vkj/akt/1a/1100/04102006
अशोधित
प्रति/
प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
अंक 6
बारहवीं
विधान सभा के
छठे सत्र का
दूसरा दिवस संख्या 2
बुद्धवार, 04अक्टूबर, 2006
राजस्थान
विधान सभा की
बैठक 11.00 बजे
विधान
सभा भवन,
जयपुर में
प्रारम्भ
हुई।
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
तारांकित
प्रश्नोत्तर
तहसील
क्षेत्र
राजगढ़(अलवर)
के माडा चयनित
ग्रामों हेतु
मूलभूत
सुविधाएं
1. श्री कान्तीप्रसाद मीणा (थानागाजी): क्या जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-
(1) विधान सभा क्षेत्र थानागाजी में तहसील राजगढ़ सहित कौन-कौनसे ग्राम माडा योजना में चयनित हैं? सूची सदन की मेज पर रखें।
(2) क्या उक्त ग्रामों में सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं? यदि हां, तो किस-किस गांव में क्या-क्या सुविधा सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है? अब सरकार इन माडा गांवों में और क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध कराने का विचार रखती है?
श्री अध्यक्ष: श्री कान्तीप्रसाद मीणा का प्रश्न स्थगित हो गया है क्योंकि पूरी सूचना नहीं आई है।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): छठे सत्र में पहला ही प्रश्न स्थगित होना शर्म की बात है सरकार के लिए...(व्यवधान) पहले सत्र में पहला प्रश्न स्थगित होना...
श्री अध्यक्ष: ऐसा है, जब बहुत अधिक सूचना हो यानी माडा गांवों में और क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध कराने का विचार रखते हैं तो सारे ही विभागों से सम्बन्धित हो गया, इतनी विस्तृत सूचना प्राप्त करने में समय भी लगता है और 14 दिनों में यह सूचना प्राप्त नहीं हो सकती थी इसलिए यह स्थगित किया गया है।...(व्यवधान) दूसरा प्रश्न भी स्थगित किया गया है। (व्यवधान) और आप बैठे-बैठे बोलेंगे फिर, ठीक है।
अबीमित
सरकारी
वाहनों
द्वारा
दुर्घटनाओं के
कारण व्यय
राशि
2. श्री जोगाराम पटेल (लूणी): क्या यातायात मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-
(1) क्या यह सही है कि सरकारी वाहन बिना बीमा कराये उपयोग में लिये जा सकते हैं?
(2) क्या सरकारी वाहनों को बीमा नहीं करवाने की छूट मोटरयान अधिनियम में प्रदान की हुई है? यदि हां, तो कब से?
(3) राज्य सरकार को गत तीन वर्षों में विभिन्न दुर्घटनाओं के मुआवजे के रूप में कितनी राशि वहन करनी पड़ी?
श्री अध्यक्ष: दूसरा प्रश्न श्री जोगाराम पटेल का भी स्थगित किया गया है...(व्यवधान) सुनिये माननीय प्रतिपक्ष के नेता महोदय। तीन वर्षों में विभिन्न दुर्घटनाओं में मुआवजे के रूप में कितनी राशि वहन करनी पड़ी है, इस प्रश्न का जवाब 13-14 दिन में नहीं आ सकता था, इसलिए इसे भी स्थगित किया जा रहा है। मैं समझती हूं शायद आप सरकार की मजबूरी समझ गये होंगे।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्यक्ष महोदय, तो नियमों में प्रावधान है कि आप अस्वीकार कर सकती हैं। आपने एक्सेप्ट क्यों किया? जब आपने स्वीकार कर लिया तो सरकार के लिए लाजिमी है कि वह जवाब दे।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): आप माननीय अध्यक्ष महोदय के आदेशों को चैलेंज कर रहे हैं।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हम अध्यक्षीय व्यवस्था पर ही ध्यान दिलाना चाहते हैं। अध्यक्षीय व्यवस्था पर ही हम अध्यक्षजी का ध्यान दिलाना चाहते हैं, ऐसा नियमों में प्रावधान है...
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): वह स्वीकार किया है, वह भी आपने ही किया है और यह स्थगित किया है, वह भी अध्यक्षजी ने ही किया है।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष) कोई बात तो सुनो मेरी आप, कोई बात तो सुने मेरी, कोई ऐसा प्रश्न है जो....
श्री अध्यक्ष: प्रतिपक्ष के नेता की बात तो सुन लो।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): आप व्यवस्था नहीं दें।
श्री अध्यक्ष: अब आप बीच में नहीं बोलें। बोलने दें प्रतिपक्ष के नेता को।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): ...लेंथी हो, इतने समय में जवाब कलेक्ट नहीं कर सकती सरकार तो उसको प्रोटेक्शन देने के लिए आप हैं लेकिन जब आप स्वीकार कर लेती हैं तो हमारे राइट्स को प्रोटेक्शन देने के लिए आप हैं। अब यहां भी आप सरकार को प्रोटेक्ट करती हैं, वहां भी करती हैं, चारों तरफ सरकार को प्रोटेक्ट कर रही हैं, यह कोई बात थोड़े ही हुई...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: मैं तो आपको प्रोटेक्ट करती हूं, सरकार को नहीं करती हूं।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं नहीं आप, पहले दिन से ही...
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह पूरा झुंझुनूं जिला जानता है आप किसको प्रोटेक्ट करती हैं? (व्यवधान) पूरा झुंझुनूं जिला जानता है, आप किसको प्रोटेक्ट करती हैं?
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं नहीं, माननीय पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर साहब, सिर्फ चार दिन तो विधान सभा चलेगी और अध्यक्ष महोदय एक के बाद एक प्रश्न को स्थगित करती जा रही हैं, यह तो कोई बात नहीं हुई मान्यवर, यह तो पहला अवसर है, किसी भी पक्ष की किसी भी सरकार ने....
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे आपत्ति है, प्रतिपक्ष के नेता महोदय, इसको यह ऐसे-ऐसे करते हैं, इसके टूटने का खतरा है। एक तो अध्यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के नेता महोदय के यहां एक डंडा जरूर लगवायें जिससे कम से कम यह माइक बच जाये, मेरा आपसे करबद्ध निवेदन है कि यह व्यवस्था आप कर दें।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे इस बारे में और निवेदन करना है आपसे। (व्यवधान)
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा निवेदन यह है कि अध्यक्ष महोदय के ऊपर किसी प्रकार से, इस प्रकार के रिमार्क्स कि आप सत्ता पक्ष का पक्ष ले रही हैं, इधर भी लेती हैं, उधर भी लेती हैं, यह बहुत आब्जेक्शनेबल है, यह आसन के प्रति जिस प्रकार का रिमार्क्स है, यह असम्मानजनक टिप्पणी है माननीय अध्यक्ष महोदय के ऊपर।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैंने प्रतिपक्ष और पक्ष की बात नहीं की।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): इस पर आपको नोटिस लेना चाहिए।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्यक्ष महोदय, आप मेरे शब्दों पर तो ध्यान दीजिये। मैंने नहीं कहा कि आप पक्षपात करती हैं। मैंने कहा, आप प्रोटेक्शन करती हैं। यहां भी करती हैं, बाहर भी करती हैं, हमें चारों तरफ से आप पीटती हैं, ऐसा कैसे होगा? सदन में तो आपको हमारा प्रोटेक्शन करना चाहिए।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): ये तो बराबर आपको प्रोटेक्शन करती हैं। (व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हमारा राइट है, आप हमें प्रोटेक्शन कीजिये। यदि हम इनसे प्रोटेक्शन नहीं मांगेंगे तो क्या महावीर प्रसाद जी से मांगेंगे क्या? (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: प्रश्न का जवाब आने दें, प्रश्न का जवाब आने दें अब आप। सरकारी मुख्य सचेतक महोदय, इस हाउस के अन्दर लीडर आफ द हाउस को भी पूरी बात जो चाहे कहने का हक है, इसी तरीके से प्रतिपक्ष के नेता को भी जो चाहे कहने का हक है। (व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह तो कोई बात हुई।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है आपसे कि सरकार उत्तर नहीं देना चाहती है। सिर्फ दो जगह से इनको सूचना एकत्र करनी थी। यह सही है कि सरकारी वाहनों को छूट दी हुई है। जब भी ऐसा प्रश्न आता है तो फाइनेंस डिपार्टमेंट कन्करेंस देता है।
श्री अध्यक्ष: यह प्रश्न तो स्थगित हो गया है, इस स्थगित प्रश्न के बारे में क्या सुनें, स्थगित प्रश्न के बारे में क्या सुनें?
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): देखिये, मेरी बात सुन लें आप। नहीं नहीं, आप मेरी बात सुन लें। आपने कहा है कि इतने सारे महकमों से सूचना लेनी है, उसके ऊपर मैं निवेदन कर रहा हूं। यह सरकार की इनएफिशियंसी दर्शाती है यह बात क्योंकि जब आपको एडिशनली चाहिए तो आपको फाइनेंस डिपार्टमेंट की कन्करेंस चाहिए और जो भी एडिशनली वहां से दी जाती है, सारा हिसाब एक जगह पर वहां मौजूद होता है, नम्बर एक और बाकी रोडवेज की बसों में दुर्घटनाएं होती हैं, आपको सिर्फ दो जगहों से सूचना लेनी थी कि मुआवजे की राशि जो दी गई है कि यह विभिन्न विभागों से लेनी है? यह बिलकुल गलत बात है। सरकार में यह सम्बन्धित विभागों से.....
श्री अध्यक्ष: तीन वर्षों की विभिन्न विभागों की सूचना है, तीन वर्षों की विभिन्न विभागों से सूचना 15 दिन के अन्दर सम्भव नहीं थी।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): हां हां, है, मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं कि यह दो दिन की सूचना है, आप चार घंटे के अन्दर सारी सूचना ले सकते हैं। वहां फाइनेंस डिपार्टमेंट के अन्दर सारी चीजें मौजूद रहती हैं, यह सम्बन्धित विभाग की लापरवाही है। इन्होंने इससे बचने के लिए यह सारा काम किया है।
श्री अध्यक्ष: प्रश्न स्थगित किसी की भी सरकार हो, हमेशा होते रहे हैं और जब समय पर जवाब नहीं आता है तो स्थगित करना पड़ता है। श्री रिछपाल सिंह मिर्धा।
विधान
सभा क्षेत्र
डेगाना की
अपूर्ण/विचाराधीन
पेयजल
योजनाएं
3. श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): क्या ग्रामीण विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-
(1) जिला ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ नागौर द्वारा वर्ष 2004-05 एवं 2006-07 के दौरान विधायक स्थानीय क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम के तहत विधान सभा क्षेत्र डेगाना में पेयजल से सम्बन्धित विभिन्न योजनाओं के लिए कौनसे कार्यों की कुल कितनी राशि की स्वीकृतियां जारी की गईं? विवरण ग्रामवार/योजनावार सदन की मेज पर रखें।
(2) उक्त जारी की गई स्वीकृतियों के विभिन्न कार्यों में से कितने कार्य पूर्ण हो चुके हैं, कितने अपूर्ण हैं व कितने अभी तक शुरू ही नहीं किये गये? विवरण सदन की मेज पर रखें।
(3) क्या उक्त अपूर्ण कार्यों को सरकार भविष्य में पूरे करने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं तो क्यों? विवरण सदन की मेज पर रखें।
श्री कालूलाल गुर्जर (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): (1) जिला परिषद (ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ) नागौर द्वारा वर्ष 2004-05 एवं वर्ष 2006-07 के दौरान विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजनान्तर्गत विधान सभा क्षेत्र डेगाना में पेयजल से सम्बन्धित वर्ष 2004-05 में 13 परियोजनाएं राशि रुपये 9.26 लाख एवं वर्ष 2006-07 में आठ परियोजनाएं राशि रुपये 9.83 लाख, इस प्रकार कुल 21 परियोजनाओं की कुल राशि 19.09 लाख रुपये की स्वीकृतियां जारी की गई। इन कार्यों का विवरण ग्रामवार, योजनावार संलग्न परिशिष्ट-क पर अवलोकनीय है।
(2) उक्त 21 कार्यों में से वर्ष 2004-05 के समस्त 13 कार्य पूर्ण करवा लिये गये हैं। वर्ष 2006-07 के आठ कार्यों में से एक कार्य प्रगतिरत है व सात कार्य जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा बिना टेण्डर प्रीमियम के कार्य नहीं कराने के कारण इन कार्यों की तकनीकी स्वीकृति जारी नहीं की गई है, जिसके कारण से ये कार्य प्रारम्भ नहीं किये गये। विवरण परिशिष्ट-क के कालम संख्या-11 पर अंकितानुसार है1
(3) जी हां। अपूर्ण एक कार्य ग्राम पंचायत गुणसली द्वारा शीघ्र पूर्ण करवा लिया जायेगा तथा शेष सात कार्य जिनकी कार्यकारी एजेंसी जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को नियुक्त किया गया था, इन सभी कार्यों हेतु बिना टेण्डर प्रीमियम के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा कार्य करवाने से इन्कार कर दिया गया है। इन सभी कार्यों की कार्यकारी एजेंसी परिवर्तन पर विचार कर कार्य शीघ्र पूर्ण करवा लिये जायेंगे।
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि एक जनवरी, 2006 को विधायक कोष से जो स्वीकृति दी, इसमें अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ और इस बारे में सरकार आज तक फैसला नहीं कर पाई कि कौनसी कार्य एजेंसी इस कार्य को करेगी? नम्बर दो, विधायक कोष कार्यों के लिए.....
श्री अध्यक्ष: आप लिखकर देंगे, कौनसी कार्यकारी एजेंसी होगी? जब आपका पैसा है तो आप लिखकर दें।
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): हम तो कह रहे हैं कि यह हमने थोड़े ही तय किया था कि कार्यकारी एजेंसी कौनसी होगी, वह तो सरकार तय करेगी। नहीं नहीं, हमने तो लिखकर दिया है जलदाय विभाग को, पीएचईडी को ये सब कार्य दिये थे...
श्री अध्यक्ष: तो जलदाय विभाग ने ना कर दिया कि हम नहीं है। आप दूसरी कार्यकारी एजेंसी से करवा लो। आप दूसरी नियुक्त कर दो।
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): यह तो सरकार की जिम्मेदारी है ना, काम फिर कौन करेगा? दूसरे के लिए सरकार लिखे। हमारी गाइडलाइन में है तब करेंगे, कैसे करें, गाइडलाइन में नहीं है तो।
श्री अध्यक्ष: आप दूसरी नियुक्त कर दो। पंचायत है, पंचायत समिति है। उनको कर दो आप।
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): पंचायत से नहीं करा सकते इनको पानी वाले कार्यों को। आप पूछो मंत्रीजी से, पंचायत से नहीं करा सकते। पूछ लो आप मंत्रीजी से, यह करवा सकते हैं क्या आप पंचायत से?
श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्यक्ष महोदय, आप बता दो। आप अलाउ करवा दीजिये, पीएचईडी वाले कार्यों को आप पंचायत या पंचायत समिति से करवा दीजिये। पीएचईडी के काम है, यह पीएचईडी से करा लो या दूसरे विभाग से करा लो, यह आप अलाउ करवा दीजिये। (व्यवधान) यह पीएचईडी नहीं कर सकती तो और कोई कार्यकारी एजेंसी करा नहीं सकती है अध्यक्ष महोदय।
श्री अमराराम (धोद): यह सरकारी विभाग है, पेयजल का काम है, यह पेयजल विभाग से ही करवा सकते हैं। स्पष्ट आदेश है कि उनसे कोई काम नहीं करा सकते। (व्यवधान)
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): एक-एक साल से काम अधूरे पड़े हैं।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्यक्ष महोदय, ये काम अधूरे पड़े हैं, आप अलाउ करवा दीजिये। (व्यवधान)
श्री अमराराम (धोद): ये तो मनमर्जी कर रहे हैं। (व्यवधान)
Jk/akt/11.10/1b/4.10.2006
श्री जुबेर खान: डेढ़-डेढ़, दो-दो साल गुजरते हैं, काम नहीं होते हैं अध्यक्ष महोदय। खास तौर से पीएचईडी और यह विद्युत विभाग, दो विभाग ऐसे हैं....(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप एक साथ इतने जने क्यों बोल रहे हैं, मूल प्रश्नकर्ता को बोलने दीजिये, आप क्यों खड़े हो गये बीच में।
श्री रिछपाल मिर्धा: मेरा मूल प्रश्न है अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से बड़े विनम्र शब्दों में कह रहा हूं कि कार्य एजेंसी जलदाय विभाग के द्वारा यह कार्य कराने पड़ते हैं, दूसरी कार्य एजेंसी हम नियुक्त नहीं कर सकते। आप पूछ लीजिये यह। पूरे सदन में अभी आ जायेगा मामला सामने।
श्री अध्यक्ष: हम रोज कराते हैं, यह कैसे मान लूं।
श्री रिछपाल मिर्धा: हमारे कहे फिर क्यों नहीं करते हैं, इस बात का जवाब दे दो आप, हमारे क्यों नहीं किये जाते।
श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): अध्यक्ष महोदय, इसकी समय सीमा तो फिक्स है क्या। तकनीकी स्वीकृति, प्रशासनिक स्वीकृति की क्या समय सीमा फिक्स है क्या।
श्री अध्यक्ष: हां, देखिये...
श्री मुरारी लाल मीणा: एक-एक साल तक न तो प्रशासनिक स्वीकृति निकलती, न तकनीकी स्वीकृति निकलती है इसमें।
श्री अध्यक्ष: बड़ी एस.आर. के अलावा बाकी सारे काम पंचायत समिति भी करती है, पंचायत भी करती है।
श्री रिछपाल मिर्धा: पेयजल का कह रहा हूं मैं अध्यक्ष महोदय, मेरा सवाल पेयजल से संबंधित ही है।
श्री अध्यक्ष: हां, पेयजल की ही मैं कह रही हूं। (व्यवधान)
श्री रिछपाल मिर्धा: माननीय अध्यक्ष महोदय, क्या राजस्थान पूरे में ही यह व्यवस्था है।
श्री मुरारी लाल मीणा: माननीय अध्यक्ष महोदय, एम.एल.ए. लेड के कामों की क्या टाइम, एक-एक साल तक प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति नहीं मिलती है, इसकी समय सीमा फिक्स होनी चाहिए। (व्यवधान)
श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री का जवाब ही पूरा असत्य है। मंत्री का जवाब ही गलत है। (व्यवधान)
एक माननीय सदस्य: पूरे राजस्थान के जो विधान सभा क्षेत्र है उनमें पूरी व्यवस्था है क्या यह।
श्री कैलाश त्रिवेदी: माननीय अध्यक्ष महोदय, आप सुन लें मेरी बात को। मंत्रीजी ने जो जवाब दिया है कि विभाग ने बिना टेंडर प्रीमियम उक्त कार्य को करने के लिए विभाग ने मना किया है और भाग (क) के अंदर आपने यह लिखा है कि तकनीकी स्वीकृति प्राप्त नहीं होने से एफ.एस. जारी नहीं की गई माननीय सदस्य की। तकनीकी स्वीकृति के अंदर कभी भी आपको टेंडर प्रीमियम की जरूरत नहीं है, बीएसआर से आपका टेक्नीकल एस्टीमेट बनता है और विभाग ने यह एस्टीमेट नहीं बनाया है, जबकि टेक्नीकल एस्टीमेट ओनली फोर बीएसआर से बनता है, किसी भी बिल्डिंग का हो, किसी भी काम का हो। माननीय विधायक की अनुशंषा के बाद साल भर तक घुमाया गया जबकि ग्रामीण विकास विभाग को 35 दिन में इसकी टी.एस. और एफ.एस. जारी करनी थी लेकिन ग्रामीण विकास विभाग की लापरवाही से एक साल तक माननीय विधायक की घोषणा के अनुरूप गांव में लोगों को पानी नहीं मिला, यह है। यह ग्रामीण विकास की योजनाओं की क्रियान्विति नियम के अनुरूप, ग्रामीण विकास बीएसआर के अनुरूप अगर इसका जो तखमीना बनता, एफ.एस. जारी होती और यह जो विभाग, जिसने यह मना किया है, आप इसी भाग (क) में देखें....
श्री अध्यक्ष: तो आप मूल प्रश्नकर्ता को पूछने दीजिये।
श्री कैलाश त्रिवेदी: भाग (क) में देखें कि यह पीएचईडी द्वारा इन कामों का...
श्री राजेन्द्र राठौड़(संसदीय कार्य मंत्री): यह भाषण दे रहे हैं साहब, यह भाषण दे रहे हैं, कोई प्वाइंटेड सवाल लायें।
श्री अध्यक्ष: आप केवल प्रश्न पूछ सकते हैं, भाषण का समय नहीं है।
श्री कैलाश त्रिवेदी: हां, तो आप सुनिये। इसी विभाग ने...
श्री अध्यक्ष: आप मूल प्रश्नकर्ता के बाद...
श्री कैलाश त्रिवेदी: माननीय अध्यक्ष महोदय, सुन लें, आप दो मिनट सुनें।
श्री अध्यक्ष: नो। मिस्टर त्रिवेदी, आप बिराजिये।
श्री कैलाश त्रिवेदी: हां, मैं क्वेश्चन ही पूछ रहा हूं।
श्री राजेन्द्र राठौड़: बिना आपकी अनुमति के बोल रहे हैं।
श्री कैलाश त्रिवेदी: माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करें...
श्री अध्यक्ष: आपने इतनी देर तक भाषण दे दिया, अब आप कह रहे हैं मैं प्रश्न पूछ रहा हूं...
श्री कैलाश त्रिवेदी: अब आप सुन लें, वो तो भाषण की बात चल रही थी इसलिए मैं भी भाषण...
श्री अध्यक्ष: मूल प्रश्नकर्ता का प्रश्न आने दीजिये पहले।
श्री कैलाश त्रिवेदी: मैंने आपको मूल चीज समझाई है, विभाग की लापरवाही।
श्री अध्यक्ष: स्थान ग्रहण कर लें। मूल प्रश्नकर्ता का जवाब...
श्री राजेन्द्र राठौड़: बिना आपकी अनुमति के बोल रहे हैं।
श्री कैलाश त्रिवेदी: आप तो इसमें मैं जो पूछ रहा हूं उसका जवाब दिला दें। माननीय मंत्री महोदय यह बता दें...
श्री अध्यक्ष: जवाब देने की आवश्यकता नहीं है।
श्री कालूलाल गुर्जर: माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं जवाब दे देता हूं।
श्री कैलाश त्रिवेदी: नहीं, माननीय मंत्री महोदय, एक मिनट। (व्यवधान)
श्री कालूलाल गुर्जर: नहीं, पहले मूल प्रश्नकर्ता का।
श्री अध्यक्ष: आप पहले मूल प्रश्नकर्ता का जवाब देंगे, इनका जवाब देने की आवश्यकता नहीं है।
श्री कैलाश त्रिवेदी: आपने इसी विभाग के, पीएचईडी ने पांचवें...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: किसी भी सदस्य को इस प्रकार से खड़े होकर के प्रश्न काल में भाषण देने का अधिकार नहीं है।
श्री कैलाश त्रिवेदी: यह इसी विभाग ने बिना टेंडर के पांचवें साल के अंदर माननीय सदस्य के कार्य कैसे पूरे किये और 06 में टेंडर करने की क्या जरूरत पड़ी..(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आपकी पार्टी के मेम्बर हैं, बैठाइये।
श्री कैलाश त्रिवेदी: आप तो यह बता दें कि माननीय सदस्य के पांचवें साल में जो भाग (क) में...
श्री अध्यक्ष: अंकित नहीं हो। अंकित नहीं हो।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी: ***
श्री
रिछपाल
मिर्धा:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
मंत्रीजी यह
बता दें कि
एमएलए लैड के
पेयजल से
संबंधित
कार्य कौन सी
एजेंसी कर
सकती है, इसका
जवाब दे दें।
नम्बर दो,
विधायक कोष के
कार्यों के
लिए निर्देशिका
में बीएसआर
रेट 1998 से लागू
है जबकि
प्रचलित दरें
अधिक हैं, इस
संबंध में
सरकार ने आज
तक फैसला नहीं
किया जबकि
तखमीना विभाग
बनाता है और
विभाग यह लिख
देता है कि
तखमीने के
अनुसार हम इस
कार्य को पूरा
नहीं कर
सकते।
तखमीना
विभाग बना देता
है उस आधार पर
हम स्वीकृति
देते हैं, फिर
भी यह एक साल
से सारे कार्य
अधूरे हैं,
इसके लिए कौन
जिम्मेदार
है और जिन
अधिकारियों ने
इसमें
लापरवाही की,
सरकार उनके
खिलाफ क्या
कार्यवाही
करने जा रही
है।
श्री
कालूलाल
गुर्जर:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य ने जो
कहा कि एक साल
हो गया और
बहुत लम्बा
समय हो गया,
मैं यह सारा
विस्तृत बता
देता हूं। अध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
सन् 2004 और 05 के
जितने 13 कार्य
स्वीकृत
करवाये वह सब
कार्य पूरे हो
गये और 06-07 के जो
कार्य हैं आठ,
उसमें से एक
कार्य की
एजेंसी पंचायत
है जो कुआ
गहरा करवाने
का काम कर रही
है, बाकी पाईप
लाईन और कुछ
टंकी बनाने का
जो कार्य है
जीएलआर का, वह
पीएचईडी को
दिया गया और
अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
स्पष्ट
करना चाहता
हूं कि इनका
जो पहला काम
पाइप लाइन
पीवीसी 10 एम.एम.
साइज,
नाथावड़ा,
मेड़ा सकला, इसकी
अनुशंषा इन्होंने
की थी तारीख 20.4.2006
को, 300 फीट पाईप
लाईन डालने की
मोहल्ला
अंतरोली में,
इसकी अनुशंषा
आपने की थी 15.5 को,
तुलछाराम साहू
की जीएलआर,
इसके लिए भी
आपने 15.5 को की थी
और जीएलआर 10
किलोलीटर
रामसुखजी
बुडालिया की
ढाणी, यह भी
आपने 15.5 को की थी
अनुशंषा और एक
17-5 को की थी और एक
15.5 को की थी और एक
15.6 को आपने
अनुशंषा की
थी। मेरा
निवेदन करना
यह है कि मई और
जून के अंदर
आपने अनुशंषा
की, अनुशंषा
करने के बाद
तत्काल ही यह
हमने 22.5 को ही
सारी
प्रशासनिक स्वीकृतियां
विभाग की और
से हमारे
सी.ई.ओ. साहब ने
निकाल दी।
उसके बाद जब
पीएचईडी को यह
स्वीकृतियां
वहां यह
प्रशासनिक गई
और टेक्नीकल
स्वीकृति के
लिए उनसे मांग
की गई तब उन्होंने
समय पर नहीं
निकाली तो
हमने वापिस
तारीख 7.7.2006 और 17.7.2006
को और फिर
आठवें महीने
में 28.8 को, फिर
उसके बाद 20.9 को लैटर
लिखा तो एक्स.ईएन.
को बार-बार,
चूंकि एक्स.ईएन.
बदल गया था,
पहले वाले
सारे कार्य भी
इनके पीएचईडी
के थे,
पीएचईडी ने कर
दिये, बीच में
एक्स.ईएन.
बदल गया तो
नया एक्स.ईएन.
जो आया उसने
कहा कि मैं तो
बिना टेंडर प्रीमियम
के इसकी स्वीकृति
जारी नहीं
करूंगा, न तो
टेक्नीकल स्वीकृति
जारी करूंगा
और न यह काम
करवाऊंगा, यह बार-बार,
दो बार हमने
लैटर लिखा कि
पहले आप कई सालों
से तो काम कर
रहे हैं, अब आप
नई इसमें यह
कानूनी क्यों
अड़चन डालते
हैं तो उन्होंने
अंत में तारीख
26...(व्यवधान) आप
सुन लें पहले।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी: आप
अब प्रीमियम
एबव ब्लाक की
कैसे बात करते
हैं...(व्यवधान)
श्री
कालूलाल
गुर्जर: आप
सुन लो। आप
समझा करें,
पहले सुन लें।
तारीख 20.9 को अध्यक्ष
महोदय, तारीख 20.9
को अंत में
उन्होंने
लैटर लिख दिया
कि हम तो
इसमें
करवायेंगे ही
नहीं। तो हमने
फिर यह तय
किया कि हम
इसकी कार्यकारी
एजेंसी
माननीय
विधायक से पूछ
करके बदल
देंगे, आप
अनुशंसा कर
दें कि पंचायत
से करवा दो। जहां तक
आपने दूसरा यह
पूछा कि...
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, आप मेरी
एक बात का
जवाब दे दें।
श्री
कालूलाल
गुर्जर: हां।
श्री
अध्यक्ष:
हमारे जिले के
अंदर जीएलआर
का निर्माण पंचायत
भी करती है,
पंचायत समिति
भी करती है और विधायक
की मंशा के
अनुसार
पीएचईडी भी
करता है। तो
क्या नागौर
के अंदर सरपंच
को, पंचायत को
या पंचायत
समिति को
जीएलआर के निर्माण
का प्रावधान
नहीं है?
एंटाइटल नहीं
हैं वह बनाने
के? आप यह बता
दीजिये
सिर्फ।
श्री
कालूलाल
गुर्जर: अध्यक्ष
महोदय,
प्रावधान स्पष्ट
है, हमारी मैं
गाइड लाईन की
यह है हमारे
यहां पर, धारा 3(14)
और 3(14)(2) और 3(14)(3) में
इसका स्पष्ट
प्रावधान है।
इसमें यह लिखा
हुआ है कि
विधायक
महोदय...
श्री
अध्यक्ष:
मैंने जो
प्रश्न पूछा
उसका जवाब दें
आप। (व्यवधान)
मैंने पूछा
उसका जवाब।
(व्यवधान) प्लीज,
आप बैठें, आसन
पांवों पर है।
मैं जो पूछ रही
हूं उसका जवाब
दें आप।
श्री
कालूलाल
गुर्जर: हां,
वह है। अध्यक्ष
महोदय,
पंचायतों को
ही गांव के
अंदर काम कराने
का प्रावधान
है। अगर
विधायक महोदय
चाहें तो
पंचायतों को
हम दे देंगे,
हमें कोई आपत्ति
नहीं है और...
श्री
अध्यक्ष:
हमारे यहां तो
हैं, हमारे
जिले में तो
है।
श्री
कालूलाल गुर्जर:
जिन एक्स.ईएन.
महोदय ने मना
किया, उनके
खिलाफ भी हम
संबंधित
विभाग को
लिखेंगे ताकि
एक्शन लेंगे
कि उन्होंने
मना क्यों
किया।
श्री
जुबेर खान:
अध्यक्ष
महोदय, यह स्पष्ट
हो गया आज कि
पेयजल योजना
के विधायक कोष
के कार्य
पंचायत और
पंचायत समिति
करा सकती है,
यह हम अर्थ
निकालें।
एक
माननीय सदस्य:
हां, करा सकते
हैं।
श्री
जुबेर खान: क्योंकि
नहीं कराते
हैं, नहीं
कराने देते
हैं। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
सुनिये।
श्री
कालूलाल
गुर्जर:
बिलकुल करवा
सकते हैं, पूरा
प्रावधान है।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
मंत्रीजी, मेरी
बात सुनिये।
मैंने तो अपने
अनेक काम,
जीएलआर
पंचायत के
मार्फत,
पंचायत समिति
के मार्फत और
पाईप डालने तक
का काम पंचायत
समिति और
पंचायत के
मार्फत
करवाया है।
मोहम्मद
माहिर
आजाद(नगर):
लेकिन हमारे
यहां नहीं है, हमारे
यहां इजाजत
नहीं है।(व्यवधान)
श्री
जुबेर खान:
पेयजल
योजनाओं के
काम कहीं नहीं
होने देते
ग्राम
पंचायतों और
पंचायत
समितियों से,
हम कह रहे
हैं। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: अब
आप एक साथ
इतने बोलते
हैं, मुझे समझ
में नहीं आता
है।
श्री
जुबेर खान: आप
निर्देश दें
सरकार को कि सभी
जिलों में
लागू करे।
श्री
अध्यक्ष: प्लीज,
आप बिराजिये।
इस बात को स्पष्ट
करने दें उन्हें।
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा(मेड़ता):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जब
सार्वजनिक
निर्माण
विभाग भी इसका
काम करवा सकता
है तो पीएचईडी
क्यों नहीं
करवा सकता।
श्री
सांवर लाल(जन
स्वास्थ्य
अभियांत्रिकी
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह जो
समस्या है,
यह आज की नहीं
है। एमएलए
साहब, एम.पी.
साहब पेयजल
योजनाओं के
लिए पैसे देते
रहे हैं और जब
सरकार आपकी थी
तब भी यह समस्या
आती थी कि
एमएलए के पैसे
को पीएचईडी
काम में नहीं
लेता था क्योंकि
एमएलए अपने
हिसाब से जनता
की, जहां पर
उनके नोर्म्स
में नहीं आता
था, उन
योजनाओं के
लिए भी पैसे देते
थे।....
पर
जब से यह
सरकार बदली है
मैंने माननीय
अध्यक्ष
महोदय, सदन
में यह आश्वस्त
किया है कि
पेयजल
योजनाओं के
लिए, पानी की
समस्या के
लिए अगर किसी
माननीय सदस्य
को आवश्यकता
है तो एमएलए
फंड से पैसा
देने की आवश्यकता
नहीं है पहली
बात तो मैंने
यह अर्ज किया हुआ
है तो यह अगर
हमको देवें तो
हम उसको पूरा
करायेंगे।
नंबर-2 - टेण्डर
प्रीमियम की
जो बात आयी
अगर माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
किसी एमएलए
साहब ने एक
लाख रुपये का
पैसा सैंक्शन
किया और टेण्डर
किया और टेण्डर
में अगर डेढ़
लाख आ जाएंगे
तो फिर वो
पैसा तो देना
पड़ेगा इसलिए
जो भी विलम्ब
हुआ है ...(व्यवधान)...
बैठ तो जाओ न
आप क्यों ज्यादा
ऊपर नीचे हो
रहे हैं?
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): ...(व्यवधान)...
आप ढंग से
बोलें मंत्री
महोदय।
श्री
अध्यक्ष:
सहाड़ा से आने
वाले माननीय
सदस्य बात
सुनिये आप
पहले।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
सही बात सुनने
में भी आपको
तकलीफ है तो
इसका इलाज
मेरे पास में
नहीं है।
श्री
अध्यक्ष:
मेड़ता से आने
वाले माननीय
सदस्य स्थान
ग्रहण करें।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अभी
मैं माननीय
सदस्य के
एरिये में गया
था ।
श्री
अध्यक्ष: आप
मंत्री जी को
सुनें उसके
बाद यदि आपको
कोई गलतफहमी
हो या प्रश्न
पूछना हो, तो
पूछिये। उनकी
बात तो सुनिये
आप पहले।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय,
मैं अभी
डेगाना भी गया
था ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: आप
उन्हें सुन
लें पहले।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): तब भी
एक समस्या
हमारे सामने
आयी थी जैसे
एमएलए साहब
ने, एमपी साहब
ने अपने एरिये
में कहीं टंकी
की डिमाण्ड
की, टंकी बनवा
दी। अब वहां
पर सोर्स नहीं
है पाइपलाइन
नहीं है तो
ऐसे राजस्थान
में कई केसेज
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
हैं तो वो
सैंक्शन हो
गये, काम हो
गया पर पूरा
काम नहीं होने
से सिस्टम
डवलप नहीं
होने से अभी
भी उसका उपयोग
नहीं हो रहा
है तो मैंने
डेगाना मैं भी
यह घोषणा की
और हमारे
अधिकारियों
को निर्देश
दिया कि जो भी
माननीय एमपी,
एमएलए ने
बनाया है और
वो सिस्टम
काम में नहीं
आ रहा है
उसमें क्या-क्या
और चाहिए वो
सारी रिक्वायरमेंट
हमारे पास
भेजिये उसको
भी हम काम करवायेंगे
पीएचईडी के
माध्यम से
जनता को उसका
लाभ मिलेगा और
भी कहीं राजस्थान
में अगर कोई
स्थिति ऐसी है
...(व्यवधान)... ।
श्री
अमराराम (धोद):
ये काम कब तक
हो जाएंगे आप
बता दें। आपके
विभाग के एक्सईएन
यह मना कर दें
पैसे देने के
बाद वो काम नहीं
करेंगे जबकि
सरकार ने साफ
निर्देश दे
रखे हैं कि
कोई भी सरकारी
विभाग एमएलए
और एमपी लेड
में प्रो रेटा
चार्जेज नहीं
लेगा और फिर
वो प्रो रेटा
चार्जेज के
लिए मना करते हैं
उसके खिलाफ आप
कार्यवाही
करेंगे? और
इनके काम जो
सैंक्शन
किया वो कितने
दिन में आप
पूरा कर देंगे
विभाग से? यह
बता दें।
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची):
मंत्री महोदय,
एक प्रश्न है
मेरा।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अब
प्रश्न क्या
जवाब ही दे
रहा हूं क्योंकि
जनरल मैंने
सारी बात कह
दी।
श्री
अध्यक्ष: सारी
बात तो कह दी
और अब क्या
बाकी रह गया?
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): अध्यक्ष
महोदय, हम
यह जानना
चाहते हैं कि
माननीय
मंत्री महोदय,
जो आपने बात
कही है कि अगर
विधायक कोष
द्वारा
कंपलीट कार्य
करवाकर दे
दिया जाए तो
उसकी बिजली का
भुगतान आप करवाने
की व्यवस्था
करेंगे क्या?
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, कई
नीतिगत सवाल
उठाये हैं धोद
से आने वाले माननीय
सदस्य ने कहा
जो हमारी
जानकारी में
आया है, जो न्यूनतम
समय टेण्डर
में लगता है
वो करके हम
काम को एग्जीक्यूट
करवा देंगे।
हमने नौ महीने
आजकल जो छोटी
योजनाएं जो भी
होती है
अधिकतम समय तय
किया है पहले
दो-दो साल था
इस समय को भी
हमने तय किया
है जो भी योजनाएं
एग्जीक्यूट
हों उसका लाभ
जल्दी से जल्दी
लोगों को
मिले तो इसको
हम जल्दी
प्राथमिकता
से करवा देंगे
बाकी आपने जो
सवाल उठाया है
उसमें आवश्यकता
होगी तो हम
निश्चित रूप
से उसके ऊपर
विचार कर
लेंगे आपको
मना थोड़े कर
रहे हैं।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक
सवाल इस सदन
के अन्दर यह
सवाल पूर्व
में भी उठा था
कि विधायक कोष
के पैसे का
काम समय में
विभिन्न
एजेंसियां
नहीं करती हैं
लोकसभा के अन्दर
भी इसके बारे
में एक कमेटी
बनी है एमपीज
की राज्य सभा
के अन्दर भी
एक कमेटी
बनायी है।
मैंने पूर्व
में भी यह
मांग की थी और
उस वक्त
माननीय मुख्यमंत्री
जी ने एक आश्वासन
दिया था कि हम
इसके बारे में
विचार करेंगे
और आभास ऐसा
था कि शायद
सदन की एक
कमेटी बना दी
जाएगी। इस
प्रकार के
प्रकरण अगर
वहां मॉनिटर
हो जाएंगे
जहां की काफी
देर हो रही है,
और दूसरी समस्या
क्या खड़ी
होती है कि
इसमें कई पेच
हैं पीएचईडी वाले
काम नहीं करते
हैं जो उनका
एस्टीमेट
आता है वह इन्फ्लेटेड
आता है। अब
उसके कई कारण
हैं उस विगत में
मैं नहीं जाना
चाहूंगा
लेकिन क्या
सरकार की मंशा
है कि सदन की
एक कमेटी बना
दी जाए, जो इस
प्रकार की अन्य
समितियां हैं
लोक सभा और
राज्य सभा की
भांति जिससे
इस प्रकार के
मामले वहां पर
एमएलएज ले जा
सके और उनका
निराकरण
शीघ्र हो जाए,
इसके बारे में
सरकार में क्या,
और आपसे भी
मैंने निवेदन
किया था
माननीय अध्यक्ष
महोदया, आपसे
भी कई दफा
मिला इस बारे
में दो दफा आपसे
भी निवेदन
किया था तो
मेरा आप किसी,
आप कोई नयी
कमेटी न बना
करके किसी एग्जस्टिंग
कमेटी जिसके
पास काम कम हो
उस समिति को
यह कार्य
सौंपा जा सकता
है जिससे
एमएलएज को राहत
मिले सके।
आपसे निश्चित
कह रहा हूं कि
उस वक्त भी
पक्ष और
विपक्ष दोनों
के विधायक
खड़े हुए थे ।
श्री
अध्यक्ष: अब
आप भाषण देने
लग गये। आप
प्रश्न
पूछने की बजाय
भाषण देने लगे
गये।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
एक मेरा
निवेदन सुन
लें। मैं भाषण
कहां दे रहा
हूं मुझे भाषण
देने की आदत
ही नहीं है
मैं तो बोलता
ही नहीं हूं
आपके डर की
वजह से बोलता
ही नहीं हूं
मैं तो।
मैं
आपसे निवेदन
कर रहा हूं कि
इस बारे में
मैं आसन से
निवेदन करना
चाहूंगा कि
मुख्यमंत्री
जी के आश्वासन
के उपरांत भी
आज काफी समय
बीत गया है क्या
सरकार इसके
ऊपर अपनी
सहमति देगी
सदन की कमेटी
गठित करने के
बारे में जो
एग्जिस्टिंग
समिति है उनके
अन्दर
जिसमें इस
प्रकार के
प्रकरण, क्योंकि
कई मामलों में
मुझे मालूम है
कि तत्कालीन
जिला कलेक्टर
ने एक एमपी का
काम नहीं किया
था तो राज्य
सभा सचिवालय
ने उनको दिल्ली
तलब कर लिया
था इस प्रकार
से जब एक दफा
सदन के सामने
आ जाएंगे तो
काम में निश्चित
रूप से इस
विकास के काम
के अन्दर गति
आएगी यह मेरा
आपसे अनुरोध
है इसके बारे
में सरकार की
क्या नीति है
अवगत कराने की
कृपा करें।
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
अध्यक्ष
महोदय, एक
सवाल है।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
मंत्री जी, यह
बात तो सही है
एमएलए लेड का
जो काम है
उसकी समयावधि
तो होनी चाहिए
कि इतने समय
में वो पूरा
हो जाएगा कुछ
तो समय होना
चाहिए कम से
कम साल दो साल
तीन साल।
तीन-तीन साल
चलते रहते हैं
और काम नहीं
होता है आप कम
से कम फिक्स
करें कि इतनी
अवधि में यह
काम पूरा हो
जाना चाहिए।
चाहे छ: महीने
करें चाहे आठ
महीने करें
चाहे साल कर
दें लेकिन
उसमें वो काम
पूरा होना
चाहिए यह तो
आप तय कर सकते
हैं।
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
अध्यक्ष
महोदय, एक
सवाल।
श्री
अध्यक्ष:
मंत्री जी को
सुनिये अब
आप।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं
पंचायती राज मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय,
विभाग के
द्वारा एमएलए
लेड के लिए जो
स्वीकृति
जारी की जाती
है ...।
श्री
अध्यक्ष: अब
आप विराजें और
मंत्रीजी को
सुनिये।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं
पंचायती राज
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
विभाग द्वारा
जो एमएलए लेड
की स्वीकृति
जारी की जाती
है उसके अन्दर
बिलकुल
बाकायदा समय
निर्धारित
करके ही हम आदेश
जारी करते हैं
लेकिन उसके
बाद यदि कोई
अधिकारी देरी
से काम करता
है तो उसको हम
नोटिस देते
हैं उसके
खिलाफ
कार्यवाही
करते हैं लेकिन
चूंकि ...(व्यवधान)...
एक मिनट ।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): एक के
खिलाफ भी की
क्या आज तक?
एक के खिलाफ
कार्यवाही की
क्या आज तक?
...(व्यवधान)... एक
के खिलाफ भी
कार्यवाही की
क्या आपने ?
...(व्यवधान)...
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं
पंचायती राज
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
अन्य विभाग
के जो अधिकारी
समय पर काम
नहीं करते हैं
उसके लिए
माननीय प्रद्युम्न
सिंह जी ने
पहले भी विधान
सभा में यह
बात रखी थी और
माननीय मुख्य
मंत्री जी ने
आश्वासन
दिया, यह आश्वासन
अभी सितम्बर
महीने में
हमारे पास आ
गया है और इस
पर कार्यवाही
हो रही है ।
मैं सदन को
आश्वस्त
करता हूं कि
मुख्य
मंत्री जी और
आप मिलकर के
जो भी कमेटी
विधान सभा की
इसके लिए
बनायेंगे
उसको हम जल्दी
से जल्दी ...(व्यवधान)...
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
अध्यक्ष
महोदय, एक
छोटा सा सवाल।
अभिशंषा को ..।
अध्यक्ष
महोदय, एक
छोटा सा सवाल।
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: डॉ.
समरजीत सिंह।
सारी बात आ
गयी। डॉ.समरजीत
सिंह। मैंने
अगला प्रश्न
पुकार लिया।
मैंने अगला
प्रश्न
पुकार लिया।
नो।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय,
सुन लीजिये आप
भले ही
रिकार्ड न
करवायें। यह सारी
प्रोब्लम
आपके डिप्टी
सेकेट्री
ने...।
श्री
अध्यक्ष: एक
घंटा पच्चीस
मिनट हो गये
हैं । नहीं अब
कुछ नहीं ।
अंकित नहीं
हो।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
***
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा): ***
श्री
अध्यक्ष:
डॉ.समरजीत
सिंह। नैक्स्ट
क्वेश्चन।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष:
मैंने अगला
प्रश्न
पुकार लिया।
मैंने अगला
प्रश्न
पुकार लिया
है।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष: नो।
ऊर्जा
मंत्री।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष:
मैंने अगला
प्रश्न
पुकार लिया।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष: I am not going to hear anything.
अगला प्रश्न
पुकार लिया।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष: अब
कोई माननीय
अध्यक्ष
नहीं। मैंने
अगला प्रश्न
पुकार लिया।
नो। स्थान
ग्रहण कर लें।
सिरोही से आने
वाले माननीय सदस्य
बहुत
विनम्रता से
कह रही हूं।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष: क्या
चुनौती दे रहे
हैं आप?
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष: मैं
कह रही हूं आप
स्थान ग्रहण
कर लें।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष: अब
नहीं
सुनूंगी।
नहीं
सुनूंगी। अब
आसन आपकी कोई
बात नहीं
सुनेगा। ...(व्यवधान)...
अंकित नहीं
हो।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष:
इसलिए नहीं
सुनना चाहती
कि आप अध्यक्ष
को नहीं सुनना
चाहते। आप अध्यक्ष
की बात को
नहीं मानते
इसलिए नहीं
सुनना चाहती।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष: ...(व्यवधान)...
आवश्यकता
नहीं है।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष:
इसलिए नहीं
सुनना चाहते
कि आप अध्यक्ष
की व्यवस्था
को नहीं मानते
हैं आप अध्यक्ष
की व्यवस्था
को मानते हुए
कोई बात
कहेंगे तो
निश्चित तौर
पर सुनूंगी जब
मैंने नैक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया तो
फिर आपको बैठ
जाना चाहिए।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
कैलाश/
4.10.06 11.30 (1) 1d
श्री
रामनारायण
चौधरी(नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष
महोदय, दो
मिनट दे दो ,
साहब थोडा
बड़ा दिल रखो
।
श्री
अध्यक्ष: फिर
वही बात अब क्या
दे दो मैंने
नेक्स्ट क्वेश्चन
पुकार लिया है
। श्री राजेन्द्र
राठौड
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ***
श्री
अध्यक्ष:
मैंने नेक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया
उसके बाद आप
कहते हैं कि
दो मिनट दे दो
।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री
अध्यक्ष: (व्यवधान)
आप प्रतिपक्ष
के नेता हैं ।
(व्यवधान) अब
कोई अध्यक्ष
महोदय नहीं,
स्थान ग्रहण
कीजिए । मैं
कहती हूं स्थान
ग्रहण कीजिए ।
मंत्री जी ने
जवाब दे दिया ।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ***
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): ****
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ***
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री) :
(व्यवधान)
बल्कि
प्रावधान तो
यह है कि टेण्डर
भी किया जा
सकता है बस
प्रिमीयम
अलाऊ नहीं है
।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ****
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ***
श्री
अध्यक्ष: आसन
पांवों पर है,
आसन पांवों पर
है कृपया स्थान
ग्रहण करें,
कृपया स्थान
ग्रहण करें ।
जब नेक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया
गया तो इस
प्रकार से खडे
होना सही नहीं
है । सब के
प्रश्न बहुत
महत्वपूर्ण
होते हैं । सब
माननीय सदस्य
चाहते हैं कि
उनके प्रश्नों
का जवाब भी
आये । एक
प्रश्न पर 32
मिनट हो गये
कितना और समय
दिया जाये एक
प्रश्न पर और
आप अध्यक्षीय
व्यवस्था
को मानने को
तैयार नहीं
हैं सदन चलेगा
कैसे ।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ****
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): ***
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ***
श्री
अध्यक्ष: आप
खाम ख्वाह
सदन का समय
बरबाद कर रहे
हैं । मैंने
नेक्स्ट क्वेश्चन
पुकार लिया है
1 नेक्स्ट
क्वेश्चन
का जवाब आने
दीजिए । आप स्थान
ग्रहण कर लें
।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): ***
श्री
अध्यक्ष:
प्रतिपक्ष के
नेता महोदय
मैं आपसे निवेदन
कर रही हूं
आपके माननीय
सदस्य थोडी
व्यवस्था
को बनाये रखें
तो उचित रहेगा
।
श्री
रामनारायण
चौधरी(नेता, प्रतिपक्ष):
मैंने तो आपसे
अनुरोध किया था
कि दो मिनट
उन्हें दे दो
।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अध्यक्ष
महोदय, यह
झगडा आन्तरिक
है जो यहां पर
हो रहा है ।
प्रतिपक्ष के
नेता ने कल भी
सभी माननीय
सदस्यों को
कहा था कि
मुख्य
मंत्री जी
बहुत होशियार
है सावधान रहो
।
श्री
अध्यक्ष: इन्होंने
कहा क्लेवर
है ।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ****
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आपकी
बात कोई सुनता
नहीं है और
कैसे इनका
विदाई समारोह
हो, प्रतिपक्ष
के नेता के विदाई
समारोह में लगे
हुए हैं यह।
यह झगड़ा है
और यह झगड़ा
सदन में
निपटाना चाहते
हैं । इनको
काम से कोई
मतलब नहीं है
।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ****
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ****
श्री
अध्यक्ष:
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य आपको
मैं फिर कह
रही हूं कृपया
स्थान ग्रहण
कर लें मैने
नेक्स्ट क्वेश्चन
पुकार लिया है
अब नेक्स्ट
का ही जवाब
आयेगा उसके
पहले कोई
चर्चा नहीं होगी
।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
***
श्री
अमराराम (धोद):
अध्यक्ष
महोदय,
मंत्री जी
जवाब तो दें,
मंत्री जी तो
आराम से विराजे
हुए हैं ।
जोधपुर
संभाग के ग्रामीण
क्षेत्रों
में विद्युत
आपूर्ति
4. डा.
समरजीत
सिंह(भीनमाल):
क्या ऊर्जा
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1) क्या
यह सही है कि
सरकार द्वारा
जोधपुर
डिवीजन के
ग्रामीण
क्षेत्रों
में सिंगल फेस
विद्युत आपूर्ति
24 घंटे उपलब्ध
करवाई जाने की
घोषणा की गई
थी ? यदि हां, तो
यह घोषण किसके
द्वारा की गई
और क्या इसके
लिये कोई आदेश
भी जारी किये
गये हैं ? यदि
हां, तो जारी
आदेशों की
प्रति सदन की
मेज पर रखें ।
(2) क्या
यह भी सही है
कि विद्युत
वितरण कम्पनी,
जोधपुर
द्वारा या अन्य
संस्थान
द्वारा
माननीय मुख्य
मंत्री जी की
तस्वीर छपे
पम्पलेट
विद्युत
विभाग के
सहायक
अभियंता/कनिष्ठ
अभियन्ताओं
को इस घोषणा
पर अमल करने
के लिये व
कार्यालय में
चस्पा करने
के लिये उपलब्ध
कराये गये
जिनमें 24 घंटे
सिंगल फेस
बिजली दिये
जाने का उल्लेख
था ? यदि हां, तो
किस स्तर के
अधिकारी द्वारा
इस कार्य को
अंजाम दिया
गया ? विवरण
सदन की मेज पर
रखें ।
(3) क्या
यह भी सही है
कि 24 घंटे
सिंगल फेज
बिजली दिये जाने
की घोषणा की
पालना करीब दो
माह तक अधिकारी
करते रहे ? यदि
हां, तो क्हां
कहां पर इस
घोषणा की
पालना की गई ?
क्या अब इसे
बंद कर दिया
गया ? यदि हां
तो क्यो ?
(4) क्या
यह भी सही है
कि अब जोधपुर
विद्युत
वितरण कम्पनी
द्वारा 24 घंटे
विद्युत
सिंगल फेज
उपलब्ध
कराने के कारण
अधिनस्थ
अधिकारियों
के विरुद्ध
अनुशासनात्मक
कार्यवाही की
जा रही है ? यदि
हां, तो क्या
व क्यों ?
श्री
अध्यक्ष:
ऊर्जा मंत्री
जी जवाब दें ।
राज्य
मंत्री, ऊर्जा
(श्री गजेन्द्र
सिंह) : (1) फीडर
सुधार
कार्यक्रम के
दिशा निर्देशों
के अंतर्गत 15
प्रतिशत से कम
विद्युत छीजत
वाले 11 केवी
ग्रामीण
फीडरों से
जुडे गांवों
में 24 घंटे
घरेलू
आपूर्ति करने
का प्रावधान
है । दिशा
निर्देशों की
प्रति
परिशिष्ठ-‘अ' पर
उपलब्ध है ।
(2)
जोधपुर
विद्युत
वितरण निगम
द्वारा पम्पलेट/पोस्टर
जोधपुर डिस्काम
क्षेत्रान्तर्गत
जन प्रचार एवं
प्रसार हेतु
वृत/खण्ड/उपखण्ड
स्तर के
अधिकारियों
को जल चेतना
अभियान के तहत
उपलब्ध
कराये गये थे
।
(3)
जोधपुर विद्युत
वितरण निगम
क्षेत्रान्तर्गत
ग्रामीण
क्षेत्रों
में फीडर
सुधार कार्यक्रम
के क्रियान्वयन
से जिन फीडर
पर छीजत 15
प्रतिशत से कम
हुई वहां 24
घंटे सिंगल
फेज विद्युत
उपलब्धता के
आधार पर दी गई
। परन्तु ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: बीच
में नहीं
बोले, जवाब सुने
।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री,
ऊर्जा) : पिछले
कुछ समय से
कुछ केन्द्रीय
विद्युत उत्पादन
इकाइयों के
बन्द होने से
उपलब्धता
में कमी हो गई
जिससे इन
फीडरों पर
विद्युत
आपूर्ति कम कर
दी गई । जैसे
जैसे उत्पादन
इकाइयों में
उत्पादन
बढकर आवंटन
बढेगा इन
गांवों में
विद्युत
आपूर्ति पुन: 24
घंटे कर दी
जायेगी ।
जोधपुर
डिवीजन के जिन
ग्रामीण क्षेत्रों
में फीडर
सुधार
कार्यक्रम के
अंतर्गत
विद्युत
आपूर्ति की गई
उनकी सूची
परिशिष्ठ ‘ब’ पर
उपलब्ध है ।
(4) जी
नहीं ।
डा.समरजीत
सिंह (भीनमाल):
अध्यक्ष
महोदय, जब
से यह सरकार
सत्ता में आई
है विभिन्न
प्रकार से
घोषणाएं करती
रही है कि हम 24
घंटे विद्युत
आपूर्ति
गांवों में
करेंगे, घरेलू
कनेक्शन
देंगे । आज भी
हालात यह है
कि जैसा सभी
माननीय सदस्य
कह रहे हैं 3-4
घंटे से ज्यादा
सप्लाई नहीं
आ रही है । ऐसे
हालात में
मैंने जो मूल
प्रश्न किया
है उसमें इन्होंने
जो जवाब दिया
है, पहली बात
तो मैंने पूरे
जोधपुर डिस्काम
का सवाल पूछा
था इन्होंने
सिर्फ जालौर
जिले का जवाब
देकर मुझे संतुष्ट
करना चाहा कि
जालौर से आते
हैं इसलिए
जालौर से ही
संतुष्ट
होइए । आपने
जो अभियान
चलाया था जल
चेतना यात्रा
का उसमें
लोगों को
प्रोत्साहित
किया कि आपके
यहां सिंगल
फेजेज ट्रांसफारमर
लगेंगे और
सिंगल फेजेज
ट्रांसफारमर
लगने से छीजत
रुकेगी । यही
भावना थी
हमारी कि छीजत
रुकेगी और
उससे 24 घंटे
सप्लाई दी
जायेगी । अब
आप यह कह रहे
हैं 15 प्रतिशत
से कम छीजत वाले
11 केवी
ग्रामीण
फीडरों से
जुडे गांवों में
24 घंटे
आपूर्ति करने
का प्रावधान
है । आपने जो
जालौर जिले की
लिस्ट दी है,
मेरे अलावा भी
जालौर जिले के
4 विधायक यहां
बैठे हैं कोई
दावा कर दें
कि गांवों में
18-20 घंटे सप्लाई
मिली है ।
मेरी जानकारी
में तो यह गलत
सूचना है ।
दूसरी बात यह
है जब आपने
सिंगल फेजेज
ट्रांसफारमर
लगा दिये तब
भी आप छीजत
नहीं रोक पाये
। इसका मतलब
तो यह हुआ कि
यह सिंगल फेजेज
ट्रांसफारम
जो नार्मल
ट्रांसफारमर
से मंहगे आपने
खरीदे और उसके
बावजूद भी
आपकी छीजत नहीं
रुक रही है यह
साबित हुआ है
। इसके अलावा
जो चौथा प्रश्न
मैंने पूछा था
वह यह था कि क्या
जोधपुर
विद्युत
वितरण कम्पनी
द्वारा
24 घंटे सिंगल
फेज उपलब्ध
कराने के कारण
अधीनस्थ
अधिकारियों
के विरुद्ध
कोई
अनुशासनात्मक
कार्यवाही की
जा रही है ।
आपने सिंपल कह
दिया, नहीं ।
आपके
सैक्रेटरी डिस्काम
बी.एल.मेहरा
ने 5.8.06 को 14
इंजीनियर्स
को आपके ओसियां,
सोजत, भीनमाल,
घूमडिया,
सिवाना इत्यादि
को नोटिस जारी
किया कि आपने
जल चेतना यात्रा
के बाद इन
गांवों में 24
घंटे सिंगल
फेज सप्लाई
क्यों दी और
यहां कह रहे
हैं कि ऐसा
कोई नोटिस ही जारी
नहीं हुआ ।
अध्यक्ष
महोदय, यह
गुमराह कर रहे
हैं ।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री,
ऊर्जा) :अध्यक्ष
महोदय,
सबसे पहले
माननीय सदस्य
ने जो प्रश्न
पूछा था उसमें
क्लियर लिखा
है कि जौधपुर
डिवीजन और
जोधपुर
डिवीजन में 5-6
जिले आते हैं
पूरी डिस्काम
नहीं आती है ।
इसलिए आपके
प्रश्न का जो
मैंने जवाब
दिया है वह
जोधपुर
डिवीजन का है,
या तो आपको
प्रश्न में
पूरी डिस्काम
का जिक्र करना
चाहिये था ।
आपने डिवीजन
के बारे में
कहा था तो
मैंने आपको
जवाब डिवीजन का
दिया है ।
DDM/AKT 04102006 1140 1e
डा. समरजीत
सिंह (भीनमाल):
मंत्रीजी,
जोधपुर
डिवीजन में क्या
पाली नहीं
आता, जोधपुर
नहीं आता,
बाड़मेर नहीं
आता। डिवीजन
में सिर्फ
जालौर जिला ही
आता है? (व्यवधान)
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
दूसरा अध्यक्ष
महोद, सरकार
ने 2005-06 के अन्दर
850 फीडर का
रिनोवेशन हम
कर चुके हैं।
और 2006-07 में साढे
तीन हजार के
लगभग फीडर रिनोवेट
हो जाएंगे और
जो बाकी बचे
हैं, 2007-08 मार्च तक
हम टोटल 8500 फीडर
का रिनोवेशन
कर देंगे। और
फीडर सुधार
कार्यक्रम
का...।
श्री अध्यक्ष:
फीडर का
रिनोवेशन तो
कर देंगे आप,
बिजली कितनी
देंगे, यह भी
बता दें आप।
श्री गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
मैं उसी पर आ
रहा हूं। (व्यवधान)श्री
लालचन्द
कटारिया
(आमेर): आप तो यह
बताओ कि...। (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): इतनी
देंगे कि कोई
कमी नहीं
रहेगी। (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, बिजली
के मामले में
यह सरकार पूर्णतया
विफल रही है।
(व्यवधान) एक
मेगावाट
बिजली पैदा
नहीं की, एक
मेगावाट।
पूरी तरह विफल
रही है,
गांवों में
जाकर के देखो
आप। जगह-जगह
आन्दोलन कर
रहे हैं,
प्रदर्शन कर
रहे हैं। (व्यवधान)
जगह-जगह आवाज
उठा रहे हैं।
गांव को बिजली
नहीं मिलती,
किसान परेशान,
मजदूर परेशान,
घर वाले
परेशान। फिर
भी आप कहते,
पूरी बिजली
मिल रही है।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
एक साथ खड़े
होकर इतने
माननीय सदस्य
बोलते हैं,
मंत्रीजी, बात
तो सुन नहीं
पाते हैं। (व्यवधान)
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार): यह
सत्तापक्ष
के सदस्य
टेबल बजा रहे
हैं (व्यवधान)
गांव में हालत
बहुत खराब है।
सिर बचाने की
चिन्ता
करिये आप।
श्री
अध्यक्ष: आप
अपना स्थान
तो ग्रहण
करें। माननीय
सदस्य, सब एक
साथ खड़े होकर
बोलेंगे तो
मंत्रीजी सुन
नहीं पाएंगे।
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार):
मंत्रीजी
मिलेंगे कैसे
गांव वालों
को। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: मूल
प्रश्नकर्ता।
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार): 4 घण्टे
बिजली नहीं
मिल रही है।
अध्यक्ष
महोदय, हालत
बहुत खराब है।
यह टेबल बजाने
से, वाहवाही
लूटने से काम
चलेगा नहीं।
जनता सिर पकड़
लेगी इनका।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपने
जो माननीय
सदस्य ने
फरमाया था...।
श्री
अध्यक्ष: मूल
प्रश्नकर्ता
के प्रश्न का
जवाब दें आप।
आप स्थान
ग्रहण करें।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
मैं आपको
बताना
चाहूंगा कि कई
ऐसे फीडर हैं
जहां पर आपके 70
प्रतिशत से 20
प्रतिशत डाउन
आ चुका है।
डा.
समरजीत सिंह
(भीनमाल):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जो मूल
प्रश्नकर्ता
का है, उसका
जवाब दे ही
नहीं रहे हैं
आप।
श्री
अध्यक्ष:
सुनिये,
शांतिपूर्वक
सुनिये।
डा.
समरजीत सिंह
(भीनमाल): मैं
जो प्रश्न
करता हूं,
सीधे पाइण्टेड
सवाल पूछ रहा
हूं, आप बता ही
नहीं रहे हैं
उसका जवाब।
श्री
अध्यक्ष:
मंत्रीजी
खड़े हैं,
जवाब दे रहे
हैं और आप
खड़े हो गये,
बीच में। (व्यवधान)
नो, स्थान
ग्रहण करें।
(व्यवधान) नो,
स्थान ग्रहण
करें। आप
तीनों स्थान
ग्रहण करें।
श्री
मंगलाराम
गोदारा
(श्रीडूंगरगढ़):
किसान मरने
को, आत्मदाह
कर रहे हैं
किसान।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान
ग्रहण।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
जोधपुर के
अलावा किस-
किस डिवीजन
में छीजत पर
कार्यक्रम हो
गया। (व्यवधान)
श्री
मंगलाराम
गोदारा
(श्रीडूंगरगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मंत्रीजी यह
बतायें कि
पूरे राजस्थान
में किसान मर
रहे हैं,
बिजली 3-4 घण्टे
मिल नहीं रही
है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आपने 24 घण्टे
बिजली सप्लाई
की है, उनके भी
नाम बताएं।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
स्थान ग्रहण
करें।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): केवल
जालौर का ही
कर दिया है
जबकि जोधपुर
डिवीजन में
पाली है,
जैसलमेर है,
बाड़मेर है।
अकेले जालौर
को ही ये
जोधपुर
डिवीजन समझ
रहे हैं। यह
हमारा दुर्भाग्य
है। (व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
मंत्रीजी, यह
बता दें कि
फीडर
रिनोवेशन जिनका
हुआ है, उनमें
कितने दिन 24
घण्टे बिजली
की सप्लाई की
है। वह दिन
बता दें कि 10
दिन की है, या 15
दिन की है। (व्यवधान)
डा.
समरजीत सिंह
(भीनमाल): अध्यक्ष
महोदय, जो
मैंने सीधे
सवाल पूछे हैं
उसका जवाब तो
दें आप। (व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
अब आदेश था,
जिन्होंने 2
दिन दे दी
उनको तो इनके
अधिकारियों
ने नोटिस थाम
दिया कि 24 घण्टे
क्यों दी।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
देखिये, बिजली
की
अवेलेबिलिटी
होगी तो वहां
पर 24 घण्टे
मिलेगी। जब
बिजली की
अवेलेबिलिटी
ही नहीं है तो
कहां से मिल
जाएगी।
श्री
अमराराम (धोद):
नहीं, फिर यह
कहें कि देंगे
ही नहीं।
अवेलेबिलिटी
तो पैदा करने
पर होगी। पैदा
करेंगे नहीं।
पैदा करेंगे
नहीं, खरीदेंगे
नहीं,
अवेलेबिलिटी
होगी नहीं और 5
साल पूरे हो
जाएंगे। फीडर
रिनोवेशन के
नाम से करते
जा रहे हैं 5
हजार करोड़
रुपये को।
मकसद क्या
है, 5 हजार
करोड़ रुपया
जो खर्च किया
जा रहा है,
उसका लाभ जनता
को नहीं मिल
रहा है। केवल
अधिकारियों
को और
मंत्रीजी के
सफा चट हो
जाएं, 5 हजार
करोड़ रुपये
तो क्या मतलब
है, इससे।
जनता को फायदा
नहीं मिले, 24 घण्टे,
एक महीने भी
नहीं दें,
पौने तीन साल
में, एक महीना
भी नहीं दें
तो क्या मतलब
है इसका।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जहां
एफ.आर.पी. का
काम कम्पलीट
हो गया, जिन
जी.एस.एस. पर उन
पर, कहीं पर भी
आज तक सिंगल
फेज लाइट दी
हो तो
मंत्रीजी बता
दें। एक साल
हो गया,
करोड़ों
रुपया खर्च कर
चुके हैं आप एफ.आर.पी.
पर।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, अभी
केवल 850 फीडर्स
का रिनोवेशन
हुआ है। अगले
वर्ष साढे तीन
हजार
होंगे।(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
मंत्रीजी को
पूरा सुनें
पहले, मंत्रीजी
क्या कह रहे
हैं, पहले
सुनें आप। स्थान
ग्रहण करें।
बानसूर से आने
वाले माननीय सदस्य,
आपको कह रही
हूं, मैं।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
नहीं, यह तो बतायें,
किस जी.एस.एस.
पर आपने ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: नो,
कोई जवाब नहीं
देंगे। नहीं,
स्थान ग्रहण
करें, जवाब
नहीं देंगे
इनका।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
सरकार की मंशा
है कि जहां
फीडर रिनोवेट
हो जाता है और 15
प्रतिशत छीजत
होती है वहां
पर 24 घण्टे
बिजली दी
जाएगी।(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
मंत्रीजी को
सुनना नहीं
चाहते हैं।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
और जहां पर 20
प्रतिशत से कम
होती है, वहां पर
हम जो सुबह की
अर्ली
मार्निंग की
बिजली मिलाकर
12 घण्टे
देंगे। लेकिन
यह सब्जेक्ट
टू
अवेलेबिलिटीहै।
आज जो हमारा
उत्पादन है, 2600
मेगावाट तो है
हमारी सरकार का
और 2600 मेगावाट
जो हमें बिजली
मिल रही है, वह
सैण्ट्रल
यूनिट से मिल
रही है। मैं
आपको बताना
चाहूंगा आज की
तारीख, 3 अक्टूबर
को रिहंद 500
मेगावाट डाउन
हो चुकी है,
सेण्टर की।
सिंगरौली की 200
मेगावाट, आज
की तारीख में बंद
है। (व्यवधान)
ऊंचाहार की 210
मेगावाट
बिजली डाउन
है। एन.एस...... की 220
मेगावाट डाउन
है। (व्यवधान)
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
आपने कितनी
बढ़ाई?
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
जो सवाल हम कर रहे
हैं, उसका तो
जवाब दो। आपको
जो पूछा गया,
उसका जवाब तो दो।
हमने पूछा,
नोटिस दिये या
नहीं दिये।
(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप तो गांव
हमारे साथ चले
चलिये। गांवों
में घूमिये और
गांव वालों से
पूछिये। आपके
ये सारे
आंकड़े फर्जी
हैं। सारी व्यवस्था
चरमरा गयी है।
बिजली के नाम
पर, फीडर
रिनोवेशन के
नाम पर
करोड़ों
रुपया खर्च
करने के बाद
ऐसी खराब स्थिति
है बिजली के
मामले में। आप
हमारे साथ
चलेंगे,
भारतीय जनता
पार्टी के
विधायक,
चलिये, मंत्रीजी,
चलिये। आप
गांवों में
घुस नहीं सकते
हैं, बिजली के
मामले में।
बिजली एक पैदा
नहीं की और
बिजली-बिजली,
काहे की सप्लाई
है आपकी बिजली
की।
श्री
नवरतन
राजोरिया
(फुलेरा): और
आपकी
कांग्रेस
सरकार है, जो
दिल्ली के
लोगों को लाइट
नहीं दे रही
है। (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अशोक गहलोत ने
1760 मेगावाट
बिजली पैदा की
है। (व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा
(मेड़ता): 3 साल
में एक भी
मेगावाट आपने
जनरेट की है
क्या? (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आसन
पांवों पर,
आसन पांवों पर
है। (व्यवधान)
माननीय सदस्य,
माननीय सदस्य,
आसन पांवों पर
है। (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप हमारे साथ
गांवों में
चलेंगे, सरकार
की कितनी
तारीफ है, पता
लग जाएगा,
बिजली के मामले
में, आप चलो तो
सही। (व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा
(मेड़ता): 3 साल
में कितनी
मेगावाट बिजली
उत्पादित की
गयी। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आसन
पांवों पर है।
आसन पांवों पर
है। मंत्रीजी,
आप सब बात
बताई। जनमत को
जानते हुए एक निवेदन
कर रही हूं कि
नवम्बर के
महीने में कम
से कम...। (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आप तो
आदेश्ं
कीजिए। आपके
आदेश की पालना
आपके कक्ष में
कर देंगे। (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
बैठिये, आप
बैठिये। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
नवम्बर के
महीने में ठीक
कर देना, जनमत
को जानते
हुए...।
डा.
समरजीत सिंह
(भीनमाल): अक्टूबर,
नवम्बर
दोनों में
बुवाई है रबी
की।
श्री
अध्यक्ष: अब
आप मंत्रीजी
को बोलने दें।
मंत्रीजी बोल
रहे हैं। (व्यवधान)
मंत्रीजी बोल
रहे हैं। पहले
जवाब सुन लीजिये।
(व्यवधान)
श्री
अशोक बैरवा (खण्डार):
असत्य बोल
रहे हैं। (व्यवधान)
यह बहुत बड़ा
मुद्दा है, 2003 से
लेकर 2006 तक...। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: खण्डार
से आने वाले
माननीय सदस्य,
नो। अंकित
नहीं हो।
अंकित नहीं
हो। (व्यवधान)
अंकित नहीं
हो।
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार): ***
श्री
अध्यक्ष: अब
आप बोलें। (व्यवधान)
खण्डार से
आने वाले
माननीय सदस्य,
आप व्यवधान न
करें।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
मैं यह बताना
चाहूंगा आज जो
भी बिजली का
संकट है यह
कांग्रेस की
पिछली सरकार
की वजह से है।
(व्यवधान)
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार): ***
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा
(मेड़ता): ***
विष्णु/अरुण
04.10.06/ 11.50/ 1f
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री अशोक
बैरवा (खण्डार):
***
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): ***
श्री अध्यक्ष:
पता नहीं
माननीय सदस्यों
को क्या हो
गया आज? आप
मंत्रीजी का
जवाब सुनने को
तैयार नहीं
हैं। आप
मंत्रीजी का
जवाब सुनने को
तैयार नहीं
है। नहीं,
माननीय सदस्य,
आप कृपया,
पहले मुझे
सुनिये। नहीं,
आप स्थान
ग्रहण करें।
आप प्रश्न
इसलिए पूछते
हैं कि आपको
सूचनाएं
चाहिए।
श्री
अमराराम (धोद): ***
श्री अध्यक्ष:
वे जब सूचनाएं
देना चाहते
हैं किसी चीज की
तो आप सुनना
नहीं चाहते
हैं। आप
सुनिये। ... (व्यवधान)
आप सुनना ही
नहीं चाहते
हैं। आप क्यों
खड़े हो गये
एक साथ? ... (व्यवधान)
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
अध्यक्ष
महोदय, मुझे
मौका दीजिए।
मेरी बात तो
सुनिये आप।
मेरी बात तो
सुनिये आप। ...
(व्यवधान)
आपको फैक्ट्स
एण्ड फिगर
देता हूं। आपको
शर्म आएगी। ...
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
एक साथ क्यों
खड़े हो गये?
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): ***
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
आपको शर्म
आएगी
when you will hear my facts and figures.
श्री अध्यक्ष:
वे जानकारी दे
रहे हैं। ... (व्यवधान)
श्री अशोक
बैरवा (खण्डार):
***
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
वे जवाब सुनकर
फिर बोल ही
नहीं पाएंगे।
... (व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय, दिसम्बर,
2003 के अन्दर जब
हमारी सरकार
आयी थी, पूछा
जाए कि कितने
मेगावाट के ऑन
गोइंग
प्रोजेक्ट
छोड़कर गये
थे? एक गिरल का 125
मेगावाट का और
वह आपका
जनवरी, 2007 के अन्दर
... (व्यवधान)
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): ***
श्री अध्यक्ष:
नो, बीच में
नहीं
बोलेंगे। बीच
में नहीं
बोलेंगे आप। जवाब
देने दीजिए।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक
परियोजना तो
यह छोड़कर गये
थे 125 मेगावाट
की दिसम्बर, 2003
के अन्दर और
वह जो यूनिट
गिरल की 125
मेगावाट की
उसका उत्पादन,
पहली यूनिट
बिजली
निकलेगी
जनवरी, 2007 में और
उन्होंने प्लानिंग
की थी एक साल
पहले। चार साल
तो आपने लगा
दिये तो आप
हमें तीन साल
नहीं दे सकते
हैं बिजली
पैदा करने के
लिए? ... (व्यवधान)
डा. समरजीत
सिंह (भीनमाल): ***
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
***
श्री अशोक
बैरवा (खण्डार):
***
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): ***
डा.
भंवरलाल
राजपुरोहित
(मकराना): ***
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): ***
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
... (व्यवधान)
प्रोजेक्ट्स
का काम चल रहा
है। 5
प्रोजेक्ट्स
का काम चल रहा है।
5 प्रोजेक्ट्स
का काम चल रहा
है और 3 का और
शुरू होने
वाला है।
सेंक्शन हो
गयी है। टेंडर
भी हो चुके
हैं।
डा. समरजीत
सिंह (भीनमाल): ***
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
बताना
चाहूंगा कि
पिछले ढाई साल
में ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
वे आपको जो
जानकारी देना
चाहते हैं आप
उसको सुनना
नहीं चाहते।
उसका क्या
इलाज हो, यह
बता दीजिए? एक
साथ खड़े हो
जाते हैं आप।
वे जानकारी दे
रहे हैं आपको।
... (व्यवधान)
डा. समरजीत
सिंह (भीनमाल): ***
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, पिछले
ढाई साल के
अन्दर यह
रिकार्ड है कि
हमने 30 परसेंट
बिजली ... (व्यवधान)
ज्यादा
दिलायी। हम
खरीद कर लाये
चाहे हमने कुछ
भी किया हो 30
परसेंट ढाई
साल के अन्दर
ज्यादा
दिलायी। ... (व्यवधान)
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): ***
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): ***
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, 5
साल के अन्दर
कांग्रेस
सरकार ने 150
करोड़ की
बिजली खरीदी जबकि
हम दो साल में
ही करीबन 957
करोड़ की ... (व्यवधान)
खरीद चुके
हैं। 957 करोड़ ...
(व्यवधान) आकड़े
देखो आप। ... (व्यवधान)
आपने केवल 150
करोड़ की
बिजली खरीदी
और हमने दो
साल में ही यह
खरीदी। ... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां): ***
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): ***
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपकी
सरकार ने 5 साल
में 1070 मेगावाट
बिजली दी और
हम ढाई साल में
405 मेगावाट ... (व्यवधान)
दे चुके हैं
ऑलरेडी। ... (व्यवधान)
हम आपसे तीन
गुणा बिजली ज्यादा
प्रोड्यूस
करके बताएंगे
आपको। ... (व्यवधान)
डा. समरजीत
सिंह (भीनमाल): ***
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): ***
श्री अध्यक्ष:
श्री
बृजकिशोर
शर्मा, नेक्स्ट
क्वेश्चन।
आप सुनने को
तैयार नहीं
हैं। आप लोगों
को वे जानकारी
देना चाहते
हैं पर आप
सुनने को तैयार
नहीं हैं। एक
साथ खड़े होकर
दस-दस बोल रहे
हैं। सुनने को
आप तैयार नहीं
हैं। मैंने
नेक्स्ट क्वेश्चन
पुकार लिया
है। ... (व्यवधान)
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): ***
डा. समरजीत
सिंह (भीनमाल): ***
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां): ***
श्री
अमराराम (धोद): ***
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): ***
श्री अध्यक्ष:
मैंने अगला
प्रश्न
पुकार लिया
है। मैंने
अगला प्रश्न
पुकार लिया है।
... (व्यवधान)
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री अशोक
बैरवा (खण्डार):
***
श्री अध्यक्ष:
प्रतिपक्ष के
नेता खड़े
हैं। अब तो
विराजमान हो
जाए आप।
आपके नेता
खड़े हैं। ... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे निवेदन
करना चाहता
हूं। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
हां। ... (व्यवधान)
आप मंत्रीजी
विराजिये। ...
(व्यवधान)
श्री
प्रकाश चौधरी
(बड़ी सादड़ी): ***
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे निवेदन
करना चाहता
हूं कि आप किसान
की बेटी हैं।
आप किसान की
बेटी हैं। खुद
किसान है।
बिजली का
मामला है। आज
सारा राजस्थान,
क्या किसान,
क्या मजदूर,
क्या
बिजनेसमैन, सब
बिजली से
त्रस्त है और
इसका संतोषजनक
जवाब मंत्री
महोदय नहीं दे
पा रहे हैं और
आप ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आपने मंत्रीजी
को सुना ही
नहीं है इसलिए
आप यह कैसे कह
रहे हैं? आपके
दस-दस आदमी तो
खड़े हो गये।
सुन ही नहीं
रहे आप उनको।
आपने सुना ही
नहीं उनको। ...
(व्यवधान)
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही):
***
डा.
भंवरलाल
राजपुरोहित
(मकराना): ***
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अब मैं, हमारे
पास इसके
सिवाय और कोई
चारा नहीं है
मान्यवर, कि
आप संतोषजनक
जवाब नहीं दे
पा रहे हैं, न दिलवा
रही हैं, न
मंत्री महोदय
जवाब दे रहे
हैं। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
प्रतिपक्ष के
नेता महोदय,
मैंने जवाब देने
के लिए कहा
उन्हें
लेकिन आपके एक
साथ दस-दस
माननीय सदस्य
खड़े हो गये। ...
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
ऐसी सूरत में
हम हमारा
विरोध दर्ज
करना चाहते
हैं कि ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
काहे पर दर्ज
करवा रहे हो?
काहे पर दर्ज
करवा रहे हो? ...
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
यह सरकार
बिजली की व्यवस्था
सुदृढ़ रूप से
नहीं कर रही
है, करने की
नीयत नहीं है।
एक मेगावाट
बिजली उन्होंने
बनायी नहीं,
पुरानी बिजली
जो कांग्रेस के
राज में बनी
थी उसके आधार
पर यह काम चला
रहे हैं। इनके
लायक, इनके
शर्म के सिवाय
इनके पास और
काम नहीं है,
हम ... (व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): ***
श्री अध्यक्ष:
नेता
प्रतिपक्ष
बोलते हैं जब
खड़े नहीं होते
हैं। नेता
प्रतिपक्ष
खड़े होते हैं
जब बीच में
बोलने के लिए
खड़े नहीं
होते हैं।
राजसमन्द से
आने वाले
माननीय सदस्य,
जब लीडर ऑफ द
हाउस और
प्रतिपक्ष के
नेता बोलने के
लिए खड़े हो
जाते हैं तो
बीच में दूसरे
लोग खड़े नहीं
हुआ करते हैं।
... (व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): ***
श्री अध्यक्ष:
फिर वही बात,
आप स्थान
ग्रहण करें।
आप स्थान
ग्रहण कर
लीजिए। ... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
मुझे दु:ख है,
मान्यवर, कि
सरकार के
संतोषजनक
जवाब, उत्तर
के अभाव में
हमें बाहर
जाना पड़ रहा
है और हम जा
रहे हैं।
श्री अध्यक्ष:
नहीं, आप जवाब
सुन लीजिए
पहले और उसके
बाद बाहर
जाइयेगा। ... (व्यवधान)
नो,
पहले जवाब
सुनिये,
पहले जवाब
सुनो आप उनका।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
आप दिलवा नहीं
रहीं और वे दे
नहीं रहे हैं।
... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आप उनका जवाब
सुनिये,
शांतिपूर्वक
और उसके बाद
जाना बाहर आप।
... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
इसके खिलाफ हम
वाक-आउट करते
हैं। ... (व्यवधान)
(इण्डियन
नेशनल
कांग्रेस दल
के माननीय
सदस्यों
द्वारा सदन से
बहिर्गमन)
श्री
अमराराम (धोद):
अध्यक्ष
महोदय, आगे का
पुकारिये।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यह
जवाब को सुनना
नहीं चाहते। ...
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आप बहिर्गमन
कर रहे हैं, आप
चले जाइये चुपचाप।
शांतिपूर्वक
जाइये।
बहिर्गमन कर
रहे हैं,
जाइये
शांतिपूर्वक।
नेता
प्रतिपक्ष। नहीं,
मैं सुनाऊंगी I will call him again. आप
बहिर्गमन कर
रहे हैं तो
कृपया
बहिर्गमन कर जाइये।
आपके नेता ने
बहिर्गमन का कहा
है। बहिर्गमन
कर जाइये। ... (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आप
सुनना नहीं
चाहते हैं।
श्री अध्यक्ष:
आपके नेता ने ...
(व्यवधान)
मुझे मजबूर
नहीं करें आप।
... (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
मनमोहन सिंह
सरकार ने,
प्रधान
मंत्री
मनमोहन
सिंहजी की
सरकार ने
बिजली रोकी
हुई है और यह
सुनना नहीं
चाहते हैं। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
मुझे मजबूर
नहीं करें। ...
(व्यवधान)
माननीय सदस्य,
आपके नेता ने
बहिर्गमन
किया है। ... (व्यवधान)
बाहेती,
बाहेती ही है
न यह? इनका क्या
नाम है,
बाहेती ... (व्यवधान)
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण):
मैंने कहा
प्रश्न संख्या-5
श्री अध्यक्ष:
मिस्टर
प्रकाश
चौधरी।
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण):
आपने पुकारा
है मुझे, आपने
मुझे पुकारा
है। आपने मुझे
पुकारा है। ...
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
मिस्टर
प्रकाश
चौधरी।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यह
नेता ही नहीं
मानते हैं
उनको। ... (व्यवधान)
शिव/चौहान/12.00/1g/4.10.2006
यह जयपुर
देहात से आने
वाले माननीय
बृजकिशोर जी प्रतिपक्ष
के नेता को
नेता नहीं
मानते हैं और उनके
विरोध में
यहां यह प्रश्न
पूछ रहे हैं।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
मंत्रीजी
आपकी जो
उपलब्धि हो तो
बता दें आप।
श्री
अमराराम(धोद): अध्यक्ष
महोदय, आपने
आगे वाला
प्रश्न
पुकार लिया।
श्री
अध्यक्ष: अब
वह उपलब्धि
बता रहे हैं न
। (व्यवधान)...
श्री
अमराराम(धोद):
नहीं, अब आपने
आगे वाला
प्रश्न
पुकार लिया।
अध्यक्ष
महोदय, आपने
आगे वाला
प्रश्न
पुकार लिया तो
पीछे वाले
मंत्रीजी
कैसे उत्तर
देंगे ? सदन
परम्पराओं
से, नियमों से
चलेगा। (व्यवधान)
.....
श्री
अध्यक्ष: धोद
से आने वाले
माननीय सदस्य,
आप कृपया स्थान
ग्रहण कर लें।
जब विपक्ष इस
बात को लेकर,
कि आपने बिजली
का उत्पादन
किया नहीं,
बिजली की हालत
बहुत खराब है,
उस हालत में
जब आप
बहिर्गमन कर गये
और मंत्रीजी
की बात को
सुनें नहीं तो
मंत्रीजी
अपनी बात तो
कहेंगे कि उत्पादन
की क्या कमी
है, क्या
नहीं ?
श्री अमराराम(धोद):
अध्यक्ष
महोदय, आपने
आगे का प्रश्न
पुकार
लिया।(व्यवधान)
आप खुद कह रही
हैं ....(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा: आपने
अगला प्रश्न
पुकार लिया तो
आप व्यवस्था
नहीं बदल
सकते। आपने व्यवस्था
देदी अगले
प्रश्न की। यह
गलत परम्परा
आरम्भ हो
जायेगी। अगर एक
बार अगला
प्रश्न
पुकारने के
बाद वापस यह
कहेंगी कि ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष :
प्रश्नकाल
समाप्त हुआ।
(व्यवधान)
श्री
बृजकिशोर
शर्मा: आपने
मेरा क्वेश्चन
पुकारा है, आप
मुझे इजाजत
दीजिये। मेरे
प्रश्न का
जवाब दिलाया
जाये।
(
माननीय सदस्य,
श्री बृजकिशोर
शर्मा वैल में
धरने पर बैठे)
(माननीय
सदस्य, श्री
बृजकिशोर
शर्मा द्वारा
धरना समाप्त)
श्री
अमराराम(धोद):
अध्यक्ष
महोदय, यह
प्रतिपक्ष और
पक्ष दोनों
ही, नहीं अध्यक्ष
महोदय, मेरा
अगला प्रश्न
है जिसमें
किसानों का 125
करोड़ छह
महीने से सरसों
का, जो छह
महीने पहले
किसानों ने
सरसों बेची
थी, उसका 125
करोड़ रूपया
छह महीने से
बकाया है। उस
किसान की
कुर्की की है,
किसाना का
बकाया के नाम
पर कनेक्शन
काटा जा रहा
है और दोनों
सरकारों ने
किसानों के
पेमेन्ट को
...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: अंकित
नहीं हो।
मैंने नाम
नहीं पुकारा,
अंकित नहीं
हो। (व्यवधान)
श्री
अमराराम(धोद) : ***
श्री
अध्यक्ष: आप किस
नियम में इस
बात को उठा
रहे हैं ?
श्री
अमराराम(धोद): ***
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
जीरो ऑवर के
अंदर आप पर्ची
के माध्यम से
ला सकते हैं,
आप स्थगन
प्रस्ताव के
माध्यम से ला
सकते हैं, 295 के
माध्यम से ला
सकते हैं, 131 के
माध्यम से ला
सकते हैं,
किसी भी माध्यम
से लाइये।
श्री
अमराराम(धोद): ***
अनुपस्थिति
के लिये
अनुमति
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण,
मुझे सदन को
सूचित करना है
कि श्री वासुदेव
देवनानी,
शिक्षा राज्य
मंत्री ने पैर
की हड्डी में
फैक्चर हो
जाने के कारण
दिनांक
30 अक्टूबर, 2006
से सत्रांत तक
सदन की बैठकों
से अनुपस्थित
रहने की
अनुमति चाही है,
क्या सदन की
अनुमति है ?
(
स्वीकृति )
अनुपस्थित
रहने की
अनुमति
प्रदान की
गयी।
मोहम्मद
माहिर आजाद :
घनश्याम
तिवाड़ी जी का
क्या हुआ ?
श्री
हरिमोहन
शर्मा: घनश्याम
जी का भी है क्या
कोई
प्रार्थना
पत्र ?
मोहम्मद
माहिर आजाद :
घनश्याम
तिवाड़ी जी का
क्या हुआ ? वह
क्यों नहीं आ
रहे ?
श्री
अध्यक्ष :
अभी स्थगन
प्रस्तावों
पर व्यवस्था
होगी, फिर पर्ची
पर व्यवस्था
होगी, फिर 295 पर
होगी, उसके
बाद जब प्रश्न
आये तब प्रश्न
करियेगा।
मुझे व्यवस्था
तो देने
दीजिये।
स्थगन
प्रस्तावों
पर अध्यक्षीय
व्यवस्था
मुझे
माननीय सदस्यों
को सूचित करना
है कि निम्न
स्थगन प्रस्तावों
की सूचना
प्राप्त हुई
है :–
1. मोहम्मद
माहिर आजाद
एवं पांच अन्य
सदस्यों की
ओर से जयपुर
विकास
प्राधिकरण
द्वारा आवंटित
भूमि पर हज
हाउस का
निर्माण
कराने के संबंध
में।
चूंकि
उक्त प्रकरण
न्यायालय
में
विचाराधीन है,
अत: इस पर
अनुमति देने
में असमर्थ
हूं।
मोहम्मद
माहिर आजाद: यह
तो कहीं नहीं
है
विचाराधीन।
कोर्ट में कोई
मामला पेंडिंग
नहीं है। यहां
टेबिल पर रखा
जाये।
श्री
बृजकिशोर
शर्मा(जयपुर
ग्रामीण): अध्यक्ष
महोदय, यह
होने का सवाल
ही नहीं उठता।
मोहम्मद
माहिर आजाद:
अध्यक्ष
महोदय, आपको
गलत सूचना दी
है। आप टेबिल
कराइये।
श्री
अध्यक्ष: अगर
आसन कोई व्यवस्था
देता है तो
किसी को भी
खड़े होने का
अधिकार नहीं
है।
श्री
बृजकिशोर
शर्मा: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
मुख्य
मंत्रीजी ने
इस सदन में हज
हाउस बनाने के
बारे में जवाब
दिया है, उसका
क्रियान्वयन
कराया जाये।
न्यायालय का
प्रश्न ही
नहीं उठता।
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्यगण, आसन
की व्यवस्था
के बाद में आप
कुछ कह सकते
हैं। (व्यवधान)
...
मोहम्मद
माहिर आजाद:
सदन को गलत
गुमराह किया
है । अध्यक्ष
महोदय, आपको
गलत सूचना दी
है । यहां पर
बताया जाये कि
कौनसे न्यायालय
में है और क्या
मामला है ?
श्री
बृजकिशोर
शर्मा: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
मुख्य
मंत्रीजी ने
जो सदन में
घोषणा की है
हज हाउस के
संबंध में,
उसका
क्रियान्वयन
कराया जाये। न्यायालय
की आड़ में
लेकर हज हाउस
के काम को
रोकना चाहते
हैं।
श्री
अध्यक्ष:
डॉ.चन्द्रशेखर
बैद एंव 6 अन्य
सदस्यों की
ओर से ..(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन : अध्यक्ष
महोदय, एक
मिनट मैं आपको
निवेदन करना
चाहता हूं कि
नगर से आने
वाले माननीय
सदस्य, जिन्होंने
यह स्थगन
प्रस्ताव भी
दिया है, उन्होंने
संविधान के
आर्टिकल 188 के
अन्तर्गत
सशपथ लेकर यह
कहा है कि मैं
इनके उपबन्धों
का पालन
करूंगा और यह
स्थगन प्रस्ताव
और अपने वक्तव्यों
द्वारा यह इस
सदन के माननीय
सदस्य रहने
के काबिल नहीं
है। मैं आपको
निवेदन करना
चाहता हूं ....(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा: आपके
कैबिनेट
मंत्री तो वक्तव्य
देने के बाद
भी काबिल हैं
शपथ का उल्लंघन
करने के बाद
और यह काबिल
नहीं हैं।
बोलो आप। (व्यवधान)
.. आप खुद क्या
बोले थे ? आप भी
काबिल नहीं
हो इस जगह पर
रहने के लिये।
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
मैं बोल रहा
हूं। (व्यवधान)
श्री
बृजकिशोर
शर्मा: मुख्य
मंत्रीजी ने
सदन में घोषणा
की है, उनका यह
बयान है और जब
मुख्य
मंत्रीजी ने
सदन में घोषणा
की है तो उसका
क्रियान्वयन
कराया जाये
इसी हज हाउस
पर।
श्री
राम प्रताप
कासनियां : अध्यक्ष
महोदय, मैं इस
विवाद से
दु:खी होकर
हाउस से बहिर्गमन
करता हूं।
(श्री
रामप्रताप
कासनियां,
सदस्य
द्वारा सदन से
बहिर्गमन)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : अध्यक्ष
महोदय, आपने
व्यवस्था
दे दी है, आसन
की व्यवस्था
सर्वोपरि है।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
जयपुर
ग्रामीण से
आने वाले
माननीय सदस्य,
आप बैठिये।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : अध्यक्ष
महोदय, आपने
व्यवस्था
देदी। मैं एक
मिनट
प्रार्थना कर
रहा हूं आपकी
व्यवस्था
के बाद आसन
सर्वोपरि है ।
हम कोई भी
सवाल आसन के
प्रति नहीं
उठा सकते। अब
आप नैक्स्ट
पुकारे अध्यक्ष
महोदय। इसमें
आपने व्यवस्था
फरमा दी है कि
यह न्यायालय
में लम्बित
है, इस पर
विवाद नहीं हो
सकता। न्यायालय
में लम्बित है
यह ।
श्री
अध्यक्ष: आप
कृपया स्थान
ग्रहण करें।
नगर से आने
वाले माननीय
सदस्य, मुझे
यह निवेदन
करना है कि जब
अध्यक्षीय
व्यवस्था
हो रही हो तो
जब तक अध्यक्षीय
व्यवस्था
होती है तब तक
किसी भी
माननीय सदस्य
को खड़े नहीं
होना चाहिये।
यह सदन का
नियम भी है,
सदन की परम्परा
भी रही है,
लेकिन इस परम्परा
को सब सदस्य
तोड़ते नजर आ
रहे हैं। चाहे
प्रतिपक्ष हो,
चाहे सत्ता
पक्ष हो, कोई
भी इस व्यवस्था
का ध्यान
नहीं रखते।
इसलिये मैं
आपको याद दिला
रही हूं , स्मरण
करा रही हूं
कि नियमों का
और इस परम्परा
का आप सख्ती
के साथ पालन
करेंगे तो ही यह
सदन ठीक
प्रकार से चल
सकेगा । आप
आखिर यहां जनहित
की बात करने
ही आये हैं तो
एक साथ खड़े
होकर दस-दस
माननीय सदस्य
खड़े हो जाते
हैं तो पता
नहीं लगता कि
क्या बोल रहे
हैं, क्या
नहीं बोल रहे
। इस सदन की यह
गरिमा रही है
कि यहां एक
माननीय सदस्य
जब बोलते हैं
तो दूसरा बीच
में खड़ा नहीं
होता है। आप
एक के बाद एक न
जाने कितने
खड़े हो जाते
हो। मैं यह
निवेदन कर रही
थी कि आपको
मैंने कहा
इसको
विचाराधीन कर
दिया, मैं इस
पर अनुमति
देने में
असमर्थ हूं।
अब यदि आपको बाद
में कुछ कहना
है तो आप भी
कहियेगा और
माननीय
सरकारी मुख्य
सचेतक जी,
आपको जो कुछ
कहना है तो
आपको भी समय दूंगी,
लेकिन अभी इस
व्यवस्था
के बारे में
आप कुछ नहीं
बोलेंगे।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : आपने
व्यवस्था
ही देदी।
श्री
अध्यक्ष: 2. डॉ0
चन्द्रशेखर बैद
एवं 6 अन्य
सदस्यों की
ओर से राज्य
में बी.पी.एल.
परिवारों की
संख्या 21 लाख
से घटकर 17.34 लाख
कर दिये जाने
से उत्पन्न
स्थिति के
संबंध में।
3. श्री
हरिमोहन
शर्मा, सदस्य
की ओर से
ग्रामीण
क्षेत्रों
में बीपीएल
परिवारों की
संख्या में
भारी कमी कर दिये
जाने के संबंध
में।
स्थगन
प्रस्ताव पर
तो अनुमति
देने में
असमर्थ हूं क्योंकि
यह इतना महत्वपूर्ण
नहीं है कि
सदन की
कार्यवाही को
रोककर इस पर
चर्चा की
जाये, ऐसा
नहीं है, फिर
भी मैं
चाहूंगी कि मंत्री
महोदय इसके
संबंध में वक्तव्य
दें।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
: आप समय तय कर
दें ।
श्री
अध्यक्ष: No, I am not going to hear anything. अभी
मैंने आपको व्यवस्था
बता दी।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: बारां
में 10 हजार
आदमियों ने प्रदर्शन
किया है
बीपीएल के
मामले में, यह
सरकार कुछ
सुनना ही नहीं
चाहती। एक
विधायक आमरण
अनशन पर बैठा
हुआ है और इस
पर व्यक्तव्य
अगर दिलाना है
तो आज वक्तव्य
दिलाने की व्यवस्था
करें आप। अध्यक्ष
महोदय, वहां
पर 10 हजार
आदमियों के
साथ बैठे हैं
विधायक।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : अध्यक्ष
महोदय, आपने
व्यवस्था
दी है।
msr/usc/1h/1210/04102006/
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आज
गांवों-गांवों
में जिस
प्रकार के हालात
हैं बी.पी.एल.
के मामले, में
आपसे निवेदन
करता हूं कि
वह व्यवस्था
आज ही दिलाएं
आप इनकी।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आपकी आज्ञा
अनुसार सरकार
वक्तव्य देने
के लिए तैयार
है, समय तय कर
दें। इनका समय
तय कर दें। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
करें। आप वक्तव्य
कब दिलायेंगे?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, आपके
वैश्म में आ
कर के हम तय कर
देंगे, जब भी
आप समय तय
करेंगे वक्तव्य
देने के लिए
सरकार तैयार
है।
श्री
अध्यक्ष: जब
आप चाहेंगे उस
दिन वक्तव्य
हो जायेगा।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आज नहीं,
अध्यक्ष
महोदय। आज
नहीं, कल दे
देंगे ...(व्यवधान)...
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण): आज
दिलाया जाए।
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: आज
तो देखिये, एक
मिनट, एक मिनट
...(व्यवधान)...
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
बी.पी.एल. के
मामले में
बैठे हुए हैं,
जो उनके साथ
ज्यादतियां
हुईं, उस
मामले में
बैठा हुआ है,
वहां के अस्पताल
की जो हालत
बिगड़ी है उस
मामले में
बैठा हुआ है
और दस-दस हजार
आदमियों के
साथ प्रदर्शन
किया है और,
अध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
जो आदेया
निकाले हैं
नाम जोड़ने
का, अपील करने
का उसको भी 27
तारीख को स्थगित
कर दिया गया
है। ...(व्यवधान)...
और गांव-गांव
में अपील के
नाम से इस
मामले को डिले
करना चाहते
हैं और एक
आदमी की जान
से खिलवाड़
करना चाहते
हैं ...(व्यवधान)...
मैं आपसे
निवेदन कर रहा
हूं, अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण कर लें
अब आप। ...(व्यवधान)...
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
मैं आपसे
निवेदन करना
चाहता हूं,
अध्यक्ष
महोदय, इनसे
आज ही वक्तव्य
दिलवाएं।
श्री
अध्यक्ष: अब
आप स्थान
ग्रहण कर लें।
आप स्थान
ग्रहणकरें।
...(व्यवधान)...
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, पाँच
आदमी भी नहीं
हैं वहां पर
...(व्यवधान)...
वहां पाँच आदमी
भी नहीं बैठे
हुए ...(व्यवधान)...
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप तो बोलने
की स्थिति में
ही नहीं हो।
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): पाँच
आदमी भी नहीं
हैं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप तो बोलने
की स्थिति में
ही नहीं हो। दस
हजार आदमियों
के साथ
प्रदर्शन
किया है अगले
ने, आप जा कर के
तो देखो,
गांव-गांव में
जा कर के देखो,
यह ओमजी बिरला,
हमारे
प्रभारी हो कर
आये थे बूंदी
में।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): अध्यक्ष
महोदय, वहां
के जो माननीय
सदस्य हैं
इनकी कुछ व्यक्तिगत
समस्याएं
हैं जिनको
सरकार पूरा
नहीं कर
सकती,सम्पत्ति
से जुड़े हुए
मामले हैं ...(व्यवधान)...
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
गांव-गांव में
बी.पी.एल. के
मामले में आवाज
है, गांव-गांव
में बिजली के
मामले में
आवाज है, इनका
घेराव तक हुआ
है, आप कैसी
बात कर रही
हैं यहां
बैठे-बठै। ...(व्यवधान)...
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): आदमी
नहीं थे वहां
पर, वहां दस
हजार आदमी थे,
हद करते हो
आप।
श्री
अध्यक्ष:
हिण्डौली से
आने वाले
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
कर लें। स्थान
ग्रहण करें।
दो
मिनट पहले कहा
कि व्यवस्था
के बीच में
नहीं उठें,
नहीं बोलें, न
यह परम्परा
है न यह
नियमों है।
इसके बावजूद भी ...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, आसन
पैरों पर है,
प्रति पक्ष के
नेता महोदय को
देखो।
श्री अध्यक्ष:
उनको, वो
क्षम्य हैं,
वो उनकी बात
थी। वो क्षम्य
हैं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): वो क्षम्य
हैं?
श्री
अध्यक्ष:
हां, वो क्षम्य
हैं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): यह दादागिरी
है, अध्यक्ष
महोदय।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
मैं घुटनों के
बल आया हूं।
श्री
अध्यक्ष:
उनको आने में
समय लगता है।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): यह तो
झुन्झुनूं
वालों की
दादागिरी है,
साहब।
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण): यह
दादागिरी का क्या
मतलब है?
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
घुटनों के बल
के ऊपर कोई भी
आसन के सामने
आ सकता है। ...(व्यवधान)...
आपको अनुमति
होगी, आप सीधा
सीना कर के नहीं
आ सकते,
घुटनों के बल
आओ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): हां, वो
समय आ जायेगा।
एक
माननीय सदस्य:
आ जायेगा जब
झुकना पड़ेगा
आपको।
श्री
अध्यक्ष: ऐसा
है, आसन जब
पांवों पर
नहीं था तो वो
चल चुके थे,
आने में समय
लगता है इसलिए
क्षम्य हैं।
अब आप
सुनिये। अब
मैं आपसे फिर
निवेदन कर रही
हूं, आप लोग
आसन की
सदाशयता का
बेजा फायदा
उठा रहे हैं,
में अधिक अब
नहीं सदाशय
रहूंगी। यह मैं
सब से कह रही
हूं, व्यवस्था
के बीच में
कोई बोलेगा
मुझे उसके
खिलाफ कुछ न
कुछ कठोर
कार्यवाही
करनी पड़ेगी।
...(व्यवधान)... क्या?
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार): अध्यक्ष
महोदय, यह
देखिये।
श्री
अध्यक्ष: बैठ
गये न वो, बैठ
गये।
देखिये,
पहले दिन ही
मैंने माननीय
सदस्यों को
कहा था कि जब
आसन पांवों पर
हो तो एन्ट्रेन्स
उनकी नहीं
होनी चाहिए।
वह, स्वर्गीय
मोहनलालजी
सुखाडि़या
मुख्यमंत्री
रहते हुए
दस-दस मिनट तक
यहां खड़े रहा
करते थे। ...(व्यवधान)...
एक
माननीय सदस्य:
अध्यक्ष
महोदय, यह
देखिये।
श्री
अध्यक्ष: अरे
वाह, भाई, क्या
करें, कमाल है,
यह छ:-छ:, सात-सात
बार जीत कर
आये हुए लोग
हैं,
मोहनलालजी
सुखाडि़या का
समय भी देखा
है इन लोगों
ने इसके
बावजूद भी अब
इन्होंने इस
असेम्बलि को,
विधान सभा को यों
कर दिया है।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): यह तो
पुरातत्व
विभाग के लोग
हैं। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: आप
क्यों खड़े
हो गये? आप
किसलिए खेड़े
हुए।
अब व्यवस्था
के बीच में
कोई नहीं
बोलेगा और
हिण्डौली से
आने वाले
माननीय सदस्य,
इतने उत्तेजित
भी न हुआ करो
कि एक मिनट
में खड़े हो
जाओ। नहीं, आप
एक मिनट में
खड़े हो जाते
हैं, आप ध्यान
नहीं रखते हैं
इस बात का, मैं
रिवाइण्ड
करा रही हूं
आपको।
कब
देना चाहेगी
सरकार इसके
बारे में? मैं
समझती हूं
पूरी तैयारी
के साथ,
देखिये, चाहे
आज न दें, कल दें
लेकिन पूरी
तैयारी के साथ
दें ताकि कोई
इनको किसी तरह
का शक-शुबा
नहीं हो, क्या
कारण रहे हैं
इसके।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, बिजनस
एडवायजरी
कमेटी में यह
तय हुआ था कि
नौ तारीख को
इन सारे
विषयों पर
विस्तृत
चर्चा हो जाए
अगर नौ तारीख
फरमाएं तो नौ
तारीख को दे
देंगे। ...(व्यवधान)...
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अध्यक्ष
महोदय, नहीं,
नहीं, कल की
तारीख में, कल
दिलवाएं आप
इनसे।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अगर आपकी
आज्ञा कल के
लिए होगी तो
कल दे देंगे।
अध्यक्ष
महोदय, अगर कल
की आज्ञा हो
तो कल दे
देंगे।
श्री
अध्यक्ष: कल,
कल। कल हो
जायेगा, इस पर
स्टेटमेण्ट
हो जायेगा
गवर्नमेंट का
कल।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
वो हड़ताल पर,
भूख-हड़ताल पर
बैठा है, नौ को
देंगे तो क्या
होगा?
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): कल दे
देंगे।
श्री
अध्यक्ष:
देखिये, यह तो
बात सही है कि
वो भूख-हड़ताल
पर बैठे हैं,
चिंता की बात
है लेकिन
सरकार यदि
आधी-अधूरी
अपनी जानकारी
के आधार पर
कोई स्टेटमेण्ट
देगी तो वो भी
उचित नहीं
होगा इसलिए
पूरी तैयारी
का समय दिया
जाना चाहिए
ताकि वो पूरी
तैयारी के साथ
जवाब दे सकें।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): कल दे
देंगे, साहब।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, एक
मिनट।
श्री
महादेव सिंह
(खण्डेला):
अध्यक्ष
महोदय---
श्री
अध्यक्ष: यह
शेखावाटी
वालों को पता
नहीं क्या हो
गया, सीकर और
झुन्झुनूं
वालों को पता
नहीं क्या हो
गया।
श्री
अमराराम (धोद):
यह तो
नाथद्वारा के
हैं, साहब।
श्री
अध्यक्ष:
इतना अपना भी
मत समझो मुझे,
में अध्यक्ष
हूं, दोनों के
लिए बराबर
हूं। इतना
अपना भी मत
समझो कि झुन्झुनूं
और सीकर वाले
बेजा फायदा
उठा रहे हैं।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
आप आसन पर
विराजें तो
मैं एक बात
अर्ज करूं।
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, नहीं, अब
नहीं, आसन
पैरों पर।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
यह सदन चल रहा
है, एक विधायक
के साथ जो एक
घटना हो रही
है, आप कृपा कर
के सरकार से
कहें उनसे जा
कर के बात करें।
श्री
अध्यक्ष: (4)
श्री वीरेन्द्र
बेनीवाल एवं
पाँच अन्य
सदस्यों की
ओर से राज्य
में असमान
वर्षा के कारण
किसानों की
फसल एवं बीजान
के नष्ट होने
के सम्बन्ध
में।
बात यह
है कि सारी
गड़बड़ जो है
यह नेता प्रति
पक्ष और
उप-नेता प्रति
पक्ष करते
हैं, क्या
करूं, इलाज
नहीं है।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
आदेशों की
पालना करते
हैं।
श्री
अध्यक्ष: (5)
श्री अमराराम
धोद एवं पाँच
अन्य सदस्यों
की ओर से राज्य
में बाढ़
प्रभावित
इलाकों में
प्रशासन की कथित
निष्क्रियता
से जन-धन की
भारी हानि
होने के सम्बन्ध
में।
(6) श्री
हेमाराम
चौधरी एवं 15
अन्य सदस्यों
की ओर से राज्य
के अनेक जिलों
में माह अगस्त,
2006 में आयी बाढ़
एवं
अतिवृष्टि से
लाखों लोगों
के बेघर होने
के सम्बन्ध
में।
उपरोक्त
प्रस्तावों
के विषयों पर
सदन में चर्चा
होगी अत: इन पर
अनुमति देने
में असमर्थ
हूं। आज ही
चर्चा हो रही
है इसलिए आप
को पूरा मौका
मिलेगा।
(7) श्री
भरत सिंह एवं
एक अन्य सदस्य
की ओर से
प्रदेश में
अवैधानिक
खनिज कार्य में
लिप्त
ठेकेदार के
पास कार्यरत
मृतक मजदूर के
आश्रितों को
पर्याप्त
सहायता नहीं
दिये जाने से
उत्पन्न
स्थिति के सम्बन्ध
में।
(8) श्री
जुबेर खान एवं
चार अन्य
सदस्यों की
ओर से जिला
अलवर के ग्राम
मुसाखेड़ा के
दस-ग्यारह
परिवारों की
महिलाओं एवं
बच्चों को
पुलिस
प्रशासन
द्वारा उनके
घरों में प्रवेश
नहीं करने
देने के सम्बन्ध
में।
उपरोक्त
प्रस्ताव
ऐसे नहीं हैं
कि सदन की
पूर्व
निर्धारित कार्यवाही
को रोक कर इन
पर विचार किया
जाए। माननीय
सदस्य, श्री
जुबेर खान तो
गत सत्र में
भी अपने इस विषय
को उठा चुके
हैं अत: इन पर
अनुमति देने
में असमर्थ
हूं।
(9) श्री
संयम लोढ़ा,
सदस्य की ओर
से सिरोही
जिले की रेवदर
तहसील में हत्या
के मामले को
आत्महत्या
करार दिये
जाने के सम्बन्ध
में।
स्थगन
प्रस्ताव का
विषय तो नहीं
है अत: इस पर
अनुमति देने में
असमर्थ हूं
फिर भी माननीय
सदस्य को
सिर्फ दो मिनट
में अपनी बात
रखने की अनुमति
होगी ताकि गृह
मंत्रीजी इस
बारे में बात
को स्पष्ट
कर सकें।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपने
अभी व्यवस्था
दी है कि गत
सत्र में
मैंने, इसके
सम्बन्ध
में आप निकाल
लीजिए किसी
भी, ना तो 295 में,
ना 131 में, ना 50
में, आपने
अनुमति नहीं
दी थी। मेरा
अधिकारहै, अध्यक्ष
महोदय, में
आपसे संरक्षण
चाहूंगा कि
मुसाखेड़ा
में 150 बच्चे
और औरतें और
छोटे-छोटे बच्चे,
उस परिवार में
नौ साल से ऊपर
की आयु का कोई
भी मेल मैम्बर
उनके साथ नहीं
है, 11 महीने से
दर-दर भटक रहे
हैं। आपके
परिवार के
रेश्तेदार
आपके क्या 11
महीने आ कर रह
हसकते हैं?
उनको पुलिस
प्रशासन घरों
में नहीं
घुसने दे रहा है,
बच्चे 11
महिनों से स्कूल
नहीं आ पा
रहे। इस राज्य
की राज्यपाल
महिला, अध्यक्ष
महोदय महिला,
मुख्यमंत्री
महिला औरे फिर
150 महिला और
छोटे-छोटे बच्चे
दर-दर की
ठोकरें खा रहे
हैं, इससे बड़े
शर्म की बात
इस प्रदेश के
लिए हो नहीं
सकती। मैं
चाहूंगा गृह
मंत्रीजी
यहां बैठे
हैं, अनेकों
बार मिले हैं
हम इनसे---
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य
जो कहें अंकित
नहीं होगा।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
***
प्रक्रिया
के नियम 295 के
अन्तर्गत
प्राप्त
सूचनाएं
श्री
अध्यक्ष: (1)
श्री हरिमोहन
शर्मा, सदस्य
की ओर से हिण्डौली
की ग्राम
पंचायत मेण्डी
के ग्राम
गणेशगंज में
वन विभाग
द्वारादिनांक
02.08.06 को 50 वर्षों
से काबिज
झौपड़ों को
नष्ट कर दिये
जाने के सम्बन्ध
में।
(2) डा.
चन्द्रशेखर
बैद, सदस्य
की ओर से विधान
सभा क्षेत्र
तारानगर में
उपखण्ड
कार्यालय
खोलने के सम्बन्ध
में।
(3) श्री
मोहन लाल गुप्ता,
सदस्य की ओर
से विधान सभा
क्षेत्र
किशनपोल में
चिकित्सा
सुविधाओं का
समुचित विस्तार
करने के सम्बन्ध
में।
(4)
श्रीमती
राजकुमारी
शर्मा, सदस्य
की ओर से सीकर
एवं झुन्झुनूं
जिले में
अवस्थित
चौबीस कोसी
परिक्रमा को
पर्यटन स्थल
के रूप में विकसित
करने के सम्बन्ध
में।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): ***
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): ***
श्री
जितेन्द्र
सिंह (अलवर): ***
(5) श्री
मोहम्मद
माहिर आजाद,
सदस्य की ओर
से सिंचाई
विभाग में
कनिष्ठ
अभियन्ता
सिविल (डिप्लोमा)
की नियुक्ति
एवं पदोन्नति
में आरक्षित
वर्ग के साथ
विसंगति के
सम्बन्ध
में।
(6) श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर, सदस्य
की ओर से
मंदिर माफी की
भूमि पर हुए
अतिक्रमण को
हटवाने के सम्बन्ध
में।
(7) डा. सुरेश
चौधरी, सदस्य
की ओर से
बेरोजगार
डिग्रीधारी
कृषि स्नातक,
स्नातकोत्तर
को रोजगार के
अवसर उपलब्ध
कराने के सम्बन्ध
में।
माननीय
सदस्यों को
उनके द्वारा
दी गई सूचना
को पढ़ने की अनुमति
होगी।
Ars/usc/1220/1j/04102006/1/अशोधित
प्रति/प्रकाशनार्थ
नहीं
(कांग्रेस
के अनेक
माननीय सदस्य
सदन कूप में
आकर जोर जोर
से बोलने लगे।
)
श्री
सी.डी.देवल ***
श्री
मदन दिलावर:***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़:***
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): ***
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री): ***
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): *** [1]
श्री
अध्यक्ष: यह
सदन नियमों और
अध्यक्षीय
व्यवस्थाओं
से चलता है ।
यदि किसी को
(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ***
श्री
अध्यक्ष: यदि
आपको अध्यक्षीय
व्यवस्था
से कोई
नाराजगी है तो
मेरे कक्ष में
मुझसे बात करें
लेकिन यह
तरीका बहुत
गलत है और मैं
इस तरीके को
बर्दाश्त
नहीं करूंगी ।
मैं आपसे कह
रही हूं यह
सदन (व्यवधान)
सुनिये आप ।
बीच में नहीं
बोलें आप । (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ***
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): ***
श्री
अध्यक्ष: यह
सदन नियमों और
अध्यक्षीय
व्यवस्था
के आधार पर
चलता है ।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
***
श्री
अध्यक्ष: आप
इनको भी स्थान
पर तो बैठाओ
माननीय
प्रतिपक्ष के
नेता महोदय।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): ***
श्री
अध्यक्ष: आसन
न तो आपकी
धमकी में आएगा
न इनकी धमकी में
आएगा, आसन
नियमों से और
अपनी व्यवस्थाओं
से काम करेगा
।
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): ***
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य
गण, दो मिनट
पहले मैंने
कहा कि अध्यक्ष
की व्यवस्था
के खिलाफ यदि
आपको कोई किसी
तरह की आपत्ति
हो तो बीच में
जब अध्यक्ष
खड़े
हों तब आप
अपने स्थान
से नहीं
उठेंगे उसके
बावजूद भी आप
अध्यक्षीय
व्यवस्था
के खिलाफ रोष
में, आक्रोश
में आकर के
वैल में आ
जाएं जो मर्जी
आए तब बोलने
लग जाएं । अध्यक्ष
को पार्टी
बाजी में डाल
दें और यह
कहें कि
पक्षपातपूर्ण
रवैया है, मैं
समझती हूं कि
यह आपका हित
नहीं है और
मैं इसको बहुत
सीरियसली ले
रही हूं । मैं
यह भी देख रही
हूं कि कुछ
माननीय सदस्य
हैं जो अपने
स्थान पर
बेवजह जब
मर्जी आए तब
खड़े होकर जो
मर्जी आए सो
बोलने लग जाते
हैं । मैंने
कहा यह सदन नियमों
से और अध्यक्षीय
व्यवस्थाओं
से चलेगा । आप
अपने अपने स्थान
पर जाएं हम
यहां पर जनहित
की चर्चा पर
आए हैं जनहित
में जो कोई
बात होगी यहां
पर उस बारे में
चर्चा की
जाएगी । आपको
पूरा मौका
दूंगी । जनहित
के मुद्दे पर
आपको अपनी बात
कहने का पूरा
मौका दूंगी
लेकिन नियमों
में दूंगी और
मौका है आपके
पास । आप एक
बार उठा चुके
हैं इस बात को,
कितनी बार
उठायेंगे।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री):
***
श्री
अध्यक्ष:
आपने पिछली
बार भी उठाया
था, सदन का यह
नियम है जो
मुद्दा एक बार
उठ जाता है वह
दुबारा नहीं
उठाया जा सकता
। आप अपने
अपने स्थान
पर जाओ।
vns/usc/12.30/1k/4.10.06
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्यक्ष महोदय, आप हमारी बात सुनो...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप अपने-अपने स्थानों पर जाओगे तो सुनूंगी वर्ना मैं आपकी कोई बात नहीं सुनूंगी। आप अपने स्थान पर उठे तो यहां नेता प्रतिपक्ष कस भी कहना आप नहीं मानते। वह क्या इतने कमजोर हैं कि आप यहां खड़े रहो और वह बोलें फिर उनको बोलने का भी अधिकार नहीं। अपनी पार्टी को व्यवस्थित पहीं कर सकते नेता प्रतिपक्ष। मुझे बहुत ही ....(व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्यक्ष महोदय, नेता प्रतिपक्ष के नियंत्रण में तैयार नहीं है। एक भी आदमी नियंत्रण में नहीं, एक भी माननीय सदस्य नियंत्रण में नहीं है और अध्यक्ष महोदय, जब तक यह वैल में रहें एक चीज भी रिकार्ड पर नहीं लें। मेरी प्रार्थना है कि उनकी एक चीज भी रिकार्ड पर नहीं आनी चाहिये जब तक यह सीटों पर नहीं बैठे।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैं माननीय सदस्य जो मेरी पार्टी के हैं उनसे निवेदन करूंगा कि वह हमारा विरोध सदन में आकर ....(व्यवधान) मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि एक बार आप सीटों पर आ जाएं।
श्री अध्यक्ष: बाढ़ जिससे लोग मर गये, जन धन की हानि हुई उस पर तो चर्चा करना नहीं चाहते पर मूसलखेड़ा पर चिन्ता की चर्चा हो रही है आपको। अकारण लोगों की जन धन की हानि हुई है, चालीस हजार पशु मर गये, इन्सान मर गये, उनकी तो चिन्ता नहीं है, बाढ़ पर आपको किसी को भी चर्चा करने की चिन्ता नहीं है और मूसलखेड़ा की चिन्ता हो रही है आप सब लोगों को। बाढ़ वालों की चिन्ता नहीं है जहां हजारों पशु मर गये, सैंकड़ों व्यक्ति मर गये, कर रहे हैं फालतू की। फालतू की बात करते हो ...(व्यवधान) समय क्यों बरबाद कर रहे हो ? जिस पर आप बाढ़ पर घेर सकते हो सरकार को उस पर चर्चा नहीं करना चाहते आप।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं आप भी कृपा करके शांति धारण करें। नाराजगी जाहिर बहुत हो गयी और हमने भी नाराजगी प्रकट कर दी आपके सामने आकर। अब बात बहुत हो गयी। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि एक माननीय सदस्य जो जिम्मेदार है अपने क्षेत्र का उसके इलाके में एक परिवार इतने दिन से दर-दर घूम रहा है और वह अपनी बात सदन के सामने आपकी मार्फत लाना चाहता है और गृह मंत्रीजी यहां बैठे हुए हैं, वह जानकारी नहीं दे सकते कि क्या हो रहा है ? वह बात सुनते क्यों नहीं ? आप उनकी बात दो मिनट में सुनवा दीजिये और इनसे स्पष्टीकरण दिलवा दीजिये।
श्री अध्यक्ष: यह आसन एक बार व्यवस्था देने के बाद में चाहे आप कितनी घुड़की पिलायें और कितना ही कहें यह आसन अपनी व्यवस्था को नहीं बदलेगा। आप यह भूल रहे हैं ...(व्यवधान) आप मेरे वैश्म में आकर मुझसे मिलिये और माननीय सदस्य को भी लाइये। मैं गृह मंत्रीजी को बुलाऊंगी। उनसे बात करूंगी इस बारे में और उनको राहत देने के बारे में कहूंगी, उनसे निवेदन कस्ंगी लेकिन मेरी इस व्यवस्था को बदलने के लिये अब मैं कतई सहमत नहीं हूं।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आसन इतना कठोर..(व्यवधान) मैं आपको कहता हूं कि आसन इतना कठोर कभी नहीं हुआ है जितनी कठोरता आप दिखा रहे हैं। मानरूवर, आपको अभी इतनी कठोरता प्रकट करने की जरूरत नहीं है। आपको तो लिबरल होना चाहिये किस तरह से ..(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: कठोरता का प्रश्न नहीं है, नियमों का प्रश्न है। यह अध्यक्षीय व्यवस्था का पश्न है इसमें कठोरता का सवाल नहीं है।
श्री जितेन्द्र सिंह (अलवर): अध्यक्ष महोदय, बहुत शर्म की बात है उन महिलाओं और बच्चों के बारे में आप नहीं सोच रहे और पिछले सत्र में कोई मामला नहीं उठाया।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह कौनसी बात हुई ?
श्री अध्यक्ष: मैंने कह दिया आपको आप मेरे वैश्म में आइये। होम मिनिस्टर को बुलाऊंगी। मैंने कह दिया ना आपको मेरे वैश्म में आइये और मैं बुलाऊंगी होम मिनिस्टर को। कहूंगी उनसे सारी बातें..(व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हम नियमों के हिसाब से अनुरोध कर रहे थे..(व्यवधान)
श्री जुबेर खान (रामगढ़): जेल में और भर दो इनको भी। भर दो कौन रोक रहा है ? भर दो ना जेलों में, भरो।
श्री अध्यक्ष: इस तरह से सारे माननीय सदस्य वैल में आ- आ करके और अध्यक्षीय व्यवस्था को रोजाना बदलवायेंगे उससे सदन नहीं चलेगा।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप मेरी बात सुनो।
श्री अध्यक्ष: आपकी तो सुन लूंगी बात। सुनाइये।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप इतनी कठोरता मत दिखाओ। आपकी इतनी कठोरता का नतीजा अच्छा नहीं क्योंकि वह में भी नुकसान देगा और गलत परम्पराएं कायम होंगी। मैं कोई कोई धमकी नहीं दे रहा हूं लेकिन मैं अनुरोध कर रहा हूं, सादर अनुरोध कि आप माननीय सदस्य की दो मिनट में बात सुन लीजिये। पहले यह बात कभी नहीं कही गयी है और उसका आप गृह मंत्रीजी से..(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आपको याद नहीं है लेकिन मुझे याद है यह चर्चा यहां आ चुकी है मूसलखेड़ा की। मुझे याद अच्छी तरह से है परिप्रेक्ष्य....(व्यवधान)
श्री जुबेर खान (रामगढ़): नहीं आयी है, नहीं आयी है। आप निकलवा लीजिये रिकार्ड पर। आपने अलाऊ नहीं किया था।
श्री अध्यक्ष: मैं उस दिन की कार्यवाही निकालूंगी। आपने गृह विभाग की डिमाण्ड के रोज इस बात को उठा दिया था और मुझे अच्छी तरह से याद है। अब आपको तो याद नहीं है लेकिन मुझे याद है।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपसे अनुरोध तो कर ही सकते हैं आप अपना रेफरेंस देख लीजिये। आप अपने टेबल आफिस को कह दीजिये कि वह रेफरेंस देख लेंगे कब आया है ? आया है तो हम विदड्रा कर लेंगे। इनकी बात पहले आयी है, सदन में चर्चा हुई है तो हम विदड्रा कर लेंगे।
श्री अध्यक्ष: गृह विभाग की डिमाण्ड पर बोला है। यह दिया किसने। मैंने आपसे निवेदन कर दिया मरे वैश्म में आप भी पधारिये, उनको भी लाइये। चाय भी पिलाऊंगी। होत मिनिस्टर साहब को भी बुलाऊंगी और इसका हल निकालेंगे लेकिन अब मैं मेरी व्यवस्था को नहीं बदलूंगी।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैं हाथ जोड़कर, आप जितना हाथ जोड़ रही हैं उतना मैं भी ...(व्यवधान)
डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): अध्यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के नेता को भी ..(व्यवधान)
श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): अध्यक्ष महोदय, पाइंट आफ इनफोर्मेशन।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप देख लीजिये अगर आयी है तो हम विदड्रा कर लेंगे।
श्री अध्यक्ष: गृह विभाग की डिमाण्ड पर बोल चुके थे वह I remember it very well.
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं आयी है।
श्री अध्यक्ष: प्रतिपक्ष के नेता महोदय, मेरी भी बड़ी सहानुभूति है I remember it very well. गृह विभाग की डिमाण्ड पर बोल चुके थे वह
डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि सोनिया जी और प्रणव मुखर्जी के दौरे के बावजूद भी केन्द्र ने ..(व्यवधान)आज उसी पर चर्चा करना चाहते हैं तो यह विषय ला रहे हैं..(व्यवधान) चर्चा का विषय बाढ़ और अतिवृष्टि का है उसमें चर्चा नहीं करना चाहते हैं। राजस्थान की बाढ़ पीडि़त जनता के साथ इनको कोई सहानुभूति नहीं है। (व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अगर आयी है तो आपके आफिस को कह दीजिये कब आयी ?
श्री अध्यक्ष: बोल चुके हैं वह तो। कह दिया ना आपको कि आप मेरे वैश्म में पधारिये, इनको भी लाइये। गृह मंत्रीजी को भी बुला लूंगी। कह दिया ना मैंने आपको।
संयम लोढ़ा। श्री संयम लोढ़ा, दो मिनट में आप अपनी बात कह सकते हैं। (व्यवधान) इम्पोर्टेंट बाद में होगी ..(व्यवधान) अंकित नहीं हो। मैंने श्री संयम लोढ़ा का नाम पुकार लिया था।
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): आपने कहा था कि व्यवस्था देने के बाद में मेरे एक मिनट आप सुनेंगी इसलिये मेरा आपसे निवेदन है कि मेरे स्थगन प्रस्ताव को आपने निरस्त किया है। एक मिनट मुझे उस पर कुछ कह लेने दें। आपको यह जानकारी दी है कि हज हाउस प्रकरण में न्यायालय में मामला विचाराधीन है। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: किसी का अंकित नहीं हो।
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): ***
श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***
श्री अध्यक्ष: अंकित नहीं हो रहा है। आप कुछ भी कहें अंकित नहीं हो रहा है। (व्यवधान) आप कोई नियमों में लेकर आएं श्रीमान इसे आप। सदन का समय बर्बाद ना करें। माननीय सदस्य सदन के समय को बरबाद ना करें।
श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***
श्री अध्यक्ष: आप अपना स्थान ग्रहण कर ले। आप स्थान ग्रहण करिये। अब आपने बहुत कुछ कह दिया, स्थान ग्रहण कर लें। मुझे मजबूर ना करें। माननीय सदस्य श्री संयम लोढ़ा।
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): ****
श्री अध्यक्ष: तो मैंने नाम पुकार लिया संयम लोढ़ा का, आप उसके बाद बोल लेना।
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर):***
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से...
श्री अध्यक्ष: दो मिनट में बात कहेंगे आप अपनी।
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सदन का ध्यान उस दुखद घटना की तरु आकृष्ट करना चाहता हूं जिसमें एक बहुत ही साधारण आदमी ओमपुरी की 27 मई को मृत्यु हो गयी और उसका अपराध रेवदर थाना में दर्ज हुआ। जिन व्यक्तियों के ऊपर यह आरोप लगाया गया और जिनको उसकी मृत्यु का जिम्मेदार ठहराया गया वह उसी दिन पुलिस थाने में ओमपुरी को लेकर गये। पुलिस थाने में ओमपुरी के साथ मारपीट हुई और उसके बाद वह इतना आतंकित हुआ उससे कि उसने पुलिस अधीक्षक और दूसरे लोगों को लिखित में यह रिपोर्ट किया कि मैं इतना आतंकित हूं इनकी वजह से और मैं मरूंगा। उसके बाद जो लोग उसको थाने से लेकर गये उन्होंने दुकान से जहर खरीदा, उसको जहर पिला दिया, एक तिराहे पर छोड़ दिया और बाद में दूसरे हास्पिटल में ले गये जहां उसकी मौत हो गयी। मिसरोही में आकर उस पीडि़त नवयुवक की मां कई दिन धरने पर बैठी, उपवास पर बैठी लेकिन चूंकि पुलिसकर्मियों का इस मारपीट में इनवाल्वमेंट था इसलिये लगातार पुलिस पूरे घटनाक्रम के प्रति उदासीन बनी रही। गृह मंत्रीजी का खुद का जब दौरा हुआ सिरोही में उस पीडि़त व्यक्ति की मां गृह मंत्रीजी से मिली तब तो उनके बयान लिखे गये और पुलिस का इस कदर पूरे मामले में गठबंधन रहा कि पुलिस ने उनकी अग्रिम जमानत तक हो जाने दी और आज भी उस मामले को लेकर पीडि़त परिवार को कोई न्याय नहीं मिला है। जिन पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की जिसकी वजह से वह आत्महत्या पर विवश हुआ कोई मुकदमा उनके ऊपर कायम नहीं किया गया और जिन लोगों ने जहर खरीदकर जहर पिलाया उनके खिलाफ भी धारा 304 के तहत कोई कार्यवाही नहीं की गयी।
श्याम/चौहान 4.10.2006
12.40 (1) 1l
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से माननीय गृह
मंत्री जी का
ध्यानाकर्षित
करना चाहता
हूं और उनसे
इस बात की फरियाद
करता हूं कि
वह पीडि़त व्यक्तियों
को न्याय
दिलावें
जिससे जिले
में पुलिस
प्रशासन के
प्रति विश्वास
में जो दरार
पड़ी है वह
विश्वास
शासन के प्रति
पुन: कायम
किया जा सके,
धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष: ठीक
है, थैंक्यू
वैरी मच।
मंत्री जी बोल
रहे हैं न।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, जैसे
ही यह घटना ध्यान
में आयी, घटना
तो सामान्य
थी कि एक
मुकेश
अग्रवाल ने
रिपोर्ट
लिखायी थी कि
उसको टेलीफोन
पर धमकी दी और
इस पर एक-दो केस
पुराने भी थे।
उसके कारण से
उसको 107 में
लाये थे। थाने
पर दोनों को
बुलाकर के आपस
में समझौता
कराकर उनको
रवाना किया
था। उसके बाद 28
तारीख के दिन
उसका केस दर्ज
हो गया कि उसने
कोई जहरीला
वस्तु खायी
और वह बेहोश हो
गया। पहले
उसको आबू रोड
में फिर उसके
बाद महसाना के
किसी
हास्पिटल में
भर्ती करया।
यह घटना थी 28 की
और 7.6 को उसी डैथ
हो गयी। जो
इनका 39/2006 पहले मुकदमा
जिन धाराओं
में आया उसमें
304 जोड़ दिया और
उसकी तफ्तीश
आई.जी. को दी है
और आई.जी. के स्तर
पर इसकी जांच
हो रही है। जो
भी इसमें सच्चाई
होगी जिसका भी
दोष होगा,
निश्चित रूप
से जांच के
बाद ही इसमें
आगे
कार्यवाही
करेंगे। इतना
मैं विश्वास
दिला सकता
हूं।
श्री
अध्यक्ष: ठीक
है, माहिर
आजाद।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय, मेरी
बात सुनिये,
मैंने खुद ने
पुलिस
महानिदेशक से
जब उसकी मां
सिरोही में
बैठी हुई,
मैंने खुद ने
वहां से फोन
पर बात की, जब
यह सारे तथ्य
मेरे सामने
आये। यह मेरे
क्षेत्र का
मामला नहीं
है। मामला
रेवदर का है।
श्री
अध्यक्ष:
आई.जी. जांच कर
रहे हैं।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
लेकिन उसके
बाद भी आज तक
जिन
पुलिसकर्मियों
ने मारपीट की
उसके साथ में
और उसके बाद
उसने तुरंत
फैक्स किया
और थाने के
अंदर मारपीट
के वक्त जो
व्यक्ति साथ
था।
श्री
अध्यक्ष: यह
बहुत गलत बात
है। जब उन्होंने
सारी बात कह
दी और आई.जी.
जांच कर रहे
हैं और आप
बोले ही चले
जा रहे हैं।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): आपके
निर्देश के
बाद उसका बयान
दर्ज हुआ,
इसके बावजूद
आज तक पुलिस
कर्मियों के
खिलाफ कोई
कार्यवाही
आपने नहीं की
है ...(व्यवधान)
मैं यह कहना
चाहता हूं।
श्री
अध्यक्ष:
श्री माहिर
आजाद।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय, आपके
दो मिनट देने
का मतलब क्या
हुआ, मैं यहां
कोई भाषण देने
के लिए खड़ा
हुआ था।
श्री
अध्यक्ष:
आपने अपनी बात
कह दी ...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय, मेरा
सीधा आरोप है
कि पुलिस
कर्मियों के
शामिल होने की
वजह से सरकार
पूरे मामले को
खराब कर रही
है ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: इन्होंने
आई.जी. को जांच
दी और क्या
चाहते हैं आप?
वह कह रहे हैं
जांच कर रहे
हैं ...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): पूरे
मामले को, गृह
मंत्री जी बता
दें ओमपुरी के
साथ में जो व्यक्ति
थाने में था,
क्या उसने
बयान नहीं
दिया कि
मारपीट की। क्या
उसने बयान
नहीं दिया और
जब उसने बयान
दिया है कि
मारपीट की,
उसके बाद में
उसने एस.पी. को
फैक्स कर
दिया कि मैं
इस मारपीट की
वजह से आत्महत्या
करूंगा और जो
लोग साथ लेकर
गये उन्होंने
जहर पिलाया।
फिर आप क्यों
पुलिस
कर्मियों के खिलाफ
कार्यवाही
नहीं कर रहे
हैं।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): मैं
आपको यह विश्वास
दिला रहा हूं
कि चाहे पुलिस
ने किया हो, चाहे
किसी ने भी
किया हो, जांच
आई.जी. को दी
हुई है। जांच
रिपोर्ट आने
के बाद अगर
पुलिस का दोष
निकला तो
पुलिस के लोग
सज़ा पायेंगे
जिसका जो दोष
होगा। लेकिन
जब तक उसकी
जांच स्पष्ट
सामने नहीं
आती तब तक मैं
किसी को दोषी
करार नहीं कर
सकता हूं।
जांच दी हुई
है, मैं कोशिश
करूंगा कि जल्दी
से जल्दी वह
पूरी होकर
उसकी
फाइंडिंग
आये।
श्री
अध्यक्ष:
मोहम्मद
माहिर आजाद।
श्री
जितेन्द्र
सिंह (अलवर):
गृह मंत्री जी
आप इस पर भी तो
ध्यान
दीजिये। आप
इसमें क्यों
चुप बैठे हुए
हैं।
मूसाखेड़ी
वाले मामले पर
आप क्यों चुप
बैठे हुए हैं।
इसमें भी आप
अपना वक्तव्य
दीजिये।
श्री
अध्यक्ष:
माहिर आजाद
...(व्यवधान)
श्री
जितेन्द्र
सिंह (अलवर): आप
इसके बारे में
भी साथ-साथ क्यों
नहीं बोल लेते
हैं।
श्री
अध्यक्ष:
अलवर से आने
वाले माननीय
सदस्य, मैंने
नाम पुकार
लिया है,
मोहम्मद
माहिर आजाद।
श्री
जितेन्द्र
सिंह (अलवर):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपको निवेदन
करना चाहता
हूं।
श्री
अध्यक्ष:
यहां निवेदन
ऐसे नहीं होता
है। मैंने नाम
पुकार लिया
है।
श्री
जितेन्द्र
सिंह (अलवर): मैं
तो वैसे ही
बहुत कम बोलता
हूं। बहुत ही
संवेदनशील
मामला है। इन
छोटे-छोटे बच्चों
और महिलाओं को
कहां लेकर के
जायें। आप
निवेदन
करेंगे तो आपके
घर ले जाकर के
बसा दें। अध्यक्ष
महोदय, आपके
घर ले आयें।
श्री
अध्यक्ष: आप
नियमों में
जाकर करें।
मैंने मोहम्मद
माहिर आजाद का
नाम पुकार
लिया है।
श्री
जितेन्द्र
सिंह (अलवर): आप
हमें समय मत
दीजिये। हम
यहां नहीं
बोलेंगे इस
मामले पर, आज
भी नहीं उठायेंगे,
अगले दो साल
में भी नहीं
उठायेंगे। आप
हमें यह आश्वासन
दे दीजिये कि
इनको आपके घर
ले जाकर के
बसा दें।
श्री
अध्यक्ष: बात
तो हो गयी है।
अब आप सुनते
तो हो नहीं, कहीं
चले जाते हो,
मैंने कह दिया
है कि आप मेरे वैश्म
में पधारें।
मैं आपको चाय
भी पिलाऊंगी,
होम मिनिस्टर
साहब को
बुलाऊंगी,
सारी बात आपकी
सुनुंगी ...(व्यवधान)
श्री
जितेन्द्र
सिंह (अलवर):
बहुत-बहुत धन्यवाद
आपको कि आप
चाय
पिलायेंगी।
हम उन महिलाओं
को और बच्चों
को साथ ले आते
हैं, आपके
कक्ष में ही
बता देते हैं।
श्री
अध्यक्ष: फिर
आप वही बात कह
रहे हैं। जब
एक बार बात हो
गयी तो उसको
क्यों उठा
रहे हैं आप।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): अध्यक्ष
महोदय, आसन का
आदेश
शिरोधार्य,
मैंने रामसिंहपुरा,
सांगानेर के
हज हाउस की
घटना के संबंध
में स्थगन
प्रस्ताव के
माध्यम से
आपको सूचना दी
थी।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मेरा
पाइंट ऑफ
आर्डर है।
श्री
अध्यक्ष: क्या
पाइंट ऑफ
आर्डर है
आपका।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): जीरो आवर
में काहे का
है, मुझे अध्यक्ष
जी ने अनुमति
दी है ...(व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
आसन ने व्यवस्था
दी है आसन ने
...(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): मेरी बात
कहने के बाद ...(व्यवधान)
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
पाइंट ऑफ
आर्डर नहीं
उठा सकते हैं
...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मेरा
पाइंट ऑफ
आर्डर है ...(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): मैं मेरी
बात निवेदन कर
दूं उसके बाद
आप इनकी सुन
लें ...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): कोई भी
एक सदस्य ...(व्यवधान)
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर):
पाइंट ऑफ
आर्डर उठा ही
नहीं सकता है
...(व्यवधान)
जीरो ऑवर में
पाइंट ऑफ
आर्डर उठा ही
नहीं सकता है
...(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): मैंने
मेरी बात कह
दी, फिर आप
इनकी बात सुन
लें ...(व्यवधान)
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): आसन
ने व्यवस्था
दी हुई है।
आसन नयी व्यवस्था
शुरू कर रहा
है तो अलग बात
है ...(व्यवधान)
लेकिन जीरो
ऑवर में पाइंट
ऑफ आर्डर आज तक
नहीं उठा है
...(व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): अध्यक्ष
महोदय की व्यवस्था
के बाद आप
बोलें ...(व्यवधान)
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): अध्यक्ष
महोदय, यह एक
नयी परंपरा
शुरू कर रहे
हैं फिर हम भी
पाइंट ऑफ
आर्डर ...(व्यवधान)
जीरो ऑवर में,
आप भी इनको
अलाऊ करते हैं
तो ...(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): आप
इनको पाइंट आफ
आर्डर ...(व्यवधान)
आदेश दे रहे
हैं, इनको
बैठाये ...(व्यवधान)
आखिर यह सदन
नियमों से
चलता है,
परंपराओं से
चलता है। आपकी
खुद की व्यवस्था
है और यह बोले
जा रहे हैं और
आप इनको समय
दे रही हैं।
श्री
महावीर प्रसाद
जैन (मुख्य
सचेतक): जो नया
सदस्य कोई भी
...(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर):
माननीय सदस्य
जो बोलना
चाहते हैं
उनको आप समय
नहीं देते हैं।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
नियमों में स्पष्ट
व्यवस्था
है ...(व्यवधान)
कि एक मत
समाप्त होने के
बाद दूसरा ज्यों
ही शुरू होता
है।
श्री
अध्यक्ष:
नियमों में यह
भी व्यवस्था
है कि जीरो
आवर में औचित्य
का प्रश्न
नहीं उठ जाता
है ...(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): यस,यस ...(व्यवधान)
बैठ जायें,
बैठ जायें।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
अब बैठ जायें
...(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर):
थोड़ी-बहुत भी
हया-शर्म है
तो बैठ जायें
...(व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
अब बैठ जायें
यही अच्छा है
...(व्यवधान) यह
नई परंपरायें
मत कायम करें,
बैठें ...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): जीरो
ऑवर में ही ...(व्यवधान)
उठाया गया है,
आज तक औचित्य
के सवाल पर
प्रश्न उठा
है ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
उनको बात तो
कहने दीजिय
फिर औचित्य
उठा लेना ...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मैं
इसलिए कहना
चाहता हूं कि
इन्होंने
संविधान की
शपथ ...(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): मेरी बात
ही नहीं आयी
...(व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय, पहले
मुझे मौका
दिया है, मैं
खड़ा हुआ है
इससे पहले ही
...(व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
इनको शनिदेव
को बैठायें
...(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): अध्यक्ष
महोदय, आपके
निर्देश को यह
मान नहीं रहे हैं
...(व्यवधान) और
आप भी इनके
खिलाफ कोई
कार्यवाही
नहीं कर रहे
हैं। आसन के
आदेश की
अवहेलना कर
रहे हैं, इनके
खिलाफ
कार्यवाही
करायें ...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): हमने
सबने यह शपथ
ली है ...(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): आप बोल
किस पर रहे हो
...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मैं
विधि द्वारा
स्थापित
भारत के
संविधान के
प्रति सच्ची
श्रद्वा ...(व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
शनिदेव
महाराज
बिराजें ...(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): हाउस के
फ्लोर पर मेरा
पजेशन है आप
बैठ जायें ...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): और
अखंडता
अक्षुण्ण
रखूंगा ...(व्यवधान)
जिस पद को
ग्रहण करने
वाला हूं ...(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): यह बोल
काहे पर रहे
हैं ...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मेरे
कर्तव्य को
श्रद्वापूर्वक
निर्वहन
करूंगा।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
सरकारी मुख्य
सचेतक आपकी व्यवस्था
को नहीं मान
रहे हैं। उनका
कर्तव्य है कि
सदन की
कार्यवाही
सुचारू रूप से
चले। इसमें आप
मददगार होते
हैं और आप तो
अध्यक्षीय
व्यवस्था
के खिलाफ बोल
रहे हैं।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मैं
अध्यक्ष की
अनुमति से बोल
रहा हूं ...(व्यवधान)
कहां बोल रहा
हूं खिलाफ
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
और क्या कर
रहे हैं ...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मैं
अनुमति से बोल
रहा हूं।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
आपने कहां
अनुमति दी
बोलने की ...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मैं
अध्यक्ष की
अनुमति से ही
बोला हूं ...(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष ने
अनुमति नहीं
दी है ...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अध्यक्ष
ने कहा है कि
जीरो ऑवर्स
में बोलने का
...(व्यवधान)
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): यह
शनिदेव
महाराज हैं
...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): सवाल
नहीं उठाया है
...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
आपने प्रश्न
उठाया है कि
संविधान की
जिस शपथ के
बारे में चर्चा
की, वह
संविधान की जो
शपथ है उसका
क्या कोई उन्होंने
उल्लंघन
किया है। जो
आप कुछ कह रहे
हैं।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यही
बात कह रहा
हूं।
श्री
अध्यक्ष: क्या
उल्लंघन कर
दिया।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): अध्यक्ष
महोदय, अभी तो
मैं बोला ही
नहीं ...(व्यवधान)
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): इतरा
प्रिकोशन तो आप
बाढ़ में रखते
तो लोग नहीं
मरते ...(व्यवधान)
इन्हें
बोलने तो दें
...(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): मेरी बात
तो मुझे बोलने
दें। उसके बाद
यह कुछ कहें
...(व्यवधान)
आपने मुझे
अनुमति दी है।
आप मेरे अधिकारों
की रक्षा करें
...(व्यवधान)
हाउस के फ्लोर
पर मेरा कब्जा
है।
श्री
अध्यक्ष:
इनको कह लेने
दें ...(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): और यह बीच
में खड़े हो
रहे हैं। इनको
या तो मुझसे
अनुमति लेनी
चाहिए या आपसे
अनुमति लेनी
चाहिए ...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): कहने
दें, पहले उनको
कहने दें ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
हां, कहने दो
...(व्यवधान)
फिर कहना आप
...(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): काहे के
मुख्य सचेतक
हैं यह ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
पहले उनको
कहने दें फिर
आपको कुछ कहना
हो तो कहना।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): अध्यक्ष
महोदय,
बैठायें आप
देखिये इनका
हाल ...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अब आप
अनुमति देते
हैं तो उसके
बाद में
बोलूंगा ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
हां, बिलकुल
बोलना, बोलने
दें ...(व्यवधान)
लैट हिम स्पीक
...(व्यवधान) अब
आप ही कर रहे
हैं ...(व्यवधान)
अब आप भी कर
रहे हैं।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): अध्यक्ष
महोदय, आसन की
व्यवस्था
के प्रति मेरा
पूर्ण सम्मान
है। आपकी
अनुमति से मैं
अपनी बात आपके
सामने कहना
चाहता हूं ...(व्यवधान)
संविधान के
प्रति भी है,
कानून के प्रति
भी है। आपको
देखने की
जरूरत नहीं है
...(व्यवधान)
डा.
जालम सिंह
रावलोत (शिव):
सड़कों पर
निपट लिया जायेगा
...(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): आर.एस.एस.
के प्रति नहीं
है।
डा.
जालम सिंह
रावलोत (शिव):
यह आपकी
संविधान में ...(व्यवधान)
श्री
देवीशंकर
भूतड़ा (ब्यावर):
सड़कों पर
निपटने का
कौनसा तरीका
है ...(व्यवधान)
आप हिन्दु-मुसलमानों
के
सांप्रदायिक
दंगों ...(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): मुख्यमंत्री
शिलान्यास
करने गयी ...(व्यवधान)
श्री
देवीशंकर
भूतड़ा (ब्यावर):
आप हमेशा हिन्दु-मुसलमानों
के दंगे कराना
चाहते हैं ...(व्यवधान)
सड़कों पर भी
निपटा ...(व्यवधान)
यह तो दंगा ही
कराना चाहते
हैं ...(व्यवधान)
सड़कों पर
हिन्दु-मुसलमानों
के दंगें
करायेंगे यह
...(व्यवधान)
डा.
जालम सिंह
रावलोत (शिव):
यह सदस्य
बनने के लायक
नहीं हैं ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
मैंने उनका
नाम पुकारा
है। उन्हें
अपनी बात कह
लेने दो। बीच
में आप टोके
नहीं। आप तीन
मिनट में अपनी
बात कह
दीजिये।
जयगोविन्द/यूएस/4.10.6/12.50/1m/अशोधित
प्रति/प्रकाशनार्थ
नहीं
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): ठीक है। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
निवेदन कर रहा
हूं कि मैंने
और मेरे
साथियों ने रामसिंहपुरा,
सांगानेर में
हज हाउस
निर्माण के सम्बन्ध
में स्थगन
प्रस्ताव
दिया था। आपने
व्यवस्था
दी, आपको
सरकार ने
सूचना दी कि
उस पर न्यायालय
का कोई स्थगन
आदेश है।
श्री
अध्यक्ष: स्थगन
आदेश नहीं, न्यायालय
में
विचाराधीन, स्थगन
नहीं कहा
मैंने।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): न्यायालय
के विचाराधीन
है, सबज्यूडिस
नहीं। मैं उस
सम्बन्ध
में कोई बात
नहीं कहना
चाहता। मेरा
न्यायालय के
प्रति भी पूरा
सम्मान है।
माननीय अध्यक्ष
महोदय मैं यह
निवेदन करना चाहता
हूं कि हज
कमेटी होम
डिपार्टमेण्ट
का एक पार्ट
एण्ड पार्शल
है और यू डी एच
डिपार्टमेण्ट
जिसके अण्डर
में जे डी ए
आता है सरकार,
सरकार के एक
विभाग द्वारा
सरकार के
दूसरे विभाग
को पाँच बीघा
जमीन हज हाउस
बनाने के लिए
दी। हज हाउस
की आवश्यकता
इसलिए पड़ी कि
जयपुर के
सांगानेर
हवाई अड्डे
को...।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, यह नई
परम्परा हो
जाएगी। जो
प्रकरण न्यायालय
में
विचाराधीन है,
उस पर कोई
चर्चा हुई
नहीं। अब इन्होंने
उसको आपकी
सदाशयता का
फायदा उठाकर
वह सारा चैप्टर
खोल दिया। आप
खुद देख लें
अध्यक्ष
महोदय, न्यायालय
के विचाराधीन
है, 9 तारीख
उसमें है, 9 तारीख
उसमें है।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): आप
संसदीय कार्य
मंत्री हैं, अभी
आपने कार्य
सलाहकार
समिति का
उदाहरण दिया
जबकि उसकी
रिपोर्ट अभी
हाउस में रखी
नहीं गई है।
आप तो कायदे
कानून की
जानकारी
हासिल करो
थोड़ी। हमको
यह लिफ़ाफ़ा भेजा
है, उस पर लिखा
है, गोपनीय,
अभी हाउस ने
अप्रूव नहीं
किया और आप
उसमें बोल रहे
हैं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, न्यायालय
में जो
विचाराधीन
प्रकरण है उन
पर चर्चा इस
सदन में नहीं
होती और यह
वहीं आ रहे
हैं, वहीं आ
रहे हैं और
आपने व्यवस्था
भी यही दी है।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
आपने उनको
बोलने की
अनुमति दे दी
और आप बीच में
कहां आ रहे
हैं मान्यवर?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): यह अनुमति
नहीं दी उन्होंने,
यह अनुमति
नहीं दी।
श्री
अध्यक्ष:
आपको तीन मिनट
का समय दिया
है, उनको बोल लेने
दीजिए, उन्होंने
कह दिया कि न्यायालय
का सम्मान
करता हूं, जो
कुछ कहना चाह
रहे हैं कह
लेने दीजिए।
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह गलत
परम्परा
कायम हो
जाएगी।
श्री
अध्यक्ष: आप
अपना स्थान
ग्रहण कीजिए।
आप दो मिनट
में अपनी बात
कह लें।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, हां,
मैं दो ही
मिनट में, आधा
मिनट ही हुआ
है, अभी तो,
आपने तीन मिनट
का कहा था
पहले। माननीय
अध्यक्ष महोदय,
मैं यह निवेदन
कर रहा था कि
सरकार के एक विभाग
ने सरकार के
दूसरे विभाग
को पाँच बीघा
जमीन आवंटित
की। पिछली
कांग्रेस
सरकार ने कर्बला
में जमीन
आवंटित की थी,
हम सब लोग
चाहते थे कि
वहां हज हाउस
बने लेकिन इस
सरकार ने
सांगानेर में
अंतराष्ट्रीय
हवाई अड्डा
बनने के बाद
अब चूंकि पूरे
राजस्थान की
हाजी
सांगानेर में
आएंगे, इन्होंने
रामसिंहपुरा
में एक जमीन
आवंटित कर दी।
जमीन सरकार ने
आवंटित की, उस
जमीन को लेकर
सरकार के एक
मंत्री जो
कैबिनेट में
बैठे हैं, श्री
घनश्यामजी
तिवाड़ी, वह
यह कहें कि
साहब, यह
चारागाह भूमि
आवंटित कर दी
तो यह जिम्मेदारी
हमारी तो नहीं
थी, यह अर्ज कर
रहा हूं।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, यह
सारा प्रकरण
न्यायालय
में
विचाराधीन
है।
श्री
अध्यक्ष: अब
आप इसमें किसी
भी मंत्री का
नाम नहीं लेंगे।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): अच्छा
ठीक है, नहीं
लूंगा।
श्री
अध्यक्ष:
आपको हज हाउस
निर्माण के
बारे में
अनुमति दी है।
(व्यवधान) प्लीज।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): वह
उपस्थित भी
नहीं है
माननीय अध्यक्ष
महोदय। (व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): यह
इन्होंने
नाम कैसे
पुकारा?
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
न्यायालय के
विचाराधीन है,
यह प्रकरण पर
सदन में कोई
विचार नहीं
किया जाएगा।
श्री
अध्यक्ष:
आपको विस्तृत
जानकारी है।
(व्यवधान) आप
स्थान ग्रहण
करिए।
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
यह सदन की
गरिमा के
खिलाफ है।
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण कर लें।
मैं आपको बीच
में टोक रही हूं
माननीय सदस्य।
जो सूचना
रिकार्ड में
है उस पर तो आज
भी जे डी ए ने
उसे चारागाह
लिख रखा है।
(व्यवधान)
प्रकरण न्यायालय
में गया, अब क्या
बोलना?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): यह नई परम्परा
स्थापित कर
रहे हैं।
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
प्रकरण न्यायालय
के विचाराधीन
है। (व्यवधान)
कोई भी प्रकरण
न्यायालय
में
विचाराधीन हो
तो इस सदन में
किसी भी
माननीय सदस्य
को उस पर
बोलने का
अधिकार नहीं
है। (व्यवधान)
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं
पंचायती राज
मंत्री): उस पर
यहां पर चर्चा
नहीं होनी
चाहिए, उसके
आधार पर किसी
पर आरोप नहीं
लगाया जा
सकता।
श्री
अध्यक्ष: आप
उसी पर आइए कि
हज हाउस बनना चाहिए,
बस उसके अलावा
आप उसके मेरिट
पर नहीं जा
सकते, आप केस
के मेरिट में
नहीं जाएं, आप
केवल इतनी सी
अपनी बात कहिए
कि हज हाउस
बनना चाहिए।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): अच्छा
ठीक है।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य ने
सारी बात कह गए,
जब प्रकरण न्यायालय
के विचाराधीन
है फिर बन रहा
है कि नहीं बन
रहा है, न्यायालय
का फैसले के
बाद होगा।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): कोई स्थगन
आदेश नहीं है।
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
न्यायालय के
अंदर
विचाराधीन है
तो इस सदन में
काहे की बात,
इस पर चर्चा
ही नहीं होनी
चाहिए, माननीय
न्यायालय का
अपमान है यह
सीधा-सीधा।
श्री
अध्यक्ष: हज
हाउस बनना
चाहिए, यह
कहकर बात खतम
कीजिए।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): अच्छा
मैं यही बात
कह रहा हूं।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यहां
गृह मंत्रीजी
बैठे हैं जो
इस हज हाउस
कमेटी के
विभाग के
प्रभारी
मंत्री भी
हैं, यह भी उस
प्रोग्राम
में मौजूद थे
जो शिलान्यास
20 तारीख को हुआ,
संसदीय कार्य
मंत्रीजी भी
उस प्रोग्राम
में मौजूद थे
और मुख्य
मंत्रीजी ने
शिलान्यास
किया है, मैं
तो आपके माध्यम
से....।
श्री
अध्यक्ष: बात
खतम हुई बस।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): मैं तो
सरकार से यह
निवेदन करना
चाहता हूं कि
आज पूरे राजस्थान
के मुसलमान इस
सदन के जरिए
आपकी तरफ और
सरकार की तरफ
देख रहे हैं
कि हज हाउस का
निर्माण
सांगानेर में
कब हो जाएगा,
कितनी जल्दी
होगा, होगा कि
नहीं होगा,
सरकार इस सदन
के जरिए राजस्थान
के उन
मुसलमानों को
आश्वस्त
करे। कहीं ऐसा
तो नहीं है कि
इसका शिलान्यास
कर दिया और जब
आप यह बात कह
रहे हैं कि
चारागाह भूमि
है, जो भी
रिकार्ड में
है तो शिलान्यास
करने वाले को सोचना
चाहिए था। यह
तो कहने वाला
जाने, इसमें
हमारा कहां
दोष है?
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
रामसिंहपुरा,
सांगानेर में
हज हाउस बनना
चाहिए, देश के
दूसरे हिस्सों
में भी हज
हाउस बने हुए
हैं।
श्री
अध्यक्ष:
कर्बला में भी
बनना चाहिए यह
भी कहो, कर्बला
में भी बनना
चाहिए।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): मुख्य
मंत्रीजी ने
पिछली ईद पर
यह आश्वासन
दिया था कि
दोनों जगह हज
हाउस बनेगा,
कर्बला में
एडमिनिस्ट्रेटिव
ऑफिस बनेगा।
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
इस सदन का
सदुपयोग किया
जाए।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपने
मुझे अनुमति
दी है। माननीय
अध्यक्षजी
ने मुझे
अनुमति दी है।
आप विराजिए।
श्री
अध्यक्ष:
मैंने अनुमति
दी है इनको,
इनका औचित्य
का प्रश्न
था।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, नगर से
आने वाले
माननीय सदस्य
हैं उनके बारे
में जो उन्होंने
प्रस्ताव
दिया, फिर
आपने व्यवस्था
दी कि मामला
सब ज्यूडिस
है, उसके
बावजूद आपने
उनको
उदारतापूर्वक
बोलने का अवसर
दिया, उस अवसर
का दुरुपयोग
करते हुए उन्होंने
इस प्रकार के
प्रसंग जो सब
ज्यूडिस है,
जो कोर्ट के
विचाराधीन है,
उन सब प्रश्नों
को उजागर
किया। उन्होंने
यह कहा कि
मुख्य
मंत्रीजी ने शिलान्यास
किया, गृह
मंत्रीजी
उसमें थे (व्यवधान)।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): क्या
बोल रहे हैं,
आपकी तो कोई
व्यवस्था
ही नहीं है।
श्री
अध्यक्ष:
इनको समय दिया
है।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): हम तो
बैठ जाएंगे
लेकिन यह बोल
किस व्यवस्था
पर रहे हैं, यह
तो पता चलना
चाहिए कि यह
क्या बोल रहे
हैं और किस
विषय पर बोल
रहे हैं तथा अध्यक्ष
महोदय की
अनुमति से बोल
रहे हैं। हज
हाउस का मामला
है राजस्थान
के पूरे
मुसलमानों से
जुड़ा हुआ है,
आप मुस्लिम
विरोधी हैं,
सब लोग जानते
हैं।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
मैं यह निवेदन
करना चाहता
हूं कि सरकार
के (व्यवधान)
ये यहां इस
बात पर केवल
राजनीति कर
रहे हैं, हज
हाउस नहीं
बनना चाहिए,
यह यहां
राजनीति कर रहे
हैं, यह मेरा
आरोप है कि
इन्होंने...।
श्री
हरिमोहन
शर्मा : हल
हाउस हमको
बनाना है कि
आपको बनाना
है। आप
बनाएंगे कि हम
बनाएंगे।
बनाने तो आप
नहीं देना चाहते।
(व्यवधान) आप
यह कह दो कि आप
नहीं बनाएंगे
तो फिर हम बनाएंगे।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
वह गहलोत साहब
बना गए न
कर्बला में,
बना लिया न
उन्होंने
कर्बला में।
(व्यवधान) तो
माननीय अध्यक्ष
महोदय,...।
एक
माननीय सदस्य:
पाँच साल तक
तो आपने झख
मारा है और अब
आप कह रहे हो
कि बना देंगे।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
अध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
शपथ ली है
संविधान की
धारा 188 के
अंतर्गत, आर्टिकल
188 के अंतर्गत
कि मैं
प्रभुसत्ता,
अखण्डता,
अक्षुण्ण
रखूंगा और जिस
पद को ग्रहण
करने वाला
हूं, अपने
कर्तव्यों
का
श्रद्धापूर्वक
निर्वहन
करूंगा और संविधान
के प्रति सच्ची
श्रद्धा, निष्ठा
रखूंगा। यह
आपने शपथ ली
और उसके बाद
सरकार ने, मुख्य
मंत्रीजी
ने....।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: यह शपथ
तो मंत्रिमण्डल
के सदस्यों
ने भी ली है,
घनश्यामजी
ने भी ली है और
आपने भी ली है
लेकिन मुख्य
मंत्रीजी के
खिलाफ आप टीवी
पर बोले खुद,
फिर आपका क्या
होगा?
श्री
रमेश खींची
(कठूमर): घनश्याम
तिवाड़ीजी
बोले, उनका क्या
होगा?
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
कमाल की बात
है, आप तो बोलो
तो कुछ का कुछ,
आपके
मंत्रिमण्डल
के माननीय
सदस्य और फिर
आप यह कहो कि
यह बोल दिया।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
कृपया स्थान
ग्रहण करें।
माननीय
सरकारी मुख्य
सचेतक। (व्यवधान)
श्री
रमेश खींची
(कठूमर): अध्यक्ष
महोदय, घनश्यामजी
तिवाड़ी ने ओथ
ली है, उनका क्या
होगा? उन्होंने
ओथ नहीं ली क्या?
घनश्यामजी
तिवाड़ी ने
नहीं ली क्या?
