vkj/akt/ 1100/1a

अशोधित प्रति/ प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

 

अंक  5    बारहवीं विधान सभा के पांचवें सत्र का चौथा दिवस   संख्‍या  4

 

 

शुक्रवार,

03 मार्च, 2006

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 1100 बजे

विधान सभा भवन,जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

 

श्री अध्‍यक्ष:  श्री शंकर सिंह राजपुरोहित।

जिला जालौर में जारी शस्‍त्र अनुज्ञा पत्र

39. श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): क्‍या गृह मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-    (1) जिला जालौर में विगत पाँच वर्षों में शस्‍त्र लाइसेंस प्राप्‍त करने के लिए कितने आवेदन प्राप्‍त हुए, इनमें से कितने लाइसेंस जारी किये गये व कितने शेष हैं ? तहसीलवार सूची सदन की मेज पर रखें।

                (2) उक्‍त वर्षों में जिले में कितने व्‍यक्तियों को टोपीदार, 12 बोर व रिवाल्‍वर के लाइसेंस जारी किये गये? तहसीलवार सूची सदन की मेज पर रखें।     

                (3) क्‍या यह सही है कि जिले में आपराधिक, गुण्‍डा प्रवृत्ति के लोगों व जिनके विरुद्ध न्‍यायालय में मुकदमे दर्ज हैं, उनको भी शस्‍त्र लाइसेंस जारी किये हुए हैं? यदि हां तो किन-किनको ?

      (4) क्‍या सरकार इस प्रकार के जारी शस्त्र लाइसेंस को निरस्‍त करने का विचार रखती है? यदि हां तो कब तक ?

गृह मंत्री(श्री गुलाबचन्‍द कटारिया): (1) जिला जालौर में विगत पाँच वर्षों में शस्‍त्र लाइसेंस प्राप्‍त करने के लिए 1749 आवेदन पत्र प्राप्‍त हुए। इनमें से 1229 व्‍यक्तियों को लाइसेंस जारी किये गये, 456 आवेदन पत्र खारिज किये गये तथा 64 आवेदन-पत्र शेष हैं। तहसीलवार सूची परिशिष्‍ट- पर संलग्‍न है।

                (2) विगत पाँच वर्षों में जिले में टोपीदार बन्‍दूक के 1111, 12 बोर गन के 82 व रिवाल्‍वर के 36 लाइसेंस जारी किये गये। सूची परिशिष्‍ट- पर संलग्‍न है।

                (3) अब तक सूची परिशिष्‍ट में से 29 व्‍यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक प्रवृत्ति के मुकदमे दर्ज होना पाया गया है। सूची परिशिष्‍ट पर संलग्‍न है।

                (4) अनुज्ञापन अधिकारी द्वारा लाइसेंस निरस्‍त करने की कार्यवाही की जा रही है जिस पर उनके द्वारा विधिक प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लिया जायेगा।

 

श्री अध्‍यक्ष: मोबाइल किसका बज रहा है?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: सी.पी.जोशी का बज रहा है।

डा. सी.पी.जोशी: मेरा आप ले जाओ।

श्री शंकरसिंह राजपुरोहित: माननीय अध्‍यक्ष महोदया, आपके माध्‍यम से मेरा एक छोटा सा प्रश्‍न है। टोपीदार बन्‍दूक के लाइसेंस देने का अधिकारी तहसीलदार होता है, कुछ तहसीलों में किसी एक तहसीलदार द्वारा एक साथ बहुत भारी संख्‍या में लाइसेंस दिये गये हैं, जरा इसकी जांच करवाई जाये और जालौर जिले में बिना लाइसेंस हथियार कितने हैं, उनमें से कितने पकड़े गये और उन पर क्‍या कार्यवाही हुई?

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया: वैसे हमने आपको अपनी तरफ से परिशिष्‍ट-क लगाया है उसमें हमने बिलकुल प्रत्‍येक चीज को स्‍पष्‍ट किया है। कितने आवेदन हमको प्राप्‍त हुए, कितने उसमें से दिये। पाँच वर्षों में जारी किये गये 12 बोर की तहसीलवाइज सूची आपको दे रखी है। जालौर में 25, आहोर में 20, सायला में 2, बागोडा में नहीं, भीनमाल में 17, रानीवाड़ा में 12, सांचौर में 6, कुल 82 हैं। इसी तरह से रिवाल्‍वर की भी हमने सूची दे रखी है, जिसमें 36 है टोटल। टोपीदार बन्‍दूक की भी हमने सूची दे रखी है, इसमें 1111 बता रखे हैं। मैं सोचता हूं, मैंने कोशिश की है कि प्रत्‍येक चीज का जवाब आपको इन सारी चीजों को देखने के बाद मिल जाये परन्‍तु अवैध हथियार कितने हैं? यह एकदम तो मैं एट रेंडम नहीं कह सकता हूं कि समय समय पर हमारी पुलिस अवैध हथियारों को पकड़ने का काम करती है, उसके केसेज भी बनाते हैं और अगर कहीं कोई ध्‍यान में आता है तो हम उस दृष्टि से कार्यवाही करते हैं पर एग्‍जेक्‍ट उनकी संख्‍या गिनकर बताना तो मुश्किल है, अगर मैं यह बताऊं इसका मतलब है कि फिर मुझे जानकारी है और फिर भी मैं कार्यवाही नहीं कर रहा हूं, ऐसा मेरे पर आरोप लगेगा।

श्री संयम लोढ़ा(सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्रीजी से यह निवेदन करना चाहता हू कि जो 1111 टोपीदार लाइसेंस का आपने उत्‍तर में जिक्र किया है, क्‍या यह सही है कि एक तहसीलदार तीन तहसीलों में वहां कार्यरत रहा है और 1111 लाइसेंस में से 500 से अधिक टोपीदार लाइसेंस एक ही तहसीलदार ने दिये हैं और उसमें उन लोगों को भी दिये हैं जिनके खिलाफ गम्‍भीर किस्‍म के आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, नम्‍बर एक? नम्‍बर दो, जिन लोगों को आपने यह पिस्‍टल, रिवाल्‍वर और ये सारे लाइसेंस जारी किये हैं, उनमें ऐसे कितने लोग हैं जिन्‍होंने लाइसेंस जारी होने के बाद अस्‍त्र नहीं खरीदे और आपने उनके लाइसेंस निरस्‍त किये हैं?

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया: वैसे हमने इस प्रश्‍न का पूरा जवाब मंगाने पर बिलकुल ढूंढकर निकाला कि ऐसे कितने लोग हैं जिन पर किसी प्रकार के मुकदमे हैं फिर भी लाइसेंसी आज की तारीख में है। 29 लोगों के ऐसे प्रकरण हैं, उन 29 में से केवल चार प्रकरण ऐसे हैं जो लाइसेंस जारी के पहले भी उन पर मुकदमे थे, उसके बाद भी लाइसेंस उनको जारी हुए पर वह बहुत सामान्‍य किस्‍म के मुकदमे थे। एक मुकदमा जरूर हमारी छानबीन में से आया है। यह जो रामकिशन पुत्र श्री मोतीजी, इनको लाइसेंस जारी किया हमने 6.3.87 को और इन पर एक गुजरात में एन.डी.पी.एस. एक्‍ट में एक मुकदमा 111/86 दर्ज था। पहले मुकदमा दर्ज होते हुए भी 1987 में इनका लाइसेंस बना। यह केस आपके इस प्रश्‍न के माध्‍यम से हमारे ध्‍यान में आया, हम निश्चित रूप से देख रहे हैं कि किसने यह गलती की? समय पर सूचना हमारे पास थाने में आनी चाहिए, वह नहीं आई, गुजरात में हो चाहे कहीं का हो। दूसरा, दुर्जन सिंह का है। इनका प्रकरण 2000 में दर्ज हुआ थ पर एक सामान्‍य किस्‍म का था 341-323 का, मैं सोचता हूं शायद पर एकदम एग्‍जेक्‍ट नहीं कह सकता हूं पर एक सामान्‍य किस्‍म का था, हो सकता है जब हमने जारी किया था 2003 में, मुकदमा था 2000 का तो यह सूचना भी मेरे पास नहीं आ पाई थी कि उस समय तक मुकदमा खतम हो चूका था या उसके समय में पेंडिंग था पर मुकदमा उसमें दर्ज था। इसी तरह से एक और है, रडमा उर्फ रिडमलराम का, इनका भी इसी तरह का एक 341-323/34 का मुकदमा था। यह 1995 में दर्ज था और 1998 में इनका लाइसेंस जारी हुआ है। बाकी तो 1991 का एक केस है। कहीं पर 1995 में दर्ज था और फिर भी 1998 में लाइसेंस बना है। इसके बाद एक मुकदमा जरूर लगता है कि रमेशा कुमार पुत्र लालजी जो 200 में दर्ज है, वह आबकारी अधिनियम के तहत था, वह वास्‍तव में मुकदमा जिस तरह का था, दर्ज होने के बाद अगर यह 2002 में जो इनका लाइसेंस जारी हुआ, मैं इसकी जांच करूंगा कि अगर यह जानकारी में होते हुए भी जिस किसी ने लाइसेंस देने वाले अधिकारी ने इसको नजर अंदाज किया तो वह व्‍यक्ति कौन था, किसके कारण से हुआ है, इसमें जो भी आवश्‍यक कार्यवाही होगी, वह मैं निश्चित रूप से करूंगा।

श्री संयम लोढ़ा: गृह मंत्रीजी, आपने मेरे दोनों प्रश्‍नों के उत्‍तर नहीं दिये। मैंने पहला यह पूछा है कि आपने जो 1111 टोपीदार लाइसेंस जारी किये हैं, एक ही तहसीलदार जालौर जिले में तीन जगहों पर तहसीलदार रहा है और 500 से ज्‍यादा लाइसेंस उसने जारी किये हैं और दूसरा, जिन लोगों को आपने लाइसेंस जारी किये, उनमें ऐसे कितने हैं जिन्‍होंने शस्‍त्र नहीं खरीदे और नहीं खरीदने के कारण आपने लाइसेंस निरस्‍त किये। दो बातें मैंने आपसे पूछी है।

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया: यह जो आपने टोपीदार लाइसेंस के बारे में पूछा है...

श्री अध्‍यक्ष: श्री जीतमल खांट। जरा इनको भी पूछ लेने दीजिये।

श्री जीतमल खांट(बागीडोरा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय गृह मंत्रीजी बताने का श्रम करेंगे कि बांसवाड़ा, डूंगरपुर विशेष शांतिप्रिय इलाका है और वहां पर मौत-मरण और ऐसे त्‍यौहारों पर टोपीदार बन्‍दूकों का उपयोग लिया जाता है। मैं आपसे जानना चाहूंगा कि जिन लोगों ने टोपीदार लाइसेंस हेतु आवेदन कर रखा है और जिनके ऊपर किसी प्रकार का दोषारोपण नहीं है, इनके लाइसेंस रोकने का क्‍या कारण है? और विशेष रूप से बांसवाड़ा डूंगरपुर के लिए मैं निवेदन कर रहा हूं  कि वहां पर हमारा विशेष शांतिप्रिय इलाका है, कम से कम मौत-मरण और सामाजिक फंक्‍शनों में हम लोग टोपीदार बन्‍दूक का उपयोग करते हैं, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करूंगा कि इसमें आप कोई...

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह तो अलग से प्रश्‍न है। आप जवाब देना चाहें तो दें।

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया: अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह तो नहीं बता सकता कि उस समय कौन तहसीलदार तीन तहसीलों में था क्‍योंकि मेरे पास इनकी जानकारी तो नहीं है। (व्‍यवधान) मैं कोशिश कर रहा हूं, मेरी बात को आप सुन लें। जो टोपीदार बन्‍दूक के लाइसेंस बने हैं, वह मैंने आपको बताया है। जालौर में 60 बने, आहोर में 217 बने, सायला में 196 बने, बागोडा में 150 बने, भीनमाल में 410 बने। निश्चित रूप से यह जो जिन तहसीलों में अधिक बने हैं, पर टोपीदार बन्‍दूक के लाइसेंस हैं, जिसमें सामान्‍यत: अगर उसके खिलाफ कोई केस है तो नहीं बनता है, बाकी सामान्‍यत: किसान को यह देते हैं और मैंने जो आपको बताया है और जो मैंने रिजेक्ट किये हैं, वह भी लिस्‍ट मेरे पास पूरी है। यह जो मैंने जारी किये हैं, उसकी पूरी एक-एक व्‍यक्ति की सूची इसके साथ है। जिनके खिलाफ मुकदमा है और विभाग ने जिनको मुकदमों को ध्‍यान में नहीं रखा, उसकी मैंने आपको डिटेल दी है और अब वहां तहसीलदार कौन तीन तहसीलों में था, यह मेरे पास इस समय एकदम तुरन्‍त उपलब्‍ध नहीं है कि कौन व्‍यक्ति तीन तहसीलों में था.......

 

Jkj/akt/1110/1b/03032006

 

   कि कौन व्‍यक्ति तीन तहसीलों में था और उसके द्वारा जारी हुए, अगर इसमें भी कहीं आपको लगता है कि इंटेसनली किसी आदमी ने किया है तो मैं फिर से इसको दिखवा दूंगा, अगर कोई इंटेसनली उसने कुछ किया है तो जो भी कानून के तहत मुझे अधिकार प्राप्‍त है उसके अनुसार उसके खिलाफ कार्यवाही हो जायेगी।

श्री संयम लोढ़ा:  आपने कितने लाइसेंस निरस्‍त किये जिन्‍होंने अस्‍त्र नहीं खरीदे...

श्री अध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य, आप हर बाद इस तरह से मत खड़े हुआ करें...

श्री संयम लोढ़ा:  उसका आपने उत्‍तर नहीं दिया है।  लाइसेंस जारी होने के बाद कितने लोगों ने शस्‍त्र नहीं खरीदे और इस वजह से आपने उनके लाइसेंस निरस्‍त किये हैं या नहीं किये।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया:  मैं यह अभी बताने की स्थिति में नहीं हूं कि जिनको मिल गये और उनमें से कौन से निरस्‍त हुए, यह सूची मेरे पास इस समय नहीं है, लेकिन जो एप्‍लीकेशंस इन दिनों में जो लगी थीं उनकी सूची जरूर है कि इतने हमने निरस्‍त किये, वह तहसीलवाइज भी सूची है, नामवाइज भी है।

      जहां तक बांसवाड़ा के माननीय सदस्‍य ने कहा टोपीदार बंदूकों के बारे में, हमने अभी 16.8 को ही फिर डाइरेक्‍शन जारी किये हैं, उस डाइरेक्‍शन में कहा कि अधिक से अधिक 60 दिन के अंदर-अंदर एस.पी. को अपने नीचे की सारी रिपोर्ट कम्‍पलीट करके, थाने की करके और कलेक्‍टर तक पहुंचानी होगी।  कलेक्‍टर को 30 दिन का समय दिया है, उस 30 दिन में उसका निस्‍तारण करना है।  यदि वह किसी कारण से उसको ठीक नहीं समझता है तो इसका निस्‍तारण करके इसको रिजेक्‍ट करना है, पर 90 दिन उसकी मेक्जिमम सीमा हमने दी है और हमने यह, क्‍योंकि एक प्राक्‍कलन समिति की जब मीटिंग हुई थी, उस मीटिंग में जब यह सवाल खड़े हुए थे तो हमारे सारे अधिकारियों ने जानने के बाद, सितम्‍बर में उनकी मीटिंग हुई, 16.8 के दिन हमने अपने सारे नये आदेश जारी किये और एक बार फिर समय की ठीक तरह से पालना हो, इसका प्रयास किया है।  अभी तक कोई सौ प्रतिशत उसका पालन हो रहा है, ऐसा दावा मैं नहीं कर रहा हूं, लेकिन इस बात की कोशिश कर रहे हैं कि जो समय सीमा उनको निर्धारित है उसमें ही अगर रिजेक्‍ट करना है तो रिजेक्‍ट कर दें और अगर उनको देना है तो दे दें।

श्री अध्‍यक्ष:  नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह:  अध्‍यक्ष महोदय, एक सवाल।  एक सवाल।

श्री अध्‍यक्ष: मोहम्‍मद माहिर आजाद।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: अध्‍यक्ष महोदय, एक सवाल।  ओनली वन क्‍वेश्‍चन।(व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल:  आल राजस्‍थान का आल इंडिया करने में भी छह-छह महीने लगते हैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय।  एक लाइसेंस आल राजस्‍थान है और आल इंडिया करने के लिए भी छह-छह महीने लग जाते हैं जबकि जिला कलेक्‍टर, नागौर ने अभिशंषा कर दी, आज तक वह लाइसेंस आल राजस्‍थान से आल इंडिया नहीं हुए।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बारह मिनट हो गये, अब आप किसलिए खड़े हैं।  आप किसलिए खड़े हो गये।(व्‍यवधान) बारह मिनट हो गये हैं, मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह:  एक सवाल। एक सवाल।

श्री अध्‍यक्ष: यह क्‍या मतलब हुआ, कितने प्रश्‍न पूछेंगे।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह:  नहीं-नहीं, वह तो आपकी मर्जी है।  अगर आप चाहें तो एक सवाल पूछ सकता हूं, वरना नहीं पूछूंगा।

श्री सी.डी.देवल:  जब यह खड़े हुए तब से पहली बार से मैं हाथ खड़ा किये हूं, आप सामने देखती नहीं हैं, और प्रश्‍न नहीं पूछने देती हैं, फिर इस प्रश्‍न काल का मतलब ही क्‍या रहा, आप इसको, प्रश्‍न काल को खत्‍म ही कर दो। (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह:  जो आपका विरोध पक्ष के प्रति नरम रूख तो है नहीं, आजकल तो बहुत कड़ा रूख है आपका विरोध पक्ष के प्रति, अगर आप चाहें तो एक सवाल पूछ लें, एक सवाल पूछना चाहता हूं।

एक माननीय सदस्‍य: अध्‍यक्ष महोदय, बहुत महत्‍वपूर्ण है, एक सप्‍लीमेंट्री पूछ लें।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह:If you allow, only then I will ask. Otherwise I will not ask. (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: औरों को बैठाइये पहले, औरों को बैठाइये तब आपको इजाजत दूं मैं। आपके पीछे जो खड़े हैं उनको बैठाओ आप।

श्री सी.डी.देवल:  साहब, मैं तो जब यह खड़े हुए उसके बाद से पूछ रहा हूं, हाथ खड़ा कर रहा हूं, आप ध्‍यान ही नहीं देते हैं, बोलने ही नहीं देते हैं और फिर प्रश्‍न काल का मतलब क्‍या है, इसको समाप्‍त करो प्रश्‍न काल को आप।  प्रश्‍न काल का मतलब तो यह है कि इनसे, मंत्रीजी से कोई सूचना मांगे।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या कहना चाहते हैं आप?

श्री सी.डी.देवल:  मैं उस समय से हाथ खड़ा कर रहा हूं, आप...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या कहना चाहते हैं आप?

श्री रामनारायण चौधरी: आसन का रूख बहुत कठोर होता जा रहा है...

श्री अध्‍यक्ष:  आप प्रतिपक्ष के नेता, इस माईक को पकड़ कर मत खड़े हुआ करो आप, इससे खराब हो जायेगा।

श्री रामनारायण चौधरी:  आसन का रूख बहुत कठोर होता जा रहा है, इसमें प्रतिपक्ष को आपत्ति है।  अगर आप सदन को सुचारू रूप से चलाना चाहती हैं तो आपको हमारा सहयोग देना होगा।

श्री सी.पी.जोशी:  यह ठीक नहीं है। आप सीएलपी लीडर पर कमेंट कर रही हैं अध्‍यक्ष महोदय।  यह पहले भी बात हो चुकी है, आप सीएलपी पर कमेंट कर लेती हैं, यह क्‍या मतलब हुआ अध्‍यक्ष महोदय।

श्री रामनारायण चौधरी: और यह इतनी कठोरता आपकी बर्दाश्‍त नहीं की जायेगी।(व्‍यवधान)

श्री सी.पी.जोशी:  आप खुद अध्‍यक्ष महोदय, सीएलपी लीडर की गरिमा को नहीं रखना चाहती हैं, आप खुद कमेंट कर रही हैं।

श्री रामनारायण चौधरी:  आप बहुत कठोर हैं....

श्री सी.पी.जोशी:  हर बार यह इश्‍यू बन जाता है...

श्री सी.डी.देवल:  आखिर यह आपसे सीनियर हैं, यह भी इस कुर्सी पर रहे हैं।

श्री सी.पी.जोशी:  एक मिनट, आप बिराजो न साहब।  अध्‍यक्ष महोदय, हम सीरियस कन्‍सर्न करते हैं, आपसे फिर निवेदन करना चाहते हैं कि सीएलपी लीडर को आप कमेंट नहीं करें।  जब भी सीएलपी लीडर खड़े होते हैं, आप कमेंट कर देती हैं।  आप खुद की, आसन की जिम्‍मेदारी है, जो हमने फैसला किया था कि लीडर ऑफ द हाउस और लीडर ऑफ द अपोजीशन खड़े हों, उसके सामने कोई नहीं बोलें और आसन ही बोलने लग जायेगा तो बाकी क्‍या बच जायेगा।(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: आप हर बार ही ख़ड़े होते हैं बार-बार।

श्री सी.पी.जोशी: What message do we want to give? आज कम से कम सेल्‍फ डिसेप्लिन चेयर का नहीं रहेगा,  very unfortunate, you see, in the history of two and a half years, सवा दो साल में अध्‍यक्ष ने सीएलपी लीडर के संबंध में जितने कमेंट्स किये हैं, पचास साल के इतिहास में कभी नहीं हुए होंगे, कभी नहीं आज दिन तक।

श्री अध्‍यक्ष: ना-ना।

श्री सी.पी.जोशी: You should discourage it.  You should patronise we people.  Instead of patronising we people, you always come out with sarcastic remarks.  This is not desirable. At least, we expect from you, being a senior parliamentarian, आपको हमको प्रोटेक्‍ट करना चाहिए, हमारे लीडर को ही आप कह देंगी तो हम क्‍या बोलेंगे।(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन:  अध्‍यक्ष महोदय, यह तो हद हो गई।

श्री अध्‍यक्ष:  नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य, नियमों में यह प्रावधान है कि कम से कम एक दिन में बारह प्रश्‍नों का जवाब आये।

श्री सी.पी.जोशी:  यह ढाई साल से प्रावधान है, पचास साल से प्रावधान है...

श्री अध्‍यक्ष: सुनिये, सुनिये।

श्री सी.पी.जोशी:  जब आप पिक एण्‍ड चूज करें तब नहीं हो सकता। You see the history, आपके टेन्‍योर में आधे-आधे घंटे तक क्‍वेश्‍चन हुए हैं, स्ट्रिक्‍ट एक ही दिन होंगी क्‍या आप।  आपको खुद को सीएलपी लीडर को करना चाहिए, सीनियर आदमी हैं, आप कमेंट करती हैं सीनियर आदमी को।

श्री महावीर प्रसाद जैन: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपकी उदारता का गलत, नाजायज फायदा उठा रहे हैं।

श्री सी.पी.जोशी:  सीनियर लीडर को भी आप नहीं जानना चाहते, नये को नहीं जानना चाहते हैं,this is not the way to conduct the House

   आप सीएलपी को नहीं बोलने देना चाहो तो क्‍या मतलब है।You always come out with sarcastic remarks. (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी:  आप क्‍या कहना चाहते हैं(व्‍यवधान) वह बोल रहे हैं हमारे आदमी।

श्री महावीर प्रसाद जैन:  प्रतिपक्ष के नेता महोदय, जब आप खड़े थे...

श्री अध्‍यक्ष:  प्रतिपक्ष के नेता, माईक को यों न करें आप।(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन: आपके माननीय सदस्‍य खड़े हो गये, आपके सदस्‍य तो आपको बोलने नहीं देते।

श्री रामनारायण चौधरी:  उनको बोलने का अधिकार है, आप विघ्‍न नहीं डालें, रोकने का काम आसन का है।(व्‍यवधान)

श्री सी.पी.जोशी:  आप विराजिये। आप विराजिये महावीरजी।  आप खड़े हैं, आप खुद खड़े हुए हैं।  आप भी खड़े हो, आप क्‍या बैठाओगे। आप क्‍या कह रहे हो।(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन:  आप क्‍यों खड़े हैं।

श्री सी.पी.जोशी:  आप काहे के हेड हैं, आप चीफ व्‍हीप हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन:  आप क्‍यों खड़े हैं।

श्री सी.पी.जोशी:  मैं तो एम.एल.ए. हूं, आप चीफ व्‍हीप हैं, आप ध्‍यान रखिये। I am an MLA, you are Chief Whip. आप रूलिंग पार्टी के चीफ व्‍हीप हैं, मैं तो एम.एल.ए. हूं।

श्री सी.डी.देवल:  महावीर प्रसादजी, आप जो कर रहे हैं, ठीक नहीं कर रहे हैं।  आपकी नेता बोलेगी तो हम भी सब खड़े हो जायेंगे।(व्‍यवधान)

श्री सी.पी.जोशी: Please enforce the rules. आपको नियम तोड़ करके ही चलना चाहिए, आप पार्टी के चीफ व्‍हीप हैं, रूलिंग पार्टी के।

श्री महावीर प्रसाद जैन:  मैं इसलिए खड़ा हूं कि जो तय हुआ है...(व्‍यवधान)

श्री सी.पी.जोशी:  अध्‍यक्ष महोदय, यह रूलिंग पार्टी के चीफ व्‍हीप हैं, I am simply an MLA. यह क्‍या एग्‍जाम्‍पल देना चाहते हैं, (व्‍यवधान)

श्री सी.डी.देवल:  कल प्रतिपक्ष के नेता खड़े थे, आधे-आधे घंटे क्‍यों चलता रहा अध्‍यक्ष महोदय..(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य को बोलने के लिए...

श्री सी.डी.देवल: कल आधा घंटे कैसे चला।(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी:  रोकने का काम आपका नहीं है, रोकने का काम आसन का है।

श्री सी.डी.देवल: आपको इनको बैठाते नहीं हैं, महावीर प्रसादजी सब जगह खड़े हो जाते हैं,सीएलपी लीडर के सामने...

श्री महावीर प्रसाद जैन:  आपको नेता नहीं मानते वह।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से, आपके भाव से ऐसा लगा कि आपने कृपापूर्वक मुझको अलाउ कर दिया है, ऐसा आभास लगा, अभी भी अगर आप मुझे...

श्री नन्‍दलाल बंशीवाल:  यह परम्‍परा नहीं है हाउस की, नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन काल हो गया और आपको अलाउ कर दें।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह:  अभी भी आप नहीं चाहती हैं, मैं नहीं पूछूंगा।  अगर आप नहीं चाहती हैं तो मैं नहीं पूछूंगा।  आप कहें कि हां पूछिये, तब तो पूछूंगा वरना मैं कतई नहीं पूछूंगा।

श्री नन्‍दलाल बंशीवाल:  एक नई परम्‍परा डाल रहे हैं अध्‍यक्षजी, आप।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह:  और यह मानकर, यह तो आज ही आ गया सदन के अंदर...

श्री नन्‍दलाल बंशीवाल:  नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन काल हो गया और इनको अलाउ करें हम।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह:  कि आसन का रूख विपक्ष के प्रति बहुत कठोर होता जा रहा है..(व्‍यवधान)

श्री नन्‍दलाल बंशीवाल:  ना अध्‍यक्ष महोदय।  इनको अलाउ नहीं करेंगे आप। अध्‍यक्ष महोदय, नई परम्‍परा डाल रहे हैं आप, नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन काल हो गया और आपने इनको परमिशन दे दी।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: इसलिए मेरा आपसे निवेदन है, मैं आपको कटु शब्‍द इस्‍तेमाल कर नहीं सकता, मैं आपसे यह कहना चाहता हूं...

श्री अध्‍यक्ष:  प्रश्‍न सत्‍ता पक्ष का था, मैंने जानबूझ कर प्रतिपक्ष को बोलने का, सप्‍लीमेंट्री पूछने का मौका दिया, यद्यपि इधर से भी खड़े थे, माननीय सदस्‍य इधर से भी खड़े थे और इस तरह से आप आक्षेप यदि लगाते हैं कोई सदन के ऊपर, तो आप जैसे सदस्‍य से मैं यह उम्‍मीद नहीं करती हूं।(व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह:  मेरा आक्षेप सिर्फ इतना ही है कि मैं ऐसा महसूस कर रहा हूं, हमारे सदस्‍य राजसमंद से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो बात कही, मैं उसको दूसरे शब्‍दों में कह रहा हूं....

श्री रघुवीर सिंह मीणा:  नीतिगत बात है...

श्री अध्‍यक्ष:  अब आप खड़े क्‍यों हैं, एक को बोल लेने दीजिये।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह:  कि आपका रूख जो है विपक्ष के प्रति बहुत कठोर होता जा रहा है दो दिन में और पूर्व में था तो उसके बारे में तो मुझे कुछ कहना नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष:  आपके प्रति तो मेरा रूख कठोर नहीं है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह:  वह तो आपकी कृपा है।  मैंने विपक्ष के प्रति कहा है।  मैं अब

   आपसे यह पूछना चाहता हूं आपके मार्फत....

श्री नन्‍दलाल बंशीवाल:  आपके प्रतिपक्ष के नेता खड़े हैं।(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी:  सदन में आसन एक व्‍यक्ति से दूसरे व्‍यक्ति में भेदभाव कर रहा है।  यह भी आसन के लिए शोभनीय नहीं है। दूसरी बात आपने कही कि सत्‍ता पक्ष का प्रश्‍न है...

श्री अध्‍यक्ष:  प्रतिपक्ष के नेता, आप आसन पर आक्षेप लगा रहे हैं, यह शोभनीय नहीं है, I am very sorry.

श्री रामनारायण चौधरी:  मैं आक्षेप नहीं कर रहा हूं, आक्षेप नहीं है।

एक माननीय सदस्‍य: बहुत गम्‍भीर बात है।

श्री रामनारायण चौधरी:  यह आक्षेप नहीं है, आप खुद...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष:I am very sorry. मुझे बड़ा अफसोस है इस बात का।(व्‍यवधान) विपक्ष के नेता यह बात कह रहे हैं।

श्री रामनारायण चौधरी:  आप कह रहे हैं कि मैंने ऐसा होते ऐसा किया है, क्‍यों कहा आसन ने।  आसन खुद ही कह रहा है।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या?

श्री रामनारायण चौधरी: क्‍या कहा, आप दिखवा लीजिये।  आसन खुद ही कह रहा है।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष:  यह क्‍या गलत कह दिया मैंने, क्‍या गलत कहा।

श्री रामनारायण चौधरी:  कि आप पर मैंने अहसान किया है।

श्री अध्‍यक्ष:  जब उनको मौका दिया तो मैंने कहा आपके प्रति तो कठोर नहीं हूं। आप क्‍यों कह रहे हैं ऐसा।

 श्री रामनारायण चौधरी:  कहां मौका दिया?

 श्री अध्‍यक्ष:  यह क्‍या गलत कह दिया।  लेकिन आपने जो कुछ कहा है...

श्री रामनारायण चौधरी:  मैंने क्‍या कह दिया...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष:  आसन के प्रति प्रतिपक्ष के नेता से यह उम्‍मीद नहीं की जाती है कि आसन के प्रति इस तरह की बात करें।(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी:  नहीं-नहीं, हमने आसन के प्रति कोई अनादर नहीं किया।  हम तो यह कह रहे हैं कि आसन, हम तो यह कह रहे हैं कि आसन कठोर हो रहा है, तो यह कहने का अधिकार है, यह पार्लियामेंट्री वर्ड है, कठोर है आसन।  हम यह नहीं कहते पक्षपात कर रहे हैं।(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: विपक्ष के नेता, आसन की एक मर्यादा है, आसन की गरिमा है, आसन की मर्यादा है, आप तो हमें कुछ सिखाने के लिए हैं, इतने वरिष्‍ठ आप हैं, आप आसन को ही कह रहे हैं, आसन को सीधा चार्ज कर रहे हैं।(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन:  प्रतिपक्ष की मर्यादा नहीं है।(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़:  आसन पर सीधा आक्षेप लगा रहे हैं, कम से कम आपसे उम्‍मीद नहीं है ऐसी।  आप कई वर्षों तक इस सदन में रहे हैं। आसन सर्वोपरि है, आसन की गरिमा है, आसन का सम्‍मान करना हम सब का फर्ज है, नियमों और प्रक्रियाओं में प्रावधान है।

श्री सी.डी.देवल:  आसन का मतलब यह नहीं है ऐसी इकतरफी कार्यवाही करे।(व्‍यवधान)

श्री सी.पी.जोशी:  हमारी जिम्‍मेदारी नहीं है, आपकी भी जिम्‍मेदारी बनती है हाउस चलना।

श्री सी.डी.देवल: आसन न्‍याय करे।

श्री रामनारायण चौधरी: सुनिये, सुनिये साहब, सी.पी.साहब।  जो गरिमा का पाठ आप मुझे पढ़ा रहे हैं वह पाठ मैं उस समय से जानता हूं जब आप पानी को बू कहते थे, पानी को आप बू कहते थे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: इसीलिए मुझे अफसोस है कि आप उस समय से सदन में आ रहे हैं जब पानी को मैं बू कहता था और उसके बाद आसन पर इस तरह का हस्‍तक्षेप, आसन पर इस तरह का आरोप आपके द्वारा, इसीलिए मुझे अफसोस है।(व्‍यवधान)

श्री सी.पी.जोशी: यह नेता के सामने खड़े हैं, क्‍या आरोप दे रहे हैं, क्‍या बात कर रहे हैं, खुद ही यह पार्लियामेंट्री मिनिस्‍टर हैं, यह पार्लियामेंट्री मिनिस्‍टर एग्‍जाम्‍पल दे रहे हैं, सीएलपी लीडर के सामने खड़े हुए हैं, You want to set an example? पार्टी चला रहे हैं, राज कर रहे हैं आप।  आप राज कर रहे हैं, हम जो विरोध कर रहे हैं, हमें तो हल्‍ला करने दो, राज करने के बाद में अक्ल नहीं है, क्‍या बातें कर रहे हैं आप।(व्‍यवधान)इसलिए अक्ल नहीं है आपमें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: करो-करो।

श्री सी.पी.जोशी:  अध्‍यक्ष महोदय, फिर कहना चाहूंगा अध्‍यक्ष महोदय, आपके चेम्‍बर में मीटिंग हुई, आपने एक एग्‍जाम्‍पल सेट किया और यह एग्‍जाम्‍पल आपके चेम्‍बर में मीटिंग होने के बाद का ठीक नहीं है और हम कहना चाहते हैं, हमने कल प्रश्‍न लगाया गृह कर का, आज आपने सात बजे लगा दिया गृह कर का, यह अपोजीशन के प्रति आपका रूख है अध्‍यक्ष महोदय।  जो एक क्‍वेश्‍चन डेफर किया, उसको लगा दिया आपने लास्‍ट में।  आप चाहते ही नहीं कि सदन के अंदर प्र‍तिपक्ष की कोई बात को हम हाउस के अंदर रखें।

 

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   इसलिए अध्‍यक्ष महोदय, आप अपने चैम्‍बर में मीटिंग कराओ।

श्री अध्‍यक्ष: चर्चा कराएंगे न आपकी।

डॉ.सी.पी.जोशी: कब करायेंगे 8 बजे रात को?

श्री अध्‍यक्ष:  हमेशा रात को होती है। 

डॉ.सी.पी.जोशी: 7 बजे तो हाउस खतम होगा आपका कब चर्चा करायेंगे?

श्री अध्‍यक्ष:  हमेशा बाद में होती है। (व्‍यवधान)

डॉ.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, आप फिर याद कर लें स्‍थगन प्रस्‍ताव पर हमने आपको कहा था कि मौका देते हैं तब भी आपने कहा कि नहीं होता है।  आपकी या तो याददाश्‍त ठीक नहीं है या आपकी मेमोरी में कोई तकलीफ हो गयी है।

श्री सी.डी. देवल: ...(व्‍यवधान)... पक्षपात की उम्‍मीद नहीं करते हैं।  अध्‍यक्ष महोदय, लोगबाग आसन से उम्‍मीद करते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: मोहम्‍मद माहिर आजाद।

श्री सुरेश मीणा (करौली): लाइसेंस का मामला है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक बात पूछना चाहता हूं सिर्फ।

श्री सांवरलाल: अध्‍यक्ष महोदय, 7 बजे क्‍या इस सदन में तो रात को एक-एक बजे तक चर्चा हुई है मुझे यह समझ में नहीं आ रहा है कि आपने इतनी गम्‍भीरता से लेकर पहली बार आधा घंटे की चर्चा दी है और माननीय सदस्‍य कह रहे है कि 7 बजे लगा दी। यहां तो एक-एक बजे तक चर्चा हुई है विधान सभा में।  7 बजे कोई  आपका समय विगड़ रहा है क्‍या?

डॉ.सी.पी.जोशी: ...(व्‍यवधान)... यह कोई नियम है आप उठा कर के देख लीजिये आप नियम को जब चाहें तब यूज कर लें आप। आपको गवर्नर की डिबेट के पहले लगानी चाहिए थी यह और आपने गवर्नर की डिबेट के बाद में लगाया।  आप क्‍या इम्‍पोर्टेंस करना चाहते हैं?

श्री सांवरलाल: 7 बजे की तकलीफ आपको भी महसूस हो रही है क्‍या?

डॉ.सी.पी.जोशी: आपने गवर्नर की डिबेट के बाद लगाया आप उठा कर देख लीजिये कोई भी बात विपक्ष उठाये उस पर आप डिबेट नहीं करना चाहते हैं...(व्‍यवधान)

श्री नरपतसिह राजवी(उद्योग मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आसन के प्रति जितने भी आरोप लगाये कृपया आप उनको देख कर विलोपित करें। यह नहीं चलेगा, हम चुपचाप बैठे हैं। (व्‍यवधान)

डॉ.सी.पी.जोशी: बंद करिये नहीं चलेगा तो।  6 महीने पहले क्‍या कर लिया आपने?...(व्‍यवधान) ... बंद करिये हाउस को कोई जरूरी थोड़े ही है हाउस चले यदि हाउस को चलाने की जिम्‍मेदारी हमारे पर है तो इनकी भी जिम्‍मेदारी है ...(व्‍यवधान)

श्री महिपाल सिंह यादव (बानसूर): सिंचाई मंत्री जी, 8 बजे रात का समय नजदीक आ जाता है न इसलिए गम्‍भीरता खतम हो जाती है।

श्री सांवरलाल: मैं तो यह सोच रहा हूं कि आपका भी 8 बजे का समय आता है क्‍या?

श्री महिपाल सिंह यादव: 8 बजे बाद तो सरकार का ही नहीं पता रहता है।

श्री सांवरलाल:  अध्‍यक्ष महोदय, नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य को जो 12 सवाल का आपने कहा है अगर...।

श्री रामनारायण चौधरी: ...(व्‍यवधान)... आपके सामंत रहे हैं।  सामंती परम्‍परा और नौकरशाही की परम्‍परा यहां नहीं चलती है सदन चलाना आपको है अगर नहीं चलाना चाहते हैं तो मत चलाओ हमें क्‍या आपत्ति है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: आपके सहयोग से चलायेंगे।

श्री रामनारायण चौधरी: चलाओ।  हमें क्‍या धमकी दे रहे हैं आप? (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन:...(व्‍यवधान)..  आप नहीं चाहते तो नहीं चलेगा।

डॉ. बुलाकीदास कल्‍ला:  ऐसा है सामान्‍यतया गवर्नर साहब के एड्रेस पर जब डिबेट होती है तो इस प्रकार के मुद्दे जीरो ऑवर में ही उठाये जाते हैं।  दोनों पक्षों की सहमति से कभी कभी एकाध उदाहरण के अलावा काई भी उदाहरण नहीं है। इस प्रकार की चर्चा जिसको आपने नियत किया है वो प्रश्‍नकाल के बाद तत्‍काल लेनी चाहिए यह हाउस की परम्‍परा रही है पहले से ।  आप उठा कर देख लें रिकार्ड ।  अब माननीय सदस्‍यों की जिस तरीके से मांग है उसके आधार पर आपको इसको मंजूर करना चाहिए और 7 बजे की जगह जीरो ऑवर में ही हाउस टैक्‍स के बारे में डिबेट करानी चाहिए क्‍योंकि प्रेस भी इसके बाद चली जाती है फिर उसका मतलब ही नहीं रहता है चर्चा का। इसलिए आप इसको इस वक्‍त में करायें और प्रश्‍नों के बारे में मंत्री तैयारी करके नहीं आते हैं कम से कम दो-चार सप्‍लीमेंट्री तो हर प्रश्‍न में होनी चाहिए।

श्री अध्‍यक्ष: हो रही है न सप्‍लीमेंट्री कब नहीं हुई सप्‍लीमेंट्री?

डॉ. बुलाकीदास कल्‍ला: कल भी सप्‍लीमेंट्री नहीं हुई थी।

श्री सांवरलाल: अध्‍यक्ष महोदय, प्रेस के बारे में आप कह रहे हैं प्रेस तो रात को दो-दो बजे तक यहां रहती है।  आपको जो बोलना है और छपाना है प्रेस बैठी रहती है इसलिए आपको प्रेस की चिन्‍ता नहीं करनी चाहिए।

श्री गुलाबचंद कटारिया:  अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि सदन के सभी माननीय सदस्‍य इस प्रश्‍न के उत्‍तर में अगर कहीं आप कोई कमी खामी पायें तो सदन के बाद भी अगर आप मुझे कहेंगे तो सदन जैसा ही मान करके उसके खिलाफ भी कार्यवाही करने में कोई हिचकने का सवाल नहीं करूंगा। [1]...(व्‍यवधान)श्री खुशवीर सिह जोजावर(खारची): मंत्री महोदय, मैं यह जानना चाहता हूं आपसे कि हजारों पशुपालक राज्‍य से बाहर अन्‍य राज्‍यों में जाते हैं..।

श्री सी.डी. देवल:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब ये पहली बार खड़े हुए और आप...(व्‍यवधान)... तुम विधान सभा के सदस्‍य नहीं हो आप यह फैसला कर दें।  कोई बात नहीं हम बाहर चले जाएंगे लेकिन आप बोलने ही नहीं देते हैं यह क्‍या बात हुई? हम भी निर्वाचित होकर आये हैं ..(व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर:  ... और प्रतिवर्ष उनके साथ में लूट होती है लुटेरे लूट कर चले जाते हैं उनके मवेशियों को और उन्‍होंने लाइसेंस के लिए एप्‍लाई कर रखा है उन कितने पशुपालकों को आपने लाइसेंस जारी किये हैं जो प्रदेश से बाहर जा रहे हैं और उन्‍होंने एप्‍लाई कर रखा है लाइसेंस के लिए?

श्री सी.डी.देवल:  स्‍पीकर का काम न्‍याय करना है विधान सभा अध्‍यक्ष से अपेक्षा है कि सबके साथ न्‍याय करें। कल जब शिक्षा का प्रश्‍न आया था तो आपने आधा घंटा चलाया ...(व्‍यवधान)

श्री गुलाबचंद कटारिया:  जिन लोगों ने एप्‍लाई कर रखा है, मैं आप सब लोगों को...(व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर:  पाली जिले में 20 पशुपालकों ने एप्‍लाई किया है और मंत्री महोदय उनको लाइसेंस जारी नहीं हुए हैं जबकि माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय ने पत्र जारी करके मेरे पास में भी भेजा है कि इनको लाइसेंस जारी किये जाएंगे।

श्री सी.डी.देवल:  ...(व्‍यवधान)... इस तरह सदन चलता है तो सदन का चलने का काई मतलब ही नहीं है। बोलना बर्दाश्‍त नहीं हो तो अध्‍यक्ष महोदय, आप फैसला कर दो। ***

श्री अध्‍यक्ष:  अंकित नहीं हो।

श्री गुलाबचंद कटारिया: ..अध्‍यक्ष महोदय, पिछले सत्र में जिन माननीय सदस्‍यों ने इस विषय में प्रश्‍न पूछे उनको भी सूचीबद्ध किया है...

श्री अध्‍यक्ष: हां अब अंकित किया जाए।

श्री गुलाबचंद कटारिया: ... इस विषय में प्रश्‍न थे प्रमोदजी भाया का, रामनारायण जी मीणा का, वीरेन्‍द्र जी मीणा का, भरत सिंह जी का इन सबके प्रश्‍नों को मैंने वापस टटोला और उसके आधार पर मैंने 16 अगस्‍त के दिन पूरे डाइरेक्‍शन जारी किये हैं कि इस तरीके से आप इसको निपटायेंगे अधिक से अधिक 90 दिन से ज्‍यादा नहीं लगेंगे चाहे वो कलेक्‍टर तक होगा।  अगर आपको रिजेक्‍ट करना है तो रिजेक्‍ट कर दीजिये आपको स्‍वीकार करना है तो स्‍वीकार करिये अगर वापस उसको नवीनीकरण करना है तो उसके लिए भी 60 दिन की समयावधि में पूरा करें।   जिनके फादर की डेथ हो गयी और लाइसेंस उनके पास आना है उसमें भी अगर डिले हो रहा है तो उस डिले को भी समाप्‍त करके जो एक प्रप्रोर्मा है जिसमें उसके परिवार के सब लोगों को उस व्‍यक्ति के नाम से वो जो शस्‍त्र ट्रांसफर करना है वो अगर पत्र भरेंगे अगर वो एलिजेबल होगा लाइसेंस के लिए तो निश्चित रूप से उसको 60 दिन में जारी कर दिया जाएगा उसके बाद भी आपको कहीं मैं सोचता हूं कि प्रश्‍न के सभी कोर्नर से  मेरे पास रिकार्ड है पर समय बचाने की दृष्टि से मैं कहना चाहता हूं कि आपको कहीं भी कोई कमी लगती है जहां पालना नहीं हो रही है ये डाइरेंक्‍शंस मैंने अभी एक तारीख को और दिये हैं कि इसके लिए कलेक्‍टर स्‍वयं जिम्‍मेदार होंगे या तो उसको 90 दिन में इसको डिस्‍पोज ओफ करना है या रिजेक्‍ट करना है, जो भी उसके पास कारण हैं मैं सोचता हूं कि आप सब के प्रश्‍नों के आधार पर ही और प्राक्‍कलन समिति के सुझावों के आधार पर ही मैं सारे के सारे डाइरेक्‍शंस जारी कर चुका हँ।  उसकी पालना हो रही है।  मैं आपको विश्‍वास दिला सकता हूं कि थोड़ी बहुत कमी खामी होगी तो और सुधारेंगे।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, सवाल मंत्री जी के उत्‍तर का नहीं है प्रश्‍न यह है कि आसन द्वारा जिस तरह से नेता प्रतिपक्ष के खड़े होने पहले ही आप कह देते हैं कि आप क्‍या बोलेंगे, यह अच्‍छी बात नहीं है। हमने आपसे उस दिन सर्वदलीय बैठक में भी निवेदन किया था और आपने स्‍वयं ने ही डाइरेक्‍शंस दिये थे कि जब नेता सदन और नेता प्रतिपक्ष खड़े होकर बोलेंगे तो कोई माननीय सदस्‍य बीच में रोक-टोक नहीं करेंगे वो बोलें जो कुछ बोलें आप बोलने से पहले ही कह देते हैं कि आप क्‍या बोलेंगे।  यह बात ठीक नहीं है हमारा विरोध इस बात को लेकर है माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

डॉ.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, आप झुंझुनूं की मीटिंग में गये अध्‍यक्ष की हैसियत से नहीं गये थे आप एक एम.एल.ए. की हैसियत झुंझुनूं की मीटिंग में गये और जिला परिषद् की मीटिंग में राजस्‍थान विधान सभा का अध्‍यक्ष झुंझुंनूं की जिला परिषद् में वाक आउट करके आ जाए और आपने कहा सदन में कि मैं एम.एल.ए. की हैसियत से गयी थी।  यहां भी आप जो बात करते हैं चेयर के साथ आप एक एम.एल.ए. भी हैं यदि आप एम.एल.ए. की हैसियत से सी.एल.पी. लीडर को टोकते हैं तो फिर क्‍या एग्‍जाम्‍पल सैट करेंगे आप। इसलिए अध्‍यक्ष महोदय, यह ज्‍यादा जरूरी है कि एम.एल.ए. की हैसियत से भी और लीडर की हैसियत से भी आपको और अध्‍यक्ष महोदय, आप...(व्‍यवधान)... ढाई साल से...।

श्री अध्‍यक्ष:  आप किस संदर्भ में कह रहे हैं यह सब?

डॉ.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, हम चार बार आपके चैम्‍बर में मिले जब  सी.एल.पी. लीडर कल्‍ला साहब थे तब भी आप इनको टोकते रहते थे हमने बार-बार आपसे यह बात कही है हमारे सी.एल.पी लीडर हो चाहे पार्टी का लीडर  सी.एम. हो  जब भी बोलें आप टोके नहीं। आप एक तरफ तो सी.एम. जब बोलती हैं तो आप टोकना नहीं चाहती और सी.एल.पी. लीडर जैसे ही खड़े होते हैं तो आप कहते हैं कि आप क्‍या बोलेंगे, आपकी क्‍या बात है, आप बुजुर्ग आदमी हैं। यह अध्‍यक्ष महोदय, लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है एक अध्‍यक्ष इस तरह  कमेंट करे।  इसका मतलब यह है कि अध्‍यक्ष अभी इम्‍पार्शल नहीं है अध्‍यक्ष के मन में अभी भी अपनी पार्टी के प्रति लायल्‍टी है।  इम्‍पार्शलिटी को रोकिये अध्‍यक्ष महोदय। ...(व्‍यवधान)...

श्री सांवरलाल:  झुंझुनूं की जिला परिषद् में एम.एल.ए. की हैसियत से जा सकती हैं और माननीय सदस्‍य यहां पर अध्‍यक्ष की हैसियत से ही बैठेंगी।

डॉ.सी.पी.जोशी:  जब तक सी.एल.पी. लीडर को सम्‍मान नहीं दिया जाएगा ...(व्‍यवधान)... तब तक सदन ...(व्‍यवधान)... नहीं हो सकता।  अध्‍यक्ष महोदय, आप स्‍वयं बताइये आप झुंझुनूं जिला परिषद् में एम.एल.ए. की हैसियत से मीटिंग में गयी थीं ....।

श्री सांवरलाल:  झुंझुनूं जिला परिषदद् में एम.एल.ए. की हैसियत से जाएंगी और राजस्‍थान के सर्वसम्‍मत अध्‍यक्ष हैं इसलिए यहां पर अध्‍यक्ष की हैसियत से बैठी हैं और चेयर का अपमान करने का आपको अधिकार नहीं है आप भी मंत्री रहे हैं आप भी जाते थे जिला परिषद की बैठकों में ।  आप एम.एल.ए. की हैसियत से जाते थे।

डॉ.सी.पी.जोशी: मान लिया ...(व्‍यवधान)...ये भारतीय जनता पार्टी की हैसियत से ...(व्‍यवधान)... अध्‍यक्ष का सम्‍मान करने की जिम्‍मेदारी हमारी है अध्‍यक्ष के सम्‍मान के साथ ...(व्‍यवधान)...

श्री सांवरलाल: यह कतई जायज नहीं है। ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

डॉ.सी.पी.जोशी: ***  

श्री सी.डी.देवल: ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: ***

श्री सांवरलाल: ***

                                                           

 

 

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श्री राजेन्‍द्र राठौड: ***

डा.सी.पी.जोशी: ***

श्री सांवरलाल: ***

डा.सी.पी.जोशी: ***

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया : ***

श्री रघुवीर सिंह मीणा: ***

डा.सी.पी.जोशी: ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड: ***

श्री सांवरलाल : ***

श्री वासुदेव देवनानी: ***

डा.सी.पी.जोशी: ***

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया : ***

श्री रामनारायण चौधरी: माननीय गृह मंत्री जी आपका सत्‍ता पक्ष गरिमा का पाठ हमें पढा रहा है और वह लोग पढा रहे हैं जब हम यहां आये उस समय वह पानी को पू कहते थे और सारा सत्‍ता पक्ष जो आज विराजमान हैं वह सब मेरे बाद में आया हुआ है, सब मेरे से बाद में जन्‍मे हुए हैं । मेरे से पहले जन्‍म लेने वाले तो चले गये दिल्‍ली या मेरे से पहले जन्‍म लेने वाले हैं स्‍पीकर साहब । यह तो अगर मुझे कुछ कहें, यह मुझे गरिमा का पाठ पढाये, गंगाराम जी तो इधर के हैं ही नहीं यह तो हमारे यहां से पैदा हुये थे और उधर बहिर्गमन कर गये और फिर इधर आ गये अब वहां हैं कोई जरूरी नहीं कि आपके पास रहे ही क्‍योंकि आपने इनको कोई सम्‍मान नहीं दिया । इनको सम्‍मान नहीं मिलने का कारण भी हम ही हैं क्‍योंकि यह हमारे थे इसलिए आप लोगों ने नहीं बनने दिया । आप मुझे पाठ पढाये मैं मानता हैं, उम्र में मेरे से छोटी हैं, मेरे से बहुत ज्‍यूनियर हैं, इनकी शादी मैं करवा कर लाया था फिर भी अगर मुझे कोई गरिमा का पाठ पढाये तो चूंकि यहां है, इस पद पर हैं मैं सम्‍मान करूंगा और मानूंगा । लेकिन अध्‍यक्ष महोदय, आप कुछ भी ख्‍याल नहीं रखतीं, इतना कठोर होती जा रही हैं यह असहनीय होता जा रहा है । जब कल हमने बहिर्गमन किया हमें बहुत दुख हुआ क्‍योंकि स्‍पीकर की रूलिंग के खिलाफ प्रथम बार हमें ऐसा करना पडा जो अक्‍सर नहीं होता और फिर आप अवसर दे रही हैं कि हम आपके खिलाफ जाये । आपकी नाराजगी है झुंझुनूं की मैं उसका क्‍या करूं । यहां से बाहर भी आपने फरमाया कल परसों कि झुंझुनूं वालो से मैं बहुत दुखी हूं । आप दुखी[2] हैं यह बात सही है लेकिन मान्‍यवर आपका निर्वाचन क्षेत्र बिगड़ा है उसमें मेरा कोई बस नहीं है और आज यह हकीकत है अध्‍यक्ष महोदय....

श्री अध्‍यक्ष: इन बातों की रिलीवेंसी क्‍या है यहां पर ।

श्री रामनारायण चौधरी : माननीय सभासदों सुन लो मेरी बात यह हकीकत है कि आपका बिगड़ गया और यह हकीकत है कि आप वहां से नहीं जीत सकेंगी यह मैं दावा करता हूं । अगर आप जीत जाये और मैं जीत कर आ गया तो मैं छोड कर चला जाऊंगा, आप नहीं जीतेंगी । वह फ्रस्‍ट्रेशन आप यहां मेरे पर क्‍यों निकल रही हैं । जिला परिषद से आपने बहिर्गमन किया मैं आपको रोक रहा था । आपने बहिर्गमन क्‍यों किया जबकि हमारा बहुमत था दूसरों का, मेरे को छोडकर भी बहुमत था । मैं अगर आपके साथ भी चला जाता तो भी वह पास होता । आप कहीं की बात यहां पर लाकर इस्‍तेमाल करती हैं यह दुखदायी है, परम्‍पराओं के खिलाफ है, आसन के लिये शोभनीय नहीं है, आसन के लिये अशोभनीय है । (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अब इधर से बोलेंगे, श्री घनश्‍याम तिवाडी ।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह : ***

श्री अध्‍यक्ष: नहीं समाप्‍त नहीं हो सकता यह मामला ऐसे, ऐसे समाप्‍त नहीं होगा, गलत बात है । आप चाहे जो कुछ बोल दें और उसे फिर आप कहें कि इसे समाप्‍त करें, नहीं होगा समाप्‍त ।

डा.सी.पी.जोशी: ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद: ***

डा.सी.पी.जोशी: ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड: ***

श्री बंशीलाल खटीक : ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आर्डर आर्डर ।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला: ***

श्री बंशीलाल खटीक:***

श्री राजेन्‍द्र राठौड: ***

(सदन में नारेबाजी)

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया: ***

श्री अध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिये स्‍थगित की जाती है ।

(तदनंतर सदन की बैठक 11.38 बजे आधे घंटे के लिये स्‍थगित हुई)

 

Ans\usc\1200\3.3.2006\2a\1

 

(समय:12.08 बजे)

(पुन: समवेत होने पर)

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री उपाध्‍यक्ष: राम-राम सा। क्‍या मंशा है आपकी, सदन की ?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़(सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, जो दृश्‍य आज राजस्‍थान की विधान सभा में हुआ है यह दृश्‍य कतई उचित नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए और स्‍थगित की जाती है।

 (तदनन्‍तर सदन की बैठक 12.09 पर स्‍थगित की गई)

 

Ddm/usc/1230/2d

 

(समय: 12.39 बजे)

(पुन: समवेत होने पर)

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष पदासीन)

 

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही एक घण्‍टे के लिये स्‍थगित की जाती है ।

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 12.39 बजे 13.39 बजे तक के लिये स्‍थगित हुई)

 

vps/usc/3-3-2006/1330/3d

 

 

(समय 13.39 बजे)

(पुन: समवेत् होने पर)

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 13.39 बजे 15.00 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)

 

Spp/usc/1500/5a/3-3-2006

 

(समय: 15.00 बजे)

(पुन: समवेत् होने पर)

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की बैठक चार बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 15.00 बजे 16.00 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)

 

 

 

 

 

 

 

msr/usc/1600/6a/3-3-2006

 

 

(समय: 16.00 बजे)

(पुन: समवेत् होने पर)

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की बैठक पांच बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 16.00 बजे 17.00 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)

 

 

ars/usc/1700/7a/3-3-2006

 

 

(समय: 17.00 बजे)

(पुन: समवेत् होने पर)

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की बैठक आधा घंटे के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 17.00 बजे 17.30 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)

Vns/usc/7d/1730/3.3.2006

 

(समय: 17.30 बजे)

(पुन: समवेत् होने पर)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज मुख्‍य मंत्री जी के कक्ष में राजनीतिक दलों की सर्वदलीय बैठक हुई थी और हम सबने, सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने सम्‍माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय से निवेदन किया था कि आज जो कुछ सदन में हुआ उसके अन्‍दर हमारी सबकी भावनाओं को सदन से अवगत करा दें और उसके बाद सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल सके।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज सुबह मैं सदन में नहीं थी जब कोई घटना यहां घटी थी, मैंने सदन की प्रोसीडिंग्‍स लेकर उसको पढ़ा है, उसको पढ़ने के बाद मैं समझती हूं कि जो भी हुआ वह दुर्भाग्‍यपूर्ण थाआसन की गरिमा को बचाये रखना यह हम सबका, जो भी सदन में बैठे हैं उन सबका कर्तव्‍य है। मैं सब लोग जो भी यहां बैठे हैं उन सबकी ओर से आपसे क्षमा चाहूंगी कि आज सुबह जो भी हुआ वह नहीं होना चाहिए था और मैं विश्‍वास करती हूं कि लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था को बनाये रखने का काम हम सबका है। हम सब मिलकर सुचारु रूप से सदन को चलाएं, यह हमारा कर्तव्‍य है। मैं विश्‍वास करती हूं, आपसे क्षमा मांगने के बाद, कि हम लोग मिलकर इस काम को कर सकेंगे। मेरा आपसे आग्रह है, हम लोग कल से इस सदन को मिलकर सुचारु रूप से चलाएं। कोई भी इस तरीके से घटना हो तो मिल बैठकर इसको सार्ट आउट करने में कोई मुसीबत नहीं होती है और मैं विश्‍वास करती हूं इस तरह की घटना फिर से सदन में नहीं होगी।

श्री अध्‍यक्ष: याचिकाओं का उपस्‍थापन। डा. किरोड़ीलाल मीणा...(.व्यवधान )

अब क्‍या कहना चाहते हैं, माननीय सदस्‍य ?

श्री हेमराज मीणा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाह रहा हूं कि माननीय मुख्‍य मंत्री जी ने जो बात कही है लेकिन जिन्‍होंने यह सिलसिला चालू किया है उनको कुछ कहना चाहिए था तो ज्‍यादा ठीक रहता क्‍योंकि ....

डा.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी आज्ञा से निवेदन करना चाहूंगा, जो पर्ची और 295 है, कल चार तारीख को ग्‍यारह बजे हाउस शुरू होगा, आज वाला बिजनस कल शुरू करने के लिए निवेदन है

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: अध्‍यक्ष महोदय, इसमें कोई एतराज की बात नहीं है पर एक निवेदन जरूर करूंगा...

श्री अध्‍यक्ष: पर्ची तो दुबारा से देनी पड़ेगी तो कल दीजिए आप पर्ची । कल प्रश्‍नकाल तो है नहीं।

डा.सी.पी.जोशी: कल शनिवार को बिजनस अपन ने रखा है तो क्‍वेश्‍चन आवर के टाइम में पर्ची .....

श्री अध्‍यक्ष: कल प्रश्‍नकाल नहीं है और मैं समझती हूं कि पर्ची और यह भी नहीं हो सीधे ही अपन गवर्नर स्‍पीच पर जाएं।

डा.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन था कि आप यह 295 और पर्ची कल ले लें 11 से 12 में। आज वाला बिजनस कल 11 से 12 में हो जाएगा।

एक माननीय सदस्‍य: आज तक नहीं हुआ।

श्री अध्‍यक्ष: 295 तो पढ़े हुए मान लिए गए हैं। सदन की मेज पर रखे जाने वाले पत्रादि। श्री प्रभुलाल सैनी।

 

सदन की मेज पर रखे गये पत्र

 

श्री प्रभुलाल सैनी( कृषि मंत्री )(ऊर्जा राज्‍य मंत्री के स्‍थान पर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से कम्‍पनी अधिनियम,1956 की धारा 619- के अन्‍तर्गत राजस्‍थान राज्‍य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड का पांचवां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा विवरण वर्ष 2004-2005 सदन की मेज पर रखता हूं।

श्री अध्‍यक्ष:श्री अर्जुन लाल मीणा ।

(अनुपस्थित)

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल ।

 

याचिकाओं का उपस्‍थापन

 

 

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल(लूणकरणसर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित याचिकाएं उपस्‍थापित करता हूं:-

            ग्राम पंचायत एवं पंचायत मुख्‍यालय सुई तहसील लूणकरणसर जिला बीकानेर में प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र स्‍वीकृत करवाने बाबत।

            लूणकरणसर जिला बीकानेर में रोड़वेज बस स्‍टैण्‍ड स्‍थापित करने बाबत।

 

 श्री अध्‍यक्ष: राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर प्रस्‍तुत धन्‍यवाद प्रस्‍ताव पर विचार प्रारम्‍भ होगा।..(व्‍यवधान) नाम मेरे पास कोई है ही नहीं, किसका लूं? जिसकी मर्जी आए खड़ा हो।

श्री महावीर प्रसाद जैन: मदन जी राठौड़।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: अध्‍यक्ष महोदय, मेरी एक प्रार्थना है, इस बार सर्वदलीय बैठक और उसके पश्‍चात आपने समय का बंटवारा किया था। समय के बंटवारे के अनुसार आपने यह भी कहा था, उस निश्चित समय में जितने माननीय सदस्‍यों को जो भी दल बुलाना चाहे, उनके सचेतक बुलाना चाहें बुलाएं हमारे दल के नौ घंटे बाकी हैं और प्रतिपक्ष दल के मात्र दो घंटे हमारे मैम्‍बर्स कल तक नहीं बोल पाएंगे इसलिए हमारी तरफ से ओपन कराएं, हमें ज्‍यादा मौका दें, बोलने के लिए हमारे कई माननीय सदस्‍य बाकी हैं। अब समय का बंटवारा आपने ही किया था

श्री जुबेर खान: अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन कर दूं....

श्री अध्‍यक्ष: प्‍लीज स्‍थान ग्रहण कर लें मैं सूचना दे रही हूं, मैं माननीय सदस्‍यों को सूचित करना चाहती हूं कि अब तक जो वाद विवाद में भाग लिया गया है वह शेष समय बचा है भारतीय जनता पार्टी का आठ घंटे उनसठ मिनट, मतलब पूरे नौ घंटे, इंडियन नेशनल कांग्रेस के बचे हैं दो घंटे अड़तीस मिनट, इंडियन नेशनल लोकदल के बीस मिनट, जनता दल यूनाइटेड के पन्‍द्रह मिनट, बहुजन समाज पार्टी के पन्‍द्रह मिनट, भारतीय कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के सात मिनट, लोक जन शक्ति पार्टी के सात मिनट, राजस्‍थान सामाजिक न्‍याय मंच के सात मिनट और निर्दलीय का एक घंटा चौंतीस मिनट, यह जब था जब आज सुबह से अपन इसको करते अब यह भी उस हिसाब से कम हो जाएगा थोड़ा। एक और सूचना मैं आपको देना चाहती हूं कि प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियमों के नियम 9(1) के अन्‍तर्गत मैं श्री राव राजेन्‍द्र सिंह सदस्‍य को सभापति तालिका के लिए मनोनीत करती हूं।

 

धन्‍यवाद प्रस्‍ताव पर वाद विवाद

 

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय,महामहिम राज्‍यपाल महोदय द्वारा इस महान सदन में दिए गए अभिभाषण के प्रति माननीय डा. एन.एस.गुर्जर साहब द्वारा प्रस्‍तुत धन्‍यवाद प्रस्‍ताव का मैं समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूं। 

    इक्‍कीसवीं सदी का प्रारम्‍भ देश के लिए तो बहुत शुभ और लाभप्रद रहा जब वहां राष्‍ट्रीय जनता गठबंधन सरकार थी और श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयीवहां के प्रधान मंत्रि थे लेकिन राजस्‍थान के लिए 2001-2003, ऐसा लगता है कि शनि की दशा उस समय लगी हुई थी जब इस राजस्‍थान प्रान्‍त का मुखिया स्‍वयं अपने परिवार की धज्जियां उड़ा रहा था, परिवार को बदनाम कर रहा था और खजाना खाली,खजाना खाली का ढोल पीट रहा था, यह बहुत दुर्भायपूर्ण स्थिति राजस्‍थान में रही। एक स्थिति और थी जब कोई भी विकास के लिए मांग करते तो राजस्‍थान केतत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री खजाना खाली कीबात कहकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे थे। चारों और हाँ-हाकार मचा हुआ था। जनता पानी के लिए मांग कर रही थी, डंडे पड़ रहे थे। कर्मचारियों के आंदोलन को कुचला गया इस प्रकार चारों और एक अंधकार का वातावरण था। उस समय आशा की एककिरण थी श्रद्धेय भैरोंसिंह जी शेखावत, लेकिन उनको भी महामहिम उपराष्‍ट्रपति बनाकर दिल्‍ली में बुला लिया गया। हालांकि भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्‍व वर्ग संर्घष कर रहा था, प्रयत्‍नशील था कि राजस्‍थान की जनता के दुःख दर्द को मिटाने के लिए प्रयास करे। तब हमारे केन्‍द्रीय नेतृत्‍व ने श्रद्धेय वसुन्‍धरा राजे सिंधिया को....

 

ssy/usc/1740/7e

 

जब श्रद्वेय वसुंधरा राजे सिंधिया जी को राजस्‍थान की बागड़ोर पार्टी के अध्‍यक्ष के नाते सौंपकर राजस्‍थान में भेजा और श्रद्वेय वसुंधरा राजे जी सिंधिया ने जब राजस्‍थान में प्रदेशाध्‍यक्ष का कार्यभार सँभाला और पार्टी के सिपाहियों को एकजुट करके परिवर्तन यात्रा प्रारंभ की और जनता के दु:ख-दर्द, अभाव-अभियोग सुनने के लिए और जब गांव-गांव, ढाणी-ढाणी में जब वह गयी तो उन्‍होंने जनता दु:ख-दर्द सुनने के साथ ही जनता को विश्‍वास दिलाया और दु:खों को दूर करने के लिए मैं प्रयत्‍न करूंगी । जनता ने भी श्रद्वेय वसुंधरा राजे सिंधिया पर विश्‍वास किया और इधर हमारे यहां से शनि की दशा भी उतरी और कहते हैं कि जब शनि की दशा उतरती है तो कुछ लाभ देकर के जाता है और राजस्‍थान में भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत प्राप्‍त किया और राजस्‍थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी । अध्‍यक्ष महोदय, वसुंधरा जी जहां कहीं भी रही पूर्व में दिल्‍ली में जब रही, जो कोई भी विभाग उनको दिया गया उस विभाग का सफलतापूर्वक संचालन किया और श्रेय प्राप्‍त किया । जब राज्‍य की बागड़ोर उन्‍होंने संभाली तो सबसे पहले सौ दिवसीय कार्य योजना दी, अधिकारियों की मीटिंग करके उनको लक्ष्‍य निर्धारित करके जब काम सौंपे और उसमें उनको सफलता मिली । इसके बाद 365 दिन की कार्य योजना दी उसमें भी उनको सफलता मिली और उनका कुशल वित्‍तीय प्रबंधन यह बेमिसाल है ना केवल हम, न केवल राजस्‍थान की जनता अपितु हिन्‍दुस्‍तान में जो इस समय कांग्रेस का शासन था वह भी इसका लोहा मान रहा है और वसुंधरा जी के कुशल वित्‍तीय प्रबंधन की प्रशंसा की और उसका लोहा माना है ।

      अध्‍यक्ष महोदय, वसुंधरा जी ने बारहवें वित्‍तीय विभाग की सिफारिशों को ध्‍यान में रखते हुए राजस्‍व घाटा कम किया जबकि 2001-02 में 31 प्रतिशत, 2002-03 में 30 प्रतिशत था उसको 2004-05 में घटाकर के 12 प्रतिशत पर ले आयी । वित्‍तीय घाटे में भी उन्‍होंने बहुत कमी की है । हमारे पड़ौस की विधान सभा के सदस्‍य ने मुझसे पूछा कि क्‍या कारण कि आपकी यह वसुंधरा जी कहां से धन लाती हैं, किस प्रकार से विकास के काम करा देती हैं तो मैंने उनसे कहा कि आपकी आदतें तो खराब हैं, आप जो कुछ भी प्राप्‍त करते हैं, बहुत कुछ इधर-उधर फालतू में खर्च कर देते हैं । थोड़ा-बहुत कुछ ले जाकर अपनी पत्‍नी को देते हैं वह गृह लक्ष्‍मी किस प्रकार से आपके बच्‍चे की फीस भर देती है और उसके कपड़े भी सिलवा देती है, आपके लिये जूते भी वह लाकर के देती है । यह सारा काम वह कर देती है किस प्रकार से वह संचालन करती है । उन्‍होंने कहा कि यह तो वास्‍तव में वही जाने । बहुत अच्‍छा प्रबंधन, कुशल वित्‍तीय प्रबंधन है । मैं आपके लिये नहीं कह रहा हूं, आपकी दाढ़ी में तिनका क्‍यों आ रहा है...(व्‍यवधान) मैं आपके लिये नहीं कह रहा हूं, मेरे पड़ोसी यूं ही चिंतित हो रहे हैं, मैं उनके लिये नहीं कह रहा हूं, ताइद कर रहे हैं, ठीक बात है । उन्‍होने कहा कि यह तो वही जाने गृह लक्ष्‍मी, तो ठीक इसी प्रकार से हमारे श्रद्वेय वसुंधरा जी भी राजस्‍थान की जनता की मातृवत सेवा कर रही हैं । कुशल वित्‍तीय प्रबंधन करके और चाहे कहीं से भी जुगाड़ करके, व्‍यवस्‍था करके राजस्‍थान की जनता के अभाव-अभियोग दूर करने में किसी भी प्रकार से वह कसर भी नहीं छोड़ती है । जहां जरूरत पड़ती है वहां खर्चा भी करती है । किसी प्रकार की फिजुलखर्ची भी नहीं करते । यह हमारे विपक्ष के माननीय सदस्‍य यह भरतपुर नगर से आने वाले भी कल जोर-जोर से बोल रहे थे कि हाकिम बदल जाते हैं हुक्‍म नहीं बदलता लेकिन मैं इनको बताना चाहूंगा कि जब 1998 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी और कल भी मैंने एक प्रश्‍न दिया था कि जयपुर मैटल्‍स उद्योग के लिये जब वह रूग्‍ण स्थिति में था तो भैरोंसिह शेखावत की सरकार ने 20 करोड़ रूपये स्‍वीकृत किये । साढ़े चार करोड़ रूपये की किश्‍तें भी उन्‍होंने जारी कर दी । उसके बाद में दुर्भाग्‍य से हाकिम बदल गया और भारतीय जनता पार्टी के स्‍थान पर कांग्रेस की सरकार आ गयी । कांग्रेस की सरकार आने पर हुक्‍त भी बदल दिया और वहां पर हजार से अधिक मजदूर जो जयपुर मैटल्‍स उद्योग में कार्यरत थे जिनको बीस करोड़ की स्‍वीकृति दे दी थी । साढ़े चार करोड़ तो तत्‍कालीन भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पहले दे दिये । आपके सत्‍ता में आते ही वह रूपया भी रोक दिया और उनकी किश्‍तें भी रोक दी और वहां पर तालाबंदी कर  दी । उसके बाद में एक हजार से अधिक मजदूर आज वह वहां कंगाली की स्थिति में जीवन जी रहे हैं । कई लोगों के घरों में भूखमरी की हालत बन गयी है । जब हाकिम बदल गया तो हुक्‍म भी बदल दिया ।

       अध्‍यक्ष महोदय, जहां जरूरत थी वहां तो इन्‍होंने धन खर्च नहीं किया जहां जरूरत नहीं थी वहां इन्‍होंने धन खर्च किया । इन्‍होंने धन खर्च किया जोधपुर में अशोक उद्यान बनाने में, क्‍या जरूरत थी अशोक उद्यान बनाने की । सम्राट अशोक नहीं रखा उसका नाम, वहां पर तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री जी को खुश करने के लिए तत्‍कालीन आवासन मंडल ने अशोक उद्यान स्‍थापित किया, जहां पर करोड़ो रूपया खर्च किया गया । जमीन को उन्‍होंने बरबाद कर दिया और अजमेर में भी अशोक उद्यान बनाया है । अब मैं यह पूछना चाहता हूं कि विपक्ष के माननीय सदस्‍यों से कि अगर किसी में हिम्‍मत है तो बताये कि बाबू लक्ष्‍मण सिंह कौन थे ?राजस्‍थान की जनता भी नहीं जानती कि बाबू लक्ष्‍मणसिंह कौन थे । बाबू लक्ष्‍मण सिंह पार्क पर भी आपने करोड़ों रूपया जोधपुर में खर्च किया  । हिम्‍मत है तो बतायें कि कौन है बाबू लक्ष्‍मण सिंह...(व्‍यवधान) गहलोत के पिताजी होना, कि जिनके नाम से इतना बड़ा पार्क बनाया जाये, यह कोई ठीक बात नहीं है ।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: वह नगर परिषद, जोधपुर के चेयरमैन थे ।

श्री मदन राठौड़: जोधपुर का नागरिक भी नहीं जानता ।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: आप मत जानो ।

श्री मदन राठौड़: आप यदि बता सकें...(व्‍यवधान) जोधपुर नगर परिषद के कभी भी वह चेयरमैन नहीं रहे(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: माननीय सदस्‍य, आपसे इतना ही निवेदन है कि जो व्‍यक्ति इस दुनिया में नहीं है कृपया उसको आप अपनी आलोचना का विषय नहीं बनायें ।

श्री मदन राठौड़: मैं आलोचना नहीं कर रहा हूं । मैंने कभी नहीं कहा कि वह घटिया आदमी थे ।

श्री संयम लोढ़ा:  इतना ही आपसे प्रार्थना है ।

श्री मदन राठौड़: मैं कोई भी गलत शब्‍द नहीं बोल रहा हूं । मैं तो यह कह रहा हूं कि माननीय सदस्‍य आपको बुरा लग रहा है, एक तरफ तो उनके नाम से करोड़ों रूपया जोधपुर में खर्च करने की आवश्‍यकता नहीं थी । वह कोई राष्‍ट्र पुरूष नहीं थे, कोई महापुरूष वह नहीं थे कि जिनके नाम से इतना रूपये खर्च किये जायें । एक तरफ तो आप कह रहे हैं कि खजाना खाली है । खजाना खाली है । जनता को पानी नहीं पिला रहे हो, जनता के लिस सड़कें नहीं बना पा रहे हो और दूसरी और बाबू लक्ष्‍मण सिंह के नाम से पार्क बना रहे हैं ।  अरबों रूपया खर्च कर रहे हैं । यह ठीक नहीं है । मैं सोचता हूं कि जनता के धन को आपने बरबाद करने का प्रयास किया है । यह ठीक बात नहीं है । बर्हिगमन मत करिये, मेरी पूरी बात सुनिये, आर बाहर जा रहे हैं माननीय प्रद्युम्‍न सिंह जी,पूरी बात सुन लीजिये और हिम्‍मत है तो जवाब देने का भी प्रयास करें...(व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: अरबों रूपया, अब आप झूंठ का पुलिंदा बोल रहे हो कि अरबों रूपया खर्च हो गया तो क्‍या करूं, जाऊं नहीं तो क्‍या करूं, अरबों रूपया खर्च हुआ है मुझसे यह असत्‍य बात सुनी नहीं जाती है(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: अध्‍यक्ष महोदय, आपने ही फैसला किया था कि टोका-टोकी नहीं होगी । माननीय प्रतिपक्ष के सदस्‍य बोलते हैं तो हम बोलते ही नहीं हैं, हम अपनी सीट से खड़े ही नहीं होते हैं ।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: इन्‍होंने कहा है कि आप कहां जा रहे हैं उसी का मैंने जवाब दिया है(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़: मैं यह निवेदन कर रहा हूं कि जहां गाढ़े पसीने की कमाई जनता के हितों की रक्षा के लिये खर्च होनी चाहिऐ । जनता के लिस सड़कें बनायें, पानी की व्‍यवस्‍था करो । उसके लिये खर्च करो । यह इस प्रकार से कोई स्‍वनामधन्‍य के निमित्‍त रूपया खर्च करे यह ठीक बात नहीं है । एक तरफ तो आप खजाना खाली की बात कर रहे हैं दूसरी तरफ इस प्रकार से धन बहा रहे हैं । यह भी  ठीक नहीं है । मैं यह बताना चाहूंगा कि आपके यहां पर जो रूपया खर्च किया कम से कम भी 63 लाख रूपये लगाकर के ऐसी मास्‍क लाइटें लगाई । इस तरह से जनता का धन आपने बरबाद किया । आज कहां हैं वह लाइटें । मैं यह सब भी आपके सामने रखने के लिए तैयार हूं । आपको आश्‍चर्य होगा मैंने जोधपुर के कई महानुभावों से पूछा कि यह कहां पर लगी हुई हैं तो वह भी कहने लगे कि इस प्रकार की लाइटें हमने तो नहीं देखी और इलेक्‍ट्रानिक ट्री आपने खरीदे और करोड़ रूपये उसमें बरबाद किये । यह ठीक नहीं था । मैं तो कवेल यही आपसे निवेदन कर रहा था ...(व्‍यवघान) हां, मैं बता रहा हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: बीच में टोका-टोकी नहीं करें ।

श्री मदन दिलावर: अध्‍यक्ष महोदय, हमने बहुत काम किये । आप जानते हैं कि पूर्व सरकार अपना फिस्‍क्‍ल रिफार्म फैसेलिटी के अंतर्गत 2001-02 में प्रोत्‍साहन राशि प्राप्‍त नहीं कर सकी थी जबकि हमने 2003-04 में 59 करोड़ 77 लाख रूपये प्राप्‍त किये यही नहीं 2004-05 में 60 करोड़ 62 लाख रूपये प्राप्‍त किये हैं । पूर्व में बकाया राशि 146 करोड़ भी हमने प्राप्‍त की । यह है कुशल वित्‍तीय प्रबंधन, मैं और लंबी-चौड़ी बात नहीं करूंगा, मिड-डे मील के बारे में बहुत कहा चुका है । बच्‍चों को मुफ्त पुस्‍तकें दीं और उसके बारे में भी बहुत कहा जा चुका है । आप जानते हैं कि पहले भी जब राजस्‍थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी तो पांचवीं तक के लड़कों को और आठवीं तक की लड़कियों को मुफ्त में पुस्‍तकें दिया करते थे । लेकिन फिर से आपकी सरकार आयी और आपने इस योजना को आगे नहीं बढ़ाया । अब जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार राजस्‍थान में आयी है तो हमने बारहवीं तक की लड़कियां और आठवीं तक के लड़कों को मुफ्त में पुस्‍तकें वितरित की है । यही नहीं जिनके पिताजी इनकम टैक्‍स नहीं देते हैं उन लड़कों को भी बारहवीं तक मुफ्त में पुस्‍तकें वितरित की हैं ।  

 

jyg/akt/030306/1750/7f

 

    इसी प्रकार 1 करोड़ 14 लाख बच्‍चों को मुफ्त पुस्‍तकें दी है।  हमने एक और योजना तैयार की है। देखिए, धन एकत्रित करने का भी एक तरीका होता है। हमने स्‍व कर निर्धारण की स्‍कीम दी ताकि कोई व्‍यवहारी हो वह प्रोत्‍साहित हो कि वह टैक्‍स भरे और इसके अलावा कोई बकाया नहीं, इस प्रकार के व्‍यवहारियों की सूची हमने वेव साइट पर जारी की ताकि उनको आफिसों के चक्‍कर नहीं काटना पड़े और वह प्रोत्‍साहित होते रहे तथा स्‍व कर निर्धारण करके वह अपने टैक्‍स जमा कराए। यही नहीं पंजीयन के कई मामले, साढ़े पाँच हजार से अधिक मामले लम्बित पड़े थे, रजिस्‍ट्रेशन की एक टाइम बाउण्‍ड स्‍कीम देकर वह भी पूरे कराए। आपको मालूम होगा कि स्‍टाम्‍प ड्यूटी 11 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत की, महिलाओं के लिए साढ़े पाँच प्रतिशत की। इसके बावजूद भी हमने राजस्‍व में वृद्धि की है।

      अध्‍यक्ष महोदय, मैं बताना चाहूंगा कि योजना का आकार हमने दुगुना किया, पूंजीगत विनियोजन भी हमने दुगुना किया। 20 सूत्री कार्यक्रम में राजस्‍थान की भारतीय जनता पार्टी की सरकार हिन्‍दुस्‍तान में नम्‍बर वन आई है, यह हमारे लिए बड़ी खुशी की बात है और आप सबको भी इसकी प्रशंसा करनी चाहिए। राजस्‍थान राहत कोष स्‍थापित किया क्‍योंकि जो लोग आपदा राहत कोष की नियमावली में नहीं आते थे लेकिन जिनको राहत देना बहुत आवश्‍यक था, उनको राजस्‍थान राहत कोष के माध्‍यम से सहयोग देने की योजना हमने बनाई। ओलावृष्टि से प्रभावित जो किसान थे उनके चार महीने के बिजली के बिल हमने माफ किए, यह भी कोई कम बात नहीं है। हमने बी पी एल, पी एल और इन सबको भी राशन वितरित करने का हमने प्रयास किया। आप में यदि हिम्‍मत हो तो जाइए दिल्‍ली में जहां पर अभी केन्‍द्र की सरकार ने पी एल का गेहूं बन्‍द कर दिया है  और बी पी एल का भी आधा कर दिया है। आज गेहूं की कीमत 13 रुपए किलो हो गयी है, थोड़ा विचार कीजिए, केवल राजनीतिक लाभ के लिए काम मत कीजिए, जन हित के लिए कुछ निर्णय लीजिए, जन हित में निर्णय लेकर केन्‍द्र पर दबाव डालिए मैं आपको बताना चाहूंगा कि हमारे यहां पर पैसा भी जमा करवा दिया है, अन्‍न भी आया हुआ पडा है एफ सी आई में लेकिन केन्‍द्र की सरकार ने टेलीफोन करके वहां तार देकर मना कर दिया कि अभी गेहूं मत दीजिए इनको, इस प्रकार के राजनीतिक भेदभाव का काम आप लोग कर रहे हैं, थोडा विचार कीजिए।

      अध्‍यक्ष महोदय हमने पंचायतों का कम्‍प्‍यूटरीकरण किया, इण्‍टर कनेक्टिविटी 'करिश्‍मा' के माध्‍यम से 9 दिसम्‍बर, 2005 को की। यही नहीं फसली ऋण और दीर्घकालीन फसली ऋण 2130 करोड़ का दीर्घकालीन ऋण 195 करोड़ रुपए का हमने दिया।

       न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य पर हमने सरसों खरीद की, रिकार्ड खरीद हुई 1700 रुपए के हिसाब से हमने सरसों की 14 लाख टन खरीद की, यह व्‍यवस्‍था पहली बार ऐसी हो पाई है। राष्‍ट्रीय कृषि बीमा योजना के बारे में बताना चाहूंगा कि 6 लाख किसानों को 220 करोड़ रुपए हमने वितरित किए। हम तब भी आते थे तो तत्‍कालीन मुख्‍य मंत्री से हमने कहा कि राष्‍ट्रीय कृषि बीमा योजना को लागू कीजिए, वह कहते थे हम लागू नहीं करेंगे जबकि हिन्‍दुस्‍तान के 19 प्रान्‍तों में यह योजना लागू थी। आपने राजस्‍थान में लागू नहीं की केवल एक कारण था कि राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार उस समय थी और आप प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उसका श्रेय नहीं देना चाहते थे। इसलिए आपने लागू नहीं की। श्रेय के चक्‍कर में आपने गरीबों के मुंह का निवाला छीन लिया, आपको शर्म आने की बात है, विचार करना चाहिए। यह राजनीतिक काम मत कीजिए और मैं अब भी कहना चाहता हूं कि आपकी यदि दिल्‍ली में चलती है तो वहां जाकर कहिए कृषि बीमा योजना है और इसमें आपने तहसील को इकाई मान रखा है, यह ठीक बात नहीं है और इसमें इकाई होनी चाहिए खुद किसान का खेत और यदि खेत भी नहीं कर सके तो एक ग्राम पंचायत को इकाई करवाने में आप हमारा सहयोग कीजिए। श्रद्धेय मुख्‍य मंत्रीजीने भी मांग कर रखी है, आप भी जाइए यदि आपकी चलती है। मैं मानता हूं कि आपकी बात वहां कोई सुनने वाला नहीं है लेकिन फिर भी आप थोड़ा प्रयास तो कीजिए कोई सकारात्‍मक प्रयास आप कीजिए, जनता आपको धन्‍यवाद देने के लिए तैयार हो जाएगी।

    हमने जैविक खेती को बढ़ावा दिया। आप जानते हैं कि कृषि उपज मण्‍डी समितियों के चुनाव कराने का हमने निर्णय लिया है, 30 वर्ष हो गए चुनाव नहीं हुए, हम चुनाव करवाना चाहते हैं। आपको जानकारी होगी अध्‍यक्ष महोदय कि दुग्‍ध उत्‍पादक सहकारी संघ के चुनाव हमने करवा दिए। जिला दुग्‍ध उत्‍पादक संघ के चुनाव हमने करवा दिए। आपने चुनाव कभी नहीं कराए आप तो चुनाव से सदैव डरते रहे, यह विपक्ष घबराता रहा, चुनाव से दूर भागता रहा।

                  (समय समाप्ति सूचक घण्‍टी)

    अध्‍यक्ष महोदय, थोड़ा सा समय दें।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया कन्‍क्‍लूड कीजिए।

श्री मदन राठौड़: हमने सहकारी सोसायटी के चुनाव करवाने के लिए निर्वाचन प्राधिकारी नियुक्‍त कर दिए, उप नियमों में हमने संशोधन कर लिया, हम चुनाव करवाना चाहते हैं। आप चुनाव से हमेशा भागते रहे।

       जल संसाधन विभाग के निमित्‍त मैं बताना चाहूंगा कि बहुत से काम किए हैं हमारी सरकार ने। मैं आपको बताऊं की ऐसी 20 लघु सिंचाई योजनाएं तो हमने पूरी कर ली और 25 पर प्रगति हो रही है। मैं आपको बताना चाहूंगा कि मेरे वहां पर एक सेही बान्‍ध है जो पहाड़ों के बीच में स्थित है, पहाड़ों में पानी जल्‍दी जाता है, पौने सात किलोमीटर सुरंग से पानी हमारे जवाई बान्‍ध में आता है, वह पानी इकट्ठा होकर पहाड़ में आकर और बहकर गुजरात में जाता था। गुजरात सरकार ने वहां पर टावर लगा रखा है, एक अधिकारी वहां नियुक्‍त कर रखा है जो यह सूचना देता है कि पानी रहा है, गांव के गांव खाली करवा दो। एक तरफ गुजरात के गांव के गांव खाली करवाने पड़ रहे हैं दूसरी तरफ राजस्‍थान में पीने के लिए पानी नहीं है। मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि श्रद्धेय वसुन्‍धराजी को, उस बान्‍ध को अपग्रेड करने के लिए इन्‍होंने रुपए तुरन्‍त स्‍वीकृत कर दिए। अभी उसका शिलान्‍यास भी हो गया, वह बान्‍ध अपग्रेड हो जाएगा और वह पानी जवाई बान्‍ध में आएगा हमारे इस क्षेत्र में जहां रेलों से पानी पिलाया जाता था वहां पर पीने के लिए पानी उपलब्‍ध रहेगा। नर्मदा का पानी आप जानते हैं कि माही नदी का पानी गुजरात को दिया जाता था और बदले में गुजरात की नर्मदा का पानी देने के लिए तैयार था और गुजरात कह रहा था कि राजस्‍थान अपने हिस्‍से का पैसा जमा कराए। पिछली सरकार ने एक धेला भी जमा नहीं कराया, मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा श्रद्धेय वसुन्‍धराजी को जिन्‍होंने सत्‍ता में आते ही 335 करोड़ रुपए जमा कराए और अभी तक 646 करोड़ रुपए गुजरात सरकार को जमा करवा दिए। नर्मदा का पानी जालौर तक पहुंच चुका है, बहुत जल्‍द राजस्‍थान को पानी मिलने लगेगा।

      (समय समाप्ति सूचक घण्‍टी)

    अध्‍यक्ष महोदय, थोड़ी सी मैं अपनी बात पूरी करूंगा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, हमारा समय बाकी है इसलिए बोलने दें।

श्री मदन राठौड़: मैं धन्‍यवाद दूंगा सार्वजनिक निर्माण मंत्री जी को जिन्‍होंने समय तो दिलवाया ही साथ में मैं यह भी बतलाना चाहूंगा कि इन्‍होंने प्रधान मंत्री सड़क योजना के लिए जितना काम किया, ऐतिहासिक काम किया, 500 की आबादी के गांवों को सड़क से जोड़ा है और यही नहीं अब तो इन्‍होंने और निर्णय लिया है कि हम 250 की आबादी की ढाणियों को भी सड़क मार्ग से जोड़ेगें। अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको बताना चाहता हूं कि जब मैंने चुनाव लड़ा था तो वहां खिदारा गांव है और वहां पर लोगों ने मतदान का बहिष्‍कार किया। मैं कहना चाहूंगा कि आदरणीय जोशीजी, अब आप वहां पर आएंगे, 120 की स्‍पीड से आप कार लेकर सकते हैं, 120 की स्‍पीड से, वहां पर पेवर रोड़ बन चुकी है। आप कार लेकर फालना से सुमेरपुर सकते हैं, इतनी बढि़या सड़क इन्‍होंने बना दी। सालासर महादेव की सड़क इन्‍होंने बना दी। सड़कों का जाल इन्‍होंने बिछा दिया। विकास के काम इन्‍होंने कर लिए।

      अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से गृह मंत्रीजी की प्रशंसा करना चाहता हूं। अब आपने समय कम कर दिया इसलिए मैं अपनी बात पूरी नहीं बता पा रहा हूं। अपराधों में कमी की है। कई इनामी डकैतों को पकड़ने का काम किया है, आप कोई इनामी डकैत नहीं पकड़ पाए। आप आतंकवादियों को नहीं पकड़ पाए, आपने किसी को पकड़ा है तो एक धामिक नेता को पकड़ा तोगडि़याजी को पकड़कर आप खूब ढोल पीट रहे थे। आपने तो यह सब कर लिया। भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने बांग्‍लादेशियों को चिह्नित करके बाहर निकालने का, खदेड़ने का काम किया है। मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि हमारे गृह मंत्री को, हमारी राजस्‍थान की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पुलिस कर्मियों की भर्ती की है।

      रोप वे कनक वृन्‍दावन से जयगढ़, यह निर्माण करने का भी काम किया है। मैं आवासन मण्‍डल को भी धन्‍यवाद देना चाहूंगा, स्‍वायत्‍त शासन मंत्रीजी को भी मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा, इन्‍होंने किसी एक उद्यान को बनाने में खर्चा नहीं किया। घरोन्‍दा आवासीय योजना तैयार की और वह योजना एक ऐसी योजना है, बेमिसाल योजना है, ऐतिहासिक योजना है, 76 हजार की लागत से मकान बनाकर और 18 रुपए रोज की किश्‍त पर गरीब को मकान मिलेगा, ऐसी योजना दी है। निश्चित रूप से इनकी भी भूरि-भूरि प्रशंसा की जानी चाहिए

      शिक्षा मंत्रीजी ने भी कोई कम काम नहीं किए हैं। बहुत कमाल किया है, 54284 लोगों को इन्‍होंने नौकरी दी है। कई स्‍कूलों को इन्‍होंने क्रमोन्‍नत कर दिया, 1705 राजीव गान्‍धी पाठशालाओं, मैं आपको क्‍या गिनाऊ, गिनाने के लिए बहुत कुछ है लेकिन समय की कमी है।

       चिकित्‍सा मंत्रीजी ने भी बहुत काम किए हैं। उन्‍होंने टेली मेडिसन की एक नवीन स्‍कीम दी है जिसके द्वारा दिल्‍ली में बैठा हुआ डाक्‍टर पाली में बैठे हुए व्‍यक्ति का आपरेशन कर सकता है। यही नहीं इन्‍होंने ऐसे-ऐसे काम किए हैं कि कई स्‍थानों पर सीटी स्‍केन की मशीनें दी हैं, जोधपुर में कैथलेब, उदयपुर में कार्डियोथोरोसिक सेण्‍टर, जयपुर और कोटा में मेमोग्राफी मशीन, बीकानेर में लीनियर एक्‍सीलेटर मशीन, जयपुर, पाली और उदयपुर में सीटी स्‍केन मशीन, इसी प्रकार से इन्‍होंने बहुत से विकास के काम किए हैं।

      अध्‍यक्ष महोदय, हमारी सरकार ने पहली बार चिन्‍ता की है अनाथ बच्‍चों की।

 

Gpc/akt/1800/8a

 

   अनाथ बच्‍चों के बारे में पूर्व की कांग्रेस सरकार ने कभी भी चिन्‍ता नहीं की। अनाथ बच्‍चों को 675 रुपये प्रतिमाह और दो हजार रुपये प्रतिवर्ष कपड़े लेने के लिए दिया है। अनाथ बच्‍चों की भी चिन्‍ता इन्‍होंने की है। यही नहीं एस.सी., एस.टी. और सहरिया लड़कियों को कालेज जाने के लिए 12297 साइकिलें वितरित की हैं, यह कोई कम काम नहीं किया है, इसकी प्रशंसा की जानी चाहिए।  मन ही मन तो आप प्रशंसा करना चाहते हो, लेकिन सदन में आप बोलना नहीं चाहते क्‍योंकि आप जानते हैं कि श्रेय इनको मिल जाएगा। अच्‍छे काम की तो मुक्‍त कंठ से प्रशंसा करें। श्रेय देंगे तो और प्रोत्‍साहित होंगे, और उत्‍साहित होंगे और विकास के काम करेंगे।

      26 हजार सहयोगिनियों को इन्‍होंने लगाया है, यह कोई कम काम नहीं। ऊर्जा के क्षेत्र में भी बहुत काम किया है। अध्‍यक्ष महोदय, हम सब जानते हैं आज कोई भी प्रोजेक्‍ट चालू करें तो 5-10 वर्ष बाद में बिजली मिलती है, लेकिन इन्‍होंने पाँच वर्ष में कोई भी ऐसा काम नहीं किया। आज बिजली की समस्‍या खड़ी है वह इसी कारण खड़ी है कि इन्‍होंने उसके बारे में कतई चिन्‍ता नहीं की। ये तो टाइम पास जॉब कर रहे थे, समय गुजार रहे थे। मैंने सुना है इनके एक मंत्रीजी हैं नाथद्वारा वाले, उनका एक भाषण मैंने सुना था, यहां पर सुरेन्‍द्र सिंह जी मंत्री बैठे हैं वे भी वहां पर बैठे थे, इन्‍होंने कहा कि मेरी सरकार दुबारा आने वाली नहीं है, अब तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार आएगी। ये खुद जब मंत्री थे और अपने निर्वाचन क्षेत्र में इस प्रकार का भाषण दिया, इसका गवाह भी मौजूद है, ये जानते थे कि इन्‍होंने काले कारनामे किये हैं, घटिया काम किया है, जनता की चिन्‍ता नहीं की तो दुबारा सदन में ये किस प्रकार से आ सकते हैं?

       हमने यहां पर छबड़ा तापीय विद्युत गृह तैयार किया, 1750 करोड़ रुपये और 500 मेगावाट क्षमता का तैयार किया। यही नहीं गिराल, धौलपुर, कोटा, बरसिंहसर, इस प्रकार से बिजली पैदा करने के लिए भी हमने कई प्रोजेक्‍ट तैयार किये हैं जिसका लाभ भी जनता को मिलने वाला है। दिसम्‍बर, 03 से जनवरी, 06 तक 876 नये कनेक्‍शन किसानों को दिये। यही नहीं चालू वर्ष में हम 40 हजार कनेक्‍शन और देना चाहते हैं और इस प्रकार की हमने व्‍यवस्‍था कर रखी है। अध्‍यक्ष महोदय, 220 केवी के 2 ग्रिड सब स्‍टेशन, 132 केवी के 12 और 33 केवी के 180 ग्रिड सब स्‍टेशन लगाये हैं। इस प्रकार से राजस्‍थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने बहुत काम किये। इसके लिए जितनी प्रशंसा की जाए कम है।   

      अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक-दो और निवेदन आपको करना चाहूंगा। पहले की सरकार ने कोई वसूली नहीं की। जो वसूली इनको करनी चाहिए थी, आपको भी आश्‍चर्य होगा एक प्रश्‍न के उत्‍तर में इन्‍होंने बताया है कि इन्‍होंने 674 अवैध खनन के मामले पकड़े थे, लेकिन मुकदमा केवल 55 के खि‍लाफ दर्ज कराये। बाकी के खिलाफ क्‍यों नहीं कराये, इसका जवाब तो ये ही दे सकते हैं। इन्‍होंने 2001 में 566 अवैध खनन के मामले पकड़े, लेकिन एफ.आई.आर. दर्ज करायी केवल 33 के खिलाफ। यह आश्‍चर्य की बात है कि इन्‍होंने ऐसा किया। 2000 में 401 मामले पकड़े, लेकिन एफ.आई.आर. दर्ज करायी केवल 10 में और चालान पेश किया केवल 9 में। अब विचार करो कैसे आप स्थिति सुधारोगे, राजस्‍व कैसे प्राप्‍त करोगे। आपने क्‍या किया? क्‍या मिलीभगत से काम चला लिया, यह तो आप ही जानें, मैं तो कोई आरोप लगाऊंगा तो आप सब एक साथ खड़े होकर हंगामा करने लग जाएंगे। लेकिन अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा..

श्री अध्‍यक्ष: अब कंक्‍लूड कर दो आप।

श्री मदन राठौड़: इन्‍होंने वित्‍तीय प्रबंधन में लापरवाही बरती है। मैं धन्‍यवाद देना चाहता था आदरणीय राजेन्‍द्र जी को। इनके बारे में मैं एक बात कहना चाहूंगा 2000 से 2003 तक ये विपक्षी लोग चिल्‍लाते थे कि हमने एक गांव प्रतिदिन सड़क से जोड़ा है, लेकिन मैं बताना चाहूंगा हमारे सार्वजनिक निर्माण मंत्रीजी चार गांव रोज सड़क से जोड़ रहे हैं, 12 किलोमीटर प्रतिदिन सड़क बना रहे हैं। यही नहीं 700 करोड़ रुपये व्‍यय करके 8 हजार किलोमीटर मुख्‍य सड़कों का नवीनीकरण किया है। यही नहीं 100 करोड़ रुपये व्‍यय करके महत्‍वपूर्ण पुलों का निर्माण किया है, हांगकांग स्‍टाइल में फ्लाइओवर ब्रिजेज, यह पहली बार राजस्‍थान में देखने को मिल रहा है। राजस्‍थान में आप जाएं किशनगढ़ मार्ग पर सिक्‍स लाइन रोड। आपने क्‍या किया? आपने दिल्‍ली में आते ही इसका नाम परिवर्तन करके अब ताल ठौंक रहे हैं, खुश हो रहे हो, नाम बदल दिया। यह तो कोई काम नहीं हुआ, केवल नाम बदलने से काम चलने वाला नहीं है। यही नहीं 750 करोड़ रुपये खर्च करके 12 से 15 वर्ष पुरानी 18 हजार किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण करने का कार्य किया है। इसके लिए इनकी भी भूरि-भूरि प्रशंसा की जानी चाहिए। अध्‍यक्ष महोदय, मैं फिर से महामहिम राज्‍यपाल महोदय ने जो अभिभाषण दिया उसका समर्थन करता हूं, पुरजोर शब्‍दों में उसका समर्थन करता हूं। आपने समय दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: देखिए अब केवल 25 मिनट बचे हैं, क्‍योंकि 6.30 बजे आधा घण्‍टे की चर्चा आएगी। इसलिए इस 25 मिनट के अंदर आप कहें तो तीन को बुलवा दें, आप कहें तो दो को बुलवा दें।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा: एक मुझे भी बुला दो।

श्री अध्‍यक्ष: आपकी तो पर्ची काफी पीछे आयी है, माफ करना। माहिर आजाद, आप कितना समय लेंगे?

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आधा घण्‍टा।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, 25 मिनट है, बोलिए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: अध्‍यक्ष महोदय, समय के बंटवारे में हमारा ज्‍यादा समय है। ये कल बोल लें, अभी हमारे मेम्‍बर्स को बुला लें।

एक माननीय सदस्‍य: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 7-7 मिनट में दो को बुलवा दो।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, श्री जोगाराम पटेल।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सदन महामहिम राज्‍यपाल महोदय द्वारा इस सदन में इस सरकार द्वारा लिखित अभिभाषण पर डा. एन.एस. गुर्जर द्वारा रखे गये धन्‍यवाद प्रस्‍ताव पर वाद-विवाद और चर्चा कर रहा है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बड़े जोर-शोर से इस अभिभाषण में सबसे ज्‍यादा जोर जो दिया गया वह इस बात पर दिया गया कि हमारा वित्‍तीय प्रबंधन बहुत अच्‍छा है, ओवरड्राफ्ट नहीं हुआ, हमारे पास विकास के काम के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है, खजाना पूरा भरा हुआ है, लेकिन वास्‍तविकता कुछ और है। आप भी अच्‍छी तरह से जानते हैं कि पिछली सरकार ने राज्‍य कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु को 60 वर्ष से घटाकर 58 वर्ष करने का काम किया था। जब यह सरकार सत्‍ता में आयी इसने वापस 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष करने का काम कर दिया। यहां सरकार के वित्‍त मंत्री और वित्‍त राज्‍य मंत्री तो नहीं बैठे हैं बाकी जो मंत्री बैठे हैं वे भी गुफ्तगू में लगे हुए हैं। मैं आपसे पूछना चाहता हूं क्‍या आपको जानकारी है कि एक साल में जो सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्‍त होते हैं उनको सरकारी कोष से कितने पैसे का भुगतान विभिन्‍न मदों में किया जाता है?

श्री प्रताप सिंह सिंघवी: जितनी जानकारी आपको है उतनी ही जानकारी इनको है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद- आपको तो नहीं है, आप बैठ जाइए।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी: मैं आपका छोटा भाई हूं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आप तो धीमी गति के समाचार हो, आप तो बैठ जाओ, इनको बोलने दो।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी: मैं तो आपका छोटा भाई हूं, जितना सिखाओगे उतना ही तो सीखूंगा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद:  एक वर्ष में 12 अरब रुपये के करीब भुगतान सरकारी कर्मचारियों को किया जाता है। दो वर्ष का पैसा आपके पास बच गया। उस पैसे के ऊपर उछल रहे हो, अगली साल जब कर्मचारी रिटायर होंगे तब आपकी वित्‍तीय स्थिति क्‍या होगी उसका अंदाजा लगा लें। यहां 2400 करोड़ रुपये आपके पास बच गया। जौहरी बाजार से आने वाले सदस्‍य यहां नहीं हैं कल वे धन्‍यवाद प्रस्‍ताव पर बोल रहे थे, बड़े जोर-शोर से कह रहे थे कि केन्‍द्र सरकार ने हमारे 190 करोड़ रुपये रोक रखे हैं। 190 करोड़ रुपये रोका तो आप रो रहे थे। केन्‍द्र सरकार ने विभिन्‍न मदों में आपको कितना पैसा दिया। आप हमसे ही यह अपेक्षा करते हो कि कोई काम आपकी सरकार अच्‍छा करे तो हम उसकी यहां प्रशंसा करें। आपमें से एक के मुंह से भी निकला कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यू.पी.ए. की सरकार ने विभिन्‍न मदों में सेंट्रल स्‍पोंसर्ड स्‍कीम में हमको जितना मांगा था ज्‍यादा पैसा दिया है, उसके लिए हम आभारी हैं? एक शब्‍द भी ऐसा आपके मुंह से निकला? इतने +++ से आप केन्‍द्रीय सहायता भी ले लेंगे और उनके लिए धन्‍यवाद नाम का शब्‍द भी आपकी डिक्‍शनरी में नहीं होगा, ऐसी अपेक्षा आपसे नहीं की जा सकती।

श्री अध्‍यक्ष: यह +++ शब्‍द निकाल देना।

                 

mlb/akt/8b/1810/3.3.2006

 

 

मोहम्‍मद माहिर आजाद: एहसान फरामोश अब आप कहोगे, यह एहसान फरामोश क्‍या होता है, डिक्‍शनरी ले आना, समझ लेना, नहीं माननीय अध्‍यक्ष को सारी भाषाओं का ज्ञान है उनसे पूछ लेना।

श्री हीरालाल रैगर: वित्‍तीय प्रबंधन के लिए बहुत तारीफ की थी मैंने आप कैसे कह रहे हो कि नाम ही नहीं लिया ?

मोहम्‍मद माहिर आजाद: वाह साहब, बहुत बढि़या काम किया आपने। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरी बात यहां पर जोर शोर से कही गही और यह जो भारतीय जनता पार्टी का चुनाव घोषणा पत्र है जिसमें माननीय अटल जी और वसुंधरा जी की और आडवाणी जी की फोटो छापकर के आपने राजस्‍थान की जनता को गुमराह किया है, इसमें आपने कहा हम एक लाख लोगों को प्रतिवर्ष रोजगार देंगे। मैं पहले तो आपसे यह सफाई भी चाहता हूं कि आपका सरकारी नौकरी देने का अभिप्राय था रोजगार से या रोजगार केउ अवसर प्रदान करेंगे उसमें आप निजी सैक्‍टर में और प्राइवेट सैक्‍टर में और पब्लिक सैक्‍टर में भी वह जो नौकरी मिलेगी, अगर यहां झुंझुनूं का कोई सेठ आकर के फैक्‍ट्री लगाता है और वह 20 आदमियों को नौकरी देता है वह भी क्‍या अपने खाते में गिनोगे ? क्‍या था यह आप अपने उत्‍तर में क्लियरिफाई करने का काम करेंगे ? 51हजार शिक्षा विभाग में आपने नौकरी उपलब्‍ध कराई, आपने 32 हजार साथिनों को काम दिया, इसकी हम प्रशंसा करते हैं लेकिन यहां इतना असत्‍य कथन कहा जाएगा कि उद्योग विभाग में 83 हजार लोगों को आपने रोजगार उपलब्‍ध कराया है  तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि आप सदन को अवगत कराइए कि आपने कहां कहां किन किन उद्योगों के अन्‍दर किस तरीके से 83 हजार लोगों को केवल एक लिख देने या बोल देने से काम चलने वाला नहीं है।

      माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बड़े जोरशोर से कहा गया कि हमारा योजना का आकार हमने बढ़ा दिया, हमारी योजना का आकार हमने पहले से बढ़ाकर और 8350 करोड़ का कर दिया है । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछली सरकार में यही हुआ था और पिछली सरकार फिर जब हमने बजट पर सप्‍लीमेंटरी ग्रांट्स और डिमाण्‍ड्स पर चर्चा की थी तब नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने और दूसरों ने यह बताया था कि किस विभाग के अन्‍दर आपने बजट आवंटित जो किया था उसका कितना प्रतिशत खर्च किया है । 20 प्रतिशत से लेकर और 60 प्रतिशत के बीच में खर्च किया था। योजना का आकार बढ़ा देना कोई वाहवाही का काम है ? उस पर वास्‍तविक व्‍यय आप कितना कर पाएंगे तब जाकर आपकी स्थिति का पता चलेगा। क्‍या आपने इतना किया था ? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब नई सरकार आई तो बड़े जोर शोर से हमारे इन विपक्षी साथियों ने कहा कि अशोक और अकाल और वसुंधरा और वर्षा की राशि एक है। राजस्‍थान अब सरसब्‍ज हो जाएगा, राजस्‍थान में खूब वर्षा हो जाएगी, प्‍यासी धरती माता की प्‍यास बुझ जाएगी। मैं आपसे पूछना चाहता हूं आज 22 जिलों में 15778 गांव अकालग्रस्‍त नहीं हैं ? क्‍या हुआ आपके इस दौरे का ? क्‍या अशोक और अकाल और वसुंधरा और वर्षा एक राशि है ? ऐसे ख्‍याली पुलाव बनाने से राजस्‍थान के किसान का और राजस्‍थान की गांवों का भला होने वाला नहीं है। आप तुलना कीजिए ईमानदारी से कि पिछली सरकार थी उस सरकार ने अगस्‍त महीने के अन्‍दर अकाल राहत कार्य शुरू कर दिये थे और आपकी अब क्‍या स्थिति है ? आपने दो लाख सवा दो लाख लेबर सिलिंग जनवरी के लिए बनाई है लेबर उसको बढ़ाकर तीन साढ़े तीन लाख आपने फरवरी में की थी। लेकिन इतना मंत्री महोदय आप लगा नहीं पाओगे, अकाल राहत कार्य कब जाकर आपने खोले हैं, यह स्थिति आपकी अकाल की थी।

श्री लक्ष्‍मी नारायण दवे: भरतपुर की स्थिति बता दें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: भरतपुर की स्थिति पर अभी चर्चा करूंगा, पहले अकाल की स्थिति हो जाय, इन दिगम्‍बर सिंह जी ने कानाफूसी की होगी शायद आपसे। तो मैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि आज बिजाई है, मैं स्‍वर्गीय मुख्‍यमंत्री हीरालाल जी देवपुरा की अध्‍यक्षता में प्राक्‍कलन समिति के रूप में राजस्‍थान के अकालग्रस्‍त क्षेत्रों का दौरा करने गया था 2003 के अन्‍त में, इन क्षेत्रों में गये, लोग कहते थे कि हमारे यहां अच्‍छा जमाना होता है तब भी हमको बाजरी और मक्‍का खाने को मिलती है, भला हो इस अशोक गहलोत का और कांग्रेस सरकार का कि इतना अच्‍छा अकाल का प्रबंधन किया है, हमारे घर गोदाम जो है गेहूं की बोरियों से भरे हुए हैं और हमको गेहूं खाने को मिल रहा है, आज भी कई जगेंह बचे हुए रखे होंगे। यह स्थिति पिछले साल अकाल की थी और आज आपकी स्थिति यह है कि आप सही तरीके से पहले अकालराहत कार्य खोले नहीं पा रहे हैं। अभी भरतपुर का जिक्र किया भरतपुर में अकाल नहीं पड़ता है, भरतपुर में अतिवृष्टि होती है लेकिन इस प्रकार भरतपुर के अन्‍दर पाला पड़ गया और जो अगेती सरसों थी, उस सरसों में नुकसान हुआ है, हमारे भरतपुर से आने वाले सदस्‍य बैठे हैं यहां डा. दिगम्‍बर सिंह जी मेरीबात से सहमत होंगे।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग: भरतपुर गये हो क्‍या आप ?

मोहम्‍मद माहिर आजाद: मैं तो 8 साल से गया हुआ हूं, रेल में तो नहीं गया आपकी तरह मलकानी जी की तरह कोई भी तो मुझे नहीं मिला, आप तो अपनी बात करो, भरतपुर गया हूं, कोई बुरा काम नहीं किया है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आसन से प्रोटेक्‍शन चाहता हूं।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग: आपकी तरह तो नहीं कहा है मैंने।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अगर मैं कोई गलत बात कहूं तो माननीय विपक्षी सदस्‍यों को बोलने का अधिकार है, बोल देंगे। मैंने किसी को टोकने का काम नहीं किया, मैं जो बात कह रहा हूं उसको सुना लो, आपके शब्‍द मेरे मुंह में आप नहीं रख सकते, कोई भी नहीं रख सकता, सब मिल कर भी नहीं रख सकते। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन अभी तक उसकी गिरदावरी नहीं हुई भरतपुर में और पूर्वी राजस्‍थान में चाहे अलवर हो, चाहे धौलपुर हो, चाहे भरतपुर हो, चाहे करौली हो, चाहे दौसा हो वहां पर...

डा. किरोड़ी लाल: आप गहलोत साहब की प्रशंसा कर रहे हैं, राजग की सरकार ने 32.5 लाख मैट्रिक टन गेहूं दिया था।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आप तो डाक्‍टर साहब, कल वह जो चिट्ठी पेश कर रहे थे, शरद पवार जी को लिखी है आपने।

डा. किरोड़ी लाल: मेरी सुन लो।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: ए.पी.एल. के गेहूं की जरा वह प्रोड्यूस कर दें सदन में। आपने कल कहा था कि मैं कल रख दूंगा, आज कल भी हो गया।

डा. किरोड़ी लाल: मैं वह भी रख दूंगा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: वह रख दीजिए, आप तो जो कहा है सदन में वह पूरा कर दीजिए।

डा. किरोड़ी लाल: मैं वह भी रख दूंगा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आपने कहा हम छात्रों को केरोसिन देंगे, कितना छात्रों को केरोसिन दिया वह बता दीजिए।

डा. किरोड़ी लाल: आप जितना भी अनाज के भण्‍डार भरने की बात कह रहे हैं न उस पर मैं बोल रहा हूं। 32‑5 लाख मैट्रिक टन गेहूं 968 करोड़ रुपये 3200 करोड़ रुपये राजग की सरकार ने दिया है जो जब से अब तक अकाल पड़ रहे हैं ुजो भी कोई राजस्‍थान में आया उतनी मदद आज तक दिल्‍ली की किसी सरकार ाने नहीं की, जो राजग सरकार ने की।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आप तो यह भी बता दें अकाल अब ज्‍यादा है या पिछली बार ज्‍यादा था ? आपका अकाल पिछले 4 वर्षों में ज्‍यादा था तो ज्‍यादा सहायता मिलेगी तो सीधी सी गणित कीबात है, इसमें क्‍या बात हो गई ? पिछली बार 23 हजार गांव प्रभावित थे, अब 15 हजार गांव प्रभावित हैं।

डा. किरोड़ी लाल: 2059 को छोड़कर कांग्रेस के राज में कभी भी समय पर अकाल के काम चालू नहीं हुए, कभी समय पर अकाल के काम चालू नहीं हुए हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: दिसम्‍बर में ?

डा. किरोड़ी लाल: हां।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आपका समय शुरू होता है दिसम्‍बर में क्‍योंकि मुख्‍य मंत्री जी ने 8 दिसम्‍बर को शपथ ली थी इसलिए हमारे टाइम में अगस्‍त के अन्‍दर अकाल राहत कार्य शुरू हो गये थे। गलत है क्‍या बात ?

डा. किरोड़ी लाल: भारत सरकार ने जो कोड बना रखा है जो फैमिन कोड है, रामनारायण जी आप बैठ जाओ।

श्री रामनारायण मीणा: माननीय मंत्री जी आप सिर्फ बहस नहीं करें, यह परिपाटी नहीं डालें, देखिए, ढंग सेबहस चल रही है, जो कुछ कहना था कह दिया।

डा. किरोड़ी लाल: नहीं, नहीं ये कह रहे हैं।

श्री रामनारायण मीणा: आप जवाब दे रहे हो क्‍या सरकार की तरफ से ?

डा. किरोड़ी लाल:  हां, हां, बिलकुल दे रहा हूं न, मैं दूंगा।

श्री रामनारायण मीणा: माननीय अध्‍यक्ष जी, आप सरकार की तरफ से जवाब दे रहे हो, कान्‍क्‍लूड कर रहे हो ?

डा. किरोड़ी लाल: क्‍यों नहीं दूंगा ? मेरी जिम्‍मेदारी बनती है।

श्री रामनारायण मीणा: कान्‍क्‍लूड कर रहे हो, इनकी गलती है, आप भी कहिए,

डा. किरोड़ी लाल: आप अकाल की बात करो, हमको अभी तक एक लाख मैट्रिक टन गेहूं दिया है।

श्री रामनारायण मीणा: आप तो एक बात बताइए।

डा. किरोड़ी लाल: यूपीए सरकार ने अभी तक एक लाख मैट्रिक टन गेहूं दिया है।

श्री रामनारायण मीणा: आप तो एक बात बताइये, अभी माननीय सदस्‍य कह रहे थे कि ढाई उसौ की जनसंख्‍या पर सड़क बना रहे हैं और अपनी मुख्‍यमंत्री सड़क बना रहे हैं, पैसा प्रधानमंत्री सड़क योजना से आपके माध्‍यम से रहा है इसलिए बहस... (व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल: मैं इसलिए जवाब दे रहा हूं।

श्री रामनारायण मीणा: कृपया बैठ जाइए।

डा. किरोड़ी लाल: आप बिराज जाओ, अब तक अकाल के कामों की ....

श्री रामनारायण मीणा: आप हर जवाब मत दीजिए और आप जवाब दोगे तो यह नहीं हो पाएगा।

डा. किरोड़ी लाल: अध्‍यक्ष महोदय, अब तक अकाल के काम चालू करने के लिए मात्र एक लाख मैट्रिक टन गेंहूं हमको मिला है और यह श्रीमान् जी भाषण दे रहे हैं, बगल में रामनारायण जी खड़े हो रहे हैं, आप दिल्‍ली की सरकार से क्‍यों नहीं कहते ? हां, हमने ज्ञापन भेजा है 13 लाख मैट्रिक टन गेहूं का, वहां से गेंहूं क्‍यों नहीं दिलाते ? गेहूं दिलाइए वहां से।

डा. किरोड़ी लाल:आप जब चाहो जब फोटो खिंचवा लेते हो, जब चाहो जब पैसा ले आते हो, जब चाहो बोनस ले आते हो, आप चाहते क्‍या हो ?हमसे बचा क्‍या है ? सब कुछ तो लग रहे हो फोटो खिंचा खिंचा कर।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: डा. साहब, मेरे पास आज के लेटेस्‍ट आंकड़े हैं।

श्री अध्‍यक्ष: बीच में डिस्‍टर्ब नहीं करें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: क्‍या आपने अभी तक संवत 2062 में कराये जा रहे अकाल राहत कार्यों पर लगे श्रमिकों के भुगतान की स्थिति आपने केवल मात्र अजमेर में 1503 टन गेहूं का आपने भुगतान किया है बाकी आपने जयपुर में 92.925 किया है, जालौर में किया है, आपके बारां, बाड़मेर, भीलवाड़ा, बीकानेर, चित्‍तौड़ यह पाली, नागौर, जोधपुर यहां कोई भुगतान नहीं किया गया है। आज ही के एक प्रश्‍न में आपने उत्‍तर दिया है तो आप तो गेहूं भुगतान कर ही नहीं रहे हो, श्रमिक जो लगे हुए हैं वह अभी तक आपके पूरे लगे हुए नहीं हैं, यह आज ही के आपके आंकड़े हैं लेटेस्‍ट इन्‍फार्मेशन है इसलिए मैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से निवेदन कर रहा था कि हमने अकाल राहत कार्य अगस्‍त में शुरू किये और आपने दिसम्‍बर में जाकर केवल ऊँट के मुंह में जीरा, आपने दो लाख की लेबर सिलिंग निर्धारित, दो लाख 23 हजारा की, यह आप खुद इससे सेटिस्‍फाइड हो क्‍या कि राजस्‍थान के 22 जिलों में 15778 गांव और उसके प्रभावित लोग और केवल 2 लाख लोगों की तय की औरस उसमें वास्‍तवित कितने लाख लगे और उनको कितना रोजगार दिया, जरा आप अपनी छाती पर हाथ रख कर देख लेना, आपको पता पड़ जाएगा कि आप राजस्‍थान की अकाल प्रभावित जनता के साथ न्‍याय कर रहे हैं या अन्‍याय कर रहे हैं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस सरकार की यह स्थिति है कि आज आप कहीं भी निकल जाएं राजस्‍थान के गांवों में शहरों में कहीं भी आपको पीने के पानी के लिए फिर भी नहीं भटकना पड़ेगा लेकिन दारू की दुकानें इतनी खोल दी कि हर तीसरी दुकान शराब की खोलने का काम किया है।

 

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आपने आबकारी नीति की धज्जियां उड़ा दीं। आपने जो सूखा दिवस थे उनकी संख्‍या कम कर दी, आपने धार्मिक त्‍यौहारों को भी नहीं बख्‍शा और गंगानगर शुगर मिल का जो बेड़ा गर्क किया है, यह राजस्‍थान की जनता आपको माफ नहीं करेगी। जितनी शराब दुखान्तिकाएं आपके राज में हुई हैं, जितने लोग राजस्‍थान के अन्‍दर मरे हैं उतने राजसथान के 50 साल के इतिहास में नहीं मरे होंगे। यह आपने कीर्तिमान स्‍थापित किया है। अगर मैं गलत कह रहा हूं तो मुझे शुद्ध करने का काम कर दें।

              माननीय अध्‍यक्ष महोदय, महामहिम राज्‍यपाल के अभिभाषण में क्‍या कहा गया है कि अपराधों में कमी आई है, महिला अपराधों में कमी आई है, अनुसूचित जाति, जनजाति के अपराधों में कमी आई है। कमी तो इसलिए आई है कि पिछले साल अपराध 7.5 प्रतिशत बढ़ गये थे, आपका चालानी का प्रतिशत 50 घट गया था और आपने मौखिक निर्देश दे दिये कि आदमी, पीडि़त लोग रोते रहें, मुकदमें दर्ज ही मत करो ताकि यह अपराधों की संख्‍या हम विधान सभा में सही दिखा सकें। यह वास्‍तविकता है। आप कह रहे हो कि महिला अत्‍याचारों में कमी आई है, आज राजस्‍थान की स्थिति यह है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे कहते हुए शर्म आती है कि आज 6 साल से लेकर के 60 साल तक की औरत सुरक्षित नहीं है और बलात्‍कार के जो कीर्तिमान आपके राज में हुए हैं, अस्‍पताल में बलात्‍कार, थानों में बलात्‍कार। और तो और जोधपुर के रणछोड़दास मन्दिर तक के अन्‍दर महिला के साथ बलात्‍कार किया गया है। इससे ज्‍यादा और क्‍या घटना होगी और आप क्‍या करना चाहते हो। इस महिला सशक्तिकरण के वर्ष में आप महिलाओं को यही सम्‍मान देना चाहते हो ? अपराधों में बढ़ोतरी क्‍यों नहीं हो जब अपराधों की हालत यह है कि थानों से हथियार लूटे जा रहे हैं, जेलों से कैदी फरार हो गये हैं, साम्‍प्रदायिकता की घटनाएं बढ़ रही हैं, पुलिस संरक्षण के अन्‍दर दंगे कराये जा रहे हैं। वेलेंटाइन डे के मैं पक्ष में नहीं हूं लेकिन यहां अभी राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य नहीं हैं, आपके बजरंग दल और शिवसेना के सदस्‍य वेलेंटाइन डे के ऊपर पुलिस को साथ लेकर सैण्‍ट्रल पार्क में पति और पत्‍नी भी बैठे थे तो उनके साथ ही बदतमीजी करने का काम कर रहे थे। इस तरीके की इजाजत सत्‍ता के संरक्षण में मिले, लोगों को सही तरीके से जीने का हक नहीं मिले इससे ज्‍यादा बुरी बात कुछ हो नहीं सकती। आपके बड़े नेता, राष्‍ट्रीय नेता, राज्‍य सभा में विरोधी दल के नेता माननीय जसवंत सिंह जी, मैं उनका आदर करता हूं, मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी अजहर मसूद को अपने साथ हवाई जहाज में बिठाकर के कंधार कौन ले गये थे ? आदमी से एक बार गलती हो जाए, भूल हो जाए, सुधर जाए, अब पाकिस्‍तान की यात्रा की, वह प्रख्‍यात तस्‍कर, गृह मंत्री जी स्‍वीकार कर रहे हैं कि वह तस्‍कर गया कैसे ?

श्री अध्‍यक्ष: पार्टी का पदाधिकारी है। उस तस्‍कर को कैसे.... (व्‍यवधान) आप शांत रहिये।

श्री मदन राठौड़: .... वह पंचायत समिति का सदस्‍य, सरपंच, कार्यकर्ता, ब्‍लॉक अध्‍यक्ष आपकी कांग्रेस पार्टी का रहा है। वही व्‍यक्ति जब आपके पास रहे तो खरा सोना और इधर आ जाए तो बदमाश, आतंकवादी। आपके पास रहे तो खरा सोना, गले लगाकर के रखा। कितने वर्षो तक ? 15 वर्षों तक।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अजहर मसूद पंचायत समिति का सदस्‍य ?  

श्री मदन राठौड़: वह जेल में गया। आप भाषण भी दो तो सही तथ्‍यों पर दो तो ज्‍यादा ठीक रहेगा। आप मनगढ़ंत बात करते हो। वही व्‍यक्ति जब आपके पास रहे तो बहुत अच्‍छा, मालाएं पहनाते हो, स्‍वागत करवाते हो, उसका अभिनन्‍दन करते हो। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अगर मेरी बात गलत हो अध्‍यक्ष महोदय....

श्री रामनारायण मीणा: इन्‍होंने कब कहा कि हम संस्‍कारित हैं ? आप तो कहते हो कि संस्‍कारित हैं। ऐसा धंधा क्‍यों करते हैं ?

श्री मदन राठौड़: ये संस्‍कारित नहीं हैं यह बात कह दो। यह बात भी ठीक है। ये कह दें कि ये संस्‍कारित नहीं हैं। वैसे भी ये कई बार पार्टी बदलते रहे हैं। कभी हमारे साथ ही रहे हैं, कभी उधर भी रहे हैं, फिर कोई भरोसा भी नहीं है, कभी इधर भी आ सकते हैं। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अब यह देखो आप। राजेन्‍द्र जी भी हमारे साथ रहे हैं, आप तो कल आये हो। माननीय अध्‍यक्ष भी रही हैं, ये रामनारायण जी डूडी कहां थे ? ये गंगाराम जी कहां थे ? आप फालतू की बात मत करिये। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़: आपका इरादा क्‍या है वह बता दो। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अजहर मसूद को कंधार लेकर के गये, क्‍या सही है क्‍या यह काम ? आप प्रशंसा कर सकते हो इसकी, माहिर आजाद नहीं कर सकता, कांग्रेस नहीं कर सकती। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़: उस समय उन यात्रियों को छुड़ाने के लिए आप छाती पीटकर रो रहे थे, आप हल्‍ला मचा रहे थे कि इनको छुड़ाओ, इनको छुड़ाओ तब फिर छुड़ाने के लिए जाना भी पड़ा। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: हम तो दाउद इब्राहिम के लिए भी रोयेंगे, उसको भी ले आओ न। (व्‍यवधान)  

श्री मदन राठौड़: रोयेंगे तो खतरनाक बात है। यदि दाउद के लिए रोयेंगे तो बहुत खतरनाक बात है। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: क्‍या बात करते हो आप ? (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक: दाउद इब्राहिम के लिए रोओगे तो सलमान खान की तरह अंदर रहोगे। (व्‍यवधान) दाउद इब्राहिम के लिए रोओगे तो सलमान खान की तरह अंदर रहोगे। (व्‍यवधान) अब आपका असली रूप सामने आ गया है।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सत्‍ता पक्ष के माननीय सदस्‍य, कृपया स्‍थान ग्रहण करें। आप माननीय सदस्‍य को बोलने दें। (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दाउद इब्राहिम की चर्चा नहीं होने देंगे। नाम कैसे लिया ? (व्‍यवधान) ऐसे खूंखार आतंकवादी का नाम भी इस पवित्र सदन में कैसे लिया। (व्‍यवधान)

श्री मोहन लाल गुप्‍ता: .... दुश्‍मन का नाम लिया है। (व्‍यवधान) दुश्‍मन का नाम लिया है। (व्‍यवधान) उसके समर्थक हैं ये। (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक: इन्‍होंने भारत के दुश्‍मन का नाम यहां कैसे ले लिया ?

श्री मोहन लाल गुप्‍ता: भारत के दुश्‍मन का नाम लिया है। (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक: ऐसे पवित्र सदन में उसका नाम कैसे ले लिया, इनको माफी मांगनी चाहिए। (व्‍यवधान) ऐसे धूर्त, हत्‍यारे, कसाई का नाम पवित्र सदन में नहीं लेना चाहिए। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण करें।

श्री बंशीलाल खटीक: दाउद इब्राहिम हमारे हिन्‍दुस्‍तान का दुश्‍मन है और उसका यहां पवित्र सदन में नाम लेना अन्‍याय है, इनको माफी मांगनी चाहिए। (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य, बोलने दो उन्‍हें। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: पता नहीं पेड़ में क्‍या मरोड़ हो जाता है। (व्‍यवधान) अजहर मसूद को ले गये, वो दोस्‍त था क्‍या ? (व्‍यवधान) हम तो उसकी भी आलोचना कर रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री मोहन लाल गुप्‍ता: .... माननीय सदस्‍य, सुनिये, यह बात हमारे राष्‍ट्र भक्ति के लिए ठीक नहीं है, आप भी राष्‍ट्र भक्‍त हैं। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आपके पास जितने.... (व्‍यवधान) कम नहीं हैं।

श्री महिपाल सिंह यादव: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर इसी तरह से व्‍यवधान किया गया तो हम भी माननीय सदस्‍यों के खिलाफ बोलेंगे। (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: इनकी पार्टी में तो सारे ही लोग ऐसे हैं। (व्‍यवधान)

श्री महिपालसिंह यादव: आपके निर्देश के बाद भी ये कर रहे हैं। (व्‍यवधान) ऐसा लगता है कि दंगा पार्टी साबित हो रही है। (व्‍यवधान)

श्री श्रवण कुमार: .... बहुत अच्‍छा बोल रहे हैं फिर इनको तकलीफ किस बात की है? क्‍या तकलीफ हो रही है आपके ? (व्‍यवधान) क्‍या तकलीफ हो रही है जब बोल रहे हैं तो। (व्‍यवधान) What is this ? (व्‍यवधान) क्‍या सदन है यह ?

श्री मोहन लाल गुप्‍ता: आप जैसे समझदार सदस्‍यों से, आप जैसे राष्‍ट्र भक्‍तों से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि दाउद इबा्रहिम को लाने की आप सिफारिश करेंगे। (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक: दाउद इब्राहिम के हिमायती नहीं बनने देंगे इस पवित्र सदन में।

श्री अध्‍यक्ष: राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य.... (व्‍यवधान) नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप भी कोई ऐसी बात नहीं करें कि लोग खामख्‍वाह में उत्‍तेजित हों। (व्‍यवधान)

श्री महिपाल सिंह यादव: जिन्‍ना का क्‍या हुआ ? कहां गये आडवाणी ? (व्‍यवधान)

श्री मोहन लाल गुप्‍ता: दाउद इब्राहिम हमारे देश का दुश्‍मन है। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अजहर मसूद दोस्‍त है क्‍या ?

श्री मोहन लाल गुप्‍ता: यह किसने कहा ?

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अजहर मसूद दोस्‍त है क्या ? क्‍यों ले गये उसे हवाई जहाज में बिठाकर के ? (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा: जिन्‍ना साहब की कब्र पर धोक देकर के आये हो और राष्‍ट्रवादी बनते हो। बोलने दो। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कानून और व्‍यवस्‍था की स्थिति पर आपसे चर्चा कर रहा था।

श्री अध्‍यक्ष: आप भी कहां पांच वर्ष पहले की बात पर आ गये। 

मोहम्‍मद माहिर आजाद: उसको तस्‍कर को तो अभी ही ले गये हैं, एक महीना ही हुआ है। उस पर हुई थी इनके तो चुरौंटी। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: उसके बारे में तो बता दिया है। (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया: अध्‍यक्ष महोदय, यह सदन में क्‍या हो रहा है यह देखकर मेरी आत्‍मा अन्‍दर ही अन्‍दर कुचेट रही है मुझे।

श्री अध्‍यक्ष: वह तो बता दिया न कि वो कांग्रेस पार्टी का है, वह कह रहे हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: लेकर ये क्‍यों गये थे ? इनको क्‍या जरूरत पड़ रही थी ? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपको प्रोटेक्‍ट करना चाहिए, मैं मेरी बात कर रहा हूं, गलत हो तो आप उसको निकाल दें, ये उसका जवाब दे दे, प्रतिवाद कर दें। (व्‍यवधान)

श्री श्रवण कुमार: पांच साल की बात पर पीड़ा हुई है और लालकृष्‍ण आडवाणी ने जब पाकिस्‍तान में जाकर के कह दी छोटी सी बात तो इन्‍होंने अध्‍यक्ष को हटा दिया, इस बात पर श्रम आने लग गई कि हमारे देश के खिलाफ कैसे बोलकर के आये हो और यह छोटी सी बात की तकलीफ हो गई। आडवाणी को हटा दिया और उनकी फोटो अटल बिहारी वाजपेयी के साथ लगाते थे।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, बहुत अच्‍छा। आप बोलें।

श्री बंशीलाल खटीक: पर दाउद इब्राहिम के हिमायती तो नहीं बनने देंगे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: हम हिमायती नहीं हैं, तुम वक्‍त बदलते ही पाला बदल लेते हो।

श्री मोहनलाल गुप्‍ता: ... तो स्‍वागत है आपका। आपने बोला कि नहीं हैं, ठीक है, यह बोलिये आप, धन्‍यवाद आपको।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: नहीं हैं, कतई नहीं हैं।

श्री अध्‍यक्ष: अब आपके केवल दो मिनट रह गये हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: पांच मिनट बोला हूं और दो मिनट ही रह गये।

श्री अध्‍यक्ष: देखिये, यह व्‍यवस्‍था पहले दी जा चुकी है कि साढ़े छह बजे आधा घंटे की चर्चा होगी और 7 बजे के बाद समय नहीं बढ़ाया जाएगा। यह बात पहले तय हो चुकी है इसलिए मैं आपसे कह रही हूं कि आपके दो मिनट रह गये हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अध्‍यक्ष महोदय, कल भी राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य बोल रहे थे तो उनके बोलने तक आपने समय बढ़ाया था। यह तो कोई बात नहीं हुई कि दो मिनट में बात खत्‍म हो।

श्री अध्‍यक्ष: वह आधे घंटे की चर्चा है, उसका समय है इसलिए कह रही हूं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: वह 10 मिनट बाद हो जाएगी, उसमें क्‍या हो गया।

श्री अध्‍यक्ष: लेकिन आपने 25 मिनट पहले बोलना शुरू किया था, मैं यह मान लूं कि आपका 4 मिनट चला गया व्‍यवधान में तो....

मोहम्‍मद माहिर आजाद: चार मिनट, आप देख लें, आपके पास तो रिकार्ड है।

श्री अध्‍यक्ष: पांच मिनट मान लीजिये तो भी 20 मिनट बोल चुके आप।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस अभिभाषण में पेज 43 पर कहा गया है, इन्‍होंने चुनाव घोषणा पत्र में वायदा किया था कि हम बिजली का उत्‍पादन बढ़ायेंगे, बिजली की बढ़ी हुई दरों को व्‍यावहारिक बनायेंगे और इलेक्‍ट्रोनिक मीटरों की समीक्षा करके हटायेंगे। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं कि एक भी इलेक्‍ट्रोनिक मीटर आपने हटाया? आपने बेतहाशा उपभोक्‍ताओं और कृषकों की रेट बढ़ा दी, एक मेगावाट बिजली का उत्‍पादन आप कर नहीं पाये। आज आप मजे में इसलिए हो कि पिछली कांग्रेस की अशोक गहलोत की सरकार 1750 मेगावाट बिजली का रिकार्ड उत्‍पादन करके छोड़कर गई थी जिसकी प्रशंसा तत्‍कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी जी वाजपेयी जब कोटा में आये थे तो उन्‍होंने भी की थी। आज उसके मजे मार रहे हो। मैं आपसे पूछना चाहता हूं, 20   साल से राजेन्‍द्र जी, आप और हम इस सदन में हैं....


Vkj/akt/1830/8d

 

श्री अध्‍यक्ष: पूछो मत आप, कहते जाओ। पूछो मत कुछ, आप कहते जाओ। जवाब देने वाला कोई नहीं है ना, इसलिए कह रही हूं, आप कहते जाओ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अच्छा कह देता हूं साहब, चलिये। (व्‍यवधान) कभी कांग्रेस के शासन में जुलाई के अन्‍दर पावर कट नहीं हुआ। नवम्‍बर, दिसम्‍बर, जनवरी में जब गेहूं की फसल को पानी के लिए बिजली की जरूरत ज्‍यादा होती थी जब भले ही कटौती हो जाती थी। आपके राज में दो साल से जुलाई में पावर कट हो रहा है। आप शहरों में कर रहे हैं, गांवों में कर रहे हैं। सिंगल फेस भी आप स्‍टूडेंट्स को दे नहीं पा रहे हैं और स्थिति यहां तक हो गई कि आपने बिजली के अन्‍दर राजस्‍थान के हिस्‍से की बिजली मध्‍यप्रदेश को दे दी। आज भी मुख्‍य मंत्री का मध्‍यप्रदेश से मोह भंग नहीं हो रहा है। राजस्‍थान के हिस्‍से का पानी आप मध्‍यप्रदेश को देकर राजस्‍थान की अनदेखी कर रहे हैं और आप इसमें कह रहे हैं कि हम 2011-12 तक 1000 मेगावाट बिजली का उत्‍पादन कर लेंगे। यह मुंगेरीलाल के सपने क्‍यों देख रहे हो? मैं भी कह दूं कि साहब, मैं अगले जन्‍म में मुख्‍य मंत्री होऊंगा, प्रधान मंत्री होऊंगा। 2011-12 में आप कहां होंगे, कुछ आपका कोई ठिकाना, अता-पता रहेगा कि नहीं रहेगा?

श्री अध्‍यक्ष: बन सकते हो प्रधान मंत्री भी। ऐसी कोई बात नहीं है, बन सकते हो, मुख्‍य मंत्री तो आप बन सकते हो।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि आज राजस्‍थान का कोई भी वर्ग इस सरकार से खुश नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया आप कन्‍क्‍लूड करें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: मैं दो मिनट में कन्‍क्‍लूड कर रहा हूं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सेज पर एम.ओ.यू. साइन हुआ है। मैं आपको यह निवेदन करना चाहता हूं कि जिस दिन यह साइन हुआ, उस दिन से अब तक यानी 4 जुलाई, 2005 से अब तक इसके अन्‍दर 27 संशोधन हो चुके हैं। ऐसा कभी हुआ है? एक एम.ओ.यू. आप साइन कर रहे हो और उसके ऊपर 27 संशोधन आप 4 जुलाई से अब तक कर चुके हैं और ये सारे संशोधन किसलिए कर रहे हो, महेन्‍द्रा एण्‍ड महेन्‍द्रा को आप फायदा पहुंचाने के लिए कर रहे हो। आपने अभी लेटेस्‍ट में 16 फरवरी को जब इनके अरुण नन्‍दा मुम्‍बई से यहां आये थे। आपने एक ऐसा भयंकर संशोधन किया है कि जो जमीन प्‍लाट काटने के बाद बच जायेगी, उस पर भी महेन्‍द्रा एण्‍ड महेन्‍द्रा जब चाहे टाउनशिप कर सकती है। एम.ओ.यू. साइन होता है एक टाइम पीरियड के लिए, यह सारा आप किसलिए कर रहे हो? आपने अजमेर रोड की जमीन 40-50 हजार, एक लाख रुपये बीघा की थी, इनको आपने 7-8 हजार रुपये बीघा पर दे दी। आप मारने वाले का लट्ठ पकड़ सकते हो लेकिन आप कहने वाले की जुबान नहीं पकड़ सकते। आपके दो मंत्रियों ने सेज का विरोध किया, केबिनेट का बहिष्‍कार किया और उसके बाद बाद में चुपचाप में समझौता कर लिया। लोग यह कहते हैं, मुझे नहीं पता वास्‍तविकता क्‍या है लेकिन जनता मिलती है, वह कहती है कि इन दोनों मंत्रियों की और इनके चहेतों की जमीन भी सेज में आ रही थीं इसलिए विरोध किया और जब उस जमीन को उससे निकाल दिया गया, अवाप्ति से मुक्‍त कर दिया गया तो ये राजी हो गये। इस तरीके का भ्रष्‍टाचार आज इस सेज के नाम पर कर रहे हो।

श्री ओम बिरला: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो बात की है और जो आरोप लगाया है, या तो उसके तथ्‍य सदन के पटल पर रखे और उन आरोप को साबित करे अन्‍यथा यह मानेंगे कि...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर ये आरोप लगाना चाहते हैं तो नियमों में आ जाये। ये नोटिस देते 273 में।

श्री बंशीलाल खटीक: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बिना तथ्‍यों के आधार पर माननीय मंत्रियों के ऊपर आरोप लगाया है।

श्री अध्‍यक्ष: नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य, कौनसा खसरा नम्‍बर है इनका, वह तो बता दीजिये आप...(व्‍यवधान) क्‍या इनकी खातेदारी है, वह तो बता दो।

श्री बंशीलाल खटीक: सदन में माननीय मंत्रियों के ऊपर आरोप लगाना...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आज इस सरकार के अन्‍दर जितना भ्रष्‍टाचार हो रहा है, उतना भ्रष्‍टाचार पहले कभी नहीं हुआ।

श्री बंशीलाल खटीक: यह कार्यवाही में से निकालना चाहिए। (व्‍यवधान)

श्री ओम बिरला: आजादी के बाद से लेकर जिन्‍होंने भ्रष्‍टाचार किया है, उससे भ्रष्‍टाचार की क्‍या चर्चा करें। (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक: ये भ्रष्‍टाचार के अन्‍नदाता हैं, ये भ्रष्‍टाचार के जन्‍मदाता हैं। आप अपने गिरहबान में झांककर देखो। 45 साल तक इस देश को लूट-लूटकर खा गये और इस देश को कंगाल बना दिया और...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य, राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य, क्‍यों उत्‍तेजित हो जाते हैं, आप बार-बार क्‍यों खड़े हो जाते हैं? (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक: हमारे मंत्रियों पर बिना तथ्‍यों के आधार पर आरोप लगाये जाते हैं, यह ठीक नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री मौजूद हैं। उनकी जमीन कहां है, या तो खसरा नम्‍बर ये बता दे या मंत्रीजी खुद कह दें। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: ये नोटिस देकर आते, नोटिस देते ये, 273 में नोटिस देते, हम जवाब देते। यह क्‍या बात हुई अध्‍यक्ष महोदय। मर्जी से अनर्गल आरोप लगा दिया, बिना किसी आधार पर लगा दिया, हम बैठे-बैठे सुनते रहे। ये मंत्रीजी को नोटिस देते।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे....

श्री अध्‍यक्ष: छह बजकर 34 मिनट हो गये हैं। पाँच मिनट जो आपने लिये थे, वह आपने ले लिये हैं। अब तो कन्‍क्‍लूड कर दो।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: हां, मैं खतम कर रहा हूं, मैं कन्‍कलूड कर रहा हूं। इस सरकार में जितना भ्रष्‍टाचार फैल रहा है, मुझे यह कहते हुए....

श्री बंशीलाल खटीक: इन्‍होंने जो कहा है, वह कार्यवाही से निकाला जाये। (व्‍यवधान)अभी आरोप जो लगाया है, वह कार्यवाही से निकाला जाये।

श्री अध्‍यक्ष: आप कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज जितना भ्रष्‍टाचार इस राज में फैल रहा है, उस भ्रष्‍टाचार के नाम गिनाने की बजाय मुझे गालिब का एक शेर याद आ रहा है। गालिब ने सही कहा था कि ‘’बरबाद-ए-गुलिस्‍तां करने को बस एक ही उल्‍लू काफी था, अब हाल-ए-गुलिस्‍तां क्‍या होगा, हर शाख पे उल्‍लू बैठा है’’ । आज चारों तरफ भ्रष्‍टाचार है, सर्वत्र भ्रष्‍टाचार ही भ्रष्‍टाचार हो रहा है...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: यह बासी शेर है। यह शेर आप 15वीं बार सुना रहे हो। (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: आपके तो भ्रष्‍टाचार में लिप्‍त हैं। और उस भ्रष्‍टाचार ने आपको भगाया है। (व्‍यवधान)

श्री ओम बिरला: ...उन पर तो प्रमाणित मुकदमे हैं। भ्रष्‍टाचार में लिप्‍त प्रमाणित मुकदमे है। भ्रष्‍टाचारी मंत्रियों के नाम बतायें कि उनके ऊपर मुकदमे हैं। बात कर लो आप इस पर एक बार। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: यह आज ही वन मंत्रीजी ने मेरे दूसरे प्रश्‍न का जवाब दिया है। शेरों की, बाघों की और बघेरों की संख्‍या घटी है, मुझे खुशी है यह कहते हुए कि बीजेपी का राज जब से आया है, गीदड़ों और लंगूरों की संख्‍या बढ़ रही है, आप यह जवाब देख लो। यह जवाब में कहा गया है। कहा या नहीं कहा है आपने? यह स्थिति है आपकी, आप क्‍या बात करना चाहते हो? (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप कृपया कन्‍क्‍लूड कर दें। आपने शेर पढ़ दिया, हर शाख में उल्‍लू बता दिया, अब तो बैठ जाओ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आधा मिनट, आधा मिनट।

श्री मदन राठौड़: बहुत पुराना शेर है, पुराना शेर पढ़ा है। यह गीदड़ से भी कम हुआ।

श्री विजय बंसल: बरबाद-ए-गुलिस्‍तां करने को एक ही उल्‍लू काफी था।

श्री मदन राठौड़: हां, इनको मालूम ही नहीं है। आपने गलत शेर पढ़ा है, सही शेर इन्‍होंने बताया है...(व्‍यवधान) आपने शेर भी गलत पढ़ा है। यह संसारचन्‍द्र कौन था?

मोहम्‍मद माहिर आजाद: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस महामहिम राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण में कहीं अल्‍पसंख्‍यकों का नाम तक भी लेना इस सरकार ने उचित नहीं समझा। दलितों के बारे में कोई बात नहीं कही गई है। यह सब असत्‍य है। इसलिए मैं इस महामहिम राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण के धन्‍यवाद प्रस्‍ताव पर अपना समर्थन व्‍यक्‍त करने में असमर्थ हूं इसलिए मैं इसका पुरजोर शब्‍दों में विरोध करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आधा घंटे की चर्चा होगी अब। हां, आप क्‍या कहना चाहते हैं?

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: अध्‍यक्ष महोदय, मैं धन्‍यवाद दूंगा माननीय माहिर आजाद साहब को कि उन्‍होंने मुझे एक बहुत अच्‍छा अवसर दे दिया है। इतनी सी बात उन्‍होंने कही है, दो मंत्रियों का उन्‍होंने, मेरा नाम तो नहीं लिया लेकिन मैं समझता हूं कि मेरा नाम है उन दो मंत्रियों में, मैं उस मीटिंग में नहीं आया था। उन्‍होंने कहा कि सेज में उनकी जमीन है और इसलिए पहले तो इन्‍होंने विरोध किया, फिर सेज से जमीन छोड़ दी इसलिए उन्‍होंने इसका समर्थन कर दिया। मैं यह निवेदन कराना चाहता हूं कि राजस्‍थान भर में एक तो मेरी जमीन है सीकर में, जो मेरी सम्‍पत्ति है। एक मेरी जमीन है सिरसी जयपुर में जो 15 वर्ष से मेरे पास है। इसके अलावा यह सेज का इलाका या कोई भी इलाका है जिसमें एक इंच भी जमीन हो तो मैं सारी मोहम्‍मद माहिर आजाद को समर्पित करता हूं, वह ले लें। इसके अलावा और किसी को मिल जाये तो वह ले लें। मैं कहना चाहता हूं अध्‍यक्ष महोदय, यह व्हिसपरिंग कैम्‍पेन चला था कि इस बात का प्रचार किया जाये कि किसानों के हित के संरक्षण की बात नहीं करता, इसकी खुद की जमीन है वहां। सेज के इलाके में मेरी, मेरे परिवार की, मेरे सम्‍बन्धियों की, मेरे किसी के मिलने-जुलने वाले की भी एक इंच जमीन नहीं है और इसलिए इस प्रकार का आरोप लगाना मिथ्‍या है, गलत है, बेबुनियाद है और अनैतिकतापूर्ण है। (व्‍यवधान)

श्री ओम बिरला: जवाब दो, जवाब दो।

श्री अध्‍यक्ष: श्री संयम लोढ़ा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: खुद माननीय शिक्षा मंत्रीजी ने कहा कि मेरे क्षेत्र के लोगों की है।आप प्रोसीडिंग निकालकर देख लें, उन्‍होंने कहा कि उनकी या उनके चहेतों की। इनके क्षेत्र के लोग इनके चहेते नहीं हैं क्‍या? आप प्रोसीडिंग निकालकर देख लीजिये। आप उठाकर देख लीजिये प्रोसीडिंग। मैं क्‍या शब्‍द बोलता हूं, मैं इसको जानता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं नहीं, गलत बात, गलत बात नहीं, नहीं नहीं। यह गलत बात है आपकी। (व्‍यवधान) नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपने कोई क्षेत्र की बात नहीं की थी। आपने केवल यह कहा था कि दो मंत्री जिन्‍होंने सेज का विरोध किया, उनकी चूंकि वहां जमीन है, वह जमीन जब छूट गई तो उन्‍होंने इसका समर्थन किया।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: चहेते वर्ड यूज किया है, आप देख लेना प्रोसीडिंग। नहीं हो तो आपकी इच्‍छा हो वह कर लेना।

श्री अध्‍यक्ष: मैं जो कह रही हूं, मेरा देखा हुआ है, वह का वह है। देखा हुआ है मेरा तो, और क्‍या देखूंगी?

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आप देख लेना। आपके कहने से क्‍या है? आपके कहने से क्‍या है? मैंने चहेते शब्‍द बोला है।

श्री अध्‍यक्ष: श्री संयम लोढ़ा। आधे घंटे की चर्चा।

श्री संयम लोढ़ा(सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान की मौजूदा सरकार ने...

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, आपको तो केवल एक मिनट में अपनी बात कहनी है, केवल यह कहना है। हां, आप पूछ लीजिये।

श्री संयम लोढ़ा: मैं पूछ ही रहा हूं अध्‍यक्ष महोदय।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: आप पहले ध्‍यान आकर्षित कर दें, फिर मंत्रीजी अपनी बात कह दें, आप फिर पूछ लेना जो पूछना हो।

 

Jkj/akt/1840/8e/03032006

 

श्री अध्‍यक्ष:  वह तो ध्‍यानाकर्षण में होता है, आधे घंटे में नहीं होता है, यह भी नहीं होता, आधे घंटे में तो सीधे मंत्री ही बोलते हैं।

श्री संयम लोढ़ा:  अब आपकी आज्ञा क्‍या है, मैं बोलूं या मंत्रीजी बोलें।

श्री अध्‍यक्ष:  आपको मैंने याद दिलाया है कि आपकी आधे घंटे की चर्चा प्रारम्‍भ हो रही है।

श्री प्रतापसिंह सिंघवी:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट बोल लेने दो।

श्री संयम लोढ़ा:  मैं पूछ लूं, फिर फरमा देना आप।

श्री प्रतापसिंह सिंघवी:  मेरे को ही सुनना चाहते हो तो मुझे सुन लो न ।

श्री अध्‍यक्ष: आप पहले बोल लें।

श्री संयम लोढ़ा:  उस समय आपने तो अपना वाचन किया था, मैं पूरक प्रश्‍न नहीं कर पाया था न।

श्री प्रतापसिंह सिंघवी:  उस वक्‍त मेरी...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा:  मैं पूछ लेता हूं, आप जवाब दे देना।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हां, बोल दीजिये।(व्‍यवधान) बोलने दीजिये उनको, एक सैकण्‍ड में कह देंगे।

श्री संयम लोढ़ा:  मैं माननीय मंत्रीजी से आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि आपने 150 करोड़ रूपये का लक्ष्‍य गृह कर के अंदर राजस्‍थान की तमाम स्‍थानीय निकायों को दिया और झालरापाटन जहां से राजस्‍थान की माननीय मुख्‍य मंत्री निर्वाचित होकर आती है, आपने 30 लाख रूपये का टारगेट दिया, पूरा साल गुजर गया, आप सिर्फ दो हजार रूपये वसूल कर पाये।  और माननीय मंत्रीजी, जिस छब़ड़ा से आप‍चुनकर आते हैं, आपने वह छबड़ा नगर पालिका को 15 लाख रूपये का टारगेट दिया और आप अपने खुद की नगर पालिका से पूरे एक साल में एक हजार रूपया मात्र वसूल कर पाये।  इसके अलावा बाकी सारे आंकड़ों में मैं नहीं जाना चाहता।  आपने जब राजस्‍थान की जनता से जनादेश मांगा तो जिन 69 प्राथमिकताओं को राज्‍य की जनता के सामने रखा था उनमें बहुत स्‍पष्‍ट लिखा यह 51 नम्‍बर पर, गृह कर समाप्‍त।  लेकिन सत्‍ता में आने के बाद में 73वें संविधान संशोधन के आधार पर जिन स्‍थानीय निकायों का कार्य सम्‍पादित किया जाना था­­­....

श्री अध्‍यक्ष:  अब हो गई बात आपकी, हो गया।

श्री संयम लोढ़ा:  आपने 26 अप्रैल, 2005 को राजस्‍थान की तमाम नगरपालिकाओं और स्‍थानीय निकायों को एक चिट्ठी भेजी कि अगर आपने पैसा वसूल नहीं किया तो आपका अनुदान रोक दिया जायेगा।  मैं इसका यह अंश पढ़कर सुनाना चाहता हूं।  जिन नगरीय निकायों द्वारा उक्‍त निर्देशों की अवहेलना करते हुए गृह कर निर्धारण व प्रभावी वसूली की कार्यवाही नहीं की जायेगी, उनको राज्‍य सरकार की ओर से देय अनुदान हस्‍तांतरित किया जाना सम्‍भव नहीं होगा।  साथ ही संबंधित के विरूध्‍द नियमानुसार आवश्‍यक कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। माननीय अध्‍यक्ष महोदय...

श्री अध्‍यक्ष:  हो गया।  अब इनको जवाब देने दीजिये न आप।

श्री संयम लोढ़ा:  मैं यही निवेदन करना चाहता हूं कि यह इस तरह का आदेश जारी करके राजस्‍थान सरकार...

श्री प्रतापसिंह सिंघवी:  बस, हो गया अब तो।

श्री संयम लोढ़ा:  उन स्‍थानीय निकायों की स्‍वायत्‍तता में हस्‍तक्षेप कर रही है और भारत की पार्लियामेंट ने जिस 73वें संविधान संशोधन के बाद में इन स्‍थानीय निकायों का जो स्‍वरूप निर्धारित किया है, राजस्‍थान की मौजूदा सरकार न केवल उसमें हस्‍तक्षेप करने का प्रयास कर रही है बल्कि उनकी स्‍वायत्‍तता पर हमला करने का प्रयास कर रही है और पूरे राजस्‍थान में इस तरीके से एक-एक मोहल्‍ले के अंदर शिविर लगाकर के जो आपने लोगों का जुलूस निकाला है...

श्री अध्‍यक्ष:  आधे घंटे में आपको केवल प्रश्‍न पूछने का अधिकार है, उनके वक्‍तव्‍य के बाद में, भाषण देने का नहीं है, सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री प्रतापसिंह सिंघवी:  प्रश्‍न पूछ लिया साहब,उन्‍होंने।  आप भाषण दे रहे हैं।

श्री संयम लोढ़ा:  मैं, अध्‍यक्ष महोदय, भाषण नहीं दे रहा हूं, मैं तो संवैधानिक व्‍यवस्‍था की और सरकार का ध्‍यान आकृष्‍ट कर रहा हूं जिस संवैधानिक प्रावधान का उल्‍लंघन­­­­­­­­­......

श्री अध्‍यक्ष:  सरकार का ध्‍यान है तभी तो आधे घंटे की चर्चा हुई है।

श्री संयम लोढ़ा:  राजस्‍थान की मौजूदा सरकार कर रही है।

श्री अध्‍यक्ष:  आधे घंटे की चर्चा इसीलिए यहां नियत है कि वो अपना वक्‍तव्‍य दें, फिर कोई प्रश्‍न पूछना हो, वह आप पूछ लें।

श्री संयम लोढ़ा: आप जवाब दो, मैं फिर पूछ लूंगा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़:  आधे-आधे घंटे का भाषण दे रहे हैं..

श्री संयम लोढ़ा:  मंत्रीजी जवाब दे दें, मैं बाद में पूछ लूंगा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़:  आधे घंटे का भाषण दे दिया, अब क्‍या बचा है।

श्री प्रतापसिंह सिंघवी:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दिनांक 01 मार्च को सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य संयमजी लोढ़ा ने एक प्रश्‍न लगाया था गृह कर के बारे में।  हालांकि उसका समुचित जवाब मैंने समय पर ही दे दिया था पर कुछ माननीय सदस्‍यों की और हमारे सीनियर पार्लियामेंटेरियन माननीय सी.पी.जोशी साहब की का‍फी थोड़ी नाराजगी थी कि मंत्री बहुत धीरे-धीरे पढ़ रहा है और ढंग से जवाब नहीं दे रहा है।  मेरी मंशा उस समय यह थी कि मैं इसकी पूरे विस्‍तार में जानकारी दे दूं ताकि कोई शंका माननीय सदस्‍य के मन में नहीं रहे।  फिर जैसा आप सब जानते हैं, माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने आप सब के, प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों के निवेदन पर उन्‍होंने आधे घंटे की चर्चा का, जैसा उन्‍होंने कहा, माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने भी कहा कि आधे घंटे की चर्चा रखवा दीजिये, हमको कोई आपत्ति नहीं है और मान्‍यवर, आपने उस बात को सहर्ष स्‍वीकार किया और यह आधे घंटे की चर्चा आपने रखी।  मैं कोशिश करूंगा कि जो माननीय सदस्‍यों की शंका है उनका पूरा जवाब दे सकूं।

      माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान नगर पालिका का जो एक्‍ट 1959 में बना था उसमें यह प्रोवीजन मेंडेटरी था कि किसी न किसी, तीन प्रकार के टैक्‍स राजस्‍थान की जितनी भी नगर पालिकाएं हैं, उनमें लिया जाय।  उसमें एक गृह कर था, एक चुंगी थी और तीसरा व्‍यवसाय कर था।  व्‍यवसाय कर जब से नगर पालिकाएं अस्तित्‍व में आईं, व्‍यवसाय कर राजस्‍थान में किसी भी नगर पालिका में नहीं लगा।  चुंगी कर की काफी डिमांड उठती रही और बीच में चुंगी कर भी माफ कर दिया गया।  अब जो वर्तमान स्थिति है उसमें यह बात सही है कि राजस्‍थान में जितनी भी नगर पालिकाएं हैं उनमें गृह कर लिया जा रहा है।  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसलिए निवेदन करना चाहूंगा कि गृह कर एक तो 1959 का जो कानून है उसके तहत भी मेंडेटरी है और भारत सरकार की वह जो पुराने समय पर, आज से साल भर पहले जो यूरिफ की योजना बनी थी उसमें भी उन्‍होंने हमको जो गाइड लाइन दी थी उसमें यह कहा था कि यह जो यूरिफ का पैसा राजस्‍थान सरकार को आयेगा, उसमें भी यह मेंडेटरी कर दिया था कि आपको किसी न किसी प्रकार का टैक्‍स नगर पालिकाओं में वसूल करना पड़ेगा, गृह कर के लिए, सम्‍पत्ति कर के लिए उन्‍होंने विशेष करके आग्रह किया था।  मेरा, मान्‍यवर, अध्‍यक्ष महोदय, आपसे निवेदन है कि यूरिफ योजना तो खत्‍म हो गई और अभी भारत सरकार ने तीन योजनाएं नई प्रस्‍तावित की हैं। बजट में उनका उल्‍लेख भारत के जो माननीय वित्‍त मंत्री हैं, उन्‍होंने भी इस बात का हवाला दिया है।  तीन जो स्‍कीमें हैं, मैं उसके बारे में आपको निवेदन करना चाहूंगी कि एक तो जवाहर लाल नेहरू राष्‍ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन है, इसमें हमको भारत सरकार से काफी पैसा आयेगा।  दूसरी, लघु-मध्‍यम कस्‍बों का शहरी आधारभूत सुविधाओं के लिए विकास योजना है जिसको यूआईडीएसएसएमटी के नाम से जानते हैं।  तीसरी एकीकृत आवास एवं गंदी बस्‍ती, यह स्‍लम डवलपमेंट का कार्यक्रम है, आईएसचएसडीपी।  इन तीनों योजनाओं में भारत सरकार से हमको काफी पैसा मिलने वाला है और इन्‍होंने भी, भारत सरकार ने भी हमको यह गाइड लाइन दी है, भारत सरकार ने हमको कहा है कि आप हाउस टैक्‍स लें, तभी हम आपको इस प्रकार की ग्रांट देंगे।  हम अगर हाउस टैक्‍स नहीं लेते हैं तो इस प्रकार की ग्रांट जिससे राज्‍य के शहरों का नक्‍शा बदलेगा, जिस प्रकार की आज शहरों में जरूरत है, जिस प्रकार से आज शहरों में ट्रेफिक कंजेशन बढ़ रहा है, जो दूसरी प्रकार की स्थिति शहरों की हो रही है, जिस प्रकार जनसंख्‍या का दवाब शहरों में बढ़ रहा है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान सरकार अपने बूते पर तो यह सब कुछ नहीं कर सकती, इसमें भारत सरकार का सहयोग भी हमको चाहिए।  इसलिए हम यह गृह कर चालू रख रहे हैं।  फिर भी मैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपको निवेदन करना चाहूंगा कि यह बात सही है कि सन् 2000 का जो चुनाव हुआ, सन् 2004 का‍चुनाव हुआ, उसमें हमारी भारतीय जनता पार्टी के जो हम सत्‍ता पक्ष के लोग बैठे हैं, इन्‍होंने जो मेनिफेस्‍टो डिक्‍लेयर किया, उसमें यह बात साफ तौर पर कही गई थी कि भारतीय जनता पार्टी शासन में आती है तो निश्चित रूप से हम गृह कर समाप्‍त करेंगे।  

      माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको निवेदन करना चाहूंगा कि जो भी पार्टी चाहे कांग्रेस पार्टी सरकार में हो, चाहे भारतीय जनता पार्टी सरकार में हो, चाहे और कोई पार्टी सरकार में हो, जिसकी भी सरकार बनती है, जो भी मेनिफेस्‍टो लेकर जनता के बीच में चुनाव के समय पार्टी जाती है, जो सरकार सत्‍ता में आ जाती है, जिसकी पार्टी सत्‍ता में आ जाती है, वह पाँच साल का मेंडेट होता है, पाँच साल में उन चीजों को पूरा करने के लिए हमारा जो कार्यक्रम है, हम आज भी यह नहीं कह रहे हैं, हम यह जरूर कह रहे हैं कि हम परीक्षण करवा रहे हैं, परीक्षण के बतौर क्‍या किस‍प्रकार से राजस्‍थान की नगर पालिकाओं की माली हाल ठीक करवाई जा सकती है, हम परीक्षण कर रहे हैं।  परीक्षण के बाद जिस प्रकार का भी हमारा निर्णय होगा, निश्चित प्रकार से हम आपको अवगत करायेंगे।  माननीय, आज हमारा पाँच साल के लिए है, सवा दो साल गुजरे हैं, अभी तीन साल बाकी है, निश्चित रूप से अब यह गृह कर है, हमने मेनिफेस्‍टो में जो बातें डिक्‍लेयर करीं, वह भी काफी पूरी कर दी हैं, अभी पाँच साल का समय है, इस पर भी विचार किया जायेगा।  मैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपको एक निवेदन(व्‍यवधान) एक मिनट भाई साहब।

श्री अध्‍यक्ष: बीच में नहीं।

श्री प्रतापसिंह सिंघवी:  अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि अरबन डवलपमेंट के मामले में पिछली सरकार, जो गहलोत साहब मुख्‍य मंत्री बने थे......

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   उन्‍होंने भी कुछ घोषणाएं की थी उन्‍होंने 1998 के चुनाव में घोषणा पत्र में यह कहा था कि आवास नीति बनायी जाएगी और आवास नीति में जो घोषणा की थी लोगों के समाधान के लिए आवास नीति बनायी जाएगी। मैं मान्‍यवर, निवेदन करना चाहूंगा कि इन्‍होंने पाँच साल पूरे निकाल दिये, सवा दो साल अब ये विपक्ष में भी बैठ लिये और इन्‍होंने आज दिन तक कभी भी मैंने तो नहीं सुना इस हाउस में आवास नीति की बात की हो। दूसरा इन्‍होंने यह कहा है कि जो कृषि भूमि पर जो कालोनियां बनी हैं इनका जब नियमन किया जायेगा तो हम स्‍टाम्‍प ड्यूटी फ्री कर देंगे। मैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपसे पूछना चाहूंगा कि ये हमको तो कह रहे हैं हमको तो शिक्षा दे रहे हैं कि आपने घोषणा पत्र में जो बातें कही हैं पूरी करो पर मैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपसे कहना चाहूंगा प्रतिपक्ष के नेता से कहनाचाहूंगा कि आपने जो ये घोषणाएं कीं कम से कम इसके बारे में तो जिक्र करते।  तीसरा अभी सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य श्री संयम जी लोढ़ा ने निवेदन किया कि आपने इस प्रकार की चिट्ठियां लिखी हैं ।  यह बात सही है कि ये रूटीन की चिट्ठियां हैं रूटीन में इस प्रकार की चिट्ठियां विभाग लिखता रहता है क्‍योंकि आज की तारीख में हमने गृहकर समाप्‍त नहीं किया है इसलिए यह हमारे अधिकारियों का काम है और उसको फॉलो अप कर रहे हैं।  कोई भी सरकार बनती है तो प्रत्‍येक वर्ष टारगेट बढ़ा कर देती है हमने भी टारगेट बढ़ा कर दिया है ।  रहा जहां तक सवाल छबड़ा और झालरापाटन का आपने जो जिक्र किया । वहां भी आप ये नहीं कह सकते कि हमने वसूली के लिए चिट्ठी नहीं लिखी है कोई पत्र नहीं लिखा है । अगर जो चिट्ठी मान लो किसी और नगरपालिका ने या और किसी निगम ने इस प्रकार की स्थिति नहीं की है तो उनको भी उसी प्रकार के पत्र लिखे हैं और उनके लिए भी वो ही कहा है जो संबंधित दूसरी नगरपालिकाओं के लिए कहा है । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक निवेदन और करना चाहूंगा कि कांग्रेस के समय हाउस टैक्‍स से 11-12 करोड़ रुपये मिलते थे, मुझे यह बताते हुए खुशी है कि आज की तारीख में हमने 26 करोड़ रुपये से ज्‍यादा 15 फरवरी तक वसूल कर लिया है और आपको ये भी निवेदन करना चाहूंगा कि पिछले समय में नगरपालिकाओं में गृहकर मात्र 80 नगरपालिकाओं में इकट्ठा किया जाता था जो आज बढ़कर 170 नगरपालिकाओं में गृहकर अपने आप वसूल करने लगे हैं । उसमें कांग्रेस की भी नगरपालिकाएं हैं भारतीय जनता पार्टी की भी नगरपालिकाएं हैं । अगर आपको गृहकर का विरोध करना था तो आपके जो चेयरमेन हैं जहां आपकी नगरपालिकाएं हैं कम से कम उनके चेयरमेनों को तो कहते कि आप गृहकर मत लीजिये । उन्‍होंने किस आधार पर गृहकर लिया मुझे आप इसका भी जवाब दें । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने मेरी बात जितनी थी गृहकर के मामले में माननीय सदस्‍य की जितनी आशंका थी वो दूर कर दी है । (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: पहले उन्‍हें कंपलीट करने दें उसके बाद।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी:  केन्‍द्र सरकार की भी योजनाएं जो हमारे अरबन डवलपमेंट के लिए उन्‍होंने बनाई है उनमें भी गृहकर मेंडेटरी किया है इसलिए फिर भी हम इस पर विचार कर रहे हैं और जैसा भी फैसला होगा उससे जनता को अवगत करा दिया जायेगा। 

श्री संयम लोढ़ा:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोटा में जो भारतीय जनता पार्टी का बोर्ड है उसने प्रस्‍ताव पारित करके इसका विरोध किया है कोटा में।

श्री विजय बंसल:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से स्‍वायत्‍त शासन मंत्री जी से यह जानना चाहूंगा कि राजस्‍थान में 182 नगरपालिका, परिषद् और निगम हैं...।

श्री अध्‍यक्ष:  आप नहीं जान सकते हैं पहले संयम लोढ़ा जानेंगे।  आप नहीं जानेंगे पहले संयम लोढ़ा जानेंगे।

श्री संयम लोढ़ा:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा कि माननीय मंत्री जी ने यह कहा कि है कांग्रेस के बोर्ड इसका विरोध करें तो कांग्रेस के बोर्ड्स ने तो किया ही है पर आपके अपने भारतीय जनता पार्टी के बोर्ड ने कोटा के नगर निगम ने प्रस्‍ताव पारित करके इसका विरोध किया है और आपका यह उत्‍तर इस बात की जानकारी देता है कि आप कोटा में एक फूटी कौड़ी भी वसूली नहीं कर पाये और झालरापाटन की जनता ने आपके और आपके मुख्‍यमंत्री के इस आह्वान को मात्र एक हजार रुपये जमा करके साफ ठुकरा दिया है।  आपके छबड़ा के लोगों ने ठुकरा दिया है और आपको और आपकी मुख्‍यमंत्री को इस बात का संदेश दिया है कि जो वादा चुनाव के समय आपने जनता के साथ किया है उसको तुरंत पूरा करें इसलिए माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पिफर निवेदन करना चाहता हूं कि सत्‍ता में आने के बाद अपने तौर तरीके बदलो मत ।  जिन वादों के आधार पर आप राजस्‍थान की जनता से जनादेश लेकर हुकूमत में बैठे हो, केन्‍द्र सरकार की चिट्ठियों के आधार पर राजस्‍थान की जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश मत करो और आपकी इस 26 अप्रैल की चिट्ठी के आधार पर आपके अधीनस्‍थ अधिकारी और आपके कर्मचारी मौहल्‍लों में जाकर जिस तरह से कैम्‍प लगाकर लोगों की इज्‍जत का जुलूस निकाल रहे हैं । मेहरबानी करके सत्‍ता के अहंकार में आप मत रहो और माननीय मंत्री जी और मुख्‍यमंत्री जी को आप सद्बुद्धि दो। यह झालरापाटन की जनता का संदेश है कि 15 लाख 30 लाख का टारगेट देने के बाद उसने एक हजार रुपये जमा कराये और लोकतंत्र के अंदर जनता के आदेश से बड़ा कोई नहीं होता है इसलिए मेहरबानी करके जनता की भावनाओं का सम्‍मान करें और इसी सदन में और आज ही के दिन गृहकर समाप्‍त करने की घोषणा करें।

श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं दो मिनट बोलना चाहती हूं।

श्री अध्‍यक्ष: वैसे तो आधा घंटे की चर्चा में केवल जो माननीय सदस्‍य जिसका प्रश्‍न होता है उसी को इजाजत दी जाती है फिर भी...।

श्री जुबेर खान:  अध्‍यक्ष महोदय, दो और सात होते हैं क्‍योंकि ऐसी परिस्थिति में आपने एडमिट किया था यह आधे घंटे की चर्चा का उस टाइम फोरमल नोटिस नहीं दिया गया था इसलिए आपसे हमारा करबद्ध निवेदन है कि एक-दो माननीय सदस्‍यों को स्‍पेसिफिक सवाल पूछने की अनुमति प्रदान कर दें।

श्री अध्‍यक्ष:  एक-दो को दे दूंगी इजाजत मैं बात बता रही हूं कि वैसे दी नहीं जाती है।  श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास।

श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं दो मिनट में मरी बात कहना चाहती हूं।  दो मिनट में कह दूंगी। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 2997 में बी.जे.पी. का जोधपुर नगर निगम में बोर्ड था तो उस समय माननीय अशोक जी गहलोत ने वहां पर धरना दिया था नगर निगम के बाहर और कहा था कि हाउस टैक्‍स नहीं लगना चाहिए और उन्‍होंने खुद सरकार में ओ ही हाउस टैक्‍स लगाया था।  यह क्‍या बात हो गयी जब तुम करते हो तब अच्‍छा है और हम करते हैं तब खराब हो जाता है ।  यह कोई बात हुई क्‍या।  आपकी सरकार ने आते ही हाउस टैक्‍स लगाया था...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: श्री बृजकिशोर शर्मा।

श्री बृजकिशोर शर्मा:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, परसों माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने इस सदन में यह कहा था कि उनके चुनावी घोषणापत्र के मुताबिक करीब 75 प्रतिशत वादे पूरे कर दिये हैं और बड़े गर्व से कहा था।  मैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं कि जब 75 प्रतिशत वादे पूरे कर दिये तो एक प्रतिशत वादा इस गृह कर को समाप्‍त करके क्‍यों नहीं पूरा कर देते? जिस गह कर की वजह से जयपुर शहर के अन्‍दर 19 जगह धरने लगे हैं 19 जगह लोगों को परेशानियां हुईं।  आपने इस 150 करोड़ की एवज में कुल 26 लाख रुपये वसूल किये हैं।  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी मंत्री जी जो कह रहे थे यह बात बिलकुल सरासर गलत है। 

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछें प्रश्‍न, भाषण नहीं।

श्री बृजकिशोर शर्मा:  मैं प्रश्‍न ही पूछ रहा हूं माननीय मंत्री जी क्‍या यह सही नहीं है?...

श्री संयम लोढ़ा: अध्‍यक्ष महोदय, टाइम बढ़ाइये।  चर्चा समाप्‍त होने तक टाइम बढ़ाइये।

श्री अध्‍यक्ष: एक प्रन श्री बी.डी. कल्‍ला को भी पूछने की अनुमति दे रही हूं। 

श्री संयम लोढ़ा: टाइम तो बढ़ायें।

डॉ.सी.पी.जोशी:  पहले आप सदन की चर्चा के लिए समय बढ़ाइये।

श्री अध्‍यक्ष:  सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य में और आप में कोई अन्‍तर तो है नहीं इसलिए मैं श्री बी.डी. कल्‍ला को इजाजत देती हूं।

श्री संयम लोढ़ा:  समय बढ़ाइये अध्‍यक्ष महोदय, समय बढ़ाइये।  एक मिनट बचा है समय बढ़ाइये।

डॉ. सी.पी. जोशी:  अध्‍यक्ष महोदय, सात बजे तक का समय बढाइये पहले आप उसके बाद चर्चा के लिए बात करिये।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: नहीं कोई समय नहीं बढ़ेगा।

डॉ.सी.पी.जोशी:  कोई समय नहीं बढ़ेगा, यह क्‍या मतलब है? क्‍या आप सदन की कार्यवाही चलाना चाहते हैं ? यह अध्‍यक्ष महोदय, रोज-रोज का धंधा नहीं है। ये पार्लियामेंट मिनिस्‍टर बोल रहे हैं कि नहीं बढ़ेगा।

श्री सांवरलाल : गृहकर आपकी सरकार ने लगाया है अब आप क्‍या चाहते हैं? समझ में नहीं आता है।

डॉ.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, यह क्‍या तरीका है पार्लियामेंट मिनिस्‍टर कह रहे हैं कि समय नहीं बढ़ेगा।

श्री अध्‍यक्ष:  सुनिये तो पहले।  आप आसन को सुनना नहीं चाहते।  चूंकि पाँच मिनट पीछे प्रारम्‍भ हुआ था समय इसलिए मैं 7 बज कर 5 मिनट पर सदन को एडजर्न कर दूंगी।

डॉ.सी.पी. जोशी:  अध्‍यक्ष महोदय, बंद कर दीजिये हमें चर्चा ही नहीं करनी है।  बंद करिये।  चर्चा को जिस कांटेक्‍स्‍ट में आपने अलाऊ किया है उसकी सैंक्टिटी भी नहीं रखना चाहते। Half an hour, it is no sacrosanct. अध्‍यक्ष महोदय, It is not sacrosanct half an hour. It is not sancrsanct half an hour.

श्री अध्‍यक्ष: क्‍यों? आधा घंटा है।  शुरू में कम था तो पाँच मिनट और दे दिये।  क्‍या हुआ?

डॉ.सी.पी. जोशी: It is not sancrsanct half an hour.हॉफ एंड ऑवर का मतलब यह है कि हाफ एंड ऑवर चर्चा का मतलब चर्चा होगी It is not the deadline of half an hour. आप अध्‍यक्ष महोदय, नाराजगी रखिये लेकिन Half an hour is not a sacrosanct half an hour. It can be extended 10 minutes this way or that way. 

 

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श्री अध्‍यक्ष: नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य आप हर समय आसन को डिक्‍टेट करना चाहते हैं ।

डा.सी.पी.जोशी : अध्‍यक्ष महोदय, डिक्‍टेट नहीं करना चाहते आप हमारी भावनओं को समझना नहीं चाहती, हम कभी डिक्‍टेट नहीं करना चाहते , यह डिबेट कर लें ।

श्री अध्‍यक्ष: आपकी भावनाओं को समझा तब 5 मिनट और बढा रही हूं ।

डा.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय या तो आप डिमाण्‍ड पर रख देतीं, पिन पाइंट प्रश्‍न तो पूछने पडेंगे । आपने पहले ही कह दिया कि एक माननीय सदस्‍य ने पूछा है उनको मैं उलाऊ करूंगी, फिर आपने कहा कि दो को अलाऊ करूंगी । अध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं यह तो आपकी हमारे प्रति ज्‍यादती है । आप चाहते हैं कि डिबेट नहीं हो तो डिबेट नहीं होगी, कोई तकलीफ नहीं है पर आप यह नाराजगी व्‍यक्‍त कर के हमारे अधिकार को वंचित करे यह तो उचित नहीं है ।

श्री बृजकिशोर शर्मा : अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं क्‍योंकि आपने कहा कि मैं प्रश्‍न पूछूं । मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं कि क्‍या राजस्‍थान की जनता और खास कर जयपुर में हाउस टैक्‍स को वसूल करने के लिये बिना नोटिस दिये ढोल नगाडे नहीं बजाये हैं । मेरे पास ढोल नगाडे बजाने का सबूत है, इसका जवाब दे दें ।

श्री भवानी सिंह राजावात : ... राजस्‍थान की जनता पर से करों का बोझ हमारी सरकार ने कम किया है । राजस्‍थान की जनता पर जो करों का बोझ आपने लगाया था उसको हमने कम किया है । चुंगी किसने लगाई थी, चुंगी आपने लगाई थी जिसको हमने समाप्‍त किया था ।

श्री बृजकिशोर शर्मा : यह कह कर आप पूरा नहीं कर सकते, अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी जवाब दें (व्‍यवधान)

डा.बुलाकीदास कल्‍ला : अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय स्‍वायत्‍त शासन मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि क्‍या यह सही है आपके चुनाव घोषणा पत्र में आपने हाउस टैक्‍स माफ करने का वादा किया था ।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी : किया था ।

डा.बुलाकीदास कल्‍ला : यदि वादा किया था तो आप कब हाउस टैक्‍स माफ कर रहे हैं । दूसरा, मैं यह जानना चाहता हूं कि क्‍या यह सही है कि कोटा संभाग में आप जान बूझ कर सख्‍ती नहीं कर रहे हैं इसलिये वहां पर वसूली नहीं हो रही है और आपने कहा कि जहां कांग्रेस की नगर पालिकाएं हैं वहां वसूली हो रही है वहां आप एड रोक रहे हो । जो सरकार की तरफ से एड मिलती है उसको आप नहीं दे रहे हैं इसके कारण वहां पर वसूली हो रही है । इन बातों का आप खुलासा करें और आप यह स्‍पष्‍ट बताये कि कब तक हाउस टैक्‍स माफ करेंगे और नहीं तो यह जो वादाखिलाफी आप कर रहे हैं, जैसे आप नगाडे बजा रहे हैं चुनाव के वक्‍त यही लोग नगाडे बजाकर यह कहेंगे कि बीजेपी को वोद मत दो, बीजेपी को वोट मत दो ।

श्री बृजकिशोर शर्मा : अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक और प्रश्‍न पूछना चाहूंगा कि क्‍या यह सरकार अगर हाउस टैक्‍स माफ करती है तो कोई दूसरा टैक्‍स उसके एवज में तो नहीं लगायेगी ।

श्री अध्‍यक्ष: यह कोई प्रश्‍न थोडे ही हुआ आपका, इस प्रश्‍न का कोई संबंध नहीं है । माननीय मंत्री जी बोलिये ।

श्री श्रवण कुमार : मंत्री जी एक बात कह रहे हैं कि कांग्रेस के  समय में यह हुआ, बीजेपी के समय में हम करेंगे । मैं मंत्री जी को याद दिलाना चाहता हूं कि एक मामले में मैंने कहा था कि मंत्री जी अन्‍याय हो रहा है । उन्‍होंने कहा कि बीजेपी के लोगों को फायदा नहीं देंगे तो क्‍या आपको फायदा देंगे । तो मैंने कहा मंत्री जी अवैध कब्‍जा कराना न बीजेपी का दायित्‍व है न कांग्रेस का दायित्‍व है ।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी : अध्‍यक्ष महोदय, दोषी तो भारत सरकार है । भारत सरकार हमको कह रही है कि टैक्‍स लगाइये और मैं आपको निवेदन करना चाहूंगा कि उन्‍होंने हमको जो गाइड लाइन दी है, जो हमको इंस्‍ट्रक्‍शन दिये हैं उसमें कहा है कि 7 सालों में इसकी वसूली 85 प्रतिशत तक हो जाना जरूरी है ।

डा.सी.पी.जोशी : अध्‍यक्ष महोदय, यह गाइड लाइन पालिसी से ऊपर है क्‍या । आप संविधान के अंतर्गत चल रहे हैं या गाइड लाइन की बाते कर रहे हैं । जो कानून की व्‍यवस्‍था लिखी हुई हैं उसके अंतर्गत राजस्‍थान सरकार को काम करना है । गाइड लाइन आपको बाउंड नहीं कर सकती ।

श्री श्रवण कुमार : आपने चुनाव घोषणा पत्र में क्‍यों कह दिया था ।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी : दूसरा मेरा आपसे निवेदन है कि जिस प्रकार से कल्‍ला साहब ने कहा कि आप कोटा संभाग में तो सख्‍ती नहीं बरत रहे हो और पूरे राजस्‍थान में सख्‍ती बरत रहे हो । कल्‍ला साहब इस क्षेत्रवाद के कारण ही आप उधर बैठे हो ।

डा.बुलाकीदास कल्‍ला : सरकार वादाखिलाफी कर रही है, जनता के साथ धोखा कर रही है इसलिए हमारी कांग्रेस पार्टी सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ सदन से वाकआउट करती है और राजस्‍थान की जनता को बताना चाहती है कि आपकी वादाखिलाफी नहीं चलेगी, हाउस टैक्‍स को माफ करना पडेगा, माफ करना पडेगा ।

(कांग्रेस विधायक दल द्वारा सदन से बहिर्गमन )

श्री प्रताप सिंह सिंघवी : ..(व्‍यवधान) हम क्षेत्रवाद नहीं करते, हम पूरे राजस्‍थान को एक मानते हैं, पूरे हिन्‍दुस्‍तान को एक मानते हैं । अध्‍यक्ष महोदय, मैंने प्रतिपक्ष के सभी माननीय सदस्‍यों के प्रश्‍न जो उन्‍होंने आधे घंटे की चर्चा के दौरान पूछना चाहा था उनका मैंने सबका जवाब दिया है । प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों की जितनी भी शंकाएं गृह कर के बारे में थीं उनका अक्षरशः मैंने जवाब दिया है और उनकी सभी आशंकाएं पूरी कर दी हैं । यह गृह कर पर राजनीति करना जानते हैं, राजस्‍थान की जनता इनको अच्‍छी तरफ पहचानती है, इनकी कथनी और करनी में बहुत फर्क है इ‍सलिये इनकी यह हालत हुई है, बहुत बहुत धन्‍यवाद ।

 श्री महावीर प्रसाद : अध्‍यक्ष महोदय, आसन के खिलाफ इन्‍होंने बहिर्गमन किया । आज भी संसदीय परम्‍पराओं को बिलकुल ताक में रखकर लगातार यह जो व्‍यवहार कर रहे हैं मैं समझता हूं उचित नहीं है । मैं आपके माध्‍यम से प्रतिपक्ष के नेता से निवेदन करना चाहता हूं क्‍योंकि एक सी.पी.जोशी साहब नहीं बोल पाये इसलिए सी.पी.जोशी साहब ने प्रतिपक्ष के नेता को कहकर बहिर्गमन करवा दिया । इस प्रकार धमका कर बहिर्गमन कराना उचित नहीं है । मैं यह निवेदन करना चाहता हूं संसदीय गरिमा के लिये ही वह वापस हाउस में बैठें ।

श्री अध्‍यक्ष: बहिर्गमन उनका विषय है आप उस पर क्‍यों बोल रहे हैं, यह उनका विषय है ।

श्री संयम लोढा: अध्‍यक्ष महोदय, ओन ए पाइंट आफ आर्डर ।

श्री अध्‍यक्ष: सदन की बैठक शनिवार दिनांक 4 मार्च,2006 के प्रात: 11 बजे तक के लिये स्‍थगित की जाती है ।

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 19.05 बजे शनिवार,दिनांक 4 मार्च, 2006 के प्रात: 11.00 बजे तक के लिये स्‍थगित हुई।)

 

 

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     *** अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

      +++ शब्‍द/अभिव्‍यक्ति अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अपलोपित की गयी।



[1] ***: अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

*** अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया ।

***  अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया ।

[2]***अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया ।