उसको ज्यादा
भुगतनी पड़ी।
वहां के
फिगर्स मैंने
मंगाये हैं
लेकिन अभी
पिछले हफ्ते
ही या उससे
पहले लोक सभा
के अन्दर स्पीकर
ने
पार्लियामेंट्री
अफेयर्स
मिनिस्टर को
बुला कर और
सारी
पालिटिकल
पार्टीज को बुला
कर यह तय करने
की कोशिश की
कि लोक सभा
साल में कितने
दिन चलनी
चाहिए। तो
सर्व-सम्मति
से यह फैसला
हुआ कि 100 दिन
चलनी चाहिए।
मैं 1993 में जब
विधायक बन कर
आया उस वक्त
से लेकर निरन्तर
प्रयास करता
रहा हूं और
मैं इस बात के
लिए तो संसदीय
कार्य
मंत्रीजी की
आलोचना भी
करूंगा कि उन्होंने
भी कोई पहल
नहीं की।
हमारे नियमों
में यह लिखा
हुआ है कि साल
में 60 दिन
विधान सभा
चलनी चाहिए और
यह तीन साल
होने को आ गये,
हम 30, 32 और 34 के
आंकड़े पर
हैं। मैं
संसदीय कार्य
मंत्री को कह
रहा हूं और, माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
बहुत स्पष्ट
रूप से कहना
चाहता हूं कि
इनकम्बेंसी
को हमने देखा
है, आपने देखा
है, सब लोगों
ने पढ़ा है।
...(व्यवधान)...
अब मैं तो
सब की ही बधाई
कर देता हूं,
हां लेकिन मैं
इस मौके पर,
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
आपके माध्यम
से सरकार को
और विशेष कर
संसदीय कार्य
मंत्रीजी को
कहना चाहता
हूं, क्योंकि
वो एक जमीन से
जुड़े हुए
राजनेता हैं,
वह छात्र जीवन
से राजनीति
में हैं, कि कम
से कम आप अपने
देख कर इस तरह
का सुनिश्चित
करें कि विधान
सभा का सत्र
एक साल में 60
दिन कम से कम
चलता रहे तो
मैं समझता हूं
इनकम्बेंसी
नाम की कोई
चीज नहीं
रहेगी।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप तैयार
रहना, आप
माननीय मुख्यमंत्रीजी
से यह करवाने
के लिए तैयार
हैं, हम स्वागत
करते हैं इनके
प्रस्ताव
का।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आप अपना
रवैया सुधार
लो हम सब
तैयार हो
जायेंगये। पिछले
तीन दिन में
आपने क्या
किया? इस तरह
कर रहे हो न
आप।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप जानबूझकर
हम से जो
करवाना चाहते
हो वो भी हम
करते हैं
कभी-कभी।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): इसका मतलब
अपने दोनों की
बात आपने यहां
कह दी, अपन दोनों
की बात यहां
ओपन कर दी।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
हैं? आप तो 60 दिन
का करवाओ।
श्री विष्णु
मोदी (मसूदा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
दो बातें कह
कर अपनी बात
समाप्त
करूंगा। एक तो
मैं 1998 से 2003 तक जब
कांग्रेस की
गवर्नमेंट थी
उनको धन्यवाद
देना चाहता
हूं कि उन्होंने
एक मूल फैसला
किया कि वो
कोई रिटायर
आदमी हो रहा
है तो उसको
एक्सटेन्शन
नहीं देंगे।
यह सही फैसला
था क्योंकि
एक आदमी जो
हाईएस्ट
पोजिशन पर
पहुंच जाता है
उसके नीचे
वाले जो लोग
होते हैं वो एस्पिरेंट
होते हैं उस
पोजिशन में
आने के लिए और
जब आप उसको,
हैड ऑफ द
डिपार्टमेंट
को या किसी को
एक्सटेन्शन
दे देते हैं
तो नीचे डाउन
द लाईन अच्छा
मैसेज नहीं
जाता है। इस
सरकार ने बहुत
से लोगों को
एक्सटेन्शन
दिया है।
Ars/usc/1550/2o/05032007/1
अगर
आपका कोई आदमी
इनडिस्पेंसिबल
नहीं है, लोग
कहते थे कि who is after
Nehru?
लेकिन आफ्टर
नेहरू भी
हमारे देश को
अच्छी
लीडरशिप मिली तो
कोई इनडिस्पेंसिबल
नहीं है तो
मैं आपके माध्यम
से सरकार से
अपील करना
चाहूंगा कि
अगर कोई इनडिस्पेंसिबल
है तो आप री
एम्पलॉयमैंट
कर लीजिए
लेकिन कृपा
करके एक्सटेंशन
नहीं दें और
जो कुछ भी एक्सटेंशन
दे रखा है
उनको सबको आप
वापस करें।
मैं इस मौके
पर जब माननीय
हरिदेव जोशी
मुख्यमंत्री
थे, खेतसिंह
जी राठौड़
हैल्थ
मिनिस्टर थे
तो डाक्टर जे
पी सेठी का वह
कार्यकाल
बढ़ाना चाहते
थे। मुझे उन्होंने
भेजा तो डाक्टर
सेठी ने जवाब
दिया मैंने
बहुत नौकरी कर
ली और I don’t want a single day extension. तो
मेरा इसमें यह
भी मानना है
कि जो बिलो
एवरेज लोग हैं
वह एक्सटेंशन
की बात करते
हैं, जिनमें
कान्फिडेंस नहीं
होता वह एक्सटेंशन
की बात करते
हैं । जो आदमी
नोबल होता है,
जो जॉब सैटिस्फेक्शन
होता है वह
कभी एक्सटेंशन
की बात नहीं
करता।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, जब
माननीय वसुन्धरा
जी ने सरकार
बनाई तो एक
नवीन प्रयोग
किया। वाटर
रिसोर्स
डवलपमैंट उन्होंने
अण्डर
ग्राउंट वाटर,
इर्रिगेशन, पी
एच ई डी यह अलग अलग
विभाग होते
थे, अलग अलग
मंत्री होते
थे, उन्होंने
एक किया जैसे
उन्होंने
एन्वायरमैंट
फोरेस्ट और
माइन्स भी एक
किया। मुझे
तकलीफ है आज
इस बात की कि
भारत सरकार ने
पचास हेक्टेअर
तक एन्वायरमैंट
क्लियरेंस
राजस्थान
सरकार को हस्तानांतरित
कर दी। राजस्थान
सरकार को अपने
स्तर पर एक
कमेटी बनानी
थी और वह
कमेटी भारत
सरकार को
भेजनी थी कि
यह हम कमेटी
बनाते हैं।
उन्होंने
नार्म्स और
गाइड लाइन्स
सारी दी हैं
और उससे हम यह
कमेटी बनाते
हैं तो वह
नोटिफाई हो
जाती तो राजस्थान
में आज एन्वायरमैंट
क्लियरेंस के
जितने मसले
पैण्डिंग
पड़े होते
उनमें तेजी
आती लेकिन हम
वह कमेटी आज
तक नहीं बना
पाए। इसके साथ
वसुन्धरा जी
ने ही एन्वायरमैंट,
फोरेस्ट और
माइन्स का
डिपार्टमैंट
एक बनाया है,
एक मंत्री
बनाया। आज
मुझे तकलीफ है
इस बात की जब 1994
के अन्दर
सुप्रीम
कोर्ट का
फैसला आया “No other than
forest works will continue in any forest area and the works should be stopped
henceforth.”
उस वक्त
राजस्थान की
करीब पाँच
हजार खानें
बंद हुईं
उसमें आज की
तारीख में भी 1500
से ज्यादा
खानों की
फाइलें इधर से
उधर धक्के खा
रही हैं और वह
भारत सरकार को
प्रपोजल नहीं
गये और मुझे
अफसोस है इस
बात का कि तीन
साल से एक ही
मंत्री दोनों
विभागों का
मंत्री होने के
बाद उसमें दस
फाइलें, पचास
फाइलें, सौ
फाइलों का भी
निपटारा होता
तो मैं समझता
हूं जिस मंशा
से इनको क्लब
किया गया था
उसका एक ठोस
नतीजा मिलता ।
अध्यक्ष
महोदय, मैं
माननीय राज्यपाल
महोदय का अपने
मन से धन्यवाद
करता हूं ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): मन और
आत्मा दोनों
से ।
श्री
विष्णु मोदी
(मसूदा): मन और
आत्मा दोनों
से धन्यवाद
करता हूं और
आपका भी करता
हूं।
श्री
अध्यक्ष: क्या
बात हुई मन और
आत्मा, दिल
और दिमाग कहते
तो समझ में
आता, मन और आत्मा
क्या बात
हुई?
श्री
विष्णु मोदी
(मसूदा): धन्यवाद।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): घनश्याम
जी, अब तो स्पष्ट
है ना यह
डेपुटेशन पर
आपके यहां
हैं।
श्री
अध्यक्ष:
श्री जोगाराम
पटेल।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
मसूदा से आने
वाले वरिष्ठ
माननीय सदस्य
द्वारा
महामहिम राज्यपाल
महोदय के
अभिभाषण पर जो
धन्यवाद
प्रस्ताव
रखा है उसका
समर्थन करता
हूं और उसके
समर्थन में ही
आपके माध्यम
से राजस्थान
के इस पवित्र
सदन में इस
सदन के माध्यम
से राजस्थान
की जनता तक यह
बात पहुंचाने
का प्रयास करूंगा
कि राजस्थान
की मौजूदा
सरकार ने वह
आयाम कायम किए
हैं, वह
ऊंचाइयां
प्राप्त कीं
हैं जो इतिहास
में शायद आज
तक किसी भी सरकार
ने प्राप्त
नहीं की है।
महामहिम राज्यपाल
महोदय ने
पिछले तीन
वर्षो के
दौरान, गत वित्तीय
वर्ष के
दौरान, मौजूदा
वसुन्धरा
राजे की सरकार
के कार्यकाल
के दौरान जो
डवलपमैंट के
वर्क किए, जो
नीतिगत
निर्णय लिए,
जो जनता के
विकास के
कार्य किये और
जो जनता के
हित के सम्बन्ध
में कार्य किए
उनका एक तरह
से लेखे जोखे
के रूप में
अभिभाषण के
रूप में इस
पवित्र सदन
में रखा, मैं
उनका बहुत
बहुत आभारी
हूं ।
मैं
अपनी बात
प्रारम्भ
करूं उससे
पहले मैं इस
दोहे से अपनी
बात प्रारम्भ
करूंगा,
‘
होते हैं
जिनमें
हौंसले मिलते
उन्हीं को
रास्ते, ये
दुनियां नहीं
है दोस्तों
बुजदिलों के
वास्ते, बुजदिलों
में हिम्मत
कहां जो रोक
लें इस िदलेर
को, धोखे में
तो काट लेते
हैं कुत्ते
भी शेर को ‘ ।
श्री
टीकम चन्द
कान्त
(सिवाना): यह
कुत्ते और
शेर कौन कौन
हैं जरा बता
देना।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): यह
समझने की बात
है बताने की
बात नहीं है ।
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
ख्याल बदल
जायेंगे,
वसुन्धरा जी
आपके इस हार्ड
वर्क से
इतिहास के पन्ने
बदल जायेंगे।
मैं इस बात से
अपनी बात
प्रारम्भ
करूंगा। राजस्थान
विभिन्न
भौगोलिक
परिस्थितियों
का, राजस्थान
विभिन्न
बोलियों का,
राजस्थान
विभिन्न वेश
भूषाओं का,
राजस्थान
विभिन्न
परिस्थितियों
का प्रदेश है।
भौगोलिक दृष्टि
से भारत में
सबसे बड़ा
प्रदेश है ।
करीब दस प्रतिशत
इसका भौगोलिक
क्षेत्र है
जनसंख्या के
क्षेत्र से भी
काफी बड़ा
क्षेत्र है, पशुधन
के लिहाज से
भी बहुत बड़ा
क्ष्ंेत्र
है। करीबन 18
प्रतिशत
पशुधन राजस्थान
में है इस
दृष्टि से अगर
राजस्थान का
विकास करने के
लिए कई तरह की
परिस्थितियों
का सामना करना
पड़ता है। मैं
बिंदुवार आपसे
निवेदन करूं ।
कुछ महत्वपूर्ण
बिंदु जो मैं
आपके सामने
रखना चाहूंगा
जिस पर राजस्थान
की सरकार ने
बहुत गहनता से
वर्क किया है,
कार्य किया
है, अचीवमैंट
प्राप्त
किया है। सबसे
पहले राजस्थान
की आदरणीय
मुख्यमंत्री
ने कहा था
जनता का विश्वास
ही हमारी
धरोहर है और
अपने इस अटल
वाक्य पर,
अपने इस विश्वास
पर, अपने इस
दृढ़ निश्चय
पर आज भी वह
कायम हैं और
उसकी बराबर
बराबर पालना
कर रही हैं।
( )
(
श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष,
पदासीन)
माननीय
उपाध्यक्ष
जी, विभिन्न
राजस्थान के
जो क्षेत्र
हैं इन विभिन्न
क्षेत्रों
में विभिन्न
प्रयोग,
विभिन्न
नीतिगत
परिवर्तन देश
के विकास के
साथ आत्मनिर्भरता
की ओर बढ़ रहे
हैं और उस ओर
बढ़ाये गये
कदम हैं ।
लगातार पाँच
साल तक खजाना
खाली की रट
करने वाले
मेरी
पूर्ववर्ती
सरकार के साथियों,
प्रदेश की छवि
में जो कलंक
लगा दिया था इस
कंगाली के
कलंक को धो
डालने का
प्रयास किया
गया और इसमें
बहुत हद तक
सफलता मौजूदा
सरकार ने
प्राप्त की।
नई थिंकिंग,
नई दिशा, नई
तकनीक
त्रिवेणी ने
विश्वास की
एक ऐतिहासिक
गंगा कायम की
है जो दिन दूनी
रात चौगुनी चल
रही है।
सार्वजनिक व
निजी भागीदारी
के ताने बाने
से विकास रूपी
एक इमारत खड़ी
की है और एक
बहुत बड़ी
इमारत राजस्थान
के विकास में
भारत में ही
नहीं विश्व
में जिसका
विश्वास
जगाया है।
उद्यमियों को
निवेश हेतु
आकर्षित किया,
साझेदारी के
रूप में कार्य
करने का आह्वान
किया और पावर
सैक्टर में
जो कार्य किया
उसके दो वर्ष
के बाद सरप्लस
प्रदेश के रूप
में पावर सरप्लस
प्रदेश के रूप
में यह देश
होगा यह
प्रदेश होगा।
पाँच मेगा हाई
वे अभी बताया
गया था मेरे किसी
साथी ने कि
इसमें राजस्थान
का कितना पैसा
लगा है इसलिए
मैं उन माननीय
भाई को आपकी
मार्फत बताना
चाहता हूं कि
पाँच मेगा हाई
वे के निर्माण
के बाद उत्तर
दक्षिण, पूरब
पश्चिम के
कोरीडोर से
जुड़ेगा और
मुख्यमंत्री
सड़क योजना के
नाम से जो
विकास कार्य किए
जिसका मैं अभी
आपके सामने
निवेदन
करूंगा, एक
अद्वितीय, एक
अविस्मरणीय
और इतना एक
विकास का
कार्य है अगर
आप देखना
चाहें ........
vns/usc/16.00/2p/5.3.2007
फलौदी से
रामजी के गोल
यहां इस
क्षेत्र में
सबसे नजदीक
इतनी आलीशान
रोड़ शायद
इतिहास में
कहीं भी नहीं
बनी। मिड डे
मील स्वयंसेवी
संस्थाओं के
माध्यम से
पार्टनरशिप
के रूप में
उसका उपयोग,
प्राइवेट
ऊर्जा व जल
साधन के
पब्लिक
प्राइवेट पार्टनरशिप
का प्रयोग,
कृषि क्षेत्र
में इजरायल की
वैज्ञानिक
पद्धति व
तकनीकों का
अध्ययन और इस
पवित्र सदन के
कई माननीय
सदस्य इस
हेतु इजरायल
भी जाकर आए
हैं। इन सब
बातों की और
मैं अभी आपका
बिन्दुवार
ध्यान
दिलाऊं। बीस
हजार गांवों
में जल चेतना
यात्रा, जल
संरक्षण व
पानी के महत्व
का एक अभिनव
प्रयोग,
बूंद-बूंद
सिंचाई व फव्वारा
पद्धति जैसे
वैज्ञानिक
तरीकों को
अपनाने पर
जोर, इसमें
वित्तीय
प्रबंधन इत्यादि
जो बिन्दु
हैं जिनका इस
महामहिम के
अभिभाषण में
उल्लेख है।
आदरणीय
उपाध्यक्ष महोदय,
मैं आपके
सामने सबसे
पहले
फाइनेंशियल मैनेजमेंट
के सम्बन्ध
में जो बात है
क्योंकि कहा
गया है पहला
सुख निरोगी
काया, दूजा सुख
है घर में
माया। किसी
प्रदेश, किसी
व्यक्ति या
किसी देश के
लिये अगर कोई
सबसे महत्वपूर्ण
है तो वह...
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
घर में माया
में तो आप
बहुत प्रगति कर
रहे हो यह इन्कार
नहीं करते। सब
आदमी कह रहे
हैं बहुत माया
आ रही है।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): अगर
प्रदेश में
माया आयेगी तो
आपका विकास भी
साथ होगा, आप
चिन्ता न
करें। तो यह
प्रदेश एक
अपना घर है और
अगर आपके
बैठे-बैठे फोन
से बात करते
हैं अगर आपको
यह लगता है कि
यह प्रदेश
अपना घर नहीं
है तो यह आपकी
अपनी थिंकिंग
है। मैं तो
मानता हूं कि
राजस्थान जो
प्रदेश है वह
हम सभी का
करीब छह करोड़
की जनसंख्या
वाले इस
प्रदेश का
सबका घर है और
इस घर के अन्दर
अगर माया आयेगी
तो वह सभी की
माया है और वह
माया है विकास
के रूप में।
पिछले पाँच
वर्ष के
शासनकाल के
दौरान हम रोज
यह सुनते थे,
पढ़ते थे ओवर
ड्राफ्ट, ओवर
ड्राफ्ट, ओवर
ड्राफ्ट
लेकिन मौजूदा
सरकार आने के
बाद फरवरी, 2004 के
बाद कभी भी
ओवर ड्राफ्ट
की स्थिति नहीं
रही। ऐसा कोई
जादू नहीं
हुआ, ऐसी ऊपर
से कोई भविष्यवाणी
नहीं हुई या एक
ही दिन किसी
ने लाकर कोई
इतनी धन-दौलत
उपलब्ध नहीं
करवा दी गयी
कि एक ही दिन
में ओवर ड्राफ्ट
खतम हो गया
लेकिन कुशल
वित्तीय
प्रबंधन की
वजह से, बैटर
फाइनेंशियल
मैनेजमेंट के
कारण यह सब
संभव हुआ।
इतना ही नहीं
योजना का
आकार, व्यय
में निरन्तर
वृद्धि, राजकोषीय
घाटे में
निरन्तर
सुधार यह सारे
बिन्दु इसके
अन्दर
आयेंगे।
अभी-अभी कुछ
महीने पहले या
कह दें कुछ
दिन पहले 68422.16
करोड़ की
पंचवर्षीय
योजना स्वीकार
की गयी है
जिसके बारे
में मसूदा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने आपको
आदरणीय मोन्टेक
सिंहजी,
आदरणीय
प्रधानमंत्री
जी और अन्य
योजना आयोग के
जो सदस्य हैं
उनके जो
उद्धरण थे,
उन्होंने
इसके बारे में
क्या कहा वह
पढ़कर
सुनाया। उसे
मैं रिपीट
नहीं करूंगा
लेकिन इस
योजना को देख
करके इसके
आकार को देखकर
देश का हर
नागरिक राजस्थान
की और आशा भरी
निगाह से देख
रहा है कि
राजस्थान की
सरकार ने इतनी
बड़ी योजना
किस तरह से संभव
की। अड़सठ
करोड़ की जो
योजना है वह
आठवीं, नवीं
और तीन
पंचवर्षीय
योजनाओं को
तीनों को मिला
दें उसके
बराबर की एक
पंचवर्षीय
योजना है।
कहने में तो
बहुत कुछ है।
नुक्ताचीनी
निकालने में
कुछ भी नहीं
लगता है लेकिन
वास्तविकता
को
परिप्रेक्ष्य
में लावें तो
आठवीं, नवीं
और दसवीं जो
पंचवर्षीय
योजनाएं थी उन
सबकी लागत
होती है 66894
करोड़ जबकि
अकेली जो
योजना है वह
उससे भी करीब
चार हजार
करोड़ की अधिक
है इसलिये
मेरा पहला
निवेदन था कि
पंचवर्षीय
योजना अपने
आपमें स्पष्ट
करती है कि
राजस्थान
सरकार आगामी
पाँच वर्ष में
प्रदेश में
कितना बड़ा
विकास करने जा
रही है।
दूसरा,
आपको यह
जानकारी होकर
बहुत खुशी
होगी उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी मार्फत
बताना भी
चाहूंगा कि यह
जो पंचवर्षीय
योजना अभी चल
रही है जो अभी
खतम होने वाली
है। इसके जो
अंतिम तीन
वर्ष मौजूदा
सरकार के
कार्यकाल में
हैं इन तीन
वर्षों के अन्दर
22853 करोड़ रुपये
खर्च किये गये
जो कुल योजना
का 19567 करोड़
रुपये अधिक है।
इन्होंने जो
दो वर्ष में
खर्च किये
उससे भी कई गुणा
खर्च इन तीन
वर्षों के अन्दर
किया गया।
इतना ही नहीं
अभी जो इस वर्ष
2007-08 की वास्तविक
योजना बनी है
यह 11638 करोड़ की
है और जो
आठवीं
पंचवर्षीय
योजना थी उस
योजना के कुल
आकार से भी
बड़ी है। आप
अनुमान
लगावें एक
पंचवर्षीय योजना
और एक वित्तीय
वर्ष की योजना
का आकार 11638
करोड़ रुपये।
जब खर्च राजस्थान
में होगा तो
निश्चित रूप
से राजस्थान
का विकास
होगा। यह पहला
जो बिन्दु है
सरकार को काम
करने की जो
क्षमता है,
प्रदेश में
विकास करने की
जो क्षमता है,
प्रदेश में
किस-किस सैक्टर
में क्या-क्या
विकास होगा जो
क्षमता है
उसको आंकने का
उसकी
पंचवर्षीय
योजना और वित्तीय
वर्ष की योजना
इन दोनों से
स्पष्ट है
कि राजस्थान
की मौजूदा
सरकार ने बहुत
तहेदिल से मन
से, लगन से,
कर्म से काम
कर करके इतनी
बड़ी योजना के
आकार को मंजूर
करवाया और
इसकी जो
भूरि-भूरि प्रशंसा
की गयी है वह
अभी आपके
सामने मेरे
पूर्ववर्ती
वक्ता मसूदा
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने बतायी।
वित्तीय
घाटे के सम्बन्ध
में बहुत कुछ
रोज सुनने को
मिलता है। हर
प्रदेश और
राष्ट्र के
स्तर पर इतना
वित्तीय
घाटा है। इतना
वित्तीय
घाटा नहीं है।
राजस्थान
में जो बारह
प्रतिशत वित्तीय
घाटा था उसको
घटाकर तीन
प्रतिशत तक ले
आये हैं और यह
सिर्फ कुशल
मैनेजमेंट की
वजह से ही
संभव हुआ है।
कहां बारह
परसेंट और
कहां तीन
परसेंट घाटा
और जैसा अभी
फाइनेंशियल
मैनेजमेंट चल
रहा है उसके
अनुसार देखते
हुये, उसको
देखते हुये तो
वर्ष 2008-09 में यह
जो वित्तीय
घाटा है वह
करीब-करीब
समाप्त हो
जायेगा और
राजस्थान
शायद पहला
प्रदेश होगा
भारत में
जिसमें वित्तीय
घाटे पर इतना
प्रबंध किया
है, इतना कुशल
अंकुश लगाया
है और वित्तीय
घाटे को खतम
किया है। यह
शायद पहला
प्रदेश होगा।
इतना ही
नहीं ऋण की जो
दर 28 प्रतिशत
थी उसको घटाकर
17 परसेंट किया
गया है। 28
परसेंट जो कुल
लोन लिया जाता
है, जो ऋण लिया
जाता है,
विभिन्न
प्रकार के जो
ऋण लिये जाते
हैं उसको घटा
करके 17 परसेंट
कर दिया गया
है और अन्य
स्रोतों से जो
आय है उसमें
बहुत अधिक
बढ़ोतरी की
गयी है जिसका
मैं अभी आपके
सामने निवेदन करूंगा।
योजना आकार 2207
में जो 31 करोड़
था, इस तरफ रखा है
जो 68 करोड़ है
और यह 11,000 जैसा
मैंने अभी
निवेदन किया
और इन सबको
अगर देखा जाये
तो ऐसा लगेगा
कि एक तरह से
विकास के
मामले में क्योंकि
अर्द्ध धन के
बिना किसी का
विकास नहीं होता।
न सड़क बनेगी,
न पानी आयेगा,
न बिजली होगी और
न कोई और
कार्य होंगे।
इस तरह से
जो किया गया
है वित्तीय
प्रबंधन का एक
मैं आपके
उदाहरण रखना चाहूंगा।
वर्ष 2005-2006 की
प्राप्तियों
के सम्बन्ध
में बजट
अनुमान था 20538
करोड़ का, फिर
संशोधित अनुमान
20746 करोड़ और जब
एक्चुअल्स
आये जिसको
वास्तविक
प्राप्तियां
कहते हैं वह
आयीं 20849 करोड़।
तो यह कुशल
वित्तीय
प्रबंधन का ही
परिणाम है कि
प्राप्तियों का
जो आंकड़ा तय
किया गया था
उससे भी अधिक
आंकड़ा 20849
करोड़ प्राप्त
किया गया।
वित्तीय
जो व्यय है,
एक्सपेंडीचर
साइड में भी
आप देखेंगे तो
वही की वही
बात आपको
मिलेगी। उसका
जो बजट अनुमान
था वह था 22061
करोड़ का, अनुमान
लगाया 21011 करोड़
का जब वास्तविक
हुआ तो 21499 करोड़
का। इससे भी
पता लगता है
कि राजस्थान
सरकार ने व्यय
की जो दर थी
उसको बहुत
अधिक बढ़ाया
है। हर सैक्टर
में व्यय
किया है।
राजस्व घाटा
2005-06 में अनुमान
लगाया गया था 1523
करोड़ का
होगा। बाद में
जब संशोधित
अनुमान लगाया
गया तो 4865 करोड़
का माना गया
और अधिक कुशल
वित्तीय
प्रबंधन का
परिणाम था
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, कि वह 660
करोड़ का ही
हुआ। यह इस
बात का द्योतक
है कि राजस्थान
में मौजूदा
सरकार ने कुशल
वित्तीय
प्रबंधन किया
है और इसी का
परिणाम है कि
आज की तारीख
में यह जो
राजस्थान
प्रदेश है हम
सबके लिये
गर्व का विषय
है कि यह कोई
बीमारू
प्रदेश, कोई
पिछड़ा हुआ
प्रदेश न जाने
किन-किन
अलंकारों से
इसे संबोधित
किया जाता था
लेकिन आज न वह
बीमारू
प्रदेश है, न
वह पिछड़ा प्रदेश
है। आज यह
विकसित प्रदेश
की श्रेणी में
आकर खड़ा हुआ
है और सबसे आगे
की दौड़ में
खड़ा है। हम
सब आपसे
प्रार्थना
करते हैं
राजस्थान के
विकास में
आइये, सहयोग
कीजिये और
सहयोग करेंगे
तभी पार
लगेगा।
श्याम/चौहान 5.03.2007
16.10 2q
इसमें
सहयोग करेंगे
तभी पूरा
होगा, नहीं तो जैसा
कि अभी एक बजट
अभी भी आया था
थोड़े दिन पहले
केन्द्र
सरकार का भी
बजट आया, कोई
दो प्रदेशों
की सरकारों के
संबंध में भी
जनता ने
जनादेश दिया और
उस जनादेश के
बारे में एक
कवि ने लिखा
है कि, जो अभी
जनादेश आया,
महंगाई के
कारण जो कहा
गया कि महंगाई
का परिणाम है,
कोई कहे कि
महंगाई मार
गयी, पता नहीं
किन-किन लोगों
ने क्या-क्या
लिखा है, इस पर
कवि ने कहा है
कि महंगी
रोटी, महंगी
चीनी, महंगा
सब सामान, बेच
रहे देश की
शान फिर भी
मेरा देश
महान। लेकिन
अब यह चीज
चलने वाली
नहीं है। इस
बार तो जो
वास्तविक
स्थिति है उसी
के आधार पर
चलना पड़ेगा।
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे निवेदन
कर रहा था
कुशल वित्तीय
प्रबंधन की,
दूसरा मेरा जो
इस संबंध में
बिन्दु है,
वह है कि जो
राजस्व
प्राप्तियां
हो रही हैं, जो
खर्चा हो रहा
है, उस सबकी
विधिवत प्लानिंग
की गयी है और
उसके उपरांत
उस पर वर्क किया
जा रहा है और
उसके अलावा
सबसे बड़ा जो
काम किया गया
है, व्यय
सुधार आयोग का
गठन किया गया
है, वह जो आयोग
है वह अपनी
सिफारिशें
करता है, वह जो
सुझाव देता
है, वह अपनी जो
रिकमंडेशन
करता है, उसको
भी कंसीडर
किया जाता है
और उसके बाद
में जो काम की
बाते हैं उन
पर वर्क किया
जाता है।
दूसरा, मुख्य
सचिव जो चीफ
सेक्रेटरी
महोदय हैं,
उनकी अध्यक्षता
में लोक व्यय
पुनरीक्षण
समिति, पब्लिक
एक्सपेंडिचर
रिव्यु
कमेटी बनायी
गयी है और वह
जो कमेटी है
वह जितना एक्सपेंडिचर
हो रहा है
उसको कंसीडर
करती है, उसको
रिव्यु करती
है और इस बात
की जांच करती
है कि कोई
अननेसेसरी
एक्सपेंडिचर
तो नहीं हो
रहा है। कोई
फालतू व्यय
तो नहीं हो
रहा है, व्यय
जो हो
रहा है उसका
रिटर्न मिल
रहा है कि
नहीं मिल रहा
है और उसकी
रिकमंडेशन को
भी कंसीडर
किया जाता है।
यह पहली बार
राजस्थान
में अगर किसी
सरकार ने किया
व्यय सुधार
आयोग और
पब्लिक एक्सपेंडिचर
रिव्यु
कमेटी तो इस
मौजूदा सरकार
ने किया है।
उपाध्यक्ष
महोदय, इतना
ही नहीं,
वर्तमान
सरकार ने जो
पूंजीगत
परिव्यय
होता है,
जिनसे
परिसंपत्तियों
का पुर्ननिर्माण
किया जाता है
वह सबसे अहम
मुद्दा होता है
और अगर कोई खर्च
भी किया जाता
है, कोई ऋण भी
लिया जाता है
और
परिसंपत्तियों
का निर्माण
नहीं हो तो वह
सारा का सारा
व्यय व्यर्थ
चला जाता है
उसका कोई
हिसाब-किताब
नहीं रहता है
और उसके
द्वारा
प्रदेश को कोई
फायदा नहीं
होता है।
लेकिन इस
संबंध में मैं
राजस्थान की
मौजूदा सरकार
को धन्यवाद
दूंगा, राजस्थान
की मुख्यमंत्री
वसुंधरा राजे
जी को दूंगा
जो फाइनेंसियल
मैनेजमेंट का
जिम्मा लिये
हुए भी साथ ही
साथ हैं।
वर्तमान
सरकार ने इन
परिसंपत्तियों
के निर्माण के
लिए जो
परिवर्तन
किया, जो
एचिवमेंट
प्राप्त
किया, उसकी एक
झलक के रूप
में मैं
रखूंगा।
पिछली सरकार
ने 2001-02 में 29.82
प्रतिशत, 2002-03 में 34.36
प्रतिशत राशि
का पूंजीगत
परिव्यय
किया जबकि
मौजूदा सरकार
ने 2003 के बाद में
जब मौजूदा
सरकार आयी तो
आप इनकी
स्थिति देखें
2003-04 में 42.47 करीब 43
प्रतिशत, 2004-05
में 51.50 प्रतिशत
यानि करीब 52
प्रतिशत, 2005-06
में 83 प्रतिशत
शुद्व ऋणों की
राशि को
पूंजीगत
परिव्यय में
खर्च किया।
महोदय, एक
पूर्ववर्ती
सरकार है और
उसने 2002-03 में
खाली 34 प्रतिशत
खर्च किया है
पूंजीगत
परिसंपत्तियों
के निर्माण
में जबकि जो
मौजूदा सरकार
है वह 83 प्रतिशत,
जो ऋण लिया जा
रहा है उसका
जो व्यय हो
रहा है वह
करीब 83
प्रतिशत
परिसंपत्तियों
के निर्माण पर
खर्च हो रहा
है, इसलिए ऐसा
नहीं कहा जा
सकता है कि जो
मौजूदा सरकार
है वह खर्च
सही नहीं कर
रही है। इतना
ही नहीं इस
मौजूदा वित्तीय
वर्ष में करीब
97 प्रतिशत, 96.98
प्रतिशत पूंजीगत
परिव्यय
हेतु
प्रावधान
किया है, यह जो
है वह इस मौजूदा
सरकार का
तीसरा कुशल
वित्तीय
प्रबंधन का
अनूठा नमूना
है।
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
इसके अलावा यह
भी आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहूंगा
कि मैं तो एक
सबसे जूनियर
एम.एल.ए. के रूप
में इस विधान
सभा में हूं
लेकिन आप जैसे
कई वरिष्ठ
माननीय विधान
सभा सदस्य
यहां
विराजमान
हैं। उनके
अनुभव भी बहुत
पुराने रहे
हुए हैं।
लेकिन
फाइनेंसियल
मैनेजमेंट के
बारे में भी
ऐसा उदाहरण
पेश किया
जायेगा राजस्थान
के इस पवित्र
सदन में कि
आपसे भी
बढि़या वित्तीय
प्रबंधन
फलां-फलां सरकार
का फलां-फलां
साल में था या
फलां-फलां व्यय
में किया गया
है,
परिसंपत्तियों
के पुर्ननिर्माण
में किया गया।
वह आपसे भी ज्यादा
था या
फलां-फलां जो
फाइनेंसियल
डेफेसिट था वह
इससे कम था,
अधिक था।
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
दूसरे वित्तीय
सुधारों के
संबंध में
आपसे निवेदन
करना
चाहूंगा।
राज्य सरकार
के इस कुशल
वित्तीय
प्रबंधन के
परिणाम स्वरूप
ही राजस्व
घांटे में
सुधार हुआ है,
उसके जो
आंकड़े हैं वह
दो लाइनों में
आपके सामने
प्रस्तुत
करना
चाहूंगा।
इसको जानकार
आपको आश्चर्य
होगा कि राजस्थान
सरकार ने
फाइनेंसियल
मैनेजमेंट
में कितना
अचिवमेंट
किया है, 2001-02 में
जो राजस्व
प्राप्तियों
का राजस्व
घाटा था 2001-02 में
31.23, 2002-03 में 30.07
प्रतिशत था जो
कि 2004-05 में घटकर 12.6
प्रतिशत हो
गया। 2005-06 में जो
संशोधित अनुमान
था उसके
अनुसार सिर्फ
चार प्रतिशत
राजस्व
प्राप्तियों
का घाटा घटकर
रहेगा और यह
आप अनुमान लगायें
कहां 2002-03 में 30
प्रतिशत था वह
घटकर के सिर्फ
चार प्रतिशत
रह गया है। यह
शो करता है कि
राजस्थान की
जो मौजूदा
सरकार है वह
वित्तीय
प्रबंधन कुशल
तरीके से कर
रही है। इतना
ही नहीं अभी
जो
फाइनेंसियल
ईयर 2007-08 का है
उसमें यह
अनुमान लगाया
गया है कि
इसको 0.18 प्रतिशत
लाकर के
छोड़ेंगे तो
एक दिन आयेगा
जिस दिन यह
समाप्त भी हो
जायेगा।
उपाध्यक्ष
महोदय, मेरा
आपसे निवेदन
है कि इस
पवित्र सदन में
कि यह सारे
आंकडे यह शो
करते हैं कि
राजस्थान
सरकार का जो
फाइनेंसियल
मैनेजमेंट है वह
भारत की अन्य
सरकारों की
अपेक्षा सबसे
अधिक है और इस
बिन्दु पर
जैसा कि अभी
एक्ट के बारे
में बताया
गया, एफ.आर.बी.
एक्ट के बारे
में बताया गया
लेकिन
वर्तमान
सरकार को
राजस्व घाटे
में जो
अपेक्षित
सुधार करना था
और जो सुधार
किया गया उसके
आंकड़ों की और
आप देखें, 2003-04, 2004-05
में जो राशि
है, जो केन्द्र
सरकार प्रोत्साहन
के रूप में
देती है वह 59.77
करोड़ थी, गत
वित्तीय
वर्ष में 60.61
करोड़ हो गयी
और
पूर्ववर्ती
सरकार में जो
थी 146.27 करोड़ और
जो यह केन्द्र
सरकार से
प्राप्त
नहीं कर सके
और मौजूदा सरकार
ने अपनी कुशल
वित्तीय
प्रबंधन से वह
राशि भी
प्राप्त की
और यह सारे के
सारे आंकड़े
यह शो करते
हैं कि मौजूदा
सरकार ने
कितना कुशल
वित्तीय
प्रबंधन किया
है कि भारत
सरकार ने वह
पुरानी जो
राशि थी वह भी
पूरी की पूरी
रिलीज कर दी।
उपाध्यक्ष
महोदय, इस
संबंध में
पिछले काफी
समय से सुनते
थे वैट और
आखिरकार वैट
आया, राजस्थान
में भी लागू
हुआ और राजस्थान
में लागू होने
के बाद कई
शंकाएं थी, कई
दूसरे
प्रदेशों में
कई तरह के हेजिटेशन
भी हुए। लेकिन
राजस्थान
में इस तरह का
कोई छोटा-मोटा
उदाहरणों के अलावा
किसी तरह का
नहीं हुआ।
आराम से सभी
व्यापारियों
को कांफिडेंस
में लेकर,
उनको वास्तविक
स्थिति का
ज्ञान कराकर
कि वैट उनके
लिए कितना
उपयोगी है,
सरकार के लिए
कितना उपयोगी
है और मौजूदा
परिप्रेक्ष
में यह किस
तरह लागू करना
जरूरी है को
आधार बनाकर
वैट प्रणाली
में सुविधा
हेतु हैल्प लाइन
शुरु की गयी।
किसी भी व्यापारी
को, किसी भी व्यक्ति
को किसी भी
तरह की अगर
कोई परेशानी
है तो वह
तुरंत ही हैल्प
लाइन से मदद
प्राप्त कर
सकता है। उससे
असिस्टेंस
प्राप्त कर
सकता है,
शंका-समाधान
कर सकता है।
उपाध्यक्ष
महोदय, व्यापारी
दूरभाष पर
शंका-समाधान
कर सकते हैं
उस हैल्प
लाइन के माध्यम
से, तीसरा
इसकी वैबसाइट
पर, राजस्थान
सरकार ने इसकी
वैबसाइट
बनायी और इस
पर पूरा का
पूरा परिदृश्य
है। वह फीड
करके सबको
दिया। कोई भी
व्यापारी,
कहीं पर भी
बैठा हो,
वैबसाइट आराम
से देख सकता
है कि उसे
कितना वेट
देना है,
कितना बाकी
है, कितना दे
दिया है वह
सारा का सारा
यह साइट मेरे
ज्ञान के
अनुसार मैं
अपने आपको सब्जेक्ट
टू करेक्शन
यह शायद भारत
में पहला
प्रदेश है
जिसने वैबसाइट
जारी करके सभी
व्यापारियों
को सुविधा के
लिए दे दिया
है। इतना ही
नहीं वैट लागू
करने के लिए
प्रत्येक
संभाग में व्यापारियों
तथा
सलाहकारों की
बैठक बुलायी
गयी, बैठक में
उनको बताया
गया, समझाया
गया कि किस तरह
से यह उपयोगी
है। इसके बाद
आज की तारीख
में वैट का जो
कार्य चल रहा
है वह आराम से
चल रहा है।
राजस्थान
सरकार को भी
इससे फायदा है
और व्यापारियों
को भी फायदा
है।
उपाध्यक्ष
महोदय, अंत
में जो आंकड़े
आपके सामने दे
रहा हूं,
प्रेषित कर
रहा है, आपको
दिखाना
चाहूंगा ताकि
आपको पता लगे
कि राजस्थान
सरकार का जो
फाइनेंसियल
मैनेजमेंट ही
नहीं उनका जो
लक्ष्य है,
हर गरीब का
विकास करना,
हर क्षेत्र का
विकास करना,
कोई जाति
नहीं, कोई
धर्म नहीं, सब
धर्म और
जातियां एक ही
हैं और राजस्थान
प्रदेश का
विकास करना और
इस संबंध में
मैं आपको इस
वर्ष में जो
योजना बनायी
गयी है, जो पंचवर्षीय
योजना बनायी
गयी है, उसमें
जो सबसे अधिक
धन रखा है वह
सामाजिक,
सामुदायिक
सेवाओं पर और
इसमें करीब 28
प्रतिशत धन
रखा है।
जयगोविन्द/यूएस/3a-16.20-5.3.7
दूसरा है ऊर्जा। किसी भी देश में, किसी भी प्रदेश में, किसी भी घर में, अगर ऊर्जा नहीं है तो वह प्रदेश विकास नहीं कर सकता। राजस्थान में अभी जैसा मैं ऊर्जा के क्षेत्र में आपसे निवेदन करूंगा, सबसे अधिक जो धन रखा गया है दूसरे नम्बर पर वह 36 प्रतिशत रखा गया है। तीसरा रखा गया है सिंचाई और बाढ पर नियंत्रण, 10 प्रतिशत, ग्रामीण विकास, 6 प्रतिशत, सामान्य सेवाएं, 6 प्रतिशत, तो इन सबसे सरकार की मंशा इस पर झलकती है कि मौजूदा सरकार हर उपेक्षित पर जिसको जरूरत है, जिसको सबसे अधिक जरूरत है उस पर अधिक से अधिक धन खर्च कर उसका उद्धार कर रही है।
मैं आपके माध्यम से यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि राजस्व घाटे में जो कमी की गई है उससे यह नहीं कि विकास की दर में कोई कमी कर दी गई है और विकास पर राजस्व व्यय में कोई कमी कर दी गई है, राजस्व व्यय में 4.17 की वृद्धि की गई है, इधर कमी की गई है और उधर वृद्धि की गई है और राजस्व व्यय में 4.77 की वृद्धि करने के बावजूद भी राजस्व घाटे को ठेठ 0.18 पर ले आए, इसमें मैं सभी को इस मौजूदा सरकार की आदरणीय मुख्य मंत्रीजी को, राजस्थान सरकार के सभी सम्बन्धित अधिकारियों को, मंत्रियों को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन सब के संयुक्त प्रयास से आज यह सम्भव हो पाया है। इतना ही नहीं मान्यवर, वर्ष 2003-2004 में 1544.41 करोड़, 2003-2004 में 32.60 करोड़, 2004-2005 में 542 करोड़ यह जो राजस्व घाटा था 15 हजार करोड़ रुपए, 32 हजार करोड़ रुपए उसको 2004-2005 में जो मौजूदा सरकार आई तो शुद्ध उसको 542 करोड़ पर ले आए। 2005-06 में 337 करोड़ पर ले आए और निरन्तर इसमें भी घटी की गई, राजस्व घाटे में कमी की गई, यह सारे के सारे आंकड़े यह शो करते हैं कि मौजूदा सरकार के कुशल वित्तीय प्रबन्धन के कारण यह सब सम्भव हो पाया है। लब्बोलुवाव में राजस्व व्यय में निरन्तर जो खर्च करना चाहिए, वह खर्च भी किया जा रहा है और जो फालतू का घाटा हो रहा है उसमें कमी की जा रही है और हर व्यक्ति को हर शोषित को, हर सेक्टर के ज्यादा से ज्यादा विकास पर खर्च किया जा रहा है।
मान्यवर, राजस्थान के परिप्रेक्ष्य में एक बहुत बड़ी बात कही जा रही है, इस प्रदेश में जैसा मैंने अभी आपके सामने कहा,
‘भांत-भांत
री वनस्पति,
जीव जन्तु सौ
फेर,
पानी रे
परताप सूं
दिखे सांझ
सवेर।’
अगर पानी नहीं हो तो वह सब दिखना भी बंद हो जाए, दूसरे प्रदेशों का रुख कर जावे। इसलिए सबसे अधिक इस प्रदेश में कोई जरूरी है तो वह है पानी और इस सम्बन्ध में कहा गया है,
‘आब
रही तो आबरू,
रहसी आपो आप,
आब गई तो
सब गया आब
मिनख रो माप’
आब रही तो आबरू, ‘आब’ पानी को कहा गया है, जिसको कहा गया है मैं आपसे निवेदन भी करना चाहूंगा कि राजस्थान के हर निवासी को, राजस्थान के हर निवासी का, राजस्थान में जन्म लेने वाले या रहने वाले, राजस्थान में नहीं भी रहने वाले, उन सबका परम कर्तव्य हो जाता है कि पानी का सदुपयोग हो, नहीं तो वह दिन दूर नहीं जैसा मेरे पूर्व वक्ताओं ने बताया और पिछली विधान सभा में भी बताया गया था कि पानी के लिए संघर्ष होगा, पिछली बार यह भी बताया गया कि अगर कोई तीसरा या चौथा, कौनसा भी विश्व युद्ध कहा जाएगा, अगर वह विश्व युद्ध होगा तो पानी के लिए होगा,। इस सारे परिप्रेक्ष्य में इसको समझने की जरूरत है, इसके महत्व को सबसे अधिक समझने की जरूरत है।
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, राजस्थान सरकार ने इसको समझा और खाली समझा ही नहीं इसका किस तरह से स्थायी निराकरण किया जा सकता है, फ्यूचर में इसको किस तरह से कण्ट्रोल किया जा सकता है और आने वाले भविष्य चाहे वह मनुष्य हो, चाहे जीव जन्तु हो, पानी के मुत्तलिक किस तरह से सुरक्षित हुआ जा सकता है, इसके लिए भी बहुत गहनता से काम किया है और उस गहनता से काम करने के कुछ उदाहरण मैं आपके सामने रखना चाहता हूं। पहला, अपने तीन साल के कार्यकाल के दौरान राजस्थान की मौजूदा सरकार ने 1158 पेयजल योजनाएं स्वीकृत की, यह 1158 पेयजल योजनाएं वे हैं जो लार्ज स्केल वाली बड़ी योजनाओं से अलग हैं और इन योजनाओं पर 3972 करोड़ रुपए खर्च किए गए। मान्यवर, इसके अलावा 26 ऐसी बड़ी लार्ज स्केल परियोजनाएं हैं जिन पर 5336 करोड़ रुपए खर्च किए गए। अगर इन दोनों को मिलाया जाए तो 1184 ऐसी पेयजल योजनाएं हैं जिन पर 9308 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। राजस्थान के आज तक के इतिहास में किसी भी सरकार ने, किसी भी पूर्ववर्ती सरकार ने खर्च नहीं किया, वह इसलिए खर्च किया कि आने वाला भविष्य राजस्थान का अगर सुरक्षित रखना है तो चाहे जीव जन्तु के लिए हो चाहे वह मनुष्य के लिए हो, चाहे वह पशु के लिए हो, वह तभी सम्भव हो सकता है जब इसकी ऐसी परियोजना बनाई जाए जो पीने के पानी की, इर्रिगेशन के पानी की समस्या निश्चित रूप से स्थायी समाधान हो सके। दूसरा, आठ बड़े-बड़े कस्बों, 3225 ग्राम और ढाणियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने हेतु योजनाएं बनाई गई है चाहे जवाई-पाली योजना हो, चाहे जयपुर वाली परियोजना हो। इन दोनों परियोजनाओं पर करीब 760 करोड़ रुपए खर्च किए गए। मान्यवर, शेष स्वीकृत परियोजनाएं जो 47 कस्बों के लिए है, इनसे 12860 गांव और ढाणियां भी लाभांवित होगी। इसके अलावा सारी योजनाएं बनाकर स्वीकृत की गई है। जोधपुर लिफ्ट परियोजना जो बहुत लम्बे समय से, जब से हम बच्चे थे सुन रहे थे कि बन रही है, वह द्वितीय चरण अब जाकर के पूरा हुआ है। कितने वर्षों बाद वह उन पेयजल परियोजनाएं अब जाकर स्वीकृत हुई है और जिससे 12.50 एमसीएफटी पानी रिजर्व किया गया है। उदयपुर शहर के लिए स्वीकृत मानसी वाकल परियोजना जिस पर 60 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, उदयपुर शहर हेतु देवास सैकण्ड परियोजना पर139.40 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। बाहरी नाका परियोजना जिस पर 128 करोड़ रुपए की लागत है, इसमें 206 गांव लाभांवित होंगे। इतना ही नहीं नागौर जिले के लिए 502 गांव व 5 शहरों हेतु 761 करोड़ की योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। रायपुर से आने वाले माननीय सदस्य हैं उनको बखूबी जानकारी है कि पाली जिले के लिए 531 गांव और 10 शहरों हेतु जवाई पाली परियोजना पश्चिमी राजस्थान की सबसे बड़ी परियोजना है उस पर भी 396 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। पहली बार बीससलपुर जयपुर परियोजना 11 सौ करोड़ रुपए की, बीसलपुर दूदू फुलेरा योजना इस पर करीब 243 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, चम्बल परियोजना है इस पर करीब 480 करोड़ रुपए। अगर मैं यह लिस्ट गिनाऊं तो बहुत लम्बी लिस्ट है।
राजस्थान की सरकार ने हर गांव, हर ढाणी, हर शहर, हर कस्बे लिए योजना बनाई है और उस पर कार्यवाही भी प्रारम्भ की है। (व्यवधान)
राजस्थान में अगर सबसे अधिक पानी से पीडि़त क्षेत्र है तो वह लूणी है उसके बाद आपका सिवाना, उसके बाद पचपदरा, उससे लगता हुआ शेरगढ़ का कुछ भाग, कुछ सिवाना का इधर का भाग, कुछ ओसियां का इधर का भाग, यह बेल्ट है जो डार्क जोन में है और माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं यह मानता हूं कि आपका फलौदी क्षेत्र भी उसी के साथ है, आपके बाड़मेर का क्षेत्र भी है।
श्री उपाध्यक्ष: लूणी कायलाना भी।
श्री जोगाराम पटेल: सभी हैं करीब-करीब लेकिन मेरे लूणी विधान सभा क्षेत्र का उदाहरण के रूप में बताऊं आपको, मेरे साक्षी हैं सिवाना से पधारने वाले मेरे वरिष्ठ साथी, करीब 4 अरब रुपए की योजना मंजूर कर कार्य प्रारम्भ किए और दूसरी योजना है जो करीब-करीब कार्य समाप्ति पर आ गई है और ये दो-तीन सालों के अंदर 4 अरब की पानी की योजनाएं बनाई, स्वीकृत की गई, काम शुरू करवाए गए और उनको निश्चित रूप से टारगेट दिए गए कि आपको 2007 में आकर उसको पूरा करना है और समझ लीजिए कि लूणी की अगर ये दो योजनाएं पूरी हो जाएगी तो लूणी का 75 प्रतिशत कार्य, वहां के पूरे गांव कवर हो जाएंगे। 308 करोड़ रुपए की दांतीवाड़ा की जो योजना है, बिलाड़ा से आने वाले माननीय सदस्य, माननीय मंत्रीजी यहां नहीं हैं, उनका क्षेत्र प्लस मेरे लूणी का क्षेत्र वह पूरा होते ही लूणी का हर गांव, कस्बा, इसी तरह से इन योजना का दूसरा भाग है जो सिवाना तहसील के 160 गांव, समदड़ी कस्बा, उसके आसपास पचपदरा के कुछ गांव हैं 59-60, यह सारे कवर हो जाएंगे। इतना बड़ा काम हुआ है। सूरसागर से आने वाले माननीय सदस्य उनके क्षेत्र की भी बहुत बड़ी-बड़ी 4 योजनाएं स्वीकृत हुई हैं।
Gpc/usc/05032007/1630/3b
और अगर
जोधपुर संभाग
को ले लिया
जाए तो मैं
आंकड़ों में
नहीं बता सकता
खरबों रुपयों
की योजनाएं इस
मौजूदा सरकार
ने स्वीकृत
की है। इसलिए
जोधपुर संभाग
के सभी माननीय
सदस्य चाहे
वे पक्ष के
हों या
प्रतिपक्ष के
हों सभी एकमत
से धन्यवाद
देते हैं
मौजूदा सरकार
को कि इन्होंने
पानी के लिए
इतना बड़ा
विकास हुआ।
श्री
बाबूसिंह
राठौड़
(शेरगढ़): आजादी
के 60 साल बाद
लूणी मीठी हुई
है इसके लिए
धन्यवाद दो।
श्री जोगाराम
पटेल (लूणी):
इसके लिए मैं
धन्यवाद
दूंगा कि
आजादी के 60 साल
बाद ..(व्यवधान)..
मैं इतना जरूर
निवेदन
करूंगा कि
पूर्ववर्ती
सरकार के इस
विभाग के
माननीय
मंत्री थे वे
चाहते तो कर
सकते थे, उनको
पावर भी था,
समर्थन भी था
..(व्यवधान)..
यों मान लो कि
मेरे लिए
छोड़ा या मेरी
जनता को
परेशान करने
के लिए छोड़ा,
वह एक अलग बात
हो सकती है,
लेकिन उन्होंने
एक भी नहीं
किया। आने
वाली सरकार के
बाद अभी 2003 में
जो इलेक्शन
हुए उस वक्त
तक एक भी
परियोजना
नहीं थी इस
मौजूदा सरकार ने
सारी योजनाएं
बनायीं, स्वीकृत
कीं और लागू
की। इसलिए
आपने जो बात
कही, कर सकते
थे यह आदमी की
नीति पर फर्क
पड़ता है,
आदमी किस
भावना से, किस
नीति से वर्क
करता है उससे
फर्क पड़ता
है। अगर ऐसे
ही वोट मिल
जाए, गए दो-चार
इधर लगाये, दो-चार
इधर लगाये,
वोट मिल जाए
तो ही पार पड़
जाए और कोई
आदमी वर्क
करके वोट मांग
रहा है वह भी
फर्क पड़ता
है। यह तो
अपनी-अपनी
नीति,
अपनी-अपनी
थिंकिंग है उस
पर फर्क पड़ता
है। माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
सामने निवेदन
करना
चाहूंगा..
श्री
उपाध्यक्ष: अब लूणी
के बाद क्या
रह गया? सारी
लूणी आ गयी।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): लूणी के
बाद राजस्थान
रह गया। अभी
तो शुरू हुआ
है। माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, अभी
शेरगढ़ से आने
वाले माननीय
सदस्य ने
विषय छेड़
दिया, मैं
आपके सामने
तुलनात्मक
आंकड़े पेश
करूंगा और मैं
निवेदन
करूंगा इस
पवित्र सदन
में कि अगर
मेरे आंकड़े
गलत हो, क्योंकि
यहां पूर्ववर्ती
सरकार के इसी
विभाग के
माननीय
मंत्री भी विराजमान
हैं और इस
मौजूदा सरकार
के तीन साल और
उनके पाँच
साल। हमारे
तीन साल का
कार्यकाल है
उसमें कई गुना
अधिक वर्क हुआ
है उनके पाँच
साल की तुलना
में। मेरे
लूणी विधान
सभा क्षेत्र
में तो 57 साल के
आंकड़ों से
अधिक दो साल
के आंकड़े
हैं। इन्होंने
जो 57 साल में
नहीं किया वह
दो साल में
किया। किया ही
नहीं, खर्च
करके बताया,
पानी पहुंचाकर
बताया। आप
देखें,
पूर्ववर्ती
सरकार ने पाँच
वर्ष के
कार्यकाल में
जो शहरी
क्षेत्र की पेयजल
योजनाओं पर
आपने 1343 करोड़
रुपये खर्च
किये, मौजूदा
सरकार ने तीन
वर्ष में, तीन
वर्ष अभी पूरे
नहीं हुए, 11097
करोड़ रुपये
खर्च किये।
इसी का
दूसरा भाग है
ग्रामीण
क्षेत्र।
ग्रामीण क्षेत्र
में
पूर्ववर्ती
सरकार ने 126
करोड़ रुपये
खर्च किये,
मौजूदा सरकार
ने तीन साल के
कार्यकाल में
169 करोड़ रुपये
खर्च किये। यह
तो
कंसोलिडेटेड
आंकड़े थे,
प्रतिवर्ष
कितना खर्च
होता है,
पूर्ववर्ती
सरकार के
कार्यकाल के
दौरान 142 करोड़
रुपये
प्रतिवर्ष
खर्च होते थे,
मौजूदा सरकार
में 230 करोड़
रुपये
प्रतिवर्ष
पेयजल व्यवस्था
पर खर्च हो
रहे हैं। आप
अनुमान लगा
लें। एक तरफ 142
करोड़ रुपये प्रतिवर्ष
और दूसरी तरफ 230
करोड़ रुपये
प्रतिवर्ष और
वह भी
कार्यान्विती
निश्चित
योजना के साथ,
प्रोग्रेस
रिपोर्ट के
साथ।
तीसरा
पेयजल संबद्ध
मद है ग्रामीण
और शहरी
क्षेत्रों
में जो
छोटी-छोटी
योजनाएं होती
हैं आपके कार्यकाल
के दौरान 2497
करोड़ रुपये
मौजूदा सरकार
के तीन वर्ष
के कार्यकाल
के दौरान 2311.81 यानी
2312 करोड़। यह
पेयजल पर औसतन
प्रतिवर्ष
मैंने बताया
है 499 करोड़।
पूर्ववर्ती
सरकार के पाँच
साल में औसतन
आया 499 करोड़ और
मौजूदा सरकार
के तीन साल के
कार्यकाल के
दौरान 761 करोड़
प्रतिवर्ष
औसतन। आप
अनुमान लगाएं
कितना
डिफरेंस है,
एक अनुमान
लगाने से पता
लग जाएगा कि
राजस्थान
सरकार पानी के
प्रबंधन के
लिए कितना
कार्य कर रही
है। इतना ही
नहीं ग्रामीण
पेयजल योजनाओं
पर जो खर्च
किया गया है
पूर्ववर्ती
सरकार के
कार्यकाल के
दौरान 1849 करोड़
और मौजूदा
सरकार के
कार्यकाल में
1777 करोड़।
पूर्व में
पाँच साल में
लाभान्वित गांव
व ढाणियां 6223,
मौजूदा सरकार
में 3650, आंशिक
लाभान्वित 41
हजार, यहां 30
हजार।
फ्लोराइड
वाटर है जिससे
कूबड़े हो
जाते हैं,
दाँत पीले हो
जाते हैं और
शरीर पर जो
विकास पैदा हो
जाते हैं उसके
लिए
पूर्ववर्ती
सरकार ने कोई
काम नहीं
किया, निल
रिपोर्ट। कोई
वर्क नहीं
किया। मौजूदा
सरकार ने 2443
करोड़ रुपये
खर्च किये। स्वजलधारा
योजना में स्वीकृत
योजनाएं वहां
35 थीं और यहां 2343
करोड़। वृहद
परियोजनाएं 1528
करोड़, मौजूदा
सरकार ने 1184
करोड़ की।
वृहद
परियोजनाओं
की कुल लागत
थी आपके
कार्यकाल के
दौरान 3023 करोड़
की और यहां 9
हजार करोड़
की। आप अनुमान
ही नहीं लगा
पाएंगे कि कुल
कितना पेयजल
व्यवस्था
पर किया जा
रहा है। यह
इसका एक भाग
है। इसका जो
दूसरा भाग है
..(व्यवधान)..
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
मैटेरियल
कंपोनेंट कितना
है?
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): वह भी
मिलेगा। वह भी
आपको लाकर बता
दूंगा कि
मैटेरियल
कंपोनेंट
कितना है, वे
सारे आंकड़े
मेरे पास हैं।
मैटेरियल कंपोनेंट
की बात चली थी,
मैं एक उदाहरण
बताता हूं, एक
विधान सभा
क्षेत्र का,
जैसा मैंने
अभी आपके
सामने लूणी का
कहा था,
शेरगढ़ से आने
वाले माननीय
सदस्य ने कह
दिया, उम्मेदसागर
परियोजना
जिसका सेकण्ड
पार्ट सिवाना
और पचपदरा
कांस्टीट्युएंसी
के लिए है 65
करोड़ रुपये
और उसके बाद
में 9 करोड़
रुपये स्वीकृत
हुए। 65 प्लस प्लस
9 करोड़ रुपये
की लागत की
योजना में 75
परसेंट काम हो
गया है तीन
साल के अंदर।
कूड़ी-लूणी-सालावास
परियोजना 31
करोड़। करीब 60
परसेंट से ऊपर
काम हो गया
है। इन्दोका-माणकलाल-धातीवाल
परियोजना 308
करोड़, टी.एस.
की कार्यवाही
चल रही है।
मोगड़ा
परियोजना 18 करोड़,
टी.एस. हो गया
है। ये सारे
काम हो गये
हैं, इनका काम
टी.एस. लेवल पर
आ गया है।
हैण्ड पम्प
आदि पर 29.28 लाख।
अन्य पेयजल
योजनाओं पर 61.2
लाख। एमएलए
लेड के पाइप पर
10 लाख।
एमएलए,एमपी
लेड पर 56 लाख।
इस तरह से कुल मिलाकर
5 करोड़ 76 लाख के
कार्य लूणी
में स्वीकृत
हुए हैं। ..(व्यवधान)..
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, जोशी जी
इस विभाग के
मंत्री रहे
हैं उनको यह
पता था कि इतना
काम हम नहीं
कर पाये, इन्होंने
कर दिया, इतना
तो स्वीकार
करते हैं, मैं
मानता हूं वे
जेंटलमेन हैं
उनको स्वीकार
है, कानों से
सुन नहीं सके
इसलिए सोचा कि
यहां से चलो
और वे निकल
गये।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, एक बजट
अनुमान आप
देखेंगे इस
विभाग के
संबंध में और
उससे भी पता
लगेगा सरकार
की मंशा क्या
है, कैसे काम
करती है,
कितना बजट
अलॉट करती है
और खाली बजट
अलॉट ही नहीं
करती है उस पर
कार्य का
नियंत्रण भी
रखती है।
योजनाओं के
संवर्द्धन
कार्य, जल
परिवहन पर 7726
करोड़। जल परिवहन
पर 1500 करोड़,
हैण्ड पम्प
पर एक हजार
करोड़ और
इसमें सबसे
अधिक राशि ले
जाने वाले
शायद शेरगढ़
के माननीय
विधायक
होंगे। पम्प
एवं मोटर
रिपेयर पर 700,
किराए पर कुएं
लेना 50 और जल
संसाधन 300 । यह
गत वित्तीय
वर्ष में अकाल
की स्थिति थी,
उसके लिए इतना
खर्चा किया
गया। इतना ही
नहीं सबसे
अधिक महत्वपूर्ण
कार्य हुआ वह
जो विकास
यात्राएं
निकाली गईं,
बहुत लम्बे
समय तक पब्लिक
को समझाया गया
कि जल का कितना
महत्व है। हर
गांव-गांव,
ढाणी-ढाणी
जन-प्रतिनिधियों
को,
अधिकारियों
को, आम जनता को
जल के महत्व
से जोड़ा गया,
यह पहली बार
हुआ। करीब दो
महीने का
अभियान चला, उस
अभियान के
दौरान हर व्यक्ति
को आज गांव
में यह पता
लगा है कि
पानी का महत्व
है, पानी को
फिजूलखर्च
नहीं करना है।
इससे पहले
किसी ने ध्यान
नहीं दिया,
इससे पहले
किसी ने इस ओर
काम नहीं किया
कि पानी के
महत्व को
देखते हुए आम
जनता से जोड़ा
जाए और पहली
बार मौजूदा
सरकार ने,
आदरणीय
वसुंधरा जी
राजे ने आम
आदमी को पानी
के महत्व के
साथ जोड़ा है,
उसके महत्व
को समझाया है
और कई
प्रतिपक्ष के
नेताओं व माननीय
सदस्यों ने
हमें बताया
है।
मोहन/चौहान/अशोधित
प्रति
प्रकाशनार्थ
नहीं/05032007/3c/1640
नहीं, यह तो
सबसे जरूरी
कार्यक्रम था
जो इस सरकार ने
किया। उसके
लिए उन्होंने
धन्यवाद
भी दिया है।
मान्यवर,
इतना ही नहीं,
राजस्थान के
237 जो ब्लाक्स
हैं उनमें से 41
ब्लाक अत्यन्त
विषम
परिस्थितियों
के हैं, 140 विषम
परिस्थितियों
के हैं। उन से
में मैं अब
नहीं जाकर के
जो एक अहम
बिन्दू है,
उस विषय को
फ्लोराइड को
कम करने का
सबसे अहम बिन्दू
है और अगर वह
कम नहीं किया
जाता, पानी
सप्लाई भी कर
दिया जाता है
तो उससे जनता
को फायदा नहीं
होता, पशुओं
को फायदा नहीं
होता है और वह कम
करने के लिए
पूर्ववर्ती
सरकारों ने
कुछ नहीं किया
था, सिर्फ मौजूदा
सरकार ने ही
कार्य किया है
कि फ्लोराइड
जो वाटर में
है वह किस तरह
कम किया जावे
और इसको कम
करने के संबंध
में अधिक
फ्लोराइड
वाले जो क्षेत्र
हैं उनको अलग
किया, कम
फ्लोराइड
वाले क्षेत्र
हैं उनको अलग
किया और उन सब
के संबंध में
कार्य किया और
2643 ग्रामों को
लाभान्वित
करने हेतु
फर्स्ट फेज
में 36.48 करोड़
रुपये और
सैकण्ड फेज
में 74 करोड़
जिसमें से कुल
556 ग्राम
लाभान्वित
होंगे और उसके
बाद फ्लोराइड
की जो समस्या
है वह धीरे
धीरे करके
राजस्थान
में समाप्त
हो जाएगी, इस ओर
कार्य किया
गया है।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय
जोगाराम जी,
बाबूसिंह जी
और बन्नेसिंह
के लिए भी कुछ
छोड़ो भाई।
कन्क्लूड
कीजिए आप।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय,
राजस्थान की
मौजूदा सरकार
ने इतने विकास
के कार्य किये
हैं कि 365 दिन
में सभी सदस्यों
को बोलने का
मौका दिया
जावे तो
लगातार धाराप्रवाह
से गिनाएंगे
फिर भी वह
कार्य पूरे नहीं
होंगे। इसलिए
हम तो उदाहरण
के रूप में एक
टेलर के रूप
में बता रहे
हैं, इतने
विकास के काम हुए
हैं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आपको जो
गिनाना है तो
ये दो साल ही
बाकी हैं, आगे
की आप छोड़
देना बात।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): माननीय
सदस्य,
आप तो बहुत
वरिष्ठ और
ज्ञानी भी
हैं। ...(व्यवधान)...
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली):
हरिमोहन जी,
आप जो कह रहे
हैं, आप कल्पना
कर रहे हैं और
कल्पना की
उड़ान भर रहे
हैं। ऐसा कुछ
नहीं होगा।
...(व्यवधान)...
नाचे मन की
कठपुतली, मन
की कठपुतली मत
नचाओ, नाचने
वाली नहीं है
और आपका राजस्थान
आने वाला नहीं
है फिलहाल।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
बिलकुल, आप
लाइन में लगे
रहो, मुझे
उसमें आपत्ति
नहीं है लेकिन
अधिकांश
बी.जे.पी. के लीडर्स
इस बात को मान
चुके हैं,
दिल्ली से
लेकर राजस्थान
तक कि आगे
हमारे सरकार
इस नेतृत्व
में नहीं
आएगी। ...(व्यवधान)...
श्री
जीवराम चौधरी
(सांचौर):
इस बात पर
आदरणीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
माननीय सदस्य
को इस बात पर
एक दोहर कहना
चाहूंगा कि
'
टूट गई तलवार
मगर धार वही
है, निपट
गये दो राज्यों
में मगर वार
वही है।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): जैसे
आप वहां निपट
वैसे ही आप
यहां निपटोगे,
उसी का अनुसरण
होगा यहां भी।
...(व्यवधान)...
श्री नन्दलाल
बंशीवाल
(दौसा): क्या
नतीजे रहे उत्तराखण्ड
और पंजाब में।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): उत्तरखण्ड
और पंजाब के
आधार पर ही
चलना चाह रहे
हो न ?
श्री नन्दलाल
बंशीवाल
(दौसा): हम तो
बहुत बढि़या
चल रहे हैं और
आगे भी सत्ता
में आएंगे।
...(व्यवधान)... आप
आ जाओ, आपका स्वागत
है।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
जो निवेदन
आपसे कर रहा
था कि एक बात
माननीय मेरे
बहुत वरिष्ठ
और ज्ञानी हैं
उनको कहना यह
चाहूंगा कि
पहलवान .....
श्री
उपाध्यक्ष:
आप उसमें मत
उलझो।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): मैं
मेरी बात ही
कहूंगा, मैं
मेरी बात
कंटीन्यु कर
रहा हूं, मैं
इनको सम्बोधित
नहीं करूंगा।
मेरे बहुत
वरिष्ठ हैं,
बहुत ज्ञानी
हैं, मैं इनको
कुछ कहने की स्थिति
में नहीं हूं,
मैं इतना कहता
हूं कि पहलवान
मैदान में
लड़ते हैं,
बाहर आकर
बांहें नहीं
चढ़ाते हैं,
मैदान खुला
है, आ जाना, पता
लग जाएगा।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय,
प्रोफेसर ब्यास
की अध्यक्षता
में एक कमेटी
बनाई गई जल
नीति का प्रारूप
दिया गया, वह
जरूरी है और
जल नीति को
वेबसाइड पर
लेकर के सभी
राजस्थान के
वासियों के
लिए खुला रखा
गया उसमें वह अपने
सुझाव दे
सकें, अपने
कमेंट दे
सकें, वह इसलिए
कि जल प्रबंधन
नीति का जावे
और सभी के लिए
उपयोगी हो। यह
पहली बार किया
गया है।
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, कुछ
अन्तराराष्ट्रीय
मैदान थे,
पानी के विवाद
में कुछ
प्रदेशों के
आप में मुद्दे
थे, 1981 का अनुबंध
इसमें मैं विस्तृत
रूप से नहीं
जाऊंगा। इन
सारों का अगर
कोई सोल्यूशन
किया गया तो
दृढ़ता से
राजस्थान का
अगर किसी ने
पक्ष रखा गया
तो मौजूदा सरकार
में रखा गया,
पूर्ववर्ती
सरकार द्वारा
नहीं रखा गया
है, चाहे 1981 के
अनुबंध की व्याख्या
एवं पाकिस्तान
के साथ
रावी-व्यास
के बारे में
राज्यों के
हिस्से का 8.6
एम.ए.एफ. पानी
को उपलब्ध
करवाना हो
चाहे
रोपड़-हरि
परियोजना का
काम हो, चाहे
भाखड़ा ब्यास
मैनेजमेंट का
काम हो, इन
सारों पर अगर
कोई कार्य
किया गया है
तो मौजूदा
सरकार ने किया
है। मई, 94 के
समझौते में
राज्य को 0.91
एम.ए.एफ. जल
आवंटित हुआ
था, यमुना
बेसिस के ऊपरी
क्षेत्र में
जल संरक्षण की
स्कीम बनने
तक राज्य को
अंतरिम आवंटन
नहीं किया गया
था, जो अब किया
गया है। माही
जल परियोजना,
ानर्मदा जल
परियोजना,
ईसरदा जल
परियोजना, जल
चेतना यात्रा,
किसान महोत्सव,
ये सारे जो
कार्य हुए
हैं, इस
मौजूदा सरकार ने
हुए हैं।
इसलिए मैं यह
कहना चाहूंगा
और मैं फख्र
के साथ कहना
चाहूंगा, मैं
राजस्थान की
जनता के सामने
कह रहा हूं, इस
पवित्र सदन के
सामने कह सकता
हूं कि इस
क्षेत्र में
राजस्थान की
मौजूदा सरकार
ने बहुत अच्छा
कार्य किया है
और जो भावी
पीढि़यां आने
वाली कई
पीढि़यां याद
रखेंगी, ऐसा
कार्य किया
है।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय,
इसके संबंध
में दूसरा जो
महत्वपूर्ण
बिन्दु है,
वह है ऊर्जा
जिसको हम
बिजली कहते
हैं और जिसको
लेकर के मेरे
प्रतिपक्ष के
सभी वरिष्ठ
साथियों ने
ऐसा प्रयास
किया, ऐसा
जताने का प्रयास
किया और कुछ
गिने-चुने
लोगों को
किसान का रूप
देकर कि साहब,
यह किसान
एजीटेशन कर
रहे हैं,
किसान आन्दोलन
कर रहे हैं,
ऐसा रूप देने
का प्रयास
किया परन्तु
तीन सालों के
कार्यकाल के
दौरान वास्तविक
एक भी किसान
इनके साथ खड़ा
नहीं हुआ। किसान
यह जानता है
कि राजस्थान
की सरकार
बिजली के
क्षेत्र में,
ऊर्जा के क्षेत्र
में बहुत
बढि़या काम कर
रही है। ...(व्यवधान)...
यह बारिश केवल
भगवान का खेल
है, वह आपके भाग्य
में नहीं है,
वह भी भाग्य
के साथ चलती
है और वह भाग्य
में होगा उसी
को मिलता है,
जिसके भाग्य
में नहीं है
उसको नहीं
मिलेगा, वह तो
भाग्य का खेल
है, उसमें तो
आप और हम कुछ
नहीं कर सकते,
भाग्य का खेल
भाग्य के साथ
चलता है, जो
भगवान को याद
रखता है, जो परमात्मा
को याद रखता
है, सतनाम से
कार्य करता
है, सद्भावना
से र्का करता
है, भगवान भी
उसका साथ देता
है और मन में
कुछ, मुंह में
कुछ, वह ऐसा
काम करता है
उसका भगवान भी
साथ नहीं देता
है। मेरा तो
ऐसा मानना है।
विद्युत के क्षेत्र
में गत 5
वर्षों के
दौरान और फिर 3
वर्षों के
दौरान
पूर्ववर्ती
सरकार ने और
मौजूदा सरकार
ने चाहे बिजली
का उत्पादन
हो, बिजली का
वितरण हो,
बिजली के दर
की रेट हो,
बिजली खरीद कर
किसानों को
देनी हो या
छीजत कम करनी
हो, किसानों
को कनेक्शन
देने हों,
डोमेस्टिक
कनेक्शन
देने हों, इन
सारे
क्षेत्रों
में बहुत अधिक
कार्य किया
गया है मौजूदा
सरकार के
द्वारा और
उसका रिकार्ड
है जैसा कि
हमारे
पूर्ववर्ती साथी
ने खुद केन्द्रीय
बिजली मंत्री
केन्द्र के
जो सिंडे साहब
हैं, उनके उद्धरण
आपके सामने
बताए और उनकी
खुद उन्होंने
कितनी
प्रशंसा की
है, वह आपके
सामने रखी। यह
लिग्नाइट का
125 का जो
उद्घाटन हुआ,
अभी जो दो दिन
बाद में होने
वाला है, ये
सारी जो
परियोजनाएं
हैं, इन सब के
बारे में जो
इतना कह गया
है और अभी हाल
ही में ...(व्यवधान)...
वह इनकी जानें
साहब, ऐसा क्यों
लिखा। अभी
जैसा बताया
गया है एक
उद्धरण मैं
आपके सामने
रखूंगा। अभी
इन्होंने 28
फरवरी को जब
यह गिरल लिग्नाइट
का उद्घाटन
हुआ, उस
उद्घाटन के
मौके पर केन्द्रीय
राज्य
मंत्री श्री
डा. दास हरि
नारायण राव
आये थे, वह
मुख्य अतिथि
के रूप में
मौजूद थे।
मुख्यमंत्री
वसुंधरा राजे
जी ने उसका
उद्घाटन किया
और उन्होंने
जो शब्द वहां
संबोधन के
दौरान कहे, उस
संबोधन के दौरान
जो शब्द कहे
वह सारा
परिदृष्य स्पष्ट
कर देता है कि
राजस्थान
शीघ्र ही
विद्युत के
क्षेत्र में
समृद्ध राज्य
बनने वाला है,
राज्य सरकार
राजस्थान का
विकसित
प्रदेश बनाने
में कामयाब
रही है। यह
कांग्रेस के
एक माननीय
केन्द्रीय
मंत्री
द्वारा कहे
गये उद्धरण
हैं, ये मेरे
कहे गये नहीं
हैं, यह हमारी
सरकार के किसी
प्रतिनिधि के
कहे हुए नहीं
हैं, आपकी ही
पार्टी के एक
वरिष्ठ नेता
द्वारा कहा
गया है कि
राजस्थान
शीघ्र ही
विद्युत के
क्षेत्र में
समृद्ध राज्य
बनेगा, राज्य
सरकार प्रदेश
को विकसित
बनाने में
कामयाब रही
है। इतना ही
नहीं, मुख्य
अतिथि के पद
से यह बात भी
कही लोकार्पण
के मौके पर कि
सरकार ने
कोयला आधारित
विद्यत उत्पादन
की जो योजना
बनाई है वह
इण्डिया की
सबसे बढि़या
योजना है,
सबसे कम
खर्चीली
योजना है और
कम खर्चे में
सबसे अधिक
विद्युत उत्पादन
होगा। लिग्नाइट
के क्षेत्र
में भी कहा,
कोयला के
क्षेत्र में
भी कहा।
Skp/akt/05032007/1650/3d/1
इसी तरह से
पांच वर्षों
की तुलना में
मैं आपके
सामने
तुलनात्मक
आंकड़े
रखूंगा। कहना
बहुत कुछ होता
है लेकिन वास्तविकता
को नकारा नहीं
जा सकता।
कितना भी कुछ
भी कह दें
दीवार दीवार
ही रहेगी और
जो वास्तविकता
है वह वास्तविकता
रहेगी, उसको
छिपाया नहीं
जा सकता, उसको
झुठलाया नहीं
जा सकता।
पिछले पांच
वर्षों के
दौरान 1998 से 2003 के
दौरान कुल 419
करोड़ की
अतिरिक्त
बिजली की खरीद
की जबकि
मौजूदा सरकार
जब आई तो
किसानों के
हितार्थ, आम
जनता के
हितार्थ, हर व्यक्ति
के हितार्थ 2004
में 127 करोड़, 2005
में 344 करोड़ और
2006 में 670 करोड़
की अतिरिक्त
बिजली खरीदकर
किसानों को
उपलब्ध कराई
ताकि किसान
अपनी पैदावार
से महरूम नहीं
रहे, यह संदेश
नहीं जावे कि
राजस्थान के
किसान के पास
बिजली नहीं
है, यह संदेश जाए
कि राजस्थान
के किसान के
पास बिजली है।
इतना ही नहीं,
जो छोटे घरेलू
उपभोक्ता
हैं, जैसा अभी
बताया गया कि
किसी तरह की
शुल्क में
वृद्धि नहीं
की गई। जो
फीडर सुधार
कार्यक्रम है,
जो सबसे महत्वपूर्ण
कार्यक्रम
फीडर सुधार
कार्यक्रम है उसके
पहले शहर की
कच्ची
बस्तियों में
बी. पी. एल.
परिवारों तथा
ग्रामीण
कुटीर ज्योति
जो कनेक्शन
हैं उनकी रेट 1.70
रुपये प्रति
यूनिट से
घटाकर 85 पैसे
प्रति यूनिट
की गई जबकि
पूर्ववर्ती
सरकार ने नहीं
की। वो 1.70 रुपये
प्रति यूनिट
ले रही थी और
मौजूदा सरकार
ने 85 पैसे
प्रति यूनिट
की, आपने नहीं
की। इतना ही
नहीं, इनको
लाभान्वित
करने के लिए 26.5
करोड़ की
वार्षिक
योजना का वित्तीय
भार भी सहन
किया। मान्यवर
थोड़ा सा रहा
है।
श्री
उपाध्यक्ष:
थोड़ा कन्क्लूड
कीजिये।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): जल्दी
करता हूं,
बहुत जल्दी
करता हूं। काम
ही इतने बड़े
हैं कि शॉर्ट
में गिनाऊं तो
भी टाइम लग
रहा है।
श्री
उपाध्यक्ष:
विदिन टू
मिनट्स।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): मान्यवर,
फीडर सुधार
कार्यक्रम के
तहत पांच हजार
करोड़ रुपये
व्यय करके 8475
फीडर सुधार
कार्यक्रम का
लक्ष्य था और
20 प्रतिशत
छीजत कम करने
का लक्ष्य था
और मैं आपको
फख्र के साथ
कहता हूं कि
जोधपुर डिस्कॉम
ने 170 करोड़ का
घाटा कम किया
और 8 प्रतिशत
छीजत कम करके
रिकार्ड कायम
किया है और यह
इस मौजूदा
सरकार के कार्यकाल
के दौरान हुआ
है। इसी तरह
से दूसरी जो
कम्पनियां
हैं वो भी इस
तरह से कर रही
हैं लेकिन सबसे
अधिक छीजत कम
की है 8
प्रतिशत तो वो
जोधपुर डिस्कॉम
ने की है और 170
करोड़ का घाटा
भी उन्होंने
कम कर दिया
है। 800 करोड़ का
जो रेवेन्यू
था, जो बकाया
था, जो दे नहीं
रहे थे वो
सारा का सारा
रिकवर भी किया
है और एक
रिकार्ड कायम
किया है। मान्यवर,
इतना ही नहीं,
जो हमारा
प्रयास है...
सदन की
कार्यवाही
विधान
सभा की बैठक
के निर्धारित
समय में
वृद्धि
डा. ओ. पी.
महेन्द्रा
(उप मुख्य
सचेतक):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
प्रस्ताव
करता हूं कि
सदन का समय एक
घंटा बढ़ाया
जाए।
श्री
उपाध्यक्ष:
क्या सदन का
समय एक घंटा
बढ़ा दिया
जाए?
(स्वीकृत)
सदन का समय
एक घंटा
बढ़ाया जाता
है।
माननीय
सदस्य, अब आप
समाप्त
कीजिये।
अनुमोदन कर
दीजिये धन्यवाद
प्रस्ताव
का। आपने बहुत
कुछ डिटेल के
अन्दर कह
दिया है।
धन्यवाद
प्रस्ताव पर
वाद िववाद
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): डिटेल
में नहीं, 5-7
मिनट में कन्क्लूड
कर रहा हूं।
हमारा प्रयास
है, हमारा
उद्देश्य है,
हमारा लक्ष्य
है खुशहाल
किसान। हमारा
एक लक्ष्य है
और इस लक्ष्य
को आगे लेकर
के हम चल रहे
हैं। हमारा
प्रदेश खुशहाल
हो इसलिए कृषि
की बिजली दर
में कोई वृद्धि
नहीं की गई।
विद्युत नीति
जो बनाई गई वो
पहली बार बनाई
गई। तकमीने के
बजाय हार्स
पावर आधारित
डिमांड नोटिस
जारी किये
गये। प्रत्येक
कृषि कनेक्शन
की तुलना में
लागत से 80
प्रतिशत से
अधिक राशि विद्युत
निगमों
द्वारा वहन की
गई। दो वर्ष
के पुराने सभी
विशेष श्रेणी
व फार्म हाउस
के कनेक्शन
सामान्य
श्रेणी में
परिवर्तित
किये गये। दो
वर्ष से पूर्व
के कटे हुए
कनेक्शनों
को पुन: चालू
करने का
निर्णय, जले
हुए ट्रांसफार्मरों
को 72 घंटे में
बदलने का समय,
पंचायत समिति
क्षेत्र में
कहीं भी कनेक्शन
का स्थानान्तरण,
मीटर वाले
कृषि उपभोक्ताओं
को न्यूनतम
राशि की वसूली
पिछले तीन
वर्ष में स्थगित,
सरकार द्वारा
2006 करोड़ का
प्रतिवर्ष व्यय,
ये सारे लक्ष्य
शो करते हैं कि
सरकार की नीयत
हर उपभोक्ता
को राहत
पहुंचाने की
है।
मान्यवर,
इतना ही नहीं,
कृषि क्षेत्र
में रिकार्ड
विद्युत
कनेक्शन
जारी किये गये
हैं। 1998 से 2003 तक
इन्होंने 1,11,770
कनेक्शन
जारी किये और
इन तीन साल के
अन्दर 1,03,100
कनेक्शन
जारी किये
गये। अब तुलना
करें, कहीं न
कहीं पांच साल
पर तीन साल।
इतना ही नहीं,
ग्रामीण
विद्युतीकरण
के मामले में ले
लें या किसी
भी सैक्टर
में ले लें,
आपके पांच
वर्ष के
कार्यकाल से कई
गुणा अधिक यह
तीन साल का
कार्यकाल है।
मेरे पास बहुत
लम्बी
तुलनात्मक
लिस्टें
हैं। आप कहना
चाहें तो आपने
400 के.वी. के
ग्रिड स्टेशन
एक बनाया, इस
सरकार ने तीन
साल में दो
बना दिये।
आपने 400 के. वी. की
लाइनें
सर्किट
किलोमीटर कोई
भी नहीं लगाई,
मौजूदा सरकार
ने 303 किलोमीटर
लगाई। 220 के. वी.
ग्रिड स्टेशन
आपने 11 बनाये
पांच साल में
और इस सरकार
ने तीन साल में
7 बना दिये। 220 के.
वी. की लाइनें
सर्किट किलोमीटर
891 बनाई, मौजूद
सरकार ने 1254 बना
दी। 132 के. वी. ग्रिड
स्टेशन आपने
63 बनाये,
मौजूदा सरकार
ने दो साल में 35 बना
दिये। 132 के. वी.
की लाइन
सर्किट
किलोमीटर 1570 आपने
लगाई, 670 इन्होंने
लगा दी। ग्रिड
स्टेशनों
में क्षमता
परिवर्तन 2077
आपने की, 1800 इन्होंने
भी कर दी।
गांवों का
विद्युतीकरण
2760 किया। कुओं
का
विद्युतीकरण,
जैसा मैंने
अभी बता दिया,
हरिजन बस्ती,
एस. सी. बस्ती,
कुटीर ज्योति
कनेक्शन, इन
सारे
क्षेत्रों
में जो विकास
के कार्य हुए
हैं उसका कहीं
आपका नजदीक का
भी रिश्ता
नहीं है। मान्यवर,
इस सम्बन्ध
में आप भारत
के
परिप्रेक्ष्य
में भी
देखेंगे,
दूसरे राज्यों
के
परिप्रेक्ष्य
में भी
देखेंगे तो
घरेलू श्रेणी
में जो बिजली
उपलब्ध कराई
जा रही है
उसमें 5वें
नम्बर पर
हैं। चार
प्रदेश इससे
ज्यादा विद्युत
कर, विद्युत
रेट वसूल कर
रहे हैं।
अघरेलू में 10
राज्य ज्यादा
हैं जो अधिक
वसूल कर रहे
हैं। कृषि में
10 राज्य रेट
अधिक ले रहे
हैं, 11वां
राजस्थान
है। ऐसे ही
लघु उद्योग,
मध्यम
उद्योग, वृहत्त
उद्योग,
सार्वजनिक
प्रकाश, इन
सारे क्षेत्रों
में जो राजस्थान
सरकार ने
कार्य किया है
वह जैसा मैंने
आपके सामने
निवेदन किया
कि इतिहास के
पन्नों में
लिखा जाएगा।
वो मैंने जो
आपके सामने दोहा
रखा था...
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): लूणी
से आने वाले
माननीय सदस्य,
इतिहास कहां
से शुरू
कराओगे?
ब्रह्मा जी का
मंदिर है पुष्कर
में, वहीं से
शुरू कराओगे
न? यह सरकार
कैसा इतिहास
बना रही है यह
पुष्कर से
शुरू कराना।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): आपके
पास इसके
सिवाय कोई आधार
नहीं है। आप
यही कह सकते
हैं कि पुष्कर
में यह कर
लिया। बिजली,
पानी, सड़क,
कृषि, इन मामलों
में बात करो,
वो आपके पास नहीं
है। एक मुद्दा
बता दें आप कि
हम पानी के मामले
में बात करते
हैं। आप
आंकड़ों पर
आइये। बिजली
के मामलों में
आंकड़ों पर
आइये, सड़क के
आंकड़ों में
आइये, शिक्षा
के आंकड़ों पर
आइये। (व्यवधान)
श्री
हीरालाल
(निवाई): बिजली
का एक आंदोलन
नहीं हुआ इस
सरकार के
दौरान।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): मुद्दा
लाओ राजस्थान
के विकास का,
मुद्दा लाओ
राजस्थान की
मौजूदा
सरकार....
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): गृह
मंत्री जी बता
देंगे कि
आंदोलन हुए या
नहीं हुए। ये
सही आदमी हैं,
इनको मालूम है
कि पुलिस ने
कितना काम
किया आंदोलनों
को दबाने के
लिए। (व्यवधान)
श्री
हीरालाल
(निवाई): बिजली
के मामले में
कोई आंदोलन
हुआ तो पहले
बताओ न आपको
मालूम है तो।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): आप
जयपुर में तो
घुसने नहीं दे
रहे, आंदोलन
की हालत तो यह
हो गई है। (व्यवधान)
श्री
हीरालाल
(निवाई): पूर्व
मुख्य
मंत्री को
अपनी चप्पलें
छोड़कर के
एक-एक
किलोमीटर
दौड़ाया है लोगों
ने। एक-एक
किलोमीटर
भागे हैं चप्पलें
हाथ में लेकर।
(व्यवधान)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): अलवर
जिले का बता
सकता हूं कि
अलवर जिले में
जिन लोगों ने
डिमांड नोट की
राशि गत 9
महीने पहले
जमा कराई है,
आज तक उनको
कनेक्शन
नहीं दिये जा
रहे हैं। मैं
यह सत्यता से
कह रहा हूं, आप
जानकारी करा
लीजिये। 9-9 महीने
से लोगों ने 70-70, 80-80
हजार रुपये
डिमांड नोटिस
के कृषि कनेक्शन
के जमा हैं, आज
तक उनको कनेक्शन
नहीं दिया जा
रहा है। यह
सत्यता है।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): इसका
मेरा जवाब है।
(व्यवधान)
श्री
हीरालाल
(निवाई): पिछले
टाइम तो दिये
ही नहीं थे।
(व्यवधान)
श्री
भागीरथ चौधरी
(किशनगढ़):
उपाध्यक्ष
महोदय,
प्रतिपक्ष तो
विकास में
विश्वास
रखता ही नहीं
है। (व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, आपका
जवाब है –
धुन के
पक्के कर्मठ
मानव,
जिस पथ
पर बढ़ जाते
हैं,
एक बार
तो रोक नरक को,
स्वर्ग
बना दिखलाते
हैं।
राजस्थान
को स्वर्ग
बनाकर के
दिखला दें।
आपकी इन बातों
का मेरा जवाब
यह है।
श्री
उपाध्यक्ष:
धन्यवाद
माननीय सदस्य।
श्री
अर्जुन सिंह
(दानपुर):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, बिजली
की बात है,
छोटी सरवन के
अन्दर डी पी
चैंज करने की
बात आठ दिन तक
नहीं हुई और
भारतीय जनता
पार्टी के मण्डल
उपाध्यक्ष
ने उसकी पैरवी
की और जाकर के
एस. ई. से बदलवाई।
नाम बता दूं
मैं। उसके बाद
में तलवाड़ा
पंचायत समिति
में कूलरखेड़ी
में झरनिया
पंचायत में
पिछले 10 महीनों
से काश्तकारों
ने डोमेस्टिक
और कृषि कनेक्शन
के लिए 170 आवेदन
कर रखे हैं पर
अभी तक कनेक्शन
नहीं हुए हैं।
और चाहिए तो
बता दूं।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
कन्क्लूड
कीजिये।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, यह जो
समय जाया होता
है वो मेरा नहीं
है। यह समय
जाया होता है
वह मेरा नहीं
है। अब बहुत
संक्षेप में
कन्क्लूड
कर रहा हूं।
श्री
उपाध्यक्ष:
अब आप एक मिनट
में समाप्त
कीजिये।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): बस दो
मिनट में करता
हूं। माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, आपदा
प्रबन्धन भी
एक बहुत बड़ा
विषय है, सड़क
निर्माण का भी
बहुत बड़ा
विषय है और
अन्य बहुत
बड़े-बड़े
विषय हैं
जिनका अगर
लेखा-जोखा
देखा जाए तो
जैसा मैंने
कहा कि 365 दिन
में भी पूरा
नहीं हो सकता।
पर एक आपदा
प्रबन्धन
वाला विषय
आपके सामने
रखूंगा और
बहुत संक्षेप
में रखूंगा और
निवेदन भी करूंगा
मेरे सभी
प्रतिपक्ष के
साथियों का कि
अभी सम्वत् 2062
में, जो गया उस
वर्ष में और
इस वर्ष में
भी आपदा
प्रबन्धन 22
जिलों में
लागू किया था, 22
जिलों में
अकाल पड़ा और
उसमें 15 हजार
के करीब गांव 50
प्रतिशत से अधिक
खराबा वाले थे
जिनको
अभावग्रस्त
घोषित किया
गया।
ओलावृष्टि
में भी हुआ और
अभी 1.1.2006 से 10.1.2006 तक
इस पर रोटेशन
प्रणाली से
कार्य भी हुआ।.....
विजय/अरुण/05032007/1700/3e
13.30
करोड़ मानव
दिवस डवटेल
में खर्च भी
किये गये। इन
सब बातों को
आप जाने दें
पर जो कार्य
हुए, उन
कार्यों को
आपको गिनाना
चाहूंगा कि 14,809
रसोइयां बनीं
डवटेल करने के
कारण राजस्थान
में। 3,568
आंगनबाडी
केन्द्र बने,
13,803 ग्रामीण डब्ल्यू.सी.
वगैरह बने, 7,504
खेत-तलाइयां
बनाये और 1,244
कुओं को वर्षा
से
सुदृढ़ीकरण
किया गया और 23,400
तालाबों की
खुदाई की गई।
यह रिकार्ड है
परिसम्पत्तियों
के निर्माण का
अकाल के
दौरान...
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय
जोगाराम जी
बिराजें। धन्यवाद,
धन्यवाद।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): मान्यवर,
इतना ही नहीं,
अभी जो बाढ़
आई, इस बाढ़ के
दौरान जो
पैकेज बनाकर
भेजा गया, उस
पैकेज के
निमित्त छह
महीने तक तो
निर्णय नहीं
लिया केन्द्र
सरकार ने और
मैं इस मौके
पर निवेदन
करना चाहूंगा
कि इसमें कोई
राजनैतिक बात
नहीं होनी चाहिए,
यह राजस्थान
के विकास की
बात है। इतना
बड़ा पैकेज, 3,000
करोड़ रुपये
का जो पैकेज
बनाकर भेजा
गया और छह महीने
तक उस पर कोई
निर्णय नहीं लिया।
अभी पाँच-सात
दिन में ही, subject to
correction,
पाँच-सात दिन
पहले ही
निर्णय लिया
गया है कि 100 करोड़
रुपये जो हमने
दिये हैं, वह
बहुत है, और कुछ
नहीं है। मैं
इस बात को
यहां इस
पवित्र सदन में
यह निवेदन
करना चाहूंगा
कि राजनैतिक
दृष्टि से
भेदभाव के
कारण यह
निर्णय केन्द्र
सरकार के
द्वारा लिया
गया है, जिसकी
एकमत से इस
पवित्र सदन के
द्वारा भर्त्सना
की जानी
चाहिए।
दूसरी
बात, चाहे आन्ध्रप्रदेश
हो चाहे
महाराष्ट्र
हो, वह
राजनैतिक
प्रतिस्पर्द्धा
रखते हुए उनको
तो बहुत
बड़े-बड़े पैकेज
दिये गये जबकि
राजस्थान को
ऐसा पैकेज
नहीं दिया गया
जिसके लिए भी मैं
इतना निवेदन
अवश्य
करूंगा कि
राजनैतिक
परिदृश्य
में राजनैतिक
दृष्टि से
निर्णय नहीं
लेना चाहिए।
मान्यवर,
सड़क के मामले
में यह राजस्थान
पहला राज्य
है, राजस्थान
पहला राज्य
है जो सड़क
निधि के अन्दर
भारत में अव्वल
नम्बर पर है
चाहे वह
पी.एम.जी.एस.वाई
सड़क हो, चाहे
वह मुख्य
मंत्री सड़क
योजना हो या
मिसिंग लिंक
हो, रिन्युअल
हो, जिनके
आंकड़े अगर
मैं गिनाऊं तो
मेरे पास इतने
लम्बे
आंकड़े हैं कि
रात भर खतम हो
जाये, वह
आंकड़े खतम
नहीं हो, इतने
बड़े आंकड़े
हैं।
मान्यवर,
इतना ही नहीं,
शिक्षा के
क्षेत्र को ले
लें, जैसा अभी
बताया गया कि
अन्तरराज्यीय
पुरस्कार जो
मिला, वह पहली
बार राजस्थान
को मिला, इसके
लिए राजस्थान
को गर्व है।
इतना ही नहीं,
स्कूल-कालेज,
अध्यापक,
लाखों की संख्या
में सारे कुछ
जितने कार्य,
करोड़ों
रुपये के
कार्य हुए।
अभी आपके
सामने एक
आर्गुमेंट
किया गया कि केन्द्र
सरकार का
कितना रुपया
है? अगर आप कम्पेरिजन
करना चाहते
हैं तो आपकी
सरकार के दौरान
आपके कितना
रुपया आया और
कितना खर्च
किया और
मौजूदा सरकार
में कितना
रुपया आया और
कितना खर्च
किया? राजस्थान
का भी हित है
उसमें, राजस्थान
का भी हिस्सा
है उसमें।
राजस्थान ने
प्रयास किया
है। प्रयास
करने से भी
पैसे मिलते
हैं। आपके
कार्यकाल के
दौरान तो एक
ही था कि
खजाना खाली है
और अब है
खजाना भरा हुआ
है। जितना
चाहे विकास के
लिए ले जाइये।
आप चिंता मत
कीजिये। पानी
के मामले में
कहा था एक-एक
माननीय सदस्य
को कि कितने
हैण्डपम्प
चाहिए, ले
जाइये। कितनी
योजनाएं
चाहिए, ले जाइये।
स्कूल कितनी
चाहिए? कभी
माननीय
शिक्षा
मंत्रीजी ने
मना नहीं
किया। कितनी
क्रमोन्नत
करवानी है, ले
जाइये। मेरे
एक विधान सभा
क्षेत्र में 56
स्कूलें
क्रमोन्नत
हुई हैं।
आई.टी.आई.
कालेज खुले
हैं, कई-कई स्कूलें
क्रमोन्नत
हुई हैं।
जितना मांगा,
वह सब मिला
है। यह सारा
कुछ परिदृश्य
है, वह इस
अभिभाषण के
मार्फत राजस्थान
की जनता तक
पहुंचाने की
आवश्यकता
है।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, समय की
अपनी मर्यादा
है, आपका आदेश
भी है, मेरी भी
मजबूरी है पर
मैं इतना अंत
में जरूर कहूंगा,
मैं भी निवेदन
अवश्य
करूंगा कि अगर
सारे आंकड़े
हमारे सामने आ
जाये तो
प्रतिपक्ष के
एक भी साथी
यहां नहीं
रहे, पर सारे
आंकड़े नहीं आ
रहे हैं। मैं
तो आपसे इतना
निवेदन
करूंगा कि
महामहिम राज्यपाल
महोदय
मेहरबानी
करके यहां
पधारे,
अभिभाषण दिया
और उस अभिभाषण
में राजस्थान
के विकास का
परिदृश्य
बतलाया, उसका
एक संक्षिप्त
में लेखा-जोखा
रखा और उन्होंने
जो अपना समय
दिया, उसके
लिए मैं उनका
तहेदिल से
बहुत-बहुत धन्यवाद
करता हूं। धन्यवाद,
जय हिन्द, जय
भारत।
श्री
उपाध्यक्ष:
धन्यवाद।
श्री हरिमोहन
जी शर्मा।
एक
माननीय सदस्य:
अपने मन से
बोलना।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
जैसा मैं
बोलूं, उसके
बाद निर्णय
करना कि मैं
मन से बोल रहा
हूं या सही
बोल रहा हूं
या गलत बोल
रहा हूं।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): मन से तो
आप बोल ही
नहीं सकते।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
पहले ही आप
जिस प्रकार
अपनी सरकार के
नेतृत्व पर
शंकाएं अभिव्यक्त
करते हैं, उस
प्रकार की
शंकाएं आप
मेरे लिए ना
करें। (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
हरिमोहन जी तो
घनश्याम जी
तिवाड़ी के मन
से बोलेंगे।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
यह जरूरी नहीं
है कि मैं
उनके मन से
बोलूं। मैं उन
पर भी अगर वक्त
आये या अगर
कोई बात अच्छी
नहीं लगे तो
पूरा प्रहार
करूंगा, सरकार
पर भी प्रहार
करूंगा। जो
कुछ समझ में
आता है, वह सदन
के पटल पर
रखूंगा।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आपका
अधिकार
सुरक्षित है
बोलने का।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
यह मैं मानता
हूं और मैं भी
आपके अधिकारों
की, आप जो कुछ
बोले हैं,
पूरी
ईमानदारी से
रक्षा करूंगा
और यहां
रखूंगा।
महामहिम राज्यपाल
महोदय के
अभिभाषण पर
माननीय उपाध्यक्षजी,
मसूदा से आने
वाले माननीय सदस्य
उनके अभिभाषण
के प्रस्ताव
को पास करने
के लिए प्रस्तावक
बने और लूणी
से आने वाले
माननीय
विधायक उस
प्रस्ताव के
समर्थक हैं और
दोनों ही सदस्यों
ने अपने-अपने
ढंग से,
अपने-अपने
दृष्टिकोण से,
अपनी-अपनी सोच
से उन पर विस्तार
से प्रकाश
डाला। हर आदमी
का अपना
दृष्टिकोण
होता है, अपना
विजन होता है
और जैसा विजन
वह अपनी आंखों
से देखता है,
उसी के अनुरूप
अपनी अभिव्यक्ति
सदन में प्रस्तुत
करता है इसलिए
उन्होंने
जैसा सोचा और
जैसा कहा,
उसमें मैं
अधिक जाने की
बजाय मैं मेरी
बात आपके
सामने इस
अभिभाषण के
सम्बन्ध
में सदन के
सामने निवेदन
कर रहा हूं।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, यह वह
अभिभाषण है जो
संवैधानिक परम्पराओं
के विपरीत,
संवैधानिक
प्रावधानों
के विपरीत,
विधिवत रूप से
इसे पढ़े जाने
का प्रस्ताव
आये जाने पर, नहीं
आने के बाद भी
माननीय अध्यक्ष
महोदय के
निर्णय के
अनुसार इस
संवैधानिक
परम्पराओं
के विपरीत इस
अभिभाषण पर
हमको विचार करने
के लिए,
माननीय अध्यक्ष
महोदय के
निर्णय के
अनुसार अपना
विचार अभिव्यक्त
करना पड़ रहा
है। मैं
निवेदन करना
चाहता हूं
माननीय उपाध्यक्षजी,
आपने पहले भी महामहिम
राज्यपाल से
तीन अभिभाषण
इस सदन में
प्रस्तुत
किये हैं और
उन अभिभाषणों
में जो कुछ
आपने लिखा है,
आपको इस बात
का भी ध्यान
रखना चाहिए कि
महामहिम से जो
बात हम कहलवाते
हैं, अभिभाषण
में उन कहलाई
गई बातों पर
हमने कोई
कार्य भी किये
हैं या हमने
महामहिम से जो
बातें कहलवाई
हैं, वे सच्चाई
से परे हैं और
उस पर भी
महामहिम का
संवैधानिक
उपयोग कर जिन
कार्यों को हम
पूरा नहीं कर सकें,
जिनका उल्लेख
हम इस अभिभाषण
में कर दें और
गत तीन सालों में
रखे गये
अभिभाषणों
में जो-जो
आपने लिखा है,
उन पर थोड़ी
भी उनकी
क्रियान्विति
नहीं करें तो
ऐसे अभिभाषण
का कोई महत्व
नहीं रह जाता
है।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहता हूं कि 19
जनवरी, 2004,
माननीय मदन
लाल जी खुराना
साहब जो महामहिम
थे, उनका
अभिभाषण इन्होंने
सदन में रखा
और उसमें सबसे
पहले पैरा नम्बर
चार में इन्होंने
यह लिखा है कि
हम आठ घंटे
रबी में किसानों
को बिजली
देंगे और उसके
साथ ही छह से 10
बजे तक रात्रि
में और सुबह
पाँच से सात
बजे तक किसानों
को डोमेस्टिक
लाइट देंगे।
आज दिन तक भी
यह आठ घंटे की
लाइट किसानों
को नहीं दे
पाये और आज दिन
तक भी यह सात घंटे
किसानों को
डोमेस्टिक
लाइट नहीं दे
पाये, जो इन्होंने
19 जनवरी, 2004 को
पैरा नम्बर
चार में इस
सरकार ने उल्लेखित
करवाया था।
यही
नहीं, माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
इसी क्रम में
यह भी निवेदन
करना चाहता
हूं कि इन्होंने
जब श्रीमती
प्रतिभा
पाटील से भी
तीन फरवरी, 2005 को
जो अभिभाषण
दिलाया, उस
अभिभाषण के
पैरा नम्बर
चार में, उस
पैरा से हटकर
खुद ने ही यह
लिख दिया कि
हम रबी की फसल
हेतु किसानों
को आठ घंटे तक,
इन्होंने
खुराना साहब
से कहलवा दिया
और अब आठ घंटे
बदलकर इन्होंने
ही अपने
अभिभाषण के
पैरा नम्बर (18) में
इन्होंने
सात घंटे की
घोषणा कर दी।
खुद पहले आठ घंटे
देने की बात
कर रहे हैं,
खुद आठ घंटे
देने के साथ
सात घंटे की
डोमेस्टिक
लाइट देने की
बात कर रहे
हैं और खुद ही
उसको बदलकर
आगे आने वाले समय
में यह सात
घंटे कर देते
हैं।
पैरा
नम्बर दो, 19
जनवरी, 2004 का,
बड़ी आलोचना
की राजस्थान
सरकार की कि 52,000
करोड़ रुपये
का कर्ज छोड़
गये, हम क्या
करेंगे? आर्थिक
दृष्टि से
राजस्थान को
पिछड़ा कर गये
और आज यह 52,000
करोड़ का कर्ज
छोड़ने का
आरोप लगाने
वालों ने
महामहिम राज्यपाल
के अभिभाषण
में जिस
प्रकार से यह
उल्लेख किया
कि 52,000 करोड़
रुपये का कर्ज
छोड़ गये, इन्होंने
आज की तारीख
में राजस्थान
पर 72,000 करोड़ रुपये
का कर्ज छोड़ा
है और......
Jkj/akt/17.10/3f/5.3.2007
और 52
हजार करोड़ के
कर्जे की
आलोचना लेकिन
72 हजार करोड़
के कर्जे के
मामले में
जनता को
जानकारी नहीं देना,
अभिभाषण में
नहीं कहलवाना,
यह इनके दोहरे
मानदण्ड हैं
और 72 हजार
करोड़ का
कर्जा तो
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, जब हुआ
है कि अभी
हमको तीन साल
है और भारत
सरकार ने
जिसका
प्रमाण-पत्र
माननीय प्रस्तावकजी
और समर्थक
आपके इस सदन
पटल पर रख रहे
हैं कि भारत
सरकार के
प्रधान
मंत्रजी,
अहलूवालियाजी,
बिजली मंत्रीजी,
ग्रामीण
विकास
मंत्रीजी
हमारी मुक्त
कंठ से तारीफ
कर रहे हैं और
उनके द्वारा
ही इनको ऋण के
ब्याज में
छूट दी गई और
मैं दावे से
कहता हूं कि यह
जिस योजना की
बात कर रहे थे
माननीय प्रस्तावक
महोदय कि
राजस्थान के
इतिहास में
इतनी बड़ी
योजनाएं
बनीं।
हर योजना
हुई,
पंचवर्षीय
योजना हर
पिछली वाली योजना
से बढ़ी है। आप एक
ऐसी योजना
मुझे बता दें,
एक ऐसी योजना
कि जो प्रथम
पंचवर्षीय योजना
में थी उसका
अमाउंट दूसरी
में नहीं बढ़ा
हो।
दूसरी का
तीसरी में
नहीं बढ़ा हो, तीसरी
का चौथी में
नहीं बढ़ा
हो।
योजना बढ़ना
और बढ़ाना यह
दायित्व है
और समय की
मांग है और
प्राइस इन्फ्लेशन
के हिसाब से
भी योजना
बढ़ती आई है
और इसमें कोई
नई बात आपकी
नहीं है। इसी प्रकार
आपने.....
श्री
विष्णु
मोदी:
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
इंट्रप्ट
नहीं कर रहा
हूं, योजना
बढ़ती है
लेकिन मैं
माननीय सदस्य
को यह अवगत
कराना चाहता
हूं कि उसमें
सबसे बड़ा कम्पोनेंट
कि आपका कितना
कंट्रीब्यूशन
होगा, आपकी
कितनी बड़ी
रेवेन्यू
होगी उसके ऊपर
प्लान....
श्री
हरिमोहन
शर्मा: नहीं,
एक्सप्लेनेशन
की बात बाद
में।
एक्सप्लेनेशन
देंगे आपका...
श्री
विष्णु
मोदी:
प्लान होता
है पर आप तो यह
बात करो कि
आठवीं, नौवीं,
दसवीं
पंचवर्षीय
योजना में जब
आप थे तब आपने
क्या किया।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: जवाब
देना है मुख्य
मंत्री को। जवाब
आपको नहीं
देना है। आपने तो
जो कहना था वह
कह दिया, जवाब
जो भी मुख्य
मंत्रीजी
हमारी बातों
का मुनासिब
समझेंगी देना,
दे देगी, नहीं
देना मुनासिब
समझेगी, कोई बात
नहीं है, आप
बीच में ही,
जवाब देने के
लिए भी आपकी
जिम्मेदारी
थोड़े है,
आपकी तो प्रस्ताव
रखने की जिम्मेदारी
थी वह आपने
बखूबी,
ईमानदारी से
जितनी प्रशंसा
आप अपने कंठ
से कर सकते थे,
ईमानदारी से
आपने वह कार्य
किया, उसमें
हमें कोई
एतराज नहीं
है।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
यह तो आपसे
मित्रता निभा रहे
हैं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: हां,
मित्रता निभा
रहे हैं, मैं
मानता हूं कि
यह भी मित्रता
निभा रहे हैं
और आपको भी
जहां जिस स्थान
पर मित्रता
निभाने का
दायित्व
सौंपा गया है,
आप भी कोई कम
नहीं हो, आप भी
अपनी मित्रता
तो निभा हीरहे
हो। हम
तो आप लोगों
की मित्रता के
कायल हैं और
इसीलिए जो कुछ
भी, जो व्यवस्थाएं
और जो सामान
हमारे पास है
उसमें आप
लोगों का बहुत
बड़ा योगदान है। अगर आप
लोगों का
योगदान नहीं
होता, जैसे
हमारे प्रधान
मंत्रीजी का
पत्र लिखने का
योगदान, जैसे
हमारे बिजली
मंत्रीजी का
तारीफ करने का
योगदान है,
जैसे
अहलूवालिया
साहब का, इनका
फाइनेंशल
मामले में
तारीफ करने का
है, वैसे ही इस
सरकार...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
नहीं, वह कैसे
कर रहे हैं वह
भी तो बता दो। प्रधान
मंत्रीजी,
वित्त
मंत्रीजी,
अहलूवालियाजी
जो हमारी
तारीफ कर रहे
हैं वह किन
कारणों से कर
रहे हैं जरा
वह कारण
बतायें।
श्री
जुबेर खान:
जैसे आपके छह
मंत्री कर रहे
हैं।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
आप पहले वह तो
बताओ, छह
मंत्री तो
अपना स्पष्ट
करेंगे तब
देंगे, आप वह
तीन बताओ,
गड़बड़ क्या
है, नहीं,
गड़बड़ कहां
है यह।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: आप
उनके, हमारी
पार्टी के नेताओं
के
प्रमाण-पत्र
पर अपनी तारीफ
करवाना चाह रहे
हैं और अपनी
तारीफ करते
हैं उसके लिए
तो हम आपके
आभारी हैं कि
हमारा नेतृत्व
वर्ग जो उनको
सही लगता है
वह बात कहता
है लेकिन मैं
असली मूल्यांकन....
श्री
मोहनलाल गुप्ता:
बिलकुल सही
कहा। आपने सही
बोला है। वह सही
बोल रहे हैं,
वह सही बोले
हैं, मूल्यांकन
सही किया है।
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
मतलब वह तथ्यों
से विपरीत कर
रहे हैं या
हमसे कहीं न
कहीं प्रभावित
होकर कर रहे
हैं, यही है
कहना आपका मतलब।
श्री
उपाध्यक्ष:
उनको कहने
दीजिये।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: असली
मूल्यांकन
इस सरकार के
कार्यकलापों
का, आप उनके आधार
पर अपनी सरकार
को ठीक बता
रहे हैं और
माननीय मुख्य
सचेतक महोदय,
मैं आपके और
आपके
मंत्रिमण्डल
के सदस्यों
के और आपके
विधायकों का
इस सरकार के
मामले में क्या
ख्याल है वह
प्रमाण-पत्र
आपको बताऊंगा,
आपने हमारे
प्रमाण-पत्र
बताये, हम
आपके
प्रमाण-पत्र
के आधार पर इस
सरकार के
संबंध में जो
भी बात है वह आपके
सामने अभी
रखते हैं,
थोड़ा तसल्ली
तो रखें। इसी
प्रकार....
श्री
रामनारायण
चौधरी(नेता,
प्रतिपक्ष):
उपाध्यक्ष
महोदय, इनके
दो भाषण हुए,
हमने कहीं भी
हस्तक्षेप
नहीं किया। अब
हमारी तरफ से
बोलने के लिए
खड़े हुए तो
कम से कम बीस
माननीय सदस्यों
ने हस्तक्षेप
खड़ा कर दिया।
श्री
उपाध्यक्ष:
नहीं। यह
हरिमोहनजी....
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
इनको एतराज है
क्या? विपक्ष
के नेता
महोदय, एतराज
है क्या
उनको?
श्री
रामनारायण
चौधरी: हां,
एतराज है।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
एतराज है?
श्री
रामनारायण
चौधरी: है।
श्री
महावीर प्रसाद
जैन: चलो, हम
नहीं बोलते।
श्री
हेमाराम
चौधरी: एक ही
दस के बराबर
है। (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
नहीं, यह
हरिमोहनजी की
परमिशन से ही
बोल रहे हैं।
एक
माननीय सदस्य:
वह हरिमोहनजी
और आपके आपस
की बात है।
श्री
रामनारायण
चौधरी:
रोकिये, साहब।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़:
हरिमोहनजी को
मजा ही नहीं
आता जब तक टोकाटाकी
नहीं होगी।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: 19 जनवरी
सन् 2004, पैरा नम्बर
22, आपने
पढ़ा है इसको? माननीय
संसदीय
मंत्रीजी और
इस अभिभाषण के
तैयार करने
वालों ने
पुराने
अभिभाषण पढ़े
ही नहीं। अगर
पढ़ते तो आपने
घोषणा की,
पैरा नम्बर 22,
औद्योगिक
क्षेत्र, शहरी
क्षेत्र एवं
पाँच हजार से
अधिक आबादी
वाले कस्बों
को निरंतर
विद्युत
आपूर्ति
सुनिश्चित की
जायेगी। आपने तो
बड़े-बड़े
शहर, राजधानी,
इनमें ही
विधिवत
आपूर्ति
सुनिश्चित
नहीं की और
आपने इसमें
लिखवाया कि
पाँच हजार की
आबादी का कोई
कस्बा होगा
राजस्थान
में, यह 2004 की 19
जनवरी को लिखा
है आपने, यह 2007
है, उसमें
आपने लिखा था
कि पाँच हजार
की आबादी को और
औद्योगिक
क्षेत्र को हम
निरंतर
विद्युत सप्लाई
करेंगे 24 घंटे,
आपकी इस सरकार
ने, इस समय पर शहर
में, जयपुर
राजधानी में,
पूरे जिलों
में, हर स्थान
पर बिजली की
कटौती की और
इस प्रकार
असत्य वाचन
करने के बाद
भी आप गर्व से
कुछ कहें तो मुझे
इस मामले में
कुछ आपको नहीं
कहना है। इसी
प्रकार आपने 2004
में माननीय
खनिज मंत्रीजी,
आपने उसमें
लिखवाया था,
लिखवाया था – जिला खान
योजना तीन माह
में तैयार। जिला
खान योजना तीन
माह में नहीं, यह
तीन साल में
तैयार नहीं
हुई, क्या
जिला खान
योजना है, तीन
महीने का आपने
इसमें गवर्नर
से लिखवाया था
और तीन साल हो
गये, आपकी
जिला खान
योजना गायब। माननीय
शिक्षा
मंत्रीजी, आप
लगातार कह रहे
हैं दो
प्राइमरी स्कूल
में एक मीडिल
स्कूल हो
जायेगी, कर दी
आपने? दो
प्राइमरी स्कूल
में अगर एक
मिडल स्कूल
आपने कर दी हो
तो आप सदन के
सामने कहें,
नहीं तो मैं
चैलेंज से
कहता हूं कि
राजस्थान
में जितनी
प्राइमरी स्कूल
हैं, उन दो के
बीच में एक
उच्च
प्राथमिक
विद्यालय गत
साल के पहले
वाले में भी
कहा, 2004 में भी
कहा, लेकिन दो
प्राइमरी स्कूलों
के बीच आज तक
भी एक उच्च
प्राथमिक
विद्यालय
आपने नहीं
खोला।
यह तो तब है
जब सर्व
शिक्षा
अभियान के तहत
केन्द्र
सरकार से आपको
भरपूर मदद मिल
रही है और आपको
उप समिति का
अध्यक्ष और
बना दिया, यह
निष्पक्षता
है, राजनीतिक
दृष्टिकोण
नहीं है केन्द्र
सरकार का,
नहीं तो आपको
क्यों बनाने
लगते, आपकी
तरह राजनीतिक
सोच केन्द्र
का नहीं है,
इसके बावजूद
भी दो-दो बार
आपने लिखवा
दिया, दो
प्राइमरी स्कूल
में एक मिडल
खोलेंगे। (व्यवधान)
बोल तो लेने
दो भई।
श्री
घनश्याम तिवाड़ी:
कर दी, कर दी।
श्री
उपाध्यक्ष:
बोलने दो भई।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: यह
आपने नहीं
किया। आपने
कहा गर्व से,
एक लाख लोगों
को हर साल
रोजगार, तीन
लाख लोगों को
रोजगार दे
दिया आपने? आप
मन से मानते
हैं? आपका एक
विधायक नहीं
मानता। आपका
कोई नेता नहीं
मानता कि तीन
साल में आपने
तीन लाख लोगों
को रोजगार
दिया हो। आपने
अभिभाषण में
लिखा है, वही
मैं पढ रहा हूं
और इसके अलावा
आपने उसके
पैरा नम्बर 96
में लिखा 2004 में
कि अकाल
सहायता कोड 62
के स्थान पर
नया सूखा
प्रबंधन
मेनुअल आप
तैयार करवा
देंगे।
श्री
जोगाराम पटेल:
कर दिया।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: नहीं
हुआ। अभी तक
नहीं हुआ।
डा.
किरोड़ी लाल:
आप देखा करो,
ढंग से पढ़ा
करो, एक साल हो
गया।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: नहीं,
एक जो सूखा
मेनुअल है, आपके
विधिवत रूप से
आज तक नहीं
है।
डा.
किरोड़ी लाल:
आप यों ही क्यों
हांक रहे हैं।
श्री
हरिमोहनशर्मा:
आपने पैरा नम्बर
48, आइये, आप आगे
आइये।
डा.
किरोड़ी लाल:
प्रभु, आप
मेरी
प्रार्थना
सुन लें।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: आप
सुने तो सही,
पैरा नम्बर 98,
गरीब को गणेश
मानते हुए...
श्री
जोगाराम पटेल:
अकाल प्रबंधन
तो जारी हो
गया...
श्री
हरिमोहन
शर्मा: तो और
बातें जो हैं
उससे तो आप
इत्तफाक
करते हैं कि
नहीं हुआ।
श्री
जोगाराम पटेल:
यह तो गलत है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: और तो
सब इत्तफाक
कर रहे हैं ल?
श्री
जोगाराम पटेल:
नहीं, और की
बात नहीं कर
रहा मैं। ..(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा: और तो
सब इत्तफाक
कर रहे हैं न
आप। आप और तो
सब इत्तफाक
कर रहे हैं?
डा.
किरोड़ी लाल:
यह तो आप असत्य
बोल रहे हैं न?
श्री
जोगाराम पटेल:
यह तो असत्य
बोल रहे हैं।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
बीच में
टोकाटाकी
नहीं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: पैरा
नम्बर 98, इसको
मैं...
श्री
टीकम चन्द
कांत: कृपया
झूठ की जगह
असत्य
प्रयोग करें।
श्री
उपाध्यक्ष:
नहीं, कोई
नहीं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: पैरा 98 ,
जिस पर जो शब्द
हैं, उनको अभी
बोल देता हूं
लेकिन इसके
आखिर में आपकी
स्थिति की
विवेचना
करेंगे, गरीब
को गणेश मानते
हुए पारदर्शी,
संवेदनशील और
जवाबदेह
प्रशासन
तैयार कर जन
जन का सपना
पूरा करेंगे। इस पर
मैं अपने
कमेंट उसके
बाद में
कहूंगा, इसके
साथ ही आपने
जो दूसरा है, 03
फरवरी,
प्रतिभा
पाटील, 2005, आपने
पहले लिखा है,
सुनामी लहरों
से पीडि़त
लोगों की
सहायता
करेंगे। आप आज तक
पूरे पैसे को
दो साल गुजरने
के बाद खर्च
नहीं कर पाये,
उनके लिए कोई
व्यवस्था
नहीं कर पाये,
जितना पैसा
आपने एकत्रित
किया था वह
कुछ नहीं कर
पाये।
उसमें लिख दिया
पीडि़त लोगों
की आप पूरी
सहायता
करेंगे,क्या
सहायता की
आपने? आपने
सोचा, कभी
विचार किया? दस
बार अखबारों
में छप गया, दस
बार बातों में
आ गया लेकिन
कोई
मानीटरिंग
सिस्टम नहीं
और उनका आज तक
भी नहीं हुआ।
Lpm/akt/1720/3g/5032007
आपने
घरौंदा योजना
के नाम पर 13
शहरों और अनेक
कस्बों में
इस योजना को
चालू करके
लोगों को
लाभान्वित
करने की बात
की, आपने जो
वादा
था, उन शहरों
में, उन कस्बों
में आपने अभी
पूरा काम नहीं
किया है। इसके
अलावा आपने
पैरा नम्बर-16
में लिखा मिशन
बसेरा, जयपुर
विकास प्राधिकरण
क्षेत्र में
कच्ची
बस्तियों के
निवासियों को
10 रूपए
प्रतिदिन
किश्त पर दो
हजार आवास
उपलब्ध
कराएंगे। आज
तक मान्यवर,
केन्द्र
सरकार की
सहायता के
बावजूद एक
मकान इस मिशन
बसेरा के तहत
आपके
मंत्रीजी
यहां बैठे
हैं, एक मकान
कोई आप तीन सालों
में आपने
उपलब्ध करा
दिया हो
फिर भी कहो
साहब हमारे तो
जो राज्यपाल
अभिभाषण है वह
बहुत अच्छा
है और हमने जो
विकास की गंगा
बहा दी यहां,
यह गरीबों के
प्रति आपकी सोच
है। आपने दो
बार वादे किए
कि नर्बदा का
पानी हम
सिंचाई हेतु
जालौर-बाड़मेर
में पहुंचा देंगे।
हमने सब व्यवस्था
कर ली है, दो
बार
अभिभाषणों
में आपने लिखा
है। अभी गये
साल में भी
आपने लिखा। आप
वहां के मुख्यमंत्रीजी
के सामने आपकी
जो राजनीतिक
स्थिति आज जो
बनती है इतनी
मजबूत नहीं है
और वहां के
माननीय गुजरात
के मुख्यमंत्री
आकर के यहां
पर घोषणा कर
गये थे हम आपको
पानी पहुंचा
देंगे आज तक
वह पानी आपने
पहुंचाया?
समयबद्ध होते
हुए भी आपने
उन्हें पानी
नहीं
पहुंचाया।
पैरा नम्बर-91
में माननीय
खनिज
मंत्रीजी
आपने पैरा नम्बर-91
में लिखवाया
कि वन क्षेत्र
में नये खनन
पट्टे आवंटित
करने हेतु वन
भूमि में खनिज
क्षेत्रों का
अनारक्षण। इस
कारण वन
क्षेत्र में
बहुमूल्य
खनिज भण्डारों
का दोहन हो
जाएगा। हो गया
क्या? फोरेस्ट
की जमीन में
आपने नई नीति
बना दी, नये
आरक्षण कर
दिये। यहां ये
बातें आपने जो
लिखवाई है इन
बातों पर
माननीय राज्यपाल
महोदय का
अभिभाषण जो
आपने अभी
तैयार किया है
अच्छा तो यह
होता कि यह
आपकी कैबिनेट
मीटिंग में चाहे
वह तीन आदमी
की हो, कुछ भी
हो वह इनको
अगर पुराने
अभिभाषणों को
पढ़ लेती तो
ऐसे लोक-लुभावन
बातें करने का
और आपने जो
कुछ भी आपने
लिखा उसको
पूरा नहीं
करने का ध्यान
अगर यह कमेटी
देती तो अनेक
ऐसी बातें
जिनको आप राज्यपाल
से कहलवा रहे
हैं, जिनको आप
पूरा नहीं कर सकते,
आपकी पृष्ठभूमि
और आपका
पुराना
कार्यकाल ऐसा
रहा है कि राज्यपाल
से कहलाने के
बाद भी आप उन
बातों को पूरा
नहीं कर सकते।
ऐसे असत्य
कथन मेरी इस
सरकार से,
कैबिनेट से और
सभी साथियों
से विनम्र
अनुरोध और
प्रार्थना है
कि उन असत्य
कथनों का उल्लेख
आप राज्यपाल
के अभिभाषण
में न करें और
राज्यपाल को
यह मौका न दें
कि असत्य बात
कहने के लिए
संवैधानिक जो
एक रास्ता है
उसके अनुसार
कम से कम आप स्वयं
खुद ही असत्य
बात करने में
माहिर है आप
स्वयं ही
असत्य बात
करने में
माहिर है तो
कम से कम राज्यपाल
का सहारा तो
आप असत्य बात
कहने का न लें
...(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आप तो
सत्य कह रहे
हैं, आपने अभी
सुनामी के
मामलें में
कहा कि राज्य
सरकार ने कुछ
नहीं कहा,
आपको मालूम है
15 करोड़ का काम
वहां चल रहा
है, 11 करोड़
रूपए रिलीज हो
गये, 19 करोड़
रूपए कुल थे,
आप यूं ही चेप
रहे हों...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आज सुनामी
पीडि़तों की
बाकी मदद करते
हों आप चलों
हमारे साथ देखने
के लिए हम बात
सुनो, दो बार
होकर आये हैं।
आपने तो 20
करोड़ इकट्ठा
करके आज तक
उसको खर्च नहीं
किया है तीन
साल, ढाई साल
हो गये और
अमरीका से जो
पैसा आया था
क्लिंटन ...(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): आप
चुनौती दे रहे
हो क्या? (व्यवधान) 15 करोड़ 23
लाख रूपए
रिलीज हुए हैं
(...व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
उसमें
निर्धारित
अवधि में सारा
का सारा काम
उनका कर दिया
आपने सुनामी
पीडि़तों का
पैसा आज तक भी
खर्च नहीं
किया वहां ...(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): 11 करोड़
खर्च हुए हैं
...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आज की तारीख
में भी आपके
पास 10 करोड़, 15
करोड़ रूपए के
आसपास राशि
शेष है आप
कैसी बात करते
हैं?...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आप और
मि. चन्द्रशेखरजी
वहां जाकर के
आये हैं, आप स्वयं
देखकर आये हैं
कि तमिलनाडु
सरकार ने इसकी
तारीफ की है
और यह कहा है
कि राजस्थान
वालों का ही
केवल सुनामी
में जो काम
हुआ है और
जितना अच्छा
काम हुआ है आप
स्वयं
सर्टिफिकेट
देकर आये हैं
वहां ...(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अब आप
कोलापुरम गये
थे, कांचीपुरम
गये थे।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): गये
थे, गये थे, यह
असत्य बात
नहीं
बोलेंगे। आप
गये गये थे,
काम देखकर के
आये थे..(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): खंडालोर
में गये थे ..(व्यवधान)
आप जो काम
सरकार कर रही
है कम से कम ...(व्यवधान)
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं
पर्यावरण
मंत्री):
गुजरात में जब
भूकम्प आया
था आपकी सरकार
ने गुजरात में
कितने वर्ष तक
काम नहीं
किया...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
एक साथ तीन
मंत्री, एक-एक
खड़ा हो, एक-एक
का जवाब
देंगे।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): (..व्यवधान)
15 करोड़ रूपए
खर्च कर दिया
और आप गिनाओ नहीं....(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
एक-एक जवाब देंगे,
मैं मेरे
उद्देश्य
में सफल हूं
कि आपको मेरी
सच बात इतनी
कड़वी लग रही
है ...(व्यवधान)
नहीं,
कटारियाजी भी
तो नहीं हुए
हैं..(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): उपाध्यक्ष
महोदय, आप
क्षमा करोगे
आप असत्य बोल
रहे हें
इसीलिए बात
कड़वी लग रही
है। जिस काम
के लिए लोगों
ने प्रशंसा की
है राजस्थान
वासियों ने
आगे बढ़कर
इतना अच्छा
काम किया ...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
मैं कह रहा
हूं कि 20 करोड़
में से 10 करोड़
भी खर्च नहीं
हुए हैं तुम्हारे,
मैं यह कह रहा
हूं कि 10 करोड़
आज भी तुम्हारे
पास रखे हुए
हैं और दो-ढाई
साल हो गये
हैं, काई की
तारीफ करवाते
हो, आज तक खर्च
नहीं हुए सुनामी
पीडि़तों के
लिए 20 करोड़
रूपए जो इकट्ठा
किया था।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री):
और तमिलनाडु
की सरकार ने
प्रशंसा की है।
उपाध्यक्ष
महोदय 11 करोड़
रूपए खर्च हो
गये। 15 करोड़ का
काम चल रहा
है। पूरे का
पूरा गांव बसा
रही है राजस्थान
सरकार, दो बार
मुख्यमंत्रीजी
खुद जाकर के
देख आये,
प्रशंसा करनी चाहिए
इनको मतलब खुद
ही हलाहल चेप
रहे हैं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आपने तो शिलान्यास
माननीय मुख्यमंत्रीजी
से वहां
करवाया है
जहां वह
बिल्डिंग
बनाना ही नहीं
था, आपने एक स्कूल
में ले जाकर
के स्कूल में
शिलान्यास
करवाया है जिस
स्थान पर आप
बिल्डिंग
बनाने वाले थे
कुडलोर में,
आप तो वहां
जाने की
स्थिति में ही
नहीं थे अगर सच
बात कहूं तो
यह मैं और
आपसे कहता
हूं।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
इसका जवाब ही
नहीं है...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): कुडलोर
के अन्दर काम
चल रहा है 15
करोड़ रूपए
रिलीज हो गये, 11
करोड़ खर्च हो
गये...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अरे रिलीज
नहीं है (...व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): तमिलनाडु
सरकार ने पत्र
लिखकर धन्यवाद
दिया है (...व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): वह स्कूल
भी बन चुकी है
स्वयं देखकर
आये हो आप(...व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): नये सिरे
से स्कूल बनी
है वो..
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मैं
आपका
सर्टिफिकेट
बता दूं मेरे
पास हैं वहां
देके आये हैं
जो...व्यवधान
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अरे मैं यह कह
रहा हूं कि 20
करोड़ में से 10
करोड़ खर्च
नहीं हुए ढाई
साल हो गये (...व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मैं
कहता हूं आप
सर्टिफिकेट
देकर आये हैं
(...व्यवधान) स्कूल
व छात्रावास
बन गये हैं(...व्यवधान)
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री): आपको
क्या पता वह
खर्च नहीं हुए
हैं? आप किस
आधार पर कह रहे
है, आपकी
मर्जी से ही,
मैं कह रहा
हूं हिसाब हमारे
पास है सारे
खर्च हो गये
हैं (...व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
मैं बताऊ आपको
अगर सारे खर्च
हो गये हैं या
तो आप
मंत्रीमण्डल
से इस्तीफा
दें दे नहीं
तो मैं दे
दूंगा, क्या
बात करते हों
(...व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): 15 करोड
में से 11 करोड़
खर्च हुए हैं
अगर नहीं हुए
तो आपकी शर्त
मंजूर है (..... व्यवधान)
श्री
अर्जुन सिंह
(दानपुर):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, माननीय
एक मंत्रीजी
कह रहे हैं 11
करोड़ है और
दूसरे
मंत्रीजी कह रहे
हैं
सारे खर्च हो
गये,
हरिमोहनजी एक
मिनट(...व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
हरिमोहनजी के
कहने पर....
श्री
अर्जुन सिंह
(दानपुर): एक
मंत्रीजी कह
रहे हैं 11 करोड़
खर्च हुआ,
दूसरे
मंत्रीजी कह
रहे हैं सारा खर्च हो
गया, सही कौन
है यह बताइए,
दोनों में सही
कौन है यह
बताइए नहीं तो
इस्तीफा दें
इनको नॉलेज
नहीं है (...व्यवधान)
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री):
दोनों सही
है(...व्यवधान)
श्री
जयराम जाटव
(खैरथल): पंजाब
और उत्तरांचल
में इनको जवाब
मिल गया है ये
जो बोल रहे
हैं(...व्यवधान)
श्री
अर्जुन सिंह
(दानपुर):
निर्णय करें
आप बताये यह
दोनों मंत्री
जवाब दें
दोनों में से
दें(...व्यवधान)
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री):
इसमें सरकार
सही है(...व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
(...व्यवधान)
फेमिन कोड
जारी नहीं हुए
है(...व्यवधान)
श्री
अर्जुन सिंह
(दानपुर):
पंचायतराज
मंत्री कह रहे
हैं सारा खर्च
हो गया,
संसदीय
मंत्री कह रहे
हैं 11 करोड़
खर्च हुआ आप
दोनों में सही
कौन है, निर्णय
करें(...व्यवधान)
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक आपूर्ति
मंत्री): मैं
संबंधित
विभाग का
मंत्री हूं और
हरिमोहनजी
बोल रहे थे कि
फेमिन कोड
जारी नहीं
हुआ, फेमिन
कोड जारी हुए
एक साल हो
गया(...व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
हो गया, मेरी
बात सुनो अगर
फेमिन कोड जारी
हो गया तो आप
यह तो मानो ना
कि आपने दो साल
तक नहीं किया
है, आपने तो
उसी साल
पूरा करने का
कहा था(...व्यवधान)
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): आप *** बोल रहे
हैं ...(व्यवधान) माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय 15 करोड़
खर्च हुए जैसा
मंत्री जी ने
कहा और उसमें
...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
*** नहीं, *** तो आप
इनका शब्द
हटाइए ...(व्यवधान)
यूं बोलों ना,
मंत्री होकर
तो सही बोलो
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): आप
असत्य बोल
रहे हैं
और माननीय
उपाध्यक्षजी
15 करोड़ रूपए
जैसा
मंत्रीजी ने
कहा रिलीज हुआ
और उसमें 11
करोड़ रूपए
खर्च हो गया, 19
करोड़ कुल हमने
वहां पर भेजे
हैं और यह खुद
भी वहां पर
देखकर आये हैं
...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
...(व्यवधान) 9
करोड़ अभी
इनके पास और
धरे हैं, 19 में
से 9 करोड़ ...(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
कर रहे हैं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, यह तो
मैंने उन तथ्यों
की और आपका ध्यान
आकर्षित किया
है जिसे हम
सरकार से
अपेक्षा करते
थे। राज्यपाल
के अभिभाषण
में वह चीज
नहीं लिखें जो
करने की
स्थिति में न
हो, असत्य
बयान राज्यपाल
महोदय से करवाकर
के संवैधानिक
परम्पराओं
के अंतर्गत
चूंकि राज्यपाल
कैबिनेट
द्वारा प्रस्तुत
अभिभाषण को
पढ़ने के लिए
बाध्य है
इसलिए ऐसा काम
तो कम से कम
राज्यपाल से
आप न करवायें
और भविष्य
में इन बातों
का आप ध्यान
रखें।
भीम/अरुण/5.3.07/17.30/3h
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, अब जो मुख्य मुद्दा है कि ये सरकार और मंत्रिमंडल के सदस्य अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं या नहीं। आज की तारीख में पूरा इतिहास उठा करके आप देख लें सबसे पहले माननीय मुख्यमंत्री जी ने सेज का निर्णय लिया सेज के मामले में अपनी घोषणाओं की और राजस्थान के मंत्रिमंडल के सदस्यों ने खुले-आम यह कहा कि न तो यह केबिनेट में आया और न पारदर्शिता बरती गयी, कुछ लोगों को लाभ देने के लिए सेज का निर्णय किया गया। उस आरोप के बाद मंत्रिमंडल के सदस्यों के आरोप के बाद भी, उस कार्यक्रम में शरीक न होने के बाद भी माननीय मुख्मंत्री जी और मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ बैठे हुए हैं, आश्चर्यजनक घटनाक्रम है।
डा. किरोड़ी लाल (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आपके हरियाणा में क्या हुआ? इसका जवाब दे दें।
श्री मदन राठौड़: उपाध्यक्ष महोदय, मैं इनसे पूछूंगा कि इनकी सरकार में चंदनमलजी बैद को क्यों हटाया गया?
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): आप तो इनको रोक लें अब नंबर इन्हीं का है न इसलिए हर मिनिस्टर उठेगा।
श्री मदन राठौड़: उपाध्यक्ष महोदय, एक मिनट मैं इनसे पूछूं कि ये कृपया बता दें कि चंदनमलजी बैद जो वित्त मंत्री थे इनकी सरकार में वो क्यों हटाये गये? इसका जवाब जरा दे दो। ...(व्यवधान)...
श्री उपाध्यक्ष: माननीय सदस्य।
श्री अर्जुन सिंह: हमने तो हटाया आप भी तो हटाओ जिन्होंने भ्रष्टाचारी की है आप भी तो हटाने की व्यवस्था करो।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): इसके बाद हज हाउस का फैसला किया ...(व्यवधान)... श्री कालूलाल गुर्जर (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): आपका मतलब चंदनमलजी बैद ने भ्रष्टाचार किया इसलिए हटाया गया ।
श्री उपाध्यक्ष: माननीय सदस्य।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): माननीय उपाध्यक्ष महोदय, कम से कम मंत्रियों को तो नियंत्रण में करो।
श्री अर्जुन सिंह:.... उलझ गये थे अभी वो तो बीच में आ गयी बात।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): मंत्रियों को तो नियंत्रण में करो आप।
श्री उपाध्यक्ष: आप हरिमोहन जी को डिस्टर्ब मत करो।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): एक साथ तीन-तीन, चार-चार मंत्री खड़े हो रहे हैं। चार-चार मंत्री खड़े हो रहे हैं विधायकों पर विश्वास नहीं है।
डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): ...(व्यवधान)... अपनी लोयलटी ...(व्यवधान)... दे रहे हैं ...(व्यवधान)... आप क्यों भला चिंता कर रहे हैं ...(व्यवधान)...
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): डबल रोल किसी का चलने वाला नहीं है किरोड़ीलाल जी रोल रखो तो सिंगल रखो।
डा. किरोड़ी लाल (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): हमारा तो डबल रोल नहीं चल रहा है हमको तो चिन्ता यह है कि हरिमोहन जी जितना जमते हैं विधान सभा में वैसे आज जम नहीं रहे हैं।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): मुझे जमना नहीं है बैठना विपक्ष में ही है ...(व्यवधान)... माननीय उपाध्यक्ष जी, इसके बाद आप यह देख लें हज हाउस वाले मामले में केबिनेट के मंत्रियों ने जो निर्णय किया और जिस प्रकार का खुला खेल पूरे राजस्थान की जनता ने देखा और जिस प्रकार की भ्रामक स्थितियां बनीं मंत्रिमंडल के सदस्यों ने उसमें जाने का बहिष्कार किया और पूरे राजस्थान की जनता ने यह देखा कि यह मंत्रिमंडल के सदस्य और माननीय मुख्यमंत्री जी संवैधानिक परम्पराओं का पालन नहीं कर रहे हैं और जनता को दिग्भ्रमित और दिशाभ्रमित करके अपने अपने उद्देश्यों की पूर्ति हेतु इस प्रकार का कलात्मक प्रदर्शन करते रहे। माननीय ये तो समझ में आता है कि मंत्री जी कोई बात करें अपनी बात बेबाकी से रखें लेकिन यह समझ में नहीं आता है कि जिस भारतीय संस्कृति के पुजारी और विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंध रखने वाले व्यक्ति और विशेष रूप से सिद्धांतों की राजनीति की बात करने वाले व्यक्ति की जमात दुर्गा के रूप में शेर पर माननीय मुख्यमंत्री जी को ही बैठा दे और नियमित रूप से उनको बैठाकर उनकी पूजा अर्चना करे और पूजा अर्चना करने के बाद मैं इस ईमानदार से उनकी इस बात का तो ...।
श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): उपाध्यक्ष महोदय, ...(व्यवधान)... यह अभिभाषण पर बहस कर रहे हैं या काहे पर कर रहे हैं? ये 28 तारीख का जो अभिभाषण महामहिम जी ने दिया है.... ...(व्यवधान)... इसी अभिभाषण पर बोलें।
डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): ...(व्यवधान)... यह लिखित में भाषण आपके लिए है अभिभाषण तो हमारे लिये है।
श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): शंका तो सबके है सही मुद्दा हरिमोहन जी के पास है ही नहीं।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): और मैं इस बात की तारीफ करूंगा सिंघवी साहब की कि उन्होंने कहा कि हां मेरे यहां मुख्यमंत्री जी की पूजा होती है और आरती भी होती है प्रतिदिन यह काम भाजपा का ही कोई कार्यकर्ता करता है और मैं कभी-कभी आरती में शामिल होता हूं और हिन्दू धर्म में महिला को देवी का रूप माना जाता है हमारी मुख्यमंत्री जी महिला हैं और उनकी पूजा करने में क्या दिक्कत है?
यह माननीय सिंघवी साहब ने ईमानदारी से चूंकि वो ज्यादा राजनीतिक उछल-पुछल में नहीं रहते उनका जो उद्देश्य है उसकी तरफ वो बिलकुल होशियार और माहिर हैं कि जब-जब भी पूजा अर्चना करते हैं, मंत्रिमंडल में आपको ले लिया मंत्रिमंडल में आपको सदस्य बना दिया और आपने सारी हिन्दू संस्कृति की धज्जियां उड़ा कर, यह आरएसएस के लोग क्या कर रहे हैं? आरएसस के लोग क्या कर रहे हैं इस पर कि देवी की जगह शेर पर बैठाकर के हाथों में तलवार देकर आप इनकी पूजा अर्चना करो।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्यक्ष महोदय, कई बार अध्यक्षीय व्यवस्था यह है कि मात्र समाचार पत्रों के आधार सदन में कोई बात नहीं उठायी जा सकती। किस आधार पर बात कर रहे हैं? क्या प्रमाण है इनके पास ...(व्यवधान)... क्या प्रमाण है इनके पास?
डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): ...(व्यवधान)... क्या बोला था उस समय जब यह उठाया था जुबेर खान जी ने कि प्रेस को कोट नहीं करें तो आपने कहा कि ठीक है बिलकुल। जब विष्णु मोदी जी कोट कर रहे थे सेन्टर मिनिस्टर्स के स्पीच तब तो यह जुबेर खान जी ने प्रश्न उठाया था कि अखबारों को कोट नहीं किया जाए, तब तो कहा कि बिलकुल ठीक है।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): जब मैंने कहा था कि मैं अखबारों का रख दूं तो आपने कहा था कि रख देना।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह उनका कथन था जो उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा।
डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): यह किसका है? यह सिंघवी साहब का कथन है अख़बार में।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): क्या प्रमाण है सिंघवी साहब ने कहा है? समाचार पत्रों के आधार पर सदन में बहस होने लग जाए ...(व्यवधान)...
डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): खंडन करें ये सिंघवी साहब खड़े होकर खंडन करें हाउस में। सिंघवी साहब खड़े होकर खंडन करें कि मैं मुख्यमंत्री की पूजा नहीं करता हूं। खंडन करें उसका।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): समाचार पत्रों के आधार पर सदन में बहस होने लग जाए तो फिर ...(व्यवधान)...
श्री जुबेर खान (रामगढ़): सिंघवी साहब, खंडन करें कि मैंने ऐसा नहीं कहा ।
डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): कोई बात नहीं है आप माननीय राठौड़ साहब सिंघवी साहब से खड़े होकर कहलवा दो कि मैं पूजा नहीं करता यह सब गलत लिखा हुआ है, दुर्गा नहीं मानता हूं, कहलवा दो न क्या तकलीफ है? यह कहलवा दो क्या तकलीफ है? यह कहलवा दो आप। यह भी नहीं बोलवाना चाहते। खंडन भी नहीं करना चाहते।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): अफसोस इस बात का है कि अच्छा तो यह होता कि माननीय मुख्यमंत्री जी खुद इनको निर्देशित करती और डांट कर यह कहती कि कम से कम जब मैंने आपको आपकी योग्यता के आधार पर मंत्रिमंडल में ले ही लिया तो अब चाटुकारिता करने की आपको क्या आवश्यकता है? मुख्यमंत्री को स्वयं को कहना चाहिए था लेकिन...।
श्री जोगाराम पटेल (लूणी): माननीय उपाध्यक्ष महोदय, यह अभिभाषण का विषय है क्या? यह अभिभाषण का विषय है, यह अभिभाषण के संबंध में कहा जा रहा है? यह बताएं आंकड़े और विकास, ये बतायें आंकड़े और विकास। एक महीने पहले कहा था। ये आंकड़े और विकास इनके पास नहीं हो सकते सिर्फ एक है चाटुकारिता और यह कह दिया इससे राजस्थान का विकास नहीं है बतायें आंकड़ों में आकर के राजस्थान का विकास किया। यह पूर्ववर्ती सरकार ने विकास किया, वर्तमान सरकार ने विकास किया। बतायें आंकड़ों के आधार पर बताओ शिक्षा, चिकित्सा, पेयजल के बारे में आइये। उसका कुछ भी नहीं है एक शब्द नहीं है।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): लूणी से आने वाले माननीय सदस्य से मेरा विनम्र अनुरोध है... ।
श्री उपाध्यक्ष: माननीय सदस्य।
श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय उपाध्यक्ष महोदय, एक मिनट मेरी बात सुन लें माननीय मुख्यमंत्री जी के प्रति मैं श्रद्धा के भाव रखता हूं इसमें कोई दो राय नहीं है पर अख़बार में जिस तरह की भाषा लिखी है उस प्रकार का वर्जन अख़बार वालों ने मेरे से नहीं लिया है।
श्री उपाध्यक्ष: गलत लिखा है ठीक है। बात खतम हुई।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): ये फोटो तो सही है न?
श्री उपाध्यक्ष: मुख्यमंत्री का मान सम्मान कर सकते हैं करना ही चाहिए।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): और इसमें और भी बात है मंत्रिमंडल में आप सब कुछ कर सकते हो और जिस दिन आप शरीक होते हो...।
श्री भवानी जोशी (राज्य मंत्री, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य): माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय अटलबिहारी वाजपेयी जी ने भी इंदिरा गांधी को दुर्गा का स्वरूप बताया था उस समय तो आप लोगों ने कोई विरोध नहीं किया। हमने किसी महिला को अगर दुर्गा का स्वरूप बताया है तो उनको विरोध नहीं करना चाहिए।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): हम दुर्गा के स्वरूप का विरोध नहीं कर रहे हैं लेकिन आप उनको ...।
श्री भवानी जोशी (राज्य मंत्री, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य): आप उस पर कमेंट्स कर रहे हैं आपने उस समय कमेंट्स क्यों नहीं किया जब हमने इंदिरा गांधी को दुर्गा का स्वरूप बताया था तब आपने कमेंट्स क्यों नहीं किया?
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): नहीं, दुर्गा का स्वरूप बतायें उसमें किसी भी महिला के लिए आपत्ति नहीं है लेकिन दुर्गा मानकर आप पूजा करो और तिलक लगावें माथे पर पाठ पूजन करने के लिए माननीय जोशी जी, आप वहां विराज जाएं उससे ज्यादा शर्म की बात कोई नहीं हो सकती। अगर इनको माता मानते हो तो मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि बांसवाड़ा में आप कंकाली माता की पूजा करने की बजाय आप भी लगा लो मुझे आपत्ति नहीं होगी लेकिन आप तो नहीं लगाओ और उनसे कहो कि तुम कुए में पड़ रहे हो जो ठीक है, इस बात से मैं आपसे सहमत नहीं हूं लेकिन पूजा अर्चना करने के साथ जो आदमियों के कमेंट्स हैं आपने जो ...।
श्री उपाध्यक्ष: माननीय सदस्य, मंत्री जी ने स्पष्ट कर दिया।
श्री लक्ष्मीनारायण दवे: माननीय उपाध्यक्ष महोदय, वैदिक संस्कृति में वैदिक सभ्यता में हर व्यक्ति के दिल के अन्दर भगवान विराजमान हैं घट-घट में तो इसमें क्या एतराज है? हर शरीर के अन्दर भगवान विराजमान हैं यह हमारी संस्कृति में है हमारी वैदिक संस्कृति में है।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): मुझे प्रसन्नता होती ...(व्यवधान)... श्री हरिसिंह रावत: आप भी मानने लग जाएंगे तो सुख पाएंगे।
श्रीमती लक्ष्मी बारूपाल : माननीय उपाध्यक्ष महोदय, ‘यत्र नार्यस्तु पुजयन्ते तत्र रमंते देवता’ इसलिए करते हैं हमारी संस्कृति के अनुरूप।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): मुझे प्रसन्नता होगी कि माननीय वन मंत्री जी सिंघवी साहब का अनुसरण करें मुझे आपत्ति थोड़े ही है आप करो न शुरूआत।
कैलाश/
2.3.07 17.40 (1) 3j
आप
पिछड जाओगे,
कालूलाल जी
पिछड
जायेंगे... (व्यवधान)
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
उपाध्यक्ष
महोदय, वन
मंत्री जी ने
सही कहा है कि
हर व्यक्ति
के घट में
भगवान बसते
हैं पर हर व्यक्ति
भगवान नहीं
होता है और
भगवान है तो
पूरा मंत्री
मंडल पूजा
करें उसकी ।
बनाओं यहां एक
मंदिर, लगाओ
यहां फोटो करो
उसकी पूजा कौन
आपको मना कर
रहा है । सत्य
बात तो स्वीकारो
कम से कम ।
देवी मां की
पूजा को आप
इससे जोड दो
और सत्य स्वीकार
नहीं कर सको।
(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
सुदर्शन जी से
यह फतवा दिलवा
दो कि यह ठीक
किया है हम तो
मान लेंगे,
हमको उसमें भी
दिक्कत नहीं
है । (व्यवधान)
लेकिन याद रखो
कि ‘
सचिव वेद गुरु
तीन जो प्रिय
बोल भयआत राज
धर्म तन तीनका
होय बेगही
नाश। आप सत्यानाश
करने में क्यों
तुले हो, इतनी ***
तो मत करो,
थोडी सीमा रखो
।
(समय: )
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
श्रीमती
राजकुमारी
शर्मा (सीकर):
अध्यक्ष
महोदय, हम
इनका यह भाषण
सुनने के लिये
नहीं आये हैं
। गीता में
साफ साफ लिखा
है ....
श्री
अध्यक्ष: आप
दोनों में से
एक ही माननीय
सदस्य बोलें
तो ठीक रहेगा
।
श्रीमती
राजकुमारी
शर्मा (सीकर):
अध्यक्ष
महोदय,
मैं यह बोलना
चाह रही हूं
कि हम नये
सदस्य आये
हैं और यह
इतनी देर से
कहे जा रहे
हैं कि उसकी
पूजा कर रहे
हैं उसकी पूजा
कर रहे हो ।
गीता में साफ
साफ कहा है कि
राज सिंहासन
पर किसी को
बैठे हुए देखो
उसे मेरी मूर्ति
मानो । आप क्या
गीता नहीं
पढते हैं और
माननीय सदस्य
इतने पुराने
होते हुए ऐसा
भाषण दे रहे
हैं, इस तरह की
बाते कर रहे
हैं बडी
शर्मनाक लग
रही है हमको ।
हम यह सुनना
नहीं चाहते,
आप अपना
अभिभाषण
पढिये ताकि हम
भी कुछ सीखें,
औरतों जैसी
बातें करने के
लिये यहां आ
गये हैं यह
इनको अच्छा
नहीं लगता ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अध्यक्ष
महोदय,
विराजे हुए
हैं औरतों
जैसी बात करने
में कोई गलत करना
नहीं है, होनी
चाहिये
महिलाओं की
बात तो ।
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल
(देसूरी): इनका
कहने का मतलब
था कि यहां
नारियों की
पूजा होती है
। नारियों की
पूजा होती है
वह देश तो
फलता फूलता ही
है इसमें क्या
बुराई है ।
श्री
अध्यक्ष: बीच
में व्यवान
नहीं डाले
माननीय सदस्या
।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
नारियों की
पूजा होती है
इस देश में
उसको मैं
मानता हूं
लेकिन नारी को
देवी और भगवान
मानकर पूजा
करें तो आप
अपने अपने
घरों में सबको
लगा लो मुझे
कोई एतराज
नहीं है इसमें
।
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल (देसूरी):
हम तो देवियां
ही हैं आपके
घर में देवी नहीं
है क्या, आप
उसकी पूजा
नहीं करते क्या
। घर की लक्ष्मी
तो पूजा करने
लायक ही होती
है उसकी
दुर्गति
करोगे तो आपकी
पहले होगी ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अध्यक्ष
महोदय, आप
लोगों का
परेशान होना
बहुत स्वाभाविक
है ।
श्री
अध्यक्ष: आप
राज्यपाल
महोदय के अभिभाषण
पर जो बोलना
है वह बोलिए।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
मैं उसी पर
बोल रहा हूं
अध्यक्ष
महोदय ।
श्री
अध्यक्ष:
कहां बोल रहे
हैं आप ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
क्या
राजनीतिक
विवेचना नहीं की
जा सकती,
मंत्री मंडल
के सदस्य जो
काम करते हैं
उन पर नहीं
बोला जा सकता
।
श्री
अध्यक्ष: आप
तो रामायण का
दोहा पढ रहे
हैं ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
मंत्री मंडल
के सदस्य जो
संवैधानिक
दायित्व
नहीं निभा पा
रहे हैं उस पर
नहीं बोल
सकते। आपको जो
अच्छा लगे
वैसा ही बोलना
हो तो फिर हम
बैठ जायें । हम
तो हमारी बात
कहेंगे । आज
मंत्री मंडल
के 6 सदस्यों
ने अध्यक्ष
महोदय,
आपके सामने इस
सरकार के
कार्य कलापों
की घोर आलोचना
की और घोर
आलोचना कर के इस्तीफ़े
देने तक की
खबर सारे
समाचार
पत्रों में
करवायी और यह
आरोप लगा,
सारे अखबारों
में छपा है कि
इस सरकार के कारनामे
भ्रष्ट हैं
और भ्रष्टाचार
व्यापक रूप
से आगे बढ रहा
है । प्रशासन
ठीक नहीं है,
मंत्री मंडल
के सदस्यों
की सुनी नहीं
जाती । यह
आरोप राजस्थान
मंत्री मंडल
के 6 सदस्य
लगाकर इनके
हाई कमान के
पास जाये ।
सारा प्रेस
उनको कवर
करें, सारी
बात उनके
सामने हो और
इसके बावजूद
भी मंत्री
मंडल ...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, यह
किस आधार पर
यह कह रहे हैं
कि मंत्री
मंडल के 6 सदस्यों
ने मुख्य
मंत्री जी की
या सरकार की
आलोचना की ।
आपके पास कोई
आधार है क्या
?
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
जी हां ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): बिना आधार
पर कोई बात कर
रहे हैं, कपोल
कल्पित बात कर
रहे हैं, पूरी
कपोल कल्पित
बात कह रहे
हैं ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
इस आधार पर कह
रहा हूं कि
राजस्थान
पत्रिका में
यह समाचार छपा
और मुख्य
मंत्री जी
सहित मंत्री
मंडल के एक भी
सदस्य ने
उसका खंडन
नहीं किया कि
भ्रष्टाचार
के आरोप नहीं
लगा, इस आधार
पर कह रहा हूं मैं
। आपने खंडन
किया क्या ? आप
सरकार के
प्रवक्ता
हैं आपने उस
अख़बार को
पढने के बाद
खंडन किया क्या
?
श्री
अध्यक्ष:
थोडी देर पहले
तो आप कह रहे
थे कि अख़बार की
कोई
ओथेंटिसिटी
नहीं है । अभी
जब मसूदा से
आने वाले
माननीय सदस्य
बोल रहे थे तब
आपने कहा था ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
मैंने आपसे
पूछ लिया था
और आपने
रूलिंग दी है
कि अखबारों को
कोट किया जा
सकता है ।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): आपने
सर्टिफिकेट
दे दिया था,
आपने व्यवस्था
दे दी थी कि आप
भी अख़बार कोट
कर सकते हैं ।
श्री
अध्यक्ष: कोट
कर सकते हैं ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
कोट ही कर रहे
हैं और क्या
है । ताज्जुब
की बात यह है
कि मुख्य
मंत्री जी और
मंत्री मंडल
के सब सदस्य
एक दूसरे पर
आरोप प्रत्यारोप
सार्वजनिक
रूप से लगाने
के बाद,
माननीय समाज
कल्याण
मंत्री ने क्या
कहा था वह
आपने नहीं पढा
। क्या आरोप
लगाये थे कि
चरित्रहीन,
भ्रष्ट और
निकम्मा है ।
मैं वह बात
अपने मुंह पर
नहीं लाना
चाहता । आप भी
मंत्री मंडल
में हो, समाज
कल्याण
मंत्री भी
मंत्री मंडल
में है और
मुख्य
मंत्री जी मूक
दर्शक .... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
सुमेरपुर से
आने वाले
माननीय सदस्य
आप बोलने दें
।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
अध्यक्ष
महोदय, यह
असत्य भाषण
कर रहे हैं, यह
इनके सामने
कहा या किसके सामने
कहा। यह फालतू
की बाते कर
रहे हैं । ऐसी बात
कहीं पर भी
नहीं आई थी ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अगर आप कहो तो
ईटीवी की सीडी
पकड लाऊं ।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
अध्यक्ष
महोदय, यह
भी नहीं आया
कि किसके लिये
कहा, यह फालतू
की अनर्गल बातें
कर रहे हैं यह
तो हम नहीं
सुनना चाहते ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
मदन जी अच्छा
होता आप खंडन
कर देते उसी
समय कि उन्होंने
यह वक्तव्य
नहीं दिया ।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
उन्होंने
नहीं कहा ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अख़बार पढकर
अंदर अंदर तो
आप भी आनंद का
अनुभव कर रहे
थे ।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): आप
किस आधार पर
कह रहे हैं,
किसके लिये
कहा है ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप जिस पृष्ठभूमि
के हैं आप भी
अनुभव कर रहे
थे कि यह ठीक
चल रहा है ।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): आप
यूं ही फालतू
की बातें कर
रहे हैं, असत्य
भाषण कर रहे
हैं ।
श्री
अध्यक्ष: अब
आप विराजिए,
विराजे ।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
इनके पास कोई
मुद्दा नहीं
है । इस
प्रकार की
बातें जो इन्होंने
नहीं कहीं वह
बातें यह कह
रहे हैं । पता
नहीं इनको क्या
हो गया है ।
श्री
अध्यक्ष:
अख़बार को कोट
कर रहे हैं वो
।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): यह
जिस देवी को
मानते हैं
इटली वाली
सोनिया जी
उनको खुश करने
के लिये यह
बोलते जा रहे
हैं । पता
नहीं इनको क्या
हो गया है।
किस प्रकार से
आप *** कर
रहे हैं या क्या
कर रहे हैं यह
आप खुद जाने ।
श्री
अध्यक्ष: यह ***
शब्द हटा
देना ।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
अध्यक्ष
महोदय,
इन्होंने
पहले बोला है
।
श्री
अध्यक्ष:
इनका भी हट
जायेगा ।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
अध्यक्ष
महोदय, जब
पंचायती राज मंत्री
जी बोल रहे थे
तो हिण्डौली
के माननीय
सदस्य ने कहा
कि आप ***
कर रहे है, यह
इन्होंने
बोला है । यह
इन्हीं को
वापस समर्पित
है । जो इन्होंने
बोला वह इनको
ही समर्पित है
।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
... (व्यवधान) और
आप उनको सुन
रहे हो ।
श्री
अध्यक्ष: आप
तो वरिष्ठ
सदस्य है आप
ऐसी भाषा का
प्रयोग ना
करें ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
कौनसी भाषा ?
श्री
अध्यक्ष: *** ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
यह आरोप मदन
दिलावर ने
सार्वजनिक
रूप से प्रेस
में और आपने
भी पढा है और
आपने भी टीवी देखा
है ।
श्री
अध्यक्ष: ***
शब्द की बात
है ।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
आपने बोला कि
नहीं यह बताइए
।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
मैं तो जो
मंत्री जी ने
बोला वह कह
रहा हूं और
आश्चर्य की
बात यह है अध्यक्ष
महोदय, कि
मुख्य
मंत्री जी के
मंत्री मंडल
में आरोप
लगाने वाले और
आरोपित दोनों
ही व्यक्ति
हंसी खुशी साथ
साथ घूम रहे
हैं, स्थिति
स्पष्ट तो
होनी चाहिये ।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
पंचायती राज
मंत्री जी
बोले तो इन्होंने
कहा कि आप *** मत
करो ।
श्री
अध्यक्ष: उन्होंने
कहा है वह भी
निकल जायेगा,
मैं देख लूंगी
प्रोसेडिंग ।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): प्रोसेडिंग देख लेना आप । इसी प्रकार रामगंज मंडी से आने वाले विधायक ने खुला आरोप लगाया कि कोटा में संसदीय सचिव करोडों रुपये की नगर निगम की भूमि जिसकी 9 करोड़ की प्राइज है उस पर जबरदस्ती कब्जा कर के 20 करोड़ रुपये की भूमि पर धार्मिकता की आड लेकर कब्जा करके लाखों रुपया चंदे के रूप में बटोर रहे हैं और चंदे के रूप में बटोर कर के सारी कार्यवाही कर रहे हैं । यह मैंने नहीं भारतीय जनता पार्टी के रामगंज मंडी से आने वाले विधायक ने टीवी पर और अखबारों में सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया है। क्या कर रहे हैं आपकी मुख्य मंत्री जी, क्या कर रहे हैं आपके मंत्री मंडल के सदस्य । आप कोई दायित्व तो निभाना नहीं चाहते और हम से यह कहते हो कि हमको तो प्रधान मंत्री जी ने प्रमाण पत्र दे दिया कि हम बहुत अच्छे हैं । मैं वह प्रमाण पत्र आपके सामने पेश कर रहा हूं जो इनके लोगों के द्वारा, इनके मंत्रियों के द्वारा इस सरकार के कार्य कलापों के बारे में सार्वजनिक रूप से बताये जा रहे हैं ।
अध्यक्ष महोदय, इन सारी बातों को साफ करने के लिये आपसे एक और निवेदन करना चाहता हूं कि आप और हम प्रस्ताव लाये पंजाब सरकार के खिलाफ कि हमको हमारे हक का पानी मिलना चाहिये और जो पानी को रोका है वह गलत रोका है और हमको हमारा अधिकार मिलना चाहिये । सर्वसम्मति से 83 में प्रस्ताव पास हुआ, सर्वसम्मति से हमने आपकी अध्यक्षता में प्रस्ताव पास किया और राजस्थान की मुख्य मंत्री जी पंजाब चुनाव प्रचार में गई जहां भारतीय जनता पार्टी और अकाली दल के घोषणा पत्र में यह लिखा हुआ है कि हम पानी नहीं देंगे और जो संशोधन किया है हम उसको भी निरस्त कर देंगे और पूर्व की कांग्रेसी सरकार ने गलत फैसला किया है हम उस धारा को हटा देंगे । उस थ्यौरी के तहत हमारा अधिकार है हम उनको पानी नहीं देंगे । हमारे सदन की यह भावना होने के बावजूद माननीय मुख्य मंत्री जी वहां जाकर उस चुनावी घोषण पत्र की तारीफ कर, उन सिद्धांतों की तारीफ कर वहां सरकार बनाने के लिये चुनाव प्रचार करें और इसके बाद मुख्य मंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में जाये और इसी माह की तीन तारीख को सार्वजनिक रूप से मुख्य मंत्री प्रकाश सिंह बादल कहे कि नहीं हम अगली विधान सभा में कानून लाकर जो पुराना संशोधन है उसको हटा देंगे और इनका कोई हक नहीं बनता है और हम पानी नहीं देंगे ।
ans/akt 3k 5.3.2007 1750
क्या
यह ठीक था? मुझे
कोई दिक्कत
नहीं है, आप
इसको ठीक माने
तो मुझे उसमें
आपत्ति नहीं
है1 इस प्रकार
आपके सामने
मैं निवेदन
करना चाहता
हूं....( व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
आपत्ति क्यों
नहीं है, आपको
आपत्ति होनी
चाहिये।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
किसमें?
श्री
अध्यक्ष: आप
कह रहे हैं कि
मुझे कोई
आपत्ति नहीं है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
किसमें कोई
आपत्ति....
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): अध्यक्ष
महोदय,सदन को
आपत्ति होनी
चाहिये इस बात
में क्योंकि
सदन में प्रस्ताव
पारित किया
था।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
मैं तो आपका
ध्यान, आपने
सबको एक टेबल
पर बिठाकर
राजस्थान के
हितो का ध्यान
रखकर एक
सर्वसम्मत
प्रस्ताव बनाया
था वैसा ही
प्रस्ताव
राजस्थान की
विधान सभा ने 1983
में शिवचरण जी
के समय में पास
करवाया था। उस
भावना के
विपरित जहां चुनाव
घोषणा पत्र हो
और....(व्यवधान)
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं
पर्यावरण
मंत्री): तब किसने
मंजूरी दी थी
और जो मुख्यमंत्री
थे, दिल्ली
की सरकार के सामने
किसने घुटने
टेके थे। (.व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप जब
ही तो राज कर
रहे हो ना। मैं
चाहता हूं कि
आप थोड़ा लंबा
राज कर लो अगर
हमारी बात मान
लो तो, आप पहले
ही डूबना चाहते
हो तो हमको
एतराज नहीं
है। एतराज
थोड़े ही है,
आप पहले ही
डूबना चाहते
हो, वैसे कोई
कसर तो आपने
छोड़ी नहीं।
जो अन्तर्विवाद
सामने है उससे
तो हमको कुछ
कहने की जरूरत
ही नहीं है।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
कहने को गालिब
ख्याल अच्छा
है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
और इसी प्रकार
माननीय आज की
तारीख में मैं
आपसे निवेदन
करना चाहता
हूं कि
बीपीएल, बहुत
गरीबी की बात
कर रहे हैं,
बहुत उदार मन
है,मुख्यमंत्री
जी जब जनसभाओं
में जाती है
तो उसी स्थान
के,उसी कल्चर
के वस्त्र
पहनती है,
गरीब बच्चों
को गोद में
लेती है, गरीब
की स्कूटी पर
बैठती है और
भावनात्मक
रूप से इमोशनल
रूप में उनको
प्रभावित
करने का एक
कारगर प्रयास
करती है और
भावनात्मक
रूप चूंकि यह
हिन्दुस्तान
संस्कृति का
पुजारी है और
भावनात्मक
रूप से ऐसे
कलात्मक
प्रदर्शन से
चुनाव के समय
भी प्रभावित
हो गये। वैसा
कलात्मक
प्रदर्शन
करने के साथ
मन में गरीब
के प्रति,
उसकी सेवा
करने की इच्छा
भी होनी
चाहिये। इच्छा
है नहीं और
प्रदर्शन है।
आज की तारीख
में
इन्होंने
बीपीएल
परिवारों की
घोषणा कर दी ।
नई लिस्ट
जारी कर दी।
आज की तारीख
में लगभग पाँच
लाख लोगों ने
अपील की है,
मानननीय
मंत्री जी एक
भी अपील का
फैसला किया क्या?
आप जवाब नहीं
दे रहे हो।
पन्द्रह दिन
पहले चिट्ठी
लिखी कि राजस्थान
के किस-
किस जिले में
जिन बीपीएल
परिवारों के
नाम सम्मिलित
नहीं थे उनके
नाम लिखाने के
लिए कितनी
अपीलें, तीस
हजार अपील तो
मेरे बूंदी
में है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आप मांफ
करेंगे, यह
बीपीएल का
सर्वे किसने
करवाया था ? 2002-3
में जो कुकर्म
आपने किया....(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप बिराजिये।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री):
आपने संख्या
घटाई। इसका
सारा दोष है
तो अशोक जी
गहलोत जो उस
समय मुख्यमंत्री
थे, जिन्होंने
सर्वे
प्रारम्भ
किया, उसी समय
पूरा हुआ अध्यक्ष
महोदय....(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अब आप बिराज
जाइये।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,पंजाब
में पानी की
बात कर रहे
हैं। मैं स्पष्ट
कह देना चाहता
हूं, राजस्थान
की सरकार
राजस्थान के
किसानों के
लिए कटिबद्व
है। राजस्थान
का एक बूंद भी पानी,
राजस्थान का
हिस्सा इंडस
वाटर ट्रीटी
में था। 1981 के
समझौते में
था, 8.6 एमएफ पानी
जिसमें .6 एमएफ
पानी तो यह
छोड़कर आये थे
आज हमसे यह
बात कर रहे
हैं जो खुद
राजस्थान के
हितो को उस
समय छोड़कर
आये, तत्कालीन
प्रधानमंत्री
जी के आगे
घुटने टेककर
आये। (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
जी, मैं यह बात
नहीं कर रहा,
मैं बात कर
रहा हूं चुनाव
घोषणा पत्र
की..(व्यवधान)
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय, एक तो बीपीएल
के बारे में
आपने कहा, मैं
कहता हूं बीपीएल
का सर्वे आपने
किया, इसके
बावजूद भी आज
दिन तक, आपके
टाइम में भी
बीपीएल की
सूचियां जारी
होती थी उसमें
किसी
प्रकार की
अपील का
प्रावधान
नहीं था। कोई
संशोधन पाँच
साल तक नहीं
कर सकते थे।
पहली बार हमने
यह प्रावधान किया बिना
लिमिटेशन के
जब व्यक्ति
को नाम ध्यान
आये कि मेरा
जुड़ना
चाहिये तब
जुड़वा सकता
है। किसी का
गलत जुड़ा है
तो कटवा सकता
है। इतना बड़ा
प्रावधान
हमने किया।
इतना बड़ा वेरिएशन
आपकी वजह से।उस
जगह हमने
रिसर्वे
करवाया। आज
अपीले जितनी
है हम त्वरित
गति से निस्तारण
कर रहे हैं और
जहां नाम
जोड़े जा रहे
हैं वहां सब
नामों को
जोड़ेगे।
हमने आश्वस्त
किया कि चाहे
दो लाख, ढाई
लाख, तीन लाख
जो भी और नाम
जुड़गे सबको
जोड़ेगे। आप
कैसी बात कर
रहे हो।(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक नाम
नहीं जोड़ा।
तीस हजार
अपीलें तो
केवल बूंदी
जिले की है जो
इतना सा जिला
है। एक नाम
नहीं जोड़ा और
बात करते हो।
आपने नये
बीपीएल होल्डर्स
को आज तक
बीपीएल कार्ड
बनाकर नहीं
दिया। उनको
मेडीकल रिलिफ
के कार्ड नहीं
दिये। एक आदमी
को नहीं दिया।
(व्यवधान)
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं
पंचायती राज
मंत्री):
मेडीकल रिलिफ
और अनाज के
कार्ड 21 लाख पहले....(
व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):बीपीएल
की सूची जारी
कर दी और एक
आदमी को यह
संवेदनशील
सरकार,
पारदर्शी
सरकार, एक
आदमी को
बीपीएल कार्ड
नहीं दे पाई। (व्यवधान)
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
उनको मेडीकल
की सुविधा और
गेंहू वैसे की
वैसे ही मिल
रहे हैं
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
नहीं मिल रहे
।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
सबको मिल रहे
हैं। (व्यवधान)
अभी तो हमने
इन दो मामलों
में बीपीएल की
नई सूची को
लागू ही नहीं
किया क्योंकि
सूची संशोधित
होनी है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
एक बीपीएल को
नहीं दिया।(व्यवधान)
वह कार्ड
देखते हैं और
कार्ड नहीं है
तो घर जाओं, एक
बीपीएल वाले
का नहीं हो रहा।
जो सूची है
उसमें
एक आदमी को
भी बीपीएल
कार्ड और
मेडीकल रिलिफ
कार्ड आज तक
जारी नहीं
किया।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री): सुन
लीजिए,आपकी जानकारी
के लिए बता
रहा हूं कि अभी तक
हमने नई सूची
इन दो मामलों
में लागू नहीं की।
मेडीकल और
राशन जो मिलता
है उसकी
पुरानी सूची के
आधार पर ही...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
बीपीएल कार्ड
की सूची(व्यवधान)
न तो गेंहू
दिया जा रहा
है.....
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
अपीले पेंडिग
है1 जब
तक अपीलों का
निस्तारण
नहीं होगा, इन
दो मामलों में
हमने सूची जारी
नहीं की।(व्यवधान)
बिना बेस के
बात कर रहे
हो।
सदन
की कार्यवाही
विधान
सभा की बैठक
के निर्धारित
समय में
वृद्वि
डा. ओ.
पी. महेन्द्रा
( उप मुख्य
सचेतक): अध्यक्ष
महोदय, मैं
प्रस्ताव
करता हूं कि
सदन का समय एक
घंटे के लिए
और बढाया जाए।
श्री
अध्यक्ष: क्या
सदन की सहमति
है ?
(स्वीकृत)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
हरिमोहन जी के
भाषण खतम होने
तक।
श्री
अध्यक्ष: सदन
का समय एक
घंटे के लिए
बढ़ाया गया।
डा. ओ.
पी. महेन्द्रा
(उप मुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, सदन का
समय माननीय
सदस्य के
भाषण की
समाप्ति तक
बढ़ाया जाए।
श्री
अध्यक्ष: एक
घंटे के लिए
बढ़ा दिया, अब
आप कह रहे हैं
माननीय सदस्य
के
भाषण...(व्यवधान)
धन्यवाद
प्रस्ताव पर
वाद विवाद
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह स्वंय
यह स्वीकार
कर चुके हैं,
मैं बहुत
संक्षिप्त
में अपनी बात
कह रहा हूं...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): मैं निवेदन
करूं, आप जो
कुछ कह रहे
हैं बिना तथ्य
के आधार पर कह
रहे हैं। जो
अपीलें पूरे
राजस्थान
में बीपीएल
परिवारों ने
की .....
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप यह बात
कैसे....(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): उसमें
मैं आपको कह
रहा हूं 82539
अपीलों का
निस्तारण हो
चुका है,कुल
जो अपीलें आई
उनमें से 86539 अपीलों
का निस्तारण
हो चुका है।
मैं जिम्मेवारी
से कह रहा
हूं। कोई भी
आंकडा सही
नहीं है, कोई
भी बात सही
नहीं है। सदन
है, तो जिम्मेवारीह
से तो बोले,
गम्भीरता से
बोले। (व्यवधान)
नहीं है तो आप
चुनौती दे
दें, मैं
आंकडे रख रहा
हूं...
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
मेरी चुनौती
के बजाए मदन
दिलावर जी की
चुनौती स्वीकार
करो श्रीमान,
मेरी चुनौती
में क्या धरा
है। मेरी
चुनौती तो रोज
यहां बोलते
हैं उस किस्म
की है। मैं
दावे से
कहता हूं कि
एक बीपीएल
परिवार को,
इन्होंने
घोषण कर दी कि
यह सूची है, यह
बीपीएल परिवार
के सदस्य है,
न उनके इलाज
की सुविधा है
न उनको गेंहू
की सुविधा है।
यह खड़े होकर
कह दे। मैं
कालूलाल जी की
बात को स्वीकार
करूंगा कि नई
लिस्ट आपने
जो डिक्लियर
की और केन्द्र
से
पूरा पैसा ले रहे
हैं, केन्द्र
पूरा सहयोग कर
रही है।(व्यवधान)
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): न तो
पुरानी सूची वालों
को गेंहू दिया
जा रहा है और न
नई सूची वालों
को गेंहू दिया
जा रहा है,
पूरा का पूरा
इनके कार्यकर्ता
ब्लेक कर रहे
हैं।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
नई सूची आई
उसमें चूंकि परिवर्तन
होना है इसलिए
हमने कहा,
राशन कार्ड और
मेडीकल की नई
सूची इसलिए
जारी नहीं की
कि कुछ नाम और
एड होने है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
कन्टीन्यूइंग
प्रोसेस है(व्यवधान)
यह इंतजार कर
रहे हैं..
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
किसी का नाम
कटता है तो कार्ड
केंसिल करना
पड़ता है
इसलिए अध्यक्ष
महोदय, बराबर
इक्कीस लाख
लोगों को जो
इतने वर्षों
से राशन मिल रहा
है उनको...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अध्यक्ष
महोदय,आप
फरमाए, नाम एड
होना तो
कन्टीन्यूइंग
प्रोसेस यह
बता रहे हैं
और यह कह रहे
हैं कि हम तो इंतजार
करेंगे नाम
जुड़ने के बाद
दी इन गरीबों
को जब तक इनको
बेमौत मरने
देंगे, एक को
भी एक पैसा
इलाज का नहीं
देंगे, बीपीएल
की सूची हमने
केन्द्र के
कहने से
प्रकाशित कर
दी लेकिन हम
इनकी व्यवस्था
नहीं करेंगे,
यह स्वंय
सरकार स्वीकार
कर रही है।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
जिन लोगों ने
अपील की है
मेरे यहां तो
उनके नाम जुडे
हैं, आपके
यहां किसी ने
अपील नहीं की
होगी।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप तो मुझे यह
बता दीजिए ,
आपके यहां अपील
की है, अध्यक्ष
जी के यहां
जुड जए कोई नई
बात नहीं है
लेकिन इसके
बावजूद अपील
भी(व्यवधान)
मेरी बात
सुनिये आप,
आपके यहां
बीपीएल में
आपने
नाम भी
जुड़वा लिये,
आपने सूची भी
घोषित करवा
ली, मैडम क्या
एक आदमी का भी
इलाज करवा
पाई, एक आदमी
को भी गेंहू
दिलवा पाई ? उस
सूची को चाटे
क्या जो इन्होंने
घोषित कर दी।
एक आदमी भी
उसमें
लाभान्वित
नहीं हो रहा।
नाम जुड़वाकर
खुश हो जाए
लेकिन व्यवहार
में तो उन
गरीबों को कुछ
नहीं मिला। व्यवहार
में तो यह
सरकार बिल्कुल....(व्यवधान)
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
आपने कहा कि
सूचियों में कम
हो गई, पहले 21
लाख थे। मैं
फिर कह रहा
हूं कि 21 लाख
लोगों
को,जिनको
वर्षों से दे
रहे हैं उनको
बराबर दोनों
सुविधाएं दे
रहे हैं। अब
नई सूची में,
जब यह फाइनल
होगी उसके बाद
नये के आधार
पर देंगे
लेकिन अभी तो
पुराने आधार
पर बराबर दे
रहे हैं। 21 लाख
लोगों को राशन
और मेडीकल की
सुविधा बराबर
मिल रही है।
क्या आलोचना
करना चाहते
हैं ?
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली): आप यह
घोषित कर
दीजिए( व्यवधान) नये
बीपीएल
परिवारों की
सूची वापस
बनाते हैं....
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
क्या कहना
चाहते हैं एक
तो आपने कहा
कम नहीं होना
चाहिये, 21 लाख
लोगों को
मिलना चाहिये,
21 लाख को बराबर
दे रखा है फिर
क्या कहना
चाहते हैं। (
व्यवधान)
दुर्गा/त्रिपाठी
050307 1800 3l
इसके
बाद नयी सूची
जारी करेंगे,
नये कार्ड
बनायेंगे तो
उसके बाद नये
कार्डों पर
देना शुरू कर
देंगे। यह स्पष्ट
इस सदन में
पहले भी घोषणा
की है कि 3-4
महीने तक इसको
कंटीन्यू
करेंगे। (व्यवधान)
आपकी समझ के
बाहर है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आपने
सार्वजनिक
रूप से केन्द्र
सरकार को
सूचित किया है
कि हमने
बी.पी.एल. की
सूची जारी कर
दी है।
बी.पी.एल. की
सूची जारी कर दी
है। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
नगरीय विकास
मंत्रीजी कुछ
कहना चाह रहे हैं।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय, कई
मामले हैं,
केन्द्र
द्वारा
संचालित
जितनी भी
हमारी
योजनाएं हैं
उनमें जारी कर
दी परन्तु दो
चीजें गरीबों
को चूंकि ज्यादा
जरुरत होती है
और कार्ड अभी
कम्पलीट
नहीं हुए
इसलिये
पुराने ही
लागू कर रखे हैं।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
नगरीय विकास
मंत्रीजी भी
कुछ कह रहे
हैं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
नगरीय विकास
का बी.पी.एल. से
क्या
लेना-देना?
श्री
अध्यक्ष: वे भी
कुछ कह रहे
हैं, आप सुन
लीजिये।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): हिण्डौली
से आने वाले
माननीय सदस्य
लगातार
गलतबयानी कर
रहे हैं। इन्होंने
पहले तो मेरे
पर आरोप लगाया
कि माननीय मुख्य
मंत्रीजी के
लिये ऐसा कहा,
वैसा कहा। उसी
प्रकार से
मिशन बसेरा के
बारे में और
घरौंदा के
बारे में कहा
कि आपने
गवर्नर साहब
से घोषणा तो
करवा दी, उनके
मुख से कहलवा
तो दिया परन्तु
न तो मिशन
बसेरा में एक
भी मकान
बनाया, न घरौंदा
में एक मकान
बनाया। मैं
आपको निवेदन
करना चाहूंगा
कि हमने
पालड़ी मीणा
में, गोबिन्दपुरा
में और बक्शावाला
में मिशन
बसेरा के तहत 3
हजार मकान बनाये
हैं। उनमें से
करीब 903 मकान 10
रुपये रोज में
आबंटित किये
हैं, बाकी
मकान भी
आबंटित कर
देते पर कच्ची
बस्तियों के
सम्बन्ध
में माननीय
उच्च न्यायालय
का स्टे आ
जाने की वजह
से वह मकान आबंटित
नहीं हो पाये।
इसी प्रकार से
माननीय अध्यक्ष
महोदय, घरौंदा
योजना के बारे
में बताऊंगा
कि यह 25 कस्बों
में हमने लागू
की है। इसमें 3135
मकान हमारे निर्मित
हो चुके हैं।
उनमें से 2099
आवासों का कब्जा
दे दिया है और 3111
आवास आबंटित
कर दिये हैं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जहां
तक अब ..(व्यवधान)
हां, बोल रहा
हूं, काहे को
बुलवाते हो। मैं
जितना कम
बोलूं, वह ठीक
है आप लोगों
के हित में
वही है। छेड़ो
मत, छेड़ो मत।
(व्यवधान)
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): एक
बी.पी.एल. का
मैं भी बता
देता हूं।
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
बी.पी.एल. की अब
तक प्राप्त
सूचना के
अनुसार 6 लाख 4
हजार 301 अपील
दायर हुई, इनमें
से 86539 का निस्तारण
हो चुका है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
यह मैंने 5 लाख
बतायीं, मैंने
तो डेढ लाख और
कम बताये, इतनी
अपीलें जारी
हो गयीं तो
माननीय
कालूलालजी ने
कहा कि इतनी
तो अपीलें ही
जारी नहीं
हुई। वे साढे
छह लाख बता
रहे हैं। आप
सच हो कि वे सच
हैं, बोलें
आप। (व्यवधान)
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
मैंने कब कहा?
मैंने कब कहा,
अपीलें जारी
नहीं हुईं। आप
आपकी मर्जी से
ही कह रहे हो।
(व्यवधान) मैंने
तो यह कहा था
कि अपीलों का
निस्तारण हो
रहा है और
जितने भी नाम
जुड़ेंगे और बी.पी.एल.
की कैटेगिरी
में आयेंगे,
उनको जोड़ेंगे।
मैंने यह नहीं
कहा कि इतनी
नहीं आयीं।
आपकी मर्जी से
ही असत्य बोल
रहे हैं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं और
निवेदन करना
चाहूंगा कि इस
प्रकार आपने
विधवाओं को 10
किलो गेहूं
देने का वादा
किया था ना इस
सदन में। मुख्य
मंत्रीजी से
कहलवाया था।
दे रहे हो क्या
10 किलो गेहूं।
एक विधवा को
दो महीने बाद
आज तक 10 किलो
गेहूं के बजाय
कह दिया हम तो 5
रुपये किलो से
ही देंगे।
विधवाओं को
मदद देनी थी,
गेहूं 10 किलो
देना था। आप
अपने कदम से
हटाकर, यहां
वाह-वाही
लूटकर के,
तालियां
बजवाकर के, आप
उन विधवाओं की
बात नहीं कर
रहे हो, आप
बी.पी.एल.
परिवारों की
बात नहीं कर
रहे हो, किसान
कोई आपसे
मांगने आता है
तो आप गोलियों
की बात करते
हो और फिर भी
आप संवेदनशील
प्रशासन देने
की बात करते
हो। तारीफ
करेंगे आपकी।
संवेदनशील
प्रशासन, इन
गरीबों की हत्या
करना, गरीबों
पर गोलियां
चलाना,
बी.पी.एल. परिवारों
को इलाज की व्यवस्था
नहीं करना, बसेरा
के अन्तर्गत
लोगों को
वायदे के
अनुसार नहीं
बसाना, इन
सबको करने के
बाद भी अगर आप
संवेदनशीलता
की बात करो तो
मुझे कुछ नहीं
कहना। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं तो
संक्षेप में
और अन्त में
यह निवेदन
करता हूं कि
हमारे तो
सुझाव हैं,
हमारी तो
भावना है,
आपको जो करना
है, वह आप
करें। सरकार
जिस प्रकार से
चल रही है,
चलायें।
मंत्रिमण्डल
जिस प्रकार से
चल रहा है,
उसको उसी गति
से चलने दें।
आप लोग जिस
प्राकर से
अलग-अलग ढंग
से अपनी अपनी
अभिव्यक्ति
सरकार और
नेतृत्व के
खिलाफ करते
हैं, मेहरबानी
करके यथावत
करते रहें। हम
आपकी बात से
बहुत खुश हैं
कि आप कुछ तो
कर रहे हैं। हमसे
ज्यादा कर
रहे हो आप इस
सरकार के लिये
कि कैसी सरकार
चल रही है।
आखिर में मैं
तो एक ही यह
छोटा सा शैर
है, बशीर बद्र
का शैर है-
‘सितारों
को आखों में
महफूज रखना,
मुसाफिर
हैं हम भी,
मुसाफिर हो
तुम भी,
मिलेंगे
किसी मोड़ पर
फिर कभी हम,
हमारी
नसीहत को याद
रखना।
श्री
अध्यक्ष:
वाह-वाह। शैर
पढ़ा नहीं
करते हैं,
सुनाया करते
हैं। आपने तो
पढ़ लिया।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
हां पढ़ लिया।
गलत बोलने से
तो अचछा है कि
पढ़कर सुना
दिया।
श्री
अध्यक्ष: याद
करके सुनाते।
एक
माननीय सदस्य:
आज हरिमोहनजी
जमा नहीं
मामला, सारी
बातें असत्य
हो गयीं आपकी।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
श्री रामलाल
शर्मा।
श्री
रामलाल शर्मा
(चौमूं):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
महामहिम राज्यपाल
महोदय ने 28
तारीख को जो
अभिभाषण इस
सदन में दिया
और मसूदा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने इस अभिभाषण
के समर्थन में
अपना प्रस्ताव
रखा उसका मैं
समर्थन करते
हुए अपने
विचार और
सरकार ने 3 साल
के कार्यकाल
में जो कार्य
किये हैं उनका
जिक्र करना
चाहता हूं।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, अभी
हिण्डौली से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने महिमहिम
राज्यपाल के
अभिभाषण पर
अपने विचार
प्रकट किये। मुझे
ऐसा लगता है,
इन्होंने
विचार प्रकट
किये थे उस
समय भी मैंने
कहा था कि मन
से विचार
प्रकट करना
मस्तिष्क से
नहीं। उन्होंने
पूरे विचार
मात्र
मस्तिष्क से
प्रकट किये,
मन से नहीं।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, सरकार
ने 3 साल के अन्दर
जो कार्य किये
हैं, उन्हीं
कामों का
जिक्र इस
अभिभाषण में
किया गया।
पिछले विगत 5
साल की जो
कांग्रेस
गवर्नमेंट रही,
न शिक्षा के
क्षेत्र में
काम किया, न स्वास्थ्य
के क्षेत्र
में काम किया,
न सड़क बनाने
का काम किया, न
स्कूल खोले
और न उनके अन्दर
कोई टीचर
लगाये। राजीव
गांधी
विद्यालयों के
बारे में मैं
कहना चाहता
हूं कि शिक्षा
के क्षेत्र
में राजीव
गांधी
प्राइमरी स्कूल
खोली लेकिन
टीचर लगाये 1200
रुपये के,
मात्र चूना
लगाने वाले
टीचर, जिन्होंने
छात्रों के
भविष्य के
साथ भी चूना
लगाया और खुद
के व्यक्तिगत
जीवन के साथ
भी चूना
लगाया। मैं
धन्यवाद
देना चाहता
हूं इस सरकार
को कि विगत 3
साल के अन्दर
लगभग्हजार
स्कूलें नयी
खोलीं और
क्रमोन्न्त
करने का काम
किया है। यह वसुंधरा
राजे सरकार ने
किया है। ऐसे
एक नहीं
अनेकों एतिहासिक
काम किये हैं।
लूणी
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने भी अपने
विचार प्रकट
करते हुए कहा
कि सरकार ने 3
साल के अन्दर
जो काम किये
हैं यदि उन
कामों का
लेखा-जोखा प्रस्तुत
करें तो मैं
समझता हूं कि
कितने ही वर्ष
लग जाएं लेकिन
उन कामों को
पूरा नहीं
किया जा सकता।
अभी
शिक्षा के
क्षेत्र में
बात करें, जब
सरकार बनी थी
उस समय हर
युवा के मन
में यह था कि
विगत 5 साल की
जो सरकार
कांग्रेस की
रही उसने एक
भी युवा को
नौकरी देने का
काम नहीं
किया। लेकिन
वसुंधरा राजे
की सरकार ने
सत्ता में
आते ही सबसे
पहले
शिक्षकों की
भर्ती की
प्रक्रिया
शुरू की। लगभग
42 हजार
शिक्षकों की
भर्ती हो चुकी
है, 35 हजार की भर्ती
प्रक्रिया
में है। जो
काम सरकार ने
किये हैं उनकी
बात तो करते
नहीं। बात वह
करते हैं कि
अभिभाषण से
बहुत दूर,
सिर्फ कल्पनाओं
की बात करने
का काम इस सदन
के अन्दर
प्रतिपक्ष के
सदस्य कर रहे
हैं। और यदि
उनसे हम जब
बाहर मिलते
हैं और पूछते
हैं तो
कहते हैं कि
हमारा विरोध
तो मात्र
विरोध करने के
लिये है। हम
प्रतिपक्ष
में हैं
इसलिये विरोध
कर रहे हैं।
बाकी सरकार ने
उल्लेखनीय
काम किये हैं।
इस बात का तो
हम भी समर्थन
करते हैं।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, इस 3 साल
के कार्यकाल
में चिकित्सा
के क्षेत्र
में जो
काम इस सरकार
ने किये हैं
उनका जिक्र
मैं थोड़ा
करना
चाहूंगा। पिछले
5 साल की
कांग्रेस
सरकार ने एक
भी आयुर्वेदिक
औषधालय नहीं
खोला, एक भी
यूनानी
औषधालय नहीं
खोला। एक भी
सी.एच.सी. को
क्रमोन्नत
करने का काम
नहीं किया, एक
भी नयी
पी.एच.सी. नहीं
खोली। कुछ
आंकड़े मैं
आपके सामने
रखना
चाहूंगा। 3
साल के
कार्यकाल में
लगभग 686 सब सेण्टर
इस सरकार ने
खोले और
आज पूरे
राजस्थान
में एक भी ऐसी
ग्राम पंचायत
नहीं है जो सब सेण्टर
से वंचित हों।
राजस्थान की
सम्पूर्ण
ग्राम
पंचायतें सब-सेण्टर
से युक्त
हैं। पिछली
गवर्नमेंट ने
मात्र 18
पी.एच.सी. 5 साल
में खोली और
हमने मात्र 3
साल के अन्दर
64 पी.एच.सी.
खोलीं।
हरिमोहनजी, आप
ध्यान से
सुनना। पिछले
5 साल में एक भी
सी.एच.सी. को क्रमोन्न्त
करने का काम
नहीं किया। इन
3 सालों के अन्दर
हमने 51 सी.एच.सी.
को क्रमोन्नत
करने का काम
किया।
आयुर्वेदिक
औषधालय एक भी
नहीं खोला,
हमने 65
आयुर्वेदिक
औषधालय खोले।
Vps-akt-05.03.07-18.10-3m-1
होम्योपैथिक औषधालय एक भी नहीं खोला ... (व्यवधान) किनके?
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि इस सरकार ने काम तो बहुत किये हैं लेकिन न तो यह अपने मुख से कुछ कहना चाहते हैं और न यह सुनने के आदी हैं।
माननीय अध्यक्ष महोदय, जिस क्षेत्र में मैं रहता हूं उस क्षेत्र का एक छोटा सा उदाहरण मैं आपके माध्यम से देना चाहता हूं। मात्र चिकित्सा के क्षेत्र के अन्दर मेरे दो सी.एच.सी. है, दोनों सी.एच.सी. के अन्दर डाक्टर्स पहले एक-एक, आधा-आधा किलोमीटर दूर रहते थे। एक भी चिकित्सक होस्पिटल के अन्दर नहीं रहता था और आज स्थिति यह है कि दोनों सी.एच.सी. के अन्दर आवास बनकर डाक्टर्स के तैयार हैं। डाक्टर्स 24 घंटे उसी परिसर के अन्दर रहते हैं। समुचित चिकित्सा की व्यवस्था की गयी है। माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहता हूं कि ग्रामीण क्षेत्र के अन्दर जन हित सुरक्षा योजना प्रारम्भ की गयी और जन हित सुरक्षा योजना के माध्यम से जो सहायता दी जाती है, उस सहायता से लाखों ग्रामीण महिलाओं को उस योजना का लाभ मिला है। माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि मात्र चिकित्सा के क्षेत्र में ही नहीं, सड़कों के क्षेत्र में भी इस सरकार ने तीन साल में चाहे किसी भी योजना में सड़कें बनी हो, चाहे प्रधान मंत्री सड़क योजना हो, चाहे मिसिंग सड़क योजना हो, चाहे सड़कों का सुदृढ़ीकरण का काम हो, निश्चित रूप से इन तीन साल के कार्यकाल के अन्दर उल्लेखनीय कार्य सड़कों के क्षेत्र में हुए हैं। मात्र यह कहना कि इन तीन साल के कार्यकाल में पैसा चाहे सेन्टर से आया हो, चाहे स्टेट गवर्नमैंट का लगा हो लेकिन निश्चित रूप से ग्रामीण क्षेत्र के किसानों का पैसा, जो अंश के रूप में स्टेट को मिलता है, न कोई विशेष पैकेज केन्द्र की यी.पी.ए. सरकार ने इस राजस्थान की सरकार को दिये हैं। हमारा हक और जितना हिस्सा बनता था, उसी पैसे को हमने लेकर इस राजस्थान के क्षेत्र को पूरे विकसित करने का काम किया है।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से एक और निवेदन करना चाहता हूं कि कृषि के क्षेत्र में इस सरकार ने जितने काम किये हैं, चाहे वह कृषि विपणन बोर्ड के द्वारा सड़क बनाने का काम हो, चाहे किसानों द्वारा किसान महोत्सव, चेतना-यात्रा निकालने का काम हो और निश्चित रूप से सरकार जो भी बने, चिकित्सा के क्षेत्र में, सड़कें बनाने के क्षेत्र में, पानी के क्षेत्र में सभी काम करते हैं लेकिन पहली बार इस सरकार ने एक जाग्रति का काम किया है। जन-जाग्रति का काम किया है और किसान महोत्सवों के माध्यम से इस सरकार ने जन-जन तक यह पहुंचाने का काम किया है कि इस राजस्थान के लोगों के लिए भविष्य में होने वाली चेतावनी को प्रगट करने के लिए पानी को किस तरीके से, बरसात के बहते हुए पानी को किस तरीके से रोका जाए, पानी के महत्व को बताया गया और इस पानी के महत्व को आने वाले समय के अन्दर इन किसान महोत्सव से लाखों लोगों को जन-जाग्रत करने का काम भी इस सरकार ने किसान महोत्सव के माध्यम से किया है। माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मेरे विधान सभा क्षेत्र की बात करूं। कृषि विपणन बोर्ड के माध्यम से 2 करोड़ 56 लाख रुपये की 8 सड़कें जहां एक मात्र मेरे विधान सभा क्षेत्र में बनी हैं तो निश्चित रूप से राजस्थान के 200 विधान सभा क्षेत्रों में कृषि विपणन बोर्ड ने भी अनेकों सड़कें बनाने का काम किया है। मैं इस सरकार के तीन साल के जो सबसे बड़े उल्लेखनीय काम किया है, कभी-कभी सत्य कहने में भी विपक्ष को झिझकना नहीं चाहिए। मैं प्रतिपक्ष के माननीय सदस्यों से यह पूछना चाहता हूं कि विधवाओं की पेंशन किसने बढ़ायी? पूर्व सैनिकों की विधवाओं की पेंशन किसने बढ़ायी? जन-जाति क्षेत्र के अन्दर छात्राओं को साइकल देने का काम किस सरकार ने किया? छात्राओं को पढ़ने के लिए नि:शुल्क पुस्तकें किस सरकार ने दी? छात्राओं को नि:शुल्क बस की, परिवहन की व्यवस्था किस सरकार ने की? इन बातों का जवाब मात्र हम विपक्ष में है और विपक्ष के नाते हम विरोध कर रहे हैं, ऐसा तो उचित नहीं समझता।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहता हूं कि राजस्थान के मात्र 6 जिले सम्पूर्ण गारंटी रोजगार योजना से जुड़े हैं। उदयपुर, बांसवाड़ा, झालावाड़, करौली, सिरोही है। मैं प्रतिपक्ष के माननीय सदस्यों से निवेदन करना चाहूंगा कि आपकी यू.पी.ए. सरकार जो केन्द्र के अन्दर बैठी हुई है, कभी भी आपने एक पत्र ऐसा नहीं लिखा होगा कि राजस्थान की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इस योजना के अन्दर अन्य जिलों को भी शामिल करना चाहिए और पहली बार पूरे भारत में, सम्पूर्ण देश में चलने वाली इस योजना में मात्र राजस्थान ही एक ऐसा पहला स्टेट है जिसने अपने प्रबंधन के माध्यम से इस योजना को क्रियान्वित करने का काम किया है और लगभग 146 करोड़ रुपये इस योजना के तहत खर्च करके पूरे भारत में पहला स्थान प्राप्त करने का गौरव इस राजस्थान ने प्राप्त किया है। राजस्थान की सरकार ने प्राप्त किया है।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहता हूं कि मात्र सड़क और स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं, सरकार ने पेयजल के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय काम किये हैं और पेयजल की स्थिति तो आज यह है कि चाहे कोई भी ढाणी हो, चाहे कोई भी गांव हो, कोई भी मकान हो यदि पेयजल की व्यवस्था नहीं है तो उसके लिए विशेष रूप से आने वाले समय के अन्दर और पिछले, चाहे हैण्डपम्प लगाने की बात हो, चाहे ट्यूबवैल खोदने की बात हो, चाहे पाइप-लाइन बिछाने की बात हो, मैं तो नहीं समझता कि किसी भी क्षेत्र के अन्दर पेयजल में कोई दिक्कत है। निश्चित रूप से सरकार संवेदनशील होकर पेयजल की और चिकित्सा की समुचित व्यवस्था करने में लगी हुई है। निश्चित रूप से राज्यपाल महोदय ने अपने अभिभाषण के अन्दर जिन मनतव्य के आधार पर अभिभाषण दिया है, निश्चित रूप से सरकार उस पूरे मन के साथ, विवेक के साथ काम कर रही है और आने वाले समय के अन्दर वैसा ही काम और तीव्र गति से हो पाएगा।
माननीय अध्यक्ष महोदय, ज्यादा कुछ मैं निवेदन करना नहीं चाहता। आने वाले समय के अन्दर दो प्रमुख समस्या और चुनौती हम सबको दिखाई देती है और वह दो समस्या और चुनौती जो मैं समझता हूं, एक पानी की समस्या और एक खेती के ऊपर आधारित इण्डस्ट्रीज लगाने की समस्या। जब तक प्रत्येक किसान के खेत को पानी और प्रत्येक युवा को रोजगार से नहीं जोड़ेंगे तब तक सम्पूर्ण राजस्थान को विकसित क्षेणी में ला पाने में हम सफल नहीं हो सकते और एक दूसरा, माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से यह निवेदन भी करना चाहूंगा, आप भी ग्रामीण क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं और आपने भी ऐसा महसूस किया होगा कि जिस तीव्र गति से युवावस्था के अन्दर हार्ट-फेल हो, हार्ट के ऊपर अटेक हो, हार्ट का ब्लास्ट होना और यह एक गम्भीर रूप लेता जा रहा है। क्यों न इस विषय के अन्दर भी कोई सेमीनार आयोजित करके, कोई संगोष्ठी आयोजित करके, किस वजह से आज मनुष्य का जीवन किन वजह से हानिकारक हो रहा है। किस खान-पान की वजह से, किस खेती के उत्पादन की वजह से यह भी अपने लिए एक चुनौती का विषय है और मैं समझता हूं कि इस बारे में भी कोई योजना ऐसी बने कि जिस तीव्र गति से युवाओं के ऊपर बीमारी, जो अटेक के रूप में आ रही है, चाहे वह मस्तिष्क के ब्रेन हेमरेज के माध्यम से हो, चाहे हार्ट-अटेक के रूप में हो या कोई खान-पान के माध्यम से, माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे मन की पीड़ा यह है कि जिस अनाज के लिए पहले ग्रामीण क्षेत्र में यह कहते थे कि अनाज से दूर रहो। नहीं तो यह तीव्र गति से, जिसको मैं मारवाड़ी में कहना चाहूंगा कि राबड़ी या खिचड़ी बनाते हुए जो कहते थे कि इससे दूरी बनाकर रखो, नहीं तो यह लात मारेगी। आज किस वजह से उस अनाज में ताकत नहीं है कि जिस वजह से छोटा बच्चा भी उसको हिलाने के अन्दर आराम से बैठकर हिला सकता है।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि कृषि क्षेत्र में जो रासायनिक खाद का उपयोग करते हुए हम मनुष्य के जीवन को खतरे में डालते जा रहे हैं। इस जैविक खेती के माध्यम से मनुष्य के इस जीवन को बचाने के लिए, इसको प्रोत्साहन देने के लिए अधिक से अधिक हम काम कर सकें, ऐसी मेरी मन की इच्छा है। दूसरा पानी, जल ही जीवन है, तो-
रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून।पानी गये न ऊबरे, मोती, मानस, चून। जल ही जीवन है। इस जल को बचाने के लिए और जन-जाग्रति के अभियान चलाने की आवश्यकता है। पेयजल का स्रोत सीमित है। इस सीमित पानी का किस तरीके से हम उपयोग कर सकते हैं। बरसात के पानी को किस तरीके से रोक सकते हैं और आने वाले समय के अन्दर जो बरसात के प्रवाह के जो मार्ग थे और जिन के ऊपर अतिक्रमण हो रखे हैं उन अतिक्रमणों को हटाकर उन बारिश के स्रातों में पानी किस तरीके से लाया जा सकता है, इसकी वृहद् योजना भी बनाने की आवश्यकता है और आज इस अवसर के ऊपर ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता। मात्र इतना निवेदन करना चाहता हूं कि राज्यपाल महोदय ने अपने अभिभाषण के अन्दर सरकार के तीन साल के कामों को जिस संवेदनता के माध्यम से रखने का प्रयास किया है, मैं उनका पुरजोर समर्थन करता हूं और आशा करता हूं कि आने वाले समय के अन्दर यह सरकार हर मनुष्य के जीवन को केन्द्र मानते हुए, गरीब आदमी को गणेश मानते हुए, एक ढाणी में बैठे हुए व्यक्ति की कल्पना करते हुए काम करेगी। निश्चित रूप से ऐसा मेरा मन और विश्वास है और सरकार के द्वारा किये गये तीन साल के उल्लेखनीय कार्य जिनका मैं विपक्ष से भी निवेदन करना चाहूंगा कि वह भी समर्थन मन से तो करते हैं लेकिन मस्तिष्क से नहीं करते इसलिए वे मस्तिष्क से भी समर्थन करने का विचार बनाये। धन्यवाद, जय हिन्द।
श्री अध्यक्ष: श्री दांताराम गुर्जर।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): यह मन और मस्तिष्क का अन्तर आपने जो निकाला न, यह आप अपने उस साइड पर भी निकालो। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: अब आप बीच में क्यों बोल रहे हैं? एक घंटे से ज्यादा तो बोल लिये आप, अब आप बीच में बोल रहे हैं। ... (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): नहीं, आपकी आज्ञा हुई जब ही तो बोला, साहब।
श्री अध्यक्ष: अब आप विराजिये-विराजिये।
श्री दाताराम गुर्जर (खेतड़ी): माननीय अध्यक्ष महोदय, महामहिम राज्यपाल महोदय ने एक मार्च को जो अभिभाषण यहां हाउस में पढ़ा, उसके समर्थन में, उनके प्रस्ताव के लिए मसूदा से आने वाले माननीय सदस्य ने जो प्रस्ताव रखा है ...
शिव/चौहान/18.20/3n/5.3.2007(1)
और
उसका लूणी से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने समर्थन
किया, मैं भी
उसके समर्थन
के लिये आपकी
आज्ञा से खड़ा
हुआ हूं। अध्यक्ष
महोदय, एक तो
अभी तीन-चार रोज
से जो गतिरोध बना,
यह प्रतिपक्ष
का कोई
दुर्भाग्य
रहा है कि जब
जब महामहिम
राज्यपाल
महोदय ने हाउस
को आहूत किया,
उस समय इनको
किसी न किसी
राज्य में,
चाहे राजस्थान
में हो, चाहे
अन्य राज्यों
में, जनता से
मात खाकर यहां
हाउस में आना
पड़ता है। उस
सच्चाई को यह
पचा नहीं पाते
और इस कारण से
जनता इनको जो
मात देती हे
उसको यहां
हाउस में
विरोध करके,
उसको सच्चाई
में बदलने का
प्रयास करते
हैं। शुरू में
जब विधान सभा
आहूत की गयी
तब तो लोक सभा
में राजस्थान
में कांग्रेस
का सफाया हो
गया था।
दुबारा जब
विधान सभा का
सत्र आहूत हुआ
उस समय ग्राम
पंचायत के
चुनावों में
इनको मात
मिली। तीसरी
बार
नगरपालिकाओं
के चुनावों
में और चौथी बार
पंजाब और उत्तराखण्ड
में इनको मात
मिली है। इन
सब बातों का जनता
में तो सामना
कर नहीं सकते
इसलिए सिर्फ
प्रेस में
अपनी इमेज
बनाने के लिये
कि यहां
विपक्ष में
बैठे हैं और
विपक्ष की
भूमिका का
पूरी तरह से
निर्वहन कर रहे
हैं इसलिए तीन
- चार दिन से
इन्होंने
सारा वातावरण
बनाया है। अब
जनता बिलकुल
जान चुकी है
कि राजस्थान की
सरकार ने तीन
साल में कितने
कीर्तिमान
कार्य किये
हैं। चाहे वह
शिक्षा के
क्षेत्र में
हो, चाहे
पेयजल के क्षेत्र
में हो, चाहे
सड़कों के
क्षेत्र में
हो, चाहे
चिकित्सा के
क्षेत्र में
हो। राजस्थान
में ऐसा कोई
विभाग नहीं
बचा है जिसमें
तीन साल में
इनके पाँच साल
की तुलना में
हमारी सरकार
ने ज्यादा
कार्य किया
है।
महामहिम
राज्यपाल
महोदय ने जो
अभिभाषण में
पढ़ा, उसमें जल
संसाधन के
लिये जो कार्य
किये, उन पर
सर्वोच्च
प्राथमिकता
का जो इसमें
विवरण लिखा
गया है, तीन
वर्षों - 2004-05, 2005-06 और
2006-07 में 2650.08 करोड़
की राशि व्यय
की, जबकि गत
सरकार ने पाँच
वर्षों में
सिर्फ 2465.46 करोड़
रूपये की राशि
व्यय की। तुलनात्मक
दृष्टि से यह
इस बात को
मानने को वैसे
आत्मा से तो
तैयार हैं, क्योंकि
जब भी यह
मिलते हैं तो
यह बात कहते
रहते हैं कि
सरकार ने वास्तव
में काम तो
अच्छा किया
है, लेकिन हम
जनता में जाकर
क्या जवाब
दें ? हमारा
धर्म बनता है
कि हम यहां
विरोध करें।
वैसे तो आन्तरिक
रूप से इनकी
भावना तो यही
कहती है कि
काम बहुत अच्छे
हो रहे हैं।
हमारी सरकार
के समय में भी
इतने काम नहीं
हुए जितने
हमारे आज
प्रतिपक्ष
में बैठने के
बावजूद भी काम
हो रहे हैं।
यह लोग कई बार
चर्चा करते
हैं तो यह
कहते भी हैं
कि मुख्य
मंत्रीजी ने
इतने काम किये
हैं राजस्थान
में, हो सकता
है कि उसका
रिजल्ट हमको
भी मिल जायें।
श्री
हरिमोहनजी
जैसे और रामगढ़
से आने वाले
माननीय सदस्य
तो कहते भी
यही हैं कि जब
भारतीय जनता
पार्टी की
सरकार राजस्थान
में होती है
तो हम भी
जीतकर आ जाते
हैं और कांग्रेस
की सरकार होती
है तो हमारा
नम्बर जीतने
में नहीं आता।
इसलिए यह तो
सिर्फ यहां
कहने की बातें
हैं , बाकी जो
दिल में है वह
निश्चित रूप
से सरकार के
पक्ष में हैं।
नर्मदा
परियोजना के
पेटे राजस्थान
ने जो इस राशि
में खर्च किया
है इसमें फरवरी,
2004 में जो पाँच
वर्षों में 57
करोड़ रूपये
दिये गये थे,
वह इसमें
सम्मिलित
हैं। इन कार्यों
से तीन वर्षों
में 3, 82,670 हैक्टेयर
अतिरिक्त
सिंचाई की
कार्यक्षमता
सृजित हुई है,
जबकि पूर्व
पाँच वर्षों
में 3,72,060 हैक्टेयर
अतिरिक्त
सिंचाई की
क्षमता सृजित
हुई थी।
वर्षों से अधूरी
पड़ी सिंचाई
परियोजना को
पूर्ण करने का
जो जन साधारण
के लिये काम
किया हमारी
सरकार ने,
निश्चित रूप से
तीन वर्षों
में 126 सिंचाई
परियोजनाएं
पूर्ण की हैं,
जबकि पिछले
पाँच वर्षों
में पिछली
सरकार ने पाँच
साल में सिर्फ
65 परियोजनाओं
को ही पूरा
किया था और इस
प्रकार 61
योजनाएं
हमारी सरकार
ने तीन साल
में अधिक स्वीकृत
की हैं।
अध्यक्ष
महोदय, हमारे
राजस्थान
में तीन
संवैधानिक
पदों पर तीन
महिलाएं बैठी
हैं और
निश्चित रूप
से हमारी मुख्य
मंत्रीजी ने
महिलाओं के
सशक्तिकरण के
लिये बहुत अच्छा
कार्य किया
है। महिलाओं
के सशक्तिकरण
हेतु उनके
पक्ष में कृषि
योग्य भूमि
के क्रय दस्तावेज
पंजीयन कराने
का जो काम
किया, उसमें
मुद्रांक
शुल्क की
रियायती दर 5
प्रतिशत की,
उसके कारण राज्य
में 3.68 लाख
महिलाओं को
सम्पत्ति का
अधिकार पहली
बार राजस्थान
में प्राप्त
हुआ है।
सड़कों
के क्षेत्र
में निश्चित
रूप से जितना
काम हुआ है,
लोग तो यहां
तक चर्चा करते
हैं, जनता में जब हम
जाते हैं कि
देश में आजादी
के बाद में
इतनी सड़कें
नहीं बनीं
जितनी तीन साल
में इस सरकार
ने बनाई हैं।
सड़कों के क्षेत्र
में हमारी
सरकार ने तीन
वर्षों में जो
काम किया है 1,904
करोड़ रूपये
के निवेश की
तुलना में इस
सरकार ने 4055
करोड़ रूपये
का निवेश किया
है, उससे तीन
गुणा, पिछली
सरकार से तीन
गुणा अधिक
किया है हमारी
सरकार ने।
इसी
प्रकार
प्रधान
मंत्री योजना
के अन्तर्गत
18660 किलोमीटर
सड़कों का निर्माण
कर 5,538 गांवों को
सड़कों से
जोड़ा है।
पिछली सरकार
ने 14,724 किलोमीटर डामर
की सड़कों का
निर्माण करके
और सिर्फ 4,620
गांवों को ही
जोड़ा है। गत
सरकार के
कार्यकाल में
3,936 किलोमीटर
किलोमीटर
डामर की
सड़कों का
निर्माण कर 918
गांवों को
सड़कों से
जोड़ दिया
जबकि हमारी
सरकार ने राज्य
में प्रति
वर्ष औसत 4130 किलोमीटर
लम्बाई में
राज्य की
सड़कों का
सुदृढ़ीकरण
एवं नवीनीकरण
का कार्य
करवाया है। राज्य
में 7 अक्टूबर,
2005 से हमारी
सरकार ने मुख्य
मंत्री सड़क
योजना की जो
शुरूआत की,
उसमें भी
निश्चित रूप
से कई
मेगा-हाइवेज
की चौड़ाई ज्यादा
की गयी है और
प्रथम चरण में
पाँच
राजमार्गों
के 1053 किलोमीटर
सड़कों की चौड़ाईकरण
करके इनका
कार्य किया
है। इसी
प्रकार रेल
फाटक पर ओवर
ब्रिज का काम
था, उसमें भी
हमारी सरकार
ने 11 ओवर ब्रिज
और 28 बाई पास का निर्माण
किया है।
निश्चित
रूप से तीन
साल का जो
कार्यकाल है,
यह पाँच साल की
तुलना में
शिक्षा के
क्षेत्र में
भी अगर देखा
जाये तो इनके
समय में तो नये
प्राथमिक
विद्यालय
सिर्फ पाँच
साल में 550 खोले
जबकि हमारी
सरकार ने 4,162
प्राथमिक
विद्यालय तीन
साल में खोले
हैं। इसी
प्रकार से
प्राथमिक से
उच्च प्राथमिक
में जो
क्रमोन्नत
का कार्य किया
है वह भी इन्होंने
पाँच साल में
सिर्फ 3089 स्कूल
उच्च
प्राथमिक में
क्रमोन्नत
किये जबकि
हमारी सरकार
ने 10,175
विद्यालयों
को उच्च
प्राथमिक
विद्यालय में
क्रमोन्नत
किया है।
इसी
प्रकार से
नियुक्तियों
की बात है।
अभी मेरे से
पूर्व वक्ता
श्री हरिमोहन
जी बोल रहे थे
कि सरकार ने
नौकरियां
कहां दी हैं ? शिक्षा
के क्षेत्र
में
नियुक्तियों
का जो मामला
है, तृतीय
श्रेणी के
शिक्षकों के
पदों पर इनकी
सरकार ने
सिर्फ 11,478
शिक्षकों को
पाँच साल में
नियुक्तियां
दीं जबकि
हमारी सरकार
ने 32,953 तो तृतीय
श्रेणी के
शिक्षकों को
नियुक्तियां
दीं। इसी
प्रकार से
महिला अध्यापिकाओं
को इनकी सरकार
ने कोई भी
नियुक्ति स्पेशल
रूप से नहीं
दी थी। हमारी
सरकार ने 11,310
महिलाओं को
शिक्षकों के
रूप में
नियुक्त
किया है। इसी
प्रकार तृतीय
श्रेणी के पर
पर इनकी सरकार
ने कभी भी
किसी प्रकार
की कोई रियायत
देकर विधवा
महिलाओं को
शिक्षा के
क्षेत्र में
कोई नियुक्ति
नहीं दी थी।
हमारी सरकार
ने 2389 विधवा और
परित्यक्तता
महिलाओं को
शिक्षा विभाग
में
नियुक्तियां
दी हैं। इसी
प्रकार
द्वितीय
श्रेणी के जो
अध्यापक
लगाये हैं
सिर्फ 2233 अध्यापक
पाँच साल में
लगाये जबकि हमारी
सरकार ने तीन
साल में ही 2352
शिक्षक
द्वितीय
श्रेणी के
लगाये। इसी
प्रकार से भवन
बनाने में है,
जितने भी प्राथमिक
विद्यालय
खुले उन सबमें
प्राथमिक
विद्यालय के
लिये सवा तीन
लाख रुपये और
मिडल स्कूल
जो क्रमोन्नत
हुए उसमें 4
लाख 68 हजार का
पैकेज देकर और
जो नये
विद्यालय
खुले या
क्रमोन्नत
किये गये, उन
सबमें भवन की
पहली बार
राजस्थान
में व्यवस्था
की गयी है।
हमारी
सरकार ने युवक
को नौकरी तो
दी है। उसके
साथ वरिष्ठ
जनों का भी ध्यान
रखा गया है।
पहली बार
वरिष्ठ
नागरिकों के
सम्मान के
लिये सरकार ने
65 वर्ष से अधिक
उम्र के वरिष्ठ
नागरिकों को
16.1.2006 से अन्तरराज्यीय
मार्गों पर
परिवहन के
वाहनों में
यात्रा किराये
में पहली बार 30
प्रतिशत की
छूट देकर और वरिष्ठ
नागरिकों का
सम्मान किया
है। स्थानीय
निकायों के
मामले में
सरकार ने जो
घोषणा पत्र
पार्टी ने
जारी किया है ....
msr/usc/1830/3o/05032007
घोषणा
पत्र जारी
किया उस के
अनुरूप और जो
अभी नगरीय
क्षेत्रों
में, नगरपालिकाओं
में गृह कर
समाप्त कर के
हमारी सरकार
ने कथनी और करनी
में कोई फर्क
नहीं होता, इस
बात को साबित
किया है और
सबसे बड़ी
पीड़ा तो
प्रतिपक्ष के
लोगों को इसी
बात की है कि
पिछली बार तो इन्होंने
गृह कर के लिए
काफी दिनों तक
यहां हाउस में
शोर किया और
इस बार कोई
मुद्दा भी
नहीं है जिसके
लिए बोलें और
हाउस में जब
जाएं तो जनता
को यह कह सकें
कि इस बात की
मांग हमने रखी
और उसके लिए सरकार
ने उस बात को
स्वीकार नहीं
किया है।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, पहली बार
हमारी सरकार
ने वृद्ध जन,
समाज के सम्माननीय
और वन्दनीय
जो व्यक्ति
हैं उनके जो
पेन्शन की व्यवस्था
थी उसमें भी 65
वर्ष से अधिक
आयु के वृद्ध जन,
नि:शक्तजन
एवं विधवाओं
को दी जाने
वाली पेन्शन
जो 200 रुपये प्रति
माह दी जाती
थी उसको बढ़ा
कर दोगुना कर
के पहली बार
हमारी माननीय
मुख्यमंत्रीजी
ने, हमारी
सरकार ने 400
रुपये प्रति माह
की है और
सरकार ने
इसमें सात लाख
90 हजार परिवार
को फायदा दिया
है।
कर्मचारियों
के भी पिछली
सरकार के समय
में कई बार
आन्दोलन
होते थे लेकिन
हमारी सरकार
जब से आयी है
तब से किसी
प्रकार का कोई
भी आन्दोलन,
जो उनकी
वैधानिक मांग
थी उसके लिए
कभी कोई ऐसे
आन्दोलन का
अवसर सरकार ने
नहीं दिया है
और समय रहते-रहते
पहली बार
सरकार ने उनके
जो भी भत्ते
और डिमाण्ड
होती थी उन पर
सब पर
कर्मचारियों
के हित में फैसला
कर के और उनके
हितों की
निश्चित रूप
से रक्षा की
है।
किसानों
के लिए जो
किसान महोत्सव
जल चेतना
अभियान चलाया,
निश्चित रूप
से किसानों से
सम्बन्धित
जो भी बातें
थीं और कृषि
की उन्नत
किस्म से किस
प्रकार से
कृषि की जाए,
यह सब जानकारियां
प्रदान करने
के लिए हमारी
सरकार ने पहली
बार गांवों
में किसान महोत्सव
जल चेतना
यात्रा का जो कार्यक्रम
चलाया,
निश्चित रूप
से किसानों का
उसको अच्छा
जन समर्थन मिला
है और कृषकों
को इसमें खरीफ
और रबी से
पूर्व इस
सरकार के
अभियान में
विगत दो
वर्षों में
क्रमश:12.35 लाख
मैट्रिक टन और
14.17 लाख मैट्रिक
टन सरसों की
समर्थन मूल्य
पर खरीद भी
हमारी सरकार
ने पहली बार
की है जबकि
इससे पहले
सरकार ने,
पिछली जो भी
सरकार थी उसने
कभी भी किसानों
की इतनी अधिक
मात्रा में
सरसों की खरीद
समर्थन मूल्य
पर नहीं की।
इस
प्रकार से जो
हमारे
प्रतिपक्ष के
भाई हैं, कई
बार कहते थे
कि भारतीय
जनता पार्टी किसान
विरोधी है, अब
इनको यह आभास
होने लग गया है
कि यह वर्तमान
सरकार
किसानों की
हितैषी है और
किसानों को जो
पहले कभी चार
घंटे बिजली
मिलती थी वहां
6 घंटे नियमित
रूप से बिजली
देकर किया, अब
इन्होंने 7
घंटे, 8 घंटे की
बात तो कही है
लेकिन यह नहीं
देखा कि दिल्ली
में जो आपकी
सरकार है,
हमारे हिस्से
में जो बिजली
मिलनी चाहिए
थी उसके बारे
में तो कभी एक
प्रतिशत भी
आपने उनको
नहीं कहा कि राजस्थान
की जनता को भी
बिजली उपलब्ध
कराओ। उसमें
उन्होंने जो
पक्षपात किया
और जितनी
बिजली हमारे
राजस्थान को
मिलनी चाहिए
थी उसको पंजाब
की जनता को देकर,
पंजाब में
जहां सरकार
इनकी थी वहां
इन्होंने
बिजली दी और
इसका परिणाम
यह तो सोचते
थे कि वहां
अपनी सरकार
दोबार आ
जायेगी लेकिन
वह सोच इनकी
पूरी नहीं हुई
और जो राजस्थान
के हक की
बिजली को इन्होंने
पंजाब में दी
और उसकी एवज
में हमारी
सरकार को अन्यत्र
बिजली खरीद कर
किसानों को
सप्लाई की व्यवस्था
करनी पड़ी लेकिन
ईश्वर ने
इसमें हमारी
मदद की और समय
रहते हुए अच्छी
वर्षा हो कर
किसानों को
राहत प्रदान
की।
यह सही
है कि जो
हमारी सरकार
में आस्था की
भावना है और
उसी का परिणाम
यह सामने है
कि तीन साल से, जब
से हमारी
सरकार यहां
आयी है कभी
ऐसी स्थिति
आयी नहीं है
लेकिन फिर भी
हमारे
प्रतिपक्ष के
लोग कई बार इस
बात की मांग
करते रहते हैं
कि अकाल राहत
कार्य चलाओ क्योंकि
पाँच साल में
अकाल राहत की
जो एक रटी-रटायी
इनकी बात हो
गयी है वह आज
भी इनके दिमाग
में और दिल में
बैठी हुई है
कि अकाल राहत
कार्य चलाओ।
जब सरकार में
ऐसी स्थिति
आयी ही नहीं
और हम तो ईश्वर
से भी यही
प्रार्थना
करते हैं कि
अकाल के लिए
आप बात ही क्यों
करते हो। जब
भारतीय जनता
पार्टी की
सरकार यहां
राजस्थान में
है तो अकाल के
नाम को तो
वैसे ही आपको
भूल जाना
चाहिए और यह
तो आप सपने
में भी मत
सोचो की दोबारा
अकाल यहां कभी
पड़े और सब को
प्रार्थना भी
यही करनी
चाहिए कि
राजस्थान
में जब अच्छी
वर्षा समय पर
होती है, अच्छी
फसल होती है
तो अकाल की
बात आप बारबार
क्यों करते
हैं। इसको
छोड़ दो, शायद
राजस्थान
में अकाल का
नाम ही मिट
जाए और अकाल
जैसी स्थिति कभी
बने भी नहीं।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, हमारी
सरकार ने अभी
पिछले दिनों
ग्राम जन सम्पर्क
अभियान चालू
किया। उसमें
काफी लोगों
को, किसानों
को राहत मिली।
अभी तक उसमें 2
जनवरी, 2007 से 9
फरवरी, 2007 तक 2,09,897
के करीबन
नामान्तरकरण
सत्यापित
किये गये।
पहली बार
लोगों को
गांवों में
सरकार ने,
प्रशासनिक
अधिकारियों
ने जाकर लोगों
के जमीन से
सम्बन्धित
जो भी थे, उन सब
का निस्तारण
किया और करीबन
1,07,147 पासबुक
वितरण की गयी
और 18205 किसानों
को खातेदारी
का अधिकार
दिया गया और 21,560
विभाजन के
प्रकरण मौके
पर ही निस्तारित
किये गये। इस
प्रकार इस
अभियान का
जनता में अच्छा
संदेश गया है
और जनता ने यह
महसूस किया है
कि वर्तमान
सरकार
किसानों के,
गांवों के और
गरीब के हित
में जो कार्य
कर रही है
निश्चित रूप
से यह प्रशंसा
योग्य हैं और
हमारी
महामहिम ने जो
अभिभाषण पढ़ा,
निश्चित रूप
से मैं उसका
समर्थन करता
हूं और जो
प्रस्ताव
माननीय सदस्य
ने रखा है
उसका मैं
समर्थन करता
हूं।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आपने
मुझे समय दिया
इसके लिए
बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष: डा.
श्रीगोपाल
बाहेती।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपका
बहुत-बहुत धन्यवाद,
आपने मुझे समय
दिया।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, हम सदन
में महामहिम
के अभिभाषण पर
चर्चा कर रहे
हैं। इस
अभिभाषण में
जो अंतिम पैरा
है उसमें लिखा
गया है कि-
'वसुधैव
कुटुम्बकम्
की भावना से
अनुप्राणित
हमारी संस्कृति
है। वैश्विक
दृष्टि रखते
हुए हमें 'सत्यम्
शिवम् सुन्दरम्'
अनुपम रूपम
राजस्थान का
बनाना है।'
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
मेरी बात यहीं
से प्रारम्भ
करना चाहता
हूं कि जिस
राजस्थान
सरकार में परिवार
की भावना नहीं
हो, जिस
मंत्रिमण्डल
में सामंजस्य
नहीं हो उस
मंत्रिमण्डल
द्वारा प्रस्तावित
अभिभाषण किस
प्रकार
वसुधैव
कुटुम्बकम्
या सत्यम्
शिवम् सुन्दरम्
का आवरण ओढ़
सकता है। इस
प्रकार की
साईकोफेन्सी
कर के मुझे एक
बात याद आती
है, एक गरीब के
बच्चे ने कहा
कि, मां, मुझे
भूख लगी है,
मां रोटी, मां
रोटी, मां
रोटी करता
रहा। वह महिला
बी.पी.एल. की थी, उसके
घर में अनाज
नहीं था। अभी
जो पहले चर्चा
चल रही थी
बी.पी.एल. की,
मैं आपको बहुत
अधिकारपूर्वक
कह रहा हूं,
विश्वास से
कह रहा हूं कि
आज भी गांवों
के अन्दर बी.पी.एल.,
ए.पी.एल. को
पूरा गेहूं
नहीं मिलता
है। बी.वी.एल.
की लिस्ट को
लेकर आज भी
आपस में कन्फ्यूजन
है, लिस्ट
पुरानी मानें
या नई मानीं।
खैर, यह चर्चा
की अलग बात है,
मैं यह कह रहा
था कि वह बच्चा
मां से रोटी
मांग रहा था
कि, मां रोटी,
मां रोटी, मां
रोटी। रोटी
मां के पास थी
नहीं तो मां
ने उठा कर बच्चे
को परिण्डे
पर रख दिया।
छोटा बच्चा
था, अब बच्चा
रोटी भूल गया
और कि, मां,
नीचे उतार,
मां नीचे उतार,
मां नीचे
उतार, इसमें
लग गया। यह
काम राजस्थान
की बी.जे.पी. की
सरकार कर रही
है। जब बिजली
नहीं हो, जब
पानी नहीं हो,
जब मास्टर
नहीं हों, जब
डाक्टर्स
नहीं हों, जब
दवा नहीं हो
तब दो काम करो,
या दिखा दो
कोई यात्रा,
जल चेतना
यात्रा, स्वास्थ्य
चेतना यात्रा
और वो भी नहीं
हो तो आपस में
लड़ लो तो वह
ध्यान बंट कर
के आपस में
झगड़े में बंट
जाए।
मुझे समझ
में नहीं आता
कि भारतीय
संस्कृति की
बात करने वाले
लोग, वेद की
बात करने वाले
लोग, मनु की
बात करने वाले
लोग, उपनिषद
की बात करने
वाले लोग किस
प्रकार अपने
सामूहिक दायित्व
से बचते हैं
और अपने
झगड़ों को
सड़क पर लाकर के
गरीब जनता की
भूख पर, उसकी
नीड पर एक
बहुत बड़ा
क्रूर मजाक करते
हैं।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
बहुत पीड़ा
होती है मुझे
इस बात को
लेकर के कि इस
प्रकार के
अभिभाषण जब
औपचारिक बन
जाते हैं। अभी
हिण्डौली से
आने वाले
माननीय सदस्य
आपको बता रहे
थे कि किस
प्रकार से यह
कोरे कागज का
दस्तावेज
है। मैं उस
दिन कहने वाला
था आपसे कि
कृपा कर के
गवर्नर जैसे
संवैधानिक पद
की गरिमा कम
मत कीजिए।
उनकी गरिमा
हल्ला होने
से कम नहीं
हुई है, उससे
ज्यादा
गरिमा कम हुई
है कि झूठा
दस्तावेज
तैयार कर के
उनसे
पढ़वाएं।
जब आप
राजस्थान के
अन्दर कहते
हैं कि हम
बहुत
संवेदनशील
हैं, मैं आपसे
पूछना चाहता
हूं कि अकाल
राहत के अन्दर
आपने भेदभाव
किया। मैं
निमंत्रण
देता हूं मेरे
विपक्षी
विधायकों को
कि एक कमेटी
बनाएं और दौरा
करें अजमेर
जिले का कि
किस प्रकार से
उन्होंने
वहां पर
गिरदावरी की
है खराबे की।
Ars/usc/3p/1840/05032007/1
पूरे
जिले के अन्दर
कुल 230 गांव
खराबे में लिए
हैं पूरा जिला
अकाल की चपेट
में है। चारा
डिपो नहीं,
पशु कैम्प
नहीं, पीने को
पानी नहीं फिर
भी
संवेदनशील। बहुत
बहुत बधाई के
पात्र हैं यह
लोग । इससे बड़ी
और क्या बात
हो सकती है
किसान को समय
पर यूरिया नहीं
मिले, उसको
समय पर बीज
नहीं मिले,
उसको बिजली
नहीं मिले
उसके बाद में
यह बात करें।
श्री
कनकमल कटारा
(महिला एवं
बाल विकास
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष महोदय,माननीय
सदस्य ने
मुझे कहा था
उस समय में तो
अभी अभी मैं
गया था तो
जिला कलैक्टर
से पूछा था
आपके तेरह
गांव ले लिए
हैं
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
मैं खेती नहीं
करता हूं,
मेरा शहर में
क्लिनिक है
उसके बाद भी
मैं आपसे कह
रहा हूं गांव
के गरीब के
साथ, गांव के
किसान के साथ
और खेत मजदूर
के साथ क्रूर
मजाक मत करो,
भगवान माफ
नहीं करेगा। ‘ जासु राज
प्रजा दुखारी
सो नृप अवश्यं
नर्क अधिकारी ‘ आप
कौनसी
संवेदना की
बात करते हैं
और कौनसे आप
धन्यवाद
प्रस्ताव की
बात करते हैं।
मैं कहना
चाहता हूं
आपसे कि विकास
एक सामान्य
प्रक्रिया है
और निरन्तर
चलने वाली
प्रक्रिया
है। आप याद
कीजिए जब सुखाडि़या
साहब मुख्यमंत्री
थे, मोहनलाल
जी सुखाडि़या,
पूरे राजस्थान
के अन्दर एक
एम्बेसेडर
कार से घूमते
थे और वह भी
नोन ए सी। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आज
घूमने को
हैलीकाप्टर
हैं, इनोवा
कारें हैं, आज
घूमने को
सफारी कारे
हैं तो समय के
हिसाब से
बदलाव आता है।
यह जो बड़ी
बड़ी योजनाओं
की आप बात
करते हो,
कौनसा साल ऐसा
रहा है जब इस वार्षिक
योजना के आकार
में वृद्धि
नहीं हुई हो।
यह तो केन्द्र
सरकार की
सदाशयता है,
उसका बड़प्पन
है कि उसने
कभी भेद नहीं
किया क्योंकि
जैसे आप ठीक
कह रहे थे कि
केन्द्र के
पैसे में आपका
भी अधिकार है,
राजस्थान का
भी अधिकार है
तो यह अधिकार
तीन साल पहले
नहीं था क्या,
तीन साल पहले
भी था ।
डा.
जालम सिंह
रावलोत (शिव):
बाड़मेर में
क्या किया
...(व्यवधान)
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
बाड़मेर में
कवास के लोग
तो आज भी आपको
याद कर रहे
हैं ...(व्यवधान)
डा.
जालम सिंह
रावलोत (शिव):
...(व्यवधान)
रुपए मांगे थे
बाढ़ के नाम
पर केवल सौ
करोड़ रुपए
दिए, मलवा और
कवास आपको रो
रहे हैं ।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
कवास और
बाड़मेर तो
आपकी संवेदना
को आज भी याद
कर रहे हैं कि
किस प्रकार
वहां लोग आज
भी नंगे आसमान
में पड़े हुए
हैं।
डा.
जालम सिंह
रावलोत (शिव):
हमने तो बंगले
बनाकर दिए
बंगले बनाकर,
राज्य सरकार
ने अपने दम पर
बंगले बनाकर
दिए हैं ।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
एक बात याद
रखना इस बात
को कि जब राज
में बैठे हो
तो बहुत गम्भीरता
से बहुत जिम्मेदारी
से हमें यहां
काम करना
पड़ेगा।
श्री
अध्यक्ष: आप
बीच में रोकें
टोंके नहीं,
बोलने दें उन्हें
...(व्यवधान)
बैठे बैठे
नहीं बोलें।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे जो बात
कह रहा था कि
संवेदना की
बात कर रहे थे
कि बी पी एल
परिवार के लोगों
को जिनका नई
लिस्ट में
नाम आया है,
बड़ा कन्फ्यूजन
है। आप देखिए
बी पी एल की जो
पुरानी लिस्ट
थी उसके आधार
पर राजीव
गांधी
विद्युतीकरण
मिशन के अन्दर
प्रोग्राम
बने थे गांवों
में बिजली
लगाने के। अब
आर एस ई बी क्या
कर रही है कि
उस लिस्ट को
भूलकर के जो
नई लिस्ट आ
गई है उससे
काम कर रही है,
योजना बनी उस
पुरानी लिस्ट
से, पैसा उसी
से सैंक्शंड
है, यदि वह कर
देवें तो क्या
दिक्कत है? उनको
इसमें क्या
कन्फ्यूजन
है। आज भी जो
चिकित्सालय
हैं उसमें बी
पी एल के
परिवारों को
जो पुरानी
लिस्ट के लोग
जाते हैं,
कार्ड लेकर
जाते हैं तो
कहते हैं नई
में नाम है क्या,
नहीं है आपको
दवाई नहीं
मिलेगी, नई
लिस्ट में
नाम है उनके
पास कार्ड
नहीं है। हम
किस प्रकार
संवेदनशील
हैं। मैं कहता
हूं, मैं कहीं मना
नहीं करता इस
बात को माननीय
शिक्षा मंत्री
जी ने बहुत
लोग भर्ती किए
होंगे लेकिन
स्कूलों की
स्थिति क्या
है, आज भी गांव
के विद्यालय अध्यापकों
को तरस रहे
हैं, आज भी
गांव के
विद्यालय दो
दो मास्टरों
से चल रहे हैं,
आज भी गांव के
विद्यालयों में
टीचर्स नहीं
हैं ।
आप
देखिए इस
राजस्थान के
अन्दर जिस
प्रकार हमने
विकास की बात
की, और तो और माननीय
अध्यक्ष
महोदय, यह पढ़
लीजिए आप
आंकड़ों ने
उड़ाए होश, जो
आंकड़े दिए
ठहराव के
कितनी उसमें
कमी आ गई है,
कार्टून दिया
अख़बार वाले
ने तो यह लिखा
है कार्टून के
अन्दर आप
मास्टर तो
भर्ती कर रहे
हो और
विद्यार्थी
रुक नहीं रहे
स्कूलों के
अन्दर क्या
स्थिति है? आपके
मिड डे मील
में घोटाला,
मिड डे मील का
आया था कि
जिसके अन्दर
लाखों रुपए का
घोटाला है।
कौन देखेगा और
फिर हम बात कर
रहे हैं कि
हमें धन्यवाद
प्रस्ताव
पास करना है।
आप खूब पास
करिए ऐसे
प्रस्ताव
पास करने का
मीनिंग क्या
है जब किसान
को आप बिजली
नहीं दे सकते।
अभी बच्चों
के एक्जाम चल
रहे हैं। क्या
गांव के बच्चे
इम्तिहान
नहीं देते,
गांव के बच्चे
नहीं पढ़ते
बारहवीं क्लास
केअन्दर ? वहां
आप रात को
बिजली नहीं
देते सिंगल
फेस की, वह बच्चे
नहीं पढ़
सकते, गांव के
बच्चे पढ़कर
आई ए एस, आर ए एस
नहीं बनना
चाहते, लेकिन
नहीं। जो
सरकार
राजधानी में ।
श्री
जयराम जाटव
(खैरथल):
कांग्रेस के
राज में एक
मिनट शाम को
बिजली नहीं
मिलती थी पूरी
रात अन्धेरे
में रहते थे
गांव के बच्चे।
श्री
अध्यक्ष: बीच
में नहीं
बोलें।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
कांग्रेस के
राज में बिजली
का बहुत आराम
था।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आपने
कांग्रेस के
राज में कितनी
बिजली पैदा की
याद है कि
नहीं है 1700
मेगावाट।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
मिड डे मील
में जितने घोटाले
आपके राज के
हैं वह अब
निकल रहे हैं।
हमारे टाइम का
एक भी घोटाला
नहीं है ।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
बहुत बढि़या
बात आपकी, आप
यही कहते रहना
कि आपके राज
के निकल रहे
हैं मैं यह कह
रहा हूं ...
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
निकल रहे हैं
ना आपके टाइम
के निकल रहे
हैं हमारे
टाइम का एक भी
घोटाला नहीं
है ...(व्यवधान) आपने
कोई घोटाला
नहीं निकलने
दिया अब निकल
रहा है हमारे
टाइम का,
हमारा राज आने
के बाद का
घोटाला नहीं
है ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आपके टाइम का
घोटाला आप
थोड़े ही
निकालोगे
आपके टाइम का
घोटाला तो हम
निकालेंगे।
श्री
भंवरू खान
(फतेहपुर):
लोकायुक्त
का पद ही तीन
साल तक खाली
पडा रहा ...(व्यवधान)
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
वह तो आप ख्याली
पुलाव पकाते
रहो ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आपस
में वाद विवाद
नहीं करें
बोलने दें उन्हें।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
अध्यक्ष
महोदय, इनके
राज की स्थिति
यह है कि
एक
बच्चे ने
पोषाहार की
नागी खा ली स्कूल
के अन्दर
पीटकर उस बच्चे
का यह हाल कर
दिया, इनके
राज की स्थिति
तो यह है कि एक
नागी खा ली
बच्चे ने
उसको पीटकर
जख्मी कर
दिया गुरुजी
ने, यह इनके
राज का हाल है
और मैं कहता
हूं राज आपके
पास है, कानून
आपके पास है,
पुलिस आपके
पास है यदि
जिम्मेदार
यह लोग हैं तो
आप चढ़ाइये
फांसी के ऊपर ।
एक कवि ने ठीक
लिखा कि
‘ इनको
बदलने को वक्त
तो मिला था
कुछ तुम मेरे
दोस्त चंद
रोज में बदले
गये, इनको
उछलने को
बल्लियां
मिली थीं कुछ
और तुम मेरे
दोस्त बिन
बल्लियों उछल
गये, इनको
फिसलने को
सीढि़यां
मिली थीं कुछ
और तुम मेरे
दोस्त बिना
सीढि़यों
फिसल गये’ नीतियां
बनाने और
बदलने में लगे
रहे और तुम मेरे
दोस्त सब
नीतियां चबा
गये, तुम मेरे
दोस्त सब
नीतियां चबा
गये।
अब
आपकी नीति क्या
है भारती मंदिर
से जो आर्डर आ
गया उसको
मानना है उसको
मान लो मैं यह
कहता हूं कि
आपकी मुख्यमंत्री
ने ।
श्री
अध्यक्ष: आप
तो अच्छे
गायक भी हैं
बाहेती जी।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
आप तो कवि सम्मेलन
में जाना
शु्रू कर दो
वास्तव में भारतवर्ष
में नाम हो
जाएगा।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
धन्यवाद।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
निवेदन कर रहा
था कि इनकी संवेदना
कितनी
खूबसूरत है,
देखिए आप
हमारे राजस्थान
की मुख्यमंत्री,
राजस्थान
विधान सभा
प्रस्ताव
पास करे,
संकल्प पास
करे पानी के
लिए पंजाब के
अन्दर इनकी
पार्टी अकाली
दल से मिलकर
घोषणा पत्र देवे
कि राजस्थान
को कोई पानी
नहीं देंगे,
उस राजस्थान
की मुख्यमंत्री
उस मुख्यमंत्री
के शपथ ग्रहण
में जावे और
वह भी सरकारी
हैलीकाप्टर
से, राजस्थान
की जनता के
पैसे से,
राजस्थान की
जनता का पैसा,
राजस्थान की
मुख्यमंत्री,
राजस्थान का
समय, राजस्थान
के खिलाफ
फैसला और माला
पहनावे इससे
बड़ी संवेदना
और क्या हो
सकती है, बहुत
संवेदनशील
हैं, मैं कहता
हूं आपसे आप
देखिए ...(व्यवधान)
एक
माननीय सदस्य
: आपने भी ...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
हमने किया वही
आपको करना है
तो कुछ कहना
ही नहीं है ना,
आप स्वीकार
तो करो कि हम
भी ऐसा ही
करेंगे।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
मैं तो यह कह
रहा हूं कि
राजस्थान
विधान सभा में
संकल्प करने
के बाद सदन की
नेता जाए, यह
सोचने की बात है
...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: बीच
में नहीं
बोलें।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
और यह कहना आप
बंद करिए कि
आपने किया
इसलिए हम कर
रहे हैं ।
जनता ने मौका
दिया है जनता
की सेवा करिए
और जनता की
सेवा करके यश
लूटिये। मैं
आपसे इसलिए बात
कर रहा हूं
मुझे पीड़ा
इसलिए होती है
कि अपन जिस
सदन में जनता
के लिए आए हैं
वहां जनता की
बात तो अपन कम
करते हैं हम
करते हैं बात
महिमा मंडन
की। आपके चीफ
व्हिप खुद यह
कहते हैं कि
हमारी सरकार
में शुचिता और
सुराज की कमी
है इससे बड़ा
और क्या
चाहिए
सर्टिफिकेट
आपको कि आपकी
सरकार में शुचिता
और सुराज की
कमी है और वह
यह और कहते
हैं कि मौका
पडा तो मैं
विधान सभा में
कहूंगा। इससे
बड़ी बात क्या
हो सकती है ।
एक मंत्री कहे
तो दूसरा गलत
है दूसरा कहे
तीसरा गलत है,
कैसे बात
चलेगी। भगवान
राम ने केवल
एक धोबी के
कहने से सीता
को भेज दिया
अग्नि
परीक्षा पर। *** (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): किस आधार
पर कह रहे हैं
यह ?
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
*** ...(व्यवधान)
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह क्या
बात कर रहे
हैं ...(व्यवधान)
vns/usc/18.50/3q/5.3.2007
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): किस आधार
पर कह रहे हैं
यह ? किस आधार
पर कह रहे हैं
यह ? यह कोई बात
हुई ? (व्यवधान)
श्री
कनकमल कटारा
(महिला एवं
बाल विकास
मंत्री): माननीय
मुख्यमंत्री
जी के बारे
में यह किस
ढंग से इस तरह
की बातें कर
रहे हैं आप।
अध्यक्ष
महोदय, हजार
आरोप, यह इन
सबकी बात कर
रहे हैं । आप
एक बता दें
हजार आरोपों
में से। (व्यवधान)
श्री
भंवरू खान
(फतेहपुर):
लोकायुक्त
की पोस्ट
भरिये पता चल
जायेगा। आप तो
लोकायुक्त
का पद भरिये
पता चल
जायेगा। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: यह
आप लोग माइक
को क्यों
छेड़ते हो ?
माइक को
छेड़कर माइक
खराब करते हो।
मैं कई लोगों
को देख रही
हूं कि माइक
को यूं-यूं करते
रहते हैं।
माइक को क्यों
छेड़ते हो....(व्यवधान)
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं आवासीय):
यह बेबुनियाद
माननीय मुख्यमंत्रीजी
पर आरोप लगाये
हैं इनको एक्सपंज
कराइये
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): मुख्यमंत्रियों
पर पहले आरोप
लगते हैं कि
नहीं ? यह कोई
नयी बात हो
गयी क्या ? (व्यवधान)
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): तथ्यों
के आधार पर
आरोप
लगायें...(व्यवधान)
डा. ओ.
पी. महेन्द्रा
(उप मुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, बिना
तथ्यों के
कोई आरोप नहीं
लगाये जा
सकते। बिना
तथ्यों के
किसी प्रकार
के कोई आरोप
इस सदन में नहीं
लगाये जा सकते।
तथ्यों के
आधार पर कोई
आरोप लगते
हैं, बिना तथ्यों
के कोई आरोप
नहीं लगाये जा
सकते।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): यह
कोई नयी बात
है क्या ?
इसको कहां से
एक्सपंज
कराइयेगा ? जब
आपके
मंत्रिमंडल
के सदस्य
मुख्यमंत्री
पर आरोप लगा
रहे हैं। आरोप
यह है कि यह
सरेआम कह रहे
हैं कि
पारदर्शिता
नहीं बरती
गयी। यह आरोप
नहीं है तो क्या
है..(व्यवधान)
श्री
जयराम जाटव
(खैरथल):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, सारी
अख़बार की
कटिंग है।
सारी कटिंग
लेकर यह
माननीय सदस्य
आये हैं..(व्यवधान)
आपसे निवेदन
यह है कि इस
तरह के कोई
आरोप लगायें
तो तथ्यों के
आधार पर
लगाये, अख़बार
के माध्यम से
नहीं। तथ्यों
के आधार पर
लगाने
चाहिये..(व्यवधान)
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय):
माननीय अध्यक्षजी,
जो पुष्कर से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने माननीय
मुख्यमंत्री
जी पर आरोप
लगाया कि सेज
के मामले में
उन्होंने
करोड़ों
रुपये खाये
हैं इसका या
तो वह प्रमाण
दें वरना आप
इसको एक्सपंज
कराइये और यह
माफी मांगे।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, गत सदन
में गत सत्र
के अन्दर
बीकानेर से
आने वाले
माननीय
विधायक ने यह
बात आपकी
विधान सभा में
कही थी। यह
आपके रिकार्ड
में है। आप भी
उठाकर देख
लें। तब आपने
किसी ने उसका
खंडन नहीं
किया और यदि
उसको आप, मैं
यह कहता हूं
कि आप तो राम
को मानने वाले
हो, सीता को तो
जाना पड़ा
अग्नि
परीक्षा में।
सीता को भी तो
मुख्यमंत्री
बड़ी बात नहीं
है। आप जवाब
दीजिये इस बात
का। इसमें खास
बात नहीं है
और मैं यह
कहता हूं
कि..(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
अजमेर से आने
वाले माननीय
सदस्य, आपको
यह भी बताना
चाहिये था कि
हजार करोड़ खाये
थे तो किससे
खाये ? आपके
पास क्या
सबूत है ? ऐसे
ही आप कह रहे
हैं कि एक
हजार करोड़
रुपये खा
लिये।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
आप जांच करवा
लीजिये।
श्री
अध्यक्ष: आप
जांच, सवाल यह
नहीं है। किसी
के खिलाफ भी..(व्यवधान)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
कृपया यह
निर्देशित कर
दीजिये सरकार
को कि वह नया
लोकायुक्त
अपाइंट करे।
तीन साल हो
गये आज राजस्थान
में लोकायुक्त
नहीं है। इससे
बड़ी शर्म की
बात क्या
होगी।
श्री
अध्यक्ष:
किसी भी मैम्बर,
किसी भी
मंत्री के
खिलाफ जब आप
कोई आरोप लगाते
हैं..(व्यवधान)
प्लीज आप
बैठें..(व्यवधान)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): यह
द्योतक है इस
बात का कि सरकार
में भ्रष्टाचार
हो रहा है
इसलिये
लोकायुक्त
को नहीं लगा
रहे हैं। आरोप
है ना मेरा।
आप क्यों
नहीं तीन साल
से लोकायुक्त
नियुक्त कर
रहे हैं अगर
आप सही बात
करना चाहते
हैं..(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
रामगढ़ से आने
वाले माननीय
सदस्य..(व्यवधान)
आप लोग स्थान
ग्रहण करें।
माननीय
बैठे-बैठे
नहीं बोलें
आप। एक तो मेरा
सभी माननीय
सदस्यों से..
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): आप
इनको
निर्देशित
करिये लोकायुक्त
तो अपाइंट
करें। वह तय
करेगा कि
मंत्रिमंडल में
भ्रष्टाचार
है या नहीं ? आप,
हम क्या तय
करेंगे ? तीन
साल से
लोकायुक्त
नहीं है।
श्री
अध्यक्ष: आसन
पांवों पर
है..(व्यवधान)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
इसलिये आप
इनको डिफेंड
मत करिये।
श्री
अध्यक्ष: आसन
पांवों पर है।
आसन पांवों पर
है। आप आसन के
प्रति इस तरह
की जो भावना
रख रहे हैं और जो
एक्सप्रेस
कर रहे हैं
मैं समझती हूं
वह बात बहुत
गंभीर है कि
आसन इनको बचा
रहा है। क्या
सवाल है ? यहां
पर हमारे
नियमों में स्पष्ट
है कि जब कभी
किसी के खिलाफ
आप कोई भी
आरोप लगायेंगे
तो उस आरोप के
बारे में आपको
कांक्रीट प्रूफ
देकर और पहले
से सूचित करना
पड़ेगा। यदि 273
में आपने लगा
दिया है, लिखकर
दे दिया है कि
मुझे मुख्यमंत्री
के खिलाफ यह
आरोप लगाना है
तो उसकी इजाजत
मिलेगी वरना
आप इस तरीके
से नहीं कह
सकते कि इस मामले
में मुख्यमंत्री
ने हजारा
करोड़ खाये
हैं या
करोड़ों खाये
हैं। अपने सदन
की यह परम्परा
रही है और
मेरा सभी
माननीय सदस्यों
से एक निवेदन
है कि मैं देख
रही हूं कई
माननीय सदस्य
इस माइक को
यूं-यूं करते
रहते हैं। 25
माइक खराब हो
चुके हैं ऐसा
करने की वजह
से। इसलिये
मैं चाहूंगी
माइक का सहारा
लेकर और इसको
आप इस तरीके
से नहीं किया
करें क्योंकि
25 माइक अभी
बदलने पड़े
हैं। इसी सेशन
में बदलने
पड़े हैं। मैं
देख रही हूं,
अभी मैंने कई
लोगों को देखा
है। एक को
नहीं, सबने
आपने यूं-यूं
कर रखे थे। क्यों
कर यूं। आप
ऐसे रखिये।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): माननीय,
प्रतिपक्ष की
तरु से 25 माइक
खराब हुए
होंगे।
श्री
अध्यक्ष: पच्चीस
हजार कीमत है
एक माइक की और
आप लोगों की
आदत पड़ गयी
यूं-यूं करते
रहते हैं आप।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): यह
प्रतिपक्ष की
और से ही होता
है हमारे यहां
से तो नहीं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मेरी
प्रार्थना है
कि बिना किसी
प्रमाण के इन्होंने
जो चलते हुए
आरोप लगाये
उसको एक्सपंज
करवायें आप।
श्री
अध्यक्ष: वह
ठीक है। वह
ठीक है। हो
गयी।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): इनको प्रताडि़त
भी करें आप।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपसे
एक और निवेदन
है हमारा आप
यह दिखवा लें
कि आज से पहले
मुख्यमंत्रियों
पर आरोप कभी
नहीं लगे इस
सदन में ? फिर
आप सबको एक्सपंज
कराइयेगा।
मैं आपको
दूंगा
कार्यवाही जिसमें
मुख्यमंत्रियों
पर तरह-तरह के
आरोप लगाये
गये। इसी सदन
में भ्रष्टाचार
के भी आरोप
लगाये गये।
अगर आपको एक्सपंज
कराना है तो
आप एक आँख से
देखिये। आप
सबको भी एक्सपंज
कराइये। कब
नहीं लगे यहां
? यह घनश्याम
तिवाड़ी जी
बैठे हैं और
गृह मंत्रीजी,
कब-कब मुख्यमंत्रियों
पर आरोप नहीं
लगे हैं ? आरोप
हमेशा लगे
हैं।
डा. ओ.
पी. महेन्द्रा
(उप मुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, नियम,
प्रक्रिया
में स्पष्ट
उल्लेख है जब
कोई आरोप
लगायेगा उसके
पक्ष में साक्ष्य
प्रस्तुत
किये
जायेंगे।
बिना साक्ष्यों
के कोई आरोप
नहीं लगाये
जाएं। नियम,
प्रक्रिया,
अध्यक्षीय
निर्णय में स्पष्ट
रूप से लिखा
हुआ है।
श्री
अध्यक्ष: 273
में नोटिस
दीजिये फिर
लगाइये..(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
यह माननीय
कालीचरण जी
सर्राफ ने
आरोप लगाया कि
पहले के सब
मुख्यमंत्री
भ्रष्ट थे और
बैठे-बैठे बोल
रहे हैं। गैर
जिम्मेदाराना
ढंग से बोल
रहे हैं। कैसे
लगा दिया आपने
? अगर इनका
आरोप सही है
तो इनका भी
सही है। वह बैठे-बैठे
ही लगा रहे
हैं कि पहले के
मुख्यमंत्री
भ्रष्ट थे।
कैसे कह दिया
उन्होंने ?
पहले के मुख्यमंत्रियों
के मुकाबले
में तो आप
छोड़ो चक्कर..(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
हिण्डौली से
आने वाले
माननीय सदस्य,
जो लोगे
बैठे-बैठे कोई
बात यूं ही
सरपास अपनी कर
देते हैं वह
अंकित नहीं
होता है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
हां अंकित
नहीं होगा।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं तो
बहुत नया आदमी
हूं, आप तो बहुत
पुरानी नेता
हैं मैं आपको
एक बात ध्यान
दिलाना चाहता
हूं। जब
मोरारजी भाई
इस देश के
प्रधानमंत्री
थे और चरण
सिंहजी गृह
मंत्री थे तो
चरण सिंहजी के
दामाद और
मोरारजी के बेटे
पर भ्रष्टाचार
के आरोप लगे
थे..(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
बीच में न
टोकें सीकर से
आने वाली माननीय
सदस्या। बोल
लेने दें उन्हें।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
उस समय
प्रधानमंत्री
जी के बेटे और
चरण सिंहजी के
दामाद पर
भ्रष्टाचार
के आरोप लगे
थे..(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
विधान सभा की
बात करिये।
पहले यह है। आप
राजस्थान
विधान सभा की
बात करें।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
अध्यक्ष
महोदय, आप जब
कहती हैं कि
लोक सभा स्पीकर
ने यह बोला,
जहां आप कहती
हैं कि कलकत्ता
हाई कोर्ट ने
यह बोला, हम जब
बहुत उच्च
मानक की बात
करते हैं कि
राजस्थान
विधान सभा
बहुत उच्च
मानकों पर है
तो हमारे
आदर्श बहुत
ऊंचे होने
चाहिये।
हमारे आदर्श
छोटे-मोटे
नहीं होने चाहिये।
मैं जब आपसे
कह रहा था उस
समय चरण
सिंहजी ने एक
पत्र लिखा
प्रधानमंत्री
जी को..(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
आपके केवल तीन
मिनट बाकी हैं
अब चरण सिंहजी
को छोड़कर
यहां आ जाइये
आप। आप चरण
सिंहजी को
छोड़कर राजस्थान
विधान सभा में
आ जाइये।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
अध्यक्ष महोदय,
मेरे तीन मिनट
बाकी नहीं है।
जो मेरा समय
खराब हुआ है
उसका जिम्मेदार
मैं नहीं हूं।
श्री
अध्यक्ष: क्या
?
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
जो लोगों ने
मेरा समय लिया
है उसका जिम्मेदार
मैं नहीं हूं।
तब चरण सिंहजी
ने यह कहा कि
मेरे दामाद और
आपके बेटे की जांच
होनी चाहिये।
उन्होंने यह
नहीं कहा कि
आरोप मिथ्या
है। वह आपकी
मरजी है आप
इसको कैसे
मानें, कैसे
लेवें ? मैं
इसमें नहीं
कहता। मैं
आपसे यह बात
कह रहा था कि
आपके राज के
अन्दर पूरे
तीन साल बीत
गये हैं, 40
महीने। उन तीन
साल के अन्दर
गांव का आदमी
न चैन से सो
सका, न
विद्यार्थी
पढ़ सका और न
वह अपना इलाज
करा सका। मुझे
लगता है कि
आपके इस
अभिभाषण में
और आपके बजट
में झालावाड़
और जयपुर, यह
आपके लिये
राजस्थान
है। एस एम एस
में आपने कर
लिया तो मान
लो आपने पूरे
चिकित्सा
में कर लिया।
झालावाड़ में
कर लिया पूरे
राजस्थान
में कर लिया।
आप यह भूल
जाते हैं कि
उसमें और भी
गांव है। ऐसे
भी गांव है
जहां आज भी
सड़क नहीं है।
ऐसे गांव भी
है जहां
रोजगार नहीं
है। आज गांव
के अन्दर
अकाल के मारे
आदमी
बेरोजगार है।
वहां काम नहीं
है। पलायन की
स्थिति के अन्दर
है और आपकी
सरकार ने
राजनैतिक
दवाब में, मैं
फिर कह रहा
हूं आपसे ऊपर
से तो दबाव
डालकर
पटवारियों के
माध्यम से
खराबे की
रिपोर्ट दर्ज
करायी है..(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
कृपया समाप्त
करें। समय
होने जा रहा
है।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
मैंने पहले
आपने निवेदन
किया कि जो
समय मेरा इन
लोगों ने लिया
है वह आप मुझे
दीजिये
कृपापूर्वक।
ऐसे नहीं है।
सुनिये मेरी
बात आप।
श्री
अध्यक्ष:
मुझे कोई
तकलीफ नहीं
है। मैंने
भारतीय जनता
पार्टी को दे
दिया 7 घण्टे 16
मिनट और
इंडियन नेशनल
लोकदल के 3 घण्टे
18 मिनट हैं
जिसमें पूरा
एक घण्टा ले
चुके हैं आपके
हिण्डौली से
आने वाले
माननीय सदस्य।
और लोग भी
बोलना
चाहेंगे
इसलिये मैं
आपको यह कह
रही थी। आपने 6
बजकर 37 मिनट पर
अपना भाषण प्रारम्भ
किया था
इसलिये मैं
चाहूंगी कि अब
आप समाप्त
करें।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
लेकिन आप मुझे
यह बतायें अध्यक्ष
महोदय, कि जो
बीच में
टोकाटाकी हुई,
जो समय गया वह
समय न
कांग्रेस का
है, न मेरा है वह
समय।
श्री
अध्यक्ष: आप
यह मानकर
चलिये कि जो
मूवर और सैकण्डर
होता है उनकी
मेन स्पीचेज
होती हैं।
श्याम/चौहान 05.03.2007
19.00 4a
श्री
अध्यक्ष:
उनसे आप तुलना
नहीं कर सकते।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
मैं उनसे
तुलना कर ही
नहीं रहा।
श्री
अध्यक्ष: क्या
बात कर रहे
हैं।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
मैं तुलना
नहीं कर रहा
हूं, मैं यह कह
रहा हूं कि जो
समय जाया हुआ
...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: मैं
आपको पाँच मिनट
में अपना भाषण
समाप्त करने
के लिए कह रही
हूं, प्लीज
पाँच मिनट में
करिये।
सदन
की कार्यवाही
विधान
सभा की बैठक
के निर्धारित
समय में वृद्धि
डा. ओ.
पी. महेन्द्रा
(सरकारी उप
मुख्य
सचेतक): अध्यक्ष
महोदय, सदन का
समय पाँच मिनट
और बढ़ाया जाये।
श्री
अध्यक्ष: क्या
सदन की अनुमति
है कि सदन का
समय पाँच मिनट
और बढ़ाया
जाये?
(स्वीकृत)
सदन
का समय पाँच
मिनट के लिए
बढ़ाया गया।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
नहीं, अध्यक्ष
महोदय, ऐसा मत
कीजिए प्लीज।
मेरी बात मुझे
पूरी करने
दीजिये।
श्री
अध्यक्ष: आसन
आपके कहने से
नहीं चलेगा।
आपको आसन के
कहने से चलना
पड़ेगा।
धन्यवाद
प्रस्ताव पर
वाद विवाद
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
नहीं, यूं
नहीं, यदि
मुझे पता होता
कि मुख्यमंत्री
के खिलाफ
बोलने की इतनी
बड़ी सज़ा है तो
मैं नहीं
बोलता। मुख्यमंत्री
के खिलाफ
बोलने की सज़ा
यह है कि आप
बोलने ही नहीं
दोगे तो मैं
नहीं बोलता।
मैं तो आपसे
और पूछना
चाहता हूं
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अध्यक्ष: अब
आप अपनी बात
कह दीजिये।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
अभी 28 तारीख को
माननीय मुख्यमंत्री
महोदया जिंदल
ग्रुप के लिग्नाइट
पावर प्रोजेक्ट
के शिलान्यास
में गयी,
शिलान्यास
करके आयी।
बहुत बढि़या
बात है, राजस्थान
को नया
प्रोजेक्ट
मिलेगा। इसके
लिए आप धन्यवाद
के पात्र हैं।
लेकिन उस
प्रोजेक्ट
के अंदर आज की
तारीख तक
पर्यावरण की
एन.ओ.सी. नहीं
है। उसमें 1166
एकड़ जमीन ली
किसानों को,
किसानों को
मुआवजा अभी तक
तय नहीं हुआ
है, वह मिले
वहां मुख्यमंत्री
से तो जिंदल
ग्रुप वालों
ने कहा मार्च
तक कर देंगे।
कितनी
संवेदनशील
सरकार आपकी है,
मुआवजा तय
नहीं,
पर्यावरण की
एन.ओ.सी. नहीं
और जल्दी
आपको इसलिए है
कि आपने उसको
कमिट किया है
कि 2008 के
पहले-पहले आप एक
यूनिट चालू कर
देंगे ताकि
हमारी नाक बच
जाये, यह
स्थिति जिस
सरकार की हो।
श्री
अध्यक्ष: यह
कोई गलत बात
थोड़े ही है।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
यह गलत बात
नहीं है।
श्री
अध्यक्ष:
बिजली मिलेगी,
यह गलत बात
थोड़े ही है।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
यह गलत बात
नहीं है कि
जिसकी एन.ओ.सी.
नहीं है पर्यावरण
की, वहां मुख्यमंत्री
करें शिलान्यास,
यह कोई गलत
बात नहीं है
...(व्यवधान)
इससे बढि़या
बात क्या
होगी, बहुत
संवेदनशील आप
हैं ...(व्यवधान)
आप बहुत यश
लूट रहे हैं
कॉपरेटिव
चुनावों का,
बहुत धन्यवाद
आपको। उसमें
किया क्या
आपने कि पहली
बार सारे
कानून-कायदों
को ताक पर
रखकर के आपने
जब डेयरी के
चुनाव हुए तो
वह जब डायरेक्टर
सर पर आ गये,
डायरेक्टर
का बन गया
इलेक्टेड
बोर्ड तो आपने
किया
रिजर्वेशन,
कमाल देखिये
आप, आपकी
कितनी
बदनीयती है कि
जब इकाइयों का
काम चालू हुआ
...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप बदनीयती की
बात करते हो,
प्रहलाद गुंजल
का हाल
देखिये, पूरा
का पूरा चुनाव
जीता हुआ
निरस्त ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
आपका समय
हिंडौली से
आने वाले
माननीय सदस्य
खा रहे हैं।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे यह कह
रहा हूं कि
डेयरी मूलत:
ग्रामीण
विकास का आधार
है और किसानों
की संस्था
है। उस डेयरी
के साथ मखौल
करना और जब
चुनाव आये
डायरेक्टर
के तब करना
रिजर्वेशन
करना, यह मखौल
है, रिजर्वेशन
के लिए भी,
एस.सी., एस.टी. के
लिए भी और किसानों
के लिए भी,
यहीं इंतहा
नहीं हो गयी,
उसके बाद जब
डायरेक्टर
के चुनाव हो
गये तो हार्स
ट्रेडिंग हुई
और वह करके
आपने ...(व्यवधान)
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): क्या
रिजर्वेशन
नहीं होना
चाहिए था?
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
होना चाहिए
था, वह इकाइयों
के स्तर पर,
यह आपकी
बदनीयती थी,
आपने उसको
चालू किया बीच
के अंदर, यह सब
लागू नहीं
होता है, यह
आपकी संवेदना
है, इस प्रकार
से कुल मिलाकर
के, आज तक मैंने
देखा है कि
पूरे राजस्थान
को आप लोग
नेस्तानाबूद
करना चाहते
हैं। चाहे सेज
के नाम पर, चाहे
रतनजोत के नाम
पर, किसान की
जमीन गांव की,
गोचर जमीन वह देंगे
आप मल्टीनेशनल
को रतनजोत के
नाम पर,
दीजिये किसान
को आप, किसान
बोये उसको,
किसान गरीब है
उसको लोन दीजिये,
दीजिये उसको
नो-हाउ व काम
करे। किसान की
आप बात करते
हैं। किसान को
आप आज जयपुर
में नहीं
घुसने दो। आंदोलन
करे गांवों
में आप वहां
केस लगा दो।
बिजली आप दो
नहीं, पानी आप
दो नहीं, अध्यापक
आप दो नहीं और
बात करो धन्यवाद
प्रस्ताव
पास करने की
और कोई मुख्यमंत्री
के खिलाफ बोल
जाये तो आप
दबाना चाहते हो।
यह आपकी
संवेदनशीलता
है।
अध्यक्ष
महोदय, यह सदन
राजस्थान की
जनता का सदन
है, किसी
पार्टी की
बपौती नहीं
है, यह खाला जी
का घर नहीं है
कि इसका हम
मखौल बनाये।
इस सदन के
अंदर चर्चा
होनी चाहिए
किसान की, खेत-मजदूर
की, गरीब की,
गांव की,
विकलांग की,
विकलांग की आप
बात करते हो,
इसमें आपने
विकलांग का भी
एक क्लॉज
दिया है, आज तक
आपने आयोग
नहीं बनाया
विकलांग के
लिए। एक मात्र
वृद्व आश्रम
चलता है राजस्थान
का पुष्कर
में समाज कल्याण
विभाग का,
उसकी आकर
देखें कि क्या
दुर्गति है।
दो रूपये नाश्ते
के लिए हफ्ते
के, दो रूपये
दाढ़ी के लिए
महीना भर के
लिए, साबुन के
तीन रूपये यह
तो स्थिति है
और फिर कहते
हो कि हमारे
पास पैसा बहुत
है और जो एडेड
इंस्टीटयुशंस
चलती हैं ...(व्यवधान)
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): यह दो
रूपया, तीन
रूपया कब का
है?
श्री
अध्यक्ष: आप
बीच में ना
बोलें, प्लीज,
सीट डाउन।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
यह समय मेरा
नहीं है। अध्यक्ष
महोदय, यह समय
मेरा नहीं है।
एडेड स्कूल
कुल तीस करोड़
रूपये के लिए
तरस रही हैं।
श्री
अध्यक्ष: सदन
की कार्यवाही
मंगलवार,
दिनांक 6 मार्च,
2007 के प्रात: 11.00
बजे तक के लिए
स्थगित की
जाती है।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 19.05
बजे मंगलवार, 6
मार्च, 2007 के
11.00
बजे तक के लिए
स्थगित हुई।)