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण कर लें,
स्थान ग्रहण
करें।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
मैं यह निवेदन
करना चाहता
हूं कि
श्रीमान् नगर
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने, माहिर
आजाद ने..(व्यवधान)
श्री
रमेश खींची
(कठूमर): अध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
शपथ नहीं ली
क्या? घनश्यामजी
तिवाड़ी ने,
फिर इनको क्यों
अनुमति दे रहे
हो? (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन :
दो अक्टूबर
को मुस्लिम
संगठनों की
बैठक बुलाई और
इन्होंने हज
हाउस के मसले
पर मुस्लिम
संगठनों के
प्रोग्रेसिव
फ्रंट का गठन
किया।
कांग्रेस के
विधायक माहिर
आजाद ने
प्रदेश
कांग्रेस मुख्यालय
में प्रेस
कांफ्रेंस कर चेतावनी
दी कि हज हाउस
का काम रोका
गया तो सड़कों
पर निपटेंगे,
इसमें रणनीति
के लिए दो अक्टूबर
को बैठक बुलाई
गई। (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
कहना चाहता
हूं कि यह
साम्प्रदायिक
उन्माद
फैलाने की यदि
किसी ने कोशिश
की है, (व्यवधान)
मुख्य
मंत्रीजी ने
तो...।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: भारतीय
जनता पार्टी
और बजरंग दल
वालों ने
निपटा है,
माननीय मुख्य
मंत्रीजी के
सामने सड़कों
पर तो बजरंग दल
और भारतीय
जनता पार्टी
के नेताओं ने
निपटा है, पत्थरबाजी
इन्होंने की
है, टायर इन्होंने
जलाये है,
उससे क्या
होगा फिर?
Gpc/akt/04102006/1300/1n
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: मुस्लिम
समाज सड़कों
पर निपटेगा,
हिन्दू समाज को
इस प्रकार की
चेतावनी देकर
इन्होंने इस
प्रकार का
मुद्दा खड़ा
कर दिया कि आज
नहीं 100 साल तक
हज हाउस नहीं
बन सकता।
इसलिए नहीं बन
सकता कि इन्होंने
साम्प्रदायिक
माहौल को
बिगाड़ा है,
इसलिए नहीं बन
सकता कि इन्होंने
वातावतरण को
बिगाड़ने का
काम किया है। संविधान
की शपथ लेकर
इनको यहां पर
बैठने का भी
अधिकार नहीं
है, इनको सदन
में रहने का
भी अधिकार
नहीं है। ये
केवल धार्मिक
उन्माद पैदा
करते हैं। ..(व्यवधान)..
और केवल माहिर
आजाद ही नहीं
कांग्रेस के
सारे नेता ..(व्यवधान)..
कश्मीर में
क्या हो रहा
है? कश्मीर
में वहां के
मुख्यमंत्री
ने कहा कि
वहां पर फांसी
..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष:
अफजल को फांसी
न दी जाए।
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आप
दूसरों की
सुनती ही नहीं
हैं। ..(व्यवधान)..
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अफजल
को फांसी न दी
जाए और उनके
मंत्री ने कहा
कि उनको फांसी
दी जाए। अब यह
डबल स्टेंडर्ड
की बात करते
हैं। देश का
मामला हो चाहे
और कोई मामले
हो, इसलिए मैं
आपसे निवेदन करना
चाहता हूं कि
यह केवल वोटों
की राजनीति है।
श्री
रघुवीर सिंह
मीणा (सराड़ा):
कोई सर्कस बना
रखा है? ..(व्यवधान)..
आपने सर्कस
बना रखा है
सदन को?
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अध्यक्ष
महोदय, मैं
चाहता हूं
आपकी रूलिंग
के बाद भी वे
बोलें और जिस
प्रकार का उन्होंने
षड्यंत्र
करके प्रदेश
का वातावरण
बिगाड़ने की
कोशिश की है
उसके बारे में
आप व्यवस्था
दें। ..(व्यवधान)..
श्री
रघुवीर सिंह
मीणा (सराड़ा) इनके
मंत्री कह रहे
हैं कि 100 साल तक
नहीं बनेगा।
..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष:
श्री हरिमोहन
शर्मा। कृपया
अपना 295 पढ़ें।
श्री हरिमोहन
शर्मा।
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण): यह
बहुत महत्वपूर्ण
प्रश्न है।
..(व्यवधान)..
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
अध्यक्ष
महोदय, यह हाउस
वाद-विवाद की
बलि चढ़ गया।
इसकी छह सीटिंग
होगी। ..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
करें।
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा): छह
सीटिंग में भी
वाद-विवाद में
यह समय निकल
जाएगा, ऐसा
महसूस हो रहा
है।
श्री
अध्यक्ष:
मुझे ऐसा लगता
है कि
अतिवृष्टि पर
माननीय सदस्य
चर्चा नहीं
करना चाहते
इसीलिए इन
बातों में समय
खो रहे हैं।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
जो इश्यू हज
हाउस का था
उसमें जो बयान
मुख्य सचेतक
जी ने दिये यह
बहुत गंभीर
बयान है। यह सामान्य
बात नहीं है।
..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष: डा.
हरिमोहन
शर्मा।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
इस बात को आप
देखिए और
गंभीरता से
देखिए कि
सरकार की नीयत
सामने आ रही
है ..(व्यवधान)..
सरकार की नीयत
क्या है?
मुख्यमंत्री
और दूसरे
मंत्री मिलकर
इस बात का ..(व्यवधान)..
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): मुख्य
मंत्रीजी कह
रहे हैं बनेगा
और यह कह रहे
हैं नहीं
बनेगा। ..(व्यवधान)..
यह मुख्य मंत्री
को चुनौती है।
..(व्यवधान).. दो
साल बाद बनवा
देंगे हमारी
सरकार आएगी
जब। यह तो
आपके मुख्यमंत्री
को चैलेंज है।
खुद को सोचना
चाहिए। हमारा
राज आएगा। ..(व्यवधान)..
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
कोर्ट में
विचाराधीन
है।
श्री
बृजकिशोर शर्मा
(जयपुर
ग्रामीण):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे निवेदन
करना चाहता
हूं कि मुख्य
सचेतक द्वारा
दिया गया बयान
सही है या
मुख्य मंत्री
द्वारा दिया
गया बयान सही
है।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य
..(व्यवधान).. 295
में केवल 250 शब्दों
का ही होना
चाहिए, इसमें
तो 700 शब्द हो
गये हैं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
700 नहीं है।
श्री
अध्यक्ष:
मैंने देख
लिया है,
लेकिन भविष्य
में थोड़ा
संक्षेप में
लिखा करें।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आपके आदेश की
अनुपालना कर
दूंगा आइंदा और
दूसरे में।
श्री
अध्यक्ष: चलिए,
प्रारंभ
करिए।
नियम 295
के तहत विशेष
उल्लेख
हिण्डोली
की ग्राम
पंचायत मेण्डी
के ग्राम
गणेशगंज में
50
वर्षों से
काबिज
झोंपड़ों को
वन विभाग द्वारा
नष्ट किया
जाना
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
प्रक्रिया के
नियम 295 के
अंतर्गत मेरा
विशेष उल्लेख
का प्रस्ताव
है। तथ्य यह
है कि मेरे
विधान सभा
क्षेत्र हिण्डोली
की ग्राम
पंचायत मेण्डी
के ग्राम
गणेशगंज के
झौंपड़ों में
दिनांक 2.8.06 को वन
विभाग द्वारा
गत 50 वर्षों से
वहां काबिज
किसानों के
मकानों, फसलों
एवं कुओं आदि
को नष्ट कर
दिया।
प्रशासन एवं
वन विभाग की
इस
बर्बरतापूर्ण
कार्यवाही से
कई लोग बेघर
हो गये। इस
आशय का समाचार
विभिन्न
समाचार
पत्रों में
प्रमुखता से
छपा है। ये लोग
मय परिवारों
के गत 50 वर्षों
से यहां अपनी
फसल कर रहे
हैं, मकान बना
रखे हैं और
इन्होंने
विधिवत रूप से
बिजली के
कनेक्शन भी
ले रखे हैं।
इस समय भी
इनकी फसलें
मौके पर खड़ी
हुई हैं।
इनके
साथ अत्याचार
की पराकाष्ठा
यह है कि एक
औरत जिसने एक
दिन पूर्व ही
बच्चे को जन्म
दिया और दूसरी
औरत जिसने 6-7
दिन पूर्व बच्चे
को जन्म
दिया, उसे
झौंपड़े से
बेरहमी से
बाहर निकाल दिया।
एक पाँच वर्ष
का बच्चा
कार्यवाही के
दौरान मकान
में दब गया
जिसे मुश्किल
से बाहर
निकाला। एक व्यक्ति
से मारपीट कर
उसका हाथ तोड़
दिया। एक 75 वर्षीय
महिला से
मारपीट कर
दुर्व्यवहार
किया गया। वन
कर्मचारियों,
अधिकारियों
ने पुलिस
अधिकारियों
की उपस्थिति
में झौंपड़ों
व मवेशी रखने
के स्थान पर
आग लगायी। इस
वर्षा के मौसम
में बेरहमी से
उनके मकान
तोड़ दिये
गये। इनके व्यवहार
से ऐसा लगा कि
हम लोकतंत्र
में नहीं बल्कि
सामन्ती शासन
में जीवन व्यतीत
कर रहे हैं।
स्वयं वन
विभाग की
जानकारी में
है कि ये 50
वर्षों से
यहां काबिज
हैं।
श्री
अध्यक्ष: आप
बोलते कुछ और
हैं और लिखा
कुछ और है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
एक भी अक्षर
नहीं।
श्री
अध्यक्ष:
पढि़ए।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
इसके पास ही
सैकड़ों बीघा
जमीन वन विभाग
की खाली पड़ी
हुई है जिस पर
लोगों के
अतिक्रमण
करने की निगाह
है। उस स्थान
पर प्लांटेशन
लगाना वन
विभाग ने क्यों
मुनासिब नहीं
समझा, यह समझ
से बाहर है।
मैं दिनांक 2.8.06
को जब मौके पर
गया और इस
हृदय विदारक
घटना को मैंने
मेरी आंखों से
देखा तो इस
प्रशासनिक
अत्याचार के
सामने हर किसी
व्यक्ति का
जो मानवीय
दृष्टिकोण
रखता है उसका
चेहरा शर्म से
झुके बिना
नहीं रह सकता।
इनके परिवारजनों
को 24 घंटे से
खाना तक नसीब
नहीं हुआ और
इस वर्षा के
समय में उन्हें
खुल आसमान के
नीचे दो दिन व
सात दिन के
बच्चों सहित
अपना समय
गुजारना पड़
रहा है।
खाने-पीने के
खाद्य पदार्थ,
बिछाने के लिए
बिस्तर, सोने
की खाटों को
भी जेसीबी की
मशीन से
जानबूझकर नष्ट
कर दिया गया।
यहां तक कि उन
सामानों को
मकान से बाहर
निकालने का
समय भी
जान-बूझकर
नहीं दिया।
इन्हें रहने
के लिए
वैकल्पिक स्थान
भी उपलब्ध
नहीं कराया
गया है बल्कि
इन
अधिकारियों,
कर्मचारियों
के द्वारा इन
लोगों के
खिलाफ मुकदमे
दर्ज कराये जा
रहे हैं। यह
भी एक आश्चर्य
की बात है कि
जहां 200-250
पुलिसकर्मी व
वनकर्मी
मौजूद हों और
वनकर्मियों
जिन्होंने
झौपड़ों में
आग लगायी उनको
पुलिस प्रशासन
देखता रहा। जब
अन्य स्थानों
पर पुराने
काबिजों को
नहीं हटाया जा
रहा है और वन
विभाग के पौधे
लगाने हेतु
सैकड़ों बीघा
भूमि उसी स्थान
पर रिक्त
पड़ी हुई है
तो इन्हें भी
वहीं बसाते
हुए बेदखल
नहीं किया
जाना चाहिए।
यही
नहीं, वन
विभाग के
कर्मचारियों
ने स्वयं ने
किसानों के
साथ मारपीट की
और उनको नुकसान
पहुंचाया।
नियमन होने
योग्य होते
हुए भी उनकी
नियमन की
कार्यवाही
नहीं की और
उनके खिलाफ
इल्जाम संख्या
253/06 थाना हिण्डोली
में बरधा
वगैरह 14
वर्षीय एक नाबालिग
लड़की के
खिलाफ 332, 323 का
झूठा मुकदमा
दर्ज कराया जिसमें
अभी 5-6 दिन पहले
गिरफ्तार कर
लिया जिसमें
अब चालान पेश
करने की
तैयारियां
है। इसके
विपरीत थाना
हिण्डोली
में जो 3
मुकदमें वहां
के निवासियों
ने वन विभाग
के इन
अधिकारियों
के खिलाफ दर्ज
कराये थे
जिनका इल्जाम
नम्बर 255/06, 256/06 और 259/06
है उनको झूठा
मानकर पुलिस
ने अंतिम प्रतिवेदन
देने की बात
कही है। यह वन
विभाग एवं
पुलिस का
सर्वाधिक
झूठा और
अनैतिक कृत्य
है। इस संबंध
में मैंने
समय-समय पर
पत्रों के
माध्यम से और
व्यक्तिगत
रूप से माननीय
वन मंत्रीजी व
अन्य
अधिकारियों
से मिलकर वस्तुस्थिति
की जानकारी दी
तथा सभी
राजनैतिक दलों
के नेताओं,
कार्यकताओं
और
जनप्रतिनिधियों
ने इस जघन्य
कुकृत्य की
सार्वजनिक
रूप से निन्दा
की, धरने व
प्रदर्शन
किये और इस
सामन्ती
रवैये की कटु
आलोचना की।
मेरा
आपसे अनुरोध
है कि तत्काल
प्रभाव से
नियमन योग्य
व्यक्तियों
का नियमन कर
उन्हें हुए
नुकसान का
मुआवजा
दिलवाया जाय
और झूठे
मुकदमे वापस
लिये जाय।
मैं
निवेदन करना
चाहता हूं
हमारे संसदीय
सचिव, प्रभारी
मंत्री खुद
वहां जाकर आये
हैं, भारतीय
जनता पार्टी
के लोक सभा के
सदस्य खुद
वहां जाकर आये
हैं। व्यक्तिगत
रूप से इनसे
मिले, माननीय
मुख्यमंत्रीजी
से मिले,
लेकिन अभी तक
कुछ नहीं हुआ।
इसलिए मेरा
अनुरोध है कि
ज्यादती हुई
है, उनके
खिलाफ उचित
कार्यवाही
करें।
श्री
अध्यक्ष: 295 का
नहीं है। नो, 295
में केवल लिखा
हुआ पढ़ा जाता
है। ..(व्यवधान)..
माननीय सदस्य,
295 में जो लिखा
जाता है केवल
उतना ही पढ़ा
जाता है और आप
जो बात कर रहे
हैं मैं समझती
हूं यह शायद
न्यायालय से
कोई निर्णय
हुआ होगा ..(व्यवधान)..
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
कोई न्यायालय
का निर्णय
नहीं है।
माननीय वन
मंत्री जी ने
खुद ने माना
है ज्यादती
हुई है, मैं
इनसे मिला
हूं, इन्होंने
टेलीफोन भी
किया है। आपके
संसदीय सचिव वहां
गये, उन्होंने
कहा कि ऐसी
भीषण ज्यादती
मैंने नहीं
देखी। कोटा के
लोक सभा के
भारतीय जनता
पार्टी के
सदस्य हैं
उन्होंने
सार्वजनिक
रूप से कहा ..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष: ठीक
है, आपकी बात आ
गई।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
उन्होंने
सार्वजनिक
रूप से कहा है
ऐसा तो सामन्ती
युग में इनके
साथ नहीं हुआ।
वैसा का वैसा
ही अखबारों
में छपा है।
संसदीय सचिव
विराज रहे हैं
आप उनसे पूछ लें।
श्री
अध्यक्ष: डा.
चन्द्रशेखर
बैद।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आपने नहीं कहा
कि वहां ज्यादती
हुई है? आपके
कार्यकर्ताओं
ने कहा, आपने
खुद ने
सार्वजनिक
रूप से कहा।
..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष: वन
विभाग को रोक
लीजिए,
अतिक्रमी जो
चाहे सो करें।
मतलब तो आपका
यही है। डा.
चन्द्रशेखर
बैद। ..(व्यवधान)..
मोहन/अरूण/4102006/1310/1o
तारानगर
में उप खण्ड
कार्यालय की
स्थापना
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
राजस्थान
विधान सभा के
प्रक्रिया
एवं कार्य
संचालन
संबंधी नियम 295
के अन्तर्गत
विधान सभा
क्षेत्र
तारानगर में
उपखण्ड
कार्यालय
खोलने के
संबंध में
चर्चा के लिए।
महोदय,
सरकार ने
विशाल लोकहित
एवं जन कल्याण
की भावना से
प्राय: सभी
छोटी बड़ी
तहसील मुख्यालयों
को उपखण्ड का
दर्जा दे दिया
है। चूरू जिले
में मात्र तारानगर
तहसील को ही
इस सुविधा से
वंचित रखा गया
है जो कि समान
व्यवहार की
क्रियान्वयन
की नीति एवं
समानता पोषक
सिद्धांत के
निर्वहन के
विपरीत भावना
को परिलक्षित
करता है।
वर्तमान
में तारानगर
तहसील को
राजगढ़ उपखण्ड
मुख्यालय से
जोडा हुआ है।
तारानगर
तहसील के कुछ
ग्रामों की
राजगढ़ मुख्यालय
से दूरी 80-90 किमी
तक है। दैनिक
जीवन की आवश्यकताओं
से जुड़े
सामान्य
कार्यों के
लिए राजगढ़
उपखण्ड मुख्यालय
में जाना उक्त
दूर-दराज के
निवासियों को
काफी अर्थ एवं
समय व्यय
करना पड़ता
है। ऐसी
स्थिति में इस
तहसील के लोग
सहज व सुलभ
प्रशासनिक
सेवाओं का लाभ
प्राप्त
करने से वंचित
रह जाते हैं।
तारानगर
तहसील मुख्यालय
पर कोई राजस्व
न्यायालय भी
नहीं है।
उपखण्ड
राजगढ़ में एक
माह में केवल
तीन दिन कैम्प
लगता है,
लेकिन वह भी
नियमित रूप से
संचालित नहीं
किया जाता है।
उपखण्ड
मजिस्ट्रेट
का मुख्यालय
राजगढ़ हो
जाने से
पत्रावलियां
राजगढ़ रहती
हैं। छोटे से
छोटे निर्णय
की प्रति लेने
के लिए भी
राजगढ़ जाना
पड़ता है।
राजस्व
मण्डल राजस्थान,
अजमेर के पत्र
दिनांक 23.5.2006 के
अनुसार
तारानगर
तहसील मुख्यालय
पर सहायक जिला
कलक्टर का न्यायालय
खोला जाना
प्रस्तावित
है, लेकिन
प्रशासनिक
सेवाओं की
उपलब्धता
तथा राजस्व
मामलों के
कार्य
क्षेत्र की
विशालता के
मध्य नजर
उपखण्ड न्यायालय
का खोला जाना
जनहित में अत्यन्त
आवश्यक है।
माननीय
मुख्य
मंत्री जी
द्वारा धन्यवाद
यात्रा के
दौरान
तारानगर में
उपखण्ड
मजिस्ट्रेट
कार्यालय
खोलने की
घोषणा की गई
थी।
अत:
मेरा आपसे
निवेदन है कि
तहसील
तारानगर की आबादी
भूमि, राजस्व
प्रकरण एवं
भौगोलिक
स्थिति तथा
जनता को द्रुत
एवं स्थानीय
स्तर ही त्वरित
एवं सुलभ न्याय
तथा
प्रशासनिक
सुविधाएं
उपलब्ध
कराने हेतु
उपखण्ड
कार्यालय
अविलम्ब स्थापित
किया जावे।
श्री
अध्यक्ष: धन्यवाद।
श्री मोहन लाल
गुप्ता।
किशनपोल
विधान सभा
क्षेत्र में
चिकित्सा
सुविधाओं का
विस्तार
श्री
मोहनलाल गुप्ता
(किशनपोल): माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
प्रक्रिया के
नियम 295 के अन्तर्गत
किशनपोल
विधान सभा
क्षेत्र में
चिकित्सा
सुविधाओं के
विस्तार
करवाने के
संबंध में।
महोदय,
विद्याधर नगर
जयपुर की बहुत
बड़ी कालोनी
है तथा सीकर
रोड पर भी अत्यधिक
संख्या में
जनसंख्या
निवास करती है
लेकिन इस
क्षेत्र में
एक भी सरकारी
चिकित्सालय
नहीं है।
श्री
अध्यक्ष:
प्रतिपक्ष के
नेता महोदय,
ऐसे बैठे बैठे
आप भाषणबाजी
कर रहे हो, ऐसे
काम कैसे
चलेगा ? क्या
करते हो आप ?
श्री
मोहनलाल गुप्ता
(किशनपोल):
जिससे इस
क्षेत्र की
जनता को चिकित्सा
कीा समुचित
सुविधा उपलब्ध
कराने हेतु
बड़ा चिकित्सालय
स्थापित
किया जाना
आवश्यक है।
किशनपोल
विधान सभा
क्षेत्र काफी
विस्तृत है।
इस विधान सभा
क्षेत्र में
वर्तमान में
दो बड़े
चिकित्सालय
हरिबक्श
कांवटिया
जिला चिकित्सालय,
शास्त्री
नगर और
बनीपार्क
सेटेलाइट
चिकित्सालय
स्थित हैं।
महोदय,
बनीपार्क
सेटेलाइट
चिकित्सालय
लम्बे समय से
बनीपार्क
धर्मार्थ
संस्थान
द्वारा दिये
गये भवन में
चल रहा है और
वहां
प्रतिदिन की
आउटडोर
मरीजों की
संख्या 700
लगभग है और
इनडोर मरीजों
के लिए 50 बेड्स
की व्यवस्था
है। इस चिकित्सालय
में जनरल
सर्जरी, आंख
की सर्जरी,
गायनी आदि के
ऑपरेशन हेतु
चिकित्सक
पदस्थापित
हैं लेकिन एक
ही आपरेशन
थियेटर है
जिसके कारण
मरीजों के
ऑपरेशन उस
अनुपात में
नहीं हो पाते,
जितने होने
चाहिए। मेरा
माननीय चिकित्सा
मंत्री महोदय
से निवेदन है ....
श्री
अध्यक्ष: एक
थियेटर आप बना
दो एम.एल.ए. लेड
से, क्या
फर्क पड़ता है
?
श्री
मोहन लाल गुप्ता
(किशनपोल): हां,
मैं बना
दूंगा। मैं तो
इनसे निवेदन
ही कर रहा हूं,
साहब, यह
प्रस्ताव है,
पैसे भी हम दे
देंगे लेकिन
उसको शिफ्ट करा
दें।
श्री
अध्यक्ष: ठीक
है, पढ़ें आप।
श्री
मोहन लाल गुप्ता
(किशनपोल): कि
सिंधी कालोनी
बनीपार्क में
स्थित मातृ
एवं शिशु कल्याण
केन्द्र की
भूमि पर नया
बनीपार्क
सेटेलाइट
चिकित्सालय
का भवन बनाया
जाना चाहिए क्योंकि
यह 3000 वर्ग गज
भूमि में है।
चिकित्सा
विभाग की सम्पति
है। बनीपार्क
सेटेलाइट
चिकित्सालय
का वर्तमान
भवन में स्थान
का बहुत ही
अभाव है जिसकी
पूर्ति नया
भवन बनने से
ही हो सकेगी।
हरिबक्श
कांवटिया
चिकित्सालय
जिसे जिला अस्पताल
का दर्जा
प्राप्त है
लेकिन समुचित
स्टाफ जैसे
ईसीजी
टेक्निशियन
तो है ही नहीं
और लेब में
होने वाली
जांचों की
तुलना में लेब
टेक्निशियन
भी नहीं हैं।
इतना ही नहीं,
महोदय, रात्रि
में इमरजेंसी
में आने वाले
मरीजों की
जांचों एवं
ईसीजी करने
वाला कोई
टेक्निशियन
नहीं होता है
जिसके कारण
चिकित्सक
मरीजों का
समुचित इलाज
नहीं कर पाते
हैं। साथ ही,
इस जिला
चिकित्सालय
में इनडोर
मरीज काफी
भर्ती रहते हैं
लेकिन चिकित्सकों
के कोई क्वार्टर
नहीं हैं
जिससे इन
मरीजों तथा
इमरजेंसी की
स्थिति में
चिकित्सकों
के अस्पताल
में आने में
समय लग जाता
है इसलिए इस
चिकित्सालय
भवन में कम से
कम 5 क्वार्टर
चिकित्सकों
हेतु बनाये
जाने चाहिए।
मेरा
माननीय
चिकित्सा
मंत्री महोदय
से निवेदन है
कि विधान सभा
क्षेत्र किशनपोल
में समुचित
चिकित्सा
सुविधाओं का
विस्तार कर
जनता को राहत
प्रदान करने
का कष्ट
करें।
इसमें
जनता का, व अन्य
दानदाताओं का
पूर्ण सहयोग
आपको रहेगा और
मेरे एलएलए
लेड फंड का
पैसा निश्चित
रूप से मैं प्रदान
करूंगा।
श्री
अध्यक्ष: धन्यवाद।
श्रीमती
राजकुमारी
शर्मा ।
झुंझुनूं
में
चौबीस-कोसी
परिक्रमा-मार्ग
का विकास
श्रीमती
राजकुमारी
शर्मा (सीकर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
प्रक्रिया के
नियम 295 के अन्तर्गत
विशेष उल्लेख
प्रस्ताव
आपके समक्ष रख
रही हूं।
विषय
सीकर-झुन्झुनूं
जिले में
चौबीस कोसी
परिक्रमा
मार्ग को विकसित
करने बाबत।
महोदय,
मैं राजस्थान
विधान सभा की
प्रक्रिया
एवं कार्य
संचालन
संबंधी
नियमावली के
नियम 295 के तहत
विशेष उल्लेख
के जरिए
सीकर-झुन्झुनूं
जिले में पहाड़ी
क्षेत्र में
अवस्थित
लाखों लोगों
की श्रद्धा मार्ग
चौबीस कोसी
पैदल
परिक्रमा
मार्ग को विकसित
करने के संबंध
में निवेदन
करना
चाहूंगी।
मैं
सीकर एवं झुन्झुनूं
जिले में
लाखों लोगों
की श्रद्धा की
चौबीस कोसी
दुर्गम
परिक्रमा
मार्ग को सुगम
बनाये जाने
बाबत निवेदन
कर रही हूं।
सीकर जिले में
इस चौबीस कोसी
परिक्रमा में
भादव मास में
लाखों लोग
परिक्रमा
करते हैं। यह
चौबीस कोसी
परिक्रमा
लगभग 84
किलोमीटर की
है। न केवल
भादव मास,
में अपितु इस
मार्ग में
काफी धार्मिक
एवं रमणिक स्थल
होने के कारण
वर्ष पर्यन्त
लाखों लोग
श्रद्धा के
कारण आते रहते
हैं। मैंने स्वयं
ने इसी भादव मास
में यह पद
यात्रा तीन
दिनों में
पूरी की है।
यह एक पहाड़ी
क्षेत्र है
जिसमें नदी,
नाले, पहाड़,
पठार, तालाब,
कुण्ड व
मंदिर पुराने
कूप व
बावडि़या
अवस्थित हैं।
इस पद यात्रा
में वृद्धजन
भी काफी
मात्रा में
भाग लेते हैं।
यह चौबीस कोसी
परिक्रमा
संभत: गत 100 वर्षों
से निरन्तर
भादव मास में
जारी रहती है।
यह परिक्रमा
रघुनाथगढ़,
डाब पनोरा,
कालाखेत, शोब,
सकराय, नीमड़ी
की घाटी
चिराना व
लोहार्गल आदि
काफी ग्रामों
के मध्य से
गुजरती है। इन
ग्रामों में
से काफी ग्रामों
में मार्ग ऐसे
हैं जैसे
पहाड़ से
गिरने का बराबर
खतरा बना रहता
है। कई
दानदाताओं ने
काफी वर्षों
पहले सिढि़यां
व कहीं कहीं
जर्जर
अवस्थित में
पुरानी बनाई
गई रेलिंग
विद्यमान है।
इस यात्रा के
दौरान कहीं भी
कोई आधारभूत
सुविधाएं भी
उपलब्ध नहीं
रहती हैं।
मात्र गैर
सरकारी संगठन
दान-पुन्य के
स्थान पर जगह
जगह भण्डारे के
आयोजन एवं
विश्राम हेतु
विश्रामालय
की व्यवस्था
करते हैं। मैं
यहां मुख्यत:
सदन को यह
बताना
चाहूंगी कि यह
चौबीस कोसी परिक्रमा
मार्ग ही नहीं
है अपितु
रमणिक स्थलों
का केन्द्र
है तथा जिस
मार्ग पर
लाखें लोग
श्रद्धा के
साथ पद यात्रा
करते हैं उसका
विकास भी आवश्यक
है। इस मार्ग
को पर्यटन के
नक्शे पर भी
उभारा जा सकता
है तथा इस
मार्ग को सुगम
बनाकर इसके
दोनों तरु
वृक्षारोपण
कर इस मार्ग
की सुन्दरता
में चार चांद
लगाये जा सकते
हैं।
अन्त
में, मैं
पुरजोर शब्दों
में सीकर व
झुन्झुनूं
जिले में
अवस्थित
चौबीस कोसी परिक्रमा
को पर्यटन स्थल
के रूप में
विकसित करने
या इस
परिक्रमा मार्ग
को सुन्दर,
सरल एवं इस
मार्ग के
दोनों ओर
वृक्षारोपण की
मांग करती हूं
ताकि लाखें
लोग जो
श्रद्धा एवं
इस मार्ग की
रमणिकता के
कारण इस पद
यात्रा को
करते हैं उनके
लिए सुगम,
सौम्य रास्ता
उपलब्ध हो
सके।
वन्दे
मातरम् ।
श्री
अध्यक्ष:
मोहम्मद
माहिर आजाद -
अनुपस्थित।
श्री
खुशवीर सिंह।
Skp/akt/4.10.2006/1320/1p
मंदिर
माफी की भूमि
पर हुए
अतिक्रमण से
मुक्ति
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची) : अध्यक्ष
महोदय,
प्रक्रिया के
नियम 295 के अन्तर्गत
मंदिर माफी की
भूमि देव
मूर्तियों के
नाम करने व
बेची गई भूमि
का कब्जा
देने बाबत।
महोदय,
सैंकड़ों
सालों से
मंदिरों के
नाम जमीनों की
आमदनी से देव
मूर्तियों की
सेवा पूजा
होती आ रही थी
क्योंकि
आजादी से
पूर्व एक
सुचारू व्यवस्था
के तहत जिसमें
यह प्रावधान
था कि कोई भी
मंदिर बनायें
उससे पूर्व
मंदिर की पूजा
अर्चना व्यवस्थित
हो इस हेतु यह
प्रावधान था
कि उक्त
निर्मित
मंदिर के लिए
उचित देखरेख
हेतु कृषि
भूमि तय सीमा
कितनी भी हो
सकती थी,
मंदिर के अधीन
रहे। अब सरकार
का अंकुश कम
होने के कारण
पुजारियों ने
व व्यवस्थापकों
ने मंदिर माफी
की जमीनों का
बेचान कर दिया।
इस हेतु तत्कालीन
सरकार ने 1992 में
एक परिपत्र
जारी कर मंदिर
माफी की जमीन
का खाता
देवमूर्ति के
नाम दर्ज करने
के आदेश दिये।
लेकिन आज भी
कई हजार बीघा जमीनें
ऐसी हैं जिन
पर स्थानीय
भू-माफिया लोग
कब्जा जमाये
बैठे हैं।
महोदय, माननीय
उच्च न्यायालय,
रेवेन्यू
बोर्ड तथा
निचली
अदालतों में
मंदिर माफी की
जमीन का इन्द्राज
देवमूर्ति के
नाम करने व
कब्जा हटाने
की बात कही
है।
महोदय,
जिला चित्तौड़गढ़
के बान्सी
ग्राम में 7
मंदिरों का
रजिस्टर्ड
ट्रस्ट है
तथा वहां के
अध्यक्ष ने
जिला कलेक्टर
से निवेदन
किया है कि
देवमूर्तियों
की जमीनों पर
अतिक्रमण
हटवाये जाएं
जिससे पूजा
अर्चना विधि
विधान से हो
सके। लेकिन आज
दिन तक उन मंदिरों
की जमीनों पर
से अतिक्रमण
नहीं हटाये
गये।
अत: अध्यक्ष
महोदय,
प्रक्रिया के
नियम 295 के अन्तर्गत
मैं आपके माध्यम
से राजस्व
मंत्रि से
निवेदन करना
चाहूंगा कि
उक्त ग्राम
की मंदिर माफी
की जमीन पर
हुए अतिक्रमण
को तुरन्त
प्रभाव से
हटवाये व
राजस्थान
प्रदेश की
जितनी भी
मंदिर काफी की
जमीनें अतिक्रमियों
के कब्जे में
हैं, उन्हें
भी मुक्त
करवायें।
श्री अध्यक्ष:
धन्यवाद।
पहले आयेंगे
डाक्टर
सुरेश चौधरी
और उसके बाद
आप आयेंगे क्योंकि
You have missed
your oppourtinity.
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): मैं तो
यहीं था।
श्री अध्यक्ष:
डाक्टर
सुरेश चौधरी
पहले और उसके
बाद आप।
डिग्रीधारी
कृषि स्नातकों
को रोजगार के
अवसर
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
प्रक्रिया
तथा कार्य
संचालन सम्बन्धी
नियम 295 के तहत
बेरोजगार
डिग्रीधारी
कृषि स्नातक
स्नातकोत्तर
को रोजगार के
अवसर उपलब्ध
कराने से सम्बन्धित
मामला सदन की
जानकारी में
लाने बाबत।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
प्रक्रिया के
नियम 295 के तहत
सदन का ध्यान
आकर्षित करना
चाहता हूं कि
हमारे प्रदेश में
कृषि स्नातक
एवं कृषि स्नातकोत्तर
डिग्रीधारी
बेरोजगार
नवयुवकों को
रोजगार के नये
अवसर व साधन
उपलब्ध
कराने बाबत
निम्न
निवेदन करना
चाहूंगा:-
(1) हमारे प्रदेश
में लाखों
हैक्टेयर
कृषि योग्य
भूमि सरकार के
अधीन बिना
किसी उत्पादन
कार्य के
बेकार अवस्था
में पड़ी हुई
है जिसका
सदुपयोग
प्रदेश के मान्यता
प्राप्त
कृषि स्नातक
एवं अधिस्नातक
डिग्रीधारी
बेरोजगार
नवयुवकों को
आबंटित कर
किया जा सकता
है। इससे न
केवल बेकार
भूमि का
सदुपयोग ही
होगा बल्कि
बेरोजगार
कृषि
डिग्रीधारियों
को रोजगार भी
उपलब्ध
होगा। जो अपने
ज्ञान एवं नई
तकनीक के माध्यम
से इस बेकार
भूमि का पूर्ण
दोहर करते हुए
भूमि उपजाऊ कर
प्रदेश के
कृषि उत्पादन
बढ़ोतरी में
सहायक सिद्ध
होंगे।
इस सम्बन्ध
में निवेदन है
कि पूर्व में
राज्य सरकार
द्वारा बेकार
पड़ी भूमि का
कृषि बेरोजगारों
को आवंटन किया
गया था जिसे
बाद में किसी
कारणवश बन्द
कर दिया गया।
अगर इसे वापस
शुरू किया
जाता है तो
कृषि
बेरोजगारों
की समस्या से
काफी सीमा तक
निपटा जा सकता
है तथा बेकार
भूमि का सुदपयोग
भी संभव हो
सकेगा।
(2) दूसरी
समस्या कृषि
से सम्बन्धित
कीटनाशकों,
खरपतवार-नाशकों
और खाद व बीज
के लिए दिये
जाने वाले
लाइसेंस की
है। इस सम्बन्ध
में मैं सदन
का ध्यान
आकर्षित करना
चाहूंगा कि
उक्त
लाइसेंस कृषि
से सम्बन्धित
डिग्रीधारियों
को ही आवंटित
किये जाने
चाहिए क्योंकि
कृषि क्षेत्र
का जानकार व्यक्ति
ही इनका सही
सदुपयोग कर
सकता है। अत:
कृषि स्नातकों
एवं कृषि
डिग्रीधारियों
को लाइसेंस आवंटित
कर इस क्षेत्र
के बेरोजगार
लोगों की संख्या
में कमी लाई
जा सकती है।
जो कृषि उत्पादन
बढ़ाने के
साथ-साथ किसानों
को उत्पादन
बढ़ाने सम्बन्धी
आवश्यक
तकनीक व
जानकारियां
भी उपलब्ध
करा सकेंगे।
(3) हमारे
प्रदेश में 2
कृषि विश्वविद्यालय
तथा 8 कृषि
महाविद्यालय
संचालित हैं
जिनमें कृषि
से सम्बन्धित
उच्च कोटि की
शिक्षा
छात्रों को दी
जाती है। इन छात्रों
की शिक्षा पूर्ण
होने के बाद
इनको रोजगार
मिलने की कोई
निश्चित
गारंटी नहीं
होती है।
प्रदेश में 1996
के बाद कृषि
विभाग द्वारा
कोई नियुक्ति
नहीं की गई
जिससे योग्यताधारी
कृषि स्नातक
एवं स्नातकोत्तर
डिग्रीधारी
नवयुवकों में
बेरोजगारी की
समस्या बड़ी
विकट हो गई
है। अत: इनको
रोजगार के
अवसर उपलब्ध
कराने हेतु
मैं सदन का ध्यान
आकर्षित करना
चाहूंगा ताकि
प्रदेश की प्रतिभाओं
को पलायन रोका
जाकर इनका
प्रदेश के कृषि
उत्पादन
बढ़ाने में
सहयोग लिया जा
सके।
अत: मैं
माननीय अध्यक्ष
महोदय के माध्यम
से सदन का ध्यान
पुन: आकर्षित
कर निवेदन
करना चाहूंगा
कि कृषि
क्षेत्र के
समग्र विकास
हेतु उपरोक्त
बिन्दुओं पर
गौर फरमाकर
आवश्यक
कार्यवाही
कराने की कृपा
करें।
श्री अध्यक्ष:
धन्यवाद।
श्री मोहम्मद
माहिर आजाद।
सिंचाई
विभाग में
कनिष्ठ
अभियन्ता
सिविल (डिप्लोमा)
की
नियुक्ति एवं
पदोन्नति
में आरक्षण की
विसंगति
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
राजस्थान
विधान सभा की
प्रक्रिया
एवं कार्य
संचालन के
नियम 295 के अन्तर्गत
सिंचाई विभाग
में कनिष्ठ
अभियंता (डिप्लोमा)
की नियुक्ति
एवं पदोन्नति
के सम्बन्ध
में विशेष उल्लेख
करना चाहता
हूं।
महोदय,
सिंचाई विभाग
द्वारा 1980 से 1982
की अवधि में
कनिष्ठ
अभियन्ता
सिविल (डिप्लोमा)
की 462 पदों पर
नियुक्ति की
गई थी जिनमें
अनुसूचित
जाति के 22 एवं
जनजाति के 7
कनिष्ठ
अभियन्ताओं
को नियुक्ति
दी गई। इस
प्रकार
अनुसूचित जाति
के 51 एवं जनजाति
के 49 पदों का
बैकलॉग शेष रह
गया। तदन्तर
दिनांक 01.4.1988 तक
विभाग में
तदर्थ रूप से
कार्यरत इन
वर्गों के
कनिष्ठ
अभियन्ताओं
को नियमित
किया गया, या
नहीं?
(समय : )
(श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष,
पदासीन)
सिंचाई
विभाग में
कनिष्ठ
अभियन्ता
सिविल (डिप्लोमा)
से सहायक
अभियन्ता के
पदों पर 1996-97 से 27.9.2006
तक 625 पदों पर
विभागीय पदोन्नति
दी गई इनमें
अनुसूचित
जाति एवं
जनजाति के आरक्षित
पद क्रमश: 100 एवं
75 कुल 175 के स्थान
पर मात्र 60 व 28
कुल 88 को ही
पदोन्नति दी
गई। ऐसा क्यों?
जबकि बैकलॉग
भरने के पक्ष
में संविधान
में 81वां संशोधन
के उपनियम
अनुच्छेद 16 (4-ख)
के निर्णय एवं
राज्य सरकार
के कार्मिक
विभाग के
परिपत्र
क्रमांक एफ-15(24)
डी.ओ.पी./ए-11/75
दिनांक 14.12.2000 के
जारी होने के
उपरान्त भी
दिनांक 27.9.2006 तक
बैकलॉग भरने
के आदेशों की
पालना नहीं की
गई है।
वर्ष 2000 में
सामान्य
वर्ग के 213
कनिष्ठ
अभियंताओं को
बगैर पदोन्नति
के सहायक
अभियन्ता के
पद पर
कार्यकारी व्यवस्था
में लगाया गया
था इनमें
अनुसूचित
जाति एवं जनजाति
का कोई भी व्यक्ति
नहीं लिया
गया। क्या
सामान्य
वर्ग के ही व्यक्तियों
को इतने लम्बे
समय तक
कार्यकारी व्यवस्था
में रखकर लाभ
देने का
नियमों में
प्रावधान है?
वर्तमान
में सिंचाई
विभाग में
अनुसूचित
जाति व जनजाति
के सिविल
(डिग्रीधारी)
सहायक अभियन्ता
के पद पर कोई
भी व्यक्ति
कार्यरत नहीं
है जबकि विभाग
में कनिष्ठ
अभियन्ता
सिविल
(डिग्रीधारी) 20
वर्ष का
सेवानुभव रखते
हैं।
मैं सदन
एवं माननीय
सिंचाई
मंत्री जी को
विशेष उल्लेख
के माध्यम से
सिंचाई विभाग
में आरक्षित
वर्ग के कनिष्ठ
अभियन्ता
सिविल (डिप्लोमा)
की नियुक्ति
एवं पदोन्नति
में जारी उक्त
विसंगतियों
को दूर करने हेतु
ध्यान
आकर्षित करना
चाहता हूं।
कृपया
अनुमति
प्रदान करने
का कष्ट
करें।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आपकी बात
मंत्री महोदय
तक पहुंच गई।
(व्यवधान)
जवाब आ जाएगा।
माननीय सदस्य,
इसका जवाब
आपके पास आ
जाएगा।
माननीय सदस्य,
भाषण नहीं।
(व्यवधान)
एक माननीय
सदस्य :
लिखित में
जवाब दे
देंगे। (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
आपने पढ़
दिया। (व्यवधान)
माननीय सदस्य,
आपने पढ़कर के
सुना दिया। अब
भाषण नहीं। अंकित
नहीं होगा यह।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): ***
श्री
उपाध्यक्ष:
पर्ची के माध्यम
से उठाये जाने
वाले विषय।
डा. श्रीगोपाल
बाहेती।
अजमेर जिले की
निरन्तर
बिगड़ती
पानी-बिजली की
व्यवस्था
पर।
पर्ची के
माध्यम से
उठाये गये
मुद्दे
अजमेर
जिले में
निरन्तर
बिगड़ती
बिजली-पानी की
व्यवस्था
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
पर्ची के माध्यम
से अजमेर जिले
की निरन्तर
बिगड़ती
बिजली और पानी
की व्यवस्था
के बारे में
सरकार का ध्यान
आकर्षित करना
चाहता हूं।
अजमेर जिले
में पानी का
हाल यह है कि
दो दिन से, तीन
दिन से, चार दिन
से कब आयेगा
इसका न
डिपार्टमेंट
को पता है और न
जनता को पता
है। सरकार की
बार-बार की
घोषणा के बाद,
निरन्तर
प्रशासनिक
मीटिंगों के
बाद भी पानी
की सप्लाई
में कोई इम्प्रूवमेंट
नहीं हुआ और
स्थिति यह है
कि वहां के
लोग पानी के
इंतजार में सब
काम छोड़कर के
घर बैठे रहते
हैं। सबसे
बड़ी
दुर्भाग्यपूर्ण
बात यह है कि
अजमेर जिले के
लिए बनी बीसलपुर
योजना जिसमें
पर्याप्त
पात है उसके
बाद भी अजमेर
जिले में पानी
की पर्याप्त
सप्लाई नहीं
हो और उससे
पहले उस पानी
को जयपुर सहित
अन्य जिलों
में देने की
व्यवस्था
की जाए तो
इससे अजमेर की
जनता बहुत
भयाक्रांत
रहती है। मेरी
आपके माध्यम
से सरकार से
पुरजोर अपील
है कि पानी की
सप्लाई में
समुचित सुधार
किया जाए।
माननीय मंत्री
जी भी हमारे
जिले के ही
हैं इसलिए
उनसे विशेष
आग्रह है कि
अजमेर जिला
आपका ऋणी
रहेगा इस बात
के लिए कि
अजमेर जिले की
पानी की व्यवस्था
में सुधार हो।
vkj/akt/1330/04102006/1q
आज की
भी स्थिति शहर
की यह है
मंत्री महोदय,
दो-तीन दिन
में पानी वहां
आता है। पानी
कब आयेगा, यह
पता नहीं है।
कितना प्रेशर
आयेगा, यह पता
नहीं है और यह बात
निरन्तर हर
सेशन में
मैंने अपने
मुंह से विधान
सभा में उठाई
है। उसके बाद
भी अपेक्षित
सुधार उसमें
नहीं आया है।
साथ ही साथ
निवेदन यह भी
है कि यदि
सरकार इस बात
पर आमादा है
कि बीसलपुर का
पानी अजमेर के
अलावा दूसरे
जिलों को
बांटना है तो
चम्बल का
पानी लाने की
व्यवस्था
अजमेर जिले के
लिए की जाये।
इसमें मैं
बताना चाहता
हूं कि
पूर्ववर्ती
कांग्रेस की
सरकार के समय
जब स्वर्गीय
रामसिंह जी
विश्नोई
मंत्री थे,
उन्होंने
सम्भवत: कोई
आदेश भी दिया
था इसके सर्वे
के लिए तो मैं
उम्मीद करता
हूं, मंत्री
महोदय भी यहां
बिराजमान हैं,
वह इसमें गति
देकर अजमेर की
जनता को पानी दिया
जायेगा क्योंकि
अजमेर का आज
तक का विकास
पिछड़ा है।
अजमेर की जनता
ने 8-8 दिन, 10-10 दिन, 15-15
दिन से पानी
पीया है और अब
बमुश्किल यह
बीसलपुर भरा
तो उस बीसलपुर
के ऊपर पूरे प्रांत
की गिद्ध
दृष्टि हो गई
है कि वह पानी
कब कहां
जायेगा, इसको
लेकर के अजमेर
का नागरिक बहुत
भयाक्रांत है
और उसको पीड़ा
इस बात की है
कि जब हमसे
मजबूत आदमी या
हमसे बड़ा
आदमी इसमें
हिस्सा
मांगेगा तो
हमारे पानी का
क्या होगा?
तो मैं सरकार
से यह अपील
करता हूं कि जब
तक अजमेर जिले
के पूरे गांव
और ढाणियों को
और शहर को
पूरा पानी
बीसलपुर से
नहीं मिल
जाये, तब तक
बीसलपुर का
पानी दूसरे
जिलों को नहीं
दिया जाये और
साइमलटेनियसली
उसमें चम्बल
के पानी को
लाने की व्यवस्था
को गति दी
जाये क्योंकि
चम्बल का
पानी अजमेर
पहुंचने में
कोई महंगा
सौदा नहीं है,
बहुत सस्ता
सौदा है और
उससे स्थाई
समाधान पानी
की व्यवस्था
का हो जायेगा।
इसी
तरह से माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपका ध्यान
जिले में
बिजली की व्यवस्था
की ओर दिलाना
चाहता हूं।
जिले में
बिजली का हाल
यह है कि
सिंगल फेस की
बिजली है, वह
भी गांवों में
तीन-चार घंटे
बमुश्किल
मिलती है जबकि
इस समय पूरा
जिला
चिकनगुनिया
और वायरल फीवर
से त्रस्त
है। हर गांव
के अन्दर
सैंकड़ों
रोगी इस
बीमारी के हैं
जिनको बिना
विद्युत के
रात में सोना
भी मुश्किल
है। सरकार को
इस बात पर ध्यान
देना चाहिए
निश्चित रूप
से कि गांवों
के अन्दर
सिंगल फेस की
बिजली पूरी
रात में मिले
ताकि आदमी
आराम से सो
सके। गांवों
में चोरियां
बढ़ गई हैं,
डकैती बढ़ गई
है, झगड़े बढ़
गये हैं...(व्यवधान)
मैं पर्ची पर
बोल रहा हूं,
मेरी पर्ची बिजली
पानी पर है।
मेरा विषय है
बिजली और
पानी। मंत्री
महोदय, विषय
है बिजली और
पानी...(व्यवधान)
मैं कह रहा
हूं आपसे।
श्री
उपाध्यक्ष:
बिजली पानी
दोनों ही हैं।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
मैं फिर कह
रहा हूं आपसे,
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, कि
चिकनगुनिया
का मरीज,
वायरल का मरीज,
बुखार का
मरीज, उसको
बिना बिजली के
जो कष्ट होता
है, उसकी कल्पना
वही कर सकता
है, आप और हम इस
बात की कल्पना
नहीं कर सकते।
आप लोग और हम
लोग तो यहां
आराम से ए.सी.
में बैठकर
चर्चा कर रहे
हैं, इसलिए
पता नहीं कि
बिजली की दिक्कत
क्या है या
गर्मी की दिक्कत
क्या है? आज
गांव का
किसान, गांव
का मजदूर,
गांव का नागरिक
इस बात को
लेकर बहुत
चिंतित है कि
उसके बच्चे
को पढ़ने के
लिए रात को
बिजली नहीं
मिलती है,
उसके बच्चे
रात को पढ़
नहीं सकते हैं
तो यह सौतेला
व्यवहार क्यों?
एक तरफ सरकार
बिजली पैदा
नहीं करना
चाहती है और
बिजली जैसे
मुद्दे पर
गलतबयानी
करके अपना पल्ला
छुड़ाना
चाहती है और
मैं जो बात कह
रहा हूं, उस
बात को मजाक
में लिया जा
रहा है।
माननीय मंत्री
महोदय, गांवों
में जाकर
देखिये,
गांवों में
स्थिति क्या
है? इसके
अलावा आप
देखिये, पहली
बार राजस्थान
में यह हुआ है
कि जिला मुख्यालयों
पर और सम्भाग
मुख्यालयों
पर भी आपने
पावर कट दिये
हैं। पावर कट तीन
घंटे की है,
बिजली बंद
पाँच घंटे की
है। तीन घंटे
का घोषित पावर
कट और दो घंटे
का अघोषित
पावर कट। इन
परिस्थितियों
के अन्दर
अजमेर जिले की
जो स्थिति
बिगड़ी है
बिजली और पानी
की, उसको
सरकार तत्काल
सुधारे अन्यथा
जनता को कोई
उग्र रूप धारण
करना पड़ेगा।
मैं आपको
बताना चाहता
हूं इस बात को
कि जब जनता पानी
मांगने आती
है, बिजली
मांगने आती है
तो सरकार अपना
लोकतांत्रिक
रूप एक तरफ
रखकर सामंती
रूप सामने
लाकर उनसे
लाठियों और
गोलियों से
बात करती है।
ब्यावर के
अन्दर युवक
कांग्रेस के
अध्यक्ष ने
दो बार आन्दोलन
किया है। एक
बार बिजली के
लिए, एक बार
पानी के लिए,
दोनों बार उस
पर मुकदमा
लगाया गया। अजमेर
में वहां के
पार्षदों ने,
वहां की जनता
ने आन्दोलन
किया तो उन पर
मुकदमा लगाया
गया। गांवों में
गांव का
नागरिक सरपंच
या जन
प्रतिनिधि से बात
करता है तो उन
पर मुकदमा
लगता है तो
स्थिति इस
प्रकार की है,
कोई सुनने को
तैयार नहीं है
और अभी आप
देखिये, मैंने
अभी कुछ दिन
पहले हमारे
अफसरों को
लिखा था कि यह
रमजान का
महीना है,
पूरे राजस्थान
में मुसलमान
लोग रोजा रखते
हैं तो शहरों
के लिए जो आप
बिजली देते
हैं सुबह पाँच
बजे, वह आप तीन
बजे कर दें।
कोई हमने वहां
विशेष टाइम नहीं
बढ़वाया, वह
उनसे नहीं
हुआ। न बिजली
सिंगल फेस की
है, न बिजली
थ्री फेस की
है कि आखिर क्या
करें साहब,
यदि थ्री फेस
की बिजली
मिलती
तो आज राजस्थान
के अन्दर जो
फसल थी, उस फसल
को देखते हुए
अकाल की स्थिति
नहीं रहती है
और किसान आपका
धन्यवाद
करता तो मैं
आपका ज्यादा
समय नहीं
लेकर, मैं
आपसे यह
निवेदन करना चाहता
हूं कि अजमेर
जिले की पानी
की बिजली की
व्यवस्था
में आमूलचूल
सुधार किया
जाये, उसको
दुरस्त किया
जाये और उसमें
जो कमी है धन
की या बजट की, वह
सरकार एक्स्ट्रा
बजट वहां दे
और उसको
प्रारम्भ
करे ताकि लोग
आपका एहसान
मानकर अपना
जीवन बिता
सके। धन्यवाद,
जय हिन्द।
कोटा
के चिकित्सालयों
में इलाज में
बरती जा रही
लापरवाही
श्री
उपाध्यक्ष:
धन्यवाद।
श्री
रामनारायण
मीणा, कोटा
में निजी चिकित्सालयों
में पैसे के
लालच में इलाज
कर, लापरवाही
पूर्वक इलाज
कर मृत्यु
कारित करने के
सम्बन्ध
में।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
आदरणीय उपाध्यक्ष
महोदय, एक तरफ
चिकनगुनिया
और दूसरी
मौसमी
बीमारियों से
आदमी मर रहा
है और दूसरी
तरफ माननीय
चिकित्सा
मंत्रीजी से
मैं माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से
अर्ज करना
चाहूंगा, आपके
चिकित्सक
हैं, निजी
चिकित्सालयों
में
प्रेक्टिस
करते हैं और
अस्पताल में
जाते हैं तो
कहते हैं कि
घर आ जाओ या इस
चिकित्सालय
में चले जाओ।
यह आपके जयपुर
में है। आप राजस्थान
का ऐसा एक
जिला बता दो,
आप खुद मानते
हो, आप खुद
जानते हो इस
बात को चिकित्सा
मंत्रीजी, यह
संवेदनहीनता
की दृष्टि से
बहुत गम्भीर
अपराध है।
मैं
आपको कुछ
घटनाएं
बताऊंगा।
हमारे कोटा
में डाबर निवासी
रामस्वरूप
नागर, साधारण
सी बीमारी थी,
उसको बुखार था,
वह
मोटरसाइकिल
पर खुद बैठकर,
खाना खाकर चिकित्सालय
में गया। वहां
मिस्टर
एम.बी. चित्तौड़ा
नाम के राजकीय
चिकित्सक
थे। उसने उसको
तो कह दिया कि
सीधे अस्पताल
चले जाओ, वहां
चला गया,
चार-पाँच लाख
रुपये खर्च हुए
सात दिन में
और जयपुर रैफर
करने की
स्थिति आई,
उसके घर वालों
से कहा गया कि
यहां पर एम्बूलेंस
नहीं है। 80,000
रुपये में
यहां से उसके
लिए एम्बूलेंस
गई, उसमें भी
कमीशन, वह मर
गया, डाक्टर
के खिलाफ वहां
पर आन्दोलन
हुआ, मुकदमा
दर्ज हुआ और
उस मुकदमे में
माननीय गृह
मंत्रीजी
यहां
बिराजमान हैं,
माननीय गृह
मंत्रीजी,
सुप्रीम
कोर्ट का आदेश
है या आर्डर
है या फैसला
है कि जिस
चिकित्सक के
ऊपर यदि किसी
तरह का होगा
तो उसके ऊपर
नहीं होगा
लेकिन
लापरवाही की
गई, उसके घर
वाले बयान दे
रहे हैं। पाँच
लाख रुपये
खर्च हुए सात
दिन में, ऐसी
कौनसी दवाई दी
गई है।
दूसरा
मेरा आपसे
अर्ज करना है
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, सूरजमल
वर्मा, एक
वकील, वह
देवपुरा के
दीगोद तहसील
का रहने वाला
है, इसी तरह से
वहां गया, उसी
अस्पताल में
भर्ती हुआ,
उसका केस भी
रजिस्टर है।
माननीय गृह
मंत्रीजी
यहां
बिराजमान हैं,
नम्बर 375/2006
दादाबाड़ी
थाने में और
यह उसके रिश्तेदार
उमाशंकर मीणा
ने सूरजमल
वर्मा का मुकदमा
दर्ज करवाया
है और आज तक भी
चालान नहीं
हुआ। ऐसे
सैंकड़ों
केसेज
मिलेंगे
आदरणीय उपाध्यक्ष
महोदय, भवानी
मण्डी में एक
डाक्टर को
इसलिए पकड़ा
गया कि उससे
वहां के स्थानीय
नेता नाराज थे
क्योंकि
झालावाड़ में
कोई न कोई
नेता ऐसा होगा
जो मुख्य
मंत्री से ज्यादा
पावरफुल होगा,
इसलिए मैं
उसमें नहीं
जाना चाहता
लेकिन उपखण्ड
अधिकारी ने एक
चिकित्सक को
वह बेचारा
कमरे में बन्द
हो गया, वहां
पकड़ा, फिर
वहां से भगा,
वहां पकड़ा और
जयपुर में
निजी चिकित्सालय
में यदि हमारे
एम.एल.ए. या
हमारे मंत्री
जाकर के
सरकारी डाक्टर
के हैसियत से
वहां
प्रेक्टिस
करते हैं तो वहां
उससे काम
करवाया,
आपरेशन
करवाया या
दूसरा धंधा
करवाया, आप
मुझे बता दो।
हमारे बूंदी
में या कहीं
भी जो डाक्टर
का आप
ट्रांसफर
करते हो, ए.पी.ओ.
करते हो, वह छुट्टी
लेकर अपनी
बीवी के
चिकित्सालय
में या भाई के
चिकित्सालय
में या खुद के
नर्सिंग होम
में काम करता है,
आप उसका कुछ
नहीं बिगाड़
सकते इसलिए
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं आपसे
अर्ज करना
चाहूंगा कि इस
समय गरीब आदमी
सरकारी
चिकित्सालयों
में इलाज नहीं
करा सकता, हम
सरकारी चिकित्सालयों
से उसको दवाई
नहीं दे सकते।
बी.पी.एल. में
सरकारी
कर्मचारी आ
गये,
बड़े-बड़े
पैसे वाले आ
गये। गरीब
आदमी की हालत
खराब है। उसस्थिति
में राज्य
सरकार को
चाहिए कि ऐसे
मामलों में
संवेदनशीलता
बरते और अपने
पावर का उपयोग
करे। ऐसे डाक्टरों
के खिलाफ
एकतरफा
कार्यवाही
करे। इसलिए मेरे
जो कोटा में
जैसे सुधा
चिकित्सालय
है, दूसरे
चिकित्सालय
हैं आदरणीय
डाक्टर साहब,
आप तो देख
सकते हो, अपनी
रिपोर्ट ले सकते
हो, कहां नहीं
हो रहा है।
जहां मुकदमा
दर्ज हो गया,
गृह मंत्रीजी
और आप दोनों
बैठकर इस बात
का निर्णय करें
कि सरकार का
क्या आदेश
है, उन आदेशों
की पालना नहीं
हो रही है, किसी
स्तर पर एक
प्रतिशत
पालना नहीं हो
और वह डाक्टर
बचकर जाते
हैं। बूंदी
में भी इस तरह
का केस हुआ।
डाक्टर को
इसलिए बचा
दिया गया कि
सुप्रीम
कोर्ट के किसी
फैसले का
हवाला दे दिया
गया, गरीब
मारा गया,
आपरेशन का
पैसा नहीं
दिया, उसकी नस
काट दी, सारा
खून बह गया।
वह गृह
मंत्रीजी तक
आये, चिकित्सा
मंत्री तक
आये, संसदीय
सचिव तक गये,
मुख्य
मंत्री तक
गये, कहां नहीं
गये, कोई
सुनवाई नहीं
हुई। यह डाक्टर
का पेशा है,
बदनामी का
पेशा है।
माननीय चिकित्सा
मंत्रीजी, आप
जिस भावना से
स्टेथस्कोप
लेकर देखते
हो, वैसा इन
डाक्टर्स को
बनाइये ना,
नहीं बना सकते
हो तो हाथ खड़े
करके जनता से
माफी मांग तो
लो, कम से कम
सदन में माफी
मांग लो। नहीं
मांगते हो तो
मजबूती से काम
करो, माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, इनको
कौन रोकता है?
प्रभारी
मंत्री हैं,
मुख्य
मंत्रीजी
इनसे बहुत खुश
हैं, गृह
मंत्रीजी इनके
साथ हैं, आज
सारा सदन इनके
साथ है।
Jkj/akt/13.40/2a/4.10.2006
इसलिए
इसके बारे में
कोई कार्यवाही
करें और
मजबूती से
कार्यवाही
करें, हमें आश्वस्त
करें कि यह
छोटे-छोटे
मामलों में
मरीजों को सरकारी
चिकित्सालयों
में सरकारी
डाक्टर भेजे,
वह कतई उचित
नहीं है और यह
संवेदनहीनता
है, गरीबों के
साथ अन्याय
है और ऐसे कौन
से चिकित्सालय
हैं माननीय
उपाध्यक्ष महोदय,
जहां पर डाक्टर्स
पूरे हों,
जहां पर
नर्सें पूरी
हों।
मेरे नैनवां
के अंदर
नर्सों के दस
पद खाली हैं,
डाक्टर्स के
पद खाली हैं। इसलिए
गृह मंत्रीजी,
हंसने का सवाल
नहीं है, सवाल
यह है कि जो मुकदमे
दर्ज हुए हैं
आपके वहां
सुधा हास्पीटल
के, आप कितने
मजबूत हैं इस
बात का हमें
पता चल
जायेगा, आप
मुकदमे का
चालान कर
देंगे।
मुझे यही
कहना है माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, सरकार
पूरा ध्यान
देगी हमारी
बात का और
हमें निश्चित
तौर पर उत्तर
देगी, यही हम
आशा करते हैं।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री
उपाध्यक्ष:
श्री वीरेन्द्र
बेनीवाल।
श्री
रामनारायण
मीणा: यह
सरकार बैठी है
क्या?
श्री
उपाध्यक्ष:
सब कर रही है,
आपकी बात
सारी, सब आपकी
बात ध्यान में...
श्री
रामनारायण
मीणा: सो रही
है, सेज पर
पैसे कमा रही
है...
श्री
उपाध्यक्ष:
सब नोट कर रहे
हैं, सब एक्शन
हो रहा है।
श्री
रामनारायण
मीणा: गरीबों
को मार रही है,
मुझे बता दीजिये
कि किस जिले
में मजदूर,
गरीब नहीं
मरा।
श्री
उपाध्यक्ष:
सब जगह एक्शन
हो रहा है,
जहां-जहां भी...
श्री
रामनारायण
मीणा: माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं यह
नहीं अर्ज कर
रहा...
श्री
उपाध्यक्ष:
हो रही है
कार्यवाही।
श्री
रामनारायण
मीणा:
संवेदनशील
मामले में
जहां मुकदमे
दर्ज हों, ग;ह
मंत्री हंसते
रहें, चिकित्सा
मंत्री सुस्त
होकर सोते
रहें, आखिर यह
सदन किसलिए
है...
श्री
उपाध्यक्ष:
किसी भी
अपराधी को
नहीं बख्शा
जायेगा। गृह
मंत्रीजी
किसी अपराधी
को नहीं बख्शेंगे।
श्री
रामनारायण
मीणा: इसलिए
है कि अपनी
बात कह दें।
इसलिए है कि
सरकार बोले
नहीं, यह कौन
सी किताब में
लिखा है कि
सरकार मुंह के
पट्टी बांधकर बैठेगी,
इनका मुंह
किसने सी
लिया।
श्री
उपाध्यक्ष:
कोई किसी का
भी...
श्री
रामनारायण
मीणा: और यह
कालूलालजी
देखो, पैंतालीस
दिन में यह
एमएलएज का फंड
रिलीज कर रहे
हैं, पाँच-पाँच
साल में नहीं
हो रहा है
कालूलालजी।
श्री
उपाध्यक्ष:
गृह मंत्रीजी
और चिकित्सा
मंत्रीजी
किसी को बख्शने
वाले नहीं
हैं। माननीय
सदस्य श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल।
श्री
रामनारायण
मीणा: उपाध्यक्ष
महोदय, आप आदेश
नहीं दे सकते?
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया(गृह
मंत्री):
मुकदमा दर्ज
हैं, एफएसएल
में इसकी जांच
गई हुई है,
मेडिकल बोर्ड
की रिपोर्ट
आने के बाद इस
केस में आगे
जो कार्यवाही
होनी है वह
होगी।
श्री
उपाध्यक्ष:
वह होगी जी।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया: क्या
चीज चाहते हैं
आप, यह सब
जानकारी होने
के बाद भी बोल
रहे हैं आज
आप।
श्री
रामनारायण
मीणा: आदमी मर
गये। नहीं,
कितने दिन
में?
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया: मर
गये उसी का तो
मुकदमा दर्ज
हुआ, बाकी
किसके लिए
होता है।
श्री
रामनारायण
मीणा: यह एफ एस
एल, एक मिनट..
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया: अगर
नहीं मरते तो
मैं मुकदमा
थोड़े ही दर्ज
करता, मरे हैं
इसीलिए
मुकदमा दर्ज
किया है, क्या
बात करते हैं।
श्री
रामनारायण
मीणा: गृह
मंत्रीजी,
मुकदमा तो पब्लिक
ने दर्ज करा
दिया, एफ एस एल
में छह’छह महीने
लगते हैं।
आपका विभाग
है, आखिर देर
क्यों है?
श्री
कालूलाल
गुर्जर: आपका
विभाग था
तो...(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
हो रही है, जल्दी
हो रही है। हो
रही है जल्दी।
श्री
रामनारायण
मीणा: मैं
ग्रामीण
विकास विभाग
में मस्टररोल
थोड़े ही
बांटता हूं।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
हो गया। श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल(लूणकरणसर):
धन्यवाद
उपाध्यक्ष
महोदय।
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से माननीय...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
सीट बदल गई
है।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल: यह
आपने बदल दी
साहब। हां,
सीट बदल गई,
मैं आपको कहना
चाहता हूं, धन्यवाद
भी देना चाहता
हूं,
बदलते-बदलते...
श्री
उपाध्यक्ष:
आपको देखकर के
बैठ गये।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल:
बदलते-बदलते
यूं ला रहे
हैं, उस तरफ ले
आयेंगे।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
धन्यवाद, धन्यवाद।
आइये, आइये, स्वागत
है आपका।
नापासर
में स्वीकृत
विद्युत
सहायक अभियन्ता
कार्यालय का
स्थानान्तरण
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल:
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से माननीय
ऊर्जा
मंत्रीजी का
मेरे विधान सभा
क्षेत्र
लूणकरणसर के
नापासर
क्षेत्र की ओर
आकृष्ट करना
चाहता हूं।
नापासर में,
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, 132 केवी
जीएसएस के अन्तर्गत
चार फीडर
पड़ते हैं,
रामसर, मूण्डसर,
बादनू और
नापासर और इन
चारों फीडर के
अंतर्गत तीस
से ज्यादा
गांव आते हैं।
यह इलाका वह
इलाका है जो विशुध्द
रूप से कृषि
कुओं का
क्षेत्र है। जिला
बीकानेर के
विधान सभा
क्षेत्र
लूणकरणसर का अधिकांशत:
कृषि कुओं से
उत्पाद लेने
वाला कृषक इसी
क्षेत्र के
अन्तर्गत
निवास करता है
और हजारों की
संख्या में
यहां पर कृषि
कुएं हैं। क्योंकि
यह इलाका पूरा
वह इलाका है
उपाध्यक्ष
महोदय, जो
बड़े-बड़े
गांव हैं और
यहां पर घरेलू
बिजली का भी
उपभोग खूब
होता है,
उपभोक्ता
इसके भी खूब
हैं। इन सब
समस्याओं को
देखते हुए,
उनकी आवश्यकताओं
को देखते हुए
लगातार चल रही
मांग के उपरांत
नापासर में
उपखण्ड
कार्यालय स्वीकृत
किया गया,
सहायक
अभियंता को
माह जनवरी 2006 से
वहां पर पदस्थापित
किया गया और
पदस्थापित
करने के साथ
ही, क्योंकि
उसके लिए
कार्यालय की
व्यवस्था
नहीं थी,
औद्योगिक
क्षेत्र जो
हमारे वहां पर
नापासर का है
वहां पर उनके
लिए भवन
किराये पर
लिया गया। महज तीन
या साढ़े तीन
महीने उन्होंने
उस कार्यालय
के अंदर
गुजारे होंगे
और इसके
साथ-साथ
माननीय
मंत्री महोदय
की सदाशयता के
परिणामस्वरूप
आठ लाख रूपये
की राशि भी स्वीकृत
कर दी गई और 33
केवी जीएसएस
के परिसर के
अंदर सहायक
अभियंता के
कार्यालय का
निर्माण करवा
दिया गया।
कार्यालय का
निर्माण होने
के डेढ़ माह
पश्चात्
वहां पर सहायक
अभियंता ने
अपना कार्यालय
स्थानांरित
भी कर लिया। उपाध्यक्ष
महोदय, जनवरी
माह में
कार्यालय
शुरू होता है
और उसके
तीन-साढ़े तीन
महीने बाद में
राशि स्वीकृत
करके
कार्यालय का
निर्माण भी
करा दिया जाता
है और अब
अचानक बड़े ही
शुभ दिन, 23
तारीख को हमारे
नवरात्र शुरू
होते हैं उसके
साथ ही सहायक
अभियंता
महोदय अपना
सारा सामान समेट
कर वापिस
बीकानेर चले
जाते हैं। मैं
माननीय
मंत्री महोदय
से, उपाध्यक्ष
महोदय, आपके
मार्फत यह
जानना
चाहूंगा कि यह
इलाका जिसका
हमने एक सेंटर
प्वाइंट
माना था
नापासर को, जो
बीकानेर शहर
में 27 किलोमीटर
दूर नापासर है
और उस नापासर
से लगभग 45
किलोमीटर के
रेडियस के इन
गांवों को,
वहां के आम
काश्तकारों
को, वहां के आम
उपभोक्ता को
बार-बार
बीकानेर जाने
की समस्या
नहीं झेलनी
पड़े, इसके
लिए वहां पर
हमने सहायक
अभियंता
कार्यालय स्थापित
किया, क्या
ऐसे कारण थे
और किनके ऐसे
आदेश थे जिस
आदेश के चलते
वह कार्यालय
वहां से स्थानांतरित
हुआ? क्या
इस तरीके का
कोई आदेश
सरकारी स्तर
पर हुआ है, क्या
इस तरीके का
कोई आदेश किसी
स्थानीय
अधिकारी ने
दिया है, अगर
दिया है तो क्यों
दिया है, क्या
इसका कारण है,
यह माननीय
मंत्री महोदय
स्पष्ट
करें तो थोड़ा
लगे कि एक जो
समस्या का
समाधान करने
का आपने
प्रयास किया
था, उसकी
स्थिति स्पष्ट
होगी।
इसके
साथ-साथ,
मंत्री महोदय,
मैं आपको यह
और निवेदन
करना चाहूंगा,
जिला बीकानेर
के अंदर वर्तमान
समय में
विद्युत
वितरण निगम
लिमिटेड के अंदर
कर्मचारी भी
कम पदस्थापित
हैं,
इंजीनियर्स
भी कम पदस्थापित
हैं, जिसके
चलते मैं एक
क्षेत्र
विशेष का आपको
निवेदन करना
चाहूंगा, मेरे
विधान सभा
क्षेत्र के उप
खण्ड
खाजूवाला के
अन्तर्गत
हजारों की
संख्या में
उपभोक्ताओं
के विद्युत
कनेक्शन
चाहने के
आवेदन लम्बित
पड़े हैं
जिनका आज तक
निस्तारण
नहीं हो पा
रहा है।
तो मेरा निवेदन
है आप यह
स्थिति एक तो
स्पष्ट
करने का कष्ट
करें, आप यहां
स्वयं
विराजमान हैं,
कि क्या आप
पुन: नापासर
के अंदर सहायक
अभियंता को पदस्थापित
करने का विचार
रखते हैं या
नहीं रखते हैं
और साथ में आप
थोड़ा सा यह
भी स्पष्ट
करने का कष्ट
करें कि यह स्थानांतरित
अगर हुआ तो
किनके आदेश से
हुआ और आने वाले
समय में आप
वहां की व्यवस्था
को किस प्रकार
से बनाये रखना
चाहते हैं, थोड़ा
आप फरमाने का
कष्ट करें,
उपाध्यक्ष
महोदय, निवेदन
करूंगा,
मंत्री महोदय
विराजमान
हैं।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
यह तो आपकी
सुविधा के लिए
हुआ दिखता है।
आपकी सुविधा
के लिए नजदीक
लाये हैं,
बीकानेर आप
अच्छी तरह से
संभाल पाओगे,
शिकायतों को
सुन सकोगे।
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल:
उपाध्यक्ष
महोदय, मेरा
निवेदन यह है
कि मेरी
सुविधा को तो
बिलकुल लाल
पेन फेर दिइया
जाये, आम काश्तकार
की सुविधा का
ध्यान रखा
जाय, आम काश्तकार
की समस्या का
ध्यान रखा
जाय, जहां
सरकार ने एक
और इतनी
सदाशयता का
परिचय दिया कि
तत्काल
प्रभाव से तो
आपने वहां पर
उसको पदस्थापित
करा दिया,
उसके साथ-साथ
कार्यालय का
भी निर्माण
करवा दिया,
पैसे भी दे
दिये, फिर क्यों
आप उसको ले
गये, किसके
प्रभाव से तो
आपने यह कार्य
किया और किसके
प्रभाव से अब
आप उसको, क्या
ए.ईएन. को
रिलीफ देना
चाह रहे हैं,
क्या करना
चाह रहे हैं,
यह थोड़ा सा
बताया जाय, मंत्री
महोदय।
श्री
उपाध्यक्ष:
यह आप मंत्री
महोदय से मिल
लें चेम्बर
में, वह एक्सप्लेन
कर देंगे।
श्री जोगाराम
पटेल।
राज्य
में बिजली की
उपलब्धता
एवं आपूर्ति
श्री
जोगाराम
पटेल(लूणी):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, आपका
आभारी हूं
मुझे परची के
माध्यम से
अपने विचार
रखने की
अनुमति दी। मेरे से
पूर्व भी
माननीय सदस्यों
ने इस विषय को
रखा है।
सर्वप्रथम तो
मैं निवेदन
करूंगा, मेरे
विधान सभा
क्षेत्र लूणी
में एक
क्रियेशन आफ
सब डिवीजन का
मैंने निवेदन
किया और
माननीय
मंत्री महोदय
ने उस संबंध
में सकारात्मक
विचार रखकर
उसको आगे
बढ़ाया है। मैं
मंत्री महोदय
से निवेदन
करूंगा कि
उसको शीघ्र
मंजूरी
दिलावें।
परंतु उसके साथ-साथ
मैं आपके माध्यम
से यह निवेदन
भी करना
चाहूंगा कि
विद्युत व्यवस्था
जो है वह जीवन
का अंग है और
वर्तमान युग
में सबसे अधिक
महत्वपूर्ण
विषय है और इस
विषय के संबंध
में दो शब्द
मैं आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहूंगा
इस पवित्र सदन
में। 2003-04
में जो बिजली
की आपूर्ति थी
वह 2685 करोड़
यूनिट थी,
मौजूदा सरकार
के कार्यकाल
प्रारम्भ
होते ही दूसरे
वर्ष 2004-05 में 2953
करोड़ यूनिट
हुई, करीब दस
प्रतिशत की
वृध्दि हुई एक
साल के अंदर-अंदर। तीसरे
वर्ष 2005-06 में 3152
करोड़ यूनिट की
वृध्दि हुई और
पिछले वर्ष की
अपेक्षा सात
प्रतिशत की
वृध्दि हुई। यह
बिजली
आपूर्ति में
वृध्दि हुई,
माननीय सदस्यों
ने कई ने
बताया कि
बिजली की खपत
अधिक है....
भीम/अरुण/10.4.06/13.50/2b
कि बिजली की खपत अधिक है आपूर्ति कम है परन्तु मैं इस मौके पर आपसे निवेदन करना चाहता हूं आपकी मार्फत निवेदन करन चाहूंगा कि मौजूदा सरकार की मुख्यमंत्री के सहयोग, आशीर्वाद और मंत्रीजी के प्रयासों से एक वर्ष में दस प्रतिशत दूसरे वर्ष में सात प्रतिशत की वृद्धि हुई है आपूर्ति में और विशेष रूप से मैं मेरे प्रतिपक्ष के सभी वरिष्ठ साथियों से निवेदन भी करना चाहूंगा आग्रह भी करना चाहूंगा कि आप अपने पॉवर का प्रयोग करें और केन्द्र सरकार पर दबाव डालें जिसकी वजह से ये आपूर्ति ठप्प हो रही है जिसकी वजह से सारे गड़बड़ घोटाले हो रहे हैं रियाद जो यूपी में है वहां कल की तारीख तक पाँच सौ मेगावाट यूनिट, सिंगरोली जो एपी में है वहां दो सौ मेगावाट यूनिट, पुनस्सर में 210 मेगावाट यूनिट, नेशनल पॉवर प्रोजेक्ट है इसमें 220 मेगावाट और कोटा थर्मल ऑटोमेटिक पॉवर यूनिट में 150 मेगावाट और इस तरह से करीब 1280 मेगावाट बिजली की आपूर्ति केन्द्र सरकार के सौतेले व्यवहार, राजस्थान सरकार को तंग करने, राजस्थान सरकार को बदनाम करने के लिहाज से इस तरह से बंद की जा रही है कम की जा रही है जिससे मैं निवेदन करना चाहूंगा ..।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य यह कह रहे हैं। माननीय सदस्य, एक मिनट।
श्री जोगाराम पटेल: कि आप कृपया इसको सुनें और इसमें सुविधा दें काश्तकारों की सुविधा के लिए । आप कृपया मेरे बीच में नहीं बोलें।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आपने कहा है यह पर्ची जो है ...।
श्री उपाध्यक्ष: माननीय सदस्य, आप बीच में नहीं।
श्री जोगाराम पटेल: फ्लोर मेरे कब्जे में है मेरा अधिकार है बोलने का और मैं उस अधिकार का प्रयोग करके बोल रहा हूं मुझे माननीय उपाध्यक्ष महोदय ने अनुमति दी है।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय उपाध्यक्ष महोदय, यह पर्ची इसलिए थोड़े है कि आप ...(व्यवधान)... आप हमारे सामने आयें न।
श्री जोगाराम पटेल: विराजें। आपको सुनने की क्षमता होनी चाहिए ...(व्यवधान)... आप अभी जवाब दे देना । आप विराजिये।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): क्षमता भी है । क्षमता भी है और सब है।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप बीच में व्यवधान
नहीं करें।
श्री जोगराम पटेल: आप बीच में व्यवधान मत कीजिये।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय उपाध्यक्ष महोदय, ये पर्ची में ये चीज आनी ही नहीं चाहिए।
श्री जोगाराम पटेल: आप पहले व्यवधान मंत्री रह चुके हैं अब नहीं हैं।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): पर्ची में ये चीज आनी नहीं चाहिए।
श्री उपाध्यक्ष: नहीं-नहीं, मैं आपको अलाऊ नहीं कर रहा हूं।
श्री जोगाराम पटेल: यह विषय आपका नहीं है। यह विषय जिनका है वो देखेंगे।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अटलबिहारी वाजपेयी संसद में बैठते हैं उनसे कहलाओ न।
श्री जोगाराम पटेल: यह विषय आपका नहीं है आप सुनिये।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): लालकृष्ण आठवाणी बैठते हैं उनसे कहलाओ न ...(व्यवधान)...
श्री जोगाराम पटेल: कितना ही व्यवधान, सुनिये विषय आपका नहीं है।
श्री उपाध्यक्ष: माननीय सदस्य।
श्री जोगाराम पटेल: यह विषय आपका नहीं है आप सुनिये आपको सुनने में तकलीफ क्यों हो रही है?
श्री उपाध्यक्ष: माननीय सदस्य, आप इसमें दखल न करें।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): किसका है? माननीय उपाध्यक्ष महोदय, इन्होंने हमें इंगित करके कहा है इन्होंने, इनके नेता ने मुख्यमंत्री ने हमसे कभी नहीं कहा। ये कहें हमसे।
श्री जोगाराम पटेल: इस सदन के पवित्र माध्यम से मैं वास्तविकता सामने ला रहा हूं और वास्तविकता सामने ला रहा हूं तो आपको तकलीफ हो रही है आपको सुनना पड़ेगा।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): हमसे क्या चाहते हैं आप हमसे कहिये।
श्री जोगाराम पटेल: मैं दूसरा निवेदन यह कर रहा था माननीय उपाध्यक्ष महोदय,..।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह पर्ची का मुद्दा नहीं है न व्यवस्था का प्रश्न है माननीय उपाध्यक्ष महोदय।
श्री जोगाराम पटेल: 2003 में जब सरकार आयी ...।
श्री उपाध्यक्ष: आप बीच में नहीं ...(व्यवधान)...
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप ऐसी व्यवस्था दें कि इस तरह की बातें नहीं करें सदन में। वो समझदार सदस्य हैं और बहुत संघर्ष के बाद आये हैं बहुत अच्छे आदमी हैं ।
श्री जोगाराम पटेल: आप सुनें।
श्री उपाध्यक्ष: आप सुनें।
श्री जोगाराम पटेल: मेरा अधिकार है और आपने मुझे कंपलीमेंट दिया उसके लिए आपको धन्यवाद। मैं यह भी निवेदन करना चाहता था कि दिसम्बर, 03 से लगाकर मार्च, 04 में दो सौ करोड़ रुपये, 2004-05 में 322 करोड़ रुपये और 2005-06 में 635 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्चा करके किसानों को विद्युत आपूर्ति हो सके यह सरकार ने बिजली खरीद करके किसानों को दी। यह भी मैं आपको निवेदन करना चाहता हूं इतना ही नहीं कृषि कनेक्शनों के संबंध में विशेषकर राजस्थान में जो काश्तकारों को सुविधा दी जा रही है उसके संबंध में 2004-05 में 39841 जो आपके समय में दस बारह वर्षों से कनेक्शन पड़े थे उनकी पूर्ति की गयी।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): उपाध्यक्ष महोदय, मैं सदन में कहना चाहता हूं कि शिड्यूल्ड कास्ट के कनेक्शन तो खतम कर दिये।
श्री जोगाराम पटेल: मैं बता रहा हूं मैं आपका जवाब दे दूंगा आपका शिड्यूल्ड कास्ट का भी जवाब दूंगा।
श्री उपाध्यक्ष: मैं तथ्य बता रहा हूं और मैं कहना चाहता हूं कि सरकार ने शिड्यूल्ड कास्ट के कनेक्शन कम कर दिये ।
श्री जोगाराम पटेल: आप बीच में व्यवधान नहीं डालें।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप बीच में
नहीं बोल
सकते।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप उपाध्यक्ष महोदय, आप तो सारी बात जानते हो।
श्री उपाध्यक्ष: नहीं-नहीं माननीय सदस्य को बोलने दीजिये।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आपके सामने असत्य कथन हो...।
श्री जोगाराम पटेल:297 मेगावाट, 65 करोड़ यूनिट...। बिलकुल सत्य है।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
इतना असत्य
कथा वाचन हो।
श्री जोगाराम पटेल: यह शत प्रतिशत सत्य है। आपको सत्य सुनने की आदत नहीं है यह शत-प्रतिशत सत्य है।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
यह क्या हो
रहा है माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय?
श्री उपाध्यक्ष: आप चिन्ता काहे के लिए करते हैं?
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): ऐसा अन्याय हो रहा है शिड्यूल्ड कास्ट के साथ में।
श्री जोगाराम पटले: सत्य सुनने की आदत नहीं है आदत डालें सत्य सुनने की।
श्री उपाध्यक्ष: नहीं बीच में नहीं।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अब आप कहेंगे तो मैं तो बैठ जाऊंगा पर वास्तविकता तो अर्ज कर दूं न माननीय उपाध्यक्ष महोदय।
श्री उपाध्यक्ष: नहीं, आप अपना स्थान ग्रहण कीजिये।
श्री जोगाराम पटेल: 2005-06 में 42789 काश्तकारों को कृषि कनेक्शन जारी किये और इस तरह से कुल 99 लाख 433 एग्रीकल्चर कनेक्शन इन दो तीन सालों में दिये गये हैं आपको सत्य सुनना पडेगा और सुनकर वेरीफाई कर देना गलत हो उस दिन मेरे को आकर उसका जवाब पूछ लेना।
इतना ही नहीं इस संवेदनशील सरकार ने आपके समय से पड़े कनेक्शन जो जारी नहीं किये थे काश्तकारों के साथ अन्याय किया उनको बिजली का संबंध नहीं दिया और इस सरकार ने आने के बाद करीब 1,99,433 कनेक्शन जारी कर दिये हैं और आगे भी जारी करने वाले हैं। इतना ही नहीं कृषि श्रेणी में जो लगने वाला खर्चा था उसको भी आप सुन लें उसको भी आप सुन लें अगर तीन पोल लगाते थे तो आप 14,500 रुपये लेते थे इस सरकार ने उसको आधा कर दिया साढ़े सात हजार । पाँच पोल में जहां तेईस हजार लगते थे वहां 12500 रुपये कर दिये । पाँच पोल में जहां 24875 लगते थे वहां मौजूदा सरकार ने 18750 कर दिये। इस तरह से करके आठ श्रेणियों में बिजली कनेक्शन देने में जो खर्चा आता था काश्तकारों की सहायता के लिए इस संवेदनशील सरकार ने सारा का सारा खर्चा कम कर दिया काश्तकारों को जीवनदान दिया । मान्यवर, इतना ही नहीं कृषि हेतु फीडर सुधार कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम सरकार ने हाथ में लिया और इस फीडर सुधार कार्यक्रम के तहत 7 लाख 42 हजार जो राजस्थान में कृषि कनेक्शन दिये हुए हैं उन सबके लिए पूरा वोल्टेज मिले ट्रेपिंग कम से कम हो, मोटरें नहीं जले इस हेतु पाँच सौ करोड़ का जो प्रोजेक्ट हाथ में लिया है उसमें 11 केवी फीडर सुधार के लिए 2005-06 में 1097 केवी फीडर के सात सौ करोड़ रुपये खर्च करके सही कर दिया है। 2006-07 में जो गवर्नमेंट का जो ओब्जेक्ट है जो प्रोजेक्ट है जो योजना है 3550, 1450 करोड़ रुपये करके हाथ में लिया गया है और इस वर्ष पूरा होने वाला है और इससे करीब पन्द्रह प्रतिशत छीजत कम हो जाएगी।
मान्यवर,
अभी यह बताया
गया है माननीय
सदस्य की ओर
से बीपीएल
परिवारों को 15
हजार पिछले
वर्षों में
कनेक्शन
जारी किये गये
हैं और
वर्तमान में 47
हजार जारी
किये गये।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): उपाध्यक्ष महोदय, यह इस सदन में ध्यानाकर्षण कर रहे हैं या सरकार की तरफ से जवाब दे रहे हैं आप यह तो तय कर लीजिये यहां ये पर्ची के माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित करते हैं । सरकार की तरफ से जवाब नहीं देते हैं। आप यह नयी परम्परा मत डालिये।
श्री उपाध्यक्ष: बोलने दीजिये इनको।
श्री जोगाराम पटेल: ...इसमें पचास प्रतिशत की छूट दी गयी मान्यवर और आप जो 1.70 रुपये प्रति यूनिट देते थे उसको 85 पैसा प्रति यूनिट कर दिया यह मौजूदा सरकार ने किया है आपने नहीं किया आपकी सरकार ने नहीं किया बिजली के उत्पादन में भी आप देखिये आगामी दो तीन वर्षों के अन्दर जो प्रोजेक्ट है वो सब पूरे होने वाले हैं ।
श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): ऊर्जा मंत्री जी, आप सुनिये क्या जवाब दे रहे हैं आपकी तरफ से।
श्री जोगाराम पटेल: मैं जो निवेदन कर रहा हूं वो तथ्यों के आधार पर आधारित कर रहा हूं इसलिए मेरा निवेदन है कि वाहवाही लूटने के लिए ...(व्यवधान)...
श्री अर्जुनलाल मीणा: ऊर्जा मंत्री जी ये सब आंकड़े होते हुए आप कहीं नहीं, मंत्री वो न बन जाएं।
श्री जोगाराम पटेल: ...(व्यवधान)... आप भले ही बता दें लेकिन वास्तविक तथ्य यही हैं जो मैंने आपके सामने रखे हैं मान्यवर उपाध्यक्ष महोदय।
डा. चन्द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आपसे विनम्र शब्दों में निवेदन है कि पर्ची के माध्यम से ऊर्जा मंत्री जी की तरफ से ये जवाब दे रहे हैं ...(व्यवधान)... प्रस्तुत कर रहे हैं।
श्री जोगाराम पटेल: उपाध्यक्ष महोदय, इनको बहुत तकलीफ हो रही है माननीय उपाध्यक्ष महोदय, बैद साहब को बहुत तकलीफ हो रही है, माननीय मीणा साहब को बहुत तकलीफ हो रही हैं।
श्री उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
कर लीजिये।
श्री जोगाराम पटेल: मैं पर्ची के माध्यम से वास्तविक तथ्य हाउस के फ्लोर पर रख रहा हूं। मुझे बोलने का मौका दिया इसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।
डॉ.श्रीगोपाल बाहेती: माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी बता दें दो साल में कितने कनेक्शन दिये है और कब से बेन लगा हुआ है?
श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय उपाध्यक्ष महोदय, पाइंट ऑफ इन्फोर्मेशन।
श्री उपाध्यक्ष: माननीय सदस्य। जीरो ऑवर समाप्त।
श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय उपाध्यक्ष महोदय, पाइंट ऑफ इन्फोर्मेशन । मैं एक महत्वपूर्ण सूचना देना चाह रहा हूं । उपाध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में आठ दिन से बीसों लोग अनशन पर बेठे हुए हैं और उनकी तबीयत बिगड़ गयी है और वो राजस्व मंत्री के कुछ आदेश जिस व्यक्ति को शिकायत के आधार पर हटाया गया था उस पटवारी को उसी को वापस लगाया गया और भारतीय जनता पार्टी के सभी कार्यकर्ता अनशन पर बैठे हैं उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गयी है उसके लिए राजस्त मंत्री से मैं चाहूंगा कि समस्या का निराकरण करें मैं मेरी पार्टी के लोगों की बात नहीं कर रहा हूं आपकी पार्टी के लोगों की बात कर रहा हूं।
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): कोई अधिकारी भी वहां नहीं गया उपाध्यक्ष महोदय, वो भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं कोई अधिकारी तक वहां नहीं गया नेता तो नहीं जाए मंत्री नहीं जाए लेकिन कोई अधिकारी भी नहीं जाते हैं आप इस समस्या का समाधान करावें।
श्री उपाध्यक्ष: माननीय सदस्य।
श्री जोगाराम पटेल: नहीं उपाध्यक्ष महोदय, आप अभी की अभी किसी को भिजवायें।
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): लोग मर जाएंगे। एक पटवारी के लिए लोग मर जाएंगे और इनकी पार्टी के लोग ही बैठे हुए हैं ।
श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): उपाध्यक्ष महोदय, व्यवस्था दें कि माननीय मंत्री जी अभी की अभी किसी अधिकारी को वहां भिजवायें और उनकी ...।
श्री उपाध्यक्ष: माननीय सदस्य, आपकी सूचना नोट कर ली गयी है।
श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): लेकिन आपने व्यवस्था नहीं दी है उपाध्यक्ष महोदय।
सदन की
मेज पर रखे
गये पत्र
राष्ट्रपति/राज्यपाल
महोदय की
अनुमति
प्राप्त
विधेयकों का
विवरण
श्री
उपाध्यक्ष:
सदन की मेज पर
रखे जाने वाले
पत्रादि ।
सचिव, विधान सभा गत सत्र में पारित उन विधेयकों का विवरण सदन की मेज पर रखेंगे जिन पर राष्ट्रपति महोदय/राज्यपाल महोदय की अनुमति प्राप्त हो चुकी है।
सचिव,विधान सभा: महोदय, मैं गत सत्र में पारित उन विधेयकों का विवरण सदन की मेज पर रखता हूं जिन पर राष्ट्रपति महोदय अथवा राज्यपाल महोदय की अनुमति प्राप्त हो चुकी है:
अ. राष्ट्रपति महोदय द्वारा अनुमति प्राप्त विधेयक – राजस्थान सम्पत्ति विरूपण निवारण विधेयक, 2006
ब. राज्यपाल
महोदय द्वारा
अनुमति
प्राप्त
विधेयक -
1.राजस्थान
विनियोग (संख्या-1)
विधेयक, 2006
2.राजस्थान
विनियोग (संख्या-2)
विधेयक, 2006
कैलाश/चौहान 4.10.06
14.00 (1) 2c
राजस्थान
सूचना का
अधिकार निरसन
विधेयक, 2006,
राजस्थान
वित्त
विधेयक, 2006,
राजस्थान
संस्कृत
विश्व
विद्यालय नाम
परिवर्तन
विधेयक, 2006,
राजस्थान
संसमारक
पुरातत्वीय
स्थल तथा
पुरावशेष
(संशोधन)
विधेयक, 2006,
राजस्थान
नगर पालिका
संशोधन
विधेयक, 2006,
राजस्थान
तकनीकी विश्व
विद्यालय
विधेयक, 2006,
राजस्थान
सार्वजनिक
पुस्तकालय
विधेयक, 2006,
राजस्थान
विधान सभा
अधिकारियों
तथा सदस्यों
की
परिलब्धियों
और पेंशन
(संशोधन)
विधेयक, 2006
राजस्थान
मंत्री वेतन
(संशोधन)
विधेयक, 2006,
दिनांक 4
अक्टूबर, 2006 को
निधियों का
विवरण सदन की
मेज पर रखा गया।
श्री
उपाध्यक्ष:
श्री घनश्याम
तिवाडी ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
उपाध्यक्ष
महोदय,
पाइंट आफ
आर्डर, उपाध्यक्ष
महोदय,
I am on a point
of order.
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय,
मैं आपकी
आज्ञा से
राजस्थान
सिविल न्यायालय
(संशोधन)
विधेयक, 2006...
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही):
पाइंट आफ
आर्डर हैं
मंत्री जी आप
बैठे । (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): आप
इसे
रेगुलराइट
कीजिए (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): मैं इसे
रख तो दूं । (व्यवधान)
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
उपाध्यक्ष
महोदय,
पाइंट आफ
आर्डर है । I have asked for point of
order. (व्यवधान)
श्री सी. डी.
देवल (रायपुर):
उपाध्यक्ष
महोदय,
हमारा पाइंट
आफ आर्डर है। (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): .. (व्यवधान)
पाइंट आफ
आर्डर नहीं
होता (व्यवधान)
श्री सी. डी.
देवल (रायपुर): ...
(व्यवधान)
इनके बोलने के
बाद पाइंट आफ
आर्डर का क्या
मतलब रह
जायेगा । (व्यवधान)
इसलिए पहले
पाइंट आफ
आर्डर को सुने
। (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): उपाध्यक्ष
महोदय,
मैं आपकी
आज्ञा से
राजस्थान ...
(व्यवधान)
श्री सी. डी.
देवल (रायपुर):
पहले पाइंट आफ
आर्डर आयेगा,
(व्यवधान)
उसके बाद पीछे
क्या रह
जायेगा । (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): उपाध्यक्ष
महोदय,
मैं आपकी
आज्ञा से
राजस्थान
सिविल न्यायालय
(संशोधन)
विधेयक, 2006 (2006 का
विधेयक संख्या-19) को सदन
की मेज पर
रखता हूं ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
उपाध्यक्ष
महोदय,
I said ‘point of
order.’ आप सुन
रहे हैं,
उपाध्यक्ष
महोदय, .. (व्यवधान)
आप सुनिए, आप
विराजिए ।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): उन्होंने
कह दिया कि
मैं पाइंट आफ
आर्डर उठा रहा
हूं और उसके
बाद मंत्री जी
जबरदस्ती
विधेयक रख रहे
हैं । (व्यवधान)
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
मैं कल भी यही
बात अध्यक्ष
महोदय के चेम्बर
में बोल चुका
हूं, इनको
मालूम है बात
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अध्यक्ष
के आदेश के
बिना कोई
पाइंट आफ
आर्डर नहीं
होगा । (व्यवधान)
श्री सी. डी.
देवल (रायपुर):
पाइंट आफ
आर्डर में अध्यक्ष
नहीं चाहिये ।
(व्यवधान)
उपाध्यक्ष
महोदय,
इसके बाद इसका
क्या मतलब रह
जायेगा ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
अच्छा आप
विराजिए, आप
सुनिए ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): उपाध्यक्ष
महोदय, क्या
आपने अनुमति
दे दी । (व्यवधान)
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
उपाध्यक्ष
महोदय,
पाइंट आफ
आर्डर रूल 294:- “A
point of order shall relate to the interpretation or enforcement of these rules
or….”पार्लियामंट्री
मिनिस्टर
सुन लें “…or such Articles of the Constitution as
regulate the business of the House…”
श्री राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): रेगुलेटेड
।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
जी रेगुलेटेड,
हां अंग्रेजी
पढा लिखा हूं
मैं आपकी तरह
अनपढ नहीं हूं
, रेगुलेटेड ।
(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आप हमें
धमका रहे हैं
क्या ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
हां जान रहे
हैं आपको, धमका
रहे हैं आपको
स्पीकर को
नहीं धमका रहा
हूं ।“…regulate
the business of the House and shall raise a question which is within the
cognizance of the Speaker.”
उपाध्यक्ष
महोदय,
भारत के
संविधान के
आर्टिकल 208 के
अंतर्गत,
उपाध्यक्ष
महोदय,
मैं आर्टिकल 208
को कोट करना
चाहता हूं ।
आर्टिकल 208 यह
कहता है “A House of the Legislature of a State
may make rules for regulating, subject to the provisions of this Constitution,
Hon’ble Mr. Parliamentary Minister, its procedure and the conduct of its
business.”
उपाध्यक्ष
महोदय, इस 208
के अंतर्गत यह
विधान सभा के
नियम बने हैं
और कांस्टीट्यूशन
को प्रोविजन
क्या किया,
कांस्टीट्यूशन
के प्रोविजन
में मैं आपका
ध्यान
आकर्षित करना
चाहता हूं Part V, the States, Chapter II, the Executive. विधान
सभा एग्जीक्यूटिव
और उसके बाद
ज्युडीशियरी,
इन तीन के
संबंध में
संविधान में व्यवस्था
की गई है कि
कांस्टीट्यूशन
में एग्जीक्यूटिव
के पावर क्या
होंगे, विधान
सभा के पावर
क्या होंगे,
और ज्युडीशियरी
के पावर क्या
होंगे ।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय,
आपने क्या
कोई डिबेट
प्रारम्भ
करा दी ।
पाइंट आफ
आर्डर है तो
वह स्पेसिफिक
बताये । आपने
कोई डिबेट
चालू कर दी क्या
?
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
यह सुनो आप,
अपनढ आदमी सुनो
आप । .. (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
कानून पढ कर
आया करो,
किताबे देख
लिया करो ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
उपाध्यक्ष
महोदय,
सप्लीमेंट्री
से पास हुए तो
कैसे पढे
तकलीफ यह है ।
उपाध्यक्ष
महोदय,
मैं आपका ध्यान
आकर्षित करना
चाहता हूं,
मैंने आपसे
कहा एग्जीक्यूटिव
के संबंध में
भारत के
संविधान में 153
से लगाकर 167
आर्टिकल है । इसमें
एग्जीक्यूटिव
को डिफाइन
किया गया है ।
एग्जीक्यूटिव
में कौन कौन
है The
Governor, Council of Ministers and the Advocate Generals. यह एग्जीक्यूटिव
के ओर्गन हैं
और 163 में लिखा
हुआ है Council of Ministers to aid and advise Governor. “There
shall be a Council of Ministers with the Chief Minister at the head….” मैं
फिर दुबारा
रिपीट कर रहा
हूं Article
163. “Council of Ministers to aid and advise Governor. There shall be a Council
of Ministers with the Chief Minister at the head to aid and advise the Governor
in the exercise of his function, except in so far as he is by or under this
Constitution required to exercise his functions or any of them in his
discretion.” उपाध्यक्ष
महोदय,
आर्टिकल 164”Other provisions as to Ministers. (1)
The Chief Minister shall be appointed by the Governor and other Ministers shall
be appointed by the Governor on the advice of the Chief Minister, and the
Ministers shall hold office during the pleasure of the Governor” उपाध्यक्ष
महोदय, 163 का
पार्ट 2 है “The Council of Ministers shall be
collectively responsible…”
उपाध्यक्ष
महोदय,
मैं दुबारा
रिपीट कर रहा
हूं “The
Council of Ministers shall be collectively responsible to the Legislative
Assembly of the State.” और
उपाध्यक्ष
महोदय,
तीसरा इसमें
लिखा हुआ है “Before a Minister enters upon
his office, the Governor shall administer to him the oaths of office and of
secrecy according to the forms set out for the purpose in the Third Schedule.” उपाध्यक्ष
महोदय,
मैं थर्ड
शिड्युल्ड
का वह पार्ट
भी पढ़ना
चाहता हूं जब
मंत्री शपथ
लेता है उसमें
कहता है “…that I will do right to all manner of
people in accordance with the Constitution and the law, without fear or favour,
affection or ill will.”
उपाध्यक्ष
महोदय,
एग्जीक्यूटिव
में जो
काउंसिल मिनिस्टर
है उसके संबंध
में आर्टिकल 164
में यह प्रोविजन
किये गये हैं
। उपाध्यक्ष
महोदय,
आर्टिकल 166 में
यह कहा गया है “Conduct of business of the
Government of a State. The Governor shall make rules for the more convenient
transaction of the business of the Government of the State, and for the
allocation among Ministers of the said business in so far as it is not business
with the respect to which the Governor is by or under this Constitution
required to act in his discretion.”
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य
।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
उपाध्यक्ष
महोदय, आप
मेरी पूरी बात
सुन लें ।
श्री
उपाध्यक्ष:
स्पेसिफिक
पाइंट आफ
आर्डर बताइए ।
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
उपाध्यक्ष
महोदय, आप
मेरी पूरी बात
सुन लें, मैं 294
पर आपका ध्यान
आकर्षित करता
हूं । 294 का जो
पार्ट 2 है वह
मैं आपके ध्यान
में लाना
चाहता हूं (3) Subject to conditions
referred to in sub-rule (1) and (2), a member may formulate a point of order.
Let me formulate my point of order. This is my right. I am formulating. Let me
formulate my point of order then you say it. I am formulating my point of
order. I have not concluded it. So I am formulating my point or order. That’s
why I am saying. I am bringing in your notice what I am saying is Article 166
then I am coming to the Article 167. यह सब
एग्जीक्यूटिव
की बातें कर
रहा हूं मैं,
एग्जीक्यूटिव
में लिखा है “Duties of Chief Minister as
respects the furnishing of information to Governor etc. I shall be the duty of
the Chief Minister of each State:- (a) to communicate to the Governor of the
State all decisions of the Council of Ministers relating to the administration
of the affairs of the State and proposals for legislation.”
श्री
सांवरलाल
(सिंचाई
मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय, यह
सारी व्यवस्थाएं
सब जानते हैं ...
(व्यवधान)
इसकी मुझे
जरूरत नहीं है
माननीय सदस्य
। सभी जानते
हैं
संवैधानिक व्यवस्थाएं
आपका
पर्टीकूलर
पाइंट आफ
आर्डर क्या
है वह बताइए
आप । (व्यवधान)
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
यह आकपी समझ
में नहीं आने
वाला है । (व्यवधान)
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
उनसे रिक्वेस्ट
कर लीजिए । (व्यवधान)
श्री सांवरलाल
: इतने घंटे तक
अगर आप
फार्मूलेशन
आफ
पाइंट आफ
आर्डर में
रहेंगे तो यह
ठीक नहीं है ।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): ... (व्यवधान)
और मंत्री मण्डल
का क्या
दायित्व है
इस पर अध्यक्षीय
व्यवस्था
और क्या यह
सदन ... (व्यवधान)
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
इतना काम्प्लीकेटेड
कांस्टीट्यूशनल
पाइंट है वह
साधारण लोगों
के बस की बात
नहीं है ।
आपके बस की
बात नहीं है
आप उलझो मत
इसमें ।
एक माननीय
सदस्य: आपसे
तो ज्यादा
समझदार हैं,
आपसे ज्यादा
जानते हैं ।
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य सचेतक):
.. (व्यवधान) यह
अपनी
राजनीतिक
लड़ाई को यहां
पर लड रहे हैं
। (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): उपाध्यक्ष
महोदय, आप
इसका कोई समय
तो निश्चित
करें । (व्यवधान)
पाइंट आफ
आर्डर के नाम
पर यहां डिबेट
चालू हो गई ।
आप यह नई परम्परा
डाल रहे हैं,
आप नई परम्परा
डाल रहे हैं ।
(व्यवधान)
डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा):
उपाध्यक्ष
महोदय,
माननीय सदस्य
विश्व
विद्यालय के
छात्र नेता
रहे हैं,
छात्र नेता की
ट्रेनिंग है
इनकी एसेम्बलि
की ट्रेनिंग
तो है नहीं ।
Ddm/usc 04102004 1410 2d
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
छात्र नेता
कैसे हल्ला
करके विश्वविद्यालय
में बोलना I have to speak it. I have to
formulate it.
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, पाइण्ट
आफ आर्डर के
नाम पर आप
कितना समय
देंगे? (व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा): It is my privilege to raise a
point of order. I will not concede it. I am on the Floor of the House. Let me
formulate my point of order. It is my privilege. You have allowed it let me
formulate a point of order. I will not concede it.
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य, सभी
माननीय सदस्य
संवैधानिक व्यवस्थाओं
की जानकारी
रखते हैं। अगर
आपकी कोई पर्टिकूलर
बात हो तो
बताइये।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
ये विद्वान
आदमी हैं, मिनिस्टर
हैं। मैं इनको
यही कह रहा
हूं, उपाध्यक्ष
महोदय, यह
संविधान के
अन्तर्गत इस
राजस्थान
विधान सभा का
सत्र नहीं चल
रहा है। Let me complete it. It can not be forced.
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
संविधान के
हिसाब से सारी
व्यवस्थाएं
चल रही हैं।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा): I have taken the permission
from you. The rules say I have to formulate my point of order. You please
permit me to formulate my point of order then you reject it. I have not
concluded it. Let me formulate my point of order.
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप पहले यह
बताइये, पाइण्ट
आफ आर्डर किस
पाइण्ट के
ऊपर , किसी बात
पर उठाना
चाहते हैं।
उसके बाद में
फार्म्यूलेट
करें कि आपका
मेन आब्जेक्शन
क्या है।
पाइण्ट आफ
आर्डर आप स्पेस्फिक
कहिये।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
उपाध्यक्ष
महोदय, आप
विराजिये।
श्री
उपाध्यक्ष:
हां, वह
बताइये आप।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
मैंने आपका ध्यान
आकर्षित किया,
दुबारा
आकर्षित कर
देता हूं।
मेरा पाइण्ट
आफ आर्डर यह
है, 294 को मैं पढ़
रहा हूं, आप
पढ़ लीजिये,
उपाध्यक्ष
महोदय।
श्री
उपाध्यक्ष:
मैं आपका
पाइण्ट आफ
आर्डर समझ
गया। आप पाइण्ट
आफ आर्डर, अभी
एक मंत्री ने
जो ...(व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
नहीं, नहीं, यह
नहीं है। आप
विराजिये। आप
कैसे इन्फार्म
करेंगे। मेरा
पाइण्ट आफ
आर्डर है, मैं
बोलूंगा।
श्री
उपाध्यक्ष:
नहीं, तो अभी
और भी हैं।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
नहीं, नहीं I am sorry. How do you
infer that what I am going to say? I am
not saying about Minister. I am not saying about anybody. आप इन्फार्म
कैसे कर रहे
हैं।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आप
बिना आसन की
इजाजत के नहीं
बोल सकते हैं।
बोलूंगा कैसे,
यह कोई....।
श्री
उपाध्यक्ष:
यह इस बात पर
नहीं है तो
फिर किस बात
का पाइण्ट आफ
आर्डर है।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
आप सुनिये तो
सही, सुनिये
आप। You
have permitted me.
श्री
उपाध्यक्ष:
फार्म्यूलेट
करके you
must come to the conclusion.
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आसन
पैरों पर है।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय, पूरा
संविधान बता
देंगे। (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आसन
पैरों पर है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
आप काहे के
लिये खड़े हो,
आप काहे के
लिये खड़े हो।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आपको
बताने के
लिये, आप
बतायेंगे यहां
पर।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
संविधान का
जवाब संविधान पकड़कर
ही दो,
महावीरजी।
ऐसे नहीं दिया
जाएगा। आप
इनको पूरा
करने दो, फिर
आप देना जवाब।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
संविधान के
नियमों के
तहत, इस सदन की
कार्यवाही
नहीं चल रही
है।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा): Let me conclude it Hon’ble Dy.
Speaker Sir. How you can infer it? It is my privilege to formulate it. You can
not infer what I have to say. You can not infer what I want to say. Let me
formulate it.
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): यह
आसन को चुनौती
नहीं दे सकते
हैं, उपाध्यक्ष
महोदय।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
उपाध्यक्ष
महोदय, आप गलत
परम्परा
डालने की बात
कर रहे हैं।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
आप कैसे इन्फार्म
कर देंगे। I have not conceded the Floor.
Let me conclude it. You have permitted me. I have not conceded the Floor. I am
having the Floor. You have permitted me. Let me speak it. आप
सुनेंगे नहीं,
क्या बात
करेंगे। (व्यवधान)
आप मना कर
दीजिये, आपको
नहीं बोलने
दूंगा, मैं। You refuse it.
श्री
उपाध्यक्ष: You have made it clear at the
beginning that this my opinion.
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
तो मैं बता
रहा हूं, आप सुन
नहीं रहे हैं।
मैं बता रहा
हूं, आपको।
यही तो कह रहा
हूं, आपको।
श्री
उपाध्यक्ष:
तो करिये, आप
कब कम्पलीट
करेंगे?
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
यह लिख रखा है,
फिर दुबारा
पढ़ रहा हूं
मैं। (व्यवधान)
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): वह सब
कहें, जहां पर वायलेशन
हुआ, यह
बताइये आप।
आपके संविधान
बताने से ।
श्री उपाध्यक्ष: आप
सुनेंगे तो
सही। ये
बोलेंगे, आप
सुनिये।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
विराजिये आप।
मैं आपका फिर
ध्यान
आकर्षित कर
रहा हूं। यह
लिख रखा है ‘such articles.’ Let me say
it. It is not article. It is a plural. ‘Such articles of the Constitution.’ Let
me cite the articles. There are a number of articles. जो
कांस्टीट्यूशन
का उल्लंघन
हो रहा है, आप
पढि़ये इनको।
आप वकील हैं। आप
खुद वकील हैं।
Let me conclude
it that how many articles are there.
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): सभी
माननीय सदस्य,
उपाध्यक्ष
महोदय,
संविधान के
कौनसे
आर्टिकल का
वायलेशन हो
रहा है। (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): कांस्टीट्यूशन
का क्या
वायलेशन हुआ
है। (व्यवधान)
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): सारे
कांस्टीट्यूशन
के अन्दर
आर्टिकल्स
की व्याख्या
सुनने के लिये
नहीं बैठे हैं
हम। कोई अगर
वायलेशन हुआ
है तो आप
पर्टिकूलर
बताइये। आप तो
किताब लेकर
बैठ गये पूरी
पढ़ने के
लिये। हम
उपदेश सुनने
के लिये नहीं
हैं।
श्री
उपाध्यक्ष: Let him say.
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): Point of order should particular कि किस
व्यवस्था
के सम्बन्ध
में आप उठाना
चाहते हैं,
बताइये आप।
श्री
उपाध्यक्ष:
कहने दीजिये,
कहने दीजिये,
इनको। काइंडली
शोर्ट में
कहिये।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा): Let me say. Hon’be Dy. Speaker
Sir, I very sorry I have not raised a point of order on the business of the
House. I have raised the point of order about the Articles of the Constitution.
They are violating it. Are you not saying about ki मैं बिजनस
थोड़ी बोल रहा
हूं। I
am talking, पढि़ये
इसको,प्रोफेसर
साहब, इसमें
लिखा हुआ है ‘Articles’ is a plural. It is
not one ‘Article’. There are number of ‘Articles’ being violated by this
government. That’s why I want to quote it. It is my privilege. You can not say
it. Let me conclude it.
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): You must say on particular कि
कौनसे आर्टिकल
की।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
आप बोल देना,
आप बोल देना।
बोल लेना आप।
मैं बोल रहा
हूं। मैं
जितने आर्टिकल
बोल रहा हूं,
आप रिफ्यूट कर
देना बाद में।
जितने
आर्टिकल मैं
बोल रहा हूं,
आप रिफ्यूट कर
देना। आपको
अधिकार है।
श्री
उपाध्यक्ष:
कहने दीजिये। Let him say.
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा): Let me conclude it. I have
cited all the ‘Articles’
मैं कहूंगा
नहीं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): उपाध्यक्ष
महोदय, आपने
अनुमति दी,
हमें कोई
एतराज नहीं
है। माननीय
सदस्य, अपनी
बात कहें,
इसमें भी कोई
एतराज नहीं
है। पर कोई
समय तो
निश्चित होगा।
पाइण्ट आफ
आर्डर के कहने
से अगर आप नई
डिबेट चालू करने
की, नई परम्परा
डालेंगे तो
कैसे काम
चलेगा। यह
पर्टिकूलर
आपने पाइण्ट
आफ आर्डर
उठाया।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
यह भारतीय
जनता पार्टी
के कार्यालय
से विधान सभा
नहीं चल रही
है। यह कांस्टीट्यूशन
से चल रही है।
इनको यह
जानकारी नहीं है।
वहां पर आपकी
नहीं चलती है।
वहां भी आपकी नहीं
चलती है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): नहीं,
आपको यह
जानकारी है।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
यह सरकार चल
रही है, इतना
काफी है। न
भारतीय जनता
पार्टी के
संविधान को
समझते हैं, न
भारतीय
संविधान को
समझना चाहते
हैं और राज
करना चाहते
हैं। ऐसे राज
नहीं होगा।
राज होगा,
संविधान के
अन्तर्गत।
इसलिये सुनना
पड़ेगा आपको,
हो क्या रहा
है। सुनना
पड़ेगा आपको।
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपका ध्यान
आकर्षित करना
चाहता था
आर्टिकल 167 पर “to communicate to the
Governor of the State all decisions of the Council of Ministers relating to the
administration of the affairs of the State and proposals for legislation.” चीफ
मिनिस्टर को
गवर्नर को इन्फार्म
करना है। और
उपाध्यक्ष
महोदय, इसमें
लिखा हुआ है
कि “The
Chief Minister shall be appointed by the Governor and other Ministers shall be
appointed by the Governor on the advice of the Chief Minister and the Ministers
shall hold office during the pleasure of the Governor.” Not on the pleasure of
the Chief Minister. Let me conclude the Constitution. उपाध्यक्ष
महोदय, आप
बताइये, इसमें
जो लिख रखा है
कि चीफ मिनिस्टर
अपाइण्ट
करेगा मिनिस्टर
को। चीफ
मिनिस्टर को
गवर्नर हटा
सकता है। पर
मिनिस्टर,
जिनको अपाइण्ट
करता है चीफ
मिनिस्टर, उन
मिनिस्टर्स
को हटाया
जाएगा गवर्नर
के द्वारा,
चीफ मिनिस्टर
के द्वारा
नहीं। (व्यवधान)
उपाध्यक्ष
महोदय, क्योंकि
इसके साथ में
क्या लिखा
हुआ है कि “the Council of Ministers shall be
collectively responsible to the Legislative Assembly of the State.” मैं
कोट करना
चाहता हूं “Collective responsibility is
assured by the enforcement of two principles; first, no person is nominated to
the Council except on the advice of the Prime Minister, and secondly, no person
is retained as a member of the Council if the Prime Minister demands his
dismissal. The essence of collective responsibility is that a Minister is free
to express his dissent when a policy is in the stage of discussion, but after a
decision is taken every Minister is expected to stand by it without any
reservation. The only alternative, therefore, for a Minister who does not see
eye to eye with the Prime Minister in matters of policy or is not prepared to
defend a Cabinet decision is to resign.” जिनकी
यह किताब है,
कौल और शकधर
की, उपाध्यक्ष
महोदय। इसमें
लिखा हुआ है,
कलेक्टिव रेस्पांसिबिल्टि
का मतलब क्या
है
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष
पदासीन)
(समय: )
और अध्यक्ष
महोदय, मैं
अपने मन से
नहीं कह रहा
हूं। I
am quoting it that what is the provision and what is the practice and procedure
of the Parliament as mentioned by Mr. Kaul and Shakdhar at page No. 686
कलेक्टिव
रेस्पांसिबिल्टि
का मतलब क्या
होता है, अध्यक्ष
महोदय। अध्यक्ष
महोदय, मैं
इसलिये कहना
चाहता हूं,
आर्टिकल 212 में
भी आप का ध्यान
आकर्षित करना
चाहता हूं।
आर्टिकल 212 है,
वह डिबार करता
है कि असेम्बली
की जो
प्रोसीडिंग्स होगी,
अध्यक्ष
महोदय, उसको
कहीं पर भी
कोर्ट के अन्दर,
यह व्यवस्था
नहीं है, यह
चैलेन्ज
नहीं हो सकती
है। 212
says that Courts not to inquire into proceedings of the Legislature. The
validity of any proceedings in the Legislature of a State shall not be called
in question on the ground of any alleged irregularity of procedure.” अब अध्यक्ष्ं
महोदय,
आर्टिकल 166 में
मुख्य
मंत्रीजी, जो
इसकी हेड हैं,
कौंसिल आफ
मिनिस्टर्स
की, जो उनकी
एडवाइज पर बनी
हुई हैं ,
कलेक्टिव
रेस्पांसिबिल्टि जो उसके
अन्दर
डिफाइन की हुई
है। आर्टिकल 164
का वायलेशन हो
रहा है।
आर्टिकल 163 का
भी वायलेशन हो
रहा है। क्योंकि
इसमें लिखा है
कि the
Chief Minister is the head.
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): क्या
वायलेशन हुआ,
यह बताओ ना।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
कलेक्टिव
रेस्पांसिबिल्टि
क्या होगी,
हाथ लगाने से
क्या होगा।
बोल रहा हूं,
सुनिये आप।
(व्यवधान)
हां बता रहा
हूं, बता रहा
हूं, आगे
बढिये।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मुझे
बहुत खुशी
हुई। यह कह
रहे हैं, क्या
हो रहा है,
बतायें। मैं
बताना चाहता
हूं।
श्री अध्यक्ष:
मैं आपको
बोलने की
अनुमति
दूंगी। वह क्या
कह रहे हैं, आप
कृपया (व्यवधान)
आप को भी मौका
दूंगा, आप
बोलने
दीजिये।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष महोदय,
यह तो चाहते
हैं, वह भी
इनकी मदद नहीं
करुंगा। Don’t
worry,
मैं आपकी मदद
करने वाला
नहीं हूं। मैं
आपसे मदद लेने
वाला नहीं
हूं, दोनों
तरफ से ही।
अध्यक्ष
महोदय,
कलेक्टिव
रेस्पांसिबिल्टि
कहां-कहां खत्म
हुई। अक्टूबर
में हमने
पढ़ा, अध्यक्ष
महोदय, सेज के
सम्बन्ध
में केबिनेट
की मीटिंग में
पूरे मिनिस्टर
नहीं गये। अध्यक्ष
महोदय,
केबिनेट के दो
मिनिस्टर्स
ने अख़बार में
इंटरव्यू
देकर अपनी बात
कही और उसके
बाद केबिनेट
की एक सब
कमेटी बन गयी।
आज दिन तक
केबिनेट की सब
कमेटी जिसके
अध्यक्ष होम
मिनिस्टर
साहब हैं,
उनका अख़बार
में स्टेटमेंट
है कि मेरे
पास इसका कोई
नोटिफिकेशन नहीं
है कि इस तरह
से सब कमेटी
बनी है।
कौंसिल आफ
मिनिस्टर्स
का पहला फैसला
आया, मुझे
नहीं कहना
चाहिए।
मंत्री को
अमेरिका ले
जाया गया,
अमेरिका में
दर्शक के रूप
में बैठाया
गया। फिल्मों
में जो गेस्ट
आर्टिस्ट
होते हैं,
गेस्ट
प्रतिनिधि की
तरह बैठाया
गया। और सेज
के सम्बन्ध
में आज दिन तक
फैसला नहीं
हुआ कि
केबिनेट की सब
कमेटी का क्या
फैसला हुआ। आज
दिन तक अध्यक्ष
महोदय, नहीं
हुआ है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, आपने
क्या अनुमति
दे दी, पाइण्ट
आफ आर्डर के नाम
से यह पूरा ही
डिस्कशन
करते रहें, सब
चीजें खोलते
चले जाएं, कोई
पाइण्टेड
बात हो तो
कहें। पाइण्ट
आफ आर्डर,
आपका 294, यह कहता
है, अध्यक्ष
महोदय।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, let me formulate it.
श्री अध्यक्ष/
164, संविधान के 164
के तहत आपने
अपनी तरपु से
एक इश्यू उठा
दिया।
विष्णु/अरुण
04.10.06/ 14.20/ 2e
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
मेरी बात
सुनिये और फिर
अपना मत रखिये
let
me say. अध्यक्ष
महोदय मेरा
पाइंट आफ
आर्डर let me summarize it and let me speak on it. My point
of order is very simple. कांस्टीट्यूशन
में आर्टिकल 153
से 167 में
एग्जिक्यूटिव
के फंक्शन
डिफाइन है।
आर्टिकल 212 में
यह डिफाइन है
कि हाउस की
प्रोसीडिंग्स
पर डिस्कस
नहीं किया
जाएगा। हाउस
में यदि यह
डिस्कशन है,
काउंसिल आफ
मिनिस्टर की
अकाउंटेबिलिटी
लेजिस्लेचर
के साथ में है
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आप तो
बहुत सीनियर
सदस्य हैं।
आप तो
कॉमन-वैल्थ
की एग्जिक्यूटिव
की मैम्बर
हैं। दुनिया
के सारे आदमी
आपको देख रहे
हैं। आपको यह
बताना पड़ेगा
कि यह 153 में जो
एग्जिक्यूटिव
के जो पावर
दिये हैं इनकी
फर्स्ट एण्ड
फोर मोस्ट
रेस्पांसिबिलिटी
है स्टेट
असेम्बली के
प्रति। स्टेट
असेम्बली की
रेस्पांसिबिलिटी
है जनता के
प्रति। यह स्टेट
असेम्बली
में पूछना
चाहते हैं।
काउंसिल आफ
मिनिस्टर,
जिसमें यह
लिखा हुआ है
कि काउंसिल आफ
मिनिस्टर की
जोइंट रेस्पांसिबिलिटी
है। क्या यह
सरकार अपनी
जोइंट रेस्पांसिबिलिटी
के कर्तव्य
को जो कांस्टीट्यूशन
में लिखा हुआ
है, उसका पालन
कर रही है? एक
उदाहरण दिया
मैंने सेज का,
दूसरा उदाहरण मैं
देना चाहूंगा
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इसी सदन
के अन्दर
माननीय गृह
मंत्रीजी ने
जो बहुत कॉम्पीटेंट
मिनिस्टर
हैं, उन्होंने
खड़े होकर
रिलिजिएस
एनडोमेंट बिल
के संबंध में
क्या कहा? यह
सदन के
रिकार्ड में
है। मुझे कहना
नहीं चाहिए ...
(व्यवधान)
फैसला हुआ
केबिनेट का
उसके बाद,
मंत्रीजी ने
हाउस के अन्दर
यह कहा। ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: उस
वक्त तो यह
प्रश्न नहीं
उठाया आपने।
उस वक्त तो
आपने यह बात
नहीं उठायी।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
क्या?
श्री
अध्यक्ष: उस
वक्त तो आपने
यह प्रश्न
नहीं उठाया।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
यह उठायी है
मैंने, आप रिकार्ड
देख लें
माननीय अध्यक्ष
महोदय, फिर
तीसरे पाइंट
की ओर माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आपका ध्यान
आकर्षित करना
चाहता हूं और
तीसरा माननीय अध्यक्ष
महोदय, हज हाउस,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, हज हाउस
बने या नहीं
बने, फैसला
किया या नहीं
किया, मैं
नहीं जानता पर
माननीय अध्यक्ष
महोदय, केबिनेट
का एक मिनिस्टर
यह कहे कि हज
हाउस नहीं
बनेगा और यह
आर्टिकल यह
कहता है कि
एडमिनिस्ट्रेटिव,
आर्टिकल 167 के
अन्तर्गत ...
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यह
आपको कहा है
क्या? नहीं,
आपको कहा है
क्या यह? ... (व्यवधान)
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
मैं नहीं कह
रहा । यह आप फैसला
कर लें अपने
हिसाब से ... (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): नहीं,
आपको कहा है
क्या यह? ... (व्यवधान)
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
मैं कुछ नहीं
कह रहा ।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
मंत्रीजी ने
आपको कहा है
क्या यह?
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
जो बात आपने
ई-टीवी पर कही
है वही बात
मंत्रीजी ने
ई-टीवी में
कही है। यह
रिकार्ड है। ...
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): जो बात
आप यहां पर
परसनल नॉलेज
के आधार पर बोल
रहे हैं ... (व्यवधान)
यहां परसनल
नॉलेज के आधार
पर कहा जाता है
वह ... (व्यवधान)
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
जो बात आपने
चीफ-व्हिप की
हैसियत से, जो
बात कही है
ई-टीवी में
सरकार के
खिलाफ, वह की
वह बात ई-टीवी
के अन्दर कही
है, रिकार्ड
मंगा लीजिए।
विराजिये आप,
सुनिये। आपको
बोलना है तो
आप बाद में बोल
लीजिए।
विराजिये। This is not a
debate.
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): जो बात
आप यहां पर कह
रहे हैं, वह
किस आधार पर
कह रहे हैं।
मैंने ई-टीवी
में जो कुछ
कहा है वह ... (व्यवधान)
यहां परसनल
नॉलेज के आधार
पर कहा जाता
है। ... (व्यवधान)
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, डिबेट
का यह कोई
तरीका नहीं
है। ... (व्यवधान)
I am
on the possession of the Floor of the House.
श्री
अध्यक्ष:
आपने एक बात
कह दी। ... (व्यवधान)
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण): ... (व्यवधान)
आपने कहा था
कि 100 वर्ष तक
नहीं बनेगा।
अब आप खुद बदल
रहे हैं। आपने
खुद ने कहा है
मुख्य
सचेतकजी, कि
हज हाउस 100 वर्ष
नहीं बनेगा।
आपने खुद ने
अभी कहा है।
आज की
प्रोसीडिंग्स
देख लीजिए। आज
की
प्रोसीडिंग्स
देख लीजिए। ...
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मैंने
यह कहा है कि
यदि मुसलमान
यदि, माहिर
आजाद यह कहेगा
कि ... (व्यवधान)
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण): यदि
का कोई सवाल
नहीं है। आज
का सवाल है।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): घनश्यामजी
नहीं हैं, आप
क्यों बैठे
हैं? ... (व्यवधान)
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण):
आपने कहा है।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): हिन्दू
और मुसलमानों
को लड़ाकर हज
हाउस 100 साल तक
नहीं बनेगा। ...
(व्यवधान)
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण):
आपका रिकार्ड
है, आपके
रिकार्ड में
है, आपने कहा
कि 100 वर्ष तक
नहीं बनेगा।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यह कहा
है कि हिन्दू-मुसलमानों
को लड़ाकर 100
साल तक भी हज
हाउस नहीं बन
सकता, जो
माहिर आजाद ने
जो कृत्य
किया है वह ... (व्यवधान)
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण):
आपने उस समय
कहा कि जब
मुख्य
मंत्रीजी ने
इसी सदन में
यह कहा था कि
दोनों हज हाउस
बनेंगे एक तरफ
तो मुख्य
मंत्रीजी क्या
करती है और
दूसरी तरफ आप
क्या कहना
चाहते हैं? ... (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मुख्य
मंत्रीजी तो
करना चाहती
हैं लेकिन आप
राजनीतिक
रोटियां
सेंकना चाहते
हैं। मुख्य
मंत्रीजी
बनाना चाहती
हैं और आप
राजनीतिक रोटियां
सेंकना चाहते
हैं और कतले
आम करवाना चाहते
हो। हिन्दू
और मुसलमानों
को लड़ाना
चाहते हो, इस
हालत में वह
नहीं बन सकता,
यूं कहना
चाहता हूं। ...
(व्यवधान)
श्री
बृजकिशोर शर्मा
(जयपुर
ग्रामीण): मत
बनाओ। मत
बनाओ। कौन कह
रहा है? ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
सरकारी मुख्य
सचेतकजी, यह
प्रश्न हज
हाउस बनाने का
या न बनने का
यहां पर नहीं
है। आप क्यों
कह रहे हो इस
बात को? आपने
कही है क्या
यह बात?
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
नहीं-नहीं,
अपना काम ही
नहीं है यह। ...
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
बृजकिशोरजी
ने जो कहा, उन्होंने
कहा मैंने
उसका जवाब दे
दिया। ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
बृजकिशोरजी
कुछ भी कहें ...
(व्यवधान) इस
समय
सी.पी.जोशीजी
का पाइंट आफ
आर्डर चल रहा
है। ... (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): वे कुछ
भी कह दें, ऐसा
थोड़े ही हो
सकता है? हम
कोई सुनने
थोड़े ही आये
हैं यहां पर? ...
(व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
उनको कौनसा घर
पर जाकर कहा? ...
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य,
आप अपनी बात
एक मिनट में
समाप्त कर
दें ताकि आगे
उसकी
कार्यवाही हो
सके। एक मिनट
में अपनी बात
समाप्त कर
दें। ... (व्यवधान)
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक मिनट
में कोई तकलीफ
नहीं है मुझे।
आप कहेंगे तो
मैं वैसे ही
बंद कर दूंगा,
मुझे कोई तकलीफ
नहीं है लेकिन
मैं आपका ध्यान,
मैं आपसे
प्रोटेक्शन
चाहता हूं। आप
एक
प्रीविलेज्ड
मैम्बर है एक
हाउस के, यह
रिकार्ड में
जाएगा। यह रिकार्ड
में जाएगा कि
आपने एक मैम्बर
बनने के बाद ...
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
आर्टिकल 164 के
बाद ... (व्यवधान)
आप कन्क्लूड
करिये। यस।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
नहीं-नहीं, let me conclude
it. Don’t infer it. Let me conclude it. I said ‘Articles’. I am not saying
‘Article”. Let me conclude it. No. 1. this is aq violation of the Article. Let
me say very categorically. I want to say. I want to quote it. Article 163 says
that; “ There shall be a Council of Ministers with the Chief Minister at the
head.” As a Chief Minister अपने काम
को परफोर्म
करने में फेल
रही है, नम्बर-1,
नम्बर-2
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आर्टिकल
164- “Other
provisions as to Ministers. The Chief Minister shall be appointed by the
Governor and other Ministers shall be appointed by the Governor on the advice
of the Chief Minister, and the Ministers shall hold office during the pleasure
of the Governor.” I have quoted the Kaul and Shakdhar. या तो
चीफ मिनिस्टर
और मिनिस्टर
जो उनके साथडिसेंट
रखते हैं
पॉलिसी में
उनको रिजाइन
करें या खुद
रिजाइन करें
चीफ मिनिस्टर,
चीफ मिनिस्टर
अपनी परफोर्म
करने में फेल
रही हैं।
आर्टिकल 164 (1),
नम्बर- 2
आर्टिकल
माननीय अध्यक्ष
महोदय,”The Council of Ministers shall be collectively
responsible to the Legislative Assembly of the State.” यह जो
माननीय मुख्य
मंत्रीजी-
वसुन्धराजी
की जो सरकार
है, इनके
मंत्री अपनी
कलेक्टिव
रेस्पांसिबिलिटी,
जो स्टेट के
लेजिस्लेचर
के प्रति रेस्पांसिबल
है, अपने इस
कर्तव्य का
निर्वहन करने
में फेल रही
है और यह जो
जितना भी जो
काम कर रही है
यह
गैर-कानूनी,
गैर संवैधानिक
कार्य है
इसलिए सरकार
को रहने का
अधिकार नहीं
है। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, यह तीसरा
163, 167 ”It shall be the duty of the Chief Minister of each State; (a) to
communicate to the Governor of the State all decisions of the Council of
Ministers relating to the administration of the affairs…”
माननीय अध्यक्ष
महोदय, “…relating to the administration of the affairs of the
state and proposals for legislation.” यह जो
एडमिनिस्ट्रेटिव
निर्णय है कि
कहां पर हज
हाउस बनेगा या
नहीं बनेगा,
कहां पर यह
कमेटी बनेगी,
इतनी बनेगी,
यह एडमिनिस्ट्रेटिव
निर्णय को भी
गवर्नर को कम्यूनिकेट
करने का काम
चीफ मिनिस्टर
का है। मुख्य
मंत्री अपने
इस कर्तव्य
का निर्वहन
करने में भी
असफल रही है
इसलिए मेरा
माननीय अध्यक्ष
महोदय, और चौथा,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह एक
आर्टिकल 164 (3) के
अन्दर इन
मंत्रियों ने
शपथ ली है। यह
सब मंत्री इल-विल
चाहे वह कोटा
के मंत्री हो,
माइनोरिटी, इसाई
के प्रति रखना
हो, या
माइनोरिटी का
काम रखना हो,
यह इल-विल
लगता है।
संविधान की
शपथ के प्रति
यह निष्ठावान
नहीं है इसलिए
मंत्री बने
रहने का कोई अधिकार
नहीं है।
इसलिए माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं कहना
चाहता हूं कि
यह आर्टिकल्स
आफ कांस्टीट्यूशन,
जिसके अन्तर्गत
यह विधान सभा
बनी है, जिसके
अन्तर्गत यह
नियम और कानून
बने हैं, यह
हमें कम्पेल
करते हैं,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, कि 212 के
अन्तर्गत हम
कोर्ट में
नहीं जा सकते।
हमारे पास एक
ही ऑप्शन बचा
है, माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आप अध्यक्ष
की हैसियत से
या तो राज्य
सरकार को निर्देश
दें कि यह
सरकार अपने
जिन आर्टिकल्स
का, कांस्टीट्यूशन
का वॉयलेशन कर
रही है, उनको
ठीक करके सदन
की दुबारा
मीटिंग
बुलाये और पास
करे, यह सरकार
को आप निर्देश
दें।
श्री
ओम बिरला
(संसदीय सचिव):
यह मनमोहन
सिंहजी को समझा
दें आप। ... (व्यवधान)
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अन्यथा
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आर्टिकल 356
के अन्तर्गत
हम भारत सरकार
से यह मांग
करेंगे कि यह सरकार
संवैधानिक
सरकार नहीं
है। इस सरकार
को भंग किया
जाए और नये
चुनाव करवाये
जाए जिससे जनता
का मेंडेट पता
पड़ सके कि यह
सरकार किस बात
की है। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, कोल्यूजन
सरकार का एक
अलग जोन होता
है । या तो यह
कह दें कि
वसुन्धरा
राजे की सरकार
है तो मुझे
कुछ नहीं
बोलना है। यदि
भारतीय जनता
पार्टी की
सरकार है तो
यह सरकार अपने
कर्तव्यों
का निर्वहन
करने में असफल
रही है इसलिए
मेरा पाइंट आफ
आर्डर है।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): कोल्यूजन
गवर्नमेंट के
लिए अलग से
कांस्टीट्यूशन
है क्या? ... (व्यवधान)
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आपसे निवेदन
है कि आप अध्यक्ष
महोदय की
हैसियत से क्योंकि
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आर्टिकल,
इस कांस्टीट्यूशन
के अन्तर्गत
आप आफिसर है Speaker is
defined as an Officer. आफिसर है
स्पीकर।
एग्जिक्यूटिव
का काम मंत्री
और मुख्य
मंत्री करते
हैं। हम हाउस
के मैम्बर्स
हैं। यह आप
सबकी
अकाउंटेबिलिटी
लेजिस्लेचर,
असेम्बली के
प्रति है, आप
आफिसर होने के
नाते आप
कंसोलिडेटेड
फण्ड से पैसा
लेते हैं,
राजस्थान की
पाँच करोड़ की
जनता आपसे आशा
करती है कि यह
जो सरकार
गैर-कानूनी
ढंग से अपने
कर्तव्यों
का निर्वहन कर
रही है, इस
सरकार को
निर्देश दें
कि या तो अपने
काम-काज को
ठीक ढंग से
निर्वहन करें,
कानून-सम्मत,
अन्यथा इस
सरकार को भंग
करके नये
चुनाव करने के
लिए आप भारत
सरकार को रिक्वैस्ट
करें, यह हम
आपसे निवेदन
कर रहे हैं
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अध्यक्ष:
हां, पी.ए.डी.
मिनिस्टर।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आपकी
आज्ञा से जब
मैं राजस्थान
सिविल न्यायालय
(संशोधन)
विधेयक, 2006 अध्यादेश
सदन के पटल पर
रख रहा था तब
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने पाइंट आफ
आर्डर के नाम
पर सेक्शन 294
को कोट करते
हुए 1 घंटे का
शानदार भाषण
दिया। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, यह पहली
बार होगा कि
जब ... (व्यवधान)
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
शानदार भाषण
नहीं, मुझे
कोई तकलीफ
नहीं है, मैं
मान लूंगा,
मुझे कोई तकलीफ
नहीं है पर ... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): मैंने
आपको सुना है।
... (व्यवधान)
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा): मैं
तो खाली यह
पूछ रहा हूं,
क्वालिफाई
कर रहा हूं कि
यह मुख्य
मंत्रीजी की
फलेटरी में हो
रहा है या
कांस्टीट्यूशन
के मुताबिक हो
रहा है? यह पूछ
रहा हूं। फिर
कह रहे हैं
अच्छा भाषण
दे रहे हैं। ... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, यह
पहली बार होगा
जब पाइंट आफ
आर्डर को
उठाने के नाम
पर किसी
माननीय सदस्य
ने सदन के समय
का दुरुपयोग
किया होगा।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं आपका
ध्यान 294,
पाइंट आफ
आर्डर की ओर
दिलाना चाहता
हूं। 294 औचित्य
प्रश्न और उन
पर विनिश्चय
। औचित्य
प्रश्न इन
नियमों या
संविधान के
ऐसे अनुच्छेदों
के, जिससे सदन
का कार्य
अभिनियमित हो,
यानि माननीय
अध्यक्ष
महोदय, “as regulate the business of the House”
मेरी समझ में
नहीं आया कि
ऐसा कौनसा “as regulate the business of the House”
करने के लिए
इन्होंने
पाइंट आफ
आर्डर उठाया।
जिसके बारे
में इन्होंने
इस तरह की व्याख्या
की। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, हम सब
जानते हैं,
यहां सदन में
आने वाले सब
माननीय सदस्य
जानते हैं कि
राजस्थान
विधान सभा से,
जहां भी नियम
और प्रक्रिया बनी,
वह अर्टिकल 208
के अन्तर्गत
बनी और उन
सारे नियम और
प्रक्रियाओं
से हम सब बंधे
हुए हैं। पहला
मैं निवेदन
करना चाहता
हूं, माननीय
अध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
आर्टिकल 208 के
तहत जिस नियम
और प्रक्रिया
का जिक्र
किया।
शिव/चौहान/14.30/2f/4.10.2006
इन्होंने
उसका
दुरूपयोग
करके सदन का
समय बिना मतलब
जाया किया।
अध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
आर्टिकल 163 की
बात कही,
आर्टिकल 164 की
बात कही। एक
मिनट (व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी
(नाथद्वारा):
आप तो अपने
पक्ष की बात कहो।
पार्लियामेंट
अफेयर्स
मिनिस्टर
बहुत लिट्रेट
(व्यवधान) आप
तो अपने पक्ष
की बात करो।
मुख्य
मंत्रीजी के
घर पर भाषण
नहीं देना है,
यहां हाउस के
अंदर भाषण
देना है। Come to the point and talk about the point. Be
relevant. You are not allowing to speak on it.
मोहम्मद
माहिर आजाद:
अगर आपके पास
कोई मसाला है,
कोई बात कहना
चाहें तो तो
कहें, समय
आबाद किया,
बर्बाद किया
यह देखना आसन
का काम है, यह
अध्यक्षजी
का काम है। यह
आपका काम नहीं
है संसदीय
कार्य
मंत्रीजी।
इन्होंने
बहुत कानूनी
पेचीदगी की
बात कही है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: अध्यक्ष
महोदय, मुझे
आपका
प्रोटेक्शन
चाहिये, मुझे
आपका संरक्षण
चाहिये। अध्यक्ष
महोदय, हमने
पूरे एक घण्टे
पूरी बात सुनी
है।
श्री
अध्यक्ष:
प्रतिपक्ष के
माननीय सदस्य,
जयपुर
ग्रामीण से
आने वाले
माननीय सदस्य,
जब नाथद्वारा
से आने वाले
माननीय सदस्य
बोल रहे थे तो
उन्होंने
अपनी बात
एटलेंथ कही।
अब जो कुछ वह
कहना चाह रहे
हैं तो वह भी
सुन लीजिये।
(व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी
(नाथद्वारा): Don’t protect
him. You see the proceedings. Don’t encourage him. We expect from you. Don’t
protect the Minister.
श्री अध्यक्ष:
मैंने एटलेंथ
ही तो कहा है।
डॉ.सी.पी.जोशी
(नाथद्वारा): From half an hour
the Minister is talking and you are protecting him.
श्री अध्यक्ष:
एटलेंथ ही तो
कहा है, मैंने
एक घण्टा तो
नहीं बताया।
डॉ.सी.पी.जोशी
(नाथद्वारा): This is very
unfortunate.
श्री अध्यक्ष:
एटलेंथ का
मतलब समय सार
होता है।
मैंने एटलेंथ
ही तो कहा है।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
अध्यक्ष
महोदय, यह
इनकी बात है।
(व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी
(नाथद्वारा):
यह मेरी आदत
तो ठीक है। आपकी
आदत मुख्य
मंत्रीजी के
प्रति ....(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
इसके कारण आप
निकाल दिये गये,
माफी मांगनी
पड़ी पर आप
अपने आपको
सुधार नहीं
पाये।
डॉ.सी.पी.जोशी
(नाथद्वारा):
मुझे किससे
माफी मांगनी
पड़ी, न मैं
आर.एस.एस. के
प्रति निष्ठावान
हूं, न मुख्य
मंत्री के
प्रति निष्ठावान
हूं। मैं
कानून के
प्रति निष्ठावान
हू इसलिये
मुझे कोई चिन्ता
नहीं है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : अध्यक्ष
महोदय, यहां
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने संविधान के
आर्टिकल 163 का
जिक्र किया,
संविधान के
आर्टिकल 164 का
जिक्र किया और
इन्होंने
अपनी पूरी बात
वैसे तो 163 और 164
मैं भी पढूं तो
सदन का समय
जाया होगा,
इन्होंने
अपनी पूरी बात
संविधान के
आर्टिकल 164(2) पर आकर
केन्द्रित की
और 164(2) यह कहता
है मंत्री
परिषद् राजस्थान
सरकार के
प्रति
सामूहिक उत्तरदायी
है, हम मानते
हैं । अध्यक्ष
महोदय, प्रत्येक
मंत्री के
कृत्य के
लिये सम्पूर्ण
मंत्रि-परिषद्
उत्तरदायी
है, हम यह भी
मानते हैं और
उसके बाद इन्होंने
164(3) में थर्ड है
उसमें ओथ का
जो फार्मूला
है, उसका
जिक्र भी
किया। अध्यक्ष
महोदय, मेरी
समझ में नहीं
आया कि यह
अपने पूरे
भाषण के बाद
क्या कहना
चाहते हैं ? अध्यक्ष
महोदय, मैं
माननीय सदस्य
का ध्यान
आकर्षित करना
चाहूंगा, अध्यक्ष
महोदय, उस समय,
जिस समय आप भी
सदन की माननीय
सदस्या थीं।
हम उधर बैठते
थे, मैं
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
17.04.2001, वह समय जब
राजस्थान के
इस विधान सभा
के इतिहास में
आपने किसी भी
कारण से बजट
लीक किया था
और इसी सदन
में उधर बैठे
जब हम मांग कर
रहे थे कि आप
आफिशियल सीक्रेट
एक्ट के तहत
इसकी इंक्वायरी
कराओ। मैं
आपकी बात और
तत्कालीन
प्रतिपक्ष के
नेता और उप
राष्ट्रपति
महोदय की बात
को कोट करना
चाहूंगा। आप कहें
तो मैं
प्रोसिडिंग
आपको देदूं।
श्री भैरोंसिंह
शेखावत:
आफिशियल
सीक्रेट एक्ट
में मुकद्मा
बनाया जाये।
डा.सी.पी.जोशी:
ठीक है, आप
चाहते हैं।
श्री भैरोंसिंह
शेखावत: हां।
डॉ.सी.पी.जोशी:
हम मान लेंगे,
हमें क्या
तकलीफ है? कोई
तकलीफ नहीं।
श्री
भैरोंसिंह शेखावत:
उपाध्यक्ष
महोदय, मुझे
बहुत खुशी है।
मैं सरकार को भी
धन्यवाद
दिये बिना
नहीं रह सकता।
आपने आफिशियल
सीक्रेट एक्ट
में मुकद्मा
बनाकर इस पर
कार्यवाही करने
की बात को स्वीकार
किया है। श्री
खेतसिंह
राठौड़,
पार्लियामेंट
अफेयर्स
मिनिस्टर :
यहां कहां से
ले आये ? गवर्नमेंट
ने कहां एक्सेप्ट
किया? यह तो
इनकी व्यक्तिगत
राय है। उसके
बाद जो उस वक्त
माननीय अध्यक्ष
महोदय बिराज
रहे थे, उन्होंने
यह कहा कि यह
इनकी व्यक्तिगत
राय हो सकती
है। यह
रिकार्ड पर है
अध्यक्ष
महोदय, यह
सारी
प्रोसिडिंग्स।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: बात
कैबिनेट के
डिसीजन की हो रही
है। आप समझो
बात को। वह
कैबिनेट का
डिसीजन नहीं
था। यह
कैबिनेट के
डिसीजन की बात
है।
डॉ.सी.पी.जोशी
(नाथद्वारा):
राठौड़ राठौड़
को लेकर आये।
जैसे खेतसिंह
जी राठौड़, वैसे
राजेन्द्र
जी राठौड़।
कोट कर रहे
हैं, किसको
कोट कर रहे
हैं ...(व्यवधान)
लगाते हैं आप,
यह बातें
दूसरों को कहो
आप। ..(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ :
बिराजो आप।
(व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी
(नाथद्वारा):
बिराजिये आप। Don’t quote
irrelevant things. उसकी
क्या हालत
हुई पता है न?
(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : आप
बिराजो तो
सही, आप नाराज
क्यों हो रहे
हो? आपकी बात
हमने पूरी
सुनी, आप
नाराज क्यों
हो रहे हो? (व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी
(नाथद्वारा):
यह बातें दूसरों
को बताया करो
आप।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: पोल
खुल रही है
आपकी। (व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी
(नाथद्वारा):
मेरी काहे की
पोल खुल रही
है, पोल तो
आपकी खुल रही
है। मुख्य
मंत्रीजी को
गलत राय देकर
सरकार की
दुर्गति कर
रखी है। आप कह
रहे हैं पोल
खुल रही है।
एक आदमी मुख्य
मंत्रीजी के
पक्ष में खड़ा
नहीं हो रहा
है, क्या
दुर्गति कर
रखी है आपने।
सारी दुर्गति
कर रखी है
मुख्य
मंत्रीजी और
खड़े होकर बात
कर रहे हैं।
एक आदमी पक्ष
में खड़ा नहीं
हो रहा है और
दुर्गति की
बातें कर रहे
हैं। दुर्गति
खुद की कर रखी
है और दूसरों
की बातें कर
रहे हैं। (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा :
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
कैबिनेट
डिसीजन के बाद
कलेक्टिव रेस्पांसिबिलिटी
की बात है।
बात तो सही है
। (व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी
(नाथद्वारा): Was it a
collective decision? Don’t quote it. Is it a Cabinet decision? Don’t talk
irrelevant things.
श्री
हरिमोहन
शर्मा: राजस्व
मंत्री क्या
कर रहे थे,
दूसरे मंत्री
क्या कर रहे
थे? कैबिनेट
डिसीजन के बाद
जो कलेक्टिव
रेस्पांसिबिलिटी
की बात आपने
नहीं निभाई,
सवाल यह है
इसलिये
रिजेक्ट
किया जाना
चाहिये।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
यह अपनी बात
कह देंगे और
सुनेंगे
नहीं।
डॉ.सी.पी.जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, यह
सदस्य को
बोलने का
अधिकार है it was not a
collective decision. I standby about which what I said. It was not a
collective. It was not a Cabinet decision. Don’t misquote the things.
राजेन्द्र
राठौड़ : एक
सैकण्ड, मैं
पूरी कर दूं।
(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा: अब
आपकी इस बात
को क्या समझा
जाये?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन कर रहा
था, यही नहीं
अभी केन्द्रीय
सरकार ने सेज
का एक्ट
पारित किया।
सेज का एक्ट
पारित किया
संसद में 2005 में
और एक्ट बन
गया। नीतिगत
निर्णय हो गया
और आपने देखा होगा
केन्द्रीय
सरकार के वित्त
मंत्री का अलग
बयान आया क्योंकि
सोनिया
गांधीजी का
अलग बयान था,
उद्योग मंत्रीजी
का अलग बयान
आया। इनकी
दिल्ली की
सरकार के
मंत्री, जो
कैबिनेट का
फैसला, जिस
फैसले के आधार
पर एक्ट बना,
पार्लियामेंट
ने पास किया,
कैबिनेट ने पास
किया और उसमें
विरोधी बयान
दे।
डॉ.सी.पी.जोशी
(नाथद्वारा):
कैबिनेट के
निर्णय के बाद
में मंत्री
बोले क्या ? बतायें,
फालतू बात कर
रहे हैं,
इर्रिलेवेंट
बात कर रहे हैं।
भारत सरकार के
सेज के अंदर
एक भी आदमी
निर्णय के बाद
नहीं बोला है।
Don’t
misquote it.
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: अध्यक्ष
महोदय, यह कई
अध्यक्षीय
व्यवस्थाएं
हैं, आप कहें
तो इन अध्यक्षीय
व्यवस्थाओं
को पढ़कर सुना
सकता हूं
जिनमें यह कहा
गया जब तक
आपकी कोई व्यक्तिगत
जानकारी पुख्ता
नहीं हो, ऐसे
अखबारों के
माध्यम से
कोई बात आई
होगी, आशंकाओं
के आधार पर
इन्होंने कह
दिया कि मुख्य
मंत्री और
मंत्रियों की
राय अलग अलग
है जबकि मुख्य
मंत्रीजी के
नेतृत्व में
पूरी
मंत्रिमण्डल
उनके साथ है
और यह अनर्गल
बात करके इस
तरह की बात कर
रहे हैं।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहता हूं अभी
हाल में .....(व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी
(नाथद्वारा): अभी
हाल में ताली
बजाई, वह भी
रिकार्ड हुआ
है। यह
रिकार्ड हुआ
है, वहां
वीडियो कैमरा
है कितने ताली
बजाई, यह भी ध्यान
रखना।
श्री हरिमोहन
शर्मा: एक
कैबिनेट
मिनिस्टर के
बॉयकाट किया
है और अपने स्टेटमेंट
दिये । (व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी
(नाथद्वारा):
कितने ताली
बजाई, नोट कर
लेना । (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : अध्यक्ष
महोदय, यह
इनके प्रधान
मंत्रीजी अभी
हवाना के अदंर
गये।
मोहम्मद
माहिर आजाद:
हमारे प्रधान
मंत्री नहीं,
भारत के
प्रधान
मंत्री
बोलो।पैसा
लेने जाते हो
तब तो लल्लों-चप्पों
की। भारत के
प्रधान
मंत्री
बोलिये । आपको
इतना ही पता
नहीं है
मनमोहन
सिंहजी भारत
के प्रधान
मंत्री हैं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़:
मनमोहन सिंह
जी और रक्षा
मंत्री प्रणव
मुखर्जी ,
इनके दोनों के
बयानों का
जिक्र करना
चाहता हूं।
रक्षा मंत्री
प्रणव
मुखर्जी यह
कहते हैं कि
पाकिस्तान
आंतकवाद की
...(व्यवधान) ...
मनमोहन सिंह
जी यह कहते
हैं कि आंतकवाद
का पाकिस्तान
के साथ
मैकेनिज्म
तय करना
पड़ेगा। (व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी
(नाथद्वारा):
भारत सरकार को
फालो कर रहे
हैं ? सीधे
सीधे कह
दीजिये, बात
खत्म हुई। आज
जो भारत सरकार
में हो रहा है,
राजस्थान
सरकार नहीं कर
रही है, नियम
और कानून नहीं
मानती, बात
खत्म करते
हैं। आप खड़े
होकर बोल
दीजिये यह बात
कि राजस्थान
सरकार संविधान
से नहीं चल
रही है। भारत
सरकार जो कर
रही है वैसा
का वैसा हम कर
रहे हैं, बात
खत्म। बातें
कर रहे हैं
अपनी। (व्यवधान)
प्रो0
सांवर लाल:
भारत सरकार
बिना
संवैधानिक व्यवस्थाओं
के चल रही है
क्या, आप यह
बताइये?
डॉ.सी.पी.जोशी
(नाथद्वारा):
और क्या है
बोलो यह । (व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद:
इधर की सरकार
तो नागपुर से
चल रही है।
जयपुर से नहीं
नागपुर से चल
रही है। (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: अपना
आईना तो देख
लो पहले, अपना
चेहरा तो देख
लें।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
यह
आंतकवादियों
से तो नहीं चल
रही है।(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा: राजस्थान
के मुख्य
मंत्रीजी और
राजस्थान की
वर्तमान
सरकार की जो
सार्वजनिक
रूप से जनता
के सामने
दुर्गति हो
रही है, ऐसी
दुर्गति
राजस्थान के
इतिहास में
कभी नहीं हुई।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
हर बात पर
आपका बोलना
आवश्यक नहीं
है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: आप
दोनों इस
दुर्गति के
लिये पूरे
जिम्मेदार
हो। आप भी
जिम्मेदार
हो इसके लिये।
(व्यवधान)
श्री
कालूलाल
गुर्जर: केन्द्रीय
सरकार की ऐसी
दुर्गति भी
कभी नहीं
हुई।(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: अध्यक्ष
महोदय, अभी
संसद पर हमले
की जिसने
रणनीति बनाई
आंतककारी मोहम्मद
अफजल, उसको
फांसी की सजा
दी। सबको
मालूम है। (व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद:
अजहर मसूद को
कंधार कौन
छोड़कर आया
था, राजेन्द्र
जी, यह भी बताओ
आप? अजहर मसूद
को कंधार कौन
छोड़कर आया था
? तत्कालीन
विदेश मंत्री
छोड़कर आये थे
।
(व्यवस्था
सूचक घण्टी)
श्री
हरिमोहन
शर्मा: और उन
पैसों की
अटैची का क्या
हुआ ? हवाई
जहाज में जो
रूपयों की
अटैची थी उसका
क्या हुआ ? अजहर
मसूद की बात
करते हो। अजहर
मसूद को कौन
छोड़कर आया
था, इसका भी
जवाब देओ।
अजहर मसूद को
कंधार कौन
छोड़कर आया
था, इसका भी
जवाब देओ। (व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसंमद):
उसको
सार्वजनिक
फांसी दी
जायेगी अफजल
गुरू को। आप
उसको बचा नहीं
सकते। अफजल
गुरू को
सार्वजनिक
फांसी दी
जायेगी। संसद
पर हमला करने
वालों को
बचाने वालों,
उसको फांसी की
सजा दी
जायेगी। आप क्या
संसद के
हमलावरों को
बचाते हो ?
श्री
अध्यक्ष:
राजसंमद से
आने वाले
माननीय सदस्य,
क्यों उत्तेजित
हो जाते हैं
आप हर बात पर?
श्री
बंशीलाल खटीक:
संसद पर हमला
करने वाले
लोगों को
बचाने का काम
करते हैं यह
लोग।
msr/usc/2g/1440/04102006
श्री
अध्यक्ष: आसन
पैरों पर है।
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
उनको
सार्वजनिक
फांसी दी जानी
चाहिए।
श्री
अध्यक्ष: आसन
पैरों पर है।
सदन में सब को
अपनी बात कहने
का हक है, आवश्यक
नहीं है कि हर
बात का आप
जवाब दें। कोई
आवश्यक नहीं
है आपके लिए।
...(व्यवधान)...
नौ, नौ, स्थान
ग्रहण करें।
स्थान ग्रहण
करें आप।
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
संसद पर हमला
करने वालों का
हम पक्ष नहीं
लेने देंगे।
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण करें।
वो कह रहे हैं
न तो, आप क्यों
बोल रहे हो
बीच में। ऐसे
तो सब जगह एक
जैसा हो रहा
है, किसने
पहले क्या
किया, अब क्या
कर रहा है, सब
को सब मालूम
है कहां क्या
हो रहा है ...(व्यवधान)...
छोड़ो इन
बातों को।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
जो हो रहा है
लेकिन आपका
फैसला बिलकुल
नये ढंग का
होना चाहिए कि
अब क्या हो
रहा है और कब
क्या हो रहा
है ...(व्यवधान)...
आप इतिहास
कायम करो,
मैडम। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: कब
क्या होगा,
क्या नहीं
होगा, मैं
दोनों तरफ से
बात सुन रही
हूं, फैसला
उसके बाद
दूंगी।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन कर रहा
था कि संसद पर
हमले की
रणनीति बनाने
में अफजल गुरु
को फांसी की
कसजा हुई, जम्मू-काश्मीर
के मुख्यमंत्री
जो इनके बहुत
बड़े नेता
हैं, गुलामनबी
आजाद, वो यह
मांग कर रहे
हैं कि इनकी
फांसी की सज़ा
माफ कर दी
जाए। वो मांग
कर रहे हैं और
ज म्मु-काश्मीर
के उप-मुख्यमंत्री,
मंगतराम कह
रहे हैं कि
इनको फांसी की
सज़ा बहाल रखी
जाए। ...(व्यवधान)...
इनकी कथनी और
करनी का अन्तर
देखिये, अध्यक्ष
महोदय, इसलिए
मैं निवेदन
करना चाहूंगा
...(व्यवधान)...
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): अध्यक्ष
महोदय, यह 294
कौनसा पढ़ रहे
हो? ...(व्यवधान)...
यह आप काश्मीर
कहां पहुंच
गये?
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): यह
कौनसे
आर्टिकल में
है, यह तो बता
दो आप। ...(व्यवधान)...
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): हां, यह
पढ़ो
आर्टिकल। ...(व्यवधान)...
यह पाइण्ट ऑफ
आर्डर का जवाब
दे रहे हैं या
काश्मीर
पहुंच गये।
...(व्यवधान)...
हां, कहां
पहुंच गये आप?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, पाइण्ट
ऑफ आर्डर के
नाम पर ...(व्यवधान)...
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): कहां
पहुंच गये आप।
...(व्यवधान)...
अजहर मसूद को
छोड़ आओ जब
ठीक, तब नहीं
बोलो, विदेश
मंत्री आपका,
तब बोली बंद।
...(व्यवधान)...
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
एक ही काफी
है। ...(व्यवधान)...
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
क्या मांग कर
रहे हैं अफजल
को फांसी से
छुड़ाया जाए,
अफजल गुरु को
तो सार्वजनिक
फांसी देनी चाहिए
और आप जैसे
ऐसे पक्ष लेने
वालों को भी
सज़ा देनी
चाहिए।
एक
माननीय सदस्य:
हो गया फैसला
वो तो हो गया।
श्री
अध्यक्ष: क्या
कह रहे हैं यह?
आप क्या कह
रहे हो?
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
मंत्री महोदय,
गुलामनबी आजाद
को तो कोट कर
दिया पर हिन्दुस्तान
के इतिहास में
किसी मुख्यमंत्री
पर अपने
मंत्रियों की
जासूसी करने
और फोन टेपिंग
करने के
मंत्रियों ने
आरोप नहीं लगाये
होंगे, इसका
जवाब दो आप।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, कहां
बात आ गयी यह?
श्री
अध्यक्ष: इस
बात से इसकी
क्या
रिलेवेन्सी
है ...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): जब
कलेक्टिव
रेस्पोंसिबिलिटी
पर बात हो रही
है ...(व्यवधान)...
पूरे तीन साल
सामूहिक उत्तरदायित्व
का उल्लंघन
इस सरकार ने
किया है, पूरे
तीन साल।
श्री
भवानी सिंह
राजावत
(संसदीय सचिव):
बेबुनियाद आरोप
आप ही लगा
सकते हो।
एक
माननीय सदस्य:
एक भी दिन
नहीं किया है।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): किया
है। ...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मुझे
अनुमति दे रखी
है आपने, मुझे मेरी
बात पूरी करने
की अनुमति
आपने प्रदान
कर रखी है।
श्री अध्यक्ष:
उनको बात तो
पूरी करने
दीजिए।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): मुझे बात
तो पूरी करने
दें। ...(व्यवधान)...
अध्यक्ष
महोदय, में यह
निवेदन कर रहा
था कि पाइण्ट
ऑफ आर्डर की
आड़ में कुछ
काल्पनिक
सवाल खड़े
करने की कोशिश
माननीय नाथद्वारा
से आने वाले
सदस्य ने की
है। राजस्थान
के मंत्रिमण्डल
का फैसला नहीं
था कि हज हाउस
बने या नहीं
बने और किसी
भी मत्रिमण्डल
के फैसले के
खिलाफ किसी
मंत्रियों की
दूसरी राय भी
नहीं थी। कोई
समाचार
पत्रों में,
कतिपय समाचार
पत्रों में
कोई समाचार
प्रकाशित हुआ
होगा, उसके
आधार पर इस
सदन के अन्दर
एक बार नहीं,
दो बार नहीं,
अध्यक्ष
महोदय, आप यह
कहें ---
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
कटारियाजी
खड़े हो कर बोल
दें तो विथ्ड्रा
कर लेंगे।
कटारियाजी
खड़े हो कर
बोल दें कि
सेज के बारे
में नहीं बोले
उन्होंने कि
यह जानकारी
नहीं है।
कटारियाजी
खड़े हो कर
बोल दें कि इस
ए.सी.एस.टी. की
कमेटी के बारे
में मुझे
जानकारी नहीं
है तब भी हम
मान लेंगे।
...(व्यवधान)...
माननीय
मंत्रीजी
बैठे हुए हैं,
बोल दें, हमें
विथ्ड्रा
करने में क्या
तकलीफ है। ...(व्यवधान)...
एक
माननीय सदस्य:
हज हाउस के
लिए लैण्ड
अलाटमेण्ट
केबिनेट में
नहीं ली क्या?
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप बोलिये, हम
विथ्ड्रा कर
लेंगे, क्या
तकलीफ है? अब
यह काल्पनिक
बातें हैं,
माननीय सदस्य
बैठे हुए हैं,
बोल देंगे न
काल्पनिक,
माननीय
मंत्रीजी स्वयं
बैठे हुए हैं,
काल्पनिक है
तो माफी मांग
लेंगे, हम
माफी मांग लेंगे।
...(व्यवधान)... यह
काल्पनिक तो
मंत्रीजी
अपने मुख्यमंत्रीजी
के नजदीक रहने
के लिए जो
कहानी गढ़ी है
न वो कहानी
मजबूत कहानी
नहीं है, कोई
अच्छी कहानी
गढ़ा करो।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): यहां पर
गृह मंत्रीजी
बैठे हैं, वो
कह दें इसको
स्पष्ट।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, यह क्या
तरीका हुआ, यह
तो जब चाहे जब
जो भी बात
बोलें, अगर,
अध्यक्ष
महोदय, इस तरह
सदन चलेगा तो
दूसरे लोग भी बोल
सकते हैं। यह
कोई बात हुई
क्या?
श्री सी.
डी. देवल
(रायपुर): अध्यक्ष
महोदय, मंत्री
महोदय प्रेस
वालों को भी झूठा
बता रहे हैं।
प्रेस वालों
को भी आप झूठा
बताने की
कार्यवाही कर
रहे हो। प्रेस
वाले झूठ लिखते
हैं? ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप व्यवधान
पैदा कर रहे
हैं।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): यह
सारी बातें
लिखी हैं,
आपने सुनी है
और आपने देखी
है ...(व्यवधान)...
आज भी घनश्यामजी
तिवाड़ी आफिस
में नहीं हैं,
आज भी यहां नहीं
हैं घनश्यामजी,
अध्यक्ष
महोदय।
श्री
भवानी सिंह
राजावत
(संसदीय सचिव):
सदन में कार्यवाही
प्रमाणों के
आधार पर चलती
है, प्रेस का
अधिकार है कुछ
भी लिखे, उस पर
हम फेवर नहीं
करना चाहते
लेकिन प्रमाण
पेश करें कि
किस मंत्रीने
इसमें विरोध
किया ...(व्यवधान)...
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
प्रेस कान्फ्रेंस
के अन्दर
फोटो कहां है,
टी.वी. में
फोटो है प्रेस
कान्फ्रेंस
का, वह प्रमाण
लेकर आएं क्या
फिर? प्रमाण
तो है ...(व्यवधान)...
प्रमाण कहां
तक रोकोगे आप,
प्रमाण है। ...(व्यवधान)...
श्री
भवानी सिंह
राजावत
(संसदीय सचिव):
एक भी डिसेंट
ऑफ नोट का
पत्र सदन के
पटल पर रख दें,
एक भी डिसेंट
ऑफ नोट का
पत्र ...(व्यवधान)...
जिसमें
माननीय
मंत्री ने
मंत्रिमण्डल
के निर्णय का
विरोध किया
है, वह सदन के
पटल पर रख
दें।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
मंत्रीजी
बैठे हुए हैं
सामने, बुलवा
दो। बुलवा दो
न आप,
मंत्रीजी बैठे
हुए हैं। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: आप
कन्टिन्यू
करें।
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य,
आप बैठे-बैठे
न बोलें।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, जिन
काल्पनिक
आधार पर
समाचार
पत्रों में
छपे समाचारों
के आधार पर
इन्होंने
पाइण्ट ऑफ
आर्डर के आधार
पर यह बात
उठायी, एक बात
नहीं, अध्यक्ष
महोदय, कई बार
अध्यक्षीय
व्यवस्था
है, आप कहो तो
यह 31.03.1971 में यह
अध्यक्षीय
व्यवस्था
है- सदन में
कोई भी समाचार
पत्रों की
सूचना के आधार
पर कोई चीज
नहीं उठायी जा
सकती, व्यक्तिगत
जानकारी होनी
चाहिए। अध्यक्ष
महोदय, यही
नहीं, उसके
बाद कई बार यह
है।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा): Don’t misquote.
It is everything mentioned in the Articles. Don’t misquote.
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
जिन संविधान
के अनुच्छेदों
की बात की,
उसको कोई भी
पढ़ कर सुना
सकता है, पढ़ा
जा सकता है,
लिखा हुआ है
पर इन्होंने
बिना किसी
आधार पर, कल्पनाओं
के आधार पर जो
कुछ इस पाइण्ट
ऑफ आर्डर के
माध्यम से
सरकार पर
आरोपे लगाये
वो मिथ्या
हैं, भ्रामक
हैं, आधारहीन
हैं इसलिए
मेरी प्रार्थना
है कि इस
पाइण्ट ऑफ
आर्डर को
निरस्त करें
आप।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
एक भी आर्ग्यूमेण्ट
आपका
रिलेवेन्ट
नहीं है कांस्टीट्यूशन
से,
जनरल भाषण
ठोक दिया, कोई
जवाब माकूल
दिया नहीं और
न दे सकते
इसलिए इस कांस्टीट्यूशनल
मामले में,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आप एक
इतिहास कायम
करो हिन्दुस्तान
में। ...(व्यवधान)...
आप एक इतिहास
कायम करें,
कांस्टीट्यूशन
का जो पाइण्ट
उठाया है उसके
मामले में
आपकी नजीर
हिन्दुस्तान
की दूसरी
विधान सभाओं
के लिए भी एक
नजीर बने।
श्री
अध्यक्ष:
सर्वश्रेष्ठ
विधायक को भी
सुन लीजिए, वो
क्या कह रहे
हैं।
श्री
भवानी सिंह
राजावत (संसदीय
सचिव): अब
हमारे
विशेषज्ञ
सदस्य खड़े
हैं, आप सुनो।
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने जो कहा---
श्री
अध्यक्ष:
चुपचाप सुनें,
आप बात सुनें,
शोर नहीं मचाएं।
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
अध्यक्ष
महोदय, में
रिलेवेण्ट
बात बोल रहा
हूं, आप चाहें
तो मैं भी
पालिटिकली I am not speaking
on the political basis. I am quoting the Article of the Constitution.
श्री
अध्यक्ष: आप
बोलिये,बोलिये।
आप बैठे-बैठे
तो न बोलें।
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
माननीय
नाथद्वारा से
आने वाले
विद्वान सदस्य
ने संविधान के
विभिन्न
अनुच्छेदों
का उल्लेख
करते हुए और
बाकी रूल्स
सारे इन्होंने
कोट कर के यह
कहने की कोशिश
की कि कलेक्टिव
रेस्पोंसिबिलिटी
मंत्रिमण्डल
में नहीं है,
मैं जो समझ
पाया हूं। मैं
इन्होंने जो
कोट किया वह
भी और कुछ
दूसरे
आर्टिकल्स
भी और जो कोल
और शकधर का
अपना जो
पार्लियामेंट्
का प्रोसीजर
है उसमें से,
मेज
पार्लियामेंट,
यह सब कोट कर
के मैं सिद्ध
करने की कोशिश
करूंगा
कि कलेक्टिव
रेस्पोंसिबिलिटी
हमारी सरकार
का मंत्रिमण्डल
निभा रहा है,
उन्होंने
कलेक्टिव
रेस्पोंसिबिलिटी
का कहीं भी
उल्लंघन
नहीं किया है।
मैं मेरी बात
कहने की कोशिश
कर रहा हूं
फिर उसके बाद,
अध्यक्ष
महोदय, आपके
ऊपर है, उनकी
भी बात आपने
सुनी है,
हमारी भी बात
आप सुन रही
हैं उसके बाद
आप जो भी
निर्णय देंगी,
दोनों तरफ से
और कोई माननीय
सदस्य सम्बन्धित
बात में कहना
चाहें तो आप
सुन कर के फैसला
आप अंतिम उस
पर व्यवस्था
का जो उन्होंने
प्रश्न
उठाया, आप
देंगे।
श्री
अध्यक्ष: आप
तो अपने तर्क
दें।
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
इन्होंने
कलेक्टिव
रेस्पोंसिबिलिटी
की बात कही है,
कांस्टीट्यूशन
के आर्टिकल 164
का हवाला दिया
है उदसमें वन
ओर टु आर्टिकल
के जो कोट
किये हैं “The Chief
Minister shall be appointed by the Governor and other Ministers shall be
appointed by the Governor on the advice of the Chief Minister…” यह
बिलकुल ठीक
है। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
दो-तीन बात पर
बोलें आप तो,
कलेक्टिव
रेस्पोंसिबिलिटी।
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
देखिये आप,
मैं यह कोट कर
रहा हूं “…and the Ministers shall hold
office during the pleasure of the Governor.” It means ‘Minister’.
इसका गवर्नर
का मतलब यह है
कि मिनिस्टर
प्लेजर ऑफ द
गवर्नर, इसका
मतलब प्लेजर
ऑफ द चीफ
मिनिस्टर।
अनेक
माननीय सदस्य:
नौ।
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
यस। लिसन,
लिसन। मैं बोल
रहा हूं।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
हम तो आपकी
तारीफ कर रहे
हैं, आप जो कह रहे
हैं सही कह
रहे हैं।
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
नहीं, वो कह
रहे हैं न नौ,
नौ, नौ, पीछे से
सुन तो रही
है। मैं इसलिए
कह रहा हूं कि
मिनिस्टर
चीफ मिनिस्टर
की एडवाइज के
ऊपर गवर्नर,
जब उसके ऊपर
बनाया जाता
है, अभी
माननीय सदस्य
ने भी यही बात
कही है, में
उनकी बात को
रिपीट कर रहा
हूं। अब आप कह
रहे हो नौ, नौ,
नौ, वो बोलते
हैं वो ही बात
तो यस, यस, यस और
मैं बोलता हूं
तो नौ, नौ, नौ।
...(व्यवधान)...
अब आप
आगे सुनिये।
इसमें दूसरा
लिखा है, मैं
इसका जो
प्रोविजो है
वो नहीं पढ़ना
चाहता क्योंकि
वो इससे रिलेटेड
नहीं है। नैक्स्ट,
सेकण्ड इसका
है---।
Ars/usc/2h/1450/04102006/1/
The Council of Ministers shall be collectively
responsible to the Legislative Assembly of the State. इसका
मतलब क्या है
असेम्बली से
रिलेटेड
जितने भी काम
हैं ।
कलैक्टिव रेस्पांसिबिलिटी
का मतलब जो स्टेट
असेम्बलि से
रिलेटेड काम
हैं उनके
प्रति कौंसिल
आफ मिनिस्टर्स
की कलैक्टिव
रेस्पांसिबिलिटी
है । इसका
मतलब यह है कि
एक मिनिस्टर
दूसरे मिनिस्टर
on behalf of the other Minister if
he is ill or otherwise he is absent he
may reply the questions entered in the name of that concerned Minister. वह उनके
आधार पर उनके
विभाग का उत्तर
दे सकता है,
पेपर्स ले
डाउन कर सकता
है । बिल को
उनके बिहाफ पर
दूसरे विभाग
का मंत्री
पायलट कर सकता
है । यह स्टेट
लेजिस्लेटिव
असेम्बलि
में कलैक्टिव
रेस्पांसिबिलिटी,
इसका मतलब यह
कलैक्टिव
रेस्पांसिबिलिटी
है क्या और
आगे फिर इसको
डिफाइन किया
है ।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यह
संविधान के
विशेषज्ञ
हैं।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
डेफिनेटली
रेस्पांसिबल
हैं । (व्यवधान)
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
आगे सुनिये ना
।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): The contents will also be responsible of that
person.
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
आप बात सुनिये
। आप बोल रहे
थे तब मैं
नहीं बोला।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप विद्वान
हैं आधा तथ्य
मत बोलें ।
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
मैंने पूरी
बात आपकी सुनी
मैंने
इंटरफियर
नहीं किया। आप
स्वतंत्र
हैं बोलने के
लिए, मैं भी स्वतंत्र
हूं ...(व्यवधान)
मैं कोई आपके
हिसाब से तो
कहूंगा नहीं ।
यह तो लॉ है
अपने अपने
हिसाब से
इंटरप्रेट करते
हैं । सुप्रीम
कोर्ट और हाई
कोर्ट में
वकील अपने
अपने हिसाब से
लॉ को
इंटरप्रेट
करते हैं । अब
जज अपने हिसाब
से जजमैंट
देता है तो आप
इसमें क्यों
परेशान हो रहे
हो ...(व्यवधान)
मैं मेरे
हिसाब से
इंटरप्रेट
करूंगा।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
हम तो बहुत
प्रसन्नचित्त
हो रहे हैं कि
...(व्यवधान) हम
कहां परेशान
हो रहे हैं ।
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
मैं मेरे
हिसाब से
इंटरप्रेट
करूंगा लॉ को
आपके हिसाब से
थोड़े ही
करूंगा ।
श्री
रघुवीर सिंह
मीणा (सराड़ा):
लॉ का मतलब ...(व्यवधान) नौ के
बराबर आप
अकेले हो यह
कह रहे थे हम इतनी
देर से ।
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
आगे कॉल एण्ड
शकधर इसका
फिफ्थ एडिशन
है इसका मैं
पेज 24 President
and Houses of Parliament. इसके
नीचे लिखा है The Council of Ministers, under the
Constitution, is collectively responsible to the Lok Sabha only. टू
दी लोकसभा
ओनली। लोकसभा
से रिलेटेड
वर्क के लिए
कलैक्टिवली
रेस्पांसिबल
हैं । इसमें
यह नहीं लिखा
है कहीं कि गवर्नमैंट
के किसी आर्डर
के प्रति,
इसमें यह नहीं
लिखा है कि
गवर्नमैंट के
किसी
डिपार्टमैंट
का कोई
परिपत्र निकल
गया उसके
प्रति, कोई आदेश
निकल गया उसके
प्रति, इसमें
लिखा है “to the Legislative Assembly” और वहां
लिखा है टू दी
लोकसभा ओनली
वर्ड लिखा है
और आगे लिखा
है “The collective
responsibility implies that a motion of no-confidence can be moved in the
Council of Ministers as a whole.”
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आगे भी ।
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
आप मेरे बाद
खड़े होकर के
अगर आपको कोई
आर्ग्यूमैंट
देने हों तो
दे दीजिए please don’t interrupt me.
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप पूरा कोट
करें ना ।
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
पूरा आगे आ
रहा है ना ।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
पूरा कोट
करिये ना ।
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
आप मुझे बीच
बीच में एक एक
लाइन पर
टोकेंगे तो
पूरा कैसे
पढूंगा।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप पढ़ लीजिए
अम्बेडकर का
पूरा ।
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
आप मुझे एक एक
लाइन पर टोकना
शुरू करेंगे तो
I cann’t go ahead. The collective
responsibility implies that a motion of no-confidence can be moved in the
Council of Ministers as a whole and nopt in an individual Minister. Regarding
the concept of collective responsibility…”
इसका मतलब यह
हुआ कि आप
लेजिस्लेटिव
असेम्बलि से
संबंधित और
लोकसभा से
संबंधित क्या
काम हैं, नो
कान्फिडेंस
मोशन करेंगे
एक मिनिस्टर
के खिलाफ नहीं
कर सकते आप
पूरे
मंत्रिमण्डल
के खिलाफ
लायेंगे। यह
कलैक्टिव
रेस्पांसिबिलिटी
है और यदि वह
डिफीट होता है
तो पूरी
गवर्नमैंट को
जाना पड़ता है
।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
कोमा के आगे
पढि़ए ना ।
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
आगे पढ़
रहाहूं ना
कोमा कहो का Dr. B.R. Ambedkar observed in the Constituent
Assembly
आब्जर्व
किया वह है ।
वह तो आब्जर्व
किया है उन्होंने
That is not the part of the
Constitution. लेकिन वह भी
आप कह देंगे
तो मैं बोल
दूंगा ।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप पढ़ दें वह
।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
वह भी मैं बोल
दूंगा ।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मास्टर
जी हैं यह ।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
मास्टर नहीं
हैं ...(व्यवधान)
मंत्री बना दो
ना । खोटे
आर्ग्यूमैंट
करके मंत्री
क्यों बना
रहे हो ।
मंत्री वैसे
बना दो मान
लेंगे हम तो
लिखा हुआ है ki these are the two…..(interruption)
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
Yes, I am quoting Dr. Ambedkar
also.
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): These are the two ……(interruption)
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
Yes, I am quoting Dr. Ambedkar
also. Sit down first. Listen me. Dr. B.R. Ambedkar observed in the Constituent Assembly.
Yes I am going ahead.
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक
मिनट
नाथूसिंह जी
प्लीज, आपके
कहने का
अभिप्राय यह
है कि खाली
विधान सभा या
लोकसभा के
प्रति
मंत्रिमण्डल
की सामूहिक
जिम्मेदारी
है । मैं आपकी
बात से यही
समझ रहा हूं ।
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, आप सही
समझ रहे हो
पालिटिकली
रेस्पांसिबल
हैं ।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
इसका मतलब यह
है कि मंत्रिपरिषद
के सदस्य,
मंत्रिमण्डल
के सदस्य
मुख्यमंत्री
के प्रशासनिक
निर्णयों के
खिलाफ सदन के
बाहर मनमाने
तरीके से
बकवास करते
फिरें । क्या
मतलब है आपका ?
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
आप पूरी बात
सुनिये तो मैं
अभी एक्सप्लेन
करूंगा। ...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): ...(व्यवधान)
की तरह नहीं
करेंगे,
अर्जुन सिंह
जी की तरह
आरक्षण के
मुद्दे पर और
सेज के मुद्दे
पर
प्रधानमंत्री
के निर्णय के
खिलाफ ...(व्यवधान)
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
Let me complete first. I am not
yielding. प्रद्युम्नसिंह
जी, माननीय
राजाखेड़ा से
आने वाले सदस्य
......
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
...(व्यवधान)
खाली सदन के
अन्दर, सदन
के प्रति उत्तरदायित्व
है, सदन के
प्रति
सामूहिक जिम्मेदारी
है तो मैं
आपका बहुत
आभारी रहूंगा
।
श्री
अध्यक्ष:
आपको मौका
मिलेगा, आप भी
कहिएगा, आप भी
बोलिएगा, उसके
बाद दूंगी व्यवस्था
।
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
You are very senior Member of this
House. Let me complete. आप
बोलिये ना आप
बहुत सीनियर
हैं ...(व्यवधान)
श्री
सुरेन्द्र
सिंह राठौर
(श्रीगंगानगर):
अध्यक्ष
महोदय, यह सी
पी जोशी जी तो
भागने की पूरी
भूमिका बना
रहे हैं ।
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
आप जब बोल रहे
थे तो मैं भी
यह बात बोल
सकता था यह
पढि़ये आप, यह
पढि़ये लेकिन
मैंने नहीं
कहा ।
श्री
सुरेन्द्र
सिंह राठौर
(श्रीगंगानगर):
यह तो भागने
की भूमिका बना
रहे हैं कि
बायकाट करके
भागो । यह पता
है मुझे आप
मिले हुए हो ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
नहीं तो क्या
शिलाओं पर सिर
फोड़ें क्या
शराबखाने के
लिए .(व्यवधान)
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
आप पहले
सुनिये । अध्यक्ष
महोदय, बीच
बीच में, प्लीज
मेरे को बोलने
दीजिए। मैं
इरर्रेलेवेंट
नहीं बोल रहा
हूं ।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप बैठे बैठे
बोलते हैं
बैठे बैठे
नहीं बोलें ।
हरिमोहन जी हर
बात पर खड़ा
होना जरूरी
नहीं है । आप
सुनिये तो सही
।
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
अध्यक्ष
महोदय, मुझे
बड़ी आपत्ति
है बीच में जो
इंटरफियर कर
रहे हैं । मैं
जवाहर लाल
नेहरू जी जो
इनके नेता थे
और हमारे देश
के नेता थे, हम
भी नेता मानते
हैं ।
प्रधानमंत्री
थे और उस समय प्रतिपक्ष
के एक माननीय
सदस्य बोल
रहे थे विदेश
नीति पर बोल
रहे थे, अच्छा
भाषण दे रहे
थे उस समय कई
कांग्रेस के
माननीय सदस्य
पीछे से हाँ
हुल्लड बार
बार कर रहे थे
कि खड़े होकर
के प्रतिपक्ष
के जो माननीय
सदस्य थे उन्होंने
कहा था अध्यक्ष
महोदय और
माननीय
प्राइम
मिनिस्टर
महोदय की तरफ
देखकर और फिर
अध्यक्ष
महोदय को
संबोधित करते
हुए कहा था,
अध्यक्ष
महोदय, बोलने
के लिए वाणी
चाहिए मगर चुप
रहने के लिए
वाणी और विवेक
दोनों चाहिए ।
यह बात कही थी
और मुझे याद
है मैंने पढ़ी
है लोकसभा की
प्रोसीडिंग्स
उस समय नेहरू
जी ने खड़े
होकर के अपने
सदस्यों को
डांटा था ।
श्री
अध्यक्ष:
विवेक रखिये ।
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
और कहा था कि
आप पढ़कर के
आते नहीं हो
और जो पढ़कर
के आते हैं
उनको बोलने
नहीं देते हो
। मैं यह
चाहूंगा माननीय
लीडर आफ
अपोजिशन से कि
जब मैं बोल
रहा हूं, मेरे
बोलने के बाद
कोई भी तर्क
आप देने को स्वतंत्र
हैं लेकिन बार
बार एक एक
लाइन पर बीच बीच
में टोकना, यह
मैं कह रहा
हूं अच्छी
परम्परा
नहीं है । मैं
इतनी देर तक
आधा पौन घंटे
तक सी पी जोशी
जी को सुनता
रहा लेकिन एक
बार भी न खड़ा
हुआ और न एक
शब्द बोला और
न इनको टोका ।
इनको कोई
अधिकार नहीं है
मेरे को बीच
में टोकने का
और जो मैं कोट
कर रहा हूं
बीच में बोल
रहा हूं यह जो
इंटरप्रेट करेंगे
उसके हिसाब से
मैं
इंटरप्रेट
नहीं करूंगा।
श्री
अध्यक्ष:
इनके पास वाणी
है विवेक नहीं
है ना ।
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
अब यह तो मुझे
मालूम नहीं है
। यह तो यही
आब्जर्व कर
लें मुझे पता
नहीं है इस
बारे में मैंने
तो सेम कहा है
जो पहले कहा
गया है
पार्लियामैंट
में और कहा भी
माननीय अटल
बिहारी जी
वाजपेयी ने
है, जो प्रधान
मंत्री रहे
हैं इस देश के
इसलिए अध्यक्ष
महोदय Dr.
B.R. Ambedkar observed in the Constituent Assembly; In my judgement, collective
responsibility is enforced by the enforcement of two principles. One principle
is that no person shall be nominated to the Cabinet except on the advice of the
Prime Minister. Here the Chief Minister. It is very clear. जो
मैंने पहली
बार कहा था कि and the second is क्योंकि
कोई माननीय
सदस्य, समय
लगेगा मैं “Secondly, no person shall be retained as a
Member of the Cabinet if the Prime Minister says that he shall be dismissed.” If the Prime Minister says. Here if the Chief
Minister says. इंग्लिश में
बोल रहा हूं
इसको ।
vns/usc/15.00/2j/4.10.06
यह सी एम
का राइट है कि
कौन मिनिस्टर
होगा, कौन
नहीं होगा।
कौन केबिनेट
के अन्दर
होगा, कौन
बाहर होगा You have no business to interfere in this matter. आपका
कोई अधिकार
नहीं है कि
केबिनेट के
अन्दर क्या
रेसपांसिबिलिटी
है, कलेक्टिव
नहीं है, कौन बाहर
रहेगा और कौन
नहीं रहेगा It is sweat will of the Chief Minister. उनको पता
है कि
कलेक्टिव
रेसपांसिबिलिटी
किसकी है और
किसकी नहीं
है, कौन क्या
कर रहा है और
कौन नहीं कर
रहा है यह चीफ
मिनिस्टर का
अधिकार है
इसमें आप
इंटरफियर
नहीं कर सकते।
30.12.1948 में यह
डिबेट हुई थी
इसके अन्दर
डाक्टर अम्बेड़कर
ने यह बात कही
थी। मैं इसके
अलावा आपको और
भी कोट करना
चाहूंगा जो
इन्होंने
कहा है ”pleasure of the
Governor” यह
इन्होंने
कहा है कि
काउंसिल आफ
मिनिस्टर का
जो भी डिसीजन
होगर “relating to the business
of the House” उसके
प्रति उनकी
रेसपांसिबिलिटी
है और यदि उससे
वह डिसएग्री
करते हैं, यह
क्लियर है
इसमें और वह
डिसएग्री
करते हैं
मंत्रिमंडल
में डिसीजन
होने के बाद
डिसेंट नोट
नहीं लगाते,
डिसएग्री
करते हैं,
हाउस के अन्दर
उसका अपोज
करते हैं the
Minister will have to go. लेकिन
अध्यक्ष
महोदया, यह वह
केस नहीं है,
यहां केस यह
है कि इसके
साथ 75(2) कांस्टीट्यूशन
के अन्दर एक
मिनिस्टर एक
सिटीजन भी है
पर आज मिनिस्टर
का काम करता
है तो एज ए
मिनिस्टर
काम करता है और जो
इन्होंने ऑथ
ली है उस ऑथ के
अन्दर भी
शिड्यूल थर्ड
जिसको
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
कोट कर रहे थे,
कांस्टीट्यूशन
के अन्दर
थर्ड शिड्यूल
में फिफ्थ एण्ड
सिक्सथ,
दोनों मैं
पढ़कर सुनाना
चाहता हूं। “Form of oath of office for a Minister for a State: I, A.B. do
swear in the name of God that I will bear true faith and allegiance to the
Constitution of India as by law established that I will uphold the sovereignty
and integrity of India…”
इसको चेलेंज
ही नहीं किया
किसी ने “…that I
will faithfully and conscientiously discharge my duties as a Minister for the
State of….”
अपनी ड्यूटी
एज ए मिनिस्टर
करने में
इसमें कुछ
गड़बड़ नहीं
है”…and that I will do right to all manner
of people in accordance with the Constitution and the law without fear or
favour, affection or ill will.”
यह इन चीजों
के अलावा अगर
कोई मिनिस्टर
कार्य करता है
तो वह
कलेक्टिव
रेसपांसिबिलिटी
या कांस्टीट्यूशन
के खिलाफ जाता
है। इसके आगे
फिफ्थ और सिक्सथ
में “….that I will not directly or
indirectly communicate or reveal to any person or persons any matter which
shall be brought under my consideration…” चूंकि यह तो
कुछ है नहीं
कि इन्होंने
कोई रिवील
किया हो
इसलिये इसके
पढ़ने की आवश्यकता
नहीं है।
इसमें एक चीज
और कहना चाहूंगा
“75(2) The Ministers shall hold office during the
pleasure of the President.” “Governor” that is “C.M” जो मैं कह
चुका हूं उसके
प्लेजर के
आधार पर कर
सकते हैं। अब 91
का एक मिनिस्टर
है एक तरफ तो
वह एज ए
मिनिस्टर
वर्क कर रहा
है दूसरी तरफ
मिनिस्टर
बनने से उसका
जो सिटीजनशिप
का राइट है,
अगर वह इंडिया
का सिटीजन है
तो एज ए
सिटीजन के जो
राइटस हैं वह
वायलेट नहीं
हो सकते। वह
घर में जाकर
अपने बच्चों से क्या
बात करेगा
वहां मिनिस्टर
का कानून लागू
नहीं होगा। वह
घर जाकर अपने मां-बाप
के पैर छुएका
वहां मिनिस्टर
का कानून लागू
नहीं होगा,
वहां उसका
सिटीजनशिप का
राइट लागू
होगा इसलिये
हर महीने में
तय है कि
इसमें
आर्टिकल 91(1ए)
पढ़कर सुनाना
चाहता हूं, टू
भी सुनाना
चाहता हूं मैं
जिससे सब
क्लियर हो
जाए। आर्टिकल
91 का क्लाज है
इसमें (a) all the
citizens shall have the right to freedom of speech and express.हर
सिटीजन को
फ्रीडम आफ स्पीच
और एक्सप्रेशन
का राइट है और
इसी राइट का
फायदा उठाते
हुए और
इसमें आगे
दिया कि
कौन-कौनसी कंडीशंस
पर फ्रीडम आफ
स्पीच रोकी
जा सकती है जब
कण्ट्री को
थ्रेट हो और
कई मामले हैं
इसमें और इसका
टू है जिसमें
दिया है “nothing in
sub-section” आप
एक मिनट पहले let me complete. फिर
उसके बाद बोल
लेना। अध्यक्ष
महोदया, 91 और 92
मैं यह ज्यादा
92 में पड़कर
आपका समय ...(व्यवधान)
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): He should come out of the Council of Ministers.
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आप एक मिनट सुन लीजिये।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): He should come out of the Council of Ministers.
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): Let me complete please. I am not yielding.
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): यह गलत कोट कर रहे हैं आप।
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आप बैठिये तो सही I am not yielding. अध्यक्ष वन, टू एण्ड फोर्थ 91 का यह है राइट जिसमें उनको यह राइट है कि and they have also the personal right of speech and expression और इसी आधार पर कई बार हम समाचार पत्रों में पढ़ते हैं आज से नहीं जब से सरकारें बनी हैं पंडि़त जवाहरलाल नेहरू जी के जामने से। 1977 से 80 तक मैं पार्लियामेंट में था, मोरारजी देसाई प्राइम मिनिस्टर थे। वहां माननीय चरण सिंहजी कृषि नीति के ऊपर कोई मसौदा आता था कुछ चीजें वहां रखते थे। माननीय जगजीवन रामजी कुछ विचार रखते थे....
श्री अध्यक्ष: अब आप समाप्त करें। समाप्त।
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैं समाप्त कर रहा हूं। सेण्टर में इस समय अभी आरक्षण का मुद्दा है अर्जुन सिंहजी कुछ बोल रहे थे, कपिल सिब्बल कुछ बोल रहे थे, प्रणव मुखर्जी किसी मामले में बोल रहे हैं, लालू प्रसाद जी कुछ बोलते हैं, पासवान जी कुछ बोलते हैं, मुलायम सिंहजी के मंत्रिमंडल के सदस्य कुछ बोलते हैं, डी एम के के कुछ बोलते हैं, यह सब हम देखते हैं वह बोलते हैं और बोलने के बाद एक लाइन जरूर जोड़ते हैं कि यह मेरे निजी विचार हैं। दनको निजी विचार व्यक्त करने की 91 के तहत हर व्यक्ति को, सिटीजन को स्वतंत्रता है। निजी विचार अध्यक्ष महोदय..(व्यवधान) इसीलिये Government is Government whether it is a coalition or not. एक मिनट सुनिये..(व्यवधान)
एक माननीय सदस्य: इसमें कोई अलग नियम थोड़ी बना है, संविधान थोड़े ही है ...(व्यवधान)
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैं बोल रहा हूं let me finish. अध्यक्ष महोदय, कांस्टीट्यूशन में काउंसिल आफ मिनिस्टर डिफाइन है। इसमें मेरा कोएलिजन गवर्नमेंट के बारे में अलग संविधान होगा उस मंत्रिमंडल का या उस पार्टी का मंत्रिमंडल होगा उसका अलग संविधान होगा, यह कोट नहीं है....
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्य, आप कृप्या समाप्त कर दें। आपने अपनी सारी बात कह दी। पूरी बात आपने फीड में..(व्यवधान) समाप्त कर दें।
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अध्यक्ष महोदया, एक लाइन बोलकर समाप्त कर रहा हूं। मैं समाप्त कर रहा हूं एक लाइन में ही। माननीय अशोक जी गहलोत जब मुख्यमंत्री थे इसी हाउस में माननीय रामसिंह जी ने यहां तक कह दिया था कि यह क्या पोपाबाई का राज है, केबिनेट मिनिस्टर होते हुए....(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: तो आप ...(व्यवधान) सवाल है।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): अध्यक्ष महोदय, उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस तो नहीं डुबोएगी यह अशोक गहलोत डुबोएगा। यह कहा उन्होंने। । यह कहा था कि नहीं कहा , यह बताओ। यह कहा कि वह इस अशोक गहलोत के कारण नाराज हैं और कांग्रेस को अशोक गहलोत डुबोएगा और कांग्रेस अशोक गहलोत मुख्यमंत्री डुबोएगा और फिर वह मंत्री बने रहे।
श्री रमेश खींची (कठूमर): रामसिंह जी विश्नोई साहब ने नहीं कहा, राद्येश्याम जी गंगानगर ने कहा था जब वह मिनिस्टर नहीं थे।
श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): आप भी बोलो पोपाबाई का राज है।
श्री अध्यक्ष: आइंदा आप स्वीट ...(व्यवधान)
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अध्यक्ष महोदया, मैं आपके ध्यान में केवल यह सब्मिट करना चाहता हूं। मैं आपसे केवल यह निवेदन करना चाहता हूं..(व्यवधान)
श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): तो आपको कौन डुबोएगा ?(व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप क्या कर रहे थे उस वक्त। आपने कहा था ना। आपने कहा था ना अशोक जी गहलोत के लिये ही। आप क्या बोल रहे थे, आप भूल गये।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): माननीय अध्यक्ष महोदय, कहा है गहलोत से नाराज कांग्रेस से नहीं-विश्नोई। 17.5.2003 को उन्होंने यह कहा कि कांग्रेस नहीं यह हमारा नेता जो है अशोक गहलोत वह डुबोएगा। उन्होंने कहा यह सुनिये आप।
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैं वह कोट नहीं करना चाहता था, माननीय मुख्य सचेतक महोदय ने कोट कर दिया। मेरे पास और भी....(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: देखिये मैंने आपकी बात सुनी। कांस्टीट्यूशन के अनुच्छेद 164 के मुताबिक आपकी बात सुन चुकी हूं और मुझे व्यवस्था देने दीजिये ....(व्यवधान) अपने विचार हैं...(व्यवधान)
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मुझे समाप्त करने दीजिये चूंकि समय का अभाव है ...(व्यवधान)
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप यहां पर पंचायती करना चाहते हो क्या। (व्यवधान) अध्यक्ष महोदय, नाथूसिंह जी ने कहा पोपाबाई का राज है, रामसिंह जी ने..(व्यवधान) आप घसीटना चाहते हो क्या..(व्यवधान)
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अध्यक्ष महोदय, मुझे समाप्त करने दीजिये। मैं आपको निवेदन करना चाह रहा हूं।
श्याम/अरूण 4.10.2006
15.10 2k
समय-समय
पर हर
मंत्रिमंडल
में कई माननीय
सदस्यों ने
अपनी व्यक्तिगत
राय कहकर के
हमेशा से कि
यह मेरी निजी
राय है और
पार्टी में भी
विधायक कह
देते हैं कि
यह मेरी निजी
राय है,
पदाधिकारी भी
कह देते हैं
कि यह मेरी
निजी राय है,
कहकर के एक्सप्रेशन
ऑफ फ्रीडम का
लाभ उठाकर के
यह बात बोलते
हैं और यह
बोलते
आ रहे हैं और
बोलते रहते
हैं इसलिए यह
जो कलेक्टिव
रेस्पोंसिबिलिटी
का उल्लंघन
का जो यह आरोप
लगा रहे हैं
वह बिलकुल गलत
है। माननीय
मुख्यमंत्री
जी के प्रति
मंत्रिमंडल
का विश्वास
है और
मंत्रिमंडल
में किसे रखना
और किसे नहीं
रखना है यह
मुख्यमंत्री
जी का पूरा
अधिकार है इसलिए
जो माननीय
नाथद्वारा से
आने वाले माननीय
सदस्य ने जो
व्यवस्था
का प्रश्न
उठाया है इसको
आप रद्द करें।
यही मेरी आपसे
अपील है, धन्यवाद।
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार): कल
ही विधायकों
ने कहा है कि
मंत्रिमंडल लेकर
के डूबेगा
भाजपा को। कल
ही कहा है,
आपकी मीटिंग
में कहा है ...(व्यवधान)
मुख्यमंत्री
को लेकर के
डूबेगा
मंत्रिमंडल
...(व्यवधान) यह
कल की मीटिंग
में कहा है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
अतिवृष्टि पर
बहस है। 25-26
माननीय विधायक
बोलना चाहते
हैं ...(व्यवधान)
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार): आप
पहले अपने घर
में झांककर
आया करें ...(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अतिवृष्टि
पर इन्होंने
ही बहस मांगी
है ...(व्यवधान)
यह बहस इन्होंने
ही मांगी है
...(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
अध्यक्ष
महोदय, आपने
मुझे ऐसा आभास
दिया था ...(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): सरकार
अपना स्टेटमेंट
भी देना
चाहेगी ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
कृपया आप
दोनों ही स्थान
ग्रहण करें
...(व्यवधान)
हां, हां, आपको
दे रही हूं न ...(व्यवधान)
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार):
मुख्यमंत्री
जी तो लंदन
चली जायेंगी,
आपका क्या
होगा।
श्री
अध्यक्ष:
खंडार से आने
वाले माननीय
सदस्य, आप क्यों
खड़े हैं ...(व्यवधान)
चाहे जब खड़े
हो जाते हैं
...(व्यवधान)
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार):
मुख्यमंत्री
जी तो लंदन
चली जायेंगी,
आपका क्या
होगा ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: ऐसा
है बाढ़ पर
कोई चर्चा
करना नहीं चाहता
है और इस
संवैधानिक
...(व्यवधान) 64 पर
ही लोग करना
चाहते हैं,
मैं प्रद्युम्न
सिंह जी आपको
दो मिनट का
समय दे रही हूं
और उसके बाद
में व्यवस्था
दूंगी ...(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): दो
मिनट नहीं,
पाँच मिनट दे
दीजिये।
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली):
अध्यक्ष
महोदय, जो
पाइंट आफ
आर्डर ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: अब
मैं किसी को
नहीं दूंगी
समय ...(व्यवधान)
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली):
नाथद्वारा से
आने वाले सदस्य
ने उठाया है
उस पर मुझे
कुछ कहना है
...(व्यवधान) और
मैंने पहले
हाथ रेज किया
है ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: नो,
नो, प्रद्युम्न
सिंह जी
बोलेंगे और
उसके बाद ...(व्यवधान)
मौका दिया है
...(व्यवधान)
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली):
मैंने आपसे
पहले अनुमति
के लिए हाथ
खड़ा किया था
...(व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय, मुझे
दो मिनट ही
कहना है ...(व्यवधान)
मुझे दो मिनट
ही बोलना है
...(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
अध्यक्ष
महोदय,
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने संविधान के
डिफरेंट
आर्टिकल्स
का हवाला देते
हुए जिसके तहत
सदन की
कार्यवाही
चलती है इसके
बारे में यहां
पर अपने विचार
रखे और जैसे
ही संसदीय
कार्य मंत्री
जी ने उनको
रखने का हक था,
लॉ मिनिस्टर
की तरफ से उनका
बिल यहां रखा,
उनका यह आशय
था जो मैं
समझा हूं कि
नियमों और
संविधान के
तहत इस सरकार
की कलेक्टिव
रेस्पोंसिबिलिटी
पूरी हो नहीं
रही है। यह
उनका आशय था
और सम्मानीय
डॉ. नाथूसिंह
जी, एल.एल.एम.
साहब ने ...(व्यवधान)
एल.एल.एम. हैं,
आप हंस क्यों
रहे हैं इसमें
क्या बात है. He is Master of
Laws.
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
पी.एचडी. हूं
और वह मेरी
मेहनत से हूं किसी
की मेहरबानी
से नहीं हूं,
एग्जाम पास
करके आया हूं।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मैं तो आपकी
तारीफ कर रहा
हूं। आप इतने
पढ़े-लिखे
हैं, इतने
विद्वान हैं।
श्री
अध्यक्ष:
चाहे कोई
एल.एल.एम. हो,
चाहे कोई
पांचवी पास
हो, सब माननीय
सदस्य यहां
एक जैसे हैं।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
अध्यक्ष
महोदय, आप जब
एल.एल.एम. ...(व्यवधान)
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
अध्यक्ष
महोदय, बीच
में मुझे
बोलना तो नहीं
चाहिये पर न
तो मैं
पढ़ा-लिखा हूं
और न मेरे पास
पुस्तक है
...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य
सबको एक
अर्पोच्युनिटी
है और सबको एक
अधिकार है बस
...(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
यह सही है ...(व्यवधान)
एक मिनट रूक
जायें, खत्म
कर लेने दो।
लेकिन यह बात
निश्चित है
जिसको कानून का
ज्ञान ज्यादा
होता है उसका
लोहा मानना
चाहिए।
श्री
अध्यक्ष: आप
मान लो लोहा
...(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मैं मान रहा
हूं, लेकिन
उनकी एक बात
से मैं सहमत
नहीं हूं। उन्होंने
यहां पर जिस
हिसाब से कहा
उनका इंटरप्रिटेशन
यह था कि खाली
सदन में ही
सामूहिक जिम्मेदारी
होती है, सदन
के बाहर कोई
सामूहिक जिम्मेदारी
नहीं होती है
जो मैं समझा
हूं। उन्होंने
जो यहां पर
कहा है उसके
बीच में मैंने
उठकर एक सवाल
किया था जिसका
कि उन्होंने
उत्तर नहीं
दिया। बड़ा
अच्छा सवाल
था कि क्या
मुख्यमंत्री
के निर्णयों
की
मंत्रिमंडल
के सदस्यों
को बाहर
आलोचना करने
का, उनका
विरोध प्रकट
करने का, अपने
साथियों को
उकसाकर के
विरोध प्रदर्शन
करने का क्या
अधिकार है।
उसके बाद सवाल
है जिस तरह से
यहां हुआ कि
इसके बारे में
आपने बताया,
एक पुरानी
परंपरा है,
पंडित
जवाहरलाल
नेहरू के वक्त
की आप बात कर
रहे थे। अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपको याद
दिलाना चाहता
हूं, आप निकाल
लीजिये जब स्टेट
री-आर्गेनाइजेशन
कमीशन का गठन
हुआ था, जब गुजरात
राज्य बनाया
गया था
महाराष्ट्र
में से तोड़कर
तो तत्कालीन
वित्त
मंत्री श्री
देशमुख साहब
ने इस्तीफा
दिया था। वह
इस बात से
नाराज थे
हालांकि
निर्णय था मंत्रिमंडल
का, लेकिन एक
तरफ नैतिकता
का वह जमाना
था कि he resigned from the Council of Ministers. He went
out. अब
यहां पर
तिवाड़ी जी,
मैं नाम लेकर
के कह रहा हूं
कि माननीय
तिवाड़ी जी का
सारे अख़बार
में आया है,
जैसा संसदीय
कार्य मंत्री
जी ने कहा है,
उनका इस बात
का विरोध है
कि सांगानेर
के अंदर यह
नहीं बनना
चाहिए, मूल के
अंदर यह बात
थी, इसको
घूमा-फिराकर
के कोई कुछ कह
ले, कैसे भी कह
ले तो आज एक
बड़ा भारी
महत्वपूर्ण
प्रश्न यह
आया है कि आप
खाली सदन के प्रति
जिम्मेदार हैं
तो इस
लोकतंत्र का
क्या होगा
...(व्यवधान)
सदन के अंदर
तो आपकी
सामूहिक जिम्मेदारी
है और सदन के
बाहर
मंत्रिमंडल
के सदस्य
मुख्यमंत्री
के अधिकारों
को, मुख्यमंत्री
के निर्णयों
को, प्रशासनिक
आदेशों का अगर
मखौल उड़ाते
फिरेंगे तो यह
लोकतंत्र का मखौल
हो जायेगा यह
मेरा आपसे
निवेदन है. “The essence of
collective responsibility …” इन्होंने
आधा हिस्सा
पढ़ा उसका,
आधा हिस्सा
जो इनके मतलब
का था वह पढ़
गये, आधा हिस्सा
यह दबा गये। “The essence of
collective responsibility is that a Minister is free to express his dissent
when a policy is in the stage of discussion, …” चर्चा
हो रही थी
सबको मालूम था
कि यह बनने
वाला था, मुख्यमंत्री
जी शिलान्यास
करने पहुंची।
उसके पूर्व ही
कार्ड बंट गये,
निर्णय हो गया
कि वह जाने
वाली हैं, वह
भी अतिथि थे।
माननीय गृह
मंत्री जी का
महकमा था वह
भी वहां पर
अतिथि थे।
श्री
अध्यक्ष: आप
अनुच्छेद 166
जो उन्होंने
कहा है उस पर
चर्चा करें
...(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मैं इसी को
कोट कर रहा
हूं।
श्री
अध्यक्ष: क्या
हुआ, क्या
नहीं हुआ यह
छोड़ो ...(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
थोड़ा
एलोब्रेट तो
करना पड़ेगा
...(व्यवधान) अब
थोड़ा तो
रखेंगे। आपने
नाथूसिंह जी को
आधा घंटा ...(व्यवधान)
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
अध्यक्ष
महोदय, मुझे
भी आप इसके
बाद अगर इजाजत
दें तो इनको
याद दिलाऊं कि
इनके पड़ौस के
मध्यप्रदेश
का मामला, इसी
संबंध में हाई
कोर्ट में गया,
फिर सुप्रीम
कोर्ट में गया
और सुप्रीम कोर्ट
ने क्या
डिसीजन किया
वह भी मैं
आपको बताऊंगा
...(व्यवधान)
मैं एंटरफियर
नहीं कर रहा
हूं आपको।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
बैठिये न
महाराज “The essence of collective responsibility is that a
Minister is free to express his dissent when a policy is in the stage of
discussion, but after a decision is taken every Minister is expected to stand
by it without any reservation. The only alternative, therefore, for a Minister
who does not see eye to eye with the Prime Minister in matters of policy or is
not prepared to defend a Cabinet decision is to resign.” कोई चारा
ही नहीं है
आपके पास।
श्री
अध्यक्ष: The portion you
are citing,
यह आपने साइट
किया है, किस
किताब से किया
है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
यह Practice and Procedure of Parliament by M.N.Kaul and S.L.Shakdher, page
686
निकाल लीजिये
यह।
श्री अध्यक्ष:
पार्लियामेंट
का ना ...(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): Practice and
Procedure of Parliament. जी हां, जी
हां, अब मैं
आपसे निवेदन
कर दूं ...(व्यवधान) अध्यक्ष
महोदय, इनका
जो पाइंट ऑफ
आर्डर था वह
यह था कि
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय का
चूंकि अब यह बड़ा
विचित्र
आर्गूमेंट था
माननीय
नाथूसिंह जी का
कि सिर्फ हाउस
के लिए
कलेकिटव रेस्पोंसिबिलिटी
है और कहीं के
लिए नहीं है।
यह तो समझ में
आता है कि
माननीय
पार्लियामेन्ट्री
अफेयर मिनिस्टर
ने लॉ मिनिस्टर
साहब के बिहाफ
पर पेश किया,
वह यहां सदन
में अस्वस्थ
होने के कारण
नहीं आये।
जैसा अख़बार
में पढ़ा है।
ठीक है, नो प्रोब्लम. Any minister can
pilot a Bill. Any minister can, on behalf of other ministers, reply to
questions and he can lay papers on the table of the House. He can do anything
with the permission of the Chair. That too with the permission of the Chair.
Not without the permission of the Chair.
He has to seek the permission of the Chair. Then only he can lay any
paper on the table of the House. मेरा तो
आपसे केवल यही
निवेदन है कि निर्णय
किया जाता है,
एक मखौल की
स्थिति बन
जायेगी और यह
देश के लिए,
लोकतंत्र के
लिए और इस
प्रदेश के लिए
एक मखौल बनकर
रह जायेगा या
तो मुख्यमंत्री
इस्तीफा दें
या वह मंत्री
इस्तीफा दे
या उसको
बर्खास्त
किया जाये
मेरा आपसे यही
निवेदन करना
है ...(व्यवधान)
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
अध्यक्ष
महोदय, इसमें
एक महत्वपूर्ण
चीज नहीं आयी
जो आपने कोट
किया है, अध्यक्ष
महोदय, आधा
मिनट लूंगा
...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
पीलीबंगा से
आने वाले
माननीय सदस्य,
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य ...(व्यवधान)
जो बातें यहां
पर आ गयी हैं
...(व्यवधान)
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
आधा मिनट
लूंगा ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: मैं
बोलने का समय
नहीं दूंगी,
मैं दुबारा
बोलने का समय
नहीं दूंगी।
जयगोविन्द/अरुण/41006/1520/2l
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
वह मैं जी वी
मावलंकर को
कोट करके बैठ
जाऊंगा अध्यक्ष
महोदय। ...(व्यवधान)...
उससे सारा क्लीयर
हो जाएगा। जी
वी मावलंकर को
रिकार्ड में आने
दीजिए अध्यक्ष
महोदय। ...(व्यवधान)...
जी वी मावलंकर
को कोट करके
बैठ जाऊंगा, पाँच-सात
लाइन।
श्री
अध्यक्ष: आप
सर्वश्रेष्ठ
विधायक हो।
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
आधा मिनट में
अध्यक्ष
महोदय, आप
परमिट करें।
अध्यक्ष:
आप आज्ञा का
उल्लंघन
करते हो।
डा. एन. एस.
गुर्जर
(टोडारायसिंह):
आपने बोला है उसके
आधार पर।
श्री
अध्यक्ष: आप
आसन की आज्ञा
का उल्लंघन
करते हो।
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
नहीं, नहीं,
मैं आपका उल्लंघन
नहीं कर रहा
हूं, परमिशन
सीक कर रहा
हूं।
अध्यक्ष:
वह जो कुछ कर
रहे हैं, इसका
जवाब देने की
जिम्मेदारी
आसन की है।
आसन व्यवस्था
देगा। जो
बातें अब तक
कही जा चुकी
है, आपके इधर
से काफी कुछ
कह दिया है।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): मैं
कोई रिपीटेशन
नहीं कर रहा
हूं, मैं
सिर्फ
सुप्रीम
कोर्ट के
फैसले की दस
लाइनें कोट
करना चाहता
हूं, सिर्फ एक
मिनट में।
श्री
अध्यक्ष:
नहीं सुप्रीम
कोर्ट का
नहीं।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
सिर्फ एक मिनट
में नाथू सिंह
जी ने जो बात
कही है उसी के
रेफरेंस में
सिर्फ दस लाइन
कोट करना
चाहता हूं।
श्री
अध्यक्ष: कोई
आवश्यकता
नहीं है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, आज
बाढ़ जैसे
महत्वपूर्ण
विषय पर बहस
होनी है,
सरकार का स्टेटमेण्ट
आना है, 27 माननीय
सदस्य
बोलेंगे।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
सिर्फ दस लाइन
कोट कर रहा हूं।
श्री
अध्यक्ष: जो
कुछ हो रहा है,
उसकी व्यवस्था
देने की जिम्मेदारी
आसन की है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आप व्यवस्था
दीजिए।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): सिर्फ
दस पंक्तियां
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अध्यक्ष: यदि
सुप्रीम
कोर्ट यह कहता
है कि हाउस में
क्या हो रहा
है, कौन बोल
रहा है और यह
रिकार्ड हमें
दिया जाए, मैं
इस बात को
मानने को
तैयार नहीं हूं,
सक्षम है यह
हाउस,
इण्डिपिडेण्ट
है। कोई कोर्ट
में यह सब बातें
नहीं कहे, आप
मुझे व्यवस्था
देने दीजिए।
यदि कोई नई
बात जो अब तक
नहीं आई हो...।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): नहीं
आई है, मैं वही
बात कह रहा
हूं अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अध्यक्ष:
सुप्रीम
कोर्ट की
रूलिंग दे रहे
हैं और क्या
नई बात कह रहे
हैं?
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
मेरे ऊपर
धौलपुर से आने
वाले माननीय
सदस्य और
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने आरोप लगाए
हैं, मैंने
पूरा कोट नहीं
किया है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अब प्रोफेसर
तगारामजी
अपनी बात
कहेंगे। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: जो
प्रश्न
उठाया गया है,
आप क्या
बोलना चाहते
हैं, जो बात अब
तक कही जा
चुकी है वह
नहीं कहेंगे
आप। ...(व्यवधान)...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहता हूं कि
माननीय सदस्य
ने...।
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
मेरे ऊपर एक
आरोप लगाया
है, माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मेरे
ऊपर आरोप
लगाया गया है,
राजाखेड़ा से
आने वाले माननीय
सदस्य ने जो
रिकार्ड में
है, मेरे ऊपर
आरोप लगाया
है, राजाखेड़ा
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने। फिर मैंने
कोट किया है।
मैं एक्सप्लेनेशन
देना चाहता
हूं उसी का।
श्री
अध्यक्ष: आप
अपनी बात कह
चुके हैं
पहले।
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
नहीं, उन्होंने
मेरे ऊपर आरोप
लगाए हैं फिर
मैंने मिस कोट
किया है।
श्री
अध्यक्ष:
उसका जवाब
देने की जिम्मेदारी
आसन की है,
आपको अब
दुबारा जवाब
देने की आवश्यकता
नहीं है।
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
नहीं, उन्होंने
मेरे ऊपर आरोप
लगाए हैं।
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, आप पर
कोई आरोप नहीं
लगाया है। आप
पर कोई आरोप
नहीं लगाया
है।
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
मैं मावलंकर
को कोट करना
चाहता हूं। मावलंकरजी
ने क्या कहा,
आप इजाजत दे
तो। ...(व्यवधान)...
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मेरे पास पुस्तकों
का ज्ञान तो
नहीं है लेकिन
मैं यह निवेदन
करना चाहता
हूं कि घर का मुखिया
कोई बात कह दे
तो वह मान्य
होनी चाहिए।
दूसरा व्यक्ति
घर में कोई
बात बोले यह
नहीं होना चाहिए।
तो अध्यक्ष
महोदय वह घर
चाहे
कांग्रेस का
हो चाहे बी जे
पी का हो चाहे
किसी दल का हो,
इतनी सी बात
को लेकर इस
हाउस का समय
बरबाद कर दिया
दो घण्टे।
...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय, आज
आपने क्या तय
कर लिया?
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
औचित्य के
सवाल पर विधान
सभा के कार्य
और प्रक्रिया
सम्बन्धी
नियम 294 के आधार
पर नाथद्वारा
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने ..।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, ...(व्यवधान)...
माननीय अध्यक्ष
महोदय, ...(व्यवधान)...
।
श्री
अध्यक्ष: आप
स्थान ग्रहण
कर लें। मैंने
नाम पुकार
दिया।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): कांस्टीट्यूशन
की धारा 164...।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आज
आपने तय किया
हुआ है कि
सफेद बाल वाले
ही बोलेंगे,
सफेद बाल
वालों को ही
बोलने का मौका
देंगे, यह तय
कर लिया तो कल
मैं भी सफेद
कराकर आऊं बाल?
श्री
अध्यक्ष:
मैंने कुछ तय
नहीं किया।
...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): तो कल
मैं भी सफेद
कराकर आऊं
बाल। यह क्या
मतलब हुआ?
अध्यक्ष:
यदि आप नियमों
का उल्लंघन
करेंगे। ...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
नियमों के उल्लंघन
की क्या बात
हुई? आप एक
मिनट का समय
भी नहीं दे
सकतीं? आपने
हर को बोलने
का मौका दिया
है दूसरों को।
अध्यक्ष:
आप नियमों का
उल्लंघन
करेंगे, आसन
की व्यवस्था
को नहीं
मानेंगे, आसन
की आज्ञा का
पालन नहीं
करेंगे उसको
बोलने नहीं
दूंगी।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): तो
निकालो न फिर।
निकाल दीजिए
फिर क्या
करेंगे, निकाल
दीजिए नहीं
बोलने देना
चाहते तो।
निकाल दीजिए।
श्री
अध्यक्ष: आपकी
धमकी से नहीं
चलेगा यह सदन।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): यह क्या
बात हुई? मैं
भी किसी से
नहीं डरता।
...(व्यवधान)...
आपको धमकी कौन
दे रहा है? कौन
धमकी दे रहा
है? आप जो कह
रही हो, आप
बोलने नहीं दे
रही हो। ...(व्यवधान)...
अध्यक्ष:
आप आसन की
अवहेलना करते हैं,
क्या समझते
हैं आप? ...(व्यवधान)...
आपकी धमकी से
आसन नहीं डरने
वाला है। ...(व्यवधान)...
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
आसन को धमकी
देने जैसी बात
कर रहे हैं।
...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
फालतू की बात
कर रहे हो। ...(व्यवधान)...
आप क्या कर
रहे हो? ...(व्यवधान)...
आपकी मनमानी
से भी नहीं
डरता मैं?
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
...(व्यवधान)... व्यवस्था
होनी चाहिए।
इनको बाहर
निकालो।
सीधे-सीधे आसन
को चेलेंज
करना, आसन को
चेतावनी देना
...(व्यवधान)... ।
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जो
भी कहा गया है
उसको
कार्यवाही से
निकलवाइए, आसन
को धमकी भरे
शब्दों में
बोले हैं, यह
बहुत
आपत्तिजनक
है।
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
...(व्यवधान)...
आसन की गरिमा
को कम नहीं
होने देंगे। ...(व्यवधान)...
डा. एन.
एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
इन शब्दों को
सदन की
कार्यवाही से
बाहर निकालो,
आसन के लिए
अपमानजनक शब्दों
का प्रयोग
किया है। ...(व्यवधान)...
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
आसन का अपमान
करने वाले को
इस सदन में
बैठने का
अधिकार नहीं
है। आपको व्यवस्था
देनी चाहिए,
ऐसके सदस्य
को सदन से
बाहर निकालना चाहिए,
आसन का अपमान
किया है। ...(व्यवधान)...
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): यह
आसन का अधिकार
है, उनसे बोलने
की परमीशन
मांगी है इन्होंने
...(व्यवधान)...
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
हम आसन का
अपमान नहीं
होने देंगे,
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
आपके सहृदय
होने का ये
लोग इस प्रकार
दुरुपयोग
करते हैं, आप
थोड़ा कठोर
रुख अपनाइए।
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
राजसमन्द से
आने वाले
माननीय सदस्य,
...(व्यवधान)...
मैं सदन को
निवेदन करना
चाहती हूं कि
मैं जब तक इस आसन
पर हूं किसी
की धमकी से
कोई व्यवस्था
नहीं करने
वाली, चाहे
प्रतिपक्ष
कहे चाहे सत्ता
पक्ष कहे, मैं
अपने विवेक के
अनुसार ...(व्यवधान)...
।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): एक
मिनट का टाइम,
एक मिनट का
टाइम। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
पक्षपातपूर्ण
रवैया नहीं
रखती हूं,
निष्पक्ष
होकर काम करने
की कोशिश करती
हूं इसलिए मैंने
इसे अलाऊ किया
वरना हो सकता
था कि मैं अलाऊ
ही नहीं करती
तो क्या करते
आप। इसलिए मैं
आपको ज्यादा
से ज्यादा
बोलने का मौका
देती हूं,
इसलिए देती
हूं कि आपके
पास कहने के
अलावा कुछ
नहीं है और जनहित
के जो मुद्दे
हैं, इस तरह के
जो संवैधानिक
इश्यू हैं उस
पर यदि हम बहस
नहीं करें तो
फिर किस बात
पर बहस करेंगे
इसलिए मैं
जनहित के
मुद्दों पर भी
आपको अवसर
देती हूं और
चूंकि इन्होंने
एक कांस्टीट्यूशनल
मामला उठाया
है इसलिए
मैंने कहा कि
इस पर चर्चा
हो जाए सबको
अपनी बात कहने
का मौका मिल
जाए। आपकी तरफ
से दो लोगों
ने, सी पी जोशी
साहब ने
उठाया, राजाखेड़ा
से आने वाले
माननीय सदस्य
तो वित्त
मंत्री रह
चुके, बहुत
विद्वान आदमी
हैं, उधर से भी
बोल लिए, पी ए
डी मिनिस्टर
बोल लिए, उसके
बाद
सर्वश्रेष्ठ
विधायक बोल
लिए, अब और क्या
कहना चाह रहे
हैं आप. मैं कह
रही हूं कि
फिर भी आपको
जो बात अब तक
इन्होंने
नहीं कही है 293
पर तो बात खतम
हुई लेकिन उसके
अलावा भी यदि
इस मामले में
कुछ कहना है
तो आप जरूर कह
दीजिए तीन चार
मिनट में अपनी
बात समाप्त
कर दीजिए फिर
मैं व्यवस्था
दूंगी। ...(व्यवधान)...
मैं किसी को
नहीं बोलने
दूंगी।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): एक
मिनट दे देना
आप। इतनी कठोर
तो मत बनो, एक
मिनट में क्या
चला जाएगा
हाउस का?
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मैं
आपसे निवेदन
करना चाहता
हूं कि नाथद्वारा
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने संविधान के
विभिन्न
आर्टिकलों के
तहत जो व्याख्या
की इसमें किसी
का कोई विरोध
नहीं है जो
उन्होंने व्याख्या
की, वह सबने
पढ़ी, सबने
सुनी। ...(व्यवधान)...
अध्यक्ष:
अब आप
शांतिपूर्वक
बात सुनिए।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): और
मंत्रिमण्डल
का गठन एक
सामान्य
प्रक्रिया है,
राज्यपाल
महोदय
मंत्रिमण्डल
को शपथ
दिलवाएंगे
मुख्य
मंत्री की
अनुशंसा पर
करेंगे।
अध्यक्ष:
उनकी सलाह पर।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): उनकी
सलाह पर
करेंगे और
सबकी जोइण्ट
रेस्पोंसिबिलिटी
है इसमें भी
कोई दो राय
नहीं है और वह
इस मंत्रिमण्डल
के प्रति जिम्मेदार
होंगे, इस
विधान सभा के
प्रति जिम्मेदार
होंगे, इसमें
भी किसी को
कोई दो राय
नहीं है और
यह....।
एक
माननीय सदस्य:
नई बात बोलो।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): ...(व्यवधान)...
नई बोल रहा
हूं लेकिन
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे यह
निवेदन करना
चाहता हूं
कि...। ...(व्यवधान)...
अध्यक्ष:
बैठे-बैठे
नहीं बोलें।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): जिस
कांस्टीट्यूशन
का हवाला देते
हुए औचित्य
का प्रश्न का
हवाला देते
हुए जिन बातों
को खड़ा किया
गया कि माननीय
शिक्षा
मंत्रीजी,
घनश्यामजी
तिवाड़ी ने
कोई वक्तव्य
दिया ...(व्यवधान)...
आप किस बात
की बहस कर रहे
थे?
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा): I have raised a point of order.
I have not said it. Don’t misquote it. I have never said it. Don’t misquote.
श्री अध्यक्ष:
कांस्टीटयूशन
के अनुच्छेद
164....।
Gpc/akt/041006/1530/2m
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): 164 में
मंत्रिमण्डल
का जो गठन है
उसके बारे में
आपने कहा और
उसमें यह कहा
कि घनश्याम
जी तिवाड़ी,
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने भी कहा 164 की
सारी व्याख्या
करने के पीछे
एक ही उद्देश्य
है कि शिक्षा
मंत्री घनश्याम
जी तिवाड़ी ने
मुख्यमंत्री
हज हाउस के
शिलान्यास
में गयी उसका
उन्होंने
विरोध किया,
यही मामला मैं
समझता हूं कि
आपने उठाया।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
गलत कोट किया
जा रहा है।
मेरा बिलकुल
स्पष्ट मत
है कि 164, 167, 163 जो
एक्जीक्यूटिव
के पावर हैं
उन पावर की जो
संवैधानिक व्यवस्था
है उसका पालन
नहीं हो रहा
है। This is I have given example of. I have not raised
anything else.
इसलिए अध्यक्ष
महोदय …….
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): इसका
मतलब यह हुआ
कि इन्होंने
एक पाठ पढ़ाया
..(व्यवधान)..
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, यहां
तो सब प्रिज्युडिस
हैं, हमारे मन
की
हाइपोथेटिकल
है, मैंने क्या
उठाया है, उत्तर
भी इनके पास
है, क्वश्चन
भी इनके पास
है। मेरा सीधा
प्रश्न है कि
कांस्टीट्युशन
के अंदर
लेजिस्लेटिव,
एक्जीक्युटिव
और ज्युडिशरी
इनके फंक्शन
डिफाइन है।
मैंने एक्जाम्पल
दिया आर्टिकल
294 के अंतर्गत,
ये आर्टिकल जो
कांस्टीट्युशन
के हैं उन
आर्टिकल के
अंतर्गत एक्जीक्युटिव
के जो पावर हैं
इसके अंतर्गत
स्टेट
लेजिस्लेटर
को रेस्पोंसिबल
होना है, उसका
पालन नहीं हो
रहा है। इसलिए
इस सरकार के
संबंध में या
तो आप निर्देश
दें या इस
सरकार को भंग
करने की
कार्यवाही की जाए,
यह बात कही, और
कोई बात ही
नहीं की हमने।
..(व्यवधान)..
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इसका
मतलब यह हुआ
..(व्यवधान)..
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
एक्जाम्पल
दिया है
मैंने। मान्यवर,
एक्जाम्पल
दिया, सेज का
एक्जाम्पल
दिया ..(व्यवधान)..
मंत्री बैठे
हुए है,
मंत्री खड़े
होकर जवाब
नहीं दे रहे
हैं। What else you want?
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): इसका
मतलबयह हुआ
कि नाथद्वारा
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने केवल
माननीय सदस्यों
के ज्ञान के
लिए यह सारा
कहा।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
जो काल्पनिक
मंत्री बनने
वाले हैं वे
काल्पनिक
तथ्य का उत्तर
दे रहे हैं।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): कोई
इनके पास स्पष्टीकरण
ऐसा नहीं है
कि जिसके कारण
यह कह सके कि इस
प्रोविजन का
यहां उल्लंघन
हुआ है। इसलिए
ये किस बात की
व्यवस्था
चाहते हैं, यह
मैं नहीं समझ
पाया। इसलिए
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
निवेदन करना
चाहता हूं कि
यदि कोई
माननीय सदस्य
ने इन
प्रोविजनों
का, इन विभिन्न
आर्टिकल्स
का या
प्रक्रिया और
नियम हैं उनका
कोई पालन नहीं
किया और उसमें
कहीं व्यवधान
उत्पन्न
हुआ उसके कारण
कोई स्थिति
पैदा हुई तो
उस पर चर्चा
का था। जब
आपने कहा कि मैंने
यह कहा ही
नहीं है तो
फिर अब प्रश्न
ही नहीं उठता
है। इन्होंने
केवल समय व्यर्थ
करने के लिए,
बल्कि इन्होंने
272 में जो एक
माननीय सदस्य
के लिए पालनीय
नियम है उनकी
पालना भी नहीं
की। ..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष: अब
विराज जाओ।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप जो एस्पर्शन
लगा रहे हैं
मैं सुनने को
तैयार नहीं
हूं कि 272 में
उठाकर मैंने
टाइम जाया
किया। मैं
आपकी परमिशन
से नहीं बोला
हूं. Don’t cast aspersion. With the permission of the
Chair, I have raised it. 272
में यह किया,
मैंने वह
किया। आप
अनपढ़ आदमी की
तरह बहस न
करें। आप
पार्टी के
जिम्मेदार
व्हिप हैं। आप
आर्टिकल का
एक्जाम्पल
दे दें, 165 का दे
दें, 163 का दे दें,
167 का दे दें, जो
मैंने उदाहरण
दिये उनका क्या
हुआ?
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मैं
जिम्मेदारी
से कह रहा
हूं।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप ये बातें न
करें कि 272 में
टाइम खराब
किया। आपका
राज है, बहुमत
आपका है, सरकार
आपकी है, आप
मनमानी करें,
पर हमारा
अधिकार है कि
कानून की व्यवस्था
के अंतर्गत हम
प्रश्न
उठाएं, आप
करें या न
करें, मत
मानें। आप
कौनसी बात मान
रहे हैं? आप
मुख्यमंत्री
की बात नहीं
मान रहे हो,
चीफ व्हिप बने
हुए हैं। आप
मानते हैं
मुख्यमंत्री
की बात? चल रहे
हैं, आप
गाड़ी-घोड़े
का उपयोग ले
रहे हैं, हम
मना नहीं कर
रहे हैं आपको।
..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष:
कृपया अपना स्थान
ग्रहण कर लें।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यदि
कोई
मंत्रिमण्डल
में उस बात का
कोई उल्लंघन
भी करता है,
संयुक्त
जिम्मेदारी
से दूर भागता
है तो माननीय
विपक्ष के नेता
और सदस्यों
के प्रति ..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष: अब
आप मुझे व्यवस्था
देने दीजिए।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य सचेतक):
132 में यह
प्रोविजन है
कि वह
मंत्रिमण्डल
के खिलाफ
अविश्वास
प्रस्ताव ला
सकते हैं,
निंदा प्रस्ताव
ला सकते हैं।
जो इनको करना
चाहिए वह तो
किया नहीं और
ये केवल पाठ
पढ़ा रहे हैं,
यह समझ में
नहीं आया कि
किन आर्टिकल्स
का और किन
नियमों का उल्लंघन
हुआ है। क्या
यह विधान सभा
इस संविधान के
उपबंधों पर क्या
होना चाहिए,
क्या नहीं
होना चाहिए
इसके लिए भी
सक्षम है या नहीं
है। इसलिए मैं
यह निवेदन
करना चाहता
हूं कि
संविधान के
उपबंधों का
कहीं उल्लंघन
हुआ है यह
हमारा विषय
नहीं है। या
तो कोर्ट में
जाएं और यदि
मंत्रिमण्डल
में अविश्वास
है तो अविश्वास
का प्रस्ताव
लाएं, यह मेरा
निवेदन है।
श्री
अध्यक्ष: अब
आप विराजें।
..(व्यवधान)..
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
रिकार्ड पर तो
बहुत बातें
हैं। ..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष: अब
आप मुझे व्यवस्था
देने दीजिए। नाथद्वारा
से आने वाले
माननीय सदस्य
..(व्यवधान)..
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय, एक मिनट
मुझे भी दे
दें।
श्री
अध्यक्ष: अब
मैं कुछ नहीं
सुनूंगी।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अब आप
नहीं सुनोगे
तो पाइंट ऑफ
आर्डर की
कार्यवाही का
मैं बहिष्कार
करता हूं।
श्री
अध्यक्ष: कर
दीजिए आप
बहिष्कार।
(श्री
संयम लोढ़ा,
माननीय सदस्य
ने सदन से
बहिर्गमन
किया)
व्यवस्था
नाथद्वारा
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने एक औचित्य
का प्रश्न
उठाया और वह
उन्होंने यह
उठाया कि
कांस्टीट्युशन
के अंदर अनुच्छेद
164 है वह पढ़कर
उन्होंने
सुनाया- “…The Council of Ministers shall be collectively
responsible to the Legislative Assembly of the State.” यह बात
सही है कि लेजिस्लेटिव,
असेम्बली के
अंदर
कलेक्टिव,
उनकी ज्वाइंट
रेस्पोंसिबिलिटी
है। मैं इस
बात से भी
इंकार नहीं करती
कि उनकी ज्वाइंट
रेस्पोंसिबिलिटी
बाहर नहीं है।
उन्होंने 167
में बताया – “It shall be
the duty of the Chief Minister of each State – (a) to communicate to the
Governor of the State all decisions of the Council of Ministers relating to the
administration of the affairs of the State and proposals for legislation; (b)
to furnish such information relating to the administration of the affairs of
the State and proposals for legislation as the Governor may call for; and (c)
if the Governor so requires, to submit for the consideration of the Council of
Ministers any matter on which a decision has been taken by a Minister but which
has not been considered by the Council.” यहां
मुख्यमंत्री
का नाम नहीं
बल्कि मिनिस्टर
का नाम है। इस
बारे में मैं
सदन को थोड़ा
रिमाइंड करना
चाहूंगी।
वैसे तो हाउस
के अंदर तो राजनैतिक
उत्तरदायित्व
है और
राजनैतिक उत्तरदायित्व
के अंदर ज्वाइंट
रेस्पोंसिबिलिटी
में कोई भी
मिनिस्टर
किसी भी दूसरे
मिनिस्टर का
जवाब भी दे
सकता है, बिल
को भी पारित
कर सकता है, सब
कुछ कर सकता
है, लेकिन 1992 में
इसी प्रकार एक
बार पहले भी
प्रश्न आ
चुका है। उस
बारे में मुझे
निवेदन करना
है कि किसी
मंत्री की
नियुक्ति अथवा
उसका मंत्री
पद पर बना
रहना वैधानिक
है इसका
निर्वचन करने
की अधिकारिता
अध्यक्ष
नहीं रखता है।
अत: प्रक्रिया
के नियम 119 के
अंतर्गत, खैर
यह अलग बात है,
लेकिन इस बारे
में कौल एंड
शकधर ने भी जो
कहा है वह भी
मैं आपको
पढ़कर सुनाना
चाहूंगी। कौल
और शकधर ने इस
बारे में कहा
है ‘’एक
प्रश्न जो
उपस्थित होता
है वह यह है कि
अध्यक्ष के
कृत्यों में
किसी भी
मंत्रिपरिषद
की वैधानिकता
के प्रश्न को
अथवा किसी एक
मंत्री की
नियुक्ति
अथवा उसका
मंत्री पद पर
बना रहना
वैधानिक है
अथवा नहीं इस
पर निर्वचन
करने की
अधिकारिता
अध्यक्ष
नहीं रखता है।‘’ इस
संबंध में कौल
एंड शकधर ने
जो लिखा है कि
यदि ऐसी
कंट्रोवर्सी
होती है तो
आपको मंत्रिपरिषद
के खिलाफ
निंदा प्रस्ताव
लाना चाहिए,
अविश्वास का
प्रस्ताव ला
सकते हैं,
निंदा प्रस्ताव
ला सकते हैं,
वह आपका
अधिकार है,
सेंशर कर सकते
हैं, लेकिन इस
बारे में अध्यक्ष
की अधिकारिता
नहीं है कि वह
इस बारे में
किसी प्रकार
का निर्णय दे।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
मैं आपकी व्यवस्था
को चेलेंज
नहीं कर रहा।
मैंने यह
प्रश्न
उठाया ही नहीं
जिस प्रश्न
का आप जवाब दे
रहे हैं।
मैंने किसी
मंत्री को
हटाने के लिए
आपसे रिक्वेस्ट
नहीं की।
श्री
अध्यक्ष:
आपने जो मंत्रिपरिषद
की ..(व्यवधान)..
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, मैं आपसे
माफी चाहता
हूं मैंने 294,
जिसका ओरिजन कांस्टीट्युशन
की धारा 208 से
हुआ है उसमें
जो आर्टिकल्स
ऑफ कांस्टीट्युशन
है उसकी तरफ
आपका ध्यान
आकर्षित किया. Let it be very
clear. I have not said.
श्री
अध्यक्ष:
कलेक्टिव
रेस्पोंसिबिलटी
है यह मैंने
कहा।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा): Ma’m, let me say
one thing. I have quoted 163, I have quoted 164 and I have quoted 167. I have
not asked anything
जिसमें मैंने
आपको यह कहा
हो कि एक व्यक्ति
मंत्री या
दूसरे मंत्री
को त्यागपत्र
के लिए मैंने
नहीं कहा। ..(व्यवधान)..
मैंने आपको
कहा है, अध्यक्ष
महोदय, आपसे
प्रे किया है
कि आप सरकार
को डाइरेक्शन
दें कि इन
नियमों का
पालन करके
संविधान के अंतर्गत
आये, इसकी
जिम्मेदारी
आपकी है क्योंकि
सदन संविधान
के नियमों के,
कानून के जो
प्रोविजन हैं
उसके अंतर्गत
चल रहा है।
आपको भी पावर,
सदन की जो
क्रिएशन है वह
क्रिएशन
कांस्टीट्युशन
के कारण है।
आप अध्यक्ष
हैं कांस्टीट्युशन
के कारण हैं।
कांस्टीट्युशन
का उद्भव हुआ
है वह लेजिस्लेशन
के कारण हुआ
है। वहां यदि
कांस्टीट्युशन
का उल्लंघन
हो रहा है।
आपने निर्णय
दिया, I don’t want to challenge it, I accept but
मेरा सबमिशन
यह था, मेरे
प्रश्न के
रेलेवेंट
आपका फैसला
होता तो उचित
होता, बाकी
मुझे कोई
कमेंट नहीं
करना।
श्री
अध्यक्ष:
असेम्बली
में, इस विधान
सभा में मंत्रीगण
संयुक्त रूप
से भी और पृथक
रूप से भी
विधायिका के
प्रति जिम्मेदार
रहें यह देखने
का काम आसन का
है।
मोहन/अरूण/4102006/1540/2n
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आगे पुकारें
साहब।
श्री अध्यक्ष:
अधिसूचनाएं ।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
इस पर तो
फैसला किया
ही
नहीं आपने कि
राजेन्द्र
जी राठौड़ और
नाथूसिंह जी
में नम्बर
किसको मिले।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपका आज्ञा से
...
श्री अध्यक्ष:
अधिसूचनाएं ।
श्री कालूलाल
गुर्जर ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): नहीं,
अध्यक्ष
महोदय,
मुझे रखना है,
अभी मैं रख
रहा था पहले।
श्री अध्यक्ष:
रख तो दिया था
न आपने ?
सदन की
मेज पर रखे
गये पत्र
अधिसूचनाएं
पंचायती
राज विभाग
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
कार्य सूची
में किये गये
उल्लेख के
अनुसार
पंचायती राज
विभाग की निम्नांकित
अधिसूचनाएं
सदन की मेज पर
रखता हूं -:
1.
अधिसूचना
संख्या-एफ.186(14) (23)
एकाउण्ट्स/इन्स-1/मिस/2648
दिनांक 7.6.2006
जिसके द्वारा
राजस्थान
पंचायती राज
नियम, 1996 में
संशोधन किया
गया है।
2.अधिसूचना
संख्या-.4(27)परावि/विधि/शिक्षकभर्ती/एली.एज्यू./2006/3002
दिनांक 28.6.2006
जिसके द्वारा
राजस्थान
पंचायती राज
नियम, 1996 में
संशोधन किया
गया है।
3.
अधिसूचना
संख्या-एफ.
1(2)आरडीपीआरडी/पीएचई/रूल्स
99-2000/3089 दिनांक 5.7.2006
जिसके द्वारा
राजस्थान
पंचायती राज
नियम, 1996 में
संशोधन किया
गया है।
श्री अध्यक्ष:
राजेन्द्र
राठौड़।
सार्वजनिक
निर्माण
विभाग
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
सार्वजनिक
निर्माण
विभाग की
अधिसूचना संख्या-एफ.8(58)
सानि/77/126 दिनांक
15.6.2006 जिसके
द्वारा यथा
संशोधित
समसंख्यक
अधिसूचना
दिनांक 27.10.1994 में
संशोधन किया
गया है, को सदन
की मेज पर
रखता हूं।
श्री अध्यक्ष:
श्री गजेन्द्र
सिंह।
ऊर्जा
विभाग
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
अध्यक्ष महोदय, मैं कार्य
सूची में किये
गये उल्लेख
के अनुसार
ऊर्जा विभाग
की चार
अधिसूचनाएं
सदन की मेज पर
रखता हूं।
|
1. |
अधिसूचना
संख्या-राविविआ/सचिव/विनियम/45
दिनांक 28.2.2006
जिसके
द्वारा
राजस्थान
विद्युत
विनियामक
आयोग
(विवादों का
औम्बडस्मैन
द्वारा
निपटारा)(तृतीय
संशोधन)
विनियम, 2006
विरचित किये
गये है । |
|
2. |
अधिसूचना
संख्या-राविविआ/सचिव/विनियम/44
दिनांक 15.2.2006
जिसके
द्वारा
राजस्थान
विद्युत
विनियामक
आयोग
(विद्युत
प्रदाय कोड
और संबंधित
मामले)(तृतीय
संशोधन)
विनियम, 2006 विरचित
किये गये है । |
|
3. |
अधिसूचना
संख्या-राविविआ/सचिव/विनियम/46
दिनांक 16.3.2006
जिसके
द्वारा
राजस्थान
विद्युत
विनियामक
आयोग (कार्य
का सम्पादन)
विनियम, 2005
(प्रथम
संशोधन)
विरचित किये
गये है । |
|
4. |
अधिसूचना
संख्या-राविविआ/सचिव/विनियम/47
दिनांक 11.5.2006
जिसके
द्वारा
राजस्थान
विद्युत
विनियामक
आयोग (टैरिफ
निर्धारण
हेतु निबन्धन
व
शर्तें)(प्रथम
संशोधन)
विनियम, 2006
विरचित किये
गये है । |
प्रतिवेदन
एवं लेखे
राजस्थान
भूमि विकास
निगम का 31वां
वार्षिक
प्रतिवेदन
एवं लेखे वर्ष
2004.05
श्री अध्यक्ष:
प्रतिवेदन
एवं लेखे।
श्री सांवर
लाल।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
राजस्थान
भूमि विकास
निगम अधिनियम,
1975 की धारा 37(9) के
अन्तर्गत
राजस्थान
भूमि विकास
निगम का 31वां
वार्षिक
प्रतिवेदन
एवं लेखे वर्ष
2004.05 सदन की मेज
पर रखता हूं।
राजस्थान
स्टेट एग्रो
इण्डस्ट्रीज
कॉरपोरेशन
लिमिटेड
का 36 वां
वार्षिक
प्रतिवेदन
वर्ष 2004.05
राजस्थान
स्टेट सीड्स
कॉरपोरेशन
लिमिटेड का
26वां
वार्षिक
प्रतिवेदन
वर्ष 2003-04 एवं
27वां
वार्षिक
प्रतिवेदन
वर्ष 2004.05
श्री अध्यक्ष:
श्री
प्रभुलाल
सैनी।
श्री
प्रभुलाल
सैनी (कृषि
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
कम्पनी
अधिनियम, 1956 की
धरा 619-ए के अन्तर्गत
राजस्थान स्टेट
एग्रो इण्डस्ट्रीज
कॉरपोरेशन
लिमिटेड का 36
वां वार्षिक
प्रतिवेदन
वर्ष 2004.05 एवं
राजस्थान स्टेट
सीड्स
कॉरपोरेशन
लिमिटेड का
26वां वार्षिक
प्रतिवेदन
वर्ष 2003-04 एवं
27वां वार्षिक
प्रतिवेदन
वर्ष 2004.05 सदन की
मेज पर रखता
हूं।
राजस्थान
राज्य पथ
परिवहन निगम
के लेखों का
अंकेक्षण
प्रतिवेदन 31
मार्च, 2005
श्री
युनूस खान
(यातायात
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
सड़क परिवहन
निगम अधिनियम,
1950 की धारा 33 (4) के अन्तर्गत
राजस्थान
राज्य पथ
परिवहन निगम3
के लेखों का 31
मार्च, 2005 को
समाप्त हुए
वर्ष के लिए
अंकेक्षण
प्रतिवेदन व
प्रमाण पत्र
सदन की मेज पर
रखता हूं।
राजस्थान
राज्य
विद्युत उत्पादन
निगम लिमिटेड
का
चतुर्थ
वार्षिक
प्रतिवेदान
वर्ष 2003-04
श्री अध्यक्ष:
श्री गजेन्द्र
सिंह।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
कम्पनी
अधिनियम, 1956 की
धारा 619-ए के अन्तर्गत
राजस्थान
राज्य
विद्युत उत्पादन
निगम लिमिटेड
का चतुर्थ
वार्षिक
प्रतिवेदन
वर्ष 2003-04 सदन की
मेज पर रख्ता
हूं।
राजस्थान
लोक सेवा आयोग
का 55वां
वार्षिक
प्रतिवेदन
वर्ष 2004.05
श्री अध्यक्ष:
श्री ओम बिरला
।
श्री ओम
बिरला (संसदीय
सचिव): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
भारत के
संविधान के
अनुच्छेद-323 (2)
के अन्तर्गत
राजस्थान
लोक सेवा आयोग
का 55वां
वार्षिक
प्रतिवेदन
वर्ष 2004.05 सदन की
मेज पर रखता
हूं।
कार्य
सलाहकार
समिति का प्रतिवेदन
(सं0 14)
श्री अध्यक्ष:
कार्य
सलाहकार
समिति के
प्रतिवेदन का
उपस्थापन।
सरकारी मुख्य
सचेतक।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
कार्य
सलाहकार
समिति के 14वें
प्रतिवेदन का
उपस्थापन
करता हूं।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
कार्य
सलाहकार
समिति की बैठक
दिनांक 3 अक्टूबर,
2006 को मध्यान्ह
12.00 बजे माननीय
अध्यक्ष के
वैश्म (चैम्बर)
में हुई।
समिति ने
निर्णय लिया
कि दिनांक 4 अक्टूबर,
2006 से 9 अक्टूबर,
2006 तक सदन में
लिये जाने
वाले कार्य का
बंटवारा निम्न
प्रकार से
किया जाए:-
|
बुधवार,
दिनांक 4 अक्टूबर,
2006 |
राज्य
में अतिवृष्टि
से उत्पन्न
स्थिति पर विचार |
|
गुरूवार,
दिनांक 5 अक्टूबर,2006 |
1.अतिरेक
मांगें वर्ष 2000-2001,
2001-02 एवं 2002-03
मुखबन्द का
प्रयोग किया
जाकर मतदान
एवं पारण। 2.
राजस्थान
विनियोग
(संख्या-3) विधेयक,
2006, राजस्थान
विनियोग
(संख्या-4) विधेयक,
2006, एवं राजस्थान
विनियोग
(संख्या-5)
विधेयक, 2006 का
पुर:स्थापन,
उस पर विचार
एवं पारण। 3.राजस्थान
सिविल न्यायालय(संशोधन)
विधेयक, 2006 पर
विचार एवं
पारण। |
|
शुक्रवार,
दिनांक 6 अक्टूबर,
2006 |
1. प्रवर
समिति
द्वारा
प्रतिवेदित राजस्थान
समाज विरोधी क्रियाकलाप
निवारण
विधेयक, 2006 |
|
शनिवार,
दिनांक 7 अक्टूबर,
2006 रविवार,
दिनांक 8 अक्टूबर,
2006 |
बैठक नहीं
होगी |
|
सोमवार,
दिनांक 9 अक्टूबर,
2006 |
1.
राज्य में
अकाल एवं
बिजली की
स्थिति पर
विचार। 2.
राज्य में
मौसमी
बीमारियों
से उत्पन्न
स्थिति पर
विचार।
|
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
प्रस्ताव
करता हूं कि
यह सदन कार्य
सलाहकार समिति
के 14वें
प्रतिवेदन पर
अपनी सहमति
प्रकट करता
है।
श्री अध्यक्ष:
प्रश्न यह है
कि यह सदन
कार्य
सलाहकार
समिति के 14वें प्रतिवेदन
पर अपनी सहमति
प्रकट करता है
?
(स्वीकृति)
सदन
द्वारा
प्रतिवेदन पर
सहमति प्रदान
की गई।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया, गृह
मंत्री।
समिति
का प्रतिवेदन
राजस्थान
समाज विरोधी
क्रियाकलाप
निवारण, 2006 पर
गठित प्रवर
समिति
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
राजस्थान
समाज विरोधी
क्रियाकलाप
निवारण, 2006 पर
गठित प्रवर
समिति के
प्रतिवेदन का
उपस्थापन करता
हूं।
राजकीय
उपक्रम समिति
श्री अध्यक्ष:
श्री
शांतिलाल
चपलोत।
श्री
शांतिलाल
चपलोत
(सभापति,
राजकीय
उपक्रम समिति):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
कार्य सूची
में किये गये
उल्लेख के
अनुसार
राजकीय
उपक्रम समिति,
2006-07 समिति के 13
प्रतिवेदन
उपस्थापित
करता हूं।
|
1. |
राजस्थान
राज्य भण्डार
व्यवस्था
निगम
लिमिटेड [अंकेक्षण
प्रतिवेदन
(वाणिज्यिक)
वर्ष 1998-99] से
संबंधित
समिति का 43वां
प्रतिवेदन । |
|
2. |
राजस्थान
राज्य बीज
निगम
लिमिटेड [अंकेक्षण
प्रतिवेदन
(वाणिज्यिक)
वर्ष 2000-2001] से
संबंधित
समिति का 44वां
प्रतिवेदन । |
|
3. |
राजस्थान
राज्य सड़क
परिवहन निगम [अंकेक्षण
प्रतिवेदन
(वाणिज्यिक)
वर्ष 2002-2003] से
संबंधित
समिति का 45वां
प्रतिवेदन । |
|
4. |
राजस्थान
राज्य
गंगानगर
शुगर मिल्स
लिमिटेड [अंकेक्षण
प्रतिवेदन
(वाणिज्यिक)
वर्ष 2003-2004] से
संबंधित
समिति का 46वां
प्रतिवेदन । |
|
5. |
राजस्थान
राज्य
होटल्स
निगम
लिमिटेड [अंकेक्षण
प्रतिवेदन
(वाणिज्यिक)
वर्ष 1996-97] से
संबंधित
राजकीय
उपक्रम
समिति, 2002-2003 के
58वें प्रतिवेदन
में समाविष्ट
सिफारिशों
पर शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही विषयक्
समिति का 47वां
प्रतिवेदन । |
|
6. |
राजस्थान
राज्य कृषि
उद्योग निगम
लिमिटेड [अंकेक्षण
प्रतिवेदन
(वाणिज्यिक)
वर्ष 1991-92] से
संबंधित
राजकीय
उपक्रम
समिति, 2003-2004 के
72वें प्रतिवेदन
में समाविष्ट
सिफारिशों
पर शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही विषयक्
समिति का 48वां
प्रतिवेदन । |
|
7. |
राजस्थान
राज्य गंगानगर
शुगर मिल्स
लिमिटेड [अंकेक्षण
प्रतिवेदन
(वाणिज्यिक)
वर्ष 1993-94] से
संबंधित
राजकीय
उपक्रम
समिति, 2004-2005 के
द्वितीय
प्रतिवेदन
में समाविष्ट
सिफारिशों
पर शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही विषयक्
समिति का 49वां
प्रतिवेदन । |
|
8. |
राजस्थान
राज्य खनिज
विकास निगम
लिमिटेड
(अंकेक्षण
प्रतिवेदन
वर्ष 1994-95) से
संबंधित
राजकीय
उपक्रम
समिति, 2004-2005 के
15वें प्रतिवेदन
में समाविष्ट
सिफारिशों
पर शासन
द्वारा की गई
क्रियान्विति
विषयक्
परिपालनात्मक
समिति का 50वां
प्रतिवेदन । |
|
9. |
राजस्थान
लघु उद्योग
निगम
लिमिटेड (अंकेक्षण
प्रतिवेदन
वर्ष 1998-99) से
संबंधित
राजकीय
उपक्रम
समिति, 2004-2005 के
16वें प्रतिवेदन
में समाविष्ट
सिफारिशों
पर शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही विषयक् समिति
का 51वां
प्रतिवेदन । |
|
10. |
राजस्थान
राज्य
विद्युत मण्डल
(अंकेक्षण
प्रतिवेदन
वर्ष 1991-92) से
संबंधित
राजकीय
उपक्रम
समिति, 2004-2005 के
18वें प्रतिवेदन
में समाविष्ट
सिफारिशों
पर शासन
द्वारा की गई
क्रियान्विति
विषयक्
परिपालनात्मक
समिति का 52वां
प्रतिवेदन । |
|
11. |
राजस्थान
राज्य
विद्युत मण्डल
[अंकेक्षण
प्रतिवेदन
(वाणिज्यिक)
वर्ष 1994-95] से संबंधित
राजकीय
उपक्रम
समिति, 2004-2005 के
20वें प्रतिवेदन
में समाविष्ट
सिफारिशों
पर शासन
द्वारा की गई
क्रियान्विति
विषयक्
परिपालनात्मक
समिति का 53वां
प्रतिवेदन । |
|
12. |
राजस्थान
राज्य
विद्युत मण्डल
[अंकेक्षण
प्रतिवेदन
(वाणिज्यिक)
वर्ष 1999-2000] से संबंधित
राजकीय
उपक्रम
समिति, 2004-2005 के
21वें प्रतिवेदन
में समाविष्ट
सिफारिशों
पर शासन
द्वारा की गई
क्रियान्विति
विषयक्
परिपालनात्मक
समिति का 54वां
प्रतिवेदन । |
|
13. |
राजस्थान
राज्य भण्डार
व्यवस्था
निगम
(अंकेक्षण
प्रतिवेदन
वर्ष 2001-2002) से
संबंधित राजकीय
उपक्रम
समिति, 2005-2006 के
34वें
प्रतिवेदन
में समाविष्ट
सिफारिशों
पर शासन
द्वारा की गई
क्रियान्विति
विषयक्
परिपालनात्मक
समिति का 55वां
प्रतिवेदन । |
जन लेखा
समिति
श्री अध्यक्ष:
धन्यवाद। डा.
सी.पी. जोशी।
डा. सी. पी.
जोशी (सभापति,
जनलेखा समिति):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
कार्य सूची
में किये गये
उल्लेख के
अनुसार
जनलेखा समिति,
2006-07 के 29
प्रतिवेदन उपस्थापित
करता हूं।
|
1. |
जनलेखा
समिति, 2004-2005 के
67वें
प्रतिवेदन
में समाविष्ट
सिफारिशों
की परिपालना
हेतु शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही
पर
क्रियान्विति
विषयक समिति
का 140वां
प्रतिवेदन । |
|
2. |
जनलेखा
समिति, 2003-2004 के
212वें
प्रतिवेदन
(11वीं विधान
सभा) में
समाविष्ट
सिफारिशों
की परिपालना
हेतु शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही
पर
क्रियान्विति
विषयक् समिति
का 141वां
प्रतिवेदन । |
|
3. |
जनलेखा
समिति, 2002-2003 के
140वें
प्रतिवेदन
(11वीं विधान
सभा) में
समाविष्ट
सिफारिशों
की परिपालना
हेतु शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही
पर
क्रियान्विति
विषयक् समिति
का 142वां
प्रतिवेदन । |
|
4. |
जनलेखा
समिति, 2001-2002 के
125वे
प्रतिवेदन
(11वीं विधान
सभा) में
समाविष्ट
सिफारिशों
की परिपालना
हेतु शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही
पर
क्रियान्विति
विषयक्
समिति का 143वां
प्रतिवेदन । |
|
5. |
भारत के
नियंत्रक
महालेखा
परीक्षक के
प्रतिवेदन
(सिविल) वर्ष 2001-2002
का अनुच्छेद
संख्या-3.6
महिला एवं
बाल विकास
विभाग वर्ष 2002-2003
का अनुच्छेद
संख्या-1.8.3
सहायता विभाग,
2.4 एवं 4.4.1 वित्त
विभाग 4.2.1
पर्यावरण
विभाग, 5.1.1 अल्प
बचत विभाग, 5.1.2
राज्य बीमा
एवं
प्रावधायी
निधि विभाग
एवं 5.1.4
वाणिज्यिक
कर विभाग से
संबंधित
मामलों पर समिति
का 144वां
प्रतिवेदन । |
|
6. |
भारत के
नियंत्रक
महालेखा
परीक्षक के
प्रतिवेदन
(सिविल) वर्ष 2002-2003
में समाविष्ट
चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
विभाग से
संबंधित
अनुच्छेद
संख्या-3.2 एवं 4.4.3
तथा
आयुर्वेद
विभाग से
संबंधित
अनुच्छेद
संख्या-3.4 से
संबंधित
मामलों पर
समिति का 145वां
प्रतिवेदन । |
|
7. |
जनलेखा
समिति, 2002-2003 के
160वें
प्रतिवेदन (11वीं
विधान सभा)
में समाविष्ट
सिफारिशों
की परिपालना
हेतु शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही
पर
क्रियान्विति
विषयक् समिति
का 146वां
प्रतिवेदन । |
|
8. |
भारत के
नियंत्रक
महालेखा
परीक्षक के
प्रतिवेदन
(सिविल) वर्ष 2002-2003
के पैरा संख्या-2.5
ग्रामीण
विकास विभाग,
वर्ष 2003-2004 पैरा
संख्या-4.2.9, 4.2.10
एवं 4.3.1
सार्वजनिक
निर्माण
विभाग पैरा
संख्या-2.4
ग्रामीण
विकास विभाग
एवं पैरा
संख्या-4.4.2
नगरीय विकास
एवं आवासन
विभाग से
संबंधित मामलों
पर समिति का
147वां
प्रतिवेदन । |
|
9. |
भारत के
नियंत्रक
महालेखा
परीक्षक के
प्रतिवेदन
(सिविल) वर्ष 1997-98
में समाविष्ट
वित्त
विभाग से
संबंधित
अनुच्छेद
संख्या-2.6 से
संबंधित
मामलों पर
समिति का 148वां
प्रतिवेदन । |
|
10. |
जनलेखा
समिति, 2002-2003 के
158वें
प्रतिवेदन
(11वीं विधान
सभा) में
समाविष्ट
सिफारिशों
की परिपालना
हेतु शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही
पर
क्रियान्विति
विषयक् समिति
का 149वां
प्रतिवेदन । |
|
11. |
जनलेखा
समिति, 2004-2005 के
93वें
प्रतिवेदन
में समाविष्ट
सिफारिशों
की परिपालना
हेतु शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही
पर
क्रियान्विति
विषयक् समिति
का 150वां
प्रतिवेदन । |
|
12. |
जनलेखा
समिति, 2004-2005 के
34वें
प्रतिवेदन
में समाविष्ट
सिफारिशों
की परिपालना
हेतु शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही
पर
क्रियान्विति
विषयक् समिति
का 151वां
प्रतिवेदन । |
|
13. |
जनलेखा
समिति, 2004-2005 के
30वें
प्रतिवेदन
में समाविष्ट
सिफारिशों
की परिपालना
हेतु शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही
पर
क्रियान्विति
विषयक्
समिति का 152वां
प्रतिवेदन । |
|
14. |
जनलेखा
समिति, 2003-2004 के
206वें
प्रतिवेदन
(11वीं विधान
सभा) में
समाविष्ट
सिफारिशों
की परिपालना
हेतु शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही
पर
क्रियान्विति
विषयक् समिति
का 153वां
प्रतिवेदन । |
|
15. |
जनलेखा
समिति, 2002-2003 के
179वें
प्रतिवेदन
(11वीं विधान
सभा) में
समाविष्ट
सिफारिशों
की परिपालना
हेतु शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही
पर
क्रियान्विति
विषयक् समिति
का 154वां
प्रतिवेदन । |
|
16. |
भारत के
नियंत्रक
महालेखा
परीक्षक के
प्रतिवेदन
(सिविल) में
समाविष्ट वित्त
विभाग से
संबंधित
अंकेक्षण
प्रतिवेदन
वर्ष 2001-2002 का
अनुच्छेद
संख्या-6.3 से
संबंधित
मामलों पर
समिति का 155वां
प्रतिवेदन । |
|
17. |
भारत के
नियंत्रक
महालेखा
परीक्षक के
प्रतिवेदन
(सिविल) वर्ष 2001-2002
पैरा संख्या-4.5
एवं 4.7 तथा वर्ष
2002-2003 पैरा संख्या-4.1.2
एवं 4.3.1, सिंचाई
विभाग से
संबंधित
मामलों पर
समिति का 156वां
प्रतिवेदन । |
|
18. |
भारत के
नियंत्रक
महालेखा
परीक्षक के
प्रतिवेदन
(सिविल) वर्ष 2002-2003
का पैरा संख्या-1.8.1,
4.2.3, 4.2.4, 4.6.4 वर्ष 2003-2004 का
पैरा संख्या-2.5,
2.6, 4.1.3 एवं 4.2.13
ग्रामीण
विकास एवं
पंचायती राज
विभाग से संबंधित
मामलों पर
समिति का 157वां
प्रतिवेदन । |
|
19. |
जनलेखा
समिति, 2002-2003 के
180वें
प्रतिवेदन
(11वीं विधान
सभा) में
समाविष्ट
सिफारिशों
की परिपालना
हेतु शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही
पर
क्रियान्विति
विषयक् समिति
का 158वां
प्रतिवेदन । |
|
20. |
जनलेखा
समिति, 2004-2005 के
35वें
प्रतिवेदन
में समाविष्ट
सिफारिशों
की परिपालना
हेतु शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही
पर
क्रियान्विति
विषयक् समिति
का 159वां
प्रतिवेदन । |
|
21. |
जनलेखा
समिति, 2004-2005 के
66वें
प्रतिवेदन
में समाविष्ट
सिफारिशों
की परिपालना
हेतु शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही
पर
क्रियान्विति
विषयक् समिति
का 160वां
प्रतिवेदन । |
|
22. |
भारत के
नियंत्रक-महालेखा
परीक्षक के
प्रतिवेदन
(सिविल) वर्ष 2002-2003
पैरा संख्या-3.7
जन स्वास्थ्य
अभियांत्रिकी
विभाग से
संबंधित
मामलों पर
समिति का 161वां
प्रतिवेदन । |
|
23. |
भारत के
नियंत्रक-महालेखा
परीक्षक के
प्रतिवेदन
(सिविल) में
समाविष्ट
सिंचित
क्षेत्र
विकास एवं जल
उपयोगिता
विभाग,
अंकेक्षण
प्रतिवेदन
वर्ष 2001-2002 का
अनुच्छेद
संख्या-4.3 से
संबंधित
मामलों पर
समिति का 162वां
प्रतिवेदन । |
|
24. |
जनलेखा
समिति, 2002-2003 के
138वें
प्रतिवेदन
(11वीं विधान
सभा) में
समाविष्ट
सिफारिशों
की परिपालना
हेतु शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही
पर
क्रियान्विति
विषयक् समिति
का 163वां
प्रतिवेदन । |
|
25. |
भारत के
नियंत्रक-महालेखा
परीक्षक के
प्रतिवेदन
(सिविल) वर्ष 2000-2001
पैरा संख्या-3.4
(माध्यमिक
शिक्षा), वर्ष
2001-2002 पैरा संख्या-3.1
(माध्यमिक
शिक्षा), वर्ष
2002-2003 पैरा संख्या-4.6
(प्राथमिक
शिक्षा) तथा
वर्ष 2003-2004 पैरा
संख्या-4.2.4
(प्राथमिक
शिक्षा)
विभाग से
संबंधित
मामलों पर
समिति का 164वां
प्रतिवेदन । |
|
26. |
जनलेखा
समिति, 2001-2002 के
96वें एवं 2002-2003 के
176वें
प्रतिवेदन
(11वीं विधान
सभा) में
समाविष्ट
पंजीयन एवं
मुद्रांक कर
विभाग से
संबंधित सिफारिशों
पर शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही
पर क्रियान्विति
विषयक्
समिति का 165वां
प्रतिवेदन । |
|
27. |
जनलेखा
समिति, 2002-2003 (11वीं
विधान सभा) के
133वें व 145वें
एवं 2004-2005 (12वीं
विधान सभा) के
97वें
प्रतिवेदन
में समाविष्ट
राज्य
आबकारी
विभाग से
संबंधित
सिफारिशों
पर शासन
द्वारा की गई
कार्यवाही
पर
क्रियान्विति
विषयक्
समिति का 166वां
प्रतिवेदन । |
|
28. |
वर्ष 2001-2002
के लिए भारत
के नियंत्रक-महालेखा
परीक्षक के
प्रतिवेदन
(राजस्व) में
समाविष्ट
चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
विभाग से
संबंधित
मामलों पर
समिति का 167वां
प्रतिवेदन । |
|
29. |
वर्ष 2002-2003
के लिए भारत
के नियंत्रक-महालेखा
परीक्षक के
प्रतिवेदन
(राजस्व
प्राप्तियां)
में समाविष्ट
राज्य
आबकारी
विभाग से
संबंधित
मामलों पर
समिति का 168वां
प्रतिवेदन । |
सरकारी
आश्वासनों
संबंधी समिति
श्री अध्यक्ष:
श्री
प्रद्युम्न
सिंह।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह(सभापति,
सरकारी आश्वासनों
संबंधी
समिति): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से सरकारी आश्वासनों
संबंधी समिति,
2006-07 पशुपालन,
मत्स्य,
सैनिक कल्याण,
खाद्य एवं
नागरिक
आपूर्ति तथा
इंदिरा गांधी
नहर परियोजना
विभाग के वर्ष
2001 के लम्बित आश्वासनों
से संबंधित
समिति का
प्रथम
प्रतिवेदन
उपस्थापित
करता हूं।
श्री अध्यक्ष:
2006-07 का है यह तो।
श्री श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
साहब, यह तो
इसमें लिखा है
विभाग के 2001 के
जो लम्बित थे।
श्री अध्यक्ष:
इसमें तो 2006-07
लिखा है।
समिति का
प्रथम प्रतिवेदन
उपस्थापित
करेंगे।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): 2006-07
में पेश किया
जा रहा है न ?
श्री अध्यक्ष:
प्रथम
प्रतिवेदन।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
जी, हां।
श्री अध्यक्ष:
इन्होंने तो
29-29 कर दिये और आप
प्रथम ही कर
रहे हो ?
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): 2001
के लम्बित
पुराने पड़े
हुए हैं, अब
मैं यहां कहना
नहीं चाहता कि
पूर्व में ...
श्री अध्यक्ष:
ठीक है, ठीक
है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): I don’t want to comment
anything.
श्री अध्यक्ष:
ठीक है, ठीक
है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
इन्होंने
कुछ किया ही
नहीं तो मैं
क्या करूं ?
श्री अध्यक्ष:
पुर:स्थपित
किये जाने
वाले विधेयक।
राजस्थान
सिविल न्यायालय
(संशोधन)
विधेयक, 2006 ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी आज्ञा से
राजस्थान
सिविल न्यायालय
(संशोधन)
विधेयक, 2006 को
पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
के लिए प्रस्ताव
करता हूं।
श्री अध्यक्ष:
प्रश्न यह है
कि राजस्थान
सिविल न्यायालय
(संशोधन), 2006 को
पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
प्रदान की जाए
?
(स्वीकृति)
विधेयक
को पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
प्रदान की गई।
प्रभारी
मंत्री
विधेयक को
पुर:स्थापित
भी करें।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
राजस्थान
सिविल न्यायालय
(संशोधन), 2006 को
पुर:स्थापित
करता हूं।
श्री अध्यक्ष:
कारण भी बताओ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
प्रक्रिया के
नियम 63-1 के अन्तर्गत
राजस्थान
सिविल न्यायालय
(संशोधन), 2006 का
अध्यादेश
संख्या-4
जारी करने के
कारणों का
विवरण सदन की
मेज पर रखता
हूं।
श्री अध्यक्ष:
राजस्थान
विधान सभा
सदस्य
(निरर्हता-निराकरण)
(संशोधन)
विधेयक, 2006।
श्री राजेन्द्र
राठौड़।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी आज्ञा से
राजस्थान
विधान सभा
सदस्य
(निरर्हता-निराकरण)
(संशोधन)
विधेयक, 2006 को
पुर:स्थापित
करने की
आज्ञान के लिए
प्रस्ताव
करता हूं।
श्री अध्यक्ष:
प्रश्न यह है
कि राजस्थान
विधान सभा सदस्य
(निरर्हता-निराकरण)
(संशोधन)
विधेयक, 2006 को
पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
प्रदान की जाए
?
(स्वीकृत)
विधेयक
को पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
प्रदान की गई
।
पुर:स्थापित
भी करेंगे।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
राजस्थान
विधान सभा
सदस्य
(निरर्हता-निराकरण)
(संशोधन)
विधेयक, 2006 को
पुर:स्थापित
करता हूं।
श्री अध्यक्ष:
एक्सेस
डिमांड्स का
उपस्थापन।
वित्तीय
कार्य।
श्री
वीरेन्द्र
मीणा (राज्य
मंत्री, वित्त
एवं करारोपण):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से 2000.2001, 2001-02 एवं 2002-03 के
लिए अतिरेक
मांगों का
उपस्थापन
करता हूं।
श्री अध्यक्ष:
अब राज्य में
अतिवृष्टि से
उत्पन्न
स्थिति पर
विचार होगा और
विभिन्न
दलों ने जो
अपनी सूची दी
है उसी के
मुताबिक, हां,
इससे पूर्व कि
माननीय सदस्य इस बारे
में कहें।
Skp/akt/04102006/1550/2o/1
इससे पूर्व कि माननीय सदस्य इस बारे में कहें, मैं चाहूंगी कि सरकार इस बारे में अपना वक्तव्य दे ताकि कुछ लोगों की शंकाओं का निराकरण हो सके और जो सुझाव उन्हें देने हैं, आपके वक्तव्य में जो बात नहीं आई है उस बारे में उन्हें सुझाव देने होंगे वो दे सकें। आपको बोलने का मौका मिलेगा न, बोलने का मौका मिलेगा आपको। सरकार आपको बतायेगी क