vps/usc/1e/1145/01032007

 

अशोधित प्रति/ प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

 

अंक  7    बारहवीं विधान सभा के सप्‍तम सत्र का प्रथम दिवस   संख्‍या  1

 

 

गुरुवार, 01 मार्च, 2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11.45 बजे

विधान सभा भवन, जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

राष्‍ट्रीय गीत

 

वन्‍दे मातरम् । वन्‍दे मातरम् ।

सुजलाम् सुफलाम् मलयज शीतलाम्।

शस्‍य श्‍यामलाम् मातरम्। वन्‍दे मातरम् ।

शुभ्र ज्‍योत्‍स्‍ना पुलकित या‍मिनी।

फुल्‍ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनी।

सुहासिनी सुमधुर भाषिणी ।

सुखदाम् वरदाम् मातरम्।

वन्‍दे मातरम् । वन्‍दे मातरम् ।

 

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): भारत माता की जय।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा पाइंट आफ आर्डर है। मेरा पाइंट आफ आर्डर है कि आपने जो आज सदन की कार्यवाही स्‍थगित की वह नियमानुसार नहीं थी क्‍योंकि गवर्नर का भाषण कोई सदन का पार्ट नहीं है। पहले गवर्नर के जाने के बाद सचिव महोदय आकर घोषणा करते, उसके बाद आपको कोई कार्यवाही करनी चाहिए थी लेकिन यह जो कुछ हुआ है यह दुर्भाग्‍यपूर्ण है इसलिए मेरा यह पाइंट आफ आर्डर है कि यह कार्यवाही बिलकुल गलत हुई है, इसका आप कोई निराकरण करें।

श्री अध्‍यक्ष: आपने जो अपना व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न उठाया है मैं उस पर अपनी व्‍यवस्‍था तो दूंगी बाद में लेकिन मैं आपसे यह निवेदन करना चाहूंगी कि चूंकि शोर-शराबा ही नहीं बल्कि नारे लग रहे थे और आज दिन तक कभी भी राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण के ऊपर इस प्रकार का प्रदर्शन नहीं हुआ कि उनके सामने आकर नारे लगे। उनके सामने आकर नारे लगे इसलिए ... (व्‍यवधान)

अनेक माननीय सदस्‍य: शेम-शेम।  

श्री अध्‍यक्ष: आज दिन तक कभी नहीं हुआ ऐसा इसलिए मैंने उचित समझा ... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, आज तक तो इससे आगे भी हुआ है इस विधान सभा में ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अब आप बीच में नहीं बोलें।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, आज तक तो इससे आगे भी हुआ इस इस विधान सभा में ... (व्‍यवधान) यह मंथन फाड़कर भी फेंका गया है, इसी सदन के अन्‍दर ... (व्‍यवधान) फाड़कर इसी सदन में ... (व्‍यवधान)  हुआ है। ... (व्‍यवधान)   

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): इससे आगे भी किया है। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैं समझती हूं कि मुझे देखने दीजिए। यदि इसमें किसी प्रकार से कोई संवैधानिक मेरी गलती हुई है तो उसके लिए मैं खेद प्रगट करती हूं लेकिन व्‍यवस्‍था मैं बाद में दूंगी। ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ठीक है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ऑन ए पाइंट आफ आर्डर, अध्‍यक्ष महोदय। ऑन ए पाइंट आफ आर्डर अध्‍यक्ष महोदय। ऑन ए पाइंट आफ आर्डर, ऑन ए पाइंट आफ आर्डर।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): एक मिनट, साहब। ऐसा है कि जो हुआ वह तो बहुत से लोग उनके विचार के सहमत हैं। कांग्रेस वाले इसमें कोई शरीक नहीं । तो एक बात कहना चाहूंगा कि आपने यह जो कहा कि सदन में ऐसा नहीं हुआ यह बात सही नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: नारे लगे कभी?

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): अब आप सुनिये। अब आप सुनिये। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: इस प्रकार से गवर्नर के सामने आकर नारे लगे?

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): हां। मैंने किया है डी.पी.चटटोपाध्‍याय के सामने इसलिए मुझे यह याद है। I have done it.   ... (व्‍यवधान)

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): पर्चे भी फाड़े हैं। ... (व्‍यवधान) पर्चे भी फाड़े हैं, हमने देखे हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, डी.पी.चटटोपाध्‍याय राज्‍यपाल थे, उनके सामने ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, उस समय भी किया है, आप रिकार्ड देख लीजिए। ... (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 20 साल बाद यह घटना घटी है।  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 20 साल के अन्‍तराल में महामहिम राज्‍यपाल महोदय का अपमान इस प्रांगण में हुआ है। 20 साल के बाद ... (व्‍यवधान)  जिस तरह इन्‍होंने बात की यह ... (व्‍यवधान) 

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): यह आपके ध्‍यान में ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ... (व्‍यवधान) माननीय अध्‍यक्ष महोदय तो खुद विधान सभा के अन्‍दर बोली हुई हैं, गवर्नर स्‍पीच के अन्‍दर। यह पहली बार नहीं हुआ है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह संवैधानिक मर्यादा के पद हैं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आपने जो कहा है वह ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह पहली बार नहीं हुआ है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, संवैधानिक प्रमुख का इस तरह अपमान मैं समझता हूं कि निन्‍दनीय है। ... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): मंत्री महोदय, राज्‍यपाल महोदय का कोई अपमान नहीं है। सरकार की ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यहां तो कापियां, भाषण की कापियां भी छीनी गयी हैं अध्‍यक्ष महोदय।  ... (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, आपने कहा कि ... (व्‍यवधान) भाषण कापियां भी छीनी गयी हैं और आप नारों की बात करती हैं। ... (व्‍यवधान) 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह राज्‍यपाल महोदय का अपमान है, यह राज्‍यपाल महोदय का अपमान है। ... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): राज्‍यपाल के अभिभाषण पर प्रतिवाद होते रहे हैं और प्रतिवाद की बात  ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ... (व्‍यवधान) लेकिन उस पर कार्यवाही हुई है। असंवैधानिक जो किया है इसके लिए अध्‍यक्ष महोदय को खेद प्रगट करना चाहिए। ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ऑन ए पाइंट आफ आर्डर, अध्‍यक्ष महोदय। ... (व्‍यवधान)

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कई बार हुआ है। ... (व्‍यवधान) पिछली बार हुआ है।  ... (व्‍यवधान) इतना बड़ा घोटाला राजस्‍थान के इतिहास में पहली बार हुआ है।

श्री अध्‍यक्ष: The Chair is on its legs.

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ऑन ए पाइंट आफ आर्डर, अध्‍यक्ष महोदय।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): इतना बड़ा घोटाला राजस्‍थान के इतिहास में पहली बार हुआ है। ... (व्‍यवधान)  

 

शिव/चौहान/11.50/1f

 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ऑन ए पाइंट ऑफ आर्डर। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: कृपया अपना-अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये। The Chair is on its legs.  आप अपना अपना स्‍थान ग्रहण करें। (व्‍यवधान) सदन की मेज पर रखे जाने वाले पत्रादि। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ऑन ए पाइंट ऑफ आर्डर। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष : अब आपका क्‍या है ? (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके ध्‍यान में यह लाना चाहता हूं कि आज (व्‍यवधान) .....

श्री अध्‍यक्ष : मैंने सदन की मेज पर रखे जाने वाले पत्रादि के बारे में कह दिया। (व्‍यवधान) ...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैंने पहले ही पाइंट ऑफ आर्डर उठा दिया था और मेरे बाद राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य खड़े हुए हैं। (व्‍यवधान) माननीय अध्‍यक्ष महोदय मेरा निवेदन यह है कि आज महामहिम राज्‍यपाल महोदय का अभिभाषण जिस रूप में पढ़वाया गया है उसमें संवैधानिक मर्यादाओं और परम्‍पराओं का पालन नहीं किया गया है, मैं आपसे यह निवेदन करना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आपको अभिभाषण पर वाद-विवाद के समय छूट होगी, उस समय यह सब बातें आप उठायेगा। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मेरा पाइंट ऑफ आर्डर है माननीय अध्‍यक्ष महोदय। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: इसमें क्‍या पाइंट ऑफ आर्डर है ? (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप सुन तो लीजिये।(व्‍यवधान) आप सुन तो लें।

श्री अध्‍यक्ष: जब आप अपना अभिभाषण दें तब उठायेगा। वह बात तो खत्‍म हो गयी।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं संविधान के अनुच्‍छेद 176 के रेफरेंस में अपना पाइंट ऑफ आर्डर ला रहा हूं आपके सामने। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब अभिभाषण पढ़ा जा रहा था, आपने तो यह कहा था कि अध्‍यक्षता महामहिम राज्‍यपाल महोदय करेंगी। फिर आपने किस आधार पर यह व्‍यवस्‍था दी और दूसरा, अभिभाषण का पहले का पृष्‍ठ पढ़ने के बाद और आखिरी पृष्‍ठ के बीच का अंश पढ़ा हुआ मान लिया जायेगा, इसके संबंध में न तो कोई प्रस्‍ताव लाया गया और न प्रस्‍ताव लाने के लिये आप सक्षम हैं। इसके लिये सदन की नेता की और से प्रस्‍ताव लाया जाना चाहिये था। वह प्रस्‍ताव नहीं लाया गया, इसलिये यह जो अभिभाषण हुआ है यह संवैधानिक परम्‍पराओं को, संवैधानिक मान्‍यताओं को, प्रस्‍ताव को ताक पर रखकर हुआ है इसलिए महामहिम का अभिभाषण फिर से करवाया जाना चाहिये। यह मेरा पाइंट ऑफ आर्डर है।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, आपके पाइंट ऑफ आर्डर पर व्‍यवस्‍था बाद में दूंगी। (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): मैं एक मिनट कह दूं। इसमें सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो बात उठाई हे, उसमें दो बिन्‍दु हैं। एक तो यह प्रस्‍ताव हमेशा चीफ व्हिप के माध्‍यम से आना चाहिये और चीफ व्हिप के माध्‍यम से आने के बाद आपको अथवा म‍हामहिम को सदन की अनुमति लेनी चाहिये। क्‍या सदन की अनुमति है कि अन्तिम पैरा पढ़ने के बाद इसे पढ़ा हुआ मान लिया जाये ? इन दोनों परम्‍पराओं का उल्‍लंघन तो हुआ है और इसके लिये सरकार को खेद प्रकट करना चाहिये। परम्‍पराओं को मनवाने की जिम्‍मेदारी संसदीय कार्य मंत्री की है। इसमें सरकार को खेद प्रकट करना चाहिये। इसमें सदन का अपमान हुआ है। सदन सर्वोपरि है, इसलिये सदन की अनुमति लिये बिना इसको पढ़ा हुआ मान लिया गया। और न कोई विधिवत् रूप से प्रस्‍ताव आया। इसमें प्रस्‍ताव आना चाहिये था सरकार की तरफ से। सुखदेव प्रसाद जी जब गवर्नर थे उस वक्‍त कांग्रेस पार्टी सरकार में थी। उस समय कांग्रेस के चीफ व्हिप प्रस्‍ताव लेकर आये थे और यह कहा था कि इनका स्‍वास्‍थ्‍य ठीक नहीं है, अन्तिम पैरा पढ़कर इस भाषण को पढ़ा हुआ मान लिया जाये। उन्‍होंने सदन की अनुमति ली, क्‍या सदन की अनुमति है ? सदन ने अनुमति दी। उसके बाद उन्‍होंने अन्तिम पैरा पढ़ा और उसको पढ़ा हुआ मान लिया गया। स्‍पीकर साहब, आप लाइब्रेरी से किताबें उठाकर देख लें। खेतसिंह जी, जब चीफ व्हिप थे, उस वक्‍त भी गवर्नर साहब के सामने उन्‍होंने भी संसदीय कार्य मंत्री के रूप में प्रस्‍ताव रखा कि महा‍महिम महोदय, आपका स्‍वास्‍थ्‍य ठीक नहीं है, आप अन्तिम पैरा पढ़ दें, इसे पढ़ा हुआ मान लिया जायेगा। इसके बाद उन्‍होंने अन्तिम पैरा पढ़ने के लिये अनुमति मांगी सदन की और सदन ने अनुमति दी। उसके बाद अभिभाषण का अन्तिम पैरा पढ़कर इसे पढ़ा हुआ मान लिया गया। इसलिये इसमें एक तरह से संवैधानिक परम्‍पराओं को नुकसान पहुंचा है। न तो चीफ व्हिप की तरफ से प्रस्‍ताव आया, न सदन की अनुमति ली गयी, इसलिए सरकार को खेद प्रकट करना चाहिये।      

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह आज के चीफ व्हिप स्‍वयं मौजूद थे, पुरानी विधान सभा में इन्‍होंने खुद ने कहा था।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने आपसे कहा कि मैं इसकी व्‍यवस्‍था बाद में दूंगी। मैंने आपसे निवेदन कर दिया। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): एक बार महामहिम चेन्‍ना रेड्डी जी आये थे, आप स्‍वयं प्रस्‍ताव लाये थे कि स्‍वास्‍थ्‍य खराब है महामहिम का, इसको पढ़ा हुआ मान लिया जाये, फिर अनुमति ली गयी थी सदन से। आप स्‍वयं इसके साक्षी हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आप उन्‍हीं बातों को दोहरा रहे हैं। मैंने आपसे कह दिया कि मैं इस पर व्‍यवस्‍था बाद में दूंगी। कह तो दिया मैंने। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, आप व्‍यवस्‍था नहीं दे सकते। संविधान के अनुसार यह प्रेरोगेटिव अधिकार गवर्नर का है। सदन को एड्रेस करने का प्रेरोगेटिव कांस्‍टीट्यूशन में गवर्नर को है और गवर्नर को जब एड्रेस है तो स्‍पीकर रूलिंग नहीं दे सकते। आप काहे की रूलिंग देंगे। सदन को बुलाने का काम कांस्‍टीट्यूशन के अन्‍तर्गत राज्‍यपाल महोदय ने किया है और राज्‍यपाल महोदय ने जब सदन को बुलाया है तो महामहिम राज्‍यपाल के अभिभाषण के संबंध में विधान सभा का स्‍पीकर रूलिंग दे, मैं समझता हूं, गलत परम्‍परा डाल रहे हैं आप। आप अपने आपको करेक्‍ट कर लें पहले। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हो गया, आप बैंठें। सचिव, विधान सभा, सदन की मेज पर रखे जाने वाले पत्रादि।

 

सदन की मेज पर रखे गये पत्र

राज्‍यपाल महोदय का अभिभाषण

सचिव (विधान सभा) : महोदय, मैं राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण की प्रति सदन की मेज पर रखता हूं।

विधेयकों का विवरण

महोदय, मैं गत सत्र में पारित उन विधेयकों का विवरण सदन की मेज पर रखता हूं जिन पर राज्‍यपाल महोदय की अनुमति प्राप्‍त हो चुकी  है :-   

1. राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-3) विधेयक, 2006

2. राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-4) विधेयक, 2006

3. राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-5) विधेयक, 2006

4. राजस्‍थान सिविल न्‍यायालय (संशोधन) विधेयक, 2006

5.  राजस्‍थान विधान सभा सदस्‍य निरर्हता निराकरण (संशोधन) विधेयक,2006

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ऑन ए पाइंट ऑफ आर्डर।

अध्‍यादेश राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर (संशोधन) अध्‍यादेश 2006

 

श्री अध्‍यक्ष: श्रीमती वसुन्‍धरा राजे।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर (संशोधन) अध्‍यादेश 2006 (वर्ष 2006 का अध्‍यादेश संख्‍या-5) सदन की मेज पर रखती हूं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, सचिव महोदय ने जो अभिभाषण की प्रति रखी है उस पर हमारी आपत्ति है। हम कैसे मान लें, वह राज्‍यपाल महोदय द्वारा पढ़ा ही नहीं गया। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, कृपया बिराजें। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍यपाल महोदय द्वारा अभिभाषण पढ़ा ही नहीं गया और न राज्‍यपाल महोदय ने कहा है कि मेरे अभिभाषण को पढ़ा हुआ मान लिया जाये।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, कृपया अपना स्‍थान ग्रहण करें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, आई एम ऑन ए पाइंट ऑफ आर्डर।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप जो शोकाभिव्‍यक्ति का प्रस्‍ताव रख रही हैं, यह जो शोकाभिव्‍यक्ति की सूची दी है इसमें इराक के पूर्व राष्‍ट्रपति सद्दाम हुसैन का नाम नहीं है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय मंगलवार, 20 फरवरी को मध्‍य प्रदेश विधान सभा में भी सद्दाम हुसैन को श्रृद्धाजंलि दी गयी है। आप चाहें तो वहां से पता कर लें। देश की अन्‍य दूसरी विधान सभाओं में भी उनको श्रृद्धाजंलि दी गयी है। इसलिए मेरा आपसे निवेदन है कि आप भले ही पता कर लें, आज नहीं तो कल मैं यह चाहता हूं कि सदन की तरफ से इराक के पूर्व राष्‍ट्रपति सद्दाम हुसैन को श्रद्धाजंलि दी जानी चाहिये।

श्री विजय बंसल (भरतपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस अपराधी को फांसी दी गयी हो, मैं नहीं समझता कि इस सदन में उसको श्रद्धाजंलि दी जाये। अपराध सिद्ध होने पर फांसी दी गयी है। 

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, शोकाभिव्‍यक्ति के इस अवसर पर (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदन के पटल पर अभिभाषण की प्रति रखी गयी है, वह राज्‍यपाल महोदय के द्वारा न तो पढ़ी गयी है और न राज्‍यपाल महोदय ने सदन से यह कहा है कि उनका अभिभाषण पढ़ा हुआ मान लिया जाये।

श्री अध्‍यक्ष: शोकाभिव्‍यक्ति हो रही है और आप बोलते चले जा रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मेरा पाइंट ऑफ आर्डर है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैं शोकाभिव्‍यक्ति का प्रस्‍ताव रख रही हूं और आप बोले चले जा रहे हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मेरा पाइंट ऑफ आर्डर है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: पाइंट ऑफ आर्डर इस समय नहीं है, शोकाभिव्‍यक्ति हो रही है। 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैंने सचिव महोदय के रखने के तुरन्‍त बाद पाइंट ऑफ आर्डर उठा दिया था। 

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे यह निवेदन करना चाहता हूं ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अब क्‍या हो गया शोकाभिव्‍यक्ति का ? (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): जब गवर्नर साहब ने यह कहा ही नहीं कि मेरा अभिभाषण पढ़ा हुआ मान लिया जाये तो यह अभिभाषण सदन के पटल पर कैसे रख दिया ?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): कई सवाल महामहिम राज्‍यपाल महोदय के बारे में उठाये गये, सदन में अभिभाषण को पढ़ने का उनका अधिकार है और जितना वह चाहे उतना पढ़ने का स्‍वयं का अधिकार है। किसी को कहने की और प्रस्‍ताव लाने की कोई परम्‍परा न तो रही है और न कभी इस प्रकार की आवश्‍यकता पड़ी है। यह गलत कोड कर रहे हैं कि मैं ऐसा कोई प्रस्‍ताव रेड्डी साहब के समय लाया था।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): कौनसे नियम में बोल रहे हैं ?

श्री अध्‍यक्ष: अब तक आप कौनसे नियमों में बोल रहे थे ?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): नियम - 7 में है, तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसलिए यह गलत इंटरप्रिटेशन हो रहा है। महामहिम राज्‍यपाल महोदय सदन को बुलाते हैं और उसके बाद वह अपना अभिभाषण पढ़ते हैं, जितना वह पढ़ना चाहे, बाकी पढ़ा हुआ माना जाता है। यह स्‍वस्‍थ परम्‍परा है, चाहे राष्‍ट्रपति महोदय हों, चाहे राज्‍यपाल महोदय हों।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): लेकिन गवर्नर साहब को कहना पड़ेगा कि मेरा अभिभाषण पढ़ा हुआ मान लिया जाये। यह कहना पड़ेगा और उन्‍होंने नहीं कहा है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): राज्‍यपाल महोदय ने कृपापूर्वक यहां आकर और ........... (व्‍यवधान) .............

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उन्‍होंने नहीं कहा है। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): राज्‍यपाल महोदय ने नहीं कहा है कि मेरा अभिभाषण पढ़ा हुआ मान लिया जाये। (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): महामहिम राज्‍यपाल महोदय ने नहीं कहा, यह सिर्फ आपका कहा हुआ कहा । (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष को आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है राज्‍यपाल महोदय को। (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह अध्‍यक्ष पद से दिये गये ..... (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍यपाल महोदय तो पूरा अभिभाषण पढ़ना चाहती थीं, आपने करवाया है पूरा। आपने कहा कि आखिरी पैरा पढ़ दीजिये। महामहिम ने कहा ? (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): इनकी क्‍या बात सुनें , इनकी तो कोई बात है ही नहीं। इनकी क्‍या बात सुनें ? (व्‍यवधान)  

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, कृपया स्‍थान ग्रहण करें। सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, कृपया अपना स्‍थान ग्रहण करें। जयपुर ग्रामीण से आने वाले माननीय सदस्‍य, रायपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, कृपया अपना स्‍थान ग्रहण करें। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): नियमों का उल्‍लंघन हो रहा है।

श्री अध्‍यक्ष: मुझे मजबूर ना करें नाम से पुकारने के लिये, स्‍थान ग्रहण कर लें। (व्‍यवधान)...प्‍लीज स्‍थान ग्रहण करें। (व्‍यवधान) कृपया स्‍थान ग्रहण करें।  (व्‍यवधान) ... कृपया स्‍थान ग्रहण करें । (व्‍यवधान) ..........

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सचिव महोदय द्वारा जो अभिभाषण की प्रति प्रस्‍तुत की गयी और मैंने व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न उठाया... (व्‍यवधान) ­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­

महेन्‍द्र/चौहान/1g/1200/01.03.2007

 

श्री अध्‍यक्ष: आप बोले जायेंगे, आप सुनेंगे नहीं? ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): और मैंने व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न उठाया है।

श्री अध्‍यक्ष: आप बोलें तो किसी और को भी सुनना पड़ेगा आपको। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मेरा व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न है, अध्‍यक्ष महोदय, इसके बीच में कैसे खड़े हो सकते हैं यह?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): 1991 में, 22.02.1991 में महामहिम राज्‍यपाल महोदय यहां पधारे उस समय यह व्‍यवस्‍था दी गयी ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, जब मेरे व्‍यवस्‍था के प्रश्‍न पर आपने व्‍यवस्‍था नहीं दी तो बीच में यह कैसे खड़े हो सकते हैं?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैं पढ़ कर सुनाता हूं। हमारे हाउस की व्‍यवस्‍था भी है कि 1975 में विशेष परिस्थितियों में महामहिम राज्‍यपाल महोदय के द्वारा बिना पढ़े ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): महामहिम राज्‍यपाल महोदया ने सदन से यह नहीं कहा कि मेरे अभिभाषण को पढ़ा हुआ मान लिया जाए। इसलिए, अध्‍यक्ष महोदय, यह पढ़ा हुआ नहीं माना जा सकता।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): इसमें संवैधानिक आवश्‍यकताओं की पूर्ति हो जाती है।

श्री अध्‍यक्ष: प्‍लीज, सिट डाउन। स्‍थान ग्रहण करें। मैं आप से कह रही हूं, सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण कर लें।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): उनसे संवैधानिक आवश्‍यकताओं की पूर्ति हो जाती है। राज्‍यपाल महोदय द्वारा पढ़े गये अभिभाषण की जो प्रति सदन की मेज पर रखी जाती है वही अभिभाषण की प्रमाणित प्रति है।

यह 4.3.1975 को यहां पर अध्‍यक्ष का फैसला हुआ है। इस तरह से 3.3.1966 को भी, यदि आप राज्‍यपाल महोदय की अस्‍वस्‍थता के कारण, अन्‍य कारणों से अपना अभिभाषण पूरा नहीं पढ़ सकें तो भी संविधान के अनुच्‍छेद 176 के अन्‍तर्गत उसे पढ़ा हुआ माना जायेगा। इस आधार पर मैं पाइंट ऑफ आर्डर रिजैक्‍ट करता हूं।

यह, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 1991 में यह व्‍यवस्‍था दी गयी जब यह ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय का आदेश था कि आप यह अंतिम पैरा पढ़ दो, राज्‍यपाल महोदया ने कभी नहीं कहा कि मैं अंतिम पैरा पढ़ना चाहती हूं। यह आपकी व्‍यवस्‍था थी, तो क्‍या अध्‍यक्ष यह व्‍यवस्‍था दे सकता है स्‍पीकर के खिलाफ में। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: इस सदन की परम्‍परा यह है कि जब कोई एक माननीय सदस्‍य बोलते हैं तो दूसरों को तसल्‍ली से बात सुननी चाहिए। आपको भी मौका देंगे उसका जवाब देने का। लेकिन यह कोई तरीका नहीं है कि एक बोल रहा और दूसरे खड़े हो गये। यह बहुत गलत बात है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, न तो 1966 में यह व्‍यवस्‍था हुई कि कोई कोई प्रस्‍ताव लाये हैं न 1975 में कोई यह व्‍यवस्‍था हुई कि कोई प्रस्‍ताव लाये हैं और उसको पढ़ा हुआ माना गया है। और यह व्‍यवस्‍थाएं भी दी जा चुकी हैं और यह व्‍यवस्‍थाएं हैं।

अपना हाउस अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍थाओं से, परम्‍पराओं से चलता है और इस प्रकार मैं यह समझता हूं और मैं माननीय सदस्‍यों से निवेदन भी  करना चाहता हूं कि हमारी बहुत उच्‍च परम्‍पराएं रही हैं उन उच्‍च परम्‍पराओं को ध्‍यान में रखते हुए राजस्‍थान के इतिहास में महामहिम राज्‍यपाल के ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): संवैधानिक परम्‍पराओं काक मखौल पड़ाया है इस सरकार ने, पूरी तरह मखौल उड़ाया है और सदन की गरिमा का हनन किया है। ...(व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): ऐसा लगता है कि हम समस्‍याओं के प्रति गम्‍भीर नहीं हैं और ऊल-जलूल बातें कर के समय बर्बाद करते हैं।

मैं बहुत विनम्र शब्‍दों में निवेदन करता हूं कि अभी हम को डेढ़ महीने ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: इस समय सदन का प्रांगण उनके कब्‍जे में है, प्‍लीज आप बैठें।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): डेढ़ महीने सदन को चलना है और डेढ़ महीने में लोगों की समस्‍याओं को आप लेकर आइये ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, जो बोलता है उसके प्रांगण में होता है, यह आपको गलतफहमी है। सदन का प्रांगण जो बोलता है उसके कब्‍जे में होता है उस समय।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, डेढ़ महीने सदन को चलना है और ऐसे जनहित के जो मुद्दे हैं, यह बात निश्चित है कि प्रतिपक्ष सरकार पर अंकुश का काम करता है। हम भी चाहते हैं कि हमारे अंकुश के रूप में आप काम करें लेकिन यह ऊल-जलूल ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हमारी जरूरत नहीं है, यह कार्य आप कर रहे हैं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): यह कार्य तो आप बहुत बढि़या तरीके से निभा रहे हो अंकुश का कार्य।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): चलो आपका और मेरा, दोनों का काम मैं कर रहा हूं तो आपको तो खुशी होनी चाहिए। ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: बहुत खुशी है। 

अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे विनम्र शब्‍दों में निवेदन करना चाहता हूं कि इस सदन को शांतिपूर्वक चलाएं और क्‍योंकि हमारी यह परम्‍परा भी रही है और उन परम्‍पराओं का पालन करते हुए और महामहिम राज्‍यपाल महोदय, चाहे राष्‍ट्रपति महोदय, जब भी सदन में आये हैं और वे कृपापूर्वक आये हैं, वह संवैधानिक पद है, उसकी जिम्‍मेदारी पक्ष और विपक्ष की उतनी ही है कि जितनी पक्ष की है उतनी ही विपक्ष की भी है, उसका आदर हमेशा से होता आया है।

एक बार, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पार्लियामेंट में एक मैम्‍बर खड़ा हो गया और उसने एक कागज लहरा दिया। उस पर उस मैम्‍बर की सदस्‍यता निलम्बित कर दी, सदस्‍यता समाप्‍त कर दी।

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): आप भी लाइये यह प्रसताव।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, अपने राजस्‍थान में भी 1966 में जब सुखदेव प्रसादजी आये ...(व्‍यवधान)...

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): जिन-जिन लोगों ने राज्‍यपाल महोदया के अभिभाषण पर जो परिस्थितियां सदन में पैदा की हैं तो आप प्रस्‍ताव लाएं कि उनको पूरे सदन के समय के लिए निलम्बित कर दिया जाए। खाली टैक्निकलिटीज की बात कर के जो आज वातावरण राज्‍यपाल महोदया के सामने प्रस्‍तुत किया गया उससे हमें तो शर्म आ रही है कि राज्‍यपाल यहां लेखा-जोखा प्रस्‍तुत करने आये, तो, अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं ...(व्‍यवधान)... जिन-जिन सदस्‍यों ने इस तरह का वातावरण पैदा किया उनको पूरे इस सदन के लिए ...(व्‍यवधान)...

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो वातावरण सरकार के अन्‍दर इतने दिनों से देखा जा रहा है, जो मंत्री एक-दूसरे के ऊपर भ्रष्‍टाचार के आरोप लगा रहे हैं, मंत्री एक-दूसरे के ऊपर खुल कर धडल्‍ले से भ्रष्‍टाचार के आरोप लगा रहे हैं, एक-एक मंत्री के पास करोड़ों रुपये, अरबों रुपये की सम्‍पत्ति पायी गयी है ...(व्‍यवधान)...

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): चपलोत साहब ने ...(व्‍यवधान)... निकाल दिया था इस तरह का बर्ताव करने वालों के लिए। ...(व्‍यवधान)...

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): मंत्रियों के पास करोड़ों रुपये की बेनामी सम्‍पत्ति पायी गयी है। ...(व्‍यवधान)...

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): मैं इस सरकार से निवेदन करना चाहता हूं आपके माध्‍यम से कि जिन सदस्‍यों ने राज्‍यपाल महोदया के सामने इस तरह की परिस्थितियां पैदा की हैं उनके लिए आप निलम्‍बन का प्रस्‍ताव लेकर आएं। ...(व्‍यवधान)...

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): यहां राज्‍यपाल महोदय को अभिभाषण नहीं पढ़ने दिया गया है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैं प्रक्रिया के नियम ...

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रक्रिया के नियम से पहले मेरी बात सुन लीजिए आसन की तरफ से।

मैं माननीय सदस्‍यों की जानकारी में यह लाना चाहूंगी कि यह 22.02.1991 के अध्‍यक्षीय पीठ का दिया हुआ फैसला है और व्‍यवस्‍था यह है कि राज्‍यपाल महोदय अस्‍वस्‍थता के कारण या अन्‍य कारणों से, 'अन्‍य कारणों से' अपना अभिभाषण पूरा नहीं पढ़ सकें तो भी संविधान के अनुच्‍छेद 176 के अन्‍तर्गत उसे पढ़ा हुआ माना जायेगा।'

इसके अलावा एक बात और आपको बता दूं, वेस्‍ट बंगाल के अन्‍दर भी इस तरीके का मामला एक बार हुआ था और उसमें यही हुआ था, मैं आपको पढ़ कर सुनना चाहूंगी कि “In West Bengal, the Governor failed to deliver his Address to the Legislature on February 8, 1965 due to noisy disturbances and made up the failure by publication of the Address to the Members of the Legislature by laying the Address on the Table of the House. Dismissing the writ of mandamus, the Calcutta High court observed that procedural failure should not be overemphasized, because by laying a copy of the Governor’s Address on the Table, the object of the Address was substantially served and the Members would become aware of the contents of the Address. The Court further observed that unless there grows a constitutional convention, the Governor’s Address shall be heard with attention…”

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हमें यह आब्‍जैक्‍शन नहीं है, स्‍पीकर महोदय ने कैसे कहा कि पढ़ा हुआ माना जायेगा? ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: इसलिए मैं समझती हूं ...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप कोट कर रहे हैं धर्मवीरजीका, बंगाल का कोट कर रहे हो, किसी का कोट कर रहे हो, उसमें स्‍पीकर का इण्‍टरवेन्‍शन नहीं है, आपने इण्‍टरेवेन्‍शन किया है। यह कहां लिखा हुआ है, बताइये आप। यह कहां लिखा हुआ है?

श्री अध्‍यक्ष: अब आप सुन लीजिए। अब आप मुझे सुनिये।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह कहां लिखा हुआ है? आप बताइये वो कहां लिखा हुआ है?

श्री अध्‍यक्ष: अब आप मुझे सुन लीजिए। मैंने सुना आपको, मुझे तो सुनिये आप। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हम को आपने नहीं बुलाया ...(व्‍यवधान)... गवर्नर ने बुलाया है। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप दो मिनट सुनेंगे? आप मेरा भी सुनेंगे न क्‍यों कहा मैंने। मैंने इसलिए कहा ...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): You are misquoting the judgment. There was no intervention by the Speaker.

श्री अध्‍यक्ष: मैंने इसलिए कहा कि मुझे उन्‍होंने कहो था, राज्‍यपाल महोदया ने..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप जिस नजीर का जिक्र कर रहे हैं, अध्‍यक्ष महोदय, यह पूनमचंदजी के प्रस्‍ताव पर 1991 में यह फैसेला हुआ है लेकिन उसके कन्‍टेंट दूसरे हैं, हमारा पाइंट ऑफ आर्डर दूसरा है।

श्री अध्‍यक्ष: नौ, नौ। सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण कर लें। ...(व्‍यवधान)... आप स्‍थान ग्रहण करें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप इस नजीर से हमारे पाइंट ऑफ आर्डर की व्‍यवस्‍था नहीं दे सकतीं। ...(व्‍यवधान)... यह पाइंट ऑफ आर्डर दूसरा है।

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण करें।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपने इण्‍टरविन किया है। आपने इण्‍टरविन कर के किया है। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: मैंने क्‍यों कहा, वो तो सुनिये। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): In what capacity? You are not supposed to do it. It was the Governor who was addressing. She was chairing the meeting.  आपने कैसे इण्‍टरविन किया।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप सुनिये। अब आप क्‍यों खड़े हो गये। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपको सदाशयता से यह मानना चाहिए। ...(व्‍यवधान)... एक मिनट।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, वह काफी हैं, वह दोनों खुद सक्षम हैं बात करने में।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): देवल साहब, एक मिनट बैठो।

श्री अध्‍यक्ष: मैं निवेदन यह कर रही हूं, मैंने क्‍यों कहा।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, सुनिये आप।

श्री अध्‍यक्ष: सुनिये तो सही। आप मुझे सुनेंगे पहले। मैंने इसलिए कहा कि राज्‍यपाल महोदया ने मुझे कहा कि चूंकि मैं अधिक देर खड़ी नहीं रह सकती हूं इसलिए मैं अब लास्‍ट पैराग्राफ पढ़ दूं। इसलिए कहा। ...(व्‍यवधान)...

अनेक माननीय सदस्‍य: नौ, नौ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह कहा है, बिलकुल कहा है। बिलकुल कहा है। यही कहा है। यही कहा है। ...(व्‍यवधान)...

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): पहले जो कोट किया है अस्‍वस्‍थता का कारण था, आज भी गवर्नर साहब का अस्‍वस्‍थता का कारण था, यह उन्‍होंने कहा है।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): नहीं, पर माननीय अध्‍यक्ष ने अगर रिक्‍वैस्‍ट की और गवर्नर साहब अगर सहमत हो गयीं तो आपको क्‍या तकलीफ है? क्‍या तकलीफ है? ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): स्‍पीकर का अधिकार नहीं है, यह हमारा अधिकार है। ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आसन की व्‍यवस्‍था को यदि चैलेंज किया जाए

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ओवर ऑल संवैधानिक व्‍यवस्‍था यह है कि अगर गवर्नर अभिभाषण ...(व्‍यवधान)...

 

Ars/usc/1210/01032007/1h/1

 

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आसन को बोलने नहीं दिया जा रहा है।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आप क्‍यों परेशान हो रहे हो जब गवर्ननर साहब ने टेबल कर दी सारी ?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): और वरिष्‍ठ सदस्‍य आसन की व्‍यवस्‍था को चेलैंज करें इससे ज्‍यादा और दुर्भाग्‍य नहीं हो सकता ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ..... गवर्नर और हाउस के बीच में आसन कहां होता है?

श्री अध्‍यक्ष: आपने तो उस आसन का भी पालन नहीं किया और इस आसन का भी नहीं कर रहे हैं, दोनों ही का नहीं कर रहे हैं। उनका भी नहीं किया आपने तो।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): जिस तरह से राज्‍यपाल महोदय यहां पधारीं, उनका अभिभाषण यहां पर देने का था, मैं समझता हूं सभी लोग उनको सुनने के लिए तैयार थे सिवाय अमराराम जी और दो तीन और सदस्‍यों के, मैं ऐसा मानता हूं कि जो स्थितियां पैदा हुईं उन स्थितियों को आप टाल सकती थीं, आपके हाथ में थी। आपने स्‍वयं यह कहा आज मैं अध्‍यक्ष नहीं हूं आज हाउस को यह चला रही हैं राज्‍यपाल महोदय और यह संविधान की व्‍यवस्‍था भी है, परम्‍परा भी है और मैं समझता हूं राज्‍यपाल महोदया जो राज्‍य सभा की वाइस चेयरमैन भी थीं, अच्‍छी तरह से जानती हैं नियमों को। अगर आप बीच में नहीं बोलती तो मैं समझता हूं ...(व्‍यवधान) आप इतने वरिष्‍ठ हैं मैं कह रहा हूं कि माननीय राज्‍यपाल, आप मेरी सुन तो लें ...(व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री):  आप इनके बीच में खड़े हो गये तो मैं भी आपके खड़ा हो सकता हूं यह क्‍या बात हुई।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): घनश्‍याम जी, आपसे मुझे उम्‍मीद यह नहीं है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): मुझे भी यह नहीं थी कि आप अध्‍यक्ष महोदय के बीच में खड़े होंगे। आप कैसे अध्‍यक्ष महोदय के बीच में खड़े हो गये इतने बड़े आदमी हैं।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): आप मेरे बाद कह लीजिए।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): हाउस इनके कब्‍जे में है।

श्री अध्‍यक्ष: कब्‍जे में है तो आप क्‍यों ले रहे हो उस कब्‍जे को, आप क्‍यों छीन रहे हो कब्‍जा ?

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): आपने व्‍यवस्‍था दी थी और मैं यह कह रहा हूं कि इस स्थिति को आसानी से टाल सकते थे। उन्‍होंने खुद दो बार कहा। आपकी बात मैंने सुन ली है और आप इसके बाद जब भी बहस होगी आप चर्चा कर सकते हैं, एक बार उन्‍होंने यह कहा कि आप गुड जैस्‍चर दिखाइये। बहुत नम्रता से उन्‍होंने यह बात कही। हम सब लोग भी अमराराम जी से यह बात कह रहे थे कि हो गया आपका जो विरोध था आपने जता दिया। अब मैं समझता हूं ऐसा कोई बहुत बड़ा प्रोवोकेशन नहीं था। अभी दो दिन पहले 26 तारीख को जब रेल बजट पेश हुआ, सारे देश की सौ करोड़ जनता लालू प्रसाद जी से यह उम्‍मीद कर रही थी बहुत शानदार बजट पेश होगा और आपकी पेरेन्‍ट बाडी।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री को आप इक्‍वेट नहीं करिए राज्‍यपाल से। आप मंत्री को इक्‍वेट कर रहे हैं राज्‍यपाल से।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): महामहिम राज्‍यपाल महोदय संवैधानिक प्रमुख हैं हमारी। संवैधानिक प्रमुख का अपमान किया है आप लोगों ने ।

श्री अध्‍यक्ष: आप राज्‍यपाल से इक्‍वेट कर रहे हैं क्‍या बात हुई?

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): आप मेरी बात पूरी सुनिये। मैं यह कह रहा था कि ऐसा कोई प्रोवोकेशन भी नहीं था। आपकी पेरेंट बाडी बी जे पी ने सारे टाइम लालू प्रसाद जी का भाषण नहीं सुना।

श्री अध्‍यक्ष: यह मंत्री बोले तब आप कर सकते हो, राज्‍यपाल से इक्‍वेट न करें आप उसे, क्‍या बात हुई ...(व्‍यवधान)

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): उन्‍होंने आपसे कहा था कि मैं नहीं पढ़ना चाहती ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बोलने दो वह क्‍या कहना चाह रहे हैं आप बीच में क्‍यों बोलते हो ? बोल लेने दो उनको आप हाथ क्‍यों उठा रहे हो, उन्‍हें बोलने दो ना आप।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): मैं आपको यह कह रहा हूं कि यह स्थिति टाली जा सकती थी जिसको नहीं टाला और आप प्रोएक्टिव हो गईं उससे समस्‍या बढ़ी है। मैं समझता हूं कि पुरानी परम्‍पराएं भी हैं हाउस की कि ऐसे मौके पर सरकार कह दे कि जो कुछ भी हुआ है उसको हम भी ठीक नहीं मानते और मामला समाप्‍त करना चाहिए। इतनी लम्‍बी बहस करने का सवाल कहां उठता है। लेकिन मैं यह मानता हूं कि जो हुआ वह सही नहीं हुआ राज्‍यपाल महोदय पढ़ना चाहती थीं, उन्‍होंने पढ़ने से कभी इन्‍कार नहीं किया और दो बार उन्‍होंने इंटरविन भी किया।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): जब स्‍पीकर महोदया कह रही हैं कि यह मुझे उन्‍होंने कहा कि मैं नहीं पढ़ सकती हूं तो फिर आप उस बात को भी नहीं मान सकते हो क्‍या। आपको कहा क्‍या कि पढ़ना चाहती हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: मैं आपको मौका दूंगी प्‍लीज सिट डाउन। राज्‍यपाल महोदय ने रात को मेरे पास अपनी प्राइवेट सेक्रेटरी मीनाक्षी हूजा को भेजा और मुझे उन्‍होंने कहा कि मैं अधिक देर तक नहीं पढ़ पाऊंगी इसलिए मेरे भाषण को अन्तिम करके पढ़ा हुआ समझ लिया जावे, यह व्‍यवस्‍था आप कर देना। चूंकि मैं किसी को इशारा नहीं कर सकती थी इसलिए मैंने उनको खुद ही कह दिया। मैं गलत नहीं कह रही हूं आपसे, आप पूछ लीजिएगा उन्‍होंने कहा कि मेरे पाँव में दर्द है मैं अधिक देर तक खड़ी नहीं रह सकती हूं, मैं थोड़ा सा ही पढूंगी, यह उन्‍होंने कहलवा दिया था मुझे।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, जो आपने 1991 का हवाला दिया है आप प्रोसीडिंग्‍स निकलवा लीजिए, सदन की अनुमति ली गई थी आप 1991 की प्रोसीडिंग्‍स निकलवा लीजिए, सदन से अनुमति ली गई थी कि क्‍या महामहिम राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण को पढ़ा हुआ मान लिया जाए और वहां सदन ने अनुमति दी थी और उस सदन के सदस्‍य आज टोंक से आने वाले माननीय सदस्‍य बैठे हैं, चूरू से आने वाले माननीय सदस्‍य बैठे हैं, नगर से आने वाले बैठे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने आपको 1991 की व्‍यवस्‍था पढ़कर सुना दी।

 श्री जुबेर खान (रामगढ़): 1991 में अनुमति ली गई थी आप रिकार्ड दिखवा लीजिए ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: उसे पढ़ा हुआ माना जाएगा, रख देंगे तो भी पढ़ा हुआ माना जाएगा, मैंने आपको सुना दिया और क्‍या चाहते हैं आप?

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आप तो स्‍पीकर साहब सबसे पुराने सदस्‍यों में से हैं आप बता दीजिए कभी राज्‍यपाल के अभिभाषण को पढ़ा हुआ मान लिया जाए ऐसा प्रस्‍ताव कभी स्‍पीकर ने प्रस्‍तुत किया है? ऐसी परम्‍पराएं रही हैं कि चीफ व्हिप या संसदीय कार्य मंत्री प्रस्‍ताव लेकर आए हों और उसको सदन की अनुमति मिली हो तब पढ़ा हुआ माना गया है। इसलिए यहां पर दो परम्‍पराओं का उल्‍लंघन हुआ है एक तो प्रस्‍ताव आना चाहिए था चीफ व्हिप या संसदीय कार्य मंत्री के माध्‍यम से और दूसरा उल्‍लंघन यह हुआ है कि सदन की अनुमति नहीं ली गई। जब यह प्रस्‍ताव आता तो सदन सर्वोपरि है, सदन से बड़ा कोई नहीं है, सदन से अनुमति ली जानी चाहिए थी।

श्री अध्‍यक्ष: पढ़कर सुना दी थी ना 1991......

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): नहीं नहीं, यह ऐसा हो सकता है लेकिन इसके लिए प्रक्रिया है सदन की अनुमति ली जाती है । मैं आपको जब भी सदन एडजोर्न होगा, आपको लाइब्रेरी से प्रोसिडिंग निकाल कर बता दूंगा। इसमें साफ लिखा हुआ है कि सदन की अनुमति ली जानी चाहिये। इन दोनों परम्‍पराओं का उल्‍लंघन हुआ है। मैं समझता हूं मुख्‍य मंत्रीजी को माफी मांगनी चाहिये। ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपको उदाहरण बता दिया, आपको पढकर सुना दिया और क्‍या चाहते हैं आप ? ...(व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): चीफ व्हिप इस बात को जानते हैं, लेकिन जान-बूझकर प्रस्‍ताव नहीं लेकर आये। ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): किसी वकील ने यह कहा हो, मैं बाद में लाकर बता दूंगा। आप मुझे बता दें तो मैं कल्‍ला साहब का कायल रहूंगा। आज तक किसी प्रिसाइडिंग आफिसर के सामने, या माननीय अध्‍यक्ष महोदय के सामने यह कहा गया हो कि मैं बाद में आपको लाकर यह फलां कानून लाकर बता दूंगा। ...(व्‍यवधान).....

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): अभी लाकर बता दूं, आप 10 मिनट एडजोर्न कर दें। लाइब्रेरी जाना पड़ेगा,अभी लाकर बता दूंगा।  

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): तैयार होकर आना पड़ता है। ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: ऐसे नहीं होता है। ऐसे एडजोर्न नहीं होता है। ऐसे लाकर नहीं दिखाया जाता है। ...(व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): कभी स्‍पीकर प्रस्‍ताव लेकर नहीं आये हैं। मैं आपको कोट कर रहा हूं। सुखदेव प्रसाद जी के वक्‍त का कोट किया और जब खेतसिंह जी चीफ व्हिप थे, उस समय का कोट किया, दोनों वक्‍त में कभी स्‍पीकर प्रस्‍ताव लेकर नहीं आये, हमेशा चीफ व्हिप या संसदीय कार्य मंत्री प्रस्‍ताव लेकर के आये हैं और उसके लिये सदन की अनुमति ली गयी है और आप जानते हुए भी गलत परम्‍पराओं से चलाना चाहते हों। यह सदन का अपमान है और यह हम नहीं होने देंगे।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या हाई कोर्ट का रूल इस विधान सभा पर लागू होगा। आपने गवर्नर को इस बात के लिये आदेश दिया कि वह आखिरी पैरा पढ़ें, क्‍योंकि कभी गवर्नर ने यह नहीं कहा, यह आपका आदेश था। अगर स्‍पीकर आदेश दे तो ऐसी परम्‍परा, रूलिंग आप कोई बता दें, या चीफ व्हिप बता दें जिसमें स्‍पीकर ने आदेश दिया हो, अगर गवर्नर रिक्‍वेस्‍ट करते तो भी हम मान लेते।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 1962 में इसी विधान सभा में राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण (व्‍यवधान)......यह व्‍यवस्‍था दी गयी, वह पढ़कर आपको सुना रहा हूं। (व्‍यवधान)... विधान सभा में राज्‍यपाल महोदय जब अपना अभिभाषण पढ़ रहे थे ..

श्री अध्‍यक्ष: 1962 के बाद 1991 की व्‍यवस्‍था हो गयी और जो बाद में दी हुई व्‍यवस्‍था है, वही लागू होती है(व्‍यवधान)......

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): क्‍या कभी स्‍पीकर ने गवर्नर को अन्तिम पैरा पढ़ने के लिये बाध्‍य किया ? (व्‍यवधान)......

श्री ओ.पी.महेन्‍द्रा (उप मुख्‍य सचेतक): इस विषय पर व्‍यवस्‍था दे दी, उसको हाउस ने स्‍वीकार कर लिया फिर इस विषय पर पुन: चर्चा करने की कहां आवश्‍यकता रहती है, सभी ने स्‍वीकार किया है। पूरे विपक्ष ने स्‍वीकार किया है फिर पुन: इस पर चर्चा की कहां आवश्‍यकता रहती है ? (व्‍यवधान)......

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह आपका कोई अधिकार नहीं है, यह अधिकारों का का हनन है। यह गवर्नर के अधिकारों का हनन है। (व्‍यवधान)......

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): राज्‍यपाल महोदय जब अपना अभिभाषण पढ़ रहे थे तो विपक्ष ने यह सुझाव दिया था कि इसका शेष भाग पढ़ा हुआ मान लिया जाए। हमारा कहने का आशय यही है कि यह प्रस्‍ताव आना चाहिए था। चाहे सदन की नेता की तरफ से आता, चाहे सदन के किसी भी सदस्‍य की तरफ से आता, चाहे गवर्नर की तरफ से आता।

श्री टीकमचन्‍द कान्‍त: अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या अभी हम राज्‍यपाल द्वारा लिये गये निर्णय पर बहस कर रहे हैं या उसको चैलेंज कर रहे हैं । राज्‍यपाल महोदय ने आपके कहने से, आपके सुझाव से परिस्थितियां ऐसी थीं हाउस में, आप उनके साथ बैठी थीं और उस समय अगर भलमनसाहत के कारण से ही या यहां की परिस्थितियों को सामने रखकर अगर आपने उनको सुझाव दे दिया और उन्‍होंने मान लिया तो यह निर्णय राज्‍यपाल महोदय का हुआ और राज्‍यपाल महोदय के निर्णय को अब चैलेंज यह हाउस कर रहा है, क्‍या यह उचित हैं ?

 

vns/usc/12.20/1j/1.3.2007

 

 क्‍या यह उचित है ? नम्‍बर एक। नम्‍बर दो, व्यवस्थाएं अध्‍यक्ष देते हैं। समय-समय पर देते हैं और 191 की व्‍यवस्‍था वह भी दी गयी थी अध्‍यक्ष पद से और आज मैं चाहूंगा इन परिस्थितियों के अन्‍दर जो कुछ भी हुआ है उस पर भी आज एक नयी व्‍यवस्‍था आप दे दें ताकि आगे यह काम आयेगी।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक बात है। बिलकुल ठीक है। हां बोलिये।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रक्रिया के नियम 292 के अन्‍तर्गत निलम्‍बन प्रस्‍ताव की सूचना देता हूं...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह सदन नहीं चलाना चाहते हैं। यह सरकार फेस नहीं कर सकती है। जिस प्रकार का ..(व्‍यवधान) इस प्रकार का निर्णय हुआ, इस प्रकार का निर्णय होगा तो हम चुप नहीं बैठेंगे..(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, आप पाइंट आफ आर्डर की व्‍यवस्‍था कर रहे हैं कि यह प्रस्‍ताव मूव कर रहे हैं ? एक्‍सपल्‍शन क्‍या है ? ..(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, यह गलत परम्‍परा डाल रहे हैं...(व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): पाइंट आफ आर्डर निपटा ही नहीं यह प्रस्‍ताव आ गया...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, आप तो ओबीच्‍युरी की बात कर रहे थे यह कौनसा प्रस्‍ताव लेकर आ रहे हैं आप ? यह भारतीय जनता पार्टी तो कुछ भी नहीं कर पायेगी...(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, आप तो ओबीच्युरी की बात कर रहे थे..(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, आप बहुत गलत परम्‍पराओं का निर्वहन कर रहे हैं यहां पर। आप तो ओबीच्युरी की बात कर रहे थे, यह ओबीच्युरी है ? आपको ओबीच्‍युरी की बात करनी चाहिये अभी, प्रस्‍ताव कहां से आ गया ? प्रस्‍ताव तो कल आता आज कैसे प्रस्‍ताव आ गया ? 

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): महोदय, आज दिनांक 1 मार्च, 2007 को जब महामहिम राज्‍यपाल महोदय अपना अभिभाषण प्रारम्‍भ करने वाली थीं उसी समय श्री अमराराम (धोद) अपने स्‍थान से जोर-जोर से बोलने लग गये। महामहिम द्वारा उनको कहने पर कि आप बैठ जाइए आपकी बात मेरी समझ में आ गयी है और आप वाद विवाद के समय इस मुद्दे को उठाएं। किन्‍तु वे उनके निर्देशों एवं अनुरोध को नजरअंदाज करते हुए लगातार हो-हल्‍ला करते हुए महामहिम की अवहेलना करते रहे। इसके साथ ही श्री रणवीर सिंह  (गुढ़ा), श्री सुरेश मीणा एवं श्री मुरारी लाल मीणा भी हो-हल्‍ला एवं अमर्यादित आचरण करते हुए महामहिम के अभिभाषण में व्‍यवधान उत्‍पन्‍न करने लगे एवं अपना स्‍थान छोड़कर वैल में आ गये एवं जोर-जोर से नारेबाजी की। महामहिम राज्‍यपाल महोदया ने इन सभी माननीय सदस्‍यों से कई बार अनुरोध किया कि वे अपने स्‍थान ग्रहण करें एवं उनके अभिभाषण को सुनें किन्‍तु उन्‍होंने महामहिम के संवैधानिक पद की मर्यादाओं, संविधान की भावनाओं एवं इस सदन की स्‍वस्‍थ परम्‍पराओं का लगातार उल्‍लंघन किया। साथ ही सदन के विशेषाधिकार का हनन भी किया है। उक्‍त माननीय सदस्‍यों का यह रवैया इरादतन अपमानजनक, आसन की अवहेलना व सदन की कार्यवाही को बाधित करने वाला रहा है। (व्‍यवधान)  

  अंत: मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि संसदीय परम्‍पराओं एवं सदन की मर्यादाओं की रक्षा के लिये प्रक्रिया के नियम 292 के तहत उक्‍त आचरण हेतु माननीय सदस्‍य श्री अमराराम (धोद), श्री रणवीर सिंह (गुढ़ा), श्री सुरेश मीणा एवं श्री मुरारी लाल मीणा को विधान सभा सत्र की शेष अवधि के लिये सदन से निलम्बित किया जाय। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): सरकार नहीं चाहती है कि यह सदन चले। सरकार भागना चाहती है इस प्रकार से गलत प्रस्‍ताव करके। सरकार नहीं चाहती है कि इनके भ्रष्‍टाचार पर विचार हो। सरकार नहीं चाहती है कि इन्‍होंने विधान का किस प्रकार से उल्‍लंघन किया उस पर विचार हो। सरकार नहीं चाहती है कि राजस्‍थान की समस्‍याओं पर किस प्रकार से विचार हो। सरकार अलोकतांत्रिक कदम उठाकर जो गलत प्रस्‍ताव पेश कर रही है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपको इसका प्रतिरोध करना चाहिये...(व्‍यवधान) आप यही चाहते हो तो चलाओ सदन...(व्‍यवधान) कतई गलत परम्‍परा है..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: जो प्रस्‍ताव महावीर प्रसाद जी जैन, सरकारी मुख्‍य सचेतक ने प्रस्तुत किया है उसे स्‍वीकार किया जाए ?

(स्‍वीकृत)

प्रस्‍ताव स्‍वीकार किया गया।

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन कूप में नारेबाजी)

  माननीय सदस्‍यगण, शोकाभिव्यक्ति का प्रस्‍ताव पेश करने जा रही हूं मैं। आपको हाय-हाय करनी है बाद में करना। शोकाभिव्‍यक्ति पास कर लेने दीजिये।..(व्‍यवधान) वापस नहीं लेंगे। वापस मैं क्‍या करूंगी, वह लेंगे। मैं क्‍या करूंगी वापस ? How can I ? ऐसे करोगे तो विपक्ष भी नहीं बचायेगा। यह धंधे करोगे तो वह भी होगा..(व्‍यवधान) ऐसे धंधे करोगे, यह भी करोगे, यहां आकर नारे लगाओगे तो वह भी निकलेंगे। उनको भी निकालेंगे...(व्‍यवधान) देखिये आपका मतलब यह है कि आप शोकाभिव्‍यक्ति भी पास नहीं करना चाहते। शोकाभिव्‍यक्ति का प्रस्‍ताव भी पास नहीं करना चाहते ..(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, पहले महामहिम राज्‍यपाल का अपमान इस सदन में हो उसके बाद वह दिवंगत आत्‍माएं जो इस सदन के सदस्‍य रहे हैं उनको श्रद्धांजलि देने का प्रस्‍ताव आए एस पर भी चर्चा नहीं करना। शोकाभिव्‍यक्ति के प्रस्‍ताव पर भी जो लोग सुनना नहीं चाहें मैं समझता हूं शर्मनाक बात है यह।

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन कूप में नारेबाजी)

श्री अध्‍यक्ष: कौन चला रहा है राजशाही ? कौन चला रहा है ? कौन चला रहा है राजशाही ..(व्‍यवधान)

  सदन की कार्यवाही 12 बजकर 45 मिनट तक के लिये स्‍थगित की जाती है।  

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 12.28 बजे 

12.45 बजे तक के लिये स्‍थगित हुई।)

 


श्‍याम/चौहान  01.03.2007  12.40  अशोधित प्रति/प्रकाशनार्थ नहीं  1l

 

 

 

(समय:12.45 बजे)

(पुन: समवेत होने पर) 

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही 1.15 बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

(तदनन्‍तर सदन की कार्यवाही 13.15 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)

 

 

जयगोविन्‍द/यूएस/010307/1310/1o/अशोधित प्रति/प्रकाशनार्थ नहीं

 

(13.15 बजे)

(पुन: समवेत् होने पर)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

 

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन कूप में धरना व नारेबाजी)

 

शोकाभिव्‍यक्ति एवं श्रद्धांजलि

 

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, शोकाभिव्‍यक्ति के इस अवसर पर मैं गत दिनों दिवंगत हुए असम के पूर्व राज्‍यपाल श्री देवी दास ठाकुर, मध्‍यप्रदेश के पूर्व मुख्‍य मंत्री श्री श्‍यामाचरण शुक्‍ल, इस विधान सभा के पूर्व सदस्‍य एवं पूर्व मंत्री श्री गुलाब सिंह शक्‍तावत, श्री शिवनाथ सिंह, श्री अर्जुन दास मदान, श्री अमरचन्‍द मिढ़ा, श्रीमती रतनकंवर, श्री अब्‍दुल रहमान चौधरी, श्री माणक लाल ठाकोर, श्री मोहर सिंह, श्रीमती शकुन्‍तला श्रीवास्‍तव, श्री किशोरीलाल शर्मा, श्री विजय सिंह, श्री छोटू सिंह आर्य तथा श्री बालमुकुन्‍द के प्रति संवेदना व्‍यक्‍त करते हुए यह शोक प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करती हूं। यह शोक प्रस्‍ताव पास कर रही हूं आपके पूर्व सदस्‍यों के प्रति।

असम के पूर्व राज्‍यपाल श्री देवी दास ठाकुर का जन्‍म 9 दिसम्‍बर, 1929 को डोडा जिले की रामबन तहसील के बटरू ग्राम में हुआ। आपने बी.ए., एलएल.बी की उपाधियां प्राप्‍त कीं।

श्री देवीदास ठाकुर दिनांक 2 मई, 1990 से 17 मार्च, 1991 तक असम के राज्‍यपाल पद पर आसीन रहे। इस अवधि के दौरान 9 मई, 1990 से 17 मार्च, 1991 तक आपके पास अरुणाचल प्रदेश के राज्‍यपाल का अतिरिक्‍त कार्यभार भी रहा। वर्ष 1991 में आपने राज्‍यपाल पद से त्‍याग पत्र दे दिया तथा गोहाटी हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्‍य बने। श्री ठाकुर उत्‍तरी पूर्वी सात राज्‍यों की आर्थिक परिषद् के सभापति भी रहे।

अधिवक्‍ता के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरूआत करने वाले श्री ठाकुर ने 1956 में प्रजा समाजवादी पार्टी की सदस्‍यता ग्रहण की। आप वर्ष 1973 में जम्‍मू-कश्‍मीर उच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायाधीश बनाए गए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): शोकाभिव्‍यक्ति में तो शर्म करो। शोकाभिव्‍यक्ति है, शर्म करो कुछ तो।

श्री अध्‍यक्ष: वर्ष 1975 में आपने इस पद से त्‍याग पत्र दे दिया। इसके बाद शेख मोहम्‍मद अब्‍दुला के मंत्रिमण्‍डल में आपको वित्‍त मंत्री बनाया गया। श्री ठाकुर वर्ष 1984 से 1986 तक जी.एम. शाह मंत्रिमण्‍डल में उप मुख्‍य मंत्री रहे।

अध्‍ययन में रुचि रखने वाले श्री ठाकुर ने नई दिल्‍ली से प्रकाशित होने वाली एक पत्रिका का सम्‍पादन किया। माई लाइफ एण्‍ड इयर्स इन कश्‍मीर पोलिटिक्‍स शीर्षक से आपकी आत्‍मकथा प्रकाशित हुई है।

श्री देवीदास ठाकुर का दिनांक 3 फरवरी, 2007 को निधन हो गया।

मध्‍यप्रदेश के पूर्व मुख्‍य मंत्री श्री श्‍यामाचरण शुक्‍ल का जन्‍म दिनांक 27 फरवरी, 1925 को अविभाजित मध्‍यप्रदेश के रायपुर में हुआ। आपने बी.एससी, एलएल.बी. की उपाधियां प्राप्‍त कीं।

श्री श्‍यामाचरण शुक्‍ल दूसरी से पांचवीं तथा नौंवी से ग्‍यारहवीं मध्‍यप्रदेश विधान सभा के सदस्‍य रहे। आप दूसरी मध्‍यप्रदेश विधान सभा के लिए बिन्‍दरनवागढ़ निर्वाचन क्षेत्र से तथा छह बार राजिम निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित हुए। श्री शुक्‍ल मार्च, 1969 से जनवरी, 1972, दिसम्‍बर, 1975 से अप्रेल, 1977 तथा दिसम्‍बर, 1989 से मार्च, 1990 तक मध्‍यप्रदेश के मुख्‍य मंत्री पद पर आसीन रहे। श्री शुक्‍ल वर्ष 1963 से 1967 तक विधान सभा में कांग्रेस पार्टी के सचेतक तथा वर्ष 1967 से 1969 एवं 1990 से 1992 तक मध्‍यप्रदेश विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता रहे। आप वर्ष 1967 में सिंचाई मंत्री भी रहे।

श्री शुक्‍ल तेरहवीं लोक सभा में मध्‍य प्रदेश के महासमुन्‍द निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस के सांसद रहे। आप लोक सभा में पेट्रोलियम और रसायन सम्‍बन्‍धी समिति तथा रक्षा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के सदस्‍य रहे। पत्रकारिता में रुचि रखने वाले श्री शुक्‍ल छत्‍तीसगढ़ के पहले दैनिक महाकौशल के संस्‍थापक सम्‍पादक रहे। आपने इस समाचार पत्र का लगभग 21 वर्ष तक सम्‍पादन किया।

श्री शुक्‍ल 17 वर्ष की आयु में ही स्‍वतंत्रता आन्‍दोलन में सम्मिलित हो गए थे। इनके जीवन पर महात्‍मा गांधी, डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद और पं. जवाहर लाल नेहरू जैसे नेताओं के सानिध्‍य का गहरा प्रभाव पडा। मृदुभाषी, मिलनसार और सहृदय व्‍यक्तित्‍व के धनी श्री शुक्‍ल ने मध्‍यप्रदेश के विकास में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई।

श्री श्‍यामाचरण शुक्‍ल का दिनांक 14 फरवरी, 2007 को निधन हो गया।

                                                       

Gpc/usc/1.3.2007/1320/1p

 

  (प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन कूप में लगातार नारेबाजी)

..(व्‍यवधान).. गुलाबसिंह जी शक्‍तावत का शोक प्रस्‍ताव पेश कर रही हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जिंदा थे तब भी गुलाब सिंह जी को नहीं चाहते थे। गुलाब सिंह जी शक्‍तावत का नाम आ रहा है। गुलाब सिंह जी को तो श्रद्धांजलि दे दो। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: पूर्व मंत्री श्री गुलाब सिंह शक्‍तावत का जन्‍म 22 अप्रैल, 1928 को उदयपुर जिले के भीण्‍डर कस्‍बे में हुआ। आपने बी.ए. की उपाधि प्राप्‍त की।

  श्री गुलाब सिंह शक्‍तावत दूसरी, चौथी, पांचवीं, आठवीं, दसवीं तथा ग्‍यारहवीं राजस्‍थान विधान सभा में वल्‍लभनगर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक रहे। श्री शक्‍तावत वर्ष 1973 से 1977 तक राजस्‍थान सरकार में गृह राज्‍य मंत्री, मार्च, 1985 से जनवरी, 1988 तक सिंचाई, ऊर्जा, सार्वजनिक निर्माण, समाज कल्‍याण, महिला कल्‍याण, गृह और जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी विभाग, दिसम्‍बर, 1989 से मार्च 1990 तक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, अकाल, बाढ़ एवं पुनर्वास तथा स्‍वायत्‍त शासन विभाग, दिसम्‍बर, 1998 से मार्च, 2000 तक सहकारिता, सहायता एवं पुनर्वास विभाग तथा मार्च, 2000 से दिसम्‍बर, 2003 तक गृह विभाग के मंत्री रहे। श्री शक्‍तावत विधान सभा के अपने दीर्घ कार्यकाल के दौरान सामान्‍य प्रयोजनों संबंधी समिति और पेयजल समस्‍या समाधान समिति के सदस्‍य तथा अधीनस्‍थ विधान संबंधी समिति के सभापति रहे।

  अपने सार्वजनिक जीवन में आप वर्ष 1952 में ग्राम पंचायत, भीण्‍डर के सरपंच, वर्ष 1964 से 1966 तक भीण्‍डर नगरपालिका के अध्‍यक्ष, वर्ष 1966 से 1972 तक उदयपुर सेन्‍ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के अध्‍यक्ष और इसके बाद राजस्‍थान स्‍टेट को-ऑपरेटिव बैंक के संचालक तथा अध्‍यक्ष रहे। श्री शक्‍तावत उदयपुर विश्‍वविद्यालय के बोर्ड ऑफ कन्‍ट्रोल के सदस्‍य तथा जावर माइन्‍स मजदूर संघ के मंत्री भी रहे। राजनैतिक जीवन के आरम्‍भ से ही कांग्रेस से सम्‍बद्ध रहे श्री शक्‍तावत पार्टी संगठन में विभिन्‍न पदों पर आसीन रहे। अध्‍ययन में रुचि रखने वाले श्री शक्‍तावत वर्ष 1957 से 1960 तक साप्‍ताहिक पत्र प्रगति के प्रधान सम्‍पादक रहे। श्री शक्‍तावत के निधन से राजस्‍थान में एक कुशल राजनेता की कमी हो गई है।

  श्री गुलाब सिंह शक्‍तावत का दिनांक 9 नवम्‍बर, 2006 को निधन हो गया।

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन कूप में लगातार नारेबाजी)

 

पूर्व विधायक श्री शिवनाथ सिंह का जन्‍म 11 मई, 1925 को झुंझुनू जिले के धमोरा ग्राम में हुआ। आपने राजस्‍थान विश्‍वविद्यालय से बी.कॉम., एलएल.बी की उपाधियां प्राप्‍त कीं।

  श्री शिवनाथ सिंह दूसरी, चौथी, दसवीं तथा ग्‍यारहवीं राजस्‍थान विधान सभा से गुढ़ा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। आपने दसवीं विधान सभा में निर्दलीय तथा दूसरी, चौथी तथा ग्‍यारहवीं राजस्‍थान विधान सभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्‍व किया। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप सरकारी आश्‍वासनों संबंधी समिति के सभापति तथा प्रश्‍न एवं संदर्भ समिति और जनलेखा समिति के सदस्‍य रहे। श्री शिवनाथ सिंह पांचवीं लोकसभा के लिए वर्ष 1971 में झुंझु नूं निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के सांसद निर्वाचित हुए। आपने वर्ष 2003 में श्रीलंका में आयोजित राष्‍ट्रमण्‍डल संसदीय संघ की द्वितीय एशिया क्षेत्रीय सेमिनार में राजस्‍थान शाखा का प्रतिनिधित्‍व किया।

  अपने सार्वजनिक जीवन में आप वर्ष 1952 से 1959 तक झुंझुनूं जिला बोर्ड के सदस्‍य, वर्ष 1965 से 1967 तक पंचायत समिति, उदयपुरवाटी के प्रधान तथा वर्ष 1982 से 1985 तक राजस्‍थान राज्‍य सहकारी संघ के अध्‍यक्ष रहे। आप झुंझुंनू जिला परिषद तथा जिला विकास अभिकरण के सदस्‍य भी रहे। प्रारम्‍भ से ही कांग्रेस से सम्‍बद्ध रहे श्री शिवनाथ सिंह प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्‍य तथा झुंझुनूं जिला कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी समिति के सदस्‍य भी रहे। अध्‍ययन में विशेष रुचि रखने वाले श्री शिवनाथ सिंह के अमर शहीद तथा श्री भागीरथ मल स्‍वामी का जीवन परिचय प्रकाशित हुए। संसदीय विषयों पर भी आपके आलेख विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। सरल, मृदुभाषी तथा संसदीय विषयों पर गहरी पकड़ तथा सूझबूझ रखने वाले श्री शिवनाथ सिंह के निधन से प्रदेश ने एक कुशल जन नेता खो दिया है।

  श्री शिवनाथ सिंह का दिनांक 17 फरवरी, 2007 को निधन हो गया।

 

  पूर्व विधायक श्री अर्जुनदास मदान का जन्‍म 22 अगस्‍त, 1936 को पाकिस्‍तान के झंग जिले के नैकूकारा ग्राम में हुआ। आपने उदयपुर से एम.ए. की उपाधि प्राप्‍त की।

  श्री अर्जुनदास मदान नौवीं तथा दसवीं राजस्‍थान विधान सभा के लिए लाडपुरा निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक निर्वाचित हुए। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप अधीनस्‍थ विधान संबंधी समिति, याचिका समिति, विशेषाधिकार समिति, राजकीय उपक्रम समिति तथा राजस्‍थान आवासन मण्‍डल के कार्यकलापों की जांच संबंधी समिति के सदस्‍य रहे।

  श्री मदान अपने सार्वजनिक जीवन में राजस्‍थान माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड, रेलवे परामर्शदात्री समिति तथा होलसेल उपभोक्‍ता भण्‍डार, कोटा के संचालक मण्‍डल के सदस्‍य रहे। आप लगभग पन्‍द्रह वर्ष तक जे.के. सिन्‍थेटिक्‍स एम्‍प्‍लाइज को-ऑपरेटिव सोसाइटी के सचिव सहित जे.के. संस्‍थान में श्रम कल्‍याण अधिकारी, मुख्‍य कल्‍याण अधिकारी, प्रबन्‍धक आदि पदों पर रहे। तीन वर्ष तक आप जिला सहकारी संस्‍थान, कोटा के मानद सचिव भी रहे। सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में रुचि रखने वाले श्री मदान भारतीय जनता पार्टी संगठन में कोटा जिला इकाई के वरिष्‍ठ उपाध्‍यक्ष तथा प्रदेश कार्य समिति के सदस्‍य भी रहे।

  श्री अर्जुनदास मदान का दिनांक 22 नवम्‍बर, 2006 को निधन हो गया।

  पूर्व विधायक श्री अमरचन्‍द मिढ़ा का जन्‍म जनवरी, 1928 को श्री गंगानगर जिले की श्रीविजयनगर तहसील के बिलोचिया ग्राम में हुआ। आपने भावलनगर (पाकिस्‍तान) से मैट्रिक तक शिक्षा प्राप्‍त की।

  श्री अमरचन्‍द मिढ़ा दसवीं राजस्‍थान विधान सभा के लिए सूरतगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक निर्वाचित हुए। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप राजकीय उपक्रम समिति के सदस्‍य रहे।

  समाज सेवा तथा गरीबोत्‍थान के लिए प्रयत्‍नशील रहे श्री मिढ़ा वर्ष 1952 से 1960 तथा वर्ष 1965 से 1974 तक श्रीविजयनगर ग्राम पंचायत के सरपंच रहे। आप पंचायत समिति रायसिंहनगर के उप प्रधान भी रहे।

  विकास कार्यों में रुचि रखने वाले श्री अमरचन्‍द मिढ़ा का दिनांक 17 दिसम्‍बर, 2006 को निधन हो गया।

  पूर्व विधायक श्रीमती रतन कंवर का जन्‍म वर्ष 1915 में बस्‍तवा ग्राम में हुआ।

  श्रीमती रतन कंवर आठवीं राजस्‍थान विधान सभा के लिए शेरगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की विधायक निर्वाचित हुई। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप वर्ष 1985 से 1987 तक विशेषाधिकार समिति तथा वर्ष 1987 से 1990 तक याचिका समिति तथा पुस्‍तकालय समिति की सदस्‍य रही। समाज सेवा के प्रति कृत संकल्‍प रही श्रीमती रतन कंवर अपने क्षेत्र की समस्‍याओं के निराकरण तथा महिलाओं एवं बालकों के कल्‍याण के लिए सदैव प्रयत्‍नशील रही।

  श्रीमती रतन कंवर का दिनांक 23 नवम्‍बर, 2006 को निधन हो गया।

 

  पूर्व उप मंत्री श्री अब्‍दुल रहमान चौधरी का जन्‍म 15 जून, 1932 को नागौर जिले के मकराना कस्‍बे मुआ। आपने बी.कॉम. की उपाधि प्राप्‍त की।

  श्री अब्‍दुल रहमान चौधरी सातवीं राजस्‍थान विधान सभा में मकराना निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस (आई) के विधायक रहे। आप जून, 1980 से जुलाई, 1981 तक राज्‍य सरकार में अंत्‍योदय, ऊर्जा, वक्‍फ, सिंचाई तथा सूचना एवं जन सम्‍पर्क विभाग के उप मंत्री रहे। विधान सभा में आप विशेषाधिकार समिति, प्राक्‍कलन समिति तथा चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य, परिवार कल्‍याण और आयुर्वेद विभाग की संसदीय परामर्शदात्री समिति के सदस्‍य रहे।

  श्री चौधरी भू-आवंटन (उपनिवेशन क्षेत्र) सलाहकार समिति, तेजाजी पशु मेला समिति, परबतसर, राजस्‍थान विद्युत मण्‍डल परामर्श समिति, राजस्‍थान खनिज परामर्श समिति तथा मकराना होस्पिटल डवलपमेंट समिति के सदस्‍य रहे। आप मकराना की अनेक औद्योगिक एवं व्‍याव‍सायिक संस्‍थाओं से सम्‍बद्ध रहे। आप मकराना नगरपालिका मण्‍डल के अध्‍यक्ष भी रहे। समाज सेवा में विशेष रुचि रखने वाले श्री चौधरी मकराना रिलीफ फण्‍ड के संस्‍थापक अध्‍यक्ष, मकराना मदरसा अन्‍जुमन तथा चौधरी मुबारक हुसैन स्‍कूल के अध्‍यक्ष रहे। आप आल इण्डिया कौमी एकता कमेटी के महासचिव तथा इण्‍डो अरब मित्रता की राजस्‍थान इकाई के कोषाध्‍यक्ष भी रहे।

  श्री अब्‍दुल रहमान चौधरी का दिनांक 20 जनवरी, 2007 को निधन हो गया।

 

  पूर्व विधायक श्री माणकलाल ठाकोर का जन्‍म 26 जून, 1926 को बूंदी जिले के नैनवां कस्‍बे में हुआ। आपने बी.ए., एलएल.बी की उपाधियां प्राप्‍त कीं।

  श्री माणकलाल ठाकोर छठी राजस्‍थान विधान सभा के लिए नैनवां निर्वाचन क्षेत्र से जनता पार्टी के विधायक निर्वाचित हुए।

  श्री ठाकोर वर्ष 1950 से 1961 तथा 1971 से 1974 तक नैनवां नगरपालिका के अध्‍यक्ष रहे। आप लम्‍बे समय तक नैनवां अभिभाषक परिषद के अध्‍यक्ष भी रहे। छात्र जीवन से ही स्‍वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले श्री माणकलाल ठाकोर आपातकाल के दौरान 18 माह जेल में रहे। आप वर्ष 1971 में भूमि मुक्ति आंदोलन के दौरान जेल भी गये।

  श्री माणकलाल ठाकोर का दिनांक 22 अक्‍टूबर, 2006 को निधन हो गया।

 

   मोहन/अरूण/01032007/1330/1q  

 

 

 

पूर्व विधायक श्री मोहर सिंह का जन्‍म वर्ष 1916 में चूरू जिले की राजगढ़ तहसील के जैतपुरा ग्राम में हुआ। आपने मैट्रिक तक शिक्षा प्राप्‍त की।

श्री मोहर सिंह दूसरी तथा पांचवीं राजस्‍थान विधान सभा में विधायक रहे। आप दूसरी विधान सभा के लिए चूरू निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय तथा पांचवीं विधान सभा के लिए वर्ष 1974 में हुए उप चुनाव में सादुलपुर निर्वाचन क्षेत्र से मार्क्‍सवादी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के विधायक निर्वाचित हुए। विधान सभा में आप अपने क्षेत्र के विकास के लिए सदैव प्रयत्‍नशील रहे।

श्री मोहर सिंह वर्ष 1946 में बीकानेर राज्‍य प्रजा परिषद् के प्रतिनिधि तथा वर्ष 1949 में जिला किसान सभा के मंत्री एवं प्रधान रहे। स्‍वतंत्रता सेनानी श्री मोहर सिंह ने विभिन्‍न आन्‍दोलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया। आप 18 माह तक हैदाराबाद की जेल में बंदी रहे। कामरेड श्री मोहर सिंह वर्ष 1960 में कम्‍युनिस्‍ट पार्टी तथा 1964 में मार्क्‍सवादी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के जिला सचिव रहे।

श्री मोहर सिंह का दिनांक 30 दिसम्‍बर, 2006 को निधन हो गया।

पूर्व विधायक श्रीमती शकुन्‍तला श्रीवास्‍तव का जन्‍म नवम्‍बर, 1930 में जयपुर में हुआ। आपने बी.ए. तथा साहित्‍यरत्‍न की उपाधियां प्राप्‍त कीं।

श्रीमती शकुन्‍तला श्रीवास्‍तव पांचवीं राजस्‍थान विधान सभा के लिए आमेर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस की विधायक निर्वाचित हुई। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप प्राक्‍कलन समिति की सदस्‍य रहीं।

श्रीमती श्रीवास्‍तव महिलाओं एवं बालकों के कल्‍याण के लिए सदैव प्रयत्‍नशील रही। आप राजस्‍थान राज्‍य बाल कल्‍याण परिषद् की सचिव, परिवार एवं बाल कल्‍याण परियोजना, झोटवाड़ा तथा मूक एवं बधिर स्‍कूल समिति की सभापति रहीं। आप वर्ष 1952 से 1955 तक कारागार विभाग में जेलर, वर्ष 1965 से 1972 तक पंचायत समिति की प्रधान, जेल सलाहकार समिति एवं जेल रिफार्म्‍स कमीशन, राजस्‍थान सर्किल की टेलिफोम सलाहकार समिति, राजस्‍थान मद्य निषेध सलाहकार समिति एवं अन्‍तरराष्‍ट्रीय महिला वर्ष आयोजन समिति की सदस्‍य तथा जयपुर जिला महिला किक्रेट एसोशिएशन की सभापति रही। मजदूरों के कल्‍याण संबंधी कार्यक्रमों से जुड़ी श्रीमती श्रीवास्‍तव झोटवाड़ा क्षेत्रीय खादी ग्रामोद्योग संघ की सभापति, जयपुर ठेला हॉकर्स यूनियन तथा जल प्रदाय विभाग मजदूर यूनियन की अध्‍यक्ष, इन्‍टक कार्यकारिणी की सदस्‍य एवं कोषाध्‍यक्ष रहीं। आप कांग्रेस संगठन के विभिन्‍न पदों पर भी रही।

श्रीमती शकुन्‍तला श्रीवास्‍तव का दिनांक 30 दिसम्‍बर, 2006 को निधन हो गया।

पूर्व विधायक श्री किशोरीलाल शर्मा का जन्‍म 10 दिसम्‍बर, 1915 को उदयपुर में हुआ। आपने हिन्‍दी विद्यापीठ, उदयपुर से हिन्‍दी साहित्‍य विशारद की उपाधि प्राप्‍त की।

श्री शर्मा पांचवीं राजस्‍थान विधान सभा के लिए सलुम्‍बर निर्वाचन क्षेत्र से हुए उप चुनाव में कांग्रेस के विधायक निर्वाचित हुए।

श्री किशोरी लाल शर्मा वर्ष 1944 से 1947 तक प्रजामण्‍डल के सचिव तथा अक्‍टूबर, 1959 से जनवरी, 1974 तक तहसील सराड़ा, सलुम्‍बर के प्रधान रहे। इसके पश्‍चात् आप 27 मई, 1974 को धारा सभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए। दलित वर्ग के उत्‍थान हेतु प्रयत्‍नशील रहे श्री शर्मा कांग्रेस संगठन में ब्‍लाक अध्‍यक्ष सहित प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्‍य भी रहे।

श्री किशोरीलाल शर्मा का दिनांक 20 नवम्‍बर, 2006 को निधन हो गया।

पूर्व विधायक श्री विजय सिंह का जन्‍म 12 फरवरी, 1935 को नागौर जिले के मकराना कस्‍बे में हुआ। आपने बी.ए. की उपाधि प्राप्‍त की।

श्री विजय सिंह चौथी राजस्‍थान विधान सभा के लिए मकराना निर्वाचन क्षेत्र से स्‍वतंत्र पार्टी के विधायक निर्वाचित हुए। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप राजकीय उपक्रम समिति के सदस्‍य रहे।

श्री विजय सिंह वर्ष 1959 में मकराना नगरपालिका के सदस्‍य तथर वर्ष 1961 में मकाराना पंचायत समिति के उप प्रधान रहे। सामाजिक कार्यों में रुचि रखने वाले श्री विजय सिंह मकराना सनातन धर्म सेवा संघ के अध्‍यक्ष भी रहे।

श्री विजय सिंह का दिनांक 27 दिसम्‍बर, 2006 को निधन हो गया।

पूर्व विधायक श्री छोटू सिंह आर्य का जन्‍म 21 अगस्‍त, को अलवर में हुआ। आपने आर.आर. कॉलेज, अलवर से स्‍नातक की उपाधि प्राप्‍त करने के बाद लखनऊ विश्‍वविद्यालय से एम.ए., एलएल. बी. की उपाधियां प्राप्‍त कीं।

श्री छोटू सिंह आर्य पहली तथा दूसरी राजस्‍थान विधान सभा के लिए अलवर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक निर्वाचित हुए। विधान सभा में आप अपने क्षेत्र के विकास के लिए सदैव प्रयत्‍नशील रहे।

स्‍वतंत्रता सेनानी श्री छोटू सिंह आर्य वर्ष 1939 में मास्‍टर भोलानाथ की प्रेरणा से प्रजामण्‍डल आन्‍दोलन से जुड़े तत्‍पश्‍चात् आपने अनेक आन्‍दोलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया। श्री आर्य वर्ष 1946 एवं 1949 में म्‍युनिसिपल कमिश्‍नर भी रहे। आपकी शिक्षा के प्रसार में गहरी आस्‍था थी। आर्य कन्‍या विद्यालय, अलवर के संस्‍थापक रहे श्री आर्य अलवर हरिजन सेवक संघ के प्रेजीडेन्‍ट सहित अनेक सामाजिक एवं शैक्षिक संस्‍थाओं से सम्‍बद्ध रहे। आप अलवर जिला कांग्रेस कमेटी के कोषाध्‍यक्ष भी रहे।

श्री छोटू सिंह आर्य का दिनांक 23 फरवरी, 2007 को निधन हो गया।

 

पूर्व विधायक श्री बालमुकुन्‍द का जन्‍म वर्ष 1931 में डूंगरपुर जिले के सांकरसी ग्राम में हुआ। आपने वनवासी छात्रालय, उदयपुर से विशारद की शिक्षा प्राप्‍त की।

श्री बालमुकुन्‍द दूसरी राजस्‍थान विधान सभा में डूंगरपुर सुरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से साम्‍यवादी पार्टी के विधायक निर्वाचित हुए। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप अपने क्षेत्र की जन समस्‍याओं के निराकरण के लिए सदैव प्रयत्‍नशील रहे।

श्री बालमुकुन्‍द वर्ष 1950 से 1951 तक समाज कल्‍याण विभाग में अध्‍यापक तथा 5 मई, 1953 से 7 नवम्‍बर, 1956 तक ग्रामसेवक रहे। आपने एक वर्ष तक होम गार्ड में जूनियर कम्‍पनी कमांडर के पद पर कार्य किया।

श्री बालमुकुन्‍द का दिनांक 19 नवम्‍बर, 2006 को निधन हो गया।

मैं, अपनी ओर से तथा इस सदन के सभी माननीय सदस्‍यों की ओर से दिवंगतों के प्रति शोक प्रकट करते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना व्‍यक्‍त करती हूं तथा दिवंगत महानुभावों को श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। मैं ईश्‍वर से प्रार्थना करती हूं कि दिवंगत व्‍यक्तियों की आत्‍मा को शान्ति प्रदान करें तथा उनके शोकसंतप्‍त परिजनों को उनका बिछोह सहन करने की शक्ति दे।

दिनांक 18 फरवरी, 2007 को हरियाणा में पानीपत के निकट अटारी समझौता एक्‍सप्रेस में हुए दो बम विस्‍फोटों में लगभग 68 यात्रियों की मृत्‍यु हो गई तथा कई व्‍यक्ति घायल हो गये। इन शक्तिशाली विस्‍फोटों के बाद ट्रेन की दो बोगियों में लगी आग से वे पूरी तरह नष्‍ट हो गईं। मैं, इन बम विस्‍फोटों से मारे गये यात्रियों की मृत्‍यु पर भी शोक प्रकट करती हूं तथा पीडि़त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्‍यक्‍त करती हूं।

माननीय सदस्‍यगण कृपया दो मिनट मौन खड़े रहकर दिवंगतों की आत्‍मा की शान्ति के लिए प्रार्थना करें।

(तदनन्‍तर सदन ने दो मिनट मौन खड़े होकर दिवंगत आत्‍माओं की शांति के लिए प्रार्थना की)

  ओम शांति, शांति, शांति । ...(व्‍यवधान)...

  मुझे बड़ा अफसोस है इस बात का कि राजस्‍थान विधान सभा के इतिहास में पहली बार जब दिवंगतों के प्रति शोकाभि‍व्‍यक्ति की जा रही है, उस समय विपक्ष का यह रवैया और इस तरीके से शोर मचाना उन सभी दिवंगतों के प्रति अपमानजनक है और मुझे बड़ा अफसोस है इस बात का। मैं सदन की कार्यवाही ...(व्‍यवधान)...

  सदन की बैठक शुक्रवार, दिनांक 2 मार्च, 2007 के प्रात: 11.00 बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 13.29 बजे शुक्रवार 2 मार्च, 2007 के   11.00 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई)