vps/usc/11.00/1a/3.4.2007
अशोधित प्रति/प्रकाशनार्थ नहीं
राजस्थान विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
अंक 7 बारहवीं विधान सभा के
सातवें सत्र का चौतीसवां
दिवस संख्या 21
मंगलवार, 3 अप्रैल,
2007
राजस्थान विधान सभा की
बैठक 11:00 बजे
विधान सभा भवन
जयपुर में
प्रारम्भ हुई।
(श्रीमती सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष, पदासीन)
तारांकित
प्रश्नोत्तर
प्रश्न
संख्या 272
श्री अध्यक्ष:
श्री नन्दलाल
मीणा।
(अनुपस्थित:
कृपया आगे देखें।)
श्री दाताराम
गुर्जर
शिक्षा
मित्र योजनान्तर्गत
अस्थाई नियुक्तियां
273. श्री दाताराम गुर्जर (खेतड़ी) एवं श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): क्या शिक्षा मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-
(1) क्या यह सही है कि राज्य में शिक्षकों की कमी को देखते हुए शिक्षा मित्र योजनान्तर्गत अनुभवी लोगों को अस्थाई नियुक्तियां दी गई हैं? यदि हां, तो गत एक वर्ष में कितने लोगों को नियुक्तियां दी गईं? जिलेवार संख्या विवरण सदन की मेज पर रखें।
(2) सरकार द्वारा उक्त शिक्षा मित्र योजना पर गत एक वर्ष में कितनी राशि व्यय की गई?
(3) क्या यह भी सही है कि परीक्षा की निकटता के बावजूद सरकार द्वारा शिक्षा मित्रों को हटाया जा रहा है? यदि हां, तो क्यों?
राज्य मंत्री, शिक्षा (श्री वासुदेव देवनानी): (1) शिक्षा विभाग में शिक्षा मित्र योजना के नाम से योजना संचालित न होकर विद्यार्थी मित्र योजना इसी शैक्षणिक सत्र से प्रारम्भ की गई। इस वर्ष विद्यार्थी मित्र योजना के तहत लगाये गये अध्यापकों का जिलेवार संख्यात्मक विवरण का परिशिष्ट ‘क’ संलग्न है।
(2) माध्यमिक शिक्षा में उक्त योजना के अन्तर्गत लगभग 6.25 करोड़ रुपये एवं प्रारम्भिक शिक्षा के अन्तर्गत लगभग 11.00 करोड़ रुपये व्यय किया गया।
(3) माध्यमिक शिक्षा में विद्यार्थी मित्र योजना दिनांक 28.02.2007 तक के लिए तथा प्रारम्भिक शिक्षा में 31.03.2007 तक के लिए रिक्त पदों के परिणामस्वरूप छात्रों के अध्यापन में व्यवधान नहीं हो, को मद्देनजर रखते हुए उक्त योजना लागू की गई थी। चूंकि, 10वीं बोर्ड की परीक्षा 30 मार्च, 2007 एवं 8वीं बोर्ड की परीक्षा 16 मार्च, 2007 को समाप्त हो चुकी है तथा 12वीं बोर्ड की परीक्षा 02 अप्रैल, 2007 को समाप्त होगी अत: विद्यार्थी मित्र योजना के तहत दिनांक 31.03.2007 पश्चात् विद्यार्थी मित्र लगाने की आवश्यकता नहीं थी।
श्री दाताराम गुर्जर (खेतड़ी): माननीय अध्यक्ष महोदय, क्या यह सही है कि विद्यार्थी मित्र योजना के बावजूद विभिन्न स्तर के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी रही? यदि हां, तो क्यों? और दूसरा, मेरा क्वेश्चन है कि क्या ऐसी भी शिकायतें मिली थीं कि विद्यार्थी मित्र योजना के इच्छुक लोगों के आवेदन के बावजूद भी उन्हें नियुक्तियां नहीं दी गयीं? यदि हां, तो क्यों?
श्री वासुदेव देवनानी (राज्य मंत्री, शिक्षा): माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सही है कि व्याख्याता, वरिष्ठ अध्यापक, अध्यापक माध्यमिक शिक्षा में 4661 पद व्याख्याता के रिक्त थे, 6930 पद वरिष्ठ अध्यापक के रिक्त थे और 2118 रिक्त पद अध्यापकों के थे। इसके लिए हमने 2104 व्याख्याता, 2897 वरिष्ठ अध्यापक और 911 अध्यापकों के पद लगायें लेकिन यही तक हम सीमित नहीं रहें। हमने शैक्षिक व्यवस्था के तहत माध्यमिक से माध्यमिक और प्रारम्भिक से माध्यमिक भी हमने अध्यापकों को लगाया जिसमें 1707 व्याख्याता, 2595 वरिष्ठ अध्यापक और 352 अध्यापक लगाकर इस प्रकार से 509, ... (व्यवधान) 12 तो विद्यार्थी मित्र और 4654 हमने शैक्षिक व्यवस्था के तहत अध्यापक लगायें। इस तरह सारी शैक्षिक व्यवस्था पहली बार काफी हद तक हम लोग ठीक कर पायें।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न है। यह बीच में कैसे पूछने लग जाते हैं? अभी मैं पूछ रहा हूं और उससे पहले ही यह ... (व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्रीजी से यह जानना चाहता हूं कि आपका सत्र शुरू होता है जुलाई महीने में और 86 हजार पद खाली पड़े हुए थे और 6 महीने आपने निकाल दिये और एक भी विद्यार्थी मित्र आपने नहीं लगाया पूरे छह महीने में। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: सिरोही से आने वाले माननीय सदस्य, सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्य का भी प्रश्न है यह। पहले उन्हें पूछ लेने दें, फिर आप पूछिएगा।
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): जी, ठीक है।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह जानना चाहता हूं कि जो परीक्षाएं मार्च में प्रारम्भ हुईं तो फरवरी में ही यह विद्यार्थी मित्र योजना बंद क्यों कर दी गयी और इसके लिए जो दोषी हैं उनके खिलाफ आप क्या कार्यवाही करेंगे?
दूसरा यह है कि अगले सत्र प्रारम्भ होने से पूर्व सरकार व्याख्याता, सैकण्ड ग्रेड और थर्ड ग्रेड की नियुक्तियों के संबंध में क्या विचार रखती है?
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्यक्ष महोदय, पूछ लूं मैं भी आपकी आज्ञा हो तो?
श्री वासुदेव देवनानी (राज्य मंत्री, शिक्षा): एक बार इनका उत्तर दे दूं, आप बाद में ... (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष महोदय, 8वीं की परीक्षा बोर्ड की 6 मार्च को शुरू हुई, 10वीं की 15 मार्च को शुरू हुई और 12वीं की 8 मार्च को शुरू हुई। साधारणतया परीक्षाएं शुरू होने के सात दिन पहले, दस दिन पहले प्रिपेशन लीव हो जाती है अत: माध्यमिक शिक्षा में 28 फरवरी के बाद अध्यापकों की कोई आवश्यकता नहीं रहती। जहां तक आगामी वर्ष के लिए है, आगामी वर्ष में सरकार माध्यमिक शिक्षा, प्रारम्भिक शिक्षा में अध्यापकों की व्यवस्था उचित करने के लिए प्रयत्नशील है। प्रारम्भिक में हमने 31433 पद, आर.पी.एस.सी. भरने जा रही है और सैकिण्ड ग्रेड और फर्स्ट ग्रेड के लिए हमने 2500 पद आर.पी.एस.सी. को भेजे हैं और 3062 पद डी.पी.सी. से भरने वाले हैं। इसी तरह फर्स्ट ग्रेड के भी 1407 पद हमने भेजे थे। 990 पद भर दिये हैं। हिन्दी के 309 पद हम बहुत जल्दी ही भरने जा रहे हैं। इसके अलावा 3670 पद डी.पी.सी. से भरे जाएंगे। इसके साथ ही इस बार बजट में 12500 नये पदों को भरने की घोषणा की गयी है जिसमें जो नये स्कूल क्रमोन्नत होंगे, हमने अभी से उसकी व्यवस्था की है। उसमें 3600 पद व्याख्याता के हैं, 600 प्रधानाचार्य के हैं, 900 प्रधानाध्यापक के हैं और 3000 पद सैकण्ड ग्रेड के हैं। इस तरह हम बहुत बड़ी संख्या में अध्यापकों की नियुक्ति कर पाएंगे।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्यक्ष महोदय, ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: हां, आपको भी देंगे।
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्रीजी से यह जानना चाहता हूं कि पिछले बजट सत्र में जब भीनमाल से आने वाले माननीय सदस्य के एक सवाल पर चर्चा हुई थी तब शिक्षा मंत्रीजी ने यह आश्वस्त किया था कि जो कमियां और खामियां जो शिक्षकों की कमी, गैस्ट फैकल्टी का वह अरेंजमैंट नहीं कर पाये हैं। अगले सत्र में जुलाई महीने से ही हम यह व्यवस्था कर देंगे लेकिन पूरे छह महीने निकल गये। एक भी विद्यालय के अन्दर आपने विद्यार्थी मित्र नहीं लगायें जबकि 86 हजार पद खाली पड़े हुए थे तो शिक्षा मंत्रीजी, आपकी घोषणा के बाद भी आपके विभाग के अधिकारियों ने उसकी पालना नहीं की, उनके खिलाफ आप क्या कार्यवाही करेंगे?
श्री वासुदेव देवनानी (राज्य मंत्री, शिक्षा): माननीय अध्यक्ष महोदय, शिक्षा विभाग सबसे बड़ा विभाग है। उसमें थर्ड ग्रेड के 2 लाख 17 हजार 955 अध्यापक हैं और सैकिण्ड ग्रेड के 23465 पद हैं। चूंकि साधारणतया स्कूल क्रमोन्नत होते हैं, कुछ रिटायर होते हैं तो यह हमेशा 15 से 20 परसेंट अध्यापकों की उसमें कमी हमेशा रहती है और इसमें प्रारम्भ से ही रही है इसलिए हमने तो उसको भरने का प्रयत्न किया और 86 हजार नहीं है, आपका आकड़ा गलत है। मेरा पहले आप जवाब सुनिये। ... (व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप तो यह बताइये कि आपने किस महीने से ... (व्यवधान)
श्री वासुदेव देवनानी (राज्य मंत्री, शिक्षा): पहले जवाब सुनिये आप।
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैंने यह पूछा ही नहीं है। यह आंकड़े सब मेरे पास है। कितने खाली हैं, कितने भरे हुए हैं, यह सब मेरे पास है। आप तो यह बताइये कि विद्यार्थी मित्र आपने किस महीने से लगायें, यह बताइये आप तो ... (व्यवधान)
श्री वासुदेव देवनानी (राज्य मंत्री, शिक्षा): विद्यार्थी मित्र हमने 1 जनवरी से लगाये हैं।
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): फिर क्यों पूरे छह महीने आपने, क्यों निकालें आपने? जब शिक्षा मंत्रीजी ने घोषणा कर दी? क्या राजस्थान के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के लिए आपको राज दिया हुआ है? 86 हजार पद, शिक्षकों के पद खाली पड़े हुए हैं। पूरे छह महीने आपने निकाल दिये हैं। एक भी पद नहीं... (व्यवधान)
श्री वासुदेव देवनानी (राज्य मंत्री, शिक्षा): हमने तो राजस्थान के छात्रों के भविष्य की चिंता की है। आपने तो एक भी पद नहीं भरकर राजस्थान के छात्रों के साथ अन्याय किया है।
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): दो महीने के लिए आपने मात्र 18 करोड़ रुपये खर्च करके लीपापोती करने की कोशिश की है। राजस्थान के बच्चों का भविष्य बरबाद करने का काम आपने किया है। ... (व्यवधान)
श्री वासुदेव देवनानी (राज्य मंत्री, शिक्षा): हमने तो भविष्य बनाया है। बरबाद तो पाँच सालों में आपने किया है। हमने तो उस बरबादी को घटाने के लिए काम किया है। ... (व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):... (व्यवधान) आपने विधान सभा में आश्वासन देने के बाद भी ... (व्यवधान) छह महीने के बाद आपने की। छह महीने तक एक भी शिक्षक आपने नहीं लगाया। एक भी टीचर नहीं लगाया।
श्री वासुदेव देवनानी (राज्य मंत्री, शिक्षा): मैं आपको आंकड़े बता सकता हूं। ... (व्यवधान)
श्री अमराराम (धोद): एक भी मत लगाओ, भविष्य बन जाएगा क्या? ... (व्यवधान)
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): शिक्षा मंत्रीजी, आपकी घोषणा है। आप खड़े होकर बोलिये कि छह महीने तक शिक्षक, विद्यार्थी मित्र भर्ती क्यों नहीं किये? यह जवाब तो मंत्रीजी आप खुद दीजिए। ... (व्यवधान)
श्री अमराराम (धोद): आपकी जिम्मेदारी थी। ... (व्यवधान)
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): बोलिये, आप खुद बोलिये। आप बताइये। आपको विद्यार्थी मित्र ... (व्यवधान) आपका स्टेट मिनिस्टर असेम्बली में जवाब देने के लिए ही है? बाकी के लिए नहीं है? ... (व्यवधान) आप जवाब दीजिए। आप खाली जवाब दिलाना चाहते हो मंत्रीजी से यहां। ओन नहीं करना चाहते हैं। आप स्वयं की घोषणा है, आप स्वयं की घोषणा है। छह महीने तक नहीं लगे, इसके लिए जिम्मेदार कौन है? यह बताइये आप तो कि ... (व्यवधान)
श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्द): आपने अपने पाँच साल में क्या किया वह तो देखो। यह पांच साल में क्या किया वह तो देखो ... (व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह यूनेस्को पुरस्कार के मिल जाने से काम नहीं चलेगा। ... (व्यवधान)
श्री वासुदेव देवनानी (राज्य मंत्री, शिक्षा): हमने भर्ती की प्रक्रिया शुरू की। किसी भी प्रक्रिया में समय लगता है। उस प्रक्रिया में ही विद्यार्थी मित्र यह हमारी ... (व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): शिक्षा मंत्रीजी, यह यूनेस्को पुरस्कार के गीत गाने से काम नहीं चलेगा। आप राजस्थान की जनता को जवाब दो कि आपने घोषणा करने के बाद भी छह महीने तक आपने विद्यार्थी मित्र क्यों नहीं लगायें आपने? ... (व्यवधान)
श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्द): हमारी सरकार ने विद्यार्थी मित्र लगाये हैं।
श्री वासुदेव देवनानी (राज्य मंत्री, शिक्षा): हमने घोषणा की इसलिए घोषणा की पालना करने के लिए ... (व्यवधान) हमने यह पद भरने शुरू किये। ... (व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आपने तो बरबाद करने का, राजस्थान के गांव-गांव और ढाणी-ढाणी में रहने वाले उस बच्चे के भविष्य को बरबाद करने का काम आपने किया है। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: राजसमन्द से आने वाले माननीय सदस्य। राजसमन्द से आने वाले माननीय सदस्य। राजसमन्द से आने वाले माननीय सदस्य, आप बीच में नहीं खड़े होंगे। आप बीच में खड़े नहीं होंगे। ... (व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): कटारिया साहब को मैं याद दिलाना चाहूंगा कि कटारिया साहब, आप सिरोही आये थे उस कोर्ट का उद्घाटन करने, कितने बच्चे आपके सामने आकर तख्ती लेकर बैठ गये थे? हमें मास्टर साहब चाहिए। नहीं बैठे थे क्या? सैकड़ों की तादाद में जिला कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन हुए शिक्षकों की कमी की वजह से और आपने उसका कोई नोटिस नहीं लिया। ... (व्यवधान)
श्री वासुदेव देवनानी (राज्य मंत्री, शिक्षा): माननीय अध्यक्ष महोदय, छात्रों की निश्चित रूप से, शिक्षा विभाग में अध्यापकों की बड़ी संख्या में, उनको हमने भरने का प्रयत्न किया। किसी भी घोषणा होने का, उसमें प्रक्रिया लगती है। हमने प्रकियाधीन,... (व्यवधान) भरे हैं। कुछ आर.पी.एस.सी. को भेजें। आर.पी.एस.सी. का अपना एक समय होता है। उसके अलावा विद्यार्थी मित्र योजना भी पहली बार हमने लागू की है। इसके पहले किसी भी सरकार ने लागू की हो तो बताइये? हमने इतने सारे स्कूल खोलकर अध्यापकों की नियुक्ति की है। केवल सदन में यह कह देना कि ... (व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सरकार ने विद्यार्थी मित्र की घोषणा की थी, घनश्यामजी, आप तो ... (व्यवधान)
श्री वासुदेव देवनानी (राज्य मंत्री, शिक्षा): वास्तविकता तो यह है ... (व्यवधान) हमने तो प्रयत्न करके छात्रों के हितों की रक्षा की है। आप लोग तो केवल, ऐसा भाषण तो दिया जा सकता है पर ... (व्यवधान)
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हमने भी लगाये थे। क्या बात कर रहे हैं? गैस्ट फैकल्टी हमने लगायी है। यहां पर बातें कर रहे हैं। गैस्ट फैकल्टी हमारी सरकार ने लगायी है। ... (व्यवधान) नाम बदलकर नहीं होता है। ... (व्यवधान) गैस्ट फैकल्टी हमने लगायी है। ... (व्यवधान) मालूम तो है नहीं और यहां पर भाषण दे रहे हैं आप। ... (व्यवधान)
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श्री
वासुदेव देवनानी
(राज्य मंत्री, शिक्षा): क्या
भाषण दे रहा हूं।
.(व्यवधान)..
डा. सी.
पी. जोशी (नाथद्वारा):
हमारी सरकार ने
लगायी है गैस्ट
फैकल्टी और यहां
खड़े होकर बोल
रहे हैं आप। गैस्ट
फैकल्टी का कंसेप्ट
कांग्रेस के शासन
में लागू हुआ और
आप बातें करते
हैं, मालूम ही नहीं
है। .(व्यवधान)..
श्री
वासुदेव देवनानी
(राज्य मंत्री, शिक्षा): गैस्ट
फैकल्टी लगाने
की प्रक्रिया हाई
कोर्ट ने बंद कर
दी।
डा. सी.
पी. जोशी (नाथद्वारा):
आप बातें कर रहे
हैं खामख्वाह
। माननीय अध्यक्ष
महोदय, इस सरकार
ने पिछले छह महीने
से आर.पी.एस.सी. के
मैम्बर नियुक्त
नहीं किये और वहां
पर रिक्वीजिशन
भेज देते हैं।
जब आपके पास आर.पी.एस.सी.
के मैम्बर नहीं
हैं तो रिक्वीजिशन
कैसे पूरा होगा
? सदन को बार बार
आप गुमराह कर रहे
हें। आप जो रिक्वीजिशन
आर.पी.एस.सी. में
भेज रहे हैं, आपकी
आर.पी.एस.सी. का कोटा
पूरा नहीं होने
से वह रिक्वीजिशन
पूरा नहीं हो रहा
है, उसके लिये सरकार
जिम्मेदार नहीं
है ? छह महीने से
आर.पी.एस.सी. के मैम्बर
की पोस्टें खाली
पड़ी हुई हैं और
सदन को गुमराह
कर रहे हैं आप, हमने
रिक्वीजिशन भेज
दिया। जब आपके
आर.पी.एस.सी. में
मैम्बर नहीं हैं
तो उस रिक्वीजिशन
को कौन पूरा करेगा
? यह सरकार जिम्मेदार
है जो आर.पी.एस.सी.
के मैम्बर को
नौमीनेट नहीं
कर रही है और रिक्वीजिशन
भेजकर सदन को गुमराह
कर रहे हैं । इसका
जवाब दें कि सरकार
छह महीने में मैम्बर
के पद को खाली क्यों
रख रखा है
?
एक माननीय
सदस्य : आप अपने
समय की देखो। ..(व्यवधान)..
श्री
हेमराज मीणा (किशनगंज):
शिक्षा मंत्रीजी,
एक सवाल, क्या
आने वाली जुलाई
से आप शिक्षा मित्र
योजना के अन्तर्गत
भर्ती करेंगे,
जो खाली जगह हुई
है, यह भी साथ में
बता दें आप।
श्री
घनश्याम तिवाड़ी
(शिक्षा मंत्री):
मैं सबको जवाब
देता हूं, विराजो
। अध्यक्ष महोदय,
यह विवाद की बात
नहीं है कि अध्यापकों
की कमी है। निश्चित
रूप से इसमें कोई
विवाद का विषय
नहीं है और हमने
उसको पूरा करने
का प्रयत्न किया
है। यह भी सही है
कि मैंने विधान
सभा में यह कहा
था कि जुलाई से
हम इस बात की व्यवस्था
करेंगे। लेकिन
तीन कारणों से
इसमें अवरोध आया।
पहला कारण था कि
गैस्ट फैकल्टी
पर राजस्थान उच्च
न्यायालय ने स्थगन
दे दिया कि गैस्ट
फैकल्टी में आप
टीचर्स को नहीं
लगा सकते, इसके
कारण से विलम्ब
हुआ। उसके
बाद में हमने उनको
जो छूट मिली कि
केवल आप रिटायर्ड
आदमियों को लगा
सकते हो तो पहले
हमने रिटायर्ड
के लिये निकाला
तो रिटायर्ड में
हमारे पास पर्याप्त
आदमी नहीं थे।
उसके बाद में हमने
बी.एड., बी.एस.टी.सी.
को इसमें लगाने
के लिये निकाला,
लेकिन चूंकि राजस्थान
लोक सेवा आयोग
की परीक्षाओं के
कारण से जितने
भी बी.एड., बी.एस.टी.सी.
के लोग थे, वह सारे
परीक्षा की तैयारी
में लग गये और हमको
वह टीचर्स भी उपलब्ध
नहीं हुए । उसके
बाद में हमने उसमें
छूट करके जो भी
उपलब्ध हुए एम.ए;
बी.ए. पास लड़के
चाहे बी.एड., बी.एस.टी.सी.
नहीं हों, उनको
भी लगाया जाये
और इसके कारण से
हमने कुल मिलाकर
27 हजार विद्यार्थी
मित्र के रूप में
दोनों जगह लगाये,
लेकिन इस पीरियड
में हमने कुछ शैक्षणिक
व्यवस्थाएं
कीं । कुछ अध्यापकों
को हमने दो दो जगह
ड्यूटी पर लगाया
कि आप यहां भी पढ़ायेंगे,
वहां भी पढ़ायेंगे।
इसको मानने में
मुझे कोई आपत्ति
नहीं है कि निश्चित
रूप से इसमें कुछ
विलम्ब हुआ है
और विलम्ब कुछ
न्यायिक प्रक्रियाओं
के कारण से , कुछ
अनुपलब्धता के
कारण से । यह भी
सही बात है कि आर.पी.एस.सी.
को इसको भर्ती
करने में समय लगा
है, उसके कारण से
हुआ है। लेकिन
अब मैं आश्वस्त
करता हूं आप लोगों
को, कि एक प्रतिशत
अध्यापकों के
पद भी खाली हों
तो राजस्थान में
शिक्षा में 20-30 प्रतिशत
पद हमेशा खाली
बने रहेंगे, उनको
एक निश्चित प्रक्रिया
द्वारा भरने का
पूरा प्रयत्न
करेंगे। जहां तक
मैं समझता हूं
कि विद्यार्थी
मित्र की आप अगली
जुलाई से बात कर
रहे हैं, अभी 31 हजार
वह और 2500 सैकण्ड
ग्रेड के अध्यापकों
की डायरेक्ट भर्ती
का विज्ञापन अगले
कुछ दिनों में
आर.पी.एस.सी. से निकल
जायेगा। हम कोशिश
यह करेंगे कि जुलाई
का सत्र प्रारम्भ
होने से पहले पहले
हम इन सब लोगों
को नियुक्ति देते
हैं और इसी प्रकार
से 12,500 पद हमने इस
बार घोषित किये
हैं, उनको भी हम
एक सिस्टम बदलकर
प्रावधान कर रहे
हैं कि यह भर्ती
में समय लगता है
और सैकण्डरी और
सीनियर सैकण्डरी
में अध्यापकों
की आवश्यकता है
तो हम एक समय का
प्रमोशन की स्कीम
में छूट देकर जो
हमारे वर्तमान
अध्यापक कार्यरत
हैं, उनको हम एक
बार सबको प्रमोट
करके 12,500 पद वहां
भरना है, फिर इन
सारी वेकेन्सीज
को हम थर्ड ग्रेड
में इकट्ठी करके
अगली साल फिर तीसरी
आर.पी.एस.सी. में
वेकेन्सी निकाल
कर, उसको जुलाई
में ही निकाल कर
हम इसको पूरा करना
चाहते हैं और हमारी
जो स्कीम इस समय
भारत सरकार के
पास है और मैं धन्यवाद
भी देना चाहूंगा
कि जो हमारे 75 और
25 का रेशो अटका हुआ
था, पहले 50-50 का था,
वह 75 और 25 हो। यू.पी.ए.
की संचालन समिति,
जिसकी सोनिया जी
अध्यक्ष हैं,
उन्होंने भी यह
सिफारिश की है
कि यह 50-50 नहीं होना
चाहिये, यह 75-25 होना
चाहिये और 10-11 तारीख
को शिक्षा मंत्रियों
की दिल्ली में
मीटिंग है, उसमें
भी हम सब शिक्षा
मंत्री इस बात
की मांग कर रहे
हैं कि सर्व शिक्षा
अभियान के तहत
जो सर्व शिक्षा
अभियान सीनियर
सैकण्डरी तक बढ़
गया है, उसमें जो
50-50 का रेशो है, उसके
बजाय 75-25 का रेशो होना
चाहिये और मैं
समझता हूं कि यह
मांग स्वीकार
हो जायेगी और कोशिश
पूरी करेंगे कि
राजस्थान में
अध्यापकों की
जो कमी है, अगले
सत्र में अध्यापकों
की कमी नहीं रहे।
इसका बेहतर प्रबन्धन
करने की कोशिश
करेंगे। हां, मैं
यह मानता हूं कि
2-3 महीने के लिये
विविध कारणों से
इसमें विलम्ब
हुआ। ..(व्यवधान)...
श्री
रमेश खींची (कठूमर):
एक स्कूल में
सात-सात अध्यापक
लगे हुए हैं। मेरा
पूरक प्रश्न है
कि शहरों के अंदर
छात्र कम हैं और
टीचर ज्यादा हैं।
श्री
अध्यक्ष: नेता
प्रतिपक्ष खड़े
हैं न। ..(व्यवधान)...
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता, प्रतिपक्ष):
शिक्षा मंत्रीजी
का उत्तर बहुत
विस्तृत है और
उसके बाद में कुछ
बचता नहीं है, लेकिन
भरना आपके हाथ
की बात नहीं है।
आप तो आर.पी.एस.सी.
को लिख रहे हैं।
राज्य मंत्री
ने कहा हम आर.पी.एस.सी.
को भेज रहे हैं।
आप भी कह रहे हो
हम आर.पी.एस.सी. को
भेज रहे हैं तो
आर.पी.एस.सी. तो किसी
के हाथ में नहीं
है, उसमें कब होंगे
? इसका कोई सोल्युशन
निकालें आप।
श्री
घनश्याम तिवाड़ी
(शिक्षा मंत्री):
यह बता रहा हूं
माननीय नेता।
श्री
अध्यक्ष: पहले
बात कम्प्लीट करने
दीजिये मंत्रीजी
इनको।
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता, प्रतिपक्ष):
सर्व शिक्षा अभियान
का आप कह रहे हो
बदलने वाला है
75 और 25 होने वाला है।
75-25 होने वाला है भारत
सरकार से बात चल
रही है। भारत सरकार
को दूसरे मामलों
में तो आप गाली
निकालते हो और
आप यहां उनसे याचना
कर रहे हो। आपके
संबंध बहुत मधुर
हैं, आपके खुद के।
..(व्यवधान).. चेयरमैन
हैं जब ही तो।
डा. सी.
पी. जोशी (नाथद्वारा):
वह तो मूंछों वालों
की कृपा से है।
श्री
घनश्याम तिवाड़ी
(शिक्षा मंत्री):
मैं माननीय नेता,
एक सैकण्ड बोल
दूंगा। आपका भी
बोल दूंगा। ..(व्यवधान)...
श्री
रमेश खींची : एक
स्कूल में सात
टीचर हैं और पास
की ही स्कूल में
आठवीं के तीन टीचर
हैं। यह समानीकरण
की व्यवस्था
तो सही करवा दें।
श्री
घनश्याम तिवाड़ी
(शिक्षा मंत्री):
बता रहा हूं।
डा. सी.
पी. जोशी (नाथद्वारा):
सैकण्डरी एजुकेशन
के चेयरमैन हैं,
यह जो फीगर आपने
दिये 6 हजार टीचर्स
की शार्टेज हैं।
सैकण्ड ग्रेड
और लैक्चरर की
जो फीगर मंत्रीजी
ने दिया है If I am correct आप अगली
बार 1500 स्कूल खोल
रहे हैं। आपने
कहा हम और ज्यादा
खोल देंगे 3000 खोल
देंगे। भारत सरकार
से पैसा मिल रहा
है आपको। जब आपको
यह तथ्य मालूम
हैं कि अगली बार
सैकण्डरी खोलने
के लिये हमें इतने
सैकण्ड ग्रेड
और लैक्चरर के
पद चाहेंगे तो
आप इस व्यवस्था
को करने के लिये
क्या सदन को आश्वस्त
कर सकते हैं ? आर.पी.एस.सी.
नोट सोल्युशन
। आर.पी.एस.सी. में
आपने मैम्बर बनाये
नहीं। आर.पी.एस.सी
का जो रिक्वीजिशन
है उसको भेजकर
इंटरव्यू कराना
आपके हाथ में नहीं
है। आप हमें यह
आश्वस्त करें
कि अगली जुलाई
में जो स्कूल
खोल रहे हैं और
जिन सैकण्डरी
स्कूल में पद
खाली हैं, उनकी
व्यवस्था क्या
आप जुलाई में कर
देंगे, बात खत्म
हुई। अन्त में,
आपने हमारे पर
तो आरोप लगाया
था कि आठवीं पास
पढ़ा रहे हैं।
आपने बिना एस.टी.सी.
और बी.एड. किये लोगों
को लगाया है।
श्री
घनश्याम तिवाड़ी
(शिक्षा मंत्री):
हां, लगाया है।
लगाया है।
डा. सी.
पी. जोशी (नाथद्वारा):
उसमें कोई आरोप
नहीं है। इस सरकार
ने आठवीं पास वाले
लगाये और राजीव
गांधी पाठशाला
में तीन हजार आठवीं
पास लगाये तो हल्ला
कर दिया आपने।
आज आपकी सरकार
बिना बी.एड. और बिना
एस.टी.सी. के टीचर
लगा रही है उसमें
कोई कम्प्रोमाइज
नहीं हो रहा है।
इससे बड़ी विचित्र
स्थिति और क्या
बन सकती है ? ...(व्यवधान)..
श्री
घनश्याम तिवाड़ी
(शिक्षा मंत्री):
मैं बताता हूं।
एक मिनट रुको गोविन्द
जी। आप दुबारा
पूछ लेना। मैं
यह कह रहा था एक
तो माननीय नेता
प्रतिपक्ष ने पूछा
कि आर.पी.एस.सी. में
मैम्बर नहीं है,
आप कैसे करेंगे
? आर.पी.एस.सी. ने
31 हजार लोगों का
रिजल्ट निकाल
दिया और 30 मार्च
तक की उनको डेट
दी है, 30 मार्च तक
वह करेंगे, उसके
बाद हमने काउंसलिंग
का टाइम तय कर दिया
है। एक डिप्टी
सेक्रेट्री सरकार
का जायेगा, एक डिप्टी
सैक्रेटरी आर.पी.एस.सी.
का बैठेगा और लगातार
काउंसलिंग चलेगी
और पूरा प्रयत्न
करेंगे कि जुलाई
के महीने के पहले
तक यह पद भर जायें।
दूसरे माननीय सदस्य
ने प्रश्न पूछा
कि आप नये स्कूल
खोल रहे हो और जुलाई
तक , मैंने इसका
जवाब दिया कि राजस्थान
लोक सेवा आयोग
से इन पदों की पूर्ति
12 महीने तक नहीं
हो सकती, इसलिए
प्रमोशन की नई
स्कीम लगाकर जो
वर्तमान में एग्जिस्ट
हमारे सारे टीचर्स
हैं, उनको एक साथ
सीनियरिटी के आधार
पर सब्जैक्टवाइज
देकर हम इन 12,500 पदों
को भी इसी से भरना
चाहते हैं ताकि
स्कूल खुलने के
साथ अध्यापकों
की समस्या का
समाधान हो जाये।
डा. सी.
पी. जोशी (नाथद्वारा):
यह संभव नहीं है।
श्री
घनश्याम तिवाड़ी
(शिक्षा मंत्री):
है।
डा. सी.
पी. जोशी (नाथद्वारा):
मैं इसलिए कह रहा
हूं कि आप डिस्क्रिपेंसी
पैदा कर देंगे
। जो टीचर थर्ड
ग्रेड के हैं जनरल,
सब्जैक्टवाइज
नहीं, उसमें आपको
केवल मात्र अंग्रेजी
गणित उसमें आपका
सब्जैक्टवाइज
है, बाकी थर्ड ग्रेड
में रिक्रूटमेंट
नहीं है तो वह टीचर
बिना साइंस और
गणित है, वह तो तीन
साल में लेक्चरर
बन जायेगा और जो
टीचर सिविक्स
और हिंदी का है
वह 25 साल तक लेक्चरर
नहीं बनेगा, यह
डिस्क्रिपेंसी
आप पैदा कर देंगे।
मैं समझता हूं
कि कोई आदमी लिटिगेशन
में जायेगा, संभव
नहीं होगा। इसलिए
आप सदन में वही
बातें कहें जो
नियम और कानून
की पालना करते
हुए संभव हो सके।
मैं आपको फिर निवेदन
करना चाहता हूं
तीनों साल, आपने
एक साल नहीं मंत्री
बनने के बाद इस
सदन को आश्वस्त
किया है कि जुलाई
में टीचर लगा दूंगा
और तीनों साल बिना
टीचर लगाये हुए
आपने स्कूल चलाये,
छह छह महीने तक
अब भगवान के लिये
आपका आखिरी साल
है, मेहरबानी करके
यह एश्योर कर
लीजिये कि हम अगली
जुलाई में कम से
कम टीचर दो साल
तो भगवान पर हैं,
इसलिये आखिरी साल
तो हवा में निकलता
है। आपका आखिरी
साल है उसमें पूरे
टीचर लगावें और
जो आपको शिक्षा
के क्षेत्र में
आप जो वाहवाही
ले रहे हैं, उसको
एजुकेशन के अचीवमेंट
में वाहवाही लें
। स्कूल खोलकर
मास्टर लगाकर
तो आपने वन मोद
फेदर आपने गेदर
कर लिया, लेकिन
मैं आशा करता हूं
कि आपके होते हुए
कम से कम जुलाई
में यह जो आप बातें
कह रहे हैं, यह प्रेक्टिल
पोसिबिल नहीं है।
कटारिया जी आपके
पास बैठे हुए हैं।
वह शिक्षा मंत्री
रहे हैं। यह इस
बात को जानते हैं
कि यह संभव नहीं
है। न आर.पी.एस.सी.
में आप मैम्बर
लगा रहे हो और आर.पी.एस.सी.
की जो व्यवस्था
है, उसमें अगले
नवम्बर तक आप
लेक्चरर और सैकण्ड
ग्रेड टीचर की
भर्ती नहीं कर
पाओगे । इसलिए
मेहरबानी करके
आप जो कुछ भी कहो,
उसको जुलाई तक
कर देना, यह आपसे
निवेदन करना चाहता
हूं।
श्री
घनश्याम तिवाड़ी
(शिक्षा मंत्री):
मैं पुन: एक बार
आश्वस्त करना
चाहता हूं, पिछले
साल भी मैंने कहा
था और 15 हजार से अधिक
अध्यापकों का
प्रमोशन हमने किया
है। इस बार यह बात
सही है कि आर.पी.एस.सी.
में दो मैम्बर
हैं, लेकिन हमने
जो परीक्षा की
पद्धति निकाली
है, उसमें इंटरव्यू
नहीं है।
Msr/usc/1120/1c/03042007
इसमें
सिर्फ आब्जेक्टिव
टाइप प्रश्न के
आधार पर मैरिट
पर सलैक्शन होता
है इसलिए उसका
कोई असर नहीं पड़ेगा
और 2500 जो सेकण्ड
ग्रेड अध्यापक
हैं उनकी भी डाइरेक्ट
भर्ती हो जायेगी।
माननीय
अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम
से आपको पूर्ण
आश्वस्त करना
चाहता हूं कि हम
पूरा प्रयत्न
करेंगे कि जुलाई
में अधिकांश अध्यापकों
की जिनकी 31 हजार
यह 33 वो जो विडो कोटे
के अन्तर्गत भर्ती
हो रहे हैं वो और
2500 जो सेकण्ड ग्रेड
में आर.पी.एस.सी.
में आ रहे हैं वो
और बाकी जिनका
प्रमोशन होना है
वो, वो कर के हम निश्चित
रूप से जुलाई में
अधिक से अधिक अध्यापकों
को लगा कर इसका
पूरा प्रयत्न
करेंगे।
एक दूसरा
प्रश्न जो माननीय
सदस्य, आपने पूछा,
यह बात सही है, हमने
एक सूची बना ली
है और सूची बना
कर 1500 टीचर्स शहरों
में सरप्लस हैं,
जो अपने पद से ज्यादा
हैं उन 1500 टीचर्स
को भी इस साल हमने
यह घोषणा की थी
कि जिनके रिजल्ट
सेकण्डरी और सीनियर
सेकण्डरी में
बोर्ड के एवरेज
से कम होंगे, बोर्ड
के एवरेज से जिन
सरकारी स्कूलों
के रिजल्ट कम
होंगे उनका स्थानान्तरण
उन खाली स्थानों
पर किया जायेगा
जो दुरस्त हैं।
तीन साल तक हमने
कोई स्थानान्तरण
इस प्रकार का नहीं
किया लेकिन पहली
बार जो रिजल्ट
खराब हैं, जिनका
रिजल्ट खराब है
उनके स्थानान्तरण
किये जायेंगे इसलिए
यह जो समस्या
है समानीकरण वाला,
उसका भी समाधान
हो जायेगा।
श्री
गोविन्द राम मेघवाल
(नोखा): माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से शिक्षा
मंत्रीजी से आग्रह
है ...(व्यवधान)...
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
शिक्षा मंत्रीजी,
रिजल्ट की तो
आप बात ही मत करो।
श्री
गोविन्द राम मेघवाल
(नोखा): एक मिनट, माहिर
आजादजी।
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
मैरिट आती है, मैरिट
में सरकारी स्कूल
का नाम पडा मुश्किल
से देखने को मिलता
है। देख लो आप उठा
कर के दो साल की।
...(व्यवधान)...
श्री
गोविन्द राम मेघवाल
(नोखा): ऐसा है कि
जो शहरों में बैठे
हैं वर्षों से,
यह सबसे बड़ी प्राब्लम
है कि शहर में छात्र
संख्या है 40 और
शिक्षक संख्या
है ...(व्यवधान)...
श्री
अमराराम (धोद): माननीय
अध्यक्ष महोदय, मंत्रीजी
कह रहे हैं एक जुलाई
से, राजस्थान
में अभी 16 अप्रैल
से नया सत्र शुरू
हो जाता है।
श्री
गोविन्द राम मेघवाल
(नोखा): हमारा आपसे
आग्रह है कि जब
तक शहरों के टीचर्स
को, आप इसको रिजल्ट
से नहीं जोड़ कर
के और जो शहरों
में टीचर्स बहुत
लम्बे समय से
बैठे हैं उन लोगों
को आप गांवों में
लगाने का काम करें।
श्री
अमराराम (धोद): सत्र
आपका 16 अप्रैल से
शुरू हो जाता है
और आप पूर्ति करने
की बात कर रहे हैं
एक जुलाई से। ...(व्यवधान)...
श्री
गोविन्द राम मेघवाल
(नोखा): हमारे यहां
एक और गड़बड़ है
कि शहर में जो टीचर
लगते हैं उनको
मकान का भत्ता
ज्यादा दे रहे
हैं और जो गांव
में, दूर दराज जो
टीचर काम कर रहा
है उसको हम लोग
सुविधा कम दे रहे
हैं इसलिए प्रत्येक
टीचर लगने के बाद
में वो शहर जाने
के लिए आतुर होता
है।
श्री
अमराराम (धोद): शिक्षा
मित्र योजना में
लगे ...(व्यवधान)...
16 अप्रैल से नया
शिक्षा सत्र डेढ़
महीने तक चलेगा
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्य, प्रश्न
काल है। भाषण देने
के लिए नहीं, प्रश्न
काल है, प्रश्न
पूछिये कुछ पूछना
हो तो। नैक्स्ट
क्वेश्चन।
श्री
गोविन्द राम मेघवाल
(नोखा): मैं प्रश्न
ही पूछ रहा हूं।
श्री
अध्यक्ष: आप भाषण
दे रहे हैं।
श्री
गोविन्द राम मेघवाल
(नोखा): नहीं, मेरा
आग्रह है कि जो
शहर में टीचर बैठे
हैं लम्बे समय
से उनको आप गांव
में लगाने का कष्ट
करें। जो शहर में
बैठे हैं ...(व्यवधान)...
श्री
घनश्याम तिवाड़ी
(शिक्षा मंत्री):
आपकी सुन लो, आपकी
बता देता हूं।
आपने यह कहा है
कि शिक्षा सत्र
तो आपने प्रारम्भ
कर दिया है, अभी
अप्रैल में शुरू
हो जायेगा और आप
टीचर्स लगायेंगे
जुलाई में। यह
बात ठीक है, शिक्षा
सत्र हमारा उन
कक्षाओं के लिए
वो 17 अप्रैल से शुरू
हो जायेगा लेकिन
टीचर्स की व्यवस्था
हम जुलाई में ही
कर पायेंगे इसलिए
जो कर पा रहे हैं
वो इस सदन में मैंने
आपको बताया।
श्री
अमराराम (धोद): नहीं,
आपने जो लगाया
उनको हटा क्यों
रहे हैं?
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जब 16 अप्रैल
से नया सत्र शुरू
हो जायेगा और उनको
आप मार्च में हटा
रहे हैं तो जब नया
सत्र शुरू हो जायेगा
तो हटा क्यों
रहे हैं?
श्री
घनश्याम तिवाड़ी
(शिक्षा मंत्री):
वो हमारे पास इतने
पर्याप्त टीचर्स
हैं कि शुरू में
वो काम चला लेंगे।
श्री
अध्यक्ष: नैक्स्ट
क्वेश्चन। श्री
पुष्पेन्द्र
सिंह।
विधान
सभा क्षेत्र बाली
के क्षतिग्रस्त
जल स्रोतों की
मरम्मत/नवीनीकरण
274. श्री
पुष्पेन्द्र
सिंह (बाली): क्या सिंचाई
मंत्री यह बताने
की कृपा करेंगे
:-
(1) विधान
सभा क्षेत्र बाली
में वर्ष 2006 की बाढ़
के दौरान कौन-कौनसा
बाँध, तालाब, एनीकट,
नहरें व आवक फीडर्स
क्षतिग्रस्त
हुए? विवरण
सदन की मेज पर रखें।
(2) क्या
इन क्षतिग्रस्त
बाँध, नहरों, आवक
फीडर्स, तालाब
व एनीकट की मरम्मत/नवीनीकरण
हेतु सरकार को
प्रस्ताव प्राप्त
हुए हैं?
यदि हां, तो कितनी-कितनी
लागत के प्रस्ताव
कब प्राप्त हुए? प्रत्येक
बाँध, नहरें, तालाब,
एनीकट, आवक फीडर्स
काक विवरण सदन
की मेज पर रखें।
(3) क्या
यह भी सही है कि
सरकार को प्राप्त
उक्त नवीनीकरण/मरम्मत
प्रस्तावों के
अनुरूप स्वीकृतियां
जारी नहीं होने
से इनकी मरम्मत/नवीनीकरण
कार्य प्रारम्भ
नहीं किये गये
हैं या अपूर्ण
है? यदि
हां, तो क्यों?
(4) क्या
सरकार बाढ़ में
क्षतिग्रस्त
उक्त बाँध, नहर,
तालाब, एनीकट, आवक
फीडर्स के मरम्मत/नवीनीकरण
हेतु प्राप्त
प्रस्तावों के
अनुरूप शीघ्र स्वीकृतियां
जारी कर कार्य
कराने का विचार
रखती है?
यदि हां, तो कब तक?
सिंचाई
मंत्री (श्री सांवर
लाल): (1) विधान सभा
क्षेत्र बाली में
वर्ष 2006 की अतिवृष्टि के कारण जल
संसाधन विभाग के
आठ बाँध, नहरें
एवं 26 एनीकट/सरफेस
बेरीयर्स इत्यादि
क्षतिग्रस्त
हुए। विवरण क्रमश:
प्रपत्र ‘अ’ व ‘ब’ पर संलग्न
है।
(2) क्षतिग्रस्त
कार्यों को मरम्मत
करवाने हेतु प्रस्ताव
दिनांक 22.08.2006 एवं दिनांक
31.08.2006 को प्राप्त
हुए जिनका विवरण
क्रमश: प्रपत्र
‘अ’ व ‘ब’ पर संलग्न
है।
(3) वित्तीय
संसाधनों की उपलब्धता
एवं कार्यों की
आवश्यकता/प्राथमिकता
को ध्यान में
रखते हुए प्रपत्र-‘अ’ में
अंकित कार्यों
के लिए स्वीकृतियां
जारी की गई हैं।
प्रपत्र-‘ब’ में
अंकित कार्यों
के लिए आवश्यकता
एवं वित्तीय संसाधनों
की उपलब्धता के
आधार पर स्वीकृतियां
जारी किया जाना
सम्भव हो सकेगा।
(4) वित्तीय
संसाधनों की उपलब्धता
के आधार पर ही विचार
किया जाना सम्भव
हो सकेगा।
श्री
पुष्पेन्द्र
सिंह (बाली): माननीय
अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्रीजी
से यह पूछना चाहूंगा
कि आपने बताया
कि लगभग आठ बाँध
और लगभग 26 एनीकट
क्षतिग्रस्त
हुए हैं, कुछ एनीकट
तो पूर्ण रूप से
क्षतिग्रस्त
हो गये, कुछ आंशिक
रूप से क्षतिग्रस्त
हो गये। उसमें
लगभग ज्यादा एनीकट
आंशिक रूप से आपके
क्षतिग्रस्त
हैं। उसमें दो
लाख, तीन लाख रुपये
की आवश्यकता है
और जो बाँध हैं
उसमें आपने 19 लाख
रुपये दिये 34 लाख
के ऊपर।
मेरा
आपसे अनुरोध है
कि जिस बाँध पर
सरकार तीन से चार
करोड़ रुपये खर्च
करती है और मामूली
पर चार, पाँच लाख
रुपये देने पर
अगर उसको अपन वापस
मेन्टेन कर सकते
हैं तो मुझे लगता
है कि यह आगे जाकर
के बहुत, अभी जैसे
कोट बाँध का आपके
कार्यकाल में ढाई
करोड़ रुपये दिये
...
श्री
अध्यक्ष: आप प्रश्न
पूछिये न।
श्री
पुष्पेन्द्र
सिंह (बाली): और आज
हमें उस पर आठ लाख
रुपये की आवश्यकता
है, आपने मात्र
तीन लाख 90 हजार दिये,
अगर यह पाइपिंग
आज वापस चालू हो
जाए तो यह चार, पाँच
करोड़ का बाँध
वापस क्षतिग्रस्त
होने की संभावना
...
श्री
अध्यक्ष: आप प्रश्न
पूछिये।
श्री
पुष्पेन्द्र
सिंह (बाली): मैं
आपसे यह अनुरोध
करूंगा कि जितना
आपसे एस्टीमेट
मांगा है, कम से
कम बाँध और नहरों
पर विशेष ध्यान
रखते हुए 34 लाख रुपये
मांगे हैं तो उनको
34 लाख पूरा दें, उसकी
मेन्टीनेन्स
वापस पूरी हो जाए।
नहीं तो इतना बड़ा
जो जल संसाधन है
वो खराब बहुत जल्दी,
ज्यादा बरसात
होने से वापस फूट
सकते हैं।
दूसरा,
मेरा आपसे एक अनुरोध
है कि ...
श्री
अध्यक्ष: अब आपको
प्रश्न पूछना
हो तो पूछिये, भाषण
तो ना दें।
श्री
पुष्पेन्द्र
सिंह (बाली): 2001 में
लाटाड़ा बाँध क्षतिग्रस्त
हो गया, आज दिन तक
उस पर कोई कार्यवाही
नहीं हुई। क्या
आप उसको वापस बनाना
चाहते हैं क्योंकि
वहां के जो किसान
हैं वो काफी दुःखी
हैं।
श्री
अध्यक्ष: मंत्रीजी,
जवाब दें।
श्री
सुरेन्द्र गोयल
(जैतारण): माननीय
अध्यक्ष महोदय, मेरा भी निवेदन
है मंत्री महोदय
से कि जो बाँध, जिसके
ऊपर लाखों रुपये
गवर्नमेंट के खर्च
हो चुके हैं और
अतिवृष्टि के कारण
उनमें खर्चा आ
गया, मेरे क्षेत्र
में भी कम से कम
आठ, दस एनीकट ऐसे
हैं जिन पर करोड़ों
रुपये खर्चा किया
गवर्नमेंट ने,
अब उनमें पी.टी.
अमाउण्ट का खर्चा
है और वहां से जवाब
यह आता है कि यह
केचमेंट में आता
है। अब केचमेंट
में आया, पहले बनाया
क्यों?
इसलिए मेरा निवेदन
है कि इसके लिए
कि उनको रिपेयर
कराएं वरना सामने
जितनी भी जमीन
है खाली उन काश्तकारों
को इतना भारी नुकसान
हो रहा है कि जिसकी
भरपाई पन नहीं
कर पायेंगे। इसलिए
मेरा निवेदन है
कि उनको भी ठीक
करेंगे या नहीं
करेंगे?
श्री
अध्यक्ष: हां,
हां ठीक है।
श्री
सांवर लाल (सिंचाई
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष महोदय, यह बिलकुल
माननीय सदस्यों
की चिंता ठीक है।
अतिवृष्टि और बाढ़
से जो क्षतिग्रस्त
1994, 1995, 1997, 1998 में जो नुकसान
हुआ उस समय सी.आर.एफ.
में प्रावधान था
और उस टाइम में
जब मैं रिलीफ मिनिस्टर
था तो उस टाइम 50,
60 करोड़ रुपये हमने
इर्रिगेशन को दिये
थे उसके बावजूद
भी कई टूटफूट रह
गयी। वो आज तक कई
क्षतिग्रस्त
है।
आजकल
जो परम्पराएं
नहीं पिछले वर्षों
में मेन्टीनेन्स
और टूटफूट के लिए
बजट प्रावधान पर्याप्त
नहीं है। नये काम
के लिए तो विविध
प्रकार से सोर्सेज
उपलब्ध हो जाते
हैं पर जो स्ट्रैक्चर
एक बार खड़ा हो
गया उसके क्षतिग्रस्त
होने के बाद में
जो इन्वेस्टमेंट
किया गया उसका
लाभ लोगों को नहीं
मिलता है। इसलिए
इसके ऊपर प्राथमिकता
के आधार पर सी.आर.एफ.
से जो राशि मिलती
है वो तो केवल इतनी
मिलती है जिससे
आप तुरन्त ही
टाइम पर उसके ऊपर
काम में ले सकते
हो, रिपेयर कर सकते
हो। जिस लेवल तक
डैमेज हुआ उसके
लिए बंद कर दिया
फिर भी राज्य
सरकार की तरफ से
हम कोशिश करेंगे।
जैसे
अभी माननीय सदस्य
ने बताया कोट बाँध
के लिए आठ लाख की
मांग की है तो चार
लाख हमने दिये
हैं और अगर यह जरूरत
होगी कि बरसात
से पहले-पहले चार
लाख और खर्च करने
पड़ेंगे तभी वो
सुरक्षित रहेगा
तो मैं माननीय
सदस्य को आश्वस्त
करना चाहता हूं
कि उनको हम ठीक
करा देंगे।
इसके
अलावा जो एनीकट
की लिस्ट दी है
मैंने अभी कुछ
एनीकट की जो हमने
शर्तें चैंज कर
दी थी कि दो नैनी
सीजन में अगर क्षतिग्रस्त
हो जायेगा तो चो
ठेकेदार को आगे
ठीक करवाना पड़ेगा।
इनके चार, पाँच
एनीकट तो ऐसे हैं
कि जो ठेकेदार
की लायबिलिटी हैं,
वो ठीक करायेगा
बाकी इन एनीकट
के लिए विशेष नुकसान
नहीं है, साइड ब्रेस
ऐसा ही हुआ बाकी
इनमें पानी सारा
भरा रहा है।
तो मैं
माननीय सदस्य
को आश्वस्त करना
चाहता हूं कि माननीय
मुख्यमंत्रीजी
ने गई बार भी रिपेयर
के लिए काफी बजट
प्रावधान दिया,
इस बार भी दिया
तो जितना हो सकेगा
कोशिश कर के जो
भी प्राथमिकता
से आवश्यक काम
होंगे उनको करवाने
की कोशिश करेंगे।
श्री
संयम लोढ़ा (सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
श्रीमती
ममता शर्मा (बूंदी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अध्यक्ष: श्री
सुभाष चन्द्र
बहेडि़या। नैक्स्ट
क्वेश्चन।
श्री
पुष्पेन्द्र
सिंह (बाली): माननीय
अध्यक्ष महोदय, लाटाड़ा बाँध
के लिए भी मंत्रीजी
कहें। लाटाड़ा
बाँध के लिए भी
कहें, 2001 से वहां क्षतिग्रस्त
है, वहां के किसानों
को ...
श्री
अध्यक्ष: कह दिया
न उन्होंने कि
अब मैं प्राथमिकता
के आधार पर कराऊंगा।
कह तो दिया।
श्री
पुष्पेन्द्र
सिंह (बाली): इस लाटाड़ा
बाँध के लिए नहीं,
कोट बाँध के लिए
कहा है।
श्री
अध्यक्ष: कह तो
दिया इन्होंने
कि प्राथमिकता
के आधार पर कराऊंगा।
प्रश्न
संख्या 275
श्री
सुभाष चन्द्र
बहेडि़या।
(अनुपस्थित
– कृपया
आगे देखें)
श्रीमती
ममता शर्मा (बूंदी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, बहुत
रिलेवेण्ट क्वेश्चन
है, पूछने दीजिए।
श्री
अध्यक्ष: श्री
रामरतन बैरवा।
श्रीमती
ममता शर्मा (बूंदी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, बहुत
रिलेवेण्ट क्वेश्चन
है, पूछने दीजिए।
श्री
संयम लोढ़ा (सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
श्रीमती
ममता शर्मा (बूंदी):
माननीय मंत्रीजी,
स्टेट टाइम के
जो बाँध हैं और
जो काफी क्षतिग्रस्त
हैं उनको आप मरम्मत
के लिए...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: मैंने
नैक्स्ट क्वेश्चन
पुकार लिया। अंकित
नहीं हो। अंकित
नहीं करना। हां,
मंत्रीजी, जवाब
दें।
श्रीमती
ममता शर्मा (बूंदी):
000
विधान
सभा क्षेत्र शाहपुरा
(भीलवाड़ा) में
औद्योगिक क्षेत्र
की स्थापना
276. श्री
रामरतन बैरवा
(शाहपुरा): क्या
उद्योग मंत्री
यह बताने की कृपा
करेंगे:-
क्या
सरकार विधान सभा
क्षेत्र शाहपुरा
में औद्योगिक विकास
हेतु औद्योगिक
क्षेत्र बनाने
का विचार रखती
है? यदि
हां, तो कब तक व नहीं,
तो क्यों?
उद्योग
मंत्री (श्री नरपत
सिंह राजवी): जी,
नहीं। वर्तमान
में शाहपुरा (भीलवाड़ा)
में रीको द्वारा
औद्योगिक क्षेत्र
की स्थापना का
कोई प्रस्ताव
विचाराधीन नहीं
है। इस क्षेत्र
में औद्योगिक विकास
की संभावना का
आंकलन कर यथोचित
निर्णय लिया जावेगा।
श्री
रामरतन बैरवा
(शाहपुरा): ‘क्या तारीफ
करूं बजट ए इन्तजाम
की, राजस्थान
का विकासकरने चली
महारानी राजस्थान
की।‘ ...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा (सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह महारानी
शब्द पर आपत्ति
है हमारी।
श्री
रामरतन बैरवा
(शाहपुरा): क्यों
आपत्ति है आपको?
श्री
संयम लोढ़ा (सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह कोई
महारानी नहीं है
अब राजस्थान के
अन्दर। प्रजातंत्र
है अब यहां। ...(व्यवधान)...
श्रीमती
ममता शर्मा (बूंदी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, उनको
तो आप अलाऊ करते
हैं जो शेरो-शायरी
कर रहे हैं सदन
में और जो रिलेवेण्ट
क्वेश्चन पूछना
चाहते हैं उनको
आप अलाऊ नहीं करते।
...(व्यवधान)...
Ars/usc/1d/3.4.2007/1130/1
श्री
रामरतन बैरवा
(शाहपुरा): आप नहीं
करते हैं क्या,
आपको क्या आपत्ति
हो रही है ...(व्यवधान)
क्यों मिर्ची
लग रही है आपके
?
श्री
संयम लोढ़ा (सिरोही):
प्रजातंत्र में
सब महाराजा और
सब महारानियां
हैं, पूरा हिन्दुस्तान
ही महाराजा और
महारानी है ...(व्यवधान)
श्री
रामरतन बैरवा
(शाहपुरा): सोनिया
गांधी को क्या
बोला था ...(व्यवधान)
विदेशी महिला को
...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: महारानी
वह स्वयं कहें
तो ...(व्यवधान) कोई
और कहे तो क्यों
एतराज है।
श्री
रामरतन बैरवा
(शाहपुरा): माननीय
अध्यक्ष महोदय,
शाहपुरा की धरती
भक्ति और शक्ति
का प्रतिबिम्ब
है। ...(व्यवधान)
वहां पर प्रसिद्ध
क्रांतिकारी हुए
हैं। एक क्रांतिकारी
का मैं स्टेटमैंट
देना चाहता हूं
...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा (सिरोही):
अब कोई महारानी
नहीं हैं।
श्री
रामरतन बैरवा
(शाहपुरा): आपके
माध्यम से मंत्री
महोदय से मेरे
एक दो प्रश्न
हैं। क्या पूर्व
में मुख्यमंत्री
ने वहां किसी फैक्ट्री
का उद्घाटन किया
है क्या ? किया
है तो किस तारीख
को ? या पूर्व में
रीको एरिया घोषित
हुआ कांग्रेस शासन
में? यह तीन प्रश्न
हैं मेरे।
श्री
नरपत सिंह राजवी
(उद्योग मंत्री):
अध्यक्ष महोदय,
भीलवाड़ा से 45 किलोमीटर
दूर ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: बैठे
बैठे बात नहीं
करें। प्रतिपक्ष
के नेता स्वयं
ही बात करते हैं,
किसी और को क्या
कहूंगी मैं ...(व्यवधान)
प्रतिपक्ष के नेता
धुमा मत करो, जिससे
जरुरत हो बात करने
की उसे ही बुला
लिया करो, अच्छा
नहीं लगता आप ऐसे
पीठ किये हुए ...
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता, प्रतिपक्ष):
मैं तो बहुत धीरे
धीरे बोल रहा था।
श्री
अध्यक्ष: बोल
तो आप धीरे ही रहे
होंगे लेकिन जब
आप पीठ करके बैठते
हैं तो अच्छा
नहीं लगता है।
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता, प्रतिपक्ष):
नहीं, मैं टेढ़ा
बैठा था।
श्री
अध्यक्ष: प्रतिपक्ष
का नेता आसन की
तरफ पीठ करे यह
अच्छा नहीं लगता
है।
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता, प्रतिपक्ष):
नहीं, आपकी तरफ
नहीं की।
श्री
अध्यक्ष: प्रतिपक्ष
का नेता आसन की
तरफ पीठ करे, उचित
नहीं लगता है।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): पर झुन्झुनूं
के अन्दर तो पीठ
ही रहेगी इनकी
आपकी तरफ।
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
अध्यक्ष महोदय,
आपकी तरफ तो पीठ
हो ही नहीं सकती
मंत्री महोदय।
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता, प्रतिपक्ष):
पीठ आपको ही नहीं,
पीठ किसी को ही
नहीं दिखायेंगे।
श्री
अध्यक्ष: अच्छी
बात है।
श्री
रामरतन बैरवा
(शाहपुरा): मंत्री
महोदय, बताइये
किन किन मुख्यमंत्रियों
ने कब कब, किन किन
तारीख को किन किन
फैक्ट्रियों का
उद्घाटन किया
?
श्री
नरपत सिंह राजवी
(उद्योग मंत्री):
अध्यक्ष महोदय,
भीलवाड़ा, जहाजपुर
रोड पर जहाजपुर
में एक औद्योगिक
क्षेत्र स्थित
है जो 1982 में 30.50 एकड़
भूमि पर स्थापित
किया गया। यह अभी
तक अनसैचुरेटेड
श्रेणी में है।
कुल 44 नियोजित भूखण्डों
में से 31 भूखण्ड
आबंटित किये गये।
गत चार वर्षो में
2003 से 2007 तक केवल तीन
भूखण्ड आबंटित
हुए, शेष तेरह भूखण्ड
रिक्त हैं। इन
इकाइयों पर अभी
भी जितने भी भूखण्ड
इसमें अस्सी रुपये
प्रति वर्ग मीटर
की दर से यह भूखण्ड
आबंटित किये गये
थे, अनसैचुरेटेड
हैं, अभी भी भूखण्ड
खाली हैं। इसलिए
नया क्षेत्र वहां
पर कोई अभी स्थापित
करने का प्रश्न
विचाराधीन नहीं
है।
जहां
तक जिस मंत्री
के बारे में आप
कह रहे हैं, यह प्रश्न
का भाग नहीं है
इसलिए मैं अभी
उत्तर दे नहीं
पाऊंगा।
श्री
अध्यक्ष: ठीक
है, मुख्यमंत्री
क्यों कह .....
श्री
रामरतन बैरवा
(शाहपुरा): अध्यक्ष
महोदय, मेरे तीनों
प्रश्नों का उत्तर
ही नहीं है इसमें।
श्री
अध्यक्ष: सबका
जवाब दे दिया, आपने
सुना ही नहीं, समझे
नहीं आप।
श्री
खुशवीर सिंह।
खाटू
बड़ी (नागौर) के
खसरा नम्बर 1148 में
नियम विरूद्ध जारी
क्वारी लाइसेंस
277. श्री
खुशवीर सिंह जोजावर
(खारची): क्या खनिज
मंत्री यह बताने
की कृपा करेंगे
:-
(1) क्या
यह सही है कि बिना
डेलीनियेशन के
क्वारी लाइसेंस
जारी करने का प्रावधान
है? यदि हां, तो नियमों
की प्रति सदन की
मेज पर रखें।
(2) क्या
यह सही है कि राजस्थान
अप्रधान खनिज रियायत
नियम, 1986 के लागू होने
के पश्चात 1986 के
पूर्व की डेलीनेटेड
बाउन्ड्रियों
की सीमा के बाहर
बिना सक्षम अधिकारी
की अनुमति के क्वारी
लाइसेंस स्वीकृत
किये गये हैं? यदि
हां, तो कितने? संख्या
सूची सदन की मेज
पर रखें।
(3) क्या
यह सही है कि ग्राम
खाटूबड़ी जिला
नागौर का खसरा
नम्बर 1148 क्वारी
लाइसेंस देने हेतु
डेलीनियेटेड किया
गया है? यदि हां,
तो कब? आदेश की प्रति
सदन की मेज पर रखें।
(4) क्या
यह सही है कि उक्त
खसरा नम्बर 1148 में
बिना डेलीनियेशन
के क्वारी लाइसेंस
जारी किये गये
हैं? यदि हां, तो
किन नियमों के
तहत? नियम विरूद्ध
आबंटन हेतु कौन
कौन दोषी हैं व
उनके विरूद्ध सरकार
द्वारा क्या कार्यवाही
की जा रही है ?
(5) क्या
उक्त खसरा में
जारी लाइसेंस के
लिए खनिज अभियन्ता
ने अपने उच्चाधिकारियों
से अनुमति ली है
? यदि हां, तो किस
किस मामले में
किन किन अधिकारियों
ने किन नियमों
के तहत अनुमति
दी ? नियम विरूद्ध
अनुमति के दोषी
व्यक्तियों के
विरूद्ध सरकार
द्वारा क्या कार्यवाही
की जा रही है ?
वन एवं
पर्यावरण मंत्री
(श्री लक्ष्मीनारायण
दवे): (1) जी
हां । राजस्थान
अप्रधान खनिज रियायत
नियमावली, 1977 एवं
1986 के संबंधित नियमों
की प्रति परिशिष्ठ-1
पर संलग्न है।
(2) जी हां।
सूची परिशिष्ठ-2
पर संलग्न है।
(3) जी नहीं।
(4) जी हां।
राजस्थान अप्रधान
खनिज रियायत नियमावली,
1986 के नियम 22(1) के परन्तुक
के तहत जिला नागौर
के खसरा नम्बर
1148 में बिना डेलीनियेशन
के क्वारी लाइसेंस
जारी किये गये
हैं। नियमों की
पालना के सन्दर्भ
में जांच कराई
जाकर दोषी व्यक्तियों
के विरूद्ध कार्यवाही
की जाएगी।
(5) राजस्थान
अप्रधान खनिज रियायत
नियमावली, 1986 के नियम
22(1) के परन्तुक के
तहत स्वीकृतियां
दी गई हैं और क्वारी
लाइसेंस प्रकरण
में सक्षम अधिकारी
खनिज अभियंता स्वयं
हैं। निदेशालय,
उदयपुर से एक प्रकरण
और अतिरिक्त निदेशक,
खान, जोधपुर से
27 प्रकरणों में
अनुमति प्राप्त
की गई है। सूची परिशिष्ठ
-3 पर संलग्न है।
नियमों की पालना
के सन्दर्भ में
जांच कराई जाकर
दोषी वयक्तियों
के विरूद्ध कार्यवाही
की जाएगी।
श्री
खुशवीर सिंह जोजावर
(खारची): अध्यक्ष
महोदय, नियम 22(1) के
तहत राज्य में
आज भी बिना डेलीनियेशन
के खानें क्या
मंत्री महोदय स्वीकृत
हो रही हैं? भविष्य
में इसे रोकने
के लिए आप क्या
कदम उठा रहे हैं
?
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं पर्यावरण
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष महोदय,
1986 के नियम 22(1) के तहत
बिना डेलीनियेशन
और बिना नोटिफिकेशन
के क्वारी लाइसेंस
जारी नहीं किये
जा सकते परन्तु
नियम 22(1) में एक प्रोवीजो
रखा है, उस प्रोवीजो
के तहत रैंट कम
रॉयल्टी लीज ग्रांट
जो हो चुकी है और
क्वारी लाइसेंस
में परिवर्तन कर
दिया गया है। उनमें
एम. एम. सी. आर. 1986 नियम
22(1) के प्रोवीजो के
तहत जो 1986 के बाद में
इस प्रकार की बिना
डेलीनियेशन किये,
बिना नोटिफिकेशन
किये अगर इस प्रकार
के क्वारी लाइसेंस
जारी किये हैं
तो निश्चित रूप
से यह गम्भीर
विषय है। माननीय
अध्यक्ष महोदय,
मैं इसकी जांच
कराने की आपको
यहां घोषणा करता
हूं और मरे डिप्टी
सेक्रेटरी को आदेश
देता हूं कि एक
माह के अन्दर
अन्दर इसकी जांच
करें और इस जांच
में जो निश्चित
रूप से दोषी पायेंगे
and they will be penalized.
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से माननीय
मंत्री जी से यह
जानना चाहता हूं
कि यह क्वारी
लाइसेंस की स्वीकृति
हेतु जो अधिकृत
अधिकारी हैं वह
अभियन्ता और सहायक
अभियन्ता हैं।
आपके नियम 22 के तहत
क्या यह सही है
कि राजस्थान में
बापी पट्टे सिस्टम
आज भी लागू है और
वह सोजत में, खाटू
में, मकराना में,धौली
खान राजसमंद और
कहां कहां हैं?
दूसरा,
यह कि यह जो डेलीनियेशन
है यदि किसी भी
जो खनिज सम्पदा
है उसको छोटे छोटे
प्लाट में विभक्त
करने का यह काम
जियोलॉजिस्ट
द्वारा किया जाता
है। क्या राजस्थान
में जो बापी खानें
हैं उनका जियोलॉजिस्ट
द्वारा आज तक कभी
डेलीनियेशन कराया
गया है ? यदि कराया
गया है तो कहां
कहां कराया गया
है ?
तीसरा,
अध्यक्ष महोदय,
मैं आपके माध्यम
से माननीय खनिज
मंत्री जी से यह
जानना चाहता हूं
कि यह जो क्वारी
लाइसेंस जारी किये
हैं, क्या इनको
जारी करने से पहले
निदेशक खान विभाग
उदयपुर और अतिरिक्त
निदेशक, जोधपुर
से भी इसकी स्वीकृति
ली गयी है क्या?
और अगर आप जांच
करायेंगे तो क्या
निदेशक और अतिरिक्त
निदेशक जिन्होंने
इसके लिए स्वीकृति
दी है, वह भी जांच
के दायरे में आयेंगे?
कृपया इसका जवाब
दें।
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं पर्यावरण
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष महोदय,
नियम 22(1) एम. एम. सी.
आर. 1986, प्रोवीजो पढ़
रहा हूं “Provided that no such notification shall be necessary for the areas in
respect of which rent-cum-royalty leases have been granted earlier and have
been converted into quarry licences in accordance with these rules.” इनके
अन्दर जो पहले
बापीदार, सरफेस
राइट और जो थे, जब
राजस्थान स्टेट
बनी और उसके अन्दर
आर. सी. आर. एल. के तहत
जो क्वारी लाइसेंस
के बिना नोटिफिकेशन
क्वारी लाइसेंस
के पट्टे इश्यु
किये गये और 1986 के
इस प्रोवीजो परन्तुक
के अन्दर उनको
रेगुलराइज करने
की व्यवस्था
थी और इसके बाद
में माननीय अध्यक्ष
महोदय, इसका डेलीनियेशन
होता है और डेलीनियेशन
होता है उसका अंकन
होता है, प्लाट
का नम्बर होता
है, एस. टी. एस. सी.
का रिजर्वेशन होता
है। जिस हिसाब
से इस 22(1) के प्रोवीजो
का जो दुरूपयोग
किया गया है और
निश्चित रूप से
एस. सी. एस. टी. के लिए
यह अभी का नहीं
है, यह लगातार 1986 से
जिस हिसाब से बिना
डेलीनियेशन क्वारी
लाइसेंस को रेगुलराइज
किया गया नागौर
के अन्दर माननीय
अध्यक्ष महोदय,
गोचर भूमि में
तत्कालीन कलैक्टर
ने कइयों में एन.
ओ. सी. इश्यु कर
दी, कईयों में गोचर
भूमि में एन. ओ. सी.
नहीं दी गयी और
जो खातेदारी भूमि
थी, खातेदारी भूमि
के अन्दर अगर
कोई है तो चार हैक्टेयर
के अन्दर भूमि
का अलॉटमैंट होता
है।
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
पंचायतों के प्रस्ताव
पर दी है।
श्री
अध्यक्ष: आप अलग
से पूछें।
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
पंचायतों ने प्रस्ताव
किया है, उनके ऊपर
कलैक्टर ने एन.
ओ. सी. दी है। माननीय
अध्यक्ष महोदय,
मेरा सवाल यह नहीं
है।
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं पर्यावरण
मंत्री): चार हैक्टेयर
गवर्नमैंट को सरेण्डर
की गयी।
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
माननीय मंत्री
जी, मैंने आपसे
आपने चैप्टर थर्ड
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं पर्यावरण
मंत्री): आप पूछ
लेना।
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
राजस्थान माइनर
मिनरल कंस्ट्रक्शन
रूल्स 1986 का 22 का
उदाहरण दिया। आपने
केवल तीन लाइनें
पढ़ीं, आप इसको
पूरा पढ़ें इससे
अपने आप साबित
हो जाएगा ग्रांट
आफ क्वारी लाइसेंस
22 Restriction on grant of quarry
licences:- (1) No quarry licence shall be granted for any mineral deposit
unless it is notified in the Rajasthan Gazette or at least one daily newspaper
having wide circulation in the State as well as one newspaper having wide
circulations in the locality nearest to the area in question, by the Mining Engineer/Assistant Mining
Engineer after due approval of the Director. Such notification shall be made
after delineating the plots of quarries…”यह डायरेक्टर
से निर्देश लेकर
के उसके बाद जारी
किये हैं।
दूसरा
अध्यक्ष महोदय,
आपके माध्यम से
मैंने निवेदन किया
था ..........
vns/usc/11.40/1e/3.4.2007/1
कि जो बापी
खानें हैं। बापी
खानों का मतलब
होता है जो बपौती
से बाप दादाओं
से चली आ रही हैं।
जागीरदारों के
टाइम में एरिया
निश्चित नहीं होता
था और उस वक्त
के ठिकानेदार और
जागीरदार जो पूरा
एरिया होता था
वह दे देते थे कि
आप इसके अन्दर
माइनिंग करें।
आप यह बतायें कि
वह जो बापी पट्टे
हैं उनमें आज तक
राजस्थान में
कहीं डेलीनियेशन
हुआ है क्या ? हुआ
है तो कहां-कहां
हुआ है ? वह बताइये।
केवल एक ही जगह
डेलीनियेशन की
आप बात कर रहे हैं।
तीसरा, मैंने आपसे
यह सवाल किया था
कि आप कह रहे हैं
... (व्यवधान)
श्री हरीसिंह रावत (भीम): एक प्रश्न है मेरा माननीय अध्यक्ष महोदय, ... (व्यवधान)
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): जांच करायेंगे लेकिन यह जो कलेक्टर ने गोचर भूमि में एन.ओ.सी. दी। पंचायतों के प्रस्ताव हैं। पंचायत ने प्रस्ताव दिये उसके बाद दी और उसमें एन.ओ.सी. दे दी उस पर किसी को आपत्ति नहीं है। अगर इसने गलत दिया आप जांच कराइये, हमको कोई आपत्ति नहीं है लेकिन डायरेक्टर से अप्रूवल ली है। एडिशनल डायरेक्टर से अप्रूवल ली है एम.ई. ने तो आप उनको भी जांच के दायरे में शामिल करिये। यह मेरा निवेदन है। केवल एक छोटा अधिकारी जिसने ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: क्वेश्चन पूछिये। प्लीज आस्क द क्वेश्चन। आप पूछिये ना।
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): ऊपर के निर्देश से जांच लेकर कर दी। आप उसको चाहे जांच करके उसके ऊपर तलवार लटका दें और जो निदेशक और अतिरिक्त निदेशक हैं जिनका एन.ओ.सी. देने और जिनकी स्वीकृति देने के बाद यह काम हुआ है उसको भी सुनें।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): यह डेलीनियेशन में जो-जो भी डिफैक्टस, जो-जो भी गलतियां हुई अधिकारियों से उसकी जानकारी आपको इस प्रश्न लगने के बाद हुई या इससे पहले हुई ? अगर पहले हुई तो आपने क्या-क्या कार्यवाहियां की ?
श्री अध्यक्ष: बस ठीक है।
श्री लक्ष्मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, नगर से आने वाले सदस्य कन्फ्यूज हो रहे हैं। मैंने स्वयं ने पहले कहा था कि आर.सी.आर.एल. और जो बापी पट्टेदार थे उनके लिये ही 22(1) के अन्दर प्रोविजो रखा है। इसमें स्पष्ट लिखा हुआ है “Provided that no such notification shall be necessary for the areas in respect of which rent-cum-royalty leases have been granted earlier and have been converted into quarry licences in accordance with these rules.” यह उनके लिये ही बना था। माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने कहा है कि यह माइनिंग इंजीनियर को अधिकार, पर माइनिंग इंजीनियर को डेलीनियेटेड किये बिना क्वारी लाइसेंस ग्रांट करने का कोई अधिकार नहीं है। है तो 1986 और 1977 के इस प्रोविजन में है जो बापीदार पट्टे थे या यह जो आर.सी.आर.एल. के जो पट्टेधारी थे उनको देने का प्रावधान था। जो आप गोचर भूमि में कलेक्टर की बात करते हो कि एन.ओ.सी. पंचायत द्वारा दी गयी, एक जानकारी और देना चाहता हूं माननीय अध्यक्ष महोदय, कि जो खातेदार, जिन खातेदारों को इस हिसाब से इस कानून को बरगलाने के लिये, इसको डाइल्यूट करने के लिये 22(1) को उन्होंने गवर्नमेंट वह भूमि सरेंडर कर दी। जब गवर्नमेंट को वह भूमि सरेंडर कर दी है गवर्नमेंट की भूमि हो गयी उसमें डेलीनियेशन आवश्यक है। डेलीनियेशन नहीं किया गया चाहे डायरेक्टर हो, चाहे एडिशनल डायरेक्टर हो, चाहे माइनिंग इंजीनियर और डायरेक्टर ... (व्यवधान) अब सुनिये एक मिनट। बैठिये आप। माइनिंग इंजीनियर ने मार्गदर्शन मांगा है एडिशनल डायरेक्टर से और डायरेक्टर से और डायरेक्टर को कोई अधिकार नहीं है। गवर्नमेंट से 65 में रिलेक्सेशन मांगने चाहिये और 65 में रिलेक्सेशन की अनुमति राज्य सरकार से प्राप्त होती है इसलिये निश्चित रूप से मैं डिप्टी सेक्रेटरी से और एक महीने के अन्दर इसकी जांच कराऊंगा और इसमें जो दोषी होंगे निश्चित है वह पैनलाइज होंगे।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): मेरी बात का जवाब नहीं आया। मेरी बात का जवाब नहीं आया ... (व्यवधान)
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा सवाल तो यह था कि डेलीनियेशन जियोलॉजिस्ट करता है। जियॉलॉजिस्ट यह देखता है कि यहां कितना खनिज भण्डार है, कितनी गहराई पर है, कितना है ? डेलीनियेशन एम.ई. नहीं करता। कहीं भी असिसटेंट इंजीनियर और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर नहीं करता, जियॉलॉजिस्ट करता है।
दूसरा मैंने सवाल आपसे स्पेसिफिक यह पूछा था कि राजस्थान में जो बापी पट्टे हैं। पाँच जगह के नाम भी बताये उनमें कहीं एक भी जगह डेलीनियेशन हुआ है क्या ? अब भी विदाउट डेलीनियेशन वहां माइनिंग हो रही है और बापी पट्टों पर काम हो रहा है तो यह काम केवल आप एक ही जगह खाटू में लागू करना चाहते हैं या इन बापी पट्टों का हर जगह डेलीनियेशन करा कर पूरे राजस्थान में कहीं भी हो उन सबको इस चक्रव्यूह में लेना चाहते हैं।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): मैंने जो प्रश्न किया था ... (व्यवधान)
श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): आप उस संदेह के घेरे में आ रहे हो क्या ?
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): मैं नहीं हूं। जांच करा लीजिये।
श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): तो फिर ?
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): जांच करा लीजिये। यह बैठे हैं। मेरे पास कुछ नहीं है। फकीर आदमी हूं। आपके दर्द नहीं होना चाहिये। मैं तो बात कर रहा हूं कानून की। समझ में आ गयी बात। यह जो पूरे राजस्थान के जहां-जहां बापी पट्टे हैं उसका सवाल है। केवल एक जगह का नहीं है ... (व्यवधान)
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं जो समझ पाया हूं कि आपने कलेक्टर ने गोचर भूमि को भी किया, यह भी किया तो आप एक डिप्टी सेक्रेटरी लेवल के अधिकारी से कलेक्टर की भी जांच करवायेंगे ?
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): हां, देखो आप।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपको यदि जांच करवानी है। आपकी मंशा है जैसा हिण्डौली से आने वाले माननीय सदस्य ने कहा तीन साल तक आप मंत्री रहे। तीन साल तक आपको यह जानकारी में आ जाना चाहिये था किस तरह से स्थिति बनी हुई है। यदि आपको जांच करवानी है तो चीफ सेक्रेटरी लेवल से जांच कराइये तब इसकी जांच होगी। आप चीफ सेक्रेटरी लेवल पर जांच क्यों नहीं देते ? इन्होंने कोट किया है कि आपका जो डेलीनियेशन प्लान बनता है इसको अखबार में निकालना पड़ता है। डायरेक्टर, माइन्स की अप्रूवल होनी चाहिये। डायरेक्टर, माइन्स को 65 रूल है, लेने चाहिये1 यह आप सब बता रहे हो। इसका मतलब जो अधिकार है 65 के अन्दर सरकार को था। 65 तो एप्लीकेशन नहीं हुआ और डायरेक्टर ने अपने लेवल पर यह पट्टे दे दिये। इतनी बड़ी गड़बड़ मानते हैं तो आप इसकी जांच चीफ सेक्रेटरी लेवल से कराइये Why for a Dy. Secretary level?बताइये हमको इस बात की। इसका क्या उपाय है। बताइये आप।
श्री हरीसिंह रावत (भीम): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं खनिज मंत्रीजी से पूछना चाहता हूं कि 108/04/16.6.2004 को एक केस दायर हुआ था मांगलियावास पुलिस स्टेशन पर। इसमें सैक्शन 379 आई.पी.सी. के थ्रू और एम.डी.डी.आर. एक्ट 1957 की धारा 4.21 के अन्तर्गत साढ़े सात करोड़ की रिकवरी इसमें निकली है लेकिन आज तक इस केस में कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसका कारण बतायें मुझे।
दूसरा माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें भ्रष्टाचार के अन्तर्गत काफी लोग सम्मिलित हैं तो अभी तक पुलिस केस ही हुआ है ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप भाषण नहीं दें।
श्री हरीसिंह रावत (भीम): लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई, इसका कारण क्या रहा ?
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): मैंने जो प्रश्न पूछा था उसका भी यह जवाब दें। मैंने यह पूछा था कि क्या इस बात की जानकारी आपको यह प्रश्न लगाने के बाद हुई ? और अगर इसकी जानकारी आपको पहले थी तो अब तक आपने उन अधिकारियों के खिलाफ क्या-क्या कार्यवाही की ?
श्री लक्ष्मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं अभी क्लीयर कर रहा हूं कि 22(1) प्रोविजों के अन्दर जो नगर से आने वाले सदस्य ने कहा है 22(1) प्रोविजों में जो आर.सी.आर.एल. और बापी पट्टेदार हैं उनके लिये डेलीनिएशन का नहीं रखा था प्रोविजन और उनको जो 77 और उसके पहले जिनको बिना क्वारी लाइसेंस इश्यू किये गये थे। बिना डेलीनिएशन और बिना बाउण्ड्री के उन लोगों को रेगुलराइज का प्रावधान 22(1) प्रोविजो में रखा है और 22(1) के अन्दर नोटिफिकेशन होता है, बाउण्ड्री तय होती है। नक्शे बनते हैं। प्लाटिंग होती है। उसमें माइनिंग इंजीनियर को अधिकार है परन्तु बिना नोटिफिकशन, बिना डेलीनिएशन, बिना गजट में दिये माइनिंग इंजीनियर ने इस प्रकार का कृत्य किया है। जैसे ही जानकारी मिली, आपने यह देखा होगा, हिण्डौली से आने वाले माननीय सदस्य ने जो प्रश्न का उत्तर, प्रश्न के उत्तर में मैंने इस बात को तय करवाया कि मैं इसकी जांच करूंगा। मेरे ख्याल से आज तक प्रश्न के उत्तर में कंसीड करने का आज तक नहीं हुआ है। यह पहली बार हुआ है। माननीय अध्यक्ष महोदय, और यह आज के कार्यकाल के नहीं है यह 1986 से लगातार हो रहा है। नागौर डिस्ट्रिक्ट के अन्दर, जायल के अन्दर लगातार कई लोगों को इस हिसाब से वायलेशन करते हुए, 22(1) के प्रोविजन का वायलेशन करते हुए डेलीनिएशन की कार्यवाही बिना डेलीनिएट किये गये इनमें अनुसूचित जाति के व्यक्तियों के अधिकारों का हनन हुआ है। इसी बात पर मैं आज कहता हूं कि निश्चित रूप से मैं इसकी जांच करवाऊंगा।
श्री अध्यक्ष: नेक्स्ट क्वेश्चन। ... (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं हुआ। ... (व्यवधान)
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): किससे जांच करवा रहे हो आप? ... (व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह आपका खेल ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: नेक्स्ट क्वेश्चन। मैंने नेक्स्ट क्वेश्चन पुकार लिया। ... (व्यवधान)
श्री लक्ष्मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं इसकी जांच डिप्टी सैक्रेटरी से करवाऊंगा। अगर जांच में उच्च स्तर के जिला कलक्टर और अधिकारी हुए हैं तो निश्चित रूप से इसकी भी जांच करवाऊंगा। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: नेक्स्ट क्वेश्चन। नेक्स्ट क्वेश्चन पुकार लिया। श्री हेमराज मीणा।
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्यक्ष महोदय, अब जब रिकार्ड पर बात आ गयी थी कि जिला कलक्टर ने एन.ओ.सी. दी है तो डिप्टी सैक्रेटरी जांच कैसे करेगा यह समझाइये हमको ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: जांच करवा रहे हैं। ... (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): डिप्टी सैक्रेटरी तो आर.ए.एस. है। ... (व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह ... (व्यवधान) सही लगता है। यह मंत्रीजी की मिलीभगत है। ... (व्यवधान) जब आप डिप्टी सैक्रेटरी से जांच करवा सकते हो ... (व्यवधान)
श्री लक्ष्मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): 22(1) के प्रोविजन का जो वायलेशन किया है इसकी जांच डिप्टी सैक्रेटरी करेगा और इसमें जिला कलक्टर ... (व्यवधान) स्तर के अधिकारी से जांच करवा दूंगा। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: नेक्स्ट क्वेश्चन। श्री हेमराज मीणा। ... (व्यवधान)
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्यक्ष महोदय, यह खसरा नम्बर 1148 के अन्दर रियासत-काल के समय से, जागीरदारों के समय से इसमें खनिज हो रहा है। तब की एन.ओ.सी. दी हुई है। आपका जवाब है यह ... (व्यवधान) आज थोड़े ही दिये गये हैं। इस पर आपका जवाब 2006 में ... (व्यवधान) यह 1148 खसरा नम्बर है। जो गैर मुमकिन गोचर है। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: नेक्स्ट क्वेश्चन। मैंने नेक्स्ट क्वेश्चन पुकार लिया। श्री हेमराज मीणा। ... (व्यवधान) अंकित नहीं हो।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): 000
श्री संयम
लोढ़ा (सिरोही):
000
श्री अध्यक्ष: मैंने नेक्स्ट क्वेश्चन पुकार लिया। श्री हेमराज मीणा। मैंने दूसरा प्रश्न पुकार लिया। ... (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): 000
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000
श्री अध्यक्ष: तो फिर ... (व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000
श्री लक्ष्मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): 22(1) के प्रोविजो की जांच कह रहा हूं, डिप्टी सैक्रेटरी ... (व्यवधान) 22(1) के इसमें जो दोषी होंगे कलक्टर स्तर के ... (व्यवधान) इसमें जांच करवा देंगे। ... (व्यवधान)
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): 000
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000
श्याम/चौहान 03.04.2007
11.50 1f
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): 000
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000
श्री अध्यक्ष: नैक्स्ट क्वेश्चन, श्री हेमराज मीणा।
जिला बारां
की आंवला फसल का
विपणन
278.श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): क्या कृषि मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-
(1) क्या यह सही है कि सरकार द्वारा बारां जिले में आंवले के बगीचे लगाये गये थे। यदि हां, तो कहां-कहां, कितने-कितने बीघा में। ग्रामवार सूची सदन की मेज पर रखे।
(2) क्या यह सही है कि सरकार द्वारा आंवले के बगीचों पर अनुदान दिया गया था। यदि हां, तो कितना।
(3) क्या यह भी सही है कि इन आंवलों के बगीचे से सैकड़ों टन आंवले का उत्पादन जिले में हो रहा है। यदि हां, तो इनको विक्रय करने की सरकार द्वारा क्या योजना है।
राज्य मंत्री, कृषि (श्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी): (1) बारां जिले में काश्तकारों द्वारा अनुदान पर आंवले के बगीचे लगाये गये हैं। ग्रामवार सूची संलग्न है।
श्री अध्यक्ष: बातें नहीं करें ...(व्यवधान)
श्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी (राज्य मंत्री, कृषि): (2) जी हां। बारां जिले में आंवले के बगीचों की स्थापना पर अब तक 27.03 लाख रूपये का अनुदान दिया गया है।
(3) बारां जिले में आंवले का उत्पादन लगभग पचपन सौ क्विंटल हो रहा है।
श्री अध्यक्ष: 5 हजार 500, पंच सौ नहीं, 5 हजार 500।
श्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी (राज्य मंत्री, कृषि): 5 हजार 500, पचपन सौ, एक ही बात है।
श्री अध्यक्ष: आपने 5 हजार 500 लिखा है।
श्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी (राज्य मंत्री, कृषि): 5 हजार 500, पचपन सौ क्विंटल हो रहा है, राजस्थान कृषि उपज विपणन अधिनियम 1959 के अंतर्गत अघोषित कृषि अनुसूची में आंवला सम्मिलित है। बारां जिले के अंतर्गत कृषि उपज के क्रय-विक्रय के लिए बारां, अटरू व छबड़ा कृषि उपज मंडी समितियां स्थापित की हुई है।
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अध्यक्ष महोदय, मेरा एक बहुत महत्वपूर्ण सवाल है कि हार्टिकल्चर के द्वारा बारां जिले में ही नहीं सारे राजस्थान में आंवले की पौध लगायी गयी है।
श्री अध्यक्ष: सारे राजस्थान में ...(व्यवधान)
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): बारां जिले में ही नहीं सारे राजस्थान में है ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: हां, हां, बोलो ...(व्यवधान)
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): सारे राजस्थान में हार्टिकल्चर के द्वारा आंवले की पौध लगायी गयी है।
श्री अध्यक्ष: बीच में नहीं बोलें माननीय सदस्य।
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): बारां जिले में 27 लाख का अनुदान है और पूरे राजस्थान में तो करोड़ों का अनुदान दिया होगा। अध्यक्ष महोदय, मैं यह पूछना चाहूंगा कि इससे आंवले का उत्पादन तो शुरू हो गया और लगभग 4-5 साल पहले से आंवले की पौध लगायी जा रही है, बगीचे लगाये जा रहे हैं, लेकिन मार्केटिंग की व्यवस्था अभी तक सरकार ने की नहीं है और मार्केटिंग की व्यवस्था क्या होगी।
दूसरा, सवाल यह करना चाहूंगा कि इन्होंने राजस्थान कृषि उपज विपणन बोर्ड के अधिनियम के अनुसार बारां, अटरू और छबड़ा में मंडी को बताया है, अभी तक वहां पर आंवले का ऑक्शन होता ही नहीं है। वहां पर कोई खरीददार मिलता ही नहीं है तो आंवले का उत्पादन तो राजस्थान में शुरू हो गया, बारां जिले में भी शुरू हो गया लेकिन उस उत्पादन की मार्केटिंग की क्या व्यवस्था होगी। काश्तकार उस आंवले को लेकर के कहां जायेगा। काश्तकार उस आंवले को लेकर के मारा-मारा फिर रहा है। अध्यक्ष महोदय, मैं चाहूंगा कि सरकार ने इसकी क्या नीति बनाई है और इसका क्या उपयोग होगा इसके बारे में मंत्री जी जानकारी दें।
श्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी (राज्य मंत्री, कृषि): अध्यक्ष महोदय, यह बात बिलकुल सही है कि आंवले के क्षेत्रफल और उत्पादन में बहुत बड़ी वृद्वि पिछले दो सालों में हुई है। जब हमारा शासन आया तो मात्र 730 हेक्टेयर में आंवले के बाग़ थे और उत्पादन मात्र 6347 क्विंटल था, दो साल में यह क्षेत्रफल बढ़कर हमने 11657 हेक्टेयर कर दिया और उत्पादन 150552 क्विंटल हो गया। निश्चित रूप से जो उत्पादन बढ़ा है इसकी मार्केटिंग की व्यवस्था खड़ी करना सरकार का धर्म है और बहुत ईमानदारी से सरकार ने प्रयास इसके संबंध में किये हैं। सबसे पहला प्रयास किया इसकी प्रोसेसिंग की यूनिट बनाने का पहले प्रचलन नहीं था, पहले 50 हजार मात्र इसकी सब्सिड़ी थी, अब दस लाख तक कोई भी इसकी प्रोसेसिंग यूनिट लगायेगा तो उसकी सब्सिड़ी 50 प्रतिशत कर दी, पाँच लाख हम सब्सिडी देंगे। इस कारण से बहुत से लोगों ने इसमें रूचि दिखायी है। अब बारां, अटरू सहित चार जगह यह प्रोसेसिंग प्लांट खुले हैं।
श्री अध्यक्ष: आप तो मार्केटिंग की व्यवस्था करें, यह तो ठीक है, सब्सिडी तो बढ़ा दी आपने।
श्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी (राज्य मंत्री, कृषि): मार्केटिंग की व्यवस्था में आ गया ना, मार्केटिंग की व्यवस्था में हमने चौमूं में आंवले की विशेष मंडी स्थापित की है ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: बीच में नहीं बोलें।
श्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी (राज्य मंत्री, कृषि): उस मंडी में पैक हाउस भी बन रहा है, उस मंडी में ...(व्यवधान)
श्री अमराराम (धोद): वह वहां से बेचने आयेगा आंवला ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप सुन तो लें।
श्री अमराराम (धोद): यह तो 12 बज रहे हैं वहां ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: नहीं, आप बीच में मत बोलें।
श्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी (राज्य मंत्री, कृषि): क्या बात कर रहे हैं, 12 तो आपके बजा दूंगा एक मिनट में, सुन लें।
श्री अध्यक्ष: आप सुनें बात उनकी ...(व्यवधान) आप मिड डे मील में कुछ न कुछ आंवले की प्रिपेएशन दें ...(व्यवधान) ताकि उसकी मार्केटिंग हो जायेगी।
श्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी (राज्य मंत्री, कृषि): अध्यक्ष महोदय, मैं बता रहा हूं ...(व्यवधान) मैं इसी पर आ रहा हूं। आप सुन लें, आंवले की खपत में जो प्रमुख सोर्सेज हैं, इसका पाउडर आयुर्वेदिक दवाइयों में काम आता है। इसके अंदर प्रयास होने चाहिंए, तेल बनता है ...(व्यवधान) सुनें तो सही ...(व्यवधान)
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): मेरा एक सवाल है, चार साल में इन्होंने ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: जो बात है वह बतायें ना ...(व्यवधान)
श्री अमराराम (धोद): अब बारां की बात कर रहे हैं और चौमूं में पैकिंग करा रहे हैं ...(व्यवधान)
श्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी (राज्य मंत्री, कृषि): सारे प्रदेश की बात हो रही है ...(व्यवधान)
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अध्यक्ष महोदय, मेरा तो एक सवाल है ...(व्यवधान)
श्री श्रवणकुमार (पिलानी): आंवले का पाउडर बनाकर के मिड डे मील में डलवा दें ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: बीच में नहीं बोलें ...(व्यवधान) आप बैठें।
श्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी (राज्य मंत्री, कृषि): अब बारां की बात कर रहे हैं, बारां की सुन लें आप ...(व्यवधान)
श्री श्रवणकुमार (पिलानी): आंवले का पाउडर बनाकर के मिड डे मील में डलवा दें ...(व्यवधान)
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय कृषि राज्य मंत्री जी आप विवेक से जवाब दें। हालांकि 12 बजे के आसपास प्रश्न किया है। मगर आप विवेक नहीं खोयें ...(व्यवधान)
श्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी (राज्य मंत्री, कृषि): बैठ जायें आराम सें, आपके बज जायेंगे ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: बहुत महत्वपूर्ण सवाल है, किसानों की बात है ...(व्यवधान)
श्री श्रवणकुमार (पिलानी): माननीय मंत्री जी, आप ऐसा करो, मंडी तो नहीं लगा सकते लेकिन इसका पाउडर बनवा लें और उसको मिड डे मील में डलवा दें तो बच्चे खायेंगे और क्या करेंगे ...(व्यवधान)
श्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी (राज्य मंत्री, कृषि): अध्यक्ष महोदय, बारां में हमने जो मंडी स्थापित की है ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: स्थान ग्रहण कर लें, राजसमंद से आने वाले माननीय सदस्य, हर बार खड़े हो जाते हैं आप, मैं कह रही हूं बैठ जायें ...(व्यवधान) बैठिये आप।
श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्द): मैं तब का ही हाथ खड़ा कर रहा हूं ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: सुनिये, मंत्री जी क्या कह रहे हैं, हाथ उठाने से कुछ नहीं होता है ...(व्यवधान)
श्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी (राज्य मंत्री, कृषि): अध्यक्ष महोदय, बारां में हमने इसी बजट में फल-सब्जी मंडी की घोषणा की है और वहां फल-सब्जी मंडी के लाइसेंस जारी हो चुके हैं और उनके माध्यम से आंवले की खरीद का काम भी शुरू हो जायेगा। इसके साथ-साथ बारां में हमने प्रोसेसिंग के लिए एक किसान को सब्सिडी दी, वह जगदीश नाम का है, अलीपुर पंचायत समिति, अंता में, इसने मुरब्बा बनाने का काम शुरू किया और इसका मुरब्बा 60 रूपये किलो तक बिक रहा है। ऐसे एक नहीं है, उदयपुर में हेमराज, भिंडर पंचायत समिति में कल्याण कृषि फार्म, धरियावद प्रियंका नाम की महिला ने और इसी प्रकार कैलाश चौधरी, कीर्तिपुरा, जयपुर में, इसी प्रकार पवन पुत्र नर्सरी सीकर में जो हजारों क्विंटल पैदावार करने लग गये हैं। इसी तरह एक प्रोजेक्ट हम लाये हैं उसमें महिला समूह हम बना रहे हैं। उसमें महिलाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं, दस हजार फंड दे रहे हैं, वह भी आंवले का मुरब्बा बनायें, जूस बनायें, तेल बनायें, पाउडर बनाये। हम गंभीरता से इसके लिए प्रयास कर रहे हैं और इस संबंध में पूरा प्रबंध करेंगे ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: मूल प्रश्नकर्ता पूछेंगे, आप बिराजें, स्थान ग्रहण कर लें। मूल प्रश्नकर्ता हेमराज मीणा।
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अध्यक्ष महोदय, मेरा तो सवाल यह था कि ...(व्यवधान)
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): अध्यक्ष महोदय, अब यह स्वाद आंवले का मुंह में आ गया। इन्होंने इतनी सारी चीजें बता दी, अब कैसे बैठे रहें चुपचाप ...(व्यवधान)
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): आंवला किसके काम में आयेगा और आंवला किस-किस उपयोग में आयेगा यह तो बता दिया लेकिन मार्केटिंग की व्यवस्था के बारे में कुछ नहीं बताया है। अभी तो मंडियों में कोई काम शुरू ही नहीं हुआ है ...(व्यवधान) मार्केटिंग की कोई व्यवस्था अभी तक नहीं हुई है ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: कहा है ना, मंडियां खोल रहे हैं ...(व्यवधान)
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): काश्तकार का जो आंवला है वह बेचेगा कहां ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: मंडियों में खरीदेंगे कहा है ना ...(व्यवधान)
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): डेढ़-डेढ़ रूपये किलो बेचने के लिए मजबूर हैं। हजारों बीघा जमीन में आंवले की पौध लगी हुई है और लगातार प्रोडक्शन आ रहा है। इसकी मार्केटिंग की उचित व्यवस्था ही माननीय मंत्री जी ने अभी तक नहीं की है ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप सुनते तो हो नहीं मंत्री जी को और खड़े हो जाते हो ...(व्यवधान)
श्री अमराराम (धोद): अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि क्या आंवला पैदा करने वाले किसानों का आंवला खरीदने का सरकार इरादा रखती है तथा क्या कीमत उन्होंने तय की है और कब तक खरीदेंगे, यह बता दें।
श्री अध्यक्ष: कीमत अभी तय नहीं की है।
श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्द): अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न है मंत्री महोदय से कि राजसमंद जिले को बागवानी मिशन से जोड़ने का विचार रखते हैं, यदि रखते हैं तो कब तक। बागवानी मिशन इससे ही संबंधित है ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: कृपया शांत रहें। मंत्री जी को सुनें ...(व्यवधान) कृपया मंत्री जी को सुनें ...(व्यवधान)
श्री रामलाल शर्मा (चौमूं): अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री जी एक मिनट, मैं माननीय मुख्यमंत्री जी से यह जानना चाहूंगा कि आंवलों के फार्म हाउस को विकसित करने के लिए आपने यह तय किया है कि हमारे अधिकारी/कर्मचारी आंवले के विकसित ग्राफटेड पेड़ तैयार करायें।
jyg/usc/3.4.7/12.00/1g
माननीय
अध्यक्ष महोदय, एक हजार ग्राफ्टेड
पेड़ देने थे, उनकी
जगह दो सौ ग्राफ्टेड
पेड़ दिए और आठ
सौ फर्जी पेड़
दिए जिन पर आंवले
नहीं लगते और लगते
भी हैं तो बहुत
छोटे। क्या माननीय
मंत्रीजी, इसकी
जांच करवाने का
आश्वासन देंगे?
श्री
सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी (राज्य
मंत्री, कृषि):
सम्माननीय अध्यक्षजी,
जहां तक आंवले
के उत्पादन की
खपत करने की बात
है, मार्केटिंग
की बात है, डाबर
कम्पनी और वैद्यनाथ
कम्पनी से हमारी
बातचीत चल रही
है और उनको हमने
इन्वाइट किया
है कि आप यहां आकर
राजस्थान में
आंवला खरीदें और
जो सुविधाएं आप
चाहते हैं वह हम
आपको सरकार से
दिलवाएंगे। इसी
तरह से मैसर्स
जैन इर्रिगेशन,
जलगांव से भी हमारी
बातचीत हो चुकी
है, उन्होंने
हमसे कहा है कि
अगली बार से हम
उत्पादन जितना
है उसके अंदर खरीद
शुरू करेंगे।
...(व्यवधान)... इसी
तरह से जो मैंने
आपको कहा, पैक हाउस
बनाएंगे ...(व्यवधान)...
।
श्री
रामप्रताप कासनिया
(पीलीबंगा): माननीय
अध्यक्ष महोदय, कोई गिड़गिड़ाने
से खरीद करने वाला
नहीं है, क्या
सरकार यह विचार
रखती है ...(व्यवधान)...
।
श्री
अध्यक्ष: प्रश्न
काल समाप्त हुआ।
...(व्यवधान)... प्रश्न
काल समाप्त हुआ,
माननीय सदस्यगण,
स्थान ग्रहण करें।
...(व्यवधान)... माननीय
मंत्रीजी, आप भी
स्थान ग्रहण करें।
...(व्यवधान)...
शोकाभिव्यक्ति
माननीय
सदस्यगण,
शोकाभिव्यक्ति
के इस अवसर पर मैं
हाल ही में दिवंगत
हुए इस विधान सभा
के पूर्व सदस्य
श्री भोमाराम चौधरी
एवं श्री चन्द्रवीर
सिंह भाटी के प्रति
संवेदना व्यक्त
करते हुए यह शोक
प्रस्ताव प्रस्तुत
करती हूं।
पूर्व
विधायक श्री भोमाराम
चौधरी का जन्म
नागौर जिले के
विजयपुरा बैरी
कलां ग्राम में
हुआ। श्री चौधरी
लगभग 80 वर्ष के थे।
आपने उच्च प्राथमिक
स्तर तक शिक्षा
प्राप्त की।
श्री
चौधरी पांचवी राजस्थान
विधान सभा के लिए
डीडवाना निर्वाचन
क्षेत्र से स्वतंत्र
पार्टी के विधायक
निर्वाचित हुए।
विधान सभा के कार्यकाल
के दौरान आप सरकारी
आश्वासनों सम्बन्धी
समिति के सदस्य
रहे। विधान सभा
में आप अपने निर्वाचन
क्षेत्र की समस्याओं
के समाधान के लिए
सदैव प्रयत्नशील
रहे।
आप वर्ष
1941 में सेना में भर्ती
हुए तथा आपने वर्ष
1952 में सैन्य सेवा
से अवकाश ग्रहण
किया। श्री चौधरी
वर्ष 1960 में ग्राम
पंचायत, डावडा
के सरपंच तथा वर्ष
1999 से 2004 तक डीडवाना
पंचायत समिति के
प्रधान रहे। समाज
सेवा में विशेष
रुचि रखने वाले
श्री चौधरी जनता
मोर्चा से भी जुड़े
रहे।
श्री
भोमाराम चौधरी
का दिनांक 30 मार्च,
2007 को निधन हो गया।
पूर्व
विधायक श्री चन्द्रवीर
सिंह भाटी का जन्म
30 मार्च, 1949 को जैसलमेर
में हुआ। आपने
अजमेर के मेयो
कॉलेज तथा गवर्नमेंट
कॉलेज में अध्ययन
किया।
श्री
भाटी वर्ष 1980 में
सातवीं राजस्थान
विधान सभा के लिए
जैसलमेर निर्वाचन
क्षेत्र से भारतीय
जनता पार्टी के
विधायक निर्वाचित
हुए। विधान सभा
में आप अपने क्षेत्र
के विकास के लिए
निरन्तर प्रयत्नशील
रहे। आप पुस्तकालय
समिति तथा याचिका
समिति के सदस्य
रहे। समाज सेवा
में रुचि रखने
वाले श्री भाटी
पंचायत राज एवं
सामुदायिक विकास,
भू-जल, अन्त्योदय,
राष्ट्रीय ग्रामीण
रोजगार कार्यक्रम
और सैनिक कल्याण
विभागों की संसदीय
परामर्शदात्री
समिति के सदस्य
रहे।
श्री
भाटी अपने सार्वजनिक
जीवन में जैसलमेर
मास्टर प्लान
परामर्शदात्री
समिति, जिला ग्रामीण
विकास अभिकरण में
सूखा सम्भाव्य
क्षेत्र परियोजना
क्रियान्वयन
समिति तथा लघु
एवं मध्यम कस्बों
के एकीकृत विकास
कार्यक्रम हेतु
गठित मोनिटरिंग
कमेटी के सदस्य
रहे।
अजमेर
क्लब के सदस्य
रहे श्री भाटी
संगीत, स्वीमिंग,
बिलियर्ड, घुड़सवारी,
स्क्वैश और क्रिकेट
में भी काफी रुचि
रखते थे।
श्री
चन्द्रवीर सिंह
भाटी का दिनांक
31 मार्च, 2007 को निधन
हो गया।
मैं, दिवंगत
व्यक्तियों को
अपनी ओर से तथा
इस सदन के सभी माननीय
सदस्यों की ओर
से श्रद्धांजलि
अर्पित करती हूं
तथा ईश्वर से
प्रार्थना करती
हूं कि दिवंगतों
की आत्मा को शांति
प्रदान करे तथा
उनके शोक संतप्त
परिजनों को उनका
बिछोह सहन करने
की शक्ति दे।
माननीय
सदस्यगण कृपया
दो मिनट मौन खड़े
रहकर दिवंगतों
की आत्माओं की
शांति के लिए प्रार्थना
करें।
(तदनन्तर
सदन ने दो मिनट
मौन खड़े रहकर
दिवंगत आत्माओं
की शांति के लिए
प्रार्थना की।)
ओम शांति,
शांति, शांति।
सदन की
कार्यवाही दस मिनट
के लिए अर्थात्
बारह बजकर बीस
मिनट तक के लिए
स्थगित की जाती
है।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 12.05 बजे,
12.20 बजे तक के लिए
स्थगित हुई।)
Gpc/akt/
03042007/1220/1j
(पुन: समवेत
होने पर)
(12.20 बजे)
(श्रीमती
सुमित्रा सिंह,
अध्यक्ष, पदासीन)
श्री अध्यक्ष: मैं प्रक्रिया और कार्यसंचालन नियमावली के नियम 307 के अंतर्गत अपने विशेष अधिकार का प्रयोग करते हुए आज जीरो ऑवर सस्पेंड कर रही हूं, लेकिन मैं माननीय सदस्यों को इस बात का विश्वास दिला रही हूं कि प्रक्रिया के नियम 295 के अंतर्गत जितनी भी सूचनाएं प्राप्त हुई हैं वे सूचनाएं अब तक जितनी यहां पेण्डिंग हैं सारी की सारी सरकार को भिजवा रही हूं और उन सबका जवाब माननीय सदस्यों को मिल जाएगा।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): पढ़ा हुआ मान लो आप।
श्री अध्यक्ष: यहां पढा हुआ मान लिया गया इसीलिए भिजवा रही हूं, राज्य सरकार को भिजवा रही हूं, राज्य सरकार उन सबका समय पर जवाब दे देगी, भिजवा देगी।
मैं इसके साथ ही साथ माननीय सदस्यों को यहं भी निवेदन करना चाहूंगी कि राष्ट्रपतिजी जब आये थे तो वे अपना एक मैसेज देकर गये थे और उन्होंने कहा था कि इस मैसेज को आप विधान सभा में पढ़कर सुनाना, क्योंकि वह सब माननीय सदस्यों को एड्रेस्ड है। उन्होंने कहा था, वह अभी कहां है? ..(व्यवधान).. मेरे आफिस में है, अभी आ रहा है, आप मंगवा लो। ..(व्यवधान).. वह मैं आपको पढ़कर सुनाऊंगी उससे पूर्व अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखें। श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ।
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्यक्ष महोदय, मैंने एक प्रस्ताव दिया था। उस स्थगन प्रस्ताव के बारे में आपने कोई व्यवस्था नहीं दी है।
सदन की मेज
पर रखे गये पत्र
अधिसूचनाएं
ऊर्जा विभाग
की आठ अधिसूचनाएं
श्री गजेन्द्र सिंह (राज्य मंत्री, ऊर्जा): अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से कार्यसूची में किये गये उल्लेख के अनुसार ऊर्जा विभाग की आठ अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखता हूं।
1. अधिसूचना संख्या-राविविआ/सचिव/विनि.54 दिनांक 2.9.2006 जिसके द्वारा राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (विद्युत प्रदाय कोड और संबंधित मामले) (पंचम् संशोधन) विनियम, 2006 विरचित किये गये है ।
2. अधिसूचना संख्या-राविविआ/सचिव/रेगु./55 दिनांक 12.1.2007 जिसके द्वारा राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (अनुज्ञप्ति की शर्तें) विनियम, 2004 (द्वितीय संशोधन) विरचित किये गये है ।
3. अधिसूचना संख्या-राविविआ/सचिव/विनियम/56 दिनांक 20.11.2006 जिसके द्वारा राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (वितरण अनुज्ञापत्रधारी की ऊर्जा क्रय तथा अधिप्राप्ति प्रक्रिया)(प्रथम संशोधन) विनियम, 2006 विरचित किये गये है ।
4. अधिसूचना संख्या-राविविआ/सचिव/विनि./57 दिनांक 21.11.2006 जिसके द्वारा राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (टैरिफ निर्धारण हेतु निबन्धन व शर्तें) (तृतीय संशोधन) विनियम, 2006 विरचित किये गये है ।
5. अधिसूचना संख्या-राविविआ/सचिव/विनियम/58 दिनांक 27.12.2006 जिसके द्वारा राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (खुले अभिगमन हेतु निबन्धन व शर्तें) (तृतीय संशोधन) विनियम, 2006 विरचित किये गये है ।
6. अधिसूचना संख्या-राविविआ/सचिव/विनि./59 दिनांक 12.1.2007 जिसके द्वारा राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (याचिकाओं हेतु शुल्क) विनियम, 2005 (तृतीय संशोधन) विरचित किये गये है ।
7. अधिसूचना संख्या-राविविआ/सचिव/विनि./60 दिनांक 17.1.2007 जिसके द्वारा राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (राज्य भार प्रषण केन्द्र द्वारा शुल्कों एवं प्रभारों का उदग्रहण) (द्वितीय संशोधन) विनियम, 2007 विरचित किये गये है ।
8. अधिसूचना संख्या-राविविआ/सचिव/विनि./61 दिनांक 22.1.2007 जिसके द्वारा राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (विद्युत प्रदाय कोड और संबंधित मामलें) (षष्ठम् संशोधन) विनियम, 2007 विरचित किये गये है ।
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने स्थगन प्रस्ताव के बारे में कोई व्यवस्था नहीं दी, 295 की व्यवस्था दी है। जबकि आरक्षण का मसला है, पूरे राजस्थान की पिछड़ी जाति ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष: स्थगन प्रस्ताव के बारे में ..(व्यवधान).. माननीय सदस्य, आप पहले विराजिए। जब मैंने यह कह दिया कि मैं अपने विशेष अधिकारों का नियम 307 में प्रयोग करते हुए आज जीरो ऑवर को सस्पेंड करती हूं उसमें सब बात आ गई। ..(व्यवधान).. अब क्या?
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप बैठें तो मैं बोलूं। आप स्थगन प्रस्ताव का भी कह दें कि मैं राज्य सरकार को भेज रही हूं। 295 जैसे राज्य सरकार को भेजा है।
श्री अध्यक्ष: 295 को भेज रही हूं।
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): स्थगन प्रस्ताव भी भेजिए आप।
श्री अध्यक्ष: भेज रही हूं।
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): उसके बारे में आपने कोई व्यवस्था नहीं दी जबकि यह पिछड़ी जाति का मामला है। राजस्थान की पिछड़ी जाति उद्वेलित है। सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आया है, उनके अधिकारों का हनन हो रहा है।
श्री अध्यक्ष: अब आप अधिकारों के हनन की बात छोडि़ए। जितने स्थगन प्रस्ताव आज पेश हुए हैं उनको भी मैं राज्य सरकार को भिजवा देती हूं।
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): पढ़कर तो सुना दीजिए कौन-कौनसे हैं? ..(व्यवधान)..
श्री रिछपालसिंह मिर्धा (डेगाना): मंदिर की जमीन पर ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष: वह जीरो ऑवर का थोड़े ही है। आपकी जो व्यवस्था की बात है 127 में दिया है।
श्री रिछपालसिंह मिर्धा (डेगाना): 131 में।
श्री अध्यक्ष: 131 का आप चेम्बर में बात करिएगा। वेश्म में आकर बात करिएगा।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): वह राज्य सरकार के पास भेज दो।
श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्दा): माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे पर्ची के माध्यम से बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न लगे हैं। मैं अनुरोध करूंगा पर्ची के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री जब कोटड़ा पधारे थे ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष: आसन पांवों पर है और आप बात कर रहे हैं। पर्चियों को भी भिजवा दूगी। जो पर्चियां हैं उन सबको राज्य सरकार को भिजवा दूंगी। ..(व्यवधान)..
उन्होंने हिन्दी और इंग्लिश दोनों में दिया है। कौनसे में पढ़कर सुनाऊं।
अनेक माननीय सदस्य: हिन्दी में।
संदेश
महामहिम
राष्ट्रपति का
राजस्थानवासियों
के लिए संदेश
श्री अध्यक्ष: राजस्थान के लिए संकल्पना
‘’सुन्दर परिवेश में सद्विचार जन्म लेते हैं।
सद्विचारों से सृजनात्मकता जन्म लेती है’’
राजस्थान के 58वें स्थापना दिवस के अवसर पर राजस्थान की समृद्धि के बारे में अपने विचार आपके साथ बांटते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। काव्यात्मक भाषा में राजस्थान को भारत को कोहेनूर कहा जाता है। वर्ष 1949 में राजस्थान राज्य बना, तबसे यह निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। आप सबके माध्यम से मैं सम्पूर्ण राजस्थानवासियों को एक गौरवमय भविष्य के लिए अपनी शुभ कामनाएं प्रेषित करता हूं।
राजस्थान और मैं
मैं, राजस्थान राज्य में चहुंमुखी खुशहाली और समृद्धि लाने के मिशन में आपकी सफलता की कामना करता हूं। आज जबकि आप सब राजस्थान राज्य का स्थापना दिवस मना रहे हैं, मुझे भी राजस्थानवासियों के साथ मेरे संबंध और काम करने का अनुभव याद आ रहा है। राष्ट्रपति का पदभार सम्भालने के बाद मैंने ग्रामीण इलाकों सहित राजस्थान की पाँच यात्राएं की हैं। इन यात्राओं में मुझे राजस्थान की संस्कृति, कला, इतिहास और इन सबसे अधिक राजस्थानियों की उदारता देखने को मिली। इस मौके पर राजस्थान के साथ अपने बहुत निकट संबंध दर्शाने वाली एक घटना मुझे याद हो आई है। इस क्षेत्र में मेरा वह एक अविस्मरणीय अनुभव था। उन दिनों मैं रक्षा मंत्री का वैज्ञानिक सलाहकार था। उन दस वर्षों के दौरान मैंने अपना सर्वाधिक समय इसी क्षेत्र में व्यतीत किया था। यह राजस्थान का मरुस्थल क्षेत्र पोखरण था। यह क्षेत्र मेरी, मेरे दल तथा परमाणु ऊर्जा विभाग के वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकीविदों की कर्मभूमि था। हमने इस क्षेत्र में लगातार कई महीनों तक, विशेषकर मई के महीने में जब दोपहर में तापमान 53 डिग्री सेलसियस से भी अधिक हो जाता था, दिन-रात अथक कार्य किया था। परन्तु हमें इतनी अधिक गर्मी का अहसास भी नहीं हुआ क्योंकि हम सभी पूर्ण निष्ठा से एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मिशन पर कार्य कर रहे थे। 11 और 13 मई, 1998 को हमारा मिशन पूरा हुआ था। मिशन की सफलता के साथ ही हमारा देश एक परमाणु अस्त्र सम्पन्न राज्य बन गया था। राजस्थानवासी बहुत वर्षों तक हमारे इस मिशन में हमें सहयोग देते रहे थे और वे इस मिशन के विभिन्न चरणों में हमारे बहुत उपयोगी साथी थे। इन्हें उस समय यह मालूम नहीं था कि हम क्या काम कर रहे हैं, पर वे यह जरूर जानते थे कि हम किसी महत्वपूर्ण और उपयोगी मिशन पर कार्य कर रहे थे। इसलिए उन्होंने इस विषय पर चुप्पी साधे रखी। मिशन के सफल निष्पादन के लिए यह समय की मांग भी थी। इस दौरान मुझे राजस्थान के मरुस्थल में पूर्णिमा की अनेक रातें देखने का अवसर मिला था। वे रातें विशेष खूबसूरत थी जब चमकती रेत पर पूरे चाँद की किरणें पड़ती और कहीं-कहीं पर हिरनों के झुण्ड भी दिखाई देते थे, वे दृश्य बहुत मनोरम होते थे।
राजस्थान
के लिए संकल्पना
प्रिय विधायको, गत 58 वर्षों से आप सभी एक साथ मिलकर लगातार राजस्थान की समृद्धि और खुशहाली के लिए अपना योगदान दे रहे हैं। मैं सोच रहा था कि इस विशेष अवसर पर मैं आपके साथ किस विषय पर चर्चा करूं। राजस्थान में 40,000 गांव हैं और इसकी 75 प्रतिशत जनसंख्या गांवों में रहती है। इसलिए राज्य के विकास के लिए बहुत जरूरी है कि इन 40,000 गांवों का विकास और उन्नयन हो। यह विकास कृषि, निर्माण और सेवा क्षेत्र तथा शहरी विकास के अलावा राज्य में ‘पुरा’ योजना (ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं उपलब्ध करवाना) के तहत 450 पुरा ग्रामीण समूह स्थापित करके किया जा सकता है। आइए मैं आपको बताऊं कि मैंने वर्ष 2017 में कैसे राजस्थान की संकल्पना की है?
1 राज्य में गरीबी रेखा के नीचे रह रहे लोगों की वर्तमान 16 प्रतिशत संख्या लगभग शून्य हो जाएगी और समृद्धि का आविर्भाव होगा।
2 राज्य की प्रति व्यक्ति आय रुपये 17500 से बढ़कर रुपये 75000 तक हो जाएगी।
3 शिशु मृत्यु दर वर्तमान 67 प्रति हजार शिशु से घटकर केवल 10 प्रति हजार रह जाएगी। राज्य पानी से होने वाली बीमारियों से मुक्त हो जाएगा और सभी नागरिकों को उच्च स्तरीय सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
4 वर्तमान 62 प्रतिशत साक्षरता दर बढ़कर शत प्रतिशत हो जाएगी और मानव विकास इण्डेक्स 5 प्रतिशत से भी कम हो जाएगा।
5 सभी राजस्थानवासी खासकर महिलाओं को अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजगार क्षमताओं से सशक्त बनाया जाएगा।
राजस्थान में विशाल भूभाग, प्राकृतिक संसाधन जैसे खनिज व पदार्थ प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। यहां पर्यटन आकर्षण के बहुत से स्थान हैं और यहां सूखे जैसी घोर प्राकृतिक विपदा का भी सामना करने वाले दृढ़ इच्छा और साहस से युक्त पारम्परिक बहादुर लोग भी हैं। इंदिरा गांधी नहर वास्तव में राजस्थान को प्राप्त एक बेहतर जल संसाधन है और वाष्पीकरण से बचाने के लिए इसे पाइपों और सीमेंट से बनायी गयी नहर के जरिये जल के परिवहन के संयोजन से और बढ़ाया जाना है।
मोहन/अरूण/अशोधित
प्रति प्रकाशनार्थ
नहीं/03042007/1230/1k
विश्वभर
में यह माना जाता
है कि सभी रेगिस्तानी
क्षेत्र तेल व
गैस प्राकृतिक
संसाधनों से सम्पन्न
हैं और हमें उनका
पूरी तरह अन्वेषण
और विदोहन करना
चाहिए। राज्य
में लिग्नाइट
की उपलब्धता से विद्युत
शक्ति में और अधिक
वृद्धि होगी। इन
सभी संसाधनों में
राजस्थान को
2017 से पहले ही एक समृद्ध
राज्य बनाने की
क्षमता है1 अब समय
है जब राजस्थान
को एक दस वर्षीय
संकल्पना बनानी
चाहिए ताकि राजस्थान
के लोग राज्य
के विकास मिशनों
पर ध्यान दे सकें
और उनके लिए कार्य
कर सकें। राजस्थान
के लोग वास्तव
में ऐसी चुनौतियों
की प्रतीक्षा कर
रहे हैं। प्रिय
विधायकों, आपके
लिए यह एक महान
अवसर है कि आप अपनी
समझ, अनुभव और दूरदर्शिता
से राज्य के लिए
एक दीर्घकालिक
संकल्पना तैयार
करने हेतु एक दल
के रूप में कार्य
कर उस संकल्पना
को समबद्ध तरीके
से साकार करने
के लिए नेतृत्व
प्रदान करें। आइए,
अब मिल कर जानें
कि पुरा मिशन क्या
है।
पुरा मिशन
पुरा
समूहों (ग्रामीण
क्षेत्रों में
शहरी सुविधाएं
उपलब्ध करवाना)
का निर्माण राष्ट्रीय
विकास के महत्वपूर्ण
घटकों में से एक
है। पुरा में ग्रामीण
भारत में समृद्धि
लाने के लिए समेकित
संयोजन की संकल्पना
की गयी है। ये हैं
– बेहतर
सड़कों व परिवहन
के माध्यम से
ग्राम समूहों का
भौगोलिक संयोजन,
नगरों से ग्रामीण
क्षेत्रों तक पहुंचने
वाली उच्च वैंडविड्थ
फाइबल ऑप्टिक तार
युक्त दूरसंचार
और इंटरनेट कियोस्क
के माध्यम से
विद्युत संयोजन,
और किसानों, कारीगरों
व हस्तशिल्पियों
के लिए शिक्षा,
व्यावसायिक प्रशिक्षण
और उद्यमिता कार्यक्रमों
के माध्यम से
ज्ञान संयोजन।
इन तीन संयोजनों
और बैंकों, लघु
ऋणों और उत्पादों
के विपणन की सहायता
से स्थापित उद्यमों
से आर्थिक संयोजन
हो पाएगा।
प्रत्येक
पुरा समूह रेगिस्तान
क्षेत्र में लगभग
एक लाख आबादी वाले
50 से 100 गांवों को
जोड़ेगा। इसके
लिए धन निजी क्षेत्र
की भागीदारी के
अलावा भारत निर्माण
कार्यक्रम और राज्य
विकास कार्यक्रमों
से आएगा। निर्माण
आदि के दौरान शुरुआती
अल्पकालिक रोजगार
के बाद हमें पुरा
समूह के सभी रोजगार
योग्य लोगों के
लिए कृषि प्रसंस्करण,
विनिर्माण और सेवा
क्षेत्रों में
राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय
उद्यमों के अंतर्गत
नियमित और स्वरोजगार
के अवसर प्रदान
करने हेतु कार्य
शुरू करने की योजना
बनानी चाहिए। पुरा
कार्यक्रम ग्रामीण
क्षेत्रों में
सतत आर्थिक विकास
प्रदान करेगा।
पुरा
प्रणाली द्वारा
सृजित ग्रामीण
समृद्धि के अलावा,
परमाणु ऊर्जा संयंत्रों
द्वारा उत्पन्न
क्षमता के अतिरिक्त,
नवीन और अक्षय
ऊर्जा मंत्रालय
की सहायता से 2000 मेगावाट
लिग्नाइट आधारित
ऊर्जा संयंत्रों,
1000 मेगावाट पवन ऊर्जा
कार्यों और 1000 मेगावाट
सौर तापीय विद्युत
संयंत्रों से राजस्थान
अधिक विद्युत उत्पादन
वाला राज्य बन
जाएगा। यह विशेषकर
जस्ता, सीसे, स्वर्ण
और अन्य दुर्लभ
धातुओं के खान
में एक अग्रणी
राज्य बन जाएगा।
राजस्थान प्रतिवर्ष
देश को एक करोड़
टन कच्चे तेल
का योगदान देगा।
राजस्थान सबसे
आकर्षक पर्यटक
गंतव्य स्थल
बन जाएगा। राज्य
सूचना प्रौद्योगिकी,
सूचना प्रौद्योगिकी
सहायक सेवाओं और
बी.पी.ओ. क्षेत्रों
में उद्योगों के
विकास के लिए एक
अनुकूल वातावरण
प्रदान करेगा।
राज्य में पूर्ण
पारदर्शी नागरिक
केन्द्रित प्रशासनिक
प्रणाली की दिशा
में कार्य करने
वाली शासन प्रणाली
होगी। राज्य देश
का एक आदर्श राज्य
होगा।
निष्कर्ष
राजस्थान
की समृद्धि के
लिए मिलकर कार्य
कर सकने वाले छह
करोड़ लोगों की
संख्या राजस्थान
की मुख्य विशेषता
है। समाज को प्रौद्योगिकी,
ज्ञान और कौशल
के साथ संगठित
करने, उसे नैतिक
मूल्य प्रणाली
और विरासत के साथ
जोड़ने और राज्य
के लोगों, विशेषकर
तीन करोड़ युवाओं
को विकास की प्रक्रिया
के साथ जोड़ने
में विधायकों की
सक्षमता निश्चित
रूप से राजस्थान
को समृद्ध बनाएगी।
ऐसा करते समय राजस्थान
को जल प्रबंधन
से संबंधित विशेष
पहलुओं को ध्यान
में रखना होगा
ताकि हम जल के वाष्पीकरण
के प्रभाव को कम
कर सकें और जल की
उत्पादक उपलब्धता
बढ़ा सकें। सइके
साथ साथ राजस्थान
को शुष्क कृषि
और बागवानी क्षेत्र
प्रौद्योगिकी
के विकास में अग्रणी
बनना चाहिए। परिवहन,
आवास, पर्यटन आतिथ्य,
अनुसंधान आधारित
पर्यटक मार्गदर्शन
उपलब्ध करवाकर
तथा राज्य की
प्रमुख क्षमता
प्रदर्शित करने
वाले विशेष हस्त
निर्मित शिल्प
की व्यवस्था
के माध्यम से
पर्यटन विकास किया
जा सकता है। ऐसे
समन्वित कार्य
सुनिश्चित करेंगे
कि राजस्थान में
शहरी क्षेत्रों
जैसी आर्थिक उपलब्धता
और ग्रामीण क्षेत्रों
जैसा शांतमय जीवन
होगा तथा दोनों
क्षेत्र बहुत ही
समृद्ध होंगे।
राजस्थान के प्रत्येक
नागरिक को, चाहे
वह किसी व्यवसाय,
आयु, विशेषज्ञता
या राजनीतिक विचारधारा
से संबंधित हो,
राजस्थान को देश
का सबसे समृद्ध
राज्य बनाने के
मिशन में योगदान
देने योग्य बनना
चाहिए। अब, मैं
राजस्थान वासियों
को एक सात सूत्री
शपथ दिलाना चाहूंगा।
58वें स्थापना
दिवस के अवसर पर
राजस्थानवासियों
के लिए शपथ :
3.
मैं स्वास्थ्य
और समृद्धि के
लिए अपना परिवार
छोटा रखूंगा।
4. आज
से मैं कम से कम
पांच निरक्षर लोगों
को लिखना और पढ़ना
सिखाऊंगा।
5. पानी
हमारी सम्पति
है, मैं पानी की
हरेक बूंद की बचत
करूंगा। मैं ग्रामवासियों
की सहायता से अपने
गांव के अथवा अपने
क्षेत्र के कम
से कम एक तालाब
को उपयोग में लाने
योग्य बनाऊंगा।
6. अतिथि
देवो भव ! मैं राज्य
में आने वाले पर्यटकों
की यात्रा सफल
और सुखद बनाने
के लिए पूर्ण सहयोग
दूंगा।
7. मैं
राजस्थानी संस्कृति
से प्राप्त सदाचारपूर्ण
जीवन व्यतीत करूंगा
और अपने बच्चों
का आदर्श बनूंगा।
58वें
स्थापना दिवस
के अवसर पर राजस्थान
विधान सभा के मायों
के माध्यम से
सभी राजस्थानवासियों
को मेरी बधाई और
शुभकामनाएं।
ईश्वर
की आप सब पर कृपा
रहे।
यह
था उनका संदेश।
श्री
अमराराम (धोद): मागअम
मैंने 157 में एक विशेषाधिकार
हनन 23 तारीख को आपके
सम्मुख रखा था।
श्री
अध्यक्ष: वह मैंने
आपको कहा था न कि
आप गृह मंत्री
जी को और आपकी आमने
सामने बातचीत कराऊंगी।
श्री
अमराराम (धोद): नहीं
आप रखने की इजाजत
दें। अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अध्यक्ष: नहीं
तो, मैंने कह दिया
न आपको।
श्री
अमराराम (धोद): मैंने
आपके सामने उस
समय 18 अक्टूबर
को रखा था। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: नहीं
तो, कल भी गृह मंत्री
जी मिले नहीं थे
मुझे। ...(व्यवधान)...
श्री
महावीर प्रसाद
जैन (मुख्य सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, विशेषाधिकार
के मामले में जब
तक आप स्वयं कोई
निर्णय नहीं करें
तब तक आपकी बिना
अनुमति के उठाया
नहीं जा सकता।
श्री
अध्यक्ष: नहीं,
वह मैंने कह दिया
इनको। ...(व्यवधान)...
श्री
अमराराम (धोद): अध्यक्ष
महोदय, आप मुझे
रखने की इजाजत
दें। गृह मंत्री
जी, जवाब देंगे
जो भी तथ्य उसमें।
श्री
अध्यक्ष: मैं
अपने चैम्बर के
अन्दर और उनको
दोनों को बुलाकर
और बात करूंगी।
श्री
अमराराम (धोद): नहीं,
अध्यक्ष महोदय, आपके
चैम्बर में नहीं,
हाउस में रखने
के लिए मैंने दिया
है, आप अगर सहमति
दें तो मैं आपके
समक्ष रख दूं, गृह
मंत्री जी भी अपना
वक्तव्य दे देंगे।
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: ऐसा
है, विशेषाधिकार
पर ऐसे थोड़े ही
चर्चा होती है
उसको तो पहले मैं
फैसला करूंगी,
विशेषाधिकार बनता
है कि नहीं बनता
है तब जाकर होगी
चर्चा उस पर, ऐसे
थोड़े ही हो जाएगी।
श्री
अमराराम (धोद): नहीं,
पेश तो करने दें।
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: तो बुलाकर
बात करूंगी न दोनों
को, माननीय प्रतिपक्ष
के नेता। ...(व्यवधान)...
डा.
सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):
अध्यक्ष महोदय, आप
बिठा कर चर्चा
कर लें फिर आपको
लगे तो रखवा दें।
...(व्यवधान)...
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, हाउस में
इस पर चर्चा हो
हुई थी उस रोज आपकी
चर्चा हुई थी।
...(व्यवधान)...
श्री
रामप्रताप कासनिया
(पीलीबंगा): यह हाईलाइट
का मामला है, बाकी
कोई विशेषाधिकार
के हनन की बात नहीं
नहीं है। ...(व्यवधान)...
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
तो माननीय सदस्य
को चार घंटे थाने
में बिठाये रखा
तो उस रोज आपने
कह दिया था कि मेरे
चैम्बर में आकर
के गृह मंत्री
और इनकी बात करा
दूंगी, आज उस बात
को तो काफी टाइम
हो गया। उसके बाद
तो आप पाकिस्तान
जाकर भी आ गई हैं,
हफ्ता भी उस बात
को गुजर गया, होम
मिनिस्टर भी यहीं
रहते हैं, आप भी
यहीं रहते हैं
तो बात करके इसका
कोई हल निकालें
तो फिर इनको मूव
करने दीजिए।
श्री
अध्यक्ष: जब गृह
मंत्री जी यहां
होते हैं तो यह
नहीं होते हैं
और जब यह यहां होते
हैं तो वह नहीं
होते हैं, क्या
करूं ? ...(व्यवधान)...
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
दोनों और आप सब
होते हो यहां।
...(व्यवधान)...
श्री
रामप्रताप कासनिया
(पीलीबंगा): अध्यक्ष
महोदय, हाईलाइट
करने की बात है,
परमिशन दे दें।
...(व्यवधान)...
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
अध्यक्ष महोदय, कालेज
टीचर्स एसोशिएशन
के लोग भारी संख्या
में बाहर आए हुए
हैं, आज जीरो ऑवर
है नहीं, उन्हें
भी बुला कर माननीय
शिक्षा मंत्री
जी को बात करनी
चाहिए और उनकी
जो वाजिब समस्या
है उनका हल करना
चाहिए।
श्री
अध्यक्ष: चले
गये मंत्री जी।
श्री
घनश्याम तिवाड़ी
(शिक्षा मंत्री):
अध्यक्ष महोदय, मिल
चुका हूं उनसे
मैं। मेरे से मिल
गये हैं, मैं उनकी
समस्या से मुझे
ज्ञात है। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: श्री
गजेन्द्र सिंह,
ऊर्जा राज्य मंत्री
अधिसूचनाएं सदन
की मेज पर रखेंगे।
श्री
संयम लोढ़ा (सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं आपका
ध्यान दिलाना
चाहूंगा।
श्री
अध्यक्ष: आपका
क्या ध्यान हो
गया अब ?
श्री
संयम लोढ़ा (सिरोही):
हमने स्थगन प्रस्ताव
दिया था कि जिन्होंने
संवैधानिक प्रावधान
के अधीन मंत्री
पद की शपथ नहीं
ली है।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, आपके वैश्म
में बात हो गयी
थी, मुख्य मंत्री
जी के ध्यान में
यह सारी बात ले
आए थे।
श्री
अध्यक्ष: तो मुख्य
मंत्री जी कह देंगी,
क्या दिक्कत
है ?
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): मुख्य
मंत्री जी कह देंगी।
श्री
अध्यक्ष: कह देंगी
वह, क्या दिक्कत
आ रही है ∙?
श्री
संयम लोढ़ा (सिरोही):
जी, हां फरमाइए,
फरमाइए।
श्रीमती
वसुन्धरा राजे
(मुख्य मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आज सुबह
चर्चा के दौरान
आपने जो विषय मेरे
सामने रखा था और
जिसके ऊपर चर्चा
की थी, उसके ऊपर
मैं आपको यह बताना
चाहूंगी कि उसमें
जो भी संशोधन करने
की जरूरत होगी,
वह संशोधन अपन
करवा लेंगे, एक।
दूसरी बात हमारे
एक ध्यान में
लाया गया था, माननीय
सदस्य कुछ मिले
थे कि जो एप्रोप्रिएशन
बिल के अन्दर
हमने जो रिप्लाई
दिया था उसमें
घोषणा की थी, जो
विधायक कोष है
जिसको हमने 60 लाख
से बढ़ा कर 80 लाख
कर दिया है उसमें
हमने यह तय किया
था कि 15 लाख रुपये
पीएचईडी के लिए
विधायक कोष से
अलग से देंगे, वह
राइडर लगाया था,
अब मैं कहना चाहता
हूं हाउस के अन्दर,
उस राइडर को हम
विदड्रा कर लेते
हैं, 80 ालाख रुपये
जिस तरके से चाहें
उस तरीके से इस्तेमाल
कर सकते हैं।
श्रीमती
ममता शर्मा (बूंदी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, अभी अभी
जो आपने महामहिम
का जो पढ़ा है यहां
पर, मेरा एक सजेशन
है छोटा सा कि सभी
माननीय विधायकों
को उसकी एक एक कॉपी
मिल जाए।
श्री
अध्यक्ष: हां,
भिजवा दी जाएगी
आपको।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मेरा यह
भी निवेदन है कि
हमारी तरफ से माननीय
सदन की तरफ से आप
महामहिम राष्ट्रपति
महोदय को धन्यवाद
भी दें कि उन्होंने
राजस्थान के सुख
भविष्य की कल्पना
की है।
सुरेन्द्र/अरुण/03042007/1240/1l/1
और हमें उत्साहित किया है। हम उनके प्रेरणादायी इस पत्र से अपने आपको हर्षित और उत्साहित महसूस करते हैं।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मुख्य मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं लेकिन मुख्य मंत्री जी, संशोधन के बारे में, किसमें संशोधन करेंगी आप? आपने खाली कहा है कि संशोधन कर देंगे।
श्री अध्यक्ष: प्रभारी लिखेंगे और क्या संशोधन था। (व्यवधान)
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): जो इश्यू था कि जिसमें...
श्री अध्यक्ष: कह दो न कि आगे प्रभारी के साथ मंत्री नहीं लिखेंगे, बस खत्म हो गई। आप कह दो ना मुख्य मंत्री जी। क्या दिक्कत है उसमें?
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मैं माफी चाहता हूं. There are two issues. मुख्य मंत्री जी के नोटिस में लाये हैं, एक प्रभारी मंत्री वाला था और दैन सैकण्ड वॉज पार्लियामेंट सैक्रेटरी का। These are two issues जिनके सम्बन्ध में आप दिखवा लें।
श्रीमती वसुन्धरा राजे (मुख्य मंत्री): मैंने यही कहा कि यह जो बात हुई है अध्यक्ष महोदय के साथ, उसके ऊपर पूरी तरह से देखकर तय करके और जो संशोधन करवाने की जरूरत है वह संशोधन अपन करवा लेंगे।
श्री अध्यक्ष: नहीं तो भविष्य के अन्दर जो मंत्री नहीं हैं उसे मंत्री नहीं लिखेंगे। यह कहने में क्या आपत्ति है?
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): ..... प्रभारी बनाकर के बोर्डों के चेयरमैनों को भी भेजेंगे, संसदीय सचिवों को भी भेजेंगे। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: यह क्या बात हुई? (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): आज ही अख़बार में आया है। (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्यक्ष महोदय, अब इस चीज को फिर ओपन किया जा रहा है। आपके वैश्म में सारी बात हो गई थी और तदनुसार संशोधन कर लेंगे। अब इस इश्यू को वापस.... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): .... इनको प्रभारी बनाया जाएगा तो प्रभारी क्या है जिले में? बिना मंत्रियों के प्रभारी बन जाएंगे तो फिर अध्यक्ष महोदय, यह तो उचित नहीं है। (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्यक्ष महोदय, आपने निर्देश दे दिये, आपके निर्देशों की पालना हो जाएगी।
श्री अध्यक्ष: आसन ने दे दी न व्यवस्था। श्री वीरेन्द्र मीणा।
वित्त विभाग
की दो अधिसूचनाएं
श्री वीरेन्द्र मीणा (राज्य मंत्री, वित्त एवं करारोपण): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से निम्नांकित दो अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखता हूं:-
1. अधिसूचना संख्या-एफ.4(1)एफडी/इएक्स/2007 दिनांक 1.4.2007 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्या-एफ.4(62)एफडी/इएक्स/96 दिनांक 31.3.1997 (समय-समय पर यथा संशोधित) में संशोधन किया गया है ।
2. अधिसूचना संख्या-एफ.4(1)एफडी/इएक्स/2007 दिनांक 1.4.2007 जिसके द्वारा राजस्थान एक्साईज (ग्रांट ऑफ होटल बार/क्लब बार लाईसेंस)(एमेंडमेंट) रूल्स, 2007 विरचित किये गये है ।
प्रतिवेदन
एवं लेखे
मोहन लाल
सुखाडि़या विश्वविद्यालय,
उदयपुर का वार्षिक
प्रतिवेदन
श्री अध्यक्ष: श्री घनश्याम तिवाड़ी।
श्री घनश्याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मोहन लाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय, उदयपुर अधिनियम, 1962 की धारा 39 के अन्तर्गत मोहन लाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय, उदयपुर का वार्षिक प्रतिवेदन सदन की मेज पर रखता हूं।
राजस्थान
राज्य पथ परिवहन
निगम का अंकेक्षण
प्रतिवेदन वर्ष
2006
श्री अध्यक्ष: श्री युनुस खान, प्रतिवेदन रखें।
श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से सड़क परिवहन निगम अधिनियम, 1950 की धारा- 33(4) के अंतर्गत राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के लेखों का 31 मार्च, 2006 को समाप्त हुए वर्ष के लिए अंकेक्षण प्रतिवेदन व प्रमाण-पत्र सदन की मेज पर रखता हूं।
याचिकाओं
का उपस्थापन
श्री अध्यक्ष: याचिकाओं का उपस्थापन। श्री अशोक कुमार नवलखा।
श्री अशोक कुमार नवलखा (निम्बाहेड़ा): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से निम्नांकित याचिकाओं का उपस्थापन करता हूं:-
I निम्बाहेड़ा उप खण्ड के बाड़ी मानसरोवर सिंचाई परियोजना में आरक्षित जल से बाड़ी से गोमाना गांव तक 14 गॉवों को पेयजल उपलब्ध कराने बाबत् ; एवं
II तहसील छोटी सादड़ी की प्रस्तावित बागदरी लघु सिंचाई परियोजना को स्वीकृत करने बाबत् ।
श्री अध्यक्ष: श्री केशर देव बाबर।
श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्मणगढ़): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से निम्नांकित याचिकाओं का उपस्थापन करता हूं:-
I तहसील
लक्ष्मणगढ़ (सीकर)
में औद्योगिक क्षेत्र
विकसित करने
बाबत् ; एवं
II लक्ष्मणगढ़ (सीकर) में पेयजल व्यवस्था करने बाबत् ।
श्री अध्यक्ष: श्री तगाराम चौधरी।
श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से कार्यसूची में उल्लेखित दो याचिकाएं.....
श्री अध्यक्ष: एक ही याचिका है। बाड़मेर से आने वाले माननीय सदस्य, आपकी याचिका किस सम्बन्ध में है यह बताइये जरा।
श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी आज्ञा से बाड़मेर शहर स्थित तिलक नगर बस स्टेण्ड के पास विवेकानन्द चौराहा एवं बाड़मेर-जैसलमेर रोड़ राष्ट्रीय राजमार्ग-15 पर ओवर ब्रिज बनाने बाबत् 10 व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षरित याचिका का उपस्थापन करता हूं।
श्री अध्यक्ष: ठीक है। श्री अर्जुनलाल जीनगर।
श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से गंगरार स्थित विभिन्न बांधों की नहरों की मरम्मत कराये जाने बाबत् 5 व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षरित याचिका का उपस्थापन करता हूं।
श्री अध्यक्ष: डाक्टर सुरेश चौधरी।
डा. सुरेश चौधरी (भादरा): माननीय अध्यक्षजी, मैं आपकी अनुमति से भादरा कस्बे के मध्य स्थित नजूल सम्पत्ति के निस्तारण बाबत् 4 व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षरित याचिका का उपस्थापन करता हूं।
श्री अध्यक्ष: राज्य में बिजली एवं अकाल की स्थिति पर विचार।
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह) :माननीय अध्यक्ष महोदय, पाइंट ऑफ इन्फार्मेशन। अध्यक्ष महोदय, पाइंट ऑफ इन्फार्मेशन।
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय अध्यक्ष महोदय, महामहिम आये तो उन्होंने सब को भेजा है कि यह स्थिति है। आप पाकिस्तान जाकर के आये हैं तो आप अपने अनुभव कम से कम इस सदन को ही बतायें कि हम बिना यात्रा किये ही देख सकें। आडवाणी जी जिन्ना की मजार पर जाकर के आये, आप भी वहां पधारीं या नहीं?
श्री अध्यक्ष: आप बिजली और अकाल के ऊपर जो चर्चा होगी, मैं समझती हूं कि बहुत महत्वपूर्ण है। मेरी पाकिस्तान यात्रा के संस्मरण हैं वे तो मैं आपको चैम्बर में भी सुना सकती हूं लेकिन यहां बिजली और अकाल....
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): यहां सुनायें साहब, आपके चैम्बर में कैसे आयेंगे सारे। (व्यवधान) एक मिनट में क्या फर्क पड़ रहा है, कौनसी चर्चा हो रही है? (व्यवधान)
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्यक्ष महोदय, आडवाणी साहब भी जिन्ना की मजार पर जाकर के आये हैं तो आप भी पधारीं या नहीं, कम से कम....
श्री अध्यक्ष: नहीं, मैं किसी की मजार पर जाकर के नहीं आई। मैं तो वहां पर एशिया रीजन और इण्डिया रीजन के प्रिजाइडिंग ऑफिसर जितने हैं उनकी कांफ्रेंस थी उसको अटेंड करके आई हूं। मैं किसी मजार पर जाकर के नहीं आई। (व्यवधान)
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): हमने न्यूज पेपर में आपने संबोधन दिया है वह पढ़ा था तो हम चाहते हैं कि उसके कुछ उद्धरण, कुछ अंश यहां हमको भी तो मिले। (व्यवधान)
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अध्यक्ष महोदय, मैं पाइंट ऑफ इन्फार्मेशन के माध्यम से आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि मेरी इन्फार्मेशन के अनुसार....
श्री अध्यक्ष: पाइंट ऑफ इन्फार्मेशन है या पाइंट ऑफ आर्डर है?
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): इन्फार्मेशन है। मेरी जानकारी के अनुसार....
श्री अध्यक्ष: क्या इन्फार्मेशन दे रहे हैं आप?
पाइंट ऑफ
इन्फार्मेशन
ओ बी सी के
युवकों द्वारा
आंदोलन विषयक
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैं बता रहा हूं। एक मिनट मुझे इजाजत तो दें। मेरी जानकारी के अनुसार राजस्थान में जो ओ बी सी के युवक हैं वो बहुत बड़ा आंदोलन खड़ा करने के लिए हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं। जगह-जगह उनमें असंतोष है क्योंकि केन्द्र सरकार ने पिछले दिनों ओ बी सी को टेक्नीकल इंस्टीट्यूशंस में आरक्षण दिया था और उसके कारण सुप्रीम कोर्ट में कुछ याचिका गई और उन्होंने उसमें स्टे दे दिया। इसके कारण बहुत जबरदस्त असंतोष है। साउथ के अन्दर आपने समाचार पत्रों में पढ़ा होगा, साउथ में कई स्टेट्स बन्द हुए, महाराष्ट्र के अन्दर रोड्स ब्लॉक कर दीं। अब राजस्थान में भी ऐसी स्थिति नहीं आ जाए कि ऐसी स्थिति हो रही है कि ओ बी सी के विद्यार्थियों के अन्दर, स्टूडेंट्स के अन्दर, यूथ के अन्दर बहुत ज्यादा असंतोष है। इसलिए मैं चाहता हूं कि ऐसी स्थिति आये उसके पहले ही हमारी भावना केन्द्र सरकार को पहुंचाना चाहते हैं कि वो तुरन्त इस मामले का निपटारा करवायें और आवश्यकता पड़े तो कांस्टीट्यूशन में अमेंडमेंट करें क्योंकि कांस्टीट्यूशन की मूल भावना यह थी कि एस सी, एस टी और ओ बी सी के जो पिछड़े लोग हैं उनको समाज की और राष्ट्र की मुख्य धारा में अतिरिक्त प्रोटेक्शन देकर के कैसे खड़ा किया जाए। इसलिए उस भावना के साथ केन्द्र सरकार ने जो आरक्षण दिया था ओ बी सी के छात्रों को, विद्यार्थियों और युवकों को। उसमें इंटरिम स्टे हो गया है।
श्री अध्यक्ष: यह इन्फार्मेशन आ गई आपकी।
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): इसलिए हमारी भावना केन्द्र सरकार को हम पहुंचाना चाहते हैं। ओ बी सी के सारे की भावना सदन के माध्यम से केन्द्र सरकार को पहुंचाना चाहते हैं कि इस सम्बन्ध में केन्द्र सरकार कार्यवाही करे। मैं आपसे यही निवेदन करना चाहता हूं ताकि कोई बहुत बड़ा आंदोलन नहीं हो। आपने मौका दिया इसके लिए धन्यवाद।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): केन्द्र सरकार ने कह दिया कि अपील में जा रहे हैं। कोर्ट का मामला है, क्यों डिस्कशन कर रहे हो यहां पर? (व्यवधान)
डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): कोर्ट में क्या है, कोर्ट की पीठ....
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्यक्ष महोदय, केन्द्र सरकार स्वयं इस चीज को जानती है। केन्द्र सरकार ने आरक्षण दिया था ओ बी सी को और केन्द्र सरकार अपील में जाएगी, नियमों में संशोधन की जरूरत पड़ेगी तो उसकी बात करेंगे लेकिन आज आपने जीरो ऑवर तो खत्म कर दिया और उसके बाद यहां पर चर्चा हो रही है। आज अकाल और बिजली पर चर्चा होनी चाहिए। (व्यवधान)
श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): आप सुप्रीम कोर्ट को चैलेंज करेंगे क्या? (व्यवधान) आप कर सकते हो तो करो। (व्यवधान)
एक माननीय सदस्य : मुख्य मंत्री केन्द्र सरकार को चिट्ठी लिखे नाथूसिंह जी। (व्यवधान)
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): केन्द्र सरकार स्वयं चिंतित है इस मामले पर। (व्यवधान)
एक माननीय सदस्य : आपने क्या किया है यहां पर? बैक-लॉग तो आपका पूरा हुआ ही नहीं यहां पर। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, माननीय सदस्यगण, माननीय सदस्यगण, आपको कोई इन्फार्मेशन देनी थी वह दे दी, बात खत्म हो गई। अब आगे चलिये। (व्यवधान)
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा स्थगन प्रस्ताव था उस पर तो कुछ कहा नहीं और उनको अलाऊ कर दिया। यह क्या बात हो गई?
श्री अध्यक्ष: किसको अलाऊ किया है। यह पाइंट ऑफ इन्फार्मेशन थी...
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपके लिए सारे माननीय सदस्य बराबर हैं। मुझे तो आपने स्थगन प्रस्ताव पर कह दिया कि सरकार को भेजेंगे और टोडारायसिंह से आने वाले माननीय सदस्य की पूरी बात सुन ली। यहां तो आपका बड़प्पन होना चाहिए, माननीय अध्यक्ष महोदय, आपका न्याय बराबर होना चाहिए। (व्यवधान)
Lpm/akt/1250/1m/3.4.2007(1)
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्य पॉइन्ट
आफ ऑर्डर और पॉइन्ट
ऑफ इन्फोर्मेशन
के आधार पर (व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
अध्यक्ष महोदय,
आप सर्वोच्च आसन
पर है, जब मैंने
स्थगन प्रस्ताव
रखा था तो मुझे
भी बोलने देते,
आप मुझे भी बोलने
देते...
डा. एन.
एस. गुर्जर (टोडारायसिंह):
आपने स्थगन प्रस्ताव
दिया है, मैंने
पॉइन्ट आफ इन्फोर्मेशन
दी है।
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
इन्फोर्मेशन
से पहले मैंने
स्थगन प्रस्ताव
दिया है उसी के
आधार पर दिया है
कि ओबीसी पूरी
उद्वेलित है, ओबीसी
के साथ अन्याय
हो रहा है (व्यवधान)
श्री
वीरेन्द्र बेनीवाल
(लूणकरणसर): अध्यक्ष
महोदय, मेरा निवेदन
है कि इस पर सर्व-सम्मति
से प्रस्ताव लिया
जाना चाहिए, अन्य
राज्यों की विधानसभाओं
में भी सर्व-सम्मति
से प्रस्ताव लेकर
के भेजे हैं।
श्री
अध्यक्ष: सदन
की यह परम्परा
है कि इस सदन में
पॉइन्ट ऑफ ऑर्डर
और पॉइन्ट आफ
इन्फोर्मेशन
के आधार पर यदि
कोई माननीय सदस्य
खड़े होते हैं
तो वह बात सुनी
जाती है, मैंने
सोचा कि क्या
पता क्या इन्फोर्मेशन
देंगे, कोई नई इन्फोर्मेशन
लाए हैं, मुझे क्या
पता था कि ये ऐसी
घिसी-पिटी इन्फोर्मेशन
देंगे, मुझे थोड़े
ही मालूम था...
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा): माननीय
अध्यक्ष महोदय,
यह घिसी-पिटी इन्फोर्मेशन
नहीं है, यह देश
के लाखों नौजवानों
के भविष्य का
सवाल है (व्यवधान)
श्री
वीरेन्द्र बेनीवाल
(लूणकरणसर): अध्यक्ष
महोदय, अन्य राज्य
की विधानसभाओं
ने इस पर सर्व-सम्मति
से प्रस्ताव लिए
हैं, हमारी विधानसभा
भी इस पर सर्व-सम्मति
से प्रस्ताव लेकर
के भेजे (व्यवधान)
डा. एन.
एस. गुर्जर (टोडारायसिंह):
अध्यक्ष महोदय,
यह हमें बड़ा दुःख
है आपने जो प्रतिक्रिया
दी है (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्यगण, माननीय
सदस्य आपने इन्फोर्मेशन
दे दी (व्यवधान)
आसन से क्या चाहते
हैं आप? आपने इन्फोर्मेशन
दे दी।
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
अध्यक्ष महोदय,
केन्द्र सरकार
आश्वासन दे रही
है आपको तो केवल
यहां से एक प्रस्ताव
लेकर के भेजना
है कि सर्वोच्च
न्यायालय में
अपील की जाए (व्यवधान)
श्री
वीरेन्द्र बेनीवाल
(लूणकरणसर): हमारी
विधानसभा से सर्व-सम्मति
से प्रस्ताव लिए
जाने के लिए आप
निर्देशित करें
(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
(व्यवधान) इसको
9वीं सूची में डाला
जाए, अगर 9वीं सूची
में आ जाता है उसके
बाद में सारी व्यवस्था
(व्यवधान) आपको
यह करना चाहिए
अध्यक्ष महोदय
(व्यवधान)
श्री
वीरेन्द्र बेनीवाल
(लूणकरणसर): अध्यक्ष
महोदय, अन्य राज्यों
की विधानसभाओं
में इस आदेश के
खिलाफ सर्व-सम्मति
से प्रस्ताव लिए
गए हैं, हमारी भी
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: सदन
में संकल्प पारित
करवाने से पूर्व
(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय (व्यवधान)
भेजा जाए, उनकी
टिप्पणी को आप
घिसी-पिटी कहते
हो अध्यक्ष महोदय,
मैं क्षमा चाहता
हूं (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: घिसी-पिटी
का मतलब पुरानी
बात है।
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
आखिर इतने विद्वान
व्यक्ति है ये
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: इसमें
क्या बात है? पुरानी
बात है यह...
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा): माननीय
अध्यक्ष महोदय,
यह हिन्दुस्तान
के करोड़ों नौजवानों
के भविष्य का
सवाल है (व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, इसे आप घिसी-पिटी
नहीं कह सकते (व्यवधान)
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा): माननीय
अध्यक्ष महोदय,
यह देश के करोड़ों
नौजवानों के भविष्य
का सवाल है और जैसे
राजस्थान विधानसभा
उसी तरह का एक प्रस्ताव
अगर जिस तरह का
तमिलनाडु और कर्नाटक
की विधानसभा ने
प्रस्ताव पास
करके केन्द्र
सरकार को भिजवाया
है ताकि चाहे इस
नियम में हमें
संशोधन करना पड़े
(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
इसे संविधान की
9वीं सूची में डालने
का प्रस्ताव
(व्यवधान)
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा): माननीय
अध्यक्ष महोदय,
अन्य पिछड़ा वर्ग
आयोग और केन्द्र
सरकार जिस भावना
के साथ यह (व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
संविधान पीठ फैसला
नहीं कर सके इसलिए
यह प्रश्न सारे
सदस्यगण (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्यगण, माननीय
सदस्य स्थान
ग्रहण करे, ऐसा
है कि सदन में कोई
भी संकल्प पारित
करने से पूर्व
राज्य सरकार से
भी बात करनी चाहिए,
ऐसे थोड़े ही संकल्प
पारित हो जाता
है कि आप पाँच आदमी
खड़े हो जाए और
मैं (व्यवधान)
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा): यह
पाँच आदमियों की
मांग नहीं है अध्यक्ष
महोदय (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप कहिए
न, मुझे कोई आपत्ति
नहीं है आप बात
करे, मुझे कोई आपत्ति
नहीं है इस बात
के लिए...
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा): पाँच
आदमियों की बात
नहीं है यह देश
के करोड़ों नौजवानों
के भविष्य का
सवाल है (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप बात
करें, मुझे कोई
आपत्ति नहीं है
इस बात की (व्यवधान)
अंकित नहीं हो।
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
000
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा): 000
श्री
जीतमल खांट (बागीडोरा):
000
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण करें, प्लीज
स्थान ग्रहण करें,
अपना-अपना स्थान
ग्रहण कर ले, आप
स्थान ग्रहण करें,
आप स्थान ग्रहण
करे, स्थान ग्रहण
करें आप मैं कहती
हूं आपसे...
श्री
हेमाराम चौधरी
(गुढ़ामालानी):
000
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
000
श्री
बद्रीलाल जाट
(कपासन): 000
श्री
जीतमल खांट (बागीडोरा):
000
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
000
श्री
वीरेन्द्र बेनीवाल
(लूणकरणसर): 000
श्री
हेमाराम चौधरी
(गुढ़ामालानी):
000
श्री
अध्यक्ष: (व्यवधान)
पारित नहीं होता
है यदि आपको संकल्प
लाना है तो संकल्प
लाते आप, मैं कब
मना कर रही हूं,
लेकिन पॉइन्ट
आफ इन्फोर्मेशन
के आधार पर आप कोई
संकल्प पास करवाना
चाहते हैं ऐसा
नहीं होता है, ऐसा
नहीं होता है।
श्री
हेमाराम चौधरी
(गुढ़ामालानी):
000
श्री
अध्यक्ष: किसका?
श्री
हेमाराम चौधरी
(गुढ़ामालानी):
000
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): कल आपके
पास पूरा दिन था
ना (व्यवधान) कल
इनका दिन था कल
क्यों नहीं लेकर
के आये, प्राइवेट
मेम्बर डे पर
ले आते आप (व्यवधान)
श्री
रामलाल (बनेड़ा):
000
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
000
श्री
हेमाराम चौधरी
(गुढ़ामालानी):
000
श्री
अध्यक्ष: जीरो
आवर को सस्पेंड
करके उनको सरकार
के पास भेज दिया
है।
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
000
डा. एन.
एस. गुर्जर (टोडारायसिंह):
देवल साहब, एक मिनट,
अध्यक्ष महोदय,
मेरा एक व्यवस्था
का प्रश्न है
एक मिनट, मेरा एक
व्यवस्था का
प्रश्न है अध्यक्ष
महोदय इस हाउस
के अंदर ऑन-रिकार्ड
आप उठाकर देख लीजिए
कि इस नाली के अंदर,
इस नाली में कुत्ता
मर गया उसकी चर्चा
यहां पर हुई, इस
हाउस के अंदर फला
जानवर, फला जगह
मर गया इसकी चर्चा
हुई और उनको एक्सेप्ट
किया गया, मैंने
जिस चीज को लेकर
के सारा देश उद्वेलित
है, पूरा राजस्थान
उद्वेलित है, आपने
उसको कह दिया घिसी-पिटी
इन्फोर्मेशन
है....
श्री
अध्यक्ष: आप संकल्प
लाते, नो-नो....
डा. एन.
एस. गुर्जर (टोडारायसिंह):
अध्यक्ष महोदय,
मेरा आपसे अनुरोध
है, हाथ जोड़कर
के कि कृपया आपने
जो टिप्पणी की
है, उस 85 प्रतिशत
लोगों से जुड़ा
हुआ मामला है, उस
टिप्पणी को आप
अगर वापिस ले ले
तो हम आपके बहुत
आभारी रहेंगे।
85 प्रतिशत लोगों
से जुड़ा हुआ मामला
है और आप घिसी-पिटी
इन्फोर्मेशन
बता रहे हो, महाराष्ट्र
की सड़कें जाम
है, तमिलनाडु बंद
है, आंध्रप्रदेश
के अंदर हंगामा
हो रहा है, पूरा
साउथ खड़ा हो गया
है और राजस्थान
के अंदर यूनिवर्सिटी
में हस्ताक्षर
अभियान चल रहा
है (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: यह इन्फोर्मेशन
आज की तो है नहीं,
सुप्रीम कोर्ट
ने बहुत पहले फैसला
दे दिया था, इसलिए
जो सूचना बहुत
पहले आ गई वह पुरानी
सूचना तो है ही...
डा. एन.
एस. गुर्जर (टोडारायसिंह):
नहीं, नहीं जो सुप्रीम
कोर्ट ने दिए हैं
उस संबंध में कुछ
नहीं कर रहा हूं,
हम उस संबंध में
कुछ नहीं कह रहे
हैं, हम यह कह रहे
हैं कि जो अंतरिम
आदेश दिया है सुप्रीम
कोर्ट ने उसके
खिलाफ केन्द्र
सरकार कोई कदम
(व्यवधान) कोई
न कोई इसका रास्ता
निकाले, यह कोई
घिसी-पिटी सूचना
नहीं है (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: अंकित
नहीं हो, आप किस
पर चर्चा कर रहे
हो, न आपको अकाल
पर चर्चा करनी
है, न आपको बिजली
पर चर्चा करनी
है, मैं यह मानू,
यह समझू...
श्री
बद्रीलाल जाट
(कपासन): 000
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
000
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा): 000
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
000
श्री
बद्रीलाल जाट
(कपासन): 000
श्री
जीतमल खांट (बागीडोरा):
000
डा. एन.
एस. गुर्जर (टोडारायसिंह):
000
डा. सी.
पी. जोशी (नाथद्वारा):
000
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री):
अध्यक्ष महोदय,
सदन की भावनाओं
से मुख्यमंत्री
जी को अवगत भी करा
देंगे और भारतीय
जनता पार्टी का
केन्द्रीय जो
हमारी कार्य समिति
है उसका प्रस्ताव
पहले से लिया जा
चुका है।
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
000
डा. बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर):
000
श्री
अमराराम (धोद): 000
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
000
श्री
जीतमल खांट (बागीडोरा):
000
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
000
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
000
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): मुख्यमंत्री
जी को सदन की भावना
से अवगत करा दूंगा
(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल (रायपुर):
000
श्री
अध्यक्ष: माननीय
मंत्री जी आप पहले
रखे।
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता, प्रतिपक्ष):
मेरी तरफ से मुझे
बहुत दुःख है कि
अगर सर्वश्रेष्ठ
विधायक ऐसे आपका
कॉन्फीडेंस लेकर
के चाहे जो बोल
देंगे, यह तो बहुत
अनुचित है।
डा. एन.
एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैंने अनुमति
लेकर के बोला है
माननीय प्रतिपक्ष
के नेता, मैंने
माननीय अध्यक्ष
महोदय को पहले
अवगत करा दिया
था कि मैं इस विषय को सदन के
अंदर पॉइन्ट आफ
इन्फोर्मेशन
से मैं सदन को अवगत
कराऊंगा क्योंकि
राजस्थान यूनिवर्सिटी
में हस्ताक्षर
अभियान चल रहा
है, कई यूनिवर्सिटीज्
में इसलिए आप इस
तरह की टिप्पणी
कर रहे हो कि मैं
अध्यक्ष महोदय
के विश्वास को
तोड़ रहा हूं (व्यवधान)
डा. सी.
पी. जोशी (नाथद्वारा):
000
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता, प्रतिपक्ष):
मैंने नहीं की
और उन्होंने वह
टिप्पणी की थी,
मुझे बड़ा दुःख
हुआ।
Bhs/akt/2.4.07/13.00/1n
कि हमारा
सर्वश्रेष्ठ
विधायक इस तरह
से स्पीकर साहब
के कांफीडेंस को
हिलायेगा। यह हमने
कल्पना नहीं की
थी।
राज्य
में बिजली एवं
अकाल की स्थिति
पर विचार
श्री
गजेन्द्र सिंह
(राज्य मंत्री, ऊर्जा): अध्यक्ष
महोदय, मैं
प्रस्ताव करता
हूं कि राज्य
में बिजली की स्थिति
पर विचार किया
जाय।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): अकाल राहत
मंत्री जी। ...(व्यवधान)...
डॉ. एन.एस.
गुर्जर (टोडारायसिंह):
000
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता प्रतिपक्ष):
यह मामले की बात
नहीं है यह आप दो
के बीच की बात है। मामले की
कोई बात नहीं है
मामला उठाओ।
डॉ. एन.एस.
गुर्जर (टोडारायसिंह):
000
श्री
अध्यक्ष: माननीय
मंत्री।
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता प्रतिपक्ष):
हमने तो आरक्षण
लिया है लड़ कर
के हमने तो आरक्षण
लड़ करके लिया
है संघर्ष करके
और हमने ही कमीशन
बैठाया था ऑल इंडिया
बेसिस पर और उसी
आधार पर आरक्षण
जाटों को मिला
था।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): अब आपने
अध्यक्ष महोदय, नाम पुकार
लिया इनका।
डा. किरोड़ी
लाल (खाद्य
एवं नागरिक आपूर्ति
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव
करता हूं कि राज्य
में अकाल की स्थिति
पर विचार किया
जाय।
श्री
अध्यक्ष: श्री
मदन राठौड़। बोलें,
आप बोलें।
श्री
रामलाल (बनेड़ा):
000
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले
मैं आपको बहुत-बहुत
धन्यवाद देना
चाहूंगा कि आज
आपने ...(व्यवधान)...
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
अध्यक्ष महोदय, परम्परा
यह रही है कि जब
इस विषय पर चर्चा
होती है तो प्रतिपक्ष
की तरफ से शुरूआत
की जाती है हमेशा
यह परम्परा रही
है तो आपसे मेरा
निवेदन है कि पूर्व
की भांति आज भी
प्रतिपक्ष की तरफ
से बुलवाने का
क्रम जारी रखें।
श्री
अध्यक्ष: अब मैंने
नाम पुकार लिया
उसके बाद में आपको
कह दूंगी। दो आपके बुला
दूंगी। ऊपर पर्ची
ये पड़ी थी इसलिए
उनका नाम हो गया
आपकी पर्ची इसके
नीचे लगी थी। ...(व्यवधान)...
मैंने नहीं लगायी
थी।
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
मैं आपको यह भी
धन्यवाद देना
चाहूंगा कि आपने
बिजली पर चर्चा
करने के लिए मुझे
अवसर दिया। अध्यक्ष
महोदय, आज व्यक्ति
के दैनिक जीवन
में बिजली का उपयोग
बढ़ा है।
श्री
अध्यक्ष: इसी
क्रम में आयी पहले
इनकी आयी आपकी
बाद में आयी। पहले
पर्ची इनकी आयी।
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
पर्ची तो सबसे
पहले हमने दी है
साहब बोलने की।
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता प्रतिपक्ष):
आप यह तो सुनने
की कृपा करें कि
सत्ता पक्ष बिजली
पर क्या चर्चा
करेगा। सत्ता
पक्ष अकाल
पर, बिजली पर क्या
चर्चा करेगा।
श्री
अध्यक्ष: क्यों?
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता प्रतिपक्ष):
नहीं कर सकता।
श्री
अध्यक्ष: क्यों
नहीं कर सकता?
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता प्रतिपक्ष):
आत्मा मरी हुई
है इनकी। ये क्या
चर्चा करेंगे।
चर्चा आपको करानी
है सार्थक तो आप
प्रतिपक्ष को मौका
दीजिये।
श्री
अध्यक्ष: श्री
मदन राठौड़ सुमेरपुर
से आने वाले माननीय
सदस्य, प्रतिपक्ष
के नेता कह रहे
हैं कि इनकी आत्मा
मरी हुई है ये क्या
चर्चा करेंगे
...(व्यवधान)... यह
कह रहे हैं कि क्या
चर्चा करेंगे इनकी
तो आत्मा मरी
हुई है।
श्री
हेमाराम चौधरी
(गुढ़ामालानी):
...(व्यवधान)... ये
तो प्रशंसा करेंगे
हमको समस्या बतानी
है यह अंतर है साहब।
हम तो अपनी समस्या
रखेंगे और ये प्रशंसा
करेंगे इसके सिवाय
दूसरा कोई काम
नहीं है सत्ता
पक्ष में तो प्रशंसा
ही प्रशंसा है।
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
अध्यक्ष महोदय, ये प्रतिपक्ष
के नेता जी हैं
ये क्या बोलते
हैं इनको खुद को
भी बाद में मालूम
पड़ता है। ये क्या
बोलते हैं ये इनको
बाद में पता चलता
है।
श्री
हेमाराम चौधरी
(गुढ़ामालानी):
ये तो खाली प्रशंसा
के ढोल पीटेंगे
और अपनी समस्या
रखेंगे। समस्या
रखने वाले को पहले
बुलाना चाहिए ढोल,
पीटने वाले तो
बाद में पीट लेंगे।
डा. जालम
सिंह रावलोत (शिव):
गुढ़ामालानी से
आने वाले माननीय
सदस्य, प्रतिपक्ष
के नेता आप हो या
आप हैं?
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता प्रतिपक्ष):
नहीं ढोल पीटने
का तो आज एजेंडा
ही नहीं है।
श्री
अध्यक्ष: नेता
प्रतिपक्ष, पहले
पर्ची इनकी तरफ
से आयी थी।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): आपकी आत्मा
तो सोयी हुई है
कभी जागती ही नहीं
है पूरा सत्र चला
गया एक दो बार श्रीमुख
से बोलो।
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
मैं आप पर कोई कमेंट
करना नहीं चाहता
नेता प्रतिपक्ष।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): आज आप से
ही मार्गदर्शन
ले लें आप भी बोलों
कुछ। न अकाल पर
बोले, न बिजली पर
बोले, न अभिभाषण
पर बोले, न बजट पर
बोले और शिक्षा
हमें दे रहे हैं
कि उनकी आत्मा
मरी हुई है।
श्री
हेमाराम चौधरी
(गुढ़ामालानी):
आप बोलने कहां
देते हैं आप बोलने
दें इधर से। यह
प्रतिपक्ष के नेता
ने कहा है न हमारे
को बोलने का मौका
दो। आप हमारे को
बोलने का मौका
ही नहीं देते हो।
...(व्यवधान)... आप
पूरी दादागीरी
चला रहे हो। ये
मीणा साहब तो दादागीरी
चला रहे हैं पूरी।
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
नेता प्रतिपक्ष
ने जब कभी भी सदन
में बोला है ...(व्यवधान)...
श्री
वासुदेव देवनानी
(राज्य मंत्री, शिक्षा): आत्मा
मरती नहीं है आत्मा
अमर है। आत्मा
तो अमर है कभी मरती
नहीं है। माननीय
नेता प्रतिपक्ष,
आत्मा कभी भी
मरती नहीं है आत्मा
अजर-अमर है। किसी
भी आत्मा को मारने
का कभी सोचना भी
नहीं चाहिए। अपन
भारी संस्कृति
के अन्दर है और
भारत में रहते
हैं।
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
यह बात बिलकुल
सही है कि इतने
वर्षों ...।
डॉ. एन.एस.
गुर्जर (टोडारायसिंह):...(व्यवधान)... जो विशेष
ज्ञान दिया है
मैं समझता हूं
कि इसके लिए हम
इनके आभारी हैं
कि आत्मा मृत
होती है । यह विशेष
ज्ञान दिया हमको
इसके लिए बहुत
आभारी हैं। इनके
बहुत आभारी हैं
आज तक तो हम समझते
आ रहे थे, भगवान
कृष्ण ने कहा
है कि आत्मा अमर
है और प्रतिपक्ष
के नेता कह रहे
हैं कि आत्मा
मरती है इनके ज्ञान
के लिए हम बहुत
आभारी हैं इनका
जो ज्ञान इन्होंने
प्रदर्शित किया
सदन में।
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता प्रतिपक्ष):
मैं इस विधान सभा
के सदस्य की हैसियत
से बता रहा हूं
कि आत्मा जो आपकी
जीवित है वो भटक
रही है।
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
मरी हुई है कि भटक
रही है?
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता प्रतिपक्ष):
...(व्यवधान)... आत्मा
भटक रही है वो अपनी
जगह पर नहीं है
...(व्यवधान)...
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
अच्छा भटक रही
है कि मरी हुई है?
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता प्रतिपक्ष):
इसलिए आप कुछ नहीं
बोल सकोगे।
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
और यदि भटक रही
है तो जिन्दी
है ...(व्यवधान)...
श्री
वासुदेव देवनानी
(राज्य मंत्री, शिक्षा): माननीय
नेता प्रतिपक्ष,
यह शरीर मरता है
भारतीय संस्कृति
में अपन अजर अमर
हैं। ...(व्यवधान)...
डा. बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर):
अध्यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष
के नेता बोल रहे
हैं और वो ...(व्यवधान)...
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
भटक रही है तब तो
जिन्दा है अध्यक्ष
महोदय, मैं
एतराज करता हूं
कि नेता प्रतिपक्ष
ने कहा कि इनकी
आत्मा मरी हुई
है फिर इन्होंने
बोला कि आत्मा
भटक रही है ओर यदि
भटक रही है तब तो
जिन्दा है। अब
आपने क्या कहा
?
श्री
कैलास त्रिवेदी
(सहाड़ा): ...(व्यवधान)...
बातें बोल रहे
हो, ढोल पीट रहे
हो ऐसा अकाल पडा
हुआ है।
आत्मा मरी हुई
है तभी तो ढोल पीटने
के लिए बोल रहे
हो।
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
अभी मालूम पड़
जाएगा कि मरी हुई
है कि जिन्दा
है आपको पता चल
जाएगा।
श्री
रिछपाल सिंह मिर्धा
(डेगाना): माननीय
अध्यक्ष महोदय, अकाल और बिजली
जैसे गंभीर विषय
पर चर्चा होनी
है और सदन कितना
गंभीर है आप देख
रहे हैं।
श्री
अध्यक्ष: अकाल
और बिजली में आत्मा
की बात कहां से
आ गई? चर्चा करो
अकाल की स्थिति
पर।
श्री
रिछपालसिंह मिर्धा
(डेगाना): अब राजस्थान
में तो किसानों
को तो दुःख हो रहा
है कि अकाल में
लोग मर रहे हैं
और सदन में कैसा
माहौल है आप देखें।
श्री
अध्यक्ष: सदन
का माहौल तो माननीय
प्रतिपक्ष के नेता
ने ही आत्मा मार
कर कर दिया न क्या
करें। ...(व्यवधान)...
आत्मा मर गयी
इनकी क्या बोलेंगे
ये।
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
अध्यक्ष महोदय, मैं आपका भी
धन्यवाद ज्ञापित
करना चाहूंगा कि
आपने बिजली जैसे
विषय पर चर्चा
प्रारंभ करवायी।
श्री
श्रवणकुमार (पिलानी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, दोनों की
बात पर मैं ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: आप बीच
में नहीं।
श्री
श्रवणकुमार (पिलानी):
हमारा भी नाम लेना
आज।
श्री
अध्यक्ष: नौ-नौ,
नाम पुकार लिया
मैंने।
श्री
श्रवणकुमार (पिलानी):
झुंझुनूं में अकाल
है मेरे को भी बोलने
का मौका देना।
श्री
अध्यक्ष: मैंने
नाम पुकार लिया।
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
अध्यक्ष महोदय, व्यक्ति
के दैनिक जीवन
में हम यह मानें
कि बिजली का उपयोग
बढ़ा है। चाहे
सर्दी का समय हो
तो तापमान गिरे
हुए को सामान्य
करने के लिए बिजली
का उपयोग करना
पड़ता है ठीक इसी
प्रकार से उष्णता
के समय में तापमान
को गिराने के लिए
बिजली का उपयोग
करना पड़ता है।
माननीय नेता प्रतिपक्ष
को भी यहां आने
के लिफ्ट का उपयोग
करना पड़ता है
तो बिजली का उपयोग
सभी जगह पर है और
बिजली का उपयोग
इतना बढ़ा है कि
आज जैसे महाराष्ट्र
में बोम्बे जैसे
शहर में पहले बिजली
की कमी कभी भी महसूस
नहीं की जाती थी
लेकिन आज समाचार
पत्रों में आया
है कि वहां पर चार
सौ मेगावाट बिजली
की कमी आ गयी और
उस सरकार को भी
चिन्ता करने की
जरूरत पड़ गयी
है कि क्या कटौती
करनी पड़ेगी या
उत्पादन बढ़ाना
पड़ेगा।
अध्यक्ष
महोदय, अभी
आपने महामहिम राष्ट्रपति
महोदय के राजस्थान
प्रवास के समय
में उन्होंने
जो टिप्पणी की
उसके लिए मैं आपका
ध्यान पुन: आकर्षित
करना चाहूंगा कि
महामहिम राष्ट्रपति
महोदय ने स्वयं
ने स्वीकार किया
यह कि राजस्थान
में जो बिजली की
उत्पादन क्षमता
बढ़ाने के लिए
इस दिशा में जो
प्रयास किया जा
रहा है वो सराहनीय
है और महामहिम
राष्ट्रपति महोदय
ने स्वयं यह महसूस
किया कि राजस्थान
निश्चित रूप से
2008 में आत्मनिर्भर
बना दिया जाएगा।
मैं इसके लिए राजस्थान
की वर्तमान सरकार
को बहुत-बहुत धन्यवाद
देना चाहूंगा कि
जिसके लिए स्वयं
महामहिम राष्ट्रपति
जी ने इस बात को
महसूस किया कि
राजस्थान में
इस दिशा में राजस्थान
सरकार महत्वपूर्ण
काम कर रही है, अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अध्यक्ष: ये आप
क्या कर रहे हैं
मि. रिछपाल सिंह
मिर्धा, What are you doing? आप बोलने वाले
के बीच से निकल
कर आ गये। आप पुराने
सदस्य हो।
श्री
रिछपालसिंह मिर्धा
(डेगाना): अध्यक्ष
महोदय, माफी
चाहता हूं ...(व्यवधान)...
मैं मंत्री महोदय
के पास जा रहा था।
श्री
अध्यक्ष: अब आप
बैठें।
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
माननीय सदस्य,
आप दूसरे की सीट
से बोल रहे हैं
और गलती कर रहे
हैं। दूसरी गलती
और कर रहे हैं कि
दूसरे की सीट से
बोल रहे हैं।
श्री
रिछपालसिंह मिर्धा
(डेगाना): ...(व्यवधान)...
मैंने तो माफी
मांगी है।
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
माफी मांगें तो
भी अपनी जगह पर
जाकर मांगें तो
ठीक रहेगा। ...(व्यवधान)...
अध्यक्ष
महोदय, अभी
ये एतराज कर रहे
हैं इसका कारण
यह है कि जब इनका
राज था तो इन्होंने
इस दिशा में कोई
महत्वपूर्ण काम
नहीं किये। किसानों
को कनेक्शन देने
में इन्होंने
आना-कानी की, रोक
लगा दी थी और जब
से हमारी भारतीय
जनता पार्टी की
सरकार राजस्थान
में बनी है इन्होंने
किसानों को कनेक्शन
देने में बहुत
उदारता बरती और
यही कारण है कि
अभी तीन वर्षों
में हमने एक लाख
पाँच हजार छ: सौ
नौ कृषि कनेक्शन
जारी कर दिये।
यह एक महत्वपूर्ण
उपलब्धि है। जिसके
लिए पूरा किसान
वर्ग हमें बहुत-बहुत
धन्यवाद दे रहा
है। अध्यक्ष महोदय, जब इनका राज
था कांग्रेस का
तब इन्होंने किसानों
को बिजली की रेट
प्रतियूनिट की
बढ़ायी । पहले
जब भारतीय जनता
पार्टी की सरकार
थी तो पचास पैसे
प्रति यूनिट किसान
से वसूला जाता
था लेकिन इन्होंने
बढ़ा करके नब्बे
पैसे किया यानी
85 प्रतिशत टैरिफ
बढ़ा दिया प्रति
यूनिट यानी कैसे
किसानों के हितैषी
हैं आप किस प्रकार
की आप बात करते
हैं। अब आत्मा
किसकी मरी हुई
है यह थोड़ा विचार
कर लीजिये। किसानों
के प्रति किसने
चिन्ता जाहिर
की।
श्री
अध्यक्ष: आप तो
अकाल और बिजली
की बात करें। आप
आत्मा की मत करो
बात।
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
अच्छा इनकी आत्मा
के बारे में मैं
कुछ नहीं बोलूंगा
अध्यक्ष महोदय।
अब इनकी आत्मा
जैसी है वैसी ही
रहेगी लेकिन एक
खुशी की
बात यह है अध्यक्ष
महोदय, कि हमने
बिजली की रेट्स
नहीं बढ़ायी ।
श्री
रामनारायण चौधरी
(नेता प्रतिपक्ष):
आत्मा के बारे
में क्या बोलेंगे
जिनकी मर चुकी।
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
हमने बिजली की
रेट यथावत रखी।
बिजली की रेट को
नहीं बढ़ने दिया।
चाहे हमें कितनी
भी बिजली खरीदनी
पड़ी, चाहे कितने
ही रुपये खर्च
करने पड़े लेकिन
हमने बिजली की
दरें नहीं बढ़ायी।
तीन वर्षों में
बिजली की दरें
यथावत रखी यह बहुत
बड़ी उपलब्धि है
इसके लिए भी वर्तमान
सरकार को धन्यवाद
दिया जाना चाहिए
और हमने यह भी तय
किया अध्यक्ष
महोदय, कि हम
2010 तक बिजली की दरें
नहीं बढ़ायेंगे।
कैलाश/ 3.4.07
13.10 (1) 1o
किसानों को 2010 तक उसी रेट पर हम बिजली उपलब्ध करायेंगे इसके लिये भी मैं बिजली मंत्री जी का और वर्तमान सरकार का धन्यवाद देना चाहूंगा । अध्यक्ष महोदय, यही नहीं जो ड्रिप इर्रिगेशन करता है, जो फव्वारा पद्धति से खेती करता है उसके लिये हमने 10 पैसा प्रति यूनिट कम किया है । उस पद्धति को हम बढावा देना चाहते हैं इसके लिये भी मैं आपका बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहूंगा । यही नहीं जो मीटर प्रणाली से कृषि कनेक्शन थे जिस पर पहले 85 रुपया प्रति हार्स पावर प्रति माह लिया करते थे हमने 10 रुपये घटाकर 75 रुपये किये इसके लिये भी मैं वर्तमान सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगा ।
श्री अध्यक्ष: आपको व्यवधान डालने के लिये मैं क्षमा चाह रही हूं । माननीय सदस्यों से मैं यह कहना चाह रही हूं कि आज जो चर्चा हो रही है वह बिजली और अकाल की समस्या क्या है और उसको किस प्रकार से दूर किया जा सकता है यह सुझाव सरकार को दें । क्या उपलब्धियां है इसके लिये चर्चा कराने की आवश्यकता नहीं थी । वह तो मंत्री जी बतायेंगे इसलिए आप यह बताइए कि आपके इलाके में बिजली देने में कोई गड़बड़ है, बिजली पाने में कोई गड़बड़ है या कोई बिलों में है या आपके ट्रांसफारमर टाइम पर नहीं मिलते । मतलब जों बिजली के संबंध में आपकी समस्या है वह बताइए तो ज्यादा उपयुक्त होगा ।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): समस्या ही नहीं है तो क्या बतायेंगे ।
श्री रामनारायण चौधरी(नेता, प्रतिपक्ष): अध्यक्ष महोदय, जिसके कोई समस्या ही नहीं है...
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्यक्ष महोदय, मुझे यह समझ में नहीं आया कि जब कभी भी मैं बोलता हूं ...
श्री अध्यक्ष: आप एक बार सुन लो प्रतिपक्ष के नेता को ।
श्री रामनारायण चौधरी(नेता, प्रतिपक्ष): जिसके कोई समस्या ही नहीं है वह क्या बतायेगा आपकी भावनओं के मुताबिक, वह तो वह बतायेंगे जो दुःखी है उनको तो आप मौका देती नहीं है आपने उनको खड़ा कर दिया ।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्यक्ष महोदय, मेरी एक बहुत बडी समस्या है और वह है माननीय नेता प्रतिपक्ष मुझे बोलने नहीं देते । जब कभी भी मैं खड़ा होता हूं तो यह बीच में टोकने के लिये खडे हो जाते हैं । मैं आपको यह निवेदन करूं कि कल मेरी पर्ची थी तब भी यह *** मुझे एक वाक्य बोलने नहीं दिया और अभी भी मैं बोल रहा हू, आप एक बात महसूस करें कि आज किसान को जरूरत है बिजली की कि उसको कम से कम 8 घंटे बिजली मिले । आज आम उपभोक्ता को जरूरत है कि उसके हमेशा लट्टू जलता रहे, विद्यार्थी को जरूरत है कि पढाई के लिये उसको बिजली उपलब्ध रहे ।
श्री महादेव सिंह (खण्डेला): अध्यक्ष महोदय, जब इनको बीच में कोई टोकता है तो इनको बड़ा दुःख होता है और अब आप प्रतिपक्ष के नेता महोदय के लिये कह रहेहैं कि आप *** । *** शब्द बोला है इन्होंने । प्रतिपक्ष के नेता के लिये इन्होंने कहा कि जब भी मैं बोलता हूं बीच में आप *** । यह बहुत ही गलत शब्द है इसको निकाला जाना चाहिये ।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्यक्ष महोदय, यह तो बीच में व्यवधान करने के लिये *** की जरूरत क्या पड गई । शांति से बात करते हैं आपका अवसर आयेगा आप बोलिए । आपको क्या जरूरत पड गई बीच में टोकने की । मुझे यह समझ में नहीं आता कि इनको यह डर है कि कहीं इनकी पोल खुलेगी और इतनी पोल खुलेगी कि यह शर्मसार हो जायेंगे, *** , यह स्थिति इनकी होने वाली है । पता नहीं इनको क्या हो जाता है जब कभी भी कोई व्यक्ति बोलता है, कोई बात करता है आप भी जब अवसर आये आप जवाब दे देना ।
श्री अध्यक्ष: आप तो बिजली पर बोलो ।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैंने यह बात कही कि आज आवश्यकता है कि विद्यार्थी को पढने के लिये बिजली मिले लेकिन इन्होंने कभी भी चिंता नहीं की, इन्होंने कभी भी विद्यार्थी की चिंता नहीं की और चिंता की है तो राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने की है जिन्होंने फीडर रिनोवेशन का काम शुरू किया । यानी बिजली की छीजत को कम करने के लिये जिस किसी भी क्षेत्र में जहां 15 प्रतिशत छीजत रह जायेगी उस क्षेत्र को 24 घंटे बिजली मिलेगी और इस दिशा में जो वर्तमान सरकार ने सराहनीय प्रयास किये हैं उसकी प्रशंसा तो करनी पडेगी । इससे आपको दर्द होता है, इसके कारण आपके पेट में मरोडे उठते हो तो उसका तो इलाज मेरे पास है नहीं । यहां पर व्यवस्थाएं भी हैं कि आप उसका इलाज वहां जाकर करवा दे ।
अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहूंगा कि अभी ओलावृष्टि हुई । ओलावृष्टि में किसानों को रबी की फसल पैदा करने में जो चार महीने लगते हैं उन चार महीनों के बिजली के बिल माफ करने की जो घोषणा की है यह राजस्थान की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने की है और इसके लिये मैं इनको बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहूंगा ।
श्री अध्यक्ष: जिन मंत्रियों को आज बोलना है, जवाब देना है वह प्लीज माननीय सदस्यों से डिसकस नहीं करें । मंत्री जी आज आप सबसे कहें कि आपको डिस्टर्ब न करें।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): इन्होंने कभी भी इस प्रकार की घोषणा नहीं की । इनका पाँच वर्ष का कार्यकाल भी निकाला होगा इन्होंने कभी भी ओलावृष्टि या किसी भी तबाही के समय में किसानों को राहत देने की कोई कोशिश नहीं की । अध्यक्ष महोदय, अभी जो एक व्यवस्था हुई है कि एक किसान अपने खेत में यदि उसके दो कुए हैं तो एक कनेक्शन से दो कुए चला सकता ह, यह कोई कम बात नहीं है यह बहुत अच्छी बात है और इसकी प्रशंसा तो करनी चाहिये ।
श्री अध्यक्ष: मंत्री जी, आज आप माननीय सदस्यों से कहे कि वह आपको डिस्टर्ब नहीं करे, आप सुने कौन क्या कह रहा है आपको जवाब देना है ।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन कर रहा था कि एक किसान अपने खेत में एक कनेक्शन से दो कुए चला सकता है यह बात पहले किसी के समझ में नहीं आई यह इन्होंने व्यवस्था की है और यही नहीं उसके खेत में एक से अधिक कनेक्शन वह लेना चाहे, एक कुए में पानी कम है और दूसरी जगह उसने और कुआ खुदवा दिया और वहां पर भी वह कनेक्शन लेना चाहे तो एक खेत में दो कनेक्शन भी ले सकता है । यह दोनों बातें बहुत सराहनीय है और इसके लिये निश्चित रूप से सराहना की जानी चाहिये । यह बहुत जरूरत थी किसानों को, इसकी बहुत आवश्यकता थी किसानों को ।
श्री अध्यक्ष: एक कनेक्शन से दो कुए चलायेंगे यह बात मेरे समझ में नहीं आई ।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): एक कनेक्शन से दो कुए वह चला सकता है ।
श्री अध्यक्ष: कैसे चलायेगा ।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): वहां पर हार्स पावर की व्यवस्था होती है जैसे तीन हार्स पावर की यहां लगाई, तीन हार्स पावर की वहां लगाई इस प्रकार की व्यवस्था है, अध्यक्ष महोदय, यह व्यवस्था दी है ।
श्री अध्यक्ष: आप खेती करते नहीं आपको नहीं मालूम । (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): माननीय विद्युत मंत्री जी यहां बैठे हैं थोडा वैरीफाई कर दो यह क्या कह रहे हैं ।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैं कह रहा हूं तो वह जवाब दे देंगे आप थोडा धैर्य तो रखो । जो बात मैंने कही है कि एक कनेक्शन से ...
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): आपने जो बात कही है फिर आपसे अध्यक्ष जी ने स्पष्टीकरण मांगा है वह आप दे ही नहीं पा रहे हो ।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): बोल रहा हूं ना ।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): आप नहीं दोगे तो फिर वह देंगे । आप समझा दो अध्यक्ष जी को ।
श्री मदन राठौड़
(सुमेरपुर): दो पंप
चला सकते है। मैं वहीं
तो कह रहा हूं ।
श्री गजेन्द्र सिंह (राज्य मंत्री, ऊर्जा): अध्यक्ष महोदय, लोड एक्सटेंशन की बात कर रहे हैं ।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): Load extension is another thing.
श्री अध्यक्ष: उनको बोलने दो ना क्या कह रहे हैं मेरी समझ में नहीं आई कि एक से दो कुए कैसे चलायेंगे ।
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्यक्ष जी तो ऊर्जा मंत्री रही हैं स्वयं और राजस्थान की सफल ऊर्जा मंत्री रही हैं ।
श्री अध्यक्ष: और मैं काश्तकार भी हूं ।
श्री गजेन्द्र सिंह (राज्य मंत्री, ऊर्जा): अगर एक खेत में एक कुआ हो और उपभोक्ता एक और कुआ खुदवाना चाहे तो वह लोड एक्सटेंशन कर के सैकिंड कनेक्शन भी ले सकता है ।
श्री अध्यक्ष: वह अलग बात है, लेकिन वह एक कनेक्शन से दो कुए कैसे चला सकता है ।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मतलब एक कनेक्शन से दो कुए वह चला सकता है, दो पंप लगा कर, लोड एक्सटेंशन के लिये वही मैंने निवेदन किया था ।
श्री अध्यक्ष: कैसे चलायेगा एक कनेक्शन से दो कुओं को समझ में नहीं आई बात ।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैं एक्सप्लेन कर रहा हूं । मैं यही निवेदन कर रहा हूं...
श्री अध्यक्ष: ठीक है आगे बढिए आप ।
श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): अध्यक्ष महोदय, क्या एक बार हम कनेक्शन ले लेते हैं तो उससे दो कुओं पर चला सकते है क्या । मंत्री जी हमारे माननीय सदस्य जो बोल रहे हैं उनकी भावनाओं को आप क्लियर क्यों नहीं करते ।
श्री गजेन्द्र सिंह (राज्य मंत्री, ऊर्जा): लोड बढाने की फाइल लगानी पडेगी, आपको पेमेंट देना पडेगा और फिर उससे लोड बढा सकते हैं ।
श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): वह तो अलग बात है, माननीय राठौड साहब जो बता रहे हैं इसके मुताबिक आपकी क्या भावना है ।
श्री अध्यक्ष: राठौड साहब को पूरी तरह से ज्ञान नहीं है ।
श्री गजेन्द्र सिंह (राज्य मंत्री, ऊर्जा): आपने बोल दिया लोड एक्सटेंशन के बारे में । (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: दो कुए कैसे चलायेगा एक कनेक्शन से ।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): बता दिया ना, दो पंप चला सकता है ।
श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): यह जानते नहीं है .. (व्यवधान) लोड बढ जायेगा उसमें चाहे दो कुए चले चो चार कुए चले, बिल आ जायेगा ।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): बिल एक आयेगा दो पंप चला सकते हैं । आपको समझना है तो और समझ लो वैसे अपन सब को मिला है उसमें यदि आप थोडा अध्ययन कर लेते तो शायद यह प्रश्न यहां दुबारा करने की आवश्यकता नहीं पडती । क्योंकि अपन उसमें से पढते तो है नही, तैयारी कर के आते नहीं है ।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): जब उसके पढने से ही काम चल जायेगा तो आप काहे को बोल रहे हो, पढ लेंगे ।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैं बोल रहा हूं उसमें तो आप टोक रहे हैं ।
डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): पढने के बाद समझ कर आयेंगे और भाषण शानदार दे रहे हैं ।
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): अध्यक्ष महोदय, मैं चाहता तो नहीं था मेरे मित्र मदन जी को डिस्टर्ब करूं लेकिन अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि हमको डिमांड में और चर्चा में फर्क तो समझना पडेगा । आज बजट की डिमांड नहीं है जिसमें उपलब्धी भी बताएं और कमियां भी बताएं । आज राज्य में बिजली की स्थिति और सूखे व अकाल की स्थिति पर चर्चा है । उस चर्चा में अपनी अपनी जो समस्याएं हैं कि हमारे यहां यह होना चाहिये वह अगर बतायेंगे तो सरकार की तरफ से समाधान होगा और फिर आप चार बजे कह दो कि आज महामहिम राज्यपाल महोदय आ रहीहै वह बेस्ट विधायकों वाला हो जायेगा तो मैं समझता हूं दो घंटे में कैसे यह चीज हो पायेगी । इसलिए कोई आप एक प्रक्रिया तय कर लें । मदन जी अपनी बात कन्टीन्यु रखें अगर उसके हिसाब से चलेंगे तो काम चलेगा नहीं तो कोई मतलब नहीं निकलने वाला है ।
श्री अध्यक्ष: पाँच नहीं साढे चार बजे ही बंद हो जायेगा ।
ans/akt
13.20 1p 3.4.2007
श्री मदन राठौड़
(सुमेरपुर): आप बोलने
तो दीजिए। (व्यवधान)
श्री मंगलाराम गोदारा (श्रीडूंगरगढ़): मैंने आपको नहीं रोका (व्यवधान) आप टाइम फिक्स करो।
श्री अध्यक्ष: किसी भी वक्ता को दस मिनट से ज्यादा समय नहीं मिलेगा।
श्री मंगलाराम गोदारा (श्रीडूंगरगढ़): अध्यक्ष महोदय, कम से कम टाइम फिक्स करो, सबको मौका मिले बोलने का।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आपने मुझे कहा, एक मिनट तो बोलने दिया नहीं।
श्री मंगलाराम गोदारा (श्रीडूंगरगढ़): सब अपनी समस्या सुना सके, कम से कम टाइम तो फिक्स कीजिए।
श्री अध्यक्ष: किसी भी वक्ता को दस मिनट से ज्यादा समय नहीं मिलेगा। (व्यवधान)
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्यक्ष महोदय, एक मिनट एक वाक्य भी पूरा नहीं कर पाता हूं। मैं बोलना शुरू करता हूं और यह टोकना शुरू करते हैं फिर दर्द भी महसूस करते हैं और मित्र भी बनते हैं, मित्र बनते हो तो मित्र बनते हो तो मित्रता निभाने की तो कोशिश करो। आप मित्र बन रहे हो और बीच में टोक रहे हो। अध्यक्ष महोदय, बीच में टोक रहे हैं।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): यह मित्र कैसे बनाए इनके अंदर की बात आप बाहर कर देते हो। आपको प्राइवेट बात बताते हैं वह बाहर कर देते हो।
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): जिसकी प्राइवेट लाइफ ठीक नहीं है उसकी सार्वजनिक लाइफ अच्छी हो ही नहीं सकती। ( व्यवधान)
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): जो नरभक्षी है यह ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप बीच में नहीं बोले।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): आपको नरभक्षी कह रहे हैं।( व्यवधान) यह कहा है उन्होंने।
श्री अध्यक्ष: मुख्य सचेतक जी।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): आपके लिए कहा है । (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: माननीय मुख्य सचेतक।
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): आपको टैस्ट करने के लिए कह रहे होंगे, हक है उनको।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): यह उन्होंने कहा, जो आपने बताया ना उसका नाखून आपके गले में आ गया था। बताया था इन्होंने।
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): ठीक है । (व्यवधान)
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्यक्ष महोदय, यह निवेदन कर रहा था कि कई ढाणियां अविद्युतीकृत रह गई और उसका कारण यह रहा कि जो राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना लागू है वह हमारे पाली जिले में लागू नहीं थी। हमने बहुत कोशिश की कि यह वहां भी लागू हो जाए, इस प्रकार के बहुत प्रयास किए। राजस्थान के कई जिलों में वह लागू थी लेकिन पाली जिले को उससे वंचित रखा गया, इसमें निश्चित रूप से इनकी दोहरी नीति थी। इन्होंने पाली जिले के साथ में, जब कांग्रेस का राज था इन्होंने भेदभाव किया क्योंकि वहां आठ में से आठ विधायक बीजेपी के जीतते थे। अभी छह विधायक जीतकर आए, सांसद हमारा है, जिला प्रमुख हमारा और सभी चुनाव भारतीय जनता पार्टी ने जीते इसलिए पाली जिले को इन्होंने वंचित रखा।
मैं आपके माध्यम से राजस्थान की वर्तमान सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगा और वसुन्धरा राजे जी सिंधिया को जिन्होंने दिल्ली तक संघर्ष किया। हमारे मंत्री जी ने भी चिट्ठियां लिखी और चिट्ठियां लिखकर अब राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का लाभ पाली जिले को मिल रहा है। इसके कारण निश्चित रूप से अब हमारी जो छोटी-छोटी ढाणियां हैं ,अनुसूचित जनजाति की ढाणियां है वह भी अब विद्युतीकृत हो जाएगी। इस प्रकार की व्यवस्था बहुत पहले हो जानी चाहिए थी, जो इन्होंने नहीं होने दी लेकिन अब होगी इसके लिए मैं वर्तमान सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगा।
माननीय अध्यक्ष महोदय, पहले ट्रांसफार्मर जलते थे और ट्रांसफार्मर जलने के काफी लंबे समय तक यह परवाह नहीं करते थे लेकिन हमारी सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि 72 घंटे में, यानि सूचना मिलते ही 72 घंटे में निश्चित रूप से ट्रांसफार्मर बदल दिए जाएंगे। मैं इसके माध्यम से आपसे निवेदन करूं कि हमने तीन वर्षों में 107030 ट्रांसफार्मर बदले, यह कोई कम बात नहीं है। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: यह जवाब मंत्री जी देंगे।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्यक्ष महोदय, जब विषय आएगा तो बोलना तो पड़ेगा। मेरे यह समझ में नहीं आया मैं काई भी बात बोलूं, मैं बोल तो रहा हूं, जब राजीव गांधी की बात कही तब तो इनको बहुत अच्छा लगा कि राजीव गांधी का नाम ले रहा है लेकिन जब मैं कोई यह बात बोलूं कि यह आपने नहीं किया हमने किया है तो इनको और दर्द होने लग जाता है और एतराज करना शुरू कर देते हैं। (व्यवधान) मंत्री जी तो बोल देंगे लेकिन मुझे तो अपनी बात कहने दें। फीडर इनोवेशन के काम करवाने हैं और इसके लिए थोड़ी स्पीड बढ़ाने की आवश्यकता, तो फीडर इनोवेशन...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: कृपया समाप्त करें। कृपया समाप्त करें।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्यक्ष महोदय, मैंने कितने मिनिट बोला आप देख लें।
श्री अध्यक्ष: आपने 1.06 बजे शुरू किया था अब 1.23 हो रहे हैं।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्यक्ष महोदय, उसमें टोका टोकी में कितना गया..(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: व्यवधान हुआ...
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): यह मेरे साथ हमेशा होता है। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आपके व्यवधान हुआ है।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): व्यवधान का समय तो दें। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: मैंने आपको 18 मिनिट इसीलिए दिए हैं कि आपके व्यवधान हुआ।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्यक्ष महोदय, यूं तो मेरा विषय पूरा ही नहीं होगा।
श्री अध्यक्ष: अब तो आप कृपा करों ना मेरे पर। थैंक्यू वेरी मच, थैंक्यू। श्री बी.डी. कल्ला।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): अध्यक्ष महोदय, आज विद्युत और अकाल के बारे में चर्चा हो रही है उसके बारे में अपने विचार व्यक्त कर रहा हूं। राजस्थान में प्राय: इन्फ्रास्ट्रक्चर के डवलपमेंट के लिए 60 प्रतिशत पैसा खर्च किया जाता रहा है लेकिन पिछले 3 वर्ष 4 महीने में वर्तमान सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर के डवलपमेंट के लिए जिसमें विद्युत प्रमुख, सिंचाई दूसरा है, विद्युत के लिए इतनी राशि खर्च नहीं की जिसके कारण 3 वर्ष 4 महीने में जितना विद्युत का उत्पादन होना चाहिए वह उत्पादन नहीं हुआ।
मैं केन्द्रीय सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी का आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि उन्होंने बरसिंहसर पलाना लिग्नाइट थर्मल पावर प्रोजेक्ट जो वर्षों से लंबित था उस योजना को स्वीकृत करके पश्चिमी राजस्थान के उस इलाके में 125 X 2 मेगावाट के दो संयंत्र लगाने का निर्णय लिया और उसका शिलान्यास भी हो चुका है। उससे पश्चिमी राजस्थान के 12 जिलों को जो एरिड और सेमी एरिड जोन में आते हैं उनको इसका विशेष लाभ मिलेगा। (व्यवधान)
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): गलत बात बोल रहे हैं कि खर्च कम किया। बिजली खरीदने में कितना खर्च किया और उत्पादन में कितना खर्च किया यह थोड़ा पढ़ लेते तो फिर नहीं बोलते। (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): मैंने उत्पादन की बात की है यह खरीदने की बात कर रहे हैं। (व्यवधान)
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): उत्पादन के बारे में भी आपने गलत जानकारी दी है। (व्यवधान) आप मुझे नहीं बोलने देते हो तो फिर आप कैसे बोलेंगे यह सब।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): मैं तो एक बार भी खड़ा नहीं हुआ आपके बीच में। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्य ऐसा कहना उचित नहीं है। (व्यवधान) आपके भाषण के दौरान मिस्टर बी डी कल्ला एक बार भी न बोले न खड़े हुए और आप..। हर व्यक्ति को यहां आजादी है वह चाहे वह बोले और उस पर न कहीं कोई कार्यवाही हो सकती है, न कोई कोर्ट में जा सकता है। अब वह बोल रहे हैं, अब कौन कितना सही बोलता है, कितना गलत बोलता है, सब आंकते हैं इस बात को। सब आकलन हो रहा है। आप क्यों बोलते हैं, गलत बोल रहे हैं कि सही बोल रहे हैं, आप बोलने दे Let him speak.
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मेरे समय में क्या हुआ अध्यक्ष महोदय ?(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: किसके राज में काम हो रहा सब जानते हैं। क्या हो रहा है, क्या नहीं हो रहा आपको कहने की क्या जरूरत है यह बात । (व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मेरा जहां तक ख्याल है इनको गलतफहमी हो रही है। कल्ला साहब की आवाज सुन नहीं पा रहे है। कृपया करके आप इधर पधार जाओ1 नजदीक आ जाओंगे तो सुन लोगो तो जवाब भी ठीक ढंग से दे पाओंगे, आप मेहरबानी करिये। नीचे कील है क्या कि आप बार बार चिल्लाते हो(व्यवधान) एक लीडर बोल रहे हैं। एक लीडर बोल रहे हैं, थोड़ा उसमें रहा करें। आप ही विधायक नहीं हो यहां।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आप क्यों खड़े हो गए, आप तो बैठो, दूसरों को हुकम देते हो।(व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): अध्यक्ष महोदय, मैं यह कह रहा था प्रधानमंत्री जी के हम आभारी है कि उन्होंने पश्चिमी राजस्थान में पलाना बरसिंहसर लिग्नाइट थर्मल पावर प्रोजेक्ट की शुरूआत की और उससे राजस्थान के उन 12 जिलों को, जो एरिड और सेमी एरिड जोन में आत हैं उनको लाभ मिलेगा। एक बार प्रोफेसर सी एस क्रिश्चियन सन 1959 में यहां पर एक टीम लेकर आए थे यू एन ओ उसमें उन्होंने राजस्थान की एक्स्ट्रीम एरिडिटी जहां पर सर्दी में बहुत सर्दी पड़ती है, गर्मी में बहुत अधिक सर्दी पड़ती है टेम्परेचर का वेरीएशन, बरसात की कमी और एक्स्ट्रीम एरिडिटी यानि मरूस्थल को देखते हुए वहां के वनस्पतियों का ध्यान रखते हुए 12 जिलों को एरिड और सेमी एरिड जोन में विभक्त किया। जिसमें खासतौर से बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, जालौर, झुन्झुनू,सीकर, चूरू और यहां तक सिरोही तक का इलाका आता है। 12 जिलों को एरिड और सेमी एरिड जोन में बांटा। झुन्झुनू, सिरोही यह सेमी एरिड जोन में हैं और बीकानेर, जेसलमेर बाड़मेर जहां एक्स्ट्रीम एरिडिटी है उनको उन्होंने एरिड जोन में विभक्त किया। इन 12 जिलों को इस बिजली के कारखाने से बिजली मिलेगी।
मैं आपके ध्यान में यह भी लाना चाहता हूं कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के वक्त में सूरतगढ़ थर्मल पावर प्रोजेक्ट है उसके अंतर्गत प्रतिवर्ष 250 मेगावाट बिजली पैदा हुई और राज्य को लगभग साढ़े बारह सौ मेगावाट बिजली मिली। कुल मिलाकर पिछले पाँच वर्ष में यानि 98 से 2003 तक हमने राजस्थान में लगभग 1750 मेगावाट बिजली राजस्थान को पैदा करके दी जिससे किसानों के खेतों में बिजली पहुंची। किसानों को लगभग आठ घंटे बिजली मिली। किसान खुशहाल हुआ। मैं जानना चाहता हूं 3 वर्ष और 4 महीने में माननीय ऊर्जा मंत्री जी आप यह बताए कि आपने कितनी बिजली किस-किस संयंत्र से पैदा की, केन्द्रीय किट से आपको कितनी बिजली मिली और खासतौर से जो इन्फ्रास्ट्रक्चर का 60 प्रतिशत पैसा डवलपमेंट करने के लिए आप खर्च करते हैं उसमें आपने इन्फ्रास्ट्रक्चर पर और खासतोर से बिजली के ऊपर कितना खर्च इन 3 वर्ष 4 महीने में किया, इसका हिसाब राजस्थान की जनता आपसे चाहती है।
दुर्गा/त्रिपाठी
030407 1330 1q
मैं आपके माध्यम से ऊर्जा मंत्रीजी से निवेदन करना चाहूंगा कि हम लोगों ने सन 98 से लेकर 2003 तक बिजली की छीजत को रोकने के लिये 11 के.वी., 33 के.वी. और उसके बाद में 120 के.वी., 220 के.वी. और खास तौर से 11 के.वी. और 33 के.वी. का तो जाल बिछा दिया था और उससे बिजली की छीजत भी कम हुई। लेकिन आज बिजली की छीजत बढ़ रही है जिसके कारण आज आपको बिजली की छीजत बढ़ने के कारण बिजली कम्पनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मैं यह भी आपके ध्यान में लाना चाहता हूं कि आपने परिवर्तन यात्रा शुरू की, आज की मुख्य मंत्री उस समय भारतीय जनता पार्टी की अध्यक्ष थीं, उस समय दो बातें किसानों के सामने रखीं, एक तो यह कहा कि बिजली के बिल में करण्ट आ रहा है, हम जब सत्ता में आएंगे तब बिजली का करण्ट कम करेंगे। अब किसान भाइयों से जाकर पूछो, आम उपभोक्ताओं से पूछो कि बिजली का करण्ट ज्यादा आ रहा है या कम आ रहा है। 950 करोड़ रुपये की वृद्धि बिजली के बिलों में कर दी, प्रतिवर्ष। और उसके साथ-साथ आज बिजली मात्र साढे तीन से चार घण्टे आ रही है। आठ घण्टे बिजली देने का वादा करने वाली सरकार ने आज किसानों को मात्र साढे तीन-चार घण्टे बिजली दी है। जिसके कारण वह त्राहि-त्राहि कर रहा है।
मैं यह भी कहना चाहता हूं कि जिस किसान के खेत में पानी खत्म हो गया है वह चाहता है कि दूसरे रकबे पर वह कुआं खोदकर कनेक्शन लेना चाहे तो उसको कनेक्शन नहीं मिलता है। कई बार किसानों का मीटर जल जाता है, मीटर जलने के बाद, अध्यक्ष महोदय, उस मीटर को बदलने के लिये पैसे लिये जाते हैं। किसान की तो कोई गलती नहीं, बिजली में फ्लक्चुएशंस आने के कारण मीटर जल गया, लेकिन किसान को बारबार मीटर जलने पर उसकी राशि जमा करानी पड़ती है। और उसमें भी, राशि जमा कराने के बाद दो महीने से लेकर चार महीने तक मीटर बदला नहीं जाता है। इससे भी किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। इसको ठीक किया जाना चाहिए। गांव में जो बिजली की लाइनें पड़ी हुई हैं, वह बिजली की लाइनें इतनी ढीली हैं कि उसके कारण कई बार ट्रक टकरा जाते हैं, कई बार एक्सीडेंट हो जाते हैं। इसलिये गांवों में जो विद्युत लाइनें डाली हुई हैं उनको ठीक करने की आवश्यकता है, दुरुस्त करने की आवश्यकता है। इसके अलावा मैं यह आपके ध्यान में लाना चाहता हूं कि खास तौर से बकाया कितना है राज्य में और उसके लिये आपने 3 वर्ष और 4 महीने में क्या अभियान चलाया। मैं जानना चाहता हूं कि आज राजस्थान में जो विद्युत के बिलों का बकाया है, वह खास तौर से बड़े लोगों का बकाया है। उन बकाया की वसूली के लिये आपने क्या-क्या प्रयत्न किये और कितनी-कितनी वसूली की और अब कितना बकाया है। उसके लिये आप के पास क्या योजना है, उसके बारे में आप प्रकाश डालेंगे, राज्य का हजारों करोड़ रुपया जो बिजली का बकाया है वह वसूल होने का मार्ग प्रशस्त होगा।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप चाहते हो ना वसूली करें हम।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): हां, मैं चाहता हूं वसूली हो, बकाया की वसूली हो।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अभियान चलाएं, किसान का कनेक्शन काटें। किसान के कनेक्शन काटकर वसूली करें। अध्यक्ष महोदय, आपने मना कर रखा है कि टोकाटाकी न करें, पर कह क्या रहे हैं, यह रिकार्ड पर जा रहा है। कल्लाजी, आपकी पार्टी के लोग ही नहीं छोड़ेंगे आपको।
श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): किसानों के तो आप कनेक्शन ही काटोगे। राठौड़ साहब, किसान के तो कनेक्शन ही काट देंगे, वसूली हो जाएगी। बड़े लोगों को आप संरक्षण दे रहे हैं, उनसे सरकार मिली हुई है, लाखों करोड़ों रुपया जिनके बिल बकाया हैं, उनकी बात है।
श्री मंगलाराम गोदारा (श्रीडूंगरगढ़): बड़े लोगों को संरक्षण दे रहे हैं, उन किसानों को कौन छोड़ रहा है। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्य, माननीय सदस्य, विराजिये।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उनके मुंह से निकली हुई बात, कांग्रेस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष के मुंह से निकली हुई बात है। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: जो चाहेंगे वह कहेंगे।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): आप विराजिये। अध्यक्ष महोदय, मैंने कहा, बड़े लोगों का बकाया है और यह किसानों पर आ गये। यह बात को डाइवर्ट करने के मास्टर हैं। मैं कह रहा हूं बड़े लोगों के बकाया हैं और आप आ गये किसान पर।
श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): किसानों को तो कौन छोड़ेगा वहां पर।
श्री अध्यक्ष: आप अपनी मास्टरी कम करो थोड़ी।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपने कह दिया तो अब चुप रहेंगे।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): यह बात को ट्विस्ट करने का यह इन्होंने अपने पुराने नेता से सीखा है, बात को ट्विस्ट कैसे करना। लेकिन हमारे मुंह में आप अपने शब्द नहीं डाल सकते । हम किसान के हितैषी हैं, आप लोगों की सरकार, किसानों की हितैषी नहीं है, किसानों के प्रति संवेदनाहीन हैं आप लोग।
मैं इसके अलावा आपके सामने यह बात रखना चाहता हूं कि आर.ए.पी.पी. का थर्ड यूनिट, जिसकी ढाई सौ मेगावाट बिजली राजस्थान को मिलती है उसे आपने मध्य प्रदेश को क्यों दे दी। इससे क्या आप ढाई सौ मेगावाट बिजली जो हमेशा राजस्थान को मिलती थी, उसको कहां से लाएंगे। और एक बात जो राजस्थान के हित की महत्वपूर्ण है। हमेशा जब यहां विपक्ष में बी.जे.पी. रहती थी तो इण्टर-स्टेट डिस्प्युट्स को हमेशा उठाती थी। मैं आपके माध्यम से यह कहना चाहता हूं कि आपने इण्टर-स्टेट डिस्प्युट्स के मामले में क्या-क्या किया। आज रावी और व्यास का पानी जहां-जहां से गुजरता है, रिहन्द, थीम डेम, इसके ऊपर हमारा जो भी बिजली का हिस्सा बनता है, उसको लेने में आपने क्या वार्ता की। क्या आपने कभी पंजाब से वार्ता की, आज पंजाब में आपकी सरकार है। आपने उसके बारे में कब-कब कैसी मीटिंग में इन मसलों को उठाया। राजस्थान के हितों की हमेशा बात करने वाले जब आप विपक्ष में थे तो राजस्थान के हितों की बात करते थे लेकिन सत्ता में आने के बाद आप शिथिल हो जाते हैं। सत्ता में आने के बाद इस प्रकार की कोई बात नहीं करते। तो मैं चाहता हूं कि पंजाब की रावी और व्यास की नदियां, जिनके ऊपर बिजली घर बने हैं उसमें राजस्थान के हिस्से का पानी लेने के लिये आपने क्या-क्या प्रयत्न किये और राजस्थान के हितों के बारे में आपने क्या-क्या रक्षा की, इस बारे में आप बतायें। इसके आगे मैं यह कहना चाहता हूं कि कोल और पार्वती योजना में भी हमारा हिस्सा था। इस कोल और पार्वती योजना में जो एग्रीमेंट हुआ था उस एग्रीमेंट के आधार पर उसमें हमको कम से कम एक हजार मेगावाट से ज्यादा बिजली मिलती। लेकिन मैं जानना चाहता हूं कि कोल और पार्वती योजना, जो अब सेण्ट्रल ग्रिड में चली गयी है उसके लिये आपने क्या प्रयत्न किये, उसमें हमको कैसे-कैसे, कितनी-कितनी बिजली मिलेगी। मध्य प्रदेश के साथ जो हमारे समझौते हैं और चम्बल के ऊपर लगने वाले बिजली घर में हमारा हिस्सा अभी तक तय नहीं हो पाया है। इसी प्रकार रोपड़ का जो बिजली घर है उसके बारे में हमारा जो विवाद चल रहा है, उसके बारे में आप क्या कर रहे हैं। तो इन इण्टर-स्टेट डिस्प्युट्स से जो जो हल होकर, विवाद हल करके हमको बिजली मिलनी चाहिए उस बिजली के बारे में आपको निश्चित रूप से सदन को बताना चाहिए कि हमने तीन वर्ष और चार महीने में यह-यह प्रयत्न किये। मैंने पहले भी इस सदन में जब गवर्नर एड्रेस पर दो साल पहले इन मुद्दों को उठाया था उस समय यह कहा था कि आप इसके लिये एक रिटायर्ड चीफ इंजीनियर, एक रिटायर्ड चीफ जस्टिस और एक रिटायर्ड आई.ए.एस. अफसर जो चीफ सेक्रेटरी लेवल का हो, इन तीनों की कमेटी बनाकर हमारे इण्टर-स्टेट डिस्प्युट्स के बारे में पूरी निगरानी रखें और नियमित रूप से वह इसके ऊपर कार्य करेंगे, तब जाकर के हम राजस्थान के हितों की रक्षा कर पाएंगे।
मैं यह भी कहना चाहता हूं, मैं कोई आरोप नहीं लगा रहा हूं। लेकिन खास तौर से सजग करना चाहता हूं। कोयले की खरीद में कई बार समाचार पत्रों में यह आरोप लगा है कि कोयले की खरीद में गड़बड़ी हुई है। यदि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो ऊर्जा मंत्रीजी, मैं मानता हूं कि आप स्टेट-फारवर्ड मिनिस्टर हैं, आप इसकी जांच कराएं और जहां किसी ने कोई गलती की है, गड़बड़ की है तो उस जांच को करने के बाद इस सदन के पटल पर उस बात को रखें कि कोयले की दलाली में कहीं किसी ने गड़बड़ की है या नहीं की है। अब मैं आपके सामने अकाल के बारे में कुछ बातें कहना चाहूंगा। राज्य में निरन्तर....।
श्री अध्यक्ष: कब रखेंगे, 6 महीने के बाद होगा अब तो। खत्म हो रहा है, कब रखेंगे।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): अकाल के बारे में बहुत संक्षेप में बताऊंगा। मैं अकाल के जिले से आता हूं। राज्य में प्रति एक वर्ष के बाद और कई बार तो हमारे बीकानेर जैसे जिले में लगातार 5-6 साल से अकाल पडा हुआ है। इन अकालग्रस्त क्षेत्रों में राज्य सरकार ने 10649 गांवों को अकालग्रस्त क्षेत्र घोषित किया और अभी एक लिस्ट 1266 गांवों की और निकाली है आपने। मैं यह जानना चाहता हूं आपके माध्यम से, माननीय अकाल राहत मंत्रीजी से, जो यहां सदन में उपस्थित नहीं हैं, कि अकाल राहत कार्य आपने कहां-कहां प्रारम्भ किये और कब से प्रारम्भ किये। और एक महीने में कितने-कितने लेबरर्स को रखा। क्या राज्य में एक भी पशु सेवा शिविर कार्यरत है। आप गायों के नाम पर वोट मांगते हैं लेकिन आज उस गाय को भूखा मरने के कगार पर आपने छोड़ दिया है। गायें भूखी मर रही हैं और उनके लिये राज्य में एक भी पशु सेवा शिविर खोला हुआ नहीं है। चारा डिपो भी नाम मात्र के खुले हुए हैं। और अकाल राहत कार्य टेस्ट-वर्क के रूप में खोले हुए हैं। जब कांग्रेस का राज था उस वक्त हमारे तत्कालीन मुख्य मंत्रीजी ने अगस्त से राहत कार्य खोल दिये और अगस्त में राहत कार्य खोलने के बाद लगभग 11 महीने तक राहत कार्य चालू रखे, जिसके कारण किसान के घर में अगले वर्ष तक गेहूं की बोरियां पड़ी रहीं और वह उस समय की सरकार को धन्यवाद देता रहा । लेकिन मैं यह जानना चाहता हूं कि इतना भंयकर अकाल होते हुए भी आपने उन 10649 गांवों में अभी तक काम नहीं खोला है और गांव के सरपंच को कहीं 20, कहीं 30, कहीं 40 के समीप मंजूर किये हैं, वह किसको रखे और किसको न रखे। मैं समझता हूं कि ऐसी स्थिति में आपको अकाल राहत कार्य, अभी एक अप्रैल से आपको सी.आर.एफ. की नई किश्त मिल गयी है, ऐसे वक्त में धन की आपके पास में कोई कमी नहीं है। आप धन के ऊपर सांप की तरह कुंडली मारकर न बैठकर किसानों के लिये सी.आर.एफ. का पैसा खर्च करें और किसानों को ज्यादा से ज्यादा राहत दें। अब आप सदन को कह रहे हैं सुझाव दें, अकाल क्यों पड़ता है, इसके बारे मं कभी कोई चर्चा नहीं करता। मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं।
Vps-akt-03042007-1340-2a-1
श्री अध्यक्ष: आप बता दो कि क्यों पड़ता है? आप बता दो क्यों पड़ता है?
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): मैं बता रहा हूं। मैं देख रहा हूं कि रेगिस्तान में तो पेड़ लग रहे हैं और हमारी अरावली की पहाडि़यां आप जाकर कभी देखें तो वह बिलकुल पेड़ विहीन हो रही हैं। सारे पेड़ जो है, जंगल बन रहे हैं और पेड़-विहीन जंगल बन रहे हैं। वहां पर आपको कोई झाड़ी भी नहीं मिलेगी। ऐसी परिस्थिति में जब तक हम अरावली की पहाडि़यों को हरा-भरा नहीं करेंगे, जब तक हम अपनी पर्वत श्रृंखलाओं को हरा-भरा नहीं करेंगे तब तक राज्य में वर्षा नहीं होगी। दूसरी तरफ ग्लोबल वार्मिंग के कारण से भी बरसात की कमी हो रही है तो हमको अपने राजस्थान को हरा-भरा बनाना होगा। पेडों की कटाई को रोकना होगा और राज्य में चारों तरफ खास तौर से तीन-चार वर्ष तक पूरे पहाड़ों को आप चारों तरफ कांटेदार एक तरीके से, वह कांटेदार झाडि़यों से रोककर अथवा दीवार बनाकर पूरे पहाड़ों को पेड़-युक्त कीजिए तब जाकर बरसात होगी और जैसा कहते हैं न कि- दाता, तरुवर, संतजन, चौथा बरसते मेह, परमारथ के कारणे इण चारों धारी देह। यह परमार्थ के कारण देह धारण करके आये हैं लेकिन वर्षा जब ही होगी जब पेड़ होंगे। पेड़ नहीं होंगे तो बरसात नहीं होगी। राजस्थान में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के कारण आज राजस्थान में आकल और अभाव की स्थितियां बनती रहती हैं इसलिए आपको मेरा सुझाव है कि आप ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगायें और अभी राष्ट्रपतिजी ने भी यह भावना व्यक्त की थी कि एक व्यक्ति पाँच पेड़ लगाये। हमारी जनसंख्या करीब 6 करोड़ से ऊपर हो गयी है। 6 करोड़ लोग 5-5 पेड़ लगायें तो 30 करोड़ पेड़ लगाये जा सकते हैं और सरकार लगाना चाहे तो ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: नहीं, आप 200 तो लगा लो पाँच-पाँच पौधे। यह तो हो जाएंगे। ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): हां, लगाएंगे, हम तो लगाते हैं। हम तो उद्घाटनों में भी कम से कम 20-25-50 पेड़ तो उद्घाटनों में ही लगा देते हैं और वैसे भी लगाते रहते हैं ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): खुद के घर में एक पेड़ नहीं है। क्या बात कर रहे हो?
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): किसके घर में? अभी आप जाकर देखो कि पेड़ है या नहीं? आप चलकर देखो कि पेड़ है कि नहीं मेरे पास में ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: ऐसे लगाने से नहीं होता है, बीकानेर से आने वाले माननीय सदस्य, ऐसे नहीं।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): यह जयपुर में ही आपको घर में बता दूं कि कितने पेड़ लगा रखे हैं। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: वर्षा के जल के संचयन से ... (व्यवधान)
श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्द): हमने यह जल चेतना यात्रा में निश्चित किया था वृक्षारोपण ... (व्यवधान)
श्री बाबूलाल नागर (दूदू): मेहरबानी करके आप बोलने दें। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: वर्षा के जल के संचयन से पेड़-पौधों को पालो, यह कहा है उन्होंने कि वर्षा के जल के संचयन से पालो, उन्हें लगाओ और फिर पालो। ... (व्यवधान)
श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्द): हमने तो जल चेता यात्रा में बहुत ही सुरक्षित किया था, साहब... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): नहीं-नहीं यह तो बात ही नहीं है कि ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: अध्यक्ष की हैसियत से लगाये हैं। कुछ करके देखा है क्या ... (व्यवधान)।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं लगाये माननीय अध्यक्ष महोदय, इन्होंने ... (व्यवधान) इन्होंने तो कुत्ता है, इसके अलावा ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे घर में सात पीढ़ी में कभी किसी ने कुत्ते को नहीं रखा है। ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): न इसके अलावा माननीय अध्यक्ष महोदय, ... (व्यवधान) कोई पशु पाला है, न इन्होंने एक भी पेड़ लगाया है। न एक भी आदमी को साक्षर किया है। आपने इतनी अच्छी शिक्षा दी आज महामहिम राष्ट्रपति महोदय के पत्र के माध्यम से , एक भी काम यह नहीं करते हैं कांग्रेस के अध्यक्षजी। ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): यह बिलकुल ऐसा है, मेरे घर में सात पीढ़ी में कभी किसी ने कुत्ता पाला हो तो मैं सदन से, सदन की सदस्यता से त्याग-पत्र दे दूंगा। सात पीढ़ी में कभी किसी ने कुत्ता नहीं पाला। ... (व्यवधान)
एक माननीय सदस्य: आपका पेड़ तो निश्चित मर जाएगा और कल्ला जी का जिंदा रह जाएगा। ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): छोटा कुत्ता, छोटा वाला कुत्ता। ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): छोटा नहीं, कोई पिल्ला भी नहीं है। यह आपने किया है वह काम।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): छोटे वाला। माननीय अध्यक्ष महोदय, आखिरी दिन है वरना मैं उसको लाकर दिखाता। उसका नाम भी बताऊं? उसका नाम भी बताऊं? ममताजी, आप बता दो उसका नाम। ... (व्यवधान)
एक माननीय सदस्य: टोमी-टोमी।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): कोई टोमी है, न कोई बोमी है। यह आप अपनी कपोल कल्पना कर रहे हो। आपको पता ही नहीं है। यह तो ऐसी बात हुई मेरे को अभी किसी, पिछले सत्र में एक माननीय सदस्य ने यह कहा कि ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: प्लीज-प्लीज ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): आप टी.वी. देखते हो? तो मैंने पहले उनसे पूछा कि मैं कहां रहता हूं? तो उन्होंने कहा कि मुझे पता नहीं। तो मैंने कहा कि मेरे पास टी.वी. है या नहीं? तो उन्होंने कहा कि मैंने तो मजाक की है। वैसे ही यह मजाक कर रहे हैं। मैं कह रहा हूं कि मेरी सात पीढ़ी में कभी किसी ने कुत्ता नहीं पाला।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अब यह सात पीढ़ी की बात कर रहे हैं। तीन पीढ़ी का भी पता नहीं। छठी पीढ़ी में कौन था आपके प्रमुख, परिवार का नाम बता सकते हैं?
श्री अध्यक्ष: प्लीज डोंट डिस्टर्ब। ... (व्यवधान)
श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्द): आप सात पीढ़ी की क्या कह रहे हो? आप तो आजीवन कहो कि मेरी किसी भी पीढ़ी ने नहीं पाला। ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): उद्धोदासजी कल्ला। छठी पीढ़ी उद्धोदासजी कल्ला थे। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: उनकी बात का आप जवाब दे रहे हैं, यह जवाब हुआ क्या? ... (व्यवधान)
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अब मैं यह कैसे एतराज करूं? कुछ भी, उमेश कल्ला बता दो आप तो। ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): उनको पता नहीं है। ऐसा है उनको पता नहीं है। हम तर्पण करने वाले लोग हैं। हम तर्पण करने वाले लोग हमारी चार-पाँच पीढि़यों को, 6 पीढि़यों को हम याद करते हैं। उनको तर्पण करते हैं बराबर। हम ऋषियों को तर्पण करते हैं। स्वतंत्रता सेनानियों को तर्पण करते हैं। इनको पता तो है नहीं संस्कृति का। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: हां। ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): अभी यह आत्मा की बात कर रहे थे। मैं आत्मा के बारे में भी बता दूं। आत्मा के माध्यम से बुद्धि को नियंत्रित करो और बुद्धि के माध्यम से मन को नियंत्रित करो और मन के माध्यम से हमारी ज्ञानेन्द्रियों को और कर्मेन्द्रियों को नियंत्रित करो। आत्मा जो है स्वयं की ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: वाणी को नियंत्रित करो।
श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्द): आप ऐसा करते हैं क्या? आप स्वयं करते हैं क्या ऐसा? कथनी और करनी में अन्तर है आपके। अन्तर है आपके कथनी और करनी में ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: राजसमन्द से आने वाले माननीय सदस्य।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): ... (व्यवधान) प्रतिपक्ष के नेता ने ठीक कहा है। ... (व्यवधान) आत्मा जिन्दा होकर भी मरी हुई के समान होगी। आत्मा का नियंत्रण बहुत जरूरी है और नहीं तो आत्मा जिन्दा दिल में भी आत्मा नहीं होती। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: वाणी का नियंत्रण भी जरूरी है। वाणी का नियंत्रण भी जरूरी है। ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): हां, वह जब होगा, जो मैंने आपको कहा है न आत्मा का बुद्धि पर नियंत्रण, बुद्धि का मन पर नियंत्रण और मन का नियंत्रण कर्मेन्द्रियों पर ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: यह लोग नहीं रखते हैं वाणी पर नियंत्रण। कई माननीय सदस्य नहीं रखते हैं वाणी पर नियंत्रण, इनसे कहो आप ... (व्यवधान) कई सदस्य नहीं रखते हैं वाणी पर नियंत्रण।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): हां, वह नहीं है।
श्री अध्यक्ष: इनसे कहो आप। ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): और वाणी जो है वह कर्मेन्द्रिय भी है और ज्ञानेन्द्रिय भी है। ... (व्यवधान)
श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्द): माननीय अध्यक्ष महोदय, हमेशा ऐसा करते ही नहीं हैं। ऐसा करते ही नहीं हैं वह कहने वाले ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): रहिमन जिह्वा बावरी, रहिमन जिह्वा बावरी कह गयी सरक पाताल, आपुही तो अन्दर भई और जूती खात कपाल।
श्री अध्यक्ष: वाह।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): इसलिए यह जो जिह्वा है न यह ज्ञानेन्द्रिय भी है और कर्मेन्द्रिय भी है।
श्री अध्यक्ष: आपुही तो भीतर गई, यह है आपुही तो भीतर गयी और जूती खात कपाल ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): हां, आपुही तो भीतर गयी, जूती खात कपाल तो इसलिए जिह्वा को बस में रखने की जरूरत है। मैं आपके माध्यम से माननीय अकाल राहत मंत्रीजी को यह निवेदन करना चाहता हूं ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: यहां तो कोई कपाल पर खाने की गुंजाइश नहीं है, जूते खाने की ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): नहीं, हमारे तो नहीं है।
श्री अध्यक्ष: यहां तो नहीं है न?
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): मैं तो इन सब चीजों का ज्ञान रखता हूं।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): करेगा जो खाएगा, नहीं करेगा तो कैसे खाएगा? ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना, इसके अन्तर्गत पहले 6 जिले थे अब 12 जिले थे। उनमें माननीय अध्यक्ष महोदय, इन्होंने एक भी राहत कार्य नहीं खोला और अभी भी सरकार की कोई योजना नहीं है। उन जिलों में जहां अकाल है, राज्य सरकार को तत्काल राहत कार्य खोलने चाहिए और उन क्षेत्रों में पशु सेवा शिविर खोलने चाहिए। पहले जो डेयरी के माध्यम से जो केटल फीड मिलता था उसके ऊपर सब्सिडी मिलती थी वह सरकार ने बंद कर दी है उसको भी मैं समझता हूं कि उसके ऊपर सब्सिडी देनी चाहिए और इसके साथ-साथ केटल फीड की कीमत राज्य सरकार ने बढ़ाई है उसको अकाल को देखते हुए कम किया जाना चाहिए, इसके अलावा ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: वह मंत्रीजी नदारद हैं, आप किसको कह रहे हैं? ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): इसके अलावा अभी हाल ही में ... (व्यवधान) कोई मंत्री नहीं है यहां पर, मंत्रीजी सीरियस नहीं हैं। ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): तबीयत खराब है। मैं नोट कर रहा हूं। जवाब आपका, एक-एक चीज का आपका जवाब देंगे हम। ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): अब अभी हाल ही में जो ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: जवाब भी आप ही देंगे क्या?
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं-नहीं, जवाब वह ही देंगे, साहब।
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): यह हरफ़नमौला है, यह दे सकते हैं।
श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): यह हरफ़नमौला है? ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: नहीं, हरफ़नमौला मत कहो, सर्वगुण सम्पन्न कहो आप। यह गलत बात है। सर्वगुण सम्पन्न कहो।
श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): यह हरफनमौला क्या है? वह उसका ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): हरफ़नमौला का भी मतलब यही है कि सब जगह हाथ मार लेते हैं। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: नहीं हरफ़नमौला नहीं ... (व्यवधान) नहीं यह गलत बात है।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्यक्ष महोदय, एक यह कहावत है कि- Jack of all trade, master of none. यह कहावत है।
श्री अध्यक्ष: हरफ़नमौला का मतलब ... (व्यवधान)
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): नहीं, मैं एक दूसरी बात कह रहा हूं, वह उसको दूसरी बात कह देते हैं, Jack of all trade, master of none.
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अच्छा दे रहे हो। ... (व्यवधान)
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): हंसी-मजाक भी होनी चाहिए, कभी-कभी। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आज यह श्रेष्ठ विधायक अपना वह प्रदर्शन कर रहे हैं न ... (व्यवधान)
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): ठीक है, हंसी-मजाक भी तो होनी चाहिए हाउस में, ऐसी बात तो नहीं है कि नहीं होनी चाहिए। ... (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी जो यह ओलावृष्टि हुई उसमें यह घोषणा की गयी कि जो मृतक परिवार है उनको 51-51 हजार रुपये दिये जाएंगे और इसी प्रकार से उनको इन्होंने पहले 2500 रुपये प्रति हैक्टेयर, फिर 3000 रुपये प्रति हैक्टेयर और दो हैक्टेयर तक सीमित रखते हुए मुआवजा देने की बात की। मैं इस संबंध में पुन: राज्य सरकार को यह सुझाव देना चाहता हूं कि हरियाणा हमारा पड़ोसी राज्य है। पंजाब भी हमारा पड़ोसी राज्य है। वहां पर आठ हजार रुपये हैक्टेयर से लेकर 12 हजार रुपये हैक्टैयर तक किसानों को मुआवजा दिया जा रहा है तो इसके ऊपर इनको पुनर्विचार करने की आवश्यकता है और अभी आज ही मेरे से, मैं यह ज्ञापन यहां पर सदन के पटल पर रखना चाहता हूं, उसमें देव गांव भीलों की ढाणी, इसके लोग मुझे मिले। उनको केवल मात्र 800-800 रुपये का मुआवजा दिया गया है जो निश्चित रूप से बहुत ही न्यूनतम राशि है। इसके बारे में भी सरकार को पुनर्विचार करके और किसानों के बिजली के बिल छह महीने के माफ करने चाहिए और कम से कम आठ हजार रुपये प्रति हैक्टेयर से लेकर 12 हजार रुपये प्रति हैक्टेयर के हिसाब से और जितने हैक्टेयर में उन्होंने फसल बोई है उसका पूरा का पूरा मुआवजा दिया जाना चाहिए। एक माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं एक केस आपके सामने रखना चाहता हूं जो हमारे नोखा तहसील, बीकानेर जिले का है। उसमें बीकानेर की नोखा तहसील के नाथूसर गांव के निवासी सावतराम पुत्र भैराराम की मौत हुए 15 साल बीत चुके हैं लेकिन गांव के चारा डिपो ने उनके नाम से 18 सितम्बर, 2006 को चारा वितरण किया गया और चारा वितरण रजिस्टर के पृष्ठ संख्या 23 पर उनके हस्ताक्षर भी किये गये। नोखा तहसील के ही साइसर गांव के बुधराम पुत्र सोनाराम की 5 नवम्बर, 2002 को मौत हो चुकी थी लेकिन चारा वितरण रजिस्टर के पृष्ठ संख्या-4 पर उनके नाम के आगे 3 अगस्त, 2006 को चारा वितरण दर्ज है। उनके नाम के सामने बाकायदा उनके हस्ताक्षर भी किये गये हैं। यानि मृतकों को चारा बांट दिया, यह सारी चीजें जांच का विषय है।
श्री अध्यक्ष: मृतकों को बांटा गया है?
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): हां, मृतकों को बांटा गया है।
श्री गोविन्द राम मेघवाल (नोखा): माननीय अध्यक्ष महोदय, कितना-कितना चारा दिया गया है? कितना-कितना चारा उठाया गया है?
डा. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): यह सारी चीजें जांच का विषय है। ... (व्यवधान)
श्री गोविन्द राम मेघवाल (नोखा): माननीय अध्यक्ष महोदय, इनसे पूछा जाए कि कितना चारा उठाया गया है, उनके नाम से? कितना-कितना चारा, वह भी सदन के पटल पर रखा जाए कि कितना-कितना चारा उठाया गया है। ... (व्यवधान)
spp/usc/13.50/2b/3.4.2007(1)
माननीय
अध्यक्ष महोदय,
यह मात्र इस सदन
को मिस गाइड करने
का है, मान लो भीड़
में दो नाम लिखकर
ले गये, यह बिलकुल
सही कह रहे हैं
एक-एक क्विंटल
चारा इनके नाम
से उठा है। एक तरफ
तो यह लालू जैसे
करोड़ों रुपये
के (व्यवधान).. सरकार
चला रहे हैं और
एक एक क्विंटल
ले गये हैं। ..(व्यवधान)..
डा. बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर):
यह मृतक है कि नहीं
? यह जस्टिफाई करें।
एक क्विंटल भी
किसी ने मृतक के
नाम पर उठाया है
तो यह बुरी बात
है।..(व्यवधान)...
श्री
गोविन्द राम मेघवाल
(नोखा): मैं इसलिये
कह रहा हूं वह जानकारी
सदन में रखी जाये
। मान लो 500 चारा वालों
की भीड़ आ रही है
तो डिपो होल्डर
को ध्यान में
नहीं रहा और अपने
पिता के साइन करके
ले गये, यह बिलकुल
सही कह रहे हैं
लेकिन वह कितना
ले गये क्वांटिटी
में, यह भी देखा
जाये कि कितना
बड़ा गबन हुआ है।
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
माननीय सदस्य,
जब आप बोलें, अपनी
बात रख दें। अब
हर बात का जवाब
दिया जायेगा ...(व्यवधान)..
श्री
गोविन्द राम मेघवाल
(नोखा): मैं यही तो
जानना चाहता हूं
कि सदन में रखें
कितना चारा आया
था। पूरी जानकारी
दो, फिर अधूरी क्यों
दे रहे हो ।
श्री
अध्यक्ष: बीच
में नहीं बोलें।
श्री
गोविन्द राम मेघवाल
(नोखा): मैं नोखा
विधान सभा का हूं
इसलिए जुबेर खान
जी बीच में बोल
रहा हूं कि आप जानकारी
रखो तो पूरी रखो
न, एक एक क्विंटल
ही तो बोल रहे हैं
प्रदेश अध्यक्षजी।
डा. बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर):
ऐसा है, अध्यक्ष
महोदय, यह बात तो
सिद्ध हो गयी कि
एक एक क्विंटल
चारा मृतकों के
नाम उठ गया। इस
संस्था ने 80 ट्रक
मंगवाये हैं और
इसमें अलग अलग
ट्रक हैं नहीं,
कोई और वाहन हैं
उसका इन्द्राज
हो गया। 80 ट्रक चारा
इस संस्था ने
वहां पर खरीदा
और वहां पर इतना
कोई अकाल भी नहीं
था, अभाव की स्थितियां
नहीं थीं लेकिन
इसके बावजूद जिस
तरह से वहां चारे
की बंदर बांट की
गयी और जिस तरीके
से चारे का वहां
पर दुरूपयोग किया
गया और गलत लोगों
को वितरित किया
गया । इसमें जो
गड़बड़ घोटाला
हुआ, इसकी जाचं
की जाये और जो दोषी
लोग हैं, उनको दण्डित
किया जाये। धर्मदास
स्वामी, जो एस.डी.एम.
है, उसने भी कहा
है जांच में ऐसे
लोगों को चारा
वितरित करने का
मामला सामने आया
है जो गांव में
रहते ही नहीं हैं।
अब इस मामले की
दुबारा जांच चल
रही है। मैं चाहता
हूं कि जहां जहां
चारा घोटाला हुआ
है, उसकी जांच की
जाये और जांच करके
जो दोषी लोग हैं,
उनको दण्डित किया
जाये।
अन्त
में, अध्यक्ष
महोदय, अकाल राहत
मंत्रीजी से यह
चाहूंगा कि राज्य
में तत्काल गर्मी
की स्थिति को देखते
हुए 40 डिग्री से
ऊपर टेम्प्रेचर
राजस्थान में
हो गया है और पश्चिमी
राजस्थान में
तो कहीं-कहीं 43-44 डिग्री
टेम्प्रेचर हो
गया है, ऐसी स्थिति
में पीने के पानी
की भयंकर कमी है।
जिन गांवों में
पीने के पानी की
कमी है वहां ट्रक
के माध्यम से
पानी का इन्तजाम,
पशु सेवा शिविर
का इन्तजाम और
उसके अलावा चारा
डिपो का इन्तजाम
किया जाये और जहां
ओलावृष्टि हुई
है वहां पर भी आपको
राहत कार्य तत्काल
शुरू किये जाने
चाहिये। नहीं तो
फिर लोग कहेंगे
कि -
''दिल की
आरजू मिट्टी में
मिला देती है,
तंगदस्ती
हमें जीने की सज़ा
देती है,
जीने
देती है न मरने
की रजा देती है,
कैसी
है यह भाजपा की
हुकूमत
जो हंस
हसकर सज़ा देती
है।''
आपके
तीन वर्ष और चार
महीने के कार्यकाल
में आपने अकाल
पीडि़तों को, आपने
गांवों के किसानों
को पीडि़त ही पीडि़त
किया है। इसलिए
मैं कहना चाहता
हूं कि आप की सरकार
गांव, गरीब और किसान
की एक तरह से रक्षा
नहीं कर पा रही
है। आप उनके प्रति
संवेदनहीन हैं,
इसलिए संवेदनशीलता
को ध्यान में
रखते हुए आने वाले
समय में अकाल पीडि़त
क्षेत्रों में
और ओलावृष्टि क्षेत्रों
में ज्यादा से
ज्यादा काम कीजिये,
राहत कार्य खोलिये,
पशु सेवा शिविर
खोलिये और अकाल
पीडि़त लोगों की
संभाल कीजिये।
बहुत बहुत धन्यवाद,
जय हिन्द।
श्री
अध्यक्ष: श्री
जुबेर खान।
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
अध्यक्ष महोदय,
आज बिजली और अकाल
पर चर्चा है, मैं
आपके माध्यम से
निवेदन करना चाहूंगा
कि भारतीय जनता
पार्टी ने दिसम्बर,
2003 में जो अपना घोषणा
पत्र जारी किया
था, उसमें सबसे
ऊपर लिखा है न्याय
सभी को, सम्मान
सभी को। अंधियारे
से उजियारे की
और, यह घोषणा पत्र
जारी किया था और
यह भी कहा था कि
हम भय, भूख और भ्रष्टाचार
से मुक्ति देंगे।
भय से कैसे मुक्ति
मिली है अभी धौलपुर
में नकेल डालने
का मामला आया और
भूख में सहरियों
का मामला आया और
भ्रष्टाचार तो
रोजाना टी.वी. और
अख़बार में रचे
पड़े हैं। जिस
तरह से सरकार के
कारनामे और जयपुर
के आस पास जिस तरह
के जमीनों के घोटाले
हो रहे हैं, मैं
निवेदन करना चाहूंगा
अध्यक्ष महोदय..(व्यवधान)...
डॉ0 जालमसिंह
रावलोत : बिजली
और अकाल की चर्चा
है, जमीनों का घोटाला
कहां से आ गया ? ..(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: बीच
में नहीं बोलते
हैं।
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
मैं यह निवेदन
करना चाहूंगा इस
सरकार ने जब परिवर्तन
यात्रा चल रही
थी तो कल्ला साहब
ने जिक्र किया
था जगह जगह यह बात
कही कि बिजली आठ
घण्टे की घोषणा
है, आ नहीं रही है
और इन्होंने जो
घोषणा पत्र जारी
किया, अध्यक्ष
महोदय, उसमें साफ
कहा है किसानों
को आठ घण्टे बिजली
उपलब्ध कराई जायेगी।
आगे लिखा है 01 नवम्बर,
2003 तक के सभी कृषि
कनेक्शन 15 महीने
में दे दिये जायेंगे
ताकि प्रतीक्षा
सूची समाप्त हो
सके और इसकी ताईद
इस बात विधान सभा
का प्रथम सत्र
हुआ तो उस वक्त
जिनके पास ऊर्जा
का विभाग था, माननीय
घनश्याम तिवाड़ी
जी ने यह वक्तव्य
दिया था, कहा था
कि हम 15 महीने के
अंदर अंदर यह प्रतीक्षा
सूची, वेटिंग लिस्ट
एग्रीकल्चर कनेक्शन
की खत्म कर देंगे
और ऐसी व्यवस्था
कर देंगे कि इधर
आवेदन लेकर आइये
और इधर बिजली का
कनेक्शन लेकर
जाइये। यह इस पवित्र
सदन में घोषणा
की गयी थी। आज 2007 आ
गया और दिसम्बर,
2008 में इनको पाँच
साल पूरे होने
वाले हैं। मैं
यह जानना चाहूंगा
इस सरकार से कि
क्या अन्तरात्मा
से अपने जमीर से
आप यह कह सकते हैं
कि जो आपने घोषणा
पत्र में वादा
किया था कि 15 महीने
के अंदर अंदर हर
किसान को विद्युत
का कनेक्शन दे
देंगे । आठ घण्टे
बिजली देंगे, क्या
आप जमीर से कह सकते
हैं कि किसानों
को आठ घण्टे बिजली
मिली है ? आपके राज
में चार पाँच घंटे
से ज्यादा बिजली
नहीं मिली ।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): 01 लाख 13 हजार
किसानों को कनेक्शन
दिये हैं। जमीर
से यह कह सकते हैं
आपने पाँच साल
में जितने लोगों
को कनेक्शन नहीं
दिये थे, उससे ज्यादा
कनेक्शन हमने
दिये हैं।
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
मैंने यह पूछा
है सरकार में आने
के बाद में क्या
किया है ? ..(व्यवधान)..
आप यह बता दीजिये
।
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
सरकार बनने के
बाद का ही तो बता
रहे हैं। ..(व्यवधान)..
सरकार बनने के
बाद में ही तो बताया
है। (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदया, आप भी किसान
परिवार से आती
हैं। आज स्थिति
(व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, अभी इनको
जो बताया है, वह
सरकार बनने के
बाद ही बताया है
कि इन्होंने पाँच
वर्ष में जितने
कनेक्शन दिये,
उससे अधिक हमने
तीन वर्षों में
दिये उससे ज्यादा
और क्या चाहिये
आपको ?
श्री
अध्यक्ष: प्लीज
डोंट डिस्टर्ब।
माननीय सदस्य,
ट्रांसफार्मर
तो 72 घण्टे में
बदले जा रहे हैं,
यह बात तो सही है।
(व्यवधान)
श्री
हेमाराम चौधरी
(गुढ़ामालानी):
अध्यक्ष महोदय,
आपके प्रभाव से
लग जाते हैं। हमारी
कोई नहीं सुनता।
आपकी सुनवाई होगयी
इसका मतलब यह नहीं
है कि सबकी सुनवाई
हो गयी । (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: हो सकता
है आपकी पीड़ा
हो। (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
अध्यक्ष महोदय,
इन्होंने घोषणा
पत्र में यह भी
कहा कि कांग्रेस
शासन में आदिवासियों
के कुओं पर विद्युत
संबंध, जो रियायती
दर पर दिये जा रहे
थे, बंद कर दिये
गये, उन्हें पुन:
चालू कर दिया जायेगा।
क्या चालू किये?
बिलकुल चालू नहीं
किये। इसके लिये
हमारे आदिवासी
माननीय सदस्यों
ने जोरदार हंगामा
किया था। अध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
यह भी कहा कि घरों
पर एक बत्ती कनेक्शन
प्राथमिकता के
आधार पर दे दिये
जायेंगे। यहां
तक कि राजीव गांधी
ग्रामीण विद्युत
योजना के अन्तर्गत
जो बी.पी.एल.परिवारों
को कनेक्शन देना
है, वह भी कनेक्शन
आज तक दिये नहीं
जा रहे । स्पष्ट
लिखा है 1997 की बी.पी.एल.
सूची के आधार पर
लोगों को कनेक्शन
दिये जायेंगे।
आज उनको कनेक्शन
नहीं दिये जा रहे
अध्यक्ष महोदय।
(व्यवधान) आज स्थिति
है कि किसान अपना
आवेदन करने का
नम्बर आता है,
डिमाण्ड नोटिस
की राशि जमा कराता
है, डिमाण्ड नोटिस
की राशि 70-80 हजार लोगों
ने पिछले 9 महीने
से जमा किया हुआ
है। मैं अलवर के
बारे में दावे
से कह सकता हूं
8-9 महीने से डिमाण्ड
नोटिस की राशि
जमा है।
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
मैं यह बताना चाहता
हूं 3 लाख 60 हजार को
लाभान्वित किया
है।
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
उनको कनेक्शन
नहीं दिये जा रहे
। दो दो साल से घरेलू
कनेक्शनों की
फाइल जमा है, उनको
कनेक्शन नहीं
दिये जा रहे हैं।
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
दिये जा रहे हैं।
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
72 घण्टे में ट्रांसफार्मर
बदलने की बात कर
रहे हैं, मैं आपसे
यह निवेदन करना
चाहता हूं (व्यवधान)
डॉ0 जालम
सिंह रावलोत : अध्यक्ष
महोदय, हमारे यहां
पूरी तैयारी है,
जवाब दे रहे हैं
आपको। (व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
मैंने आपको निवेदन
किया बी पी एल के
3 लाख 60 हजार .. (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: कृपया
व्यवधान नहीं
डालें। (व्यवधान)
श्री
महिपाल यादव : आपकी
पोल निकल रही है
पोल, बैठ जाओ। (व्यवधान)
श्रीमती
ममता शर्मा: और
आप अपना इनडायजेशन
कम करिये बोलने
का।(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्य, कृपया
बीच में व्यवधान
नहीं डालें। बोलने
दें, जो कुछ बोल
रहे हैं। (व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह बीच बीच
में खड़े होते
हैं। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: यह नहीं
बोलेंगे, लेकिन
आप बीच में नहीं
बोलेंगे बस। (व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
आपके आदेश की पालना
करूंगा। मैं तो
आपके आदेश की पालना
करूंगा।
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
आपके यहां 72 घण्टे
में बदल जाते होंगे,
लेकिन स्थिति यह
है कि 72 घण्टे तो
ए.ईएन नहीं मिलता
है लिखाने के लिये,
ट्रांसफार्मर
की रिपोर्ट कर
दीजिये। किसान
से कहा जाता है
अपना ट्रांसफार्मर
रखकर लाइये और
यहां ए.ईएन. आफिस
में जमा कराइये,
तब हम आपके जलने
की रिपोर्ट लिखेंगे।
उसके बाद में एक्स.ईएन.
के पास फाइल जाती
है, एस.ई. के यहां
से आवंटन होता
है,फिर किसान से
कहा जाता है कि
आप कल लेकर आ जाना
ट्रेक्टर, आपको
ट्रांसफार्मर
दे देंगे। बेचारा
दिन भर इंतजार
करता रहता है, शाम
तक ए.ईएन.दफ्तर
में नहीं आता है।
दो तीन दिन तक किसान
को डीजल फूंकना
पड़ता है, ट्रेक्टर
ट्रॉली लेकर आना
पड़ता है तब जाकर
उनको ट्रांसफार्मर
मिलता है। यह वास्तविकता
है और सच्चाई
है आप चाहें तो
किसी भी माननीय
सदस्य से यह पूछ
सकते हैं कि अलवर
जिले में यह स्थिति
चल रही है। अध्यक्ष
महोदय, मैं यहां
यह भी कहना चाहूंगा
.. (व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
जब इन्होंने कहा
किसी भी माननीय
सदस्य से पूछ
सकते हैं तब मैं
बोलूंगा। किसी
भी माननीय सदस्य
से आप पूछने की
बात करते हैं तीन
वर्षों में 01 लाख
7,030 ट्रांसफार्मर
बदले गये। 1 लाख
11 हजार ट्रांसफार्मर
खराब हुए थे इनमें
से 1 लाख 7030 ट्रांसफार्मर
बदल दिये 72 घण्टे
के अंदर। आप खुद
चुनौती देते हो,
आप कहते हो ।
Msr/usc/1400/2c/03042007
श्री रिछपाल
सिंह मिर्धा (डेगाना):
यह बिजली मंत्री
हैं क्या, साहब।
...(व्यवधान)...
श्री मदन
राठौड़ (सुमेरपुर):
आप कहते हो किसी
भी माननीय सदस्य
से पूछ लो।
श्री रिछपाल
सिंह मिर्धा (डेगाना):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह क्या तरीका
है?
...(व्यवधान)... मंत्रीजी
क्या करेंगे फिर? ...(व्यवधान)...
श्री मदन
राठौड़ (सुमेरपुर):
अभी इन्होंने
चुनौती दी है ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य।
श्री रिछपाल
सिंह मिर्धा (डेगाना):
मंत्रीजी जवाब
दे देंगे। ...(व्यवधान)...
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): क्या
है यह? इनको तीन बार
कह दिया आपने, चार
बार कह दिया, माननीय
अध्यक्ष महोदय, आप
काई भी व्यवस्था
दे सकती हैं। यह
मंत्री हैं क्या?
श्री अध्यक्ष:
यह मंत्री नहीं
हैं लेकिन माननीय
सदस्य ...(व्यवधान)...
श्री महीपाल
सिंह यादव (बानसूर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह बारबार
खड़े हो जाते हैं,
क्या बैठी का
बाल है क्या इनके? ...(व्यवधान)...
श्री रिछपाल
सिंह मिर्धा (डेगाना):
क्या बोलेंगे? इन
***
को रोको, साहब, आप।
...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
डेगाना से आने
वाले माननीय सदस्य,
आप विराजें। आप
स्थान ग्रहण करें,
बानसूर से आने
वाले माननीय सदस्य।
आप स्थान ग्रहण
करें, पिलानी से
आने वाले माननीय
सदस्य। ...(व्यवधान)...
श्री महीपाल
सिंह यादव (बानसूर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इनके घोषणा
पत्र की पोल निकल
रही है, बारबार
खड़े हो जाते हैं।
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य
ने चुनौती दी सारे
माननीय सदस्यों
को कि एक
भी माननीय सदस्य
खड़ा होकर के यह
कह दे, तब, उनको आपने
चैलेंज किया तब
वो खड़े हुए थे।
...(व्यवधान)... आपने
क्यों कही यह
बात?
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): मैंने
अलवर जिले का कहा
है, माननीय अध्यक्ष
महोदय, आप रिकार्ड
निकलवा लीजिए।
मैंने अलवर जिले
का कहा है, माननीय
अध्यक्ष महोदय।
...(व्यवधान)...
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): मंत्री
थोड़ी हैं, साहब,
यह जो यह समझायेंगे।
श्री अध्यक्ष:
आपने कहा एक भी
माननीय सदस्य
खड़ा होकर के यह
कह दे।
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): आठ
घंटे के लिए तो
मैंने कहा है कि
कोई भी माननीय
सदस्य ईमानदारी
से खड़ा होकर के
कह दे ...(व्यवधान)...
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): आठ घंटे
बिजली राजस्थान
में नहीं दी है
...(व्यवधान)...
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): लेकिन
मैंने अलवर जिले
के लिए कहा है, माननीय
अध्यक्ष महोदय, मैं
आपसे निवेदन करना
चाहूंगा कि अलवर
जिले की बात मैंने
कही है क्योंकि
मैं वहां से आता
हूं। ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
स्थान ग्रहण करें।
...(व्यवधान)...
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): मैं यह
कह रहा हूं ...(व्यवधान)...
यह शंकर भगवान
की बारात को रोको।
...(व्यवधान)... माननीय
अध्यक्ष महोदय, यह
शंकर भगवान की
बारात का कोई रखवाला
भी है क्या? यह
माननीय संसदीय
कार्य मंत्रीजी
क्या करते हैं,
आप, अपनी फौज को
कंट्रोल करो न।
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): माननीय
अध्यक्ष महोदय, धौलपुर
प्रोजेक्ट की
बहुत बात की गयी।
...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
कृपया स्थान ग्रहण
कर लें। ...(व्यवधान)...
श्री जयराम
जाटव (खैरथल): जब
तक 20 हजार, 10 हजार
की गड्डी कर्मचारियों
के जेब में नहीं
जाते जब तक ट्रांसफार्मर
नहीं बदला जाता
था दो-दो महीने
में।
श्री रामनारायण
मीणा (नैनवां): माननीय
सदस्य, आप एक मिनट
बैठें। मैं तो
यह निवेदन करूंगा,
अभी बात चली, इन्होंने
कहा कोई खड़ा होकर
के, मैं खड़ा होकर
के कहता हूं इस
सदन में, माननीय
अध्यक्ष महोदय, आपके
माध्यम से, ऊर्जा
मंत्रीजी, सालभर
पहले ट्रांसफार्मर
खरीदे, ज्यादा
ट्रांसफार्मर
की बात हो रही है
न, कम कैपेसिटी
के थे, ज्यादा
पैसे के थे, वो जल
जाते हैं, उनका
तेल चुराया जाता
है, उसका मुकदमा
तक दर्ज नहीं होता।
इतना करप्शन है।
आपने जांच करायी
क्या इसकी? आडिट
रिपोर्ट में भी
आयी जो, इतना करप्शन
हमने कभी नहीं
देखा। ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
तो आपका समय आये
जब बोलना आप।
श्री रामनारायण
मीणा (नैनवां): मैं
सदन में कह रहा
हूं इसलिए ऐसी
बात नहीं कर सकते।
करप्शन पर नहीं
जाएं, इस सरकार
ने जितना करप्शन
किया है किसी सरकार
ने नहीं किया।
...(व्यवधान)...
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): माननीय
अध्यक्ष महोदय, यहां
धौलपुर प्रोजेक्ट
की बहुत बात की
जाती है सरकार
द्वारा अखबारों
में भी, सब जगह ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
कृपया स्थान ग्रहण
कर लें।
श्री जयराम
जाटव (खैरथल): बिजली
की व्यवस्था
किसानों को इतनी
हुई है कि ऐसी कभी
नहीं हुई।
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण करें।
श्री जयराम
जाटव (खैरथल): और
अलवर जिले के लिए
माननीय विधायकजी
कह रहे थे, माननीय
अध्यक्ष महोदय, यह
बिलकुल गलत है।
...(व्यवधान)...
श्री रामनारायण
मीणा (नैनवां): किसानों
की बात कर रहा हूं,
अलवर जिले की बात
कर रहे हो आप।
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): तो
आपका, माननीय सदस्य,
जब नम्बर आये
जब बोल लीजिए।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, अगर बीच-बीच
में, मैं कोई असंसदीय
भाषा नहीं बोल
रहा, मैं अपने तरीके
से अपनी बात कह
रहा हूं।
श्री जयराम
जाटव (खैरथल): आपने
अलवर जिले के लिए
कहा तो मैं अलवर
जिले का ही तो हूं।
आपने अलवर जिले
के लिए कहा है।
...(व्यवधान)...
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): माननीय
अध्यक्ष महोदय, धौलपुर
की बहुत बात की
गयी।
श्री महीपाल
सिंह यादव (बानसूर):
अलवर जिले में
140 हैजिटेशन हैं,
आप कौनसी की बात
कर रहे हो?
श्री जयराम
जाटव (खैरथल): आपको
पता ही नहीं है।
श्री महीपाल
सिंह यादव (बानसूर):
पता ही नहीं है
आपको, आप बताओगे
जब पता लगेगा? क्षेत्र
में चार घंटे से
ज्यादा बिजली
आयी नहीं।
श्री जयराम
जाटव (खैरथल): आप
या तो मिड-वे में
सोते हैं या जयपुर
में रहते हैं, आप
क्षेत्र में जाते
ही नहीं ...(व्यवधान)...
आपको पता ही नहीं
है।
श्री महीपाल
सिंह यादव (बानसूर):
अच्छा, आप ही रहते
हो क्षेत्र में? अब
पता लग जायेगा
जब क्षेत्र में
जाओगे।
श्री जयराम
जाटव (खैरथल): जितना
मुझे पता है न आपको
नहीं पता। ...(व्यवधान)...
मैं क्षेत्र में
रहता हूं और जिले
में रहता हूं और
किसान हूं, यह और
बता दूं, खुद खेती
करता हूं अपने
हाथ से। ...(व्यवधान)...
श्री महीपाल
सिंह यादव (बानसूर):
यह असत्य* बोल रहे
हैं, अलवर जिले
में चार घंटे से
ज्यादा बिजली
नहीं आयी। ...(व्यवधान)...
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): यहां
मुख्य मंत्रीजी
नहीं बैठी हैं
...(व्यवधान)... आप
अपनी बात बाद में
कह दीजियेगा।
...(व्यवधान)...
श्री महीपाल
सिंह यादव (बानसूर):
यह ***
करते हैं यहां
पर।
श्री जयराम
जाटव (खैरथल): बिजली
किसान को राजस्थान
में अब की बार अच्छी
हुई है ...(व्यवधान)...
ऐसा नहीं है।
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): वो तो परीक्षा
2009 में होगी। यह परीक्षा
2009 में होगी ...(व्यवधान)...
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): माननीय
अध्यक्ष महोदय, धौलपुर
की बात कही गयी।
श्री जयराम
जाटव (खैरथल): जब
कांग्रेस राज था,
चार दिन, पाँच दिन
अनशन पर बैठे बिजली
की मांग को लेकर।
आपको पता नहीं
है?
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): 2008 में बतायेंगे
कहां रहोगे। 2008 में
मालूम होगा। ...(व्यवधान)...
श्री जयराम
जाटव (खैरथल): लेकिन
अब कोई वो नहीं
हुए, इस तरह के वो
धरने।
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): माननीय
अध्यक्ष महोदय, धौलपुर
की बहुत बात की
गयी।
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): कहां जाते
हो और क्या करते
हो ...(व्यवधान)...
परीक्षा 2008 में होगी।
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): माननीय
अध्यक्ष महोदय, धौलपुर
की बहुत बात की
गयी लेकिन मैं
आपके माध्यम से
कहना चाहूंगा कि
धौलपुर के प्रोजेक्ट
जो हैं, धौलपुर
गैस पावर प्रोजेक्ट
कांग्रेस सरकार
के समय में इसका
शिलान्यास हुआ,
इसकी स्वीकृति
हुई। ...(व्यवधान)... माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक बात मैं
पूछना चाहूंगा
कि यह धौलपुर प्रोजेक्ट
का जो टेण्डर
हुआ है उसमें क्या
इण्टरनेशनल बिडिंग
की गयी है? जब
इतना ज्यादा पैसे
का खर्च किया जा
रहा है तो इण्टरनेशनल
बिडिंग ना कर के
बी.एच.ई.एल. को दे
दिया। कह देंगे
यह बी.एच.ई.एल., यह
भारतीय सरकार का
उपक्रम है लेकिन,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं बताना
चाहूंगा बी.एच.ई.एल.
का 65 से 68 परसेंट सामान
मारकेट से खरीदते
हैं, कोई अपना नहीं
बनाता है। इससे
बाकी यह अपना बनाता
है। आपको करना
चाहिए था चाहे
बी.एच.ई.एल. आये, कोई
भी आये आपको इण्टरनेशनल
बिडिंग करनी चाहिए
थी। ...(व्यवधान)...
श्री गजेन्द्र
सिंह (राज्य मंत्री, ऊर्जा):
आपने अपने सब पावर
प्रोजेक्ट बी.एच.ई.एल.
को क्यों दिये? आपने
सब के सब दे दिये,
क्यों दिये आपने
बी.एच.ई.एल. को?
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): इसकाक
मतलब यह नहीं है।
श्री गजेन्द्र
सिंह (राज्य मंत्री, ऊर्जा):
आपने सब क्यों
दे दिये?
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): इसका
मतलब यह नहीं है
कि पहले नहीं किये
थे तो आपको तो करने
चाहिए थे। तो फिर
आप यह मत छपवाते,
आपने हिन्दुस्तान
टाइम्स, टाइम्स
ऑफ इंडिया, राजस्थान
पत्रिका, दैनिक
भास्कर पूरे-पूरे
पेज पर जनता के
पैसे से इश्तिहार
छपवा रहे हैं, हम
आत्मनिर्भर होने
जा रहे हैं, हम पारदर्शिता
से यह काम कर रहे
हैं। फिर यह मत
छपवाइये अगर आप
टेण्डर नहीं करना
चाहते हैं।
माननीय
अध्यक्ष महोदय, मैं
एक बात और पूछना
चाहूंगा कि क्या
जिस दिन यह एग्रीमेंट
किया था पावर प्रोजेक्ट
उस दिन क्या गैस
का आपका एग्रीमेंट
हो चुका था? क्या
जिस दिन आपने इनसे
गैस का एग्रीमेंट
किया आपके पास
गैस का एग्रीमेंट
था नहीं, गैस की
आपने व्यवस्था
की नहीं और आपने
एग्रीमेंट कर के
...
श्री गजेन्द्र
सिंह (राज्य मंत्री, ऊर्जा):
जब आपने सेंक्शन
किया था, आपके पास
क्या गैस का एग्रीमेंट
था?
गैस का एग्रीमेंट
तो हम लोगों ने
किया, आपके पास
तो एग्रीमेंट नहीं
था, आपने सेंक्शन
निकाली विदाउट
एग्रीमेंट।
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): मैं
यह पूछ रहा हूं
कि जिस दिन आपने
...
श्री गजेन्द्र
सिंह (राज्य मंत्री, ऊर्जा):
था, नहीं था, हमारा
गैस का एग्रीमेंट
हो चुका है। ...(व्यवधान)...
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): नहीं,
मेरा यह कहना है
कि जिस दिन आपने
बी.एच.ई.एल. के साथ
एग्रीमेंट किया
उस दिन आपके पास
गैस का एग्रीमेंट
नहीं हुआ था।
श्री गजेन्द्र
सिंह (राज्य मंत्री, ऊर्जा):
आपने बिना गैस
के एग्रीमेंट के
सेक्शन कैसे निकाली,
यह बताइये आप।
श्री प्रद्युम्न
सिंह (राजाखेड़ा):
एम.ओ.यू. नहीं था?
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): मुख्यमंत्रीजी
बारबार यह कहती
हैं, अखबारों में
छपवाती हैं कि
हम तो बहुत ही जल्दी
सरप्लस हो जायेंगये
बिजली के मामले
में। घोषणा पत्र
में भी कहा कि 15 महीने
में हर आदमी को
कनेक्शन दे देंगे।
मैं यहां यह निवेदन
करना चाहूंगा,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, कि आप यह बताइये,
मंत्री महोदय,
आपके जवाब में
कि आपका कितना
कन्जम्प्शन
हर साल बढ़ रहा
है?
राजस्थान में
बिजली के कन्जम्प्शन
की आवश्यकता हर
साल कितनी बढ़
रही है? क्या आप दिसम्बर,
2008 तक उस कन्जम्प्शन
के अनुरूप में
बिजली पैदा कर
के सप्लाई कर
देंगे? जो आप कह रहे
हैं कि हम तो आत्मनिर्भर
हो जायेंगे, जो
बात आपने घोषणा
पत्र में तो 2007 तक
की कही थी कि आत्मनिर्भर
हो जायेंगे, 2007 का
अप्रैल शुरू हो
गया है, अभी तक आपकी
कोई भी यूनिट चलने
की स्थिति में
नहीं है।
मैं यहां
एक और निवेदन करना
चाहूंगा, माननीय
अध्यक्ष महोदय।
मंत्रीजी, आप जरा
बताएं छबड़ा में
जो आप प्रोजेक्ट
को लगा रहे हैं
उसमें क्या-क्या
कार्यवाही हो चुकी
है?
कोटा में जो दूसरी
नयी यूनिट लगाना
है, उसमें आपने
क्या-क्या कार्यवाही
कर ली? आप जरा जवाब
में बताइयेगा।
सूरतगढ़ में जो
नया प्रोजेक्ट
लग रहा है उसके
लिए आपने क्या-क्या
कार्यवाही कर ली? गिराल,
बाड़मेर में जो
आपका लग रहा है,
उसमें बिजली कब
तक बनेगी? कितने
दिन से कह रहे थे
बन गयी, बन गयी, बन
गयी, अब जाकर के
कहीं बिजली बनने
की स्थिति वहां
पैदा हुई है। पिछले
तीन साल से यह भाषण
आपकी सरकार के
और आपके मुख्यमंत्री
के अख़बार में
पढ़-पढ़ कर हम थक
लिये। यह तो आपके
कथनी और करनी का
अन्तर है।
माननीय
अध्यक्ष महोदय, मैं
यहां यह और कहूंगा,
मैं स्पेसिफिक
पूछना चाहूंगा,
मंत्रीजी अपने
जवाब में कहियेगा,
इन योजनाओं में
से आपेन किन-किन
को आर्डर प्लेस
किये हैं और कब-कब
आर्डर प्लेस किये
हैं और अब तक आप
इनमें बिजली बनाने
की बात करेंगे? आप
खाली बड़ी-बड़ी
कम्पनियों से
अपनी सांठगांठ
कर के आर्डर प्लेस
कर के छोड़ देंगे
और आपकी सरकार
के चुनाव आ जायेंगे
लेकिन जब तक बिजली
वहां चालू नहीं
होगी। आप बता दीजिए
कि जिन योजनाओं
का उल्लेख मैंने
किया है इन योजनाओं
पर क्या दिसम्बर,
2008 तक आप बिजली लोगों
को सप्लाई करना
शुरू कर देंगे,
यह आप अपने जवाब
में जरूर बताइयेगा।
माननीय
अध्यक्ष महोदय, यहां
यह भी कहना चाहता
हूं कि इसमे पारदर्शिता
से जो यह आर्डर
दिये जा रहे हैं
वो नहीं हो रहे
हैं। इसमें भ्रष्टाचार
व्याप्त है।
मैं चाहता हूं
कि आप जांच करा
कर दिखवाइये कि
इसमें भ्रष्टाचार
फैलाया जा रहा
है या नहीं फैलाया
जा रहा है? और
आप तो यह बता दीजिए,
आपकी फाइल आपके
कार्यालय और मुख्यमंत्रीजी
के कार्यालय में
दस-दस दफे तो फाइलें
आती-जाती हैं, वो
क्या कारण है
कि बारबार फाइल
आ रही है और जा रही
है?
एक बार में ही फाइल
क्लियर क्यों
नहीं होती है? यह
भी आप पूरा प्रकाश
डालियेगा। ...(व्यवधान)...
माननीय
मुख्यमंत्रीजी
बहुत जोर-जोर से
कहती हैं कि बरसिंहसर
योजना का काम शुरू
करक दिया, माननीय
अध्यक्ष महोदय, आप
तो स्वयं मंत्री
थीं तत्कालीन
आदरणीय महामहिम
मुख्यमंत्री,
भैरोंसिंहजी शेखावत,
जो आज महामहिम
उपराष्ट्रपति
हैं देश के, उनके
समय में यह नवेली
लिग्नाइट कारपोरेशन
से समझौता हुआ
था और क्या हुआ
था कि 1.25 रुपये पर
यूनिट पर बिजली
देंगे लेकिन आज
इस सरकार ने जो
एग्रीमेंट किया
है, कितने रुपये
यूनिट बिजली खरीद
कर इस जनता के खून-पसीने
के पैसे को लगायेंगे।
आज मेरी जानकारी
है लगभग चार रुपये
पर यूनिट के हिसाब
से बिजली खरीदने
यह जा रहे हैं जो
महामहिम उपराष्ट्रपति,
भैरोंसिंहजी के
समय में 1.25 रुपये
में एग्रीमेंट
हुआ था।
श्री अध्यक्ष:
तब से अब तक कीमतें,
हर चीज की कीमत
बढ़ गयी है। कोयले
की बढ़ गयी, सब की
बढ़ गयी।
श्री गजेन्द्र
सिंह (राज्य मंत्री, ऊर्जा):
महाराष्ट्र में
आपकी सरकार 9 रुपये
में बिजली ले रही
है पूना के अन्दर,
आप ही की कांग्रेस
की सरकार है। 9 रुपये
प्रति यूनिट...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
नहीं, एग्रिकल्चरिस्ट
को सस्ती दर पर
मिल रही है। सबसे सस्ती
दर पर। ...(व्यवधान)...
Ars/usc/1410/2d/03042007/1
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
मैं एक और निवेदन
करना चाहूंगा कि
लिग्नाइट, जो
राजस्थान की धरोहर
है और इस सरकार
ने भ्रष्टाचार
करके बीकानेर के
गुढ़ा में जो लिग्नाइट
के डिपाजिट्स हैं,
वह हिन्दुस्तान
में ही नहीं दुनिया
में सबसे अच्छी
क्वालिटी के लिग्नाइट
के डिपाजिट्स हैं।
श्री
घनश्याम तिवाड़ी
(शिक्षा मंत्री):
कौनसी क्वालिटी
के?
श्री
अध्यक्ष: नौ,नौ,गलत
है यह ।
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
इसलिए है बढि़या,
मैं क्यों कह
रहा हूं इसमें
क्लोरोफिक वेल्यू,
जलने की जो क्षमता
होती है वह सबसे
ज्यादा है और
इसमें ओवर बर्डन
जो मिट्टी होती
है वह सबसे कम है,
इस तरह का यह डिपाजिट
है। इस सरकार ने
भ्रष्टाचार करके
क्या किया, अध्यक्ष
महोदय, इस धरोहर
को मरुधर पावर
कार्पोरेशन को
जिस हिसाब से बेचने
का काम किया, अध्यक्ष
महोदय, आप स्वयं
दिखवा लीजिएगा
कि इसमें भ्रष्टाचार
की बू झलकती है।
यह तो मंत्री महोदय
आपको ज्यादा पता
होगा।
श्री
गजेन्द्र सिंह
(राज्य मंत्री, ऊर्जा): आपकी
ही सरकार ने उनको
क्लियरेंस दिया
है। आप ही की सरकार
से क्लियर कराकर
गये हैं मरुधर
पावर प्रोजक्ट,
नेवेली लिग्नाइट
के थ्रू। ...(व्यवधान)
आप पधारें तो वैल
प्रिपेयर्ड तो
होकर पधारें आप
।
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
इसी तरह से बाड़मेर
का गिराल क्षेत्र
है, जहां अच्छा
क्षेत्र है वह
भी इन्होंने जिंदल
समूह को दे दिया
और उनसे बिजली
खरीदने का एग्रीमैंट
कर दिया। यह तो
बताइये कब तो प्रोजक्ट
लगायेंगे, कब आपको
बिजली देंगे?
श्री
गजेन्द्र सिंह
(राज्य मंत्री, ऊर्जा): 1996 में
आप ही लोगों ने
चूज किया था काम्पीटिटिव
बिडिंग के थ्रू,
आपको मालूम ही
नहीं है आप किस
विषय पर चर्चा
कर रहे हैं।
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
हमने क्या चूज
किया था ?
श्री
रामनारायण मीणा
(नैनवां): मंत्री
जी आप तो जांच करा
लीजिए ...(व्यवधान) आप तो जांच
करा लो, आपके ऊपर
सबसे ज्यादा आरोप
लग रहे हैं यहां।
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
आपका मतलब यह है
कि जो भारतीय जनता
पार्टी की सरकार
आज है उस टाइम भी
यही भारतीय जनता
पार्टी की सरकार
थी, नेतृत्व अलग
हो सकता है, बहुत
से चेहरे मंत्री
यहां सामने बैठे
हैं ...(व्यवधान)
श्री
रामनारायण मीणा
(नैनवां): आपके मंत्री
के खिलाफ आरोप
लग रहे हैं इससे
ज्यादा शर्मनाक
बात और क्या हो
सकती है, जिंदल
को दे दिया, पता
नहीं किसको दे
दिया ...(व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़ (सुमेरपुर):
क्या लग रहे हैं
?
श्री
रामनारायण मीणा
(नैनवां): आरोप लग
रहे हैं, जांच करवा
लो।
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
अध्यक्ष महोदय,
पहली बार विद्युत
उत्पादन निगम
का चेयरमैन वह
बनाया गया जो राजस्थान
की मिट्टी में
पैदा नहीं हुआ।
क्या राजस्थान
में आपको कोई ऐसा
काबिल आदमी नहीं
मिला था कि जिसको
आप विद्युत उत्पादन
निगम का अध्यक्ष
बना सकते, आप उत्तरप्रदेश
से उठाकर ले आये।
श्री
तगाराम चौधरी
(बाड़मेर): माननीय
अध्यक्ष महोदय,
बाड़मेर के बारे
में मेरे को ज्यादा
जानकारी है बनिस्पत
माननीय उप नेता
महोदय प्रतिपक्ष
को, बाड़मेर में
गिराल कहां है
और कहां वह ...(व्यवधान)
काम कर रहा है, वह
अलग अलग क्षेत्र
हैं, श्रीमान्
आपको पता ही नहीं
है ...(व्यवधान)
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
तगाराम जी, जब आप
कांग्रेस में थे
तब मैंने बाड़मेर
जैसलमेर का बहुत
दौरा किया ...(व्यवधान)
श्री
तगाराम चौधरी
(बाड़मेर): आप कोयले,
बिजली और तेल ...(व्यवधान)
मेरे से जान लीजिए
कि क्या है वहां
का हाल। ...(व्यवधान)
डा. जालम
सिंह रावलोत (शिव):
केवल दौरों से
समझ में नहीं आएगा,
न आपको आएगा, न सोनिया
जी को आएगा।
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
अध्यक्ष महोदय,
गिराल का प्रोजक्ट,
तो मुझे आशंका
है, मैं कहना चाहता
हूं कि इसमें संदेह
है कि यह चल पाएगा
...(व्यवधान) क्योंकि
जहां इसका शिलान्यास
किया है, फाउण्डेशन
जहां हुआ अध्यक्ष
महोदय, वहां बैंटोनाइट
है अन्दर जो कि
नर्म होता है और
कल को प्रोजक्ट
लगकर चल गया, वहां
नमी है नीचे, अगर
वहां कल को यह हो
गया, यह धंस गया
या खराब हो गया
तो कितनी जान और
माल की हानि हो
सकती है, यह आप अन्दाजा
लगा सकते हैं।
डा. जालम
सिंह रावलोत (शिव):
मेरे क्षेत्र का
मामला है ...(व्यवधान)
शिलान्यास इनके
कहने से हुआ, उद्घाटन
हमने किया।
श्री
जुबेर खान (रामगढ़):
अध्यक्ष महोदय,
इस सरकार का भ्रष्टाचार
उत्पादन में ही
नहीं रुका, इन्होंने
प्रसारण में भी
कोई कमी नहीं छोड़ी।
वर्ल्ड बैंक का
जो फीडर सुधार
कार्यक्रम, राजीव
गांधी विद्युत
ग्रामीण योजना,
इसमें जो इन्होंने
टेंडर किये हैं,
अध्यक्ष महोदय,
परम्परा है एल-1,
सबसे लोएस्ट जो
होता है उसको ठेका
दिया जाता है।
मंत्री महोदय से
मैं जानना चाहूंगा
कि कितनी जगह आपने
एल-1 को न लेकर एल-2
और एल-3 को आपने काम
करने का मौका दिया
है ? यह जरा आप बतायेंगे।
अध्यक्ष
महोदय, मैं आपसे
एक निवेदन और करना
चाहूंगा कि जब
काश्तकार, किसान
अगर एक दिन लेट
हो जाता है बिजली
का बिल जमा करवाने
में, उसके ऊपर पैनल्टी
लगती है और ब्याज
लगता है और यहां
अस्सी- अस्सी,
नब्बे-नब्बे
हजार डिमाण्ड
नोटिस के छह छह
महीने तक किसानों
के लेकर रखते हैं,
क्यों नहीं पहल
करती है सरकार
कि किसान का पैसा
जितने दिन जमा
रहेगा, जब तक आप
उसको बिजली नहीं
दोगे तब तक उसको
उसका ब्याज दिया
जाएगा। जब आप ले
सकते हैं किसान
से तो किसान को
इतनी बड़ी रकम
का ब्याज क्यों
नहीं देते?
अध्यक्ष
महोदय, एक और समस्या
है जो आपने कर रखी
है, एक समय था कि
विद्युत विभाग
के लोग गांवों
में जाते थे, विद्युत
लगवा लीजिए, लोग
लगवाने को तैयार
नहीं होते थे।
लोगों ने विद्युत
लगवायी है चाहे
गैर खातेदारी हो
चाहे सिवाय चक
हो, सबने लगवायी
है। जो कनेक्शन
वहां हो गया और
अब वहां पानी सूख
गया,
(समय-समाप्ति-सूचक-घण्टी)
लोग दूसरी
जगह कनेक्शन लेना
चाहते हैं, आप कहते
हैं कि गैर खातेदारी
में तीस साल पहले
कनेक्शन हुआ था,
अब इसको शिफ्ट
नहीं करेंगे। माननीय
सिंचाई मंत्री
जी कह रहे थे कल
गैर खातेदारी से
तो खातेदारी ले
लीजिए।
हमारे
यहां दूसरी समस्या
है कस्टोडियन
लैण्ड की। जो
लोग शरणार्थी आये
थे 1947 में, उनको जमीन
अलॉट कर दी गयी।
एक आध साल बाद स्थानीय
किसानों को जमीन
वह बेचकर चले गये।
अब गैर खातेदारी
उनके नाम दर्ज
है, खातेदारी भी
उन्हीं को ही
मिलेगी, गैर खातेदारी
भी लेनी है तो वही
लेंगे, उनका अता
पता नहीं है, कहां
हैं, कहीं ढूंढ
भी नहीं सकते।
कोई दिल्ली जाकर
बस गया, कोई बाम्बे
जाकर बस गया, कोई
चंडीगढ़ जाकर बस
गया। वह किसान
जो बीस तीस साल
से बिजली लगाये
बैठा है, वहां कुआं
सूख गया, ट्यूबवैल
सूख गया, कैसे रहेगा
( समय-समाप्ति-सूचक-घण्टी
) इसकी व्यवस्था
अध्यक्ष महोदय,
सरकार को करनी
चाहिए खास तौर
से अलवर में जहां
जहां यह कस्टोडियन
भूमि का मामला
है, वहां यह समस्या
है।
एक बात
और कहूंगा अन्त
में, आपने घंटी
बजा दी। घरेलू
कनेक्शन, अब आप
नई टंकियां दे
रहे हैं कि कम से
कम एक जगह आठ दस
कनेक्शन लेने
वाले होंगे तभी
आप छोटी सोलह हार्स
पावर की टंकी लगायेंगे।
अध्यक्ष महोदय,
ऐसी भी जगह है कि
पहले लोगों ने
कुओं के कनेक्शन
से डोमेस्टिक कनेक्शन
ले रखे थे अपने
घरों पर, आप जानते
हैं गांवों में
लोग खेतों पर मकान
बना लेते हैं।
अब इन्होंने लाइन
अलग कर दी। उन लोगों
के पास डोमेस्टिक
कनेक्शन हैं,
बिजली के बिल आ
रहे हैं, दे रहे
हैं लेकिन अब उनके
कनेक्शन कट गये
और कहते हैं कि
आप संख्या बढ़ाइये।
एक तरफ तो आप कहते
हैं कि जनसंख्या
पर नियंत्रण करिये
और दूसरी तरफ कहते
हैं कि संख्या
बढ़ाइये तब आपको
ट्रांसफार्मर
देंगे। उन लोगों
का क्या होगा
जो कितने दिन से
डोमेस्टिक से कनेक्शन
लिये हुये हैं
? उनको डोमेस्टिक
कनेक्शन आपने
काट दिया फीडर
सुधार के नाम से,
उनके बारे में
भी कुछ सोचिये।
अगर किसी ढाणी
में दस घर कनेक्शन
लेने वाले नहीं
हैं तो उनको कनेक्शन
से आप वंचित कर
दोगे ? एक मेरा यह
निवेदन था। ( समय-समाप्ति-सूचक-घण्टी
)
अध्यक्ष
महोदय, मैं अन्त
में यह कहना चाहूंगा,
मंत्री महोदय,
आपने हमारे रामगढ़
में 132 जी.एस.एस. स्वीकृत
किये दो साल हो
गये हैं, आज तक उस
पर काम शुरू नहीं
हुआ है। अगर जी.एस.एस.
के दो साल पहले
स्वीकृत होने
के बाद में आज तक
भी काम नहीं चले
तो आप इससे अंदाजा
लगा सकते हैं कि
किस तरह की प्रोग्रेस
आपके विभाग में
हो रही होगी।
मेरा
आपसे अन्त में
निवेदन है कि आप
स्टाफ बढ़ाइये,
लोग जाते हैं लाइनमैन
मिलते नहीं हैं,
कागज लिये फिरते
हैं लाइनमैन के
पास, मिलता नहीं
है। लाइनमैन के
पास एक एक के पास
पाँच-पाँच, छह-छह
पंचायत हैं, लम्बा
एरिया है। आप चाहे
कान्ट्रेक्ट
पर लीजिये, चाहे
रिटायर्ड आदमियों
को लीजिये, किसी
तरह से इसमें बाकी
जनता को सुविधा
मिल सके। यह मैं
आपसे निवेदन करना
चाहता हूं। अध्यक्ष
महोदय, आपने मुझे
समय दिया, धन्यवाद।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं प्रार्थना
यह कर रहा था कि
सवा चार बजे के
लगभग दोनों मंत्रियों
के उत्तर होकर
इन दोनों मांगों
के बारे में कन्क्लूड
होना है और सोलह
माननीय सदस्य
बोलने वाले हैं।
अध्यक्ष महोदय,
दोनों इम्पार्टेंट
मांगें हैं इसलिए
आपने बड़ी कृपापूर्वक
बीकानेर से आने
वाल माननीय सदस्य
को चालीस मिनट
दे दिये, इनको पैंतीस
मिनट दे दिये।
श्री
अध्यक्ष: सत्ता
पक्ष के हैं चौदह
बोलने वाले और
प्रतिपक्ष के हैं
दस बोलने वाले...
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, चालीस चालीस
मिनट आप फरमा रहे
हैं।
श्री
अध्यक्ष: तीन
हैं इंडिपेन्डेंट्स
और दूसरी दूसरी
पार्टियों के।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): इसलिए
पाँच पाँच मिनट
का समय निर्धारित
करें, अपनी बात
कहें, चालीस चालीस
मिनट का समय दे
रहे हैं। तथ्य
की बात कोई है नहीं।
श्री
अध्यक्ष: श्री
बाबूसिंह राठौड़
।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): बाबूसिंह
जी, गागर में सागर
भर दो।
डा. सी.
पी. जोशी (नाथद्वारा):
राठौड़ हैं इसलिए
?
श्री
अध्यक्ष: पाँच
मिनट का समय है,
चार मिनट के बाद
घण्टी बजाऊंगी
और पांचवें मिनट
में आप समाप्त
कर देना।
श्री
बाबूसिंह राठौड़
(शेरगढ़): अध्यक्ष
महोदय, आपने मुझे
अकाल और बिजली
पर बोलने के लिए
मौका दिया इसके
लिए मैं आपका आभारी
हूं। पिछले वर्ष
संवत् 2062 में राजस्थान
में विशेष तौर
से पश्चिमी राजस्थान
में भंयकर अकाल
था और उस अकाल को
देखते हुए और अकाल
को हालात को देखते
हुए मुख्यमंत्री
जी वास्तव में
विस्मित हुईं और
जो हालात देखे
और जो स्थितियां
देखीं, उसको देखते
हुए मैं कह सकता
हूं कि राजस्थान
सरकार ने पहली
बार आपदा प्रबन्धन
नीति, पिछले वर्ष
2005-06 में सी. आर. एफ. नार्म्स
के अन्दर जो काम
नहीं आते थे और
उसके बगैर काम
नहीं हो सकते थे
उसके लिए भी अच्छा
प्रावधान करते
हुये पाँच करोड़
का प्रावधान रखा
और राजस्थान राहत
कोष बनाया। दूसरा,
सूखा प्रबन्धन
नीति भी बनायी,
राज्य आपदा मार्गदर्शिका
भी बनायी । इसलिए
मैं निवेदन करना
चाहूंगा कि यह
सारी नीतियां,
प्रबन्धन जो बनाया
है और जो मार्गदर्शिका
बनायी है, जिला
स्तर पर इस मार्गदर्शिका
को अभी तक अधिकारियों
ने देखा नहीं है
या शायद पढ़ा नहीं
है। मैं यह पहली
बार महसूस कर रहा
हूं कि जोधपुर
जिला मुख्यालय,
मैं विधान सभा
क्षेत्र शेरगढ़
से आता हूं ।
vns/usc/14.20/2e/3.4.2007/1
जब
अकाल के कार्य
शुरू होते हैं
तो कम से कम जिला
स्तरीय एक बैठक
होनी चाहिये और
बैठक के अन्दर
कैसे अकाल राहत
के कार्य को कराया
जाए उस हिसाब से
नीति बनाकर वैसी
योजना बनाकर काम
होना चाहिये। अध्यक्ष
महोदय, हम लोग चाहेंगे
कि लम्बे समय
से जब अकाल के कार्य
शुरू होते हैं
तो कच्चे कार्यों
के लिये ज्यादा
काम होते हैं।
उसमें लेबर कम्पोनेंट
अकुशल श्रमिक लगाकर
राहत प्रदान की
जाती है।
मैं अध्यक्ष
महोदय, कहना चाहूंगा
कि जो कच्चे कार्य
होते हैं उसमें
ज्यादातर नाडि़यों
के काम होते हैं।
नाडि़यां खुदाई
के काम होते हैं
और पुराने समय
से जो नाडि़यां
बनी हुई थी और जिस
प्रकार नाडि़यों
में जो रेतीली
मिट्टी या चिकनी
मिट्टी थी उस वजह
से पानी उसमें
रुकता था। अब उस
नाड़ी की इतनी
खुदाई हो गयी कि
वह चिकनी मिट्टी
भी उसमें रही नहीं
और पानी भी उसमें
ठहरता नहीं। राजस्थान
की कई नाडि़यों
को अगर आप देखें
तो उसमें पानी
ठहरता नहीं है।
कुछ एक नाडि़यां
ऐसी हैं जिसमें
अच्छा पानी रहता
है बाकी सब जगह
पानी नहीं रहता।
मैंने कई बार ऐसे
सुझाव भी दिये
कि जो हालात अकाल
के बने हुए हैं
और उस अकाल का सिर
कैसे तोड़ा जाए
उस हिसाब से किया
जाना चाहिये। इसमें
अधिकतर पौधे लगाकर
राजस्थान को हरा-भरा
करना चाहिये इसलिये
मैंने कई बार यह
निवेदन किया और
मंत्रीजी से भी
निवेदन किया कि
आप अगर रिंग पिट
बनाएं, गांवों
के अन्दर लेबर
को रिंग पिट दें
तो उससे उसमें
पौधे लग सकते हैं
और एक रिंग पिट
जो खुदता है उसमें
छह आदमी, छह श्रमिक
मिलकर एक रिंग
पिट खोदते हैं।
अध्यक्ष महोदय,
हम अगर एक रिंग
पिट खोदते हैं
तो उनको पूरी 73 रुपये
की मजदूरी मिलती
है। वह रिंग
पिट जिसमें दो
खाईयां होती है
और गहरा भी होता
है तो उसके अन्दर
अगर सारी जगह जो
ओरण है, जो गोचर
है, जो हमारी सड़कें
बनी हुई हैं। इतनी
शानदार और जानदार
प्रधानमंत्री
ग्रामीण सड़कें
बनी हैं उन सड़कों
के पास अगर रिंग
पिट खोद दिया जाए,
वह बजट रिंग पिट
के अन्दर लगा
दिया जाए तो सब
जगह आने वाले बरसात
के मौसम के अन्दर
उसमें पौधे लग
सकते हैं और हरियाली
आ सकती है। तो मैं
यह निवेदन करना
चाहूंगा कि अगर
आपके पास मैटेरियल
कम्पोनेंट नहीं
है तो लेबर से ही
आप यह अच्छे काम,
सुन्दर काम करा
सकते हैं। एक तो
खास मेरा इसमें
यह निवेदन था।
दूसरा मैं यह
निवेदन करना चाहूंगा
कि अकाल राहत के
कार्य काफी चल
रहे हैं। अब इन
अकाल राहत कार्यों
के अन्दर जो आचार
संहिता बनायी गयी
है, जो प्रबंध निर्देशिका
बनी है उसके अन्दर
1500 लेबर के ऊपर एक
निष्ठ अभियन्ता
नियुक्त करने
का इस मार्गदर्शिका
में है और 5000 लेबर
के ऊपर गाड़ी का
प्रावधान भी है
जिससे उन अकाल
राहत कार्यों को
देखा जा सके लेकिन
यह हो नहीं रहा
है। अध्यक्ष महोदय,
हालात यह हैं कि
1500 के ऊपर भी एक जे.ईएन.
मेरी पंचायत समिति
शेरगढ़ में केवल
मात्र एक ही जे.ईएन.
है। दूसरा जे.ईएन.
नहीं लगने से अकाल
राहत के काम सही
समय पर नहीं लगाये
जा सकते। दूसरा
मैं यह निवेदन
करना चाहूंगा कि
गाड़ी नहीं होने
की वजह से अकाल
के सारे जो काम
है उनका हम सही
ढंग से निरीक्षण
नहीं कर सकते और
कार्यों का सही
नाप नहीं आता।
नाप नहीं आने की
वजह से लेबर को
पूरी मजदूरी का
भुगतान नहीं मिलता।
मैं कहना चाहूंगा
कि अकाल राहत के
अन्दर जो श्रमिक
लगे हैं वह ज्यादातर
किसान वर्ग से
संबंधित श्रमिक
हैं और हालात यह
हैं कि..
(समय समाप्ति
सूचक घण्टी)
जब किसान वर्ग
से लेबर काम कर
रही है तो मैं यह
निवेदन करना चाहूंगा
कि उसके अन्दर
निर्माण के जो
श्रमिक हैं उनके
पास औजार भी होते
हैं और वह काम करने
के अन्दर निपुण
भी होते हैं तो
जो हमारी टास्क
के हिसाब से लेबर
आ रही है, विधान
सभा क्षेत्र शेरगढ़
में सारे गांव
अकाल से प्रभावित
हैं और वहां जो
टास्क आ रही है
वह 30 रुपये से कम
आ रही है। 10 रुपये,
12 रुपये वह टास्क
आ रही है और जहां
30 रुपये से कम लेबर
है वहां पर जिला
कलेक्टर इसके
लिये अधिकृत हैं
कि वह इसकी टास्कको
बढ़ाते हुए कम
से कम 30 रुपये तो
उस लेबर को दें।
इस प्रकार का प्रावधान
करना चाहिये।
मैं निवेदन
करना चाहूंगा कि
इस बार पहली बार
केन्द्र सरकार
की तरफ से गेहूँ
नहीं मिलने की
वजह से हालात यह
हो गये कि लेबर
को रोकड़ के रूप
में भुगतान हो
रहा है। रोकड़
पैसा मिलने की
वजह से सारे दिन
जो उनका समय व्यतीत
होता है उससे उनका
गुजारा नहीं चल
सकता। पिछली बार
और जब पूर्ववर्ती
सरकार के प्रधानमंत्री
अटल बिहारी वाजपेयी
साहब थे तो उस समय
गेहूँ की कोई कमी
नहीं रही। मैं
कहना चाहूंगा कि
उस समय बहुत तादाद
में गेहूँ मिला
और गेहूँ उस समय
470 रुपये क्विंटल
के हिसाब से मिलता
था आज भाव 1000, 1100 के हो
गये और पैसामिलता
है उससे तो वह गेहूँ
भी लाएं तो उनको
गेहूँ कम मिलता
है। मैं कहना चाहूंगा
गेहूँ ज्यादा
मिले और पैसे कम
मिले इसका भी होना
चाहिये।
मैं बहुत-बहुत
आभारी हूं मुख्यमंत्री
जी का कि पक्की
परि सम्पित्तियां
बनाने के लिये
उन्होंने पिछली
बार जो हमारे पश्चिमी
राजस्थान के अन्दर
विशेष तौर से बाड़मेर,
जोधपुर, जैसलमेर
के अन्दर बहुत
आंधियां चलती हैं
और आंधियों की
वजह से जो मिड डे
मील का कार्यक्रम
शुरू हुआ। वहां
भोजन अच्छा नहीं
मिलने की वजह से....
(समय समाप्ति
सूचक घण्टी)
आंधियों की
वजह से सब जगह रेती
आती थी और खाना
सही नहीं पकता
था तो इसके लिये
मैं आभारी हूं
कि आपने 14809 मिड डे
मील, 3568 आंगनबाड़ी
केन्द्र और 13803 ग्रामीण
शौचालय बनाये...
(समय समाप्ति
सूचक घण्टी)
इसके लिये मैं
आभारी हूं। अब
इसी में मैं निवेदन
यह करना चाहूंगा।
5 मिनट तो दो। ऐसे
सुझाव दे रहा हूं
दो-तीन मैं। मैं
आपसे अध्यक्ष
महोदय, यही निवेदन
करना चाहूंगा कि
इस बार भी मुख्यमंत्री
जी की घोषणा है...
(समय समाप्ति
सूचक घण्टी)
श्री अध्यक्ष:
श्री बाबूलाल नागर।
श्री बाबूसिंह
राठौड़ (शेरगढ़):
और कई आंगनबाड़ी
केन्द्र अभी नहीं
बने हैं तो वह आंगनबाड़ी
केन्द्र भी बनने
चाहिये। पिछली
बार भी अध्यक्ष
महोदय, घण्टी
बजा दी। यह 5 मिनट
के सुझाव दे रहा
हूं और मैं कोई
ज्यादा बात नहीं
कर रहा हूं।
श्री अध्यक्ष:
6 मिनट बोल लिये।
माननीय सदस्य
5 की बजाय 6 बोल चुके
हैं।
श्री बाबूसिंह
राठौड़ (शेरगढ़):
सुझाव दे रहा हूं।
5 मिनट। आप सुझाव
तो देने दीजिये।
श्री अध्यक्ष:
You have taken
more than five minutes.
श्री बाबूसिंह
राठौड़ (शेरगढ़):
अकाल के जो सुझाव
हैं। अकालग्रस्त
क्षेत्र से हम
आते हैं वह सुझाव
भी आप देने नहीं
देते।
श्री अध्यक्ष:
मैंने कह दिया
अब समाप्त करें।
श्री बाबूसिंह
राठौड़ (शेरगढ़):
35 मिनट बोल गये, 40
मिनट बोल गये, 50 मिनट
बोल गये। पहले
मदन जी राठौड़
खड़े हुए उनको
आपने बोलने नहीं
दिया। पिछली बार
जब मैं बोलने खड़ा
हुआ तो बोलने दिया
नहीं। सुझाव ही
तो दे रहा हूं अकाल
पर और बिजली पर।
वह भी आप देने देते
नहीं। यह 5 मिनट
में कोई माननीय
अध्यक्ष महोदय, क्या बात अपनी
कह सकता है तो 2 मिनट
का समय तो मुझे
भी दे दीजिये।
मैं यह निवेदन
करना चाहूंगा कि
पिछली बार भी मुख्यमंत्री
महोदय ने 50 करोड़
का प्रावधान सामग्री
के लिये किया था
... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
सत्ता पक्ष के
मंत्रीजी ने ही
सुझाव दिया है
कि 5 मिनट से अधिक
समय नहीं दिया
जाए तो मैं करूं।
उन्होंने ही कहा
है।
श्री बाबूसिंह
राठौड़ (शेरगढ़):
अब वह अभी हैं नहीं।
5 मिनट आप मेहरबानी
करें। आप मेहरबानी
कर दो। 5 मिनट में
मेरी बात कह दूंगा
और मैं निवेदन
यह करना चाहूंगा
पिछली बार भी ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
नहीं ऐसे काम नहीं
चलेगा। ऐसे काम
नहीं चलेगा। आप
बोल चुके हैं 7 मिनट।
आपने 2.18 पर शुरू किया
था, 2.25 हो गये।
श्री बाबूसिंह
राठौड़ (शेरगढ़):
सुझाव दे रहा हूं
मैं तो। दो-तीन
सुझाव तो देने
दीजिये।
श्री अध्यक्ष:
सब सुझाव दे रहे
हैं यहां अपने।
ऐसे कोई नहीं बोलता।
सब सुझाव ी देते
हैं।
श्री बाबूसिंह
राठौड़ (शेरगढ़):
मैं कोई ज्यादा
बात तो नहीं कर
रहा, मैं कोई मंत्री
वाले जवाब तो दे
नहीं रहा, मैं तो
यही सुझाव दो-तीन
दे रहा हूं। 5 मिनट
में क्या बोल
सकता है कोई ?
श्री अध्यक्ष:
सब अपने-अपने समझ
से सुझाव देते
हैं ... (व्यवधान)
श्री बाबूसिंह
राठौड़ (शेरगढ़):
या आइंदा से हम
बोलना ही बंद करें।
5-5 मिनट में कौन क्या
बोल सकता है ? मैं
यही निवेदन करना
चाहूंगा कि पिछले
वर्ष भी ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
यह तो बड़ा मुश्किल
है। इस तरह
यदि माननीय सदस्य
मानेंगे नहीं तो
बड़ा मुश्किल है
आसन के लिये। फिर
आसन क्या करेगा
?
श्री बाबूसिंह
राठौड़ (शेरगढ़):
अकाल की, बिजली
की दो बात भी नहीं
कर सकते। 5 मिनट
में बात होती है
क्या ? 5 मिनट में
कोई बात हो सकती
है ? ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आपने मैं कह रही
हूं 2.18 पर शुरू किया
था। मैंने लिखा
है। अब 2.26 हुए हैं
... (व्यवधान)
श्री बाबूसिंह
राठौड़ (शेरगढ़):
सुझाव ही शुरू
किये हैं, मैंने
प्रशंसा ही नहीं
की। सुझाव ही शुरू
किये हैं आज तो।
मैं यह निवेदन
करना चाहूंगा पिछली
बार भी सामग्री
मद के अन्दर 50 करोड़
का प्रावधान करके
लेबर मैटेरियल
सरकार की तरफ से
मिले थे और कुशल,
अकुशल सबको शामिल
करते हुए, डोवटेल
करते हुए एम.एल.ए.
लैड और एम.पी. लैड
दूसरी योजनाओं
के काम भी डोवटेल
करके कराये थे।
इस बार भी प्रावधान
करना चाहिये और
मंत्री महोदय को
जवाब देना चाहिये
कि जो हमारे एम.एल.ए.
कोटे से, सांसद
कोटे से काम हो
रहा है या दूसरी
योजनाओं में भी
काम हो रहा है उनको
भी डोवटेल करके
काम करायें तो
परिसम्पत्तियां
ज्यादा बनेंगी।
पक्के कार्य ज्यादा
होंगे और इससे
हमारा काम हो सकेगा।
खास तौर से यह मेरा
निवेदन था अकाल
राहत के अन्दर
अच्छे काम हों।
दो सुझाव मैं
बिजली के मामले
में, ऊर्जा में
देना चाहूंगा।
अभी राजीव गांधी
ग्रामीण विद्युतीकरण
योजना चल रही है।
अब उस राजीव गांधी
विद्युतीकरण योजना
में मेरे विधान
सभा क्षेत्र शेरगढ़
में पहली बार सन्
1952 के बाद 109 गांवों
में बिजली गयी
है और 8 ग्राम पंचायतों
में पहली बार बिजली
गयी है लेकिन उसमें
प्रावधान ऐसे जटिल
हैं कि 10 परसेंट
एक गांव के अन्दर,
10 परसेंट ढाणियों
के अन्दर आप कनेक्शन
दे रहे हो। केवल
मात्र 10 परसेंट।
यहां पर 300 ढाणियां
हैं अब 300 ढाणियों
में 10 परसेंट कनेक्शन
होगा तो 30 ढाणियों
में कनेक्शन होगा
और 270 ढाणियां तो
वंचित रह जायेगी।
इसलिये मंत्री
महोदय, मैं आपसे
निवेदन करना चाहूंगा
कि आप केन्द्र
सरकार से भी प्रयास
करेंगे, विपक्ष
भी प्रयास करेगा
और खास तौर से राजस्थान
सरकार की भी नीति
आप बनाएं तो जो
शेष ढाणियां बच
रही हैं उन ढाणियों
में भी कनेक्शन
हो जाए। अब उन ढाणियों
के कनेक्शन के
लिये, गांवों में,
ढाणियों में, हमारे
यहां तो सब ढाणियों
से बसते हैं और
आपकी एक घरेलू
विद्युतीकरण की
योजना है जिसमें
सौ रुपये मीटर
के हिसाब से कनेक्शन...
(समय समाप्ति
सूचक घण्टी)
वह भी ग्राम
पंचायत की आबादी
क्षेत्र में ढाणियों
में कनेक्शन नहीं
मिल रहे ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
श्री बाबूलाल नागर।
श्री बाबूसिंह
राठौड़ (शेरगढ़):
थोड़ी कनेक्शन
की बात कर दूं।
बिजली के कनेक्शन
की बात कर लूं आप
थोड़ा सा ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
प्रारम्भ करें।
... (व्यवधान)
श्री बाबूसिंह
राठौड़ (शेरगढ़):
कनेक्शन के लिये
निवेदन ... (व्यवधान)
डा. श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, पाइंट
आफ एक्सप्लेनेशन।
जो मैंने कल बात
की थी जमीनों के
बारे, उसका आज जवाब
आना था। जो मंत्री
पर आरोप लगाया
था हमने उसका जवाब
आ जाए आज ... (व्यवधान)
यह और निवेदन है
आपसे ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह
पाइंट आफ एक्सप्लेनेशन
कहां से आ गया ? आज
समय कम है। दो महत्वपूर्ण
मांगों पर चर्चा
हो रही है। यहां
पाइंट आफ एक्सप्लेनेशन
करके कल की तर्ज
पर फिर चालू हो
गये ... (व्यवधान)
डा. श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
मेरी केवल एक ही
मिनट की बात थी
मंत्रीजी। केवल
एक मिनट की बात
थी मेरी तो ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
कल की तर्ज पर फिर
चालू हो गये ... (व्यवधान)
डा. श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
पाइंट आफ एक्सप्लेनेशन।
मैंने यह कहा था
कि कल जो आरोप लगाये
थे हमने तो वह मंत्री
जवाब दे देवें
और उसमें क्या
कह दिया ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
जो सदस्य बैठते
नहीं हैं ... (व्यवधान)
सत्ता पक्ष के
माननीय सदस्य
अब नहीं बैठ रहे
हैं तो अब क्या
किया जाए ? ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
वह तो बैठ जायेंगे।
वह तो आपकी आज्ञा
की पालना कर लेंगे।
शेरगढ़ से आने
वाले माननीय सदस्य
तो आपकी आज्ञा
मान लेंगे। अब
क्या पाइंट आफ
एक्सप्लेनेशन
हुआ ... (व्यवधान)
डा. श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
केवल बात यह थी
... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
सत्ता पक्ष के
माननीय सदस्य
जो नहीं बैठ रहे
हैं तो अब क्या
किया जाए ? सत्ता
पक्ष के माननीय
सदस्य बार-बार
टोकने पर भी जब
नहीं बैठें तो
क्या किया जाए
?
श्री बाबूसिंह
राठौड़ (शेरगढ़):
आइंदा से नहीं
बोलने दिया जाए।
धन्यवाद।
डा. श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मेरा
पाइंट आफ एक्सप्लेनेशन
यह था कि कल जो बात
कही थी मंत्री
महोदय ने हमको
जमीनों के बारे
में ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
मैंने नाम पुकार
लिया। बाबूलाल
नागर ... (व्यवधान)
डा. श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
जो आरोप लगे थे
डी-एक्वीजिशन
करने के तो उसका
जवाब दे दें वह।
आपने कल यह बात
कही थी कि व्यवस्था
देंगी आप ... (व्यवधान)
श्री अमराराम
(धोद): माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपने
व्यवस्था दी
थी कि यहां से दो
और यहां से दो, बीच
में तीसरी, बीच
में से एक बोलेंगे
... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
कहां बोले दो-दो
? एक-एक ही तो बोल
रहे हैं। एक-एक
ही तो बोले हैं।
श्री अमराराम
(धोद): दो इधर से बोल
गये, तीन इधर से
बोल गये। माननीय
अध्यक्ष महोदय, बीच में से कोई
बोला नहीं ... (व्यवधान)
डा. श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
इस मेरी मांग को
आप रिकार्ड पर
ले लें माननीय
अध्यक्ष महोदय, ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
यहां से बोले हैं
बी.डी.कल्ला और जुबेर
खान और इधर से बोले
हैं ... (व्यवधान)
डा. श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
कागज पेश कर दूंगा।
आप रिकार्ड में
... (व्यवधान) मेरे
पास कुछ दस्तावेज
हैं। दस्तावेज
को रिकार्ड में
लें। खाली दस्तावेज
को आप ... (व्यवधान)
श्री अमराराम
(धोद): मदन सिंह जी
और दो बोल गये।
बीच में से कोई
बोला ही नहीं माननीय
अध्यक्ष महोदय, ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
कोई इधर से नहीं
... (व्यवधान) मदन
राठौड़ और बाबूसिंह
राठौड़ इधर से
बोले हैं। दो ही
बोले हैं इधर से।
अब यह तीसरे कांग्रेस
के हैं और इसके
बाद मैं किसी और
पार्टी वालों को
दूंगी ... (व्यवधान)
श्री अमराराम
(धोद): बीच में तो
बोले हैं माननीय
अध्यक्ष महोदय, आपने कहा था
कि यह दो इधर से
और दो ... (व्यवधान)
श्याम/चौहान 03.04.2007
14.30 2f
श्री अध्यक्ष:
अब आप समय बरबाद
मत करें ...(व्यवधान)
डा. श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
अध्यक्ष महोदय,
मेरा पाइंट ऑफ
इनफार्मेशन यह
है कि कल जो बात
की थी जमीनों के
बारे में, डि-एक्विजेशन
की उसके कागज मेरे
पास हैं, आप रिकार्ड
में ले लें और उसका
जवाब दिलवायें
आप।
श्री अध्यक्ष:
काहे का जवाब।
डा. श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
वह जो कल बात हुई
थी जमीनों के डि-एक्विजेशन
की, एक्विजेशन
की, डि-एक्वायर
करने के बारे में
...(व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
अध्यक्ष महोदय,
इस तरह चलते सदन
में कोई अचानक
खड़ा होकर के पाइंट
ऑफ एक्सिप्लेनेशन
के नाम पर सदन का
दुरूपयोग करके
कागज रख देगा चलते
सदन में ...(व्यवधान)
बहस किसकी हो रही
है ...(व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा
(सिरोही): सदन के
दुरूपयोग की बात
नहीं है, आप सत्ता
का दुरूपयोग कर
रहे हैं। आप सत्ता
का दुरूपयोग कर
रहे हैं ...(व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
इन्होंने कह दिया
पाइंट ऑफ इन्फार्मेशन
के द्वारा मैं
कागज रखना चाहता
हूं ...(व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा
(सिरोही): हमारी
जिम्मेदारी है
आपको रोकने की
...(व्यवधान) आप सत्ता
का दुरुपयोग कर
रहे हैं, आपको रोकने
की हमारी जिम्मेदारी
है ...(व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
अध्यक्ष महोदय,
यह क्या बात हुई
...(व्यवधान) अगर
प्रतिपक्ष अकाल
में और बिजली में
भाग नहीं लेना
चाहता है तो वैसे
बात कर ले, कोई दिक्कत
की बात नहीं है,
जल्दी एडजोर्न
हो जायेगा ...(व्यवधान)
डा. श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
चर्चा करनी है
...(व्यवधान) उस पर
भी चर्चा करनी
है अकाल और बिजली
पर भी लेकिन भ्रष्टाचार
पर नियंत्रण होना
आवश्यक है ...(व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा
(सिरोही): आप खड़े
होकर के कह रहे
थे, लाओ, हम सब कागज
लाये हैं, आओ, आओ
चर्चा पर।
श्री रामनारायण
मीणा (नैनवां): चर्चा
नहीं है, आप तो सब
कुछ जानते हो कि
वास्तविकता क्या
है, राजस्थान
में क्या हो रहा
है, आप रखने दीजिये
ना ...(व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
अध्यक्ष महोदय,
मुझे एतराज है,
इस आसन का दुरुपयोग
करके कोई भी बात
कहकर के यहां से
चले जाना, कल बात
हुई थी, आपके वैश्म
में आकर के मैंने
तब भी कहा था और
मैं आज भी उस बात
पर कायम हूं। कल
जिन चीजों की चर्चा
की थी, आप अपने चैम्बर
में इन्हें बुला
लें, हमें बुला
लें, हम भी सारी
बातें रखने को
तैयार हैं ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण
मीणा (नैनवां): आप
खड़े होंगे, मैं
बैठ जाऊंगा, आपके
खड़े होते ही मैं
बैठ जाऊंगा ...(व्यवधान)
डा. सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): राठौड़
साहब, चलिये अभी,
किसको कह रहे हैं
आप ...(व्यवधान) अध्यक्ष
महोदय, हम बिलकुल
तैयार हैं। आप
चलिये चैम्बर
में, चलिये चैम्बर
में क्या तकलीफ
है।
श्री अध्यक्ष:
ठीक है।
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
चलिये, कौन मना
कर रहा है ...(व्यवधान)
डा. सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): चलिये,
चलिये ...(व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
ठीक है, आ जायें
...(व्यवधान) अध्यक्ष
महोदय, कोई एतराज
की बात नहीं है।
श्री अध्यक्ष:
ठीक है, हो गयी बात
...(व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
यह जिस तरह की चुनौती
देते हैं उस तरह
की चुनौती हमें
भी स्वीकार है
...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
हां, हां, हो गयी
बात ...(व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
मैं अभी कागज ले
आता हूं ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण
मीणा (नैनवां): हां,
जाइये ले आइये
...(व्यवधान) कितनी
देर में ले आयेंगे
...(व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
मैं ले आता हूं
कागज ...(व्यवधान)
मैं कागज ले आऊंगा
...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
हां, ले आओ, ले आओ
...(व्यवधान)
श्री रामनारायण
मीणा (नैनवां): कितनी
देर में।
श्री अध्यक्ष:
ले आओ, ले आओ ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
किस बात पर नाराज
हो रहे हैं आप ...(व्यवधान)
किस बात पर नाराज
हो गये पार्लियामेंट्री
अफेयर मिनिस्टर
...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
लाइये तो देखें
...(व्यवधान)
श्री अशोक बैरवा
(खण्डार): सरकार
का दिवालिया होने
वाला है। आप भागे
मत बैठें ...(व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
अध्यक्ष महोदय,
कुछ तो गरिमा रहेगी।
श्री रामनारायण
मीणा (नैनवां): यह
तो हमारी भलमनसाहत
है कि हम आपके खिलाफ
बोल नहीं रहे हैं
क्योंकि आपका
चेहरा दिखता है,
नहीं तो आप कितने
क्या है, आप जानते
हो सारी बात ...(व्यवधान)
श्री मदन राठौड़
(सुमेरपुर): आपकी
बदनामी है यह, आप
जान-बूझकर के ऐसा
कर रहे हैं ...(व्यवधान)
कैसी भलमनसाहत
है ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण
मीणा (नैनवां): बंदर
घुड़की मत बतायें,
कागज लाइये ...(व्यवधान)
श्री मदन राठौड़
(सुमेरपुर): मनुष्यत्व
भी नहीं है ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण
मीणा (नैनवां): बंदर
घुड़की मत बतायें,
कागज लायें। दूध
का दूध, पानी का
पानी करें ...(व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
हां, हां ...(व्यवधान)
चलिये साहब, नाम
पुकारें ...(व्यवधान)
श्री मदन राठौड़
(सुमेरपुर): बाबूलाल
जी को बोलने देंगे
लेकिन मुझे टोका
था बाबूलाल जी
ने ...(व्यवधान)
श्री बाबूलाल
नागर (दूदू): कब।
श्री मदन राठौड़
(सुमेरपुर): मैं
कह रहा हूं बोलें,
बाबूलाल जी को
टोक नहीं रहा हूं।
श्री अध्यक्ष:
पुकार लिया ना
नाम, बाबूलाल नागर।
श्री बाबूलाल
नागर (दूदू): अध्यक्ष
महोदय, अकाल प्राकृतिक
आपदा है, सरकार
का दायित्व बनता
है कि अकाल जैसे
मुद्दे पर सरकार
संवेदनशील रहे।
श्री अध्यक्ष:
2.32 पर शुरू किया है
आपने, 2.37 पर खत्म।
श्री बाबूलाल
नागर (दूदू): अध्यक्ष
महोदय, पाँच मिनट
ही।
श्री अध्यक्ष:
हां, पाँच मिनट।
श्री बाबूलाल
नागर (दूदू): अध्यक्ष
महोदय, मैं एक तो
निवेदन करना यह
चाह रहा था कि वर्तमान
सरकार जयपुर जिले
में राजनीतिक भावना
से काम रही है।
दूदू, फागी और फुलेरा
तीनों ऐसे क्षेत्र
हैं जहां भयंकर
अकाल पड़ता है
लेकिन इस बार जब
सरकार ने अभावग्रस्त
गांवों की सूची
05.01.2007 को घोषित की, दूदू
विधान सभा क्षेत्र
का एक भी गांव अकाल
में शामिल नहीं
किया। फुलेरा विधान
सभा का एक भी गांव
शामिल नहीं किया।
फागी के मात्र
20 गांव शामिल किये।
अध्यक्ष महोदय,
वहां की जनता का
अकाल पीडि़त होने
के कारण इतना बुरा
हाल है, प्रभारी
मंत्री जी एक बार
दूदू आये, सार्वजनिक
रूप से सारे जन-प्रतिनिधियों
ने कहा कि अधिकारियों
को पता नहीं किसने
निर्देश दिये हैं
कि जान-बूझकर शत-प्रतिशत
अकाल होने के बावजूद
भी हमारे क्षेत्र
को अकाल में शामिल
नहीं किया। राजनीतिक
पार्टियों की भी
जहां तक बात करें,
हमारे उपखंड मुख्यालय
के भवन का उदघाटन
था, सब जन-प्रतिनिधियों
ने एक राय से बात
की, फिर इसके बाद
भारतीय जनता पार्टी
के मंडल अध्यक्ष
जी ने भारतीय जनता
पार्टी की मीटिंग
रखी, उसमें प्रभारी
मंत्री कटारिया
जी से उन्होंने
सार्वजनिक रूप
से, एक सम्मत रूप
से कहा कि कटारिया
जी यह बहुत बड़ा
अन्याय हो गया।
हमारे यहां तो
40-50 गांव ऐसे हैं जहां
एक भी गांव में
एक मुट्ठी अनाज
पैदा नहीं हुआ
और जहां शत-प्रतिशत
खराबा था और यह
क्या कारण हुआ
कि हमारी पंचायत
समिति का एक भी
गांव अकाल में
नहीं लिया।
अध्यक्ष महोदय,
मैं माननीय मुख्यमंत्री
जी से भी मिला, 11 जनवरी
को मैंने निवेदन
किया, मैंने उनसे
आग्रह किया कि
पहले भी ऐसा 1998 में
हुआ था, उस समय सरकार
ने दुबारा रिवाइज
रिपोर्ट मंगायी।
वहां दुबारा गिरदावरी
के आदेश हुए कि
नहीं हुए, मेरी
जानकारी में नहीं
है लेकिन उस समय
मैंने मुख्यमंत्री
जी से निवेदन किया,
दुबारा रिवाइज
रिपोर्ट जिला कलेक्टर
के यहां से आयी
और उन्होंने मौके
पर जानकारी ली
और उसके आधार पर
हमारे 30 जनवरी को
दुबारा गांव शामिल
किये। मेरा निवेदन
यह है कि यह सरकार
शुरू से ही अकाल
के लिए संवेदनशील
नहीं है। राजस्थान
में 58 साल में से
46 साल अकाल पडा है।
राजस्थान और अकाल
का चोली-दामन का
साथ है। यह सरकार
जब से आयी है राजस्थान
में, सवा तीन साल
में 7.12.2005 को राजस्थान
में अकाल की पिछली
बार अधिसूचना जारी
की, 10 फरवरी, 2006 को जो
सीलिंग रखी थी
( बजे)
(श्री रामनारायण
विश्नोई, उपाध्यक्ष,
पदासीन)
राजस्थान
में, अकाल राहत
मंत्री जी तो यहां
नहीं हैं, 3 लाख 51 हजार
सीलिंग रखी लेकिन
लेबर इन्होंने
2 लाख 18 हजार 812 लगायी।
इसी तरह इन्होंने
20.02 को सीलिंग रखी
3 लाख 51 हजार और लेबर
एंगेज की 1 लाख 27 हजार
438, इसी तरह से 28.02 को
1 लाख 84 हजार 362, जब भी
कोई अकाल की शुरूआत
होती है, अकाल के
काम शुरू होते
हैं तो धीरे-धीरे
सीलिंग बढ़ती है।
लेबर की संख्या
बढ़ायी जाती है।
मुझे समझ में नहीं
आ रहा है कि यह सरकार
कौनसा दावा रोप
रही है कि जब शुरू
करते हैं उस समय
तो एंगेज करते
हैं 2 लाख 18 हजार और
फिर उसके बाद में
1 लाख 27 हजार हो जाते
हैं, फिर उसके बाद
में 1 लाख 84 हजार होते
हैं। इसी तरह से
20.03.2006 की डेट को इन्होंने
रिलीफ की सीलिंग
रखी। मुझे बड़ी
तकलीफ इस बात की
है कि 48 हजार 370 आदमी
रिलीफ में इन्होंने
पूरे राजस्थान
में लगाये हैं
और एक अशोक गहलोत
जी का शासन था जब
70-70 हजार आदमी अकेले
दूदू विधान सभा
में अकाल में काम
करते थे। मुझे
ताज्जुब है कि
48 हजार 370 लेबर एंगेज
किये मार्च, 2006 में,
इसी तरह से निवेदन
करना चाहता हूं
...(व्यवधान)
श्री मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): अशोक जी
के समय ही अकाल
पड़ता था।
श्री बाबूलाल
नागर (दूदू): मैं
इंटरप्ट करता
नहीं, मंत्री महोदय,
किसी को डिस्टर्ब
करता नहीं हूं।
श्री उपाध्यक्ष:
बीच में नहीं बोलें।
श्री बाबूलाल
नागर (दूदू): इसी
तरह से 10.04.2006 को सीलिंग
रखी रिलीफ में
6 लाख 800 और आपने एंगेज
किया इसके लिए
69 हजार 649, इसी तरह
से 20.04.2006 को आपकी सीलिंग
थी वही 6 लाख 800 और
आपने एंगेज की
3 लाख 61 हजार ...(व्यवधान)
श्री उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
बीच में नहीं ...(व्यवधान)
अपने स्थान पर
बिराजें ...(व्यवधान)
श्री बाबूलाल
नागर (दूदू): यह तो
2006 का फीगर था। अब
2007 के बारे में निवेदन
करूं, राजस्थान
में इस सरकार ने
5.01.2007 को अकाल की घोषणा
की, 11 जनवरी से राजस्थान
में अकाल के काम
कराने की बात की
सरकार ने।
श्री उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आपके पाँच मिनट
समाप्त हो चुके
हैं ...(व्यवधान)
श्री बाबूलाल
नागर (दूदू): उपाध्यक्ष
महोदय, मैं यह निवेदन
कर रहा हूं कि यह
सरकार कितनी संवेदनशील
है।
श्री उपाध्यक्ष:
आप अपनी बात एक
मिनट में कह दीजिये।
श्री बाबूलाल
नागर (दूदू): उपाध्यक्ष
महोदय, आप जानते
हो कि मैं वैसे
ही कम बोलता हूं
...(व्यवधान)
श्री उपाध्यक्ष:
बहुत से सदस्य
बोलने वाले हैं
...(व्यवधान) कम बोलने
वालों में आप नहीं
हो ...(व्यवधान)
श्री बाबूलाल
नागर (दूदू): उपाध्यक्ष
महोदय, 11 जनवरी को
राजस्थान में
अकाल की घोषणा
की, अकाल के काम
चालू किये। इस
सरकार ने एक लाख
लेबर सीलिंग तय
की और इस सरकार
ने 20.01.2007 तक की रिपोर्ट
बताती है 9 हजार
470 आदमी अकाल पर लगाये।
मुझे ताज्जुब
होता है कि यह अकाल
राहत में, अकाल
पर लगाने में यह
सरकार कितनी गंभीर
है।
श्री उपाध्यक्ष:
काम पर नहीं आ रहे
हैं ...(व्यवधान)
श्री बाबूलाल
नागर (दूदू): एक लाख
सीलिंग तय करते
हैं और 9 हजार 470 आदमी
काम पर लगाते हैं
...(व्यवधान)
श्री उपाध्यक्ष:
काम करने के लिए
आ नहीं रहे हैं,
वास्तव में काम
नहीं करना चाहते
हैं ...(व्यवधान)
श्री बाबूलाल
नागर (दूदू): उपाध्यक्ष
महोदय, 25-25 हजार आदमी
जयपुर में आकर
इस सरकार को रोये
हैं। इस सरकार
का ध्यानाकर्षित
करने के लिए जयपुर
की सड़कों पर, अपने-अपने
खर्चे से आकर के
रोये हैं कि हम
भूख से मर रहे हैं।
हमारी बुरी हालत
हो रही है। अकाल
में हमारे गांव
को शामिल करें।
एक-एक रोटी के लिए
गांव के लोग पलायन
कर रहे हैं और उपाध्यक्ष
महोदय, आप कह रहे
हैं कि कोई काम
करने के लिए नहीं
आ रहा है।
jyg/usc/3.4.7/14.40/2g
माननीय
उपाध्यक्ष महोदय, मैं फिर आपसे
निवेदन करना चाहता
हूं कि मेरे पास
31.1.2007 की रिपोर्ट है।
जिसमें एक लाख
इस सरकार ने सीलिंग
करी है।
श्री
उपाध्यक्ष: श्री
जालम सिंह रावलोत।
...(व्यवधान)... अब
अंकित नहीं होगा। ...(व्यवधान)...
अब अंकित नहीं
होगा आपका, आपको
पाँच मिनट दिए
थे।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
उपाध्यक्ष: व्यवस्था
मत बिगाड़ो।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
उपाध्यक्ष: आ
गई आपकी बात। आप
स्थान ग्रहण कीजिए।
आपको समय की पाबन्दी
माननी पड़ेगी।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
उपाध्यक्ष: अंकित
नहीं होगा आपका।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
उपाध्यक्ष: माननीय
सदस्य, मैंने
दूसरा नाम पुकार
लिया है। अंकित
नहीं होगा, ...(व्यवधान)...
माननीय सदस्य,
अंकित नहीं हो
रहा आपका। ...(व्यवधान)...
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
उपाध्यक्ष: माननीय
सदस्य, आप क्यों
समय खराब कर रहे
हो, आपने सब कह दिया,
आपकी बात आ गई।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
रामनारायण मीणा
(नैनवां): 000
श्री
उपाध्यक्ष: माननीय
सदस्य, आपकी पार्टी
के लोग नहीं मानेंगे,
बोलने वाले तो
बोलेंगे, आपके
कहने से नहीं मानेंगे।
...(व्यवधान)... कौन
कह रहा है आप बताओ?
श्री
रामनारायण मीणा
(नैनवां): 000
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
उपाध्यक्ष: देखा
है, 50 हजार में से
लेबर लगने वाला
एक नहीं था उसमे,
मजदूरी करने वाला
एक नहीं है। ...(व्यवधान)...
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
रामनारायण मीणा
(नैनवां): 000
श्री
उपाध्यक्ष: माननीय
सदस्य, आप बैठिए,
आपकी बात भी नहीं
सुनी जाएगी।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
उपाध्यक्ष: माननीय
सदस्य, अंकित
नहीं हो रहा है।
अंकित नहीं करें।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
उपाध्यक्ष: माननीय
सदस्य, आप स्थान
ग्रहण कीजिए।
श्री
अशोक बैरवा (खण्डार):
000
श्री
उपाध्यक्ष: माननीय
सदस्य, आप काहे
पर बोल रहे हो, आप
अपना स्थान ग्रहण
कर लीजिए।
श्री बाबूलाल
नागर (दूदू): 000
श्री
उपाध्यक्ष: आपका
अंकित नहीं हो
रहा है। यह गलत
बात है आपकी, माननीय
सदस्य, यह कोई
तरीका नहीं है।
जब सदन में तय हो
चुका है कि पाँच
मिनट का समय दिया
जाएगा। आपका अंकित
नहीं होगा। अंकित
नहीं होगा।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
उपाध्यक्ष: अंकित
नहीं हो रहा है।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
उपाध्यक्ष: अंकित
नहीं हो रहा है।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
उपाध्यक्ष: माननीय
सदस्य, आपके दल
का कोई भी माननीय
सदस्य आपके इस
आचरण से सहमत नहीं
है।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
(माननीय सदस्य,
श्री बाबूलाल नागर
द्वारा सदन से
बर्हिगमन)
श्री
उपाध्यक्ष: श्री
जालम सिंह रावलोत।
माननीय सदस्य
समय का ध्यान
रखकर 5 मिनट में
अपनी बात समाप्त
करें।
श्री
रामनारायण मीणा
(नैनवां): 000
श्री
अशोक नागपाल (सूरतगढ़):
000
डा. जालम
सिंह रावलोत (शिव):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, हमारे
बाड़मेर और जैसलमेर
में सामान्यत:
अकाल रहता है।
इस बार बाढ़ आई
लेकिन राहत विभाग
ने माननीय मुख्य
मंत्रीजी और माननीय
मंत्रीजी की अगुवाई
में जो शानदार
काम किया है और
लोगों को जो राहत पहुंचाई
है मैं उसके लिए
इस अवसर पर हमारी
सरकार को साधुवाद
देना चाहता हूं।
जहां प्रतिपक्ष
के लोग अभी बता
रहे थे कि अकाल
राहत में मजदूर
नहीं लगाए गए हैं,
मैं आपके माध्यम
से सदन का बताना
चाहता हूं कि इस
समय साढ़े तीन
लाख मजदूर राजस्थान
में अकाल के क्षेत्रों
में काम कर रहे
हैं। जैसा बीकानेर
से आने वाले माननीय
सदस्य ने कहा
था कि एक पशु सेवा
शिविर चालू नहीं
किया गया, मैं आपके
माध्यम से निवेदन
करना चाहता हूं
कि इस समय सात जिलों
में 2,10,715 पशु सेवा
शिविर चल रहे हैं
जिनमें 18 रुपए प्रति
बड़ा पशु और 12 रुपए
प्रति छोटा पशु
प्रतिदिन पेमेंट
दिया जाता है और
अच्छी घास, अच्छा
चारा और सारी व्यवस्था
इन पशु सेवा शिविरों
के माध्यम से
करके गौ वंश का
संवर्द्धन कर रहे
हैं।
माननीय
उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम
से यह कहना चाहता
हूं कि हमारी माननीय
मुख्य मंत्रीजी
ने इस बात को स्वीकार
किया है कि जहां
एक ओर बाड़मेर
और जैसलमेर के
बाढ़ पीडि़तों
के लिए 32 सौ करोड़
रुपए की मांग की
जगह केन्द्र सरकार
ने केवल सौ करोड़
रुपए दिए हैं।
पिछली बार सोनिया
गांधीजी जब जैसलमेर
आई अकाल के समय
और बाढ़ के समय
बाड़मेर आई तो
उनको लोगों के
जबर्दस्त आक्रोश
का सामना करना
पडा।
Gpc/akt/ 03042007/1450/2h
उसके बावजूद
उन्होंने केवल
राजनीति की, एक
पैसा नहीं दिया।
मैं मुख्यमंत्रीजी
की इस बात के लिए
और उनके साहसपूर्ण
निर्णय की सराहना
करना चाहूंगा कि
हमारे इन दोनों
जिलों के लिए और
अन्य बाढ़ग्रस्त
जिलों के लिए व्यक्तिगत
आवास योजना, व्यक्तिगत
लाभ योजना प्रारंभ
की जिसके अंतर्गत
एक लाख 30 हजार परिवार
बाड़मेर के और
30 हजार परिवार जैसलमेर
के, उनको व्यक्तिगत
लाभ योजना के तहत
मकान निर्माण का
लेबर में 25 हजार
मकान के लिए साढ़े
बारह हजार लेबर
का उनको फायदा
मिल रहा है और शानदार
तरीके से काम चालू
हो गया है।
मैं आपके माध्यम
से सरकार को यह
सुझाव देना चाहता
हूं कि उन्होंने
जो आंशिक और गंभीर
क्षतिग्रस्त
मकान हैं उनकी
मरम्मत के लिए
साढ़े बारह हजार
रुपये का प्रावधान
किया है। साढ़े
बारह हजार रुपये
मानकर साढ़े छह
हजार का प्रावधान
किया गया है। वास्तव
में स्थिति यह
है कि बाढ़ के समय
जो मकान गंभीर
क्षतिग्रस्त
हुए या आंशिक क्षतिग्रस्त
हुए उन सबकी स्थिति
ऐसी है कि वे पूरी
तरह से क्षतिग्रस्त
हो चुके हैं, उनकी
रिपेयरिंग नहीं
हो सकती। इसलिए
उनको भी जैसा कि
पूर्ण क्षतिग्रस्त
के लिए प्रावधान
है इंदिरा आवास
के लिए साढ़े बारह
हजार रुपये देने
का वैसे ही साढ़े
बारह हजार रुपये
का फायदा आंशिक
क्षतिग्रस्त
और गंभीर क्षतिग्रस्त
के लिए दिया जाना
चाहिए ताकि वे
गरीब लोग जिनके
छत भी नहीं है, खुले
आसमान में सो रहे
हैं उनको आवास
का फायदा मिल सके।
उपाध्यक्ष
महोदय,
मैं आपके
माध्यम से हमारे
बिजली क्षेत्र
में जो शानदार
काम हुए हैं और
हमारे क्षेत्र
की कुछ विशेष बातें
हैं उनकी तरफ माननीय
ऊर्जा मंत्रीजी
का ध्यान आकर्षित
करना चाहता हूं।
दिसम्बर, 2003 में
जब हमने सत्ता
संभाली थी चारों
तरफ बिजली का संकट
था, लेकिन हमारे
मुख्यमंत्रीजी
ने बिजली के क्षेत्र
में जो शानदार
काम किये हैं, उनका
जो लक्ष्य है
कि 2008 तक बिजली के
क्षेत्र में राजस्थान
पूरी तरह से आत्मनिर्भर
बने वह केवल नारा
नहीं है, उस दिशा
में शानदार काम
चालू हुए हैं।
28 फरवरी, 2007 का दिन
मेरे विधान सभा
क्षेत्र के लिए
तथा राजस्थान
में लिग्नाइट
उत्पादन के हिसाब
से शानदार दिवस
रहा जब केन्द्रीय
बिजली राज्य मंत्रीजी
ने हमारे सरकार
के बिजली क्षेत्र
में शानदार किये
जाने वाले कामों
की भूरि-भूरि प्रशंसा
की। अभी थोड़ी
देर पहले रामगढ़
से आने वाले माननीय
सदस्य ने यह कहा
था कि बिजली के
क्षेत्र में जो
बाड़मेर में काम
चालू हुए उनका
कब तक उत्पादन
होगा, ये फालतू
की घोषणाएं हैं,
शिलान्यास कर
रहे हैं। शिलान्यास
करने का काम चाहे
पानी का है, बिजली
का है सड़क का है,
कांग्रेस ने किया
था। हम जो कहते
हैं करके बताते
हैं। स्पष्ट
रूप से घोषणा की
है हम गिरल लिग्नाइट
को जून, 2008 तक पूरा
करेंगे सेकण्ड
यूनिट का और जालिप्पा
कपूरडी का काम
है 250 मेगावाट दिसम्बर,
2008 तक, जालिप्पा
कपूरडी का 375 का
2009 तक और जालिप्पा
कपूरडी में जो
बचा हुआ 375 मेगावाट
है, कुल एक हजार
मेगावाट वो 2010 तक
पूरा करेंगे।
श्री उपाध्यक्ष: धन्यवाद,
श्री रामरतन बैरवा।
डा. जालम सिंह
रावलोत (शिव): ये
बिजली के क्षेत्र
में हमारे काम
हैं। मैं निवेदन
करना चाहता हूं
..(व्यवधान)..
श्री उपाध्यक्ष: बाकी मंत्री
महोदय बताएंगे।
श्री रामरतन बैरवा।
टाइम पूरा हो गया
है।
डा. जालम सिंह
रावलोत (शिव): एक
मिनट में मेरे
क्षेत्र की बातें
हैं। राजीव गांधी
विद्युतीकरण योजना
में केवल दो जिले
बाड़मेर और नागौर
ऐसे जिले हैं जिनको
राजीव गांधी विद्युतीकरण
योजना के तहत गरीब
लोगों तक बिजली
पहुंचानी चाहिए
ऐसा केन्द्र का
नारा रहा है। हमारे
बाड़मेर, नागौर
की फाइलें सैद्धान्तिक
स्वीकृति के लिए
दिल्ली में अटकी
पड़ी हुई हैं।
माननीय मुख्यमंत्रीजी
और बिजली मंत्रीजी
के प्रयत्न के
बावजूद भी केन्द्र
सरकार की नींद
खुल नहीं रही है।
मैं आपका आह्वान
करना चाहता हूं
कि हमारे यहां
बिजली के बारे
में राजीव गांधी
विद्युतीकरण योजना
का काम केन्द्र
सरकार स्वीकृत
नहीं करेगी तो
कांग्रेस के नेताओं
को बाड़मेर व जैसलमेर
में प्रदेश स्तर
के नेताओं और केन्द्रीय
नेताओं को घुसने
नहीं दिया जाएगा।
श्री उपाध्यक्ष: श्री रामरतन
बैरवा। माननीय
सदस्य।
डा. जालम सिंह
रावलोत (शिव): बिजली
के क्षेत्र में
मैं निवेदन करना
चाहता हूं मेरे
विधान सभा क्षेत्र
में ..(व्यवधान)..
श्री उपाध्यक्ष: माननीय सदस्य।
श्री रामरतन बैरवा।
अंकित नहीं होगा।
अपना स्थान ग्रहण
करें।
डा. जालम सिंह
रावलोत (शिव): 000
श्री उपाध्यक्ष: अंकित नहीं
हो रहा है। माननीय
सदस्य, स्थान
ग्रहण कर लीजिए।
आप बैठ जाइए, मैंने
नाम पुकार लिया
दूसरे सदस्य का।
डा. जालम सिंह
रावलोत (शिव): 000
श्री उपाध्यक्ष: श्री रामरतन
बैरवा। माननीय
सदस्य, समय का
ध्यान रखें।
श्री रामरतन
बैरवा (शाहपुरा):
मैं तीन मिनट में
ही खत्म कर दूंगा।
श्री उपाध्यक्ष: पाँच मिनट
के अंदर समाप्त
करना है। ..(व्यवधान)..
श्री रामरतन
बैरवा (शाहपुरा):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय,
हमारे तत्कालीन
राजाधिराज सर नाहरसिंह
जी ने दो बांधों
का निर्माण अकाल
के दौरान कराया
वे तो इस साल बारिश
में भर गये। स्वतंत्र
भारत में एक बाँध
बना खारी नदी पर,
मानसी नदी पर, वह
बाँध खाली रह गया।
वहां तो फसल नहीं
बोयी गई और जहां
पानी पर्याप्त
था दो बांधों के
नीचे वहां फसल
पर्याप्त नहीं
हुई। क्योंकि
अभी बारिश आई थी,
बारिश में जीरे
की संपूर्ण फसल
नष्ट हो गई जिसमें
7-8 पंचायतें हैं
उसमें 100 परसेंट
जीरे की फसल नष्ट
हो गई। जिसमें
कनेचन कलां, कनेचन
खुर्द, राज्यास,
देवरी, खामोर, बचकेड़ा,
प्रतापपुरा के
आसपास के इलाके
में 100 परसेंट जीरे
की फसल बर्बाद
हो गई वहां अकाल
की स्थिति है।
वहां सर्वे कराकर
उन काश्तकारों
को मदद दिलायी
जाए यह मेरा आपसे
निवेदन है, नहीं
तो वहां पयालन
करेंगे और इधर-उधर
रोजगार की तलाश
में फिरेंगे। मेरा
आपसे निवेदन है
कि सर्वे कराकर
उनको मुआवजा दिलाया
जाए और हमारे शाहपुरा
की धरती में फ्लोराइड
की मात्रा ज्यादा
है। हर गांव में
आदमी फ्लोराइडयुक्त
पानी पीने को मजबूर
है जिसकी वजह से
युवावस्था में
वे वृद्ध नजर आने
लगते हैं। ऐसे
लगभग 80 गांव हैं
जिसमें ज्यादा
फ्लोराइड की मात्रा
है। आदरणीय माथुर
साहब अच्छी तरह
से उन गांवों को
जानते हैं। मेरा
आपसे निवेदन है
कि वहां शुद्ध
पानी की व्यवस्था
की जाए। खारी नदी
के पास जितने भी
गांव हैं, अभी पेयजल
की विकट समस्या
का सामना वे लोग
कर रहे हैं। लगभग
30 गांवों में टैंकरों
से पानी पहुंचाने
की व्यवस्था
करें, यह मेरा आपसे
निवेदन है, जयहिन्द।
श्री उपाध्यक्ष: श्री रिछपालसिंह
मिर्धा।
श्री रिछपालसिंह
मिर्धा (डेगाना):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय,
आज सदन में
अकाल और बिजली
पर चर्चा हो रही
है। राजस्थान
और अकाल का रिश्ता
कई सालों से लगता
है पुराना हो गया
है। आजकल राजस्थान
में करीब पिछले
7-8 सालों से लगातार
अकाल की स्थिति
बनी हुई है।
उपाध्यक्ष
महोदय,
राजस्थान
में 22 जिलों में
अकाल है। विशेष
रूप से मैं जिस
जिले से आता हूं
उस जिले के संबंध
में और मैं जिस
क्षेत्र से आता
हूं उसके संबंध
में मेरी बात आपके
समक्ष रखूंगा।
नागौर जिले में
अकाल की इतनी भयंकर
स्थिति है कि पूरे
जिले में 1527 गांवों
में से 712 गांव 50 प्रतिशत
से 74 प्रतिशत के
खराबे के हैं और
125 गांव 76 प्रतिशत
से 100 प्रतिशत के
खराबे के हैं।
उपाध्यक्ष
महोदय,
अकाल तो
है जो है, लेकिन
इस साल जो कुओं
की सिंचित फसल
थी उस पर ओलावृष्टि
ने ऐसा कहर ढहाया
कि ऐसी बर्फ की
चीपें जो 80 साल, 85
साल की उम्र के
हो गये उन लोगों
ने कहा कि आज तक
ऐसी ओलावृष्टि
हमने कभी नहीं
देखी।
उपाध्यक्ष
महोदय,
अकाल में
अलग-अलग जिलों
में अलग-अलग राहत
कार्य उपयोगी होते
हैं। मैं मेरे
जिले से संबंधित,
मेरे विधान सभा
क्षेत्र से संबंधित
कुछ कार्यों के
लिए कुछ सुझाव
देना चाहूंगा।
हमारे क्षेत्र
में जो 80 से 82 गांव
अकाल में हैं उनमें
बड़े-बड़े गांवों
में जो बड़े तालाब
हैं उनकी खुदाई
का काम उपयोगी
है। ग्रेवल सड़क,
जो कच्ची सड़कें
हैं उनका काम अगर
सरकार ले तो वे
उपयोगी हैं। आज
हर हाथ को काम मिले।
उपाध्यक्ष महोदय, आज हर
गांव में लोग मजदूरी
चाहते हैं। कोई
ऐसा गांव नहीं
है जहां मजदूर
न मिले। सभी लोग
यह चाहते हैं।
गांव में अकाल
है और अकाल राहत
के तहत कार्य खोले
जाएं और लोगों
को मजदूरी मिले।
पक्के कार्यों
पर ज्यादा मजदूरी
मिलने की गुंजाइश
नहीं है। कच्चे
कार्य जितने भी
राज्य सरकार अकाल
राहत के तहत लेगी
उन पर लोगों को
मजदूरी मिलेगी
और लोग पलायन करने
से बचेंगे।
पश्चिमी राजस्थान
के लिए मैं कहना
चाहता हूं लोग
इतने मजबूत हैं,
पानी गहरा है, नहीं
तो अन्य प्रदेशों
में जो काश्तकारों
की हालत है और किसान
आज आत्महत्या
करने को मजबूर
हैं, पर राजस्थान
का किसान इतना
मजबूत है कि लगातार
अकाल की स्थिति
होते हुए, खेतों
में पैदावार नहीं
होते हुए आज इस
स्थिति को झेल
रहे हैं और गांवों
में लोगों के पास
सिवाय खेती और
पशुपालन के आमदनी
का दूसरा जरिया
नहीं है। लगातार
7-8 वर्ष की स्थिति
ने काश्तकारों
की कमर तोड़कर
रख दी है। मैं हमारे
जिले की जो श्रमिक
सीमा है उसकी तरफ
अकाल राहत मंत्रीजी
का ध्यान आकर्षित
करना चाहता हूं
कि नागौर जिला
बड़ा जिला है उसके
लिए एक लाख श्रमिक
सीमा की जाए तब
लोगों को मजदूरी
मिलेगी। अकाल राहत
के कार्य जनवरी
के अंदर आपने खोले।
पिछले वर्ष अकाल
की स्थिति थी, आपने
कब कार्य खोले?
मोहन/अरूण/अशोधित
प्रति प्रकाशनार्थ
नहीं/03042007/1500/2j
उपाध्यक्ष महोदय, यह जनवरी में कार्य खोले, बहुत इसके लेट कार्य खोले गये, अकाल राहत के इसके लिए मैं उनसे निवेदन करना चाहता हूं कि अब श्रमिक सीमा बढ़ाकर लोगों को तुरन्त राहत दी जाए। उपाध्यक्ष महोदय, कुछ बातें ऐसी हैं जो मैं निवेदन करना चाहता हूं, हमारे जिले में पशुधन जो कि खतम होने के कगार पर हैं, चारा डिपो कोई खोले नहीं इसलिए मैं इस संबंध में कहना चाहता हूं कि जो गौशालाएं हैं उनको जो अनुदान दिया जाता है, एक ऐसा आदेश मिला है कि 2005 के बाद जो गौशालाएं पंजीकृत हैं उनको अनुदान नहीं दिया जाएगा तो उपाध्यक्ष महोदय, यह गौशालाओं के लिए यह जो आदेश आया है, यह उनके साथ में अन्याय होगा। हमारे जिले में जो पशुधन है उसको बचाना है तो मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि जो गौशालाएं पंजीकृत हैं उनको आप अनुदान जारी रखें और वह तो अन्दर रहती हैं, चाहे जमाना हो, काल हो, उन गौशालाओं पर क्या असर आता है ? इसलिए मैं निवेदन करना चाहता हूं उनका अनुदान वापस चालू किया जाए। उपाध्यक्ष महोदय, हमारे जिले में विशेष तौर पर पानी बहुत अब ऐसा पानी हो गया कि जानवर को पीने से उसको बीमार होने लग गये। हमारे जिले में पशुधन जो भेड़, गाय, बकरी और ऊँट यह पशुधन है उसके लिए भी अब यह पानी हानिकारक हो गया, इतनी मात्रा में फ्लोराइड हो गया, मैं आपके माध्यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि नागौर जिले में इन्दिरा गांधी नहर का पानी जल्दी पहुंच जाए तो वहां के काश्तकारों को कुछ राहत मिल सकती है।
श्री उपाध्यक्ष: अमरा राम जी की मेहरबानी होनी चाहिए भाई।
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): अमरा राम जी की पूरी है, साहब, पूछ लो आप।
श्री उपाध्यक्ष: आने नहीं दे रहे हैं। ...(व्यवधान)...
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): अमरा राम जी की है और सभी माननीय सदस्यों की है इस मामले में तो।
श्री उपाध्यक्ष: आने नहीं दे रहे हैं।
श्री अमराराम (धोद): पीने के लिए कौन मना कर रहा है प्रथम चरण में ?
श्री अशोक नागपाल (सूरतगढ़): पीने के लिए भी आप नहीं जाने दोगे ...(व्यवधान)... फिर प्रथम चरण में जाओगे फिर आप।
श्री अमराराम (धोद): यह आपने प्रचार करके कह दिया। ...(व्यवधान)...
श्री अशोक नागपाल (सूरतगढ़): फिर घड़साना, रावला में भी आप यही करोगे जाकर।
श्री अमराराम (धोद): इश्तिहार छपा कर देख लिया, कोई इन बातों में नहीं आने वाला है, आप लोगों को गुमराह करना चाहते हैं, पीने के पानी के लिए कोई मना नहीं करता।
श्री अशोक नागपाल (सूरतगढ़): माननीय सदस्य, पिछले 6 वर्षों का रिकार्ड है। घड़साना, रावला क्षेत्र में फसलों का, 6 वर्ष का रिकार्ड है, आप दिखवा लीजिए। ...(व्यवधान)...
श्री अमराराम (धोद): आपका रिकार्ड तो जब्त कर लेंगे वहां।
श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): इन्दिरा गांधी नहर का पानी नागौर में जरूर आएगा, सितम्बर तक आएगा, उसको कोई नहीं रोक पाएगा, सबसे पहले नागौर जिले को मिलेगा।
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): आप तो दो काम करा दो, उपाध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य परबतसर से आने वाले कह रह थे, अमरा राम जी कह रहे हैं, पानी आ जाएगा तो बहुत अच्छी बात है।
श्री अमराराम (धोद): तीन साल में तो एक बून्द नहीं आया। ...(व्यवधान)...
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): कब का तो अब यह बताएंगे, साहब, कैसे आएगा।...(व्यवधान)... नहीं, नहीं। मंत्री जी मेरे को कुछ आश्वासन दे रहे हैं, मैं आपके माध्यम से उनसे यह निवेदन करना चाहता हूं, अमरा राम जी काश्तकारों का आदमी है, यह कभी पानी के लिए विरोध नहीं करेंगे।
श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): चलो, यह तो मान लिया अमरा राम जी सही हैं। ...(व्यवधान)... एक मंत्री नागौर के उधर हैं और एक मंत्री इधर हैं, दोनों ने आश्वासन और दिया है, सदस्य महोदय, दोनों ने आश्वासन दिया है, आपके पास में बैठे हैं, यह बैठे हैं कि इसी साल नागौर में पानी आएगा।
श्री गजेन्द्र सिंह (राज्य मंत्री, ऊर्जा): सितम्बर, 2008 तक प्रवेश कर जाएगा।
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): बहुत आभारी रहेंगे आपके और आपकी फोटो खिंचवा कर हर घर में लगवा देंगे कि साहब, यह देखें आप।
श्री गजेन्द्र सिंह (राज्य मंत्री, ऊर्जा): खिंचवाना तो अभी से शुरू कर दो आप। ...(व्यवधान)...
श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): अभी से आप पानी का प्रवेश तो दिलवाओ। ...(व्यवधान)...
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): यह मैं आपसे निवेदन कर सकता हूं कि यह काम जल्दी हो जाए तो आपका केलेण्डर मैं छपवा दूंगा और हर घर में लगवा दूंगा। ...(व्यवधान)...
श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): बहुत अच्छी बात है। ...(व्यवधान)...
श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): चुनाव के बाद में पानी पहुंचने की बात हो रही है या पहले की ?
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): चुनाव के बाद नहीं, पहले की बात हो रही है, बाद की बात नहीं है उपाध्यक्ष महोदय।
श्री घनश्याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): फोटो तो आप उतरा ही दोगे न ?
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): बिलकुल उतरा देंगे।
श्री घनश्याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): ठीक है।
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): पर आपका आशीर्वाद चाहिएगा उसमें।
श्री अमराराम (धोद): पानी आ जाएगा तो वैसे फोटो उतार देंगे और पानी नहीं आएगा तो वैसे फोटो उतार देंगे।
श्री धर्मेन्द्र कुमार मोची (टिब्बी): वह तो अमरा राम जी माहिर हैं फोटो उतरवाने में तो। अमरा राम जी माहिर हैं इस चीज में तो। ...(व्यवधान)... अब आप इनको कोप भंजन बनवाओगे इन सब को, मुझे पता है। ...(व्यवधान)...
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): मैं तो जो जिले की स्थिति है, वह बयान कर रहा हूं। मैं कोई दुर्भावनावश नहीं कर रहा हूं और आ जाएगा जो मंत्री जी फरमा रहे हैं, यह काम हो जाए तो नागौर जिले की उन्नति होगी, नागौर जिले के लोगों को जो पीने के पानी से बीमारियां हो रही हैं, आज दाँत पीले हो रहे हैं, हड्डियां दुख रही हैं और जो 6 माह में आदमी के यहां फ्लोराइड जमने लग गया है, उपाध्यक्ष महोदय, पीछे रीढ़ की हड्डी में उसका इलाज अब हरेक आदमी के बस की बात नहीं है, यह पानी की बीमारियां बता रहा हूं मैं आपको, जो कर रहा हूं निवेदन तो इनसे निजात मिलेगी।
श्री उपाध्यक्ष: नागौर वालों की नजर लग गई, नागौर वालों को।
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): नागौर वाले तो नजर लगाते हैं, साहब, उनको क्या लगे, नागौर तो इतना मजबूत जिला है, नजर लगाता है, उनके नहीं लगती है, वह तो उतारता है नजर।
डा. सुरेश चौधरी (भादरा): नजर लगे हुओं को महावीर जी थुथकारा डालते हैं, जिनके नजर लग जाती है उनको मुख्य सचेतक महोदय थुथकारा डाल कर ठीक कर देते हैं।
श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): माननीय उपाध्यक्ष महोदय को नागौर होकर उधर गुजरना पड़ता है, पहले नागौर आता है। ...(व्यवधान)...
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): नागौर वाले तो कहते हैं कि कोई भी बीमारी हो जाए, कोई आफरा हो जाए तो उसकी दवाई हमारे जिले में है, आफरा उतारने की। ...(व्यवधान)...
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): नहीं, महावीर जी को नहीं।
उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से यह गंभीर मुद्दा है हमारे जिले का इसलिए निवेदन कर रहा हूं, अब हमारे जिले में जो खेती है उस पर जो खर्चा आता है, बात अकाल राहत की है, उससे ही संबंधित है उस पर, उपाध्यक्ष महोदय, नहरी इलाके से आप तुलना करें, नहरी इलाकों में जो खेती होती है उसमें खर्चा आता है आधा और हमारे उधर आता है चार गुना खर्चा नहरी इलाके से ज्यादा आता है तो मैं इस संबंध में माननीय मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहूंगा कि जितने भी आपने अकाल राहत के तहत यह श्रमिक सीमा की है वह पर्याप्त नहीं है। ओलावृष्टि में एक, उपाध्यक्ष महोदय, बिजली के संबंध में मैं दो तीन बातें ही सुझाव देना चाहूंगा कि जो दो हैक्टेयर तक का बिल माफ किया है, मैं उपाध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि इसका हमारे जिले वाले काश्तकारों को कोई लाभ नहीं मिलेगा। ...(व्यवधान)... नहीं, मंत्री जी नहीं बुलवा रहे हैं, मंत्री जी कैसे बुलवाएंगे। ...(व्यवधान)... और मंत्री जी कहें तो मैं बोल दूं, आपको तकलीफ तो नहीं है ? ...(व्यवधान).. नहीं, आपको आफरा हो गया।
श्री उपाध्यक्ष: रिलीफ तो वही देंगे भाई।
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): आफरा हो गया तो है दवाई मेरे पास। ...(व्यवधान)... हेमराज जी, आप भी किसान हो और मैं किसान की बात कह रहा हूं।
श्री उपाध्यक्ष: वह रिलीफ देने वाले हैं।
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): मैं यह निवेदन कर रहा था, उपाध्यक्ष महोदय, दो हैक्टेयर का किसान नागौर में नहीं है और आपने यह घोषणा की है कि दो हैक्टेयर वाले किसान का हम बिजली का बिल माफ करेंगे इसलिए मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि दो हैक्टेयर वाले किसान नहीं है। इनको लाभ नहीं मिलेगा, आप इसमें संशोधन करके जो दो हैक्टेयर से ज्यादा के काश्तकार हैं, जिनके ओलावृष्टि हुई है और जिनकी फसलों का नुकसान हुआ है, उनके बिल भी माफ करें, इसकी घोषणा आप करेंगे तो राजस्थान के किसान आपके आभारी रहेंगे।
श्री उपाध्यक्ष: पश्चिम राजस्थान में दो हैक्टेयर वाले बहुत कम मिलेंगे।
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): बहुत कम मिलेंगे, यही निवेदन मैं कर रहा हूं, साहब, पश्चिम राजस्थान में ही हैं अपन। दूसरी बात मैं आपको मेरे क्षेत्र की बिजली से संबंधित एक दो बातें हैं वह निवेदन करना चाहूंगा सांजू में एक जीएसएस एक 32 का वहां हमारे बना हुआ है, उस पर तीन ब्रेकर लगाने की आवश्यकता है और वह आवश्यकता इसलिए है कि वहां बिजली की अव्यवस्था रहती है। अगर आप तीन ब्रेकर वहां लगवा देंगे तो यह बिजली वहां अच्छी तरह मिलेगी और अच्छे वोल्टेज किसानों को मिलेंगे। एक अनियमित चेटिंग जिसके बारे में मैं निवेदन करना चाहता हूं कि हर कोई, आज वह ऐसा कौन सा मीटर हैं जो लेकर चला जाए, 10 हार्स पावर की मोटर अन्दर लगी हुई है और वह ऊपर उसको देख कर बताते हैं कि साहब, इसमें 15 हार्सपावर की मोटर है। ऐसे कई मामले हैं जिनसे काश्तकारों को भारी परेशानी हो रही है और उपाध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से यह भी निवेदन करना चाहता हूं कि जिन काश्तकारों के बिल बकाया हों, उनको आप नोटिस देकर उनके ट्रांसफार्मर उतारें तो उनको तकलीफ नहीं होगी, अन्यथा उनकी खड़ी फसल में उनके ट्रांसफार्मर बिना नोटिस के उतार कर ले जाते हैं तो उनकी फसल बरबाद हो जाती है, आगे ही किसान कंगाल है तो आप मेहरबानी करके यह दो तीन बातें जो बिजली के संबंध में मैंने कही, काश्तकारों में ज्यादा चोरी नहीं है, उपाध्यक्ष महोदय, अभी कह रहे थे, काश्तकार एक कनेक्शन से दो ट्यूबवैल चला रहा है, कहां चला रहा है ? काश्तकार तो तीन चार साल बाद में यह स्थिति बन सकती है, अगर बरसात नहीं हुई तो काश्तकार खुद आपके पास आएगा, उपाध्यक्ष महोदय, यह मैं कहना चाहता हूं कि हमारे कनेक्शन काटो आप, क्यों काटो, क्योंकि पानी ही नहीं रहेगा, अगर ऐसी ही स्थिति रही बरसात की तो पानी नहीं रहेगा काश्तकारों के कुए में और वह अपने आप आएगा आपके पास, यह बिजली के कनेक्शन कटाने के लिए तो उपाध्यक्ष महोदय, अब बकाया की बात कोई काश्तकारों के करोड़ों रुपये, अरबों रुपये बताए, मैं इस बात से सहमत नहीं हूं। मैं आपके माध्यम से यह निवेदन करना चाहता हूं जितने भी बिजली की बड़ी इण्डस्ट्रीज, बड़े कारखाने उनमें लाखों, करोड़ों, अरबों रुपये बकाया हैं, पर आज सदन में चर्चा हो और किसान चोरी करता हुए दिखे, किसान चोर नहीं है इसलिए आपसे निवेदन है कि किसानों के अगर बिल बकाया हैं तो उनसे आप किश्तों में, किसी भी जिस तरीके से चार किश्तें, पांच किश्तें करके आप राशि ले सकते हैं। उपाध्यक्ष महोदय, इसलिए मैं आज मंत्री जी अकाल से संबंधित रहते हैं, उनकी तबीयत ठीक नहीं है, मैंने संक्षेप में मेरी बात रखी, आपने समय दिया उसके लिए मैं आपका आभारी हूं और सदन के सभी माननीय सदस्यों को जिन्होंने बड़ी शांतिपूर्वक मेरे को टोटा-टाकी नहीं की और विशेष रूप से महावीर जी साहब को और आपका आभार व्यक्त करता हूं। आपने समय दिया उसके लिए धन्यवाद।
श्री उपाध्यक्ष: कोई आपने कोई ऐसी उत्तेजना वाली बात ही नहीं कही।
श्री अमरा राम धोद ।
सुरेन्द्र/अरुण/03042007/1510/2k/1
श्री अमराराम (धोद): माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आज बिजली और अकाल की समस्या पर जो चर्चा हो रही है। बिजली प्रति व्यक्ति....
श्री उपाध्यक्ष: ये बीच के हैं।
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): ये तो पार्टी के नेता हैं। उपाध्यक्ष महोदय, हम जो बीच में बैठे हैं उनका मतलब निर्दलीय है, मैं और मेरा दल।
श्री उपाध्यक्ष: ये बीच में हैं, ये दोनों पक्षों को नहीं बख्शते।
श्री अमराराम (धोद): माननीय उपाध्यक्ष महोदय, बिजली का प्रति व्यक्ति कंजम्प्शन इस बात को दिखाता है कि बिजली का कितना कंजम्प्शन प्रति व्यक्ति है चाहे वह कृषि का विकास हो, चाहे वह उद्योग का विकास हो और चाहे वह जनरल विकास हो। हमारे राजस्थान का जो प्रति व्यक्ति बिजली का कंजम्प्शन है वह देश के एवरेज से बहुत नीचे है और हमारा नम्बर देश में नीचे से आता है। राजस्थान में सब सम्भावनाएं होने के बाद भी मैं समझता हूं कि राजस्थान का यह दुर्भाग्य कहें कि राजस्थान में लगातार बिजली की मांग और पूर्ति में डिफरेंस बढ़ता जा रहा है और उसका सबसे बड़ा खामियाजा राजस्थान के किसान और गांव के गरीब को भोगना पड़ रहा है। राजस्थान में लिग्नाइट भरपूर मात्रा में है, राजस्थान में हवा से बिजली पैदा की जा सकती है, सूर्य की रोशनी से बिजली पैदा की जा सकती है। लेकिन राजस्थान की आजादी के बाद के 58 साल के सफर में हमारे राजस्थान की किसी भी सरकार ने विकास का जो आधार स्तम्भ है इस ओर हमारे संसाधनों से किस तरह से बिजली पैदा की जा सकती है, कोयले से लेकर हवा से, सूर्य की रोशनी से, गैस और पैट्रोलियम पदार्थों तक राजस्थान की सम्पदा होने के बाद भी राजस्थान ने वो योजनाएं नहीं बनाईं जो राजस्थान के संसाधनों से बिजली पैदा करके राजस्थान को बिजली में आत्मनिर्भर बनाया जा सके। इसका सबसे बड़ा खामियाजा राजस्थान के किसान को भोगना पड़ा है।
राजस्थान में जितना सिंचित क्षेत्र है उसका 70 प्रतिशत आज भी कुओं से सिंचित होता है और उसमें से अधिकतर बिजली से है। उपाध्यक्ष महोदय, बिजली की मांग और सप्लाई में जो गैप आया है उसका सबसे बड़ा खामियाजा राजस्थान के किसान और गांव के गरीब को भोगना पड़ा है। इस सरकार ने घोषणा पत्र में परिवर्तन यात्रा के माध्यम से बड़े-बड़े वायदे किये कि राजस्थान में यदि भारतीय जनता पार्टी को वसुंधरा जी के नेतृत्व में राजस्थान के किसान और आम जनता ने विश्वास दिया और सरकार में बिठाया तो राजस्थान के किसान को 8 घंटे बिजली मिलेगी, राजस्थान के गांव को 24 घंटे बिजली मिलेगी। मैं आपके माध्यम से पूछना चाहता हूं, मंत्री जी जवाब दे दें कि सवा तीन साल में एक भी दिन किसान को 8 घंटे बिजली दी हो। गांव को 24 घंटे बिजली देने की बात तो छोड़ो, राजस्थान के शहरों और राजधानी में बिजली की कटौती की स्थिति पैदा हो गई और राजस्थान की सरकार ने किसान और गांव के गरीब के साथ विश्वासघात करने का काम किया है।
सरकार ने घोषणा की थी कि 1,86,000 किसान जो पिछले 16 साल से पैण्डिंग हैं उन सब को हम 31 मार्च, 2007 तक कनेक्शन दे देंगे। इस राजस्थान में किसान जो फसल पैदा करना चाहता है उसको 16 साल तक इंतजार करना पड़ता है और राजस्थान में कोई उद्योगपति अगर कारखाना लगाने की बात करता है तो मांगने से पहले कनेक्शन मिलेगा। राजस्थान के किसान को 24 घंटे से घटकर 4 घंटे बिजली दी है, 8 घंटे सवा तीन साल में एक दिन भी दी हो तो सरकार बता दे। इस सरकार के भरोसे तो मैं समझता हूं कि पिछले 4 साल में इस साल को छोड़कर के एक लाख इन्होंने कनेक्शन बढ़ादिये, बाकी कनेक्शन भी बढ़े होंगे, बिजली का कंजम्प्शन बढ़ा है लेकिन उत्पादन और खरीद में इस साल में जितना आपने दिया है, पिछले तीन सालों से कम है। फिर भी सरकार कह रही है कि बहुत बढि़या व्यवस्था है। मैं समझता हूं कि यह बरसात हो गई जिससे यह फसल हो गई वरना इस सरकार की बिजली के भरोसे तो कोई फसल नहीं होती। इसलिए जो बिजली सप्लाई में जहां 24 घंटे से घटकर किसान की 4 घंटे पर आ गई। गांव की सुबह और शाम की बिजली की घोषणा कि 4 घंटे शाम को जाएगी, दो घंटे सुबह जाएगी लेकिन मैं नहीं समझता हूं कि वह कहां जाती है। अगर मंत्री जी के यहां जाती है तो मैं कह नहीं सकता, राजस्थान के गांवों में बिजली नहीं जाती। उसकी आवश्यकता के अनुसार 24 घंटे में उसको एक घंटे बिजली नहीं मिले। 24 घंटे में किसान को घटते-घटते 4 घंटे और तीन घंटे में आ जाए और ऊपर से यह और एलान किया जा रहा है कि किसान को बिजली देने के लिए शहर की बिजली काटी गई है। मैं समझता हूं कि यह सबसे बड़ा दुर्भाग्य किसान के साथ न केवल कनेक्शन में हो रहा है, अभी सरकार घोषणा कर रही है कि राजस्थान की सरकार ने बिजली की रेट नहीं बढ़ाई। मंत्री जी, मुख्य मंत्री जी ने भी बजट में कहा है, इस सरकार ने 85 रुपये फ्लैट रेट पर 55 रुपये बढ़ाये हैं। राजस्थान की बिजली की रेट बढ़ाने में इतिहास में राजस्थान की सरकार ने सबसे हाइएस्ट बिजली की रेट बढ़ाई है। यह तो मैं धन्यवाद दूंगा अखिल भारतीय किसान सभा और उन किसानों को जो इस सरकार ने वादाखिलाफी करके 50 प्रतिशत से ज्यादा रेट बढ़ाई थी, 8 दिन तक बैठकर के सरकार को इस बात के लिए मजबूर किया कि इस बढ़ाई हुई रेट को सरकार को वापस लेना पड़ा। राजस्थान में चाहे कोई भी सरकार आई हो, राजस्थान के किसान की मजबूरी का फायदा उठाया। कभी नर्सरी के नाम से, कभी स्पेशल के नाम से, कभी दो साल तक डबल बिल लगेगा, कभी नम्बर आने तक 16 साल तक लगेगा। इस सरकार ने तो इसके अलावा और भी कमाल किया कि अब कोई फार्म हाउस में कनेक्शन लेगा उसको जिंदगी भर जब तक कनेक्शन रखेगा, उसको तीन गुना रेट देना पड़ेगा। यह किसान की मजबूरी का फायदा राजस्थान में जो भी सरकार आई उसने उठाया। जबकि अकाल का सबसे बड़ा समाधान मैं समझता हूं कि अपनी मेहनत का पैसा लगाकर के ट्यूबवैल लगाकर के पूरा पैसा खर्च करके अकाल का मुकाबला करने के लिए सबसे बढि़या कोई सर्वोत्तम काम था जहां बढि़या पानी था उसका काम किया। उपाध्यक्ष महोदय, इसके बाद भी उनको सामान्य करने के लिए दो साल में कर दिया लेकिन जो छोटी म्युनिसिपैलिटी में एक वो किसान जिनको सप्लाई गांव की मिलती है वो ही चार घंटे की मिलती है लेकिन उनका सामान्य में नहीं करेंगे। मैं समझता हूं कि यह तो उनके साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा। राजस्थान में गांवों की सप्लाई मिलने वाले, जो ग्रामीण क्षेत्र हैं उनको दो साल के बाद में चाहे वो स्पेशल में या किसी भी कैटेगिरी में है, उनको दो साल के बाद में पूर्ण बिल देने के बाद में सामान्य में करते हैं लेकिन म्युनिसिपैलिटी एरिया में होने से तो म्युनिसिपैलिटी एरिया में है, रींगस है, चौमूं है या और कोई भी छोटी म्युनिसिपैलिटी हो लेकिन उनको सप्लाई तो मिलती है ग्रामीण फीडर से और वह 4 घंटे की सप्लाई मिलती है लेकिन उनका स्पेशल और फार्म हाउस से सामान्य में नहीं होगा। मैं समझता हूं कि यह सबसे बड़ा विश्वासघात है। जहां सरकार घोषणा करती है कि जो पानी का मैक्सिमम यूटिलाइजेशन करेगा, जो फव्वारा सिंचाई पद्धति, बूंद-बूंद सिंचाई से पानी का अधिकतम उपयोग करेगा, सरकार ने घोषणा की कि उसको 10 पैसा प्रति यूनिट के हिसाब से छूट देंगे। उपाध्यक्ष महोदय, वो छूट लागू नहीं हुई उससे पहले 8.12.2006 को वापस विद्ड्रा कर ली। यह सरकार की जो फव्वारे से, ड्रिप इर्रिगेशन से 8.12.2006 को 10 पैसा प्रति यूनिट में जो फ्लैट रेट में है उसके लिए नहीं किया लेकिन उसको भी मैं समझता हूं कि वापस ले लिया। यह केवल किसानों को बेवकूफ बनाने की, उनके साथ खिलवाड़, विश्वासघात करने का काम कर रही है।
अभी मुख्य मंत्री जी ने बजट में घोषणा की कि जिस फीडर में टी एण्ड डी लोसेज 15 प्रतिशत से कम होंगे, हम उनको 40 पैसा प्रति यूनिट के हिसाब से छूट देंगे। मैं समझता हूं कि राजस्थान में एक भी ऐसा ग्रामीण फीडर नहीं है। ग्रामीण फीडर तो बहुत लम्बे-लम्बे हैं, उनकी बात तो छोडि़ये, शहर में भी एक भी फीडर मंत्री जी अपना उत्तर दें तब बता दें कि जिसका टी एण्ड डी लोसेज 15 प्रतिशत से कम हो। इससे ज्यादा थोथी घोषणाएं और क्या हो सकती हैं। जो भी किसान के लिए घोषणाएं कीजाएं उनको पूरा नहीं किया जाए। यह इस सरकार ने रिकार्ड बनाया है। पिछले डेढ़ साल में, किसी भी तरह का राजस्थान के इतिहास में कभी भी कनेक्शन करने में रोक नहीं लगाई, शिड्यूल्ड कास्ट हो, शिड्यूल्ड ट्राइब हो, शहीद के परिजन हों, इस सरकार ने एक साल तक किसी को कनेक्शन नहीं दिया और सबसे बड़ी अफसोसजनक बात तो यह है कि सरकार ने घोषणा की कि 2007 तक जो इंतजार नहीं कर सकता वो पहले आये और पहले पाये, स्पेशल में 5200 रुपये जमा कराये। 2004 में 40 हजार किसानों ने सरकार पर विश्वास करके 5 लाख रुपये लगाकार के ट्यूबवैल बनाया, सरकार ने घोषणा की कि पहले आओ, पहले पाओ में 5200 रुपये देंगे उनको 120 दिन में कनेक्शन मिल जाएगा। लेकिन 40 हजार किसान आज तक इस सरकार के विश्वास पर जिन्होंने लाखों रुपया खर्च किया, ट्यूबवैल बनाया कि इनको 120 दिन में कनेक्शन मिलेगा लेकिन 2004 से 2007 हो गया, आज तक कनेक्शन नहीं मिला। उत्तर मिलेगा कि बहुत ज्यादा एप्लीकेशन आ गई। आज हमारे पास जितना सामान था उतनी ही एप्लीकेशन लेते तो बात समझ में आती। जितनी आपके पास बिजली थी, जितनों को आप कनेक्शन दे सकते थे उसके बाद में आप एप्लीकेशन लेना बंद कर देते लेकिन 40 हजार किसान जिन्होंने 8 से 10 लाख रुपये खर्च कर दिये इस सरकार की घोषणा के विश्वास के आधार पर कि 120 दिन के बाद में उनको कनेक्शन मिल जाएगा पर आज 2007 तक में नहीं मिलता है।
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, एक सबसे बड़ा हथियार जो सरकार ने उन बिजली के अधिकारियों को लूटने के लिए दिया है वह वी सी आर के नाम से दिया है। इनके बिजली के अधिकारी जाते हैं और कहते हैं कि 80 हजार का वी सी आर होगा, 40 हजार रुपये दे दो। मैं मंत्री महोदय से कहना चाहता हूं कि किसी भी ऐसे कनेक्शन, जे ईएन और ए ईएन के एरिया में अगर डायरेक्ट चोरी करते हुए पाये गये तो आपने एक भी बिजली के अधिकारी जो मिलकर के चोरी करवाते हैं उन अधिकारियों पर कोई भी एक्शन नहीं होते। उनको एक हथियार दे दिया। जिसने कनेक्शन ले रखा है, 25 हॉर्स पावर का कनेक्शन ले रखा है.....
Lpm/akt/1520/2l/3.4.20079
(1)
मैं उदाहरण
सहित बता सकता
हूं जो 25 एच.पी. का
पाँच हजार या छह
हजार रुपए पैसा
जमा कराता है और
इनके वीसीआर भरते
हैं 90 हजार रुपए
की, माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, आप जानते
हैं जिस किसान
का अनाज और चारा
पूरा बेचेगा, किसान
का तो सालभर का
90 हजार का नहीं होता
है, वह बिल भी देना,
90 हजार भी, केवल इनको
लूटने के लिए इनके
भ्रष्ट अधिकारियों
को लूटने का एक
अधिकार है तो मैं
समझता हूं कि अगर
सरकार किसान की
मदद करना चाहती
है तो जिसने भी
कनेक्शन ले रखा
है अगर लोड ज्यादा
पाया जाता है तो
उससे ज्यादा का
ले लिया जाए अगर
मीटर जल गया आज
वो कुआँ बंद नहीं
रख सकता, मीटर एक
साल तक ये नहीं
बदलते तो आप यह
समझिए कि मीटर
जलने के बाद एक
साल तक वो कुआँ
बंद रखेगा, आप मीटर
नहीं हो, प्लैट
रेट से लीजिए, अगर
मीटर जल गया, अगर
केबल जल गई तो आप
फ्लैट रेट से लीजिए,
आप डेढा लीजिए
लेकिन एक किसान
से 90 हजार की वीसीआर
के नाम से इनके
भ्रष्ट अधिकारी
जिस तरह से लूटने
में लगे हुए हैं
मैं समझता हूं
कि सरकार अगर किसान
की मदद करना चाहती
है तो जिस भी किसान
ने कनेक्शन ले
रखा है उसके नाम
से वीसीआर, अब आप
दुकानदार के लिए
तो कह रहे हैं इंस्पेक्टर
राज राजस्थान
में खत्म हो गया,
कोई भी इंस्पेक्टर
राजस्थान के व्यापारी
के प्रतिष्ठान
पर चैक करने के
लिए नहीं जाएगा
लेकिन यही सरकार
आदेश देती है कि
राजस्थान के किसान
की चैंकिग करने
के लिए जाएगा और
एक-एक किसान के
एक लाख से ज्यादा
वीसीआर जिसने कनेक्शन
ले रखा है 12 महीने
से बिल दे रहा है
उसको एक-एक लाख
का वीसीआर के नाम
से लूटने का और
अधिकार दे दिया
कि वो लूट के जाकर
के कहेगा
60 हजार का वीसीआर
है, आप 30 हजार दे दो
तो आपका वीसीआर
नहीं है। आप तो
उत्तर देकर बता
दे एक भी अधिकारी
ऐसा जिसके एरिया
में डायरेक्ट
जिसमें कोई कनेक्शन
नहीं है अगर दस
से ज्यादा कनेक्शन
हो गये तो उस एईएन,
या जेईएन को आपने
सस्पेंड किया
तो बता दे जो चोरी
को प्रोत्साहन
करता है, मिलकर
के चलवाता है, ऐसे
मैं कई उदाहरण
दे सकता हूं लेकिन
वो तो इनके शार्गिद
है। भोपालगढ़ में
इनको जब पैसा नहीं
दिया, एक पैसा बकाया
नहीं था मैंने
यहां सदन में रखा,
20 दिन तक ट्रासंफारर्मर
नहीं दिया आपने,
फिर मंत्री जी
ने शायद इन्टरफियर
किया, 20 दिन के बाद
जाकर के ट्रांसफारर्मर
लगाकर के आए। एक
जो सुपर ट्रांसफारर्मर
के नाम से जो लूट
हो रही है उपाध्यक्ष
महोदय, जिस तरह
से कंपनियों का
निश्चित रूप से
फीडर इनोवेशन करें,
इसमें किसी को
एतराज नहीं है
लेकिन जिस सुपर
ट्रांसफारर्मर
के नाम से केवल
मीटर ट्रांसफारर्मर
के अंदर लगाकर
के जो नहीं चल रहा
है, चार-चार दफा
चार दिन में वापस
आ रहा है उस तरह
से जो लूट हो रही
है मैं समझता हूं
कि इसको मिटाई
जानी चाहिए, एक
जो कनेक्शन शिफ्टिंग
का मामला है अब
किसी का कनेक्शन
है, वो कहां लेकर
के जाना चाहता
है, दो साल के पहले
जो जमीन होनी चाहिए
वो वह अपना कनेक्शन
है, कहां पानी समाप्त
हो गया? कहां पानी
वापस हो गया? खेत
में कहां हो गया?
खारा पानी है, किसी
से मीठा लेना चाहता
वह अपना एक का दो
तो नहीं करेगा,
एक कनेक्शन से
दो कुएं चलाने
की बात है, पैसे
2600 रुपए पर एच पी लेते
हैं.....
श्री
टीकम चन्द कान्त
(सिवाना): अमराराम
जी वो अगर बेचते
है ब्लैक में
तो....
श्री
अमराराम (धोद): नहीं,
इसमें बेचने की
कहां बात है?
श्री
टीकम चन्द कान्त
(सिवाना): ब्लैक
में बेच दे कि तु
ले ले मेरे यहां
पानी तो है नहीं,
मुझे लाख दो लाख
रुपए दे दे मैं
तेरे यहां जमीन
का एक टुकड़ा लेकर
के बेच देता हूं
तो?
श्री
अमराराम (धोद): उपाध्यक्ष
महोदय, बेच भी दे
तो, अब शहर में दुकान
है कोई बेच देता
है तो क्या आप
रोक दोगे? किसी
ने किराये पर दुकान
ले रखी है, वो भी
अगर मालिकाना हक
किसी को बेचता
है तो मालिक केवल
25 प्रतिशत लेता
है जब दुकान बेच
सकता है, किराये
की दुकान बेच सकता
है तो कनेक्शन
क्यों नहीं बेच
सकता? जब कनेक्शन
जितने है उन्हीं
के लेने की बात
है तो मैं समझता
हूं कि यह केवल
भ्रष्टाचार को
बढ़ावा देने की....
श्री
उपाध्यक्ष: ऐसा
है अमराराम जी
उसमें भी दुरुपयोग
के मामले बहुत
सामने आ रहे हैं,
बहुत ही ज्यादा
सामने आ रहे हैं।
श्री
अमराराम (धोद): उपाध्यक्ष
महोदय, दुरुपयोग
क्या, जहां एक
कनेक्शन है वो
कनेक्शन की जगह
कनेक्शन होगा,
जहां आप कह रहे
थे बेचने की जब
वो किराये की दुकान
अपना मालिकाना
हक बेच सकता है
तो कनेक्शन क्यों
नहीं बेच सकता?
अगर बेच भी रहा
है तो इसमें फोरजरी
क्या है? एक कनेक्शन
है, वह सीकर में
है, नागौर में होगा,
जोधपुर में होगा,
फलौदी में होगा,
कहीं भी होगा, होगा
तो एक ही, एक के दो
तो नहीं हो सकते....
श्री
उपाध्यक्ष: वहां
का काश्तकार तो
प्रभावित हो जाएगा,
उसको दो साल और
इंतजार करना पड़ेगा
अपने कनेक्शन
के लिए, जो पहले
से ही 16 साल इंतजार
कर रहा है।
श्री
अमराराम (धोद): इंतजार
तो माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, 16 साल करा
रहे हैं और यही
हालत रही बिजली
की, पैदावार की
तो मैं समझता हूं
कि 16 साल नहीं और
हो जाएगी 16 साल और
जैसा मिर्धा साहब
कह रहे थे पानी
की यही हालत रही,
बरसात नहीं हुई
तो 15 साल बाद में
कोई कनेक्शन मांगने
वाला भी नहीं मिलेगा,
लेकिन जब तक है
तब तक तो उसको प्राथमिकता
हो और उसकी लूट
का आधार नहीं हो
इसलिए उपाध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से इतना
ही निवेदन करना
चाहता हूं कि जिन
किसानों से आपने
एप्लीकेशन लेकर
के दस लाख रुपए
जमा करा लिए, वीसीआर
के नाम से जो लूट
हो रही है अगर सरकार
उनको किसानों के
प्रति उनका थोड़ा
सा भी विश्वास
है तो ये जिनका
कनेक्शन ले रखा
है जहां इस देश
में 8 राज्यों
में बिजली फ्री
दी जा रही है, जहां
इंस्पेक्शन
के नाम से, विजलेंस
के नाम से जो लूट
मचा रखी है, जो भ्रष्ट
अधिकारी अपना घर
बना रहे हैं, एक-एक
एसी के 7-7 करोड़ रुपए
का माल मिलता है,
यह इसी का नतीजा
है इसलिए मैं तो
आपके माध्यम से
इतना ही निवेदन
करना चाहूंगा कि
सरकार उन किसानों
से जो वादा करके
आई है सप्लाई
का, कनेक्शन का,
उसकी लूट मिटाने
का निश्चित रूप
से या तो सरकार
उन वादों को पूरा
करेगी वरना तो
सरकार जब भी 18 महीनों
के बाद उनके बीच
में जाएगी, इस वादा-खिलाफी
का निश्चित रूप
से इसका खामियाजा
सरकार के बैठे
हुए लोगों को भुगतना
पड़ेगा, आपने समय
दिया उपाध्यक्ष
महोदय, इसका मैं
आपका आभार व्यक्त
करना हूं, धन्यवाद
पेश करता हूं और
मेरी बात समाप्त
करता हूं। धन्यवाद।
श्री
उपाध्यक्ष: धन्यवाद,
श्री अशोक नागपाल।
श्री
अशोक नागपाल (सूरतगढ़):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, आज सदन में
बिजली और अकाल
की स्थिति पर विचार
हो रहा है, मैं अपने
आपको इसमें सम्मिलित
करते हुए मुझ से
पूर्व माननीय सदस्यों
ने राज्य सरकार
की उपलब्धियों
के बारे में आपके
सामने बात रखी,
मैं धन्यवाद देना
चाहूंगा माननीय
मुख्यमंत्री
महोदय को, ऊर्जा
मंत्री महोदय को
कि सूरतगढ़ थर्मल
में छठी इकाई का
शिलान्यास किया
और ऊर्जा के क्षेत्र
में आगे बढ़ने
में राजस्थान
को अग्रिम पंक्ति
में लाने में आपने
प्रयास किया। मैं
ज्यादा नहीं कहते
हुए मेरे क्षेत्र
की कुछ बाते हैं,
कुछ समस्याएं
हैं, मैं आपके माध्यम
से माननीय मंत्री
महोदय के सामने
रखना चाहूंगा।
जिस तरह हनुमागढ़
जिले में नाली-बैल्ट
के जो ट्यूबवैल्स
लगे हुए हैं, उनका
पानी खारा होने
के बाद उनको कनेक्शन
शिफ्टिंग के लिए
जिला हनुमानगढ़
में आदेश किए गए
हैं उसी अनुरूप
में क्योंकि यह
जो नाली-बैल्ट
है पूरे अनूपगढ़
तक नाली-बैल्ट
है और वह क्षेत्र
श्रीगंगानगर जिले
में आता है। मैं
आपके माध्यम से
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय माननीय मंत्री
महोदय से यह आग्रह
करना चाहूंगा कि
जिस तरह हनुमानगढ़
जिले में ट्यूबवैल
जिनका पानी खारा
हो चुका है, उनका
कनेक्शन शिफ्टिंग
के लिए आपने आदेश
प्रदान किये है
उसी अनुरूप श्रीगंगानगर
ज़िले में सूरतगढ़
से लेकर अनूपगढ़
तक के क्षेत्र
में उसी तरह के
आदेश प्रदान करें।
इसी के साथ-साथ
राजीव गांधी विद्युतीकरण
योजना में श्रीगंगानगर
ज़िले को 32 करोड़
रुपए मिला है लेकिन
मैं उसमें यह कहना
चाहूंगा माननीय
उपाध्यक्ष महोदय,
आपके माध्यम से
अभी तक उसमें कोई
भी प्रगति नहीं
हुई है, उस क्षेत्र
में राजीव गांधी
विद्युतीकरण योजना
के अंतर्गत सबसे
ज्यादा क्षेत्र
जो है ढाणियां
पूरे विधानसभा
क्षेत्र में सूरतगढ़
में बहुत अधिक
हैं।
मैं माननीय
उपाध्यक्ष महोदय,
आपके माध्यम से
माननीय मंत्री
महोदय से आग्रह
करना चाहूंगा कि
इस राजीव गांधी
विद्युतीकरण योजना
के अंतर्गत जो
श्रीगंगानगर ज़िले
को 32 करोड़ रुपया
मिला है उसका सही
समय पर सदुपयोग
हो, इसके लिए आप
अपने संबंधित अधिकारियों
को जो भी दिशा-निर्देश
है वह प्रदान करेंगे।
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, पूर्व में
सामान्य श्रेणी
में ट्यूबवैल्स
के लिए काफी कनेक्शन
एप्लाई किये गये
जब उनका समय आया
विभागीय त्रुटि
के कारण या उन काश्तकारों
की गलती के कारण
वह कनेक्शन जो
डिमाण्ड नोटिस
थे उनके पास तक
नहीं पहुंच सके
और वो 2005 तक के जो
हमारे कनेक्शन
थे उनमें मेरे
विधानसभा क्षेत्र
के काफी ऐसे मामले
हैं जो पेंडिंग
पड़े हैं, मैं आपके
माध्यम से मंत्री
महोदय से यह निवेदन
करना चाहूंगा कि
उन लोगों को राहत
प्रदान की जाए
जो सामान्य श्रेणी
में जिन्होंने
एप्लाई किया और
उनका नम्बर आने
के बाद विभागीय
त्रुटि से या स्वयं
की किसी भी गलती
के कारण वो नहीं
हो सके, यह मैं आपके
माध्यम से कहना
चाहूंगा। माननीय
उपाध्यक्ष महोदय
एक बात और भी कहना
चाहूंगा कि विधायक
कोष से पैसा दिया
जाता है उसकी एक
समय सीमा होती
है, मैंने मेरे
विधानसभा क्षेत्र
में श्रीविजयनगर
नगरपालिका में
करीब एक लाख रुपए,
96 हजार के समथिंग
रुपए मैंने विद्युतीकरण
के लिए दिया लेकिन
बड़े ही दुःख का
विषय है एक साल
और तीन चार महीने
निकलने के बाद
भी वह कार्य मेरे
बार-बार कहने के
बावजूद अब जाकर
के वह पूरा हुआ
है। जब विधायक
कोष से पैसा दिया
जाता है.....
Bhs/akt/3.4.07/15.30/2m
उसकी
समय-सीमा होती
है उसमें ऐसे अधिकारी
जो उस काम को पूरा
नहीं करते हैं
विशेष रूप से इस
तरह की एक मॉनिटरिंग
करके ऐसे अधिकारियों
को दंडित भी किया
जाए और उसके उपरांत
जो भी पैसा विधायक
कोष से या अन्य
कोष से दिया जाए
उसका सही समय पर
सदुपयोग हो, यह
मैं आपके माध्यम
से कहना चाहूंगा। इसके अलावा
मेरे विधान सभा
में सूरतगढ़ तहसील
की बारह ग्राम
पंचायतें हैं इसके
साथ-साथ जो अकाल
पर भी थोड़ी सी
चर्चा हो रही है
उस पर भी अपनी बात
कहना चाहूंगा। उस तहसील
के गांव जो हैं
वो सूरतगढ़ तहसील
श्रीगंगानगर जिले
में जरूर है लेकिन
वहां का जो क्षेत्र
हैं वहां कहीं
भी पानी नहीं लगता
है वहां हालात
यह है कि किसान
की फसल सिर्फ बरसात
पर डिपेंड करती
है और वो क्षेत्र
काफी पिछड़ा हआ
है। मैं आपके माध्यम
से माननीय अकाल
राहत मंत्री जी
से यह आग्रह करना
चाहूंगा कि उस
क्षेत्र में चारा
डिपो खोले गये
हैं लेकिन वो पर्याप्त
नहीं हैं सिर्फ
राजयेसर और देवीदासपुरा
में दो ही डिपो
खोले गये हैं मालेर,
सिगरासर, डीडवाना
काफी गांव ऐसे
हैं जो इससे वंचित
हैं और मैं एक ही
बात आपके माध्यम
से माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, कहना
चाहूंगा कि जिस
तरह से बीकानेर
जिले को इस चारे
के ऊपर अनुदान
दिया जाता है उसी
अनुरूप उस क्षेत्र
को भी अनुदान दिया
जाए ताकि उस क्षेत्र
के जो हमारे काश्तकार
हैं जो गरीब किसान
हैं उनको फायदा
मिल सके।
श्री
उपाध्यक्ष: आ
गयी बात।
श्री
अशोक नागपाल (सूरतगढ़):
जिस तरह अभी माननीय
मुख्यमंत्री
ने घोषणा की है,
राज्य सरकार के
दिशा-निर्देशों
के अनुसार पच्चीस
प्रतिशत की जहां
कम छीजत के गांव
हैं वहां चौबीस
घंटे बिजली उपलब्ध
करवा दी जाएगी।
इसी अनुरूप मैं
आपसे आग्रह करना
चाहूंगा कि गंगानगर
जिले में ऐसे ज्यादा
से ज्यादा ग्रामीण
क्षेत्रों को राहत
प्रदान की जाय।
माननीय
उपाध्यक्ष महोदय, आपने समय दिया
उसके लिए बहु त-बहुत धन्यवाद।
जय हिन्द। जय
भारत।
श्री
उपाध्यक्ष: धन्यवाद। श्री रामलाल
शर्मा (अनुपस्थित)।
श्री नरेन्द्र
नागर (अनुपस्थित)।
श्री हीरालाल रैगर।
श्री
हीरा लाल (निवाई):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, आज अकाल
और बिजली पर चर्चा
हो रही है।
श्री
रामप्रताप कासनिया
(पीलीबंगा): उपाध्यक्ष
महोदय, आपने
मेरा नाम पुकार
लिया।
श्री
उपाध्यक्ष: नहीं
पुकारा। अभी नहीं
पुकारा।
श्री
हीरा लाल (निवाई):
...इसमें मैं भी अपने
आपको शामिल करता
हूं । मैं ज्यादा
आंकड़ों में और
इस सरकार ने क्या
किया, उस सरकार
ने क्या किया
मैं उसमें नहीं
पड़ना चाहता। सबसे
पहले आपके माध्यम
से विद्युत मंत्री
जी से निवेदन करना
चाहूंगा कि मेरे
विधान सभा क्षेत्र
में दो जीएसएस
दो वर्ष पहले मंजूर
हुए थे जो आज तक
भी चालू नहीं हुए।
दूसरा मेरे क्षेत्र
में कई जेइएन के
पद रिक्त हैं
इससे ग्रामों में
विद्युत आपूर्ति
में परेशानी होती
है तो जेइएन के
पद भी भरे जाएं।
साथ ही आजादी के
साठ साल बाद भी
मेरे विधान सभा
क्षेत्र में ग्राम
मेहताबपुरा, ग्राम
पंचायत सिरस, दयालपुरा,
ग्राम पंचायत सेदरिया,
खारड़ा, पंचायत
जामडोली, भांवता,
पंचायत चैनपुरा
इस तरह चार-पाँच
गांव हैं जो आज
भी विद्युतीकरण
से महरूम हैं इसलिए
मेरा निवेदन है
माननीय उपाध्यक्ष
जी, आपके माध्यम
से कि इन गांवों
का तुरंत विद्युतीकरण
कराया जाय। जहां
तक अकाल का प्रश्न
है विधान सभा क्षेत्र
निवाई में बिलकुल
वर्षा नहीं हुई।
मैं माननीय अकाल
राहत मंत्री जी
को, माननीय मुख्यमंत्री
जी को धन्यवाद
देना चाहूंगा कि
मेरे विधान सभा
क्षेत्र में अकाल
राहत कार्य प्रारंभ
किये हैं। अभी
ओलावृष्टि से जो
नुकसान हुआ उसका
भी मैंने स्वयं
भी मौके पर जाकर
मुआयना किया, देखा
और ओलावृष्टि से
भी जो किसान पीडि़त
थे उनको सहायता
राशि की कार्यवाही
की जा रही है उसके
लिए मैं सरकार
को धन्यवाद देना
चाहूंगा माननीय
उपाध्यक्ष जी
आपके माध्यम से
लेकिन मेरे यहां
बरसात बिलकुल नहीं
हुई। कुछ ऐसे छोटे-छोटे
किसान हैं जिनकी
वर्षा पर ही आधारित
खेती है। न तो खरीफ
की फसल हुई उनकी,
न रबी की फसल हुई
इसलिए उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम से
सरकार का ध्यान
आकर्षित करना चाहूंगा
कि जो छोटे किसान
हैं जिन्होंने
फसल बोई नहीं वर्षा
के अभाव में उनको
भी अकाल राहत या
जिस तरह से ओलावृष्टि
में सरकार सहायता
दे रही है उससे
जोड़ा जाए। पुन:
आपने मुझे बोलने
का समय दिया मैं
आपका बहुत-बहुत
आभार व्यक्त
करता हूं। जय हिन्द।
जय भारत।
श्री
उपाध्यक्ष: बहुत-बहुत
धन्यवाद। श्री
मंगलाराम गोदारा।
श्री
मंगलाराम गोदारा
(श्रीडूंगरगढ़):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, आज बिजली
पर, अकाल पर चर्चा
हो रही है। मैं
मेरे क्षेत्र की
कुछ बिजली की समस्या
के बारे में आपके
माध्यम से मंत्री
महोदय को अवगत
कराना चाहता हूं।
मेरे विधान सभा
क्षेत्र में बीकानेर
डिवीजन में सबसे
ज्यादा ट्युबवैल
हैं और मूंगफली
का बैल्ट है जहां
सबसे ज्यादा मूंगफली
पैदा होती है और
वहां बिजली की
सबसे ज्यादा की
जरूरत रहती है।
इस सरकार के आने
के बाद घोषणा तो
आठ घंटे की थी मगर
वहां बिजली तीन-चार
घंटे मिलती है।
हालत यह है कि वहां
दो एइएन ऑफिस हैं
और दोनों ऑफिसों
में एइएन नहीं
हैं और एक ऑफिस
में तो कम से कम
आठ महीने से एइएन
नहीं है और एक ऑफिस
में कम से कम तीन-चार
महीने से पोस्ट
खाली पड़ी है।
श्री
उपाध्यक्ष: एइएन
को आप सहयोग नहीं
कर रहे हैं।
श्री
मंगलाराम गोदारा
(श्रीडूंगरगढ़):
सहयोग तो कर रहे
हैं साहब, वहां
कोई है ही नहीं।
कोई लगा ही नहीं
रहे हैं ये।
श्री
उपाध्यक्ष: आपके
डर से कोई लग नहीं
रहा है वहां।
श्री
मंगलाराम गोदारा
(श्रीडूंगरगढ़):
सहयोग करने के
लिए तो हमारे यहां
कॉमरेड कभी-कभी
चले जाते हैं अमराराम
जी। ये आते हैं।
श्री अमराराम (धोद): इनके तो बुरा है साहब। स्पेशल में डूंगरगढ़ में एक भी कनेक्शन नहीं हुआ। नोट ए सिंगल।
श्री उपाध्यक्ष: पहले से ज्यादा हो गये।
श्री अमराराम (धोद): पहले से कहां ज्यादा हो गये ये तो बेचारे सब गहरे पानी में 40 एचपी की मोटर लगा करके दस लाख रुपये लगा करके उन धोरों में मूंगफली पैदा कर रहे हैं और स्पेशल में एक कनेक्शन नहीं हुआ। पचपन दिन तक इंतजार किया लोगों ने । आप कह रहे हैं कि ज्यादा हो गये।
श्री उपाध्यक्ष: फसलें अच्छी हो रही हैं इनके।
श्री मंगलाराम गोदारा (श्रीडूंगरगढ़): माननीय उपाध्यक्ष महोदय, हालत यह है कि जैसे कनेक्शन साल भर से रोक रखे हैं। शहीद कोटे के कनेक्शन की कई फाइल गलत थी वो रुक गयी, कई फाइल ऐसी फाइल जो पास हो गयी उसके बाद में ...(व्यवधान)... जो शहीद कोटे के कनेक्शन हैं वो कनेक्शन नहीं हो रहे हैं, साल भर से वो चक्कर काट रहे हैं और स्पेशल श्रेणी के कनेक्शन, 5200 रुपये जमा कराने के बाद में सरकार ने नोटिस दिया ट्युबवैल बनाने का। ट्युबवैल बना लिया किसान ने और ट्युववैल बनाने के बाद में साल भर से अभी तक कोई कनेक्शन नहीं हुआ। हालत यह है कि वो किसान दर-दर भटक रहा है और उनके कनेक्शन नहीं हो रहे हैं और सबसे ज्यादा डूंगरगढ़ में कनेक्शन पेंडिंग हैं जितने कनेक्शन डूंगरगढ़ में पेंडिंग हैं उतने कनेक्शन किसी जगह नहीं है और हालात यह है कि एक-एक ट्यूबवैल पर सात-सात, आठ-आठ लाख रुपये खर्च होते हैं। उपाध्यक्ष महोदय, आपको तो जानकारी है पूरे उस इलाके की । आप तो मंत्री भी रहे हैं आपने शुरू में जो कनेक्शन दिये थे तो आज हालात यह है कि पूरा क्षेत्र बिजली के मामले में तीन-चार घंटे बिजली मिलती है । ये तो बरसात हो गयी नहीं तो वहां किसान के एक क्विंटल भी अनाज नहीं होता । यह हालत थी और अभी मूंगफली की बुआई चालू होने वाली है इस बुआई के चालू होने से पहले अगर किसानों को जो कनेक्शन पेंडिंग हैं वो कनेक्शन अगर मिल जाएं तो वो किसान जिन्दा रह सकता है अन्यथा उस किसान को आत्महत्या करनी पड़ेगी क्योंकि बैंक से कर्ज ले रखा है या अन्य किसी और से कर्जा ले रखा है और हालत यह है कि वो कर्जा अगर किसान को कनेक्शन नहीं मिला तो वो कर्जा उतरेगा नहीं और किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाएगा। इसलिए मेरा आपके माध्यम से मंत्री जी से निवेदन है कि इसी महीने में आप जो पेंडिंग कनेक्शन हैं जैसे शहीद कोटे के हैं, सामान्य श्रेणी के हैं और विशेष श्रेणी के हैं और एससी/एसटी के कनेक्शन भी पेंडिंग हैं तो सारे कनेक्शन जितने भी पेंडिंग कनेक्शन हैं वो इस महीने के अन्दर आप दें अन्यथा किसान मजबूर हो जाएगा आने वाले समय में और दूसरा दो-तीन जगह वोल्टेज की भी भयंकर कमी रहती है। जैसे जाखासरनया और राजेडू में काफी ट्युबवैल हैं और 33 केवी के वहां जीएसएस नहीं हैं। 132 के वी जीएसएस भी काफी टाइम से जैसे 220 के वी जीएसएस बन रहा है ।
कैलाश 3.4.07
15.40 (1) 2n
132 के जीएसएस भी दो तीन जगह स्वीकृत हैं वह भी अभी तक न तो उनकी स्वीकृति है और न वहां चालू हुए हैं । आपने जो किसानों को नये ट्रांसफारमर दिये हैं वह ट्रांसफारमर अगर कहीं वोल्टेज कम है तो किसान का कुआ नहीं चल सकता क्योंकि पानी गहरा है, लोड ज्यादा है और लोड ज्यादा होने की वजह से अगर किसी जगह वोल्टेज कम है तो वह ट्रांसफारमर चलता नहीं है और उस ट्रांसफारमर की अगर सील टूट गई, किसान सील तोड कर अगर उसको डाइरेक्ट चलाता है और वह ट्रांसफारमर जल गया और ट्रांसफारमर जल जाने के बाद चेंज कराने के लिये किसान लेकर आता है तो वह ट्रांसफारमर चेंज नहीं करते हैं उसके ऊपर पैनेल्टी ठोकते हैं 50-50 हजार की । वह कहते हैं कि आपने यह सील क्यों तोडी । किसान की मजबूरी है कि वह ट्रांसफारमर कम वोल्टेज पर चलता नहीं है, नहीं चलता है तो उस किसान को सील तोड कर सीधा डाइरेक्ट चलाना पडता है और सीधा डाइरेक्ट चलता है तो उसके ऊपर 50 हजार रुपये जुर्माना लगता है । इसलिए किसान को बचाने के लिये कम से कम जो पहले ट्रांसफारमर थे या तो उस टाइप के ट्रांसफारमर दें या उसमें वोल्टेज का सुधार कराएं अन्यथा किसान की हालत खराब है । जैसे 72 घंटे में ट्रांसफारमर चेंज करने की बात कर रहे हैं तीन चार दिन तक ...
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्यक्ष महोदय, सदन में जो मंत्री विराजमान है वह कर रहे हैं आपस में बातें, कोई एक आदमी नोट कर रहा नहीं, जब से चर्चा शुरू हुई है अकाल राहत मंत्री जी का कोई ठिकाना नहीं है । बिजली मंत्री सदन में मौजूद नहीं । अगर सरकार गंभीर नहीं है तो आप बंद करवाइए ना चर्चा । कोई नोट नहीं कर रहा है, बातें कर रहे हैं आपस में ।
डा. ओ. पी. महेन्द्रा (सरकारी उप मुख्य सचेतक): उपाध्यक्ष महोदय, अकाल मंत्री जी का स्वास्थ्य खराब है, ऊर्जा मंत्री जी अभी केवल पानी पीने के लिये गये हैं । उनका नोट हो रहा है, सारा नोट कर रहे हैं । (व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ... (व्यवधान) बातें कर रहे हैं यहां पर । कोई मंत्री नहीं है यहां पर, अकाल मंत्री नहीं, बिजली मंत्री नहीं, मजाक बना रखा है हाउस को ।
डा.बुलाकीदास कल्ला(बीकानेर): कोई भी मंत्री नहीं है उपाध्यक्ष महोदय, बडे अफसोस की बात है ।
श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): सिरोही से आने वाले माननीय सदस्य आपको क्या हो गया है, क्या हो गया आपको ।
श्री रामनारायण डूडी (राजस्व मंत्री): मंगला राम जी जो बोल रहे हैं... (व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्यक्ष महोदय, सरकार को संवेदनशील होना चाहिये किसानों और गरीबों के मुद्दे पर सदन में चर्चा हो रही है ।
डा.बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): सदन के प्रति बिलकुल गंभीरता नहीं है ।
श्री रामनारायण डूडी (राजस्व मंत्री): ... (व्यवधान) शहीदों के कनेक्शन नहीं दिये, सैनिकों के कनेक्शन नहीं दिये, क्या नोट कराना है, यह दो तीन बातें ही बोली है और ज्यादा तो बोला नहीं है ।
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): कटारिया साहब तो मेवाड को मजबूत कर रहे हैं सुरेन्द्र जी के साथ बात कर के और युनूस भाई अभी यहां पर गप लडा रहे थे ।
श्री उपाध्यक्ष: माननीय सदस्य आपकी सब बात नोट हो रही है ।
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मेरी आपसे यही प्रार्थना है कि आप यह निर्देश प्रदान करो और यह मंत्री गायब कहां है इनको बुलाओ ।
श्री उपाध्यक्ष: जवाब दिया जायेगा आप तसल्ली रखो ।
श्री रामनारायण डूडी (राजस्व मंत्री): उपाध्यक्ष महोदय, जितना मामला है उतना नोट हो रहा है। यह जो जो बोले वह मैंने बताया और क्या चाहिये आपको ।
श्री उपाध्यक्ष: माननीय सदस्य आप स्थान ग्रहण कीजिए, कहने दीजिए । सब नोट हो रहा है ।
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): लिखे तो जा रहे हैं इनके पैन में स्याही नहीं है, बिना स्याही का पैन है इनके पास ।
डा. सुरेश चौधरी (भादरा): आप उनके पास पैड देख लो अगर नहीं लिखा हुआ है तो।
श्री उपाध्यक्ष: हर बात का जवाब दिया जायेगा ।
श्री सुरेश मीणा (करौली): किसी ने भी नोट नहीं किया यह सब, इस बारे में गंभीर नहीं है सरकार ।
डा. सुरेश चौधरी (भादरा): राजस्व मंत्री जी लगातार लिखे जा रहे हैं आप उनका पैड देख सकते हो । सरकारी उप मुख्य सचेतक जी लगातार लिखे जा रहे हैं आप उनके पास पैड देख लो ।
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सत्ता पक्ष के आनरेबल चीफ व्हिप भी आप गये आप इनको निर्देश दो, बिजली मंत्री जी को बुलाओ, अकाल मंत्री जी को बुलाओ जिससे जो माननीय सदस्य विचार व्यक्त करे उनके वापस ढंग से जवाब आ सके ।
श्री उपाध्यक्ष: सब नोट हो रहा है, जवाब आयेंगे । हर चीज का जवाब आयेगा ।
डा. सुरेश चौधरी (भादरा): अब चीफ व्हिप जी आ गये हैं तो आपकी बिना बोली चीज भी लिख लेंगे यह ।
श्री रामनारायण डूडी (राजस्व मंत्री): ... (व्यवधान) 8 घंटे बिजली नहीं मिली, मूंगफली की बुआई अभी शुरू होने वाली है और क्या चाहिये, जितना इन्होंने बोला उतना आपको बता दिया मैंने । सब नोट है ।
श्री उपाध्यक्ष: सब नोट हो रहा है, माननीय सदस्य को आप कहने दीजिए ।
श्री मंगलाराम गोदारा (श्रीडूंगरगढ़): उपाध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से मंत्री जी से यही निवेदन है कि डूंगरगढ तहसील में जब से यह कापरेटिव के और इनके कोई छोटा मोटा झगडा हुआ था उसके बाद से डूंगरगढ के खिलाफ पूरा विभाग एक तरह से दुश्मन की नजर से देखता है । न तो वहां कोई ए. ईएन है, न कोई वहां कनेक्शन है, न कोई कनेक्शन देने वाला है, कोई छोटा मोटा सामन की भी किसान को जरूरत है तो न वह मिलता है, न आफिस में कोई आदमी मिलता है । हालात यह है कि जैसे पूरे विधान सभा क्षेत्र में कम से कम चार हजार ट्यूब वैल ह, न विधासर में कोई व्यवस्था है जो मेरे विधान सभा क्षेत्र में पडता है । न कोई डूंगरगढ में व्यवस्था है । वहां एक एक्स. ईएन की पोस्ट खाली पडी है, वह एक्स. ईएन की पोस्ट स्वीकृत तो हो गई उसके बावजूद ढाई साल हो गये आज तक कोई एक्स.ईएन वहां नहीं बैठा । मेरा आपके माध्यम से यही निवेदन है कि कम से कम जो पेंडिंग कनेक्शन है जिन किसानों ने ट्यूब वैल बना रखा है उनको तो आप कम से कम कनेक्शन दो जिससे कि वह किसान मरने के लिये मजबूर नहीं हो । क्योंकि जिस किसान ने 10 लाख रुपये ऋण लेकर, किसी दूसरे से ऋण लेकर ट्यूब वैल बना लिये वह भी आपके कहने पर, सरकार के कहने से कि आप ट्यूब वैल बनाओ और कनेक्शन लो। ट्यूब वैल बना लिये नोटिस आपने दिया कि अगर आपका ट्यूब वैल तैयार है तो आप कनेक्शन लो । उसके बाद में भी कनेक्शन नहीं मिला दो दो साल हो गये उन लोगों के पैसे भराये हुए और 10-10 लाख रुपये उन किसानों के लग गये । आज वहां भयंकर अकाल है उस अकाल में अगर आप उन किसानों को कनेक्शन नहीं दोगे तो वह किसान तो मरने के लिये मजबूर हो जायेगा । हालात भयंकर खराब है और ब्याज सहित डूबेगा किसान तो । इसीलिए मेरा आपके माध्यम से यही निवेदन है कि वहां कम से कम ए. ईएन की पोस्ट भर, एक्स ईएन की पोस्ट भरे । जे. ईएन वहां है नहीं । जे. ईएन की 5-5 पोस्ट है और मुश्किल से दो जे. ईएन है । 5 पोस्ट है और 2 जे. ईएन है और लंबा चौडा इलाका है, लंबे चौडे ट्यूब वैल है । जिन किसानों ने ट्यूब वैल बना रखे हैं उनको कनेक्शन नहीं है । न एससी, एसटी का है, न शहीद कोटे का कनेक्शन है, न सामान्य श्रेणी का है और न कोई विशेष श्रेणी का है और पैसे आपने भरा रखे हैं उसके बाद में भी कनेक्शन नहीं है । ट्रांसफारमर अगर किसी का जल जाता है तो वह टाइम पर चेंज नहीं होता है । आप 72 घंटे की बात कर रहे ह, आप वहां जा कर पता कर लो कभी भी 4-5 दिन से पहले उसको ट्रांसफार्मर नहीं मिलता है और बगैर पैसे के ट्रांसफार्मर नहीं मिलता है । आज पैसे दो रात को ट्रांसफार्मर ले जाओ, अगर पैसे नहीं है तो ट्रांसफार्मर नहीं है । अब गरीब आदमी कहां से पैसे लाये । 2-3 हजार रुपये दो, दलाल छोड रखे हैं और हालात भयंकर खराब है ।
श्री उपाध्यक्ष: धन्यवाद, श्री रामप्रताप कासनिया । थोडा बोलने दीजिए उनको ।
श्री टीकम चन्द कान्त (सिवाना): उपाध्यक्ष महोदय, मैं दूसरी बात कह रहा हूं, मैं यह कह रहा था कि आज अगर बिजली राज्य मंत्री जी आगे आकर बैठ जाये तो आसन को एतराज थोडे ही हो सकता है ।
श्री उपाध्यक्ष: वहां पर बैठे हैं कोई दिक्कत नहीं है ।
श्री टीकम चन्द कान्त (सिवाना): आज के दिन के लिये तो बैठ जाये ।
श्री उपाध्यक्ष: कोई दिक्कत नहीं वह अपने हिसाब से ही चल रहे हैं ।
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): राजस्थान को बहुत पीछे धकेल दिया इन्होंने, पीछे ही ठीक हैं यह ।
श्री उपाध्यक्ष: माननीय कासनिया जी पाँच मिनट में समाप्त करेंगे, बिना कहे पाँच मिनट में ।
ans/akt
15.50 2o 3.4.2007
डा. सुरेश चौधरी (भादरा): दो मिनट में ही निपटा देंगे। शब्दों का ऐसा जाल है इनके पास में, दो मिनट में ही निपटा देंगे।
श्री उपाध्यक्ष: माननीय सदस्य।
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अकाल और बिजली के बारे में चर्चा हो रही है। उपाध्यक्ष महोदय, जो धरातल पर बात है मैं वो ही करूंगा। मैं यह कहने में कतई संकोच नहीं करूंगा कि सरकार ने सत्ता में आने के बाद बिजली की तरफ जितना ध्यान दिया है इतना ध्यान पूर्ववर्ती सरकार ने नहीं दिया। चाहे उत्पादन का मामला हो, चाहे नई इकाई लगाने की बात हो।
उपाध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र के अंदर जो बात मैंने मेरी आंखों से देखी है, सूरतगढ़ छठी इकाई का शिलान्यास, उद्घाटन हुआ था उसमें मैं मौजूद था। मैं ऊर्जा विभाग को धन्यवाद देना चाहूंगा कि सूरतगढ़ थर्मल पावर में उत्पादन के मामले में देश में प्रथम स्थान है। यह हमारे लिए गौरव की बात है। मैं एक-एक प्लांट की यहां चर्चा नहीं करूंगा पर मोटे रूप में मुझे इतना ज्ञान है कि सरकार ने उत्पादन के लिए अलग अलग जगह इकाइयों की स्थापना की है और 2008 तक, यह भी घोषणा की है कि बिजली की राजस्थान को जितनी जरूरत है उतनी पैदावार हो जाएगी, दस तक शायद। अनपढ़ हूं कोई थोड़ी बहुत चूक हो सकती है।
उपाध्यक्ष महोदय, बिजली के बारे में मोटे रूप में कमी है, बरसों से जो कमी है, लाइनों में सुधार हो रहा है, नये नये ट्रान्सफार्मर लगाये जा रहे हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में सिंगल फेज के ट्रान्सफार्मर लग रहे हैं, लाइनें बदली जा रही है, तो बिजली के मामले में जो भी करने की आवश्यकता है, मंत्री महोदय मैं आप पर ही छोड़ता हूं।
उपाध्यक्ष महोदय, अकाल के बारे में मुख्य रूप से, अकाल के अंदर जो दुर्दशा होती है गांवों की, उससे पूरा हाउस परिचित है। पिछले 60 वर्षों से हम लगातार चर्चा करते आ रहे हैं। अकाल का स्थाई समाधान भी हो सकता है लेकिन इसकी तरफ हमारा कभी ध्यान नहीं दिया। हमारा ध्यान रहता है एक दूसरे पर आरोप लगाने का। चाहे कांग्रेस का राज हो चाहे बीजेपी का हो, अगर हम सब सहमत होकर और अकाल का स्थाई समाधान करना चाहे तो कर सकते हैं।
उपाध्यक्ष महोदय, आपको पता है अरबों, करोड़ों रूपये अकाल के नाम पर खर्च होते हैं, कोई स्थाई सम्पत्ति का निर्माण नहीं होता। लोगों की यह हालत है, लोगों की हमने आदत खराब कर दी, काम करने की मंशा नहीं है। अकाल राहत के अंदर जो कार्य होते हैं, कच्चे काम, जैसे मैं उदाहरण के तौर पर बताऊं जैसे रास्ता साफ करना, मिट्टी हटाना, उल्टा नुकसान होता है, जब नई मिट्टी आती है पुराने रास्ते में तो उसमें पोलापन पैदा हो जाता है जिसके कारण हमारे ऊँट- गाडे़, व्हीकल निकलने में उल्टे कठिनाई पैदा होती है। इसी तरीके से जोड़ खुदाई का काम हम करवाते हैं, कम से कम हमारे भेजे में इतनी बात तो होनी चाहिये कि जिस स्थान पर हम जोड खुदाई कर रहे हैं वहां पानी रूकेगा कि नहीं रूकेगा, उसके पास केचवमेंट एरिया है कि नहीं है। मेरा आपके माध्यम से सरकार से यह निवेदन है कि अकाल का स्थाई समाधान करने के लिए हमें मिल बैठकर सोचना पड़ेगा। परसों में अख़बार में पढ़ रहा था उसमें एक लाख हजार करोड रूपये तो अकेले केन्द्र सरकार को इस सेज को फायदा देने से नुकसान हो रहा है एक साल में। तो क्या हम बड़ी बड़ी कम्पनियों को जब इतनी छूट दे सकते हैं, वह हमारे पर काई अहसान नहीं कर रहे हैं। जो इतनी बड़ी बड़ी कम्पनियां हमारे देश में आ रही है, आप यह मत समझिये कि छूट देने के कारण आ रही है, हमारे देश में वह कम्पनियां इसलिए आ रही है कि हमारे यहां जो पंजीरी की पैदावार है वह दिन प्रतिदिन इस देश में बढ़ती जा रही है। उपभोक्ताओं की संख्या बहुत ज्यादा है इसलिए वह कम्पनियां यहां आकर्षित हो रही है, यह पंजरी का मतलब जनसंख्या। इस जनसंख्या के कारण से हमारे देश में कम्पनियां आकर्षित हो रही है। उनको अपना भविष्य यहां सुनहरा दिखाई दे रहा है। मेरे कहने का भावार्थ है जब हम कम्पनियों को इतनी बड़ी छूट दे सकते हैं तो अकाल के स्थाई समाधान के लिए भी हम कार्यवही कर सकते हैं,परन्तु हम एक दूसरे पर आरोप नहीं लगाए। पानी संरक्षण के नाम पर आज कितना पंचायत राज के माध्यम से पैसा खर्च हो रहा है।
उपाध्यक्ष महोदय, मैं यह जानना चाहूंगा जहां पर जोहड पायतान की भूमि है, जोहड पायतन की भूमि में पानी का अगर हम स्टाक करना चाहे तो पक्की मिट्टी है पहले उसको दिखवा लिया जाए। पक्की मिट्टी नहीं है तो कम से कम उसको,पक्का जोड़ हो या डिग्गी हो उसको पक्का किया जा सकता है। उसके इईगिर्द पशुओं को पीने के लिए पानी मिलेगा और बड़ा तालाब अगर हम विकसित कर लेंगे तो सिंचाई भी हो सकती है, यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। कोई इंजीनियर की, कोई दिमाग लगाने की आवश्यकता नहीं है। हजारो-हजारों एकड़ हमारे पास गोचर पड़ी है, जोहड पायतन की भूमि पड़ी है।
हमारी तो आज हालत यह है आज अकाल राहत के अंदर हमने जैसे 100 मजदूर लगा रखे हैं तो 70 तो हाजिर और 30 गैर हाजिर हैं, उनकी हाज़िरी लगती है और उस कार्य का नाप तौल जेईएन. के द्वारा नहीं किया जाता, एक यह कमी है। मैं मंत्री महोदय का ध्यान इस और आकर्षित करना चाहूंगा कि 100 में से 70आदमी काम कर रहे हैं 30 की गैरहाजिरी वैसे ही लग रही है, अगर नाप तौल हो तो वह 70 व्यक्ति जो काम कर रहे हैं वह बताएंगे खुद ही बता देंगे कि यह गैर हाजिरी फलां-फलां व्यक्ति की जो हाज़िरी लगी है यह गलत है,क्योंकि मिट्टी का नापतौल करके पैसा डिवाइड होता है मजदूरों में, पर उसका मेजरमेंट नहीं होता, इस कारण से यह बेइमानी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
मैं सरकार से यह निवेदन करना चाहूंगा कि आपको अकाल का स्थाई समाधान करना पड़ेगा। चाहे केन्द्र की सरकार हो,चाहे राज्य की सरकार को। अब हमें इस तरफ बिना राजनीति के ध्यान देना चाहिये और अकाल का स्थाई समाधान करना चाहिए। दूसरा..
श्री उपाध्यक्ष: धन्यवाद।
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): उपाध्यक्ष महोदय, अभी अकाल की चर्चा हो रही थी..
श्री उपाध्यक्ष: माननीय सदस्य, थोड़ा एक निवेदन करना है कि सवा चार बजे अपने को करीब करीब कार्यवाही समाप्त करनी है वरना हम आगे का प्रोग्राम नहीं कर पा सकेंगे, इसलिए मैं अभी बिजली मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि जवाब दें।
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपकी आज्ञा का पालन करूंगा। पुनः सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगा कि तीन साढ़े तीन साल में आपने एक पैसा भी बिजली का नहीं बढ़ाया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देना चाहूंगा।
श्री उपाध्यक्ष: माननीय मंत्री जी।
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे समय दिया बहुत बहुत धन्यवाद।
श्री गोविन्द राम मेघवाल (नोखा): उपाध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र से जुड़ा हुआ मुद्दा है, आदरणीय कल्ला जी ने कोई आरोप लगाए थे मुझे उसका जवाब देने के लिए समय दें। मुझे कृपया समय दिया जाए। (व्यवधान)
श्री जुबेर खान (रामगढ़): आपके ऊपर थोड़े ही आरोप लगाए थे।
श्री गोविन्द राम मेघवाल (नोखा): मुझे जवाब देना है। (व्यवधान)
श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): एक एक मिनिट हमारी बात भी...(व्यवधान)
श्री गोविन्द राम मेघवाल (नोखा): हमारे क्षेत्र के लोगों पर आरोप लगाए, मुझे जवाब देना है। मैं कोई लंबी चौड़ी बात नहीं बोलूंगा, जवाब देना है। (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): फिर रिप्लाई नहीं हो पाएगा। ( व्यवधान)
श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): उपाध्यक्ष महोदय, आज आखिरी दिन है, बिजली और अकाल जैसे मुद्दे पर.....(व्यवधान)
श्री श्रवणकुमार (पिलानी): काम्पीटेंट नहीं है...
श्री जीतमल खांट (बागीडोरा):हम हमारी बात नहीं कहेंगे तो कहां कहेंगे ? (व्यवधान)
श्री गोविन्द राम मेघवाल (नोखा): उपाध्यक्ष महोदय, मेरा आपसे आग्रह है, मेरे विधान सभा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। आदरणीय कल्ला जी ने आरोप लगाए, मैं दो मिनिट अपना स्पष्टीकरण देना चाहूंगा। दो मिनिट का समय दिया जाए।
श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): हमारे साथ में बहुत अन्याय हुआ है। आज हम आसन से...(व्यवधान)
श्री गोविन्द राम मेघवाल (नोखा): दो मिनिट में कोई प्रलय होने वाली नहीं है। मुझे दो मिनिट का समय दिया जाए।
श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): हमारे साथ अन्याय...(व्यवधान) हमें भी एक मिनिट बोलने दीजिए।
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): उपाध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य कह रहे हैं कि आपके पास फार्मूला है क्या अकाल के स्थाई समाधान का, मेरे पास फार्मूला है जरूरत होगी तो आप पूछ लेना बता दूंगा। (व्यवधान)
श्री गोविन्द राम मेघवाल (नोखा): दो मिनिट का समय दिया, मुझे ज्यादा नहीं चाहिए।
श्री श्रवणकुमार (पिलानी): समय खराब हो रहा है। (व्यवधान)
श्री उपाध्यक्ष: मैं दूंगा समय...(व्यवधान)
श्री गोविन्द राम मेघवाल (नोखा): दो मिनिट का समय दें।
श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): उपाध्यक्ष महोदय, हमको अकाल और बिजली पर बोलने के लिए हमें मौका नहीं दिया जाता है...( व्यवधान) तो हमारा यहां बैठने का क्या औचित्य है और सदन से समय समय पर इजाजत लेते हैं, आपके आदेश की पालना करते हैं इसका मतलब यह थोड़े ही हुआ... (व्यवधान) हमें बोलने का मौका दिया जाए।
श्री गोविन्द राम मेघवाल (नोखा): उपाध्यक्ष महोदय, मुझे दो मिनिट मात्र, मैं कोई लंबी चौड़ी बात नहीं कहूंगा।
श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): सबसे ज्यादा हमारा ट्राइबल सब प्लान बांसवाड़ा, डूंगरपूर ज्यादा है और हमको बोलने के लिए मौका नहीं दे... (व्यवधान)
दुर्गा/त्रिपाठी
030407 1600 2p
श्री जीतमल
खांट (बागीडोरा):
हमको बोलने के
लिये मौका नहीं
दे रहे हैं। (व्यवधान)
श्री उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आपको मौका और मिलेगा।
(व्यवधान)
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
उपाध्यक्ष महोदय,
मैं आपके माध्यम
से निवेदन करना
चाहता हूं कि हमारे
यहां सांइसर के
अन्दर एक चारा
डिपो चल रहा है।
(व्यवधान) सांइसर
के अन्दर एक चारा
डिपो चल रहा है।
(व्यवधान)
श्री उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप क्या कहना
चाहते हैं? (व्यवधान)
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): क्या
है, क्या है, यह
क्या है, बताओ
ना। (व्यवधान)
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
चारा डिपो चल रहा
है, जिसमें आदरणीय
कल्लाजी ने आरोप
यह लगाया है कि
वहां... (व्यवधान)
80 गाडि़यों का घपला
हुआ है। (व्यवधान)
80 गाडि़यों का घपला
हुआ है। (व्यवधान)
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): पर्सनल
आरोप इनके ऊपर
कोई नहीं लगाया
है। (व्यवधान)
कल्लाजी ने इनका
नाम भी नहीं लिया
है। (व्यवधान)
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): इन पर लगाया
है क्या... (व्यवधान)
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
बिलकुल असत्य।
मैं आपको इसका
स्पष्टीकरण
देना चाहता हूं।
(व्यवधान)
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): उपाध्यक्ष
महोदय, यह क्या
बात हुई? (व्यवधान)
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): इतना महत्वपूर्ण
समय खराब कर रहे
हैं हाउस का। (व्यवधान)
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा): यह मात्र
राजनीतिक स्टण्ट
है। सांइसर के
अनदर आज 50 पशु... (व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
उपाध्यक्ष महोदय,
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, नोखा से
आने वाले माननीय
सदस्य ने यहां
पर पहले चर्चा
करते हुए बीकानेर
के पूर्व सांसद
श्री रामेश्वर
डूडी के बारे में
कहा था कि जहां
पर *** (व्यवधान)
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
क्या कहा था।
आप कार्यवाही निकाल
लीजिये।
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
इसको आप कार्यवाही
से निकाल दीजिये।
आप इसको कार्यवाही
से निकलवाइये।
(व्यवधान)
श्री उपाध्यक्ष:
अंकित नहीं हो।
(व्यवधान)
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
000[1]
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
000
श्री जीतमल
खांट (बागीडोरा):
000
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
000
डा. बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर):
000
श्री उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
और मौका मिलेगा
अपने को। पहले
मंत्रीजी को सुन
लीजिये।
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
000
मोहम्मद
माहिर आजाद (नगर):
000
श्री जीतमल
खांट (बागीडोरा):
000
श्री उपाध्यक्ष:
आपके ऊपर कोई पर्सनल
आरोप लगाया है
क्या। (व्यवधान)
आपके ऊपर कोई पर्सनल
आरोप लगाया है
क्या। (व्यवधान)
डा. बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर):
000
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
000
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री उपाध्यक्ष:
कोई बात अंकित
नहीं हो रही, अंकित
नहीं हो रहा है।
(व्यवधान) कोई
पर्सनल आरोप नहीं
है।
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
000
डा. बुलाकीदास
कल्ला (बीकानेर):
000
श्री उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
सम्बन्धित अधिकारी
जांच कर लेंगे।
आप काहे को परेशान
हो रहे हो।
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
000
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री उपाध्यक्ष:
कोई अंकित नहीं
हो रहा है, अंकित
नहीं हो रहा है।
(व्यवधान)
श्री महीपाल
सिंह यादव (बानसूर):
000
श्री जीतमल
खांट (बागीडोरा):
000
श्री उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप काहे के लिये
बीच में बोल रहे
हैं। (व्यवधान)
श्री महीपाल
सिंह यादव (बानसूर):
000
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
समय बर्बाद मत
कीजिये। (व्यवधान)
नहीं किया। (व्यवधान)
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
000
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री उपाध्यक्ष:
हां बैठ जाएंगे,
बैठें आप। माननीय
सदस्य, आप अपना
स्थान ग्रहण कीजिये।
अंकित नहीं हो
रहा है। (व्यवधान)
कोई धमकी नहीं
है। (व्यवधान)
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
000[2]
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री जयराम
जाटव (खैरथल): 000
श्री मदन
राठौड़ (सुमेरपुर):
000
श्री उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
माननीय सदस्य,
माननीय सदस्य।
(व्यवधान) आपके
ऊपर पर्सनल आरोप
नहीं है। (व्यवधान)
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
000
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
माननीय सदस्य,
आप काहे के लिये
उत्तेजित हो रहे
हो। (व्यवधान)
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
000
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
माननीय सदस्य।
डा. सुरेश
चौधरी (भादरा): 000
( बजे)
(श्रीमती
सुमित्रासिंह,
अध्यक्ष, पदासीन)
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
कृपया स्थान ग्रहण
कर लें, माननीय
सदस्य। माननीय
मंत्रीजी, जवाब
दें।
श्री जीतमल
खांट (बागीडोरा):
000
श्री उपाध्यक्ष:
नहीं, प्लीज, अब
प्लीज, मेरी बात
आप सुनिये। आप
कृपया स्थान ग्रहण
कीजिये। मैं अपने
आप बंद करा दूंगी।
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
000
श्री अध्यक्ष:
पाँच बजे माननीय
राज्यपाल महोदया
यहां आएंगी और
उससे पूर्व सवा
चार बजे तक हमको
विधान सभा का यह
खत्म कर देना
है, कार्यवाही।
अब आप मुझे यह बताइये,
आप इस तरह से करते
रहेंगे तो कैसे
होगा।
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
000
श्री जीतमल
खांट (बागीडोरा):
000
श्री अध्यक्ष:
आसन पांवों पर,
आसन पांवों पर,
आसन पांवों पर।
माननीय सदस्यगण,
आपको मालूम है
पाँच बजे राज्यपाल
महोदया आएंगी।
हमारे सर्वश्रेष्ठ
विधायकों को सम्मान
देने का जो फंक्शन
है, वह होना है।
उससे पहले तैयारी
करनी है इसलिये
मैं चाहूंगी कि
20 मिनट के अन्दर,
4 बजकर 10 मिनट हो गये
हैं। 20 मिनट में
साढे चार बजे हम,
10-10 मिनट का समय दे
रहे हैं, दोनों
मंत्रियों को,
वह अपना जवाब दें।
Vps-usc-03042007-1610-2q-1
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
000
श्री अध्यक्ष:
कोई तरीका नहीं
है आपका, आप स्थान
ग्रहण करें। ... (व्यवधान)
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
000
श्री अध्यक्ष:
बोलना तो बहुत
से माननीय सदस्य
चाहते थे लेकिन
समय की कमी के कारण
नहीं बोल पाये
इसका मतलब यह तो
नहीं है कि समय
को यूं ही बरबाद
किया जाए। माननीय
मंत्रीजी।
श्री गोविन्द
राम मेघवाल (नोखा):
000
श्री श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री गजेन्द्र
सिंह (राज्य मंत्री, ऊर्जा): माननीय
अध्यक्ष महोदय, यह जो
आपने मुझे बोलने
का मौका दिया, धन्यवाद
देना चाहूंगा और
सब सदस्यों ने
जो अपने विचार-विमर्श
किये हैं, जो आपने,
आपकी जो कम्प्लेंट्स
हैं, जो आपने सुझाव
दिये हैं, मैं धन्यवाद
देना चाहता हूं, because life is a learning
process. समय के
अभाव की वजह से
में यही निवेदन
करूंगा कि आप बीच
में रोका-टोकी
नहीं करें because time is limited.
राजस्थान के जो पावर सैक्टर के बारे में एक थोड़ा सा ओवर व्यू देना चाहूंगा जिसमें अन्य जो मुद्दे उठाये गये हैं उनका जवाब उसी में मिल जाएगा। बिजली एक कोर सैक्टर है और मुझे याद है कि दो वर्ष पहले बीकानेर से पधारने वाले माननीय सदस्य, जब आप प्रतिपक्ष के नेता थे, आपने रेज किया था कि यह एक कोर सैक्टर है। एक बहुत इम्पोर्टेंट, एक विकास का प्रमुख द्वार है तो इसके अन्दर ऑल पार्टी पार्टिसिपेशन एक कॉमन प्लेटफार्म पर अपन नहीं करेंगे तो यह हमारे स्टेट के लिए खराब है। यह एक दूसरे को आप, यह कोई फॉल्ट फाइंड करने के लिए बिना बात आरोप लगायें तो उसका कोई मकसद नहीं है। हमें जैसा कि एक ओलम्पिक टोर्च लेकर एथलिट्स आते हैं, अलग-अलग टीम्स के आते हैं, आपस में के कम्पिटिटर्स आते हैं पर वे टोर्च ल&